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# अपडेट - 119
मैंने अपना हाथ उसकी छाती पर रखा , उसकी सांसे बहुत तेजी से चल रही थी. मैंने उसको अपने सीने से चिपका लिया. उसके गले लगते ही मन को सुकून सा मिला. कि बस इन्हीं बांहो मे लेटा रहूं...
उसके चेहरे पर उलझ आई बालो की लटो को सुलझाते हुए बोला मैं- हनी...
पायल - हूं.....
मैं- कैसा फील हुआ...
पायल - बहुत अच्छा....
मैं - क्या सोच रही हो..?
पायल - अपनी लाइफ के बारे मे...
मैं - क्या..?
पायल - कभी सोचा नहीं था कि मेरी लाईफ मे भी कोई आयेगा जो मुझे प्यार करेगा. फिर आप मेरी जिंदगी में आये...
मैं - अच्छा...
पायल - हां... मैं बहुत चाहने लगी हूं...
मैं - मैं भी...
वो उठने की कोशिश करने लगी तो - आआहह.. आह दर्द होता हैं
मैं- कहाँ पर हो रहा हैं...
पायल - नीचे.. वैजाइना मे...
मैं - और क्या कहते हैं उसे...
पायल - पता नहीं...
मैं उसकी चूत को सहलाते हुए - इसे चूत कहते हैं और इस पेनिस को लंड़... तो अब से तुम चूत और लंड ही बोलोगी...
पायल - OK... जान मुझे उठाओ ना जरा सा पानी पीना है.
मैं - मैं लाकर देता हूँ...
मैंने पास मे टेबल से पानी का गिलास उसको पकडाया.. उसने पूरा गिलास पानी पी लिया... मैंने वो गिलास वापिस रख दिया...
मैं उसके पास लेट गया और पायल ने मेरे हाथ को थाम लिया.
पायल - थैंक्यू जान...
मैं - क्यों...
पायल - मुझे प्यार देने के लिए...
मैं - अभी तो और प्यार करना है
पायल - और...
मैं - हां... तुम्हारा मन भर गया?
पायल - नहीं जान... पर अभी भी दुख रहा है...
मैं - हनी.. इस दर्द का भी एक मजा है. मुझे और प्यार करना है.
मैं अपनी ऊँगली को उसकी छोटी सी नाभि पर फिराने लगा. उसके कोमल बदन में फिर से एक बार हलचल सी होने लगी , मैंने अपना मुँह उसकी चूची पर लगाया तो उसका हाथ मेरे लंड पर कस गया, उसके हाथ में जाते ही लंड फिर से तनाव में आने लगा.
मैं उसके गुलाबी निप्पल को दांतों से काटने लगा... तो उसका हाथ मेरे अन्डकोशो पर कस गया. मेरे आंड भींच गये. मुझे दर्द और मजे का मिश्रित अनुभव हुआ...
पायल - आह... क्या करते हो जान, दुखता हैं ना
मैं तो उसके बोबो को चुसने मे लगा हुआ था. पायल की साँसे धीरे धीरे फूलने लगी थी. उसके बोबे पहले से और ज्यादा सख्त होने लगी. वो अपने हाथ को तेजी से मेरे लंड पर ऊपर नीचे कर रही थी. मैं बारी बारी से उसके दोनों बोबो को मसलते हुए पी रहा था. मेरा मुसल पूरी तरह फिर से तैयार हो चूका था. दोनों जिस्म एक बार फिर से एक दुसरे में समा जाने को बेताब हो रहे थे.
पायल का मुंह मेरी तरफ था. हम दोनों टेढ़े एक दूसरे के सामने थे.
मैंने पायल के कुलहो पर थाप दी और उसके एक पैर को उठाकर मेरी कमर पर रख दिया. और अपने लंड को उसके पैरों के बीच से चूत के छेद पर रख दिया और उसने रगड़ने लगा. ऐसा करने से पायल मचलने लगी. वो मुझे किस करने लगी.
मैंने उसकी कमर को थामा और लगा दिया निशाना मंजिल की ओर. फच की आवाज के साथ लंड आधा चुत मे धंस गया.
पायल के जिस्म ने झटका खाया, उसकी आवाज मेरे मुंह मे ही रह गई...
मैंने उसकी कमर को अपने बाहों से पकड़ा और एक झटका और मार दिया... लंड पूरा चूत की गहराइयों मे समा गया.
पायल ने मुँह कस लिया, पायल के दांत मेरे होंठो पर दब गये. वो मुझसे चिपक गई. मेरा होंठ कट गया...
मैं वैसे ही रूक गया.. 10 सैंकड बाद वो बोली - आहह.. धीरे से डाल सकते हो ना..
मैं - हनी... तुम्हारी चुत है ही ऐसी मुझसे सब्र ही नहीं हुआ. ओह.. मेरी हनी कितनी कामुक हो तुम, तुम्हारी चुत कितनी गरम हैं. जैसे कोई भट्टी सुलग रही हो तुम्हारे अंदर... तुम्हारे इस कामुक जिस्म की गरमी से देखो किस तरह पिघल रहा हूँ मैं...
मैं लंड को धीरे धीरे आरे पिछे करने लगा.. पायल ओर मेरे नजदीक आ गई.. मैं उसकी कमर को सहलाते हुए चोदने लगा
पायल - आहह... उऊह.. जान बहुत अच्छा लग रहा है...
मैं - आआह.. हनी मुझमें समा जाओ...
हम दोनों के बीच मे अब तिनके जितनी भी जगह नहीं थी. पूरे कमरे मे बस पायल की सिसकारियों की आवाज़ थी. उसकी उखड़ी हुई साँसों कि और हमारे टकराने की थप थप की आवाज पूरे माहौल को और कामुक बना रही थी.
दनदनाता हुआ मेरा लंड पायल की चूत के छल्ले को फैलाता हुआ घमासान मचा रहा था. ऊपर से उसकी रसीली चूत इतना रस छोड़ रही थी कि क्या बतांऊ... हम दोनों एक दुसरे मे समां जाना चाहते थे. लंड और चूत एक दूसरे की प्यास बुझाने को बेताब थे.
कुछ देर ऐसे ही कुश्ती करने के बाद मैंने लंड निकाल लिया और उसको सीधा लिटा दिया और उसकी टांगो को फैला दिया.