• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest मेरी आत्मा मेरे पिता के शरीर में घुसी

तभी तनु को अनु बुलाने आती है और वो अंदर चली जाती है और उसके पीछे अनु भी चली जाती है और वीर वापिस जाते टाइम उसकी गांड़ देखने लगा अनु को इस बात का पता चल गया।

उसकी इस बात को साक्षी ने भी नोटिस किया

साक्षी - शर्म तो आती नही इसको ऐसे घुरते हुए, तुझे दिक्कत होती है तो मना कर दिया कर।

अनु - क्या कह कर मना करू की अपनी पत्नी को ऐसे घूरो मत, इतना अपनापन दिखाओ, वैसे आपको और तनु दीदी को क्यों दिक्कत नही होती।

तनु - तेरे सुर तो एक दिन में ही बदल गए।

ये सुन कर अनु झेप जाती है

साक्षी चल खा चुप चाप फिर बाहों में सोना भी तो है

वही ये सुन कर अनु के गाल लाल हो गया थे।

अनु - हाँ तो पती है मेरा।

साक्षी - क्या है

तनु - मत छेड़ो उसको ।

तभी वीर अंदर आता है तभी उसका कॉल बज जाता है।

वीर - सुबह सुबह ही बहन के लन्ड का कॉल आ गया

वीर - हेलो

जमींदार - बेटा जरा 4 घंटे के लिए कार ले कर चले आओ 12 बजे तक छोड़ दूंगा। पैसे भी ले लेना 4000

वीर - ठीक है

जमीदार - सुनो

वीर - हा

जमीदार - तुम मेरे खास आदमी हो परेशान मत हो बड़ा भाई समझ अपना

वीर - धन्यवाद

जमींदार - सुनो

वीर - हा

जमीदार - कंडोम का डिब्बा भी ले लेना 2 पेकेट और दवा भी और जल्दी आओ कार की सीट पीछे वाली पर कवर चढ़ा लेना ।

तभी फोन कट जाता है।

इधर वीर की तीनो पत्नियां हँस रही थी।

वीर तीनो को एक एक बारी बारी देखता है और कहता है आज कुछ भी कर के किसी एक का तो होठ काट कर रहूंगा।

साक्षी - कब तक आओगे

वीर - 12

तनु - 12 मतलब 12.30 इससे लेट हुआ तो समझ लेना।

वीर हाँ कह कर निकल जाता है लेकिन वीर को कहाँ पता था आज उसकी जवानी पर बिजलियां गिरने वाली है आज वो आंखो से देखगा चूदाई किसको कहते है तभी तो 3 वाइफ संभाल सकेगा। इधर वीर के दिमाग मे किस चल रही थी जो आज उसको किसी से लेना थी।

.

.

.
 
साक्षी - कब तक आओगे

वीर - 12

तनु - 12 मतलब 12.30 इससे लेट हुआ तो समझ लेना।

वीर हाँ कह कर निकल जाता है लेकिन वीर को कहाँ पता था आज उसकी जवानी पर बिजलियां गिरने वाली है आज वो आंखो से देखगा चूदाई किसको कहते है तभी तो 3 वाइफ संभाल सकेगा। इधर वीर के दिमाग में किस चल रही थी जो आज उसको किसी से लेनी थी।

अब आगे

वीर कार ले कर निकल पड़ता है और कहता है साला जमीदार की औलाद इतना अच्छा देख रहा था तीनो को लेकिन इस मादरचोद ने कंडोम मगाने के लिए मुझे बुलाया।

वीर सीधा कार ले कर एक दवा की दुकान से कंडोम खरीद लेता है और सीधा चल पड़ता है जमीदार के घर के बाहर कार खड़ी करता है और सीधा अंदर चला जाता है।

जमीदार - आ गए बबुआ उम्मीद तो नहीं थी इतनी जल्दी आ जाओगे।

वीर उसको वो सारा समान पकड़ा देता है और जमीदार कहता है अरे वाह ये है ना काम की चीज़।

तभी वीर की नज़र ऊपर पड़ती है जहा से उसको रज्जो दिखती है जो बहुत गुस्से मे लग रही थी।

तभी जमीदार बिना कुछ बोले ऊपर चला जाता है और वीर को भी अपने साथ आने को बोलता है, थोड़ी देर बाद वो वीर को ऊपर रोक देता है और कहता है बस दो मिनट में आया तू देखना रज्जो ना आ जाए।

वीर कुछ समझ नही पाता तभी जमीदार अंदर चला जाता है

वीर तभी देखता है जमीदार अंदर चला गया जिसे देख कर वीर कहता है ये बहन का चोदा, मुझे सुबह सुबह इसलिए बुलाया अपनी छत देखने के लिए।

तभी वो बिना कुछ बोले अपनी मोबाइल चलाने लगता है तभी वीर को चिल्लाने की आवाज़ आती है।

"आआह्हह आआआआहहह मैमम्मी ईईईईई मार दोगे क्या आआआआहह्हह यार रहम करो"

"अरे यार रज्जो सुन लेगी आआआआहह रुक रुक जाओ साबर करो".

वीर ये घूर कर देखने लगता है तभी वो कहता है मन में साला जबरदस्ती चोदता है।

तभी जमीदार चमेली को छोड़ देता है और ऊपर से हट जाता है तभी चमेली फिर उसके ऊपर कुद पड़ती है और खड़े खड़े लन्ड लेने लगती है

वीर अब ये देख कर हैरान रह जाता है उसके कुछ समझ नही आ रहा था लेकिन उसको ये जरूर पता चल जाता है की चूदाई कैसे करते हैं।

तभी उसका ध्यान उसके लौड़े पर जाता है जो एक दम खड़ा हो गया था अब वीर भी जवान था उसकी साँस चढ़ गई ये देख कर।

तभी वीर की नज़र अपने बगल पर पड़ती है जहा उसको रज्जो खड़ी दिखाई देती है।

जिसको देख कर वीर डर जाता है और रज्जो अब गुस्से मे जमींदार की ओर बढ़ती है तभी वीर उसका मुंह दबा कर उसको खींचते हुए दूर ले आता है

रज्जो - तू नौकर है ना तो हद में रह

वीर - क्यों मरवा रही हो अगर उसने देख लिया तो हम दोनो के लोड़े लगा देगा और क्या कर लेंगे हम दोनो

रज्जो - तू हट मैं जान ले लुंगी उसकी, तुम सभी मर्द ऐसे होते हो हवसी

वीर - मैं ऐसा नहीं हूं समझी और अभी जा कर भी क्या कर लोगी वो कौन सा तुझसे डरता है अरे निकाल देगा तो कहा जाएगी हा।

रज्जो अब रोने लगती है और वीर उसको चुप कराता है

तभी वीर कहता है रोने से कोई फायदा नही तू अपनी जिंदगी मज़े से जियो वो कौन सा तुमको मना करेगा।

तभी रज्जो बस हाँ में सर हिला देती है और दोनो की नज़र दरवाजे पर जाती है जहा अन्दर चूदाई का प्रोग्राम मचा हुआ था।

तभी रज्जो अपने आँसू पोछती है कहती है ठीक है तुम पैसे के लिए काम करते हो तो मेरे लिए करोगे बदले मैं तुम्हें पैसे दूंगी।

वीर उसकी बात मान लेता है क्युकी उसे पैसे की जररूत थी क्युकी उसके सर पर बहुत ज़िम्मेदारी थी।
 
तभी रज्जो मन में सोचती है आज पहली बार इतने करीब होने के बाद भी कोई रज्जो पर ध्यान नहीं दे रहा, वही वीर को रज्जो के गदराए हुआ बदन में ज़रा भी झुकाव ना था उसने ना ही रज्जो के बदन को देखा ही नहीं।

रज्जो मन में कहती है अब से मैं आज़ाद हूं, तुम्हे अपने करीब भी नही आने दूंगी।

रज्जो- वीर की नियत भी सही है लेकिन जहा तक मैं जानती हूं तो मर्दों को तो भरी हुई औरते पसंद होती है==

इधर रज्जो कहती है तुम मेरे लिए काम करोगे, जमीदार की सारी जानकारी, सभी लड़कियों के बारे में किसको किस तरह चोदता है सब मुझे बताओ।

वीर उसकी बात मान जाता है और तभी रज्जो उसको पैसे दे कर चली जाती है क्युकी अब जमीदार आने वाला था।

रज्जो जाते टाइम सोचती है, अच्छा है अब मैं बताऊंगी तुमको जमींदार, तुमने मुझे बहुत समय से धोका दिया अब मेरी बारी है।

इधर वीर बाहर खड़ा था, की जमीदार उसको देखता है और कहता है चले

दोनो कार के पास आते है और तभी एक आदमी आता है और कहता है -साहब

उसकी बात सुन कर जमीदार कहता है हाँ बोलो का बात बा

"साहब हमार बहिन के शादी बिना पैसा चाहत हा, अगर तू दई देवा तो बहुत दया होई"

उसकी बात सुन कर जमीदार कहता है अरे तू जरा भी टेंशन ना लेंया हो तू आपन आदमी हा, हम अभी ही घर जा कर तुम्हारी बहिन को पैसा दे देते है

तभी वो आदमी चला जाता है।

इधर वीर और जमीदार चल पड़ते है और कार सीधा उस आदमी के घर पर रुकती है

जमीदार को देख कर उस आदमी की मां बाहर आती है और आदर सत्कार करती है।

जिसकी उम्र यही कोई 45 के आस पास थी।

जिसको देख कर जमीदार बोलता है चलो तुम्हारी बेटी मेरी बेटी है अब तुम जरा भी टेंशन मत लो बस तुम कार में चल कर बैठो, अभी चल कर पैसे दे देते है अंदर तक।

तभी वो औरत बेटी को गले लगा कर चल देती है और वीर मन में कहता है, हो गया इसका भी कल्याण

तभी वो औरत कार में बैठ जाती है और जमीदार कार में आता है और कार चल पड़ती है।

जमींदार - जरा कार के शीशे लगा दे।

वीर उसकी बात मान कर कार के शीशे लगा देता है और वो औरत जमीदार से कहती है आपका बहुत बहुत धन्यवाद साहब।

जमीदार - अरे बेटी है वो मेरी तू टेंशन मत ले

औरत बस हाँ कहती है तभी जमीदार अपनी लुंगी उतार देता है और उसका लन्ड एक दम टाइट हो जाता है।

वही ये देख कर वो औरत कहती है नही मुझे नही चहिए पैसे मुझे जाने दीजिए

इसके पहले की वो कुछ और कहती जमींदार उसकी साडी उठा कर लन्ड डाल देता है

औरत - आआआआहह्ह साहब हम का पैसा ना चाही साहब

जमींदार - अरे कुछ ना होता तू मेरी पत्नी है अगर वो मेरी बेटी है तो तू मेरी बीवी और सुन मेरी बेटी की शादी धूमधाम से होनी चाहिए कोई कमी ना आने पाए

और अब वो औरत कुछ नहीं बोलती बस चुप चाप धक्के खा कर पैसे ले कर अपने घर उतर जाती है।

और वीर उसके पैसे से भरा बैग ले कर उसके साथ चलता है

औरत - बस यही रख दो मेरा बैग

वीर पैसे दे कर चला जाता है और औरत अपने आँसू पोछती है जिसे देख कर वीर उसके आँसू पोछता है

जिसे देख कर वो अपनी साड़ी का पल्लू झटक देती है और चिल्लाते हुए कहती है तुम भी चोद लो मजबूरी का फायदा उठा ले तू भी।

तभी वीर उसका साड़ी का पल्लू सही करता है और उसके आँसू पोछता है और उसको गले लगा लेता है और कहता है मैं भी मजबूर हूं, नहीं रोक सकता था, लेकिन आपको रोता हुआ भी नहीं देख सकता, लेकिन अगर रोने से ही सब सही होता तो आज सब सही होता।

वही वीर उसका माथा सहला कर चला जाता हैं वही वीर के जाने के बाद वो औरत थोड़ी शांत हो जाती है, और आँसू पोछते हुए भी उसे हँसी आ जाती है, आज पहली बार उसे किसी ने बड़े अपनेपन से सहलाया था।

औरत - आज भी ऐसे लडके होते है वर्ना हर तरफ तो हवस के मारे भरे है

तभी उसको एक लड़की की आवाज़ आती है अरे मां।

////////////////////////////////////////////////////

इधर वीर भी जमीदार को छोड़ कर रज्जो को सब बता कर पैसे ले कर चला जाता है घर का समान ले कर।

वही आज इतनी सारी चूदाई देख कर उसका भी दिमाग हिल गया था।

इधर वीर भी जोश में घर निकल जाता है।

……………………………………………………………..
 
इधर दूसरी तरफ एक लड़की ऑफिस में बैठी थी ।

लड़की - रमेश मैं तुम्हें बर्बाद कर दूंगी लेकिन अब वीर पर कोई आंच नहीं आने दूंगी, वादा रहा मेरी छोटी बहन तुम्हारे लिए तो मैं दुनिया छोड़ दूंगी।

.

.

.
 
इधर वीर भी जोश में घर निकल जाता है।

……………………………………………………………..

इधर दूसरी तरफ एक लड़की ऑफिस में बैठी थी ।

लड़की - रमेश मैं तुम्हें बर्बाद कर दूंगी लेकिन अब वीर पर कोई आंच नहीं आने दूंगी, वादा रहा मेरी छोटी बहन तुम्हारे लिए तो मैं दुनिया छोड़ दूंगी।

अब आगे

लड़की - अंजली मेम

अंजली - क्या है

लड़की - ये हमारी इस महीने का टूर का प्रॉफिट है।

अंजलि - ठीक है

अंजली किसी को कॉल लगाती है और कहती है " पता करो रमेश कहाँ है और उसकी बेटी आज कल कहाँ रहती है"

……………………………………………..

इधर वीर भी तेजी से साँस लेते हुऐ आज जो जो उसने देखा था उससे उसका दिमाग जो हिल गया था।

तभी वो ऊपर आता है तो उसके सामने से कोई जा रहा होता है वो समझ जाता है ये उसकी ही वाइफ है।

तभी वो नज़र डालता है तो देखता ही रह जाता है।

उसकी वाइफ इतनी सजी हुई थी ऊपर से इतनी सुंदर ऊपर से गदराया हुआ बदन, ऊपर से वीर अभी भी वर्जिन वो बहक गया उसने बिना जाने समझें की वो कोन है उसने उसको पीछे से अपने बाहों में समेट लिया।

वीर ने अपने हाथ उसकी कमर पर लोक कर के, उससे पीछे से चिपक जाता है और अपने होठों को उसके पीठ पर रख देता है।

वही वीर उसकी कमर पर हाथ सहलाते हुए बोलता है आई लव यू

तभी किसी की खांसने की आवाज़ आती है।

तभी वीर को तनु धकेल देती है

जिसे देख कर निधि बोलती है ओए होए दीदी रोमांस हा।

निधि - इसी लिए आपने काव्या को तनु और साक्षी के साथ भेज दिया बाग हाँ अब आम तो एक बहाना है असली मकसद तो प्यार को पाना है क्या जीजू

तभी राखी हँसते हुआ निधि को जबरदस्ती नीचे ले कर चली जाती है।

राखी - तुम दोनो आराम करो बेटा, दामाद जी बहुत प्यारे है।

बेचारी तनु का पारा चढ़ गया ये देख कर वो गुस्से मैं वीर को देखती है जिससे वीर सहम जाता है और कहता है मत मारो वो बहुत अच्छी लग रही थी।

तनु - ऐसी हरकतें क्यो करते हो जिससे मैं मारू तुमको, कितना भी सोच लूं तुमको ना मारू, लेकिन नही बिना लात खाए दिमाग नही चलता तुम्हारा ।

वीर चुप चाप सर नीचे झुकाए सुन रहा था वो इतने प्यार से मुंह बना कर सुन रहा था ।

तनु - घर में एक बेटी है, चैन नहीं है तुम्हें कभी भी कुछ भी कर देते हो।

तनु - मूड खराब मत करो अब वर्ना सीधा सैंडल उतारूंगी, चुप चाप बोलते हो या नहीं।

वीर - क्या बोलूं

तनु - कल रात से देख रही हूं, हरकते तुम्हारी सब सच सच बोलते हो दूसरा तरीका है मेरे पास किसके साथ मुंह काला कर रहे हो।

वीर - मतलब

तनु - अब सैंडल उतारती है अपनी

तभी वीर जल्दी से कुद पड़ता है और बोलता है अरे मैने कुछ नहीं किया सच्ची मैं कल रात को बस पानी पीने उठा था तभी कुछ शोर सुना तो नीचे चला गया तो देखा राज निधि प्यार कर रहा था और फिर मैं ऊपर चला आया और आज काम पर गया तो जमीदार ने एक औरत को कार में चोदा और वो रो रही थी तभी मैं उसको चुप कराने के लिए गले लगा दिया वो मां की उम्र थी।

(एक तरफ से वीर सब कुछ बक दिया तनु को)

वीर - में अपनी बेटी की कसम खाता हूं मैं ने बस तुम्हारे और अपनी पत्नियों के अलावा किसी को भी गलत नजर से नहीं देखा।

तनु फिर उसको घूरती है

वीर - तुम्हारी कसम मेरे दिल में ज़रा भी उनको ले कर हवस नही आई ।

तनु - वो तो घर आते ही दिख रहा था।

तभी तनु वीर को पास बुलाती है।

वीर स्माइल करते हुआ जाता है उसके पास तभी तनु उसका हाथ पकड़ कर पास में गरम गरम चूल्हे से लकड़ी उठा लेती है।

ये देख कर वीर की गांड़ फट कर हाथ में आ जाती है और वो जल्दी से कुद कर बेड पर आ जाता है।

तनु - रुको बहुत देखने का नशा चढ़ा हुआ है ना उतारती हूं अभी आओ नीचे, आओ आज हग करवाती हूं बहुत दुसरे का हिम्मत देना है ना आओ दिलवाती हूं।

वीर -नहीं नहीं अब से कसम से अब नही होगा।

तनु - घर में तीन तीन को दिन भर ताड़ते हो हवशी कहीं के रुको तुम आज

वीर - रे मैं जल जाऊंगा उससे , मेरी नियत खराब नहीं थी।

तनु - नियत खराब नहीं थी तो हो जाएगी, तुमने उनको छूआ कैसे।

तनु को इतना गुस्से मे देख कर वीर की गांड़ फटी हुई थी

तनु - तुम्हारी नियत सही हो या नहीं आज के बाद किसी को भी नहीं छूना नौकरी करने भेजती हूं हिम्मत देने नहीं।

वीर - हा हा पक्का

तनु - और ये झांकने की आदत कहाँ से सीख रहे हो घर में।

वीर - अब से पक्का तुम सब के अलावा किसी को नहीं झांकुंगा मैने तो वैसे भी कुछ गलत नहीं किया।

तनु - गलत किया या नहीं किया मुझसे नहीं मतलब अब से अगर किसी और को छुआ हम तीनो के अलावा गलती से भी, तो तुम देखना क्या करती हूं मैं।

वही साक्षी अंदर आती है और उसके हाथ से लकड़ी ले लेती है और कहती है वो समझ गया।

वीर - बाहरी वाले से क्या मतलब मैं तो छूता तो छोड़ो देखता भी नहीं, मेरी खुद तीन पटाका पत्नियां है मुझे दूसरे की क्या जरुरत छुने की, मैं तो तुमसे सारी बात शेयर करता हूं।
 
वीर तभी जाने लगता है तो कहता है बाहरी को क्या छूना घर वाली को छूता हूं तो गांड़ फाड़ देती है।

तभी तनु वापिस से लड़की उठा लेती है और कहती है रुको आओ प्यार करती हूं

लेकिन वीर लकड़ी देख कर भाग जाता है बाथरूम और भागते हुए बोलता है जल्दी भाग वर्ना लोड़ा जला देगी, साले जमीदार तेरी मां की साला कुत्ता।

तनु - अरे आओ ना कपड़े उतार दूं

वही ये देख कर साक्षी हँसते हुआ लड़की छीन लेती है और और तनु के सर पर मारती है।

साक्षी - क्या करती रहती है तू।

तनु – देखा नहीं तूने उस बुढ़िया से तो मैं मिलूंगी तब बताउन्गी मेरे सीधे साधे पति को बहला रही है ना जो रुको

साक्षी हँस रही थी --अरे वो बस उसका रोना चुप करा रहा था।

तनु - मेरा पति है बस मेरा ऐसे सब का रोना चुप कराने के लिए नहीं है वो, बस हमारा रोना चुप कराए और बस हमारी डॉट खाए बस किसी और ने ये हक लेने की कोशिश की तो जान ले लुंगी।

तभी साक्षी कहती है चलो कम से कम पति तो माना तुमने।

साक्षी - तू भी अच्छी तरह जानती है, वो हम दोनो के होते हुए कही नहीं जा सकता उसके दिल पर हमारा कब्जा है।

साक्षी - भाभी वाला फिगर और थोड़ा अच्छा फेस इसी पर तो वो फिदा रहता है वैसे भी वो हम तीनो से प्यार करता है।

तनु अब खाने बनाने लग जाती है और साक्षी भी बनाने में लग जाती है।

साक्षी - तनु

तनु - अब क्या है

साक्षी - वैसे हम दोनो ऐसे साड़ी लपेट लेते है तो इससे कंट्रोल नही होता, जिस दिन सज धज जाएंगे क्या होगा।

तनु - इसी लिए जरा भी मेकअप नहीं करती, ऊपर से डर लगता है मेरी बेटी भी है इसीलिए मार भी नहीं सकती।

तभी साक्षी कहती है वैसे अब हम दोनो की लाइफ सेट हो गई है ना।

तनु - हा

तभी काव्या अंदर आती है और बोलती है मम्मी आपकी पीठ पर ये रेड रेड क्या है।

जिससे अनु देख कर हैरान रह जाती है क्युकी वो अच्छे से पहचानती थी इस निशान को ये लव बाइट का था।

तभी वीर जो अभी अभी अंदर आया था वो वापिस जाने लगता है।

अनु - वो एक चिटी ने काट लिया था इनको।

काव्या - ओ मम्मी ध्यान रखा करो ना इस चिटी ने कल बड़ी मम्मी को भी काटा था।

ये सुन कर साक्षी और तनु एक साथ अटक जाती है।।

तभी अनु बाहर चली जाती है किसी काम से।

और वीर रूम में चुप चाप बैठा था दोनो पत्नी को ताड़ रहा था अपनी।

तभी उसे किसी के डाट खाने की आवाज़ आती है जिससे वो उठ कर बाहर आता है तो देखता है सीढ़ी के पास खड़ी अनु थोड़ा उदास हो कर बैठी हुई है।

वीर पास से देखता है तो पता है उसकी आंखे नम थी।

वीर - क्या है क्यो रो रही हो आप हा

अनु आँसू पोछते हुए तुमसे मतलब मैं चाहे जो करू।

वीर - मतलब है तुम मेरी हो तुम्हे रुलाने का हक बस मेरा है आज तक तुम्हारे पति ने तुम्हे नहीं रुलाया तो किसकी हिम्मत हो गई तुम्हें रुलाने की।

अनु वीर की बात सुन कर अब थोड़ा चुप हो जाती है और कहती है मेरी सहेली की शादी है लेकिन मुझे कोई जाने नहीं दे रहा।

वीर – कोन नहीं जाने दे रहा।

अनु - कोई नही जाने देगा मैं बाहर जा रही थी तो पापा ने डाट कर ऊपर फेक दिया वापिस कहता है बाहर गई तो मुंह तोड़ दूंगा।

वीर - बाहर क्या करने जा रही हो।

अनु - तो क्या करू दिन भर दीदी लोग भी ऊब जाती है और मेरी फ्रेंड की शादी में भी नहीं जाने देंगी।

वीर - अगर मैं तुम्हे ले चलू शादी में और घूमने तो ?

अनु - सच्ची ? लेकिन तनु दीदीनहींमानेगी।

वीर - वो मैं देख लूंगा अभी चलो मेरे साथ

वीर उसको ले कर बाहर चल देता है और बाग में आ जाता है ।

जहा वो अनु का हाथ पकड़ कर चल रहा था।

और रास्ते में उसको सब देख रहा था और अब उसके पापा ने भी नहीं डाटा उसको।

वीर के साथ बाग आ कर वो बहुत खुश थी वो उछल उछल कर आम तोड़ थी और वीर उसको देख रहा था।

वीर उसके पास आ कर खड़ा हो जाता है और कहता है मुझे पता है तुम मुझसे नफ़रत करती हो शायद इस शरीर ने तुम्हारे साथ भी कुछ गलत किया लेकिन तुम उदास मत होया करो तुम हँसती हुई प्यारी लगती हो।

उसकी ये बात सुन कर अनु उसको देखती है और अब वीर उसको ले कर घर चल देता है।

अनु - इतनी जल्दी क्यों है चलने की मेरे साथ रहना तो तुम्हे जरा भी पसन्द है नही क्यों।

वीर उसको कुछ नहीं कहता है और अनु कहती है मैं सही थी तुम हो ही ऐसे हू ।

अनु - इतनी जल्दी मेरे दिल नहीं पिघलेगा।

तभी घर आ जाता है और वो दोनो खाना खाते है और वीर नोटिस करता है अब तनु उसे इग्नोर कर रही थी।

वही साक्षी हँस रही थी।

वीर - अभी भी गुस्सा है क्या

साक्षी - हाँ मना लेना रात को ।

तभी वीर कहता है बाहर घूमने चले मॉल।

साक्षी - पागल हो तुम तनु मार डालेगी

तभी वीर हँसता है और काव्या को इशारा कर देता है।

थोड़ी देर बाद...................
 
तुम्हारासाक्षी और तनु मॉल में साडी ले रहे होते है और दूसरे तरफ अनु वीर के पास खड़ी थी।

वीर - अब सुनो मेरी बात शादी कब है।

अनु - 5 दिन बाद

वीर - ठीक है तुम अच्छी सी ड्रेस ले लो

अनु और वीर ड्रेस लेने लगते है।

अनु - ये कैसी है

वीर - कलर अच्छा नहीं है।

अनु - ये

वीर - ये ठीक है

अनु - रुको मैं ट्राय कर के आती हूं।

अनु ड्रेस पहन कर आती है और जिससे वो बहुत प्यारी लग रही थी और वीर अनु के लिए बहुत सी जींस लेता है क्युकी उसे बहुत पसन्द थी।

वही अब अनु वीर को घूर रही थी उसने कभी नहींसोचा था कि वीर उसके लिया ये सब करेगा।

अनु मन में कहती है थैंक्यू वीर

वही वीर उसको खोया हुआ देख कर उसके पास आता है और कहता है क्या हुआ और कुछ चाहिए।

अनु - नहीं पागल इतना बहुत है

तभी वीर अनु के हाथों में 2000 रख देता है और कहता है मेरी वाइफ हो ये तुम्हारे खर्चे के लिया।

अब अनु की आंखे नम हो गईं आज पहली बार किसी ने उसे इतना प्यार दिया था।

वही फिर वो सीधा भाग गई सीधा साक्षी के पास।

वही साक्षी कब से देख रही थी की वीर अनु को संभाल रहा है आज साक्षी बहुत खुश थी एक तरफ आज वीर ने थोड़ा ही सही तनु के करीब आया और अब अनु के लिए इतना कुछ।

तभी वीर तनु के पास जाता है लेकिन तभी वो ट्राय रूम में चली जाती है।

और इधर से शॉपिंग कर के वो सब घर चल देते है और वीर ने सब के लिए बहुत कुछ लिया था और आते आते रात हो गई थी इसलिए उन सब ने बाहर से खाना खा लिया।

फिर आते ही काव्या सो गई और आज उसने बहुत खेला था वो बहुत खुश थी और उसकी खुशी देख कर तनु।

तभी सोने का टाइम हुआ और एकदम कोने काव्या उसके बगल तनु और फिर वीर और फिर साक्षी और अनु।

जैसे ही वीर ने देखा काव्या सो गई वीर ने तनु के पैर के ऊपर पैर लाद दिए और उसे अपनी तरफ खींच लिया।

लेकिन तनु ने जरा भी करवट नहीं लिया।

तो वीर ने धीरे से उसके बाल को सहलाया और उसको बोला नाराज हो हमसे।

तनु - नाराज़ क्यों होंगी तुमने तो बहुत अच्छा किया आज मेरी बेटी खुश है देखो सो गई।

वीर - और मेरी पत्नी खुश नहीं है क्या।

तभी वीर ने उसको पकड़ कर अपनी तरफ कर लिया, अब तनु का फेस वीर की तरफ था।

वीर - माफ कर दो अब से कभी नहीं करूंगा ऐसा पक्का।

तनु - नही जाओ सपोर्ट करो ना

वीर - प्रोमिस नहीं होगा ऐसा दुबारा मैं तो बस तुम्हारा हूं ना तुम्हारी डाट सुनुगा दिन भर और मार खाऊंगा दिन भर और ये हक तो बस तुम्हरा है।

उसकी ये बात सुन कर तनु भी हल्का हँस देती है।

तनु - अच्छा ठीक है अब सो जाओ लेकिन अब से नही होना चाहिए।

वीर - पक्का कभी नहीं होगा।

तनु वापिस अपनी बेटी को देखती है और उसे गले लगा कर लेट जाती है।

तभी वीर वापिस साक्षी को देखता है जो अनु को गले लगा कर सो रही थी।

वीर वापिस तनु को सीधा करता है और कहता है मैं तुमसे बहुत प्यार करता हुं तनु तुमने मुझे मारा पीटा मुझे फरक नही पड़ा, क्योंकि तुम जैसी भी हो मेरी हो मेरी पत्नी तुम्हरा गुस्सा भी प्यारा होता हैं ही ही ही ही

वीर - तनु

तनु - हम्म्म

वीर - मैं कोशिश कर रहा हूं तुम्हारा दिल जीतने की तुमको खुश करने की, तुम देखना तुम्हारा दिल जीत लूंगा मैं।

तनु - इतना ही प्यार था तो पहले छोड़ क्यो दिया, और अब प्यार आ रहा है जब सब बदल गया मेरी फीलिंग,

वीर - क्या सच्ची तुम्हें मुझसे प्यार नहीं है

तनु कुछ नही बोलती और करवट बदल लेती है

तभी वीर उसकी कमर पकड़ कर डरते हुआ उसके ऊपर आता है जो अब उसके ऊपर आने मात्र से काप रहा था।

वही तनु अब वीर को कटीली नज़र से देखती है।

वीर - नहीं करती प्यार मुझसे

तनु - हाँ नही करती क्यो करू तुमसे प्यार हां बंदर कही के।

वीर - मैं तुमसे प्यार करता हूं सबसे करता हूं, तुम मुझसे गुस्सा मत होया करो, मार दिया करो मुझे जब गुस्सा आया करे तो लेकिन इग्नोर करती हो तो दिल में दर्द होता है नही बर्दास्त होता।

तनु - और जो दिमाग चलाते हो आज कल ज़्यादा मुझे सब पता है समझे।

वीर - क्या मतलब

तनु - काव्या से क्या क्या कहलवाते हो ये करो वो करो कही भी चलना हो तो काव्या का सहारा ले लेते हो। और रहते रहते तुम्हारा दिमाग काम करना बंद कर देता है क्या, क्या जरुरत थी इतने पैसे खर्चे करने की मॉल में सारे पैसे लगा दिए हम सब के कपडे मैं।

वीर - मुझे अच्छा लगता है तुम सब के ऊपर खर्चा करना वैसे भी तुम्हारी स्माइल से बड़ कर थोड़ी कुछ है।
 
अब वीर तनु के उपर लेता था जिससे उसका लन्ड टाइट हो गया था लेकिन वो कुछ कह नहीं रही थी और वीर एक नज़र देखता है तो तनु सच मैं किसी चांद जैसी है रूप रंग ऊपर से उसकी चूचियां में उभार।

वीर - मेरा साथ दोगी, मेरा हाथ थामोगी, पक्का कुछ भी उल्टा सीधा नहीं करूंगा।

तनु - नहीं

वीर - हाँ कर दो ना रोज तुम्हारे पैर दबा दिया करूंगा।

वही तनु उसकी बात सुन कर मन ही मन हँस देती है और ना चाहते हुए भी उसके होठ खिल उठते है नन्ही सी स्माइल के साथ, जो तनु वीर को नही दिखाना चाहती थी इसलिए वो अपना सर पलट देती है दूसरी तरफ।

लेकिन वीर ने देख लिया और कहता है धीरे से ओय मेरी बच्चो की मम्मी आपकी स्माइल बहुत लाजवाब है।

तनु की स्माइल बड़ी हो जाती है अब वीर उसके ऊपर चढ़ कर उसको छेड़ रहा था, जिसे वो ना चाहते हुए भी बहुत पसन्द आ रही थी।

तनु वही मन में वो सब बात याद करती है की जब वो वीर को डाट देती थी, तो भी वो चुप चाप सुनता रहता है हमेशा उसकी डाट सुन लेता है एक बार भी नज़र ऊपर कर के नहीं देखता है, उसका चुपके चुपके उसे घूरना उसकी डाट और मार के बाद भी वो बस तनु को प्यार की नज़र से ही देखता।

वही ये सब सोच कर उसकी स्माइल बड़ी जा रही थी और वीर को देखती है जो उसकी स्माइल को बस प्यार से देख रहा था उसे।

वीर - क्या तुम मुझसे नफ़रत करती हो।

तनु - पहले तुमने मेरे साथ

वीर उसके मुंह पर हाथ रख देता है और कहता है मत याद करो उसे मुझे खुद वो सब बात याद नहीं क्या पता मैं कोई दूसरा शख्स हूं, वो कहानी तो खत्म हो चुकी है उसे सोच कर मूड मत खराब करो अपना बहुत मेहनत करी है मैने ये स्माइल वापिस लाने मैं।

और जब वो हाथ हटाता है तो तनु कहती है मेहनत कैसी मेहनत हाँ

वीर - क्यो हरदम मार खाता रहता हूं तब जा कर अपनी तनु की हँसी देखी है मैने, और वैसे भी सुबह तो जलने वाला था मैं।

वीर की बात सुन कर फिर ना चाहते हुए भी तनु का चेहरा खिल जाता है और धीरे से कहती है अच्छा ठीक है नहीं सोचती वो सब बात।

वीर - ही ही ही तो आपको हमसे प्यार हो गया ना

तनु - गधे ऐसे ही मार खाओ, फिर सोचूंगी।

वीर अब ना चाहते हुए भी तनु को देखता है उसकी कमर उसके चूंचे अब बेचारा के नीचे इतनी प्यारी वाइफ हो तो कोन नही बहकेगा।
 
वीर की बात सुन कर फिर ना चाहते हुए भी तनु का चेहरा खिल जाता है और धीरे से कहती है अच्छा ठीक है नहीं सोचती वो सब बात।

वीर - ही ही ही तो आपको हमसे प्यार हो गया ना

तनु - गधे ऐसे ही मार खाओ, फिर सोचूंगी।

वीर अब ना चाहते हुए भी तनु को देखता है उसकी कमर उसके चूंचे अब बेचारा के नीचे इतनी प्यारी वाइफ हो तो कोन नही बहकेगा।

वीर धीरे धीरे उसके होठ की ओर बढ़ने लगता है लेकिन तनु उसको रोक देती है और कहती है मैने तुम्हे थोड़ा क्या भाव दिया तुम तो सर पर चढ़े जा रहे हो हा, मैने कब कहा कि मेरे दिल पिघल गया।

वीर तेजी से साँस लेते हुआ कहता है प्लीज़ मैं जानता हूं तुम्हरा दिल भी प्यार करता है

तनु - बड़े आए मेरे दिल की जानने वाले

वीर - करती हो ना प्यार मुझसे

तनु - रात को तुम्हे क्या हो जाता है दिन भर तो चुप चाप सर झुकाए रहते हो और रात को हरकतें देखो अपनी।

वीर - में क्या करू ऐसा की तुम्हे मुझसे प्यार हो जाए तुम्हारा दिल पिघल जाए, तुम्हारी हँसी वापिस आ जाए।

वही ये सुन कर तनु हँस देती है और कहती है बस करो सब जाग गए अगर तो मैं बहुत मारूँगी कसम से कह रही हूँ।

तनु का दिल भी जानता था की अब वो कितनी खुश रहने लगी है।

तभी वीर फिर आगे आता है और तनु फिर रोक देती है।

वीर अब उदास हो जाता है और चुप चाप ऊपर से हट जाता है।

तनु ये देख कर बहुत हँसती है और उसकी हँसी रुक ही नहीं रही थी वो किसी तरह अपनी हँसी रोकती है और वीर की सारी बात याद करती है जो उसे बहला रहा था उसे मना रहा था।

तनु मन में कहती है प्यार करते हो ना मुझसे गधे और फिर वो हँसती रहती है तभी वो कहती है वैसे झूठ भी नहीं कह रहा था थोड़ा ही सही लेकिन प्यार तो है।

तनु अपनी बेटी को देखती है जो बहुत गहरी नींद में सोई थी और वो कहती है अब सब अच्छा चल रहा है अब आदत डालनी पड़ेगी ऐसे ही खुशी की।

तनु वापिस से वीर की तरफ मुंह करती है और उसे अपनी तरफ मुंह करने को कहती है

तनु - उदास मत हो एक बात बताऊं

वीर - हा

तनु - मैने ये नहीं कहा की प्यार करती हुं लेकिन मैने ये भी नही कहा की प्यार नहीं करती हुं।

वीर इतना सुनता ही पागल हो गया लेकिन उसने कंट्रोल रखा तो वापिस तनु ने बोला अब मैं बहुत खुश हूं तुम्हारे वजह से।

वीर - तो मुझे एक्सेप्ट करने में क्या दिक्कत है

तनु फिर हँसती है अच्छा बच्चू मेरा मन नहीं है जो दिन भर उठ पटांग हरकतें करते हो इसीलिए बहक रहे हो क्यो करते हो ऐसी हरकते ।

वीर - बस थोड़ा सा

तनु - अच्छा ठीक है प्यार है तुमसे तुम बहुत प्यारे हो बस

वीर - बस एक किस करने दोगी

तनु - वादा करो उससे आगे नहीं बढ़ोगे

वीर - वादा

तनु - किसी और की तरफ़ नहीं देखोगे

वीर - पक्का बस तुम तीनो को देखूंगा

तनु - ठीक है फिर एक किस कर लो

तनु का इतना सुनते ही वीर उसके ऊपर कुद पड़ा और उसके होंठो मैं होठ मिला दिया और काटने लगा पहली बार अपनी वाइफ को थोड़ा ही सही प्यार कर रहा था इसीलिए खुश था।

वीर तनु के होंठो को चूम रहा था काट रहा था उसे बहुत प्यार आ रहा था तनु पर।

तनु - उम्मम्म्म उम्म्म

तनु फिर वीर को हटा देती है जिससे वीर का मुंह बच्चे जैसा हो गया जैसे वीर का पसंदीदा चीज छीन लिया गया हो।
 
तनु - पागल हो क्या खा जाओगे 1 घंटा हो गया है हटो मेरे ऊपर से और तुम्हारे हाथ कहाँ है ।

वीर - जल्दी से अपना हाथ उसकी चूची पर से हटा लेता है

वीर - मेरी नियत जरा भी खराब नहीं थी।

तनु - अच्छा तो मुझे गड़ क्या रहा है नीचे

ये सुन कर वीर के गाल ही लाल हो गए था।

तनु - हटो अब एक ही बात हुई थी।

वीर - क्या एक ही किस बस और अब मैं कभी नहीं कर सकता

तनु - नहीं कभी नहीं।

वीर वापिस उदास हो जाता है और तनु हँस रही थी।

तभी तनु बहुत देर तक हँसी फिर वापिस से कहती है अच्छा सुनो

वीर - हा

तनु - आई लव यू, अब खुश हाँ प्यार करती हूं तुमसे बहुत ज्यादा तुम्हारे आने से सब बदल गया। एक दिन मैं तो प्यार जाग नही जाएगा, एक दिन मैं इतना क्लोज आई बात की ये काफी नहीं है क्या।

वीर अब खुश हो जाता है और तनु फिर बोलती है याद रहे मैने बस एक किस बोला था।

वीर - और आगे का

तनु ये सुन कर गुस्सा हो जाती है और कहती है क्या आगे का जरा बोलो तो

वीर अब चुप हो जाता है तभी तनु कहती है अब सो जाओ जरा भी इधर उधर का ख्याल आया तो जान ले लुंगी समझे हवशी कही के।

वही वीर अब सो जाता है और तनु वापिस पलट कर देखती है उसे तो हँसी आ जाती है और कहती है कमीने ने प्यार तो करवा दिया।

तनु - साक्षी सही कहती थी प्यार तो खुद बा खुद हो जाएगा अब इतनी मार खा कर भी केयर करेगा तो आएगा ही ना।

तनु - कमीना कही का पूरा होठ दर्द कर रहे है किस कम किया लेकिन काट डाला पूरा।

वीर बहुत खुश था उसके लाइफ की फर्स्ट किस जो मिली थी तनु से।

वीर - तनु को पहले जैसा खुश कर दिया धीरे धीरे ही सही वो एक दम खुश रहने लगेगी।

इधर तनु ये सुन कर स्माइल करती है तनु भी जान रही थी वीर क्या चाह रहा है और वो मन में कहती है ऐसे ही नही होगा वीर बहुत प्यार जताना पड़ेगा बहुत मेहनत करवाऊंगी लेकिन प्रोमिस अगर तुम दिल जीत लिया तो पक्का खुद साडी उतारूंगी और किस करना भी सिखाऊंगी, और वादा तुम्हारी साक्षी को भी तैयार कर दूंगी।

इधर तभी तनु को वापिस वीर बुलाता है

तनु - अब क्या है

वीर कुछ नही बोलता बस उसके सीने पर अपना सर रख कर लेट जाता है और कब भी तनु सो गई उसे पता ही नहीं चला

.

.

..

.

.

.
 
Back
Top