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Jaal -जाल compleet

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जाल पार्ट--90

गतान्क से आगे......

तभी दोनो को किसी कार के आने की आवाज़ सुनाई दी.शाह ने फ़ौरन लंड बाहर खींचा & रंभा की सारी नीचे कर उसे कार मे बिठाया,फिर वही ज़मीन पे गिरे उसके बॅग & फटे ब्लाउस को उठाया & उसे थमाके खुद कार मे बैठ गया.उसने कार स्टार्ट की तभी 1 और कार पार्किंग मे आई.रंभा ने देखा & उसके मुँह से हैरत भरी आवाज़ निकलते-2 बची..सामने वाली कार देवेन की थी.रंभा ने बॅग से अपना मोबाइल निकाला & पहले शाह को कनखियो से देखा..वो कार निकालने मे मशगूल था.

काली कार वाहा आई & रुक गयी.देवेन 1 खाली जगह मे कार लगा उसके ड्राइवर के उतरने का इंतेज़ार कर रहा था.काली कार का दरवाज़ा अंदर से खुला & वो बाहर की तरफ धकेला ही जा रहा था कि कुच्छ देख वो रुक गया.शाह की कार बाहर निकल रही थी & वो काली कार का ड्राइवर शायद उसे देख रुक गया था.देवेन भी शाह की कार को देख रहा था मगर उसे पता नही था कि अंदर कौन है.

तभी वो चौंक गया,काली कार के ड्राइवर ने कार स्टार्ट कर उसे तेज़ी से एग्ज़िट की तरफ बढ़ा दिया था.ठीक उसी वक़्त लिफ्ट आई & उसमे से 2 लोग उतर अपनी कार की तरफ बढ़े.देवेन ने अपनी कार काली कार के पीछे लगाई पर तभी वो दो लोग अपनी कार मे बैठ उसे रिवर्स कर उसी की कार के सामने ले आए थे.देवेन ने झल्ला के हॉर्न बजाया पर रास्ता सॉफ होने 2 मिनिट लगे & जब वो बाहर आया तो काली कार नदारद थी.वो आधे घंटे आस-पास के इलाक़े को छानता रहा मगर वो कार नही मिली.

रंभा मोबाइल पे मेसेज टाइप कर रही थी जब महदेव शाह ने उस से मोबाइल छीन पीछे की सीट पे फेंका & दाए हाथ से स्टियरिंग संभाले बाए से उसे अपनी ओर खींचा & चूमते हुए कार चलाने लगा.रंभा समझ गयी की अब मेसेज करना ख़तरे से खाली नही & फिर पार्किंग मे हुई चुदाई के बाद वो बहुत मस्त भी हो गयी थी.उसने बाया हाथ शाह के लंड पे रखा जोकि अभी भी उसकी पॅंट से बाहर था & उसके बाए गालो को चूमने लगी.

कार 1 सिग्नल पे रुकी तो शाह ने उसके सीने पे पड़ा आँचल हटाया & उसकी चूचियो चूसने लगा.रंभा सीट पे आडी उसकी ज़ुबान से मस्त होने लगी..कितना मस्ताना एहसास था ये!..वो शहर की भीड़ के बीचोबीच थी..उसकी खिड़की के बाहर 1 बाइक पे लड़का बैठा था..हर तरफ लोग थे पर किसी को ये खबर नही थी कि वो कार मे नगी थी & उसका आशिक़ उसकी चूचियाँ पी रहा था..उफफफ्फ़..रंभा ने आँखे बंद कर शाह के बॉल नोचे!

कुच्छ देर बाद बत्ती हरी हुई तो शाह ने महबूबा की चूचियाँ छ्चोड़ी & कार अपने गहर की तरफ बढ़ा दी.गहर पहुँचते ही गेट के बाहर खड़े दरबान ने सलाम ठोनकतेहुए गेट खोला & कार अंदर दाखिल हो गयी.दरबान गेट के बाहर था & आज भी शाह का घर बिल्कुल सुनसान था.

रंभा के कार से उतरते ही शाह ने उसे बाहो मे भर लिया & वही खुले मे ही उसे चूमने लगा.उसे खुद पे हैरत हो रही थी..इस लड़की मे ऐसी क्या कशिश थी..क्या जादू था जो वो इस तरह दीवानो सी हरकतें कर रहा था!..रंभा ने उसकी शर्ट पकड़ ज़ोर से खींची तो उसके बटन्स टूट के बिखर गये.रंभा ने कमीज़ को उसके जिस्म से अलग किया & उसके निपल्स को चूसने लगी.

शाह उसकी पीठ पे हाथ फिरा रहा था.रंभा उसके सीने को चूमती नीचे झुकी & उसकी पॅंट भी उतार दी.अब शाह पूरा नंगा था & वो सिर्फ़ सारी मे.वो शाह के लंड को चूसने मे जुट गयी तो शाह गाड़ी की बॉनेट से टिक के खड़ा हो गया & उसके बालो मे उंगलिया फिराने लगा.रंभा शाह के आंडो को चूस रही थी & अपनी उंगली से उसके लंड के छेद को हौले-2 छेड़ रही थी.शाह के लंड मे उसके छुने से सनसनी दौड़ गयी.उसने रंभा को पकड़ के उपर उठाया तो रंभा ने उसके गले मे बाहे डाल दी & उसे चूमने लगी.

शाह उसकी मांसल कमर & गुदाज़ गंद को सहलाते हुए उसकी किस का जवाब दे रहा था.शाह के गर्म हाथो की हरारत रंभा को फिर से मस्ती मे बावली कर रहे थे.रंभा चूमते हुए आहे भरने लगी थी & आगे होके अपनी चूत शाह के लंड पे दबा रही थी.अब उसे बस वो लंड अपनी चूत मे चाहिए था.शाह ने उसकी गंद की कसी फांको को पकड़ा & बाहर की ओर फैलाया तो रंभा ने आह भरते हुए किस तोड़ी & सर पीछे झटका.

उसके ऐसा करने से रंभा की चूचियाँ शाह के सामने उभर गयी & उसने अपना मुँह उनसे लगा दिया.रंभा ने भी चूचियाँ आगे उचका दी ताकि उसका आशिक़ आराम से उन्हे चूस सके.रंभा के जिस्म मे बिजली दौड़ने लगी.शाह उसके निपल्स को दन्तो से काटने के बाद पूरी की पूरी चूची को मुँह मे भर ज़ोर से चूस्ता तो वो सिहर उठती.शाह का दिल उसके मस्ताने उभारो को दबाने का किया तो उसने उसकी कमर पकड़े हुसे उसे घुमा के बॉनेट से लगाया & फिर उसकी कमर पकड़ उसे उसपे बिठा दिया.

रंभा ने अपनी टाँगे खोल उसे आगे खींचा तो उसने उसकी चूचिया पकड़ ली & मसलते हुए चूसने लगा.रंभा पीछे झुकती हुई आहे भर रही & अपनी ज़ूलफे झटक रही थी.उसके हाथ अभी तक शाह के सर से लगे अपने सीने पे उसे दबा रहे थे मगर अब उसकी चूत की कसक बहुत ज़्यादा बढ़ गयी थी.रंभा के हाथ शाह के सरक के नीचे उसकी पीठ से होते हुए उसकी गंद पे आए & उसे दबाया.

शाह उसका इशारा समझ गया & उसके होंठ रंभा की चूचियो से फिसलते हुए उसके पेट के रास्ते उसकी चूत तक पहुँचे.थोड़ी देर उसने बॉनेट पे बैठी रंभा की अन्द्रुनि जाँघो को चूमा & फिर उसकी चूत मे जीभ फिराने लगा.रंभा का जिस्म झटके खाने लगा & वो मस्ती मे आहें भरते हुए अपनी टाँगो से शाह के जिस्म को & अपने हाथो से उसके सर को अपनी चूत पे दबाने लगी.शाह काफ़ी देर उसकी चूत चाटता रहा & जैसे ही उसने महसूस किया कि वो झड़ने की कगार पे है वो खड़ा हो गया & उसकी जंघे थाम अपना लंड उसकी चूत मे धकेला.

रंभा ने उसके कंधे थाम लिया & अपनी जंघे पूरी फैला उसके लंबे & बेहद मोटे लंड को चूत मे घुसने मे मदद की.वो उस से चिपेट गयी & उसके बाए कंधे पे ठुड्डी टीका उसकी पीठ & गंद से लेके उसके बालो तक बेसब्र हाथ चलाती उस से चुदने लगी.शाह के धक्के सीधे उसकी कोख पे पद रहे थे & उसके जिस्म मे मज़े की धाराएँ बहने लगी थी.चाँद धक्को के बाद उसके नाख़ून शाह के जिस्म को कहरोंछने लगे & वो झाड़ गयी.

झाड़ते ही वो निढाल हो बॉनेट पे लेट गयी.शाह ने बाया हाथ उसके पेट पे रखा & दाए से उसकी चूचिया मसलता उसे चोदने लगा.बंगल के खुले अहाते मे चिड़ियो की चाहचाहाहट के साथ दोनो की आहें,दोनो के जिस्मो के टकराने की आवाज़ & चुदाई से बॉनेट मे होती आवाज़ गूँज रही थी.

रंभा ने अपने सीने को मसल्ते आशिक़ के हाथो के उपर अपने हाथ जमा दिए थे & अपनी टाँगे उसकी कमर पे कसे उसकी चुदाई से पागल हुए जा रही थी.शाह भी बस अब उसकी चूत मे झड़ना चाहता था.वो आगे झुका & रंभा के कंधो के नीचे से हाथ लगाते हुए उसे अपनी बाहो मे भर लिया & उसके चेहरे को चूमते हुए धक्के लगाने लगा.रंभा भी उसके जिस्म को बाहो मे भर उसे खरोंछती अपनी कमर उचकाती उसका भरपूर साथ दे रही थी.

"आन्न्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह...!"

"ओह..!",रंभा शाह की चुदाई से बहाल हो कराही & झाड़ गयी.झाड़ते ही उसकी चूत ने शाह के लंड को दबोचा & वो भी आपे से बाहर हो वीर्य उगलने लगा.दोनो ने मंज़िल पा ली थी & अब बहुत सुकून था उनके चेहरो पे पर दोनो को पता था कि ये तो बस पहला पड़ाव है.अभी दोनो को शाम तक इस सफ़र को करना था & उसमे ऐसी काई मंज़िले तय करनी थी.

वो काली कार शाह के बंगल के बाहर आई & रुक गयी & उसका शीशा कुच्छ इंच नीचे हुआ,अभी भी उसके ड्राइवर की शक्ल च्छूपी थी.जब दोनो प्रेमियो ने साथ-2 मंज़िल पा के अपनी मस्तानी आहो से उसका इज़हार किया तो वो आवाज़ बाहर बैठे दरबान के कानो & उस कार के ड्राइवर तक पहुँची.दरबान अपने मालिक की हर्कतो से अच्छी तरह वाकिफ़ था & वो बैठा-2 मुस्कुराया & उस कार के ड्राइवर ने आवाज़ें सुनते ही शीशा बंद किया & कार वापस ले ली.

उस कार से बेख़बर शाह ने अपनी माशुका को अपनी बाहो मे उठाया & उसके हुस्न & जवानी का और लुफ्त उठाने के मक़सद से बंगल के अंदर चला गया.

“क्या हुआ?”,देवेन के वापस लौटते ही विजयंत मेहरा ने उस से सवाल किया.देवेन ने कंधे झटके जैसे उसे भी कुच्छ पता नही.विजयंत के माथे पे उसका जवाब सुन शिकन पड़ी तो उसने बताया कि कैसे उसने काली कार को खो दिया.

“हूँ..अच्छा,देवेन क्या ऐसा हो सकता है कि उस काली कार वाले को तुम्हारे पीछा करने का पता चल गया हो & उसने तुम्हे चकमा दिया हो?”

“लगता तो नही पर पक्का नही कह सकता.”

“तब तो हमारे पास तुम्हारी इश्तेहार मे दी तारीख तक इंतेज़ार करने के अलावा & इस सामने वाले घर पे नज़र रखने के अलावा & कोई चारा नही.”

“हाँ.”,देवेन ने ताकि आवाज़ मे जवाब दिया.उसके दिमाग़ मे बार-2 पिच्छले घंटे की बाते घूम रही थी.कभी उसे खुद पे गुस्सा आता कि क्यू उसने उस कार को नज़रो से ओझल होने दिया तो कभी वो इस सोच मे डूब जाता कि क्या सचमुच दयाल ही था उस कार मे.कुच्छ देर बाद उसने इस फ़िज़ूल की जद्दोजहद को अपने ज़हन से निकाला & रंभा का नंबर मिलाने लगा.घंटी बजती रही पर उसने फोन नही उठाया.देवेन ने 2-3 बार & उसका नंबर ट्राइ किया & फिर छ्चोड़ दिया.उसने सोचा कि ज़रूर वो किसी काम मे फँसी होगी मगर किस काम मे ये उसे पता नही था.

रंभा उस वक़्त महादेव शाह के सीने पे हाथ जमाए उसके लंड को अपनी चूत मे लिए कूद रही थी.उसका मोबाइल वही कार की पिच्छली सीट पे बज रहा था पर उसे उस वक़्त फोन क्या खुद का भी होश नही था.शाह के सख़्त हाथ उसकी कोमल चूचियो को मसल रहे थे & उसकी मस्ती का कोई ठिकाना नही था.शाह 2 बार झाड़ उसके जिस्म मे झाड़ चुका था & इसी वजह से अब वो झड़ने मे ज़्यादा वक़्त ले रहा था.रंभा ने देखा की वो थोडा थका भी लग रहा था.अपनी उम्र के हिसाब से तो इस वक़्त उसे गहरी नींद मे होना चाहिए था मगर वो किसी जवान मर्द की तरह 2 घंटे मे तीसरी बार उसे चोद रहा था.ये तो शायद कयि जवानो के बस की बात भी नही थी..पर फिर भी मुझे इसका ख़याल रखना होगा..रंभा ने सोचा & उसी वक़्त उसकी चूत ने अपनी मस्तानी हरकते शुरू कर दी & नतीजतन उसके साथ-2 शाह भी झाड़ गया.

“ओह्ह..थक गयी मैं तो..”,रंभा हाँफती उसके सीने पे पड़ी हुई थी,”..पागल कर देते हैं आप!“,शाह ने उसे हंसते हुए अपने उपर से उतारा तो रंभा उसकी बाहो के घेरे मे उसके बाई तरफ लेट गयी.

“पागल तो तुमने मुझे कर दिया है.”,शाह उसके जिस्म को प्यार से सहला रहा था,”अच्छा,ये बताओ कि समीर की अपायंट्मेंट्स के बारे मे पता किया तुमने?”

“आप मुझे इसके अलावा..”,रंभा ने उसके सिकुदे लंड पे चपत लगाई,”..किसी और बात के बारे मे सोचने का वक़्त दें तब तो पता लगाऊं!”,शाह उसके जवाब पे हंस पड़ा & फिर उबासी ली.रंभा ने इसीलिए झूठ बोला क्यूकी पहले उसे सब कुच्छ देवेन को बताना था & उसके साथ मिलके सारी प्लॅनिंग करनी थी.

“थोडा आराम कीजिए अब.”,रंभा ने उसका सीना सहलाया.

“हूँ.”,शाह को भी नींद आ रही थी,”मैं इसलिए पुच्छ रहा था क्यूकी मुझे पता चला है कि बस 4 दिन बाद ही मानपुर प्रॉजेक्ट का टेंडर खुलने वाला है.”

“ ओह.आप बेफ़िक्र रहिए,मैं जल्द ही ये काम पूरा करूँगी.”

“ओके,डार्लिंग.”,रंभा ने उसके सीने पे सर रख दिया & उसका पेट सहलाने लगी.कुच्छ ही देर मे शाह सो गया.कुच्छ देर तो रंभा वैसे ही पड़ी रही पर जब उसे यकीन हो गया कि शाह गहरी नींद मे चला गया है तब वो धीरे से उसकी बाँह केग हियर मे से निकालते हुए उठी & शाह की अलमारी खोल उसका 1 ड्रेसिंग गाउन निकाल के पहना.

“हेलो,देवेन.सॉरी पहले आपका फोन नही उठाया.”,वो बाहर आके कार से अपना मोबाइल निकाल उसपे बात कर रही थी.

“तुम हो कहा?”

“शाह के घर पे.”,रंभा को ना जाने क्यू ये बात बताते हुए थोड़ी ग्लानि सी हुई.

“ओह.”,देवेन की आवाज़ मे भी कुच्छ ऐसा था जोकि रंभा को आहत कर गया,”..तो वो कहा है?”

“सो रहा है.”

“अच्छा.”,देवेन की आवाज़ कुच्छ ज़्यादा भारी थी मगर उसने फ़ौरन खुद को संभाला,”..अच्छा ये सुनो,कोई आया था इश्तेहार मे दिए पते पे?”

“क्या?!कौन?!”,रंभा की धड़कने भी तेज़ हो गयी थी.देवेन ने उसे पूरी बात बताई,”..अच्छा,देवेन.ये शाह समीर का आक्सिडेंट करवाने को उतावला हो रहा है.उपर से मानपुर का टेंडर भी बस 4 दिनो मे खुलने वाला है.”

“समीर की अपायंट्मेंट्स मिली तुम्हे?”

“हां.”

“तो ठीक है.तुम इस शाह से ये निकलवाने की कोशिश करो की आख़िर वो समीर के साथ ये हादसा करवाएगा कैसे?..किस जगह पे?..किस से?..सब कुच्छ मगर होशियारी से.ये मुझे बहुत शातिर इंसान लगता है.ऐसे इंसान को ज़रा भी शक़ हुआ तो वो खुद को बचाने के लिए कुच्छ भी कर सकता है.”

“आप चिंता ना करें,देवेन.मैं सब संभाल लूँगी.”

“मुझे पूरा भरोसा है रंभा पर तुम्हे यू अकेला छ्चोड़ने मे फ़िक्र तो होती ही है ना.”

“बस ये सब निपट जाए,देवेन फिर सुकून ही सुकून होगा.”

“बस ऐसा जल्द से जल्द हो.”

“हाँ.अच्छा अब फोन रखती हू.शाम को आऊँगी.”

“ठीक है..अरे!रूको,अभी फोन मत काटो.”,देवेन के ज़हन मे तभी 1 ख़याल आया.

“हां,क्या हुआ?”

“रंभा,अब तुम यहा अपनी कार से नही आना & ना ही सामने के दरवाज़े से.जब भी आना पहले मुझे फोन करना & आते वक़्त अपनी शक्ल च्छुपाए रखना.देखो,आज जो आया वो आगे भी आ सकता है.तुम्हारी शक्ल लोग पहचानते हैं.अब मैं नही चाहता कि अगर वो काली कार फिर आती है तो उसका ड्राइवर कही तुम्हे देख कोई अटकल ना लगाए.”

“ठीक है,देवेन.मैं ख़याल रखूँगी.अब रखू फोन?”

हां.बाइ!”

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क्रमशः.......

JAAL paart--90

gataank se aage......

tabhi dono ko kisi car ke aane ki aavaz sunai di.shah ne fauran lund bahar khincha & rambha ki sari neeche kar use car me bithaya,fir vahi zamin pe gire uske bag & phate blouse ko uthaya & use thamake khud car me baith gaya.usne car start ki tabhi 1 & car parking me aayi.rambha ne dekha & uske munh se hairat bhari aavaz nikalte-2 bachi..samne vali car deven ki thi.rambha ne bag se apna mobile nikala & pehle shah ko kankhiyo se dekha..vo car nikalne me mashgul tha.

kali car vaha aayi & ruk gayi.deven 1 khali jagah me car laga uske driver ke utarne ka intezar kar raha tha.kali car ka darwaza andar se khula & vo bahar ki taraf dhakela hi ja raha tha ki kuchh dekh vo ruk gaya.shah ki car bahar nikal rahi thi & vo kali car ka driver shayad use dekh ruk gaya tha.deven bhi shah ki car ko dekh raha tha magar use pata nahi tha ki andar kaun hai.

tabhi vo chaunk gaya,kali car ke driver ne car start kar use tezi se exit ki taraf badha diya tha.thik usi waqt lift aayi & usme se 2 log utar apni car ki taraf badhe.deven ne apni car kali car ke peechhe lagayi par tabhi vo do log apni car me baith use reverse kar usi ki car ke samne le aaye the.deven ne jhalla ke horn bajaya par rasta saaf hone 2 minute lage & jab vo bahar aaya to kali car nadarad thi.vo aadhe ghante aas-paas ke ilake ko chhanta raha magar vo car nahi mili.

Rambha mobile pe message type kar rahi thi jab Mahdev Shah ne us se mobile chhen peechhe ki seat pe phenka & daye hath se steering sambhale baye se use apni or khincha & chumte hue car chalane laga.rambha samajh gayi ki ab message karna khatre se kahli nahi & fir parking me hui chudai ke baad vo bahut mast bhi ho gayi thi.usne baya hath shah ke lund pe rakha joki abhi bhi uski pant se bahar tha & uske baye gaalo ko humne lagi.

car 1 signal pe ruki to shah ne uske seene pe pada aanchal hataya & uski chhatiyan chusne laga.rambha seat pe adi uski zuban se mast hone lagi..kitna mastana ehsas tha ye!..vo shehar ki bheed ke beechobeech thi..uski khidki ke bahar 1 bike pe ladka baitha tha..har taraf log the par kisi ko ye khabar nahi thi ki vo car me nagi thi & uska aashiq uski chhatiya pi raha tha..uffff..rambha ne aankhe band kar shah ke baal noche!

kuchh der baad batti hari hui to shah ne mehbooba ki choochiyan chhodi & carapne gahr ki taraf badha di.gahr pahunchte hi gate ke bahar kahde darban salamthonkte hue gate khola & car andar dakhil ho gayi.darban gate ke bahar tha & aaj bhi shah ka ghar bilkul sunsan tha.

rambha ke car se utarte hi shah ne use baaho me bhar liya & vahi khule me hi use chumne laga.use khud pe hairat ho rahi thi..is ladki me aisi kya kashish thi..kya jadu tha jo vo is tarah deewano si harkaten kar raha tha!..rambha ne uski shirt pakad zor se khinchi to uske buttons tut ke bikhar gaye.rambha ne kamiz ko uske jism se alag kiya & uske nipples ko chusne lagi.

shah uski pith pe hath fira raha tha.rambha uske seene ko chumti neeche jhuki & uski pant bhi utra di.ab shah pura nanga tha & vo sirf sari me.vo shah ke lund ko chusne me jut gayi to shah gadi ki bonnet se tik ke khada ho gaya & uske balo me ungliya firane laga.rambha shah ke ando ko chus rahi thi & apni ungli se uske lund ke chhed ko haule-2 chhed rahi thi.shah ke lund me uske chhune se sansani daud gayi.usne rambha ko pakad ke upar uthaya to rambha ne uske gale me baahe daal di & use chumne lagi.

shah uski mansal kamar & gudaz gand ko sehlate hue uski kiss ka jawab de raha tha.shah ke garm hatho ki hararat rambha ko fir se masti me bawli kar rahe the.rambha chumte hue aahe bharne lagi thi & aage hoke apni chut shah ke lund pe daba rahi thi.ab use bas vo lund apni chut me chahiye tha.shah ne uski gand ki kasi fanko ko pakda & bahar ki or failaya to rambha ne aah bharte hue kiss todi & sar peechhe jhatka.

uske aisa karne se rambha ki chhatiya shah ke samne ubhar gayi & usne apna munh unse laga diya.rambha ne bhi chhatiya aage uchka di taki uska aashiq aaram se unhe chus sake.rambha ke jism me bijli daudne lagi.shah uske nipples ko danto se katne ke baad puri ki puri choochi ko munh me bhar zor se chusta to vo sihar uthati.shah ka dil uske mastane ubharo ko dabane ka kiya to usne uski kamar pakde huse use ghuma ke bonnet se lagaya & fir uski kamar pakd use uspe bitha diya.

rambha ne apni tange khol use aaeg khincha to usne uski choochiya pakad li & maslate hue chusne laga.rambha peechhe jhukti hui aahe bhar rahi & apni zulfe jhatak rahi thi.uske hath abhi tak shah ke sar se lage apne seene pe use daba rahe the magar ab uski chut ki kasak bahut zyada badh gayi thi.rambha ke hath shah ke sarak ke neeche uski pith se hote hue uski gand pe aaye & use dabaya.

shah uska ishara samajh gaya & uske honth rambha ki chhatiyo se fisalte hue uske pet ke raste uski chut tak pahunche.thodi der usne bonnet pe baithi rambha ki andruni jangho ko chuma & fir uski chut me jibh firane laga.rambha ka jsim jhatke khane laga & vo masti me aahen bharte hue apni tango se shah ke jism ko & apne hatho se uske sar ko apni chut pe dabane lagi.shah kafi der uski chut chaatata raha & jaise hi usne mehsus kiya ki vo jhadne ki kagar pe hai vo khada ho gaya & uski janghe tham apna lund uski chut me dhakela.

rambha ne uske kandhe tham liya & apni janghe puri faila uske lambe & behad mote lund ko chut me ghusne me madad ki.vo us se chipat gayi & uske baye kandhe pe thuddi tika uski pith & gand se leke suke baalo tak besabr hath chalati us se chudne lagi.shah ke dhakke seedhe uski kokh pe pad rahe the & uske jism me maze ki dharayen behne lagi thi.chand dhakko ke baad uske nakhun shah ke jism ko kahronchne lage & vo jhad gayi.

jhadte hi vo nidhal ho bonnet pe let gayi.shah ne baya hath uske pet pe rakha & daye se uski choochiya masalta use chodne laga.bungle ke khule ahate me chidiyo ki chahchahahat ke sath dono ki aahen,dono ke jismo ke takrane ki aavaaz & chudai se bonnet me hoti aavaz gunj rahi thi.

rambha ne apne seene ko masalte aashiq ke hatho ke upar apne hath jama diye the & apni tange uski kamar pe kase uski chudai se pagal hue ja rahi thi.shah bhi bas ab uski chut me jhadna chahta tha.vo aage jhuka & rambha ke kandho ke neeche se hath lagate hue use apni baaho me bhar liya & uske chehre ko chumte hue dhakke lagane laga.rambha bhi uske jism ko baaho me bhar use kharonchti apni kamar uchkati uska bharpur sath de rahi thi.

"aanngghhhhhhh...!"

"ohhhhhhhhhh..!",rambha shah ki chudai se behaal ho karahi & jhad gayi.jhadte hi uski chut ne shah ke lund ko dabocha & vo bhi aape se bahar ho virya ugalne laga.dono ne manzil pa li thi & ab bahut sukun tha unke chehro pe par dono ko pata tha ki ye to bas pehla padav hai.abhi dono ko sham tak is safar ko karna tha & usme aisi kayi manzile tay karni thi.

vo kali car shah ke bungle ke bahar aayi & ruk gayi & uska shisha kuchh inch neecvhe hua,abhi bhi uske driver ki shakl chhupi thi.jab dono premiyo ne sath-2 manzil pa ke apni mastani aaho se uska izhar kiya to vo aavaz bahar baithe darban ke kano & us car ke driver tak pahunchi.darban apne malik ki harkato se achhi tarah vakif tha & vo baitha-2 muskuraya & us car ke driver ne aavazen sunte hi shisha band kiya & car vapas le li.

us car se bekhabar shah ne apni mashuka ko apni baaho me uthaya & uske husn & jawani ka & kutf uthane ke maqsad se bungle ke andar chala gaya.

“Kya hua?”,Deven ke vapas lautate hi Vijayant Mehra ne us se sawal kiya.deven ne kandhe jhatke jaise use bhi kuchh pata nahi.vijayant ke mathe pe uska jawab sun shikan padi to usne batay ki kaise usne kali car ko kho diya.

“hun..achha,deven kya aisa ho sakta hai ki us kali car vale ko tumhare peechha karne ka pata chal gaya ho & usne tumhe chakma diya ho?”

“lagta to nahi par pakka nahi keh sakta.”

“tab to humare paas tumhari ishtehar me di tarikh tak intezar karne ke alawa & is samne vale ghar pe nazar rakhne ke alawa & koi chara nahi.”

“haan.”,deven ne thaki aavaz me jawab diya.uske dimagh me baar-2 pichhle ghante ki baate ghum rahi thi.kabhi use khud pe gussa aata ki kyu usne us car ko nazro se ojhal hone diya to kabhi vo is soch me doob jata ki kya sachmuch Dayal hi tha us car me.kuchh der baad usne is fizul ki jaddojahad ko apne zehan se nikala & Rambha ka number milane laga.ghanti bajti rahi par usne fone nahi uthaya.deven ne 2-3 baar & uska number try kiya & fir chhod diya.usne socha ki zarur vo kisi kaam me phansi hogi magar kis kaam me ye use pata nahi tha.

Rambha us waqt Mahadev Shah ke seene pe hath jamaye uske lund ko apni chut me liye kud rahi thi.uska mobile vahi car ki pichhli seat pe baj raha tha par use us waqt phone kya khud ka bhi hosh nahi tha.shah ke sakht hath uski komal chhatiyo ko masal rahe the & uski masti ka koi thikana nahi tha.shah 2 bar jhad uske jism me jhad chuka tha & isi wajah se ab vo jhadne me zyada waqt le raha tha.rambha ne dekha ki vo thoda thaka bhi lag raha tha.apni umra ke hisab se to is waqt use gehri nind me hona chahiye tha magar vo kisi jawan mard ki tarah 2 ghante me teesri baar use chod raha tha.ye to shayad kayi jawano ke bas ki baat bhi nahi thi..par fir bhi mujhe iska khayal rakhna hoga..rambha ne socha & usi waqt uski chut ne apni mastani harkate shuru kar di & nateejatan uske sath-2 shah bhi jhad gaya.

“ohh..thak gayi main to..”,rambha hanfti uske seene pe padi hui thi,”..pagal kar dete hain aap!“,shah ne use hanste hue apne upar se utara to rambha uski baaho ke ghere me uske bayi taraf let gayi.

“pagal to tumne mujhe kar diya hai.”,shah uske jism ko pyar se sehla raha tha,”achha,ye batao ki Sameer ki appointments ke bare me pata kiya tumne?”

“aap mujhe iske alawa..”,rambha ne uske sikude lund pe chapat lagayi,”..kisi & baat ke bare me sochne ka waqt den tab to pata lagaoon!”,shah uske jawab pe hans pada & fir ubasi li.rambha ne isiliye jhuth bola kyuki pehle use sab kuchh Deven ko batana tha & uske sath milke sari planning karni thi.

“thoda aaram kijiye ab.”,rambha ne uska seena sehlaya.

“hun.”,shah ko bhi nind aa rahi thi,”main isliye puchh raha tha kyuki mujhe pata chala hai ki bas 4 din baad hi Manpur project ka tender khulne wala hai.”

“ oh.aap befikr rahiye,main jald hi ye kaam pura karungi.”

“ok,darling.”,rambha ne uske seene pe sar rakh diya & uska pet sehlane lagi.kuchh hi der me shah so gaya.kuchh der to rambha vaise hi padi rahi par jab use yakin ho gaya ki shah gehri nind me chala gaya hai tab vo dhire se uski banh keg here me se nikalte hue uthi & shah ki almari khol uska 1 dressing gown nikal ke pehna.

“hello,deven.sorry pehle aapka fone nahi uthaya.”,vo bahar aake car se apna mobile nikal uspe baat kar rahi thi.

“tum ho kaha?”

“shah ke ghar pe.”,rambha ko na jane kyu ye baat batate hue thodi glani si hui.

“oh.”,deven ki aavaz me bhio kuchh aisa tha joki rambha ko aahat kar gaya,”..to vo kaha hai?”

“so raha hai.”

“achha.”,deven ki aavaz kuchh zyada bhari thi magar usne fauran khud ko sambhala,”..achha ye suno,koi aaya tha ishtehar me diye pate pe?”

“kya?!kaun?!”,rambha ki dhadkane bhi tez ho gayi thi.deven ne use puri baat batayi,”..achha,deven.ye shah sameer ka accident karwane ko utawla ho raha hai.upar se manpur ka tender bhi bas 4 dino me khulne vala hai.”

“sameer ki appointments mili tumhe?”

“haan.”

“to thik hai.tum is shah se ye nikalwane ki koshish karo ki aakhir vo sameer ke sath ye hadsa karwayega kaise?..kis jagah pe?..kis se?..sab kuchh magar hoshiyari se.ye mujhe bahut shatir insan lagta hai.aiseinsan ko zara bhi shaq hua to vo khud ko bachane ke liye kuchh bhi kar sakta hai.”

“aap chinta na karen,deven.main sab sambhal lungi.”

“mujhe pura bharosa hai rambha par tumhe yu akela chhodne me fikr to hoti hi hai na.”

“bas ye sab nipat jaye,deven fir sukun hi sukun hoga.”

“bas aisa jald se jald ho.”

“Haan.achha ab fone rakhti hu.sham ko aaoongi.”

“thik hai..are!ruko,abhi phone mat kato.”,deven ke zehan me tabhi 1 khayal aaya.

“haan,kya hua?”

“rambha,ab tum yaha apni car se nahi aana & na hi samne ke darwaze se.jab bhi aana pehle mujhe phone karna & aate waqt apni shakl chhupaye rakhna.dekho,aaj jo aaya vo aage bhi aa sakta hai.tumhari shakl log pehchante hain.ab main nahi chahta ki agar vo kali car fir aati hai to uska driver kahi tumhe dekh koi atkal na lagaye.”

“thik hai,deven.main khayal rakhungi.ab rakhu fone?”

Haan.bye!”

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--91

गतान्क से आगे......

होटेल वाय्लेट की 25वी मंज़िल के अपने बाप के सूयीट के बिस्तर पे समीर कामया को अपनी बाहो मे कसे लेटा चूम रहा था.कहने की ज़रूरत नही के दोनो नंगे थे & उनके हाथ 1 दूसरे के नाज़ुक अंगो से खिलवाड़ कर रहे थे.समीर दाए हाथ की उंगली से उसकी चूत कुरेदता हुआ उसके उपर झुका बाए से उसकी दाई चूची दबाता उसके चेहरे को चूम रहा था & दोनो जिस्मो के बीच अपना बाया हाथ घुसा कामया उसके लंड को हिला रही थी.

"समीर,रंभा तलाक़ देने मे कोई आना कानी तो नही करेगी ना?",समीर ने उसे अभी-2 मानपुर वाले टेंडर के 4 दिनो के बाद खुलने की बात बताई थी & साथ ही ये भी बाते था कि उसके बाद वो अपने वकील के ज़रिए रंभा को तलाक़ देने की करवाई शुरू करवा देगा.

"नही,कामया.",समीर ने अपना हाथ हटा के उसकी जगह अपना मुँह उसकी छाती से लगा दिया.

"उउम्म्म्म....तो फिर हमारे इंतेज़ार के दिन ख़त्म हुए?"

"हां,मेरी जान."

"ओह,समीर!",कामया ने हाथ उसके लंड से हटा उसे बाहो मे भरा & उसे पलट के उसके उपर आ गयी.उसका हाथ दोबारा दोनो जिस्मो के बीच गया & समीर के सख़्त लंड को पकड़ चूत के मुँह पे रखा,"..आख़िरकार हम 1 हो ही जाएँगे!..कितनी जद्ड़ोजेहाद की हमने इस सब के लिए!"

"हां,मेरी जान.अब तुम मेरी रानी बनोगी & हम दोनो मिलके इस सारी मिल्कियत पे राज करेंगे.",समीर ने उसकी कमर जाकड़ नीचे से अपनी कमर उचकाई & लंड उसकी चूत मे घुसा उसकी चुदाई शुरू कर दी.

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रंभा के लिए महादेव शाह और उसका रिश्ता बस जिस्मानी था.उसे उसके साथ सोने मे जो मज़ा आता था वो अनूठा था पर शाह उसके लिए शक़ के घेरे मे खड़ा वो शख्स था जोकि शायद उसके ससुर विजयंत मेहरा की मौजूदा हालत का ज़िम्मेदार था & अब उसके पति समीर की ज़िंदगी लेने की भी सोच रहा था.पर उसने महसूस किया था कि शाह के जज़्बात अब केवल जिस्मानी नही रह गये थे बल्कि उसके दिल मे भी रंभा के लिए जगह बन गयी थी.

रंभा ने सोच लिया था कि अब वो इस पहलू को मद्देनज़र रख के आगे की चाले चलेगी & इसी सोच को ध्यान मे रख वो देवेन से बात करने के बाद वो अंदर बंगल की रसोई मे आ गयी थी & अपने सोते हुए आशिक़ के लिए खाना बनाने मे लग गयी थी.खाना लगभग तैय्यार ही था जब उसका मोबाइल बजा.उसने देखा उसकी सहेली सोनम का फोन था.

"हाई!सोनम,बोल कैसी है?",रंभा ने मुस्कुराते हुए फोन कान से लगाया & दूसरे हाथ से खाने को प्लेट मे निकालने लगी.समीर अपनी माशुका से मिलने लंच के वक़्त गया था & ये खबर किसी तरह सोनम को पता चल गयी & उसने उसे ये बात फ़ौरन बताना ठीक समझा तो फोन कर दिया.रंभा को अभी अपने पति & उसकी प्रेमिका की रंगरलियो मे खलल डाला नही था तो उसके लिए ये खबर अभी किसी काम की नही थी पर तभी उसे 1 ख़याल आया.

"अच्छा सुन,छ्चोड़ उन दोनो को.आज शाम तो मिल रही है ना?",दोनो ने शाम मिलने की बात पहले ही तय की थी.सोनम ने हां बोला तो रंभा ने उस से समीर के अगले 10-15 दिनो की अपायंट्मेंट्स की कॉपी साथ लाने को कहा.वो उसके ब्लॅकबेरी से ये जानकारी निकाल चुकी थी मगर सोनम से दोबारा उसका शेड्यूल मंगवाने मे कोई हर्ज नही था.कुच्छ देर सहेली से बाते करने के बाद उसने फोन साइलेंट मोड पे किया & अपने बॅग मे डाला,फिर खाना ट्रे मे सज़ा अपने आशिक़ को जगाने चल दी.

टेंडर खुलने वाला था & मानपुर प्रॉजेक्ट मिलने की उमीद मे समीर ने कुच्छ प्रॉजेक्ट्स को जल्द से जल्द निपटाने की बात सोची थी.इसके चलते इधर काम बढ़ गया था & प्रणव भी बहुत मसरूफ़ हो गया था पर उस मसरूफ़ियत मे भी उसने अपने असली मक़सद & उसमे उसका साथ दे रहे महादेव शाह के बारे मे सोचना नही छ्चोड़ा था.

शाह उसे शुरू से ही थोड़ा अजीब इंसान लगा था.वो अपने घर से बहुत कम निकलता था & उसके यहा बहुत लोग आते-जाते भी नही थे पर समीर के लिए उसके घर के दरवाज़े हुमेशा खुले रहते थे.उसे शायद प्रणव पे पूरा भरोसा था पर प्रणव के उसके बारे मे ख़यालात ऐसे नही थे & इसीलिए उसने सोच रखा था कि समीर को शाह के ज़रिए रास्ते से हटवाने के बाद वो उसी बात का इस्तेमाल कर शाह को अपने रास्ते से हटा देगा.

पर इधर चंद दिनो से शाह उसे बदला-2 नज़र आ रहा था.1-2 बार उसने उस से मिलने का वक़्त बदल दिया था & जब मिला तो ना जाने किस जल्दी मे दिखा.जब उसने समीर को मारने के प्लान के बारे मे पुछा तो उसने बात टाल दी & कहा की वो फ़िक्र ना करे,काम हो जाएगा.प्रणव को उसका रुख़ कुच्छ ठीक नही लगा पर अब वो क्या कर सकता था!वो बहुत आगे आ चुका था & अब मुड़ना नामुमकिन था.उसने तय किया की चाहे जो भी हो वो अगली मुलाकात मे शाह से इस बारे पे ज़रूर बात करेगा.

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शाह इस वक़्त अपने बिस्तर मे बैठा खुद को दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान समझ रहा था.कुच्छ ही देर पहले उसकी महबूबा ने उसे जगाके अपने हाथो से लज़ीज़ खाना खिलाया था & उसके बाद शाह ने उसे बाहो मे भर उसके जिस्म पे लिपटे अपने ड्रेसिंग गाउन की बेल्ट खोल दी थी.दोनो पलंग के हेडबोर्ड से टेक लगा के बैठे थे & शाह ने अपनी माशुका को बाई बाँह मे घेरा हुआ था.रंभा उसकी ओर चेहरा किए घूम के बैठी थी & अपनी चूचियो पे घूमते उसके दाए हाथ से मस्त हो रही थी.

"तुमने इतनी तकलीफ़ क्यू उठाई?बस इस इंटरकम से फोन करना था & कोई नौकर आ जाता..",शाह ने साइड-टेबल पे रखे फोन की ओर इशारा किया,"..और खाना बना देता.",शाह ने उसकी चूचियाँ मसली तो रंभा ने गाउन से बाई टांग निकालते हुए शाह की टाँगो पे चढ़ा दी.

"उउंम्म....",उसने अपना बाया हाथ शाह की छाती दबाते हाथ के उपर रख दिया & उसे दबाने लगी,"..लगता है आपको मेरा बनाया खाना पसंद नही आया?"

"नही,मेरी जान.तुम तो मुझे ग़लत समझ गयी.",शाह उसके गालो को चूमने लगा,"..इतना लज़ीज़ खाना तो मैने ज़िंदगी मे पहले कभी खाया ही नही!मैं तो बस ये कह रहा था कि मुझे तुम्हे तकलीफ़ उठाते देख अच्छा नही लगता.",शाह नंगा था & उसने रंभा के सीने से हाथ हटा उसकी जाँघ को पकड़ जब अपनी टांग पे और चढ़ाया तो उसका लंड रंभा की चूत से जा लगा.

"आपके लिए खाना बनाने मे तकलीफ़ कैसी!",रंभा थोड़ा आगे हुई & खुले गाउन से झँकति अपनी चूचियो शाह के बालो भरे सीने से सटा दी & उसके कंधो पे अपने हाथ रख दिए,"..1 बात कान खोल के सुन लीजिए..",उसने उसके बाए गाल पे जीभ की नोक फिराते हुए उसे बाए कान मे उतरा & फिर उसे छेड़ने के बाद दन्तो से कान को काटा,"..शादी के बाद हर रोज़ कम से कम 1 बार आपको मेरे हाथ का खाना खाना ही पड़ेगा."

"ठीक है.",शाह का हाथ गाउन मे घुस उसकी गंद को सहला रहा था,"..अब तो हम आपके गुलाम हैं & आप हमारी मल्लिका!",शाह की बात रंभा हंस दी.शाह ने उसकी गंद सहलाते हुए उसपे चिकोटी काट ली.

"आउच!",रंभा ने बाए हाथ से उसका दाया हाथ पकड़ लिया,"..ऐसे पेश आते हैं अपनी मल्लिका से?",उसने बनावटी गुस्सा दिखाया.

"ये तो प्यार है जानेमन.",शाह ने मुस्कुराते हुए उसकी गंद मे 1 उंगली घुसा दी तो रंभा चिहुनक के उस से & सात गयी.शाह उसके गले को चूमते हुए उंगली से उसकी गंद मारने लगा.रंभा उसकी टाँगो पे टांग चढ़ाए उसके लंड पे चूत को दबाने लगी.

"ओह..महादेव....डार्लिंग..अब जल्दी से मुझे अपनी दुल्हन बनाइए!",रंभा की मस्ती बिल्कुल सच्ची थी पर उसके मुँह से निकलते बोल बिल्कुल झूठे.कमरे मे लगे शीशे मे वो खुद को शाह की बाहो मे देखा & जोश मे आ गयी थी & यही हाल शाह का भी था,"..अब मुझसे & इंतेज़ार नही होता.बताइए ना..हाईईईईईईईईईई..",उंगली गंद मे कुच्छ ज़्यादा अंदर घुस गयी & उसी वक़्त उसका बाया निपल शाह के दन्तो के बीच आ गया,"..कब उस गलिज़ इंसान को मेरी ज़िंदगी से निकालेंगे ताकि मैं हर पल आपकी बाहो मेसुकून से गुज़ार साकु..?..आननह..!",चूत पे दब्ता लंड & गंद मे चलती उंगली ने रंभा को फ़ौरन झाड़वा दिया.

"ये तो तुम्हारे उपर है,जानेमन.तुम समीर की अपायंट्मेंट्स के बारे मे बताओ तभी तो मैं उसकी मौत का वक़्त मुक़र्रर करू.",शाह ने उंगली गंद से बाहर खींची तो मस्ती मे डूबी रंभा खुद ही उसकी गोद मे बैठ गयी.दोनो घुटने शाह के दोनो ओर बिस्तर पे जमा के उसने खुद को शीशे मे देखा तो शाह ने उसके कंधो से गाउन नीचे सरका उसे नंगी कर दिया.वो आगे झुका & उसकी चूचियो को हाथो मे भर खींचते हुए उन्हे चूसने लगा.

"उउन्न्ञणन्..वो तो बता दूँगी पर 1 बात बताइए उसे मारेंगे कैसे & फिर क्या हम फँसेगे नही उसके क़त्ल के जुर्म मे?",शाह ने उसकी चूचिया छ्चोड़ी & अपने लंड को उसकी चूत पे टीका के उसे नीचे बिठाया.रंभा आँखे बंद कर उसके लंड को अंदर लेने लगी.

"उसका क़त्ल नही होगा,1 हादसा होगा & हादसे के ज़िम्मेदार हम नही होंगे.",शाह की आवाज़ मे खून जमाने वाला ठण्दपन था.रंभा बेइंतहा मस्ती मे डूबी थी पर उस वक़्त शाह की आवाज़ की ठंडक से डर उसकी आँखे खुल गयी,"..सड़क पे 1 ट्रक उसकी कार से टकराएगा जिसमे उसकी मौत होगी.उसके बाद ट्रक ड्राइवर गिरफ्तार होगा.पता चलेगा कि वो नशे मे धुत था और उसे सज़ा होगी."

"पर कोई हमारे लिए क्यू फाँसी चढ़ेगा?",दोनो 1 दूसरे से जुड़े बैठे थे.चुदाई अभी शुरू नही हुई थी.

"फाँसी नही जैल होगी उसे.उसने जान बुझ के धक्का नही मारा था & मेरी जान,इस काम के लिए उसके परिवार को वो दौलत मिलेगी जो उसने सपने मे भी नही सोची होगी & फिर भी अगर किसी को इसके बारे मे पता चलेगा तो भी वो उस ड्राइवर से हमारे तक के सिरे को ढूंड नही पाएगा,ये मेरी गॅरेंटी है."

"& अगर समीर आक्सिडेंट मे बच गया तो?"

"ऐसा नही होगा.",शाह कुटिलता से मुस्कुराया,"..वो ड्राइवर ये पक्का करेगा कि पोलीस को समीर की बेजान लाश मिले.अगर समीर ट्रक के धक्के से नही मारा तो फिर ड्राइवर अपने हाथो से उसे मारेगा.",रंभा कुच्छ पल उसे देखती रही.उसे शाह से डर लगने लगा था पर इस वक़्त वो अपने दिल के जज़्बातो को ज़ाहिर करने की ग़लती नही कर सकती थी.वो भी शाह की तरह ही उसकी आँखो मे झँकते हुए मुस्कुराने लगी.

"आइ लव यू,महादेव!",वो आगे झुकी & शाह को इस शिद्दत से चूमा की वो सिहर उठा.रंभा ने काफ़ी देर बाद अपने लब उसके लाबो से जुदा किए & उसके चेहरे को हाथो मे भर उसकी आँखो से अपनी आँखे मिला दी.उसका चेहरा तमतमाया हुआ था,शाह को चूमते वक़्त उसका डर बहुत कम हो गया था & 1 विश्वास उसके अंदर आ गया था कि वो इस इंसान को अपनी उंगलियो पे जैसे मर्ज़ी नचा सकती है.इस ख़याल से उसे बहुत रोमांच हुआ जोकि उसके चेहरे पे सॉफ दिख रहा था.

"महादेव,1 बात का वादा कीजिए.",रंभा वैसे ही उसकी आँखो मे देख रही थी.

"किया मेरी जान."

"उस कामीने को मारने मे आप मुझे अपने साथ रखेंगे."

"क्या?!..तुम ये तकलीफ़ क्यू उठाओगी,मेरी रानी.तुम बेफ़िक्र रहो,मैं हू ना तुम्हारे साथ."

"बात वो नही है.आप जब भी अपने प्लान पे अमल करें तो मुझे अपने साथ रखें.मेरी दिली तमन्ना थी की अपने बेवफा पति को अपने हाथो से मारू.वो करना तो बेवकूफी होगी तो उसे मारने के प्लान को अंजाम देने मे मैं आपके साथ रह अपनी ये हसरत इस तरह पूरी करना चाहती हू.",शाह उसे गौर से देख रहा था..इतनी मोहब्बत थी इसे समीर से तभी तो इतनी नफ़रत भी है!..ये शिद्दत..ये जुनून उसकी मोहब्बत मे भी दिखता था & इसी ने उसके हुस्न के साथ मिलके उसपे जादू कर दिया था!..अब ये हुसनपरी मेरी है..सिर्फ़ मेरी..इसकी हर ख्वाहिश पूरी करूँगा मैं..चाहे कुच्छ भी हो जाए!

"ठीक है,रंभा.मैं तुम्हारी ख्वाहिश ज़रूर पूरी करूँगा.",रंभा आगे झुकी & अपने आशिक़ को चूमने लगी.शाह ने उसे बाहो मे भरा & उसकी किस का जवाब देते हुए कमर उचकते हुए चुदाई शुरू कर दी.

देवेन 1 झटके से उठ बैठा.वो दोपहर का खाना खा के सोने चला गया था.कुच्छ देर पहले हुई बातो को सोचते हुए वो बस सोने ही वाला था कि 1 ख़याल उसके दिमाग़ मे बिजली की तरह कौंधा..दयाल जितना शातिर था उतना ही ख़तरनाक भी..ड्रग्स के धंधे के आकाओं को भी झांसा दिया था उसने & इंटररपोल जैसी एजेन्सी को भी..वो काली कार कही बस इलाक़े का मुआयना करने तो नही आई थी..हमले के पहले का मुआयना!

देवेन बिस्तर से उतरा & फटाफट समान पॅक करने लगा.अपना समान बाँधने के बाद उसने विजयंत मेहरा को जगाया & उसे सारी बात बताई,"पर अब हम जाएँगे कहा?",विजयंत जल्दी-2 अपना समान अपने बॅग मे डाल रहा था.

"पता नही.पर इस शहर से बाहर जाना पड़ेगा.",देवेन रंभा का फोन लगा रहा था पर वो फिर से फोन नही उठा रही थी.उसने कुच्छ सोच के इस बार अमोल बपत को फोन लगाया.

"क्या यार!तू तो गायब ही हो गया."

"बात ही कुच्छ ऐसी थी,बपत साहब."

"अच्छा & यार..तुम भी कमाल हो.",बपत हँसने लगा,"..अख़बार मे इशतहार देने से वो साला आ जाएगा क्या?!",बपत ने इशतहार देख लिया था.

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क्रमशः.......

JAAL paart--91

gataank se aage......

Hotel Violet ki 25vi manzil ke apne baap ke suite ke bistar pe Sameer kamya ko apni baaho me kase leta chum raha tha.kehne ki zarurat nahi ke dono nange the & unke hath 1 dusre ke nazuk ango se khilwad kar rahe the.sameer daye hath ki ungli se uski chut kuredta hua uske upar jhuka baye se uski dayi chhati dabata uske chehre ko chum raha tha & dono jismo ke beech apna baya hath ghusa kamya uske lund ko hila rahi thi.

"sameer,Rambha talaq dene me koi aana kani to nahi karegi na?",sameer ne use abhi-2 Manpur vale tender ke 4 dino ke baad khulne ki baat batayi thi & sath hi ye bhi batay tha ki uske baad vo apne vakil ke zariye rambha ko talaq dene ki karvai shuru karwa dega.

"nahi,kamya.",sameer ne apna hath hatake uski jagah apna munh uski chhati se laga diya.

"uummmm....to fir humare intezar ke din khatm hue?"

"haan,meri jaan."

"oh,sameer!",kamya ne hath uske lund se hata use baaho me bhara & use palat ke uske upar aa gayi.uska hath dobara dono jismo ke beech gaya & sameer ke sakht lund ko pakad chut ke munh pe rakha,"..aakhirkaar hum 1 ho hi jayenge!..kitni jaddojehad ki humne is sab ke liye!"

"haan,meri jaan.ab tum meri rani banogi & hum dono milke is ari milkiyat pe raaj karegne.",sameer ne uski kamar jakad neeche se apni kamar uchkayi & lund uski chut me ghusa uski chudai shuru kar di.

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Rambha ke liye Mahadev Shah & uska rishta bas jismani tha.use uske sath sone me jo maza aata tha vo anutha tha par shah uske liye shaq ke ghere me khada vo shakhs tha joki shayad uske sasur Vijayant Mehra ki maujuda halat ka zimmedar tha & ab uske pati sameer ki zindagi lene ki bhi soch raha tha.par usne mehsus kiya tha ki shah ke jazbat ab kewal jismani nahi reh gaye the balki uske dil me bhi rambha ke liye jagah ban gayi thi.

rambha ne soch liya tha ki ab vo is pehlu ko maddenazar rakh ke aage ki chaale chalegi & isi soch ko dhyan me rakh vo Deven se baat karne ke baad vo andar bungle ki rasoi me aa gayi thi & apne sote hue aashiq ke liye khana banane me lag gayi thi.khana lagbhag taiyyar hi tha jab uska mobile baja.usne dekha uski saheli Sonam ka phone tha.

"hi!sonam,bol kaisi hai?",rambha ne muskurate hue phone kaan se lagaya & dusre haths e khane ko plate me nikalne lagi.sameer apni mashuka se milne lunch ke waqt gaya tha & ye khabar kisi tarah sonam ko pata chal gayi & usne use ye baat fauran batana thik samjha to fone kar diya.rambha ko abhi apne pati & uski premika ki rangraliyo me khalal dala nahi tha to uske liye ye khabar abhi kisi kaam ki nahi thi par tabhi use 1 khayal aaya.

"achha sun,chhod un dono ko.aaj sham to mil rahi hai na?",dono ne sham milne ki baat pehle hi tay ki thi.sonam ne haan bola to rambha ne us se sameer ke agle 10-15 dino ki appointments ki copy sath lane ko kaha.vo uske Blackberry se ye jankari nikal chuki thi magar sonam se dobara uska schedule mangwane me koi harj nahi tha.kuchh der saheli se baate karne ke baad usne fone silent mode pe kiya & apne bag me dala,fir khana tray me saja apne aashiq ko jagane chal di.

Tender khulne wala tha & Manpur Project milne ki umeed me Sameer ne kuchh projects ko jald se jald niptane ki bat sochi thi.iske chalte idhar kaam badh gaya tha & Pranav bhi bahut masruf ho gaya tha par us masrufiyat me bhi usne apne asli maqsad & usme uska sath de rahe Mahadev Shah ke bare me sochna nahi chhoda tha.

shah use shuru se hi thoda ajib insan laga tha.vo apne ghar se bahut kam nikalta tha & uske yaha bahut log aate-jate bhi nahi the par sameer ke liye uske ghar ke darwaze humesha khule rehte the.use shayad pranav pe pura bharosa tha par pranav ke uske bare me khayalat aise nahi the & isiliye usne soch rakha tha ki Sameer ko shah ke zariye raste se hatwane ke baad vo usi baat ka istemal kar shah ko apne raste se hata dega.

par idhar chand dino se shah use badla-2 nazar aa raha tha.1-2 baar usne us se milne ka waqt badal diya tha & jab mila to na jane kis jaldi me dikha.jab usne sameer ko marne ke plan ke bare me puchha to usne baat taal di & kaha ki vo fikr na kare,kaam ho jayega.pranav ko uska rukh kuchh thik nahi laga par ab vo kya kar sakta tha!vo bahut aage aa chuka tha & ab mudna namumkin tha.usne tay kiya ki chahe jo bhi ho vo agli mulakat me shah se is bare pe zarur baat karega.

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shah is waqt apne bistar me baitha khud ko duniya ka sabse khushnasib insan samajh raha tha.kuchh hi der pehle uski mehbooba ne use jagake apne hatho se laziz khana khilaya tha & uske baad shah ne use baaho me bhar uske jism pe lipte apne dressing gown ki belt khol di thi.dono palang ke headboard se tek laga ke baithe the & shah ne apni mashuka ko bayi banh me ghera hua tha.rambha uski or chehra kiye ghum ke baithi thi & apni chhatiyo pe ghumte uske daye hath se mast ho rahi thi.

"tumne itni taklif kyu uthayi?bas is intercom se phone karna tha & koi naukar aa jata..",shah ne side-table pe rakhe phone ki or ishara kiya,"..& khana bana deta.",shah ne uski chhatiya masli to rambha ne gown se bayi tang niklate hue shah ki tango pe chadha di.

"uummm....",usne apna baya hath shah ke chhati dabate hath ke upar rakh diya & use dabane lagi,"..lagta hai aapko mera banaya khana pasand nahi aaya?"

"nahi,meri jaan.tum to mujhe galat samajh gayi.",shah uske galo ko chumne laga,"..itna laziz khana to maine zindagi me pehle kabhi khaya hi nahi!main to bas ye keh raha tha ki mujhe tumhe taklif uthate dekh achha nahi lagta.",shah nanga tha & usne rambha ke seene se hath hata uski jangh ko pakad jab apni tang pe & chadhaya to uska lund rambha ki chut se ja laga.

"aapke liye khana banane me taklif kaisi!",rambha thoda aage hui & khule gown se jhankti apni chhatiya shah ke baalo bhare seene se sata di & uske kandho pe apne hath rakh diye,"..1 baat kaan khol ke sun lijiye..",usne uske baye gaal pe jibh ki nok firate hue use baye kaan me utara & fir use chhedne ke baad danto se kaan ko kata,"..shadi ke baad har roz kam se kam 1 baar aapko mere hath ka khana khana hi padega."

"thik hai.",shah ka hath gown me ghus uski gand ko sehla raha tha,"..ab to hum aapke ghulam hain & aap humari mallika!",shah ki baat rambha hans di.shah ne uski gand sehlate hue uspe chikoti kaat li.

"ouch!",rambha ne baye hath se uska daya hath pakad liya,"..aise pesh aate hain apni mallika se?",usne banwati gussa dikhaya.

"ye to pyar hai janeman.",shah ne muskurate hue uski gand me 1 ungli ghusa di to rambha chihunk ke us se & sat gayi.shah uske gale ko chumte hue ungli se uski gand marne laga.rambha uski tango pe tang chadhaye uske lund pe chut ko dabane lagi.

"oh..mahadev....darling..ab jaldi se mujhe apni dulhan banaiye!",rambha ki masti bilkul sachchi thi par uske munh se nikalte bol bilkul jhoothe.kamre me lage shishe me vo khud ko shah ki baaho me dekha & josh me aa gayi thi & yehi haal shah ka bhi tha,"..ab mujhse & intezar nahi hota.bataiye na..haiiiiiiiiiii..",ungli gand me kuchh zyada andar ghus gayi & usi waqt uska baya nipple shah ke danto ke beech aa gaya,"..kab us galiz insan ko meri zindagi se nikalenge taki main har pal aapki baaho mesukun se guzar saku..?..aannhhhhhhhhhhhh..!",chut pe dabta lund & gand me chalti ungli ne rambha ko fauran jhadwa diya.

"ye to tumhare upar hai,janeman.tum Sameer ki appointments ke bare me batao tabhi to main uski maut ka waqt mukarrar karu.",shah ne ungli gand se bahar khinchi to masti me dubi rambha khud hi uski god me baith gayi.dono ghutne shah ke dono or bistar pe jama ke usne khud ko shishe me dekha to shah ne uske kandho se gown neeche sarka use nangi kar diya.vo aage jhuka & uski choohciyo ko hatho me bhar khicnhte hue unhe chusne laga.

"uunnnnn..vo to bata dungi par 1 baat bataiye use marenge kaise & fir kya hum phansege nahi uske qatl ke jurm me?",shah ne uski choochiya chhodi & apne lund ko uski chut pe tika ke use neeche bithaya.rambha aankhe band kar uske lund ko andar lene lagi.

"uska qatl nahi hoga,1 hadsa hoga & hadse ke zimmedar hum nahi honge.",shah ki aavaz me khun jamane vala thandapan tha.rambha beintaha masti me dubi thi par us waqt bjhi shah ki aavaz ki thandak se darr uski aankhe khul gayi,"..sadak pe 1 truck uski car se takrayega jisme uski maut hogi.uske baad truck driver giraftar hoga.pata chalega ki vo nashe me dhut tha & use saza hogi."

"par koi humare liye kyu phansi chadhega?",dono 1 dusre se jude baithe the.chudai abhi shuru nahi hui thi.

"phansi nahi jail hogi use.usne jaan bujh ke dhakka nahi mara tha & meri jaan,is kaam ke liye uske parivar ko vo daulat milegi jo usne sapne me bhi nahi sochi hogi & fir bhi agar kisi ko iske bare me pata chalega to bhi vo us driver se humare tak ke sire ko dhund nahi payega,ye meri guarantee hai."

"& agar sameer accident me bach gaya to?"

"aisa nahi hoga.",shah kutilta se muskuraya,"..vo driver ye pakka karega ki police ko sameer ki bejaan lash mile.agar sameer truck ke dhakke se nahi mara to fir driver apne hatho se use marega.",rambha kuchh pal use dekhti rahi.use shah se darr lagne laga tha par is waqt vo apne dil ke jazbato ko zahir karne ki galti nahi kar sakti thi.vo bhi shah ki tarah hi uski aankho me jhankte hue muskurane lagi.

"i love you,mahadev!",vo aage jhuki & shah ko is shiddat se chuma ki vo sihar utha.rambha ne kafi der baad apne lab uske labos e juda kiye & uske chehre ko hatho me bhar uski aankho se apni aankhe mila di.uska chehra tamtamaya hua tha,shah ko chumte waqt uska darr bahut kam ho gaya tha & 1 vishwas uske andar aa gaya tha ki vo is insan ko apni ungliyo pe jaise marzi nacha sakti hai.is khayal se use bahut romanch hua joki uske chehre pe saaf dikh raha tha.

"mahadev,1 baat ka vada kijiye.",rambha vaise hi uski aankho me dekh rahi thi.

"kiya meri jaan."

"us kamine ko marne me aap mujhe apne sath rakhenge."

"kya?!..tum ye taklif kyu uthaogi,meri rani.tum befikr raho,main hu na tumhare sath."

"baat vo nahi hai.aap jab bhi apne plan pe amal karen to mujhe apne sath rakhen.meri dili tamanna thi ki apne bewafa pati ko apne hatho se maru.vo karna to bevkufi hog to use marne ke plan ko anjam dene me main aapke sath reh apni ye hasrat is tarah puri karna chahti hu.",shah use gaur se dekh raha tha..itni mohabbat thi ise sameer se tabhi to itni nafrat bhi hai!..ye shiddat..ye junun uski mohabbat me bhi dikhta tha & isi ne uske husn ke sath milke uspe jadu kar diya tha!..ab ye husnpari meri hai..sirf meri..iski har khwahish puri karunga main..chahe kuchh bhi ho jaye!

"thik hai,rambha.main tumhari khwahish zarur puri karunga.",rambha aage jhuki & apne aashiq ko chumne lagi.shah ne use baaho me bhara & uski kiss ka jawab dete hue kamar uchakte hue chudai shuru kar di.

Deven 1 jhatke se uth baitha.vo dopahar ka khana kha ke sone chala gaya tha.kuchh der pehle hui baato ko sochte hue vo bas sone hi wala tha ki 1 khayal uske dimagh me bijli ki tarah kaundha..Dayal jitna shatir tha utna hi khatarnak bhi..drugs ke dhandhe ke aakaon ko bhi jhansa diya tha usne & Interpol jaisi agency ko bhi..vo kali car kahi bas ilake ka muayana karne to nahi aayi thi..humle ke pehle ka muayana!

deven bistar se utra & fatafat saman pack karne laga.apna saman bandhne ke baad usne Vijayant Mehra ko jagaya & use sari baat batayi,"par ab hum jayenge kaha?",vijayant jaldi-2 apna saman apne bag me daal raha tha.

"pata nahi.par is shehar se bahar jana padega.",deven rambha ka fone laga raha tha par vo fir se fone nahi utha rahi thi.usne kuchh soch ke is baar Amol Bapat ko fone lagaya.

"kya yaar!tu to gayab hi ho gaya."

"baat hi kuchh aisi thi,bapat sahab."

"achha & yaar..tum bhi kamal ho.",bapat hansne laga,"..akhbar me ishtehar dene se vo sala aa jayega kya?!",bapat ne ishtehar dekh liya tha.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--92

गतान्क से आगे......

"बपत साहब,अब मच्चली पकड़नी हो तो चारा डालना ही पड़ेगा ना & लगता है मच्चली ने चारा खा भी लिया है."

"क्या?!",देवेन ने उसे सारी बात बताई,"हूँ..मामला ख़तरनाक लगता है पर भाई,तुम निकल जाओगे तो वो साला पकड़ मे कैसे आएगा?”

“आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे मैं को पोलिसेवला हू.”,देवेन ने उसी के अंदाज़ मे जवाब दिया तो बपत ने ठहाका लगाया,”..बपत साहिब,मुझे अपनी परवाह नही पर कुच्छ लोग हैं जिनकी ज़िम्मेदारी मेरे सर है & मैं उन्हे तकलीफ़ मे नही डाल सकता इसीलिए तो आपको फोन किया है कि किसी तरह डेवाले पोलीस को उसके बारे मे सुराग दे दीजिए की वो यहा आ सकता है.

“हूँ..करता हूँ कुच्छ.”,दोनो की बात ख़त्म हो गयी.

“महादेव डार्लिंग.”,रंभा अपने आशिक़ के सीने पे सर रखे उसकी झांतो मे बाए हाथ को फिरा रही थी.

“बोलो जानेमन.”,शाह उसकी ज़ुल्फो की खुश्बू मे मदहोश रहा था.

“उस कामीने के मारने के बाद हम शादी कब करेंगे?”

“1 महीने का इंतेज़ार करना होगा हमे.”

“इतना लंबा!”,रंभा बाई कोहनी पे उचकी.उसके चेहरे पे नाखुशी सॉफ दिख रही थी.

“मेरी जान,इतना इंतेज़ार तो ज़रूरी है वरना किसी को शक़ सकता है.”

“पर मैं कैसे रहूंगी इतने दिनो तक आपके बिना.”,वो किसी बच्चे की तरह मचल रही थी.

“अरे!बस चंद दिनो की तो बात है.”

“नही!मैं नही जानती कुच्छ वो मरेगा & मैं आपके पास आ जाऊंगी.”,शाह उसकी बचकानी ज़िद सुनके थोड़ा घबरा गया था.रंभा ने भी भाँप लिया कि उसने कुच्छ ज़्यादा नाटक कर दिया है,”..मैं क्या करू!जानती हू आप सही कह रहे हैं..”वो फिर उसके सीने पे लेट गयी,”..पर अब सब्र नही होता ना!”

“मैं समझता हू,रंभा.ऐसा ही कुच्छ तो मेरा भी हाल है.”

“अच्छा छ्चोड़िए उस बात को..”,रंभा ने बात बदली,”..हम शादी करेंगे कहा & कैसे?”

“यही तो मैं भी सोच रहा था.किसी मंदिर मे शादी कर के मॅरेज रिजिस्ट्रार के ऑफीस से सर्टिफिकेट निकलवा लेंगे.”

“हां,पर किस मंदिर मे शादी करेंगे?इस शहर मे तो हमे कोई भी पहचान सकता है.”

“हां,यहा से दूर जाना होगा पर ज़्यादा दूर नही जा सकते.वरना किसी को शक़ हो सकता है कि पति की मौत के महीने भर बाद ही तुम कहा चल दी.”,शाह सोचने लगा.रंभा के ज़हन मे फ़ौरन ही इस काम के लिए सही जगह आ गयी थी पर वो चुप रही & थोड़ी देर सोचने का नाटक करती रही.

“1 जगह है.”,वो किसी बच्ची की तरह उच्छली जिसने होमवर्क मे मिले मुश्किल सवाल का सही जवाब ढूंड लिया हो.

“कौन सी?”

“क्लेवर्त.”,शाह उसे गौर से देखने लगा.रंभा का दिल धड़क उठा पर उसने बड़ी मासूमियत से पुछा,”क्या हुआ?..वो जगह ठीक नही रहेगी क्या?”

“नही मेरी रानी,वो बिल्कुल सही जगह है!”,शाह का संजीदा चेहरा अचानक हंसते चेहरे मे तब्दील हो गया & वो रंभा को बाँहो मे भर चूमने लगा,कैसे सोचा तुमने उस जगह के बारे मे?”

“आपको याद होगा जब समीर लापता हुआ था तो मैं उसके डॅडी के साथ उसे ढूँदने के चक्कर मे वाहा गयी थी.वाहा जो हुआ बहुत बुरा हुआ पर उस जगह की खूबसूरती & सैलानियो की पसंदीदा जगह होने के बावजूद वाहा की शान्ती ने मेरे दिल मे घर कर लिया.हम बड़ी आसानी से वाहा जाके चुपचाप शादी कर सकते हैं.”

“अच्छा ये बताइए..”,रंभा ने सवाल किया,”..समीर की मौत के बाद ट्रस्ट ग्रूप की मीटिंग कब होगी?”

“मुझे लगता है कि उसकी मौत के बाद क्रिया-कर्म & फिर क़ानूनी फॉरमॅलिटीस निपटाते हुए 1 महीने का वक़्त गुज़र जाएगा.मीटिंग भी तब ही होगी.”

“अच्छा,तो फिर 1 काम करते हैं ना!हम उसकी मौत के 15-20 दिन बाद ही वाहा चले जाते हैं & शादी कर लेते हैं फिर वापस आ जाएँगे & फिर जब सही मौका आएगा तब दुनिया को बताएँगे की आप & मैं पति-पत्नी हैं.”

“हूँ.बात तो ठीक लगती है तुम्हारी.”,शाह सोच रहा था.

“अच्छा,अब जब भी उसकी मौत का इंतेज़ाम करें तब मुझे बुला लीजिएगा.”,रंभा बिस्तर से उतरी & सोच मे पड़ गयी.उसका ब्लाउस तो शाह लगभग फाड़ ही चुका था.शाह उसकी उलझन समझ गया & मुस्कुराता हुआ बिस्तर से उठा & अलमारी खोल 1 पॅकेट रंभा को थमाया जिसमे 1 ड्रेस थी.

“ये किसकी है?”,रंभा ने उसे छेड़ा.

“जिसकी भी हो,अब तो तुम्हारी है.”,शाह ने भी वैसे ही जवाब दिया तो दोनो खिलखिला उठे.

देवेन विजयंत मेहरा को लेके उस घर से निकला & डेवाले की सड़को पे घूमने लगा.रंभा ने महादेव शाह के घर से निकलते ही उसे फोन किया तो उसने रंभा को सारी बात बताई.रंभा फ़ौरन उनके पास पहुँची & तीनो देवेन के साथ उसकी कार मे बैठ आगे के बारे मे सोचने लगे.

"रंभा,इस वक़्त हमे दयाल को छ्चोड़ सिर्फ़ शाह पे ध्यान देना चाहिए.मुझे लगता है कि जैसे ही हम उसकी पोल खोल विजयंत को दुनिया के सामने लाएँगे,विजयंत के इस हाल का राज़ भी खुद बा खुद खुल जाएगा."

"हां,आपकी बात ठीक है पर अभी आप जाएँगे कहा?"

"तुम्हारी बात से मुझे आइडिया आया है."

"क्या?"

"हम क्लेवर्त जाते हैं."

"क्या?!पर वाहा रहेंगे कहा?"

"अरे!उसके पास वो गाँव भूल गयी,हराड.",रंभा के गाल उस गाँव मे उसकी & देवेन की पहली रात को याद कर सुर्ख हो गये.

"वाहा उसी बुड्ढे की मदद लेंगे?"

"हां."

"ठीक है.पर फिर समीर का काम."

"उसकी फ़िक्र मत करो.बस तुम मुझे फोन से सब बताती रहना."

"ओके.",रंभा दोनो मर्दो से गले मिली & उन्हे अलविदा कह के वाहा से सोनम से मिलने चली गयी.सोनम के साथ उसके घर पे बैठी वो काफ़ी देर तक गप्पे लड़ाती रही फिर उसकी दी गयी समीर के शेड्यूल की कॉपी ले वाहा से चली आई.घर आके उसने देखा की सोनम के दिए गये & समीर की ब्लॅकबेरी से निकले शेड्यूल बिल्कुल 1 जैसे थे.

अगले दिन देवेन हराड पहुँचा & उसे फोन किया तो रंभा ने उसे समीर के शेड्यूल के गॅप के बारे मे बता दिया.देवेन ने उसे ये बात शाह को बताने को कहा.रंभा ने ऐसा ही किया तो शाह ने उसे अगले दिन मिलने को कहा.

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इधर देवेन हराड गया उधर दयाल उसके घर के सामने वाले मकान पर गया उसकी तलाश मे.उसने भी उस काली कार की ही तरह पूरे इलाक़े का चक्कर लगाया पर उसे कुच्छ ना मिला.काली कार के ड्राइवर ने उसे बताया था कि वाहा कुच्छ भी गड़बड़ नही दिखी थी.दयाल वापस लौट गया पर उसने सोच लिया था कि उस पते पे नज़र तो रखनी ही पड़ेगी.

उसने 1 आदमी को इस काम पे लगाया भी पर कुच्छ नतीजा नही निकला.वो तारीख भी आके चली गयी जो इशतहार मे लिखी थी पर उस दिन भी दयाल के आदमी को वाहा कोई नही दिखा.

इस सब से पहले कुच्छ & हुआ जिस से चारो तरफ सनसनी फैल गयी.

जिस रोज़ देवेन & विजयंत डेवाले से निकले उसके ठीक 4 दिन बाद मानपुर प्रॉजेक्ट का टेंडर खुला & जैसी की उमीद थी वो ट्रस्ट ग्रूप को ही मिला.समीर इस बात का जश्न मानने के लिए शहर के बाहर बने मेहरा परिवार के फार्महाउस के लिए रवाना हो गया.कामिनी वाहा पहले से ही पहुँच चुकी थी.

डेवाले से बाहर निकलते हाइवे पे 5 किमी के सफ़र के बाद 1 रास्ता बाई तरफ चला जाता है जिसके दोनो तरफ खाली झाड़-झंखाड़ से भरी ज़मीन है.इस रास्ते पे कोई 2किमी चलने के बाद बड़े ही आलीशान & खूबसूरत फार्म्हाउसस दिखने लगते हैं.इन्ही मे से 1 फार्महाउस मेहरा परिवार का था.समीर खुशी मे डूबा सीटी बजाता उस सड़क पे बढ़ा जा रहा था कि पीछे से 1 ट्रक ने हॉर्न बजाया.उसने उसे आगे जाने देने के लिए कार थोड़ी किनारे की.वो ट्रक बगल से आगे जाने लगा पर जब उस ट्रक का पिच्छला हिस्सा समीर की ड्राइविंग सीट के बराबर आया तो ट्रक ड्राइवर ने अचानक ट्रक को बाई तरफ मोड़ा.ट्रक का पिच्छला हिस्सा समीर की कार से टकराया जो अपना बॅलेन्स खोती सड़क के किनारे की कच्ची ज़मीन पे चली गयी & 1 पेड़ से टकराई.

शाम 5 बजते-2 कामया बहुत घबरा गयी.समीर ना तो अपना फोन उठा रहा था ना ही वो दफ़्तर मे था.2 बजे मिलने की बात तय हुई थी & अब 3 घंटे बीट चुके थे.उसकी समझ मे नही आ रहा था कि क्या करे.उसने 5 बजे फिर समीर के दफ़्तर फोन किया & सोनम को सारी बात बताई.सोनम ने सबसे पहले ये खबर प्रणव को दी & उसके बाद अपने मोबाइल से अपनी सहेली को.

प्रणव ने भी समीर को ढूंडना शुरू किया पर जब उसे भी समीर कही नही मिला तो उसने पोलीस कमिशनर के दफ़्तर फोन करने की सोची पर वो फोन मिलाता उस से पहले ही घबराई & बौखलाई सोनम उसके कॅबिन मे घुसी,"सर.."

"क्या हुआ सोनम?"

"सर,पोलीस आई है."

"हां तो.",प्रणव खड़ा हुआ.

"समीर सर की कार मिली है."

"क्या?!..कहा?!",प्रणव तेज़ी से उसकी तरफ बढ़ा..शाह ने उसे तो कुच्छ नही बताया था फिर क्या उसने उसे बिना बताए सब कर दिया?

"उनकी लाश मिली है,सर."

"क्या बकती हो?!",प्रणव की आँखे हैरत से फॅट गयी.तभी 1 पोलीस वाला उसके कॅबिन के खुले दरवाज़े से अंदर घुसा.

"ये सही कह रही है,मिस्टर.प्रणव.हमे समीर जी की कार मिली है.उसका आक्सिडेंट हुआ लगता है पर साथ ही 1 लाश भी मिली है उस कार मे जिसका चेहरा बुरी तरह ज़ख़्मी है.मैं इसीलिए यहा आया हू ताकि आप या फिर कोई ऐसा शख्स जो उन्हे करीब से जानता हो,वो चल के उस लाश की शिनाख्त कर ले."

"मिस्टर.समीर मेहरा की वसीयत मे कही भी ये ज़िक्र नही है कि ट्रस्ट ग्रूप के उनके शेर्स का क्या किया जाए.इस सूरते हाल मे ये शेर्स उनकी बीवी रंभा मेहरा को जाने चाहिए..",समीर की मौत के 10 दिन बाद मेहरा परिवार के बुंगले के हॉल मे वकील समीर की वसीयत पढ़ने के बाद बोल रहा था जिसे सारे परिवार वाले सुन रहे थे,"..पर अगर आप मे से किसी को भी इस बात से ऐतराज़ हो तो आप अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं.",वकील ने सभी की ओर देखा.

तीनो औरतें सफेद सारी मे बैठी थी.रंभा सर झुकाए थी & ऐसे बैठे थी जैसे उसे किसी बात से कोई मतलब नही पर हक़ीक़त ये थी कि वो सब कुच्छ बड़े ध्यान से सुन-देख रही थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--92

gataank se aage......

"bapat sahab,ab machhli pakadni ho to chara dalna hi padega na & lagta hai machhli ne chara kha bhi liya hai."

"kya?!",deven ne use sari baat batayi,"hun..mamla khatarnak lagta hai par bhai,tum nikal jaoge to vo sala pakad me kaise aayega?”

“aap to aise keh rahe hain jaise main ko policevala hu.”,deven ne usi ke andaz me jawab diya to bapat ne thahaka lagaya,”..bapat sahib,mujhe apni parvah nahi par kuchh log hain jinki zimmedari mere sar hai & main unhe taklif me nahi daal sakta isiliye to aapko fone kiya hai ki kisi tarah Devalay police ko uske bare me surag de dijiye ki vo yaha aa sakta hai.

“hun..karta hun kuchh.”,dono ki baat khatm ho gayi.

“Mahadev darling.”,Rambha apne aashiq ke seene pe sar rakhe uski jhanto me baye hath ko fira rahi thi.

“bolo janeman.”,shah uski zulfo ki khushbu me madhosh raha tha.

“us kamine ke marne ke baad hum shadi kab karenge?”

“1 mahine ka intezar karma hoga hume.”

“itna lumba!”,rambha bayi kohni pe uchaki.uske chehre pe nakhushi saaf dikh rahi thi.

“meri jaan,itna intezar to zaruri hai varna kisi ko shaq sakta hai.”

“par main kaise rahungi itne dino tak aapke bina.”,vo kisi bachche ki tarah machal rahi thi.

“are!bas chand dino ki to baat hai.”

“nahi!main nahi janti kuchh vo marega & main aapke paas aa jaoongi.”,shah uski bachkani zid sunke thoda ghabra gaya tha.rambha ne bhi bhanp liya ki usne kuchh zyada natak kar diya hai,”..main kya karu!janti hu aap sahi keh rahe hain..”vo fir uske seene pe let gayi,”..par ab sabr nahi hota na!”

“main samajhta hu,rambha.aisa hi kuchh to mera bhi haal hai.”

“achha chhodiye us baat ko..”,rambha ne baat badli,”..hum shadi karenge kaha & kaise?”

“yehi to main bhi soch raha tha.kisi mandir me shadi kar ke marriage registrar ke office se certificate nikalwa lenge.”

“haan,par kis mandir me shadi karenge?is shehar me to hume koi bhi pehchan sakta hai.”

“haan,yaha se door jana hoga par zyada door nahi ja sakte.varna kisi ko shaq ho sakta hai ki pati ki maut ke mahine bhar baad hi tum kaha chal di.”,shah sochne laga.rambha ke zehan me fauran hi is kaam ke liye sahi jagah aa gayi thi par vo chup rahi & thodi der sochne ka natak karti rahi.

“1 jagah hai.”,vo kisi bachchi ki tarah uchhli jisne homework me mile mushkil sawal ka sahi jawab dhoond liya ho.

“kaun si?”

“Clayworth.”,shah use gaur se dekhne laga.rambha ka dil dhadak utha par usne badi masumiyat se puchha,”kya hua?..vo jagah thik nahi rahegi kya?”

“nahi meri rani,vo bilkul sahi jagah hai!”,shah ka sanjida chehra achanak hanste chehre me tabdil ho gaya & vo rmabha ko bahao me bahr chumne laga,kaise socha tumne us jagah ke abre me?”

“aapko yaad hoga jab sameer lapata hua tha to main uske daddy ke sath use dhoondne ke chakkar me vaha gayi thi.vaha jo hua bahut bura hua par us jagah ki khubsurti & sailaniyo ki pasandeeda jagah hone ke bavjud vaha ki shanty ne mere dil me ghar kar liya.hum badi asani se vaha jake chupchap shadi kar sakte hain.”

“achha ye bataiye..”,rambha ne sawal kiya,”..sameer ki maut ke baad Trust Group ki meeting kab hogi?”

“mujhe lagta hai ki uski maut ke baad kriya-karm & fir kanooni formalities niptate hue 1 mahine ka waqt guzar jayega.meeting bhi tab hi hogi.”

“achha,to fir 1 kaam karte hain na!hum uski maut ke 15-20 din baad hi vaha chale jate hain & shadi kar lete hain fir vapas aa jayenge & fir jab sahi mauka aayega tab duniya ko batayenge ki aap & main pati-patni hain.”

“hun.baat to thik lagti hai tumhari.”,shah soch raha tha.

“achha,ab jab bhi uski maut ka intezam Karen tab mujhe bula lijiyega.”,rambha bistar se utri & soch me pad gayi.uska blouse to shah lagbhag phaad hi chuka tha.shah uski uljhan samajh gaya & muskurata hua bistar se utha & almari khol 1 packet rambha ko thamaya jisme 1 dress thi.

“ye kiski hai?”,rambha ne use chheda.

“iiski bhi ho,ab to tumhari hai.”,shah neb hi vaise hi jawab diya to dono khilkhila uthe.

Deven vijayant Mehra ko leke us ghar se nikla & Devalay ki sadko pe ghumne laga.Rambha ne Mahadev Shah ke ghar se niklate hi use phone kiya to usne rambha ko sari baat batayi.rambha fauran unke paas pahunchi & teeno deven ke sath uski car me baith aage ke bare me sochne lage.

"rambha,is waqt hume Dayal ko chhod sirf shah pe dhyan dena chahiye.mujhe lagta hai ki jaise hi hum uski pol khol vijayant ko duniya ke samne layenge,vijayant ke is haal ka raaz bhi khud ba khud khul jayega."

"haan,aapki baat thik hai par abhi aap jayenge kaha?"

"tumhari baat se mujhe idea aaya hai."

"kya?"

"hum Clayworth jate hain."

"kya?!par vaha rahenge kaha?"

"are!uske paas vo ganv bhul gayi,Haraad.",rambha ke gaal us ganv me uski & deven ki pehli raat ko yaad kar surkh ho gaye.

"vaha usi buddhe ki madad lenge?"

"haan."

"thik hai.par fir sameer ka kaam."

"uski fikr mat karo.bas tum mujhe fone se sab batati rehna."

"ok.",rambha dono mardo se gale mili & unhe alvida keh ke vaha se Sonam se milne chali gayi.sonam ke sath uske ghar pe baithi vo kafi der tak gappe ladati rahi fir uski di gayi sameer ke schedule ki copy le vaha se chali aayi.ghar aake usne dekha ki sonam ke diye gaye & sameer ki Blackberry se nikale schedule bilkul 1 jaise the.

agle din deven haraad pahuncha & use phone kiya to rambha ne use sameer ke schedule ke gap ke bare me bata diya.deven ne use ye baat shah ko batane ko kaha.rambha ne aisa hi kiya to shah ne use agle din milne ko kaha.

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idhar deven haraad gaya udhar dayal uske ghar ke samne vale makan par gaya uski talsh me.usne bhi us kali car ki hi tarah pure ilake ka chakkar lagaya par use kuchh na mila.kali car ke driver ne use bataya tha ki vaha kuchh bhi gadbad nahi dikhi thi.dayal vapas laut gaya par usne soch liya tha ki us pate pe nazar to rakhni hi padegi.

usne 1 aadmi ko is kaam pe lagaya bhi par kuchh natija nahi nikla.vo tarikh bhi aake chali gayi jo ishtehar me likhi thi par us din bhi dayal ke aadmi ko vaha koi nahi dikha.

is sab se pehle kuchh & hua jis se charo taraf sansani phail gayi.

jis roz deven & vijayant devalay se nikle uske thik 4 din baad Manpur project ka tender khula & jaisi ki umeed thi vo Trust Group ko hi mila.sameer is baat ka jashn manane ke liye shehar ke bahar bane Mehra parivar ke farmhouse ke liye ravana ho gaya.Kamini vaha pehle se hi pahunch chuki thi.

devalay se bahar nikalte highway pe 5 km ke safar ke baad 1 rasta bayi taraf chala jata hai jiske dono taraf khali jhad-jhankhad se bhari zamin hai.is raste pe koi 2km chalne ke baad bade hi aalishan & khubsurat farmhouses dikhne lagte hain.inhi me se 1 farmhouse mehra parivar ka tha.sameer khushi me duba seeti bajata us sadak pe badha ja raha tha ki peechhe se 1 truck ne horn bajaya.usne use aage jane dene ke liye car thodi kinare ki.vo truck bagal se aage jane laga par jab us truck ka pichhla hissa sameer ki driving seat ke barabar aaya to truck driver ne achanak truck ko bayi taraf moda.truck ka pichhla hissa sameer ki car se takraya jo apna balance khoti sadak ke kinare ki kachchi zamin pe chali gayi & 1 ped se takrayi.

sham 5 bajte-2 kamya bahut ghabra gayi.sameer na to apna fone utha raha tha na hi vo daftar me tha.2 baje milne ki baat tay hui thi & ab 3 ghante beet chuke the.uski samajh me nahi aa raha tha ki kya kare.usne 5 baje fir sameer ke daftar fone kiya & sonam ko sari baat batayi.sonam ne sabse pehle ye khabar pranav ko di & uske baad apne mobile se apni saheli ko.

pranav ne bhi sameer ko dhundna shuru kiya par jab use bhi sameer kahi nahi mila to usne police commissioner ke daftar phone karne ki sochi par vo fone milata us se pehle hi ghabrayi & baukhlayi sonam uske cabin me ghusi,"sir.."

"kya hua sonam?"

"sir,police aayi hai."

"haan to.",pranav khada hua.

"sameer sir ki car mili hai."

"kya?!..kaha?!",pranav tezi se uski taraf badha..shah ne use to kuchh nahi bataya tha fir kya usne use bina bataye sab kar diya?

"unki lash mili hai,sir."

"kya bakti ho?!",pranav ki aankhe hairat se phat gayi.tabhi 1 police vala uske cabin ke khule darwaze se andar ghusa.

"ye sahi keh rahi hai,mr.pranav.hume sameer ji ki car mili hai.uska accident hua lagta hai par sath hi 1 lash bhi mili hai us car me jiska chehra buri tarah zakhmi hai.main isiliye yaha aaya hu taki aap ya fir koi aisa shakhs jo unhe karib se janta ho,vo chal ke us lash ki shinakht kar le."

"Mr.Sameer Mehra ki vasiyat me kahi bhi ye zikr nahi hai ki Trust Group ke unke shares ka kya kiya jaye.is surate haal me ye shares unki biwi Rambha Mehra ko jane chahiye..",sameer ki maut ke 10 din baad mehra parivar ke bungle ke hall me vakil sameer ki vasiyat padhne ke baad bol raha tha jise sare parivar vale sun rahe the,"..par agar aap me se kisi ko bhi is baat se aitraz ho to aap adalat ka darwaza khatkhata sakte hain.",vakil ne sabhi ki or dekha.

teeno auraten safed sari me baithi thi.rambha sar jhukaye thi & aise baithe thi jaise use kisi baat se koi matlab nahi par haqeeqat ye thi ki vo sab kuchh bade dhyan se sun-dekh rahi thi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--93

गतान्क से आगे......

"नही,वकील साहब हमे कोई ऐतराज़ नही.",वकील की बात पे प्रणव,रीता & शिप्रा ने 1 दूसरे को देखा & फिर रीता ने जवाब दिया. "अच्छी बात है.तो मेरा काम ख़त्म होता है.मिस्टर.प्रणव,समीर के बाद दे फॅक्टो Cएओ तो आप ही हैं.अब आप ही कि ये ज़िम्मेदारी बनती है कि जल्द से जल्द शेर्होल्डर्स की मीटिंग बुलाएँ & फिर ग्रूप के मालिकाना हक़ की बाते सॉफ करे." "जी,वकील साहब.",वकील ने सब से विदा ली तो प्रणव उसे बाहर तक छ्चोड़ने आया.उसे यकीन नही हो रहा था कि उसका सपना सच होने वाला था.उसके ज़हन मे पिच्छले 10 दिनो की बाते घूम रही थी.वो यक़ीनन समीर की ही लाश थी.उसने भी पहचाना था & रंभा ने भी.उसे महादेव शाह पे बहुत गुस्सा आया था कि उसने उसे बिना बताए ये काम कर दिया.वो शाह को चाह कर भी फोन नही कर सकता था क्यूकी मामला अभी पोलीस के हाथ से निकला नही था. समीर की लाश 1 ताबूत मे बंद कर मेहरा परिवार के बंगल के 1 हाल मे रखी गयी थी जहा सभी उसे श्रद्धांजलि देने आ रहे थे.शाह भी आया & वही सबकी नज़र बचा समीर ने उस से ये सवाल किया. "पर प्रणव,मैने कुच्छ नही किया.मैं तो बस सोच ही रहा था इस बारे मे & ये हादसा हो गया." "मतलब आपने नही कराया ये सब?",प्रणव की आँखे हैरत से फॅट गयी थी..तो क्या तक़दीर उसपे मेहेरबान थी?..अब उसे सारी ज़िंदगी इस राज़ को सीने मे दबाए रखने की भी ज़रूरत नही थी. समीर की मौत की खबर सुनते ही रीता ने उसका गिरेबान पकड़ लिया था & उसपे इल्ज़ाम लगाया था कि समीर का आक्सिडेंट करवा उसे लाचार बनाने के चक्कर मे प्रणव ने ही ये सब कराया था.बड़ी मुश्किल से प्रणव अपनी सास को समझा पाया था.वो सच बोल रहा था & रीता को उसपे यकीन करना ही पड़ा था..बस अब 15 दिन बाद सब कुच्छ उसका होगा..रंभा तो बस नाम की मालकिन होगी. "प्रणव..",वो अपना नाम सुन ख़यालो से बाहर आया. "ह-हां..अरे रंभा.बोलो?" "मैं कुच्छ दिन के लिए यहा से बाहर जाना चाहती हू." "बाहर?कहा?.. क्यू?" "बस प्रणव यहा रहने मे अब मेरा जी घबराता है." "मैं तुम्हारी हालत समझता हू,रंभा पर बस मीटिंग हो जाने दो फिर चली जाना." "मीटिंग कब तक होगी?" "देखो,जल्द से जल्द भी कर्वाऊं तो भी 15-20 दिन तो लग ही जाएँगे." "तो प्लीज़ प्रणव मुझे जाने दो,मैं मीटिंग के लिए आ जाऊंगी." "पर जाओगी कहा?" "क्लेवर्त." "क्लेवर्त?" "हां,प्रणव.मैं यहा से दूर जाना चाहती हू & वो जगह मुझे पसंद है." "ओक,मैं वाहा होटेल वाय्लेट मे इत्तिला कर देता हू." "थॅंक्स,प्रणव.",रंभा बड़ी शालीनता से उसके गले लगी,"..तुम मेरा कितना बड़ा सहारा हो ये तुम्हे पता नही." "प्लीज़,रंभा.ऐसी बाते कर मुझे शर्मिंदा ना करो.",दोनो पूरी तरह से नाटक कर रहे थे पर जहा रंभा प्रणव की हक़ीक़त से वाकिफ़ थी वही प्रणव अभी भी अंधेरे मे था. रंभा & शाह की देवेन & विजयंत मेहरा के हराड जाने के बाद 1 मुलाकात हुई थी जिसमे उन्होने समीर की मौत की सारी प्लॅनिंग की थी.शाह ने पर्दे के पीछे रह के 1 ट्रक ड्राइवर को ये काम सौंपा था.रंभा उसके साथ हर वक़्त मौजूद रही थी.दोनो ने उसी दिन तय कर लिया था की किस दिन रंभा क्लेवर्त जाएगी & उसके बाद किस दिन दोनो शादी करेंगे. रंभा अगले दिन क्लेवर्त के होटेल वाय्लेट पहुँची.अगले 3 दिनो तक वो 1 दुखी विधवा का नाटक करती रही & चौथे दिन उसने उसी बुंगले मे जाने की बात कही जहा वो & विजयंत ठहरे थे & देवेन चोरी से घुसा था.अब होटेल वालो को क्या करना था इस से.वो मालकिन थी जहा मर्ज़ी जाए,जो मर्ज़ी करे! रंभा ने विजयंत के उस दोस्त से पहले ही बात कर ली थी & उसने खुशी-2 उसे वाहा की चाभी दी थी.रंभा 1 रात वाहा रही & अगली सुबह 1 बॅग लेके 1 कार खुद चलके उस मंदिर पे पहुँची जहा उसे महादेव शाह से शादी करनी थी. उस मंदिर के 1 कमरे मे उसने कपड़े बदले.शाह अपनी होने वाली दुल्हन के लिए गहने लाया था जिन्हे रंभा ने अपने बदन पे सजाया.इस मौके के लिए उसने खुद ही 1 सारी चुनी थी.उसी सारी मे 2 घंटे बाद वो शाह की बीवी बन चुकी थी.पति की मौत के 15 दिनो बाद ही रंभा ने दूसरी शादी कर ली थी. मंदिर से निकलते-2 शाम ढल चुकी थी.रंभा ने अपनी कार महादेव शाह के ड्राइवर के सुपुर्द की & खुद उसकी कार मे बैठ उसके साथ उसके बंगल को चल दी.शाह ने उसे इस बारे मे भी पहले ही बता दिया था.शाह बहुत खुश था.उसे तो लग रहा था की वो दुनिया का सबसे खुशकिस्मत इंसान है.वो कार चलते हुए बार-2 अपनी नयी-नवेली दुल्हन को देखे जा रहा था.अपनी खुशी मे उसका ध्यान उस कार पे नही गया जो मंदिर से ही उसके पीछे लगी थी. मंदिर क्लेवर्त के बाहर था & शाह का घर भी वाहा से दूर था.घर जाने से पहले रास्ते मे शाह ने खाना पॅक करवाया जिसे घर पहुँचते ही दोनो ने खाया.ये सब निबटते रात के 10 बज गये. "ओह!रुकिये ना!",शाह ने खाना ख़त्म होते ही अपनी दुल्हन को बाहो मे भर लिया था,"ऐसे नही.",रंभा उसे खुद से दूर करती शोखी से मुस्कुराइ,"..आज हमारी सुहागरात है & वो ऐसे नही मानूँगी मैं.मेरा कमरा सज़ा है या नही?",कमर पे हाथ रख उसने अपने शौहर से सवाल किया. "उपर जाके देख लो.",शाह की आँखो मे उसकी बात से वासना के लाल डोरे तैरने लगे थे. "ठीक है.आपको जब बुलाऊं तब आईएगा.",रंभा साथ लाया बाग उठा मुस्कुराती सीढ़िया चढ़ने लगी.शाह वही हॉल मे बैठ गया & टीवी देख वक़्त काटने लगा.45 मिनिट बाद उसके कानो मे रंभा के बुलाने की आवाज़ आई तो वो किसी जवान लड़के की तरह सीढ़िया फलंगता उपर कमरे तक पहुँचा. महादेव शाह कमरे मे दाखिल हुआ तो सामने का नज़ारा देख उसका दिल खुशी & रोमांच से भर गया.फूलो से भारी सेज के बीचोबीच गहरे लाल रंग के लहँगे मे लाल ओढनी मे चेहरा छिपाए रंभा बैठी थी.मद्धम रोशनी माहौल को & रोमानी बना रही थी.शाह मुस्कुराता बिस्तर की ओर बढ़ा & अपनी दुल्हन के पास बैठ उसका घूँघट उठाया.रंभा की माँग मे टीका चमक रहा था & नाक मे नाथ.उसकी आँखे हया के मारे बंद थी.रंभा ने ये सारा नाटक शाह को अपने जाल मे फँसाए रखने के लिए किया था पर सच्चाई ये थी की माहौल ने उसपे भी असर किया था & उसकी शर्म पूरी तरह से नाटक नही थी. शाह ने रंभा की ठुड्डी पकड़ उसका चेहरा उपर किया.उसे यकीन नही हो रहा था की उसने शादी कर ली थी.जिस चीज़ को वो सारी उम्र फ़िज़ूल समझता रहा,आज इस लड़की की वजह से वो उसकी ज़िंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन गयी थी.रंभा की धड़कने तेज़ हो गयी थी..ऐसा तो उसे समीर के साथ अपनी पहली सुहागरात के वक़्त भी महसूस नही हुआ था..शाह उसके रूप को निहारे जा रहा था..वो इस चेहरे को चूम चुका था,इस नशीले जिस्म के रोम-2 से अच्छी तरह वाकिफ़ था..उसे बाहो मे भर जी भर के प्यार किया था उसने..मगर फिर भी आज वो उसे नयी लग रही थी,आनच्छुई लग रही थी. शाह आगे झुका & रंभा के सुर्ख लाबो को हल्के से चूम लिया.रंभा ने शर्मा के मुँह फेर लिया.शाह मुस्कुराया & उसके सर से ओढनी को नीचे सरका दिया.ऐसा करते ही उसकी सांस तेज़ हो गयी & उसका हलक सूख गया.रंभा ने चोली ही ऐसी पहनी थी.स्ट्रिंग बिकिनी के टॉप की तरह गले मे माला की तरह 1 डोरी & पीठ पे2 पतली बँधी डोरियो के सहारे उसके सीने को ढँकी चोली के गले से उसका क्लीवेज नज़र आ रहा था.शाह ने पीछे देखा & रंभा की नंगी पीठ देख उसका लंड खड़ा हो गया.रंभा ने बहुत ढूँदने के बाद ये चोली पसंद की थी क्यूकी उसे पता था कि उसे इसमे देख उसका दूसरा शौहर जोश मे पागल हो जाएगा. रंभा के मेहंदी लगे हाथ उसके घुटनो पे थे.शाह झुका & उसके हाथो को चूम लिया.रंभा ने शर्मा के हाथ पीछे खिचने चाहे तो शाह ने उसका बाया हाथ पकड़ लिया & उसकी हथेली चूम ली.रंभा उसके होंठो की च्छुअन से सिहर उठी.शाह उसकी कलाई से कंगन & चूड़िया उतारते हुए चूमने लगा.कुच्छ ही पॅलो मे बिस्तर के 1 कोने मे उसकी दोनो कलाईयो से उतरे कंगन & चूड़िया पड़ी थी & शाह उसके दोनो हाथो को बेतहाशा चूमे जा रहा था.रंभा शर्म से मुस्कुराते हुए हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी पर शाह की पकड़ मज़बूत थी. उसके हाथो को पकड़े हुए शाह उसके चेहरे पे झुका & उसके बाए गाल को चूमने लगा.रंभा अब मस्त हो रही थी.शाह उसके दाए गाल को चूमने लगा पर उसकी नाथ आड़े आने लगी.शाह ने उसकी नाथ उतारी & उसे बाहो मे भर लिया.नंगी पीठ पे उसके आतूरता से फिरते हाथो ने रंभा को मस्ती मे सिहरा दिया & वो उसकी बाहो मे पिघलने लगी.शाह उसके चेहरे को अपने होंठो की गर्माहट से लाल किए जा रहा था.शाह उसके बाए गाल को चूमते हुए उसके बाए कान तक पहुँचा जहा लटका झुमका उसे चुभ गया.झुमका बस कान के छेद मे लटका हुआ था.शाह ने उसे दन्तो से पकड़ा & उतार दिया & फिर उसकी कान की लौ को जीभ से हल्के से चटा & फिर काट लिया.रंभा मस्ती मे करही & जब उसके शौहर ने यही हरकत दाए कान के साथ दोहराई तो उसने भी उसे बाहो मे कस लिया. शाह उसके माथे को चूम रहा था.उसने उसकी माँग से टीका हटाया & अपने नाम का सिंदूर देख उसका दिल रंभा के लिए मोहब्बत & जोश से भर गया.उसने उसकी माँग चूमि & दाया हाथ पीछे ले जा उसके जुड़े को खोल दिया.रंभा की गोरी पीठ पे काली ज़ूलफे बिखर गयी.शाह उसकी रेशमी ज़ुल्फो को उसकी पीठ पे सहलाने लगा तो रंभा के जिस्म मे झुरजुरी दौड़ गयी.शाह उसे बाहो मे भर चूमते हुए लिटा रहा था.फूलो से भरे बिस्तर पे दोनो लेट गये & 1 दूसरे को चूमने लगे.दोनो के हाथ 1 दूसरे के जिस्म पे फिसल रहे थे & होठ सिले हुए थे.ज़ुबाने आपस मे गुत्थमगुत्था थी & जिस्म 1 दूसरे से मिलने को बेताब थे. रंभा इस वक़्त सब भूल चुकी थी.उसे उस कमरे के रोमानी माहौल के सिवा & किसी बात का होश नही था.पाजामे मे क़ैद शाह का लंड उसकी चूत पे दबा था,उसकी चूचियाँ वो अपने सीने से पीस रहा था & उसकी मज़बूत बाहे उसकी कमर को जकड़े हुई थी.शाह के मर्दाना जिस्म की नज़दीकी से रंभा की चूत अब बहुत मस्त हो गयी थी.शाह उसके होंठो को छ्चोड़ चूमता हुआ उसकी गर्देन पे आ गया.रंभा उसके बालो को सहला रही थी.शाह उसके क्लीवेज को चूम रहा था & उसका दाया हाथ उसके पेट पे घूम रहा था.वो उसकी नाभि को कुरेदता & फिर उसके चिकने पेट को सहलाने लगता.रंभा की चूत की कसक अब बहुत बढ़ गयी थी & वो अपनी जंघे आपस मे रगड़ने लगी थी.शाह को अब उसके जिस्म का तजुर्बा हो चुका था & वो अपनी दुल्हन की हालत बखूबी समझ रहा था. वो उसके सीने को चूमते हुए नीचे उतरा & उसके पेट को चूमने लगा.रंभा आहे भरने लगी.शाह अपनी ज़ुबान उसके पेट पे घुमाता & फिर पेट के हिस्से को मुँह मे भर चूस लेता.रंभा बिस्तर पे कसमसा रही थी & उसके बालो को नोच रही थी.शाह ने ज़ुबान उसकी नाभि मे उतार दी & घुमाने लगा.अब बात रंभा की बर्दाश्त के बाहर हो गयी.वो शाह के सर पकड़ उसकी ज़ुबान को अपनी नाभि से अलग करने की कोशिश करने लगी,उस से ये एहसास सहा नही जा रहा था.पर शाह ने उसकी कोशिश नाकाम कर दी & उसकी नाभि को & शिद्दत से चाटने लगा & तब तक चाटता रहा जब तक रंभा झाड़ नही गयी & सुबकने लगी. शाह उसके पैरो के पास चला गया & उन्हे चूमने लगा.ऐसा करने से उसके पैरो की पायल बजने लगी & उसकी रुनझुन ने माहौल को & रोमानी बना दिया.शाह उसके पैरो की उंगलियो को चूमने के बाद उपर बढ़ने लगा.जैसे-2 वो उपर बढ़ रहा था,वैसे-2 उसका लहंगा भी उपर सरकने लगा.ज्यो-2 उसकी गोरी टाँगे नुमाया हो रही थी,शाह का जोश भी बढ़ रहा था.रंभा अभी भी अपनी भारी-भरकम जंघे मस्ती मे आहत हो रगड़ रही थी.शाह उसकी टाँगो को चूमते हुए उसके घुटनो तक आ गया था & उन्हे चूम रहा था.उसके हाथ लहँगे को रंभा की कमर तक उठा चुके थे & उसकी मखमली जाँघो पे बेसब्री से घूम रहे थे.रंभा की आहें अब & तेज़ी से कमरे मे गूँज रही थी. शाह उसके घुटनो के बाद उसकी जाँघो पे आया & उन्हे ना केवल चूमने लगा बल्कि चूसने भी लगा.रंभा मस्ती मे बिस्तर की चादर & सर के नीचे के तकिये को भींच रही थी & ऐसा करने मे उसके हाथो तले बिस्तर पे बिछि फूलो की पंखुड़िया पिस रही थी.शाह उसकी चूत तक पहुँच गया था.लाल रंग की छ्होटी सी सॅटिन पॅंटी मे ढँकी चूत की नशीली खुश्बू नाक से टकराते ही शाह उसे चोदने को आतुर हो उठा पर वो जानता था की थोड़ा सब्र रखने से मज़ा भी दोगुना हो जाएगा. ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ क्रमशः....... JAAL paart--93 gataank se aage...... "nahi,vakil sahab hume koi aitraz nahi.",vakil ki baat pe Pranav,Rita & Shipra ne 1 dusre ko dekha & fir rita ne jawab diya. "achhi baat hai.to mera kaam khatm hota hai.mr.pranav,sameer ke baad de facto CEO to aap hi hain.ab aap hi ki ye zimmedari banti hai ki jald se jald shareholders ki meeting bulayen & fir group ke malikana haq ki baate saaf kare." "ji,vakil sahab.",vakil ne sab se vida li to pranav use bahar tak chhodne aaya.use yakin nahi ho raha tha ki uska sapna sach hone vala tha.uske zehan me pichhle 10 dino ki baate ghum rahi thi.vo yakinan sameer ki hi lash thi.usne bhi pehchana tha & rambha ne bhi.use Mahadev Shah pe bahut gussa aaya tha ki usne use bina bataye ye kaam kar diya.vo shah ko chah kar bhi fone nahi kar askta tha kyuki mamla abhi police ke hath se nikla nahi tha. sameer ki lash 1 tabut me band kar mehra parivar ke bungle ke 1 hal me rakhi gayi thi jaha sabhi use shraddhanjali dene aa rahe the.shah bhi aaya & vahi sabki nazar bacha sameer ne us se ye sawal kiya. "par pranav,maine kuchh nahi kiya.main to bas soch hi raha tha is bare me & ye hadsa ho gaya." "matlab aapne nahi karaya ye sab?",pranav ki aankhe hairat se phat gayi thi..to kya taqdeer uspe meherban thi?..ab use sari zindagi is raaz ko seene me dabaye rakhne ki bhi zarurat nahi thi. sameer ki maut ki khabra sunte hi rita ne uska gireban pakad liya tha & uspe ilzam lagaya tha ki sameer ka accident karwa use lachar banane ke chakkar me pranav ne hi ye sab karaya tha.badi mushkil se pranav apni saas ko samjha paya tha.vo sach bol raha tha & rita ko uspe yakin karna hi pada tha..bas ab 15 din baad sab kuchh uska hoga..rambha to bas naam ki malkin hogi. "pranav..",vo apna naam sun khayalo se bahar aaya. "h-haan..are rambha.bolo?" "main kuchh din ke liye yaha se bahar jana chahti hu." "bahar?kaha?.. kyu?" "bas pranav yaha rehne me ab mera ji ghabrata hai." "main tumhari halat samajhta hu,rambha par bas meeting ho jane do fir chali jana." "meeting kab tak hogi?" "dekho,jald se jald bhi karwaoon to bhi 15-20 din to lag hi jayenge." "to please pranav mujhe jane do,main meeting ke liye aa jaoongi." "par jaogi kaha?" "Clayworth." "clayworth?" "haan,pranav.main yaha se door jana chahti hu & vo jagah mujhe pasand hai." "ok,main vaha Hotel Violet me ittila kar deta hu." "thanks,pranav.",rambha badi shalinta se uske gale lagi,"..tum mera kitna bada sahara ho ye tumhe pata nahi." "please,rambha.aisi baate kar mujhe sharminda na karo.",dono puri tarah se natak kar rahe the par jaha rambha pranav ki haqeeqat se vakif thi vahi pranav abhi bhi andhere me tha. rambha & shah ki Deven & Vijayant Mehra ke Haraad jane ke baad 1 mulakat hui thi jisme unhone sameer ki maut ki sari planning ki thi.shah ne parde ke peechhe reh ke 1 truck driver ko ye kaam saunpa tha.rambha uske sath har waqt maujood rahi thi.dono ne usi din tay kar liya tha ki kis din rambha clayworth jayegi & uske baad kis din dono shadi karenge. rambha agle din clayworth ke hotel violet pahunchi.agle 3 dino tak vo 1 dukhi vidhwa ka natak karti rahi & chauthe din usne usi bungle me jane ki baat kahi jaha vo & vijayant thehre the & deven chori se ghusa tha.ab hotel valo ko kya karna tha is se.vo malkin thi jaha marzi jaye,jo marzi kare! rambha ne vijayant ke us dost se pehle hi baat kar li thi & usne khushi-2 use vaha ki chabhi di thi.rambha 1 raat vaha rahi & agli subah 1 bag leke 1 car khud chalake us mandir pe pahunchi jaha use mahadev shah se shadi karni thi. us mandir ke 1 kamre me usne kapde badle.shah apni hone vali dulhan ke liye gehne laya tha jinhe rambha ne apne badan pe sajaya.is mauke ke liye usne khud hi 1 sari chuni thi.usi sari me 2 ghante baad vo shah ki biwi ban chuki thi.pati ki maut ke 15 dino baad hi rambha ne dusri shadi kar li thi. Mandir se nikalte-2 sham dhal chuki thi.Rambha ne apni car Mahadev Shah ke driver ke supurd ki & khud uski car me baith uske sath uske bungle ko chal di.shah ne use is bare me bhi pehle hi bata diya tha.shah bahut khush tha.use to lag raha tha ki vo duniya ka sabse khushkismat insan hai.vo car chalate hue baar-2 apni nayi-naveli dulhan ko dekhe ja raha tha.apni khushi me uska dhyan us car pe nahi gaya jo mandir se hi uske peechhe lagi thi. mandir clayworth ke bahar tha & shah ka ghar bhi vaha se door tha.ghar jane se pehle raste me shah ne khana pack karwaya jise ghar pahunchte hi dono ne khaya.ye sab nibtate raat ke 10 baj gaye. "oh!rukiye na!",shah ne khana khatm hote hi apni dulhan ko baaho me bhar liya tha,"aise nahi.",rambha use khud se door karti shokhi se muskurayi,"..aaj humari suhagraat hai & vo aise nahi manaungi main.mera kamra saja hai ya nahi?",kamar pe hath rakh usne apne shauhar se sawal kiya. "upar jake dekh lo.",shah ki aankho me uski baat se vasna ke laal dore tairne lage the. "thik hai.aapko jab bulaoon tab aaiyega.",rambha sath laya bag utha muskurati seedhiya chadhne lagi.shah vahi hall me baith gaya & tv dekh waqt katne laga.45 minute baad uske kano me rambha ke bulane ki aavaz aayi to vo kisi jawan ladke ki tarah seedhiya falangta upar kamre tak pahuncha. Mahadev Shah kamre me dakhil hua to samne ka nazara dekh uska dil khushi & romanch se bhar gaya.phoolo se bhari sej ke beechobeech gehre laal rang ke lehange me laal odhni me chehra chhipaye Rambha baithi thi.maddham roshni mahaul ko & romani bana rahi thi.shah muskurata bistar ki or badha & apni dulhan ke paas baith uska ghunghat uthaya.rambha ki mang me teeka chamak raha tha & naak me nath.uski aankhe haya ke mare band thi.rambha ne ye sara natak shah ko apne jaal me phansaye rakhne ke liye kiya tha par sachchai ye thi ki mahaul ne uspe bhi asar kiya tha & uski sharm puri tarah se natak nahi thi. Shah ne rambha ki thuddi pakad uska chehra upar kiya.use yakin nahi ho raha tha ki usne shadi kar lit hi.jis chiz ko vo sari umra fizul samajhta raha,aaj is ladki ki vajah se vo uski zindagi ka sabse aham hissa ban gayi thi.rambha ki dhadkane tez ho gayi thi..aisa to use Sameer ke sath apni pehli suhagraat ke waqt bhi mehsus nahi hua tha..shah uske roop ko nihare ja raha tha..vo is chehre ko chum chuka tha,is nashile jism ke rom-2 se achhi tarah vakif tha..use baaho me bhar ji bhar ke pyar kiya tha usne..magar fir bhi aaj vo use nayi lag rahi thi,anchhui lag rahi thi. Shah aage jhuka & rambha ke surkh labo ko halke se chum liya.rambha ne sharma ke munh fer liya.shah muskuraya & uske sar se odhni ko neeche sarka diya.aisa karte hi uski sans tez ho gayi & uska halak such gaya.rambha ne choli hi aisi pehni thi.string bikini ke top ki tarah gale me mala ki tarah 1 dori & pith pe2 patli bandhi doriyo ke sahare uske seene ko dhanki choli ke gale se uska cleavage nazar aa raha tha.shah ne peechhe dekha & rambha ki nangi pith dekh uska lund khada ho gaya.rambha ne bahut dhoondne ke baad ye choli pasand ki thi kyuki use pata tha ki use isme dekh uska dusra shauhar josh me pagal ho jayega. Rambha ke mehandi lage hath uske ghutno pe the.shah jhuka & uske hatho ko chum liya.rambha ne Sharma ke hath peechhe khichne chahe to shah ne uska baya hath pakad liya & uski hatheli chum li.rambha uske hotho ki chhuan se sihar uthi.shah uski kalai se kangan & chudiya utarte hue chumne laga.kuchh hi palo me bistar ke 1 kone me uski dono kalaiyo se utre kangan & chudiya padi thi & shah uske dono hatho ko bethasha chume ja raha tha.rambha sharm se muskurate hue hath chhudane ki koshish kar rahi thi par shah ki pakad mazbut thi. Uske hatho ko pakde hue shah uske chehre pe jhuka & uske baye gaal ko chumne laga.rambha ab mast ho rahi thi.shah uske daye gaal ko chumne laga par uski nath aade aane lagi.shah ne uski nath utari & use baaho me bhar liya.nangi pith pe uske aaturta se firte hatho ne rambha ko masti me sihra diya & vo uski baaho me pighalne lagi.shah uske chehre ko apne hotho ki garmahat se laal kiye ja raha tha.shah uske baye gaal ko chumte hue uske baye kaan tak pahuncha jaha latka jhumka use chubh gaya.jhumka bas kaan ke chhed me latka hua tha.shah ne use danto se pakda & utar diya & fir uski kaan ki lau ko jibh se halke se chata & fir kata liya.rambha masti me karahi & jab uske shauhar ne yehi harkat daye kaan ke sath dohrayi to usne bhi use baaho me kas liya. Shah uske mathe ko chum raha tha.usne uski mang se tika hataya & apne naam ka sindur dekh uska dil rambha ke liye mohabbat & josh se bhar gaya.usne uski mang chumi & daya hath peechhe le ja uske jude ko khol diya.rambha ki gori pith pe kali zulfen bikhar gayi.shah uski reshmi zulfo ko uski pith pe sehlane laga to rambha ke jism me jhurjhuri daud gayi.shah use baaho me bhar chumte hue lita raha tha.phoolo se bhare bistar pe dono let gaye & 1 dusre ko chumne lage.dono ke hath 1 dusre ke jism pe fisal rahe the & hoth sile hue the.zubane aapas me gutthamguttha thi & jism 1 dusre se milne ko betab the. Rambha is waqt sab bhul chuki thi.use us kamre ke romani mahaul ke siwa & kisi baat ka hosh nahi tha.pajame me qaid shah ka lund uski chut pe daba tha,uski chhatiya vo apne seene se pees raha tha & uski mazbut baahe uski kamar ko jakde hui thi.shah ke mardana jism ki nazdiki se rambha ki chut ab bahut mast ho gayi thi.shah uske hotho ko chhod chumta hua uski garden pe aa gaya.rambha uske baalo ko sehla rahi thi.shah uske cleavage ko chum raha tha & uska daya hath uske pet pe ghum raha tha.vo uski nabhi ko kuredta & fir uske chikne pet ko sehlane lagta.rambha ki chut ki kasak ab bahut bahd gayi thi & vo apni janghe aapas me ragadne lagi thi.shah ko ab uske jism ka tajurba ho chuka tha & vo apni dulhan ki halat bakhubi samajh raha tha. 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Shah uske pairo ke paas chala gaya & unhe chumne laga.aisa karne se uske pairo ki payal bajne lagi & uski runjhun ne mahaul ko & romani bana diya.shah uske pairo ki ungliyo ko chumne ke baad upar badhne laga.jaise-2 vo upar badh raha tha,vaise-2 uska lehanga bhi upar sarakne laga.jyo-2 uski gori tange numaya ho rahi thi,shah ka josh bhi badh raha tha.rambha abhi bhi apni bhari-bharkam janghe masti me aahat ho ragad rahi thi.shah uski tango ko chumte hue uske ghutno taka a gaya tha & unhe chum raha tha.uske hath lehange ko rambha ki kamar tak utha chuke the & uski makhmali jangho pe besabri se ghum rahe the.rambha ki aahen ab & tezi se kamre me gunj rahi thi. Shah uske ghutno ke baad uski jangho pe aaya & unhe na keval chumne laga balki chusne bhi laga.rambha masti me bistar ki chadar & sar ke neeche ke takiye ko bhinch rahi thi & aisa karne me uske hatho tale bistar pe bichhi phoolo ki pankhudiya pis rahi thi.shah uski chut tak pahunch gaya tha.laal rang ki chhoti si satin panty me dhanki chut ki nashili khushbu naak se takrate hi shah use chodne ko aatur ho utha par vo janta tha ki thoda sabr rakhne se maza bhi doguna ho jayega. ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ kramashah.......

 
जाल पार्ट--94 गतान्क से आगे...... उसके हाथ रंभा की बगल मे गये & लहँगे को खोल उसके जिस्म से उतार दिया.अब रंभा केवल चोली & पॅंटी मे थी.शाह उसके हुस्न को देख दीवाना हो रहा था.वो झुका & अपनी दुल्हन को बाहो मे भरा तो उसकी मस्ती मे डूबी बीवी ने भी उसे बाहो मे कस लिया.रंभा के हाथ उसके कुर्ते मे घुस गये & उसकी पीठ पे घूमने लगे.रंभा उसकी पीठ को वैसे ही भींच रही थी जैसे बिस्तर की चादर को.वो भी शाह को नंगा देखना चाहती थी & उसने उसका कुर्ता खींच दिया. कुर्ता निकालने के बाद उसने शाह को पलट के बिस्तर पे लिटाया & उसके चेहरे पे किस्सस की झड़ी लगा दी.उसके हाथ शाह के सीन एके बालो को खींच रहे थे & कुच्छ ही देर बाद उसके होंठ भी उन्ही बालो मे थे.वो शाह के सीने को चूमती & फिर उसके निपल्स को चूस लेती.शाह आँखे बंद करके आह भरता तो वो सीने पे काट लेती.शाह जोश मे पागल हो रहा था.रंभा चूमते हुए उसके पेट तक आ पहुँची थी.उसने शाह की नाभि मे जीभ फिराई & फिर वाहा के बालो को दाँत मे पकड़ के खींचा.शाह का लंड अब पाजामे की क़ैद से बाहर आने को बिल्कुल बहाल हो गया. रंभा ने पाजामे की डोर को दाँत से पकड़ उसकी गाँठ खोली & उसे नीचे सरका दिया.शाह अब पूरा नंगा था.रंभा ने लंड की फोर्सकीन को दन्तो मे बहुत हल्के से पकड़ के नीचे की तरफ खींचा तो शाह दर्द & अंसती के मिलेजुले एहसास से कराहा.रंभा मुस्कुराइ & उसकी फॉरेस्किन को नीचे कर उसके प्रेकुं से गीले सूपदे को चूसने लगी.अब कसमसाने की बारी शाह की थी.रंभा उसके आंडो को दबाती उसके सूपदे को चुस्ती रही.उसके बाद उसने लंड को हिलाते हुए चूसना & चाटना शुरू कर दिया.जीभ की नोक को लंड की लंबाई पे चलाते हुए जब उसने आंडो को मुँह मे भरा तो शाह मस्ती से आहत हो उठ बैठा & रंभा को पकड़ के अपनी बाहो मे भर लिया. दोनो बिस्तर पे घुटनो पे खड़े 1 दूसरे से लिपटे चूम रहे थे.शाह उसकी नंगी कमर को मसल रहा था & वो शाह की उपरी बाहो & कंधो पे अपने हाथ गर्मजोशी से घुमा रही थी.शाह के हाथ उसकी कमर से फिसल उसकी पॅंटी मे घुस गये.रंभा को कोमल गंद पे उसके हाथो का सख़्त एहसास बहुत अच्छा लग रहा था.उसकी चूत मे सनसनाहट होने लगी थी.शाह उसकी गंद की फांको को कभी आपस मे दबाता तो कभी बिल्कुल फैला देता.रंभा ने मस्ती मे सर पीछे झुका लिया था & अब उसके हाथ शाह की पीठ पे थे.शाह उसके क्लीवेज को चूम रहा था. शाह ने रंभा की पॅंटी नीचे सर्काई & घुटनो पे ही उसके पीछे आ गया & उसकी ज़ुल्फो को उसके बाए कंधे के उपर से आगे कर दिया & उसकी गर्दन & पीठ को चूमने लगा.उसकी चोली की गाँठ के पास पहुँचते ही उसने उसे दन्तो से खींच के खोल दिया.वो चूमता वो नीचे बढ़ा & उसकी कमर के मांसल हिस्सो को जम के चूमा. रंभा की गंद शाह के होंठो का अगला निशाना थी & हर बार की तरह इस बार भी वो उसे देख पागल हो गया & उसकी फांको को चूमने ,चूसने के साथ-2 काटने भी लगा.उसने रंभा की पॅंटी को उसके जिस्म से पूरी तरह अलग किया & फिर घुटनो पे ही उसके पीछे आ खड़ा हुआ.रंभा के गले से चोली को निकाल उसने उसकी बाहे उपर कर दी & उन्हे सहलाने लगा.रंभा पीछे झुक गयी & उसके बाए गाल को चूमने लगी.गंद मे चुभता लंड अब उसके जिस्म की आग को बहुत भड़का चुका था.शाह के हाथ उसकी मुलायम चूचियो से आ लगे थे & उन्हे मसल रहे थे.रंभा के हाथ अपने शौहर के हाथो के उपर आ लगे & उन्हे बढ़ावा देने लगे.शाह का लंड गंद की दरार मे अटक चुक्का था & रंभा अब गंद पीछे धकेल अपने दिल की हसरत जता रही थी.शाह का बाया हाथ उसकी चूचियो से ही चिपका रहा & दाया नीचे आया & उसकी चूत मे घुस गया.रंभा ने पीछे सर झटकते हुए आह भरी & टाँगे फैला दी.काफ़ी देर तक उसकी गर्दन & गाल चूमते हुए शाह उसकी चूचियो & चूत से खेलता रहा.जब उसने देखा की रंभा की गंद लंड पे कुच्छ ज़्यादा ही ध्यान दे रही है तब उसने चूत से हाथ को अलग किया & उसकी जगह अपने लंड को उसमे उतार दिया.रंभा ने बाई बाँह शाह की गर्देन मे डाल दी & दाए हाथ को अपनी कमर को जकड़े शाह की दाई बाँह पे रख दिया & उसकी चुदाई का मज़ा लेने लगी. शाह जब धक्का लगता तो उसके लंड की आस-पास का हिस्सा रंभा की मोटी गंद से टकराता & उसके आंडो मे अजीब सा मज़ा पैदा होता जिसकी तासीर वो पूरे जिस्म मे महसूस करता.शाह रंभा के कंधो & चेहरे को चूमता हुआ धक्के लगाए जा रहा था.रंभा अपनी चूत के अंदर-बाहर होते शाह के मोटे लंड की रगड़ से पागल हो रही थी.उसकी चूत अब शाह के लंड पे & कसने लगी तो वो समझ गया कि रंभा झड़ने के करीब है.उसने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी & रंभा के दाए कंधे पे अपने होंठ दबा दिए & उसकी चूचियो को बहुत ज़ोर से भींचा.शाह का लंड चूत मे कुच्छ & अंदर जाने लगा & रंभा की चूत ने उसे अपनी क़ातिल गिरफ़्त मे कस लिया.रंभा अपने शौहर की बाहो मे झाड़ रही थी. वो निढाल हो आगे झुक गयी & बिस्तर पे घुटनो & हाथो पे हो गयी.शाह उसकी कमर पकड़े उसकी गंद की फांको को मसलता धक्के लगाए जा रहा था.रंभा मस्ती की 1 लहर से उतार दूसरी पे सवार हो गयी थी.वो & आगे झुकी & बिस्तर पे लेट गयी.शाह भी उसके उपर लेट गया & उसके जिस्म के नीचे हाथ ले जाके 1 बार फिर उसकी चूचियो को जाकड़ लिया.दोनो को जिस्मो के भर तले फूलो की पंखुड़िया पिस रही थी & उनकी खुश्बू कमरे मे फैल रही थी.रंभा शाह के नीचे मदहोशी मे आहे भरती छॅट्पाटा रही थी.शाह के लंड की रगड़ ने उसे फिर से झाड़वा दिया. शाह उसके जिस्म से उपर उठा & बिना लंड बाहर खींचे रंभा को घुमा के सीधा लिटा दिया.उसने उसकी बाई टांग को उठा के अपने दाए कंधे पे रखा & उसे चूमते हुए चोदने लगा.रंभा अब पूरी तरह मदहोश थी & अपने हाथो से अपने चेहरे & जिस्म को बेसरबरी से सहला रही थी. महादेव शाह के हर धक्के पे रंभा के पैरो की पायल बजती & उसकी छन-2 सुन रंभा को हया & मस्ती का मिलाजुला अजब मदहोश करने वाला एहसास होता.शाह तो उसकी बाई टांग को चूमते हुए पायल की खनक से मतवाला हो रहा था.रंभा पानी से निकली मच्चली की तरह बिस्तर पे छॅट्पाटा रही थी.शाह का लंड उसकी कोख पे छोटे पे चोट कर रहा था & वो मस्ती मे बावली हुई जा रही थी.उसके होंठो से आहो के साथ मस्तानी आवाज़ें निकल रही थी.शाह ने उसकी दूसरी टांग भी अपने दूसरे कंधे पे चढ़ा ली & आगे झुका. ऐसा करने से रंभा की गंद हवा मे उठ गयी & शाह का लंड उसकी चूत के & अंदर जा उसकी कोख पे थोड़ा और ज़ोर से चोट करने लगा.उसकी जंघे उसकी छातियो पे दबी थी & उसका शौहर उसके चेहरे को थाम उसे चूम रहा था.रंभा के हाथ शाह की बाहो से लेके कंधे & सर के बालो से लेके जाँघो तक घूम रहे थे.जब से शाह ने उसे सीधा करके चोदना शुरू किया था तब से रंभा कितनी बार झाड़ चुकी थी ये उसे पता नही था. वो शाह को बाहो मे भरना चाहती थी,अपनी कमर उचका उसकी ताल से ताल मिला चुदाई मे उसका भरपूर साथ देना चाहती थी पर शाह के कंधो पे चढ़ि उसकी टाँगे इस काम मे आड़े आ रही थी.शाह भी उसके जिस्म के साथ अपने जिस्म को पूरी तरह से मिलाना चाहता था.उसने उसकी टांगको कंधो से उतारा & दोनो प्रेमियो ने 1 दूसरे को आगोश मे भर लिया.रंभा ने अपनी टाँगे शाह की टाँगो पे चढ़ा फँसा दी & उनके सहारे कमर उचका उसके हर धक्के का जवाब देने लगी.शाह के हाथ उसके कंधो के नीचे से फिसल उसकी गंद के नीचे जा पहुँचे थे & उसकी फांको को मसल रहे थे.रंभा के हाथ शाह की पीठ & गंद को छल्नी करने मे जुटे थे. शाह भी बहुत तेज़ धक्के लगा रहा था & रंभा की कमर भी उतनी ही तेज़ी से उचक रही थी.दोनो के बेसब्र जिस्म अब बस चैन पा जाना चाहते थे.दोनो 1 दूसरे को ऐसे पकड़े हुए थे मानो छ्चोड़ने पे क़यामत आ जाएगी!कमरे मे जिस्मो के टकराने की आवाज़ के साथ-2 रंभा की आहें गूँज रही थी की तभी रंभा की तेज़ आह के साथ 1 और आह भी गूँजी.ये आह शाह ने भरी थी जोकि इस बात का एलान थी कि अपनी दुल्हन के साथ-2 वो भी झाड़ गया है.रंभा की कोख मे जैसे ही शाह का गर्म,गाढ़ा वीर्य गिरा उसके जिस्म मे दौड़ती बिजली और भी तेज़ हो गयी.वो झड़ने की ऐसी शिद्दत से बिल्कुल मदहोश हो गयी.शाह का जिस्म भी झटके पे झटके खाए जा रहा था.रंभा की चूत उसके लंड पे ऐसे कसी हुई थी मानो उसके सारे वीर्य को निचोड़ लेना चाहती हो.दोनो लंबी-2 साँसे ले रहे थे.शाह का सर रंभा की छातियो पे था & वो आँखे बंद किए अपनी दुनिया मे खोई हुई थी.कुच्छ पल बाद जब मदहोशी थोड़ी कम हुई तो दोनो मस्ती मे सराबोर प्रेमी 1 दूसरे को चूम 1 दूसरे को इतनी खुशी महसूस करने का शुक्रिया अदा करने लगे. "वाह!बहुत अच्छे!शाह जी विधवा से शादी कर आप तो आज समाज सेवक भी बन गये!",कमरे का दरवाज़ा धड़ाक से खुला & 1 खिल्ली उड़ाती आवाज़ आई तो दोनो चौंक के घूमे और सामने खड़े शख्स को देख हैरत से उनकी आँखे फॅट गयी. रंभा ने जल्दी से पैरो के पास रखी चादर खींच अपने नंगे बदन को ढँका. "वाह!बहूरानी..",कमर पे हाथ रखे रीता उसे देख मुस्कुरा रही थी,"..जवानी ने इतना परेशान कर दिया तुम्हे!", "रीता..",महादेव शाह अपने कपड़े पहनता उसकी ओर बढ़ा. "चुप,कामीने!",रीता गुस्से से चीखी,"..वही खड़ा रह धोखेबाज़!",शाह और रंभा ने देखा की रीता के दोनो तरफ प्रणव और शिप्रा आ खड़े हुए थे और प्रणव के हाथ मे 1 पिस्टल थी.बंदूक देख रंभा के होश फाख्ता हो गये.उसका दिल बहुत ज़ोरो से धड़कने लगा.उसने सपने मे भी नही सोचा था कि खुद रीता वाहा आ जाएगी & वो भी इस रूप मे,"प्रणव,बांधो दोनो को." रीता ने उस से पिस्टल ले दोनो की ओर तान दी.प्रणव 1 छ्होटे से बॅग को लेके आगे बढ़ा.रंभा ने देखा की शाह बिल्कुल खामोश खड़ा था.प्रणव ने बॅग खोल 1 डक्ट टेप का रोल और 2 हथकड़िया निकाली & शाह के हाथ उसके बदन के पीछे बाँधने लगा.रंभा अपने कपड़े पहनने लगी.उसकी समझ मे नही आ रहा था कि आख़िर वो लोग उन्हे बाँध क्यू रहे हैं?..पोलीस बुलाके उन्हे उसके हवाले क्यू नही करते!..ऐसी सूरते हाल मे तो पोलीस को शक़ नही पूरा यकीन होगा कि समीर की मौत मे शाह और रंभा का ही हाथ है. "ले चलो दोनो को.",रीता का रूप देख रंभा को सबसे ज़्यादा हैरानी थी.तीनो ने दोनो बंधको को बाहर निकाल 1 कार मे डाला & चल दिए.दोनो के मुँह पे टेप लगा था & मुँह से आवाज़ निकाल मदद के लिए चिल्लाना नामुमकिन था.रंभा बाहर देख रही थी & उसकी समझ मे आ रहा था कि वो कहा जा रहे हैं. "उतरो!",रीता की कड़कदार आवाज़ गूँजी.रंभा ने बिल्कुल सही सोचा था,सब कंधार फॉल्स पे आ गये थे,"..महादेव शाह,बहुत शौक है ना तुम्हे ट्रस्ट ग्रूप का मालिक बनने का.तो आज तुम वही जाओगे जहा इस ग्रूप का पहला मालिक गया है.",रंभा चौंक गयी..तो क्या रीता ही विजयंत मेहरा के इस हाल की ज़िम्मेदार है. "चलो,प्रणव.फेंको दोनो को झरने मे.बहुत शौक है दोनो को रंगरेलिया मनाने का.अब दूसरी दुनिया मे जाके करना जितनी चुदाई करनी है!",रीता के होंठो पे शैतानी मुस्कान थी.ऐसा लगता था जैसे की वो रीता नही उसकी कोई हमशक्ल हो जो रीता होने का नाटक कर रही हो. "मुझे धोखा देने की सोच अच्छा नही किया,शाह.",प्रणव मुस्कुरा रहा था & शाह को झरने के पास बने बॅरियर की ओर ले जा रहा था.शाह अभी भी खामोश था.उसे यकीन नही हो रहा था कि उस से चूक कहा हुई..आज तक वो अपनी ज़िंदगी मे बस 1 उसूल मानता आया था वो ये कि किसी भी लड़की को ज़रूरत से ज़्यादा करीब नही आने दो.उसने वो उसूल तोड़ा & आज देखो उसका खेल ख़त्म होने वाला है.प्रणव ने उसके मुँह से टेप निकाला. "1 सवाल का जवाब मिलेगा?",शाह ने पुछा तो प्रणव ने अपनी सास को देखा. "पुछो.",रीता कमर पे हाथ रखे खड़ी थी. "तुम्हे हम दोनो के बारे मे पता कैसे चला?" ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ क्रमशः....... JAAL paart--94 gataank se aage...... Uske hath rambha ki bagal me gaye & lehange ko khol uske jism se utar diya.ab rambha keval choli & panty me thi.shah uske husn ko dekh deewana ho raha tha.vo jhuka & apni dulhan ko baaho me bhara to uski masti me dubi biwi ne bhi use baaho me kas liya.rambha ke hath uske kurte me ghus gaye & uski pith pe ghumne lage.rambha uski pith ko vaise hi bhinch rahi thi jaise bistar ki chadar ko.vo bhi shah ko nanga dekhna chahti thi & usne uska kurta khinch diya. Kurta nikalne ke baad usne shah ko palat ke bistar pe litaya & uske chehre pe kisses ki jhadi laga di.uske hath shah ke seen eke baalo ko khinch rahe the & kuchh hi der baad uske honth bhi unhi balo me the.vo shah ke seene ko chumti & fir uske nipples ko chus leti.shah aankhe band karke aah bharta to vo seene pe kaat leti.shah josh me pagal ho raha tha.rambha chumte hue uske pet taka a pahunchi thi.usne shah ki nabhi me jibh firayi & fir vaha ke baalo ko dant me pakad ke khincha.shah ka lund ab pajame ki qaid se bahar aane ko bilkul behaal ho gaya. Rambha ne pajame kid or ko dant se pakad uski ganth kholi & use neeche sarka diya.shah ab pura nanga tha.rambha ne lund ki forskin ko danto me bahut halke se pakad ke neeche ki taraf khincha to shah dard & amsti ke milejule ehsas se karaha.rambha muskurayi & uski foreskin ko neeche kar uske precum se gile supade ko chusne lagi.ab kasmasane ki bari shah ki thi.rambha uske ando ko dabati uske supade ko chusti rahi.uske baad usne lund ko hilate hue chusna & chatna shuru kar diya.jibh ki nok ko lund ki lambai pe chalate hue jab usne ando ko munh me bhara to shah masti se aahat ho uth baitha & rambha ko pakad ke apni baaho me bhar liya. Dono bistar pe ghutno pe khade 1 dusre se lipate chum rahe the.shah uski nangi kamar ko masal raha tha & vo shah ki upri baaho & kandho pe apne hath garmjoshi se ghuma rahi thi.shah ke hath uski kamar se fisal uski panty me ghus gaye.rambha ko komal gand pe uske hatho ka sakht ehsas bahut achha lag raha tha.uski chut me sansanahat hone lagi thi.shah uski gand ki fanko ko kabhi aapas me dabata to kabhi bilkul faila deta.rambha ne masti me sar peechhe jhuka liya tha & ab uske hath shah ki pith pe the.shah uske cleavage ko chum raha tha. Shah ne rasmbha ki panty neeche sarkayi & ghutno pe hi uske peechhe aa gaya & uski zulfo ko uske baye kandhe ke upar se aage kar diya & uski gardan & pith ko chumne laga.uski choli ki ganth ke paas pahunchte hi usne use danto se khinch ke khol diya.vo chumta hu neeche badha & uski kamar ke mansal hisso ko jum ke chuma. Rambha ki gand shah ke hotho ka agla nishana thi & har baar ki tarah is baar bhi vo use dekh pagal ho gaya & uski fanko ko chumne ,chusne ke sath-2 kaatne bhi laga.usne rambha ki panty ko uske jism se puri tarah alag kiya & fir ghutno pe hi uske peechhe aa khada hua.rambha ke gale se choli ko nikal usne uski baahe upar kar di & unhe sehlane laga.rambha peechhe jhuk gayi & uske baye gaal ko chumne lagi.gand me chubhta lund ab uske jism ki aag ko bahut bhadka chuka tha.shah ke hath uski mulayam chhatiyo se aa lage the & unhe masal rahe the.rambha ke hath apne shauhar ke hatho ke upar aa lage & unhe badhawa dene lage.shah ka lund gand ki darar me atak chukka tha & rambha ab gand peechhe dhakel apne dil ki hasrat jata rahi thi.shah ka baya hath uski chhatiyo se hi chipka raha & daya neeche aaya & uski chut me ghus gaya.rambha ne peechhe sar jhatakte hue aah bhari & tange phaila di.kafi der tak uski gardan & gaal chumte hue shah uski choochiyo & chut se khelta raha.jab usne dekha ki rambha ki gand lund pe kuchh zyada hi da rahi hai tab usne chut se hath ko alag kiya & uski jagah apne lund ko usme utar diya.rambha ne bayi banh shah ki garden me daal di & daye hath ko apni kamar ko jakde shah ki dayi banh pe rakh diya & uski chudai ka maza lene lagi. Shah jab dhakka lagata to uske lund kea aas-paas ka hissa rambha ki moti gand se takrata & uske ando me ajib sa maza paida hota jiski taseer vo pure jism me mehsus karta.shah rambha ke kandho & chehre ko chumta hua dhakke lagaye ja raha tha.rambha apni chut ke andar-bahar hote shah ke mote lund ki ragad se pagal ho rahi thi.uski chut ab shah ke lund pe & kasne lagi to vo samajh gaya ki rambha jhadne ke karib hai.usne dhakko ki raftar badha di & rambha ke daye kandhe pe apne honth daba diye & uski choochiyo ko bahut zor se bhincha.shah ka lund chut me kuchh & andar jane laga & rambha ki chut ne use apni qatil giraft me kas liya.rambha apne shauhar ki baaho me jhad rahi thi. Vo nidhal ho aage jhuk gayi & bistar pe ghutno & hatho pe ho gayi.shah uski kamar pakde uski gand ki fanko ko masalta dhakke lagae ja raha tha.rambha masti ki 1 lehar se utar dusri pe savar ho gayi thi.vo & aage jhuki & bistar pe let gayi.shah bhi uske upar let gaya & uske jism ke neeche hath le jake 1 baar fir uski choochiyo ko jakad liya.dono ko jismo ke bhar tale phoolo ki pankhudiya pis rahi thi & unki khushbu kamre me phail rahi thi.rambha shah ke neeche madhoshi me aahe bharti chhatpata rahi thi.shah ke lund ki ragad ne use fir se jhadwa diya. Shah uske jism se upar utha & bina lund bahar khinche rambha ko ghuma ke seedha lita diya.usne uski bayi tang ko utha ke apne daye kandhe pe rakha & use chumte hue chodne laga.rambha ab puri tarah madhosh thi & apne hatho se apne chehre & jism ko besarbri se sehla rahi thi. Mahadev Shah ke har dhakke pe Rambha ke pairo ki payal bajti & uski chhan-2 sun rambha ko haya & masti ka milajula ajab madhosh karne vala ehsas hota.shah to uski bayi tang ko chumte hue payal ki khanak se matwala ho raha tha.rambha pani se nikli machhli ki tarah bistar pe chhatpata rahi thi.shah ka lund uski kokh pe chote pe chot kar raha tha & vo masti me bawli hui ja rahi thi.uske hontho se aaho ke sath mastani aavazen nikal rahi thi.shah ne uski dusri tang bhi apne dusre kandhe pe chadha li & aage jhuka. aisa karne se rambha ki gand hawa me uth gayi & shah ka lund uski chut ke & andar ja uski kokh pe thoda & zor se chot karne laga.uski janghe uski chhatiyo pe dabi thi & uska shauhar uske chehre ko tham use chum raha tha.rambha ke hath shah ki baaho se leke kandhe & sar ke baalo se leke jangho tak ghum rahe the.jab se shah ne use seedha karke chodne shuru kiya tha tab se rambha kitni baar jhad chuki thi ye use pata nahi tha. vo shah ko baaho me bharna chahti thi,apni kamar uchka uski taal se taal mila chudai me uska bharpur sath dena chahti thi par shah ke kandho pe chadhi uski tange is kaam me aade aa rahi thi.shah bhi uske jism ke sath apne jism ko puri tarah se milana chahta tha.usne uski tangko kandho se utara & dono premiyo ne 1 dusre ko agosh me bhar liya.rambha ne apni tange shah ki tango pe chadha phansa di & unke sahare kamar uchka uske har dhakke ka jawab dene lagi.shah ke hath uske kandho ke neeche se fisal uski gand ke neeche ja pahunche the & uski phanko ko masal rahe the.rambha ke hath shah ki pith & gand ko chhalni karne me jute the. shah ba bahut tez dhakke laga raha tha & rambha ki kamar bhi utni hi tezi se uchak rahi thi.dono ke besabr jism ab bas chain pa jana chahte the.dono 1 dusre ko aise pakde hue themano chhodne pe qayamat aa jayegi!kamre me jismo ke takrane ki aavaz ke sath-2 rambha ki aahen gunj rahi thi ki tabhi rambha ki tez aah ke sath 1 & aah bhi gunji.ye aah shah ne bhari thi joki is baat ka elan thi ki apni dulhan ke sath-2 vo bhi jhad gaya hai.rambha ki kokh me jaise hi shah ka garm,gadha virya gira uske jism me daudti bijli & bhi tez ho gayi.vo jhadne ki aisi shiddat se bilkul madhosh ho gayi.shah ka jism bhi jhatke pe jhatke khaye ja raha tha.rambha ki chut uske lund pe aise kasi hui thi mano uske sare virya ko nichod lena chahti ho.dono lambi-2 sanse le rahe the.shah ka sar rambha ki chhatiyo pe tha & vo aankhe band kiye apni duniya me khoyi hui thi.kuchh pal baad jab madhoshi thodi kam hui to dono masti me sarabor premi 1 dusre ko chum 1 dusre ko itni khushi mehsus karane ka shukriya ada karne lage. "vaah!bahut achhe!shah ji vidhwa se shadi kar aap to aaj samaj sevak bhi ban gaye!",kamre ka darwaza dhadak se khula & 1 khilli udati aavaz aayi to dono chaunk ke ghume & samne khade shakhs ko dekh hairat se unki aankhe phat gayi. Rambha ne jaldi se pairo ke paas rakhi chadar khinch apne nange badan ko dhanka. "vaah!bahurani..",kamar pe hath rakhe Rita use dekh muskura rahi thi,"..jawani ne itna pareshan kar diya tumhe!", "Rita..",Mahadev Shah apne kapde pehanta uski or badha. "chup,kamine!",rita gusse se chikhi,"..vahi khada reh dhokhebaaz!",shah & rambha ne dekha ki rita ke dono taraf Pranav & Shipra aa khade hue the & pranav ke hath me 1 pistol thi.banduk dekh rambha ke hosh fakhta ho gaye.uska dil bahut zoro se dhadakne laga.usne sapne me bhi nahi socha tha ki khud rita vaha aa jayegi & vo bhi is roop me,"pranav,bandho dono ko." rita ne us se pistol le dono ki or taan di.pranav 1 chhote se bag ko leke aage badha.rambha ne dekha ki shah bilkul khamosh khada tha.pranav ne bag khol 1 duct tape ka roll & 2 hathkadiya nikali & shah ke hath uske badan ke peechhe bandhne laga.rambha apne kapde pehanane lagi.uski samajh me nahi aa raha tha ki aakhir vo log unhe bandh kyu rahe hain?..police bulake unhe uske hawale kyu nahi karte!..aisi surate haal me to police ko shaq nahi pura yakin hoga ki Sameer ki maut me shah & rambha ka hi hath hai. "le chalo dono ko.",rita ka roop dekh rambha ko sabse zyada hairani thi.teeno ne dono bandhako ko bahar nikal 1 car me dala & chal diye.dono ke munh pe tape laga tha & munh se aavaz nikal madad ke liye chillana namumkin tha.rambha bahar dekh rahi thi & uski samajh me aa raha tha ki vo kaha ja rahe hain. "utro!",rita ki kadakdar aavaz gunji.rambha ne bilkul sahi socha tha,sab Kamdhar Falls pe aa gaye the,"..mahadev shah,bahut shauk hai na tumhe Trust Group ka mailk banane ka.to aaj tum vahi jaoge jaha is group ka pehla malik gaya hai.",rambha chaunk gayi..to kya rita hi Vijayant Mehra ke is haal ki zimmedar hai. "chalo,pranav.fenko dono ko jharne me.bahut shauk hai dono ko rangreliya manane ka.ab dusri duniya me jake karna jitni chudai karni hai!",rita ke hotho pe shaitani muskan thi.aisa lagta tha jaise ki vo rita nahi uski koi humshakl ho jo rita hone ka natak kar rahi ho. "mujhe dhokha dene ki soch achha nahi kiya,shah.",pranav muskura raha tha & shah ko jahrne ke paas bane barriere ki or le ja raha tha.shah abhi bhi khamosh tha.use yakin nahi ho raha tha ki us se chuk kaha hui..aaj tak vo apni zindagi me bas 1 usul manta aaya tha vo ye ki kisi bhi ladki ko zarurat se zyada karib nahi aane do.usne vo usul toda & aaj dekho uska khel khatm hone vala hai.pranav ne uske munh se tape nikala. "1 sawal ka jawab milega?",shah ne puchha to pranav ne apni saas ko dekha. "puchho.",rita kamar pe hath rakhe khadi thi. "tumhe hum dono ke bare me pata kaise chala?" ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ kramashah.......

 
जाल पार्ट--95

गतान्क से आगे......

"सब तुम्हारी ग़लती थी,दयाल.",रंभा की आँखे हैरत से फॅट गयी..दयाल!..उसकी मा की ज़िंदगी बेनूर करने वाला,देवेन को जैल भिजवाने वाला दयाल,"..तुमने मुझे भेजा था ना वो पता चेक करने के लिए.उस पते को चेक कर मैं किसी काम से ट्रस्ट फिल्म्स के दफ़्तर जा रही थी.वाहा के बेसमेंट मे मैने तुम्हारी कार देखी.पहले तो मैने सोचा कि तुम्हे रोकू पर फिर ना जाने क्यू सोचा कि देखु तुम यहा क्या कर रहे हो.उसके बाद तुम्हारा पीछा किया & उस दिन से पीछा ही कर रही हू." "..और ये सोच रहे हो ना कि मेरी कार तुम कैसे नही पहचान पाए तो मेरे धोखेबाज़ आशिक़ मेरी कार मे कुच्छ गड़बड़ थी और मैं अपनी बेटी की कार लेके आई थी.",रंभा टेप के पीछे से चिल्लाना चाह रही थी.उसकी आँखो मे आँसू छलक आए थे.वो इस वक़्त बहुत असहाय महसूस कर रही थी.इतने दिन वो अपने दुश्मन के साथ हमबिस्तर होती रही और उसका भरपूर मज़ा उठाती रही..उसे खुद से घिन हो गयी..क्यू है वो ऐसी?..अपने जिस्म की गुलाम! प्रणव शाह को झरने के किनारे तक ले गया था & धक्का देने ही वाला था की सारा इलाक़ा रोशनी से नहा गया और 1 कड़कदार आवाज़ गूँजी,"रुक जाओ!" रंभा,रीता,प्रणव & शिप्रा सभी उस आवाज़ के मालिक से अच्छी तरह वाकिफ़ थे.रंभा के कानो मे जैसे ही वो आवाज़ पड़ी उसका दिल खुशी से भर गया & राहत महसूस करते ही उसकी रुलाई छूट गयी.रीता & उसके बेटी-दामाद उस आवाज़ को सुन जहा के तहा जम गये थे.उन्हे यकीन नही हो रहा था.उन्होने देखा तो 4 पोर्टबल फ्लडलाइट्स की रोशनी से उनकी आँखे चुन्धिया गयी & रोशनी के पीछे से 1 लंबा-चौड़ा शख्स सामने आया जिसे देख हैरानी और ख़ौफ्फ ने उन्हे आ घेरा. "नही..!",रीता बस इतना ही बोल पाई कि उस शख्स के पीछे 1 और इंसान आ खड़ा हुआ..ऐसा नही हो सकता था..2 मरे इंसान ऐसे कैसे वापस आ सकते थे.विजयंत मेहरा अपने बेटे के साथ उनके सामने खड़ा था. किसी ने रीता के हाथ से पिस्टल ली तो उसने देखा 1 अंजान शख्स उसकी पिस्टल ले उसे 1 किनारे ले जा रहा था.अचानक वाहा बहुत सारे लोग आ गये थे और 1 बूढ़ा सा शख्स जिसके गाल पे निशान था शाह और प्रणव की ओर बढ़ रहा था.उस शख्स ने बॅरियर पार किया और उस घबराहट मे भी रीता ने देखा कि दयाल उसे देख बौखला गया था..दयाल..शातिर दयाल बौखला गया था! "आज मेरी तलाश ख़त्म हुई कमिने!",देवेन ने प्रणव को किनारे धकेला & शाह/दयाल का गिरेबान पकड़ लिया,"..बहुत चालाक है तू पर मेरे मामूली से जाल मे फँस गया.हैं!",देवेन मुस्कुरा रहा था.1 आदमी रंभा की हथकड़ी खोल रहा था & उसके मुँह से टेप हटा रहा था. "देवेन..",रंभा रोती हुई उसके करीब आई. "आओ,रंभा.यही है वो कमीना जिसने मेरी & सुमित्रा की ज़िंदगी उजाड़ दी थी." "देवेन,मैं इसके.." "कोई बात नही.उसका ज़िम्मेदार भी मैं ही हू.मुझे पता चल गया था कि ये कौन है फिर भी मैने तुम्हे नही बताया क्यूकी मुझे इसके बच निकलने का डर था.इसके लिए तुम मुझे जो भी सज़ा दोगि,मुझे मंज़ूर है.",रंभा बिलखती उसके सीने से लग गयी & उसके सीने पे मुक्के मारने लगी.1 आदमी दयाल को वाहा से ले जा रहा था तो देवेन ने उसे रोका,"..बस थोड़ी के लिए देर इसके हाथ खोल इसे मेरे हवाले कर दो.",उस आदमी ने दयाल की हथकड़ी खोल दी. देवेन ने दयाल का गिरेबान पकड़ा और उसे पीटने लगा.उस आदमी ने देवेन को रोकने की कोशिश की पर तभी दूर खड़े 1 शख्स ने अपना हाथ उठा उसे ऐसा करने से रोका.देवेन दयाल को बुरी तरह मार रहा था. "देवेन..इतनी नफ़रत है तो मुझे धकेल दे ना इस झरने मे.",दयाल मुस्कुराया तो देवेन ने उसके पेट मे 1 घूँसा जडा. "साले!तू खुद को बहुत शातिर समझता है ना!",उसने उसके जबड़े पे करारा वार किया,"..मैं तुझे यहा से धकेल दू ताकि तू फ़ौरन मर जाए.नही,दयाल..जैसे मैं जैल मे सड़ा हू वैसे तू भी उन सलाखो के पीछे सड़ेगा..हर वक़्त खुद को कॉसेगा & 1 रोज़ सलाखो से सर पीट-2 के अपनी जान दे देगा.",देवेन ने उसे पकड़ के उसी शख्स की ओर धकेल दिया जो उसे पकड़ने आया था.उसने दयाल को हथकड़ी बँधी और उसे ले गया. "हो गया भाई देवेन तुम्हारा.",अमोल बपत वाहा आया तो देवेन मुस्कुरा दिया. "इसे तो क़यामत तक पीटता रहू तो भी मेरा जी नही भरेगा,बपत साहब." "तो चलो यार,शर्मा साहब इंतेज़ार कर रहे हैं & फिर ज़रा मेहरा परिवार के लोगो के चेहरे तो देखो.सबको असल बात तो बताई जाए." "चलिए.",देवेन हंसा और रंभा के कंधे पे हाथ रख 1 कार की तरफ बढ़ गया. सवेरे के 3 बज रहे थे जब वो क्लेवर्त पोलीस के हेडक्वॉर्टर पहुँचे.रीता,प्रणव & शिप्रा अभी भी हैरत और शायद शॉक मे थे. "देवेन जी..",1 करीब 45 बरस के मून्छो वाले शख्स ने देवेन को इशारा किया,"..सारी बात बताने के लिए आपसे बेहतर कोई शख्स नही है.तो शुरू कीजिए.",सभी 1 कमरे मे बैठे थे. "थॅंक यू,शर्मा साहब,"..ये मिस्टर.एस.के.शर्मा हैं,क्बाइ के स्पेशल क्राइम्स डिविषन मे स्प हैं और ये हैं मिस्टर.अमोल बपत,गोआ के फॉरिनर्स रेजिस्ट्रेशन ऑफीस के हेड & झरने पे जो बाकी लोग थे,वो सभी CBई या लोकल पोलीस के आदमी हैं." "..मैने जब अख़बार मे इश्तेहार दिया तो दयाल ने किसी को उस पते को चेक करने के लिए भेजा तो मुझे विजयंत मेहरा की फ़िक्र हो गयी..अरे-2 मैने रीता जी को तो बताया ही नही कि उनके शौहर हमे कैसे मिले.",सभी हंस पड़े सिवाय रीता & उसके बच्चो के.देवेन ने विजयंत के मिलने का किस्सा बताया. "तो मैं यहा से हराड चला गया पर जाने से पहले मैने बपत साहब को सारी बात बताई.बपत साहब ने बहुत सोचने के बाद शर्मा साहब से कॉंटॅक्ट किया.आप दोनो की जितनी तारीफ की जाए कम है..",वो दोनो अफसरो से मुखातिब हुआ,"..कहा जाता है कि पोलीस हमेशा देर से पहुँचती है पर उस दिन आपकी वजह से पोलीस वक़्त से पहले पहुँची.." "..दयाल ने शाम को फिर किसी पैसे लेके काम करने वाले गुंडे को वाहा भेजा & वो पोलीस के हाथ लग गया.शर्मा साहब ने सूझ-बूझ दिखाते हुए उस गुंडे के ज़रिए महादेव शाह का पता लगा लिया & जब मुझे शाह की तस्वीर दिखाई गयी तो मैने अपने दुश्मन को फ़ौरन पहचान लिया.बपत साहब तो धोखा खा गये थे." "अरे यार!..बीसेसर गोबिंद का मेकप इतना ज़बरदस्त किया था इसने कि मुझे दोनो की शक्ल मे कोई समानता दिखी ही नही!",कमरे मे फिर हल्की हँसी गूँजी,"..वो तो हमने 1 फेस डिटेक्षन & आइडेंटिफिकेशन सॉफ़्टवर्रे के ज़रिए इस आदमी के नक़ली नामो वाले पासपोर्ट्स की फोटोस से शाह के फोटो मिलाए & फिर हमे इसी के दयाल होने का यकीन हो गया." "तो ये थी दयाल की कहानी.CBई ने इसकी निगरानी शुरू कर दी.ये चाहते तो पहले ही दिन दयाल को गिरफ्तार कर सकते थे पर मेरे कहने पे ना केवल इन्होने विजयंत की गुत्थी सुलझाने की गरज से इसे गिरफ्तार नही किया बल्कि उस काम मे भी हमारी मदद की." "..समीर का आक्सिडेंट हुआ पर उसे बस मामूली खरॉच आई थी.दयाल ने जिस ट्रक ड्राइवर को ये काम सौंपा था उसे हमने गिरफ्तार किया & फिर उसने हमारी देख-रेख मे आक्सिडेंट करने के बाद दयाल से वही बोला जो हमने उस से कहवाया.मॉर्चुवरी से 1 समीर के हुलिए से मिलती-जुलती लाश पहले ही तैय्यार थी.उसे समीर के कपड़े पहना के हमने कार मे डाला.चेहरा ज़ख़्मी था & किसी को शुबहा नही हुआ की लाश समीर की नही जबकि असली समीर सीबीआई के पास था.." "..समीर को हमने विजयंत के सामने किया & कमाल हो गया!" "हां..",विजयंत खड़ा हो गया,"..आगे की कहानी मैं सुनाता हू.शर्मा साहब ने 1 बहुत उम्दा डॉक्टर से मेरी जाँच करवाई थी & उसी के कहे मुताबिक समीर और मेरी मुलाकात कंधार पे करवाई गयी.उस वक़्त मैनेक्या महसूस किया ये मैं बयान नही कर सकता..लगा जैसे दिमाग़ मे 1 धमाका हुआ..अनगिनत तस्वीरे 1 साथ उभरने & गायब होने लगी & मेरा सरदर्द से फटने लगा & मैं बेहोश हो गया & जब होश आया तो मुझे सब याद आ गया था.." "..उस रात फोन आने के बाद मैं सोनिया के साथ कंधार पहुँचा.सोनिया को मैने ब्रिज कोठारी को जज़्बाती चोट पहुचाने की गरज से अपने इश्क़ के जाल मे फँसाया था.जब मैं वाहा पहुँचा तो मुझे समीर झरने के पास बँधा दिखा.मैं भागता उसके पास गया कि ब्रिज भी वाहा आ गया और मुझपे टूट पड़ा.हम गुत्थमगुत्था थे जब मैने देखा कि समीर अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ.उसके हाथ बँधे नही थे बस उसकी कलाईयो पे रस्सी लिपटी थी.मैने सोचा कि मेरा बेटा मुझे बचाएगा..",विजयंत समीर को घूर रहा था,".पर उसने मुझे ब्रिज सहित किनारे से धकेल दिया & मेरे पीछे-2 उस मासूम सोनिया को भी.",कमरे मे बिल्कुल खामोशी थी. "क्यू किया तुमने ऐसा समीर?",विजयंत ने बहुत हल्की आवाज़ मे पुछा. ""क्यूकी आपने कामया को अपनी हवस का शिकार बनाया था.",समीर की आंखो मे पानी था & साथ ही अँगारे भी. "शिप्रे ने मेरे गुजरात से लौटने पे जो पार्टी दी थी,उसमे मैने आप दोनो को कमरे से बाहर आते देख लिया था.कामया मेरा पहला प्यार थी & मैं गुस्से से बौखला उठा था.उसी ने मुझे बताया कि आप उसे बलcक्मैल करते हैं कि अगर वो आपके साथ नही सोई तो आप उसका करियर तबाह कर देंगे." "झूठ बक रही थी वो.अपनी मर्ज़ी से सोती थी वो मेरे साथ.मेरी बात पे यकीन नही होगा पर पोलीस की बात पे होगा ना!",विजयंत ने अभी तक समीर से उस से ये सारी बाते नही की थी.शर्मा के इशारे पे 1 इनस्पेक्टर कमरे से बाहर गया & जब लौटा तो कामया उसके साथ थी,"..अब बताओ आगे की कहानी." "हरपाल सिंग पैसो और कामया के जिस्म के लालच मे मेरे साथ मिल गया.उसका पार्टी मे नशे मे बकना,मेरे खिलाफ बात करना सब प्लान का हिस्सा था.रंभा से शादी और आपसे झगड़ा & फिर पंचमहल आना सब मैने सोच रखा था.मैं जानता था की गायब हुआ तो आप मेरी तलाश मे ज़रूर आएँगे." "पर मैं ही क्यू?",रंभा गुस्से मे थी. "क्यूकी तुम ही सामने थी और तुमसे इश्क़ का नाटक करना भी आसान था." "हरपाल का क्या हुआ?" "मुझे नही पता.वो पैसे लेके गायब हो गया." "अच्छा और कोई नही था तुम्हारे साथ?",विजयंत की मुस्कान मे गुस्से से भी ज़्यादा दर्द था. "मोम थी.ये बदला मैने मोम के लिए भी लिया था.आप बस अयस्शिया करते रहते & वो बेचारी अकेली बैठी रहती.मोम ने मेरा पूरा साथ दिया इस बात मे." ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ क्रमशः....... JAAL paart--95 gataank se aage...... "sab tumhari galti thi,Dayal.",rambha ki aankhe hairat se phat gayi..dayal!..uski maa ki zindagi benoor karne vala,Deven ko jail bhijwane vala dayal,"..tumne mujhe bheja tha na vo pata check karne ke liye.us pate ko check kar main kisi kaam se Trust Films ke daftar ja rahi thi.vaha ke basement me maine tumhari car dekhi.pehle to maine socha ki tumhe roku par fir na jane kyu socha ki dekhu tum yaha kya kar rahe ho.uske baad tumhara peechha kiya & us din se peechha hi kar rahi hu." "..& ye soch rahe ho na ki meri car tum kaise nahi pehchan paye to mere dhokhebaz aashiq meri car me kuchh gadbad thi & main apni beti ki car leke aayi thi.",rambha tape ke peechhe se chillana chah rahi thi.uski aankho me aansu chhalak aaye the.vo is waqt bahut asahay mehsus kar rahi thi.itne din vo apne dushman ke sath humbistar hoti rahi & uska bharpur maza uthati rahi..use khud se ghin ho gayi..kyu hai vo aisi?..apne jism ki ghulam! pranav shah ko jharne ke kinare tak le gaya tha & dhakka dene hi vala tha ki sara ilaka rsohni se naha gaya & 1 kadakdar aavaz gunji,"ruk jao!" rambha,rita,pranav & shipra sabhi us aavaz ke malik se achhi tarah vakif the.rambha ke kano me jaise hi vo aavaz padi uska dil khushi se bhara gaya & rahat mehsus karte hi uski rulayi chhut gayi.rita & uske beti-damad us aavaz ko sun jaha ke taha jum gaye the.unhe yakin nahi ho raha tha.unhone dekha to 4 portable floodlights ki roshni se unki aankhe chundhiya gayi & roshni ke peechhe se 1 lamba-chauda shakhs samne aaya jise dekh hairani & khauff ne unhe aa ghera. "nahi..!",rita bas itna hi bol payi ki us shakhs ke peechhe 1 & insan aa khada hua..aisa nahi ho sakta tha..2 mare insan aise kaise vapas aa sakte the.vijayant mehra apne bete ke sath unke samne khada tha. kisi ne rita ke hath se pistol li to usne dekha 1 anjan shakhs uski pistol le use 1 kinare le ja raha tha.achanak vaha bahut sare log aa gaye the & 1 boodha sa shakhs jiske gaal pe nishan tha shah & pranav ki or badh raha tha.us shakhs ne barrier paar kiya & us ghabrahat me bhi rita ne dekha ki dayal use dekh baukhla gaya tha..dayal..shatir dayal baukhla gaya tha! "aaj meri talash khatm hui kamine!",deven ne pranav ko kinare dhakela & shah/dayal ka gireban pakad liya,"..bahut chalak hai tu par mere mamuli se jaal me phans gaya.hain!",deven muskura raha tha.1 aadmi rambha ki hathkadi khol raha tha & uske munh se tape hata raha tha. "deven..",rambha roti hui uske karib aayi. "aao,rambha.yehi hai vo kamina jisne meri & Sumitra ki zindagi ujad di thi." "deven,main iske.." "koi baat nahi.uska zimmedar bhi main hi hu.mujhe pata chal gaya tha ki ye kaun hai fir bhi maine tumhe nahi bataya kyuki mujhe iske bach nikalne ka darr tha.iske liye tum mujhe jo bhi saza dogi,mujhe manzur hai.",rambha bikalhti uske seene se lag gayi & uske seene pe mukke marne lagi.1 aadmi dayal ko vaha se le ja raha tha to deven ne use roka,"..bas thodi ke liye der iske hath khol ise mere hawale kar do.",us aadmi ne dayal ki hathkadi khol di. deven ne dayal ka gireban pakda & use pitne laga.us aadmi ne deven ko rokne ki koshish ki par tabhi door khade 1 shakhs ne apna hath utha use aisa karne se roka.deven dayal ko buri tarah maar raha tha. "deven..tini nafrat hai to mujhe dhakel de na is jharne me.",dayal muskuraya to deven ne uske pet me 1 ghunsa jada. "sale!tu khud ko bahut shatir samajhta hai na!",usne uske jabde pe karara var kiya,"..main tujhe yaha se dhakel du taki tu fauran mar jaye.nahi,dayal..jaise main jail me sada hu vaise tu bhi un salakho ke peechhe sadega..har waqt khud ko kosega & 1 roz salakho se sar peet-2 ke apni jaan de dega.",deven ne use pakad ke usi shakhs ki or dhakel diya jo use pakadne aaya tha.usne dayal ko hathkadi bandhi & use le gaya. "ho gaya bhai deven tumhara.",Amol Bapat vaha aaya to deven muskura diya. "ise to qayamat tak peetata rahu to bhi mera ji nahi bharega,bapat sahab." "to chalo yaar,Sharma sahab intezar kar rahe hain & fir zara Mehra parivar ke logo ke chehre to dekho.sabko asal baat to batayi jaye." "chaliye.",deven hansa & rambha ke kandhe pe hath rakh 1 car ki taraf badh gaya. savere ke 3 baj rahe the jab vo clayworth police ke headquarter pahunche.rita,pranav & shipra abhi bhi hairat & shayad shock me the. "Deven ji..",1 karib 45 baras ke moonchho vale shakhs ne deven ko ishara kiya,"..sari baat batane ke liye aapse behtar koi shakhs nahi hai.to shuru kijiye.",sabhi 1 kamre me baithe the. "thank you,Sharma sahab,"..ye Mr.S.K.Sharma hain,CBI ke special crimes division me SP hain & ye hain Mr.Amol Bapat,Goa ke foreigners registration office ke head & jharne pe jo baki log the,vo sabhi CBI ya local police ke aadmi hain." "..maine jab akhbar me ishtehar diya to Dayal ne kisi ko us pate ko check karne ke liye bheja to mujhe Vijayant Mehra ki fikr ho gayi..are-2 maine Rita ji ko to batay hi nahi ki unke shauhar hume kaise mile.",sabhi hans pade siway rita & uske bachcho ke.deven ne vijayant ke milne ka kissa bataya. "to main yaha se Haraad chala gaya par jane se pehle maine bapat sahab ko sari baat batayi.bapat sahab ne bahut sochne ke baad sharma sahab se contact kiya.aap dono ki jitni tarif ki jaye kam hai..",vo dono afsaro se mukhatib hua,"..kaha jata hai ki police humesha der se pahunchti hai par us din aapki vajah se police waqt se pehle pahunchi.." "..dayal ne sham ko fir kisi paise leke kaam karne vale gunde ko vaha bheja & vo police ke hath lag gaya.sharma sahab ne sujh-bujh dikhate hue us gunde ke zariye Mahadev Shah ka pata laga liya & jab mujhe shah ki tasvir dikhayi gayi to maine apne dushman ko fauran pehchan liya.bapat sahab to dhokha kha gaye the." "are yaar!..Bisesar Gobind ka makeup itna zabardast kiya tha isne ki mujhe dono ki shakl me koi samanta dikhi hi nahi!",kamre me fir halki hansi gunji,"..vo to humne 1 face detection & identification softwarre ke zariye is aadmi ke naqli namo vale passports ki photos se shah ke photo milaye & fir hume isi ke dayal hone ka yakin ho gaya." "to ye thi dayal ki kahani.CBI ne iski nigrani shuru kar di.ye chahte to pehle hi din dayal ko giraftar kar sakte the par mere kehne pe na keval inhone Vijayant ki gutthi suljhane ki garaz se ise giraftar nahi kiya balki us kaam me bhi humari madad ki." "..Sameer ka accident hua par use bas mamuli kharoch aayi thi.dayal ne jis truck driver ko ye kaam saunpa tha use humne giraftar kiya & fir usne humari dekh-rekh me accident karne ke baad dayal se vahi bola jo humne us se kahwaya.mortuary se 1 sameer ke huliye se milti-julti lash pehle hi taiyyar thi.use sameer ke kapde pehna ke humne car me dala.chehra zakhmi tha & kisi ko shubaha nahi hua ki lash sameer ki nahi jabki asli sameer cbi ke paas tha.." "..sameer ko humne vijayant ke samne kiya & kamal ho gaya!" "haan..",vijayant khada ho gaya,"..aage ki kahani main sunata hu.sharma sahab ne 1 bahut umda doctor se meri janch karwayi thi & usi ke kahe mutabik sameer & meri mulakat Kamdhar pe karvayi gaya.us waqt mainekya mehsus kiya ye mai bayan nahi kar sakta..laga jaise dimagh me 1 dhamaka hua..anginat tasveere 1 sath ubharne & gayab hone lagi & mera sardard se phatne laga & main behosh ho gaya & jab hosh aaya to mujhe sab yaad aa gaya tha.." "..us raat phone aane ke baad main Soniya ke sath kamdhar pahuncha.soniya ko maine Brij Kothari ko jazbati chot pahuchahne ki garaj se apne ishq ke jaal me phansaya tha.jab main vaha pahuncha to mujhe sameer jharne ke paas bandha dikha.main bhagta uske paas gaya ki brij bhi vaha aa gaya & mujhpe ttot pada.hum gutthamguttha the jab maine dekha ki sameer apni jagah se uth khada hua.uske hath bahde nahi the bas uski kalaiyo pe rassi lipati thi.maine socha ki mera beta mujhe bachayega..",vijayant sameer ko ghur raha tha,".par usne mujhe brij sahit kinare se dhakel diya & mere peechhe-2 us masum soniya ko bhi.",kamre me bilkul khamoshi thi. "kyu kiya tumne aisa sameer?",vijayant ne bahut halki aavaz me puchha. ""kyuki aapne kamya ko apni hawas ka shikar banaya tha.",sameer ki aaankho me pani tha & sath hi angare bhi. "Shipre ne mere Gujarat se lautne pe jo party di thi,usme maine aap dono ko kamre sr bahar aate dekh liya tha.Kamya mera pehla pyar thi & main gusse se baukhla utha tha.usi ne mujhe bataya ki aap use balckmail karte hain ki agar vo aapke sath nahi soyi to aap uska career tabah kar denge." "jhuth bak rahi thi vo.apni marzi se soti thi vo mere sath.meri baat pe yakin nahi hoga par police ki bata pe hoga na!",vijayant ne abhi tak sameer se us se ye sari baate nahi ki thi.Sharma ke ishare pe 1 inspector kamre se bahar gaya & jab lauta to Kamya uske sath thi,"..ab batao aage ki kahani." "Harpal Singh paiso & kamya ke jism ke lalach me mere sath mil gaya.uska party me nashe me bakna,mere khilaf baat karna sab plan ka hissa tha.Rambha se shadi & aapse jhagda & fir Panchmahal aana sab maine soch rakha tha.main janta tha ki gayab hua to aap meri talash me zarur ayenge." "par main hi kyu?",rambha gusse me thi. "kyuki tum hi samne thi & tumse ishq ka natak karna bhi aasan tha." "harpal ka kya hua?" "mujhe nahi pata.vo paise leke gayab ho gaya." "achha & koi nahi tha tumahre sath?",vijayant ki muskan me gusse se bhi zyada dard tha. "mom thi.ye badla maine mom ke liye bhi liya tha.aap bas ayasshiya karte rehte & vo bechari akeli baithi rehti.mom ne mera pura sath diya is baat me." ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ kramashah.......

 
जाल पार्ट--96

गतान्क से आगे......

"रीता,अपने बेटे को इस्तेमाल किया तुमने मुझे रास्ते से हटाने के लिए.क्यू?" "केवल तुम्हे नही इसे भी.",रीता ने समीर की ओर इशारा किया. "क्या?!",ये सवाल लगभग कमरे मे मौजूद हर शख्स की ज़ुबान से निकला. "हाँ!तुम्हारी अयस्शिओ का नतीजा था ये जिसे तुमने मेरी गोद मे पटक दिया पालने के लिए.इसके चलते मेरी अपनी बेटी कंपनी से महरूम रही और चलो,उसे कोई शौक नही था कोम्पनी मे जाने का.उसके पति का तो हक़ बनता था उसकी जगह!",रीता चीखी.समीर के उपर जैसे पहाड़ गिर गया था.उसे कानो पे यकीन नही हो रहा था..इतनी नफ़रत करती थी मोम उस से! "हां,ये मेरे और इसकी मा के रिश्ते का नतीजा था.वो अचानक चल बसी & इस मासूम को अनाथालय मे छ्चोड़ने को मेरा दिल नही माना.पर रीता,इतने सालो तक तुम इस नफ़रत को अपने दिल मे पालती रही?" "नही.मैने अपना लिया था समीर को पर जब ये मेरी बेटी और उसके शौहर का हक़ मारने लगा तो इसे कैसे छ्चोड़ देती मैं.पहले मैने इसके ज़रिए तुम्हे हटवाया & फिर दयाल के ज़रिए मैं इसे हटाना चाहती थी पर दयाल इस चुड़ैल..",उसका इशारा रंभा की ओर था,"..के चक्कर मे पड़ गया & हमे ही धोखा देने लगा.",रीता के दिल मे इतना ज़हर था,ये किसी ने सोचा भी नही था & सभी बिल्कुल खामोश थे. "मुझे फोने कर कौन झरने पे बुलाता था?",विजयंत ने चुप्पी तोड़ी. ".ब्रिज को भी मैं ही फोन करता था.कामया ने मुझे आपके & सोनिया के रिश्ते के बारे मे बता दिया था.ब्रिज & आपकी तनातनी के बारे मे सभी को पता था तो मैने उसी को इस्तेमाल कर सारा शक़ उसकी तरफ करवा दिया.",समीर बोला,"..उस रोज़ हरपाल वाहा से भागा पर कामया वही थी.आप लोगो को धक्का देने के बाद उसी ने मेरी आँखो पे पट्टी लगाई & हाथ बाँधे.सारा खेल बिगड़ जाता उस रोज़ क्यूकी पोलीस भी जल्द ही आ गयी थी पर इसकी किस्मत अच्छी थी जो ये च्छूप के बच निकली." "आप दयाल को कैसे जानती हैं?",शर्मा ने सवाल किया. "मैं कोलकाता से हू.वही मेरी मुलाकात इस से हुई थी.ये मेरा पहला प्यार था & मैने इस से शादी करने की सोची थी पर ये बिना कुच्छ बताए ना जाने कहा गायब हो गया.",पहली बार रीता की आँखो मे नमी दिखी,"..फिर विजयंत मेरी ज़िंदगी मे आया & हमारी शादी हो गयी.ये शादी मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी भूल थी.मैं तो दयाल को भूल विजयंत को अपना चुकी थी पर इसका मन 1 लड़की से कहा भरने वाला था.मेरी शादीशुदा ज़िंदगी के हर पल इस आदमी ने मुझसे बेवफ़ाई की है.",रीता सूबक रही थी.रंभा ने सर झुका लिया.वो रीता के दर्द को समझ रही थी. "..& फिर कुच्छ महीनो पहले अचानक 1 दिन ये मेरे सामने आ खड़ा हुआ..",रीता का इशारा दयाल की ओर था,"..मैने इसे दुतकारा,लताड़ा यहा तक की 2-3 चांट भी रसीद कर दिए पर ये बस सर झुकाए सब सहता रहा.कुच्छ भी हो ये मेरा पहला प्यार था & मेरे सामने अपना गुनाह कबूल कर रहा था..मैं भी कितनी देर इस से खफा रहती..मैं इसकी बाहो मे चली गयी & फिर हम मिलने लगे.मैं इस से अपने सारे दर्द,सारी खुशिया बाँटती..वो सब एहसास जिन्हे मेरे साथ बाँटने को मेरे पति के पास वक़्त नही था.",विजयंत अपनी बीवी से निगाहे नही मिला पा रहा था. "..ऑफीसर,ये शक्ष जिसका असली नाम पता नही दयाल है भी या नही,1 साँप है..1 ऐसा साँप जो डंस्ता है तो पता भी नही चलता पर उसका ज़हर आपके दिलोदिमाग पे चढ़ने लगता है..मैने जो भी किया उसका मुझसे ज़्यादा नही तो मेरे बराबर का ज़िम्मेदार ये भी है!",देवेन जानता था कि रीता सही कह रही है.दयाल की बातो की वजह से ही उसकी ज़िंदगी बर्बाद हुई थी. कमरे मे काफ़ी देर तक खामोशी फैली रही फिर बाहर से चिड़ियो के चाचहने की आवाज़ आई तो सबको पता चला की सवेरा हो गया है.पोलिसेवाले अपनी करवाई मे जुट गये.रीता,प्रणव,समीर,कामया & दयाल गिरफ्तार किए जा रहे थे. देवेन रंभा के साथ खड़ा था & विजयंत अपनी बेटी के साथ.इस सबमे शिप्रा ही थी जोकि मासूम थी & उसे बिना किसी ग़लती के सज़ा मिल रही थी. बपत & शर्मा खुश थे.उन्होने 1 ऐसे शख्स को पकड़ा था जिसने इंटररपोल तक को चकमा दे दिया था.उनकी तरक्की तो अब पक्की थी. 2 घंटे बाद मुजरिम पोलीस हिरासत मे थे & बाकी लोग अपने-2 घर जाने की तैय्यारि कर रहे थे. -------------------------------------------------------------------------------

"रंभा..देवेन..तुम दोनो ने जो किया उसके लिए शुक्रिया अदा कर मैं तुम्हे शर्मिंदा तो नही करूँगा..",एरपोर्ट पे गोआ की फिलगत छूटने से पहले विजयंत देवेन & रंभा के साथ खड़ा था,"..बस इतना कहूँगा कि मैं तुम दोनो को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानता हू.वादा करो कि जब भी ज़रूरत पड़े तुम लोग मुझे ही याद करोगे.",पास ही सोनम भी खड़ी थी जो अपनी सहेली को विदा करने आई थी. "वादा.",दोनो हंस दिए. तुम्हारे साथ जो भी वक़्त बिताया वो बहुत खुशनुमा था,देवेन.",विजयंत ने उसे गले लगाया,"..रंभा के साथ नयी ज़िंदगी मुबारक हो!" "शुक्रिया,दोस्त!" "डॅड..",रांभाने समीर से तलाक़ की अर्ज़ी अदालत मे दाखिल कर दी थी पर विजयंत के लिए & कोई नाम उसकी ज़ुबान से निकलता नही था,"..शिप्रा का ख़याल रखिएगा.उस बेचारी को बेवजह ये सब झेलना पड़ा है." "रंभा,उसे सब मेरी वजह से झेलना पड़ रहा है.क़ानून की नज़र मे जो मुजरिम थे वो गिरफ्तार हो गये पर सबसे बड़ा मुजरिम तो मैं हू.जो भी हुआ मेरी आदत & फ़ितरत की वजह से हुआ & देखो,आज मैं दुनिया का सबसे ग़रीब इंसान हू.मेरी कंपनी मेरे हाथ मे है पर ना बीवी है ना बेटा & बेटी की ज़िंदगी तो.." सोनम ने विजयंत का हाथ थाम लिया तो विजयंत ने उसकी तरफ देखा.रंभा & देवेन दोनो को देख मुस्कुराए,"..पर हर रात के बाद सुबह आती है.मैं शिप्रा के ज़ख़्मो पे मरहम लगाउंगा,1 बार फिर से उसकी ज़िंदगी मे बहार लाऊंगा.",विजयंत की बातो मे उसका जाना-पहचाना विश्वास झलक रहा था.तभी गोआ की फ्लाइट की अनाउन्स्मनिट हुई & विजयंत ने उनसे विदा ली.रंभा अपनी सहेली से गले मिली.दोनो लड़कियो की जुदा होते वक़्त आँखे भर आई थी.विजयंत ने अपना रुमाल सोनम को दिया & जब उसने शुक्रिया अदा कर अपनी आँखे पोन्छि तो उसके कंधे पे हाथ रख वो देवेन & रंभा से 1 आख़िर बार विदा ले एरपोर्ट की एग्ज़िट की तरफ बढ़ गया देवेन & रंभा कुच्छ देर सोनम के कंधे पे हाथ रखे उसे अपने साथ ले जाते विजयंत को देखते रहे & फिर 1 दूसरे को देख मुस्कुराए & 1 दूसरे की कमर मे बाहे डाल घूम के चल दिए अपनी नयी ज़िंदगी की तरफ. तो दोस्तो ये कहानी यही ख़तम होती है फिर मिलेंगे एक और नई कहानी के साथ आपका दोस्त राज शर्मा

समाप्त दा एंड

JAAL paart--96 gataank se aage...... "Rita,apne bete ko istemal kiya tumne mujhe raste se hatane ke liye.kyu?" "keval tumhe nahi ise bhi.",rita ne sameer ki or ishara kiya. "kya?!",ye saval lagbhag kamre me maujud har shakhs ki zuban se nikla. "haan!tumhari ayasshio ka natija tha ye jise tumne meri god me patak diya palne ke liye.iske chalte meri apni beti company se mehrum rahi & chalo,use koi shauk nahi tha aompany me jane ka.uske pati ka to haq banta tah uski jagah!",rita chikhi.sameer ke upar jaise pahad gir gaya tha.use kano pe yakin nahi ho raha tha..itni nafrat karti thi mom us se! "haan,ye mere & iski maa ke rishte ka natija tha.vo achanak chal basi & is masoom ko anathalay me chhodne ko mera dil nahi mana.par rita,itne salo tak tum is nafrat ko apne dil me paalti rahi?" "nahi.maine apna liya tha sameer ko par jab ye meri beti & uske shauhar ka haq marne laga to ise kaise chhod deti main.pehle maine iske zariye tumhe hatwaya & fir dayal ke zariye main ise hatana chahti thi par dayal is chudail..",uska ishara rambha ki or tha,"..ke chakakr me pad gaya & hume hi dhokha dene laga.",rita ke dil me itna zehar tha,ye kisi ne socha bhi nahi tha & sabhi bilkul khamosh the. "mujhe fone kar kaun jharne pe bulata tha?",vijayant ne chuppi todi. "main.brij ko bhi main hi fone karta tha.kamya ne mujhe aapke & soniya ke rishte ke bare me bata diya tha.brij & aapki tanatani ke bare me sabhi ko pata tha to maine usi ko istemal kar sara shaq uski taraf karwa diya.",sameer bola,"..us roz harpal vaha se bhaga par kamya vahi thi.aap logo ko dhakka dene ke baad usi ne meri aankho pe patti lagayi & hath bandhe.sara khel bigad jata us roz kyuki police bhi jald hi aa gayi thi par iski kismat achhi thi jo ye chhup ke bach nikli." "aap dayal ko kaise janti hain?",sharma ne sawal kiya. "main Kolkata se hu.vahi meri mulakat is se hui thi.ye mera pehla pyar tha & maine is se shadi karne ki sochi thi par ye bina kuchh bataye na jane kaha gayab ho gaya.",pehli baar rita ki aankho me nami dikhi,"..fir vijayant meri zindagi me aaya & huamri shadi ho gayi.ye shadi meri zindagi ki sabse badi bhool thi.main to dayal ko bhool vijayant ko apna chuki thi par iska man 1 ladki se kaha bharne vala tha.meri shadishuda zindagi ke har pal is aadmi ne mujhse bewafai ki hai.",rita subak rahi thi.rambha ne sar jhuka liya.vo rita ke dard ko samajh rahi thi. "..& fir kuchh mahino pehle achanak 1 din ye mere samne aa khada hua..",rita ka ishara dayal ki or tha,"..maine ise dutkara,lathada yaha tak ki 2-3 chante bhi raseed kar diye par ye bas ar jhukaye sab sahta raha.kuchh bhi ho ye mera pehla pyar tha & mere samne apna gunah kabul kar raha tha..main bhi kitni der is se khafa rahti..main iski baaho me chali gayi & fir hum milne lage.main is se apne sare dard,sari khushiya baantati..vo sab ehsas jinhe mere sath baanatane ko mere pati ke paas waqt nahi tha.",vijayant apni biwi se nigahe nahi mila pa raha tha. "..officer,ye shaksh jiska asli naam pata nahi dayal hai bhi ya nahi,1 sanp hai..1 aisa sanp jo dansta hai to pata bhi nahi chalta par uska zehar aapke dilodimagh pe chadhne lagta hai..maine jo bhi kiya uska mujhse zyada nahi to mere barabar ka zimmedar ye bhi hai!",deven janta tha ki rita sahi keh rahi hai.dayal ki baato ki vajah se hi uski zindagi barbad hui thi. kamre me kafi der tak khamoshi phaili rahi fir bahar se chidiyo ke chachahane ki aavaz aayi to sabko pata chala ki savera ho gaya hai.policevale apni karvayi me jut gaye.rita,pranav,sameer,kamya & dayal giraftar kiye ja rahe the. deven rambha ke sath khada tha & vijayant apni beti ke sath.is sabme shipra hi thi joki masum thi & use bina kisi galti ke saza mil rahi thi. bapat & sharma khush the.unhone 1 aise shakhs ko pakda tha jisne Interpol tak ko chakma de diya tha.unki tarakki to ab pakki thi. 2 ghante baad mujrim police hirasat me the & baki log apne-2 ghar jane ki taiyyari kar rahe the. ------------------------------------------------------------------------------- "rambha..deven..tum dono ne jo kiya uske liye shukriya ada kar main tumhe sharminda to nahi karunga..",airport pe Goa ki filght chhutne se pehle vijayant deven & rambha ke sath khada tha,"..bas itna kahunga ki main tum dono ko apna sabse achha dost manta hu.vada karo ki jab bhi zarurat pade tum log mujhe hi yaad karoge.",paas hi Sonam bhi khadi thi jo apni saheli ko vida karne aayi thi. "vada.",dono hans diye. tumhare sath jo bhi waqt bitaya vo bahut khushnuma tha,deven.",vijayant ne sue gale lagaya,"..rambha ke sath nayi zindagi mubarak ho!" "shukriya,dost!" "dad..",rambhane sameer se talaq ki arzi adalat me dakhil kar di thi par vijayant ke liye & koi naam uski zuban se nikalta nahi tha,"..shipra ka khayal rakhiyega.us becahri ko bevajah ye sab jhelna pada hai." "rambha,use sab meri vajah se jhelna pad raha hai.kanoon ki nazar me jo mujrim the vo giraftar ho gaye par sabse bada mujrim to main hu.jo bhi hua meri aadat & fitrat ki vajah se hua & dekho,aaj main duniya ka sabse garib insan hu.meri comapny mere hath me hai par na biwi hai na beta & beti ki zindagi to.." sonam ne vijayant ka hath tham liya to vijayant ne uski taraf dekha.rambha & deven dono ko dekh muskuraye,"..par har raat ke baad subah aati hai.main shipra ke zakhmo pe marham lagaunga,1 baar fir se uski zindagi me bahar laoonga.",vijayant ki baato me uska jana-pehchana vishvas jhalak raha tha.tabhi goa ki flight ki announcemnet hui & vijayant ne unse vida li.rambha apni saheli se gale mili.dono ladkiyo ki juda hote waqt aankhe bhar aayi thi.vijayant ne apna rumal sonam ko diya & jab usne shukriya ada kar apni aankhe ponchhi to uske kandhe pe hath rakh vo deven & rambha se 1 aakhir baar vida le airport ki exit ki taraf badh gaya deven & rambha kuchh der sonam ke kandhe pe hath rakhe use apne sath le jate vijayant ko dekhte rahe & fir 1 dusre ko dekh mukusraye & 1 dusre ki kamar me baahe daal ghum ke chal diye apni nayi zindagi ki taraf.

THE END

 
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