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Guest
ऐसा मैंने कई बार किया और शालिनी भी थोड़ा किनारे पर आकर मेरे उपर पानी फेंकने लगी,,, मेरे पानी फेंकने से उसकी टी-शर्ट काफी ज्यादा भीग गई थी और उसकी ब्रा की रूपरेखा नजर आने लगी थी,,,,
मैंने कई बार उससे कहा कि आ जाओ बहुत मजा आ रहा है ठंडे ठंडे पानी में,,,तरो ताजा हो जाओगी,,,, मगर वो अभी भी संकोच कर रही थी शायद मेरे साथ इस खुली हुई जगह पर नहाने में,,,,,,,,
इस बार जैसे ही उसी चट्टान पर नीचे हो कर शालिनी मुझ पर पानी फेंकने की कोशिश करती है तो उसका पैर फिसल जाता है और झरने के बहते पानी में वो गिर जाती है , खैर उसे तैरना आता था,,, मगर जैसे ही कुछ गिरने की आवाज़ सुनी मैंने तो देखा कि शालिनी पानी में गिर गई है । नदी ज्यादा गहरी नहीं थी शालिनी की चूचियों तक पानी था । मैं जल्दी से तैरता हुआ उसके पास आया और उसे अपनी बांहों में भर कर सम्हालने लगा,,, और उसके शरीर को जोर से भींच कर मैंने उसके पेट को दबाया तो शालिनी को*एक तेज धार के साथ उल्टी हुई और सारा पानी उसके मुँह से निकल गया,, थोड़ी देर में वो सामान्य हो गई।
मैं अभी भी उसको बाहों में थामे हुए था, वो मेरे उपर से नंगे जिस्म और मजबूत बाँहों में अभी तक चिपटी हुई थी । वो महसूसबार किसी पुरुष के जिस्म को इस तरह भीगे बदन महसूस कर रही थी वो भी उसका भाई । शालिनी की सांसें तेज हो गई और दिल तेजी से धड़कने लगा,, शायद उसकी चूत से पानी में पानी रिसने लगा था और उसे इसका एहसास हुआ तो वह मुझसे थोड़ा सा अपने बदन को दूर कर ली,,,, मैं तो आज सुबह से ही शालिनी और मेरे बीच की बातें सुनकर और रास्ते में मूतने के बहाने उसे अपना लौड़ा दिखाने से गर्म हो रहा था मेरा लंड अभी भी अकड़ा हुआ था । शालिनी के कामुक जिस्म को छूकर मेरा लंड कब खड़ा हो जाता है मुझे पता भी नहीं चलता है,,, इतनी सेक्सी लड़की के खयाल से ही लौड़े झटके लेने लगते हैं हम जैसे कुंवारे लड़कों के,,,
जब शालिनी मुझसे अलग हुई तब मैंने अपने लंड की अकड़न को महसूस किया जो फ्रेन्ची से बाहर आने को बेताब हो रहा था ,,,, मैं अपने मन को नियंत्रित करते हुए
मैं- चोट तो नहीं आई?*
शालिनी- चोट तो नहीं आई है भैय्या लेकिन मेरे सारे कपडे भीग गए, अब में भीगे कपड़े पहन कर घर कैसे जाउंगी,, वो चिंतित होती हुई बोली*
मैं- पहले तुम नहा लो अब भीग तो गई ही हो और बैग में जो कपड़े हैं उसमें से निकाल कर पहन लेना,,, सो सिम्पल,,
शालिनी- वो तो ठीक है लेकिन घर पर भीगे हुए कपड़े मम्मी ने देख लिया तो उनको क्या बताएंगे,,,
मैं- हर प्राब्लम का सोल्यूशन है बेबी,,, अरे यार कुछ भी बता देना या फिर ऐसा क्यों नहीं करती तुम,,, ये कपड़े उतार कर उस चट्टान पर डाल दो और जब तक ये थोड़ा सूख जाए तब तक हम लोग नहाते हैं,, कम आन यार,,, इतना मस्त नजारा है,,,
शालिनी- कपड़े सूखने में 2 घंटे लगेंगे तब तक में क्या पहन कर रहूंगी,
मैं- तब तक तुम पानी में नहाओ, 2 घंटे तक पानी के अंदर ही रहो,, कुछ मत पहनो और क्या ,,,
शालिनी- ओह्हो भाई इतने ठन्डे पानी में 2 घंटे तक रहूं,, और बिना कपड़ों के,, पागल मैं नंगी नहीं हो सकती यहां,, यार समझा करो,,,
मैं- क्या बेबो,,, अभी देखा नहीं पीछे उधर वो दोनों लड़कियां भी तो बिना कपड़ों के मजे कर रही थी,,
शालिनी- नहीं भाई,, मुझसे नहीं होगा और उन बेशरम लड़कियों की तो तुम बात ही मत करो,, खैर,,उन्होंने भी कम से कम पैंटी तो पहन ही रखी है,,
मैं- ओह बेबी,, अब यार यहां कोई भी कपड़े पहन कर तो नहीं नहा रहा है और सब एक जैसे ही है,, कोई किसी को डिस्टर्ब नहीं कर रहा,,
मैंने काफी समझाया उसे कि यहां इस तरफ कोई हमें देख नहीं रहा है और मैं तो तुम्हें पहले भी देख ही चुका हूं हर तरह से.... ब्रा पैंटी में और बिना ब्रा के भी,,,तो मुझसे कैसी शरम ,,,
आखिर कार मेरी बहस में जीत हुई और शालिनी अपनी जींस और टी-शर्ट उतार कर सिर्फ ब्रा पैंटी में नहाने के लिए तैयार हो ही गई,,,,,
और वो धीरे धीरे पानी से बाहर निकल कर सामने की बड़ी चट्टान के पास गई और एक बार फिर से आस पास देखने के बाद बैठकर अपनी जींस निकाल दी,,,,, मैं भी किनारे पर आकर उसके आने का वेट करने लगा
तभी शालिनी खड़ी हुई और उसकी गोरी गोरी टांगें धूप में अलग ही चमक बिखेर रही थी उपर की टी-शर्ट उसने अब तक उतारी नहीं थी,,,
उसने मेरी तरफ देखते हुए अपनी उंगली से सु-सू करने का इशारा किया और वो बड़ी चट्टान से आगे चलकर पेशाब करने के लिए लहराते हुए कदमों से जाने लगी,,,, उसका ये रूप और भी कातिलाना अंदाज दिखा रहा था,,, शायद इसीलिए जानकर कहते हैं कि लड़कियों के कपड़े एक एक करके उतरने/उतारने का मजा ही कुछ और है,,, उसके चलने से उसके दोनों चूतड़ों की आपसी रगड़ और थिरकन को उसकी छोटी सी पैंटी कहां छुपा पाती,,,,
मैं वहीं किनारे पर पानी में बिल्कुल किनारे लेटे जैसे था कि तभी सामने से शालिनी मुझे हाथ के इशारे से अपनी ओर बुला रही थी और साथ ही उसने दूसरे हाथ की एक उंगली अपने होंठों के उपर रख रखी थी जैसे वो कह रही हो कि भाई जल्दी से मेरे पास आ जाओ मगर बिना आवाज किए...
मुझे लगा कि वो मुझे कुछ दिखाना चाहती है और मैं चुपचाप पानी से निकलकर दबे पांव शालिनी के पास पहुंच गया,,,
मैंने उसे इशारे से पूछा कि क्या है पर वो बोली कुछ नहीं और दबे पांव आगे बढ़ी मैं भी उसके पीछे पीछे चल दिया,,,, करीब पंद्रह कदम चलकर वो रुक गई और मेरे हाथ को पकड़ कर सामने पड़े हुए दो बड़े पत्थरों के बीच की झिरी में देखने का इशारा किया.....
मैंने एक कदम आगे बढ़ा कर शालिनी से सटकर खड़े होकर उस झिरी में देखा तो दोनों पत्थरों के उस पार दो जवान जिस्म एक दूसरे में ऐसे समाये हुए थे जैसे जन्मों के प्यासे हों और एक दूसरे में समा जाना चाहते हों,,,, उनके सारे कपड़े वही पास में बिखरे पड़े हुए थे और वो दोनों आराम से बातें करते हुए एक दूसरे के अंगों को चूम रहे थे और चाट रहे थे,,, ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें किसी के देखने का जरा भी डर ना हो,,,
खैर, वैसे तो मैं बहुत ज्ञानी बनता था शालिनी के सामने सेक्स संबंधित बातों में,,, मगर इस बार सच में मेरी भी घिग्घी बंध गई थी,,, मैंने कभी किसी को असलियत में इस तरह नंग धड़ंग चुदाई की तैयारी करते हुए नहीं देखा था अब तक,,, मेरा सारा ज्ञान वीडियो क्लिप तक ही सीमित था,,, लाईव वीडियो का मेरा भी यह पहला मौका था और शालिनी का भी,,
हम दोनों ने एक साथ एक दूसरे की नजरों में देखा और इस बार हम दोनों को थोड़ी सी झेंप लगी और हम एक-दूसरे की आंखों में देखने की बजाय फिर से झिरी में देखने लगे,,, उधर अब तक एंगल बदल चुका था,,,
मैंने कई बार उससे कहा कि आ जाओ बहुत मजा आ रहा है ठंडे ठंडे पानी में,,,तरो ताजा हो जाओगी,,,, मगर वो अभी भी संकोच कर रही थी शायद मेरे साथ इस खुली हुई जगह पर नहाने में,,,,,,,,
इस बार जैसे ही उसी चट्टान पर नीचे हो कर शालिनी मुझ पर पानी फेंकने की कोशिश करती है तो उसका पैर फिसल जाता है और झरने के बहते पानी में वो गिर जाती है , खैर उसे तैरना आता था,,, मगर जैसे ही कुछ गिरने की आवाज़ सुनी मैंने तो देखा कि शालिनी पानी में गिर गई है । नदी ज्यादा गहरी नहीं थी शालिनी की चूचियों तक पानी था । मैं जल्दी से तैरता हुआ उसके पास आया और उसे अपनी बांहों में भर कर सम्हालने लगा,,, और उसके शरीर को जोर से भींच कर मैंने उसके पेट को दबाया तो शालिनी को*एक तेज धार के साथ उल्टी हुई और सारा पानी उसके मुँह से निकल गया,, थोड़ी देर में वो सामान्य हो गई।
मैं अभी भी उसको बाहों में थामे हुए था, वो मेरे उपर से नंगे जिस्म और मजबूत बाँहों में अभी तक चिपटी हुई थी । वो महसूसबार किसी पुरुष के जिस्म को इस तरह भीगे बदन महसूस कर रही थी वो भी उसका भाई । शालिनी की सांसें तेज हो गई और दिल तेजी से धड़कने लगा,, शायद उसकी चूत से पानी में पानी रिसने लगा था और उसे इसका एहसास हुआ तो वह मुझसे थोड़ा सा अपने बदन को दूर कर ली,,,, मैं तो आज सुबह से ही शालिनी और मेरे बीच की बातें सुनकर और रास्ते में मूतने के बहाने उसे अपना लौड़ा दिखाने से गर्म हो रहा था मेरा लंड अभी भी अकड़ा हुआ था । शालिनी के कामुक जिस्म को छूकर मेरा लंड कब खड़ा हो जाता है मुझे पता भी नहीं चलता है,,, इतनी सेक्सी लड़की के खयाल से ही लौड़े झटके लेने लगते हैं हम जैसे कुंवारे लड़कों के,,,
जब शालिनी मुझसे अलग हुई तब मैंने अपने लंड की अकड़न को महसूस किया जो फ्रेन्ची से बाहर आने को बेताब हो रहा था ,,,, मैं अपने मन को नियंत्रित करते हुए
मैं- चोट तो नहीं आई?*
शालिनी- चोट तो नहीं आई है भैय्या लेकिन मेरे सारे कपडे भीग गए, अब में भीगे कपड़े पहन कर घर कैसे जाउंगी,, वो चिंतित होती हुई बोली*
मैं- पहले तुम नहा लो अब भीग तो गई ही हो और बैग में जो कपड़े हैं उसमें से निकाल कर पहन लेना,,, सो सिम्पल,,
शालिनी- वो तो ठीक है लेकिन घर पर भीगे हुए कपड़े मम्मी ने देख लिया तो उनको क्या बताएंगे,,,
मैं- हर प्राब्लम का सोल्यूशन है बेबी,,, अरे यार कुछ भी बता देना या फिर ऐसा क्यों नहीं करती तुम,,, ये कपड़े उतार कर उस चट्टान पर डाल दो और जब तक ये थोड़ा सूख जाए तब तक हम लोग नहाते हैं,, कम आन यार,,, इतना मस्त नजारा है,,,
शालिनी- कपड़े सूखने में 2 घंटे लगेंगे तब तक में क्या पहन कर रहूंगी,
मैं- तब तक तुम पानी में नहाओ, 2 घंटे तक पानी के अंदर ही रहो,, कुछ मत पहनो और क्या ,,,
शालिनी- ओह्हो भाई इतने ठन्डे पानी में 2 घंटे तक रहूं,, और बिना कपड़ों के,, पागल मैं नंगी नहीं हो सकती यहां,, यार समझा करो,,,
मैं- क्या बेबो,,, अभी देखा नहीं पीछे उधर वो दोनों लड़कियां भी तो बिना कपड़ों के मजे कर रही थी,,
शालिनी- नहीं भाई,, मुझसे नहीं होगा और उन बेशरम लड़कियों की तो तुम बात ही मत करो,, खैर,,उन्होंने भी कम से कम पैंटी तो पहन ही रखी है,,
मैं- ओह बेबी,, अब यार यहां कोई भी कपड़े पहन कर तो नहीं नहा रहा है और सब एक जैसे ही है,, कोई किसी को डिस्टर्ब नहीं कर रहा,,
मैंने काफी समझाया उसे कि यहां इस तरफ कोई हमें देख नहीं रहा है और मैं तो तुम्हें पहले भी देख ही चुका हूं हर तरह से.... ब्रा पैंटी में और बिना ब्रा के भी,,,तो मुझसे कैसी शरम ,,,
आखिर कार मेरी बहस में जीत हुई और शालिनी अपनी जींस और टी-शर्ट उतार कर सिर्फ ब्रा पैंटी में नहाने के लिए तैयार हो ही गई,,,,,
और वो धीरे धीरे पानी से बाहर निकल कर सामने की बड़ी चट्टान के पास गई और एक बार फिर से आस पास देखने के बाद बैठकर अपनी जींस निकाल दी,,,,, मैं भी किनारे पर आकर उसके आने का वेट करने लगा
तभी शालिनी खड़ी हुई और उसकी गोरी गोरी टांगें धूप में अलग ही चमक बिखेर रही थी उपर की टी-शर्ट उसने अब तक उतारी नहीं थी,,,
उसने मेरी तरफ देखते हुए अपनी उंगली से सु-सू करने का इशारा किया और वो बड़ी चट्टान से आगे चलकर पेशाब करने के लिए लहराते हुए कदमों से जाने लगी,,,, उसका ये रूप और भी कातिलाना अंदाज दिखा रहा था,,, शायद इसीलिए जानकर कहते हैं कि लड़कियों के कपड़े एक एक करके उतरने/उतारने का मजा ही कुछ और है,,, उसके चलने से उसके दोनों चूतड़ों की आपसी रगड़ और थिरकन को उसकी छोटी सी पैंटी कहां छुपा पाती,,,,
मैं वहीं किनारे पर पानी में बिल्कुल किनारे लेटे जैसे था कि तभी सामने से शालिनी मुझे हाथ के इशारे से अपनी ओर बुला रही थी और साथ ही उसने दूसरे हाथ की एक उंगली अपने होंठों के उपर रख रखी थी जैसे वो कह रही हो कि भाई जल्दी से मेरे पास आ जाओ मगर बिना आवाज किए...
मुझे लगा कि वो मुझे कुछ दिखाना चाहती है और मैं चुपचाप पानी से निकलकर दबे पांव शालिनी के पास पहुंच गया,,,
मैंने उसे इशारे से पूछा कि क्या है पर वो बोली कुछ नहीं और दबे पांव आगे बढ़ी मैं भी उसके पीछे पीछे चल दिया,,,, करीब पंद्रह कदम चलकर वो रुक गई और मेरे हाथ को पकड़ कर सामने पड़े हुए दो बड़े पत्थरों के बीच की झिरी में देखने का इशारा किया.....
मैंने एक कदम आगे बढ़ा कर शालिनी से सटकर खड़े होकर उस झिरी में देखा तो दोनों पत्थरों के उस पार दो जवान जिस्म एक दूसरे में ऐसे समाये हुए थे जैसे जन्मों के प्यासे हों और एक दूसरे में समा जाना चाहते हों,,,, उनके सारे कपड़े वही पास में बिखरे पड़े हुए थे और वो दोनों आराम से बातें करते हुए एक दूसरे के अंगों को चूम रहे थे और चाट रहे थे,,, ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें किसी के देखने का जरा भी डर ना हो,,,
खैर, वैसे तो मैं बहुत ज्ञानी बनता था शालिनी के सामने सेक्स संबंधित बातों में,,, मगर इस बार सच में मेरी भी घिग्घी बंध गई थी,,, मैंने कभी किसी को असलियत में इस तरह नंग धड़ंग चुदाई की तैयारी करते हुए नहीं देखा था अब तक,,, मेरा सारा ज्ञान वीडियो क्लिप तक ही सीमित था,,, लाईव वीडियो का मेरा भी यह पहला मौका था और शालिनी का भी,,
हम दोनों ने एक साथ एक दूसरे की नजरों में देखा और इस बार हम दोनों को थोड़ी सी झेंप लगी और हम एक-दूसरे की आंखों में देखने की बजाय फिर से झिरी में देखने लगे,,, उधर अब तक एंगल बदल चुका था,,,