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Guest
रात मे सभी लोग अपने अपने कमरो मे चले गये ।रज्जो मौसी मेरे कमरे मे आ गयी ,,,
लेकिन जब ये तय हो रहा था कि कौन कहा सोयेगा तो पापा और बुआ की आपसी जुगलबन्दी काफी कुछ शरारत भरी थी ।
यहा मै रज्जो मौसी को पाकर मस्त था .
हम लोग कमरे मे आये और मैने रज्जो मौसी को हग कर लिया ,,,वो भी मुस्कुराई और मुझे कस कर दबोच लिया
मेरा सीना उनकी मुलायम भारी चुचियॉ पर बहुत ही गुदगुदी मह्सूस कर रहा था ।
मैने मेरे हाथ मौसी के उठे हुए कूल्हो पर ले गया और साड़ी के उपर से ही उन्हे सहलाते हुए मौसी के होठ चूसने लगा ।
ना जाने क्यू लेकिन मौसी से मुझे एक खासा लगाव था ,,,, उनका भरा और गुदाज जिस्म मुझे पागल कर देता था ,,,
उनका सावला रूप और निखरा हुआ जिस्म , वो नशीली आंखे और नरम मोटे होठ ,
उम्म्ंम्ममम्ंं मै बंद आंखो से मौसी के उन्ही चब्बी होठो को चुब्लाता हुआ उन्के कुल्हे सहलाए जा रहा था ।
नीचे मेरा लण्ड अकड कर पूरी तरह से तन गया था तो मैने खुद अपनी कमर को ठेल कर और मौसी के कूल्हो को अपनी ओर दबा कर लण्ड को उनके चुत वाले हिस्से के पास दबा दिया ।
लोवर मे तना मेरा सख्त सुपाडे का कोना मौसी के चुत के उपरी भागो को चुबने लगा । जिससे वो सिस्क पड़ी और मेरे होठ छोड कर मुझे अपने सीने से कस लिया ।
मै और भी जोश मे आ गया और ब्ड़ी ही मादकता से अपना लण्ड उनकी चुत पर दबाते हूए उनके कान मे जीभ फिराते हुए बोला - मौसीईई लण्ड लोगि
मौसी गनगना गयी और सिहर उठी - उम्म्ंमममंं अह्ह्ह हा बेटा
मैने साडी के उपर से उनके कूल्हो को मसला और बोला - चुत मे लोगि मौसी
वो और भी मादक होने लगी और बस मेरे सीने पर अपने चुचे दबाते हुए बोली - हम्म्म्मममं
मै देर ना करते हुए मौसी का साड़ी सामने से हटाया और जल्दी जल्दी ब्लाउज खोलना शुरु कर दिया ,,,वही मौसी मेरी आतुरता देख कर मुस्कुराइ और लपक कर मेरा लण्ड थाम लिया ,,, मै एक एक करके सिर्फ पेटिकोट छोड़ कर मौसी को उपर से नंगा कर दिया और पीछे से चिपक गया ।
वो सिहर गयी और मैने नीचे से उन्के 42 साइज़ के चुचो लो थामा और हथेली सरका कर निप्प्ल तक ले आया और अपनी खुरदरी हथेली को मौसी के मोटे काले निप्प्लो पर घुमाया ,,वो सिसकी सिहरि और मुझसे और चिपक गयी ।
मै वापस से उन मोटे मोटे खरबुज जैसे चुचो को थामा और उन्के निप्प्ल को सामने की ओर खिच कर छोड दिया और फिर से हाथो मे भरभर कर मसला ।
रज्जो मौसी सिस्कती रही और अपना बदन मे उपर निढ़ाल करती रही ।
मै उन्हे पकड कर बिसतर तक लाया और खुद बैठ कर उनको अपने साम्ने किया ।
मैने अपने पैर खोले और मौसी को अपनी जांघो मे कैद कर एक हाथ उनकी नंगी गुदाज पीठ पर रख कर दुसरा हाथ मौसी के एक चुचे को थाम लिया ।
मौसी उत्तेजीत देख कर मुस्कुराई और मेरे बालो मे हाथ फेरते हुए खुद एक हाथ से चुची को उठाया और उनका निप्प्ल वाला हिस्सा मेरे मुह तक लाई
मैने एक बार को थुक गटका और जीभ निकाल कर मौसी की आंखो मे देखते हुए निप्प्ल की टिप को जीभ से छुआ
मौसी सिस्क कर कांप उठी और मै और भी उत्तेजित होकर उस निप्प्ल को मुह मे भर लिया ।
मुह मे मैने उसे चुबलाया ,,कभी दाँतो मे काटा,,कभी उसपे जीभ से फ्लिप किया
हर एक नये एहसास से मौसी को रुबरू करवाते हुए उन्हे आहे भरने को मजबुर करता रहा
बारी बारी मैने दोनो चुचियॉ को खुब मसला और चूसा ।
यहा मौसी की हालत खडे खडे खराब होने लगी ।
मौसी - ओह्ह्ब बेटा मुझे लेट जाने दे ना ,फिर कर तू
मै मुस्कुरा कर उठा और घुमा कर मौसी को धकेल दिया बिस्तर पर और वो जान्घे फ़ोल्ड किये लेट कर हसने लगी ।
मै बिना कच बोले उन्के बराबर मे आया और उनकी ओर करवट लेके वापस से उनकी चुची को मुह मे भर चुसते हुए हाथ को उनकी चुत वाले हिस्से पर सहलाने लगा ।
चुत पर हाथो का स्पर्श पाते ही मौसी और भी मधोश होने लगी ।
मुझे भी अह्सास हुआ कि वहा मौसी गीली हो चुकी है तो मै मुस्कुरा कर उथा और नीचे उन्के जांघो के बिच गया ।
बिना नाड़ा खोले मैने मौसी के पेटीकोट को उपर कर दिया तो देखा कि नीचे मौसी ने कुछ नही पहना था ।
मै मौसी को देखा तो वो मुस्कुराई मानो पुछ रही हो कि क्या हुआ
मैने मुस्कुरा कर ना मे सर हिलाया और जांघो को सहलाते हुए चुत की ओर झुकता चला गया ।
मैने धीरे से अपनी जीभ को निकाला और मौसी की पिच्पिचाती चुत पर लगा दिया ।
मौसी सिहर उथी ।।
उन हल्के बालो वाले हिस्से पर एक दो बार मैने अपनी थुक से उन्हे गिला कर मौसी के चुत के बाहर निकली चमडी की चुबलाने लगा ।
मैने अपना पूरा का पूरा मुह मौसी के भोसड़े मे दे दिया ,,, जिससे पागल होकर मौसी मेरे सर और पकड कर उसके उपर दबाने लगी
वही नीचे मै अपने होठ और नथुने उनकी चुत के दानो और चमडी पर रगड़ रहा था और कभी कभी उपर की चमडी को मुह मे खिच के चुबला लेता ,,,, आखिर कार मौसी अपने आवेग को रोक ना सकी और अपनी गाड उचकाते हुए झड़ने लगी ।
शुरु के कुछ ड्रॉप सीधा मेरे होठ के पास पिचपिचाये और बाकी सब रिसने लगे ।
मैने मौसी के जांघो को अच्छे से खोल कर चुत के हिस्से पर चढ़ी चर्बी को दोनो हाथो से फैलाते हुए अच्छे से जीभ से चाट चाट कर साफ करने लगा ,,,,वही रज्जो मौसी की आअहे रुक नही रही थी ,,,वो हाफ भी रही थी ।
मै वापस उपर गया और अपने कपडे निकाल दिये
मै मौसी से चिप कर उनके होठ चुस्ते हुए उनकी चुत के स्वाद को उन तक के गया ।
मेरे हाथ वापस से मौसी के चुचो को छुते ही मौसी मे उत्तेजना लौट आई और वो मेरे लण्ड को थाम कर उसे उपर की ओर भीचने लगी ।
हमारी आंखे आपनी मे टक टकी लगाये दिल ही दिल मे अपनी भावना बताये जा रही थी ।
हवस के हाथ हम दोनो पर आलस भी हावी था , शायद इसिलिए मौसी ने अपने हथेली मे थुक लेके उसे मेरे लण्ड पर मसला और खुद मेरे ओर सरक कर लण्ड के मुहाने को अप्नी चुत की ओर ले जाने लगी ।
लेकिन आलस उन्हे था मुझे नही
मै फटाक से उठा और वापस से मौसी के जांघो को खोलकर उन्के बीच आ गया और लण्ड को उन्के बड़े से भोस्ड़ेदार चुत पर लगा कर गचाक से एक बार मे उतार दिया
मौसी - आआआ लल्ल्लाअह्ह्ह उफ्फ्फ अरामं से बेटा
मै हसा और उन्के उपर चढ़ कर धक्का लगाते हुए उनकी एक चुची को मुह मे भर लिया ।
मौसी - आ आ आह्ह्ह लल्ल्ला उम्म्ंम और अन्दर बेटा उम्म्ंम अह्ह्ह ऐसे ही ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह
मौसी के गुदाज बदन पर लेट कर चोदने मे मुझे बहुत ही मजा आ रहा था ,,,
मै उनके उपर से उठ कर उनकी जांघो को खोलते हुए और तेजी से घपाघप उन्के भोस्ड़े मे लण्ड को पेलने लगा और चुत के उपर की मुलायम चर्बी को मसलते सहलाते हुए उनकी नाभि तक हाथो को ले गया । इस दौरान मेरे कमर लगातर चलते रहे और फिर मै रुका
मौसी जो आन्नद के सुख ले रही थी वो तडप कर रह गयी और गरदन उथा कर देखने लगी ,,,
मै मुस्कुरा कर उनका एक पैर पकड कर घुमाया और वो समझ गयी ।
मै थोडा पीछे हुआ और मौसी फटाक से करवट लेते हुए घोड़ी बन गयी और मै अपनी घुटनो के बल आकर उन्के कूल्हो को सहलाते हुए अपनी ओर नीचे की तरफ खीचकर लण्ड के लेबल मे लाया और उनकी गाड़ के पाट को फैलाते हुए लण्ड को पकड के अनुमान लगाकर चुत के मुहाने पर ले गया और थोडा सा सुपाडे को फसा कर हाथ बाहर लाया और एक जोर का धक्का मौसी के कूल्हो को थाम कर पेल दिया
रज्जो मौसी - उम्म्ंम्ं अफ्फ्फ बेताआह्ह्ह ,,,, उफ्फ्फ्फ सीईईई उम्म्ंम्म्ं
मुझे मौसी के बड़े बड़े गुदाज और चाकलेती गाड को देखकर और भी ऊततेज्ना हो रही थी और मै तेज धक्के लगाते हुए पूरा का पूरा लण्ड मौसी की चुत मे देने लगा
मौसी की गाड़ मेरे जांघो की थाप से हिल्कोरे मार रही थी और मेरा हर तेज धक्का दुगनी थाप से वाप्स फेक रही थी
जिससे लगातार थपथप की आवाज सुनाई दे रही थी उपर से मौसी दुबारा झडने के करीब थी और मेरे लण्ड को निचोडना शुरु कर दी थी
मै भी उनकी इसी अदा का दीवाना था और उनका भोस्डा मेरे लण्ड पर कसने से मुझे और भी मजा आ रहा था जिससे मेरे आड़ो से नसो मे भी सोमरस भरने लगा ।
मेर लण्ड हर धक्के के साथ और सख्त हुआ जा रहा था ,,,सुपाड़े पर जलन सी होने लगी थी ,,,लण्ड की निचली नसो मे चिलिक सी होने लगी
कारण था मै अपनी गाड के छेद को सिकोड़ते हुए अपनी सास बाँधे आखिरी धक्के मौसी की बहती हुई चुत मे मार रहा था ।
कमरे मे आवाज की टोन अब बदल चुकी थी ,,जहा थप्पथप्प के साथ चुत से फच्च फ्च्च्ज की अवाजे आ रही थी ,,वही मौसी झदते हुए और भी जोशीली हो गयी।थी वो हाफते हुए मुझे उत्तेजित कर रही थी
मौसी -अह्ह्ह आह्ह हा बेटा पेल और पेल और और और हआआ अहाआ हाआ और और ऐसे ही ही हा हा ह्ह्होह्ह ओह्ह्ह्ह हा अह
मै भी अपनी गाड के पाट सख्त किये लण्ड की नसो पर जोर दिये आखिरी धक्को के सुपाडा ढिला छोड़ते हुए लण्ड को मौसी की चुत की गहराई मे ले गया और झडने लगा
मै - अह्ह्ह मौसीईईई उह्ह्ह्ह मैहहह आआआ रहा हुउउऊ
मै लगातार मौसी की चुत मे झड़ता रहा और ढह कर उन्के उपर झुक गया ।
मौसी अब भी उसी पोज मे सुस्ताती रही ,,,उनका चुत पूरी तरह से लबालब हुआ टपक रहा था बेडशीट पर ।
मौसी थोडी देर बाद कसमसाइ और बोली - अह्ह्ह लल्ल उतर कमर अकड जायेगी मेरी उह्ह्ह
मै उठा और बगल मे बैठ गया ,,,मौसी ने अपने पेटिकोट से ही अपनी चुत को पोछा और वो पलट कर बैठी
मौसी कराह कर - अह्ह्ह अम्मा
मै - क्या हुआ मौसी
मौसी ह्स के - अरे वो एक पाव मे झुनझुनी हो रही है ,,,रुक पैर सीधा करने दे
मौसी मुस्कुरा कर - तू उपर चढा रहा गया था इसिलिए हुआ शायद
मै उनको देख कर मुस्कुरा रहा
मौसी भी मुस्कुरा कर मेरे गाल को सह्लाया
मै हस कर - तो जाना है पापा के पास
मौसी शर्मा कर - धत्त जमाई जी ने मुझे पुछा तक नही आज ,,,
मै ह्स कर उनकी कमर मे हाथ डाल कर - अरे पुछते कैसे ,,,देखा नही कितने लोग जमा थे ,,,,मैने तो देखा उनकी और चाचा दोनो की नजरे बराबर आप पर ही थी
मौसी हस कर ब्लाउज उठाकर पहनते हुए - धत्त बदमाश कही का ,,,
मै मौसी को रोक कर - मै जानता हू आपकी इच्छा है मौसी ,,आप चले जाओ ना
मौसी उलझन भरे भाव मे - और तू
मै ह्स कर - मै तो सोने जा रहा हू वैसे भी हिहिहिही
मौसी चहक कर - पक्का ना
मै हा मे सर हिलाया
मौसी - ठीक है फिर तू एक बार बाहर देख कोई है तो नही
मै इशारे से मौसी को छेडा और वो शर्मा गयी
मै उठा और अपना लोवर पहन लिया और टीशर्ट पहन कर बड़े आराम से दरवाजे की चटखनि खोली ।
इस समय अभी मुशकील से 10:30 भी नही बजे थे और फिर भो एक चुप्पी थी ।
सामने पापा के कमरे से कुलर की तेज घनघनाहट आ रही थी मगर दरवाजा बंद था ।
तभी मुझे गेस्ट रूम का दरवाजा हल्का भिड्का दिखा दिखा और मेरे दिमाग मे विचार आया
और मै मेरे मन मे उठी शंका को दुर करने गेस्टरूम के पास गया और हल्का सा दरवाजा को खोला तो देखा- अन्दर सिर्फ चाची सो रही है और शिला बुआ नजर नही आ रही है ।
मै समझ गया कि पापा ने अपना दाव खेल दिया था ,,,कारण था कि कल शाम को ही सगाई के बाद बुआ वापस अपने घर जाने वाली थी क्योकि वहा उन्के ससुराल के खानदान मे कोई शादी थी । इसिलिए पापा ने आज बुआ को अपने पास बुला लिया था ।
मै मुस्कुरा कर वापस मौसी के पास आया और दरवाजा बंद कर चटखनि लगा दी ।
मुझे दरवाजा बंद करता देख मौसी चौकी - क्या हुआ लल्ला
मै ह्स कर - वो मौसी ,,वो हिहिही
मौसी मानो मेरे मन की बात को ताड़ गयी ।
मौसी हस कर - लग रहा है कि ननद रानी गयी है आज
मै शौक मे था - हिहिही आपको कैसे पता
मौसी इतरा के हसी
मै समझ गया कि ये भी मम्मी ने नही छिपाया उनसे
मै -तो मम्मी ने बता दिया आपको हिहिही
मौसी - हम्म्म्म और बाऊजी वाला भी ,,खुब समझती हू तेरी बदमाशी
मै भी अपनी तारिफ कर थोडा झेप सा गया और हम दोनो बाते करते हुए बिस्तर पर आ गये ।
मौसी ने अब तक ब्लाउज पहन लिया था और साड़ी पहनने वाली थी कि मै आ गया था,,,,
हम दोनो बिस्तर पर एक दूसरे की ओर करवट लिये टकटकी लगाये देख रहे थे और मुस्कुरा रहे थे
मेरे लण्ड मे वापस से कसाव बढने लगा था और मैने एक बार फिर अपने हाथ मौसी के चुचियॉ पर ले गया और हल्के उभरे हुए निप्प्ल को सहलाया
मौसी सिहर गयी और आंखे बन्द कर ली , मै उन्के करीब गया और उनका हाथ पकड कर अपने लोवर मे तने हुए लण्ड पर रखा और हाथ को दबाया , जिससे मुझे और भी उत्तेजना होने लगी ,,,लण्ड पूरी तरह से फौलादी होने लगा
मै अपने गर्दन आगे बढ़ाया और मौसी के मुलायम होठो को चूम लिया
इधर हमारा चूमना जारी रहा और इसी दौरान मौसी ने मेरा लण्ड लोवर से बाहर निकाल कर उसे सहलाना शुरु कर दिया ।
मैने थोडा खुद के होठो को रोका और बहते भावनाओ मे भी अपनी चेतना को जागृत कर बोला - अह्ह्ह्ब मौसीईई चुसो ना आअम्म्मम्म
वो मेरे चेहरे के बिल्कुल सामने और पास थी ,,,उनकी मोटी आंखो ने थोडा मुझे देखा और फिर मौसी मुस्कुरा कर उठी ।
उन्होने मेरे बगल मे पैरो के पास बैठ कर मेरा लोवर जांघो तक किया और मेरे लण्ड को उपर से सह्लाया
मै सिस्क उठा ,,,वो वापस से हाथ को मेरे आड़ो तक ले गयी और मुठीया शुरु कर दी लण्ड को
मै आहे भरते हुए मौसी को निहारने लगा ।
मौसी झुकी और मुह खोलते हुए मेरा सुपाडा एक बार मे ही गपक ली
उनके होठो की नरमी और मुह के अंदर की गरमी मुझे बैचैनी और पागल करने लगी । मेरे हाथ खुद ब खुद मौसी के बालो मे घूमने लगे
धिरे धिरे मौसी ने पूरा लंड मुह मे ले लिया और गले तक ले गयी और मै बडी उत्तेजना मे मेरे गाड को उचका कर उनका सर दबाया
मौसी की गुउउउउज्गऊउऊक्क और ख्वीईइज्ज्ज खवीइंज्ज्ज की आवाज के साथ उन्के मुह की लार भी बाहर आने लगी , उन्के लिये और रुकना मुस्किल हुआ जा रहा था लेकिन मुझे इस बेरहमी मे मजा आ रहा था
जब मौसी ने मेरे जांघो की थप्की दी तो मै चौका और दबाव कम किया
मौसी ने फटाक से मुह खिच लिया और एक गहरि सास ली
मौसी का चेहरा एकदम लाल पडा था ,,,मुह की लार भी गालो तक बहि हुई थी ,,, बाल भी थोडे बिखर गये थे,,,मगर अब भी मौसी ने मेरे लण्ड को छोडा नही था
वो वापस झुकी और उनकी लार से भीग चुके लण्ड को वापस से सुरपना शुरु कर दिया और लण्ड को तेजी से मुठियाना भी
जब मुझे अह्सास हुआ कि अब लण्ड पूरी तरह से तनमना गया है तो मैने हाथो से मौसी को रोका
वो रुक सी गयी और बडी उम्मीद से मुझे देख कर बोली कि क्यू रोक दिया उन्हे ।
मै उठ कर बैठ गया और बिना कुछ बोले मौसी को बिस्तर पर घुमा कर धकेल दिया
वो समझ गयी और वापस घोड़ी बन गयी
मै वापस से उन्का पेटिकोट उपर किया और इस बार मेरा इरादा अलग था
मै मौसी के गाड के पाटो को सहलाते हुए दोनो पंजो को जोर से दोनो पाटो पर थ्पेड़ा ।
मौसी सिस्क पड़ी
मौसी के चुतड हाथो की थाप से झकझोर उठे
मैने वाप्स से उन्के मखमली मुलायम और मोटे गाड़ की दोनो पाटो फैलाते हुए अपनी जीभ की टिप सीधा मौसी के गाड की सुराख पर लगा दी और थुक से उसे गिला करने लगा ।
मौसी छ्टकने लगी तो मैने उन्के कुल्हे थामे और चुत सहलाते हुए मुह को उनकी गाड के सुराख पर लगाये रखा ।
बिच बिच मै अपनी जीभ को नीचे चुत के निचले हिस्सों पर भी फिरा देता जिस्स्से मौसी को एक न्या एहसास मिलता था ।
अब देर ना करते हुए मै उठा और थोडा सा थुक से अपना सुपाडा गिला कर उसे मौसी के गाड की छेद पर रखा।
मौसी ने खुद को ढिला छोडा और मैने सुपाडे को पकड कर उनकी गाड़ के मुहाने पर दबाते हुए जोर लगाया और पेल दिया ।
मौसी की आंखे बाहर को आ गयी और वो मुह खोल कर तेजी से हाफने लगी
मगर मेरा सुपाडा घुस चुका था उन्की गाड़ मे और मै वही रुका हुआ था ।
उन्होने खुद को बराबर कर मुझे ह्न्मममं बोल कर इशारा किया कि मै आगे बढू
मै भी मुस्कुरा कर उन्के कूल्हो को सहलाते हुए लंड को वहि से जोर देकर आगे ठेल दिया और आधा से ज्यादा लण्ड मौसी की गाड मे चला गय ।
मौसी की हालत खराब होने लगी ,,कारण था कि वो अभी अच्छे से गरम हुई नही थी और मेरा लण्ड उनकी गाड़ मे घुस चुका था
मैने मौसी की पीठ कमर औए कूल्हो को सहलाते हुए धीरे धीरे धक्का लगाना शुरु किया ।
पीठ और कमर पर मेरे हाथ का स्पर्श पाकर मौसी सिहर लगी ,,,क्योकि जब मेरे हाथ उन्की पीठ की तरफ जाते तब मेरा लण्ड उनकी गाड मे अंदर की ओर जा रहा होता था ।
ऐसे ही कुछ ही धक्को मे मौसी गरम होने लगी और सिसकने लगी
मौका देखकर मै अपना धक्का तेज करने लगा
अब मेरा ज्यादा से ज्यादा लण्ड मौसी की गाड मे घुसने लगा ।
इतनी चुदाई के बाद भी मौसी की गाड़ बहुत टाइट थी ,,,कारण था कि मौसी बहुत कम गाड़ मरवाती थी ,,,क्योकि ज्यादतर लोग उन्हे सामने से चोद्ना पसन्द करते थे उनकी खर्बुज सी चुचियॉ को चुस्ते हुए और गुदाज जिस्म पर चढ़ कर
मै तेज धक्को से लगातार मौसी को पेलता रहा और कुछ ही मिंट मे मै झडने के करीब था
उससे पहले ही मौसी ने मुझे चेता दिया था कि वो मुह मे लेंगी
इसिलिए मैने फौरन लण्ड को बाहर खिच लिया और खड़ा हो गय , मौसी भी इस्का मतलब समझ ली और फौरन घुटनो के बल आकर मेरे लण्ड को मुह मे लेके मुथियाना शुरु कर दी
कुछ ही पलो मे मेरे गाड के पाटे सख्त होने लगे और मैने अपनी पैर की एड़ियो को उचका कर लण्ड को मौसी के मुह मे भर दिया और उनक सर दबाते हुए मुह मे झडने लगा ।
लण्ड झाड़ने के बाद मै नोर्मल हुआ और वही मौसी ने अच्छे से मेरे लण्ड को साफ किया और लेट गयी
मै भी तृप्त हो कर उन्के बगल मे लेट गया ।
थकान की वजह से कब मुझे निद आ गयी मुझे याद ही नही आया
रात मे किसी पहर मेरी नीद खुली तो देखा मै पसीने से भीगा हुआ हू और लाईट नही है ।
मैने आस पास टटोला तो मौसी नजर नही आइ,,मैने आवाज भी दी
जारी रहेगी
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लेकिन जब ये तय हो रहा था कि कौन कहा सोयेगा तो पापा और बुआ की आपसी जुगलबन्दी काफी कुछ शरारत भरी थी ।
यहा मै रज्जो मौसी को पाकर मस्त था .
हम लोग कमरे मे आये और मैने रज्जो मौसी को हग कर लिया ,,,वो भी मुस्कुराई और मुझे कस कर दबोच लिया
मेरा सीना उनकी मुलायम भारी चुचियॉ पर बहुत ही गुदगुदी मह्सूस कर रहा था ।
मैने मेरे हाथ मौसी के उठे हुए कूल्हो पर ले गया और साड़ी के उपर से ही उन्हे सहलाते हुए मौसी के होठ चूसने लगा ।
ना जाने क्यू लेकिन मौसी से मुझे एक खासा लगाव था ,,,, उनका भरा और गुदाज जिस्म मुझे पागल कर देता था ,,,
उनका सावला रूप और निखरा हुआ जिस्म , वो नशीली आंखे और नरम मोटे होठ ,
उम्म्ंम्ममम्ंं मै बंद आंखो से मौसी के उन्ही चब्बी होठो को चुब्लाता हुआ उन्के कुल्हे सहलाए जा रहा था ।
नीचे मेरा लण्ड अकड कर पूरी तरह से तन गया था तो मैने खुद अपनी कमर को ठेल कर और मौसी के कूल्हो को अपनी ओर दबा कर लण्ड को उनके चुत वाले हिस्से के पास दबा दिया ।
लोवर मे तना मेरा सख्त सुपाडे का कोना मौसी के चुत के उपरी भागो को चुबने लगा । जिससे वो सिस्क पड़ी और मेरे होठ छोड कर मुझे अपने सीने से कस लिया ।
मै और भी जोश मे आ गया और ब्ड़ी ही मादकता से अपना लण्ड उनकी चुत पर दबाते हूए उनके कान मे जीभ फिराते हुए बोला - मौसीईई लण्ड लोगि
मौसी गनगना गयी और सिहर उठी - उम्म्ंमममंं अह्ह्ह हा बेटा
मैने साडी के उपर से उनके कूल्हो को मसला और बोला - चुत मे लोगि मौसी
वो और भी मादक होने लगी और बस मेरे सीने पर अपने चुचे दबाते हुए बोली - हम्म्म्मममं
मै देर ना करते हुए मौसी का साड़ी सामने से हटाया और जल्दी जल्दी ब्लाउज खोलना शुरु कर दिया ,,,वही मौसी मेरी आतुरता देख कर मुस्कुराइ और लपक कर मेरा लण्ड थाम लिया ,,, मै एक एक करके सिर्फ पेटिकोट छोड़ कर मौसी को उपर से नंगा कर दिया और पीछे से चिपक गया ।
वो सिहर गयी और मैने नीचे से उन्के 42 साइज़ के चुचो लो थामा और हथेली सरका कर निप्प्ल तक ले आया और अपनी खुरदरी हथेली को मौसी के मोटे काले निप्प्लो पर घुमाया ,,वो सिसकी सिहरि और मुझसे और चिपक गयी ।
मै वापस से उन मोटे मोटे खरबुज जैसे चुचो को थामा और उन्के निप्प्ल को सामने की ओर खिच कर छोड दिया और फिर से हाथो मे भरभर कर मसला ।
रज्जो मौसी सिस्कती रही और अपना बदन मे उपर निढ़ाल करती रही ।
मै उन्हे पकड कर बिसतर तक लाया और खुद बैठ कर उनको अपने साम्ने किया ।
मैने अपने पैर खोले और मौसी को अपनी जांघो मे कैद कर एक हाथ उनकी नंगी गुदाज पीठ पर रख कर दुसरा हाथ मौसी के एक चुचे को थाम लिया ।
मौसी उत्तेजीत देख कर मुस्कुराई और मेरे बालो मे हाथ फेरते हुए खुद एक हाथ से चुची को उठाया और उनका निप्प्ल वाला हिस्सा मेरे मुह तक लाई
मैने एक बार को थुक गटका और जीभ निकाल कर मौसी की आंखो मे देखते हुए निप्प्ल की टिप को जीभ से छुआ
मौसी सिस्क कर कांप उठी और मै और भी उत्तेजित होकर उस निप्प्ल को मुह मे भर लिया ।
मुह मे मैने उसे चुबलाया ,,कभी दाँतो मे काटा,,कभी उसपे जीभ से फ्लिप किया
हर एक नये एहसास से मौसी को रुबरू करवाते हुए उन्हे आहे भरने को मजबुर करता रहा
बारी बारी मैने दोनो चुचियॉ को खुब मसला और चूसा ।
यहा मौसी की हालत खडे खडे खराब होने लगी ।
मौसी - ओह्ह्ब बेटा मुझे लेट जाने दे ना ,फिर कर तू
मै मुस्कुरा कर उठा और घुमा कर मौसी को धकेल दिया बिस्तर पर और वो जान्घे फ़ोल्ड किये लेट कर हसने लगी ।
मै बिना कच बोले उन्के बराबर मे आया और उनकी ओर करवट लेके वापस से उनकी चुची को मुह मे भर चुसते हुए हाथ को उनकी चुत वाले हिस्से पर सहलाने लगा ।
चुत पर हाथो का स्पर्श पाते ही मौसी और भी मधोश होने लगी ।
मुझे भी अह्सास हुआ कि वहा मौसी गीली हो चुकी है तो मै मुस्कुरा कर उथा और नीचे उन्के जांघो के बिच गया ।
बिना नाड़ा खोले मैने मौसी के पेटीकोट को उपर कर दिया तो देखा कि नीचे मौसी ने कुछ नही पहना था ।
मै मौसी को देखा तो वो मुस्कुराई मानो पुछ रही हो कि क्या हुआ
मैने मुस्कुरा कर ना मे सर हिलाया और जांघो को सहलाते हुए चुत की ओर झुकता चला गया ।
मैने धीरे से अपनी जीभ को निकाला और मौसी की पिच्पिचाती चुत पर लगा दिया ।
मौसी सिहर उथी ।।
उन हल्के बालो वाले हिस्से पर एक दो बार मैने अपनी थुक से उन्हे गिला कर मौसी के चुत के बाहर निकली चमडी की चुबलाने लगा ।
मैने अपना पूरा का पूरा मुह मौसी के भोसड़े मे दे दिया ,,, जिससे पागल होकर मौसी मेरे सर और पकड कर उसके उपर दबाने लगी
वही नीचे मै अपने होठ और नथुने उनकी चुत के दानो और चमडी पर रगड़ रहा था और कभी कभी उपर की चमडी को मुह मे खिच के चुबला लेता ,,,, आखिर कार मौसी अपने आवेग को रोक ना सकी और अपनी गाड उचकाते हुए झड़ने लगी ।
शुरु के कुछ ड्रॉप सीधा मेरे होठ के पास पिचपिचाये और बाकी सब रिसने लगे ।
मैने मौसी के जांघो को अच्छे से खोल कर चुत के हिस्से पर चढ़ी चर्बी को दोनो हाथो से फैलाते हुए अच्छे से जीभ से चाट चाट कर साफ करने लगा ,,,,वही रज्जो मौसी की आअहे रुक नही रही थी ,,,वो हाफ भी रही थी ।
मै वापस उपर गया और अपने कपडे निकाल दिये
मै मौसी से चिप कर उनके होठ चुस्ते हुए उनकी चुत के स्वाद को उन तक के गया ।
मेरे हाथ वापस से मौसी के चुचो को छुते ही मौसी मे उत्तेजना लौट आई और वो मेरे लण्ड को थाम कर उसे उपर की ओर भीचने लगी ।
हमारी आंखे आपनी मे टक टकी लगाये दिल ही दिल मे अपनी भावना बताये जा रही थी ।
हवस के हाथ हम दोनो पर आलस भी हावी था , शायद इसिलिए मौसी ने अपने हथेली मे थुक लेके उसे मेरे लण्ड पर मसला और खुद मेरे ओर सरक कर लण्ड के मुहाने को अप्नी चुत की ओर ले जाने लगी ।
लेकिन आलस उन्हे था मुझे नही
मै फटाक से उठा और वापस से मौसी के जांघो को खोलकर उन्के बीच आ गया और लण्ड को उन्के बड़े से भोस्ड़ेदार चुत पर लगा कर गचाक से एक बार मे उतार दिया
मौसी - आआआ लल्ल्लाअह्ह्ह उफ्फ्फ अरामं से बेटा
मै हसा और उन्के उपर चढ़ कर धक्का लगाते हुए उनकी एक चुची को मुह मे भर लिया ।
मौसी - आ आ आह्ह्ह लल्ल्ला उम्म्ंम और अन्दर बेटा उम्म्ंम अह्ह्ह ऐसे ही ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह
मौसी के गुदाज बदन पर लेट कर चोदने मे मुझे बहुत ही मजा आ रहा था ,,,
मै उनके उपर से उठ कर उनकी जांघो को खोलते हुए और तेजी से घपाघप उन्के भोस्ड़े मे लण्ड को पेलने लगा और चुत के उपर की मुलायम चर्बी को मसलते सहलाते हुए उनकी नाभि तक हाथो को ले गया । इस दौरान मेरे कमर लगातर चलते रहे और फिर मै रुका
मौसी जो आन्नद के सुख ले रही थी वो तडप कर रह गयी और गरदन उथा कर देखने लगी ,,,
मै मुस्कुरा कर उनका एक पैर पकड कर घुमाया और वो समझ गयी ।
मै थोडा पीछे हुआ और मौसी फटाक से करवट लेते हुए घोड़ी बन गयी और मै अपनी घुटनो के बल आकर उन्के कूल्हो को सहलाते हुए अपनी ओर नीचे की तरफ खीचकर लण्ड के लेबल मे लाया और उनकी गाड़ के पाट को फैलाते हुए लण्ड को पकड के अनुमान लगाकर चुत के मुहाने पर ले गया और थोडा सा सुपाडे को फसा कर हाथ बाहर लाया और एक जोर का धक्का मौसी के कूल्हो को थाम कर पेल दिया
रज्जो मौसी - उम्म्ंम्ं अफ्फ्फ बेताआह्ह्ह ,,,, उफ्फ्फ्फ सीईईई उम्म्ंम्म्ं
मुझे मौसी के बड़े बड़े गुदाज और चाकलेती गाड को देखकर और भी ऊततेज्ना हो रही थी और मै तेज धक्के लगाते हुए पूरा का पूरा लण्ड मौसी की चुत मे देने लगा
मौसी की गाड़ मेरे जांघो की थाप से हिल्कोरे मार रही थी और मेरा हर तेज धक्का दुगनी थाप से वाप्स फेक रही थी
जिससे लगातार थपथप की आवाज सुनाई दे रही थी उपर से मौसी दुबारा झडने के करीब थी और मेरे लण्ड को निचोडना शुरु कर दी थी
मै भी उनकी इसी अदा का दीवाना था और उनका भोस्डा मेरे लण्ड पर कसने से मुझे और भी मजा आ रहा था जिससे मेरे आड़ो से नसो मे भी सोमरस भरने लगा ।
मेर लण्ड हर धक्के के साथ और सख्त हुआ जा रहा था ,,,सुपाड़े पर जलन सी होने लगी थी ,,,लण्ड की निचली नसो मे चिलिक सी होने लगी
कारण था मै अपनी गाड के छेद को सिकोड़ते हुए अपनी सास बाँधे आखिरी धक्के मौसी की बहती हुई चुत मे मार रहा था ।
कमरे मे आवाज की टोन अब बदल चुकी थी ,,जहा थप्पथप्प के साथ चुत से फच्च फ्च्च्ज की अवाजे आ रही थी ,,वही मौसी झदते हुए और भी जोशीली हो गयी।थी वो हाफते हुए मुझे उत्तेजित कर रही थी
मौसी -अह्ह्ह आह्ह हा बेटा पेल और पेल और और और हआआ अहाआ हाआ और और ऐसे ही ही हा हा ह्ह्होह्ह ओह्ह्ह्ह हा अह
मै भी अपनी गाड के पाट सख्त किये लण्ड की नसो पर जोर दिये आखिरी धक्को के सुपाडा ढिला छोड़ते हुए लण्ड को मौसी की चुत की गहराई मे ले गया और झडने लगा
मै - अह्ह्ह मौसीईईई उह्ह्ह्ह मैहहह आआआ रहा हुउउऊ
मै लगातार मौसी की चुत मे झड़ता रहा और ढह कर उन्के उपर झुक गया ।
मौसी अब भी उसी पोज मे सुस्ताती रही ,,,उनका चुत पूरी तरह से लबालब हुआ टपक रहा था बेडशीट पर ।
मौसी थोडी देर बाद कसमसाइ और बोली - अह्ह्ह लल्ल उतर कमर अकड जायेगी मेरी उह्ह्ह
मै उठा और बगल मे बैठ गया ,,,मौसी ने अपने पेटिकोट से ही अपनी चुत को पोछा और वो पलट कर बैठी
मौसी कराह कर - अह्ह्ह अम्मा
मै - क्या हुआ मौसी
मौसी ह्स के - अरे वो एक पाव मे झुनझुनी हो रही है ,,,रुक पैर सीधा करने दे
मौसी मुस्कुरा कर - तू उपर चढा रहा गया था इसिलिए हुआ शायद
मै उनको देख कर मुस्कुरा रहा
मौसी भी मुस्कुरा कर मेरे गाल को सह्लाया
मै हस कर - तो जाना है पापा के पास
मौसी शर्मा कर - धत्त जमाई जी ने मुझे पुछा तक नही आज ,,,
मै ह्स कर उनकी कमर मे हाथ डाल कर - अरे पुछते कैसे ,,,देखा नही कितने लोग जमा थे ,,,,मैने तो देखा उनकी और चाचा दोनो की नजरे बराबर आप पर ही थी
मौसी हस कर ब्लाउज उठाकर पहनते हुए - धत्त बदमाश कही का ,,,
मै मौसी को रोक कर - मै जानता हू आपकी इच्छा है मौसी ,,आप चले जाओ ना
मौसी उलझन भरे भाव मे - और तू
मै ह्स कर - मै तो सोने जा रहा हू वैसे भी हिहिहिही
मौसी चहक कर - पक्का ना
मै हा मे सर हिलाया
मौसी - ठीक है फिर तू एक बार बाहर देख कोई है तो नही
मै इशारे से मौसी को छेडा और वो शर्मा गयी
मै उठा और अपना लोवर पहन लिया और टीशर्ट पहन कर बड़े आराम से दरवाजे की चटखनि खोली ।
इस समय अभी मुशकील से 10:30 भी नही बजे थे और फिर भो एक चुप्पी थी ।
सामने पापा के कमरे से कुलर की तेज घनघनाहट आ रही थी मगर दरवाजा बंद था ।
तभी मुझे गेस्ट रूम का दरवाजा हल्का भिड्का दिखा दिखा और मेरे दिमाग मे विचार आया
और मै मेरे मन मे उठी शंका को दुर करने गेस्टरूम के पास गया और हल्का सा दरवाजा को खोला तो देखा- अन्दर सिर्फ चाची सो रही है और शिला बुआ नजर नही आ रही है ।
मै समझ गया कि पापा ने अपना दाव खेल दिया था ,,,कारण था कि कल शाम को ही सगाई के बाद बुआ वापस अपने घर जाने वाली थी क्योकि वहा उन्के ससुराल के खानदान मे कोई शादी थी । इसिलिए पापा ने आज बुआ को अपने पास बुला लिया था ।
मै मुस्कुरा कर वापस मौसी के पास आया और दरवाजा बंद कर चटखनि लगा दी ।
मुझे दरवाजा बंद करता देख मौसी चौकी - क्या हुआ लल्ला
मै ह्स कर - वो मौसी ,,वो हिहिही
मौसी मानो मेरे मन की बात को ताड़ गयी ।
मौसी हस कर - लग रहा है कि ननद रानी गयी है आज
मै शौक मे था - हिहिही आपको कैसे पता
मौसी इतरा के हसी
मै समझ गया कि ये भी मम्मी ने नही छिपाया उनसे
मै -तो मम्मी ने बता दिया आपको हिहिही
मौसी - हम्म्म्म और बाऊजी वाला भी ,,खुब समझती हू तेरी बदमाशी
मै भी अपनी तारिफ कर थोडा झेप सा गया और हम दोनो बाते करते हुए बिस्तर पर आ गये ।
मौसी ने अब तक ब्लाउज पहन लिया था और साड़ी पहनने वाली थी कि मै आ गया था,,,,
हम दोनो बिस्तर पर एक दूसरे की ओर करवट लिये टकटकी लगाये देख रहे थे और मुस्कुरा रहे थे
मेरे लण्ड मे वापस से कसाव बढने लगा था और मैने एक बार फिर अपने हाथ मौसी के चुचियॉ पर ले गया और हल्के उभरे हुए निप्प्ल को सहलाया
मौसी सिहर गयी और आंखे बन्द कर ली , मै उन्के करीब गया और उनका हाथ पकड कर अपने लोवर मे तने हुए लण्ड पर रखा और हाथ को दबाया , जिससे मुझे और भी उत्तेजना होने लगी ,,,लण्ड पूरी तरह से फौलादी होने लगा
मै अपने गर्दन आगे बढ़ाया और मौसी के मुलायम होठो को चूम लिया
इधर हमारा चूमना जारी रहा और इसी दौरान मौसी ने मेरा लण्ड लोवर से बाहर निकाल कर उसे सहलाना शुरु कर दिया ।
मैने थोडा खुद के होठो को रोका और बहते भावनाओ मे भी अपनी चेतना को जागृत कर बोला - अह्ह्ह्ब मौसीईई चुसो ना आअम्म्मम्म
वो मेरे चेहरे के बिल्कुल सामने और पास थी ,,,उनकी मोटी आंखो ने थोडा मुझे देखा और फिर मौसी मुस्कुरा कर उठी ।
उन्होने मेरे बगल मे पैरो के पास बैठ कर मेरा लोवर जांघो तक किया और मेरे लण्ड को उपर से सह्लाया
मै सिस्क उठा ,,,वो वापस से हाथ को मेरे आड़ो तक ले गयी और मुठीया शुरु कर दी लण्ड को
मै आहे भरते हुए मौसी को निहारने लगा ।
मौसी झुकी और मुह खोलते हुए मेरा सुपाडा एक बार मे ही गपक ली
उनके होठो की नरमी और मुह के अंदर की गरमी मुझे बैचैनी और पागल करने लगी । मेरे हाथ खुद ब खुद मौसी के बालो मे घूमने लगे
धिरे धिरे मौसी ने पूरा लंड मुह मे ले लिया और गले तक ले गयी और मै बडी उत्तेजना मे मेरे गाड को उचका कर उनका सर दबाया
मौसी की गुउउउउज्गऊउऊक्क और ख्वीईइज्ज्ज खवीइंज्ज्ज की आवाज के साथ उन्के मुह की लार भी बाहर आने लगी , उन्के लिये और रुकना मुस्किल हुआ जा रहा था लेकिन मुझे इस बेरहमी मे मजा आ रहा था
जब मौसी ने मेरे जांघो की थप्की दी तो मै चौका और दबाव कम किया
मौसी ने फटाक से मुह खिच लिया और एक गहरि सास ली
मौसी का चेहरा एकदम लाल पडा था ,,,मुह की लार भी गालो तक बहि हुई थी ,,, बाल भी थोडे बिखर गये थे,,,मगर अब भी मौसी ने मेरे लण्ड को छोडा नही था
वो वापस झुकी और उनकी लार से भीग चुके लण्ड को वापस से सुरपना शुरु कर दिया और लण्ड को तेजी से मुठियाना भी
जब मुझे अह्सास हुआ कि अब लण्ड पूरी तरह से तनमना गया है तो मैने हाथो से मौसी को रोका
वो रुक सी गयी और बडी उम्मीद से मुझे देख कर बोली कि क्यू रोक दिया उन्हे ।
मै उठ कर बैठ गया और बिना कुछ बोले मौसी को बिस्तर पर घुमा कर धकेल दिया
वो समझ गयी और वापस घोड़ी बन गयी
मै वापस से उन्का पेटिकोट उपर किया और इस बार मेरा इरादा अलग था
मै मौसी के गाड के पाटो को सहलाते हुए दोनो पंजो को जोर से दोनो पाटो पर थ्पेड़ा ।
मौसी सिस्क पड़ी
मौसी के चुतड हाथो की थाप से झकझोर उठे
मैने वाप्स से उन्के मखमली मुलायम और मोटे गाड़ की दोनो पाटो फैलाते हुए अपनी जीभ की टिप सीधा मौसी के गाड की सुराख पर लगा दी और थुक से उसे गिला करने लगा ।
मौसी छ्टकने लगी तो मैने उन्के कुल्हे थामे और चुत सहलाते हुए मुह को उनकी गाड के सुराख पर लगाये रखा ।
बिच बिच मै अपनी जीभ को नीचे चुत के निचले हिस्सों पर भी फिरा देता जिस्स्से मौसी को एक न्या एहसास मिलता था ।
अब देर ना करते हुए मै उठा और थोडा सा थुक से अपना सुपाडा गिला कर उसे मौसी के गाड की छेद पर रखा।
मौसी ने खुद को ढिला छोडा और मैने सुपाडे को पकड कर उनकी गाड़ के मुहाने पर दबाते हुए जोर लगाया और पेल दिया ।
मौसी की आंखे बाहर को आ गयी और वो मुह खोल कर तेजी से हाफने लगी
मगर मेरा सुपाडा घुस चुका था उन्की गाड़ मे और मै वही रुका हुआ था ।
उन्होने खुद को बराबर कर मुझे ह्न्मममं बोल कर इशारा किया कि मै आगे बढू
मै भी मुस्कुरा कर उन्के कूल्हो को सहलाते हुए लंड को वहि से जोर देकर आगे ठेल दिया और आधा से ज्यादा लण्ड मौसी की गाड मे चला गय ।
मौसी की हालत खराब होने लगी ,,कारण था कि वो अभी अच्छे से गरम हुई नही थी और मेरा लण्ड उनकी गाड़ मे घुस चुका था
मैने मौसी की पीठ कमर औए कूल्हो को सहलाते हुए धीरे धीरे धक्का लगाना शुरु किया ।
पीठ और कमर पर मेरे हाथ का स्पर्श पाकर मौसी सिहर लगी ,,,क्योकि जब मेरे हाथ उन्की पीठ की तरफ जाते तब मेरा लण्ड उनकी गाड मे अंदर की ओर जा रहा होता था ।
ऐसे ही कुछ ही धक्को मे मौसी गरम होने लगी और सिसकने लगी
मौका देखकर मै अपना धक्का तेज करने लगा
अब मेरा ज्यादा से ज्यादा लण्ड मौसी की गाड मे घुसने लगा ।
इतनी चुदाई के बाद भी मौसी की गाड़ बहुत टाइट थी ,,,कारण था कि मौसी बहुत कम गाड़ मरवाती थी ,,,क्योकि ज्यादतर लोग उन्हे सामने से चोद्ना पसन्द करते थे उनकी खर्बुज सी चुचियॉ को चुस्ते हुए और गुदाज जिस्म पर चढ़ कर
मै तेज धक्को से लगातार मौसी को पेलता रहा और कुछ ही मिंट मे मै झडने के करीब था
उससे पहले ही मौसी ने मुझे चेता दिया था कि वो मुह मे लेंगी
इसिलिए मैने फौरन लण्ड को बाहर खिच लिया और खड़ा हो गय , मौसी भी इस्का मतलब समझ ली और फौरन घुटनो के बल आकर मेरे लण्ड को मुह मे लेके मुथियाना शुरु कर दी
कुछ ही पलो मे मेरे गाड के पाटे सख्त होने लगे और मैने अपनी पैर की एड़ियो को उचका कर लण्ड को मौसी के मुह मे भर दिया और उनक सर दबाते हुए मुह मे झडने लगा ।
लण्ड झाड़ने के बाद मै नोर्मल हुआ और वही मौसी ने अच्छे से मेरे लण्ड को साफ किया और लेट गयी
मै भी तृप्त हो कर उन्के बगल मे लेट गया ।
थकान की वजह से कब मुझे निद आ गयी मुझे याद ही नही आया
रात मे किसी पहर मेरी नीद खुली तो देखा मै पसीने से भीगा हुआ हू और लाईट नही है ।
मैने आस पास टटोला तो मौसी नजर नही आइ,,मैने आवाज भी दी
जारी रहेगी
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