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Guest
अपडेट 6
☆☆☆☆☆
खाना खाने के बाद सभी लोग थोड़ी देर हॉल मे बैठे फिर पापा खेतो की तरफ चले गये और गर्मियों के दिन थे इसलिए मम्मी भी अपने रूम मे सोने के लिए चली गयी
मैं, निशा दी, डॉली और मोना कुछ देर इधर उधर की बाते करते रहे लेकिन डॉली ने अभी भी मुझसे कोई बात नही की और ना ही मेरी तरफ देखा मुझे समझ नही आरहा था कि मैं भी उससे बात कैसे करूँ फिर थोड़ी देर बाद मैं भी अपने रूम मे आराम करने चला गया यहाँ
मैं आपको बता दूं कि हमारा घर जोकि दो मंज़िला है इसमे नीचे मम्मी पापा का बेडरूम था और उसके साइड वाला रूम डॉली का था जबकि निशा दी का बेडरूम उपर की मंज़िल पर था और उसके साइड वाला रूम ही मुझे मम्मी ने दिया था
अपने रूम मे जाकर मैने मोबाइल देखा तो मेरी दोनो ही सिम अभी तक आक्टीवेट नही हुई थी फिर मैं सोचने लगा कि कैसे मैं निशा दी
के दिमाग़ से उस माँ के लौडे का भूत उतारू लेकिन मुझे कुछ समझ नही आरहा था ऐसे ही सोचते सोचते मुझे नींद लग गई
शाम के करीब 6 बजे मेरी नींद खुली मैं फ्रेश होकर नीचे हॉल मे आया तो देखा कि मेरी ही उमर के दो लड़के वहाँ बैठे थे और मम्मी से बात कर रहे थे निशा और डॉली मुझे दिखाई नही दी शायद अपने रूम होंगी
मुझे आता देख मम्मी बोली "लो आ गया सोनू अब तुम लोग बाते करो मैं चाइ भिजवाती हूँ"
ये कह कर मम्मी जाने लगी तभी जैसे उन्हे कुछ याद आया वो पलटी और मुस्कुराते हुए बोली "मैं तो भूल ही गयी थी कि सोनू तुम लोगो
को पहचान नही पाएगा तो लो पहले मैं तुम लोगो का इंट्रो करवा देती हूँ, वैसे सोनू क्या तुमने इन्हे पहचाना"
मेरी गर्दन ना मे हिली
"ये ग्रीन शर्ट वाला तुम्हारा बचपन का दोस्त किशन है और ये वाइट शर्ट वाला अशोक दोनो तुम्हारे आने की बात सुनकर तुमसे मिलने आए
है अब तुम लोग आपस मे बाते करो मैं चाइ भेजती हूँ" इतना कह कर मम्मी अंदर चली गई
किशन और अशोक दोनो ही मेरे बचपन मे खास दोस्त थे हम तीनो की तिकड़ी से स्कूल और गाओं वाले सभी बहुत परेशान रहते थे हम लोग बहुत शरारत किया करते थे और आज सात साल बाद उनसे मिलकर मुझे बहुत खुशी हो रही थी
मम्मी के जाते ही मैने अपनी बाहें फैला दी और वो दोनो लपक कर मेरे गले से लग गये
"कैसे हो दोस्तो" मैं भर्राये गले से बोला
"बस ठीक ही है यार इन सात सालो से तेरे वापस आने का इंतज़ार ही कर रहे थे/ किशन बोला
"सच यार तेरे जाने के बाद तो हमारी शराराते ही बंद हो गई थी और इसका दोष भी तब गाओं वालो ने तुझे ही दिया था कि सोनू ही इन
दोनो को बिगाड़ता था वरना तो कितने अच्छे बच्चे है ये दोनो" अशोक बोला
"कोई बात नही भाई लोगो इन गाओं वालो को अब फिर मज़ा चखा देंगे" मैं हँसता हुआ बोला और हम तीनो अलग हो कर बैठ गये और
पुराने जमाने की बाते याद करने लगे थोड़ी देर बाद चाइ भी आ गई
"तो सोनू आज शाम का क्या प्रोग्राम है" किशन मुझसे बोला
"मेरा तो आज शाम तुम दोनो से ही मिलने का प्रोग्राम था लेकिन तुम खुद ही आ गये अब तुम ही बताओ कि क्या करना है" मैं बोला
मेरी बात सुनकर अशोक ने चारो तरफ नज़र दौड़ाई लेकिन हॉल मे मे हमारे सिवा कोई नही तो धीमी आवाज़ मे बोला "कभी बियर पी है"
"कैसी बात करता है यार, वहाँ बोरडिंग मे बियर कहाँ से मिलेगी" मैने जवाब दिया
"तो चल आज हमारी तरफ से तुझे बियर पार्टी" किशन बोला
"अबे मरवाओगे क्या अभी कल ही सात साल की जैल काट के आया हूँ और तुम फिर से मुझे भगाने पे तुले हुए हो कहीं पापा को पता
चल गया ना तो गान्ड ही मार लेंगे मेरी" मैं बोला
"अरे कुछ नही होता भाई हम तेरे दोस्त है दुश्मन नही किसी को पता भी नही चलेगा" अशोक बोला
"लेकिन...." मैने बोलना चाहा
"कोई लेकिन वेकीन नही बस थोड़ी सी पीना और वैसे भी बियर मे नशा ज़्यादा नही होता और इन गर्मियो मे तो वो अमृत का काम करती है
, चल अब उठ तुझसे और भी बाते करनी है" कहते हुए किशन उठ गया
मैं भी उठा और मम्मी को बता कर आ गया की मैं किशन और अशोक के साथ गाओं मे घूमने जा रहा हूँ फिर हम तीनो किशन की ही बाइक पर निकल गये
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खाना खाने के बाद सभी लोग थोड़ी देर हॉल मे बैठे फिर पापा खेतो की तरफ चले गये और गर्मियों के दिन थे इसलिए मम्मी भी अपने रूम मे सोने के लिए चली गयी
मैं, निशा दी, डॉली और मोना कुछ देर इधर उधर की बाते करते रहे लेकिन डॉली ने अभी भी मुझसे कोई बात नही की और ना ही मेरी तरफ देखा मुझे समझ नही आरहा था कि मैं भी उससे बात कैसे करूँ फिर थोड़ी देर बाद मैं भी अपने रूम मे आराम करने चला गया यहाँ
मैं आपको बता दूं कि हमारा घर जोकि दो मंज़िला है इसमे नीचे मम्मी पापा का बेडरूम था और उसके साइड वाला रूम डॉली का था जबकि निशा दी का बेडरूम उपर की मंज़िल पर था और उसके साइड वाला रूम ही मुझे मम्मी ने दिया था
अपने रूम मे जाकर मैने मोबाइल देखा तो मेरी दोनो ही सिम अभी तक आक्टीवेट नही हुई थी फिर मैं सोचने लगा कि कैसे मैं निशा दी
के दिमाग़ से उस माँ के लौडे का भूत उतारू लेकिन मुझे कुछ समझ नही आरहा था ऐसे ही सोचते सोचते मुझे नींद लग गई
शाम के करीब 6 बजे मेरी नींद खुली मैं फ्रेश होकर नीचे हॉल मे आया तो देखा कि मेरी ही उमर के दो लड़के वहाँ बैठे थे और मम्मी से बात कर रहे थे निशा और डॉली मुझे दिखाई नही दी शायद अपने रूम होंगी
मुझे आता देख मम्मी बोली "लो आ गया सोनू अब तुम लोग बाते करो मैं चाइ भिजवाती हूँ"
ये कह कर मम्मी जाने लगी तभी जैसे उन्हे कुछ याद आया वो पलटी और मुस्कुराते हुए बोली "मैं तो भूल ही गयी थी कि सोनू तुम लोगो
को पहचान नही पाएगा तो लो पहले मैं तुम लोगो का इंट्रो करवा देती हूँ, वैसे सोनू क्या तुमने इन्हे पहचाना"
मेरी गर्दन ना मे हिली
"ये ग्रीन शर्ट वाला तुम्हारा बचपन का दोस्त किशन है और ये वाइट शर्ट वाला अशोक दोनो तुम्हारे आने की बात सुनकर तुमसे मिलने आए
है अब तुम लोग आपस मे बाते करो मैं चाइ भेजती हूँ" इतना कह कर मम्मी अंदर चली गई
किशन और अशोक दोनो ही मेरे बचपन मे खास दोस्त थे हम तीनो की तिकड़ी से स्कूल और गाओं वाले सभी बहुत परेशान रहते थे हम लोग बहुत शरारत किया करते थे और आज सात साल बाद उनसे मिलकर मुझे बहुत खुशी हो रही थी
मम्मी के जाते ही मैने अपनी बाहें फैला दी और वो दोनो लपक कर मेरे गले से लग गये
"कैसे हो दोस्तो" मैं भर्राये गले से बोला
"बस ठीक ही है यार इन सात सालो से तेरे वापस आने का इंतज़ार ही कर रहे थे/ किशन बोला
"सच यार तेरे जाने के बाद तो हमारी शराराते ही बंद हो गई थी और इसका दोष भी तब गाओं वालो ने तुझे ही दिया था कि सोनू ही इन
दोनो को बिगाड़ता था वरना तो कितने अच्छे बच्चे है ये दोनो" अशोक बोला
"कोई बात नही भाई लोगो इन गाओं वालो को अब फिर मज़ा चखा देंगे" मैं हँसता हुआ बोला और हम तीनो अलग हो कर बैठ गये और
पुराने जमाने की बाते याद करने लगे थोड़ी देर बाद चाइ भी आ गई
"तो सोनू आज शाम का क्या प्रोग्राम है" किशन मुझसे बोला
"मेरा तो आज शाम तुम दोनो से ही मिलने का प्रोग्राम था लेकिन तुम खुद ही आ गये अब तुम ही बताओ कि क्या करना है" मैं बोला
मेरी बात सुनकर अशोक ने चारो तरफ नज़र दौड़ाई लेकिन हॉल मे मे हमारे सिवा कोई नही तो धीमी आवाज़ मे बोला "कभी बियर पी है"
"कैसी बात करता है यार, वहाँ बोरडिंग मे बियर कहाँ से मिलेगी" मैने जवाब दिया
"तो चल आज हमारी तरफ से तुझे बियर पार्टी" किशन बोला
"अबे मरवाओगे क्या अभी कल ही सात साल की जैल काट के आया हूँ और तुम फिर से मुझे भगाने पे तुले हुए हो कहीं पापा को पता
चल गया ना तो गान्ड ही मार लेंगे मेरी" मैं बोला
"अरे कुछ नही होता भाई हम तेरे दोस्त है दुश्मन नही किसी को पता भी नही चलेगा" अशोक बोला
"लेकिन...." मैने बोलना चाहा
"कोई लेकिन वेकीन नही बस थोड़ी सी पीना और वैसे भी बियर मे नशा ज़्यादा नही होता और इन गर्मियो मे तो वो अमृत का काम करती है
, चल अब उठ तुझसे और भी बाते करनी है" कहते हुए किशन उठ गया
मैं भी उठा और मम्मी को बता कर आ गया की मैं किशन और अशोक के साथ गाओं मे घूमने जा रहा हूँ फिर हम तीनो किशन की ही बाइक पर निकल गये