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Incest विदाउट रूल्स फैमिली लव अनलिमिटेड

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Guest
विदाउट रूल्स फैमिली लव अनलिमिटेड

तरुण आज अपनी बी.टेक ग्रॅजुयेशन कंप्लीट करके वापस

अपने घर जाने की तैयारी कर रहा था. ये बी.टेक के 4 साल

कैसे बीत गये पता ही नही चला. तरुण ने इन 4 सालो मे एक

बार भी घर की शकल नही देखी.. उसको घर की तो बहुत

याद आई थी. बट उसके डॅड ने उसे बोला था की तरुण अपनी

ग्रॅजुयेशन कंप्लीट करके ही घर वापस आ सकता है. तरुण

घर का इकलौता लड़का था.बाकी उसकी 4 बहने थी. इसलिए घर

मे सब का लाड़ला था.बट उसके डॅड एजुकेशन को ले कर बहुत

स्ट्रिक्ट थे.. अभी तरुण अपना समान पॅक करके हॉस्टिल के

बाहर आ गया ओर अपने डॅड का वेट करने लगा. वो आज उसे लेने आने वेल

थे. वो अपने डॅड से पूरे 4 साल बाद मिलने वाला था. तरुण

अपने दोस्तो को घर जाते हुए देख रहा था. तभी वहाँ एक

ब्लॅक कलर की स्कॉर्पियो आ कर रुकी..

(तरुण के डॅड का नाम मयंक कपूर है. उनकी एज 44यियर्ज़

है. बट वो 35 के आस-पास लगते है. उन्होने अपनी बॉडी को

अच्छा मैंटेन किया हुआ है. ओर हॅंडसम लगते है..वो एक

बड़े बिजनेस मैन है. उनकी खुद की कंपनी है. तरुण की

फॅमिली बहुत रिच है. उसके डॅड अक्सर टूर पर बाहर जाते

रहते है.)

तरुण ने पहचान लिया.. ये उसके डॅड की गाड़ी है.. उसमे से

डॅड बाहर आए ओर तरुण जा उनके सीने से लग गया.. ओर गाड़ी

मे झाँक कर देखने लगा. उसमे कोई नही था..

तरुण – “ डॅड, घर से ओर कोई नही आया.”

डॅड – “ नही बेटा, वो सब घर पर तुम्हारा वेट कर रहे है.”

(तरुण का मुँह उतर जाता है.. वो थोड़ा सॅड होते हुए.)

तरुण – “ मोम भी नही आई..?”

डॅड - "नही बेटा उनको कुछ काम था, इसलिए वो नही आ पाई.

अब चलो जल्दी से तुम्हारा लगेज गाड़ी मे रखो. फिर हम चलते है."

तरुण - "ओके"

( तरुण अपना समान गाड़ी मे रखता है.. ओर गाड़ी की फ्रंट

सीट पर आ कर बैठ जाता है.. उसके डॅड भी ड्राइविंग सीट पर आ

कर बैठ ते है. और तरुण की ओर देखते है.. वो अभी भी सॅड

था..)

मयंक - ( अपने बेटे के सर पर हाथ फेरते हुए..) " दुखी क्यो

हो बेटा.. अभी देखो हम 3अवर मे घर पहुच जाएँगे..

फिर मिल लेना सब से. "

तरुण कुछ नही बोलता है. ओर डॅड की तरफ़ एक स्माइल कर देता

है.. मयंक भी गाड़ी को ड्राइव करने लगते है.. 3 अवर के बाद

वो घर पहुच जाते है.

( उनका घर बहुत बड़ा है.. तरुण की फॅमिली

1. मयंक - तरुण के डॅड

2. कामिनी - तरुण की मोम उनकी एज 39 है बट वो भी अपनी

बॉडी को बहुत अच्छा मैंटेन किया हुआ है उनका फिगर. 32-

28-30 है, वो पढ़ी लिखी है. एंड कभी कभी ऑफीस भी जाती

है. बट ज़्यादा टाइम घर पर ही रहती है.

3. तन्नू - घर की सबसे बड़ी बेटी. अपनी ग्रेज़ूएशन कंप्लीट

करके घर ही रहती है.. अभी कोई जॉब नही करती. उसकी एज **

है. उसका फिगर बहुत मस्त है वो बिल्कुल अपनी मा पर गयी

है गोरा रंग.. बड़े बड़े बूब्स, ओर उसकी गान्ड का तो जवाब

नही.. एक झलक ही किसी भी लड़के का पानी निकाल देना.. हाइट

5'6''. ओर तन्नू अपने छोटे भाई तरुण से बहुत ज़्यादा प्यार

करती है.

4 टीना - घर की दूसरी बेटी... तन्नू से छोटी. ये बहुत ही

सिंपल है. अभी ग्रेज़ूएशन कर रही है. सिंपल सूट सलवार

मे रहती है टीना भी अपने भाई तरुण से बहुत प्यार करती

है. बट कभी दिखा नही पाती.. क्योंकि ये बहुत कम बोलती है.

सारा ध्यान अपनी स्टडी पर रखती है. ओर स्टडी मे

बहुत अच्छी है.

5. तानिया - घर की तीसरी बेटी. ये बहुत मॉर्डन है.. जीन्स

एंड टॉप पहनती है. लगभग तरुण के बराबर की एज की है. इसकी

तरुण से कभी नही बनती.. ये हमेशा तरुण से झगड़ा करती

रहती है.. ओर बहुत जिद्दी है. तानिया ने अभी कॉलेज स्टार्ट ही

किया है.. बट कॉलेज जाती नही है.. ओर लड़को की बहुत इन्सल्ट

करती है.. उसके अभी तक काफ़ी बाय्फ्रेंड रह चुके है.

6. टिया - घर की 4त बेटी.. तरुण से छोटी ये अभी बहुत स्वीट

है.. फेस ऐसा है जिसे देख कर ही प्यार आ जाए.. सभी इससे

घर मे बहुत प्यार करते है.
 
7 तरुण - हमारा हीरो

तरुण का घर बहुत बड़ा था.. ग्राउंड फ्लोर पर किचन एंड

एक रूम था जिसमे मयंक ओर कामिनी रहते थे. वही पर

डाइनिंग हॉल था.. एंड उसके अलावा बहुत बड़ा हाल था एंड

टीवी एंड सोफा सेट लगा हुआ था.

1स्ट्रीट फ्लॉर पर 5 रूम से थे.

सबसे पहले तन्नू का उसके बिल्कुल सामने तानिया का रूम..

उसके बगल मे टीना एंड उसके सामने तन्नू का रूम... ओर

सबसे पीछे वाला सेंटर मे तरुण का रूम था... वहाँ एक

कामन बालकनी थी.. एंड ऊपर टेरेस था घर से अलग

गेरेज भी था. जहा उनके पास 3 कार थी.. एंड 1 बाइक ओर बाइक

को सिर्फ़ तरुण उसे करता था..

मयंक ने घर के सामने गाड़ी रोकी ओर तरुण की ओर देखा...

मयंक - " बेटा उतरो.. सभी तुम्हरा वेट कर रहे है. मैं गाड़ी पार्क करके आता हू."

तरुण लगेज ले कर उतर जाता है. तभी अंदर से एक प्यारी आवाज़ आती है. "भैया आगये. भैया आगये, भैया आगये.."ये टिया की आवाज़ थी.. वो भागती हुई तरुण की ओर आ रही थी..

उसको देख कर तरुण के फेस पर एक बहुत बड़ी स्माइल आ गयी.

वो अपने घुटनो के बल बैठ गया.. ओर टिया आ कर उसके गले

लग गयी.. तरुण ने उसे टाइट हग किया.. वो टिया को बहुत

मिस करता था.. दोनो 2-3 मिंट तक ऐसे ही गले लगे रहे..

फिर तरुण ने उसे अपने से अलग करने की कोसिस की... बट टिया

नही हटी तो.. अपने बाहें तरुण के गले में डाल कर ज़ोर से हग

किए रही.
 
तरुण - " टिया "

टिया - " ह्म "

तरुण - " मुझे छोड़ो "

टिया - "नही... अब मैं तुम को कभी नही छोड़ूँगी.. तुम

बहुत साल बाद आए हो. फिर से कही चले गये तो."

तरुण - " सॉरी बाबा, अब कही नही जाउन्गा. अब छोड़ घर के

अंदर चलते है.. "

टिया फिर भी अँहि छोड़ती है.. तभी पीछे से मयंक गाड़ी

गेराज मे पार्क करके आते है. ओर देखते है.. टिया ने तरुण को

हग किया हुआ है..

मयंक - टिया बेटा, भैया को अंदर नही लेजाओगी.

इतने मे तरुण टिया को अपनी गोद मे उठा लेता है.. और अंदर

की ओर बढ़ जाता है.

मयंक भी लगेज ले कर चल देते है.

घर के गेट पर ही कामिनी पूजा की थाली ले कर तरुण का वेट कर

रही होती है. कामिनी तरुण की आरती करती है. उसके बाद सब

घर के अंदर आते है.. सभी तरुण को देख कर बहुत

खुश थे बट तानिया को देख ऐसा लग रहा था. जैसे उसे

कोई फ़र्क़ ही नही पड़ रहा है. तरुण ने सभी को हग किया.,..

ओर थोड़ी बहुत बाते की

मयंक- " तरुण तुम तक गये होंगे जाओ. अपने कमरे मे

फ्रेश हो कर आराम कर लो."

तरुण - " हा डॅड,,,, मोम मुझे बहुत भूक लगी है.. प्लीज़

कुछ खाना बना दो. मैं फ्रेश हो कर आता हू. "

कामिनी- " ओके बेटा.. तुम आओ मैं खाना लगा देती हू. "

तरुण अपने कमरे मे जा कर अपने कमरे को अच्छे से

देखता है. कैसे वो 4 साल तक अपने इस कमरे से दूर रहा

.. उसके बाद समान रख कर.. बाथरूम मे नहाने चला

जाता है.. नहा कर बाहर निकलता है.. ओर अपने कपड़े पहन कर

मिरर मेखुद को देख रहा होता है. अचानक टिया भागती

हुई अंदर आती है..- " भैया मोम बुला रही है. चलो

खाना ख़ालो..."

तरुण टिया के साथ डाइनिंग हॉल मे चला जाता है..

डाइनिंग हॉल मे पहुच कर डाइनिंग टेबल से साइड मे चेयर पर बैठा

है. कामिनी किचन मे खाना गर्म कर रही थी. ओर तन्नू भी उनकी हेल्प

कर रही थी. तानिया टीवी देख रही थी. थोड़ी देर मे टीना भी आ कर तरुण

के बगल मे बैठ जाती है. वही पर टिया भी आ कर बैठती है.

टीना - " भाई कैसा रहा सफ़र..? "

तरुण - " थोड़ा अच्छा रहा .. बट अगर घर से सब लेने आते तो ज़्यादा

खुशी होती."

(तरुण के चेहरे पर इस बात की नाराज़गी सॉफ दिखाई दे रही थी.)

टीना - " भाई मैं तो आना चाहती थी.. बल्कि हम सभी आना चाहते थे.

बट वो डॅड ने मना कर दिया. "

तरुण - " ओके बट मोम तो आ सकती थी ना ..? "

टीना - " हा अब मोम के बारे मे तुम मोम से ही पूछो. ऐसे मुझसे

तो नाराज़ मत रहो ना.. इतने सालो बाद आए हो.. ओर मुझसे ऐसे बात

कर रहे हो.. "

तरुण - "हा ऐसे ही बात करूँगा. तुम ने ग़लती की है."

टीना - " प्लीज़ भाई "तभी कामिनी खाना ले कर आती है ओर तरुण को सर्व करती है. तरुण

खाना खाना स्टार्ट करता है. ओर टीना को इग्नोर करने लगता है. टीना की

आखे नम हो जाती है. ओर वो वहाँ से उठ कर अपने रूम में चली जाती

है. टिया भी उठ कर उसके पीछे चली जाती है.

कामिनी - "बेटा तुम इतने दिनों तक कैसे रहे हम सब के बिना..?"

तरुण - "वैसे ही जैसे आप लोग रहे.?"

कामिनी उसकी नाराज़गी का कारण जानती थी.
 
कामिनी - "बेटा मैं तो तुम को लेने आने वाली थी. बट ऑफीस मे एक

बहुत इम्पोर्टेंट काम आ गया था.. तो तुम्हारे डॅड या मुझमे से

किसी ना किसी को तो रुकना था ना."

तरुण - " हा वो काम शायद मुझसे ज़्यादा इम्पोर्टेंट होगा. मैं

समझ गया "

कामिनी - "नहीं बेटा ऐसी बात नही है.. मैं तो अपने बेटे से बहुत

प्यार करती हू."

ओर कामिनी खड़ी हो कर तरुण को अपने सीने से लगा लेती है.. और एक टाइट

हग कर लेती है.. तरुण का फेस कामिनी के बूब्स मे धँस रहा था. बट

वो ये सब नही सोच रहा था. उसने भी अपनी मा को हग किया.. ओर

बोला.. " इट'स ओके मा.. मैं तो कुछ ज़्यादा ही रिएक्ट कर रहा था..."

कामिनी - "मेरा प्यारा बेटा."

ओर कामिनी तरुण को माथे पर एक किस करके किचन मे चली गयी.

तभी टिया अंदर से आ कर तरुण की साइड मे बैठती है.

टिया - "भैया तुम ने ठीक नही किया टीना दीदी के साथ. एक तो इतने दिनों

बाद आए हो. ओर टीना दीदी को रुला दिया."

तरुण - "मैने कब रुलाया.?"

टिया - " अभी आपने उनसे इतना रूडली बात किया. वो रो रही है."

तरुण को अपनी ग़लती का अहसास हो गया था. वो कुछ ज़्यादा ही रुड हो गया था.. उसने टीना से बात करने का मन बनाया.. ओर अपना खाना ख़त्म किया टीवी देखने लगा.

वो अभी सोच ही रहा था की कैसे टीना को खुश करे.. तभी उसे याद

आया अपनी सभी बहनो के लिए गिफ्ट्स लाया है... तरुण इतना सोच ही रहा

था की किसी ने उसके हाथो से टीवी का रिमोट छीन लिया. वो तानिया थी

तानिया - " ओये ये किया टीवी ओं करके ड्रीम्स देख रहा है. किसी को तो टीवी

देखने दे "
 
तरुण अभी तानिया को कोई जवाब नही देना चाहता था. वो अभी सिर्फ़

टीना के बारे मे सोच रहा था.. वो उठ कर अपने रूम मे गया. उसने

सोचा मैं शाम मे टीना से बात करूँगा.. क्योंकि वो बहुत थक

चुका था.. वो अपने बेड पर पड़ते ही सो गया. तरुण ईव्निंग 8 बजे

तक सोता रहा..

तभी तरुण को किसी की आवाज़ आई.. भैया उठो मोम

बुला रही है. तरुण पेट के बल लेटा हुआ था. ओर टिया उसकी कमर पर

बैठी हुई थी. ओर उसको जगाने की नाकाम कोसिस कर रही थी.

टिया - "भैया उठो ना. बहुत लेटा हो गया है. मोम बुला रही है"

तरुण - "हा हा उठ रहा हू. बस थोड़ी देर ओर."

टिया - " नही भैया मोम बुला रही है "

तरुण सीध होते हुए. टिया को पकड़ता है.. ओर अपने साथ लिटा देता है..

ओर उसको हग करके दुबारा सोने का ट्राइ करता है.. बट टिया अभी भी

उसको उठाने की कोसिस करती है ओर खड़ी हो जाती.. तरुण भी बेड पर बैठ

जाता है.

वो टिया को देखता है.

तरुण - "टिया इधर आओ."

टिया तरुण को हग करती है. ओर तरुण टिया को गाल पर एक किस करता है..

बाथरूम मे चला जाता है.

वो बाथ ले कर सिर्फ़ टवल मे बाहर आता है.. वो अपने कपड़े पहनने

लगता है.. तभी उसकी नज़र गेट पर जाती है वहाँ तन्नू खड़ी हो कर

उसे देख रही थी. तरुण चॉक कर

तरुण - " दी आप यहा ऐसे "

तन्नू –"हा वो तुझे डिन्नर के लिए बुलाने आई थी."

तरुण - " ओके दी आप जाओ मैं आता हू "

तन्नू वहाँ से चली जाती है. तरुण को ये बहुत अजीब लगता है की तन्नू

उसकी बड़ी बहन उसे कपड़े चेंज करती हुए देख रही थी. बट इन

बात पर ज़्यादा ध्यान नही देता है.. क्योंकि वो अपनी तन्नू दी को

बहुत लाइक करता है.. अपनी बहन से कुछ ज़्यादा.. बट वो इस फीलिंग

को कभी बाहर नही आने देता है... वो डिन्नर के लिए रेडी होता है.

ओर रूम से निकलता है. वो टीना के रूम के पास जा कर उसे टीना के

बारे मे याद आता है की उसने टीना को बहुत हर्ट किया है.. इसलिए

वो वापस अपने रूम मे जाता है. वो टीना का गिफ्ट ले कर वहाँ से सीधा

टीना के रूम मे जाता है.
 
टीना का रूम अंदर से लॉक था. तरुण डोर

पर नॉक करता है.. थोड़ी देर मे टीना डोर ओपन करती है. ओर सामने

अरुण को देख कर. . वापस अंदर जा कर अपने बेड पर बैठ जाती है. उसका

फेस दूसरी तरफ़ था. शायद वो अपनी आखो के आसुओ को छुपाने की

कोसिस कर रही थी. बट तरुण ने उसके आसू पहले ही देख लिए थे.

तरुण रूम मे एंटर करता है.

तरुण – “ टीना दी , आप मुझसे नाराज़ हो ..? “

टीना – “ मैं कौन होती हू. तूमे तुमसे नाराज़ होने वाली तुम ही

मुझसे नाराज़ हो. “

तरुण टीना के बगल मे जा कर बैठता है ओर उसके कान के पास जा कर

धीरे से कहता है.

तरुण – “ दी मैं आपके लिए एक गिफ्ट लाया हू.”

टीना – “नही मुझे नही चाहिए कोई गिफ्ट.”

तरुण उठ कर टीना के सामने जाता है. ओर टीना का फेस देख कर तरुण ग्लानि

मे भर जाता है. टीना की आखे लाल थी. देखने से पता चल रहा था

की टीना बहुत रोई है. उसके गालो पर आसुओ के निशान अभी भी थे. ये

सब देख कर तरुण की रूह काँप गयी.. कैसे उसकी एक छोटी सी ग़लती से उसकी

बहन को इतना हर्ट हुआ है. वो समझ गया था. की उसने बहुत

बड़ी ग़लती की थी. वो तुरत टीना के घुटनो के पास बैठ गया. ओर अपने

हाथो से टीना के आसू पोछने लगा.

तरुण – “दी आई आम रियली सॉरी.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.. आपको रोते

हुए नही देख सकता हू ”

टीना – “ माफी किस बात की तुम ने क्या किया है. “

तरुण – “ वो मैने आज आपसे बहुत रूडली बात की थी ना.. मैं तो मज़ाक कर रहा था. मुझे नही पता था.. आपको इतना हर्ट होगा.प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.“

टीना – “ इट’स ओके भाई.. लेकिन प्लीज़ दोबारा ऐसा मत करना. मैं कुछ

भी सह सकती हू. लेकिन त्म्हरी नाराज़गी नही सह सकती. “

तरुण – “ प्रोमिस दी ऐसा दोबारा कभी नही होगा. अब चलो डिन्नर

के लिए चलते है”

टीना – “ पहले ये तो बताओ मेरा गिफ्ट कहाँ है.?

तरुण – “ कॉन्सा गिफ्ट “

टीना – “वही गिफ्ट जो तुम मेरे लिए लाए थे. “

तरुण – “बट आपको तो वो गिफ्ट नही चाहिए ना.. मैं सोच रहा हू वो

गिफ्ट तानिया को दे दूँ”

(एक ओर बात टीना तानिया के बीच भी बिल्कुल नही बनती.. दोनों एक दूसरे

को बिल्कुल लाइक नही करती है)

टीना ये सुनते ही खड़ी हो गयी. ओर तरुण की ओर झपटी. ओर उसकी कोल्लर पकड़ ली

टीना – “मेरा गिफ्ट किसी ओर को देने की कोई ज़रूरत नही है. मेरा भाई

मेरे लिए लाया है तो मैं ही रखूँगी.”

तरुण – “ ओके बाबा ये लो. अपना गिफ्ट. बट इसे बाद मे खोलना अभी

डिन्नर के लिए चलते है. मुझे बहुत भूक लगी है.

टीना गिफ्ट को बेड पर रख कर तरुण के साथ डाइनिंग हॉल मे आती है..

वहाँ मयंक ओर तानिया बैठे हुए थे. तन्नू ओर कामिनी किचन मे

काम कर र्ही थी. टिया टीवी देख रही थी. टीना ओर तरुण भी डाइनिंग

टेबल पर आ कर बैठ गये. कामिनी ओर तन्नू खाना ले कर आते है. एंड

टिया भी आकर तरुण के बगल मे बैठ जाती है. खाना डाइनिंग टेबल पर

लगा कर. तन्नू ओर कामिनी भी बैठ जाते है. तन्नू तरुण के बिल्कुल

सामने बैठती है. आज तन्नू तरुण को कुछ अजीब निगाहो से देख रही

थी,, वो तिर्छि नज़रो से तरुण को देखती है.. कुछ देर बाद तरुण ये

बात नोटीस कर लेता है. वो तन्नू को देखता है.. तन्नू बहुत

कामुक नज़रो से उसे देख रही थी. तरुण इससे अपनी ओल्ड फीलिंग (लव

वाली फ़ील्लिंग ) जागने लगी.. बट वो जब ये बात समझा तो उसने तुरंत

अपनी नज़रे खाने पर किया ओर खाना खाने मे वयस्त हो गया.. उसने

अपनी फीलिंग को दोबारा अपने सीने मे दबा दिया.. वो समझ रहा था

की ये ग़लत है.. अगर तन्नू को पता लगेगा तो कितना हर्ट होगा उनको..

ऐसा ही सोच कर उसने कभी अपनी फीलिंग को बाहर नही आने दिया..

लेकिन आज तन्नू की इन कामुक नज़रो ने उसके अंदर आस जगा दी थी की शायद वो सही है. उसे अपने लव को दबाना नही चाहिए.. बट वो अभी इसके लिए तैयार नही था. तरुण से सब सोच ही रहा था की

तन्नू ने तरुण को पूछ

तन्नू- “ तरुण क्या हुआ.? खाना क्यो नही खा रहे हो..? खाना

अच्छा लगा क्या.?”

तरुण – “नही दी ऐसी कोई बात नही है.. वो मैने अभी ईव्निंग मे ही

खाना खाया था ना. तो ज़्यादा भूक नही है.”

तब तक सभी डिन्नर ख़त्म करके अपने अपने रूम की ओर जाते है.

तन्नू और कामिनी बर तन ले कर किचन की ओर जाते है. ओर टीना ऊपर की ओर

जाने लगती है तभी तरुण उसे पीछे से आवाज़ देता है.

तरुण – टीना दी रूको मैं भी आता हू

टीना रुक जाती है.. ओर फिर दोनों एक साथ टीना के रूम मे चले जाते

है.. तन्नू ये सब देखती है. ओर थोड़ा सॅड मुँह बना कर बर्तन साफ

करने लगती है..
 
वहाँ टीना ओर तरुण टीना के रूम मे पहुचते है

टीना – क्या अब मैं अपना गिफ्ट खोल सकती हू.

तरुण – “हा खोलो ना”

टीना अपना गिफ्ट पॅकिंग को खोलती है. जिसमे एक बहुत ही एक्सपेन्सिव

एंड ब्यूटिफुल पेन होता है. टीना उसको देख कर बहुत खुश हो जाती

है. टीना अपनी स्टडी टेबल पर जा कर पेन को रखती है.. ओर वापस आ कर

तरुण को अपने गले से लगा लेती है..

टीना – थॅंक यू भाई… ये गिफ्ट बहुत अच्छा है,, मैं इससे हमेशा

अपने पास रखूँगी.

तरुण – ह्म ओके अब मैं चलता हू

टीना तरुण को पीछे से आवाज़ देती है. ओर तरुण पीछे मूढ़ कर देखता

है.. टीना तरुण के पास आती है. ओर तरुण के गालो पर एक प्यारा सा किस

कर देती है.. तरुण के गाल शर्म से लाल हो जाते है. ओर वो टीना को ओके

स्माइल देता है ओर अपने कमरे की ओर चला जाता है. तरुण अपने कमरे

मे लेटा हुआ सोच रहा होता है की आज कितने दिनों बाद वो अपने

परिवार के साथ है..

तभी उसको तन्नू के बारे मे याद आता है.. आज

तन्नू उसे बहुत अजीब नज़रो से देख रही थी.. ओर आज उसने तरुण से

ज़्यादा बात भी नही की.. तभी तरुण ने डिसाइड किया की वो अपने प्यार

की फीलिंग को अंदर नही दबाएगा,,, ये सोचते सोचते उसे नींद आने

लगी थी. तभी उसके डोर पर नॉक होता है.. वो तुरंत जाग कर टाइम

देखता है यहा 10:30 हो रहे थे. तरुण सोचने लगा अब इतनी रात में कौन आया होगा.. वो डोर ओपन करता है. ओर सामने देखा की
 
जब तरुण ने डोर ओपन किया तो देखा सामने तन्नू खड़ी

थी. तरुण उसको देख कर चॉक गया. क्योंकि इतनी रात को उसने

तन्नू को अपने रूम मे आना कभी एक्सपेक्ट नही किया था..

उसके दिमाग़ मे वो सभी ख्वाब एक मिंट मे आगये जो जो वो

इतने सालो से अपने दिल मे दबाने की कोसिस कर रहा था.. वो

कुछ समझ नही पा रहा था की क्या हो रहा है.. ये सच

है या वो कोई ड्रीम देख रहा है.

तन्नू – “ तरुण अंदर आने को नही कहोगे “

तरुण – (तरुण एक दम से होश मे आते हुए.) हा ,,,,,, हा दी

आआओ ना..

तन्नू अंदर आ कर बेड पर बैठ जाती है.. तरुण भी अंदर

आने लगता है.

तन्नू – “ तरुण डोर को लॉक कर दो प्लीज़”

तरुण ये बात सुन कर थोड़ा अजीब फील करता है की ये सब उसके

साथ क्या हो रहा है.. अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो खुद की

फीलिंग को कंट्रोल नही कर पाएगा. . लेकिन ये सब सोचते

उसने पूछ लिया

तरुण – “डोर लॉक क्यो करना है दी..? ”

इतना सुनते ही तन्नू खड़ी हो कर डोर की ओर जाती है ओर डोर को

अंदर से लॉक कर देती है ओर पीछे मूड कर तरुण की ओर देखती

है..

तन्नू – “ मैं तुमसे अकेले मे बाते करना चाहती हू.”

तन्नू ये सब कहते वक़्त बहुत शरमा रही थी. वो तरुण से

नज़रे नही मिला रही थी. वो ये कहते हुए धीरे से वापस बेड

पर जाकर बैठ गयी.. तरुण के दिमाग़ ने अब सोचना समझना

बंद कर दिया था. वो ओपन होने की कोशिश करने लगा.. तरुण

एक चेयर ले कर बिल्कुल तन्नू के सामने बैठ गया.

तरुण – “ हा दी बोलो.. कोई इंपॉर्टेंट बात है क्या..??

तन्नू- “ नही वो जब से तुम आए हो हम ने ठीक से बात

भी नही की है. मुझे तुमसे बहुत सारी बाते करनी है.पहले ये बताओ. तुम मुझसे इतने सालो तक दूर थे. वहाँ

तुम को मेरी याद तो नही आई होगी..? “
 
तरुण ने जब से सुना तो उसके दिल मे एक खुशी लहर दौड़

गयी. वो थोड़ा थोड़ा समझने लगा था की दी क्या पूछना

चाहती है. ये सब सोचते हुए. तरुण के चेहरे पर एक छोटी

सी स्माइल आ गयी ओर वो नीचे देखने लगा.तभी तन्नू से

दोबारा पूछा.

तन्नू – “बताओ ना..”

तरुण – “क्या बताऊं..??”

तन्नू – “ कुछ नही..”

ओर तन्नू इतना कह कर खड़ी हो जाती है जाने लगती है. तभी

तरुण तन्नू का हाथ पकड़ता है ओर उसको वापस ला कर बेड पर

बैठता है. तन्नू ने चेहरा नीचे किया था. तरुण ने अपने एक हाथ से तन्नू की ठोडी को पकड़ कर तन्नू के फेस को ऊपर

किया.. तन्नू की आखे नम थी. तरुण ने थोड़ा सीरीयस होते

हुए कहा.. “क्या हुआ दी आप रो क्यो रही है. क्या अपनी दी से

मज़ाक भी नही कर सकता.?”

तन्नू – “ऐसा मज़ाक मत करो प्लीज़.. मैं तुमसे यहा

मिलने आई हू. ओर तुम ऐसे मज़ाक कर रहे हो..”

तरुण ने अपने हाथो से तन्नू के आसू पोंछे ओर तन्नू को

अपने सीने से लगा लिया

तरुण - “ आई आम सॉरी दी…. आप प्लीज़ रोना बंद कीजिए….

आप रोती हुई बिल्कुल अच्छी नही लगती है.”

तन्नू – “ अच्छी नही लगती तो रुलाते क्यो हो..?”

तरुण – “ ओके दी मैने सॉरी बोला ना.. अब प्लीज़ रोना बंद

करो.. वरना मैं भी रो दूँगा. “

इतना सुनते ही तन्नू खिलखिला कर हँसने लगी..

तन्नू – “हहा तू मत रोना .. तू रोता हुआ बिल्कुल बंदर लगता

है.”

तरुण – “अच्छा. आपको कैसे पता..?”

तन्नू- “ जब तू छोटा था तो तुझे बंदर कह कर चिड़ाते थे हम. “

तरुण एक दम रुक कर तन्नू की फेस की ओर गौर से देखने

लगता है.. तन्नू अपने आसू पोंछ रही थी. ओर हँस रही थी..

तभी तन्नू तरुण को देखती है.. वो तन्नू के चेहरे को

देखे ने मे खोया हुआ था.. तन्नू थोड़ा शर्मा जाती है. ओर

गर्दन को नीचे कर लेती है

तन्नू – “ ऐसे क्या देख रहे हो..? “

तरुण – “आपको, आप हँसती हुई बहुत अच्छी लगती है.”

तरुण के मुँह से अपने लिए ऐसे वर्ड्स सुनकर तन्नू का

चेहरा शर्म से लाल हो जाता है. ओर वो उठ कर जाने लगती है,
 
तन्नू – “ अब मुझे चलना चाहिए. कल जल्दी उठना है.”

तरुण इसके एक्शन के लिए पहले से ही तैयार था. उसने तुरंत

उठ कर कहा

तरुण – “ दी आप ये नही जानना चाहोगी की मैने इन 4 सालो में

आपको याद किया की नही.”

तन्नू से सुन कर वही रुक जाती है.. तन्नू का दिल ज़ोर से

धड़कने लगता है. ओर फेस पर एक स्माइल भी है.जैसे की वो

जानती है. तरुण क्या कहने वाला है. लेकिन वो तरुण के मुँह

से सुनना चाहती थी. इसलिए उसने मूड कर तरुण की ओर देखा ..

तरुण अब बेड पर दूसरी ओर मुँह करके बैठा हुआ था. तन्नू

उसके जवाब का वेट कर रही थी. बट तरुण ने कुछ नही बोला..

कुछ देर बाद

तरुण – “ आप जाओ कल जल्दी उठना है ना.”

तन्नू ने ये अभी एक्सपेक्ट नही किया था.. बट वो समझ

गयी थी की तरुण उसको छेड़ रहा है.. . वो तरुण के पास जा

कर बेड पर बैठ गयी. ओर तरुण का हाथ पकड़ कर

तन्नू – “प्लीज़ भाई बोलो ना.. मेरी याद आई थी क्या..?”

तरुण – “पहले एक प्रोमिस करो. तब बताउन्गा.”’

तन्नू – “कैसा प्रोमिस.?”

तरुण- “कल भी मुझे ऐसे ही मिलने आओगी.”

तरुण की ये बात सुन कर तन्नू के मन में खुशी के लड्डू

फूटने लगे.. उसने कल आने का प्रोमिस किया.. तब तरुण खड़ा

हुआ..ओर तन्नू भी खड़ी हो गयी.. तन्नू भी कुछ बोलने ही वाली थी कि तरुण ने उसके होतो पर अपनी उंगली रख कर उसको चुप रहने का इशारा किया. ओर उसके दोनो गालो को अपने

हाथो मे भर कर अपने चेहरे को उसके चेहरे के बिल्कुल

पास लाया.. दोनो की साँसे बहुत तेज चल रही थी.

दोनो एक दूसरे की साँसे को अपने होंठो पर महसूस कर पा रहे थे..

कमरा बिल्कुल शांत हो गया था… ऐसा लग रहा था.. जैसा

वक़्त यही थम गया है.. तब तरुण ने बोला

तरुण – “ दी मैं कुछ पल साँसे के बिना जिंदा रह सकता हू,,,

लेकिन आपकी यादो के बिना एक भी जिंदा नही रह सकता. मैं

वहाँ बस आपकी यादो के सहारे जिंदा था.. मैं वहाँ अपनी हर साँस के साथ आपको याद करता था. “

इतना कह कर तरुण चुप हो गया. तरुण ने जब ये कहा तो

तरुण नही जानता था की वो क्या कह रहा है. उसके दिल मे जो

आ रहा था.. उसने बोल दिया.. ये सब सुन कर तन्नू ने अपनी जिन

फीलिंग पर कंट्रोल किया हुआ था.. वो बाहर आने को उतारू हो

गयी थी.. तन्नू ने तरुण को अपनी बाहों मे भर लिया.. वो एक

दम टाइट हग किया..
 
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