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Incest हुस्न का जादू और वासना के अंगारे

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लक्की उसके चेहरे को देखकर उसे पढ़ने की कोशिश कर रहा था,

वो जिस तरह से अपने होठों को जीभ से गीला कर रही थी उससे साफ पता चल रहा था कि वो उत्तेजित हो रही है...

इसलिए उसने पहल करना सही समझा ।

वो उसके करीब गया और प्रीति का हाथ पकड़ा लिया...

वो कांप सी गई जब उसके कठोर हाथो ने उसके नरम हाथों को दबोचा..

इतने दिनों बाद एक मर्दाना स्पर्श से उसके अंदर की तरंगें बज उठी.

वो समझ गया कि अब वो कोई विरोध नहीं करेगी, लक्की ने उसके साड़ी के आंचल को नीचे गिरा दिया

उसके ब्लाउज़ में फंसे हुए बूब्स अब उसकी आंखों के सामने थे

प्रीति का सीना तेजी से ऊपर नीचे हो रहा था

उसके सीने की क्लीवेज़ देखकर उससे सब्र नहीं हुआ और वो प्रीति पर झपट पड़ा

अब तक जो काम बहुत प्यार से, धीरे से हो रहा था उसने तेजी पकड़ ली

लक्की के दोनो हाथ उसकी नरम छतियो का मर्दन करने लगे….

प्रीति को मजा भी बहुत आ रहा था और दर्द भी बहुत हो रहा था

पर एक मर्द के हाथों का स्पर्श कई सालो बाद मिला था स्तनों को , इसलिए वो भी फूले नहीं समा रहे थे

इसलिए दर्द को भुलाकर उससे मिलने वाले मजे को महसूस करके प्रीति भी सिसकारियां मारने लगी

कुछ ही देर में लक्की के डॉलीभवी हाथो ने उसके जिस्म के एक-2 कपड़े को निकाल फेंका और उसे नंगा कर दिया...

अब प्रीति पूरी नंगी होकर लेटी थी उसके सामने ट्रैन बर्थ पर

वो बिन पानी की मछली जैसी मचल रही थी

और लक्की को शायद अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था कि पहली बार में ही उसके जाल में ऐसी रस भरी मछली आ फंसी है

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