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ऋतु लल्लू के चूचुक को अपने जीभ से छेड़ते हुए अपने गान्ड को कभी लल्लू के कमर पर घिसते हुए आगे पीछे होती तो कभी अपने गान्ड को गोल गोल घुमाती.
थोड़ी देर में दोनो एक साथ झड़ गये.
लल्लू ऋतु के एक टंकी को पकड़ कर ज़ोर से उसके चूचुक को दबा कर मसल दिया.
ऋतु ज़ोर से सिसक उठी.
लल्लू बेड से उतर का कपड़े पहन बाहर आ गया.
काजल- ( जो उठ गई थी. आँगन में झाड़ू लगा रही थी) क्या बात है बेटा. आज तो तू लेट उठा है.
लल्लू- हा मा, आज लेट आँख खुली.
काजल- कोई बात नही बेटा. होता है कभी कभी.
लल्लू वहाँ से निकल कर दालान पर आया.
सुनील- बेटा उठ गया तू.
चल आज खेत में पानी लगाने का काम हम काका भतीजे को मिला है.
लल्लू- कोई बात नही काका. ये तो सब से आसान काम है. मोटर चला कर बस देखते रहो की कही कोई मेढ ना टूट गया हो. बस…
सुनील हँसता हुआ उसकी पीठ को थपथपा कर साथ चल दिया.
लल्लू एक कुदाल अपने कंधे पर ले रखा था और एक कुदाल उसके काका.
दोनो खेत पहुच कर वहाँ खेत के चारो और सुनील घूम कर देख रहा था तब तक लल्लू भी जा कर मोटर चालू कर दिया.
बहुत बड़े एरिया में पानी लगाना था जिस में दोनो काका भतीजे को शाम हो गया.
सुनील के बाकी भाई दूसरे कामो में बिज़ी थे.
इस बीच एक मजदूर को भेज कर ये दोनो घर से अपने लिए खाना भी मंगवा लिए थे.
शाम को दोनो लोगो का शरीर बहुत दर्द कर रहा था.
पानी डल गया तो दोनो मोटर बंद कर घर की ओर चल दिए.
लल्लू- काका आज तो आप ने पूरा थका दिया.
सुनील- नही बेटा. ये तो सब से आसान काम है. मोटर चालू…..
लल्लू- बस बस काका. में समझ गया. कोई भी काम आसान नही होता.
सुनील- गुड, अब तुम समझदार हो गये बेटा.
लल्लू- काका मुझे आप से दो बाते करना है.
सुनील- तुम्हे पूछने की ज़रूरत कब से पड़ने लगी बेटा. बेझिझक बोलो.
लल्लू- पहली बात की मुझे भी बुलेट चलाना सीखा दीजिए.
सुनील- ठीक है. ये तो में भी सोच रहा था. अब दूसरी बात बोलो.
लल्लू- दूसरी बात. मुझे भी अब अलग कमरा चाहिए. अब में बड़ा हो गया हूँ ना.
सुनील- हाहाहा.. ठीक है. कमरा चाहिए तो बोल देना मा को वो सॉफ करवा देंगे.
लल्लू- काका आप ही बोल देना ना. आप की बात कोई नही टालता. दीदी लोग जिस केमरे में रहती है उसके बगल वाला कमरा खाली ही है तो वो में ले लूँगा.
सुनील- पता है तुम्हे. जब मेरी शादी नही हुआ था तब में भी उसी कमरे में रहता था.
लल्लू- सच काका.
सुनील- हा. बिल्कुल सच.
यू ही बाते करते दोनो घर पहुच गये.
आँगन आ कर लल्लू खाट पर जा कर गिर गया.
लल्लू- आ, आज बहुत थक गया.
ऋतु- आ गया मेरा बेटा. तक गया है. कोई बात नही. आ में तुम्हारा बदन दबा दूं.
ऋतु लल्लू के पास जा कर उसे पेट के बल उल्टा कर उसके बदन को दबाने लगी.
मा- घोड़ा जैसा हो गया है और तुझे शरम नही आती की अपने काकी से बदन दबवा रहा है
लल्लू- अपनी काकी से नही दबवा रहा बल्कि अपनी प्यारी बीबी से दबवा रहा हूँ. ( लास्ट का शब्द धीरे से बोला जो सिर्फ़ ऋतु ही सुन पाई)
ऋतु मुस्कुराती हुई उसकी पीठ पर एक मुक्का लगा दी.
लल्लू- क्या हुआ क्या में कुछ ग़लत कहा.
ऋतु शरमाती हुई सर ना में हिला दी.
थोड़ी देर बाद लल्लू काकी को पकड़ कर अपने साथ खटिया पर बैठा कर उसके चुचे को सब से छुप कर मसल देता.
ऋतु शर्मा कर वहाँ से भाग गई.
तब तक सोनम नाश्ता ले कर लल्लू को पकड़ा दी.
लल्लू- आआयईी, आज सूरज किधर से निकला भाई. ये में क्या देख रहा हूँ. दीदी किचन से निकली है.
सोनम- मा.. देखो कैसे बोल रहा है भाई. क्या में काम नही करती.( सोनम पैर पटक कर बच्चो की तरह नाटक करती बोली)
ऋतु- बिल्कुल करती हो बेटी. लेकिन सिर्फ़ अपने कमरे में अपना बेड तोड़ने का.
ऋतु की बात सुन कर सब हँसने लगे.
सोनम- मामा.. तुम भी सब के साथ मिल गये.
लल्लू आगे बढ़ कर सोनम को अपने गले से लगा लिया.
लल्लू- मेरे प्यारी दीदी को काम करने की क्या ज़रूरत है. उन के लिए इतने लोग है तो काम करने को.
सोनम- मेरा प्यारा भाई.
सोनम कस्स कर लल्लू को गले लगा ली.
सोनम की बड़े बड़े दूध लल्लू के छाती में घुस गये.
लल्लू का रोमांच से रोया रोया खड़े हो गये.
अब लल्लू का बाबूराव अपना सर उठाने लगा था.
लल्लू भी सोनम को अपने गले से लगाए उसकी पीठ पर हाथ फेर रहा था.
लल्लू को बहुत मज़ा आ रहा था.
अब लल्लू का लॉडा आधा खड़ा हो गया था जिसे सोनम अपने पेट पर फील कर रही थी.
सोनम मारे शरम के अपना मूह लल्लू के छाती में छुपा ली फिर लल्लू के आगोश से निकल कर अपने कमरे में चली गई.
थोड़ी देर में दोनो एक साथ झड़ गये.
लल्लू ऋतु के एक टंकी को पकड़ कर ज़ोर से उसके चूचुक को दबा कर मसल दिया.
ऋतु ज़ोर से सिसक उठी.
लल्लू बेड से उतर का कपड़े पहन बाहर आ गया.
काजल- ( जो उठ गई थी. आँगन में झाड़ू लगा रही थी) क्या बात है बेटा. आज तो तू लेट उठा है.
लल्लू- हा मा, आज लेट आँख खुली.
काजल- कोई बात नही बेटा. होता है कभी कभी.
लल्लू वहाँ से निकल कर दालान पर आया.
सुनील- बेटा उठ गया तू.
चल आज खेत में पानी लगाने का काम हम काका भतीजे को मिला है.
लल्लू- कोई बात नही काका. ये तो सब से आसान काम है. मोटर चला कर बस देखते रहो की कही कोई मेढ ना टूट गया हो. बस…
सुनील हँसता हुआ उसकी पीठ को थपथपा कर साथ चल दिया.
लल्लू एक कुदाल अपने कंधे पर ले रखा था और एक कुदाल उसके काका.
दोनो खेत पहुच कर वहाँ खेत के चारो और सुनील घूम कर देख रहा था तब तक लल्लू भी जा कर मोटर चालू कर दिया.
बहुत बड़े एरिया में पानी लगाना था जिस में दोनो काका भतीजे को शाम हो गया.
सुनील के बाकी भाई दूसरे कामो में बिज़ी थे.
इस बीच एक मजदूर को भेज कर ये दोनो घर से अपने लिए खाना भी मंगवा लिए थे.
शाम को दोनो लोगो का शरीर बहुत दर्द कर रहा था.
पानी डल गया तो दोनो मोटर बंद कर घर की ओर चल दिए.
लल्लू- काका आज तो आप ने पूरा थका दिया.
सुनील- नही बेटा. ये तो सब से आसान काम है. मोटर चालू…..
लल्लू- बस बस काका. में समझ गया. कोई भी काम आसान नही होता.
सुनील- गुड, अब तुम समझदार हो गये बेटा.
लल्लू- काका मुझे आप से दो बाते करना है.
सुनील- तुम्हे पूछने की ज़रूरत कब से पड़ने लगी बेटा. बेझिझक बोलो.
लल्लू- पहली बात की मुझे भी बुलेट चलाना सीखा दीजिए.
सुनील- ठीक है. ये तो में भी सोच रहा था. अब दूसरी बात बोलो.
लल्लू- दूसरी बात. मुझे भी अब अलग कमरा चाहिए. अब में बड़ा हो गया हूँ ना.
सुनील- हाहाहा.. ठीक है. कमरा चाहिए तो बोल देना मा को वो सॉफ करवा देंगे.
लल्लू- काका आप ही बोल देना ना. आप की बात कोई नही टालता. दीदी लोग जिस केमरे में रहती है उसके बगल वाला कमरा खाली ही है तो वो में ले लूँगा.
सुनील- पता है तुम्हे. जब मेरी शादी नही हुआ था तब में भी उसी कमरे में रहता था.
लल्लू- सच काका.
सुनील- हा. बिल्कुल सच.
यू ही बाते करते दोनो घर पहुच गये.
आँगन आ कर लल्लू खाट पर जा कर गिर गया.
लल्लू- आ, आज बहुत थक गया.
ऋतु- आ गया मेरा बेटा. तक गया है. कोई बात नही. आ में तुम्हारा बदन दबा दूं.
ऋतु लल्लू के पास जा कर उसे पेट के बल उल्टा कर उसके बदन को दबाने लगी.
मा- घोड़ा जैसा हो गया है और तुझे शरम नही आती की अपने काकी से बदन दबवा रहा है
लल्लू- अपनी काकी से नही दबवा रहा बल्कि अपनी प्यारी बीबी से दबवा रहा हूँ. ( लास्ट का शब्द धीरे से बोला जो सिर्फ़ ऋतु ही सुन पाई)
ऋतु मुस्कुराती हुई उसकी पीठ पर एक मुक्का लगा दी.
लल्लू- क्या हुआ क्या में कुछ ग़लत कहा.
ऋतु शरमाती हुई सर ना में हिला दी.
थोड़ी देर बाद लल्लू काकी को पकड़ कर अपने साथ खटिया पर बैठा कर उसके चुचे को सब से छुप कर मसल देता.
ऋतु शर्मा कर वहाँ से भाग गई.
तब तक सोनम नाश्ता ले कर लल्लू को पकड़ा दी.
लल्लू- आआयईी, आज सूरज किधर से निकला भाई. ये में क्या देख रहा हूँ. दीदी किचन से निकली है.
सोनम- मा.. देखो कैसे बोल रहा है भाई. क्या में काम नही करती.( सोनम पैर पटक कर बच्चो की तरह नाटक करती बोली)
ऋतु- बिल्कुल करती हो बेटी. लेकिन सिर्फ़ अपने कमरे में अपना बेड तोड़ने का.
ऋतु की बात सुन कर सब हँसने लगे.
सोनम- मामा.. तुम भी सब के साथ मिल गये.
लल्लू आगे बढ़ कर सोनम को अपने गले से लगा लिया.
लल्लू- मेरे प्यारी दीदी को काम करने की क्या ज़रूरत है. उन के लिए इतने लोग है तो काम करने को.
सोनम- मेरा प्यारा भाई.
सोनम कस्स कर लल्लू को गले लगा ली.
सोनम की बड़े बड़े दूध लल्लू के छाती में घुस गये.
लल्लू का रोमांच से रोया रोया खड़े हो गये.
अब लल्लू का बाबूराव अपना सर उठाने लगा था.
लल्लू भी सोनम को अपने गले से लगाए उसकी पीठ पर हाथ फेर रहा था.
लल्लू को बहुत मज़ा आ रहा था.
अब लल्लू का लॉडा आधा खड़ा हो गया था जिसे सोनम अपने पेट पर फील कर रही थी.
सोनम मारे शरम के अपना मूह लल्लू के छाती में छुपा ली फिर लल्लू के आगोश से निकल कर अपने कमरे में चली गई.