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Incest सपना-या-हकीकत

मै खुश होकर मा के गाल को चुमा - ठीक है मा आता हू अभी ।

मा - वो अपना मोबाईल देके जा जरा घर की खोज खबर लेलू

मै मा को मोबाइल दिया और निकल गया गीता बबिता के रूम मे

कमरे मे जाकर मैने दरवाजा बंद किया और उन्के बेड पर चला गया ।

दोनो बिस्तर पर बैठे हुए बाते कर रही थी और मुझे देखते ही बबिता बोली

बबिता - आओ भैया बैठो

मै - क्यू तुम दोनो को सोना नही है देखो 9:30 बजने वाले है

गीता - ब्क्क्क भैया हमलोग वो खेल खेलने वाले थे ना ,,और आप कल चले भी जओगे ।

गीता बहुत ही गिरे मन से बोली

मै मुस्कुरा कर - हम्म्म तो बैठी क्यू हो चलो शुरू हो जाओ

गिता - सच भैया

मै - हा मेरी मीठी

गीता को बाहो मे भर कर गाल को काटते हुए बोला

बबिता हस्ते हुए - हिहिहिही पहले कपडे तो निकालो ना भैया

मै - वो भी मै ही करू हा

गिता उठी और झट से मेरे पैर के पास जमीन पर घुटनो के बल आ गई

गिता - चलो खड़ा हो जाओ आप

मै ह्सा और खड़ा हो गया

गीता ने मेरे लोवर को पकड़ा और घूतने तक खीचा जिससे आधा खड़ा हुआ लण्ड का सामने आ गया वही बबिता बगल मे बिस्तर पर घोड़ी बन कर गरदन आगे करके मेरे लण्ड को निहार रही थी ।

गीता ने एक नजर मुझे देखा और उत्साह मे बबिता को देख कर मुस्कुराई और उठे मेरे लण्ड को चूम लिया ,जिससे मेरा लण्ड झटके खाने लगा

वही मौका पाकर बगल मे घोड़ी बनकर मेरे लण्ड को झाकती बबिता ने एक हाथ से मेरे आडो को सहलाना शुरू कर दिया और गीता मेरे आधे झुके लण्ड के सुपाडे होठो मे भर ली ।

जल्द ही मेरा लण्ड तनने लगा और बबिता के कोमल हाथो मे आड़ो के मसलने से मेरे लण्ड मे खुन का बहाव तेज होने लगा जिससे गिता के मुह मे मेरा लण्ड कसना शुरू कर दिया ।

अब बबिता ने आड़ो के साथ चमडी को पीछे ले जाने लगी जिससे गिता मेरे सुपाडे को और मुह खोल कर अन्दर लेती

मै सिसकियाँ लेते हुए मेरी जवान कसी हुई बहानो के मज़े लेने लगा ।

मेरी नजर जब बबीता पर गयी तो वो गीता को लण्ड चुस्ते हुए ही निहार रही है और जैसे जैसे गीता मेरे लण्ड को मुह मे भरती वैसे ही बबिता के खुले मुह लण्ड के चूसने की कलपना करके हिलते रहते ।

हवस धीरे धीरे बबिता पर बढ़ने लगा जिसका अंदाजा मुझे अपने आड़ो पर पड़ रही उसके हाथ की तेज मसलन से साफ पता चल रहा था ।

फिर मै रहम कर गीता के सर को पकड कर पीछे किया और बबिता की तरफ घूम गया ।

बबिता मुझे देखी और मुस्कुराई फिर एक हाथ से लण्ड की चमडी को आगे पीछे करते हुए मेरी आँखो मे देखा और फिर आंखे बंद कर बडे चाव से मुह खोल कर लण्ड को भर लिया और चूसने लगी । मै बबिता के बालो मे हाथ फेरते हुए सिसकता रहा और अपनी कमर को आगे बढ़ाते हुए लण्ड को उसके गले मे उतारने की कोसिस करता तो वो मेरे पेट को हाथ से रोक देती जिसका इशारा होता कि वो इससे ज्यादा नही ले सकती थी।

वही मेरे पीछे गीता वैसे बैठे बैठे ही मेरे चुतडो को सहलाने लगी ,,जिससे मुझे गुदगुड़ी होने लगी । जिससे मेरे सिस्कियो मे मीठी सी मुस्कान भी आ चुकी थी ।

मै अभी झडना नही चाह्ता था तो बबिता को भी खुद से अलग किया और वो जीभ लपल्पती अपने लार को चाटते हुए अलग हुई मुझ्से ।

फिर मै बबिता को खड़ा किया और उसके टीशर्ट को निकालने लगा

अन्दर उसने कुछ नही पहना था जिससे उसकी चुचिया की गुलाबी चुचक खिलकर मेरे सामने थे । मै झुक कर जीभ निकालते हुए एक बार बबिता की दाई चुची के निप्प्ल को छुआ और होठो मे भर लिया ,

बबिता - सीईईई उह्ह्ह्ह भैया अह्ह्ह्ज उम्म्ंम्ं

बबिता की आवाज सुन कर मुझे आभास हुआ की गीता निचे से खड़ी हो गयी और अपने कपडे निकालने लगी ।

वही मै बबिया की कमर को थामे उसकी चुचिया चुस रहा था और वो मेरे सर को अपने चुचीयो पर रगड़ने लगी ।

इसी बीच गीता मेरे टीशर्ट को उपर की तरफ करने लगी और पीछे से ही मेरे पीठ से चिपक गयी ।

कुछ पल के लिए मेरे सारे क्रिया कलाप रुक गये क्योकि गीता के मुलायम चुचियो का अपनी पीठ पर अह्सास पाते ही मै सिहर गया । वही वो हाथ को आगे ले जाकर वापस मेरे लण्ड को पकड लिया और नीचे उसकी जन्घे मेरे जांघो को छू रही थी ।

खुद को थोडा सम्भाल कर मै वापस बबिता के चुचियो पर टुट पडा

एक तरफ जहां मै बबिता के चुचे चुस रहा वही गीता अपने पेट मेरे चुतडो पर नचा कर मुझे गुदगुदी सा अह्सास दिला रही थी और अपने चुचियो को मेरे पीठ पर रगड़ रही थी ।

मै गीता की कामुक हरकत से उतेजित होकर सारी भड़ास बबिता के चुचियो पर निकाल रहा था इसी दौरान गीता घूमी और अपने गुदाज गाड़ को मेरे चुतडो पर रगड़ते हुए सिसकने लगी

गीता- अह्ह्ह्ह भैया कितना मज़ा आ रहा है गाड़ रगड़ने मे उफ्फ्फ हिहिहीहीहि कित्नी मुलायम गाड़ है आपकी भैया अह्ह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ्फ इस्स्स्स्स अह्ह्ह

मै भी गीता के इस नये स्पर्श से मदहोश होने लगा इसी बीच किसी ने दरवाजा खटखटा कर हमारी मस्ती को नजर लगा दी

कौन हो सकता था अब क्योकि सारे लोग तो अपने कमरे मे थे सिवाय मा के जो अकेली थी । कही वही तो नहीं ना हो ।

मैने झट से दोनो को अलग किया और इशारे मे कपडे पहन कर सोने का नाटक करने को बोला और मै भी अपने खडे लंड पर लोवर पहन कर दरवाजे तक गया और दरवाजा खुला तो जो सामने दिखा उसकी इस समय होने की उम्मीद मैने नही की ।

सामने कोमल खड़ी थी और अंदर झाक कर एक बार बेड पर देखा तो गीता बबिता उसे सोती हुई नजर आई ।

फिर मेरी नजर मुझसे मिली तो

मै - अरे कोमल तुम यहा इस वक्त

कोमल मुस्कुरा कर - हा वो कोई था नही कमरे मे सोचा देखू तुम क्या कर रहे हो ।

मै दरवाजा खोला और उसको कमरे मे आने का इशारा कर दरवाजा बंद करते हुए बोला - क्या हुआ कोमल तुम्हारी मा कहा गयी ।

कोमल - वो मा किसी से बात करने के लिए छत पर गयी है तो मै अकेले क्या करती

मै एक नजर गीता बबिता को देखा और फिर कोमल को देख कर मुस्कुराते हुए - कोई बात नहीं कोमल आओ बैठो यहा

मैने कोमल को बेड के सामने सोफे पर बैठने को कहा

वो बैठी और मै उसके सामने बेचैनी से टहल रहा था क्योकि मुझे डर था कही गीताबबिता के सामने कोमल कोई गड़बड़ ना करे

कोमल - क्या हुआ राज तुम ऐसे घूम क्यू रहे हो बैठ जाओ

उसकी आवाज सुन कर मै उसकी तरफ घुमा तो उसकी नजर मेरे लोवर मे तने हुए लण्ड पर गयी ,,,

कोमल मुस्कुरा कर - वैसे क्या कर रहे थे जनाब अकेले मे जो ये फिर से ,,, मेरे लण्ड की तरफ इशारा किया
 
मै हड़बड़ी मे बार बार गीता बबिता को देख कर वो वो करने लगा

कोमल - अरे रिलैक्स राज वो सो गयी है ना , बताओ

मै - हा वो मै रोज रात मे इसकी मालिश करता हू ना इसिलिए

कोमल मुह पर हाथ रख कर मुस्कुराते हुए बोली - अरे बुधु तो इतना संकोच मे क्यू बोल रहे , अभी थोडी देर पहले तक तो मेरे से खुल कर बाते कर रहे थे और अगर मालिश की बात थी तो मुझसे कह देते ना तुम

मै कोमल की बाते सुनके परेशान था कि क्यू ये यहा आई और इसको कूछ गडबड़ करने से कैसे रोकू ,, कयोंकि अगर गिता बबिता को भनक लग गयी तो वो अपनी बेवकूफ़ी मे उसका क्या मतलब निकालेगी वो तो राम ही जाने

मै इस सोच मे डुबा था की कोमल ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बिस्तर पर बिठाया और मुझे रिलैक्स करते हुए - अरे तुम परेशान ना हो वो दोनो सो गई है ।

मै - हम्म्म्म्ं

कोमल - राज मुझे तुमसे कुछ कहना है

मै बार बार गीता बबिता को देख कर बस हू हा हम्म्म यही जवाब दे रहा था

मै - हा बोलो ना कोमल

कोमल - मै सोच रही थी कि क्यू ना घर जाने से पहले हम लोग यहा एक बार और मस्ती कर ले

मै हड़बड़ी मे - क्या क्याआआआ कह रही हो कोमल तुम ,,और कोमल को बिस्तर पर सोयी गीता बबिता की तरफ इशारा करते हुए बोला

कोमल - मै वो सब अभी नही चाहती हू राज , मै तो बस

मै - हम्म्म्म क्या

कोमल शर्मा कर - मै तो बस तुम्हारे मुसल को एक बार और प्यार करना चाहती हू

मै कोमल को बिस्तर पर इशारा कर - यार कोमल समझो तुम हम घर पर भी कर सकते है और वो फिर मुझे तुम्हारा वो घर का काम करना ही है तो प्लीज

मै प्लीज प्लीज करता रहा लेकिन कोमल ने मेरी एक ना सुनी और फर्श पर घुटनो के बल आ कर मेरे लण्ड को मेरे लोवर से बाहर निकाला और चूसना शुरू कर दी ।

मै एक बार फिर से हवा में तैरने लगा,,,फिर मेरी नजर बिस्तर पर गयी तो मेरी जुबान बाहर आने वाली स्थिति थी क्योकि इस समय गीता करवट लेके कोमल को मेरा लंड चुस्त्र देख रही थी जबकि बबिता गिता के कन्धे के सहारे आगे होकर मुझसे इशारे मे बोल रही थी की ये सब क्या है ।

मै दोनो को चुप रहने का इशारा करते हुए आंखे मूंद लिया क्योकि कोमल मेरे सुपाड़े को अपने गले में लटकती घंटी से टच करवा रही और सुउउउरररररररुउउऊप्प्प्प सुउउउईयररररुउउईप्प्प करके मेरे लण्ड को चुस रही थी ।

मै इक बार फिर से हवस की उचाईयो को छूने लगा । और कोमल का सर पर हाथ फेरते हुए उसे और जोशिले व्यंग्य से लण्ड की तरफ दबाने लगा तभी दरवाजे पर एक और खट खट हुई ।

गीता बबिता झट से वापस से सोने का नाटक करने लगे । यहा मेरी और कोमल की स्थिति ऐसी की काटो तो खून नहीं वाली थी ।

कोमल ना चाहते हुए भी मेरे लंड से अलग हुई

कोमल हड़बड़ी मे - क्क्काआआऔनन होगा राज

मै - कही तुम्हारी मा तो नही ना गयी तुमको खोजते हुए

कोमल सहम गयी क्योकि इत्नी रात मे मेरे साथ बंद कमरे मे

डर तो मुझे भी था

मै - कोमल तुम जल्दी से बेड के निचे घुस जाओ मै देखता हू कि कौन है ।

कोमल जल्दी से बेड के निचे गयी और मै वापस से अपनी मरियल किस्मत को कोसता हुआ गीले लंड पर लोवर चढ़ा कर चल दिया दरवाजा खोलने

देखते हैं दोस्तो अब क्या नये हंगामे होने वाले है ।

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मै कोमल को झट से बेड के निचे जाने को बोला और अपने कपडे ठीक करके मन मे बड़बड़ाते हुए दरवाजे के पास गया और जैसे ही दरवाजा खोला तो सामने मामी खड़ी थी जो मुझे देख कर मुस्कुराई

वो भी एक नजर बेड पर डाली और गीता बबिता को सोता देख अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेरे आड़ो को लोवर के उपर से थाम लिया

मेरी तो फट गई यार , शुक्र था कोई मामी का हाथ देख नही पाता पीछे से लेकिन डर इस बात का था कि कही कोमल के सामने मेरा भंडा ना फुट जाये क्योकि मै गीता बबिता को तो सम्झा सकता था लेकिन कोमल के सामने मै जितनी भी डीन्गे हाक चूका था उसका चौपट होना था और शायद वो नाराज भी हो जाती है।

इधर मामी मेरे आड़ो को थामा और सहलाते हुए लण्ड को पकडे हुए बोली - ओहो हीरो देखो तो अभी से तन गया है ये तो

मै घबरा गया कि अब तो पक्का सब कूछ जाना ही है हाथ से

मै मामी की बात पलट दिया - अरे मामी आप यहा कैसे

मामी मन गिरा कर - यार वो तेरे मामा को फोन आ गया था कि उनको अनाज वाले गोदाम पर जाना है तो वो वही चले गये

मै समझ गया कि मामा कहा गये थे क्योकि अभी थोडी देर पहले विमला भी फोन आने का बहाना करके निकली थी ।

मै - तो आप यहा क्यू

मामी अभी भी मेरे लण्ड को लोवर पर से ही निचे से उपर की तरफ सहलाते हुए कातिल मुस्कान से धीमी आवाज मे बोली - मुझे मेरे राजा बाबू के लण्ड के बिना नीद नही आयेगी हिहिहिही

मै एक नजर कमरे मे देखा और बहाना मार कर बोला - अच्छा तो आपके कमरे मे बिल्ली का बच्चा घुस गया है वही परेसान कर रहा है चलिये मै देख कर आता हूँ फिर सोउँगा

मामी को मेरी बाते समझ से बाहर लगी - तू क्या बोल रहा है

मै झट से मामी को बाहर किया और खुद भी बाहर आ गया और जल्दीबाजी मे दरवाजा बाहर से बंद कर दिया

मामी - अरे ये अन्दर तू क्या बोल रहा था

मै - मामी गीता बबिता अभी सोयी नही थी वो मेरे साथ बाते कर रही थी और कोई उनको जागता देख डाटे नही इसिलिए वो सोने का नाटक कर रही थी

मामी - ओह्ह फिर ठीक किया मेरे राजा ,, अब जल्दी से कमरे मे चल कर मेरी प्यास बुझा दो ना राजा

मै मामी के हिलते चुतडो पर हाथ फेरते हुए कहा- हा मेरी रानी क्यू नही

फिर हम ऐसे ही मस्तियाँ करते हुए मामि के कमरे मे गये

अन्दर पहुचते ही मामी ने झट से अपनी साडी खोल दी

मैं मामी उतावला पन देख कर उत्तेजित हो गया था और लोवर के उपर से लण्ड को मुठियाते हुए उन्के पास गया

मामी ने वापस से मेरे लण्ड को थामा और मैने मामी की गर्दन को पकड कर उन्के होठो को चुस्ना शुरू कर दिया ।

उफ्फ्फ मामी के वो मुलायम गुलाबी होठ

धिरे धीरे मेरे हाथ मामी के उठे हुए भारी गोल गोल चुतडो पर गया और मै मामी के रसीली होठो को पान करते हुए उनको चुतडो को पकड कर फैलाने लगा

मामी के गाड़ का स्पर्श मुझे हवस की नयी सीमा पर ले गया और मै उत्तेजित होकर मामी को वापस बेड पर हाथो के बल झुका दिया और उनके पेतिकोट को उठा दिया

ओह्ह्हह फिर से वही गोरी चमड़ी वाली मुलायम थिरकती गाड़ मेरे सामने थी ।

मामी के चुतडो के पाट आपस मे काफी सटे हुए थे जिससे गाड़ की लकीर ज्यादा फैली हुई नही थी ।

मैने मामी के पाटो को फैला कर उस गुलाबी भूरे रंग गाड़ की छेद को देखा जो मामी की तेज चलती सांसो के हिसाब से खुल बंद हो रही थी ।

फिर मैने अपनी जीभ पर खुब सारा लार इकठ्ठा किया और जीभ को मामी की सास लेते हुए गाड़ की छेद पर लगा दिया

मामी सिहर गई- उफ्फ्फ्फ राज अम्म्ं इस्स्स्स्स

अब मै उस लार को मामी की गाड़ के छेद पर लीपने लगा और जीभ को नुकीला कर मामी की गाड़ की उस सिकुडी हुई छेद को खोदने लगा । जिससे मामी बार बार फुदक कर आगे हो जाती

मजबूरन मुझे उनकी गाड़ को मजबूती से पकडना पडा और अब मेरी जीभ फेरने की सीमा बढ़ गई ।

मै जीभ को गाड़ के छेद से गाड़ के उपरी सिरे तक उन दरारो मे घसीटते हुए ले जाता और वापसी मे उन्हे चुत के निचले हिस्से तक छूआ देता

इधर मामी छटप्टाति हुई सिसकियाँ लेती रही

धीरे धीरे मामी की चुत टपकना शुरु हो गयी और मामी - अह्ह्ह राज जल्दी से मेरि चूत को सह्लाओ दाने के पास खुजली हो रही है

मै झुककर एक नजर मामी की चुत पर डाली तो देखा कि गाड़ उठाए होने की वजह से मामी की चुत का रस उन्के चुत के दाने पास इकठ्ठा हो रहा था जिस्से बगल की झाटे भीगी हुई लग रही थी ।

मै भी अपनी हथेली आगे कर उनकी चुत पर रख कर मसल दिया

मामी - अह्ह्ह्ह माआआआ मर गई रे उह्ह्ह अह्ह्ह राज ऐसे ही अह्ह्ह अह्ह्ह मा उफ्फ्फ्फ और रगडो मेरे राअज्ज्जाआआ उम्म्ं सीईईईई उफ्फ्फ्फ्फ हय्य्य्य्य मा उफ्फ्फ

मै अच्छे से मामी की चुत को मसलने के बाद अपनी हथेली को चाट कर साफ किया और झट से लोवर निचे किया

अबतक तीन जवान लौदियो ने मेरा लण्ड चुस कर काफी खड़ा कर दिया था ।

मैने लण्ड को थामा और मामी के एक टांग को उठा कर बेड पर रख जिससे उनकी चुत खूल कर मेरे सामने आये

और मैने वापस से थोडा थूक लिया और सुपाडे को चिकना किया और मामी के चुत पर सेट किया और एक तेज धक्के से आधा लण्ड मामी की चुत मे पेल दिया

मामी - ओह्ह्ह्ह्ह माआआआ उह्ह्ह्ह सीईई अह्ह्ह्ज माआ आराम से मेरे राजा उफ्फ्फ

मै वापस से लण्ड को पीछे किया और जगह बनाकर एक और तेज धक्के से मामी की चुत मे पुरा लण्ड पेल दिया

मामी गरदन उठाए ऐसे चिलला रही थी मानो घोड़ी अपनी चुत मे घोड़े का मोटा लण्ड पाकर जैसे चिघाड़ती रही हो

मै बेरहम से मामी की चुतडो को थामे घपा घ्प्प पेले जा रहा था

मामी -अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह हाआ ऐसे ही ओह्ह्ह राज तुम पहले क्यू नही आये ह्य्य्य्य मा उफ्फ्फ्फ और तेजज्ज़्ज़ हा उफ्फ्फ मा अह्ह्ह अहहहह मेरे राआआज्ज्ज्जाआ

मै - क्यू मेरी जान मज़ा आया ना

मामी - हा अह्ह्ह्ह हा बहुत आ रहा और तेज चोदो नाअज्ज्ज अह्ह्ह्ह औफ्फ

मैने धक्को की रफ्तार को बढाया और तेज़ी से मामी की चुतडो की थामे चोदने लगा

मामी -अह्ह्ह राज थोडा धीरे उहहह दर्द हो रहा है

मै स्पीड कम कर - क्या हुआ मेरी रन्डी अभी तो बोल रही थी कि तेज चोदो अभी क्या हुआ सालि हा

मामी बिना कूछ बोले अप्नी गाड़ मेरे लण्ड पर फेकते हुए चुदती रही

मै - बोल ना साली कुतिया ,,कह तो इस गाड़ मे डाल दू ,

मै मामी की गाड़ मे अंगूठा घुसाते हुए बोला

मामी - अह्ह्ह अह्ह्ह नही मेरे राजा आह्ह निकालो दर्द हो रहा है अभी अह्ह्ज

मै अंगूठे को और घुसाते हुए - क्या हुआ कभी लिया नही क्या इसमे बोल ना

मै जब कोई जवाब नही पाया तो मामी कि तरफ देखा वो गरदन उठाए अपनी आखे उलतने लगी और उन्के खुले मुह से तेज सासे बाहर निकल रही थी मै उन्की चूत के जड़ मे लण्ड रोक दिया और अंगूठे को वापस निकाल लिया कि तभी मेरे लण्ड पर एक गरम लावा बहता मह्सूस हुआ और उनकी कमर झटका खाने लगी

मतलब मामी झड़ रही थी

जैसे ही वो झडी उनकी सासे वापस लौटी और वो तेज तेज आहे भरने लगी

मै मामी को नॉर्मल होता देख वापस से चुत मे पेलना शुरू कर दिया और अब फ्च फचच की आवाज से तेज़ी से चोदे जा रहा था

मामी - राज मेरे मुह मे देना सारा माल आह्ह अह्ह्ह्ज

मै झट से चुत से लण्ड को निकाला और मामी को निचे किया और उन्के चेहरे के उपर लण्ड मुठियाने लगा

कुछ ही झटके मे मेरा माल मामी के मुह पर गिरने लगा

झड़ने के बाद दो तीन बार मैने अपना लण्ड मामी के मुह पर हल्का हल्का पटका और

मामी भूखे भेड़िये के जैसे मेरे लण्ड को अपने चुत के पानी के स्वाद के साथ चाट गयी ।

मै - मज़ा आया ना मेरी रानी

मामी मुस्करा कर ऊँगलीया चुस्ते हुए बोली - बहुत ही ज्यदा मेरे राजा ,,, अब फिर कब आओगे

मै - जब तुम अपना गाड़ देने को राजी हो जाओगी मेरी जान

मामी मुस्कुरा कर - मै तो तभी ही ले लेती गाड़ मे तुम्हारा ये मुसल , जभी तुम मेरे गाड़ को अपनी रसिली जीभ से कुरेद रहे थे

मै - तो बोल देती ना मेरी जान पहले गाड़ ही मार देता

मामी थोडा मन गिरा कर - कैसे कह देती मेरी चुत बहुत ही कुलबुला रही थी ।

चुत कुलबुलाने से मुझे याद आया कि मै तीन तडपती हसिनाओ को तो एक कमरे मे बन्द करके आया हू

कही वो लोग आपस मे मेरा भेद ना खोल दे फिर मेरे लौडे लग जायेंगे ।

मै - चलो ठीक है मामी अब मै चल रहा हू

मामी उदास मन से - इतना जल्दी चलो ना एक बार और

मै - मामी मामा कभी भी आ सकते है समझो और मै तो आता ही रहूंगा ना अपनी जान से मिलने

मामी खुश हुई और बोली - पक्का ना ,

मै - हा मेरी जानू पक्का , वैसे भी आपकी ये गोरी गाड़ मुझे चैन से रहने कहा देगी हीहीहि

मामी - धत्त बदमाश चलो अब जाओ

मै झट से लोवर उपर किया और मामी को कमरा बंद करने का बोल कर चुपचाप निकल गया

और तेज़ कदमो से फिर से गिता बबिता के कमरे की तरफ गया और हल्के से दरवाजा खोला क्योकि रात बहुत हो गयी थी और सन्नाटा पसरा हुआ था ।

मै दरवाजा खोला तो सामने कोमल बेचैन कमरे मे टहल रही थी और गिता बबिता सोये हुए थे ।

मै एक ठंडी आह्ह भरी और कोमल को पीछे से हग कर लिया

कोमल गुस्से मे मुझे धक्का देकर अलग हुई और तेज आवाज मे बोलना चाहा तो मै झट से उसके मुह पर हाथ रख कर बिस्तर पर सोती गिता बबिता की ओर इशारा किया

वो शांत हुई लेकिन मन मे भड़ास अब भी थी

कोमल धीमी आवाज मे अपनी बातो पर जोर देते हुए - तुम मुझे यहा कमरे मे बंद करके भाग गये और अभी आ रहे हो आधा घंटा हो गया

मै धीमी आवाज मे - सॉरी कोमल वो बिल्ली का बच्चा बहुत डरा हुआ था तो उसको बहुत मुस्किल से बाहर निकाला मै

कोमल - हा लेकिन ये दरवाजा क्यू बंद किया

मै - ताकि अगर तुम्हारी मा यह कमरा बाहर से बंद देखे तो तुमको य्हा ना खोजे

कोमल - वो सब तो ठीक है लेकिन अब तक तो मा आ गई होगी ना कमरे मे

मै मुस्कुरा कर ना मे सर हिलाया

कोमल - दाँत ना निकालो बहुत गुस्सा आ रहा है मुझे

मै - यार वो मेरे मामा के साथ अनाज वाले गोदाम पर गयी है और अभी तक मेरे मामा नही आये है

कोमल थोड़ा रिलैक्स होकर - ओह्ह्ह फिर ठीक है

मै - क्या ठीक है अब तुम भी जाओ जल्दी से कमरे मे हम ज्यादा रिस्क नहीं ले सकते है समझी ना

कोमल - हा सही कह रहे हो तुम , मै जा रही हू गूड़ नाइट

मै झट से कोमल पर झपटा और उसकी कमर मे हाथ डाल कर अपनी ओर खींच कर बोला - बस ऐसे ही होगा गूड़ नाइट हा

कोमल शर्मा कर - फिर कैसे

मैने कोमल के होठो को मुह मे लेके चूसा और बोल - हा हुआ गूड़ नाइट

कोमल शर्मा कर मुस्कुराते हुए - धत्त अब छोडो मुझे बाय

मैने कोमल को अजाद किया और वो अपने कमरे मे चली गई ।

फिर मेरी नजर गीता बबिता पर गई जो शायद सच मे सो गई थी लेकिन एक बार मैने अपनी तसल्ली के लिए उनको चेक किया और फिर निकल कमरे से बाहर निकल गया ।

बाहर पुरा सन्नाटा था और कोई भी नजर नही आ रहा था ।

पुरे बरामदे मे दो लाईट जल रही थी जो नाना के कमरे के बाहर और एक किचन के बाहर ।

मामी के तरफ कमरो का लाईट ऑफ़ था । मै भी मा के कमरे की तरफ जाने लगा तभी लाईट चली गई

अब मेरे हाथ मे मोबाइल भी नही था ना कोई टॉर्च मै क्या करता कैसे अन्धेरे मे जाता तो सोचा मस्त हवा चल रही है यही रुक जाता हू कुछ देर अभी आ ही जायेगी लाईट तो

और मै दीवाल पकडते हुए गेस्टरूम के बाहर रखे अनाज की बोरियो तक पहुंचा तो उसी बोरी पर टटोल कर बैठ गया ।

तभी नाना के कमरे की खिडकी खुली और हल्की पीली रोशनी बाहर आने लगी ।

मुझे ध्यान आया कि मौसी तो नाना के साथ ही है कही उन्होने तो नही , कही अन्दर अभी भी

मेरे चेहरे पर एक कातिल मुस्कान आई और मै बोरी से उठ कर उस हल्की रोशनी निकली खिडकी के बगल मे खड़ा हुआ तो अन्दर का नजारा देख वापस से मेरा हाथ लण्ड पर चला गया अब कमरे का सीन ही कुछ ऐसा था तो मै क्या करता

मैने देखा मौसी पूरी नंगी अपनी मोटे मोटे हिलते चुतडो के साथ खिडकी खोलने के बाद वापस नाना के पास जा रही है और नाना बेड पर अपना मुसल थामे बैठे हुए

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लालटेन की पिली रोशनी मे मौसी का बदन चमक रहा था उनके चुतडो की दरार गहरी और काली दिख रही थी ।

धिरे धीरे चल कर मौसी नाना के पैर के पास बैठ गई और दाये हाथ से लण्ड सहलाने लगी ।

नाना - रज्जो अब तू भी परसो चली जायेगी तो मै फिर से अकेला पड़ जाऊंगा बिटिया

मौसी - बाऊ जी मै तो आती जाती ही हू ना ,,लेकिन उससे जरुरी है कि आप अपना ख्याल रखें

नाना - तू रहती है तो मै बेफिकर होता हू और मज़ा भी मिल्ता है जीने का

मौसी - वही मज़ा ही अब आपको कम करना है बाऊजी

नाना - तो तू चाहती है कि मै बिना चुदाइ के रहू ,,,मेरी तलब जानती है ना तू

मौसी - हा जानती हूँ इसिलिए चेता रही हू आपको और आज आप मुझसे ये वादा करिये कि आप हफ्ते मे एक बार ही ये सब करेंगे

नाना - बस एक बार

मौसी - हा बाऊजी डॉक्टर ने क्या बोला पता है ना और मै नही चाहती कि ऐसा कुछ दिक्कत हो आपको

नाना - ठीक है मेरी मा लेकिन जब तक तू है तब तक तो ये सब नियम मै नही मानूँगा हा

मौसी हस कर - मै मानने दूँगी तब ना बाऊ जी हिहिहिही

नाना - तू कितना ख्याल रखती है रे मेरा आज 30 साल हो गये हैं तेरी मा को गुजरे हुए लेकिन इन 30 सालो मे तुने कभी तेरी मा की कमी नही होने दी ।

बुआ - आगे भी नही होने दूँगी हिहिहिही ,,, बुआ नाना के आड़ो को मसल्ते हुए बोली

तभी कमरे मे रोशनी हुई और बाहर भी

नाना - अह्ह्ह वाह आ गई लाईट जा बेटा खिडकी बंद कर दे

मै नाना की बात सुन कर झट से निचे बैठ गया और सोचा यार लग रहा है कि इन दोनो का ऐसे ही चलेगा मै चलता हू मा के पास

तभी खिडकी बन्द होने की आवाज आई और मै वापस से खड़ा हुआ और निकल गया मा के रूम मे

कमरे का दरवाजा खोला तो देखा की मा ब्लाऊज पेतिकोट पहने हुई थी और बेड पर टेक लगाये हुए टाँगे खोल कर अभी भी फोन पर लगी है और मुझे कमरे मे आता देख कर चुप रहने का इशारा किया

मै सोच रहा था कि ऐसी क्या बाते हो रही है । लेकिन मा का ये खुला खुला रूप देख कर मै उत्तेजित होने लगा

मै चुपचाप से दरवाजा बन्द किया और मा के बगल मे खड़ा हुआ तो मेरी नजर मा के सामने की तरफ भीगी हुई पेतिकोट पर गई तो सब कुछ मेरे समझ से बाहर जाने लगा

मै मा के कन्धे पर हाथ से ठोक कर इशारे मे पुछा की ये पेतिकोट कैसे भिगा

तो मा मुस्कुराते हुए फोन पर इशारा करते हुए चुप रहने को कहा

मै मा के बगल मे बैठ गया और मा के हाथ से मोबाइल लेके उसको स्पीकर पर कर दिया

तभी सामने से जो आवाज आई उससे मै खुसी से उत्तेजित होने लगा क्योकि ये आवाज शिला बुआ की थी

बुआ फोन से - अहहहह भाभी अब भैया मेरे गाड़ को जीभ से चाट रहे है उफ्फ्फ्फ हय्य्य दईया मर गईईई उम्म्ंमममं

मा हस्ते हुए - खा जाओ मेरे राजा आज अपनी बहन की गाड़ ,,ऐसा निशान लगाओ की जीजा जी जान जाये की उनकी रन्डी बीबी मायके मे किसी से चुद कर आई है हिहिहिहिही

पापा फोन से - सही कह रही हो जान,,,आज तो दीदी की गाड़ फाडकर रख दूँगा

मै मा , पापा और बुआ की सेक्सी बाते सुनकर बहुत ही उत्तेजना से भरने लगा और मा की जांघो को सहलाने लगा

मा ने मुस्कुरा कर एक नजर मुझे देखा और बोली - ओह्ह मेरे राजा आखिर कब मेरी गाड़ फाडोगे ,,, कल से लण्ड नही मिला है

पापा फोन से - कल आ रही हो ना जानू ,, कल तुम्हारी और दीदी की मिल कर फाडूंगा

मा मुस्करा कर मेरे चेहरे को दुलारते हुए - हा लेकिन आज रात का क्या होगा मेरे सईया

बुआ फोन से - अह्ह्ह्ह्ह भैया आराम से उह्ह्ह

मा - क्या हुआ जीजी

बुआ फोन से - वो भैया ने मेरे गाड़ मे अपना खूटा गाड़ दिया ना अह्ह्ह मा उफ्फ्फ

पापा फोन से - अह्ह्ह जान वहा राज है ना उसके साथ कुछ कर लो ना

मा मुस्कुरा कर मेरे गाल को चुमा और इतरा कर बोली - क्या जी आप मुझे मेरे बेटे की नजर मे रन्डी बनवाना चाहते हो

पापा फोन से - अह्ह्ह हहहह हा मेरी जान मै चाहता हू मेरा बेटा मेरे सामने तुम्हे रन्डी की तरह चोदे उफ्फ्फ दीदी क्या कसी हुई गाड़ है अह्ह्ह

मै पापा और बुआ की चुदाई भरी बाते सुन कर बहुत गरम हो गया था और मेरा भी मन अब मा की गाड़ मारने को होने लगा

मै झट से उठा और अपने सारे कपडे निकाल कर मा के सामने हाथ मे लण्ड मुठीयाते खड़ा हो गया । मा की नजर जब मुझ पर गयी तो वो मुस्कुरा कर चुत को पेतिकोट के उपर से रगड़ने लगी ।

जिससे मा की आह्ह निकलने लगी

बुआ फोन से - क्या हुआ भाभी आपको भी लण्ड मिल गया क्या

मा मदहोसी मे बोली - अह्ह्ह नही जीजी मै तो पहले के जैसे अब भी चुत मसल रही हू ,,मेरे हिस्से का लण्ड तो आप खा रही है

मै मा को कमर से थामा और घोड़ी बना दिया

मा थोडी अचरज मे इशारे से बोली क्या करने जा रहा है

मै मा की गाड़ को सहलाते हुए ह्सने लगा

मा मुस्कुरा कर हा मे इशारा की

बुआ फोन से - कल जल्दी आना भाभी हम दोनो गोदाम मे जाकर जम कर चुदाई करेंगे क्यू भैया अह्ह्ह उह्ह्ह

पापा फोन से - आह्ह हा हा क्यू नही ,,जीजी ठीक कह रही है जानू कल जल्दी निकलना और सीधा दुकान ही आना

मा घोड़ी बनी हुई सिसक रही थी क्योकि इस वक़्त मा के गाड़ के छेद पे मेरी जीभ नाच रही थी

पापा फोन से - ओह्ह जानू बोलो ना

मा सिसकते हूए - अह्ह्ह हा हा मेरे राअज्ज्जआ क्यू नही ,,मै तो आपके लण्ड के लिए तरस गयी हू ओह्ह्ह
 
मै लपालप मा की गाड़ चाट रहा था और बिच बिच मे हाथ मे भर कर मा की चुत रगड़ देता जिस्से मा और तेज सिस्क उठती

मै मुह मे लार इकठ्ठा किया और सारा मा के गाड़ की छेद पर लगा दिया और वापस से थोडा थूक लेके लण्ड के सुपाडे को चिकना किया

वही फोन पर बुआ और पापा की सेक्स से भरी बातचित जारी थी

मै झट से घुटनो के बल आया और मा की टाँगे चौडी किया । लण्ड को मा के गाड़ के छेद पर लगा कर अंगूठे से सुपाडे को दबाते हुए लण्ड को अन्दर डाल दिया

मेरे चाटने और लार की वजह से मेरा सुपाड़ा मा के गाड़ घुस गया और वही मा की अह्ह्ह और तेज होने लगी

मा - ओह्ह्ह राज के पापा अह्ह्ह उम्म्ंम

पापा फोन से - क्या हुआ जानु

मा - वो मैने अपने गाड़ मे एक मोटा गाजर डाला है उह्ह्ह ओह्ह उफ्फ्फ

पापा फोन से - अह्ह्ह मेरी जान इतनी तडप रही है अह्ह्ह और घुसा ले गाड़ मे उसको , पुरा भर ले अपनी गाड़ मे मेरी रान्ड

मै पापा की बात सुना और उत्तेजित होकर मा के कमर को थमा और धक्के लगाने ल्

गा ,,कुछ ही धक्को मे मा की खुली गाड़ ने रास्ता दे दिया और मै तेज़ी से मा की गाड़ फ़ाडना शुरू कर दिया जिस्से मा की चिखे तेज होने लगी

पापा भी फोन से बार बार मा को झडने के लिए उत्तेजित कर रहे थे

मा - हा मेरे राजा चुद रही है तुम्हारी रन्डी आह्ह्ह औह्ह्ह मज़ा आ रहा है ,,कब डालोगे मेरे राजा अपना मुसल मेरी गाड़ मे अह्ह्ह

मै मा की बातो से उत्तेजित होकर धकाधक मा के गाड़ मे पेले जा रहा था

मा कुछ पलो ढहने लगी और झडने लगी।

पापा फोन से - लग रहा है मेरी जान ने अपना पानी बहा दिया

मा हाफते हुए - आह्ह हा जान चलो मै साफ करने जा रही हू फिर बात करती हू

फिर मा ने फोन काट कर रख दिया और गरदन घुमा कर बोली - अह बेटा अब चोद अपनी मा को आह्ह आह्ह

मै मा की बात सुन के और उत्तेजित होने लगा ।

मा - हा बेटा और फाड़ अपनी मा की गाड़ ओह्ह्ह अह्ह्ह राज बेटा और तेज्ज़्ज़ उफ्फ्फ ह्य्य्य्य बस ऐसे ही अह्ह्ह्ह

मै तेज़ी से मा की गाड़ मे चोदे जा रहा था और मेरे सुपाडा अब फूलने लगा और मा की गाड़ मे फसने लगा

मै - आह्ह मा मै आने वाला हू आह्ह मा इह्ह्ह ऊहह

मा - झड़ जा बेटा अपनी मा की गाड़ मे ,,भर दे बेटा मेरी गाड़ मे अपना पानी उफ्फ्फ अह्ह्ह

मै अब चरम सीमा पर पहुंच गया और लण्ड को मा के गाड़ की जड़ मे ले गया और झटके के साथ झडने लगा । जब मेरे लण्ड की आखिरी ड्रॉप तक मा की गाड़ मे झाड़ दिया फिर मै खिच कर बाहर निकाला तो मा गाड़ की दरारो मे मेरा माल बहने लगा और मा बेसुध होकर बिस्तर पर ढह गयी ।

मै भी मा से अलग होकर बिस्तर पर गिर गया और हाफ्ने लगा ।

धीरे धीरे मेरी आँखो मे नीद आने लगी । आती भी क्यू नही सुबह से 5वी बार झड़ा जो था और मेरे बगल मे मेरी मा तो वैसे ही गाड़ उठाए सो गयी । फिर मै भी वैसे ही मा से चिपक कर सो गया ।

सुबह करीब 6 बजे मेरी आंख किसी के जगाने से खुली तो देखा मौसी थी जो झुक कर मेरा कन्धा पकडे मुझे हिला रही थी जिससे उनके लटके हुए चुचे हिल्कोरे मार रहे थे।

मै मुस्कुरा कर मौसी घाटियाँ देखते हुए बोला - गूड़ मॉर्निंग मेरी सेक्सी मौसी

मौसी चिढ़ कर - सेक्सी के बच्चे उठ जा और कुछ पहन के आज 10 बजे के बस से तुझे घर जाना है ।

मै - अरे हा मै तो भूल ही गया था

मौसी - अब उठ और जल्दी से नहा ले और आजा नासता करने

मै मौसी को अपना खड़ा लण्ड दिखाते हुए कहा- नासता तो यही है मौसी कर लो ना

मौसी मुस्कुरा कर - धत्त सुबह सुबह शुरू हो गया

मै जिद करते हुए - मौसी प्लीज ना अभी तो मै चला भी जाऊंगा तो फिर कब आना हो

मौसी - तू चिन्ता ना कर उसकी जाने से पहले मै तुझे मौका जरुर दूँगी अभी तू तैयार हो जा मेरा लल्ला

मै मौसी को हग किया और उठ कर कपडे पहन कर निकल गया फ्रेश होने

7 बजे तक मै नहा धो कर किचन मे पहुचा तो सारे लोग खुश नजर आ रहे थे सिवाय गिता बबिता के

मेरी नजर जब गिता से मिली तो वो हुह करके मुह फेर ली

मै सोचा जाने से पहले इन दोनों को मनाना पडेगा

मै जल्दी से खाना खाया और गीता बबिता से बोला - मिथी और गुडिया क्या तुम मेरा बैग पैक करवाने मे हैल्प करोगी ।

मामी - हा क्यू नही , जाओ बेटा भैया के साथ

फिर वो दोनो मुह फुलाए मेरे साथ मेरे कमरे मे आई और मै झट से दरवाजा बंद कर दिया ।

मै गिता को पीछे पकड कर हग करते हुए

मै -क्या हुआ मेरी मीठी गुस्सा है

फिर बबिता के चेहरे को उठाया - तुम भी नाराज हो क्या गुडिया

बबिता - हा भाईया हम दोनो नाराज है आपसे

गीता - आप हमे सुला कर कोमल दीदी के साथ खेलने लगे हा नही तो

मै उनकी मासूमियत पर हसा और एक आइडिया मन मे लाया

फिर मै दोनो से अलग होकर अपना जीन्स खोला और लण्ड बाहर निकाल दिया

मै - कौन कौन खेलेग इससे जल्दी जल्दी बताओ

दोनो घूमी और मेरा आधा खड़ा लण्ड देख कर खुश हो गयी और मेरे कदमो मे बैठ कर उसे चूसना शुरू कर दिया

दोनो बारी बारी से मेरे लण्ड को चुस कर मेरा लण्ड का माल पिया और मैने भी उनकी चुचीयो से खेला । फिर उनको एक बार फिर सम्झाया कि कैसे और कहा खेलना है दोनो को ।

फिर मै बाहर निकल आया तो पता चला कि सब नाना के कमरे मे है तो मै भी उधर ही चला गया।

देखते है दोस्तो अब जल्द ही राज की घर वापसी क्या रंग लाती है ।

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रूम से बाहर निकल कर मै नाना के कमरे मे गया ।

जहा नाना मेरे , मा , कोमल और विमला मौसी के लिए कपडे और मिठाई दिये ।

नाना - बेटा तु मेरा नं अपने मोबाइल से सेट कर ले और आते रहना ठीक है

मै हा मे सर हिलाया

फिर बारी बारी से नाना ने सबको कपडे दिये और आशीर्वाद दिया ।

इसीबिच मे सोनल दीदी का फोन आने लगा

मै फोन उठाकर बाहर आगया ।

फोन पर

दिदि - हाय्य मेरे हीरो आज तो फ़र्स्ट रिंग में ही फोन उठा लिया

मै - हा सोचा अपनी डार्लिंग को अब ज्यादा परेसान नही करना है

दीदी - तो चले आओ ना भाई जल्दी से आज तुम्हारे लिए कुछ सरप्राइज है हीहीहि

मै खुश होकर - क्या सच मे दीदी

दीदी - हम्म्म्म

मै - ठीक है मै 12 बजे तक आ जाऊंगा दीदी ओक्के

दीदी - ठीक है चल मै जा रही हू खाना बनाने

मै - ओके बाय

फिर मै फोन रखा और देखा कि मै तो बात करते करते छत पर आ गया

जैसे ही पीछे वाले सीढ़ी से निचे जाने को हुआ तो देखा रज्जो मौसी आगन मे अपना साडी निकाल कर ब्लाउज पेतिकोट मे नहाने के लिए बाथरुम में जाने वाली थी ।

मै झट से मोबाईल को जेब में डाला और तेज़ी से सीढ़ी से नीचे उतर गया और मौसी के पीछे ही बाथरूम मे घूम गया ।

मौसी को पता ही नही की मै उनके पीछे हू

जब वो पल्टी तो चौक गयी

मौसी - अरे बेटा तू है क्या इसमे ,, सॉरी मै बगल वाले बाथरुम में चली जा रही हू

मै मौसी की मोटी कमर मे हाथ डाल कर उन्के पहाड़ जैसे उठे चुतडो पर हाथ फेरते हुए कहा ( धीमी आवाज मे क्योकि बाथरूम मे आवाज गूज रही थी ) - कही जाने की जरुरत नही है मौसी जल्दी से वादा पुरा करो

मौसी मुस्कुराई धीरे से बोली - हा ठीक है लेकिन यहा नही ,तू कमरे मे चल मै झट से नहा कर आती हू क्योकि बगल वाले बाथरुम मे विमला नहा रही है

मै मौसी की गाड़ को मसला और गाल पर चुम्मा देके बोला - ठीक है जल्दी आओ तब तक मै मस्त तेल लगा लण्ड को खड़ा कर रहा हू , बहुत समय से आपकी मोटी गाड़ मे घुसा नही हू

मौसी हस्ते हुए - बदमाश अभी परसो रात मे क्या किया था हा ,,अब जा मै आती हू

मै चुपचाप निकल गया और ताक झाक करते हुए मौसी के कमरे मे घुस गया ।

कमरे मे एक गुलाबी रंग की साडी और उसका ब्लाउज पेतिकोट बेड पर रखा था और पेतिकोट के निचे से एक सफेद रंग की ब्रा की पट्टी नजर आई तो मैने उसे खीचा जिसके साथ एक हल्के आसमानी रंग की पैंटी भी आ गई ।

क्या मुलायम पैंटी थी हाथ मे आते ही लण्ड कडक होने लगा और मुझसे रहा ना गया तो मै उसे अपने नाक पर लगा कर सूंघने लगा

अह्ह्ह क्या मादक खुस्बु थी मौसी के पैंटी , मेरे मुह मे पानी आने लगा और एक अजब सी मदहोसी छाने लगी । ना जाने क्यू उस पैंटी को मै अपने चेहरे और गरदन पर फेरने लगा और फिर भी मुझसे ना रहा गया तो मैने उसे जीन्स के उपर से ही लण्ड पर घुमाने लगा जिससे मेरे आड़ो में एक सिहरन सी होने लगी और मेरा लण्ड जीन्स मे बहुत ज्यादा कसने लगा । जब मुझे दर्द का आभास हुआ तब मेरी तंद्रा टूटी और मुझे लगा कि मै तो ऐसे ही दरवाजा खोले मौसी की सिर्फ़ पैंटी से इतना ज्यादा नशे मे खो गया था ।

फिर मेरे चेहरे पर एक कातिल मुस्कान आई और मैने वो पैंटी जेब मे रख ली ।

और जीन्स निकाल कर मौसी का इंतजार करने लगा ।

थोडी देर बाद मौसी आई तो वो मैक्सि डाले हुई थी और उन्के

मोटे भिगे हुए चुचे मक्सि से चिपके हुए थे और मौसी की हिलोर मारती कमर मे एक गजब का नशा था ।

वही मौसी की नजर जब मेरे लटके हुए लण्ड पर गई तो वो मुस्कुरा कर बोली - लग रहा है मेरा लल्ला आज मेरे तरबूजो को सच मे फाड ही देगा

मै भी लण्ड को पकडे हुए - आज ऐसा फाड़ना है मौसी की याद करोगी ।

मै आगे बढ़ते हुए मौसी के करीब गया और उनकी गाड़ पर हाथ फेरा

मौसी मेरी हरकत से मुस्कुरा कर - बेटा दरवाजा तो बन्द कर दे

मै भी लपक कर दरवाजा बंद कर दिया और जैसे ही घुमा तो देखा मौसी ने निचे से मैक्सि उपर कर दी और उनके हाथ सर मे लपेटे तौलिये और मैक्सि के साथ फस गई । वो मदद के लिए मुझे आवाज दे रही है ।

मै मौसी के नंगे ताजे भिगे बदन को देख कर उत्तेजित हो गया

अभी भी उनके बालो का पानी रिस कर उनकी चुचियो को गिला कर रहा था । उनकी हल्के झाटो वाली चुत अभी भी भीगी हुई थी जिसे देख कर मेरा मुह वापस पानी से भरने लगा और मैने उनकी कमर से जांघो की जड़ो मे हाथ फेरने लगा

मौसी - ओह्ह्ह लल्ल्ला पहले मेरे हाथ तो छूडा

मै बिना कुछ बोले मजबुर मौसी का फायदा उठा कर मज़े ले रहा था ।

धीरे धीरे मेरे हाथ उनके चुत के दाने पर चले गए और मौसी छटपटाने लगी ।

मौसी - आह्ह बेटा उम्म्ंमममं ऑफफ़फ्फ

इधर मौसी कोसिस करके अपना चेहरा बाहर निकाल ली लेकिन उनके हाथ अब भी क्रॉस होकर सर मे फसे थे ।

मै मौसी को पकड कर बिस्तर तक ले गया और उनकी एक टांग उठा कर बिस्तर पर रख दिया और खुद घुटनो के बल बैठ कर उनकी चुत को सूंघने लगा ।

कितनी मादक खुसबू थी चुत की ओर मुझसे रहा न गया तो मै भी जीभ निकाल कर गरदन उठाया और लपालप चुत पर फेरने लगा जैसे कोई साड़ एक गाय की चुत को सूंघ कर अपनी लम्बी जीभ उसकी चुत पर चलाता है ।

जिससे मौसी के पैर कापने लगे

मौसी - बेटा प्लीज रहम कर हाथ मे बहुत दर्द हो रहा है

मै मुस्कुरा कर खड़ा हुआ और चुत की पानी लगी जीभ मौसी के होठो पर फेरते हुए उनके मैक्सि को बाहर निकाल कर हाथ आजाद कर दिये और उनके झूलते चुचो पर झपट पडा । नहाने के बाद मौसी के चुचे और भी मुलायम लग रहे थे और बदन से साबुन की भीनी भीनी सी खुशबू मुझमे और जोश ला रही थी ।

मै मौसी को चुचे को मुह मे भर कर अपने दोनो हाथ पीछे ले गया और उनके गदरायी चुतडो पर फेरने लगा ।

मौसी दोनो हाथो से मेरे सर को अपने चुचो पर दबाते हुए सिस्क रही थी ।वही मेरा खड़ा लण्ड मौसी के जांघो मे रगड़ खा रहा था

जल्द ही मौसी ने मुझे अलग किया और मेरे कदमो मे आकर मेरे लण्ड को अपने गले मे उतारने लगी ।

मुझे एक अलग ही ठंडक का एहसास हुआ और मै मौसी के सर को पकडे मुह मे पेल्ने लगा । मै झड़ना नही चाहता था इसिलिये मै मौसी के मुह से कुछ ही देर मे लण्ड को निकाल लिया

मौसी उम्मीद भरी नजरो से मुझे देखा मानो पूछ रही हो की क्या हुआ आखिर क्यू उनका मनपसंद खिलौना छीन लिया उनसे

मै मौसी के पास से हटा और दरख्त पर रखी हुई तेल की शिशि लेके आया तब मौसी के चेहरे पर मुस्कान आई और वो खड़ी हो गयी ।

मै - मौसी कुतिया बन जाओ आप अब

मौसी - ओह्ह्ह मेरे लल्ल्ला आज कुतिया की तरह पेलेगा क्या

मै - हा मौसी आज आपकी गाड़ अपना माल भरूँगा

मौसी - ला ये शीशी मुझे दे आज तेरे इस मुसल को मै लेपुंगी

मै मुस्कुरा कर तेल की शीशी मौसी को देदी

मौसी पहले बेड पर बैठ गई और मुझे मेरा लण्ड पकड कर अपने पास किया और फिर से उसे चूसा । फिर शीशी से ढेर सारा तेल मेरे सुपाडा पर गिराया और दोनो हाथो से मेरे लण्ड पर मलने लगी ।

वो मेरे आड़ो को भी मसल रही थी और मेरे चमडी को ज्यदा से ज्यादा नीचे खीचती जबतक मेरी आह ना निकल जाती ।

अच्छे से तेल मे मेरे लण्ड को चभोड़ लेने के बाद मौसी बिस्तर के बीच मे घोड़ी बन गयी और जांघो को फैला कर गाड़ के पाटो को खोल दिया जिस्से उनका भूरे रंग का सिकुड़ा हुआ गाड़ का मोटा छेद दिखने लगा ।

मै भी मुह की लार गटकते हुए बेड पर चढ़ कर उनके गाड़ के सामने खड़ा हो गया और एक पैर उठा कर उसके मोटे अंगुठे से मौसी के गाड़ की छेद को छूआ और वापस चुत तक रगड़ कर ले गया ।

फिर मै पैर निचे कर थोडा सा झुक कर दोनो हाथो से मौसी की कमर को थामा और अपना घुटना मोड कर उनके भोस्दे कर रगड़ने लगा

मौसी - अह्ह्ह बेटा क्या कर रहा है ,, टांग से ही चोदेगा क्या मुझे

मै घुटने को मौसी की फुली और पिचपिचाती चुत पर दबाते हुए - मन तो कर रहा है कि अभी अपना घुटना आपके भोद्से मे डाल दू मौसी ,,, कितना मुलायम भोस्डा है मौसी आपका अह्ह्ह
 
फिर मै तेल की शिसी को उठाया और मौसी के गाड़ छेद पर टिप टिप टिप टिप टिप टिप टिप कर लगातार बूद बूद करके गिराने लगा और अंगूठे से तेल को मौसी की गाड़ ले जाने लगा ।

मौसी सिसकती रही और मेरा अंगूथा तेल को उसकी गाड़ मे ले जाता रहा

फिर मैने अपना अंगुथा मौसी की गाड से निकाला और सुपाड़े को मौसी के गाड़ की छेद पर रखा ।

मेरे लण्ड का वजन अपनी सुराख पर पाते ही मौसी की सांसे तेज हो गयी और मै भी देर ना करते हुए लण्ड को पकड कर गाड़ मे सुपाडा घुसेड़ दिया

मौसी - अह्ह्ह बेटा अह्ह्ह मा मर गई रे हाय्य्य्य लल्ला कितना मोटा है रे तेरा अह्ह्ह मा

मै - आज सच मे मुझे भी लग रहा है मौसी की रोज से मोटा है

मै धीरे धीरे आगे बढ़ाते हुए लण्ड को मौसी के गाड़ की जड़ मे ले गया

मौसी अब सिर्फ तेज सासे ले रही थी और मै धीरे धीरे धक्के तेज करते हुए गाड़ मे लण्ड पेलने लगा ।

मौसी का दर्द मुझे भी मह्सूस हो रहा था

क्योकि जब मै लण्ड को उनके गाड़ की गहराई मे ले जाता तो वो गाड़ को सिकोड़ लेती और जब मै वापस लण्ड खिचता अब वो उसे ढिला कर देती

मै तेज़ी से मौसी को गलिया बकते हुए चोदने लगा और चट्ट चट्ट उनके तरबुजो को चपाट लगाता रहा

जल्द ही मौसी ने मुझे अपने गिरफ्त मे ले लिया और अब वो मज़े से मेरे मोटे लण्ड को लेने लगी

मौसी - आह्ह बेटा मज़ा आ रहा है बहुत दिन से गाड़ मे नही लिया तो सिकुड़ गया था अह्ह्ह

मै - क्यू मौसी रात मे नाना ने नही पेला क्या गाड़ मे

मौसी - नही बेटा वो कहा कुछ कर पाते है मुझे ही कूदना पड़ता है अह्ह्ह ओह्ह्ह उम्म्ंम्ं

मै - आपको मज़ा आता है ना नाना से चुदवा कर अह्ह्ह

मौसी - आह्ह उम्म्ंम हा लल्ल्ला वो ही तो मेरी सील तोड़े थे उन्मममं अह्ह्ह बहुत मज़ा आता है और तेरे साथ भी आता है अह्ह्ह

मै - फिर तो आप ससुराल मे भी बहुत लंड खाई होगी न मौसी

मौसी - अह्ह्ह नही रे ,,,सब लार टपकाटे है लेकिन मै घास नही देती ,, मेरा बेटा काफी है मेरे लिये वहा अह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं

मै - मौसी मै आपको रमन भैया से चुदते हुए देखना चाहता हू अह्ह्ह

मौसी - बस देखेगा ही चोद भी लेना रे ,, मै भी दो लण्ड एक साथ ले लुंगी इह्ह्ह अह्ह्ह और तेज और तेज्ज़्ज़्ज़्ज़ अह्ह्ह्ह

मै मौसी को गाड़ को पकडे धक्के लगाते हुए - तो क्या आप कभी भी दो लण्ड से नही चुदी

मौसी - उम्म्ंम नही बेटा लेकिन चुद्ना चाहती हू अह्ह्ह

मै - ठीक है मौसी जल्द ही आऊंगा मै आपके यहा तो मै और रमन भैया मिल के आपके भोस्दे और गाड़ मे एक साथ पेलेंगे अह्ह्ह मेरा आ रहा है अह्ह्ह

मौसी - भर दे बेटा मेरी गाड़ मे रस अपना अह्ह्ह मै तो कबकी झड़ गई दो लण्ड से चुद्ने का सोच कर उह्ह्ह आअह्ह्ह

मै मेरे लण्ड को मौसी के गाड़ की जड़ ले गया और मौसी गाड़ थामे माल उगलने लगा , फिर मौसी क उपर ही गिर कर हाफने लगा ।

थोडी समय बाद हम अलग हुए और मै अपना कपड़ा पहन लिया ।

लेकिन मौसी को देखा तो वो अपना बदन साफ कर इधर उधर कुछ खोज रही थी

मै ह्स्ते हुए - क्या खोज रही हो मौसी

मौसी मुझे हस्ता देखा तो समझ गई- जल्दी दे मुझे मेरी पैंटी

मै मौसी की गाड़ पर चट्ट से मार कर - आपको क्या जरुरत है पैंटी पहनने की मौसी , वैसे भी अभी हमारे जाने के बाद मामा और रात मे नाना सब चोदन्गे ही ना हिहिहिही

मौसी मुस्कुराई- धत्त बदमाश , क्या करेगा ले जाकर उसको

मै - उसमे रोज मूठ मारुंगा

मौसी पेतिकोट का नाड़ा बान्धते हुए - क्यू छोटी तो रहेगी ना घर पर फिर

मै - हा लेकिन जब आपकी याद आयेगी तब इसे मा को पहना कर चोदूँगा

मौसी - तू पागल है चल अब बाहर जा मै आती हू

फिर मै मौसी को एक किस्स कर बाहर निकल गया 9:30 हो गये । मा , कोमल , विमला मौसी सब तैयार हो गये थे और फिर मौसी आई ।

फिर हम सब से विदा हुए और चारो निकल गए बस स्टैंड के लिए ।

हमारा समान एक नौकर लेके पहुच बस स्टॉप तक और हमारे लिये 4 सीट भी बुक ही गयी थी ।

फिर हम सब बस मे बैठ कर निकल गए घर के लिए ।

देखते है दोस्तो कोमल , विमला और अपनी मा के साथ ये बस का सफ़र राज के लिए कैसा होगा या कोई नया रोमांच समय ने राज के लिए तैयार रखा है ।

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हम लोग बस में चढ़ते समय मा और कोमल आगे थे उसके पीछे मै और मेरे पीछे विमला मौसी थी ।

तो कोमल को मा के साथ बैठना पडा और मुझे विमला मौसी के साथ ।

कोमल एक नजर अफसोस से मुझे मुड कर देखा क्योकि मै भी जानता था कि कोमल मेरे साथ ही बाते करते हुए जाना चाहती थी लेकिन अब सीट पर बैठ गयी थी क्या हो सकता था ।

क्योकि हमारे बाद और भी लोग चढ़े थे बस मे जिस्से बस पूरी कस गयी थी ।

मै विंडो सीट से लग कर बैठ गया और मेरे बगल मे विमला मौसी बैठ गयी ।

विमला मौसी ने एक डीप गले का नेवी ब्लू रंग की कुर्ती और वाइट लेगी पहनी थी और बाई तरफ से दुपट्टे को कन्धे पर रखा हुआ था ।

विमला मौसी के बदन की गरमी और बस के हिल्कोरे मेरे लण्ड की नसो मे सिहरन पैदा करने लगे और मै रह रह कर तिरछी नज़र से विमला मौसी के चुचियो की घाटी को निहार रहा था ।

विमला मौसी के दाई तरफ एक आदमी उन्की तरफ मुह करके सीट पकडे खड़ा था ।

जब ही बस ह्च्के लेती वो मौसी के उपर झुक जाता जिससे बचने के लिए विमला मौसी मेरे तरफ झुकती और अजिब नजरो से देखती उस आदमी को

फिर जब मुझसे नजर मिलती तो मुस्करा देती थी।

फिर मै नोटिस किया की वो आदमी के पैंट मे तम्बू बना और उसकी नजर विमला मौसी की घाटियो मे है । इस बार जब झटका लगा तो वो बहुत हल्का फुल्का ही था मैने गौर से देखा कि वो जानबुझ कर अपना तम्बू मौसी के बाह पर छुआ देता था ।

इधर निचे की तरफ का बस के झटको से मौसी के बाई तरफ की जांघ कसी हुई लेगी मे दिख रही थी क्योकि हवा से उनकी कुर्ती हट जा रही थी।

विमला मौसी की मासल जान्घे देख कर मेरे मुह मे पानी आ रहा था ।

मै सोचा है तो एक नं की चुद्क्क्ड फिर क्यू नखरे दिखा रही है चलो इसे टटोल कर देखता हू

मैने अपना ड्रामा शुर किया ताकि किसी तरह उनको सेक्स वाली टोपिक पर ले आऊ

सबसे पहले मैने एक बार मौसी की कुर्ती को पकड कर वापस उनकी जांघ पर रख दिया

मुझे ऐसा करता देख वो मुस्कुराई लेकिन कुछ बोली नही

लेकिन कुछ ही देर मे फिर से कुरती हट गयी तो वापस से मैने उसे सही किया और इस बार पकडे रहा

विमला मौसी मुस्कुराई

विमला - अरे बेटा परेशान ना हो उसके लिये

मै विमला के पास होकर कान मे जाकर बोला - वो मौसी बगल वाला आदमी घुर रहा है इसिलिए मैने

विमला मुस्कुराई और बोली - अरे बेटा वो उसे नही इसे घुर रहा है । विमला ने अपने चुचो की तरफ इशारा करते हुए बोली

मै शर्माने की ऐक्टिंग करते हुए चुपचाप बैठ गया और मुस्कुराने लगा

फिर बोला - तो मौसी दुपट्टा कर लिजीये आगे

विमला - अरे बेटा कोई बात नही अगर इतना सोचूंगी तो मेरे फैशन का क्या होगा हीहीहि

मै समझ गया कि अब ये लाईन पर आयेगी इसको छेड़ने की ब्स जरुरत थी ।

मै मुस्कुराते हुए - क्या मौसी आप भी , वैसे सच मे एक बात कहू

विमला - हा बोल ना बेटा

मै झुक कर विमला के कान मे - ऐसे कपड़ो मे आप बहुत अच्छे दिखते हो ,

विमला मुस्कुरा कर - सच मे

मै हा मे सर हिलाते हुए मुस्कुरा दिया

मै वापस से विम्ला के कान मे - क्या आप ऐसे ही कपडे हमेशा पहनते हो या फिर और भी मोर्डन

विमला - बेटा सच कहू तो मुझे छोटे छोटे कपडे भी पसंद है लेकिन घर मे तो पहन नही सकती ना और अब तो मै विधवा हू तो चार लोग ऐसे ही बात बनायेंगे ,,,तू समझ रहा है ना

मै - हा मौसी जानता हू , ये समाज किसी की भावना को सिर्फ अपनी जरुरत के लिए महत्व देता है बस

विमला मुस्कुरा कर - अरे वाह तू तो बड़ो के जैसे बाते करने लगा अब

मै मुस्कुरा कर - काम भी बड़ो के जैसे कर लेता हू मौसी ,,कभी जरुरत हो तो याद करना

विमला मेरे डबल मिनिग बात को समझ गयी और मुस्कुरा कर सामने देखने लगी ।

इधर वो आदमी अब ज्यादा से ज्यादा विमला के बदन से सट कर खड़ा हो गया था और उनकी तम्बू विमला के बाजू को रगड़ रहा था ,

मै विमला के कान मे - मौसी वो आदमी कुछ ज्यादा नही परेशान कर रहा है आपको

विमला मुस्कुरा कर मेरे कान मे बोली - उसकी छोड बेटा वो तो अभी जवान है , उसके बगल मे खड़े बूढ़े को देख ,,,कब से अपनी धोती खुजा रहा है हिहिहिही

मै विमला से इतना ज्यादा खुल कर बात करने की उम्मीद नही थी और मैने जब उस बुढे को देखा तो वो मौसी के बगल मे खडे आदमी के पीछे से ही मौसी की घाटियो को निहारते हुए धोती मे हाथ फ्साये हुए था ।

मुझे हसी आ गई और मै विमला के कान मे बोला - आपको अजीब नही लगता मौसी कि ऐसे सब आपको देख कर हरकते कर रहे है

विमला मुस्कुराई और बोली - बेटा हम औरतो को इन सब की आदत होती है और अबला स्त्री को सेक्स की भुखी समझ कर हर कोई अपना हाथ आजमाना चाह्ता है

मै अचरज के भाव मे - तो मतलब आपको कोई फर्क नही पड़ता है ऐसे कोई करे तो

विमला - बेटा फर्क किसे नही पड़ता अब तो मेरे पति को गुजरे 4 साल हो गए है और जरुरत सबको होती है , मुझे भी है लेकिन मै अपनी मर्यादा नही लाँघ सकती ना

मै मन मे - देखो सालि कितनी सती सावित्री बन रही है मेरे सामने जबकि लण्ड की इतनी आदी है कि देवरो का लण्ड नही मिला तो मेरे मामा को भी लपेट लिया और अब मेरे सामने खुद को मजबुर दिखा रही है ।

मै - तो ऐसे मे आप क्या करती हो मौसी अपनी जरुरतो के लिए

विमला मुस्कुराई- तू तो ऐसे बोल रहा है जैसे तुझे कूछ पता ही ना हो कि एक अबला बिना पति के कैसे अपनी जरूरत पूरी करती है ।
 
मै अचरज का भाव लाकर - सच मे नही पता मौसी

विमला शर्मा कर - चल झुठा ,

मै हैरान सा मुह लेके - मै झूठ क्यू बोलूंगा

विमला - अच्छा अभी तो कह रहा था कि बड़ो के सारे काम कर लेता है तू और अब कह रहा है की एक अबला की जरुरत के बारे मे तुझे पता ही । सच मे नही जानता या मेरे मुह से निकलवाना चाहता है

मै विम्ला की बात से हस दिया

विमला मेरे हाथ पर चींटी काटते हुर - बहुत बदमाश हो गया है तू हा

मै - अह्ह्ह आह्ह सो सो सॉरी ना मौसी हीहीहि

विमला ने मुझे छोड़ दिया और मुस्कुराने लगी ।

इसीबिच वो बुढऊ निढ़ाल होकर मौसी के बगल वाले खडे आदमी के कन्धे के सहारे हो गये

जब मौसी के बगल वाले आदमी को अपने कन्धे पर उस बुढे के सर मह्सूस हुआ

आदमी - अरे बाऊ जी क्या हुआ सो गये क्या

जैसे ही मै और विमला उस आदमी की बाते सुने एक दुसरे के तरफ देख कर मुस्कुराये फिर मुह दबा कर हसने लगे ।

हसी इस बात की थी कि मौसी की घाटियो का मज़ा लेने वाले बाप बेटे निकले हाहाह्हाह्हा

तभी आगे जाकर बस रुक गयी सड़क के किनारे लगायी गयी । आस पास कोई दुकान नही थी एक दम सुनसान जगह थी दोनो तरफ जंगल थे ।

काफी लोग बस से उतर कर नजारा देख रहे थे इधर मा और कोमल परेशान हो गये कि क्यू इतना टाईम लग रहा है और बस क्यू रुकी है

मा - बेटा जरा देख क्या हुआ है यहा बीच जन्गल मे बस क्यू रोक दी इनलोगो ने

मै खिडकी से झाका तो बस conductor से पुछा की क्या बात है तो वो बोला बस की अगली टायर पन्चर हो गयी है ।

टायर पन्चर का सुन कर हम सबके और पसीने छूट गए क्योकि गर्मी बहुत थी उस पे बस खराब होना

इधर बस से लगभग सारे लोग निकल गये थे और हमे भी बाहर आने को बोला गया

मै - चलो मा बाहर जाना पडेगा तभी बस बनेगी

मा और कोमल उठ गये और आगे जाने लगे

मै विमला को इशारे से उठने को बोला तो वो उठी और जैसे ही हम आगे बढ़ते की हमारी सीट के पीछे वो बुढऊ बेसुध सोये हुए दिख गये ।

उनको देख कर मेरी और विमला की फिर से हसी छूट गई ।

फिर विमला आगे बढी तो पीछे उसकी कुर्ती सिम्टी हुई थी

मै - मौसी आप कुर्ती सही कर पीछे सिलवटे आ गई है

मेरी बात सुन के विमला मूडी और बोली - बेटा जरा नीचे बैठ कर सही कर देगा , अच्छा नही लगता है ऐसे

मै मुस्कुरा झुका और कुर्ती का नीचे का हिस्सा खीच कर थोडा ठीक किया लेकिन उतना अच्छा हुआ नही

विमला - अरे बेटा हाथ लगा कर सही के दे ना

मै एक कातिल मुस्कान से एक हाथ विमला की कुर्ती का निचला हिस्सा पकड का खीचा और दुसरे हाथ से प्रेस की तरह उसके चुतडो पर हाथ फेरने लगा फिर दोनो हाथों से खिच के कुर्ती ठीक किया और खड़ा हो गया ।

मै - हो गया मौसी चलो

विमला मुस्कुराई और अपने चुतड हिलाते बस से निचे उतर गयी।

बाहर तेज धूप थी और आस पास कोई ठिकाना भी नही नजर आ रहा था

बस से निकले लोग जंगल मे चले गये छाव के लिए ।

कुछ आदमी बस से दुर हट कर सड़क किनारे पेसाब कर रहे थे तो कुछ जन्गल मे थोडा उतर कर

एक दो औरते जन्गल मे अन्दर की तरफ जा रही थी पेसाब करने के लिए ही शायद

उन औरतो को जन्गल मे जाता देख मा बोली - अरे विमला सुनो चलो हम भी फ्रेश होकर आते है, आ कोमल तू भी चल

लेकिन कोमल अंदर जाने से डर रही थी

कोमल सहम कर - मौसी कितना बड़ा जन्गल है और देखो उधर बन्दर भी है

बंदरो को देख कर मा का मन भी डोल गया

मा - हा बात तो सही है लेकिन मुझे प्रेसर आया है

विमला मुस्कुरा कर - मुझे भी रागिनी

मा - बेटा राज तू भी चल हमारे साथ थोडा बंदरो पे नजर रखना

मै खुश हुआ और एक कातिल मुस्कान से कोमल को देखा तो वो शर्मायी लेकिन मुझे छेड़ने के मूड मे अजीब सा मुह बना कर - क्या सच मे ये भी आयेगा

विमला - अरे तो क्या हुआ चल बेटा

मै कोमल को आंख दिखाते हुए हसा और उन लोगो के साथ बस से थोडी दुर होकर जंगल मे एक पतले से रास्ते पर उतरने लगा जो थोडा बहुत आवागमन से बना हूआ था , उस सकरे रास्ते के अगल बगल झाडिया और मूँझ उगे थे

आगे आगे करीब 20 25 मीटर जाने के बाद मै घुमा तो तीनो आपस मे बाते करते हुए आ रही थी

जंगल के जिस एरिया मे हम रुके थे वहा कुछ कुछ ही आम के पेड़ थे बाकी सगौन के ही मोटे मोटे पेड़ लगे और नीचे झाडियों भी थी

मै - मा कहा पे जाओगे आप

मा ने एक नजर सड़क की तरफ आदमियो को तहलते देखा तो बोली - थोडा और आगे चल ना बेटा यहा सब दिखेगा

मै करीब सड़क से 50 मीटर की दुरी पर आ गया और रास्ता घुमावदार था अब सड़क भी नही दिख रही थी

मा - बस रुक जा बेटा

मै रुक गया और उन लोगो की तरफ घूम गया

मा - कोमल चल इधर थोडा आगे ही कर लेटे है ।

मा - बेटा तू यही रुक विमला के साथ कोई आये ना इस रास्ते हम लोग आते है

वो दोनो चली गयी और विमला मौसी और मै खडे बाते करने लगे कि कब कैसे बस सही होगा कितना समय लगेगा

इसीबिच मुझे पास के ही आम के पेड़ पर दो बंदरो की आपस मे चुदाई होते दिखी जिसको देख कर मेरी हसी छूटी

विमला - क्या हुआ बेटा हस क्यू रहा है

मै हसते हुए - कुछ नही

विमला - फिर हस क्यू रहा है

मैने विमला को आम के उसी मोटे डाल पर इशारा किया तो विमला भी देख कर मुस्कुराने लगी ।

तभी उन बंदरो की नजर हम दोनो पर पड़ी तो वो हमारी तरफ ही शोर मचाते आने लगे जिससे विमला डरने लगी लेकिन मैने पास से एक मिट्टी का ढेला लिया और उनकी तरफ फेका तो वो उसी तरफ भागे जिधर मा और कोमल गये थे ।

फिर विमला चैन की सांस ली

तभी मा और कोमल सामने से आते दिखे

मा - जा विमला तू भी पलट आ

विमला अकेले जाने का सोच कर ही घबरा गई

विमला - अरे नही तू भी चल ना , अभी दो बन्दर हमे काटने को आ रहे थे वो तो राज ने उन्हे उसी तरफ खदेड़ा

मा भी थोडी डर गयी - ऐसा कर तू राज के साथ चली जा , हम दोनो बस तक जाते है यहा रुकना खतरनाक है

मा - बेटा तू चला जा इसके साथ आगे बस 10 15 मीटर आगे ही एक खाली जगह है

मै हा मे सर हिलाया और विमला के साथ उधर ही निकल गया , मा और कोमल बस के तरफ निकल गए

विमला मेरे काफी करीब होकर चल रही थी और फिर हम उस खुली जगह पर आ गये

पास मे ही मुझे पेशाब किये हुए दो गीले जगह दिखे जो मा और कोमल के ही थे ।

मै - मौसी आप कर लो मै यही हू

विमला मुझे अपनी तरफ पीठ करता देख बोली - अरे तू उधर देखेगा और कही बन्दर मेरे पीछे से काट लिये तो

विमला - तू मेरी तरफ ही देख बेटा ठीक है

मै थोडा संकोच मे - म म मै ,,,, लेकिन

विमला - तू लेकिन वेकिन छोड

इससे पहले मै कुछ ज्यादा कहता विमला ने झट से पैंटी के साथ लेगी को नीचे किया और फट से बैठ गई

मेरी आन्खे विमला को गोरी चित्ती जान्घे और चुतडो के गोल उभार देख कर फटी रह गयी

उधर विमला तेज धार से मूत रही थी और मै थूक गटकते हुए उसको साइड से उसके गाड़ की गोलाई को निहार रहा था । जिससे मेरे जीन्स मे तम्बू बन गया था

मुतने के बाद विमला उठी और मेरी नजर को अपनी गाड़ पर गड़ा देखा शरारती अंदाज मे अपनी पैंटी को कमर पर चढाते हुए बोली - तुझे मैने मेरे पीछे नजर रखने को बोला था तू तो पिछवाड़े पर ही नजर गड़ा लिया

मै झेप गया - अ अ ब ब वो वो मै देख रहा कही कोई पीछे न आये मौसी

विमला अपनी लेगी को चढाती हुई कुर्ती ठीक करते हुए - हा देखा मैने मौके का फायदा उठा लिया आखिर तुने भी हा

मै शर्मिदा मह्सूस कर रहा था

तभी विमला की नजर मेरे जीन्स मे बने तम्बू पर गयी

विमला - अब तू भी कर ले जल्दी

मै - नही मै उधर ही कर लूंगा

विमला - हा क्यो नही वहा ज्यादा औरतो के बीच मूतने मे ज्यादा मज़ा आयेगा ना

मै झेप गया फिर से

विमला मुस्कराई- अरे कर ले मै मज़ाक कर रही हू

मै थोडी राहत की सांस ली एक पल को लगा ये सच मे बहस करने के मूड मे है ।

मै थोडा आगे बढ़ते हुए एक साइड मे खड़ा हुआ और लण्ड को बाहर निकाल कर झाडियो मे मूतने लगा

विमला - कितना टाईम लगा रहा है जल्दी कर ना

मै - बस हो गया है एक मिंट वो चैन पुरा खुला नही है तो धीरे धीरे हो रहा है

विमला - हा जल्दी कर भाई

फिर मै जल्दी से लण्ड अन्दर किया और घुम के विमला के पास आया

वो फिर मेरे जीन्स मे बने तम्बू को देख कर मुस्कुराते हुए बोली - अरे अभी सही से किया नही क्या

मै शर्मा कर - कर तो लिया मौसी

विमला - फिर ये क्यू ऐसे है

मेरे जीन्स मे बने उभार की तरफ इशारा करते हुए बोली

मै - वो तो

विमला ह्स्ते हुए - हा हा समझ गई,, शर्म कर मै तेरे मा की उम्र की हू

मै मुस्कुरा कर - मेरा तो ठीक था लेकिन बस मे वो बुढऊ का क्या

विमला हस्ते हुए - हमम कोई नही हो जाता है अभी नया नया जवान हुआ , शायद मेरे से पहले किसी के नंगे कुल्हे देखे भी नही होगे तुने , क्यू सही है ना

मै शर्मा कर चुप रहा

विमला - अरे शर्मा मत होता है और तू भी सही है , अब जब मेरे घर मे मेरे खुद के दोनो देवर मुझ पर लार टपकाते है तो तू तो जवान है

मै कोमल के चाचाओ का जिक्र सुन कर मेरे मन मे एक नयी हलचल हुई

मै - क्या सच मे मौसी ऐसा सोचते है आपके देवर लोग

विमला - बेटा एक विधवा औरत को सब कोई अपनें निचे लाना चाहता है और मजबूरी का फायदा उठाकर इस्तेमाल करना चाहता है

मै - लेकिन मै ऐसा नही हू मौसी ,,,हमारे बीच जो भी हुआ वो अनजाने मे हुआ है बस

विमला मुस्कुरा कर - हा जानती हू रे पगले ,,,तू पहला है जिसने मेरे तन को उघारने के बजाय ढकने का सोचा ।

मै मन ही मन खुश हुआ

विमला आगे आगे चल रही थी और मै पीछे उसके हिलते चुतडो को निहारते हुए मज़े से उसकी बाते सुन रहा था ।

विमला - ये दुनिया बहुत जालिम है राज ,,लोग अपनी जरुरत के लिए रिस्तो का मतलब भी परे कर दते है और चंद पैसो के लिए मजबुर लाचार लोगो की मजबूरी का फायदा उठाते हैं ।
 
मै समझ गया कि विमला के बातो के पीछे का दर्द जो वो खुल कर मुझसे कहना नही चाहती थी लेकिन कोमल की मदद के लिए मुझे उसकी मा से बात करना बहुत जरूरी था

मै - एक बात पूछू मौसी बुरा नहीं मनोगे ना

विमला रास्ते मे रुक गयी अभी हम सड़क से 40 मिटर दुर थे

विमला मुस्कुरा कर छ्लकी आँखो को पोछते हुए - हा बोल ना बेटा

मै - आपकी बातो से लग रहा है आप मौसा के जाने के बाद से बहुत तकलीफ मे है

विमला मुस्कुराई- पति के बिना कौन खुश होता है बेटा , लेकिन तकलीफ तब ज्यादा होती है जब सहारा देने वाले ही धकेलने पर आ जाये

मै - मै कुछ समझा नही मौसी

विमला दुखी होकर - अब तुझसे क्या बताऊ बेटा

मै विमला को आश्वासन देते हुए - आप बताओ ना मौसी हो सकता है आपको जिस मदद की तलाश हो वो मै ही हू

विमला मेरी बातो से मुस्कुरा कर बोली - तू बहुत भोला है रे , और तेरा मन बहुत साफ है बिलकुल तेरी मा के जैसे ,,लेकिन मै अपने गरज के लिए तुझ मासूम को इस दलदल मे नही घसीटना चाहती हू

ये बोल कर विमला सिस्क पड़ी

मै विमला के कन्धे पर हाथ रखा और बोला- देखो मौसी मै आपमे और मा मे कोई फर्क नहीं रखता हूँ, मै बस इतना ही कहूंगा और अगर आप मुझे अपना समझती होगी तो अपना दर्द जरुर बतायेगी

विमला मेरे बातो से बहुत प्रभावित हुई और एक उम्मीद भरी नजरो से मुझे देखने लगी

मैने उनके दुपट्टे से उनके आंसू पोछे और बोला - चलिये अब आपके दीवाने आपको खोज रहे होगे

मेरी बाते सुन कर विमला हस दी - धत्त बदमाश , चल अब

फिर हम दोनो खुद को नोर्मल किये और सड़क के किनारे आ गये जहा एक साइड मा और कोमल खड़ी थी ।

मा - देख बेटा अभी तक नही बना

मै - अरे मा अभी तो 15 मिनट भी नही हुआ , बन जायेगा

तभी मुझे वो बुढऊ एक पेड़ के किनारे सर पर गम्छा रखे हुए बस की तरफ हो रहे काम को निहार रहा था

मैने विमला के हाथ पर चींटी काट कर बुढऊ की तरफ इशारा करते हुए हसा

विमला मुह पर हाथ रख कर हसने लगी और अपनी भौहे उठा कर मुझ पर झूठ का गुस्सा दिखा कर मुस्कुराने लगी ।

फिर ऐसे ही समय कटा और करीब 20 मिंट मे बस फिर से जाने के लिए तैयार थी और बारी बारी से सारे लोग बस मे बैठ गये और इस बार मौका देख कर कोमल मेरे बगल मे बैठ गई,,,, इस बार विमला को अफसोस हुआ मेरे साथ कोमल के बैठने पर लेकिन जलद ही वो मा के साथ बातो मे लग गई और इधर मै कोमल को झेद्ते उसके साथ मस्ती करते हुए सफ़र का मज़ा लेने लगा ।

करीब पौने 12 वजे तक बस चमनपुरा बस स्टैंड पहुची और हम सब उतर गये और अपने अपने बैग लिये ।

कुछ दुरी साथ मे आने के बाद विमला और कोमल अपने घर के रास्ते पर निकल गये क्योकि उनका घर मार्केट से बाहर की तरफ था और मै मा के साथ अपने घर के रास्ते पर जाने लगा ।

रास्ते मे

मै ह्स्ते हुए - मा दुकान पर जाओगी या घर चलोगी

मा मेरा मुस्कुराता चेहरा देख कर समझ गई मै रात वाली फोन पर हुई बात को उभार रहा हू जब बुआ ने मा को गोदाम में एक साथ पापा से चुदने का आमंत्रण दिया था ।

मा मुस्कुराते हुए - नही घर चल मेरे पैर दुख रहे है

मै - तो चलो

फिर हम घर के तरफ की गली मे मुड गये ।

देखते है दोस्तो राज की घर वापसी कहानी मे क्या रूप लेती है

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