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Incest मेरा परिवार और मेरी वासना

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अपडेट 6

☆☆☆☆☆

खाना खाने के बाद सभी लोग थोड़ी देर हॉल मे बैठे फिर पापा खेतो की तरफ चले गये और गर्मियों के दिन थे इसलिए मम्मी भी अपने रूम मे सोने के लिए चली गयी

मैं, निशा दी, डॉली और मोना कुछ देर इधर उधर की बाते करते रहे लेकिन डॉली ने अभी भी मुझसे कोई बात नही की और ना ही मेरी तरफ देखा मुझे समझ नही आरहा था कि मैं भी उससे बात कैसे करूँ फिर थोड़ी देर बाद मैं भी अपने रूम मे आराम करने चला गया यहाँ

मैं आपको बता दूं कि हमारा घर जोकि दो मंज़िला है इसमे नीचे मम्मी पापा का बेडरूम था और उसके साइड वाला रूम डॉली का था जबकि निशा दी का बेडरूम उपर की मंज़िल पर था और उसके साइड वाला रूम ही मुझे मम्मी ने दिया था

अपने रूम मे जाकर मैने मोबाइल देखा तो मेरी दोनो ही सिम अभी तक आक्टीवेट नही हुई थी फिर मैं सोचने लगा कि कैसे मैं निशा दी

के दिमाग़ से उस माँ के लौडे का भूत उतारू लेकिन मुझे कुछ समझ नही आरहा था ऐसे ही सोचते सोचते मुझे नींद लग गई

शाम के करीब 6 बजे मेरी नींद खुली मैं फ्रेश होकर नीचे हॉल मे आया तो देखा कि मेरी ही उमर के दो लड़के वहाँ बैठे थे और मम्मी से बात कर रहे थे निशा और डॉली मुझे दिखाई नही दी शायद अपने रूम होंगी

मुझे आता देख मम्मी बोली "लो आ गया सोनू अब तुम लोग बाते करो मैं चाइ भिजवाती हूँ"

ये कह कर मम्मी जाने लगी तभी जैसे उन्हे कुछ याद आया वो पलटी और मुस्कुराते हुए बोली "मैं तो भूल ही गयी थी कि सोनू तुम लोगो

को पहचान नही पाएगा तो लो पहले मैं तुम लोगो का इंट्रो करवा देती हूँ, वैसे सोनू क्या तुमने इन्हे पहचाना"

मेरी गर्दन ना मे हिली

"ये ग्रीन शर्ट वाला तुम्हारा बचपन का दोस्त किशन है और ये वाइट शर्ट वाला अशोक दोनो तुम्हारे आने की बात सुनकर तुमसे मिलने आए

है अब तुम लोग आपस मे बाते करो मैं चाइ भेजती हूँ" इतना कह कर मम्मी अंदर चली गई

किशन और अशोक दोनो ही मेरे बचपन मे खास दोस्त थे हम तीनो की तिकड़ी से स्कूल और गाओं वाले सभी बहुत परेशान रहते थे हम लोग बहुत शरारत किया करते थे और आज सात साल बाद उनसे मिलकर मुझे बहुत खुशी हो रही थी

मम्मी के जाते ही मैने अपनी बाहें फैला दी और वो दोनो लपक कर मेरे गले से लग गये

"कैसे हो दोस्तो" मैं भर्राये गले से बोला

"बस ठीक ही है यार इन सात सालो से तेरे वापस आने का इंतज़ार ही कर रहे थे/ किशन बोला

"सच यार तेरे जाने के बाद तो हमारी शराराते ही बंद हो गई थी और इसका दोष भी तब गाओं वालो ने तुझे ही दिया था कि सोनू ही इन

दोनो को बिगाड़ता था वरना तो कितने अच्छे बच्चे है ये दोनो" अशोक बोला

"कोई बात नही भाई लोगो इन गाओं वालो को अब फिर मज़ा चखा देंगे" मैं हँसता हुआ बोला और हम तीनो अलग हो कर बैठ गये और

पुराने जमाने की बाते याद करने लगे थोड़ी देर बाद चाइ भी आ गई

"तो सोनू आज शाम का क्या प्रोग्राम है" किशन मुझसे बोला

"मेरा तो आज शाम तुम दोनो से ही मिलने का प्रोग्राम था लेकिन तुम खुद ही आ गये अब तुम ही बताओ कि क्या करना है" मैं बोला

मेरी बात सुनकर अशोक ने चारो तरफ नज़र दौड़ाई लेकिन हॉल मे मे हमारे सिवा कोई नही तो धीमी आवाज़ मे बोला "कभी बियर पी है"

"कैसी बात करता है यार, वहाँ बोरडिंग मे बियर कहाँ से मिलेगी" मैने जवाब दिया

"तो चल आज हमारी तरफ से तुझे बियर पार्टी" किशन बोला

"अबे मरवाओगे क्या अभी कल ही सात साल की जैल काट के आया हूँ और तुम फिर से मुझे भगाने पे तुले हुए हो कहीं पापा को पता

चल गया ना तो गान्ड ही मार लेंगे मेरी" मैं बोला

"अरे कुछ नही होता भाई हम तेरे दोस्त है दुश्मन नही किसी को पता भी नही चलेगा" अशोक बोला

"लेकिन...." मैने बोलना चाहा

"कोई लेकिन वेकीन नही बस थोड़ी सी पीना और वैसे भी बियर मे नशा ज़्यादा नही होता और इन गर्मियो मे तो वो अमृत का काम करती है

, चल अब उठ तुझसे और भी बाते करनी है" कहते हुए किशन उठ गया

मैं भी उठा और मम्मी को बता कर आ गया की मैं किशन और अशोक के साथ गाओं मे घूमने जा रहा हूँ फिर हम तीनो किशन की ही बाइक पर निकल गये

 
गाओं के पास ही एक तालाब था जहाँ अशोक ने हमे उतार दिया और खुद बियर लेने चला गया मैं और किशन वही किनारे पर बैठ

गये गर्मियो के इस मौसम मे तालाब की लहरो से आती ठंडक बहुत सुकून दे रही थी

"और भाई सोनू बता बोरडिंग मे सिर्फ़ पढ़ाई ही की या कुछ और भी किया" किशन ने पुछा

"अरे यार लड़की पटाई कि नही कोई" किशन बोला

"वहाँ ये सब पोज़िबल ही नही था एक तो वो बाय्स स्कूल था दूसरे हमे स्कूल की चार दीवारी से बाहर महीने मे सिर्फ़ एक बार ही जाने

दिया जाता था वो भी टीचर्स के साथ अकेले नही तो ऐसे मे लड़की पटाना तो दूर लड़किया देखने को भी नही मिलती थी" मैने जवाब दिया

"धत्त तेरे की.....मतलब तूने अभी तक लड़कियो से कोई मज़े नही किए आज तक किसी को चोदा भी नही?"

किशन हैरानी से बोला

"हां यार यही बात है वैसे वहाँ मेरे दो दोस्त थे जिनके मोबाइल पर मैने ब्लूफिल्म बहुत देखी है" मैं बोला

"चल कोई बात नही कल ही तुझे किसी चूत मे डुबकी लगवा देते है" किशन बोला

"क्या मतलब?" मैं कुछ समझा नही

"अरे पगले कल ही तेरी ज़िंदगी की पहली चुदाई का इंतज़ाम करवा देते है" किशन बोला

"लेकिन कैसे लड़की कहाँ से लाओगे" मैने पुछा

"लड़कियो की फिकर मत कर तेरे जाने के बाद हमारे गाओं मे बंजारो का एक कबीला आया था जो अब गाओं से बाहर जंगल के किनारे बस गया है उनके कबीले के रिवाज से उनके कबीले मे देह व्यापार होता है इसलिए लड़की का कोई मॅटर नही है उठा लाएँगे कोई अच्छी सी बस कुछ पैसे देने होंगे तू उसकी फिकर मत कर" किशन बोला

"लेकिन काम कहाँ करेंगे" मैने पुछा

"अबे मेरे खेत मे एक मकान बना हुआ है और अभी खेतो मे ज़्यादा काम नही होने से उधर कोई ज़्यादा आता जाता भी नही तो वही

बैठक जमा लेंगे दोपहर को" किशन बोला

"लेकिन मैं घर पर क्या बोलूँगा" मैं अभी भी डरा हुआ था

"वो तू नही मैं बोलूँगा, अब देख भाई तू इतने दिनो बाद आया है तो पार्टी तो बनती है ना तो कल मैं तेरे घर आकर चाचा चाची से बोल

दूँगा कि मैं आज तुझे मुर्गा खिला रहा हूँ तो वो मना तो नही करेंगे ना" किशन बोला

मुझे भी उसकी बात सही लगी और ज़िंदगी की पहली चुदाई की बात सुनकर मेरी धड़कने भी तेज हो गई थी तभी अशोक दो बियर कुछ स्नेक्स और डेस्पो. ग्लास लेकर आ गया फिर हम तीनो ही बियर पीने लगे और किशन अशोक को वो सभी बाते बताने लगा फिर वो

दोनो आपस मे ही कल की पार्टी कैसे करनी है डिसाइड करने लगे

मैने एक ही ग्लास बियर पी थी लेकिन पहली बार होने से मुझ पर नशा कुछ ज़्यादा ही हावी होने लगा था और तभी मुझे याद आया कि कल तो निशा दी अपने बाय्फ्रेंड से मिलने जाने वाली है जो पता नही उनके साथ कल क्या करे लेकिन मैं उन्हे कैसे रोक सकता था अगर मैं घर वालो को बताता तो हो सकता था कि दीदी हमेशा के लिए मुझसे नाराज़ हो जाती और मैं उससे भी खुल कर नही बोल सकता था तो मैं

क्या करू तभी मुझे सूझा की अशोक और किशन से कुछ मदद लेता हूँ लेकिन मुझे ये ठीक नही लगा भले ही वो मेरे पक्के दोस्त थे लेकिन इस से उनकी नज़रो मे मेरी दीदी की इमेज खराब हो जाती इसलिए आख़िर मे मैने फ़ैसला किया कि मुझे अब दीदी से खुल कर बात करनी होगी और वो भी आज रात को ही चाहे कुछ भी हो जाए

तब तक किशन और अशोक भी अपनी बियर ख़तम कर चुके थे और रात के 8 भी बज चुके थे तो हम ने कल का प्लान पक्का किया और वापस निकल पड़े ठंडी हवा के झोंको ने बहुत हद तक मेरा नशा ख़तम कर दिया था बस एक हल्का हल्का सुरूर ही बाकी था जो

मुझे बहुत मज़ा दे रहा था और हिम्मत भी क्योंकि आज मुझे निशा दी से उस लड़के के बारे मे बात करनी थी.....
 
अपडेट 7

☆☆☆☆☆

मैं घर वापस आया तो सभी लोग खाने पर मेरा इंतज़ार कर रहे थे मैं चुपचाप खाना खाने बैठ गया क्योंकि मैं ज़्यादा बात कर के किसी को भी ये हिंट नही देना चाहता था कि मैं नशे मे हूँ मोना अपने घर वापस जा चुकी थी

मम्मी पापा ने मुझसे मेरे दोस्तो और गाओं घूमने के बारे मे पुछा तो भी मैने हां हूँ मे ही जवाब दिया और खाना होने के बाद सिर दर्द का बहाना बना कर उपर अपने रूम मे चला गया

रूम मे आते ही मैने सबसे पहले अपना मोबाइल देखा मेरी दोनो ही सिम चालू हो गई थी मैने सब से पहले जे और गुड्डू के नंबर. निकाले और उन्हे कॉंटॅक्ट मे सेव किया और दोनो को कॉल की और अपने दोनो नंबर. बता कर सेव करने को कहा थोड़ी देर इधर उधर की

बाते करने के बाद मैने उनसे विदा ली और कॉल कट कर दी अभी कॉल ख़तम हुए दो मिनिट भी नही हुए थे कि मेरे मोबाइल पर मसेज

की बाढ़ सी आ गई मैने देखा तो वो सब व्हाट्सअप के मसेज थे जय और गुड्डू ने मुझे इन्वाइट किया था और दोनो ने ही कोई 4-5 ग्रूप मे मुझे आड कर लिया था जिनमे वेज और नॉनवेज सभी तरह के मसेज थे पॉर्न पिक्स और वीडियो भी थे ये सब देख कर मुझे ऐसा लगा

जैसे मुझे कुबेर का खजाना मिल गया हो मैं वही सब देखने मे व्यस्त था और मुझे पता भी नही चला कि कब रात के 10 बज गये है

ठीक उसी टाइम मुझे निशा दी के रूम से कुछ आवाज़ आई मैं समझ गया कि दीदी वापस आ गई है मैने फोन वही रखा और दीदी के रूम की तरफ चल दिया अब तक मेरे नशे की सारी खुमारी उतर चुकी थी दीदी के रूम का गेट बंद था मैने गेट खटखटाते हुए उन्हे आवाज़ लगाई तो कुछ सेकेंड्स बाद उन्होने गेट खोल दिया दीदी पर नज़र पड़ते ही मेरे मुँह से सिटी निकल गई क्या लग रही थी वो अभी एक

ब्लॅक टीशर्ट और लोवर मे जिसमे उनके बड़े बड़े बूब्स और भारी भारी जांघे देख कर मेरा मन ललचा गया लेकिन तभी मेरे मन मे

ख़याल आया कि ये मेरी बहन है और दीदी की आवाज़ सुनकर जैसे मैं नींद से जागा

"ओये हीरो.....कहाँ खो गया और ये सिटी क्यूँ बजाई" दीदी बोल रही थी

"सीटी....वो मैने कब बजाई?" मैं हकलाते हुए बोला

"मुझे पागल समझता है क्या मुझे देखते ही तूने सिटी बजाई थी और तू मुझे इस तरह क्यों घूर रहा था" कहते हुए दीदी अंदर जाकर बेड पर बैठ गई

मैं भी दरवाजा भिड़ा कर उनके बेड के पास पड़ी कुर्सी पर बैठ गया मैने पक्का कर लिया था कि अब दीदी के साथ ओपन होना ही

पड़ेगा वरना मैं उन्हे उस लड़के के चंगुल से बचा नही पाउन्गा ये सोचते हुए मैं बोला "दी सिटी मैने नही बजाई वो खुद ही बज गई थी"

"अच्छा क्यों भला" दीदी ने पुछा

"अब जब सामने सीटी बजने लायक चीज़ हो तो सीटी बजेगी ही ना" मैं बोला

"ये क्या चीज़ चीज़ लगा रखा है तूने सुबह भी तूने मुझे खास चीज़ कहा था क्या कोई अपनी बहन से ऐसे बात करता है क्या" दीदी बोली लेकिन उनके लहजे मे गुस्सा नही था

"अब इसमे मैने क्या ग़लत कह दिया क्या तुम सुंदर नही हो, क्या तुम सेक्सी नही हो? मुझे तो लगता है कि तुम्हारे कॉलेज के सारे

लड़के तुम्हारे ही पिछे पड़े रहते होंगे" मैं बोला

मेरी बात सुनकर दीदी के होंठो पर हल्की सी मुस्कान आई और तुरंत गायब हो गई मैं समझ गया कि हर लड़की की तरह उन्हे भी अपनी तारीफ पसंद है लेकिन अपने भाई के सामने वो थोड़ी परेशानी महसूस कर रही थी और यही मुझे दूर करनी थी

"ये कैसे वर्ड यूज़ कर रहा है तू अपनी बड़ी बहन के लिए" दीदी मुझे आँख दिखाते हुए बोली

"तो क्या सच मे तुम सेक्सी नही हो, अच्छा चलो आज ही तुम्हे मालूम पड़ा कि मैं तुम्हारा भाई हूँ तो तुम ऐसा कह रही हो अगर कल शहर मे मैं तुम्हारी तारीफ करता तो क्या तब भी तुम मुझे ऐसे ही टोकती एक बात और दी मैं अब तुम्हारा भाई बन कर नही बल्कि दोस्त बन

कर रहना चाहता हूँ ताकि हम अपने सुख दुख से लेकर हर बात आपस मे शेयर कर सके जोकि भाई बहन के रिश्ते मे संभव नही है जिस भाई को तुम सात साल से भूली हुई थी उसे अभी भी भूले ही रहो प्ल्ज़" मैं बोला

मेरी बात सुनकर दीदी कुछ देर तक सोचती रही फिर बोली "ओके....मुझे भी तेरी बात ठीक लगी हर एक की ज़िंदगी मे एक ऐसा दोस्त होना ही चाहिए"

"तो आज से हम दोस्त" मैं बोला और अपना हाथ आगे बढ़ा दिया

"दोस्त" दीदी बोली और मुझसे हाथ मिला लिया

फिर हम कुछ देर इधर उधर की बात करते रहे फिर अचानक ही दीदी ने मुझसे पुछा "सोनू आज तूने कितनी गर्लफ्रेंड बनाई है"

"बस एक" मैं बोला

"अच्छा क्या नाम है उसका और वो कहाँ रहती है" दीदी ने पुछा

"उसका नाम निशा है और वो मेरे घर मे ही रहती है" मैं बोला

 


"क्या मतलब" दीदी बोली

"अरे यार दी तुम तो जानती ही हो कि मैं बाय्स स्कूल से पढ़ा हूँ और वहाँ हमे हॉस्टिल से बाहर जाने की भी पर्मीशन नही थी तो वहाँ मैं

कहाँ से बनाता और आज ही तुम मेरी दोस्त बनी हो और गर्ल भी हो तो हो गई ना मेरी गर्ल फ्रेंड" मैं बोला

"बड़ा स्मार्ट है तू" दीदी मुस्कुराते हुए बोली

"बस स्मार्ट ही..." मैं बोला

"नही..नही स्मार्ट ही नही हॅंडसम भी और डॅशिंग भी और जो जो होता है ना वो सब भी" दीदी बोली

"फिर भी आज तक मेरी कोई गर्लफ्रेंड नही थी और जो बनी वो भी किसी काम की नही बस नाम की है हा..हा..हा" मैं हँसते हुए बोला

"क्यों काम की नही है" दीदी ने पुछा

"अरे जैसा सभी लड़के अपनी गर्लफ्रेंड के साथ करते है वैसा मैं तुम्हारे साथ तो नही कर सकता ना" मैं दी की आँखो मे देखते हुए बोला

मेरी बात का मतलब समझ कर दीदी के गाल शरम से लाल हो गये मैने भी देखा की अब सही मौका है दीदी को उस लड़के की हक़ीकत बताने का तो मैं बोला "वैसे दी ये गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड वाला रिश्ता बड़ा ख़तरनाक होता है लड़किया तो बेचारी भावनाओ मे बह जाती है

लेकिन लड़के कम ही अच्छे होते है अब कल की ही बात लो ट्रेन से उतरने के बाद गाओं की बस निकलने मे टाइम था तो मैं बस स्टॅंड के पास वाले पार्क मे चला गया और जिस बँच पर मैं बैठा था उसके पिछे वाली झड़ी के अंदर एक लड़का और लड़की बाते कर रहे थे जो मुझे सुनाई दे गयी लड़का लड़की को सेक्स करने को उकसा रहा था और लड़की इसके लिए मान नही रही थी (कहते हुए मैने दीदी की तरफ देखा उनके चेहरे पर घबराहट के भाव आ गये थे) तो लड़के ने अपने प्यार का वास्ता देकर लड़की को ब्लॅकमेल किया और लड़की भी उसके बहकावे मे आकर सेक्स के लिए तो नही मानी लेकिन सेमी न्यूड होने के लिए तैयार हो गई फिर वो लोग वहाँ से वापस जाने लगे तो मैं लड़की को तो नही देख पाया लेकिन लड़के की सूरत मुझे दिखाई दे गई और आज जब मैं बाइक लेने टीवीएस शोरुम मे गया तो वो लड़का

मुझे वहाँ दिखाई दिया शायद वो शोरुम उसके पापा का ही था मैं वही उसके काउंटर के पास बैठा था तभी उस लड़के को किसी का

फोन आया मैने उनकी बाते सुनी जिसमे वो लड़का उसके दोस्त से कह रहा था कि उसे उस लड़की से कोई प्यार व्यार नही है वो बस

उस लड़की से सेक्स करना चाहता है और जब उसका मन भर जाएगा तो वो अपने उस दोस्त को भी उस लड़की से सेक्स करने देगा

और बाद मे उस लड़की का वीडियो एमएमएस बना कर मार्केट मे बेच कर पैसा कमाएगा, कितना कमीना है वो लड़का मुझे तो उस

बेचारी लड़की पर दया आती है जो कल उस कुत्ते से मिलने जाने वाली है और उसे उसके इरादो की खबर भी नही है पता नही वो कल

क्या करेगा उसके साथ"

मेरी बात सुनकर दीदी के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी गला सुख गया और वो थूक गुटकते हुए बोली "तूने सच मे उस लड़की को नही देखा"

"नही दीदी अगर देखा होता तो भी क्या होता मैं उस बेचारी को जानता तो हूँ नही कि जाकर उसे उस लड़के की सच्चाई बता देता" मैं बोला

मेरी बात सुनकर दीदी सोच मे पड़ गई और कुछ देर बाद मुझसे बोली अब तू जा मुझे नींद आ रही है बाकी बात कल करेंगे मैं समझ गया की मेरा काम हो गया है दीदी ज़रूर अभी अपने तरीके से कन्फर्म करेंगी की क्या मैं सच कह रहा हू

मैं उठा और दीदी को गुड नाइट कह कर रूम से बाहर निकल गया मेरे निकलते ही दीदी ने गेट बंद कर लिया और मैने गेट पर कान लगा दिए और तुरंत ही मेरा ख़याल सही निकला मुझे कहीं फोन की घंटी जाने की आवाज़ सुनाई दी दीदी ने कही फोन लगाया था तभी मुझे

दीदी की आवाज़ सुनाई दी पहले तो दीदी ने नॉर्मल हाई-हेलो की और फिर सीधे मतलब की बात पर आ गई

"तुम्हारा फॅमिली बिजनेस क्या है"

(अब मैं सिर्फ़ दीदी का कहा हुआ ही लिखूंगा क्योंकि दूसरी साइड कहा हुआ मुझे सुनाई नही दे रहा था)

"और"

"अच्छा कॉन सी बाइक का"

"ओह टीवीएस का, क्या आज तुम वहाँ बैठे थे"

"और वहाँ तुम्हे अपने किसी दोस्त की कॉल भी आई थी"

"मैं ये सब क्यों पुच्छ रही हूँ वो छोड़ो और बताओ कि कॉल आई थी या नही"

"और वो कॉल मेरे बारे मे ही थी है ना"

"मैं जानती हूँ वो मेरे बारे मे ही थी मेरे पास उसकी रेकॉर्डिंग है"

"कई है को छोड़ कुत्ते कितने गंदे ख़याल रखता है तू मेरे बारे बारे मे तू खुद मुझे चोदेगा और बाद मे अपने उस दोस्त से चुदवायेगा और इन सब का वीडियो बना कर पैसे कमाएगा हराम खोर इतनी गंदी सोच वाला है तू, प्यार का नाटक कर के लड़कियो की ज़िंदगी खराब करता

है बोल मैं सच कह रही हूँ या नही"

कुछ देर तक मुझे दी की आवाज़ नही आई शायद उधर से बहुत कुछ कहा जा रहा था

थोड़ी देर बाद दी की आवाज़ आई "कमिने तू मेरे नाम के अलावा मेरे बारे मे कुछ नही जानता यदि जानता होता कि मैं किसकी बेटी हूँ

तो शायद कभी इतनी हिम्मत नही करता अब देख मैं तेरा क्या हाल करवाती हूँ"

और फिर मुझे दीदी के सिसकने की आवाज़ आई शायद दीदी ने कॉल कट कर दी थी

मैं समझ गया कि अपना काम तो हो गया अब दीदी कल शहर नही जाने वाली थी अब मैं कल अपने दोस्तो के साथ चुदाई पार्टी अटेंड कर सकता था फिर भी मैं कोई रिस्क नही लेना चाहता था इसलिए कल सुबह दीदी से और बात करने की सोच कर मैं अपने रूम मे चला गया..........
 
अपडेट 8

☆☆☆☆☆

सुबह मैं टाइम से उठा और फ्रेश होकर हॉल मे आ गया पापा शायद खेतो की तरफ गये थे और मम्मी मंदिर गई थी निशा दी मुझे पता था कि अभी सो कर नही उठी है अब बस डॉली ही बची थी जो मुझे चाइ पिला सकती थी क्योंकि काम वाली बाई के आने मे अभी टाइम

था लेकिन डॉली से बोलने की मेरी हिम्मत नही हो रही थी मैने टीवी चालू कर लिया और साउंड थोड़ा तेज कर लिया की डॉली समझ जाए कि मैं हॉल मे आचुका हूँ

जैसा मैने सोचा था वैसा ही हुआ 5 मिनिट के अंदर ही डॉली मेरे लिए चाइ लेकर आ गई

"लो चाइ पी लो" वो मुझे चाइ देते हुए बोली

"मम्मी कहाँ है" मैने जानते हुए भी पुछा और चाइ लेकर टेबल पर रख दी

"मंदिर गई है" डॉली बोली और वापस जाने को मूडी तो मैने उसका हाथ पकड़ लिया उसने सवालिया नज़रो से मुझे देखा

"डॉली तू मेरे साथ ऐसा बिहेव क्यों कर रही है

जैसे मैं कोई पराया हूँ" मैं बोला

"तू खुद जानता है सोनू कि तूने मेरे साथ क्या किया था, क्या कोई भाई अपनी बहन के साथ ऐसा करता है" वो अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करती हुई बोली

"तू जानती है कि वो सब अंजाने मे हुआ था यदि मुझे पता होता कि तू मेरी बहन है तो क्या मैं ऐसा कर सकता था" मैंने उसकी कलाई पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी

"तो क्या तुम्हारी नज़र मे अपनी बहन की ही इज़्ज़त है बाकी लड़किया क्या किसी की बहन नही है" वो नम आँखो से बोली

"वो सब मैं नही जानता मुझे सिर्फ़ अपनी बहन से मतलब है और फिर मैने ऐसा किया भी क्या था उन कुत्तो वाली बात से तो मेरा कोई मतलब ही नही था और रही बात बार बार ब्रेक लगा कर तुम्हे अपने से टकराने की तो उसके लिए मैं सॉरी बोलता हूँ, अब तो माफ़ कर दो" मैं बोला

जवाब मे उसने कुछ नही कहा और अपना हाथ छुड़ा कर अंदर चली गई मैं भी झुंझलाता हुआ बैठ कर चाइ पीने लगा

तभी मुझे निशा दी की याद आई रात को फोन काटने के बाद वो कैसे सिसक रही थी शायद उसका दिल टूट गया था मुझे उसके लिए

कुछ करना चाहिए ये सोच कर मैने चाइ ख़तम की और उपर दी के रूम के सामने पहुच कर नॉक किया

"कॉन..." अंदर से दी की उदास सी आवाज़ आई

"दी मैं हूँ" मैं बोला

"आ जाओ" वो बोली

मैं अंदर दाखिल हुआ तो देखा की दीदी नहा चुकी थी और आज उन्होने एक सादा सा सलवार सूट पहना हुआ था उनके चेहरे पर

उदासी छाइ हुई थी और आँखे भी कुछ सूजी-सूजी सी लग रही थी जो शायद रोने या फिर लेट सोने की वजह से हुआ था

"क्या बात है दी तुम्हारा चेहरा उतरा हुआ क्यों है?" मैने पुछा

"कुछ नही वो बस थोड़ी तबीयत खराब है" दी बोली

"और आँख भी कुछ सूजी हुई लग रही है जैसे तुम रात बहुत रोई हो" मैने फिर कहा

"अरे ऐसा कुछ नही है ये तो मैं रात मे लेट सोई थी ना इसलिए ऐसा हुआ होगा" दी उदास लहजे मे बोली

"दीदी मुझसे छुपाने की कोशिश मत करो मैं अच्छे से समझ रहा हूँ कि तुम परेशान हो प्ल्ज़ बता दो ना कि क्या बात है" मैं ज़िद्द से बोला

"तू समझता क्यों नही कि ऐसा कुछ नही है बस मेरी तबीयत थोड़ी खराब है और हाँ अब बंद कर ये टॉपिक समझा" इस बार दी गुस्से से बोली और अपना बेड ठीक करने लगी

 


कुछ देर मैं चुपचाप सोचता रहा कि क्या करूँ कैसे दी की उदासी दूर करूँ फिर मैने पक्का कर लिया कि मुझे क्या करना है और मैं धीरे

से बोला "दी, मैं उस पार्क वाली लड़की को जानता हूँ मैने उसे देखा था"

"क.क..क्याअ....." दीदी ऐसे बोली जैसे मैने कोईधमाका किया हो

"हां...दी मैने उस लड़की की सूरत देखी थी" मैं बोला

"का...का..कौन ह..है व.व.वो..." दीदी काँपते स्वर मे बोली शायद वो उपर वाले से दुआ कर रही थी कि मैने उसे उस लड़की रूप मे ना पहचाना हो

"दी वो आप थी..." मैं बोला

मेरी बात सुनकर दीदी धम्म से बेड पर बैठ गयी और अपने हाथो मे अपना चेहरा छुपा कर रोने लगी

मुझे दीदी का इस तरह रोना बहुत बुरा लगा मैं उनके पास गया और उनके सिर पर हाथ फिराने लगा और उन्हे चुप होने को कहते रहा

कुछ देर बाद मेरे समझाने से दीदी कुछ शांत हुई और सुबक्ते हुए बोली "मैं कितनी बुरी हूँ ना सोनू"

"नही दी किसने कहा कि आप बुरी हो बुरा तो वो लड़का है आपने तो उससे प्यार किया था और वो आपका फ़ायदा उठाना चाहता था आप अपने आपको दोष मत दो दीदी" मैं बोला

मेरे ऐसा कहने से दीदी को थोड़ी हिम्मत मिली और उनका सुबकना बंद हो गया था

"सोनू मैं समझ गई जब तूने पहली बार मुझे देखा था तो तू क्यों चौंका था लेकिन जब तू जानता था कि वो लड़की मैं हूँ तो तूने सीधे ही मुझे उस लड़के के बारे मे क्यों नही बता दिया की वो मेरे बारे मे क्या सोच रहा था" दी बोली

"दी मैं सीधे आपको इस बारे मे बता कर शर्मिंदा नही करना चाहता था और फिर पता नही कि उस कंडीशन मे तुम मेरी बात का यकीन भी करती या नही और ये तो पक्का था कि तुम उससे मिलने जाती ही जाती और फिर वो तुम्हे सेनटी करके बहला देता लेकिन अब जो हुआ वो बिल्कुल सही हुआ" मैं बोला

"तू सही कहता है सोनू लगभग सभी लड़के ऐसे ही होते है लेकिन मेरा भाई ऐसा नही है, है ना" दीदी बोली

"हां दीदी मैं कभी भी किसी को धोखा नही दे सकता" मैं बोला

"तो भाई आज मैं हुई कसम खाती हूँ कि आज से मैं कभी भी किसी लड़के को बाय्फ्रेंड नही बनाउन्गी अब जैसी गुजर रही है वैसे ही गुज़ारुँगी भले ही मेरी सहेलिया कुछ भी कहे" दीदी बोली

"अब इसमे तुम्हारी सहेलिया क्या कहेंगी" मैं ना समझ सा बोला

"अरे पगले आज कल फॅशन हो गया बाय्फ्रेंड रखने का जिन लड़कियों का बाय्फ्रेंड नही होता उन्हे पुराने जमाने की और बहन जी कहा जाता है हमारे कॉलेज मे" दी ने बताया

"अरे तो चिंता क्यों करती हो मैं हूँ ना तुम्हारा बाय्फ्रेंड, जब भी तुम्हे अपनी सहेलियो के सामने बाय्फ्रेंड की ज़रूरत पड़े मुझे बुला लिया करना" मैं बोला

"हूंम्म...लेकिन तू तो सिर्फ़ नाम का बाय्फ्रेंड है ना तू मेरी सहेलियो के सामने वो सब कैसे कर पाएगा जो असली बाय्फ्रेंड करते है" दीदी मुस्कुराते हुए बोली अब उसकी सारी टेन्षन दूर हो गयी थी

"ऐसा नही है यदि तुम चान्स दो तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ" मैं भी शरारत से बोला

"पक्का, कर लेगा कुछ भी..." दीदी बोली

"तुम कहो तो क्या करके दिखाऊ ना किया तब बोलना" मैं बोला

"तो चल मुझे......" दीदी बोलते बोलते रुक गई क्योंकि किसी के आने की आवाज़ आ रही थी

"क्या कर रहे हो तुम दोनो यहाँ, नाश्ता नही करना है क्या मम्मी पापा वेट कर रहे है" डॉली रूम मे आते हुए बोली

"कुछ नही हम तो बस आने ही वाले थे, चल सोनू नीचे चले" दीदी बोली और मेरा हाथ पकड़ कर चलने लगी

दीदी ने जिस तरह से मेरा हाथ पकड़ा था और जिस तरह चिपक कर चल रही थी मुझे सच मे ऐसा लग रहा था कि वो मेरी गर्लफ्रेंड हो चिपक कर चलने से बार बार उनका लेफ्ट बूब मेरी बाँह पर रगड़ खा रहा था और उसकी सॉफ्टनेस मुझे जैसे जन्नत का मज़ा दे रही थी और दीदी की गोरी मांसल हथेली जो अभी मेरी हथेली मे थी उसकी नर्माहट और गर्माहट मेरे खून का दौरा बढ़ाए दे रही थी मैने भी दीदी की हथेली को कस कर भींच रखा था

पता ही नही चला कब हम नाश्ते की टेबल तक आ गये जहाँ मेरे हाथ से दीदी का हाथ अलग हो गया और मुझे ऐसा लगा जैसे किसी

ने मुझसे सारा जहाँ छीन लिया हो और नाश्ते की टेबल पर बैठ कर नाश्ता करने लगे.....

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अपडेट 9

♡♡♡♡♡

नाश्ते के कुछ देर बाद लगभग 10 बजे किशन और अशोक मेरे घर आए जहाँ उन्होने पापा से मुझे पार्टी देने की बात कही और मुझे

साथ लेजाने के लिए उनसे इजाज़त माँगी तो पापा ने बेहिचक इजाज़त दे दी क्योंकि वो भी जानते थे कि इतने दिनो बाद मिले दोस्तो मे इतना सब तो चलता ही है

घर से मैं अपनी बाइक पर निकला मेरे साथ अशोक था हम किशन की बाइक पिछे पिछे चल रहे थे जो उसके खेत की तरफ जा रही थी किशन का खेत गाओं से कोई 2 किमी दूर था और इसीलिए उधर बहुत कम लोगो का आना जाना होता था इसलिए ये जगह बहुत अच्छी

थी चुदाई जैसे काम के लिए

हम लोग खेत मे बने उस मकान मे पहुचे जिसमे एक बहुत बड़ा हॉल था जो शायद तैयार फसल रखने के काम आता होगा लेकिन अभी वो खाली था और साइड मे दो रूम बने हुए थे पीछे एक कमरा और बना हुआ था जिसमे एक लकड़ी से जलने वाला चूल्हा था जहाँ किशन

का एक नौकर मुर्गा काटने मे लगा हुआ था

"क्यों भाई छोटे कितना टाइम लग जाएगा मुर्गा बनने मे" अशोक ने पुछा

"बस कोई आधा घंटा" नौकर जिसका नाम छोटे था बोला

"और रोटी चावल का क्या इंतज़ाम है" मैं इधर उधर देखते हुए बोला

"वो सब आइटम ढाबे से ला लिया है खाना खाते वक्त गरम कर लेंगे" किशन बोला

"अरे छोटे वो लोग आई कि नही" तभी अशोक बोला "आ गई है भैया रूम मे बैठी है" छोटे बोला

"वो लोग मतलब, एक से ज़्यादा को बुलाया है" मैने पुछा

"नही तो क्या हम दोनो बगैर चुदाई के रह जाते, तीनो के लिए तीन बुलाई है पर पहला चान्स तेरा होगा कि तीनो मे से तू जिसे पसंद कर लेगा वो तेरे साथ जाएगी बाद हम दोनो आपस मे देख लेंगे" अशोक बोला

"तो चलो फिर देर क्यों कर रहे हो" किशन बोला और अंदर बने एक रूम की तरफ बढ़ गया

मैं और अशोक भी उसके पिछे चलने लगे लेकिन मेरी हालत अजीब सी हो गई थी ज़िंदगी की पहली चुदाई करने के नाम से ही मेरा बदन काँपने लगा था और धड़कने भी तेज हो गई थी गला सुख चुका था भले ही मैने बहुत सी ब्लू फिल्म देखी थी लेकिन जब प्रॅक्टिकल का

समय आया तो मैं समझ नही पा रहा था कि मैं ये सब कैसे करूँगा

हम तीनो रूम मे पहुचे जहाँ तीन लड़किया बैठी थी उसमे से एक शादी शुदा थी बाकी दो कुवारि थी दोनो कलर तीनो का ही सावला था लेकिन नाक नक्श बढ़िया बने हुए थे हमे आते देख तीनो ही लड़किया खड़ी हो गई

"ले भाई पसंद करले अपने लिए कोई भी" किशन मुझसे बोला

"म..मा..." मेरे मुँह से कुछ भी निकल नही पा रहा था

"अबे ये क्या बकरी की तरह मे मे कर रहा है जल्दी से बता किसे चोदेगा तू" अशोक बोला

अब मैने धययन से तीनो को देखा दोनो कुवारि लड़किया 20-21 साल की रही होगी जबकि तीसरी कोई 25 की होगी लेकिन हर तरफ से

भारी भारी लग रही थी उसके दूध और गान्ड उन दोनो लड़कियो से बड़े थे और चेहरा भी बहुत आकर्षक था तो मैने उसकी तरफ इशारा कर दिया

"गई भैंस पानी मे, अबे ज़िंदगी की पहली चुदाई कर रहा है वो भी शादीशुदा के साथ करेगा" किशन बोला

"अब यार जब इसे वही पसंद है तो ठीक है और वैसे भी ये दोनो सिर्फ़ नाम की कुवारि है गड्ढे तो तीनो के एक जैसे ही बड़े है" अशोक बोला

"ये भी ठीक है, तो चलो अपन चारो साइड वाले रूम मे चलते है इन दोनो को यही करने दो" किशन बोला

"लेकिन तुम दोनो एक ही रूम मे" मैने पुछा

"भाई ये तेरा पहला टाइम है इसलिए तू अलग रूम मे है अगली बार हम तीनो एक ही रूम मे करेंगे समझे, और हां तू देखना हमारे दोस्त का पहली टाइम है ख़याल रखना की उसे पूरा मज़ा आए" अशोक बोला और फिर वो चारो वहाँ से निकल गये

अब रूम मे मैं और वो लड़की दोनो ही थे वो आगे बढ़ी और उसने दरवाजा बंद कर दिया और मुझे देखने लगी लेकिन मेरे तो हाथ पाव सुन्न पड़े हुए थे मैं अपनी जगह से हिला भी नही

"क्या नाम है बाबू तेरा, और क्या सच मे ये तेरा पहली बार है" उसने पुछा

"स.स...सोनू, और ये मेरा पहली बार ही है" मैं हकलाते हुए बोला

"तो फिर चल आजा, और शुरू हो जा" वो बोली

"लेकिन मुझे तो कुछ आता ही नही" मैं बोला

"क्यों, क्या कभी नंगी फिल्म नही देखी है" वो हँसते हुए बोली

,"देखी है लेकिन देखने और करने मे बहुत फरक होता है" मैं बोला

"तो चल कपड़े उतार मैं सिखाती हूँ तुझे" वो बोली और अपनी साड़ी उतारने लगी कुछ ही देर मे वो सिर्फ़ पैंटी मे मेरे सामने खड़ी हुई

थी उसके बड़े बड़े बूब्स खुली हवा मे सांस ले रहे थे इधर मैं भी अब तक सिर्फ़ चड्डी मे हो चुका था

 
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