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Incest सुलगते जिस्म और रिश्तों पर कलंक

उसके बाद वो.मुझे एक खूबसूरत रूम में ले आती है जहा चार कुर्सिया और एक एक शानदार लकड़ी की टेबल रखी हुई थी....एक छोटा सा मिनी बार भी उस कमरे में बना हुआ था...

में वहाँ एक कुर्सी पर शालीनता के साथ जा बैठा....कुछ देर इंतजार करने के बाद वो लड़की फिर से आ गई और वहाँ बने मिनी बार की तरफ बढ़ गयी....

लड़की--बाबूजी आप क्या लेना पसंद करेंगे...

में--जो तुम्हे पसंद हो वो ले आओ....लेकिन कामली बाई ने क्या कहा....

लड़की--कामली बाई बस कुछ ही देर में आपसे मिलने के लिए आरहि है....जब तक आप खुद को शराब से तरोताज़ा कर लीजिए....

में--क्या में तुम्हारा नाम जान सकता हूँ....

लड़की--नज़्म....नज़्म नाम है मेरा बाबूजी....

में--तुम्हे यहाँ कितना समय हो गया नज़्म....

नज़्म--मेरा जनम यही हुआ है.....

में--क्या तुम्हारी भी नाथ उतराई.....

नज़्म--नही बाबूजी अभी उस में वक़्त है....अगले साल मेरा नंबर है....अभी में बस मेहमानो की सेवा करती हूँ..,.और नाचने गाने का अभ्यास करती हूँ.....

में--क्या तुमने पढ़ाई नही करी नज़्म....

नज़्म--जब से होश संभाला मेरे पैरो में घुंघरू पड़ गये...और पढ़ाई करके कौनसा मुझे कही नोकरि करनी थी....मैने जो भी सीखा इसी कोठे की चारदीवारी के भीतर ही सीखा....

तभी दरवाजा खुलने की आवाज़ होती है....और 50 - 55 साल की खूबसूरत औरत मेरे सामने बड़ी अदा से झुक का सलाम करती है..,.में भी तुरंत अपनी जगह से खड़ा हो जाता हूँ....वो कामली बाई थी....

कामली--लगता है आप पहली बार किसी कोठे की शान बढ़ाने निकले है घर से....

में--आपने ठीक पहचाना.....में पहली बार ही किसी कोठे पर आया हूँ....और पहली बार में ही निराश होकर नही जाना चाहता.....

कामली--अरे जनाब....यहाँ तो लोग अपनी निराशा भगाने के लिए आते है....में पहला शक्श देख रही हूँ जो यहाँ से निराश हो कर जाने की बात कर रहा है....

में--शायद मुझे यहाँ कुछ दिन बाद आना चाहिए था....लेकिन कुछ दिनो बाद में हमेशा के लिए भारत छोड़ कर जा रहा हूँ....में एक शादी शुदा मर्द हूँ....लेकिन मेरी बीवी माँ नही बन पा रही है....उसके कहने पर ही में आपके यहाँ से लड़की खरीदने आया हूँ....

कामली--माँ ना बन पाने का दर्द एक लड़की से सब कुछ करवा देता है....क्या में जान सकती हूँ आप की पत्नी माँ क्यो नही बन सकती.....

में--मेरी पत्नी की बच्चेदानी कमजोर है....अगर हम बच्चा करने की कोशिश भी करेंगे तो उसकी जान को ख्तरा भी हो सकता है....इसीलिए में आपके पास आया हूँ....,

कामली--क्या आपकी पत्नी एक सोतन बर्दास्त कर लेगी....

में--जैसा कि आपने बोला एक लड़की माँ बनने के लिए कुछ भी कर जाती है....शायद इसीलिए वो ये सब बर्दाश्त करने के लिए तैयार है....

कामली--लेकिन जनाब रस्म होने मे अभी वक़्त है...और वक़्त से पहले.....आपको कैसे में लड़की दे सकती हूँ.....

में--तो इसका मतलब जो कभी नही हुआ वो आज होगा....

कामली--आपका मतलब नही समझी में....

में अपना बना हुआ पेग एक ही साँस में ख़तम करता हूँ और वहाँ से उठ कर बोलता हूँ...

में--आज पहली बार आपके इस कोठे से कोई निराश होकर जा रहा है....
 
PART-25

दोपहर को जब गौरव और शिवानी नीचे जाकर लंच कर रहे थे तो उस समय ही शिवानी को उसके घर से फ़ोन आ गया.

शिवानी फोन पर बात करने लगी. शिवानी के सास ससुर और गौरव तीनों ही शिवानी की तरफ देखने लगे क्योंकि शिवानी के घर से फोन बहुत कम ही आता था

फोन रखने के बाद शिवानी बोली : मेरा एक मौसेरा भाई रवि है -उसकी शादी इस गाँव की ही किसी लड़की पुष्पा से हुई है-कल मम्मी पापा और मेरी छोटी बहन उस शादी में शरीक होने के लिए यहां आ रहे हैं -मुझे भी इस शादी में जाना होगा

सुनीता देवी (सास) : हाँ बहू, तुम भी अपनी तैयारी कर लो -मौसेरे भाई की शादी में जाना तो बनता ही है -वैसे लड़की का नाम क्या बताया तुमने ?

शिवानी :किसी डॉक्टर की बेटी है-पुष्पा

सुनीता देवी : अरे यह पुष्पा को अपनी डॉक्टर उर्मिला की इकलौती बिटिया है- चलो बढ़िया है उनकी बिटिया का भी रिश्ता हो गया -वैसे शिवानी बेटा, तुम्हारा मौसेरा भाई क्या करता है शहर में

शिवानी : मम्मी जी, वह पुलिस इंस्पेक्टर है

शिवानी की इन बातों से गौरव के चेहरे पर अजीब से हाव भाव नज़र आ रहे थे -उसके चेहरे पर चिंता और परेशानी के भाव साफ़ देखे जा सकते थे

दरअसल पुष्पा गौरव के दोस्त पुनीत की बहन और डॉक्टर उर्मिला की बेटी हैं- पुष्पा के बहाने पुनीत और डॉक्टर उर्मिला से शिवानी की नजदीकियां बढ़ने से गौरव का भंडाफोड़ भी हो सकता है

गौरव यह सब सोचते सोचते खाना ख़त्म करके ऊपर अपने कमरे में आकर लेट गया

उसके कुछ देर बाद शिवानी भी ऊपर अपने कमरे में आकर आराम करने लगी

शिवानी अभी तक इस बात से अनजान थी कि उसकी होने वाली भाभी पुष्पा उसी पुनीत की सगी बहन है जिसने शिवानी का गैंग रेप किया था

अगले दिन शिवानी के मम्मी पापा और छोटी बहन रवीना शादी में शामिल होने के लिए शहर से गाँव पहुँच गए- उनके साथ शिवानी भी शादी में शामिल हो गयी

शिवानी जब लड़की के घर पहुँची और जब उसने वहां पुनीत को देखा तो उसे सारा माज़रा समझ आ गया और यह भी समझ आ गया की गौरव कल उस समय से ही इतना ज्यादा परेशान क्यों है

गौरव को अब यह लग रहा था कि अगर उसका भंडाफोड़ हो गया तो वह अपने मम्मी पापा और विवेक भैया को क्या जबाब देगा ?

यही सब सोचते सोचते वह किसी नयी साज़िश को अंजाम देने की योजना बनाने में लग गया

शादी में पुनीत और शिवानी की मुलाकात भी हुई. दोनों की जैसे ही नज़रें मिलीं तो दोनों को यह समझ में आ गया था कि उन दोनों की मुलाकात पहले भी हो चुकी है- पुनीत को वह दिन ध्यान आ गया था जब उसने डॉक्टर अनुराग के कहने पर एक सेक्स गेम शिवानी के साथ खेला था और उसे शिवानी के नंगे बदन से उसकी पैंटी उतारने का मौका मिला था

शिवानी को भी यह अच्छी तरह याद था की उन पांचो लड़कों में से सबसे ज्यादा बदमाशी पुनीत ने ही उसकी साथ की थी क्योंकि उसने शिवानी को अपने सामने बिठाकर उसका मुंह खुलवाया था और फिर उसके खुले मुंह में अपने लण्ड से पेशाब की धार छोड़ दी थी.

शिवानी और पुनीत दोनों ही एक दूसरे से अपनी नज़रें बचा रहे थे लेकिन अचानक जब पुनीत और शिवानी एक कमरे में अकेले टकराये तो पुनीत शिवानी से कहने लगा : देखिये, हम लोगों को अब पुरानी बातों को भूल जाना चाहिए और इस नयी रिश्तेदारी का स्वागत करना चाहिए -मैंने आपके साथ जो कुछ भी किया है, उसके लिए मैं बहुत ज्यादा शर्मिंदा हूँ और आपसे हाथ जोड़कर माफी भी मांगता हूँ- मुझे आपको इस सिलसिले में एक "सीक्रेट" बात भी बतानी है

शिवानी सीक्रेट बात सुनकर चौंक पडी : क्या सीक्रेट बात है ?

पुनीत : मेडिकल चेक अप के दौरान आपके अंदर कोई कमी नहीं पायी गयी थी- आपको तो ऐसे ही आपके देवर के कहने पर सेक्स स्लेव बनाने के लिए यह सब नाटक रचा गया था- दरअसल आपके पति की रिपोर्ट के हिसाब से वह बच्चा पैदा करने के अयोग्य हैं-गौरव की यही साज़िश थी की वह इस बात को सबसे छिपाकर आपको पेलता रहेगा-और अब जब आपके कोई बच्चा होगा भी तो वह आपके पति विवेक का नहीं, बल्कि गौरव का होगा. सारी दुनिया उसे आपका और आपके पति विवेक का ही बच्चा समझेगी लेकिन सिर्फ गौरव को यह मालूम होगा की यह बच्चा दरअसल उसका है

पुनीत की बात सुनकर शिवानी का मानों सर चकरा गया. वह कभी सोच भी नहीं सकती थी कि उसका हरामी देवर अपनी सेक्स क़ी भूख मिटाने के लिए इस हद तक भी गिर सकता है

शिवानी अपने मम्मी पापा और छोटी बहन रवीना के साथ शादी में से वापस आ गयी थी -जब उसके मम्मी पापा और छोटी बहन शहर जाने क़ी बात करने लगे तो शिवानी क़ी सास सुनीता देवी ने कहा : हमें तो आपकी यह दूसरी बिटिया रवीना भी बहुत अच्छी लगती है-हम इसे भी अपने घर क़ी बहू बनाना चाहते हैं-अगर आपको ऐतराज़ न हो तो हम अपने छोटे बेटे गौरव के लिए इसका हाथ आपसे मांगे लें ? अगले हफ्ते ही मुहूर्त देखकर इसकी भी शादी कर देते हैं- हम दोनों अपनी अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएंगे

शिवानी को यह सुनकर बड़ा झटका सा लगा. वह तो यह हरगिज़ नहीं चाहती थी कि उसकी बहन का रिश्ता उसके हरामी देवर गौरव के साथ हो लेकिन इससे पहले की वह कुछ बोल पाती, उसके पापा ने अपनी हामी भरते हुए कहा : अजी यह तो आप लोगों का बड़प्पन है -इसे तो आप आज से ही अपने घर की ही छोटी बहू समझिये-बस हम लोगों की तरफ से तो हाँ ही है-शिवानी का भी अपनी छोटी बहन के साथ मन लगा रहेगा और इसका मन भी शिवानी के साथ लगा रहेगा

अगले हफ्ते विवेक भी अपनी यात्रा पूरी करके गाँव वापस आ गया था- चट मांगनी और पट ब्याह के तर्ज़ पर गौरव और रवीना की शादी भी हो गयी और अब रवीना भी इस घर में छोटी बहू बनकर आ गयी थी।

शेष अगले भाग में....

राज शर्मा स्टॉरीज पर पढ़ें हजारों नई कहानियाँ
 
कामली ने तुरंत मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे बिठाते हुए बोली....

कामली--जनाब ये कोठा 300 साल पुराना है....आपके यहाँ से निराश होकर जाते हे....इसके 300 साल से बने हुए दबदबे पर बट्टा लग जाएगा.....मुझे थोड़ा सोचने का समय दीजिए....तब तक आप कुछ और जाम नोश फरमाइए....

उसके बाद कामली वहाँ से उठ कर चली जाती है....और तब तक नज़्म मेरे लिए एक जाम और भर देती है....

नज़्म-- क्या आपकी पत्नी बहुत खूबसूरत है......

में--वो इतनी खूबसूरत है कि चाँदनी भी शर्मा जाए....वो मेरी जान है....

नज़्म--फिर भी आप एक बच्चे के लिए यहाँ से लड़की ले जा रहे है....

में--बच्चा पैदा करने की ज़िद्द उसी की है नज़्म....में तो बस उसका दर्द कम करना चाहता हुन्न.....

नज़्म--सच में आप एक शानदार मर्द के साथ एक शानदार इंसान भी है वरना कौन अपनी पत्नी को खुश करने के लिए एक कोठे से लड़की खरीद कर ले जाता है....आप चाहते तो दूसरी किसी लड़की से शादी भी कर सकते थे...लेकिन ऐसा करना आपका आपकी पत्नी के लिए धोखा होता...मैने यहाँ जिस्मो को नोचने वाले गिद्ध देखे है....लेकिन एक देवता पहली बार देख रही हूँ....

कुछ दे की शांति के बाद कामली फिर से अंदर आजाती है....

कामली--जनाब आप यहाँ से निराश हो कर नही लौटेंगे....बल्कि खुशी खुशी अपने साथ यहाँ की कोई भी लड़की ले जा सकते है.....लेकिन कीमत देने में कोई परेशानी तो नही है ना...,

में--कीमत आप जो चाहे....लेकिन पसंद मेरी अपनी होगी....आप किसी को भी पसंद करने की ज़बरदस्ती मेरे साथ नही कर सकती है...,

कामली--जनाब अगर आप मुँह माँगा पैसा देंगे तो बगैर आपकी पसंद के ऐसे कैसे हम आप के गले से कुछ भी बाँध देंगे....

उसके बाद कामली नज़्म को बाहर भेज देती है और एक एक करके कुछ लड़कियो को अंदर भेजने को कहती है....सब से पहली ही लड़की ग़ज़ब की खूबसूरत उसका नाम सुमन था....

कामली--ये है सुमन...प्यार से हम इसे सुम्मी कहते है.....खूबसूरती के साथ साथ ये गाना गाने में भी माहरी है....

लेकिन में उस लड़की की तरफ एक हल्की सी नज़र ही उठा कर देखता हूँ और अपना जाम पीने लग जाता हूँ....शायड कामली समझ जाती है कि वो मुझे पसंद नही आई है....

और इसके बाद तकरीबन 10 लड़कियाँ और... एक के बाद एक आकर चली जाती है लेकिन में किसी की तरफ़ ज़्यादा तवज्जो नही देता.....

कामली--जनाब आप लड़की खरीदने निकले है या कोहिनूर....

में--कामली बाई में हीरो का खोट एक नज़र में पहचान लेता हूँ....वो चाहे कितना भी चमक ले.... मेरी नज़र से बच नही सकते...अगर आप के पास कुछ और है तो दिखा दो वरना में चला....में अपने साथ लाए हुए बेग में से 500 रुपये की एक गॅडी नज़्म को बुला कर दे देता हूँ....और उठ कर जाने लगता हूँ....

कामली--जनाब आप नाराज़ मत होइए....में तो बस आपको परख रही थी....लेकिन आप तो बिल्कुल पारखी नज़र के मालिक निकले....आगे जो लड़की आने वाली है उसको दिखाने से पहले मेरी एक शर्त है....

में--बोलिए क्या शर्त है आपकी....

कामली--में देखना चाहूँगी आपकी पत्नी कितनी खूबसूरत है....अगली लड़की तभी आपके सामने आएगी जब में तुम्हारी पत्नी और मेरी लड़की की सुंदरता का मिलान कर लूँ....अगर किसी भी तरह आपकी पत्नी मेरी लड़की से कम निकलती है तो तब आप यहाँ से तशरीफ़ ले जा सकते है....क्योकि में वो लड़की ऐसे ही किसी को नही दे दूँगी....

में--मुझे आपकी ये शर्त मंजूर है...लेकिन मेरी भी एक शर्त है....अगर मुझे वो लड़की पसंद आजाती है तो उसके जन्म से लेकर अभी तक का सारा हिसाब किताब चाहिए....वो कहाँ पैदा हुई कैसे आपसे मिली ये सब कुछ....

कामली--लेकिन ये सब जान कर आप क्या करेंगे....आपको लड़की चाहिए आप लड़की ले जाओ बस....

में--में एक परिवार वाला हूँ कामली बाई....मुझे पता होना चाहिए जिसे में अपने साथ ले जा रहा हूँ वो किसी इंसान की पैदाइश है या यहाँ की गंदी नाली की..,.

कामली--ठीक है जनाब....जैसे आपकी मर्ज़ी....क्या आपके पास आपकी पत्नी की कोई तस्वीर है....

में अपने मोबाइल में से नीरा की एक तस्वीर कामली को दिखा देता हूँ.....

कामली--हे मेरे श्याम....इतना खूबसूरत चेहरा....ये तो खुद एक खूबसूरती की देवी है...एक देवी की तुलना दूसरी देवी से करना मेरे बस का नही है....

नज़्म.....शमा को अंदर भेजो....

शमा जैसे ही अंदर आती है में अपनी कुर्सी से उठ कर खड़ा हो जाता हूँ....शमा ने अभी भी अपने होंठो तक अपना घूँघट कर रखा था....एक कसा हुआ कीमती बेस उसने पहना हुआ था उसकी नेट की चुनरी में से उसकी नाभि सूर्य की तरह उदित होती हुई नज़र आरहि थी....

में--तुमसे मिलकर नीरा बहुत खुश होगी....तुम बिल्कुल उसी की तरह सुंदर हो तुम दोनो की सुंदरता का कोई पैमाना नही है.....

कामली बाई मुझे ये लड़की पसंद है.,...

कामली--अरे नज़्म जल्दी से शमा का मुँह मीठा करा और बाकी सारी लड़कियो का भी....और शमा तू इन जनाब का मुँह मीठा कर दे अब से तुझे इन्ही के साथ रहना है....उसके बाद नज़्म एक मिठाई का डिब्बा ले आती है और शमा के हाथो में पकड़ा देती है....शमा धीरे धीरे चलते हुए अपनी नज़ारे नीचे झुकाए मेरे मुँह से वो मिठाई का दुकड़ा लगा देती है....आधा टुकड़ा में खुद खाता हूँ और आधा में शमा को खिला देता हूँ....उसके बाद बाकी सारी लड़किया हँसती हुई शमा को कमरे से बाहर ले जाती है....

कामली--सही में आप एक ज़ोहरी की नज़र रखते है....शमा घूँघट में थी फिर भी आपने उसकी सुंदरता को पहचान लिया....
 
में-- कामली बाई असली सुंदरता हमेशा छुपि हुई रहती है....एक हीरा भी अपनी सुंदरता समेटे हुए धरती की गहराइयो में रहता है....उसी तरह ये सुंदरता भी आपके यहाँ ही दबी हुई थी....में शमा को आज ही लेकर जाउन्गा अपने घर के लिए....

कामली--अरे ....अरे...जनाब थोड़ा सबर...

में--सबर....अब क्या बाकी रह गया है....

कामली--जनाब नथ उतराई की रसम आपको यही मनानी पड़ेगी....इसी कोठे मे....

में--मतलब कुछ समझ में नही आया ज़रा खुल कर बताइए....

कामली--जनाब इस कच्ची कली को फूल आपको इसी कोठे पर बनाना होगा...

में--लेकिन ये पासिबल नही है....ये तो मेरी पत्नी के लिए मेरी तरफ से धोका हुआ....अगर मुझे किसी के साथ रात ही गुजारनी होती तो मुझे किसी लड़की को खरीदने की ज़रूरत नही थी....

कामली--जनाब आप बुरा मत मानिए ये हमारी परंपरा है जब भी यहाँ की लड़की की नथ उतरती है वो इसी कोठे पर उतारी जाती है....और सबूत के तौर पर मिलन से निकले खून से सनी हुई चादर को. पूरे कोठे का चक्कर लगवाया जाता है.....

में--ये आपने मेरे लिए दुविधा वाला काम पैदा कर दिया....ये सब में अपनी पत्नी के साथ मिलकर करना चाहता था....लेकिन माफ़ कीजिए में उसके बिना ऐसा कुछ भी नही कर सकता....अब मुझे जाना होगा....

कामली--क्या जनाब आप बार बार नाराज़ होकर खड़े हो जाते है....अगर आप अपनी पत्नी को यहाँ बुलाना चाहे तो बुला सकते है....वैसे भी आप तीनो आगे से एक ही कमरे में रहोगे....तो इसमें दुविधा वाली बात कौनसी है....

में--ठीक है कामली बाई....में अभी होटेल जा रहा हूँ....आप मुझे शमा की कीमत बता दीजिए....ताकि कल सुबह आपको आपकी अमानत दे सकूँ....

कामली--आपने क्या कीमत लगाई है शमा की....

में-मेरे लिए ये अनमोल है....मैं इसकी कीमत कभी नही लगा सकता....

कामली--15 करोड़....

में--सुबह कॅश मिल जाएगा....

कामली--जनाब आप सिर्फ़ पैसो के ही धनी नही है दिल के भी धनी है....

शमा मेरे लिए भी अनमोल है....लेकिन वो आपके साए में रहेगी तो खुशिया उसके कदम चूमेंगी....आप बस 15 लाख रुपये दे देना....15 करोड़ मेने बस आपको परखने के लिए कहा था....अब कल आप अपनी पत्नी को लेकर आ जाए और बंद कमरे के अंदर जो करना चाहे कर लीजिए...बस ये रस्म पूरी होनी चाहिए......

उसके बाद में वहाँ से निकल कर बाहर आ गया और सबसे पहले राजेश को आज का प्लान कँसिल करने की सूचना दे दी और उस से होटेल में मिलने को कह दिया.....

होटेल पहुँचने से पहले में गंगा नदी के एक घाट पर पहुँच गया....कितना मनौरम दृश्य वहाँ फैला हुआ था....गंगा में टिमटिमाते हुए दीपक और मंदिर की घंटियो की आवाज़ मे एक अजब सा सुकून मुझे मिल रहा था....कहते है इस नदी मे नहाने से सारे पाप धूल जाते है...लेकिन इंसान इतने पाप करता ही क्यो है जो गंगा जैसी निर्मल नदी में उसे अपने पाप धोने पड़े....

मैने वही बैठे बैठे नीरा के मोबाइल पर कॉल लगा दिया....

नीरा--जान कहाँ हो आप... आपको देखने का मन कर रहा है....मुझे ऐसे छोड़ कर मत जाया कीजिए....

में--शादी करेगी मुझ से.....???

नीरा--क्या कहा.....????एक बार फिर से कहना....

में--नीरा तुम अभी फ्लाइट पकड़ लो वाराणसी एरपोर्ट के लिए....कल सुबह हम दोनो की शादी है.....

नीरा---लेकिन इतना जल्दी.....आप ही तो कहते थे कि कॉलेज ख़तम होने के बाद शादी करूँगा....

में--मेरे कहने से कुछ नही होता नीरा ये सब किस्मत का खेल है.....मुझे तेरी ज़रूरत है यहाँ....एक ख़ास मकसद पूरा करने आया हूँ में यहाँ....

नीरा--में अभी निकल जाती हूँ वाराणसी के लिए तो सुबह 3 बजे तक पहुँच जाउन्गी....

लेकिन घर वालो को क्या बोलूं कि कहाँ जेया रही हूँ.....

में--मम्मी को बोल देना कि मैने बुलाया है....वो तुझे रोकेंगी नही....वो जानती है में जो भी करूँगा सही करूँगा.....

नीरा--ठीक है आप परेशान मत होना में आ रही हूँ....आप मुझे एरपोर्ट लेने आजना.....

में--नीरा भाभी की कुछ हॅवी साड़ी ले आना अपने साथ....मम्मी को बोल देना वो तुझे दिलवा देंगी भाभी से.....अब तू खाना खा कर निकलने की तायारी कर और फ्लाइट में बैठने से पहले मुझे कॉल ज़रूर कर देना.....

नीरा--ठीक है में सब कर लूँगी....अब में फोन रख रही हूँ....जल्दी हे आपके सामने होउंगी में अब..
 
नीरा--ठीक है आप परेशान मत होना में आ रही हूँ....आप मुझे एरपोर्ट लेने आजना.....

में--नीरा भाभी की कुछ हॅवी साड़ी ले आना अपने साथ....मम्मी को बोल देना वो तुझे दिलवा देंगी भाभी से.....अब तू खाना खा कर निकलने की तायारी कर और फ्लाइट में बैठने से पहले मुझे कॉल ज़रूर कर देना.....

नीरा--ठीक है में सब कर लूँगी....अब में फोन रख रही हूँ....जल्दी हे आपके सामने होउंगी में अब....

उसके बाद नीरा फोन काट देती है....और तभी अचानक मेरा फोन बजने लगता है.....वो कॉल डॉक्टर आलोक का था....

डॉक्टर--भाई कहाँ हो....यार माफ़ करना दिन में रूही आई थी लेकिन में किसी कारण से कहीं गया हुआ था तो उसे रिपोर्ट नही दे पाया था...4 बजे मैने तुम्हे फोन भी किया था लेकिन तुम्हारा फोन बंद आरहा था.....

में--कोई बात नही सर....में उस समय फ्लाइट में था अगर रूही ने भी मुझे कॉल किया होगा तो उसे भी मेरा नंबर बंद मिला होगा....

डॉक्टर--अच्छा सुनो वो रिपोर्ट्स रेडी हो गयी है....उस में सब कुछ ठीक है.....घर के मुखिया से ही सारे बच्चे है.... और जो नया वाला सॅंपल देकर गये थे वो तुम्हारे दोस्त की सग़ी बहन है....मेरे ख्याल से अब कोई कन्फ्यूषन नही रहा होगा तुम्हारे मन में.....

में--सर आपने एक बड़ा बोझ मेरे सीने से उतार दिया है....

डॉक्टर--अब वादे के मुताबिक तुम मुझे बताओ सच क्या है.....

में--सर ये काफ़ी लंबी कहानी है....में एक बार घर आ जाऊ उसके बाद आपको सारी बाते बता दूँगा.....

उसके बाद डॉक्टर आलोक फोन काट देते है और....में गंगा का जल हाथ में लेकर उसे पी कर अपने सिर पर छिड़क लेता हूँ....

जो काम में करने जा रहा था वो काम गंगा मेँया के आशीरावाद के बिना पूरा नही हो सकता था....

एक पाप करने जा रहा था में.... जो समाज के नियमो के खिलाफ था....एक पाप करने जा रहा था में....जिसे पापी भी इसी समाज ने बनाया है..... एक ऐसा पाप जो सब कुछ बदल के रख देगा मेरे जीवन में.....

में वहाँ से उठ कर अपनी होटेल की तरफ चल पड़ा, अपने दिल में चल रहे तूफान को लेकर....होटेल में अभी राजेश नही आया था....मैने अपने लिए कुछ पीने का सामान मंगवा लिया और थोड़ी देर मे मेरे सामने एक शराब की बोतल और कुछ खाने का सामान पड़ा था....

मेने जल्दी जल्दी अपने तीन पेग ख़तम करे और एक फोन लगा दिया.....

में--सुहानी कैसी हो....??

सुहानी--क्या बात है सर आज काफ़ी दिनो बाद याद किया....सब ठीक तो है ना

में--तुम तो जानती हो सुहानी....जब में हर तरफ से मुसीबतो से घिर जाता हूँ....तब तुम्हारी याद आ ही जाती है.....

सुहानी--क्या हुआ सर....कौनसी मुसीबतो की बात कर रहे हो आप....

में--सुहानी...समझ में नही आरहा में ये बात तुम से कैसे कहूँ....

सुहानी--जहाँ तक में आपको समझ पाई हूँ सर....आपके फ़ैसले आप दिल से लेते हो....लेकिन कभी कभी दिमाग़ का इस्तेमाल भी करना ज़रूरी होता है...अगर आप किसी ऐसी उलझन में हो जो आप मुझे बता नही सकते....इसका मतलब आपने अपने दिमाग़ को यूज़ लेना शुरू कर दिया है....आप ने जो करने की सोचा है वो बिल्कुल ठीक ही होगा सर....क्योकि कभी कभी दिल और दिमाग़ दोनो का ही सही सेमाल करना ज़रूरी होता है....आपने जो भी फ़ैसला लिया है आप अपना ध्यान पूरी तरह से उसी पर रखे....क्या होगा और क्या नही उसके परिणामो के बारे में मत सोचिए....

में--सुहानी में बस यही जानना चाहता था जो में कर रहा हूँ वो सही भी है या नही....
 
सुहानी--सर में जानती हूँ आप किसी का बुरा नही कर सकते....लेकिन अगर आप किसी का अच्छा करने की कोशिश कर रहे है तो फिर सोचना कैसा.....आप जो भी करोगे वो अच्छा ही होगा....सोचना बंद करो और अपने काम को अंजाम तक पहुचाओ....

में--एक बार फिर तुमने मेरे भटकते हुए दिल को सही रास्ता दिखा दिया है....में जल्दी ही दुबारा अपने परिवार के साथ तुमसे मिलने आउन्गा....

सुहानी--युवर मोस्ट वेलकम सर....आपसे मिलने के लिए में भी बेकरार हूँ....जल्दी आइए....

और उसके बाद सुहानी फोन काट देती है और में अपना पेग ख़तम कर के एक और पेग बना लेता हूँ.....

मेने सारी सोच अपने दिमाग़ से निकाल दी और ऐसे ही टीवी देखने लग गया....तभी मेरा मोबाइल एक बार फिर से बजने लग गया.....ये कॉल राजेश का था.....

राजेश--जय क्या हो रहा है....

में--राजेश भाई बस आप ही का वेट कर रहा था....कब तक आओगे आप..??

राजेश--दरअसल मुझे टाइम लग जाएगा ऑफीस में ही....रेड के लिए टीम रेडी कर रहा हूँ...अभी तक ये किसी को नही बताया गया है कि ये टीम किस लिए है..,..सिर्फ़ यहाँ के कमिशनर को पता है. इस बारे में....

में--कल रात को आपको रेड करनी है वहाँ पर...और मेरी बहन नीरा आ रही है यहाँ....

इसलिए में अब आपसे दुबारा यहाँ नही मिल पाउन्गा.....

राजेश--उसे क्यो बुला लिया आपने इस काम के बीच में.....

में--उसका होना काफ़ी ज़रूरी है राजेश भाई....ये में आपको समझा नही पाउन्गा लेकिन उसके बिना में शमा को यहाँ से निकाल कर नही ले जा पाउन्गा....

राजेश--ठीक है जय भाई जैसा आप सही समझे....में अब बनारस मे आपसे नही मिलूँगा....

में--ठीक है राजेश भाई अब सीधा उदयपुर में ही मिलना होगा.....

उसके बाद में वो फोन डिसकनेक्ट कर देता हूँ और फिर से टीवी देखने लग जाता हूँ....होटेल मे मैने नीरा के आने का बता दिया था....इसलिए नीरा के रुकने में कोई परेशानी नही थी....

तभी................
 
#99

तभी एक बार फिर से मेरा फोन घनघनाने लग गया.....इस बार कॉल नीरा का था....

नीरा--जान में एरपोर्ट पहुँच गयी हूँ....आपने खाना खा लिया....

में--नही नीरा खाना नही खाया मैने अभी तक.....लेकिन तू तो कुछ खा कर निकली है ना....

नीरा--भूख तो नही थी लेकिन मम्मी ने ज़बरदस्ती खिला दिया....आप भी कुछ खा लो...

में--चल अच्छा किया....अब जल्दी से तू यहाँ मेरे पास आजा....खुद को काफ़ी अकेला महसूस कर रहा हूँ में आज.....

नीरा--आप चिंता मत करो...सब ठीक हो जाएगा.....मेरी फ्लाइट का टाइम हो गया है अब में फोन काट रही हूँ....यहाँ पहुँच कर आपको रिंग करती हूँ.....

फोन एक साइड में रखने के बाद एक बार फिर से में ख्यालो में डूब गया..और कब मुझे नींद ने अपने आगोश में ले लिया मुझे पता ही नही चला...,.

सपने मे मुझे फिर से वही साधु बाबा नज़र आने लगे....वो मुझ से कुछ कह रहे थे....

साधु--बेटा तूने बिल्कुल सही फ़ैसला लिया है.....वरना कब तक वो मासूम बच्ची भगवान के चर्नो में अपना सिर पटकती रहती....

में--बाबा ये फ़ैसला कैसे सही है.....एक बहन की कुर्बानी देकर दूसरी बहन को बचाना...,.ये कहाँ का इंसाफ़ है....

साधु--नीरा तुमसे प्यार करती है.....उसके लिए सारी दुनिया में तुम से बढ़ कर कुछ नही है....और कभी ना कभी तो ये होना ही था...ये मत सोचो कि तुम लोगो के प्यार का गवाह एक मामूली कोठा बनेगा....बस इतना सोचो कि उस कोठे में भी भगवान विराज्ते है....तुम जो कर रहे हो सही है....और जो आगे भी करोगे वो भी सही ही होगा....तुम्हे अभी काफ़ी लंबा रास्ता तैय करना है.....और ये कोठा तुम्हारी पहली मंज़ील है.....

अब उठ और अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़....उठ और जो जीते जी मर चुके है उन्हे फिर से जीवन दान दे....उठ अब और किसी बालक की भाती सोना बंद कर....समय तेरी प्रतीक्षा कर रहा है....उठ तेरा प्यार तुझे याद कर रहा है......

और इसीके साथ में हड़बड़ा के उठ जाता हूँ मेरा पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था.......में तुरंत अपने मोबाइल को उठाता हूँ और उस में समय देखने लगता हूँ....2.30 बज गये थे....में फटाफट उठा और फ्रेश होकर होटेल द्वारा मँगवाई गयी टेक्शी में बैठ कर एरपोर्ट की तरफ चल पड़ा.......

में एरपोर्ट पहुँच गया था.....मुझे नीरा वही इंतजार करती हुई मिल गयी बिल्कुल मासूम सी गुड़िया लग रही थी वो इस समय....मुझे देखते ही वो भागकर मेरे सीने से लग गयी....

नीरा--पता है कितना डर लगता है जब आप साथ में नही होते मेरे....

में--मेरे होते हुए तुझे कैसा डर चल अब होटेल चलते है....फिर बाकी की बाते वही करेंगे....

नीरा--मेरे माथे पर किस करते हुए.....आइ लव यू जान....

उसके बाद हम फिर से होटेल की तरफ बढ़ जाते है....

होटेल पहुँच कर में नीरा को फ्रेश होने के लिए कहता हूँ और एक बढ़िया साड़ी पहने ने के लिए कह देता हूँ.....

जब वो साड़ी पहन कर बाहर आजाति है तो में उसे बस देखता ही रह जाता हूँ....किसी परी से कम नही थी मेरी नीरा.....

वो मेरे सामने आकर खड़ी होगयि और में उसे अपलक निहारे जा रहा था....

नीरा--कहाँ खो गये....मुझे इस तरह देखना बंद करो शर्म आ रही है मुझे....

में--तुम्हारी खूबसूरती का कोई मुक़ाबला नही है नीरा....सच मे मैने कुछ अच्छे काम किए होंगे तभी एक पत्नी के रूप में तुम मुझे मिल रही हो.....

नीरा--अब बंद भी करो मेरी तारीफ़ करना....और मुझे जल्दी से बताओ कि क्या हुआ है जो इतना जल्दी सब कुछ कर रहे हो.....

में खुद का ध्यान नीरा की खूबसूरती से हटते हुए कहता हूँ....

में--नीरा हमारी एक बहन और भी है....में उसे ही बचाने यहाँ आया हूँ....

नीरा--क्या....??ये क्या कह रहे हो आप....एक बहन और....कहाँ है वो मुझे अभी उस से मिलना है....मेरी एक बहन और है और ये आप मुझे अब बता रहे हो....

में--नीरा में पहले खुद कन्फर्म करना चाहता था....लेकिन अब कन्फर्म हो गया है....कि शमा ही हमारी बहन है.....

नीरा--तो फिर हम अभी तक यहाँ क्यो रुके है चलो....चलके शमा को घर ले चलते है....

में--ये इतना आसान नही है नीरा....वो एक कोठे पर है....और उसको यहाँ से भगा के लेजाना काफ़ी मुश्किल है....

नीरा--तो आपने अब तक क्या सोचा है....में शमा से मिलने के लिए मरी जा रही हूँ...अब आप जल्दी उसके पास मुझे ले चलो....

में--शमा की मालकिन कामली बाई ने एक शर्त रखी है....कि शमा की नथ उतराई उसी के कोठे पर होगी....मुझे उस वक़्त कुछ समझ में नही आया इसलिए उसे मैने कह दिया ये सब कुछ मेरी पत्नी के सामने होगा....
 
#100

नीरा--आपका मतलब ये है कि उस कमरे में हम तीन जने होंगे और कमरे के अंदर नथ उतरई शमा की नही बल्कि मेरी होगी......

में अपना सिर झुका कर नीरा को हाँ में जवाब दे देता हूँ.....

नीरा--मुझे कोई परेशानी नही है....अगर आपने सोच हे लिया है तो.....में आपसे इतना प्यार करती हूँ कि आप अगर मुझे किसी चौराहे पर भी नंगा होने को कहोगे तो में खुशी खुशी अपने प्यार की खुशी के लिए अपने सारे कपड़े वही उतार दूँगी....शमा तो फिर भी मेरी बहन है....

में--नीरा में जानता हूँ तू मुझ से कितना प्यार करती है....इसीलिए बिना सोचे समझे तुझे उस गंदे महॉल में ले जाने के लिए तैयार हुआ......

लेकिन अब सब ठीक है....मैने सब कुछ सोच लिया है....में तुझ से पहले शादी करूँगा.....और उसके बाद ही हम वहाँ चलेंगे....

सुबह 6 बज गये थे....हम लोगो को बाते करते करते....मैने होटेल वालो से एक कार का इंतज़ाम करने को कहा जिसे में खुद ही चलाने वाला था.....जब हम लोग अपने रूम में से निकलकर होटेल लॉबी में पहुँचे तो वहाँ मोजूद सभी लोगो की नज़रें बस नीरा पर ही टिकी हुई थी.....उसकी खूबसूरती के वार से तो वहाँ मोजूद औरते और लड़किया भी खुद को ठंडी साँस भरने से नही रोक पाई.....हम लोग सीधा गंगा नदी के किनारे बने एक मंदिर में पहुँच गये....रास्ते में एक सुनार की दुकान से हमने एक मंगल सूत्र भी खरीद लिया था और पुजारी को कुछ पैसे देकर वहाँ हमने पूरे धार्मिक रीति रिवाज से शादी कर ली.....नीरा गजब ढा रही थी ....

उसकी माँग में मेरे नाम का सिंदूर भरा हुआ था....और सीने पर लटकता . नीरा की खूबसूरती में चार चाँद लगा रहा था.....साक्षात रति का अवतार लग रही थी नीरा.....

हम दोनो का रिश्ता अब बदल चुका था....अब हमारे बीच भाई बहन के रिश्ते की जगह पति पत्नी के रिश्ते का मजबूत बंधन पड़ चुका था...

मंदिर से भगवान का आशीर्वाद लेकर हम वहाँ से वापस सीधा होटेल पहुँच गये....

रूम के अंदर पहुँचते ही मैने नीरा को कस कर अपनी बाहो मे भर लिया....

नीरा--अरे थोड़ा सब्र करो पहले जो काम करने आए है उस पर ध्यान दो....

में--नीरा के गालो पर हाथ फेरते हुए कहता हूँ....सही कहा नीरा तुमने....मुझे अभी बॅंक जाना है....वहाँ से कुछ पैसे भी निकलवाने है....

नीरा--ठीक है आप जाकर आओ तब तक में थोड़ा फ्रेश हो जाती हू....और शमा के यहाँ कब चलना है....

में--शमा के पास हमे 2 बजे तक पहुँचना है....अभी 10 बज रहे है....जब तक में बॅंक का काम निपटा लेता हूँ....

नीरा---ठीक है आप जाइए....में आपके आने का इंतजार करूँगी....

उसके बाद में वहाँ से निकल कर सीधा बॅंक पहुँचता हूँ....और बॅंक से पैसे निकलवाने के बाद.....में बाज़ार से कुछ फ्रूट्स और मिठाई खरीद लेता हूँ.....मुझे बाजार में घूमते हुए 12 बज चुके थे उसके बाद में वहाँ से निकल कर सीधा होटेल पहुँच जाता हूँ.,.,रूम मे नीरा मेरा इंतजार कर रही थी....जब उसने दरवाजा खोला वो कुछ इस तरह लग रही थी..

में उसकी तरफ लगातार देखे ही जेया रहा था....और उसके करीब जा कर मैने पहले उसके माथे को चूमा और फिर....उस की आँखो से थोड़ा काजल निकाल कर उसकी गरदन के पीछे एक काला टीका लगा दिया...

में--जिस जगह हम जा रहे है...वहाँ सब की नज़रे तुम पर ही होंगी....और में नही चाहता किसी की भी बुरी नज़र तुम पर पड़े.....

नीरा--इतना प्यार करते हो मुझ से....

में--हाँ मेरी जान......तेरे लिए में कुछ भी कर जाउन्गा....

नीरा--अब बातें बनाना बंद करो और जल्दी चलो में शमा को देखने के लिए बैचेन हो रही हूँ कब से....

में--नीरा शमा को यही पता है कि में अपनी वाइफ के साथ यहाँ आ रहा हूँ..,.अपने बारे में उसे कुछ नही पता........

नीरा--जब हम यहाँ से उसे ले जाएँगे तो उसे सब कुछ सच सच बता देंगे....और वैसे भी अब में आपकी पत्नी हूँ....इसलिए मुझे अब कोई डर नही है....

उसके बाद हम दोनो उसी कार में बैठकर गलियो में से होते हुए....उस कोठे के बाहर तक पहुँच गये....पूरा बाज़ार सज़ा हुआ था जैसे वहाँ कोई शादी का महॉल हो..

जब हम दोनो कार से उतरे तो हर किसी की निगाहे सिर्फ़ नीरा पर ही थी....में जल्दी जल्दी उस जगह से नीरा को उस कोठे में ले आया ....

वहाँ नज़्म पहले से ही खड़ी थी....उसके हाथो में आरती का सुंदर थाल था अंदर आते ही उसने हम दोनो की साथ में आरती उतारी....और मैने कुछ 500-500 के नोट उस थाली में रख दिए....

नज़्म--क्या किस्मत पाई है बाबूजी आपने....इतनी सुंदर बीवी हर किसी को नही मिलती....कभी किसी की बुरी नज़र ना लगे इनको....

और ये कह कर वो हम दोनो का रास्ता छोड़ देती है....कामली बाई भी हॉल में ही हमे मिल जाती है....सब से पहले कामली बाई नीरा की बालाएँ लेती है....और एक नींबू नीरा के उपर वार के नज़म को उसे चौराहे पर रख कर आने को कह देती है....

कामली--वाह जनाब इतनी खूबसूरती मैने आज तक नही देखी....अब तो आपके पास दो दो खूबसूरती की मिसाले हो गयी है....

नीरा--कामली जी अगर आप बुरा ना माने तो क्या में अब शमा से मिल सकती हूँ....

कामली--इस में बुरा मानने वाली बात कौनसी है....अब तो वैसे भी वो आप लोगो की हो चुकी है....जैसे चाहो वैसे मिलो....उसके बाद सुम्मी नीरा को एक रूम की तरफ ले जाती है वहाँ शमा बेसब्री से हमारा इंतजार कर रही होती है.

नीरा और सुम्मी के चले जाने के बाद....में और कामली बाई मिनी बार वाले रूम में चले जाते है....अंदर बैठते ही में उसे 15 लाख रुपये दे देता हूँ.....

कामली--जनाब क्या कमाल का रूप है आपकी पत्नी का....कोई बूढ़ा भी देख ले तो शेर बन जाए....

में--कामली बाई नीरा के लिए कहा गया हर बुरा शब्द....मेरे गुस्से को बढ़ा देता है...इसलिए आपसे गुज़ारिश है आप उसके लिए कुछ ग़लत ना बोले....

कामली--नही...नही....जनाब में तो तारीफ़ कर रही थी....में उस हुश्न की मल्लिका के लिए बुरा कैसे कह सकती हूँ.....

अब बताइए क्या लेंगे आप ठंडा या गर्म...

में--कुछ भी पिला दीजिए जो आपको पसंद हो....

उसके बाद कामली बाई....मेरे लिए एक चाँदी के ग्लास में शराब भर के ले आती है और पहला सीप मारने के बाद में उस से कहता हूँ.....

में--कामली बाई वादे के मुताबिक मैने आपको पैसे देकर अपना वादा पूरा कर दिया है....अब आपकी बारी है वादा पूरा करने की.....

कामली--पूछिए जनाब क्या पूछना चाहते है....अब शमा आपकी हो गयी है....और शमा के साथ जुड़ा हर राज़ भी....

में--शमा आपके कोठे पर कैसे पहुँची.... इसके माँ बाप कौन है....???

कामली--19 साल पहले मेरे पास दीनू इस बच्ची को लेकर आया था....बच्ची को देख कर लग रहा था कि कुछ दिन पहले ही ये पैदा हुई है.....पहले तो मैने उस हरामजादे को खूब पिटवाया अपने आदमियो से....इतनी मासूम बच्ची को अपनी माँ से जुदा करने के लिए....और जब उस से पुछा गया ऐसा उसने क्यो किया है तो उसने किसी का नाम लिया.....

में--किसका नाम लिया कामली बाई...याद करिए...

कामली--दीनू किसी मुंबई में रहने वाले प्रधान की बात कर रहा था....उसने इस बच्ची को ख़तम करने की सुपारी दी थी....लेकिन ज़्यादा पैसा कमाने के चक्कर में वो इसे मेरे पास बेचने के लिए ले आया.....

में अपने मन में ही प्रधान का नाम सुनकर चोन्के बिना नही रह सका....

में--क्या मुझे प्रधान या दीनू के बारे में कोई जानकारी मिल सकती है.....
 
#102

कामली--जनाब जिस तरह से मैने अभी तक आपके बारे में नही पूछा वैसे ही मैने ना ज़्यादा प्रधान के बारे में पूछा और ना ही दीनू के बारे में.....लेकिन दीनू की पिटाई करवाने के बाद उसकी जेब में जो भी माल था वो सब निकाल लिया गया था....तकरीबन 20000 रुपये और कुछ कागज भी मिले थे उसकी जेबो मे से.....उन कागजो में उसका गाड़ी चलाने का लाइसेन्स भी था....

में--क्या में वो सब कागज देख सकता हूँ...

कामली--बेशक जनाब.....माना कि ये कागज मेरे किसी काम के नही थे लेकिन अमानत के तौर पर आज भी मैने संभाल कर रखे है...क्या पता वो अपने कागजात लेने वापस आता लेकिन 19 सालो में वो दुबारा कभी नही आया....में अभी वो कागजात ले कर आती हूँ....

में--मन मे ही सोचे जा रहा था....प्रधान और दीनू के बारे मे....इन दोनो का नाम मैं पहले भी कही सुन चुका था....लेकिन कहाँ सुना कुछ याद नही आ रहा था....लेकिन अगर कामली के पास दीनू का ड्राइविंग लाइसेन्स पड़ा है तो इसका मतल्ब जल्दी ही इस पहली से परदा हट जाएगा.....

तभी कामली भी वापस आचुकी थी...उसने वो कागज मेरे हाथ में पकड़ा दिए....

उन कागजो में कुछ हिसाब किताब लिखा था कुछ रसीद थी सामानों की और एक ड्राइविंग लाइसेन्स

में उस लाइसेन्स को उलट पुलट कर देखने लगता हूँ....दिनेश वर्मा....सोन ऑफ गोपाल लाल वर्मा

अथवा लाने नियर क्रिस्टल अपार्टमेंट सूरत गुजरात.....

मेरे पास दीनू का 19 साल पहले का पता आचुका था...

में--कामली बाई क्या में इसे अपने पास रख सकता हूँ....

कामली--ज़रूर जनाब....लेकिन मेरे मन में एक सवाल उठ रहा है....आप क्यो गढ़े मुर्दे उखाड़ने की कोशिश कर रहे है....

गढ़े मुर्दे नही में बिछड़े हुए कुछ अपनो को मिलाने की कोशिश कर रहा हूँ....कम से कम शमा जान तो पाएगी कि उसके माँ बाप कौन है....

कामली--जनाब आप सही कह रहे है....लेकिन ये कोठा है और यहाँ जो एक बार आजाता है उसे दुनिया इतनी आसानी से नही अपनाती है...

में--आपको कोई ऐतराज तो नही है अगर में शमा के माँ बाप को ढूँढने की कोशिश करूँ....

कामली--जनाब ऐतराज कैसा शमा की पूरी कीमत दी है आपने....आप जो चाहे वो करे लेकिन इस कोठे के कुछ उसूल है इन्हे आपको पूरा करना बाकी है....अब आप शमा की नथ उतराई की रसम जल्दी से जल्दी पूरा कर दीजिए....

में--कामली बाई आपसे एक चीज़ माँगूँ....

कामली--हुकम कीजिए जनाब....

में--जब हम लोग यहाँ से जाए....तो वो खून से सना हुआ कपड़ा आप मुझे वापस लौटा दीजिएगा....क्योकि में तंत्र मंत्र पर काफ़ी यकीन रखता हूँ और में नही चाहता कोई भी उस कपड़े का ग़लत यूज़ करे.....

कामली--जनाब यहाँ के रिवाज के अनुसार कोठे के चारो तरफ घुमा लेने के बाद वो कपड़ा हमारे किसी काम का नही होता वैसे तो हम उसे जला देते है लेकिन अगर आप उसे अपने साथ लेजाना चाहे तो ले जा सकते है.
 
#103

कामली--जनाब यहाँ के रिवाज के अनुसार कोठे के चारो तरफ घुमा लेने के बाद वो कपड़ा हमारे किसी काम का नही होता वैसे तो हम उसे जला देते है लेकिन अगर आप उसे अपने साथ लेजाना चाहे तो ले जा सकते है.....

अब में कामली की तरफ 2 लाख रुपये और बढ़ा देता हूँ और बड़ी अदा के साथ वो उन 2_2हज़ार के नोटो को अपने ब्लाउस की गहराईयो में दफ़न कर देती है....

कामली--अब उठिए जनाब.....वो दोनो आपकी राह देख रही होंगी....

और इसीके साथ में अपना जाम एक ही साँस में ख़तम करके नीरा और शमा के रूम की तरफ बढ़ जाता हूँ....रूम का दरवाजा खोलते ही में पलट कर जल्दी से उसे लॉक कर देता हूँ....

शमा और नीरा वहाँ मोजूद डबल बेड पर बैठी हुई एक दूसरे से बाते कर रही थी....

कमरे मे काफ़ी रोशनी थी बेड से थोड़ी ही दूरी पर लकड़ी का एक बाथ टब गर्म पानी से लबालब भरा हुआ था एक कमोड भी लगा हुआ था वही कौने में ही....यानी कि उस रूम का बाथरूम भी बिना चार दीवारी के था.....सिर्फ़ एक खिड़की पर परदा लगा हुआ था बाकी परदा रखने की कोई जगह उस कमरे में नही थी....

बेड पर बैठी हुई शमा और नीरा दोनो ही खूबसूरती मे बेमिसाल लग रही थी ऐसा लग रहा था दोनो ही के जिस्मों को भगवान ने बड़ी फ़ुर्सत में बनाया हो...दोनो की आँखे नाक बिल्कुल एक जैसे लग रहे थे....जैसे दोनो जुड़वा बहने हो....

में अब उन दोनो के पास बैठ गया उस रूम को अच्छे से देखने के बाद...

शमा--भैया अब कैसे होगा ये सब....भाभी को भी आपने यहाँ बुला लिया....कैसे सबूत दे पाएँगे हम नथ उतराई का....

नीरा--तुम चिंता मत करो शमा....सब कुछ हो जाएगा....तुम्हारी जगह आज में लूँगी इस नथ उतराई की रस्म मे....

शमा--लेकिन भाभी कैसे दे पाएँगी आप वो सबूत....आप तो कुँवारी नही है फिर कैसे होगा सब कुछ....

नीरा--किसने कहा में कुवारि नही हूँ....हम लोगो ने आज ही शादी करी है....सिर्फ़ तुझे यहाँ से निकालने के लिए....और आज पहली बार हम दोनो के जिस्म मिलेंगे....आत्मा तो कब की मिल चुकी है....

शमा--लेकिन यहाँ आप मेरे सामने सब कुछ कैसे कर पाएँगे....

में--शमा मेरी बहन मुझे माफ़ कर देना लेकिन ये सब तुम्हारे सामने ही होगा....

तभी दरवाजे पर दस्तक होती है और हम तीनो एक दूसरे की शकल देखने लग जाते है में शमा को अपनी गोद में खीच लेता हूँ शमा को अपनी गोद में बिठाने के बाद में नीरा से दरवाजा खोलने की कह देता हूँ.....

नीरा दरवाजा खोलती है और कामली बाई के साथ नज़्म एक बड़ी सी ट्रे में चाँदी के ग्लास कुछ खाने का सामान और एक बढ़िया स्कॉच की बोतल ले कर अंदर घुस जाती है....कामली बाई शमा को मेरी गोद में इस तरह बैठे देख कर हम दोनो की बालाए लेने लग जाती है...,

कामली--मुझे माफ़ करे जनाब शमा अभी बच्ची है और इसे ज़्यादा दर्द ना हो इसीलिए में ये शराब आप लोगो के लिए ले आई....अब आपको कोई तंग नही करेगा अब जब आप ये दरवाजा खोलेंगे....तभी ये दरवाजा खुलेगा,...

और ये कह कर वो दोनो बाहर चली जाती है..
 
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