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Incest सपना-या-हकीकत

Update 63

मै पापा को बोलकर खुशी खुशी कोमल के घर की तरफ जाने लगा ।

घर पहुचा तो मेन गेट पहले की तरह खुला ही था लेकिन कोई नजर नही आ रहा था आज भी ।

मै हाल से होते हुए आस पास के सभी कमरे देखे जिसमे से सिर्फ एक कमरा खुला था तो मै उस तरफ गया और कमरे मे देखा तो वहा भी कोई नही था , और कमरे की हालत देख कर साफ पता चल रहा था कि ये मनोज का कमरा है , बेड पर मनोज का बैग ही पडा था ।

मै फिर कमरे से बाहर होकर हाल के आगे आगन मे गया जहा से किसी के कपडे धुलने की आवाज आ रही थी साथ मे सरफ की भीनी भीनी खुशबू फैली हुई थी ।

मै मन मे - वहा कौन हो सकता है आगन मे , कही विमला मौसी कपडे धुल तो नही रही है । अगर वो धुल रही है तो क्या पहनी होगी , उनकी सरफ के झाग से भीगी चुचिया और गोरी पिंडलि कैसी दिख रही होगी ।

ये सब सोच कर मेरा लण्ड टनटनाने लगा ।

मै दबे पाव धीरे धीरे गैलरी से होकर पीछे आगन की तरफ जाने लगा और जैसे ही मै गैलरी के मुहाने पर पहुंचा मेरी नजर एक लडके पर गयी जो नल के आगन की चारदिवारी से लग कर एक मोके से अंदर देखते हुए अपना लण्ड हिला रहा था ।

मै मन मे - अरे तो मनोज है और ये किसको देख कर हिला रहा है

मै मुस्कुरा कर मन मे - यार सारे घर के लडके अब ऐसे ही होते है , मै तो सोचता था कि एक मै ही मादरचोद हू लेकिन देख रहा हू आजकल सब अपने घर की माल को घर मे ही चोदने को बेताब हैं ।

मैने मनोज के लण्ड पर गौर किया तो वो 6 इन्च के करीब लम्बा था लेकिन मोटा ज्यादा नही था , तभी उसके मुह से सिसकियाँ निकलने लगी और वो आंखे बंद करके झडने लगा - आह्ह मा अह्ह्ह अह्ह्ह आह्ह

मै गैलरी से ही अंदर की तरफ देख रहा था

उसकी सिस्कियो से आगन मे बैठी विमला ब्लाउज पेटिकोट मे बाहर आई , उसका पेटिकोट नीचे से पूरा भीगा हुआ था और हाथ भी गीले थे

विमला गुस्से से मनोज को देखते हूए - तू आज फिर से उसी गंदी चीज़ मे लग गया ,, अभी परसो मुझसे वादा किया था ना

मनोज की जैसी फत कर हाथ मे आ गई और मै भी चौक गया कि विमला को पता है कि उसका बेटा उसको देख कर अपना लण्ड हिलाता है

मनोज अपना सर नीचे कर लिया

विमला थोडा भावुक होकर - बेटा अब तू ही तो एक सहारा है मेरा ,,और तू अगर अपने चाचाओ जैसे मुझसे पेश आयेगा तो मेरा जीना बेकार है,,इससे अच्छा है कि मै मर जाऊ

मनोज झट से विमला के पैर पकड कर रोने लगा - मा प्लीज ऐसा मत कहो , मै भी मर जाऊंगा आपके बिना

फिर विमला ने मनोज को खड़ा किया - बेटा तू समझता क्यू नही , ये सब गलत है मै मा हू तेरी , कल को किसी को पता चला तो क्या मुह दिखाऊंगी मै किसी को

मनोज सर झुकाये खड़ा रहा और उसका लण्ड पूरी तरह से मुरझा गया था लेकिन अभी भी पैंट की चैन से बाहर लटका हुआ था ।

विमला मनोज के आखो से बहते आसुओ को देख कर पिघल गयी , आखिर एकलौता बेटा था वो उसका

विमला मनोज की तरफ मुस्कुरा कर देखी और बोली - तू खुद देख अभी ढंग से तेरा छुटकू बड़ा भी नही हुआ और तू ऐसे ऐसे काम करता है

विमला मनोज के मुरझाए लण्ड की तरफ इशारा करते हुए बोली

मनोज को भी हसी आई - मा वो आप डांट रही हो तो छोटा हो गया है

विमला हसते हुए - चल उसे अन्दर कर अभी

मनोज मुस्कुरा कर अपने आसू पोछे और अपना लण्ड अन्दर कर लिया

विमला - अब आगे से ये सब मत करना बेटा , खा मेरी कसम

मनोज निराश मन से - मा बहुत तकलीफ होती है सोने मे रात को

विमला - क्यू तकलीफ कैसी

मनोज - वो रात मे खड़ा होता है ना

विमला - क्या सोचता है तू ऐसा , कही तू गंदी फिल्मे तो नही देख रहा है ना

मनोज - नही मा मै नही देखता

विमला - फिर कैसे तुझे दिक्कत हो रही है या तो तू किसी के बारे मे सोचता होगा , कोई लडकी मे दोस्त वोस्त है तेरी

मनोज - नही मा ऐसा कुछ नही है वो तो मै

विमला - बोल कुछ आगे

मनोज - वो मुझे आपकी याद आती है रात मे इसलिये

विमला हस के - मेरी याद क्यू ,मै तो इसीघर मे हू

विमला थोडा सोचने के भाव मे - कही तू मुझे लेके वो सब गंदी हरकते नही सोचता है ना

मनोज एक दम चूप था

विम्ला थोडे गुस्से मे - हे राम अभी क्या कम तकलीफ थी मेरी जिन्दगी मे जो आप उसे और नर्क बना रहे है

विमला - अभी तू जा यहा से मेरा सर घूम रहा है मै बाद मे बात करती हू तुझसे

मै भी समझ गया कि मुझे यहा से हट जाना चाहिये और मै वापस हाल मे आकर बैठ गया ।

तभी सामने गैलरी से मनोज आता हुआ दिखा और मुझे देख कर सहम गया

मै हस्ते हुए - और मनोज भाई कैसा है

मनोज थोडा सहम कर - ठी ठी ठीक हू भाइया ,,आप यहा कैसे

मै - अरे वो मै मौसी को मिलने आया था तो यहा कोई दिखा नही , तो सोचा यही बैठ कर इन्तेजार कर लेता हू

मै - कहा है सब कोई दिख नही रहा है

मनोज थोडा शांत हो कर - वो दीदी बगल मे सिलाई कढ़ाई सेंटर गयी होगी और मा तो अन्दर नहा रही है

इतने मे अन्दर से विमला की आवाज आई - कौन आया है मनोज

मनोज गैलरी की तरफ मुह करके - राज भैया आये है मा

तभी गैलरी से दौड़ते हुए विमला आई , वो ब्लाउज मे हिलते चुचे देखकर वापस मेरा लण्ड खडा होने लगा

विमला मुझे देख के खुश होते हुए - अरे राज बेटा तू

मै उठ कर उसके पाव छुए और उसके कपड़ो से अब भी सरफ की खुशबू आ रही थी

विमला खुशी से- खुश रह मेरे लाल

विमला - वो मै थोडे कपडे धुल रही थी तो ऐसे ही चली आई ,मनोज तू इसे बिठा कर पानी पिला मै आती हू

मनोज - जी मा

फिर मनोज किचन मे चला गया और विमला घूम कर गैलरी की तरफ गयी , ओह्ह उसके चुतड भीगी हुई पेटिकोट से चिपके हुए थे और पूरी घाटी का दिदार मेरे सामने था

मै वापस सोफे पर बैठ गया
 
मनोज मेरे लिए पानी लेके आया इधर हम दोनो थोडी बहुत बाते किये । कि विमला हाल मे वापस आ गई उसने काटन की एक मैकसी पह्नी हुई थी लेकिन उसमे भी उसका भरा गदराया बदन खुल कर दिख रहा था और उपर के बटन खुले थे तो छातियो की घाटी साफ दिख रही थी ।

विमला - और बता बेटा कैसे है सब घर पर

मै - सब ठीक है मौसी आप बताओ

विमला एक नजर मनोज को देख कर - जो भी है बेटा अब ठीक ही है क्या कर सकते है

वही अपनी मा की बात सुन कर मनोज का चेहरा मुरझा गया ।

मै मुस्करा कर - अरे मौसी चिन्ता ना करो जल्द ही सारी तकलीफे दूर जायेगी

विमला चेहरे पर खुशी का भाव लाकर - हा बेटा हो जाये तो अच्छा ही हैं

मै - मौसी मुझे आपसे जरुरी बात करनी है

मै मनोज को देख कर बोला

विमला - मनोज तू जा नहा ले मुझे राज के साथ कुछ जरुरी बात करनी है आ बेटा कमरे मे जाते है ।

मनोज थोडा गंभीर होकर कुछ सोचने लगा तो मैने उसके कन्धे पर हाथ रख कर- भाई चिन्ता मत कर , ये सब तेरे लिए ही हो रहा है और समय आने पर तुझे मौसी बता देंगी ।

मनोज खुश होकर - जी भैया

फिर हम दोनो कमरे मे चले गए और विमला मे सारे खिडकी दरवाजे बंद कर दिये

विमला - हा अब बोल बेटा क्या बात है

मै ह्स्ते हुए - ऐसे थोडी ना पहले चुम्मी दो मुझे

मै उसके तरफ गाल करते हुए कहा

विमला खुश होकर मेरे एक गाल पे किस्स की

विमला - हा अब बोल

मै दुसरा गाल आगे कर - इसपर भी

विमला मुस्कुरा कर मेरे चेहरे को थामा और मेरे दुसरे गाल को चूम लिया फिर मेरे चेहरे को सीधा करके लिप टू लिप किस्स दिया और फिर मेरे लिलार पर किस्स करके - देख हो गया सब अब बता

मै हस कर अपने होठो को साफ करते हुए - अरे वाह मौसी आप बहुत मीठी चुम्मी देती हो

विमला शर्मा गयी - धत्त बदमाश, चल अब बता क्या बात है

मै - खुशखबरी है मौसी खुशखबरी

विमला खुश होकर - अरे तो बता ना क्या हुआ , भाईसाहब ने कुछ किया क्या

मै - अरे कुछ नही मौसी बहुत कुछ,, आज दोपहर मे ही पापा को आपके घर के कागज मिल गये ।

विम्ला खुशी से आसू छलका दी - सच कह रहा है तू बेटा

मै खुसी से - हा मौसी सच है और मै पापा से मिलकर और आपके कागज की फ़ाईल देख कर ही आया हू

विमला खुशी से मेरे माथे को चूम लेती है और मुझे अपने सीने से लगा लेती है

उसके सीने से लगते ही मुझे आभास हो जाता है कि मैक्सि के अन्दर विमला ने कुछ नही पहना था और मै भी उसके मुलायम चुचो मे अपना चेहरा घिस लेता हू

मै - अरे बस करो और सुनो पापा ने कुछ कहा है आपसे

विमला मुझसे अलग होकर - हा बोल ना बेटा

फिर मै विमला को पापा ने आज जो मुझे बताया वो सब मैने उसे बताया और इस बात की चेतावनी भी दी कि भूल से भी इस बात की चर्चा अपने देवरो के सामने ना करे ।

विमला - अरे वाह बेटा तेरे पापा तो बहुत छिपारुस्तम निकले हिहिही

मै - हा लेकिन मैने जो बताया उसको ध्यान रखना और अपने हिसाब से ही मनोज को कुछ बताना

विमला - और कोमल को

मै - उसे तो सारी बाते बता देना , आखिर उसी की पहल से ही सब हुआ है न

विमला - नही बेटा इसमे सबसे बड़ा योगदान तेरा है तू ना होता तो शायद मेरी बेटी भी किसी और से ये बाते ना कहती

मै - अब सारी टेनसन छोडो और कुछ ही दिनो मे हमारा प्लान काम करना शुरू हो जायेगा

विमला - वैसे भाईसाहब ने अच्छी तरकिब लगाई है

मै - हम्म्म तब मेरा इनाम हिहिहिही

विमला - बोल ना क्या चाहिये तुझे

मै - आपके मीठी पप्पी का स्वाद हाहाहाहहा

विमला - बद्माश कही का , चल आ देती हू तुझे

फिर विमला मेरे चेहरे को थामी और उपरी होठ को चुसने लगी , जिससे मेरे होठो की पकड मे विमला के मोटे रसिले निचले होठ आ गये और मै उन्हे चूसने लगा ।

फिर हम अलग हुए और हस्ते हुए अपने होठ पोछ रहे थे

विमला - अब खुश

मै - हा अभी के इतना ठीक है आगे फिर कभी मन किया तो

विमला - जब कहेगा तब तुझे अपने मीठी चुम्मी दूँगी मेरे लाल

मै - सबके सामने भी

विमला - हा तो , अपने बेटे को प्यार करने मे मुझे कोई दिक्कत नही हिहिहिही

फिर हम हसने लगे

फिर मै उनसे विदा होकर घर वापस आ गया और मा को सारी बाते बताई जिससे मा भी खुश हो गयी ।

आज शाम लेट होने की वजह से मेरी कोचिंग छूट गयी थी और अभी 5 वज रहे थे

मै - मा चलो ना आज का कोटा पूरा कर के

मा मुस्कुरा कर - धत्त पागल शाम हो गयी है और अभी सोनल आती होगी

मै - मा भी 5 ब्जे है मै अनुज को बुला देता हू फिर हम छत पर जाकर

मा मुस्कुरा कर - ठीक है बुला फिर

मै अनुज को बुलाने छत पर गया और नीचे जाने को बोला

मै - छोटे नीचे जा और मा को भेज दे मुझे भूख लगी है

अनुज - ठीक है भैया

फिर अनुज नीचे दुकान मे गया और मा उपर आई और उपर कमरे मे जाकर मा ने झटपट अपनी साडी पेटिकोट उठा कर अपनी पैंटी निकालने लगी

मा की जल्दबाजी देख कर हस्ते हुए - अरे आराम से मा इत्नी भी क्या जल्दी है

मा मेरे करीब आकर पैंट के उपर से लण्ड को सहलाते हुए - तेरे मोटे मुसल को जितना जल्दी अपनी चुत मे लेलू उतना ही मज़ा आता है ।

मै मा को बिस्तर पर धकेल दिया और मा ने अपनी साड़ी पेटिकोट कमर तक उठा कर जन्घे खोल दी जिससे उनकी हलकी झाटो वाली चुत मेरे सामने आ गई

मै झट से अपना पैंट और अंडरवियर निकाल कर मा के भोस्डी को देखते हुए अपना लण्ड आगे पीछे करते हुए बिस्तर पर आ गया और लेट चुत पर मुह लगा दिया

मा अपने चुत के होठो पर मेरे होठो का स्पर्श पाकर उत्तेजना से अपनी कमर उचकाने लगी

मा - ओह्ह्ह बेटा तू तो एक नं का खिलाडी है तेरे चुत चाटने मे एक अलग ही नशा होता है अह्ह्ह्ह मेरे लाल उह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं सीईईई इसस अह्ह्ह अह्ह्ह

मै अपना मुह मा की पिचपिचाती चुत मे दबाए उन्के दाने पर जीभ घुमा रहा था और बीच बीच में आइसक्रीम की तरह चुत को नीचे से उपर की तरफ चाट रहा था ।

फिर मै अपना लण्ड हिलाते हुए मा के सीने पर बैठ गया और उन्के मुह पर अपना मोटा मुसल पटकने लगा

मा मुह खोल कर जीभ से मेरे लण्ड को झपटती लेकिन वो मेरे सुपाडे से सरक जाती

फिर मै खुद को पीछे कर मा के मुह लण्ड को उतार दिया मानो चुत मे उतारा हो और गले तक ले जाने के बाद अपने हाथो के बल आगे झुक कर कमर हिलाते हुए मुह मे पेलना सुरु कर दिया

मा मेरे आड़ो को सहलाते हुए लण्ड को मुह मे भरने लगी और गुउउउऊ गुउउऊ करनें लगी । जब मा को घुटन हुई तो वो मेरे पेड़ू पर हाथ रख कर धकेली और मै लण्ड निकाल कर बगल मे आ गया

मा थोडा खासने के बाद मुस्कुरा कर - अह्ह्ह बेटा अब ऐसे ही बेरहमी से मेरे चुत मे भी पेल दे

मै झुक कर मा के होठो को चूम कर उसके खुले जांघो के बीच आ गया और लण्ड को बुर पर लगा कर एक तेज धक्के से अन्दर की तरफ पेल दिया
 
मा - अह्ह्ह बेटा उह्ह्ह उह्ह्ह अब रुका क्यू है चोद ना मेरे लाल अह्ह्ह आह्ह ऐसे ही आह्ह उम्म्ं मा ह्य्य्य्य मज़ा आ रहा है अह्ह्ह बेटा आह्ह

फिर मै तेजी को चोदने लगा और मा मेरे लण्ड को निचोडना शुरू कर दी

मै - अह्ह्ह मा ऐसे ना करो मै जल्दी झड़ जाऊंगा

मा - हय्य अह्ह्ह आह्ह तो झड़ जा नाअह्ह्ह्ह्ह उफ्फ्फ आह्ह मा आह्ह मा देखह्ह मै झड़ रही हहह अह्ह्ह अह्ह्ह पेल मेरे बच्चे अप्नी मा को आह्ह और और अह्ह्ह आह्ह हय्य्य मा

मा तेजी से गाड़ पटकने लगी

और मै तेजी से मा की चुत मे घ्प घप घपा घ्प घपा घ्प पेलने लगा

मै - आह्ह मा मै आ रहा हू अह्ह्ह

मा - जल्दी से मेरे मुह मे भर देते बेटा ला

मै झट से लण्ड निकाला और मेरा लण्ड झटके खाते हुए मा के पुरे बदन और कपडे पर वीर्य गिरने लगा और मा के मुह तक जाते जाते सारा माल मा की चुचियो और गरदन तक ही गिर गया लेकिन फिर भी मा ने मेरे लण्ड को मुह मे लेके अच्छे से चुस कर साफ किया और फिर हम लेट गये

मा हसकर हाफते हुए - आज फिर तुने मेरे कपड़े खराब कर दिये

मै हाफ्ते हुए - सॉरी मा वो मै बस झडने के करीब था तो ..

मा मुस्कुरा कर - कोई बात न्ही बेटे मै अभी जाकर कपड़े बदल लुंगी और साफ कर लुंगी ।

फिर मा चली गयी और मै भी अपने कपडे पहन कर वही चादर ओध कर सो गया ।

जारी रहेगी

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शाम को मा की एक जोरदार चुदाई के बाद मै वही बेडरूम मे कपडे पहन कर एक चादर ओढ़ कर सो गया ।

मुझे सोये ज्यादा समय नही हुआ था कि बेडरूम का दरवाजा खुला और मेरी आंखे खुल गयी

मै समझ गया कि दीदी आई होगी तो मै वैसे ही सोने का नाटक करता रहा

फिर बेडरूम का दरवाजा बंद होने की आवाज आई और दीदी एक रोमांटिक बालीवूड गाना गुनगुना रही थी ।

तभी बेड पर कुछ गिरने का आभास हुआ मै हल्का सा चादर उठा कर देखा था मेरी जीभ चटकारे लेने लगी

क्योकि दीदी ने अपना सूट सलवार निकाल कर बेड पर रख दिया था और इस समय ब्रा पैंटी मे आ गई थी। उनकी मखमली गोरी गाड़ को मरून पैंटी ने कैद देख कर मेरा लण्ड फड़फदाने लगा ।

सोनल बिस्तर पे बैठ कर एक लोवर पहनने लगी और अभी तक उसका ध्यान मुझ पे नही गया था और वो गाना गाने मे मस्त होकर कपड़े पहन रही थी

मै हौले से उठा और धीरे धीरे सोनल के पीछे आकर उनकी नंगी पीठ को चूम लिया

सोनल झट से चीखते हुए लोवर लेके खड़ी हो गयी और अपनी पीठ पर हाथ फेरते - यीईई मम्म्म्मीईईई

उसकी चीख सुन के मै खिलखिला कर हसने लगा

और वो मुड कर देखी तो मुझे हस्ता पाया - राज ये सब क्या है , मै सोची कोई कीड़ा रेग रहा है

मै - मै भी तो कीड़ा ही हू कहो तो नीचे रेग जाऊ

सोनल शर्मा कर झेप सी गयी मानो उसके पास मेरी बातो का कोई जवाब ही नही - तू यहा कैसे आया

मै - मै तो यही सोया था और अपनी जान की जवानी को निहार रहा था

मै बिस्तर से उतर के सोनल के पास जाते हुए बोला

सोनल पीछे होते हुए लोवर कमर तक चढा ली - देख राज अभी मैने कुछ पहना नही दुर रह हिहिहिही प्लीज भाई

मै लगातार उसकी तरफ बढ़ रहा था और वो पीछे होती गयी

फिर आखिर कार दिवाल से लग गई और मै उसके सामने होकर - अब तो दिखा दो ना दीदी , कितना दिन हो गया इन्हे देखे

मै उसके मरून ब्रा मे कैद चुचो को घुरते हुए बोला

सोनल ने झट से अपने हाथ क्रॉस करके अप्नी चुची पर रख दिया और हस्ते हुए बोली - तेरे इरादे ठीक नहीं लग रहे है राज हिहिही

मै सोनल की नंगी कमर मे हाथ डाल कर अपनी तरफ खींचा जिससे दिदी सिहर गई और अपनी आंखे भींच ली

मै उसके कान के पास जाकर बोला - इरादे नेक हैं दीदी मै उनको कैद से आजाद करना चाहता हू

सोनल हस्ते हुए मेरे बाह मे कसमसाने लगी - हिहिहिही नही भाई प्लीज छोड ना

मै उसे अपने और करीब के आया और उसके होठो तक अपनी होठ ले गया लेकिन उसमे अपने होठ भी अन्दर कर लिये

मै उसकी शरारत समझ गया और उसके कन्धे को चूमने लगा और वो नशे मे डूबने लगी ।

मै उसके कान के निचले हिस्से से गरदन और कन्धे तक अपने होठ से चूमने लगा

सोनल मेरी बाहो मे कसमसा कर सिसकने लगी- ओह्ह्ह्ह भाई क्या कर रहे अह्ह्ह्ह इम्स्स्स्स आह्ह

मै सोनल के कानो को काटने लगा और उसमे जीभ फिराने लगा जिससे कोमल ने अपने हाथ चुचियो से हटा कर मेरे पीठ कर रख कर मुझे और करीब कर लिया

वो मदहोश होकर तेज सांसो मे मेरे पीठ कर हाथ फेरने लगी ।

मै उसके कान से होकर उसके गालो को चूमते हुए उसको होठो को मुह मे भर कर चूसने लगा , दीदी भी मेरा भरपूर साथ देने लगी ।

और फिर होठो से सरक कर कब मै दीदी की चुचियो को मिज्ते हुए उसने ब्रा के उपर से काटने लगा मुझे पता ही नही चला वही दीदी मेरे सर पर हाथ फेरते हुए आहे भर रही थी ।

इतने मे मा की आवाज आई और हम दोनो अलग हो गए

दीदी - हट भाई मा बुला रही

मै - ठीक है अभी जाओ जल्द ही इन्हे खोल कर चूसूंगा

दीदी शर्मा कर मुझसे अलग हुई और अपना टीशर्ट पहन कर किचन मे चली गयी और मै नीचे चला गया ।

शाम को पापा भी जल्दी आ गये दुकान से फिर मा और मेरे साथ हुई आज की घटना की पुनरावृति की गयी ।

रात मे खाना खा कर मै नये वाले घर निकल गया सोने के लिए ।

दिन गुजरे और पापा ने अपने प्लान पर संजीव ठाकुर और वकिल मित्र सुभाष के साथ काम शुरू कर दिया ।

एक दिन भरी दूपहरी मे 3 पुलिस की गाडिया अपना शायरन बजाते हुए सररर सररर कोमल के मुहल्ले मे गुजरी और कोमल के घर के सामने रुकी । जिसमे सबसे आगे वाली गाड़ी एसडीएम साहब की थी जिसमे मेरे पापा के दोस्त सुभास निकले और बाकी दो जो पुलिस की गाडिया थी उनमे से सारे हवलदार और एक दारोगा बाहर आया ।

मुहल्ले मे चारो तरफ भीड़ एक्थ्था होने लगी और जिसके मन में जो आता वो बाते बनाने लगा । कुछ हवलदार गेट पर रुके और दो हवलदार, दारोगा और वकिल के साथ कोमल के घर मे गये और मुस्किल से 15 20 मिंट बाद वो सब वापस गाड़ीयो मे बैठ गये और गाडिया वापस से होर्न बजाते हुए तेजी निकल गयी ।

पुरे मुहल्ले मे कौतूहल मच गया और मौका देख के शाम होते होते संजीव ठाकुर ने अफवाह उड़वा दी कि नया एसडीएम विमला के रिश्ते मे है , कही ये अफवाह आने लगी की महेश ने विमला की जमीन हड़प ली है उसी के खिलाफ तहरीर दर्ज हुई है ।

बस फिर क्या था ये अफवाह आग की तरह महेश तक आई और उसको काटो तो खून नहीं वाली हालत हो चुकी थी

इधर विमला को भी थोडी बहुत परेशानी हुई की चार लोग मुहल्ले के इच्छुक है आखिर उन्हे क्या जवाब दे ।फिर उसने सभी को ये कह कर समझा दिया कि वो मेरे दुर के रिश्ते मे है

उधर महेश को चैन की नींद नही आ रही थी उसे दिनरात डर होने लगा कि वो क्या करे , ना वो अब विमला को कोई धमकी दे सकता था ना ही उसके कागज वापस कर बच सकता था ।

इधर पापा ने विमला के हौसले को बन्धे रखा क्योकि सबर इस जंग मे हमारा सबसे बड़ा हथियार थी ।

एक हफ्ते बाद फिर एक पुलिस की गाड़ी ने कोमल के घर का दौरा किया जिससे मजबूरन महेश अपनी लाज बचाने के लिए भागा भागा संजीव ठाकुर के यहा पहुचा लेकिन वहा भी उसे दुत्कार दिया गया । जिसकी सूचना संजीव ठाकुर ने पापा को देदी थी और ये भी कहा कि जल्द ही अब वो विमला से मिलेगा ।

और हुआ भी वही क्योकि

उसी दिन शाम को 5 बजे विमला का पापा के पास फोन आया और फिर पापा ने मुझे बताया कि मै जाकर कोमल के यहा आज की रात रुक जाऊ क्योकि आज शाम को ही महेश विमला से बात करने गया था तो विमला थोडी डरी हुई है ।

मै शाम 7 बजे तक कोमल को सूचना देके उसके घर पहुच गया ।

जहा पहले की तरह ही मेरा आवभगत हुआ

हाल मे सारे लोग थे मै , कोमल , विमला और मनोज

मै विमला से - मौसी क्या बात है आपने अचानक से मुझे यहा क्यू बुलाया

विमला थोडी परेशान होकर- बेटा आज शाम को महेश और अनिता आये थे मुझसे बात करने

मै - हा तो क्या बाते हुई फिर

विमला - पहले तो उसने मुहल्ले मे उड़ रही अफवाहो के बारे मे पुछा की क्या सही है क्या नही

मै - फिर आपने क्या बोला

विमला - वही जो भाईसाब ने मुझे समझाया था

मैने उसको बोला

विमला - देखिये ये बात सच है कि नये एसडीएम मेरे दुर के रिश्ते मे है लेकिन मैने आपके खिलाफ कोई तहरीर नही लिखवाई है वो सब सरासर झूठ है

महेश - वो सब बाते जो आजकल मुह्लले मे उठ रही है और वो वकिल दो बार आया था उसका क्या

विमला - दरअसल बात ये है कि मै ये घर एसडीएम साहब को ही बेच रही हू तो उसी की कागज बनवाने के लिए वो वकिल आया ।

विमला - और उसको असली कागजात चाहिये तो मैने उनको इतना बोला है कि वो कागज आपके पास सुरक्षित है जैसे जरुरत होगी आप मुझे दे देंगे

महेश और अनिता डर से एक दुसरे की तरफ देखने लगे

विमला मुस्कुरा कर - मै खुद आपके पास आने वाली थी कागज के लिए , लेकिन देखिये आप लोग खुद आ गये

महेश के पास इस समय कोई जवाब नही था

अनिता - दीदी आप लोग ये घर बेच कर कहा जाओगे

विमला - दरअसल मेरी बड़ी दीदी शहर मे रहती है तो वो कोमल को वही एक जॉब दिलवा रही है और शहर मे मनोज की पढाई भी अच्छे से हो जायेगी और मै भी वही दीदी के साथ रह लुंगी ।

महेश थोडा डर के भाव से - बात ये भाभी हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई है

विमला - क्या हुआ देवर जी

महेश - वो कागजात हमारे पास नही है , वो संजीव ठाकुर के पास है
 
विमला जानबुझ कर अचरज का भाव लाकर - ये क्या कह रहे हैं आप देवर जी , देखीये आजतक आपलोगो ने जो कुछ भी किया वो सब मैने घर की बात समझ कर सह लिया लेकिन अगर मेरे ब्च्चो के भविष्य खराब होने की नौबत आई तो मजबूरन मुझे एसडीएम साहब को सच बताना पडेगा ।

महेश बिलखते हुए - मुझे माफ कर दिजीये भाभी जी , अगर आपने ऐसा कर दिया तो मै कही का नही रहूंगा

अनिता - हा दीदी जो कुछ भी हमने आजतक किया उसके लिए हम दिल से माफी मांग रहे है ।

विमला - मै कुछ नही जानती देवर जी मुझे मेरे कागजात वापस चाहिये , बाकी आपकी मर्जी आप अपना देख समझ लिजीये ।

मै - बस यही हुआ तो उसमे डरने की बात थी

विमला - बेटा मै तैस मे आज पहली बार उसको ऐसे लहजे मे बात की थी तो डर लगेगा ही ना

मै विमला के मन का डर समझ सकता था कि कैसे एक अबला स्त्री उस इन्सान का सामना अकेले करे जिसने आज तक उसे अपने पैरो तले दबा रखा हो

मै - ठीक है अब आप लोग चिन्ता ना करिये मै आ गया हू ना और जब तक ये मामला शांत नही हो जाता मै यही रहूंगा

विमला खुश होकर - सच बेटा , सुक्रिया

फिर हमने और भी बाते की और रात का खाना खा कर हम सोने के लिए चले गये ।

मुझे रात मे मनोज के साथ सोना पड़ गया जो मै नही चाहता था क्योकि मै रात मे कोमल के साथ मज़े करना चाहता था ।

वो रात किसी तरह बीती और अगले दिन मै विमला को ये बोल कर घर निकल गया कि मै शाम तक अपने कपड़े लेके आऊंगा ताकि बार बार आना जाना ना रहे ।

दिन में मैने दुकान और नये घर का काम देखा और शाम को कोचिंग के बाद कोमल के यहा चला गया

आज विमला काफी शांत और खुश नजर आ रही थी ।

शाम को 7 बजे मै उसके साथ टहलने छत पे गया ।

अभी मार्च का महीना चल रहा था तो मौसम सुहाना ही था ।

विमला एक पटियाला सूट सलवार मे थी । बिना दुपट्टे के

उसके चुचो के उभार से उसकी घाटी पता चल रही थी

मै - आज बड़ी खुश लग रही हो मौसी

विमला मुस्कुरा कर- क्यू ना होऊ , जब मेरे बेटे ने मेरी सारी तकलीफे दुर कर दी है ।

मै - हा लेकिन आपके बेटे को इनाम नही मिला कुछ अभी तक

विमला - क्या चाहिये तुझे

मै - वही मीठी मीठी पप्पी

विमला - वो तो जब तू चाहे ले सकता है बेटा

मै विमला का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ किया

विमला थोडा संकोच करते हुए- य य ये क्या कर रहा है तू बेटा

मै - अब हीरोइन के साथ हीरो जैसे पेश आना पडेगा ना तो वैसे ही अंदाज मे किस्स करने का सोच रहा हूँ

ये बोल कर मैने उसकी मुलायम कमर मे हाथ डाल कर अपनी तरफ किया और उसकी आँखो मे देखने लगा

विमला मेरी बाहो मे आ कर हसते हुए - धत्त बदमाश , मै कहा से हीरोइन हू , मेरी तो उम्र हो गयी है

मै विमला के उडते जुल्फो को उसके कान मे फसाते हुए उसके गालो को चूम कर - यहा से लगते हो हेरोइन आप

विमला शर्म से पानी पानी हो गयी

मै विमला के चेहरे को उपर कर उसके होठो से अपने होठ मिलाते हुए उन्हे चूसने लगा और अपने हाथ उसके कूल्हो तक ले गया और वही घुमाने लगा

विमला किसी भुखी शेरनी की तरह मेरे होठो को चूसने लगी और करीब 5 मिंट तक की लम्बी चुम्बन के बाद मै उससे अलग हुआ । मेरे हाथ अब भी उसके कूल्हो से होकर उसकी गाड़ को थामे थे ।

विमला मुस्कुरा कर - चुम्मी के बहाने चांस मार रहा है , हाथ कहा है तेरा

मै विमला की बाते सुन कर उसके गाड़ को एक हाथ मे हल्का दबाते हुए - काफी मुलायम जगह लग रही है मौसी लेकिन ये है क्या

विमला ह्स्ते हुए - तेरी हीरोइन का पिछ्वाडा है

मै थोडा बनावती भाव लाकर - ओ मॉय गॉड ये तो काफी बड़ा है मौसी ,

विमला के चुतडो को दोनो हाथो से सहलाते हुए बोला

विमला हस्ते हुए - बोल तो ऐसे रहा है जैसे पहले देखा नही हो ,

मै - सच मे नही देखा मैने मौसी

विमला इतरा कर - अच्छा फिर उस दिन जंगल मे क्या कर रहा था

मै ह्स्ते हुए - वो तो बस किनारे से दिखा था , और मेरा ध्यान तो बंदरो पर था ना

विमला मेरे गाल खिच कर ह्स्ते हुए - नटखट है तू बहुत पता है मुझे , मै जानती तू मुझे नंगी करने की फिराक मे है

मै हस कर - अरे नही नही मौसी , मै बस आपके सुन्दर मटको को देखना चाहता था

विमला हस के - मटके!!! हिहिहिहिही फिर इन्हे क्या कहेगा तबेला

विमला अपने उभरे हुए चुचो को दिखाती हुई बोली

मै अपना एक हाथ उपर लाकर विमला की घाटियो मे उंगलिया फिराते हुए विमला की तरफ देखा तो मेरे उंगलियों का स्पर्श अपने चुचो पर पाकर आंखे बंद कर सिस्क पड़ी थी

मै - मै तो इन्हे थन कहूंगा मौसी , ये किसी मोटी भैस के थन जैसे मोटे मोटे है

विमला मेरी बातो से हस कर - धत्त मै तुझे अब मोटी भैस दिख रही हू ना

"जा मै तुझसे बात नही करती " , ये बात विमला इतरा कर बोलते हुए मुझसे अलग होकर मुह फेर ली

मै उसको पीछे से हग किया जिससे मेरा पैंट मे खड़ा लण्ड उसकी गाड़ के पाट पर स्पर्श होने लगा

मै उसको हग के उसके कान मे बोला - मौसी आप तो अप्सरा हो , मै तो बस तुलना कर रहा था , असल मे आपके ये बहुत सुन्दर और गोल है

विमला के बाई चुची को नीचे से सहलाते हुए बोला

विमला मेरे हाथो का स्पर्श पाकर मेरे कन्धे के बल हो गयी और अपना पूरा बदन ढिला छोड दिया

जिससे मैं पीछे को गिरने लगा

मै विमला को सम्भालते हुए - उह्ह्ह्ह्ं मौसी सीधा खडे होईये मै गिर जाऊंगा आपको लेके

विमला होश मे आई और सीधा खड़ा होकर हसने लगी

मै - आप हस क्यू रहे हो

विमला ह्सते हुए - कुछ नही चल नीचे चलते है हिहिहिहिही भैस से अप्सरा बना दिया

विमला बूदबुदाते हुए बोली

मै भी उसके साथ नीचे चल दिया

फिर मै मनोज के कमरे के जाकर अपना ड्रेस बदल कर टीशर्ट लोवर पहन लिया और रात सब खाना खाने बैठ गये ।

विमला ने भी एक काटन की नाइटी पहन ली थी , वही कोमल पहले की कैसे टीशर्ट स्कर्ट मे थी । मेरी नजर मनोज पर गयी तो वो बार बार मा को निहारे जा रहा था ।

उधर मेरे सामने बैठी कोमल मुझसे बात करने का इशारा कर रही थी । मै भी कोमल से अकेले मिलने को बेताब था लेकिन क्या कर सकता था मुझे मनोज के साथ ही सोना था ।

खाना खाने के बाद मै और मनोज छत पर टहलने चले गए जहा मैने एक बार मा पापा से फोन पर हालचाल लिया और फिर मनोज से थोडी इधर उधर की बाते की फिर नीचे आ गया सोने ।

विमला - अरे बेटा वहा तुझे कोई तकलीफ तो नही ना मनोज के साथ सोने मे

मै मुस्कुरा कर - अरे नही मौसी कोई तकलीफ नही , बस घर पर अकेले सोने की आदत थी कोई बात नही मै मैनेज कर लूंगा

विमला थोडा फ़िकरमन्द होकर - अच्छा ,, ठीक है आज रात सो ले कल से मै तेरे लिए वो गेस्टरूम साफ कर दूँगी

मै - अरे नही मौसी मुझे कोई दिक्कत नही है

मनोज - नही मा कल आप वो कमरा सही कर देना , मुझे भी अकेले सोने की आदत है

मै - ओह्ह फिर ठीक है मौसी आप कल उस कमरे को सही कर ही देना , आज मै यही सोफे पर सो जाता हू

विमला - क्या बात कर रहा है बेटा तू , ऐसे कैसे सोफे पर सोयेंगा

मै - फिर मनोज को दिक्कत होगी न मौसी

विमला - एक काम कर मनोज तू चल मेरे साथ सो जा और राज को तेरे कमरे मे सोने दे

मनोज तो मानो खुशी से उछल पड़ा- ठीक है मा हिहिही

मै - क्या हुआ मनोज इतनी खुशी

मनोज - हा मा के कमरे मे डबलबेड है ना और मेरे कमरे मे चौकी तो

विमला हस्ते हुए - पागल कही का चल जा अब सो जा

मै एक नजर कोमल की तरफ कातिल नजर से देखा और मनोज के कमरे मे आ गया

देखते है दोस्तो आने वाली रात कितनी लम्बी और चीख भरी होने वाली है

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रात मे सारे लोग अपने तय कमरे मे सोने के लिए चले गये ।

मै कमरे मे पहुचा ही था कि मेरे मोबाईल पर एक sms बिप हुआ , मोबाईल देखा तो उम्मीद के हिसाब से कोमल का ही था

कोमल - सोना मत अभी मै आ रही हू

मै उसको ओके लिख के भेज दिया और आने वाले पल को लेके लण्ड को दुलारते हुए कल्पनाओ मे खो गया

थोडी ही देर मे मौसी ने मेन गेट बंद किया और बाहर की लाईट बुझाते हुए मेरे कमरे के पास आई और बोली - बेटा लाईट बुझा दू बाहर की कोई दिक्कत तो नही है ना

मै - नही मौसी कोई दिक्कत नही है ।

फिर विमला ने लाईट बुझा कर अपने कमरे की तरफ गयी और अपने कमरे के बाहर लगी लाईट को बुझा कर कमरे का दरवाजा बन्द कर दिया

मैने झट से मोबाईल उठाया कोमल को मैसेज किया

मै - मै आऊ तुम्हारे पास या तू आओगी

कोमल - तू ही आजाओ मेरे हीरो हिहिही

मै झट से बिस्तर से उठा और दबे पाव कोमल के कमरे के पास गया जो मनोज के कमरे के तुरंत बगल मे ही था ।

मै दरवाजा खोला और चुप चाप कमरे मे जाकर अन्दर से दरवाजा बन्द कर दिया ।

कमरे मे लाईट जल रही थी और कोमल मेरी तरफ देखते हुए करवट लेके लेटी हुई थी ।

मै उसके पास गया और लेट गया उसकी तरफ करवट लेके

और अब हम दोनो आमने सामने एक दुसरे की आँखो में आंखे डालकर मुस्कुरा रहे थे ।

फिर पहले कोमल ने मेरा चेहरा थामा और मेरे होठो को चूम लिया और खस्क कर मेरे और करीब आ गयी ।

कोमल के बदन से एक भिनी सी खुस्बु आ रही थी मै उसके कमर मे हाथ डाल कर अपने से चिपका कर उसके होठो को चूसने लगा । जिससे कोमल जोश मे आकर अपना एक पैर मेरे कमर पर फेक के अपनी चुत को मेरे लोवर मे खडे लण्ड से सटाते हुए मेरे गले मे हाथ डाल कर चिपक गयी ।

मैने भी कोमल के उसी पैर को स्कर्ट के अन्दर हाथ डाल कर सहलाते हुए उसके चुतडो तक ले गया तो पाया की कोमल ने अन्दर कुछ नही पहना है ।

कोमल की मुलायम नंगी गाड़ मेरे हाथ मे आते ही मेरे अन्दर जोश का एक सैलाब सा उठा और मै उसके गाड़ को अपने लण्ड पर दबाते हुए अपनी कमर की और आगे किया ।

जिस्से कोमल छटपटाने लगी ।

मै कोमल को खीच कर अपने उपर किया और खुद पीठ के बल लेट गया और अब कोमल मेरे गाल गरदन सीने पर चूमने लगी । मै उसकी गाड़ को पकड कर उसके पाटो को फैलाने लगा ।

जल्द ही जोशिली कोमल ने अपना टीशर्ट निकाल कर फेक दिया जिससे बिना ब्रा के उसके 32 के चुचे हवा मे झूल गये ।

मै कोमल के झुलते गोरे मुलायम गुलाबी निप्प्ल वाले चुचे को देख कर उत्तेजित हो गया और कोमल की पीठ को थाम कर उसे अपने उपर किया फिर उसकी एक चुची को पकड कर मुह मे भर लिया ।

उफ्फ़ क्या मुलायम और मीठी सी निप्प्ल थी उसकी

मेरे मे निप्प्ल जाते ही कोमल आंखे बंद किये तेज सांसे लेते हुए मेरे उपर लोटने लगी अपनी चुत को मेरे लण्ड पर घिस्ना शुरू कर दिया ।

मै बारी बारी से दोनो चुचियो को मसल मसल कर चुस्ते हुए लाल कर दिया और कोमल को एक जोरदार किस्स करते हुए उसे अपने लण्ड की तरफ जाने का इशारा किया

कोमल के कातिल मुस्कान के साथ नीचे मेरे जांघो के बिच मे गयी और लोवर मे तने लण्ड को सुन्घा और नशिलि आखो से मेरे तरफ देख्ते हुए लोवर के उपर से अपनी जीभ को मेरे लनड के उपर घुमाने लगी ।

कोमल की इस अदा से मेरे तन बदन मे गर्मी बढ़ गयी मेरे लण्ड की नशो मे नया जोश आने लगा

फिर उसने मेरे लोवर और अंडरवियर पको खींचा और मेरा लनड़ तन कर फनफनाने लगा

मेरे रबर के डण्डे जैसे लण्ड को स्प्रिंग जैसा हिलता देख उसे हाथ मे थाम लिया कोमल ने और चमडी को नीचे खीचते हुए अपनी लार की मोटी धार मेरे सुपाडे पर गिराते हुए गप्प से उसे मुह मे भर ली ।

मै कोमल की इस हरकत से अकड गया और उसके बालो को सहलाते हुए अपने गाड़ के पाटो को सख्त कर कमर उचका कर लन्द को उसके मुह मे पेल्ने लगा ।

कोमल अपने लटकती जुल्फो को बार बार कान मे खोस कर गुउऊ गुउऊ करके मेरे लण्ड को चूसे जा रही थी ।

हम दोनो मे कोई बात नही हो रही थी जबसे मै कमरे मे आया था । बस आँखो से इशारे और मुस्करा के ही हा ना मे बाते हो रही थी ।

फिर कोमल ने मुह से लण्ड निकाल कर ढेर सारा लार मेरे सुपाडे पे छोडा और उसे पुरे लण्ड पर लीपने लगी ।

मै एक मुस्कान के साथ उठ गया और कोमल को बिस्तर पर लिटा कर उसके चुचो पे झपट गया ।

उसके चुचो को मिजना शुरू करते ही वो सिस्कने लगी । हम दोनो इस बात का पूरा खयाल रखरहे थे कि आवाज बाहर ना जाये ।

इसी बीच मैने कोमल की स्कर्ट उपर करके लण्ड को उसकी नाजुक चिकनी रस छोड़ती चुत पर रगड़ना सुरु कर दिया ।

कोमल मेरे गर्म लण्ड का स्पर्श अपनी नाजुक चुत पर पाकर सनसना उथी और मेरे पीठ पर हाथ डाल कर मुझे अपने सीने से लगा लिया ।

मेरे लण्ड की रगड़न से कोमल मादक और दबी हुई सिसकियाँ लेने लगी थी ।

मै कमर उपर करके लण्ड के सुपाड़े को उसके चुत के होठो को खोल कर लगाया और सुपाड़े पर जोर दिया ।

कोमल दर्द से तडप कर मेरे पीठ को अपनी तरफ दबा के और तेज मुझसे चिपकती हुई सिसकने लगी और मैने धीरे धीरे अपना सुपाडे को उसकी रस बहाती चुत मे दबाते हुए अन्दर घुसेड़ दिया ।

मेरा सुपाडा अन्दर जाते ही मैने कोमल को ढिला किया तो वो एक गहरी सांस लेते हुए हाफने लगी और उसके चेहरे पर दर्द की लाली साफ दिख रही थी लेकिन हिम्मत बाँधे मुस्कुरा कर मेरे गालो को चूमा और आँखो से इजाजत दी की मै आगे बढू ।

फिर मै उसके होठो को चूम कर उसकी एक जांघो को अपनी कमर पर चढ़ाया । वही कोमल गहरी सांसे लेके आने वाले दर्द के लिए तैयार होने लगी ।

मै उसके गाड़ को थाम के हल्का सा जोर देके लण्ड को कोमल के आधी चुत मे चिरते हुए ले गया जिससे कोमल मेरे नीचे छटपटाने लगी और धीरे से बोली - बहुत जलन हो रहा है राज बहुत ज्यादा उफ्फ्फ

कोमल दर्द और जलन से अपने कन्धे झटक रही थी

मै उसके गालो को थपथपा कर उसके सर पर अपना होठ रख कर एक और धक्के के साथ पूरा लण्ड कोमल की चुत मे उतार दिया ।

कोमल एक लम्बी और गहरी सांस लेके अपनी चुतडो को दर्द से उठा कर पटका और खुद कमर हिलाने लगी ।

अब मैने धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू किया और चोदने लगा ।

कोमल के दर्द की तडप ने मेरे लण्ड में थोडा ढिलापन ला दिया था लेकिन वापस जब उसने कमर उच्काना शुरू किया तो मेरे लण्ड मे जोश आ आगय और मै रफ्तार बढ़ाते हुए चोद्ना शुरू कर दिया

और समय के साथ कोमल की चुत मेरे लण्ड के लिये जगह बना ली और मै अब धक्को को तेज कर दिया ।

कोमल मेरे पीठ को पकड कर अपनी जांघो को खोले मेरे तेज धक्के से अपनी चुत को कूटवाति रही और जल्द ही मै झडने को आया

कोमल - वो मुझे चाहिये राज

मै पसीने से तर उसको हस कर देखते हुए - क्या चाहिये कोमल

कोमल - वो पानी मुझे चाहिये

मै - नही आज का नही

कोमल - क्यू

मै - आज तुम्हारा पहली बार था तो हो सकता हो अन्दर का ब्लड लगा हो

कोमल मेरे चेहरे को दुलारते हुए मुस्कुरा कर ओके बोली और फिर मै कोमल से एक कपडा मांगा तो कोमल ने तकिये के नीचे से अपनी पैंटी निकाल कर दी मुझे

मै झट से कोमल की चुत से लण्ड को निकाला और उसकी दी हुई पैंटी को लण्ड के सुपाडे पर लगा कर मुठियाने लगा

मेरा लौडा सख्त हो चूका था और मै आंखे बन्द किये कोमल का नाम बूदबुदाते झडने लगा

कुछ ही देर मे मेरे माल से कोमल की पैंटी भीग गयी और उसी से मैने अपना लण्ड पोछा और फिर कोमल की चुत साफ करके बेड के पावे के पास रख दी और वापस कोमल के बगल मे आ गया ।

कोमल खुश होकर मेरे सीने से चिपक गयी ।

मै उसको अप्नी बाहो मे भर लिया

मै - कोमल मेरे ख्याल से मुझे अब अपने कमरे मे जाना चाहिए

कोमल - बक्क इतना जल्दी ,ऐसे सोने दो अच्छा लग रहा है और थैंकयू

मै मुस्करा कर - थैंकयू क्यू भई

कोमल मेरे गालो को चूम कर - इतनी केयर करने के लिए और क्या , जैसा तुमने किया वैसा थोडी ना कोई करता है ।

मै हस के - पागल कही की चलो तुम आराम करो

कोमल- मुझे सुला दो फिर जाओ ना

मै हसकर - चल चल फुररर,,मुझे क्या अपना आशिक़ समझा है कि तुझे बाबू सोना करू

कोमल मेरे सीने पर हल्के मुक्के मारती हुई - क्या यार थोडी देर के लिए बन जाओ ना मेरे बॉयफ्रेंड , बाकी टाईम तो हम दोस्त है ना

मै उसको अपने तरफ खिच कर हग करते हुए उसके माथे को चूमा और बोला - ठीक है सो जाओ

फिर उसको थपकी देके सुलाने लगा और थकी हारी कोमल कुछ ही मिनटो मे गहरी नींद मे चली गयी ।

फिर मैने उसको आराम से लिटा कर उसकी स्कर्ट को नीचे किया और एक चादर उढा कर अपने कपडे सही किये कमरे से बाहर निकल गया ।

कमरे से निकल कर थोड़ी देर बाहर की ताजा हवा लेने के बाद मै अपने कमरे मे जाने को हुआ तो मुझे लगा कि सोने से पहले एक बार मुत लू नही तो भोर मे उठ कर मूतने जाना पडेगा और नीद खराब होगी

फिर मै कमरे से मोबाईल लिया और टॉर्च जला कर पीछे आगन की तरफ जाने लगा ।

जारी रहेगी

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मै अपने मोबाईल का टॉर्च ऑन करके पीछे आगन मे गया और मुत कर वापस कमरे मे आया और धिरे से दरवाजा बंद कर दिया

मै लाईट बुझा कर बिस्तर पर लेता ही था की बाहर से एक दरवाजे खुलने की आवाज आई

मै उठा और अपने कमरे की खिडकी का पर्दा हटा कर बाहर देखा तो सामने विमला के कमरे का दरवाजा खुला था और कमरे की लाईट जल रही थी ।

फिर मुझे दो परछाइया कमरे मे टहलती दिखी और फिर मनोज दरवाजे से बाहर गरदन निकाल कर झाका तो मुझे उसका कन्धा खुला हुआ दिखा क्योकि सोने जाने से पहले वो टीशर्ट लोवर पहने हुए था ।

मनोज एक बार बाहर सब तरफ देखा और फिर कमरे मे चला गया

मुझे कुछ समझ नही आया आखिर चल क्या रहा है

तभी कमरे से विमला अपनी सूट को उपर किये हुए बाहर निकली और उसकी नाभि , गोरा पेट और चिकनी कमर साफ दिख रही थी ।उसके बाद मनोज बाहर आया और वो सिर्फ अंडरवियर मे था जो मोबाईल का टॉर्च जला कर विमला को आगन की तरफ लेके जा रहा था । वो दोनो आपस मे कुछ खुसफुसा भी रहे थे ।

मुझे कुछ समय मे नही आया तो मै धीरे से कमरे का दरवाजा खोल कर दबे पाव अन्धेरे मे अन्दाजा लगा कर चलते हुए गैलरी तक आया तो आगन मे मोबाईल के टॉर्च की रौशनी नजर आ रही थी ।

चुकी रास्ता एक तरफा था तो मै और आगे जाकर रिस्क नही लेना चाह्ता था इसलिये मै वही हाल मे बने गैलरी के सुरु मे ही दीवाल से लग कर खड़ा हो गया

थोडी ही देर मे विमला और मनोज वापस आने लगे तो मै झट से जीने के नीचे हो गया और वो लोग मोबाईल के टॉर्च की रोशनी मे देखते हुए जाने लगे ।

फिर कमरे मे पहुच कर उन्होने दरवाजा बंद कर दिया ।मै भी झट से फुर्ती दिखाते हुए विमला कमरे के पास बिना कोई आहट के पहुच गया और थोडा दरवाजे से लग कर अन्दर की बातो पर ध्यान देने लगा

मनोज - सॉरी मा वो जल्दबाजी मे बिस्तर से उतर नही पाया

विमला थोडी गुस्से मे - तेरे चक्कर मे ये नयी बेडशिट मे दाग गया

मनोज - मेरी प्यारी माआआ माफ कर दो ना

विमला झल्लाते हुए स्वर मे - दुर हट मुझसे चिपक मत , अभी कबसे चिपक कर मुझे रगड़ मिज कर क्या क्या किया वो कम था

मनोज हस्ते हुए - नही मै तो ऐसे ही सोउँगा वो भी रोज

विमला - नही नही !!! कल से तू अपने कमरे मे सोयेगा ।

मनोज - प्लीज ना मा

विमला - नही मै ये सब रोज नही झेल सकती हू

मनोज - तो आप चाहती हो की रोज मै ऐसे ही तडपता रहू , ठीक से सोऊ भी नही

विमला चुप रही

मनोज - बोलो ना मा

विमला - चल ठीक है अभी सो जा कल का कल देखेंगे , लेकिन दुर होकर सो अब

तभी विमला के खिलखिलाने की आवाज आई - अरे छोड ना बहुत गुदगुदी लग रही है हिहिहिहिही

मनोज हस्ते हुए - पहले बोलो रोज सुलाओगी अपने पास

विमला हस्टे हुए - हिहिहि ठीक है अभी छोओओओड़ह मुझे हाहाह्हा

फिर सब शांत हो गया और वापस अपने कमरे मे मुस्कुरा कर जाने लगा । मुझे इस बात का बखूबी अन्दाजा हो गया था कि अभी थोडी देर पहले मनोज और उसकी मा के बीच क्या हो रहा था । कि कैसे मनोज अपनी गदरायी मा को अपने भावनात्मक जाल मे फसा कर उसके जिस्म को मल कर अपना माल उसकी नंगी पेट पर गिराया होगा और उसी चक्कर मे बेडशिट मे दाग लग गया होगा ।

खैर मे भी थक गया था तो कमरे मे आकर सो गया ।

सुबह मनोज ने दरवाजा खटखटाया तो मेरी नीद खुली और मै बाहर आया ।

सुबह के 6 बज गए थे

मनोज - चलो भैया बाहर टहलने जाते है

मै एक जोर की अन्गडाई

लेते हुए - रुक थोडा मुह धुल लू

मनोज थोडा झिझक कर - वो भैया दीदी नहाने गयी है

मै - अच्छा ठीक है फिर चलते है ऐसे ही

मैने अपने टीशर्त को नीचे वे उठाया और उसी से आँखो के कचरे को साफ किया और निकल गया टहलने ।

आज तक की लाइफ मे ये मेरा पहला अनुभव था सुबह टहलने जाने का

धीरे धीरे हम गली से मेन सड़क पर आये और फिर बस स्टैंड की तरफ जाने लगे ।

आहाहा मै मनोज को जितना धन्यवाद करता कम था । उसने तो मेरा दिन बना दिया था

भाई जिधर नजर जाती हर उम्र की रसिली गदरायी माल टहलती दौड़ती नजर आ रही थी ।

"अरे वो देख क्या मस्त उसके चुचे उपर नीचे हो रहे है "

"ओह्ह्ह मा इसकी गाड़ कितनी फैली हुई है लोवर मे"

" आहाआ और झुकाओ ना और थोडा सा बाहर निकाल गाड़ "

"हा हा हा ये बुढऊ भी उसकी गाड़ घुर रहे है "

मै बस मन ही मन बड़बडाते हुए हसिन नजारो के दिदार कर रहा था ।

टाउन मे इतनी हसिन गोरी और गदरायी माल भी होगी ये मै कभी ध्यान ही नही दिया ।

मै तो बस आपने परिवार और दोस्तो मे ही खोया हुआ था ।

तभी हमारे सामने से एक 42 साइज़ के चुचे वाली हल्की गति मे जोग्गिंग करती हुई निकली और लोवर मे उसकी 44 की फैली हुई गाड़ देख मै थूक गटकने लगा और मनोज के सामने ही पीछे मुड कर उसकी मटकती और लोवर मे झोल देती गाड़ के हिलते मोटे मोटे पाटो को देखने लगा

मनोज मुस्कुरा कर - भैया चलो ये सब रोज का है

मै उसकी तरफ भौच्का खाये - हा हा चल भाई

मनोज - लग रहा है आप पहली बार आये हैं सुबह मे

मै - हा भाई पहली बार ही है , मुझे नही पता था न कि अपने चमनपूरा की सुबह इतनी अच्छी होती है , अब तो रोज आना ही है

मनोज हस्ते हुए - वैसे वो सरोजा जी थी , संजीव ठाकुर की छोटी बहन

मनोज के मुह से संजीव ठाकुर के बारे मे सुन कर ना जाने क्यू मेरा मन खुशी से झुम गया ।

मै - इनकी शादी नही हुई है क्या

मनोज - अरे आपको नही पता , इनका तालाक हो गया है और अब तो 2 साल होने को है

मै - लेकिन किस बात पर तालाक हुआ था , इतनी सुन्दर और अच्छी औरत को इस उम्र मे क्यू छोड दिया

मनोज - भाई सरोजा जी की उम्र ज्यादा नही है अभी 35 साल की है और 30 साल की उम्र मे सादी हुई थी । आप तो जानते ही हो की ठाकुर लोग अपनी शादिया कितनी लेट करते है ।

मै गंभीर भाव लाकर - ओह्ह ये बात , लेकिन छोड़ा क्यू

मनोज - बस सुनी सुनाई खबर है भैया की सरोजा जी का पति बिजनेसमैन है तो उसको सरोजा जी के साथ पार्टी मे आने जाने मे शर्म महसूस होती थी और वो उनके बदन को लेके बहुत ताने मारता था और शादी के वक़्त भी वो मोटी थी । फिर अभी इन्होने खुद उसे तालाक दे दिया और एक साल मे अपनी बॉडी फिट कर ली ।

मै मनोज की बाते बडे ध्यान से सुन रहा था ।

फिर हम लोग वापस घर की तरफ चल दिये ।

रास्ते मे मनोज ने मुझे सरोजा ठाकुर के बारे मे बहुत सी बाते बताई और फिर ये भी पता चला कि टाउन मे जो नया शॉपिंग माल खुला है वो सन्जीव ठाकुर ने ही अपनी छोटी बहन के नाम से सरोजा कॉमप्लेक्स खुलवाया है ।

फिर हम वापस घर आये तो देखा कि

विमला भी नहा चुकी थी और साडी पहने हुए पूजा कर रही थी ।

मै मनोज को बोल कर पीछे आगन मे फ्रेश होने और नहाने के लिए चला गया ।

नहाने के बाद मैने नास्ता किया और कोमल से उसका हाल चाल पुछा तो वो मुस्कुरा कर मुझे इशारे मे ठीक होने का बोला ।

फिर 9 बजे तक मै विमला को बोल कर निकल गया नये घर का काम देखने के लिए तो वहा पापा भी मौजुद थे ।

फिर मै पापा से मिला तो पापा ने बताया कि सब काम खतम हो गया है बस दो तीन दिन मे साफ सफाई करवा के घर रहने लायक हो जायेगा ।

उसी शाम को हमे जानकारी मिली कि वकिल अंकल ने सारे नये कागजत तैयार करवा लिये है और कल 11 बजे विमला को आना पडेगा हस्ताक्षर के लिये जिससे सारी संपति उसके नाम हो जाये ।

मै शाम को कोचिंग के बाद सीधा विमला के घर उसको ये खुशखबरी देने चल गया ।

घर एक दम सुनसान पडा हुआ था और कही कोई नजर नही आ रहा था ।

शाम के 6 ही बज रहे थे ।

मुझे अजीब लगा कि सब कहा गये ।

मेरे सांसो की आहट और चप्पल की खसखस भी हाल मे गूंज रही थी ।
 
धीरे धीरे चप्पल निकाल कर हाल मे घुसा सब दरवाजे सनासन बंद दे , एक अजीब सी घबराहट मह्सूस हो रही थी ।

मै धीरे धीरे छत पर गया और वहा भी सब कूछ खाली मिला तो मै झट से मोबाइल निकाल कर विमला के पास फोन किया

रिंग जा रही थी लेकिन विमला फोन नही उठा रही थी , मेरी घबडाहट हर बजते रिंग के साथ बढ़ रही थी और मै पसीना पसीना हुए जा रहा था , एक अन्जाना सा डर मेरे माथे पर चढ़ने लगा था और मुझे ठंडी हवा की जरुरत मह्सूस होने लगी तो मै छत पर टहलने लगा और दुबारा से विमला के पास फोन किया इस बार उसने फोन उठाया

मै हड़ब्ड़ी मे विमला से - मौसी मै आपके घर पर हू आप कहा हो कोई दिख नही रहा है , घर पूरा खाली पडा है

विमला - बस बेटा यही पडौस मे आई हू तू बैठ मै 2 मिंट मे आ रही थी

फिर फोन कट गया ।

मै छत से नीचे हाल मे उतर रहा था कि विमला आ गयी

मै - अरे मौसी कहा गयी थी घर खुला छोड कर मै परेशान हो गया था कि कही कोई दिक्कत तो नही हुआ ना , कही वो आपका देवर या देवरानी की वजह स कोई बखेडा तो नही न खड़ा हो गया

विमला थोडा सोची और बोली - अरे बेटा नही ऐसा कोई बात नही है , तू बता घर से आया है सब ठीक है वहा

मै मुस्कुरा कर - हा मौसी सब ठीक है , बस आपको एक खुशखबरी देनी थी

विमला चहक कर - हा बता ना बेटा , जबसे तू मेरी जिन्दगी मे आया है मेरी दुनिया मे खुशिया ही खुशिया है

मै विमला का हाथ पकड़ के सोफे पर बिथाते हुए - मौसी कल सारे कागज आपके नाम पर होने वाले है इसलिये कल 11बजे तक आपको डिस्ट्रिक्ट कोर्ट पहुचना है

विमला खुशी से - सच कह रहा है बेटा ,,लेकिन डिस्ट्रिक्ट कोर्ट तो बहुत दुर है और 11 बजे तक कैसे पहुँच पाऊंगी मै

मै विम्ला के गले मे हाथ डाल कर उसके पास बैठते हुए मानो यारी दोस्ती हो अपनी - ओ मेरी प्यारी मौसी , उस्का इन्तेजाम पापा ने कर दिया है कल मै आप साथ मे दुकान जायेगे वही से एक गाड़ी बुक की गयी है ।

विमला मे मेरे तरफ देखते हुए मुस्कुरा देती है और मेरे गालो को चूम लेती है

मै - कल सारा काम हो जाने दो फिर मै सिर्फ पप्पी से काम नही चलेगा

विमला मुस्कुरा कर - फिर क्या चाहिये तुझे

मै उसकी कमर मे हाथ डाल कर उसके होठो को चुस्ते हुए बोला - समय आने दो डार्लिंग सब पता चल जायेगा

विमला मुझसे अलग होकर हस्ते हुए - अच्छा मौसी से अब डार्लिंग हिहिही

मै - क्यू पसंद नही आया

विमला - तू मुझे कुछ भी बुला सकता है बेटा मुझे तेरी सारी नटखट हरकतें अच्छी लगती है हिहिहिही

ये बोल कर विमला किचन की तरफ अपने चुतडो को मटकाते हुए जाने लगी

मै शरारती अंदाज मे - ओ छम्मक्छल्लो रानी कहा चली ये मटके हिलाते हुए

विमला मेरी बाते सुन कर शर्मा कर झेप गयी - धत्त बदमाश , शर्म कर क्या क्या बना रहा है मुझे तू

मै उठ कर विम्ला के पीछे किचन मे घुस गया - अपनी जानेमन को मै किसी भी नाम से बुला सकता हू आप तो बोली

विमला फिर से मेरी बातो से बेजुबान हो गयी और हस कर - ठीक है जो तेरी मर्जी है बोल कर तू , उससे पहले ये पानी पी

विमला गुलाबजामुन की कटोरी मेरे आगे करते हुए बोली

मै उसमे से एक गुलाब जामुन को रस से भर उठाया और बोला - पहले मेरी डार्लिंग खायेगी फिर मै

विमला ना ना करते हुए अपनी गरदन पीछे करती ही लेकिन मै गुलाब जामुन हाथ मे लिये उसके मुह तक ले जाता हू और उसके मुह मे जाने से पहले रस की कुछ बुन्दे विमला के चुचियो के उभार पर टपक जाती है लेकिन तब तक मै गुलाब जामुन उसके मुह मे भर देता हू

वो भरे मुह से मुझे डाटती हुई बार बार अपने सीने पर टपके रस की बूंदो को दिखाती है

मै उसको शांत होने का इशारा कर झुक कर उसके चुचियो के उपर झलकते रस की बूंदो को चाट लेता हु जिससे विमला सिहर जाती है ।

मै वापस खड़ा होकर चटकारे लेते हुए - अह्ह्ह्ह मौसी बहुत मीठा रस है आपका

विमला मेरी डबल मिनिंग की बात बखूबी समझ कर मुस्कुरा रही थी

मै इतरा कर - अब मुझे भी खिलाओ ना जानू

विमला मेरे नटखट हरकतो मे शामिल होकर मुसकराते हुए - पहले मुह तो खोलो मेरे राजा

मै विमला की कामुक भरी बात से थूक गटक कर मुह खोला और वो एक गुलाब जामुन मेरे मुह मे बहुत ही सेक्सी ढंग से डाली और फिर हसने लगी ।

मै उसको कुछ बोल पाता तभी हाल मे कोमल आ जाती है और हम दोनो नोर्मल व्यवहार करने लग जाते है

फिर रात मे खाना खाने के बाद मै विमला और मनोज तीनो साथ मे छत पर टहलने जाते है और मै बगल मे महेश का घर देख उसको बेवकूफ बनाये जाने और उसके किये की सजा उसको मिलने पर बाते कर रहा था और मनोज मेरी बातो मे सहमती दिखा रहा था लेकिन विमला चुप थी ।

मुझसे विमला की चुप्पी देखी नही गयी तो मै उससे पुछा की क्या हुआ तो वो अपने आशू पोछते हुए कुछ नही मे सर हिला दी

मै समझ गया कि किसी बात को लेके विमला परेशान है तो मैने मनोज को नीचे जाने को बोला और वो भी बात की गंभीरता को समझ कर नीचे चला गया ।

मै विमला के पास गया और बोला - क्या हुआ मौसी आप खुश नही है

विमला - नही बेटा मै खुश हू लेकिन

मै विमला के कन्धे पे हाथ रखते हुए - क्या बात है मौसी मुझे नही बताओगी

विमला मेरे तरफ घूम के - बेटा बताना तो मै भी चाहती हू लेकिन पता नही वो जान कर तू क्या समझेगा

मै मुस्कुर कर - अरे मेरी भोली मौसी , जो कोई भी बात रहेगी ये तो पक्का है मै अपनी डार्लिंग से नाराज तो नही होने वाला हिहिहिही

विमला हसते हुए - पक्का ना

मै - हमम बताओ अब क्या बात है

विमला - बेटा दरअसल मै सोच रही थी कि महेश को उसकी गलती की सजा मिल चुकी है और उसे अपनी गलती का एहसास भी है । अब तो मेरे कागज भी मिल गये है और मुझे नही लगता कि आगे फिर कभी वो ऐसी हरकते करेगा तो

मै सीरियस होते - हा तो आगे बोलो ना मौसी

विमला - मै सोच रही थी बेटा कि क्यू ना उसे माफ कर दू आखिर है तो हमारे घर का ही आदमी

मै बीच मे कुछ बोलता उससे पहले विमला ने मुझे टोका - मेरी पहले बात पूरी सुन ले फिर कुछ बोलना

मै - ठीक है बोलो मौसी आप

विमला - देख बेटा उसने जो कुछ भी मेरे साथ किया उसको उस बात के लिए पछतावा भी है और परसो रात से महेश की तबियत बहुत खराब है चिन्ता की वजह से। आज उसे पानी चढा है सुबह मे, उसे कुछ हुआ तो फिर उस्का भी परिवार मेरे तरह बिखर जायेगा बेटा और शायद उसे मेरी तरह कोई तेरे जैसा फरिश्ता भी ना मिले

मै - आपको क्या लगता है मौसी क्या वो भरोसे लायक है भी या ढोंग कर रहा है

विमला - नही बेटा सच मे उसकी तबियत ठीक नहीं है मै शाम को उसी से मिलने गयी थी जैसे ही मुझे जानकारी मिली

मै थोडा सोच कर - मेरे ख्याल से भी मौसी उसे एक मौका देना चाहिए सुधरने का , और वैसे भी अब वो चाह कर भी कुछ गलत नही कर पायेगा आगे ।

विमला खुश होते हुए - शुक्रिया बेटा , तुने तो मेरे मन का बोझ हल्का कर दिया , मै कल ही महेश के यहा जाकर उससे बात करती हू

मै ह्स्ते हुए - अरे मौसी कल कैसे

विमला - अरे हा कल तो बडे शहर जाना है ना , ठीक है मै शाम को वापस आकर बात कर लुंगी ।

मै थोडा शरारती अंदाज में विमला के गले मे हाथ डाल कर - तब मेरी जानेमन सोने चले

विमला एक कातिल अदा से - चलो ना मेरे राजा

मै हस्ते हुए - क्या फायदा राजा होने का जब रानी से दुर ही सोना पड़े

विमला - ऐसी बात है तो फिर आज ये रानी अपने राजा के साथ ही सोयेगी हिहिही

मै उसकी गाड़ को सहलाते हुए कहा- तो चले जानेमन

विमला ह्स्ते हुए - पागल चल चलते है

फिर हम लोग नीचे आ गये

जारी रहेगी

......................
 
मै और विमला साथ मे नीचे उतरे तब तक कोमल अपने रूम मे जा चुकी थी और मनोज विमला के कमरे मे जा चुका था

मै विमला से खुसफुसा कर - जानू कमरे मे तो मनोज होगा ना

विम्ला मुस्करा कर मेरे गालो को छुते हुए - उसे उसके कमरे मे भेज देती हू मेरे राजा हिहिहिही

फिर हम दोनो कमरे के पास गये तो दरवाजा बन्द था लेकिन खिडकी खुली थी और मेरी नजर खिडकी से अंदर गयी तो कमरे मे मनोज बेड पर टेक लगा कर सिर्फ अंडरवियर मे बैठा हुआ था और अंडरवियर के होल से अपना लण्ड बाहर निकाल कर सहला रहा था

इधर विमला दरवाजा खोलने को होती है कि मै लपक कर उसका हाथ पकड लेता हू और उसे अपने पास खिच कर खिडकी से कमरे मे मनोज की करतूत दिखा देता हू

विम्ला पहले गुस्सा करती है लेकिन मेरे वजह से शर्म से मुह झुका लेती है

मै - मौसी ये मनोज तो

विमला गुस्से मे - इसकी आदत से तो मै तंग आ चूकी हू

मै उस्क्क शांत करते हुए - पहले आप उसको उसके कमरे मे भेजिए फिर हम इस पर बाते करते है ।

फिर विमला ने दरवाजा खटखटाया और मनोज ने दरवाजा खोला तो

विमला गुस्से मे - तू जा अपने कमरे मे सो मुझे राज से कुछ जरुरी बाते करनी है औए कल बडे शहर जाना है

मनोज विमला को गुस्से मे देख सहम गया और बिना कोई सवाल जवाब के अपने कमरे मे चला गया

फिर मैने कमरे की खिडकी बन्द की और बिस्तर पर बैठ गया लेकिन विमला के चेहरे पर चिन्ता साफ दिख रही थी ।

मै उसे पकड कर बिस्तर पर बिठाते हुए - मौसी आप परेशान न हो समय के साथ वो समझदार हो जायेगा

विमला चिंता के भाव मे - ऐसा कुछ नही बेटा , तू जो समझ रहा है ये बात उससे कही ज्यादा बड़ी है

मै - क्या बात है मौसी खुल कर बताईये न

विमला झिझक कर - मै क्या बताऊ बेटा , एक मा के लिए ये सब सह पाना बहुत मुश्किल है कि

मै विमला को तसल्ली देते हुए - मौसी आप मुझ पर भरोसा कर सकती है ये बात बस इस कमरे मे रहेगी और हो सकता हो मेरे पास आपकी इस सम्स्या का हल भी हो

विमला - मुझे तुझ पर भरोसा है बेटा लेकिन मै किस मुह से तुझे बताऊ कि मेरा बेटा मेरे मोह मे पड़ गया है और मुझसे संबंध बनाना चाहता है

मै तो इस बात को पहले से ही जानता था लेकिन फिर भी एक बनावटी आश्चर्य भाव लाकर - ये क्या कह रही हो मौसी , मनोज आपके साथ ...

विमला परेशान होकर - पता नही उसे मुझमे क्या दिखता है जो वो ऐसे पेश आ रहा है, तू ही बता मै कौन सा कही की अप्सरा हू जो वो मेरे पीछे पागल हुए जा रहा है

मै - देखिये मौसी मनोज वाली सम्स्या तो हल हो जायेगी लेकिन

विमला चेहरे पर खुशी के भाव लाकर - लेकिन क्या बेटा

मै एक कातिल मुस्कान के साथ- लेकिन मनोज का आपके लिए दीवाना होना जायज है, मै तो सोचता हू कि काश मै आपका बेटा होता तो रोज इस संगमरमरी हुस्न का दिदार कर पाता

विमला मेरे बातो से शर्म से पानी पानी होने लगी और मुस्कराते हुए बोली - अब तू भी शुरू हो गया

मै - अब मेरी जानू है इतनी हसिन तो तारिफ क्यू ना करू हिहिहिहिही

विमला शर्मा कर - बस भी कर भई

मै - ह्य्य्य देखो कैसे शर्म से गुलाबी हुए जा रही है मेरी गुलाबो

विमला के गाल खीचते हुए बोला

विमला मेरे हाथ झटक कर खड़ी हुई और साडी निकालने लगी

मै - लग रहा है आज अपने राजा को खुश करने मे मूड मे मेरी रानी

विमला - बस भी बेटा कितना परेशान करेगा अब

मै - परेशान मै नही आप करने वाले हो

विमला अचरज से - अच्छा वो कैसे

मै - आप कपड़े निकाल रहे हो तो मै परेशान होउँगा ना

विमला हाथ मे उधेड़ी साड़ी लेके मेरी बातो से बेजुबान होकर हस्ते हुए बैठ गयी ।

मै ह्स्ते हुए - क्या हुआ बोलो ना

विम्ला हसते हुए वापस खड़ी हुई और साडी निकाल कर फ़ोल्ड करने लगी - पागल मै साडी निकाल कर ही ऐसे सोती हू और तू ....

मै ह्स्ते हुए - मै क्या आगे तो बोलो

विमला साडी किनारे रख कर घोड़ी बन कर बिस्तर पर चढ़ने लगी और उसी भरी हुई 42 की गाड़ और फैल कर मेरे सामने आ गई

बिस्तर पर चढ़ कर वो टेक लेते हुए पैर फैला कर बैठ गयी

विमला - अब वो लाईट बंद कर और आजा सो जा

मै एक नजर विमला के कसे चुचे ब्लाउज मे देखा और बोला - मौसी कोई तौलिया है क्या

विमला - क्या करेगा अब

मै हस्ते हुए - वो मुझे भी अंडर के कपडे मे सोने की आदत है ना

विमला मुझे छेड़ते हुए - हय्य देखो यहा तो राजा खुद अपनी रानी के सामने शर्मा रहा है

मै ह्स्ते हुए लोवर निकालने लगा - वो बात नही है मेरी रानी

विमला - फिर क्या बात है

विमला की जवानी और उसके साथ चटपटि बातो से मेरा लण्ड टनटना गया था और अंडरवियर मे उभार दिखने लगा था मैने अपना टीशर्ट भी निकाल कर सिर्फ अंडरवियर मे आगया और बिस्तर पर चढ़ गया ।

विमला मुझे ऐसे देख कर सच मे झेप सी गयी लेकिन फिर भी मुझे निहारते हुए बोली - अरे ब्ताओगे क्या बात है

मै विमला के गोद मे सर रखते हुए - बात ये है कि कही रात मे इधर उधर हाथ गया मेरी रानी का तो वो डर ना जाये

विमला ह्स्ते हुए मेरे गालो को खीच कर बोली - बहुत बदमाश हो गया है तू , वैसे डरने लायक है भी कुछ या बस फेक रहा है

मै विमला के चुची पर ऊँगली घुमाते हुए - आपके इन मोटे थनो की कसम जान, छुआ तो दुर देख भी लिया तो भी डर जाओगी हाह्हाह्हहा

विम्ला अपनी चुची पर रेग्ते मेरे हाथ पर चट्ट से मारते हुए - बहुत नटखट है रे तू हा

मै - अब अपनी रानी से शरारत ना करू तो किस्से करू

विमला मेरे बालो मे हाथ फेरते हुए - पगला कही का , काश तू सच मे मेरा बेटा होता

मै हसते हुए - अच्छा है नही हू ,, नही तो मनोज की तरह मुझे भी डाट देती

विमला मेरे बालो मे हाथ फेरते हूए - तू मनोज की तरह थोडी ना वो सब करता

मै ह्स्ते हुए - क्यू मेरे पास भी तो वही है जो मनोज के पास है हाहाहाहाह

विमला मेरे गाल खिचते हुए -

तो क्या तू भी वही सब करेगा हा बदमाश

मै थोडा म्ज़ा लेते हुए - ओह्ह गॉड, आपके रहते मुझे अपने हाथो से करना पड़ेगा , ये दिन आ गये मेरे हिहिहिहिही

विमला - तू ना बस कर अब उठ जा , मुझे सोने दे । मै तुझसे नही जीत सकती हूँ

मै हस कर विम्ला के बगल मे बैठ गया और बोला - लो देखो आपके हाथों का सुख जान कर ये भी जाग गया

मै विमला को अंडरवियर मे बने टेन्ट की तरफ इशारा करते हुए कहा

विमला की नजर मेरे अंडरवियर के खडे लण्ड पर गयी तो मेरे तरफ घूम कर शरारत भरी अंदाज मे मेरे लण्ड को निहारते हुए बोली - लग तो नही रहा है की खड़ा हुआ है

मै समझ गया विमला मूड मे है और अगर पहल हुई तो आज कुछ ना कुछ हाथ साफ हो ही जायेगा

मै - कहो तो बाहर निकाल दू वैसे भी अन्दर कैद मे फड़फ्ड़ाता बहुत है

विमला मेरे नंगे पेट को सहलाते हुए मादक होने लगी और हाथ को सरका कर मेरे अंडरबियर की इलास्तिक मे फसा कर नीचे करने लगी

मै कमर उठा कर झट से अंडरवियर को सरका दिया जिससे मेरा मोटा लण्ड फनफन कर खड़ा हो गया

विमला ने एक नजर मुझे देखा और बोली - सच मे ये तो अन्दर कैद में परेशान था

मै अपना अंडरवियर पैर से निकाल कर विमला की चुचियो पर इशारा करते हुए कहा - कैद मे तो आपने भी इनको रखा है

विमला की सांसे मेरे खडे लण्ड को देख कर उखड़ने लगी थी और वो टकटकी लगाये मेरे लण्ड को निहार रही थी उसे होश ही नही था कि मै अभी क्या बोल गया उसे ।

मै विमला की बेचैनी और बढाने के लिए एक हाथ से लण्ड को थामकर उसकी चमडी को खीच कर मोटे सुपाडे के नीचे लाया जिससे मेरे सुरुवाती रस की एक हल्की सी बूद मेरे सुपाडे से निकाली और मैने उसे अंगूठे से सुपाडे पर मल दिया

ये देख कर विमला की सासे और तेज हो गयी और उसकी जीभ उसके सुखे फड़डके होठो पर घूमने लगी

मै विमला की आंखो मे देखकर - आपने मेरी बात का जवाब नही दिया मौसी

विमला मानो किसी गहरे सपने से जगी हो - हह क क कुछ कहा तूमने बेटा

मै ह्स्ते हुए - मै ये कह रहा था कि आपने इन्हे क्यू कैद कर रखा है,,, विमला के चुचे को छुते हुए बोला

विम्ला मेरे स्पर्श से सिहरते हुए - सीईईईई उम्म्ंम्ं वो बेटा बात ये है ना कि अगर इन्हे आजाद कर दू तो ये मुझे बहुत परेशान करते है

मै विमला की तरफ घूम कर उत्सुकता भरे लहजे मे - वो कैसे

विमला शर्म से मुझसे आंखे चुराते हुए - वो बेटा मै कैसे बताऊ अब तुझे

मै शरारती अंदाज मे विमला के ब्लाउज के बटन पर हाथ ले जाकर एक एक बटन चटका कर खोल्ते हुए - रुकिये फिर मै ही देख ले रहा हू कि आखिर कैसे परेशान करते हैं ये

आखिरी के दो बटन पर जाते जाते विमला ने मेरे हाथ को रोक लिया और बोली - नही बेटा , मुझे शर्म आ रही है

मै दुसरे हाथ से विमला के हाथों को अपने हाथ से हटाया जिसका विरोध विमला ने तनिक भर नही किया और आराम से अपने हाथ वापस कर लिये और मदहोशि मे बेड से सर टिका कर मुझे अपना ब्लाउज खोलते देखने लगी ।

मैने बाकी के दोनो बटन खो कर ब्लाउज के दोनो हिस्सो को अलग थलग किया और एक गुलाबी ब्रा मे कैद विमला की चुचिया सास लेती उपर नीचे होती दिखने लगी ।

ब्लाउज खुलने के बाद विमला और ढीली पड़ गयी और मै एक एक करके ब्लाउज को उसके कन्धे से उतारने लगा

विमला मेरे इस कृत्य मे साथ दे रही थी और जैसे जैसे मेरे हाथ उसके मुलायम कंधो से ब्लाउज के साइड को हटाते वो सिहरती जाती
 
आखिरकार उसने अपने गरदन को बेड के पाटी से टिकाते हुए सीने को उचका कर बाजुओ को ढिला छोड दिया और उसका बलाऊज उसकी कमर के पास गिर गया ।

मै वापस से विमला के गोरे और दूधिया संगमरमरी कंधो से अपनी उंगलियो को सहलाते हुए उसके ब्रा के कप के किनारे किनारे फिराने लगा ।

विमला अपने मुलायम मोटे चुचो की पतली चमडी पर मेरे उंगलियों की थिरकन से बेचैन होने लगी थी ।

मै नशीले अंदाज मे - क्या हुआ मौसी

विमला हफते हुए - कुछ नही बेटा ,

मै हस्ते हुए - अब आप इनको खुद खोलोगे या मै हाथ डाल कर निकालू

विमला थोडा खुद को सामान्य करते हुए अपनी पीठ बेड के पाती से लगाकर बोली - नही मै कर लुंगी

फिर विमला वापस से अपने चुचे उठा कर अपने हाथ पीछे ले गयी और ब्रा का हुक खोल दिया जिससे उसके भारी चुचे ब्रा की कप छोड कर झूल गये और ब्रा विमला के सीने पर ढीली हो गयी ।

मै अपने एक हाथ को आगे कर ऊँगली से विमला के ब्रा को पकड कर सामने की तरफ खीचा तो विमला ने अपने दोनो हाथ सीधे कर ब्रा निकालने मे मदद की और वापस बेड के पाटी से गरदन लगाकर तेज सासे लेने लगी।

ब्रा हटते ही विमला के मुलायम गोरे चुचे पर गहरे भूरे रंग की घुंडीया मुझे ललचाने लगी ।

मै विमला के चुचो को निहारते हुए - ये तो एकदम शांत है मौसी , आप तो कह रही थी कि ये परेशान करेंगे

विमला तिरछी नजरो से मुझे देख कर बोली - धत्त बदमाश वो ऐसे थोडी ना होता है

मै - फिर कैसे अब तो बता दो अब तो ये आजाद भी है

विमला मुस्कुराई और विस्तर पर चुतडो को खसकाते हुए लेटने लगी और चुतड खस्काते समय उसकी चुचिया उछल जाती थी

फिर विमला लेट गयी और मेरे तरफ करवट लेली जिससे उस्की चुचिया बेड पर फैल गयी

विमला मुझे अपने बेड पर फैले चुचे दिखाते हुए बोली - देखा ये कैसे फैल गये , ऐसे पूरी रात कभी इधर तो कभी उधर होते रहते है

मै विम्ला के बराबर मे उसकी तरफ करवट लेके लेटते हुए उसकी उपर की चुची को दोनो हाथो से थामा जिससे विमला कापने लगी

मै - ये तो भारी है मौसी , कैसे ढो लेते हो आप दिनभर

विमला हस्ते हुए - धत्त बदमाश ये और भी बडे हो जाये तो भी औरतो को फर्क नही पडेगा

मै हैरान होने के भाव से - इससे भी बडे होते है क्या मौसी

विमला ह्स्ते हुए मेरे गाल खिंच कर - क्यू तेरे रज्जो मौसी का नही देखा

मै ना मे सर हिला कर - नही मौसी

और अपने अंगूठे से विम्ला के निप्प्ल को रगड़ दिया

विम्ला सिस्क कर - अह्ह्ह क्या कर रहा है बदमाश

मै मुस्कुरा कर - कुछ नही ब्स सोच रहा हू

विमला - क्या बोल ना

मै विमला के चुचे पर हाथो को गोल गोल घुमाते हुए - काश सच मे मै आपका बेटा होता तो इन्हे चुसा होता ना , कितने नरम और रसिले है ये

विमला मेरे चेहरे को दुलार कर नशे में बोली - सीईई अह्ह्ह तो बन जा ना मेरा बेटा और चुस के इन्हे

मै विमला के निप्प्ल की टिप पर नाखून से कुरेदकर - क्या मै आपका मनोज बन कर चुसू इसको

विमला मदहोश होकर सिस्कते हुए - आह्ह्ह्ह हा बेटा बन जा ना

मै वापस विमला के दुसरे चुची को थाम कर - मै आपको मा बुलाऊ मौसी

विमला नशे मे आंखे बंद कर मेरे बालो मे हाथ फेरते हुए - हा मै तेरी मा हू बेटा चुस ले अब अह्ह्ह्ह्ह

मै एक नजर विमला को मदहोश होता देख बोला - देखो ना मा आपका मनोज फिर से आपके दूध पी रहा है

ये बोल कर मैने विमला का एक निप्प्ल अपने मुह मे भर कर चुसने लगा

विमला एक नये रोमांच गनगना गयी और मेरे सर को अपनी चुचियो मे दबाते हुए बोली - अह्ह्ह मेरा बच्चा मनोज , चुस ले अपनी मा के दूध अह्ह्ह बेटा उफ्फ्फ

मै दोनो हाथो से चुचियो को थाम के भर भर कर चुस्ता रहा और धीरे धीरे अपना हाथ विमला के गाड़ पर के जाकर एक मटके को सहलाना शुरू कर दिया

वही विमला अपने बेटे के नाम पर उत्तेजित हुए जा रही थी

मै उनकी मोटी जांघो को थाम कर अपने तरफ खिच कर अपना लण्ड विमला की चुत से सटा दिया जिससे विमला मुझे अपने और करीब करते हुए बोली - अह्ह्ह बेटा क्या कर है ये तू अपनी मा के साथ

मै विमला के रसिले चुचे से मुह हटा कर बोला - वही कर रहा हू मै जिसका मै रोज सपना देखता हू मा

विमला मेरे कमर से नीचे हाथ फेरते मुझे अपनी तरफ खिच कर अपनी चुत पर मेरे लण्ड को सटाते हुए बोली - उफ्फ़फ्फ क्या देखता है बेटा तू

मै विमला की पेटिकोट के अन्दर हाथ डाल कर उसकी मुलायम जांघो को सहलाते हुए उसकी गरदन पर किस्स करते हुए - मै सपने आपको भोगते हुए देखता हू मा

विमला मेरे इस व्यंग से और ज्यादा सिहर गयी और उसने मुझे अपने उपर कर अपने सीने से मुझे चिपकाते हुए मेरे बालो से लेकर कमर तक मदहोशि मे हाथ फेरने लगी

मै अब विमला के उपर आ गया था और उसका पेटिकोट जांघो तक पहुंच गया था ।

वही मेरा लण्ड तन कर विमला की चुत की दिवारो पे पेटिकोट के उपर से टकरा रहा था ।

मै विमला के कान मे - मा सुनो ना

विमला मदहोशि मे मुझे अपने गर्म बदन पर और कसते हुए - हा बेटा बोलना

मै - मै आपको चोदना चाहता हू मा

विमला सिस्क्ते हुए अपनी कमर उचकाने लगी और बोली - उम्म्ंम्ं क्या सच मे तू ऐसा सोचता है मेरे बारे मे

मै विमला के चुचे मस्ल्ते हुए और लण्ड को पेटिकोट के उपर रगड़ते हुए - हा मा , मुझे आप बहुत सेक्सी लगती हो

विमला मदहोशि मेरे कान काटते हुए अपनी कमर उचका कर बोली - तो क्या सच मे मेरा मनोज मुझे चोदेगा

मै विमला के दोनो चुचियो को मसलते हुए - हा मा , मै आपको चोदना चाह्ता हू आपकी चुत मे अपना लण्ड डालना चाहता हू

विमला अपनी कमर उचका कर मेरे लण्ड को चुत पर महसूस करते हुए - अह्ह्ह चोद ले बेटा अपनी मा को अह्ह्ह

मै अब ज्यादा देरी नही करना चाहता था क्योकि अगर एक बार विमला झड़ जाती तो उसकी चेतना लौट आती और फिर मेरा प्लान बेकार हो जाता

मै देर ना करते हुए विमला के पेटिकोट को कमर तक चढाया और अन्दर नंगी चुत पर लण्ड को रगड़ने लगा

मै विम्ला की दोनो जांघो को खोल कर उसको सह्लाते हुए लण्ड विमला की चुत पर रगड़ने लगा

विमला सिस्कती रही और अपनी कमर उचकाती रही

मै अपने लण्ड को विमला के चुत पर सुपाडे को लगाते हुए बोला - देखो ना मा आपका मनोज आपको चोदने जा रहा है

विमला गर्दन उपर कर अपने फैले पेटिकोट को समेटते हुए एक नजर चुत मे टिके सुरक लाल मोटे सुपाडे को देखी और वापस बिस्तर पर लेटते हुए बोली - हा बेटा चोद दे अपनी मा की आह्ह

मै अपना सुपादा विमला के चुत के होठो पर लगाया और सररर से उसकी पानी से लबालब चुत मे उतार दिया और उसके उपर चढ़ गया

एक दो धक्के लगाने के बाद मै विम्ला के उपर लेट गया और उसके नुकीले कडक निप्प्ल वाप्स से मेरे सिने मे चुबने लगे।

मै हलके धक्कों के साथ विमला की चुत की गहराई मे लण्ड को उतारते हुए उसके कान मे बोला - कैसा लग रहा है मा आपको अपने बेटे का मुसल

विमला मेरे संवाद से सिहर कर मेरे लण्ड को निचोड़ते हुए बोली- बहुत ही अच्छा लग रहा है बेटा , अह्ह्ह्ह चोद ले अपनी मा को अब तुझे कभी भी मुठियाने नही दूँगी , रोज तुझे अपनी चुत दूँगी मेरे लाल

मै विमला की बातो से उत्तेजित होकर - अह्ह्ह मा मै भी आपको रोज चोदूँगा

विमला - हा बेटा और फाड अपनी मा की चुत को अह्ह्ह अह्ह्ह ऐसे ही बेटा अह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं उफ्फ़फ्फ बहुत दिन बादद मिला है इतना मस्त लण्ड और चोद बेटा अह्ह्ह मै झड़ रही हू मनोज अह्ह्ह बेटा अह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह ह्य्य्य माआअह्ह्ह और तेजज्ज्ज्ज अह्ह्ह्ह

मै विमला की उत्तेजना से बहुत जोश मे आ गया और लम्बे लम्बे जोरदार शॉट लगाने लगा वही विमला मेरे लण्ड को निचोड़ना शुरू कर दी और झडने लगी और मै भी अगले कुछ ही धक्को मे झडने को होने लगा

मै - अह्ह्ह्ह मा अह्ह्ह मै झड़ने वाला हू

विमला - अपनी मा के मुह मे झड़ना बेटे , मुझे तेरा रस चखना है जल्दी आ और झड़ जा अह्ह्ह

मै झट से विमला के भोस्दे से अपना मुसल निकाला और उसके मुह के बगल मे बैठ कर लण्ड को मुठियाने लगा

मै - अह्ह्ह अह्ह्ह मा आह्ह लो मेरा पानी अह्ह्ह अह

विमला मेरे आड़ो को सह्लाते हुए - हा बेटा भर दे मेरे मुह मे अह्ह्ह आह्ह उफ्फ्फ आह्ह

मै विम्ला के मुह पर झड़ते हुए - अह्ह्ह्ह येईईईई अह्ह्ह आह्ह्ह लो मा और लो अह्ह्ह अह्ह्ह चुस लो हा ऐसे ही आह्ह अह्ह्ह निचोड लो अपने मनोज का लण्ड आह्ह्ह मा

विमला मेरे लण्ड को निचोड कर बेजान बना कर छोड दिया और सीधा लेट कर हाफने लगी

मै भी उसकी बगल में लेट गया और सांसे बराबर करने लगा ।

जब हमारी सांसे बराबर हुई तो मेरी नजर विमला से मिली तो वो हसने लगी जिस्से मेरी भी हसी छूट गयी

मै ह्स्ते हुए - मा आपको मज़ा आया है ना

विमला - धत्त बदमाश कही का , मै जान गई हू तू एक नम्बर का खिलाडी है इनसब मे

मै ह्स्ते हुए विमला के चुचे दबाते हुए - खिलाडी तो आप भी हो मौसी , इत्ना तेजी से मेरा लण्ड निचोड लिया था

विमला शर्मा के - अब बस कर सब कुछ तो कर लिया और बोल भी लिया

मै विमला को अपनी तरफ खिच कर - और मनोज वाली प्रोब्लम भी दुर कर दी है ना

विमला शर्मा कर - हम्म्म्म लेकिन उसके सामने मै नही कर पाऊंगी राज

मै - मै जानता हू मौसी आप बहुत गर्म औरत हो और आप अपनी जरुरत जानती ही हो कि ये गर्मी आपसे क्या कया करवा सकती है , उदाहरन के लिए महेश को ही लेलो उसने कैसे आपको जिस्म के जाल मे फ्सा लिया था

विमला - हमम सही कह रहे हो बेटा तुम

मै - देखो मौसी मै यही कहूंगा की मनोज आपको वो खुशी देना चाहता है जो आप चाहती है और आपकी जरुरत घर मे पूरी हो जायेगी तो कल को कोई खतरा भी नही होगा

विम्ला मेरे गाल खिचते हुए - वैसे बड़ी दुर की सोचता है रे तू हा

मै ह्स्ते हुए विमला को लण्ड की तरफ दिखा कर - मै कहा ये सोचता है हिहिहिही

विमला - बदमाश कही का चल सो जा

मै अचरज भाव से - सो जाऊ ???

विमला - तब !!

मै हस कर - अभी तक सिर्फ बेटे का जलवा देखा है थोडा मेरा जलवा भी देख लो ना मेरी जान

विमला एक कातिल मुस्कान से - तो शुरू करो ना मेरे राजा अह्ह्ह

फिर एक बार मेरे और विम्ला मे जोरदार चुदाई हुई और हम वैसे ही चिपक कर नंगे सो गये

देखते है आने वाली सुबह राज के लिए क्या नये रंग दिखाने वाली है ।

दोस्तो आज का अपडेट कैसा लगा पढ कर जरुर बताये

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