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जाल पार्ट--90
गतान्क से आगे......
तभी दोनो को किसी कार के आने की आवाज़ सुनाई दी.शाह ने फ़ौरन लंड बाहर खींचा & रंभा की सारी नीचे कर उसे कार मे बिठाया,फिर वही ज़मीन पे गिरे उसके बॅग & फटे ब्लाउस को उठाया & उसे थमाके खुद कार मे बैठ गया.उसने कार स्टार्ट की तभी 1 और कार पार्किंग मे आई.रंभा ने देखा & उसके मुँह से हैरत भरी आवाज़ निकलते-2 बची..सामने वाली कार देवेन की थी.रंभा ने बॅग से अपना मोबाइल निकाला & पहले शाह को कनखियो से देखा..वो कार निकालने मे मशगूल था.
काली कार वाहा आई & रुक गयी.देवेन 1 खाली जगह मे कार लगा उसके ड्राइवर के उतरने का इंतेज़ार कर रहा था.काली कार का दरवाज़ा अंदर से खुला & वो बाहर की तरफ धकेला ही जा रहा था कि कुच्छ देख वो रुक गया.शाह की कार बाहर निकल रही थी & वो काली कार का ड्राइवर शायद उसे देख रुक गया था.देवेन भी शाह की कार को देख रहा था मगर उसे पता नही था कि अंदर कौन है.
तभी वो चौंक गया,काली कार के ड्राइवर ने कार स्टार्ट कर उसे तेज़ी से एग्ज़िट की तरफ बढ़ा दिया था.ठीक उसी वक़्त लिफ्ट आई & उसमे से 2 लोग उतर अपनी कार की तरफ बढ़े.देवेन ने अपनी कार काली कार के पीछे लगाई पर तभी वो दो लोग अपनी कार मे बैठ उसे रिवर्स कर उसी की कार के सामने ले आए थे.देवेन ने झल्ला के हॉर्न बजाया पर रास्ता सॉफ होने 2 मिनिट लगे & जब वो बाहर आया तो काली कार नदारद थी.वो आधे घंटे आस-पास के इलाक़े को छानता रहा मगर वो कार नही मिली.
रंभा मोबाइल पे मेसेज टाइप कर रही थी जब महदेव शाह ने उस से मोबाइल छीन पीछे की सीट पे फेंका & दाए हाथ से स्टियरिंग संभाले बाए से उसे अपनी ओर खींचा & चूमते हुए कार चलाने लगा.रंभा समझ गयी की अब मेसेज करना ख़तरे से खाली नही & फिर पार्किंग मे हुई चुदाई के बाद वो बहुत मस्त भी हो गयी थी.उसने बाया हाथ शाह के लंड पे रखा जोकि अभी भी उसकी पॅंट से बाहर था & उसके बाए गालो को चूमने लगी.
कार 1 सिग्नल पे रुकी तो शाह ने उसके सीने पे पड़ा आँचल हटाया & उसकी चूचियो चूसने लगा.रंभा सीट पे आडी उसकी ज़ुबान से मस्त होने लगी..कितना मस्ताना एहसास था ये!..वो शहर की भीड़ के बीचोबीच थी..उसकी खिड़की के बाहर 1 बाइक पे लड़का बैठा था..हर तरफ लोग थे पर किसी को ये खबर नही थी कि वो कार मे नगी थी & उसका आशिक़ उसकी चूचियाँ पी रहा था..उफफफ्फ़..रंभा ने आँखे बंद कर शाह के बॉल नोचे!
कुच्छ देर बाद बत्ती हरी हुई तो शाह ने महबूबा की चूचियाँ छ्चोड़ी & कार अपने गहर की तरफ बढ़ा दी.गहर पहुँचते ही गेट के बाहर खड़े दरबान ने सलाम ठोनकतेहुए गेट खोला & कार अंदर दाखिल हो गयी.दरबान गेट के बाहर था & आज भी शाह का घर बिल्कुल सुनसान था.
रंभा के कार से उतरते ही शाह ने उसे बाहो मे भर लिया & वही खुले मे ही उसे चूमने लगा.उसे खुद पे हैरत हो रही थी..इस लड़की मे ऐसी क्या कशिश थी..क्या जादू था जो वो इस तरह दीवानो सी हरकतें कर रहा था!..रंभा ने उसकी शर्ट पकड़ ज़ोर से खींची तो उसके बटन्स टूट के बिखर गये.रंभा ने कमीज़ को उसके जिस्म से अलग किया & उसके निपल्स को चूसने लगी.
शाह उसकी पीठ पे हाथ फिरा रहा था.रंभा उसके सीने को चूमती नीचे झुकी & उसकी पॅंट भी उतार दी.अब शाह पूरा नंगा था & वो सिर्फ़ सारी मे.वो शाह के लंड को चूसने मे जुट गयी तो शाह गाड़ी की बॉनेट से टिक के खड़ा हो गया & उसके बालो मे उंगलिया फिराने लगा.रंभा शाह के आंडो को चूस रही थी & अपनी उंगली से उसके लंड के छेद को हौले-2 छेड़ रही थी.शाह के लंड मे उसके छुने से सनसनी दौड़ गयी.उसने रंभा को पकड़ के उपर उठाया तो रंभा ने उसके गले मे बाहे डाल दी & उसे चूमने लगी.
शाह उसकी मांसल कमर & गुदाज़ गंद को सहलाते हुए उसकी किस का जवाब दे रहा था.शाह के गर्म हाथो की हरारत रंभा को फिर से मस्ती मे बावली कर रहे थे.रंभा चूमते हुए आहे भरने लगी थी & आगे होके अपनी चूत शाह के लंड पे दबा रही थी.अब उसे बस वो लंड अपनी चूत मे चाहिए था.शाह ने उसकी गंद की कसी फांको को पकड़ा & बाहर की ओर फैलाया तो रंभा ने आह भरते हुए किस तोड़ी & सर पीछे झटका.
उसके ऐसा करने से रंभा की चूचियाँ शाह के सामने उभर गयी & उसने अपना मुँह उनसे लगा दिया.रंभा ने भी चूचियाँ आगे उचका दी ताकि उसका आशिक़ आराम से उन्हे चूस सके.रंभा के जिस्म मे बिजली दौड़ने लगी.शाह उसके निपल्स को दन्तो से काटने के बाद पूरी की पूरी चूची को मुँह मे भर ज़ोर से चूस्ता तो वो सिहर उठती.शाह का दिल उसके मस्ताने उभारो को दबाने का किया तो उसने उसकी कमर पकड़े हुसे उसे घुमा के बॉनेट से लगाया & फिर उसकी कमर पकड़ उसे उसपे बिठा दिया.
रंभा ने अपनी टाँगे खोल उसे आगे खींचा तो उसने उसकी चूचिया पकड़ ली & मसलते हुए चूसने लगा.रंभा पीछे झुकती हुई आहे भर रही & अपनी ज़ूलफे झटक रही थी.उसके हाथ अभी तक शाह के सर से लगे अपने सीने पे उसे दबा रहे थे मगर अब उसकी चूत की कसक बहुत ज़्यादा बढ़ गयी थी.रंभा के हाथ शाह के सरक के नीचे उसकी पीठ से होते हुए उसकी गंद पे आए & उसे दबाया.
शाह उसका इशारा समझ गया & उसके होंठ रंभा की चूचियो से फिसलते हुए उसके पेट के रास्ते उसकी चूत तक पहुँचे.थोड़ी देर उसने बॉनेट पे बैठी रंभा की अन्द्रुनि जाँघो को चूमा & फिर उसकी चूत मे जीभ फिराने लगा.रंभा का जिस्म झटके खाने लगा & वो मस्ती मे आहें भरते हुए अपनी टाँगो से शाह के जिस्म को & अपने हाथो से उसके सर को अपनी चूत पे दबाने लगी.शाह काफ़ी देर उसकी चूत चाटता रहा & जैसे ही उसने महसूस किया कि वो झड़ने की कगार पे है वो खड़ा हो गया & उसकी जंघे थाम अपना लंड उसकी चूत मे धकेला.
रंभा ने उसके कंधे थाम लिया & अपनी जंघे पूरी फैला उसके लंबे & बेहद मोटे लंड को चूत मे घुसने मे मदद की.वो उस से चिपेट गयी & उसके बाए कंधे पे ठुड्डी टीका उसकी पीठ & गंद से लेके उसके बालो तक बेसब्र हाथ चलाती उस से चुदने लगी.शाह के धक्के सीधे उसकी कोख पे पद रहे थे & उसके जिस्म मे मज़े की धाराएँ बहने लगी थी.चाँद धक्को के बाद उसके नाख़ून शाह के जिस्म को कहरोंछने लगे & वो झाड़ गयी.
झाड़ते ही वो निढाल हो बॉनेट पे लेट गयी.शाह ने बाया हाथ उसके पेट पे रखा & दाए से उसकी चूचिया मसलता उसे चोदने लगा.बंगल के खुले अहाते मे चिड़ियो की चाहचाहाहट के साथ दोनो की आहें,दोनो के जिस्मो के टकराने की आवाज़ & चुदाई से बॉनेट मे होती आवाज़ गूँज रही थी.
रंभा ने अपने सीने को मसल्ते आशिक़ के हाथो के उपर अपने हाथ जमा दिए थे & अपनी टाँगे उसकी कमर पे कसे उसकी चुदाई से पागल हुए जा रही थी.शाह भी बस अब उसकी चूत मे झड़ना चाहता था.वो आगे झुका & रंभा के कंधो के नीचे से हाथ लगाते हुए उसे अपनी बाहो मे भर लिया & उसके चेहरे को चूमते हुए धक्के लगाने लगा.रंभा भी उसके जिस्म को बाहो मे भर उसे खरोंछती अपनी कमर उचकाती उसका भरपूर साथ दे रही थी.
"आन्न्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह...!"
"ओह..!",रंभा शाह की चुदाई से बहाल हो कराही & झाड़ गयी.झाड़ते ही उसकी चूत ने शाह के लंड को दबोचा & वो भी आपे से बाहर हो वीर्य उगलने लगा.दोनो ने मंज़िल पा ली थी & अब बहुत सुकून था उनके चेहरो पे पर दोनो को पता था कि ये तो बस पहला पड़ाव है.अभी दोनो को शाम तक इस सफ़र को करना था & उसमे ऐसी काई मंज़िले तय करनी थी.
वो काली कार शाह के बंगल के बाहर आई & रुक गयी & उसका शीशा कुच्छ इंच नीचे हुआ,अभी भी उसके ड्राइवर की शक्ल च्छूपी थी.जब दोनो प्रेमियो ने साथ-2 मंज़िल पा के अपनी मस्तानी आहो से उसका इज़हार किया तो वो आवाज़ बाहर बैठे दरबान के कानो & उस कार के ड्राइवर तक पहुँची.दरबान अपने मालिक की हर्कतो से अच्छी तरह वाकिफ़ था & वो बैठा-2 मुस्कुराया & उस कार के ड्राइवर ने आवाज़ें सुनते ही शीशा बंद किया & कार वापस ले ली.
उस कार से बेख़बर शाह ने अपनी माशुका को अपनी बाहो मे उठाया & उसके हुस्न & जवानी का और लुफ्त उठाने के मक़सद से बंगल के अंदर चला गया.
“क्या हुआ?”,देवेन के वापस लौटते ही विजयंत मेहरा ने उस से सवाल किया.देवेन ने कंधे झटके जैसे उसे भी कुच्छ पता नही.विजयंत के माथे पे उसका जवाब सुन शिकन पड़ी तो उसने बताया कि कैसे उसने काली कार को खो दिया.
“हूँ..अच्छा,देवेन क्या ऐसा हो सकता है कि उस काली कार वाले को तुम्हारे पीछा करने का पता चल गया हो & उसने तुम्हे चकमा दिया हो?”
“लगता तो नही पर पक्का नही कह सकता.”
“तब तो हमारे पास तुम्हारी इश्तेहार मे दी तारीख तक इंतेज़ार करने के अलावा & इस सामने वाले घर पे नज़र रखने के अलावा & कोई चारा नही.”
“हाँ.”,देवेन ने ताकि आवाज़ मे जवाब दिया.उसके दिमाग़ मे बार-2 पिच्छले घंटे की बाते घूम रही थी.कभी उसे खुद पे गुस्सा आता कि क्यू उसने उस कार को नज़रो से ओझल होने दिया तो कभी वो इस सोच मे डूब जाता कि क्या सचमुच दयाल ही था उस कार मे.कुच्छ देर बाद उसने इस फ़िज़ूल की जद्दोजहद को अपने ज़हन से निकाला & रंभा का नंबर मिलाने लगा.घंटी बजती रही पर उसने फोन नही उठाया.देवेन ने 2-3 बार & उसका नंबर ट्राइ किया & फिर छ्चोड़ दिया.उसने सोचा कि ज़रूर वो किसी काम मे फँसी होगी मगर किस काम मे ये उसे पता नही था.
रंभा उस वक़्त महादेव शाह के सीने पे हाथ जमाए उसके लंड को अपनी चूत मे लिए कूद रही थी.उसका मोबाइल वही कार की पिच्छली सीट पे बज रहा था पर उसे उस वक़्त फोन क्या खुद का भी होश नही था.शाह के सख़्त हाथ उसकी कोमल चूचियो को मसल रहे थे & उसकी मस्ती का कोई ठिकाना नही था.शाह 2 बार झाड़ उसके जिस्म मे झाड़ चुका था & इसी वजह से अब वो झड़ने मे ज़्यादा वक़्त ले रहा था.रंभा ने देखा की वो थोडा थका भी लग रहा था.अपनी उम्र के हिसाब से तो इस वक़्त उसे गहरी नींद मे होना चाहिए था मगर वो किसी जवान मर्द की तरह 2 घंटे मे तीसरी बार उसे चोद रहा था.ये तो शायद कयि जवानो के बस की बात भी नही थी..पर फिर भी मुझे इसका ख़याल रखना होगा..रंभा ने सोचा & उसी वक़्त उसकी चूत ने अपनी मस्तानी हरकते शुरू कर दी & नतीजतन उसके साथ-2 शाह भी झाड़ गया.
“ओह्ह..थक गयी मैं तो..”,रंभा हाँफती उसके सीने पे पड़ी हुई थी,”..पागल कर देते हैं आप!“,शाह ने उसे हंसते हुए अपने उपर से उतारा तो रंभा उसकी बाहो के घेरे मे उसके बाई तरफ लेट गयी.
“पागल तो तुमने मुझे कर दिया है.”,शाह उसके जिस्म को प्यार से सहला रहा था,”अच्छा,ये बताओ कि समीर की अपायंट्मेंट्स के बारे मे पता किया तुमने?”
“आप मुझे इसके अलावा..”,रंभा ने उसके सिकुदे लंड पे चपत लगाई,”..किसी और बात के बारे मे सोचने का वक़्त दें तब तो पता लगाऊं!”,शाह उसके जवाब पे हंस पड़ा & फिर उबासी ली.रंभा ने इसीलिए झूठ बोला क्यूकी पहले उसे सब कुच्छ देवेन को बताना था & उसके साथ मिलके सारी प्लॅनिंग करनी थी.
“थोडा आराम कीजिए अब.”,रंभा ने उसका सीना सहलाया.
“हूँ.”,शाह को भी नींद आ रही थी,”मैं इसलिए पुच्छ रहा था क्यूकी मुझे पता चला है कि बस 4 दिन बाद ही मानपुर प्रॉजेक्ट का टेंडर खुलने वाला है.”
“ ओह.आप बेफ़िक्र रहिए,मैं जल्द ही ये काम पूरा करूँगी.”
“ओके,डार्लिंग.”,रंभा ने उसके सीने पे सर रख दिया & उसका पेट सहलाने लगी.कुच्छ ही देर मे शाह सो गया.कुच्छ देर तो रंभा वैसे ही पड़ी रही पर जब उसे यकीन हो गया कि शाह गहरी नींद मे चला गया है तब वो धीरे से उसकी बाँह केग हियर मे से निकालते हुए उठी & शाह की अलमारी खोल उसका 1 ड्रेसिंग गाउन निकाल के पहना.
“हेलो,देवेन.सॉरी पहले आपका फोन नही उठाया.”,वो बाहर आके कार से अपना मोबाइल निकाल उसपे बात कर रही थी.
“तुम हो कहा?”
“शाह के घर पे.”,रंभा को ना जाने क्यू ये बात बताते हुए थोड़ी ग्लानि सी हुई.
“ओह.”,देवेन की आवाज़ मे भी कुच्छ ऐसा था जोकि रंभा को आहत कर गया,”..तो वो कहा है?”
“सो रहा है.”
“अच्छा.”,देवेन की आवाज़ कुच्छ ज़्यादा भारी थी मगर उसने फ़ौरन खुद को संभाला,”..अच्छा ये सुनो,कोई आया था इश्तेहार मे दिए पते पे?”
“क्या?!कौन?!”,रंभा की धड़कने भी तेज़ हो गयी थी.देवेन ने उसे पूरी बात बताई,”..अच्छा,देवेन.ये शाह समीर का आक्सिडेंट करवाने को उतावला हो रहा है.उपर से मानपुर का टेंडर भी बस 4 दिनो मे खुलने वाला है.”
“समीर की अपायंट्मेंट्स मिली तुम्हे?”
“हां.”
“तो ठीक है.तुम इस शाह से ये निकलवाने की कोशिश करो की आख़िर वो समीर के साथ ये हादसा करवाएगा कैसे?..किस जगह पे?..किस से?..सब कुच्छ मगर होशियारी से.ये मुझे बहुत शातिर इंसान लगता है.ऐसे इंसान को ज़रा भी शक़ हुआ तो वो खुद को बचाने के लिए कुच्छ भी कर सकता है.”
“आप चिंता ना करें,देवेन.मैं सब संभाल लूँगी.”
“मुझे पूरा भरोसा है रंभा पर तुम्हे यू अकेला छ्चोड़ने मे फ़िक्र तो होती ही है ना.”
“बस ये सब निपट जाए,देवेन फिर सुकून ही सुकून होगा.”
“बस ऐसा जल्द से जल्द हो.”
“हाँ.अच्छा अब फोन रखती हू.शाम को आऊँगी.”
“ठीक है..अरे!रूको,अभी फोन मत काटो.”,देवेन के ज़हन मे तभी 1 ख़याल आया.
“हां,क्या हुआ?”
“रंभा,अब तुम यहा अपनी कार से नही आना & ना ही सामने के दरवाज़े से.जब भी आना पहले मुझे फोन करना & आते वक़्त अपनी शक्ल च्छुपाए रखना.देखो,आज जो आया वो आगे भी आ सकता है.तुम्हारी शक्ल लोग पहचानते हैं.अब मैं नही चाहता कि अगर वो काली कार फिर आती है तो उसका ड्राइवर कही तुम्हे देख कोई अटकल ना लगाए.”
“ठीक है,देवेन.मैं ख़याल रखूँगी.अब रखू फोन?”
हां.बाइ!”
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क्रमशः.......
JAAL paart--90
gataank se aage......
tabhi dono ko kisi car ke aane ki aavaz sunai di.shah ne fauran lund bahar khincha & rambha ki sari neeche kar use car me bithaya,fir vahi zamin pe gire uske bag & phate blouse ko uthaya & use thamake khud car me baith gaya.usne car start ki tabhi 1 & car parking me aayi.rambha ne dekha & uske munh se hairat bhari aavaz nikalte-2 bachi..samne vali car deven ki thi.rambha ne bag se apna mobile nikala & pehle shah ko kankhiyo se dekha..vo car nikalne me mashgul tha.
kali car vaha aayi & ruk gayi.deven 1 khali jagah me car laga uske driver ke utarne ka intezar kar raha tha.kali car ka darwaza andar se khula & vo bahar ki taraf dhakela hi ja raha tha ki kuchh dekh vo ruk gaya.shah ki car bahar nikal rahi thi & vo kali car ka driver shayad use dekh ruk gaya tha.deven bhi shah ki car ko dekh raha tha magar use pata nahi tha ki andar kaun hai.
tabhi vo chaunk gaya,kali car ke driver ne car start kar use tezi se exit ki taraf badha diya tha.thik usi waqt lift aayi & usme se 2 log utar apni car ki taraf badhe.deven ne apni car kali car ke peechhe lagayi par tabhi vo do log apni car me baith use reverse kar usi ki car ke samne le aaye the.deven ne jhalla ke horn bajaya par rasta saaf hone 2 minute lage & jab vo bahar aaya to kali car nadarad thi.vo aadhe ghante aas-paas ke ilake ko chhanta raha magar vo car nahi mili.
Rambha mobile pe message type kar rahi thi jab Mahdev Shah ne us se mobile chhen peechhe ki seat pe phenka & daye hath se steering sambhale baye se use apni or khincha & chumte hue car chalane laga.rambha samajh gayi ki ab message karna khatre se kahli nahi & fir parking me hui chudai ke baad vo bahut mast bhi ho gayi thi.usne baya hath shah ke lund pe rakha joki abhi bhi uski pant se bahar tha & uske baye gaalo ko humne lagi.
car 1 signal pe ruki to shah ne uske seene pe pada aanchal hataya & uski chhatiyan chusne laga.rambha seat pe adi uski zuban se mast hone lagi..kitna mastana ehsas tha ye!..vo shehar ki bheed ke beechobeech thi..uski khidki ke bahar 1 bike pe ladka baitha tha..har taraf log the par kisi ko ye khabar nahi thi ki vo car me nagi thi & uska aashiq uski chhatiya pi raha tha..uffff..rambha ne aankhe band kar shah ke baal noche!
kuchh der baad batti hari hui to shah ne mehbooba ki choochiyan chhodi & carapne gahr ki taraf badha di.gahr pahunchte hi gate ke bahar kahde darban salamthonkte hue gate khola & car andar dakhil ho gayi.darban gate ke bahar tha & aaj bhi shah ka ghar bilkul sunsan tha.
rambha ke car se utarte hi shah ne use baaho me bhar liya & vahi khule me hi use chumne laga.use khud pe hairat ho rahi thi..is ladki me aisi kya kashish thi..kya jadu tha jo vo is tarah deewano si harkaten kar raha tha!..rambha ne uski shirt pakad zor se khinchi to uske buttons tut ke bikhar gaye.rambha ne kamiz ko uske jism se alag kiya & uske nipples ko chusne lagi.
shah uski pith pe hath fira raha tha.rambha uske seene ko chumti neeche jhuki & uski pant bhi utra di.ab shah pura nanga tha & vo sirf sari me.vo shah ke lund ko chusne me jut gayi to shah gadi ki bonnet se tik ke khada ho gaya & uske balo me ungliya firane laga.rambha shah ke ando ko chus rahi thi & apni ungli se uske lund ke chhed ko haule-2 chhed rahi thi.shah ke lund me uske chhune se sansani daud gayi.usne rambha ko pakad ke upar uthaya to rambha ne uske gale me baahe daal di & use chumne lagi.
shah uski mansal kamar & gudaz gand ko sehlate hue uski kiss ka jawab de raha tha.shah ke garm hatho ki hararat rambha ko fir se masti me bawli kar rahe the.rambha chumte hue aahe bharne lagi thi & aage hoke apni chut shah ke lund pe daba rahi thi.ab use bas vo lund apni chut me chahiye tha.shah ne uski gand ki kasi fanko ko pakda & bahar ki or failaya to rambha ne aah bharte hue kiss todi & sar peechhe jhatka.
uske aisa karne se rambha ki chhatiya shah ke samne ubhar gayi & usne apna munh unse laga diya.rambha ne bhi chhatiya aage uchka di taki uska aashiq aaram se unhe chus sake.rambha ke jism me bijli daudne lagi.shah uske nipples ko danto se katne ke baad puri ki puri choochi ko munh me bhar zor se chusta to vo sihar uthati.shah ka dil uske mastane ubharo ko dabane ka kiya to usne uski kamar pakde huse use ghuma ke bonnet se lagaya & fir uski kamar pakd use uspe bitha diya.
rambha ne apni tange khol use aaeg khincha to usne uski choochiya pakad li & maslate hue chusne laga.rambha peechhe jhukti hui aahe bhar rahi & apni zulfe jhatak rahi thi.uske hath abhi tak shah ke sar se lage apne seene pe use daba rahe the magar ab uski chut ki kasak bahut zyada badh gayi thi.rambha ke hath shah ke sarak ke neeche uski pith se hote hue uski gand pe aaye & use dabaya.
shah uska ishara samajh gaya & uske honth rambha ki chhatiyo se fisalte hue uske pet ke raste uski chut tak pahunche.thodi der usne bonnet pe baithi rambha ki andruni jangho ko chuma & fir uski chut me jibh firane laga.rambha ka jsim jhatke khane laga & vo masti me aahen bharte hue apni tango se shah ke jism ko & apne hatho se uske sar ko apni chut pe dabane lagi.shah kafi der uski chut chaatata raha & jaise hi usne mehsus kiya ki vo jhadne ki kagar pe hai vo khada ho gaya & uski janghe tham apna lund uski chut me dhakela.
rambha ne uske kandhe tham liya & apni janghe puri faila uske lambe & behad mote lund ko chut me ghusne me madad ki.vo us se chipat gayi & uske baye kandhe pe thuddi tika uski pith & gand se leke suke baalo tak besabr hath chalati us se chudne lagi.shah ke dhakke seedhe uski kokh pe pad rahe the & uske jism me maze ki dharayen behne lagi thi.chand dhakko ke baad uske nakhun shah ke jism ko kahronchne lage & vo jhad gayi.
jhadte hi vo nidhal ho bonnet pe let gayi.shah ne baya hath uske pet pe rakha & daye se uski choochiya masalta use chodne laga.bungle ke khule ahate me chidiyo ki chahchahahat ke sath dono ki aahen,dono ke jismo ke takrane ki aavaaz & chudai se bonnet me hoti aavaz gunj rahi thi.
rambha ne apne seene ko masalte aashiq ke hatho ke upar apne hath jama diye the & apni tange uski kamar pe kase uski chudai se pagal hue ja rahi thi.shah bhi bas ab uski chut me jhadna chahta tha.vo aage jhuka & rambha ke kandho ke neeche se hath lagate hue use apni baaho me bhar liya & uske chehre ko chumte hue dhakke lagane laga.rambha bhi uske jism ko baaho me bhar use kharonchti apni kamar uchkati uska bharpur sath de rahi thi.
"aanngghhhhhhh...!"
"ohhhhhhhhhh..!",rambha shah ki chudai se behaal ho karahi & jhad gayi.jhadte hi uski chut ne shah ke lund ko dabocha & vo bhi aape se bahar ho virya ugalne laga.dono ne manzil pa li thi & ab bahut sukun tha unke chehro pe par dono ko pata tha ki ye to bas pehla padav hai.abhi dono ko sham tak is safar ko karna tha & usme aisi kayi manzile tay karni thi.
vo kali car shah ke bungle ke bahar aayi & ruk gayi & uska shisha kuchh inch neecvhe hua,abhi bhi uske driver ki shakl chhupi thi.jab dono premiyo ne sath-2 manzil pa ke apni mastani aaho se uska izhar kiya to vo aavaz bahar baithe darban ke kano & us car ke driver tak pahunchi.darban apne malik ki harkato se achhi tarah vakif tha & vo baitha-2 muskuraya & us car ke driver ne aavazen sunte hi shisha band kiya & car vapas le li.
us car se bekhabar shah ne apni mashuka ko apni baaho me uthaya & uske husn & jawani ka & kutf uthane ke maqsad se bungle ke andar chala gaya.
“Kya hua?”,Deven ke vapas lautate hi Vijayant Mehra ne us se sawal kiya.deven ne kandhe jhatke jaise use bhi kuchh pata nahi.vijayant ke mathe pe uska jawab sun shikan padi to usne batay ki kaise usne kali car ko kho diya.
“hun..achha,deven kya aisa ho sakta hai ki us kali car vale ko tumhare peechha karne ka pata chal gaya ho & usne tumhe chakma diya ho?”
“lagta to nahi par pakka nahi keh sakta.”
“tab to humare paas tumhari ishtehar me di tarikh tak intezar karne ke alawa & is samne vale ghar pe nazar rakhne ke alawa & koi chara nahi.”
“haan.”,deven ne thaki aavaz me jawab diya.uske dimagh me baar-2 pichhle ghante ki baate ghum rahi thi.kabhi use khud pe gussa aata ki kyu usne us car ko nazro se ojhal hone diya to kabhi vo is soch me doob jata ki kya sachmuch Dayal hi tha us car me.kuchh der baad usne is fizul ki jaddojahad ko apne zehan se nikala & Rambha ka number milane laga.ghanti bajti rahi par usne fone nahi uthaya.deven ne 2-3 baar & uska number try kiya & fir chhod diya.usne socha ki zarur vo kisi kaam me phansi hogi magar kis kaam me ye use pata nahi tha.
Rambha us waqt Mahadev Shah ke seene pe hath jamaye uske lund ko apni chut me liye kud rahi thi.uska mobile vahi car ki pichhli seat pe baj raha tha par use us waqt phone kya khud ka bhi hosh nahi tha.shah ke sakht hath uski komal chhatiyo ko masal rahe the & uski masti ka koi thikana nahi tha.shah 2 bar jhad uske jism me jhad chuka tha & isi wajah se ab vo jhadne me zyada waqt le raha tha.rambha ne dekha ki vo thoda thaka bhi lag raha tha.apni umra ke hisab se to is waqt use gehri nind me hona chahiye tha magar vo kisi jawan mard ki tarah 2 ghante me teesri baar use chod raha tha.ye to shayad kayi jawano ke bas ki baat bhi nahi thi..par fir bhi mujhe iska khayal rakhna hoga..rambha ne socha & usi waqt uski chut ne apni mastani harkate shuru kar di & nateejatan uske sath-2 shah bhi jhad gaya.
“ohh..thak gayi main to..”,rambha hanfti uske seene pe padi hui thi,”..pagal kar dete hain aap!“,shah ne use hanste hue apne upar se utara to rambha uski baaho ke ghere me uske bayi taraf let gayi.
“pagal to tumne mujhe kar diya hai.”,shah uske jism ko pyar se sehla raha tha,”achha,ye batao ki Sameer ki appointments ke bare me pata kiya tumne?”
“aap mujhe iske alawa..”,rambha ne uske sikude lund pe chapat lagayi,”..kisi & baat ke bare me sochne ka waqt den tab to pata lagaoon!”,shah uske jawab pe hans pada & fir ubasi li.rambha ne isiliye jhuth bola kyuki pehle use sab kuchh Deven ko batana tha & uske sath milke sari planning karni thi.
“thoda aaram kijiye ab.”,rambha ne uska seena sehlaya.
“hun.”,shah ko bhi nind aa rahi thi,”main isliye puchh raha tha kyuki mujhe pata chala hai ki bas 4 din baad hi Manpur project ka tender khulne wala hai.”
“ oh.aap befikr rahiye,main jald hi ye kaam pura karungi.”
“ok,darling.”,rambha ne uske seene pe sar rakh diya & uska pet sehlane lagi.kuchh hi der me shah so gaya.kuchh der to rambha vaise hi padi rahi par jab use yakin ho gaya ki shah gehri nind me chala gaya hai tab vo dhire se uski banh keg here me se nikalte hue uthi & shah ki almari khol uska 1 dressing gown nikal ke pehna.
“hello,deven.sorry pehle aapka fone nahi uthaya.”,vo bahar aake car se apna mobile nikal uspe baat kar rahi thi.
“tum ho kaha?”
“shah ke ghar pe.”,rambha ko na jane kyu ye baat batate hue thodi glani si hui.
“oh.”,deven ki aavaz me bhio kuchh aisa tha joki rambha ko aahat kar gaya,”..to vo kaha hai?”
“so raha hai.”
“achha.”,deven ki aavaz kuchh zyada bhari thi magar usne fauran khud ko sambhala,”..achha ye suno,koi aaya tha ishtehar me diye pate pe?”
“kya?!kaun?!”,rambha ki dhadkane bhi tez ho gayi thi.deven ne use puri baat batayi,”..achha,deven.ye shah sameer ka accident karwane ko utawla ho raha hai.upar se manpur ka tender bhi bas 4 dino me khulne vala hai.”
“sameer ki appointments mili tumhe?”
“haan.”
“to thik hai.tum is shah se ye nikalwane ki koshish karo ki aakhir vo sameer ke sath ye hadsa karwayega kaise?..kis jagah pe?..kis se?..sab kuchh magar hoshiyari se.ye mujhe bahut shatir insan lagta hai.aiseinsan ko zara bhi shaq hua to vo khud ko bachane ke liye kuchh bhi kar sakta hai.”
“aap chinta na karen,deven.main sab sambhal lungi.”
“mujhe pura bharosa hai rambha par tumhe yu akela chhodne me fikr to hoti hi hai na.”
“bas ye sab nipat jaye,deven fir sukun hi sukun hoga.”
“bas aisa jald se jald ho.”
“Haan.achha ab fone rakhti hu.sham ko aaoongi.”
“thik hai..are!ruko,abhi phone mat kato.”,deven ke zehan me tabhi 1 khayal aaya.
“haan,kya hua?”
“rambha,ab tum yaha apni car se nahi aana & na hi samne ke darwaze se.jab bhi aana pehle mujhe phone karna & aate waqt apni shakl chhupaye rakhna.dekho,aaj jo aaya vo aage bhi aa sakta hai.tumhari shakl log pehchante hain.ab main nahi chahta ki agar vo kali car fir aati hai to uska driver kahi tumhe dekh koi atkal na lagaye.”
“thik hai,deven.main khayal rakhungi.ab rakhu fone?”
Haan.bye!”
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kramashah.......
गतान्क से आगे......
तभी दोनो को किसी कार के आने की आवाज़ सुनाई दी.शाह ने फ़ौरन लंड बाहर खींचा & रंभा की सारी नीचे कर उसे कार मे बिठाया,फिर वही ज़मीन पे गिरे उसके बॅग & फटे ब्लाउस को उठाया & उसे थमाके खुद कार मे बैठ गया.उसने कार स्टार्ट की तभी 1 और कार पार्किंग मे आई.रंभा ने देखा & उसके मुँह से हैरत भरी आवाज़ निकलते-2 बची..सामने वाली कार देवेन की थी.रंभा ने बॅग से अपना मोबाइल निकाला & पहले शाह को कनखियो से देखा..वो कार निकालने मे मशगूल था.
काली कार वाहा आई & रुक गयी.देवेन 1 खाली जगह मे कार लगा उसके ड्राइवर के उतरने का इंतेज़ार कर रहा था.काली कार का दरवाज़ा अंदर से खुला & वो बाहर की तरफ धकेला ही जा रहा था कि कुच्छ देख वो रुक गया.शाह की कार बाहर निकल रही थी & वो काली कार का ड्राइवर शायद उसे देख रुक गया था.देवेन भी शाह की कार को देख रहा था मगर उसे पता नही था कि अंदर कौन है.
तभी वो चौंक गया,काली कार के ड्राइवर ने कार स्टार्ट कर उसे तेज़ी से एग्ज़िट की तरफ बढ़ा दिया था.ठीक उसी वक़्त लिफ्ट आई & उसमे से 2 लोग उतर अपनी कार की तरफ बढ़े.देवेन ने अपनी कार काली कार के पीछे लगाई पर तभी वो दो लोग अपनी कार मे बैठ उसे रिवर्स कर उसी की कार के सामने ले आए थे.देवेन ने झल्ला के हॉर्न बजाया पर रास्ता सॉफ होने 2 मिनिट लगे & जब वो बाहर आया तो काली कार नदारद थी.वो आधे घंटे आस-पास के इलाक़े को छानता रहा मगर वो कार नही मिली.
रंभा मोबाइल पे मेसेज टाइप कर रही थी जब महदेव शाह ने उस से मोबाइल छीन पीछे की सीट पे फेंका & दाए हाथ से स्टियरिंग संभाले बाए से उसे अपनी ओर खींचा & चूमते हुए कार चलाने लगा.रंभा समझ गयी की अब मेसेज करना ख़तरे से खाली नही & फिर पार्किंग मे हुई चुदाई के बाद वो बहुत मस्त भी हो गयी थी.उसने बाया हाथ शाह के लंड पे रखा जोकि अभी भी उसकी पॅंट से बाहर था & उसके बाए गालो को चूमने लगी.
कार 1 सिग्नल पे रुकी तो शाह ने उसके सीने पे पड़ा आँचल हटाया & उसकी चूचियो चूसने लगा.रंभा सीट पे आडी उसकी ज़ुबान से मस्त होने लगी..कितना मस्ताना एहसास था ये!..वो शहर की भीड़ के बीचोबीच थी..उसकी खिड़की के बाहर 1 बाइक पे लड़का बैठा था..हर तरफ लोग थे पर किसी को ये खबर नही थी कि वो कार मे नगी थी & उसका आशिक़ उसकी चूचियाँ पी रहा था..उफफफ्फ़..रंभा ने आँखे बंद कर शाह के बॉल नोचे!
कुच्छ देर बाद बत्ती हरी हुई तो शाह ने महबूबा की चूचियाँ छ्चोड़ी & कार अपने गहर की तरफ बढ़ा दी.गहर पहुँचते ही गेट के बाहर खड़े दरबान ने सलाम ठोनकतेहुए गेट खोला & कार अंदर दाखिल हो गयी.दरबान गेट के बाहर था & आज भी शाह का घर बिल्कुल सुनसान था.
रंभा के कार से उतरते ही शाह ने उसे बाहो मे भर लिया & वही खुले मे ही उसे चूमने लगा.उसे खुद पे हैरत हो रही थी..इस लड़की मे ऐसी क्या कशिश थी..क्या जादू था जो वो इस तरह दीवानो सी हरकतें कर रहा था!..रंभा ने उसकी शर्ट पकड़ ज़ोर से खींची तो उसके बटन्स टूट के बिखर गये.रंभा ने कमीज़ को उसके जिस्म से अलग किया & उसके निपल्स को चूसने लगी.
शाह उसकी पीठ पे हाथ फिरा रहा था.रंभा उसके सीने को चूमती नीचे झुकी & उसकी पॅंट भी उतार दी.अब शाह पूरा नंगा था & वो सिर्फ़ सारी मे.वो शाह के लंड को चूसने मे जुट गयी तो शाह गाड़ी की बॉनेट से टिक के खड़ा हो गया & उसके बालो मे उंगलिया फिराने लगा.रंभा शाह के आंडो को चूस रही थी & अपनी उंगली से उसके लंड के छेद को हौले-2 छेड़ रही थी.शाह के लंड मे उसके छुने से सनसनी दौड़ गयी.उसने रंभा को पकड़ के उपर उठाया तो रंभा ने उसके गले मे बाहे डाल दी & उसे चूमने लगी.
शाह उसकी मांसल कमर & गुदाज़ गंद को सहलाते हुए उसकी किस का जवाब दे रहा था.शाह के गर्म हाथो की हरारत रंभा को फिर से मस्ती मे बावली कर रहे थे.रंभा चूमते हुए आहे भरने लगी थी & आगे होके अपनी चूत शाह के लंड पे दबा रही थी.अब उसे बस वो लंड अपनी चूत मे चाहिए था.शाह ने उसकी गंद की कसी फांको को पकड़ा & बाहर की ओर फैलाया तो रंभा ने आह भरते हुए किस तोड़ी & सर पीछे झटका.
उसके ऐसा करने से रंभा की चूचियाँ शाह के सामने उभर गयी & उसने अपना मुँह उनसे लगा दिया.रंभा ने भी चूचियाँ आगे उचका दी ताकि उसका आशिक़ आराम से उन्हे चूस सके.रंभा के जिस्म मे बिजली दौड़ने लगी.शाह उसके निपल्स को दन्तो से काटने के बाद पूरी की पूरी चूची को मुँह मे भर ज़ोर से चूस्ता तो वो सिहर उठती.शाह का दिल उसके मस्ताने उभारो को दबाने का किया तो उसने उसकी कमर पकड़े हुसे उसे घुमा के बॉनेट से लगाया & फिर उसकी कमर पकड़ उसे उसपे बिठा दिया.
रंभा ने अपनी टाँगे खोल उसे आगे खींचा तो उसने उसकी चूचिया पकड़ ली & मसलते हुए चूसने लगा.रंभा पीछे झुकती हुई आहे भर रही & अपनी ज़ूलफे झटक रही थी.उसके हाथ अभी तक शाह के सर से लगे अपने सीने पे उसे दबा रहे थे मगर अब उसकी चूत की कसक बहुत ज़्यादा बढ़ गयी थी.रंभा के हाथ शाह के सरक के नीचे उसकी पीठ से होते हुए उसकी गंद पे आए & उसे दबाया.
शाह उसका इशारा समझ गया & उसके होंठ रंभा की चूचियो से फिसलते हुए उसके पेट के रास्ते उसकी चूत तक पहुँचे.थोड़ी देर उसने बॉनेट पे बैठी रंभा की अन्द्रुनि जाँघो को चूमा & फिर उसकी चूत मे जीभ फिराने लगा.रंभा का जिस्म झटके खाने लगा & वो मस्ती मे आहें भरते हुए अपनी टाँगो से शाह के जिस्म को & अपने हाथो से उसके सर को अपनी चूत पे दबाने लगी.शाह काफ़ी देर उसकी चूत चाटता रहा & जैसे ही उसने महसूस किया कि वो झड़ने की कगार पे है वो खड़ा हो गया & उसकी जंघे थाम अपना लंड उसकी चूत मे धकेला.
रंभा ने उसके कंधे थाम लिया & अपनी जंघे पूरी फैला उसके लंबे & बेहद मोटे लंड को चूत मे घुसने मे मदद की.वो उस से चिपेट गयी & उसके बाए कंधे पे ठुड्डी टीका उसकी पीठ & गंद से लेके उसके बालो तक बेसब्र हाथ चलाती उस से चुदने लगी.शाह के धक्के सीधे उसकी कोख पे पद रहे थे & उसके जिस्म मे मज़े की धाराएँ बहने लगी थी.चाँद धक्को के बाद उसके नाख़ून शाह के जिस्म को कहरोंछने लगे & वो झाड़ गयी.
झाड़ते ही वो निढाल हो बॉनेट पे लेट गयी.शाह ने बाया हाथ उसके पेट पे रखा & दाए से उसकी चूचिया मसलता उसे चोदने लगा.बंगल के खुले अहाते मे चिड़ियो की चाहचाहाहट के साथ दोनो की आहें,दोनो के जिस्मो के टकराने की आवाज़ & चुदाई से बॉनेट मे होती आवाज़ गूँज रही थी.
रंभा ने अपने सीने को मसल्ते आशिक़ के हाथो के उपर अपने हाथ जमा दिए थे & अपनी टाँगे उसकी कमर पे कसे उसकी चुदाई से पागल हुए जा रही थी.शाह भी बस अब उसकी चूत मे झड़ना चाहता था.वो आगे झुका & रंभा के कंधो के नीचे से हाथ लगाते हुए उसे अपनी बाहो मे भर लिया & उसके चेहरे को चूमते हुए धक्के लगाने लगा.रंभा भी उसके जिस्म को बाहो मे भर उसे खरोंछती अपनी कमर उचकाती उसका भरपूर साथ दे रही थी.
"आन्न्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह...!"
"ओह..!",रंभा शाह की चुदाई से बहाल हो कराही & झाड़ गयी.झाड़ते ही उसकी चूत ने शाह के लंड को दबोचा & वो भी आपे से बाहर हो वीर्य उगलने लगा.दोनो ने मंज़िल पा ली थी & अब बहुत सुकून था उनके चेहरो पे पर दोनो को पता था कि ये तो बस पहला पड़ाव है.अभी दोनो को शाम तक इस सफ़र को करना था & उसमे ऐसी काई मंज़िले तय करनी थी.
वो काली कार शाह के बंगल के बाहर आई & रुक गयी & उसका शीशा कुच्छ इंच नीचे हुआ,अभी भी उसके ड्राइवर की शक्ल च्छूपी थी.जब दोनो प्रेमियो ने साथ-2 मंज़िल पा के अपनी मस्तानी आहो से उसका इज़हार किया तो वो आवाज़ बाहर बैठे दरबान के कानो & उस कार के ड्राइवर तक पहुँची.दरबान अपने मालिक की हर्कतो से अच्छी तरह वाकिफ़ था & वो बैठा-2 मुस्कुराया & उस कार के ड्राइवर ने आवाज़ें सुनते ही शीशा बंद किया & कार वापस ले ली.
उस कार से बेख़बर शाह ने अपनी माशुका को अपनी बाहो मे उठाया & उसके हुस्न & जवानी का और लुफ्त उठाने के मक़सद से बंगल के अंदर चला गया.
“क्या हुआ?”,देवेन के वापस लौटते ही विजयंत मेहरा ने उस से सवाल किया.देवेन ने कंधे झटके जैसे उसे भी कुच्छ पता नही.विजयंत के माथे पे उसका जवाब सुन शिकन पड़ी तो उसने बताया कि कैसे उसने काली कार को खो दिया.
“हूँ..अच्छा,देवेन क्या ऐसा हो सकता है कि उस काली कार वाले को तुम्हारे पीछा करने का पता चल गया हो & उसने तुम्हे चकमा दिया हो?”
“लगता तो नही पर पक्का नही कह सकता.”
“तब तो हमारे पास तुम्हारी इश्तेहार मे दी तारीख तक इंतेज़ार करने के अलावा & इस सामने वाले घर पे नज़र रखने के अलावा & कोई चारा नही.”
“हाँ.”,देवेन ने ताकि आवाज़ मे जवाब दिया.उसके दिमाग़ मे बार-2 पिच्छले घंटे की बाते घूम रही थी.कभी उसे खुद पे गुस्सा आता कि क्यू उसने उस कार को नज़रो से ओझल होने दिया तो कभी वो इस सोच मे डूब जाता कि क्या सचमुच दयाल ही था उस कार मे.कुच्छ देर बाद उसने इस फ़िज़ूल की जद्दोजहद को अपने ज़हन से निकाला & रंभा का नंबर मिलाने लगा.घंटी बजती रही पर उसने फोन नही उठाया.देवेन ने 2-3 बार & उसका नंबर ट्राइ किया & फिर छ्चोड़ दिया.उसने सोचा कि ज़रूर वो किसी काम मे फँसी होगी मगर किस काम मे ये उसे पता नही था.
रंभा उस वक़्त महादेव शाह के सीने पे हाथ जमाए उसके लंड को अपनी चूत मे लिए कूद रही थी.उसका मोबाइल वही कार की पिच्छली सीट पे बज रहा था पर उसे उस वक़्त फोन क्या खुद का भी होश नही था.शाह के सख़्त हाथ उसकी कोमल चूचियो को मसल रहे थे & उसकी मस्ती का कोई ठिकाना नही था.शाह 2 बार झाड़ उसके जिस्म मे झाड़ चुका था & इसी वजह से अब वो झड़ने मे ज़्यादा वक़्त ले रहा था.रंभा ने देखा की वो थोडा थका भी लग रहा था.अपनी उम्र के हिसाब से तो इस वक़्त उसे गहरी नींद मे होना चाहिए था मगर वो किसी जवान मर्द की तरह 2 घंटे मे तीसरी बार उसे चोद रहा था.ये तो शायद कयि जवानो के बस की बात भी नही थी..पर फिर भी मुझे इसका ख़याल रखना होगा..रंभा ने सोचा & उसी वक़्त उसकी चूत ने अपनी मस्तानी हरकते शुरू कर दी & नतीजतन उसके साथ-2 शाह भी झाड़ गया.
“ओह्ह..थक गयी मैं तो..”,रंभा हाँफती उसके सीने पे पड़ी हुई थी,”..पागल कर देते हैं आप!“,शाह ने उसे हंसते हुए अपने उपर से उतारा तो रंभा उसकी बाहो के घेरे मे उसके बाई तरफ लेट गयी.
“पागल तो तुमने मुझे कर दिया है.”,शाह उसके जिस्म को प्यार से सहला रहा था,”अच्छा,ये बताओ कि समीर की अपायंट्मेंट्स के बारे मे पता किया तुमने?”
“आप मुझे इसके अलावा..”,रंभा ने उसके सिकुदे लंड पे चपत लगाई,”..किसी और बात के बारे मे सोचने का वक़्त दें तब तो पता लगाऊं!”,शाह उसके जवाब पे हंस पड़ा & फिर उबासी ली.रंभा ने इसीलिए झूठ बोला क्यूकी पहले उसे सब कुच्छ देवेन को बताना था & उसके साथ मिलके सारी प्लॅनिंग करनी थी.
“थोडा आराम कीजिए अब.”,रंभा ने उसका सीना सहलाया.
“हूँ.”,शाह को भी नींद आ रही थी,”मैं इसलिए पुच्छ रहा था क्यूकी मुझे पता चला है कि बस 4 दिन बाद ही मानपुर प्रॉजेक्ट का टेंडर खुलने वाला है.”
“ ओह.आप बेफ़िक्र रहिए,मैं जल्द ही ये काम पूरा करूँगी.”
“ओके,डार्लिंग.”,रंभा ने उसके सीने पे सर रख दिया & उसका पेट सहलाने लगी.कुच्छ ही देर मे शाह सो गया.कुच्छ देर तो रंभा वैसे ही पड़ी रही पर जब उसे यकीन हो गया कि शाह गहरी नींद मे चला गया है तब वो धीरे से उसकी बाँह केग हियर मे से निकालते हुए उठी & शाह की अलमारी खोल उसका 1 ड्रेसिंग गाउन निकाल के पहना.
“हेलो,देवेन.सॉरी पहले आपका फोन नही उठाया.”,वो बाहर आके कार से अपना मोबाइल निकाल उसपे बात कर रही थी.
“तुम हो कहा?”
“शाह के घर पे.”,रंभा को ना जाने क्यू ये बात बताते हुए थोड़ी ग्लानि सी हुई.
“ओह.”,देवेन की आवाज़ मे भी कुच्छ ऐसा था जोकि रंभा को आहत कर गया,”..तो वो कहा है?”
“सो रहा है.”
“अच्छा.”,देवेन की आवाज़ कुच्छ ज़्यादा भारी थी मगर उसने फ़ौरन खुद को संभाला,”..अच्छा ये सुनो,कोई आया था इश्तेहार मे दिए पते पे?”
“क्या?!कौन?!”,रंभा की धड़कने भी तेज़ हो गयी थी.देवेन ने उसे पूरी बात बताई,”..अच्छा,देवेन.ये शाह समीर का आक्सिडेंट करवाने को उतावला हो रहा है.उपर से मानपुर का टेंडर भी बस 4 दिनो मे खुलने वाला है.”
“समीर की अपायंट्मेंट्स मिली तुम्हे?”
“हां.”
“तो ठीक है.तुम इस शाह से ये निकलवाने की कोशिश करो की आख़िर वो समीर के साथ ये हादसा करवाएगा कैसे?..किस जगह पे?..किस से?..सब कुच्छ मगर होशियारी से.ये मुझे बहुत शातिर इंसान लगता है.ऐसे इंसान को ज़रा भी शक़ हुआ तो वो खुद को बचाने के लिए कुच्छ भी कर सकता है.”
“आप चिंता ना करें,देवेन.मैं सब संभाल लूँगी.”
“मुझे पूरा भरोसा है रंभा पर तुम्हे यू अकेला छ्चोड़ने मे फ़िक्र तो होती ही है ना.”
“बस ये सब निपट जाए,देवेन फिर सुकून ही सुकून होगा.”
“बस ऐसा जल्द से जल्द हो.”
“हाँ.अच्छा अब फोन रखती हू.शाम को आऊँगी.”
“ठीक है..अरे!रूको,अभी फोन मत काटो.”,देवेन के ज़हन मे तभी 1 ख़याल आया.
“हां,क्या हुआ?”
“रंभा,अब तुम यहा अपनी कार से नही आना & ना ही सामने के दरवाज़े से.जब भी आना पहले मुझे फोन करना & आते वक़्त अपनी शक्ल च्छुपाए रखना.देखो,आज जो आया वो आगे भी आ सकता है.तुम्हारी शक्ल लोग पहचानते हैं.अब मैं नही चाहता कि अगर वो काली कार फिर आती है तो उसका ड्राइवर कही तुम्हे देख कोई अटकल ना लगाए.”
“ठीक है,देवेन.मैं ख़याल रखूँगी.अब रखू फोन?”
हां.बाइ!”
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क्रमशः.......
JAAL paart--90
gataank se aage......
tabhi dono ko kisi car ke aane ki aavaz sunai di.shah ne fauran lund bahar khincha & rambha ki sari neeche kar use car me bithaya,fir vahi zamin pe gire uske bag & phate blouse ko uthaya & use thamake khud car me baith gaya.usne car start ki tabhi 1 & car parking me aayi.rambha ne dekha & uske munh se hairat bhari aavaz nikalte-2 bachi..samne vali car deven ki thi.rambha ne bag se apna mobile nikala & pehle shah ko kankhiyo se dekha..vo car nikalne me mashgul tha.
kali car vaha aayi & ruk gayi.deven 1 khali jagah me car laga uske driver ke utarne ka intezar kar raha tha.kali car ka darwaza andar se khula & vo bahar ki taraf dhakela hi ja raha tha ki kuchh dekh vo ruk gaya.shah ki car bahar nikal rahi thi & vo kali car ka driver shayad use dekh ruk gaya tha.deven bhi shah ki car ko dekh raha tha magar use pata nahi tha ki andar kaun hai.
tabhi vo chaunk gaya,kali car ke driver ne car start kar use tezi se exit ki taraf badha diya tha.thik usi waqt lift aayi & usme se 2 log utar apni car ki taraf badhe.deven ne apni car kali car ke peechhe lagayi par tabhi vo do log apni car me baith use reverse kar usi ki car ke samne le aaye the.deven ne jhalla ke horn bajaya par rasta saaf hone 2 minute lage & jab vo bahar aaya to kali car nadarad thi.vo aadhe ghante aas-paas ke ilake ko chhanta raha magar vo car nahi mili.
Rambha mobile pe message type kar rahi thi jab Mahdev Shah ne us se mobile chhen peechhe ki seat pe phenka & daye hath se steering sambhale baye se use apni or khincha & chumte hue car chalane laga.rambha samajh gayi ki ab message karna khatre se kahli nahi & fir parking me hui chudai ke baad vo bahut mast bhi ho gayi thi.usne baya hath shah ke lund pe rakha joki abhi bhi uski pant se bahar tha & uske baye gaalo ko humne lagi.
car 1 signal pe ruki to shah ne uske seene pe pada aanchal hataya & uski chhatiyan chusne laga.rambha seat pe adi uski zuban se mast hone lagi..kitna mastana ehsas tha ye!..vo shehar ki bheed ke beechobeech thi..uski khidki ke bahar 1 bike pe ladka baitha tha..har taraf log the par kisi ko ye khabar nahi thi ki vo car me nagi thi & uska aashiq uski chhatiya pi raha tha..uffff..rambha ne aankhe band kar shah ke baal noche!
kuchh der baad batti hari hui to shah ne mehbooba ki choochiyan chhodi & carapne gahr ki taraf badha di.gahr pahunchte hi gate ke bahar kahde darban salamthonkte hue gate khola & car andar dakhil ho gayi.darban gate ke bahar tha & aaj bhi shah ka ghar bilkul sunsan tha.
rambha ke car se utarte hi shah ne use baaho me bhar liya & vahi khule me hi use chumne laga.use khud pe hairat ho rahi thi..is ladki me aisi kya kashish thi..kya jadu tha jo vo is tarah deewano si harkaten kar raha tha!..rambha ne uski shirt pakad zor se khinchi to uske buttons tut ke bikhar gaye.rambha ne kamiz ko uske jism se alag kiya & uske nipples ko chusne lagi.
shah uski pith pe hath fira raha tha.rambha uske seene ko chumti neeche jhuki & uski pant bhi utra di.ab shah pura nanga tha & vo sirf sari me.vo shah ke lund ko chusne me jut gayi to shah gadi ki bonnet se tik ke khada ho gaya & uske balo me ungliya firane laga.rambha shah ke ando ko chus rahi thi & apni ungli se uske lund ke chhed ko haule-2 chhed rahi thi.shah ke lund me uske chhune se sansani daud gayi.usne rambha ko pakad ke upar uthaya to rambha ne uske gale me baahe daal di & use chumne lagi.
shah uski mansal kamar & gudaz gand ko sehlate hue uski kiss ka jawab de raha tha.shah ke garm hatho ki hararat rambha ko fir se masti me bawli kar rahe the.rambha chumte hue aahe bharne lagi thi & aage hoke apni chut shah ke lund pe daba rahi thi.ab use bas vo lund apni chut me chahiye tha.shah ne uski gand ki kasi fanko ko pakda & bahar ki or failaya to rambha ne aah bharte hue kiss todi & sar peechhe jhatka.
uske aisa karne se rambha ki chhatiya shah ke samne ubhar gayi & usne apna munh unse laga diya.rambha ne bhi chhatiya aage uchka di taki uska aashiq aaram se unhe chus sake.rambha ke jism me bijli daudne lagi.shah uske nipples ko danto se katne ke baad puri ki puri choochi ko munh me bhar zor se chusta to vo sihar uthati.shah ka dil uske mastane ubharo ko dabane ka kiya to usne uski kamar pakde huse use ghuma ke bonnet se lagaya & fir uski kamar pakd use uspe bitha diya.
rambha ne apni tange khol use aaeg khincha to usne uski choochiya pakad li & maslate hue chusne laga.rambha peechhe jhukti hui aahe bhar rahi & apni zulfe jhatak rahi thi.uske hath abhi tak shah ke sar se lage apne seene pe use daba rahe the magar ab uski chut ki kasak bahut zyada badh gayi thi.rambha ke hath shah ke sarak ke neeche uski pith se hote hue uski gand pe aaye & use dabaya.
shah uska ishara samajh gaya & uske honth rambha ki chhatiyo se fisalte hue uske pet ke raste uski chut tak pahunche.thodi der usne bonnet pe baithi rambha ki andruni jangho ko chuma & fir uski chut me jibh firane laga.rambha ka jsim jhatke khane laga & vo masti me aahen bharte hue apni tango se shah ke jism ko & apne hatho se uske sar ko apni chut pe dabane lagi.shah kafi der uski chut chaatata raha & jaise hi usne mehsus kiya ki vo jhadne ki kagar pe hai vo khada ho gaya & uski janghe tham apna lund uski chut me dhakela.
rambha ne uske kandhe tham liya & apni janghe puri faila uske lambe & behad mote lund ko chut me ghusne me madad ki.vo us se chipat gayi & uske baye kandhe pe thuddi tika uski pith & gand se leke suke baalo tak besabr hath chalati us se chudne lagi.shah ke dhakke seedhe uski kokh pe pad rahe the & uske jism me maze ki dharayen behne lagi thi.chand dhakko ke baad uske nakhun shah ke jism ko kahronchne lage & vo jhad gayi.
jhadte hi vo nidhal ho bonnet pe let gayi.shah ne baya hath uske pet pe rakha & daye se uski choochiya masalta use chodne laga.bungle ke khule ahate me chidiyo ki chahchahahat ke sath dono ki aahen,dono ke jismo ke takrane ki aavaaz & chudai se bonnet me hoti aavaz gunj rahi thi.
rambha ne apne seene ko masalte aashiq ke hatho ke upar apne hath jama diye the & apni tange uski kamar pe kase uski chudai se pagal hue ja rahi thi.shah bhi bas ab uski chut me jhadna chahta tha.vo aage jhuka & rambha ke kandho ke neeche se hath lagate hue use apni baaho me bhar liya & uske chehre ko chumte hue dhakke lagane laga.rambha bhi uske jism ko baaho me bhar use kharonchti apni kamar uchkati uska bharpur sath de rahi thi.
"aanngghhhhhhh...!"
"ohhhhhhhhhh..!",rambha shah ki chudai se behaal ho karahi & jhad gayi.jhadte hi uski chut ne shah ke lund ko dabocha & vo bhi aape se bahar ho virya ugalne laga.dono ne manzil pa li thi & ab bahut sukun tha unke chehro pe par dono ko pata tha ki ye to bas pehla padav hai.abhi dono ko sham tak is safar ko karna tha & usme aisi kayi manzile tay karni thi.
vo kali car shah ke bungle ke bahar aayi & ruk gayi & uska shisha kuchh inch neecvhe hua,abhi bhi uske driver ki shakl chhupi thi.jab dono premiyo ne sath-2 manzil pa ke apni mastani aaho se uska izhar kiya to vo aavaz bahar baithe darban ke kano & us car ke driver tak pahunchi.darban apne malik ki harkato se achhi tarah vakif tha & vo baitha-2 muskuraya & us car ke driver ne aavazen sunte hi shisha band kiya & car vapas le li.
us car se bekhabar shah ne apni mashuka ko apni baaho me uthaya & uske husn & jawani ka & kutf uthane ke maqsad se bungle ke andar chala gaya.
“Kya hua?”,Deven ke vapas lautate hi Vijayant Mehra ne us se sawal kiya.deven ne kandhe jhatke jaise use bhi kuchh pata nahi.vijayant ke mathe pe uska jawab sun shikan padi to usne batay ki kaise usne kali car ko kho diya.
“hun..achha,deven kya aisa ho sakta hai ki us kali car vale ko tumhare peechha karne ka pata chal gaya ho & usne tumhe chakma diya ho?”
“lagta to nahi par pakka nahi keh sakta.”
“tab to humare paas tumhari ishtehar me di tarikh tak intezar karne ke alawa & is samne vale ghar pe nazar rakhne ke alawa & koi chara nahi.”
“haan.”,deven ne thaki aavaz me jawab diya.uske dimagh me baar-2 pichhle ghante ki baate ghum rahi thi.kabhi use khud pe gussa aata ki kyu usne us car ko nazro se ojhal hone diya to kabhi vo is soch me doob jata ki kya sachmuch Dayal hi tha us car me.kuchh der baad usne is fizul ki jaddojahad ko apne zehan se nikala & Rambha ka number milane laga.ghanti bajti rahi par usne fone nahi uthaya.deven ne 2-3 baar & uska number try kiya & fir chhod diya.usne socha ki zarur vo kisi kaam me phansi hogi magar kis kaam me ye use pata nahi tha.
Rambha us waqt Mahadev Shah ke seene pe hath jamaye uske lund ko apni chut me liye kud rahi thi.uska mobile vahi car ki pichhli seat pe baj raha tha par use us waqt phone kya khud ka bhi hosh nahi tha.shah ke sakht hath uski komal chhatiyo ko masal rahe the & uski masti ka koi thikana nahi tha.shah 2 bar jhad uske jism me jhad chuka tha & isi wajah se ab vo jhadne me zyada waqt le raha tha.rambha ne dekha ki vo thoda thaka bhi lag raha tha.apni umra ke hisab se to is waqt use gehri nind me hona chahiye tha magar vo kisi jawan mard ki tarah 2 ghante me teesri baar use chod raha tha.ye to shayad kayi jawano ke bas ki baat bhi nahi thi..par fir bhi mujhe iska khayal rakhna hoga..rambha ne socha & usi waqt uski chut ne apni mastani harkate shuru kar di & nateejatan uske sath-2 shah bhi jhad gaya.
“ohh..thak gayi main to..”,rambha hanfti uske seene pe padi hui thi,”..pagal kar dete hain aap!“,shah ne use hanste hue apne upar se utara to rambha uski baaho ke ghere me uske bayi taraf let gayi.
“pagal to tumne mujhe kar diya hai.”,shah uske jism ko pyar se sehla raha tha,”achha,ye batao ki Sameer ki appointments ke bare me pata kiya tumne?”
“aap mujhe iske alawa..”,rambha ne uske sikude lund pe chapat lagayi,”..kisi & baat ke bare me sochne ka waqt den tab to pata lagaoon!”,shah uske jawab pe hans pada & fir ubasi li.rambha ne isiliye jhuth bola kyuki pehle use sab kuchh Deven ko batana tha & uske sath milke sari planning karni thi.
“thoda aaram kijiye ab.”,rambha ne uska seena sehlaya.
“hun.”,shah ko bhi nind aa rahi thi,”main isliye puchh raha tha kyuki mujhe pata chala hai ki bas 4 din baad hi Manpur project ka tender khulne wala hai.”
“ oh.aap befikr rahiye,main jald hi ye kaam pura karungi.”
“ok,darling.”,rambha ne uske seene pe sar rakh diya & uska pet sehlane lagi.kuchh hi der me shah so gaya.kuchh der to rambha vaise hi padi rahi par jab use yakin ho gaya ki shah gehri nind me chala gaya hai tab vo dhire se uski banh keg here me se nikalte hue uthi & shah ki almari khol uska 1 dressing gown nikal ke pehna.
“hello,deven.sorry pehle aapka fone nahi uthaya.”,vo bahar aake car se apna mobile nikal uspe baat kar rahi thi.
“tum ho kaha?”
“shah ke ghar pe.”,rambha ko na jane kyu ye baat batate hue thodi glani si hui.
“oh.”,deven ki aavaz me bhio kuchh aisa tha joki rambha ko aahat kar gaya,”..to vo kaha hai?”
“so raha hai.”
“achha.”,deven ki aavaz kuchh zyada bhari thi magar usne fauran khud ko sambhala,”..achha ye suno,koi aaya tha ishtehar me diye pate pe?”
“kya?!kaun?!”,rambha ki dhadkane bhi tez ho gayi thi.deven ne use puri baat batayi,”..achha,deven.ye shah sameer ka accident karwane ko utawla ho raha hai.upar se manpur ka tender bhi bas 4 dino me khulne vala hai.”
“sameer ki appointments mili tumhe?”
“haan.”
“to thik hai.tum is shah se ye nikalwane ki koshish karo ki aakhir vo sameer ke sath ye hadsa karwayega kaise?..kis jagah pe?..kis se?..sab kuchh magar hoshiyari se.ye mujhe bahut shatir insan lagta hai.aiseinsan ko zara bhi shaq hua to vo khud ko bachane ke liye kuchh bhi kar sakta hai.”
“aap chinta na karen,deven.main sab sambhal lungi.”
“mujhe pura bharosa hai rambha par tumhe yu akela chhodne me fikr to hoti hi hai na.”
“bas ye sab nipat jaye,deven fir sukun hi sukun hoga.”
“bas aisa jald se jald ho.”
“Haan.achha ab fone rakhti hu.sham ko aaoongi.”
“thik hai..are!ruko,abhi phone mat kato.”,deven ke zehan me tabhi 1 khayal aaya.
“haan,kya hua?”
“rambha,ab tum yaha apni car se nahi aana & na hi samne ke darwaze se.jab bhi aana pehle mujhe phone karna & aate waqt apni shakl chhupaye rakhna.dekho,aaj jo aaya vo aage bhi aa sakta hai.tumhari shakl log pehchante hain.ab main nahi chahta ki agar vo kali car fir aati hai to uska driver kahi tumhe dekh koi atkal na lagaye.”
“thik hai,deven.main khayal rakhungi.ab rakhu fone?”
Haan.bye!”
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kramashah.......