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Guest
मेरे झटकों से ऋतू की हालत पतली होती जा रही थी, वो अपनी चूत के अन्दर अपनी चार उँगलियाँ डाले उसे बुरी तरह से रगड़ रही थी...
जल्दी ही मेरी मेहनत और ऋतू की रगडाहट रंग लायी और उसने अपनी चूत के अन्दर से लावा उगलना शुरू कर दिया...मैंने भी अपना दूध उसकी गांड के तालाब में भर दिया...
"आआआआह्ह्ह्ह ,,,,,भाई .......ऊऊओ .....मम्मी........अह्ह्ह्ह......मजा आ गया......अह्ह्ह्ह......"
मम्मी ने जब देखा की उनकी लाडली झड चुकी है तो उन्होंने इशारा करके हम दोनों को अन्दर आने को कहा...
हम अन्दर चले गए..
मम्मी : "तुम दोनों को बाहर खड़ा होने की क्या जरुरत थी...तुम्हे अगर मेरा ये खेल देखना ही था तो अन्दर आ जाते..तुम दोनों से क्या पर्दा...."
मैं और ऋतू मम्मी की बात को सुनकर मुस्कुराने लगे...
मम्मी : "चलो अब वहां सोफे पर बैठ जाओ...क्योंकि असली खेल तो अब शुरू होगा...इन दोनों रंडियों के साथ..."
मम्मी ने ये बात अपने दांतों को चबाते हुए कुछ इस अंदाज में कही थी की मुझे और उन दोनों के शरीर में फिर से एक सिहरन सी दौड़ गयी...
मम्मी ने बेड पर पड़ा हुआ वो बड़ा वाला काला डिल्डो उठाया और अपनी गीली चूत के ऊपर रगड़ने लगी...और फिर उसे चाटने भी लगी...
ऐसा करते हुए वो किसी ब्लू फिल्मो की हिरोईन लग रही थी..वो रबर का लम्बा और काला लंड उनके हाथ में थिरकन के साथ हिल रहा था और उसके ऊपर चमकती हुई प्लास्टिक की नसे इतनी ज्यादा थी की अगर किसी की चूत में जाए तो अन्दर जाकर चूत की दीवारों पर उनसे होने वाली रगड़ाई का एहसास कैसा होगा ये मैं सोचकर ही घबराने लगा..क्योंकि एक तो उस रबर के डिल्डो की मोटाई भी लगभग 6 इंच थी जो मेरे, पापा और दादाजी के लंड से भी कही ज्यादा थी और उपर से उसपर नसे भी काफी थी, जिससे चूत के अन्दर काफी मुश्किलें पैदा होने वाली थी..
मम्मी ने अन्नू को अपने पास बुलाया और बोली : "तो तू दादाजी का लंड लेना चाहती है..."
अन्नू : "जी...जी बीबीजी.."
मम्मी : "उसके लिए मुझे तेरी चूत को तैयार करना पड़ेगा...चल जाकर वो तेल की शीशी उठा ला."
अन्नू जाकर कोने में रखी तेल की शीशी उठा लायी.
मम्मी ने उसका ढक्कन खोलकर तेल की धार लंड के ऊपर गिरानी शुरू कर दी...जो उसके ऊपर से बहता हुआ नीचे जमीन पर गिरने लगा... मम्मी ने फिर हाथ से पुरे डिल्डो पर अच्छी तरह से तेल लगा दिया और अब तेल लगने की वजह से वो काला लंड और भी ज्यादा चमकने लगा.
अन्नू की तो हालत खराब होने लगी..वो शायद ऋतू और सोनी से ज्यादा चुद चुकी थी पर आज से पहले उसने इतना बड़ा लंड या इतनी मोटी कोई भी चीज अपनी चूत में नहीं ली थी जैसी ये थी..
मम्मी ने उसे बेड पर लेटने को कहा...सोनी और ऋतू उठ कर उसके पास जाकर बैठ गए, मैं भी उठकर बेड के पास जाकर खड़ा हो गया, मेरा लंड सोनी की नंगी पीठ को छु रहा था..
मम्मी ने अन्नू की टाँगे चौड़ी की और उसकी चूत के होंठ खोलकर उसके ऊपर लंड को टिकाया..मैंने देखा की अन्नू की टाँगे कांप रही थी आने वाले पल की कल्पना से..
अन्नू : "बीबीजी...थोडा धीरे..दाआआआआआअल्ल्ल्ल .......आआआआअह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊग माआआ माआर्र्र्र गयी.......अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह " वो अपनी बात पूरी भी ना कर पायी थी की मम्मी ने अपनी हथेली का तेज धक्का मारकर वो डिल्डो उसकी चूत में धकेल दिया...अन्नू की टांगो को मम्मी और ऋतू ने दोनों तरफ से पकड़ा हुआ था, इसलिए वो उन्हें खींच भी नहीं पायी.. दर्द इतना था की उसके मुंह से आवाज निकलनी ही बंद हो गयी और उसकी दोनों आँखों से आंसू झर-२ बहने लगे..
मम्मी ने उसे थोडा बाहर खींचा और एक और तेज धक्का मारा....इस बार तो अन्नू उठ कर बैठ गयी....और सामने बैठी हुई अपनी बहन को भींच लिया अपनी बाँहों में...
मम्मी तब भी रुकी नहीं और एक के बाद एक कई बार धक्के मार मारकर वो काला लंड जबरदस्ती उसकी चूत के अन्दर तक पहुंचा दिया...उसकी चूत के दूसरी तरफ की दिवार से ठोकर लगी तब मम्मी ने उसे और अन्दर धकेलना बंद किया .. पर अभी भी वो लगभग 8 इंच के आसपास बाहर ही था..और लगभग उतना ही अन्दर..पर लंड की मोटाई ज्यादा होने की वजह से अन्नू को ज्यादा तकलीफ हो रही थी..
"अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊओ मार डाला.....अह्ह्ह्हह्ह सोनी......दीदी......निकालो.....इसे बाहर....अह्ह्ह्ह.......मेरी चूत फट गयी रे.....अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह " वो किसी बच्चे की तरह से रो रही थी..
अचानक सोनी पलटी और मेरी तरफ घूमकर मेरे लंड को हाथ में पकड़ा और अन्नू के मुंह में डाल दिया...
जल्दी ही मेरी मेहनत और ऋतू की रगडाहट रंग लायी और उसने अपनी चूत के अन्दर से लावा उगलना शुरू कर दिया...मैंने भी अपना दूध उसकी गांड के तालाब में भर दिया...
"आआआआह्ह्ह्ह ,,,,,भाई .......ऊऊओ .....मम्मी........अह्ह्ह्ह......मजा आ गया......अह्ह्ह्ह......"
मम्मी ने जब देखा की उनकी लाडली झड चुकी है तो उन्होंने इशारा करके हम दोनों को अन्दर आने को कहा...
हम अन्दर चले गए..
मम्मी : "तुम दोनों को बाहर खड़ा होने की क्या जरुरत थी...तुम्हे अगर मेरा ये खेल देखना ही था तो अन्दर आ जाते..तुम दोनों से क्या पर्दा...."
मैं और ऋतू मम्मी की बात को सुनकर मुस्कुराने लगे...
मम्मी : "चलो अब वहां सोफे पर बैठ जाओ...क्योंकि असली खेल तो अब शुरू होगा...इन दोनों रंडियों के साथ..."
मम्मी ने ये बात अपने दांतों को चबाते हुए कुछ इस अंदाज में कही थी की मुझे और उन दोनों के शरीर में फिर से एक सिहरन सी दौड़ गयी...
मम्मी ने बेड पर पड़ा हुआ वो बड़ा वाला काला डिल्डो उठाया और अपनी गीली चूत के ऊपर रगड़ने लगी...और फिर उसे चाटने भी लगी...
ऐसा करते हुए वो किसी ब्लू फिल्मो की हिरोईन लग रही थी..वो रबर का लम्बा और काला लंड उनके हाथ में थिरकन के साथ हिल रहा था और उसके ऊपर चमकती हुई प्लास्टिक की नसे इतनी ज्यादा थी की अगर किसी की चूत में जाए तो अन्दर जाकर चूत की दीवारों पर उनसे होने वाली रगड़ाई का एहसास कैसा होगा ये मैं सोचकर ही घबराने लगा..क्योंकि एक तो उस रबर के डिल्डो की मोटाई भी लगभग 6 इंच थी जो मेरे, पापा और दादाजी के लंड से भी कही ज्यादा थी और उपर से उसपर नसे भी काफी थी, जिससे चूत के अन्दर काफी मुश्किलें पैदा होने वाली थी..
मम्मी ने अन्नू को अपने पास बुलाया और बोली : "तो तू दादाजी का लंड लेना चाहती है..."
अन्नू : "जी...जी बीबीजी.."
मम्मी : "उसके लिए मुझे तेरी चूत को तैयार करना पड़ेगा...चल जाकर वो तेल की शीशी उठा ला."
अन्नू जाकर कोने में रखी तेल की शीशी उठा लायी.
मम्मी ने उसका ढक्कन खोलकर तेल की धार लंड के ऊपर गिरानी शुरू कर दी...जो उसके ऊपर से बहता हुआ नीचे जमीन पर गिरने लगा... मम्मी ने फिर हाथ से पुरे डिल्डो पर अच्छी तरह से तेल लगा दिया और अब तेल लगने की वजह से वो काला लंड और भी ज्यादा चमकने लगा.
अन्नू की तो हालत खराब होने लगी..वो शायद ऋतू और सोनी से ज्यादा चुद चुकी थी पर आज से पहले उसने इतना बड़ा लंड या इतनी मोटी कोई भी चीज अपनी चूत में नहीं ली थी जैसी ये थी..
मम्मी ने उसे बेड पर लेटने को कहा...सोनी और ऋतू उठ कर उसके पास जाकर बैठ गए, मैं भी उठकर बेड के पास जाकर खड़ा हो गया, मेरा लंड सोनी की नंगी पीठ को छु रहा था..
मम्मी ने अन्नू की टाँगे चौड़ी की और उसकी चूत के होंठ खोलकर उसके ऊपर लंड को टिकाया..मैंने देखा की अन्नू की टाँगे कांप रही थी आने वाले पल की कल्पना से..
अन्नू : "बीबीजी...थोडा धीरे..दाआआआआआअल्ल्ल्ल .......आआआआअह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊग माआआ माआर्र्र्र गयी.......अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह " वो अपनी बात पूरी भी ना कर पायी थी की मम्मी ने अपनी हथेली का तेज धक्का मारकर वो डिल्डो उसकी चूत में धकेल दिया...अन्नू की टांगो को मम्मी और ऋतू ने दोनों तरफ से पकड़ा हुआ था, इसलिए वो उन्हें खींच भी नहीं पायी.. दर्द इतना था की उसके मुंह से आवाज निकलनी ही बंद हो गयी और उसकी दोनों आँखों से आंसू झर-२ बहने लगे..
मम्मी ने उसे थोडा बाहर खींचा और एक और तेज धक्का मारा....इस बार तो अन्नू उठ कर बैठ गयी....और सामने बैठी हुई अपनी बहन को भींच लिया अपनी बाँहों में...
मम्मी तब भी रुकी नहीं और एक के बाद एक कई बार धक्के मार मारकर वो काला लंड जबरदस्ती उसकी चूत के अन्दर तक पहुंचा दिया...उसकी चूत के दूसरी तरफ की दिवार से ठोकर लगी तब मम्मी ने उसे और अन्दर धकेलना बंद किया .. पर अभी भी वो लगभग 8 इंच के आसपास बाहर ही था..और लगभग उतना ही अन्दर..पर लंड की मोटाई ज्यादा होने की वजह से अन्नू को ज्यादा तकलीफ हो रही थी..
"अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊओ मार डाला.....अह्ह्ह्हह्ह सोनी......दीदी......निकालो.....इसे बाहर....अह्ह्ह्ह.......मेरी चूत फट गयी रे.....अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह " वो किसी बच्चे की तरह से रो रही थी..
अचानक सोनी पलटी और मेरी तरफ घूमकर मेरे लंड को हाथ में पकड़ा और अन्नू के मुंह में डाल दिया...