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Guest
अपडेट - 99
मेरे हाथ अब भी पंकज रानी के चुतडो़ पर ही थे. इसलिए मैंने भी जोश मे चुतडो़ को अब जोरों से पकड़ लिया और नीचे से धक्के लगाते हुए उसके कूल्हों को पकड़कर उसे जल्दी जल्दी आगे पीछे करने लगा.
अब तो मानो पंकज पर कहर बरस पड़ा और वो और भी जोरों से कूदने लगी. क्योंकि मेरा लंड चुत में अन्दर बाहर होने के साथ चुत के पास की चमड़ी पर भी लंड की रगड़ लगने लगी थी. जिससे पंकज के मुँह से अलग सी आवाजें निकलना शुरू हो गईं.
हम दोनों की ही सांसें अब फूल गयी थीं. शायद पंकज अब अपने चरमोत्कर्ष के करीब पहुंच गयी थी. उसके बदन मे जोश आ गया और उसकी चुत में भी संकुचन सा हो रहा था.इसलिए मैंने अब फिर तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए.
हमारे होंठ आपस मे जुड़े हुए थे,मेरे होंठों को जोर से चुमने लगी, उन्हें जोरों से चूसते हुए काटने लगी.
हम एक दुसरे के होंठों को जोरों से चूसते हुए, अपनी कमर को अपनी पूरी तेजी से हिलाने लगे.
बस कुछ देर ही हमने ऐसे ही तेजी से धक्के लगाये थे कि अचानक से पंकज मुझसे किसी बेल की तरह लिपट गयी और उसका बदन अकड़ सा गया. उसकी चुत की दीवारें मेरे लंड पर कस गईं.
और उसने मुँह से -उऊऊऊ...ओहहह.. आहहहहहहह... की आवाजें निकालते हुए रह रह कर अपनी चुत के अन्दर ही अन्दर मेरे लंड को प्रेमरस से नहलाना शुरू कर दिया.
मैं सच बता रहा हूँ, उस दिन पंकज की चुत ने जो प्रेमरस उगला था वो लावा जैसा गरम था. मेरा लंड उसकी चुत में घुसा हुआ होने के बावजूद भी किनारों से उसकी चुत ने प्रेमरस की इतनी पिचकारियां मारी थीं कि उससे मेरे पेट के साथ साथ मेरी दोनों जांघें भी भीग गयी थीं.
पंकज के गरम लावे को महसूस करते ही मेरे लंड ने भी समर्पण कर दिया. मैंने पंकज को अपनी बांहों में जोरों से भींच लिया और चार पांच किस्तों में उसकी चुत को अपने वीर्य से पूरा भरकर निढाल होकर गिर गया.
वो भी मेरे से लिपटी हुई, मेरे सीने पर लेटी रही...
वो देर से सांसे ले रही थी, वो अपनी आँखों को बंद किये हुए अपनी सांसों को नियंत्रित कर रही थी. उसकी गरम सांसे मेरे सीने को गरम कर रही थी.
कुछ देर तक वो ऐसे ही आनंद के सागर मे लेटी रही...
फिर उसने अपनी आँखें खोली और अपनी उंगली को मेरे सीने पर फिराने लगी. उसने मेरे सीने को अपने होंठों से चुमते हुए कहा - कैसा लगा...
मैं - बहुत मजा आया..मुझे मेरा गिफ्ट मिल गया.
मैंने पंकज को हल्का सा ऊपर खिसका लिया और उसके अधरों को चुम लिया
मैं - मैं बहुत खुश हूँ...
पंकज - आप ने जो मुझे दिया है, उसके आगे तो ये कुछ नहीं हैं.
मुझे - मेरी रानी मैंने कुछ लेने के लिये तुम्हें ये ( मैं पंकज के पेट पर हाथ रखकर ) नहीं दिया है समझी...
ये तो सबसे बेस्ट चुदाई थी...
मुझे - रानी...
पंकज - हूँ...
मैं - अगर मैं किसी और के साथ ये सब करू तो..?
वो मेरी तरफ देखने लगी और बोली - ये सब..?
मैं - मैं किसी और के साथ सेक्स करूं, किसी और को चोदु तो...
पंकज कुछ नहीं बोली, पंकज का का चेहरा नीचे हो गया...
मैं - क्या हुआ रानी, बोलो तो...
पंकज - मेरा आप पर इतना हक नहीं है कि मैं आपको रोकु, मैं रोकना भी नहीं चाहती. मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से आपको कुछ दिक्कत हो. किसी के साथ भी करो मुझे कोई दिक्कत नहीं है...
मैं - अच्छा...!
पंकज - आपने मुझे बहुत प्यार दिया हैं. ऐसा प्यार मुझे पहले कभी मिला ही नहीं था. आपने मुझे जो ये खुशी दी है, ये सबसे बड़ी खुशी है.
पर मैं आपसे एक वादा चाहती हूँ...
मैं - क्या वादा..?
पंकज - आप हमेशा मुझे प्यार करना, कभी अपने से दूर मत करना. मेरा हक मुझसे कभी नहीं छिनोगे...
मैं - रानी मैं तुम्हें हमेशा प्यार करूंगा. तुम्हारा हक मुझ पर हमेशा रहेगा...
मेरी बात सुनकर पंकज ने मुझे बांहों मे कस लिया...
फिर उसने मेरे गालों को चूमते हुए कहा - चलो अब उठो... चाचा,चाची भी आने वाली होंगे.
मैं - थोड़ी देर रूको ना... मुझे तुम्हारी बांहों मे रहने दो...
पंकज भी मेरे सीने से लिपट गई. कुछ देर(5-7 मिनट) तक हम एक - दूसरे की बांहो मे लेटे रहे...
फिर हम दोनों खड़े हुए, वो कपड़े पहन कर बाहर चली गई और मैं फ्रेश होने चला गया...
मैं नहा के रेडी होकर हॉल मे आ गया और न्यूज पेपर पढ़ने लगा. कुछ देर मे मम्मी पापा भी आ गये...
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कहानी अच्छी लगे तो अपने विचार जरूर दीजिये... Thanks For Reading...