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Incest मेरा परिवार और मेरी वासना

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"पगले कहीं के, मैं रात को तुम दोनो भाई बहनो को सारी बाते सुन चुकी हूँ और मुझे तुम्हारी एक बात बिल्कुल सही लगी की अगर मैं किसी और से शादी करलू और वो कहीं बाहर मुँह मारे तो मैं कुछ भीनही कर पाउन्गी लेकिन तुम्हारे साथ मुझे गॅरेंटाय है की तुम बाहर कहीं भी ऐसा नही करोगे और जहाँ तक बात रही डॉली और निशा दीदी की तो वो घर की बात है और घर मे ही रहेगी और फिर कुछ सालो मे तो इन्हे शादी करके अपने घर जाना ही है इसलिए मुझे इनसे कोई परेशानी नही है बल्कि तब तक इनके साथ मज़े करने के और सेक्स के बारे मे सीखने का मौका मिल जाएगा" मंजू मुस्कुराते हुए बोली

"थॅंक्स मंजू, लेकिन मुझे तुमसे एक बात और कहनी है" मैं बोला

"वो क्या......" मंजू ने पूछा

"वो...वो.....बात ये है की मैं शादी तक तुम्हारे साथ सेक्स नही करना चाहता" मैं हिचकिचाते हुए बोला

"क्यों......" मंजू ने फिर पूछा

"वो.....वो......समझा करो ना यार" मैं कोई जवाब नही दे पाया

"हूंम्म्मम.....चलो रहने दो वो अपनी आपस की बात है बाद मे कर लेंगे" मंजू मुस्कुराते हुए बोली

"तो फिर सोनू आज रात का प्रोग्राम पक्का" डॉली ने पूछा

"अब तो मेडम से पर्मिशन भी मिल गई है तो पक्का ही है" मैने जवाब दिया

"लेकिन मेरी एक शर्त है" मंजू बोली

"क्या......" मैने पूछा

"तुम दोनो का ये प्रोग्राम मैं लाइव देखूँगी"

मंजू बोली

"मतलब......." अब डॉली ने पूछा

"मतलब ये की जब तुम लोग सेक्स कर रहे होंगे मैं भी तुम्हारे साथ वहीं रहूंगी" मंजू बोली

"ले....लेकिन ये कैसे हो सकता है" मैं बोला

"क्यों, क्यों नही हो सकता" मंजू ने पूछा

"वो...वो...मैं तुम्हारे सामने नंगा..... आई मीन...."

मैं अपनी बात पूरी नही कर पाया

"चलो छोड़ो भी यार अब, मैं तुम्हारा 'वो' नंगा देख ही चुकी हूँ और फिर भी कोई और भी झिझक है तो वो भी दूर कर दूँगी थोड़ी देर बाद, अब तो ठीक है ना" मंजू बोली

"मगर......." मेरे मुँह से निकला

"अब मान भी जा यार इतने नखरे ठीक नही और इसके साथ होने से और ज़्यादा मज़ा आएगा" डॉली बोली

"प्लीज़ सोनू मान जाओ ना" मंजू मेरा हाथ पकड़ कर बोली

"ओके.....जब तुम दोनो की यही मर्ज़ी है तो मुझे भी मंजूर है" मैं हार मानते हुए बोला

"ये हुई ना बात..." मंजू खुशी से बोली "और अभी लंच के बाद मैं तुम्हारी रही सही झिझक भी दूर कर दूँगी"

"वो कैसे......" डॉली ने पूछा

"तू भी तो साथ ही रहेगी खुद ही देख लेना" मंजू डॉली को आँख मारते हुए बोली

"ओके अब चल बहुत भूख लग रही है खाना खा लेते है" डॉली बोली

"ओके...चलो सोनू तुम भी खाना खा लो" मंजू मेरा हाथ पकड़ते हुए बोली और मुझे अपने साथ लेकर चलने लगी

मैं खाना तो खा चुका था लेकिन ढंग से नही खाया था तो मैं उसके साथ चलने लगा और मेरे दिमाग़ मे यही चल रहा था की मंजू ऐसा क्या करने वाली है जो मेरी झिझक दूर हो जाएगी...................
 
अपडेट 85

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मैं खाना तो खा चुका था लेकिन ढंग से नही खाया था तो मैं उसके साथ चलने लगा और मेरे दिमाग़ मे यही चल रहा था की मंजू ऐसा क्या करने वाली है जो मेरी झिझक दूर हो जाएगी................... .

अब आगे......

खाना हो चुका था और मैं उपर अपने रूम मे आ गया था जबकि डॉली और मंजू नीचे मम्मी के पास ही थी मेरे मन मे बहुत जिग्यासा थी की मंजू ऐसा क्या करने वाली है जिससे मेरी झिझक दूर हो जाएगी मैं अपने रूम मे बेड पर लेटे हुए यही सोच रहा था की कोई आधे घंटे बाद मुझे मंजू और डॉली के हँसने की आवाज़ आई वो दोनो उपर आ गई थी और शायद मंजू के रूम मे चली गई थी मेरी इच्छा हुई की मैं भी उसके साथ शामिल हो जाउ लेकिन फिर याद आया की मंजू खुद ही मुझे बुलाने वाली है इसलिए मैं अपने रूम मे ही लेटे हुए मंजू के बुलावे का इंतज़ार करने लगा

अभी 20 मिनिट्स ही हुए थे की डॉली मेरे रूम मे आई

"चल तुझे तेरी महारानी जी ने बुलाया है" डॉली मुस्कुराते हुए बोली

"किसलिए......" मैने जानते हुए भी पूछा

"वो तो वहीं चल कर मालूम पड़ेगा वैसे उसने तुझसे कहा तो था की वो तेरी सारी झिझक दूर कर देना चाहती है" डॉली बोली

"लेकिन वो करना क्या चाहती है" मैने फिर पूछा

"वो मुझे नही पता, तू उसके रूम मे जा मैं अभी आती हूँ" डॉली बोली और बाहर जाने को मूडी

"अब तू कहाँ जा रही है" मैने पूछा

"वो मम्मी मोना के घर जा रही है और पापा घर पर है नही तो मम्मी को विदा करके गेट बंद करके आती हूँ" डॉली स्माइल देते हुए बोली और नीचे चली गई

अब मुझे भी महारानी साहिबा के बुलावे पर उनके रूम मे जाना ही पड़ा मैं रूम के सामने पहुचि तो देखा की दरवाजा भीड़का हुआ था मैने गेट को नॉक किया

"खुला है, अंदर आ जाओ और हाँ अंदर आकर वापस भिड़ा देना" अंदर से मंजू की आवाज़ आई

मैने दरवाजा धकेल कर अंदर कदम रखा तो सामने का नज़ारा देख कर मेरा दिमाग़ हिल गया

सामने मंजू एक बेहद छोटी ड्रेस मे खड़ी थी और बहुत ही सुंदर लग रही थी लेकिन आज तक मैने कभी भी उसे ग़लत नज़र से नही देखा था तो मेरे दिमाग़ मे इस वक्त सिर्फ़ सुंदर शब्द ही आया था और उसे टकटकी लगा कर देखने की वजह से मैं दरवाजा भिड़ाना भूल गया था

"ऐसे क्या देख रहे हो, चलो दरवाजा बंद करो मुझे शरम आ रही है" मंजू शरमाते हुए बोली

"हा....हा.. .हाँ" मेरे मुँह से निकला और मैने पलट कर दरवाजा वापस भिड़ा दिया

"कैसी लग रही हूँ मैं" मंजू ने शरमाते हुए पूछा

"बहुत सुंदर" मेरे मुँह से निकला

"बस सुंदर ही और कुछ नही" उसने फिर पूछा

"वो...वो....क्या है ना की आज तक मैने तुम्हे किसी औरनज़र से नही देखा ना इसलिए........." मैं बोला

"वही तो........तुम्हारी यही झिझक और मेरे बारे मे तुम्हारा नज़रिया बदलने के लिए ही मैने तुम्हे यहाँ बुलाया है और ये सब कर रही हूँ" मंजू बोली और उसने अपनी छोटी सी चड्डी के हुक्क खोल कर अपनी टॉप को थोड़ा सा उपर उठा दिया और धीरे धीरे करके अपनी टॉप को निकाल फेका अब उसके बड़े बड़े बूब्स सिर्फ़ ब्रा मे थे और मेरी नज़र वहाँ टिक सी गई थी मेरा पूरा ध्यान सिर्फ़ वहीं लगा हुआ था और इस बीच पता नही कब मंजू अपनी चड्डी भी निकाल चुकी थी

अब वो सिर्फ़ ब्रा और पैंटी मे मेरे सामने खड़ी थी और मेरी नज़र उसकी पैंटी मे क़ैद फूली हुई चूत पर पड़ चुकी थी उसके चेहरे पर इस वक्त बहुत ही मोहक मुस्कान थी आज पहली बार मेरे मन मे उसके लिए 'हॉट' शब्द आया था और मैं उसे लगातार घुरे जा रहा था
 
"अब बोलो, क्या अब भी सुंदर ही लग रही हूँ या फिर कुछ और भी" उसने पूछा

"अब तो ह...ह...हॉट भी लग रही हो" मैं अपने सुख चुके होंठो पर जीभ फिराते हुए बोला

"आगे आगे देखो अभी तो तुम्हारे सारे ख़याल ही बदल जाएँगे मेरे बारे मे" कहते हुए मंजू ने अपने हाथ पीछे ले जाकर अपनी ब्रा खोल दी जो खुलने के बाद उसकी बड़ी बड़ी चुचियो पर अटक गई थी

ब्रा के खुलते ही मंजू ने अपने एक हाथ से उसे अपनी चुचियो पर ही अटके रहने दिया और स्माइल देते हुए मुझे देखने लगी और उसकी बड़ी बड़ी चुचियो का अंदाज़ा लगा कर मेरा गला सूखने लगा था और लंड महाराज हरकत करने लगे थे चुकी मैने अभी लोवर पहना हुआ था तो उन्हे भी अंगडाइयां लेने के लिए भरपूर जगह उपलब्ध थी अभी मैं यही सब देखने मे मस्त था की मंजू ने अपनी ब्रा को छोड़ दिया और वो उसके कदमो पर गिर पड़ी और ब्रा निकलते ही मंजू पीछे को मूड गई जिससे मुझे पैंटी मे फसी उसकी मांसल गान्ड और साइड से उसके बड़े बड़े बूब्स की भी नज़ारा मिल गया

इस वक्त वो जीती जागती सेक्स की मूरत लग रही थी और मेरी नज़र उसके बदन से हटने का नाम ही नही ले रही थी

"अब कैसी लग रही हूँ मैं" उसने कातिल मुस्कान के साथ पूछा

"हॉट आंड से......" मेरे मुँह से निकलने को हुआ

"क्या से....." उसने झट से पूछा

"पहले ज़रा फ्रंट से दिखाओ तब बताऊ" मैने भी शरारत से कहा और लोवर के अंदर खड़े हो चुके अपने लंड को मंजू के सामने ही अड्जस्ट करने लगा

मेरी बात सुनकर और मेरी हरकत देख कर वो भी फुल मस्ती मे आ गई और मेरे सीधी होकर मेरे पास आकर पोज़ बना कर खड़ी हो गई

अब मैं आज पहली बार उसके सुंदर मुखड़े के नीचे छिपा हुआ खजाना देख रहा था उसके चेहरे के नीचे उसकी सुरहीदार गर्दन और उसके नीचे भरे हुए बड़े बड़े बूब्स सॉफ मे चिकने सपाट पेट पर पतली कमर के बीच गहरी नाभि और उसके नीचे केले के तने जैसी चिकनी भारी और मांसल जाँघो के बीच पैंटी मे छिपी हुई उसकी फूली हुई चूत

'आ' जैसे जन्नत का नज़ारा मेरे सामने था मन तो कर रहा था की एकाएक झपट्टा मारू और सारा खजाना हजम कर जाउ लेकिन ये अभी मुमकिन नही था

"अब बोलो......." मंजू की आवाज़ ने मुझे ख़यालो से बाहर निकाला

"का....क्या" मेरे मुँह से निकला

"अब कैसी लग रही हूँ मैं" उसने बड़ी अदा से पूछा

"हॉट आंड सेक्सी" मैं मुस्कुराते हुए बोला

"मुझे टच करने की इच्छा हो रही है?" उसने फिर पूछा

"एस........." मैं बोला

"इससे आगे देखने की इच्छा हो रही है" उसने अपनी पैंटी मे उंगली फँसा कर कहा

"हाँ........" मैं थूक गुटकते हुए बोला

"शादी से पहले मेरे साथ सेक्स करोगे?" वो अपनी पैंटी को थोड़ा नीचे करते हुए बोली

"दिल तो कर रहा है लेकिन दिमाग़ नही मान रहा है" मैं थोड़ा आगे बढ़ता हुआ बोला

"स्टॉप, वहीं रुक जाओ" वो पीछे हटते हुए बोली

"क्यों......अभी तो मेरी झिझक दूर करवा रही थी और अब पीछे हट रही हो" मैं रुकते हुए बोला

"थोड़ा सबर रखो ये आख़िरी कपड़ा भी उतर जाएगा और तुम जो करना चाहते हो वो भी कर सकोगे लेकिन मेरी एक शर्त है जो तुम्हे पूरी करनी होगी" मंजू बोली

अभी मैं कुछ कह पता इसके पहले ही दरवाजा नॉक हुआ तो हम दोनो ने चौंक कर दरवाजे को तरफ देखा

"मैं अंदर आजाउ क्या" बाहर से डॉली की आवाज़ आई

उसे तो हम दोनो ही भूल गया थे अब मंजू के चेहरे पर मुस्कान आ गई थी

"आ जाओ" मंजू बोली और उसने अपनी दोनो छातियों को

अपने हाथ से ढक लिया..............
 
अपडेट 86

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मैं अंदर आजाउ क्या" बाहर से डॉली की आवाज़ आई

उसे तो हम दोनो ही भूल गये थे अब मंजू के चेहरे पर मुस्कान आ गई थी

"आ जाओ" मंजू बोली और उसने अपनी दोनो छातियों को अपने हाथ से धक लिया........................ .

.

अब आगे.......

"वाउ.......तो ये सब चल रहा था यहाँ, इसी के लिए तूने सोनू को बुलवाया था" डॉली अंदर आकर मंजू को उस हाल मे देख कर आँखे चौड़ी करते हुए बोली

"हाँ यार, अगर मैं ये सब नही करती तो पता नही ये महाशय कब अपनी शरम छोड़ते" मंजू बोली उसने अभी भी अपने हाथ से अपनी चुचियो को कवर किया हुआ था

"जब तू सोनू को अपने बूब्स दिखा ही चुकी है तो मुझे दिखाने मे क्या शरम है, चल हाथ हटा मैं भी तो देखु की तेरा साइज़ कैसा है" डॉली बोली

"शरम कैसी वो बस ऐसे ही......." कहते हुए मंजू ने अपने हाथ हटा लिए और एक बार फिर उसके बड़े बड़े बूब्स मेरी आँखो के सामने थे जिनके निपल्स तन चुके थे

"गुड..... साइज़ तो मस्त है" डॉली मंजू के बूब्स देख कर बोली

"लेकिन तुझसे कम ही है" मंजू मुस्कुराते हुए बोली

"नही यार थोड़ा ही फरक होगा वरना मेरे जीतने ही बड़े है" डॉली बोली

"थॅंक्स फॉर दा कॉंप्लिमेंट" मंजू आँख मारते हुए हँस कर बोली

"लेकिन ये पैंटी क्यों नही उतारी अभी तक" डॉली ने पूछा

"वो भी उतार दूँगी लेकिन उसके लिए सोनू को मेरी एक शर्त पूरी करनी होगी" मंजू मेरी तरफ कुटिल मुस्कान के साथ देखते हुए बोली

"कैसी शर्त........" डॉली ने पूछा

"शर्त ये है की पहले सोनू को मेरे सामने तेरे साथ सेक्स करना होगा फिर ये जो भी कहेगा मैं करने को तैयार हूँ" मंजू ने बताया

"ये सेक्स वेक्स क्या होता है यार सीधे सीधे बोल ना की चुदाई करनी होगी" डॉली बोली अब वो मंजू को पूरी तरह खोलने के मूड मे थी

"हाँ...हाँ वही" मंजू थोड़ा हकलाते हुए बोली

"वही क्या?" डॉली फिर बोली
 
"अब यार........तू भी ना, चल सुन जो तू चाहती है.....पहले सोनू को मेरे सामने तेरी छू... छू....चुदाई करनी होगी" मंजू शरमाते हुए बोली

"और वो मेरी चुदाई किस चीज़ से करेगा" डॉली ने पूछा

"अपने हथियार से" मंजू ने जवाब दिया

"फिर वही बात.......अब जब सब कुछ सॉफ हो चुका है तो शरमाना कैसा जो भी कहना है खुले शब्दो मे कह" डॉली उसे हिम्मत देते हुए बोली

"ओके.....वो तेरी चुदाई अपने लंड से करेगा" आख़िर मंजू ने भी बोल ही दिया

"और चुदाई करते वक्त वो अपना लंड कहाँ डालेगा" डॉली ने एक सवाल और पूछा

"तेरी....तेरी चूत मे" मंजू बोली और शर्मा कर नज़रे झुका ली और मैं एक तरफ बुत बन कर दोनो लड़कियो के नंगे वर्ड सुनते रहा

"ये हुई ना बात, वैसे अभी तुझे बहुत कुछ जानना है लेकिन फिलहाल के लिए इतना काफ़ी है, अब तू बोल भाई देखनी है मंजू की चूत" डॉली बोली

मैने झिझकते हुए हाँ मे गर्दन हिला दी

"तो फिर तुझे उसकी शर्त पूरी करनी होगी, बोल करेगा" डॉली मुस्कुराते हुए बोली

"हाँ रात मे उसकी शर्त पूरी कर दूँगा" मैं बोला

"रात मे क्यों अभी क्यों नही वैसे भी घर मे कोई नही है और मैं भी पूरी तरह तैयार हो कर आई हूँ" डॉली मादक निगाहो से मुझे देखते हुए बोली

"हाँ ये सही रहेगा, सोनू तुम अभी मेरी शर्त पूरी कर दो रात मे हम कुछ नया करेंगे" मंजू डॉली की बात सुनकर झट से बोली

अब मैं कहाँ मना करने वाला था वैसे भी खुलकर चुदाई किए हुए बहुत टाइम बीत चुका था \

"ओके. ....मुझे कोई प्राब्लम नही है, वैसे तू क्या तैयारी करके आई है"

"खुद ही देख ले, ध्यान से देखेगा तो सब समझ जाएगा" डॉली अपने कपड़ो को देखते हुए बोली

और अब पहली बार मैने उसे गौर से देखा तो मुझे धीरे धीरे सब समझ आ गया

डॉली ने इस वक्त एक वाइट टॉप और फ्लॉरल प्रिंट वाली ब्लॅक स्कर्ट पहनी थी जो उसके घुटनो के उपर थी और

उसके टॉप को देख कर सॉफ नज़र आरहा था की उसने अंदर ब्रा नही पहनी है और मेरा अंदाज़ा था की उसने स्कर्ट के नीचे पैंटी भी नही पहनी थी यानी सिर्फ़ दो कपड़े उतरते ही वो पूरी नंगी हो जाने वाली थी

"कुछ समझ आया?" डॉली ने पूछा

"जी माँ, कुछ नही सब समझ आ गया" मैं बोला

"क्या समझे ज़रा हमे भी तो बताओ" अबकी बार मंजू बोली

"यही की सिर्फ़ दो कपड़े उतरते ही ये पूरी नंगी हो जाएगी" मैं डॉली की तरफ इशारा करते हुए बोला

"वाउ.....परखी नज़र और निर्मा सूपर, बहुत तेज हैतू" कहते हुए डॉली ने अपनी स्कर्ट उपर उठा ली

स्कर्ट उपर उठते ही उसकी चिकनी गोरी चूत दिखने लगी और उसकी चूत का नज़ारा देख कर मंजू ने सिटी बजा दी और मंजू की सिटी सुनते ही डॉली ने अपनी स्कर्ट निकाल दी और नीचे से पूरी नंगी होकर अपना टॉप भी निकालने लगी

टॉप के निकालते ही डॉली की बड़ी बड़ी चुचिया जैसे क़ैद से आज़ाद हो गई और मंजू ने सच ही कहा था की डॉली के बूब्स उससे बड़े है

नंगी होते ही डॉली बेड पर जाकर उल्टी पेट के बाल लेट गयी जिससे उसकी भरी हुई मस्त गान्ड मेरी आँखो के सामने आ गई और मैं सोचने लगा की कब मेरे लंड को तकदीर खुलेगी और कब वो डॉली के मांसल चूतडो को चीरते हुए उसकी गान्ड मे घुसेगा

"ऐसे क्या देख रहा है भाई मैं जानती हूँ की लड़कियो की गान्ड तेरी फेवोवरिट है लेकिन अभी मेरी गान्ड तेरी किस्मत मे नही है अभी चूत ही अच्छे से खोल दे गान्ड बाद मे फैला देना, और अब देर मत कर जल्दी से

आ पहले थोड़ी मालिश कर दे फिर जी भर कर चोद लेना" डॉली बोली और उधर एक तरफ खड़ी मंजू सब देख सुन रही थी
 
अब मैं भी आगे बढ़ा और डॉली के पास पहुच कर सच मे ही उसकी मालिश करने लगा

अब मैं कभी उसकी मोटी और चिकनी जाँघो को सहला रहा था तो कभी उसकी गद्देदार गान्ड को मसल रहा था कभी मेरे हाथ उसकी चिकनी पीठ को सहलाते तो कभी मैं उसकी गान्ड की दरार मे उंगली कर देता तो कभी उसकी पीठ चूम लेता मेरे ऐसा करने से डॉली की चूत गीली होने लगी और इधर मेरा लॉडा भी पूरा टाइट हो गया था आख़िर डॉली पलट कर सीधी लेट गयी

"पीछे को मालिश बहुत हो गई अब सामने भी कर दे" पॅलेट ही वो बोली और अब मेरे हाथ उसकी छाती पर अपना कमाल दिखाने लगे

मैं अपने दोनो हाथ मे भर कर उसके बूब्स मसलने लगा और उसके निपल्स को पिंच करने लगा और ज़ोर ज़ोर से आहे भरने लगी उसके सॉफ्ट बूब्स की हल्की हार्डनेस मुझे और भी इनसेन लगी तो मैं ज़ोर ज़ोर से उन्हे भींचने लगा

"आ.......भाई ज़रा धीरे तेरी बहन हूँ कोई रंडी नही, आहह" डॉली दर्द और मज़े भरी आवाज़ मे सिसकी लेते हुए बोली

थोड़ी देर उसके बूब्स की अच्छे से मालिश करने के बाद मैने अपने हाथ उसके पेट पर लगा दिए और उसके पेट की मालिश करता हुआ उसकी नाभि से खेलने लगा और जैसे ही उसकी नाभि से मेरा मन भरा मैने हाथ नीचे ले जाकर उसकी चूत को अपनी मुट्ठी मे भर लिया और मेरे ऐसा करने से उसने एक ज़ोर की आ भरी और अपनी कमर को उपर उछाल दिया अब मैने अपने एक हाथ से उसकी चूत की फांको को फैलाया

और दूसरे हाथ की दो उंगलिया धीरे धीरे उसकी चूत मे घुसा दी

मेरे ऐसा करने के साथ ही रूम मे डॉली के साथ मंजू की भी सिसकारी गूँज गई मैने मंजू की तरफ देखा तो उसकी पैंटी के अंदर उसकी चूत भी फूल कर कुप्पा हो गई थी और रस बहाने लगी थी

अब मैं डॉली की चूत मे उंगली चलाने लगा था और डॉली कमर उछाल उछाल कर रेस्पॉन्स देने लगी थी उधर मंजू भी अपनी चूत को पैंटी के उपर से रगड़ने लगी थी थोड़ी ही देर मे मेरी उंगलियो ने कमाल दिखाया और डॉली मज़े से झड़ने लगी और मेरे हाथ को अपनी चूत पर दबा कर गहरी गहरी साँसे लेने लगी

थोड़ी देर बाद जब उसकी खुमारी उतरी तो उसने मुस्कुरा कर मुझे देखा और मेरे लोवर के उपर से मेरे लंड पर हाथ रख दिया

"अब मेरी बारी " डॉली मेरे लंड को लोवर से बाहर निकाल कर चूमते हुए बोली

मैं वैसे ही बेड के बाजू मे खड़ा था और डॉली मेरे लंड को हाथ मे पकड़ कर चाटे जा रही थी थोड़ी देर के बाद उसने लेटे लेटे ही मेरा लंड मुँह मे भर लिया और मुँह आगे पीछे करते हुए मेरा लंड चूसने लगी

उसके मुँह की गर्मी और गीलेपन से मैं फुल ओं न मस्ती मे आ गया और अपनी कमर हिलाते हुए उसका साथ देने लगा लेकिन ऐसे मैं खुल कर मज़े नही ले पा रहा था तो मैने डॉली को सीधे लिटाया और पीछे से उसके पास आकर उसके मुँह मे लंड ठूँस कर उसकी चुचियो को अपने दोनो हाथो से रोँदणे लगा

थोड़ी ही देर ऐसा करने से मेरे लंड रोड की तरह कड़क हो गया और मैं मस्ती मे आकर डॉली का मुँह चोदने लगा लेकिन मेरे धक्को की स्पीड कुछ ज़्यादा होने से डॉली की हालत खराब हो गई और उसने लंड को अपने मुँह से बाहर निकाल दिया

"भाई प्लीज़ ऐसे नही अब इसे मेरी चूत मे डाल दो बहुत तरस रही है बेचारी" डॉली फरियाद करते हुए बोली

अब मेरा भी सबर ख़तम हुआ जा रहा था तो मैं वापस पहले वाली जगह आया और डॉली को ठीक

पोज़िशन मे कर के खड़े खड़े हो उसकी चूत मे लंड सामने लगा

उसकी चूत गीली होने के बाद भी डॉली लंड बहुत रगड़ते हुए उसकी चूत मे जा रहा था क्योंकि ये उसकी सिर्फ़ दूसरी ही चुदाई थी और शायद उसे दर्द भी हो रहा था लेकिन उसने आँखे बंद करके अपने होंठ भींच रखे थे और कुछ भी नही बोल रही थी सिर्फ़ लंड को अंदर जाते हुए महसूस कर रही थी मैं भी बहुत प्यार से लंड अंदर कर रहा था मैं नही चाहता था की उसे दर्द हो और एक बार पूरा लंड अंदर होते ही मैं उसे धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा और जैसे ही लंड आसानी से इन आउट होने लगा मेरे धक्को की स्पीड बढ़ने लगी

अब डॉली भी दर्द भुला कर इस चुदाई का मज़ा लेने लगी और उधर मंजू भी अपनी आँखे बंद करके अपनी पैंटी मे हाथ डाल कर अपनी चूत मे उंगली करने लगी थी उसके बड़े बड़े बूब्स के निपल्स तन कर पूरी तरह कड़क हो चुके थे और मदहोशी उसके चेहरे पर सॉफ नज़र आ रही थी

अब खड़े खड़े चोदने से मेरे पैरो मे दर्द होने लगा था तो मैं बेड मे डॉली की पीठ से चिपक कर लेट गया और नीचे से ही उसकी चूत मे लंड डाल कर चुदाई करने लगा

ऐसे चुदाई करने से लंड बहुत तेज़ी से अंदर जा रहा था और चुदाई मे बहुत मज़ा आरहा था डॉली भी अलग अलग पोज़िशन मे चुदाई का भरपूर मज़ा लेरही थी और कमर आगे पीछे करके मेरा साथ दे रही थी लेकिन अभी मुझे एक पोज़िशन और ट्राइ करनी थी इसलिए मैने डॉली को घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत मे लंड पेलने लगा

डॉली के मांसल चूतडो को गर्मी की अपनी जाँघो पर महसूस करते हुए उसके चूतडो को दबाते हुए मैं जोरदार धक्के लगाने लगा और डॉली भी कमर पीछे करके मेरे लंड को अंदर तक लेने की कोशिश करने लगी और कोई 2 मिनिट बाद ही उसका पानी निकलने लगा और वो झड़ने लगी उसकी चूत बार बार मेरे लंड को भींचने लगी और अब मैं भी सहन नही कर पाया और मेरा भी पानी निकलने को होने लगा

"आ डॉली मैं भी झड़ने वाला हूँ पानी कहाँ निकालु" मैं लंड बाहर निकालते हुए बोला

"भाई बहुत दिनों से तेरा पानी नही चखा आज इसे मेरे मुँह मे ही निकाल दे" डॉली झड़ने की खुमारी मे बोली

और उसकी बात सुनकर मैं उसके मुँह के पास खड़ा हो गया और चार पाँच ज़ोर के झटके लगा कर उसके मुँह मे पानी निकालने लगा

डॉली मेरे लंड से निकली एक एक बूँद को चाट चाट कर पीने लगी और पूरा पानी खाली होते ही मैं भरभरा कर वहीं फर्श पर बैठ कर साँसे संभालने लगा तभी मेरी नज़र मंजू पर पड़ी जो खुद भी आँखे बंद किए फर्श पर बैठे गहरी गहरी साँसे ले रही थी मैं समझ गया की वो भी मेरी और डॉली की धुआधार चुदाई देख कर झड़ चुकी है...............................
 
अपडेट 87

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डॉली मेरे लंड से निकली एक एक बूँद को चाट चाट कर पीने लगी और पूरा पानी खाली होते ही मैं भरभरा कर वहीं फर्श पर बैठ कर साँसे संभालने लगा तभी मेरी नज़र मंजू पर पड़ी जो खुद भी आँखे बंद किए फर्श पर बैठे गहरी गहरी साँसे ले रही थी मैं समझ गया की वो भी मेरी और डॉली की धुआधार चुदाई देख कर झड़ चुकी है............................... .

अब आगे.....

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कुछ देर हम तीनो ही जहाँ के तहाँ बैठे अपनी साँसे काबू मे करते रहे और फिर सबसे पहले डॉली उठी और बाथरूम मे चली गई क्योंकि इस चुदाई मे सबसे ज़्यादा गंदी वही हुई थी उसकी दोनो जांघें मेरे और उसके पानी से सन चुकी थी जो उसकी चूत से वापस निकला था उधर मंजू का भी लगभग यही हाल था उसकी पैंटी के नीचे जाँघो पर उसका पानी भी अलग ही दिखाई दे रही था डॉली के बाथरूम मे घुसते ही वो उठी और पास पड़े अपने एक कपड़े को उठाया और उससे अपनी जांघें सॉफ करली फिर उसने उसी कपड़े को अपनी पैंटी के अंदर डाल कर अपनी चूत भी सॉफ करली और फिर मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखा और उठ कर मेरे पास आ कर बैठ गई और मेरे लंड को तरफ देखने लगी जो इस वक्त च्छुई - मुई की तरह मुरझाया हुआ था

"क्या देख रही हो" मैने पूछा

"बस यही देख रही हूँ की अभी तुम्हारा हथियार को काले नाग की तरह फुफ्कार कर डॉली की बंद बजा रहा था अब किट्टू सा हो गया है" वो मेरे लंड को देखते हुए बोली

"इसका क्या है अभी अभी माल खाली हुआ है ना इसलिए आराम कर रहा है जैसे ही कोई और गोदाम दिखाई देगा तो ये फिर से खड़ा हो जाएगा और फिर माल खाली करने लगेगा" मैं बोला

"तो फिर इसे खड़ा करो ना गोदाम मैं दिखाती हूँ इसे" मंजू अपने होंठो पर जीभ फिराते हुए बोली

"मंजू मैने तुमसे कहा था ना की मैं तुम्हारे साथ शादी के पहले सेक्स नही करना चाहता" मंजू की बात सुनकर मैं कुछ देर सोचने के बाद बोला

"लेकिन क्यों? अगर हमने शादी के पहले भी सेक्स कर लिया तो क्या ग़लत हो जाएगा आख़िर हम दोनो ही एक दूसरे से प्यार करते है और इसका इकरार भी कर चुके है अब शादी तो बस वक्त की बात है" मंजू मेरी आँखो मे देखते हुए बोली

"वो तो ठीक है और ऐसा कोई बंधन भी नही है की मैं शादी से पहले तुम्हारे साथ सेक्स ना करू लेकिन सुहागरात पर लड़की की सील तोड़ने का जो मज़ा है वो शायद और सबसे ज़्यादा है" मैं बोला और तब तक डॉली भी रूम मे वापस आ गई और अपने कपड़े पहन.ने लगी जबकि इधर मैं पूरा नंगा और मंजू सिर्फ़ पैंटी मे ही थी
 
"क्या बाते हो रही है भाई" डॉली कपड़े पहनते हुए बोली

"मैं सोनू को सेक्स करने के लिए कह रही हूँ और ये कह रहा है की शादी के बाद करेंगे अब तू ही बता

शादी क्या कल हो जाएगी, उसमे तो अभी सालो लगेंगे और जब तक मैं क्या करूँगी मेरी आग तो तुम लोगो ने अभी से भड़का दी है" मंजू बोली

"सोनू मंजू बिल्कुल सही कह रही है अपनी ज़िद छोड़ दे" डॉली बोली

"मैं ज़िद नही कर रहा मैं बस ये कह रहा हूँ की सुहागरात का मज़ा खराब हो जाएगा बस" मैं बोला

"तू उसकी चिंता मत कर मैं तुझे सुहागरात वाला मज़ा ही दिलवाउंगी बस शादी बाद मे होगी" डॉली बोली

"वो कैसे......" मैने पूछा

"देख....यहाँ घर पर तो हम कुछ कर नही सकते

लेकिन गोआ मे हमारी पहली रात तुम दोनो की सुहागरात होगी उसकी सारी तैयारी मैं वहाँ कर लूँगी" डॉली बोली

"वाउ ग्रेट........" मंजू खुशी से चहकते हुए बोली

"उस रात तू मंजू की चूत की सील खोल लेना और बात रही रियल वाली सुहागरात की जो तुम्हारी शादी के बाद होगी तो उसके लिए मंजू अपनी गान्ड की सील बचा कर रखेगी जो की तेरी फेवोवरिट भी है तो उस रात तू इसकी गान्ड का छेद खोल लेना सिंपल" डॉली बोली और सब क्लियर कर दिया और मुझे उसकी बात सही भी लगी आख़िर सुहागरात के लिए कुछ तो बचा रहेगा

"ओके मुझे मंजूर है लेकिन गोआ जाने तक घर मे मैं मंजू को नही छोड़ूँगा" मैं मंजू को देखते हुए बोला

"मुझे भी मंजूर है लेकिन तब तक उपर उपर से तो कर सकते है ना" मंजू मेरी बात मानते हुए बोली

"वो तो कर सकते है" मैं मुस्कुराते हुए बोला

"तो फिर करो ना.........." मंजू तरसते हुए बोली

"तुझे टाइम का कुछ ख़याल है या नही जो करना है रात को कर लेना मम्मी आती ही होगी अब" डॉली बोली और उसकी बात ख़तम होते ही डोर बेल बजने लगी

"मैं जाती हूँ तुम लोग भी तैयार हो कर नीचे आ जाओ" डॉली बोली और नीचे चली गई

"तो रात का प्रोग्राम पक्का है ना" मंजू मेरे लंड की तरफ हाथ बढ़ाते हुए बोली

"एस......लेकिन हम हमारे बीच के सारे पर्दे रात को ही हटाएँगे और तुम्हारा ये आख़िरी कपड़ा भी रात को ही उतरेगा" मैं उसका हाथ रास्ते मे ही पकड़ कर उसकी पैंटी को देखते हुए बोला और उसे अपना लंड नही पकड़ने दिया

"ओके जैसी तुम्हारी मर्ज़ी" वो उदास लहजे मे बोली और खड़ी होकर बाथरूम मे चली गई

अब मेरा भी वहाँ कोई काम नही था तो मैने भी अपने कपड़े पहने और अपने रूम मे आ गया और बाथरूम मे घुस कर नहाने लगा मेरे दिमाग़ अब यही चल रहा था की रात मे मंजू को कैसे खुश करना है...............
 
अपडेट 88

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अब मेरा भी वहाँ कोई काम नही था तो मैने भी

अपने कपड़े पहने और अपने रूम मे आ गया और

बाथरूम मे घुस कर नहाने लगा मेरे दिमाग़ अब

यही चल रहा था की रात मे मंजू को कैसे खुश

करना है...............

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अब आगे. .....

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रात का खाना खा कर सभी लोग अभी सोने की तैयारी कर रहे थे मम्मी और पापा तो अपने रूम मे भी जा चुके थे और हम तीनो से भी कह चुके थे की टीवी बंद करके हम भी सोने चले जाए इसीलिए उठ कर मैने टीवी बंद कर दी और उपर जाने लगा

"ओये हीरो, किधर चला" तभी डॉली बोली

"सोने और कहाँ" मैं जानबूझ कर बोला जबकि मैं जानता था की वो क्या कहना चाहती थी

"और इसका क्या होगा?" डॉली मंजू की तरफ देखते हुए बोली

"उसका जो होना होगा हो जाएगा तू क्यों चिंता करती है" मैं बोला

"अरे........ऐसे कैसे चिंता ना करू मेरी बेस्ट फ्रेंड

है और अब तो भाभी भी बन.ने वाली है, क्यों मंजू" डॉली मंजू को देखते हुए बोली

"बात तो तेरी सही है लेकिन मुझे लगता है की अभी तुझे अपने भाई की बात मान लेनी चाहिए" मंजू मुस्कुराते हुए बोली

"कौन सी बात........" डॉली कन्फ्यूज़ होते हुए बोली क्योंकि

अभी तक मैने उससे कुछ कहा ही नही था

"वो ही बात को वो इशारो मे कहना चाह रहा है" मंजू बोली

"क्या......" डॉली के मुँह से निकला

"यही की मेरा जो होना है हो जाएगा तू अपने रूम मे जाकर आराम से सो जा" मंजू ने उसे समझाया

"क्या...........याने तुम दोनो मस्ती करो और मैं सोई पड़ी रहूं" डॉली थोड़ा लाउड्ली बोली

"हाँ......और वैसे भी अपने हिस्से की मस्ती तू दोपहर को कर चुकी है और अब मेरी बारी है" मंजू बोली

"लेकिन उस टाइम तो तू भी वहीं थी ना तो अब अगर मैं तुम दोनो के साथ रहूंगी तो क्या फरक पड़ जाएगा" डॉली बोली

"प्लीज़ डॉली ज़िद मत कर, देख ये हम दोनो का पहली बार है ना तो तेरे सामने मैं खुल कर कुछ नही कर पाउन्गी और मुझे मज़ा नही आएगा लेकिन हाँ ये वादा है की मेरी सुहागरात मे तू ज़रूर हमारे साथ होगी" मंजू बोली

और मंजू की बात सुनकर डॉली ने कुछ सोचा और और अपने स्वाभाव के खिलाफ बोली "ओके........ठीक है लेकिन अपना वादा याद रखना"

"थॅंक्स डियर" मंजू बोली और उसने आगे बढ़ कर डॉली को गले लगा लिया

अब मेरे सुन.ने या करने लिए यहाँ कुछ नही था तो मैने अपने कदम सीधी की तरफ बढ़ा दिए

"ओये अब मंजू का वादा तेरा भी है याद रखना कहीं आज ही सब कुछ मत कर लेना" पीछे से डॉली बोली

"चिंता मत कर इसकी सील टूटने पर निकला हुआ खून तू ही सॉफ करेगी ये मेरा वादा है" कहते हुए मैं अपने रूम मे आ गया

पीछे उन दोनो के बीच हुआ हुआ मुझे नही पता लेकिन मेरे रूम मे आने के एक घंटे बाद मंजू

मेरे रूम मे आ गई उसके चेहरे पर शरम और वासना के मिले जुले भाव थे

"बहुत देर लगा दी" मैं उसे देखते हुए बोला

"हाँ वो...वो....." उसके मुँह से ज़्यादा कुछ निकाल नही पता

"चलो कोई बात नही" कहते हुए मैं बेड से उठा और आगे बढ़ कर गेट लॉक कर दिया और मंजू का हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ बेड पर बैठा कर उसकी आँखो मे देखने लगा

"ऐसे क्या देख रहे हो" वो शर्मा कर बोली

"मैं देख रहा था की इन आँखो मे मेरे लिए कितना प्यार है" मैं उसका चेहरा अपने दोनो हाथो से पकड़ कर बोला

"तो क्या दिखा......." वो अपना चेहरा आगे करते हुए बोली उसके होंठ काँपने लगे थे
 
"मुझे तो कुछ दिखाई नही दिया तुम ही बता दो" कहते हुए मैने उसकी नाक से अपनी नाक टीका दी हम दोनो की गरम साँसे आपस मे टकरा रही थी

"वहाँ तुम्हारे लिए प्यार के सिवा कुछ और है ही नही तो तुम्हे नज़र कैसे आएगा" वो कनपटी आवाज़ मे बोली और तब तक मेरे होंठ उसके होंठो से चिपक चुके थे और एक जोरदार किस की शुरुआत हो चुकी थी

उसके शहद से भी मीठे होंठो को चूस्ते हुए मुझे एक अलग ही फीलिंग हो रही थी और वो भी मेरा बराबर साथ दे रही थी थोड़ी ही देर बाद हम दोनो की जीभ एक दूसरे के मुँह मे घुस कर आपस मे भिड़ी हुई थी

और इस सब के बीच मुझे पता ही नही चला की कब मेरे हाथ उसकी बड़ी बड़ी चुचियो पर पहुच कर उन्हे सहलाने लगे थे हम दोनो की ही साँसे भारी होने लगी थी और मंजू भी किस मे पूरा साथ देने हुए मेरे बालो मे अपनी उंगलिया चला रही थी आख़िर मे कोई 10 मिनिट बाद जब हमे सांस लेना मुश्किल हो गया तब हमारी किस टूटी और जैसे ही हमारी नज़रे मिली तो मैं मुस्कुरा दिया जबकि मंजू ने शरम से अपनी नज़रे झुका ली

अब मैने ज़्यादा देर करना ठीक नही समझा और उसके कपड़े उतारने की कोशिश करने लगा तो वो मुस्कुराइ और खुद ही अपनी स्कर्ट निकाल दी और अपना टॉप उतारने लगी

टॉप उतारने के बाद मैने खुद उसकी समीज़ निकालने मे उसकी मदद की और उसके बड़े बड़े बूब्स खुली हवा मे सांस लेने लगे

अब वो उपर से पूरी नंगी थी और अब उसके बदन पर सिर्फ़ एक पैंटी थी जोकि उसका आख़िरी कपड़ा था जो दोपहर मे भी दीवार बना हुआ था मेरे और उसकी प्यारी चूत के बीच लेकिन अब मैं सारी दीवारे हटा देना चाहता था तो मैने अपना मुँह उसकी चूत के पास लाया और पैंटी के उपर से ही उसकी चूत चूमते हुए धीरे से उसकी पैंटी उतार दी अब मेरी आँखो के सामने उसकी पानी बहती चिकनी बिना बालो की अनचुदी चूत थी और उसे देख कर मेरा कंट्रोल ख़तम हो गया और उसकी टाँगो के बीच आकर मैने उसकी चूत को अपने मुँह मे भर लिया

थोड़ी देर उसकी चूत को चाटने के बाद मैं उसकी चूत की फांको को फैला कर उसके अंदर अपनी जीभ चलाने लगा और उसकी चूत के दाने को अपने होंठो से दबाने लगा ये मंजू का किसी लड़के के साथ पहली बार था तो वो ज़्यादा देर टिक ना पाई और भरभरा कर झड़ने लगी और उसने मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा दिया जिससे उसका कुछ पानी मेरे मुँह के अंदर चला गया और कुछ मेरे चेहरे पर लग गया बाकी का सारा उसकी जाँघो पे बहने लगा

थोड़ी देर बाद वो नॉर्मल हुई तो उसने आगे बढ़ कर मेरे होंठ चूम लिए जो उसके पानी से भरे हुए थे

फिर उसने पास पड़े टॉप से मेरा चेहरा सॉफ किया और बोली "अब मेरी बारी है"

इतना कहते ही उसने मेरी अंडरवेर मे से फुफ्कारते हुए लंड को बाहर निकाल लिया

"जिस दिन से इसे नंगा देखा है तब से ही मैं तड़प रही थी इसके साथ खेलने को और अब जाकर वो मौका आया है" कहते हुए मंजू सच मे मेरे लंड से खेलने लगी कभी वो मेरे लंड को चमडी आगे पीछे करती तो कभी उसके सुपाडे पर अपनी उंगली घुमाती और उसके ऐसा करने से मेरे लंड मे उबाल सा आने लगा

"ऐसे मे कोई मज़ा नही है जान मुँह मे लेकर इसे चूसो फिर देखना कितना मज़ा आता है" मैं बोला और मेरी बात सुनकर उसने मुस्कुरा कर मुझे देखा और मेरे लंड को अपने मुँह मे भर लिया

ये उसकी पहली लंड चूसा थी इसलिए उससे ज़्यादा की उम्मीद तो बेकार थी लेकिन उसके मुँह की गर्मी से

मुझे बहुत मज़ा मिल रहा था लेकिन इस तरह बैठे बैठे लंड चुदवाने मे ज़्यादा मज़ा भी नही आरहा था

"यार ऐसे मे मज़ा नही आरहा है खड़े होकर करते है" मैं बोला

"हाँ और तुम अपने कपड़े भी उतार लो" वो खड़े होते हुए बोली

अब मैने भी खड़े होकर अपने कपड़े उतार दिए और हम दोनो पूरे नंगे एक दूसरे के सामने खड़े थे मंजू ने मेरे विकराल लंड को पकड़ लिया और उसे मसलते हुए मेरे होंठो से होंठ मिला दिए

एक बार फिर से एक गहरी किस के बाद मैने उसे अपने सामने बैठ कर लंड चूसने को कहा तो वो घुटनो के बल बैठ गई और मेरे लंड को पकड़ कर सुपाडे को अपनी जीभ से चाटने लगी

थोड़ी देर तक उसकी जीभ मेरे सुपाडे पर और लंड के छेद पर घूमती रही और वो मेरे लंड उपर से नीचे तक चाटने लगी लेकिन इधर मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी तो मैने उसके बाल पकड़ कर उसका चेहरा पीछे किया और अपना लंड उसके मुँह मे ठूँस दिया और फिर वो आराम से उसे मुँह आगे पीछे करते हुए चूसने लगी

थोड़ी ही देर मे उसकी मेहनत रंग लाई और मेरा लंड फटने के लिए तैयार हो गया और मैं ज़ोर ज़ोर से उसके मुँह को चोदने लगा

"आ......मंजू मेरा होने वाला है" मेरे मुँह से निकला तो उसने लंड को अपने मुँह से निकाल दिया

"इसे बाहर ही खाली करो डियर अभी मैं इतनी पक्की नही हुई हूँ की तुम्हारा माल चाट साकु" मंजू बोली

"तो इसे ज़ोर ज़ोर से हिला कर तुम ही खाली कर दो जहाँ भी तुम चाहती हो" मैं उत्तेजना से आगे पीछे होते हुए बोला

और फिर मंजू ज़ोर ज़ोर से मेरे लंड को मूठ मारने लगी उसके कोमल नाज़ुक हाथो की नर्मी गर्मी और मजबूत पकड़ से कुछ ही झटको के बाद मेरा लंड अपना माल निकालने लगा जिसे मंजू अपने चेहरे पर लेने लगी और कुछ ही देर मे मेरी आख़िरी पिचकारी के साथ मंजू का चेहरा मेरे पानी से भर गया

मंजू ने निचोड़ निचोड़ कर मेरे लंड से आख़िरी बूँद भी बाहर निकाल ली उसका हाथ भी मेरे पानी से भर गया था जब मेरा लंड मुरझाने लगा तो मंजू उठ कर खड़ी हो गई और उसी तरह मेरे पानी से भरे चेहरे और हाथ के साथ दूसरे हाथ से अपनी कपड़े उठाने लगी

"अरे पहले ये सब सॉफ तो कर लो" मैं बेड पर बैठते हुए बोला

"जी नही ये तो मेरे चेहरे के लिए टॉनिक है मैं इसकी मालिश करूँगी तो मेरी सुंदरता और बढ़ जाएगी" मंजू मुझे आँख मार कर बोली

अब मैं क्या कहता उसे यही करना था तो करे

"ओके अब मैं चलती हूँ रात काफ़ी हो गई है लेकिन सॉरी मैं अभी तुम्हे किस नही कर सकती वरना मेरा टॉनिक फैल जाएगा" वो हँसते हुए बोली और वैसे नंगे ही रूम से बाहर निकाल गई

पीछे से उसकी मटकती नंगी गान्ड देख कर मन मे आया की पकड़ कर अभी उसमे अपना लंड घुसेड दूँ लेकिन मुझे पता था की यही वो चीज़ है जो मुझे सबसे आख़िर मे मिलने वाली है और इसमे किसी को कोई ग़लती नही थी ये मेरी ही ज़िद की वजह से होना था अब आगे गोआ मे क्या और कैसे होना था मैं यही सब सोचते हुए कब सोया पता ही नही चला..................
 
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