S
StoryPublisher
Guest
अगली सुबह विमला ने मुझे उठाया और कपडे पहनने को बोले । अभी सुबह के 5:30 बजे थे
तो मै उठा और कपडे पहन कर बाहर आया तो कोमल अपने कमरे से बाहर निकल रही थी और वो बाथरूम की तरफ जा रही थी
मै - गुड मोरनिंग कोमल
कोमल बडे बेतुके ढंग से - हा गुड मॉर्निंग हुउह्ह
मुझे बहुत अजीब लगा कि इसे क्या हुआ कही रात मे मै विमला के साथ सोया था उसका गुस्सा तो नही है ना
मै मुस्कुरा कर कोमल के पीछे चल दिया और पीछे आगन मे जाकर उसको पकड लिया और वो मेरे बाहो ने छटपटाने लगी
मै उसके चेहरे को पकड कर एक जोर का लिप किस्स किया और बोला - ये सुबह सुबह किस बात के नखरे भई
कोमल इतरा कर मुह फेरते हुए - कल क्यू नही आये मेरे पास , और कमरे मे भी नही थे , वो तो मैने ध्यान दिया कि मनोज है नही तो गडबड हो जाती
मै मुस्कुरा कर - क्या गडबड़ हो जाती
कोमल शर्मा कर - वो मै रात के 11 ब्जे तक गयी थी तो मुझे लगा तुम सो गये हो तो तुम्हे जगाने के लिए सोचा लेकिन तभी मुझे मनोज का चेहरा दिख गया और मै बाल बाल बच गयी
मै उसे छेड़ने के अंदाज मे - मनोज का चेहरा ही बस देखा या और भी कुछ
कोमल शर्मा कर - तूम वो बताओ जो मैने पूछा है , बाकी सब छोडो
मै ह्स्ते हुए - सॉरी कोमल वो आज मौसी को कोर्ट लेके जाना है ना सारे काम खतम होने को है इसिलिए वही उनसे बाते करते हुए वही सो गया
कोमल - ठीक है कोई बात नही, लेकिन आज रात मत दुर रहना मुझ्से। ठीक है
मै कोमल के गालो को चूम कर - ठीक है मेरी गुलाबो हिहिही
फिर मै कोमल को छोड कर वापस मनोज को जगाने आ गया
दरवाजा पहले ही खुला हुआ था और मनोज अपने लण्ड के उभार पर हाथ रखे सो रहा था ।
फिर मैने उसे जगाया और हम दोनों कल की तरह आज भी निकल गए टहलने लेकिन आज हम 6 बजे पहले ही निकले थे तो आज कल से ज्यादा औरते दिखी और सबसे नयी शादीशुदा औरते दिखी जो साडीयो मे थी ।
मुझे इनसब से अलग सरोजा ठाकुर का इन्तजार था ।
और तभी मुझे एक परफ्युम की खुशबू आई और मेरे पीछे से सरोजा जी जोगिंग करती हूई, मेरे बगल से आगे निकली
आज तो वो कल से ज्यादा खुबसूरत दिख रही थी और मै तो उनकी उभरी जवानी को आन्खो से ओझल नही होने देना चाहता था और उनके पीछे पीछे उनके मोटे मोटे झोल मारते चुतड के पाटो को देखते हुए जोग्गिंग सुरु कर दिया और मनोज भी मेरा साथ देने आ गया
मनोज मेरी मनोभावनाये और सरोजा के प्रति दीवानगी को बखूबी समझ रहा था
मनोज - भैया क्या बात है आज दौड़ रहे हैं
मै - हा अब सोच रहा हूँ कि जब आया तो थोडी बहुत कसरत दौड़ कर ही ले क्यू
आगे जाकर सरोजा जी एक जगह रुकी और अपनी सांसे थोडी बराबर की और वापस घूमने लगी और हमारी तरफ आने लगी तो उनकी नजर मुझ पर गयी और वही मै आंखे फाडे उन्के उछलते चुचे निहार रहा था ,, फिर जब उनसे नजर मिली तो वो एक मुस्कान देके सीधा चल दी ।
सरोजा की मुस्कान पाते ही मै जहा तक गया था वही से वापस सरोजा के पीछे घूम गया ।
मनोज मुझे सरोजा की तरफ जाते हुए देख कर मुस्कराया और मेरे साथ चल दिया ।
मै वापस से सरोजा के भारी चुतडो को निहारते जाने लगा और फिर एक समय आया कि वो हवेली के रास्ते पर मूड गयी और मै एक नजर देखा उनको और आगे निकल गया
मै और मनोज वापस घर आये और फिर मै और विमला 10 बजे तक तैयार होकर दुकान गये और फिर वही से तय गाड़ी से मै ,पापा, विमला और वकिल अंकल जिला कोर्ट गये और 2 बजे तक सारे कागजी काम खतम करा कर शाम 4 बजे तक हम सब वापस आ गये ।
रास्ते मे विमला ने पापा को महेश को माफ करने वाली बात बतायी तो पापा भी उनकी बात से सहमत हुए और विमला की उदारता के लिए उसकी तारिफ भी की साथ ही सतर्क रहने के लिए चेताया भी ।
शाम 4 बजे हम चमनपूरा वापस आये तो पापा ने विमला को घर चलने का आग्रह किया और फिर हमारी गाड़ी हमारे घर के लिए मुड गयी ।
घर पहुच कर हम सब दुकान के पीछे वाले कमरे मे एकठ्ठा हुए और मा ने वही नास्ता लेके आई
पापा - अरे रागिनी अब ये चाय नास्ता से काम नही चलेगा , अब तो पार्टी बनती है क्यू बहन जी
विम्ला मुस्कुरा के - हा जी बिल्कुल जब आप कहिये भाईसाहब
पापा - नही नही पार्टी तो हमारे तरफ से ही होगी वो भी हमारे नये वाले घर पर और अब तो होली को भी ज्यादा दिन नही बचे है हाहाहाहहा
मै खुश होकर - हा पापा क्यू ना इस बार की होली हम सब साथ मे नये घर पर मनाये
मा खुश होकर - हा जी मेरा भी मन यही कर रहा है
पापा - ठीक है फिर वही करते है सारा प्रोग्राम क्यू बहन जी ।
पापा विमला की तरफ हस्ते हुए उसकी रजामंदी लेने के लिए बोले लेकिन
विमला थोडी नाखुश सी दिखी तो पापा ने उसको पुछा
पापा - क्या हुआ बहन जी आप खुश नही है
विमला थोडा बनावती हस कर - अरे नही नही वो बात नही है
मा - फिर क्या बात है विमला अब तो सब ठीक है ना
विमला - हा रागिनी लेकिन मै कैसे होली खेल सकती हू मै तो
ये बोल कर विमला ने दुख से अपना सर झुका लिया
पापा - क्या बहन जी आप भी इतनी मोर्डन होकर पूराने ख्यालो मे जी रही है , माना की भाईसाहब हमारे बिच नही है अब लेकिन ये तो वो भी नही चाहेगे कि उनकी फैम्ली खुशिया ना मनाये ।
मा - हा विमला आजकल ये सब नोर्मल है और हम सब वहा अपने घर के लोग ही रहेंगे कोई बाहर का भी तो नही रहेगा ना
विमला अपने आसू पोछते हुए - ठीक है लेकिन
मा विमला के कन्धे को थामते हुए - लेकिन वेकिन छोड और जिंदगी के मज़े ले और उन मासूम बच्चों का सोच जो तुझे दुखी देख कर क्या कोई खुशिया मना पायेंगे
विमला मा के हाथ थामते हुए - नही रागिनी मै मेरे बच्चो की खुशियो पर अब और गम का साया नही आने दूँगी , अब से एक नयी विम्ला को जनमा पायेगी तू
मा ह्स्ते हुए - आ ले ले ले मेरी बच्ची आ दुधू दू तुझे हाहाहा बड़ी आई नया जन्म लेने वाली
फिर सारे लोग मा की बात से हसने लगे और विमला भी मा के सीने से लग कर आसू बहाते हुए ह्सती रही
फिर मै विम्ला को लिवा के उसके घर चल गया
जहा घर पर अनिता कोमल से बाते कर रही थी और हमे आते देख उठ कर दरवाजे तक आई
अनिता - आओ जीजी , कोमल बिटिया पानी ला अपनी मा के लिए
विमला के मन मे वैसे भी अनिता और महेश के लिए पहले ही कोई द्वेष नही था और वो कोमल को भी सुबह ही समझा चुकी थी ये सब
फिर हम हाल मे बैठे और कोमल ने हमे पानी दिया
तो मै उठा और कपडे पहन कर बाहर आया तो कोमल अपने कमरे से बाहर निकल रही थी और वो बाथरूम की तरफ जा रही थी
मै - गुड मोरनिंग कोमल
कोमल बडे बेतुके ढंग से - हा गुड मॉर्निंग हुउह्ह
मुझे बहुत अजीब लगा कि इसे क्या हुआ कही रात मे मै विमला के साथ सोया था उसका गुस्सा तो नही है ना
मै मुस्कुरा कर कोमल के पीछे चल दिया और पीछे आगन मे जाकर उसको पकड लिया और वो मेरे बाहो ने छटपटाने लगी
मै उसके चेहरे को पकड कर एक जोर का लिप किस्स किया और बोला - ये सुबह सुबह किस बात के नखरे भई
कोमल इतरा कर मुह फेरते हुए - कल क्यू नही आये मेरे पास , और कमरे मे भी नही थे , वो तो मैने ध्यान दिया कि मनोज है नही तो गडबड हो जाती
मै मुस्कुरा कर - क्या गडबड़ हो जाती
कोमल शर्मा कर - वो मै रात के 11 ब्जे तक गयी थी तो मुझे लगा तुम सो गये हो तो तुम्हे जगाने के लिए सोचा लेकिन तभी मुझे मनोज का चेहरा दिख गया और मै बाल बाल बच गयी
मै उसे छेड़ने के अंदाज मे - मनोज का चेहरा ही बस देखा या और भी कुछ
कोमल शर्मा कर - तूम वो बताओ जो मैने पूछा है , बाकी सब छोडो
मै ह्स्ते हुए - सॉरी कोमल वो आज मौसी को कोर्ट लेके जाना है ना सारे काम खतम होने को है इसिलिए वही उनसे बाते करते हुए वही सो गया
कोमल - ठीक है कोई बात नही, लेकिन आज रात मत दुर रहना मुझ्से। ठीक है
मै कोमल के गालो को चूम कर - ठीक है मेरी गुलाबो हिहिही
फिर मै कोमल को छोड कर वापस मनोज को जगाने आ गया
दरवाजा पहले ही खुला हुआ था और मनोज अपने लण्ड के उभार पर हाथ रखे सो रहा था ।
फिर मैने उसे जगाया और हम दोनों कल की तरह आज भी निकल गए टहलने लेकिन आज हम 6 बजे पहले ही निकले थे तो आज कल से ज्यादा औरते दिखी और सबसे नयी शादीशुदा औरते दिखी जो साडीयो मे थी ।
मुझे इनसब से अलग सरोजा ठाकुर का इन्तजार था ।
और तभी मुझे एक परफ्युम की खुशबू आई और मेरे पीछे से सरोजा जी जोगिंग करती हूई, मेरे बगल से आगे निकली
आज तो वो कल से ज्यादा खुबसूरत दिख रही थी और मै तो उनकी उभरी जवानी को आन्खो से ओझल नही होने देना चाहता था और उनके पीछे पीछे उनके मोटे मोटे झोल मारते चुतड के पाटो को देखते हुए जोग्गिंग सुरु कर दिया और मनोज भी मेरा साथ देने आ गया
मनोज मेरी मनोभावनाये और सरोजा के प्रति दीवानगी को बखूबी समझ रहा था
मनोज - भैया क्या बात है आज दौड़ रहे हैं
मै - हा अब सोच रहा हूँ कि जब आया तो थोडी बहुत कसरत दौड़ कर ही ले क्यू
आगे जाकर सरोजा जी एक जगह रुकी और अपनी सांसे थोडी बराबर की और वापस घूमने लगी और हमारी तरफ आने लगी तो उनकी नजर मुझ पर गयी और वही मै आंखे फाडे उन्के उछलते चुचे निहार रहा था ,, फिर जब उनसे नजर मिली तो वो एक मुस्कान देके सीधा चल दी ।
सरोजा की मुस्कान पाते ही मै जहा तक गया था वही से वापस सरोजा के पीछे घूम गया ।
मनोज मुझे सरोजा की तरफ जाते हुए देख कर मुस्कराया और मेरे साथ चल दिया ।
मै वापस से सरोजा के भारी चुतडो को निहारते जाने लगा और फिर एक समय आया कि वो हवेली के रास्ते पर मूड गयी और मै एक नजर देखा उनको और आगे निकल गया
मै और मनोज वापस घर आये और फिर मै और विमला 10 बजे तक तैयार होकर दुकान गये और फिर वही से तय गाड़ी से मै ,पापा, विमला और वकिल अंकल जिला कोर्ट गये और 2 बजे तक सारे कागजी काम खतम करा कर शाम 4 बजे तक हम सब वापस आ गये ।
रास्ते मे विमला ने पापा को महेश को माफ करने वाली बात बतायी तो पापा भी उनकी बात से सहमत हुए और विमला की उदारता के लिए उसकी तारिफ भी की साथ ही सतर्क रहने के लिए चेताया भी ।
शाम 4 बजे हम चमनपूरा वापस आये तो पापा ने विमला को घर चलने का आग्रह किया और फिर हमारी गाड़ी हमारे घर के लिए मुड गयी ।
घर पहुच कर हम सब दुकान के पीछे वाले कमरे मे एकठ्ठा हुए और मा ने वही नास्ता लेके आई
पापा - अरे रागिनी अब ये चाय नास्ता से काम नही चलेगा , अब तो पार्टी बनती है क्यू बहन जी
विम्ला मुस्कुरा के - हा जी बिल्कुल जब आप कहिये भाईसाहब
पापा - नही नही पार्टी तो हमारे तरफ से ही होगी वो भी हमारे नये वाले घर पर और अब तो होली को भी ज्यादा दिन नही बचे है हाहाहाहहा
मै खुश होकर - हा पापा क्यू ना इस बार की होली हम सब साथ मे नये घर पर मनाये
मा खुश होकर - हा जी मेरा भी मन यही कर रहा है
पापा - ठीक है फिर वही करते है सारा प्रोग्राम क्यू बहन जी ।
पापा विमला की तरफ हस्ते हुए उसकी रजामंदी लेने के लिए बोले लेकिन
विमला थोडी नाखुश सी दिखी तो पापा ने उसको पुछा
पापा - क्या हुआ बहन जी आप खुश नही है
विमला थोडा बनावती हस कर - अरे नही नही वो बात नही है
मा - फिर क्या बात है विमला अब तो सब ठीक है ना
विमला - हा रागिनी लेकिन मै कैसे होली खेल सकती हू मै तो
ये बोल कर विमला ने दुख से अपना सर झुका लिया
पापा - क्या बहन जी आप भी इतनी मोर्डन होकर पूराने ख्यालो मे जी रही है , माना की भाईसाहब हमारे बिच नही है अब लेकिन ये तो वो भी नही चाहेगे कि उनकी फैम्ली खुशिया ना मनाये ।
मा - हा विमला आजकल ये सब नोर्मल है और हम सब वहा अपने घर के लोग ही रहेंगे कोई बाहर का भी तो नही रहेगा ना
विमला अपने आसू पोछते हुए - ठीक है लेकिन
मा विमला के कन्धे को थामते हुए - लेकिन वेकिन छोड और जिंदगी के मज़े ले और उन मासूम बच्चों का सोच जो तुझे दुखी देख कर क्या कोई खुशिया मना पायेंगे
विमला मा के हाथ थामते हुए - नही रागिनी मै मेरे बच्चो की खुशियो पर अब और गम का साया नही आने दूँगी , अब से एक नयी विम्ला को जनमा पायेगी तू
मा ह्स्ते हुए - आ ले ले ले मेरी बच्ची आ दुधू दू तुझे हाहाहा बड़ी आई नया जन्म लेने वाली
फिर सारे लोग मा की बात से हसने लगे और विमला भी मा के सीने से लग कर आसू बहाते हुए ह्सती रही
फिर मै विम्ला को लिवा के उसके घर चल गया
जहा घर पर अनिता कोमल से बाते कर रही थी और हमे आते देख उठ कर दरवाजे तक आई
अनिता - आओ जीजी , कोमल बिटिया पानी ला अपनी मा के लिए
विमला के मन मे वैसे भी अनिता और महेश के लिए पहले ही कोई द्वेष नही था और वो कोमल को भी सुबह ही समझा चुकी थी ये सब
फिर हम हाल मे बैठे और कोमल ने हमे पानी दिया