• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest मटकनी गांड का कमाल

S

StoryPublisher

Guest
Incest मटकनी गांड का कमाल

हैलो दोस्तो,,एक बार फिर मैं आप लोगों के सामने एक नई कहानी लेकर आया हूं,,,,,

1 सुगन्धा

2 अंकीत

3 तृप्ति,,

4 सुरज( अंकीत का दोस्त)

5 रोनक(बिगड़ेल लड़का)

6 नुपुर (सुगंधा की सहअध्यापिका)

7 सुषमा ( सुगंधा की सहेली और उसकी पड़ोसन)

8 सुमन,,,( सुषमा की बेटी)

देख अंकित इस आखिरी ओवर में हमें जीतने के लिए 12 रन चाहिए,,,, और स्ट्राइक तेरी है इसलिए एक रन लेकर मुझे स्ट्राइक दे देना मैं जानता हूं कि तू नहीं मार पाएगा,,,,

ठीक है सूरज तू चिंता मत कर,,,,,।

(इतना कहने के साथ ही अंकित बल्लेबाजी करने के लिए,,,, तैयार हो गया,,,, यह कोई राष्ट्रीय या किसी उच्च स्तर पर खेले जाने वाली क्रिकेट नहीं थी बल्कि गली मोहल्ले की ही क्रिकेट थी जिसमें आखिरी ओवर में 12 रन चाहिए थे और स्ट्राइक पर अंकित था,,,,,, सूरज इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि अंकित बल्लेबाजी में कम लेकिन गेंदबाजी में अव्वल था वह जानता था कि अंकित से इतने रन लगने वाले नहीं है इसलिए वह उसे रन लेने के लिए बोल रहा था ताकि वह स्ट्राइक पर जा सके और फिर बल्लेबाजी करके अपनी टीम को मैच जीता सके वैसे भी वह टीम का कप्तान था,,,,, और 10 10 रुपए की मैच खेली जा रही थी,,,, और यह मैच मोहल्ले के पीछे खाली पड़ी मैदान में खेली जा रही थी,,,,,, जहां पर एक बड़ा सा तालाब भी था,,,,,,,,, मोहल्ले की ही दो टीम खेल रही थी और कुछ लड़के बैठकर मैच देख रहे थे तभी बॉलर ने गेंद फेंक और बड़ी चालाकी से अंकित ने बैट से कट लगाकर एक रन दौड़ गया इतने से ही अंकित बहुत खुश हो गया था क्योंकि उसे भी उम्मीद ही नहीं थी कि उसकी बेट पर गेंद बराबर आ पाएगी,,,,, लेकिन अंकित ने कर दिखाया था इसलिए टीम भी बहुत खुश थी सूरज के स्ट्राइक पर आते ही,,,, टीम के लोग सूरज सूरज कहकर उसका हौसला बढ़ाने लगे,,,,, सूरज को पूरा विश्वास था कि वह,,,, गेंद को बाउंड्री लाइन के पास पहुंचा देगा लेकिन ऐसा हो नहीं पाया लगातार दोगे खाली निकल गई जिससे सूरज की टीम में तनाव बढ़ने लगा,,,,, और अंकित मन में यही सोचने लगा कि अच्छा हुआ कि वह सामने स्ट्राइक पर नहीं है वरना बदनामी हो जाती,,,,, पहली बॉल में सिंगल और बाकी के दो गेट खाली निकालने के बाद सामने की टीम पूरी तरह से जोश में आ गई थी और उनका कप्तान जोर-जोर से ताली बजाते हुए अपनी टीम का जोश बढा रहा था,,,, सूरज का दिमाग बड़े जोरों से घूमने लगा था एक तो उसकी टीम बाहर ने वाली थी और साथ में ₹10 भी जाने वाला था जिसकी उसे बहुत चिंता हो रही थी यह ₹10 भी टीम के सभी सदस्य से चंदा लेकर इकट्ठा किया गया था,,,,

कभी गेंदबाज ने अगली बार फेंका और सूरज ने पूरी ताकत के साथ बाला घुमाया लेकिन बोल बाउंड्री के बाहर नहीं जा पाई और फिर एक सिंगल लेकर सूरज दूसरी ओर पर पहुंच गया और अंकित फिर से बल्लेबाजी करने के लिए आ गया अब दोगेंदों में 10 रन चाहिए था,,,, लेकिन अंकित के लिए तो यह एकदम नामुमकिन था वह जानता था कि आप उसे लगने वाला नहीं है और बाकी की टीम भी समझ गई थी कि वह लोग हार चुके हैं सामने तो जश्न की तैयारी हो चुकी थी सभी लोग जोश में आ चुके थे और लगभग लगभग जीत की तैयारी में जश्न मनाना भी शुरू कर दिए थे,,,,,,

अंकित के माथे पर पसीने की बूंदे उपस थी,,,, सूरज जोकी टीम का कप्तान था वह समझ गया था कि अब वह हार चुका है क्योंकि अगर वह एक रन लेकर सामने पहुंच भी जाता है तो भी एक बॉल में 9 रन किसी भी कीमत में लगने वाले नहीं थे इसलिए वह एकदम उदास हो चुका था,,,,,, तभी सामने की टीम का गेंदबाज पांचवी बोल पूरी ताकत के साथ फेंका और अंकित का बदला घुमा अंकित का नसीब बहुत तेज था इस बार उसके बल्ले पर गेंद बराबर बैठ गई थी और अंकित पूरी ताकत के साथ बाला घुमाया था और इसी के साथ बल्ले के साथ ही गेंद हवा में लहराता हुआ बाउंड्री के पार चला गया था,,,,, टीम के साथ-साथ विरोधी दल भी इस प्रहार को देखकर चौंक गया था क्योंकि अंकित ने छक्का लगा दिया था जो कि उसके बस की बात बिल्कुल भी नहीं थी गेंदबाजी में वह कई कमाल कर दिखाया था लेकिन बल्लेबाजी में हुआ एकदम जीरो था लेकिन आज उसके बदले से छक्का निकल गया था जिसे देखकर सब लोग हैरान हो गए थे खुद अंकित भी चौंक गया था,,,,। उसके चेहरे पर तो आश्चर्य और खुशी दोनों के भाव नजर आ रहे थे,,,,, और यही हाल उसकी टीम का भी था सबके मुंह खुला को खुला रह गए थे अब एक बॉल में केवल चार रन चाहिए थे लेकिन हमेशा किस्मत साथ नहीं देता इस बात को भी सब जानते थे इसलिए ज्यादा खुश तो नहीं हुई लेकिन फिर भी अंकित का जोश बढ़ाते हुए जोर-जोर से उसका नाम पुकारने लगे,,,,, गेंदबाज ओवर की अंतिम बोल लेकर आगे बढ़ा और बड़ी तेजी से उसे अपने हाथ की कलाई मोड कर अंकित की तरफ फेंकते हुए आगे बढ़ा कि तभी एक बार फिर से अंकित ने कर से बाला घुमाया और फिर हवा में गेंद जाकर बाउंड्री के बाहर गिरा और यह दूसरा छक्का था और इसके साथ ही अंकित की टीम विजय घोषित कर दी गई थी अंकित के लगातार दो छक्के मारने पर उसकी टीम जीत चुकी थी जिसका अंदाजा ना तो अंकित की टीम को था ना अंकित को था और ना ही विरोधी टीम को सब लोग आश्चर्यचकित हो गए थे,,, सूरज तो दौड़ता हुआ गया और अंकित को उठा लिया था और सभी टीम जोर-जोर से अंकित का नाम लेने लग गए थे,,,,

जहां एक तरफ खुशी का माहौल था वहीं दूसरी तरफ विरोधी टीम में मायूसी निराशा छा चुकी थी उनकी टीम का कप्तान बॉलर को गंदी-गंदी गालियां देना शुरू कर दिया था क्योंकि वह लोग लगभग लगभग इस मैच को जीत चुके थे लेकिन अंकित के चमत्कार ने उनके हाथ में आई हुई बाजी को छीन ली दिया था जिसमें बॉलर की गलती बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि अंकित के हाथों से उसके बदले से लगातार दो चक्का लग जाना किसी चमत्कार से कम नहीं था अपने कप्तान से गाली खाने के बाद गेंदबाज पूरी तरह से क्रोधित हो चुका था और वह गुस्से में आकर अंकित को बोला,,,,।

मादरचोद,,,,।

देख रौनक खेल में जीत हार तो होती रहती है लेकिन तू इस तरह से गाली देगा तो बिल्कुल भी नहीं चलेगा,,,

दूंगा हजार बार दूंगा,,,,,।

देख रोनक अभी भी तुझे समझा रहा हूं,,,,, बदतमीजी मत कर,,,,

तेरी मां की बुर में लंड,,,,,।

(रौनक के मुंह से अपनी मां के लिए इतनी गंदी बातें सुनते ही अंकित एकदम क्रोध से भर गया और वह उसको करने के लिए आगे बढ़ा ही था कि उसके दोस्तों ने अंकित को रोक लिया और उसे समझाने की कोशिश करने लगे और रौनक को भी समझने की कोशिश करने लगे लेकिन रौनक अपनी गेंदबाजी में अपनी ओवर में लगे लगातार दो छकको की वजह से पूरी तरह से,,, बौखला गया था,,,,)

देख रौनक इस तरह से गाली मत दे मैं इस तरह के शब्दों का प्रयोग बिल्कुल भी नहीं करता मैं आज तक किसी को गाली नहीं दिया हूं इसलिए मैं नहीं चाहता कि मुझे भी कोई गाली दे,,,,

भाग भोंसड़ी के तेरे में हिम्मत कहां है गाली देने की वैसे भी तेरी मां कितनी मस्त है बड़ी-बड़ी गांड लेकर जब सड़क पर चलती है ना तो मेरा तो खड़ा हो जाता है,,,,(उसे कुछ लोग पकड़े हुए थे उसे समझाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन फिर भी वह मन नहीं रहा था वह अपना अपमान सहन नहीं कर पा रहा था इसलिए अंकित को गाली देकर अपने मन की भड़ास निकाल रहा था और अंकित अपनी मां के बारे में इतनी गंदी-गंदी इतनी गंदे शब्दों का प्रयोग सुनकर एकदम से क्रोधित हो गया था) तेरी मां कितनी गोरी है उसकी बुर भी कितनी मस्त होगी फुली हुई एकदम कचोरी की तरह,,,,।

(अब अंकित से सहन कर पाना मुश्किल हुआ जा रहा था और वह सबको धोखा देकर आगे बढ़ा और रौनक का गिरेबान पड़कर उसके पेट में दो-चार घुसा जमा दिया और वह एकदम से दर्द से दिल मिला उठा एक बार फिर से अंकित को सभी लोग पकड़ कर दूर करने लगे और जैसे तैसे करके दोनों को अलग कर दीए,,,, रौनक अपने घर की तरफ चला गया और जीत की खुशी में सूरज अंकित और बाकी टीम के सदस्य को लेकर एक चाय की दुकान पर पहुंच गया और अंकित को अपने पास में बैठाता हुआ वह बोला,,,,)

जाने दे अंकित उसके मुंह लगने से कोई फायदा नहीं है कीचड़ में अगर पत्थर मारोगे तो कीचड़ अपने ऊपर ही आकर गिरेगा उसे कोई फर्क नहीं पड़ता उसे कोई गाली दे मारे पीटे वह तो एक नंबर का हारामी है,,,,

लेकिन यार देखा नहीं कितनी गंदी गंदी गाली दे रहा था,,,, मम्मी के बारे में,,,,,

चल जाने दे यार तूने उसको सबक सिखा दिया ना हिसाब बराबर हो गया यह सब दिल पर नहीं लेना चाहिए,,,, चल चाय पी,,,,,,(और फिर इतना कहने के साथ ही सभी टीम के सदस्य के लिए चाय आ गई और बोला वहीं बैठकर चाय पीने लगे,, चाय की दुकान पर रेडियो पर गाना बज रहा था धूप में निकला ना करो रूप की रानी कहानी गोरा रंग काला ना पड़ जाए, तभी सामने के सड़क पर एक खूबसूरत औरत अपने हाथ में सब्जी का थैला लिए अपने घर की तरफ जा रही थी उसे औरत को देखते ही सूरज के साथ-साथ उसके दोस्त लोग बोले,,,)

हाय हाय क्या मस्त ,,, चिकनी माल है यार,,,,

तू सच कह रहा है यार साड़ी में इसकी गांड और भी ज्यादा कसी हुई लग रही है,,,,,

कसम से साड़ी कमर तक उठा दे तो मजा आ जाए इसकी गांड देखने में,,,,

अरे पागल अगर अंदर चड्डी पहनी होगी तो गांड कैसे देख पाएगा,,,,

भले यार इसकी चड्डी देखने में भी बहुत मजा आएगा गोरे-गोरे बदन पर पता तो चले किस रंग की चड्डी पहनी है,,,,

तुम लोगों को गांड और चड्डी की पड़ी है जरा यह तो सोचो वह जब खुद इतनी गोरी है तो उसकी बुर कितनी गोरी होगी मेरा तो सोच कर ही खड़ा हो जाता है,,,,

कसम से यार वह किस्मत वाला होगा जो इसकी बुर में लंड डालकर चोदता होगा उसकी तो किस्मत खुल गई होगी,,,,

अरे यार मैं जानता हूं ,,,, भाभी को अपने नुक्कड़ के आगे तीसरी गली है ना उसी में तो रहती है मरियल सा आदमी है इसका मुझे तो नहीं लगता कि अपने आदमी से खुश हो पाती हो कि देखा नहीं रहा है इसकी शरीर इसके तो कोई मोटा सांड चाहिए जो अपना लंड इसकी बुर में डालकर इसका पानी निकल सके,,,,,।

(एक-एक करके सभी लोग उसे औरत के बारे में अपना विचार व्यक्त कर रहे थे लेकिन इन सब बातों को सुनकर अंकित को गुस्सा आ रहा था और वह गुस्से में बोला,,,)

यार तुम लोगों को शर्म नहीं आती,,, तुम लोग भी रौनक की तरह ही बातें कर रहे हो तुम लोगों में और उसमें फर्क क्या है,,,,?

अरे यार अंकित तू भी बेवजह गुस्सा हो रहा है,,,, हम तो सिर्फ बातें कर रहे हैं और वैसे भी जो सड़क पर औरत गई है वह हम में से तो किसी की कुछ लगते नहीं है ना इसलिए किसी की नाराजगी का कोई मतलबी नहीं होता लेकिन तू है कि खामखा गुस्सा दिखा रहा है,,,,

कुछ भी हो यार मुझे इस तरह की बातें पसंद नहीं है,,,,

(इतना कहने के साथ ही वह चाय खत्म करके चाय का कप वही टेबल पर रख दिया और अपना चलता बना उसे रोकने की कोशिश सूरज करता रहा लेकिन वह रुका नहीं बस अपने घर की ओर निकल गया उसे जाता हुआ देखकर सूरज बाकी अपने दोस्तों से बोला,,)

भोसड़ी का एकदम बेकार है औरतों को देखकर कुछ समझ में नहीं आता इस पर वैसे भी रौनक सच ही कह रहा था इसकी मां वाकई में बहुत मस्त है,,,,

................................
 
अंकित गुस्सा कर अपने दोस्तों को चाय की दुकान पर छोड़कर अपने घर की तरफ निकल गया था क्योंकि उसे लगने लगा था कि अब वहां रुक कर भी कोई फायदा नहीं है क्योंकि उसके दोस्त लोग भी,,, रौनक की ही जुबान बोल रहे थे,,,, अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि आखिरकार किसी गैर औरत के बारे में अपने मन में इतनी गंदी भावनाएं लाकर क्या मिलता होगा वह भी तो किसी की मां होगी बहन होगी बेटी होगी और उनके खुद के घर में भी तो मां बहन है इनकी मां बहन के बारे में अगर कोई गलत गलत बात कर तो इन्हें कैसा लगेगा,,,,, अपने घर की ओर चले जाते समय अंकित के मन में रौनक की बातें घूम रही थी और उसे बहुत गुस्सा आ रहा था अगर उसके दोस्तों ने उसे पकड़ ना दिया होता तो वह रौनक का हाथ मुंह तोड़ दिया होता क्योंकि बात ही कुछ ऐसी कह दिया था हालांकि इस तरह की गाली गलौज तो दोस्तों में आम बात होती है,,,, दोस्त लोग आपस में ही मां बहन की गाली देते ही रहते हैं और इसमें कोई बुरा भी नहीं मानता लेकिन अंकित इन सभी में सबसे अलग था क्योंकि वह ना तो किसी को मां बहन की गाली देता था और ना ही किसी के मुंह से अपने लिए इस तरह की गाली सुनना पसंद करता था,,,,, सीधे-सीधे रौनक ने अंकित के मुंह पर कह दिया था कि तेरी मां कितनी मस्त है उसकी बुर कितनी कचोरी की तरह खुली हुई होगी एकदम गोरी गोरी मौका मिले तो वह उसकी बुर में अपना लंड डालकर उसकी चुदाई कर दे इन सब बातों को सोचकर अंकित का मन भरा जा रहा था वह गुस्से से पागल हुआ जा रहा था लेकिन किसी तरह से वह अपने आप को संभालने की कोशिश कर रहा था और अपना ध्यान दूसरी तरफ लगाने की कोशिश कर रहा था,,,,, की तभी चाय की दुकान पर उसके दोस्तों की बातें याद आने लगी कि वह लोग कैसे किसी भी औरत के बारे में गलत धारणा बांध लेते हैं,,,, औरत हट्टी कट्टी शरीर से भरी हुई हो और आदमी मरियल हो तो उससे क्या फर्क पड़ता है,,, लेकिन उसके दोस्तों ने इस कमी को भी लेकर उसे औरत का मजाक बना रहे थे,,,,।

बाकी सभी को औरतें किस तरह की बातें औरतों के बारे में गंदी बातें अच्छी लगती थी और इस तरह की बातें सुनकर उन लोगों के मन में उत्तेजना का भी अनुभव होता था लेकिन अंकित इन सबसे अलग था वह औरतों के मामले में उनसे दूर ही रहना पसंद करता था और औरतों की इज्जत करता था इसीलिए तो वह चाय की दुकान पर 1 मिनट भी ठहरना पसंद नहीं किया और वहां से चलता बना,,,,,,, बार-बार रोनक की कही गई बातों को याद करके वह क्रोध से भरा जा रहा था,,,, ऐसा नहीं था कि अंकित को इस बात का आवाज नहीं था कि उसकी मां कैसी दिखती है वह अच्छी तरह से जानता था कि,,, उसकी मां बेहद खूबसूरत थी लेकिन उसके दोस्तों की नजर में खूबसूरती का मतलब था वासना और वह लोग खूबसूरत चीज को गंदी नजरों से देखते थे और यही बात उसे अच्छी नहीं लगती थी,,,,, कई बार तो उसे ऐसा महसूस होता था कि अपने दोस्तों को छोड़ दे और अपने आप में ही मस्त रहे लेकिन खेलने के लिए कोई तो होना चाहिए था इसलिए वह अपने दोस्तों का साथ छोड़ भी नहीं सकता था,,,,,।

शाम ढलने वाली थी और सुगंधा खाना बनाने की तैयारी कर रही थी वह अपने खुले बालों का जुड़ा बनाकर अपने कमरे में गई और आईने के सामने खड़ी होकर अपनी साड़ी उतारना शुरू की अपने कंधे से साड़ी का पल्लू हटते ही आईने में विशाल वछ स्थल नजर आने लगा और सुगंधा एक नजर अपनी विशाल छतिया पर डालकर अपनी कमर में से साड़ी को खोलना शुरू कर दी और देखते ही देखते वह कुछ ही देर में अपने बदन से साड़ी को उतार कर एक तरफ रख दी और अब वह आईने के सामने केवल ब्लाउज और पेटीकोट में थी,,,,, शाम ढल चुकी थी इसलिए कमरे में अंधेरा था और इसीलिए वह कमरे में प्रवेश करते ही स्विच ऑन करके ट्यूबलाइट जला दी थी जिसकी दूधिया रोशनी पूरे कमरे में फैल चुकी थी और उसे दूधिया रोशनी में आदम कद आईने में उसे अपना अक्स एकदम साफ नजर आ रहा था,,,,,,, 40 की उम्र में भी सुगंधा का बदन एकदम कसा हुआ था वह पूरी तरह से जवानी से भरी हुई थी लेकिन अफसोस इस बात का था कि इस जवानी का मजा लेने वाला इस दुनिया से 5 साल पहले ही जा चुका था और तब से वह इसी तरह से अपने जीवन व्यतीत कर रही थी,,,, सुगंधा अपने पति के गुजरे 5 साल हो चुके थे लेकिन वह धीरे-धीरे अपने पति को भुला चुकी थी,,,, वह पूरी तरह से अपने बच्चों में व्यस्त हो चुकी थी,,,, अपने पति से उसे ज्यादा कुछ तो नहीं मिला था लेकिन दो बच्चे और रहने के लिए घर जो की तीन कमरों का था और छत के ऊपर वाला कमरा अभी भी खाली था,,,, जिसे वह किराए पर देना चाहती थी लेकिन जवान लड़की के चलते वह अपना कमरा किराए पर देना उचित नहीं समझ रही थी,,,,,,, पति शिक्षक थे इसलिए अपने जीवित रहते ही वह जुगाड़ लगाकर अपनी पत्नी को भी एक अच्छी सी स्कूल में शिक्षिका की नौकरी दिला दिए थे इसलिए उनके जाने के बाद घर चलाने में किसी भी प्रकार की दिक्कत सुगंध को महसूस नहीं हो रही थी वह बड़े आराम से अपने बच्चों का पालन पोषण कर रही थी,,,,,,,

पति के गुजर जाने के बावजूद भी 5 सालों में उसने कभी भी अपने कदम को देखने नहीं दी थी हालांकि वह बाला की खूबसूरत थी और सड़क पर आते जाते उसे इस बात का एहसास हो भी जाता था क्योंकि जब वह सड़क पर चलती थी तो उसके खूबसूरत बदन की थिरकन उसके नितंबों का उतार चढ़ाव और उसकी छातीयो के गोलापन को देखकर मर्दों की नजर उसके इन अंगों पर सकती रहती थी और कई बार तो उसने कई मर्दों को उसे देखने के बाद अपने लंड पर हाथ लगाते हुए भी देखी थी,,,, यह सबसे अच्छा नहीं लगता था लेकिन धीरे-धीरे इन सबकी उसे आदत हो गई और वह इन सबको अपने दिलों दिमाग से निकाल कर अपने काम में ध्यान लगाने लगी,,,,, इस बात का भी एहसास उसे अच्छी तरह से था कि उसकी उम्र की औरतों के बदन में ढीलापन आ जाता था बदन में चर्बी जम जाती थी लेकिन ऐसा कुछ भी उसके बदन में बदलाव आया नहीं था बल्कि उसके बदन की खूबसूरती और ज्यादा बढ़ गई थी,,,,

अपने आप को आदम कद आईने में देख कर सुगंधा के चेहरे पर अपने बदन की बनावट को देखकर एक गर्व की आभा नजर आती थी और वह मुस्कुराते हुए अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी,,,, एक औरत के द्वारा अपने ब्लाउज का बटन खोलने भी एक मादकता भारी क्रिया से कम नहीं होता अगर इस नजारे को कोई गैर मर्द देख ले तो शायद उसका पानी छूट जाए लेकिन यह सब औरतों के लिए एकदम सहज था जो की यही सब अंजान मर्द को असहज बना देता है,,,, औपचारिक रूप से सुगंध अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी और वह एक-एक करके अपनी नाजुक उंगलियों का सहारा देकर अपने ब्लाउज का बटन खोले जा रही थी और देखते-देखते वह अपने ब्लाउज के सारे बटन को खोल दी और ब्लाउज के दोनों पट को अपने हाथों से अलग करते हुए उसे अपनी बाहों से बाहर निकलने लगी ऐसा करते समय ब्रा में कैद उसकी बदमाशी कर देने वाली खरबूजे जैसी चूचियां एकदम आगे की तरफ आ गई और आईने में एकदम फुटबॉल की तरह नजर आने लगी जिसे देखकर खुद उसकी आंखें चौदिया गई थी,,,, अपने ब्लाउस को अपनी बाहों से अलग करते समय पल भर में उसे अपने पति की याद आ गई और वह सोचने लगी की खास उसका पति अगर जीवित होता तो वह अपनी जवानी का जलवा अपने पति पर पूरी तरह से बिखेर देती लेकिन अफसोस सब कुछ बदल गया था अपनी जवानी का जलवा वह अब नहीं भी कर सकती थी,,,,,,,, अपने पति का ख्याल आते ही उसके बदन में झनझनाहट से होने लगी थी क्योंकि उसे वह पल याद आ गया जब वह इसी तरह से अपने कपड़े बदलती थी तो तुरंत उसका पति उसके पीछे आकर अपनी बाहों में भर लेता था और अपने चुंबनों की बौछार उसके गर्दन पर करते हुए ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूची पकड़ कर दबाना शुरू कर देता था और उत्तेजित अवस्था में सुगंध अपने नितंबों पर अपने पति के टनटनाए लंड का स्पर्श पाते ही पूरी तरह से उत्तेजित हो जाती थी,,,, और फिर उसका पति आईने के सामने ही उसे घोड़ी बनाकर पीछे से उसकी बुर में लंड डालकर चोदना शुरू कर देता था और यह सब सुगंध को उसे समय बहुत अच्छा और संतुष्टि भरा लगता था जिसकी कमी उसे अब महसूस होती थी तो उसकी आंखों में आंसू आ जाते थे,,,,,।

अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर वह अपने ब्रा का हुक खोलने लगी उसके गोरे बदन पर लाल रंग की ब्रा बहुत ज्यादा खिल रहीं थी चूचियों के आकर से कम नाप वाला हुआ ब्रा पहनती थी ताकि उसकी खरबूजे जैसी चूचियां छोटे से ब्रा में एकदम कसी हुई रहे और वैसे भी उसकी चूचियां एकदम कसी हुई थी,,,, ब्रा की खेत से आजाद होते ही उसकी खरबूजे जैसी चूचियां रबड़ के गेंद की तरह छतिया पर उछलने लगी जिसे वह आईने में अच्छी तरह से देख रही थी और मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,,, अपनी चूचियों की खूबसूरती देखकर उसे रहने की और वह अपना हाथ अपनी चूचियों पर रखकर उसके आकार को टटोलकर महसूस करने लगी और अपने मन में सोचने लगी की एक मर्द को इसी तरह की चुचीयां अच्छी लगती हैं,,, एकदम गोल गोल कसी हुई छतिया पर तनी हुई जिसमें बिल्कुल भी लक ना हो और बिल्कुल ऐसी ही चूचियां सुगंधा के पास थी जो कि उसकी खूबसूरती में चार चांद लग रही थी,,,,

अपने कमरे में सुगंधा एकदम निश्चिंत थी,,,, वह आईने में देखते हुए अपनी पेटिकोट की डोरी को उंगलियों में फंसा कर एक झटके से खींच ली और कमर पर कसी हुई पेटिकोट एकदम से ढीली हो गई,,,, बंद कमरे में सुगंधा की यह क्रियाकलाप बेहद मदहोश कर देने वाली थी लेकिन इसे देखने वाला कमरे में कोई भी स्थित नहीं था,,,,,, ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सुगंधा का गोरा बदन और भी ज्यादा खूबसूरत और चमक रहा था,,,,, कमर पर ढीली पड़ी पेटीकोट को वह एक झटके से अपने हाथ से छोड़ दी और उसकी पेटिकोट कमर पर से भर भर कर एक झटके में उसके कदमों में जाकर गिर गई और आईने के सामने सुगंधा पूरी तरह से निर्वस्त्र हो गई केवल उसके उसके बदन पर एक पेंटिं भर रह गई थी उसके बेशकीमती खजाने को छुपाने के लिए,,,,,, अपने नंगे बदन को आईने में देखते ही सुगंधा ने गहरी सांस ली,,,, और तुरंत दरवाजा खुला और सुगंध एकदम से घबराकर दरवाजे की तरफ देखते हुए दोनों हाथों से अपनी छाती को ढकने की नाकाम कोशिश करने लगी,,,,।

क्या मम्मी तुम इधर हो,,,,,।

(दरवाजे पर तृप्ति को देखते ही सुगंधा की जान में जान आई और वह गहरी सांस लेते हुए बोली)

बाप रे तृप्ति तूने तो मुझे डरा ही दिया,,,,

क्या मम्मी तुम अभी कपड़े बदलने में लगी हो मुझे तो लगा था कि अब तक चाय बना ली होगी,,,,, और मम्मी दरवाजा बंद करके कपड़े उतार करो अगर किसी दिन ऐसे हालात में अंकित ने तुम्हें देख लिया तो गजब हो जाएगा,,,,,

धत् पगली तू भी ना अनाप शनाप बकती रहती है,,,(इतना कहने के साथ ही सुगंधा उसी अवस्था में ही केवल अपने बदन पर लाल रंग की पैंटी पहने वह अलमारी की तरफ गई और उसमें से एक गाऊन निकालने लगी पीछे खड़ी तृप्ति दरवाजे को बंद कर चुकी थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि अगर अंकित आ जाए तो इस तरह की दृश्य को अपनी आंखों से देखें वह अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को देख रही थी और मंद मंद मुस्कुरा भी रही थी अपनी मां की खूबसूरती और इस उम्र में भी कैसे हुए बदन को देखकर खुद तृप्ति को भी अपनी मां पर गर्व होता था,,, तृप्ति इस घर की बड़ी लड़की थी और वह अपनी मां का पूरा ख्याल रखती थी क्योंकि वह अपनी मां के दुख को अच्छी तरह से जानती थी इसलिए अपनी बातों से अपने चुटकुले से वह अपनी मां को हमेशा खुश रखती थी और उसकी मां भी अपने बच्चों से बहुत खुश थी,,,,,,

सुगंधा अलमारी मे से एक खूबसूरत गाउन को निकाल कर पहन ली हालांकि वह अपनी चूचियों को नग्न नहीं रहने दी उसे पर ब्रा नहीं पहनी जिसकी वजह से गाउन के ऊपर उसकी खरबूजे जैसी चूचियां एकदम साफ झलक रही थी,,,, सुगंधा अपनी बेटी तृप्ति की तरफ घूमते हुए बोली,,,।

आज गर्मी बहुत है इसलिए हल्का कपड़ा ही ठीक रहेगा,,,,

ठीक है मम्मी,,, अब जल्दी से चाय बना दो,,,,, थोड़ा थका महसूस हो रही है फिर चाय पीकर मैं खाना बनाने में मदद करती हूं,,,,

नहीं तू रहने दे आराम कर खाना में बना लूंगी तू भी दिन भर थक जाती होगी,,,, कॉलेज फिर ट्यूशन,,,

अरे नहीं मम्मी इतना भी नहीं थकी हूं बस जल्दी से एक कप चाय मिल जाए तो ताजगी आ जाए,,,।

तू 2 मिनट रुक मैं अभी बना देती हुं,,,,।

(और इतना कहकर वह रसोई घर में चली गई,,,)

.......................................
 
अपनी मां को कपड़े बदलते हुए तृप्ति ने देख ली थी एक औरत होने के नाते वह अपनी मां की खूबसूरती को अच्छी तरह से जानती थी तृप्ति को इस बात का एहसास था कि उसके मोहल्ले में उसकी मां से ज्यादा खूबसूरत और कोई औरत नहीं थी और इस बात से भी उसे इनकार नहीं था कि सड़क पर आते जाते लोग उसकी मां को ही प्यासी नजरों से देखते रहते थे लेकिन सब कुछ जानने के बावजूद भी तिरुपति या तो उसकी मां कुछ कर नहीं सकते थे क्योंकि औरतों का हर जगह यही हाल होता है मर्द प्यासी नजरों से हमेशा ताडते ही रहते हैं,,,,,,,,,, एक औरत होने के बावजूद भी तृप्ति को खुद अपनी मां के गोल-गोल नितंब कुछ ज्यादा ही आकर्षक लगते थे,,,, कई बार तो वह खुद अपनी मां के नितंबों को ही देखते रह जाती थी और अपने मन में सोचती रहती थी कि का स उसकी गांड भी उसकी मां की तरह एकदम भारी-भारी हो जाए ऐसा नहीं था कि तृप्ति के पास रूप लावण्य नहीं था सुगंधा की लड़की होने के नाते उसमें भी सुगंधा जैसी ही खूबसूरती भरी हुई थी लेकिन अभी-अभी वह जवानी की दहलीज पर कदम रख रही थी इसलिए उसके बदन पर एक औरत के बदन वाला भराव नहीं था,,, लेकिन फिर भी किसी भी पुरुष को आकर्षित करने लायक उसके बदन का उभार भराव और कटाव सब कुछ उत्तमता से भरा हुआ था,,,,

तृप्ति भी अपनी मां की तरह लंबी कद काठी की थी,,,, छतिया की शोभा बढ़ा रहे दोनों संतरे इतना तो भरे हुए थे कि उन्हें छुपाने के लिए दुपट्टे का सहारा लेना पड़ता था,,,, और पिछवाड़े में अभी उतना भराव नहीं आया था लेकिन फिर भी किसी भी मर्द का लंड खड़ा कर सके इस तरह का आकर्षण उसकी गांड की गोलाई लिए हुए थी,,,,,।

सुगंधा रसोई घर में जाकर चाय बनाने लगी थी,,,, और तृप्ति कुर्सी पर बैठकर टेबल पंखे को चालू करके उसका हवा ले रही थी,,,,, और अपनी मां के बारे में सोच रही थी,,,,, वह जानती थी कि उसकी मां ने उसके और उसके भाई की परवरिश के लिए दिन-रात एक कर दी है,,,, तृप्ति इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि जब उसके पिताजी का देहांत हुआ था तब उसकी मां की जवानी पूरे सभा में थी अगर चाहती तो वह किसी से भी शादी करके अपना जीवन बसर कर सकती थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया था इसलिए तृप्ति के मन में अपनी मां के लिए और भी ज्यादा इज्जत बढ़ जाती थी,,,, ऐसा नहीं था कि ढलती उम्र के साथ सुगंधा की जवानी भी ढल चुकी थी ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कुदरत की कृपा सुगंधा पर पूरी तरह से छाई हुई थी इसलिए तो पति के देहांत के 5 साल गुजारने के बावजूद भी अभी भी उसकी जवानी पूरी तरह से निखर रही थी,,,,,। तृप्ति कुर्सी पर बैठे-बैठे कुछ और ज्यादा सोच पाती से पहले ही दरवाजे पर दस्तक होने लगी और वह ना चाहते हुए भी कुर्सी पर से उठकर खड़ी हो गई क्योंकि वह जानती थी कि इस समय उसका भाई अंकित आ गया होगा,,,, वह बेमन से चलते हुए दरवाजे तक गई और दरवाजा खोल दी अंकित दरवाजे पर ही खड़ा था,,,,, अपने दोस्तों की बातों को सुनकर उसके मन में अभी भी क्रोध भरा हुआ था लेकिन फिर भी अपने घर पर पहुंचकर वह अपने क्रोध को एक तरफ रख कर वह मुस्कुरा कर अपनी बहन की तरफ देखा तृप्ति भी अपने भाई को देखकर मुस्कुरा दी और बोली,,,,)

आ गए राजा साहब,,,,,

क्यों तुम्हें क्या लग रहा था कि मैं वहीं रुक जाता,,,,

रुक जाना चाहिए था ना दोस्तों में कुछ ज्यादा ही उठना बैठना हो गया है तुम्हारा,,,,

अब क्या करूं दीदी घर में बैठे-बैठे बोर हो जाता हूं इसलिए दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने चला जाता हूं,,,,,

देखना दोस्तों के साथ ज्यादा मत घुमना वैसे भी तेरी दोस्त कुछ अच्छे नहीं है उनके संगत ठीक नहीं,,,।

(इतना सुनते ही अंकित चौक गया वह अपने मन में सोचने लगा कि उसकी बहन को कैसे मालूम कि उसके दोस्त अच्छे नहीं है गंदे हैं कहीं ऐसा तो नहीं उसकी बहन के बारे में भी उसके दोस्त उल्टी सीधी बात की है और किसी के जरिए उसकी बहन को पता चल गया पल भर के लिए अंकित को लगा कि वह भी बता दे कि सच में उसके दोस्त अच्छे नहीं है वह लोग मां के बारे में गंदी गंदी बातें करते हैं लेकिन ऐसा कहने की और पूछने की उसकी हिम्मत नहीं हुई,,,,, क्योंकि वह अपनी बहन या अपनी मां के सामने इस तरह की बातों का जिक्र करना भी गलत समझता था इसलिए अपनी बहन की बात सुनकर हां में सिर हिला दिया और बोला,,,)

चाय बन गई क्या दीदी,,,?

अभी तो नहीं मम्मी बना रही है,,,,

ठीक है तब तक में नहा धोकर फ्रेश हो जाता हूं,,,,,

अरे हाथ पैर धोकर फ्रेश हो जा नहाने की क्या जरूरत है,,,

नहीं नहीं दीदी पूजा पाठ भी करना रहता है ना,,,,,

ठीक है अच्छा जल्दी कर वरना चाय ठंडी हो जाएगी तो फिर वापस गरम करने वाली नहीं हूं ठंडी चाय ही पीनी पड़ेगी,,,,

बस 2 मिनट दीदी,,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित घर के पिछले हिस्से में चला गया जहां पर बाथरूम बना हुआ था और वह जगह,,,, दीवार से घिरी हुई थी लेकिन नहाने वाली जगह खुली थी,,,,, बस ताड़पत्री से घेरा बनाकर छोटे से बाथरूम की शक्ल दे दी गई थी और वहीं पर अंकित ठंडे पानी से नहाने लगा यह उसकी रोज की दिनचर्या थी शाम को वह जरूर नहाता था क्योंकि उसे पूजा पाठ करना होता था,,,,, थोड़ी ही देर में वहां नहा कर आ गया और जल्दी-जल्दी पूजा पाठ करके चाय पीने के लिए बैठ गया तब तक सुगंधा सब्जी काटकर खाना बनाने की तैयारी करने लगी जिसमें तृप्ति भी अपनी मां का हाथ बराबर बटा रही थी,,,,,,, सब्जी काटकर डब्बे से आटा निकालते हुए सुगंधा बोली,,,,)

अंकित बेटा घर का राशन खत्म होने वाला है कल मेरे साथ चलना बाजार से थोड़ा राशन खरीद लेंगे,,,,

ठीक है मम्मी,,,,, लेकिन इस बार,,,,,,,, थोड़े आलू के चिप्स भी खरीद लेना नाश्ता करते समय अच्छा लगता है,,,,

बाजार से चिप्स बहुत महंगे पड़ते हैं अंकीत घर पर ही चिप्स बना लेंगे,,,,

कोई बात नहीं मम्मी लेकिन जब भी बनाना थोड़ा ज्यादा बनाना क्योंकि बहुत जल्दी खत्म हो जाता है,,,,।

(अंकित इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि घर में कमाई का जरिया सिर्फ उसकी मां ही थी जो की स्कूल में टीचर थी और उन्हीं के पैसों से घर चला था इसलिए बहुत संभाल कर खर्च करना पड़ता था इसलिए अंकित भी ज्यादा जिद नहीं किया क्योंकि वह भी अपनी स्थिति को अच्छी तरह से जानता था,,,,,)

ठीक है बेटा इस पर ज्यादा बना दूंगी,,,,,(और इतना कहने के साथ ही आंटा गुंथने लगी,,,, और इसके बाद अंकित भी कुछ नहीं बोला,,,,, रोटी तवे पर रखकर उसे पकाते हुए सुगंधा स्कूल में अपने सीनियर शिक्षक दुबे जी के बारे में सोचने लगी एक तरह से वह दुबे से परेशान हो चुकी थी क्योंकि दुबे हमेशा उसे प्यासी नजरों से वासना की नजरों से देखा करता था,,,, खास करके जब हुआ स्कूल में सीढ़ियां चढ़कर ऊपर की तरफ जाती थी तब वह सीढीओ के नीचे खड़ा होकर सुगंधा को ही देखा करता था,,,, सुगंधा को नहीं बल्कि उसकी जवानी से लदी हुई भारी भरकम गांड को देखा करता था क्योंकि जब वह सीढ़ियां चढ़ने के लिए एक-एक करके ऊपर पर बढ़ती थी तब उसके नितंबों का उभार इस कदर बड़े-बड़े तरबूज की तरह बढ़ जाता था कि जिसे देखकर ही दुबेजी का लंड खड़ा हो जाता था,,,,, जानबूझकर किसी ने किसी बहाने मदद करने के बहाने उसके हाथ को उसके बदन को स्पर्श करने की कोशिश में लगा रहता था इसलिए सुगंधा हमेशा दुबे से दूरी बनाकर ही रहती थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि किसी भी तरह से उसकी बदनामी हो,,,,, इतने वर्षों में सुगंधा समझ गई थी कि अगर बाहर निकाल कर काम करना है तो इस तरह की नजरों का सामना करना ही होगा और हमेशा इस तरह की गंदी नजरों से अपने आप को बचाकर भी रखना होगा क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि एक औरत होने के नाते एक मर्द को जरा सा भी बढ़ावा देने पर इज्जत दांव पर लग जाने का चांस कुछ ज्यादा ही रहता है और वह किसी भी तरह से अपनी बदनामी नहीं चाहती थी,,,,, कई बार वह इस बारे में स्कूल के प्रिंसिपल को भी कहने की कोशिश की थी लेकिन का नहीं पाई थी क्योंकि वह जानती थी कि,,, प्रिंसिपल और दुबे जी में काफी अच्छी बनती थी और ऐसे हालात में दुबे जी के बारे में शिकायत करने का मतलब था कि अपनी नौकरी पर खतरा उठाने और ऐसे हालात में वह अपनी नौकरी पर बिल्कुल भी खतरा उठाने नहीं चाहती थी क्योंकि गुजर बसर करने का बस एक ही जरिया रह गया था,,,,।

थोड़ी ही देर में खाना बनकर तैयार हो गया था,,, और सुगंधा गरमा गरम खाना परोसने लगी वह तीनों साथ में ही भोजन करते थे,,,, तृप्ति और अंकित दोनों हाथ धोकर खाना खाने बैठे ही थे कि दरवाजे पर दस्तक होने लगी ,,,,,,,, और तृप्ति ने अंकित से कहा,,,,।

जा जा कर देख तो कौन है,,,,।

(इतना सुनते ही अंकित अपनी जगह से खड़ा हुआ और दरवाजा खोलने के लिए दरवाजे की तरफ आगे बढ़ गया,,,, और जेसे ही दरवाजा खोला तो सामने बगल वाली चाची हाथ में कटोरी लिए मुस्कुराते हुए बोली,,,)

बेटा अंकित जरा अपनी मम्मी से थोड़ा अचार मांग कर ले आना ना मेरा अचार खत्म हो गया है,,,,

जी चाची,,,,,

कौन है अंकित,,,,

बगल वाली चाची है मम्मी,,,,

अरे सुषमा दीदी है अंदर बुला ले,,,,

नहीं नहीं सुगंधा सुमन के पापा खाना खाने बैठे हैं और आचार खत्म हो गया थोड़ा अचार मिल जाता तो,,,,

अरे क्यों नहीं दीदी,,,(दूर से ही आवाज लगाते हुए सुगंधा बोली) अंकित कटोरी ले आना तो,,,,

जी मम्मी अभी लाया,,,,(और इतना कहने के साथ ही जैसे ही अंकित कटोरी लेने के लिए हाथ आगे बढ़ाया तो उसकी नजर सुषमा चाचा के ब्लाउज पर चला गया जो कि ऊपर के दो बटन खुले हुए थे जिसमें से उसकी आधे से ज्यादा चूचियां एकदम साफ नजर आ रही थी और गदराया बदन होने के नाते उसकी चूचियां भी काफी बड़ी-बड़ी थी जिसे देखते ही संजू मन में बुदबुदाया,,,) चाचा को जरा सा भी दिमाग नहीं है कैसी अवस्था में किसी के भी घर पर पहुंच गई है देखो तो सही आधे से ज्यादा तो नजर आ रहा है,,,, एक पल के लिए तो उसका मन कहा कि उसे बोल दे की ब्लाउज का बटन तो बंद कर लो लेकिन ऐसा कहने की उसकी हिम्मत नहीं हुई और वह कटोरी लेकर अपनी मां के पास चला गया और थोड़ी ही देर में उसमें अचार लेकर वापस दरवाजे पर आया और सुषमा चाचा को थमा दिया,,,, सुषमा अंकित के हाथ से कटोरी लेकर मुस्कुराते हुए बोली,,,)

बहुत अच्छे बेटा तुम्हारी मां बहुत अच्छी है,,,

थैंक यू चाची,,,,,(अंकित के इतना कहते ही सुषमा मुस्कुराते हुए चली गई और अंकित उसे जाता हुआ देखता रहा हालांकि सुषमा चाची की गांड भी बहुत बड़ी-बड़ी थी जिस पर अंकित की नजर तो पड़ी थी लेकिन उसके मन में एक औरत के अंगों को देखकर उसे तरह के भाव उत्पन्न नहीं हुए,,,, जैसा कि किसी दूसरे लड़के को इस तरह का नजारा देखकर उत्तेजना का अनुभव होता वह तो इस तरह के नजारे को देखकर सुषमा चाची को ही मन में भला बुरा कह रहा था,,,,,, दरवाजा बंद करके वापस अंकित खाना खाने बैठ गया था और थोड़ी देर में तीनों खाना खाकर साफ सफाई कर के जब तक टीवी वाले रूम में आए तब तक 10 बच चुका था और थोड़ी ही देर में भी व्योमकेश बक्शी शुरू होने वाला था,,,,,,,, यह 90 के दशक की बातें इसलिए मनोरंजन के साधन के रूप में केवल रेडियो टेप और टेलीविजन ही था,,,,,,, यह उसे समय का दौर था जब घर के सभी लोग एक साथ बैठकर टीवी देखा करते थे और टीवी का आनंद लिया करते थे,,,,,

सुगंधा तृप्ति और अंकित तीनों को दूरदर्शन की ब्योमकेश बक्शी वाली सीरियल बहुत अच्छी लगती थी जिसमें नायक अपना दिमाग लगाकर गुत्थियों को सुलझाता था,,,,, थोड़ी ही देर में धारावाहिक खत्म है हो गया और तीनों सोने की तैयारी करने लगे,,,,,।
 
अंकित टीवी बंद कर दे,,,,,, और सो जा,,,,(इतना कहने के साथ ही तृप्ति इस कमरे में बने बाथरूम में घुस गई और थोड़ी ही देर में अंकित के कानों में पेशाब करने की सीटी की आवाज सुनाई देने लगी जिसे सुनकर काफी हद तक अंकित के मन में अजीब सी तरंगे उठने लगती थी वह अनजाने में ही उत्तेजना का अनुभव करने लगता था क्योंकि उसे इस बात का ज्ञान था कि इस समय उसकी बड़ी बहन बाथरूम में घुसकर पेशाब कर रही थी और उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज को सुनकर वह ना चाहते हुए भी उत्तेजना का अनुभव करने लगता था और अपने आप पर क्रोधित भी होता था क्योंकि उसे सिटी की आवाज को सुनकर ना जाने क्यों उसका लंड खड़ा होने लगता है जबकि वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहता था जैसे तैसे करके वह अपने हाथ से अपने लंड को दबाकर उसे बैठने की नाकाम कोशिश करता था लेकिन ऐसा हो नहीं पता था और थोड़ी ही देर में तृप्ति बाथरूम से बाहर निकाल कर हल्की नींद में होने के नाते सलवार की डोरी को बांधते हुए अपने कमरे की तरफ चली जाती थी,,,,, यह वाक्या लगभग रोज ही होता था,,,,. कुछ देर के लिए अंकित की सांसे तेज हो जाती थी और थोड़ी देर वह टीवी के सामने बैठा रहता था जब तक की उसका ध्यान दूसरी तरफ ना हो जाए और जैसे ही वह अपने आपको साथ महसूस करता था वह तुरंत अपने कमरे में चला जाता था और सो जाता था,,,,,।

बाथरूम में अपनी बहन के द्वारा पेशाब करने के कारण कुछ देर के लिए अंकित अपने तन बदन में उत्तेजना का अनुभव करता था जिसके चलते वह अपने आप को कोसता भी था अपने आप से क्रोधित भी होता था क्योंकि अपनी बहन के पेशाब करने की सीट की आवाज अपने कानों में पढ़ते ही जिस तरह का अनुभव जिस तरह के हालात का वह सामना करता था और जिस तरह से उसका लंड खड़ा हो जाता था वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहता था इसलिए उसे ग्लानी महसूस होती थी,,,,, जिसमें उसका बिल्कुल भी दोस्त नहीं होता था क्योंकि वह जवानी के दौर में पहुंच चुका था और ऐसे हालात में किसी भी स्त्री के उभार दार अंगों को देखकर उनके बारे में सोच कर ही किसी का भी लंड खड़ा हो जाता था लेकिन अंकित के मामले में ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता था लेकिन जब भी वह रात के समय अपनी बहन की पेशाब की आवाज को सुनकर अपने आप को रोक नहीं पता था और ना चाहते हुए भी उसके बदन में उत्तेजना का अनुभव होने लगता था,,,, इन सबके बावजूद भी बहुत कभी अपनी बहन के बारे में अपने मन में गंदे विचार नहीं लाया था और ना ही ऐसे विचार लाने के बारे में सोच भी सकता था,,,,,।

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
दूसरे दिन सुबह नाश्ता करके तृप्ति और अंकित दोनों अपने-अपने रास्ते निकल चुके थे,,,,, सुगंधा का भी समय हो रहा था इसलिए वह जल्दी-जल्दी अपना काम खत्म करके कमरे में प्रवेश कर गई और हमेशा की तरह आजम का आने के सामने अपने गाउन को उतारकर एक बार फिर से नंगी हो गई,,,, सुबह-सुबह वह नहाने के बाद गाउन पहन लेती थी क्योंकि उसे खाना बनाना पड़ता था नाश्ता तैयार करना पड़ता था,,,, क्योंकि अगर वह नहाने के तुरंत बाद तैयार हो जाए तो स्कूल जाते-जाते उसे अजीब सा लगने लगता था इसलिए वह सारा काम खत्म करके तैयार होने के बाद स्कूल जाती थी,,,,।

आईने के सामने वह एक बार फिर से नंगी हो चुकी थी उसके बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं था,,,, वैसे तो पति के देहांत के बाद उसके लिए सजना समझना सब कुछ बेकार ही था लेकिन वह स्कूल में पढ़ने का काम करती थी वह टीचर थी स्कूल में और भी टीचर थी जो सज धज कर ही आया करती थी और इसीलिए उसे भी एकदम अप टू डेट होकर ही जाना पड़ता था ऐसा कोई नियम तो नहीं था लेकिन फिर भी सुगंधा अपने मन को मनाने के लिए अपने पति के देहांत के बाद बस थोड़ा सा सज संवर लेती थी,,, जल्दी से उसने अलमारी में से अपने लाल रंग की ब्रा निकाल जो कि उसकी चूचियों की साइज से कम माप की थी,,, वह जानबूझकर अपनी चूचियों के साइज से कम माफ वाली ब्रा पहनती थी ताकि उसकी चूचियां और भी ज्यादा कसी हुई रहे,,,,

जल्दी-जल्दी उसे अपनी बाहों में डालकर वहां पीछे से बरा का हक लगने लगी और दोनों कप को अपनी दोनों खरबूजे जैसी चुचियों में समाकर उसे कस ली गोरे बदन पर लाल रंग की ब्रा और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी इसी तरह से वह लाल रंग की पहनती भी अलमारी से निकाली,,, और उसे उलट-पुलट कर देखने लगी पेंटिं में हल्का सा छेद था,,,, और उसे छेद को देखते हुए वह अपने मन में सोचने लगी कि इस बार तनख्वाह मिलेगी तो वह अपने लिए जरूर नई पेटी खरीदेगी,,, और ऐसा सोचते हुए वहां अपनी लंबी-लंबी टांगों को उसे पेटी के दोनों छेद में भारी-बड़ी से डालकर उसे ऊपर की तरफ उठाई और कमर टकला कर अपनी खूबसूरत खजाने को उसे लाल रंग की पेंटिं के परदे में छुपा ली,,,, पेटी को पहनते समय उसकी नजर अपनी बर पर गई थी जिस पर हल्के-हल्के बोल फिर से उग आए थे,,,, पति के न होने के बावजूद भी सुगंध अपने बदन की साफ सफाई की बहुत डरकर रखती थी इसलिए समय-समय पर वीट क्रीम लगाकर अपनी बर को साफ करती थी क्योंकि उसे अपनी बुर पर बाल बिल्कुल भी पसंद नहीं थे क्योंकि घने बाल हो जाने की वजह से उन्होंने खुजली होने लगती थी और स्कूल में पढ़ते समय वह खुजाने में शर्म महसूस करती थी,,, वैसे भी अक्सर मर्दों की नजर औरतों की इस तरह की हरकत पर जरूर रहती है कि वह कब अपना हाथ कौन से अंग पर लगती हैं खास करके जब उनकी हथेली उनकी दोनों टांगों के बीच आती है तो मर्द औरत की हरकत को देखकर तुरंत औरतों की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार के बारे में कल्पना करने लगते हैं कि इसकी कैसी होगी इसकी बर पर बाल होंगे कि नहीं होंगे चिकनी होगी कैसी होगी गुलाबी होगी फूली हुई होगी इस तरह की कल्पना करके मन ही मन में आनंद लेते हैं,,,,।

और ऐसा वह खुद अपनी आंखों से देख चुकी थी क्योंकि स्कूल में पढ़ते समय जब एक बार इसी तरह से उसे खुजली हो रही थी तो वह एक हाथ में किताब लेकर दूसरे हाथ से अनजाने में ही अपनी दोनों टांगों के बीच खुजलाने लगी थी और जब उसे इस बात का एहसास हुआ तो उसकी नजर तुरंत सामने की बेंच पर बैठे लड़के पर गई और वह लड़का उसकी यही क्रिया को देखकर अंदर ही अंदर प्रसन्न हो रहा था और सुगंध को तो तब ज्यादा हैरानी हुई जब उसने उसे लड़के के हाथ को अपने पेंट के आगे वाले भाग पर रखा हुआ देखी,,, तब से वह नियमित रूप से अपनी बुर के बाल,,, को बराबर साफ करती थी,,,।,,, अपनी बुर के बारे में सोच कर सुगंधा अपनी हथेली को पेटी के ऊपर से ही अपनी बर पर रखकर उसे हल्के से थपथपा दी मानो कि जैसे उसे शाबाशी दे रही हो,,, और वैसे भी सुगंधा जैसी खूबसूरत हसीन और गदराई जवानी की मालकिन की बुर शाबाशी देने लायक ही थी क्योंकि आज तक पति के देहांत के बाद उसकी बुर ने उसे कभी भी इस कदर मजबूर नहीं की थी कि उसके कदम बहक जाएं या अपने मन में किसी गैर मर्द के बारे में कल्पना करें,,,, वरना जिस तरह के हालात सुगंधा के थे जिस तरह से वह जवानी से भरी हुई थी अगर ऐसी कोई और औरत होती तो अब तक उसके कदम जरूर डगमगा गए होते और वह अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए किसी गैर मर्द का सहारा ले ली होती लेकिन सुगंधा के मामले में ऐसा कुछ भी नहीं था,,,। पति के देहांत के बाद ही जैसे कि वह अपने दोनों बच्चों की परवरिश करने हेतु अपनी ख्वाहिश अपनी जवानी को अपने अरमानों को बंदिश का ताला लगा दी थी जिसकी चाबी तो उसके हाथों में थी लेकिन कभी भी उसने उसे चाबी का गलत उपयोग नहीं की थी इसीलिए आज इस उम्र में भी उसकी जवानी बरकरार थी उसके बदन का कसाव भर करार था उसका बदन और भी ज्यादा निखर गया था,,,,।

सुगंधा अलमारी में से पीले रंग की साड़ी निकली जो कि उसके ऊपर और भी ज्यादा खूबसूरत लगती थी,,,, जिसे वह अपनी बिस्तर पर रख दी थी और पीले रंग के ब्लाउज को पहनना शुरू कर दी थी ब्रा की तरह वह ब्लाउज भी अपनी चूचियों से कम माप वाला कप का ही पहनती थी,,, देखते ही देखते सुगंधा अपने आप को आईने में निहारते हुए,,, अपने ब्लाउज का बटन बंद करने लगी और जैसे ही ब्लाउज के सारे बटन बंद हुए उसके दोनों खूबसूरत खरबूजे ब्लाउज में कैद हो गए लेकिन अपनी आभा ब्लाउज के ऊपर बिखेर रहे थे और देखने वालों की हालत खराब करने के लिए तैयार हो चुके थे इसी तरह से वह जल्दी से पेटीकोट भी पहन कर उसे अपनी कमर पर कली और फिर साड़ी पहनने लगी,,,,,।

साड़ी पहनने के बाद वह अपने आप को आईने में देख रही थी एकदम आसमान से उतरी हुई परी लग रही थी बदन भरा हुआ था लेकिन बेहद खूबसूरत चर्बी का कहीं भी ज्यादा जमावड़ा नहीं था जहां भी चर्बी थी अपने हिसाब से थी जिसे देखने पर कोई भी मर्द मदहोश हो जाता था,,,, वह जल्दी से कंघी लेकर अपने बालों को संवारने लगी और तुरंत ही उसका जुड़ा बनाकर पीछे एक बड़ा सा बकल लगा ली जिससे उसके खूबसूरत बाल और भी ज्यादा खूबसूरत नजर आने लगे वह तैयार हो चुकी थी मन में कोई गाना गुनगुनाते हुए वह अपना पर्स उठाई और घर से बाहर आ गई घर में ताला लगा कर वह स्कूल के लिए निकल गई स्कूल आने जाने के लिए उसे बस का सहारा लेना पड़ता था और कभी कभार तो वह पैदल ही आया जाया करती थी जब कभी ज्यादा देर होती थी तो वह बस का उपयोग करती थी,,, लेकिन आज कोई जल्दबाजी नहीं थी इसलिए वह पैदल ही स्कूल के लिए निकल गई थी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि सड़क पर चलते समय आने जाने वालों की नजर उसे पर ही टिकी रहती थी क्योंकि एक तो उसका खूबसूरत बदन खूबसूरत चेहरा किसी फिल्म की हीरोइन से कम नहीं लगता था ऊपर से पीले रंग की साड़ी उसे पर तो और भी ज्यादा कयामत लगती थी आने जाने वालों की नजर भेज जब उसके ऊपर ही पड़ जाती थी आगे से आने वाला इंसान उसकी गोलाकार चूचियों को देखकर मस्त होता था और पीछे से आने वाला इंसान उसकी गदराई आई हुई मदमस्त कर देने वाली गांड को देखकर पागल हुआ जाता था,,,,, और अपने मन में यही सोचता था कि इसको छोड़ने वाला मर्द कितना खुश नसीब होगा जो रोज इसकी लेता होगा,,,,,,,,,।

शाम को अंकित घर पर पहुंचा तो उसकी मां पहले सही तैयार बैठी थी उसे मार्केट जो जाना था खरीदी करने के लिए क्योंकि घर में राशन खत्म हो रहा था,,,। अंकित जैसे ही घर में प्रवेश किया उसे देखकर उसकी मां बोली,,।

चल जल्दी से तैयार हो जा मार्केट जाना है खरीदी करने,,,

मेरे लिए नए जूते भी लोगी ना,,,

अरे बेवकूफ राशन की खरीदी करने जाना है नए जूते तुझे तनख्वाह मिलेगी तब खरीदूंगी बस,,,, आप जल्दी से तैयार हो जाओ वैसे भी बहुत देर हो चुकी है आते-आते शाम ढल जाएगी,,,,

अच्छा रुको बस 2 मिनट में आता हूं,,,,,

(इतना कहकर संजू बाथरूम में चला गया और उसकी मां वही कुर्सी पर बैठकर उसका इंतजार करने लगी और मन में सोचने लगी कि क्या-क्या खरीदना है क्या बाकी रह गया है वैसे तो वह राशन की लिस्ट तैयार कर ली थी लेकिन फिर भी सोच रही थी कि कुछ और लेना हो तो वैसे तो पति के देहांत की बात थोड़ी बहुत दिक्कत घर चलाने में हो रही थी लेकिन फिर भी टीचर होने के नाते उसे इतनी तनख्वा तो मिल ही जाती थी कि वह आराम से अपना घर चला सके,,,, सुगंधा ने बड़े सलीके से अपना घर संभाल‌ ली थी,,,, थोड़ी ही देर में अंकित तैयार होकर आ गया था और उसकी मां कुर्सी पर से उठकर कमरे से बाहर आ गई संजू भी अपनी मां के पीछे-पीछे चल दिया वैसे तो जब कभी भी सुगंधा आगे आगे चलती थी तो हर मर्द की नजर उसकी गोल-गोल गांड पर ही टिकी रहती थी क्योंकि चलते समय उसकी गांड मटती बहुत थी और मटकनी हुई गांड देखकर हर मर्द का लैंड खड़ा हो जाता था लेकिन ऐसा कुछ भी अंकित के साथ नहीं होता था हालांकि उसके नजर अपनी मां की गांड पर जाकर जरूर थी लेकिन वह कभी भी अपनी मां के बारे में गलत भावना पैदा नहीं करता था और नहीं कभी अपने मन में गलत सोचता था,,,, बस उसकी सहज रूप से नजरे उसकी मां की गांड पर चली जाती थी और वह सहज रूप से अपनी नजरों को घुमा भी लेता था उसने कभी सोचा नहीं था कि उसकी मां की गांड दूसरी औरतों की तुलना में छोटी है या बड़ी है ढीली है या कसी हुई है,,,, चलते समय मटकती है कि सामान्य रहती है चुचियों का आकार कैसा है बड़ा है कि छोटा है ब्लाउज का बटन बंद करने पर उसकी दरार दिखती है कि नहीं दिखती है इन सब पर तो उसकी नजर जाती जरूरी थी लेकिन इन सबको देखकर उसके मन में गलत भावना नहीं आती थी इसीलिए वह आज तक दूसरे लड़कों से बिल्कुल अलग था,,,,।

दोनों बाजार के लिए निकल गए थे बाजार ज्यादा दूर नहीं था केवल 10 मिनट के रास्ते पर ही था इसलिए जल्द ही दोनों बाजार में पहुंच गए और राशन की दुकान पर जाकर खड़े हो गए राशन की दुकान पर थोड़ी बहुत भीड़ थी ज्यादातर औरतें ही खड़ी थी,,,, जो कि अपना राशन खरीद रही थी,,,, अंकित दुकान के एक तरफ खड़ा हो गया था जहां उसके आगे दो-तीन औरतें खड़ी थी और ठीक बगल में उसकी मां भी खड़ी हो गई थी हाथ मे राशन का लिस्ट लिए,,,,

दुकान वाला बारी-बारी से सब की लिस्ट लेकर राशन का सामान निकाल रहा था,,, अभी सुगंधा का नंबर है या नहीं था वह वहीं खड़ी होकर अपने नंबर का इंतजार कर रही थी और दुकान में इधर-उधर देखकर और भी चीजों को देख रही थी दुकान पूरी तरह से राशन से भरी हुई थी दोनों तरफ कांच के कपाट लगे हुए थे जिसमें महंगी महंगी चीज रखी हुई थी,,,, अंकित की नजर बार-बार कंप्लेन के डिब्बे पर चली जा रही थी,,, बहुत दिनों से उसकी मां कंप्लेन पीने का कर रहा था और इस बारे में उसने अपनी मां को भी कई बार कह चुका था लेकिन उसकी मां जानती थी कि वह महंगा आता है इसलिए बार-बार जानकारी देती थी लेकिन इस बार वह भी अपने मन में यही सोच रही थी की तनख्वाह पर अंकित के लिए जरुर कंप्लेन खरीदेगी,,,,।

अंकित के आगे जो औरत खड़ी थी उसका ब्लाउज पीछे से काफी खुला हुआ था और उसकी नंगी चिकनी पीठ दिख रही थी और वह काफी गोरी भी थी अंकित की जगह अगर कोई और लड़का होता तो अब तक वह उसे औरत को स्पर्श करने की बहुत कोशिश कर चुका होता क्योंकि अक्सर दुकानों पर यही स्थिति होती है या तो वह उसे औरत को स्पर्श करने की कोशिश करता है या तो अपने आगे वाले भागों को उसके नितंबों पर स्पर्श करने की कोशिश करता लेकिन इन सब में अंकित नहीं था वह दूसरों से अलग था उसकी आंखों के सामने भले यह खूबसूरत औरत खड़ी थी खुला ब्लाउज पहनकर लेकिन फिर भी उसकी खूबसूरती पर अंकित की नजर नहीं पड़ रही थी उसका ध्यान जा रहा था तो उसे खूबसूरत औरत के बदन से उठती हुई मादक खुशबू पर उसे औरत ने बहुत ही सुगंधित परफ्यूम लगाई हुई थी जिसकी खुशबू अंकित को बहुत ही अच्छी लग रही थी और वह अपने मन में सोच रहा था कि काश उसके पास भी इस तरह का परफ्यूम होता तो मजा आ जाता वह भी इतना सोच ही रहा था कि वह औरत जो सामान ले रही थी उसके हाथ से हाथ में लिया हुआ साबुन छूट कर नीचे गिर गया और उसे उठाने के चक्कर में वजह से झुकी उसकी गांड एकदम से पीछे हुई और सीधे जाकर अंकित के लंड से टकरा गई,,, उसे औरत की गांड अंकित के लंड के आगे वाले भाग के एकदम बीचो-बीच स्पर्श हुई थी कि ना चाहते हुए भी अंकित के लंड में अजीब सी हलचल होने लगी थी,,, जैसे ही उसे औरत की गांड अंकित के आगे वाले भाग पर स्पर्श हुई अंकित तुरंत अपने आप को संभालने की कोशिश करता हुआ पीछे होने लगा लेकिन तब तक उसे औरत की गांड अपना कमाल दिखा चुकी थी उसे औरत की गर्म जवानी और उसकी मदहोश कर देने वाली गांड का स्पर्श अंकित के तन बदन में अजीब सा हलचल पैदा कर गया था और वह औरत साबुन उठाने के बाद तुरंत खड़ी हुई और पीछे देखकर अंकित की तरफ मुस्कुराई और सॉरी बोल दी अंकित उसे औरत को देखा ही रह गया उसके चेहरे पर मुस्कान देखकर और उसके द्वारा सॉरी कहने पर एक अजीब सी हलचल अंकित ने अपनी तंबदन में महसूस किया और जवाब में अंकित ने भी मुस्कुराते हुए कोई बात नहीं कह कर बात को टाल दिया,,,, बगल में खड़ी सुगंधा उसे औरत की गांड और अपने बेटे के लंड का स्पर्श उसे औरत की गांड पर तो देख नहीं पाई थी लेकिन उसे औरत को सॉरी कहते हुए देख ली थी और जवाब में अपने बेटे का जवाब सुनकर वह सहज रूप से मुस्कुरा दी थी और वापस अपने नंबर का इंतजार करने लगी थी,,,,।

थोड़ी ही देर में वह औरत थैली में अपना सामान लेकर जाने लगी थी संजू ना चाहते हुए भी पीछे मुड़कर उसे औरत की तरफ देखने लगा और पहली बार उसने किसी औरत के नितंबों को बड़े ध्यान से देख रहा था उसका मटकना हो उसे बेहद लुभाने लग रहा था पल भर में उसके मन में अजीब सी हलचल होने लगी थी उसका मन बदल गया था,,, वह तब तक उसे औरत को देखता रहा जब तक कि वह औरत बाजार की भीड़ में गुम नहीं हो गई,,,, थोड़ी ही देर में उसकी मां वजन किया हुआ सामान अपने ठेले में रखना शुरू कर दी सूजी बेसन डाल गरम मसाले मिर्ची हल्दी थोड़ा-थोड़ा करके वह सब सामान थेले में भर चुकी थी,,, तभी उसकी मां नहाने का एक सामान्य साबुन लेने लगी तो अंकित बोला,,,,)

यह वाला नहीं मम्मी लीरील साबुन खरीद लो उसकी खुशबू बहुत अच्छी है,,,,

नहीं संजु यही ठीक है बार-बार साबुन बदल के नहीं लगना चाहिए वरना नुकसान करता है,,,

क्या मम्मी तुम भी,,,,

(साबुन खरीदने की बात टाल दी गई थी दुकान वाला बिल बना रहा था और भी ग्राहक खड़े थे,,, दुकान में काम करने वाला कारीगर बार-बार सुगंधा की तरफ देख रहा था खास करके उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों की तरफ उसकी निगाह जा रही थी पहले तो संजु इस तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं देता था लेकिन आज पहली बार उसे कम करने वाले की निगाह को देख रहा था जो कि उसकी मां की खूबसूरती और उसकी चूचियों पर घूम रही थी यह देखकर अंकित को गुस्सा आने लगा लेकिन वह कुछ कह नहीं सकता था क्योंकि दुकान पर बहुत से लोग थे अगर इस बारे में वह जरा सा भी कुछ कहता तो जिसकी नजर उसकी मां पर नहीं जा रही है उन लोगों की भी नजर उसकी मां पर पहुंच जाती थी और ऐसा अंकित बिल्कुल भी नहीं चाहता था,,, फिर भी वह अपनी मां से बोला,,)

जल्दी करो ना मम्मी बहुत देर हो रही है,,,

बस बेटा हो गया,,,,।

(अंकित बार-बार दुकान में काम करने वाले आदमी को ही देख रहा था उसकी नज़रें उसकी मां के बदन पर घूम रही थी और अंकित को तुरंत उसके दोस्तों की बात याद आ गई,,, जॉकी चाय की दुकान पर बैठकर सड़क पर जाती हुई औरत के बारे में गंदी-गंदी बात कर रहे थे और उसका वह दोस्त जिसके साथ लड़ाई हुई थी उसकी मां के बारे में गंदी बात कर रहा था उसे समझते देर नहीं लगी की सब मर्दों की नजर औरत की खूबसूरती पर ही उसके अंगों पर ही रहती है ,,, थोड़ी ही देर में सुगंधा पैसे देकर हाथ में थैला लेकर चलने लगी तो अंकित खुद अपनी मां के हाथ में से वजनदार थैला को ले लिया और चलने लगा,,,

बाजार के नुक्कड़ पर पानी पुरी का ठेला लगा हुआ था दूसरी औरतों की तरह सुगंधा को भी पानी पुरी बहुत पसंद था इसलिए वह तुरंत उसे ठेले के पास खड़ी हो गई और अपने बेटे के साथ मिलकर पानी पुरी खाने लगी पानी पुरी का चटकारा मसाला उसे बहुत पसंद था,,,,,,, अंकित को भी पानी पुरी अच्छी लगती थी इसलिए वह भी खाने लगा दोनों पानी पुरी खाने के बाद तृप्ति के लिए भी पानी पुरी पैक करवा दिए थे और घर पर पहुंचने के बाद तृप्ति को उसके हिस्से की पानी पुरी दे दिए थे जिसे देखकर वह बहुत खुश हुई थी,,,,।

रास्ते भर और घर पर पहुंचने के बात भी अंकित के मन में उसे औरत की छवि बस गई थी और वह उसे औरत के बारे में सोच रहा था उसके बदन से उठने वाली मादक को खुशबू को महसूस कर रहा था और फिर उसके नितंबों से अपने लंड का टकराना और फिर हाथ में थैला लिए बाजार के भीड़ में गुम हो जाना सब कुछ सोचते हुए उसे अजीब सा महसूस हो रहा था उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी लेकिन जैसे-जैसे वह पढ़ने में मन लगने लगा वैसे-वैसे उसके दिमाग से औरत एकदम से खो गई और वह एकदम से सामान्य हो गया,,,।

...............................
 
जैसे तैसे करके सुगंधा के जीवन की गाड़ी आगे बढ़ रही थी वह अपने दोनों बच्चों से बहुत खुश थी,,,,, सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसका लड़का धार्मिक विचारों वाला और सही रास्ते पर चलने वाला एक अच्छा इंसान हैं,, और इस बात की उसे खुशी भी होती थी क्योंकि आज तक उसे मोहल्ले में से ऐसी किसी भी शिकायत के सुनने का मौका नहीं मिला था जिससे उसका सर शर्मिंदगी से नीचे झुक जाए,,,,, और यही सुख से अपने बेटी तृप्ति के तरफ से भी मिला था वह मोहल्ले में देखी थी कि उसकी बेटी की उम्र की लड़कियां कुछ ज्यादा ही सज-धज कर घर से निकलती थी,,, और बाहर लड़कों के साथ चक्कर चलाती थी क्योंकि यह सब अपने कानों से सुन चुकी थी,,, ऐसा कुछ उसे अपनी बेटी तृप्ति की तरफ से भी सुनने को मिला नहीं था लेकिन वह तृप्ति को रोज समझती थी कि इस तरह के कम कभी मत उठाना जिसे वह समाज में सर उठाकर चल ना सके और उसकी बेटी भी उसे पूरी तसल्ली देती थी कि ऐसा कभी नहीं होगा,,,,,

सुगंधा का खूबसूरत भरा हुआ बदन

लेकिन उसके कदम भी डगमगा चुके थे अपने कॉलेज में अपने सहपाठी संदीप नाम के छोकरे के प्रति वह आकर्षित हो चुकी थी या यू कह लो कि वह मन ही मन में संदीप से प्यार करने लगी थी और संदीप भी उसके पीछे पड़ा हुआ था लेकिन तृप्ति ने अभी तक अपने प्यार का इजहार उसे कि नहीं थी संदीप तो उसे अपने प्यार का इजहार कर चुका था,,,,, इस प्यार व्यार के चक्कर से वह अपने आप को हमेशा से बचाती आ रही थी लेकिन इस तरह के आकर्षण से बचने का भी एक सीमा एक उम्र होती है और जिस उम्र से वह गुजर रही थी वह जवानी से भरा हुआ था आकर्षण से भरा हुआ था इस उम्र में लड़के और लड़कियां अक्सर एक दूसरे से आकर्षित होते ही रहते हैं और किसी आकर्षण से तृप्ति भी बच नहीं पाई थी हालांकि उसने अभी तक संदीप को अपने बदन को छूने नहीं दी थी और ना ही उसे कोई छूट-छाट लेने दी थी जिससे उसकी मां बहकने लगे या इस बारे में किसी को पता चले तो वह बदनाम हो जाए,,,, धीरे-धीरे वह इस खेल में आगे बढ़ती जा रही थी लेकिन बहुत संभाल कर वह नहीं चाहती थी कि इस बारे में किसी को भी कानों कान खबर पड़े,,,,।

जिस दिन से अंकित का झगड़ा हुआ था उसे दिन से वहां अभी तक क्रिकेट खेलने के लिए नहीं गया था,,, क्योंकि ऐसे दोस्तों के साथ रहना उसे बिल्कुल भी पसंद नहीं था जो उसकी मां के बारे में या किसी भी औरत के बारे में गंदी बातें करते हो और गंदी नजर रखते हो,,,, लेकिन रविवार को उसकी कुछ दोस्त घर पर आ गए उसे लेने के लिए क्योंकि आज फिर से क्रिकेट का मैच था,,,,।

सूरज और रौनक दोनों अंकित को लेने के लिए उसके घर आए थे अंकित रौनक को देखते ही अंदर ही अंदर क्रोधित होने लगा लेकिन वह अपने गुस्से को अपने चेहरे पर नहीं लाया क्योंकि वह अपने घर में था और उसकी मां रसोई घर में खाना बना रही थी,,,,,,,, सूरज जो कि अंकित का दोस्त था वह उसे समझाते हुए बोला,,,।

यार अंकित भूल जा जो कुछ भी हुआ रौनक तुझसे माफी भी मांग रहा है,,,।

हां यार अंकित माफ कर दे जो कुछ भी हो गुस्से में हुआ था और वैसे भी जो टीम हार जाती है वह थोड़ा बहुत तो गुस्से में रहती ही है,,, और तू खामखा बात का बतंगड़ बना रहा है,,,(रौनक अंकित से माफी मांगते हुए बोला)

अंकित के दोस्त उसकी मां के बारे में इस तरह की कल्पना कर रहे थे

मैं बात का बतंगड़ बना रहा हूं रौनक,,, तुझे सोच समझ कर बोलना चाहिए था आखिर खेल में हार जीत तो चलता रहता है लेकिन तू किसी की मां बहन की गाली देगा तो क्या हुआ उसे सहन कर पाएगा,,,,

चल जाने दे अंकित चल तू हम लोगों के साथ आज दूसरे मोहल्ले वाले के साथ क्रिकेट मैच है,,, और हमें यह मैच जीतना है क्योंकि वह लोग चैलेंज किए हैं कि तुम लोग कभी भी जीत नहीं पाओगे,,,,।

(दरवाजे पर हो रही शोरगुल की आवाज सुनकर तब तक सुगंध रसोई बनाते हुए हाथ में बेलन लिए रसोई घर से बाहर आ गई,,,, और देखी की दरवाजे पर अंकित और उसके दोस्त खड़े हैं,,,, वह उन्हें देखकर खुश हो गई और एक हाथ में बेलन लिए हुए ही साड़ी के एक छेड़ को आगे से ही अपनी साड़ी में अंदर की तरफ खोंसते हुए बोली,,,)

अरे बेटा तुम दोनों बाहर क्यों खड़े हो अंदर आओ चाय गरम है आकर चाय तो पी लो,,,,,

नहीं नहीं आंटी चलेगा,,,,,( सूरज और रौनक दोनों औपचारिक रूप से बोले लेकिन उनकी नजर सुगंधा की हरकत पर थी वह जिस तरह से अपनी साड़ी के किनारी को अपनी नाभि के बगल साड़ी के अंदर डाली थी ऐसी हालत में उन दोनों की नजर सुगंधा की गहरी नाभि पर थी और गड़रे बदन पर थी वह दोनों का लंड सुगंधा की हरकत पर नृत्य करने लगा था,,, वैसे भी औरतों की यह हरकत मर्दों के बदन में मदहोशी भर देती है उन्हें जोश से भर देती है और उनके मन को चुदवासा बना देती है ,,,, वह दोनों पूरी तरह से उत्तेजित हो गए थे और सुगंधा उन दोनों की बात सुनकर बोली,,,)

नहीं नहीं ऐसा कैसे चलेगा आखिरकार तुम दोनों अंकित के दोस्त हो इसलिए आज से तुम दोनों भी मेरे बेटे जैसे ही है आओ आप जल्दी से चाय पी लेना फिर उसके बाद जहां जाना हो चले जाना,,,,(और ऐसा कहते हुए सुगंधा वापस रसोई घर में चली गई लेकिन जाते समय उसके पिछवाड़े को देखकर रौनक और सूरज दोनों के तन बदन में उत्तेजना की लहर जोड़ने लगी उन दोनों के बदन में आग लगने लगी वह दोनों छुपी नजरों से सुगंधा के गदराए जिसमें को देखकर अंदर ही अंदर उत्तेजित हुए जा रहे थे,,,,। इस समय अंकित दोनों की नजरों से अनजान था,,,, उसे नहीं मालूम था कि क्रिकेट मैच खेलने के लिए उसे बुलाने के लिए आए हुए उसके दोनों दोस्त उसकी मां के भरे हुए बदन को देख कर ललचाई नजरों से उसे देख रहे हैं,,,, और मन ही मन में उसकी मां को लेकर कल्पना भी करने लगे हैं,,,, वैसे तो अंकित का मन बिल्कुल भी नहीं था उन दोनों को चाय पिलाने का लेकिन अपनी मां की बात को टाल नहीं सकता था इसलिए वह भी उन दोनों को अंदर आने के लिए बोला और जो कुर्सी निकाल कर दोनों को बैठने के लिए दे भी दिया और अंकित जैसे ही उन दोनों के लिए अंदर पानी लेने के लिए गया तो सूरज ही रौनक के कान में धीरे से बोला,,,)

बाप रे रौनक अंकित की मां तो एकदम धमाल है कितनी मस्त माल है,,,

हां यार तू सच कह रहा है इतने नजदीक से कभी उसे देखा नहीं था बस दूर से ही देखा था और आज तो मेरी हालत खराब हो गई है देख ले जरा,,,(अपने पेट के आगे वाले भाग को दिखाते हुए जो की पूरी तरह से उत्तेजना से फूल गया था) इसकी तो हालत ही खराब हो गई,,,.

मेरी भी हालत तेरी जैसी ही है कसम से अगर ऐसी औरत बिस्तर पर होना तो जिंदगी का मजा ही कुछ और है,,,,,

चुप चुप अंकित आ रहा है,,,।

(अंकित दोनों के लिए पानी लेकर आया और तभी उसकी मां चाय गरम करके प्लेट में दो कप और दो पराठे लेकर आई,,,, अंकीत चाय पी चुका था,,, इसलिए उसके लिए नहीं लेकर नहीं आई थी,,,, अंकित जल्दी से उन दोनों के सामने एक छोटा सा टेबल रख दिया था और सुगंधा चाय का प्लेट और परांठा लेकर उन दोनों के ठीक सामने आकर खड़ी हो गई और धीरे से छुपाकर दोनों के सामने एक-एक चाय का कप और एक-एक पराठा रखने लगी लेकिन उसके झुकाने की वजह से उन दोनों की आंखों के सामने सुगंधा की बदमाशी कर देने वाली दोनों चूचियां नजर आने लगी जो झुकाने की वजह से आगे से ज्यादा तो बाहर निकली हुई थी और वह दोनों सुगंधा की मदमस्त कर देने वाली खरबूजे जैसी चुचियों का उभार देखकर एकदम मस्त हो गए उनके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी और वह सुगंधा को चोदने के लिए लालायित होने लगे,,, वह दोनों कुछ बोल नहीं पाए बस इतना ही बोले,,,)

इसकी क्या जरूरत थी आंटी,,,,

अरे खाओ बेटा मैं भी तुम्हारी मां की जैसी हूं।(इतना कहते सुगंधा मुस्कुराते हुए वापस रसोई घर में चली गई और वह दोनों तिरछी नजर से उसे जाते हुए देख रहे थे उसे जाते हुए नहीं बल्कि उसकी मटकती हुई बड़ी-बड़ी गांड को देख रहे थे जो कि कसी हुई साड़ी मैं और भी ज्यादा ऊभरी हुई और बड़ी-बड़ी लग रही थी,,,, दोनों गहरी सांस लेते हुए चाय और नाश्ता करने लगे और अपने मन में सुगंधा के साथ बिस्तर पर कबड्डी खेलने लगे वह दोनों अपने मन में कल्पनाओं के घोड़े दौड़ने लगे थे एक तरफ वह औपचारिक रूप से चाय और पराठा का आनंद भी ले रहे थे और दूसरी तरफ अपने दिल को दिमाग में सुगंधा को लेकर बिस्तर पर मजे लेने की कल्पना भी कर रहे थे रौनक तो अपने दिमाग में यही सोच रहा था कि वह अंकित की मां की साड़ी कोड अपने हाथों से उतर रहा है उसके बदन पर से हर एक कपड़ों को वह अपने हाथों से दूर करके उसे नंगी कर रहा है और नंगी कर लेने के बाद उसे अपनी गोद में उठाकर नरम-नरम बिस्तर पर पटक दे रहा है और फिर वह कल्पना में भी अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा है और तुरंत सुगंधा की दोनों टांगों के बीच आकर अपने लंड को उसकी गुलाबी छेद में डालकर उसे चोदना शुरू कर दे रहा है कल्पनाओं का घोड़ा इतना जबरदस्त था कि वह दोनों पूरी तरह से मस्त हुए जा रहे थे कल्पना में भी उन्हें हकीकत महसूस हो रहा था,,,,
 
सूरज तो रौनक से खत्म आगे था वह अंकित का एकदम खास दोस्त था लेकिन फिर भी उसकी मां की जवानी देख कर वह दोस्ती को एक तरफ रख कर अपने मन में अंकित की मां के लिए बहुत ही गंदी-गंदी ख्याल लता था वह अपने मन में चाय और पराठा का लुफ्त उठाते हुए अपने मन में सोच रहा था कि वह अपने दोस्त अंकित की मां को अपने कमरे में लेकर जा रहा है और उसकी मां तुरंत अपने हाथों से अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई है और वह खुद सूरज के कंधों को अपने हाथ से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ ले जाते हुए उसके मुंह को अपनी बु्र पर लगाकर उसे बुर चाटने के लिए मजबूर कर रही है और वह भी अंकित की मां की बुर पर अपने होंठ लगाकर उसे बड़ी लिज्जत के साथ चाट रहा है,,,, सुगंधा सूरज की हरकत पर पूरी तरह से पागल हुए जा रही है और अपनी कमर को आगे पीछे करके उसके मुंह को ही चोद रही है,,,, और कुछ देर बाद सूरज अपनी कल्पनाओं का घोड़ा और तेज दौड़ते हुए खुद खड़ा हो गया और उसकी मां को कंधों का सहारा लेकर नीचे की तरफ झुकते हुए अपने खड़े लंड को उसके मुंह में डालकर उसे चुसवा रहा है,,, और इसके बाद उसकी मां खड़ी होकर सूरज को धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दी और खुद अपनी नंगी बड़ी-बड़ी गांड उसके खड़े लंड पर रखकर पटकना शुरू कर दी दोनों की कल्पना इतनी जबरदस्ती की दोनों को हकीकत का आभास हो रहा था दोनों के पेट में तंबू बना हुआ था और दोनों चाय पराठा भी खा रहे थे इस बात से अनजान अंकित दोनों के चाय पी लेने का इंतजार कर रहा था क्योंकि वह भी क्रिकेट का शौकीन था और उसे भी क्रिकेट खेलने था बस गुस्से की वजह से वह घर में ही बैठा था लेकिन रौनक के माफी मांगने से वह मान गया था लेकिन उसे क्या मालूम था कि घर में बैठने के बावजूद भी वह दोनों उसकी मां के बारे में गंदी गंदी कल्पना कर रहे थे,,,,।

थोड़ी ही देर में दोनों चाय खत्म करके अंकित के साथ घर से निकल गए अंकित की मां तो दोनों को प्रेम भाव से चाय पराठा खिला रही थी क्योंकि वह दोनों अंकित के दोस्त भी थे और मोहल्ले के ही लड़के थे,,, इसलिए वह इस बात से अनजान थी कि उसके लड़के के हम उम्र होने के बावजूद भी और उसके लड़के के दोस्त होने के बावजूद भी उन दोनों के मन में उसके लिए इतनी गंदी-गंदी भावनाएं थी अगर वह जान जाती तो शायद उन दोनों को अपने घर में कभी प्रवेश करने ही ना देती और अंकित को भी उन दोनों के साथ रहने नहीं देती लेकिन अंकित और उसकी मां बिल्कुल अनजान थे अंकित तो फिर भी थोड़ा-थोड़ा समझता था क्योंकि उसका एक बार झगड़ा भी हो चुका था इसी बात को लेकर लेकिन रोनक के द्वारा माफी मांग लेने पर वह सब कुछ भूल गया था,,,।

अंकित क्रिकेट खेलने के लिए जा चुका था और तृप्ति भी ट्यूशन के लिए जा चुकी थी घर में केवल सुगंधा ही रह गई थी रविवार का दिन था खाना खाकर और घर की साफ सफाई करके वह बैठी थी कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई वह धीरे से उठकर दरवाजा खोली तो दरवाजे पर सुषमा खड़ी थी वह मुस्कुराते हुए बोली,,,।

क्या कर रही हो सुगंधा,,,

कुछ भी नहीं ऐसे ही बैठी थी रविवार का दिन था तो घर पर कोई है नहीं अंकित क्रिकेट खेलने गया है और तृप्ति ट्यूशन के लिए गई है और वैसे भी रविवार का दिन बहुत बड़ा लगने लगता है,,,,।

चल कोई बात नहीं मेरे घर पर भी कोई नहीं है मेरा भी समय नहीं बीत रहा था तो मैं सोची कि चल तुझे बुला लूं,,,

किस लिए,,,,

अरे किस लिए क्या चल मेरे घर में कोई फिल्म देखते हैं,,,,

हां हां यह ठीक रहेगा,,,(सुगंधा भी मुस्कुराते हुए बोली,, और वह जल्दी से दरवाजा बंद करके सुषमा के साथ उसके

घर पर जाने लगी,,,, पूरे मोहल्ले में केवल सुषमा के पास ही

बड़ा सा कैसे वाला सिस्टम था जो की 90 के दशक में लोग किराए पर लाकर मोहल्ले में देखा करते थे उसके पास अच्छा खासा फिल्म का कलेक्शन भी था सुगंधा कमरे में एक कुर्सी पर बैठ गई थी सुषमा ने दरवाजा बंद कर दी थी और वह कपाट में से एक अच्छी सी कैसेट ढूंढ रही थी,,,)

कोई अच्छी सी फिल्म लगाना मिथुन वाली,,,,।(कुर्सी पर बैठे-बैठे सुगंधा बोली)

अरे हां वही तो ढूंढ रही हुं,,,,,।

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
रविवार के दिन सुगंधा के घर में उसके दोनों बच्चे मौजूद नहीं थे अंकित अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने चला गया था और तृप्ति ट्यूशन के लिए चली गई थी और ऐसे में उसकी पड़ोसन सुषमा जो की सुगंधा से काफी घुली मिली हुई थी वह भी रविवार का दिन होने की वजह से सुगंधा को अपने साथ अपने घर ले गई थी फिल्म देखने के लिए,,, कोई खास काम न होने की वजह से सुगंधा भी फिल्म देखने के लिए तैयार हो गई थी,,, और वह भी खुशी-खुशी अपना घर बंद करके पड़ोस वाली सुषमा के घर चल दी थी,,, सुगंधा जैसे ही उसके घर में प्रवेश की वैसे ही सुषमा ने दरवाजा बंद कर दी,,,,।

सुषमा के द्वारा अपने घर का दरवाजा बंद करने का कारण कोई और नहीं था बल्कि या उसे दूर का समय था जब किसी के घर टीवी जैसे उपकरण नहीं हुआ करते थे कुछ लोगों के ही घर हुआ करते थे ऐसे में मोहल्ले के सभी लोग किसी एक घर में इकट्ठा हो जाते थे और फिर मैं देखने का आनंद लूटते थे,,, और इसीलिए सुषमा घर का दरवाजा बंद कर दी थी ताकि कोई आ न सके और उसके घर में भी घर पर कोई नहीं था,,,,,, एक कुर्सी को खींचकर सुगंधा उसे पर बैठ चुकी थी उसके मन में उत्सुकता थी फिल्म देखने की क्योंकि टेलीविजन पर कोई खास अच्छी फिल्म आती नहीं थी बस धारावाहिक ही आती थी,,, ऐसे में उसने सुषमा से फरमाइश भी कर दी थी की मिथुन की कोई अच्छी सी पिक्चर लगाई क्योंकि सुगंध को मारधाड़ वाली फिल्में बहुत अच्छी लगती थी वैसे तो वह अपने जीवन में बहुत कम फिल्म देखी थी लेकिन उसका झुकाव मिथुन के फिल्मों पर कुछ ज्यादा ही था,,,,

यह उस दौर का समय था जब मोहल्ले के लोग आपस में पैसा इकट्ठा करके रंगीन टीवी किराए पर लेट थे और साथ में वीसीआर जिसमें की बड़ी सी कैसेट आती थी और फिर खुले में फिल्म का आनंद लिया जाता था लेकिन सुषमा सुखी संपन्न थी इसलिए उसके घर पर रंगीन टीवी भी थी और बड़ी सी कैसेट वाली मशीन भी थी,,, और उसके पास फिल्मों का अच्छा खासा कलेक्शन भी था,,,,।

क्या हुआ सुषमा बड़ी देर से कैसे ढूंढ रही हो लेकिन तुम्हें मिल नहीं रहा है,,,,

हां यार सोच रही हूं कोई अच्छी सी फिल्म लगाऊं,,,,

तो लगाओ ना कि सारा समय सिर्फ कैसेट ढूंढने में ही निकाल दोगी,,,,

रुक जा यार वही तो ढूंढ रही हूं,,,,

अरे कैसेट पर फिल्म का नाम भी तो लिखा होगा,,,,

अरे वही तो देख रही हुं लेकिन कुछ कैसेट पर कुछ लिखा भी नहीं है देखु तो सही कौन सी फिल्म है,,,,,

चलो जाने दो,,,, कोई भी लगा दो,,,

चलो कोई बात नहीं यही लगा देता हूं देखो तो सही कौन सी फिल्म है,,,,(घर में ही सारा सिस्टम होने की वजह से सुषमा भी कैसे लगाना जानती थी इसलिए वह ड्रोवर में से वही कैसेट निकाली जिसमें कुछ लिखा नहीं था,,,, और वह उसे लगा दी,,,, और एक कुर्सी सुगंधा के पास ले जाकर उसे पर बैठ गई दरवाजा बंद होने की वजह से कमरे में पूरी तरह से अंधेरा था दोनों उत्सुकता के साथ रंगीन टीवी की तरफ देख रहे थे,,, सुगंधा के पास ब्लैक एंड व्हाइट टीवी थी इसलिए रंगीन टीवी में देखने का आनंद वह भी लेना चाहती थी,,, दोनों की नजरे रंगीन टीवी की स्क्रीन पर टिकी हुई थी दोपहर का समय था बाहर शोर शराबा भी नहीं था और घर में कोई मौजूद भी नहीं था इसलिए दोनों निश्चिंत थे,,,।
 
थोड़ी ही देर में स्क्रीन में कुछ इंग्लिश में लिखा हुआ आया जिस पर सुगंधा ने ध्यान नहीं दी उसका ध्यान सिर्फ फिल्म देखने पर था वह देखना चाहती थी कि सुषमा ने कौन सी फिल्म लगाई है और तभी स्क्रीन पर चित्र उभरने लगा,,,, दोनों उत्सुक नजर से टीवी की तरफ देख रहे थे जिसमें पहले ही सीन में एक खूबसूरत लड़की जोकि अंग्रेज थी वह शर्ट और स्कर्ट पहनकर सीडीओ से नीचे उतर रही थी,,,,,, कुर्सी पर बैठी सुगंध और सुषमा दोनों बड़े गौर से टीवी के स्क्रीन पर देख रही थी और उसे अंग्रेजन को देखकर सुषमा बोली,,,।

अरे यार यह कौन सी पिक्चर है कुछ समझ में नहीं आ रही है इस तरह से तो पिक्चर की शुरुआत मैंने आज तक नहीं देखी,,,,

मुझे भी तो समझ में नहीं आ रहा है,,,,(टीवी की स्क्रीन पर देखते हुए सुगंधा बोली,,,)

तभी वह खूबसूरत लड़की सीडीओ से उतर कर घर के गैराज की तरफ आगे पड़ी और जैसे-जैसे वह आगे बढ़ रही थी कैमरा उसके पीछे उसके गोल-गोल नितंबों पर टिका हुआ था और उसकी फ्रॉक में से उसकी मटकती हुई गांड बहुत खूबसूरत लग रही थी हालांकि उसकी गांड तो नजर नहीं आ रही थी लेकिन फ्रॉक में से एहसास जरूर हो रहा था,,,,,।

(हीरोइन की गांड पर कैमरा का फोकस देखकर सुगंधा और सुषमा दोनों को समझ में नहीं आ रहा था क्योंकि आज तक वह दोनों हिंदी पिक्चर में इस तरह से तो नहीं देखी थी कि कैमरा हीरोइन की गांड पर घूमता रहे,,,, तभी हैरानी जताते हुए सुषमा बोली,,,)

अरे यार यह फिल्म वालों को क्या हो गया है लड़कियों की गांड पर ही कैमरा घूमा रहे हैं आज तक तो मैं इस तरह से नहीं देखी,,,

मुझे भी तो समझ में नहीं आ रहा है सुषमा लगता है जमाना बदल गया है इसी तरह की फिल्म बनने लगी है,,,,(सुगंधा भी आश्चर्य जताते हुए बोली)

मुझे भी ऐसा ही लग रहा है चलो देखते हैं क्या होता है लेकिन अभी तक कोई हीरो दिखाई दे ही नहीं रहा है,,,।

हीरोइन दीख रही है तो हीरो भी आ ही जाएगा,,,।

(सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली)

दोनों स्क्रीन पर ही देख रहे थे कैमरा तब तक उसे हीरोइन की गांड पर ही घूमता रहा उसके उभार को ही दिखाता रहा जब तक की वह गेराज में खड़ी एक बड़ी सी गाड़ी के करीब पहुंच नहीं गई दोनों को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह हो कह रहा है,,,, वह हीरोइन गाड़ी के चारों तरफ घूम कर गाड़ी का जायजा ले रही थी,,,, तभी वह पास में ही पड़ी है बाल्टी को उठा ले जिसमें साबुन का बहुत सारा जग था लेकिन उसे बाल्टी को नीचे झुक कर उठते समय कैमरा उसकी गांड के एकदम बेहद करीब चला गया जिसमें से गांड की दोनों फैन के एकदम साफ नजर आ रही थी उसकी पीले रंग की चड्डी नजर आ रही थी जिसे देखते ही सुषमा और सुगंधा दोनों के होश उड़ गए क्योंकि वह दोनों ने आज तक इस तरह की फिल्म नहीं देखी थी इस तरह की अश्लीलता नहीं देखी थी दोनों एकदम दंग रह गए थे और हैरानी जताते हुए सुगंधा बोली,,,)

बाप रे सुषमा यह कौन सी फिल्म लगा दी,,, मैंने आज तक फिल्म इतनी अश्लीलता नहीं देखी थी,,,

अरे यार मुझे भी तो समझ में नहीं आ रहा पहली बार तो मैं देख रही हूं पता नहीं कौन सी फिल्म है जो लड़कियों को इतना गंदा दिखाया जा रहा है,,,,,(वह दोनों टीवी की स्क्रीन पर देख कर अभी बातें ही कर रहे थे कि तभी वह अपने शर्ट के बटन खोलने लगी है देख कर तो दोनों आश्चर्यचकित हो गए और देखते ही देखते हो अपने सारे बटन को खोलकर शर्ट को अपने बदन से अलग करने लगी,,)

हाय दइया सुगंधा देख तो जरा कितनी बेशरम है,,,(सुषमा का यह कहना था कि वह हीरोइन ने अपना सर उतार कर एक तरफ रख दी और शर्ट उतारने ही उसकी ब्रा नज़र आने लगी चौकी बहुत छोटी सी थी और उसकी चूची कुछ ज्यादा ही बड़ी-बड़ी एकदम गोल और कठोर से जिसे देखकर सुगंध और सुषमा दोनों आश्चर्य चकित हो गए क्योंकि इतनी गोल-गोल चुचीया खरबूजा जैसा होने के बावजूद भी एकदम कड़क हो वह दोनों नहीं जानते थे क्योंकि उन दोनों खुद की चूचियां बड़ी-बड़ी थी लेकिन जिस तरह का जाकर उसे हीरोइन की चूची का था उसे देखकर दोनों आश्चर्यचकित हो गए थे,,,, तभी वह हीरोइन नल से लगे पाइप को पकड़ी गई और लाल चालू करके पानी की धार गाड़ी पर मारना शुरू कर दी वह दोनों को इतना तो समझ में आ गया था कि यह हीरोइन गाड़ी साफ करने जा रही है लेकिन इस तरह से यह तो उन दोनों को अंदाजा भी नहीं था तो सुगंधा बोली,,,)

यह कौन सी पिक्चर लगा दी सुषमा दूसरी कोई लगा,,,,

अरे रुक यार थोड़ा देखने तो दे आखिर है क्या यह सब अभी तक वह कोई शब्द भी नहीं बोली है ना कोई गाना है और कोई दिख भी नहीं रहा है,,,,

(सुषमा के कहने से सुगंधा भी स्क्रीन की तरफ देखने लगी वह हीरोइन गाड़ी पर पानी मारते हुए वह पाइप को अपनी चूचियों की तरफ कर दी और पानी की धार को अपनी चूची पर मरने लगी और पानी की धार उसकी दोनों चूचियों के बीच में गिर रही थी जिससे उसकी ब्रा भी पूरी तरह से पानी से भीगती चली जा रही थी,,,,)

बाप रे इतनी बेशर्म हीरोइन मैंने आज तक नहीं देखी,,,(सुगंधा फटी आंखों से आश्चर्य जताते हुए बोली,,, सुषमा कुछ बोल नहीं रही थी बस देखे जा रही थी तभी वह झाग से भरी बाल्टी को उठाई और गाड़ी पर गिराने लगी,,, और थोड़ी ही देर में वह स्पंज लेकर गाड़ी को साफ करने लगी,,, दोनों को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि वह दोनों क्या देख रही है,,,, फिल्मों में आज तक दोनों ने इस तरह के दृश्य को अच्छी नहीं थी अभी तक फिल्म में कोई और दूसरा नजर नहीं आया था केवल वह लड़की ही थी जो अपनी कामुक अदाओं से गाड़ी धो रही थी,,,, तभी पेड़ के पीछे छिपे एक शख्स को स्क्रीन पर दिखाए जाने लगा वह चोरी चोरी उसे लड़की को ही देख रहा था उसके कामुक अदाओं को देख रहा था उसके अंगों को देख रहा था कैमरा बार-बार कभी-उसकी चूचियों पर तो कभी उसके कामुकता भरे चेहरे पर तो कभी उसके गोल-गोल गांड पर घूमा रहा था,,,, उस लड़की की कामुक अदाओं को देखकर वह प्रसन्न हो रहा था,,,)

अरे यार सुषमा मैं आज तक किसी भी फिल्म में इस हीरो को अच्छी नहीं कौन है यह हीरो,,

अरे तू हीरो की बात कर रही है मैं तो हीरोइन को भी नहीं देखी हूं लगता है नए-नए आए हैं,,,,

धत् कोई और फिल्म लगा नहीं तो आज का रविवार ऐसा ही चला जाएगा,,,,

अरे रुक तो सही 5 मिनट और देख ले पता तो चले फिल्म की कहानी क्या है,,,, कैसेट पड़ी है तो जरूर कुछ ना कुछ तो होगा ही,,,,।

(दोनों फिल्म को लेकर आपस में बात भी कर रहे थे और हैरान भी थे उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था बार-बार उसे लड़की की अदा और उसे लड़के की प्रसन्नता उसकी खुशी दिखा रहे थे इससे ज्यादा कुछ और नहीं था की तभी उसे लड़की की गोल-गोल गांड देखकर हीरो की हरकत दिखाई गई तो वह दोनों के पसीने छूटने लगे उन दोनों ने आज तक इस तरह के दृश्य देखे नहीं थे दोनों हैरानी से एक दूसरे की तरफ देखने लगे क्योंकि,,, हीरोइन की गांड देखकर हीरो पेट के ऊपर से ही अपने लंड को मसल रहा था जो कि पेंट में तंबू बनाया हुआ था,,,। यह दृश्य देखते ही सुषमा बोल पड़ी,,,)

हाय दइया यह क्या है यह कौन सी फिल्म लगा दी मैंने,,,, ऐसा गंदा हीरो और हीरोइन तो मैं आज तक नहीं देखी,,,

छी छी,,, बड़ी गंदी पिक्चर बनने लगी है कोई और फिल्म लगा, किसी को अगर पता चल गया तो गजब हो जाएगा,,,,,,(सुगंधा भी उस फिल्म को देखकर बोली,,,)

तू सच कह रही है सुगंधा लेकिन देखने तो दे हो सकता है जिसे हम हीरो समझ रहे हैं वह गुंडा हो और हीरोइन पर जबरदस्ती करने की कोशिश करें और फिर फिल्म का हीरो दिखाई दे,,,,

हां हो सकता है रुक देखते हैं,,,,(इतना कहने के साथ वह फिर टीवी की स्क्रीन पर देखने लगी लेकिन उसके तन-बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच थरथराहट हो रही थी बरसों बाद उसने अपने बदन में उत्तेजना महसूस की थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था एक तरफ वह फिल्म को रोक देना चाहती थी और वहीं दूसरी तरफ उसका मन उस फिल्म को आगे देखने के लिए ललाईत हो रहा था,,,, कुछ देर तक वह हीरो पेड़ के पीछे छिपकर,,, उसे हीरोइन की खूबसूरती देखकर उसकी गांड देखकर उसकी चूचियों को देख कर अपने लंड को पेंट के ऊपर से मसल रहा था,, और वह हीरोइन पानी की पाइप में से निकल रहे पानी से अपने पूरे बदन को भिगो ली थी उसकी पीले रंग की ब्रा में से उसकी तनी हुई निप्पल एकदम साफ दिख रही थी,,, जिसे देख कर दोनों के खुद के बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी थी,,,
 
कमरे के अंदर पूरी तरह से अंधेरा था केवल टीवी की रोशनी ही नजर आ रही थी दोनों का ध्यान पूरी तरह से टीवी के स्क्रीन पर हो गया था,,,,,,, दोनों इस इंतजार में थी कि आगे क्या होने वाला है उन्हें लग रहा था कि पेड़ के पीछे छुपा हुआ गुंडा अगर कुछ करेगा तो जरूर हीरो आ जाएगा और फिर असली फिल्म देखने को मिलेगी लेकिन उनके सोचने के विपरीत उनकी आंखों के सामने टीवी की स्क्रीन पर फिल्म की हीरोइन अपनी स्कर्ट को अपनी कमर तक उठा दी और यह देखकर दोनों के होश उड़ गए,,,, दोनों का ध्यान और नजर टीवी की स्क्रीन पर थी टीवी के स्क्रीन का दृश्य बेहद मादकता से भरता चला जा रहा था उन दोनों को तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि वह दोनों टीवी पर इतनी अश्लील फिल्म देख रहे हैं,,, क्योंकि आज तक दोनों ने फिल्म में इतनी अश्लील हीरोइन और इतने अश्लील हीरो को नहीं देखी थी,,,,

दोनों का दिल जोरो से धड़कने लगा था दोनों को समझ में नहीं आ रहा था कि आगे क्या होने वाला है वह हीरोइन पूरी तरह से बेशर्म बनते हुए अपनी स्कर्ट को कमर तक उठा दी थी जिससे उसकी पीले रंग की पेटी भी साफ नजर आ रही थी और पेटी जैसी थी कि आगे सिर्फ पतला सा छोटा सा कपड़ा था जिससे उसकी बुर ढकी हुई थी,,, इस तरह की पेटी तो दोनों कभी सपने में भी नहीं देखी थी और ना ही पहनने की सोची थी इसलिए तो सुषमा बोल पड़ी,,,।

हाय दइया कितनी बेशरम हीरोइन है कैसी पैंटी पहनी है,,, मैंने तो आज तक ऐसी पेंटिं देखी भी नहीं है पहनने का तो बात ही दूर है,,,

सच कह रही है सुषमा में भी हैरान हूं इसकी पेंटिं देखकर,, जिस तरह की पहनी है उसे तो सिर्फ उसकी,,,वो ही ढकी हुई है बाकी सब कुछ तो वैसे का वैसा ही है,,,,

हां और अगर ऐसे कपड़े कोई हीरोइन पहनेगी तो गुंडे तो जबरदस्ती करेंगे ही,,,,,,,(सुषमा का इतना कहना था कि वह हीरोइन धीरे से अपनी नाजुक उंगलियों का सहारा लेकर छोटे से कपड़े को उंगली से खींचकर अपनी फूली हुई बुर की दूसरी और कर दी और उसकी चिकनी बर एकदम साफ नजर आने लगी जिसे देखकर दोनों की आंखें फटी की फटी रह गई वह दोनों एकदम से आश्चर्यचकित होकर एक दूसरे को देखने लगे उन दोनों का मुंह खुला का खुला था और वह दोनों कुछ बोल पाते इससे पहले ही वह उसी जगह पर बैठ गई और पेशाब करना शुरू कर दी उसे हीरोइन को पेशाब करता हुआ देखकर वह भी टीवी की स्क्रीन पर दोनों को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था दोनों अब विश्वसनीय तरीके से एक दूसरे को देख रहे थे तो कभी टीवी की स्क्रीन को देख रहे थे और वह हीरोइन बड़े आराम से पेशाब कर रही थी और पेड़ के पीछे छुपा हुआ हीरो अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं कर पाया और उसे हीरोइन को पेशाब करता हुआ देख कर पेट में से अपने लंड को निकाल कर हिलाना सिर्फ कर दिया,,,,.

एक तरफ उसे हीरोइन की अश्लील हरकत के साथ-साथ उसे पेशाब करता हुआ देखकर दोनों आश्चर्य चकित तो हो ही चले थे ऊपर से उन दोनों का दिमाग एकदम बेकाबू हो गया जब उन दोनों ने पेड़ के पीछे छुपे हीरो के लंड को देखी उसकी साइज को देखी उसकी मोटाई और लंबाई को देखी तो दोनों के होश उड़ गए,,,, दोनों को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था सुगंधा तो एकदम से मदहोश हो गई बरसों गुजर गए थे उसे लंड के दर्शन किए सुषमा तो फिर भी पति होने के नाते लंड के दर्शन कर लेती थी,,, सुगंधा अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाई और उसके मुंह से निकल गया,,,।

बाप रे इतना बड़ा मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है,,,

वही तो मैं भी देख रही हूं सुगंधा इतना बड़ा और मोटा लंड अगर हम लोगों की बुर में जाए तो बुर तो फट जाए,,,।

(टीवी पर चल रही फिल्म का असर था जो सुषमा खुले शब्दों में बयां कर रही थी,,,, सुषमा की बात सुनकर सुगंधा भी उत्तेजनात्मक स्थिति में बोली)

तू बिल्कुल सच कह रही है मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि किसी का इतना मोटा और लंबा होता है यह कौन सी फिल्म लगा दी सुषमा तूने,,,,

अरे जो भी लगा दी अब देख ही लेते हैं मुझे तो रहा नहीं जा रहा है मैं देखना चाहती हूं आगे क्या होता है,,,

मैं भी यही सोच रही हूं लेकिन अगर किसी को पता चल गया तो कि हम दोनों इस तरह की फिल्म देख रहे थे,,,।

इस तरह की फिल्म क्या यह है ही गंदी पिक्चर मैंने तो आज तक देखी नहीं थी बस सुनी थी लेकिन मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि मेरे ड्रोवर में भी ऐसी कैसेट पड़ी है,,, मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है कि यह कैसेट यहां आई कैसे,,,,

पूरा देख कर तो यही लग रहा है यह कोई हिंदी फिल्म नहीं है कुछ और ही है,,(सुगंधा स्क्रीन की तरफ देखते हुए बोली,,)

हां वह तो देखने से ही पता चल रहा है ,,,, अपने देश के हीरो तो बिल्कुल भी नहीं लग रहे हैं यह दोनों विदेशी लग रहे हैं,,,,।

(स्क्रीन का दृश्य अपने पूरे उफान पर था वह हीरोइन पेशाब करने के बाद इस स्थिति में अपनी हथेली से अपनी बुर को रगड़ रही थी यह देखकर सुषमा और सुगंधा दोनों की बुर में पानी भर गया,,, सुषमा तो फिर भी रात को अपने पति से छुड़ा कर अपनी गर्मी शांत कर लेती लेकिन सुगंधा की तड़प शांत करने वाला कोई नहीं था उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी उसकी बुर पानी पानी हो चुकी थी बरसों बाद उसकी बुर में इतना पानी इकट्ठा हुआ था,,,, इस गरमा गरम दृश्य को देखकर सुषमा बोली,,,)

हाय दइया देख रही है सुगंधा यह तो तड़प रही है और यहां मुझे तो अपनी बुर छूने में शर्म आती है,,,,

सच कह रही है सुषमा,,,,,,, यह हीरोइन कितनी बेशरम है इस तरह की हरकत पर तो कोई भी उस पर चढ़ बैठेगा,,,

देख लेना पेड़ के पीछे छुपा हुआ हीरो पहले से ही तैयार है देख सही इसका कितना बड़ा होते जा रहा है काश इनका भी इतना बड़ा होता तो मजा आ जाता,,,।

फट जाती सुष्मा देख नहीं रही कितना मोटा और लंबा है,,,,

हां थोड़ा-थोड़ा डर तो मुझे भी लग रहा है,,,,, अब पता नहीं क्या होने वाला है,,,,।
 
Back
Top