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Incest सपना-या-हकीकत

इधर ये तीनो ने ऐसा मादक भरा सीन बना रखा था कि मेरा लण्ड बैठने का नाम नही ले रहा था ।

तभी एक नजर मैने स्टॉल की तरफ मारी तो देखा चाचा भी इसी तरफ आ रहे है

मुझे अब घबडाहट और भी ज्यादा होने लगी कि मै क्या करु ,,, अगर इन लोगो को नही रोकूँगा और चाचा यहा आ गये तो शायद त्योहार के दिन ही कच बड़ा बवाल न हो जाये और अगर इनलोगो को आवाज दी तो ये लोग होश मे आने के बाद किसका कैसे सामने करेगे

लेकिन फिलहाल मुझे यही सही लगा की इस्से पहले चाचा आये इनको अलग करना ही पडेगा बाद मे मै देख समझ लूंगा

तो मै एक बार फिर स्टॉल की तरफ नजर मारी और थोडा फुसफुसाया लेकिन किसी को मेरी आवाज नही आई

तो मजबूरन मुझे आगे जाकर पापा के पास बोलना पडा - पापा चाचा इधर ही आ रहे है

और फिर गला खसखसा कर सबको सतर्क किया

पापा तो पहले मुझे अपने बगल ने खड़ा देख के चौके लेकिन जब मैने वापस बोला की चाचा इधर आ रहे है तो वो जल्दी से खुद को ठीक किये और मा भी हडब्ड़ी मे अपना ब्लाउज बंद करके चाची के साथ स्टॉल की तरफ जाने लगी कि रास्ते मे ही चाचा मिले

फिर मै भी उधर से निकल गया गाना गुनगुनाते हुए

फिर पापा भी थोडा घूमते हुए आस पास की घरो मे देखने का नाटक करते हुए स्टॉल की तरफ आये ।

वही चाचा बाथरूम मे चले गये ।

फिर हम सब स्टॉल के पास जाकर बैठ गये

पापा भी आकर मेरे पास बैठे जो की काफी चुप थे ।

हम बैठे ही थे कि तब तक निशा दो चुनरि लेके छ्त पर आई। जिसमे से एक मा ने और एक चाची ने ओढ़ लिया । वही विमला अपना दुपट्टा चादर के जैसे चढाये हुए थी।

अनुज और राहुल छज्जे के पास खडे बाते कर रहे थे , डीजे बंद हो चूका था । थकावट के शर्मिंद्गी भी सभी के चेहरे पर दिख रही थी क्योकि पिछ्ले 3 घंटो मे जो होली खेली गयी उसमे सबके हवस और अन्दर के काले शरारतो को सामने ला दिया था ।

दोपहर के दो बज रहे थे और भूख भी सबको लगी थी ।

मा - सुनिये जी खाना बनाने की हिम्मत है नही तो ऐसा करिये कुछ मगा लिजीये , बच्चे भी भूखे है कबसे ।

पापा मानो किसी सोच से उभरे हो और बोले - अब ब ब हा रागिनी ठीक कह रही हो ,,, राज बेटा जरा कल्लु को फोन लगाना आज वो समोसे छानता है ।

फिर मैने डीजे के पास गया और अपना मोबाईल ऑन किया और कल्लु काका के पास फोन लगाया और पापा को दे दिया

पापा फोन पर - हा कल्लु मै बोल रहा हू रंगी ,,,,हा भाई वही ,, हा भाई तुझको भी होली मुबारक हो ,,अच्छा सुन जरा गरमा गरम समोसे और रसवाली गुजिया तैयार करवा कर किसी नौकर के हाथ ह्मारे नये घर भेज्वा दे ,, हा वो जो चौराहे पर बना है ,, हा हा वही भाई , कितने करू ???

पापा मा से - कितने मगाऊ रागिनी

मा - अरे अब 25 समोसे और 20गुजिया करवा लिजीये बचचे है खा लेंगे पेट भर जायेगा

पापा फोन पर - हा कल्लु 25 समोसे और 20 22 गुजिया कर देना ,,,हा जल्दी भेजना थोडा , हा ठीक है

फिर पापा ने फोन रखा और बोले - लो जी हो गया अब क्या करना है

मा - मै तो बहुत थक गयी हू और धूप भी तेज चलिये ना नीचे हाल मे चलते है फिर नासट करके नहा धो लेंगे

विमला - हा रागिनी सच मे पैर बहुत दर्द कर रहे है

पापा ह्स्ते हुए - अरे कोई बात नही आज यही आराम करिये सब

चाची - अरे लेकिन घर भी तो जाना है

मा - क्या करोगी घर जाकर ,,यहा रहो खा पी कर यही सो जाना और कल तक चले जाना क्यू जी

पापा - हा भाई कोई कही नही जायेगा और छोटे तुम भी शाम तक घूम टहल कर वापस आ जाना

चाचा ह्स्ते हुए - शालिनी भैया ठीक ही तो कह रहे है , यहा सब थके है और यही रात के लिए कुछ बन जायेगा और साथ मे खा कर आराम कर लेंगे कौन सा आज दुकान खोलना है हमे हिहिहिही

फिर सब तय हुआ और हम सब 1st फ्लोर पर के हाल मे आ गये ।

मा ने जाते ही सोफा पकड लिया पैर पसारे फैल गयी ,,उन्के बगल मे चाची फिर विमला फिर पापा और फिर चाचा बैथ गये

चुकी सोफ़ा L टाइप का है तो ज्यादा से ज्यादा 6 लोग ही बैठ सकते थे तो अनुज जाकर मा के सिने पर लग कर बैठ गया ।

वही मै और राहुल हाल मे उतरती सीढ़ी पर बैठ गये । सोनल और निशा बेडरूम मे चले गये ।

मा सोनल से - बेटा एक एक करके सारे लोग नहा लेते जाओ

नही तो रंग नही छूटेगा

सोनल - हा मा हम दोनो नहाने ही जा रहे है ।

पापा - ऐसा करते है हम सारे जेन्स नीचे जाकर नहा लेते है और आप लोग यही उपर नहा लो

मा - अरे बारी बारी से यहा का एक बाथरूम खाली है और उपर का है नहा लो ,,,नीचे कोई गन्दगी लेके नही जायेगा हा

पापा हस के - अच्छा ठीक है भई

फिर चाचा पहल करते हुए बोले - ठीक है भैया आप लोग आराम करिये मै जरा नहा लू तब तक , शालिनी बैग से मेरे कपडे निकाल दो जरा ।

फिर चाची नीचे गयी और अपना बैग लेके आई फिर चाची और चाचा दुसरे वाले खाली बेडरूम मे चले गये ।

अनुज और राहुल भी छत पर चले गये तौलिया लेके ।

मै उठा और मा के बगल मे आकर बैठ गया और उन्के उन्के चुचो पर लद कर उनको हग कर लिया और मा ने भी मुस्कुरा कर मेरे बालो मे हाथ फेरने लगी ।

इधर मै और मा एक दुसरे मे लगे थे लेकिन मेरी आंखे पूरी बंद नही थी हल्की आंखे खोले मै सब देख समझ रहा था कि पापा उठ कर विमला के बगल मे आ गये और बोले - और बताईए बहन जी मज़ा आया की नही

विमला ह्स्ते हुए - जी भाईसाहब बहुत ही ज्यादा और रागिनी तो आज कुछ ज्यादा ही मस्ती कर दी थी

पापा हस कर - अच्छा जी वो कैसे

विमला - अरे आज ये मेरे कपडे पुरे फाड ही देती ह्हिहिहिही कमीनी कही की

मा ह्स्ते हुए - चल चल स्ब्से पहले तुने मेरी साडी फाडी फिर मै क्या करती

विमला ह्स्ते हुए - मुझे तेरी साडी पहनने ना पहनने का कोई मतलब न्ही दिख रहा था सारा माल खुला रखा था तुने हाहाह्हाहा

मा थोडी शर्मायी और विमला को छेड़ते हुए बोली - हा देखा मैने तुने आज रंग लगवाने के चक्कर मे ब्रा ही निकाल दी

इधर पापा हस भी रहे थे और बार बार मेरी तरफ देख कर खुद को शांत भी रखें हुए थे

विमला शर्माते हूए - चुप कर पागल कुछ भी बक रही है

और पापा की तरफ इशारा करती है ।

मा ह्स्ते हुए - उनको क्या बोल रही है आज उन्होने भी अपनी भयोह के साथ बहुत मज़े लिये

मा की बात से पापा झेप गये और मेरी हसी छूट गयी तो मा मेरे गालो पर चपट लगाते हुए बोली - तू बड़ा हस रहा है हा ,,, दो बार क्छ्छे मे रंग डलवा लिया लेकिन शर्म नही आ रही है हम्म्म्म

मै हस कर मा के चुचियो मे सर दबाते हुए उनकी नंगी पेट को सहलाते हुए शर्माने की ऐक्टिंग करने लगा जिस्से मा मुझे बाहो मे भर मेरे माथे को चूम कर हस्ने लगी

ऐसे ही हमारी मस्ती भरी बाते चलती रही कुछ देर फिर चाचा और चाची दोनो नहा कर साथ मे बाहर आये ।

उधर निशा और सोनल भी नहा चुकी थी फिर 5 मिंट के अंतर पर राहुल और अनुज भी नहा कर हाल मे एक्क्था हुए

थोडी देर बाद कल्लु काका ने अपने नौकर से समोसा और गुजिया भेज्वाये ।

फिर मैने दोने मे ही सबके लिये समोसा गुजिया लगा दिया और फिर मा ने सबको एक एक दोना उठाने को बोला

फिर सारे लोगो ने नासता किया थोडे गप्पें हाके और थोडी देर पहले हुई चटपटि बातो की पुनरावृति करते हुए सबने सबके मजे लिये ।

फिर चाचा चाची नीचे कमरे मे सोने चले गये । सोनल और निशा अपने बाल सुखाने बालकीनि मे चली गयी ।

अनुज और राहुल दोनो नीचे हाल मे जाकर मोबाइल पर मूवी देखने का प्लान कर लिये ।

फिर वापस उपर के हाल मे मा पापा विमल और मै बच गये ।

मा उठते हुए - चल विमला तू भी नहा ले आ ,,,और आप भी बैठे ना रहिये नहा लिजीये जाकर ।

पापा - नही नही अभी मेरा मन नही है ,,आप लोग नहा लो मै यही आराम करता हू

मै - मै तो जा रहा हू उपर नहाने

मा - अच्छा ठीक है बेता वो जरा गेस्टरूम मे मेरा और विमला का बैग है वो लेते आओ

मै झट से नीचे गया और फट से दोनो बैग लेके आ गया ।

मा - विमला तू उस वाले कमरे के बाथरूम ने चली जा और मै इसमे चली जाती हू ।

फिर दोनो अलग अलग कमरो मे गये और मै भी सिर्फ तौलिया लेके छत पर चला गया ।

छत पर जाने के बाद एक नजर मैने स्टॉल पर डाली

मै मन मे - अबे यार , मस्ती तो बहुत कर ली लेकिन ये सब समान बटोरेगा कौन ,, ऐसा करता हू पहले सारा सामान जो काम लायक है वो नीचे रख देता हू फिर बाकी का कचरा एक किनारे कर दूँगा। नही तो नहाने के बाद ये काम करके सब चौपट ही रहेगा ।

फिर मैने रंग अबीर को अच्छे से वापस पैकेट मे डाला और सारी पिचकारीया बाल्टी एक साथ रख कर उसमे पानी भरा। फिर गलास के पैकेट, मिठाइया और रंग सब एक बडे झोले मे भर कर ,, उठाया और नीचे चल दिया ।

मै वापस हाल मे आया तो पापा वहा नही थे तो मै सोचा क्यू ना सारा सामान यही मम्मी जिस कमरे मे है वही रख दू और कमरे का दरवाजा ही हल्का खुला हुआ था

तो मै सारा सामान लेके दरवाजे को धक्का देकर मम्मी को आवाज लगाते हुए कमरे मे घूस्ता हू - मम्म्यीईईईईई

सामने देखा तो मेरी आंखे फटी की फटी रह गयी क्योकि पापा कमरे मे बाथरूम के पास अपना पैजामा नीचे किये खडे थे और मा पूरी नंगी होकर पापा का मोटा लण्ड नीचे बैठ कर चुस रही थी ।

पापा की नजर वापस मुझसे मिली और मा भी लण्ड निकाल कर मेरे तरफ आंखे फाडे देखने लगी । दोनो हैरत भरी नजरो से मुझे देख रहे थे और मेरी आवाज नही निकल रही थी ।

मै हडबड़ा कर नजरे चुराते हुए - अब ब ब वो वो मै ये ये समान रखने आया था ,,,

और मै झट से सामान रखा और बिना उनलोगो की तरफ देखे - सॉरी पापा

फिर कमरे के बाहर आ गया और एक गहरी सांस ली

भले ही मेरा बाप कितना ठरकी हो और मै कितना चोदू रहू लेकिन एक बाप के सामने ऐसे सीन के बाद सामना करने की हिम्मत करना आसान नही होता है । मै अपनी सांसे बराबर कर रहा था कि अन्दर से पापा की आवाज आई

पापा - अरेरे याररर , धत्त

मा - क्या हुआ जी

पापा - आज दुसरी दफा उसने हमे ऐसे हालत मे देखा ,,क्या सोच रहा होगा वो

मा - अरे वो अब बड़ा हो गया है देखा नही सॉरी बोल कर गया है । सब समझता है मेरा बेटा आप चिन्ता ना करिये

पापा परेशान लहजे मे - हा वो ठीक है रागिनी लेकिन उपर छ्त पर शालिनी भी थी ना ,,मुझे उस बात की चिन्ता है कही वो हमारे बारे मे कोई गलत राय बना ले

मा तो पहले ही मुझे जानती थी तो वो पापा को सत्तावना देते हुए - ऐसा करिये आप एक बार उससे बात करिये,

पापा हिचक कर - क क क्या आ , कह रही हो रागिनी ,मै कैसे बात करूँगा अपने ही बेटे से , वो भी ऐसे मुद्दो पर

मा झिझक कर - हा तो फिर जिन्द्गी भर नजरे चुराते रहना एक दूसरे से आप लोग ,, आगे जाकर मेरे बेटे की जिन्दगी तबाह होगी । ना वो आपसे कुछ बात करेगा ना ही आपको अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओ के बारे मे बतायेगा

पापा परेशान लहजे मे - नही नही रागिनी ऐसा नही होगा ,,,,मै कोसिस करता हू उससे बात करने की

यहा मेरी हालत और पतली हो गयी कि अब पापा मुझसे ऐसी क्या बात करेंगे , क्या समझाएंगे

पता नही आगे क्या होने वाला था और कैसे मै पापा का और पापा मेरा सामना करने वाले थे ।

कमरे हुए हंगामें की बात सोच कर और आने वाले समय मे पापा का सामना कैसे होगा , इन्ही बातो मे खोया हुआ मै वापस छत पर चला गया नहाने ।

नहाने के बाद मै तौलिया लपेटा और फिर मुझे ध्यान आया कि मैने तो कपडा लाया ही नही

मै मन ने - अबे यार अब फिर से उसी कमरे मे जाना पडेगा पता नही क्या हो रहा होगा क्या नही ,,,पता नही पापा होगे नीचे या नही

मै घबडाहट भरे मन से आने वाले परिस्थतियो के नये नये आयाम मन मे बुने जा रहा था ।

फिर मै वापस कमरे के पास गया तो इस बार दरवाजा खटखटा कर बोला - मम्मीईई

तभी खड़ाक से दरवाजा मम्मी ने खोला और वो नहा चुकी थी , उन्होने बालो मे एक दुपट्टा लपेटा हुआ था और उपर से एक मैक्सि डाली हुई थी जिसके उपरी बटन खुले थे । उन्के बदन से साबुन की मस्त खुस्बु आ रही थी जो मुझे मादक किये जा रही थी ।

मा के भिगे होठ और भी ज्यादा गुलाबी थे और उन्के चेहरे पर एक आकर्षक मुस्कान थी ।

मा - हा क्या हुआ बेटा

मै एक बार अन्दर झाका तो पापा नही दिखे

मा मुस्कुरा कर - वो नहा रहे है हिहिहिही

मुझे थोडी राहत हुई और मुस्कुरा कर - मा वो मुझे मेरे कपडे चाहिये थे ,

मा खुशी भाव से दरवाजे से हट गयी और मै कमरे मे चला गया और फिर बैग से एक जीन्स और टीशर्ट निकाला लेकिन मेरा अंडरवियर नही मिला उसमे

मै - मा मेरा अंडरवियर नही लाई क्या आप

मा ह्स्ते हुए - अब तुझे कल देखना चाहिए था ना की क्या समान रखना है क्या नही ,,,,भूलने का तो मै भी अपना ब्रा पैंटी भूल गयी हू तो क्या करू जो है वही पहन रही हू

मै मा बाते सुन कर एक नजर उनकी चुचियो के खडे निप्प्ल को मैक्सि मे उभरा देखा और थूक गटक बोला - लेकिन मुझे आदात नही है बिना अंडरबियर के

मा हस कर - अब तू जान और समझ भई ,,, लेकिन जल्दी से ये तौलिया निकाल कर दे ,,,तेरे पापा को देना है ।

मै पापा नाम सुनते ही सारी जरूरत को ताक कर रख कर मा के सामने ही तौलिये पर से ही जीन्स मे पैर डालने लगा

मा मुझे लड़खड़ाता देख हस रही थी ।

मैने किसी तरह जांघो तक जीन्स को लेके आया और अब आगे जाने के लिए तौलिया निकालना पड़ता तो मै मा को इशारा करके बोला की बाथरूम के दरवाजे पर ध्यान दे

मा हस कर हा मे इशारा किया और मै झट से तौलिया निकाल कर मा को दिया । जिससे मेरा हल्के तनाव मे खड़ा लण्ड झाटदार हिस्से के साथ मा के साम्ने था और मै जीन्स को कमर पर चढा कर बंद कर ही रहा था कि

मा - रुक रुक रुक जरा तो ,,, ये खोल ,, ये क्या अभी भी यहा का रंग नही छुटा

मै झल्ला कर - आपने ही तो डाला था

मा हस कर - मैने कहा वो तो तेरी चाची थी हिहिही

फिर मै वापस मुह बनाते हुए जीन्स पहन लिया तभी बाथरूम से पापा की आवाज आईं।

पापा - रागिनी ,,राज तौलिया देके गया क्या

मै पापा की आवाज सुन कर वाप्स सकते मे आया और मै उनका सामना नही करना चाहता था , अभी तो बिल्कुल नही

तो मै झट से अपना मोबाईल और टीशर्ट लिया और बाल्किनी की तरफ आ गया जहा रेलिंग के पास मेरी दोनो बहने अपना टीशर्ट लोवर पहने खुले बालो मे पोज देते हुए तस्बिरे निकाल रही थी ।

तभी सोनल की नजर मुझ पर गयी

सोनल - ओ बिना ऐब्स वाले शाहरुख खान,, कपडे पहन ले भाई ,,, कुछ तो शर्म कर यहा तो महिलाए है हिहिहुही

मै हसते हुए - हा सही कह रही हो अब तुम लोग महिला हो ही गयी हो

सोनल मेरा ताना समझ गयी और खीझ कर बोली - चल चल पहन कपडे नही तो निकालू फ़ोटो तेरी भी ।

मै टीशर्ट और मोबाइल एक कुर्सी पर रखते हुए उन्के पास गया और बालो मे हाथ फिराते हुए बोला - अब इतना स्मार्ट लग रहा हू तो निकाल ही दो

निशा जो अब तक चुप चाप हसे जा रही थी वो भी मेरा साथ देते हुए - हा हीरो तो तू है ही ,, निकाल सोनल इसकी फ़ोटो और स्टेटस लगाते है

मै बिंदास होकर जीन्स मे हाथ डाल कर एक पोज दिया और सोनल के क्लिक किया और दो तीन पोज के बाद मैने देखा की निशा बहुत हस थी तो मैने उसकी कमर मे हाथ डाल कर अपनी तरफ खिच दिया जिस्से वो हिचक गयी

मै ह्स्ते हुए - हा अब निकालो दीदी

सोनल ह्स्ते हुए - वॉव यार क्या मस्त जोडी लग रही है तुम दोनो की हॉट ऐण्ड सेक्सी कपल एकदम

निशा सोनल की बात से शर्मा गयी और मै उसकी बातो का फायदा उठा के- निशा को पीछे से हग किया और एक हाथ कन्धे के उपर और एक हाथ दुसरे कन्धे के नीचे से ले जाकर उसकी चुचियो पर क्रोस करते हुए दुसरे वाले कन्धे पर अपना चेहरा रख कर पोज दिया

सोनल फ़ोटो निकालते हुए - गजब बे तुझको कितने अच्छे अच्छे पोज आते है

फिर मै निशा को छोड कर सोनल के पास गया और उसके हाथ से मोबाईल लेके तसबिरे देखने लगा ।

मै सवाईप करके एक एक तस्वीर देख रहा था कि तभी मोबाईल ने निशा की ऐसी तस्वीर आई जिसमे वो अपना नाभि दिखा रही थी , फिर मैने आगे स्वाईप किया तो सोनल की भी उसी पोज मे तस्वीर थी ।

आगे बढ़ाने पर और भी कामुक कामुक अदाओ से भरी दोनो की सेक्सी तस्विरे थी ।

मै मुस्कुराते हुए - अरे वाह दीदी बहुत ही अच्छी अच्छी तस्वीरे है

सोनल - हा तो हमने खीची है

मै - लेकिन आप दोनो का एक साथ मे नही है फुल फोटो

निशा - हा यार तू निकाल दे ना हम दोनो का

मै एक शरारती मुस्कान के साथ - ठीक है लेकिन यहा नही

उस कमरे मे चलो उसमे अच्छी लाईट आयेगी ,,,यहा धूप की वजह से फिल्टर सही से काम नही कर रहा है

फिर मैने बाल्किनी मे आने वाला दरवाजा बाहर से बंद किया और फिर दोनो के लिवा कर वही के अटैच स्पेयर रूम मे लेके चला गया जो कि खाली था और उसका दरवाजा। बालकनी में खुलता था।

फिर मैने दरवाजा बंद कर सारी लाईट ऑन की जिससे कमरा पूरा जगम्गा गया ।

निशा - हा यार ये जगह तो मस्त है

मै - चलो अब दोनो साथ मे इधर खडे हो जाओ

फिर वो दोनो एक दूसरे से चिपक कर पाऊट करते हुए और एक दुसरे के बाहो मे बाहे डाले और एक दुसरे मे गालो पर किस्स करते हुए फ़ोटो निकलवाये

सोनल - भाई और कोई पोज बता ना

मै तुरंत गूगल पर कुछ सेक्सी पोजेज की तस्वीरें सर्च की और फिर दोनो को अप्ने पास बुलाया

सोनल को दिखाते हुए - ये देखो दीदी ये कैसा है

उस तस्वीर मे दो लडकिया एक दुसरे के आगे पीछे खड़ी थी । पीछे वाली लडकी अपना सर आगे वाली लड्की के कन्धे पर रखे हुए अपना हाथ आगे कर आगे वाली लड्की की ड्रेस उपर किये हुए उसकी नाभि दिखा रही थी और वही सामने वाली लडकी अपने एक साथ उस पीछे वाली लड्की के गालो को बहुत ही कामुक अंदाज मे छू रही थी ।

सोनल पोज देख कर - धत्त ये सब क्या बे ,,, ये सब बड़ी मोडल लोग ही करती है कोई देखेगा तो क्या कहेगा

मै हस कर मोबाइल की गैलरी से उनकी नाभि दिखने वाली तस्वीर खोल कर उनको दिखाते हुए बोला - क्यू ये देख कर सब लोग तारिफ करेन्गे क्या ,,अरे यार कोई बाहरी थोडी ना देखेगा । हम लोग ब्स पोज बना कर मौज मस्ती कर रहे है कौन सा इसका बैनर बनवाना है

निशा मेरी बात सुन कर ह्स्ते हुए - नही भाई ये बैनर बनवायेगी अपना हाहाहा

सोनल अपना मजाक उड़ता देख खीझ गयी और ह्स्ते हुए बोली - रुक अभी बताती हू तुझे बहुत हसी आ रही है ना

सोनल - चल भाई तू खिच , अब देख मेरा कमाल

फिर सोनल निशा को खिच कर वाप्स से उसी जगह ले गयी और उसी तसवीर की तरह निशा को आगे के उसकी उसकी टीशर्ट को उपर खिच कर पोज दिया जिसे मैने क्लिक किया

मै दुसरा पोज ब्ताता की उस्से पहले ही सोनल खड़ी हुई और निशा का टीशर्ट एक झटके मे निकाल दिया और फिर अपना टीशर्ट भी एक साथ निकाल दिया ।

ओह माय गॉड क्या गजब का सेक्सी नजारा था । दोनो बहने अब ब्रा और लोवर मे थी ।

सोनल के दूध काली ब्रा मे काफी भरे हुए थे और वही निशा के चुचे सोनल के मुकाबले छोटे थे और उसने एक प्रिंटेड आसमानी रंग की ब्रा पहनी थी ।

सोनल के टीशर्ट निकालने के बाद निशा ने झट से अपने हाथो को क्रॉस करके अपनी छाती को ढक लिया और झल्ला कर बोली - ये क्या मजाक है दीदी ,, देख नही रही राज है यही

सोनल हस के - धत पागल वो कौन सा बाहरी है ,, अपना भाई ही तो है ना ,

निशा थोडा शांत होकर - लेकिन ऐसे कैसे मुझे शर्म आयेगी यार

सोनल ह्सते हुए - अरे वो भी उपर से नंगा है और हमने तो अपने माल ढके हुए है ना हिहिहिही

फिर सोनल निशा के हाथ उसके सीने से हटाते हुए उसको अपनी तरफ खीच कर पोज देते हुए बोली - हा भाई अब खिच

मै मुस्कुरा कर जीन्स मे उभरे लण्ड को थोदा दबाते हुए - दोनो की बेहद ही सेक्सी तस्वीरे निकाली और बार बार लण्ड को दबा रह था

जिसे सोनल और निशा भी देख कर आप्स मे मुस्कुरा रही थी ।

मुझे अब रहा नही जा रहा था क्योकि मेरे लण्ड मे दर्द होने लगा था ।

मै - दिदी मै अभी आ रहा हू

सोनल ह्स्ते हुए - अरे कहा जा रहा है भाई

मै संकोचवश इधर उधर देखा कर मुस्कुरा रहा था ।

सोनल - मुझे पता है तुझे वहा दिक्कत हो रही है तो यही कर ले ना सही

निशा सोनल के बाजू पर चिगोटी काटते हुए मना करती है

सोनल ह्स्ते हुए - देख निशा भी वही बोल रही है कि यही सही कर ले हिहिहिही

निशा खीझ कर ह्स्ते हुए - क्या दीदी मैने कब बोला

सोनल - अब शर्माना छोड और यही सही कर ले

फिर मै मोबाईल उन लोगो को देके उनकी तरफ पिठ करके घूम गया और जीन्स के बटन और चैन खोल कर लण्ड को बाहर निकाल कद एक गहरी सांस ली

मै हल्के हाथो से अपने लण्ड की चमडी और सुपाडे मे उठे दर्द को कम करने के लिये एक दो बार लण्ड की चमडी आगे पीछे किया जिससे मेरे सुपाडे मे ठंडी हवा का आभास हुआ और मै कमर पर हाथ रखे गरदन उपर कर आंखे बंद किये गहरी सास लेते हुए थोडी देर वैसे ही लंड बाहर किये खड़ा रहा और मुझे बहुत ही राहत मह्सूस हो रही थी ।एक पल की मै भूल ही गया कि कहा हू तभी मुझे सोनल के खिलखिलाने और निशा के खुसफुसाने की आवाज अपने बाई तरफ से आई और मै नजर घुमा कर देखा तो सोनल ह्स्ते हुए मेरे लण्ड की तस्वीर निकाल रही थी और निशा उसको रोकने की कोसिस कर रही थी ।

मै झट से दुसरी तरफ घूमते हुए पैंट पकड लिया ।

हालाकि मेरे और सोनल के बिच , मेरे और निशा के बिच व्यकितगत रूप से कोई हिचक वाली बात नही थी लेकिन हम तीनो के कुछ ना कुछ आपस के राज थे जो हम सब से छिपे थे ।

मै ह्स्ते हुए पैंट पकड कर - ये क्या रही हो दीदी पागल हो गई हो क्या

सोनल ह्स्ते हुए - कुछ नही तुझे ब्लैकमेल करने का हथियार जुटा रही हू भाई

उनकी तरफ पिठ किये हुए - ये गलत बात है मै तकलीफ मे हू तो ये क्या बात हुई

सोनल - अच्छा ब्च्चू तकलीफ मे है ,,सुन रही है निशा क्या कह रहा है

निशा खुसफुसा कर - क्या कह रही हो दीदी बस करो अभी

सोनल हस्ते हुए - तू उसके साथ है मेरे साथ । देखती नही ये कमीना अपनी बहनो की जवानी देख कर मजे ले रहा है

मै लखड़ते लहजे मे - ये क्या बोल रही हो दिदी मैने कब ये सब सोचा

सोनल मुझे सामने घुमाते हुए - तो ये तेरा खड़ा कैसे हुआ

मै निशा को देखा जो सोनल के थोडा पीछे खड़े होकर मुह छिपाये हस रही थी और सोनल मुझे चिढाने का इशारा कर रही थी ।

सोनल अपनी होठ पे जीभ घुमाकर हस्ते हुए बोली - बता ना कैसे हुआ खड़ा , तू मेरी और निशा की छातियों को ही घुर रहा था ना

मै हस कर अपना लण्ड को छुपाने की कोसिस मे - ये क्या बात कर रही हो दीदी , मैने थोडी ना बोला आपको की आप कपडे निकाल दो ,,,क्यू निशा दीदी

निशा हस कर मुह फेर लेती है

मै मौका देख कर सोनल से इशारे मे पुछता हू क्या नाटक ये सब

सोनल हस कर इशारे मे लण्ड को चुस्ने की बात कहती है

मै इशारे मे निशा की तरफ दिखा कर उसको बोलता हू की तुम पागल हो वो यही है

सोनल इशारे मे निशा को भी शामिल होने की बात कह्कर हस्ती है

मै सोनल की प्लानिंग समझ गया कि वो क्यू इत्ना नाटक कर रही है और एक गहरी सास लेते हुए मैने भी नाटक करना शुरु कर दिया ।

मै - बोलो ना अब चुप क्यू हो

सोनल - ओहो इस्का मतलब अगर तू अपनी बहनो को नंगा देख लेता है तो तू उन्के बारे मे गंदी गंदी सोच रखेगा

सोनल वापस निशा के पास जाकर उसकी ब्रा कन्धो से सरकाते हुए - अगर मै निशा के ब्रा निकाल दू तो क्या तू फिर भी इनके बारे गलत सोचेगा हा

निशा हस कर छ्टकते हुए सोनल का हाथ हटाने की कोसिस मे - ये क्या कर रही हो दीदी

सोनल - नही निशा आज मुझे इसको आजमा लेने दे ,कल मुझे घर मे अकेला पाकर ना जाने ये क्या कर दे

फिर सोनल के निशा के ब्रा की हुक खोल दी और सामने से निशा के चुचे खोल दिये और फिर मुझे देखकर बोली - तू इधर आ अभी

मै मुस्कुरा कर दोनो के पास गया जहा निशा अपने दोनो हाथों अपने चुचियो को छिपाये सोनल से चिपकी हुई नजर नीचे किये कनअखियो से मुझे अपने पास आता देख रही थी ।

मै थोडा नाटक करता हुआ टूटे हुर लहजे मे - जी दीदी बोलो

सोनल झूठ का गुस्सा दिखाते हुए निशा का हाथ उसकी छाती से हटा देती है

वही निशा का मुलायम संतरे जैसी गुलाबी निप्प्ल वाली चुचियो को देख कर मेरा लण्ड झटके खाने लगा और मै गला गिला करने के लिए मुह की लार सोखने लगा

सोनल थोडा गुस्से का नाटक करते हुए - ध्यान से देख निशा के दूध को और एक भाई की नजर से बता ये कैसी लग रही है

मै थूक गटकते एक नजर निशा से मिलाया जो तुरंत नजर घुमा कर मुस्कुराने लगी और फिर मैने बडे गौर से निशा की गोरी मुलायम चर्बी वाली चुचियो को देखने लगा उसके गुलाबी घेरो पर उभरे रोए के दाने और मटर के दाने जैसी गोल कडक निप्प्ल देख कर मै उत्तेजन से भर गया ।

सोनल - बता ना ये भावना आ रही है तुझे एक भाई की नजर से

मै घबडाहट भरे आवाज का नाटक करता हुआ - आ ब ब वो वो वो मै क्या बताऊ दिदी अच्छी तो है ये अब क्या बताऊ इसमे कितनी गोल और मुलायम है ब्स यही सब है

सोनल - और तेरा मन नही कर रहा है कि इनको छूने का

मै ना मे सर हिला कर - नही नही दिदी मै कैसे छू सकता हू ,,निशा दिदी मेरी बहन है ।
 
सोनल थोडे भारी लहजे मे लण्ड की तरफ इशार करते हुए - तेरे इसको देख के तो ये नही लग रहा है कि तू सच बोल रहा है ,, देख रही हू जबसे मैने निशा के दूध खोले है ये और भी बड़ा हो गया है

मै घबडाहट भरे लहजे मे - वो तो होगा ही ना इतने सुन्दर दुध देख कर ,,,मुझे पता है ये मेरी बहन के है उसे थोडी ना पता होगा दीदी

निशा मेरी बात से हस दी और सोनल भी हस के बोली - मतलब तू नही चाह्ता कि इसे छुए लेकिन ये चाहता छूना

मै अंदाजा लगाने के भाव मे - नही , हा , मतलब वही

तब तक सोनल ने भी अपनी ब्रा निकाल दी और बोली - अब बता इनको देख कर क्या सोच रहा है तू और क्या सोच रहा है तेरा ये

मै दीदी की मोटी भूरे निप्प्ल वाली गोरी चुचियो को देख कर और भी हतास परेसान होने लगा

मै - अब ब ब ये ये ये तो बडे है और सेक्सी है

सोनल - येही सोचता हू तू मेरे बारे मे

मै हदब्ड़ी के भाव मे - नही नही दीदी ,,ये मै नही मेरा ये सोच रहा है

सोनल और निशा दोनो आपस मे मुस्कुरा रहे थे और हसी मुझे भी आ रही थी

सोनल - मतलब तू हमारे बारे कुछ गलत नही सोचता

मै मुस्कुराते हुए ना मे सर हिलाया

सोनल - तो मतलब हम इसके साथ कुछ भी करे तुझे कोई दिक्कत नही होगी

मै सोचने के भाव मे आ गया और कभी सोनल की कातिल मुस्कान के साथ इतराते चेहरे को देखता तो कभी निशा के शर्मा से नजरे चुरा कर मुस्कुराते हसिन चेहरे को

कभी एक पल को निशा की गुलाबी निप्प्ल वाली चुची को देखकर उसके मुलायम स्पर्श पाने को सिहर उठता तो एक सोनल के मोटी डार्क निप्पल वाली चुची को हथेली मे भर के मिजने का मन करता

आगे ना जाने ये सोनल की शरारत क्या गुल खिलाने वाली थी और क्या कुछ बदलने वाला था हमारी जिन्दगी मे
 
अब तक

सोनल - मतलब तू हमारे बारे कुछ गलत नही सोचता

मै मुस्कुराते हुए ना मे सर हिलाया

सोनल - तो मतलब हम इसके साथ कुछ भी करे तुझे कोई दिक्कत नही होगी

मै सोचने के भाव मे आ गया और कभी सोनल की कातिल मुस्कान के साथ इतराते चेहरे को देखता तो कभी निशा के शर्मा से नजरे चुरा कर मुस्कुराते हसिन चेहरे को

कभी एक पल को निशा की गुलाबी निप्प्ल वाली चुची को देखकर उसके मुलायम स्पर्श पाने को सिहर उठता तो एक सोनल के मोटी डार्क निप्पल वाली चुची को हथेली मे भर के मिजने का मन करता

आगे ना जाने ये सोनल की शरारत क्या गुल खिलाने वाली थी और क्या कुछ बदलने वाला था हमारी जिन्दगी मे

अब आगे

मै हैरत भरे भाव मे दोनो को देखकर एक छिपी मुस्कान के साथ - हा हा दीदी ,,मुझे क्या दिक्कत हो

तभी सोनल ने हाथ आगे करके मेरा खड़ा लण्ड को मुठ्ठि मे भर लिया और यहा मेरी सासे उपर नीचे होने लगी और लण्ड मे कसाव बढ़ने के साथ दीदी के गर्म मुलायम हाथ के स्पर्श से मेरे नशो मे एक बिजली सी दौड़ गयी और मै एक गहरी सास लेते हुए सिहर गया ।

वही निशा शॉक से अपने मुह पद हाथ रख ली की सोनल ने क्या कर दिया एक बहन ने अपने ही भाई का लण्ड पकडे हुए है

निशा हैरत के भाव मे - दीदी ये आ आप क क क्या कर रही है ?????

सोनल - नही निशा आज मुझे परख लेने दे कि इसका इसके अरमानो पर कितना नियन्त्रण है

निशा झिझकर - क्या दीदी जाने दो ना हो जाता है ये सब ,,, ये सब नेचुरल है होना ,,

सोनल अब निशा को लपेटते हुए - क्या कहना चाहती है तू निशा ,,, तूझे भी सेक्स भावना आ रही है क्या इसका खड़ा हुआ देख कर

अब निशा के पास कोई जवाब नही था वो बिच मे बोल के फस गयी थी

निशा शर्मा कर थोडा ह्स्ते हुए - ये क्या कह रही हो दीदी भाई है वो मेरा मुझे क्यू आयेगी ऐसी भावना

सोनल गुस्से का भाव लाके - मुझे तो लग रहा है कि तू भी इसके जैसी ही है तभी ऐसी बाते कर रही है

इतना बोल कर वो निशा हाथ पकड कर उसको नीचे घूटनो के बल मेरे लण्ड के सामने बिठा दिया

निशा जिज्ञासा भरे भाव सोनल को नजरे उपर कर देखते हुए पुछती है - ये कया कर रही हो दीदी

सोनल - मुझे तेरा भी नियंत्रण चेक करना पडेगा ,,,मुझे तो तेरी खुद की नियत नही ठीक लग रही है

निशा हस्ते हुए - क्या दीदी आप क्या बोले जा रही हो

तभी सोनल मेरे पीछे खडे होके अपना हाथ आगे लाके मेरे लण्ड नीचे से सुपाडे तक हाथ फिराया जिससे मै हिल गया वही दीदी की नंगी चुचियो के नुकीले मेरे पिठ पर चुबने लगे जिससे मेरा पूरा बदन गनगना गया

वही सोनल वापस मेरे चमडी को सुपाडे से नीचे खिच के निशा को बोलती है - ध्यान से देख निशा ,,,और बता एक बहन की नजर से तुझे क्या महसूस हो रहा है

निशा ह्स्ते हुए - धत्त दीदी , मुझे शर्म आ रही है

सोनल - मतलब मौका मिले तो तू बहक जायेगी अपने भाई के साथ ही हा

निशा थोडा सिरिअस होके अपने कामुज भावनाओ को छिपाते हुए के - क्या दीदी ये क्या कह रही हो मुझे इसको देख के क्या इसको छू भी लू तो भी मुझे कुछ नही होगा ,,,जैसे आपको नही हो रहा है असर वैसे मुझे भी नही होगा

सोनल - हमम ठीक है फिर पकड

मै चौक के - दीदी !!!!

सोनल - तू चुप रह , निशा तू पकड इसको

निशा सोनल के डांट से सहम गयी और हाथ बढ़ा कर मेरे लण्ड को सहलाने लगी ।

अब मेरे बदन मे अलग ही जोर पड़ रहा था ,,काफी समय से एक जगह खडे होने से मेरे पैर कापने लगे थे और वही निशा बड़ी मादकता से मेरे लण्ड को मुठ्ठि मे कस कर सहला रही थी ।

वही मै अपने पैर ठीक करने के लिए थोडा हिलदुल कर आगे बढ़ा और निशा के चेहरे के पास तक गया । धीरे धीरे कमरे का माहौल बेहद कामूक होने लगा ,,,और सोनल भी पीछे से अपनी चुचिया मेरे पिठ पर घिसते हुए सामने हाथ लाकर मेरे पेड़ू वाले हिस्से को सहला रही थी और उसका चेहरा मेरे कन्धे पर बहुत हल्की मादक आहे भर रहा था ,,,वही निशा भी मेरे लण्ड के स्पर्श के खो गयी ,,, और धिरे धीरे उसने अपने भाव चेहरे पर लाने शुरु कर दिये

मौका देख के मैने अपनी गाड़ के पाटो को सख्त करते हुए लण्ड को और भी तीखा कर निशा के बालो पर हाथ रखा और लण्ड की तरफ बहुत हल्का सा जोर लगाया और मदहोश निशा ने मुह खोल के धीरे से लण्ड को आधा मुह मे भर कर धीरे धीरे चूसना शुरु कर दिया

समय देख कर सोनल मेरे पीछे से हट मेरे बगल मे आई और मै उसके कमर मे हाथ डाल कर अपने करीब करता हुआ उसके होठो को चुस लेता हू

वही इनसब से अंजान निशा , मादकता से भरके बड़ी ही कामुकता से आंखे बन्द किये मेरे लण्ड को बहुत बहुत अन्दर बाहर कर रही थी । जिससे उसके होठो का मुलायाम स्पर्श मुझे झकझोर दे रहा था

वही सोनल ने धिरे से अपना हाथ बढ़ा कर निशा के बालो मे उसके सर पर हल्का जोर देते हुए और ज्यादा लण्ड मुह मे भरने के लिए दबाती है । जिससे मुह मे लण्ड भरे निशा नजरे उपर कर सोनल को देखती है और सोनल मुस्कुरा कर उसे इत्मीनान होने का इशारा कर उसके बालो मे हाथ फेरती है ।

जिससे लण्ड के नशे मे धुत निशा वापस मेरे लण्ड को वैसे ही मादक भरे अंदाज मे धीरे धीरे चूसने लगती है ।

यहा मै सोनल की एक चुची को पकड कर मिजते हुए उसके होठ चुसना शुरु कर देता हू जिस्से सोनल तडप उठती है और मेरे होठो को अपने होठो से चुस्ते हुए खीचने लगती है

वही मेरा दुसरा हाथ सोनल की गाड़ को सहला रहा था

इधर मै और सोनल मस्त थे तभी मुझे आभास हुआ की निशा ने मेरे लण्ड को चूसना बन्द कर दिया और तभी मुझे मेरे और सोनल के चेहरे के बिच एक और चेहरा घुसते हुए मह्सुस होता है और तभी आंखे खुलती है मेरी और देखता हूं निशा भी मेरे होठो को चूसने के फिराक मे झपट रही थी

तो सोनल खुद अलग होके निशा को मौका देती है और मौका मिलते ही निशा मुझ पर झपट पड़ती है और मै भी उसकी कमर मे हाथ डाल कर उसके अपनी तरफ खीच के उसके होठो को चुस्ने लगता हू और हाथ नीचे ले जाकर उसकी लोवर मे हाथ घुसा कर उसके गाड़ के मुलायम पात को फैलाते हुए मिजने लगा जिस्से निशा और भी उत्तेजित होकर मेरे होठो को चुस्ने लगी ।

इधर दीदी ने नीचे जा चुकी थी और लण्ड को मुह मे भर कर पुरे हवसी ढंग से लण्ड की चमडी को खिच के सुपाडे को सुरकते हुए लण्ड को गले तक उतार रही थी ।

इधर मै अपना सारा सिहरन और उत्तेजना निशा की मुलायम गाड़ पर उतार रहा था और धीरे धीरे उसका लोवर और पैंटी जांघो तक कर उसके गाड़ के सुराख को छेड़ने लगा जिससे तडप कर निशा मेरे होठो को छोड कर मेरे कंधो को थामे सिसकियाँ लेने लगी और मौका देख कर मैं झुककर उस्की गुलाबी निप्प्ल वाली चुची को मुह मे भर लिया जिससे निशा और भी तडप उठी

निशा - अह्ह्ह मा बचाओ दीदी अह्ह्ह उफ्फ्फ अह्ह्ह सीई उम्म्ंम्ं अह्ह्ह भाई धीरे उह्ह्ह

मै बिना कुछ बोले निशा की गाड़ कुदेरते हुए उसकी चुचिया पिए जा रहा था

इधर सोनल के लगातर हवसी ढंग से लण्ड चूसने से मेरे पैर मेरा साथ नही दे रहे थे तो मै निशा को छोडा और सोनल का सर पीछे कर उसके मुह से लण्ड निकाला और खसक कर पास के दीवाल का टेक लगा लिया और इसिबिच मदहोश हुई निशा ने झट से अपनी पैंटी और लोवर को निकाल दिया और वापस से मुझ पर झपट पड़ती है और इस बार सामने से अपनी नंगी चुत को मेरे लण्ड के सुपाडे पर घुमाते हुए अपनी जीभ मेरे मुह मे घुमाती है जिससे मै उतेजीत होकर उस्की एक टाँग उठा के कमर तक रख के उसके होठ चुसते हुए और उसकी कमर मे हाथ डाले उसके चुत के नीचे हिस्से मे लण्ड को रगड़ कर पीछे गाड़ तक ले जाता

वही मौका पाकर सोनल वापस नीचे बैठ के अपनी जीभ निकाल के मेरे आड़ो को चूसने लगी और

अपनी जीभ मेरे लण्ड के निचले नशो पर फेरते हुए चाटने लगी ,,,कभी कभी मेरे लण्ड के सुपाडे को चाटते चाटते उसकी जीभ निशा की गाड़ के सुराख को छू जाती जिससे निशा मुझे और कस कर दबोच लेती ।

जल्द ही निशा के कूल्हो मे दर्द उठने लगा और वो अपना पैर नीचे कर दी और मैने उसको घुमा कर पीछे से पकड़ते हुए उसकी चुचीयो को मिजना शुरु कर दिया और कसमसाने लगी

और फिर मैने झुक कर अपना लण्ड पीछे से उसकी गाड़ के नीचे और जांघो के बिच से सामने चुत से लकीर पर निकाला और उसको खुद से चिपका कर उसकी चूचियो को नोचते हुए उसके कंधे को चूमने लगा

निशा दर्द और लण्ड के स्पर्श से सिहर गयी और वही सोनल मेरे सुपाडे को निशा की चुत के नीचे निकला पाकर फौरन गदरन आगे कर अपनी जीभ निकाल कर मेरे सुपाडे पर जीभ घुमाने लगी और उसको मुह मे भरने की कोसीस मे सोनल के होठ निशा के चुत के दाने को छूने लगे जिससे निशा अपनी कमर उचका देती

इधर जैसे ही सोनल के जीभ निशा के दानो पर पड़े तो निशा हिछूक के - अह्ह्ह दीदी उम्म्ं उफ्फ्फ्च भाई आराम से नोच क्यू रहे है देखो लाल हो गया है उम्म्ंम्म्ं हा ऐसे करो ना उफ्फ्फ अह्ह्ह दीदी क्या कर रही हो उफ्फ्फ

मैने नजर नीचे की देखा सोनल मेरे लंड को पकड उसे नीचे झुका दिया है और अपने होठो मे निशा की झान्तो से भरी चुत को दबा कर चुबला रही है और साथ मे मेरे लण्ड की चमडी को आगे पीछे कर रही है ।

मुझे समझ नही आ रहा था कि सोनल और निशा के साथ सेक्स इतना अतभुत होगा

जल्दी ही निशा का बदन कापने लगा और वो अपनी पैर के उंगलियो के बल खड़ी होकर अपनी चुत सोनल के मुह पर रगड़ने लगी और सोनल भी मेरे लण्ड को छोड कर निशा की जांघो को थामे पूरा जोर लगा के उसकी चुत को चुस रही थी

निशा ने एक हाथ मेरे कंधो मे डाला और दुसरे हाथ से सोनल के बाल खीचते हुए कापने लगी - अह्ह्ह्ह दीदी अह्ह्ह उह्ह्ह मा उफ्फ़फ्फ आह्ह आह्ह और और रुकना मत मत भाई पकडे रहो मुझे आह्ह आह्ह

मै खुश होकर निशा को उसकी कमर मे हाथ डाल कर अच्छे से सम्भालते हुए उसकी चुचियो के निप्प्ल पर हल्के हाथो से अपने हथेली के खुरडरे स्पर्श से छुता हू जिस्से निशा और उतेजीत हो जाती है और कापते पैरो के साथ अपनी कमर उचकाने लगती है

निशा - ओ माय गॉड दीदी अह्ह्ह आह्ह ओ गॉड ओ मम्मी अह्ह्ज मा उफ्फ्फ अह्ह्ह आह्ह और और और हा हा ऐसे चुसो दीदी ओ मां अह्ह्ह निकाल दो ना उह्ह्ह्ह अह्ह्ह

निशा अपनी जांघो के दर्द और नशो मे उठी उसके कामरस के प्रवाह से मेरे बाहो मे शिथिल पड़ गयी और जल्द ही उसकी कमर ने झटका देना छोड दिया

वही सोनल ने निशा की चुत साफ करते हुए खड़ी हुई तो मै उसको अपनी तरफ खिच कर उसके होठ और जीभ चुसने लगता हू ,,मुझे भी निशा की चुत की भीनी खुशबू और स्वाद की थोडी बहुत अनुभूति हो जाती है ।

वही निशा धीरे धीरे मेरे बाहो से सरक से दीवाल का टेक लेके फरश पर पाव पसारे बैठ जाती है ।

और मै सोनल के जिस्मो को मलने लगता हू ।

और उसको घुमा कर पीछे से पकडते हुए उसकी मोटी चुचियो को मिजते हुए उसके डार्क निप्प्ल को मरोडने लगता हू वही सोनल अप्नी गाड़ मेरे खड़ा लण्ड पर रगड़ने लगती है और मै भी अपने हाथ आगे ले जाकर उसकी चुत को लोवर मे हाथ डाले सहलाने लगा जिससे सोनल और ज्यादा मचलने लगती है ।

मै उसको छोड कर झट से नीचे बैठ कर उसका लोवर और पैंटी नीचे कर देता हू और उसको दीवाल की तरफ झुकाते हुए अपना मुह सोनल की गाड़ मे लगा देता हू

सोनल अपने एड़ियो को उचका कर अपने गाड़ के पाटो को सख्त कर लेती है और मै उस्क्क जान्घो पर अपने चेहरा घुमाता हू और जल्द ही वापस सोनल अपने गाड़ को ढिला कर देती है ।

इस बार मै दोनो हाथो से सोनल के मुलायाम गुलगले गाड़ के पाटो को फैला कर अपनी जीभ को नुकिला कर सिधा उसके सुराख को छूने लगता हू जिस्से सोनल और अकड जाती है और अपने जांघो को और खोलकर चुतड को मेरे नथनो पे रगड़ने लगती है ।

मै अब लपालप जीभ घुमाते हुए उस्के गाड़ के सास लेते छेद पर जीभ चलाते हुए उसकी चुत के रिस्ते निचले हिस्से को चाटने लगता हू और अपनी चुत के नीचले हिस्सो पर मेरे जीभ का स्पर्श पाकर सोनल अपनी गाड़ उचका अपनी जांघो को और ज्यदा खोल देती है जिससे मेरे जीभ उसकी गर्म चुत मे घुस जाती है और सोनल गनगना जाती है ।

मै वापस खड़ा होके सोनल के कान मे बोलता हू - दीदी चलो ना 69 करते है

सोनल एक मादक भरे मुस्कान मे सिहर का हा मे गरदन हिला देती है और मै खुशी से उसके गाड़ के पाट को सहला कर फर्श पर लोट जात हू और सोनल अपनी गाड़ मेरे मुह पे रखते हुए 69 की पोजीशन मे आ जाती है ।

मै एक गहरी सास के साथ सोनल की चुत और गाड़ की मादक खुस्बु लेके उसके कूल्हो को थामते हूए गरदन उठा कर अपनी जीभ को सोनल के चुत पर चलाना शुरु कर दिया और वही सोनल मे मेरे लण्ड के चमडी को खिचते हुए अपनी अंदाज मे लण्ड को किसी रन्दी के जैसे चूसने लगी ।

मै लगातार अप्नी जीभ सोनल के चुत औए गाड़ के सुराख पर चलाता और कभी कभी ज्यादा गरदन उचि कर अप्नी जीभ उसकी गरम रिसती चुत मे घुसा कर अन्दर का माल चाट लेता । ऐसा करते समय सोनल अप्नी चुत मेरे मुह और दर देती थी और लण्ड को गले तक ले जाती है जल्द ही मेरा लण्ड उसकी लार से भीग गया और मुझे पूरा मन होने लगा की दीदी की चुत मे अब लण्ड उतार दू उस्के लिये मै लगातार जीभ से सोनल के बुर की खुदाई किये जा रहा था और तभी सोनल ने मेरे मुह पर बैठ कर अच्छे से चुत के दाने को रगड़ते हुए अपनी कमर झटका कर सीसक्ने लगी और जल्द ही मेरे मुह मे उस्का माल टपकने लगा ।

तभी मुझे अपने जांघो के पास एक गरमी सी मह्सूस हुई और सोनल की खुसफुसाहत भी और मै देखने के लिये आगे गरदन ऊचा किया तो सामने निशा खड़ी दिखी कुछ बोलता तब तक वो मेरा लण्ड अपने हाथ मे पकडते हुए अपनी चुत पर सेट कर अपनी गाड़ पे बल दते हुए मेरे लण्ड को अपनी सुखी चुत मे उतार लिया और मेरी चमडी खिचती हुई दर्द भरी आहहह मुझे देते गयी और मै तडप उठा ,,,वही निशा के आखो से आसू छलक प्डे

निशा दर्द से मेरे खडे लण्ड पर जोश मे बैठ तो गयी थी लेकिन उसके कुल्हे और जान्घे दर्द से उभर गये और वो दर्द भरे चेहरे से बोली - आअह्ह्झ मा दीदीईई बहुत दर्द हो रहा है उफ्फ्फ

इधर सोनल झट से मेरे मुह पर से उठी और निशा के बगल मे बैथ के उसकी कमर के नीचले हिस्सो को सहलाने लगी ।

वही निशा मेरे पेट पे हाथ रखे अपनी गाड़ उचका कर धीरे धीरे मेरे लण्ड को दर्द की वजह से छोडना चाह रही थी

सोनल निशा को दुलारते हुए - ब्स ब्स निशा अब नही होगा दर्द,रुक जा बाहर मत निकल

निशा दर्द भरी आवाज मे आसू छलकाती हुई - बहुत जलन हो रहा है दीदी अह्ह्ह

सोनल उसकी पिठ और कमर को सहलाते हुए - धीरे धीरे नीचे जाओ निशा कुछ नही होगा ,,, हा आराम से बिल्कुल

इधर निशा सोनल के कहे अनुसार वापस से मेरे लण्ड पर बैठते हुए अपनी चुत मे उसे निगलने लगी और जब जड तक मेरे लण्ड को ले लिया तो एक गहरी सास लेते हुए खुद के आसू साफ करते हुए हसने लगी ।

सोनल उसके आसूओ से भिगे गाल काटते हुए बोली - देखा कुछ नही हुआ

निशा शर्मा रही थी और सोनल के होठो को चूमते हुए बोली - थैंक यू दिदी ,,,अब क्या करु

सोनल ह्स कर -अब धीरे धीरे उपर नीचे करके अपने ये गाड़ हिला ,,,सोनल निशा के गाड़ को सहलाते हुए बोली

निशा ह्स्ते हुए अपनी गाड़ को हल्का हल्का हिलाना शुरु किया - अह्ह्ह दीदी उम्म्ं गुदगुड़ी हो रही है अन्दर अह्ह्ह उम्म्ंम

सोनल - अब आया ना मज़ा हीही

वही निशा झुक के मेरे उपर लेट गयी और मेरे होठ चुस्ते हुए बोली - आई लव यू राज

मै उसके गाड़ को सहलाते हुए अपनी कमर उचका कर उसके चुत मे लण्ड को पेलेते हुए कहा -आई लव यू टू दीदी

और धीरे धीरे मैने उस्की कमर को थामे स्पीड बढ़ाते हुए सटासट पेलना शुर कर दिया और जल्द ही उसकी चुत ने मेरे लिये जगह बना ली और उसको मजा आने लगा ,,,वही सोनल बैठी हुई कभी मेरे आड़ो को सहलाती तो कभी सोनल के गाड़ के सुराख को चाटती

कुछ समय की जोरदार कसी हुई चुत मे चोदने और पहले भी लण्ड चुस्वाने से जल्द ही मै झड़ने के करीब था

मै जल्दी से खुद को रोका और निशा को उतार दिया

फिर खड़ा होकर मै अपना लण्ड हिलाते हुए बोला दीदी मेरा आने वला है

मेरे झड़ने की बात सुन के दोनो जल्दी जल्दी मेरे कदमो मे आई और जीभ निकाल कर मेरे पिचकारी का इन्तजार करने लगी

मैने भी अपनी एड़ियो को उचका के अपने गाड़ के पाट को सख्त किया और लण्ड के सुपाडे के नीचली नश को आखिरी सास तक रोकते हुए एक लम्बी आह के साथ वीर्य से भरी ब्ड़ी पिचकारी सोनल के मुह पर छोड दी और दुसरी धार के लिये निशा ने अपना मुह आगे किया और मैने अपना लन्द उसके जीभ पर रख कर हिलाया सारा माल उसकी मुह मे भर दिया और बाकी का माल सोनल ने लण्ड को मुह मे भर कर निचोड लिया । फिर एक दुसरे के होठो को चुसते हुए माल की हेरा फेरि करते हुए हसने लगी ।

मै थक कर दीवाल का टेक लगाते हुए बैठ गया और उनकी हसी मे शामिल हो गया ।

जारी रहेगी

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निशा की जोरदार चुदाई के बाद हम सब बैठ कर एक दुसरे को देखे हस रहे थे कि आखिर इसी के लिए कबसे हमने इतना सारा ड्रामा किया और हुआ वही जिसको हम लोग नही करना चाहते थे एक दुसरे के सामने ।

मै हस कर - तो ये आपका का प्लान था दीदी

सोनल हस कर - नही ये निशा का आइडिया था

मै अचरज से - कैसे

सोनल हस कर - मुझे तेरे और निशा के बारे मे सब पता है भाई,,वो मुझसे नही छिपाती कुछ

मै चौक कर निशा की ओर देखा तो वो शर्मा रही थी

मै थोडा संकोची होकर - तो क्या ये हम दोनो के भी ....

सोनल ह्स्ते हुए हा मे इशारे करती है ।

मै - धत्त साला मतलब तुम दोनो मिल कर मेरा ही काट रहे थे तबसे और यहा मुझे लग रहा था कि मै और आप मिल कर निशा को लपेट रहे है ।

मेरी बात सुन कर दोनो हसने लगी ।

सोनल - अरे भाई निशा बहुत परेशान थी और काफी समय से तू उसकी तरफ ध्यान नही देता था तो हार मान कर उसने अपने दिल की बात मुझसे शेयर की और फिर मै सही समय का इन्तजार किया और आज मौका था तो मैने मार दिया बाजी हिहिहिजिह

मै निशा से - सॉरी दीदी वो नये घर के काम मे कुछ ज्यादा ही बिज़ी हो गया था । अब आगे से ऐसा नही होगा

इत्ने मे निशा उठ कर आई और मेरे होठो को चूम कर बोली - कोई बात नही भाई आई लव यू ना

फिर हमने थोडी बहुत बाते की और मैने उनदोनो को समझाया कि ये बात अब किसी चौथे तक ना जाये । उन्होने भी इस बात का भरोसा मुझे दिया और फिर हम सब ने कपडे पहने और बाल्किनी मे गये । वहा मैने अपना टीशर्ट पहना और मोबाईल उठाया तो देखा 4.30 बज गये है ।

फिर हम सब बाल्किनी का दरवाजा खोल कर वापस हाल मे गये तो वहा कोई नही था ।

सब कमरे मे बाहर से चटखनि लगी थी

फिर निशा और सोनल एक बेडरूम खोलकर अन्दर सोने चले गये और फिर मै वही सोफे पर बैठ कर अपना मोबाईल चेक किया और चंदू के पास फोन लगा दिया ।

फोन पर

मै - और बेटा क्या हो रहा है

चंदू - क्या यार आया नही न तू

मै चंदू के इतने अच्छे शब्दो के बातो से चौक गया कि इसको क्या हुआ जो गाली नही बक रहा है

मै - अभी आ रहा हू यार और पंडाल कब तक शुरु होगा

चंदू - शाम 6 बजे से होगा जल्दी आ , ले मा बात करेगी

( ओह तभी ये संस्कारी बना है साला , घर पर है मतलब)

मै - चल दे

रजनी - हैलो हा बाबू

मै - हैप्पी होली दीदी

रजनी - हहा तुझको भी बाबू

रजनी - कब आ रहा है, इस साल नही खायेगा क्या मेरे हाथ के बने गुलगुले हा ,, और आता भी नही है आजकल ,, भूल गया मुझे ना

मै हस कर - सॉरी दिदी , अभी आ रहा हूँ वो नये घर पर हू ना

रज्नी - हा हा वो चंदू बताया मुझे

मै - चलो ठीक है अभी मिलता हू आपसे

फिर मै उठा और नीचे हाल गया जहा मा, चाची और विमला बैठी बाते कर रही थी ।

फिर मै गेस्ट रूम मे गया जहा चाचा राहुल और अनुज सोये थे।

फिर वही टेबल से अपना पर्स लिया और हाल मे आया

मै - मा मै मार्केट वाले घर जा रहा हू रजनी दीदी बुलायी है ।

मा - अच्छा सुन तेरे पास पैसे है क्या ,

मै अचरज से - हा क्यू

मा - वो बेटा इस साल नये घर की तैयारी मे कुछ स्पैशल बना नही पाई तो ऐसा करना कल्लु भैया के यहा से एक किलो गुलाब जामुन लेते जाना रजनी के यहा

मै हस कर - ठीक है मा और कुछ

मा - नही बेटा और नही कुछ, बाकी फोन चालू रखना अगर किचन के लिए कुछ चाहिये होगा तो मै फोन करूंगी तो तू उस वाले घर से ही लेते आना

मै - ठीक है

मा - हा सुन

मै - अब क्या

मा - आराम से जाना और फिर से रंग खेल कर मत आना ध्यान देना ,,ये नये कपडे है

मै ह्स्ते हुए - ठीक है मेरी मा अभी जाने दो

फिर मै निकल गया घर से और 15 मिंट की देरी मे ही अपने मार्केट वाले मुहल्ले में पहुच गया ।

जहा सब कुछ सनासन बंद पडा था ।सारी दुकाने बंद थी सब कुछ खाली पडा था ।गलिया लाल हरे रंग और अबिरो की रंगोली से पटी हुई थी ।

किसी किसी घर मे कौतूहल की आवाजे आ रही थी ,, सनासन गली मे कही किसी घर की छ्ट से डीजे की आवाजे अभी भी थी लेकिन फिर भी एक खामोशी थी ।

कोई चहल पहल नही थी कही भी

ये तो हर साल का नजारा होता था

फिर मै टहलते अपने दुकान के सामने आया जिसके दरवाजे पर ताला लगा हुआ था और मेरे दुकान की शटर पर भी लाल रंग पिचकारी चली हुई थी ।

फिर मुझे ध्यान आया की मा ने गुलाबजामुन लेने को बोले थे तो मै चंदू के घर से आगे चाचा की दुकान के पास के मोड पर कल्लु काका के यहा से ताजे गुलाब जामुन पैक करवा कर वापस चंदू के घर की तरफ आ गया ।

जहा बरामदे मे ताजे रंग फैले हुई थे ।

मै बडे आराम से पाव रखते हुए अन्दर गया औए मुझे उपर से ही कुछ आवाजे आई तो मै सीधा सीढि से उपर चला गया।

जहा हाल मे चंदू खाना खा रहा था और वो अभी न्हाया भी नही था ।

मै वही टेबल पर मीठाई रख कर सोफे पर बैठते हुए - अरे दीदी और बाकी सब कहा है

चंदू खाते हुए - वो मम्मी किचन मे है और दीदी बगल के मुहल्ले मे अपने सहेलियो के यहा गयी है और पापा घूम रहे होगे कही ।

मै - और अभी तक तू नहया नही इतने मे रज्नी किचन से बाहर आई

ओहो क्या कयामत थी

रजनी इस समय ब्लाउज पेटिकोट मे थी और उसकी हैवी चुचिया ऐसे फुली हुई थी मानो 2 2 किलो के खरबजे हो उपर से लाल नीले रंग से पूरी तरह उनकी गरदन चुचीया और कमर चख्टी हुई थी ।। हालाकि हाथ मुह साफ थे थोडे

रजनी खुश होते हुए - अरे बाबू आ गया तू

मै - हा दीदी ये लो मम्मी ने भिजवाय है

मै गुलाब जामुन की थैली रज्नी को देने के लिए खड़ा हुआ

उफ्फ्फ क्या मस्त कसी हुई चुचिया कैद थी ब्लाउज मे और मुझे अपने चुचे घुरते देख रजनी - तू तो बड़ा साफ साफ है रे ,,,होली नही खेली क्या तुने

मै हस कर - नही नही दीदी मैने भी खेली ,,,लेकिन शायद आपके जितना नही मस्ती कर पाया हू

मै रज्नी के उभारो को देख कर थूक गटकते हुए बोला

रजनी ह्स्ते हुए - अरे नही रे मैने भी ज्यादा नही खेला था वो तो अभी थोडी देर पहले बगल के मुहल्ले की औरते आई थी वही वापस से मुझे नीचे बुला कर नहला दी ।

फिर ये बोल कर रजनी वापस किचन मे जाने लगी तो उनकी मतकती गाड़ देख कर मेरा लण्ड खड़ा होने लगा ।

वही चंदू मेरी तडप देख कर हस रहा था ।

मै झट से चंदू के पास जाकर - अबे साले कबसे घर मे अकेला है चोदा की नही दीदी को

चंदू हस कर - सुबह से दो बार पेला है भाई ,,, अभी भी मन बहुत है

मै - तो साले मुझे भी तो दिला ना कुछ कर कबतक मै हिला के काम चलाउन्गा

चंदू - यार पता नही मा मानेगी की नही और कही गुस्सा हो गयी तो मेरा भी तेरे जैसा हाल हो जायेगा

हम इधर खुसफुसा रहे थे कि इतने मे रजनी चाय पकोड़े लेके आई और मुझे देके बोली - मै नहाने जा रही हू , राज तुझे लेना होगा इससे बोल देना

मै हस कर - मै तो कब से बोल रहा हू दीदी ये तो देना ही नही चाहता मुझे

मेरी बात सुन कर चंदू की फट गयी और वो आंखे फाडे मुझे देखने लगा

रज्नी - क्यू चंदू दे दे ना जो माग रहा है ,,,तु तो हमेशा से उसको अपना सब बाटता आया है ,,, अब क्यू मना कर रहा है

चंदू - लेकिन मा कैसे मै ,,,

मै ह्स कर - देखा दीदी ऐसे ही मना कर रहा है कबसे

रजनी - तू दे रहा है कि नही उसको की लगाऊ आज ही के दिन ,,,

मै हस रहा था

चंदू - क्या चाहिये बोल ना अब

मै हस कर - तेरा मोबाइल और क्या हिहिहिही

रजनी - धत्त तू भी ना , चल मै जा रही हू नहाने

मै रजनी से मस्ती भरे मूड मे - ठीक है चलो

रज्नी हस के - क्यू तू नही न्हाया क्या जो फिर से न्हायेगा

मै ह्स कर - अभी आप ही तो बोली चल मै नहाने जा रही

रजनी झेप कर ह्स्ते हुए - धत्त पगलेट वो तो मै ,,, मै जा रही हू

फिर रजनी गाड़ मटकाते हुए कपडे लेके छत पर चली गई और मै उसकी हिलते गाड़ को देख कर लण्ड सहलाने लगा ।

इधर चंदू खाना खतम किया और मै भी अपने चाय पकोड़े खतम कर थोडी देर इधर उधर की मसती भरी बाते की और फिर मुझे पेसाब मह्सूस हुई

मै - यार मुझे पेसाब लगी है मै उपर से आता हू

चंदू - अरे उपर मा नहाने गयी है ना

मै थोडा झिझक कर - अबे तो मूतने जा रहा हू चोदने नही साले

मुझे भडकता देख के चंदू चुप हो गया और मै उठ कर उपर चला आया ।

जहा बारूम के दरवाजे के गेट पर रजनी बिना ब्लाउज के सिर्फ पेटीकोट मे अपनी गाड़ फैलाते बैठी और उसकी नंगी पिठ दिख रही थी ।

वो शायद नहा चूकी थी और अपने कपडे धुल रही थी क्योकि छपाक छपाक की आवाज सुनाई दे रही थी ।

मै धीरे धीरे रज्नी के पीछे गया और बोला - दीदी वो मुझे पेसाब करना था

रज्नी मेरी आवाज सुन कर चौकी और झट से पेटिकोट उपर खिच कर अपने चूचे ढक लिये लेकिन तब तक मै सब कुछ देख चुका था ।

रज्नी अचरज के भाव मे - अरे बाबू तू ,,, थोडा रुक जा मै नहा चुकी हू ब्स ये कपडे धुलने है फिर कर लेना

चुकी चंदू के यहा टोइलेट और बाथरूम एक ही कमरे मे थे

मै जानबुझ कर अपने पाव झटकता हुआ अपनी नुनी को सामने से पकड कर बुरा सा मुह बनाते हुए - ओह्ह्ह ठीक है दीदी रुकता हू थोडी देर

रजनी ने जब मेरी हालत देखी तो साडी बटोर कर एक किनारे कर दिया और खुद खडे हो गयी जिस्से उसका गिला पेटिकोट उसकी मोटे खर्बुजे वाली छातीयो से चिपका हुआ दिखा और उसके गहरे रंग की निप्प्ल भी साफ दिख रही थी ।

रजनी - जा कर ले देख रही हू तेरा हाल बुरा है हिहिहिही

शर्म से मुस्कुकर मै झट से अन्दर फिर दीवाल की तरफ मुह और रज्नी की तरफ पिठ करके खड़ा हुआ और अपना जीन्स खोलने लगा

रज्नी पीछे से - अरे क्या कर रहा है ,,,ऐसे करेगा तो सारा दीवाल पर जायेगा और बदबू करेगा ,,,सीधा होकर कर ले मुझसे क्या शर्मा रहा है

मै थोडा झिझिक दिखाते हुए - सीधा हुआ और मेरा फुल खड़ा मोटा लण्ड का साइड लूक रजनी के साम्ने था ।

मैने एक हाथ आगे कर चमडी को पीछे कर सुपाडे को बाहर किया और लण्ड को नीचे झुका कर तेज धार के साथ टोईलेट मे मूतने लगा

तभी रज्नी की आवाज आई - अरे तेरा तो रंग ही नही छुटा है वहा का हहहहह

मै शर्म भरे भाव मे - हा वो चाची ने लगा दिया था और रंग ना छूटने की वजह से खुजली हो रही है

मै रज्नी के सामने अपने हल्के छोटे झाटो को के हिस्से को खुजाते हुए कहा

रजनी हस कर - कोई बात नही चल अभी मै नीचे आती हू तो तुझे तेल दे दूँगी तू लगा लेना

मै मुस्कुरा कर हा मे सर हिलाया और अपना लण्ड झाड़ कर वापस अन्दर डाल कर जीन्स बन्द कर लिया

और फिर वही बगल की टोटी से हाल धुल लिया ।

रजनी - ठीक है तू नीचे बैठ मै नहा कर आ रही हू

मै मुस्करा कर नीचे चला गया जहा चंदू बैठ कर मोबाइल चला रहा था और उसके लोवर मे लण्ड उभरा हुआ था ।

मै उसके बगल मे बैठते हुए - यार तेरी मा की गाड़ बहुत फैली हुई है

चंदू मुझे कनअखियो से देखते हुए मुस्कुरा कर वापस मोबाइल चलाने लगा

मै - क्या तुने अपनी मा की गाड़ भी ली है

चंदू हस कर - क्यू कोई शक है क्या

मै - नही ब्स पुछ रहा हू बे ,,और पंडाल मे कब चलेगा

चंदू बस मा को आजाने दे फिर चल्ते है

मै - साले जाकर तू भी नहा लेना

चंदू - हा यार मै तो भूल ही गया

फिर हमने थोडी देर बाते की और फिर रजनी नहा कर एक मैकसी पहने वापस आई छत से

चंदू जल्दी से तौलिया लिया - मै नहा कर आ रहा हू यही बैठ थोडी देर

मै - ठीक है जल्दी आना

इधर चंदू नहाने छत पर गया

और रजनी बेडरूम मे चली गयी और मै उसके पीछे पीछे कमरे मे चला गया जिस्का पता रज्नी को नही था ।

और वो कमरे मे जाकर झट से अपनी मैक्सि निकाल दी और सिर्फ पेटिकोट मे आ गई

मै वापस उसको पीछे से आधी नंगी देख कर उत्तेजित होने लगा

तभी रजनी घूमी और उसकी मोटी भारी भरकम चुचिया मेरे सामने आ गयी और मै एक टक उसके डार्क और कडक मोटे दाने वाले निप्प्ल को देख्ते हुए थूक गटकने लगा ।

यहा रज्नी की नजर मुझ पर पड़ी तो झट से अपनी चुचियो को हाथो से छिपाते हुए घूम गयी

रजनी हड़बड़ी मे - तू तू क्या कर रहा है बाबू

मै शर्म भरे लहजे मे - दीदी वो मै तेल के लिए आया था ,, वो आप उपर बोली थी ना

रजनी थोडा शांत होकर - ओह्ह्ह देख वहा टेबल पर रखा है लेले

मै टेबल से नारियल के तेल की शीसी लेके बाहर जाने लगा

रजनी मुझे रोकते हुए - अरे कहा लेके जा रहा है ,,, मुझे भी लगाना है ना

मै शर्माने के अंदाज मे मुस्कुरा कर - वो मै बाहर लगा लेता ना

रजनी मुस्कुरा कर - बक्क पगलेट यही लगा ले ,

तू मेरे लिए चंदू जैसा ही है रे

फिर मै ठीक है बोल कर दरवाजा बंद कर दिया और एक सीसी लेके दरवाजे के कोने गया और जीन्स खोल कर लण्ड पर तेल गिराया और हाथ से अच्छे से मालिश करने लगा ।

रजनी ह्स्ते हुए - अच्छे से लगा लेना और फिर मुझे देना

फिर मै गरदन घुमा कर उसको तेल थमाते हुए - हा दीदी लेलो और एक तौलिया देना

रजनी तेल की शिसी पकडते हुए अचरज के भाव मे - अब तौलिया क्या करेगा

मै शर्मा कर मुस्कुराते हुए - वो दीदी तेल ज्यादा ही गया है ,,जीन्स मे दाग लग जायेगा

रज्नी मेरी बात की जांच के लिए मेरे बगल मे आई और देखा की मेरे लण्ड पर खुब सारा तेल चखटा हुआ है और सुपाडा चमक रहा है

रजनी के आते ही मै नजर नीचे कर लिया

रजनी हस कर - धत्त इतना क्यू लगा लिया पागल इतने मे तो मेरे पुरे बदन पर लग जाता हिहिहिही

मै परेशान होने के भाव ने - अब क्या करु दीदी

रजनी हस कर - रुक तू ऐसे रह मै इसका तेल निकाल कर अपने उपर लगा लुंगी

मै चौक कर रज्नी के तरफ देखने लगा

रज्नी हस कर - ऐसे क्या देख रहा है वो कोई गंदी जगह थोडी है वो शशीर का हिस्सा है ,,,साफ करता है ना रोज उसको

मै हा मे सर हिलाते हुए रज्नी के पेटिकोट मे बाँधे हुए चुचो के खड़े निप्प्ल को देखने लगा और उसकी गोरी जान्घे और भी सेक्सी लग रही थी ।

तभी रज्नी ने मेरे हाथ से जीन्स को छुड़ा कर घुटनो तक कर दिया और टीशर्ट चढा कर उपर खोस दिया और फिर मेरे लण्ड के झान्टो वाले हिस्से पर हाथ फेरते हुए उस्का तेल हाथ मे चपेड़ते हुए पहने अपने दोनो हाथो और फिर गरदन पर लगा लिया

रज्नी - हे भगवान कितना तेल गिरा लिया है तुने और नीचे भी चू रहा है

यहा मै रजनी के हरकत और उसके स्पर्श से और ज्यादा कामुकता से भर गया और मेरे लण्ड मे कसाव बढने लगा ।

जिसका आभास रजनी को भी था और वो मुस्कुरा कर अपने पेटिकोट खोलते हुए कमर पर बान्ध लेती है और उसकी एक बार फिर उसकी मोटी मोटी खर्बुजे जैसी चुचिया खुल कर मेरे सामने आ गयी ।

मै थूक गटकते हुए उसके गोरे मुलायम भारी चुचो को देख के सिहर गया और वो झुक कर इस बार मेरे लण्ड की चमडी मे लगे तेल को निचोड़ कर आगे की तरफ लेके आई और दोनो हाथो मे अच्छे से चभोड़ कर अपने दोनो निप्प्ल और फिर पुरे चूचो पर मल कर तेल लगाने लगी

वहि मेरी हालात और खराब होने लगी मानो मै अब झड़ा तब झड़ा

मै शर्मा कर और आह भरी आवाज मे - हो गया दीदी

मुझे तडपता देख रजनी अपने कांख मे तेल लगाते हुए बोली - क्या हुआ बाबू

मै नजरे नीची कर - वो दीदी इसको बंद करना है ना

रजनी हस कर - ब्स रुक जा थोडा सा तेल और है

फिर रजनी झुक कर एक हाथ से मुठ्ठि मे मेरे सुपाडे के हिस्से मे लगे तेल को निचोड जिससे मेरी आह निकल गयी

मै सिस्क कर - अह्ह्ह दीदी आराम से निकल जायेगा

रजनी हस कर हैरत भरे लहजे मे हाथ मे लिये तेल को अपनी कमर और नाभि मे लगाती हुई - क्या निकल जायेगा छोटे

मै शर्मा कर - कुछ नही दीदी

रजनी हस्ते हुए - अब मुझसे ही छिपायेगा हा ,,, तेरे उम्र की मेरी औलाद है समझा और मुझे बोल रहा है कूछ नही हिहिहिही

मै शर्मा कर - वो आपने यहा छुआ ना तो ऐसा लगा कि कही मेरा वो ना निकल जाये

रजनी हस कर - इतना जल्दी निकल जाता है क्या तेरा

मै रजनी से ऐसे किसी सवाल की उम्मीद मे नही था

मै - नही वो पहली बार किसी ने छुआ ना तो

और मुह फेर कर हसने लगा

लेकिन इस समय मै पूरी तरह से उत्तेजीत हो गया था और लग रहा था कि रज्नी का एक भी स्पर्श मुझे झड़ा देता और हुआ भी वही

रजनी हस्ती हुई - धत्त पागल कही का

और रजनी ने वापस एक बार फिर मेरे लंड को जड़ से निचोड कर सुपाडे तक लाई और सुपाडे को मुठ्ठि मे भर से हथेली से रगड़ कर तेल च्भोड़ने लगी कि तभी मेरी पिचकारी छूट गयी और रजनी का हाथ मेरे गर्म चिपचिप वीर्य से भर गया

मै - ओह्ह दीदी निकल गया अह्ह्ह

रजनी को जैसे अहसास हुआ की मै उसके हाथ मे झड़ रहा हू वो झट से नीचे बैठ कर दोनो हाथो से मेरे बीर्य को रोपने लगी कही फर्श ना गन्दा हो जाये

रजनी तेज स्वर मे ह्सते हुए - यएईई गन्दा लड़का क्या किया ये हिहिहिही पागल कही का ,,, अभी बोल रहा था और निकाल भी दिया छीईई

मै खुद को थोडा रिलैक्स कर हसते हुए - सॉरी दीदी मैने बोला था आपको

रजनी ह्स कर - कोई बात नही लेकिन इतना सारा कैसे निकला

रजनी दोनो हाथो को कटोरी बना कर रोपे हुए बीर्य को मुझे दिखाते हुए बोली

मै शर्म कर - पता नही दीदी मेरा ऐसे ही निकल जाता है कभी कभी

रजनी हैरत से - कभी कभी मतलब ,,,

मै शर्मा कर - वो दीदी रात मे कभी अपने आप निकल जाता है ना वैसे वाला

रजनी इस समय खुले चुचो मे घुटनो के बल हाथो मे मेरे वीर्य को लिये खड़ी थी ।

तभी मुझे लगा की मेरा कुछ बंद और गिरेगा

मै अपने लण्ड मे कसाव लाते हुए - दीदी लग रहा है और गिरेगा

रजनी चौक कर - अब उसे कहा पक्डू

इधर मै कुछ सलाह देता उससे पहले ही रजनी के मेरे सुपाडे के छेद से रिस्ते ड्रॉप को चाट लिया जिससे मै सिहर गया

और जानबुझ कर चौकने के भाव मे - अरे अरे दीदी ये क्या किया वो गन्दा होता है

रजनी हस के - धत्त पागल ऐसा नही है ये बहुत ताकत और फायदे की चिज है इसको पीने से लडकिया खुबसुरत होती है और चेहरे पर कोई दाग दाने नही होते

मै हस कर - तो इस लिये आपने इसको हाथ मे भर है

रजनी थोडा सा शर्म और ह्स्ते हुए - हा नही मतलब ,,अब मिल गया तो बेकार थोडी ना करूंगी

मै अजीब सा मुह बना कर - कैसा लगता होगा टेस्ट इसका दीदी

रजनी खड़ा हुई सुरुकते हुए मेरे सामने मेरा बीर्य पी गयी और बचा खुचा अच्छे से चाट गयी ।

मै उनकी हरकत से फिर से उत्तेजित होने लगा

मै फिर से - बताओ ना कैसा लगता है इसका टेस्ट

रजनी एक शरारती मुस्कान से - बताउन्गी लेकिन वादा कर किसी को कहेगा नही

मै मुस्कुराकर उत्साही भाव मे - जी दीदी ठीक है

फिर रजनी ने झट से अपनी पेटिकोट मे हाथ डाला और थोडा हरकत की और फिर अपनी चुत के पानी से सनी एक ऊँगली मेरे पास लाकर बोली - जीभ निकाल

मै अजीब सा मुह बना के पहले रजनी की ऊँगली को सुधा जिसमे से उसके चुत के पानी की कामुक खुशबू आई - दीदी ये क्या है

रज्नी हस कर - मूह खोल तू ब्स

मै जानबुझ के अपने चेहरे के भाव को अजीब करके जीभ निकाल कर उनकी ऊँगली को चाटा और फिर एक मुस्कान के साथ अच्छे से उनकी ऊँगली को चुस लिया

रजनी हस कर - क्यू पसंद आया स्वाद हिहिहिहिही

मै अपनी जीभ को मुह मे घुमाते हुए एक नये स्वाद की अनुभूति के साथ मुस्कुरा कर बोला - हा दीदी ,,,,ये तो सच मे बहुत अच्छा है ।

रज्नी थोडी हिचकी और बोली - और चाहिये हमम

मै थूक गटक उसकी आँखो मे देखते हुए हा मे गरदन हिलाया
 
रजनी मुस्कुराई और एक नजर बंद दरवाजे पर देखा और मुझे पकड के बिस्तर तक ले आई और बोली - देख मै तुझे चखा दूँगी लेकिन किसी को बोलना मत और जब भी तेरा मन होगा तू मुझसे मिलने आ जाना

मै शर्मा कर हा मे सर हिलाया

रजनी हस कर - अभी भी शर्मा रहा है पगला कही का हिहिही

मै - दीदी जल्दी करना होगा कही चंदू ना आ जाये

रजनी हस कर - उसकी छोड तू तैयार है ना , मै जो कहूँगी वो करना पडेगा तभी तुझे सही से स्वाद मिल पायेगा

मै गरदनहिला कर - जी दीदी

फिर रजनी ने झट से अपना पेटिकोट कमर तक उथाया और पैर लटका कर बेड पे लेट गयी

मै थूक गटकते हुए मन मे - वॉव कितनी चिकनी चुत है यार एक भी बाल नही है और देखो नीचे की तरफ कितनी चिपछिपी हुई है आज तो तेरे किस्मत खुले है बेटा एक ही दिन मे 3 नये चुत चाटने को मिला है

मै संकोची भाव से ब्स रजनी की गदराई जांघ और चुत के चिकने हिस्से को देख कर और उत्तेजीत हो रहा था

रजनी गर्दन उठा कर - अब देख क्या रहा है आ चाट ले जल्दी कर

मै थूक गटक कर बेड के नीचे रजनी के जांघो के बीच गया और उसकी जांघो को सह्लाते हुए उसके पैर अपने कन्धे पर रख कर उसकी चुत की तरफ झुका और मुझे एक ताज़े पानी से लबालब चुत की मादक गन्ध आई और मदहोश होकर मै जीभ निकाल कर चुत के नीचले हिस्से से उपर से दाने तक कुल्फी के जैसे चाट लिया जिस्से रजनी गनगना गयी और उसकी सांसे तेज हुई

रजनी के चुत का स्वाद अद्भूत था और मै जानता था कि उसको चुत चटवाना कितना पसंद है कि अगर मै उसके मुह पर बोल देता तो वो तुरंत चुत मेरे सामने खोल देती

रजनी क्समसाहट भरे स्वर मे - अह्ह्ह बाबू चाट ले ना क्या सोच रहा है

रजनी की बात सुन कर मै वापस अपने नथूनो को उसकी चुत मे रगड़ कर उसके चुत मे जीभ घुसा कर नचाने लगा जिससे रजनी अकड गयी और मै जीभ को उपर की तरफ ले जाकर तेजी से उसके दाने पर घुमाने लगा

जिस्से रजनी ने अपनी गाड़ पटकनी चालू कर दी

मै उसको जांघो को थाम कर अपने उपर चढ़ाते हुए उसकी चुत मे जीभ से पेलना शुरु कर दिया और बिच बिच मे चुत के दाने और चमडी को मुह मे लेके चुब्ला लेता जिस्से रजनी और भी ज्यादा खुद को झटकने लगी

और यहा मेरा लण्ड पूरी तरह से तन चुका था और मुझे इससे अच्छा मौका नही मिलता

इस लिये मैने एक नजर रज्नी की ओर देखा तो वो आंखे बंद किये मदहोश है और खुद को बडे आराम से खड़ा किया इस दौरान मै लागातार उसकी चुत मे ऊँगली पेले हुए था

और फिर अपनी पोजिसन बनाते हुए अपने लण्ड को धीरे से उसकी चुत के पास ले गया और सुपाड़े को खोल कर उसके भोस्दे को फैलाते हुए गप्प से लण्ड को पूरा का पूरा उसकी गीली चुत मे एक साथ उतार दिया

जिस्से रजनी की आंखे फट कर बाहर आ गई और वो अपने पैर झटकने लगी

रजनी गुस्से मे - कमिने ये क्या कर रहा है निकाल आह्ह्ह मा बहुत मोटा उफ्फ्फ अह्ह्ह निकाल दे कुत्ते उसे हे राम

मै रजनी चुत मे धक्के लगाते हुए - करने दो ना दिदी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है ,,मै किसी को नही कहूंगा प्लीज

रजनी मेरे रेक़ुएस्त से थोडी शांत हुई और लण्ड को निचोड़ते हुए अपनी कमर को अच्छे से सेट करते हुए बोली - अह्ह्ह बाबू तू भाई है ना रे मेरा अह्ह्ह उफ्फ्फ आराम से हा ऐसे ही अह्ह्ह

मै रजनी को शांत होता देख अपने हाथ आगे ले जाकर उसके मोटे मोटे फैले हुए चुचो को थामते हुए कहा- आह्ह दीदी आपकी चुचिया कितनी ब्ड़ी है

फिर उसकी जांघो को खोल कर उसके उपर चढ़ कर चोदते हुए उसकी चुचियो को मिजने और चूसने लगा

रजनी अब और भी ज्यदा सिस्किया लेने लगी और खुद कमर उचका कर लण्ड लेने लगी - अह्ह्ह बाबू अब रुक क्यू रहा है पेल दे ना मुझे अह्ह्ह ओह्ह्ह

मै उसको चुचो के मुलायम निप्प्ल को चुस्ते हुए एक करारा धक्का उसकी चुत मे पेला

रजनी - अह्ह्ह बाबू उम्म्ंम बड़ा जोर का चोद्ता है रे आह्ह और मार ऐसे ही हा हा ऐसे ही उफ्फ्फ मा बहुत मज़ा रहा है उम्म्ंम्म्ं अह्ह्ह्ह

रजनी मेरे बालो को सह्लाते हुए - तुझे मेरे बहुत पसंद है ना बाबू ,, पी ले मेरे लाल आह्ह और चुस और खुब जोर से पेल मुझे बहुत अह्ह्ह्ह बहुत मोटा लण्ड है रे तेरा अह्ह्ह उह्ह्ह ब्स ऐसे ही

मै वापस घुटनो के बल खड़ा हुआ और रज्नी के पैर को कन्धे पर चढा कर तेजी से थपथप थप थप थप थप थप थप थप अपनी जांघो और रजनी की जांघो से लड़ाते हुए चोडने लगा

रजनी - ओह्ह्ह माई आह्ह उह्ह्ह और तेज और तीईईईईएज्ज्ज्ज्ज उफ्फ्च मा रुउउउक्क्क नाआआह्ह मत अह्ह्ह और और आह्ह आह्ह मा मेरा आया

रजनी ऐसे ही सिसकिया लेते हुए तेजी से कमर उचकाते हुए झडने लगी और फिर मेरे लण्ड कस कर निचोडने लगी और जल्द ही मै झडने के करीब आ गया

और झट से लण्ड निकाल के उसके मुह के पास गया और घुटने के बल बैठ कर अपना लन्ड़ उसके मुह के पास हिलाने लगा

मै कापते हुए स्वर मे -अह्ह्ह दीदी मेरा निकलेगा

रजनी झट से मेरे आड़ो को सहलाते हुए लण्ड कोमुह मे भर ली और चूसना सुरु कर दिया

और कुछ ही पलो मे मै कापने लगा और मेरे लण्ड की नशे मुझे झटके देने लगी

मै रजनी का मुह पकड कर अपने चुतड सख्त करते हुए लण्ड को उसके गले तक उतार कर झटके खाने लगा

फिर जल्द ही उससे अलग होकर हाफने लगा और वो भी खास्ते हुए उठ कर बैठ गयी और अच्छे से खुद को साफ किया ।

मै वही बेड पर बैठे बैठे उसकी जांघो को सहलाते हुए उसे देख रहा था ।

रजनी एक संतुष्टी भरे मुस्कुराहट से - हो गया ना तेरा, कर ली ना मन की अपने की

मै उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा देख रहा था और वो खडे होकर अपना पेटिकोट नीचे की और पेटिकोट से उपर से ही हाथ लगा कर अपनी फुली हुई चुत की चिपचीपाहत को साफ कर ब्लाउज पहनने लगी ।

रजनी - अब क्या देख रहा है बदमाश जा कपडे पहन ले

मै खड़ा हुआ और पैरो मे पड़ी जीन्स को पहना और फिर सीसे मे अपने बाल सही किये

मै थोडा शर्मा के - मै बाहर जाऊ दीदी

रजनी मेरे पास आई और मेरे माथे को चूम कर बोली - ठीक है जा ,,लेकिन किसी को कुछ बोलना नही

मै हा मे सर हिलाया और बोला - फिर अगर मन किया वो टेस्ट लेने का तो

रजनी मुस्कुरा कर - तेरा जब मन करे आ जाना बाबू ,,वैसे तू बहुत जोर की चुस्ता है मुझे बहुत मज़ा आया

मै रजनी के खुल कर बोलने पर हस कर उसकी गाड़ को दबोचने लगा और बोला - अगली इसको भी चखा देना दीदी प्लीज

रजनी ह्स कर मुझे अपने आप से चिपका ली - ठीक है बाबू कर लेना ,,अभी जा चंदू आता होगा । मै भी तैयार हो लू

फिर मै हाल मे आ गया और थोडी देर बाद चंदू आया नहा कर और फिर वो तैयार हुआ फिर हम दोनो निकल गये पंडाल के तरफ

देखते है दोस्तो आगे क्या होने वाला है और ये होली कितनी लम्बी और कामुक होने वाली है ।

...............................
 
रजनी की मस्त चुदाई के बाद मै चंदू को लिवा के पन्डाल के लिए निकल गया ।

हमारे चमनपूरा मे नगर के थोडा सा पूर्व दिशा मे लग कर एक पूराना और भव्य शिवमंदिर था । जहा आये दिन त्योहारो पर नये नये प्रोग्राम का आयोजन नगर के बडे सेठो द्वारा बनी एक समिति की ओर से होता था । जिसमे त्योहारो से पहले ही पुरे नगर और आस पास के गाव और नगर मे घूम घूम कर समिति के कार्यकर्ता चंदा लेने जाते थे ।

हर साल होली पर मंदिर पीछे के मैदान मे एक बड़ा पंडाल लगाया जाता था । जहा प्रसाद के तौर पर भांग वाली शर्बत और लड्डु मिलते थे । हा लेकिन औरतो और बच्चो के मंदिर मे भोग लगाये सादे प्रसाद ही दिये जाते थे ।

पंडाल मे एक बड़ा मंच होता था जिसपे समिति के तरफ से बुलाये कलाकारो और कुछ क्षेत्रीय गाव के गवैये नचैये अपने कला का प्रदर्शन करते थे । हर साल जवाबी बिरहा का जोरदर समर्थन होता और कलाकारो को उन्के जोगिरा पर खुब पैसे मिलते थे ।

मै और चंदू भी मस्ती मे पांडाल की तरफ जाने लगे और वहा के स्पीकर की शिव आरती आवाज हमारे कानो पर आ गयी थी

मन्दिर मे शिव की संध्या आरती के बाद ही सारे कार्यक्रम का शुभ आरम्भ होता था और मंच पर आये सभी कलाकार मे जो पहले आता वो भी अपनी रचना भोलेनाथ को ही समर्पित रखता था ।

पान्दाल मे कोई धक्का मुक्की ना हो और औरतो बच्चो का विशेष ध्यान रखते हुए उनके बैठने की व्यव्स्था अलग ही की जाती थी ।

समिति के कार्यकर्ता सभी ओर अपनी जिम्मेदारियो को बखूबी निभाते भी थे तभी तो हमारे चमनपूरा का पान्डाल पुरे जिले मे बहुत ही प्रसिद्द हो गया था जिसकी न्यूज़ चैनलो पर रिपोर्टिंग तक की जाती थी ।

खैर हम दोनो मसती मे झूमते हुए पान्डाल तक गये जहा धीरे धीरे भीड़ होने लगी थी ।

एक तरफ स्टॉल लगा कर औरतो बचचो को और एक तरफ मर्दो के लिये

प्रसाद बटने लगा था हम दोनो ने भी सादे प्रसाद लिये और पान्डाल मे एक जगह देख कर दरी पर बैठ गये और हमारी नजर समिति के मंच पर लगे बडे बैनर पर गयी

जहा हिन्दी भोजपुरी क्षेत्र के सुपरहिट और काफी चर्चित कलाकार रम्पत हरामी और उनकी रन्गिली साथी रानी बाला की तस्वीर लगी थी

चंदू उछल कर - अबे ये तो रम्पतवा है बे यार आज तो मजा ही आ जायेगा

मै भी खुशी से झूम गया कि इतना बड़ा कलाकार आज हमारे चमनपूरा मे आया था ।

तभी शायद यहा की भीड़ बहुत ज्यादा थी ।

थोडी ही देर मे एक स्थानीय गायक ने शिव पार्वती की होली पर एक कविता पढी और फिर मंच संचालक ने एक जोरदार तालियो की अपील करते हुए रम्पत हरामी और रानी बाला का स्वागत किया ।

पुरे पान्दाल मे तालिया और सीटीया बजने लगी लोग तेज आवाज मे हल्ला करने लगे

हम भी मस्ती मे आकर अपनी उंगली को ओठ पर उपर नीचे कर उलूलुलुलुलू करने लगे और खुब हसे ।

तभी मन्च से रम्पत की आवाज आई

रम्पत एक अस्लील अंदाज मे - बस बस शांत हो जाइए दोस्तो ,,, अभी से थको मत रात बाकी है हेहेहेहे

एक बार फिर जोर के हल्लो और सिटीयो के बाद माहोल शांत हुआ

रानी - नमस्कार हारामी जी

रम्पत रानी बाला से - हाय्य्य्य्य हाय्य्य हाय्य्य नमसकार धमस्कार सम्सकार

फिर ढोल मजिरे का ताल बजता है

मन्च पर रम्पत अपनी रन्गिली टोपी रानी बाला की तरफ घुमा कर उसको पुचकारता है - सीईईई चुचू चुउउऊऊ

रानी बाला - ऐ लडके , क्या करता है

रम्पत अपनी अस्लील अन्दाज मे होठो को सिकोड़ते हुए रानी को देखकर एक चटकारा लेते हुए नीचे से एक मोटा खीरा रानी को देता है

बैकग्राउंड मे मजीरा ढोल अपनी ताल देते है

रानी मोटे खीरे को घुमाते हुए - इसका क्या काम है

रम्पत अपनी आंख दबाते हुए - बहुत काम की चिज है भौजी हमारे साथ भी और हमारे बाद भी

रानी - तुम अपनी हरकतो से बाज नही आओगे

रम्पत - ओहो भौजी ,,,अच्छा अच्छा छोडो ये बताओ होली पर कुछ खाने को लाई हो

रानी - हा हा ,,ऐसी मस्त चिज लायी हू की खा कर जोश आ जायेगा और फिर से जवान हो जाओगे

रम्पत माइक मे फुसफुसा कर - कही शिलाजीत तो नही है ना

पूरा पान्डाल हसी से ठहाको से भर गया और ढोल मजिरे अपने ताल मे बज उठे

रानी - क्या कहा

रम्पत खुद को स्म्भाल के - उह्ह्हूउऊ अह हम्म्म्म मै कह रहा था क्या लाई हो भौजी जिससे मुझे जोश आ जायेगा

रानी - प्याज के पकोड़े है प्याज के

रम्पत वापस माइक मे फुसफुसा कर - कही जापानी तेल मे नही तल दिया रानी हाय्य्य्य

रानी - हे भगवान कभी तो अच्छी बाते कर लिया करो

रम्पत - ना ना ना , हम अच्छे हो गये तो ये हरामीपन कौन करेगा क्यू भाइयो

पान्डाल एक बार फिर हसी के ठहाके और सिटीयो की आवाज से भर गया।

रमप्त - अच्छा सुनो भौजी कुछ सुनाओ

रानी - क्या सुनोगे

रम्पत - होली पे कुछ सुना दो

रानी - अच्छा होली पे , तो सुनो

पान्डाल मे वापस तालिया गुजती है

रानी अपने बनाये किसी तर्ज पर एक गाना गाती है

नीला पिला हरा गुलाबीईईईई

कालाहह भूराआआ लाआआल

होली के दिन उड़ता देखो

सतरंगी गुलाल

हो चोरी चोरी वो आके ,रंग गया डाल

हो चोरी चोरी वो आके , रंग गया डाल

रम्पत - क्या बात है भौजी ,,, कोई चोरी चोरी रंग डाल गया तुमको पता नही चला

रानी - क्या करु मै तो सोयी हुई थी

रमपत अपनी म्स्तानी अदा मे रानी के करीब मजिरे और ढोल की ताल पर नाचता हूआ रानी के करीब जाकर - एक दफा हमसे भी डलवाओ ,,सालो साल याद रखोगी

रानी - अच्छा जी

रम्पत - तो फिर , चमनपूरा के बाजार का रंग है कितना भी रगड़ लोगी छुड़ा नही पाओगी

फिर गाने की धुन पर वो दोनो अपने स्टाइल मे अपनी कमर ठुमका कर आपस मे पेट सटाते हुए नाचते है

जिसको देख के मन्च के पास भांग वाली शर्बत पीकर बैठे बुजुर्ग मे से दो तीन खडे होकर ही ठुमके लगाने जिनको देख कर जनता और भी सिटिया बजाने लगी।

इधर मन्च पर वापस दोनो अपनी अपनी माइक पर जाते है और रम्पत जोगिरा कहता है -

होली आई होली आई होली आई भौजी

औ देवर के संग होली खेलो देवर है मनमौजी

बोलो सारा रा होली है

रानी ढोल की ताल पे कमर लच्काते हुए - अच्छा जी इस उम्र मे देवर मे बनोगे

रमपति अपनी हरामी वाली हसी मे - हेहेहेहेह भूल रही हो भौजी,,, होली मे बूढ़वा भी देवर बन जाता है

रानी - अच्छा जी

रम्पत वापस से जोगिरा पढते हुए -

होली के दिन होती देखो रंगो की बौछार

अरे होली के दिन होती देखो रंगो की बौछार

भौजी के मै भी रंग लगा लू कस कस के एक बार

बोला हई रे हई रे हई हा

होली है!!!!!!

फिर रम्पत अबीर लेके रानी के गालो पर गुलाल लगाता है ।

यहा हम सब बहुत मस्ती मे शोर मचा कर मजे से बैठे हाथ उठा कर नाच रहे थे ।

फिर थोडी देर मे रम्पत का गाना खतम हुआ और फिर एक दो प्रोग्राम के बाद जवाबी बीरहा चला उसमे भी कुछ अस्लील जोगिरे गाये गये ।

फिर मट्की और मजिरे के ताल पे पास गाव के तीन चार लोगो ने साडी पहन कर लोकगीत पर नृत्य भी किया ।

फिर अंधेरा होने को आया और मैने मोबाइल देखा तो 7:30 बज गये थे और सोनल के 12 मिस्काल आये थे

मै घबडाहट मे चंदू से - अबे चल उठ घर से फोन आ रहा है

चंदू मना करते हुए - अबे यार अभी रुक ना

मै - भोस्डी के साडे सात बज रहा है

चंदू - भाई प्लीज एक लास्ट ना

मै - ठीक है तू बैठ मुझे समान लेके जाना है चौराहे पर

फिर मै उसको गाली देता हुआ बाहर निकल और मार्केट वाले रास्ते पर जाने लगा कि चंदू दौड़ता हुआ आया

मै - अब क्यू आ गया जा ना वही रह

चंदू - जाने दे तेरे बिना मन नही लगता रे

मै हस कर - भाग साले ,,मेरे बिना दीदी को चोद्ता है ना

फिर हम ऐसे ही मस्ती भरी बाते करते हुए मुहल्ले मे आये और चंदू अपने घर गया ।

मैने वापस सोनल के पास फोन किया तो पता चला कि कुछ राशन के समान लेने थे जो पापा लेके आ गये उसी के लिए मुझे फोन कर रही थी ।

फिर मै उसको घर पहुचने का बोल कर चौराहे की तरफ निकल गया ।

थोडी देर मे टहलते हुए मै चौराहे वाले घर पहुच गया जहा किचन से मस्त कलौजी के मसाले की खुस्बु आ रही थी ।

मै किचन मे घुसा तो देखा कि निशा और सोनल खाना बना रही है । कुकर मे दाल रखा हुआ था

मै - क्या बन रहा है भई

सोनल - आ गया तू ,,, कबसे फोन कर ही थी उठाया क्यू नही

मै - अरे वो मै पान्डाल मे गया था ना हिहिहिही

सोनल चिढ़ कर - हा वही आवारागर्दि कर रहा होगा

मै हस कर वहा से हाल मे आया तो देखा यहा भी किचन का माहौल बना हुआ है

हाल मे मा चाची और पापा मिल कर आटे की गोल बड़ी लोयिया बना रहे थे ।

मुझे समझ मे आ गया कि क्या प्रोग्राम था आज का ।लेकिन एक बात समझ नही आ रही थी कि ये लिट्टीया सेकि कहा जायेगी ।

तभी अनुज और राहुल उपर से कुछ लकड़िया और गोबर के कंडे एक बोरे मे लेके आये और मै मै रास्ते मे ही खड़ा था

अनुज - आह्ह भईया हटो मुझे बाहर लेके जाना है ।

मै उसको डांट कर - कहा लेके जा रहा है ये सब

मेरी आवाज तू कर मा - तू चुप कर बड़ा आया मेरे बच्चे को डांटने ,,,बेटा तू बाहर ले जा कर रख अभी तेरे पापा उसको जलाने की व्यव्स्था कर रहे है ।

मै चुप चाप आकर हाल मे आकर मा के बगल मे बैठ गया और मुस्कुराने लगा

मा मुझे ह्स्ता देख अपनी कोहनी से मुह पे लगाते हुए - दाँत तोड़ दूँगी तेरा ,, कहा था कबसे परेसान थी मै

मै मा के गुस्से की वजह जानता था तो मा को पीछे से पकड कर उन्के कन्धे पर सर लगा कर - बस यही मंदिर पर गया था मा

मा चौक कर एक बार मुझे सूंघते हुए - वो भांग वाली शर्बत तो नही ना पी तुने

मै ह्स कर ना मे सर हिलाया और वापस मा से चिपक गया

मा कसमसा कर - ओहो छोड भई काम करना है ,,, ये लड़का कब बड़ा होगा जी

पापा ह्स्ते हुए - क्या रगिनी तुम भी ,,अब तक वो नही था तो परेशान थी और अब आ गया है तो भगा रही हो ,,,

मै हस कर मा को अपनी तरफ घुमा कर - सच मे मा तुम परेशान थी मेरे लिये आव्व्व्व

मा इतराते हुए मुझे झटक कर- हट तुझे क्या उस्से मै कैसी भी रहू

मै मा के चेहरे पकड कर उसके गाल को चूम लिया - चलो हो गया छुटा अब खुश हो जाओ ना मा

मेरी हरकत से चाची विमला पापा सभी हसने लगे और मा भी ह्स्ते हुए शर्मा गयी

मै उसको पीछे से पकड कर झुलाते हुए - ओह्ह मेरी प्यारी मा ,,आई लव यू औए फिर से उसके गालो को चूम लिया

मा परेशान होकर- भक्क्क मै नही करूंगी कुछ ये मुझे परेशान करने पे तुला है

मै वही बैठे हुए हसने लगा और बाकी सब भी हसने लगे ।

विमला - अरे रागिनी तू भी ना कितना प्यारा बेटा है तेरा जो तुझे इतना प्यार करता है नही तो आज कल के लडके तो अपने दोस्त गर्लफ्रैंड से फुर्सत लेके मा बाप से बात कर ले वही बहुत है

पापा - बिल्कुल सही कह रही है बहन जी

मा मेरी तारिफ सुन के थोडी गौरान्वित होते हुए मेरे माथे को चूम लिया और अपने भारी गुलगुले सीने मे मेरे चेहरे छुपा कर मुझे दुलारते हुए- सच मे मेरा लल्ला सबसे प्यारा है

मै मौका देख कर मा के पेट मे गुदगुड़ी करने लगा

मा ह्स्ते हुए छ्टकने लगी और बोली - हिहिहिहिही छोड दे बद्माश बस कर हिहिहिही पागल कही का

इधर हम सब मस्तिया कर रहे थे कि राहुल आया

राहुल - बडे पापा हमने सारा इन्तेजाम कर दीया बस उसको जलाना है

पापा खडे होकर - हा चलो बेटा चलते है

मा - हा आप अलाव तैयार करिये मै ये लिट्टी लेके आती हू

फिर पापा बाहर गये और थोडी देर मे सारी लोईया तैयार हो गयी ।फिर मै उसको एक बडे परात मे लेके बाहर हाते मे आया । जहा पापा ने अलाव तैयार कर दिया था और कुर्सी लेके बैठे थे

मेरे साथ मा , चाची , विमला भी बाहर आई ।

फिर मा और पापा ने एक एक करके सारी लोयिया आग रखी और फिर अनुज ने सबके लिये अलाव से थोडा दुर वही आस पास कुर्सीया लगायी ।

इस समय रात के साडे आठ बज रहे थे और कोहरे हल्के कोहरे गिर रहे थे जो कि अकसर मार्च महीने के आखिरी दिनो मे गिरते है । जिससे छत की लाईट भी कुछ खास तेज नही थी

सारे लोगो को अलाव की आन्च सबको पसंद आ रही थी और गप्पे लगाये जा रहे थे ।

मा , विमला चाची तीनो ने ही मैकसी पहनी हुई थी और कुरसी पर बैठी हुई थी ।

पापा हाफ चढ़ढे मे थे ।

राहुल और अनुज अलाव के धुए से परेशान हो कर अन्दर चले गये थे ।

वही मै मा के पीछे खडे होकर उसकी हसी ठहाके की बाते सुन रहा था और रह रह कर अपने हाथ

उनके मैक्सि मे डाल कर कंधो और गरदन के हिस्सो पर घुमा कर मालिश करता जिससे मा को बहुत आराम मिल रहा था ।

मा - ओह्ह बेटा बस कर थक जायेगा

मै - कोई नही मा आपको आराम मिला ना

मा हस कर - हा बेटा आ अब बैठ

पापा हस कर - क्या करवा रही हो रागिनी अब अपने बेटे से

मा - मैने कुछ नही कहा ये खुद ही कंंधे और गरदन की मालिश कर रहा था ,,,,लेकिन बहुत आराम मिला सच मे ,,,थैंक यू बेटा

मै मा के गले मे पीछे से हाथ डाल कर उनके गाल मे गाल को सहलाते हुए अपना प्यार जताने लगा।

मा - अब बस भी कर सारा प्यार आज ही करेगा क्या हिहिहिही

विमला - काश मेरा बेटा भी राज जैसा होता,,कितना ख्याल रखता है तेरा

मै विमला की बात सुन कर उसके पास गया औए उसको भी मा के जैसे पीछे खडे होकर उसके गले मे हाथ डाल कर बोला - मै भी तो आपका ही बेटा हू ना मौसी

विमला मेरे गाल दुलारते हुए - हा मेरे लाल

मै वापस खडे होकर विमला की मैकसी मे हाथ डाल कर उसके कन्धे की मसाज करते हुए - रुको मै आपका भी कर देता हू मसाज

विमला मेरे हाथो का स्पर्श पाकर कुर्सी पर पिघलने लगी

और अलाव के धुए मे मै मौका देख कर अपने हाथ मैकसी के अन्दर आगे बढा के विमला की खुली चुचियो को मिजने लगा जिससे विमला सिहर गयी ।

थोडी देर चुचिया सहलाने के बाद मै वापस उसक कन्धे सह्लाने लगा ।

विमला हस कर - अब बस कर रहने दे थक जायेगा हिहिही

फिर मै वही उसके पीछे खडे होकर बाते करने लगा।

इतने मे चाचा आ गये बाहर से और एक कुर्सी लेके बैठ गये ।

और फिर बाते होने लगी पहले लिट्टी के प्रोग्राम के लिए औरत मंडली की तारिफ की गयी और फिर वापस इधर उधर की बाते छिड़ गयी ।

यहा मुझे थोडा शक हुआ कि चाचा कही ड्रिंक करके तो नही आये ,,,हालाकि उनको ऐसे चीजो का शौक नही था फिर मै ऐसे ही घूमते हुए उनके पास गया और बैठ गया । थोडी देर तक उनको देखा परखा लेकिन मुझे शराब की कोई बू नही मिली । फिर चाचा के बात करने के तरीके मे अलग ही जोश था ,,,और तेज आवाज मे ही बात कर रहे थे

फिर मैने सोचा कही पान्डाल मे इन्होने वो भांग वाली शर्बत तो नही ना पी ली

हा वही लग रहा है

इधर बाते हो रही थी कि चाची ने मेरी बात छेड़ दी ।

चाची ह्स्ते हुए - राज तो मुझ्से प्यार ही नही करता

मै चौक कर - क्यू चाची ऐसा क्यू

चाची हस कर - देख रही हू तुने तो मेरी मसाज की ही नही सबकी मसाज तुने की और मुझे छोड दिया हिहिहिज

मै खड़ा होता हुआ - अरे ऐसी बात है तो रुकिये आपका भी कर देता हू मै

इतने मे चाचा मुझे रोकते हुए खडे हुए - नही रुक बेटा बैठ तू । मै मसाज कर देता हू शालिनी

चाची शर्म से लाल होती हुई - अरे नही जी मै बस मजाक कर रही थी हिहिही

लेकिन तबतक चाचा चाची के पीछे पहुच गये और उनके कंधो को दबोचने लगे ।

चाची दर्द से सिहर कर - ओह्ह क्या जी छोडिए ना अह्ह् दर्द हो रहा है

चाचा लडखडाती स्वर मे - स स सॉरी सॉरी शालिनी आराम से कर रहा हू

फिर इधर पापा भी बातो मे लग गये तो अलाव मे धुआ बढ़ गया और धुए की छटाओं ने बाहर कब्जा कर लिया सब कोई आंखे बंद खास रहा था ।

मा खास्ते हुए - अरे क्या कर रहे हो जी जल्दी हवा करो ,, कुछ दिख नही रहा है ।

तभी चाची एक मादक सिसकी आई

जिसको सुन के मा उनकी तरफ फ़िकर से देखते हुए बोली - शालिनी तू ठीक है ना ,,,यहा कुछ दिख नही रहा

चाची हडबड़ा कर - हा जीजी ठीक हू मै वो ये मालिस कर रहे है ना तो ओह्हहहह बहुउउऊउऊत आआआअरामम्म मिल रहा है उम्म्ंमममंं

चाची की मादक सिस्कियो से लग तो नही रहा था कि चाचा उनके कन्धे की मालिश कर रहे थे लेकिन धुए की छटाओ से कुछ भी देख पाना मुस्किल था ।

खैर कुछ मिंट के बाद जलन भरे पीड़ा से आन्खो को आराम मिला और पापा ने किसी तरह धुए को कम किया

लेकिन यहा चाची की सिसकिया कम नही हो रही थी ।

जब धुआ थोडा हल्का हुआ तो मा की नजर अपने बगल मे थोडी दुर बैठी देवरानी पर गयी तो देखा उनके देवर ने अपनी बीवी के मैक्सि मे हाथ डाला हुआ है और भर भर कर चुचिया मसल रहे हैं

मा ह्स्ते हुए चाचा को छेड़ कर - अरे अब रहने दिजीये देवर जी कितनी होली खेलेंगे हिहिहिही

मा की बाते सुन कर चाचा और चाची चौकन्न्ना हुए और उनको ध्यान आया वो क्या कर रहे है । वही मै और विमला मुह मे हसी दबाते हुए हस रहे थे और पापा जो कि दुर थे उनको समझ नही आया कि किस बात पर हसी हो रही है

पापा - अरे इस समय फिर से होली किस बात की भाई

मा हस कर - यही आपके भाईसाब है जिनका मन नही भरा है ,, अभी भी रगड़ रहे है अपनी मेहरारू को हिहिहिही

यहा मा मजाक कर रही थी और चाची शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी ।

चाचा तो चुपचाप सरक लिये घर मे

मा चाची के ओर लपक कर फुसफुसा कर बोली - अब चली जाओ शलिनी देवर जी गये है कमरे मे इन्तजार कर रहे होगे

चाची शर्मा कर हाथ झटक देती है - धत्त क्या जीजी आप भी ,,,पता नही उनको क्या हो गया जो यहा सबके सामने शुरु हो गये थे हिहिहिही

मा चाची को छेड़ते हुए धीरे से बोली - तो जल्दी जाओ , कही जोश ठण्डा ना पड़ जाये

चाची ह्स कर - इतनी फिकर है तो आओ आप भी चलो ना ,,, आपकी इच्छा भी पूरी कर देंगे

मा ह्स कर - मेरे लिए राज के पापा ही काफी है ,, हा तुमको अगर कम पड रहा है तो कहो बात करू इनसे हिहिहीही

चाची शर्म से लाल होते हुए मुह पर हाथ रख कर हसने लगी ।

खैर ऐसे ही मस्ती भरी बाते चलती रही और थोडी देर मे लिट्टी तैयार हो गयी

फिर मा ने मस्त दाल मे छौका दिया और आलू बैगन टमाटर का टेस्टि चोखा बनाया

फिर हम सब किचन मे बने डाइनिंग टेबल पर गये और सबके लिए गरमा गरम लिट्टी-चोखा दाल और बैगन की कलौंजी थाली मे लगाया गया ।

खाने का मज़ा ही आ गया और फिर हम सब हाल मे एकठ्ठा हुए और सोने की प्लानिंग हुई ।

फिर तय हुआ कि

सोनल और निशा उपर एक बेडरूम मे

राहुल और अनुज ने एक उपर का एक बेडरूम ले लिया

चाचा चाची गेस्ट रूम मे चले गये ।

पापा - बेटा तू कहा सोयेगा फिर

विमला - कोई बात नही राज मेरे साथ सो जायेगा ,

पापा थोडा हिचक भरे मन से विमला को इशारे करते हुए - लेकिन ,, आपको कोई दिक्कत तो नही होगी ना बहन जी

विमला एक इशारे से पापा को इत्मीनान कर बोली - अरे नही नही उसकी चिंता नही करिये एक रात की तो बात है ,,,चल बेटा आजा सोते है हम लोग

फिर मै और विमला एक बेडरूम मे गये और पापा मा के साथ सामने वाले बेडरूम मे गये ।

मै पापा का दुखी मन समझ सकता था क्योकि उनकी प्लानिंग थी आज रात मे विमला को चोदने की

खैर सब कोई अपने तय कमरो मे गया और फिर हम भी अपने कमरे मे आये और मैने दरवाजा बंद किया

क्योकि मै भी विमला के साथ मस्ती करने का मौका नहीं छोडना चाहता था ।

मै बिस्तर पर चढ़ कर विमला के बगल मे लेट कर उसकी तरफ मुह करके - और जानेमन कैसी रही होली

विमला ह्स कर मेरे गाल सहलाते हुए - बहुत ही मस्त थी मेरे राजा ,, अभी इसको और भी मस्त बनाने वाली हू तेरे इस मुसल से

मै विमला की कमर पकड कर अपने तरफ खिच कर उसके होठ चुस्ते हुए बोला - तो शुरु करो ना जानू

विमला एक कातिल मुस्कान के साथ उठी और मेरे पैरों के पास बैठ कर मेरे जिन्स को खोल कर लंड निकाल लिया और अपने मुह की कला बाजी करनी शुरु कर दी ।

एक मेच्योर औरत से लण्ड चुस्वाने का सुख ही अलग होता है दोस्त ,,, जब सुपाडे की टिप उनके गले की गीली घुंडी को छूती है तो पुरे शरीर मे एक बिजली सी कौंध जाती है । जब एक अनुभवी महिला के मुलायम मोटे होठ लण्ड के सतह पर रिंग बना कर कामुकता से आहिस्ता आहिस्ता उसे निगलते है तो मुह के अन्दर की तपन से लण्ड मानो पिघलने सा लगता है और उनकी करामाती लचीली खुरदरी मुलायम जीभ जब सुपाडे पर रेगती है तो लण्ड की नशो मे उत्तेजना और बढ़ जाती है , चुतड सख्त हो जाते और मन करता है कि लण्ड को अभी उसकी केचुली से निकाल कर बाहर करके चुसने वाले के मुह मे भर दू

ठीक ऐसा ही कुछ मेरे साथ हो रहा था विमला जैसी अनुभवी रन्डी औरत ने मुझे अपने मुख मैथुन के जाल मे फास सा लिया था मै बेजुबान सा सिसकता और गाड़ उचकाता रहता और बस यही चाह करता कि लण्ड सख्त कर उसको कितना ज्यादा उसकी खाल से बाहर लेते आऊ और उस उधड़े हिस्से को भी विमला अपने मुलायम होठो से गिला करे

कुछ पल के लिये ही सही लेकिन जब तक विमला के मुह मे लण्ड था मै हवा मे उड़ता रहा और फिर वही वो उठी और अपनी मैकसी निकाल कर अपने तैयार किये हुए माल को भोग लगाने का पोज बनाते हुए अपनी चुत लेके घ्प्प से मेरे लंड पर बैठ गयी और बडे ही कामुक अंदाज मे गाड़ को हिला कर आंखे बंद किये सिस्कने लगी।

और जल्द ही उसकी हवस बढने लगी और मेरे खडे लण्ड ने उसकी चुत की खुजली को और बढ़ा दिया जिससे वो मेरे सिने पर हाथ टिका कर अब अपने चुतड पटकने लगी और सिसकिया तेज हो गयी ।

मै ऊँगली उठा कर उसके होठ पर रख कर उसे शान्त होने को बोलता हू

और फिर उसको अपने उपर खीच लेता हू जिससे उसके मोटे होठ मेरे मुह मे होते है और उनको चुस्ते हुए मैने नीचे से धक्के लगना शुरु कर देता हू

धीरे धीरे मै अपने हाथ उसके गाड़ पर ले जाकर कर उनको फैलाना शुरु कर देता हू और गरदन उठा कर लटकती चुचियो के निप्ल्ल को मुह से पकडने लगता हू

जैसे ही मेरे मुह मे उसके चुचे भर जाते है और उनको चुस्ते हुए मै अपनी कमर उठा कर धक्के तेज कर देता हू

और विमला मेरे कन्धे मे मुह धसाये अपने तेज सिस्कियो को घुटे जा रही थी जल्द ही विमला के ऐथना शुरु कर दिया और मेरा लण्ड भिगना शुरु हो गया । उस्के चुत का पानी बह कर मेरे आड़ तक को गिला कर रहा था लेकिन मेरे तेज चुदाई के धक्को मे कोई बदलाव नही था वो एक शुर मे लगातार उसकी चुत उधाड़े जा रहे थे और गचागच पेले जा रहे

जल्द ही मैने अपनी रफ़्तार कम कर विमला को नीचे किया और उसके उपर आकर उसकी जांघो को खोल कर वापस उसकी पिचपिचाती चुत मे घ्प घप लण्ड पेल दिया और तेज धक्के लगाते हुए उसकी चुचिया नोचने लगा ।

ऐसे ही लगातार धक्के लगाते हुए मैने कभी उसकी टांगो को कन्धे पर उथा लेता तो कभी पुरी जांघो को खोल कर पेलता

मेरे भी झडने का समय हो चला था और यहा विमला भी की चुत सुखी हो रही थी इसिलिए वो मेरे लण्ड को निचोडने लगी थी ताकि मै जल्दी से झड़ जाऊ

इसिलिए मैने अपना लण्ड निकाला और उसके मुह के पास लण्ड ले गया और चमडी आगे पीछे किया। कुछ ही सेकेण्ड मे मेरी पिचकारी छूटी और उसने मेरे लण्ड को मुह मे भर लिया । कुछ देर बाद विमला ने उसे निचोड़ कर छोड दिया और हम लेट कर अपनी सांसे बराबर करने लगे ।

थोडी देर बाद हम दोनो आपस मे चिपक कर बाते की और फिर मैने उसके और मनोज के रिश्ते के बारे मे पुछा तो उसने बताया सब ठीक चल रहा है । उसने मनोज के कुछ नटखट हरकतो और ख्वाईशो के बारे मे भी बताया ।

फिर ऐसी ही बाते करते हुए हमे एक घन्टा बीत गया और रात मे 12 बजने को थे कि तभी हमारे कमरे के दरवाजे पर हल्की सी खटखट हुई और मुझे पापा की दबी हुई आवाज आई , वो विमला को आवाज दे रहे थे ।

मै एक नजर विमला को देखा और हसने लगा

फिर मै उनको बोला की जाओ आप दरवाजा खोलो मै सोने का नाटक करता हू ।

फिर मैने जीन्स उपर चढ़ा लिया और एक किनारे सोने का नाटक करने लगा लेकिन पलके गिराये हुए भी लगातार दरवाजे पर नजर बनाये हुए था ।

इधर विमला ने अपना मुह साफ किया और मैकसी पहन कर दरवाजा खोलने चली गयी।

देख्ते है दोस्तो क्या कुछ नया हंगामा होना है

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यहा मैने सोने का नाटक किया और विमला अपने कपडे पहन कर दरवाजा खोला

दरवाजा खुला और सामने पापा सिर्फ हाफ चढ्ढे मे थे, उन्होने उपर कुछ नही पहना था और वो लोग आपस मे कुछ खुसफुसा रहे थे

फिर मुझे पापा की आवाज मे कुछ मायुसी होने का आभास हुआ और फिर थोडी देर मे विमला ने उनको कमरे मे खिच लिया और दरवाजा लगा कर झट से उनके पैर मे बैठ कर उनका चढ्ढा खीचा और खड़ा लंड मुह मे भर कर चूसने लगी ।

मै पापा की हिम्मत की दाद देने लगा कि आज इतना सब कुछ होने के बाद उनका आत्मविश्वास काफी ऊचा है और वो अभी भी मेरे रहते ये रिस्क लेने को तैयार है और अपना लण्ड मेरे सामने ही विमला से चुस्वा रहे है

थोडी देर बाद विमला ने पापा के लण्ड एक एक बूंद निचोड लिया और वो खडी हुई ।

पापा थोडा सा दरखवास्त के भाव मे विम्ला से इशारे करते है लेकिन विम्ला उनको पकड कर कमरे से बाहर कर बोलती है - कल मै आ जाऊंगी दुकान पर पक्का ,, प्लीज आप मेरे लाज को भी समझिये भाई साहब

फिर पापा विमला के होठ चुस कर मुस्कुरा कर अपने कमरे मे चले जाते है और विमला दरवाजा बन्द करके बिस्तर पर आती है

मै हस कर - ओहोहो ये सब कब से चालू है मौसी हा

विमला शर्मा कर ह्सते हुए - बस आज दोपहर से ही

मै खुशी से लेकिन उत्सुक होकर - लेकिन कैसे हमको नही बताओगी जान

विमला मुस्कुरा कर - क्यू नही मेरे राजा ,,,

हुआ यू कि मेरे और भाईसाब के बीच अबीर की होली चल रही थी कि मेरे आँखो मे गुलाल चला गया जिससे मुझे जलन होने लगी और फिर उपर के बाथरूम मे कोई गया हुआ था तो तेरे पापा मुझे नीचे इसी कमरे के बाथरूम के पकड कर लेके आ रहे थे ।

लेकिन सीधीयो से नीचे उतरते हुए मेरे आखे जलन से बन्द हो गयी और मै कुछ देख नही पा रही थी तो तेरे पापा ने मुझे मेरे कमर मे हाथ डाल कर पकड लेके सीढि से उतारे और फिर कमरे मे लेके आये

फिर बाथरूम मे आने के बाद उन्होने खुद टोटी चालू कर अपने हाथो से मेरे मुह को धुला । लेकिन मौके पर बाथरूम मे कोई तौलिया नही था तो मैने जल्दी मे आंख पोछने चक्कर मे मैने अपनी कुर्ती उन्के सामने उठा कर उससे अपना चेहरा पोछ रही थी कि तेरे पापा ने मस्ती मे एक मग पानी मेरे नंगी पेट पर मार दिया और मै भी मस्ती मे उन्के हाथ से मग लेके पानी उनके कमर पर मारा जिस्से उन्के खडे लण्ड का सेप मेरे सामने आ गया और वो मुझसे मग छीनने के चक्कर मे मेरे पीछे आये और उनका खड़ा लण्ड मेरे फैले हुए चुतडो मे रगड़ खाने लगा और उनके हाथ कभी मेरे छाती को छू जाते तो कभी मेरे कमर को

मै उनसे हाईट मे थोडी लंबी हू इसिलिए शरारत मे मैंने हाथ उपर कर मग को उठा लिया और उनको चिढाते हुए - हिहिहिही अब पकड़ीये भाईसाहब हीही

लेकिन तेरे पापा ने एक नं के मस्तीखोर निकले उन्होने मेरा दुसरा हाथ पकड लिया और उसको अपने खडे लण्ड पर रख दिया जिस्से मै शर्म और घबडाहट से मेरा हाथ नीचे आ गया और उन्होने लपक कर मेरे हाथ से मग ले लिया

तेरे पापा - हाह्हहहा देखा बहन जी ले लिया आखिर मैने

मै इतरा कर शर्म से - हा लेकिन ये चिटिँग है भाईसाहब

तेरे पापा इशारे से मुझको अपना लण्ड दिखाते हुए - वो चिटिँग नही मेरा लोहा है बहन जी जिसे आप पकड़ी हुई है

और तब मुझे ध्यान आया कि अभी तक मै तेरे पापा के लण्ड से हाथ नही ह्टाई हू

फिर मैने झट से उसपे से हाथ हटा कर घूम गयी और ह्स्ते हुए सॉरी बोली लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी उन्होने मुझको पीछे से पकड लिया और मेरे छाती को मस्लना शुरु कर दिया था

मै कसमसा कर - आह्ह भाईसाहब क्या कर रहे है आह्ह छोडिए ऊहह

तेरे पापा हस कर - मै तो बस हिसाब बराबर कर रहा था ह्हिहिही

मै शर्म से उनसे अलग हुई और अपनी कुर्ती सही करते हुए हस कर बोली - हिसाब ज्यादा नही हो गया आपका हा

तेरे पापा ने वापस मेरा हाथ अपने खडे लण्ड पर ले जाकर रगड़ते हुए बोले - ओह्ह तो आप भी बराबर कर लो

और मुझे खिच कर वापस से मेरे चुचे मसलने लगे और मै मदहोश होने लगी फिर कब वो नीचे गये और मेरे पिछवाड़े को चाटना शुरु कर दिया पता नही चला और फिर उन्होने ही मेरे ब्रा निकलवाये । फिर हम छ्त पर आ गये ।

मै हस कर - ओह्हो फिर तो मजा आया होगा जान गाड़ चुस्वा कर हिहिहिह

विमला इतरा कर - हम्म्म वो तो है अब कल देख क्या क्या करते है ,,,कल दुकान पर बुलाया है हिहिही

मै उसके चुचे सहलाते हुए - ओहो फिर मजे करो रानी ,,हीही फिर ऐसे ही मस्ती भरी बाते हुई ।

दिन भर की मस्तिया और तीन चुतो की कुटाई के थकान से मै विम्ला से चिपक कर सो गया ।

सुबह 8 बजे मा की आवाज आने पर मेरी नीद खुली तो और मै उठ कर हाल मे आया तो देखा की सारी औरते नहा धो कर तैयार है और किचन से चाय की मस्त खुस्बु आ रही है ।

एक जोर की अन्गडाई ले ही रहा था कि ल

मा - जा तू नहा धो ले और आज बहुत काम है

मै काम का सुन कर ही फिर से पस्त होके सोफे पे बैठ गया

मै मुह बना कर - अब क्या काम है मा

मा - अरे बेटा उस घर से सारा सामान लेके आना है और फिर यहा सेट करना है और फिर नये समान की लिस्ट बनानी है । फिर कल की पूजा के प्रसाद और होली की मिठाईया भेजनी है आस पड़ोस मे ,,, ले मै तो भूल ही गयी

मा पापा से - सुनिये जी आप 10 किलो गुलाब जामुन और 5 किलो लड्डु के ओर्डेर दे दिये थे कि नही

पापा - हा भाई कल शाम को ही मैने कल्लु को बोल दिया था और अभी दोपहर तक उसका कोई लड़का दे जायेगा

मा परेशान होकर- चलिये ये सब हो जायेगा फिर दुकान के लिए भी सोचना है क्या कैसे होगा

मै उनके बातो से ऊब कर - बस करो मा , परेशान ना हो हो जाएगा सब । आप चलना मेरे साथ अभी और उस घर से सारा समान एक ई-रिक्शा पर लाद कर लेते आयेंगे एक दो चक्कर मे , और समान लिस्ट दीदी बना देगी । मिठाई और प्रसाद अनुज बाट आयेगा । मै दुकान देख लूंगा बस

मा हस कर - हा बस ,,,मेरा ब्च्चा इधर आ

फिर मा ने मुझे पकड कर हग करते हुए दुलारने लगी

मै उबासी लेते हुए - मा चाय दो ना

मा गुस्सा दिखाते हुए - अरे मलिछ जा पहले ब्रश मन्ज्न कर फिर कुछ खा पी ,,,उठ जा

फिर मै मन मार कर उठा और फ्रेश हुआ और नहा धो कर वापस आया तब तक चाचा चाची की फैमिली और विमला जा चुके थे ।

फिर मैने चाय पी और एक ई-रिक्शा बुलवाया फिर मा और अनुज के साथ निकल गया उस घर

पापा भी अपने दुकान के लिए निकल गये ।

घर आकर अनुज के ताला खोला और फिर वो दुकान खोल कर बैठ गया फिर मै और मा उपर गये ।

पहले हमने सारे बिस्तर को समेट कर अच्छे से फ़ोल्ड किया

फिर मा स्टोर रूम से एक बक्से मे से साफ की हुई प्लास्टिक की बड़ी बड़ी बोरीया निकाली जिसमे सारे बिस्तर को भरा गया और फिर सारे कपडे भारी चैन वाले झोले भर कर दिये गये ।

फिर मै ये दोनो सामान नये घर पर रख कर वापस आया तब तक मा ने किचन से सारा सामान बटोर चटोर कर डिब्बी डिब्बा वाले सारे सामानो को एक बडे बोरी मे भरा और राशन से भरे ड्रम भी नीचे आये , जिन्हे मै एक बार फिर ई-रिक्से पर लाद कर नये घर लेके गया और वापस आया ।

इधर मा ने स्टोर रूम से राशन की बोरिया , छोटे बक्से तक बाहर निकाल लिये

मेरी हालात खराब होने लगी थी उपर से अभी तो सारी मेहनत बाकी थी

मै मना करता भी तो मा की डांट सुनता इससे अच्छा था जो मिला सब लाद फांद कर कुल 4 राउंड मे सारा नये घर के हाते मे जमा कर दिया और फिर मा को लिवा कर 12 बजे तक नये घर वापस आ गया ।

तब तक दीदी ने खाना बना दिया था और किचन के हल्के फुल्के सामान रखते हुए उनकी पर्ची भी बना ली थी कि क्या कम है क्या ज्यादा ।

फिर हमने खाना खाया और मा ने पापा को फोन से बोल दिया कि बबलू को भेज कर खाना मगवा ले क्योकि यहा कोई खाली नही है

मै खुश होकर - वाह मा ये अच्छा किया

मा हस कर सोफे पर बैठते हुए - हा जानती हू रे मेरे से ज्यादा तो तुने मेहनत की है , आ बैठ तू भी

फिर मा सोनल को पानी लाने के लिए आवाज देती है और क्या क्या खाना तैयार है उसके बारे मे पुछती है

सोनल - मा खाना एकदम तैयार है आपलोग मुह हाथ धुल लो मै खाना लगाती हू

मा - ठीक है बेटा , जरा तेरे पापा का टिफ़िन भी पैक कर दे वो बबलू आता होगा लेने ।

सोनल मुस्कुरा कर - ठीक है मा आप परेशान ना हो

फिर मैने और मा ने खाना खाया और थोडी देर आराम किया

फिर 1 ब्जे से वापस मा ने सारा सामान उठवाना शुरु किया और दीदी ने भी हमारी मदद की शाम 4 बजे तक सब कुछ अच्छे से सेट हो गया ।

स्बके कपडे उनके बेडरूम मे चले गये और राशन की बोरिया , बक्से उपर स्टोर रूम मे रख दिये गये ।

इसीदौरान कल्लु का नौकर मिठाईया दे गया ।

मा हतास होकर - हे भगवान अभी ये भी बाकी ,,क्या करू

मै भी थकी हुई आवाज मे - मा ऐसा करता हू अनुज को बोल देता हू की वो दुकान बंद कर ले चंदू की साइकिल लेके आ जाये,,और वही सब जगह बाट देगा

मा थोडी देर सोच के - हा ठीक ही कह रहा है तू ,, लेकिन अनुज के पास मोबाईल थोडी है

मै - अरे मै चंदू को बोल देता हू ना मा वो बात करवा देगा

फिर मैने चंदू को फोन किया और उसने अनुज से बात करवाई और फिर वो दुकान बंद कर साइकिल लेके आया ।

तब तक दिदी और मा ने सबके लिये अलग अलग जिनको देना था डिब्बे मे मिठाई और प्रासाद बाँधे फिर अनुज लेके निकल गया पूराने घर ।

चुकी यहा चौराहे पर कोई परिचय नही था हमारा और ज्यादा घर भी नही बने थे

पास मे थोडी दुर पर एक दो मंजिला मकान ब्ना था जिसमे एक औरत रहती थी जिस्का बेटा बाहर कमाता था शायद ,,मैने बस सुना ही था

मा - बेटा एक काम करेगा , ये जो बगल मे वाली दीदी है उन्के यहा मीठा देके आ जा

मै अजीब सा मुह ब्ना कर - क्या मा अब उनको क्या लेना देना

मा मुझे समझाते हुए - अरे बेटा , रिश्ते व्यवहार ब्नाने से बनते है और फिर ये तो प्रासाद है , इसको दुशमन से भी बाटना चाहिये

मै मन मार कर - ठीक है लाओ दो

फिर मैने हाथ मुह धुला और मिठाई का डिब्बा लेके चला गया उस बडे घर की तरफ

मै मेन गेट खुला पाकर अंदर गया और दरवाजे की बल बजाई और उस मनहूस चेहरे की राह देखने लगा जिसकी वजह से मेरे आराम के खलल पड़ी थी ।

थोडी देर मे पायलो की छन छन गैलरी ने आती सुनाई दी और फिर दरवाजा खुला

मै गिरे मन हाथ का पैकेट थमाते हुए बोला - चाची ये लो प्रसाद

और मेरी नजर सामने खड़ी महिला पर गयी , जो पीली चमकदार साडी मे कसी हुई जवानी मे लाल लिस्प्तिक लगाये दरवाजे का ओट लिये खड़ी थी ।उसका नूरानी चेहरा देख कर मेरे तन एक नई ऊर्जा दौड़ गयी क्योकि सामने कोई चाची नयी एक नयी बियाही औरत थी जिसके खुबसुरत चेहरे की चमक ने ढलती शाम मे ही चांद उगा दिया हो ।

तभी मुझे उसकी आवाज आई- कहा से आये हो बाबू

मै उसकी मीठी कोमल आवाज से पिघलने लगा और लड़खती आवाज मे - अब ब वो वो मै

मै कभी उसका गोरा गुलाब का चेहरा देख्ता तो कभी ऊँगली से अपने घर की तरफ इशारा करता

और तभी उसकी हसी छूटी और मुझे उसके खुबसूरत होठो के बिच चमकते सफेद मोतियो जैसे दाँत दिखे जो उसकी हसी को और भी सुन्दरता से नवाज रहे थे ।

मै हस कर खुद को शांत किया और एक गहरी सांस लेते हुए -सॉरी वो मै यही का हू ,ये जो बगल मे नया घर बना है वो मेरा ही है ,,,

मै - चाची नही है क्या

वो - नही वो बाजार गयी है तो मै ही हू फिलहाल ,, और कुछ

मै हस कर - नही नही मै जा रहा हू ,, और सॉरी मैने बिना देखे आपको चाची बोल दिया

वो मुस्कुरा कर - अरे कोई बात नही , होता है कभी

फिर मै घूम कर वापस जाने को हूआ और वो दरवाजा बन्द करने को हुई तभी मेरे मन मे कुछ सुझा

मै - अच्छा सुनिये

वो बंद किये दरवाजे को खोल कर - हा कहिये

मै संकोचवश- वो आप कौन है ,,वो मुझे मा को बताना पडेगा ना कि किसको दिया मैने

वो हस कर - वैसे तो मै उनकी बहू हू और मेरा नाम काजल है

मै हस कर - जी भाभी जी बस बस इतना ही

काजल हस कर - और अपना परिचय नही देंगे क्या आप

मै हस कर - मै मै ,, मेरा नाम राज है और मै रंगीलाल जी का बेटा हू , उनकी बाजार मे बरतन की बड़ी दुकान है और

काजल हस कर - और क्या

मै - और मेरी बजार मे एक कासमेतिक की भी दुकान है जिसको मै और मा मिल कर चलाते है

काजल खुसी से - अरे वाह फिर तो अच्छा है , वैसे कहा है ये दुकान आपकी

फिर मैने उसको अपनी दुकान का पता बताया और फिर अलविदा कह कर मेन गेट से होकर बाहर आ गया

फिर सड़क पर चलते हुए एक गहरी सास लेके मुह में ही बड़बड़ाते हुए - उफ्फ़फ्फ क्या कयामत थी यार , हाय्य्य दिन बन गया आज तो ,,,

फिर मै खुशी मन से घर वापस आया और मा को बोलकर गेस्टरूम मे सोने चला गया ।

फिर शाम 7 बजे तक मेरी निद खुली और मै उठ कर गेस्टरूम के बाथरूम मे फ्रेश हुआ और फिर हाल मे आया तो वहा कोई नही था ।

किचन से खाने की खुस्बु आ रही थी और हल्की फुल्की भूख लगी थी मुझे तो मै किचन मे चला गया ।

जहा मा और दीदी खाना ब्नाने मे लगे थे ।

मै मा के बगल मे खडे होकर - क्या ब्ना रही हो मा मस्त खुशबू आ रही है

मा खुश होकर कुकर मे कल्छुल घुमाते हुए - तेरे पापा ने सुबह फरमयिश की थी भई कि आज राजमा बनाओ तो वही बना रही हू

मै खुशी से मा को पीछे से हग कर - वाहह मा आज तो मजा ही आ जायेगा खाने का

मा हसते हुए - अरे छोड बेटा मै जल जाऊंगी ना

फिर मै उनको छोडा और मै वही डाइनिंग टेबल पर बैठ कर सोनल से - तो दीदी सामान की लिस्ट बन गयी

सोनल मेरे बगल मे आकर - नही भाई , अभी सिर्फ किचन के समान की ही लिस्ट बनी है और अभी सभी कमरो के बेडशिट , पर्दे घड़ी और काफी सारी चीजे बाकी है ।

मै - कोई बात नही सारे समान की लिस्ट बना लो एक दिन सरोजा कॉमप्लेक्स जाकर सारी खरीदारि कर ली जायेगी

मा - हा सही है बेटा वहा सारे सामान एक साथ मिल जायेंगे चार जगह जाना भी नही पडेगा ।

फिर ऐसे ही आने वाले तैयारियो के बारे मे बाते हुई और इतने मे अनुज आ गया और वो एक टीवी और एक रैन्जर साइकिल की डिमांड रख दिया तो सोनल कैसे पीछे रहती तो उसने भी अपने लिये नये कपडे लेने की बात रखी और मा ने भी जरुरी समान जैसे एक फ्रिज और वॉशिंग मशीन के लिए बोला

मै उनके उतावले पन पर हस रहा था तो मा बोली - क्या हुआ तुझे नही चाहिये कुछ

मै हस कर - मेरा छोडो और बजट का सोचो हिहिहिही अभी दीदी की शादी का खर्चा आयेगा उसका भी ध्यान देना है ।

मा मेरी बात सुन कर मायुस होते हुए - हा बेटा बात तो तेरी सही है ,,, लेकिन ये सब जरुरी है अब ,,, इतने बडे घर मे टीवी फ्रिज और वॉशिंग मशीन होना जरुरी है । धीरे धीरे नये घर पर लोग आयेंगे और फिर सोनल की शादी तक सारी तैयारिया भी तो करनी है । पता नही कैसे होगा

मै हस कर - हो जायेगा मा सब बस दीदी को बोलो वो दहेज ना ले हाहहहहा

सोनल चिढ़ कर मुझे मारने को आई और मै भागकर मा के पास चला गया

मै हस कर - देखा देखा मा ,, दहेज का एक भी पैसा नही छोडना चाह्ती है ये हिहिही

सोनल इतरा कर - रख लेना तू अपने पैसे ,,,उनको नही चाहिए कोई दहेज

मै सोनल की बात पर तंज कस्ते हुए - सुन रही हो मा ,,, अभी से उनकोओओओ बोला जा रहा है हिहिहिहिह

सोनल शर्मा कर कमरे मे भाग गयी

मा हस कर - क्या तू भी उसको परेशान करता है ,,,ये बता बजट का क्या होगा

मै - ओहो मा आप चिन्ता ना करो सब कुछ इन्तेजाम मै और पापा कर लेंगे ,, अभी तो घर के समान के शॉपिंग जाने की तैयारी करो ।

मा खुश होकर मेरे गाल चूम लेती है - मेरा प्यारा बच्चा कितना सोचता ह्मारे बारे मे

इधर अनुज मुह बना के - हा हा वही है आपका बेटा मै तो बाहर का हू ना

मा उसकी बातो से हस के उसको अपने सीने मे कस लेती है और बोलती है - तुम सब मेरे जान हो मेरे बच्चो

फिर थोडी देर बाद पापा दुकान से आये और हम सब बाते करते हुए खाना खाये और पापा ने बजट के मामले मे मा को निश्चिँत होने को कहा ।

फिर रात मे खाने के बाद हम सब सोने चले गये

देखते है दोस्तो आगे क्या होने वाला है

राज के नये घर मे कौन कौन से हंगामे होने वाले है और उसके नये पड़ोसीयो से कैसा रिश्ता होने वाला है ।

...............................
 
अगली सुबह 6 बजे मेरी निद खुली और मै फ्रेश होकर बाहर हाते मे आया और फिर सड़क पर निकल गया ।

तभी मुझे आगे सरोजा जी बस स्टैंड की तरफ जाती दिखी

उनकी कसे लोवर मे झोल देते चुतडो ने उनका परिचय 50 मिटर की दुरी से ही दे दिया था और मै एक कातिल मुस्कान के साथ दौड़ कर उनके बराबर मे जोगिंग करने लगा

सरोजा को जब आभास हुआ कि कोई उन्के बगल मे है तो वो गरदन घुमा कर मुझे देखी और मुस्कुरा कर आगे चल दी

आज वो बस स्टैंड से आगे चमनपूरा मे प्रवेश होने वाले पुलिया तक गयी और मै उन्के साथ वहा तक गया

वहा मै अपनी सांसे बराबर करने लगा लेकिन सरोजा पर कोई फर्क नही था वो नोर्मल अपने बॉडी को स्ट्रेच कर रही थी

मै हाफते हुए - गुड मोरनिग सरोजा जी

सरोजा हस कर - ओहो आज काफी दिन बाद दिखे कहा थे

मै - वो नये घर के काम मे व्यस्त था अब यही चौराहे वाले घर पर रहता हू ना

सरोजा - ओह्ह्ह अच्छा है

मै थोडा उनकी तारिफ मे - वैसे मानना पडेगा आपके जितना रेस लगा पाना मेरे बस का नही है

सरोजा ह्स कर - हिहिही अरे बाबू रोज करोगे तो तूम्हारा भी आदत हो जायेगा

मै मस्ती भरे अंदाज मे - अब आपका साथ पाने के लिए आदत बनाना ही पडेगा हिहुही

सरोजा शर्मा के इधर उधर देखती है - तुम भी ना एक नं के पागल हो , शर्म नही आती अपने से बड़ी औरत के साथ फलर्ट करते हुए

मै हस कर - इसमे शर्म कैसा हिम्मत चाहिये हिहिहिही

सरोजा एक शर्म भरी मुस्कान के साथ - चलो ठीक है मेरा हो गया , मै जाती हू

मै - वैसे अपने इस एनर्जी का राज तो बता दिजीये

सरोजा मुस्कुरा के - इस बारे मे जानना है तो कभी मेरे मार्ट मे आना , ऑफ़िस पर वही बताऊंगी हिहिहिही

मै खुशी से - हा जी क्यू नही आप जहा कहे वहा आ जाऊ

सरोजा हस कर वापस जोगिंग करते हुए निकल गयी और मै भी और मै भी घर के लिए निकल गया । फिर नहा धो के चाय नाश्ता कर दुकान पे निकल गया ।

ऐसे ही एक दो दिन का समय बीता और हमने शॉपिंग की सारी लिस्ट बना ली और ब्ज्त तैयार कर लिया ।

फिर एक दिन समय निकाल कर पहुच गये सरोजा कॉमप्लेक्स

सरोजा कॉमप्लेक्स पहुच कर मा और दीदी किचन मे सामान मे लग गये और मै उनको आने का बोल कर निकल गया सरोजा जी के ऑफ़िस की ओर

2nd फ्लोर पर एक कॉर्नर पर उनका ऑफ़िस था जिसके दरवाजे पर उनके नाम का बोर्ड लिखा था ।

मै एक बार दरवाजा खटखटाया तो किसी स्टाफ ने दरजावा खोला और सरोजा जी ने ऑफ़िस की चेयर पर बैठे बैठे एक नजर दरवाजे पर मुझे देखा तो बोली

सरोजा - अरे बाबू तुम ,, आओ आओ

फिर मै कमरे मे गया जहा सरोजा एक हल्के गुलाबी रंग की साडी पहने हुए चेयर पर बैठी थी मुझे देख कर उठ गयी और सोफे पे बैठने का निमंत्रण दिया

फिर हम दोनो ने सोफे पर बैठे और सरोजा जी ने उस स्टाफ को दो कॉफी लाने को बोला ।

सरोजा - क्या बात है आज बडे स्मार्ट लग रहे हो

मै हस कर - सोचा जब आपसे मिलना है तो थोडा टिपटॉप होकर जाऊ ताकि आप भी मेरे उपर ध्यान दे

सरोजा मेरी बात से हस दी

मै - वैसे आप भी बहुत खुबसूरत लग रही है और ये पिंक साड़ी काफी खिल रही है आप पर हर जगह से

सरोजा चौक कर - क्या मतलब हर जगह से

मै हस कर - कुछ नही आप अच्छे लग रहे हो यही कह रहा हू

सरोजा हस कर - मै जानती हू तुम कितनी गहरी बाते बोल जाते हो और तुमको लगता है मुझे पता नही पडेगा

मै उनकी बातो को और मजे से घुमा कर बोलता हुआ - वैसे कितना गहरा मह्सुस करती है आप मेरी बातो का

सरोजा शर्मा कर ह्स्ते हुए - बदमाश बहुत पिटूंगी तुमको

मै हस कर - मै क्या गलत बोला

सरोजा हस कर - तुम ना एक नं के चालू हो हिहिही

मै ह्स कर - और आप एक नं की हसिन और खुबसूरत है हिहिहिही

सरोजा अपने लटके बाल कानो मे खोसते हुए - और क्या क्या हू मै बताना तो

मै शरारती मुस्कान से - अभी जितना देखा है उतना ही बता दिया बाकी का क्या बताऊ

सरोजा शर्मा कर - धत्त पागल, अब क्या कपडे निकालू तब तारिफ करोगे हिहिही

मै हस कर - अब तारिफ तो उनकी ही की जा सकती है ना जिनको देखा हो छुआ हो मह्सूस किया हो

सरोजा मेरी बातो से निश्ब्द होकर सोफे की कुशेन से मुझे मारते हुए - बहुत गन्दे हो तुम हिहिहिही शर्म नही आती ऐसी बाते करते हुए मुझसे

मै ह्स कर - जब आपको सुनने मे नही आती तो मुझे कहने मे क्या शर्म हिहिही

इधर सरोजा कुछ बोलती तब तक दरवाजा पर खटखट हुई और सरोजा खडे होकर दरवाजा खोलने जाते हुए बोली - तुमको तो अभी बताती हू

फिर एक स्टाफ दो काफी लेके आया और सरोजा ने उसको जाने का बोल कर दरवाजे को लॉक कर दिया और काफी टेबल पर रख कर बैठ गयी

मै हस कर - दरवाजा क्यू लॉक कर दिया कही मेरे साथ कुछ करने वाले तो नही ना

सरोजा हस कर - हा तुम्हारी इज्ज्त लुटने वाली हू

मै बाहे फैला कर - फिर देर कैसा आजाओ ना

सरोजा शर्मा कर हसते हुए -बदमाश कही के चलो काफी पीयो

फिर हमने काफी पी और हम काफी समय तक गप्पे लड़ाए

अब सरोजा मुझसे काफी खुल गयी थी और मेरे मन मे काफी सारे विचार आने लगे थे क्योकि मुझे बस पहल की जरुरत थी और सरोजा मना नही करती पर मै कोई जल्दीबाजी नही करना चाहता था इसिलिए मैने जल्दी काफी खतम की

मै - चलिये ठीक है अब मै चलता हू मा और दीदी खोज रहे होगे मुझे

तभी सरोजा मन गिरा कर - अरे यार इत्नी जल्दी अभी तो आये हो

मै हस कर - सारी बाते एक ही मुलाकात मे कर लेंगी क्या हिहिहिही चलिये मै चलता हू बाय

सरोजा - रुको राज एक मिंट

फिर सरोजा ने ड्रावर से मुझे एक 40% less का कुपन दिया और अपना विजिटिंग कार्ड दिया जिसपे उसका नं था ।

मै खुश होके - अरे वाह,,थैंक यू जी मा तो खुश हो जायेगी

सरोजा सीरियस होकर भरी आँखो से मेरे गाल को चूम कर - थैंक्स टू यू राज ,,मेरे साथ समय बिताने के लिए

मै उसकी भरी आन्खे देख कर चिंतित भाव से - अरे अरे आप रो क्यू रही है , मै कौन सा बहुत दुर हो जब मन हो बुला लिजीये और अभी नं है मेरे पास अब तो हमेशा परेसान करूँगा आपको हिहिहिही

मेरी बाते सुन सरोजा ह्स दी जिससे उसकी आखे छलक गयी

मै झट से रुमाल से उन्के गाल साफ किया - ओहो क्यू इत्ना महगा मेकअप खराब कर रही है

सरोजा ह्स्ते हुए - धत्त मै मेकअप नही लगाती ये नेचुरल स्किन है पागल

मै अचरज के भाव मे - अगर यहा की स्किन इतनी मुलायम है तोओओओ

फिर उनको देखते हुए एक कातिल मुस्कान छेद दी जिसका मतलब सरोजा समझ गई और मेरे सीने पर मुक्का मारते हुए बोली - धत्त गन्दे अब जाओ

ये बोल कर वो घूम कर अपने चेयर की तरफ जाने को हुई तो मै झट से उनका हाथ पकड कर अपनी तरफ खिचा और कमर मे हाथ फेरते हुए उनके होठो को अपने होठो मे भर लिया

सरोजा इसके लिए तैयार नही थी इसिलिए मेरे होठो ने स्पर्श से वो आखे बडी किये मुझे देखने लगी और मैने बडी कामुकता से उस्के मोटे होठो से मैरुन लिपस्टिक हटानी शुरु कर दी

जल्द ही सरोजा ने भी मेरा साथ देना शुरु कर दिया

तभी दरवाजे पे खटखट हुई और हम अलग हो गये ।

मै बिना कुछ बोले मुह साफ कर कमरे से बाहर निकल गया ।

और शॉपिंग एरिया मे आकर एक गहरी सांस ली फिर मा के पास चला गया ।

फिर उनके साथ सारे सामान की खरीदारि कर सरोजा के दिये कुपन से बिल पे किया और फिर सामान काफी ज्यादा और वजन वाला था एक auto मे समान लाद कर हम सब घर चले गये ।

रात मे खाने के बाद सब अपने अपने कमरे मे चले गये सोने लेकिन मुझे निद कहा । रात के 10 बज रहे थे

अभी भी मुझे सरोजा के बदन की खुस्बु और उसके मुलायम होठो का स्पर्श पागल किये हुए था और वो पल सोच सोच कर मेरे लण्ड मे कसाव बढ़ रहा था ।

तभी मुझे उन्के विज़िटिंग कार्ड का ध्यान आया और मैने झट से नं डायल कर सरोजा के पास काल लगा दिया

दो रिंग के बाद ही फोन उठा और सरोजा की मनमोहक आवाज आई जिसको सुन कर मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई

सरोजा - हेलो कौन

मै चुप रहा

सरोजा थोडा गुस्से के भाव मे - अरे कौन है भई बोलो तो हेल्लो

मै एक सहमे आवाज मे - म म मै बोल रहा हू राज

मेरी आवाज सुन कर सरोजा भी शांत होकर बोली - ओह्ह राज तूम हो

फिर एक बार हमारे कालिन्ग पर खामोशी छा गई

सरोजा - कहो कैसे याद किया खाना पिना हुआ

मै थोडा संकोची भाव से - ह हा हा हो गया और आपका

सरोजा ह्स कर - अरे तुम ऐसे क्यू बात कर रहे हो अभी दोपहर मे बडे जोश मे थे

मै सरोजा की दिल्कस बात सुन कर की वो नाराज नही है तो मै अपने मस्ती भरे अंदाज मे बोला - जोश मे तो अब भी हू कहो तो दिखा दू हिहिहुही

सरोजा हस के - अच्छा जी दिखाना तो तुम्हारा जोश हिहिहिही

मै झट से अपना लोवर नीचे कर अपना खड़ा लण्ड बाहर निकाल कर उसकी एक अच्छी से तस्वीर निकाली और सरोजा के वॉटसआप पर भेज दी

मै हस कर - अपना व्हाटसअप खोलिये देखिये मैने भेजा है अपना जोश

सरोजा हस के - मतलब

मै हस के - अरे देखिये देखिये

थोडी देर मे सरोजा की आवाज आई - छिईईई गंदे लडके ये क्या भेजा है हमम्म

मै हस के - क्यू है ना मोटा और बड़ा मेरा जोश

सरोजा हस कर - भक्क गन्दे कही के

मै ह्स के - क्यू पसंद नही आया

सरोजा शर्म से - तूम ना ,, रखो फोन मै तुमसे बात नही करने वाली अब बहुत गन्दे हो ,,

मै हस के - हा जान रहा हू क्यू फोन रख रही हो आप

सरोजा - अच्छा जी बताओ तो क्यू

मै हस के - फोन रखने के बाद शायद आप मेरे जोश को देख कर पसीना पसीना होने जा रही हो ।

सरोजा - धत्त पागल ,, ऐसा कुछ नही है मै बाद मे बात करती हू कोई बुला रहा है ,,चलो बाय गुड नाइट

मै ह्स के - हा बाय गुड नाइट

फिर फोन कट गया और मै मुस्काराता हुआ सरोजा के साथ के सपने बुनते हुए सो गया ।

रात के करीब साढे 12 बजे मेरा मोबाईल रिंग हो रहा था जिससे मेरी निद खुली और मैने फोन देखा तो सरोजा का ही फोन आ रहा था

मै थोडा सोचा की इत्नी रात मे सरोजा फिर से फोन कर रही है

मै झट से उठ के बैठा और फोन रिसीव कर हैल्लो बोला की उधर से एक मादक सिसकी भरी आवाज आई

सरोजा बड़ी ही कामुक आवाज मे कसमसाते हुए बोली - राआआज्ज्ज सो गये हो क्या

मै सरोजा की आवाज से थोड़ा आवाक रह गया और उसकी कामुक भरे शब्द मेरे लण्ड मे तनाव करने लगे

मै हड़बड़ा कर - न न नही तो बताईए क्या बात है , अभी सोयी नही आप

सरोजा लडखती जुबान मे - ओह्ह्ह मेरे प्यारे राआअज तूमने तो मुझ पे जादू कर दिया है अह्ह्ह मा उम्म्ंम्ं

मुझे समझते देर नही लगी की हो ना हो सरोजा ने ड्रिंक किया है

मै - क्या हुआ सरोजा जी आप ऐसे क्यू बोल रही है मैने क्या किया

सरोजा नशे मे लडखडाती जुबान से - तूम्हे पता है तालाक के बाद मैने किसी मर्द का लण्ड नही देखा था और आज्ज्ज्ज तुमने अपना लण्ड दिखा कर मेरे अन्दर की आग को भड़का दिया है राज अह्ह्ह्ह

मै घबडाहट से थूक गटकते हुए - ये आप क्या कह रही है सरोजा जी आपने कही ड्रिंक तो नही की ना

सरोजा ह्स के - हा राज की है मैने ड्रिंक लेकिन वो नशा तुमहारे नशे के आगे बेकार है राआआज्ज्ज आओ ना चोद दो मुझे अह्ह्ह देखो ना कबसे अपनी चुत रगड़ कर झड़ रही हू अह्ह्ह देखो ना फिर से झडने वाली हू मै अह्ह्ह राजज मुझे चोद दो ना अपने मोटे लण्ड से प्लीज राज अह्ह्ह मा अह्ह्ह आह्ह उफ्फ्फ घुसा दो मेरी चुत मे इसको अह्ह्ह

मै घबडाहट से पसिना पसीना हुए सोच रहा था कि कही मैने सरोजा की आग भडका कर कोई गलती तो नही की कही मेरे लिए मुसीबत न बन जाये ये

इधर फोन पर सरोजा मेरा नाम लेके झड़ते हुए शांत हो गयी और थोडी देर बाद मै भी फोन काट कर एक गहरे विचार मे खो गया और कब सो गया पता ही नही चला।

अगली सुबह मै 6 बजे उठा और जोगिंग के लिए गया लेकिन कही भी मुझे सरोजा नही दिखी तो मै भी वापस घर लौट आया और नहा धो कर नासता किया फिर दुकान पर चला गया ।

पूरा समय मै रात वाली घटना को लेके सोचता रहा और डर के मारे सरोजा को फोन तो क्या एक मैसेज करने की हिम्मत नही हुई ।

ऐसे ही मै दोपहर मे दुकान मे गहरी सोच मे बैठा था कि मा खाना लेके आई और मुझे सोच मे देख कर

मा - अरे बेटा क्या हुआ क्या सोच रहा है

मै चौक कर - नही नही मा कुछ नही ,

मा - तो चल हाथ मुह धुल के आ और खाना खा ले फिर पापा के लिए खाना लेते जाना

मै पापा के पास जाने को लेके थोडा सोच मे पड गया जिसको मा भी देख रही थी ।

मा मुस्कुरा कर मेरे बालो मे हाथ फेरते हुए - तू होली वाली बात को लेके परेशान है ना कि पापा के सामने कैसे जायेगा

मै - हम्म्म मा

मा - चिंता ना कर तेरे पापा बात करेंगे तुझसे इस बारे मे

मै संकोची होकर - लेकिन

मा मुस्कुरा कर - लेकिन वेकिन छोड और तू खाना खा ले फिर हम दोनो

मै खुशी से मा को हग कर बोला - सच मे मा

मा हा मे सर हिलाती है और फिर मै जल्दी से खाना खा कर खतम किया और थोडा दुकान का शटर गिरा के मा की जबरदस्त चुदाई की और खुशी मन से खाना लेके पापा के पास निकल गया

रास्ते भर मै सोचता रहा की पापा का सामना कैसे करूँगा और आने वाली परिस्थिती के लिए खुद को तैयार कर मै खाना लेके पापा के पास गया जो दुकान मे बैठे थे

मै एक दबी आवाज मे - पापा खाना

पापा की नजर जैसे मुझ पर गयी वो खुश हुए लेकिन मुझे नजरे चुराता देख उनको अपनी गलती याद आई और बोल शांत होकर बोले - बेटा खाना अन्दर रख दे मै आता हू ।

मै घबडाहट से आजाद हूआ कि अब उन्के सामने नही जाना पडेगा और मै झट से खाना रेस्टरूम मे रखा और वापस निकल ही रहा था कि पापा सामने आ गये ।

उनको सामने देख के पता नही क्यू मेरी फटने लगी और मै फिर से नजारे चुरा कर जाने को हुआ तभी

पापा - राज बेटा आओ बैठो मुझे कुछ बात करनी है

मेरी तो घिग्गी बन्ध गयी और थूक गटकते हुए वही खड़ा रहा ।

मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज हो गया था थी जिसका असर मेरे चेहरे पर हो रहा था ।

लेकिन पापा के चेहरे पर एक मुस्कान थी जिससे मुझे थोडी राहत हुई

पापा - अरे खडे क्यू हो आओ बैठो , लो ये पानी पीयो

फिर मैने ग्लास पापा के हाथ से लिया और गटागट पानी खतम कर एक गहरी सास ली

पापा मुस्कुराते हुए मुझे एक तस्वीर अपने पर्स से निकाल कर दिखाते है , जिसमे उनके जवानी की तस्वीर थी और उनके कन्धे पर हाथ रखे मेरे स्व. दादाजी थे ।

मै दादाजी की तस्वीर देख कर खुश हुआ

तो पापा मुस्कुराते हुए बोले - जानते हो बेटा मै और बाऊजी बहुत अच्छे दोस्त थे

मै पापा की बातो से मुस्कुराया

पापा - तू यकीन नही मनोगे बेटा

वो बहुत अच्छे शायर भी थे और मुझे प्यार मुहब्बत की शायरिया सिखाते थे । लेकिन मुझे इनसब में कोई रुचि नही होती थी

मै पापा की बाते सुन कर हस रहा था लेकिन कोई खास रिएक्ट नहीं कर रहा था ।

पापा भी इस बात को बखूबी नोटिस कर रहे थे ।

पापा - पता है बेटा आज उनके साथ रहने और समय बिताने का नतिजा है कि मै एक बेहतर जीवन जी रहा हू ,, उनके साथ बिताये समय के अनुभव से मैने बहुत कुछ सिखा और वो भी मुझे बहुत प्यार से समझाते थे चाहे कोई भी टोपिक हो ।

मै पापा की बाते ध्यान से सुन रहा था ।

पापा ठहरते हुए शब्दो मे - बेटा देख मै अब ज्यादा बातो को घुमा नही सकता ,,,मै चाहता हू कि तू होली वाले दिन की बात को लेके मेरे बारे कोई गलत ख्याल ना लाये ।

मै पापा की बात सुन कर थोडा अनकॉमफ़ोर्ट मह्सूस करने लगा

पापा मुझे समझाते हुए - देख बेटा मै भी चाहता हू तू भी तेरे मन मे जो भी बात है बेझिझक मुझसे कह जैसा मै मेरे बाऊजी से कह देता था । अब तू बड़ा हो गया है और तेरे मन में कही न कही मुझको लेके कोई बात जरुर चल रही होगी ।

पापा ने अपनी बात खतम की और थोडा सन्नाटा छाया रहा तो मै एक गहरी सांस ली और हिम्मत कर बोला - नही पापा ऐसी कोई बात नही ,,मुझे आपसे कोई शिकायत नही है और वो तो गलती मेरी थी मै बिना बोले उस दिन कमरे मे आ गया था हा लेकिन मुझे थोडा सा अजीब लगा जब छ्त पर आपको देखा तो

इतना बोल कर मै चुप हो गया और पाप के बोलने का इन्तेजार करने लगा ।

पापा थोडा गंभीर भाव मे मुझे सम्झाते हुए - दरअसल बेटा वो उपर छ्त पर जो हुआ उसमे मेरी गलती नहीं थी ,,वो मै तेरे मा के साथ लगा था और अचानक से कब तेरी चाची आ गयी और तेरी मा को समझ नही आया कि क्या करे तो झट से उसने तेरी चाची को खिच लिया कि कही वो किसी को बता न दे और अनजाने तेरे चाची का मुह तेरे मा के स्तन पर चला गया और फिर बाकी तू जानता ही है ।

मै पापा के सफाई देने के तरीके पर मुझे हसी आ रही थी लेकिन मै उसको मुह मे दबा कर ब्स मुस्कुरा रहा था

पापा मुझे मुस्कुराता देख खुद को थोडा हल्का मह्सूस किया और बोले - तो अब कोई झिझक नही है ना तेरे मन मे बेटा

मै मुस्कुराकर - जी नही पापा

पापा ह्स्ते हुए - शाबाश !! आ चल अब खाना खाते है

मै - नही नही पापा आप खाओ मै खा के आया हू

पापा - अच्छा ठीक है तू बैठ मै तेरे लिए जूस मगवा देता हू

मै ह्स कर - अरे नही नही पापा रहने दो

पापा खडे होकर - अरे बैठ भई शर्मा तो ऐसे रहा है जैसे बाप के आगे नही ससुर के आगे बैठा हो हाहाहाहह

मै पापा की बात सुन कर हसने लगा और वो बाहर किसी नौकर को एक जूस लाने को कहा और वापस आकर खाना खाने बैठ गये ।

मै वही बैठा रहा है

पापा - तब और बताओ बेटा कुछ

मै अचरज के भाव मे - क्या पूछिये पापा

पापा खाना खाते हुए - तब और बताओ हमारी होने वाली बहू से कब मिलवा रहे हो

मै शर्मा कर - जब कोई रहेगी तब ना मिलवाउँगा हिहिहिही

पापा चौकाने के भाव से - धत्त मतलब इतनी उम्र मे तुने कुछ नही किया

मै हस कर ना मे सर हिलाया

पापा - अरे जब मै तुझसे छोटा था तभी बाऊजी के पास मेरे कारनामो की शिकायते पहुचने लगी थी हिहिहिही

मै हस कर उत्सुकता से - कैसे कारनामे पापा

पापा हस कर - अरे वही सब कही इस खेत मे पकड़ा जाता किसी के साथ तो कोई अपनी बिटिया से मुझे दुर रखने की सलाह देने बाऊजी के पास आता

मै हस कर - फिर दादा जी क्या बोलते थे हिहिही

पापा हस कर - बाऊजी तो मेरे पक्के दोस्त थे और वो मुझे सम्झाते की ये सब कैसे छिप छिपा कर करना चाहिए हाहहहह

मै चौकने के भाव मे ह्स कर - भ्क्क्क सच मे

पापा ह्सते हुए - हा भई, लेकिन मेरी आदत तब बिगड़ चुकी थी फिर हार मान कर बाऊजी ने मेरे लिए रिश्ता देख कर तेरी मा से शादी करवा दी

मै थोडा मुस्कुरा कर शर्माने लगा

पापा मुझे छेड़ने के अंदाज मे - वैसे एक बात पूछू राज बेटा

मै खुशी से मुस्कुरा कर - जी पापा बोलिए

पापा - तुझे कैसी लडकिया पसंद है

मै समझ गया कि पापा धीरे धीरे अब मेरे तरफ बातो को घुमाने वाले है और मै भी उन्के साथ खुल कर शादी से पहले की उनकी सारी चतपति बाते और मस्तियो के बारे मे जानना चाहता था ।

मै थोडा शर्म से भाव मे - मतलब मै समझा नही पापा

पापा हस कर - अरे मेरे कहने का मतलब है तुझे कैसी औरत पन्सद है ,, तेरी मा कैसी भरी हुई या तेरे दीदी जैसे जवान बदन वाली

पापा ने मा और दीदी की चर्चा छेड़ कर मेरे तन मे एक सिहरन सी दौडा दी थी ।

मै संकोचवश कुछ बोल नही पा रहा था लेकिन मेरा पूरा मन था कि मै पापा को ये बताऊ की मै कैसे उन्के साथ मिल कर मा को चोदना चाहता था ।

पापा मुझे खोया हुआ देख के - क्या हुआ बेटा कुछ गलत तो नही ना पुछ लिया मैने

मै हलका सा हस कर - न न नही पापा ऐसा नही ,,लेकिन

पापा - लेकिन क्या बोलो बेटा , मुझसे ना शर्माओ , मै चाहता हू कि तुम भी मेरे साथ अपने दिल की बाते करो और नयी नयी चीज़ो के बारे मे जानो समझो ,आखिर तुम अब बडे हो रहे हो

मै मुस्कराकर - जी पापा , वैसे देखने मे तो दोनो अच्छी लगती है आखिर वो मेरी मा और बहन है ना

पापा हस कर - अरे बेटा एक भाई और बेटा बन कर नही एक मर्द बन के बताओ कि तुमको मौका मिले तो तुम किसके साथ समय बिताना चाहोगे अपनी मा के साथ या बहन के साथ

मै थोडी हिम्मत कर लड़खते शब्दो मे - वो मुझे वैसे मा ज्यादा अच्छी लगती है

ये बोल कर मै गरदन घुमा कर मुस्कुरा कर शर्माने लगा

पापा मेरे जवाब को तब्ज्जो देते हुए - अरे वाह जनाब पसंद तो आपकी बहुत बढिया है लेकिन क्या आप बतायेंगे कि आपने अपनी मा को क्यू चुना

मै शर्मा के ह्स्ते हुए - बस ऐसे ही पापा, मा मुझे अच्छी लगती है । उनकी स्किन बहुत मुलायम है और वो मुझे बहुत प्यार करती है और उनके

अब तक पापा खाना खा चुके थे और हाथ साफ करते हुए

पापा - और और ,, आगे बोलो बेटा

मै शर्मा कर - वो मा के बडे बडे दूध अच्छे ल्गते है मुझे

मै जानता था कि पापा मुझसे यही सब सुनना चाहते हैं पर मै इतना जल्दी खुलना नही चाहता था ।

पापा एक गहरी सास लेते हुए अपनी पैंट मे उभरे लण्ड को सेट करते हुए - आह्ह बेटा बात तो तेरी सही है ,,,तेरी मा के मोटे दूध है ही कमाल के ,,,मजा आ जाता है चुस के

मै पापा की बात सुन कर उत्तेजित हो रहा था लेकिन अपनी भावनाये रोक कर खुद को जान बुझ के शर्म से आच्ल से ढका हुआ था

पापा मुझे टटोलते हुए - बेटा तेरा मन नही करता कि तू फिर से तेरी मा के मोटे दूध पिए

मै पापा की बात सुन के सच मे चौक गया और मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई और मुझे समझ नही आ रहा था कि मै क्या जवाब दू इसका

मुझे चुप देख के पापा बोले - क्या हुआ बेटा बोल ना

मै मुस्कुरा कर - धत्त नही , वो मम्मी है मेरी , आप भी न हिहिहिही

पापा - अरे बेटा मा के दूध पर पहला तक तो तेरा ही है हाहाहाहा , वैसे तेरी मर्जी

पापा - अब से तू मुझे अपना दोस्त समझ और कुछ भी पुछना हो जानना हो तो हिचक ना करना

मै खुश होकर - जी पापा ,,अब मै जाऊ मा को वापस घर जाना है ना

पापा हस कर - अरे हा हा बेटा तू निकल ये टीफिन मै शाम को लेते आऊगा

फिर मै वहा से निकल पूराने घर की तरफ चल दिया और रास्ते भर पापा के साथ बिताये पलो को याद कर उत्तेजित होकर मुस्कुरा रहा था ।

फिर मै

दुकान पहुच कर मा से सारी बाते शेयर की और मा को बोला कि पापा को हमारे बारे ना बताये क्योकि मै पापा के तरीके से मजा लेना चाहता हू

और फिर हम दोनो आने वाले समय के लिए सपने बुनने लगे

जारी रहेगी

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मै पापा के वहा से वापस मा पास आया और उनको सारी बाते बताई । फिर हमारे बीच उनसब को लेके एक मस्ती भरी चर्चा के बाद मा खाने के टिफ़िन लेके घर निकल गयी और मै वही दूकान मे बैठ कर काम करने लगा ।

शाम को 3.30 बजे तक अनुज आया तो मै उसको बिठा कर निकल गया कोचिंग के लिए और शाम मे अनुज को खुद दुकान बंद करके घर आने को बोल दिया ।

चुकि 15 दिन बाद से मेरे एक्जाम भी सुरु होने वाले थे तो मै पढाई मे थोडा ध्यान देने लगा था ।

फिर शाम की कोचिंग के लिए मुझे वही अपने नये घर के बगल मे चंदू के घर पर ही जाना था और मै समय से पहुचा और क्लास अटैंड की फिर समय से घर चला गया और मा को बताया कि मेरा एक्जाम का टाईम टेबल आ गया है और दो हफ्ते बाद से मेरी परीक्षा है तो मै थोडा पढाई करना चाहता हू , आप प्लीज कुछ दिन के लिए दुकान के काम काज देख लिजीये

मा खुशी से - अरे कोई बात नही बेटा उसकी चिन्ता ना कर ,,वैसे भी अनुज की 9वी की परिक्षा पूरी हो गयी है तो वो अब फ्री है और मै उसके साथ दुकान देख लुंगी तू पढाई पर ध्यान दे

फिर मै चाय नास्ता कर उपर दीदी के साथ पढने चला गया । चुकी एग्ज़ाम आ रहे थे तो दीदी ने मस्ती करने के लिए साफ मना कर दिया था पढाई पर ध्यान देने को बोला और 8 बजे करीब मा ने हमे आवाज दी और फिर हम सब खाना खाने बैठ गये ।

पापा और अनुज भी आ गये थे

फिर हम सब ने खाना खाया और फिर पापा को भी पता चला की दो हफते बाद से हमारे एग्ज़ाम सुरु होने को है

खाने के बाद हम सब अपने कमरो मे चले गये ।

मै भी अपने क्मरे मे गया और लेट कर मोबाइल चलाने लगा ।

चेक किया तो देखा कोमल के 3 मिसकाल और 2 मैसेज आये थे । इसका मतलब था कि वो घर आ गयी थी ।

फिर मैने उसको कॉल किया और उससे हाल चाल लिया साथ एग्ज़ाम के बारे मे भी डिसकशन हुआ फिर उसने फोन रख दिया ।

मै भी बिंदास सोने के मूड मे था कि तभी एक मैसेज बिप हुआ जिसे देख कर मेरे दिल की धडकनें तेज हो गयी । ये सरोजा जी का मेसेज था

सरोजा - नाराज हो क्या राज

मै उनका मैसेज देखते ही कल रात की सारी घटनाये मन मे ताजा कर ली

फिर एक आत्मविश्वास के साथ उनको फोन किया

फोन पर :

मै - ह ह हैलो गुड इवनिंग

सरोजा - हाय राज गुड इवनिंग

मै - कैसी है आप , डिनर हुआ

सरोजा - हम्म्म्म और तुम्हारा

मै - हा मेरा हो गया और बताईये

सरोजा - राज वो मै कल रात के लिए तुमसे सॉरी बोलना चाहती हू , मैने नशे मे पता नहीं क्या क्या बोल दिया होगा तुमको

मै ह्स कर - मुझे सारा याद कहो तो बताऊ हिहिहिहिही

सरोजा शर्म से हस कर - धत्त पागल,, तुम तो फ़ोरमैलिटी जैसे चीजो को जैसे समझते ही नही हो ,,सीधा मुह पर ही बोल देते हो

मै हस कर - नही मुझे लगा शायद आप नशे मे थी तो आपको याद नही होगा तो क्यू ना मै आपकी मदद कर दू हिहिहिहिही

सरोजा - धत्त नही चाहिये मुझे मदद तुम्हारी

मै ह्स कर - कोई बात नही जी जाने दिजीये और बताईये

सरोजा थोडा संकोचवश- वो राज मै तुमसे मिलना चाहती हू ,, तुम फ्री हो इधर कभी

मै थोडा सरोजा से मजे लेने मूड मे - वैसे तो मेरे एग्ज़ाम आ रहे है लेकिन अब आप बुला रही है तो मै मना कैसे कर सकता हू

सरोजा हस कर - अरे अरे नही इतना जरुरी भी नही है , तुम पढाई करो और परीक्षा के बाद ही मिल लेंगे

क्योकि मुझे भी कल शाम तक दिल्ली के लिए नीकलना है , शादियो के सीजन आ रहे है तो नये collection के सिलसिले मे ,,, ओके चलो अभी बाय

मै - अरे कहा चली जी

सरोजा इतरा कर - सोने जा रही जी

मै ह्स के - मै भी आऊ जी

सरोजा इतरा के - ना ना जी

हिहिहिही रखो पागल कही के बाय गुड नाइट

मै ह्स कर - हा बाय गुड नाइट

फिर मैने फोन रखा और सो गया ।

फिर ऐसे ही समय बीता। धीरे धीरे हमारे परीक्षा के दिन करीब आ गये और हम सब ने जी तोड़ पढाई की और 4 अप्रैल को मेरा पहला एग्ज़ाम था ।

मै बडे सवेरे उठा और जल्दी से फ्रेश हुआ और नहाने के बाद आज मन हुआ कि एक लोटा जल सूरज दादा को भी दे ही दू । जैसा की आम परीक्षा के दिनो मे ही बच्चो को भगवान याद आते है बिल्कुल उसी तरह मुझे भी मन हुआ और मै जल देने छ्त पर गया और एक बार गायत्री मंत्र का जाप खतम कर वापस दरवाजे की ओर जा ही रहा था कि तभी मेरी नजर बगल के काजल भाभी के मकान पर गयी जहा काजल भाभी की सास नहा कर एक बाल्टी मे कपडे लेके आई थी और छ्त पर बने अरगन पर डाल रही थी ।

आह्ह क्या नजारा था ,, उनकी सास का बदन अभी भी भिगा ही था और वो बिना ब्लाउज के सिर्फ सारी को उपर से लपेटे हुए थी और उनकी नंगी पिठ पीछे से साफ दिख रही थी और वो फिर जैसे ही बाल्टी से कपडे लेने के लिए झुकी उनकी भारी गाड़ यू फैल कर सामने आई जिससे मेरा लण्ड टनटना गया और मुझे उसे पैन्त के उपर से दबाना पडा ।

फिर वही कपड़े डालने के बाद उन्होने अपनी साडी अपने छातियो से अलग की और उनकी मोटी मोटी ब्ड़ी चुची लटकी हुई दिख गयी और फिर उन्होने वही अरगन से एक सुखा हुआ ब्लाउज उतार कर पहन लिया और फिर बालटी लेके नीचे चली गयी ।

मै भी एक गहरी सास लेके - आह्ह्ह लग रहा है कि आज का पेपर मस्त होने वाला है ।

फिर मै खुश होकर नीचे आया और चाय नास्ता कर तैयार हुआ और 7 बजे तक चंदू मेरे घर अपनी साइकिल से आया । फिर मैने मा के पैर छुए और निकल गया एग्ज़ाम के लिए चंदू की साइकिल पर पीछे बैठ कर ।

रास्ते मे

चंदू - भाई मुझे तो बहुत डर लग रहा है पता नही कैसा सवाल आयेगा

मै पीछे से ही उसके सर पर अपने पटरी से मारते हुए - साले फत्तू मत बन , जो होता है अच्छे के लिए होता है ।

मै - अभी एग्ज़ाम के सवाल को छोड और रास्ते मे चल रही मस्त आईटम को देख आह्ह क्या मस्त गाड़ हिल रही है इसकी हय्य्य उम्म्ंम मा कसम मन हो रहा है खा जाऊ यार ,,अभी से इतनी मोटी गाड़

फिर हम दोनो उसको क्रॉस करते है और मैं साम्ने से उसकी मोटी उभरी हुई छातियो को देखता हू

चंदू - अबे साले वो सरला है नारायणपुर गाव वाली ,,तुने उसका चेहरा नही देखा

मै हस कर - साले तू उसका चेहरा देख रहा था हिहिहिही

फिर मैं वापस घूम कर उसका चेहरा देखता हू

मै - अरे हा रे ये तो सरला है ,,ये तो मेरे साथ 8 तक पढ रही थी । सालि कितनी गदरा गयी है । लग रहा है कोई मस्त चोद रहा है इसे

चंदू हस कर - भाई कोई और नही बल्कि इसका बापू ही इसको रोज रगड़ के चोद रहा है

मै चिढ़ कर - भाग साले तू कुछ भी बकता है और तुझे जैसे सब पता है

चंदू - अरे भाई पूरा नारारनपुर जानता है इनलोगो के बारे मे लेकिन सब चुप रहते है

मै - तुने देखा है

चंदू - नही भाई मै कहा

मै - फिर चुप कर बहस नही ,,साले वो देख कित्नी मस्त मस्त गाड़ वाली लड़कियाँ आई है ।

मै खुशी जाहिर करते हुए - आज तो दिन ही बन गया भाई उम्म्ं मुझे तो लेगी मे कसी हुई जांघो वाली माले मस्त लगती है अह्ह्ह क्या नजारा है भाई

चंदू - अबे माल छोड और आ जल्दी से रोल नं मिला कर कमरा देख ले रहे है

फिर हमने जल्दी से बोर्ड से अपना रोल नं मिलाया और अलग अलग कमरो मे निकल गये ।

इधर मै अपने एग्ज़ाम वाले कमरे मे घुसा

आहह कमरा पूरा मस्त काफी सारे परफ्युम की मिली जुली खुस्बु से महक रहा था और जहा नजर जा रही थी एक से एक हसिन माल दिख रही थी और कुछ तो भाभी टाइप की शादीशुदा थी जिनकी हाल ही मे शादी हूई थी और मस्त चुदवाने से उनका जिस्म निखर गया था ।

आह मेरे जैसे हवसी और चोदू इन्सान के लिए जन्न्त से कम नही था वो एग्ज़ाम का कमरा । ये नजारो को देख कर मैने तो प्लानिंग कर ली अगले सीजन से पक्का कालेज आना है और एक दो बढिया गदराया हुआ माल पटाना है ।

खैर मै जैसे तैसे अपनी सीट खोज कर रोल नं मिलाते हुए बैठ गया अपनी जगह और अभी 15 मिंट बाकी थे परीक्षा शुरु होने मे । इसलिए मै इधर उधर देख रहा था कि मेरे आगे पीछे कौन बैठा है लेकिन मेरे बगल वाली सित अब भी खाली थी तो मै लपक कर रोल नं वाली कागज को सीट पर चिपकी थी उसका नाम पढा और उस पर लिखा था सरला यादव

नाम को देखते ही मेरी आंखे ब्ड़ी हो गयी कि कही ये वही तो नही जिसको रास्ते मे ताड़ते हुए जा रहा था

मै बस दुआ करने लगा कि वो ना क्योकि जब मैने उसके पीछे से उसको कमेंट किया "अभी से इतनी मोटी गाड़ है आह्ह" तो मुझे डर लग रहा था कि कहो वो सुनी ना हो और मैने एक बार उसको मुड कर भी देखा था तो कही वो मुझे पहचान ना रही हो ।

खैर मै इन्ही ख्यालो मे डुबा था कि मुझे किसी आवाज ने जगाया

मै नजर उठाई तो वो सरला ही थी , छोटा कद लेकिन भरा हुआ जिस्म , मोटी जान्घे जो लाल लेगी मे कसी हुई थी और सिने पर मोटी चुचिया पीली कुर्ती मे उभरी हुई थी । हालाकी सरला का शकल कुछ खास नही था लेकिन उसके गदराये जिस्म का आकर्षण जबरजस्ट था ।

मै उसको देख कर थूक गटकते हुए चेहरे पे बनावती मुस्कान लाते हुए - अरे सरला तुम , यहा कैसे

वो भी मेरे मुस्कान को देख कर मुह बनाते हुए इतरा कर बोली - साइड हटिये मुझे उधर जाना है

मुझे सरला का ये तुनक कर जवाब देना कुछ समझ नही आया और मै चुपचाप खड़ा हुआ और वो दुसरी तरफ चली गयी और मै वापस बैठते हुए ।

मै वापस बेशर्मी से दाँत दिखाते हुए - हिहिही अरे सरला लग रहा है कि तुम मुझे पहचानी नही मै राज हू । याद है हम क्लास 8th तक साथ मे पढे थे

सरला मुह बना कर - हा याद है और मैने तुम्हे तभी पहचान लिया था जब तुम रास्ते मे मेरी तारिफ कर रहे थे ।

मै सरला के तीखे तेवर भरे जवाब से सकपका गया और जिसका डर था मुझे वही हुआ

मै कुछ बोलता उस्से पहले ही सरला वापस से अपना भड़ास निकालने लगी - तुमको शर्म नही आई राज ऐसे शब्द बोलते हुए , मै तो हमेशा तुम्हे एक अच्छा और जिम्मेदार लड़का समझती थी लेकिन तुम भी बाकियो के जैसे हो

मै सरला के दूतकार भरे लफ्जों से खुद बहुत शर्मिंद्गी मह्सुस करने लगा और एक दबे स्वर मे सरला को सॉरी बोला

इससे पहले हमदोनो के बीच कोई बातचित होती उससे पहले ही परीक्षा की घंटी बजी और पेपर बटने शुरु हुए और फिर हम दोनो अपने एग्ज़ाम मे व्यस्त हो गये ।

पेपर पढने बाद मैने लिखना शुरु किया और धीरे धीरे 2 घन्टे बीत गये और इस दौरान मेरी हिम्मत ही नही हुई कि मै सरला के तरफ कोई ताक झाक करू

आखिरी के 30 मिंट से पहले ही मेरे सारे सवाल हल हुए और मैने पेन बंद कर साइड मे रख कर मै उनका रिवीजन करने लगा । जिसे सरला बडे गौर से देख रही थी और तभी वो बोली

सरला - तुम्हारा हो गया क्या

मै उस्से ज्यादा बात करने मे हिचक मह्सूस कर रहा था तो- हममं हो गया

सरला हस कर - अरे भाव ना खाओ यार ब्स ऐसे ही खाली हुए ही तो पुछ रही हू

मै सरला के ऐसे व्यव्हार की उम्मिद नही थी क्योकि सरला को मै बचपन से जानता था वो एक स्वाभिमानी लड्की थी और बिना कोई स्वार्थ के ऐसे मीठी बाते करना मुझे शक हुआ लेकिन फिर भी मैने सामान्य होकर ही जवाब दिया

मै इत्मीनान से उसकी ओर मुह कर - हा बोलो जी

सरला हस कर हिचक दिखाते हुए अपना पेपर मेरे तरफ कर एक प्रश्न पर उन्ग्ली रख्ते हुए - ये वाला तुमने किया क्या

और वो मुस्कुराने लगी

मै समझ गया कि उसको मेरी मदद की जरुरत है तो मैने हा मे सर हिलाया और उसके बोलने से पहले ही अपनी उत्तर पुस्तिका का वो पेज खोल कर उसकी तरफ रख दिया और वो झट से 4 5 नजर मे उतर लिख कर

सरला मुस्करा कर - हो गया थैंक यू

मै सिरिअस मोड मे - हमम ओके

फिर मैने वाप्स से सारे सवाल देखे और फिर आखिरी घंटी का इन्तजार किया ।

फिर पेपर जमा कर मै बाहर निकला और सामने चंदू मिला और उसका रोना शुरु , यार थोडा समय कम पड गया और ये वाले सवाल का ये लिखा है सही होगा की नही

मै उसको गालिया देते हुए बाहर लेके आया और फिर हम दोनो निकल गये घर

रास्ते मे मैने डर के मारे और किसी लडकी को लेके कोई कमेंट बाजी नही की

घर आकर मैने खाना खाया और फिर थोडी देर सो गया और फिर शाम को उठने के बाद फिर से पढाई मे लग गया क्योकि अगला पेपर दो दिन बाद था इसिलिए इस दौरान मैने वापस से अपना ध्यान पढाई मे लगाया

रात मे नोर्माली कोमल और निशा से बात हुई वो सिर्फ एग्ज़ाम को लेके ही , सबकी फटी हुई थी एग्ज़ाम को लेके तो क्या कोई बात करता और मेरा खुद वही हाल था तो मैने भी पढाई मे ही ध्यान दिया

दो दिन बाद मेरे दुसरे परीक्षा का दिन आया और फिर उसी तरह मेरे दिन की शुरुवात हुई और सुबह मे काजल भाभी की सास के दर्शन हुए फिर 7 बजे तक चंदू आया और हम दोनो निकल गये ।

फिर रास्ते मे सरला मिली आज उसने मरून टीशर्ट और क्रीम कलर लॉन्ग स्कर्ट पहना हुआ था जिसमे उसकी गाड़ और भी हिल रही थी , वही टीशर्ट मे चुचो का कसाव ऐसा की थूक गटकने की नौबत आ जाये ।

खैर इस बार मैने कोई कमेंटबाजी नही की और सीधा निकल गया

आगे जाने पर

चंदू- अबे आज तो सरला और भी गच्च लग रही है यार

मै - हा हा चल आगे देख के चला ,,, देखा मैने सालि को

चंदू - भाई मेरा तो मूड हो गया है इसको चोदने का

मै चिढ़ कर - हा तो जा चोद ले जा

चंदू - क्या हुआ भाई आज तेरा मूड सही नही है

मै इरिटेट होने के भाव मे - नही यार ऐसा कुछ नही है छोड जाने दे । चल अपने अपने कमरे मे जाते है बाद मे मिलते है

फिर हम दोंनो अपने अपने एग्ज़ाम कमरे मे आ गये

थोडी ही देर में सरला आई और मै से बिना कूछ बोले खड़ा हुआ और वो दुसरी ओर चली गयी ।

सरला ह्स्ते हुए - गुड मॉर्निंग राज

मै उसको इग्नोर करने के अंदाज मे - हा कुछ कहा तुमने

सरला हस कर - मैने कहा गुड मॉर्निंग

मै भी फारमैलिटी करते हुए - हा गुड मॉर्निंग फिर वापस से ऐसे ही इधर उधर ताक झाक करने लगा

सरला को अह्सास था कि मै उससे बात करने के मूड मे नही हू

सरला थोडी मेरे तरफ ख्स्की तो मै चौका और उसकी ओर देखा

सरला मुस्कुरा कर - क्या यार तुम उस दिन की बात को इतना सिरिअस ले रहे हो कि अब बात भी नही कर रहे हो

मै खुद को नोर्मल दिखाता हुआ - नही ऐसी बात नही है सरला , और उस दिन के लिए मुझे बहुत अजिब फिल हो रहा है

सरला मुस्कुरा कर - कोई बात नहीं राज , हो जाता है कभी कभी , अब तुमने जो देखा वो मुह से निकल गया होगा

मै सरला की ऐसी बाते सुन कर थोडा खुद को शांत किया

सरला - यार तुम मेरे बचपन के दोस्त हो और एक छोटी सी बात को लेके बैठ गये हो । ये नही है कि मिले है इतने समय बाद तो कोई बात करे

मै थोडा मुस्कुरा कर - ठीक है तो बताओ फिर 8th के बाद कहा गायब हो गयी थी हा

सरला - वो मै मामा के यहा से पढने चली गयी थी और तुम

मै - मै तो शुरु से यही हू , वैसे बुरा न मानो एक बात पूछू

सरला हस कर - हा क्यू नही

मै - क्लास 8th तक तुम इतनी दुबली पतली थी फिर अचानक से भैस कैसे हो गयी हिहिही

सरला मेरी बात सुन कर अपने पटरी से मेरे सर पर हल्के से मारते हुए - भक्क पागल , इतनी भी मोटी नही हू कि मुझे भैस बुलाओ तुम , हा थोडा असर तो हुआ है

मै एक नजर सरला के चुचो को घुर कर टीशर्ट के उपर से दिख रहे उसके ब्रा का शेप देख थूक गटकते हुए - थोडा असर इतना नही होता

सरला मेरे बातो का मतलब समझ गयी और बोली - भक्क गंदे ,,तुम नही सुधर सकते मतलब

फिर हम दोनो हसने लगे और फिर एग्ज़ाम के पेपर बटने शुरु हुए

आज फिर मैने उसकी थोडी मदद की और हमने 20 मिंट पहले ही सारे प्रश्न हल कर लिये ।

फिर सरला - वैसे तुम्हारी पढाई तो पहले की तरह तेज ही है

मै ह्स कर - हा और तुम अभी बुधु हो हिहिही

सरला मेरी बातो से शर्मा के हसने लगी

मै ह्स कर - तब शादी कब तक कर रही

सरला चौक कर - शादी वो भी अभी से

मै हस कर - हा वो कोने मे देखो सुधा बैठी है उसकी शादी तो हो गयी ।

सरला हस कर - मैने कौन सा उसके जैसा किसी के साथ भागी हू कि मेरे बापू इतनी जल्दी मेरी शादी करवा देंगे

मै चौकते हुए - मतलब

सरला दबी हुई आवाज मे - अरे तुमको पता नही है पिछ्ले साल स्कूल खुलने के बाद वो पास के गाव के लडके के ही साथ भागी थी और बडे शहर मे पकड़ी गयी

मै - फिर क्या हुआ

सरला - फिर क्या उन दोनो की शादी कर दी गयी

मै - लेकिन फिर भी उसकी उम्र कम है अभी

सरला मुह दबा कर हस कर - हा लेकिन और कोई रास्ता नही था , उस समय वो पेट से थी तो

मै चौक कर एक नजर सुधा पर डाला लेकिन वो अपने पेपर मे बिजी थी - ओह्ह

सरला - तुम बताओ तुम कब कर रहे है शादी

मै हस कर - अभी कहा , अभी तो दिदी की शादी होनी है इसि साल फिर दो साल बाद कही मेरी होगी

सरला हस कर - और कोई गर्लफ्रेंड होगी ना

मै शर्माने के भाव मे - मुझे कौन पसन्द करेगा और कोई किया होता तो मैने उस दिन तुम्हारी तारिफ क्यू करता हिहिहिही सॉरी

सरला मेरी बातो से झेप गयी और मुह फेर के हसने लगी

मै मौका देख कर - वैसे सच मे तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड नही है

सरला ह्स्ते हुए ना मे सर हिलाया

मै भी हस कर - यार यकीन करना मुश्किल हो रहा है कि बिना बॉयफ्रेंड के

सरला शर्मा के - जैसा तुम सोच रहे हो वैसा कुछ नही है ,अब मेरी बॉडी ऐसे ही है तो मै क्या करू

मै आगे कुछ बोलता उससे पहले ही पेपर जमा होने लगे और फिर मै उसको बाय बोल कर निकल गया ।

रास्ते मे मै और चंदू घर की ओर निकले और मुझे ध्यान आया कि अगर सरला का कोई बॉयफ्रेंड नही है तो कही वो सच मे अपने बापू से तो नही

मै कुछ सोचा और फिर

मै - चंदू घर नही जाना है सीधा पुलिया की ओर चल बाग मे

चनदू - अरे लेकिन उधर क्या करने भाई भूख लग रही है

मै - भोस्डी के चल चुप चाप

और फिर हम दोनो टाउन के बाहर पुलिया के पास एक बाग की ओर चले गये। जहा उसी बाग के बीच से एक कच्ची सड़क सरला के गाव नारायनपुर को जाती थी

जारी रहेगी

.....................................
 
फिर मेरे कहे अनुसार चंदू साइकिल लेके बाग मे लेके गया और हम दोनो छिप गये ।

क्योकी सरला के गाव नारायणपुर गाव के लिए इसी बाग के बिच से एक कच्ची सड़क जाती थी

फिर हमने 15 मिंट इन्तेजार किया और सरला आती दिखी बाग की तरफ और हम दोनो उस रास्ते से दुर होकर छिप गये पेड़ की ओट मे

थोडी देर बाद जब सरला गाव की तरफ चली गयी तो हम दोंनो साइकिल लाक कर वही बाग मे जमीन पर लिटा कर छोड दिये और उसके पीछे निकल गये ।

लेकिन सरला बाग से निकलने के बाद गाव की तरफ ना जाकर खेतो की ओर जाने लगी

चंदू - अबे ये तो खेतो की ओर जा रही है

मै - अबे तू चुप कर ये कही भी जाये बस देखते रह

फिर वो आगे जाकर खेत के बीच मे बने पक्के नये घर की ओर जाने लगी जो काफी सुनसान जगह पर था । घर नया ही था लेकिन अभी रंग रोगन नही हुआ था

मै चंदू के सर पर थप्पड़ मार कर - देख साले उसका घर वहा है गाव मे नही

फिर वो दाँत दिखाने लगा

और हम दोनो उस समय सरसो और अरहर के खेतो मे छिपते हुए उसका पिछा करते हुए गये और धीरे से उसके घर के पिछवाड़े ओर घूम घुमे

क्योकि उस्का घर पीछे से खुला हाता था और आगे एक बरामदा था जिसमे एक चौकी रखी थी और दो कमरे थे ।

पीछे हाते मे एक जगह मिट्टी का चूल्हा बनाया गया था और पीछे का हाता पूरा अरहर के सुखे राठ से घेरा बना के रखा गया था । उसी राठ के बने हाते के पीछे मै और चंदू गये । वही से हम चुप चाप छोटे छोटे गैप के बिच से ही अन्दर का नजारा देख रहे थे ।

सरला के घर मे सिर्फ़ उसके बापू और वो रहते थे क्योकि सरला की मा काफी समय पहले ही गुजर गयी और उसका कोई भाई या बहन नही था ।

हम पीछे उस अरहर के राठ की ब्नाये हाते से अन्दर का नजारा देखने लगे ।

अन्दर एक तरफ रसोई के लिए जगह थी वही दुसरी तरफ जहा छाव थी वहा एक खाट पर सरला का बाप बेचन लुंगी और शर्त पहने लेता हुआ था ।

तभी सरला बापू बापू कहते आती हाते मे

सरला - अरे बापू आप सोये हो , खाना क्यू नही खाया

बेचन - अरे बिटिया सोचा तू आयेगी तो साथ मे खा लूंगा ,,आ बैठ और बता कैसी गयी तेरी आज की परीक्षा

सरला अपने लेटे हुए बापू के पेट के पास खाट पर बैठ जाती है

सरला ह्स के - अरे बापू परीक्षा एकदम मस्त हो रहा है हिहिहिही

तभी बेचन ने सरला की चुचियो को हाथ बढ़ा कर हल्का सा दबा कर कहा - आह्ह फिर तो थोडा मुझे भी मस्त कर दे ना बेटी

सरला मुस्कुरा कर क्समसाते हुए - आह्ह बापू क्या आप भी आते ही शुरु हो गये

यहा बेचन की हरकत देख कर चंदू मुझे इशारे से अन्दर के काण्ड के बारे मे बोला

मै भी उसको चौकने के भाव मे आगे देखने को इशारा किया

इधर अन्दर बेचन अपनी बेटी सरला को अपने उपर खिच उसकी चुचिया मिजने लगा और एक हाथ से उसका क्रीम कलर का स्कर्ट उठा कर लाल रंग की कच्ची के उपर से उसकी मोटी गाड़ को फैलाने लगा

अन्दर का नजारा देख हमारे पैंट मे तनाव होना शुरु हो गया और उधर बेचन उठ कर सरला को सामने अपनी गोद मे बिठा कर पीछे से उसकी दोनो मोटी चुचिया मिज्ने लगा ।

सरला - आह्ह बापू आराम से बहुत बड़ा कर दिये हो आप इसको

बेचन - अरे बेटा बड़ी चुचियो ही आजकल सबको भाती है देखना तेरी ये मोटी चुचियो को देख कर कोई अच्छा लड़का तुझे पसंद करेगा आह्ह मस्त मुलायम है रे चुची

सरला सिस्क कर - आह्ह नही बापू मुझको शर्म आती है सारे लोग घुर कर देखते है मेरे दूध और गाड़ को

गाड़ का नाम लेते ही बेचन को पता नही क्या हूआ और सरला को घुमा कर उसके चुचियो को टीशर्ट से उपर से ही मुह मे भरते हुए उसकी गाड़ को मसलने लगा और हाथ को उसकी कच्छी मे डाल दिया

बेचन - आह्ह बिटिया तेरी कच्छी तो पहले से ही गिली है

सरला मदहोशि मे - आह्ह बापू वो आज परीक्षा मे मेरा एक दोस्त था उसकी बाते सुन कर मै गरम हो गयी थी आह्ह बापू आराम से आह्ह आह्ह

बेचन जिज्ञासू भाव मे - कौन था वो बेटी

सरला शर्मा कर नाक मे नुकुराते हुए थोडा हस कर - बापू वो मेरे बचपन का दोस्त है 8वी तक पढा है ।राज नाम है उसका और मेरे बगल मे ही बैठता है अह्ह्ह आज उसने शादी ब्याह और प्यार मुहब्बत की बात छेड़ दी तो मुझे आपके मुसल की याद आ गई तो अह्ज्ज आह्ह आराम से बापू

यहा सरला के मुह से मेरा नाम सुन कर चंदू मुझ पर भड़कने लगा और इशारे मे गालिया देने लगा

वही बेचन - कोई बात नही बेटी रुक अभी तेरी गर्मी उतार देता हू

और फिर बेचन ने सरला की लिता कर उसका स्कर्ट उठा कर मुठ्ठि मे उसकी मुलायम चुत को मसलने लगा

जिस्से सरला दर्द और मजे से कसमसा गयी

फिर बेचन ने उसकी कच्छी निकाल के उसको खाट पर लिटा कर खुद जमीन पर उकुडू होकर लपालप उसकी झाट से भरी चुत चाटने लगा

सरला - आह्ह बापू आराम से उम्म्ं और चुसो बहुत खुजली हो रही थी कालेज मे आह्ह और उम्म्ंम आह्ह आह्ह बापू अह्ह्ह ओह्ह बाल ना खिचो आह्ह मा

यहा सरला की चुत चुसाई से हम लंड़ तन गये और हमने चैन खोल कर लण्ड बाहर निकाल कर मुठीयाना शुरु कर दिया

वही बेचन ने जोश मे आकर उठा और अपना लूंगी खोल कर झट से अपना सुखा लण्ड सरला की पिचपिचाती चुत मे पेल दिया

सरला चीख उठी - आह्ह बापुउउऊ आह्ह मा मर गयी अह्ह्ह धीरे आह्ह

बेचन ने अन्दर लण्ड घुसेड़ तो दिया लेकिन खाट छोटी होने से उससे धक्का लगाने मे दिक्कत हो रही थी

वही बेचन छोटे कद की सरला को झट से अपने गोद मे उठा कर खड़ा हुआ और उसे लण्ड पर बिठा कर उछालने लगा

सरला अपने बापू के मोटे लण्ड पर बैठ कर उसके कंधो मे हाथ डाले लंद पर झूल रही थी

इधर सरला की ऐसी ताबड़तोड़ चुदाई देख हमारा लण्ड फटने पर आ गया

वही सरला की गोल मतकाए जैसी गाड को थामे उसका बापू घ्प्प घ्प्प अपने लण्ड पर खडे खडे उछाल रहा था

यहा हम दोनो की हालत सरला की ऐसी चुदाई होते देख खराब हो चुकी और हमारे हाथ हमारे लण्ड पर तेजी से चल रहे थे और जल्द ही एक गहरी आह्ह के साथ हम दोनो झड़ने लगे और झट से वहा से खसक लिये ।

बाग मे पहुच कर

चंदू भडक कर - अबे साले तुने बताया क्यू नही सरला तेरे पास बैठती है

फिर मैने उसको पहले दिन हुई घटना के बारे मे बताया कि कैसे उसने मुझे बेज्ज्त किया था तब वो शांत हो गया

चंदू - फिर तू यहा क्यू आया मै तो पहले ही बोल रहा था कि वो अपने बापू से चुदती है

मै - हा वो आज उसने बताया कि उसक कोई बॉयफ्रेंड नही है तो मुझे शक हुआ कि कही तेरी बात सच तो नही है और इसी बहाने हमे उसकी मोटी गाड़ और चुत भी देखने को मिल गये हिहिहीही

चंदू - हा भाई मजा आया लेकिन उसका बापू तो बड़ी जोर की चोदता है ,,, साला उसको लेके टांग लिया और लण्ड पर ही कुदवा रहा था

फिर हम ऐसे ही बाते करते वापस अपने घर चले गये

सरला की चुदाई देखने के बाद मुझे चुत की तलब थी और अगली परीक्षा को 4 दिन का समय था तो मैने मौका देख कर निकल गया 2 वजे से विम्ला के यहा क्योकि कोमल की परीक्षा दुसरे शिफ्ट मे थी

15 मिंट बाद मै विमला के घर की तरफ पहुचा , चैत महिने की गर्मी से बाहर कोई दिख नही रहा था यहा की सड़के भी सुनी थी ।

खैर मै विम्ला के घर गया और पहले के जैसे गेट भिड्का हुआ था

तो मै बिना कोई हलचल के हल्का सा खोल कर अन्दर घुस गया और चुपचाप बढ़ने लगा । मैने सोचा क्यू ना विमला को सरप्राइज़ दू

इसिलिए चप्पल बाहर ही निकाल कर दबे पाव हाल की तरफ आया वहा भी सना सन खाली था सब । बस विमला के कमरे से टीवी की आवाज आ रही थी ।

मै एक कातिल मुस्कान के साथ उभरे लण्ड को दबा कर उस्के कमरे की ओर गया और दरवाजे पर हल्का सा जोर दिया लेकिन वो अन्दर से ब्न्द था मै झट से लपक कर खिडकी की तरफ गया लेकिन वहा भी सब बंद था । मुझे लगने लगा कि जरुर अन्दर मनोज भिडा होगा

मै थोडा मायूस होकर सोफे पर बैठ गया और 5 मिंट तक ऐसे ही थकान से झपकी सी आने लगी , तभी मुझे कमरे मे कूछ खटपट सुनाई दी और शायद टीवी भी बंद हो गया था

मै झट से उठा और बगल मे कोमल के कमरे मे घुस गया और खिडकी से बाहर की ओर देखने लगा

तभी कमरे का दरवाजा खुला और कमरे मे से अनिता और विमला सिर्फ पेटीकोट मे बाहर निकाली । दोनो की मोटी मोटी चुचिया हवा मे झूल रही थी और उनके ब्लाउज खुले हुए थे ।

तभी अनिता बोली - दीदी ये लाईट भाग जाने से मजा अधूरा रह गया

विमला - तो परेशान ना हो मेरी रसिली

आजा यही मजा करते है हाल मे

अनिता घबडाहट भरे लहजे मे - भक्क कोई आ गया तो

विमला - अरे कोई नही आयेगा , रुक मै दरवाजा बंद कर देती हू और विमला अपनी चुचिया हिलाते हुए मेन गेट की ओर जाने लगी

और यहा मुझे धकधक होने लगा कि कही वो मेरा चप्पल न देख जाये

खैर वो गयी और वापस आई

विमला हाल मे आते ही एक नजर सब ओर घुमा रही थी और मै झट से खिडकी से हत गया ।

तभी विमला की आवाज आआई

बिमला - आजा मेरी जान अब चुस मेरा भोस्डा आ

मै विमला की आवाज सुन कर वापस से झाका बाहर की ओर

जहा विमला सोफे पर टाँग फैलाये अपना पेटिकोट उपर कर अपना चुत खोलकर बैठ गयी और वही अनिता भी उकुडू बैठते हुए अपनी गरदन आगे कर लपालप चुत पर जीभ चलाने लगी ।

वही विमला उत्तेजित होकर अनिता का सर तेजी से अपने भोस्ड़े मे दरते हुए सिस्कने लगी

मै विमला को अनिता के साथ ऐसे देख कर कोई खास गड़ब्ड़ नही लगी लेकिन फिर कुछ खास सवाल जरुर आये मन मे लेकिन मैने उनको टाल दिया

और वही थोडी देर बाद विमला अनिता को फर्श पर लिटा कर उसके उपर चढ़ कर 69 की पोजीशन मे आते हुए उसकी मोटी मोटी जांघों को फैला कर उसके फैले हुए भोसड़े मे अपना मुह लगा दिया और वही अनिता अपने मुह पर विमला की गाड़ पाकर उसे चाटने लगी ।

विमला हवस से भर कर पुरे जोश मे अनिता के चुत की चमडी मुह से खीचते हुए चुस रही थी

और तभी उसके अपनी दो उंगलियाँ एक साथ अनिता के चुत मे घुसेड़ दिया

वही ये सीन देख कर मै उत्तेजित हो गया था और अपना लण्ड बाहर निकाल कर हिलाने लगा

अनिता - अह्ह्ह जीजी उम्म्ं काश कोई मोटा लण्ड मिल जाता तो उम्म्ं अह्ह्ह और तेज उम्म्ं

इधर विमला ने वापस से अपना मुह लगा कर एक बार जोर से चुसते हुए इस बार तीन ऊँगली अनिता के मोटे भोस्ड़े मे घुसेड़ते हुए अपनी कलाइया घुमाने लगी मानो कोई चीज खोज रही हो ।

अनिता तडप कर - आह्ह जीजी और अन्दर तक फैलाओ आह्ह मा आह्ह आह्ह जीजी उम्म्ंम

और वापस से अपना मुह विमला के चुत मे लगा कर जोर जोर से चूसने लगती है

मै अनिता की बात सुन कर और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया था और सोचा अब ये दोनो बहुत गरम है यही मौका है कि अनिता की चुत मे भी लण्ड डालू

इसिलिए मै झट से अपना सारा कपडा निकाल के पूरा नंगा होकर हाल मे चुपचाप गया और धीरे से अनिता के जांघो के बिच अपना लण्ड विम्ला के मुह के पास रखा

वो एक नजर मुझे देखी और मुस्कुरा दी और चुप रहने का इशारा की

मै समझा मुझे देख कर विमला चौकेगी , पर शायद गेट के पास उसने मेरे चप्पल देख लिये थे

इसिलिए वो ऐसे रियक्ट कर रही थी ।

मैने दे ना करते हुए उकुडू होकर झट से लण्ड विमला के मुह मे पेल दिया और घुटने के बल खड़ा होकर तेजी से उसका सर पकड कर लण्ड को उसके मुह मे चोदने लगा

उधर अनिता लगातर विम्ला की चुत और गाड़ मे जीभ घुमा रही थी और विमला के हाथ अभी भी अनिता की चूत पर रेग रहे थे ।

फिर विमला ने आराम से अपने मुह से मेरे लण्ड को निकला और खुद अनिता की जांघो को उपर किया और मैने देर ना करते हुए झट से आधा लण्ड अनिता की मोटी फुली हुई चुत मे घुसा दिया जिस्से वो कराह उठी

अनिता - आह्ह जीजी ये तो सच का लंड हैअह्झ मा

और अनिता ने गरदन उठाया और मुझे देखा - हय्य राम जीजी ये तो , नही नही ऐसा ना करो जीजी ,ये गलत होगा

मै एक तेज धक्का देकर उसकी चुत की गहराइयों मे लण्ड को ले गया और बोला - सालि चुप कर , जब अपने पति और देवर का लण्ड एक साथ लेती है वो गलत नही लगता , अभी नखरे दिखा रही है

और ये बोल कर मैने अनिता की जांघो को थामा और तेजी से धक्का लगाते हुए पेलने लगा ।

वही विमला वापस अनिता के मुह पर अपनी गाड़ रख कर बैठते हुए - अब चुस सालि आह्ह हा ऐसे ही उफ्फ्फ हा चाट कुतिया की तरह आह्ह आह्ह्ज

इधर विमला उत्तेजि होकर अनिता की जीभ और नथुने अपनी चूत को रगड़ रही थी वही मै अनिता की जान्घे उठाए घपाघ्प्प उसके भोस्दे मे पेले जा रहा था ।

थोडी देर बाद

मै - मौसी जरा उठना इस रन्डी को कुतिया बना कर पेलूंगा

और विमला उठ गयी और मैने झट से अनिता के चुत से उसकी पानी से सना लण्ड निकाला और फिर उसको कुतिया बनाने के लिए उसके जांघो को एक तरफ झटका जिससे वो कसमसा कर सिस्कते हुए घुटनो के बल कुतिया बन गयी

आह्ह मोटी थुलथुली गाड़ थी एकदम चर्बिदार

मै एक च्पाट अनिता की गाड़ पर लगाकर झुक कर उसके गाड़ के पाट खोलते हुए उसके सुराख चाटने लगा ।

वही विमला वापस से अनिता के सामने अपना चुत परोसते हुए लेट गयी और अनिता के झट से झुक कर उसके चुत मे मुह लगा दिया और झुकने से उसकी गाड़ और भी फैल गई,, ब्स मेरा मूड़ अब बदल गया और मैने अनिता के गाड़ के सुराख पर 3 4 बार थूक कर उसे लिपते हुए उसके गाड़ के मोटे सुराख मे अंगूठा घुसा दिया और वो विमला के चुत मे मुह घुसाये ऊहह उह्ज करने लगी ।

अनिता चाह कर भी खुल कर आहे नही भर सकती थी कयोंकि विमला ने जबरजस्ती उसका सर अपने चुत के उपर दबा रखा था

और मैने झट से अपना गिला लण्ड अनिता के गाड़ के मोटे भूरे सुराख पर रखा और उसके कूल्हो को थामते हुए जोर लगा कर अपना लण्ड उसकी गाड़ मे पेल दिया

वही अनिता ने गाड़ मे लण्ड पाते ही जोर झपट कर विमला से खुद को छुड़ा कर - आह्ह मैइया साले हरामी फाड़ दी ना मेरी गाड़

मै उसकी बाते सुन कर गुस्से मे आते हुए - दोनो हाथो से एक साथ उसक गोरी चमड़ी वाली थुलथुली गाड़ के पाटो पर जोर से मारा , जिससे अनिता दर्द से गनगना गयी और फिर मैने एक तेज झटके के साथ पूरा लण्ड उसकी गाड़ की दिवारो को चिरते हुए जड तक ले गया

यहा अनिता की आवाज बंद हो गयी । वो दर्द और थकान से बेहोश सी होने लगी ,,,लेकिन मैने बिना रुके तेजी से उसकी गाड़ मे जगह बनाना शुरु किया और तेजी से पेलना शुरु किया

जल्द ही अनिता की चेतना वापस आई और वो सिसकिया लेने लगी और उसके जुबान की मधुरता वापस आने लगी,,उसके चेहरे पर एक मादक सी मुस्कान थी और वो खुद गाड़ से मेरे लण्ड को निचोडना शुरु कर दी

अनिता - आह्ह बाबू और चोदो मुझे उम्म्ं बहुत मस्त लौडा है तेरा अह्ह्ह म्जा आ रहा है अह्ज्ज पूरा खोल कर रख दिया है अह्ह्ज

मै अनिता की बाते सुन कर विमला की ओर देखता हूँ तो वो भी मुस्कुरा कर वाप्स अनिता के मुह मे चुत लगा देती है

मै अनिता का गाड़ पर थप्पड़ लगाते हुए - क्यू सालि रन्ड़ि अभी तक तो मुझे गाली दे रही थी अब मजा आ रहा है हम्म्म्

ये बोल कर मैने अपना लण्ड उसके गाड़ के गहराई मे ले गया

अनिता सिस्क कर - ओह्ह्ह अह्ह्ज माफ करना बेटा तुने अचानक से मेरे गाड़ मे इतना मोटा लण्ड डाल दिया इसिलिए मेरे मुह से अह्ह्ज अह्ज और चोद आह्ह मजा आ रहा है जीजी , कहा से लायी हो इसको उम्म्ंम्ं

वही विमला अपने गाड़ उचका कर अनिता क महे पर दरते हुए - तू बस मेरा पानी निकाल कमिनी ज्यदा ब्ड़ब्ड़ मत कर

ये बोल कर विमला अपनी गाड़ उचका कर अनिता के मुह मे झड़ने लगी

यहा मै भी अनिता के कसी गाड़ मे पेलकर झडने के करीब था और झट से उसके गाड से लण्ड को बाहर किया तो एक खूँटे भर लाल सुराख अनिता की गाड़ मे सिकुडने लगा था

मै झट से उठा - आह्ह जल्दी आओ मौसी मेरा निकलेगा

मेरी बात सुन कर दोनो रन्ड़िया एक साथ मेरे लण्ड के नीचे आई और मेरी एक पिचकारी छूटी ।

और मैने झट स अनिता के मुह मे लण्ड भर कर उसके गले तक लण्ड ले जाकर झटकने लगा और सारा माल उसके पेट मे गिरने लगा

फिर मैने एक झटके साथ लण्ड निकाल कर विमला की ओर किया और वो गप्प से लण्ड के सुपाड़े को मुह मे लेके सुरकने लगी

वही अनिता मेरे दिये झटके से अभी भी खास रही थी

फिर दोनो ने बारी बारी से मेरे लण्ड को साफ किया और हम सब उथ कर सोफे पर बैठ कर सांसे बराबर करने लगे

थोडा समय बितने के बाद विमला किचन से मेरे लिए पानी लेके आई

वही अनिता - मुझे नही पता था बेटा तू इतना जोर का चोदता है औरतो को ,,तेरे सामने तो गबरू मर्द भी फीके पड़ जाये ,,, और दिखने मे कितना साधारन है तू

विमला ह्स कर - अरे अनिता ये ऐसे ही मुझे भी अपनी सादगी और भोलेपन मे चोद गया था हिहिहिही

मै विमला की बात सुन कर शर्माने लगा

विमला ह्स कर - इसके शर्माने की अदाओ पर मुझे बहुत प्यार आता है और इसिलिए तो ये मेरे जिगर का टुकड़ा है,,

फिर विमलां मुझे अपने सीने से लगा लेती है और मैने उसको चुचे काट लेता हू

विमला हस कर - धत्त बन्दर कही का , अभी फीर से मन है क्या तेरा

मै अंगड़ाई लेते हुए - उह्ह्ह्हऊऊह्ह मौसी मन तो बहुत है लेकिन अभी परिक्षा चल रही है तो ज्यादा थक गया तो पढ़ेगा कौन हिहिहिही

विमला मुझे सीने से लगाये - हा ठीक है कोई बात नही ले पानी पी

फिर मैने पानि पिया और कोमल के रूम से कपड़े लेके आया और उन्हे पहना ।फिर मोबाईल चेक किया तो देखा सोनल का फोन आया था

मै हस कर - चलो मौसी मै जाता हू , घर से फोन आ रहा है

विमला उदास मन से - अरे बेटा तू जा रहा है आज रुक के जा ना

मै विमला के गालो को चूम कर - मौसी मेरा एग्ज़ाम ना होता तो मै जरुर रुकता और दोनो को काफी जोर से चोदता

अनिता मेरी बातो से ह्स दी - कोई बात नही बेटा समय निकाल कर आते रहना , मै तो तेरे इस मोटे लण्ड की रह हमेशा देखूँगी हिहिहीही

फिर मैने कपडे पहने और उनलोगों से विदा लेके निकल आया है बाहर और सोनल के पास फोन किया तो पता चला कि मा ने दुकान पर बुलाया है

फिर मै दुकान पर निकल गया ।

जारी रहेगी

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