S
StoryPublisher
Guest
देखो मम्मी इसमें अब मेरी कोई गलती नहीं है क्योंकि वह आदमी भी तुम्हारे साथ वही करना चाहता था क्योंकि वह बार-बार बोल रहा था कि मैं तुम्हारे पीछे ना जाने कब से पड़ा हूं मैं तुम्हें चोदना चाहता हूं और आज तो मैं तुम्हारी चुदाई करके रहूंगा देखता हूं मुझे कौन रोकता है इसलिए जब मुझे पता चला कि तुम उस शैतान के साथ उस खंडहर में हो तो मुझे ऐसा ही लगा कि उसने तुम्हारी चुदाई कर दिया होगा,,,,( एक सांस में सब कुछ बोल गया लेकिन इतना बोलते समय इतना ज्यादा उत्तेजित हो गया था कि उसका लंड एकदम से टन्ना गया था और इस बार वह हिम्मत दिखाते हुए अपनी उंगली को गांड की गहराई में रगड़ ते हुए गांव के पूरे रंग के छोटे से छेद पर उंगली का दबाव बढ़ाते हुए धीरे-धीरे नीचे की तरफ ले गया और इस बार रोहन की उंगली का स्पर्श सुगंधा की रसीली चिकनी कचोरी जैसी फूली हुई बुर की गुलाबी पत्तियों पर हुई जिसकी वजह से सुगंधा अपने बेटे की उंगली की रगड़ अपनी रसमलाई जैसी बुर की गुलाबी पत्तियों पर महसूस करते ही वह काम उत्तेजना से एकदम से सिसक उठी और ना चाहते हुए भी उसके मुख से गर्म सिसकारी की आवाज कुछ ज्यादा ही जोर से फूट पड़ी,,,,
सससससससहहहहहह आहहहहहहहहहहहह,,,,,
क्या हुआ मम्मी,,, ? (अपनी मां के मुख से गर्म सिसकारी की आवाज सुनकर रोहन बोला,,,)
कुछ नहीं बेटा और हां जैसा तू सोच रहा था मेरे मन में भी वही ख्याल बार-बार उम्र रहे थे क्योंकि जिस तरह से वह बोल रहा था मुझे लग रहा था कि आज वह मुझे नहीं छोड़ेगा और वह मुझे उठाकर खंडार मिलेगा तो मुझे यकीन हो गया कि आज वह मेरी चुदाई कर के मानेगा,,,,
तुम भी एकदम डर गई थी ना मम्मी,,,,( रोहन अपनी बीच वाली उंगली को अपनी मां की गुलाबी कुर्ती गुलाबी पत्तियों पर रगड़ता हुआ बोला ऐसा करते हुए रोहन एकदम से मस्त हो गया था ऐसा लग रहा था जैसे उसकी मुंह मांगी मुराद पूरी हो गई हो भले ही वह अपनी मां की गुरु को ठीक से देख नहीं पा रहा था लेकिन उसे उंगली से महसूस कर पा रहा था उसके आकार को समझने की कोशिश कर रहा था ऐसा करने में उसकी उंगली पूरी तरह से अपनी मां की बुर से निकले हुए काम रस में डूबकर गीली हो चुकी थी,,,, और सुगंधा अपने बेटे की ईस हरकत की वजह से पूरी तरह से कसमसाने लगी उसके बदन में उत्तेजना की ऐठन होने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी उत्तेजना को कैसे दबाये वह तो चाह रही थी कि जिस तरह से उसका बेटा अपनी उंगलियों से उसकी रसीली फूली हुई कचोरी जैसी बुर से खेल रहा है,, काश वह अपने मोटे तगड़े लंड को हांथ मे पकड़ कर उसकी रसीली बुर से छेड़खानी करता तो इससे भी ज्यादा उसे आनंद की प्राप्ति होती,,,,, लेकिन फिर भी रोहन की हरकतों ने अपनी मां को कामोत्तेजना के परम शिखर पर पहुंचा दिया था जहां से उसके सोचने समझने की शक्ति खत्म हो चुकी थी सही गलत को परखने की क्षमता क्षीण होती जा रही थी,,, वासना के अधीन होकर वह आगे बढ़ती जा रही थी जहां से वापस लौटने नामुमकिन था,,, इसलिए तो वह एकदम मदहोश होते हुए बोली,,,,।
सच रोहन में भी एकदम से डर गई थी मुझे लगने लगा था कि अब वह अपनी मनमानी करके ही छोड़ेगा वह अपनी मनसा में कामयाब हो जाएगा क्योंकि इतनी तूफानी बारिश में वहां मेरी मदद करने वाला कोई भी नहीं था एक तु था तो तुझे भी उसने मार कर बेहोश कर दिया था,,,,,, ओर वह जिस तरह से मेरे साथ वहसीपन कर रहा था उसे देखते हुए मेरी कोई इज्जत बचा पाता ऐसी कोई आशा की किरण नजर नहीं आ रही थी,,,,
क्या कर रहा था मम्मी वह,,,, (अपनी मां की बात सुनते ही रोहन झट से बोला,,, रोहन की उत्सुकता देखकर सुगंधा मम्मी मन प्रसन्न होने लगी वह अपनी बात को थोड़ा नमक मिर्च लगाकर बताना चाहती थी ताकि उसकी बातों को सुनकर उसका बेटा पूरी तरह से चुदवासा हो जाए और उसे चोदने पर मजबूर हो जाए हालांकि इस दौरान लगातार रोहन अपनी मां की काम पिपासा को बढ़ाते हुए अपनी बीच वाली उंगली को हल्के हल्के अपनी मां की बुर के मुख्य द्वार की पतली पतली गुलाबी पत्तियों पर रगड़ रहा था जिससे सुगंधा की हालत देखते बन रही थी,,,, शर्म के मारे उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया था और वह किसी तरह से अपनी उखड़ती हुई सांसो को नियंत्रित किए हुए थी,,,,,,, सुगंधा अपने मन में सोचने लगी कि उसके बेटे ने अब जाकर सही सवाल पूछा है और यही मौका है उसे एकदम से चुदास से भर देने का इसलिए वह अपनी बातों में नमक मिर्च का घोल लगाते हुए बोली,,,,,।
यह पूछ बेटा कि वह क्या नहीं कर रहा था मुझे तो बताते शर्म आ रही है लेकिन मैंने तुझसे वादा किया कि अब तेरे और मेरे बीच दोस्ती जैसा रिश्ता इसलिए मैं तुझे सब बताती हूं लेकिन इस बात का ध्यान रखना कि यह सब बात बाहर जाकर किसी को मत बताना वरना खामखा मेरी और तेरी इज्जत खराब होगी,,,, (सुगंधा अपने बेटे को विश्वास में लेते हुए बोली,,,,,)
तो बिल्कुल भी चिंता मत करो मम्मी यह राज है हम दोनों के बीच ही रहेगा इतना कहते हुए रोहन अपनी मां की बुर की गुलाबी पत्तियों पर दबाव डालता हुआ बोला जिसकी वजह से उसकी उंगली हल्की सी अंदर की तरफ धस गई जिससे सुगंधा के तन बदन में आग लग गई वह उत्तेजना के मारे कसमस आने लगी और गर्म सिसकारी लेते हुए बोली,,,)
ससससहहहहहहह आहहहहहहहहह रोहन,,,,, ( अपनी मां की गरम सिसकारी सुनकर रोहन कुछ देर तक अपनी बीच वाली उंगली को अपनी मां की गुलाबी पतियों के पीछे ही उसी तरह से दबाए रहा जिसका असर दोनों के बीच एकदम बुरा हो रहा था दोनों की हालत खराब हो रही थी और दोनों के नाजुक अंग फुदक रहे थे,,,,,)
इतनी तेज बारिश पड़ रही थी कि देखते ही देखते मैं पूरी भीग गई थी और वह मुझे अपनी मजबूत बांहों में पकड़ कर मुझे उठा लिया मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि वह इतना ताकतवर था कि मेरे जैसी भारी भरकम शरीर वाली औरत को भी वह उठा कर अपने कंधे पर रख लिया था,,,,
क्या कह रही हो मम्मी वह तुम्हें उठा कर कंधे पर रख लिया मुझे तो विश्वास नहीं हो रहा है,,,,
विश्वास तो मुझे भी नहीं हो रहा था लेकिन जो मैं कह रही हूं एक दम सच है,,,,,
अच्छा फिर क्या हुआ?,,,
इसके बाद वह मुझे कंधे पर उठाकर खंडहर की तरफ जाने लगा मैं रोने जैसी हो गई मैं एकदम लाचार नजर आ रही थी मैं जोर-जोर से अपना हाथ उसकी पीठ पर मार रही थी लेकिन उसे जरा सा भी फर्क नहीं पड़ रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह सच का शैतान हो लेकिन इन सबके बावजूद भी वह अपनी हरकत को,,, जारी रखते हुए अपनी मजबूत हथेलियों से साड़ी के ऊपर से ही मेरी गांड को दबा रहा था,,,अपनी हथेशी को इतनी जोर जोर से मेरी गांड को साड़ी के ऊपर से दबा रहा था,, मानो कि जैसे वह खींचकर मांस बाहर निकाल लेगा,,,,, उसे तो बहुत मजा आ रहा था लेकिन मुझे बहुत दर्द हो रहा था वह बार-बार कंधे पर उठाए हुए ही मेरी साड़ी को बार-बार ऊपर की तरफ कर दे रहा था और मेरी नंगी चिकनी टांगों से खेल रहा था,,,,( सुगंधा जानबूझकर एक-एक शब्द को खोल कर अपने बेटे से बता रही थी क्योंकि वह उसके दिमाग में उत्तेजना भर देना चाह रही थी और ऐसा हो भी रहा था अपनी मां की मस्त बातों को सुनकर रोहन की हालत खस्ता खराब होते जा रही थी खास करके उसके नंद की हालत खराब थी ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी लंड की नसें फट जाएगी क्योंकि उसकी मां एकदम बेशर्म होकर एक एक शब्दों को गंदे तरीके से बता रही थी और रोहन भी मत बताओ अपनी मां की मदमस्त कार्ड से खेलता हुआ अपनी बीच वाली उंगली को जोर जोर से अपनी मां की बुर की गुलाबी पत्तियों को रगड़ रहा था।,,,, इस तरह की खुद ही बातें करते हुए और अपने बेटे की गरम हरकत की वजह से सुगंधा एकदम गरम हो चुकी थी,,, और लगातार उसकी बुर से नमकीन रस मदन रस बनकर बाहर निकल रहा था जिससे रोहन के उँगरिया एकदम गिली होती जा रही थी,,। रोहन गर्म आए हैं लेता हुआ बोला,,,,,)
फिर क्या हुआ मम्मी,,,,?
फिर क्या था वह मुझे खंडार के अंदर ले गया जहां पर बहुत अधूरा था लेकिन चारों तरफ से खुला होने की वजह से रह-रहकर अंदर बिजली की चमक की वजह से उजाला हो जा रहा था जिसमें वह मेरे नंगे बदन को देखने की कोशिश कर रहा था जो कि उस समय मेरा बदन नंगा नहीं था बल्कि वस्त्र से ढका हुआ था लेकिन तेज बारिश की वजह से मेरी साड़ी और बाकी कपड़े गीले हो चुके थे और वह मेरे बदन से एकदम चिपक से गए थे वह मुझसे बोला कि अगर तुम अपने मन से मुझे अपना तन शॉप दो तो तुम्हें कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन मैं उसकी बात कैसे मान सकती थी मैं अपनी इज्जत को कैसे दांव पर लगा सकती थी जिसे बरसों से संभाल कर रखी थी अपने खानदान की इज्जत को मैं इस तरह से एक शैतान के यहां तो लुटाना नहीं चाहती थी इससे अच्छा तो था कि मैं मर जाती लेकिन मेरे लाख इनकार करने के बावजूद भी वह दुष्ट इंसान मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा वह मुझे अपनी बाहों में भरकर मेरे होठों के रस को पीने की कोशिश करने लगा और मैं उसके इरादे को नाकाम करते हुए बार-बार उसके चेहरे को हटा दे रही थी लेकिन वह मुझसे ज्यादा ताकतवर था वह एक हाथ से मेरी सारी पकड़ कर इतनी जोर से खींचा कि मैं गोल गोल घूमते हुए गिर गई और मेरे बदन से साड़ी उतर गई मैं उसकी आंखों के सामने केवल ब्लाउज और पेटीकोट में ही थी अंधेरा होने के बावजूद भी बिजली की चमक में वह मुझे देख पा रहा था और मुझे उस हाल में देखकर एकदम खुश हो गया ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी आंखो में वासना चमक रही हो,,,
मुझे उससे मैं बहुत डर लग रहा था रोहन एक तो तूफानी बारिश और चारों तरफ सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा और ऐसे में मैं एक शैतान के हाथों अपनी इज्जत लूट आना नहीं चाहती थी और मैं प्रतिकार करती रही लेकिन उस ताकतवर इंसान ने मुझे बार-बार असफल बना दिया वह मेरे करीब आया और मुझे फिर से अपनी बाहों में भर कर अपने बदन से सटा लिया,,,,,,
( यह सब बताते हुए सुगंधा का बदन कामोत्तेजना के स्वर में अपने लगा उसे खुद यकीन नहीं हो रहा था कि वह यह सब बातें अपने मुंह से कैसे बोल दे रही है और अभी अपने बेटे के सामने जो कि इस समय वह भी अपनी मां के मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर एकदम मस्त हुआ जा रहा था वह जोर-जोर से अपनी मां की गांड को रगड़ रगड़ कर एकदम गोरी गांड को एकदम लाल टमाटर की तरह कर दिया था और जिस तरह से वह अपनी उंगली को बार बार अपनी मां की बुर के मुख्य द्वार पर दबा रहा था ऐसा लग रहा था कि किसी भी वक्त उसकी उंगली सुगंधा की गीली बुर के अंदर प्रवेश कर जाएगी जिससे सुगंधा एकदम मतवाली होती जा रही थी,,,, दोनों ऐसे बारिश के ठंडे मौसम में भी पसीने से तरबतर हो चुके थे सुगंधा अपनी बात को जारी रखते हुए बोली,,,,।)
वह जिस तरह से मुझे अपने बदन से सटा लिया था,,,, मुझे बहुत डर लग रहा था लेकिन जब मैंने अपनी टांगों के बीच कुछ चुभता हुआ महसूस की तो मैं एकदम डर से कांप गई मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं ऐसा लग रहा था कि जैसे सामने मेरी मौत खड़ी है और मैं एकदम निस्सहाय सी खड़ी होकर उसे अपने करीब आने का इंतजार कर रही थी,,,
टांगों के बीच,,,,,,, टांगों के बीच क्या चुभ रहा था मम्मी,,,,?
(रोहन आश्चर्य जताते हुए बोला जबकि वह इतना तो जानता था कि औरत को अपनी बाहों में लेने से मर्द का कौन सा अंग और उसकी दोनों टांगों के बीच झुकता है लेकिन वह अपनी मां के मुंह से सुनना चाहता था,,,, ।)
मेरी टांगों के बीच,,,,रोहन,,, मेरी टांगों के बीच उसका मोटा तना हुआ लंबा लंड चुभ रहा था जो कि अभी भी उसने पजामे में कैद करके रखा था सुगंधा बेशर्म बनते हुए बोली लेकिन इतना कहते हुए वह और भी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी और उसकी फूली हुई बुर और ज्यादा फुदकने लगी थी और रोहन तो अपनी मां के मुंह से इतना खुला शब्द सुनकर एकदम से टन्ना गया था उसे समझ में नहीं आ रहा था क्या करें और उसकी उंगली का दबाव सुगंधा की मखमली बुर पर बढ़ती जा रही थी और वह इस कदर अपनी उंगली पर दबाव बनाया कि वह हल्का सा सुगंधा की रसीली बुर मे घुस गई,,,,, अपनी बुर के अंदर अपने बेटे की उंगली को हल्का सा प्रवेश होता हुआ महसूस करके ही सुगंधा के तन बदन में आग लग गई और उसके मुख से गर्म सिसकारी फिर फूट पड़ी और अपनी मां के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज सुनकर रोहन बेझिझक बोला,,,,,,
फिर क्या हुआ मम्मी,,,,?
सससससससहहहहहह आहहहहहहहहहहहह,,,,,
क्या हुआ मम्मी,,, ? (अपनी मां के मुख से गर्म सिसकारी की आवाज सुनकर रोहन बोला,,,)
कुछ नहीं बेटा और हां जैसा तू सोच रहा था मेरे मन में भी वही ख्याल बार-बार उम्र रहे थे क्योंकि जिस तरह से वह बोल रहा था मुझे लग रहा था कि आज वह मुझे नहीं छोड़ेगा और वह मुझे उठाकर खंडार मिलेगा तो मुझे यकीन हो गया कि आज वह मेरी चुदाई कर के मानेगा,,,,
तुम भी एकदम डर गई थी ना मम्मी,,,,( रोहन अपनी बीच वाली उंगली को अपनी मां की गुलाबी कुर्ती गुलाबी पत्तियों पर रगड़ता हुआ बोला ऐसा करते हुए रोहन एकदम से मस्त हो गया था ऐसा लग रहा था जैसे उसकी मुंह मांगी मुराद पूरी हो गई हो भले ही वह अपनी मां की गुरु को ठीक से देख नहीं पा रहा था लेकिन उसे उंगली से महसूस कर पा रहा था उसके आकार को समझने की कोशिश कर रहा था ऐसा करने में उसकी उंगली पूरी तरह से अपनी मां की बुर से निकले हुए काम रस में डूबकर गीली हो चुकी थी,,,, और सुगंधा अपने बेटे की ईस हरकत की वजह से पूरी तरह से कसमसाने लगी उसके बदन में उत्तेजना की ऐठन होने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी उत्तेजना को कैसे दबाये वह तो चाह रही थी कि जिस तरह से उसका बेटा अपनी उंगलियों से उसकी रसीली फूली हुई कचोरी जैसी बुर से खेल रहा है,, काश वह अपने मोटे तगड़े लंड को हांथ मे पकड़ कर उसकी रसीली बुर से छेड़खानी करता तो इससे भी ज्यादा उसे आनंद की प्राप्ति होती,,,,, लेकिन फिर भी रोहन की हरकतों ने अपनी मां को कामोत्तेजना के परम शिखर पर पहुंचा दिया था जहां से उसके सोचने समझने की शक्ति खत्म हो चुकी थी सही गलत को परखने की क्षमता क्षीण होती जा रही थी,,, वासना के अधीन होकर वह आगे बढ़ती जा रही थी जहां से वापस लौटने नामुमकिन था,,, इसलिए तो वह एकदम मदहोश होते हुए बोली,,,,।
सच रोहन में भी एकदम से डर गई थी मुझे लगने लगा था कि अब वह अपनी मनमानी करके ही छोड़ेगा वह अपनी मनसा में कामयाब हो जाएगा क्योंकि इतनी तूफानी बारिश में वहां मेरी मदद करने वाला कोई भी नहीं था एक तु था तो तुझे भी उसने मार कर बेहोश कर दिया था,,,,,, ओर वह जिस तरह से मेरे साथ वहसीपन कर रहा था उसे देखते हुए मेरी कोई इज्जत बचा पाता ऐसी कोई आशा की किरण नजर नहीं आ रही थी,,,,
क्या कर रहा था मम्मी वह,,,, (अपनी मां की बात सुनते ही रोहन झट से बोला,,, रोहन की उत्सुकता देखकर सुगंधा मम्मी मन प्रसन्न होने लगी वह अपनी बात को थोड़ा नमक मिर्च लगाकर बताना चाहती थी ताकि उसकी बातों को सुनकर उसका बेटा पूरी तरह से चुदवासा हो जाए और उसे चोदने पर मजबूर हो जाए हालांकि इस दौरान लगातार रोहन अपनी मां की काम पिपासा को बढ़ाते हुए अपनी बीच वाली उंगली को हल्के हल्के अपनी मां की बुर के मुख्य द्वार की पतली पतली गुलाबी पत्तियों पर रगड़ रहा था जिससे सुगंधा की हालत देखते बन रही थी,,,, शर्म के मारे उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया था और वह किसी तरह से अपनी उखड़ती हुई सांसो को नियंत्रित किए हुए थी,,,,,,, सुगंधा अपने मन में सोचने लगी कि उसके बेटे ने अब जाकर सही सवाल पूछा है और यही मौका है उसे एकदम से चुदास से भर देने का इसलिए वह अपनी बातों में नमक मिर्च का घोल लगाते हुए बोली,,,,,।
यह पूछ बेटा कि वह क्या नहीं कर रहा था मुझे तो बताते शर्म आ रही है लेकिन मैंने तुझसे वादा किया कि अब तेरे और मेरे बीच दोस्ती जैसा रिश्ता इसलिए मैं तुझे सब बताती हूं लेकिन इस बात का ध्यान रखना कि यह सब बात बाहर जाकर किसी को मत बताना वरना खामखा मेरी और तेरी इज्जत खराब होगी,,,, (सुगंधा अपने बेटे को विश्वास में लेते हुए बोली,,,,,)
तो बिल्कुल भी चिंता मत करो मम्मी यह राज है हम दोनों के बीच ही रहेगा इतना कहते हुए रोहन अपनी मां की बुर की गुलाबी पत्तियों पर दबाव डालता हुआ बोला जिसकी वजह से उसकी उंगली हल्की सी अंदर की तरफ धस गई जिससे सुगंधा के तन बदन में आग लग गई वह उत्तेजना के मारे कसमस आने लगी और गर्म सिसकारी लेते हुए बोली,,,)
ससससहहहहहहह आहहहहहहहहह रोहन,,,,, ( अपनी मां की गरम सिसकारी सुनकर रोहन कुछ देर तक अपनी बीच वाली उंगली को अपनी मां की गुलाबी पतियों के पीछे ही उसी तरह से दबाए रहा जिसका असर दोनों के बीच एकदम बुरा हो रहा था दोनों की हालत खराब हो रही थी और दोनों के नाजुक अंग फुदक रहे थे,,,,,)
इतनी तेज बारिश पड़ रही थी कि देखते ही देखते मैं पूरी भीग गई थी और वह मुझे अपनी मजबूत बांहों में पकड़ कर मुझे उठा लिया मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि वह इतना ताकतवर था कि मेरे जैसी भारी भरकम शरीर वाली औरत को भी वह उठा कर अपने कंधे पर रख लिया था,,,,
क्या कह रही हो मम्मी वह तुम्हें उठा कर कंधे पर रख लिया मुझे तो विश्वास नहीं हो रहा है,,,,
विश्वास तो मुझे भी नहीं हो रहा था लेकिन जो मैं कह रही हूं एक दम सच है,,,,,
अच्छा फिर क्या हुआ?,,,
इसके बाद वह मुझे कंधे पर उठाकर खंडहर की तरफ जाने लगा मैं रोने जैसी हो गई मैं एकदम लाचार नजर आ रही थी मैं जोर-जोर से अपना हाथ उसकी पीठ पर मार रही थी लेकिन उसे जरा सा भी फर्क नहीं पड़ रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह सच का शैतान हो लेकिन इन सबके बावजूद भी वह अपनी हरकत को,,, जारी रखते हुए अपनी मजबूत हथेलियों से साड़ी के ऊपर से ही मेरी गांड को दबा रहा था,,,अपनी हथेशी को इतनी जोर जोर से मेरी गांड को साड़ी के ऊपर से दबा रहा था,, मानो कि जैसे वह खींचकर मांस बाहर निकाल लेगा,,,,, उसे तो बहुत मजा आ रहा था लेकिन मुझे बहुत दर्द हो रहा था वह बार-बार कंधे पर उठाए हुए ही मेरी साड़ी को बार-बार ऊपर की तरफ कर दे रहा था और मेरी नंगी चिकनी टांगों से खेल रहा था,,,,( सुगंधा जानबूझकर एक-एक शब्द को खोल कर अपने बेटे से बता रही थी क्योंकि वह उसके दिमाग में उत्तेजना भर देना चाह रही थी और ऐसा हो भी रहा था अपनी मां की मस्त बातों को सुनकर रोहन की हालत खस्ता खराब होते जा रही थी खास करके उसके नंद की हालत खराब थी ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी लंड की नसें फट जाएगी क्योंकि उसकी मां एकदम बेशर्म होकर एक एक शब्दों को गंदे तरीके से बता रही थी और रोहन भी मत बताओ अपनी मां की मदमस्त कार्ड से खेलता हुआ अपनी बीच वाली उंगली को जोर जोर से अपनी मां की बुर की गुलाबी पत्तियों को रगड़ रहा था।,,,, इस तरह की खुद ही बातें करते हुए और अपने बेटे की गरम हरकत की वजह से सुगंधा एकदम गरम हो चुकी थी,,, और लगातार उसकी बुर से नमकीन रस मदन रस बनकर बाहर निकल रहा था जिससे रोहन के उँगरिया एकदम गिली होती जा रही थी,,। रोहन गर्म आए हैं लेता हुआ बोला,,,,,)
फिर क्या हुआ मम्मी,,,,?
फिर क्या था वह मुझे खंडार के अंदर ले गया जहां पर बहुत अधूरा था लेकिन चारों तरफ से खुला होने की वजह से रह-रहकर अंदर बिजली की चमक की वजह से उजाला हो जा रहा था जिसमें वह मेरे नंगे बदन को देखने की कोशिश कर रहा था जो कि उस समय मेरा बदन नंगा नहीं था बल्कि वस्त्र से ढका हुआ था लेकिन तेज बारिश की वजह से मेरी साड़ी और बाकी कपड़े गीले हो चुके थे और वह मेरे बदन से एकदम चिपक से गए थे वह मुझसे बोला कि अगर तुम अपने मन से मुझे अपना तन शॉप दो तो तुम्हें कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन मैं उसकी बात कैसे मान सकती थी मैं अपनी इज्जत को कैसे दांव पर लगा सकती थी जिसे बरसों से संभाल कर रखी थी अपने खानदान की इज्जत को मैं इस तरह से एक शैतान के यहां तो लुटाना नहीं चाहती थी इससे अच्छा तो था कि मैं मर जाती लेकिन मेरे लाख इनकार करने के बावजूद भी वह दुष्ट इंसान मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा वह मुझे अपनी बाहों में भरकर मेरे होठों के रस को पीने की कोशिश करने लगा और मैं उसके इरादे को नाकाम करते हुए बार-बार उसके चेहरे को हटा दे रही थी लेकिन वह मुझसे ज्यादा ताकतवर था वह एक हाथ से मेरी सारी पकड़ कर इतनी जोर से खींचा कि मैं गोल गोल घूमते हुए गिर गई और मेरे बदन से साड़ी उतर गई मैं उसकी आंखों के सामने केवल ब्लाउज और पेटीकोट में ही थी अंधेरा होने के बावजूद भी बिजली की चमक में वह मुझे देख पा रहा था और मुझे उस हाल में देखकर एकदम खुश हो गया ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी आंखो में वासना चमक रही हो,,,
मुझे उससे मैं बहुत डर लग रहा था रोहन एक तो तूफानी बारिश और चारों तरफ सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा और ऐसे में मैं एक शैतान के हाथों अपनी इज्जत लूट आना नहीं चाहती थी और मैं प्रतिकार करती रही लेकिन उस ताकतवर इंसान ने मुझे बार-बार असफल बना दिया वह मेरे करीब आया और मुझे फिर से अपनी बाहों में भर कर अपने बदन से सटा लिया,,,,,,
( यह सब बताते हुए सुगंधा का बदन कामोत्तेजना के स्वर में अपने लगा उसे खुद यकीन नहीं हो रहा था कि वह यह सब बातें अपने मुंह से कैसे बोल दे रही है और अभी अपने बेटे के सामने जो कि इस समय वह भी अपनी मां के मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर एकदम मस्त हुआ जा रहा था वह जोर-जोर से अपनी मां की गांड को रगड़ रगड़ कर एकदम गोरी गांड को एकदम लाल टमाटर की तरह कर दिया था और जिस तरह से वह अपनी उंगली को बार बार अपनी मां की बुर के मुख्य द्वार पर दबा रहा था ऐसा लग रहा था कि किसी भी वक्त उसकी उंगली सुगंधा की गीली बुर के अंदर प्रवेश कर जाएगी जिससे सुगंधा एकदम मतवाली होती जा रही थी,,,, दोनों ऐसे बारिश के ठंडे मौसम में भी पसीने से तरबतर हो चुके थे सुगंधा अपनी बात को जारी रखते हुए बोली,,,,।)
वह जिस तरह से मुझे अपने बदन से सटा लिया था,,,, मुझे बहुत डर लग रहा था लेकिन जब मैंने अपनी टांगों के बीच कुछ चुभता हुआ महसूस की तो मैं एकदम डर से कांप गई मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं ऐसा लग रहा था कि जैसे सामने मेरी मौत खड़ी है और मैं एकदम निस्सहाय सी खड़ी होकर उसे अपने करीब आने का इंतजार कर रही थी,,,
टांगों के बीच,,,,,,, टांगों के बीच क्या चुभ रहा था मम्मी,,,,?
(रोहन आश्चर्य जताते हुए बोला जबकि वह इतना तो जानता था कि औरत को अपनी बाहों में लेने से मर्द का कौन सा अंग और उसकी दोनों टांगों के बीच झुकता है लेकिन वह अपनी मां के मुंह से सुनना चाहता था,,,, ।)
मेरी टांगों के बीच,,,,रोहन,,, मेरी टांगों के बीच उसका मोटा तना हुआ लंबा लंड चुभ रहा था जो कि अभी भी उसने पजामे में कैद करके रखा था सुगंधा बेशर्म बनते हुए बोली लेकिन इतना कहते हुए वह और भी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी और उसकी फूली हुई बुर और ज्यादा फुदकने लगी थी और रोहन तो अपनी मां के मुंह से इतना खुला शब्द सुनकर एकदम से टन्ना गया था उसे समझ में नहीं आ रहा था क्या करें और उसकी उंगली का दबाव सुगंधा की मखमली बुर पर बढ़ती जा रही थी और वह इस कदर अपनी उंगली पर दबाव बनाया कि वह हल्का सा सुगंधा की रसीली बुर मे घुस गई,,,,, अपनी बुर के अंदर अपने बेटे की उंगली को हल्का सा प्रवेश होता हुआ महसूस करके ही सुगंधा के तन बदन में आग लग गई और उसके मुख से गर्म सिसकारी फिर फूट पड़ी और अपनी मां के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज सुनकर रोहन बेझिझक बोला,,,,,,
फिर क्या हुआ मम्मी,,,,?