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Incest मेरी आत्मा मेरे पिता के शरीर में घुसी

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तनु - अब क्या है

वीर कुछ नही बोलता बस उसके सीने पर अपना सर रख कर लेट जाता है और कब भी तनु सो गई उसे पता ही नहीं चला

अब आगे

वीर सो तो गया था लेकिन थोड़े टाइम बाद उसकी नींद खुल जाती है और जब वो देखता है तो तनु के ऊपर लेटा हुआ था उसके साँस लेते हुए चूचे जिसको देखने मात्र से ही वीर की सास तेज़ हो गई।

वीर अपने आप को कंट्रोल करने की कोशिश करता है लेकिन आज उसने पहली बार किस किया था तो उसका दिमाग जरा भी काम नही कर रहा था।

तभी वो सोती हुई तनु के होंठों पर अपने होठ रख देता है और उसके नीचे के होठ को अपने मुंह में भर के नोचने लगता है और अब वीर जरा भी अपने होश में नहीं था।

वही वीर की इस हरक़त से तनु की नींद खुल जाती है और वीर को गुस्से से देखती है और वीर को धकेल देती है अपने ऊपर से और धीरे से कहती है दिमाग़ खराब है क्या तुम्हारा तुमको कुछ समझ में नहीं आता।

वीर चुप चाप सुन रहा था और क्या ही करता।

तनु - काव्या बगल में सो रही है अगर वो नही सो रही थी तो अभी पीट के रख देती।

तनु थोड़ी देर चुप होती है और अपनी बेटी की तरफ़ मुंह करती है तभी उसकी क़मर पर एक हाथ आ कर उसको जकड़ लेता है।

तनु - रात को तुमको हो क्या जाता है, इतनी हिम्मत कैसे आ जाती है तुम्हारी।

वीर कुछ नहीं कहता बस उसकी साड़ी का पिन खोल रहा होता है जो ब्लाउज पर लगा हुआ था जिससे उसका पल्लू कंधे से नीचे ना आए।

वीर को ये करता देख तनु एक बार पलट जाती है और उसको धकेल देती है जिससे उसका सर टकरा जाता है हल्का सा।

लेकिन वीर वापिस आता है उसके पास और पिन निकालने लग जाता है और ये देख कर तनु धीरे से कहती है यार क्यो नाटक लगा रखा है मानते क्यों नहीं मेरी बात काव्या उठ जाएगी तो क्या मुंह दिखाने के लायक रह जाऊंगी मैं।

तनु - मैं बाद में तैयार हो जाऊंगी तो खुद सब करने की परमिशन दे दूंगी मुझ पता है तुम बहुत अच्छे पति हो ना देखो अब तो मैं इज़हार भी करी ना।

लेकिन वीर उसकी बात बहुत प्यार से सुनता है और धीरे से कहता है ठीक है और वापिस पिन निकालने लग जाता है।

इस बात तनु का पूरा दिमाग हिल गया और वो उठ का वीर को एक झापड़ मारती है और कहती छूना भी मत अब सुबह तुम्हारी ऐसी की तैसी नहीं करी मैने तो मेरे नाम भी तनु नहीं देखना तुम।

तभी वीर अपना गाल सहलाता है लेकिन थप्पड़ बहुत टाइट था जिसकी आवाज सुन कर साक्षी और अनु भी उठ गई।

अनु - दीदी क्या हुआ

साक्षी - चुप बिलकुल चुप वर्ना तनु हम दोनो को मार देगी चुप चाप सुन।

तभी तनु अगल बगल देखती है की सब सो रही है या नही और फिर बोलती है मैने बोला एक बार जब बस बस अब बस तुमको समझ नहीं आता पहले ही मेरे होठ दर्द कर रहे है ऊपर से थोड़ा साथ क्या दिया सर पर चढ़े जा रहा हो दिमाग मत खराब करो मैं नहीं करना चाहती इतनी हवस चढ़ी है तो बताओ।

तनु वापिस लेट जाती है और वीर वापिस उसकी पिन खोलने लग जाता है तनु की आंखे गुस्सा से लाल हो गई उसने वीर को पीटना शुरू कर दिया।

लेकिन वीर रूका नहीं।

तो तनु उसकी तरफ देखती है और कहती है क्या है हाँ ?

तनु मन में कहती प्यार से समझाना पड़ेगा।

तनु - क्या है हाँ बोलो

वीर - बहुत अकेला फील करता हूं आज पहली बार किस किया तुमने तो बहक गया लेकिन मेरी नियत ऐसी नहीं है मैं कुछ खराब नहीं चाहता मैं धीरे से ही सही तुम्हारा दिल जीत लूंगा।

तनु - तो क्यों नाटक लगा रखा है सो जाओ, दिया ना मैने एक किस तो क्या कर रहा हो।

वीर - बस थोड़ा अपनापन चहिए इसीलिए अल्पिन (पिन) निकालकर साड़ी क़मर तक कर रहा था जिससे तुम्हारा ब्लाउज के पीछे जो पीठ दिख रही है वहाँ सर रख कर सोना है।

तनु - ठीक है फिर बिना नाटक के से जाओगे

वीर - पक्का

तनु जल्दी से उठ जाती है और पिन निकालकर साड़ी नीचे कर देती है जिससे उसकी कमर के ऊपर बस ब्लाउज रह जाता है।

और रात में कुछ दिख नहीं रहा था लेकिन वीर को तनु के चूड़ियों की छन छन की आवाज़ आ रही थी।

फिर तनु लेट जाती है दूसरी तरफ मुंह कर के और काव्या को देखती है जो सो रही थी उसको प्यार से सहलाती है।

वीर भी उसको सहलाता है जब दोनो को कन्फर्म हो जाता है की काव्या सो गई तो तनु कहती है अब सो जाओ तुम भी हरकतें तुम्हारी ऐसी है की पूछो मत बच्चो जैसे।

वीर उसकी कमर को जकड़ लेता है और उसकी गांड़ का फील लेता हुआ उसकी पीठ पर अपने गाल रख देता है।
 
वीर भी उसको सहलाता है जब दोनो को कन्फर्म हो जाता है की काव्या सो गई तो तनु कहती है अब सो जाओ तुम भी हरकतें तुम्हारी ऐसी है की पूछो मत बच्चो जैसे।

वीर उसकी कमर को जकड़ लेता है और उसकी गांड़ का फील लेता हुआ उसकी पीठ पर अपने गाल रख देता है।

वही वीर की बाहों में पड़ी तनु सोचती है पागल लड़का मेरा थोड़ा साथ पाने के लिया इतना मार खाया, वैसे तनु जैसी भी थी उसे इस वीर से थोड़ा तो प्यार था उसके अंदर की लड़की को वीर धीरे धीरे जगा रहा था लेकिन आज वीर ने उसको अहसास दिला दिया की वो एक शादी शुदा है, बच्ची के उठ जाने का डर और पति की ऐसी तड़प देख उसे हँसी आ रही थी यही जिंदगी तो वो जीना चाहती थी।

तनु - अभी तो मैं 28 साल की हूं, चलो अब मेरी लाइफ सुधर रही है अच्छा है।

तभी तनु को पता चलता है की वीर की तरफ पीठ कर के सो रही है इसका मतलब वीर मेरी गांड़

इतना सोच कर जल्दी से तनु करवट बदल लेती है जिसे देख कर वीर डर जाता है और कहता है अब मेने कुछ नहीं किया बस मैं तो पेट से खेल रहा था तुम्हारे।

वही ये सुन कर तनु कुछ नहीं कहती बस वीर को घूर कर देखती है और कहती सोना है या नही चुप चाप।

वीर उसके होठ को देखता है और धीरे से दूसरी तरफ़ देख कर कहता है नींद नहीं आ रही।

तनु उसे अपनी तरफ खीच लेती है और वीर तुरंत उसके होठ को चूमने लगता है उसकी जीभ से अपनी जीभ मिला देती है तनु इस अहसास से ही वीर का लन्ड खड़ा हो जाता है और तनु के साड़ी के ऊपर से ही ठोकर मार रहा था।

फिर तनु उसको रोकती है और अपनी आंखों को खोलती है और वीर के सीने में घुस जाती है और वीर अब कब सो जाता है उसे पता नहीं चलता।

वही वीर की बाहों में तनु भी सो जाती है।

और इन दोनो को सो जाने के बाद अनु हँसती है और कहती है दीदी बड़ी जबरदस्त किस थी तनु दीदी का तो पूरा होठ खा गया ।

साक्षी - मेहनत का फल है मेहनत का इतना गुस्सा सहता है बेचारा दिन भर हम सब के लिया सब कुछ करता है तो थोड़ा ही सही तनु हंसना सीख रही है।

अनु - वैसे दीदी ये कहना गलत होगा की अब तनु दीदी वीर के बिना सो नहीं पाती।

साक्षी - सो जा वर्ना अगला नंबर हमारा और तुम्हरा होगा।

वही अनु को जल्दी से साक्षी सुला देती है।

और खुद भी सो जाती है।

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वही सुबह जब तनु की नींद खुलती है तो वो देखती है की उसके ऊपर वीर सो रहा है और वीर ने अपने एक हाथ से काव्या को भी पकड़ रखा है और तनु वीर को ऐसे हाल में देख कर उसकी सुबह बन जाती है।

लेकिन अब तनु उठे कैसे क्युकी वो तो नीचे दबी हुई थी।

किसी तरह तनु उसके नीचे से निकल कर आती है और जब वो अपनी हालत देखती है तो जल्दी से बाथरूम भाग जाती है।

तनु के पूरे बाल बिखरे ब्लाउज के बैटन खुले ऊपर के और साड़ी का पल्लू कमर के नीचे लटका हुआ गले पर होंठों पर काटे जाने के निशान, पीठ पर दाँत के निशान।

सब चीज उसके शादी शुदा होने के सबूत दे रहे थे।

वही तनु जल्दी से बाथरूम में नहाते टाइम सोचती है अभी उठेगा तो देखूंगी रात को तो बड़ी हिम्मत आ रही थी अभी मेरी तरफ देख कर दिखाएं, ज़रा उठने दो तो देखती हूं रात की हिम्मत का हिसाब लुंगी उठो तो देखू तुमको।

वही तनु को रात की बात पर हँसी भी आ रही थी कितना डर रहा था वो।

फिर तनु ये सब बात छोड़ कर नहा कर टाइम देखती है तो उसका दिमाग हिल गया था 9 बजे इस लड़के ने बिगाड़ के रख दिया है।

जल्दी से तनु नहा कर बाहर आती है तो देखती है अब वीर काव्या को अपने सीने में छिपाए हुए सो रहा है और उसका दूसरा हाथ साक्षी की कमर पर था।

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जल्दी से तनु नहा कर बाहर आती है तो देखती है अब वीर काव्या को अपने सीने में छिपाए हुए सो रहा है और उसका दूसरा हाथ साक्षी की कमर पर था।

अब आगे

थोड़े देर बाद साक्षी की नींद खुल जाती है और वो देखती है की वो खुद वीर की बाहों में सो रही है उनके बीच काव्या सो रही है जो साक्षी से चिपकी हुई थी।

थोड़े देर बाद काव्या की नींद खुल जाती है और वो हँसते हुआ कहती है गुड मार्निंग मम्मी

साक्षी - गुड मार्निंग मेरी बच्ची, रात को अच्छी नींद आई।

उसके बाद साक्षी ऐसे ही काव्या को बातों मे फुसलाकर वीर का हाथ अपने कमर से हटाती है और ब्लाउज ठीक कर के काव्या को ले कर जाने लगती है और जाते टाइम चुपके से वीर के सर पर थपकी मार कर जाती है, और कहती है पागल //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f92d.svg

वही साक्षी के जाने के बाद वीर कसमसाने लगता है और साक्षी जल्दी से भाग जाती है।

साक्षी जब रूम में जाती है तो तनु बस एक कोने बैठी थी।

तनु - गुड मार्निंग बेबी।

काव्या खूब कस के तनु के सीने में घूस जाती है, मम्मी आप बहुत प्यारे लग रहे हो, नई नई साडी में अच्छी लग रही हो।

तनु - तो अच्छी नही लगूंगी, काव्या की मम्मी हूं अब तो सुन्दर लगना ही पड़ेगा।

तभी साक्षी की नज़र तनु की हालत पर जाती है जिसे देख कर उसे हँसी आ जाती है, और मन में कहती है वाह प्यार की निशानी ले कर ही मानी आप।

इधर तनु जान बूझकर काव्या को अपने दूर नहीं जाने दे रही थी उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी साक्षी से बात करने की

तभी हँसते हुआ साक्षी बोलती है तनु बेटा जाओ जल्दी से तैयार हो फ्रेश हो कर फिर आराम से खेलना।

"जी मम्मा" काव्या इतना बोल कर भाग गई।

काव्या के जाते ही तनु को देखती हुई साक्षी बोलती है चुम्मा चाटी मैं आप तो हमसे भी आगे निकली मैम।

तनु - दिमाग़ मत खराब कर समझी, कुत्ता रात को सटक गया था।

साक्षी - अच्छा कुत्ता सटक और कुतिया का दिल

तनु - हाँ तो थोड़ा प्यार आ रहा था बस, है मुझे उससे प्यार//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f615.svg इतनी मासूम सी शकल बना कर प्यार देखता है तो पिघल जाती हूं मैं।

साक्षी - वैसे एक बात बताऊं , यार यही हाल मेरा भी है लेकिन अब को भी अच्छा फील करता है खुश रहता है।

तनु - हवस भरी है खुश नहीं होगा दिन भर ताड़ता रहत है तो अच्छा नही लगेगा।

साक्षी - वैसे रात को मजा आया सच्ची बता

तनु - हट कमीनी, इतना लात खाया लेकिन मारा नहीं।

साक्षी मन में सोचती है चल कम से कम तू खुश रहना सीख गई वीर तुमने सच में कर दिखाया

इधर तनु किसी तरह साक्षी से बच जाती है और साक्षी कहती जल्दी से इसको उठाओ।

साक्षी - तू जा कर उठा , मैं नहा धो कर फ्रेश हो लूं।

तनु वीर को उठाने जाती है और जब देखती है तो वीर अब अनु की कमर पकड़ कर के सो रहा होता है वीर का हाथ उसके सलवार के अंदर जा कर उसके पेट पर था।

तनु वहाँ पर अनु को बुलाती है जब अनु थोड़ा नींद से बाहर आई तो तनु को देख कर बोली दीदी गुड़ मार्निंग।

तनु - तुम्हार रोमांस बिगाड़ने के लिए माफी चाहती हूं लेकिन अब कृपा उठ जाए वरना कुछ देर में काव्या आएगी तो ये देख कर पूरे घर में बताएगी।

वही अनु को अपनी हालत का अंदाजा हुआ तो वीर का हाथ झटक देती है और एक हाथ घुमा कर मारती है

और ये देख कर दरवाजे के गेट पर वही बैठ जाती है।

वीर पहले अपनी नज़र खोल कर आजू बाजू देखता है और उसकी नज़र अनु पर पड़ती है वो साक्षी समझ कर एक बार और उसके गले पड़ जाता है और कहता है साक्षी गुड मॉर्निंग।

लेकिन इस बार वो झापड़ तेज होता है

वीर जल्दी से उठ जाता है।

और उसको ऐसे खड़े होते हुआ देख तनु हँस देती है दरवाजे पर बैठे बैठे।

जैसे ही वीर की नज़र तनु पर पड़ती है वो देखता है वो हँसी वीर को अच्छा लग रहा था।

तभी साक्षी कहती है अरे इतना क्यों हँस रही हो कुछ हुआ क्या वो अंदर बेड के पास बैठते हुए पूछती है।

वीर - हाँ मैने आज नोटिस किया की तुम्हारी और अनु की शकल 70% मिलती है बस तुम भाभी हो वो मॉडर्न पटाका।

ये सुन कर साक्षी हँसने लगती है और वीर को देखती है
 
भले ही जो भी हो वीर को साक्षी पर हमेशा से बहुत लगाव रहा है तो वो साक्षी को ऐसे देखता है तो वो उसकी गोद में सर रख कर लेट जाता है और उसकी कमर को बहुत कस के जकड़ लेता है और कहता है मैने तुम्हे समझ कर अनु को हग कर लिया और तुम मुझे छोड़ कर मत जाया करो ना सुबह और इस तनु ने भी नहीं बचाया मुझे बस पटाका जैसे बन कर सज जाती है और हँस रही थी।

वही वीर सारी शिकायत करता है साक्षी से और साक्षी उसे प्यार से उसके बालो को सहला रही थी तभी अनु अंदर आती है और जब वो देखती है वीर को ऐसे तो उसको हटाने के लिए आगे आती है और कहती है इसको जब देखो हवस ही चढ़ी हुई है, हटो दीदी इसको मैं बताती हूं ये कह कर वो वीर के बालों पर आती है।

तभी साक्षी उसकी तरफ देखती है और कहती है खबरदार अगर छुआ भी तो अभी वो मेरे पास है समझी।

फिर वीर सबकी शिकायत कर रहा था साक्षी हंसते हुए उसके गाल सहला रही थी।

साक्षी - अच्छा अब बस जाओ और नहा कर आओ फ्रेश हो कर।

जैसे ही वीर उठता है वैसे ही बाहर निकल जाता है जहा तनु आराम से काम करने मैं लगी थी बिस्तर हटाने में।

अब वीर तनु को देखता है तो उसके पास चला जाता है और बैठ जाता है

तनु - क्या है अब

वीर धीरे से फुसफुसाते हुए कहता है बहुत अच्छी लग रही हो।

तनु - ज्यादा मस्का मत लगाओ, हटो मेरे पास से काम करने दो।

वीर - तुम हँसते हुए बहुत प्यारी लगती हो।, लेकिन गुस्से मे इतना प्यारी की पूछो मत लेकिन ये बताओ इतना मारती क्यो हो मैं तो तुम्हे

तनु - तुम्हे नही पता क्यों मारती हूं तुमको

तभी वहाँ पर काव्या आ जाती है और हँसते हुए गले लग जाती है वीर के गुड मॉर्निंग पापा।

वीर - अरे मेरा बच्चा गुड मॉर्निंग

काव्या - अरे पापा आप ने दोनो गाल पर मेकअप किया किया है बुधु पापा मेकअप लड़कियां करती है।

उसकी बात सुन कर तनु और साक्षी हँस देती है, दोनो हँसते हुए पेट पकड़ लेती है और वीर झेप जाता है।

लेकिन तनु कहती है अरे बेटा वो पापा को ना किसी कीड़े ने मार दिया।

काव्या - उसी कीड़े ने आपके होठ और गले में काटा है ना मम्मा

तनु अब झेप जाती है और वीर को देखती है और धीरे से कहती है हाँ गंदा कीड़ा था, फायदा उठा रहा था बहला कर।

ये सुन कर अनु और साक्षी हँसने लगती है और तभी काव्या कहती है उफ्फ मम्मा ये कीड़ा बहुत गंदा है यार, इसी कीड़े ने परसो बड़ी मम्मा को काट लिया था।

ये सुन कर वीर जल्दी से उसे गोद में उठा लेता है और बिना कुछ कहे बाथरूम में घुस जाता है।

और फिर दोनो की हँसी बाहर आ रही थी और उनकी इस हँसी ने तनु साक्षी और अनु का रोम रोम खुश कर दिया था।

लेकिन तभी गेट नॉक होता है और निधि अंदर आती है जिसके साथ राखी भी होती है, और जब वो दोनो तनु को देखती है तो उसकी हँसी देख कर दोनो सरप्राइज हो जाती है।

तभी निधि की नज़र तनु पर पड़ जाती है जो बहुत ध्यान से देखने पर उसे सारे लव बाइट नज़र आ जाते है और हँसते हुए कहती है।

निधी- क्या बात है तनु तू तो छिपी रुस्तम निकलीं।

वही ये सुन कर तनु थोड़ा शरमा जाती है वीर ने हरक़त ही ऐसी की थी वो लव बाइट तो छिपा देती लेकिन होठ उसके कटे पड़े थे ।

तभी निधि कहती है वैसे साक्षी तू भी कम पीछे नही है होठ तो तेरे भी चीख चीख के कह रहे है।

लेकिन जब तनु और साक्षी को ऐसे चुप और शरमाते देखती है तो अनु बोलती है अरे भाभी पूछो ही मत ऐसे ऐसे दर्द देते है की पूछो मत।

लेकिन हम तीन रहते है ना तो संभाल लेते है वर्ना घंटो तक मेहनत करनी पड़ती है।

उसकी ये बात सुन कर निधि ही झेप जाती है और कहती है अरे अनु तू तो बेशरम हो गई है।

अनु - अब शादी बाद तो बेशरम होना ही पड़ता है क्यो।

तनु - और नहीं तो क्या वर्ना कभी कभी लोग चिल्लाते है रुक रुक कर गाड़ी चलाओ ना

वही ये बात सुन कर निधि भाग जाती है गाल लाल कर के नीचे क्युकी ये चीज़ उसने राज से बोली थी चूदाई के टाइम जो सुन लिया वीर ने और वीर सब कुछ बताता था तनु से।
 
तभी निधि को ऐसे भागते देख तीनो हँस पड़ती है, तभी राखी आ कर तनु को साक्षी को गले लगा लेती है और कहती है ऐसे ही हँसते रहा बेटा तुम दोनो।

तभी वीर बाहर आता है जिसने बस एक टॉवल लगा रखा था और काव्या चिल्लाती है अरे नानी मुझसे मिलने आई हो।

राखी - हाँ तुमंसे मिलने आई हूं।

वही वीर को देख कर साक्षी उसके आगे खड़ी हो जाती है ताकि उसका शरीर राखी ना देख पाए।

और तभी तनु धीरे से कहती है, रूम में जाओ जल्दी।

तभी वीर रूम में कपड़े पहन रहा होता है तभी उसके सामने अनु आती है और रेड ड्रेस में वो बहुत सुंदर लग रही थी वो वीर को देख कर कहती है सॉरी सुबह के लिए।

तभी वीर कहता है सॉरी किस लिए

अनु - सुबह तुमको मारने के लिए

वीर - अरे तुम मेरी वाइफ हो कोई किरायेदार थोड़ी चिल खिली खिली रहती हो तो अच्छा लगता है।

अनु उसकी बात सुन कर एक टक हँस देती है और कहती है शैतान, वैसे भी में तो सबसे पतली दुबली वाइफ हो ना छोटी सी।

वही वीर उसको रोक कर कहता है पतली दुबली नहीं, सबसे मॉडर्न वैसी मुझे पसंद हो तुम।

अनु - कमीने मुझे सब पता है, 2 गदराई हुई है पहले ही इसीलिए तुझे 1 चिकनी चाहिए मॉडर्न वाली

तभी अनु को कुछ याद आ जाता है और वो कहती है मेरी सहेली के लिए तुमने तनु दीदी से बात की

लेकिन जब अनु वीर को देखती है तो पाती है वो तो उसको ऊपर से नीचे तक देख रहा है।

अनु - घुर लो आराम से, घूर लो घूर कर ही काम चला लोगे ना।

वीर - और क्या करू थोड़ा छु लिया तो इतनी मार पड़ी।

अनु - तो ऐसे करोगे तो मार पड़ेगी ना, हू नहीं तो

अनु जाने लगती है और उसको जाते हुए ऐसे देखना वीर को अच्छा नहीं लग रहा था।

वीर - उदास मत हो अच्छा सुनो, आज तुम्हे अपनी सहेली की शादी मैं ले कर चलूंगा परेशान मत हो, तुम ही तो मेरी शान हो हमेशा हँसती रहा करो ना तुम्हे उदास देखता हूं तो बुरा लगता है।

अनु कुछ नहीं कहती बस वीर को देखती है जो उसका हाथ थामे हुआ था और अब अनु को थोड़ी सी कपकपी हुई उसे अहसास हुआ एक पत्नी होने का, लेकिन साथ मैं उसे ये भी पता चला की वीर उससे प्यार करता है लेकिन डरता है।

अनु - ठीक है

और अनु जाने लगती है तभी वीर उसका हाथ पकड़ लेता है और कहता है मुझे नहीं पता तुम मेरे बारे में क्या सोचती हो लेकिन मैं तुमसे प्यार करता हूं , हाँ मैने बहुत गलतियां किया लेकिन मैं इसीलिए तो सुधारना चाहता हूं ना, आई लव यू अनु

अनु प्यार का इजहार सुन कर कप कपा जाती है और तेजी से साँस लेते हुए कहती है मेरे हाथ छोड़ो वीर , मुझे नहीं पता कुछ।

लेकिन वीर उसका हाथ नहीं छोड़ रहा था।

वीर कुछ कहता उसके पहले वो वीर के गाल पर एक थप्पड़ जड़ देती है और तेजी से भाग जाती है।

और उसको ऐसे भागता हुआ देख तनु और साक्षी हँस देती है।

वीर - बहन चोद ये लड़कियां का दिमाग अलग लेवल का चलता है में तो इसको शांत करना चाह रहा था ताकि ये आराम से मस्ती कर सके विश्वास करे मुझ पर।

तभी वीर कहता है मुझे कुछ भी कर के तनु और साक्षी को मनाना पड़ेगा, वर्ना ये मेरी जान ले लेगी, तभी वो मन में सोचता है अगर तनु और साक्षी खुश हो जाती है तो आज रात वो मुझे किस करने देंगी।

तभी वो देखता है साक्षी आईने के सामने झुमके पहन रही होती है जिसे देख कर वीर की नज़र उसकी कमर और पीठ पर टिक जाती है।
 
तभी वो साक्षी के पीछे खड़ा होता है।

साक्षी - क्या हुआ कुछ चहिए

तभी साक्षी वीर की हालत देख कर समझ जाती है क्या बात है।

लेकिन तभी वीर पीछे से उसकी उसकी कमर पकड़ कर के हग कर लेट है और उसके कंधे पर अपना सर रख देता है

साक्षी उसे कुछ नहीं कहती और और उसकी तेज सास और उसकी बेबसी देखती है आखिर वीर भी तो इंसान था, वो अपना प्यार ले लिया सब कुछ कर रहा था।

साक्षी उसका हाथ पर अपना हाथ रख देती है और कहती है आराम से सास लो मैं तुम्हारी बाहों में हूं ना, चुप बिलकुल।

साक्षी - मेरे सामने तुम्हारी सिटी पीटी क्यों गुल हो जाती है हा, अच्छा देखो मेरी आंखों में देखो बाबा

तभी साक्षी हँसती है और उसकी तरफ मुड़ जाती है और वीर उसे कस के गले लगा लेता है।

अब वीर के हाथ थोड़े थोड़े काँप रहे थे।

साक्षी - रेड साडी में अच्छी लग रही हूं ना।

वीर - हम्म

साक्षी - आइ लव यू ना बाबा इतना बेबस मत हो मैं तुम्हारी ही तो हूं ना, तुम्हारी इसी अदा पर तो मुझे प्यार है।

साक्षी - वीर प्लीज़ ना मेरी तरफ तो देखो

वीर अब साक्षी की तरफ देखता है तो साक्षी स्माइल करते हुआ कहती है तुम्हारी साक्षी सबसे खास है ना तुम्हारे लिए

वीर - हा

साक्षी - तो मैं तुमसे प्यार करती हूं बहुत, तुमने बहुत ध्यान रखते हो मेरा।

वीर अब साक्षी से दूर हटने को तैयार नहीं था।

साक्षी - वीर वीर जब मुझसे दूर नहीं रह पाते तो क्यों रहते हो।

साक्षी वीर के सीने में घुसती है और उसे खूब टाइट हग कर लेती है जिससे वीर की सास अटक जाती है और धीरे से साक्षी कहती है वैसे मेरे लिया इतना तड़प रहा है आप हा।

वीर - बहुत ज्यादा

तभी काव्या अंदर आने लगती है और वीर हट जाता है।

साक्षी वीर का उदास चेहरा देख कर हँसी आ जाती है।

साक्षी - ये लड़का ना साड़ी उतरवा कर मानेगा मानना पड़ेगा, प्यार तो बहुत करता है।

तनु - इसीलिए मैं आज इसके सामने नहीं आई

साक्षी - तो तड़पता हुआ छोड़ दोगी तो बेचारा क्या करे

तनु - तड़पाना जरूरी है

साक्षी - कमीनी तू भी जानती है और मैं भी प्यार हम दोनो करते है

तनु - ही ही ही हाँ लेकिन इतना भी नहीं की साडी उतर जाए

साक्षी - जल्दी किसको है लेकिन किस करना सीखना पड़ेगा वर्ना दिक्कत हो जाएगी।

तनु - खुद कुछ करेगा हम दोनो को खुश करने के लिया अगर मैं इंप्रेस हुई तो पक्का करना सिखा दूंगी , तू और मैं बारी बारी, लेकिन अगर मैं खुश नहीं हुई तो छुने भी नही दूंगी।

साक्षी - तू कब तक सामने नहीं आयेगी, और तुझे लगता है वो हम दोनो को देख कर कंट्रोल कर पाएगा

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वीर खाना पीना खा कर जमीदार के यहां काम करने चला जाता है और कार से फिर दोपहर को आता है।

वीर - ये बेटी चोद इंसान है या लन्ड बहन चोद बस भोसड़ा में खोया रहता है ।

तभी वीर कार को तबेले के पास खड़ा कर के जब जाने लगता है तो उसे कुछ आवाज आती है

वीर देखता है

निधि - आआआहहह हट जाइए वरना अच्छा नहीं होगा, आआआआहह्हह मम्मी छोड़ दीजिए उई मां रात को चोदने में क्या दिक्कत रहता है आपको अभी कोई आ जाएगा तो क्या रह जायेगा

निधि - निकल गया ना अब हटो , कुत्ता कही का रोज रोज का यही हो गया है।

वीर इन दोनो की चूदाई देख कर तेज से सांस लेता हुआ भाग गया।

वीर - आज एक बात तो समझ गया ना में भी हाँ होती है और सभी पत्नी की गाली खाते है , लेने के लिए।

तभी वीर ऊपर चला जाता हैं तो उसको दीवाल के पास बैठी हुई काव्या दिखती है।

और अंदर तीनो पत्नियां बैठ कर कुछ कर रही थी।

जैसे ही वीर काव्या को ले कर रूम में आता है तो देखता है तीनो उसको देखने लगती है

तभी काव्या बोलती है मम्मी चलो ना घूमने चलते है बाहर।

तभी तनु वीर को देखती है और मन में कहती है फिर कुछ दिमाग लगा कर आया है

साक्षी - हाँ बेटा हम सब चलेंगे परेशान मत हो।

तभी साक्षी और अनु काव्या को तैयार करने लगती है, और वीर बाहर आता है तभी उसको तनु बाहर दिखती है, जो दीवाल पर चढ़ के बैठी थी।

वीर - चलो ना घूमने तुम भी

तनु - वो दोनो जा रही है ना, काव्या को ले कर जाओ ना, आराम से।

वीर - नही मैने तो तुम्हारे लिया सब किया, चलो ना मैं तुमको पसन्द करता हूं।

तनु वही दीवाल पर टेक लगा कर वीर को देखती है।

और कहती है मुझे सब पता है तुम्हे क्यो पसन्द आ रही हूं मैं, हट जाओ वर्ना कूट दूंगी हटो जरा साक्षी को बताने दो मुझे ये मेरे लिया है ना रुको।

तनु की इतनी बात सुन कर वीर की गांड़ फट जाती है और वो तनु को पकड़ लेता है, अरे प्लीज़ मत बताओ ना।

ये सुन कर तनु कुछ नहीं कहती है वीर को हटने का इशारा करती है, लेकिन वीर फिर से जज्बातों में बह गया था। और तनु की खोपड़ी अब हिल गई थी।

तनु - बार बार आ कर छूना जरूरी है बिना छुए बात नहीं हो सकती तुम्हारी।

और वीर को थोड़ा धकेल देती है और आगे बड़ जाती है

वीर - मेरी ही गलती है पता नही इसको देख कर क्या हो जाता है कंट्रोल खो क्यो देता हूं।

तभी तनु गुस्से में नीचे जाती है और उसने ध्यान नहीं दिया की सीढ़ी के बगल ऊपर साइड गरम पानी है और वीर जस्ट उसके पीछे होता है।

तभी तनु का हाथ उस बर्तन पर लग जाता है, जिसमें गर्म पानी था और वो गर्म पानी तनु के ऊपर गिरने लगता है।

तभी वीर तनु को अपनी बाहों में दबोच लेता है, और सीढ़ी पर ही उसके ऊपर लेट जाता है, जिससे गर्म पानी उसके ऊपर गिर पड़ता है और तनु बिल्कुल सेफ रहती है।

तभी वीर का ध्यान आता है, की उसके एक हाथ तनु की मुलायम चुचियों पर होते है , जिसके अहसास से ही वीर का दिल खुश हो जाता है, लेकिन तभी वीर की आंखों में आँसू आ जाते है।
 
जब शरीर पर पूरा गरम पानी गिरता है ना तो सारी आशिकी गांड़ के रास्ते निकल जाती है और वही वीर के साथ हुआ।

उसकी पूरी पीठ जल गई और इस आवाज़ से हर कोई आ गया।

काव्या - ही ही ही ही पापा क्या हुआ गिर पड़े, मम्मी के ऊपर।

वही वीर काव्या की आवाज़ सुन कर जल्दी से अपना हाथ तनु के ऊपर से हटा लेता है और खड़ा हो जाता है।

साक्षी - क्या हुआ वीर, तनु, तुम दोनो ठीक हो ना।

अनु - कैसे गिर पड़े दिखाई नहीं देता क्या, अंधे हो जरा देख लिया करो, बेटी है तुम्हारी कुछ तो शर्म कर लिया करो।

तभी ये शोर सुन कर राज और उसका चाचा सूर्य और उदय दोनो खड़े थे।

उदय - दिमाग़ सही नहीं रहता क्या तेरा, तीन तीन बीवी मिलने से पागल हो गया है तू।

सूर्य - कैसे गिर पड़े , ये तुझे परेशान कर रहा था क्या बिटिया।

मधु - अरे आप दोनो कहाँ बच्चो के बीच आ गए है।

उदय - अरे ये तो इंसान ही गिरा हुआ है, पता नहीं कहा मेरी बिटिया फस गई इस करमजले के चक्कर में, कल को मेरी बेटी गिर पड़ती, चोट लग जाती तो , आज बच गई आगे क्या होगा भगवान जाने।

मधु - कुछ नहीं होगा वो दोनो खुश है।

तभी तनु चिल्लाती है , अरे इतनी ही फिकर है तो बर्तन किसने रखा था , वीर की गलती नहीं है समझे अपनी हरकतें देखे।

तभी तनु कुछ और बोलती उसके पहले वीर ने उसको इशारे से मना कर दिया।

और ऊपर जाने लगा और काव्या को देख कर बोला परेशान मत हो बेटा हम सब घूमने चलेंगे।

तनु ये सुनती है तो उसकी आंखें नम हो जाती हैं , और तनु का गुस्सा देख कर सब सटक लेते है और सब को पता चल गया था गलती वीर की नहीं थी।

वीर ऊपर आता है और तनु उसके पीछे रहती है।

साक्षी - ठीक हो तुम दोनो, बर्तन में पानी था इसलिए चोट लगी।

तभी तनु कुछ बोलती उसके पहले वीर बोलता है हाँ बाबा मैं बिल्कुल ठीक हूं आप टेंशन मत लो अब चलो वर्ना काव्या रो देगी।

तभी वो दोनो और काव्या नीचे जाने लगती है।

तनु - बताने क्यो नहीं दिया।

वीर - काव्या बहुत खुश है अगर तुम बता देती तो साक्षी कभी जाने नहीं देती, और मैं काव्या को उदास नहीं देख पाता।

तनु कुछ और कहती तभी वीर कहता है माफ करना मैने तुम्हे छुआ, अब से नही टच करूंगा।

तनु - क्यो बचाया मुझे , में तुम्हे दिन भर मारती रहती हूं फिर भी मुझे बचाया।

वीर - प्यार करता हूं , तुमसे अपनी आंखों के सामने ऐसे जलता नहीं देख सका, तो सोचा दुनिया भर की गाली सुन सकता हूं, तुम्हे बचा कर तो किया।

तनु अपनी आंखों को पोछती है और कहती है शर्ट उतारो, कमरे में चल कर।

वीर - अरे ठीक है

तभी तनु अपनी चप्पल उतार लेती है।

वीर- उतार दिया मैने आओ।

तनु - बिना डाट खाए दिमाग चलता नहीं तुम्हारा।

फिर वो वीर के पीठ पर क्रीम लगती है और धीरे धीरे पोछती है फिर शर्ट पहने को बोल देती है।

वीर जाने लगता है और कहता तुम भी चलो।

तनु - एक शर्त है

वीर - कैसी

तनु - तुमने कहा था तुम अब से मुझे टच नहीं करोगे।

वीर - हाँ तो

तनु - वैसे मैने तो रोका नहीं, इसीलिए अगर तुम उस बात के लिया सॉरी बोलो तो मैं चलूंगी।

वीर - ठीक है सॉरी, अब चलो।

तनु - ही ही ही तुमने मुझसे एक सवाल पूछा था ना, कल रात को।

वीर - हाँ , यही की तुम सजती क्यो नहीं, सवारती क्यो नहीं , बेकार सी शकल क्यों बनाए रहती हों, और मेरे प्यार झूठा है क्या, यही पूछा था।

तनु - एक औरत, तब सजती है जब उसको अपने पति को लुबाना हो, उसके लिया ही औरत सजती है , और तुमने कहा था ना बहुत प्यार करते हो मुझसे।

वीर - हा

तनु - तुमको तुम्हारी तनु को सजती हुई देखना था, वादा रहा अब से तुम्हारी तनु तुमको हमेशा सजी हुई मिलेगी, तुम्हारे लिए , अब जाओ पागल।

वीर आगे आता है और तनु भाग जाती है पीछे

तनु - ओह हेलो, मिस्टर बेताब मैने सजने को बोला की तुम्हारे लिए सजूँगी, सज नहीं गई, और वैसे भी मैने इज़हार नही किया।

वीर उदास हो कर जाने लगता है , तभी तनु कहती है लेकिन क्या पता तुम्हारा हँसता चेहरा देख कर कर दूं,

वीर हँसते हुए चला जाता है,
 
वीर हँसते हुए चला जाता है,

और तनु स्माइल करती है और कहती है बहरूपिए ने मेरा दिल तो जीत लिया और ये कहते हुए उसके गाल लाल हो जाते है।

तनु - आज तुमको पागल ना कर दिया तो मेरा नाम भी तनु नहीं, पागल लड़का कुछ भी कर देता है बताओ, बंदर कहता है तुम तो मेरी हो ही ही ही ही।

राखी - तुम्हे खुश देख कर अच्छा लगा बेटी।

तनु - मां बहुत खुश हूं मैं, बहुत प्यार करने वाला मिला, अब जो भी हो ये मुझे अपनाया है इसने अब मेरी परी इसे दिखाने की, की इसकी तनु कोई गांव की ऐसी वैसी नहीं है।

राखी - पागल

इधर तनु तैयार होना शुरू कर देती है, और दूसरी तरफ कार में साक्षी और अनु और काव्या बोर हो जाती है।

काव्या - पापा मम्मी कहाँ है , कब आएगी वो, मैं बोर हो गई।

अनु - यार दीदी बुलाओ ना, बड़ी दीदी को।

साक्षी - मेरे मैं इतनी हिम्मत नहीं , जिसको डाँट खाना हो बुलाओ।

वीर पहले सोचता है तनु को बुलाने जाए लेकिन फिर वो कहता है आज डाँट खाने का मन नही तनु कभी भी गुस्सा हो जाती है।

तभी 1.5 घंटे बाद तनु नीचे आती है, और उसको देख कर वीर की सास अटक आती है वो जल्दी से पानी पीने लगता है।

वही सूरज ढल चुका था और हल्का हल्का चांद निकला था, ऊपर से तनु ने ग्रीन साड़ी पहनी थी जिस पर स्ट्रीट लाइट की रोशनी तनु की कमर पर पड़ती है, खुले खुले बाल, होठ में हल्की लिपस्टिक, और हवा में उसके बाल लहरा रहे थे, और तनु के बाल उसकी आंखों में लग रहे थे इसलिए उसने अपनी आंखें बंद कर ली ।

और तनु का ये रूप देख कर वीर का रोम रोम हिल गया, उसे अपनी सास कंट्रोल करने में दिक्कत होने लगी, उसे ये समझ नहीं आ रहा था की सुबह वाली तनु कही कोई दूसरी तो नही थी ये तो पूरी चेंज हो गई।

वीर - तो ये है तनु जिसने पूरा गांव में अपना सिक्का चला रखा था

वीर खुद अब किसी तरह अपने लन्ड और साँस को बैठने की कोशिश कर रहा था।

और वही तनु का ऐसा रूप देख कर राज और उसके चाचा और पापा सब तनु को घूर रहे थे।

काव्या - हाए मेरी मम्मी।

साक्षी हल्की स्माइल के साथ तनु को देखती है और कार का डोर खोल कर सबसे पहले तनु को अंदर बैठने देती है।

काव्या - मम्मी मुझे चिपका लो।

उसकी ये बात सुन कर तनु को हँसी आ जाती है और उसने काव्या को अपनी गोद में बैठा लिया और वीर को हल्की स्माइल के साथ देखने लगी।
 
काव्या - मम्मी मुझे चिपका लो।

उसकी ये बात सुन कर तनु को हँसी आ जाती है और उसने काव्या को अपनी गोद में बैठा लिया और वीर को हल्की स्माइल के साथ देखने लगी।

साक्षी आगे बैठी थी वो खांसती है और कहती है चले।

अनु बस चुपके चुपके तनु को घूर रही थी वो भी लड़की थी उसे भी पता था एक लड़की कब सजती है।

अनु मन में सोचती है दीदी ने सजना शुरू कर दिया मतलब.

साक्षी - इतना टाइम कैसे लग गया।

तनु - पानी भरी नहाई, और फिर तैयार हुई, और थोड़ा हेयर रिमूवर की।

साक्षी भी अब तनु को तिरछी नज़र से देख रही थी या ये कहे उसको भी जलन हो रही थी की तनु इतना सज कर आई है।

तनु मन में कहती है वीर तुम्हारी सांस तो तेज है अभी ही, इज़हार करूंगी तो पागल हो जाओगे,

तनु को मन ही मन हँसी आ रही थी क्युकी उसको पता था , वीर को इज़हार के बाद भी बहुत प्रोब्लम होगी, उसकी 2 वाइफ और भी है।

तनु - अभी तो पार्टी शुरू हुई है वीर ……………………….

नेक्स्ट सीन

"हा भाई वीर का गेम बजा डाल" ऊपर से ऑर्डर है रमेश भाई ने बोला है।

लेकिन उन्हें क्या पता था उनकी ये कॉल अंजली बैठी सुन रही थी।

अंजलि - नाउ गेम स्टार्ट रमेश

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