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Incest मर्द का बच्चा

ऋतु लल्लू के चूचुक को अपने जीभ से छेड़ते हुए अपने गान्ड को कभी लल्लू के कमर पर घिसते हुए आगे पीछे होती तो कभी अपने गान्ड को गोल गोल घुमाती.

थोड़ी देर में दोनो एक साथ झड़ गये.

लल्लू ऋतु के एक टंकी को पकड़ कर ज़ोर से उसके चूचुक को दबा कर मसल दिया.

ऋतु ज़ोर से सिसक उठी.

लल्लू बेड से उतर का कपड़े पहन बाहर आ गया.

काजल- ( जो उठ गई थी. आँगन में झाड़ू लगा रही थी) क्या बात है बेटा. आज तो तू लेट उठा है.

लल्लू- हा मा, आज लेट आँख खुली.

काजल- कोई बात नही बेटा. होता है कभी कभी.

लल्लू वहाँ से निकल कर दालान पर आया.

सुनील- बेटा उठ गया तू.

चल आज खेत में पानी लगाने का काम हम काका भतीजे को मिला है.

लल्लू- कोई बात नही काका. ये तो सब से आसान काम है. मोटर चला कर बस देखते रहो की कही कोई मेढ ना टूट गया हो. बस…

सुनील हँसता हुआ उसकी पीठ को थपथपा कर साथ चल दिया.

लल्लू एक कुदाल अपने कंधे पर ले रखा था और एक कुदाल उसके काका.

दोनो खेत पहुच कर वहाँ खेत के चारो और सुनील घूम कर देख रहा था तब तक लल्लू भी जा कर मोटर चालू कर दिया.

बहुत बड़े एरिया में पानी लगाना था जिस में दोनो काका भतीजे को शाम हो गया.

सुनील के बाकी भाई दूसरे कामो में बिज़ी थे.

इस बीच एक मजदूर को भेज कर ये दोनो घर से अपने लिए खाना भी मंगवा लिए थे.

शाम को दोनो लोगो का शरीर बहुत दर्द कर रहा था.

पानी डल गया तो दोनो मोटर बंद कर घर की ओर चल दिए.

लल्लू- काका आज तो आप ने पूरा थका दिया.

सुनील- नही बेटा. ये तो सब से आसान काम है. मोटर चालू…..

लल्लू- बस बस काका. में समझ गया. कोई भी काम आसान नही होता.

सुनील- गुड, अब तुम समझदार हो गये बेटा.

लल्लू- काका मुझे आप से दो बाते करना है.

सुनील- तुम्हे पूछने की ज़रूरत कब से पड़ने लगी बेटा. बेझिझक बोलो.

लल्लू- पहली बात की मुझे भी बुलेट चलाना सीखा दीजिए.

सुनील- ठीक है. ये तो में भी सोच रहा था. अब दूसरी बात बोलो.

लल्लू- दूसरी बात. मुझे भी अब अलग कमरा चाहिए. अब में बड़ा हो गया हूँ ना.

सुनील- हाहाहा.. ठीक है. कमरा चाहिए तो बोल देना मा को वो सॉफ करवा देंगे.

लल्लू- काका आप ही बोल देना ना. आप की बात कोई नही टालता. दीदी लोग जिस केमरे में रहती है उसके बगल वाला कमरा खाली ही है तो वो में ले लूँगा.

सुनील- पता है तुम्हे. जब मेरी शादी नही हुआ था तब में भी उसी कमरे में रहता था.

लल्लू- सच काका.

सुनील- हा. बिल्कुल सच.

यू ही बाते करते दोनो घर पहुच गये.

आँगन आ कर लल्लू खाट पर जा कर गिर गया.

लल्लू- आ, आज बहुत थक गया.

ऋतु- आ गया मेरा बेटा. तक गया है. कोई बात नही. आ में तुम्हारा बदन दबा दूं.

ऋतु लल्लू के पास जा कर उसे पेट के बल उल्टा कर उसके बदन को दबाने लगी.

मा- घोड़ा जैसा हो गया है और तुझे शरम नही आती की अपने काकी से बदन दबवा रहा है

लल्लू- अपनी काकी से नही दबवा रहा बल्कि अपनी प्यारी बीबी से दबवा रहा हूँ. ( लास्ट का शब्द धीरे से बोला जो सिर्फ़ ऋतु ही सुन पाई)

ऋतु मुस्कुराती हुई उसकी पीठ पर एक मुक्का लगा दी.

लल्लू- क्या हुआ क्या में कुछ ग़लत कहा.

ऋतु शरमाती हुई सर ना में हिला दी.

थोड़ी देर बाद लल्लू काकी को पकड़ कर अपने साथ खटिया पर बैठा कर उसके चुचे को सब से छुप कर मसल देता.

ऋतु शर्मा कर वहाँ से भाग गई.

तब तक सोनम नाश्ता ले कर लल्लू को पकड़ा दी.

लल्लू- आआयईी, आज सूरज किधर से निकला भाई. ये में क्या देख रहा हूँ. दीदी किचन से निकली है.

सोनम- मा.. देखो कैसे बोल रहा है भाई. क्या में काम नही करती.( सोनम पैर पटक कर बच्चो की तरह नाटक करती बोली)

ऋतु- बिल्कुल करती हो बेटी. लेकिन सिर्फ़ अपने कमरे में अपना बेड तोड़ने का.

ऋतु की बात सुन कर सब हँसने लगे.

सोनम- मामा.. तुम भी सब के साथ मिल गये.

लल्लू आगे बढ़ कर सोनम को अपने गले से लगा लिया.

लल्लू- मेरे प्यारी दीदी को काम करने की क्या ज़रूरत है. उन के लिए इतने लोग है तो काम करने को.

सोनम- मेरा प्यारा भाई.

सोनम कस्स कर लल्लू को गले लगा ली.

सोनम की बड़े बड़े दूध लल्लू के छाती में घुस गये.

लल्लू का रोमांच से रोया रोया खड़े हो गये.

अब लल्लू का बाबूराव अपना सर उठाने लगा था.

लल्लू भी सोनम को अपने गले से लगाए उसकी पीठ पर हाथ फेर रहा था.

लल्लू को बहुत मज़ा आ रहा था.

अब लल्लू का लॉडा आधा खड़ा हो गया था जिसे सोनम अपने पेट पर फील कर रही थी.

सोनम मारे शरम के अपना मूह लल्लू के छाती में छुपा ली फिर लल्लू के आगोश से निकल कर अपने कमरे में चली गई.
 
लल्लू नाश्ता कर घर से दालान पर आ गया.

थोड़ी देर अपने दादू से बात करने के बाद उठ कर दालान से बाहर आ गया.

बहुत दिन हो गये थे गाँव घूमे हुए तो लल्लू सोचा की एक बार गाँव घूम लिया जाये.

शेड से अपना रेंजर बाइसिकल निकाला जो एक बार जिद् कर सुनील काका से खरीद वाया था.

सोचा जब तक काका बुलेट नही सिखाते तब तक अपने इस रेंजर से ही गाँव घूम लिया जाये.

दालान पर जा कर एक बार दद्दू को बोल लल्लू अपना रेंजर ले कर गाँव भ्रमण पर निकल गया.

लल्लू का गाँव बहुत बड़ा था. लगभग 1000 घर होंगे इस गाँव में.

लल्लू के दादा जी के पास अपना पुस्तैनि काफ़ी ज़मीन थी और लल्लू के दादा जी दो भाई थे जिन में एक भाई आर्मी में कर्नल थे. उन्होने शादी नही की थी.

रिटाइयर्मेंट के कुछ साल बाद ही उनका डेत हो गया था.

तो उनका प्रॉपर्टी पैसा सब इनको ही मिला.

लल्लू के दादा जी के पास ज़मीन जायदाद रुपया पैसा किसी चीज़ की कोई कमी है .

खाते पीते परिवार से है ये.

गाँव में अच्छा नाम है इनके परिवार का.

लल्लू अपने रेंजर पर बैठा गाँव घूम रहा था. पहले वो बाज़ार गया वहाँ पापा को एक चाय दुकान पर बैठा देख कर वहाँ से वापस गाँव के दूसरी ओर चल दिया.

लल्लू डेली सुबह अपने खेत की ओर के एक नदी के पास जाता है जो गाँव के दो दिशा से हो कर बहता है. वो नदी गाँव के पूरब से हो कर आता है और लल्लू के खेत उत्तर की ओर है तो उस दिशा में बहता हुआ दूसरे गाँव से हो कर आगे बढ़ जाता है.

लल्लू गाँव के पूर्व दिशा को घूमता हुआ जा रहा था.

तभी एक आदमी अपने 10 साल के बेटे को छड़ी ( स्टिक) से मार रहा था.

लल्लू वहाँ रुक गया.

लल्लू- क्या बात है चाचा क्यू मार रहे हो बचे को.

वो आदमी- पढ़ने को बोलता हूँ तो पढ़ता नही है. सारा दिन आवारगर्दी करता रहता है. अभी घर आया है आवारगर्दी कर के.

लल्लू- तो चाचा, आराम से प्यार से समझाओ ना. ज़रूरी थोड़े है की बच्चे मार से ही समझते है.

वो आदमी- में अपने बेटे को मारू या काटु तुम कौन होते हो बोलने वाले.

पढ़ेगा नही तो क्या तुम्हारी तरह बना दूं.

लल्लू को उस आदमी की बात सीधा दिल पर लगी.

लल्लू- भगवान करे चाचा मेरे जैसा किस्मत सब को मिले. जैसा मेरा परिवार है. जैसे मुझे प्यार करने वाले दादा, काका, काकी, मा, पापा, बहन है. वैसा तो बिरले इंसान को ही मिलता है.

वैसे में लल्लू ज़रूर हूँ लेकिन तुम से तो समझदार ही हूँ.

आदमी- जाओ जाओ. मेरे दिमाग़ ना खराब करो.

तभी घर से बाहर उस आदमी की पत्नी आई.

औरत- माफ़ करना बेटा. ये आज फिर पी कर आया है और तुम से उलझ गया. तुम जाओ बेटा. ये इसका रोज का काम है.

लल्लू- में जा ही रहा था चाची. चाचा बच्चे को पीट रहे थे तो में रुक गया था.

वैसे हमारे यहाँ तो दारू का बॅन लगा है बेचना और पीना तो फिर चाचा को दारू कहाँ से मिल गया.

औरत- क्या बेटा. कितना भी बॅन लग जाये लेकिन बेचने और पीने वाले को मिल ही जाता है.

एक नया कोई आया है वो यहाँ के पोलीस को पैसा खिला कर उधर नदी के पास झोपड़ी बना कर बेचता है. पोलीस वाले भी आ कर पीते है. कोई कुछ नही कहता है उसे.

लल्लू- अपने लड़के को घर ले जाओ काकी. रात हो रही है तो में भी चलता हूँ.

आदमी वहाँ से जा चुका था और वो औरत अपने बेटे को ले कर घर के अंदर चली गई.

लल्लू रेंजर को पॅड्ल मारता हुआ आगे बढ़ गया.

लल्लू- फला ये गाँव में नया कौन आ गया जिस ने गाँव में गंदगी फैलाना शुरू कर दिया. देखना पड़ेगा. ( लल्लू अपने आप से बाते करता नदी की ओर चला जा रहा था.

लल्लू- राम राम चाचा. अभी अब कहाँ जा रहे हो.

गाँव के एक जानकार को देख कर लल्लू बोला.

आदमी- लल्लू बेटा ये रात को तुम कहाँ जा रहे हो.

लल्लू- चाचा पहले मैने पूछा है तो मुझे जवाब दो की अभी अब कहाँ चल दिए.

आदमी- वो बेटा अभी मुझे नाइट ड्यूटी लगी है तो वही ड्यूटी पर जा रहा हूँ. अब तुम बताओ.

लल्लू- बहुत दिन हो गया था इधर आप सब से मिले हुए तो में भी घूमने आ गया था इधर.

आदमी- लल्लू बेटा दिन में घुमा करो. अभी अब घर जाओ. सुनील को पता चला तो तुम्हे तो गुस्सा करेगा ही साथ ही मुझे भी डान्टेगा की जब तुम देखे थे तो रात को घूमने से मना क्यू नही किए.

लल्लू- अच्छा ठीक है चाचा. में भी वापस घर जाता हूँ.

आदमी- हा बिल्कुल. कल दिन में आना. में भी घर ही रहूँगा. चाची से भी मिल लेना.

लल्लू- ठीक है चाचा.

लल्लू वहाँ से वापस हो गया

अब कल देखता हूँ कौन है ये आज तो बच गया.

वापस घर आ कर शेड में रेंजर खड़ी कर नलका पर हाथ पैर धो कर दालान पर आ गया.

अभी दालान पर सारे काका दादू के साथ बैठे थे.

सुनील- कहाँ से आ रही है सवारी बच्चे.

लल्लू सुनील के पास आ कर बैठते हुए बोला

लल्लू- काका में तो ऐसे ही गाँव घूमने गया था लेकिन आप के मित्र सरोज चाचा मिल गये तो वो वापस घुमा दिए.

दादू- कौन सरोज.

लल्लू- दादू वही जो बिजली बिभाग में काम करते है. अभी ड्यूटी जा रहे थे तो रास्ते में मिल गये. कहने लगे सुनील को पता चला तो हम दोनो पर गुस्सा करेगा इस लिए अभी तू घर जा. तो में वापस घर आ गया.

पापा- तुम्हे कितनी बार बोला है. रात को बाहर नही जाते तुम्हारे समझ में ही कुछ नही आता. गधा कही का…

लल्लू डर कर सिर झुका लिया.

लल्लू- काका बुलेट चलाना कब सिखाएँगे.

पापा- कोई ज़रूरत नही है. चोट लग जाएगी. अभी तुम से वो नही संभलेगा. अभी तुम बच्चे हो.

लल्लू वहाँ से उठ कर आँगन में आ गया.

लल्लू- ( फला में सच में गधा हूँ. पापा वहाँ थे तो क्या ज़रूरत थी ये सब बोलने की. हाअ.. मैने देखा भी तो नही था पापा को वहाँ बैठा हुआ. पता नही कहाँ छुप कर बैठे रहे थे.)

मा- क्या बडबडा रहा है तू अपने आप में.

पापा- ( दालान से आँगन आते हुए) लाट साहब बुलेट चलाना सीखना चाहते हैं.

मा- हा तो क्या हो गया. सीखने दीजिए.

पापा- जैसा पागल बेटा है. वैसी ही मा है.

पापा कमरे में जा कर लेट गये.

मा आँखो में आँसू ले कर रसोई में चली गई.

लल्लू आँगन में खड़ा सब देख रहा था.

काजल को यू रोता देख कर लल्लू को बहुत बुरा लग रहा था.
 
लल्लू मूड कर अपने बहनो के कमरों की ओर चला गया.

दरवाजा बंद था.

लल्लू दरवाजा खटकाया.

सोनम- खुला है आ जाओ. कौन है.

लल्लू दरवाजा धकेल कर कमरे में आ गया.

सोनम- भाई तुम थे. तुम्हे दरवाजे पर खड़े होने की कोई ज़रूरत नही है. सीधा अंदर आ जाया करो.

लल्लू का एक हाथ तुरंत अपने गाल पर चला गया.

सोनम- भाई. तुम हम सब के सब से प्यारे भाई हो. उस दिन जो हुआ वो भूल जाओ. अब तुम्हे कोई कुछ नही कहेगा. में वादा करती हूँ.

वैसे क्या बात है तुम अपना मूह क्यू लटकाए हो.

लल्लू की आँखो से आँसू गिरने लगा.

सोनम घबरा कर लल्लू को अपने गले से लगा लिया.

सारी बहने आ कर लल्लू को घेर कर खड़ी हो गई.

कोमल- क्या हुआ भाई. किसी ने कुछ कहा क्या. मा गुस्सा की है. में अभी मा को डाँटती हूँ.

रोमा- हा चल. ऐसे कैसे वो हमारे भाई को डाँट सकती है.

दोनो कमरे से जाने लगी.

लल्लू कोमल का हाथ पकड़ लिया.

लल्लू- पापा कहते है में पागल हूँ.

लल्लू रोता हुआ बोला.

लल्लू- क्या सच में मैं पागल हूँ. बताओ दीदी. लोग मुझे पागल क्यू कहते है.

( पता नही क्यू लेकिन ये दो चार लाइन लिखते हुए मेरे आँखो से भी आँसू निकल गये.)

कोमल जल्दी से अपने हाथ से लल्लू के मूह को दबा दी.

मीनू- प्लीज़ कुछ मत बोल तू और भाई. हम से अब बर्दास्त नही होगा.

सारी बहने रोने लगी.

कोमल तो फुट फुट कर रो पड़ी.

आख़िर ट्विन्स थी. उसे लल्लू के दर्द का अंदाज़ा था.

रोमा कोमल को गले लगा ली.

सोनम लल्लू को चुप करा रही थी.

मीनू पीछे से लल्लू को गले लगाए थे. एकी तरफ से रानी.

गौरी कोमल को पीछे से गले लगाए थी.

रोने की आवाज़ सुन कर ऋतु और रागिनी दौड़ कर इस कमरे में आई.

रागिनी- क्या हुआ क्यू रो रहे हो तुम लोग. किस को क्या हुआ.

रागिनी बोलते हुए सोनम के गले लगे लल्लू को खिच कर एक थप्पड़ लगा दी.

रागिनी- क्या किया है हमारी बेटी को बता.

सच कहते है सब तू पागल ही है.

रानी- मा… ज़बान संभाल कर बोल…

सोनम- चाची… आप हम सब की चाची हो और हम से बड़ी हो. कोई और अभी अगर मेरे भाई को कुछ कहा हो ता तो में अभी उसकी ज़बान खिच लेती.

सोनम लल्लू को फिर से गले लगा ली.

लल्लू का पूरा बदन काँप रहा था अभी.

तभी लल्लू सोनम के बाहों में बेजान सा बेहोश हो गया.

सोनम लल्लू को संभाल नही पाइ.

सोनम- भाई… भीइ. क्या हुआ. ( बोलते हुए बेड पर ले कर लुढ़क गई.

सोनम- कोई सुनील चाचा को बुलाओ जल्दी से.

सारी बहने ज़ोर ज़ोर से रोने लगी.

ऋतु स्तब्ध खड़ी रह गई. उसे कुछ समझ नही आ रहा था की यहाँ क्या हुआ.

आवाज़ सुन कर शालिनी और काजल भी दौड़ती हुई आ गई.

तब तक रोमा दौड़ का दालान पर भी सब को बता आई.

दालान से भी सभी दौड़ कर आ गये.

सुनील दौड़ कर लल्लू को देखा तो वो बेहोश था.
 
तुरंत लल्लू को गोद में उठा कर बाहर भगा.

सुनील- रवि बुलेट निकाल जल्दी से.

रवि दौड़ का बुलेट स्टार्ट कर लाया.

सुनील लल्लू को बीच में बैठा कर पीछे से पकड़ उसे ले कर हॉस्पिटल ले गया जल्दी से.

गाँव में हॉस्पिटल नही है.

गाँव से 5 किमी दूर सहर है जहा अच्छे डॉक्टर्स और हॉस्पिटल्स है.

गाँव में चार पाँच झोला छाप डॉक्टर्स है बस जो सिरदर्द बुखार जुकाम चोट छोटी मोटी फर्स्ट आड्स को करते है.

आँगन में….

अनिल- कोई बताएगा क्या हुआ है यहाँ.

सोनम- चाची ये क्या कर दिया आप ने. बिना जाने बिना सोचे आप ने भाई को मारा है. उस पर से उसे वही बात बोल दिए जिस को ले कर वो इतना परेशान था.

कोमल- काका मुझे भाई के पास जाना है.

( बोल कर कोमल भी वही आँगन में बेहोश हो कर गिर गई.)

सब घर में और भी घबरा गये.

तब तक राम जो आज कई महीनो बाद आँगन में अपने कमरे में आया था.

पहले राम आँगन में बस खाना खाने ही आता था.कुछ महीनो से. मिया बीबी में कोई नोकझोक हो गई थी.

राम कमरे से बाहर आया.

आँगन में भीड़ देख कर वहाँ आया.

तब तक अनिल कोमल को उठा लिया था गोद में.

राम- क्या हुआ. इतना हल्ला क्यू कर रहे हो सब.

अनिल- राम एक गाड़ी मंगवा जल्दी से.

राम- क्या हुआ है कोमल को.

ऋतु- तुम्हे सुनाई नही देता क्या एक नही तीन गाड़ी मँगवा जल्दी से.

( ऋतु गुस्से में राम को बोली)

ऋतु- अगर मेरे बेटे और बेटी को कुछ हुआ तो मुझ से बुरा कोई नही होगा. सुन ले सब.

राम- मोबाइल निकाल कर गाँव में ही किसी को कॉल किया.

गाड़ी आ रहा है. अब कोई बताएगा की यहाँ हुआ क्या है.

काजल तो एक कोने में दीवाल के सहारे पथराई आँखो से शून्य में तकती बैठी थी.

ऋतु- सब बाद में पहले मुझे मेरे बेटे के पास जाना है.

सारे घर में ताला लगा सोनम.

कोमल को आप दालान पर ले जाइए. ( अपने पति से बोलती ऋतु अपने कमरे में चली गई.)
 
अपडेट 20.

सोनम दौड़ कर ताला चाभी लाई और एक एक कर सारे घर में लगाने लगी.

ऋतु अपना हॅंड बैग उठाए कमरे से बाहर आई.

ऋतु- चलो सब दालान पर पहुचो.

राम सुनील से पूछो कहाँ पहुँचा है.

सभी लोग दालान में इकट्ठा हो गये.

दादू- क्या हो रहा है ये सब. मेरे लल्लू बेटे को क्या हुआ और अब ये कोमल बिटिया भी ऐसे है.

ऋतु- आप परेशान मत होइए. पता नही क्या हुआ की लल्लू बेहोश हो गया और उसे देख कर कोमल भी हो गई है.

तब तक बाहर दो गाड़ी आ कर खड़ी हो गई.

अनिल कोमल को उठा कर गाड़ी में डाल दिया.

ऋतु- दो ही गाड़ी आई. में तीन गाड़ी का बोला था ना.

राम- भाबी दो ही गाड़ी खाली थी अभी. वैसे भी इतने लोग जा कर क्या करेंगे वहाँ.

ऋतु- रोमा मीनू रानी गौरी रागिनी शालिनी और सोनम के पापा आप सब यही रहिए.

बाकी हम सब जा कर देखते है. ज़्यादा परेशानी वाली बात नही होनी चाहिए अगर ज़रूरत पड़ी तो कॉल कर आप सब को बुला लूँगी.

सब जाना चाहते थे हॉस्पिटल लल्लू के लिए लेकिन अभी के हालात में जिद करना सही नही था तो सब चुप रह गये.

सोनम रागिनी को घर का चाभी थमा दी.

फिर सब दो गाड़ी में बैठ कर हॉस्पिटल चल दिए.

राम कॉल कर पता कर लिया था सुनील लल्लू को ले कर कहाँ गया है.

ये दोनो गाड़ी भी वहाँ हॉस्पिटल पहुच गई.

राम कोमल को निकाल कर अंदर हॉस्पिटल में ले गये.

कोमल को भी अड्मिट कर दिया गया.

सब सुनील के पास पहुचे.

ऋतु- कैसा है मेरा बेटा सुनील.

सुनील- अभी डॉक्टर जाँच कर रहे है.

सभी वही बेंच पर बैठ गये.

काजल वहाँ भी एक कोने में खड़ी थी.

सुनील- क्या हुआ था वहाँ अब कोई बताएगा मुझे.

ऋतु- बाद में सुनील. अभी पहले दोनो को होश आ जाये और भगवान की कृपा से सब अच्छा हो फिर घर चल कर पता करेंगे की हुआ क्या था.

ऋतु- सोनम अपने चाची के साथ रहना.

सोनम काजल के पास चली गई.

कुछ देर बाद डॉक्टर बाहर निकला.

सुनील- कैसा है मेरा बेटा डॉक्टर साहब.

डॉक्टर- देखिए मरीज को किसी चीज़ का गहरा सॉक लगा है जिस कारण उसके ब्रेन का एक हिस्सा अभी काम करना बंद कर दिया है. अभी बेहोश है. अगर चार घंटे तक होश नही आया तो फिर कुछ भी कहना मुश्किल होगा. शायद मरीज कोमा में चला जाये या फिर पागल हो जाये.

सुनील डॉक्टर की बात सुन कर वही बेंच को पकड़ कर बैठ गया.

उसके लिए लल्लू सब से प्यारा था. लल्लू में वो अपनी छवि देखता था. बहुत प्यार करता था वो लल्लू से.

ऋतु तो रोने ही लगी.

रवि- भाभी भरोसा रखिए भगवान पर. वो हमारे लल्लू के साथ इतना बुरा नही करेंगे. और आप ऐसे रोइएगा तो लल्लू के मा को कौन संभालेगा.

अब सब को ऋतु क्या बताए की लल्लू उसके लिए क्या मायने रखता है.

इधर आई सी यू में लल्लू वेंटिलेटर पर लेटा हुआ था.

उसके शरीर में कोई हलचल नही हो रहा था सिवाय एक चीज़ के.

टॅटू.

उसके कंधे पर पीछे टॅटू था जो अब बढ़ता जा रहा था.

कंधे का टॅटू अभी लल्लू की आधे पीठ छाती और एक हाथ में फैल गया था.

लेकिन ये टॅटू लल्लू के शरीर में बनता बिगड़ता जा रहा था.

कभी छाती का टॅटू तो कभी हाथ का टॅटू मिट जाता था.

सब बाहर कोई बेंच पर बैठे तो कोई दीवाल के सहारे खड़ा इस बुरे वक्त को जल्द से जल्द बिताना चाहता था और अच्छे समय के आने का इंतजार.

थोड़ी थोड़ी देर में कोई ना कोई जा कर दरवाजे में लगे छोटे से ग्लास से लल्लू को देख आते थे.
 
इधर कोमल को होश आ गया था.

लेकिन उसे नींद का इंजेक्षन दे कर सुला दिए थे.

पूरे चार घंटे बाद लल्लू को होश आया.

सब में खुशी की लहर दौड़ गई.

डॉक्टर जाँच कर सबको एक एक कर मिलने को बोल दिया.

सब से पहले सुनील गया.

सुनील- बेटा क्यू ऐसा करता है. तुझ में मेरा जान बस्ता है.कोई बात है तो तू सीधा मुझ से बोला कर. खुद दिमाग़ पर ज़ोर क्यू देता है. में हूँ ना तुम्हारे साथ.

लल्लू सिर हिला कर हा कर दिया.

सुनील- चल सब से मिल ले. ज़्यादा बोलना नही.

भेजता हु में सब को.

सुनील बाहर निकला तो ऋतु और काजल अंदर चली गई.

दोनो लल्लू के बेड के पास खड़ी लल्लू को एक टक देखे जा रही थी.

लल्लू- सॉरी. ( एक हाथ से कान पकड़ कर, दूसरे हाथ में ड्रिप लगा हुआ था)

ऋतु आगे बढ़ कर उसके माथे पर एक क़िस्सी कर दी.

लल्लू काजल को देखे जा रहा था. काजल लल्लू को.

दोनो कुछ बोल नही रहे थे. बस देखे जा रहे थे.

काजल की आँखे भर आई. वो भाग कर बाहर आ गई.

ऋतु- आगे से फिर कभी ऐसा नही करना बेटा. तुम में है सब की जान बस्ती है. तेरी मा और बहन तो मर ही जाएँगी.

तभी राम आ गया वहाँ.

ऋतु बाहर चली गई.

राम- क्या हुआ था. कैसे तबीयत खराब हो गया.

लल्लू- पता नहीं.

राम- ठीक है ना अब तू.

लल्लू- जी.

राम- ठीक है. आराम कर.

राम बाहर चला गया.

रवि- कैसा है मेरा बहादुर बेटा( रवि अंदर आता बोला)

लल्लू- ठीक हूँ काका.

रवि- गुड. आराम कर.

रवि बाहर चला गया.

सोनम अंदर आ कर लल्लू के गले लग गई और उसके गालो पर चुम्मि की झड़ी लगा दी.

फिर आहिस्ता से लल्लू के होंठो को एक बार चूम कर शरमाती हुई हट गयी.

लल्लू सोनम दीदी को देखने लगा.

सोनम- आगे से फिर कभी ऐसे बच्चो की तरह रोया ना तो तेरी बहुत पिटाई करूँगी.

लल्लू सोनम को देख कर मुस्कुरा दिया फिर इसरे से अपने पास बुलाया झुकने के लिए कहा.

सोनम लल्लू पर झुक कर अपना कान उसके मूह के पास कर दिया.

लल्लू- आप बहुत प्यारी दीदी हो. ( सोनम के गाल को चूम कर बोला)

सोनम हड़बड़ा कर सीधी हो गई.

(वाउ बहुत गहरा प्यार है आप दोनो में. शादी हो गयी आप दोनो की.) एक नर्स जो एक तरफ चेर पर बैठी थी वो दोनो को देख कर बोली.

सोनम आवाज़ सुन्न कर चौक गई. फिर शरमाती हुई लल्लू को देख कर बाहर भाग गई.

लल्लू बेड पर लेता मुस्कुराता रहा.

बाहर…

ऋतु- सुनील डॉक्टर से पूछिए कब तक डिसचार्ज करेंगे दोनो को.

सुनील उठ कर डॉक्टर के कॅबिन में चला गया.

सुनील- अभी थोड़ी देर में बोला है डिसचार्ज कर देगा.

सुनील जा कर पेमेंट सारा क्लियर कर दिया.

थोड़ी देर में लल्लू और कोमल को डिसचार्ज कर दिया गया.

दोनो गाड़ी जिस में ये लोग आए थे उस में बैठ कर वापस घर आ गये.

कोमल अपने कमरे में जा कर आराम करने लगी.

सुनील- सोनम अभी लल्लू को काजल भाबी के कमरे में सुला दो लेकिन कल तुम लोग अपना बगल वाला कमरा जो बंद पड़ा है उसे सॉफ कर देना. लल्लू कल से वही रहेगा.

सोनम- ठीक है चाचा.

सुनील आँगन में खटिया पर बैठ गया.

सुनील- अब मुझे कौन बताएगा की आख़िर हुआ क्या था.

ऋतु- में गई थी तब तक तो सब रो रहे थे तो सोनम को पता होगा. सोनम बेटा क्या हुआ था.

घर के सभी वही आ गये की आख़िर हुआ क्या था.

फिर सोनम सब को बताने लगी की कैसे लल्लू कमरे में आया और बात शुरू हुई

फिर कैसे रोता हुआ बोला की सब उसे पागल समझते है.जिस से उसका मन करता है खुद ख़ुसी कर लेने का.

और फिर लल्लू की इस बात पर सारी बहनो का रोना और फिर ऋतु और रागिनी का आना.

रागिनी का लल्लू को पागल कह कर थप्पड़ मारना.

फिर लल्लू का सोनम के बाहों में बेहोश होना उसके बाद कोमल का भी बेहोश हो जाना.

सोनम की बात सुन कर सब रोने लगे. सब से ज़्यादा रागिनी रो रही थी की उस से कितना बड़ा पाप हो गया.

सुनील- रागिनी आज तुम मेरी नज़रो में गिर गई. क्या कहूं में तुम्हे अब. में अब लल्लू के सामने कैसे जाउन्गा. कैसे उस से नज़रे मिला पाउन्गा जिस की पत्नी ही उस का सब से बड़ा गुनहगार निकाला.

सोनम- लल्लू छोटे चाचा के बर्ताव से भी बहुत दुखी था. पहले राम चाचा पागल बोल दिए थे शायद और फिर रागिनी चाची आ कर पागल बोल दी. ये सुन कर उसे सॉक लगा था.

ऋतु- जो हो गया सो हो गया लेकिन आगे अगर किसी ने भी उसे पागल या कुछ भी कहा तो उसका इस घर में आखरी दिन होगा ये समझ लेना.
 
सोनम- लल्लू छोटे चाचा के बर्ताव से भी बहुत दुखी था. पहले राम चाचा पागल बोल दिए थे शायद और फिर रागिनी चाची आ कर पागल बोल दी. ये सुन कर उसे सॉक लगा था.

ऋतु- जो हो गया सो हो गया लेकिन आगे अगर किसी ने भी उसे पागल या कुछ भी कहा तो उसका इस घर में आखरी दिन होगा ये समझ लेना.

काजल लल्लू के पास बैठी हुई उसके बालो को सहला रही थी.

काजल आज बहुत डर गई थी.

राम से उसका बोल चाल पिछले 1 साल से बंद था. दोनो बच्चों को मूह देख कर वो हँसती मुस्कुरा ती रहती थी पूरे दिन लेकिन आज जो हुआ वो देख कर उसे अपने किस्मत पर बड़ा रोना आ रहा था. आज तो एक क्षण के लिए उसे लगा जैसे उसका पूरा संसार ही उजड़ गया.

पति पहले दूर था बेटे के साथ साथ बेटी भी बेहोश हो गई थी.

तभी शालिनी खाना ले कर आ गई.

शालिनी- ये बेटे को खिला देना काजल. जब थोड़ा ठंढा हो जाये तो फिर दवाई भी खिला देना.

ऋतु- सब को खाना खिला दिया शालिनी.

शालिनी- नही दीदी. किसी ने खाया ही नही.

ऋतु- रोमा जा सब को बुला कर ला खाना खा ले सब.

रोमा सब को खाना के लिए बोल आया.

सभी मर्द आ गये खाना खाने सिवाए सुनील के.

ऋतु- सुनील जी नही आए. वो कहाँ रह गये.

अनिल- वो आज नही खाएगा. सो गया वो.

ऋतु जानती थी की वो लल्लू के साथ जो हुआ इस कारण से दुखी है. और आज अब किसी के भी कहने से नही खाएगा.

मर्दो के खा लेने के बाद सब लॅडीस खाना निकाल कर ले आए.

इधर काजल ने लल्लू को अपने हाथो से थोड़ा खाना खिला दिया था और दवाई भी खिला कर सुला दी थी.

ऋतु- जा काजल को बुला ला. वो भी थोड़ा खा ले.

गौरी- चाची खाना नही खाएगी. (गौरी काजल के कमरे से वापस आ कर बोली)

ऋतु काजल के कमरे में चली गई.

कमरे में काजल लल्लू के सर को अपने गोद में ले कर बैठी उसके सर को सहला रही थी.

ऋतु- खाना खा ले थोड़ा सा.

काजल- आप सब खाओ. मुझे अभी भूख नही है.

ऋतु- रात को खाली पेट नही सोते. लल्लू का सही ख़याल तभी रख पाओगी जब खुद सही रहोगी.

काजल- में ठीक हूँ दीदी. मुझे क्या होना है. इतनी अच्छी किस्मत होती मेरी तो फिर किस बात का रोना था.

ऋतु- कोई भी अपनी जिंदगी से खुश नही होता कभी. जिस को जितना मिलता है इतने में ही खुस होना सीख लेना चाहिए. चल चुप चाप खाना खा ले चल कर.

काजल- आप मेरा खाना किसी से भेजवा दो. में बाद में खा लूँगी.

ऋतु- ठीक है लेकिन सुबह में देखूँगी की तुमने खाया या नही.

ऋतु वापस आँगन जा कर काजल का खाना उसके कमरे में ढक कर रखवा दी.

काजल उठ कर अपने कमरे का दरवाजा बंद की और लल्लू को हग कर के सो गई.
 
सुबह 4बजे लल्लू की नींद खुली.

बगल में देखा तो काजल सो रही थी. लल्लू को काजल को देख कर बहुत प्यार आया.

लल्लू- रात मेरे कारण मा कितना परेशान हुई. सब मेरी ही तो ग़लती है. अगर में दालान पर बैठता ही नही तो इतना कुछ नही होता.

लल्लू काजल को अपने आगोश में ले कर भिच लिया अपने सीने में.

फिर काजल के मासूम मुखड़े को देखा तो उस के चहरे पर सूखे आँसू की धार दिखी.

लल्लू समझ गया की मा रात में रोती हुई सोई है.

लल्लू जीभ निकाल कर मा के चेहरे को चाट लिया.

काजल कुन्मुना गई.

लल्लू मुस्कुराता हुआ काजल की आँखो को चूम लिया.

काजल नींद में ही मुस्कुरा दी.

लल्लू को मा के साथ खेलने में मज़ा आ रहा था.

लल्लू मा के माथे पर चूम लिया.

काजल भी अपने आगोश में लल्लू को पकड़ ली नींद में ही.

फिर लल्लू काजल के गालो को चाट लिया.

काजल के शरीर में सिहरन दौड़ गई.

लल्लू काजल की नाक को चूम लिया.

काजल फिर मुस्कुराई.

लल्लू काजल के नंगे कंधे को चूम लिया.

काजल का पूरा बदन कांप गया. और उसकी आँख खुल गई. लेकिन लल्लू तो काजल के कंधे पर झुका था तो उसे पता नहीं चला.

लल्लू इस बार फिर जीभ निकाला और काजल की गर्दन को चाट लिया.

काजल तेज़ी से अपने मूह को कस कर भिच ली नही तो उसके मुख से तेज सिसकी निकल जाती.

लल्लू फिर काजल की गर्दन पर चूमता ही चला गया.

काजल आँखे बंद किए अपने बेटे के सुखद स्पर्श का आनंद लेने लगी.

लल्लू गर्दन चूमते हुए काजल की चुचियों की घाटी में मूह लगा कर चूम लिया.

काजल लल्लू को जोरो से अपने में चिपका ली.

आज लगभग एक साल बाद उसे किसी पुरुष के स्पर्श का अहसास हुआ था वो भी उसके खुद के बेटे का.

काजल से अब बर्दास्त नही हुआ और लल्लू के बालो में काजल का हाथ फिसलने लगा.

लल्लू समझ गया की मा अब जाग गई है.

लल्लू- मा आप रात में रोती हुई सो गई थी.

काजल- नही तो बेटा. में क्यू रोउंगी भला.

लल्लू- मा आप वादा कीजिए की आगे से कभी भी आप नही रोएंगी.

काजल- बेटा में क्यू रोउंगी. में नही रोई थी.

लल्लू- लेकिन आप के गाल पर सूखे हुए आँसूओ का निशान बता रहा है की आप रात भी रोई थी और उस से पहले तो मैने ही आप को रुला दिया था.

काजल- तुम्हे वहम हुआ है बेटा. में बिल्कुल नही रोई हूँ.

लल्लू- अच्छी बात है मा. मा में आप का अच्छा बेटा हूँ ना.

काजल- तू मेरा सब से प्यारा बेटा है. ( काजल लल्लू को लिपटा कर उसके माथे पर चूम ली. फिर गाल फिर आँख फिर नाक उसके बाद लल्लू के कंधे पर फिर गर्दन पर और लास्ट में होंठो पर.) हिसाब बराबर हो गया ना.

लल्लू- शरमाता हुआ. मा आप जाग रही थी.

काजल- हँसती हुई. हा में जाग गई थी तुम से पहले ही. तुम्हे ही देख रही थी सोता हुआ की तुम उठ गये तो मै अपनी आँखे बंद कर सोने का नाटक करने लगी थी. इसी बहाने मुझे पता तो चला की मेरा बेटा मुझे कितना प्यार करता है.

लल्लू- शरमाता हुआ. मा में आप से बहुत बहुत प्यार करता हूँ.

काजल- में भी बेटा. में भी तुम से बहुत प्यार करती हूँ.

काजल लल्लू को फिर से बाहों में भर कर अपने से चिपका ली

लल्लू को अपनी छाती में काजल के मोटे दूध पिसता हुआ फील हो रहा था.

उसका बाबूराव अपना सर उठाने लगा.

लल्लू अपनी कमर को थोड़ा पीछे कर लिया.

काजल- बेटा अब कैसा लग रहा है तुम्हे. अब तू ठीक है ना.

लल्लू- मा में बिल्कुल ठीक हूँ. आप थोड़ी सी भी फ़िकर मत कीजिए.

काजल लल्लू के गाल को चूम लिया.

काजल- तू फ्रेश हो जा. में कुछ बनाती हूँ तुम्हे भूख लगी होगी.

रात में भी कुछ ठीक से नही खाया था.

लल्लू- मा अभी इतनी सुबह कौन ख़ाता है. अभी नही खाउन्गा.

आप बस ऐसे ही मेरे पास रहिए. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.

काजल- अच्छा मेरे बेटे को मा पर कुछ ज़्यादा प्यार नही आ रहा आज.

लल्लू- बिल्कुल नही. ये प्यार तो हमेशा से था मेरे दिल में बस आज बाहर आया है.
 
लल्लू- बिल्कुल नही. ये प्यार तो हमेशा से था मेरे दिल में बस आज बाहर आया है.

काजल- ओ क्या बात है.

काजल लल्लू के गाल को खिच कर.

आज से तू यही सोएगा. अब मुझे ये प्यार डेली चाहिए.

लल्लू- जो आग्या माताश्री.

दोनो खिलखिला कर हस दिए.

काजल- चल सुबह हो गया है मुझे उठने दे.

लल्लू काजल को कस कर अपने बाहों में जकड़ लिया.

काजल- ऐसे इतने ज़ोर से पकड़ेगा तो मेरी हड्डिया टूट जाएँगी.

लल्लू थोड़ा ढीला कर दिया.

काजल लल्लू की आँखो में देखते हुए आँखो से इशारा किया.

लेकिन लल्लू नही छोड़ा.

काजल लल्लू के होंठो पर झुकती हुई एक हल्की सी क़िस्सी दे कर बोली.

अब छोड़ दे. सब उठ गये होंगे.

लल्लू मुस्कुराता हुआ काजल को छोड़ दिया.

काजल अपने कपड़े को सही करती गेट खोल कर बाहर चली गई.

कमरे में लेटा हुआ लल्लू उब् गया तो वो भी उठ कर फ्रेश होने चला गया.

वहाँ से आ कर आँगन में खटिया पर बैठ गया.

ऋतु लल्लू के लिए चाय लाई.

लल्लू बैठा चाय पी रहा था.

तभी एक एक कर सभी बहने कमरे से बाहर आई.

ऋतु- कोमल कैसी हो बेटा अब तुम.

कोमल- ठीक हूँ काकी.

लल्लू- क्यू क्या हुआ दीदी को.

कोमल- सिर दर्द कर रहा था रात को.

लल्लू- यहाँ बैठो में दबा देता हूँ.

कोमल लल्लू के पास आ कर उसे हग करती हुई. अब में बिल्कुल ठीक हूँ.

सभी बहने एक एक कर आ कर लल्लू को हग कर उसके गाल पर चुम्मि देती जा रही थी.

रानी- अच्छा भाई आज से तु हमारे बगल वाले कमरे में सोएगा.

लल्लू- किस ने बताया आप को.

सोनम- सुनील चाचा बता रहे थे की उस कमरे को सॉफ करवा देना आज.

लल्लू- अच्छा.

वाउ फिर तो मज़ा आ जायगा. सभी बहने एक साथ बोली.
 
सारे मर्द दादू सहित आँगन में आ कर बैठ गये.

लल्लू को आँगन में बहनो के साथ देख कर सब को अच्छा लगा.

सुनील- कैसा है मेरा बेटा अब.

लल्लू- मस्त हूँ काका.

दादू- लल्लू बेटा कल तुम दोनो भाई बहन ने तो मुझे डरा ही दिया था. भाई अब में बूढ़ा हो गया हूँ. ज़रा मेरा भी ध्यान रख कर ऐसी हरकते करो तुम लोग.

लल्लू- सॉरी दादू आगे से ध्यान रखूँगा.

सब के लिए ऋतु चाय ले कर आई.

सभी लोग वही आँगन में बैठ कर चाय पी रहे थे.

ऋतु- पापा में सोच रही थी की एक गाड़ी खरीद लेते.

दादू- सही कह रही हो बहूँ. कल रात में भी यही सोच रहा था.

गौरी- य्याअ हूँउ, कौन सी गाड़ी लेंगे दादू.( गौरी उछाल कर दादू के गले लगती गौरी बोली.)

लल्लू- अरी मोटी ये तो में करने वाला था.

गौरी- तू चुप रह बंदर. मेरे भी दादू है ये.

गौरी जीभ निकाल कर चिडाने लगी.

रवि- अब ऐसे करोगे. अभी अभी मना किया है दादू ने. अभी ही शुरू हो गये.

लल्लू- छोटे काका. हम लड़ नही रहे है. ये तो हमारा प्यार है. ( लल्लू उठ कर गौरी को हग करता बोला)

वैसे दादू कौन सी गाड़ी लेंगे.

अनिल- में सोच रहा हूँ ट्रेककर ले ले. खेती के काम भी आएगी.

रोमा- याक्कक.

ऋतु- आप तो रहने ही दो. आप अपना दिमाग़ क्यू लगाते हो. जो आप के पास है ही नही.

अनिल- अरे बाबा में मज़ाक कर रहा हूँ.( हँसते हुए.)

राम- गाड़ियाँ तो मार्केट में इस समय बहुत है. लेकिन गाँव के हिसाब से मेरे ख़याल से महिंद्रा का स्कॉर्पियो सही रहेगा.

सोनम- सही कहा आप ने छोटे चाचा.

गाँव के लिए ये बेस्ट रहेगा. हमें यही लेना चाहिए.

दादू- अब मेरा छोटा बेटा और बड़ी पोती दोनो ने पसंद किया है तो में तो अब इसे ही कहूँगा लेने को.

सुनील- ठीक है फिर यही ले आएँगे. वैसे लल्लू बेटा तुम्हे कोई और पसंद हो तो बताओ तुम भी.

लल्लू- नही काका, पापा और दीदी ने जो कहा है वही सही होगा. वैसे भी ये हम से बड़े है और समझदार भी तो यही ले आए. ( लल्लू सोनम को देख कर बोला)

सोनम मुस्कुराने लगी.

दादू- राम बेटा, आज ही सहर जा कर ले आना गाड़ी.

राम- जी पापा.

राम- अब कैसी है तबीयत तुम्हारी.( लल्लू को देख कर बोला)

लल्लू- ठीक है पापा.

राम- तो चलना है गाड़ी लेने.

लल्लू- नही में घर पर ही आराम करूँगा. अभी कमज़ोरी लग रहा है थोड़ा.

राम- ठीक है आराम करो.

फिर सभी मर्द लोग दलान पर चले गये.
 
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