दिलीप- वैसे विदू की बात सही भी थी अब अगर बड़ी मामी को मनाना है तो एक ऐसा आइडिया सोचना पड़ेगा जिससे बड़ी मामी ही नही सब नई मामी को अपना लें
[वँया का रूम]
[वँया अपने रूम में इधर से उधर गुस्से में चले जा रही थी]
वँया- बेवकूफ़ गधा कही का समझता क्या है अपने आपको मुझसे पूछा भी नही मैं क्या मना कर देती एक नंबर का गधा है गधा मैं अगर बोली क़ि मुझसे बात मत करना तो क्या सच में मुझसे बात नही करेगा उपर से बिना किसी से बात किए उपर चला गया पर है तो मेरा राजकुमार सबसे अच्छा तभी तो मैं सबको उसके लिए मनाई अपनी कसम देके घूमने जाने के लिए और तो और पापा से भी पर्मिशन ले ली और सबको यह भी बोल दी कि आप अगर दिलीप को बताएँगी कि आप सब मेरे कहने पे उसके साथ शहर घूमने जा रही हैं तो वो सोचेगा कि आप सब उससे प्यार नही करती बड़ी दादी तुरंत हाँ कह दी
देखना अगर मुझे लेने आया तो मैं जाउन्गी ही नही
सच में नही जाउ
और नही तो क्या
नही मैं जाउन्गी
वो बुलाने आएगा तो मैं ज़रूर जाउन्गी
मेरा प्यारा दिलीप
[दिलीप का रूम]
कोई गेट नॉक करने लगा
मैने गेट खोला तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी
बड़ी नानी बड़ी मामी किरण मौसी सब मुस्कुरा रही थी
बड़ी नानी- बेटा अभी तक तू तय्यार नही हुआ
दिलीप- किस लिए
बड़ी मामी- क्यूँ हमे घुमाने नही ले जाएगा
दिलीप- 2 मिनिट में रेडी होता हूँ
फिर तो मैं इतनी जल्दी तय्यार हुआ कि वर्ल्ड रेकॉर्ड बन जाता
सबसे जल्दी कपड़े बदलने वाला इंसान
जब मैं नीचे पहुँचा
तो तीनो मेरा इंतेज़ार कर रही थी
लेकिन वँया नही दिखी
दिलीप- मामी वँया कहाँ है
बड़ी मामी- रूको मैं देखती हूँ
दिलीप- आप रुकिये मैं देखता हूँ
मैं उपर आ गया डर भी लग रहा था
कि कही और ज़्यादा नाराज़ हो गयी तो
लेकिन मैं बेवकूफ़
वँया के रूम का गेट नॉक किया
वँया गेट खोलके मुझे देखने लगी
फिर अपना मुँह फेर ली
मैं अंदर गया अलमारी खोला
वँया का मुँह खुला का खुला रह गया
मैं सभी कपड़ों में वो ड्रेस ढूँडने लगा
जो वँया मेरी पसंद का ली थी
आख़िर के वो ड्रेस मुझे मिल गयी
मैं वो ड्रेस निकालके बेड पे रख दिया
और वँया के स्टडी टेबल पे बैठके
एक कॉपी में लिखा
कपड़े पहेन कर नीचे आ जाओ अपने लिए नही तो अपनी माँ के लिए
बाकी तुम्हारी मर्ज़ी
मैं वो कॉपी वँया के हाथ में दे दिया
और रूम से बाहर आ गया
ठीक 10 मिनिट बाद वँया नीचे आ गई
दूसरी वाली ड्रेस पहेन कर
मेरे लिए तो यही काफ़ी था
फिर हम सब गाड़ी में बैठे कालिया गाड़ी चलाने लगा
हम उसी शहर जा रहे थे
मुझे तो विदू को किस करना याद आ गया
जहाँ मैं अपनी बहनो के साथ शॉपिंग करने गया
यह वाला शहर सबसे ज़्यादा गाओं से नज़दीक था
पहली बार किरण मौसी बड़ी मामी बड़ी नानी1 घंटे बाद हम पहुँचे शहर लखन हमे एक अच्छे से रेस्टोरेंट लेके गया
और जिसकी वजह मासी की यह हालत हुई है उसकी माँ चोद दूँगा सिर्फ़ एक बार पता चल जाए वो हराम का है कौन
थोड़ी देर बाद मैं खाना खाने नीचे गया
खाना ख़ाके छत पे आ गया
और छत के बिल्कुल साइड में आ गया
एक कदम आगे बढ़ने से मैं नीचे गिर जाता
वँया मेरी तरफ पीठ करके खड़ी हुई थी
मैने सोचा वँया मेरी तरफ पीठ करके खड़ी क्यूँ रहती है
क्या वो मुझसे इतना गुस्सा है कि मेरी शकल भी देखना नही चाहती
मैं वँया के सामने जाके खड़ा हो गया
मैने देखा वँया की आँखो से आँसू बह रहे थे
ऐसा नही था कि वँया मुझे धमकी दिए हुई थी
इसी लिए मैं वँया के साथ बात नही कर रहा था
मैं जानता था कि वँया मुझसे बहुत नाराज़ है
मुझे जल्द से जल्द बड़ी मामी को मनाना पड़ेगा
मैने वँया का हाथ पकड़ा और नीचे आ गया
वँया अपना हाथ छुड़ा कर अपने रूमे में चली गयी
इसका मतलब जब भी वँया मेरे पीछे छत पे आती थी रोती रहती थी
क्या मैं इतना बुरा हूँ
एक तो मैने वँया को थप्पड़ मारा
दूसरा मैने वँया को रुलाया
आज का दिन कितना अच्छा चल रहा था
मैने सब बर्बाद कर दिया
वँया के आँसू देख कर नींद तो भाग ही चुकी थी
विदू से बात करता तो रो पड़ता
वँया मेरी वजह से अकेली पड़ गई थी
आज किसी से बात भी नही की
विदू मेरी वजह से जान देने की कोशिश कर चुकी है
कहीं वँया भी ऐसा ना करले
वँया ऐसा क्यूँ करेगी
विदू तो मुझसे प्यार करती है
और अगर वँया मेरी कसम तोड़के ऐसा कर बैठी तो
मैं एक कागज पे लिखके वँया के रूम पे आ गया
गेट के नीचे से कागज अंदर डाल दिया
गेट नॉक करके नीचे आ गया
किरण मौसी का रूम भी खुला था लाइट भी ऑन थी
किरण मौसी बेड पे बैठी हुई थी मैं रूम में गया
दिलीप- आप अभी तक सोई नही
किरण मौसी- तुम्हारा ही इंतेज़ार कर रही थी
दिलीप- आपको पता था कि मैं आउन्गा
किरण मौसी- तुम बिल्कुल अपनी माँ जैसे हो
उसको भी अगर किसी की आदत पड़ जाती तो वो कोई ना कोई बात बनाके उसके पास चली ही जाती थी
बात बाद में करना पहले तुम्हारा सर दबा देती हूँ
[मैं किरण मौसी की गोद में सर रखके लेट गया]
अब बताओ क्या बात है
दिलीप- कुछ नही बस एग्ज़ॅम की टेन्षन है
किरण मौसी- पहले तो तुम ऐसे नही थे
दिलीप- आपको कैसे पता
किरण मौसी- वो इसलिए कि मैं तुमसे बात नही करती थी
लेकिन बड़ी माँ से तो बात करती ही थी
दिलीप- मासी आप कितनी अच्छी हैं
किरण मौसी- मैं तुम्हे अच्छी लगती हूँ
दिलीप- हाँ
किरण मौसी- तुम भी सबकी तरह मुझसे नफ़रत करोगे
दिलीप- कभी नही करूँगा और आपने ऐसा क्यूँ कहा कि मैं भी सबकी तरह आपसे नफ़रत करूँगा
किरण मौसी- कुछ नही अब तुम सो जाओ देखो 12 बज गया है
दिलीप- [फिर मैने अपनी आँखें बंद कर लिया मैं तो सोचा भी नही था कि आज फिर किरण मौसी एमोशनल हो जाएँगी मैं तो सिर्फ़ अपना जी हल्का करने आया था बड़ी नानी की तबीयत ठीक नही रहती थी मैं उनके पास जाता तो वो एक मिनिट में समझ जाती कि मैं परेशान हूँ जैसे जैसे किरण मौसी को मैं जान रहा था मेरा गुस्सा उस हरामी के लिए बढ़ता जा रहा था
किरण मौसी मेरे सर में अपनी उंगली फिरा रही थी पता ही नही चला कब नींद आ गई.,.
दिलीप- तुम दोनो इसकी इज़्ज़त लूट रहे हो लगता है तुम प्रिन्सिपल को भूल गये हो
मेरी बात सुनके दोनो लड़को की फॅट गई लेकिन सरपंच की बेटी के चेहरे पे मुस्कान आ गई
सरपंच की बेटी- [इस बार तो लंबा शिकार फँसा सीधा ठाकुर]सरपंच की बेटी मेरे पास आ गई
और मेरा कंधा पकड़ ली
वोही दामिनी वाला सीन
सरपंच की बेटी- मुझे बचा लीजिए छोटे मालिक मुझे बचा लीजिए
लड़का1- रंडी आ गई ना अपनी औकात पे
दिलीप- ज़ुबान संभाल कर एक तो इसका रेप करते हो उपर से गाली देते हो
लड़का2- हम इसका रेप नही कर रहे थे यही हमसे चुदवाने आई थी
दिलीप- मैं तुम्हे चूतिया दिखता हूँ कोई भी लड़की एक लड़के से चुदवाती है
यह कोई रंडी थोड़ी है जो तुम दोनो से चुदवायेगी
और मैने खुद सुना कि यह तुम दोनो को गाली दे रही थी
सरपंच की बेटी- हाँ छोटे मालिक इन्दोनो ने मिलके मेरी जिंदगी बर्बाद करदी
लड़का- रंडी भोसड़ी
दिलीप- बोला ना गाली मत दो
लड़का1 लड़का2 के कान में खुसुर फुसुर करने लगे
लड़का1- अबे इससे डरने की ज़रूरत नही है हम दोनो मिलके इसको बेहोश कर देते हैं
फिर यह रंडी हमारा ही साथ देगी हम गाओं में फैला देंगे कि यह इसका रेप कर रहा था
हम दोनो ने इसको बेहोश किया और इसकी इज़्ज़त बचाई
लड़का2- लेकिन वो ठाकुर का भांजा है
लड़का1- अबे पूरा गाओं जानता है बड़े ठाकुर रेपिस्ट का नाम सुनके उसकी जान पहले लेते हैं झूठ या सच बाद में तय करते हैं
लड़का2- तो प्रिन्सिपल को क्यूँ जिंदा छोड़ दिया गया
लड़का1- अबे वो तो छोटे ठाकुर ने किया था
लड़का2- लेकिन बड़े ठाकुर इसको अपना वारिस बना चुके हैं
दिलीप-यह हराम के क्या खुसुर फुसुर कर रहे थे मैं नही जानता लेकिन मेरे बारे में यह नही जानते कि मैं जब विलेन बनता हूँ तो मेरे से बड़ा विलेन कोई नही होता है
दिलीप- कुत्तो अपना प्लान अपनी गान्ड में डाल दो क्यूंकी लखन तुम्हारी गान्ड मारने आ रहा है
लड़का1- कौन लखन
दिलीप- अबे साले इस गाओं में कितने लखन हैं
लड़का2- दिलीप हमे माफ़ करदो हम कभी दोबारा ऐसा नही करेंगे अबे बोल ना
लड़का1- हाँ हम कभी दोबारा ऐसा नही करेंगे
दिलीप- मुझसे माफी मत माँगो इससे माँगो अगर यह माफ़ करेगी तो मैं किसी को कुछ नही बताउन्गी
दोनो लड़के सरपंच की बेटी से माफी माँगने लगे और सरपंच की बेटी दोनो को माफ़ भी करदी दोनो लड़के भाग गये
दोनो लड़कों के भागते ही मैने एक थप्पड़ सरपंच की बेटी के गाल पे छाप दिया
सरपंच की बेटी नीचे गिर गयी
मैं भी ज़मीन पे बैठ गया
और अपना मोबाइल निकालके सरपंच की बेटी की चुदाई का वीडियो ऑन कर दिया
दिलीप- तू समझी होगी कि तू मुझे बेवकूफ़ बना देगी
सरपंच की बेटी- तो फिर उन लड़कों के साथ मुझे भी क्यूँ नही पकड़ा आपने
दिलीप- वो इसलिए मेरी जान कि तुम तीनो मिलके मेरे खिलाफ कुछ साज़िश करते
अब तू अकेली है और मेरे पास है मेरे सिवा तेरा कोई नही है
अब अगर किसी से चुदवाइ है तो तेरी जिंदगी बर्बाद कर दूँगा
सरपंच की बेटी- तुम होते कौन हो मेरी जिंदगी का फ़ैसला करने वाले
मैं किसी से भी चुदवाऊ तुम्हे उससे क्या
दिलीप [वाह आप से सीधा तुम] देखो मैं सिर्फ़ इतना ही कहूँगा मुझे कोई मतलब नही है कि तुम किससे चुदवाती हो
सरपंच की बेटी- तुम मर्द नही हो क्या एक लड़की तुम्हारे सामने पूरी नंगी है और तुम भाषण चोद रहे हो
दिलीप- तुम जैसी लड़की को मैं अपनी मर्दानगी क्यूँ दिखाऊ और हां याद रखना अगर मेरे साथ गेम खेलोगी तो यह वीडियो लखन के पास भी है तुम तीनो को जान से मारके तालाब में फेंक देगा किसी को लाश भी नही मिलेगी यह कहके मैं अपने घर की तरफ चल दिया
दोनो लड़के एक तरफ छुप्के मेरी और सरपंच की बेटी की बात सुन रहे थे.,.
वँया- जल्दी आ जाना आज से हम जल्दी पढ़ाई करने वाले हैं
दिलीप- वो आज थोड़ा लेट आउन्गा
वँया- तुम जाते कहाँ हो
दिलीप- विनय के घर जाता हूँ और कहाँ जाउन्गा
सिर्फ़ आज के लिए कल से तो बाहर ही नही जाउन्गा
पढ़ाई पढ़ाई और सिर्फ़ पढ़ाई
वँया- देखती हूँ तुम अपना यह प्रॉमिस पूरा करते हो कि नही
दिलीप- मैं कसरत करके बिम्ला के घर आ गया
आज मैने कॉंडम भी लिया पेनकिलर और जेल भी लिया
सोचा आज शांति की अच्छे बजाउन्गा
या यूँ कहे तो आज लास्ट दिन है तो पूरे जी जान से बजाउन्गा
बिम्ला- यह तूने मेरी बेटी को क्या कर दिया
दिलीप- मैने क्या किया
बिम्ला- इतने दिन से मेरे साथ बात भी नही कर रही थी
कल अचानक मुझपे अपना प्यार लुटाने लगी
दिलीप- तो आपको तो खुश होना चाहिए
बिम्ला- खुश तो हूँ लेकिन एक दिन में इतना कैसे बदल गई
दिलीप- आप बेकार में चिंता कर रही है हो सकता है वो किसी बात से परेशान हो
बिम्ला- कहीं वो मुझे तेरे साथ तो नही देख ली
दिलीप- मुझे तो गाली दे देके मार डालती अगर वो हमे साथ देख लेती तो आप बेकार में सोच रही हो
बिम्ला- तू तो मेरे लिए कुछ करता नही है लेकिन मैं तेरा एक काम कर चुकी हूँ
दिलीप- कॉन्सा काम
बिम्ला- अंदर जाके देख ले
दिलीप- मैं शांति वाले रूम में आ गया और शांति के पास बैठ गया
शांति थोड़ा शरमा रही थी
बिम्ला बोल रही थी वो मेरा एक काम कर चुकी है
लेकिन मुझे तो याद ही नही है कि मैने बिम्ला को कोई काम दिया था
दिलीप- आज हमारा चुदाई का आखरी दिन है
शांति- जानती हूँ तुम्हारे जैसा प्यार कोई नही कर सकता
लेकिन थोड़ा आराम से करना
दिलीप- [आराम से करना मैं क्या सोचा था और शांति क्या बोल रही है] आप सच में चाहती हैं कि मैं आराम से करूँ
शांति- हाँ तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है ना तेल भी वहाँ पे रक्खा है धीरे धीरे डालना
दिलीप- [शांति कही पागल तो नही हो गयी और दिन बोलती थी दमदार चुदाई करने को
लेकिन आज बोल रही धीरे डालना आराम से करना तेल लगाके करना शांति कोई कुँवारी थोड़ी है
मुझे तो बिम्ला पे गुस्सा आ रहा था
दिलीप- अभी एक मिनिट में आता हूँ मैं रूम से बाहर आ गया
बिम्ला मुझे देख कर मुस्कुराने लगी मैं बिम्ला के पास गया
बिम्ला कुछ बोलने वाली थी उससे पहले ही मैं उसके हाथ पे चींटी काट लिया
बिम्ला- उईइ माआ
दिलीप-मैने चार पाँच और चींटी काट लिया
बिम्ला- पागल तो नही हो गया है देख मेरा हाथ लाल हो गया
दिलीप- दर्द हुआ ना मुझे भी दर्द हो रहा है आज मैं क्या क्या सोचा था और आपने सब कबाड़ा कर दिया
बिम्ला- यह तू क्या बोल रहा है
दिलीप- बिकुल सही बोल रहा हूँ आप की चुदाई नही कर रहा हूँ इसका मतलब आप मुझसे बदला लेंगी
बिम्ला- मैं कुछ समझ ही नही पा रही हूँ
दिलीप- शांति कह रही है आराम से डालना धीरे डालना तेल लगाके डालना यह था आपका काम
बिंला- [गुस्से में] वो क्या तेरी रखैल है क्या तू उसकी कुँवारी गान्ड मारेगा तो वो तो बोलेगी आराम से डालना धीरे डालना तेल लगाके डालना एक तो भली करो उपर से गाली भी खाओ
दिलीप- [बिम्ला की बात सुनके मेरा दिमाग़ सुन्न हो गया]
आपका मतलब है शांति मुझसे गान्ड मरवाने के लिए मान गयी है
बिम्ला- और नही तो क्या अब जल्दी जा
दिलीप- मैं बिम्ला के गाल को चूम लिया और सीधा शांति के रूम में घुस गया.,,..,
कभी चूत के दाने को अपने मुँह लेके चूस्ता कभी अपनी ज़ुबान से चूत को कुरेदता
अब मेरे लंड में ज़्यादा दर्द होने लगा था
फिर भी मैं शांति की चूत चूस्ता रहा
थोड़ी देर तक चूत चूसने के बाद शांति की चूत पानी छोड़ दी
मैं सारा पानी पी गया
शांति सोची कि अब मैं उसकी चूत नही चुसूंगा
शांति जैसे ही उठने लगी मैने उसकी गान्ड पे थप्पड़ मार दिया
शांति वापस लेट गयी
मैं वापस शांति की चूत चूसने लगा
चूत चुस्ते हुए एक ही बार में मैं अपनी 3 उंगली शांति की चूत में डाल दिया
शांति की आह निकल गयी
मैं बिना रुके अपनी तीनो उंगली से शांति की चूत चोदने लगा
शांति- अया दिलीप और ज़ोर से चूसो मेरी चूत को अया अया तुम तो अभी जवान ही हुए आआह हो और इतना जोश अया उईईइ माआ मर गयी और शांति की चूत एक और बार पानी छोड़ दी सारा पानी मेरे मुँह में आ गया
मैं उठके खड़ा हो गया और बेड से नीचे उतरके शांति के मुँह के पास आ गया
शांति का सर बेड के एक दम किनारे था
मैं अपना लंड शांति के होंटो पे रगड़ने लगा
शांति अपना मुँह खोलदी
मैं एक ही बार में अपना आधा लंड शांति के मुँह में डाल दिया
मेरा लंड शांति के मुँह में जाते ही ठंडा होने लगा मेरे लंड का दर्द भी कम होने लगा
मैं अपना लंड शांति के मुँह में अंदर बाहर करने लगा
शांति अपने हाथो से मेरे आंडो को सहलाने लगी
लेकिन मेरे लंड को टच नही की
मैं शांति के मुँह मे अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था
शांति एक हाथ में मेरे आंडो को दबा ली
मैं मस्त होने लगा
इसी जोश में मैं अपना पूरा लंड शांति के मुँह में डाल दिया
कुछ सेकेंड में मैं वापस शांति के मुँह को अपने आधे लंड से चोदने लगा
मेरा पूरा लंड शांति के मुँह में जाने से चिकना हो गया था
मैं शांति के मुँह से अपना लंड निकाल लिया
शांति बिना कुछ कहे घोड़ी बन गई
मैं तेल लेके बेड पे चढ़ गया
शांति के पीछे आके अपना लंड शांति की चूत पे रगड़ने लगा
शांति अपना मुँह तकिये में दबा ली
मैं शांति की कमर को पकड़ा और पूरी ताक़त से धक्का मारा
मेरा पूरा लंड शांति की चूत को चीरता पूरा समा गया
वैसे तो शांति 3 बार झड चुकी थी
लेकिन उसकी चीख तकिये से बाहर भी आरहि थी
मैं बिना रुके अपना आधा लंड शांति की चूत से बाहर निकालके शांति को चोदने लगा
शांति अभी भी अपना मुँह तकिये में दबाए हुए थी
मैं शांति के बूब्स को अपने हाथो में लेके शांति को चोदने लगा
थोड़ी देर बाद शांति आहे भरने लगी
मैं यही तो चाहता था
मैं पूरा लंड शांति की चूत से बाहर निकाल लिया
और दोबारा एक ही बार में डाल दिया
ऐसा मैं 4 बार किया शांति को फिरसे दर्द होने लगा
इस बार मैं अपना लंड बाहर निकाला और इतना तेज धक्का लगाया
कि अगर मैं शांति की कमर अपने हाथो से नही पकड़े रहता तो शांति सीधा बेड से नीचे गिर जाती
शांति रोने लगी मैने तेल अपने हाथ में लिया शांति की गान्ड पे मलने लगा
शांति को महसूस ही नही हुआ कि उसकी गान्ड पे मैं तेल मल रहा हूँ
उसकी चूत में जो दर्द हो रहा था
अब जब गान्ड के दर्द के लिए चूत का दर्द तो सहना ही पड़ेगा...,..