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Incest बहना का ख्याल मैं रखूँगा

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मैंने जब बेड पर नजर दौड़ाई तो देखा कि शालिनी के पास ही मेरे सूखे हुए वीर्य से सनी हुई ब्रा पड़ी थी और जो कपड़े पहन कर वो भाभी के साथ पार्लर गई थी वो भी बगल में पड़े हुए थे,,, मतलब शालिनी पार्लर से आने के बाद शायद कपड़े उतार कर कुछ देर आराम करने के लिए लेटी थी और फिर ऐसे ही सो गई और मेरी जोरदार किस्मत कि मैं मौके पर आ गया और शालिनी के इस जवानी से भरपूर रूप के दर्शन मिल गए ।

मैंने थोड़ा और करीब जाकर उसके बदन की खुशबू को महसूस करने की कोशिश की,, मगर मेरी गान्ड भी फट रही थी कि अगर शालिनी ने आंखें खोल दीं तो मैं क्या जवाब दूंगा,,,

मगर मैं उसके यौवन पर फिदा हो चुका था और मेरे दिमाग ने कुछ देर के लिए काम करना बंद कर दिया था,,,

मैंने पहली बार इतने करीब से किसी लड़की को देखा था इस हालत में,,,मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी और मैं शालिनी की छोटी सी पैंटी में बंद उसकी गुलाबी गुड़िया के दर्शन करना चाहता था,,, उसकी सबसे कीमती चीज और उसके शरीर का यही आखिरी अंग था जो अब भी मेरे दीदार से बरी था,,, उसके नितम्बों पर भी बाकी शरीर जैसी ही चिकनाहट और चमक थी,,

उसने एक हल्की सी करवट ली और उसकी दोनों चूचियों ने एक दूसरे को दबाते हुए एक कमनीय नजारा बना दिया,,,,

भाभी ने पार्लर में शालिनी का भी हल्का फुल्का मेकअप और मेकओवर करवा दिया था जो उसे और खूबसूरत बना रहा था

मेरे सामने लेटी हुई इतनी खूबसूरत लड़की को देखकर कोई भी आश्चर्यचकित रह जाता , शायद अपने होशोहवास खो कर उसके संगमरमरी बदन को अपने बाहुपाश में जकड़ कर उसे मसल डालता। शालिनी की खूबसूरती का पहले से कायल था मैं और मैने देखा कि ब्यूटी-पार्लर जाने के बाद तो उसका काया-पलट ही हो गया था. शालिनी ने बालों में स्टेप-कट करवाया था जिससे उसके बाल किसी मॉडल से प्रतीत हो रहे थे और उसके खुले हुए बाल उसके गोरे बदन पर फैल कर उसे और सुंदर बना रहे थे,,, उसका चेहरा भी मेकअप से दमक रहा था और गोरे-गोरे गालों पर लालिमा फैली थी। शालिनी की आँखों को हल्के मस्कारे ने और अधिक मनमोहक बना दिया था व उसके होंठों पर एक गाजरी रंग की स्पार्कल-लिपस्टिक लगी थी जिससे वे काम-रस से भरे हुए जान पड़ रहे थे,*

सामने "रूप की रानी" लेटी हुई थी और उसके रूप को चुराने की हसरत लिए मैं उसका बड़ा भाई "चोरों का राजा" की तरह उसके रूप को नजर भर कर चुरा रहा था,,,,,,,,,,, मेरा लन्ड फटने वाला लग रहा था हल्का सा प्रीकम भी शायद निकल गया था मेरा,,,

मैंने अब अपने नयन सुख को विराम देना ही ठीक समझा और धीरे से कमरे से बाहर निकल कर बरामदे में आकर थोड़ा सा जूतों को फर्श पर पटक कर तेज आवाज में चलकर फिर से कमरे में आया जिससे शालिनी को लगे कि मैं अभी अभी आया हूं,,,

मैंने बेड पर पड़ी हुई चादर उठाई और शालिनी की पैंटी के पास उसकी नंगी कमर पर हाथ रख कर उसे हिलाते हुए जगाया,,,, मगर मैंने बड़ी चालाकी से जब तक शालिनी ने अपनी आंखें नहीं खोली तब तक मैंने चादर उसके उपर नही डाली,,,,

शालिनी ने आंखें खोली और हम दोनों की नजरें एक दूसरे से मिलते ही उसे अपनी नंगी चूचियों सहित अपने नंगे शरीर का ख्याल आते ही उसने अपनी आंखें फिर से बंद कर ली और मैंने उसके उपर चादर डालकर उसे शरमो हया से बाहर निकालने की कोशिश की,,,

उसने चादर से अपने आप को ठीक से ढकते हुए मुझसे बोला...

शालिनी- स्वारी भाई,,, वो मैं ना,,,

मैं उसे बीच में ही रोकते हुए बोला

मैं- किस बात का स्वारी ,, मैं भी तो फ्रेन्ची में ही रहता हूं,, इट्स ओके यार

असल में मैं चाहता था कि शालिनी को ये भी नार्मल लगे जिससे आने वाले समय में वह फिर से मेरे सामने ऐसे अपनी चूचियों को दिखाती रहे और मैं अपनी कामवासना को उसकी नंगी गुदाज चुचियों को देख देख कर कर कुछ हद तक शांत कर पाऊं या और भड़काऊ,,,

शालिनी अपने शरीर के साथ उस चादर को लिपटाए हुए ऐसे उठी बेड से कि मैं उसके हसीन कामुक बदन को और ना देख पाऊं और वो बिना कुछ बोले ही पीछे कमरे में चली गई और कुछ मिनट बाद सलवार सूट पहन कर बाहर निकल आई ,,

शायद वह अभी अभी अपनी हसीन चूचियों के नजारे को मेरे द्वारा देखे जाने से कुछ ज्यादा ही शरमा गई थी और अपने पूरे बदन को ढकने के लिए ही सलवार सूट पहन ली थी

और शालिनी ने मुझे पानी की बोतल पकड़ाते हुए पूछा....

शालिनी- भैय्या,, कुछ चाय काफी बनाऊं तुम्हारे लिए

मैं भी इस बीच बेशरम हो कर अपने कपड़े उतार कर सिर्फ फ्रेन्ची में आ गया और अपने खड़े लन्ड को छुपाने का कोई प्रयास नहीं किया

मैं- हां हां लाओ कुछ ठंडा सा पहले,, इतनी हाट ब्यूटी क्वीन को देखकर मैं भी हाट हो गया हूं ,, ह हा हा हा,,

शालिनी- (अपने बालों का जूड़ा बनाते हुए) भाईईईईई ! स्टॉप इट ना...’ वह तो बस मस्ती-मस्ती में हल्का सा मेकअप करवा लिया मैंने भाभी के जबरदस्ती करने पर ,,

शायद मेरा रिएक्शन देख उसे लग रहा था कि मैं उसकी टाँग खींच उसे सताने के लिए ऐसा बोल रहा था । शालिनी मेरे सामने खड़ी थी और मैं उसे और छेड़छाड़ करते हुए उसकी सुंदरता की तारीफ करने लगा

मैं- अरे,, 'पहले यह तो बता दो कि आप हैं कौन हुस्न परी ?'

मैंने भी जरा मुस्कुरा कर मजाक करने के अंदाज़ से कहा

 
कुछ देर तक यूँ ही हम दोनों के बीच खींच-तान चलती रही, उसकी खूबसूरती को निहारने के मारे मैं रह-रह कर उसे देख मुस्काए जा रहे थे और उसकी तरफ देख देख कर कमेंट कर उसे चिढ़ा रहा था,,

शालिनी किचन मे जाकर चाय बनाने लगी और मैंने टीवी चला लिया और बेड पर आधा लेट गया और चाय के साथ चायवाली मतलब शालिनी का इंतजार करने लगा ।

शालिनी चाय लेकर आई और जैसे ही उसने झुककर मुझे चाय का कप पकड़ाया तो मेरी सीधी नजर उसके कुर्ते के अंदर से झांकती हुई मस्त चूचियों पर जम गई,,, आह,,, इन्हीं मस्त उरोजों को मैं अभी कुछ देर पहले ही पूरा नंगा देख चुका था मगर ऐसे हसीन नज़ारे जितना देखो उतनी ही प्यास बढ़ती जाती है,,

फिर से मेरी और शालिनी की नजरें आपस में मिली और शालिनी को शायद एहसास हो गया कि उसने कुर्ते के अंदर समीज या ब्रा कुछ नहीं पहना है और मैं उसकी रसीली चूचियों को देख रहा हूं,, और वो तुरंत मेरे पास बैठ गई और अपने कुर्ते को हल्के से ठीक किया

खैर,, हम दोनों साथ-साथ में चाय पी रहे थे और मैंने फिर से उसे छेड़ा

मैं- कसम से ,, अगर मुझे ये पता होता कि तुम पार्लर जाकर ऐसे बिजलियां गिराओगी तो पहले ही भाभी से बोल दिया होता...

शालिनी- क्या यार,, तुम फिर से ..

मैं- क्या फिर से,,, अब बिजली गिरा रही हो तो मैं क्या करूं,,

आखिरकार शालिनी को भी थोड़ी लाज आने लगी और वह उठकर बाथरूम में जा कर अपना मुहँ धो कर मेकअप हलका साफ़ कर आई,,

मैं- 'अरे वो लड़की कहाँ गई जो अभी यहाँ बैठी चाय पी रही थी ?'

मैंने शालिनी को मेकअप उतारने के बाद देखते हुए हंस कर पूछा,,,

शालिनी- भाई,,आप फिर चालू हो गए...' शालिनी हँसते हुए बोली.

मैं- अरे भई इतनी सुन्दर लड़की के साथ बैठा था अभी मैं कि क्या बताऊँ?

मैंने उसे देखते हुए मुस्करा कर कहा -पर पता नहीं कहाँ गई उठ कर अभी तुम्हारे आने से पहले...'

 
शालिनी- हा हा हा..भाग गई वो मुझे देखकर..

शालिनी हँसते हुए बोली...

मैं- ओह...मेरा तो दिल ही टूट गया फिर...

मैंने झूठा दुःख प्रकट करते हुए अपने हाथ से फ्रेन्ची के उपर से ही अपने लौड़े को मसल दिया,, जैसे मुझे वहां खुजली हो रही हो,,,

शालिनी- ऊऊऊ.. हूं,,.क्यों आपकी गर्लफ्रेंड थी क्या वो?

शालिनी मजाक करते हुए बोली और मुझको एक बार फिर मौके पर चौका मारने का चाँस मिल गया ,,,,,

मैं- मेरी किस्मत में कहाँ ऐसी गर्लफ्रेंड.......

मैंने उदास होने का ड्रामा किया जैसे मेरी कोई बहुत ही कीमती चीज मुझसे खो गई हो

शालिनी- हाहाहा भाई..गर्लफ्रेंड चाहिए तुमको? कल घर चल ही रहे हैं तो मम्मी को बता दूँगी,,, जल्दी आपकी शादी का इंतजाम करें,,,

शालिनी ने ठहाका लगाते हुए कहा, उसे भी मेरी टांग खिंचाई का मौका मिल गया और एक उंगली से उसने मेरी फ्रेन्ची में तड़पते हुए लंड की ओर इशारा किया तो मैं और मेरा लौड़ा दोनों ही खुशी से गनगना उठे ,,,

मैं- बता दो भई...मेरा क्या है तुम ही फँसोगी ?

मैंने उसे अपने पास ही बेड पर बैठाते हुए शरारत से कहा.

शालिनी- ही ही ही,,वो कैसे?

शालिनी ने अचरज जताया.

मैं- वो ऐसे मेरी स्वीट बहना,, मैं भी मम्मी से बता दूंगा कि तुमने मेरी ख़ूबसूरत गर्ल फ्रेंड को भगा दिया,,, हा हा हा

शालिनी- ओह शिट...भाईईई ! कितने खराब हो आप...हमेशा मुझे हरा देते हो...

शालिनी ने मुहँ बनाकर पाँव पटकते हुए नखरा किया....

हाहाहा... मैं उसे चिढ़ाने के लिए हंसता रहा...

शालिनी- हाँ*!*हाँ*! ले लो मेरे मज़े

मैं- अले ले,,मेरी प्यारी बहना

ऐसा*कहके*मैंने*मजाक*में*उसके*गाल*को पकड़कर*खींच*लिया*

और*ऐसे*उसका*गाल*खींचना*उसे अच्छा*नहीं*लगता था कभी भी बचपन से ही......

शालिनी-भाई*तुम्हें*मालूम*हैं*ना*मुझे*ऐसे*करना*पसंद*नहीं*.*मैं*क्या छोटी बच्ची हूँ*अभी*?*अब*मैं*बड़ी हो*गयी*हूँ*,,,,

मैंने उसके ऐसा बोलते ही अपनी आंखें उसकी चूचियों पर गड़ा दी और,,,,

मैं-ओहो*,*हो*,*हो*!!*तुम*बड़ी तो हो*गई हो*?*मगर*सिर्फ*बदन*से*बढ़*गई हो*बेबी*!*लेकिन*अपने भाई के लिए तुम*हमेशा छोटी सी बच्ची ही रहोगी,,,,,,,,,

ऐसा*कहकर*मैंने*उसे प्यार से बाँहों*में*भर*लिया*,

शालिनी-ओहो,*भाई!*

ऐसा*कहकर*उसने*भी*मुझे जोर*से*बाहों में भर*लिया ,,

इस*समय*अगर*मुझे*किसी*चीज*का*अहसास*हो*रहा*था*तो*वो चीज*थी*मेरे*सीने*पर*दबी*हुई*,*मेरी*बहन*की*बड़ी*बड़ी चूचियां*!!

शालिनी- देख लेना भैय्या अगर आपने मुझे फिर तंग किया तो आपसे कभी बात नहीं करुँगी...'

उसने मेरे नंगे सीने पर अपने आप को चिपकाते हुए कहा

 


मैं- लेकिन तुमने तो मुझसे नाराज ना होने का प्रॉमिस किया था ना ,,,

शालिनी- 'वो...वो तो मैंने ऐसे ही आपको उल्लू बनाने के लिए कर दिया था,,

शालिनी के चेहरे पर भी शरारती मुस्कान लौट आई थी...

मैं- अच्छा ये बात है...

मैंने मुस्करा कर कहा और अपने दोनों हाथ शालिनी के पेट पर ले जा कर कुर्ते के ऊपर से ही उसे गुदगुदा दिया....

'आह क्या कच्चा बदन है... हर वक़्त महकती भी रहती है...आह...' मैं शालिनी के जवान जिस्म पर इस तरह हाथ सेंकते हुए सोच रहा था,,,,

शालिनी- ईईईईईई...हाहाहा...भा ई ई या..नहीं नाराज होती...ईई...' शालिनी उछलती हुई हँस रही थी.

फिर अचानक से जैसे उसे होश आया और दीवार पर लगी हुई घड़ी को देखकर हंसते हुए बोली

शालिनी- अब मस्ती बंद,,, यार मुझे तो भूख लग रही है,, कुछ खाने के लिए बनाऊं या ऐसे ही सोना है ,,,

और इतना कहकर वो किचन की ओर चली गई और मैं अपने लौड़े को सहलाते हुए सांत्वना देने लगा कि परेशान ना हो,,, तेरा नम्बर भी आयेगा मेरे लंड राजा......

शालिनी खाना बनाती रही और मैं अपनी कामवासना को थामे हुए टीवी देखते हुए बीच-बीच में कुछ कुछ बात चीत करते हुए हम लोग खाना खाने के बाद एक बार फिर से रोज़ की तरह मैं नहाने चला गया और नहाने के बाद मैं बरमूडा पहनकर अपने लैपटॉप पर अपने कुछ काम निपटाने लगा और शालिनी नहाने के बाद आज फिर से मेरे सामने से ही सिर्फ तौलिया लपेट कर अपने मखमली बदन को अधनंगा पानी से भीगा हुआ,, मुझे दिखाते हुए अपने बदन को मेरी नज़रों से छुपाने के लिए पीछे कमरे में अपने कपड़े पहनने के लिए चली गई,,, बलखाती कमर,,, लहराते हुए कदम,,, जैसे कह रहे हों..... कब खींचोगे ये तौलिया.... आखिरी दीवार...

खैर,, शालिनी ने मुझसे कहा कि वो कल सुबह सवेरे जल्दी निकलना ठीक रहेगा,,, आज कल गर्मी कुछ ज्यादा ही हो रही है,, मैंने भी कहा कि बहुत सुबह ही निकलते हैं,,,

और वो अपना ट्रैवल बैग पैक करने लगी,,,

गर्मी के मौसम के आखिरी के दिनों की गरमी वैसे भी बहुत भयानक होती है,,,,बारिश के दिन नजदीक आ रहे थे,,, मुझे बारिशों का मौसम बहुत सुहाना लगता है,,, उसका एक बड़ा-सा कारण है कि बारिश के दिनों में एक से बढ़कर एक सुंदर हसीनाओं के भीगे हुए बदन देखने को मिलते हैं,,,

मगर आज कल तो मेरे पास सोते जागते हुए शायद मेरी कल्पनाओं से भी ज्यादा खूबसूरत बदन का दीदार मुझे मिल रहा था,,,, और दिल में उसे प्यार से भोगने की लालसा,,,

 
मैं लेट चुका था और शालिनी भी काफी देर बाद मेरे पास आ कर लेट गई,,,, आज उसने एक बहुत ही झीने से कपड़े का सफेद शार्ट शर्ट पहना था और निक्कर,, सफेद शर्ट से उसके स्तन छुप रहे थे मगर उसकी गोलाई को और ज्यादा दिखा भी रहे थे,,,

लड़कियों के शरीर को भी बनाने वाले ने क्या बनाया है,,, पूरा नंगा भी ,,, सेक्सी,, अधनंगी भी सेक्सी,,, और असली खूबसूरत राजकुमारियां कपड़ों में अधढकी और ज्यादा सेक्सी,,,

शालिनी और मैंने एक दूसरे को चूमते हुए गुडनाईट किस्सी की और मैंने उसके नये शार्ट शर्ट की तारीफ की,,,

उसके होंठों को चूसने के बाद मैं अपनी होंठों पर अपनी जीभ फिराने लगा जिसे शालिनी देख रही थी,, फिर उसने रिमोट से टीवी आफ कर दी और करवट बदल कर मेरी तरफ अपनी गांड़ को करके लेट गई,,, कुछ देर बाद मैंने करवट बदल कर उसे पीछे से पकड़ कर अपने आप से चिपका लिया और मेरा लन्ड भी साथ ही साथ खड़ा होने लगा,, मैंने बिना डरे उसके शर्ट के ऊपर से उसके सीने पर अपने एक हाथ को रख दिया था और शालिनी की अनछुई चूचियों की गर्मी को उस झीने से काटन के सफेद शर्ट के ऊपर से ही महसूस करने लगा,,,, मैंने शालिनी को थोड़ा सा हिलाकर अपने लौड़े को थोड़ा एडजस्ट किया और उसके चूतड़ों से हल्का सा दूरी बना ली,,, स्तनों की गर्मी में एक अलग ही नशा होता है,,, कुंवारे स्तनों की गर्मी अच्छे अच्छे लोगों का लंड खड़ा कर देती होगी,,, मेरी क्या औकात थी,, मगर मैं मगरमच्छ की तरह आंखें बंद करके लेटा रहा और धीरे धीरे शालिनी के शर्ट के बटन के बीच अपनी एक उंगली फिराई और ठीक उसी पल,,,,

शालिनी- (उनींदी आवाज में) राजा भैया सोने दो ना,,, सुबह जल्दी उठकर घर चलना है ना,,, और उसने मेरे हाथ को अपने हाथ में लेकर उसे वैसे ही अपने सीने पर रख दिया,,,,,,,

ये शालिनी की ओर से एक अनकहा संदेश था कि आज जल्दी सोने दो ना भाई प्लीज़,,, और मेरी चूचियों को छूकर मुझे बेकरार ना करो,,, नहीं तो ,,,

खैर एक जादू के जैसे हम दोनों को नींद आ गई कुछ ही मिनटों में और हम दोनों एक दूसरे से ऐसे ही लिपटते चिपकते हुए सोते रहे,,,

*************

 
सुबह हम दोनों ने उठते ही एक-दूसरे को गुड मार्निंग किस्सी करी और जल्दी से तैयार होने लगे,,, शालिनी तो जैसे उड़ कर घर पहुंच जाना चाहती थी,,,

उसने जल्दी-जल्दी मेरे लिए चाय बनायी और वो नहाने के लिए बाथरूम में चली गई,,

मैं बैठा न्यूज पेपर पढ़ रहा था कि वो मेरे सामने से ही तौलिया लपेट कर निकली,,,,,,,, और सुबह सुबह मेरे सारे शरीर के रोएं खड़े हो गए,,,

उसकी टावेल हल्की सी नीचे बंधी हुई थी जिसमें से उसकी गोरी गोरी चूचियां बाहर झांक रही थी। लड़कियों के शरीर को अधनंगा देखने पर एक अलग ही रोमांच पैदा हो जाता है,,,,

कुछ एक मिनट उसके रूप के नशे में चूर मैं बैठा ही रहा,,, फिर मैं भी उठकर नहाने के लिए बाथरूम में गया और जल्द ही नहाकर टावेल लपेट कर अपनी फ्रेन्ची अंडरवियर को ढूंढते हुए बाहर बरामदे से लेकर कमरे में देखते हुए मैं पीछे कमरे में दरवाजा धकेलता हुआ घुस गया और सामने एक और हसीन नजारा मेरा इंतजार कर रहा था,,, शालिनी टी-शर्ट पहन रही थी और मुझे पीछे से उसकी नंगी पीठ का अच्छा सा नजारा मिल गया,,,

शालिनी अपनी टी-शर्ट ठीक करते हुए मुझसे बोली

शालिनी- क्या भाई, तुम तैयार नहीं हो रहे,,, जल्दी करो यार,,

मैं- वो मेरी चड्डी नहीं मिल रही है,,,

और शालिनी ने बेड पर पड़े हुए कपड़ों में से मेरी अंडरवियर देते हुए बोली जल्दी करो,,, वी आर गेटिंग लेट ,, और वो अपने बालों को संवारने लगी,,

मैंने फ्रेन्ची को पहनते हुए बिना उसे उपर खींचे पहले ही टावेल हटा दिया और मेरे हल्के से खड़े लन्ड की झलक शालिनी को मिल गई,,,, मैंने भी आराम से फ्रेन्ची में दबाकर लंड को एडजस्ट किया और जींस पहनने लगा,,,

और जैसी मुझे उम्मीद थी शालिनी ने मेरे लंड को देखकर हंसते हुए कहा...

शालिनी- हा हा हा,, जंगली ... जानवर

मैं उसका मतलब समझ गया कि वो मेरी बढ़ी हुई झांटों को देखकर ऐसा बोल रही है,,,, मैं भी मुस्कुराते हुए

मैं- कहां है जंगल और उसमें रहने वाला जंगली जानवर

शालिनी- वही जानवर जिसे तुम चढ्ढी में दबा रहे हो और कौन, हा हा हा हा

मैं- अरे यार , वो काफी दिनों से जंगल में सफाई नहीं करी है ना तभी झांटे थोड़ा बढ़ गई हैं,,, वापस आ कर जंगल को सफाचट मैदान बना दूंगा,,

शालिनी- (हंसते हुए) वो क्या बोला तुमने अभी,,,,, झांटे,,

मैं- हां,, तो,,, यहां के बालों को झांटे ही कहते हैं बेबो ,,,

शालिनी- जी गुरु जी,, हा हा हा हा,, झांटे,,,,

मैं- हां हां हंस लो,,, तुम्हारी भी तो बड़ी हो गई हैं,,,

शालिनी- मेरी अभी नहीं बढ़ी हैं,,, पीरियड में तो क्लीन करी थी मैंने,,,,, और तुमने कब देख ली मेरी,,,, झाअअ

मैं- हां, ज्यादा बड़ी नहीं है तुम्हारी झांटे अभी,,, वापस आ कर तुम भी क्लीन कर लेना,,,, वो शाम को जब तुम सो रही थी सिर्फ पैंटी में,,, तो थोड़े से दिख रहे थे भूरे भूरे से बाल,,,

 
शालिनी ये सुनकर शरमा गई और कमरे से बाहर निकलते हुए बात बदलते हुए बोली

शालिनी - हूं,,, बेशरम,,

भाई माम को काल करके बता दो,, हम लोग घर आ रहे हैं,,,

मैं- नहीं यार,,, रहने दो,, मम्मी को सरप्राइज देंगे,,,

शालिनी- ओके,,,

और वो फिर से कमरे में आ कर अपनी टी-शर्ट के अन्दर डियो स्प्रे करने लगी और फिर डियो मेरी तरफ बढ़ाया तो मैंने कहा,, तुम ही लगा दो

और शालिनी ने मेरे उपर से नंगे सीने और मेरी बगलों के अंदर डियो स्प्रे कर दिया,,,,,

हम दोनों तैयार हो कर घर से निकलने ही वाले थे कि शालिनी ने मुझसे कहा

शालिनी- भाई,,, वो मोबाइल में फोटो और वीडियो कैसे हाइड करते हैं,,

मैं- क्यों क्या हाइड करना है बेबी,, मोबाइल दो,, मैं एप डाउनलोड कर देता हूं,,,

शालिनी- भाई ये जो तुमने इतने सारे फोटो और वीडियो क्लिप भेजे हैं,,, वही हाइड करना है,,, यार कहीं मम्मी ने देख लिया तो गये काम से ....

मैं- ओ हो,,, बेबी सच में समझदार हो रही है,,,

और फोटो और वीडियो मैंने हाइड करना उसे बताया और फिर हम लोग घर को लाक करके,, पड़ोसी भाई साहब और भाभी जी से एक दो दिन में आने को बता कर हमारे घर का ध्यान रखने को कहकर बाय बाय बोलकर बाइक स्टार्ट करके निकल लिए,,,,,,

शालिनी इतने दिनों बाद घर जाने को लेकर बहुत उत्साहित थी , घर से बाहर निकल कर दिन की हल्की खिली हुई धूप में शालिनी का चेहरा एकदम दमक रहा था ये एक्सट्रा ग्लो कल पार्लर में हुए मेकओवर का कमाल था,,, और टाइट जींस और टी-शर्ट में वो बहुत ही हाट और सेक्सी लग रही थी,,, मेरे पीछे बाइक पर बैठी हुई आइटम बाम्ब को रास्ते में ऐसे ही घूर घूर कर देखने वालों की कभी नहीं है इस दुनिया में,,, जैसे अब तक मैं लड़कों की बाइक के पीछे से चूचियां रगड़ती हुई दूसरी लड़कियों को देखता था वैसे ही अब बारी दूसरों के एहसान उतारने की आती हुई थी और आजकल मैं भी पटाखा माल को अपनी बाइक पर लेकर निकलता हूं,,

और कुछ दूर चलने पर उसने कहा

शालिनी- भाई,, कहीं अच्छा सा डिपार्टमेंटल स्टोर देखकर कुछ कोल्ड ड्रिंक और चिप्स ले लो,,, मैं रास्ते भर ऐसे तो बोर हो जाऊंगी,,,

मैं- ठीक है,,, बट मेरा ये वादा है बेबी ,मैं तुम्हें रास्ते में बोर नहीं होने दूंगा,,,

और कुछ दूर बाद एक स्टोर के बाहर मैंने बाइक रोकी और शालिनी से कहा कि जाकर ले लो ,,, जो भी खाना है रास्ते में,,, और शालिनी बाइक से उतरकर स्टोर का शीशे का दरवाजा खोल कर अंदर गई,,, तभी मेरी नजर स्टोर में खड़ी हुई एक आइटम मतलब लड़की पर पड़ी,,,, और मैं भी बाइक का स्टैंड लगा कर स्टोर के अंदर शालिनी के पीछे जाकर खड़ा हो गया ।

मगर मेरी तिरछी नजर उस लड़की की पीठ पर दिखती हुई उसकी ब्रा स्ट्रिप और साइड से दिखती हुई उसकी चूचियों पर ही अटकी थी,,, नीचे उसने एक निक्कर पहनी थी जो कि सिर्फ उसके चूतड़ों को छुपाने के काम आ रही थी,,, लड़की सांवली सी थी मगर पीछे से आकर्षक लग रही थी,, उसकी जांघें बहुत ही भरी भरी थी और मैं शालिनी के पीछे पेमेंट काउंटर पर खड़ा था,, बेखबर,,,

 
शालिनी ने कोल्ड ड्रिंक और चिप्स लेकर पेमेंट कर दिया और मेरी नज़रों का पीछा करते हुए उसने देखा कि मैं एक टक उस लड़की को घूरे जा रहा हूं,,, और उसने धीरे से मेरा हाथ पकड़ कर कहा,,,

शालिनी- गुरु जी,,, चलें कि अभी आंखों की रोशनी और बढ़ानी है,,,

और वो मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर बाहर बाइक तक ले आई,,,

मैं बाइक स्टार्ट कर के चलने ही वाला था कि तभी उस लड़की ने सामने शीशे के दरवाजे को खोला,,, बाहर निकलने के लिए,,,, और उसके चेहरे को देखकर मेरे सारे अरमान सो गए,,, बड़ी ही अजीब सी लग रही थी,,, और कपड़े भी अजीब ही तरीके से पहन रखी थी,,, वो मेरे पास से निकलते हुए सड़क के दूसरी तरफ खड़ी अपनी कार की ओर बढ़ी,,,

साली पीछे से मस्त चुदासी आईटम लग रही थी और सामने से चेहरा देखकर खड़ा लंड भी मुरझा जाता,,,, मेरे लिए यह एकदम बेइज्जती महसूस करने वाला पल था,,, साला यहां चौबीस घंटे एक दम पटाखा माल मेरे पास रहता है और मैं इस घटिया आईटम को देखने के चक्कर में स्टोर के अंदर तक चला गया था,,,,

खैर मैंने बाइक स्टार्ट की और शालिनी ने मेरे पीछे बैठते ही मुझे चिढ़ाने के लिए मेरी पीठ पर मुक्का मारते हुए बोला,,,

शालिनी- आईला,,, गुरु जी के साथ तो धोखा हो गया,,, घूर घूर ना देख बलिए......

और वो गाने की तरह गुनगुनाने लगी,,,

मैं- "उर ना बुर, चली फतेपुर"

और मैं बाइक की स्पीड बढ़ाते हुए थोड़ा सा गुस्से में बोल गया...

शालिनी मेरे कान के पास अपने मुंह को लगाकर बोली,,,

शालिनी- क्या,, क्या कहा तुमने भैय्या,,?

मैं- अरे कुछ नहीं वो हम लड़कों की भाषा है,,, ऐसे घटिया आईटम्स के लिए,,,

शालिनी- लड़कों की भाषा मतलब,,, इसका मतलब क्या है यार,,, बताओ ना भाई,,

मैं- अच्छा सुनो इसका मतलब ये है कि ऐसी लड़कियां जो अपने घटिया लुक्स को अच्छे कपड़ों में छुपा कर जबरदस्ती सेक्सी बनने की कोशिश करतीं हैं ना,, उन्हीं को कहते हैं...

शालिनी- हा हा हा,, मतलब जिन लड़कियों की शकल सूरत अच्छी नहीं है वो अच्छे कपड़े भी ना पहनें,,, और क्या क्या कहते हो तुम लड़के लोग,, ऐसी लड़कियों को देखकर,,,

मैं- यार जब बाडी दिखाने लायक हो तभी दिखाना चाहिए,, इस लड़की की तरह जो निकलेगी, उसे लोग कहेंगे ही,,,,,

"चूत ना चूंची नखरे नूरजहां के"

शालिनी ने शायद जानबूझकर अपनी गुदाज चूचियों को मेरी पीठ पर दबाया और

शालिनी- हा हा हा हा,, ये वाला तो और भी मजेदार है,,, ना चू,, ना चूं,,, ,हा हा हा क्या क्या लाजिकल कमेंट्स करते हो तुम लोग,,

मैं- हम लोग क्या,, लड़कियां भी तो करती हैं ,, लाजिकल कमेंट्स,,,

शालिनी- मैं तो नहीं करती,,, और हां उस हाईक्लास मैडम के बारे में तुम्हारा आधा कमेंट सही नहीं था,,, ब्रेस्ट तो ठीक ही थी उसकी,,,

मैं (हंसते हुए)- हा हा हा,, अरे बेबो,,, उसकी चूचियां भी ब्रा के सहारे ही टाईट लग रही थी,,

ऐसों की जब ब्रा में कसी हुई चूचियां देखो तो जबराट गोल खरबूजे,,,,, और ब्रा के खुलते ही पिलपिली लौकी जैसे लटकती हुई ,,,,,

शालिनी ने फिर से मेरे पीठ पर मुक्का मारते हुए मुझसे कहा

शालिनी- ओह माय गॉड,,, तुम लड़के भी ना,,,, लो चिप्स खाओ और कोल्ड ड्रिंक पिओ और पिलपिली लौकी वाली मैडम के ख्यालों से बाहर निकलो,, मेरे राजा भैया,,,

और उसने चलती हुई बाईक पर मुझे अपने हाथों से चिप्स खिलाया फिर मेरे मुंह में कोल्ड ड्रिंक लगाई,,,

शालिनी- वैसे मैडम ने ब्रा अच्छी पहनी थी,,, कलर अपीलिंग था,,,

मैं- अरे छोड़ो भी उसे,,, अच्छी ब्रा में अच्छी चूचियां और अधिक अच्छी दिखती है,,,

शालिनी- हूं,,,,तो जनाब, इसके भी एक्सपर्ट हैं,,, हा हा हा

मैं- वैसे तुम क्यों इतना परेशान हो,, तुम्हारी तो जबराट खरबूजे जैसी हैं,,,ब्रा के साथ भी और ब्रा के बिना भी,,,

शालिनी बहुत जोर से चिल्लाकर बोली

शालिनी- भाई ईईईई,,अब तुम अपनी बहन की भी देखने लगे हो क्या,,, यू बैड ब्वाय...

मैं- अरे यार, अब क्या मैं अपनी बहन की तारीफ भी ना करूं,,, और तब जबकि वो इस धरती पर आई हुई सबसे हसीन लड़कियों में से एक हो,,, मैं तो अपने आप को नहीं रोक पाऊंगा,,,

 
शालिनी ने मेरे पेट में पीछे से हल्की सी गुदगुदी लगाई और मैंने उसे मना किया कि ये हाईवे है बेबी,, ज्यादा मजाक नहीं,, गाड़ी डिसबैलेंस हो जायेगी,,

खैर,,, ऐसे ही हंसी मजाक करते हुए हम दोनों शहर से काफी दूर निकल आए थे और अब कंक्रीट के जंगलों के बजाय चारों ओर हरियाली नजर आ रही थी मगर धूप धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी,,, हम लोगों को बाइक से चलते हुए करीब दो घंटे हो गए थे और मुझे जोरों की पेशाब लगी थी और मैंने एक जगह जहां पर काफी हरियाली थी,, वहीं पर बाइक साइड में खड़ी कर दी,,, और शालिनी से उतरने को कहा....

शालिनी- क्या हुआ भाई,, बाइक क्यों रोक दी,,,

मैं- अरे बेबो,, नहीं रोकता तो जो कोल्ड ड्रिंक पिला पिला कर तुमने मेरा गाल ब्लैडर भर दिया है ना वो फट ही जायेगा,,,

और मैंने बाइक को फुल स्टैंड पर लगाया तो शालिनी भी बोली....

शालिनी- लगी तो मुझे भी है,,

मैं- तो कर लो यार,, किसी ने रोका है क्या??

शालिनी- यहां पर कैसे,, सब गाडियां निकल रही हैं,,, तुम्हारा क्या कहीं भी कर सकते हो...

मैं- तो ठीक है मत करो,,, जब फट जायेगा गाल ब्लैडर तो करना..... अच्छा सा मुहुर्त देखकर,,,

और मैं थोड़ा सा आगे बढ़ा तभी शालिनी पीछे से बोली,,,

शालिनी- प्लीज़ भैया मजाक नहीं,, सच्ची बड़ी तेज लगी है सु सू ,,,

मैं- अच्छा ठीक है इधर आगे आओ और उधर थोड़ा सा नीचे जाकर उन पेड़ों की आंड़ में कर लो,,

और शालिनी मुझसे करीब दस कदम आगे बढ़कर अपने दायें बायें देखकर थोड़ा संकोच के साथ अपनी जींस का बटन खोल कर बड़ी तेजी से एक साथ जीन्स और पैंटी को नीचे करके बैठ गई और मैं ऐसे एंगल पर खड़ा था जहां से मुझे उसके लालिमा लिए हुए गोल चूतड़ों के दर्शन हो गए और शालिनी पेशाब करने के बाद बड़ी तेजी से फिर खड़ी हुई और साथ ही साथ उसने अपनी जींस और पैंटी भी उपर खींच ली,,, जिससे मुझे ज्यादा कुछ नहीं दिखा,,, मेरे सामने शालिनी पेशाब कर रही है ये सोच कर ही लंड महाराज टाईट होने लगे,,,, हो भी क्यों ना,,,

शालिनी अपनी जींस ठीक करते हुए थोड़ा सा आगे मेरी ओर बढ़ी और मेरे पास आ कर बोली

शालिनी- ओह यार,,, इट फील्स गुड नाऊ,,,, चलो भाई,,

मैं- अरे मैं भी तो कर लूं,,

शालिनी- तो करो ना,,,

और इतना कहकर वो मेरे पास ही खड़ी रही,,,,,, मैंने भी कुछ सेकंड रुककर अपनी ज़िप खोल कर लन्ड को बाहर निकाल लिया और मूतने लगा,,,,, शालिनी मेरे बराबर में खड़ी थी और बड़े गौर से मेरे अधखड़े लन्ड को देख रही थी,,,, मैंने मजा लेते हुए अपने लौड़े को हल्के से हिलाया तो मेरे मूत की धार और दूर गिरने लगी,,,

क्या हसीन मौका था,,,, हाईवे के किनारे मैं खड़ा मूत रहा था और मेरी बहन शालिनी मुझे मूतते हुए देख रही थी,,,काश वो मेरे लौड़े को अपने हाथों में पकड़ ले तो मजा आ जाये,,,, मेरा मूत अब निकलना बंद हुआ तो मैंने लंड को हिला हिला कर आखिरी बूंदें टपकाई,,, मगर अब तक मेरा सात इंची लम्बा लौड़ा अपने पूरे शबाब पर आ गया था और मैं भी आराम से अपने लौड़े को जींस में घुसेड़ने की कोशिश करने लगा,,,

मगर लंड और टाइट होता जा रहा था,, खड़े लन्ड को जींस की छोटी सी ज़िप के रास्ते अंदर करना नामुमकिन लगा तो मैंने अपनी बेल्ट और जींस का बटन खोल कर उसे नीचे करके अपने लंड को एडजस्ट करके फ्रेन्ची में दबाकर बंद किया और मैंने अपनी नजर शालिनी से मिलाई तो वह मुझे देख कर मुस्कुराते हुए बोली

शालिनी- क्या उसे तोड़ने का इरादा है,,

मैं- नहीं भई,,, तोड़ दिया तो सु सू कहां से करूंगा, हा हा हा,,

शालिनी- हा हा हा,,, वैसे भाई तुमने अपने छुन्नू को जैसे दबाया है अंदर दर्द नहीं होता है क्या ?

मैं- क्यों,,, तुम अपने खरबूजों को ब्रा में दबाकर रखती हो तो क्या दर्द होता है,,

शालिनी- हूं,,, पागल क्या उसमें हड्डी होती है जो टूट जायेंगे और दर्द होगा,,,

मैं- तो क्या मेरे लंड में हड्डी है जो टूट जायेगी,,,

शालिनी (आश्चर्य से)- व्हाट,,, इसमें हड्डी नहीं होती तो ये ऐसे इतना कड़क कैसे हो जाता है?

 
मैं- बेबी,, इसमें कोई हड्डी नहीं होती है,,, एक्साइट होने पर इसकी मसल्स टाईट हो जाती हैं और ये बड़ा और कड़क हो जाता है,

ये बोलकर मैं शालिनी का हाथ पकड़ कर ऊपर की ओर ढलान पर चढ़ने लगा,,,

शालिनी- हूं,, (धीरे से चलते हुए) तो अभी तुम एक्साइट कैसे हो गए,,,?

मैं- (झूठ बोलते हुए) मैं कहां एक्साइट हूं,,,,

शालिनी- झुट्ठे कहीं के,,, क्या मैंने देखा नहीं अभी,,, जब तुमने उसे बाहर निकाला तब तो छोटा सा था और सु सू करते करते वो कितना बड़ा हो गया और और वो अंदर भी नहीं जा रहा था,,,

हम दोनों बाइक के पास आ गये और शालिनी ने बैग से पानी की बोतल निकाली हम दोनों ने हाथ धुले और,,, शालिनी ने बैग अपनी पीठ पर टांग लिया और हम दोनों बाइक पर सवार होकर आगे चल दिए,,,,,

अभी हम लोग आधे रास्ते में ही थे और हल्के हल्के से ऊंचे नीचे टीले जैसे पहाड़ी रास्ते पर चल रहे थे,,, कुछ दूर बाद एक बड़ी नदी आने वाली थी,,,,

नदी का पुल काफी लम्बा था और कुछ लोग वहां पुल पर खड़े होकर सेल्फी ले रहे थे तो मैंने भी बाइक बीच पुल पर रोक दी,,

हम दोनों भी सेल्फी पोज लेने लगे,,, काफी अच्छा नजारा था आसपास,,, यहां ठंडी हवाओं के कारण थोड़ी गर्मी भी कम लग रही थी,,,

हमारे पास में ही एक कपल सेल्फी ले रहे थे और आपस में बात कर रहे थे

लड़का- जानू,, चलो ना उधर टीले के पीछे एक वाटरफॉल है,,, वहां नहाते हैं और मस्त सेल्फी लेते हैं,,,

लड़की- हां,, बट यार सेफ है वो जगह,,,,, मुझे जंगल में बहुत डर लगता है,,

लड़का- बिल्कुल सेफ है और उधर ज्यादा लोग जाते भी नहीं है,,, सिर्फ कपल्स ही मिलेंगे उधर,,,

लड़की- ठीक है चलो यार झरने के पानी में नहाने का मजा ही अलग है,,

ये सब सुन कर मेरे दिमाग में तुरंत आईडिया आया कि क्यों ना हम लोग भी वहां जाकर झरने के पानी में नहाने का आनंद लें और मैंने शालिनी से कहा..

मैं- बेबी,,, क्या हम लोग भी चलें,,, मजा आ जायेगा वाटर फाल में,,, मेरा तो मन कर रहा है,,,

शालिनी- हां, चल सकते हैं अभी तो टाईम भी बहुत है,,, थोड़ी देर रुक कर घर के लिए निकलेंगे,,, बट मुझे नहाना नहीं है,,, तुम नहाना,,,

और मैंने भी अपनी बाइक उस लड़के की बाइक के पीछे लगा दी,,, कुछ दूर हाईवे पर चलने के बाद एक कच्चे रास्ते पर उसने बाइक मोड़ दी और भी उनके पीछे चलता रहा,,,,।।

मैं ये सोचते हुए बाइक चला रहा था कि शालिनी का नजरिया भी धीरे धीरे मेरे प्रति थोड़ा बदल सा गया है। आज सुबह से मैं उसे दो बार अपना लंड दिखा चुका था और पेशाब करते हुए मेरा लंड देख कर शालिनी खुद हवस की आग में जली होगी और मेरे उकसाने पर उसने खुद अपनी चूत की आग को शांत करने के लिए पहले भी उंगलिओ से हस्तमैथुन किया था , क्या अभी अगर मैं फिर से कोशिश करूं तो बात कुछ और आगे बढ़ जाये शायद ,,,

उधर शालिनी भी उस पल को नहीं भुला पा रही थी जब बाथरूम में उसने पहली बार अपनी ब्रा पर लगे मेरे लंड से निकले कामरस को उंगलिओ से लेकर चाटा था हालाँकि उसे तब तक ये पता नहीं था की वो मेरा वीर्य है लेकिन कहीं न कहीं मेरे प्रति उसका रवैया और नजरिया बदला था और धीरे धीरे हम लोगों में और अधिक खुलकर बातें और छेड़छाड़ होने लगी थी,,,,

शालिनी शायद अब भी रिश्ते की मर्यादा को लांघना नहीं चाहती थी इसलिए स्वयं ही अपने मन को स्थिर करती है ।*

इधर मेरा भी शालिनी के प्रति लगाव बढ़ता जा रहा था और अब मेरी हवस में प्यार भी आ गया था । हमदोनों शांत बैठे थे बाइक पर और चलते जा रहे थे,,,तभी शालिनी बोलती है

शालिनी- वाऊ ,,, भाई कितना मस्त नजारा है,,, हमारे घर के इतने करीब है ये और हम लोगों को इसके बारे में अब तक पता नहीं था,,,

मैं- हां,,, मुझे भी पता नहीं था जबकि मैं तो बाइक से ही इस रास्ते से कई बार घर जा चुका हूं,,, कोई नहीं शायद इस हसीन नज़ारे को देखना एक हसीना के साथ ही लिखा था इसलिए आज से पहले यहां आना नहीं हुआ,,,,

शालिनी- अच्छा तो सामने वाली बाइक पर सवार हसीना का शुक्रिया अदा हो रहा है,,

मैं- नहीं तो,,, मैं तो अपनी बाइक पर बैठी हसीना की बात कर रहा हूं बेबी,,

और शालिनी हंसते हुए बोली

शालिनी- तुम बाज नहीं आओगे,,,

तभी बातें करते करते झरने वाली जगह आ जाती है और वो कपल अपनी गाड़ी पहाड़ के बीच बने रास्ते पर ले जाता है और बड़े बड़े पहाड़ो के बीच गाडी रोक देता है । हमने भी अपनी बाइक वही पास में खड़ी कर दी और जैसे ही गाड़ी से आगे निकलते हैं वहां का सुन्दर वातावरण देख कर खुश हो जाते हैं ।

दो छोटे-छोटे पहाड़ो के बीच विशाल नदी जिसका पानी ऊँचे पहाड़ की चट्टान से गिर रहा था*,,,,

जगह इतनी सुन्दर और शांत थी की घंटो बैठकर उस जगह का आनंद लिया जा सकता है । शालिनी तो उस झरने को देख कर बहुत ज्यादा खुश हो गई और तुरंत छोटे छोटे पहाड़ो पर चढ़कर उस झरने के पास जाकर देखती है ।

वहां पर आने पर पता चला कि यहां छोटे छोटे काफी झरने हैं,,

झरने का पानी जैसे ही नीचे गिरता उसकी बौछार शालिनी के ऊपर आती है। हम दोनों उस सुन्दर वातावरण को देखने लगते हैं ।

दो चार प्रेमी प्रेमिका भी आए हुए थे जो उस झरने का आनंद ले रहे थे और नदी के बहते पानी में नहा रहे थे । एक प्रकार का पर्यटन स्थल था ये झरना जहां पर सिर्फ प्रेमी प्रेमिका आकर मौज मस्ती किया करते थे शहर और गांव के कोलाहल से दूर,,,,

झरने के नीचे नहाते लोगों को देख कर शायद शालिनी का बहुत मन कर रहा था नहाने का लेकिन वो तो पहले ही मना कर चुकी थी नहाने के लिए,,,,

हम दोनों हाथों में हाथ डाल कर कुछ देर तक इधर-उधर घूमते रहे,,, और थोड़ा आगे जाने पर एक जगह दो लड़कियां ऐसे नहा रही थी कि उन्हें देख कर शालिनी के साथ साथ मैं भी थोड़ा सा आश्चर्यचकित हो गया वो दोनों लड़कियां उपर से बिल्कुल नंगी थी और एक दूसरे पर पानी उछाल उछाल कर मज़े ले रही थी और उन्हें हम दोनों के या किसी और के देखने से बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ा और तभी उनमें से एक लड़की ने अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को अपने ही हाथों से दबाने लगी और साथ ही मोबाइल से सेल्फी पोज भी लेने लगी,,,,

शालिनी ये सब देखकर मेरे हाथ को पकड़े हुए ही आगे चलने लगी और मेरी तरफ देख कर हल्का सा मुस्कुरा दी,,,मेरा लन्ड उन दोनों लड़कियों को देखकर उत्तेजित हो गया था और मैं जल्दी से पानी में उतर कर अपने आप को ठंडा करना चाहता था,,,

कुछ दूर निकल कर आने के बाद

मैं- चलो नहाते हैं यहां,,, इधर इस पास भी कोई नहीं है,,,

शालिनी- नहीं,,, मुझे नहीं नहाना,, तुम नहाओ,,, वैसे भी तुम आंखें सेककर गर्म हो गए होगे,,, है ना भाई,,, हा हा हा

मैं- ठीक है तुम इधर ही बैठो चट्टान पर,,, मैं तो चला इस ठंडे ठंडे पानी का मजा लेने,,,

और शालिनी ने अपनी पीठ से बैग उतार कर नीचे चट्टान पर रख दिया और मैं भी अपने कपड़े उतारने लगा,, मैंने सिर्फ चड्डी नहीं उतारी और शालिनी की ओर देखते हुए पानी में छलांग लगा दी,,, वो वहीं से बैठकर मुझे पानी में मस्ती करते हुए देखती रही और मोबाइल से फोटो भी लेती रही,,, पानी ज्यादा गहरा नहीं था और मैं दूर तक तैर कर जाता फिर शालिनी के पास चट्टान के पास आकर उसके ऊपर पानी की छींटे मारकर भाग जाता,,,,

 
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