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StoryPublisher
Guest
अपडेट 70
दिलीप- मैं उसे अपनी बाहो में खींच लिया
और उसके होंठो पे अपने होंठ रखके चूसने लगा
तभी एक थप्पड़ मेरे गाल पे पड़ा
मैं होश में आया
मेरे सामने अरुणा दी खड़ी थी
मन किया कि अपना सर दीवार में दे मारु
वो इतने ही पे नही रुकी..
मुझे थप्पड़ मारती गयी
मैं थप्पड़ खाता रहा
जैसे ही अरुणा दी ने मुझे अगला थप्पड़ मारा उनका हाथ मेरी आँखो को छु कर निकल गया
सच में बहुत दर्द होने लगा
मैं अरुणा दी को गेट पर से हाथ पकड़के खींचा
और जल्दी से गेट बंद किया
गेट बंद करते ही मेरी चीख निकल गयी
मेरी आँख खुल ही नही रही थी
लगातार मेरी आँख से पानी बह रहा था
तभी अरुणा दी दौड़के मेरे पास आई
और अपने दुपट्टे में फूँक मारके मेरी आँख पे लगाने लगी
थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद मेरी आँख खुली
मैं देखा कि अरुणा दी रो रही थी
मैने अरुणा दी को गले लगा लिया
दिलीप- आप क्यूँ रो रही हैं ग़लती तो मेरी थी मुझे ऐसा नही करना चाहिए था
आप मुझे कभी माफ़ मत करना मैने ग़लती ही ऐसी की है आप चाहो तो और मार लो
अरुणा- हाँ हाँ मैं तुझे कभी माफ़ नही करूँगी
अरुणा दी गेट खोलके बाहर चली गयी
मैं अपने कपड़े बदला
और नीचे हॉल में गया बड़ी नानी के पास
बड़ी नानी- दिलीप यह क्या हुआ तेरी आँख को
दिलीप- कुछ नही मुँह पे पानी मार रहा था तो हाथ लग गया मैं विनय के घर जा रहा हूँ बहुत दिन हो गये उससे मिला नही
बड़ी नानी- शाम तक आ जाना
फिर मैं पैदल ही चल दिया गाओं की ओर
थोड़ी देर बाद पहुँचा विनय के घर
मैने बाहर से आवाज़ दिया
कोई बाहर नही आया
मैं अंदर गया आँगन में कोई नही था
फिर मैं किचेन में गया वहाँ भी कोई नही था
बेडरूम और बाथरूम में मैं जा नही सकता था
सोचा बिम्ला के यहाँ जाता हूँ
मैने बिम्ला के घर का गेट नॉक किया
बिम्ला ने गेट खोला
मैं अंदर गया
दिलीप- कैसी हो काकी
बिम्ला- कैसी रहूंगी आप बताइए आप कैसे हैं
और यह आप की आँख को क्या हुआ
दिलीप- कुछ नही एक कप चाइ पिला दो
बिंला- आप मेरे घर की चाइ पिएँगे
दिलीप- नही पिलाना है तो सॉफ मना करदो
बिम्ला- मैं तो कब से तय्यार पिलाने को आप ही नही पीते हैं
दिलीप- पिलाओगी तब तो पियुंगा
बिम्ला- अभी बनाके लाती हूँ
बिम्ला किचन की तरफ जाने लगी
मैं उसकी गान्ड को घूर्ने लगा
वैसे मेरी नज़र ऐसी नही है
पर मेरे लंड को कौन समझाए
मैं अगर बिम्ला को कहूँ कि मुझे तुम्हे चोदना है तो वो मना नही करेगी
क्यूंकी उसके चूत में आग लगी हुई
पर मैं कोई सेक्स का भूखा भेड़िया तो हूँ नही
ऐसी आग लगाउन्गा कि खुद मुझसे आके कहेगी
बिम्ला- [ज़ोर्से] छोटे मालिक
दिलीप- मैं किचन में गया
बिम्ला- वो चीनी का डब्बा उपर है आप उतार देंगे
दिलीप- [जहाँ पे बिम्ला खड़ी थी ठीक वही उपर में डब्बा रखा हुआ था]
मैं बिम्ला के पीछे खड़ा हो गया
और डब्बा उतारने लगा
मैं थोड़ा और आगे बढ़ा
जिससे मेरा लंड बिम्ला की गान्ड को टच हो गया
बिम्ला- आह
दिलीप- क्या हुआ
बिम्ला- कक्कुच्छ नही
दिलीप- कितना उपर रखा है यह कहते हुए मैं बिम्ला से पूरा सटके खड़ा हो गया अब मेरा लंड पूरी तरह बिम्ला की गान्ड पे घिस रहा था मैं अपने जिस्म को इधर उधर करने लगा जिससे मेरा लंड बिम्ला की गान्ड पे आगे पीछे होने लगा
दिलीप- बिम्ला आप थोड़ा सा झुको मेरा हाथ नही पहुँच रहा है
बिम्ला बिना देरी किए झुक गयी
मैं डब्बा उतारते हुए बिम्ला की गान्ड पे धक्के लगाने लगा
दिलीप- आप थोड़ा और झुको
अब बिम्ला पूरी झुक चुकी थी
मेरे हाथ में डब्बा आ गया
मैने डब्बा को आगे धकेल दिया
अब मैने अपने धक्के लगाने की गति को तेज़ कर दिया
बिम्ला- अयाया ऊवू आआआः
दिलीप- क्या काकी आपने डब्बा कितना उपर रक्खा है
यह कहके मैने थोड़ा ज़ोर से धक्का मार दिया
बिम्ला- म्मैइन क्या क्क्हु अया
दिलीप- 10 मिनट तक मैं अपना लंड बिम्ला की गान्ड पे घिसता रहा
बिंला- अयाया ऊवू उम्म्म्मम
दिलीप- मैं समझ गया कि काकी झड गयी हैं
मैने डब्बा उतार दिया
और किचन से बाहर आ गया
थोड़ी देर बाद बिम्ला चाइ बनाके ले आई मैने चाइ पिया और बिम्ला के घर से बाहर आ गया
फिर चल दिया अपने घर.,.
दिलीप- मैं उसे अपनी बाहो में खींच लिया
और उसके होंठो पे अपने होंठ रखके चूसने लगा
तभी एक थप्पड़ मेरे गाल पे पड़ा
मैं होश में आया
मेरे सामने अरुणा दी खड़ी थी
मन किया कि अपना सर दीवार में दे मारु
वो इतने ही पे नही रुकी..
मुझे थप्पड़ मारती गयी
मैं थप्पड़ खाता रहा
जैसे ही अरुणा दी ने मुझे अगला थप्पड़ मारा उनका हाथ मेरी आँखो को छु कर निकल गया
सच में बहुत दर्द होने लगा
मैं अरुणा दी को गेट पर से हाथ पकड़के खींचा
और जल्दी से गेट बंद किया
गेट बंद करते ही मेरी चीख निकल गयी
मेरी आँख खुल ही नही रही थी
लगातार मेरी आँख से पानी बह रहा था
तभी अरुणा दी दौड़के मेरे पास आई
और अपने दुपट्टे में फूँक मारके मेरी आँख पे लगाने लगी
थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद मेरी आँख खुली
मैं देखा कि अरुणा दी रो रही थी
मैने अरुणा दी को गले लगा लिया
दिलीप- आप क्यूँ रो रही हैं ग़लती तो मेरी थी मुझे ऐसा नही करना चाहिए था
आप मुझे कभी माफ़ मत करना मैने ग़लती ही ऐसी की है आप चाहो तो और मार लो
अरुणा- हाँ हाँ मैं तुझे कभी माफ़ नही करूँगी
अरुणा दी गेट खोलके बाहर चली गयी
मैं अपने कपड़े बदला
और नीचे हॉल में गया बड़ी नानी के पास
बड़ी नानी- दिलीप यह क्या हुआ तेरी आँख को
दिलीप- कुछ नही मुँह पे पानी मार रहा था तो हाथ लग गया मैं विनय के घर जा रहा हूँ बहुत दिन हो गये उससे मिला नही
बड़ी नानी- शाम तक आ जाना
फिर मैं पैदल ही चल दिया गाओं की ओर
थोड़ी देर बाद पहुँचा विनय के घर
मैने बाहर से आवाज़ दिया
कोई बाहर नही आया
मैं अंदर गया आँगन में कोई नही था
फिर मैं किचेन में गया वहाँ भी कोई नही था
बेडरूम और बाथरूम में मैं जा नही सकता था
सोचा बिम्ला के यहाँ जाता हूँ
मैने बिम्ला के घर का गेट नॉक किया
बिम्ला ने गेट खोला
मैं अंदर गया
दिलीप- कैसी हो काकी
बिम्ला- कैसी रहूंगी आप बताइए आप कैसे हैं
और यह आप की आँख को क्या हुआ
दिलीप- कुछ नही एक कप चाइ पिला दो
बिंला- आप मेरे घर की चाइ पिएँगे
दिलीप- नही पिलाना है तो सॉफ मना करदो
बिम्ला- मैं तो कब से तय्यार पिलाने को आप ही नही पीते हैं
दिलीप- पिलाओगी तब तो पियुंगा
बिम्ला- अभी बनाके लाती हूँ
बिम्ला किचन की तरफ जाने लगी
मैं उसकी गान्ड को घूर्ने लगा
वैसे मेरी नज़र ऐसी नही है
पर मेरे लंड को कौन समझाए
मैं अगर बिम्ला को कहूँ कि मुझे तुम्हे चोदना है तो वो मना नही करेगी
क्यूंकी उसके चूत में आग लगी हुई
पर मैं कोई सेक्स का भूखा भेड़िया तो हूँ नही
ऐसी आग लगाउन्गा कि खुद मुझसे आके कहेगी
बिम्ला- [ज़ोर्से] छोटे मालिक
दिलीप- मैं किचन में गया
बिम्ला- वो चीनी का डब्बा उपर है आप उतार देंगे
दिलीप- [जहाँ पे बिम्ला खड़ी थी ठीक वही उपर में डब्बा रखा हुआ था]
मैं बिम्ला के पीछे खड़ा हो गया
और डब्बा उतारने लगा
मैं थोड़ा और आगे बढ़ा
जिससे मेरा लंड बिम्ला की गान्ड को टच हो गया
बिम्ला- आह
दिलीप- क्या हुआ
बिम्ला- कक्कुच्छ नही
दिलीप- कितना उपर रखा है यह कहते हुए मैं बिम्ला से पूरा सटके खड़ा हो गया अब मेरा लंड पूरी तरह बिम्ला की गान्ड पे घिस रहा था मैं अपने जिस्म को इधर उधर करने लगा जिससे मेरा लंड बिम्ला की गान्ड पे आगे पीछे होने लगा
दिलीप- बिम्ला आप थोड़ा सा झुको मेरा हाथ नही पहुँच रहा है
बिम्ला बिना देरी किए झुक गयी
मैं डब्बा उतारते हुए बिम्ला की गान्ड पे धक्के लगाने लगा
दिलीप- आप थोड़ा और झुको
अब बिम्ला पूरी झुक चुकी थी
मेरे हाथ में डब्बा आ गया
मैने डब्बा को आगे धकेल दिया
अब मैने अपने धक्के लगाने की गति को तेज़ कर दिया
बिम्ला- अयाया ऊवू आआआः
दिलीप- क्या काकी आपने डब्बा कितना उपर रक्खा है
यह कहके मैने थोड़ा ज़ोर से धक्का मार दिया
बिम्ला- म्मैइन क्या क्क्हु अया
दिलीप- 10 मिनट तक मैं अपना लंड बिम्ला की गान्ड पे घिसता रहा
बिंला- अयाया ऊवू उम्म्म्मम
दिलीप- मैं समझ गया कि काकी झड गयी हैं
मैने डब्बा उतार दिया
और किचन से बाहर आ गया
थोड़ी देर बाद बिम्ला चाइ बनाके ले आई मैने चाइ पिया और बिम्ला के घर से बाहर आ गया
फिर चल दिया अपने घर.,.