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Incest बदलते रिश्ते

कुछ दिन यूं ही बीत गए रोहन लगातार इसी आशा में लगा रहा की उसे बेला के खूबसूरत अंगों को फिर से देखने का मौका मिल जाएगा और वह इसी ताक में बिना के इर्द-गिर्द घूमता रहता था लेकिन बेला पक्की खिलाड़ी थी वह रोहन को तड़पाना चाहती थी... इसलिए रोहन पर बिल्कुल भी ध्यान ना देते हुए वह अपने काम में लगी रहती थी लेकिन तिरछी नजरों से रोहन को देख ले रही थी कि वह कहां देख रहा है और उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव खिल उठते थे जब उसे पता चल जाता था कि रोहन चोरी छुपे उसके कपड़ों के भीतर झांकने की कोशिश कर रहा है.....

रूपा सिंह वाले हादसे को भुलाकर सुगंधा फिर से अपने जमीदारी के काम में लग गई थी वह रोज खेतों की तरफ जाकर फसल का मुआयना करती रहती थी.....। काम में व्यस्त रहने के बावजूद भी उसे अपने बेटे रोहन की चिंता सताए जाती थी क्योंकि वह जानती थी कि गांव के आवारा लड़कों के साथ वह बिगड़ता जा रहा था... ना तो उसका पढ़ाई में ही मन लगता था और ना ही जमीदारी के काम में रुचि लेता था बस इधर-उधर घूम कर अपना समय व्यतीत कर रहा था सुगंधा कहीं जाने के लिए अपने कमरे में तैयार हो रही थी और वह इस समय केवल एक टावल लपेटी हुई थी। उसके लंबे गदराए बदन को ढकने के लिए टावल छोटी ही पड़ती थी। वह अलमारी में अपने कपड़े ढूंढ रही थी....

और दूसरी तरफ रोहन अपनी मां के कमरे की तरफ जा रहा था क्योंकि अपने आवारा दोस्तों के साथ रहकर उसे फिजूलखर्ची की आदत जो पड़ गई थी और उसी आदत के तहत वह अपनी मां से पैसे मांगने के लिए उसके कमरे की तरफ जा रहा था और थोड़ी ही देर में वह अपनी मां के कमरे के दरवाजे के पास पहुंच गया.. और कमरे के अंदर उसकी मां बेखबर होकर अलमारी में अपने कपड़े ढूंढ रही थी और रोहन कमरे के बाहर खड़ा होकर एक पल की भी देरी किए बिना ही दरवाजे पर दस्तक देने के लिए जैसे ही अपना हाथ उठा कर दरवाजे से सटाया ... दरवाजा खुद तो खुद खुल गया क्योंकि जल्दबाजी में सुगंधा ने दरवाजे की कड़ी लगाना भूल गई थी और यही भूल उसके रिश्तो को तार-तार करने के लिए काफी होने वाला था दरवाजे के खुलते ही रोहन की आंखों के सामने जो नजारा दिखाई दिया उसे देखते ही रोहन के अंदर संपूर्ण रूप से रिश्तो को लेकर बदलाव आना शुरू हो गया रोहन की आंखों के सामने उसकी मां अपने नंगे बदन पर मात्र एक छोटा सा टावल लपेटी हुई थी जो कि उसके गदराए बदन को ढक पाने में असमर्थ था... जिस समय दरवाजा खुला और रोहन की आंखें सामने उसकी मां पर पड़ी उस समय सुगंधा अलमारी में नीचे झुक कर अपनी पेंटी ड़्औवर में से ढूंढ रही थी। और जिस तरह से झुकी हुई थी छोटी टावल होने की वजह से सुगंधा की भराव दार गाँड़ साफ साफ नजर आ रही थी ..

अपनी आंखों के सामने इस तरह का नजारा देखकर आश्चर्य से रोहन की आंखें फटी की फटी रह गई उसे इस नजारे की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी वह तो बस कल्पना में इन नजारों के चित्र रचा करता था। लेकिन आज उसकी आंखों के सामने उसकी मां की नंगी गांड बिल्कुल साफ नजर आ गई थी जिसे देखकर पल भर में ही रोहन उत्तेजित हो गया उसकी नजर उसकी मां की गदराई गांड पर ही टिकी टिकी रह गई गोरी गोरी गांड और वाह भी तरबूज के समान गोल गोल... ऐसी मस्तानी और कामुकता से भरी हुई कि मुर्दे के तन में जान डाल दे। खरबूजे जैसी गोलाई लिए हुए सुगंधा की मतवाली गांड रोहन के तन बदन में कामुकता की सुईया चुभा रही थी।

और तो और नितंबों के दोनों भागों में हो रही हलन चलन से ऐसा लग रहा था कि जैसे गुब्बारों में पानी भर के लटका दिया गया हो.. रोहन कि नाजुक उम्र इस बेहद कामुकता के वार को झेल सकने में असमर्थ साबित हो रही थी और जिस वजह से उसके लंड का तनाव पल पल बढ़ता जा रहा था। कुछ ही सेकंड में कामुकता भरे नजारे की वजह से बहुत कुछ हो चुका था रोहन के सोचने समझने की शक्ति रिश्तो के प्रति छीण होती जा रही थी। बेला के खूबसूरत बदन के नग्न दर्शन करके पहले से ही रोहन के मन में औरतों के अंगों को लेकर आकर्षण साहो चला था और रही क सर को सुगंधा की खूबसूरत बदन ने पूरा कर दिया था अपनी मां की नंगी गांड देखकर वह पल भर में ही सुगंधा में अपनी मां की जगह एक खूबसूरत गदरई जवानी जवानी से भरपूर औरत के दर्शन होने लगे थे सुगंधा अभी भी इस बात से बेखबर कि दरवाजे पर रोहन खड़ा होकर उसके नग्न नितंबों के दर्शन करके मस्त हुआ जा रहा है वह अपनी ही धुन में अलमारी में से कपड़े ढूंढने में व्यस्त थी और इसी का फायदा उठाते हुए रोहन अपनी आंखों को सेक रहा था।

 
रोहन इस नजारे का और ज्यादा फायदा उठाते हुए अपने आप को खुशनसीब समझने लगा था क्योंकि उसकी मां थोड़ा सा और नीचे झुकी जिसकी वजह से रोहन को वह अंग देखने को मिल गया जिसके बारे में सोच कर उसका लंड ना जाने कितनी बार पानी फेंक चुका था रोहन की आंखों के सामने सुगंधा की बुर नजर आने लगी थी जो कि बस केवल एक हल्की सी पत्नी रेखा की शक्ल में नजर आ रही थी और बीचों-बीच उसकी बीच की दो गुलाबी पत्तियां निकली हुई थी ऐसा लग रहा था मानो गुलाब का फूल अभी अभी खील रहा हो... रोहन के लिए यह दूसरा मौका था जब उसे अपनी आंखों से एक औरत की नंगी बुर देखने को मिल रही थी इसके पहले बेला की बुर के दर्शन रोहन कर चुका था लेकिन बस हल्की सी झलक भर मिली थी.. लेकिन आज उसकी आंखों के सामने उसकी मां की नंगी बुर नजर आ रही थी और वह भी बेहद खूबसूरत कचोरी जैसी फूली हुई अपनी मां की बुर देखकर रोहन इतना तो अनुमान लगा ही लिया होगा कि बेला की बुर से कहीं ज्यादा अत्यधिक गुना खूबसूरत और हसीन उसकी मां की बुर थी जिस पर हल्के हल्के रेशमी छोटे-छोटे बाल उगे हुए थे जो कि उसकी खूबसूरती को और ज्यादा बढ़ा रहे थे सुगंधा अभी अभी नहा कर ही आई थी जिसकी वजह से उसकी दूर के इर्द-गिर्द मोतियों के सामान पानी की बूंदे नजर आ रही थी और यह नजारा देखकर अत्यधिक उत्तेजना को न सह पाने की वजह से मन में आए लालच की गाथा गाते हुए उसके लंड ने दो बूंद पानी के टपका दीया......

उत्तेजना के मारे रोहन की सांसे तीव्र गति से चलने लगी वह अपने आपको संभाल नहीं पाया और उसके हाथ से दरवाजा हल्के से हील गया जिसकी आहट सुगंधा को महसूस हुई तो वह पल भर में ही पीछे पलट कर देखी तो दरवाजे पर रोहन खड़ा था और उसे दरवाजे पर खड़ा देखकर वह एक दम से चौंक गई,, और वह तुरंत खड़ी हो गई वह समझ नहीं पाई कि अब क्या करें, अब इतनी जल्दी तो वहां कपड़े पहन नहीं सकती थी, इसलिए दोनों हाथों को अपनी छातियों पर लाकर टावल पकड़ कर बहुत ही सामान्य तरीके से बोली'

क्या बात है बेटा इतनी सुबह-सुबह तुम यहां पर ...

( सुगंधा एकदम सामान्य होकर रोहन से बातें कर रही थी वह ऐसा जताना चाहती थी कि उसने ऐसी कोई गलती नहीं किया है जिसके लिए उसे डांटने की जरूरत पड़े क्योंकि ऐसा करने से हो सकता है कि रोहन को इस बात का एहसास हो कि उसे जो नहीं देखना चाहिए था उसने वह देख लिया है और रोहन भी बेला और अपने आवारा दोस्तों की संगत में कुछ ज्यादा ही चालाक हो गया था वह भी इस तरह का बर्ताव करने लगा कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं है...)

मम्मी मुझे कुछ पैसों की जरूरत है इसलिए मैं आपसे पैसे लेने आया था....( इतना कहते हुए व कमरे में दाखिल हो गया वह यह जताना चाहता था कि सब कुछ सामान्य है और वैसे भी सुगंधा अभी तक रोहन को बच्चा ही समझती थी लेकिन यह नहीं जानती थी कि उसका बच्चा धीरे धीरे अब बड़ा हो गया था रोहन अपनी मां से पैसे मांगते हुए जाकर बिस्तर पर बैठ गया सुगंधा चाहे जितने भी आ सामान्य तौर पर स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश कर ले लेकिन वह थी तो एक औरत ही भले ही कमरे में उसका बेटा उपस्थित था लेकिन वह था तो एक मर्द ही, सुगंधाको अंदर ही अंदर अपने बेटे की आंखों के सामने केवल टावल में खड़े रहने में शर्म महसूस हो रही थी। क्योंकि मैं अच्छी तरह से यह बात जानती थी कि आधे से ज्यादा अंग उसका टावल से बाहर नजर आ रहा था।

अभी भी वहां अपने दोनों हाथों को अपनी छातियों पर टीकाकर टॉवल पकड़े खड़ी थी.. वह जल्द से जल्द चाहती थी कि रोहन कमरे से चला जाए... इसलिए उसकी बात मानते हुए तुरंत अलमारी की तरफ घूमी है और ड़ृवर खोलकर अपना पर्स निकाली और उसमें से ₹200 निकालकर वापस पर्स रख दी.. लेकिन तुम हमको इस बार फिर से मौका मिल गया क्योंकि सुगंधा के इस तरह से घूम जाने की वजह से रोहन की नजर फिर से अपनी मां की बड़ी-बड़ी गदराई गांड पर पर पड़ गई। भले ही नितंबों का नंगापन कपड़ों के अंदर ढका हुआ था लेकिन फिर भी उसका आकार का सांचा साफ तौर पर नजर आ रहा था जिसे देख कर रोहन के मुंह में पानी आ रहा था...

लेकिन तभी उसकी मां रोहन की तरफ घूम गई और उसे ₹200 पकड़iते हुए.. बोली...

तुम कब सुधरोगे रोहन तुम नहीं जानते कि अपने आवारा दोस्तों के साथ तुम अपना समय और जीवन सब बर्बाद कर रहे हो...

मम्मी मैं किसी भी गलत संगत में नहीं हूं आप गलत समझ रही है यह पैसे तो मेरे एक दोस्त को बहुत ज्यादा जरूरी है इसलिए उसे देना है उसकी मां बीमार है...( रोहन झूठ बोलते हुए अपनी मां के हाथों से पैसे लेकर उसे अपने पेंट की जेब में रख लिया और वहां से उठकर बाहर की तरफ जाने लगा दरवाजे से बाहर निकलते ही सुगंधा लगभग दौड़ते हुए दरवाजे की तरफ आगे बढ़ी और तुरंत जाकर दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दी, लेकिन जल्दबाजी में उसकी टूऑल खुल गई और सुगंधा एकदम से नंगी हो गई लेकिन तब तक उसने दरवाजे की कड़ी लगा दी थी और दरवाजे पर पीठ टीकाकर राहत की सांस लेते हुए अपने आप से ही बातें करते हुए बोली,

हे भगवान मैंने दरवाजे की कड़ी लगाना कैसे भूल गया अच्छा हुआ कि रोहन कुछ देखा नहीं( इतना कहकर वह छत की तरफ देखती हुई कुछ पल के लिए सोच में पड़ गई और अपने आप से ही बातें करते हुए बोली.)

क्या सच में रोहन ने कुछ भी नहीं देखा होगा (अपने आप को नीचे से ऊपर की तरफ देखते हुए) लेकिन मेरे बदन का तो बहुत कुछ नजर आ रहा है.... क्या सच में रोहन ने कुछ देखा होगा............ नहीं कुछ नहीं देखा होगा मेरा बेटा ऐसा बिल्कुल भी नहीं है..

( अपने आप को झूठी तसल्ली देते हुए सुगंधा आगे बढ़ी़े तो अपनी स्थिति का भान होते ही... वह मुस्कुरा दी क्योंकि वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी लेकिन इस बार वह बिल्कुल भी हड़बड़ा हट नहीं की क्योंकि कमरे में वह अकेली ही थी... इसलिए इत्मीनान से अलमारी के करीब आए और अपने कपड़े पहनने लगी और तैयार होकर कमरे से बाहर निकल गई....
 
सुगंधा तो चली गई थी लेकिन जाते जाते रोहन की हालत खराब कर गई थी रोहन ने आज जो नजारा देखा था वह शायद बरसों तक उसके मन मस्तिष्क से मिटने वाला नहीं था और वैसे भी सुगंधा बेहद खूबसूरत थी उसे कपड़ों में ही देख कर ना जाने कितनों का खड़ा हो जाता था और आज तो रोहन में अपनी मां की नंगी गांड को और साथ ही उसकी बेहद खूबसूरत बुर के दर्शन कर लिए थे... हालांकि रोहन ने अभी तक संपूर्ण रूप से बुर के आकार को नहीं देख पाया था... बेला की बुर की हल्की दर्शन करके ही... वह मस्त हो चुका था और आज तो उसने अपनी मां की रसीलो बुर के दर्शन किए थे।

लेकिन अभी भी बुरदर्शन संपूर्ण रूप से नहीं हुआ था लेकिन जितना भी हुआ था रोहन की उम्र के मुताबिक बहुत ही ज्यादा था।...

रोहन अपने कमरे में बैठा हुआ था लेकिन उसका मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था वह बहुत ही व्याकुल नजर आ रहा था....

उसकी आंखों के सामने बार बार उसकी मां की रसीली बुर और बड़ी बड़ी गोरी गांड नजर आ जा रही थी ना चाहते हुए भी वह अपनी मां के बारे में गंदी कल्पना करने लगा बार बार उसका मन उसे ऐसा ना करने के लिए अंदर ही अंदर बोल रहा था लेकिन जो नजारा उसने अपनी आंखों से देखा था उस नजारे की वजह से वह रिश्तो की डोर को बराबर से थाभ नहीं पा रहा था। बार-बार उसके मन में अपनी मां के प्रति गंदे विचार आ रहे थे और वह इन विचारों से भाग नहीं पा रहा था बार-बार उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जानबूझकर जैसे उसकी मां अपनी गांड और बुर ऊसे दिखाकर ललचा रही हो और रोहन लार टपकाते हुए अपनी मां के नंगे बदन का दर्शन करते हुए अपना लंड हिला रहा हो यही सब ख्याल उसके दिमाग में आ रहा था थक हारकर वह तुरंत कमरे से बाहर चला गया और ठंडे पानी से अपने चेहरे को धो कर अपने आप को साबित करने की कोशिश करने लगा कुछ देर के बाद उसका मन थोड़ा शांत हुआ तो वह अपने दोस्तों से मिलने निकल गया...

उसके दोस्त भी एकदम आवारा लड़के थे गाली गलौज के बिना बात ही नहीं करते थे रोहन को देखते ही उनमें से एक बोला...

लो देखो आ गए मादरचोद हमयहां कितनी देर से इंतजार कर रहे हैं... और यह ना जाने कहां गांड मरा रहा था...

हां यार यह इंतजार बहुत करवाता है ( उनमें से ही दूसरा लड़का बोला)

तुम दोनों ज्यादा मत बोलो नहीं तो तुम्हारी मां चोद दूंगा....

( रोहन ऊन दोनों को थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोला।)

तो हम क्या बाकी रखेंगे क्या और वैसे भी हमें तो तेरी मां में बहुत मजा आएगा.... आहहहहहहहहहहह तेरी मां की गांड वाला देख कर खड़ा हो जाता है उनमें से एक्ने गरम आहें भरते हुए बोला......

तू ज्यादा बकवास मत कर बहुत बोलने लगा है तू.....

यार तू नाराज मत हो दोस्तों में तो सब कुछ चलता है मैं भी कहा इनकार कर रहा हूं.... अगर तेरी इच्छा है तो तू मेरी मां की चुदाई कर लेना मुझे जरा भी एतराज नहीं होगा लेकिन बदले में मैं भी तेरी मां की चुदाई करूंगा........

( रोहन के आवारा दोस्त ने अपनी इच्छा जताते हुए बोला...)

देख अब तू ज्यादा बोल रहा हैं... मैं अपनी मां के बारे में कुछ भी नहीं सुन सकता....

अच्छा तू अपनी मां के बारे में कुछ भी नहीं सुन सकता और हमारी मां को तो कुछ भी बोल सकता है...

शुरुआत तो तूने की ना तभी तो मैं कहा........

( उन दोनों के बीच बात बात में झगड़ा बढ़ जाता इससे पहले ही उन दोस्तों में से एक जो खड़ा हुआ और उन दोनों को शांत करते हुए बोला..)

क्या यार तुम दोनों बेवजह उलझ रहे हो यार दोस्तों में तो गाली गलौज चलती ही रहती है इसमें बुरा मानने वाली कोई बात नहीं है...

यार मैं कहां बुरा मान रहा हूं मैं तो कह रहा हूं अगर तुझे मेरी मां को चोदने है तो चोद ले बदले में मैं इसकी मां को भी चोदूंगा,'' और तुम सब अच्छी तरह से जानती हो कि किसकी मां ज्यादा मजा देगी.........( उसका इशारा रोहन की खूबसूरत मां की तरफ था इस बात से रोहन को और गुस्सा आ गया)

तू अब देख लिए फिर शुरू पड़ गया फिर तू कहना नहीं कि मैं क्या कह रहा हूं....( रोहन गुस्से में बोला)

यार तुम दोनों बेवजह उलझ रहे हो मैं जानता हूं कि तुम दोनों एक दूसरे की मां को चोदना चाहते हो तो चोद लेना... लेकिन बाद की बात को लेकर अभी क्यों सारा मजा किरकिरा कर रहा है अब दोनों कुछ भी नहीं कहोगे.... देख तू भी नहीं कहैगा और ना ही रोहन तू ही कुछ कहेगा....

साला जब देखो तब आपस में झगड़ना शुरू कर देते हो किसकी मां की गांड़ बड़ी है, किसकी मां की चूची बड़ी है ईसकी मां को चोदना है उसकी मां को चोदना है.... बस यही बात सारा दिन तुम लोग करते रहते हो.. अरे मैं जानता हूं तुम दोनों की मां की गांड बड़ी है ... हम सब की मां की गांड बड़ी है तो क्या सब की गांड मारी ही जाए.... देखो सालों जब मौका आएगा तो उस सब लोग एक दूसरे की मां की गांड मार लेना लेकिन अभी शांत रहो साला ऐसा लगता है कि जैसे तुम सब एक दूसरे की मां को चोदने को बोलते हो और वह लोग तुमसे चुदवा लेंगी। इतना आसान समझे हो तुम लोग तुम लोग सोच कर करना भी चाहो तो नहीं कर सकते समझे....( इतना कहते हुए वह उन सब को बाजार की तरफ ले जा रहा था... वैसे तो वहां उन दोनों को समझा ही रहा था लेकिन समझाने के साथ साथ वह मजा भी ले रहा था उसे भी मालूम था कि रोहन की मां की गांड बेहद खूबसूरत और बड़ी-बड़ी थी वह भी मन ही मन में रोहन की मां को चोदने की इच्छा रखता था और ना जाने कितनी बार कल्पनाओं में उसकी मां की सवारी कर चुका था लेकिन यह मुमकिन नहीं था यह बात वह भी जिसे हकीकत में भी चोदा जाए बस आपस में इस तरह की गंदी बातें करके मजा ले लेते थे। वह नहीं चाहता था कि रोहन नाराज हो क्योंकि रोहन इतनी उन सबके ऐसो आराम को पूरा करने का जरिया था इसलिए रोहन का मन बना रहे इसलिए उसके सामने ही उसने उसके दोस्त को जो कि उसकी मां के बारे में अनाप-शनाप बक रहा था उसे गंदी गंदी गालियां देने लगा.. थोड़ी ही देर में वह लोग बाजार में पहुंच गए और एक दुकान पर बैठकर नाश्ता करने लगे कोई समोसे मना रहा है कि कोई कचोरी मंगा रहा है कोई हलवा बना रहा है और यह सब का भुगतान रोहन को ही करना था इसलिए वह लोग बीच-बीच में रोहन की तारीफ भी कर दिया करते थे लेकिन इन सब के दौरान दुकान में बैठे बैठे वह लोग बाजार में आने जाने वाली औरतों को प्यासी नजरों से घूरते रहते थे.... यही उन लोगों का रोज का क्रम था....

रोहन का गुस्सा उसके दोस्त पर दिखावटी था क्योंकि रोहन को अपनी मां की बारे में गंदी बातें सुनकर कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का एहसास होता था और जब से उसने औरतों को गलत नजरिए से देखना शुरू किया था तब से तो उनके दोस्तों की गाली भी उसे अच्छी लगती थी जब उसका दोस्त की मां की गांड मारने के लिए बोला था तो वह कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का एहसास कर रहा था उसे तो मन में कल्पना भी कर रहा था कि कैसे वह खुद अपनी मां को नंगी करके चोद रहा था.... रोहन मन ही मन अपनी मां की गंदी बातें सुनकर प्रसन्न होता था.... बस उसे अपनी मां के बारे में गंदी अश्लील बातें सुनना ही अच्छा लगता था लेकिन यह कतई पसंद नहीं था कि उसकी मां को की हकीकत में चोदे....

दोस्तों की टुकड़ी दुकान में बैठकर सड़क पर आने जाने वाली लड़कियों और औरतों को घूर ही रहा था कि तभी.. एक औरत दुकान में आई और समोसे खरीदने लगी तभी रोहन के दोस्तों में से एक उसे पहचानता था वह उसके पड़ोस मे हीं रहती थी और पड़ोसी होने के नाते वह उसे भाभी कहता था। उसे देखते ही वह अपनी जगह से खड़ा हुआ और उसके करीब पहुंच गया...

क्या भाभी आजकल दिखाई नहीं दे रही हो....

 


हम तो रोज ही दिखाई देते हैं बस तुम्हारा ही ठिकाना नहीं रहता ना जाने कहां खोए रहते हो.... ( वह इतराते हुए बोली और कुर्सी पर बैठे हुए सारे दोस्तों की वजह उस औरत पर ही टिकी रह गई भाभी जिस तरह की होनी चाहिए उसी की तरह की थी बस रंग थोड़ा सा दबा हुआ था बाकी सब कुछ ठीक-ठाक था... उसके दोस्त सब जानते थे कि उस औरत का और उसके दोस्त का चक्कर चल रहा था....)

भाभी आज बहुत मन कर रहा है कुछ आशीर्वाद इधर भी मिल जाता तो बड़ी मेहरबानी होती....

हम तो हमेशा आशीर्वाद देने के लिए तैयार रहते हैं देवर जी लेकिन तुम्हें ही लगता है किसी और का आशीर्वाद मिलने लगा है इसलिए तो हमारा आशीर्वाद लेने नहीं आते....

भाभी मुझे तो अभी आशीर्वाद चाहिए......

नहीं बिल्कुल नहीं अभी हम तुम्हें कैसे आशीर्वाद दे सकते हैं थोड़ा दिन ढल जाने दो रात को घिर आने दो... तब तुम्हें आशीर्वाद लेने में और मुझे देने में बहुत मजा आएगा....

दिन ढलने का इंतजार में बिल्कुल नहीं कर सकता भाभी कहो तो 5 समोसे और बंधवा दूं....

( उसकी बात सुनकर कुछ देर तक इतराते हुए सोचने लगी और फिर बोली. )

आशीर्वाद लेने के लिए सिर्फ 5 समोसे केवल समोसे से काम नहीं चलेगा मैं तो कहती हूं आधा किलो जलेबी भी बनवा दो तो मैं तुम्हें अभी आशीर्वाद देने के लिए तैयार हो जाऊंगी....

बहुत चालाक हो भाभी तुम्हारा आशीर्वाद तो बहुत महंगा पड़ने वाला है....

देवर जी आशीर्वाद भी तो बहुत ही अनमोल भेंट है जो किसी किसी को ही मिलती है....

चलो कोई बात नहीं आशीर्वाद लेने के लिए तो मैं कुछ भी कीमत अदा कर सकता हूं....

( इतना कहने के साथ ही वह दवाई गोपाल समोसे और आधा किलो जलेबी बांधने के लिए बोल दिया और वह भाभी प्रसन्न नजर आने लगी हलवाई करीब होने की वजह से वह सुन ना ले इसलिए उसे करीब बुलाकर उसके कान में कुछ बोली और मुस्कुराने लगी वह भी उसकी बात समझ कर मन ही मन प्रसन्न होने लगा लेकिन रोहन को कुछ समझ में नहीं आ रहा था इसलिए वह.... अपने दोस्त से धीरे से बोला....)

यार मुझे तो इन दोनों की बात समझ में नहीं आ रही है यह क्या आशीर्वाद आशीर्वाद लगा रखे हैं दोनों....

तुम साले चुतिया के चुतिया ही रहोगे, आशीर्वाद का मतलब समझ में नहीं आ रहा है और चने हो उसकी मां की गांड मारने। अरे मेरे बुद्धू रोहन आशीर्वाद का मतलब है कि वह उसे चोदना चाहता हे... और मैं उसे आशीर्वाद देने के लिए मतलब की चुदवाने के लिए तैयार भी हो गई है देख नहीं रहा है कैसे 5 समोसे और आधा किलो जलेबी बंधवा रहा है साला हम सब के ऊपर खर्चा करना रहता है तो नानी मर जाती है... और भाभी का आशीर्वाद लेने के लिए कैसे पैसे लुटा रहा है....

( रोहन आशीर्वाद का मतलब समझ कर सनृन रह गया था.... और इस बात से उसके लंड में हरकत आना शुरू हो गया था कि उस औरत ने उसे आशीर्वाद देने के लिए तैयार भी हो गई थी .... वाह सामान लेकर जाने लगी और वह दोस्त उन लोगों की करीब आकर धीरे से बोला....

मैं जा रहा हूं भाभी का आशीर्वाद लेने अगर किसी को देखना हो तो आ जाओ कि मैं कैसे भाभी का आशीर्वाद लेता हूं आम के बगीचे में....

साले तेरी तो निकल पड़ी... हमारा भी तो जुगाड़ लगवा...

( उनमें से एक लालच मन से बोला..)

सालों तुम्हारा भी जुगाड़ लग जाएगा लेकिन मेरा तो काम बनने

दो.. तुम लोग आ रहे हो कि नहीं आम के बगीचे में और अगर आना है तो चोरी चोरी देखना नहीं तो सारा काम बिगड़ जाएगा क्योंकि आगे भी हमें ऊसी भाभी से काम निकलवाना है।

यार ऐसा नजारा देखने के लिए कौन इंकार करेगा हम लोग आ रहे हैं तेरे पीछे पीछे रोहन तू भी चलेगा ना (रोहन की तरफ देखते हुए बोला... यह सब सुनकर ही रोहन के तन बदन में गुदगुदी हो रही थी... उसे भी उत्सुकता थी चुदाई देखने की इसलिए वह इंकार नहीं कर सका और हा मैं सिर हिला दिया और वहां उन सबको पीछे पीछे आने के लिए बोल कर ऊस भाभी के पीछे चल दिया।

रोहन का दोस्त उस औरतों के पीछे पीछे चल दिया था और उसके पीछे पीछे रोहन और उसके कुछ साथी जाने लगे सभी के मन में उत्सुकता कुछ ज्यादा बनी हुई थी लेकिन रोहन कुछ ज्यादा ही उत्सुक नजर आ रहा था क्योंकि रोहन के बागी 2 से जहां तक चुदाई के साथ साथ इस तरह की चुदाई कई बार देख चुके थे लेकिन.. उनमें से रोहन ही एक संपूर्ण रूप से अछूता था, जिसने अभी तक चुदाई की परिभाषा को बिल्कुल भी समझ नहीं पाया था और ना ही किसी ने अभी तक समझाने की कोशिश किया था इसलिए वह धड़कते दिल के साथ उन लोगों के पीछे पीछे जाने लगा....

थोड़ी ही देर में वह लोग एक सुनसान जगह पर पहुंच गए जहां पर लोगों की आवाजाही नहीं के हीं बराबर थी... चारों तरफ पेड़ ही पेड़ और जंगली झाड़ियां उगे हुए थे... जिसकी वजह से वह जगह जंगल जैसा ही दिखाई देता था क्योंकि वहां पेड़ों और जंगली झाड़ियों से इतना ज्यादा गिरा हुआ था कि झाड़ियों के बीच क्या हो रहा है किसी को कुछ भी पता नहीं चलता वहीं पर एक टूटी हुई झोपड़ी थी जिसके चारों तरफ बड़ी-बड़ी घास उगी हुई थी अक्सर रोहन का दोस्त गांव की औरतों को यही लाया करता था और यह भाभी भी उसके साथ कई बार यहां आ चुकी थी इसलिए उसे बताने की जरूरत नहीं पड़ी थी और वह खुद ब खुद ही इस जगह पर आगे आगे पहुंच गई थी....

बोलो देवर जी कैसे लोगे मेरा आशीर्वाद... ( वह औरत कुछ टूटी हुई झोपड़ी के बाहर खड़ी होकर अंगड़ाई लेते हुए बोली)

भाभी तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो तुम्हारा आशीर्वाद कैसे लेना है यह मुझे अच्छी तरह से मालूम है ....( इतना कहने के साथ ही वह उस औरत को अपनी बाहों में भर कर चूमने लगा उसके गाल को उसको होठ को चुमते चुमते ब्लाउज के ऊपर से ही ऊसकी गोल गोल चुचियों को दबाना शुरू कर दिया।... के सारे दोस्तों के साथ साथ रोहन भी छुपकर इस दृश्य को देखकर एकदम हैरान हो रहा था और उसका दोस्त जानबूझकर झोपड़ी के बाहर ही उस भाभी के साथ रंगरेलियां मनाते हुए उसके ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दिया और कुछ ही देर में उसकी नंगी चुचीया उसकी हथेली मैं कसमसा रही थी। यह देख कर रोहन के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी भड़क ने लगी रोहन का दोस्त यह सबकुछ जानबूझकर झोपड़ी के बाहर कर रहा था ताकि उसके दोस्तों को यह सब देखने का मौका मिल जाए... अगले ही पल उसने उस भाभी की सूची को पकड़कर अपने मुंह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दिया। रोहन की तो हालत खराब होने लगी और उसके बाकी दोस्त आपस में खुसर पुसर करके उस दृश्य का आनंद लेने लगे तभी उसका दोस्त.. एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर उसकी साड़ी को पकड़कर ऊपर की तरफ उठाने लगा

यह देख कर रोहन के दिल की धड़कन तेज होने लगी और उसके देखते ही देखते उसके दोस्त ने... उस औरत की साड़ी उठाकर एकदम कमर तक कर दिया गांव की अधिकांश औरतें साड़ी के नीचे चड्डी नहीं पहनती थी इस वजह से साड़ी कमर तक उठते ही उस औरत की बड़ी-बड़ी गांड़ सामने नजर आने लगी। क्या देख कर रोहन का लंड खड़ा हो गया रोहन की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी साथ ही उसके दोस्तों का भी यही हाल था देखते ही देखते उस औरत ने अपने हाथों से ही रोहन के दोस्त की पेंट की बटन खोलकर उसे घुटनों तक नीचे गिरा दी और खुद ही घुटनों के बल लेट गई रोहिल के दोस्त का लंड तुरंत खड़ा हो गया था और वह उसे हाथ में लेकर हिलाते हुए सीधा मुंह में भर कर चुसना शुरू कर दी। रोहन तो यह देखकर एकदम हक्का-बक्का रह गया उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि जो वह देख रहा है.. वह सच है उसे सब कुछ सपना लग रहा था उसने कभी सोचा भी नहीं था कि एक औरत लैंड को मुंह में चुस्ती होगी, रोहन का दोस्त अच्छी तरह से जान रहा था कि.. उसके बाकी के दोस्त छू पकर यह सब नजारा देख रहे हैं और कहां से देख रहे हैं यदि उसे पता था तभी तो बार-बार उस तरफ देख कर मुस्कुरा दे रहा था। कुछ देर तक यूं ही वह भाभी रोहन के दोस्त के लंड को लॉलीपॉप की तरह चुस्ती रही रोहन का दोस्त एकदम मस्त हो चुका था... उससे रहा नहीं जा रहा था... वह तुरंत उस औरत की बांह पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाया और उसे घुमा कर झुकने के लिए बोला.... वह तुरंत घोड़ी बन गई , रोहन की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसके पेंट में गदर मचा हुआ था...

देखते ही देखते उसके दोस्त ने अपने लंड़ को . उस औरत की बुर में पीछे से डाल दिया और उसकी बड़ी बड़ी गांड पकड़कर अपनी कमर को आगे पीछे करके हीलाना शुरू कर दिया।

रोहन की सांसे अब उसके काबू में बिल्कुल भी नहीं थी सब कुछ बदलना शुरू हो गया था रोहन की नजरें उस दृश्य पर जम गई थी। तभी रोहन को अपने आसपास तेज सांसो की आवाज सुनाई देने लगी और उसने अपने अगल बगल नजर दौड़ाई तो हैरान रह गया क्योंकि उसके सभी दोस्तों ने अपनी अपनी पेंट से अपने लंड को बाहर निकाल कर हीलाना शुरू कर दिया था। रोहन को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें यह सब उसकी समझ और बर्दाश्त के बाहर था सामने का संभोगनीय कामोत्तेजक दृश्य उसके तन बदन को झकझोर कर रख दे रहा था और आसपास उसके दोस्तों का इस तरह से अपने हाथों से हस्तमैथुन करते हुए अपनी वासना को शांत करने का दृश्य उसकी उत्तेजना को और ज्यादा भड़का रहा था

वह कभी अपने दोस्तों को देखता तो कभी सामने भाभी की चुदाई देख कर मस्त हो रहा था उसकी भी इच्छा हो रही थी कि वह भी उन लड़कों की तरह अपना लंड बाहर निकाल कर ही लाए..... लेकिन उसे शर्म महसूस हो रही थी और वैसे भी उसने आज तक इस तरह के कार्य को अंजाम नहीं दिया था और ना ही कभी सोचा ही था सामने का नजारा और ज्यादा काम उत्तेजना से भरता चला जा रहा था। रोहन के दोस्त की दमदार चुदाई के कारण भाभी जोर जोर से चिल्ला रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था और यहां वह खुल कर मजे ले रही थी... क्योंकि वह चाहे यहां पर जितना भी जोर जोर से सिसकारी भर कर चिल्लाने कोई उसे सुनने वाला नहीं था क्योंकि यहां कोई आता ही नहीं था लेकिन वह इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि उसकी खुल कर हो रही चुदाई को कुछ लड़के मजे ले कर देख रहे हैं है वह इस बात से बेखबर जोर जोर से चिल्लाते हुए रोहन के दोस्त के लंड का मजा ले रही थी कुछ देर तक यूं ही दमदार चुदाई चलती रही... कुछ देर बाद ही उस औरत की सिसकारी की आवाज तेज हो गई और रोहन के इर्द-गिर्द हीला रहे हैं लड़कों के लाड़ ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया.... और कुछ ही पल में रोहन के दोस्त ने भी चिल्लाते अपना पानी उस औरत की बुर में गिराना शुरू कर दिया एक दमदार चुदाई खत्म हो चुकी थी वह दोनों अपने अपने कपड़े दुरुस्त करते इससे पहले रोहन और रोहन के दोस्त लोग वहां से वापस लौट गए लेकिन जाते-जाते रोहन के मन पर कामोत्तेजना का पर्दा चढ़ाते गए...
 
कुछ दिनों से रोहन की आंखें बहुत कुछ देख रही थी ऐसा लग रहा था कि उसका नसीब बहुत जोरों पर है क्योंकि पहले तो वह अपने आवारा दोस्तों के मुंह से गंदी गंदी बातें और उनके अंगों के बारे में सिर्फ सुना करता था लेकिन कुछ दिनों से तो उसे औरतों के अंगों का नजारा भी देखने को मिल रहा था पहले बेला कि आज नंगे बदन को देखकर वह अपनी मस्ती में खो रहा था की उसकी खूबसूरत और बेहद हसीन मां की नंगी गांड और उसकी रस से भरी हुई बुर देखने को मिल गई थी और अब बची कुची कसर... उसके दोस्त ने उसे भाभी की जबरदस्त चुदाई दिखाकर पूरी कर दिया था यही रोहन के लिए रह गया था और वह भी पूरा हो चुका था भाभी की जबरदस्ती चुदाई देखकर उसका दिमाग एकदम से व्याकुल होने लगा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें.... जिस तरह से शराबी को शराब का नशा होता है और समय पर शराब ना मिलने पर उनका दिमाग व्यग्र होने लगता है उसी तरह से रोहन के साथ भी हो रहा था... रोहन को औरतों की खूबसूरत अंगों को देखने का नशा हो चुका था और वह हमेशा इसी ताक में रहता था कि कब उसे उसकी मां की या बेला के खूबसूरत अंगो को देखने का मौका मिल जाए.. लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था क्योंकि बेला जानबूझकर रोहन से दूरी रखने लगी थी क्योंकि वह रोहन को और ज्यादा तड़पाना चाहती थी और वह अच्छी तरह से जानती थी कि यही तड़प उसके लिए फायदे कारक है और दूसरी तरफ सुगंधा को बिल्कुल भी वक्त नहीं मिलता था... क्योंकि गेहूं की कटाई हो चुकी थी और उन्हें साफ करके समय पर बाजार में उतार ना था इसलिए वह मजदूरों के साथ दिनभर खड़ी रह कर उनसे काम करवाती थी ताकि गेहूं समय पर बाजार में उतर जाए और उनके अच्छे से दाम मिल सके समय पर गेहूं बाजार में ना उतरने की वजह से सुगंधाको पहले बहुत घाटा सहना पड़ा था और वह नहीं चाहती थी कि इस बार ऐसा हो इसलिए वह अपने समय घर पर कम और खेतों में ज्यादा बिता रही थी....

कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए रोहन की आंखों को ठंडक और बदन को गर्माहट मिल सके ऐसा नजारा देखने को नहीं मिला और दूसरी तरफ सुगंधा गेहूं को समय पर बाजार में उतार कर एकदम निश्चिंत हो गई थी. ... रोहन की तड़प और उसकी उत्सुकता को बेला अच्छी तरह से भाप गई थी मैं समझ गई थी कि रोहन आते जाते जिस तरह से उसकी तरफ नजरें दौड़ाता है... वह अपनी नजरों से उसके गुप्त अंगो को टटोलना चाहता था और वह अपनी मंशा पूरी नहीं कर पा रहा था जिस की प्यास उसकी आंखों में बेला को साफ नजर आती थी अब समय आ गया था गर्म लोहे लोहे पर हथोड़ा मारने का......

दोपहर का समय था आसमान में सूरज तप रहा था तपती धूप की वजह से गांव में सन्नाटा फैला हुआ था लोग अपने अपने घरों में धूप से बचने के लिए आराम कर रहे थे.....

और ऐसी तपती हुई दोपहर में बेला जानबूझकर घर के पीछे बने हेडपंप के पास बैठकर कपड़े धो रही थी बेला को इस बात का पता था कि इस समय रोहन इसी रास्ते से होकर अपने दोस्तों के पास जाएगा क्योंकि यह उसका रोज का काम था....

देना आज उसे अपने अंगों का प्रदर्शन दिखा कर रोहन को एकदम अपने बस में कर लेना चाहती थी.... इसलिए तो वह अपने ब्लाउज के ऊपर के दो बटन खोल चुकी थी जिसकी वजह से उसकी आधे से ज्यादा चूचियां बाहर नजर आ रही थी...

और तो और_ बेला आज रोहन को एकदम कामा तुर बना देने के उद्देश्य से अपनी दोनों टांगों को थोड़ा सा फैला कर अपने घुटने को मोड़कर बेठी थी और अपनी पेटीकोट को घुटनों से नीचे सरका दी थी.... जिसकी वजह से उसकी मोटी मोटी मांसल जांगे साफ नजर आ रही थी.....

बेला जानबूझकर कपड़ों को धोते-धोते अपने ऊपर भी पानी डाल दे रही थी.....

 
बेला कपड़े धोते-धोते अपने ऊपर भी पानी डाल ले रही थी जिसकी वजह से उसका बदन पूरी तरह से गिला हो चुका था और उसके वस्त्र भी पूरी तरह से पानी में भीग चुके थे और उसका अंग अंग गीले कपड़ों में से साफ साफ नजर आ रहा था वह रोहन का इंतजार करते हुए अपनी धुन में कपड़े धो रही थी कि तभी सामने से रोहन आता हुआ नजर आया लेकिन बेला उस पर जरा भी ध्यान दिए बिना बस थोड़ा सा अपनी टांगों को खोल कर बैठ गई और कपड़े धोने में मसगुल हो गई... रोहन की नजर बेला.. पर पड़ चुकी थी.... वह बेला को ही देखते हुए आ रहा था यह बात बेला को पता थी लेकिन वह रोहन पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि ... रोहन खुद-ब-खुद बिना बुलाए ही उसके पास खिंचा चला आएगा और जैसा वह सोच रही थी ठीक वैसा ही हुआ अपने रास्ते जाने के बजाय बेला की तरफ मुड़ गया..... यह देखकर बेला का मन प्रसन्नता से भर गया यह औरत का आत्मविश्वास ही था शायद मर्दों की फितरत से औरत अच्छी तरह से वाकिफ होती है तभी तो रोहन को बुलाए बिना ही रोहन को अपनी तरफ खींच ली थी...... रोहन धीरे-धीरे बेला के करीब पहुंच गया लेकिन बेला रोहन पर ध्यान दिए बिना ही अपने काम में व्यस्त रहने की अदाकारी दिखा रही थी... रोहन बेला के ठीक सामने हेडपंप के करीब खड़ा था जहां से उसे बेला के ब्लाउज में से झांकते हुए उसकी दोनों नारंगी या साफ-साफ नजर आ रही थी यह देख कर रोहन का दिल उत्तेजना के मारे धड़कने लगा वह वही ठीठक कर खड़ा हो गया... बेला ने जान बूझकर अपने ब्लाउज के दो बटन खोले थे ताकि रोहन को उसकी दोनों चूचियों के दर्शन आराम से हो जाए रोहन का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि यह नजारा देखने के लिए और काफी दिनों से मशक्कत कर रहा था लेकिन अपनी मंशा में कामयाब नहीं हो पा रहा था और आज इतने दिनों के बाद बेला की अधनंगी चुचियों को देख कर वह मस्त हुए जा रहा था...... तभी बेना रोहन की तरफ गौर करते हुए ऐसे बोली कि जैसे रोहन के आने का उसे पता ही नहीं था.... अरे रोहन बाबू तुम कब आए? ( बेला रोहन पर एक नजर डाल कर वापस कपड़े धोते हुए बोली) मैं तो कब से इधर आकर खड़ा हूं लेकिन तुम हो कि जरा भी ध्यान नहीं दे रही हो इतनी धूप में सब लोग अपने अपने घर में आराम कर रहे हैं और तुम हो कि यहां बैठकर कपड़े धो रही हो.... क्या करें रोहन बाबू काम ही कुछ ऐसा है.... आखिर धोना तो मुझे ही है.... अगर तुम्हें मुझ पर दया आ रही है तो थोड़ी मदद कर दो... हाॉ हाॉ .... बोलो मैं तुम्हारी मदद करने के लिए तैयार हूं... ( रोहन की बात सुनकर बेला मन ही मन प्रसन्न होने लगी क्योंकि वह समझ गई थी कि रोहन पूरी तरह से उसके आकर्षण में बंध चुका है.. इसलिए वह जानबूझकर इस बार थोड़ा और झुकते हुए कपड़े धोने का नाटक करने की क्योंकि वह जानती थी ईस तरह से थोड़ा और झुकने की वजह से रोहन को उसकी चुचियों की भूरे रंग की निप्पल साफ साफ नजर आने लगेगी और ऐसा हुआ भी रोहन तो यह देखकर एकदम मस्त हो गया क्योंकि उसे बेला की चुचियों के साथ-साथ उसकी भूरे रंग की निप्पल साफ नजर आ रही थी यह नजारा देखकर रोहन के पेंट में हरकत होने लगी..... बेला... जानबूझकर अपने अंगों का प्रदर्शन कर रही थी और अपनी इस कामुक हरकत की वजह से खुद भी उत्तेजना के भंवर में लपट़ती चली जा रही थी.... वह रोहन की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली ...... ज्यादा कुछ नहीं करना है बस तुम्हें यह नल चलाना है ताकि में आराम से कपड़े धो सकूं तुम्हें कोई दिक्कत तो नहीं है ना.... नहीं नहीं मुझे कोई दिक्कत नहीं है (और इतना कहने के साथ ही वह हेडपंप का हत्था पकड़ कर ऊपर नीचे करके हिलाने लगा और पंप में से पानी नीचे गिरने लगा... बेला जानती थी कि उसके बदन का आधे से ज्यादा हिस्सा रोहन की निगाहों में पूरी तरह से नजर आ रहा था वह अपनी धुन में कपड़े धो रही थी और रोहन अपनी आंखों को बेला के गर्म बदन से सेक रहा था.... कुछ ही पल में रोहन पूरी तरह से उत्तेजित हो गया क्योंकि भले ही वह नेट चला रहा था लेकिन उसका सारा ध्यान बेला के ब्लाउज में से झांकते उसके दोनों कबूतरों पर था.. जो की बेला के द्वारा कपड़े धोने की वजह से आपस में किसी गोल गोल संतरो के भांति रगड़ खा रहे थे. जिसे देख कर रोहन उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच रहा था.... उसके पेंट में धीरे धीरे तंबू बनना शुरू हो गया था जो कि यह बात बेला को अच्छी तरह से खबर थी क्योंकि बेला चोर नजरों से उसके पेंट के आगे वाले भाग पर बन रहे तंबू के उठाव को देख कर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी... एक अजीब सी हलचल बेला के मन में भी मच रही थी क्योंकि बेला की अनुभवी आंखों ने पेंट के ऊपर से ही रोहन के लंड के माप को भाप ली थी इसलिए वह भी उत्सुक थी रोहन के पेंट के अंदर झांकने के लिए लेकिन वह अपनी मंशा को रोहन के आगे जाहिर नहीं होने देना चाहती थी इसलिए बिना कुछ बोले कपड़ों को धोती रहे और सामने खड़ा रोहन बेला की खूबसूरती और उसके मादक अंगों को निहार कर मन ही मन उत्तेजना अनुभव करने लगा रोहन से रहा नहीं गया तो वह बातों का सिलसिला शुरु करते हुए बोला.... इतनी तेज धूप में भी तुम काम कर रही हो जबकि गांव के सभी लोग अपने घर में आराम कर रहे हैं ... क्या करें रोहन बाबू हमारी तो किस्मत में ही काम काम और बस काम ही लिखा है... अपनी जिंदगी में आराम कहां.... ( बेला धुले हुए कपड़ों को पास में पड़ी बाल्टी में रखते हुए बोली...) ऐसा नहीं है आराम करने के लिए तो समय निकालना पड़ता है तुम अपने लिए भी समय निकाल सकती हो ..(रोहन इस तरह की बातें करते करते अपनी नजरों को थोड़ा नीचे की तरफ ले गया तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि जिस तरह उसकी नजर गई थी उधर बेला घुटनों से अपने पेटिकोट को नीचे की हुई थी और बैठने की वजह से उसका पेटीकोट जांघो तक आ गया था... और बेला जिस तरह से अपनी दोनों टांगों को फैला कर बैठी थी उसकी वजह से पेटीकोट के बीच में हल्का सा जगह बन गई थी और जिसकी वजह से रोहन की नजरें पेटिकोट के अंदर तक पहुंच रही थी... लेकिन उसकी नजरें जिस चीज को देखना चाहती थी वह अंधेरे में कहीं खो सी गई थी.. क्योंकि पेटीकोट के अंदर एकदम घना अंधेरा छाया हुआ था रोहन बड़ी मशक्कत कर रहा था अंदर उससे बेहतरीन खूबसूरत अंग को देखने के लिए लेकिन पेटिकोट के अंदर अंधेरे की वजह से उसकी मंशा पूरी नहीं हो पा रही थी बार-बार वह अपनी दिशा बदल कर हेड पंप चलाते हुए पेटिकोट के अंदर झांक रहा था लेकिन उसकी मनोकामना पूरी नहीं हो पा रही थी इसलिए वह बेहद व्याकुल हो चुका था वह नल चलाते हुए बात को आगे बढ़ाते हुए बोला....) तुम खुद ही अपनी दुश्मन बनी हो जो इस तरह से इतनी धूप में तप रही हो देखो तुम्हारा रंग भी कितना दबने लगा है .... (रोहन थोड़ी हिम्मत जुटा ते हुए यह बात बोला था... और रोहन की यह बात सुनकर बेला मन ही मन प्रसन्न होने लगी थी ...वह कपड़े धोते हुए रोहन की तरफ मुस्कुरा कर देखी और बोली...) क्या तुम्हें अच्छा नहीं लगता रोहन बाबू?.... क्या नहीं अच्छा लगता.... अरे मेरा रंग और क्या.... तुझे अच्छा नहीं लगता मेरा रंग (बेला थोड़ा उदास होते हुए बोली) नहीं नहीं मेरा यह कहने का मतलब बिल्कुल भी नहीं था तुम तो मुझे बहुत अच्छी लगती हो... वह तो धूप की वजह से मैं तुम्हें ऐसा कह रहा था कि थोड़ा बहुत आराम कर लिया करो तो तुम्हारा रंग और भी निखर जाएगा...(_ रोहन बेला के मन पर अपनी बातों का मक्खन लगाते हुए बोला लेकिन इसी दौरान वहां अपनी नजरों को बेला की पेटी को्ट के अंदर उतारने की पूरी कोशिश में लगा हुआ था... लेकिन सफल नहीं हो पा रहा था और यह बात बेला को पता चल गई कि उसकी नजर उसके किस अंग पर पहुंचने की कोशिश कर रही है इसलिए वह अपनी नजर को हल्के से नीचे की तरफ झुका कर देखी तो वह खुद ही दंग रह गई.. उसकी पेटीकोट दोनों जांघों के बीच से खुली हुई थी और उसे समझते देर नहीं लगी कि रोहन उसका क्या देखना चाहता है लेकिन उसकी नजर उसकी खूबसूरत अंग तक पहुंच नहीं पा रही थी यह बात भी बेला समझ गई थी ..वह मन ही मन रोहन की व्याकुलता को भापकर प्रसन्न होने लगी और अब वह रोहन को पूरी तरह से तड़पाने के इरादे से अपनी दोनों जांघों को हल्के से हिलाते हुए बोली...... तुम को अच्छी लगती हु ना .. बस मेरे लिए यही काफी है दूसरों को मैं कैसी लगती हूं मुझे इससे कोई भी मतलब नहीं है.. ( बेला यह कहते हुए चोर नजरों से रोहन की निगाह को देख कर अपनी पेटीकोट की तरफ देखी तो अभी भी उसके अंदर अंधेरा ही नजर आ रहा था ...वह समझ गई थी कि रोहन जो देखना चाह रहा है उसे अभी भी नहीं दिख रहा है. इसलिए जानबूझकर वह बाल्टी में से एक लोटा पानी उठाकर... अपने ऊपर डालने लगी... जिसकी वजह से एक बार फिर से उस के वस्त्र एकदम गीले हो गए और उसके वस्त्र के अंदर का अंग साफ-साफ अनावृत होता हुआ नजर आने लगा और तो और उसने रोहन की नजरों से बचकर हल्के से अपने हाथ से पेटीकोट को थोड़ा और नीचे कर दी... और थोड़ा सा अपनी टांगों को फैलाते हुए फिर से बाल्टी से एक लोटा पानी निकाल कर इस बार अपने चेहरे पर जानबूझकर डालते हुए आंखें बंद कर ली और ठंडे पानी की वजह से अपने बदन में गनगनाहट का एहसास कराते हुए इधर उधर हिलते हुए वह अपनी साड़ी को थोड़ा और सरका दी और इस बार जैसे रोहन की मंशा पूरी होती नजर आने लगी क्योंकि उसकी आंखों के सामने वह नजारा था जिसे देखने के लिए वह अंदर ही अंदर तड़प रहा था रोहन की आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि जिस अंग के बारे में वह सिर्फ कल्पना ही करता था ....उस अंग को आज वह अपनी आंखों से देख रहा था .. . उस नजारे को देखकर रोहन हेडपंप चलाना भूल गया ,,उसके हाथ हेडपंप के हत्थे पर ही जमकर रह गए , बेला यह सब चोर नजरों से देख कर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी ,क्योंकि वह जान गई थी कि उसके धनुष में से निकला तीर ठीक निशाने पर बैठा है.... वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी हरकत की वजह से उसकी बुर रोहन को साफ साफ नजर आने लगी है वह कुछ पल तक और रोहन को अपनी बुर के दर्शन कराना चाहती थी इस वजह से वह फिर से बाल्टी में से एक लोटा पानी भरकर अपने ऊपर डालने लगी इस दौरान वह अपनी आंखों को हल्का सा खोलकर रोहन की तरफ देखी जो कि अभी भी वह प्यासी नजरों से उस की बुर को ही निहार रहा था... इस बार उसके बदन में पानी के ठंडक की वजह से नहीं बल्कि उत्तेजना की वजह से गंनगनाहट आ गई.... क्योंकि वह जिस तरह से आज अपनी बुर के दर्शन रोहन को करा रही थी उस तरह से उसने आज तक किसी को भी नहीं दिखाई थी और रोहन भले ही जवानी की दहलीज पर कदम बढ़ा रहा था लेकिन था तो एक मर्द ही और एक मर्द के सामने अपने अंगों का प्रदर्शन करके बेला रोमांचित और उत्तेजित के मिश्रण के भाव में डूबने लगी थी रोहन की नजर अभी भी बेला की फूली हुई बुर पर टिकी हुई थी जोकि गरम रोटी की तरह एकदम गरम नजर आ रहे थे और बुर के गुलाब की पंखुड़ियों के इर्द-गिर्द हल्के हल्के बाल होने की वजह से उसकी खूबसूरती और भी ज्यादा बढ़ चुकी थी..... अति उत्तेजनात्मक और मादक अंग के दर्शन करके रोहन की आंखों में नशा उतर आया था उसका मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया था रोहन के चेहरे का भाव देखकर बेला मन ही मन प्रसन्न हो रही थी अब वह इससे ज्यादा देर तक अपने अंग को अनावृत रखना नहीं चाहती थी क्योंकि वह रोहन को अपने मादक अंग को महसूस कराने के उद्देश्य से और ज्यादा तड़पाना चाहती थी इसलिए वह सारे वाक्ये से अनजान बनने की कोशिश करते हुए अपने आप पर और रोहन की निगाह पर गौर करते हुए हडबडाहट भरे स्वर में बोली..... _ अरे दैया रे दैया यह कैसे हो गया ....(और इतना कहते हुए वह अपने पेटीकोट को पकड़ कर अपनी घुटनों के ऊपर के अंग को ढकने की कोशिश करने लगी... रोहन के लिए यह नजारा मादक और उत्तेजना से भरा हुआ था और उसके चेहरे पर उत्तेजना का असर साफ नजर आ रहा था उसका गोरा चेहरा एकदम लाल हो चुका था और जवानी मापने के थर्मामीटर में तनाव आ चुका था जिसकी वजह से उसके पेंट में तंबू बन गया था..... बेला की नजर रोहन के पेंट में बने तंबू पर गई तो वह दंग रह गई क्योंकि रोहन की उम्र के मुताबिक उसके पेंट में बना तंबू कुछ और ही कहानी कह रहा था अनुभवी बेला इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि एक अच्छा खासा मुस्टंडा मर्द के पेंट में भी इस तरह का तंबू नहीं बनता जिस तरह का तंबू रोहन के पेंट में इस उम्र में बन रहा था.... इसलिए बेला भी पेंट में बने तंबू को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रही थी... लेकिन वह अपने उत्साह को अपने चेहरे पर बिल्कुल भी प्रदर्शित नहीं होने देना चाहती थी इसलिए वह हड़बड़ाहट भरे लहजे में रोहन से बोली.... रोहन बाबू तुम बड़े शैतान हो (इतना कहकर वह वापस कपड़े धोने में व्यस्त हो गई) मुझे तुम ऐसा क्यों कह रही हो...? ( रोहन फिर से नल चलाते हुए बोला लेकिन इस बात का उसे बिल्कुल भी पता नहीं था कि जो वह देख रहा था इस बात का बेला को पता चल गया है..) मैं ऐसा क्यों कह रही हूं तुम्हें अच्छी तरह से पता है... नहीं मुझे बिल्कुल भी नहीं मालूम कि तुम ऐसा क्यों कह रही हो मैं तो कुछ बोला भी नहीं और तुम्हारी मदद करने के लिए नल चला रहा हूं..... अब ज्यादा बनो मत मैं जानती हूं कि तुम झूठ कह रहे हो ...(बेला कपड़े धोते-धोते रुक गई और रोहन की तरफ देखते हुए बोली..) झूठ ........भला मैं क्यों झूठ बोलूंगा और मैंने तो कुछ कहा भी नहीं तो झूठ बोलने का सवाल ही नहीं उठता...( रोहन आश्चर्य के साथ नल चलाते हुए बोला) _ अब बनो मत मेरे रोहन बाबू मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि नहाते समय अनजाने में मेरा पेटीकोट जांघो से नीचे सरक गया था.. और जिसकी वजह से तुमने वह देख लिया.... ( इस बार बेला की बात सुनकर रोहन शक पका गया वह समझ गया कि बेला जान गई है कि वह क्या देख रहा था लेकिन फिर भी अपनी बात पर अड़े रहते हुए वह बोला....) अरे तुम क्या कह रही हो मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूं तुम क्या देखने की बात कर रही हो ...( रोहन फिर से अनजान बनने का नाटक करते हुए बोला) अब बनने की जरूरत नहीं है सच सच बताओ मेरी पेटीकोट सरक जाने की वजह से तुम मेरी बुर देख रहे थे....( बेला इस बार जानबूझकर खुले शब्दों में रोहन को बोली और रोहन बेला के मुंह से बुर शब्द सुनकर एकदम उत्तेजित हो गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि एक औरत के मुंह से बुर शब्द सुन रहा है... और एक औरत के मुंह से अपने अंदरूनी अंग के बारे में खुले शब्दों में सुनकर रोहन और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया और पेंट के अंदर उसका लंड और ज्यादा टाइट हो गया उत्तेजना के मारे उसका चेहरा लाल टमाटर हो गया और वहां अपनी सांसों के बिल्कुल भी संयम नहीं रख पा रहा था उसकी सांसे गहरी चलने लगी थी फिर भी अपने आप को बचाते हुए वह बोला..... नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है जो तुम कह रही हो मैं तो उसे देखा भी नहीं मैं तो नल चला रहा हूं.... अच्छा बच्चा मेरे से चलाकी दिखा रहे हो... अगर तुम मेरी बुर नहीं देख रहे थे तो (अपना हाथ आगे बढ़ाकर पेंट में बने तंबू की नोक को अपनी दोनों उंगलियों के बीच दबाते हुए) यह तुम्हारा लैंड क्यों खड़ा हो गया है..... इतना सुनते ही और बेला की नरम गरम अंगुलियों का स्पर्श पेंट के ऊपर से ही अपने लंड के ऊपर होते ही वह और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया लेकिन इस बात की घबराहट उसके मन में होने लगी की बेला को पता चल गया था कि वह क्या देख रहा था लेकिन फिर भी इस बात को मानने को तैयार ही नहीं था कि वह उसकी बुर देख रहा था क्योंकि उसे डर लग रहा था कि कहीं वह उसकी मां को ना बता दे इसलिए वह बोला...... नहीं मैं कुछ भी नहीं देख रहा था ...... देखो बनो मत मैं जानती हूं कि तुम्हारी नजर मेरी बुर पर ही थी तभी तो तुम्हारा लंड खड़ा हो गया है और मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि मर्दों का क्यों खड़ा होता है....( इतना कहते हुए वह मुस्कुरा कर फिर से कपड़े पानी में धोने लगी कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही बेला अच्छी तरह से जान रही थी कि उसका काम बन चुका है क्योंकि रोहन पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था भले ही वह इस बात को झुठला रहा था कि उसने कुछ नहीं देखा.... कुछ ही देर में बेला पानी में सारे कपड़े धो चुकी थी अब उसे सुखाने के लिए रस्सी पर डालना था रोहन अभी भी उसी तरह से खड़ा था लेकिन इस बार उसका एक हाथ अपने आगे वाले भाग पर था जिससे वह अपनी उत्तेजना को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहा था बेला धीरे-धीरे एक-एक करके सारे कपड़ों को अपने हाथ पर रख ली और रोहन से बोली..... रोहन कपड़े सुखाने में मेरी मदद करो... ( अपनी चोरी पकड़े जाने की वजह से रोहन थोड़ा घबराया हुआ था और बेला की बात मानते हुए वह उसके पीछे पीछे चल दिया बेला एक-एक करके रोहन को अपने हाथ से कपड़े लेने के लिए कह रही थी और उसे रस्सी पर डालने के लिए कह रही थी जिसे रोहन बखूबी निभा रहा था बेला जानबूझकर रोहन को अपने हाथों से कपड़े रस्सी पर डालने के लिए बोल रही थी इसमें भी उसकी एक युक्ति थी जिसे वह बखूबी सफलतापूर्वक अपनी मंजिल पर पहुंचाना चाहती थी धुले हुए कपड़ों में रोहन के घर के ही कपड़े थे जिसमें उसके पैंट शर्ट बनियान और उसकी मां के कपड़े थे जी ने एक-एक करके रोहन बेला के हाथों से लेकर रस्सी पर सूखने के लिए डाल रहा था
 
अपनी युक्ति आजमाने में बेला का दिल जोरों से धड़क रहा था... क्या करें वह भी आखिर थी तो एक औरत ही.. और वह भी एक मर्द के अरमानों के साथ खेल रही थी... तो जाहिर सी बात थी कि उसमें भी उन्माद का असर दिखाई दे रहा था बेला एक एक करके रोहन को कपड़े थमा रही थी और रोहन मन में उमड़ रहे उन्माद के भंवर में फसता हुआ चोर नजरों से बेला के अध खुले स्तनों को देखकर मस्त हुए जा रहा था और साथ ही कपड़ों को रस्सी पर सूखने के लिए डाल रहा था तभी वह बेला की तरफ आगे बढ़ा और जैसे ही कपड़े लेने के लिए हाथ आगे बढ़ाया तो वह सन्न रह रह गया... उसके हाथ एकाएक रुक गए वह बढ़ाए हुए हाथ को एकदम से पीछे ले लिया ..यह देखकर बेला मुस्कुराने लगी और रोहन का दिल जोरो से धड़कने लगा. वह कभी बेला के हाथ के उस वस्त्र को तो कभी बेला की तरफ आश्चर्य से देख रहा था... बेला उसके मन में उमड़ रहे भावनाओं को अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए मुस्कुराते हुए बोली.... क्या हुआ रोहन लो इसे भी रस्सी पर डालो लेकिन इसे साड़ी के नीचे डालना क्योंकि यह तुम्हारी मां की चड्डी और ब्रा है.... ( इतना सुनते ही रोहन का दिल और जोरो से धड़कने लगा उसके पेंट में उसका लंड गदर मचाने लगा... अपनी आंखों के सामने बेला के हाथों में अपनी मां की चड्डी और ब्रा को देखकर रोहन एकदम से उत्तेजना से भर गया वह अप लक कुछ सेकंड के लिए एकदम से मंत्रमुग्ध होकर अपनी मां की चड्डी और ब्रा को देखता ही रह गया यह देखकर बेला मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और उसकी टांगों के बीच बने तंबू को देख कर बेला की भी लालसा जोर मार रही थी रोहन को इस तरह से देखता हुआ देखकर बेला फिर से मुस्कुराते हुए बोली .... क्या हुआ रोहन तुम इस तरह से क्यों खड़े हो ..देख नहीं रहे कितनी तेज धूप है जल्दी से लो इसे रस्सी पर डालो... ( बेला की आवाज कानों में पड़ते ही जैसे वह नींद से जागा हो इस तरह से अपना हाथ आगे बढ़ाया और कांपते हाथों से अपनी मां की ब्रा और चड्डी अपने हाथों में ले लिया अपनी मां की चड्डी और ब्रा को हाथ में लेते हैं उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे वह अपनी मां के नंगे बदन को अपनी बाहों में लेकर खड़ा है वह एकदम से उन्माद से भर चुका था उसके ना चाहते हुए भी उसकी उंगलियां अपनी मां की ब्रा और चड्डी जो कि एकदम गुलाबी रंग की थी उस पर हल्के हल्के रगड़ने लगा उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि वह अपनी मां की चड्डी पर नहीं बल्कि अपनी मां की नंगी बुर पर अपनी उंगली सहला रहा है... रोहन का तन बदन उसके काबू में बिल्कुल भी नहीं था उसके पेंट में बना हुआ तंबू किसी शामियाने में लगे हुए बंबू की तरह नजर आ रहा था यह देखकर बेला की बुर में पानी का सैलाब उठने लगा...... इतना तो उसे समझ में आ ही गया था कि रोहन की पेंट में कोई मामूली हथियार नहीं था औरतों की बुर को चौड़ा कर सके इतना मजबूत हथियार रोहन ने पेंट में छुपा रखा था.... यह सब देखकर तो बेला का मन है कि नहीं लगा था उसके मन में तो ऐसी इच्छा हो रही थी कि खुद ही अपने हाथों से रोहन की पेंट खोल कर उसके लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दे... लेकिन काफी मशक्कत कर के बेला अपने आप को संभाले हुए थी क्योंकि उसका एक गलत कदम भी उसके फैलाए जाल को काट सकती थी और वह अपनी मंशा कभी पूरी नहीं कर पाती इसलिए वह अपनी भावनाओं पर काबू करते हुए रोहन को फिर से बोली... रोहन बाबू कहां खो गए ऐसा लग रहा है कि तुम्हारे हाथों में तुम्हारी मां की ब्रा चड्डी नहीं बल्कि वह खुद ही एकदम नंगी होकर तुम्हारी बाहों में है देखो तो कितने आराम से अपनी मां की चड्डी को सहला रहे हो..... ( बेला जानबूझकर रोहन से उसकी मां से संबंधित इस तरह की गंदी बातें कर रही थी ताकि रोहन और ज्यादा उत्तेजित हो जाए और बेला की इस तरह की बात सुनकर जैसे नींद से जागा हो इस तरह से हड़बड़ाते हुए बोला..) हहहह...ममंमम..ननननन ...नही _ ऐसा कुछ भी नहीं है.... ऐसा कैसे कुछ भी नहीं है तुम जिस तरह से अपनी उंगली को अपनी मां की चड्डी पर घुमा रहे हो मुझे तो ऐसा लग रहा है कि जैसे अपनी मां की बुर पर उंगली घुमा रहे हो ...इसका मतलब यही है कि तुम औरतों की चड्डी के अंदर क्या रहता है देख चुके हो.... ननननन....नही.... मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं कर रहा था और भला मुझे क्या मालूम की चड्डी के अंदर क्या होता है .... (रोहन हड़बड़ा ते हुए बोला लेकिन बेला की इस तरह की बातें सुनकर उत्तेजित भी हो रहा था और घबरा भी रहा था दोनों का मिला जुला असर उसके चेहरे पर साफ नजर आ रहा था... बेला अंदर ही अंदर प्रसन्न हो रही थी...) अरे औरतों की चड्डी के अंदर वही होता है जो तुम अभी पागलों की तरह देख रहे थे मेरे पेटिकोट के अंदर....( बेला एकदम से बेशर्म बनते हुए रोहन के सामने खुले शब्दों में बोली और यह सुनकर रोहन का उत्तेजना से रोम-रोम पुलकित होने लगा लेकिन वह अपनी चोरी को छुपाते हुए बोला .... नहीं नहीं मैं कुछ भी नहीं देख रहा था मैं भला क्या देख रहा था मुझे कुछ भी दिखाई नहीं दिया... कुछ भी दिखाई नहीं दिया मतलब कि तुम देखने की कोशिश जरूर कर रहे थे ...(बेला रोहन की बात को पकड़ते हुए बोली तो इस बार वह अपनी चोरी को छुपा नहीं सका और शर्मिंदगी की वजह से अपना सिर नीचे झुका दिया.... रोहन की हालत को देख कर देना मंद मंद मुस्कुरा रही थी और मुस्कुराते हुए बोली ..... चलो कोई बात नहीं दिखाई नहीं दिया तो क्या हुआ तुम कहो तो मैं तुम्हें दिखा दूं कि औरतों की चड्डी के अंदर क्या छुपा होता है.... ( बेला एकदम मद भरी आवाज में रोहन से बोली तो उसकी सांसे उत्तेजना से तीव्र गति से चलने लगी और जिस तरह की बात बेला कर रही थी यह सुनकर रोहन के लंड की अकड़न बढ़ने लगी मन तो चाह रहा था कि वह खुद अपने मुंह से बोल दे कि हां मैं देखना चाहता हूं मुझे दिखाओ लेकिन शर्म के मारे बोल नहीं पा रहा था बस कभी नीचे तो कभी बेला को देख ले रहा था... रोहन का चेहरा उत्तेजना से लाल हो चुका था और वह मन में यही चाह रहा था कि बेला किसी भी तरह से अपने आप ही दिखा दे कि आखिरकार औरत की चड्डी के अंदर क्या होता है रोहन इसी आस में वहां खड़ा था हाथों में अभी भी अपनी मां की चड्डी और ब्रा पकड़े हुए था जो कि उसे आभास दिला रहे थे कि उसकी बेहद खूबसूरत मां की अंतर्वस्तु उसकी हाथों में है जिसके अंदर वह अपने बेशकीमती खजाने को छुपा कर रखती है बेला रोहन के चेहरे कि मासूमियत और उसके तन बदन की उत्तेजना को उसके चेहरे पर आई लालिमा देखकर अच्छी तरह से समझ रही थी वह रोहन को और ज्यादा तड़पाने के उद्देश्य से बात को घुमाते हुए बोली ) रोहन क्या कर रहे हो बहुत देर हो रही है मुझे कहीं और जाना है जल्दी से अपनी मां के कपड़े रस्सी पर डाल दो.... कहां जाना है तुम्हें जो इतना उतावली हो रही हो (ऐसा कहते हुए वह रस्सी पर अपनी मां की चड्डी और ब्रा टांगने यह वाला था कि उसे बीच में रोकते हुए बेला बोली...) अरे यह क्या कर रहे हो ....मैं तुमसे पहले ही कही थी रोहन बाबू के अपनी मां की साड़ियों के नीचे अपनी मां की ब्रा और चड्डी डालो ताकि कोई देख ना पाए... तुम जिस तरह से टांग रहे हो अगर मालकिन को पता चल गया तो मुझे बहुत डांटेगी ...... (रोहन इस बात को बिल्कुल समझ नहीं पाया कि आखिरकार साड़ियों के नीचे क्यों टांगने के लिए कह रही है ...लेकीन वह फिर भी बेला की बात मानते हुए अपनी मां की साड़ी के नीचे ब्रा और चड्डी को डालते हुए बोला.. ) भला ऊपर टांगने में ऐसा क्या हो जाएगा जो मम्मी तुम्हें डांटेगी.... तुम बिल्कुल पागल हो रोहन दारू औरतों के अंदरुनी वस्त्र हैं इन्हें औरतें हमेशा छुपाकर ही सुखातीे हैं... क्योंकि मर्दों का काम ही यही होता है औरतों के हर एक चीज उनसे जुड़े वस्त्र को भी देख कर मस्त हो जाना ....मर्द औरतों के अंतर्वस्त्र को देख ले तो उन्हें लेकर वह मन ही मन में कल्पना करने लगते हैं जैसे कि तुम अभी कर रहे थे अपनी मां की चड्डी हाथ में लेकर... ( बेला की यह बात बिल्कुल सही थी इसलिए तो रोहन शर्म से अपना सिर नीचे झुका लिया...) चलो अब मेरा काम निपट गया है मुझे जल्दी से एक जगह जाना है वरना सब गड़बड़ हो जाएगी..... ( बेला जानबूझकर रोहन के सामने यह बात बोल रही थी ताकि रोहन उससे जरूर पूछे कि वह कहां जा रही है और ऐसा हुआ भी वह बेला से बोला...) इतनी धूप में आखिर तुम कहां जाओगी.... ( बेला को इसी पल का इंतजार था और इस मौके का फायदा उठाते हुए बेला बोली...) क्या करूं रोहन बाबू मुझे पैसों की बहुत तंगी आ गई है और बहुत जरूरी है पास के गांव मैं एक साहूकार है जिससे मुझे उधार लेने जाना है ....(इतना कहते हुए बेला चोर नजरों से रोहन के चेहरे के हाव-भाव को पढ़ने की कोशिश कर रही थी जिससे साफ झलक रहा था कि वह उसकी मदद करना चाहता है...) यहां तो कोई ऐसा है भी नहीं कि जो मेरी मदद कर सके.... ( बेला रोहन से यह बात कहते हुए अपने साड़ी के पल्लू को अपनी उंगली में लपेट रही थी) क्यों नहीं बेला तुम मम्मी से भी उधार नहीं सकती थी वह तुम्हें कभी भी मना नहीं करती... मैं अच्छी तरह जानती हूं रोहन बाबू की मालकिन मुझे कभी भी मना नहीं करती लेकिन जरूरत पड़ने पर में हमेशा मालकिन के आगे हाथ फैला दी रहती हो बार-बार ऐसा करने में मुझे बहुत शर्म महसूस होती है गरीब हूं लेकिन खुद्दार हो बार बार मालकिन से मदद मांगने ने मुझे अच्छा नहीं लगता अब वहां जाऊंगी और अपनी पायल गिरवी रखकर उनसे ₹500 लेकर आऊंगी... ( ऐसा कहते हुए दिला अपनी कदम आगे बढ़ाकर जाने के लिए कर रही थी रोहन उसके पीछे खड़ा था... जहां से उसे बेला की गोल गोल बड़ी बड़ी भरावदार गाॉड कपड़े गीले होने की वजह से साफ साफ नजर आ रहे थे यह देख कर रोहन के लंड ने फिर से लड़ाई लेना शुरू कर दिया ....तभी रोहन उसे रोकते हुए बोला....) तुम इतनी धूप में मत जाओ तुम्हारे कपड़े गीले हैं और गीले होने की वजह से सब कुछ देख रहा है ..(यह रोहन के मस्तिष्क में बेला के बदन को लेकर उन्माद ही था जो उसके मुंह से यह शब्द निकल गया जो कि वह बोलना नहीं चाहता था...) अब देखने के लिए बचा ही क्या है तुमने तो मेरा सब कुछ देख लिया और इतनी धूप में जाते-जाते सूख जाएगा तो दूसरा कोई नहीं देख पाएगा (बेला रुक कर रोहन की तरफ मुंह करके बोली...) और यहां रुक कर भी क्या फायदा है रोहन बाबू तुम तो मेरी मदद कर नहीं पाओगे इसलिए बेहतर है कि मुझे मत रोको मुझे जाने दो....( इतना कहते हुए बेला धीरे धीरे रोहन के करीब आ गई और जब वह जाने के लिए अपने कदम आगे बढ़ाई थी तभी बात ही बात में उसने अपने ब्लाउज के तीसरे बटन को भी खोल दी थी जिसकी वजह से उसके स्तनों की गोलाई साफ साफ नजर आने लगी थी साथ ही उसके भूरे रंग की निप्पल की गोलाई भी नजर आ रही थी जिसे देख कर रोहन उत्तेजना के सागर में डूबता चला गया यह बेला जानबूझकर की थी क्योंकि वह भी नहीं जाना चाहती थी बस अपनी युक्ति आजमाना चाहती थी और वह जानती थी कि अपनी ब्लाउज के बटन को खोल कर वह रोहन के बटुए तक पहुंचना चाहती थी वह धीरे धीरे रोहन के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी थी..वह जानबूझकर इतनी गहरी गहरी सांसे खींच रही थी कि उसकी खरबूजे जैसी गोलाई ऊपर नीचे होती हुई रोहन को साफ साफ नजर आ रही थी.... जिसे देख कर रोहन की भी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी साथ ही पजामे में गदर मचा हुआ था जो कि तंबू की शक्ल में बेला की आंखों से छुप नहीं पा रहा था.... अपने रस भरे अंगों को दिखाते हुए बेला बोली.... क्यों रोहन बाबू तुम मुझे दोगे ₹500 तो मैं इतनी धूप में किसी और के सामने हाथ फैलाने नहीं जाऊंगी.... हमें तुम्हें ₹500 दूंगा लेकिन पहले एक बात बोल दूं कि मैंने तुम्हारा कुछ भी नहीं देखा हूं (रोहन कुछ देर सोचने के बाद बोला) रोहन की बात सुनते ही बेला मन ही मन प्रसन्न हो गई क्योंकि उसकी जालसाजी पूरी तरह से कामयाब हो रही थी वह अपने चेहरे पर मुस्कुराहट लाते हुए बोली.... क्यों झूठ बोल रहे हो रोहन बाबू तुमने मेरा सब कुछ देख लिए हो तभी तो मेरे भीगे बदन को देखकर तुम्हारा यह (अपना हाथ आगे ले जाकर पैंट के ऊपर से ही उसके लंड को पकड़ते हुए) खड़ा हो गया है...( इतना कहकर बेला अपना हाथ वापस खींच ली लेकिन इस 2 सेकंड के अंदर रोहन का तनबदन गनंगना गया.... Ab रोहन एकदम मस्त हो गया उसके पास छुपाने में कुछ भी नहीं था लेकिन फिर भी अपनी बात रखते हुए बोला हां यह सच है कि मैं तुम्हारे भीगे बदन को देखकर ऐसा हो गया है लेकिन जो तुम कह रही हो कि.. मैंने तुम्हारा सब कुछ देख लिया हूं तो यह बात गलत है मैंने अभी तक तुम्हारी पेटीकोट के अंदर क्या है यह नहीं देखा हूं और न जानता हूं कि औरतें अपनी चड्डी के अंदर क्या छिपा कर रख ती है।

( रोहन एकदम मासूमियत भरे लहजे में बेला से बोला लेकिन वह यह बात झूठ बोल रहा था क्योंकि उसे भी अच्छी तरह से मालूम था कि औरतें अपनी चड्डी के अंदर क्या छुपा कर रखती है और बेला के पेटीकोट के अंदर क्या है.. और यह बात दिला दी अच्छी तरह से जानती थी लेकिन वहां बड़े ध्यान से उसकी बात को सुन रही थी और इतना तो वह समझ भी नहीं गई थी कि रोहन जितना बाहर से मासूम दिखता है उतना है नहीं... बेला रोहन के जिस्मानी जज्बात को और ज्यादा भड़काने के उद्देश्य से जानबूझकर अपने हाथ से पेटिकोट के ऊपर से ही अपने बुर खुजलाने लगी और बुर को खुजलाते हुए बोली...

चलो कोई बात नहीं मैं तुम्हारी इच्छा पूरी कर दूंगी तुम नहीं जानते कि औरतें अपनी चड्डी के अंदर क्या छुपा कर रखती है तो मैं तुम्हारी यह हसरत अभी पूरी कर दूंगी और तुम भी जान जाओगे कि औरतें अपनी चड्डी और पेटिकोट के अंदर कौन सा खजाना छुपा कर रखतीैं है।( इतना कहते हुए वह अभी भी अपनी दूर कोई खुजला रही थी और यह देख कर रोहन के तन बदन में वासना की ज्वाला भड़क रही थी और उस पर घी डालने का काम बेला की बेहद मादक बातें कर रही थी... रोहन बेला की बात सुनकर एकदम से रोमांचित हो गया उसकी आंखों के सामने वह नजारा देखने लगा जो की बेला उसकी हसरत पूरी करने की बात कर रही थी उसके पेंट में बना तंबू और ज्यादा नुकीला होता जा रहा था और यह देख कर बैला कि बुर से लालच भरी पानी की बूंदे टपकने लगी। रोहन की हालत को बेला पूरी तरह से भाप गई थी। वह समझ गई थी कि इस समय रोहन कुछ भी करने को तैयार हो जाएगा इसलिए अपनी मंशा पूरी करने के उद्देश्य से वह रोहन से बोली।

मैं तुम्हें औरतों के इस महत्वपूर्ण जानकारी से अवगत तो करा दूंगी लेकिन तुम मुझे ₹500 तो दोगे ना...

हां हां जरूर क्यों नहीं (इतना कहने के साथ ही रौहन अपने पजामे की जेब में हाथ डालकर 100 100 की 5 नौट निकाल कर बेला को थमा दिया। बेला झट से उन रुपयों को अपने हाथ में लेकर अपनी साड़ी के किनारी में बांधकर गिठान मार दी.. और बोली..

लेकिन रोहन तुमने मुझे ₹500 उधार दिए हो यह बात तुम मालकिन से बिल्कुल भी मत कहना और ना ही इस बारे में किसी से भी जिक्र करना वरना मालकिन मुझ पर गुस्सा होंगी और फिर मेरा और तुम्हारा इस तरह से मिलना जुलना बंद हो जाएगा समझ गए ना..

हां मैं जानता हूं मैं किसी से भी कुछ नहीं कहूंगा....

मैं तुम्हें यहां नहीं दिखा सकती हमें उस सामने वाली (एक झोपड़ी की तरफ इशारा करते हुए) वहां चलना होगा...
 
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