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Jaal -जाल compleet

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जाल पार्ट--80

गतान्क से आगे......

"तुम फोन क्यू नही उठा रही थी?!",देवेन बहुत जल्दी-2 अपना समान पॅक कर रहा था.

"मैं नहा रही थी & फोन साइलेंट मोड पे था.",रंभा भी बॅग्स बंद कर रही थी.देवेन ने रॉकी की कार छान मारी थी & उसकी ड्राइविंग सीट के फ्लोर मॅट के नीचे उसे 1 छ्होटी पिस्टल & 1 मोबाइल फोन मिला था.देवेन ने फोने ऑन किया तो पाया था कि उसमे बस 1 नंबर से फोन आया था.

"कुच्छ छूटा तो नही?",देवेन ने अपना बॅग बंद किया.

"नही.",विजयंत मेहरा वही खड़ा दोनो को देख रहा था.

"ओके,अब तुम दोनो मेरी बात ध्यान से सुनो.",देवेन कमर पे हाथ रखे खड़ा था,"..ये शख्स यहा या तो मुझे या रंभा को मारने आया था..",बात सुनते ही रंभा का दिल धड़क उठा..समीर इस हद्द तक जा सकता है..मगर क्यू?,"..पर अब वो शख्स मर चुका है & जिसने भी उसे भेजा था वो आगे हमे नुकसान पहुचाने से पहले झिझकेगा ज़रूर.हमे अब यहा से निकल जाना है.",वो अपनी प्रेमिका से मुखातिब हुआ,"रंभा,तुम अगली फ्लाइट पकड़ के डेवाले जाओ & तुम्हे वाहा 1 खफा बीवी का खेल खेलते हुए मेहरा खानदान के 1-1 आदमी पे नज़र रखनी है."

"मगर..",रंभा के चेहरे पे ख़ौफ़ सॉफ दिख रहा था.

"घबराने की ज़रूरत नही है.मैं हमेशा तुम्हारे आस-पास ही रहूँगा & जैसा मैने कहा मुझे नही लगता कि अब तुम्हे कोई नुकसान पहुचाना चाहेगा.अगर फिर भी तुम्हे डर लगता है तो समीर को इस बारे मे बताओ & फिर 1 वकील के साथ पोलीस मे जाके ये कह दो कि तुम्हे अपने पति से जान का ख़तरा है.वैसे तुम्हे पोलीस तक जाने की ज़रूरत नही पड़ेगी.तुम्हारी बात सुनते ही समीर तुम्हारी हिफ़ाज़त का इंतेज़ाम कर देगा.मुझे नही लगता वो किसी भी तरह की नेगेटिव पब्लिसिटी चाहेगा."

"यानी की समीर का हाथ नही है इस सब के पीछे?",सवाल विजयंत ने किया & दोनो को चौंका दिया.

"पहले मुझे भी ऐसा लगा था मगर अब नही लगता.रंभा समीर से अलग होने को तैय्यार है वो भी उसके बताए वक़्त पे फिर उसे क्या तकलीफ़ हो सकती है?..ये किसी और का ही काम है."

"मगर किसका?"

"मेरा शक़ प्रणव पे है.वो मुझे बहुत शातिर खिलाड़ी लगता है & वो क्या नाम है उसके साथी का..",वो माथे पे हाथ फिराने लगा.

"महादेव शाह.",रंभा बोली.

"हां,बहुत मुमकिन है कि ये सब उसी का किया-धरा हो."

"पर वो मुझे मारना क्यू चाहेगा?..मैं मरी तो समीर कामया से शादी कर लेगा & उसका सारा खेल तो शुरू होने से पहले ही ख़त्म हो जाएगा."

"हूँ."

"मैं जानती हू ये कमिनि हरकत किसकी है?",रंभा के दिमाग़ मे अचानक बिजली कौंधी थी.

"किसकी?"

"कामया की.मेरी मौत से सबसे बड़ा फायडा उसी को होगा.डेवाले पहुचते ही उसे ठीक करती हू.",रंभा गुस्से से बोली.

"गुस्से मे होश नही खोना."

"ठीक है.तो मैं एरपोर्ट निकलु?"

"हां..और रंभा..तुम्हे डेवाले मे हम दोनो के लिए 1 घर का इंतेज़ाम करना होगा."

"ठीक है मगर आप दोनो वाहा कैसे & कब पहुचेंगे?"

"बस पहुँच जाएँगे.",देवेन हंसा & रंभा को चूमा.5 घंटे बाद रंभा डेवाले मे थी & मेहरा परिवार के सभी सदस्य जैसे उसके जाने से हैरान थे वैसे ही उसके अचानक वापस आने पे भी हैरान ही थे.

"कब आई?",समीर दफ़्तर से लौटने के बाद अपनी हैरानी च्छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहा था.

"थोड़ी देर पहले.",रंभा ने जवाब दिया & अलमारी मे अपने कपड़े ठीक करती रही.कुच्छ देर तक समीर कुच्छ नही बोला पर फिर उस से ये खामोशी बर्दाश्त नही हुई.

"वो..मैं घबरा गया था और बलबीर को.."

"प्लीज़ समीर,मेरा मूड मत खराब करो.मैने तुम्हे बोला था कि मुझे परेशान मत करना & मैं वापस आ जाऊंगी मगर फिर भी तुमने ये ओछि हरकत की."

"आइ'म सॉरी पर तुम्हे पता कैसे चला?"

"जैसे भी चला हो मगर तुम मेरी नज़रो मे और गिर गये हो.",रंभा दिल ही दिल मे हंस रही थी.

"ओके.अब ज़्यादा दिन मेरे साथ तुम्हे नही रहना पड़ेगा,बस 1 बार मानपुर वाला टेंडर खुल जाए फिर तुम्हे यहा रहने की ज़हमत नही उठानी पड़ेगी.",रंभा ने कोई जवाब नही दिया & अलमारी बंद कर कमरे से बाहर चली गयी.

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देवेन & विजयंत ने गोआ से बोम्बे तक की ट्रेन पकड़ी.दोनो ने मिलके विजयंत का हुलिया काफ़ी हद्द तक बदला.देवेन ने एसी फर्स्ट क्लास की टिकेट्स ली ताकि दोनो का सामना कम से कम लोगो से हो.बोम्बे से उसने दूसरी ट्रेन पकड़ी & डेवाले पहुँचा.डेवाले पहुचते ही उसने रंभा को फोन किया तो उसने उसे 1 पता दिया & वाहा जाने को कहा.40 मिनिट बाद देवेन और विजयंत उसके बताए पते पे टॅक्सी से उतर रहे थे.

टॅक्सी के जाते ही देवेन ने रंभा को फोन किया,"हम तुम्हारे बताए पते पे पहुँच गये हैं."

"गुड.गेट खुला है.आप अंदर जाइए & मेन डोर के बाहर जो 2 गमले रखे हैं.."

"हान..",देवेन अंदर गया तो उसके पीछे-2 विजयंत मेहरा भी समान उठाए घर के अहाते मे आ गया,"..जो गुलाब के पौधो वाले गमले हैं?"

"हां,वही.आपके बाए हाथ की तरफ वाले गमले को उठाइए,वाहा की टाइल ढीली है.उसी के नीचे घर की चाभी रखी है.",रंभा ने सोनम की मदद से ये घर किराए पे लिया था.वो नही चाहती थी कि सोनम को विजयंत के बारे मे पता चले & उसके पास चाभी देने आने का वक़्त नही था इसीलिए उसने इस तरह का इंतेज़ाम किया था.

"हां,मिल गयी.",देवेन ने दरवाज़ा खोला & दोनो मर्द घर के अंदर चले गये.

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"इस तरह से क्यू गायब हो गयी थी?",समीर के दफ़्तर जाते ही प्रणव आ धमका & उसे बाहो मे भर इस तरह चूमने लगा मानो इतने दिनो की जुदाई ने उसे पागल कर दिया हो.

"ओह्ह्ह्ह..आराम से करो..",वो रंभा की गर्दन चूम रहा था & रंभा गुदगुदी महसूस होने से खिलखिला उठी थी,"..सब्र करो,प्रणव.अभी कोई भी आ सकता है.",प्रणव ने अपने होंठ तो उसकी गर्दन से हटा दिए मगर हाथ जस के तस उसकी कमर पे बने रहे.

"क्यू चली गयी थी इस तरह?",रंभा ने घुटनो तक की कसी,सफेद स्कर्ट & कोट पहना था.स्कर्ट मे उसकी गंद बड़े क़ातिल अंदाज़ मे & उभर आई थी & प्रणव के हाथ उसकी फांको की गोलाईयो पे घूम रहे थे.

"बात ही कुच्छ ऐसी हो गयी थी.",रंभा ने नज़रे झुका ली & उसके चेहरे का रंग भी उतर गया.

"क्या बात हुई?..मुझे भी तो बताओ.",प्रणव का दाया हाथ उसकी गंद से उसके चेहरे पे आ गया & उसकी ठुड्डी पकड़ के उसे उपर कर उसकी निगाहो को खुद की नज़रो से मिलने पे मजबूर किया.

"छ्चोड़ो ना..क्या करोगे जान के?",रंभा ने उसका हाथ थाम लिया & फिर नज़रे झुका ली.

"रंभा,जब तक मुझे पूरी बता नही बतओगि मैं यहा से हिलने वाला नही.",रंभा तो बस यू ही नाटक कर रही थी.उसे प्रणव को सही बात तो बतानी ही थी.अभी तक खुल के उसने समीर की बुराई ये उसके खिलाफ होने के लिए उस से नही कहा था.वो देखना चाहती थी कि समीर की बेवफ़ाई के बारे मे बताने पे वो किस तरह से रिक्ट करता है.वो कुच्छ देर खामोश रही & प्रणव इसरार करता रहा.थोड़ी देर बाद उसने उसे समीर & कामया को रंगे हाथ पकड़ने की बात बता दी.

"कितना गिरा इंसान है ये समीर!",प्रणव गुस्से मे बोला,"..अगर यही सब करना था तो तुमसे शादी क्यू की उसने?!..रंभा,तुम्हे उसी वक़्त मुझे ये बात बतानी थी."

"क्या कर लेते तुम?..ज़्यादा से ज़्यादा समीर को डाँटते & वो जब तुम्हे कोई टका सा जवाब दे देता तो फिर बेइज़्ज़त होना क्या तुम्हे अच्छा लगता..",उसने नज़रे नीची कर ली और अपनी अंगूठी से खेलने लगी,"..तुम्हारा मुझे पता नही पर मुझे बहुत बुरा लगता अगर वो तुमसे कुच्छ ऐसी-वैसी बात कह देता तो.",प्रणव का दिल खुशी से भर गया..यानी चिड़िया पूरी तरह से उसके झूठे इश्क़ के जाल मे फँसी हुई थी!..उस बेचारे को क्या पता था कि जिसे वो मासूम चिड़िया समझ रहा था वो दरअसल सय्याद थी & बड़ी सफाई से उसे जाल मे फँसा रही थी.

"तो क्या होता?",उसने रंभा को बाहो मे भर उसके माथे को चूमा,"..कम से कम तुम यू मुझसे दूर तो ना जाती."

"ओह प्रणव!",रंभा ने भी उसे बाहो मे भर लिया & उसके सीने मे मुँह च्छूपा लिया.काफ़ी देर तक दोनो वैसे ही खड़े रहे.

"रंभा.."

"हूँ.."

"तुम्हे गुस्सा तो बहुत आया होगा ना?"

"हूँ.",रंभा वैसे ही मुँह च्छुपाए खड़ी थी.उसका दिल धड़क रहा था,प्रणव अपने मंसूबो को कुच्छ तो उजागर करने वाला था.

"तो समीर को सबक सिखाने का ख़याल नही आया तुम्हारे मन मे?"

"आया.",रंभा ने सर उपर उठाके प्रणव को देखा.

"तो कैसे करोगी ये काम?"

"यही समझ नही आया तो बेबसी और गुस्से से निजात पाने के लिए गोआ चली गयी थी."

"अच्छा & अगर मैं तुम्हे इस बाबत रास्ता दिखाऊ तो?",प्रणव ने बहुत सोच-समझ के ये बात कही थी.उसे इतना रिस्क तो उठाना ही था..आख़िर फायडा भी तो काफ़ी बड़ा होने वाला था.

"सच!..तो बताओ ना..क्या रास्ता है?",रंभा मच्लि.

"समीर को ट्रस्ट ग्रूप का मालिक होने का बहुत गुमान है ना..तो क्यू ना उसके गुमान की इस वजह को ख़त्म कर दिया जाए & तुम्हे इस साम्राज्य की मल्लिका बना दिया जाए?"

"क्या?!",रंभा के चेहरे पे हैरत & थोड़ी सी घबराहट के भाव थे,"..मगर कैसे प्रणव?"

"उसे रास्ते से हटा के."

"क्या कह रहे हो?..उसकी जान लोगे..पर..-"

"-..ना!",प्रणव ने उसके गुलाबी होंठो पे 1 उंगली रख खामोश रहने का इशारा किया,"..नही जान नही लेंगे बस उसे काम करने लायक नही छ्चोड़ेंगे.",रंभा कुच्छ देर तक वैसे ही उसे देखती रही.प्रणव को लगा कि उसने ग़लती कर दी है.रंभा घबरा के पीछे हटेगी & सारे किए-कराए पे पानी फेर देगी..उपर से उसके इरादो की जानकारी होने पे अब उसे उसका भी इलाज करना होगा..मगर तभी रंभा मुस्कुराइ & उसकी गर्दन मे बाहे डाल उसके होंठो को चूमा.

"प्रणव जी,आपको तो मैं बड़ा शरीफ इंसान समझती थी मगर आप तो काफ़ी बदमाश हैं!",वो शरारत से बोली तो दोनो खिलखिला उठे.प्रणव उसे चूमने लगा & उसकी दाई जाँघ उठा उसकी स्कर्ट मे हाथ घुसाने लगा तो रंभा उस से अलग हो गयी,"नही,अभी नही.अभी काम है मुझे & तुम्हे भी दफ़्तर जाना चाहिए.किसी को हमारे रिश्ते की ज़रा भी भनक नही लगनी चाहिए."

"ओके.",प्रणव ने मुस्कुराते हुए उसे चूमा & वाहा से चला गया.उसके जाने के कुच्छ देर बाद रंभा ट्रस्ट फिल्म्स के दफ़्तर के लिए रवाना हो गयी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--80

gataank se aage......

"Tum fone kyu nahi utha rahi thi?!",Deven bahut jaldi-2 apna saman pack kar raha tha.

"main naha rahi thi & fone silent mode pe tha.",Rambha bhi bags band kar rahi thi.deven ne Rocky ki car chhan mari thi & uski driving seat ke floor mat ke neechye use 1 chhoti pistol & 1 mobile fone mila tha.deven ne fone on kiya to paya tha ki sume bas 1 number se fone aaya tha.

"kuchh chhuta to nahi?",deven ne apna bank band kiya.

"nahi.",Vijayant Mehra vahi khada dono ko dekh raha tha.

"ok,ab tum dono meri baat dhyan se suno.",deven kamar pe hath rakhe khada tha,"..ye shakhs yaha ya to mujhe ya rambha ko marne aaya tha..",baat sunte hi rambha ka dil dhadak utha..Sameer is hadd tak ja sakta hai..magar kyu?,"..par ab vo shakhs mar chuka hai & jisne bhi use bheja tha vo aage hume nuksan pahuchane se pehle jhijhkega zarur.hume ab yaha se nikal jana hai.",vo apni premika se mukhatib hua,"rambha,tum agli flight pakad ke Devalay jao & tumhe vaha 1 khafa biwi ka khel khelte hue Mehra khandan ke 1-1 aadmi pe nazar rakhni hai."

"magar..",rambha ke chehre pe khauf saaf dikh raha tha.

"ghabrane kiz arurat nahi hai.main humesha tumhare aas-paas hi rahunga & jaisa maine kaha mujhe nahi lagta ki ab tumhe koi nuksan pahuchana chahega.agar fir bhi tumhe darr lagta hai to sameer ko is bare me batao & fir 1 vakil ke sath police me jake ye khe do ki tumhe apne pati se jaan ka khatra hai.vaise tumhe police tak jane ki zarurat nahi padegi.tumhari baat sunte hi sameer tumhari hifazat ka intezam kar dega.mujhe nahi lagta vo kisi bhi tarah ki negative publicity chahega."

"yani ki sameer ka hath nahi hai is sab ke peechhe?",sawal vijayant ne kiya & dono ko chaunka diya.

"pehle mujhe bhi aisa laga tha magar ab nahi lagta.rambha sameer se alag hone ko taiyyar hai vo bhi uske bataye waqt pe fir use kya taklif ho sakti hai?..ye kisi & ka hi kaam hai."

"magar kiska?"

"mera shaq Pranav pe hai.vo mujhe bahut shatir khildai lagta hai & vo kya naam hai uske sathi ka..",vo mathe pe hath firane laga.

"Mahadev Shah.",rambha boli.

"haan,bahut mumkin hai ki ye sab usi ka kiya-dhara ho."

"par vo mujhe marna kyu chahega?..main mari to Sameer Kamya se shadi kar lega & uska sara khel to shuru hone se pehle hi khatm ho jayega."

"hun."

"main janti hu ye kamini harkat kiski hai?",rambha ke dimagh me achanak bijli kaundhi thi.

"kiski?"

"kamya ki.meri maut se sabse bada fayda usi ko hoga.Devalay pahuchate hi use thik karti hu.",rambha gusse se boli.

"gusse me hosh nahi khona."

"thik hai.to main airport niklu?"

"haan..& rambha..tumhe devalay me hum dono ke liye 1 ghar ka intezam karna hoga."

"thik hai magar aap dono vaha kaise & kab pahuchenge?"

"bas pahunch jayenge.",deven hansa & rambha ko chuma.5 ghante baad rambha devalay me thi & mehra parivar ke sabhi sadasya jaise uske jane se hairan the vaise hi uske achanak vapas aane pe bhi hairan hi the.

"kab aayi?",sameer daftar se lautne ke baad apni haiarni chhupane ki nakaam koshish kar raha tha.

"thodi der pehle.",rambha ne jawab diya & almari me apne kapde thik karti rahi.kuchh der tak sameer kuchh nahi bola par fir us se ye khamoshi bardasht nahi hui.

"vo..main ghabra gaya tha & Balbir ko.."

"please sameer,mera mood mat kharab karo.maine tumhe bola tha ki mujhe pareshan mat karna & main vapas aa jaoongi magar fir bhi tumne ye ochhi harkat ki."

"i'm sorry par tumhe pata kaise chala?"

"jaise bhi chala ho magar tum meri nazro me aur gir gaye ho.",rambha dil hi dil me hans rahi thi.

"ok.ab zyada din mere sath tumhe nahi rehna pdega,bas 1 baar Manpur vala tender khul jaye fir tumhe yaha rehne ki zehmat nahi uthani padegi.",rambha ne koi jawab nahi diya & almari band kar kamre se bahar chali gayi.

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deven & vijayant ne Goa se Bombay tak ki train pakdi.dono ne milke vijayant ka huliya kafi hadd tak badla.deven ne AC first class ki tickets li taki dono ka samna kam se kam logo se ho.bombay se usne dusri train pakdi & devalay pahuncha.devalay pahuchate hi usne rambha ko fone kiya to usne use 1 pata diya & vaha jane ko kaha.40 minute baad deven & vijayant uske bataye pate pe taxi se utar rahe the.

Taxi ke jate hi Deven ne Rambha ko fone kiya,"hum tumhare bataye pate pe pahunch gaye hain."

"good.gate khula hai.aap andar jaiye & main door ke bahar jo 2 gamle rakhe hain.."

"haan..",deven andar gaya to uske peechhe-2 Vijayant Mehra bhi saman uthaye ghar ke ahat me aa gaya,"..jo gulab ke paudho vale gamle hain?"

"haan,vahi.aapke baye hath ki taraf vale gamle ko uthaiye,vaha ki tile dhili hai.usi ke neeche ghar ki chabhi rakhi hai.",rambha ne Sonam ki madad se ye ghar kiraye pe liya tha.vo nahi chahti thi ki sonam ko vijayant ke bare me pata chale & uske paas chabhi dene aane ka waqt nahi tha isiliye usne is tarah ka intezam kiya tha.

"haan,mil gayi.",deven ne darwaza khola & dono mard ghar ke andar chale gaye.

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"is tarah se kyu gayab ho gayi thi?",Sameer ke daftar jate hi Pranav aa dhamka & use baaho me bhar is tarah chumne laga mano itne dino ki judai ne use pagal kar diya ho.

"ohhhh..aaram se karo..",vo rambha ki gardan chum raha tha & rambha gudgudi mehsus hone se khilkhila uthi thi,"..sabr karo,pranav.abhi koi bhi aa sakta hai.",pranav ne apne honth to uski gardan se hata diye magar hath jas ke tas uski kamar pe bane rahe.

"kyu chali gayi thi is tarah?",rambha ne ghutno tak ki kasi,safed skirt & coat pehna tha.skirt me uski gand bade qatil andaz me & ubhar aayi thi & pranav ke hath uski fanko ki golaiyo pe ghum rahe the.

"baat hi kuchh aisi ho gayi thi.",rambha ne nazre jhuka li & uske chehre ka rang bhi utar gaya.

"kya baat hui?..mujhe bhi to batao.",pranav ka daya hath uski gand se uske chehre pe aa gaya & uski thuddi pakad ke use upar kar uski nigaho ko khud ki nazro se milne pe majbur kiya.

"chhodo na..kya karoge jaan ke?",rambha ne uska hath tham liya & fir nazre jhuka li.

"rambha,jab tak mujhe puri bata nahi bataogi main yaha se hilne wala nahi.",rambha to bas yu hi natak kar rahi thi.use pranav ko sahi baat to batani hi thi.abhi tak khul ke usne sameer ki burai ye uske khilaf hone ke liye us se nahi kaha tha.vo dekhna chahti thi ki sameer ki bewafai ke bare me batane pe vo kis tarah se react karta hai.vo kuchh der khamosh rahi & praqnav israr karta raha.thodi der baad usne use sameer & Kamya ko range hath pakadne ki baat bata di.

"kitna gira insan hai ye sameer!",pranav gusse me bola,"..agar yehis ab karna tha to tumse shadi kyu ki usne?!..rambha,tumhe usi waqt mujhe ye baat batani thi."

"kya kar lete tum?..zyada se zyada sameer ko daantate & vo jab tumhe koi taka sa jawab de deta to fir beizzat hona kya tumhe achha lagta..",usne nazre neechi kar li & apni anguthi se khelne lagi,"..tumhara mujhe pata nahi par mujhe bahut bura lagta agar vo tumse kuchh aisi-vaisi baat keh deta to.",pranav ka dil khushi se bhar gaya..yani chidiya puri tarah se uske jhuthe ishq ke jaal me phansi hui thi!..us bechare ko kya pata tha ki jise vo masoom chidiya samajh raha tha vo darasal sayyad thi & badi safai se use jaal me phansa rahi thi.

"to kya hota?",usne rambha ko baaho me bhar uske mathe ko chuma,"..kam se kam tu yu mujhse door to na jati."

"oh pranav!",rambha ne bhi use baaho me bhar liya & uske seene me munh chhupa liya.kafi der tak dono vaise hi khade rahe.

"rambha.."

"hun.."

"tumhe gussa to bahut aaya hoga na?"

"hun.",rambha vaise hi munh chhupaye khadi thi.uska dil dhadak raha tha,pranav apne mansubo ko kuchh to ujagar karne vala tha.

"to sameer ko sabak sikhane ka khayal nahi aaya tumhare man me?"

"aaya.",rambha ne sar upar uthake pranav ko dekha.

"to kaise karogi ye kaam?"

"yehi samajh nahi aaya to bebasi & gusse se nijat pane ke liye Goa chali gayi thi."

"achha & agar main tumhe is babat rasta dikhaoo to?",pranav ne bahut soch-samajh ke ye baat kahi thi.use itna risk to uthana hi tha..aakhir fayda bhi to kafi bada hone vala tha.

"sach!..to batao na..kya rasta hai?",rambha machli.

"sameer ko Trust Group ka malik hone ka bahut guman hai na..to kyu na uske guman ki is vajah ko khatm kar diya jaye & tumhe is samrajya ki mallika bana diya jaye?"

"kya?!",rambha ke chehre pe hairat & thodi si ghabrahat ke bhav the,"..magar kaise pranav?"

"use raste se hata ke."

"kya keh rahe ho?..uski jaan loge..pr..-"

"-..na!",pranav ne uske gulabi hotho pe 1 ungli rakh khamosh rehne ka ishara kiya,"..nahi jaan nahi lenge bas use kaam karne layak nahi chhodenge.",rambha kuchh der tak vaise hi use dekhti rahi.pranav ko laga ki usne galti kar di hai.rambha ghabra ke peechhe hategi & sare kiye-karaye pe pani fer degi..upar se uske irado ki jankari hone pe ab use uska bhi ilaj karna hoga..magar tabhi rambha muskurayi & uski gardan me baahe daal uske hontho ko chuma.

"pranav ji,aapko to main bada sharif insan samajhti thi magar aap to kafi badmash hain!",vo shararat se boli to dono khilkhila uthe.pranav use chumne laga & uski dayi jangh utha uski skirt me hath ghusane laga to rambha us se alag ho gayi,"nahi,abhi nahi.abhi kaam hai mujhe & tumhe bhi daftar jana chahiye.kisi ko humare rishte ki zara bhi bhanak nahi lagni chahiye."

"ok.",pranav ne muskurate hue use chuma & vaha se chala gaya.uske jane ke kuchh der baad rambha trust films ke daftar ke liye rawana ho gayi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--81

गतान्क से आगे......

"मुझे मेरी गैरमौजूदगी मे हुई सभी मीटिंग्स,शूटिंग्स और बाकी सभी बातो की डीटेल्स चाहिए.",रंभा अपने दफ़्तर मे बैठी थी.उसे पूरा यकीन था कि उसकी जान लेने के लिए गोआ मे उस शख्स को कामया ने ही भेजा था & अब वो उसे इस बात की सज़ा ज़रूर देगी.1 घंटे तक वो उसके पीछे मे हुई सभी बातो की जानकारी लेती रही.उसके बाद उसने मानेजमेंट की मीटिंग बुलाई.

"जो प्रॉजेक्ट्स चल रहे हैं,उनमे से 1 बिहाइंड शेड्यूल है..प्रॉजेक्ट 32..क्यू?",उसने उस फिल्म के एग्ज़िक्युटिव प्रोड्यूसर की ओर देखा.कंपनी का सीईओ रंभा के इस बदले रुख़ से हैरान था & बस चुपचाप सारी करवाई देख रहा था.अब अपने बॉस की बीवी की बात काट वो अपनी नौकरी तो ख़तरे मे नही डाल सकता था ना.

"मॅ'म,उस फिल्म की हेरोयिन कामया जी हैं & उन्होने अचानक 3 दिन की शूटिंग कॅन्सल कर दी थी.उनकी तबीयत खराब थी.",रंभा जानती थी कि कामया अपनी 'खराब तबीयत' का कैसा 'इलाज' किस 'डॉक्टर' से करवा रही थी.

"हूँ..& इन नये प्रपोज़ल्स मे ये 3 आपने चुने हैं?",उसने Cएओ से सवाल किया.

"जी,मॅ'म.सभी मुझे फ़ायदे के प्रपोज़ल्स लगे."

"वेरी गुड.मैने देखा कि सभी प्रपोज़ल्स के साथ आपने 1 टेंटेटिव टीम भी सोची है."

"येस,मॅ'म."

"बहुत अच्छा काम कर रहे हैं आप.मैने बस इन प्रपोज़ल्स मे छ्होटे-मोटे चेंजस किए हैं अगर आपको ठीक लगे तो इन प्रॉजेक्ट्स को शुरू करवा दीजिए & नही तो मैं अभी ही आपके काम मे दखल देने की माफी मांगती हू.",रंभा की जगह कोई और होता तो कामया का नाम नये प्रपोज़ल्स से काटने के बाद Cएओ को सख़्त ताकीद करता कि जो वो कहे वही हो मगर रंभा बहुत चालाक थी.उसने जानबूझ के इस तरह से बात की थी ताकि उसकी इतनी विनम्रता से कही बात को टालने का Cएओ के पास कोई बहाना ही ना रहे & फिर वो अभी भी मालिक की बीवी तो थी ही.शाम तक रंभा ने कामया के करियर के अंत की शुरुआत मे काफ़ी कदम उठा लिए थे & अब उसे थोड़ा सुकून था.

वो काफ़ी थकान महसूस कर रही थी & उसका दिल घर जाने को भी नही कर रहा था.देवेन ने उसे सख़्त हिदायत दी थी कि जब तक वो अपने घर के आस-पास के सारे इलाक़े को ठीक से चेक ना कर ले तब तक वो उस से मिलने ना आए.उसने उसे फोन किया & उसकी & विजयंत मेहरा की ख़ैरियत पुछि & फिर अपने ससुर से भी बात की.फोन रखने के बाद उसके दिल मे तैरने का ख़याल आया & उसने क्लब जाने की सोची & फिर दफ़्तर से निकालने की तैय्यारि करने लगी.

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देवेन ने घर पहुँचने के बाद फ्रेश होके सारे इलाक़ा का 1 चक्कर लगाया था & खाने-पीने & बाकी ज़रूरी समान लेके घर आ गया था.उसने देखा था कि डेवाले आने के बाद विजयंत थोड़ा चुप-2 रह रहा था.पहले उसने सोचा कि उस से इस बारे मे बात करे मगर फिर उसने इस ख़याल को छ्चोड़ दिया.उसने सोचा की ये काम रंभा ही करे तो ठीक था.

वो यहा अभी मेहरा परिवार के मुखिया के इस हाल का राज़ पता लगाने आया था मगर अभी भी वो दयाल से इन्टेक़ाम लेने की बात भुला नही था.उसका दिमाग़ हर पल दयाल को उसके बिल से बाहर निकालने की तरकीबे सोच रहा था मगर कोई ठोस आइडिया आ नही रहा था.

शाम को वो 1 यूज़्ड कार शोरुम मे गया & 1 फ़र्ज़ी आइडी से 1 कार खरीद के ले आया.उस कार से उसने आस-पास के इलाक़े का जायज़ा लिया.उसका घर मेहरा परिवार के बुंगलो से बस 10 मिनिट की दूरी पे था.उसने सोचा कि रंभा से सलाह कर वो 1 बार विजयंत को उसका घर ज़रूर दिखाएगा-शायद उसे कुच्छ याद आ जाए.रंभा से बात करने के बाद रात के खाने का इंतेज़ाम कर वो विजयंत को ले फिर से आस-पास के इलाक़े का चक्कर लगाने लगा.उसने कार के काले शीशे चढ़ाए रखे & उन रस्तो से बचता रहा जहा पोलीस की चेकिंग होती थी.उसका इरादा बस विजयंत को आस-पास के रस्तो से वाकिफ़ कराना था,ताकि अगर ज़रूरत पड़े तो उसे ख़ास मुश्किल ना हो & ये देखने का भी था कि कही कोई उनके पीछे तो नही लगा था या उनपे नज़र नही तो रख रहा था.1 1/2 घंटे बाद वो घर वापस आ गया & विजयंत के साथ खाना खाने के बाद कंप्यूटर ऑन कर सरफिंग करने लगा.

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रंभा दफ़्तर से निकली & सीधा क्लब गयी मगर उसकी जैसी सोच वाले वाहा कयि लोग थे & क्लब का पूल भरा हुआ था.रंभा का उस भीड़-भाड़ मे तैरने का दिल नही किया & उसने बस कुछ वक़्त वाहा बैठ के गुज़ारने की सोची.वो पूल साइड के किनारे रखी 1 कुर्सी पे बैठ गयी & 1 जूस का ऑर्डर दे दिया.

"गुड ईव्निंग,रंभा!कैसी हैं आप?",रंभा ने घूम के देखा,सामने महादेव शाह खड़ा था.

"गुड ईव्निंग,मिस्टर.शाह.मैं ठीक हू,आप कैसे हैं?"

"मैं भी ठीक हू.",रंभा का दिमाग़ उसे देखते ही तेज़ी से काम करने लगा था.प्रणव & ये बुड्ढ़ा शायद मिले हुए थे & उस बुड्ढे को परखने का ये बढ़िया मौका था.

"प्लीज़ बैठिए.",शाह को तो जैसे इसी का इंतेज़ार था.वो सामने की कुर्सी पे बैठ गया तो रंभा ने वेटर को बुलाके उसकी पसंद का ड्रिंक ऑर्डर किया.दोनो इधर-उधर की बाते करने लगे.आज सवेरे प्रणव ने मौका देख के उस से अपने मंसूबे ज़ाहिर किए थे.अब रंभा देख रही थी कि शाह क्या करता है.शाह को भी प्रणव & रंभा की सवेर की मुलाकात का पता प्रणव से चल चुका था & अभी इत्तेफ़ाक़ से हुई मुलाकात का फायडा उठाने के बारे मे वो सोच रहा था.

"आप इधर शहर से बाहर गयी थी?'

"हूँ.",रंभा ने जान बुझ के खुद को संजीदा कर लिया.

"बुरा ना माने तो मैं पुछ सकता हू कि कहा?"

"गोआ."

"सुना है बड़ी खूबसूरत जगह है.मेरा भी बहुत मन है वाहा जाने का मगर ना कभी मौका लगा &.."

"& क्या?"

"& ऐसी जगह बिना किसी खूबसूरत साथी जाने का क्या फायडा!आप खुशनसीब हैं,समीर साहब के साथ गयी होंगी आप तो..बल्कि मुझे तो ये कहना चाहिए कि समीर साहब खुशनसीब हैं जो आपके साथ उस खूबसूरत जगह की सैर का मौका उन्हे मिला."

"पता नही कौन खुशनसीब है!",रंभा फीकी हँसी हँसी.

"आपकी बातो से उदासी झलक रही है,मोहतार्मा.बुरा ना माने तो उसका सबब पुच्छ सकता हू.आपके जैसी खुशशक्ल ख़ातून के चेहरे पे ये परच्छाइयाँ अच्छी नही लगती.",रंभा को शाह की लच्छेदार बात सुन बड़ा मज़ा आया.इस खेल का वो भी माहिर खिलाड़ी लगता था & उसे भी मज़ा आ रहा था.

"पुछ्ने का शुक्रिया शाह साहब मगर क्यू मेरी परेशानी सुन आप अपनी शाम खराब करना चाहते हैं?"

"आपके साथ से ये शाम निखर आई है & अगर आपके गम को दूर कर सका तो इस से ज़्यादा खुशी की बात मेरे लिए & क्या हो सकती है."

"आप बहुत भले इंसान हैं,शाह साहब.मैं बस इतना कहूँगी की जिस ख़ुशनसीबी की बात आप कर रहे हैं,वो मुझे भी नसीब नही हुई.मैने भी गोआ अकेले ही घुमा.",शाह को पता तो था कि रंभा & समीर के बीच क्या हुआ है.उसने बात आगे बढ़ाई.

"आपको आपके गम की याद दिलाने की माफी चाहता हू.",मेज़ पे रखे रंभा के हाथ पे उसने अपना हाथ रख दिया,"..पता होता की आपका हसीन चेहरा मेरी बातो से यू मुरझा जाएगा तो मैं ऐसा हरगिज़ ना करता."

"प्लीज़,शाह साहब.मुझे शर्मिंदा ना करें बल्कि आज कयि दिनो बाद आपके साथ बात कर मैं खुद को हल्का महसूस कर रही हू.

"नही,मैने ग़लती तो की है & अब मैं इसकी भरपाई भी करूँगा.आप यहा सुकून पाने आई थी ना?"

"जी,सोचा था थोड़ा तैरुन्गि मगर यहा की भीड़ देख इरादा बदल दिया."

"आपको इरादा बदलने की कोई ज़रूरत नही.अब आपकी ख्वाहिश खाकसार पूरी करेगा.",शाह खड़ा हो गया & झुक के इस अंदाज़ मे बोला की रंभा को हँसी आ गयी,"आप बुरा ना माने तो मेरे ग़रीबखाने पे चलिए & वाहा के स्विम्मिंग पूल का इस्तेमाल कीजिए & फिर रात का खाना मेरे साथ खाइए."

"प्लीज़ शाह साहब,तकल्लूफ ना करें."

"तकल्लूफ कैसा!..ये तो मेरी ख़ुशनसीबी होगी..प्लीज़,मुझे 1 मौका दीजिए अपनी खातिर करने का."

"ओके,चलिए.",रंभा कुच्छ देर सोचती रही & फिर उठ खड़ी रही.शाह उसे अपनी कार मे ले गया.दोनो पिच्छली सीट पे बैठ गये तो ड्राइवर कार चलाने लगा.रंभा ने देखा की शाह की निगाहें उसकी स्कर्ट से निकलती गोरी टाँगो & कोट मे कसे सीने पे बार-2 जा रही थी.उसका दिल उसकी इस हर्कतो से धड़क उठा.उसने तय कर लिया कि आज की रात वो शाह को शीशे मे ज़रूर उतारेगी.

महादेव शाह ने रास्ते मे 1 जगह कार रुकवाई & उतर गया.वो 10-15 मिनिट बाद वापस आया.इस बीच रंभा ने देवेन को फोन कर बता दिया कि को वो कहा & किसके साथ जा रही है.देवेन ने भी उसे होशियार रहने की हिदायत दी & वाहा से निकलने के बाद सारी बात बताने को कहा.

शाह वापस आया & 20 मिनिट बाद दोनो उसके बुंगले पे थे.बुंगला आलीशान था मगर बिल्कुल वीरान.रंभा को थोडा डर लगने लगा था.उसे लग रहा था कि यहा के आके उसने कोई ग़लती तो नही की,"आपके घर-परिवार मे कौन-2 है,शाह साहब?"

"कोई नही,रंभा जी.मैं बिल्कुल तन्हा हू.मा-बाप तो बहुत पहले गुज़र गये & कोई है नही."

"आपने शादी नही की क्या?"

"जी नही.आज तक कोई मिली नही.",शाह ने 'आज तक' पे थोड़ा ज़्यादा ज़ोर दिया था.

"ये कैसी बात कर रहे हैं आप?आप जैसे कामयाब शख्स को कोई लड़की नही मिली."

"कामयाब होने का मतलब ये तो नही की जिसको चाहो वो आपको मिल ही जाए.",शाहा मुस्कुराया,"..खैर छ्चोड़िए,ये लीजिए..",शाह ने 1 पॅकेट उसे थमाया,"..माफी चाहूँगा पर मुझे रास्ते मे ख़याल आया कि पता नही आपके पास स्विम्मिंग कॉस्ट्यूम है कि नही & मैने ये खरीद लिया.",रंभा ने पॅकेट ले नज़रे नीची कर ली मानो उसे शर्म आ गयी हो,"..आप चेंज कर उधर पूल पे जाके जी भर के तैरिये.",शाह उसे 1 कमरे मे ले गया & फिर वाहा से चला गया.

रंभा ने पॅकेट खोला तो अंदर से 1 सिंगल पीस,काले रंग की बिकिनी निकली.रंभा ने कपड़े उतारे & बिकिनी पहन ली & कमरे मे लगे ड्रेसिंग टेबल के शीशे के सामने खड़ी हो गयी.बिकिनी का बॅक बहुत गहरा था & केवल उसकी गंद को ढके हुए था.उसकी पीठ पूरी नंगी थी.रंभा मुस्कुराने लगी..शाह बहुत शातिर खिलाड़ी था..उसे ये तो पता था नही कि रंभा के दिल मे क्या है,अगर 2 पीस बिकिनी लेता तो हो सकता था वो बुरा मान जाती.पर ये सिंगल पीस बिकिनी ले वो केवल उसके लिए अपनी फ़िक्र जता रहा था & साथ ही बड़ी चालाकी से इतने गहरे बॅक वाली बिकिनी चुनी उसने उसे अपना जिस्म दिखाने पे भी मजबूर कर दिया था.

रंभा मुस्कुराती हुई कमरे से बाहर शाह के बताए बंगल के पिच्छले हिस्से मे गयी.सामने बिलजुल सॉफ पानी से भरा पूल उसे बुलाता दिख रहा था.रंभा फ़ौरन पानी मे उतर गयी & तैरने लगी.पूल के 2-3 चक्कर लगाने के बाद उसने देखा की 1 घुटनो तक का बाथिंग गाउन पहने शाह हाथो मे 2 ग्लास लिए वाहा आ रहा है.रंभा ने उसे देख हाथ हिलाया तो शाह ने उसे किनारे आने का इशारा किया.

रंभा तैरती हुई पूल के किनारे आ गयी,"मिस्टर.शाह,आपके कैसे शुक्रिया अदा करू,मेरी समझ मे नही आ रहा.कितना शानदार पूल है आपका!",उसने उसके हाथ से जूस का 1 ग्लास ले 1 घूँट भरा & उसी तरह पानी मे खड़े हुए ग्लास को किनारे पे रखा.शाह की निगाहें उसके गीले जिस्म को घूर रही थी.

"आप कुच्छ ज़्यादा शर्मिंदा कर रही हैं,रंभा जी.अब ये मत कहिएगा की मेहरा खानदान के बुंगलो का पूल ऐसा नही."

"हां,कहूँगी.नही है ऐसा पूल क्यूकी आपको हैरत होगी पर हमारे बुंगलो मे से किसी मे भी स्विम्मिंग पूल नही है!",दोनो इस बात पे हंस पड़े,"..आप वाहा क्यू बैठे हैं?आइए ना,तैरिये.ऐसा पूल हो तो इंसान बाहर कैसे बैठ सकता है?"

"आपकी बात टालने की जुर्रत तो मैं कर नही सकता.",शाह ने अपना गाउन उतारा.अब वो सिर्फ़ 1 काले रंग के ट्रंक मे था.रंभा ने देखा की शाह का सीना सफेद बालो से भरा हुआ था.वो बुड्ढ़ा था & उसका जिस्म बहुत गथिला भी नही था मगर चुस्त था.रंभा की निगाहें उसके सीने से नीचे उसकी ब्रीफ्स पे आई & उसे फूला देखा वो मन ही मन मुस्कुराइ,"..पर केवल पूल का होना काफ़ी नही,आप जैसा साथी भी होना चाहिए जिसके साथ तैरने का पूरा लुत्फ़ उठाया जा सके.",शाह पानी मे उतर गया & तैरने लगा.

"चलिए,मेरे साथ मुक़ाबला कीजिए.देखे कौन इस पूल के 2 चक्कर पहले पूरे करता है.",रंभा ने हँसते हुए गोता लगाया & तैरने लगी.शाह भी हंसते हुए उसके साथ तैरने लगा.रंभा आगे थी & वो पीछे.शाह पानी मे अठखेलिया करती रंभा की गोरी टाँगो & नंगी पीठ को ललचाई निगाहो से देखता उसके पीछे आ रहा था.

"मैं जीत गयी!",रंभा पूल के सिरे पे पहुँच उसके किनारे पे कम पानी मे खड़े हो खुशी से चिल्लाई.शाह मुस्कुराता हुआ उसके पास आ गया & उसके सामने खड़ा हो उसके चेहरे को गौर से देखने लगा,"क्या देख रहे हैं?",उसकी निगाहो से रंभा के चेहरे का रंग भी बदल गया था.

"देख रहा हू कि ये पानी की बूंदे कितनी खुशकिस्मत हैं जो आपके होंठो को चूम रही हैं.",शाह उसके करीब आ गया था & रंभा को उसके सांसो की गर्मी अपने चेहरे पे महसूस हो रही थी.रंभा ने नज़रे झुका ली & घूम के अपनी पीठ शाह की ओर कर खड़ी हो गयी.उसने जान बुझ के अपनी नंगी पीठ शाह की ओर की थी.शाह ने पानी के नीचे उसकी झिलमिलाती गंद को देखा & फिर उसकी गीली पीठ को.उसका दिल किया की उसे बाँहो मे भर उसकी मखमली त्वचा को अपने होंठो से चूम ले मगर उसने खुद पे काबू रखा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--81

gataank se aage......

"Mujhe meri gairmaujudgi me hui sabhi meetings,shootings & baki sabhi baato ki details chahiye.",Rambha apne daftar me baithi thi.use pura yakin tha ki uski jaan lene ke liye Goa me us shakhs ko Kamya ne hi bheja tha & ab vo use is baat ki saza zarur degi.1 ghnate tak vo uske peechhe me hui sabhi baato ki jankari leti rahi.uske baad usne managemnet ki meeting bulayi.

"jo projects chal rahe hain,unme se 1 behind schedule hai..project 32..kyu?",usne us film ke executive producer ki or dekha.company ka CEO kamya ke is badle rukh se hairan tha & bas chupchap sari karvayi dekh raha tha.ab apne boss ki biwi ki baat kaat vo apni naukri to khatre me nahi daal sakta tha na.

"ma'am,us film ki heroine Kamya ji hain & unhone achanak 3 din ki shooting cancel kar di thi.unki tabiyat kharab thi.",rambha janti thi ki kamya apni 'kharab tabiyat' ka kaisa 'ilaj' kis 'doctor' se karwa rahi thi.

"hun..& in naye proposals me ye 3 aapne chune hain?",usne CEO se sawal kiya.

"ji,ma'am.sabhi mujhe fayde ke proposals lage."

"very good.maine dekha ki sabhi proposals ke sath aapne 1 tentative team bhi sochi hai."

"yes,ma'am."

"bahut achha kaam kar rahe hain aap.maine bas in proposals me chhote-mote changes kiye hain agar aapko thik lage to in projects ko shuru karwa dijiye & nahi to main abhi hi aapke kaam me dakhal dene ki mafi mangti hu.",rambha ki jagah koi & hota to kamya ka naam naye proposals se katne ke baad CEO ko sakht takeed karta ki jo vo kahe vahi ho magar rambha bahut chalak thi.usne jaanbujh ke is tarah se baat ki thi taki uski itni vinamrata se kahi baat ko talne ka CEO ke paas koi bahana hi na rahe & fir vo abhi bhi malik ki biwi to thi hi.sham tak rambha ne kamya ke career ke ant ki shuruat me kafi kadam utha liye the & ab use thoda sukun tha.

vo kafi thakan mehsus kar rahi thi & uska dil ghar jane ko bhi nahi kar raha tha.deven ne use sakht hidayat di thi ki jab tak vo apne ghar ke aas-pas ke sare ilake ko thik se check na kar le tab tak vo us se milne na aaye.usne use fone kiya & uski & Vijayant Mehra ki khairiyat puchhi & fir apne sasur se bhi baat ki.fone rakhne ke baad uske dil me tairne ka khayal aaya & usne club jane ki sochi & fir daftar se nikalne ki taiyyari karne lagi.

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deven ne ghar pahunchne ke baad fresh hoke sare ilaka ka 1 chakkar lagaya tha & khane-pine & baki zaruri saman leke ghar aa gaya tha.usne dekha tha ki Devalay aane ke baad vijayant thoda chup-2 reh raha tha.pehle usne socha ki us se is bare me baat kare magar fir usne is khayal ko chhod diya.usne socha ki ye kaam rambha hi kare to thik tha.

vo yaha abhi Mehra parivar ke mukhiya ke is haal ka raaz pata lagane aaya tha magar abhi bhi vo Dayal se inteqam lene ki baat bhula nahi tha.uska dimagh har pal dayal ko uske bil se bahar nikalne ki tarkeeb e soch raha tha magar koi thos idea aa nahi raha tha.

sham ko vo 1 used car showroom me gaya & 1 farzi id se 1 car kharid ke le aaya.us car se usne aas-pas ke ilake ka jayza liya.uska ghar mehra parivar ke bunglo se bas 10 minute ki duri pe tha.usne socha ki rambha se salah kar vo 1 baar vijayant ko uska ghar zarur dikhayega-shayad use kuchh yaad aa jaye.rambha se baat karne ke baad raat ke khane ka intezam kar vo vijayant ko le fir se aas-paas ke ilake ka chakkar lagane laga.usne car ke kale shishe chadahye rakhe & un rasto se bachta raha jaha police ki checking hoti thi.uska irada bas vijayant ko aas-paas ke rasto se vakif karana tha,taki agar zarurat pade to use kahs mushkil na ho & ye dekhne ka bhi tha ki kahi koi unke peechhe to nahi laga tha ya unpe nazar nahi to rakh raha tha.1 1/2 ghante baad vo ghar vapas aa gaya & vijayant ke sath khana khane ke baad computer on kar surfing karne laga.

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rambha daftar se nikli & seedha club gayi magar uski jaisi soch vale vaha kayi log the & club ka pool bhara hua tha.rambha ka us bhid-bhad me tairne ka dil nahi kiya & usne bas kuch waqt vaha baith ke guzarne ki sochi.vo pool side ke kinare rakhi 1 kursi pe baith gayi & 1 juice ka order de diya.

"good evening,rambha!kaisi hain aap?",rambha ne ghum ke dekha,samne Mahadev Shah khada tha.

"good evening,Mr.Shah.main thik hu,aap kaise hain?"

"main bhi thik hu.",rambha ka dimagh use dekhte hi tezi se kaam karne laga tha.pranav & ye buddha shayad mile hue the & us buddhe ko parakhne ka ye badhiya mauka tha.

"please baithiye.",shah ko to jaise isi ka intezar tha.vo samne ki kursi pe baith gaya to rambha ne waiter ko bulake uski pasand ka drink order kiya.dono idhar-udhar ki baate karne lage.aaj savere pranav ne mauka dekh ke us se apne mansube zahir kiye the.ab rambha dekh rahi thi ki shah kya karta hai.shah ko bhi pranav & rambha ki saver ki mulakat ka pata pranav se chal chuka tha & abhi ittefaq se hui mulakat ka fayda uthane ke bare me vo soch raha tha.

"aap idhar shehar se bahar gayi thi?'

"hun.",rambha ne jaan bujh ke khud ko sanjida kar liya.

"bura na mane to main puchh sakta hu ki kaha?"

"Goa."

"suna hai badi khubsurat jagah hai.mera bhi bahut man hai vaha jane ka magar na kbhi mauka laga &.."

"& kya?"

"& aisi jagah bina kisi khubsurat sathi jane ka kya fayda!aap khushnasib hain,Sameer sahab ke sath gayi hongi aap to..balki mujhe to ye kehna chahiye ki sameer sahab khushnasib hain jo aapke sath us khubsurat jagah ki sair ka mauka unhe mila."

"pata nahi kaun khushnasib hai!",rambha fiki hasni hansi.

"aapki baato se udasi jhalak rahi hai,mohtarma.bura na mane to usk sabab puchh sakta hu.aapke jaisi khushshakl khatun ke chehre pe ye parchhaiyan achhi nahi lagti.",rambha ko shah ki lachhedar baat sun bada maza aaya.is khel ka vo bhi mahir khiladi lagta tha & use bhi maza aa raha tha.

"puchhne ka shukriya shah sahab magar kyu meri pareshani sun aap apni sham kharab karna chahte hain?"

"aapke sath se ye sham nikhar aayi hai & agar aapke gham ko door kar saka to is se zyada khushi ki baat mere liye & kya ho sakti hai."

"aap bahut bhale insan hain,shah sahab.main bas itna kahungi ki jis khushnasibi ki baat aap kar rahe hain,vo mujhe bhi nasib nahi hui.maine bhi goa akele hi ghuma.",shah ko pata to tha ki rambha & sameer ke beech kya hua hai.usne baat aage badhayi.

"aapko aapke gham ki yaad dilane ki mafi chahta hu.",mez pe rakhe rambha ke hath pe usne apna hath rakh diya,"..pata hota ki aapka haseen chehra meri baato se yu murjha jayega to main aisa hargiz na karta."

"please,shah sahab.mujhe sharminda na karen balki aaj kayi dino baad aapke sath baat kar main khud ko halka mehsus kar rahi hu.

"nahi,maine galti to ki hai & ab main iski bharpai bhi karunga.aap yaha sukun pane aayi thi na?"

"ji,socha tha thoda tairungi magar yaah ki bhid dekh irada badal diya."

"aapko irada badlane ki koi zarurat nahi.ab aapki khwahish khaksar puri karega.",shah khada ho gaya & jhuk ke is andaz me bola ki rambha ko hansi aa gayi,"aap bura na mane to mere garibkhane pe chaliye & vaha ke swimming pool ka istemal kijiye & fir raat ka khana mere sath khaiye."

"please shah sahab,takalluf na karen."

"takalluf kaisa!..ye to meri khushnasibi hogi..please,mujhe 1 mauka dijiye apni khatir karne ka."

"ok,chaliye.",rambha kuchh der sochti rahi & fir uth khadi rahi.shah use apni car me le gaya.dono pichhli seat pe baith gaye to driver car chalane laga.rambha ne dekha ki shah ki nigahen uski skirt se nikalti gori tango & coat me kase seene pe baar-2 ja rahi thi.uska dil uski is harkato se dhadak utha.usne tay kar liya ki aaj ki raat vo shah ko shishe me zarur utaregi.

Mahadev Shah ne raste me 1 jagah car rukwai & utar gaya.vo 10-15 minute baad vapas aaya.is beech Rambha ne Deven ko fone kar bata diya ki ko vo kaha & kiske sath ja rahi hai.deven ne bhi use hoshiyar rehne ki hidayat di & vaha se nikalne ke baad sari baat batane ko kaha.

shah vapas aaya & 20 minute baad dono uske bungle pe the.bungla aalishan tha magar bilkul veeran.rambha ko thoda darr lagne laga tha.use lag raha tha ki yaha ke aake usne koi galti to nahi ki,"aapke ghar-parivar me kaun-2 hai,shah sahab?"

"koi nahi,rambha ji.main bilkul tanha hu.maa-baap to bahut pehle guzar gaye & koi hai nahi."

"aapne shadi nahi ki kya?"

"ji nahi.aaj tak koi mili nahi.",shah ne 'aaj tak' pe thoda zyada zor diya tha.

"ye kaisi baat kar rahe hain aap?aap jaise kamyab shakhs ko koi ladki nahi mili."

"kamyab hone ka matlab ye to nahi ki jisko chaho vo aapko mil hi jaye.",shaha muskuraya,"..khair chhodiye,ye lijiye..",shah ne 1 packet use thamaya,"..mafi chahunga par mujhe raste me khayal aaya ki pata nahi aapke paas swimming costume hai ki nahi & maine ye kharid liya.",rambha ne packet le nazre neechi akr li mano use sharm aa gayi ho,"..aap change kar udhar pool pe jake ji bhar ke tairiye.",shah use 1 kamre me le gaya & fir vaha se chala gaya.

rambha ne packet khola to andar se 1 single piece,kale rang ki bikini nikli.rambha ne kapde utare & bikini pehan li & kamre me lage dressing table ke shishe ke samne kahdi ho gayi.bikini ka back bahut gehra tha & keval uski gand ko dhake hue tha.uski pith puri nangi thi.rambha muskurane lagi..shah bahut shatir khiladi tha..use ye to pata tha nahi ki rambha ke dil me kya hai,agar 2 piece bikini leta to ho sakta tha vo bura maan jati.par ye single piece bikini le vo keval uske liye apni fikr jata raha tha & sath hi badi chalaki se itne gehre back vali bikini chun usne use apna jism dikhane pe bhi majbur kar diya tha.

rambha muskurati hui kamre se bahar shah ke bataye bungle ke pichhle hisse me gayi.samne biljul saaf pani se bhara pool use bulata dikh raha tha.rambha fauran pani me utar gayi & tairne lagi.pool ke 2-3 chakkar lagane ke baad usne dekha ki 1 ghutno tak ka bathing gown pehne shah hatho me 2 glass liye vaha aa raha hai.rambha ne use dekh hath hilaya to shah ne sue kinare aane ka ishar kiya.

rambha tairti hui pool ke kinare aa gayi,"mr.shah,aapke kaise shukriya ada karu,meri samajh me nahi aa raha.kitna shandar pool hai aapka!",usne uske hath se juice ka 1 glass le 1 ghunt bhara & usi tarah pani me khade hue glass ko kinare pe rakha.shah ki nigahen uske gile jism ko ghur rahi thi.

"aap kuchh zyada sharminda kar rahi hain,rambha ji.ab ye mat kahiyega ki Mehra khandan ke bunglo ka pool aisa nahi."

"haan,kahungi.nahi hai aisa pool kyuki aapko hairat hogi par humare bunglo me se kisi me bhi swimming pool nahi hai!",dono is baat pe hans pade,"..aap vaha kyu baithe hain?aaiye na,tairiye.aisa pool ho to insan bahar kaise baith sakta hai?"

"aapki baat talne ki jurrat to main kar nahi sakta.",shah ne apna gown utara.ab vo sirf 1 kale rang ke trunk me tha.rambha ne dekha ki shah ka seena safed baalo se bhara hua tha.vo buddha tha & uska jim bahut gathila bhi nahi tha magar chust tha.rambha ki nigahen uske seene se neeche uski briefs pe aayi & use phoola dekha vo man hi man muskurayi,"..par keval pool ka hona kafi nahi,aap jaisa sathi bhi hona chahiye jiske sath tairne ka pura lutf uthaya ja sake.",shah pani me utar gaya & tairne laga.

"chaliye,mere sath muqabla kijiye.dekhe kaun is pool ke 2 chakkar pehle pure karta hai.",rambha ne hasnte hue gota lagaya & tairne lagi.shah bhi hanste hue uske sath tairne laga.rambha aage thi & vo peechhe.shah pani me athkheliya karti rambha ki gori tango & nangi pith ko lalchayi nigaho se dekhta uske peechhe aa raha tha.

"main jeet gayi!",rambha pool ke sire pe pahunch uske kinare pe kam pani me kahde ho khushi se chillayi.shah muskurata hua uske paas aa gaya & uske samne khada ho uske chehre ko gaur se dekhne laga,"kya dekh rahe hain?",uski nigaho se rambha ke chehre ka rang bhi badal gaya tha.

"dekh raha hu ki ye pani ki boonde kitni khushkismat hain jo aapke hotho ko chum rahi hain.",shah uske karib aa gaya tha & rambha ko uske sanso ki garmi apne chehre pe mehsus ho rahi thi.rambha ne nazre jhuka li & ghum ke apni pth shah ki or kar khadi ho gayi.usne jaan bujh ke apni nangi pith shah ki or ki thi.shah ne pani ke neeche uski jhilmilati gand ko dekha & fir uski gili pith ko.uska dil kiya ki use bahao me bhar uski makhmali tvacha ko apne hotho se chum le magar usne khud pe kabu rakha.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--82

गतान्क से आगे......

"क्या बात है,रंभा?",उसना दाया हाथ रंभा के दाए कंधे पे रखा,"..मेरी बात बुरी लगी तो माफी चाहता हू."

"ऐसी बातो का क्या फायडा,शाह साहब जब ये जिस नज़म तक हमे ले जाती हैं मैं वाहा जा नही सकती.",रंभा ने आधा जिस्म घुमाया & उदासी से बोली.

"मगर क्यू नही जा सकती?",शाह ने उसे अपनी ओर पूरा घुमाया & उसके दोनो कंधो पे अपने हाथ जमा दिए,"..मैं तुम्हारे लायक नही क्या इसीलिए?"

"नही-2..",रंभा ने परेशान हो उसकी तरफ देखा,"..ये बात नही पर..",उसने बात अधूरी छ्चोड़ फिर से नज़रे झुका ली.

"तो क्या बात है?!",शाह ने उसे झकझोरा.

"मुझे..मुझे डर लगता है.",रंभा ने धीमी आवाज़ मे कहा.

"किस बात से डर लगता है?"

"कही किसी को पता चल गया तो?",रंभा ने उसकी ओर परेशान निगाहो से देखा.

"तो?!..तो अच्छा होगा..फिर मैं हमेशा तुम्हारे साथ रह सकता हू.",शाह ने उसके हाथ थाम लिए.

"पागल मत बानिए.मैं शादीशुदा हू."

"जो आदमी तुम्हारी कद्र नही करता,तुम्हे छ्चोड़ किसी और की बाहो मे घुसा रहता है,उसके चलते तुम मेरी मोहब्बत ठुकरा रही हो!",रंभा ने उसे ऐसे देखा जैसे उसे हैरत हुई हो कि शाह को कैसे पता चला समीर की हर्कतो के बारे मे,"हां,मुझे पता है सब कुच्छ.अब बताओ,उस इंसान के लिए तुम ना बोल रही हो?"

"नही..",रंभा बहुत पशोपेश मे होने का नाटक कर रही थी,"..देखिए शाह साहब,आप प्रणव को जानते है ना?"

"हां."

"तो मैं और वो..",रंभा ने फिर नज़रे नीची कर ली.

"हां तो क्या हुआ?",रंभा ने जैसे सोचा था गुफ्तगू वैसे ही आगे बढ़ रही थी.

"तो अब आपके साथ ये सब..शाह साहब,कल को समीर और मैं अलग हो जाएँगे तब मेरा क्या होगा?..क्या मैं प्रणव से लेके आपके बिस्तर तक घूमती रहूंगी?..यही वजूद रह जाएगा मेरा?!",रंभा की आँखो मे गुस्से के साथ-2 पानी छल्छला आया था.

"नही,ऐसा नही होगा.",शाह बहुत गंभीर आवाज़ मे बोला,"..मुझे पता है तुम्हारे & प्रणव के बारे मे.तुम किसके साथ क्या रिश्ता रखती हो,ये तुम्हारा फ़ैसला होगा मगर अगर तुम चाहोगी तो..",शाह के दिमाग़ मे रंभा की बात से बिजली कौंधी थी-अगर रंभा मान गयी तो उसे प्रणव या किसी और की कोई ज़रूरत नही रहेगी & उसका काम भी हो जाएगा,"..महादेव शाह ये वादा करता है कि तुम्हे अपनी दुल्हन बनाएगा & अपनी आख़िरी सांस तक तुम्हारे साथ रहेगा."..हां..हां..जब करोड़ो के शेर्स लेके दहेज मे आऊँगी तो दुल्हन तो बनाओगे ही!..रंभा ने मन ही मन सोचा.

"आप..आप मुझे बहला रहे हैं.",उसने काँपती आवाज़ मे कहा.

"हां,मेरा फ़र्ज़ है कि तुम परेशान हो तो तुम्हे बहलाउ लेकिन मैने जो कहा है वो बिल्कुल सच है.चाहो तो आज़मा लेना मुझे.समीर तुम्हे छ्चोड़ेगा & तुम चाहोगी तो मैं तुमसे शादी कर लूँगा."

"महादेव..",रंभा ने काँपते होंठो से बोला & फिर सुबक्ते हुए हाथ छुड़ा के घूम के अपनी पीठ शाह की ओर कर ली..उसकी चाल काम कर गयी थी..अब उसे पता चल सकता था कि कही विजयंत मेहरा के हाल के पीछे इन दोनो का हाथ तो नही था.

शाह जानता था कि मच्चली अब जाल मे फँस चुकी है.उसने रंभा के कंधे पकड़ उसे अपनी ओर घुमाया & अपने आगोश मे भर लिया.रंभा कुच्छ देर उसके सीने पे हाथ रखे मुँह च्छुपाए सिसकने का नाटक करती रही & फिर खामोश हो गयी.शाह उसकी नंगी पीठ सहलाए जा रहा था & जब उसने देखा की उसकी सिसकिया रुक गयी है तो उसने दाए हाथ से उसकी ठुड्डी पकड़ उसका चेहरा उपर किया.

"तुम्हे पहली बार देखा था तब से तुम्हे पाने की हसरत थी.आज भी यही सोच के तुम्हे दावत दी थी कि शायद मेरी किस्मत मेहेरबान हो जाए.",वो उसकी काली आँखो मे झाँक रहा था,"..& किस्मत मेहेरबान हुई भी तो किस तरह,कहा मुझे बस तुम्हारे साथ बस 1 रात की चाह थी & तुमने अपनी तमाम राते मेरे नाम कर दी.",..कितना शातिर शख्स था?!..& बातो का जाल बुनने मे माहिर..ना जाने आज तक कितनी लड़कियो को इसने इस तरह फाँसा होगा!..2 घंटे भी नही हुए मिले हुए & मुझसे शादी के लिए हां भी करवा ली इसने..तुम इसी बदगुमानी मे रहो,मिस्टर.शाह & देखो मैं तुम्हे कैसे मज़ा चखाती हू!

शाह झुका & रंभा के होंठो से पानी की बूंदे चखने लगा.रंभा ने शर्मा के मुँह बाई तरफ फेरा मगर शाह के हाथ ने उसके गाल को थाम 1 बार फिर उसके चेहरे को अपने सामने किया & इस बार दोनो हाथो मे उसके चेहरे को थाम उसके होंठो को अपने होंठो से सटने पे मजबूर कर दिया.रंभा अपने होठ नही खोल रही थी & बस शाह को उन्हे चूमने दे रही थी मगर थोड़ी देर बाद शाह की ज़ुबान ने इसरार कर-2 के उसके होंठो को खुलवा ही लिया & फिर उसके मुँह मे घुस उसकी ज़ुबान को प्यार करने लगी.

अगर शाह शातिर था तो रंभा भी जिस्मो के खेल की माहिर थी.शुरू मे शरमाती रंभा ने अब ये जताया कि शाह के होंठो ने उसे मस्त कर दिया है & अब वो अपनी शर्मोहाया भूल रही है.उसने अपने हाथ शाह के कंधो पे जमा दिए & उसकी किस का जवाब देने लगी.शाह के हाथ पानी के नीचे उसकी नंगी पीठ को सहला रहे थे.

रंभा 1 भोली-भाली लड़की का नाटक कर रही थी मगर उसे मज़ा बहुत आ रहा था.शाह ने चूमते हुए हाथो का दबाव बढ़ाया & रंभा को खुद से सटा लिया.उसका खड़ा लंड रंभा के पेट पे दब गया तो रंभा की चूत मे भी कसक उठने लगी.ठंडे पानी मे शाह के जिस्म का गर्म एहसास उसे रोमांच से भर रहा था.काफ़ी देर बाद रंभा ने सांस लेने के लिए होंठ लगा किए तो शाह ने उसके खूबसूरत चेहरे पे किस्सस की झड़ी लगा दी.

"छ्चोड़िए ना!..कही कोई आ गया तो?",रंभा ने उसे शरमाते हुए परे धकेलने की नाकाम कोशिश की.

"यहा कौन आएगा?",शाह उसके गाल चूमते हुए उसकी गर्दन पे गया था & उसकी कमर के मांसल हिस्सो को दबा रहा था.

"कोई नौकर..& वो आपका ड्राइवर..आहह..!",शाह ने उसके क्लीवेज पे अपने तपते होंठ रख दिए थे.

"मैने सबको घर से बाहर भेज दिया है.मैं तुम्हारे साथ 1-1 पल का भरपूर लुत्फ़ उठाना चाहता हू.",शाह ने उसे खुद से बिल्कुल चिपका लिया तो रंभा भी मस्ती मे भर गयी & अपनी आँखे बंद कर ली & उसकी हर्कतो का मज़ा लेने लगी.शाह उसके पूरे जिस्म को च्छुना चाहता था,चूमना चाहता था मगर पूल मे ये मुमकिन नही था.उसने रंभा को उठाया & पूल से निकाल के फर्श पे लिटा दिया.वो बुड्ढ़ा था मगर कमज़ोर नही.रंभा उसकी इस हरकत पे खुश हुई-शाह मे दम-खाँ था & रंभा को बिस्तर मे उस से खुश होने का नाटक नही करना पड़ेगा बल्कि बहुत मुमकिन था कि शाह उसे भरपूर मज़ा दे.

अब रंभा ज़मीन पे लेटी थी & शाह पूल मे खड़े-2 ही उसके होंठ चूम रहा था & उसके स्विमस्यूट से ढँके पेट को सहला रहा था.रंभा दाए हाथ से उसके सर को थामे थी & बाए को उसके पेट पे चलते हाथ के उपर रखे थी.शाह ने उसके होंठो को छ्चोड़ा & फिर उसके बाए हाथ को थाम उसकी गुदाज़ बाँह को चूमने लगा.उसकी दोनो बाहो को चूमने के बाद उसने रंभा को पलटा & पूल से निकल घुटनो पे बैठ उसकी गीली पीठ को अपने गर्म लबो से सुखाने लगा.रंभा उसके चूमने से कांप रही थी & उसकी पीठ की थरथराहट देख शाह भी जोश मे पागल हुआ जा रहा था.उसने स्विमस्यूट के स्ट्रॅप्स उसके कंधो से सरकाए & रंभा को घुमा के सीधा किया.

रंभा अब थोड़ी घबराई निगाहो से उसे देख रही थी & उसने अपने हाथ अपने सीने पे रख लिए थे.शाह की आँखो मे वासना थी.रंभा का उभरा सीना जिस तरह से उपर-नीचे हो रहा था & घबराते हुए उसने जिस तरह उसे च्छुपाया था-ये सब उसके जोश को बढ़ा रहे थे.उसने मुस्कुराते हुए उसके हाथो को सीने से हटाया & उसके स्ट्रॅप्स को पूरा नीचे खिचते हुए उसके स्विमस्यूट को उसकी कमर तक कर दिया.सामने का नज़ारा देख शाह का हलक सुख गया.वो जानता था कि रंभा बेहद हसीन है मगर उसका जिस्म इतना नशीला,इतना दिलकश होगा,इसका अंदाज़ा उसे नही था.रंभा की गोरी,मोटी छातियाँ उसके सामने उपर-नीचे हो रही थी,उनके गुलाबी निपल्स बिल्कुल कड़े उसे अपनी ओर बुलाते दिख रहे थे.उसका सपाट पेट थरथरा रहा था & उसके बीच उसकी गोल,गहरी नाभि जैसे उसकी ज़ुबान के इंतेज़ार मे ही थी.

घुटनो पे बैठ के महादेव शाह ने रंभा की छातियो को अपने हाथो से हल्के से दबाया तो उसके मुँह से आह निकल गयी & उसने अपनी छातियो पे दबे उसके दोनो हाथो को पकड़ लिया.शाह ने उसके हाथो को उठाके चूमा & फिर उन्हे उसके सर के उपर ले जाते हुए ज़मीन से लगाया & फिर रंभा के दाई तरफ लेट गया & अपने बाए हाथो मे उसके दोनो हाथो को पकड़ के उसके सीने पे झुक गया.उसने दाए हाथ मे उसकी बाई चूची को भरा & अपने मुँह को उसकी दाई चूची से लगा दिया.

बुंगले का वो खुला हिस्सा रंभा की मस्त आहो से गुलज़ार हो गया.शाह उसकी 1 चूची को मसलते हुए दूसरी को चूस रहा था.रंभा का दिल तो कर रहा था की उसके बालो को नोचे,उसकी पीठ को खरोन्चे मगर उसके हाथ शाह की गिरफ़्त मे थे & वो बेबस थी लेकिन ये बेबसी भी उसे अलग ही मज़ा दे रही थी.शाह तो उसकी चूचियो को देख पागल हो गया था.वो उन्हे पूरा का पूरा मुँह मे भर चूस रहा था & बीच-2 मे हल्के-2 दन्तो से काट भी रहा था.उसके निपल्स को वो दन्तो मे पकड़ उपर खींचता तो रंभा को हल्का दर्द होता मगर उस से भी कही ज़्यादा मस्ती का एहसास होता.

वो च्चटपटा रही थी & अपनी कसी जंघे आपस मे रगड़ रही थी.उसकी चूत की कसमसाहट अब बहुत बढ़ गयी थी.शाह उसके निपल्स को उंगलियो मे पकड़ के मसलते हुए चूचियो के उभारो के नीचे चूम रहा था & जीभ से छेड़ रहा था.उसने दोनो चूचियो के बीच मुँह घुसा के रगड़ा & वाहा भी चूसने लगा.वो रंभा के सीने पे अपने होंठो & दन्तो के निशान छ्चोड़ते जा रहा था & रंभा अब मस्ती मे सुबक्ते हुए च्चटपटा रही थी.उसकी चूत की कसक बहुत ज़्यादा बढ़ गयी थी & उसने बेचैन हो अपनी कमर उचकानी शुरू कर दी & बहुत जोरो से सिसकने लगी.शाह समझ गया कि वो झड़ने वाली है & उसने उसकी चूचियो को चूसना & तेज़ कर दिया अगले ही पल रंभा सिसकते हुए झाड़ गयी.

शाह ने उसके हाथ छ्चोड़े तो रंभा ने उसकी गर्दन को पकड़ उसे नीचे खीचा & उसे बड़ी शिद्दत से चूमने लगी.शाह केवल बाते बनाना ही नही जानता था वो 1 लड़की के जिस्म से खेल उसे खुश करना भी जानता था.रंभा ने उसके मुँह मे ज़ुबान घुसाई & फिर उसकी ज़ुबान को जम के चूसा.

काफ़ी देर तक चूमने के बाद शाह ने उसके होंठ छ्चोड़े & दोनो चूचियो पे 1-1 किस दी.उसके बाद वो नीचे गया & उसके गोरे पेट को चूमने लगा.रंभा जैसी हसीन लड़की से वो आज तक नही मिला था & उसके नशीले जिस्म के साथ खेलना उसके लिए बिल्कुल अनोखा & रोमांचकारी एहसास था.

रंभा 1 बार फिर आहे भरती हुई कसमसाने लगी थी.शाह की ज़ुबान उसके पेट को अपनी नोक से छेड़ते हुए उसकी नाभि मे उतर गयी थी & उसे चाट रही थी.रंभा उसके सर को पकड़े बेचैनी से अपने पेट से अलग करना चाह रही थी.उसकी ज़ुबान की हरकते उसे पागल कर रही थी मगर शाह भी उसके हाथो की परवाह ना करता हुआ उसके पेट पे जुटा हुआ था.जब रंभा 1 बार फिर मस्ती मे नही डूब गयी शाह ने उसकी नाभि से जीभ नही निकाली.

रंभा अब नशीली आँखो से उसे देख रही थी.उसका दिल कर रहा था की जल्दी से वो उसकी बिकिनी को उतारे & उसकी प्यासी चूत को प्यार करे.शाह ने उसके पेट से सर उठाया & उसकी तरफ देखा & जैसे उसकी आँखो मे झलक रही उसकी हसरत को पढ़ लिया.उसने उसकी कमर पे अटकी बिकिनी को नीचे खींचा तो रंभा ने अपनी गंद उठा दी.अगले ही पल वो अपने नये प्रेमी के सामने बिल्कुल नंगी थी.

रंभा के हाथ 1 बार फिर उसके सीने पे आ गये थे & वो बस शाह की अगली हरकत का इंतेज़ार कर रही थी.शाह ने उसकी चूत को देखा-ऐसी चिकनी,गुलाबी,नाज़ुक & कसी चूत उसने अपनी ज़िंदगी मे पहले कभी नही देखी थी.आज वो इस से जी भर के खेलेगा मगर उस से पहले उसे उसकी जाँघो & टाँगो का स्वाद चखना था जिन्होने शाम से ही लुभा & ललचा के उसका बुरा हाल किया हुआ था.

उसने रंभा की जाँघो को सहलाया तो उसने अपने घुटने उपर मोड़ दिए.शाह उसके उठे डाए घुटने को चूमने लगा & उसके हाथ रंभा की टांगो से लेके जाँघो के अन्द्रुनि हिस्सो पे घूमने लगे.रंभा च्चटपतती हुई अपने बालो से खेलते हुए आहे भर रही थी & अपनी जाँघो को आपस मे रगड़ अपनी चूत को शांत करने की कोशिश कर रही थी.

शाह उसके घुटने से नीचे उसकी मोटी जाँघ पे आया & चूमने के साथ-2 उसकी गुदाज़ जाँघ को चूसने भी लगा.रंभा तो मस्ती मे पागल ही हो गयी.शाह तुरंत अपने घुटनो पे बैठ गया & उसकी दाई टांग को हवा मे उठा दिया & फिर उसकी जाँघ के निचले हिस्से को चूमने,चाटने लगा.रंभा ने बाया हाथ बढ़ा उसके बाल पकड़ लिए & नोचने लगी.

आसमान के सितारे शाह की किस्मत से रश्क कर रहे थे & चाँद रंभा के हुस्न को देख जल गया & कुच्छ बादलो के पीछे च्छूप गया.ठंडी हवा के झोंके ने रंभा के जिस्म को कंपा दिया मगर शाह की हर्कतो ने उसके बदन की गर्मी को बढ़ाए रखा था.

शाह ने उसकी जाँघ चूमते हुए उसके नीचे हाथ लगा उसे पलट दिया & फिर उसकी चौड़ी गंद पे हाथ फिराने लगा.उसने उसकी गंद पे हल्की-2 च्पते लगानी शुरू की & उन चपतो पे जिस दिलकश अंदाज़ मे वो थरथराती,उसे देख उसका लंड उसके ट्रंक्स मे & कुलबुलाने लगा.शाह झुका & उसकी कमर के मांसल हिस्सो को दबाते हुए उसकी गंद की फांको को चूमने लगा.रंभा अपनी कोहनियो पे उचक अपने सर को झटकती आहे भरने लगी.

शाह उसकी फांको को भींचते हुए चूम रहा था & उसकी छातियो की तरह यहा भी अपने दन्तो से हल्के-2 काट रहा था.रंभा की मस्ती बा बहुत बढ़ गयी थी & उसने कमर हिला पानी चूत को ठंडी ज़मीन पे दबा उसका इज़हार किया.शाह भी जाल मे ताज़ा-2 फँसी मच्चली की च्चटपटाहत देख उसकी बेचैनी का सबब समझ गया & उसने उसे पलट के सीधा किया & उसकी टाँगे खोल दी.

रंभा की चूत से बहता रस उसकी जाँघो पे टपक आया था.उसने पहले उसकी जाँघो से उसे सॉफ किया & फिर उसकी गुलाबी चूत मे अपनी ज़ुबान उतार उसे सुड़कने लगा.रंभा की टाँगे अपने-आप हवा मे उठ गयी & वो उसके सर को पकड़ अपनी चूत पे भींचती,कमर उचकती चीखने लगी.शाह उसकी गंद के नीचे हाथ लगाए उसे हवा मे उठाके उसकी चूत को ज़ोर-2 से अपनी लपलपाति जीभ से चाट रहा था.रंभा के जिस्म मे बिजली दौड़ रही थी.उसने शाह के बाल पकड़ के उसे अपनी चूत पे बहुत ज़ोर से दबाते हुए कमर उचकाई & झाड़ गयी.काफ़ी देर तक रंभा झड़ने की खुमारी मे सिसकती रही & शाह भी उसकी चूत चाटता रहा.जब उसकी सिसकिया रुकी तो शाह उपर आया & उसे चूमने लगा.रंभा ने भी उसे बाँहो मे भर लिया & चूमने मे उसका साथ देने लगी.इस वक़्त शाह शक़ के दायरे मे खड़ा शख्स नही बस 1 मर्द था जो उसे भरपूर जिस्मानी खुशी से रूबरू करवा रहा था.

शाह ने किस तोड़ी & उसे अपनी बाहो मे उठा लिया.रंभा ने अपनी बाँहे उसके गले मे डाल दी & उसे चूमने लगी.शाह उसे लेके बंगल के अंदर अपने बेडरूम मे ले आया & बिस्तर पे लिटा दिया.

रंभा उस आलीशान बेडरूम को देखने लगी.कमरे की 1 दीवार पे बड़ा सा आईना लगा था जोकि दर-असल उसके पार बाथरूम का दरवाज़ा था.जिस पलंग पे रंभा लेटी थी वो बहुत बड़ा था & उसपे मखमली चादर बिछि थी जिसका मुलायम एहसास उसके रूमानी ख़यालो को & भड़का रहा था.कमरे की सजावट देख के ही लगता था कि शाह बहुत रंगीन मिजाज़ आदमी है & इस बिस्तर पे उसने कयि लड़कियो को चोदा होगा.

रंभा ने दाई तरफ लगे बड़े शीशे मे देखा तो पाया की बिस्तर पे की जाने वाली 1-1 हरकत उसमे सॉफ दिखती थी.उसका दिल खुद को शाह की बाहो मे उस से चुद्ते देखने के ख़याल से ही मस्ती मे भर उठा.शाह उसे देखते हुए मुस्कुरा रहा था.जवाब मे रंभा भी मुस्कुराइ तो शाह उसके सर के पास आ खड़ा हुआ.

उसने रंभा की आँखो मे देखते हुए उसका दाया हाथ पकड़ के अपने स्विम्मिंग ट्रंक्स पे रखा तो रंभा ने हाथ पीछे खींचने की कोशिश करते हुए शरमाने का नाटक करते हुए आँखे बंद कर ली जबकि उसका दिल तो बड़ी देर से शाह के लंड को देखने के लिए मचल रहा था.

शाह ने उसके हाथ को पकड़ के अपनी ब्रीफ पे दबाया & वही पकड़े रखा.रंभा वैसे ही आँखे बंद किए गर्दन घुमाए पड़ी रही.शाह ने दूसरे हाथ से अपने ट्रंक्स नीचे सरकाए & अपना नंगा लंड रंभा के हाथ मे थमाया & फिर उसकी ठुड्डी पकड़ चेहरा अपनी ओर किया,"ज़रा देखो तो जान कैसे पागल हो रहा है ये तुम्हारे लिए."

"उन..हूँ..मुझे शर्म आती है.",रंभा ने मुँह फेर लिया & बया हाथ अपने चेहरे पे रख अपनी हया का इज़हार किया.शाह घुटनो के बल बिस्तर पे चढ़ा & अपना लंड उसके चेहरे के बिल्कुल करीब ले गया & उसका चेहरा फिर अपनी ओर घुमाया.

"बस 1 बार देख तो लो इसे.",थोड़ी मान-मनुहार के बाद रंभा ने अपनी आँखे खोली & शाह के लंड को देखा.शाह का लंड 9 इंच लंबा था.हाथो मे लेते ही रंभा को उसकी मोटाई का एहसास हो गया था मगर आँखे खोलने पे जब उसने उसे देखा तो उसकी आँखे हैरत से फैल गयी.इतना मोटा लंड ना तो देवेन का था ना ही विजयंत मेहरा का,"कैसा लगा?",रंभा उसके सवाल पे शरमाते हुए मुस्कुराइ & हाथ लंड से खींचने लगी मगर शाह ने उसे ऐसा नही करने दिया.

"क्या हुआ पसंद नही आया,जान?",शाह के सवाल पे रंभा ने & शरमाने का नाटक किया.शाह उसकी इन अदाओं से जोश मे पागल हो गया था,"..अब तो ये सिर्फ़ तुम्हारा है,मेरी रानी!",उसकी आवाज़ बिल्कुल जोश से भरी हुई थी,"इसे प्यार तो करो.",उसने रंभा का चेहरा थाम लंड को आगे ला उसके गाल से सताया.

"धात!",रंभा ने शरमाते हुए उसे झिड़का मगर लंड के चेहरे से सताते ही वो उसे मुँह मे भरने को पागल हो उठी थी.शाह झुका & उसे चूमा & फिर उसे लंड हिलाने को कहा.रंभा ने धीमे-2 लंड हिलाना शुरू किया तो शाह आहे भरने लगा.उसने रंभा का सर पकड़ा & फिर लंड को उसके होंठो पे रगड़ने लगा.रंभा ना-नुकर कर रही थी & उसकी शर्म,उसकी झिझक शाह की हवस की आग मे घी का काम कर रही थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--82

gataank se aage......

"kya baat hai,rambha?",usna daya hath rambha ke daye kandhe pe rakha,"..meri baat buri lagi to mafi chahta hu."

"aisi baato ka kya fayda,shah sahab jab ye jis najam tak hume le jati hain main vaha ja nahi sakti.",rambha ne aadha jism ghumaya & udasi se boli.

"magar kyu nahi ja sakti?",shah ne use apni or pura ghumaya & uske dono kandho pe apne hath jama diye,"..main tumhare layak nahi kya isiliye?"

"nahi-2..",rambha ne pareshan ho uski taraf dekha,"..ye baat nahi par..",usne baat adhuri chhod fir se nazre jhuka li.

"to kya baat hai?!",shah ne use jhakjhora.

"mujhe..mujhe darr lagta hai.",rambha ne dhimi aavaz me kaha.

"kis baat se darr lagta hai?"

"kahi kisi ko pata chal gaya to?",rambha ne uski or pareshan nigaho se dekha.

"to?!..to achha hoga..fir main humesha tumhare sath reh sakta hu.",shah ne uske hath tham liye.

"pagal mat baniye.main shadishuda hu."

"jo aadmi tumhari kadr nahi karta,tumhe chhod kisi & ki baaho me ghusa rehta hai,uske chalte tum meri mohabbat thukra rahi ho!",rambha ne use aise dekha jaise use hairat hui ho ki shah ko kaise pata chala Sameer ki harkato ke bare me,"haan,mujhe pata hai sab kuchh.ab batao,us insan ke liye tum na bol rahi ho?"

"nahi..",rambha bahut pashopesh me hone ka natak kar rahi thi,"..dekhiye shah sahab,aap Pranav ko jante hai na?"

"haan."

"to main & vo..",rambha ne fir nazre neechi akr li.

"haan to kya hua?",rambha ne jaise socha tha guftgu vaise hi aage badh rahi thi.

"to ab aapke sath ye sab..shah sahab,kal ko sameer & main alag ho jayenge tab mera kya hoga?..kya main pranav se lek aapke bistar tak ghumti rahungi?..yehi vajud reh jayega mera?!",rambha ki aankho me gusse ke sath-2 pani chhalchhala aaya tha.

"nahi,aisa nahi hoga.",shah bahut gambhir aavaz me bola,"..mujhe pata hai tumhare & pranav ke bare me.tum kiske sath kya rishta rakhti ho,ye tumhara faisla hoga magar agar tum chahogi to..",shah ke dimagh me rambha ki baat se bijli kaundhi thi-agar rambha maan gayi toi use pranav ya kisi & ki koi zarurat nahi rahegi & uska kaam bhi ho jayega,"..mahadev shah ye vada karta hai ki tumhe apni dulhan banayega & apni aakhiri sans tak tumhare sath rahega."..haan..haan..jab karodo ke shares leke dahej me aaoongi to dulhan to banaoge hi!..rambha ne man hi man socha.

"aap..aap mujhe behla rahe hain.",usne kanpti aavaz me kaha.

"haan,mera farz hai ki tum pareshan ho to tumhe behlaoon lekin maine jo kaha hai vo bilkul sach hai.chaho to aazma lena mujhe.sameer tumhe chhodega & tum chahogi to main tumse shadi kar lunga."

"mahadev..",rambha ne kanpte hotho se bola & fir subakte hue hath chhuda ke ghum ke apni pith shah ki or kar li..uski chaal kaam kar gayi thi..ab use pata chal sakta tha ki kahi Vijayant Mehra ke haal ke peechhe in dono ka hath to nahi tha.

shah janta tha ki machhli ab jaal me phans chuki hai.usne rambha ke kandhe pakad use apni or ghumaya & apne agosh me bhar liya.rambha kuchh der uske seene pe hath rakhe munh chhupaye sisakne ka natk karti rahi & fir khamosh ho gayi.shah uski nangi pith sehlaye ja raha tha & jab usne dekha ki uski siskiya ruk gayi hai to usne daye hath se uski thuddi pakad uska chehra upar kiya.

"tumhe pehli baar dekha tha tab se tumhe pane ki hasrat thi.aaj bhi yehi soch ke tumhe dawat di thi ki shayad meri kismat meherban ho jaye.",vo uski kali aankho me jhank raha tha,"..& kismat meherban hui bhi to kis tarah,kaha mujhe bas tumhare sath bas 1 raat ki chah thi & tumne apni tamam raate mere naam kar di.",..kitna shatir shakhs thai?!..& baato ka jaal bunane me mahir..na jane aaj tak kitni ladkiyo ko isne is tarah phansa hoga!..2 ghante bhi nahi hue mile hue & mujhse shadi ke liye haan bhi karwa li isne..tum isi badgumani me raho,mr.shah & dekho main tumhe kaise maza chakhati hu!

shah jhuka & ramnbha ke hotho se pani ki boonde chakhne laga.rambha ne sharma ke munh bayi taraf fera magar shah ke hath ne uske gaal ko tham 1 baar fir uske chehre ko apne samne kiya & is baar dono hatho me uske chehre ko tham uske hotho ko apne hotho se satne pe majbur kar diya.rambha apne hotnh nahi khol rahi thi & bas shah ko unhe chumne de rahi thi magar thodi der baad shah ki zuban ne israr kar-2 ke uske hotho ko khulwa hi liya & fir uske munh me ghus uski zuban ko pyar karne lagi.

agar shah shatir tha to rambha bhi jismo ke khel ki maahir thi.shuru me sharmati rambha ne ab ye jataya ki shah ke hotho ne use mast kar diya hai & ab vo apni sharmohaya bhul rahi hai.usne apne hath shah ke kandho pe jama diye & uski kiss ka jawab dene lagi.shah ke hath pani ke neeche uski nangi pith ko sehla rahe the.

rambha 1 bholi-bhali ladki ka natak kar rahi thi magar use maza bahut aa raha tha.shah ne chumte hue hatho ka dabav badhaya & rambha ko khud se sata liya.uska khada lund rambha ke pet pe dab gaya to rambha ki chut me bhi kasak uthne lagi.thande pani me shah ke jism ka garm ehsas use romnach se bhar raha tha.kafi der baad rambha ne sans lene ke liye honth laga kiye to shah ne uske khubsurat chehre pe kisses ki jhadi laga di.

"chhodiye na!..kahi koi aa gaya to?",rambha ne use sharmate hue pare dhakelne ki nakaam koshish ki.

"yaha kaun aayega?",shah uske gaal chumte hue uski gardan pe gaya tha & uski kamar ke mansal hisso ko daba raha tha.

"koi naukar..& vo aapka driver..aahhhhh..!",shah ne uske cleavage pe apne tapte honth rakh diye the.

"maine sabko ghar se bahar bhej diya hai.main tumhare sath 1-1 pal ka bharpur lutf uthana chahta hu.",shah ne use khud se bilkul chipka liya to rambha bhi masti me bhar gayi & apni aankhe badn kar li & uski harkato ka maza lene lagi.shah uske pure jism ko chhuna chhata tha,chumna chhata tha magar pool me ye mumkin nahi tha.usne rambha ko uthaya & pool se nikal ke farsh pe lita diya.vo buddha tha magar kamzor nahi.rambha uski is harkat pe khush hui-shah me dum-khum tha & rambha ko bistar me us se khush hone ka natak nahi karna padega balki bahut mumkin tha ki shah use bharpur maza de.

ab rambha zamin pe leti thi & shah pool me khade-2 hi uske honth chum raha tha & uske swimsuit se dhanke pet ko sehla raha tha.rambha daye hath se uske sar ko thame thi & baye ko uske pet pe chalte hath ke upar rakhe thi.shah ne uske hontho ko chhoda & fir uske baye hath ko tham uski gudaz banh ko chumne laga.uski dono baaho ko chumne ke baad usne rambha ko palta & pool se nikal ghutno pe baith uski gili pith ko apne garm labo se sukhane laga.rambha uske chumne se kanp rahi thi & uski pith ki thartharahat dekh shah bhi josh me pagal hua ja raha tha.usne swimsuit ke straps uske kandhos e sarkaye & rambha ko ghuma ke seedha kiya.

rambha ab thodi ghabrayi nigaho se use dekh rahi thi & usne apne hath apne seene pe rakh liye the.shah ki aankho me vasna thi.rambha ka ubhra seena jis tarah se upar-neeche ho raha tha & ghabrate hue usne jis tarah use chhupaya tha-ye sab uske josh ko badha rahe the.usne muskurate hue uske hatho ko seene se hataya & uske straps ko pura neech ekhinchte hue uske swimsuit ko uski kamar tak kar diya.samne ka nazara dekh shah ka halak sukh gaya.vo janta tha ki rambha behad haseen hai magar uska jism itna nashila,itna dilkash hoga,iska andaza use nahi tha.rambha ki gori,moti chhatiya uske samne upar-neeche ho rahi thi,unke gulabi nipples bilkul kade use apni or bulate dikh rahe the.usk sapat pet tharthara raha tha & uske beech uski gol,gehri nabhi jaise uski zuban ke intezar me hi thi.

Ghutno pe baith ke Mahadev Shah ne rambha ki chhatiyo ko apne hatho se halke se dabaya to uske munh se aah nikal gayi & usne apni chhatiyo pe dabe uske dono hatho ko pakad liya.shah ne uske hatho ko uthake chuma & fir une uske sar ke upar le jate hue zamin se lagaya & fir rambha ke dayi taraf let gaya & apne baye hatho me uske dono hatho ko pakad ke uske seene pe jhuk gaya.usne daye hath me uski bayi choohi ko bhara & apne munh ko uski dayi choochi se laga diya.

bungle ka vo khula hissa rambha ki mast aaho se gulzar ho gaya.shah uski 1 choochi ko maslate hue dusri ko chus raha tha.rambha ka dil to kar raha tha ki uske baalo ko noche,uski pith ko kharonche magar uske hath shah ki giraft me the & vo bebas thi lekin ye bebasi bhi use alag hi maza de rahi thi.shah to uski choochiyo ko dekh pagal ho gaya tha.vo unhe pura ka pura munh me bhar chus raha tha & beech-2 me halke-2 danto se kaat bhi raha tha.uske nipples ko vo danto me pakad upar khincta to rambha ko halka dard hota magar us se bhi kahi zyada masti ka ehsas hota.

vo chhatpata rahi thi & apni kasi janghe aapas me ragad rahi thi.uski chut ki kasmasahat ab bahut badh gayi thi.shah uske nipples ko ungliyo me pakad ke maslate hue choochiyo ke ubharo ke neeche chum raha tha & jibh se chhed raha tha.usne dono choochiyo ke beech munh ghusa ke ragda & vaha bhi chusne laga.vo rambha ke seene pe apne hotho & danto ke nishan chhodte ja raha tha & rambha ab masti me subakte hue chhatapata rahi thi.uski chut ki kasak bahut zyada badh gayi thi & usne bechain ho apni kamar uchakni shuru akr di & bahut zro se sisakne lagi.shah samajh gaya ki vo jhadne vali hai & usne uski choochiyo ko chusna & tez kar diya.gale hi pal rambha sisakte hue jhad gayi.

shah ne uske hath chhode to rambha ne uski gardam ko pakad use neehc ekhincha & use badi shiddat se chumne lagi.shah keval baate banana hi nahi janta tha vo 1 ladki ke jism se khel use khush karna bhi janta tha.rambha ne uske munh me zuban ghusayi & fir uski zuban ko jum ke chusa.

kafi der tak chumne ke baad shah ne uske honth chhode & dono chhatiyo pe 1-1 kiss di.uske baad vo neeche gaya & uske gore pet ko chumne laga.rambha jaisi haseen ladki se vo aaj tak nahi mila tha & uske nashile jism ke sath khelna uske liye bilkul anokha & romanchkari ehsas tha.

rambha 1 baar fir aahe bharti hui kasmasane lagi thi.shah ki zuban uske pet ko apni nok se chhedte hue uski nabhi me utar gayi thi & use chaat rahi thi.rambha uske sar ko pakde bechaini se apne pet se alag karna chah rahi thi.uski zuban ki harkate use pagal kar rahi thi magar shah bhi uske hatho ki parvah na karta hua uske pet pe juta hua tha.jab rambha 1 baar fir masti me nahi dub gayi shah ne uski nabhi se jibh nahi nikali.

rambha ab nashili aankho se use dekh rahi thi.uska dil kar raha tha ki jaldi se vo uski bikini ko utare & uski pyasi chut ko pyar kare.shah ne uske pet se sar uthaya & uski taraf dekha & jaise uski aankho me jhalak rahi uski hasrat ko padh liya.usne uski kamar pe atki bikini ko neeche khincha to rambha ne apni gand utha di.agle hi pal vo apne naye premi ke samne bilkul nangi thi.

rambha ke hath 1 baar fir uske seene pe aa gaye the & vo bas shah ki agli harkat ka intezar kar rahi thi.shah ne uski chut ko dekha-aisi chikni,gulabi,nazuk & kasi chut usne apni zindagi me pehle kabhi nahi dekhi thi.aaj vo is se ji bhar ke khelega magar us se pehle use uski jangho & tango ka swad chakhna tha jinhone sham se hi lubha & lalcha ke uska bura haal kiya hua tha.

usne rambha ki jangho ko sehlaya to usne apne ghutne upar mod diye.shah uske uthe daye ghutne ko chumne laga & uske hath rambha ki tango se leke jangho ke andruni hisso pe ghumne lage.rambha chhatapatati hui apne baalo se khelte hue aahe bhar rahi thi & apni jangho ko apas me ragad apni chut ko shant karne ki koshish kar rahi thi.

shah uske ghutne se neeche uski moti jangh pe aaya & chumne ke sath-2 uski gudaz jangh ko chusne bhi laga.rambha to masti me pagal hi ho gayi.shah turant apne ghutno pe baith gaya & uski dayi tang ko hawa me utha diya & fir uski jangh ke nichle hisse ko chumne,chatne laga.rambha ne baya hath badha uske baal pakad liye & nochne lagi.

aasman ke sitare shah ki kismat se rashk kar rahe the & chand rambha ke husn ko dekh jal gaya & kuchh badlo ke peechhe chhup gaya.thandi hawa ke jhonke ne rambha ke jism ko kanpa diya magar shah ki harkato ne uske badan ki garmi ko badhaye rakha tha.

shah ne uski jangh chumte hue uske neeche hath laga use palat diya & fir uski chaudi gand pe hath firane laga.usne uski gand pe halki-2 chpaten lagani shuru ki & un chapato pe jis dilkash andaz me vo thartharati,use dekh uska lund uske trunks me & kulbulane laga.shah jhuka & uski kamar ke mansal hisso ko dabate hue uski gand ki fanko ko chumne laga.rambha apni kohniyo pe uchak apne sar ko jhatakti aahe bahrne lagi.

shah uski fanko ko bhinchte hue chum raha tha & uski chhatiyo ki tarah yaha bhi apne danto se halke-2 kaat raha tha.rambha ki masti ba bahut badh gayi thi & usne kamar hila pani chut ko thandi zamin pe daba uska izhar kiya.shah bhi jaal me taza-2 phansi machhli ki chhatpatahat dekh uski bechaini ka sabab samajh gaya & usne use palat ke seedha kiya & uski tange khol di.

rambha ki chut se behta ras uski jangho pe tapak aaya tha.usne pehle uski jangho se use saaf kiya & fir uski gulabi chut me apni zuban utar use sudakne laga.rambha ki tange apne-aap hawa me uth gayi & vo uske sar ko pakad apni chut pe bhinchti,kamar uchkati chikhne lagi.shah uski gand ke neeche hath lagaye use hawa me uthake uski chut ko zor-2 se apni laplapati jibh se chaat raha tha.rambha ke jism me bijli daud rahi thi.usne shah ke baal pakad ke use apni chut pe bahut zor se dabate hue kamar uchkayi & jhad gayi.kafi der tak rambha jhadne ki khumari me sisakti rahi & shah bhi uski chut chaatata raha.jab uski siskiya ruki to shah upar aaya & use chumne laga.rambha ne bhi use bahao me bhar liya & chumne me usk sath dene lagi.is waqt shah shaq ke dayre me khada shakhs nahi bas 1 mard tha jo use bharpur jismani khushi se rubaru karwa raha tha.

shah ne kiss todi & use apni baaho me utha liya.rambha ne apni bahe uske gale me daal di & use chumne lagi.shah use leke bungle ke andar apne bedroom me le aaya & bistar pe lita diya.

rambha us aalishan bedroom ko dekhne lagi.kamre ki 1 deewar pe bada sa aaina laga tha joki darasla uske paar bathroom ka darwaza tha.jis palang pe rambha leti thi vo bahut bada tha & uspe makhmali chadar bichhi thi jiska mulayam ehsas uske rumani khayalo ko & bhadka raha tha.kamre ki sajawat dekh ke hi lagta tha ki shah bahut rangin mijaz aadmi hai & is bistar pe usne kayi ladkiyo ko choda hoga.

rambha ne dayi taraf lage bade shishe me dekha to paya ki bistar pe ki jane vali 1-1 harkat usme saaf dikhti thi.uska dil khud ko shah ki baaho me us se chudte dekhne ke khayal se hi masti me bhar utha.shah use dekhte hue muskura raha tha.jawab me rambha bhi muskurayi to shah uske sar ke paas aa khada hua.

usne rambha ki aankho me dekhte hue uska daya hath pakad ke apne swimming trunks pe rakha to rambha ne hath peechhe khinchne ki koshish karte hue shamramne ka natak karte hue aankhe band kar li jabki uska dil to badi der se shah ke lund ko dekhne ke liye machal raha tha.

shah ne uske hath ko pakad ke apni brief pe dabaya & vahi pakde rakha.rambha vaise hi aankhe band kiye gardan ghumaye padi rahi.shah ne dusre hath se apne trunks neeche sarkaye & apna nanga lund rambha ke hatyh me thamaya & fir uski thuddi pakad chehra pani or kiya,"zara dekho to jaan kaise pagal ho raha hai ye tumhare liye."

"un..hun..mujhe sharm aati hai.",rambha ne munh fer liya & baya hath apne chehre pe rakh apni haya ka izhar kiya.shah ghutno ke bal bistar pe chadha & apna lund uske chehre ke bilkul karib le gaya & uska chehra fir apni or ghumaya.

"bas 1 baar dekh to lo ise.",thodi maan-manuhar ke baad rambha ne apni aankhe kholi & shah ke lund ko dekha.shah ka lund 9 inch lamba tha.hatho me lete hi rambha ko uski motai ka ehsas ho gaya tha magar aankhe kholne pe jab usne use dekha to uski aankhe hairat se phail gayi.itna mota lund na to Deven ka tha na hi Vijayant Mehra ka,"kaisa laga?",rambha uske sawla pe sahrmate hue muskurayi & hath lund se khinchne lagi magar shah ne use aisa nahi karne diya.

"kya hua pasand nahi aay,jaan?",shah ke sawal pe rambha ne & sharmane ka natak kiya.shah uski in adaon se josh me pagal ho gaya tha,"..ab to ye srif tumhara hai,merir ani!",uski aavaz bilkul josh se bhari hui thi,"ise pyar to karo.",usne rambha ka chehra tham lund ko aage la uske gaal se sataya.

"dhat!",rambha ne sharmate hue sue jhidka magar lund ke chehre se satate hi vo use munh me bharne ko pagal ho uthi thi.shah jhuka & use hcuma & fir use lund hilane ko kaha.rambha ne dhime-2 lund hilana shuru kiya to shah aahe bharne laga.usne rambha ka sar pakda & fir lund ko uske hotho pe ragadne laga.rambha na-nukar kar rahi thi & uski sharm,uski jhijhak shah ki hawas ki aag me ghee ka kaam kar rahi thi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--83

गतान्क से आगे......

महादेव शाह अपने दाए हाथ मे लंड को पकड़,बाए से रंभा की ठुड्डी थाम उसके गुलाबी होंठो पे अपने लंड को रगड़ रहा था.कुच्छ देर बाद रंभा ने अपने होंठ ज़रा से खोले & उसके सूपदे को चूमा.शाह खुशी से भर गया & उसने लंड को अंदर धकेला,रंभा ने सुपादे को मुँह मे भरा & & फिर चूमा.

"हां..जान..आहह..चूसो..इसे ..प्यार करो..रानी..ओह..!",शाह उसे बढ़ावा देते हुए लंड को उसके मुँह मे धकेल रहा था.थोड़ी देर मे आधा लंड रंभा के मुँह मे था & वो उसकी कमर पकड़े उसे चूस रही थी.शाह उसके सर को थामे उसकी ज़ुल्फो से खेलता खुशी से आहे भर रहा था.रंभा ने कुच्छ देर बाद उसके लंड को बाए हाथ मे थामा & हिलाते हुए उसके सूपदे को चाटने लगी.

शाह तो जैसे जन्नत मे पहुँच गया था.उसे उम्मीद नही थी कि ये लड़की इतनी मस्त होगी.वो उसके आंडो को दबाते हुए लंड को चाट रही थी,उसकी झांतो मे नाक घुसा के मुँह रगड़ रही थी.रंभा भी उस तगड़े लंड को देख जोश मे आ गयी थी.उसके नाज़ुक हाथ मे वो लंड & बड़ा लग रहा था & उसके ज़हन मे ये ख़याल आया कि उसकी कोमल चूत का वो क्या हाल करेगा & वो और मस्त हो गयी.

शाह ने दोनो के जिस्मो को इस तरह घुमाया कि वो शीशे मे रंभा को अपना लंड चूस्ता देख सके.रंभा के लिए भी इस तरह खुद को लंड चूस्ते देखना बड़ा मस्ताना तजुर्बा था.शाह तो पागल ही हो गया था.कुच्छ देर बाद रंभा ने उसका लंड छ्चोड़ दिया,"अब हो गया.",शरमाते हुए वो बिस्तर पेलेट गयी & अपना मुँह तकिये मे च्छूपा लिया.

शाह ने उसकी उभरी गंद को सहलाया तो वो चिहुनकि.शाह ने उसकी टाँगे पकड़ उसे खींचा & उसकी गंद को बिस्तर के किनारे से लगा के टाँगे हवा मे उठा दी.अब वक्त आ गया था उस नज़नीन के जिस्म के साथ मिल इस खेल के सबसे मस्त हिस्से को अंजाम दे भरपूर मज़ा पाने का.रंभा धड़कते दिल के साथ अधखुली आँखो से उसे देख रही थी.

शाह ने उसकी टाँगे उठा के उसकी जाँघो के निचले हिस्से को पकड़ उसकी चूत को बिल्कुल नुमाया किया & फिर लंड को चूत पे रख दिया.जैसे ही लंड चूत से सटा रंभा की कमर अपने आप उचकी मानो कह रही हो की लंड को फ़ौरन चूत मे घुसाओ!शाह ने उसकी जाँघो के निचले हिस्सो पे हथेलिया जमा के आगे झुकना शुरू किया & कमरे मे रंभा की आह गूँज उठी.

"आहह..!",मोटा लंड उसकी चूत को बुरी तरह फैला रहा था & वो दर्द & मज़े मे कराह रही थी.उसका जिस्म कमान की तरह मूड गया & उसने सर पीछे ले जाके आँखे बंद कर ली थी.शाह धीरे-2 लंड को जड तक उसकी चूत मे उतार रहा था & पूरा अंदर जाते ही वैसे ही उसकी जाँघो को पकड़ वो ज़ोर-2 से धक्के लगाने लगा.

रंभा मस्ती मे चीखने लगी.लंड उसकी चूत की दीवारो को बुरी तरह रगड़ रहा था & वो मस्ती मे कभी अपने बाल नोचती तो कभी शाह के सीने को कराह रही थी.शाह भी उसकी चूत की कसावट से हैरान हो गया था & उसके धक्के भी खुद बा खुद तेज़ हो गये थे.इतना मस्ताना एहसास आज तक किसी लड़की की चुदाई मे उसे नही हुआ था.

उसके दिल मे खुद को इस हुसनपरी को चोद्ते हुए देखने की ख्वाहिश जागी & उसने उसकी जंघे छ्चोड़ी & आगे झुक उसके उपर लेट गया & उसे चूमते हुए चोदने लगा 7 घुटनो के बल बिस्तर पे चढ़ गया.थोड़ी ही देर मे उसने खुद को रंभा के उपर बिस्तर पे इस तरह कर लिया था कि अगर वो बाए & रंभा दाए देखती तो शीशे मे अपनी चुदाई को सॉफ-2 देख सकती थी.

"देखो,मेरी बाहो मे तुम कितनी हसीन लग रही हो,मेरी जान!",शाह ने रंभा के होंठो को चूमा & धक्के लगाते हुए उसका सर दाई तरफ घुमा शीशे की ओर इशारा किया.रंभा ने देखा तो शीशे मे उसे शाह उसके बाए गाल पे अपना दाया गाल जमाए खुशी से भरा उसे चोद्ता दिखा.रंभा नम अपनी बाहे & टाँगे उसके जिस्म पे कस दी & उसकी पीठ नोचने लगी.उसकी मस्ती शीशे मे अपने प्रेमी & अपने अक्स को देख बहुत ज़्यादा बढ़ गयी थी.

"उउन्न्ञनह..महादेव....आननह..!",उसने उसकी गंद को नोचा & उसकी कमर पे टाँगे फँसाए कमर उचकाने लगी.वो पूरी तरह से मदहोश थी.शाह का लंड उसकी कोख पे चोट कर रहा था & वो अब बिकुल बहाल थी.अगले ही पल ज़ोर से चीख मारते वो झाड़ गयी मगर शाह का काम अभी ख़त्म नही हुआ था.

वो झुक के उसकी चूचियाँ अपने हाथो मे दबोच के पीने लगा.उसके धक्के अब धीमे मगर गहरे हो गये थे.रंभा हर धक्के पे कराह उठती.शाह चुदाई मे माहिर था & रंभा उसका भरपूर लुत्फ़ उठा रही थी.शाह उसके बदन से उपर उठ गया & अपने हाथो के सहारे टिक के धक्के लगाने लगा.

रंभा मस्ती मे बेचैन हो उसके सीने के बालो से खेलते हुए उसके निपल्स को छेड़ रही थी.उसके चेहरे पे बस मस्ती ही मस्ती दिख रही थी.उसकी चूत ने झाड़ते वक़्त जो मस्ताना हरकत की थी,शाह उस से खुशी से पागल हो गया था & उस वक़्त उसने दिल ही दिल मे 1 अहम फ़ैसला लिया था.अभी तक वो रंभा को बस 1 मोहरे की तरह इस्तेमाल करना चाह रहा था.उसके ज़रिए वो ट्रस्ट ग्रूप पे क़ब्ज़ा जमाके प्रणव & सारे मेहरा परिवार को किनारे करने की सोच रहा था.अभी भी वो रंभा के ज़रिए ही ग्रूप को हथियाने की सोच रहा था मगर अब किनारे करने वालो मे रंभा का नाम नही था.वो इस लड़की के हस,उसके जिस्म का दीवाना हो चुका था & अब वो उस से शादी कर उसके साथ अपनी बाकी की ज़िंदगी उसके पति & ट्रस्ट के मालिक के रूप मे गुज़रना चाहता था.

रंभा उसके सीने से लेके कंधो तक हाथ चलाते हुए उसके चेहरे को सहला रही थी.उसके हाथ शाह के बालो से खेलने के बाद उसके जिस्म की बगलो से नीचे सरकते & उसकी पुष्ट गंद को दबा लंड को & गहरे धक्के लगाने का इसरार करने लगते.रंभा का जिश्म कांप रहा था & उसके होंठ लरज रहे थे.वो शाह को चूमना चाहती थी & इसके लिए उसने उसकी गर्दन मे हाथ डाला & उचकने लगी.शाह उसकी हसरत समझ गया & उसके हाथ गर्दन से अलग कर घुटनो पे हो गया.

उसने रंभा की गुदाज़ बाहे पकड़ उसे उपर उठाया & अब वो घुटनो पे था & रंभा उसकी कमर पे टाँगे फँसाए उसकी गोद मे बैठ गयी.शाह उसकी मखमली पीठ सहलाते हुए धक्के लगा रहा था & वो उसके कंधो के उपर से बाहे ले जाते हुए उसकी पीठ नोचती मस्ती मे सूबक रही थी.शाह उसकी गंद की मोटी,कसी फांको को मसल रहा था.उसके अंदो मे अब हल्का-2 दर्द हो रहा था जोकि इस बात का इशारा था कि उसका लंड अब और बर्दाश्त करने की हालत मे नही था.

उसने अपने हाथ आगे लाए तो रंभा ने दाई बाँह उसकी गर्दन मे डाली & बाई पीछे ले जा हाथ बिस्तर पे टीका दिया & कमर हिलने लगी.शाह उसकी चूचियो को मसल्ते हुए चूस रहा था.रंभा 1 बार फिर मस्ती के उसी आलम मे पहुँच गयी थी जहा बस नशा ही नशा होता था.शाह ने उसकी चूचियो से खेलने के बाद 1 बार फिर अपने दोनो हाथ उसकी गंद की फांको के नीचे लगाए तो रंभा फिर से उसकी गर्दन मे बाहे डालते हुए उसकी पीठ खरोंछने लगी & कमर उचकाने लगी.

शाह उसे पागलो की तरह चूमने लगा & उसकी गंद मसलने लगा.रंभा के नाख़ून उसकी पीठ छेद रहे थे.उसकी चूत उसके लंड पे सिकुड-फैल रही थी & वो अब खुद पे और काबू नही रख सकता था.दोनो के होंठ आपस मे सिले हुए थे मगर फिर भी दोनो की आहे बाहर आ रही थी.तभी रंभा ने किस्स तोड़ी & उसकी बाहो के सहारे पीछे झुक गयी & ज़ोर से

चीखी.उसका जिस्म कांप रहा था & उसकी कमर बहुत तेज़ी से हिल रही थी.वो झाड़ रही थी & उसकी चूत ने शाह के लंड के उपऱ अपनी मस्तानी हर्कतो को और तेज़ कर दिया था.उसी वक़्त उस हरकत से बहाल शाह ने भी आह भरी & उसका जिस्म झटके खाने लगा.उसका लंड रंभा की चूत मे अपना गाढ़ा,गर्म वीर्य छ्चोड़े जा रहा था.रंभा ने वीर्य को सीधा अपनी कोख मे च्छूटता महसूस किया & सुबक्ते हुए उसके होंठो पे हल्की सी मुस्कान तेर गयी.ये देखा और शाह भी मुस्कुराया & लंबी-2 साँसे लेता हुआ उसने रंभा को बाहो मे भर लिया & दोनो सुकून से भरे जिस्म अपनी साँसे संभालने मे लग गये.

महादेव शाह रंभा के उपर से उतरते हुए दाई करवट पे हुआ तो उसका सिकुदा लंड रंभा की चूत से बाहर आ गया मगर शाह ने अपनी बाई टांग रंभा की जाँघो के बीच घुसाए रखी & उसे बाहो मे भर चूमने लगा.वो रंभा की गंद को बाए हाथ से दबाते हुए उसके दाए कंधे & गर्दन को चूमते हुए शीशे मे देख रहा था.रंभा ने उसकी ये हरकत पकड़ ली & फ़ौरन उसे धकेलते हुए उसके उपर से होती हुई बिस्तर की दूसरी तरफ अपनी दाई करवट पे आ गयी.

“अरे!क्या हुआ?”,शाह ने अपनी दाई टांग उसकी जाँघो के बीच घुसा दाए हाथ से उसकी बाई जाँघ को पकड़ अपनी कमर पे चढ़ाया & उसे सहलाने लगा.

“क्या देख रहे थे आप शीशे मे?”,रंभा ने बनावटी गुस्से से उसके सीने पे मारा.

“तुम्हारी गंद..”,शाह ने उसकी गंद की बाई फाँक को हाथ मे भर के दबाया,”..बहुत मस्त है!& क्या हुआ अगर देख रहा था तो?”

“मुझे अच्छा नही लगता.”,रंभा ने इतराते हुए कहा.

“अच्छा.क्यू?”,शाह का हाथ उसकी गंद से उसके चेहरे पे आ गया था.

“बस ऐसे ही..शर्म आती है.”,रंभा ने लजाने का नाटक करते हुए उसके कंधे मे मुँह च्छूपा लिया.शाह उसकी अदओ के जाल मे अब पूरी तरह फँस चुका था.उसे अब यकीन हो गया था कि रंभा उसपे पूरा भरोसा करने लगी है.उसका दिल खुशी से भर गया..अब ट्रस्ट ग्रूप उसके करीब आता दिख रहा था..जिस दिन ग्रूप उसके हाथ आ गया उस दिन उसका मक़सद पूरा होगा..उस दिन उसके सारे सपने हक़ीक़त मे बदल जाएँगे & फिर कोई जद्दोजहद भी नही रहेगी..फिर वो इस हसीना के साथ ज़िंदगी का भरपूर मज़ा उठाएगा!

“इस सब के बाद भी शर्म आ रही है?”,शाह ने उसके चेहरे को उपर किया & उसके सुर्ख लब चूम लिए.

“हूँ.”,रंभा के गाल मस्ती मे लाल हो रहे थे जिसे शाह उसकी हया समझ रहा था.शाह का लंड फिर से जागने लगा था.उसने रंभा की जाँघ पे हाथ चलते हुए उसके गालो को चूमना शुरू कर दिया.

“उउन्न्ञणन्..सुनिए..”,शाह ने उसकी आवाज़ नही सुनी.वो तो सर झुका के रंभा की चूचियाँ चूमने मे मशगूल था,”..महादेव..सुनिए ना..उउन्न्ञन्..”,रंभा ने उसके बाल पकड़ उसका मुँह अपने सीने से अलग किया & फिर उसे धकेल के बिस्तर पे लिटाया & उसके उपर चढ़ गयी & उसके सीने पे अपनी चूचियाँ दबाते हुए उसके गाल सहलाने लगी,”1 बात पुच्छू आपसे?”

“पुछो.”,शाह उसकी ज़ूल्फेन उसके चेहरे से हटा रहा था.

“आप अपने वादे से मुकरेंगे तो नही?”,रंभा चिंतित नज़र आ रही थी.

“तुम्हे भरोसा नही मुझपे?”,शाह उसकी गुदाज़ बाहें सहला रहा था.

“बात वो नही है पर..मैं 1 बार धोखा खा चुकी हू & अब..”,रंभा ने नज़रे नीची कर ली & शाह के सीने पे 1 उंगली चलाने लगी.

“कहो तो करारनामे पे दस्तख़त कर दू कि तुम ही मेरी दुल्हन बनोगी!”,शाह ने उसे पलटा & उसके उपर सवार हो उसकी आँखो मे झाँका.रंभा उसे खामोशी से देख रही थी..लगता तो था कि ये सच कह रहा है मगर इसका कोई भरोसा नही..पर अभी इसका यकीन करने के अलावा & कोई चारा नही था.

“आप तो बुरा मान गये..”,रंभा ने उसे दोबारा पलटा & उसके उपर आ उसे चूमने लगी,”..मेरी हालत भी तो समझिए..दूध का जला छाछ भी फूँक-2 के पीता है.”,उसके पूरे चेहरे को उसने अपनी किस्सस से ढँक दिया.

“बुरा तो लगा मुझे..”,शाह उसकी कमर सहला रहा था,”..मेरी सच्ची मोहब्बत पे शुबहा किया तुमने.”

“आइ’म सॉरी,डार्लिंग!”,रंभा उसे चूमते हुए उसके सीने पे आ गयी & उसके सीने के बालो मे उंगलिया फिराती उसके निपल्स को हौले-2 काटने लगी. शाह उसकी ज़ूलफे सहला रहा था.रंभा उसके सीने को चूमते हुए नीचे जा रही थी.शाह उसके इरादे को भाँप के खुश हो गया & उसकी उंगलिया रंभा की ज़ुल्फो से & गर्मजोशी से खेलने लगी.रंभा उसके पेट को चूमते हुए उसकी झांतो तक पहुँच चुकी थी,”आइन्दा कभी ये ग़लती नही करूँगी.आप मुझसे खफा मत होइए,प्लीज़!”,मासूमियत से कहते हुए उसने शाह के लंड को मुँह मे भर लिया.

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क्रमशः.......

JAAL paart--83

gataank se aage......

Mahadev Shah apne daye hath me lund ko pakad,baye se Rambha ki thuddi tham uske gulabi hotho pe apne lund ko ragad raha tha.kuchh der baad rambha ne apne honth zara se khole & uske supade ko chuma.shah khushi se bhar gaya & usne lund ko andar dhakela,rambha ne suapde ko munh me bhara & & fir chuma.

"haan..jaan..aahhhhhhh..chuso..ise ..pyar karo..rani..ohhhhhh..!",shah use badhava dete hue lund ko uske munh me dhakel raha tha.thodi der me aadha lund rambha ke munh me tha & vo uski kamar pakde sue chus rahi thi.shah uske sar ko thame uski zulfo se khelta khushi se aahe bhar raha tha.rambha ne kuchh der baad uske lund ko baye hath me thama & hilate hue uske supade ko chatne lagi.

shah to jaise jannat me pahunch gaya tha.use umeed nahi thi ki ye ladki itni mast hogi.vo uske ando ko dabate hue lund ko chaat rahi thi,uski jhanto me naak ghusa ke munh ragad rahi thi.rambha bhi us tagde lund ko dekh josh me aa gayi thi.uske nazuk hath me vo lund & bada lag raha tha & uske zehan me ye khayal aaya ki uski komal chut ka vo kya haal karega & vo & mast ho gayi.

shah ne dono ke jismo ko is tarah ghumaya ki vo shishe me rambha ko apna lund chusta dekh sake.rambha ke liye bhi is tarah khud ko lund chuste dekhna bada mastana tajurba tha.shah to pagal hi ho gaya tha.kuchh der baad rambah ne uska lund chhod diya,"ab ho gaya.",sharmate hue vo bistar pelet gayi & apna munh takiye me chhupa liya.

shah ne uski ubhri gand ko sehlaya to vo chihunki.shah ne uski tange pakad use khincha & uski gand ko bistar ke kinare se laga ke tange hawa me utha di.ab wqaqt aa gaya tha us naznin ke jism ke sath mil is khel ke sabse mast hisse ko anjam de bharpur maza pane ka.rambha dhadkte dil ke sath adhkhuli aankho se used ekh rahi thi.

shah ne uski tange utha ke uski jangho ke nichle hisse ko pakad uski chut ko bilkul numaya kiya & fir lund ko chut pe rakh diya.jaise hi lund chut se sata rambha ki kamar apne aap uchki mano keh rahi ho ki lund ko fauran chut me ghusao!shah ne uski jangho ke nichle hisso pe hatheliya jama ke aage jhukna shuru kiya & kamre me rambha ki aah gunj uthi.

"aahhhhhhhh..!",mota lund uski chut ko buri tarah faila raha tha & vo dard & maze me karah rahi thi.uska jism kaman ki tarah mud gaya & sne sar peechhe le jake aankhe band kar li thi.shah dhire-2 lund ko jud tak uski chut me utar raha tha & pura andar jate hi vaise hi uski jangho ko pakad vo zor-2 se dhakke lagane laga.

rambha masti me chikhne lagi.lund uski chut ki deewaro ko buri tarah ragad raha tha & vo masti me kabhi apne baal nochti to kabhi shah ke seene ko karah rahi thi.shah bhi uski chut ki kasavat se hairan ho gaya tha & uske dhakke bhi khud ba khud tez ho gaye the.itna mastana ehsas aaj tak kisi ladki ki chudai me use nahi hua tha.

uske dil me khud ko is husnpari ko chodte hue dekhne ki khwahish jagi & usne uski janghe chhodi & aage jhuk uske uapr let gaya & sue chumte hue chodne laga 7 ghutno ke bal bistar pe chadh gaya.thodi hi der me usne khud korambha ke uapr bistar pe is tarah kar liya tha ki agar vo baye & rambha daye dekhti to shishe me apni chudai ko saaf-2 dekh sakte the.

"dekho,meri baaho me tum kitni haseen lag rahi ho,meri jaan!",shah ne rambha ke hotho ko chuma & dhakke lagate hue uska sar dayi taraf ghuma shishe ki or ishara kiya.rambha ne dekha to shishe me use shah uske baye gaal pe apna daya gaal jamaye khushi se bhara use chodta dikha.rambha nme apni baahe & tange uske jism pe kas di & uski pith nochne lagi.uski masti shishe me apne premi & apne aks ko dekh bahut zyada badh gayi thi.

"uunnnnhhhhhh..mahadev....aannhhhhhhhhh..!",usne uski gand ko nocha & uski kamar pe tange phansaye kamar uchkane lagi.vo puri tarah se madhosh thi.shah ka lund uski kokh pe chot kar raha tha & vo ab bikul behaal thi.agle hi pak zor se chikh marte vo jhad gayi magar shah ka kaam abhi khatm nahi hua tha.

vo jhuk ke uski chhatiya apne hatho me daboch ke pine laga.uske dhakke ab dhime magar gehre ho gaye the.rambha har dhakke pe karah uthati.shah chudai me mahir tha & rambha uska bharpur lutf utha rahi thi.shah uske badan se upar uth gaya & apne hatho ke sahare tik ke dhakke lagane laga.

rambha masti me bechain ho uske seene ke balo se khelte hue uske nipples ko chhed rahi thi.uske chehre pe bas mati hi masti dikh rahi thi.uski chut ne jhadte waqt jo mastana harkat ki thi,shah us se khushi se pagal ho gaya tha & us waqt usne dil hi dil me 1 aham faisla liya tha.abhi tak vo rambha ko bas 1 mohre ki tarah istemal karna chah raha tha.uske zariye vo Trust Group pe kabza jamake Pranav & sare Mehra parivar ko kinare karne ki soch raha tha.abhi bhi vo rambha ke zariye hi group ko hathiyane ki soch raha tha magar ab kinare karne valo me rambha ka naam nahi tha.vo is ladki ke hus,uske jism ka deewana ho chuka tha & ab vo us se shadi kar uske sath apni baki ki zindagi uske pati & trust ke malik ke roop me guzarna chahta tha.

rambha uske seene se leke kandho tak hath chalate hue uske chehre ko sehla rahi thi.uske hath shah ke baalo se khelne ke baad uske jism ki bagalo se neeche sarakte & uski pusht gand ko daba lund ko & gehre dhakke lagane ka israr karne lagte.rambha ka jsim kanp raha tha & uske honth laraj rahe the.vo shah ko chumna chahti thi & iske liye usne uski gardan me hath daala & uchakne lagi.shah uski hasrat samajh gaya & uske hath gardan se alag kar ghutno pe ho gaya.

usne rambha ki gudaz baahe pakad use upar uthaya & ab vo ghunto pe tha & rambha uski kamar pe tange phansaye uski god me baith gayi.shah uski makhmali pith sehlate hue dhakke laga raha tha & vo uske kandho ke upar se baahe le jate hue uski pith nochti masti me subak rahi thi.shah uski gand ki moti,kasi fanko ko masal raha tha.uske ando me ab halka-2 dard ho raha tha joki is baat ka ishara tha ki uska lund ab & bardasht karne ki halat me nahi tha.

usne apne hath aage laye to rambha ne dayi banh uski gardan me dali & bayi peechhe le ja hath bistar pe tika diya & kamar hilane lagi.shah uski chhatiyo ko masalte hue chus raha tha.rambha 1 baar fir masti ke usi alam me pahunch gayi thi jaha bas nasha hi nasha hota tha.shah ne uski choochiyo se khelne ke baad 1 baar fir apne dono hath uski gand ki fanko ke neeche lagaye to rambha fir se uski gardan me baahe dalte hue suki pith kharonchne lagi & kamar uchkane lagi.

shah use paglo ki tarah chumne laga & uski gand maslane laga.rambha ke nakhun uski pith chhed rahe the.uski chut uske lund pe sikud-phail rahi thi & vo ab khud pe & kabu nahi rakh sakta tha.dono ke honth aapas me sile hue the magar fir bhi dono ki aahe bahar aa rahi thi.tabhi rambha ne kss todi & uski baahop ke sahare peechhe jhuk gayi & zor se chikhi.uska jism kanp raha tha & uski kamar bahut etzi se hil rahi thi.vo jhad rahi thi & uski chut ne shah ke lund ke uapr apni mastani harkato ko & tez kar diya tha.usi waqt us harkat se behaal shah ne bhi aah bhari & uska jism jhatke khane laga.uska lund rambha ki chut me apna gadha,garm virya chhode ja raha tha.rambha ne virya ko seedha apni kokh me chhutata mehsus kiya & subakte hue uske hotho pe halki si muskan tair gayi.ye dekha & shah bhi muskuraya & lambi-2 sanse leta hua usne rambha ko baaho me bhar liya & dono sukun se bhare jism apni sanse sambhalne me lag gaye.

Mahadev Shah Rambha ke upar se utarte hue dayi karwat pe hua to uska sikuda lund rambha ki chut se bahar aa gaya magar shah ne apni bayi tang rambha ki jangho ke beech ghusaye rakhi & use baaho me bhar chumne laga.vo rambha ki gand ko baye hath se dabate hue uske daye kandhe & gardan ko chumte hue shishe me dekh raha tha.rambha ne uski ye harkat pakad li & fauran use dhakelte hue uske upar se hoti hui bistar ki dusri taraf apni dayi karwat pe aa gayi.

“are!kya hua?”,shah ne apni dayi tang uski jangho ke beech ghusa daye hath se uski bayi jangh ko pakad apni kamar pe chadhaya & use sehlane laga.

“kya dekh rahe the aap shishe me?”,rambha ne banwati gusse se uske seene pe mara.

“tumhari gand..”,shah ne uski gand ki bayi fank ko hath me bhar ke dabaya,”..bahut mast hai!& kya hua agar dekh raha tha to?”

“mujhe achha nahi lagta.”,rambha ne itrate hue kaha.

“achha.kyu?”,shah ka hath uski gand se uske chehre pe aa gaya tha.

“bas aise hi..sharm aati hai.”,rambha ne lajane ka natak karte hue uske kandhe me munh chhupa liya.shah uski adao ke jaal me ab puri tarah phans chuka tha.use ab yakeen ho gaya tha ki rambha uspe pura bharosa karne lagi hai.uska dil khushi se bhar gaya..ab Trust Group uske karib aata dikh raha tha..jis din group uske hath aa gaya us din uska maqsad pura hoga..us din uske sare sapne haqeeqat me badal jayenge & fir koi jaddojahad bhi nahi rahegi..fir vo is haseena ke sath zindagi ka bharpur maza uthayega!

“is sab ke baad bhi sharm aa rahi hai?”,shah ne uske chehre ko upar kiya & uske surkh lab chum liye.

“hun.”,rambha ke gaal masti me laal ho rahe the jise shah uski haya samajh raha tha.shah ka lund fir se jagne laga tha.usne rambha ki jangh pe hath chalate hue uske gaalo ko chumna shuru kar diya.

“uunnnnn..suniye..”,shah ne uski aavaz nahi suni.vo to sar jhuka ke rambha ki chhatiya chumne me mashgul tha,”..Mahadev..suniye na..uunnnn..”,rambha ne uske baal pakad uska munh apne seene se alag kiya & fir use dhakel ke bistar pe litaya & uske upar chadh gayi & uske seene pe apni chhatiya dabate hue uske gaal sehlane lagi,”1 baat puchhu aapse?”

“puchho.”,shah uski zulfen uske chehre se hata raha tha.

“aap apne vade se mukrenge to nahi?”,rambha chintit nazar aa rahi thi.

“tumhe bharosa nahi mujhpe?”,shah uski gudaz baahen sehla raha tha.

“baat vo nahi hai par..main 1 baar dhokha kha chuki hu & ab..”,rambha ne nazre neechi kar li & shah ke seene pe 1 ungli chalane lagi.

“kaho to kararname pe dastkhat kar du ki tum hi meri dulhan banogi!”,shah ne use palta & uske upar sawar ho uski aankho me jhanka.rambha use khamoshi se dekh rahi thi..lagta to tha ki ye sach keh raha hai magar iska koi bharosa nahi..par abhi iska yakin karne ke alawa & koi chara nahi tha.

“aap to bura maan gaye..”,rambha ne use dobara palta & uske upar aa use chumne lagi,”..meri halat bhi to samajhiye..doodh ka jala chhachh bhi phunk-2 ke pita hai.”,uske pure chehre ko usne apni kisses se dhank diya.

“bura to laga mujhe..”,shah uski kamar sehla raha tha,”..meri sachchi mohabbat pe shubaha kiya tumne.”

“i’m sorry,darling!”,rambha use chumte hue uske seene pe aa gayi & uske seene ke balo me ungliya firati uske nipples ko haule-2 kaatne lagi. Shah uski zulfe sehla raha tha.rambha uske seene ko chumte hue neeche ja rahi thi.shah uske itade ko bhanp ke khush ho gaya & uski ungliya rambha ki zulfo se & garmjoshi se khelne lagi.rambha uske pet ko chumte hue uski jhanto tak pahunch chuki thi,”aainda kabhi ye galti nahi karungi.aap mujhse khafa mat hoiye,please!”,masumiyat se kehte hue usne shah ke lund ko munh me bhar liya.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--84

गतान्क से आगे......

“आ..आहह..!”,महादेव शाह की आँखे खुद बा खुद बंद हो गयी & वो सर पीछे कर आहे भरने लगा.रंभा उसके लंड को हाथो मे पकड़ हिला रही थी & उसके सूपदे को चाट रही थी.सूपड़ा दोनो के मिले-जुले रस से गीला था & रंभा को उसका स्वाद मस्त कर रहा था.रंभा ने अपनी ज़ुबान लंड की लंबाई पे फिराई,वो दाए हाथ की मुट्ठी बना लंड को उसमे जाकड़ रही थी मगर उसके अंगूठे & उंगलियो के बीच थोड़ा सा फासला रह रहा था जोकि शाह के लंड की मोटाई का सबूत था.रंभा का दिल 1 बार फिर शाह के मर्दाने अंग को अपनी चूत मे महसूस करने के लिए तड़प उठा.उसी वक़्त उसे देवेन की याद आई & उसे थोड़ी ग्लानि महसूस हुई.देवेन से मिलने के बाद,उसकी माशुका बनने के बाद उसे लगा था कि उसकी तलाश ख़त्म हो गयी थी और ऐसा था भी.वो अब और किसी के साथ ज़िंदगी बिताने की सोच भी नही सकती थी..लेकिन फिर शाह के साथ उसे इतना मज़ा क्यू आ रहा था..क्या आगे भी वो किसी और मर्द के साथ इसी गर्मजोशी से हुमबईस्तर होगी?..लेकिन क्यू?..वो तो देवेन को दिलोजान से चाहती है..फिर और मर्दो की उसे क्या ज़रूरत?..पर फिर शाह के लंड को वो इतनी खुशी से क्यू चूस रही है?..रंभा को उस वक़्त खुद के बारे मे 1 सच्चाई का एहसास हुआ..मैं देवेन को चाहती हू..दुनिया मे किसी भी इंसान से ज़्यादा पर मेरे जिस्म की खुशी भी उतनी ही ज़रूरी है & मैं उसके साथ कोई समझौता नही कर सकती..ये 1 मसला था जिस पर उसे देवेन के साथ बात करनी होगी..पर अभी नही..अभी तो उसके सामने इस शातिर इंसान का ये बहुत ही मस्ताना लंड था..रंभा ने उसे मुँह मे भर इतनी ज़ोर से चूसा की शाह आह भरता उठ बैठा.

उसने रंभा को उठाके अपनी गोद मे बिठाया तो रंभा ने भी अपने दोनो घुटने उसके जिस्म के दोनो ओर जमा दिए & उसके सर को थम लिया.शाह उसकी कमर को कसते हुए खुद से चिपका चूमने लगा.दोनो के हाथ 1 दूसरे के जिस्मो पे बेचैनी से फिसल रहे थे,उनके सिले होंठो के पीछे उनकी ज़ुबाने आपस मे गुत्तगुत्था थी & उनके नाज़ुक अंग आपस मे सटे मिलने की कसक से भरे हुए थे.शाह रंभा के रेशमी जिस्म को बाहो मे भर उसके नशे मे मदहोश हो रहा था & उसकी हर्कतो से उसकी बेचैनी,उसका जोश साफ झलक रहे थे.रंभा उसके जोशीले प्यार से मस्त हो गयी थी.उसका बदन मज़े की आस मे मचल रहा था.शाह के लिए रंभा का जवान जिस्म किस्मत से मिला वो तोहफा था जिसके साथ अब वो जी भर के खेलना चाहता था.

उसके हाथ रंभा की चूचियो से आ लगे & उन्हे दबाते हुए वो उन्हे चूसने लगा.ऐसा नही था की उसने कभी ऐसी बड़ी छातियो से नही खेला था मगर रंभा की चूचियो जैसी बड़ी मगर कसी & गोरी,रसीली चूचियो उसके लिए बिल्कुल ही नया तजुर्बा थी.वो उन मुलायम उभारो को गर्मजोशी से दबाता हुआ चूम & चूस रहा था & रंभा बस उसके सर को पकड़े मस्ती मे च्चटपटती आहें भर रही थी.शाह ने अपनी ज़ुबान से उसके दोनो निपल्स & अरेवला को छेड़ा तो वो सिहर उठी.उसकी चूत की कसक 1 बार फिर उसके सर चढ़ के बोल रही थी.अब तो बस उसे शाह का लंड चाहिए था अपनी चूत के अंदर.शाह ने उसकी चूचियो का जम के लुत्फ़ उठाने के बाद उसकी कमर को पकड़ उसके पेट को चूमा & फिर उसकी कमर पे अपना चेहरा रगड़ने लगा.

उसकी कमर को जाकड़ उसके बाई तरफ चूमते हुए शाह की निगाह उसकी गंद पे पड़ी तो उसने उसकी कमर के किनारे अपना चेहरा टीकाया & अपने हाथो मे उसकी मस्तानी गंद की कसी फांको को दबाने लगा.उसकी कमर चूमते हुए उसने उसकी गंद थपथपाई तो रंभा की आहो मे और इज़ाफ़ा हो गया.रंभा के शानदार जिस्म के इस क़ातिल अंग पे उसके हाथो की ताप से पैदा हुई दिलकश थरथराहट देख शाह के दिल मे उसके इस अंग का भरपूर लुत्फ़ उठाने की ख्वाहिश पैदा हो गयी.उसने सर रंभा के जिस्म के पीछे ले जाते हुए उसकी गंद की बाई फाँक को चूमना शुरू कर दिया तो रंभा आगे झुक गयी & सहारे के लिए शाह के पीछे पलंग के हेडबोर्ड को थाम लिया.वो भी शाह की नियत समझ गयी थी & उसकी धड़कने भी आने वाले गर्मागर्म पॅलो की मस्ती को सोच और तेज़ हो गयी थी.

शाह ने रंभा को बिस्तर पे उल्टा लिटा दिया & उसकी गंद को दीवानो की तरह प्यार करने लगा.उसकी गुदाज़ फांको को कभी वो आपस मे मिलके दबाता तो कभी बिल्कुल फैला देता & उनकी दरार मे अपनी नाक घुसा के रगड़ देता.रंभा उसकी हर्कतो को अपनी बाई तरफ शीशे मे देख रही थी & उसके जिस्म की गर्मी पल-2 बढ़ रही थी.आज मर्द और औरत के जिस्मानी रिश्तो के 1 नये पहलू से वो रूबरू हुई थी-वो ये की अपने आशिक़ के साथ खेलते हुए दोनो के अक्सो को शीशे मे देखना बेहद रोमांचक,बेहद मस्ताना तजुर्बा था.शाह उसकी मांसल गंद पे अपने होंठो के निशान छ्चोड़ रहा था जब उसने अपनी नयी-नवेली महबूबा को शीशे मे देखते पाया.दोनो की नज़रे मिली & शाह मुस्कुरा दिया.रंभा उस मदहोशी के आलम मे भी अपने मक़सद को भूली नही थी.उसकी 1-1 हरकत बस शाह को अपने जवान हुस्न के जाल मे फँसाने के मक़सद से थी.रंभा ने अपनी नशीली आँखो से शाह को देखा और चूमने का इशारा किया.

अब तो शाह के जोश का ठिकाना ना रहा.उसकी ज़ुबान रंभा की गंद की दरार को चाटते हुए उसके छेद से आ लगी & उसे छेड़ने लगी.उसके हाथ अभी भी गंद की फांको को मसल रहे थे.रंभा अब बिस्तर की चादर को बेसब्र हाथो से खींचती & ज़ोर से आहे भर रही थी.शाह उसकी गंद की छेद मे तेज़ी से उंगली कर रहा था.रंभा जानती थी कि वो ये सब उसके गंद के छेद को खोलने के लिए कर रहा है ताकि उसके लंड को अंदर घुसने मे आसानी हो.अचानक शाह बिस्तर से उतरा & 1 कॅबिनेट खोल 1 ट्यूब निकल के वापस आया.उसने उस ट्यूब से क्रीम निकल रंभा की गंद के छेद को भर दिया & अपने लंड पे भी उसे मला,फिर उसने रंभा की कमर पकड़ उसकी गंद को हवा मे उठा लिया & घुटनो पे खड़ा हो उसके पीछे आ गया.

“वी..माआआआआअ......!”,रंभा बहुत ज़ोर से चीखी & बिस्तर की चादर को और ज़ोर से भींच लिया.शाह का मोटा लंड उसकी गंद के छेद को बुरी तरह फैला रहा था & वो बहुत च्चटपटा रही थी.शाह उसे प्यार भरे बोल बोल समझते हुए लंड को अंदर धकेले जा रहा था.आधे लंड को घुसा उसने उसी से रंभा की गंद मारनी शुरू कर दी.कमर हिलाते हुए वो दोनो को शीशे मे देख रहा था & उसका जोश और बढ़ रहा था.थोड़ी देर बाद वो रुका & रंभा की कमर थाम उसे घुमाने लगा & थोड़ी देर मे रंभा बिस्तर पे हाथो & घुटनो पे सीधा शीशे के सामने थी & शीशे मे ही उसकी और शाह की नज़रे मिली हुई थी.

महादेव शाह अब बहुत ज़्यादा जोश मे आ गया था.रंभा की गंद की कसावट उसके लंड को पागल किए जा रही थी & अब उसे बस उस सुराख को अपने रस से भरना था.शाह अपने घुटनो से उठ रंभा की टाँगो के दोनो तरफ पैर जमा के थोड़ा झुक के खड़ा हो गया & उसकी गंद पकड़ धक्के लगाने लगा.कमरे मे रंभा की आहें-नही आहें नही मस्ती भरी चीखें-गूंजने लगी.रंभा की गंद शाह के लंड के अंदर घुसने पे सिकुड जाती & शाह का अगला धक्का पहले धक्के से ज़्यादा जोश मे भरा होता.

वो उसकी गुदाज़ गंद को जोश मे मसलते हुए धक्के लगा रहा था.रंभा की चूत को वो च्छू भी नही रहा था मगर वाहा खलबली मची हुई थी.रंभा बस बिस्तर के सहारे उसकी चादर की सलवटो के ज़रिए अपनी मस्ती,अपनी बेचैनी का इज़हार करती अपने जिस्म मे पैदा हो रहे मज़े का लुत्फ़ उठा रही थी.उसकी चूत तो ऐसे पानी छ्चोड़ रही थी मानो शाह का लंड गंद मे नही चूत मे ही धंसा हो & उसे इस बात से बहुत खुशी & उतनी ही हैरत हो रही थी.

शीशे मे शाह का जोश से तमतमाया चेहरा दिख रहा था & रंभा उस से नज़रे मिलाए आहें भरती हुई उसे चूमने के इशारे पे इशारे किए जा रही थी.शाह ने उसकी गंद की फांको को हाथो मे भर बहुत ज़ोर से दबोचा & आख़िरी धक्के लगाए.

"ओह....हाआाआआन्न्‍नननननननननणणन्.....!",रंभा बिस्तर की चादर नोचती च्चटपटाए हुए चीखने लगी.शाह के गर्म वीर्य के गंद मे च्छूटते ही उसकी चूत मे भी जैसे कुच्छ फुट पड़ा था.उसका जिस्म कांप रहा था & वो सब भूल गयी थी.वो खुशी मे डूबी आसमान मे उड़ रही थी & उसे ये होश नही था की वो सूबक रही थी.उसकी आँखो से आँसू बह रहे थे जोकि उसकी तकलीफ़ नही बल्कि शिद्दती मज़े का इज़हार कर रहे थे.

शाह का जिस्म झटके खा रहा था & उसका लंड तो वीर्य की बौच्हर पे बौच्हर छ्चोड़े जा रहा था.उसे भी खुद पे हैरत हो रही थी.आजतक किसी लड़की के साथ उसने इस कदर मज़े को महसूस नही किया था.वो निढाल हो आगे गिरा & रंभा को अपने जिस्म के नीचे दबा दिया.दोनो लंबी-2 साँसे ले रहे थे.शाह ने उसके चेहरे को ढँकी ज़ुल्फो को किनारे किया & उसके दाए गाल को चूम लिया.उसकी वासना को जिस तरह इस लड़की ने भड़काया था वैसा उसकी पिच्छली ज़िंदगी मे कभी कोई लड़की नही कर पाई थी.

लंड सिकुदा तो शाह ने धीरे से उसे गंद से बाहर खींचा & करवट बदली.रंभा अभी भी धीमे-2 सिसक रही थी.शाह उसकी पीठ सहलाने लगा.कुच्छ पल बाद रंभा ने करवट बदली तो शाह ने उसे बाहो मे भर लिया.

"तुम्हे तकलीफ़ तो नही हुई?",शाह उसकी ज़ूलफे सवार रहा था.

"हुई..पर उस से भी कही ज़्यादा..अच्छा लगा.",रंभा ने फिर उसके सीने मे मुँह च्छूपा लिया,"पर.."

"पर क्या?"

"पर अब मैं आपसे दूर नही रह सकती!",रंभा की आवाज़ मे बेसब्री थी.

"मेरा भी तो यही हाल है पर तुम्हारे तलाक़ तक तो रुकना होगा."

"मुझसे अब इंतेज़ार नही होता!",रंभा की आँखे नम हो गयी थी..ये उसकी चाल का आख़िरी पर बहुत अहम हिस्सा था.वो 1 बेवफा बीवी का नाटक रही थी जो अपने आशिक़ के साथ के लिए किसी भी हद्द तक जा सकती थी.

"इंतेज़ार तो मुझसे भी नही होता!",शाह के जज़्बात भी शिद्दती होने लगे थे.ये पहला मौका था उसकी ज़िंदगी मे जब उसे दौलत से भी ज़्यादा कोई लड़की प्यारी & ज़रूरी लग रही थी.पर रंभा तो उसके हाल-ए-दिल से नावाकिफ़ थी & उसकी बातो की सच्चाई परखने मे लगी थी,"पर क्या कर सकते हैं!"

"ठीक है मैं कल ही तलाक़ की अर्ज़ी दे देती हू.आप बस समीर को हटाइए मेरी ज़िंदगी से.",उसने शाह के सीने मे चेहरा दफ़्न किया और सुबकने लगी,"..मुझे अब 1 पल भी उसके साथ नही रहना!"

"अरे!ऐसे जल्दबाज़ी मे ये काम नही करना.",शाह घबरा गया.उसे लगा कि ये जज़्बाती लड़की कही सारा खेल ही ना बिगाड़ दे,"..अभी कुच्छ दिन इंतेज़ार करो."

"मैं नही करती इंतेज़ार!",रंभा झटके से उठ बैठी.उसकी आँखे आँसुओ से लाल थी,"आपको भी मेरी कोई फ़िक्र नही!",वो घुटनो पे हाथ रख मुँह च्छूपा रोने लगी.शाह फ़ौरन उठ बैठा और उसे समझाने की कोशिश करने लगा.

"तो फिर क्या बात है आख़िर जो आप मुझे रोक रहे हैं तलाक़ लेने से?",शाह उसके आँसू पोंच्छ रहा था & सोच रहा था कि आख़िर क्या बोले रंभा से..क्या उसे उसका असली मक़सद बता देना चाहिए?..कही ये भड़क गयी तो?..फिर ये उसका राज़ खोल देगी & उसे भी इसे ना चाहते हुए भी ठिकाने लगाना पड़ेगा.

"बोलिए!क्या बात है आख़िर?",रंभा ने उसे झकझोरा.

"रंभा,मैं जो कहूँगा उसे ठंडे दिमाग़ से सुनना.",शाह उसे बाई बाँह के घेरे मे ले बहुत गंभीर हो गया था.रंभा भी उसे ध्यान से सुनने लगी,"रंभा,मैं ट्रस्ट ग्रूप का मालिक बनाना चाहता हू.",रंभा ने चौंकने का नाटक किया,"..प्रणव भी मेरे साथ है.हमारा मानना है कि ट्रस्ट और ऊँचाइयाँ छु सकता है लेकिन समीर उसे सही ढंग से चला नही रहा.प्रणव ने तुमसे इस बारे मे कुच्छ बात की है या नही मुझे नही पता.",उसने झूठ बोला,"..देखो,रंभा मे नही चाहता कि तुम्हे लगे कि ट्रस्ट को हथियाने के लिए मैं तुम्हारे करीब आया पर प्रणव से किया कंपनी बचाने का वादा भी मुझसे तोड़ा नही जाता.इसी पशोपेश की वजह से मैं तुमसे ऐसे बात कर रहा था.",रंभा ने उसकी बात सुन सर झुका लिया.

"क्या आपको मेरे और प्रणव के बारे मे पता है?",रंभा सर झुकाए हुए थी.अब वो धीरे-2 शाह का पूरा भरोसा जीतने की ओर कदम बढ़ा रही थी.

"नही क्या..ओह..",शाह थोड़ी देर से बात समझा.

"पर अब नही.उस भले इंसान ने मुश्किल वक़्त मे मुझे सहारा दिया & हम करीब आ गये पर आज मुझे एहसास हुआ है कि मुझे असल सुकून & खुशी केवल आपके आगोश मे मिलती है!",रंभा रुवन्सि थी,"..अब सिफ आपकी होके रहना चाहती हू.प्लीज़ आप मुझे मत छोड़िएगा.",शाह ने उसे बाहो मे भर लिया.कुच्छ सिसकियो के बाद रंभा ने उसका चेहरा हाथो मे भर लिया,"..आप अगर मुझसे शादी करते हैं तो फिर आपको ट्रस्ट का मालिक बनाने का ख्वाब छ्चोड़ना होगा.है ना?",शाह ने हां मे सर हिलाया,"..& इस बात से सबसे ज़्यादा तकलीफ़ पहुँचेगी प्रणव को जो हम दोनो का दोस्त है.",शाह ने फिर सर हिलाया.

"तो कुच्छ ऐसा करते हैं कि हम भी 1 हो जाएँ & उसे भी मायूस ना होना पड़े.",रंभा की आँखो मे 1 विश्वास था & आवाज़ मे 1 ठंडापन जिस से शाह भी थोड़ा हिल गया था.

"क्या?"

"अगर तलाक़ होता है तब तो कंपनी गयी हाथ से.तो बात कुच्छ यू होनी चाहिए कि कंपनी भी हो,समीर भी रास्ते से हट जाए और हम दोनो भी 1 हो जाएँ."

"तुम कहना क्या चाह रही हो?",शाह समझ रहा था रंभा का इशारा & मन ही मन खुश था कि उसकी मुश्किल वो खुद आसान कर रही थी.

"अगर समीर नही रहता है तो क्या होगा?",उसके होंठो पे 1 कुटिल मुस्कान आ गयी थी.

"क्या होगा?"

"उसकी कोई वसीयत नही है & सब कुच्छ मेरा होगा.मैं कंपनी की मालकिन बनूँगी & मेरा दूसरा पति और उसका दोस्त मालिक.",शाह कुच्छ देर खामोशी से उसे देखता रहा.रंभा सांस रोके उसके रिक्षन का इंतेज़ार कर रही थी.शाह के होंठो पे मुस्कान की हल्की सी लकीर खींच गयी जोकि थोड़ी ही देर मे गहरी हुई & फिर अगले ही पल दोनो हंसते हुए 1 दूसरे को बाहो मे भर खुशी से चूम रहे थे.रंभा अपनी चाल मे कामयाब हो गयी थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--84

gataank se aage......

“Aa..aahhhhhhhh..!”,Mahadev Shah ki aankhe khud ba khud band ho gayi & vo sar peechhe kar aahe bharne laga.rambha uske lund ko hatho me pakad hila rahi thi & uske supade ko chat rahi thi.supada dono ke mile-jule ras se gila tha & Rambha ko uska swad mast kar raha tha.rambha ne apni zuban lund ki lambai pe firayi,vo daye hath ki mutthi bana lund ko usme jakad rahi thi magar uske anguthe & ungliyo ke beech thoda sa fasla rah raha tha joki shah ke lund ki motai ka sabut tha.rambha ka dil 1 baar fir shah ke mardane ang ko apni chut me mehsus karne ke liye tadap utha.usi waqt use Deven ki yaad aayi & use thodi glani mehsus hui.deven se milne ke baad,uski mashuka banana ke baad use laga tha ki uski talash khatm ho gayi thi & aisa tha bhi.vo ab & kisi ke sath zindagi bitane ki soch bhi nahi sakti thi..lekin fir shah ke sath use itna maza kyu aa raha tha..kya aage bhi vo kisi & mard ke sath isi garmjoshi se humbistar hogi?..lekin kyu?..vo to deven ko dilojaan se chahti hai..fir & mardo ki use kya zarurat?..par fir shah ke lund ko vo itni khushi se kyu chus rahi hai?..rambha ko us waqt khud ke bare me 1 sachchai ka ehsas hua..main deven ko chahti hu..duniya me kisi bhi insan se zyada par mere jism ki khushi bhi utni hi zaruri hai & main uske sath koi samjhauta nahi kar sakti..ye 1 masla tha jipse use deven ke sath baat karni hogi..par abhi nahi..abhi to uske samne is shatir insane ka ye bahut hi mastana lund tha..rambha ne use munh me bhar itni zor se chusa ki shah aah bharta uth baitha.

Usne rambha ko uthake apni god me bithaya to rambha ne bhi apne dono ghutne uske jism ke dono or jama diye & uske sar ko tham liya.shah uski kamar ko kaste hue khud se chipka chumne laga.dono ke hath 1 dusare ke jismo pe bechaini se fisal rahe the,unke sile hontho ke peechhe unki zubane aapas me gutthaguttha thi & unke nazuk ang aapas me sate milne ki kasak se bhare hue the.shah rambha ke reshmi jism ko baaho me bhar uske nashe me madhosh ho raha tha & uski harkato se uski bechaini,uska josh saaf jhalak rahe the.rambha uske joshile pyar se mast ho gayi thi.uska badan maze ki aas me machal raha tha.shah ke liye rambha ka jawan jism kismat se mila vo tohfa tha jiske sath ab vo ji bhar ke khelna chahta tha.

Uske hath rambha ki choochiyo se aa lage & unhe dabate hue vo unhe chusne laga.aisa nahi tha ki usne kabhi aisi badi chhatiyo se nahi khela tha magar rambha ki chhatiyo jaisi badi magar kasi & gori,rasili choochiyo uske liye bilkul hi naya tajurba thi.vo un mulayam ubharo ko garmjoshi se dabata hua chum & chus raha tha & rambha bas uske sar ko pakde masti me chhatpatati aahen bhar rahi thi.shah ne apni zuban se uske dono nipples & areola ko chheda to vo sihar uthi.uski chut ki kasak 1 baar fir uske sar chadh ke bol rahi thi.ab to bas use shah ka lund chahiye tha apni chut ke andar.shah ne uski choochiyo ka jam ke lutf uthane ke baad uski kamar ko pakad uske pet ko chuma & fir uski kamar pe apna chehra ragadne laga.

Uski kamar ko jakad uske bayi taraf chumte hue shah ki nigah uski gand pe padi to usne uski kamar ke kinare apna chehra tikaya & apne hatho me uski mastani gand ki kasi fanko ko dabane laga.uski kamar chumte hue usne uski gand thapthapayi to rambha ki aaho me & izafa ho gaya.rambha ke shandar jism ke is qatil ang pe uske hatho ki thaap se paida hui dilkash thartharahat dekh shah ke dil me uske is ang ka bharpur lutf uthane ki khwahish paida ho gayi.usne sar rambha ke jism ke peechhe le jate hue uski gand ki bayi fank ko chumna shuru kar diya to rambha aage jhuk gayi & sahare ke liye shah ke peechhe palang ke headboard ko tham liya.vo bhi shah ki niyat samajh gayi thi & uski dhadkane bhi aane vale garmagarm palo ki masti ko soch & tez ho gayi thi.

Shah ne rambha ko bistar pe ulta lita diya & uski gand ko deewano ki tarah pyar karne laga.uski gudaz fanko ko kabhi vo aapas me milake dabata to kabhi bilkul faila deta & unki darar me apni naak ghusa ke ragad deta.rambha uski harkato ko apni bayi taraf shishe me dekh rahi thi & uske jism ki garmi pal-2 badh rahi thi.aaj mad & aurat ke jismani rishto ke 1 naye pehlu se vo rubaru hui thi-vo ye ki apne aashiq ke sath khelte hue dono ke akso ko shishe me dekhna behad romanchak,behad mastana tajurba tha.shah uski mansal gand pe apne hotho ke nishan chhod raha tha jab usne apni nayi-naveli mehbooba ko shishe me dekhte paya.dono ki nazre mili & shah muskura diya.rambha us madhoshi ke alam me bhi apne maqsad ko bhuli nahi thi.uski 1-1 harkat bas shah ko apne jawan husn ke jaal me phansane ke maqsad se thi.rambha ne apni nashili aankho se shah ko dekha & chumne ka ishara kiya.

Ab to shah ke josh ka thikana na raha.uski zuban rambha ki gand ki darar ko chaatate hue uske chhed se aa lagi & use chhedne lagi.uske hath abhi bhi gand ki fanko ko masal rahe the.rambha ab bistar ki chadar ko besabr hatho se khinchti & zor se aahe bhar rahi thi.shah uski gand ki chhed me tezi se ungli kar raha tha.rambha janti thi ki vo ye sab uske gand ke chhed ko kholne ke liye kar raha hai taki uske lund ko andar ghusne me aasani ho.achanak shah bistar se utra & 1 cabinet khol 1 tube nikal ke vapas aaya.usne us tube se cream nikal rambha ki gand ke chhed ko bhar diya & apne lund pe bhi use mala,fir usne rambha ki kamar pakad uski gand ko hawa me utha liya & ghutno pe khada ho uske peechhe aa gaya.

“OUI..MAAAAAAAAAAA......!”,rambha bahut zor se chikhi & bistar ki chadar ko & zor se bhinch liya.shah ka mota lund uski gand ke chhed ko buri tarah phaila raha tha & vo bahut chhatpata rahi thi.shah use pyar bhare bol bol samjhate hue lund ko andar dhakele ja raha tha.aadhe lund ko ghusa usne usi se rambha ki gand marni shur kar di.kamar hilate hue vo dono ko shishe me dekh raha tha & uska josh & badh raha tha.thodi der baad vo ruka & rambha ki kamar tham use ghumane laga & thodi der me rambha bistar pe hatho & ghutno pe seedha shishe ke samne thi & shishe me hi uski & shah ki nazre mili hui thi.

Mahadev Shah ab bahut zyada josh me aa gaya tha.Rambha ki gand ki kasavat uske lund ko pagal kiye ja rahi thi & ab use bas us surakh ko apne ras se bharna tha.shah apne ghutno se uth rambha ki tango ke dono taraf pair jama ke thoda jhuk ke khada ho gaya & uski gand pakad dhakke lagane laga.kamre me rambha ki aahen-nahi aahen nahi masti bhari chikhen-gunjane lagi.rambha ki gand shah ke lund ke andar ghusne pe sikud jati & shah ka agla dhakka pehle dhakke se zyada josh me bhara hota.

vo uski gudaz gand ko josh me maslate hue dhakke laga raha tha.rambha ki chut ko vo chhu bhi nahi raha tha magar vaha khalbali machi hui thi.rambha bas bistar ke sahare uski chadar ki salvato ke zariye apni masti,apni bechaini ka izhar karti apne jism me paida ho rahe maze ka lutf utha rahi thi.uski chut to aise pani chhod rahi thi mano shah ka lund gand me nahi chut me hi dhansa ho & use is bata se bahut khushi & utni hi hairat ho rahi thi.

shishe me shah ka josh se tamtamaya chehra dikh raha tha & rambha us se nazre milaye aahen bharti hui use chumne ke ishare pe ishare kiye ja rahi thi.shah ne uski gand ki fanko ko hatho me bhar bahut zor se dabocha & aakhiri dhakke lagaye.

"OHHHHHHHHH....HAAAAAAAAAANNNNNNNNNNNNNN.....!",rambha bistar ki chadar nochti chhatapatae hue chikhne lagi.shah ke garm virya ke gand me chhutate hi uski chut me bhi jaise kuchh phut pada tha.uska jism kanp raha tha & vo sab bhul gayi thi.vo khushi me dubi aasman me ud rahi thi & use ye hosh nahi tha ki vo subak rahi thi.uski aankho se aansu beh rahe the joki uski taklif nahi balki shiddati maze ka izhar kar rahe the.

shah ka jism jhatke kha raha tha & uska lund to virya ki bauchhar pe bauchhar chhode ja raha tha.use bhi khud pe hairat ho rahi thi.aajtak kisi ladki ke sath usne is kadar maze ko mehsu nahi kiya tha.vo nidhal ho aage gira & rambha ko apne jism ke neeche daba diya.dono lambi-2 sanse le rahe the.shah ne uske chehre ko dhanki zulfo ko kinare kiya & uske daye gaal ko chum liya.uski vasna ko jis tarah is ladki ne bhadkaya tha vaisa uski pichhli zindagi me kabhi koi ladki nahi kar payi thi.

lund sikuda to shah ne dhire se use gand se bahar khincha & karwat badli.rambha abhi bhi dhime-2 sisak rahi thi.shah uski pith sehlane laga.kuchh pal baad rambha ne karwat badli to shah ne use baaho me bhar liya.

"tumhe taklif to nahi hui?",shah uski zulfe sawar raha tha.

"hui..par us se bhi kahi zyada..achha laga.",rambha ne fir uske seene me munh chhupa liya,"par.."

"par kya?"

"par ab main aapse door nahi reh sakti!",rambha ki aavaz me besabri thi.

"mera bhi to yehi haal hai par tumhare talaq tak to rukna hoga."

"mujhse ab intezar nahi hota!",rambha ki aankhe nam ho gayi thi..ye uski chaal ka aakhiri par bahut aham hissa tha.vo 1 bewafa biwi ka natak rahi thi jo apne aashiq ke sath ke liye kisi bhi hadd tak ja sakti thi.

"intezar to mujhse bhi nahi hota!",shah ke jazbat bhio shiddati hone lage the.ye pehla mauka tha uski zindagi me jab use daulat se bhi zyada koi ladki pyari & zaruri lag rahi thi.par rambha to uske haal-e-dil se navakif thi & uski baato ki sachchai parakhne me lagi thi,"par kya kar sakte hain!"

"thik hai main kal hi talaq ki arzi de deti hu.aap bas sameer ko hataiye meri zindagi se.",usne shah ke seene me chehra dafn kiya & subakne lagi,"..mujhe ab 1 pal bhi uske sath nahi rehna!"

"are!aise jaldbazi me ye kaam nahi karna.",shah ghabra gaya.use laga ki ye jazbati ladki kahi sara khel hi na bigad de,"..abhi kuchh din intezar karo."

"main nahi karti intezar!",rambha jhatke se uth baithi.uski aankhe aansuo se laal thi,"aapko bhi meri koi fikr nahi!",vo ghutno pe hath rakh munh chhupa rone lagi.shah fauran uth baitha & use samnjhane ki koshish karne laga.

"to fir kya baat hai aakhir jo aap mujhe rok rahe hain talaq lene se?",shah uske aansu ponchh raha tha & soch raha tha ki aakhir kya bole rambha se..kya use uska asli maqsad bata dena chahiye?..kahi ye bhadak gayi to?..fir ye uska raaz khol degi & use bhi ise na chahte hue bhi thikane lagana padega.

"boliye!kya baat hai aakhir?",rambha ne use jhakjhora.

"rambha,main jo kahunga use thande dimagh se sunana.",shah use bayi banh ke ghere me le bahut gambhir ho gaya tha.rambha bhi use dhyan se sunane lagi,"rambha,main Trust Group ka malik banana chahta hu.",rambha ne chaunkne ka natak kiya,"..Pranav bhi mere sath hai.humara maanana hai ki trust & oonchaiyan chhu sakta hai lekin Sameer use sahi dhang se chala nahi raha.pranav ne tumse is bare me kuchh baat ki hai ya nahi mujhe nahi pata.",usne jhuth bola,"..dekho,rambha mai nahi chahta ki tumhe lage ki trust ko hathiyane ke liye main tumhare karib aaya par pranav se kiya company bachane ka vada bhi mujhse toda nahi jata.isi pashopesh ki vajah se main tumse aise baat kar raha tha.",rambha ne uski baat sun sar jhuka liya.

"kya aapko mere & pranav ke bare me pata hai?",rambha sar jhukaye hue thi.ab vo dhire-2 shah ka pura bharosa jitne ki or kadam badha rahi thi.

"nahi kya..oh..",shah thodi der se baat samjha.

"par ab nahi.us bhale insan ne mushkil waqt me mujhe sahara diya & hum karib aa gaye par aaj mujhe ehsas hua hai ki mujhe asal sukun & khushi keval aapkje agosh me milti hai!",rambha ruwansi thi,"..ab sif aapki hoke rehna chahti hu.please aap mujhe mat chhdoiyega.",shah ne use baaho me bhar liya.kuchh siskiyo ke baad rambha ne uska chehra hatho me bhar liya,"..aap agar mujhse shadi karte hain to fir aapko trust ka malik banane ka khwab chhodna hoga.hai na?",shah ne haan me sar hilaya,"..& is baat se sabse zyada taklif pahunchegi pranav ko jo hum dono ka dost hai.",shah ne fir sar hilaya.

"to kuchh aisa karte hain ki hum bhi 1 ho jayen & use bhi mayus na hona pade.",rambha ki aankho me 1 vishvas tha & aavaz me 1 thandapan jis se shah bhi thoda hil gaya tha.

"kya?"

"agar talak hota hai tab to company gayi hath se.to baat kuchh yu honi chahiye ki company bhi humari ho,sameer bhi raste se hat jaye & hum dono bhi 1 ho jayen."

"tum kehna kya chah rahi ho?",shah samajh raha tha rambha ka ishara & man hi man khush tha ki uski mushkil vo khud aasan kar rahi thi.

"agar sameer nahi rehta hai to kya hoga?",uske hotho pe 1 kutil muskan aa gayi thi.

"kya hoga?"

"uski koi vasiyat nahi hai & sab kuchh mera hoga.main company ki malkin banungi & mera dusra pati & uska dost malik.",shah kuchh der khamoshi se use dekhta raha.rambha sans roke uske reaction ka intezar kar rahi thi.shah ke hotho pe muskan ki halki si lakir khinch gayi joki thodi hi der me gehri hui & fir agle hi pal dono hanste hue 1 dusre ko baaho me bhar khushi se chum rahe the.rambha apni chaal me kamyab ho gayi thi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--85

गतान्क से आगे......

“तुम्हे अब अपने घर लौट जाना चाहिए.”,खाना ख़त्म होरे ही महादेव शाह ने 1 बार फिर रंभा को बाहो मे भर लिया.

“उन्न्ञणन्..मेरा मन नही है.”,रंभा उसके गले मे बाहे डाल उसके होंठ चूमने लगी,”..आज रात यही रुक जाती हूँ.”

“दिल तो मेरा भी यही चाहता है..”,शाह ने किस तोड़ी,”..पर हमारे प्लान की कामयाबी के लिए ये बहुत ज़रूरी है कि किसी को हमारे रिश्ते की ज़रा भी भनक ना लगे इसीलिए कह रहा हू कि तुम घर लौट जाओ.”

“ठीक है.”,रंभा ने काफ़ी उदास होने का नाटक किया पर सच्चाई ये थी कि उसे थोडा बुरा तो लग रहा था.शाह के साथ चुदाई मे उसे बहुत मज़ा आया था & अभी उसका दिल वाहा से जाने को कर नही रहा था,”..आप कहते हैं तो जाती हू.”

“मेरी जान,उदास क्यू होती हो.”,शाह ने उसे वैसे ही पचकारा जैसे कोई किसी रूठे बच्चे को पूचकारता है,”.मेरा वादा है की चाहे कुच्छ भी हो जाए मैं रोज़ तुमसे मिलूँगा.”

“सच?”,रंभा ने किसी भोली लड़की की तरह खुश होने का नाटक किया.

“सच!”,दोनो 1 लंबी किस मे खो गये जिसके बाद रंभा वाहा से निकल गयी.घर पहुँच उसने समीर से छुप के देवेन को फोन किया & उस से कल मिलने की बात की.देवेन ने इलाक़े जायज़ा ले लिया था & उसे सब ठीक लगा तो उसने रंभा को अगली सुबह उनके पास आने को कहा.

गोआ से लौटने के बाद रंभा समीर से अलग कमरे मे सोने लगी थी.अपने बिस्तर पे लेटी वो अपने आशिक़ो के बारे मे सोच रही थी & उसे प्रणव का ख़याल आया.वो उठ बैठी..वो ज़रूर अभी आएगा..इस ख़याल की आते ही रंभा दबे पाँव कमरे से निकली और समीर के कमरे तक गयी और अंदर झाँका.वो गहरी नींद मे सो रहा था.वो वाहा से हटी & बाल्कनी मे चली गयी.

10 मिनिट बाद उसे प्रणव आता दिखा तो उसने हाथ से उसे रुकने का इशारा किया & फिर दबे पाँव नीचे गयी,”तुम्हारा ही इंतेज़ार कर रही थी.”,उसने उसका हाथ पकड़ा & उसे घर के अंदर ले आई.कुच्छ देर बाद दोनो रंभा के कमरे मे बैठे थे.

“कहा चली गयी थी तुम अपने दफ़्तर से?”,प्रणव के हाथ उसके जिस्म से आ लगे & वो उसे बाहो मे भर पागलो की तरह चूमने लगा.

“आराम से..आहह..आवाज़ मत करो प्रणव..कही समीर ना जाग जाए!”,उसने आँखे बंद कर ली.उसका दिल नही कर रहा था प्रणव के साथ चुदाई करने का.घर आके उसे महसूस हुआ था कि शाह ने उसे कितना थका दिया था & वो अब बस सोना चाहती थी.पर वो प्रणव को नाराज़ भी नही करना चाहती थी.

“क्लब चली गयी थी & फिर इधर-उधर घूमती वापस आ गयी..उउन्न्ह..!”,प्रणव ने उसे बिस्तर पे लिटा दिया था & उसके उपर चढ़ उसके चेहरे को चूमते हुए उसकी नाइटी के उपर से ही उसकी चूचियाँ दबा रहा था.

“मुझे बुला लेती.”,प्रणव ने उसकी नाइटी के गले को नीचे किया & उसकी दाई छाती को बाहर निकाल चाटने लगा.

“प्रणव..डार्लिंग..उउन्न्ञणन्..बुरा तो नही मनोगे?”,उसने उसके बाल पकड़ उसका सर सीने से उठाया.

“क्या बात है,रंभा?”,प्रणव फ़ौरन उसकी चूचियाँ छ्चोड़ उसकी आँखो मे देखने लगा & उसके गाल सहलाने लगा.

“आज दिल नही कर रहा.”

“ओह.”,प्रणव की आवाज़ मे मायूसी सॉफ झलक रही थी & वो उसके उपर से हटने लगा की रंभा ने उसे रोक लिया.

“दिल तो ये कर रहा है कि बस तुमहरि मज़बूत बाहो मे सुकून से सो जाऊं पर ये मुमकिन नही.”,रंभा ने ठंडी आह भरी.समीर का दिल खुशी से भर उठा.जहा रंभा उसके लिए 1 मोहरा थी जो उसे ट्रस्ट ग्रूप का मालिक बनाने वाली थी & 1 खूबसूरत खिलोना थी जिस से वो अपने जिस्म की हवस मिटाता था वही वो उस से मोहब्बत करने लगी थी.

“हां,जान फिलहाल तो ये मुमकिन नही पर हालात बहुत जल्द बदलेंगे.”,रंभा ने उसे झुका के गले से लगा लिया.उसे खुद पे गुरूर भी हो रहा था & हैरत भी..ये सारे चालाक मर्द इतनी आसानी से उसकी झूठी,रस भरी बातो मे फँस कैसे जाते थे!

कुच्छ देर बाद वो बड़े आराम से सो रही थी.

विजयंत मेहरा की नींद खुली तो वो कमरे से बाहर आया.उसने देखा कि घर के मैं दरवाज़े पे 1 लॅडीस कोट पड़ा था.उसने आगे देखा तो पाया कि घर के हॉल से लेके देवेन के कमरे तक के रास्ते मे 1 लॅडीस टॉप,जीन्स & ब्रा भी पड़े थे.वो समझ गया की रंभा आई है & उसका दिल खुशी से भर गया.वो आगे बढ़ा मगर उसने देखा की देवेन के कमरे का दरवाज़ा बंद था.उसे मायूसी हुई पर वो कर ही क्या सकता था.दोनो के इतने एहसान थे उसपे & वो अपने जिस्मानी स्वार्थ के लिए दोनो की मोहब्बत मे खलल नही डालना चाहता था.उसने दरवाज़े से कान लगाया तो अंदर से रंभा की मस्तानी आहो की धीमी आवाज़ उसके कान मे पड़ी & वो बेचैन हो गया.

वो वाहा से हटा & रसोई मे चला आया & चाइ बनाना लगा.जब से वो डेवाले आया था उसे 1 अजीब सी उलझन & बेचैनी ने आ घेरा था.उसे ये शहर,यहा की आबो-हवा सब देखे-2 से लगते थे मगर उसे कुच्छ याद नही आ रहा था.उसे उसी वक़्त रंभा की याद आई थी & वो उसे ये सब बताना चाहता था.आज वो आ गयी थी मगर..

उसने चाइ बनाई & कप मे डाल पीते हुए रंभा के कमरे से भरा आने का इंतेज़ार करने लगा.

“उउन्न्ञनननगगगगगगगघह……!”

“आहह…….!”,सलवटो से भरे बिस्तर पे आपस मे गुत्थमगुत्था दो जिस्मो ने 1 साथ ज़ोर से आ भर अपने-2 जिस्मो के मज़े की इंतेहा तक पहुचने का प्लान किया.

“तो उसका इरादा तुमसे शादी कर कंपनी हड़पने का है पर उसके पहले समीर को रास्ते से हटाना ज़रूरी है.”,देवेन अभी भी रंभा के उपर ही था.उसका लंड सिकुड़ने के बावजूद रंभा की चूत मे था.रंभा उसके चेहरे को अपनी उंगली के पोरो से सहला रही थी & वो कभी उसके चेहरे तो कभी चूचियो को चूम रहा था.

“हूँ..& अब इस काम मे हमे उसकी ‘मदद’ करनी है.”,देवेन ने उसकी ओर देखा और दोनो हंस पड़े.

“अच्छा तुम 1 काम करना..”,उसने हँसती हुई रंभा के होंठ चूमे & फिर उसके जिस्म से हट गया & बिस्तर से उतर अपने कपड़े पहनने लगा,”..जब भी अगली बार मिलो इस शाह से,मुझे खबर करना,मैं उसे देखना चाहता हू.”

“ठीक है.”,रंभा ने देवेन को अपने & शाह की पूरी कहानी नही बताई थी ना ही देवेन ने उस से ज़्यादा तफ़सील से उस बारे मे पुछा था.रंभा ने अपनी पॅंटी पहनी तो देवेन बाहर चला गया & उसके कपड़े लेके लौटा.रंभा को उस वक़्त थोड़ी ग्लानि महसूस हुई..ये शख्स उस से मोहब्बत करता था & वो भी उसे जान से ज़्यादा चाहती थी..फिर अभी भी दूसरे मर्दो से चुदने मे उसे मज़ा क्यू आता था?..वो देवेन की तरफ पीठ कर कपड़े पहनने लगी..ना जाने क्यू उस से नज़रे मिलाने मे उसे झिझक होने लगी थी.कपड़े पहन वो शीशे के सामने खड़ी हो बाल ठीक करने लगी & तब उसने अपनी ही आँखो मे झाँका..वो ऐसी ही थी & ये बात सबसे पहले उसे खुद कबूलनी थी.इसके लिए शर्मिंदा होने की कोई ज़रूरत नही थी उसे.ये उसकी शख्सियत का अहम हिस्सा था & इसके बिना वो खुश होके नही जी सकती थी.उसने अपने बाल ठीक किए & कमरे से बाहर आई.

सामने चाइ का कप उसकी ओर बढ़ाए विजयंत खड़ा था,”गुड मॉर्निंग,डॅड.कैसे हैं आप?..थॅंक्स!”,उसने आगे बढ़ विजयंत का गाल चूमा & कप ले लिया.

“ठीक हू.”,रंभा ने उसके चेहरे के भाव पढ़ लिए & देवेन से आँखो के इशारे से पुछा तो सुने कंधे उचका दिए.रंभा ने विजयंत की पीठ पे हाथ रखा & उसे उसके कमरे मे ले गयी.

“डॅड,जो भी बात है मुझसे कहिए.”,विजयंत कुच्छ पल सर झुकाए बैठा रहा & फिर उसने उसे अपने दिल का हाल बताया.रंभा को खुशी हुई कि उसे कुच्छ तो जाना-पहचाना लगा मगर साथ ही थोड़ी घबराहट भी हुई.देवेन की दिमागी हालत अभी भी नाज़ुक थी & उसे बहुत एहतियात से रहना था.अब यहा यूरी भी नही था उनकी मदद के लिए.

“डॅड..”,उसने उसके कंधे पे हाथ रखा,”..अभी मैं आपको आपकी कंपनी हड़पने के लिए चल रही चालो के बारे मे कुच्छ बताउन्गि पर उस से पहले आपसे 1 बात कहना चाहती हू.आपकी तबीयत अभी भी ठीक नही है.आप अपने दिमाग़ पे बहुत ना डालें.आपको सब याद आ जाएगा & वो भी बहुत जल्दी.ये उलझन तो यही जता रही है कि आपको कुच्छ तो याद आ रहा है.मगर फिर भी ज़रा भी तकलीफ़ हो,परेशानी हो,मुझे फोन कीजिए.मैं फ़ौरन आऊँगी.ओके?”

“ओके.”,विजयंत मुस्कुराया तो रंभा ने 1 बार फिर उसका गाल चूमा & उसे बाहर हॉल मे देवेन के पास ले आई जहा दो नो ने उसे शाह & प्रणव के बारे मे बताया.

“अच्छा देवेन..”,रंभा अपनी कार की ड्राइविंग सीट पे बैठी तो देवेन ने दरवाज़ा बंद किया,”..दयाल को ढूँडने के काम मे कुछ नया हुआ?”

“हां,कल होगा.”

“अच्छा,क्या?”,रंभा ने खुश होके पुचछा.

“कल का अख़बार पढ़ना.”

“बताइए ना!”,वो मचल गई.

“ना!कल का अख़बार पढ़ना खुद बा खुद समझ जाओगी.”,वो मुस्कुराया.रंभा समझ गयी की वो अभी कुच्छ नही बताने वाला & शोखी से मुस्कुराती अपने दफ़्तर के लिए रवाना हो गयी.

“एक्सक्यूस मी,मेडम.”,रंभा ने अपनी कार पार्क की तो 1 शॉफर उसके करीब आ खड़ा हुआ.

“यस?”,रंभा ने उसे सवालिया निगाहो से देखा.

“ये आपके लिए.”,उसने 1 पॅकेट उसे थमाया & सलाम कर चला गया.

रंभा ने पॅकेट के अंदर देखा तो 1 गिफ्ट पेपर मे लिपटा डिब्बा था जिसपे 1 गुलाब का फूल चिपका था & 1 कार्ड था जिसपे सुर्ख स्याही से लिखा था,”फॉर माइ डार्लिंग-फ्रॉम म”.रंभा समझ गयी कि उसके नये आशिक़ ने उसे तोहफा भेजा है.वो पॅकेट लिए अपने दफ़्तर मे आई.

कॅबिन के एकांत मे उसने जल्दी से तोहफा खोला तो अंदर से लेस की हल्के गुलाबी रंग की ट्रॅन्स्परेंट लाइनाये निकली.रंभा ने मुस्कुराते हुए स्ट्रेप्लेस्स ब्रा & पॅंटी को देखा.शाह आदमी जैसा भी हो उसकी पसंद बहुत अच्छी थी.रंभा ने देखा डिब्बे मे 1 क्रेडिट कार्ड जैसा भी कुच्छ था.उसे उठाया तो उसने पाया कि वो होटेल कलमबस के 1 रूम का के कार्ड था & उसके साथ 1 और कार्ड था जिसपे सुर्ख स्याही से लिखा था,2 पीएम.

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क्रमशः.......

JAAL paart--85

gataank se aage......

“Tumhe ab apne ghar laut jana chahiye.”,khana khatm hore hi Mahadev Shah ne 1 baar fir Rambha ko baaho me bhar liya.

“unnnnn..mera man nahi hai.”,rambha uske gale me baahe dal uske honth chumne lagi,”..aaj raat yahi ruk jati hun.”

“dil to mera bhi yehi chahta hai..”,shah ne kiss todi,”..par humare plan ki kamyabi ke liye ye bahut zaruri hai ki kisi ko humare rishte ki zara bhi bhanak na lage isiliye keh raha hu kit um ghar laut jao.”

“thik hai.”,rambha ne kafi udas hone ka natak kiya par sachchai ye thi ki use thoda bura to lag raha tha.shah ke sath chudai me use bahut maza aaya tha & abhi uska dil vaha se jane ko kar nahi raha th,”..aap kehte hain to jati hu.”

“meri jaan,udas kyu hoti ho.”,shah ne use vaise hi puchkara jaise koi kisi ruthe bachche ko puchkarta hai,”.mera vada hai ki chahe kuchh bhi ho jaye main roz tumse milunga.”

“sach?”,rambha ne kisi bholi ladki ki tarah khush hone ka natak kiya.

“sach!”,dono 1 lambi kiss me kho gaye jiske baad rambha vaha se nikal gayi.ghar pahunch usne Sameer se chhup ke Deven ko fone kiya & us se kal milne ki baat ki.deven ne ilake jayza le liya tha & use sab thik laga to usne rambha ko agli subah unke paas aane ko kaha.

Goa se lautne ke baad Rambha sameer se alag kamre me sone lagi thi.apne bistar pe leti vo apne aashiqo ke bare me soch rahi thi & use Pranav ka khayal aaya.vo uth baithi..vo zarur abhi aayega..is khayal kea ate hi rambha dabe panv kamre se nikli & sameer ke kamre tak gayi & andar jhanka.vo gehri nind me so raha tha.vo vaha se hati & balcony me chali gayi.

10 minute baad use pranav aata dikha to usne hath se use rukne ka ishara kiya & fir dabe panv neeche gayi,”tumhara hi intezar kar rahi thi.”,usne uska hath pakda & use ghar ke andar le aayi.kuchh der baad dono rambha ke kamre me baithe the.

“kaha chali gayi thi tum apne daftar se?”,pranav ke hath uske jism se aa lage & vo use baaho me bhar paglo ki tarah chumne laga.

“aaram se..aahhhhh..aavaz mat karo pranav..kahi sameer na jag jaye!”,usne aankhe band kar li.uska dil nahi kar raha tha pranav ke sath chuadi karne ka.ghar aake use mehsus hua tha ki shah ne use kitna thaka diya tha & vo ab bas sona chahti thi.par vo pranav ko naraz bhi nahi karma chahti thi.

“club chali gayi thi & fir idhar-udahr ghumti vapas aa gayi..uunnhhhh..!”,Pranav ne use bistar pe lita diya tha & uske upar chadh uske chehre ko chumte hue uski nighty ke upar se hi uski chhatiya daba raha tha.

“mujhe bula leti.”,pranav ne uski nighty ke gale ko neeche kiya & uski dayi chhati ko bahar nikal chaatne laga.

“pranav..darling..uunnnnn..bura to nahi manoge?”,usne uske baal pakad uska sar seene se uthaya.

“kya baat hai,rambha?”,pranav fauran uski chhatiya chhod uski aankho me dekhne laga & uske gaal sehlane laga.

“aaj dil nahi kar raha.”

“oh.”,pranav ki aavaz me mayusi saaf jhalak rahi thi & vo uske upar se hatne laga ki rambha ne use rok liya.

“dil to ye kar raha hai ki bas tumahri mazbut baaho me sukun se so jaoon par ye mumkin nahi.”,rambha ne thandi aah bhari.sameer ka dil khushi se bhar utha.jaha rambha uske liye 1 mohra thi jo use Trust Group ka malik banana wali thi & 1 khubsurat khilona thi jis se vo apne jism ki hawas mitata tha vahi vo us se mohabbat karne lagi thi.

“haan,jaan filhal to ye mumkin nahi par halaat bahut jald badlenge.”,rambha ne use jhuka ke gale se laga liya.use khud pe gurur bhi ho raha tha & hairat bhi..ye sare chalak mard itni aasani se uski jhuthi,ras bhari baato me fans kaise jate the!

Kuchh der baad vo bade aaram se so rahi thi.

Vijayant Mehra ki nind khuli to vo kamre se bahar aaya.usne dekha ki ghar ke main darwaze pe 1 ladies coat pada tha.usne aage dekha to paya ki ghar ke hall se leke deven ke kamre tak ke raste me 1 ladies top,jeans & bra bhi pade the.vo samajh gaya ki rambha aayi hai & uska dil khushi se bhar gaya.vo aage badha magar usne dekha ki deven ke kamre ka darwaza band tha.use mayusi hui par vo kar hi kya sakta tha.dono ke itne ehsan the uspe & vo apne jismani swarth ke liye dono ki mohabbat me khalal nahi dalna chahta tha.usne darwaze se kaan lagaya to andar se rambha ki mastani aaho ki dhimi aavaz uske kaan me padi & vo bechain ho gaya.

Vo vaha se hata & rasoi me chala aaya & chai banana laga.jab se vo Devalay aaya tha use 1 ajib si uljhan & bechini ne aa ghera tha.use ye shehar,yaha ki aabo-hawa sab dekhe-2 se lagte the magar use kuchh yaad nahi aa raha tha.use usi waqt rambha ki yaad aayi thi & vo use ye sab batana chahta tha.aaj vo aa gayi thi magar..

Usne chai banayi & cup me daal pite hue rambha ke kamre se bhara aane ka intezar karne laga.

“uunnnnnngggggggghhhhhhhhhh……!”

“aahhhhhhhhhhhhhhhh…….!”,salwato se bhare bistar pe aapas me gutthamguttha do jismo ne 1 sath zor se aah bhar apne-2 jismo ke maze ki inteha tak pahuchane ka élan kiya.

“to uska irada tumse shadi kar company hadapne ka hai par uske pehle sameer ko raste se hatana zaruri hai.”,deven abhi bhi rambha ke upar hi tha.uska lund sikudne ke bavjud rambha ki chut me tha.rambha uske chehre ko apni ungli ke poro se sehla rahi thi & vo kabhi uske chehre to kabhi chhatiyo ko chum raha tha.

“hun..& ab is kaam me hame uski ‘madad’ karni hai.”,deven ne uski or dekha & dono hans pade.

“achha tum 1 kaam karma..”,usne hansti hui rambha ke honth chume & fir uske jism se hat gaya & bistar se utar apne kapde pehanane laga,”..jab bhi gali baar milo is shah se,mujhe khabar karna,main use dekhna chahta hu.”

“thik hai.”,rambha ne deven ko apne & shah ki puri kahani nahi batayi thin a hi deven ne us se zyada tafsil se us bare me puchha tha.rambha ne apni panty pehni to deven bahar chala gaya & uske kapde leke lauta.rambha ko us waqt thodi glani mehsus hui..ye shakhs us se mohabbat karta tha & vo bhi use jaan se zyada chahti thi..fir abhi bhi dusre mardo se chudne me use maza kyu aata tha?..vo deven ki taraf pith kar kapde pehanane lagi..na jane kyu us se nazre milane me use jhijhak hone lagi thi.kapde pehan vo shishe ke samne kahdi ho baal thik karne lagi & tab usne apni hi aankho me jhanka..vo aisi hi thi & ye baat sabse pehle use khud kabulni thi.iske liye sharminda hone ki koi zarurat nahi thi use.ye uski shakhsiyat ka aham hissa tha & iske bina vo khush hoke nahi ji sakti thi.usne apnea bal thik kiye & kamre se bahar aayi.

Samne chai ka cup uski or badhaye vijayant khada tha,”good morning,dad.kaise hain aap?..thanks!”,usne aage badh vijayant ka gaal chuma & cup le liya.

“thik hu.”,rambha ne uske chehre ke bhav padh liye & deven se aankho ke ishare se puchha to sune kandhe uchka diye.rambha ne vijayant ki pith pe hath rakha & use uske kamre me le gayi.

“dad,jo bhi baat hai mujhse kahiye.”,vijayant kuchh pal sar jhukaye baitha raha & fir usne use apne dil ka haal bataya.rambha ko khushi hui ki use kuchh to jana-pehchana laga magar sath hi thodi ghabrahat bhi hui.deven ki dimaghi halat abhi bhi nazuk thi & use bahut ehtiyat se rehna tha.ab yaha Yuri bhi nahi tha unki madad ke liye.

“dad..”,usne uske kandhe pe hath rakha,”..abhi main aapko aapki company hadapne ke liye chal rahi chaalo ke bare me kuchh bataungi par us se pehle aapse 1 baat kehna chahti hu.aapki tabiyat abhi bhi thik nahi hai.aap apne dimagh pe bahut na dalen.aapkos ab yaad aa jayega & vo bhi bahut jaldi.ye uljhan to yehi jata rahi hai ki aapko kuchh to yaad aa raha hai.magar fir bhi zara bhi taklif ho,pareshani ho,mujhe phone kijiye.main fauran aaoongi.ok?”

“ok.”,vijayant muskuraya to rambha ne 1 baar fir uska gaal chuma & use bahar hall me deven ke paas le aayi jaha do no ne use shah & pranav ke bare me bataya.

“Achcha Deven..”,Rambha apni car ki driving seat pe baithi to deven ne darwaza band kiya,”..Dayal ko dhundne ke kaam me kuch naya hua?”

“haan,kal hoga.”

“achha,kya?”,rambha ne khush hoke puchha.

“kal ka akhbar padhna.”

“bataiye na!”,vo machli.

“na!kal ka akhbar padhna khud ba khud samajh jaogi.”,vo muskuraya.rambha samjh gayi ki vo abhi kuchh nahi batane vala & shokhi se muskurati apne daftar ke liye ravana ho gayi.

“excuse me,madam.”,rambha ne apni car park ki to 1 chauffeur uske karib aa khada hua.

“yes?”,rambha ne use sawaliya nigaho se dekha.

“ye aapke liye.”,usne 1 packet use thamaya & salam kar chala gaya.

Rambha ne packet ke andar dekha to 1 gift paper me lipta dibba tha jispe 1 gulab ka phool chipka tha & 1 card tha jispe surkh syahi se likha tha,”For my darling-from M”.rambha samajh gayi ki uske naye aashiq ne use tohfa bheja hai.vo packet liye apne daftar me aayi.

Cabin ke ekant me usne jaldi se tohfa khola to andar se lace ki halke gulabi rang ki transparent lingerie nikli.rambha ne muskurate hue strapless bra & panty ko dekha.shah aaadmi jaisa bhi ho uski pasand bahut achhi thi.rambha ne dekha dibbe me 1 credit card jaisa bhi kuchh tha.use uthaya to usne paya ki vo Hotel Columbus ke 1 room ka key card tha & uske sath 1 aur card tha jispe surkh syahi se likha tha,2 pm.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--86

गतान्क से आगे......

1.55 पे रंभा 5-स्टार होटेल कलमबस के लग्षुरी सूयीट के दरवाज़े को खोल अंदर दाखिल हो रही थी.उसने अभी भी सवेरे वाला कोट & गहरी नीली जीन्स पहनी थी मगर उनके नीचे उसने अपनी ब्रा & पॅंटी उतार आशिक़ के तोहफे को अपने जिस्म पे सज़ा लिया था.

रंभा सूयीट मे दाखिल हुई & सोफे पे अपना बॅग रख बेडरूम मे गयी.वाहा मध्हम रोशनी थी & खुश्बू वाली मोमबत्तिया जल रही थी,माहौल बड़ा ही रोमानी था,”आओ मेरी जान.”,उसकी आहत सुन कमरे की खिड़की के पास ड्रेसिंग गाउन पहने खड़ा महदेव शाह घुमा & 1 डोर खींच पर्दे को गिरा दिया.अब उस कमरे का बाहर की दुनिया से कोई सरोकार नही था.

शाह उसके करीब आया & दोनो 1 दूसरे से लिपट गये & चूमने लगे.दोनो 1 दूसरे को ऐसे चूम रहे थे जैसे बरसो बाद मिले हो जबकि बस कुच्छ ही घंटे हुए थे उनकी पिच्छली मुलाकात को.शाह ने चूमते हुए रंभा के कोट के बटन खोल उसे उसके कंधो से नीचे फर्श पे सरका दिया.रंभा भी उसके गाउन की बेल्ट खोल रही थी.कुच्छ ही पल बाद शाह उसके स्ट्रेप्लेस्स ट्यूब टॉप से नुमाया गोरे कंधो को सहलाता उसकी ज़ुबान से अपनी ज़ुबान लड़ा रहा था & रंभा उसके नंगे सीने के बालो मे हाथ फिरा रही थी.

रंभा के हाथ शाह के सीने से लेके उसके पेट तक आते & फिर पीछे उसकी कमर से होते हुए पीठ तक जाते,जहा से वो शाह के सर पे पहुँच उसके सफेद बालो को खींचने लगते.शाह ने उसकी कमर को अपनी गिरफ़्त मे कसा & अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे घुसा के अंदर घुमाई तो रंभा के जिस्म मे बिजली दौड़ गयी.शाह की मज़बूत बाहो मे उसे फिर वही मस्ती महसूस होने लगी थी.

शाह अब उसकी गंद दबा रहा था.कसी जीन्स मे उसकी चौड़ी गंद देखते ही उसका जोश बढ़ गया था & अब उसका इज़हार वो अपने बेसब्र हाथो के ज़रिए कर रहा था.रंभा गंद के मसल्ने से चिहुनक उठी थी & अब सिले लबो के पार भी उसकी आहे बाहर आ रही थी.उसने शाह को बाहो मे भर उसकी पीठ को नोचा & अपनी ज़ुबान से उसकी ज़ुबान को अपने मुँह से बाहर निकाला & फिर उसके मुँह मे अपनी जीभ घुमाने लगी.

कुच्छ पॅलो बाद शाह ने उसके लबो से अपने लब जुदा किए & उसकी गर्दन चूमने लगा.रंभा के जिस्म की खुश्बू उसे मदहोश कर रही थी.वो उसकी गर्दन को होंठो से काटने लगा था & रंभा उसकी इस हरकत से च्चटपटाने लगी थी.

“ओह..छ्चोड़िए भी!”,उसने शोखी से उसे परे धकेला तो शाह उसे देखने लगा.स्लीव्ले ट्यूब टॉप के उपर से उसकी धदक्ति छातियो का बहुत हल्का हिस्सा दिख रहा था.कसे टॉप & जीन्स मे जिस्म के कटाव बड़े दिलकश अंदाज़ मे उभर रहे थे.रंभा के होंठो पे खेलती शोख मुस्कान शाह को लुभा रही थी.

शाह का दिल अब अपनी महबूबा को नंगी देखने का था.वो उसे देखता हुआ आगे बढ़ा & उसके पीच्चे आया & उसकी ज़ुल्फो को उसके बाए कंधे के उपर से आगे की ओर कर दिया.उसकी उंगली रंभा की उपरी पीठ पे घूमने लगी तो रंभा ने मस्ती मे आँखे बंद कर आह भरी.शाह की उंगली पीठ के नंगे हिस्से पे घूमते हुए टॉप के बीचोबीच आ फाँसी & उसे नीचे खींचने लगी.रंभा उसकी इस हरकत से आहत हो आगे होने लगी तो शाह ने टॉप मे उंगली फँसाए हुए ही उसे पीछे खींचा & फिर उंगली नीचे की तो टॉप थोड़ा नीचे सरक गया.

शाह ने बाई बाँह मे उसकी कमर को लप्पेट उसे अपनी छाती से सटा लिया & उसके दाए कंधे & गर्देन को चूमने लगा.उपर से उसे रंभा का हल्का क्लीवेज दिख रहा था & ये बात उसके लंड को फनकाने के लिए काफ़ी थी.लंड ने हरकत की & रंभा की कमर को छुआ तो उसकी चूत भी कसमसने लगी.शाह के दोनो हाथो ने उसकी बाहो को उठा अपने गले मे डाला & फिर उनके गुदाज़ अन्द्रुनि हिस्सो को सहलाने लगे.रंभा ने शाह के दाए गाल को चूमा & फिर उसके बालो मे उंगलिया घूमते हुए उसके होंठो को चूमने लगी.शाह की उंगलिया उसकी बाँह को सहलाते हुए उसे सिहरा रही थी.

शाह के हाथ उसकी बाँह से उसकी चिकनी बगलो पे आए तो उसे हल्की गुदगुदी महसूस हुई & वो बड़े नशीले अंदाज़ मे हंस दी & अपनी बाहे नीचे कर ली.शाह के हाथ उसकी बगलो से निकल उसके जिस्म की बगल मे आ गये थे & टॉप को दोनो तरफ से पकड़ नीचे खींच रहे थे.रंभा का दिल धड़क उठा,अब शाह उसे अपनी दी हुई ब्रा मे देखेगा..कैसा लगेगा उसे?..क्या वो उतनी ही हसीन दिखेगी जितनी शाह ने ब्रा खरीदते वक़्त सोचा होगा?..क्या उसकी छातिया उसे & लुभावनी लगेंगी?..क्या सोच रही थी वो?दिल के दूसरे कोने से 1 दूसरी आवाज़ उठी..शाह उसके लिए बस 1 खिलोना था & उसके लिए ऐसी बातें!..हां तो क्या हुआ.. पहली आवाज़ ने जवाब दिया..ये सब 1 खेल था & ये सोचना भी उसी खेल का हिस्सा!

शाह ने उसके टॉप को कमर तक खींचा & फिर नीचे बैठ टॉप को उसकी जाँघो &टाँगो से सरकाते हुए उसके जिस्म से अलग कर दिया.शाह उसकी जीन्स उतार उसे पूरी लाइनाये मे 1 साथ देखना चाहता था.उसके होंठ रंभा की मांसल कमर को चूम रहे थे & उसके चिकने पेट पे उसके बेसब्र हाथ घूम रहे थे.

रंभा अपने बालो से खेलती आहे भर रही थी.शाह उसकी कमर को दबाते हुए उसकी जीन्स के उपर से ही उसकी गंद को चूम रहा था,”,बड़ी मस्त गंद है तुम्हारी!”,उसने उसकी फांको को दबाते हुए उसकी कमर पकड़ उसे अपनी ओर घुमाया & उसके पेट को चूमने लगा.

“ऐसी क्या बता है उसमे?..ऊहह..सभी की ऐसी ही होती है..ओवववव….!”,उसके पेट को चूमते हुए शाह ने उसकी नाभि मे जीभ उतरी थी & फिर उसके निचले हिस्से की चमड़ी को दन्तो से बड़े हल्के से काटा था.

“तुम्हे क्या पता जानेमन कितनी मस्तानी गंद है तुम्हारी..मेरी जगह आओगी तब समझोगी.”,शाह ने उसकी जीन्स के बटन कोखोला & उसे नीचे सरकाया.झीने लेस मे उसकी गीली चूत उसे दिखी तो पाजामा मे उसका लंड बाहर आने को कुलबुलाने लगा.

“उउम्म्म्म..जानती हू आप मर्दो को..बस अपने मतलब के लिए झूठी तारीफ करते हैं!”,रंभा बारी-2 से दोनो टाँगे उठा जीन्स को उतारने मे शाह की मदद कर रही थी.शाह ने जीन्स को उतार के उच्छल दिया & खड़ा हो रंभा को देखने लगा.

लेस के ट्रॅन्स्परेंट ब्रा मे उसके गुलाबी,किशमिश के दानो सरीखे कड़े निपल्स साफ दिख रहे थे.ब्रा के उपर से उसकी आधी छातियाँ नुमाया थी & उसकी तेज़ धड़कनो की कहानी कह रही थी.उसका सपाट पेट भी उसकी उलझी सांसो से उपर-नीचे हो रहा था & उसके नीचे उसकी झीनी पॅंटी से उसकी गीली चूत की दरार शाह को सॉफ दिख रही थी.शाह उसके गिर्द घूम उसे हर अंदाज़ से देखने लगा.रंभा के पीच्चे आ उसने उसकी ज़ुल्फो को उठा की आगे किया & उसकी लगभग नंगी पीठ को देखा.गोरी मखमली पीठ से नज़र नीचे फिसली तो पॅंटी के उपर पीठ के दोनो तरफ उसे 2 हल्के गड्ढे नज़र आए.शाह उन्हे देख जोश से पागल हो गया.रंभा की गोरी गंद & उसकी दरार भी पॅंटी के झीने लेस से सॉफ नज़र आ रहे थे.

“झूठ नही कह रहा,मेरी जान.सच 1 पल के लिए मर्द बन के उसकी निगाहो से अपने हुस्न को देखा तब मेरा हाल समझोगी!”,शाह अपने सीने पे बेचैनी से हाथ फिरा रहा था.

“अच्छा-2!..मान गयी आपकी बात..अब बस देखते ही रहेंगे क्या!”,रंभा ने इस शोख अंदाज़ मे उसे देख के ताना मारा कि शाह का जोश उसके सर चढ़ गया.वो आगे बढ़ा & रंभा को बाहो मे भर के दीवानो की तरह चूमते हुए बिस्तर की ओर गया & उसे लिए-दिए उसपे गिर गया.उसके गर्म लब रंभा के चेहरे & ब्रा से बाहर झाँकती चूचियो के हिस्सो पे घूमने लगे.रंभा उसके लंड को अपनी चूत पे दबा महसुसू करती उसकी ज़ुल्फो से खेलती आहे भरने लगी.उसने नज़रे घुमाके कमरे को देखा,वाहा की हल्की रोशनी,खामोशी मे गूँजती उनकी मस्तानी आवाज़ें माहौल को बहुत रोमानी बना रही थी & उसका उसपे बहुत असर हो रहा था.

महादेव शाह रंभा के नंगे कंधो & उपरी,गुदाज़ बाहो को चूम रहा था & अपनी कमर हिला लंड को चूत पे दबा रहा था.रंभा मस्ती मे चूर आहे भर रही थी.शाह उसके सीने से नीचे उसके पेट पे आया & फिर उसकी मोटी जाँघो को चूमने लगा.उसके बेसब्र हाथ जाँघो की कोमलता महसूस करते उनपे घूम रहे थे.उसने रंभा की कमर मे हाथ डाल उसे थोड़ा बेदर्दी से पलटा.

"आउच....!",रंभा कराही पर शाह उस से बेख़बर उसकी पिच्छली जाँघो को चूम रहा था.उसके हाथ तो रंभा की सुडोल टाँगो को सहलाते नही थक रहे थे.

"आहह..!",रंभा फिर करही.शाह उसकी जाँघो को काट रहा था,"..उफफफ्फ़..क्या कर रहे हैं?..ओईइ..काट क्यू रहे हैं?",शाह की टांग रंभा के सर के तरफ थी & रंभा ने मौका पाते ही अपना हाथ उसके पाजामे मे घुसा दिया था.

"जानेमन,तुम हो ही इतनी रसीली की जी करता है तुम्हे खा जाऊं!" ,शाह दोबारा उसकी जाँघो को अपने दन्तो से छेड़ने लगा & रंभा ने उसका पाजामा ढीला कर उसके लंड को दबोच लिया.

"अब रसीला तो आपका भी है,मैं तो नही खाती इसे!",रंभा ने लंड को हाथ मे पकड़ खींचा तो शाह ने बिस्तर पे थोडा सरकते हुए लंड को उसके चेहरे के करीब कर दिया,"कहिए तो खा लू?",रंभा ने शाह के लंड की फॉरेस्किन को दन्तो मे पकड़ बहुत हौले से खींचा.

"आहह..!",शाह मज़े मे आँखे बंद कर कराहा,"..तुम किस चीज़ की बात कर रही हो,डार्लिंग?..ज़रा उसका नाम भी तो लो.",दोनो अब करवट से 1 दूसरे के नाज़ुक अंगो की तरफ मुँह किए लेते थे.शाह ने नीचे अपनी महबूबा के चेहरे को देखते हुए सवाल पुचछा.

"उन..हूँ..",रंभा ने उसकी झांतो मे मुँह च्छूपा लिया,"..मुझे शर्म आती है.",वो उसके लंड से खेल रही थी,उसकी झांतो मे उसने अपना चेहरा दफ़्न किया हुआ था & फिर भी शर्म की बात कर रही थी.शाह उसकी इस अदा पे जोश से पागल हो गया.

"बोलो ना जानेमन!",उसने उसकी पॅंटी नीचे खींची & उसकी गंद की बाई फाँक को काटने लगा.

"उन..हूँ..ओवववव..!",शाह के दंटो की हर्कतो से वो आहत हो गयी.

"जब तक नही बोलॉगी मैं काटता रहूँगा.",शाह उसकी मोटी गंद के माँस को मुँह मे भरे जा रहा था.

"उन्न्ह..लंड..!",रंभा ने बहुत धीरे से,शाह की झांतो मे मुँह च्छूपा के कहा & फिर उसके अंडे चूम लिए.शाह ने जोश मे भर उसकी पॅंटी पूरी नीचे खींच दी & फिर उसकी जंघे फैला उसकी गीली चूत अपने सामने की.

"पूरी बात बोलो,जान.",उसने उसके गीलेपान को जीभ से चटा.

"आपके लंड को खा लू मैं..ऊहह...!",रंभा उसकी ज़ुबान के चूत मे घुसने से मस्त हो उठी.उसके जिस्म मे सनसनाहट होने लगी थी.

"खा लो मेरी जान!",शाह ने उसे घुमा के सीधा लिटाया & उसके मुँह मे लंड उतरते हुए उसकी चूत चाटने लगा,"..तुम्हारा ही है ये लंड,जो मर्ज़ी करो इसके साथ!..& मैं तुम्हारी रसीली चूत को खाउन्गा..देखो कितना रस बहा रही है ये!..क्या बात है रंभा,ये इतनी गीली क्यू हो रही है?",शाह ने उसके दाने को अपनी ज़ुबान से & उसके दिल को अपनी बात से छेड़ा.

"आपके लंड की हसरत मे आँसू बहा रही है,सरकार.",रंभा ने इस अदा से जवाब दिया की शाह खुशी से भर गया & कमर हिला उसके मुँह को चोदने लगा.

"उननग्घह..ओफ्फो..!",रंभा ने मुँह से लंड को निकाल दिया,"आननह...इतना बड़ा है आप...का ..है......लंड & आप इसे ..उफफफफफफ्फ़.....मेरे मुँह मे भर रहे हैं..मारना चाहते हैं मुझे क्या..हाईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई..!",शाह की ज़ुबान से आहत हो रंभा ने झाड़ते हुए उस से शिकायत की.शाह ने उसकी चूत से बहता सारा रस चॅटा & फ़ौरन उसके उपर से उतार घूम के उसके साथ लेट गया.

"क्या बात करती हो!तुम तो मेरी जान हो,मेरी रानी!..तुम्हारी जान लेने की सोच सकता हू भला.क्या करू..तुम्हारी रसीली चूत & नशीली ज़ुबान ने इसे..",उसने रंभा के हाथ मे अपना लंड दे दिया,"..मस्ती मे बेसब्र कर दिया था."

"बहुत मस्ती चढ़ती है इसे..अभी इसे ठीक करती हू!",रंभा ने अपनी ज़ुबान निकली तो शाह ने भी जीभ निकाल दी & दोनो आपस मे जीभ लड़ने लगे.रंभा बहुत तेज़ी से शाह के लंड को कस के जकड़े हुए हिला रही थी.शाह ने उसके ब्रा को नीचे किया & दाए हाथ से उसकी छातिया दबाने लगा.रंभा का हाथ उसके लंड को झड़ने के बहुत करीब ले जा चुका था & वो अभी ऐसा नही चाहता था.उसने कुच्छ देर तक छातियो को दबाने के बाद हाथ उनसे हटा नीचे ले जा रंभा के हाथ को लंड से अलग किया & फिर उसे बाहो मे भर ब्रा को उसके जिस्म से अलग कर दिया.

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क्रमशः.......

JAAL paart--86

gataank se aage......

1.55 pe Rambha 5-star Hotel Columbus ke luxury suite ke darwaze ko khol andar dakhil ho rahi thi.usne abhi bhi savere vala coat & gehri nili jeans pehni thi magar unke neeche usne apni bra & panty utar aashiq ke tohfe ko apne jism pe saja liya tha.

Rambha suite me dakhil hui & sofe pe 1pna bag rakh bedroom me gayi.vaha madhham roshni thi & khushbu vali mombattiya jal rahi thi,mahaul bada hi romani tha,”aao meri jaan.”,uski aahat sun kamre ki khidki ke paas dressing gown pehne khada Mahdev Shah ghuma & 1 dor khinch parde ko gira diya.ab us kamre ka bahar ki duniya se koi sarokar nahi tha.

Shah uske karib aaya & dono 1 dusre se lipat gaye & chumne lage.dono 1 dusre ko aise chum rahe the jaise barso baad mile ho jabki bas kuchh hi ghante hue the unki pichhli mulakat ko.shah ne chumte hue rambha ke coat ke button khol use uske kandho se neeche farsh pe sarka diya.rambha bhi uske gown ki belt khol rahi thi.kuchh hi pal baad rshah uske strapless tube top se numaya gore kandho ko sehlata uski zuban se apni zuban lada raha tha & rambha uske nange seene ke baalo me hath fira rahi thi.

Rambha ke hath shah ke seene se leke uske pet tak aate & fir peechhe uski kamar se hote hue pith tak jate,jaha se vo shah ke sar pe pahunch uske safed baalo ko khinchne lagte.shah ne uski kamar ko apni giraft me kasa & apni zuban uske munh me ghusa ke andar ghumai to rambha ke jism me bijli daud gayi.shah ki mazbut baaho me use fir vahi masti mehsus hone lagi thi.

Shah ab uski gand daba raha tha.kasi jeans me uski chaudi gand dekhte hi uska josh badh gaya tha & ab uska izhar vo apne besabr hatho ke zariye kar raha tha.rambha gand ke masalne se chihunk uthi thi & ab sile labo ke paar bhi uski aahe bahar aa rahi thi.usne shah ko baaho me bhar uski pith ko nocha & apni zuban se uski zuban ko apne munh se bahar nikala & fir uske munh me apni jibh ghumane lagi.

Kuchh palo baad shah ne uske labo se apne lab juda kiya & uski gardan chumne laga.rambha ke jism ki khushbu use madhosh kar rahi thi.vo uski gardan ko hotho se kaatne laga tha & rambha uski is harkat se chhatpatane lagi thi.

“ohhhhhhh..chhodiye bhi!”,usne shokhi se use pare dhakela to shah use dekhne laga.sleeveless tube top ke upar se uski dhadakti chhatiyo ka bahut halka hissa dikh raha tha.kase top & jeans me jism ke katav bade dilkash andaz me ubhar rahe the.rambha ke hotho pe khelti shokh muskan shah ko lubha rahi thi.

shah ka dil ab apni mehbooba ko nangi dekhne ka tha.vo use dekhta hua aage badha & uske peechhe aaya & uski zulfo ko uske baye kandhe ke upar se aage ki or kar diya.uski ungli rambha ki upri pith pe ghumne lagi to rambha ne masti me anakhe band kar aah bhari.shah ki ungli pith ke nange hisse pe ghumte hue top ke beechobeech aa phansi & use neeche khinchne lagi.rambha uski is harkat se aahat ho aage hone lagi to shah ne top me ungli phansaye hue hi use peechhe khincha & fir ungli neeche ki to top thoda neeche sarak gaya.

Shah ne bayi banh me uski kamar ko lappet use apni chhati se sata liya & uske daye kandhe & garden ko chumne laga.upar se use rambha ka halka cleavage dikh raha tha & ye baat uske lund ko phankaane ke liye kafi thi.lund ne harkat ki & rambha ki kamar ko chhua to uski chut bhi kasamasane lagi.shah ke dono hath one uski baaho ko utha apne gale me dala & fir unke gudaz andruni hisso ko sehlane lage.rambha ne shah ked aye gaal ko chuma & fir uske baalo me ungliya ghumate hue uske htoho koc humne lagi.shah ki ungliya uski banh ko sehlate hue use sihra rahi thi.

Shah ke hath uski banh se uski chikni baglo pea aye to use halki gudgudi mehsus hui & vo bade nashile andaz me hans di & apni baahe neeche kar li.shah ke hath uski baglo se nikal uske jism ki bagal me aa gaye the & top ko dono taraf se pakad neeche khinch rahe the.rambha ka dil dhakdak utha,ab shah use apni di hui bra me dekhega..kaisa lagega use?..kya vo utni hi haseen dikhegi jitni shah ne bra kharidte waqt socha hoga?..kya uski chhatiya use & lubhavani lagengi?..kya soch rahi thi vo?dil ke dusre kone se 1 dusri aavaz uthi..shah uske liye bas 1 khilona tha & uske liye aisi baaten!..haan to kya hua.. pehli aavz ne jawab diya..ye sab 1 khel tha & ye sochna bhi usi khel ka hissa!

Shah ne uske top ko kamar tak khincha & fir neeche baith top ko uski jangho &tango se sarkate hue uske jism se laga kar diya.shah uski jeans utar use puri lingerie me 1 sath dekhna chahta tha.uske honth rambha ki mansal kamar ko chum rahe the & uske chikne pet pe uske besabr hath ghum rahe the.

Rambha apne baalo se khelti aahe bhar rahi thi.shah uski kamar ko dabate hue uski jeans ke uapr se hi uski gand ko chum raha tha,”,badi mast gand hai tumhari!”,usne uski fanko ko dabate hue uski kamar pakd use apni or ghumaya & uske pet ko chumne laga.

“aisi kya bata hai usme?..oohhhhhh..sabhi ki aisi hi hoti hai..owwww….!”,uske pet ko chumte hue shah ne uski nabhi me jibh utari thi & fir uske nichle hisse ki chamdi ko danto se bade halke se kata tha.

“tumhe kya pata janeman kitni mastani gand hai tumahri..meri jagah aaogi tab samajhogi.”,shah ne uski jeans ke button kokhola & use neche sarkaya.jhine lace me uski gili chut use dikhi to pajama me uska lund bahar aane ko kulbulane laga.

“uummmm..janti hu aap mardo ko..bas apne matlab ke liye jhuthi tariff karti hain!”,rambha bari-2 se dono tange utha jeans ko utaarne me shah ki madad kar rahi thi.shah ne jeans ko utar ke uchhal diya & khada ho rambha ko dekhne laga.

Lace ke transparent bra me uske gulabi,kishmish ke dano sarikhe kade nipples saaf dikh rahe the.bra ke upar se uski aadhi chhatiya numaya thi & uski tez dhadkano ki kahani keh rahi thi.uska sapat pet bhi uski uljhi sanso se upar-neeche ho raha tha & uske neeche uski jhini panty se uski gili chut ki darar shah ko saaf dikh rahi thi.shah uske gird ghum use har andaz se dekhne laga.rambha ke peechhe aa usne uski zulfo ko utha kea age kiya & uski lagbhag nangi pith ko dekha.gori makhmali pith se nazar neeche fisli to panty ke upar eedh ke dono taraf use 2 halke gaddhe nazar aaye.shah unhe dekh josh se pagal ho gaya.rambha ki gori gand & uski darar bhi panty ke jhine lace se saaf nazar aa rahe the.

“jhuth nahi kah raha,meri jaan.sach 1 pal ke liye mard ban ke uski nigaho se apne husn ko dekha tab mera haal samjhogi!”,shah apne seene pe bechaini se hath fira raha tha.

“achha-2!..maan gayi aapki baat..ab bas dekhte hi rahenge kya!”,rambha ne is shokh andaz me use dekh ke tana mara ki shah ka josh uske sar chad gaya.vo aage badha & rambha ko baaho me bhar ke dewano ki tarah chumte hue bistar ki or gaya & use liye-diye uspe gir gaya.uske garm lab rambha ke chehre & bra se bahar jhankti choochiyo ke hisso pe ghumne lage.rambha uske lund ko apni chut pe daba mehsusu karti uski zulfo se khelti aahe bharne lagi.usne nazre ghumake kamre ko dekha,vaha ki halki roshni,khamoshi me gunjti unki mastani aavazen mahaul ko bahut romani bana rahi thi & uska uspe bahut asar ho raha tha.

Mahadev Shah rambha ke nange kandho & upri,gudaz baaho ko chum raha tha & apni kamar hila lund ko chut pe daba raha tha.rambha masti me chur aahe bhar rahi thi.shah uske seene se neeche uske pet pe aaya & fr uski moti jangho ko chumne laga.uske besabr hath jangho ki komalta mehsus karte unpe ghum rahe the.usne rambha ki kamar me hath daal use thoda bedardi se palta.

"ouch....!",rambha karahi par shah us se bekhabar uski pichhli jangho ko chum raha tha.uske hath to rambha ki sudol tango ko sehlate nahi thak rahe the.

"aahhhh..!",rambha fir karahi.shah uski jangho ko kaat raha tha,"..uffff..kya kar rahe hain?..ouiiii..kaat kyu rahe hain?",shah ki tang rambha ke sar ke taraf thi & rambha ne mauka pate hi apna hath uske pajame me ghusa diya tha.

"janeman,tum ho hi itni rasili ki ji karta hai tumhe kha jaoon!" ,shah dobara uski jangho ko apne danto se chhedne laga & rambha ne uska pajama dhila kar uske lund ko daboch liya.

"ab rasila to aapka bhi hai,main to nahi khati ise!",rambha ne lund ko hath me pakad khincha to shah ne bistar pe thoda sarakte hue lund ko uske chehre ke karib kar diya,"kahiye to kha lu?",rambha ne shah ke lund ki foreskin ko danto me pakad bahut haule se khincha.

"aahhhhh..!",shah maze me aankhe band kar karaha,"..tum ks chiz ki baat kar rahi ho,darling?..zara uska naam bhi to lo.",dono ab karwat se 1 dusre ke nazuk ango ki taraf munh kiye lete the.shah ne neeche apni mehbooba ke chehre ko dekhte hue sawal puchha.

"un..hun..",rambha ne uski jhanto me munh chhupa liya,"..mujhe sharm aati hai.",vo uske lund se khel rahi thi,uski jhanto me usne apna chehra dafn kiya hua tha & fir bhi sharm ki baat kar rahi thi.shah uski is ada pe josh se pagal ho gaya.

"bolo na janeman!",usne uski panty neeche khinchi & uski gand ki bayi fank ko kaatne laga.

"un..hun..owwww..!",shah ke danto ki harkato se vo ahat ho gayi.

"jab tak nahi bologi main kaatata rahunga.",shah uski moti gand ke mans ko munh me bhare ja raha ta.

"unnhhhhhh..lund..!",rambha ne bahut dhire se,shah ki jhanto me munh chhupa ke kaha & fir uske ande chum liye.shah ne josh me bhar uski panty puri neeche khinch di & fir uski janghe faila uski gili chut apne samne ki.

"puri baat bolo,jaan.",usne uske gilepan ko jibh se chata.

"aapke lund ko kha lu main..oohhhhhhh...!",rambha uski zuban ke chut me ghusne se mast ho uthi.uske jism me sansanahat hone lagi thi.

"kha lo meri jaan!",shah ne use ghuma ke seedha litaya & uske munh me lund utarte hue uski chut chatane laga,"..tumhara hi hai ye lund,jo marzi karo iske sath!..& main tumahri rasili chut ko khaunga..dekho kitna ras baha rahi hai ye!..kya baat hai rambha,ye itni gili kyu ho rahi hai?",shah ne uske dane ko apni zuban se & uske dil ko apni baat se chheda.

"aapke lund ki hasrat me aansu baha rahi hai,sarkar.",rambha ne is ada se jawab diya ki shah khushi se bhar gaya & kamar hila uske munh ko chodne laga.

"unngghhhh..offohh..!",rambha ne munh se lund ko nikal diya,"aannhhhh...itna bada hai aap...ka ..hai......lund & aap ise ..ufffffff.....mere munh me bhar rahe hain..marna chahte hain mujhe kya..haiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii..!",shah ki zuban se aahat ho rambha ne jhadte hue us se shikayat ki.shah ne uski chut se behta sara ras chata & fauran uske uapr se utar ghum ke uske sath let gaya.

"kya baat karti ho!tum to meri jaan ho,meri rani!..tumhari jaan lene ki soch sakta hu bhala.kya karu..tumhari rasili chut & nashili zuban ne ise..",usne rambha ke hath me apna lund de diya,"..masti me besabr kar diya tha."

"bahut masti chadhti hai ise..abhi ise thik karti hu!",rambha ne apni zuban nikali to shah ne bhi jibh nikal di & dono aaps me jibh ladane lage.rambha bahut tezi se shah ke lund ko kas ke jakde hue hila rahi thi.shah ne uske bra ko neeche kiya & daye hath se uski chhatiya dabane laga.rambha ka hath uske lund ko jhadne ke bahut karib le ja chuka tha & vo abhi aisa nahi chahta tha.usne kuchh der tak chhatiyo ko dabane ke baad hath unse hata neeche le ja rambha ke hath ko lund se alag kiya & fir use baaho me bhar bra ko uske jism se alag kar diya.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--87

गतान्क से आगे......

रंभा ने अपनी बाई टांग उसकी कमर पे चढ़ा दी & उसकी दाई टांग पे उपर से नीचे चलाते हुए अपनी बेचैनी का इज़हार करने लगी.शाह ने उसकी गंद से लेके छातियो तक हाथ फिराया & फिर उसे खुद से अलग कर बिस्तर से उतर के खड़ा हो गया.रंभा उसे सवालिया निगाहो से देखने लगी तो वो मुस्कुराते हुए झुका & उसे गोद मे उठा लिया.

"इसे उठा लो.",कमरे के कोने मे रखी 1 मेज़ पे रखी आइस-बेकेट मे ठंडी हो रही शॅंपेन की ओर उसने इशारा किया तो रंभा ने बॉटल उठा ली & फिर शाह के होंठ चूमने लगी.शाह उसे गॉस मे उठाए बाथरूम मे चला गया & खाली बाथटब मे उतरा.रंभा गोद से उतरते ही टब के फर्श पे घुटनो पे बैठ गयी & जब शाह टब मे खड़ा हुआ तो उसे बॉटल थमा दी.

"पुक्क्ककक..!",शॅंपेन का कॉर्क खुला तो रंभा ने हाथ बढ़ा के बॉटल अपने आशिक़ से ले ली & फिर उसके लंड को चूमने लगी.शाह कमर पे हाथ रखे उसे देख रहा था.रंभा ने बॉटल दाए हाथ मे ली & लंड के नीचे बाई हथेली जमा दी,फिर उसने बड़े धीरे से शॅंपेन की धार लंड पे डाली & उसके बाद उसके नीचे मुँह लगाके उसे पीने लगी.शाह तो खुशी से पागल हो गया.

"आपके जैसी ज़ालिम नही हू..",रंभा ने शोखी से नज़रे उपर की & शॅंपेन गिरने से रोका,"..लंड पसंद है तो उसे खा नही पी रही हू.",उसने दोबारा शराब की धार लंड पे डाली & 2-3 घूँट भरे.अंडे भी गीले हो गये थे & रंभा ने उनसे भी शराब चाट ली.शाह उसकी इस मस्त हरकत से गर्म हो गया था.उसने फ़ौरन उसे उपर उठाया & बाहो मे भर चूम लिया.

उसने अपनी महबूबा से बॉटल ले ली & शराब उसकी चूचियो पे उदेलने लगा.उसने अपना मुँह रंभा की चूचियो के नीचे लगाया & उसके निपल्स से झरने सी गिरती शराब को पी उसके जिस्म के नशे मे खोने लगा.रंभा ने जिस्म पे गिरती ठंडी शराब से सिहर उठी थी,शाह की लपलपाति ज़ुबान उसकी चूचियो से शराब की बूंदे सॉफ कर रही थी & उसकी चूत मे वो वही प्यारी कसमसाहट महसूस करने लगी थी.

शाह ने बॉटल को उसकी चूचियो के बीच लगाया & उस वादी से शराब को उसके पेट पे गिराने लगा.शॅंपेन की सुनेहरी धार रंभा के पेट के बीचो बीच उसकी नाभि से टकराती & उसके ठीक नीचे लगी शाह की ज़ुबान पे गिरती.रंभा शाह के रोमानी अंदाज़ की कायल हो गयी थी.वो उसका दुश्मन था मगर फिर भी वो उसके जिस्म की दीवानी हो गयी थी.रंभा ने बेचैनी मे अपनी चूचियाँ अपने ही हाथो से दबानी शुरू कर दी.उसका जिस्म अब शाह के लंड के लिए तड़पने लगा था.

महादेव शाह ने अपना हाथ नाभि के नीचे से हटाया & अपना मुँह & नीचे किया.शॅंपेन की धार अब नाभि के गड्ढे मे थोड़ा सा अंदर जाती & फिर बाहर आ सीधा रंभा की चूत पे गिरती जहा शाह की लपलपाति ज़ुबान उसे सुड़ाक रही थी.रंभा चूत पे ठंडी शॅंपेन & आशिक़ की आतुर ज़ुबान की हर्कतो से पागल हो आहे भरने लगी.उसकी चूत की कसक अब उसके सर चढ़ गयी थी.उसे अब कुच्छ होश नही था सिवाय इसके की उसका आशिक़ उसके करीब था & उसका लंड उसे चाहिए था.

"आननह..!",रंभा अपना सर उपर उठाए अपने बालो को बेचैनी से नोचती चीख रही थी.शाह की लपलपाति ज़ुबान ने उसे फिर से झाड़वा दिया था.शाह ने फ़ौरन बॉटल टब के फर्श पे रखी & उसकी कमर को बाहो मे कस उसके पेट को चूमने लगा.रंभा देर तक झड़ने की शिद्दत से बहाल हो सुबक्ती शाह की बाहो के घेरे मे खड़ी रही.

जब शाह ने देखा कि रंभा संभाल चुकी है तो उसने उसकी कमर पकड़ उसे घुमाया & उसकी गंद पे अपने हाथ बड़ी गर्मजोशी से फेरने लगा.उसने रंभा के पीछे जा उसे आगे झुकाया तो रंभा ने झुक के टब को थाम लिया.झुकने से रंभा की पूर्कशिष गंद & उभर आई & शाह का लंड उस गुदाज़ अंग को देख फंफनाने लगा.

शाह ने शॅंपेन की बॉटल उठाई & उसकी धार को रंभा की गंद की दरार पे गिराया & अपनी ज़ुबान गंद के छेद पे लगा के उसे पीने लगा.ज़ुबान की नोक गंद के छेद को लपलपाते हुए छेद रही थी & रंभा टब को थामे कसमसाते हुए आहे भर रही थी.

शाह ने बॉटल को नीचे रखा & रंभा की गंद के छेद को ज़ुबान से गीला करने लगा.रंभा उसकी नियत भाँप गयी & हटने लगी तो शाह ने उसे मज़बूती से पकड़ लिया,"कहा जा रही हो?"

"नही,आप बहुत ज़ालिम हैं.मुझे वाहा करेंगे.",रंभा ने फिर से छूयी-मुई का नाटक किया.

"कहा करूँगा मेरी जान?",शाह उसकी गंद की फांको को बेदर्दी से मसलते हुए उसकी गंद को चाट रहा था,"..उसका नाम लो जल्दी!",उसने उसकी गंद मे उंगली बहुत अंदर तक घुसा दी.

"ओईईईईईईई..गंद मेरी गंद मे करेंगे आप..ओह्ह्ह्ह....!"

"वो तो करूँगा.",शाह ने उसे घुटनो पे झुका दया & उसकी गंद के छेद पे लंड टीका दिया.उसने टब के किनारे रखे बब्बल सोपा की बॉटल को टब मे उदेला & फॉसट खोल दिया तो टब मे पानी भरने लगा.

"नही..बहुत दर्द होता है..प्लीज़ मत करिए..आअन्न्न्नह.....!",शाह ने उसकी अनसुनी करते हुए लंड को अंदर घुसा दिया.शर्ब मे भीगी उसकी गंद उसे आज & भी नशीली लग रही थी.रंभा टब को थामे छॅट्पाटा रही थी.शाह का लंड बेहद मोटा था & उसे थोड़ा दर्द हो रहा था.उसकी गंद की सिकुदा शाह के लंड को दबोच उसे भी पागल कर रही थी.उसने उसकी कमर पकड़ उसकी गंद पे ज़ोरदार चपत लगानी शुरू कर दी.

"तड़क्क्क....!",चपत पे जब रंभा की गंद थरथराती & वो हिस्सा लाल हो जाता तो ये देख शाह & जोश मे भर जाता & अगला धक्का & ज़ोर से लगता.

"हाईईईईईईईईईईई..मैं....मार..गाइिईईईईईईईईईई...है..राआंम्म्ममम..महादेव मेरी गंद फॅट जाएगी..ओईईईईईई..माआआआआआअ..!",जितना दर्द हो नही रहा था रंभा उतना होने का नाटक करती चीख रही थी.शाह उसकी गंद की दोनो फांको को अपने हाथो की मार से लाल किए दे रहा था.रंभा का मस्ती से बुरा हाल था.उसकी चूत पिच्छली रात की ही तरह गंद मारने से और कसक से भर उठी थी.

"कैसे फटेगी मेरी रानी!",शाह आगे झुका & उसकी पीठ से सताते हुए उसकी चूचियो को हाथो मे भर उसके बाए कंधे के उपर से उसके गाल चूमने लगा,"..तुमसे ज़्यादा मुझे प्यारी है ये गंद..देखो कितने प्यार से मार रहा हू."

"ऊन्न्न्नह..हटो ज़ालिम!",रंभा ने अपने चेहरे से उसका चेहरा झटका,"..आपको बस अपनी ही पड़ी रहती है..हाईईईईईईई..कितना दर्द होता है..आप क्या जाने!"

"और मज़ा?..मज़ा भी तो उतना ही आता है..उस से भी कही ज़्यादा..है की नही?..मेरी कसम सच-2 कहना तुम्हे बहुत मज़ा आता है या नही गंद मरवाने मे.",उसने उसके बाए कान को काटा & दोनो चूचियो को बहुत ज़ोर से दबाया.

"आन्न्न्नह..हााआआन्न्‍ननणणन्....बहुत मज़ा आता है..मगर ये सिर्फ़ आपकी मिल्कियत है..आपके लिए मैं कोई भी दर्द सह सकती हू....ओह..महादेव..क्या हो रहा है मुझे?!..हाईईईईईईईईईईईईईई....!",सफाई से झूठ बोलती रंभा उसकी बाहो मे क़ैद च्चटपटाने लगी.वो झाड़ गयी थी & उसकी गंद ने लंड को & कस लिया था.गंद की कसावट & रंभा के प्यार के इज़हार ने शाह के जोश को चरम पे पहुँचा दिया & उसका लंड गंद मे वीर्य की फुआहरें छ्चोड़ने लगा.

बात्ट्च्ब मे पानी भर चुका था,महादेव शाह ने फॉसट बंद किया & फिर झुक के रंभा को बाहो मे भरा & उपर उठा के उसकी ज़ूलफे चूमने लगा.जब थोड़ी देर बाद लंड सिकुदा तो उसने उसे रंभा की गंद से बाहर खींचा & फिर टब मे उसे बाहो मे भरे बैठ गया.झाग भरे पानी मे रंभा उसकी टाँगो के बीच उसके सीने से लगी बैठी थी.शाह उसके दोनो कंधो से लेके उसके चेहरे के हर हिस्से को चूम रहा था.उसके हाथ रंभा के पूरे पेट & सीने पे घूम रहे थे.शाह साबुन के झाग को उसकी चूचियो पे मलने लगा तो रंभा मुस्कुराने लगी & अपने सीने की गोलाईयो पे चलते उसके हाथो के उपर अपने हाथ रख उन्हे दबाने लगी.

“उउम्म्म्म..जादू है आपके हाथो मे!”,उसने अपने दोनो घुटने मोड़ लिए थे,”काश मैं रोज़ इसी तरह आपके साथ नहा पाती!”,रंभा उसके बाए कंधे पे झुकी & उसके बाए गाल को चूम लिया.

“बहुत जल्द ऐसा मुमकिन होगा,रंभा.”,शाह उसके पेट को रगड़ रहा था,”मैने सब सोच लिया है.”

“क्या?!सच?”,रंभा खुशी से बोली.उसका दिल धड़क उठा था..क्या घिनोनी साज़िश सोची है इस आदमी ने समीर को रास्ते से हटाने की?..& क्या विजयंत मेहरा भी इसी की किसी साज़िश का शिकार था?

“हां,तुम्हारा बेवफा पति 1 हादसे का शिकार होगा.”,शाह के हाथ उसकी जाँघो पे घूमने लगे थे.रंभा का जिस्म खुद बा खुद थोड़ा पीछे हो गया था ताकि उसकी गंद शाह के लंड को & आचे तरीके से महसूस कर सके.

“हादसा?”

“हां,हमारे मुल्क की सड़कें जितनी खराब हैं,उतनी ही खराब हमलोगो की ड्राइविंग है.आए दिन सड़क हादसे होते रहते हैं.1 & होगा & हमारी राह का रोड़ा हमेशा के लिए रास्ते से हट जाएगा.”

“मगर कब & कैसे?”,शाह के हाथ उसके घुटनो से लेके चूत तक चल रहे थे & वो 1 बार फिर वही मस्ती महसूस कर रही थी.

“इसके लिए मुझे तुम्हारी मदद चाहिए.”,शाह के दाए हाथ की उंगली उसकी चूत से लगी तो रंभा ने टाँगे & फैला दी.

“हां2.बोलिए!”,उसके जिस्म की मस्ती बढ़ रही थी & साथ ही शाह की बातो से दिल की धड़कने भी.

“मुझे समीर के अपायंट्मेंट्स की जानकारी चाहिए ताकि मैं ये हादसा सही तरीके से प्लान कर सकु.मुझे किसी ऐसे वक़्त उसके साथ ये हादसा करवाना है जब वो अकेला या बहुत से बहुत ड्राइवर के साथ किसी खुले,सुनसान या फिर तेज़ ट्रॅफिक वाले रास्ते से जा रहा हो.”

“हूँ..ऊहह..!”,शाह की उंगलिया उसकी चूत मे घुस घूमने लगी थी,”ये हो जाएगा पर 1 बात कहनी है.”

“हां,बोलो.”,शाह का लंड 1 बार फिर तन गया था & रंभा की गंद मे चुभ रहा रहा था.

“आप ये काम अभी कुच्छ दिनो के बाद कीजिए.मानपुर वाले प्रॉजेक्ट का सरकारी टेंडर किसी भी दिन खुलने वाला है & वो ट्रस्ट ग्रूप को मिलना पक्का ही समझिए लेकिन अगर टेंडर खुलने से पहले समीर को कुच्छ होता है तो फिर वो टेंडर हमे मिलेगा,मुझे नही लगता.सरकार के लिए भी वो प्रॉजेक्ट बहुत अहम है & बिना मालिक की कंपनी को वो ये टेंडर कभी नही देना चाहेगी.हमारी रकम अगर सबसे कम भी होगी तो भी कुच्छ उलट-फेर कर वो टेंडर हमे नही दिया जाएगा & हमे बहुत नुकसान होगा.”

“वाह!ये तो तुमने बड़े पते की बात की है!”,शाह की उंगलिया & तेज़ी से उसकी चूत मे घूमने लगी तो रंभा आहे भरने लगी,”ठीक है.अब वक़्त तुम बतओगि & हादसा मैं करवाउन्गा.”

रंभा की चूत ने शाह की उंगलियो को जकड़ना शुरू किया तो उसका लंड उंगलियो की जगह लेने को मचल उठा.शाह ने उसकी सुनते हुएरंभा को अपने सीने से उठाया & आगे झुका दिया.रंभा आगे झुकी & अपनी गंद थोड़ी उठा दी.शाह ने दाए हाथ मे अपना लंड थामा & बाए को रंभा की जाँघ पे टीका अंगूठे से चूत की फाँक को थोडा खोलते हुए लंड के सूपदे को अंदर घुसा दिया.रंभा सूपदे के अंदर जाते ही पीछे झुकी & लंड को पूरा अंदर लेते हुए1 बार फिर अपने आशिक़ के सीने से लग गयी.

रंभा ने बात्ट्च्ब के किनरो पे हाथ जमा उनके सहारे कमर उचकानी शुरू कर दी.शाह का मोटा लंड उसकी चूत की दीवारो पे बुरी तरह रगड़ रहा था & उसके जिस्म मे मज़े का तूफान उठना शुरू हो गया था.शाह के हाथ उसकी चूचियो को दबा रहे थे,उसकी उंगलिया उसके निपल्स को मसल रही थी.ष्हा भी उसी की तरह मज़े से भरा था,रंभा का जिस्म उसे जन्नत की सैर करा रहा था & वो उसका भरपूर लुत्फ़ उठा रहा था.

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क्रमशः.......

JAAL paart--87

gataank se aage......

rambha ne apni bayi tang uski kamar pe chadha di & uski dayi tang pe upar se neeche chalate hue apni bechaini ka izhar karne lagi.shah ne uski gand se leke chhatiyo tak hath firaya & fir use khud se alag kar bistar se utar ke khada ho gaya.rambha use sawaliya nigaho se dekhne lagi to vo muskurate hue jhuka & use god me utha liya.

"ise utha lo.",kamre ke kone me rakhi 1 mez pe rakhi ice-becket me thandi ho rahi champagne ki or usne ishara kiya to rambha ne bottle utha li & fir shah ke honth chumne lagi.shah use gos me uthaye bathroom me chala gaya & khali bathtub me utara.rambha god se utarte hi tub ke farsh pe ghutno pe baith gayi & jab shah tub me khada hua to use bottle thama di.

"puckkkk..!",champagne ka cork khula to rambha ne hath badha ke bottle apne aashiq se le li & fir uske lund ko chumne lagi.shah kamar pe hath rakhe use dekh raha tha.rambha ne bottle daye hath me li & lund ke neeche bayi hatheli jama di,fir usne bade dhire se champagne ki dhaar lund pe dali & uske baad uske neechwe munh lagake use pine lagi.shah to khushi se pagal ho gaya.

"aapke jaise zalim nahi hu..",rambha ne shokhi se nazre upar ki & champagne giaran roka,"..lund pasand hai to use kha nahi pi rahi hu.",usne dobara sharab ki dhar lund pe dali & 2-3 ghunt bhare.ande bhi gile ho gaye the & rambha ne unse bhi sharab chaat li.shah uski is mast harkat se garm ho gaya tha.usne fauran use upar uthaya & baaho me bhar chum liya.

usne apni mehbooba se bottle le li & sharab uski chhatiyo pe udelne laga.usne apna munh rambha ki choochiyo ke neeche lagaya & uske nipples se jharne si girti sharab ko pi uske jism ke nashe me khone laga.rambha ne jism pe girti thandi sharab se sihar uthi thi,shah ki laplapati zuban uski chhatiyo se sharab ki boonde saaf kar rahi thi & uski chut me vo vahi pyari kasmasahat mehsus karne lagi thi.

shah ne bottle ko uski choochiyo ke beech lagaya & us vadi se sharab ko uske pet pe girane laga.champagne ki sunehari dhar rambha ke pet ke beecho beech uski nabhi se takrati & uske thik neeche lagi shah ki zuban pe girti.rambha shah ke romani andaz ki kayal ho gayi thi.vo uska dushman tha magar fir bhi vo uske jism ki deewani ho gayi thi.rambha ne bechaini me apni chhatiya apne hi hatho se dabani shuru kar di.uska jism ab shah ke lund ke liye tadapne laga tha.

Mahadev Shah ne apna hath nabhi ke neeche se hataya & apna munh & neeche kiya.champagne ki dhaar ab nabhi ke gaddhe me thoda sa andar jati & fir bahar aa seedha Rambha ki chut pe girti jaha shah ki laplapati zuban use sudak rahi thi.rambha chut pe thandi champagne & aashiq ki aatur zuban ki harkato se pagal ho aahe bharne lagi.uski chut ki kasak ab uske sar chadh gayi thi.use ab kuchh hosh nahi tha siway iske ki uska aashiq uske karib tha & uska lund use chahiye tha.

"aannhhhhhhhh..!",rambha apna sar upar uthaye apne baalo ko bechaini se nochti chikh rahi thi.shah ki laplapati zuban ne use fir se jhadwa diya tha.shah ne fauran bottle tub ke farsh pe rakhi & uski kamar ko baaho me kas uske pet ko chumne laga.rambha der tak jhadne ki shiddat se behaal ho subakti shah ki baaho ke ghere me khadi rahi.

jab shah ne dekha ki rambha sambhal chuki hai to usne uski kamar pakad use ghumaya & uski gand pe apne hath badi garmjoshi se pherne laga.usne rambha ke peechhe ja use aage jhukaya to rambha ne jhuk ke tub ko tham liya.jhukne se rambha ki purkashish gand & ubhar aayi & shah ka lund us gudaz ang ko dekh phanphanane laga.

shah ne champagne ki bottle uthayi & uski dhar ko rambha ki gand ki darar pe giraya & apni zuban gand ke chhed pe laga ke use pine laga.zuban ki nok gand ke chhed ko laplapate hue chhed rahi thi & rambha tub ko thame kasmasate hue aahe bhar rahi thi.

shah ne bottle ko neeche rakha & rambha ki gand ke chhed ko zuban se gila karne laga.rambha uski niyat bhanp gayi & hatne lagi to shah ne sue mazbuti se pakad liya,"kaha ja rahi ho?"

"nahi,aap bahut zalim hain.mujhe vaha karenge.",rambha ne fir se chhui-mui ka natak kiya.

"kaha karunga meri jaan?",shah uski gand ki fanko ko bedardi se maslate hue uski gand ko chat raha tha,"..uska naam lo jaldi!",usne uski gand me ungli bahut andar tak ghusa di.

"ouiiiiiiiiii..gand meri gand me karenge aap..ohhhh....!"

"vo to karunga.",shah ne use ghutno pe jhuka dya & uski gand ke chhed pe lund tika diya.usne tub ke kinare rakhe bubble sopa ki bottle ko tub me udela & faucet khol diya to tub me pani bharne laga.

"nahi..bahut dard hota hai..please mat kariye..AAANNNNHHHHHHHHHH.....!",shah ne uski ansuni karte hue lund ko andar ghusa diya.sharb me bhigi uski gand use aaj & bhi nashili lag rahi thi.rambha tub ko thame chhatpata rahi thi.shah ka lund behad mota tha & use thoda dard ho raha tha.uski gand ki sikuda shah ke lund ko daboch use bhi pagal kar rahi thi.usne uski kamar pakad uski gand pe zordar chapat lagani shuru kar di.

"tadakkk....!",chapat pe jab rambha ki gand thartharati & vo hissa laal ho jata to ye dekh shah & josh me bhar jata & agla dhakka & zor se lagata.

"HAIIIIIIIIIIII..MAIN....MAR..GAYIIIIIIIIIIIII...HAI..RAAAAMMMMMM..MAHADEV MERI GAND PHAT JAYEGI..OUIIIIIIIII..MAAAAAAAAAAAAA..!",jitna dard ho nahi raha tha rambha utna hone ka natak karti chikh rahi thi.shah uski gand ki dono phanko ko apne hatho ki maar se laal kiye de raha tha.rambha ka masti se bura haal tha.uski chut pichhli raat ki hi tarah gand marne se & kasak se bhar uthi thi.

"kaise phategi meri rani!",shah aage jhuka & uski pith se satate hue uski chhatiyo ko hatho me bhar uske baye kandhe ke upar se uske gaal chumne laga,"..tumse zyada mujhe pyari hai ye gand..dekho kitne pyar se maar raha hu."

"oonnnnhhhhh..hato zalim!",rambha ne apne chehre se uska chehra jhatka,"..aapko bas apni hi padi rehti hai..haiiiiiiii..kitna dard hota hai..aap kya jane!"

"& maza?..maza bhi to utna hi aata hai..us se bhi kahi zyada..hai ki nahi?..meri kasam sach-2 kehna tumhe bahut maza aata hai ya nahi gand marwane me.",usne uske baye kaan ko kata & dono chhatiyo ko bahut zor se dabaya.

"aannnnhhhhhhhhhhhh..haaaaaaaannnnnnn....bahut maza aata hai..magar ye sirf aapki milkiyat hai..aapke liye main ko bhi dard seh sakti hu....ohhhhhh..mahadev..kya ho raha hai mujhe?!..haiiiiiiiiiiiiiii....!",safai se jhuth bolti rambha uski baaho me qaid chhatpatane lagi.vo jhad gayi thi & uski gand ne lund ko & kas liya tha.gand ki kasavat & rambha ke pyar ke izhar ne shah ke josh ko charam pe pahuncha diya & uska lund gand me virya ki phuahren chhodne laga.

Bathtub me pani bhar chuka tha,Mahadev Shah ne faucet band kiya & fir jhuk ke Rambha ko baaho me bhara & upar utha ke uski zulfen chumne laga.jab thodi der baad lund sikuda to usne use rambha ki gand se bahar khincha & fir tub me use baaho me bhare baith gaya.jhag bhare pani me rambha uski tango ke beech uske seene se lagi baithi thi.shah uske dono kandho se leke uske chehre ke har hisse ko chum raha tha.uske hath rambha ke pure pet & seene pe ghum rahe the.shah sabun ke jhag ko uski chhatiyo pe malne laga to rambha muskurane lagi & apne seene ki golaiyon pe chalet uske hatho ke upar apne hath rakh unhe dabane lagi.

“uummmm..jadu hai aapke hatho me!”,usne apne dono ghutne mod liye the,”kash main roz isi tarah aapke sath naha pati!”,rambha uske baye kandhe pe jhuki & uske baye gaal ko chum liya.

“bahut jald aisa mumkin hoga,rambha.”,shah uske pet ko ragad raha tha,”maine sab soch liya hai.”

“kya?!sach?”,rambha khushi se boli.uska dil dhadak utha tha..kya ghinoni sazish sochi hai is aadmi ne Sameer ko raste se hatane ki?..& kya Vijayant Mehra bhi isi ki kisi sazish ka shikar tha?

“haan,tumhara bewafa pati 1 hadse ka shikar hoga.”,shah ke hath uski jangho pe ghumne lage the.rambha ka jism khud ba khud thoda peechhe ho gaya tha taki uski gand shah ke lund ko & ache tarike se mehsus kar sake.

“hadsa?”

“haan,huamre mulk ki sadken jitni kharab hain,utni hi kharab humlogo ki driving hai.aaye din sadak hadse hote rehte hain.1 & hoga & humari raah ka roda humehsa ke liye raste se hat jayega.”

“magar kab & kaise?”,shah ke hath uske ghutno se leke chut tak chal rahe the & vo 1 baar fir vahi masti mehsus kar rahi thi.

“iske liye mujhe tumhari madad chahiye.”,shah ke daye hath ki ungli uski chut se lagi to rambha ne tange & faila di.

“haan2.boliye!”,uske jism ki masti badh rahi thi & sath hi shah ki baato se dil ki dhadkane bhi.

“mujhe sameer ke appointments ki jankari chahiye taki main ye hadsa sahi tarike se plan kar saku.mujhe kisi aise waqt uske sath ye hadsa karwana hai jab vo akela ya bahut se bahut driver ke sath kisi khule,sunsan ya fir tez traffic vale raste se ja raha ho.”

“hun..oohhhh..!”,shah ki ungliya uski chut me ghus ghumne lagi thi,”ye ho jayega par 1 baat kehni hai.”

“haan,bolo.”,shah ka lund 1 baar fir tan gaya tha & rambha ki gand me chubh raha raha tha.

“aap ye kaam abhi kuchh dino ke baad kijiye.Manpur vale project ka sarkari tender kisi bhi din khulne vala hai & vo Trust Group ko milna pakka hi samajhiye lekin agar tender khulne se pehle Sameer ko kuchh hota hai to fir vo tender hume milega,mujhe nahi lagta.sarkar ke liye bhi vo project bahut aham hai & bina malik ki company ko vo ye tender kabhi nahi dena chahegi.humari rakam agar sabse kam bhi hogi to bhi kuchh ulat-fer kar vo tender hume nahi diya jayega & hume bahut nuksan hoga.”

“vaah!ye to tumne bade pate ki bata ki hai!”,shah ki ungliya & tezi se uski chut me ghumne lagi to rambha aahe bharne lagi,”thik hai.ab waqt tum bataogi & hadsa main karwaunga.”

Rambha ki chut ne shah ki ungliyo ko jakadna shuru kiya to uska lund ungliyo ki jagah lene ko machal utha.shah ne uski sunte huerambha ko apne seene se uthaya & aage jhuka diya.rambha aage jhuki & apni gand thodi utha di.shah ne daye hath me apna lund thama & baye ko rambha ki jangh pe tika anguthe se chut ki fank ko thoda kholte hue lund ke supade ko andar ghusa diya.rambha supade ke andar jate hi peechhe jhuki & lund ko pura andar lete hue1 baar fir apne aashiq ke seene se ad gayi.

Rambha ne bathtub ke kinaro pe hatah jama unke sahare kamar uchkani shuru kar di.shah ka mota lund uski chut ki deewaro pe buri tarah ragad raha tha & uske jism me maze ka toofan uthna shuru ho gaya tha.shah ke hath uski choochiyo ko daba rahe the,uski ungliya uske nipples ko masal rahi thi.shha bhi usi ki tarah maze se bhara tha,rambha ka jism use jannat ki asir kara raha tha & vo uska bharpur lutf utha raha tha.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--88

गतान्क से आगे......

रंभा ने अपनी बाहे पीछे ले जा शाह के गले मे डाली & उसके बाए कंधे पे अदाते हुए उसे चूमने लगी.उसकी ज़ुबान का अपने मुँह मे इस्तेक्बाल करते हुए शाह ने उसकी चूचियो को पकड़ के बहुत ज़ोर से खींचा.

“आन्न्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..ज़ालिम!”,रंभा ने उसके कान को काट लिया,”..इन्हे उखाड़ना चाहते हैं क्या?!”,शाह उसकी बात सुन हंस दिया & उसकी दाई बाँह को अपनी गर्दन मे डाल झुका & उसकी दाई छाती को मुँह मे भर चूसने लगा.बाथरूम मे रंभा की मस्तानी आहो का शोर भर गया.वो कमर हिलाए जा रही थी & उसके उपरी जिस्म मे कंपकंपी हो रही थी.उसका सीना खुद बा खुद शाह के मुँह की ओर उठ रहा था.रंभा की चूत की कशमकश अब अपने चरम पे पहुँच रही थी.उसकी पलकें नशे से बोझल हो गयी थी.वो बहुत तेज़ी से कमर हिलाए जा रही थी.वो मंज़िल के बहुत करीब थी & जल्द से जल्द वाहा पहुचना चाहती थी.

“ऊऊऊ..आहह....!”,उसने अपना जिस्म कमान की तरह मोड़ दिया & च्चटपटाने लगी.उसकी बंद पलके & चेहरा देख लगता था जैसे वो बेहोश होने वाली है.बेहोश नही पर बेख़बर तो वो थी हर बात से,यहा तक की अपने आशिक़ से भी.उसे बस अपने जिस्म मे फुट रहे मज़े का होश था.वो हवा मे उड़ रही थी & बहुत खुश थी.उसे क्या खबर थी की किस तरह उसकी चूत की शिद्दती कसावट से बहाल होने के बावजूद शाह ने खुद को झड़ने से रोका हुआ था.शाह के आंडो मे मीठा दर्द हो रहा था & वो भी बस झड़ना चाहता था लेकिन उसका दिल उसे रोक रहा था..बस थोड़ी देर &..उसके बाद ये मज़ा भी दोगुना हो जाएगा!

जब रंभा ने आँखे खोली तो पाया शाह उसके जिस्म को प्यार से सहलाते हुए उसकी ज़ूलफे चूम रहा था.उसका लंड वो अभी भी चूत मे महसूस कर रही थी पर वो कोई हरकत नही कर रहा था.रंभा के दिल मे शाह को शुक्रिया कहना चाहता था & उसने अपने सुर्ख लबो को उसके लबो से सटा के ये काम किया.शाह ने उसके होंठो को चूमते हुए उसकी जंघे पकड़ के उसे उपर उठाते हुए उसके लंड को उसकी चूत से निकाल लिया.रंभा को उसकी इस हरकत से हैरानी हुई..वो तो अभी झाड़ा भी नही था.

शाह टब से निकला & रंभा की बाँह थाम उसे भी निकाला & शवर के नीचे ले आया.बहते पानी के नीचे अपनी महबूबा के जिस्म से वो साबुन के झाग को साफ करने लगा तो उसने भी उसके साथ वही हरकत की.दोनो 1 दूसरे को चूमते हुए नहला रहे थे.शाह ने रंभा के जिस्म को साफ करने के बाद उसे अपने आगोश मे भर लिया.दोनो अपने-2 हसरत भरे हाथ 1 दूसरे की पीठ से लेके गंद तक चलाने लगे.रंभा के मुलायम पेट से सटा शाह का सख़्त लंड उसके जिस्म को मस्ती को कम नही होने दे रहा था.रंभा की चूत शाह के लंड के लिए फिर से कुलबुलाने लगी थी.रंभा भी उसके विर्य के गीलेपान को अपनी चूत मे महसूस करना चाहती थी.

और शाह ने जैसे उसके दिल की आवाज़ सुन ली.उसके चेहरे को हाथो मे थाम चूमते हुए उसने उसे शवर के नीचे से घूमते हुए दूसरी तरफ किया तो रंभा की गंद वॉशबेसिन से आ लगी.शाह ने किस तोड़ी & उसकी कमर थाम उसे बेसिन के बगल मे काउंटर पे बिठा दिया.रंभा ने उसका इरादा समझते हुए अपने पाई उपर काउंटर पे चढ़ा अपनी टाँगे खोल अपनी गुलाबी,गीली चूत उसके लंड के लिए पेश कर दी.शाह आगे बढ़ा & अगले ही पल उसका लंड रंभा की चूत मे था.दोनो 1 दूसरे से चिपत गये,उनकी ज़ुबाने आपस मे गुत्थमगुत्था हो गयी & 1 बार फिर उनकी चुदाई शुरू हो गयी.

शाह रंभा की भारी-भरकम जाँघो पे हाथ फिरते हुए धक्के लगा रहा था & उसके होंठ अभी भी रंभा के होंठो से सटे थे.रंभा भी उसकी पीठ से लेके गंद तक अपने हाथ चला रही थी.वो उसकी गंद पकड़ ऐसे दबाती मानो लंड को & भी अंदर जाने को कह रही हो.

शाह ने अपने बाई तरफ लगे बेसिन के शीशे मे खुद को देखा ,रंभा का अक्स उसमे ठीक से नज़र आ नही रहा था,मगर इतना दिख रहा था की शाह उसे चोद रहा है.शाह हमेशा की ही तरह खुद को 1 हसीन लड़की के जिस्म से खेलते देख & जोश से भर गया.उसके धक्के & तेज़ & गहरे हो गये.रंभा ने बाई बाँह उसकी गर्देन मे डाल उसे गले से लगा लिया & आहे भरती हुई दाई से उसकी पीठ & गंद खरोंछने लगी.शाह ने उसे चूमते हुए उसकी चूचिया मसली & फिर उसकी दाई टांग उठा अपने बाए कंधे पे रख उसकी चूत को थोडा और खोल दिया.

“ओह..आन्न्‍न्णनह........औउउउउउउईईईईईईईईईईईइ........हाआआऐययईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई.....!”,बाथरूम मे रंभा की आहें,जिस्मो की टकराने की आवाज़ & शाह की जद्दोजहद भरी आवाज़ें गूंजने लगी.दोनो प्रेमी 1 बार फिर अपने पसंदीदा खेल के अंजाम तक पहुँच रहे थे.शाह रंभा की जाँघ थामे उसके चेहरे को चूमते हुए अब दीवानो की तरह धक्के लगा रहा था.रंभा बैठी उसके धक्को से मस्त हुए जा रही थी..बस कुच्छ ही पल & फिर वही शिद्दती खुशनुमा एहसास..वो अनूठा एहसास जिसके जैसा & कोई एहसास नही!..दोनो ने 1 साथ लंबी आह भरी..रंभा की हसरत पूरी हो गयी थी..अपनी चूत मे वो शाह के वीर्य की गर्माहट महसूस कर झाड़ रही थी & शाह..शाह खुद को आईने मे देख रहा था..क्या नशा था इस लड़की के जिस्म मे?..वो दीवाना हो गया था इसका..ऐसा मज़ा..ये खुशी..उसने कभी किसी के साथ महसूस नही थी ही.पिच्छली रात से लेके अब तक वो इसके जिस्म को जम के भोग चुका था,2 बार इसकी गंद मार चुक्का था पर फिर भी उसका दिल नही भरा था..,”ओह..रंभा!जादू कर दिया है तुमने मुझपे!”,उसके होंठो पे दिल की बात आ ही गयी.रंभा ने उसे बाहो मे भरा & उसके माथे को चूम मन ही मन मुस्कुराने लगी..अब उसे पक्का यकीन था कि महादेव शाह उसके जाल मे पूरा फँस चुका है.

अगली सुबह रंभा ने नाश्ते की मेज़ पे पड़ा अख़बार देखा तो उसे पिच्छले दिन की देवेन की कही बात याद आ गयी.उसने जल्दी से अख़बार उठाया & उसके पन्ने पलटने लगी.आख़िरी पन्ने पे 1 इशतहार पे उसकी नज़र पड़ी & उसके होंठो पे मुस्कान फैल गयी.

मेरे अज़ीज़ दोस्तो-रोशन पेरषद,दानिश सुलेमान,बीसेसर गोबिंद & दयाल.मैं मुल्क वापस आ गया हू पर तुम लोगो का कोई पता नही चल रहा.मुझसे जल्दी मिलो-देवेन.

नीचे डेवाले के जिस पते पे मिलने का वक़्त & तारीख लिखी थी उस पते को पढ़ रंभा को हँसी आ गयी.उसने जिस इलाक़े मे देवेन को घर दिलवाया था वो था तो शहर के बीच पर कुच्छ दिन पहले वाहा पानी की काफ़ी किल्लत थी & उस वजह से वाहा कोई रहने को तैय्यार नही था.पर ऐसी जगह देवेन & विजयंत के लिए बिल्कुल सही थी.पानी की कमी से दोनो को शुरू मे थोड़ी तकलीफ़ तो हुई पर फिर वो इसके आदि हो गये.जिस घर का पता देवेन ने लिखा था वो उसके किराए के मकान के ठीक सामने का मकान था जो खाली पड़ा था.

गोआ की ही तरह अब देवेन विजयंत के साथ अपने घर से ही उस घर पे नज़र रखेगा & अगर दयाल वाहा आया तो फिर....रंभा को अपनी मा की याद आई & वो संजीदा हो गयी..कितना कम जानती थी वो मा को..इतनी अहम बात उसने पूरी ज़िंदगी अपने सीने मे दबाए रखी..सिर्फ़ इसीलिए की वो मुझे हर परेशानी से दूर रखना चाहती थी..रंभा का दिल भर आया.आज अगर उसे किसी की कमी खलती थी तो वो सिर्फ़ अपनी मा की.आज उसके पास सारा ऐशो-आराम था पर उसकी मा नही थी.रंभा ने अख़बार मोड़ के रखा & आँखो की नमी पोंचछति अपने कमरे मे चली गयी.

देवेन ने मुल्क के 8 अख़बारो के हर बड़े शहर के एडिशन्स मे ये इश्तेहार डलवाया था.उसे उमीद थी कि दयाल अपने सभी फ़र्ज़ी नामो & देवेन का नाम पढ़ 1 बार तो उस पते पे ज़रूर आएगा.पर इस बीच उसे महादेव शाह को भी देखना था & उसपे नज़र रखने की भी कोई तरकीब सोचनी थी.उसका मोबाइल बजा तो उसने उसे उठाया & नंबर देख के मुस्कुरा दिया,”अख़बार पढ़ लिया तुमने?”

“हां.”,रंभा हंस दी,”क्या लगता है आपको?आएगा वो?”

“देखो,हम तो बस उमीद कर सकते हैं.वैसे भी उमीद पे दुनिया कायम है!”

“हूँ..अच्छा,सुनिए.शाह समीर को किसी सड़क हादसे मे ख़त्म करना चाहता है.”

“अच्छा.कोई बात नही,ये सड़क हादसा हम करवा देंगे.”

“हां,पर..”

“पर क्या?’

“मुझे थोड़ी घबराहट हो रही है.”

“जोकि लाज़मी है.रंभा,घबराहट मुझे भी होती है.हम काम ही ऐसे करने जा रहे हैं.पर तुम 1 हिम्मती लड़की हो.इस वक़्त अपना हौसला मज़बूत रखो.जिस तरह से 2 दिन की मुलाकात मे ही शाह तुमसे मिलके तुम्हारे पति की मौत प्लान कर रहा है,उस से तो यही लगता है कि यही वो शख्स है जिसके लालच & बदनीयती ने विजयंत का ये हाल किया है.”,रंभा खामोश रही.शाह इस कहानी का खलनायक सही पर उन दोनो के जिस्मो के बीच 1 ऐसा नाता जुड़ गया था जिसकी कशिश का ख़याल आते ही वो मदहोश होने लगती थी,”..तुम बस अगली मुलाकात के वक़्त मुझे उसकी शक्ल दिखा दो.”

“ठीक है,देवेन.”,उसने कुच्छ देर देवेन से उसके बारे मे बात की & फिर विजयंत को फोन पे बुला उसकी खैर भी पुछि.उसके बाद फोन रख वो गुसलखाने मे चली गयी.अब उसे तैय्यार होना था.उसे पता था कि शाह आज उसे फिर कही बुलाएगा.उसका दिल आज की मुलाकात के बारे मे सोच रोमांच से भर उठा.अपने दुश्मन के लिए ऐसे जज़्बात!..रंभा को फिर खुद पे हैरत हुई..पर जब तक शाह का असली चेहरा सामने नही आता,तब तक तो वो उसके साथ जम के लुत्फ़ उठा सकती थी.उसने कपड़े उतारे & झाग भरे बात्ट्च्ब मे बैठ गयी & पिच्छली दोपहर की रंगीन यादो मे खो गयी.

दयाल ने भी अख़बार पढ़ा और गुस्से & तनाव से बौखला उठा..इतने बरसो बाद ये देवेन कहा से आ खड़ा हुआ & उसे उसके बारे मे इतना सब कुच्छ कैसे पता चला?..उसने डेवाले के पते को पढ़ा जिसपे 15 दिन बाद मिलने की तारीख लिखी थी.वो सोच मे पड़ गया की आख़िर उस रोज़ वाहा जाए या नही?..जाना तो उसे होगा ही..पता नही देवेन क्या और कितना जानता था उसके बारे मे?..दयाल ने अख़बार किनारे रखा & देवेन से मुलाकात के पहले उस जगह को 1 बार देखने का फ़ैसला किया.

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"अब तो रंभा वापस आ गयी है..",प्रणव ने जूस ख़त्म कर ग्लास मेज़ पे रखा,"..अब समीर का काम पूरा करने मे आप झिझक क्यू रहे हैं?"

"झिझक नही रहा बल्कि इंतेज़ार कर रहा हू.",महादेव शाह मुस्कुराया.

"इंतेज़ार!",प्रणव झल्ला उठा,"..अब किस बात का इंतेज़ार?!"

"मानपुर वाले टेंडर के खुलने का.",प्रणव ने सवालिया निगाहो से देखा तो शाह ने उसे वही समझाया जो रंभा ने उसे समझाया था.

"ओह..मान गये आपके दिमाग़ को मिस्टर.शाह!"

"ठीक है.टेंडर खुलने के बाद ही हम समीर को रास्ते से हटाएँगे."

"1 बात और."

"कहिए."

"उसकी मौत के बाद रंभा को ही कंपनी की मालकिन बने रहने दो.",ओरिजिनल प्लान के मुताबिक कुच्छ दिनो बाद प्रणव को रंभा को फुसला के उस से कंपनी की बागडोर ले लेनी थी & उसे किनारे कर देना था.प्रणव ने सोचा था कि रंभा को वो अपनी रखैल बनके रखेगा.उस बेचारे को क्या पता था कि शाह & रंभा मिल चुके हैं & अब हालात मे बहुत बदलाव आया है.

"पर क्यू?"

"देखो,प्रणव.पहले विजयंत मेहरा गायब हो जाता है.उसके कुच्छ महीनो बाद उसका बेटा सड़क हादसे मे मारा जाता है.लोगो को इसमे से साज़िश की बू सूंघने मे ज़्यादा वक़्त नही लगेगा तो इसीलिए रंभा को मालकिन बने रहने दो.वैसे भी वो तो सिर्फ़ चेहरा होगी कंपनी कि असल लगाम तो तुम्हारे हाथो मे ही होगी."

"हूँ."

"देखो,जब समीर लापता हुआ & मिला & विजयंत मेहरा झरने से गिरा तब ना समीर कंपनी का हिस्सा था ना ही रंभा.पर तुम थे.अब जब समीर मरेगा तो रंभा पे शक़ तो कोई नही करेगा पर उसकी मौत से तुम्हे ही सबसे बड़ा फ़ायदा होगा.अब ऐसे मे अगर कुच्छ गड़बड़ हुई & तुम कंपनी के मालिक बन गये तो फँसेगा कौन?..तुम."

"आपकी बात थी लगती है.",प्रणव सोच मे पड़ गया था.शाह की बात उसे ठीक लग रही थी..रंभा तो 1 रब्बर स्टंप होगी,कंपनी चलाएगा तो वो ही!,"ठीक है.जैसा आप कहें.",वो शाह से हाथ मिला के वाहा से चला आया.

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क्रमशः.......

JAAL paart--88

gataank se aage......

Rambha ne apni baahe peechhe le ja shah ke gale me dali & uske baye kandhe pe adte hue use chumne lagi.uski zuban ka pane munh me istekbal karte hue shah ne uski choochiyo ko pakad ke bahut zor se khincha.

“aannhhhhhhhhhh..zalim!”,rambha ne uske kaan ko kaat liya,”..inhe ukhadna chahte hain kya?!”,shah uski baat sun hans diya & uski dayi banh ko apni gardan me daal jhuka & uski dayi chhati ko munh me bhar chusne laga.bathroom me rambha ki mastani aaho ka shor bhar gaya.vo kamar hilaye ja rahi thi & uske upri jism me kanpkanpi ho rahi thi.uska seena khud ba khud shah ke munh ki or uth raha tha.rambha ki chut ki kashmakash ab apne charam pe pahunch rahi thi.uski palken nashe se bojhal ho gayi thi.vo bahut tezi se kamar hilaye ja rahi thi.vo manzil ke bahut karib thi & jald se jald vaha pahuchana chahti thi.

“oooooo..aahhhhhhhhhh....!”,usne apna jism Kaman ki tarah mod diya & chhatpatane lagi.uski band palke & chehra dekh lagta tha jaise vo behosh hone vali hai.behosh nahi par bekhabar to vo thi har baat se,yaha tak ki apne aashiq se bhi.use bas apne jism me phut rahe maze ka hosh tha.vo hawa me ud rahi thi & bahut khush thi.use kya khabar thi ki kis tarah uski chut ki shiddati kasavat se behaal hone ke bavjud shah ne khud ko jhadne se roka hua tha.shah ke ando me mitha dard ho raha tha & vo bhi bas jhadna chahta tha lekin uska dil use rok raha tha..bas thodi der &..uske baad ye maza bhi doguna ho jayega!

Jab rambha ne aankhe kholi to paya shah uske jism ko pyar se sehlate hue uski zulfen chum raha tha.uska lund vo abhi bhi chut me mehsus kar rahi thi par vo koi harkat nahi kar raha tha.rambha ke dil me shah ko shukriya kehna chahta tha & usne apne surkh labo ko uske labo se sata ke ye kaam kiya.shah ne uske hotho ko chumte hue uski janghe pakad ke use upar uthate hue uske lund ko uski chut se nikal liya.rambha ko uski is harkat se hairani hui..vo to abhi jhada bhi nahi tha.

Shah tub se nikla & rambha ki banh tham use bhi nikala & shower ke neeche le aaya.behte pani ke neeche apni mehbooba ke jism se vo sabun ke jhag ko saaf karne laga to usne bhi uske sath vahi harkat ki.dono 1 dusre ko chumte hue nehla rahe the.shah ne rambha ke jism ko saaf karne ke baad use apne agosh me bhar liya.dono apne-2 hasrat bhare hath 1 dusre ki pith se leke gand tak chalane lage.rambha ke mulayam pet se sata shah ka sakht lund uske jism ko masti ko kam nahi hone de raha tha.rambha ki chut shah ke lund ke liye fir se kulbulane lagi thi.rambha bhi uske virya ke gilepan ko apni chut me mehsus karna chahti thi.

Aur shah ne jaise uske dil ki aavaz sun li.uske chehre ko hatho me tham chumte hue usne use shower ke neeche se ghumate hue dusri taraf kiya to rambha ki gand washbasin se aa lagi.shah ne kiss todi & uski kamar tham use basin ke bagal me counter pe bitha diya.rambha ne uska irada samajhte hue apne pai upar counter pe chadha apni tange khol apni gulabi,gili chut uske lund ke liye pesh kar di.shah aage badha & agle hi pal uska lund rambha ki chut me tha.dono 1 dusre se chipat gaye,unki zubane aaps me gutthamguttha ho gayi & 1 baar fir unki chudai shuru ho gayi.

Shah rambha ki bhari-bharkam jangho pe hath firate hue dhakke laga raha tha & uske honth abhi bhi rambha ke hotho se sate the.rambha bhi uski pith se leke gand tak apne hath chala rahi thi.vo uski gand pakad aise dabati mano lund ko & bhi andar jane ko keh rahi ho.

Shah ne apne bayi taraf lage basin ke shishe me khud ko dekha ,rambha ka aks usme thik se nazar aa nahi raha tha,magar itna dikh raha tha ki shah use chod raha hai.shah humesha ki hi tarah khud ko 1 haseen ladki ke jism se khelte dekh & josh se bhar gaya.uske dhakke & tez & gehre ho gaye.rambha ne bayi banh uski garden me daal use gale se laga liya & aahe bharti hui dayi se uski pith & gand kharonchne lagi.shah ne use chumte hue uski choochiya masli & fir uski dayi tang utha apne baye kandhe pe rakh uski chut ko thoda & khol diya.

“ohhhhh..aannnnnhhhhhhhhhhh........ouuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii........haaaaaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii.....!”,bathroom me rambha ki aahen,jismo ki takrane ki aavaz & shah ki jaddojahad bhari aavazen gunjne lagi.dono premi 1 baar fir apne pasandeeda khel ke anjam tak pahunch rahe the.shah rambha ki jangh thame uske chehre ko chumte hue ab deewano ki tarah dhakke laga raha tha.rambha baithi uske dhakko se mast hue ja rahi thi..bas kuchh hi pal & fir vahi shiddati khushnuma ehsas..vo anutha ehsas jiske jaisa & koi ehsas nahi!..dono ne 1 sath lambi aah bhari..rambha ki hasrat puri ho gayi thi..apni chut me vo shah ke virya ki garmahat mehsu kar jhad rahi thi & shah..shah khud ko aaine me dekh raha tha..kya nasha tha is ladki ke jism me?..vo deewana ho gaya tha iska..aisa maza..ye khushi..usne kabhi kisi ke sath mehsus anhi kit hi.pichhli raat se leke ab tak vo iske jism ko jum ke bhog chuka tha,2 baar iski gand maar chukka tha par fir bhi uska dil nahi bhara tha..,”oh..rambha!jadu kar diya hai tumne mujhpe!”,uske hotho pe dil ki baat aa hi gayi.rambha ne use baaho me bhara & uske mathe ko chum man hi man muskurane lagi..ab use pakka yakin tha ki mahadev shah uske jaal me pura fans chuka hai.

Agli subah rambha ne nashte ki mez pe pada akhbar dekha to use pichhle din ki Deven ki kahi baat yaad aa gayi.usne jaldi se akhbar uthaya & uske panne palatne lagi.aakhiri panne pe 1 ishtehar pe uski nazar padi & uske hotho pe muskan phail gayi.

MERE AZIZ DOSTO-ROSHAN PERSHAD,DANISH SULEMAN,BISESAR GOBIND & DAYAL.MAIN MULK VAPAS AA GAYA HU PAR TUM LOGO KA KOI PATA NAHI CHAL RAHA.MUJHSE JALDI MILO-DEVEN.

Neeche Devalay ke jis pate pe milne ka waqt & tarikh likhi thi us pate ko padh rambha ko hansi aa gayi.usne jis ilake me deven ko ghar dilwaya tha vo tha to shehar ke beech par kuchh din pehle vaha pani ki kafi killat thi & us vajah se vaha koi rehne ko taiyyar nahi tha.par aisi jagah deven & vijayant ke liye bilkul sahi thi.pani ki kami se dono ko shuru me thodi taklif to hui par fir vo iske aadi ho gaye.jis ghar ka pata deven ne likha tha vo uske kiraye ke makan ke thik samne ka makan tha jo khali pada tha.

Goa ki hi tarah ab deven vijayant ke sath apne ghar se hi us ghar pe nazar rakhega & agar dayal vaha aaya to fir....rambha ko apni maa ki yaad aayi & vo sanjida ho gayi..kitna kam janti thi vo maa ko..itni aham baat usne puri zindagi apne seene me dabaye rakhi..sirf isiliye ki vo mujhe har pareshani se door rakhna chahti thi..rambha ka dil bhar aaya.aaj agar use kisi ki kami khalti thi to vo sirf apni maa ki.aaj uske paas sara aisho-aram tha par uski maa nahi thi.rambha ne akhbar mod ke rakha & aankho ki name ponchhti apne kamre me chali gayi.

Deven ne mulk ke 8 akhbaro ke har bade shehar ke editions me ye ishtehar dalwaya tha.use umeed thi ki dayal apne sabhi farzi namo & deven ka naam padh 1 baar to us pate pe zarur aayega.par is beech use mahadev shah ko bhi dekhna tha & uspe nazar rakhne ki bhi koi tarkib sochni thi.uska mobile baja to usne use uthaya & number dekh ke muskura diya,”akhbar padh liya tumne?”

“haan.”,rambha hans di,”kya lagta hai aapko?aayega vo?”

“dekho,hum to bas umeed kar sakte hain.vaise bhi umeed pe duniya kayam hai!”

“hun..achha,suniye.shah sameer ko kisi sadak hadse me khatm karna chahta hai.”

“achha.koi baat nahi,ye sadak hadsa hum karwa denge.”

“haan,par..”

“par kya?’

“mujhe thodi ghabrahat ho rahi hai.”

“joki lazmi hai.rambha,ghabrahat mujhe bhi hoti hai.hum kaam hi aise karne ja rahe hain.par tum 1 himmati ladki ho.is waqt apna hausla mazbut rakho.jis tarah se 2 din ki mulakat me hi shah tumse milke tumhare pati ki maut plan kar raha hai,us se to yehi lagta hai ki yehi vo shakhs hai jiske lalach & badniyati ne vijayant ka ye haal kiya hai.”,rambha khamosh rahi.shah is kahani ka khalnayak sahi par un dono ke jismo ke beech 1 aisa nata jud gaya tha jiski kashish ka khayal aate hi vo madhosh hone lagti thi,”..tum bas agli mulakat ke waqt mujhe uski shakl dikha do.”

“thik hai,deven.”,usne kuchh der deven se uske bare me baat ki & fir vijayant ko fone pe bula uski khair bhi puchhi.uske baad phone rakh vo gusalkhane me chali gayi.ab use taiyyar hona tha.use pata tha ki shah aaj use fir kahi bulayega.uska dil aaj ki mulakat ke bare me soch romanch se bhar utha.apne dushman ke liye aise jazbat!..rambha ko fir khud pe hairat hui..par jab tak shah ka asli chehra samne nahi aata,tab tak to vo uske sath jum ke lutf utha sakti thi.usne kapde utare & jhag bhare bathtub me baith gayi & pichhli dopahar ki rangin yaado me kho gayi.

Dayal ne bhi akhbar padha & gusse & tanav se baukhla utha..itne barso baad ye Deven kaha se aa khada hua & use uske bare me itna sab kuchh kaise pata chala?..usne Devalay ke pate ko padha jispe 15 din bada milne ki tarikh likhi thi.vo soch me pad gaya ki aakhir us roz vaha jaye ya nahi?..jana to use hoga hi..pata nahi deven kya & kitna janta tha uske bare me?..dayal ne akhbar kinare rakha & deven se mulakat ke pehle us jagah ko 1 baar dekhne ka faisla kiya.

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"ab to Rambha vapas aa gayi hai..",Pranav ne juice khatm kar glass mez pe rakha,"..ab Sameer ka kaam pura karne me aap jhijhak kyu rahe hain?"

"jhijhak nahi raha balki intezar kar raha hu.",Mahadev Shah muskuraya.

"intezar!",pranav jhalla utha,"..ab kis baat ka intezar?!"

"Manpur vale tender ke khulne ka.",pranav ne sawaliya nigaho se dekha to shah ne use vahi samajhaya jo Rambha ne use samjhaya tha.

"oh..maan gaye aapke dimagh ko mr.shah!"

"thik hai.tender khulne ke baad hi hum sameer ko raste se hatayenge."

"1 baat aur."

"kahiye."

"uski maut ke baad rambha ko hi company ki malkin bane rehne do.",original plan ke mutabik kuchh dino baad pranav ko rambha ko phusla ke us se company ki baagdor le leni thi & use kinare kar dena tha.pranav ne socha tha ki rambha ko vo apni rakhail banake rakhega.us bechare ko kya pata tha ki shah & rambha mil chuke hain & ab halaat me bahut badlav aaya hai.

"par kyu?"

"dekho,pranav.pehle Vijayant Mehra gayab ho jata hai.uske kuchh mahino baad uska beta sadak hadse me mara jata hai.logo ko isme se sazish ki bu sunghne me zyada waqt nahi lagega to isiliye rambha ko malkin bane rehne do.vaise bhi vo to sirf chehra hogi company ki asal lagam to tumhare hatho me hi hogi."

"hun."

"dekho,jab sameer lapata hua & mila & vijayant mehra jharne se gira tab na sameer company ka hissa tha na hi rambha.par tum the.ab jab sameer marega to rambha pe shaq to koi nahi karega par uski maut se tumhe hi sabse bada fayda hoga.ab aise me agar kuchh gadbad hui & tum company ke malik ban gaye to phansega kaun?..tum."

"aapki baat thi lagti hai.",pranav soch me pad gaya tha.shah ki baat use thik lag rahi thi..rambha to 1 rubber stamp hogi,company chalayega to vo hi!,"thik hai.jaisa aap kahen.",vo shah se hath mila ke vaha se chala aaya.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--89

गतान्क से आगे......

देवेन बाज़ार से 2 आरामकूर्सिया ले आया था & विजयंत के साथ उन्ही पे बैठ के सामने वाले घर पे नज़र रखे था.देवेन ने अपने घर के मैन दरवाज़े पे ताला लगा दिया था.दयाल शातिर आदमी था & देवेन पूरी एहतियात बारात रहा था.

"देवेन,इस शख्स से इतनी नफ़रत की वजह मुझे समझ आती है पर तुम्हे लगता नही की इंटेक़ाम वो आग है जिसमे इंसान खुद ही झुक्साता है?",विजयंत कुर्सी पे अढ़लेता कोल्ड ड्रिंक पी रहा था.

"तुम सही कह रहे हो,विजयंत पर 1 बात बताओ.जिस लड़की से मैं प्यार करता था,जिसकी ज़िंदगी सँवारने का वादा किया था मैने,इस दयाल की वजह से उसे भी पूरी ज़िंदगी तकलीफें उठानी पड़ी..& वो दयाल..वो तो अपने पसनद की ज़िंदगी अपनी शर्तो पे जीता रहा.तो क्या उसे सज़ा नही मिलनी चाहिए?",देवेन की आवाज़ मे दर्द की कराह सुनाई दे रही थी.विजयंत कुच्छ नही बोला.उसे देवेन की बता सही लग रही थी.

"अब अगर इस काम मे मुझे अपनी जान भी गँवानी पड़े तो मुझे परवाह नही.",कुच्छ देर खामोशी च्छाई रही जिसे देवेन ने ही तोड़ा,"तुम बताओ,विजयंत..जब तुम्हे पता चलेगा कि तुम्हारे इस हाल का ज़िम्मेदार कौन है तो तुम क्या करोगे?"

विजयंत देवेन को देखने लगा..क्या करेगा वो?..क्या करना चाहिए उसे?..उसे तो कुच्छ याद नही था तो उसे कैसे समझ आता की उसके साथ असल मे हुआ क्या था जोकि उसकी याददाश्त चली गयी थी..रंभा & देवेन कहते थे कि वो झरने से गिरा था & उसे चोट लगी थी..तो क्या किसी ने धकेला था उसे या कुच्छ और हुआ था?..पर हक़ीक़त तो ये ही थी ना की उसे कुच्छ याद नही तो उसे क्या पता की वो क्या करेगा..!",पता नही."

उसके जवाब मे देवेन हैरत से उसे देखने लगा.दोनो कुच्छ देर 1 दूसरे को देखते रहे & उसके बाद 1 साथ खिलखिला के हंस पड़े.

रंभा अपने ड्रेसिंग टेबल के शीशे मे खुद को निहारते हुए पीली सारी लपेट रही थी.वो झुकी तो स्लीव्ले ब्लाउस के गले मे से उसकी चूचियो के बड़े से हिस्से का अक्स शीशे मे दिखा & वो मुस्कुरा उठी.अभी-2 उसने मेकप से उनके ब्लाउस के गले मे से झँकते हिस्सो पे पड़े महादेव शाह के होंठो के निशानो को च्छुपाया था.उसने सारी लपेट के आँचल सीने पे डाला.सारी के झीने कपड़े मे से उसका सपाट पेट & गोल नाभि झलक रहे थे.उसने थोड़ा घूम के पीछे का हिस्सा देखा.ब्लाउस की बॅक बहुत गहरी या कहिए कि थी ही नही.पीठ के पार 4 हुक्स के सहारे 1 पतली पट्टी ने उसे उसकी छातियो पे कस रखा था.सारी थोड़ी नीचे से बँधी गयी थी ताकि उसकी दिलकश कमर देखने वालो को घायल करती रहे.उसने पैरो मे हाइ हील की सॅंडल्ज़ पहनी & बॅग उठा निकल गयी.बाहर जिस मर्द ने भी उसे देखा,कसी सारी मे उभरते उसके कटाव को देख अपने लंड को च्छुए बिना नही रह सका.

उन सबसे बेख़बर रंभा अपने दफ़्तर पहुँची.वो तो सिर्फ़ 1 ही शख्स के लिए सजी थी-अपने दुश्मन महादेव शाह के लिए.दोनो को आज कहा मिलना था,ये उन्होने तय नही किया था बस वक़्त मुक़र्रर था,2 बजे.रंभा ने सवेरे ही समीर के ब्लॅकबेरी से उसके अगले 15 दिनो के अपायंट्मेंट्स की लिस्ट उस वक़्त निकाल ली थी जब वो नहा रहा था.इस वक़्त वो उस काग़ज़ को देखते हुए ट्रस्ट फिल्म्स की उन प्रोडक्षन्स के शेड्यूल को देख रही थी जिनमे कामया काम कर रही थी.

रंभा ने देखा ठीक 10 दिन बाद समीर के शेड्यूल मे दोपहर 2 से लेके शाम 6 बजे तक के बीच कोई अपायंटमेंट नही था.अब इत्तेफ़ाक़ ऐसा था कि अगले 10 दिनो तक सिर्फ़ 1 दिन के ब्रेक के साथ कामया भी केवल ट्रस्ट फिल्म के लिए ही शूटिंग कर रही थी & उसकी छुट्टी भी उसी रोज़ थी जिस रोज़ समीर दोपहर 4 घंटे के लिए कुच्छ नही कर रहा था.रंभा को उसके काम की जानकारी मिल गयी थी.उसने कुच्छ & काम निपटाए & 2 बजे तक का वक़्त किसी तरह कटा.

अपने आशिक़ से मिलने की आस मे उसकी चूत मे अभी से ही कसक उठने लगी थी.1.30 पे उसने काम ख़त्म किया & अपने कॅबिन से जुड़े बाथरूम मे जाके पहले खुद को शीशे मे निहारा & फिर दफ़्तर से निकल गयी.अभी तक शाह ने फोन नही किया था & उसे अब लगने लगा था कि कही वो आज की मुलाकात रद्द ना कर दे.बेसमेंट पार्किंग मे वो अपनी कार के पास पहुँची ही कि किसी ने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया.वो चौंकी & चीखी मगर 1 मज़बूत हाथ उसके मुँह पे आ लगा.

उस जिस्म के एहसास को वो बहुत अच्छे से पहचानती थी.अपने मुँह पे दबे हाथ को रंभा ने चूमा तो उसे चौंकाने वाले शख्स ने उसे घुमाया & अपनी बाँहो मे भर लिया.शाह आज खुद अपनी माशुका को लेने आया था.दोनो 1 दूसरे से लिपटे 1 दूसरे को चूम रहे थे.रंभा तो उसकी ज़ुबान के एहसास से ही मस्त हो गई थी & अपनी छातियो को शाह के सीने पे रगड़ रही थी.शाह भी उसकी कमर को मसल रहा था.तभी किसी कार के आने की आवाज़ आई तो शाह ने उसे खींचा & अपनी कार मे बिठा लिया.

देवेन & विजयंत मेहरा 1 साथ चौंक के उठ बैठे.1 काले शीशो वाली काली कार बहुत धीमे-2 उनके घर के सामने से जा रही थी.उस कार ने उनकी सड़क के 2 चक्कर लगाए.देवेन ने छत पे जाके च्छूप के देखा,वो कार उनके पूरे मोहल्ले का चक्कर लगा रही थी.जो भी था होशियार था.देवेन का दिल किया की दौड़ता जाए & उस कार को रोक अंदर से ड्राइवर को निकाल ले जोकि उसे पूरा यकीन था कि दयाल ही होगा.

देवेन ने नीचे आ विजयंत को नज़र रखने का इशारा किया & 1 मोबाइल उसे थमाया & फिर दूसरा मोबाइल ले पीछे के रास्ते निकल अपनी कार मे बैठ गया.विजयंत ने देखा कार सामने वाले घर के सामने रुकी पर उसमे से कोई उतरा नही,कार 3-4 मिनिट खड़ी रही & फिर वाहा से चली गयी.विजयंत ने फ़ौरन ये बात देवेन को बताई जोकि मोहल्ले के बाहर अपनी कार मे बैठा था.जैसे ही काली कार बाहर आई देवेन उसके पीछे लग गया.

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महादेव शाह ने अपनी कार के काले शीशो का फायडा उठाते हुए रंभा को बाहो मे भरा & दोनो दीवानो की तरह 1 दूसरे को चूमने लगे.उनके हाथ 1 दूसरे के जिस्मो पे किसी 1 जगह नही टिक रहे थे.शाह उसकी लगभग नंगी पीठ देख के ही बावला हो गया था & उसकी चिकनी त्वचा को सहलाते हुए उसके आँचल को हटाता ब्लाउस के उपर से ही उसकी चूचियो को दबा रहा था.उसके हाथो की छुअन महसूस करते ही रंभा के निपल्स कड़े हो गये & ब्लाउस के कपड़े मे उनका नुकीला उभार सॉफ झलकने लगा.तब शाह को एहसास हुआ की उसकी महबूबा ने ब्रा नही पहना है.वो & जोश मे भर गया & उसके क्लीवेज को चूमने लगा.उसके सीने को अपने होंठो से तार करते हुए उसने आँखो के कोने से देखा की 1 बार फिर बेसमेंट खाली था.

उसने फ़ौरन रंभा को छ्चोड़ा & कार से उतरा.उसके बाद उसके दरवाज़े की तरफ गया & खोल उसे भी उतरा.रंभा की सारी का आँचल ज़मीन पे था & वो तेज़ साँसे ले रही थी.शाह ने 1 पल उसके सीने से लेके उसके पेट तक नज़र फिराई.रंभा को उसकी आँखो मे सिफ वासना दिखी & उसकी चूत उसकी नज़रो की तपिश से & कसमसाने लगी,"कोई हमे देख ना ले?"

रंभा के डर को अनदेखा करते हुए शाह ने उसे बाहो मे भर घुमाया & कार के बॉनेट पे झुका दिया.उसके हसरत भरे हाथ उसकी पीठ से लेके कमर तक घूमने लगे & उनके पीछे-2 उसके गर्म होंठ.रंभा आहें भरने लगी,".उउम्म्म्म..प्लीज़,महादेव..कोई देख लेगा तो ग़ज़ब हो जाएगा..ऊहह..!",शाह उसकी गुदाज़ कमर के माँस को चूस रहा था & उसके पेट को दबा रहा था.रंभा उसकी हर्कतो से अब मस्ती मे काँपने लगी थी.उसकी कार पार्किंग के 1 कोने मे खड़ी थी & वाहा दोनो के पकड़े जाने के कम ही चान्सस थे मगर फिर भी वाहा कभी भी कोई भी आ सकता था & रंभा को उसी बात का डर था.उसे हैरत हो रही थी कि जिस शाह ने उसे होशियार रहने की नसीहत दी थी,आज वही इस तरह की ख़तरे भरी हरकत कर रहा था.पर जो भी कर रहा था,था बहुत रोमांचक!

रंभा के जिस्म को जब शाह चूमता तो वो ऐसे कसमसाती मानो उसे उसकी च्छुअन से बहुत तकलीफ़ हुई हो.तकलीफ़ उसे हो रही थी,मस्ती 1 हद्द से आगे बढ़ती है तो उसकी शिद्दातको बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है.इंसान के दिल मे 1 बेचैनी भर जाती है जो उसे परेशान करने लगती है लेकिन उस परेशानी से ज़्यादा सुकून पहुचाने वाली चीज़ शायद ही दुनिया मे दूसरी हो!

शाह अब ज़मीन पे बैठ गया था & रंभा की सारी कमर तक उठा उसकी जाँघो & टाँगो के पिच्छले हिस्सो को चूम रहा था.रंभा अभी भी उस से वाहा से चलने की मिन्नते कर रही थी पर शाह पे तो जैसे उसके जिस्म को वही भोगने का जुनून सवार था!शाह का लंड भी मौके के ख़तरे & रोमांच से ऐसा ताना था की उसे अब उसमे थोड़ा दर्द होने लगा था.

शाह ने देखा की रंभा ने आज भी वही कल वाली उसकी दी पॅंटी पहनी थी.उसका दिल उसकी चौड़ी,मक्खनी गंद को अपने दिए तोहफे मे लिपटे देख खुशी से भर उठा & वो उसकी फांको को दबाते हुए चूमने लगा.रंभा बॉनेट पे झुकी कार को थामे & ज़ोर से आहें भरने लगी.

थोड़ी देर तक उसकी जाँघो पे हाथ फिराते हुए उसकी गंद चूमने के बाद शाह ने पॅंटी को उतारा & अपनी पॅंट की जेब के हवाले किया.उसने उसकी गंद की फांको को ज़ोर से खींचते हुए फैलाया & उसकी चूत मे जीभ घुसा दी.

"उउन्नग्घह..प्लीज़..आहह..महा..देव....यहा नही..आहह..!",शाह की ज़ुबान ने बहुत जल्द ही उसकी चूत से रस की धार च्छुड़वा दी & फिर उसकी गंद के छेद को चाटने लगा.रंभा मस्ती मे कसमसाते हुए आहे भरी जा रही थी की शाह उठा & उसकी कमर को बाए हाथ मे जाकड़ दाए से अपनी पॅंट की ज़िप खोलने लगा.रंभा उसका इरादा भाँप गयी & उसका दिल धड़क उठा..अब बात हद्द से बाहर जा रही थी..कोई भी आ सकता था यहा & ये आदमी तो पागल हो गया था!

रंभा उसकी हाथ को हटा घूमी & उसे चूमने लगी पर शाह पे तो जैसे उसे वही चोदने का भूत सवार था.उसका बाया हाथ नीचे गया & उसकी सारी जोकि घूमने से नीचे आ गयी थी,को फिर से उठा उसकी टाँगे फैलाने लगा.रंभा फ़ौरन उसे रोकती हुई उसके सीने को चूमती नीचे बैठ गयी & उसके लंड को मुँह मे भर लिया.रंभा ने इतनी तेज़ी से उसके लंड को हिलाते हुए चूसा कि शाह की आ निकल गयी.वो उसके सर को पकड़ उसके मुँह को चोदने लगा.रंभा भी अपनी ज़ुबान से उसके सूपदे को छेड़ते हुए जल्दी-2 उसके लंड को चूस रही थी पर शाह का इरादा उसके मुँह मे झड़ने का था नही.

उसने फ़ौरन उसे उठाया & चूमा.रंभा की चूचियाँ उसके सीने मे दबी तो सुने नीचे देखा & पाया की ब्लाउस के गले मे से वो निकलने को बेताब हो रही हैं.शाह के सर पे तो जुनून सवार था.उसके हाथ रंभा की पीठ पे थे ही.उसने अपने हाथो से उसके ब्लाउस को पकड़ के खींचा & उसके हुक्स टूट गये.उसने ब्लाउस को बेदर्दी से उसके जिस्म से अलग कर फेंका & उसकी चूचियो को आपस मे दबाते हुए चूसने लगा.रंभा के होंठ खुल गये मगर उनमे से कोई आवाज़ नही आ रही थी.उसके अंदर मस्ती का सैलाब उमड़ आया था.वो 1 पब्लिक प्लेस मे लगभग नंगी अपने आशिक़ के बाहोमे खड़ी थी & इस ख़याल से उसका जिस्म रोमांच से थरथरा रहा था.

शाह कुच्छ देर उसकी चूचियो से खेलता रहा & फिर घुमा के कार के बॉनेट पे झुकाया & उसकी सारी उठा दी,"..प्लीज़..महादेव..ऊहह..!",शाह ने उसकी बाई टांग उठाके बॉनेट पे चढ़ा दी थी & उसकी चूत मे उंगली करने लगा था.शाह ने कुच्छ देर उंगली करने के बाद उसे हटा अपना लंड उसकी चूत पे लगाया & अंदर धकेला,"..आहह..महादेव..प्लीज़..!",शाह ने उसकी कमर को दाए & चूचियो को बाए हाथ मे दबोचा & चोदने लगा.लंड अंदर घुसते ही उसकी सख्ती & गर्मी,नाज़ुक चूचियो के बेदर्दी से पीसने & माहौल के रोमांच से रंभा मस्त हो गयी & आँखे बंद कर ली.अब तो उसे भी चुद के उस लंड से झड़ने की ही ख्वाहिश थी.उस बेचारी को क्या पता था कि शाह के दिमाग़ मे क्या चल रहा था!

शाह ने कुच्छ देर उसकी चूत को चोदा & फिर लंड बाहर निकाला.बॉनेट पे झुकी मस्ती मे चूर रंभा को लंड का निकलना बुरा लगा तो उसने आँखे खोली मगर अगले ही पल उसकी आँखे फैल गयी & बेसमेंट मे उसकी चीख गूँज उठी,"आईईईईईईयययययययईई..मररर्र्ररर गायययययीीईईईईईई..!"

बेसमेंट मे 1 गार्ड ड्यूटी पे था जो वाहा बने 1 कॅबिन मे बैठा खाना खा रहा था.रंभा की चीख सुन वो बाहर आया & चारो तरफ देखा पर जहा शाह रंभा की गंद मार रहा था उस जगह थोड़ा अंधेरा था & दोनो के जिस्म 1-2 कार्स की आड़ मे उसे नज़र नही आए.शाह & रंभा अपने खेल मे जुटे उसे देखते रहे.वो कुच्छ देर खड़ा रहा & फिर वापस अपने कॅबिन मे जा अपना खाना ख़त्म करने लगा.

शाह ने लंड उसकी चूत से निकाल उसपे थुका & फिर उसे लंड को उसकी गंद के संकरे सुराख मे घसा दिया.रंभा चीखी तो उसने बाए हाथ से उसका मुँह दबा दिया & दाए से उसकी कमर जकड़े उसकी गंद मारने लगा.कुच्छ देर बाद उसका दाया हाथ पेट से सरक चूत पे आ गया & उसे कुरेदने लगा.रंभा दर्द & मस्ती के मिलेजुले एहसास मे सब भूल गयी थी.उसकी चीखें शाह के हाथ मे दफ़्न हो रही थी.

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देवेन उस काली कार से दूरी बनाए हुए उसके पीछे चल रहा था.शाह शहर के बीचोबीच के इलाक़े मे आ गया था जहा बड़े-2 दफ़्तर थे.देवेन ने देखा कि कार ट्रस्ट ग्रूप की 1 बिल्डिंग मे घुसी तो वो भी उसके पीछे हो लिया.उस बिल्डिंग मे ट्रस्ट फिल्म्स के अलावा 1-2 बाँक्स भी थे.गार्ड के पुच्छने पे देवेन ने बॅंक का ही नाम बताया.काली कार बेसमेंट पार्किंग मे गयी तो देवेन भी उसके पीछे-2 उस पार्किंग मे चला गया.

"उउन्नग्घह...आन्न्ग्ग्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह..!",रंभा घुटि-2 आवाज़ मे आहे भर रही थी.उसकी चूत & गंद पे हुए दोतरफे हमले से उसके जिस्म ने हथियार डाल दिए थे & वो झाड़ रही थी.उसके जिस्म के दोनो पूर्कशिष सुराख अपनी मस्तानी जकड़न मे शाह के लंड & उंगली कस रहे थे & उसे भी झड़ने पे मजबूर कर रहे थे.रंभा अपनी गंद मे शाह के गर्म वीर्य को महसूस कर मस्ती मे पागल हो रही थी.रोमांच & मस्ती मे उसके झड़ने की शिद्दत बहुत बढ़ गयी थी.

झड़ने के बाद शाह उसकी पीठ पे झुक गया था & उसके मुँह से हाथ हटा उसे चूम रहा था,"..आप बहुत ज़ुल्मी हैं..!",रंभा आशिक़ से मचल रही थी,"..उउंम..नही..",उसने उसके होंठो की पेशकश ठुकराई तो शाह ने प्यार भरे बोल बोल उसे मनाया & उसके गुलाबी होंठो के रसको चूसने मे आख़िरकार कामयाब हो गया.

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क्रमशः.......

JAAL paart--89

gataank se aage......

Deven bazar se 2 aaramkursiya le aaya tha & vijayant ke sath unhi pe baith ke samne vale ghar pe nazar rakhe tha.deven ne apne ghar ke main darwaze pe tala laga diya tha.dayal shatir aadmi tha & deven puri ehtiyat barat raha tha.

"deven,is shakhs se itni nafrat ki vajah mujhe samajh aati hai par tumhe lagta nahi ki inteqam vo aag hai jisme insan khud hi jhuksata hai?",vijayant kursi pe adhleta cold drink pi raha tha.

"tum sahi keh rahe ho,vijayant par 1 baat batao.jis ladki se main pyar karta tha,jiski zindagi sanwarne ka vada kiya tha maine,is dayal ki vajah se use bhi puri zindagi taklifen uthani padi..& vo dayal..vo to apne pasnad ki zindagi apni sharto pe jita raha.to kya use saza nahi milni chahiye?",deven ki aavaz me dard ki karah sunai de rahi thi.vijayant kuchh nahi bola.use deven ki bata sahi lag rahi thi.

"ab agar is kaam me mujhe apni jaan bhi ganvani pade to mujhe parvah nahi.",kuchh der khamoshi chhayi rahi jise deven ne hi toda,"tum batao,vijayant..jab tumhe pata chalega ki tumhare is haal ka zimmedar kaun hai to tum kya karoge?"

vijayant deven ko dekhne laga..kya karega vo?..kya karna chahiye use?..use to kuchh yaad nahi tha to use kaise samajh aata ki uske sath asal me hua kya tha joki uski yaddasht chali gayi thi..rambha & deven kehte the ki vo jharne se gira tha & use chot lagi thi..to kya kisi ne dhakela tha use ya kuchh aur hua tha?..par haqeeqat to ye hi thi na ki use kuchh yaad nahi to use kya pata ki vo kya karega..!",pata nahi."

uske jawab me deven hairat se use dekhne laga.dono kuchh der 1 dusre ko dekhte rahe & uske baad 1 sath khilkhila ke hans pade.

Rambha apne dressing table ke shishe me khud ko niharte hue pili sari lapet rahi thi.vo jhuki to sleeveless blouse ke gale me se uski chhatiyo ke bade se hisse ka aks shishe me dikha & vo muskura uthi.abhi-2 usne makeup se unke blouse ke gale me se jhankte hisso pe pade Mahadev Shah ke hotho ke nishano ko chhupaya tha.usne sari lapet ke aanchal seene pe dala.sari ke jhine kapde me se uska sapat pet & giol nabhi jhalak rahe the.usne thoda ghum ke peechhe ka hissa dekha.blouse ki back bahut gehri ya kahiye ki thi hi nahi.pith ke paar 4 hooks ke sahare 1 patli patti ne use uski chhatiyon pe kas rakha tha.sari thodi neeche se bandhi gayi thi taki uski dilkash kamar dekhne valo ko ghayal karti rahe.usne pairo me high heel ki sandals pehni & bag utha nikal gayi.bahar jis mard ne bhi use dekha,kasi sari me ubharte uske katavo ko dekh apne lund ko chhue bina nahi reh saka.

un sabse bekhabar rambha apne daftar pahunchi.vo to sirf 1 hi shakhs ke liye saji thi-apne dushman Mahadev Shah ke liye.dono ko aaj kaha milna tha,ye unhone tay nahi kiya tha bas waqt mukarrar tha,2 baje.rambha ne savere hi Sameer ke Blackberry se uske agle 15 dino ke appointments ki list us waqt nikal li thi jab vo naha raha tha.is waqt vo us kagaz ko dekhte hue Trust Films ki un productions ke schedule ko dekh rahi thi jinme Kamya kaam kar rahi thi.

rambha ne dekha thik 10 din baad sameer ke schedule me dopahar 2 se leke sham 6 baje tak ke beech koi appointment nahi tha.ab ittefaq aisa tha ki agle 10 dino tak sirf 1 din ke break ke sath kamya bhi keval trust film ke liye hi shooting kar rahi thi & uski chhutti bhi usi roz thi jis roz sameer dophara 4 ghante ke liye kuchh nahi kar raha tha.rambha ko uske kaam ki jankari mil gayi thi.usne kuchh & kaam niptaye & 2 baje tak ka waqt kisi tarah kata.

apne aashiq se milne ki aas me uski chut me abhi se hi kasak uthne lagi thi.1.30 pe usne kaam khatm kiya & apne cabin se jude bathroom me jake pehle khud ko shishe me nihara & fir daftar se nikal gayi.abhi tak shah ne fone nahi kiya tha & use ab lagne laga tha ki kahi vo aaj ki mulakat radd na kar de.basement parking me vo apni car ke pas pahunchi hi ki kisi ne use peechhe se baaho me bhar liya.vo chaunki & chikhi magar 1 mazbut hath uske munh pe aa laga.

us jism ke ehsas ko vo bahut achhe se pehchanti thi.apne munh pe dabe hath ko rambha ne chuma to use chaunkane vale shakhs ne use ghumaya & apni abaho me bhar liya.shah aaj khud apni mashuka ko lene aaya tha.dono 1 dusre se lipte 1 dusre ko chum rahe the.rambha to uski zuban ke ehsas se hi mast ho agyi thi & apni chhatiyo ko shah ke seene pe ragad rahi thi.shah bhi uski kamar ko masal raha tha.tabhi kisi car ke aane ki aavaz aayi to shah ne use khincha & apni car me bitha liya.

Deven & Vijayant Mehra 1 sath chaunk ke uth baithe.1 kale shisho vali kali car bahut dhime-2 unke ghar ke samne se ja rahi thi.us car ne unki sadak ke 2 chakkar lagaye.deven ne chhat pe jake chhup ke dekha,vo car unke pure mohalle ka chakkar laga rahi thi.jo bhi tha hoshiyar tha.deven ka dil kiya ki daudta jaye & us car ko rok andar se driver ko nikal le joki use pura yakin tha ki Dayal hi hoga.

deven ne neeche aa vijayant ko nazar rakhne ka ishara kiya & 1 mobile use thamaya & fir dusra mobile le peechhe ke raste nikal apni car me baith gaya.vijayant ne dekha car samne vale ghar ke samne ruki par usme se koi utra nahi,car 3-4 minute khadi rahi & fir vaha se chali gayi.vijayant ne fauran ye baat deven ko batayi joki mohalle ke bahar apni car me baitha tha.jaise hi kali car bahar aayi deven uske peechhe lag gaya.

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Mahadev Shah ne apni car ke kale shisho ka fayda uthate hue Rambha ko baaho me bhara & dono deewano ki tarah 1 dusre ko chumne lage.unke hath 1 dusre ke jismo pe kisi 1 jagah nahi tik rahe the.shah uski lagbhag nangi pith dekh ke hi bawla ho gaya tha & uski chikni tvacha ko sehlate hue uske aanchal ko hatta blouse ke upar se hi uski chhatiyo ko daba raha tha.uske hatho ki chhuan mehsus karte hi rambha ke nipples kade ho gaye & blouse ke kapde me unka nukila ubhar saaf jhalakne laga.tab shah ko ehsas hua ki uski mehbooba ne bra nahi pehna hai.vo & josh me bhar gaya & uske cleavage ko chumne laga.uske seene ko apne hotho se tar karte hue usne aankho ke kone se dekha ki 1 baar fir basement khali tha.

usne fauran rambha ko chhoda & car se utra.uske baad uske darwaze ki taraf gaya & khol use bhi utara.rambha ki sari ka aanchal zamin pe tha & vo tez sanse le rahi thi.shah ne 1 pal uske seene se leke uske pet tak nazar firayi.rambha ko uski aankho me sif vasna dikhi & uski chut uski nazro ki tapish se & kasmasane lagi,"koi hume dekh na le?"

rambha ke darr ko andekha karte hue shah ne use baaho me bhar ghumaya & car ke bonnet pe jhuka diya.uske hasrat bhare hath uski pith se leke kamar tak ghumne lage & unke peechhe-2 uske garm honth.rambha aahen bharne lagi,".uummmm..please,mahadev..koi dekh lega to gazab ho jayega..oohhhhh..!",shah uski gudaz kamar ke mans ko chus raha tha & uske pet ko daba raha tha.rambha uski harkato se ab masti me kanpne lagi thi.uski car parking ke 1 kone me khadi thi & vaha dono ke pakde jane ke kam hi chances the magar fir bhi vaha kabhi bhi koi bhi aa sakta tha & rambha ko usi baat ka darr tha.use hairat ho rahi thi ki jis shah ne use hoshiyar rehne ki nasihat di thi,aaj vahi is tarah ki khatre bhari harkat kar raha tha.par jo bhi kar raha tha,tha bahut romanchak!

rambha ke jism ko jab shah chumta to vo aise kasmasati mano use uski chhuan se bahut taklif hui ho.taklif use ho rahi thi,masti 1 hadd se aage badhti hai to uski shiddatko bardasht karna mushkil ho jata hai.insan ke dil me 1 bechaini bhar jati hai jo use pareshan karne lagti hai lekin us pareshani se zyada sukun pahuchane vali chiz shayad hi duniya me dusri ho!

shah ab zamin pe baith gaya tha & rambha ki sari kamar tak utha uski jangho & tango ke pichhle hisso ko chum raha tha.rambha abhi bhi us se vaha se chalne ki minnate kar rahi thi par shah pe to jaise uske jism ko vahi bhogne ka junun savar tha!shah ka lund bhi mauke ke khatre & romanch se aisa tana tha ki use ab usme thoda dard hone laga tha.

shah ne dekha ki rambha ne aaj bhi vahi kal vali uski di panty pehni thi.uska dil uski chaudi,makkhani gand ko apne diye tohfe me lipte dekh khushi se bhar utha & vo uski fanko ko dabate hue chumne laga.rambha bonnet pe jhuki car ko thame & zor se aahen bharne lagi.

thodi der tak uski jangho pe hath firate hue uski gand chumne ke baad shah ne panty ko utara & apni pant ki jeb ke hawale kiya.usne uski gand ki fanko ko zor se khinchte hue failaya & uski chut me jibh ghusa di.

"uunngghhhhhh..please..aahhhhh..maha..dev....yaha nahi..aahhhhh..!",shah ki zuban ne bahut jald hi uski chut se ras ki dhar chhudwa di & fir uski gand ke chhed ko chehdne laga.rambha masti me kasmasate hue aahe bhari ja rahi thi ki shah utha & uski kamar ko baye hath me jakad daye se apni pant ki zip kholne laga.rambha uska irada bhanp gayi & uska dil dhadak utha..ab baat hadd se bahar ja rahi thi..koi bhi aa sakta tha yaha & ye aadmi to pagal ho gaya tha!

rambha uski hath ko hata ghumi & use chumne lagi par shah pe to jaise use vahi chodne ka bhut savar tha.uska baya hath neeche gaya & uski sari joki ghumne se neeche aa gayi thi,ko fir se utha uski tange failane laga.rambha fauran use rokti hui uske seene ko chumti neeche baith gayi & uske lund ko munh me bhar liya.rambha ne itni tezi se uske lund ko hilate hue chusa ki shah ki aah nikal gayi.vo uske sar ko pakad uske munh ko chodne laga.rambha bhi apni zuban se uske supade ko chhedte hue jaldi-2 uske lund ko chus rahi thi par shah ka irada uske munh me jhadne ka tha nahi.

usne fauran use uthaya & chuma.rambha ki chhatiya uske seene me dabi to sune neeche dekha & paya ki blouse ke gale me se vo nikalne ko betab ho rahi hain.shah ke sar pe to junoon savar tha.uske hath rambha ki pith pe the hi.usne apne hatho se uske blouse ko pakad ke khincha & uske hooks tut gaye.usne blouse ko bedardi se uske jism se alag kar fenka & uski chhatiyo ko aapas me dabate hue chusne laga.rambha ke honth khul gaye magar unme se koi aavaz nahi aa rahi thi.uske andar masti ka sailab umad aaya tha.vo 1 public place me lagbhag nangi apne aashiq ke baahome khadi thi & is khayal se uska jism romanch se tharthara raha tha.

shah kuchh der uski choochiyo se khelta raha & fir ghuma ke car ke bonnet pe jhukaya & uski sari utha di,"..please..mahadev..oohhhhhhhhh..!",shah ne uski bayi tang uthake bonnet pe chada di thi & uski chut me ungli karne laga tha.shah ne kuchh der ungli karne ke baad use hata apna lund uski chut pe lagaya & andar dhakela,"..aahhhhhhhhh..mahadev..please..!",shah ne uski kamar ko daye & choochiyo ko baye hath me dabocha & chodne laga.lund andar ghuste hi uski sakhti & garmi,nazuk choochiyo ke bedardi se peesne & mahaul ke romanch se rambha mast ho gayi & aankhe band kar li.ab to use bhi chud ke us lund se jhadne ki hi khwahish thi.us bechari ko kya pata tha ki shah ke dimagh me kya chal raha tha!

shah ne kuchh der uski chut ko choda & fir lund bahar nikala.bonnet pe jhuki masti me chur rambha ko lund ka nikalna bura laga to usne aankhe kholi magar agle hi pal uski aankhe phail gayi & basement me uski chikh gunj uthi,"AAIIIIIIYYYYYYYEEEEEEE..MARRRRRRR GAYYYYYIIIIIIIIII..!"

basement me 1 guard duty pe tha jo vaha bane 1 cabin me baitha khana kha raha tha.rambha ki chikh sun vo bahar aaya & charo taraf dekha par jaha shah rambha ki gand maar raha tha us jagah thoda andhera tha & dono ke jism 1-2 cars ki aad me use nazar nahi aaye.shah & rambha apne khel me jute use dekhte rahe.vo kuchh der khada raha & fir vapas apne cabin me ja apna khana khatm karne laga.

shah ne lund uski chut se nikal uspe thuka & fir use lund ko uski gand ke sankre surakh me ghsua diya.rambha chikhi to usne baye hath se uska munh daba diya & daye se uski kamar jakde uski gand marne laga.kuchh der baad uska daya hath pet se sarak chut pe aa gaya & use kuredne laga.rambha dard & masti ke milejule ehsas me sab bhul gayi thi.uski chikhen shah ke hath me dafn ho rahi thi.

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deven us kali car se duri banaye hue uske peechhe chal raha tha.shah shehar ke beechobeech ke ilake me aa gaya tha jaha bade-2 daftar the.deven ne dekha ki car Trust Group ki 1 building me ghusi to vo bhi uske peechhe ho liya.us building me Trust Films ke alawa 1-2 banks bhi the.guard ke puchhne pe deven ne bank ka hi naam bataya.kali car basement parking me gayi to deven bhi uske peechhe-2 us parking me chala gaya.

"uunngghhhhh...aanngggghhhhhhh..!",rambha ghuti-2 aavaz me aahe bhar rahi thi.uski chut & gand pe hue dotarfe humle se uske jism ne hathyar daal diye the & vo jhad rahi thi.uske jism ke dono purkashish surakh apni mastani jakdan me shah ke lund & ungli kas rahe the & use bhi jhadne pe majbur kar rahe the.rambha apni gand me shah ke garm virya ko mehsus kar masti me pagal ho rahi thi.romanch & masti me uske jhadne ki shiddat bahut badh gayi thi.

jhadne ke baad shah uski pith pe jhuk gaya tha & uske munh se hath hata use chum raha tha,"..aap bahut zulmi hain..!",rambha aashiq se machal rahi thi,"..uumm..nahi..",usne uske hotho ki peshkash thukrayi to shah ne pyar bhare bol bol use manaya & uske gulabi hotho ke rasko chusne me aakhirkar kamyab ho gaya.

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kramashah.......

 
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