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जाल पार्ट--80
गतान्क से आगे......
"तुम फोन क्यू नही उठा रही थी?!",देवेन बहुत जल्दी-2 अपना समान पॅक कर रहा था.
"मैं नहा रही थी & फोन साइलेंट मोड पे था.",रंभा भी बॅग्स बंद कर रही थी.देवेन ने रॉकी की कार छान मारी थी & उसकी ड्राइविंग सीट के फ्लोर मॅट के नीचे उसे 1 छ्होटी पिस्टल & 1 मोबाइल फोन मिला था.देवेन ने फोने ऑन किया तो पाया था कि उसमे बस 1 नंबर से फोन आया था.
"कुच्छ छूटा तो नही?",देवेन ने अपना बॅग बंद किया.
"नही.",विजयंत मेहरा वही खड़ा दोनो को देख रहा था.
"ओके,अब तुम दोनो मेरी बात ध्यान से सुनो.",देवेन कमर पे हाथ रखे खड़ा था,"..ये शख्स यहा या तो मुझे या रंभा को मारने आया था..",बात सुनते ही रंभा का दिल धड़क उठा..समीर इस हद्द तक जा सकता है..मगर क्यू?,"..पर अब वो शख्स मर चुका है & जिसने भी उसे भेजा था वो आगे हमे नुकसान पहुचाने से पहले झिझकेगा ज़रूर.हमे अब यहा से निकल जाना है.",वो अपनी प्रेमिका से मुखातिब हुआ,"रंभा,तुम अगली फ्लाइट पकड़ के डेवाले जाओ & तुम्हे वाहा 1 खफा बीवी का खेल खेलते हुए मेहरा खानदान के 1-1 आदमी पे नज़र रखनी है."
"मगर..",रंभा के चेहरे पे ख़ौफ़ सॉफ दिख रहा था.
"घबराने की ज़रूरत नही है.मैं हमेशा तुम्हारे आस-पास ही रहूँगा & जैसा मैने कहा मुझे नही लगता कि अब तुम्हे कोई नुकसान पहुचाना चाहेगा.अगर फिर भी तुम्हे डर लगता है तो समीर को इस बारे मे बताओ & फिर 1 वकील के साथ पोलीस मे जाके ये कह दो कि तुम्हे अपने पति से जान का ख़तरा है.वैसे तुम्हे पोलीस तक जाने की ज़रूरत नही पड़ेगी.तुम्हारी बात सुनते ही समीर तुम्हारी हिफ़ाज़त का इंतेज़ाम कर देगा.मुझे नही लगता वो किसी भी तरह की नेगेटिव पब्लिसिटी चाहेगा."
"यानी की समीर का हाथ नही है इस सब के पीछे?",सवाल विजयंत ने किया & दोनो को चौंका दिया.
"पहले मुझे भी ऐसा लगा था मगर अब नही लगता.रंभा समीर से अलग होने को तैय्यार है वो भी उसके बताए वक़्त पे फिर उसे क्या तकलीफ़ हो सकती है?..ये किसी और का ही काम है."
"मगर किसका?"
"मेरा शक़ प्रणव पे है.वो मुझे बहुत शातिर खिलाड़ी लगता है & वो क्या नाम है उसके साथी का..",वो माथे पे हाथ फिराने लगा.
"महादेव शाह.",रंभा बोली.
"हां,बहुत मुमकिन है कि ये सब उसी का किया-धरा हो."
"पर वो मुझे मारना क्यू चाहेगा?..मैं मरी तो समीर कामया से शादी कर लेगा & उसका सारा खेल तो शुरू होने से पहले ही ख़त्म हो जाएगा."
"हूँ."
"मैं जानती हू ये कमिनि हरकत किसकी है?",रंभा के दिमाग़ मे अचानक बिजली कौंधी थी.
"किसकी?"
"कामया की.मेरी मौत से सबसे बड़ा फायडा उसी को होगा.डेवाले पहुचते ही उसे ठीक करती हू.",रंभा गुस्से से बोली.
"गुस्से मे होश नही खोना."
"ठीक है.तो मैं एरपोर्ट निकलु?"
"हां..और रंभा..तुम्हे डेवाले मे हम दोनो के लिए 1 घर का इंतेज़ाम करना होगा."
"ठीक है मगर आप दोनो वाहा कैसे & कब पहुचेंगे?"
"बस पहुँच जाएँगे.",देवेन हंसा & रंभा को चूमा.5 घंटे बाद रंभा डेवाले मे थी & मेहरा परिवार के सभी सदस्य जैसे उसके जाने से हैरान थे वैसे ही उसके अचानक वापस आने पे भी हैरान ही थे.
"कब आई?",समीर दफ़्तर से लौटने के बाद अपनी हैरानी च्छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहा था.
"थोड़ी देर पहले.",रंभा ने जवाब दिया & अलमारी मे अपने कपड़े ठीक करती रही.कुच्छ देर तक समीर कुच्छ नही बोला पर फिर उस से ये खामोशी बर्दाश्त नही हुई.
"वो..मैं घबरा गया था और बलबीर को.."
"प्लीज़ समीर,मेरा मूड मत खराब करो.मैने तुम्हे बोला था कि मुझे परेशान मत करना & मैं वापस आ जाऊंगी मगर फिर भी तुमने ये ओछि हरकत की."
"आइ'म सॉरी पर तुम्हे पता कैसे चला?"
"जैसे भी चला हो मगर तुम मेरी नज़रो मे और गिर गये हो.",रंभा दिल ही दिल मे हंस रही थी.
"ओके.अब ज़्यादा दिन मेरे साथ तुम्हे नही रहना पड़ेगा,बस 1 बार मानपुर वाला टेंडर खुल जाए फिर तुम्हे यहा रहने की ज़हमत नही उठानी पड़ेगी.",रंभा ने कोई जवाब नही दिया & अलमारी बंद कर कमरे से बाहर चली गयी.
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देवेन & विजयंत ने गोआ से बोम्बे तक की ट्रेन पकड़ी.दोनो ने मिलके विजयंत का हुलिया काफ़ी हद्द तक बदला.देवेन ने एसी फर्स्ट क्लास की टिकेट्स ली ताकि दोनो का सामना कम से कम लोगो से हो.बोम्बे से उसने दूसरी ट्रेन पकड़ी & डेवाले पहुँचा.डेवाले पहुचते ही उसने रंभा को फोन किया तो उसने उसे 1 पता दिया & वाहा जाने को कहा.40 मिनिट बाद देवेन और विजयंत उसके बताए पते पे टॅक्सी से उतर रहे थे.
टॅक्सी के जाते ही देवेन ने रंभा को फोन किया,"हम तुम्हारे बताए पते पे पहुँच गये हैं."
"गुड.गेट खुला है.आप अंदर जाइए & मेन डोर के बाहर जो 2 गमले रखे हैं.."
"हान..",देवेन अंदर गया तो उसके पीछे-2 विजयंत मेहरा भी समान उठाए घर के अहाते मे आ गया,"..जो गुलाब के पौधो वाले गमले हैं?"
"हां,वही.आपके बाए हाथ की तरफ वाले गमले को उठाइए,वाहा की टाइल ढीली है.उसी के नीचे घर की चाभी रखी है.",रंभा ने सोनम की मदद से ये घर किराए पे लिया था.वो नही चाहती थी कि सोनम को विजयंत के बारे मे पता चले & उसके पास चाभी देने आने का वक़्त नही था इसीलिए उसने इस तरह का इंतेज़ाम किया था.
"हां,मिल गयी.",देवेन ने दरवाज़ा खोला & दोनो मर्द घर के अंदर चले गये.
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"इस तरह से क्यू गायब हो गयी थी?",समीर के दफ़्तर जाते ही प्रणव आ धमका & उसे बाहो मे भर इस तरह चूमने लगा मानो इतने दिनो की जुदाई ने उसे पागल कर दिया हो.
"ओह्ह्ह्ह..आराम से करो..",वो रंभा की गर्दन चूम रहा था & रंभा गुदगुदी महसूस होने से खिलखिला उठी थी,"..सब्र करो,प्रणव.अभी कोई भी आ सकता है.",प्रणव ने अपने होंठ तो उसकी गर्दन से हटा दिए मगर हाथ जस के तस उसकी कमर पे बने रहे.
"क्यू चली गयी थी इस तरह?",रंभा ने घुटनो तक की कसी,सफेद स्कर्ट & कोट पहना था.स्कर्ट मे उसकी गंद बड़े क़ातिल अंदाज़ मे & उभर आई थी & प्रणव के हाथ उसकी फांको की गोलाईयो पे घूम रहे थे.
"बात ही कुच्छ ऐसी हो गयी थी.",रंभा ने नज़रे झुका ली & उसके चेहरे का रंग भी उतर गया.
"क्या बात हुई?..मुझे भी तो बताओ.",प्रणव का दाया हाथ उसकी गंद से उसके चेहरे पे आ गया & उसकी ठुड्डी पकड़ के उसे उपर कर उसकी निगाहो को खुद की नज़रो से मिलने पे मजबूर किया.
"छ्चोड़ो ना..क्या करोगे जान के?",रंभा ने उसका हाथ थाम लिया & फिर नज़रे झुका ली.
"रंभा,जब तक मुझे पूरी बता नही बतओगि मैं यहा से हिलने वाला नही.",रंभा तो बस यू ही नाटक कर रही थी.उसे प्रणव को सही बात तो बतानी ही थी.अभी तक खुल के उसने समीर की बुराई ये उसके खिलाफ होने के लिए उस से नही कहा था.वो देखना चाहती थी कि समीर की बेवफ़ाई के बारे मे बताने पे वो किस तरह से रिक्ट करता है.वो कुच्छ देर खामोश रही & प्रणव इसरार करता रहा.थोड़ी देर बाद उसने उसे समीर & कामया को रंगे हाथ पकड़ने की बात बता दी.
"कितना गिरा इंसान है ये समीर!",प्रणव गुस्से मे बोला,"..अगर यही सब करना था तो तुमसे शादी क्यू की उसने?!..रंभा,तुम्हे उसी वक़्त मुझे ये बात बतानी थी."
"क्या कर लेते तुम?..ज़्यादा से ज़्यादा समीर को डाँटते & वो जब तुम्हे कोई टका सा जवाब दे देता तो फिर बेइज़्ज़त होना क्या तुम्हे अच्छा लगता..",उसने नज़रे नीची कर ली और अपनी अंगूठी से खेलने लगी,"..तुम्हारा मुझे पता नही पर मुझे बहुत बुरा लगता अगर वो तुमसे कुच्छ ऐसी-वैसी बात कह देता तो.",प्रणव का दिल खुशी से भर गया..यानी चिड़िया पूरी तरह से उसके झूठे इश्क़ के जाल मे फँसी हुई थी!..उस बेचारे को क्या पता था कि जिसे वो मासूम चिड़िया समझ रहा था वो दरअसल सय्याद थी & बड़ी सफाई से उसे जाल मे फँसा रही थी.
"तो क्या होता?",उसने रंभा को बाहो मे भर उसके माथे को चूमा,"..कम से कम तुम यू मुझसे दूर तो ना जाती."
"ओह प्रणव!",रंभा ने भी उसे बाहो मे भर लिया & उसके सीने मे मुँह च्छूपा लिया.काफ़ी देर तक दोनो वैसे ही खड़े रहे.
"रंभा.."
"हूँ.."
"तुम्हे गुस्सा तो बहुत आया होगा ना?"
"हूँ.",रंभा वैसे ही मुँह च्छुपाए खड़ी थी.उसका दिल धड़क रहा था,प्रणव अपने मंसूबो को कुच्छ तो उजागर करने वाला था.
"तो समीर को सबक सिखाने का ख़याल नही आया तुम्हारे मन मे?"
"आया.",रंभा ने सर उपर उठाके प्रणव को देखा.
"तो कैसे करोगी ये काम?"
"यही समझ नही आया तो बेबसी और गुस्से से निजात पाने के लिए गोआ चली गयी थी."
"अच्छा & अगर मैं तुम्हे इस बाबत रास्ता दिखाऊ तो?",प्रणव ने बहुत सोच-समझ के ये बात कही थी.उसे इतना रिस्क तो उठाना ही था..आख़िर फायडा भी तो काफ़ी बड़ा होने वाला था.
"सच!..तो बताओ ना..क्या रास्ता है?",रंभा मच्लि.
"समीर को ट्रस्ट ग्रूप का मालिक होने का बहुत गुमान है ना..तो क्यू ना उसके गुमान की इस वजह को ख़त्म कर दिया जाए & तुम्हे इस साम्राज्य की मल्लिका बना दिया जाए?"
"क्या?!",रंभा के चेहरे पे हैरत & थोड़ी सी घबराहट के भाव थे,"..मगर कैसे प्रणव?"
"उसे रास्ते से हटा के."
"क्या कह रहे हो?..उसकी जान लोगे..पर..-"
"-..ना!",प्रणव ने उसके गुलाबी होंठो पे 1 उंगली रख खामोश रहने का इशारा किया,"..नही जान नही लेंगे बस उसे काम करने लायक नही छ्चोड़ेंगे.",रंभा कुच्छ देर तक वैसे ही उसे देखती रही.प्रणव को लगा कि उसने ग़लती कर दी है.रंभा घबरा के पीछे हटेगी & सारे किए-कराए पे पानी फेर देगी..उपर से उसके इरादो की जानकारी होने पे अब उसे उसका भी इलाज करना होगा..मगर तभी रंभा मुस्कुराइ & उसकी गर्दन मे बाहे डाल उसके होंठो को चूमा.
"प्रणव जी,आपको तो मैं बड़ा शरीफ इंसान समझती थी मगर आप तो काफ़ी बदमाश हैं!",वो शरारत से बोली तो दोनो खिलखिला उठे.प्रणव उसे चूमने लगा & उसकी दाई जाँघ उठा उसकी स्कर्ट मे हाथ घुसाने लगा तो रंभा उस से अलग हो गयी,"नही,अभी नही.अभी काम है मुझे & तुम्हे भी दफ़्तर जाना चाहिए.किसी को हमारे रिश्ते की ज़रा भी भनक नही लगनी चाहिए."
"ओके.",प्रणव ने मुस्कुराते हुए उसे चूमा & वाहा से चला गया.उसके जाने के कुच्छ देर बाद रंभा ट्रस्ट फिल्म्स के दफ़्तर के लिए रवाना हो गयी.
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क्रमशः.......
JAAL paart--80
gataank se aage......
"Tum fone kyu nahi utha rahi thi?!",Deven bahut jaldi-2 apna saman pack kar raha tha.
"main naha rahi thi & fone silent mode pe tha.",Rambha bhi bags band kar rahi thi.deven ne Rocky ki car chhan mari thi & uski driving seat ke floor mat ke neechye use 1 chhoti pistol & 1 mobile fone mila tha.deven ne fone on kiya to paya tha ki sume bas 1 number se fone aaya tha.
"kuchh chhuta to nahi?",deven ne apna bank band kiya.
"nahi.",Vijayant Mehra vahi khada dono ko dekh raha tha.
"ok,ab tum dono meri baat dhyan se suno.",deven kamar pe hath rakhe khada tha,"..ye shakhs yaha ya to mujhe ya rambha ko marne aaya tha..",baat sunte hi rambha ka dil dhadak utha..Sameer is hadd tak ja sakta hai..magar kyu?,"..par ab vo shakhs mar chuka hai & jisne bhi use bheja tha vo aage hume nuksan pahuchane se pehle jhijhkega zarur.hume ab yaha se nikal jana hai.",vo apni premika se mukhatib hua,"rambha,tum agli flight pakad ke Devalay jao & tumhe vaha 1 khafa biwi ka khel khelte hue Mehra khandan ke 1-1 aadmi pe nazar rakhni hai."
"magar..",rambha ke chehre pe khauf saaf dikh raha tha.
"ghabrane kiz arurat nahi hai.main humesha tumhare aas-paas hi rahunga & jaisa maine kaha mujhe nahi lagta ki ab tumhe koi nuksan pahuchana chahega.agar fir bhi tumhe darr lagta hai to sameer ko is bare me batao & fir 1 vakil ke sath police me jake ye khe do ki tumhe apne pati se jaan ka khatra hai.vaise tumhe police tak jane ki zarurat nahi padegi.tumhari baat sunte hi sameer tumhari hifazat ka intezam kar dega.mujhe nahi lagta vo kisi bhi tarah ki negative publicity chahega."
"yani ki sameer ka hath nahi hai is sab ke peechhe?",sawal vijayant ne kiya & dono ko chaunka diya.
"pehle mujhe bhi aisa laga tha magar ab nahi lagta.rambha sameer se alag hone ko taiyyar hai vo bhi uske bataye waqt pe fir use kya taklif ho sakti hai?..ye kisi & ka hi kaam hai."
"magar kiska?"
"mera shaq Pranav pe hai.vo mujhe bahut shatir khildai lagta hai & vo kya naam hai uske sathi ka..",vo mathe pe hath firane laga.
"Mahadev Shah.",rambha boli.
"haan,bahut mumkin hai ki ye sab usi ka kiya-dhara ho."
"par vo mujhe marna kyu chahega?..main mari to Sameer Kamya se shadi kar lega & uska sara khel to shuru hone se pehle hi khatm ho jayega."
"hun."
"main janti hu ye kamini harkat kiski hai?",rambha ke dimagh me achanak bijli kaundhi thi.
"kiski?"
"kamya ki.meri maut se sabse bada fayda usi ko hoga.Devalay pahuchate hi use thik karti hu.",rambha gusse se boli.
"gusse me hosh nahi khona."
"thik hai.to main airport niklu?"
"haan..& rambha..tumhe devalay me hum dono ke liye 1 ghar ka intezam karna hoga."
"thik hai magar aap dono vaha kaise & kab pahuchenge?"
"bas pahunch jayenge.",deven hansa & rambha ko chuma.5 ghante baad rambha devalay me thi & mehra parivar ke sabhi sadasya jaise uske jane se hairan the vaise hi uske achanak vapas aane pe bhi hairan hi the.
"kab aayi?",sameer daftar se lautne ke baad apni haiarni chhupane ki nakaam koshish kar raha tha.
"thodi der pehle.",rambha ne jawab diya & almari me apne kapde thik karti rahi.kuchh der tak sameer kuchh nahi bola par fir us se ye khamoshi bardasht nahi hui.
"vo..main ghabra gaya tha & Balbir ko.."
"please sameer,mera mood mat kharab karo.maine tumhe bola tha ki mujhe pareshan mat karna & main vapas aa jaoongi magar fir bhi tumne ye ochhi harkat ki."
"i'm sorry par tumhe pata kaise chala?"
"jaise bhi chala ho magar tum meri nazro me aur gir gaye ho.",rambha dil hi dil me hans rahi thi.
"ok.ab zyada din mere sath tumhe nahi rehna pdega,bas 1 baar Manpur vala tender khul jaye fir tumhe yaha rehne ki zehmat nahi uthani padegi.",rambha ne koi jawab nahi diya & almari band kar kamre se bahar chali gayi.
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deven & vijayant ne Goa se Bombay tak ki train pakdi.dono ne milke vijayant ka huliya kafi hadd tak badla.deven ne AC first class ki tickets li taki dono ka samna kam se kam logo se ho.bombay se usne dusri train pakdi & devalay pahuncha.devalay pahuchate hi usne rambha ko fone kiya to usne use 1 pata diya & vaha jane ko kaha.40 minute baad deven & vijayant uske bataye pate pe taxi se utar rahe the.
Taxi ke jate hi Deven ne Rambha ko fone kiya,"hum tumhare bataye pate pe pahunch gaye hain."
"good.gate khula hai.aap andar jaiye & main door ke bahar jo 2 gamle rakhe hain.."
"haan..",deven andar gaya to uske peechhe-2 Vijayant Mehra bhi saman uthaye ghar ke ahat me aa gaya,"..jo gulab ke paudho vale gamle hain?"
"haan,vahi.aapke baye hath ki taraf vale gamle ko uthaiye,vaha ki tile dhili hai.usi ke neeche ghar ki chabhi rakhi hai.",rambha ne Sonam ki madad se ye ghar kiraye pe liya tha.vo nahi chahti thi ki sonam ko vijayant ke bare me pata chale & uske paas chabhi dene aane ka waqt nahi tha isiliye usne is tarah ka intezam kiya tha.
"haan,mil gayi.",deven ne darwaza khola & dono mard ghar ke andar chale gaye.
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"is tarah se kyu gayab ho gayi thi?",Sameer ke daftar jate hi Pranav aa dhamka & use baaho me bhar is tarah chumne laga mano itne dino ki judai ne use pagal kar diya ho.
"ohhhh..aaram se karo..",vo rambha ki gardan chum raha tha & rambha gudgudi mehsus hone se khilkhila uthi thi,"..sabr karo,pranav.abhi koi bhi aa sakta hai.",pranav ne apne honth to uski gardan se hata diye magar hath jas ke tas uski kamar pe bane rahe.
"kyu chali gayi thi is tarah?",rambha ne ghutno tak ki kasi,safed skirt & coat pehna tha.skirt me uski gand bade qatil andaz me & ubhar aayi thi & pranav ke hath uski fanko ki golaiyo pe ghum rahe the.
"baat hi kuchh aisi ho gayi thi.",rambha ne nazre jhuka li & uske chehre ka rang bhi utar gaya.
"kya baat hui?..mujhe bhi to batao.",pranav ka daya hath uski gand se uske chehre pe aa gaya & uski thuddi pakad ke use upar kar uski nigaho ko khud ki nazro se milne pe majbur kiya.
"chhodo na..kya karoge jaan ke?",rambha ne uska hath tham liya & fir nazre jhuka li.
"rambha,jab tak mujhe puri bata nahi bataogi main yaha se hilne wala nahi.",rambha to bas yu hi natak kar rahi thi.use pranav ko sahi baat to batani hi thi.abhi tak khul ke usne sameer ki burai ye uske khilaf hone ke liye us se nahi kaha tha.vo dekhna chahti thi ki sameer ki bewafai ke bare me batane pe vo kis tarah se react karta hai.vo kuchh der khamosh rahi & praqnav israr karta raha.thodi der baad usne use sameer & Kamya ko range hath pakadne ki baat bata di.
"kitna gira insan hai ye sameer!",pranav gusse me bola,"..agar yehis ab karna tha to tumse shadi kyu ki usne?!..rambha,tumhe usi waqt mujhe ye baat batani thi."
"kya kar lete tum?..zyada se zyada sameer ko daantate & vo jab tumhe koi taka sa jawab de deta to fir beizzat hona kya tumhe achha lagta..",usne nazre neechi kar li & apni anguthi se khelne lagi,"..tumhara mujhe pata nahi par mujhe bahut bura lagta agar vo tumse kuchh aisi-vaisi baat keh deta to.",pranav ka dil khushi se bhar gaya..yani chidiya puri tarah se uske jhuthe ishq ke jaal me phansi hui thi!..us bechare ko kya pata tha ki jise vo masoom chidiya samajh raha tha vo darasal sayyad thi & badi safai se use jaal me phansa rahi thi.
"to kya hota?",usne rambha ko baaho me bhar uske mathe ko chuma,"..kam se kam tu yu mujhse door to na jati."
"oh pranav!",rambha ne bhi use baaho me bhar liya & uske seene me munh chhupa liya.kafi der tak dono vaise hi khade rahe.
"rambha.."
"hun.."
"tumhe gussa to bahut aaya hoga na?"
"hun.",rambha vaise hi munh chhupaye khadi thi.uska dil dhadak raha tha,pranav apne mansubo ko kuchh to ujagar karne vala tha.
"to sameer ko sabak sikhane ka khayal nahi aaya tumhare man me?"
"aaya.",rambha ne sar upar uthake pranav ko dekha.
"to kaise karogi ye kaam?"
"yehi samajh nahi aaya to bebasi & gusse se nijat pane ke liye Goa chali gayi thi."
"achha & agar main tumhe is babat rasta dikhaoo to?",pranav ne bahut soch-samajh ke ye baat kahi thi.use itna risk to uthana hi tha..aakhir fayda bhi to kafi bada hone vala tha.
"sach!..to batao na..kya rasta hai?",rambha machli.
"sameer ko Trust Group ka malik hone ka bahut guman hai na..to kyu na uske guman ki is vajah ko khatm kar diya jaye & tumhe is samrajya ki mallika bana diya jaye?"
"kya?!",rambha ke chehre pe hairat & thodi si ghabrahat ke bhav the,"..magar kaise pranav?"
"use raste se hata ke."
"kya keh rahe ho?..uski jaan loge..pr..-"
"-..na!",pranav ne uske gulabi hotho pe 1 ungli rakh khamosh rehne ka ishara kiya,"..nahi jaan nahi lenge bas use kaam karne layak nahi chhodenge.",rambha kuchh der tak vaise hi use dekhti rahi.pranav ko laga ki usne galti kar di hai.rambha ghabra ke peechhe hategi & sare kiye-karaye pe pani fer degi..upar se uske irado ki jankari hone pe ab use uska bhi ilaj karna hoga..magar tabhi rambha muskurayi & uski gardan me baahe daal uske hontho ko chuma.
"pranav ji,aapko to main bada sharif insan samajhti thi magar aap to kafi badmash hain!",vo shararat se boli to dono khilkhila uthe.pranav use chumne laga & uski dayi jangh utha uski skirt me hath ghusane laga to rambha us se alag ho gayi,"nahi,abhi nahi.abhi kaam hai mujhe & tumhe bhi daftar jana chahiye.kisi ko humare rishte ki zara bhi bhanak nahi lagni chahiye."
"ok.",pranav ne muskurate hue use chuma & vaha se chala gaya.uske jane ke kuchh der baad rambha trust films ke daftar ke liye rawana ho gayi.
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kramashah.......
गतान्क से आगे......
"तुम फोन क्यू नही उठा रही थी?!",देवेन बहुत जल्दी-2 अपना समान पॅक कर रहा था.
"मैं नहा रही थी & फोन साइलेंट मोड पे था.",रंभा भी बॅग्स बंद कर रही थी.देवेन ने रॉकी की कार छान मारी थी & उसकी ड्राइविंग सीट के फ्लोर मॅट के नीचे उसे 1 छ्होटी पिस्टल & 1 मोबाइल फोन मिला था.देवेन ने फोने ऑन किया तो पाया था कि उसमे बस 1 नंबर से फोन आया था.
"कुच्छ छूटा तो नही?",देवेन ने अपना बॅग बंद किया.
"नही.",विजयंत मेहरा वही खड़ा दोनो को देख रहा था.
"ओके,अब तुम दोनो मेरी बात ध्यान से सुनो.",देवेन कमर पे हाथ रखे खड़ा था,"..ये शख्स यहा या तो मुझे या रंभा को मारने आया था..",बात सुनते ही रंभा का दिल धड़क उठा..समीर इस हद्द तक जा सकता है..मगर क्यू?,"..पर अब वो शख्स मर चुका है & जिसने भी उसे भेजा था वो आगे हमे नुकसान पहुचाने से पहले झिझकेगा ज़रूर.हमे अब यहा से निकल जाना है.",वो अपनी प्रेमिका से मुखातिब हुआ,"रंभा,तुम अगली फ्लाइट पकड़ के डेवाले जाओ & तुम्हे वाहा 1 खफा बीवी का खेल खेलते हुए मेहरा खानदान के 1-1 आदमी पे नज़र रखनी है."
"मगर..",रंभा के चेहरे पे ख़ौफ़ सॉफ दिख रहा था.
"घबराने की ज़रूरत नही है.मैं हमेशा तुम्हारे आस-पास ही रहूँगा & जैसा मैने कहा मुझे नही लगता कि अब तुम्हे कोई नुकसान पहुचाना चाहेगा.अगर फिर भी तुम्हे डर लगता है तो समीर को इस बारे मे बताओ & फिर 1 वकील के साथ पोलीस मे जाके ये कह दो कि तुम्हे अपने पति से जान का ख़तरा है.वैसे तुम्हे पोलीस तक जाने की ज़रूरत नही पड़ेगी.तुम्हारी बात सुनते ही समीर तुम्हारी हिफ़ाज़त का इंतेज़ाम कर देगा.मुझे नही लगता वो किसी भी तरह की नेगेटिव पब्लिसिटी चाहेगा."
"यानी की समीर का हाथ नही है इस सब के पीछे?",सवाल विजयंत ने किया & दोनो को चौंका दिया.
"पहले मुझे भी ऐसा लगा था मगर अब नही लगता.रंभा समीर से अलग होने को तैय्यार है वो भी उसके बताए वक़्त पे फिर उसे क्या तकलीफ़ हो सकती है?..ये किसी और का ही काम है."
"मगर किसका?"
"मेरा शक़ प्रणव पे है.वो मुझे बहुत शातिर खिलाड़ी लगता है & वो क्या नाम है उसके साथी का..",वो माथे पे हाथ फिराने लगा.
"महादेव शाह.",रंभा बोली.
"हां,बहुत मुमकिन है कि ये सब उसी का किया-धरा हो."
"पर वो मुझे मारना क्यू चाहेगा?..मैं मरी तो समीर कामया से शादी कर लेगा & उसका सारा खेल तो शुरू होने से पहले ही ख़त्म हो जाएगा."
"हूँ."
"मैं जानती हू ये कमिनि हरकत किसकी है?",रंभा के दिमाग़ मे अचानक बिजली कौंधी थी.
"किसकी?"
"कामया की.मेरी मौत से सबसे बड़ा फायडा उसी को होगा.डेवाले पहुचते ही उसे ठीक करती हू.",रंभा गुस्से से बोली.
"गुस्से मे होश नही खोना."
"ठीक है.तो मैं एरपोर्ट निकलु?"
"हां..और रंभा..तुम्हे डेवाले मे हम दोनो के लिए 1 घर का इंतेज़ाम करना होगा."
"ठीक है मगर आप दोनो वाहा कैसे & कब पहुचेंगे?"
"बस पहुँच जाएँगे.",देवेन हंसा & रंभा को चूमा.5 घंटे बाद रंभा डेवाले मे थी & मेहरा परिवार के सभी सदस्य जैसे उसके जाने से हैरान थे वैसे ही उसके अचानक वापस आने पे भी हैरान ही थे.
"कब आई?",समीर दफ़्तर से लौटने के बाद अपनी हैरानी च्छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहा था.
"थोड़ी देर पहले.",रंभा ने जवाब दिया & अलमारी मे अपने कपड़े ठीक करती रही.कुच्छ देर तक समीर कुच्छ नही बोला पर फिर उस से ये खामोशी बर्दाश्त नही हुई.
"वो..मैं घबरा गया था और बलबीर को.."
"प्लीज़ समीर,मेरा मूड मत खराब करो.मैने तुम्हे बोला था कि मुझे परेशान मत करना & मैं वापस आ जाऊंगी मगर फिर भी तुमने ये ओछि हरकत की."
"आइ'म सॉरी पर तुम्हे पता कैसे चला?"
"जैसे भी चला हो मगर तुम मेरी नज़रो मे और गिर गये हो.",रंभा दिल ही दिल मे हंस रही थी.
"ओके.अब ज़्यादा दिन मेरे साथ तुम्हे नही रहना पड़ेगा,बस 1 बार मानपुर वाला टेंडर खुल जाए फिर तुम्हे यहा रहने की ज़हमत नही उठानी पड़ेगी.",रंभा ने कोई जवाब नही दिया & अलमारी बंद कर कमरे से बाहर चली गयी.
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देवेन & विजयंत ने गोआ से बोम्बे तक की ट्रेन पकड़ी.दोनो ने मिलके विजयंत का हुलिया काफ़ी हद्द तक बदला.देवेन ने एसी फर्स्ट क्लास की टिकेट्स ली ताकि दोनो का सामना कम से कम लोगो से हो.बोम्बे से उसने दूसरी ट्रेन पकड़ी & डेवाले पहुँचा.डेवाले पहुचते ही उसने रंभा को फोन किया तो उसने उसे 1 पता दिया & वाहा जाने को कहा.40 मिनिट बाद देवेन और विजयंत उसके बताए पते पे टॅक्सी से उतर रहे थे.
टॅक्सी के जाते ही देवेन ने रंभा को फोन किया,"हम तुम्हारे बताए पते पे पहुँच गये हैं."
"गुड.गेट खुला है.आप अंदर जाइए & मेन डोर के बाहर जो 2 गमले रखे हैं.."
"हान..",देवेन अंदर गया तो उसके पीछे-2 विजयंत मेहरा भी समान उठाए घर के अहाते मे आ गया,"..जो गुलाब के पौधो वाले गमले हैं?"
"हां,वही.आपके बाए हाथ की तरफ वाले गमले को उठाइए,वाहा की टाइल ढीली है.उसी के नीचे घर की चाभी रखी है.",रंभा ने सोनम की मदद से ये घर किराए पे लिया था.वो नही चाहती थी कि सोनम को विजयंत के बारे मे पता चले & उसके पास चाभी देने आने का वक़्त नही था इसीलिए उसने इस तरह का इंतेज़ाम किया था.
"हां,मिल गयी.",देवेन ने दरवाज़ा खोला & दोनो मर्द घर के अंदर चले गये.
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"इस तरह से क्यू गायब हो गयी थी?",समीर के दफ़्तर जाते ही प्रणव आ धमका & उसे बाहो मे भर इस तरह चूमने लगा मानो इतने दिनो की जुदाई ने उसे पागल कर दिया हो.
"ओह्ह्ह्ह..आराम से करो..",वो रंभा की गर्दन चूम रहा था & रंभा गुदगुदी महसूस होने से खिलखिला उठी थी,"..सब्र करो,प्रणव.अभी कोई भी आ सकता है.",प्रणव ने अपने होंठ तो उसकी गर्दन से हटा दिए मगर हाथ जस के तस उसकी कमर पे बने रहे.
"क्यू चली गयी थी इस तरह?",रंभा ने घुटनो तक की कसी,सफेद स्कर्ट & कोट पहना था.स्कर्ट मे उसकी गंद बड़े क़ातिल अंदाज़ मे & उभर आई थी & प्रणव के हाथ उसकी फांको की गोलाईयो पे घूम रहे थे.
"बात ही कुच्छ ऐसी हो गयी थी.",रंभा ने नज़रे झुका ली & उसके चेहरे का रंग भी उतर गया.
"क्या बात हुई?..मुझे भी तो बताओ.",प्रणव का दाया हाथ उसकी गंद से उसके चेहरे पे आ गया & उसकी ठुड्डी पकड़ के उसे उपर कर उसकी निगाहो को खुद की नज़रो से मिलने पे मजबूर किया.
"छ्चोड़ो ना..क्या करोगे जान के?",रंभा ने उसका हाथ थाम लिया & फिर नज़रे झुका ली.
"रंभा,जब तक मुझे पूरी बता नही बतओगि मैं यहा से हिलने वाला नही.",रंभा तो बस यू ही नाटक कर रही थी.उसे प्रणव को सही बात तो बतानी ही थी.अभी तक खुल के उसने समीर की बुराई ये उसके खिलाफ होने के लिए उस से नही कहा था.वो देखना चाहती थी कि समीर की बेवफ़ाई के बारे मे बताने पे वो किस तरह से रिक्ट करता है.वो कुच्छ देर खामोश रही & प्रणव इसरार करता रहा.थोड़ी देर बाद उसने उसे समीर & कामया को रंगे हाथ पकड़ने की बात बता दी.
"कितना गिरा इंसान है ये समीर!",प्रणव गुस्से मे बोला,"..अगर यही सब करना था तो तुमसे शादी क्यू की उसने?!..रंभा,तुम्हे उसी वक़्त मुझे ये बात बतानी थी."
"क्या कर लेते तुम?..ज़्यादा से ज़्यादा समीर को डाँटते & वो जब तुम्हे कोई टका सा जवाब दे देता तो फिर बेइज़्ज़त होना क्या तुम्हे अच्छा लगता..",उसने नज़रे नीची कर ली और अपनी अंगूठी से खेलने लगी,"..तुम्हारा मुझे पता नही पर मुझे बहुत बुरा लगता अगर वो तुमसे कुच्छ ऐसी-वैसी बात कह देता तो.",प्रणव का दिल खुशी से भर गया..यानी चिड़िया पूरी तरह से उसके झूठे इश्क़ के जाल मे फँसी हुई थी!..उस बेचारे को क्या पता था कि जिसे वो मासूम चिड़िया समझ रहा था वो दरअसल सय्याद थी & बड़ी सफाई से उसे जाल मे फँसा रही थी.
"तो क्या होता?",उसने रंभा को बाहो मे भर उसके माथे को चूमा,"..कम से कम तुम यू मुझसे दूर तो ना जाती."
"ओह प्रणव!",रंभा ने भी उसे बाहो मे भर लिया & उसके सीने मे मुँह च्छूपा लिया.काफ़ी देर तक दोनो वैसे ही खड़े रहे.
"रंभा.."
"हूँ.."
"तुम्हे गुस्सा तो बहुत आया होगा ना?"
"हूँ.",रंभा वैसे ही मुँह च्छुपाए खड़ी थी.उसका दिल धड़क रहा था,प्रणव अपने मंसूबो को कुच्छ तो उजागर करने वाला था.
"तो समीर को सबक सिखाने का ख़याल नही आया तुम्हारे मन मे?"
"आया.",रंभा ने सर उपर उठाके प्रणव को देखा.
"तो कैसे करोगी ये काम?"
"यही समझ नही आया तो बेबसी और गुस्से से निजात पाने के लिए गोआ चली गयी थी."
"अच्छा & अगर मैं तुम्हे इस बाबत रास्ता दिखाऊ तो?",प्रणव ने बहुत सोच-समझ के ये बात कही थी.उसे इतना रिस्क तो उठाना ही था..आख़िर फायडा भी तो काफ़ी बड़ा होने वाला था.
"सच!..तो बताओ ना..क्या रास्ता है?",रंभा मच्लि.
"समीर को ट्रस्ट ग्रूप का मालिक होने का बहुत गुमान है ना..तो क्यू ना उसके गुमान की इस वजह को ख़त्म कर दिया जाए & तुम्हे इस साम्राज्य की मल्लिका बना दिया जाए?"
"क्या?!",रंभा के चेहरे पे हैरत & थोड़ी सी घबराहट के भाव थे,"..मगर कैसे प्रणव?"
"उसे रास्ते से हटा के."
"क्या कह रहे हो?..उसकी जान लोगे..पर..-"
"-..ना!",प्रणव ने उसके गुलाबी होंठो पे 1 उंगली रख खामोश रहने का इशारा किया,"..नही जान नही लेंगे बस उसे काम करने लायक नही छ्चोड़ेंगे.",रंभा कुच्छ देर तक वैसे ही उसे देखती रही.प्रणव को लगा कि उसने ग़लती कर दी है.रंभा घबरा के पीछे हटेगी & सारे किए-कराए पे पानी फेर देगी..उपर से उसके इरादो की जानकारी होने पे अब उसे उसका भी इलाज करना होगा..मगर तभी रंभा मुस्कुराइ & उसकी गर्दन मे बाहे डाल उसके होंठो को चूमा.
"प्रणव जी,आपको तो मैं बड़ा शरीफ इंसान समझती थी मगर आप तो काफ़ी बदमाश हैं!",वो शरारत से बोली तो दोनो खिलखिला उठे.प्रणव उसे चूमने लगा & उसकी दाई जाँघ उठा उसकी स्कर्ट मे हाथ घुसाने लगा तो रंभा उस से अलग हो गयी,"नही,अभी नही.अभी काम है मुझे & तुम्हे भी दफ़्तर जाना चाहिए.किसी को हमारे रिश्ते की ज़रा भी भनक नही लगनी चाहिए."
"ओके.",प्रणव ने मुस्कुराते हुए उसे चूमा & वाहा से चला गया.उसके जाने के कुच्छ देर बाद रंभा ट्रस्ट फिल्म्स के दफ़्तर के लिए रवाना हो गयी.
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क्रमशः.......
JAAL paart--80
gataank se aage......
"Tum fone kyu nahi utha rahi thi?!",Deven bahut jaldi-2 apna saman pack kar raha tha.
"main naha rahi thi & fone silent mode pe tha.",Rambha bhi bags band kar rahi thi.deven ne Rocky ki car chhan mari thi & uski driving seat ke floor mat ke neechye use 1 chhoti pistol & 1 mobile fone mila tha.deven ne fone on kiya to paya tha ki sume bas 1 number se fone aaya tha.
"kuchh chhuta to nahi?",deven ne apna bank band kiya.
"nahi.",Vijayant Mehra vahi khada dono ko dekh raha tha.
"ok,ab tum dono meri baat dhyan se suno.",deven kamar pe hath rakhe khada tha,"..ye shakhs yaha ya to mujhe ya rambha ko marne aaya tha..",baat sunte hi rambha ka dil dhadak utha..Sameer is hadd tak ja sakta hai..magar kyu?,"..par ab vo shakhs mar chuka hai & jisne bhi use bheja tha vo aage hume nuksan pahuchane se pehle jhijhkega zarur.hume ab yaha se nikal jana hai.",vo apni premika se mukhatib hua,"rambha,tum agli flight pakad ke Devalay jao & tumhe vaha 1 khafa biwi ka khel khelte hue Mehra khandan ke 1-1 aadmi pe nazar rakhni hai."
"magar..",rambha ke chehre pe khauf saaf dikh raha tha.
"ghabrane kiz arurat nahi hai.main humesha tumhare aas-paas hi rahunga & jaisa maine kaha mujhe nahi lagta ki ab tumhe koi nuksan pahuchana chahega.agar fir bhi tumhe darr lagta hai to sameer ko is bare me batao & fir 1 vakil ke sath police me jake ye khe do ki tumhe apne pati se jaan ka khatra hai.vaise tumhe police tak jane ki zarurat nahi padegi.tumhari baat sunte hi sameer tumhari hifazat ka intezam kar dega.mujhe nahi lagta vo kisi bhi tarah ki negative publicity chahega."
"yani ki sameer ka hath nahi hai is sab ke peechhe?",sawal vijayant ne kiya & dono ko chaunka diya.
"pehle mujhe bhi aisa laga tha magar ab nahi lagta.rambha sameer se alag hone ko taiyyar hai vo bhi uske bataye waqt pe fir use kya taklif ho sakti hai?..ye kisi & ka hi kaam hai."
"magar kiska?"
"mera shaq Pranav pe hai.vo mujhe bahut shatir khildai lagta hai & vo kya naam hai uske sathi ka..",vo mathe pe hath firane laga.
"Mahadev Shah.",rambha boli.
"haan,bahut mumkin hai ki ye sab usi ka kiya-dhara ho."
"par vo mujhe marna kyu chahega?..main mari to Sameer Kamya se shadi kar lega & uska sara khel to shuru hone se pehle hi khatm ho jayega."
"hun."
"main janti hu ye kamini harkat kiski hai?",rambha ke dimagh me achanak bijli kaundhi thi.
"kiski?"
"kamya ki.meri maut se sabse bada fayda usi ko hoga.Devalay pahuchate hi use thik karti hu.",rambha gusse se boli.
"gusse me hosh nahi khona."
"thik hai.to main airport niklu?"
"haan..& rambha..tumhe devalay me hum dono ke liye 1 ghar ka intezam karna hoga."
"thik hai magar aap dono vaha kaise & kab pahuchenge?"
"bas pahunch jayenge.",deven hansa & rambha ko chuma.5 ghante baad rambha devalay me thi & mehra parivar ke sabhi sadasya jaise uske jane se hairan the vaise hi uske achanak vapas aane pe bhi hairan hi the.
"kab aayi?",sameer daftar se lautne ke baad apni haiarni chhupane ki nakaam koshish kar raha tha.
"thodi der pehle.",rambha ne jawab diya & almari me apne kapde thik karti rahi.kuchh der tak sameer kuchh nahi bola par fir us se ye khamoshi bardasht nahi hui.
"vo..main ghabra gaya tha & Balbir ko.."
"please sameer,mera mood mat kharab karo.maine tumhe bola tha ki mujhe pareshan mat karna & main vapas aa jaoongi magar fir bhi tumne ye ochhi harkat ki."
"i'm sorry par tumhe pata kaise chala?"
"jaise bhi chala ho magar tum meri nazro me aur gir gaye ho.",rambha dil hi dil me hans rahi thi.
"ok.ab zyada din mere sath tumhe nahi rehna pdega,bas 1 baar Manpur vala tender khul jaye fir tumhe yaha rehne ki zehmat nahi uthani padegi.",rambha ne koi jawab nahi diya & almari band kar kamre se bahar chali gayi.
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deven & vijayant ne Goa se Bombay tak ki train pakdi.dono ne milke vijayant ka huliya kafi hadd tak badla.deven ne AC first class ki tickets li taki dono ka samna kam se kam logo se ho.bombay se usne dusri train pakdi & devalay pahuncha.devalay pahuchate hi usne rambha ko fone kiya to usne use 1 pata diya & vaha jane ko kaha.40 minute baad deven & vijayant uske bataye pate pe taxi se utar rahe the.
Taxi ke jate hi Deven ne Rambha ko fone kiya,"hum tumhare bataye pate pe pahunch gaye hain."
"good.gate khula hai.aap andar jaiye & main door ke bahar jo 2 gamle rakhe hain.."
"haan..",deven andar gaya to uske peechhe-2 Vijayant Mehra bhi saman uthaye ghar ke ahat me aa gaya,"..jo gulab ke paudho vale gamle hain?"
"haan,vahi.aapke baye hath ki taraf vale gamle ko uthaiye,vaha ki tile dhili hai.usi ke neeche ghar ki chabhi rakhi hai.",rambha ne Sonam ki madad se ye ghar kiraye pe liya tha.vo nahi chahti thi ki sonam ko vijayant ke bare me pata chale & uske paas chabhi dene aane ka waqt nahi tha isiliye usne is tarah ka intezam kiya tha.
"haan,mil gayi.",deven ne darwaza khola & dono mard ghar ke andar chale gaye.
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"is tarah se kyu gayab ho gayi thi?",Sameer ke daftar jate hi Pranav aa dhamka & use baaho me bhar is tarah chumne laga mano itne dino ki judai ne use pagal kar diya ho.
"ohhhh..aaram se karo..",vo rambha ki gardan chum raha tha & rambha gudgudi mehsus hone se khilkhila uthi thi,"..sabr karo,pranav.abhi koi bhi aa sakta hai.",pranav ne apne honth to uski gardan se hata diye magar hath jas ke tas uski kamar pe bane rahe.
"kyu chali gayi thi is tarah?",rambha ne ghutno tak ki kasi,safed skirt & coat pehna tha.skirt me uski gand bade qatil andaz me & ubhar aayi thi & pranav ke hath uski fanko ki golaiyo pe ghum rahe the.
"baat hi kuchh aisi ho gayi thi.",rambha ne nazre jhuka li & uske chehre ka rang bhi utar gaya.
"kya baat hui?..mujhe bhi to batao.",pranav ka daya hath uski gand se uske chehre pe aa gaya & uski thuddi pakad ke use upar kar uski nigaho ko khud ki nazro se milne pe majbur kiya.
"chhodo na..kya karoge jaan ke?",rambha ne uska hath tham liya & fir nazre jhuka li.
"rambha,jab tak mujhe puri bata nahi bataogi main yaha se hilne wala nahi.",rambha to bas yu hi natak kar rahi thi.use pranav ko sahi baat to batani hi thi.abhi tak khul ke usne sameer ki burai ye uske khilaf hone ke liye us se nahi kaha tha.vo dekhna chahti thi ki sameer ki bewafai ke bare me batane pe vo kis tarah se react karta hai.vo kuchh der khamosh rahi & praqnav israr karta raha.thodi der baad usne use sameer & Kamya ko range hath pakadne ki baat bata di.
"kitna gira insan hai ye sameer!",pranav gusse me bola,"..agar yehis ab karna tha to tumse shadi kyu ki usne?!..rambha,tumhe usi waqt mujhe ye baat batani thi."
"kya kar lete tum?..zyada se zyada sameer ko daantate & vo jab tumhe koi taka sa jawab de deta to fir beizzat hona kya tumhe achha lagta..",usne nazre neechi kar li & apni anguthi se khelne lagi,"..tumhara mujhe pata nahi par mujhe bahut bura lagta agar vo tumse kuchh aisi-vaisi baat keh deta to.",pranav ka dil khushi se bhar gaya..yani chidiya puri tarah se uske jhuthe ishq ke jaal me phansi hui thi!..us bechare ko kya pata tha ki jise vo masoom chidiya samajh raha tha vo darasal sayyad thi & badi safai se use jaal me phansa rahi thi.
"to kya hota?",usne rambha ko baaho me bhar uske mathe ko chuma,"..kam se kam tu yu mujhse door to na jati."
"oh pranav!",rambha ne bhi use baaho me bhar liya & uske seene me munh chhupa liya.kafi der tak dono vaise hi khade rahe.
"rambha.."
"hun.."
"tumhe gussa to bahut aaya hoga na?"
"hun.",rambha vaise hi munh chhupaye khadi thi.uska dil dhadak raha tha,pranav apne mansubo ko kuchh to ujagar karne vala tha.
"to sameer ko sabak sikhane ka khayal nahi aaya tumhare man me?"
"aaya.",rambha ne sar upar uthake pranav ko dekha.
"to kaise karogi ye kaam?"
"yehi samajh nahi aaya to bebasi & gusse se nijat pane ke liye Goa chali gayi thi."
"achha & agar main tumhe is babat rasta dikhaoo to?",pranav ne bahut soch-samajh ke ye baat kahi thi.use itna risk to uthana hi tha..aakhir fayda bhi to kafi bada hone vala tha.
"sach!..to batao na..kya rasta hai?",rambha machli.
"sameer ko Trust Group ka malik hone ka bahut guman hai na..to kyu na uske guman ki is vajah ko khatm kar diya jaye & tumhe is samrajya ki mallika bana diya jaye?"
"kya?!",rambha ke chehre pe hairat & thodi si ghabrahat ke bhav the,"..magar kaise pranav?"
"use raste se hata ke."
"kya keh rahe ho?..uski jaan loge..pr..-"
"-..na!",pranav ne uske gulabi hotho pe 1 ungli rakh khamosh rehne ka ishara kiya,"..nahi jaan nahi lenge bas use kaam karne layak nahi chhodenge.",rambha kuchh der tak vaise hi use dekhti rahi.pranav ko laga ki usne galti kar di hai.rambha ghabra ke peechhe hategi & sare kiye-karaye pe pani fer degi..upar se uske irado ki jankari hone pe ab use uska bhi ilaj karna hoga..magar tabhi rambha muskurayi & uski gardan me baahe daal uske hontho ko chuma.
"pranav ji,aapko to main bada sharif insan samajhti thi magar aap to kafi badmash hain!",vo shararat se boli to dono khilkhila uthe.pranav use chumne laga & uski dayi jangh utha uski skirt me hath ghusane laga to rambha us se alag ho gayi,"nahi,abhi nahi.abhi kaam hai mujhe & tumhe bhi daftar jana chahiye.kisi ko humare rishte ki zara bhi bhanak nahi lagni chahiye."
"ok.",pranav ne muskurate hue use chuma & vaha se chala gaya.uske jane ke kuchh der baad rambha trust films ke daftar ke liye rawana ho gayi.
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kramashah.......