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Incest मेरा परिवार और मेरी वासना

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अपडेट 3

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मैं अपने घर पहुचा जब मैं यहाँ से गया था तब हमारा घर एक मंज़िला था लेकिन अब ये दो मंज़िला हो गया था अंधेरा भी हो चुका था मैने बेल बजाई और दरवाजा खुलने का इंतज़ार करने लगा

"कॉन है" एक जनाना आवाज़ दरवाजे के पिछे से आई और दरवाजा खुल गया

"अरे कैसे लड़के हो तुम लिफ्ट तो देदि थी ना अब तुम्हे क्या चाहिए जो मेरे घर भी आगये" दरवाजा खोलने वाली लड़की बोली

उसे यहाँ देख कर तो मेरी सिट्टी पिटी गुम हो गई थी जब ये मेरे घर मे है और मेरे घर को अपना घर बोल रही है तो पक्का ये मेरी दोनो बहनो मे से एक होगी और सारे रास्ते मैं इसके बारे मे ना जाने क्या क्या सोचता रहा और कैसे मैने इसके सामने कुत्तो की चुदाई का

मज़ा लिया और जब स्कूटी पर ये मेरे पिछे बैठी थी तो कैसे मैने ब्रेक लगा लगा कर इसके बूब्स अपनी पीठ पर दबवाए थे 'हे भगवान

अब क्या होगा अगर सच मे ये मेरी बहन निकली तो, कहीं ये सारी बाते पापा से ना बता दे वरना एक बार फिर वो मुझे घर निकाला दे देंगे'

हे भगवान ऐसा मत करना मैं मन ही मन बड़बड़ा रहा था जब कि वो बार बार मुझसे पुछ रही थी क्या काम है यहाँ क्यों आए हो लेकिन जैसे मैं तो इस दुनिया मे था ही नही मेरी गर्दन झुकी हुई थी तभी मुझे एक दूसरी आवाज़ सुनाई दी

"क्या हुआ डॉली कॉन है" इस आवाज़ को सुनते ही मेरी फटी गान्ड और ज़्यादा फट गयी ये मेरी मम्मी की आवाज़ थी यानी अब ये पक्का हो गया था कि ये मेरी छोटी बहन डॉली है मैं मन ही मन अपने आप को कोसने लगा कि अभी कुच्छ देर पहले ही मैं अपनी बहन के बारे मे कितना गंदा गंदा सोच रहा था

"पता नही मम्मी कॉन है पहले मुझे रास्ते मे मिला था मुझसे लिफ्ट माँग रहा था गाओं तक आने के लिए लेकिन मैने नही दी लेकिन जब थोड़ा आगे जाकर मेरी गाड़ी पंचर हो गई तो टाइयर चेंज करने के बदले मैने इसे लिफ्ट दी और सामने ही चौराहे पर छोड़ दिया लेकिन ये साहब है कि मेरे पिछे पिछे घर तक ही आगये और अब पुच्छने पर आने का कारण भी नही बता रहे है" डॉली बोली

"क्या बात है भाई, क्यों इस तरह लड़की का पिछा कर रहे हो" मम्मी बोली

अब पहली बार मैने डरते डरते अपनी गर्दन उपर उठाई मुझे नही पता था कि ये जानने के बाद कि मैं उसका भाई हूँ डॉली कैसे रिक्ट करेगी

मेरे गर्दन उठाते ही मम्मी ने कुच्छ सेकेंड तक मुझे देखा और जैसे ही उन्होने मुझे पहचाना वो ज़ोर से "सोनुउऊउउ....." चिल्लाते हुए दौड़ कर मेरे गले से लग गई और उन्होने मेरे चेहरे पर पप्पीयो की बरसात सी कर दी

 
"आ गया मेरा लाल, कितना इंतजार करवाया तूने पूरे सात साल और इन सात सालो मे मैने तेरी सूरत सिर्फ़ सात बार देखी है लेकिन अब

मैं तुझे कभी भी अपने से दूर नही जाने दूँगी...." और पता नही मम्मी क्या क्या बड़बड़ाती रही लेकिन मेरी नज़र डॉली पर थी जैसे ही उसने सुना कि मैं उसका भाई हूँ उसके चेहरे पर खुशी और मुस्कान आ गई लेकिन मुझ से नज़र मिलते ही पता नही वो ख़ुसी और मुस्कान कहाँ गायब हो गई

इधर मेरी मम्मी मुझे कभी भी अपने से दूर नही करने की बात कर रही थी और उधर मैं कुच्छ देर पहले ही अपनी बहन के साथ ऐसी हरकत कर आया था जिसका पापा को पता लगते ही मेरा मम्मी से एक बार फिर दूर हो जाना कहाँ वक्त की बात थी

"अरे क्या हुआ भाई क्यों चिल्ला रही हो" कहते हुए पापा बाहर आए और मुझे देखते ही वो भी खुशी के मारे मुझसे लिपट गये

कुच्छ देर तक दरवाजे के बाहर ही हमारी मिला भेंटी होती रही फिर हम अंदर आए तो मम्मी बोली "अरे डॉली खड़ी खड़ी क्या देख रही

है अपने भाई से नही मिलेगी और सोनू तूने इसे पहचाना कि नही"

अब मैं मम्मी से क्या बोलता अगर मैं इसे पहचान जाता तो अभी तक मेरी गान्ड फट नही रही होती

"नही मम्मी मैने इसे नही पहचाना था अगर पहचान लेता तो चौराहे पर क्यों उतरता इसके साथ सीधे घर ही नही चले आता" मैं बोला

"और तू, तूने अभी तक अपने भाई से बात भी नही की" मम्मी डॉली से बोली

"हाई भैया कैसे हो" डॉली अनचाहे ढंग से बोली मैं सिर्फ़ गर्दन हिला कर रह गया

"अरे कैसी निगोडी लड़की है पूरे सात साल बाद अपने भाई से मिल रही है लेकिन बात ऐसे कर रही है जैसे पत्थर मार रही हो, जा

जाकर इसके लिए पानी वानी ला और चाय बना" मम्मी बोली

अब डॉली अंदर चली गई तो मैने मम्मी से निशा दीदी के बारे मे पुछा तो उन्होने बताया कि वो मोना के घर पर पढ़ाई के लिए गई है और कल सुबह आने वाली है लेकिन मम्मी उसे बुलाने के लिए किसी को भेजने लगी तो मैने मना कर दिया कि रहने दो सुबह तो आ ही जाएगी

और वैसे भी मैं सफ़र और पैदल चलने से बहुत थका हुआ हूँ तो वैसे भी मैं किसी से बात नही कर पाउन्गा तो मम्मी भी मान गयी

इसके बाद मैं फ्रेश हुआ और बाद मे खाना खा कर थकान की वजह से सोने चला गया मम्मी ने पहले ही मेरे लिए एक रूम सेट कर दिया था लेकिन जब तक मुझे नींद नही आई तब तक मैं डॉली के बारे मे ही सोचता रहा क्योंकि मेरे घर आने से लेकर अब तक उसने मुझसे कोई बात नही की थी और उसके चेहरे पर अजीब से भाव नज़र आ रहे थे उसकी हालत साँप छछुन्दर वाली हो गई थी ना वो मुझे निगल पा रही थी ना

उगल पा रही थी इन्ही सब सोचो मे मुझे नींद ने कब आ घेरा मुझे पता ही नही चला........
 
अपडेट 4

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अगली सुबह मैं थोड़ा लेट उठा तब तक मम्मी नाश्ता बना चुकी थी मैं नहा धोकर हॉल मे आया जहाँ पापा पहले से ही बैठे हुए थे मेरे आते ही मम्मी और डॉली ने नाश्ता लगा दिया मैने मम्मी से निशा दीदी के बारे मे पुछा तो उन्होने बताया कि वो अभी नही आई है तभी पापा बोले

पापा- तो बेटा क्या प्रोग्राम है आज का

मे- कुच्छ खास नही बस आज पुराने दोस्तो से मिलना चाहता हूँ अपने खेत और गाओं घूमना चाहता हूँ

पापा- लेकिन तुम्हारी मम्मी ने तो कुच्छ और ही डिसाइड किया है

मे- क्या? (और मम्मी की तरफ देखा)

मम्मी- आज तुम्हे पापा के साथ शहर जाना है

मे- किसलिए

मम्मी - वो तो तुम्हे वहीं जाकर पता चलेगा मे - लेकिन...

पापा- लेकिन वेकीन मत करो इसमे तुम्हारा ही फ़ायदा है

मे- ओके तो कब चलना है

पापा- बस नाश्ता ख़तम करो और चलो

मे- लेकिन अभी निशा दी भी नही आई है

मम्मी- वो कहाँ भागी जा रही है अब तो तुम भी यहीं हो शहर से वापस आकर अच्छे से मिल लेना

मे- ठीक है

और फिर इधर उधर की बाते करते हम नाश्ता करने लगे और नाश्ता करने के बाद पापा की कार से हम शहर के लिए निकले अभी हम चौराहे के पास ही पहुचे थे कि पापा कार रोक कर किसी से बाते करने लगे तभी मुझे साइड वाली गली से दो लड़कियाँ आती हुई दिखाई दी जिसमे से एक वोही लड़की थी जो कल मुझे पार्क मे दिखाई दी थी 'क्या माल है साली' मैं उसे घूरते हुए मन मे बोला उसके साथ वाली लड़की भी एक दम बॉम्ब थी दोनो की अगर तुलना की जाए तो पार्क वाली लड़की आयशा टाकिया जैसी दिखती थी जबकि उसके साथ वाली बिग बूब्स डॉली धूपिया जैसी थी

 
खैर मैं उन्हे ज़्यादा नही देख पाया क्योंकि तब तक हमारी गाड़ी आगे बढ़ चुकी थी

शहर पहुच कर पापा ने कार एक एलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान के सामने रोकी और हम दोनो दुकान मे चले गये

"चलो बेटा एक अच्छा सा स्मार्ट फोन पसंद कर लो" पापा मुझसे बोले

"क्या...." पापा की बात सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना नही रहा

"हां बेटा" पापा बोले

"ओह्ह....थॅंक्स पापा मैं आपसे मोबाइल के लिए कहने ही वाला था लेकिन आपने बिना माँगे ही मुझे दे दिया" मैं बोला और फिर मैने एक अच्छा सा 4जी फोन पसंद किया लेकिन उसकी कीमत बहुत ज़्यादा थी इसलिए मैने दूसरा मोबाइल दिखाने को कहा तो पापा ने जबरन वही फोन मुझे दिला दिया इतना अच्छा फोन पा कर मैं बहुत खुश था मोबाइल लेने के बाद जब मैं दुकान से बाहर जाने लगा तो पापा ने मुझे रोकते हुए कहा "अभी कहाँ चले अभी एक चीज़ बाकी है"

"क्या..." मैं पापा की तरफ देखते हुए बोला

"बेटा तुम्हारे लिए एक लॅपटॉप भी तो लेना है" पापा मुस्कुराते हुए बोले

पापा की बात सुनकर मारे खुशी के मैं तो जैसे सातवे आसमान पर पहुच गया मेरे लिए तो आज वही बात साबित हो गई थी कि 'बिन

माँगे मोती मिले.....'

"क्या सच...." मैं खुशी से झूमते हुए बोला

पापा ने मुस्कुरा कर हाँ मे गर्दन हिला दी

फिर मैने लेनोवो का एक लॅपटॉप खरीदा और हम दुकान से बाहर आगये वही साइड मे ही एक मोबाइल सिम की दुकान थी जहाँ से पापा ने मुझे दो अलग अलग कंपनी की सिम खरीद कर दी और मैने भी झट से वो दोनो सिम अपने मोबाइल मे लगा ली जबकि दुकान वाला

मुझे बता चुका था कि वो दोनो सिम शाम तक ही चालू होगी

उसके बाद पापा मुझे कपड़ो की एक बहुत बड़ी दुकान मे ले गये जहाँ उन्होने मुझे बहुत से कपड़े दिलवाए फिर जूते घड़ी और डेली यूज़ का और भी समान दिलवाया इतना सब खरीद कर मैं बहुत खुश था सच मे मेरे मम्मी पापा ने इन सात सालो की सारी कसर एक ही दिन मे पूरी कर दी थी

"बस पापा बहुत हो गया अब घर वापस चले"

आख़िर मे मैं पापा से बोला

"बस बेटा एक चीज़ और ख़रीदनी है उसके बाद सीधे घर चलेंगे" पापा बोले

"अब और क्या रह गया है पापा सब कुछ तो ले लिया है" मैं बोला

"बाइक.....अभी तुम्हारे लिए बाइक कहाँ ली है" पापा जैसे बॉम्ब फोड़ते हुए बोले

 
पापा की बात सुन कर मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा हार्ट फैल होने वाला है इतनी खुशिया एक ही दिन एक साथ मुझे अपने नसीब पर यकीन ही नही हो रहा था और मुझसे कुच्छ बोलते ही नही बन रहा था

"बोलो बेटा कोन्सि बाइक लेनी है" पापा ने मुझसे पुछा

पता नही मुझे क्या हुआ कि खुशी के कारण या अपने पापा का इतना प्यार देख कर मेरी आँखे भर आई और मैने लपक कर उन्हे गले लगा लिया मेरी आँखो से आँसू बहने लगे जो पापा महसूस कर चुके थे वो अब धीरे धीरे मेरी पीठ सहला रहे थे

"बेटा हम ने तुम्हे सात साल अपने से दूर रखा तो तुम क्या समझे कि हम तुम्हे प्यार नही करते तुम्हारी मम्मी और मैं दोनो ही जानते है कि इन सात सालो मे हमारा एक एक पल कैसे बीता है और हम ये सोच कर ही बैठे थे कि जिस दिन तुम वापस आओगे उस दिन सारी खुशिया तुम्हे एक साथ दे देंगे अभी जो लिया है या लेंगे उसके बाद भी तुम जिस चीज़ पर हाथ रख दोगे वो आज की आज अभी के अभी तुम्हारी हो जाएगी समझे" पापा बोले

"थॅंक्स पापा...." मैं भर्राए गले से बोला

"तो बताओ कोन्सि बाइक लेनी है" पापा मुझे अपने से अलग करते हुए बोले

मैंने अपने आँसू पोछते हुए कुच्छ देर सोचा और टीवीएस के शो रूम चलने को कहा जहाँ पहुच कर हम ने एक अपाचे बाइक खरीदी जब तक बाइक डेलिवेरी के लिए तैयार होती तब तक मैं शोरुम मे घूमने लगा तभी मुझे वहाँ वो लड़का दिखाई दिया जो कल पार्क मे था शायद वो इसी शोरुम के मालिक का बेटा था क्योंकि कॅश काउंटर वो ही संभाल रहा था मैं वही पड़ी एक कुर्सी पर बैठ गया तभी उस लड़के का मोबाइल बजा और वो बात करने लगा मुझे उसकी आवाज़ सुनाई दे रही थी

"हां यार कल पार्क मे मिली थी लेकिन साली ने सिर्फ़ उपर उपर से ही हाथ फिराने दिए और कुच्छ नही करने दिया" वो बोला

दूसरी तरफ से क्या कहा गया वो तो मुझे सुनाई देना ही नही था इसलिए जो उसने कहा वो ही लिख रहा हूँ

"अरे ऐसे कैसे छोड़ दिया आपने कल मिलने का पक्का वादा लिया है लेकिन कल भी वो सिर्फ़ ब्रा पैंटी मे ही दिखाने को तैयार हुई है" वो फिर बोला

दूसरी तरफ से फिर कुच्छ कहा गया

"नही यार कोई प्यार व्यार नही है एक बार उसे जी भर कर चोद लूँ उसके बाद तू निपटा देना फिर उसका एमएमएस बना कर मार्केट मे बेच कर पैसे बना लेंगे फिर वो अपने रास्ते और मैं अपने रास्ते" वो फिर बोला

'कितना कमीना है साला कल कैसे उस लड़की को अपने प्यार का वास्ता दे रहा था और अब यहाँ उसका एमएमएस बना कर पैसे

कमाने की सोच रहा है, मादरचोद लेकिन मुझे क्या करना है इन लोगो से' मैने मन मे सोचा

फिर कुच्छ देर मे मेरी बाइक तैयार हो गई और फिर पापा कार मे और मैं बाइक पे घर के लिए निकल पड़े दोपहर के 12 बज चुके थे और अब मुझे हल्की हल्की भूख लगने लगी थी मैं यहाँ शहर मे ही खाना खा लेता लेकिन मम्मी ने मुझे मना किया था क्योंकि वो मेरी पसंद

का खाना बनाने वाली थी इसलिए मैने भी बाइक की स्पीड बढ़ा दी और अपने गाओं की तरफ अपने घर के लिए उड़ने लगा जहाँ एक

और सिर दर्द मेरा इंतज़ार कर रहा था.....

 
अपडेट 5

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मैं घर पहुचा पापा अभी तक नही आए थे क्योंकि गाओं की गड्ढे भरी सड़को पर कार को तेज़ी से चलाना मुश्किल था

मैने बेल बजाई और कुच्छ देर बाद गेट खुला और गेट खुलते ही मेरे दिमाग़ मे धमाका सा हुआ वो पार्क वाली लड़की मेरे सामने खड़ी थी

"तुम......तुम यहाँ क्या कर रही हो" अचानक मेरे मुँह से निकल गया

"मैं यहाँ क्या कर रही हूँ, मेरे ही घर आकर पुछ्ते हो कि मैं यहाँ क्या कर रही हूँ पहले तुम ये बताओ कि तुम कॉन हो और यहाँ क्या कर रहे हो" वो बोली

उसकी बात सुन कर मेरा सिर घूम गया 'इसकी माँ की चूत ये भी मेरी बहन निशा ही निकली गाओं आते ही जिन दो लड़कियो पर मेरी गंदी नज़र पड़ी वो दोनो ही मेरी बहने निकली अब क्या होगा एक तो मेरी वजह से नाराज़ चल रही है और ये दूसरी उस लड़के के चक्कर मे फँस के पूरे खानदान की नाक कटवाने पर तुली है अब मैं क्या करूँ' यही सोचते हुए मैने निशा को रास्ते से हटाया और अंदर हॉल मे आकर सोफे पर धम्म से ढेर हो गया

"ए मिसटर ये क्या कर रहे हो तुम ऐसे कैसे किसी के घर मे घुस सकते हो" निशा बोली

"शांत....शांत....अभी पता चल जाता है" मैने उसे रोका और फिर ज़ोर से बोला "मम्मी......मैं आ गया हूँ"

"आई बेटा..." अंदर कही से मम्मी की आवाज़ आई अब चौंकने की बारी निशा की थी

"तू....तू सोनू है" वो हैरत और खुशी से बोली

"हां दी" मैने भी मुस्कुराते हुए कहा

"ओ मेरे भाई....." कहते हुए वो झपट कर मेरी गोद मे आ बैठी और मेरे सिर को चूमती हुई मुझे अपनी बाहों मे भर लिया

कुच्छ देर प्यार करने के बाद वो बोली "लेकिन सोनू दरवाजा खुलते ही मुझे देख कर तू ऐसे चौंका क्यो था जैसे कि तू मुझे जानता हो"

अब मुझे बात संभालनी थी इसलिए मैं बहुत सावधानी से बोला "वो क्या है ना दी कल शहर मे मैने आपको देखा था और आज आप मुझे आज यहाँ दिख गई इसीलिए मैं चौंक गया था"

"तो क्या हुआ कल तुमने शहर मे बहुत सी लड़की देखी होगी तो क्या तुम्हे उन सब की सूरत याद है, तुमने मुझमे ऐसा क्या देखा कि मैं तुम्हे याद रही" दी बोली और मेरी गोद से उठ कर खड़ी हो गई उसके चेहरे पर भी टेन्षन के भाव आ चुके थे मैं समझ गया कि वो डर गई थी कि कहीं मैने उसे उस लड़के के साथ तो नही देख लिया है

 
"दी...भले ही मैने वहाँ बहुत सी लड़की देखी होगी लेकिन सब तुम्हारी जैसी थोड़ी ना थी और याद तो कोई खास चीज़ ही रहती है" मैं उसे उपर से नीचे तक देखते हुए बोला

मेरी इस बात से उसका डर निकल गया था उसके होंठो पर एक शरारती मुस्कान आ गई थी

"नॉटी बॉय, अपनी बड़ी बहन को ही इस नज़र से देख रहा था" वो बोली

"लेकिन तब कहाँ पता था कि तुम मेरी बहन हो वो तो अब पता चला ना, अब नही देखूँगा वैसी नज़रो से" मैं बोला

अभी हमारे बीच कोई और बात होती इसके पहले ही मम्मी, डॉली और सवेरे निशा दी के साथ दिखी वो बड़े बूब्स वाली लड़की हॉल मे दाखिल हुई

"तो मिल लिए दोनो भाई बहन" मम्मी बोली हम दोनो ने हाँ मे गर्दन हिलाई

"तुम्हारे पापा नही आए बेटा"

"मम्मी सबसे पहले मैं आपको थॅंक्स कहूँगा मुझे इतने सारे गिफ्ट दिलवाने के लिए और बाइक से आया हूँ इसलिए जल्दी आ गया जबकि पापा कार से है तो टाइम तो लगेगा उन्हे आने मे" मैं बोला

"चल पगले कोई अपने माँ बाप को भी थॅंक्स बोलता है क्या और वैसे भी पिच्छले सात सालो मे हम ने तुम्हे कुच्छ नही दिया था तो सारी कसर एक बार मे ही पूरी कर ली" मम्मी मेरे सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए बोली

"वाउ सोनू क्या क्या गिफ्ट मिले तुम्हे" निशा ने पुछा

मैने सब बताया

"चलो ये अच्छा हुआ कि तुम्हे बिके मिल गई है अब जब भी मुझे शहर जाना होगा तुम्हारे साथ ही जाउन्गा

क्योंकि स्कूटी मे सड़क के गड्ढो के कारण बहुत परेशानी होती है" निशा दी बोली

तभी मेरी नज़र पास खड़ी उस लड़की पर गई, मेरी नज़रो का इशारा समझ कर निशा दी बोली "भाई ये वही है जिसे तूने छत से गिरा दिया था, मोना"

"हाई मोना कैसी हो तुम" मैं बोला

"भगवान की दया से अच्छी हूँ वरना तो शायद लंगड़ी लुली होती अभी तक" मोना हँसते हुए बोली

"सॉरी यार लगता है तुम अभी तक बचपन की वो बात भूली नही" मैं शर्मिंदा होते हुए बोला

"अरे नही यार जस्ट जॉकिंग" मोना बोली

तभी पापा आ गये तो मैं समान निकालने कार के पास चला गया और मम्मी और बाकी सब खाना लगाने के लिए चले गये.......
 
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