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Guest
ये बहुत बड़ी जिम थी एक ऑडिटोरियम जैसी जगह मे. और इसके 2 भाग थे, लड़को का और लड़कियों का. तकरीबन 100 लोग थे फिर भी जिम आधी खाली ही दिख रही थी.
"थोड़ा हाथ पैर हिला ले जबतक मैं मशीन रोकता हू. नही तो नंबर नही आएगा." अर्जुन भी बलबीर की बात सुनकर स्ट्रक्तचिंग करने लगा और कुछ पुषप भी लगाए. इतने मे ही मशीन पर से बलबीर नि आवाज़ लगाई. "भाई यहा आजा."
ये एक 15 प्लेट वाली कसरत की मशीन थी जिसके उपर एक रोड लटक रही थी और ठीक नीचे एक गद्दी वाला स्टूल रखा था.
"देख छोटे भाई ये किल्ली यहा ऐसे फिट करनी है, जितना तू वजन उठा सके और फिर ऐसे उपर नीचे करना है धीरे धीरे रोड को दोनो सीरे से पकड़ कर." अर्जुन को ये सब पता था लेकिन उसने सिर्फ़ हा मे गर्दन हिलाई. पहले बलबीर ने 20 बार दोहराया फिर अर्जुन ने. जब बलबीर दूसरी बार कसरत कर रहा था तो अर्जुन ने पाया की उनसे कुछ 10 कदम मशीन के पीछे से 2 लड़किया उसको ही देख रही थी. वो दोनो ही खड़ी होकर बाजू की कसरत कर रही थी और उसकी तरफ बेशर्मी से देख रही थी. "चल अब तेरी बारी."
ऐसे ही उन्होने कुछ और कसरत की फिर वापिस कोच के पास आ गये. "पानी पी कर 2 मिनिट साँस लेना. फिर बलबीर तुम्हे बताएगा की अपना मुक्का दुरुस्त कैसे करना है. कोच वापिस प्रॅक्टीस कर रहे खिलाड़िओ के बीच चले गये. किसी किसी ने लाल या नीले रंग के सेफ्टी गार्ड भी मूह पर लगाए हुए थे. ये दोनो अब एक कोने मे थे और बलबीर अर्जुन को समझा रहा था के कंधे का प्रयोग सही से कैसे करना है मुक्का चलाते वक्त. और हवा मे प्रॅक्टीस करवाने लगा.
तकरीबन 20 मिनिट बाद बलबीर ने उसको और भी बहुत कुछ बताया की कैसे क्या करना होता है और क्या नही. और जोगिंदर जी ने दूर से ही बस करने का इशारा दिया.
"आराम करना घर जा कर. सुबह दौड़ कम ही लगाना क्योंकि शरीर कसरत के बाद आराम माँगता है. कल भी यही करना है तुम्हे." जोगिंदर जी कह रहे थे तो कुछ लड़के आए उनके पैर स्पर्श करने लगे लाइन से. उन्होने भी सभी को आशीर्वाद दिया. अर्जुन ये सब ध्यान से देख रहा था. फिर हाथ जोड़कर उसने भी आज्ञा ली और साइकल स्टॅंड की तरफ़ चल दिया.
"नया है क्या यहा?" अर्जुन ताला खोल रहा था साइकल का और उस से 3 साइकल दूर अपनी साइकल स्टॅंड से बाहर निकलती लड़की ने उस से पूछा.
"जी. आज पहला दिन था मेरा बॉक्सिंग का यहा." उसने भी साइकल बाहर निकाल ली. ये लड़की अर्जुन के बराबर ही कद की थी. उभरी सख़्त टांगे, लड़कियों से हल्का
चौड़ा सीना जिसपे शायद मुट्ठी से कुछ बड़े ही उभार थे. साँवली लेकिन अच्छे नैन नक्श वाली लड़की थी वो.
"सीनियर हू तेरी यहा स्टेडियम मे. बॅस्केटबॉल, हरयाणा और नाम है मेरा मंजुला."
चल अब उसने अपना सुर एकदम बदल कर कहा तो अर्जुन भी बिना उसकी तरफ देखे साइकल के पैदल बढ़ा निकल गया.
उस लड़की के पीछे आती दूसरी लड़की ने कहा, "किसी को तो छोड़ दे मंजू. ये भी डरा दिया तूने बेवजह."
अर्रे ना सुमन. ये लड़का अलग है. अगर कल दिखा तो थोड़ा नर्मी से बात करूँगी." आँख मारते हुए वो हंस दी.
"थोड़ा हाथ पैर हिला ले जबतक मैं मशीन रोकता हू. नही तो नंबर नही आएगा." अर्जुन भी बलबीर की बात सुनकर स्ट्रक्तचिंग करने लगा और कुछ पुषप भी लगाए. इतने मे ही मशीन पर से बलबीर नि आवाज़ लगाई. "भाई यहा आजा."
ये एक 15 प्लेट वाली कसरत की मशीन थी जिसके उपर एक रोड लटक रही थी और ठीक नीचे एक गद्दी वाला स्टूल रखा था.
"देख छोटे भाई ये किल्ली यहा ऐसे फिट करनी है, जितना तू वजन उठा सके और फिर ऐसे उपर नीचे करना है धीरे धीरे रोड को दोनो सीरे से पकड़ कर." अर्जुन को ये सब पता था लेकिन उसने सिर्फ़ हा मे गर्दन हिलाई. पहले बलबीर ने 20 बार दोहराया फिर अर्जुन ने. जब बलबीर दूसरी बार कसरत कर रहा था तो अर्जुन ने पाया की उनसे कुछ 10 कदम मशीन के पीछे से 2 लड़किया उसको ही देख रही थी. वो दोनो ही खड़ी होकर बाजू की कसरत कर रही थी और उसकी तरफ बेशर्मी से देख रही थी. "चल अब तेरी बारी."
ऐसे ही उन्होने कुछ और कसरत की फिर वापिस कोच के पास आ गये. "पानी पी कर 2 मिनिट साँस लेना. फिर बलबीर तुम्हे बताएगा की अपना मुक्का दुरुस्त कैसे करना है. कोच वापिस प्रॅक्टीस कर रहे खिलाड़िओ के बीच चले गये. किसी किसी ने लाल या नीले रंग के सेफ्टी गार्ड भी मूह पर लगाए हुए थे. ये दोनो अब एक कोने मे थे और बलबीर अर्जुन को समझा रहा था के कंधे का प्रयोग सही से कैसे करना है मुक्का चलाते वक्त. और हवा मे प्रॅक्टीस करवाने लगा.
तकरीबन 20 मिनिट बाद बलबीर ने उसको और भी बहुत कुछ बताया की कैसे क्या करना होता है और क्या नही. और जोगिंदर जी ने दूर से ही बस करने का इशारा दिया.
"आराम करना घर जा कर. सुबह दौड़ कम ही लगाना क्योंकि शरीर कसरत के बाद आराम माँगता है. कल भी यही करना है तुम्हे." जोगिंदर जी कह रहे थे तो कुछ लड़के आए उनके पैर स्पर्श करने लगे लाइन से. उन्होने भी सभी को आशीर्वाद दिया. अर्जुन ये सब ध्यान से देख रहा था. फिर हाथ जोड़कर उसने भी आज्ञा ली और साइकल स्टॅंड की तरफ़ चल दिया.
"नया है क्या यहा?" अर्जुन ताला खोल रहा था साइकल का और उस से 3 साइकल दूर अपनी साइकल स्टॅंड से बाहर निकलती लड़की ने उस से पूछा.
"जी. आज पहला दिन था मेरा बॉक्सिंग का यहा." उसने भी साइकल बाहर निकाल ली. ये लड़की अर्जुन के बराबर ही कद की थी. उभरी सख़्त टांगे, लड़कियों से हल्का
चौड़ा सीना जिसपे शायद मुट्ठी से कुछ बड़े ही उभार थे. साँवली लेकिन अच्छे नैन नक्श वाली लड़की थी वो.
"सीनियर हू तेरी यहा स्टेडियम मे. बॅस्केटबॉल, हरयाणा और नाम है मेरा मंजुला."
चल अब उसने अपना सुर एकदम बदल कर कहा तो अर्जुन भी बिना उसकी तरफ देखे साइकल के पैदल बढ़ा निकल गया.
उस लड़की के पीछे आती दूसरी लड़की ने कहा, "किसी को तो छोड़ दे मंजू. ये भी डरा दिया तूने बेवजह."
अर्रे ना सुमन. ये लड़का अलग है. अगर कल दिखा तो थोड़ा नर्मी से बात करूँगी." आँख मारते हुए वो हंस दी.