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Guest
वो बोली
"म..म....अब इसके बारे मे मैं कुछ नही कह सकता लेकिन मुझे उम्मीद है की तुम ऐसा नही कहोगी" मैं हकलाते हुए बोला
"और अब जब कह रहे हो की तुम मुझसे शादी करना चाहते हो मेरे साथ ज़िंदगी बिताना चाहते हो तो अब डॉली वाले सीन का क्या होगा" वो बोली
"मतलब....." मैने पूछा
"मतलब ये की क्या अब भी तुम उसके साथ अपने सेक्षुयल रिश्ते की कंटिन्यू करोगे या फिर अब से सब बंद कर दोगे" उसने पूछा
अब उसकी बात सुनकर मैं सोच मे पड़ गया, मैं भूल चुका था की एक म्यान मे दो तलवार नही रह सकती थी
" क़ायदे से तो वो रिश्ता ही ग़लत है और अब जब ऐसी कंडीशन आ गई है तो मैं उसे समझा बुझा कर मना लूँगा और ये सब बंद कर दूँगा" कुछ देर सोचने के बाद मैं बोला मैं मंजू को अपना बनाने के लिए कोई भी कीमत अदा करने को तैयार था
"ठीक है मान लिया लेकिन फिर भी हम दोनो के एक होने मे एक परेशानी है" वो बोली
"वो क्या....." मैने पूछा
"तुम मुझसे शादी करना चाहते हो लेकिन एक बात भूल गये की भले ही दूर के रिश्ते की सही लेकिन हूँ
मैं भी तुम्हारी बहन ही, अब भला भाई बहन की शादी कैसे हो सकती है" वो बोली
"मैं तो नही भुला लेकिन शायद तुम भूल गई हो की हमारे यहाँ मामा की बेटी और बुआ के बेटे की शादी हो सकती है यदि वो दोनो सगे भाई बहन नही हो तो" मैने उसे याद दिलाया
"ओह्ह्ह्हहाँ ये तो मैं भूल ही गई थी लेकिन तुम्हे याद था मतलब पक्की तैयारी कर के बैठे हो" वो हँसते हुए बोली और मैं उसकी मासूम सी हसी मे खो कर उसके सुंदर चेहरे की निहारने लगा
"लेकिन अभी तक मैने तुम्हारे प्यार को स्वीकारा नही है और नही शादी के लिए हाँ की है" मंजू की इस बात से मेरी तंद्रा टूटी और मैं वापस इस दुनिया मे आया
"क्या मतलब......." मेरे मुँह से निकला साला पूरा दिमाग़ घूम गया था मुझे ऐसा लगा जैसे मंजू और मैं शादी के मंडप मे बैठे थे और किसी ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे मंडप से बाहर निकाल दिया हो
"मतलब ये की अभी हमारे बीच जो बाते हुई है वो सब बच्चो का खेल नही है वो सब बहुत ज़िम्मेदारी की बाते है और ऐसे ही तय नही हो सकती है बहुत कुछ सोचना पड़ता है" वो सीरियस्ली बोली
"तो सोचो ना मना किसने किया है" मैं बोला
"अभी टाइम नही है, और अब वापस घर चलो अंधेरा होने लगा है" वो उठते हुए बोली
"तो रात भर का टाइम तो बहुत होगा ना सोच कर जवाब देने के लिए" मैं भी उठते हुए बोला
"हाँ....." वो मेरी तरफ अजीब निगाहो से देखते हुए बोली
"ओके....लेकिन सुबह खुशख़बरी ही सुनाना" मैं बोला
और फिर हम बाइक पर बैठ कर वापस घर के लिए निकल पड़े और सारे रास्ते मैं यही सोच रहा था की सीधी बाद की बात थी लेकिन उसमे भी मंजू ने सोचने का लफडा डाल दिया खैर मुझे पूरी उम्मीद थी की उसका जवाब हाँ मे होगा लेकिन इस सोचने के चक्कर मे वो बेकार ही अपनी रात खराब करने जा रही थी................
"म..म....अब इसके बारे मे मैं कुछ नही कह सकता लेकिन मुझे उम्मीद है की तुम ऐसा नही कहोगी" मैं हकलाते हुए बोला
"और अब जब कह रहे हो की तुम मुझसे शादी करना चाहते हो मेरे साथ ज़िंदगी बिताना चाहते हो तो अब डॉली वाले सीन का क्या होगा" वो बोली
"मतलब....." मैने पूछा
"मतलब ये की क्या अब भी तुम उसके साथ अपने सेक्षुयल रिश्ते की कंटिन्यू करोगे या फिर अब से सब बंद कर दोगे" उसने पूछा
अब उसकी बात सुनकर मैं सोच मे पड़ गया, मैं भूल चुका था की एक म्यान मे दो तलवार नही रह सकती थी
" क़ायदे से तो वो रिश्ता ही ग़लत है और अब जब ऐसी कंडीशन आ गई है तो मैं उसे समझा बुझा कर मना लूँगा और ये सब बंद कर दूँगा" कुछ देर सोचने के बाद मैं बोला मैं मंजू को अपना बनाने के लिए कोई भी कीमत अदा करने को तैयार था
"ठीक है मान लिया लेकिन फिर भी हम दोनो के एक होने मे एक परेशानी है" वो बोली
"वो क्या....." मैने पूछा
"तुम मुझसे शादी करना चाहते हो लेकिन एक बात भूल गये की भले ही दूर के रिश्ते की सही लेकिन हूँ
मैं भी तुम्हारी बहन ही, अब भला भाई बहन की शादी कैसे हो सकती है" वो बोली
"मैं तो नही भुला लेकिन शायद तुम भूल गई हो की हमारे यहाँ मामा की बेटी और बुआ के बेटे की शादी हो सकती है यदि वो दोनो सगे भाई बहन नही हो तो" मैने उसे याद दिलाया
"ओह्ह्ह्हहाँ ये तो मैं भूल ही गई थी लेकिन तुम्हे याद था मतलब पक्की तैयारी कर के बैठे हो" वो हँसते हुए बोली और मैं उसकी मासूम सी हसी मे खो कर उसके सुंदर चेहरे की निहारने लगा
"लेकिन अभी तक मैने तुम्हारे प्यार को स्वीकारा नही है और नही शादी के लिए हाँ की है" मंजू की इस बात से मेरी तंद्रा टूटी और मैं वापस इस दुनिया मे आया
"क्या मतलब......." मेरे मुँह से निकला साला पूरा दिमाग़ घूम गया था मुझे ऐसा लगा जैसे मंजू और मैं शादी के मंडप मे बैठे थे और किसी ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे मंडप से बाहर निकाल दिया हो
"मतलब ये की अभी हमारे बीच जो बाते हुई है वो सब बच्चो का खेल नही है वो सब बहुत ज़िम्मेदारी की बाते है और ऐसे ही तय नही हो सकती है बहुत कुछ सोचना पड़ता है" वो सीरियस्ली बोली
"तो सोचो ना मना किसने किया है" मैं बोला
"अभी टाइम नही है, और अब वापस घर चलो अंधेरा होने लगा है" वो उठते हुए बोली
"तो रात भर का टाइम तो बहुत होगा ना सोच कर जवाब देने के लिए" मैं भी उठते हुए बोला
"हाँ....." वो मेरी तरफ अजीब निगाहो से देखते हुए बोली
"ओके....लेकिन सुबह खुशख़बरी ही सुनाना" मैं बोला
और फिर हम बाइक पर बैठ कर वापस घर के लिए निकल पड़े और सारे रास्ते मैं यही सोच रहा था की सीधी बाद की बात थी लेकिन उसमे भी मंजू ने सोचने का लफडा डाल दिया खैर मुझे पूरी उम्मीद थी की उसका जवाब हाँ मे होगा लेकिन इस सोचने के चक्कर मे वो बेकार ही अपनी रात खराब करने जा रही थी................