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Guest
इधर अनीस रजनी को ले कर एक रेस्टोरेंट में गया जहा इन्होने खाना खाया और फिर वहां से ये लोग मोटरसाइकिल पे सवार हो कर अपने होटल की तरफ चल दिया जहा इनका रूम बुक्ड था ....होटल पहुच कर कमरे में पहुचते ही अनीस रजनी को बाहों में जकड लिया ...रजनी उसके इस उतावलेपन को देख कर बोली की अनीस मै कही भागी नहीं जा रही हु मै तुम्हारी ही हु.....
अनीस - जाना अब बस भी करो आज मत रोको मुझे ...आज मुझे तुम्हारे इस हुस्न को पि लेने दो जिसके लिए मैंने और तुमने इतना इन्तेजार किया है आज वो पल हमारे सामने है ....और वो रजनी के होठो पे अपने होठ जमा देता है
...आज दोनों में से कोई रुकने को तैयार नहीं था अब दोनों हवस के दरिया में गोते लगाने लगे थे ...कुछ ही देर में रजनी की समीज के चेन पे अनीस ने उसको उसके बदन से अलग कर दिया और साथ ही साथ उसके सलवार को भी अब वो उसके सामने केवल एक लाल रंग की ब्रा पैंटी में थी .....और यही हाल अनीस का भी था वो भी एक अंडर वेयर में खड़ा था ......और उसका तम्बू साफ़ साफ़ दिख रहा था जिसे देख कर रजनी की सासे अटकने लगी थी ....
अनीस ने उसे कहा की जान घबराओ मत मै तुम्हे ज्यादा दर्द नहीं दूंगा .......
रजनी उसे अपने ऊपर खीच कर कहा की भरोसा है तुमपे और वैसे भी इस दर्द को झेलने के लिए ही इतने दिन इन्तेजार किया है .....
अनीस - वाह जान दिल खुश कर दिया.....और वो उसे ले कर कम्बल में घुस जाता है...और फिर शुरू होती है घमासान लड़ाई....अगले कुछ ही देर में अनीस ने रजनी के ब्रा के हुक को खोल कर उसके बदन से अलग कर दिया और वो उसकी गोल गोल सुडौल मुलायम चुचियो पे टूट पड़ा और रजनी की सिसकियाँ तेज होती जा रही थी
आज उसके जीवन में पहली बार किसी ने इस्पे मुह लगाया था और वो इस आनदं को पूरी तरह से जीना चाहती थी तभी अनीस झुकते हुए नीचे आया और उसके कमर पे अपने दातो से उसकी पैंटी में फसाते हुए उसे नीचे खीचना शुरू किया और अब रजनी उसके सामने पूरी तरह से नंगी लेटी हुयी थी ....
अनीस भी अपने बदन के एकमात्र कपडे को उतार कर नंगो हो गया और उसके ऊपर आ गया और फिर से उसके होठो को चूसने लगा.....फिर धीरे धीरे वो नीचे आता गया और उसकी अनछुई बिना बालो की एकदम चिकनी चूत पे मुह लगा दिया जिससे रजनी चीख उठी ...ऊओह्ह्ह्ह रर्र्र्राआव्व्वी आःह्ह्ह
अब अनीस ने उसकी टांगो को फैला कर उसकी चूत में लपालप अपनी जीभ से हमला करना शुरू किया और तुरत ही रजनी झड गयी और उसका सारा पानी अनीस के चेहरे पे आ गया उसके जीवन का ये पहला चरम सुख था......
रजनी और अनीस दोनों को अब बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था अनीस ने अब अपना लंड पे अपना ही थूक लगा कर उसके चूत के मुहाने पे टिकाया ...
इस स्पर्श को पाते ही रजनी फिर से चिहुक गयी और वो एक बार फिर से झड गयी .....
अनीस झुक कर उसके होठो को चूसने लगा और इधर एक करारे झटके के साथ उसने अपना लंड का टोपा उसकी चूत में घुसा दिया ...जिससे रजनी की चूत की झिल्ली फट गयी और रजनी की आँखे बाहर आने लगी मगर अनीस उसके होठो को चुसे जा रहा था और उसने कुछ देर रुक कर उसके चूत में एक और करारा झटका मारा और अपना पूरा लंड उसकी चूत में घुसेड़ दिया ......
जिससे रजनी बुरी तरह छटपटाने लगी रजनी ने उसके पीठ पे नाख़ून गढ़ा दिए मगर अनीस के बलिष्ठ बाहों के शिकंजे में वो एकदम सिकुड़ कर रह गयी ....अनीस ने कुछ देर रुक कर रजनी को शांत होने दिया और इस दरमियाँ वो उसके होठो को चूसता रहा ...
.रजनी के शांत होने पे उसने उसके होठो को छोड़ा तो रजनी ने उसे कहा की कितना हब्शी लंड है उसका उसकी चूत एकदम फट गयी होगी आह माँ मै मरी माँ....... और सुबकने लगती है साथ ही साथ अनीस के पीठ पे मुक्के मारने लगती है की उसने उसपे जरा भी दया नहीं दिखाई .....उफ़ मेरी तो जान हलक में आ गयी थी....
अनीस - कोई बात नहीं जान आखिर में मैंने तुम्हे पूरी तरह से अपनी बना ही लिया
रजनी - अभी कहाँ जनाब पहले शादी की रसम निभाइए फिर ये बात कहियेगा.....
अनीस - जरुर मेरी जान... और वो उसके होठो पे फिर से अपने होठ जमा देता है ......और फिर दोनों अपने आलिंगन में चुदाई का भरपूर मजा लेने लगते है और कमरा रजनी की सिसकियो से गूंजने लगता है.......
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अनीस - जाना अब बस भी करो आज मत रोको मुझे ...आज मुझे तुम्हारे इस हुस्न को पि लेने दो जिसके लिए मैंने और तुमने इतना इन्तेजार किया है आज वो पल हमारे सामने है ....और वो रजनी के होठो पे अपने होठ जमा देता है
...आज दोनों में से कोई रुकने को तैयार नहीं था अब दोनों हवस के दरिया में गोते लगाने लगे थे ...कुछ ही देर में रजनी की समीज के चेन पे अनीस ने उसको उसके बदन से अलग कर दिया और साथ ही साथ उसके सलवार को भी अब वो उसके सामने केवल एक लाल रंग की ब्रा पैंटी में थी .....और यही हाल अनीस का भी था वो भी एक अंडर वेयर में खड़ा था ......और उसका तम्बू साफ़ साफ़ दिख रहा था जिसे देख कर रजनी की सासे अटकने लगी थी ....
अनीस ने उसे कहा की जान घबराओ मत मै तुम्हे ज्यादा दर्द नहीं दूंगा .......
रजनी उसे अपने ऊपर खीच कर कहा की भरोसा है तुमपे और वैसे भी इस दर्द को झेलने के लिए ही इतने दिन इन्तेजार किया है .....
अनीस - वाह जान दिल खुश कर दिया.....और वो उसे ले कर कम्बल में घुस जाता है...और फिर शुरू होती है घमासान लड़ाई....अगले कुछ ही देर में अनीस ने रजनी के ब्रा के हुक को खोल कर उसके बदन से अलग कर दिया और वो उसकी गोल गोल सुडौल मुलायम चुचियो पे टूट पड़ा और रजनी की सिसकियाँ तेज होती जा रही थी
आज उसके जीवन में पहली बार किसी ने इस्पे मुह लगाया था और वो इस आनदं को पूरी तरह से जीना चाहती थी तभी अनीस झुकते हुए नीचे आया और उसके कमर पे अपने दातो से उसकी पैंटी में फसाते हुए उसे नीचे खीचना शुरू किया और अब रजनी उसके सामने पूरी तरह से नंगी लेटी हुयी थी ....
अनीस भी अपने बदन के एकमात्र कपडे को उतार कर नंगो हो गया और उसके ऊपर आ गया और फिर से उसके होठो को चूसने लगा.....फिर धीरे धीरे वो नीचे आता गया और उसकी अनछुई बिना बालो की एकदम चिकनी चूत पे मुह लगा दिया जिससे रजनी चीख उठी ...ऊओह्ह्ह्ह रर्र्र्राआव्व्वी आःह्ह्ह
अब अनीस ने उसकी टांगो को फैला कर उसकी चूत में लपालप अपनी जीभ से हमला करना शुरू किया और तुरत ही रजनी झड गयी और उसका सारा पानी अनीस के चेहरे पे आ गया उसके जीवन का ये पहला चरम सुख था......
रजनी और अनीस दोनों को अब बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था अनीस ने अब अपना लंड पे अपना ही थूक लगा कर उसके चूत के मुहाने पे टिकाया ...
इस स्पर्श को पाते ही रजनी फिर से चिहुक गयी और वो एक बार फिर से झड गयी .....
अनीस झुक कर उसके होठो को चूसने लगा और इधर एक करारे झटके के साथ उसने अपना लंड का टोपा उसकी चूत में घुसा दिया ...जिससे रजनी की चूत की झिल्ली फट गयी और रजनी की आँखे बाहर आने लगी मगर अनीस उसके होठो को चुसे जा रहा था और उसने कुछ देर रुक कर उसके चूत में एक और करारा झटका मारा और अपना पूरा लंड उसकी चूत में घुसेड़ दिया ......
जिससे रजनी बुरी तरह छटपटाने लगी रजनी ने उसके पीठ पे नाख़ून गढ़ा दिए मगर अनीस के बलिष्ठ बाहों के शिकंजे में वो एकदम सिकुड़ कर रह गयी ....अनीस ने कुछ देर रुक कर रजनी को शांत होने दिया और इस दरमियाँ वो उसके होठो को चूसता रहा ...
.रजनी के शांत होने पे उसने उसके होठो को छोड़ा तो रजनी ने उसे कहा की कितना हब्शी लंड है उसका उसकी चूत एकदम फट गयी होगी आह माँ मै मरी माँ....... और सुबकने लगती है साथ ही साथ अनीस के पीठ पे मुक्के मारने लगती है की उसने उसपे जरा भी दया नहीं दिखाई .....उफ़ मेरी तो जान हलक में आ गयी थी....
अनीस - कोई बात नहीं जान आखिर में मैंने तुम्हे पूरी तरह से अपनी बना ही लिया
रजनी - अभी कहाँ जनाब पहले शादी की रसम निभाइए फिर ये बात कहियेगा.....
अनीस - जरुर मेरी जान... और वो उसके होठो पे फिर से अपने होठ जमा देता है ......और फिर दोनों अपने आलिंगन में चुदाई का भरपूर मजा लेने लगते है और कमरा रजनी की सिसकियो से गूंजने लगता है.......
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