S
StoryPublisher
Guest
"मेरा लड्डू". इतना बोलकर कौशल्या जी ने बेटे का माथा चूमा और फिर रेखा जी ने अपने ससुर, सास और पति को पानी दिया.
बार बार शंकर जी अपने बेटे को ही देख रहे थे. और बेटा तो एकटक उन्हे देख रहा था. उसको बाप के प्यार का एहसास
आज पहली बार हुआ. वो सब भूल गया जो भी उसने बोरडिंग स्कूल मे सहा था.
"मा, मुन्ना तो मुझसे भी लंबा हो गया इतनी जल्दी. पापा ने बहुत मेहनत करी लगती है इस्पे." उनके शब्दो मे प्रशंसा
थी.
"बेटा तेरे पिताजी तो अभी बहुत कुछ सोचे बैठे है. वो सब छोड़ चल पहले खाना खा नही तो तू फिर भाग जाएगा अपने
दोस्तो के पास."
यूही वो तीनो लोग बातें करते खाना खाने लगे और राजकुमार जी भी उनसे आ मिले. दोनो भाई गरम्जोशी से मिले और फिर
एक घंटे तक यही सब होता रहा. अर्जुन कबका सबकी नज़र बचा कर अपनी साइकल लेकर संदीप के घर निकल गया.
सबके रसोई से चले जाने के बाद शंकर जी भी उठ खड़े हुए और चल दिए अपने कमरे मे जहाँ रेखा जी कपड़े तह लगा
रही थी. उन्होने पीछे से ही उनको अपनी बाहों मे कस लिया और रेखा के चेहरे पे शरम की लाली छा गई. और इस दौरान कमरे की कड़ी बंद कर दी थी उन्होने.
वही माधुरी अपने कमरे मे बैठी थी जहाँ ऋतु और कोमल भी थे. अलका दूसरे कमरे मे पढ़ाई कर रही थी. वैसे तो
चारो बहने आपस मे सब बातें कर लेती थी. लेकिन इन्होने कभी भी सेक्स के विषय पर बात नही की थी. माधुरी किसी
भी तरह ये सब डिसकस करना चाहती थी तो उसने बात शुरू के.
माधुरी- यार कोमल तेरे सब्जेक्ट्स क्या थे डिग्री मे?
कोमल- दीदी फिज़िक्स, केमिस्ट्री, बाइयालजी और इंग्लीश. वैसे क्या बात है? कुछ पूछना है क्या?
माधुरी- हा यार लेकिन बात थोड़ी पर्सनल है तो किसी और से पूछ नही सकती तो याद आया तेरे पास तो साइन्स था.
कोमल- दीदी आप तो मेरी बेस्ट फ्रेंड हो. आप बेझिझक कुछ भी पूछ सकती हो.
अब इन दोनो की बात सुनकर ऋतु ने अपनी किताब साइड मे रख दी और उनकी तरफ मूह करके बैठ गई.
माधुरी- यार दादा जी कोई लड़का देख रहे है मेरे लिए, मा से पता चला. लेकिन यार मुझे तो इसके बारे मे ज़्यादा
कुछ पता नही की आगे क्या होता है. (चेहरे पे शरम फैल गई ये सब कहते हुए जो दोनो बहनो से छुपी ना रही)
ऋतु- अर्रे दीदी आप यहा बैठो मेरे पास. मैं करती हू आपकी प्राब्लम का सल्यूशन. (आँखें मट्काते हुए उसने कहा)
माधुरी- यार मेरी 2 सहेलियों की शादी हो चुकी है और 3 साल मे एक के तो 2 बच्चे भी हो गये. और दोनो कहती है
के बस पति तो उनको ज़रूरत का समान समझता है. इसका क्या मतलब है. और यार ये भी कहा उन्होने की जान निकल जाती है
(इतना बोलकर माधुरी ने आँखें नीचे कर ली)
बार बार शंकर जी अपने बेटे को ही देख रहे थे. और बेटा तो एकटक उन्हे देख रहा था. उसको बाप के प्यार का एहसास
आज पहली बार हुआ. वो सब भूल गया जो भी उसने बोरडिंग स्कूल मे सहा था.
"मा, मुन्ना तो मुझसे भी लंबा हो गया इतनी जल्दी. पापा ने बहुत मेहनत करी लगती है इस्पे." उनके शब्दो मे प्रशंसा
थी.
"बेटा तेरे पिताजी तो अभी बहुत कुछ सोचे बैठे है. वो सब छोड़ चल पहले खाना खा नही तो तू फिर भाग जाएगा अपने
दोस्तो के पास."
यूही वो तीनो लोग बातें करते खाना खाने लगे और राजकुमार जी भी उनसे आ मिले. दोनो भाई गरम्जोशी से मिले और फिर
एक घंटे तक यही सब होता रहा. अर्जुन कबका सबकी नज़र बचा कर अपनी साइकल लेकर संदीप के घर निकल गया.
सबके रसोई से चले जाने के बाद शंकर जी भी उठ खड़े हुए और चल दिए अपने कमरे मे जहाँ रेखा जी कपड़े तह लगा
रही थी. उन्होने पीछे से ही उनको अपनी बाहों मे कस लिया और रेखा के चेहरे पे शरम की लाली छा गई. और इस दौरान कमरे की कड़ी बंद कर दी थी उन्होने.
वही माधुरी अपने कमरे मे बैठी थी जहाँ ऋतु और कोमल भी थे. अलका दूसरे कमरे मे पढ़ाई कर रही थी. वैसे तो
चारो बहने आपस मे सब बातें कर लेती थी. लेकिन इन्होने कभी भी सेक्स के विषय पर बात नही की थी. माधुरी किसी
भी तरह ये सब डिसकस करना चाहती थी तो उसने बात शुरू के.
माधुरी- यार कोमल तेरे सब्जेक्ट्स क्या थे डिग्री मे?
कोमल- दीदी फिज़िक्स, केमिस्ट्री, बाइयालजी और इंग्लीश. वैसे क्या बात है? कुछ पूछना है क्या?
माधुरी- हा यार लेकिन बात थोड़ी पर्सनल है तो किसी और से पूछ नही सकती तो याद आया तेरे पास तो साइन्स था.
कोमल- दीदी आप तो मेरी बेस्ट फ्रेंड हो. आप बेझिझक कुछ भी पूछ सकती हो.
अब इन दोनो की बात सुनकर ऋतु ने अपनी किताब साइड मे रख दी और उनकी तरफ मूह करके बैठ गई.
माधुरी- यार दादा जी कोई लड़का देख रहे है मेरे लिए, मा से पता चला. लेकिन यार मुझे तो इसके बारे मे ज़्यादा
कुछ पता नही की आगे क्या होता है. (चेहरे पे शरम फैल गई ये सब कहते हुए जो दोनो बहनो से छुपी ना रही)
ऋतु- अर्रे दीदी आप यहा बैठो मेरे पास. मैं करती हू आपकी प्राब्लम का सल्यूशन. (आँखें मट्काते हुए उसने कहा)
माधुरी- यार मेरी 2 सहेलियों की शादी हो चुकी है और 3 साल मे एक के तो 2 बच्चे भी हो गये. और दोनो कहती है
के बस पति तो उनको ज़रूरत का समान समझता है. इसका क्या मतलब है. और यार ये भी कहा उन्होने की जान निकल जाती है
(इतना बोलकर माधुरी ने आँखें नीचे कर ली)