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अपडेट 65
मंडे सुबह मैं उठा नहाया धोया तय्यार हुआ किताब सब अपने बॅग में रक्खा और नीचे हॉल में गया
बड़े मामा और छोटे मामा डिन्निंग टेबल पे बैठे थे
मैं भी जाके बैठ गया
बड़े मामा- दिलीप कल सुबह से तुम लखन के साथ अखाड़े में जाओगे
दिलीप- जी
बड़ी नानी मेरे लिए नाश्ता लेके आगयि
मैं नाश्ता किया और पूछा वँया कहाँ है
बड़ी नानी- वो तो चली गयी स्कूल
फिर मैं बाहर आया और पैदल ही चल दिया स्कूल
10 मिनिट लग गया स्कूल पहुँचने में
मैं अपनी क्लास पहुँचा और अपनी बेंच पे जाके बैठ गया
सब स्टूडेंट्स मुझे घूर्ने लगे
मेरे साथ में एक लड़का बैठा था
रवि यह सब मुझे क्यूँ घूर रहे हैं
रवि- 2 हफ्ते से ज़्यादा हो गया तुम स्कूल ही नही आए
दिलीप- तो इसमें घूर्ने वाली कौनसी बात है
रवि- अगले महीने से फाइनल एग्ज़ॅम्स हैं
दिलीप- क्या पर एग्ज़ॅम्स तो 2 महीने बाद होने वाले थे ना
रवि- वो मुझे नही पता
रवि- तुझे अगर मेरे नोट्स चाहिए तो ले लेना
दिलीप- अपनी हॅंडराइटिंग देख ऐसा लगता है कि किसी दानव ने लिखने की कोशिश की हो
फिर टीचर आगये पढ़ा कर चले भी गये
कुछ दिमाग़ में नही घुसा
एक लड़की मेरे पास आई
दीपा- दिलीप तुम्हे नोट्स चाहिए तो मुझसे ले लेना
दिलीप- 17 दिनो के नोट्स चाहिए
दीप्ति- कल सुबह दे दूँगी
दिलीप- फिर तुम्हारी पढ़ाई का क्या होगा
दीप्ति- अरे बुद्धू मार्केट जाके मेरे नोट्स की कॉपी करवा लेना
दिलीप- ठीक है
रवि- भाई कुछ ज़्यादा ही करीबी नही हो रही है
दिलीप- तू बहुत जानता है उसे
रवि- बहुत चालू लड़की है कितने लड़को का ले चुकी है
दिलीप- फिर भी पिछले साल 3र्ड आई थी
रवि- यही तो मुझे समझ नही आता
दिलीप- मुझे क्या है मुझे सिर्फ़ उसके नोट्स से मतलब है
फिर टीचर्स आते गये पढ़ाते गये
मैं बैठा रहा
थोड़ी देर बाद एक लड़का आके बोला प्रिन्सिपल ने बुलाया है
मैं गया प्रिन्सिपल ऑफीस मैने जैसे ही गेट खोला
रीना मेडम कुर्सी पे बैठी थी
रीना मेडम आप
रीना- हाँ
आशा देवी ने मुझे अब स्कूल का प्रिन्सिपल बना दिया है
दिलीप- यह तो आपके लिए बहुत अच्छा हुआ
मैं बैठ गया
रीना मेडम- दिलीप तुमने मेरी मदद क्यूँ की
दिलीप- मन किया तो कर दिया
रीना मेडम- मतलब तुम्हे मुझसे कुछ नही चाहिए
दिलीप- कुछ नही चाहिए
रीना मेडम- पर मैं तुम्हे कुछ देना चाहती हूँ
दिलीप- क्या
रीना मेडम- वही जो प्रिंसीपल मेरी मजबूरी का फ़ायदा उठाके भी ना पा सका
दिलीप- मैं कुछ समझा नही
रीना मेडम ने मुझे एक लेटर दिया
रीना मेडम- यह यहाँ से जाने के बाद पढ़ना
दिलीप- मैने वो लेटर अपनी पॅंट की जेब में रक्खा और क्लास में आगया
थोड़ी देर बाद छुट्टी होगयि
मैं स्कूल से तालाब की तरफ चल दिया
थोड़ी देर बाद मैं तालाब पे पहुँचा
मैने अपनी जेब से लेटर निकाला
लेटर
प्यारे दिलीप
मेरी मजबूरी का फ़ायदा उठाके प्रिंसीपल ने मेरी इज़्ज़त लूट ली
मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूँ
तुमने प्रिंसीपल से ना मेरी इज़्ज़त बचाई है
और ना ही तुमने मेरी जान बचाई है
तुमने मेरी और मेरे पति की जिंदगी बचाई है
मेरा बस चलता तो मैं तुम्हारे लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देती
पर मैं किसी की बीवी हूँ
तुम यह मत समझना कि मैं तुम्हे ग़लत समझ रही हूँ
लेकिन तुम मेरी जिंदगी का एक दिन मुझसे कभी भी माँग सकते हो
मैं यह इसलिए नही कह रही हूँ कि तुमने मेरी मदद की है
मैने जिससे प्यार किया
उसी से मैने शादी की
जिस दिन तुम मेरे घर आए उस दिन से आज तक मैं तुम्हारे बारे में ही सोचती हूँ
तुम ऐसा समझ सकते हो कि मैं खुद तुमसे प्यार करना चाहती हूँ
अगर मैं शादी शुदा नही होती
तो मैं खुद तुमसे कहती कि तुम मुझे प्यार करो
उम्मीद है कि तुम मेरी बात समझोगे
और मुझसे गुस्सा नही होगे
दिलीप- मैने वो लेटर फाड़के तलब में फेंक दिया
थोड़ी देर बाद मैं घर पहुँचा.,..,..
मंडे सुबह मैं उठा नहाया धोया तय्यार हुआ किताब सब अपने बॅग में रक्खा और नीचे हॉल में गया
बड़े मामा और छोटे मामा डिन्निंग टेबल पे बैठे थे
मैं भी जाके बैठ गया
बड़े मामा- दिलीप कल सुबह से तुम लखन के साथ अखाड़े में जाओगे
दिलीप- जी
बड़ी नानी मेरे लिए नाश्ता लेके आगयि
मैं नाश्ता किया और पूछा वँया कहाँ है
बड़ी नानी- वो तो चली गयी स्कूल
फिर मैं बाहर आया और पैदल ही चल दिया स्कूल
10 मिनिट लग गया स्कूल पहुँचने में
मैं अपनी क्लास पहुँचा और अपनी बेंच पे जाके बैठ गया
सब स्टूडेंट्स मुझे घूर्ने लगे
मेरे साथ में एक लड़का बैठा था
रवि यह सब मुझे क्यूँ घूर रहे हैं
रवि- 2 हफ्ते से ज़्यादा हो गया तुम स्कूल ही नही आए
दिलीप- तो इसमें घूर्ने वाली कौनसी बात है
रवि- अगले महीने से फाइनल एग्ज़ॅम्स हैं
दिलीप- क्या पर एग्ज़ॅम्स तो 2 महीने बाद होने वाले थे ना
रवि- वो मुझे नही पता
रवि- तुझे अगर मेरे नोट्स चाहिए तो ले लेना
दिलीप- अपनी हॅंडराइटिंग देख ऐसा लगता है कि किसी दानव ने लिखने की कोशिश की हो
फिर टीचर आगये पढ़ा कर चले भी गये
कुछ दिमाग़ में नही घुसा
एक लड़की मेरे पास आई
दीपा- दिलीप तुम्हे नोट्स चाहिए तो मुझसे ले लेना
दिलीप- 17 दिनो के नोट्स चाहिए
दीप्ति- कल सुबह दे दूँगी
दिलीप- फिर तुम्हारी पढ़ाई का क्या होगा
दीप्ति- अरे बुद्धू मार्केट जाके मेरे नोट्स की कॉपी करवा लेना
दिलीप- ठीक है
रवि- भाई कुछ ज़्यादा ही करीबी नही हो रही है
दिलीप- तू बहुत जानता है उसे
रवि- बहुत चालू लड़की है कितने लड़को का ले चुकी है
दिलीप- फिर भी पिछले साल 3र्ड आई थी
रवि- यही तो मुझे समझ नही आता
दिलीप- मुझे क्या है मुझे सिर्फ़ उसके नोट्स से मतलब है
फिर टीचर्स आते गये पढ़ाते गये
मैं बैठा रहा
थोड़ी देर बाद एक लड़का आके बोला प्रिन्सिपल ने बुलाया है
मैं गया प्रिन्सिपल ऑफीस मैने जैसे ही गेट खोला
रीना मेडम कुर्सी पे बैठी थी
रीना मेडम आप
रीना- हाँ
आशा देवी ने मुझे अब स्कूल का प्रिन्सिपल बना दिया है
दिलीप- यह तो आपके लिए बहुत अच्छा हुआ
मैं बैठ गया
रीना मेडम- दिलीप तुमने मेरी मदद क्यूँ की
दिलीप- मन किया तो कर दिया
रीना मेडम- मतलब तुम्हे मुझसे कुछ नही चाहिए
दिलीप- कुछ नही चाहिए
रीना मेडम- पर मैं तुम्हे कुछ देना चाहती हूँ
दिलीप- क्या
रीना मेडम- वही जो प्रिंसीपल मेरी मजबूरी का फ़ायदा उठाके भी ना पा सका
दिलीप- मैं कुछ समझा नही
रीना मेडम ने मुझे एक लेटर दिया
रीना मेडम- यह यहाँ से जाने के बाद पढ़ना
दिलीप- मैने वो लेटर अपनी पॅंट की जेब में रक्खा और क्लास में आगया
थोड़ी देर बाद छुट्टी होगयि
मैं स्कूल से तालाब की तरफ चल दिया
थोड़ी देर बाद मैं तालाब पे पहुँचा
मैने अपनी जेब से लेटर निकाला
लेटर
प्यारे दिलीप
मेरी मजबूरी का फ़ायदा उठाके प्रिंसीपल ने मेरी इज़्ज़त लूट ली
मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूँ
तुमने प्रिंसीपल से ना मेरी इज़्ज़त बचाई है
और ना ही तुमने मेरी जान बचाई है
तुमने मेरी और मेरे पति की जिंदगी बचाई है
मेरा बस चलता तो मैं तुम्हारे लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देती
पर मैं किसी की बीवी हूँ
तुम यह मत समझना कि मैं तुम्हे ग़लत समझ रही हूँ
लेकिन तुम मेरी जिंदगी का एक दिन मुझसे कभी भी माँग सकते हो
मैं यह इसलिए नही कह रही हूँ कि तुमने मेरी मदद की है
मैने जिससे प्यार किया
उसी से मैने शादी की
जिस दिन तुम मेरे घर आए उस दिन से आज तक मैं तुम्हारे बारे में ही सोचती हूँ
तुम ऐसा समझ सकते हो कि मैं खुद तुमसे प्यार करना चाहती हूँ
अगर मैं शादी शुदा नही होती
तो मैं खुद तुमसे कहती कि तुम मुझे प्यार करो
उम्मीद है कि तुम मेरी बात समझोगे
और मुझसे गुस्सा नही होगे
दिलीप- मैने वो लेटर फाड़के तलब में फेंक दिया
थोड़ी देर बाद मैं घर पहुँचा.,..,..