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Incest बदलते रिश्ते

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आज पहली बार सुगंधाको मालिश करवा कर बेहद राहत का अनुभव हो रहा था और एक अजीब सी हलचल अभी भी उसके तन बदन हो झकझोर रही थी क्योंकि जिस तरह से बेला ने उसके नितंबों को अपनी दोनों हथेलियों में भर भर कर मालिश की थी उससे ज्यादा कुछ तो नहीं लेकिन फिर भी सुगंधा की तन बदन में उत्तेजना का अनुभव होने लगा था इसका जीता जागता सबूत था कि उसकी बुर से नमकीन रस का स्राव हो रहा था जिसे वह चाहकर भी नहीं रोक पाई थी और इसीलिए अपने मन पर काबू करके वह बिना मालिश करवाएं वहां से उठ खड़ी हुई थी........ शाम ढल चुकी थी अपने कमरे में बैठे-बैठे वह अपने पति के बारे में सोच रही थी जब वह शादी करके इस घर में आई थी शुरू शुरू में सब कुछ ठीक था... अपने पति की तरफ से उसे बेशुमार प्यार मिल रहा था उसे अपनी किस्मत पर गर्म होने लगा था क्योंकि उसे ससुराल में किसी भी चीज की कमी नहीं थी मान सम्मान और शारीरिक सुख पाकर वह एकदम से धन्य हो चुकी थी उसे वह पल याद आने लगा जब बेला की तरह ही उसके पति ने उसकी मालिश की थी.....

एक दिन ऐसे ही उसकी कमर में दर्द हो रहा था और यह बात अपने पति से कहते ही उसके पति ने एक पल की भी देर किए बिना ही कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और अपने ही हाथों से देखते ही देखते सुगंधा के बदन पर से वस्त्रों को दूर करने लगा सुगंधा तो कुछ समझ ही नहीं पाए कि यह क्या कर रहा है देखते ही देखते वह कमरे में अपने पति के सामने संपूर्ण रूप से एक दम नंगी हो गई थी.... सुगंधाको तो एक पल के लिए अपने पति पर गुस्सा और चिढ आने लगा.... क्योंकि जिस तरह से वह सुगंधा के बदन पर से वस्त्र उतार रहा था उसे ऐसा ही लग रहा था कि अब वह उस से संभोग करेगा सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी ऐसी हालत होने के बावजूद भी उसका पति उसकी हालत पर बिल्कुल भी गोर किए बिना ही अपनी प्यास बुझाने को आतुर है..... कमरे में सुगंधा संपूर्ण नग्ना अवस्था में खड़ी थी उसके बदन पर कपड़े का रेशा भी नहीं था...

और उसका पति सुगंधाको नंगी अवस्था में एकदम प्यासी नजरों से खुल रहा था या देखकर सुगंधा क्रोधित हो गई और गुस्से में बोली.....

आप इंसान है या जानवर आपको बिल्कुल भी शर्म नहीं आती... मेरा सारा बदन दर्द से टूट रहा है और आपको मेरी बिल्कुल भी चिंता नहीं है बस आप मेरे बदन से आनंद लूटना चाहते हैं चाहे मैं जैसे भी हाल में हूं बस तुम्हें मुझ में एक प्यास बुझाने वाली कठपुतली नजर आती है जिसके साथ खेला खाया और हो गया मुझे आपसे यह बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी मुझे लगा था कि आप मेरी मदद करेंगे मुझे इस दर्द से राहत दिलाएंगे..लेकिन आप तो मेरे बदन के साथ साथ मेरे दिल पर भी घाव कर रहे हैं..

( सुगंधा का पति आश्चर्य से सुगंधा की तरफ देखे जा रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि सुगंधा उसके बारे में यह क्या सोच रही है वह तो जब की उसकी मदद करना चाह रहा था वह सुगंधा के नंगे बदन ऊपर से नीचे तक आश्चर्य से देखते जा रहा था और वह समझ गया कि उसकी हरकत की वजह से सुगंधा को बुरा लगा है इसलिए वह सुगंधा की गलतफहमी को दूर करते हुए बोला....)

यह क्या कह रही हो सुगंधा मेरी जान... मैं तो तुम्हारी मदद करना चाह रहा हूं....

इस तरह से करोगे मेरी मदद मेरे कपड़े उतार कर मुझे नंगी कर कर मेरे ऊपर चढ़कर मेरी मदद करोगे अगर इस तरह से मदद करना चाह रहे हो तो मुझे तुम्हारे मदद की आवश्यकता नहीं है....

कैसी बातें कर रही हो सुगंधा तू मेरे बारे में ऐसा सोच भी कैसे सकती हो कि मेरी पत्नी दर्द से कराह रही हो और मैं उसके बदन के साथ खेलने की सोचूंगा..... मैं तो तुम्हारे बदन की मालिश करने जा रहा हूं....( इतना कहते हुए वह अलमारी की तरफ घुमा और अलमारी की तरफ कदम बढ़ाते हुए) हां शायद मेरा तरीका तुम्हें गलत लगा होगा इसलिए तुम इस तरह से कह रही हो ...( इतना कहते हो गए वह अलमारी के करीब पहुंच गया और अलमारी खोलकर उसमें से सरसों के तेल की शीशी निकालकर वापस सुगंधा की तरफ कदम बढ़ा दिया अपने पति की बातें सुनकर और उसके हाथ में सरसों के तेल की शीशी देखकर सुगंधा को अपनी गलती का एहसास होने लगा वह एकदम से शर्मिंदा हो गई अब उसके पास बोलने लायक कुछ भी नहीं बचा था सुगंधा का पति सुगंधा के करीब आया और उसे बिस्तर पर लेट जाने के लिए कहा सुगंधा बिना कोई जवाब दिए बिना अपने पति की बातें सुनकर शर्मिंदगी का एहसास लिए हुए उसकी बात मानते हुए बिस्तर पर पेट के बल लेट गई...... अपनी गलती का उसे इस हद तक पछतावा था कि वह इस समय इस बात को बिल्कुल भी भूल गई कि वह इस समय संपूर्ण रूप से नंगी है ... बिस्तर पर संपूर्ण रूप से नंगे पन का एहसास उसे तब हुआ जब उसने अपने पति के दोनों मजबूत हथेलियों का स्पर्श अपनी नंगी गाड़ पर महसूस कि.... अपने पति के मजबूत हाथों के गरम स्पर्श को अपने नंगे बदन पर महसूस करके वह पूरी तरह से रोमांचित हो गई.... सुगंधा के पति ने अपनी हथेलियों का ऐसा जादू चलाया कि कुछ ही देर में सुगंधा पूरी तरह से उत्तेजना का अनुभव करने लगी.... उसके बदन से दर्द गायब हो गया और एक नए मीठे दर्द ने उसकी जगह ले ली जिसके असर में उसकी बुर से नमकीन पानी झरने लगा संभोग सुख के उन्माद से वाकिफ सुगंधा कुछ ही देर में गरम सिसकारी छोड़ने लगी और अपनी पत्नी की इस हालत को देखकर उसका पति पल भर में ही उत्तेजना का अनुभव करने लगा... बजाने के अंदर उसका लंड तन कर खड़ा हो गया अपनी बीवी की गोरी गोरी उन्नत ऊभारो वाली गांड को देख कर वह पूरी तरह से चुदवासा हो ..गया.... अगले ही पल उसने अपने पजैमे को उतार कर नंगा हो गया और अपने हाथों से उसी स्थिति में सुगंधा की मोटी मोटी चिकनी जांघों को अपने हाथों से फैला कर अपने लिए जगह बना लिया....

और देखते ही देखते सुगंधा का पति सुगंधा की बुर में अपना समूचा लंड उतार दिया कुछ ही देर में पूरा कमरा सुगंधा की गरम सिसकारी से गूंजने लगा सुगंधा के बदन का दर्द तो दूर हुआ ही साथ ही उसके बदले में मीठे दर्द का एहसास लिए हुए वह कब जड़ गई उसे पता ही नहीं चला और उसी स्थिति में वह दोनों नींद की आगोश ही चले गए....

उस दिन को याद करके सुगंधा की आंखों में आंसू आ गए क्योंकि उसने कभी अपनी जिंदगी में नहीं सोची थी कि उसका पति इस तरह से गर्द की खाई में धंसता चला जाएगा और उसे जिंदगी की राह में इस तरह से तड़पते हुए जीने के लिए मजबूर कर देगा उसे इस बात का अफसोस पूरी तरह से था कि उसके पति के जीवित रहने के बावजूद भी वह एक विधवा की तरह ही जिंदगी जी रही थी सुगंधा बीते पल को याद करते हुए नींद के आगोश में चली गई उसे पता ही नहीं चला

बाजार में गेहूं बेचने के लिए सुगंधा रोहन को भी भेजती थी ताकि उसे गेहूं चावल का हिसाब किताब के बारे में पता चले.... और वैसे भी रोहन सारा दिन इधर उधर आवारा दोस्तों के साथ घूम कर अपना समय व्यतीत कर रहा था इसलिए अपने लफंगा दोस्तों के संगत से छुड़ाने के लिए सुगंधा कोई ना कोई बहाना बनाकर उसे काम में उलझाए रहती थी..... और ना चाहते हुए भी रोहन को गेहूं की बिक्री के लिए बाजार जाना पड़ता था लेकिन रोहन का बाजार जाना रोहन के लिए भी फायदेमंद था क्योंकि उसे बाजार में औरतों की मटकती हुई गांड और खूबसूरत लड़कियां देखने को मिल जाती थी शहर में जाने पर उसे एक से एक खूबसूरत औरतें और लड़कियां देखने को मिल रही थी रोहन जब तक गेहूं की बिक्री होती तब तक वहीं बैठा बैठा आने जाने वाली औरतों की खूबसूरती और उनके कपड़ों के अंदर झांकने की कोशिश करता रहता शहर होने की वजह से जहां पर लड़कियां जींस टीशर्ट शॉर्ट टॉप पहन कर घूमती थी जिसे देखने में रोहन को उत्तेजना का अनुभव होता था और उसकी प्यासी नजरें उन की मटकती हुई गांड और दोनों नारंगीयो पर टिकी रहती थी....

कुछ दिनों से सारे गेहूं की बिक्री हो जाने तक रोहन का यही रोज का क्रम बन गया वह रोज उजाला होने से पहले... मजदूरों और मुंशी के साथ बाजार चला जाता था और गेहूं की बिक्री करने के बाद देर शाम को ही लौटता था.... तब तक वह बुरी तरह से थक जाता था और आते ही खाना खा कर सो जाता था इसलिए उसे कुछ दिनों से गांव में ताक झांक करने का बिल्कुल भी मौका नहीं मिला था ज्यादातर बात आप जा कब घर में ही करने लगा था लेकिन मालिश वाले दिन से अब तक उसे ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला था जिससे उसका तन बदन मस्त हो जाये......

धीरे-धीरे काफी समय गुजर गया बाजार में गेहूं की बिक्री हो चुकी थी इस बार सुगंधा को काफी मुनाफा हुआ था.... इसलिए वह काफी खुश नजर आती थी और रोहन को खर्चे के लिए पैसे भी ज्यादा देने लगी थी क्योंकि वह जानती थी कि उसके सिवा वैसे भी इस दुनिया में कोई नहीं था...... इसलिए सुगंधा अपने बेटे रोहन पर बेहद प्यार बरसाने लगी थी .... लेकीन रोहन को लेकर उसके मन में हमेशा चिंता बनी रहती थी... क्योंकि वह अपना ज्यादातर समय अपने लफंगे आवारा दोस्तों के साथ ही गुजारता था इसलिए सुगंधा के मन में हमेशा डर बना रहता था कि कहीं उसका बेटा भी उसके पति की तरह आवारा ना निकल जाए.....

बेला को यह बात अच्छी तरह से मालूम थी कि रोहन के पास अब काफी पैसे रहते हैं इसलिए वह रोहन से पैसे ऐंठने का जुगाड़ बनाने लगी थी वह जानती थी कि एक बार रोहन को अपनी बुर का दर्शन कराने के बाद से रोहन उसके लिए व्याकुल हो गया है और वह बुर को छूने और उसे मसलने के लिए तड़प रहा है ...इसलिए बेला भी मौका देख रही थी कि कब रोहन को फिर से अपनी बुर के दर्शन कराए और उससे नगद पैसे ऐंठ ले लेकिन ऐसा कोई भी मौका उसे प्राप्त नहीं हो पा रहा था....

और जिस दिन से रोहन ने अपनी मां के नंगे बदन का दर्शन किया था तब से वह इसी ताका झांकी में लगा रहता था कि कब उसे अपनी मां के नंगे बदन के दर्शन करने को मिल जाए लेकिन उसे भी ऐसा मौका प्राप्त नहीं हो पा रहा था ऐसे ही एक दिन वह अपने कमरे में बिस्तर पर लेट कर अपनी मां के नंगे बदन और बेला की रसीली बुर को याद करके अपना लंड पजामे के ऊपर से मसल रहा था..... उस दिन बेला घर की सफाई कर रही थी और जैसे उस दिन उसकी किस्मत उसका साथ दे रही हो और सुगंधा उस दिन घर पर मौजूद नहीं थी वह किसी रिश्तेदार के वहां गई हुई थी.... बेला सभी कमरे में झाड़ू पोछा कर रही थी उसे यह बात मालूम थी कि घर में केवल रोहन ही है और वह भी अपने कमरे में अकेला है...

 
बेला झाड़ू लगाते लगाते रोहन के कमरे तक पहुंच गई कमरे का दरवाजा खुला हुआ था वह कमरे में से अंदर की तरफ झांक कर देखी तो रोहन बिस्तर पर लेट कर पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को मसल रहा था... यह नजारा देख कर तो बेला का बदन उत्तेजना के मारे सरसरा गया.... लेकिन बहुत ही जल्दी वह अपने मन पर काबू करके कमरे के अंदर प्रवेश कर गई और झाड़ू लगाना शुरू कर दी वह जानबूझकर रोहन से बातें नहीं कर रही थी लेकिन जुबान खामोश थी पर उसने अपने बदन के होठों को खोल रखी थी जो कि बिना कुछ बोले भी बहुत कुछ बोल दे रहे थे वह अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाकर कमर से खोस ली थी जिसकी वजह से उसकी नंगी पंडरिया साफ साफ नजर आ रहे थे और छाती पर से चुनरी हटा कर एक साइड रख दी थी ताकि रोहन को उसके फड़फडाते हुए दोनों कबूतर नजर आ सके... और वह रोहन को अपनी तरफ आकर्षित करते हुए झाड़ू लगाना शुरू कर दी... कमरे में किसी के आने की आहट सुनकर रोहन की तंद्रा भंग हुई और वह दरवाजे की तरफ देखने लगा दो अपनी आंखों के सामने बेला को झाड़ू लगाता देखकर एकदम से कामोत्तेजना से भर गया लेकिन डर के मारे वह अपने बजाने पर से अपना हाथ हटा लिया कुछ देर तक रोहन बेला को यूं ही देखता रहा लेकिन बेला उससे एक शब्द भी नहीं बोल रही थी लेकिन वह अपनी गदराई की गांड को रोहन की तरफ उठाकर झाड़ू लगा रही थी जिसकी वजह से रोहन की प्यासी नजरें सीधे बेला की गांड पर जाकर टिक गई....

बेला जानबूझकर अपनी बड़ी-बड़ी गांड को मटकाते हुए झाड़ू लगा रही थी और बेला की बड़ी बड़ी गांड देखकर रोहन का लंड और ज्यादा कड़क होने लगा रोहन को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें उसका मन तो कर रहा था कि बेला को पीछे से पकड़ ले लेकिन वह औरतों को काबू करने के मामले में पूरी तरह से अज्ञानी था इसलिए ऐसी गलती उसके लिए भारी पड़ सकती थी ऐसा सोचकर वह अपने मन को दबा ले गया लेकिन बेला के नखरे उससे सही नहीं जा रहे थे क्योंकि कभी वह आगे की तरफ झाड़ू लगाती तो कभी पीछे की तरफ जिसकी वजह से उसके दोनों फडफड़ाते कबूतर ब्लाउज के अंदर साफ नजर आ रहे थे.....

कमरे में पूरी तरह से शांति छाई हुई थी बस झाड़ू की खरर खररर की आवाज सुनाई दे रही थी एक बार बेला की बुर के दर्शन कर चुका रोहन बेला की हरकतों से एकदम से परेशान हो गया उससे रहा नहीं गया तो वह सीधे ही बोला.....

आज नहीं दिखाओ गी बेला.....

( रोहन के मुंह से यह शब्द सुनकर बेला के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे उसे समझते देर नहीं लगी कि अब उसका काम बनने वाला है.... वह जानती थी कि रोहन किस बारे में बात कर रहा है लेकिन फिर भी अनजान बनते हुए उसकी तरफ घूमकर एकटक देखते हुए बोली)

क्या नहीं दिखाओ गी जरा साफ-साफ बोलो मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है.....

( बेला की यह बात सुनकर रोहन शर्मिंदगी महसूस करने लगा वह अपने मुंह से बोले भी तो कैसे बोले उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और बिस्तर से उठ कर बैठ गया और इधर उधर देखते हुए बड़ी हिम्मत करके बोला)

वही जो तुमने मुझे उस दिन झोपड़ी के अंदर दिखाई थी....

अरे रोहन बाबू यह तुम किस बारे में मुझसे बात कर रहे हो मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है...( बेला जानबूझ कर इस तरह की बातें करते हुए वापस झाड़ू लगाना शुरू कर दी वह जानबूझकर यह दिखाना चाहती थी कि उसे कुछ भी मालूम नहीं है बेला की सरोवर से रोहन बहुत परेशान हो रहा था क्योंकि उसे भी आज अच्छा मौका मिला था वापस से बेला की मदमस्त बदन का दर्शन करने के लिए)

बेला तुम कितनी जल्दी सब कुछ भूल जाती हो अभी उस दिन की तो बात है....

( बेला अभी भी अपने नितंबों को रोहन की तरफ करके झाड़ू लगा रही थी और रोहन की इस तरह की बातें सुनकर मन ही मन मुस्कुराने लगी और झाड़ू लगाना बंद करके रोहन की तरफ देखते हुए बोली)

एक बात कहूं रोहन बापू मेरी सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि मैं बहुत ही जल्दी भूल जाती हूं हो सकता है कि तुम जिस बात को याद दिलाना चाह रहे हो मैं वह बात भूल चुकी हूं...( ऐसा कहते हुए वह फिर से झाड़ू लगाना शुरू कर दी लेकिन इस बार वह रोहन के तरफ देखते हुए झाड़ू लगा रही थी और जानबूझकर कुछ ज्यादा ही झुकी हुई थी ताकि उसके दोनों नारंगी या रोहन को साफ साफ नजर आ सके और ऐसा हो भी रहा था... वास्तव में रोहन की नजरे सीधे बेला के दोनों नारंगीयो पर चली गई और रोहन पल भर में ही बेहद उत्तेजना का अनुभव करने लगा.... रोहन को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें एक तो आज मौका बहुत ही अच्छा था और ऊपर से बेला उसके कमरे में ही थी और उसकी आंखों के सामने अपने अंगों का प्रदर्शन भी कर रही थी जिसे देखकर रोहन पूरी तरह से कामातूर हो चुका था.... जिस तरह का अनुभव रोहन अपने बदन में कर रहा था वह अपने आप को रोकने में असमर्थ था वह समझ गया कि उसे साफ-साफ बोले बिना कुछ नहीं मिलने वाला इसलिए वह पक्का निर्धार करके बेला से बोला....)

बेला सुनो तो ...(इतना सुनकर बेला फिर से झाड़ू लगाना बंद करके रोहन की तरफ देखने लगी और बोली)

क्या बात है रोहन बाबू तुम इतना परेशान क्यों हो और मुझे भी परेशान कर रहे हो....

बेला में कह रहा था कि...( इतना कहकर रोहन इधर-उधर देखने लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह कैसे कहें कि उसे बुर देखना है...)

 
रोहन के मन में अजीबो-गरीब कशमकश चल रहा था उसी को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें एक तो इतना सुनहरा मौका उसके हाथ में था और वह इस मौके को जाने नहीं देना चाहता था क्योंकि मालिश वाले दिन से लेकर आज आज के दिन के दरमियान उसे दोबारा ना तो बेला के ही अंगों के दर्शन हुए और ना ही उसकी मां के इसलिए वह पूरी तरह से तड़प रहा था औरतों के जिस्मानी अंगों को अपनी आंखों से देखने के लिए इसलिए तो वह इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहता था एक तो पहले से ही बेला ने रोहन की बात मानते हुए अपना पेटीकोट उठाकर अपनी बुर के दर्शन करा चुकी थी तो ऐसे में रोहन को दोबारा अपने मन की बात बेला से कहने में कोई हिचक नहीं होना चाहिए था लेकिन रोहन में अभी इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह बेला से उसके अंग देखने की फरमाइश कर सके लेकिन मौके का पूरी तरह से फायदा उठाना था तो रोहन को थोड़ी बहुत हिम्मत दिखाना भी जरूरी था इसलिए वह हिचकिचाहट भरे लहजे में इधर-उधर देखते हुए हिम्मत जुटाकर बोला.

बेला मुझे फिर से वही चीज़ देखना है जो उस दिन तुमने झोपड़ी में अपनी पेटीकोट उठाकर दिखाई थी...

क्या दिखाई थी....( बेला अनजान बनते हुए बोली)

तुम्हारी ..बबबबब..बबब..बुरररर.... ( रोहन घबराहट भरे लहजे में बोला वह यह शब्द एक औरत के सामने कैसे बोल गया यह उसे खुद भी नहीं पता लेकिन इतना शब्द बोलने में वह उत्तेजना से भर गया और शर्मिंदगी का अहसास भी उसके अंदर बना हुआ था जिसकी वजह से अपनी नजरें नीचे झुका लिया था लेकिन रोहन की घबराहट देख कर बेला के होठों पर मुस्कान तैर रही थी रोहन की यह ख्वाहिश मेला को अपने लिए जीत नजर आ रही थी... रोहन की ख्वाहिश जानकर बेला को समझते देर नहीं लगी कि आज फिर से उसके हाथों में धन की गर्मी आने वाली है.....वह बेहद खुश नजर आ रही थी... रोहन की बात सुनकर एक पल के लिए तो उसका बदन भी गरम हो गया क्योंकि आज पहली बार उसे किसी मर्द ने खुले शब्दों में उसके अंग देखने की ख्वाहिश जताई थी..... बेला ईतराते हुए उसके बेहद करीब आकर खड़ी हो गई और बोली...

वाह रोहन बाबू क्या बात कहे हो तुम्हारे बदन में भी जवानी की गर्मी उमड़ने लगी है उस दिन सब कुछ खोल कर दिखाई थी लगता है देख कर मन भरा नहीं..... लेकिन रोहन बाबू एक बात कहूं ....आज आपका नसीब साथ नहीं दे रहा है...(. बेला की यह बात सुनकर रोहन आश्चर्य से बेला की तरफ देखने लगा)

क्योंकि आज मुझे एक रिश्तेदार के वहां कुछ पैसे उधार लेने जाने हैं क्योंकि अगले ही हफ्ते मेरे चाचा की लड़की की शादी है तो शादी में जाने के लिए कुछ पैसे तो चाहिए और मेरे पास एक फूटी कौड़ी नहीं है और मुझे अभी थोड़ी देर बाद निकलना ही है आज आपका काम नहीं हो पाएगा.....( बेला जानबूझकर अपनी बातों का जाल बिछा रही थी मैं जानती थी कि रोहन जरूर उसे पैसे देगा क्योंकि जवानी के द्वार के दर्शन जो उसे करने थे बेला इतना कहकर जानबूझकर फिर से झाड़ू लगाना शुरू कर दी)

लेकिन बेला अगर मैं तुम्हें पैसे दे दूं तो क्या तुम मुझे फिर से अपनी वो दिखाओ गी.....

( रोहन की बात सुनते ही बेला के हाथ जो कि तू रुक गए और वह मुस्कुराते हुए रोहन की तरफ झुकी हुई मुद्रा में ही बोली...)

नहीं-नहीं रोहन बाबू रहने दो मैं आपसे पहले भी पैसे ले चुकी हूं और अभी तक चुका नहीं पाई हूं अगर फिर पैसे ले लूंगी तो ना जाने कैसे चुकाऊंगी और मुझे तो डर भी लगता है कि कहीं आप मालकिन से कह दिए तो मेरी तो छुट्टी हो जाएगी....

ऐसा कुछ भी नहीं होगा बेला( इतना कहते हुए रोहन पलंग के नीचे पांव लटका कर बैठ गया) जो मैं तुम्हें पैसे दिया हूं और जो तुम्हें दूंगा यह सब पैसे मेरे हैं इसका हिसाब किताब मुझे मम्मी को नहीं देना पड़ता है इसलिए तुम बिल्कुल निश्चिंत हो जाओ...

( रोहन की बात सुनकर बेला पूरी तरह से निश्चिंत हो गई और उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी वह मन ही मन खुश हो रही थी वह समझ गई थी कि रोहन पूरी तरह से उसके कब्जे में है...

इसलिए वह तुरंत रोहन से बोली....)

तो लाओ मेरे पास सो रुपए ......(बेला फटाक से बोली)

रोहन तो यह सुनकर एकदम खुश हो गया क्योंकि वह समझ गया था कि पैसे के बदले बेला उसे अपनी पुर के दर्शन जरूर कर आएगी और वह तुरंत बिस्तर पर से उठा और अलमारी की तरफ आगे बढ़ गया यह देखकर मेरा मन ही मन प्रसन्न होने लगी साथ ही ना जाने क्यों उसकी बुर में कुल बुलाहट होने लगी.... वह हाथ में झाड़ू लिए रोहन को ही देख रही थी रोहन अलमारी खोल कर उसका ड्राइवर खोला और उसमें से 100 100 की 5 नोट निकालकर बेला की तरफ घूम गया और बेला के हाथों में पकड़ाते हुए बोला...

यह लो बेला तुम्हारे 500 रुपए और इन्हें लौटाने की कोई जरूरत नहीं है यह पैसे तुम्हारे ही हैं.....

( सौ सौ की 5 नोट देखकर बेला खुश हो गई और वह तुरंत रोहन के हाथों में से लेकर उसे गोल गोल करके अपने ब्लाउज में डाल दी यह देखकर रोहन उत्तेजना से भर गया वह मन ही मन सोचने लगा कि काश वह भी सौ सौ की नोट होता तो बेला के ब्लाउज में उसकी चूचियों के करीब रहता....)

शुक्रिया रोहन बाबू तुम अगर सही समय पर पैसे देकर मेरी मदद नहीं करते तो मुझे इस खड़ी धूप में न जाने कहां का भटकना पड़ता मैं तुम्हारी शुक्रगुजार हूं.....

( बेला की इस तरह की बात सुनकर रोहन प्रसन्न होने लगा

और मुस्कुराते हुए बोला...)

इसमें शुक्रिया कैसी बेला यह तो मेरा फर्ज था ...(रोहन मन ही मन प्रसन्न हो रहा था कि उसकी मंशा पूरी होने वाली है उसके तन बदन में उत्तेजना का असर साफ नजर आ रहा था बेला को ₹500 देने के चक्कर में रोहन यह बात एकदम से भूल गया की उत्तेजना के मारे पर जाने के अंदर उसका लंड एकदम खड़ा हो गया है जिसकी वजह से पजामी का आगे वाला भाग तंबू बनकर बेला की आंखों के सामने नजर आ रहा है और उसी तंबू को देखकर बेला मुस्कुराते हुए बोली)

रोहन बाबू ....रोहन बाबू अभी तो मैंने अपनी बुर के दर्शन भी नहीं कराए और तुम्हारा लंड तो पूरी तरह से खड़ा हो गया.....

( बेला खोलें शब्दों का प्रयोग करते हुए बेशर्म बनते हुए बोली ... _ बेला की इस तरह की बात सुनकर रोहन पूरी तरह से उत्तेजित हो गया लेकिन अपने पजामे में बने तंबू की वजह से वह शर्मिंदा भी हो गया और उसे अपने दोनों हाथों से छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगा रोहन को इस तरह से करते देख बेला अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसके हाथ को हटाते हुए बोली..)

 
अब कैसी शर्म रोहन बाबू तुम मेरी बुर देखना चाहते हो तो मुझे भी तो अपना लंड दिखाओ मैं भी तो देखूं कि कितनी गर्मी तुम्हारे लंड में है जो बार-बार खड़ा हो जा रहा है.....

( बेला जानबूझकर रोहन से इस तरह से खुले शब्दों में बात कर रही थी क्योंकि वह रोहन को और भी ज्यादा उत्तेजित करना चाह रही थी और ऐसा हो भी रहा था एक औरत के मुंह से इतनी गंदी गंदी बातें सुनकर रोहन पूरी तरह से उत्तेजना से भर गया था.... वह भी बेला की बात मानते हुए दोबारा अपने पजामे में बने तंबू को ढकने की कोशिश नहीं किया और उसी तरह से खड़ा हो गया बेला उसके पजामे में बने तंबू को देखकर पूरी तरह से उत्तेजित हो गई उसकी जांघों के बीच सुरसुरीहट होने लगी... क्योंकि बेला की अनुभवी आंखें इस बात को भाग गई थी कि रोहन के पजामे के अंदर कोई दमदार हथियार अपनी जगह बनाए हुए हैं वह भी रोहन के लंड को देखने के लिए तड़पने लगी इसलिए वह बोली....)

रोहन मैं तो तुम्हें अपनी बुर दिखा दूंगी... लेकिन मैं भी तुम्हारे दमदार हथियार को देखना चाहती हूं..... तुम्हें कोई एतराज तो नहीं है....( इस बात से भला रोहन को क्यों इंकार होता और तों और बेला की यह बात सुनकर और भी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव करने लगा और वहां हां में सिर हिलाकर मूर्ति वंत बनकर खड़ा हो गया बेला की भी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी उसके तन बदन में एक अजीब सी हलचल हो रही थी वह तुरंत खड़ी हुई और जाकर दरवाजा बंद कर दी वैसे तो उसे दरवाजा बंद करने की कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि घर में उसके और रोहन के सिवा दूसरा कोई नहीं था लेकिन फिर भी एहतियात के तौर पर वह दरवाजा बंद करके वापस लौटी रोहन बिस्तर के करीब खड़ा था बेला की आंखों के सामने रोहन के पर जाने के अंदर उसका तंबू हरकत कर रहा था यह हरकत बेला की बुर में पानी का सैलाब उठा रही थी..... बेला से रहा नहीं गया और वह अपने घुटनों के बल बैठ गई.. उसकी आंखों के सामने रोहन के पजामे में बना तंबू तना हुआ था.. बेहद काम उत्तेजना से भरपूर नजारा कमरे में बन रहा था...... बेला को इस तरह से घुटनों के बल बैठता देखकर रोहन की सांसें तेज चलने लगी..... एक अजीब सी हलचल उसके तन बदन में चिकोटि काटने लगी... रोहन को समझ में नहीं आ रहा था कि बेला क्या करने वाली है..... वह उत्सुकता बस बेला को देखें जा रहा था.... और बेला रोहन के तंबू को तभी बेला रोहन की तरफ देखी और रोहन ने भी बेला की तरफ देखा दोनों की आंखें आपस में टकराई दोनों उत्तेजना से भर गए अगले ही पल बेला अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर रोहन के पजामे को पकड़ ली और उसे धीरे-धीरे नीचे की तरफ खींचने लगी.. .. बेला की ईस हरकत की वजह से रोहन के बदन में कपकपी उठने लगी... और अगले ही पल बेला ने एक झटके में रोहन के पजामे को घुटनों तक खींच दी.... पजामा घुटनों के नीचे आते ही बेला की आंखें आश्चर्य से चौड़ी हो गई वह तो एक टक बस देखते ही रह गई अपनी जिंदगी में उसने इस तरह का जबरदस्त मोटा दमदार और लंबा लंड नहीं देखी थी....

रोहन के लंड को देखते ही उसकी बुर में सुरसुरा हट होने लगी जी मैं तो आ रहा था कि रोहन को लेटाकर खुद ही वह उसके ऊपर चढ़ जाए और अपनी बुर में उसका लंड पेलवा ले.... रोहन के लंड को लेने के लिए..... बेला की तन बदन में आग लगी हुई थी.... बेला का सब्र जवाब दे रहा था बड़ी मुश्किल से वह अपने आप को रोके हुए थी.... क्योंकि वह इतनी जल्दी रोहन को अपने ऊपर हावी होना देना नहीं चाहती थी क्योंकि अभी तो उससे वह और ज्यादा पैसे ऐंठने फिराक में थी...

लेकिन जिस तरह का दमदार लंड रोहन के पास था बेला से सब्र कर पाना मुश्किल हुए जा रहा था......

बेला मंत्र मुग्ध सी रोहन के लंड को देखे जा रही थी .और रोहन बेला को देखे जा रहा था ..लेकिन उसके अंदर बेला कि बुर देखने की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी..... दूसरी तरफ बेला की रोहन के लंड को स्पर्श करने की कामेच्छा बढ़ती जा रही थी और वह अपनी काम इच्छा की पूर्ति के लिए जैसे ही हाथ आगे बढ़ाई .... रोहन बोल पड़ा.....

बेला तुमने तो मेरा देख ली लेकिन अपना तो दिखाओ....

( इतना सुनते ही बेला का हाथ वहीं का वहीं रुक गया और वह आश्चर्य से रोहन की तरफ देखने लगी रोहन के लंड को देखकर अभी भी आश्चर्य से देने का मुंह खुला का खुला था रोहन की बात सुनकर जैसे उसे कुछ याद आया हो वह खड़ी हुई और मदहोशी भरी आवाज में बोली...)

लो तुम ही देख लो ....(इतना सुनते ही रोहन के तन बदन में उत्तेजना की ज्वाला फूटने लगे क्योंकि बेला ने खुद ही उसे उसका आगे देखने की इजाजत के साथ साथ निमंत्रण दे रहे थे यह किसी भी मर्द के लिए बहुत ही उत्तेजना से भरपूर पल होता है जिसका रोहन पूरी तरह से आनंद ले रहा था.... अब रोहन की बारी थी बेला की तरह वह भी घुटनों के बल बैठ गया .... और अपना हाथ आगे बढ़ा कर देगा कि पेटीकोट को पकड़ लिया रोहन के साथ साथ भी लकी भी सांसे तेज चल रही थी रोहन धीरे धीरे पेटीकोट को ऊपर की तरफ उठाने लगा उसकी सांसे बड़ी तेज गति से चल रही थी धीरे धीरे वह बेला कीपेटीकोट को हिम्मत दिखाते हुए ऊपर की तरफ ले जा रहा था रोहन किस तरह की हरकत की वजह से बेला की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी आज पहली बार बेला किसी नव युवा लड़के के द्वारा अपनी पेटीकोट को ऊपर की तरफ उठवा रही थी....

.. और अगले ही पल रोहन फुर्तीदिखाते हुए बेला कि पेटीकोट को उठाकर कमर तक कर दिया एक बार फिर से बेला की बुर एकदम नंगी रोहन की आंखों के सामने थी रोहन प्यासीनजरों से बेला की बुर को देखे जा रहा था.... रोहन अपनी नजरों से नहीं बल्कि अपनी उंगलियों से बेला की बुर को छूना चाहता था उसको स्पर्श करना चाहता था.... इसलिए वह प्यासी नजरों से बेला की तरफ देखा जो की बेला भी एकदम चुदास से भरी हुई थी.... रोहन बेला की तरफ देखते हुए बोला...

बेला में तुम्हारी बुर को छूना चाहता हूं (और इतना कहकर बेला का जवाब सुने बिना ही वह अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर बेला की बुर को स्पर्श करने लगा उसकी उंगलियां ...बेला की रसीली बुर पर चहल कदमी करने लगी...उस दिन की तुलना में आजबेला की बुर पर हल्के हल्के बाल उड़ गए थे जिसकी वजह से बेला की बुर और भी ज्यादा खूबसूरत और रसीली लग रही थीरोहन इतने मात्र से ही पूरी तरह से आनंदित और कामोत्तेजना के सागर में डूबने लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें वह बस गोल गोल अपनी उंगलियों को बुर के ऊपर घुमा रहा था बुर की पतली दरार पर से जब भी उसकी उंगलियां गुजर रही थीबेला का हाल बेहाल हुए जा रहा था उसकी सांसों की गति उसके बस में बिल्कुल भी नहीं थी ..... सांसों की गति बहुत गहरी चल रही थी जिसकी वजह से उसके दोनों कबूतर ब्लाउज के अंदर कुछ ज्यादा ही फड़फड़ाने लगे थे.. दोनों की सांसो की गति तेज हो रही थी पूरे कमरे में गर्म सिसकारियां गुजने लगी.... बेला अपने आप में बिल्कुल भी नहीं थी . रोहन को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था वह बेसा की बुर की रचना को समझ पाता इससे पहले ही उत्तेजना ग्रस्त होकर बेला अपना हाथ आगे बढ़ाई और रोहन का हाथ पकड़कर उसकी हथेली को जोर से अपनी बुर के ऊपर दबोच दी.......... और उसके मुख से एकाएक गर्म सिसकारी फूट पड़ी......

ससससहहहहह.....आहहहहहहहहह रोहन बाबु........

रोहन अपनी हथेली पर बेला की बुर की गर्माहट महसूस करके एकदम से उत्तेजित हो गया और वह खुद ही अपनी हथेली के अंदर बेला की छोटी सी बुर को दबोच ने लगा.. रोहन की इस हरकत की वजह से रोहन के साथ साथ बेला को भी अत्यधिक आनंद का अनुभव होने लगा रोहन पहली बार औरत के जिस्मानी अंग को छू रहा था स्पर्श कर रहा था और उसकी किस्मत इतनी तेज थी कि पहली बार में ही उसे एक औरत की बुर छूने को मसलने को मिली थी इसलिए वह इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठाते हुए अपनी हथेली में जोर जोर से बेला की बुर को दबा रहा था पूरे कमरे में बेला की गरम सिसकारी गूंज रहेी थी....

बेला पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी ...उसकी हालत पल-पल खराब हुई जा रही थी उसके दिलो दिमाग पर बस एक ही चित्र स्पष्ट हो रहा था बार-बार उसकी आंखों के सामने रोहन का मोटा तगड़ा लंबा नहीं नजर आ रहा था और इसी वजह से उसकी उत्तेजना में भी चार चांद लग रहे थे एक तो रोहन बिल्कुल... नव युवा था... जो कि अभी अभी जवान हुआ था और जवानी की शुरुआत में ही जिस तरह का तगडा मोटा दमदार लंड ऊसके पास था . उसे देख कर बेला की बुलबुल बुलाने लगी थी और जिस तरह से रोहन बड़ी बेरहमी के साथ उसकी बुर पर अपनी हथेलियों का दबाव बना रहा था उसकी वजह से बेला की बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वह पानी छोड़ रही थी और साफ-साफ शब्दों में कहें तो वह अब एकदम से चुद वासी हो गई थी और उसी अपनी बुर में एक मोटे तगड़े लंड की कमी महसूस हो रही थी जो कि रोहन के पास था... पूरा कमरा दोनों के जिस्म की गर्मी से पूरी तरह से गर्म हो चुका था बेला अपने सब्र के बांध को खो रही थी.... उससे रहा नहीं जा रहा था रोहन से चुद़वाना चाहती थी उसके मोटे लंड को अपने बुर के अंदर महसूस करना चाहती थी..... रोहन के हथेली की गर्मी से बेला पूरी तरह से नर्म पड़ती जा रही थी लेकिन तभी पैसो के लालच ने उसे ऐसा करने से रोक दिया क्योंकि वह जानती थी अगर एक बार वह रोहन को अपना सर्वस्व सौप दी तो वह अपने आप को कभी भी रोक नहीं पाएगी और खुद-ब-खुद रोहन से चुदाने के लिए तैयार हो जाएगी जैसा कि वह ऐसा होने नहीं देना चाह रही थी...... इसलिए वह बहुत ही जल्द अपने आप पर काबू कर ली और तुरंत रोहन के हाथ को पकड़कर हटाते हुए बोली...

बस रोहन बाबू अाज के लिए इतना काफी है...( इतना कहकर वह अपना पेटीकोट नीचे गिरा दी... और कुछ सुनने कहने के लिए वहां रुके बिना ही वह कमरे से बाहर निकल गई क्योंकि वह जानती थी कि अगररोहन की बात सुनेगी तो शायद उससे अपने आप को रोका नहीं जाएगा और वह सब कुछ कर डालेगी इसलिए वह कमरे से बाहर निकल गई रोहन उसे कमरे से जाता हुआ देखता रह गया....
 
बेला ने रोहन को एक अद्भुत सुख का अनुभव करा गई थी... रोहन को यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी हथेली में बेला की रसीली बुर थी जिसे वह जोर जोर से दबा रहा था.... बेला कमरे से बाहर जा चुकी थी लेकिन जाते-जाते रोहन के तन बदन में वासना की चिंगारी को भड़का गई थी रोहन की सांसे अभी भी बहुत गहरी चल रही थी बार-बार वह अपनी हथेली को देख रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी हथेली में कुछ पल पहले ही बेला की बुर थी... रोहन के पजामे में गदर मचा हुआ था उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि उसके लंड की नसें फट जाएंगी इस समय उसके लंड का कड़क पन किसी लोहे के रोड के बराबर था अगर इस अवस्था में औरत रोहन के लंड को अपनी बुर में ले ले तो वह मस्त हो जाए ऐसा सुख भोग ए की जिंदगी में उसे कभी भी ऐसा सुख भोगने को ना मिला हो और वास्तविकता यही थी अगर रोहन किसी भी औरत की बुर में डालकर उसे चोदना शुरू करें तो उसके बुरका... सारा रस निचोड़ डालें एक तरह से वह बुर की धुलाई कर दे......

रोहन बार-बार अपनी हथेली को देख रहा था जिसमें अभी तक बेला की बुर की गर्माहट महसूस हो रही थी उसकी उंगलियों सहित पूरी हथेली पर चिपचिपा द्रव्य लगा हुआ था.... हथेली में लगे चिपचिपी द्रव्य के प्रति असमंजस में था कि आखिरकार वह है क्या... एक पल तो उसे ऐसा लगा कि कहीं बेला ने उसकी हाथ पर पेशाब तो नहीं कर दी है लेकिन वह इतना तो समझता था कि वह पेशाब नहीं है क्योंकि वह बहुत की तरह चिपक रहा था उसे राह नहीं किया और वह अपनी उंगली को अपने नाक के बिल्कुल करीब लाकर उसकी खुशबू को अपने नाखूनों में उतारते हुए अपने सीने में भर दिया और अगले ही पल उसका तन बदन एक अजीब सी मादकता के नशा में खोने लगा उसके शरीर में नशा सा होने लगा उसकी खुशबू.... उसे कुछ अजीब सी लग रही थी लेकिन कुछ अजीब सी खुशबू में भी एक अजीब सा आकर्षण था जो बार-बार रोहन उंगली को अपने नाक के करीब लाकर उसकी खुशबू अपने अंदर उतार रहा था बुर के पानी से आ रही माधव खुशबू रोहन के लंड को एक अजीब सा दर्द देने लगा था रोहन को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसे वह पल याद आने लगा जब वह बेला की बुर को जोर जोर से दबा रहा था और बेला अजीब से सुख की अनुभूति करते हुए.. गरमा गरम सिसकारी ले रही थी बेला के चेहरे के बदलते हुए हवाओं को देखकर रोहन इतना तो समझ गया था कि जिस हरकत को अंजाम दे रहा है उस हरकत की वजह से बेला की तन बदन में अजीब सी हलचल मची हुई है तभी तो वह इस तरह से अजीब अजीब से चेहरे बना रही थी और उसे बेहद आनंद की अनुभूति भी हो रही थी......

जो भी हो रोहन भले ही इससे आगे ज्यादा नहीं बढ़ पाया लेकिन जितना भी हुआ उससे रोहन एकदम मस्त हो चुका था एक तो जिंदगी में पहली बार उसे औरत के अंगों को छूने का स्पर्श करने का मौका मिला था और वह भी बेला ने उसे दूसरी बार यह मौका दी थी पहली बार तो सिर्फ देख कर ही काम चला लिया था लेकिन इस बार बेला उस पर प्रसन्न होते हुए उसे अपने अंगों को छूने का मौका दे जिसका वह पूरी तरह से फायदा उठाते हुए उसकी बुर को अपनी हथेली में लेकर जोर जोर से दबा दिया था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह किसी पके हुए आम को अपनी हथेली में लेकर जोर जोर से दबा कर उसका रस निकाल रहा हो.... एक अजीब और अद्भुत सुख का अहसास रोहन को प्राप्त हुआ था जो कि उसके चेहरे से साफ झलक रहा था.....

_ दूसरी तरफ बेला अपने आप को बड़ी मुश्किल से संभाल ले गई थी वरना दूसरी कोई औरत होती तो रोहन के इतने मोटे तगड़े लंड को अपने हाथों में अपने इतने करीब देखकर बिना उसे अपनी बुर में लिए जाने नहीं देती वैसे भी रोहन के तगड़े लंड को देखकर बेला कि बुर पानी छोड़ रही थी.... और रोहन से पैसे प्राप्त करने का लालच ना होता है तो बेला आज रोहन से चुद गई होती.... बेला की आंखों के सामने अभी भी बार-बार रोहन का छत की तरफ देखता हुआ लंड नजर आ रहा था... बेला की अनुभवी आंखें रोहन के कड़े लंड को देखकर इतना तो समझ गई थी कि अगर रोहन का लंड एक बार बुर में जाए तो बिना दीन मे तारे दिखाएं बाहर नहीं आएगा...

यूं ही धीरे-धीरे दिन गुजर रहा था ... अब रोहन का डर थोड़ा थोड़ा कम हो रहा था उसकी कोशिश लगातार जारी थी कि दुबारा वह अपनी मां को नंगी देख पाए लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था और दूसरी तरफ से सुगंधा खेत खलियान और जमीदारी को संभालने मैं पूरी तरह से व्यस्त होती जा रही थी.......

एक तरह से सुगंधा अपनी जमीदारी के हिसाब से पैसे कमाने में लगी थी और दूसरी तरफ रोहन अपना समय औरतों की ताका झांकी में गवा रहा था..... जब से उसने बेला की बुर को अपनी हथेली में लेकर मसला था तब से उसे सोते जागते बस औरतों की बुर ही नजर आती थी और उसके दिल में एक ख्वाहिश खूब जोर मार रही थी कि उसे उसी तरह से ही अपनी मां की बुर को हथेली मे लेकर ंसलना है लेकिन वह जानता था कि उसकी ये ख्वाहिश कभी पूरी होने वाली नहीं है.... इसलिए वह अपनी मां की बुर के बारे में कल्पना करके अपने लंड को अपने हाथ से मचलता रहता था और अपनी सरकर की वजह से उसके तन बदन में मीठी चुभन होने लगती थी जिसका एहसास उसे सातवें आसमान तक ले जाता था रोहन काफी उत्साहित हो जाता था जब कल्पना में वह अपनी मां के बुर के बारे में सोचता था हालांकि अभी तक उसने हस्तमैथुन का अभ्यास बिल्कुल भी नहीं किया था यहां तक कि उसे यह क्रिया कैसे की जाती है इसका ज्ञान ही नहीं था जो कि इस उम्र में सभी लड़के अपने आप खुद से ही मुठ मारना सीख जाते हैं और रोहन था कि अभी तक इस बेहद उपयोगी अभ्यास से विमुक्त था एक यही क्रिया तो होती है जो कुंवारे लड़कों को अपने तन की प्यास बुझाने का सहारा बना रहता है लड़के अक्सर अपनी पसंदीदा लड़कियां औरतों की कल्पना करके _ और उनके बारे में गंदी गंदी कल्पना करते हुए अपना लंड जोर जोर से मुट्ठी में पकड़कर हिलाते हुए अपना पानी निकाल देते हैं जिस क्रिया को देसी भाषा में मुट्ठ मारना और हस्तमैथुन करना कहते हैं रोहन तो अपनी मां और बेटा की कल्पना करके केवल लंड को सहलाया ही करता था इससे आगे बढ़ने की ताकत और ज्ञान उसमें नहीं था.... हां इतना था कि रात को सोते समय सपने में अपनी मां या बेला या किसी भी औरत के साथ एकदम गर्म होकर अपने आप ही उसका पानी निकल जाता था और सुबह जब वह उठता था तो अपनी चड्डी गीली पाकर कुछ समझ नहीं पाता था बस धुंधला सा उसके दिमाग में कुछ कुछ सपने वाली बात याद रहती थी जिसकी वजह से उसकी उत्तेजना और बढ़ जाती थी.......

ऐसे ही एक दिन वह अपनी मां के बारे में कल्पना करके पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था..... पजामे में तंबू फिर से तन चुका था .... उससे अपनी जवानी की गर्मी संभाले नहीं संभल रही थी इसलिए वह नहाने के लिए चला गया... नहाने के लिए गुसलखाना घर के पीछे की तरफ बढ़ा हुआ था वहीं पर नहाना धोना सब कुछ होता था क्योंकि गांव में अफसर घर से दूर ही नहाने का प्रबंध किया जाता था.....

रोहन कपड़े लेकर घर के पीछे की तरफ जाने लगा सुगंधा की भी आप खुल चुकी थी आज उसे अपने अंगूरों के बाग देखने जाना था इसलिए उसे भी नहा कर जल्दी से तैयार होना था और वह भी घर के पीछे की तरफ जाने लगी....

रोहन गुसल खाने में पहुंच चुका था गुसलखाना चारों तरफ वृक्षों से घिरा हुआ था जिसकी वजह से दिन में भी अंधेरा जैसा ही लगता था गुसल खाने में पहुंचते ही सबसे पहले वहां हेड पंप चला कर बाल्टी को पानी से छलो छल कर दिया... और जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतार कर पूरी तरह से नंगा हो गया उसका लंड अभी भी पूरी तरह से खड़ा था क्योंकि नल चलाते समय भी उसके दिमाग में उसकी मां का नंगा बदन ही घूम रहा था ...

वह बाल्टी में से पानी लेकर खड़े खड़े ही नहाना शुरू कर दिया.. जैसे जैसे वह अपने ऊपर पानी डालते जा रहा था वैसे वैसे उसका दिमाग शांत होते जा रहा था लेकिन लंड ज्यों का त्यों सिर उठाए खड़ा था.... रोहन अपने आप को शांत करने के लिए गाना गुनगुना रहा था सुगंधा इस बात से अनजान की गुसल खाने में उसका बेटा है वह अपने कपड़े लेकर गुसल खाने के करीब पहुंच गई और उसके कानों में रोहन के गाने गुनगुनाने की आवाज सुनाई देने लगी.....

गुसल खाने के करीब का नजारा बेहद मनमोहक था चारों तरफ ऊंचे ऊंचे पेड़ ही पेड़ नजर आ रहे थे और गुसल खाने के इर्द-गिर्द फूलों के पौधे लगे हुए थे जिससे वह जगह और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी सुबह की ठंडी हवा सुगंधा के तन बदन को और तरोताजा कर रही थी ... सुगंधा के बाल खुले हुए थे जो कि ठंडी हवा के चलने से लहरा रहे थे जिससे उसकी खूबसूरती में चार चांद लग रहे थे सुगंधा अपने हाथ में साड़ी ब्लाउज लिए गुसल खाने की बिल्कुल करीब पहुंच गई थी पर अंदर से आ रहे गुनगुनाने की आवाज को सुनकर वह मन ही मन मुस्कुरा रही थी क्योंकि उसे मालूम था कि यह आवाज रोहन की ही थी... और आज इतनी जल्दी उठकर उसके नहाने की वजह से वह बेहद खुश नजर आ रही थी.....गुसल खाने का दरवाजा बंद था अंदर पानी गिरने की आवाज आ रही थी और रोहन गुनगुना रहा था..

सुगंधा उत्सुकता बस गुसल खाने के अंदर झांकने के बारे में सोचने लगी लेकिन फिर उसके दिमाग में आया कि नहीं यह गलत है किसी को नहाते हुए देखना अच्छी बात नहीं है लेकिन लगातार आ रही अंदर से गुनगुनाने की आवाज सुनकर सुगंधा उत्सुकता बस गुसल खाने के किवाड़ के एकदम करीब पहुंच गई.... आखिरकार सुगंधा अपनी उत्सुकता के आधीन हो कर अंदर झांकने का फैसला कर ली वह अंदर झांकने के लिए इधर-उधर जगह ढूंढने लगी कि कहीं से अंदर का नजारा दिख जाए...

तभी उसे लकड़ी के बने किवाड़ के बीच की दरार नजर आने लगी और वह उत्सुकता बस उस दरार पर अपनी नजरें टिका कर अंदर देखने की कोशिश करने लगी.... थोड़ी मशक्कत करने के बाद उसे अंदर का नजारा नजर आने लगा सबसे पहले उसे रोहन का चेहरा नजर आया जिस पर साबुन का झाग लगा हुआ था और वह मस्ती में झूमता हुआ गाना गुनगुना रहा था..... यह देख कर सुगंधा के चेहरे पर मुस्कुराहट खेलने लगी क्योंकि बड़ा ही मासूम लग रहा था रोहन..... धीरे-धीरे उसकी नजरें चेहरे से नीचे की तरफ आने लगी जिस पर ढेर सारा साबुन का झाग नजर आ रहा था सुगंधा उत्सुकता बस उसे देख रही थी जवानी की दहलीज पर कदम रखने के साथ ही रोहन का बदन गठीला होता जा रहा था जिसके पूरक उसकी चौड़ी छातीया थी...

सुगंधा को अपने बेटे का गठीला बदन और जवान होते हुए देख कर गर्व महसूस हो रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका एक ही सहारा था और वह था उसका बेटा क्योंकि पति से वह एकदम से ना उम्मीद हो चुकी थी.....

 
रोहन को खुश देखकर सुगंधा भी खुश हो रही थी ... क्योंकि बच्चों की ही खुशी में तो मां की खुशी होती है ओर सुगंधा भी यही चाहती थी कि उसका बेटा हमेशा खुश रहे...

सुगंधा को अपने बेटे का इस तरह से नहाना अच्छा लग रहा था उसके चेहरे से मासूमियत झलक रही थी तभी रोहन एक लोटा पानी उठाकर अपने ऊपर डाल दिया जिसकी वजह से उसके चेहरे पर साबुन का झाग निकलने लगा वह धीरे धीरे उस की चौड़ी छातियां एकदम गोरी और चमकने लगी.... सुगंधा को अपने बेटे का शरीर देखने में आनंद के साथ साथ गर्व की अनुभूति होने लगी लेकिन सुगंधा एक मां होने के साथ-साथ एक औरत भी थी और जिस तरह का नजारा वहां चोरी-छिपे देख रही थी ऐसे में औरतों के मन में एक जिज्ञासा सी हो जाती है और वही जिज्ञासा सुगंधा के मन में भी पनपने लगी वह अपने बेटे के खूबसूरत बदन के नीचे की तरफ अपनी नजरें ले जाना चाहती थी लेकिन कहीं ना कहीं उसकी मर्यादा उसके संस्कार उसे रोक रहे थे एक तरफ मां का दिल कहता था कि बस इतने ज्यादा देखना ठीक नहीं है तो कहीं एक औरत का दिल कह रहा था कि नीचे की तरफ नजर घुमाया जाए आखिरकार देख लिया जाए की कमर के नीचे उसका बेटा कितना बड़ा हुआ है लेकिन वह काफी असमंजस में पड़ चुकी थी कभी उसका मन देखने को होता तो कभी इंकार करने लगती लेकिन रोहन का गठीला बदन धीरे धीरे सुगंधा को सम्मोहित कर रहा था वह अपने आप से ही मन ही मन में कहने लगी कि देख लेने में क्या हर्ज है आखिरकार वह पूरा नंगा तो होगा ही नहीं नीचे उसने चड्डी पहन रखी होगी दो नीचे देखने में कोई हर्ज नहीं है और अपने आप को ही इस तरह का जवाब देकर वह अपनी नजरों को नीचे की तरफ ले जाने लगी लेकिन जैसे जैसे वह अपनी नजर नीचे की तरफ ले जा रही थी उसके दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी यह क्यों हो रहा था यह उसे भी नहीं मालूम था उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी उसके तन बदन में एक अजीब सी हलचल हो रही थी मन में उत्सुकता के बादल मंडराने लगे थे...

रोहन इस बात से अनजान की उसकी मां उसे इस अवस्था में देख रही है वह एकदम मस्त होकर नहाने में जुटा हुआ था कभी व नल चलाने लगता तो कभी पानी उठा कर अपने ऊपर डालने लगता ठंडे ठंडे पानी से उसके तन बदन को और दिमाग को ताजगी महसूस हो रही थी लेकिन दिलो दिमाग की ताजगी से बिल्कुल परे जवानी से भरपूर उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था उसमें बिलकुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था जिसे वह बार-बार अपने हाथ से सहला दे रहा था और ऐसा करने में उसे मजा भी आ रहा था.....

सुगंधा की नजरें उत्सुकता बस उसकी चौड़ी छाती यू से नीचे की तरफ जा रही थी ... धीरे-धीरे करके सुगंधा की नजरें कमर तक पहुंच गई बस अब वह अपनी नजरों को रोक लेना चाहती थी इससे आगे का दृश्य वह देखना नहीं चाहती थी क्योंकि ऐसा करने में उसे पाप महसूस हो रहा था लेकिन उत्सुकता उसे ऐसा करने से रोक रहे थे वह बार-बार अपने मन को मनाती कि ऐसा ना करें लेकिन वह एकदम मजबूर हो जा रही थी क्योंकि रोहन के गठीले बदन का आकर्षण कहीं ना कहीं उसके दिलो दिमाग पर भी जोर डाल रहा था... और वह मजबूर होकर अपनी नजरों को धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरकाने लगी..... रोहन के दिमाग में यह चल रहा था कि आज जब पूरी तरह से निर्वस्त्र होकर नहा रहा हुं. तो क्यों ना साबुन लगाकर अपने लंड की भी सफाई कर ली जाए..... इसलिए वह फिर से साबुन उठा दिया और अपने लंड पर साबुन लगाने के लिए अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाने लगा और वहां दूसरी तरफ किवाड़ की दरार में से झांक रही सुगंधा की नजर धीरे धीरे नीचे की तरफ फिसल रही थी और अगले ही पल जैसे उसकी नजर कमर से नीचे की तरफ गई उसकी तो सांसे ही अटक गई कमर के नीचे का नजारा देखकर सुगंधा की सांस ना तो अंदर आ रही थी ना तो बाहर ही जा रही थी ऐसा लग रहा था मानो जैसे उसे सांप सॉन्ग गया हो सुगंधा के लिए जैसे समय थम सा गया था उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसकी आंखें जो देख रही है वह सच है उसे अपने आप पर अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था सुगंधा भी क्या करती अंदर का नजारा ही ऐसा था कि उसे अपने आप पर तनिक भर भी भरोसा नहीं हो रहा था कि वह जो देख रही है वह सच है..... रोहन का लंड कुछ इस तरह से खड़ा था कि उस में तनिक भी ढीलापन नहीं था.... उसका वास्तविक आकार कुछ गजब का था जिससे सुगंधा पूरी तरह से आकर्षित हुए जा रही थी तभी उसके देखते ही देखते रोहन साबुन को अपने लंड पर रगड़ने लगा और जैसे-जैसे साबुन लगाते समय रोहन का लंड इधर उधर हो रहा था ...वैसे वैसे सुगंधा की जांघों के बीच सुरसुरा हट मचने लगी थी.... एक अजीब सी हलचल सुगंधा के तन बदन में पैदा हो रही थी उसने वैसे तो अभी तक अपने पति के ही लंड के दर्शन किए थे लेकिन उसके मन में यह धारणा बन गई थी कि उससे ज्यादा या मोटा किसी भी मर्द का नहीं होता है इसलिए उसकी कल्पनाओं में भी अपने पति के सामान ही लंड की रचना होती रहती थी... इसलिए अपनी आंखों के सामने अपने बेटे का इतना तगड़ा मोटा और लंबा लंड देखकर उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था उसकी सारी धारणा धरी की धरी रह गई थी......

पल भर में सुगंधा के तन बदन में गर्माहट का संचार होने लगा सुबह की ठंडी ठंडी हवा भी उसे गर्मी देने लगी अब आलम यह था कि वह चाहकर भी अपनी नजरों को हटा नहीं पा रही थी हालांकि उसे यहां समझ में आ रहा था कि जो वह कर रहे हैं वह गलत है लेकिन फिर भी ना जाने कैसी कशिश बनी हुई थी कि वह अपने बेटे के लंड से अपनी नजरों को हटा नहीं पा रही थी...

देखते ही देखते सब कुछ बदलने लगा था सुगंधा की सारी मर्यादाए संस्कार सब कुछ धुंधली होती नजर आ रही थी....

रोहन बड़ी मस्ती के साथ अपने घर पर साबुन रगड़ रहा था उसे ऐसा करने में बहुत मजा आ रहा था उसके तन बदन में भी गर्माहट पैदा हो रही थी इसलिए अपने आप ही उसके मुंह से गाना गुनगुनाना बंद हो गया था और वह अपना सारा ध्यान अपने लंड पर लगाए हुए था वह इस बात से पूरी तरह से अनजान थाकी बाहर उसकी मां सब कुछ देख रही है.... अपनी मस्ती में अपने खड़े लंड पर साबुन रगड़ रहा था.... अपने बेटे के विशाल लंड को देखकर अपने आप ही सुगंधा की बुर गीली होने लगी..... उसे इस बात का एहसास तब हुआ जब उसे अपनी जांघों के बीच हल्की सी खुजली महसूस हुई और वह अपनी बुर खुजलाने के लिए अपना हाथ नीचे की तरफ ले गई तो उसे अपने बुर के इर्द-गिर्द कुछ ज्यादा ही गीलापन महसूस होने लगा और वह समझ गए कि यह क्या है....

अपने हाल को देखते हुए उसे शर्मिंदगी का एहसास होने लगा वह वहां से हट जाना चाहती थी लेकिन उस नजारे पर से अपना नजर हटाने में उसे दुविधा हो रही थी .... सुगंधा पूरी तरह से आकर्षण में बंध़ती चली जा रही थी.... सुगंधा अपने बेटे को अभी तक मौसम समझ रही थी लेकिन उसके हथियार को देख कर वह अपने बेटे के बारे में कुछ भी फैसला कर पाने में असमर्थ साबित हो रही थी ..... उसके मन में यह ख्याल आ रहा था कि कहीं अपने आवारा दोस्तों के साथ रहकर रोहन भी तो उन आवारा लड़कों की तरह आवारा तो नहीं हो गया कहीं वह भी गंदे सोबत में पड़ कर गंदी हरकतें तो नहीं करने लगा लेकिन तभी उसे इस बात का ख्याल आया कि अभी तक रोहन ने कुछ ऐसी वैसी गंदी हरकत नहीं किया था जिसे देख कर यह कहा जाए कि उसका लड़का भी उन आवारा लड़कों की तरह गंदा हो गया है.... वह अपने आप से ही बात करते हुए मन ही मन में बोली की अपने अंग को इस तरह से साफ करना कोई गलत बात तो नहीं है और उसकी उम्र को देखते हुए यह अपने आप ही हो गया होगा कि उसका लंड खड़ा हो गया...

रोहन के लिए गनीमत वाली बात यह थी कि उसने अभी तक सफाई के अलावा कुछ गंदी हरकत नहीं किया था हालांकि उसके मन में अभी भी उसकी मां और बेला को लेकर गंदी बातें चल रही थी.... इसलिए सुगंधाको यह सब सामान्य ही लग रहा था लेकिन अपने बेटे के हथियार को वह बिल्कुल भी सामान्य तौर पर नहीं ले रही थी क्योंकि जिंदगी में पहली बार उसने इतने तगड़े लंड को जो देखी थी.... सुगंधा की पेंटी पूरी तरह से खेली हो चुकी थी एक अजीब सी हलचल उसके तन बदन को झकझोर से गई क्योंकि ना जाने क्यों उसका मन कर रहा था कि रोहन कुछ गंदी हरकत करें उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी वह सोच रही थी कि जैसे दूसरे लड़के अपने लंड के साथ अपने हाथ से गलत हरकत करते हैं उसी तरह की हरकत उसका बेटा भी करे ना जाने तो उसकी आंखों की प्यास बढ़ती जा रही थी उसकी आंखें कुछ और देखना चाह रही थी लेकिन रोहन तो अभी आपने इस ज्ञान से बिल्कुल भी अज्ञान था इसलिए वह ऐसा ना करके जल्दी जल्दी अपने ऊपर पानी डालने लगा और देखते ही देखते अनजाने में ही अपनी मां को मदहोश करते हुए रोहन नहा लिया अपने बेटे को मेहता देख कर आज सुगंधा के तन बदन में ना जाने कैसी हलचल ने दस्तक दे दी थी जो कि एक बहुत बड़े तूफान जो उसकी जिंदगी में आने वाला था ऊसका अंदेशा दे रही थी...

सुगंधा गुसल खाने से थोड़ी दूरी बनाकर खड़ी होकर अपने बेटे के बाहर निकलने का इंतजार करने लगी

रोहन के दिमाग में यह चल रहा था कि आज जब पूरी तरह से निर्वस्त्र होकर नहा रहा हुं. तो क्यों ना साबुन लगाकर अपने लंड की भी सफाई कर ली जाए..... इसलिए वह फिर से साबुन उठा दिया और अपने लंड पर साबुन लगाने के लिए अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाने लगा और वहां दूसरी तरफ किवाड़ की दरार में से झांक रही सुगंधा की नजर धीरे धीरे नीचे की तरफ फिसल रही थी और अगले ही पल जैसे उसकी नजर कमर से नीचे की तरफ गई उसकी तो सांसे ही अटक गई कमर के नीचे का नजारा देखकर सुगंधा की सांस ना तो अंदर आ रही थी ना तो बाहर ही जा रही थी ऐसा लग रहा था मानो जैसे उसे सांप सॉन्ग गया हो सुगंधा के लिए जैसे समय थम सा गया था उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसकी आंखें जो देख रही है वह सच है उसे अपने आप पर अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था सुगंधा भी क्या करती अंदर का नजारा ही ऐसा था कि उसे अपने आप पर तनिक भर भी भरोसा नहीं हो रहा था कि वह जो देख रही है वह सच है..... रोहन का लंड कुछ इस तरह से खड़ा था कि उस में तनिक भी ढीलापन नहीं था....

उसका वास्तविक आकार कुछ गजब का था जिससे सुगंधा पूरी तरह से आकर्षित हुए जा रही थी तभी उसके देखते ही देखते रोहन साबुन को अपने लंड पर रगड़ने लगा और जैसे-जैसे साबुन लगाते समय रोहन का लंड इधर उधर हो रहा था ...वैसे वैसे सुगंधा की जांघों के बीच सुरसुरा हट मचने लगी थी.... एक अजीब सी हलचल सुगंधा के तन बदन में पैदा हो रही थी उसने वैसे तो अभी तक अपने पति के ही लंड के दर्शन किए थे लेकिन उसके मन में यह धारणा बन गई थी कि उससे ज्यादा या मोटा किसी भी मर्द का नहीं होता है इसलिए उसकी कल्पनाओं में भी अपने पति के सामान ही लंड की रचना होती रहती थी... इसलिए अपनी आंखों के सामने अपने बेटे का इतना तगड़ा मोटा और लंबा लंड देखकर उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था
 
. कुछ देर बाद ही रोहन नहा कर बाहर आ गया नहाने के बाद वह टावल लपेटा हुआ था... और जैसे ही बाहर आया बाहर अपनी मां को खड़ा देखकर एकदम से घबरा गया और घबराते हुए बोला .....

ममममम....मम्मी तुम यहां इतनी सवेरे.......

( सुगंधा रोहन को देख कर मुस्कुरा रही थी और अपनी मां को इस तरह से मुस्कुराते हुए देखकर रोहन का दिल घबरा रहा था क्योंकि वह जानता था की गुसल खाने के अंदर वह पूरी तरह से नंगा होकर नहा रहा था ..और नहाते समय उसका लंड भी पूरी तरह से खड़ा था... उसे इस बात का डर सताने लगा कि कहीं उसकी मां ने उसे उस अवस्था में नहाते हुए देख तो नहीं ली...)

हां बेटा आज मुझे अंगूर के बाग देखने जाना है.....( सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली)....

तुम इतना मुस्कुरा क्यों रही हो.... मम्मी.. . ?

सुगंधा अभी भी मुस्कुरा रही थी क्योंकि रोहन जिस अवस्था में बाहर आया था उसके बदन पर केवल टावल ही था और उसके टावल के आगे वाला हिस्सा अभी भी हल्का सा उठा हुआ था जिसे देख कर सुगंधा मन ही मन मुस्कुरा रही थी लेकिन रोहन की बात सुनकर सुगंधा बाद बदलते हुए बोली...

कुछ नहीं बस ऐसे ही मुस्कुरा रही थी तू नहाते समय जिस तरह से गाना गुनगुना रहा था मुझे मेरे दिन याद आ गए मैं भी इसी तरह से बाथरूम में गाना गुनगुनाते हुए नहाती थी लेकिन अब सब कुछ छूट गया है.....

( रोहन को अपनी मां की बात सुनकर राहत महसूस हुई लेकिन वह बिना कुछ बोले वहीं खड़ा रहा तो सुगंधा बोली)

जाओ अपने कमरे में जाकर कपड़े बदल लो और जल्दी से तैयार हो जाओ तुम्हें मेरे साथ अंगूर के बाग देखने चलना है...

( सुगंधा की बात सुनकर रोहन थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बेमन से बोला)

मम्मी तुम चली जाओ मैं नहीं जाऊंगा....

ऐसे कैसे कह रहे हो रोहन तुम चलोगे नहीं अपने खेत खलियान के बारे में समझोगे नहीं तो आगे कैसे चलाओगे क्या तुम भी अपने बाप की तरह आवारा निकम्मा निकलना चाहते हो ताकि यह जो विरासत है यह जमीदारी है सब का सब जाता रहे.....

( सुगंधा अपने बेटे को थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए लेकिन प्यार से समझाते हुए बोली)

लेकिन मम्मी मुझे यह सब अच्छा नहीं लगता....

मैं जानती हूं बेटा कितने सब अच्छा नहीं लगता लेकिन करना ही होगा मैं नहीं चाहती कि तुम भी तुम्हारे बाप की तरह आवारा और निकम्मे निकल जाओ और मैं यह गांव वालों को यह मौका बिल्कुल भी नहीं देना चाहती कि तुम्हारे बारे में भी बातें करके तुम्हारी हंसी उड़ाए तुम सुगंधा के बेटे हो तुम्हें यह सारा काम बड़ी जिम्मेदारी से निभाना होगा इसलिए तुम्हें यह सब सीखना होगा और जाओ जल्दी से तैयार हो जाओ इतना कहकर सुगंधा गुसल खाने की तरफ कदम बढ़ा दी रोहन अपनी मां को जाते हुए देखता रह गया लेकिन जैसे ही कमर के नीचे उसकी नजर पड़ी उसका मयूर मने नाचने लगा क्योंकि रोहन अपनी मां के बड़ी-बड़ी और चौड़ी नितंबों का दीवाना था और जैसे वह गुसल खाने के अंदर जा रही थी... वैसे ही रोहन की नजर अपनी मां की मटकती हुई बड़ी बड़ी गांड पर पड़ी और वह सब कुछ भूल गया... अपनी मां की बड़ी-बड़ी और मटकती हुई गांड को देखकर रोहन गरम आहें भरने लगा........

रोहन करता भी तो क्या करता --- उसकी सबसे बड़ी कमजोरी यही थी। अपनी मां की मटकती हुई बड़ी बड़ी गांड को देखकर उससे रहा नहीं गया। एक बार फिर से उस की सोच ने उसके सोए हुए लंड को जगाना शुरू कर दिया गुसल खाने का दरवाजा बंद हो चुका था रोहन के दिमाग में कुछ और चलने लगा वह वहां से अपने घर जाने के बजाय धीरे धीरे कदम रखता हुआ गुसल खाने की तरफ जाने लगा उसका दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह जो काम करने जा रहा था उसके लिए उसने हिम्मत नहीं थी लेकिन फिर भी ना जाने कैसे आज उसके में इतनी हिम्मत आ गई थी शायद यह औरत के गदराए जवान जिस्म का असर था जो रोहन में इतनी हिम्मत जगा रहा था ।रोहन का तंबू फिर से तन कर सामियाना बन गया था चारों तरफ का माहौल काफी खूबसूरत और ठंडा था सुबह सुबह की ताजी ठंडी हवा रोहन के तन बदन को एक नई ताजगी प्रदान कर रहे थे ।लेकिन यह ताजगी सिर्फ ऊपर से ही थी बदन के अंदर तो लावा फूट रहा था वह अपने आप को संभाल नहीं पा रहा था ।और धीरे-धीरे अपने कदम बढ़ाता हुआ गुसल खाने के बिल्कुल करीब पहुंच गया।

गुसल खाने के दरवाजे के करीब पहुंचते ही रोहन खड़ा होकर चारों तरफ इर्द-गिर्द देखने लगा की कहीं कोई उसे देख तो नहीं रहा है पूरी तरह से तसल्ली कर लेने के बाद रोहन अंदर झांकने का जरिया देखने लगा। कुछ देर मशक्कत करने के बाद उसे भी दरवाजे की वही दरार नजर आई जिसमें से कुछ देर पहले सुगंधा झांक रही थी। आज पहली बार वह चोरी छुपे इस तरह से अपनी मां के जवान बदन को देखने जा रहा था इसलिए उसका दिल बड़ी जोरों से धड़क रहा था चारों तरफ केवल पंछियों के चहकने की आवाजें आ रही थी वैसे भी वह जानता था कि इधर कोई आने वाला नहीं था लेकिन फिर भी एक मन में डर सा बना हुआ था।। सुबह सुबह की ठंडी ताजा हवा में भी रोहन के माथे पर पसीने की बूंदें उपसने लगी थी ।वह धड़कते हुए दिल के साथ अपनी आंख को दरवाजे की दरार से सटा दिया। कुछ पल तो उसे समझ में नहीं आया कि अंदर क्या नजर आ रहा है लेकिन कुछ देर अपने आंखों को स्थिर करते ही उसे वह नजारा सामने नजर आया जिसे देखते ही उसका लंड अपनी मां की जवानी को सलामी भरते हुए ऊपर नीचे होने लगा।

गुसल खाने में सुगंधा केवल पेटीकोट में खड़ी थी उसके बदन के बाकी के वस्त्र उतर चुके थे नंगी चिकनी गोरी पीठ देख कर रोहन टॉवल के ऊपर से ही अपने लंड को मसलने लगा।

अपनी मां के हाथों की हरकत को देख कर उसे समझते देर नहीं लगी कि उसकी मां पेटीकोट की डोरी खोल रही है। अब तो रोहन का दिल धड़कने की बजाय जोर जोर से उछलने लगा उसकी आंखों के सामने मालिश वाले दिन जैसा ही नजारा प्रस्तुत हो रहा था उत्तेजना के मारे उसका लंड एकदम कड़क हो कर किसी लोहे के रोड की भांति हो गया था ।रोहन अपनी नजरों को किवाड़ की पतली दरार से सटाया हुआ था । वह अंदर के एक भी नजारे को चूकने नहीं देना चाहता था ।

बस एक कमी आज भी उसे खल रही थी कि उसकी मां यहां पर भी अपनी पीठ उसकी तरफ की हुई थी।

जिस तरह से रोहन उत्तेजना का अनुभव कर रहा था उसी तरह से आज सुगंधा भी काफी उत्तेजित हो रही थी और उसका एक ही कारण था उसके बेटे का तना हुआ मोटा तगड़ा लंड जिसे देखते ही उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी सुगंधा की आंखों में अपने बेटे के लंड को लेकर उसकी तरफ बढ़ती हुए आकर्षण की चमक साफ नजर आ रही थी। उसे इस बात का अनुभव अच्छी तरह से हो रहा था कि उसकी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। सुगंधा भी बार-बार अपने मन को अपनी बेटी के प्रति बढ़ते आकर्षण से रोक रही थी समझा रही थी कि उसके बारे में इस तरह का ख्याल करना अच्छा नहीं है लेकिन बार-बार उसकी आंखों के सामने रोहन का खड़ा तगड़ा मोटा लंड नजर आ रहा था जिससे वह अपने भटकते हुए मन को रोक नहीं पा रही थी। इस समय यही कहना ठीक था कि आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी सुगंधा धीरे-धीरे अपनी पेटीकोट की डोरी खोल रही थी और बाहर खड़े रोहन की उत्सुकता और उत्तेजना बढ़ती जा रही थी और अगले ही पल सुगंधा अपने पेटिकोट की डोरी खोल कर एक झटके में पेटीकोट को छोड़ दी और उसकी बेटी को ढीली होकर सीधे जाकर उसके कदमों में गिर गई।

गुलाबी कलर की पेंटी सुगंधा को पूरी तरह से निर्वस्त्र होने से रोक दी । लेकिन फिर भी इस अवस्था में भी एक छोटी सी पैंटी एक मर्द की कल्पना में सुगंधाको नंगी करने में बाधित नहीं हो रही थी क्योंकि कल्पनाओं का घोड़ा तो मन मर्जी का मालिक होता है जहां दौड़ाऔ वहां दौड़ता है। इसलिए अपनी मां के बदन पर एक छोटी सी पैंटी देख कर भी रोहन अपनी मां के नंगे पन के एहसास को महसूस कर रहा था अपनी मां की नंगी नंगी गोरी गांड को देख कर रोहन पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो गया था।।

रोहन की सांसे पलभर में ही तीव्र गति से चलने लगी । दूसरी तरफ से गंदा ना चाहते हुए भी अपनी बेटी के खड़े लंड को याद करके अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर अपने नितंबों को सहलाने लगी यह देखकर रोहन की उत्तेजना और बढ़ने लगी रोहन का दिल जोरों से धड़क रहा था उसके टॉवल में इस तरह का तंबू तन कर खड़ा हो गया था कि ऐसा लग रहा था जैसे उसकी टावल नीचे गिर जाएगी।

तभी सुगंधा अपने हाथों से अपनी पेंटी को पकड़कर अपनी बेटी के लंड के प्रति बढ़ते आकर्षण की वजह से मदमस्त होकर उसे नीचे की तरफ सरकाने लगी लेकिन अपनी पेंटी को नीचे की तरफ उतारते हुए वह अपने भारी-भरकम नितंबों को गुसल खाने के किवाड़ की तरह इस तरह से उभरते हुए उठाने लगी जैसे कि ऐसा लग रहा था कि वह अपने बेटे के मदमस्त लंड को सलामी भर रही हो।

तरबूज के जैसे गोल गोल भारी भरकम नितंबों को उठा हुआ देखकर रोहन एकदम से कामोत्तेजना से भर गया। और उसके टॉवल में एक बहुत बड़ा तंबू सा बन गया जिसकी वजह से उसकी टॉवल नीचे गिर गई लेकिन वह अपनी टावल उठाने की तस्दी बिल्कुल भी नहीं ले रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने बेहद मदमस्त कर देने वाला नजारा जो चल रहा था।

अगले ही पल सुगंधा अपने सारे वस्त्र उतारकर एकदम नंगी खड़ी थी इस समय सुगंधा एकदम काम की देवी लग रही थी उसका चमकता बदन बेहद खूबसूरत और आकर्षक लग रहा था एचएफ का नजारा बन चुका था गुसल खाने के अंदर रोहन की मां संपूर्ण रूप से नंगी खड़ी थी और गुसल खाने के बाहर रोहन एकदम नंगा खड़ा था रोहन बार-बार अपने आप से ही कह रहा था कि काश उसकी मां उसकी तरफ मुंह करके खड़ी हो जाए ताकि उसे उसकी मां की बेहद खूबसूरत बुर देखने को मिल जाए और जैसे उसकी मन की बात उसकी मां सुन ली हो इस तरह से अगले ही पल वह रोहन की तरफ मुंह कर ली रोहन का दिल जोरो से धड़कने लगा उसकी नजर सीधे उसकी मां की टांगों के बीच चली गई लेकिन उसकी किस्मत खराब थी क्योंकि तभी उसकी मां गुसल खाने में टंगी साड़ी उठा ली और अपने हाथ में पकड़ कर उसे देखने लगी जिसकी वजह से साड़ी की किनारी उसकी बुर को ढंक दी रोहन एकदम से तड़प उठा वह साड़ी हटने का इंतजार करने लगा कि तभी पत्तों की सरसराहट की आवाज आने लगी और पीछे मुड़कर देखा तो दूर से बेला चली आ रही थी रोहन तुरंत समय की नजाकत को समझते हुए नीचे गिरी टॉवल को उठाकर अपनी कमर से लपेट लिया और तुरंत वहां से नौ दो ग्यारह हो गया।

 
रोहन तैयार हो चुका था वैसे तो वह अपनी मां के साथ बाग में जाना नहीं चाहता था लेकिन उसकी मां का आज्ञा था और जिस तरह का नजारा उसने अभी अभी गुसल खाने के अंदर देख कर आया था उसके चलते वह खुद ही अपनी मां के साथ जाने के लिए मचलने लगा क्योंकि उसेअब अपनी मां के करीब रहने में उत्तेजना का अनुभव होने लगा वह तैयार होकर कमरे में बैठा था और इंतजार कर रहा था कि कब उसकी मां उसे आवाज दे साथ चलने के लिए।

सुगंधा भी नहा कर अपने कमरे में आ चुकी थी और तैयार हो रही थी कमरे के अंदर आते ही वो दरवाजे की कुंडी बंद कर दी एक अजीब सी हलचल उसके तन बदन को झकझोर रही थी। बार-बार उसकी आंखों के सामने रोहन का तना हुआ लंड जो कि टॉवल में तंबू सा बना हुआ था और जो कि उसने गुसल खाने के अंदर अपने बेटे को संपूर्ण नग्ना वस्था में देखकर उत्तेजना का अनुभव कर रही थी वही नजारा उसकी आंखों के सामने बार बार घूम रहा था।

कमरे की कुंडी लगाते ही सुगंधा अपने बदन पर से गीले वस्त्रों को उतार फेंकी और एकदम नंगी हो गई आज पहली बार उत्तेजना बस होकर उसने अपने बदन के सारे कपड़े उतार दिए थे उसकी जांघों के बीच की उस छोटी सी दरार के अंदर उसे बार-बार कुछ रीसता हुआ महसूस हो रहा था और एक अजीब सी हलचल उस छोटी सी दरार में मची हुई थी। और जो की तुलनात्मक तरीके से उसे अपनी जवानी के दिन की तरह ही लग रहे थे बार-बार वह अपना ध्यान हटाने की कोशिश करती लेकिन भटकता हुआ मन उसी चलचित्र पर आकर रुक जा रहा था और बार बार सुगंधाको उत्तेजना का एहसास दिला दे रहा था कुछ देर तक सुगंधा संपूर्ण लगना अवस्था में अपने कमरे में चहलकदमी करते हुए कुछ सोचने लगी लेकिन क्या सोच रही है यह उसे खुद भी नहीं मालूम था।

लेकिन कमरे का नजारा पूरी तरह से मादकता से भरा हुआ था मर्दों के लिए यह नजारा का असर उसके दिमाग में 100 बोतलों के नशे की तरह ही होता है क्योंकि सुगंधा जोकि खूबसूरती की मिसाल थी पूरा बदन गदराया हुआ था। जिसे लोग साड़ी में देखकर भी उसके अंगों के कटाव और मरोड़ का अंदाजा लगा लेते थे वह सुगंधा इस समय पूरी तरह से नग्न अवस्था में कमरे में चहल कदमी कर रही थी और अगर इस पल किसी की भी नजर सुगंधा पर पड़ जाए तो बिना कहे उसका लंड पानी फेंक दें क्योंकि सुगंधा अभी अभी नहा कर आई थी उसके बदन से भीनी भीनी मादक खुशबू पूरे कमरे में अपना असर छोड़ रही थी एकदम गोरी मखमली बदन वाली सुगंधा कमरे में चहल कदमी करते हुए बहुत ही ज्यादा कामुक नजर आ रही थी उसके उन्नत नितंब बहुत ही गहराई लिए हुए उसके बीच की गहरी फांक

ऐसा लग रहा था कि जैसे दो बड़े-बड़े तरबूज के बीज रेखा खींच दी गई हो जब वो चलती थी तो उसके दोनों बड़े बड़े गांड की फांक ऊपर नीचे होते हुए एक बेहद मनमोहक और मदहोश कर देने वाले नजारा पेश कर रहे थे सुगंधा अपनी गांड मटका ते हुए कमरे में इधर से उधर घूम रही थी जिसे देखना किस्मत की बात होती है गीले गीले बाल कमर तक आ रहे थे और गोरे बदन पर काले काले घने बाल बहुत ही खूबसूरत लग रहे थे और गीले बालों में से टपकते हुए पानी की बूंदे किसी मोती के दाने के समान चमक रही थी और रह रह कर उसके नितंबों को गीला कर दे रही थी।

सुगंधा की आंखों के सामने बार-बार उसके बेटे का खड़ा लंड नजर आ रहा था और उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी आंखों ने जो देखा वह सच है लेकिन वास्तविकता यही थी कि जो उसने देखी वह शत-प्रतिशत सच था और इस बात का अहसास होते ही उसके तन बदन में कामुकता की लहर दौड़ ने लगी और वह अपने हाथ को अपनी टांगों के बीच ले जाकर अपनी बुर पर उंगलियों का स्पर्श कराई तो उसे बुर की दरार के इर्द-गिर्द वाला स्थल पूरी तरह से गीला महसूस होने लगा वह लाख अपने आप को झूठी दिलासा दे कि वह उत्तेजित नहीं हुई है लेकिन उसकी बुर में से बरस रहा सावन भादो इस बात का सबूत था कि वह पूरी तरह से कामोत्तेजना के सागर में डूब रही थी।

तभी घड़ी में 8:00 बजने का अलार्म बजने लगा तो उसकी तंद्रा भंग हुई और अपने आप को पूरी तरह से नंगी देखकर शरमा गई और जल्दी से जाकर अलमारी में से अपने कपड़े निकालने लगी लेकिन तभी नजर उसकी आईने परपड़ी जिसमें उसका प्रतिबिंब नजर आ रहा था। अपना ही प्रतिबिंब वह आईने में देखकर पूरी तरह से शरमा गई वह अपनी नजरों को आईने से हटा कर वापस आलमारी में स्थिर कर दी लेकिन उसकी रुक सकता अपने आप को नंगी देखने के लिए बढ़ती जा रही थी इसलिए वह अलमारी से थोड़ा दूर हटकर अपने प्रतिबिंब को आदमकद आईने में देखने लगी पहली बार वह पूरी तरह से अपने आप को नग्न अवस्था में आईने में देख रही थी और अपने आप को देख कर शर्म के साथ साथ गर्व का अनुभव भी कर रही थी।। सुगंधा अपने खूबसूरत नंगे बदन को आईने में देखकर विश्वास नहीं कर पा रही थी कि सामने आए में में उसका जो अक्स नजर आ रहा है उसी का है बरसों बीत गए थे उसने अपने नंगे बदन को नहीं देखी थी इसलिए आईने में अपने आप को एकदम नंगी देखकर आश्चर्य का अनुभव कर रही थी।

सुगंधा को यह पहली बार पता चल रहा था कि उसके बदन में जवानी का कसाव बरकरार था। सुगंधा बड़े गौर से अपने नशीला बदन को देख रही थी बदन का हर एक मोड़ हर एक कटाव धड़कनें बढ़ा रहा था सुगंधा की नजर आईने में अपनी दोनों गोलाई पर पड़ी तो वह एकदम से प्रसन्न हो गई वह आश्चर्य से अपनी दोनों चूचियों की गोलाई को देख रही थी जो कि अभी भी छोटे से खरबूजे की तरह मदहोश कर देने वाली थी ऐसा लग रहा था कि मानव जवानी की डाली में कोई पका हुआ फल लगा हो। सुगंधा आश्चर्य से कभी आईने में तो कभी अपने आप को देख रही थी।

अपनी इस उम्र में भी सूचियों में बरकरार जवानी के कसाब को देखकर सुगंधा को अपने आप पर बेहद गर्व अनुभव रहा था लेकिन इस बात का मलाल भी था कि इन चुचियों पर उसके पति ने कुछ खास मेहनत नहीं किया था अपनी दहकती हुई जवानी से उमड़ रही उत्तेजना की लपटों से विवश होकर ना चाहते हुए भी अनायास उसके दोनों हाथ चूचियों पर आ गए और सुगंधा अपने दोनों फड़ फड़ आते हुए कबूतरों पर अपनी हथेली रखकर उन्हें हलके से दबा दी और ऐसा करने की वजह से सुगंधा के मुख से हल्की सी सिसकारी निकल गई।

:) अपनी दोनों गोलाइयों को हथेली में लेकर दबाने में सुगंधाको ना जाने क्यों बेहद आनंद की अनुभूति होने लगी। साथ ही उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जा रही थी क्योंकि इन सबके घर में आना बार-बार उसकी आंखों के सामने उसके बेटे का खड़ा लंड नजर आ जा रहा था जिसकी वजह से उसके बदन में काफी कामोत्तेजना का असर नजर आ रहा था सुगंधा अपने हाथों से अपने दोनों चुचियों को दबाते हुए मस्त हुए जा रही थी यह सब में उसका बस बिल्कुल भी नहीं चल रहा था क्योंकि आज तक सुगमता ने इस तरह की हरकत बिल्कुल भी नहीं की थी अपनी कामोत्तेजना को दबाकर वह अपनी जिंदगी को नीरस बना कर जीते आ रही थी लेकिन आज अपनी उत्तेजना के वश होकर वह अपने ही हाथों से अपनी चूचियों को दबा रही थी।

कुछ देर तक ऐसे ही अपनी चूचियों से खेलने के बाद सुगंधा की नजर आईने में अपनी मांसल चिकनी जांघों पर पड़ी तो उसे अपनी सुहागरात याद आ गई जब उसके पति ने उसको बिस्तर पर लेट आते हुए उसके पेटीकोट को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ ले जाकर उसकी मोटी मोटी जांघों को पागलों की तरह चूमना शुरू किया था और उसे वह बात भी याद आने लगी जब उसके पति ने खुद अपने मुंह से यह बताया था कि उसे सुगंधा की मोटी मोटी नंगी दूधिया जांगे बहुत ही ज्यादा उत्तेजित कर देती हैं।

कुछ देर तक आईने के सामने ऐसे ही खड़े रहने के बाद वह घूम गई और नजरें पीछे की तरफ करके आईने में अपने गोलाकार भराव दार नितंबों को देखने लगी अपनी भारी-भरकम तरबूज की तरह गोल गोल गांड को देख कर सुगंधा अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव करने लगी और उसे इस बात का यकीन हो चला कि क्यों आते जाते राहों में हर मर्द की नजरें उसकी गांड पर टिकी रहती थी उसे समझते देर नहीं लगी कि उसके नितंबों में एक गजब का आकर्षण है जिससे इस समय वह खुद आकर्षित हुए जा रही थी।

सुगंधा से रहा नहीं गया और वह खुद अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी हथेलियों को अपनी गांड की दोनों फांकों पर रखकर हल्के हल्के दबाने लगी।

सससससहहहहह आहहहहहह सुगंधा के मुख से इस तरह की हल्की सी सिसकारी निकल गई । सुगंधा कुछ ज्यादा ही जोर से अपने नितंबों को दबाने लगी जिसकी वजह से उतना हिस्सा लाल टमाटर की तरह नजर आने लगा । अपनी गांड पर पड़े उसने लाल हिस्सों को देखकर सुगंधा खुद शर्मा गई वैसे भी सुगंधा इतनी गोरी चिट्टी थी कि हल्की सी चिकोटि काटने पर भी उतनी जगह लाल हो जाती थी।

कमरे की मादकता बढ़ते जा रही थी हालांकि सुगंधाको इस अवस्था में देखने वाला वहां कोई भी नहीं था फिर भी जिस अवस्था में सुगंधा खड़ी थी शायद इस तरह के हालात कल्पना से भी परे थे। सुगंधा के गीले बाल उसके नितंबों के थोड़ा सा ऊपर तक आते थे जिस पर से बाल गीले होने की वजह से पानी की बूंदे उसके नितंबों पर गिर रही थी जो कि सुगंधा की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ावा दे रहे थे।

सुगंधा कभी नजरे नीचे की तरफ झुका कर अपने नितंबों को देखती तो कभी आईने में अपने प्रतिबिंब को निहारती। सुगंधा की खुद को देखने की प्यास बढ़ती जा रही थी एक तरह से सुगंधा खुद से ही आकर्षित हुए जा रही थी। कुछ देर तक अपने नितंबो के साथ खेलने के बाद सुगंधा वापस घूम गई और फिर से प्रतिबिंब में अपने खूबसूरती को निहार ने लगी।

सुगंधा आईने में अपने आप को देखते हुए उसकी नजर टांगों के बीच की पतली दरार पड़ गई जिस के इर्द-गिर्द घुंघराले बालों का झुरमुट सा लगा हुआ था। उस पर नजर पड़ते ही सुगंधा को इस बात का एहसास हुआ कि काफी दिनों से उसने अपनी टांगों के बीच की उस जगह को साफ नहीं की थी। पहले वहां अपने उस स्थल को इस तरह से बालों से भरा हुआ नहीं रखती थी समय-समय पर वह उसकी सफाई किया करती थी क्योंकि उसके पति को बिना बाल वाली बुर बेहद खूबसूरत लगती थी।

लेकिन अब इस बात को बरसों बीत गए थे अब इसका कोई मतलब नहीं था यह बात सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी इसलिए अपनी टांगों के बीच के बालों की सफाई के प्रति वह बिल्कुल भी ध्यान नहीं देती थी क्योंकि जिस को दिखाना था वह अब बिल्कुल भी रस नहीं लेता था। सुगंधाको वहां पर भी अच्छी तरह से याद है थी जब उसके पति ने खुद अपने हाथों से ही क्रीम लगाकर उसकी बुर के बालों की सफाई की थी उस समय अपने पति की इस तरह की हरकत की वजह से सुगंधा काफी उत्तेजित हो गई थी और देखते ही देखते उसकी बुर कचोरी की तरह फूल गई जिसे देखकर उसका पति काफी उत्तेजना का अनुभव करते हुए पूरी तरह से काम उत्तेजित हो गया और उसी समय उसकी दोनो टांगे फैलाकर अपनो लंड को उसकी बुर मे पेल दिया। सुगंधा उस समय काफी चुदवासी हो गई थी जिसकी वजह से उसने अपने पति से खुलकर और जमकर मजा ली थी। वह पल याद आते ही अनायास ही उसके जेहन में एक बार फिर से रोहन का लंड घूमने लगा। और ना चाहते हुए भी अपने पति और अपने बेटे के लंड की लंबाई और मोटाई की तुलना करने लगी। जबकि वह ऐसा करना चाहती नहीं थी यह सब अपने आप ही हो रहा था अपने पति और बेटे के लंड की तुलना करते करते उसका हाथ कब उसकी बुर पर चला गया उसे पता ही नहीं चला।

बीते हुए पल को याद करके सुगंधा पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी और उत्तेजना बस वह अपनी हथेली में अपनी छोटी सी बुर को दबोच ली जिसकी वजह से उसके मुख से हल्की सी चीख निकल गई। बुर्के एक दिखाई दे बालों का काफी झुरमुट होने की वजह से उसकी हथेली में बाल भी भींच गए जिसकी वजह से उसे हल्का सा दर्द का एहसास हुआ। तो उस दर्द की वजह से उसकी तंद्रा भंग हुई सांसे उसकी गहरी चल रही थी अपने आप को आदम कद आईने में संपूर्ण रूप से नंगी देख कर और अपनी हरकत की वजह से वह शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी इस समय ऐसा लग रहा था कि जैसे वह नशे से बाहर आ गई हो और अपनी हालत पर गौर करते हुए तुरंत अलमारी गई और अपनी साड़ी पेटिकोट और दूसरे वस्त्र निकालकर तुरंत पहनने लगी और कुछ ही देर में सुगंधा अंगूर के बाग देखने जाने के लिए तैयार हो गई.

 
सुगंधा तैयार हो चुकी थी और रोहन के साथ अंगूर के बाग देखने के लिए निकल पड़ी। वैसे तो सुगंधा के साथ मुंशी जी भी आने वाले थे लेकिन उनके रिश्तेदार के वहां शादी में जाने की वजह से वह आ नहीं सके। और इसलिए सुगंधा रोहन को लेकर अंगूर के बाग देखने चल दी।

सुगंधा ट्रांसपेरेंट पीली रंग की साड़ी में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी ट्रांसपेरेंट साड़ी की वजह से उसका गोरा बदन पीले रंग की साड़ी में भी साफ-साफ नजर आ रहा था। सुगंधा की गहरी नाभि एक छोटी सी बुर के समान बेहद मनमोहक और कामुक लग रही थी जिस पर नजर पड़ते हैं रोहन के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी। सुगंधा आगे आगे चल रही थी और रोहन पीछे पीछे वैसे रोहन जानबूझकर अपनी मां के पीछे पीछे चल रहा था क्योंकि पीछे चलने में उसे आगे का नजारा देखने को जो मिल जा रहा था ऊंची नीची पगडंडियों पर चलते हुए सुगंधा के पेड़ इधर उधर हो रहे थे जिसकी वजह से उसके नितंबों में एक अजीब सा भारीपन और थिरकन नजर आ रहा था और वह फिर कल साड़ी के अंदर होने के बावजूद भी साफ साफ महसूस हो रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे सुगंधा के कमर के नीचे दो बड़े-बड़े गुब्बारे पानी से भरे हुए बांधे हो और चलने पर इधर-उधर हो रहे हैं। रोहन को अपनी मां की मटकती हुई गांड बहुत ही खूबसूरत लग रही थी जिसकी वजह से पजामे में सोया हुआ उसका लंड हरकत कर रहा था।

सुगंधा ऊंची नीची पगडंडी पर संभाल संभाल कर अपने पैर रखते हुए आगे बढ़ रही थी। आसपास के खेतों में काम कर रहे गांव के लोग चोर नजरों से सुगंधा की मदमस्त जवानी से भरपूर बदन का रस पी रहे थे। सुगंधा पहले इन सब बातों पर बिल्कुल भी गौर नहीं करती थी लेकिन अब उसे मर्दों की नजरों के सिधान का पता चलने लगा था उसे अच्छी तरह से समझ में आ रहा था कि मर्दों की नजर अधिकतर उसके कौन से अंगों पर ज्यादा घूमती रहती थी। उसे इस तरह से मर्दों का घूरना खराब भी लग रहा था और अच्छा भी लगने लगा था सुगंधा अपने अगल-बगल आने जाने वाले गांव वासियों की नजरों को तो भाप ले रही थी लेकिन उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसके पीछे चल रहा उसका ही बेटा उसके भराव दार बड़ी बड़ी गांड को घूर रहा है।

वैसे भी सुगंधा के जमीदारी में जितने भी गांव आते थे उन सारे गांव में हरियाली हरियाली छाई हुई थी चारों तरफ बड़े बड़े पेड़ अपनी ठंडक फैला रहे थे छोटे छोटे तालाब गांव की सुंदरता को और भी ज्यादा बढ़ा दे रहे थे । सुगंधा अपनी जमीदारी पर बहुत गर्व महसूस कर रही थी।

कुछ देर के बाद सुगंधा अपने अंगूर के बाग पर पहुंच गई।

रोहन और सुगंधा दोनों एक छोटी सी मिट्टी के ऊंचे ढेर पर खड़े होकर देख रहे थे जहां से दूर दूर तक सिर्फ अंगूर के बाद ही नजर आ रहे थे रोहन तो यह सब देखकर एकदम दंग रह गया अंगूर के बाद उसे बहुत ही अच्छे लग रहे थे जगह जगह पर ढेर सारे अंगूर के गुच्छे लगे हुए थे जिसे देखने में बहुत ही मनमोहक नजारा लग रहा था रोहन खुश होता हुआ अपनी मां से बोला।

देखो तो मम्मी कितने अच्छे लग रहे हैं ये अंगूर।

इसीलिए तो तुम्हें यहां लाई हूं मुझे मालूम था कि तुम अभी तक अंगूर के बगीचे को नहीं देखे हो।

हां तुम सच कह रही हो मम्मी मैंने अभी तक अंगूर के बगीचे को देखा ही नहीं था नाही अंगूर के पौधे को आज में पहली बार अंगूर के गुच्छो को यूं तने से लगा हुआ देख रहा हूं।

( सुगंधा रोहन के चेहरे पर उत्सुकता और खुशी देखकर अंदर ही अंदर प्रसन्ना हो रही थी उसे रोहन की मासूमियत बहुत ही सुख प्रदान कर रही थी वह कभी रोहन को तो कभी अंगूर के बाग को देख रही थी रोहन अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।)

मम्मी यह सारे के सारे अंगूर के बाग अपने है?

यह सारे के सारे नहीं बल्कि जहां तक तुम्हारी नजर जा रही है वह सारे के सारे अपने ही हैं इसीलिए कहती हूं कि थोड़ी बहुत अपनी जमीन जायदाद के बारे में मालूमात रखो लेकिन तुम हो कि अपने आवारा दोस्तों के साथ इधर-उधर में ही समय बिगाड़ रहे हो।

रोहन अपनी मां की बात सुनकर बोला कुछ नहीं बस आश्चर्य से जहां तक नजर जा रही थी वहां तक देखने की कोशिश कर रहा था और अपने फैली हुई जमीदारी से बहुत खुश हो रहा था मौसम भी काफी सुहावना था रह रह कर धूप हो जा रही थी तो कभी अच्छा हो जा रही थी इसलिए रोहन का मन लग रहा था सुगंधा अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर अपनी हथेली में हथेली रखकर उसे नितंबों के उभार पर आराम से छोड़ कर खड़ी थी और वह भी अपनी फैली हुई जमीदारी को गर्वित होते हुए देख रही थी रोहन की नजर अपनी मां पर पड़ी तो वह अपनी मां के मदमस्त उभार लिए हुए नितंबों पर आराम से रखी हुई हथेलियों को देख रहा था और कलाई में चमक रही उसकी घड़ी देखकर और भी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रहा था तभी रोहन की नजर ऊपर की तरफ आई तो अपनी मां के दोनों बड़े-बड़े संतरो को देखकर रोहन का मन उत्तेजना से भर गया।

क्योंकि सुगंधा के दोनों संतरो पर लगे हुए काले जामुन किसी चॉकलेट की तरह ब्लाउज के अंदर एकदम तनी हुई थी और बहुत ही ज्यादा नुकीली लग रही थी। जो कि ऐसा प्रतीत हो रहा था कि ब्लाउज फाड़कर बाहर आ जाएंगे। सुगंधा का इस तरह से खड़ा रहना भी बेहद कामुक असर कर रहा था कुछ देर तक यूं ही मिट्टी के ढेर पर खड़े रहने के बाद सुगंधा बोली।

आओ रोहन अंगूर के बाग के अंदर चलते हैं देखो तो सही कि करम सिंह किस तरह की रखवाली कर रहे हैं।

करम सिंह कौन मम्मी?

करम सिंह हमारे अंगूर के बगीचे की देखरेख करते हैं यह सब उन्हीं के जिम्मे है।

( इतना कहकर सुगंधा टेकरी पर से उतर कर अंगूर के बगीचे के अंदर जाने लगी चारों तरफ अंगूर के दानों के गुच्छे लटके हुए थे अंगूर के तने को संभाल सके इस तरह से जगह-जगह पर बड़े-बड़े बांस गड़े हुए थे जिस पर लिपटकर अंगूर की लताएं चारों तरफ बिछी पड़ी थी और बहुत ही सुंदर नजारा लग रहा था लेकिन अंदर की तरफ जाने के लिए अंगूर के बाग के नीचे सिर झुका कर जाना पड़ रहा था और सुगंधा थोड़ा सा झुक कर अंदर की तरफ जा रही थी और पीछे पीछे रोहन भी अंदर जा रहा था झुकने की वजह से सुगंधा की बड़ी बड़ी गांड कुछ ज्यादा ही हुई हुई नजर आ रही थी वह हम तो अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड देखकर औरों अभी इस तरह से झुककर कर चलने की वजह से नितंबों का जो घेराव था वह कुछ ज्यादा ही दमदार लगने लगा था जिसे देखकर रोहन का लंड सलामी भरने लगा रोहन के मुंह में पानी आने लगा उसके जी में आ रहा था कि इसी तरह से वह अपनी मां को पीछे से पकड़ ले और अपना पूरा लंड उसकी बुर में घुसा कर उसकी चुदाई कर दें लेकिन यह सिर्फ कपोल कल्पना ही थी क्योंकि वह जानता था कि ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है और थोड़ी ही देर में सुगंधा अंगूर के बगीचे के बीचोबीच आ गई जहां पर थोड़ी दूर तक खाली जगह थी और उसमें झुग्गी सी बनी हुई थी जिसमें करम सिंह रहता था और यहीं से अंगूर के बगीचों की देखरेख करता था।

सुगंधा वहीं खड़े होकर चारों तरफ नजर घुमाकर करम सिंह को देखने लगी लेकिन झोपड़ी के बाहर कहीं भी करम सिंग नजर नहीं आया तो वह उसे आवाज लगाने लगी। लेकिन उसे कोई भी जवाब नहीं मिला तो वह समझ गई की झोपड़ी के अंदर करम सिंह नहीं है।

पता नहीं कहां चला गया अंगूर के बगीचे को छोड़कर ऐसा कहते हुए सुगंधा पास में पड़ी खाट को गिरा दी और पेड़ की छांव में खाट पर बैठ गई और रोहन को भी बैठने के लिए बोली रोहन भी उसी खाट पर बैठ गया।

कितना अच्छा नजारा लग रहा है ना मम्मी।

हां बेटा नजारा तो बहुत ही अच्छा है लेकिन यह करम सिंह कहां मर गया देख नहीं रहे हो अंगूर अब एकदम से तैयार हो गए हैं अगर ऐसे ही छोड़ कर जाता रहा तो गांव के लोग सारे अंगूर तोड़ ले जायेंगे।

हो सकता है कहीं काम से गया हो।

हां तुम ठीक कह रहे हो रोहन हो सकता है कहीं काम से गया हो क्योंकि ऐसी लापरवाही वह बिल्कुल भी नहीं करता है चलो कुछ देर तक यहां बैठकर उसका इंतजार करते हैं।

( रोहन और सुगंधा वहीं बैठ कर इधर-उधर की बातें करने लगे सुगंधा मार्केट में अंगूर के खरीदी बिक्री के बारे में समझाने लगी क्योंकि अंगूर की बिक्री के लिए भी वह रोहन को ही भेजने वाली थी ताकि धीरे-धीरे उसे सब कुछ समझ में आने लगे कुछ समय बीतने के बाद सुगंधाको प्यास महसूस होने लगी तो वह रोहन से बोली। )

रोहन बेटा मुझे प्यास लगी है यही पास में अंगूर के बाग से लगके हेडपंप होगा तू वहां से पानी भरला।

ठीक है मम्मी मुझे भी प्यास लगी है। ( और इतना कहकर रोहन वहां से उठकर जहां पर सुगंधा बताई थी उसी और चल दिया अभी कुछ ही देर बीता ही था कि सुगंधाको खूब जोरो की पेशाब लग गई ।

सुगंधा को बहुत जोरों से पेशाब लगी हुई थी वह अपने आप पर बहुत ज्यादा संयम रखने की कोशिश कर रही थी लेकिन u उसके लिए इस समय मोचना बेहद आवश्यक हो चुका था। क्योंकि ज्यादा देर तक वह अपनी पेशाब को रोक नहीं पा रही थी पेट में दर्द सा महसूस होने लगा था। सुगंधा खाट पर से उठी और कुछ देर तक इधर-उधर चहल कदमी करते हुए अपने पेशाब को रोकने की कोशिश करने लगी लेकिन कोई भी इंसान ज्यादा देर तक पेशाब को रोक नहीं सकता था इसलिए सुगंधा को भी मुतना बेहद जरूरी था। इसलिए वह ना चाहते हुए भी अंगूर की डालियों के नीचे से होकर धीरे-धीरे पेशाब करने के लिए जाने लगी और एक जगह पर पहुंच कर वह इधर उधर नजरे दौरा कर देखने की कोशिश करने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन उस अंगूर के बागान में दूसरा कोई नजर नहीं आ रहा था सुगंधा जहां पर खड़ी थी वहां पर कुछ ज्यादा ही झाड़ियां थी और वहां पर किसी की नजर पड़ने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी और वहीं पास में ही एक छोटी सी झुग्गी बनी हुई थी।

दूसरी तरफ रोहन हेड पंप के पास पहुंचकर वही पर रखे बर्तन में पानी भरने लगा और खुद भी पानी से हाथ मुंह धो कर अपने आप को ठंडा करने की कोशिश करने लगा जब वह वहां से चलने को हुआ तभी उसकी आंखों के सामने से एक खरगोश का बच्चा भागता हुआ नजर आया और रोहन उसके पीछे पीछे जाने लगा रोहन उसे पकड़ना चाहता था उसके साथ खेलना चाहता था इसलिए जहां जहां खरगोश जा रहा था रोहन उसके पीछे पीछे चला जा रहा था।

दूसरी तरफ से सुगंधा अपने चारों तरफ नजर दौड़ा कर संपूर्ण रूप से निश्चिंत होने के बाद धीरे-धीरे अपनी सारी ऊपर की तरफ उठाने लगी और ऐसा करते हुए वह बार-बार अपने चारों तरफ देख ले रही थी लेकिन चारों तरफ सिर्फ सन्नाटा ही नजर आ रहा था लेकिन उसे इस बात का डर भी लगा था कि कहीं रोहन उसे ढूंढता हुआ यहां तक ना पहुंच जाए इसलिए वह इससे पहले पेशाब कर लेना चाहती थी वैसे भी पेशाब की तीव्रता उसके पेट में ऐठन दे रही थी सुगंधा धीरे-धीरे अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी यह नजारा बेहद ही कामुकता से भरा हुआ था लेकिन इस नजारे को देखने वाला वहां कोई नहीं था धीरे-धीरे सुगंधा पूरी तरह से अपनी कमर तक अपनी साड़ी को उठा दी थी उसकी नंगी चिकनी मोटी मोटी जांगे पीली धूप में स्वर्ण की तरह चमक रही थी बेहद खूबसूरत और मादकता से भरा हुआ यह नजारा देखने वाला वहां कोई नहीं था और वैसे भी सुगंधा यही चाहती थी कि कोई उसे इस अवस्था में ना देख ले सुगंधा साड़ी को अपनी कमर तक उठा कर एक हाथ से अपनी पीली रंग की पैंटी को नीचे की तरफ सरकाने लगी धीरे धीरे सुगंधा अपनी पैंटी को अपनी मोटी चिकनी जांघों तक नीचे कर दी और तुरंत नीचे बैठ गई मुतने के लिए।

दूसरी तरफ रोहन लड़कपन दिखाते हुए खरगोश के पीछे पीछे भागता चला जा रहा था और तभी खरगोश उसकी आंखों के सामने एक घनी झाड़ियों के अंदर चला गया रोहन उस खरगोश को पकड़ लेना चाहता था इसलिए दबे पांव वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा उसके सामने घनी झाड़ियां थी। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था उसे मालूम था कि इसी झाड़ियों के अंदर खरगोश दुबक कर बैठा हुआ है इसलिए वह घनी झाड़ियों के करीब पहुंचकर धीरे धीरे पत्तों को हटाने लगा लेकिन उसे खरगोश नजर नहीं आ रहा था वह अपनी चारों तरफ नजर दौड़ाने लगा लेकिन वहां खरगोश का नामोनिशान नहीं था वह निराश होने लगा वह समझ गया कि खरगोश भाग गया है और अब उसके हाथ में नहीं आने वाला लेकिन फिर भी अपने मन में चल रही इस उथल-पुथल को अंतिम रूप देते हुए वह अपने मन की तसल्ली के लिए अपना एक कदम आगे बढ़ाकर घनी झाड़ियों को अपने दोनों हाथों से हटाकर देखने की कोशिश करने लगा लेकिन फिर भी परिणाम शून्य ही आया वह उदास हो गया वह अपने दोनों हाथों को झाड़ियों पर से हटाने ही वाला था कि उसकी नजर थोड़ी दूर की घनी झाड़ियों के करीब गई और वहां का नजारा देखकर एकदम सन्न रह गया।

रोहन को एक बार फिर से अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसकी मां की बड़ी बड़ी नंगी गांड थी उसका दिमाग काम करना बंद है कर दिया क्योंकि मैं जा रहा है उसके सामने इतना गरमा गरम था कि उसकी सोचने समझने की शक्ति ही खत्म होने लगी थोड़ी देर में उसे इस बात का अहसास हो गया कि उसकी मां वहां पर बैठकर मुत रही थी।

रोहन बार-बार अपनी आंखों को मलता हुआ उस नजारे की हकीकत को समझने की कोशिश कर रहा था।

 
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