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Incest बहना का ख्याल मैं रखूँगा

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शालिनी को भी मेरी साँसों की महक आने लगी थी ... मैंने शालिनी की कमर पे हाथ रखा और और थोड़ा झुका... मेरा चेहरा शालिनी की गोल मटोल बड़ी सी चुचियों के करीब था.... मैं उन्हें देखने लगा... शालिनी को मेरी साँस अपनी चूचियों के बीच क्लीवेज पे महसूस हुई....उसने देखा की मैं बड़ी बड़ी आखे फाड़ के उसकी चुचियों को घूर रहा हूं...

तो शालिनी ने अपने हाथ मेरेे कंधे पे रखे और इंतजार करने लगी की मैं उसे उठाऊंगा...

मैं शालिनी की चुचियों को इतने करीब से देख रहा था... और मेरा लन्ड बिना अंडरवियर के फिर से बरमूडे में खड़ा हो गया था ।

....फिर मैं अपने हाथ धीरे से नीचे ले गया... मैं जानबुझ के अपनी हथेलियां शालिनी की गांड को सहलाते हुए नीचे ले गया...क्यू की पता नहीं, ऐसा मौका दुबारा कब मिले या, ना मिले... शालिनी को मेरे हाथों का स्पर्ष अपनी गांड पे होते ही उसकी आँखे बंद सी हुई...उसकी आह निकल गयी...लेकिन उसने वो बाहर अपनी जुबान पर नहीं आने दी....शायद वो भी गर्म होने लगी थी और उसकी भी चूत गीली होने लगी हो ......उसका जिस्म गरम होने लगा...

ये सब सिर्फ कुछ सेकण्ड में हुआ लेकिन बहुत गहरा असर छोड़ रहा था मैंने अपने हाथ उसकी सुडौल गांड़ के नीचे ले जाकर एक हाथ से दूसरे हाथ को पकड़ा और शालिनी को उठाने लगा....*

शालिनी ने मुझे गले से पकड़ रखा था...एक झटके के साथ शालिनी के दोनों पैर हवा में थे...झटके के कारण शालिनी का बैलेंस थोडा बिगड़ा और उसका भार मुझ पर पड़ने लगा...उसकी चुचियां अब मेरे चहरे पे दब सी गयी..

और मेरी नाक में उसकी चूचियों की महक भर गई ...

शालिनी ने तुरंत अपने आप को थोड़ा पीछे किया...लेकिन तब तक मुझको उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों के गुदाजपन का अहसास हो चूका था...कुछ पल के लिए ही सही लेकिन मैंने अपने होंठ शालिनी की चुचियों पे रख दिए थे....

आज ये पहली बार हुआ था कि मेरे होंठों ने उसकी बड़ी बड़ी नरम चुचियों को अपने होंठों से छुआ भले ही वो टी-शर्ट के ऊपर से ही था । उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को अपने चेहरे पे पा के मेरे होश उड़ गए थे.... मेरा लगभग सात इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा लौड़ा खड़ा हो गया था जो अब सीधा 90 डिग्री के एंगल में खड़ा हो चुका था और शालिनी की नंगी जांघ पे रगड़ खा रहा था....

शालिनी को जब मेरे कड़क लंड का अहसास हुआ तो उसकी चूत और भी गीली होने लगी होगी ...उसके कान एकदम गरम हो गए...उसका चेहरा और गुलाबी रंग का होता जा रहा था......

शायद शालिनी को अब ये सब बर्दास्त के बाहर हो रहा था....

शालिनी- ओह ... भाई प्लीज़ नीचे उतारिये...मैं गिर जाउंगी....।

मैं तो उसे ऐसे ही पकड़े रहना चाहता था पर अब ये करना ठीक नहीं था...... मैं धीरे धीरे शालिनी को नीचे उतारने लगा....उतारते वक़्त मेरे हाथ फिरसे शालिनी की मांसल गुदाज , गद्दे जैसी गांड़ पर आ रुके.. शालिनी को मेरे खड़े लंड का अहसास भी हो रहा था....उसने झट से अपने आप को मुझसे दूर किया.. मेरी सांस भारी हो रही थी और थोड़ा सा हांफ भी रहा था... शालिनी ने जब ये देखा तो...

शालिनी- आप ठीक तो हैं ना ??...रुकिए मैं पानी लेके आती हुं..

शालिनी मुझसे नज़रें नहीं मिला पा रही थी और ना ही मैं ...इसलिए वो पानी लेने के बहाने से किचन में भाग गयी....

मैं बेड पर बैठ गया और अपना लंड अड्जस्ट करने लगा... शालिनी जब किचन से पानी लेकर वापस आ रही थी तब उसनेे मुझे अपना लंड दबाते हुए देखा तो वो शरम से पानी पानी हो गयी...उसने मुझको पानी दिया... शालिनी मेरे सामने खड़ी थी और मेरे खड़े लन्ड को घूर रही थी ,,, ।

मैं :- (पानी पीते हुए.......) फिट हूं मैं भी ,,,, अभी भी तुम्हें मैं... बचपन की ही तरह उठा लेता हूं ।

शालिनी :- अच्छा ,,,, भाई जी आप तो सुपर हिट हो सुपर फिट बाड़ी भी है आपकी ,,,, चलिए जी, अब सोते हैं...11.30 बज गए है....

मैं :- रुको तो बेबी ...अभी तो तुम्हें बाहों में उठाया है ...अब जरा गोद में भी तो बिठा लूं ,,,,

और मैंने उसे अपनी ओर खींच लिया ।।
 
शालिनी को शायद यकीं नहीं हो रहा था की मैंने जानबूझ कर ऐसा किया... शालिनी ही क्या...मुझको खुद पे यकीं नहीं हो रहा था कि की मैंने ये कहते हुए शालिनी को अपनी गोद में बिठा लिया है... शालिनी जब बैठी तो उसकी पीठ मेरी तरफ थी...मेरे हाथ उसकी कमर के इर्द गिर्द थे.... मुझको जैसे ही उसकी मांसल गांड का स्पर्श अपने लंड पे हुआ मेरा लंड हरकत करने लगा...

शालिनी को भी मेरे खड़े लंड का स्पर्श अपनी गांड पे साफ़ साफ़ महसूस होने लगा.... शालिनी अब थोड़ा सा साइड से टर्न हुई...जिसकी वजह से उसकी चुचियां फिर से मेरे चेहरे के पास आ गयी...वो भलीभांति जानती थी की इस समय मैं बस उसके जिस्म को छूने के बहाने ढूंढ रहा हूं ।

पर मैं ऐसे खुलकर ऐसा कुछ करूंगा, इसपे शालिनी को यकीं नहीं हो रहा होगा ।

शालिनी ने हल्के से उठने की कोशिश की तो मैंने अपना एक हाथ उसकी जांघ पे रख दिया...जब शालिनी उठने की कोशिश कर रही थी तब उसकी नरम गांड दो तीन बार मेरे हलब्बी टाइट लंड से रगड़ गयी... जिससे मेरा लंड और भी जोश में आ गया.... शायद शालिनी को ये सब अच्छा तो लग ही रहा था पर बहुत अजीब फील हो रहा हो मेरी तरह .... कुछ देर बाद

हम दोनों के लिए ही ये सब कुछ पहली बार और पहला एहसास ही था ।

शालिनी :- प्लीज़ अब छोड़िये मुझे...ये क्या कर रहे हो आप ,, आ सी ई ई ??

मैंने उसकी जांघ पे हाथ का दबाव बनाया ...

मैं :- कुछ नहीं बेबी...बचपन में तुम्हे मैं ऐसे ही गोद में लिया करता था । और आगे अपना हाथ उसके पेट पर रख दिया,,*

शालिनी मुझको ऐसे इमोशनल होते हुए देख शांत हो गयी.... शालिनी ने घूमे हुए अपना एक हाथ मेरे गले में डाला और दूसरे हाथ को मेरे चेहरे पे रखा....

हम दोनों ने एक दूसरे को देखा और शालिनी उस पल में बह गयी...और उसी हालात में उसने मुझे गले लगा लिया... शालिनी मेरी गोद में बैठी हुई थी जिसके वजह से मेरा चेहरा सीधा चुचियों के ऊपरी हिस्से पे दब गया... शालिनी ने क्या किया इसका अहसास उसे तब हुआ जब उसे अपनी गांड पे फिरसे मेरा लंड खड़ा होते हुए महसूस हुआ...

मैंने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया और शालिनी को कस के गले लगा लिया...और थोड़ा सा शालिनी को पकड़ के खुद भी अड्जस्ट हो गया... मैंने अपने गाल शालिनी की चुचियों पे एक दो बार दबा लिए....और नीचे से अपना लंड उचका के शालिनी की गांड़ पर रगड़ रहा था ।।

शालिनी की हालत फिर से खराब होने लगी....उसकी पहले से ही गीली चूत और भी गीली होने लगी होगी ....

मेरे गरम लंड का स्पर्श उसे अपनी बुर के आस पास हो रहा था...अगर वो निक्कर और पैंटी ना होती...लंड सीधा उसकी बुर पे रगड़ रहा होता....उसकी धड़कन बढ़ने लगी थी....उसकी सांसे तेज हो रही थी....जिसकी वजह से उसकी चुचियां जिसपे मेरा चेहरा था...वो तेजी से ऊपर नीचे होने लगी...

शालिनी की टी-शर्ट गले के पास कुछ ज्यादा ही खुल गई थी,, शायद जब मैंने उसे उठाया था तब खींचा तानी में उसके गोरे गोरे स्तन भी उपर से खुल गए थे । मैंने अपना गाल उसकी चुचिया जो लगभग अधनंगी हो चुकी थी उसको सहला रहा था। वो अब मुझसे दूर होना चाहती थी पर...उसे वो सब अच्छा लगने लगा था...उसे बहुत मजा आ रहा था... तभी तो वो मुझे रोक नहीं रही थी ।।

मैं धीरे धीरे उसकी ऊपर नीचे होती चुचियों पे अपने गाल दबा रहा था...और नीचे से थोड़ा अपनी गांड़ को उठाया और लंड को शालिनी की गांड पे रगड़ा... शालिनी को एक झटका सा लगा और वो हल्का सा उठ खड़ी हुई ।

मुझसे अपने को हल्का सा अलग किया... मुझको लगा की मैंने बेवजह ही ऐसा क्यू किया .... मेरे पास और मजे करने का मौका था लेकिन मैं भी क्या करता...जब लंड खड़ा हो जाता है तो उसे रगड़ना मज़बूरी हो जाती है... मैंने और शालिनी ने एक दूसरे को देखा...

शालिनी :- अब मुझे उठने दीजिये. उसकी आवाज में गज़ब की खनक थी .. और प्यास थी ... ।।

मेरे पास अब कोई बहाना नहीं था उसे रोकने का.. शालिनी बैठे बैठे ही दूसरी साइड सरक गयी...उसने देखा कि मेरा लंड पुरी तरह से तना हुआ है.. बरमूडे में अलग से जाहिर.... मुझको पता था शालिनी जैसे ही उठेगी उसे वो दिखाई देने लगेगा... मैं तैयारी में था... मैंने झट से बेड पे रखा हुआ तकिया उठाया और अपने लंड को कवर कर लिया।।

हम दोनों बहुत गरम हो चुके थे। और चुप थे। क्या बात करें किसी को समझ नहीं आ रहा था...

शालिनी - भैय्या अब सोते हैं... ..

शालिनी ने ही उस ख़ामोशी को तोड़ा ....

************
 
कल रात शालिनी के सोने के बाद मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसे चिपका कर सो गया ,,,

अगले दिन सुबह शालिनी नार्मल बिहेव कर रही थी...ये देख कर मैने ये सोचा की या तो शालिनी को मेरे उसकी चूचियों को पीकर उसकी बुर चोदने के इरादे का पता नहीं चल रहा है या पता है फिर भी वो अनजान बन के मजे ले रही है.... ।।

मैंने सुबह जब शांति से विचार किया तब मैंने बहुत सोचा और ये तय किया की अब मैं कम से कम दिन में तो शालिनी से थोड़ा दूरी बना के रहूंगा,,, क्यू की ये सब बहुत ज्यादा हो रहा था। इस सब के चक्कर में कहीं शालिनी की पढ़ाई ना डिस्टर्ब हो जाए ,,,

लेकिन जब एक बार ऐसा कुछ होता है .. तो होते रहने का दिल करता है...... एक बार कोई मर्द किसी औरत को छू लेता है तो दोनों ही एक दूसरे से ज्यादा देर दूर नहीं रह सकते और शालिनी पर कयामत के जैसे जवानी आयी थी,, उसका रुक पाना नामुमकिन हो गया था...कलरात जो भी हुआ था उससे मेरी हिम्मत और भी बढ़ गयी थी।

आज शालिनी पहले दिन कालेज में क्लास अटेंड करने के लिए जाने के लिए तैयार हो रही थी, मुझे कई बार शालिनी के शरीर को हल्के फुल्के अंदाज में टच करने का सुबह सवेरे मौका लगा । आज शालिनी ने ब्लैक कलर की टी-शर्ट के साथ ब्ल्यू शार्ट जींस पहनी थी,, उसके अंदर पर्पल कलर की ब्रा पहनी थी जिसकी एक पट्टी देख कर मैंने जाना,, गौर से देखने पर ब्रा अपना पूरा शेप दिखा रही थी,, शालिनी की मस्त चूचियां और गजब ढा रही थी ।

ये अजब खेल हो रहा था हम दोनों के बीच,,, दोनों को पता है कि अब हम दोनों सिर्फ भाई बहन नहीं रहे,,,, मगर ये भी नहीं पता कि क्या हो गये हैं , ,,, हो रहे हैं ,,,.... प्रेमी-प्रेमिका..... पिछले दिनों से जैसे हो रहा था और अब ये रुकने वाला भी नहीं था,,,

लेकिन मैं भी ,,,,, जो खुद शालिनी को अपनी तरफ से उकसा रहा था जानबूझकर ,,, मेरे में अभी भी इतनी हिम्मत नहीं हुई थी कि मैं शालिनी को सीधे सीधे छू लूं बिना किसी बहाने के ,,

जो भी भाई या बहनें इस तरह के रिलेशनशिप में रहे हैं या रहना चाहते हैं, उनको पता है कि ये इतना आसान नहीं है सगी बहन को एक झटके में चोद देना ,,, पकड़ कर चूंची दबा देना ,,, किस कर लेना ,,,,

मगर शायद अब आग तो दोनों तरफ लगी थी किसी को कम और किसी को ज्यादा ......

पहल कौन करेगा,,, लाज शर्म का ये आखिरी पड़ाव कब और कैसे पार होगा ,,, लेकिन जैसा भी चल रहा है,, बहुत मजेदार है ।।

,,, कहां मैं चूचियों की एक झलक पाने को तरसता रहता था । और अब मेरे हाथों से इतनी हसीन चूचियां मसली जा रही हैं वो भी इतनी गोरी स्पंची, और परफेक्ट साइज ३४बी की चुचियों को अपने गिरफ्त में लेने के लिए बस एक छोटे-से बहाने की जरूरत है बस..... चूचियां हाथ में .... कुछ दिन बाद शायद बहाने की जरूरत भी ना रहे और ये रसीले उरोज हमेशा हमेशा के लिए मेरे हो जाएं ।

शालिनी ने नाश्ता वगैरह का काम बहुत स्पीड में निपटाया और मेरे साथ ही अपने बैग को लेकर बाईक से कालेज के लिए निकल पड़ी । बाईक पर हम दोनों के बीच हवा जाने की भी जगह नहीं थी इतना चिपक कर बैठ गई थी शालिनी बात करने के बहाने से , खैर,,, मुझे तो दिन भर की एनर्जी मिल गई थी उसकी चूचियों की रगड़ से अपनी पीठ पर ,,,

कालेज पहुंच कर गेट के पास मैंने शालिनी को बाईक से उतारा और बेस्ट ऑफ लक और गुड डे बोल कर मैं भी अपने काम पर निकल पड़ा ।
 
शालिनी को जाते हुए पीछे से देखने से ही मेरा लन्ड फिर से खड़ा हो गया और मैं बाईक लेकर वहां से निकल लिया । दिन में मैंने कई बार शालिनी से बात की और काफी सारे जोक, हंसी-मजाक वाले और उन्हीं में कुछ डबल मीनिंग चुटकुले मैंने उसके मोबाइल पर भेजे ।

तीन बजे वो आटो से घर को आ गई,, ।।

और चार बजे के आसपास उसके रिप्लाई मैसेज आने शुरु हुए ,,, मतलब शालिनी ने सारे मैसेज पढ़ लिए हैं ,,, अब मैंने उसे काफी सारे फनी वीडियो भी भेज दिये , उसने उनको देखकर रिप्लाई किया और हल्की फुल्की चैटिंग करने के बाद मैंने उसे वीडियो काल कर दी,,,,

मुझे उसको देखें बिना अब चैन नहीं आ रहा था ।

मैं- हाय बेबी, क्या कर रही हो ?

शालिनी- अभी तो लेटी हुई हूं भैय्या और टीवी देख कर आपके मैसेज पढ़ रही थी ।।

शालिनी ने मोबाइल ऐसे पकड़ रखा था कि सिर्फ उसका चेहरा ही दिखाई दे रहा था,,, हल्का सा मोबाइल हिलने पर मुझे उसके नंगे कंधे पर ब्रा की काली स्ट्रिप दिखाई पड़ गई , मतलब शालिनी ने उपर सिर्फ ब्रा पहन रखी है और नीचे भी क्या सिर्फ पैंटी ,,,, आह,,,*

मेरे लौड़े में सनसनाहट सी होने लगी और मैं उसे ब्लैक कलर की ब्रा में देखने को उत्सुक हो गया,,, कोई बहाना बनाकर मोबाइल फुल लेंथ पर आ जाता तो मजा आ जाता । बात करते करते मेरे दिमाग में स्ट्राइक किया कि सुबह तो शालिनी ने पर्पल कलर की ब्रा पहनी थी और अब यह ब्लैक कलर की ब्रा में लेटी है .....

ओहो... तो मतलब उसने मेरे हस्तमैथुन की गवाही देती मेरे सूखे बीज से महकी हुई अपनी काली ब्रा पहनी है । और और उसने इसे धोया भी नहीं था कई दिनों से ।

मतलब मतलब मेरे वीर्य से सनी हुई ब्रा पहनकर शालिनी लेटी हुई है तो क्या शालिनी को मेरे हस्तमैथुन करने और वीर्य उसकी ब्रा में लगाने के बारे में पता है और वो उसे पसंद भी कर रही है??

मैं अब जल्द ही अपना काम निपटाते हुए घर पहुंचना चाहता था ।।

मगर मैंने शालिनी से झूठ बोला कि मैं देर से घर आऊंगा और

मैं - कुछ लाना हो तो बता दो ?

शालिनी- नहीं भैया बस आप आ जाओ लाना कुछ नहीं है ,,,,अच्छा एक चॉकलेट लेते आना । अब मैं सोने जा रही हूं जब आप आएंगे तभी जागूंगी वैसे कितने बजे तक आएंगे ।।

मैं - सात तो बज ही जाएंगे ।

अच्छा जरा मोबाइल मेरी टेबल की तरफ करो मुझे उस पर अपना कुछ पेपर देखना है और शालिनी ने उठ कर टेबल की तरफ मोबाइल करने के चक्कर में मुझे अपनी रसीली चूचियों को काली ब्रा में एक झलक दिखला ही दिया और पैंटी उसने शायद प्रिंट वाली पहनी हुई थी हल्की झलक पाकर ही मैं निहाल हो गया । मैं शालिनी की चूचियों को पहले भी ब्रा में कैद हुए देख चुका था और तब उसने खुद दिखाया था ,,, इस तरह वीडियो काल में उसकी ब्रा में कैद रसीली चूचियों ने मेरी हालत खस्ता कर दी ...
 
मैं पांच बजे ही ये सोचकर घर के लिए निकला कि शालिनी अभी तक सो रही होगी और मुझे दीदार हो जायेगा उसके मखमली बदन का ।

मैं अपने ही घर में दबे पांव लाक खोलकर अंदर आया और बहुत धीरे से गेट बंद कर दिया,,,,

सामने कमरे में कूलर फुल स्पीड में चल रहा था और दरवाजा खुला था मतलब शालिनी सो रही है । और मैं दबे पांव अंदर कमरे में आ कर धीरे से कुर्सी पर बैठ गया और शालिनी के सफेद रोशनी में चमक रहे गोरे बदन पर काली ब्रा और पैंटी,,,

उसकी पर्पल कलर वाली ब्रा साइड में पड़ी हुई थी बेड पर शायद उसने उसे उतार कर ब्लैक ब्रा पहनी थी और फिर वैसे ही सो गई ।

उसकी चूचियां पहाड़ की चोटी की तरह उपर उठती बैठती हर सांस के साथ ,,,, नीचे अंदर की ओर धंसा हुआ सपाट पेट,,, उसके नीचे छोटी सी पैंटी से सिर्फ उसका योनिछेत्र ही ढका था पीछे के हिप्स पर तो आधी से अधिक गांड़ का हिस्सा खुला ही था । मैंने आज जीभर कर शालिनी के इस यौवन को निहारा,, उसके कुछ फोटो भी ले लिया मौका देख कर ,,,,

मैं शालिनी के एक दम करीब होकर उसके बदन की खुशबू लेने लगा, तो मैंने देखा कि मेरे सूखे हुए वीर्य के धब्बे साफ साफ दिखाई दे रहे थे उसकी ब्रा के कप्स में ।

शालिनी का एक हाथ सीधा और दूसरा उसकी पैंटी के ऊपर था .... शायद ये भी सहला रही हो अपनी बुर .... और सहलाते सहलाते हुए सो गई होगी ,,, ।

रसगुल्ला सामने है मगर खा नहीं सकते वाली हालत हो रही थी,, लेकिन ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा शायद इस रसगुल्ले को चूस चूस कर खाने के लिए इसी उद्देश्य और उम्मीद से मैंने उसे हाथ नहीं लगाया ।

इच्छा तो कभी नहीं भरती उसके बदन को देख कर लेकिन काफी समय बाद मैं बाहर बरामदे में आकर खड़ा हुआ तो देखा कि वो लाल ब्रा भी मेरे वीर्य के धब्बों को अलग दिखा रही थी,,, शालिनी ने उसे भी धोया नहीं था और बाकी सारे कपड़े वो हर रोज धुल लेती थी ।। शालिनी भी कुछ कुछ हरकतें करने लगी है ,,

मैंने कुछ संयमित होकर बरामदे से ही आवाज लगाई ,,

शालिनी,, बेबी ,, और बोलते हुए कमरे में आ गया तभी शालिनी की आंखें खुली और सामने मुझे देख कर थोड़ा सा चौंक कर उठ कर बैठ गई ।

मगर पिछली बार की तरह हड़बड़ाई नहीं और ना ही अपने बदन को मुझसे तुरंत छुपाने की कोशिश भी नहीं की ,, बल्कि मुझ पर बिजली गिराते हुए उसने अपने दोनों हाथों से अपनी आंखों को भींचा और उसकी चूंचियां और उछल कर ब्रा से बाहर निकलने को हुई ,, और आंखों से हाथ हटाते हुए बोली ....

शालिनी- भाई,,,, आप .... रात ज्यादा हो गई क्या ?

मैं - नहीं मैं ही थोड़ा जल्दी आ गया ,,,

और शालिनी कुछ और सोच पाती उससे पहले मैंने उसकी फेवरेट चाकलेट को उसके हाथ में पकड़ा दिया और उसनेे पकड़ते हुए थैंक्स ब्रो बोला ।

मैं उसे ज्यादा से ज्यादा देर तक ब्रा पैंटी में ही रखना चाहता था । शालिनी ने भी कोई जल्दबाजी नहीं की और मैंने चाकलेट का रैपर निकाल कर सीधा उसके होंठों के पास लगा दिया और वो खाने लगी,,, दो बाइट खाने के बाद शालिनी ने मुझे भी चाकलेट खिलाई और आराम से बेड से उतर कर पीछे कमरे में कपड़े पहनने के लिए चली गई ,,,

पीछे उसकी पैंटी उसकी गान्ड की दरार में घुस गई थी और उसके लहराते हुए कदम,,, लेकिन वो बिंदास होकर पेश आ रही थी ,,,,

ये एक तरह से उसके कान्फीडेन्स को भी दिखाता था ,,,

मैंने भी चेंज कर लिया और शालिनी इस बार टी-शर्ट के साथ कैप्री पहनकर किचन में चाय बनाने लगी ।।

हम दोनों में बिना बातों के ही बातें हो रहीं थीं,,, आंखों ही आंखों में.......

शालिनी ने रात का खाना बनाया और नहाने के बाद अपनी रात वाले रेगुलर कपड़े मतलब समीज और निक्कर में आ गई । काश इसने कल रात ये कपड़े पहने होते तो शायद मैं और भी मज़ा ले पाता।।

लेकिन यहां कौन सा शालिनी भागी जा रही थी,,, जो मज़े में कल कमी रह गई थी कोशिश करके आज रात को पूरी करने की इच्छा मेरे मन में कुलांचे भरने लगी । मगर कैसे आज क्या बहाना बनाऊं जिससे शालिनी के सेक्सी बदन का भोग लगाने का मौका मिल जाए ।।

शालिनी- भाई आप भी नहा लीजिए फिर खाना खाते हैं ।

मैं - हां,, हां,,, मैने खयालों की दुनिया से बाहर आकर जवाब दिया ।

बाथरूम में घुस कर दरवाजा बंद करते ही, हैंगर पर टंगी शालिनी की सुबह पहनी हुई पर्पल कलर की ब्रा और प्रिंटेड पैंटी नजर आ गई,, वो शायद उन्हें बाहर फैलाना भूल गई थी । फिर मेरे दिमाग में आया कि शालिनी ने अभी शाम को तो ब्लैक वाली ब्रा पहनी थी और मैने दरवाजा खोल कर बाहर बरामदे में देखा तो ब्लैक ब्रा रस्सी पर टंगी हुई थी,,,, मैंने बाहर आ कर काली ब्रा को छूकर देखा तो वो बिल्कुल सूखी थी ,,, मतलब

शालिनी ने मेरे वीर्य वाली ब्रा को फिर से बिना धुले हुए टांग दिया है,,,, ये सब देख कर मेरा मन कहने लगा .... मंजिल अब दूर नहीं है शालिनी के मन में भी अब सेक्स के खयाल आने लगे हैं,,, मुझे उसकी ब्रा में हस्तमैथुन करने में मजा आता है और शालिनी को मेरे हस्तमैथुन के बाद वीर्य से सनी हुई ब्रा पहनने में ....
 
मैं वापस बाथरूम में घुस गया और सबसे पहले मैंने शालिनी की पर्पल कलर की ब्रा उठाई और अपने लंड पर रगड़ना शुरू कर दिया,,,, मैंने शालिनी की मस्त चूचियों को छुपाने वाली ब्रा को सूंघा भी और चाटा भी ,,,

मैं अपना लंड हिला रहा था और

अह्ह्ह्ह्ह्ह स्स्स्स्स् क्या चुचियां है शालिनी की उफ्फ्फ्फ्फ्फ इतने करीब से देखा-देखी और छूना.......

अह्ह्ह्ह मजा आ जाता है.... उम्म्म्म्म्म उसकी बुर भी कितनी मुलायम और चिकनी होगी..... स्स्स्स्स् और गीली भी .... उफ्फ्फ्फ्फ्फ अब तो वो भी मजे ले रही है अह्ह्ह्ह्ह्ह वो भी चाहती है स्सस्सस्स अब तो वो भी इतना गरम हो जाती है कि आजकल में चुदाई हो ही जायेगी ..... मुझसे ....उम्म्म्म्म्म्म्म अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह कितना मजा आएगा उसको चोदने में अह्ह्ह्ह्ह उसकी बड़ी बड़ी चुचिया दबाने में अह्ह्ह्ह्ह्ह स्स्सस्स

और

मैंने जल्दी जल्दी तेज हाथों से अपने लौड़े को आगे पीछे करते हुए उसकी ब्रा के दोनों कप्स को अपने गाढ़े वीर्य से भर दिया और फिर वैसे ही हैंगर पर उसकी ब्रा को टांग दिया ,,, और नहाने के बाद सिर्फ टावेल लपेट कर बाहर आ गया । मुझे अब जरा भी डर या संकोच नहीं था कि शालिनी उसे देखकर क्या सोचेगी ।।

शालिनी पीछे कमरे में बुक्स वगैरह देख रही थी और मैंने उसे आवाज दी कि खाना लगाओ ,, हम बेड पर ही खाते थे अक्सर,,,

मैं वैसे ही सिर्फ टावेल लपेट कर ही बैठा रहा.... मैं अब इतना उतावला हो रहा था शालिनी के लिए कि अब मैं उसे अपना लंड किसी बहाने से दिखाना चाहता था,,,, लेकिन मैं ये चाहता था कि शालिनी को ये लगे कि मेरा लन्ड उसको धोखे से दिख रहा है मैं जानबूझकर नहीं दिखा रहा हूं,,,

खाना खाते हुए हम दोनों बातें करते रहे और मैंने टावेल को इस तरह तिरछा किया कि मेरे सामने बैठी हुई शालिनी को वो दिखाई दे जाए ... मेरा लन्ड खड़ा हो ही रखा था पहले से ,,,,,,

कुछ देर बाद शालिनी की नजर मेरे दोनों पैर के बीच उपर की ओर निशाना साधते हुए मेरे लौड़े पर पड़ गई,,,, अब उसके चेहरे का रंग बदल रहा था और वो थोड़ा सा नजर इधर उधर करके फिर से मेरे लौड़े को देख रही थी ,,, मेरा लन्ड और झटके लेने लगा और मैंने थोड़ा सा ऊपर की ओर हिल कर शालिनी के लिए लन्ड को देखना और आसान कर दिया ।

हम दोनों ही खाना खाते हुए बात करते रहे और शालिनी ने उठकर प्लेट वगैरह हटाई और किचन में जाकर काम करने लगी । मैं शालिनी को अपना लौड़ा दिखाने में कामयाब रहा और शालिनी ने भी नजर भर कर उसे देखा था ,,,

मैंने टावेल हटाकर आज कई दिनों बाद शालिनी की शापिंग की हुई व्हाईट फ्रेन्ची पहली बार पहनी और उपर कुछ नहीं पहना , मेरे नंगे सीने पर एक भी बाल नहीं था,,,,और लेटकर टीवी देखने लगा ।

पहले मैं बड़ी फुल साइज की अंडरवियर पहनता था या फिर नंगा ही रहता था घर में शालिनी के आने से पहले ,,,

शालिनी मेरे से कुछ दूर पर बर्तन साफ कर रही थी और मैं लेटकर अपने लंड को फ्रेन्ची में दबा कर एडजस्ट कर रहा था,, मगर मेरे हलब्बी टाइट लंड को इसमें छुपाना नामुमकिन था खैर मैं छुपाना चाहता भी नहीं था, बस ये चाहता था कि शालिनी को ये सबकुछ प्यार में लगे और प्यार से लगे,,,

कोई जोर जबरदस्ती ना हो जो कुछ भी हम दोनों में हो रहा था वो धीरे धीरे प्यार से ही हो रहा था। सफेद वी शेप अंडरवियर में मेरे लौड़े की फूली हुई नसें भी गौर से देखने पर दिख रहीं थी और तभी शालिनी ने कमरे में आ कर एक नजर मुझ पर डाली और पानी की बोतल मेरे पास रख कर मुस्कुराते हुए पीछे कमरे में चली गई ।।

उसे थोड़ा काम था पढ़ाई का शायद ..... शालिनी अपने काम में बिजी थी। इधर मैं उसके शरीर को छूने का मौका नहीं मिलने के कारण थोड़ा बेचैन हो रहा था.... ।।

मैं बहुत ही लो वोल्यूम में टीवी चैनल बदल रहा था और किसी सेक्सी गाने की तलाश में चैनल बदलता ही रहा.... असल में टीवी पर मेरा ध्यान ही नहीं था,,, तभी मेरी नजर सामने रखी हुई ठंडे तेल की शीशी पर पड़ी और ...... मेरे शैतानी दिमाग में एक आईडिया आया ...

मैंने शालिनी को आवाज दी ,,,

शालिनी- जी आई.....

और एक पल में ही वो मेरे सामने खड़ी थी,,, मैं अभी भी लेटा था पीठ के बल और इस समय मेरा लन्ड नार्मल ही था तो भी ऐसी चढ्ढियों में लंड का आकार प्रकार अलग ही दिखाई देता है,,,

शालिनी- क्या हुआ भाई?

मैं- मेरा सिर दर्द कर रहा है,,

शालिनी-तो प्लीज़ आप दवाई ले लीजिए।

मैं- अरे नहीं,,, दवाई नहीं ,, वो माम ने एक तेल दिया है उसे लगा कर थोड़ी सी मालिश कर दो,,, बस अभी ठीक हो जाएगा ।।
 
ये सुन के शालिनी को मन में हँसी आ गयी ...उसे थोड़ा अजीब तो लगा होगा पर मन में कही न कहीं वो खुश भी हुई कि मैं उसके लिए कैसे तड़प रहा हूं .....और क्या क्या बहाने बना रहा हूं..

शालिनी:- अ..वो.. भैय्या..मै

मैं :- ओह्ह्ह कोई बात नहीं ...मैं खुद ही लगा लेता हु... थोड़ा तो आराम मिलेगा...तुम अपना काम कर लो,,,

मैंने ऐसा बोला तो शालिनी पिघल गयी...उसे लगा होगा सिर की मालिश करने में क्या बुराई है...दस मिनट में मालिश कर दूंगी...

शालिनी :- नहीं नहीं भाई...मैं वो ये सोच रही थी कि...जाने दीजिये आप लाईये तेल....

मैं :- तुम्हे कोई प्राब्लम तो नहीं...मतलब की तुम्हारा काम??

शालिनी :- काम हो ही गया है...बाकी सुबह कर लुंगी मैं यही सोच ही रही थी...वो मुझे नींद भी आ रही थी... ठीक है आज आपकी मस्त मालिश कर देती हूं ....

हां मैं यहाँ नीचे बैठ जाता हूं तुम बेड पे बैठ जाओ... ये ठीक रहेगा ।

मैंने देखा शालिनी ने आज एक थोड़ी टाइट समीज पहनी थी..अंदर ब्रा तो वो नहीं पहनी थी...और नीचे निक्कर पहना था... ब्रा नहीं पहनी थी तो क्या पैंटी भी नहीं पहनी होगी ये सोच के मेरे मन में लड्डू फूटने लगे...

और मैंने देखा कि उसके निप्पल कड़क होने लगे थे... जिसकी वजह से उसके समीज के पतले कपड़े से साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था की उसके निप्पल खड़े है... मैं नीचे बैठ गया... शालिनी मेरे सिर के पीछे बेड पे बैठ गयी... और हमारे ठीक सामने तो अलमारी में लगा आदमकद आइना था... हम दोनों उसमे साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे...

मैंने अपने पैर फर्श पर लंबे किये और अपने दोनों हाथ अपने लंड को छुपाने के हिसाब से अपनी फ्रेन्ची पर रखे हुए थे.... मैं शालिनी के दोनों पैरों के बीच बेड पे पीठ टिकाए बैठा हुआ था...

.... शालिनी की नंगी जांघे मेरे कंधो से टकरा रही थी।

शालिनी ने कुछ तेल मेरे सिर पर डाला और कुछ अपने हाथ पे लिया और धीरे धीरे मालिश करने लगी... शालिनी के मुलायम हाथों का स्पर्श जैसे ही मेरे सिर के बालों को हुआ तो मेरा रोम रोम रोमांचित हो उठा... और मेरा लंड अंगड़ाई लेने लगा...जिसको मैंने हाथों से थोड़ा दबा दिया...

मैं :- आहा हा ..ह्म्म्म कितना अच्छा लग रहा है...

शालिनी:- क्या भाईजी ??

मैं- तुम्हारे मुलायम हाथ....

शालिनी बस थोड़ा मुस्कुराई....शालिनी ने आईने में देखा कि मैं अपने लंड को लगातार धीरे धीरे दबा रहा हूं .. तो उसकी हँसी निकल गयी।

शालिनी:- ह्म्म्म... स....

और वो अपने निचले होंठ को अपने दांतों से काट रही थी .....

शालिनी धीरे धीरे मालिश करने लगी... मैं अपना सर थोड़ा थोड़ा पीछे लेके जा रहा था...

मैं :- शालिनी थोड़ा जोर लगा के करो...सर में तेल नहीं लगाना है सिर्फ ,,,, थोड़ा दबाना भी है...

शालिनी :- ओके भाई .....

शालिनी अब थोड़ा जोर लगाने लगी और थोड़ी चम्पी करने लगी जिसकी वजह से बिना ब्रा की उसकी चुचियां उछलने लगी... मैं ये नजारा आईने में देख रहा था.... मेरा लंड ये देख के और भी जोर मारने लगा... शालिनी का ध्यान जब आईने पे गया और देखा की मैं उसकी उछलती हुई चुचियों को आँखे फाड़ के देख रहा हूं तो वो शरमा गयी...

एक अजीब सी लहर मेरे दिल में उठी जो सीधा मेरे लौड़े पे जाके खत्म हुई... मेरे लन्ड में प्रीकम का पहला बून्द आ गया था...

मैं- शालिनी थोड़ा आगे सरको ना...ये बेड मेरे गर्दन को चुभ रहा है....

शालिनी न चाहते हुए भी थोड़ा आगे सरक आयी.... शालिनी अब बिल्कुल बेड के कार्नर पे बैठी थी और पैर फैले होने के कारण उसकी बुर आगे की ओर आ गयी थी,,,,,, मैंने झट से अपना सर पीछे किया और अपने सर का पिछला हिस्सा शालिनी की बुर पे निक्कर के उपर से रख दिया....

जैसे ही उसने वो महसूस किया वो अपने आप ही थोड़ा आगे खिसक गयी... मेरा सर उसकी बुर से बस कुछ ही दुरी पे था. मुझको ये समझ आ गया की शालिनी थोड़ा आगे खिसक चुकी है... मैंने आईने में देख के अंदाजा लगा लिया की मेरा सर शालिनी की बुर से कितनी दूरी पे है। मैंने शालिनी के हाथ पकड़ लिये और अपने माथे पे रख दिए।

मैं :- यहाँ पे दबाओ थोड़ा....बहुत दर्द कर रहा है।

मेरे हाथ हटाने की वजह से मेरे लंड का

उभार शालिनी को ऊपर से साफ़ दिखाई देने लगा। शालिनी उसे आँखे फाड़ के देखने लगी। ये चीज मैंने आईने में देख ली.... मैंने दुबारा अपना हाथ लंड को छुपाने के लिए नहीं रखा...शालिनी मेरा खड़ा लंड देख के और भी उत्तेजित होने लगी थी। शालिनी अब थोड़ा जोर लगा के मेरा सर दबा रही थी जिससे मैं जानबुझकर अपना सर पीछे ले जा रहा था.... ।।
 
शालिनी की तो जैसे जान ही मुंह में आ गयी...वो गरम होने लगी थी... मैं उसके चेहरे के हाव भाव देख रहा था... मुझे शालिनी की फूली हुई बुर का मुलायम अहसास साफ़ साफ़ हो रहा था। मैंने अपना सर अड्जस्ट करने के बहाने से एक दो बार शालिनी की बुर पर और दबा दिया। शालिनी को मजा आने लगा था... शायद ...

वो भले ही कितनी भी कोशिश करती हो मुझसे दूर रहने की पर जब भी वो करीब आ जाती थी तो शालिनी को शायद खुद को काबू रखना दिन ब दिन मुश्किल होते जा रहा था। मैने बहुत बढ़िया चाल चली थी...क्यू की अब शालिनी जब भी मेरा सर दबाने के लिए जोर डालती मैं अपना सर पीछे ले जा के जोर से शालिनी की बुर पे दबा देता...शालिनी की हालत बहुत ख़राब हो चली थी...अब शालिनी भी अपनी गांड़ को थोड़ा सरका के अपनी बुर को मेरे सर पर दबाने लगी थी... इस हालात में लन्ड बेकाबू और खयालात में सिर्फ इस संगमरमरी बदन को भोगने की इच्छा ... बस और कुछ नहीं ...

शालिनी की फूली हुई मुलायम बुर के स्पर्श को पाकर मैने अपनी आँखे बंद कर ली ...उसकी बुर का इस तरह महसूस करने का मेरे लिए यह पहला मौका था भले ही बीच में कपड़े की एक दीवार थी मेरे सिर और शालिनी की बुर के बीच में,,,, मैंने फिर से अपने हाथ अपने लंड पर रख लिए और थोड़ा थोड़ा उसे दबाने लगा।

शालिनी ने जब ये देखा की मैं बेशर्म हो कर उसके सामने ही लंड को मसल रहा हूं तो उसकी बुर शायद और पानी छोड़ने लगी होगी .... मुझे लगने लगा की उसकी निक्कर अब गीली होने लगी है.... वो क्या करे उसे शायद कुछ समझ नहीं आ रहा था।

मुझे लगने लगा कि ऐसे ही थोड़ी देर चलते रहा तो हम दोनों ऐसे ही झड़ जायेंगे ।।

शालिनी - भाई ईईईई ....बस हो गया क्या?? मेरे हाथ दर्द करने लगे हैं...

मुझको तो लग रहा था कि ये सब कभी खत्म ही ना हो पर अब मेरी मज़बूरी थी...

मैं :- हां...ठीक है...अब आराम है मुझे।।

मैं फर्श पर ही सीधा बैठा रहा और पीछे मुड़ा..मुड़ते ही मेरी नजर पहले शालिनी की बुर की तरफ़ गयी .. मुझेे वहां कुछ गीला सा दिखा.. एक धब्बा जेसे......पहले तो मुझे लगा की तेल का होगा पर अगले ही पल मुझे समझ आ गया की वो तेल नहीं है... शालिनी ने झट से अपने पैर पास कर लिए क्यू की वो देख रही थी की मैं उसकी बुर वाले हिस्से को बड़े गौर से देख रहा हूं...

ओह्ह्ह्ह्ह इसका मतलब शालिनी की बुर ने पानी छोड़ दिया था ...मेरे साथ ... शायद पहली बार ... और उसकी बुर गीली हो गयी थी..,मतलब उसे ये सब अच्छा लग रहा है.....उसे मजा आ रहा था....ह्म्म्म्म तो चलो कुछ और करते है...

मैं :- ह्म्म्म .... शालिनी बहूत अच्छा मस्साज किया तुमने... अब चलो मैं भी तुम्हारे सर में तेल लगा देता हूं.....बड़ा अच्छा तेल है...फ्रेश हो जाओगी... बेबी तुम ...भी ...और नींद अच्छी आएगी ।।

शालिनी शायद समझ गयी की मैं अब और कुछ हरकत करने वाला हूं....अभी मेरा मन नहीं भरा था ....

शालिनी:- नही भाई जी ठीक है...

मैं :- क्या सोचने लगी ?? चलो बैठो नीचे मैं ऊपर बैठता हूं.....

शालिनी शरमाते हुए नीचे बैठ गयी... मैं ऊपर बेड पे बैठ गया... और उसके सर पे तेल डाल के धीरे धीरे मालिश करने लगा...ऊपर से शालिनी के बड़े गले की समीज से शालिनी की चुचियां आधी से ज्यादा दिखाई दे रही थी। गोल गोल बड़ी बड़ी गोरी चुचियों को देख के मेरा लंड फिरसे खड़ा होने लगा था...

शालिनी ने आईने में देखा की मैं उसकी चुचियों को ज्यादा से ज्यादा देखने की कोशिश कर रहा हूं.... . शालिनी को हल्की सी हँसी आ गई ..... शालिनी भी अब इस खेल का मजा ले रही थी या कुछ और चाहती थी.. और मुझे तड़पाने के लिए उसने जानबूझकर

धीरे से अपनी समीज का निचला हिस्सा पकड़ा और नीचे खींचने लगी...ब्रा नही होने के कारण समीज उसकी चिकनी चूचियों पे फिसलते हुए नीचे जाने लगा....शालिनी ये काम इतने धीरे कर रही थी की मुझको पता भी ना पड़े ...लेकिन अब मुझको शालिनी की चूंचियों का काफी हिस्सा साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था। मेरा लंड अब बेकाबू हो रहा था.... मैं थोड़ा आगे हुआ और शालिनी के सर को पीछे खींचा...और अपने लंड पे रख लिया....जैसे ही शालिनी को मेरे कड़क लंड का स्पर्श अपने सर पे हुआ उसने आँखे बंद कर ली ।
 
मेरा लन्ड भी फूल पिचक रहा था जिसका एहसास शालिनी को अपने सिर पर जरूर हो रहा होगा....

मैं - बेबी,,,ऐसे ही रहो...मैं तुम्हारा सिर अब अच्छे से दबा देता हूं....

शालिनी - ओके ,, भाई.... अच्छा लग रहा है, प्लीज़ कांटिन्यू ....

शालिनी का सिर पीछे आ जाने के कारण उसकी चुचियां ऊपर की ओर आ गयी थी...और शालिनी ने समीज को थोड़ा खींच के पकड़ा हुआ था इसलिए सिर्फ नि्प्पल्स ही समीज में छुपे हुए थे....और शालिनी ने अपनी छाती को जानबूझ के थोड़ा ऊपर की ओर उठा लिया....जिससे उसकी चुचियों का दिलकश नजारा मुझको मिल रहा था वो अदभुद था....

मैं उसे ऐसे देख के पागल हो गया.... अपना लंड उचका उचका के अपनी ख़ुशी जाहिर करने लगा.... मेरे लंड का उचकना शालिनी को फील हो रहा था....उसकी साँसे तेज होने लगी....धड़कने बढ़ने लगी....उसकी तेज साँसों के साथ ऊपर नीचे होती उसकी अधनंगी चुचियों को देखकर मुझको होश ही नही रहा..... मैं शालिनी का सिर अपने लंड पे दबाने लगा.... शालिनी भी मजे से कड़क लंड का स्पर्श एन्जॉय करने लगी....कुछ मिनटों तक यही सिलसिला चलता रहा....

मैं :- अच्छा लग रहा है ना बेबी,,,, इस मालिश से तुम एकदम रिलैक्स हो जाओगी ....

शालिनी :- हां जी,,,...

उसने अपनी आंखें बंद ही रखी... शायद इस हालात में वो मुझसे नज़र मिला भी नहीं पाती .... मैं लगातार सामने आईने में भी देख रहा था ...

मैं :- मजा आ रहा है ,, बेबो,,??

शालिनी:- मजा ...?? मतलब ?? कैसा मज़ा ??

मैं जोश में होश खो बैठा था... और भूल गया था कि मैं अपनी ही सगी बहन के साथ इस हालात में हूं,,, इतना होने पर भी हम दोनों में अभी इतनी सेक्सी बातों का सिलसिला शुरू नहीं हुआ था,,,,।।

मैं :- वो..म में..मेरा...मेरा मतलब...

मेरी बात अधूरी ही रह गयी... क्यूंकि तभी कमरे के खुले दरवाजे से बरामदे की ओर से एक बड़ा सा कीड़ा शालिनी के हाथ पे आके बैठा और उड़ गया ... बड़ी तेज आवाज भी कर रहा था...

..शालिनी किसी और ही दुनिया में थी...वो आँखे बंद करे हुए थी...वो एकदम से डर गयी और हाथ से उसे झटक दिया और थोड़ा चिल्लाते हुए वो झटके से खड़ी हो गई। वो डर गयी थी और इधर उधर देखने लगी।

मैं भी जल्दी से अपने खड़े लन्ड का तम्बू दिखाते हुए बेड से उतर कर खड़ा हो गया,,, ये सब कुछ सेकंड में ही हो गया था ।

मैं :- क्या हुआ बेबी ?? क्यूं डर गयी क्या ?? कुछ नही एक कीड़ा था...बस..

रिलैक्स ...

शालिनी अब भी डरी हुई थी... मैं फिर से आगे हुआ और उसे बाहों में लिया और ...उसको अपने नंगे सीने से चिपका लिया ....

मैं :- अरे कुछ नही होता उससे...

शालिनी:- वो बड़ा ही अजीब फील हुआ हाथ पे...

शालिनी इधर डरी हुई थी और मैं अपने काम में लगा हुआ था.... मैने शालिनी को अपनी बाहों में कस लिया... शालिनी के बड़े बड़े कड़क निप्प्ल्स मुझको अपनी नंगी छाती पे महसूस हो रहे थे। नरम नरम चुचियों के स्पर्श से मेरा लंड जो थोड़ा सा मुरझा गया था....वो फिर से टाइट होने लगा.....इस बार मेरा लंड सही निशाने पर था...

क्यूंकी एक तो वो थोड़ा मुरझा गया था जिससे शालिनी को जब गले लगाया तब उसका फासला कम था लेकिन अब जब वो टाइट होने लगा था तब शालिनी की बुर के बहुत करीब हो गया था....

मैं शालिनी की पीठ पे हाथ घुमा रहा था.... और धीरे धीरे मैं अपने हाथ घुमाने का दायरा बढ़ा रहा था... नीचे कमर तक...फिर थोड़ा और नीचे शालिनी गांड के ऊपरी हिस्से पे हाथ घुमाने लगा....

शालिनी अब संभल रही थी...वो डर के ट्रैक से निकल कर वापस सही ट्रैक पे लौट आई थी... मेरा हाथ अपनी गांड़ को सहलाते हुए पाकर वो उत्तेजित होने लगी....वो चाहती तो मुझको दूर कर सकती थी पर उसे मजा आने लगा था... उसकी सांसों की गर्मी बता रही थी......

मैं :- सब ठीक है..कुछ नहीं होता...इतना क्या डरना?

मैं शालिनी को अपने आप से और चिपकाते हुए बोला ...

शालिनी अब खुद मुझसे चिपकती हुई अपनी सांसों को सम्हाल रही थी ... मैंने मौके का फायदा उठाया और अपना लंड शालिनी की फूली हुई बुर से और सटा दिया...., हम दोनों की लम्बाई में थोड़ा सा ही अंतर है जो आज बड़ा फायदा पहुंचा रहा था ।

शालिनी की आह निकलते निकलते बची....शालिनी भी शायद अब पीछे नही हटना चाहती थी...या उसे सच में पता ही नहीं है कि ये हम-दोनों में क्या हो रहा है... इसकी मंजिल कहां है ??

उसने भी अपनी बुर मेरे लंड की ओर थोड़ा बढ़ा दी...दोनों ही वासना में अंधे हो चुके थे.... लगभग दो मिनट हो चुके थे पर हम दोनों ही एक-दूसरे को छोड़ना नही चाहते थे...

लेकिन तभी वो कीड़ा फिरसे उड़ते हुए आया और शालिनी के हाथ पे बैठ गया... मैने झटके से उसे उड़ाया...लेकिन इस दरमियान मुझसे शालिनी की बाहों का घेरा छूट गया .... और शालिनी ये देख के हंस पड़ी...

शालिनी:- हा हा हा ....देखा मैंने नही कहा था...देखो आप भी डर गए ना??

शालिनी और मैंने देखा कि वो कीड़ा एक कोने में बैठा हुआ था.... और उसके रेंगने वाली जगह पर पानी जैसा थोड़ा गाढ़ा लिक्विड निकल आया था ,,,,
 
मैंने उस हरामी कीड़े को झाड़ू से मार कर बाहर बरामदे में फेंक दिया और मेरे पीछे ही शालिनी जाकर बाथरूम में घुस गई ।

मैं वापस आकर बेड पर लेट गया और सोचने लगा कि कीड़े की वजह से आज इतना हसीन सपना पूरा होते होते टल गया ,,,, मेरी सफ़ेद फ्रेन्ची में मेरे प्रीकम के दो स्पाट साफ दिखाई दे रहे थे ....

शालिनी बाथरूम से वापस आ कर उस कीड़े के लिक्विड को बड़े गौर से देखने के बाद मुस्कुराते हुए बोली --

भैय्या यही कीड़ा था शायद.... जिसे मैं कई दिनों से ढूंढ रही थी,,, यही मेरे अंडरगार्मेंट में कई दिनों से लिक्विड लगा रहा था... और भाई मैंने अभी देखा बाथरूम में मेरी पर्पल वाली ब्रा पर ऐसा ही ताजा लिक्विड लगा हुआ है जैसे अभी अभी लगाकर आया था... मैंने उसे अभी शाम को ही धुला था ...

अब मेरी चोरी पकड़ी गई थी क्योंकि ये काम उस छोटे कीड़े का नहीं बल्कि मेरे सात इंची बड़े कीड़े का था ,,, एक पल को मेरे चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी ,,, लेकिन मैंने अपने आप को सम्हाला ....

और वो मेरे पास ही बेड पर लेट गई .......

अब तक मेरा जोश थोड़ा ठंडा हो गया था और मैं ये भी सोच रहा था कि शालिनी को इस तरह सेक्स की राह पर ले चलने से पहले उसको और विश्वास में लेना चाहिए ,,, कहीं उसे ये सब मेरी तरफ से ज्यादती ना लगे और हमारे रिश्ते में कोई कड़वाहट ना आ जाये ,,,

शालिनी बाथरूम से वापस आ कर उस कीड़े के द्वारा छोड़े लिक्विड को बड़े गौर से देखने के बाद मुस्कुराते हुए बोली --

भैय्या यही कीड़ा था शायद.... जिसे मैं कई दिनों से ढूंढ रही थी,,, यही मेरे अंडरगार्मेंट में कई दिनों से लिक्विड लगा रहा था... और भाई ... मैंने अभी देखा बाथरूम में मेरी पर्पल वाली ब्रा पर ऐसा ही ताजा लिक्विड लगा हुआ है जैसे अभी अभी लगाकर आया था... मैंने उसे अभी शाम को ही धुला था ...

और वो मेरे पास ही बेड पर लेट गई .......

मैं - (थोड़ा सा सोचने के बाद) हां हां ,,, यही कीड़ा होगा ।

शालिनी- हां , गंदी तो कर देता था मेरी ब्रा ,,, बट भाई इसके लिक्विड की स्मेल बड़ी अच्छी होती थी ,,, अजीब सी ,,, किन्की टाइप ,पर अब तो आपने उसे मार दिया ....।

मैं- स्मेल अच्छी थी तो बताना चाहिए था मैं उसे नहीं मारता ,,,, चलो कोई नहीं मैं दुआ करुंगा कि तुम्हारे लिए वो परफ्यूम वाला कीड़ा उपर वाला फिर से भेज दे ,,, बेबी को परफ्यूम वाली ब्रा पहनना पसंद है ...है ना ... हा हा हा ....

शालिनी - भाई ईईईई ... आपसे तो कोई बात बताओ, बस आप मेरे मज़े लेने लगते हो ... (झूठी नाराजगी दिखाते हुए)

मैं- अरे,, अरे मेरी स्वीटू ,, नाराज क्यों हो रही हो ,, अब हम आपस में मजाक भी नहीं कर सकते क्या ??

शालिनी - तो ठीक है अब मैं भी आपके मजे लूंगी ,,, ठीक से ,, बट आप अगर मेरे से बड़े भाई ना होते, तब मैं बताती ।

मैं- क्या बताती ...?? वैसे ये बड़े छोटे भाई बहन वाले चक्कर में ना ... शालिनी हम दोनों क्या ऐसा नहीं कर सकते कि हम दोस्तों की तरह एक दूसरे से बात कर सकें ??

शालिनी - हां,, भाई ,, आप और मैं दोस्त की तरह ही तो रहते हैं ...बस

मैं- कहां हैं दोस्तों की तरह ,, जरा सा मजाक किया और बेबो नाराज !

शालिनी - अरे मैं नाराज वाराज नहीं हूं... और आपसे तो कभी नाराज हो ही नहीं सकती ।

(लेटे लेटे हीअपना हाथ उसके हाथ में लेकर)

मैं- तो अब हम दोनों आज से एक वादा करते हैं कि अब से हम दोनों भाई बहन के साथ साथ फ्रेंडस भी है और एक दूसरे से कोई भी चीज छुपायेंगे नहीं और हर तरह की बातें शेयर करेंगे ,, और ये शरम वरम बिल्कुल नहीं ,,, पक्का ,,, एग्री ??

शालिनी - हां, एग्री , आज आपने मेरे मन की बात कही है ,, फ्रेंडस ,, बट ...
 
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