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Jaal -जाल compleet

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जाल पार्ट--60

गतान्क से आगे......

“ये किसका घर है रंभा?”

“यहा के वाइड का.”

“यहा क्या मिला है तुम्हे?”

“ये.”,रंभा ने चौखट पे बैठे शख्स के चेहरे पे टॉर्च की रोशनी मारी.उस शख्स ने बहुत धीरे से हाथ उठाके रोशनी को रोका & फिर आँखे मीचे हाथ नीचे कर रोशनी मारने वाले को देखने लगा लेकिन वो कुच्छ बोला नही.देवेन आगे बढ़ा & उस शख्स के चेहरे को गौर से देखा & उसके मुँह से हैरत भरी चीख निकल गयी.

“हैं!ये तो..ये तो..विजयंत मेहरा है.!”

"ये मुझे नदी के किनारे पड़ा मिला था..",वाइड देवेन को विजयंत मेहरा के मिलने की कहानी सुना रहा था,"..यहा से बहुत आयेज.मैं उधर जड़ी-बूटियाँ चुनने जाता हू."

"आपने पोलीस को इत्तिला नही की?"

"की थी लेकिन यहा कोई पक्की चौकी नही है बस 1 हवलदार आता है हफ्ते मे 1 बार.उसने इसे देखा & बोला कि नदी मे गिर गया होगा.उसने कहा कि वो जाके थानेदार को बता देगा & फिर वोही ये पता करेगा कि इसके जैसे हुलिए वाले किसी आदमी के गुम होने की रपट लिखाई गयी है या नही."

"फिर?"

"फिर वो आअज तक यहा नही आया है."

"हूँ..वैसे इसे हुआ क्या है?..ये बोलता क्यू नही?"

"ये देखो..",वाइड काफ़ी उम्रदराज़ था & काफ़ी देर बैठने के बाद उठने मे उसे काफ़ी तकलीफ़ होती थी.वो धीरे से उठा & कमरे मे बैठे उन्हे देखते विजयंत की ओर गया.विजयंत सब सुन रहा था,उन्हे देख रहा था लेकिन उसकी आँखो मे कही भी वो भाव नही था जिसे देख ये लगे कि उसे उनकी बातें समझ आ रही थी या नही,"..इस जगह..",उसने उसके माथे पे बाई तरफ बॉल हटा के दिखाया,"..पे गहरी चोट लगी थी इसे.मैने खून रोक के टाँके लगाए.ये बोलता क्यू नही इसका कारण मुझे नही पता.पर इतना ज़रूर है कि इसके दिमाग़ पे ज़ोर की चोट लगी है & उसी वजह से या तो इसकी याददाश्त गयी है या फिर सोचने & बोलने की ताक़त.",वो वापस अपनी जगह पे बैठ गया.

"वैसे इसे बातें समझ मे तो आती है.इसे भूख लगती है,प्यास लगती है.कहो तो खड़ा हो जाएगा,बोलो तो बैठ जाएगा मगर खुद कुच्छ कहेगा नही ना ही इशारा करेगा."

"हूँ..हम इसे अपने साथ ले जाते हैं.वाहा शहर मे सरकारी लोगो के हवाले कर देंगे तो फिर ज़रा आपका हवलदार भी चौकस होगा.ढीला लगता है मुझे वो."

"बहुत अच्छे.ज़रा यहा की बिजली के बारे मे भी बात करना."

"ज़रूर.",दोनो विजयंत को वाहा से ले निकल आए.रंभा ने वाइड को कुच्छ पैसे दे दिए थे.उसे अजीब सी खुशी हो रही थी लेकिन उसकी निगाह गाड़ी चलाते देवेन पे भी थी जो बहुत संजीदा लग रहा था.अब देवी फार्म पे हुई किसी बात की वजह से या फिर विजयंत के मिलने की वजह से,ये उसकी समझ मे नही आ रहा था.देवेन उसे चाहने लगा था & वो ये भी जानता था कि रंभा के ताल्लुक़ात विजयंत के साथ भी हैं.उसने उसे सवेरे ही कहा था कि इस बात से उसे कोई ऐतराज़ नही कि वो उसके अलावा किसी & को भी चाहे लेकिन था तो वो 1 मर्द ही.

"क्या हुआ था वाहा?बताए क्यू नही?",रंभा ने अपना सर उसके कंधे पे रख दिया & उसकी बाई बाँह सहलाने लगा.

"बताता हू.",देवेन ने उसके सर को थपथपाया & कार चलते हुए उसे सारी बात बतानी शुरू की.

"गाड़ी रोकिए!",सारी बात सुनने के बाद वो बोली.

"क्या हुआ रंभा?"

"गाड़ी रोकिए!",वो रुवन्सि हो गयी थी.देवेन ने ब्रेक लगाया तो वो उसके गले लग गयी & रोने लगी.देवेन उसके जज़्बातो को समझ रहा था.1 कामीने के स्वार्थ ने तीन जिंदगियो को इतने दिनो तक खुशी से महरूम रखा था & उनमे से 1 तो अब इस दुनिया मे थी भी नही.

"इतना ख़तरा मोल लिया आपने..आप कितना चाहते थे मा को आज सही मयनो मे समझ आ रहा है मुझे..उसके धोखे की ग़लतफहमी से ही इतनी नफ़रत पैदा हुई थी आपके दिल में.",रंभा की रुलाई थम गयी थी & वो उसके गाल के निशान को सहला रही थी.

"हां,मगर आज सारी ग़लतफहमी दूर हो गयी बस 1 बात का गीला रह गया की सुमित्रा मेरी सच्चाई जाने बगैर चली गयी.",रंभा की रुलाई दोबारा छूट गयी.देर तक देवेन उसे बाहो मे भर समझाता रहा.उसने मूड के पिच्छली सीट पे बैठे विजयंत को देखा.उसने 1 बार आवाज़ होने पे आँखे खोली थी & फिर सो गया था.

"चलो,अब चुप हो जाओ.हमे यहा से जल्द से जल्द निकलना है.बालम सिंग ड्रग डीलर था & उसके मरने के बाद अब उसके लोग & पोलीस कुत्तो की तरह पूरे इलाक़े को सूंघ-2 के छनेन्गे.",उसने फिर कार स्टार्ट की तो सीधा क्लेवर्त जाके ही रोकी.रंभा होटेल वाय्लेट पहुँच समीर को विजयंत के मिलने के बारे मे बताना चाहती थी लेकिन देवेन ने उसे रोका.उसे कुच्छ खटक रहा था.

"रंभा,तुम मुझे ये बताओ कि समीर जब कंधार पे पोलीस को मिला था तो उसने क्या बताया था?",वो रात अभी भी उसके ज़हन मे ताज़ा थी बाद मे उसने & अख़बारो मे भी पढ़ा था & खबरों मे भी सुना था कि कैसे ब्रिज & सोनिया उस साज़िश मे शामिल थे & यही बात उसे खटक रही थी.रंभा ने उसे सारी बात बता दी.

"लेकिन आप ये क्यू पुच्छ रहे हैं?"

"अब मेरी समझ मे आया कि मुझे क्या खटक रहा था.",उसने खुशी से स्टियरिंग पे हाथ मारा,"..समीर झूठ क्यू बोल रहा है,रंभा?"

"क्या?समीर..झूठ..मेरी समझ मे नही आई आपकी बात.",रंभा के माथे पे शिकन पड़ गयी थी.

"उसने ये क्यू कहा कि झरने पे उसके हाथ पाँव बँधे होने के कारण वो अपने बाप की मदद नही कर सका जबकि हक़ीक़त ये थी कि उसके पाँव खुले थे."

"क्या?!"

"हां & उसे तो ये दिखना ही नही चाहिए था कि ब्रिज & सोनिया 1 साथ आए कि उसका बाप अकेला आया."

"क्यू?"

"क्यूकी उसकी आँखो पे पट्टी बँधी थी."

"क्या?!..",रंभा के चेहरे पे काई भाव आके चले गये..समीर झूठ बोल रहा था लेकिन क्यू?..विजयंत की मौत क्या 1 हादसा नही साज़िश थी?..समीर क्या नाराज़ था उसे रंभा से शादी करने पे ग्रूप से अलग करने से?..तो इसका मतलब था कि वो उस से बेइंतहा मोहब्बत करता था लेकिन उसके नमूने तो वो उस पार्टी मे देख ही चुकी थी जब वो कामया से प्यार के वादे कर रहा था..आख़िर सच क्या था?..समीर का मक़सद क्या था?

वो पलटी & पिच्छली सीट पे बेख़बर सोए विजयंत को देखा,"अब क्या करें?",उसने देवेन की ओर देखा.पहली बार उसे इस सारे मामले मे डर का एहसास हुआ था.

"पहले तो तुम समीर को इस बारे मे ज़रा भी भनक नही लगने दोगि..समीर क्या किसी को भी नही!ये राज़ सिर्फ़ मेरे तुम्हारे बीच रहेगा."

"ठीक है मगर इनका क्या करें?..इन्हे इलाज की ज़रूरत है वो भी बहुत उम्दा इलाज."

"हूँ..वो तो मैं करवा दूँगा."

"मगर कैसे?"

"वो मुझपे छ्चोड़ो."

"ओफ्फो..",तनाव की वजह से रंभा झल्ला गयी,"..मुझे भी तो बताइए कुच्छ..दिन मे भी मुझे अकेला भेज दिया & अब अभी भी नही बता रहे हैं!",खीजती रंभा देवेन को किसी बच्ची की तरह लगी..थी तो वो 1 बच्ची ही..वो तो हालात की दरकार थी की वो जल्दी बड़ी हो गयी.

"मैं इसका इलाज कारवंगा.इसे अपने साथ ले जाके..",उसने उसे अपनी ओर खींचा & उसके चेहरे को चूमने लगा.रंभा की खिज भी गायब होने लगी,"..गोआ मे."

"गोआ?"

"हां,गोआ."

देवेन विजयंत मेहरा को गोआ कैसे ले गया ये वही जानता था.कुच्छ रास्ता उसने ट्रेन से कुच्छ बस से & कुच्छ टॅक्सी से तय किया.किसी के माशूर इंडस्ट्रियलिस्ट विजयंत मेहरा को पहचान लेने का ख़तरा था & इसीलिए उसे इतनी सावधानी बरतनी पड़ी.रंभा ने विजयंत की बेतरटीबी से बढ़ी दाढ़ी & बालो को बस थोड़ा सा काटा-च्चंता & बालो की पोनीटेल बनाके उसे ढीली टी-शर्ट & जेनस पहना दी थी ताकि वो कोई हिपी जैसा लगे & वो खुद डेवाले वापस लौट गयी थी.

समीर उस वक़्त बॉमबे मे था & उसने उस बात का फयडा उठाके उसकी चीज़ो की तलाशी ली लेकिन उसे कुच्छ भी ऐसा नही मिला जोकि गुत्थी सुलझाने मे उसकी मदद करता & तब उसे अपनी सहेली सोनम की याद आई & उसने उसे मिलने के लिए 1 5-स्तर होटेल के कॉफी शॉप मे बुलाया.

"सोनम,आजकल ऑफीस मे सब कैसा चल रहा है?"

"ठीक-ठाक लेकिन तू क्यू पुच्छ रही है?"

"& आज से पहले कैसा चल रहा था?",रंभा ने उसके सवाल को नज़रअंदाज़ कर दिया.

"मैं तेरी बात समझ नही पा रही,रंभा.",सोनम के माथे पे बल पड़ गये.

"रंभा,जब समीर लापता हुआ था & दाद उसकी खोज मे गये थे तो सब ठीक चल रहा था यहा?",अब सोनम सोच मे पड़ गयी.उसका दिल धड़कने लगा कि वो उसे प्रणव के बारे मे बताए या नही.उसे ये भी डर था की कही रंभा को उसके ब्रिज से जुड़े होने की बात तो पता नही चल गयी.

"क्या हू सोनम?तू चुप क्यू है?",रंभा ने उसके हाथ के उपर अपना हाथ रखा तो सोनम ने नज़रे उपर की.रंभा की नज़रो मे उसे कोई शक़ नही दिख रहा था बल्कि चिंता दिख रही थी.

"रंभा..वो.."

"हां,बोल ना!"

"देख,मुझे ये बात शायद विजयंत सर को या तुम्हे या फिर समीर को बता देनी चाहिए थी पर मैं बहुत घबरा गयी थी."

"मगर क्यू,सोनम?",उस वक़्त सोनम ने फ़ैसला किया कि अब अपने दिल का बोझ हल्का करने के लिए अपनी सहेली को सब बता देना ही सही होगा.

"यहा नही.मेरे घर चल.",दोनो वाहा से निकले & उसके घर पहुँचे.

"अब तो बता."

"रंभा,मुझे नही पता कि तुम मेरे बारे मे क्या सोचोगी लेकिन आज मैं तुम्हे सब बता देना चाहती हू..",सोनम ने ब्रिज से मिलने से लेके प्रणव के शाह से कोई डील करने तक की सारी बातें बता दी.रंभा उसे खामोशी से देख रही थी..सोनम ब्रिज की जासूस थी..& उसे भनक भी नही लगी..उस से दोस्ती भी क्या इसीलिए गाँठि उसने?..",तू मुझे धोखेबाज़ समझ रही है ना?..लेकिन रंभा,मैने तेरी दोस्ती से कभी फयडा उठाने की कोशिश नही की.हां,शुरू मे मैने सोचा था कि समीर से तेरी नज़दीकी का फयडा उठाऊं & उस वक़्त तुझे खोदती भी रहती थी ताकि कुच्छ इन्फर्मेशन मेरे हाथ लगे लेकिन बाद मे मुझे खुद पे बड़ी शर्म आई..",सोनम की आँखे छलक आई थी..क्या ग़लती थी उसकी?..& उस से भी बड़ा सवाल क्या वो इस बात का फ़ैसला करने वाली कौन होती है?..वो भी तो उसी के जैसी थी..बस अपना फयडा देखने वाली.

वो अपनी सुबक्ती हुई सहेली के करीब गयी & उसकी पीठ पे हाथ रखा,"कुच्छ ग़लत नही किया तूने.तेरी जगह मैं भी होती तो शायद ऐसा ही करती.",सोनम के दिल का गुबार उसकी आँखो से अब फूट-2 के बहने लगा & वो रंभा के गले से लग गयी,"..बस हो गया,अब चुप हो जा..कहा ना तेरी कोई ग़लती नही..हम जैसी लड़कियो को ऐसे फ़ैसले तो लेने ही पड़ते है ना!बस चुप हो जा!",1 बच्चे की तरह उसने उसे समझाया.

सोनम को अब बहुत हल्का महसूस हो रहा था,"अब मेरी बात गौर से सुन,सोनम.डॅड की मौत की जो कहानी हमने सुनी है उसमे कुच्छ झूठ है."

"क्या?!मगर तुझे कैसे पता?"

"वो मैं तुझे बाद मे बताउन्गि क्यूकी अभी तक मुझे भी नही पता सही बात का.देख,उनकी मौत मे ब्रिज कोठारी का हाथ तो नही था."

"क्या?!"

"हां.",उसे देवेन ने बता दिया था कि सोनिया उस रात उसके ससुर के साथ होटेल से निकली थी & कंधार पहुँची थी ना कि अपने पति के साथ,"..& ये काम परिवार के ही किसी सदस्य का है."

"मतलब प्रणव?"

"तेरी बातो से मुझे उसपे भी शक़ होने लगा है."

"उसपे भी?"

"हां,पहले तो मुझे समीर पे शक़ था."

"वॉट?!"

"हां.अब हम दोनो को ये पता लगाना है कि आख़िर है कौन & उसे क्या फयडा हुआ डॅड की मौत से?"

"फयडा..हूँ..लेकिन समीर को क्या फयडा होगा..ग्रूप तो उसेही मिलना था अपने पिता के बाद."

"हां मगर मेरे लिए झगड़ा किया था उनसे उसने लेकिन..लेकिन फिर सब होने के बाद वो मुझसे ही बेरूख़् हो गया है."

"अच्छा?"

"हां,यार वो मेरे साथ सोता है,मेरे जिस्म को प्यार करता है लेकिन अब उसका प्यार मेरे दिल तक जैसे पहुँच ही नही पाता..मैं तो उसके साथ पहले जैसे ही बर्ताव करती हू मगर वो जैसे मुझे..मुझे.."

"भूल गया है?",सोनम ने सहेली की बात पूरी करनी चाही.

"नही.भूला नही जैसे अब मैं उसके लिए कोई मायने नही रखती."

"हूँ..तो तुझसे शादी भी कही उसकी किसी चाल का हिस्सा तो नही था?",रंभा ने चौंक के सहेली को देखा..इस तरह तो सोचा भी नही था उसने..मगर चल क्या हो सकती थी & क्यू?..फिर वही क्यू?..यानी मक़सद..समीर का मक़सद क्या था?..अगर शादी भी चाल थी तो उस चल का मक़सद था क्या?..रंभा का सर घूमने लगा था!

"तू थी तो है,रंभा?..ये ले पानी पी.",.सोनम ने उसे पनिका ग्लास थमाया & उसके साथ बैठ गयी.रंभा गतगत सारा पानी पी गयी.

"यार,हम कहा फँस गयी हैं!",उसने अपनी सहेली को देखा,"..बचपन से लेके जवानी ऐसे कमिनो मे गुज़ारे की दौलत & ऊँचा तबका हमारी ख्वाहिश ही नही जुनून भी हो गया लेकिन क्या ये सब उतनी ज़रूरी चीज़ें हैं जितना ये हमे लगती थी?",रंभा ने बहुत गहरी बात कह दी थी.सोनम ने आँखे झुका ली थी,"चल यार.अब ऐसे मुँह मत लटका.चल कही बाहर चल के बढ़िया खाना खाते हैं.इस मुसीबत से तो मैं निपट ही लूँगी.कोई मेरा इस्तेमाल करे & मैं उसे सबक ना सिखाऊँ,ऐसा तो होगा नही!",दोनो हंसते हुए उठे & बाहर जाने की तैय्यरी करने लगे.

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क्रमशः.......

JAAL paart--60

gataank se aage......

“ye kiska ghar hai rambha?”

“yaha ke vaid ka.”

“yaha kya mila hai tumhe?”

“ye.”,rambha ne chaukhat pe baithe shakhs ke chehre pe torch ki roshni mari.us shakhs ne bahut dhire se hath uthake roshni ko roka & fir aankhe meeche hath neeche kar roshni marne vale ko dekhne laga lekin vo kuchh bola nahi.deven aage badha & us shakhs ke chehre ko gaur se dekha & uske munh se hairat bhari chikh nikal gayi.

“hain!ye to..ye to..Vijayant Mehra hai.!”

"Ye mujhe nadi ke kinare pada mila tha..",Vaid Deven ko Vijayant Mehra ke milne ki kahani suna raha tha,"..yaha se bahut aage.main udhar jadi-butiyan chunane jata hu."

"aapne police ko ittila nahi ki?"

"ki thi lekin yaha koi pakki chauki nahi hai bas 1 hawaldar aata hai hafte me 1 baar.usne ise dekha & bola ki nadi me gir gaya hoga.usne kaha ki vo jake thanedar ko bata dega & fir vohi ye pata akrega ki iske jaise huliye vale kisi aadmi ke gum hone ki rapat likhayi gayi hai ya nahi."

"fir?"

"fir vo aaaj tak yaha nahi aaya hai."

"hun..vaise ise hua kya hai?..ye bolta kyu nahi?"

"ye dekho..",vaid kafi umradaraz tha & kafi der baithne ke baad uthne me use kafi taklif hoti thi.vo dhire se utha & kamre me baithe unhe dekhte vijayant ki or gaya.vijayant sab sun raha tha,unhe dekh raha tha lekin uski aankho me kahi bhi vo bhav nahi tha jise dekh ye lage ki use unki baaten samajh aa rahi thi ya nahi,"..is jagah..",usne uske mathe pe bayi taraf baal hatake dikhaya,"..pe gehri chot lagi thi ise.maine khoon rok ke tanke lagaye.ye bolta kyu nahi iska karan mujhe nahi pata.par itna zarur hai ki iske dimagh pe zor ki chot lagi hai & usi vajah se ya to iski yaaddasht gayi hai ya fir sochne & bolne ki taaqat.",vo vapas apni jagah pe baith gaya.

"vaise ise baaten samajh me to aati hai.ise bhookh lagti hai,pyas lagti hai.kaho to khada ho jayega,bolo to baith jayega magar khud kuchh kahega nahi na hi ishara karega."

"hun..hum ise apne sath le jate hain.vaha shehar me sarkari logo ke hawale kar denge to fir zara aapka hawaldar bhi chaukas hoga.dhila lagta hai mujhe vo."

"bahut achhe.zara yaha ki bijli ke bare me bhi baat karna."

"zarur.",dono vijayant ko vaha se le nikla aaye.rambha ne vaid ko kuchh paise de diye the.use ajib si khushi ho rahi thi lekin uski nigah gadi chalate deven pe bhi thi jo bahut sanjida lag raha tha.ab Devi Farm pe hui kisi baat ki vajahse ya fir vijayant ke milne ki vajah se,ye uski samajh me nahi aa raha tha.deven use chahne laga tha & vo ye bhi janta tha ki rambha ke tallukat vijayant ke sath bhi hain.usne use savere hi kaha tha ki is baat se use koi aitraz nahi ki vo uske alawa kisi & ko bhi chahe lekin tha to vo 1 mard hi.

"kya hua tha vaha?batae kyu nahi?",rambha ne apna sar uske kandhe pe rakh diya & uski bayi banh sehlane laga.

"batata hu.",deven ne uske sar ko thapthapaya & car chalate hue use sari baat batani shuru ki.

"gadi rokiye!",sari baat sunane ke baad vo boli.

"kya hua rambha?"

"gadi rokiye!",vo ruwansi ho gayi thi.deven ne brake lagaya to vo uske gale lag gayi & rone lagi.deven uske jazbato ko samajh raha tha.1 kamine ke swarth ne teen sindagiyo ko itne dino tak khushi se mehrum rakha tha & unme se 1 to ab is duniya me thi bhi nahi.

"itna khatra mol liya aapne..aap kitna chahte the maa ko aaj sahi mayno me samajh aa raha hai mujhe..uske dhokhe ki galatfehmi se hi itni nafrat paida hui thi aapke dil men.",rambha ki rulayi tham gayi thi & vo uske gaal ke nishan ko sehla rahi thi.

"haan,magar aaj sari galatfehmi door ho gayibas 1 baat ka gila reh gaya ki sumitra meri sachchai jane bagair chali gayi.",rambha ki rulai dobara chhut gayi.der tak deven use baaho me bhar samjhata raha.usne mud ke pichhli seat pe baithe vijayant ko dekha.usne 1 baar aavaz hone pe aankhe kholi thi & fir so gaya tha.

"chalo,ab chup ho jao.hume yaha se jald se jald nikalna hai.Baalam Singh drug dealer tha & uske marne ke baad ab uske log & police kutto ki tarah pure ilake ko sungh-2 ke chhanenge.",usne fir car start ki to seedha Clayworth jake hi roki.rambha Hotel Violet pahunch Sameer ko vijayant ke milne ke bare me batana chahti thi lekin deven ne use roka.use kuchh khatak raha tha.

"rambha,tum mujhe ye batao ki sameer jab Kamdhar pe police ko mila tha to usne kya bataya tha?",vo raat abhi bhi uske zehan me taza thi baad me usne & akhbaro me bhi pahda tha & khabron me bhi suna tha ki kaise brij & Soniya us sazish me shamil the & yehi baat use khatak rahi thi.rambha ne use sari baat bata di.

"lekin aap ye kyu puchh rahe hain?"

"ab meri samajh me aaya ki mujhe kya khatak raha tha.",usne khushi se steering pe hath mara,"..sameer jhuth kyu bol raha hai,rambha?"

"kya?sameer..jhuth..meri samajh me nahi aayi aapki baat.",rambha ke mathe pe shikan pad gayi thi.

"usne ye kyu kaha ki jharne pe uske hath panv bandhe hone ke karan vo apne baap ki madad nahi kar saka jabki haqeeqat ye thi ki uske panv khule the."

"kya?!"

"haan & use to ye dikhna hi nahi chahiye tha ki brij & soniya 1 sath aaye ki uska baap akela aaya."

"kyu?"

"kyuki uski aankho pe patti bandhi thi."

"kya?!..",rambha ke chehre pe kayi bhav aake chale gaye..sameer jhuth bol raha tha lekin kyu?..vijayant ki maut kya 1 hadsa nahi sazish thi?..sameer kya naraz tha use rambha se shadi karne pe group se alag karne se?..to iska matlab tha ki vo us se beintaha mohabbat karta tha lekin uske namune to vo us party me dekh hi chuki thi jab vo Kamya se pyar ke vade kar raha tha..aakhir sach kya tha?..sameer ka maqsad kya tha?

vo palti & pichhli seat pe bekhabar soye vijayant ko dekha,"ab kya karen?",usne deven ki or dekha.pehli baar use is sare mamle me darr ka ehsas hua tha.

"pehle to tum sameer ko is bare me zara bhi bhanak nahi lagne dogi..sameer kya kisi ko bhi nahi!ye raaz sirf mere tumhare beech rahega."

"thik hai magar inka kya karen?..inhe ilaj ki zarurat hai vo bhi bahut umda ilaj."

"hun..vo to main karwa dunga."

"magar kaise?"

"vo mujhpe chhodo."

"offoh..",tanav ki vajah se rambha jhalla gayi,"..mujhe bhi to bataiye kuchh..din me bhi mujhe akela bhej diya & ab abhi bhinahi bata rahe hain!",khijti rambha deven ko kisi bachchi ki tarah lagi..thi to vo 1 bachchi hi..vo to halaat ki darkar thi ki vo jaldi badi ho gayi.

"main iska ilaj karaunga.ise apne sat le jake..",usne use apni or khincha & uske chehre ko chumne laga.rambha ki khij bhi gayab hone lagi,"..Goa me."

"goa?"

"haan,goa."

Deven Vijayant Mehra ko Goa kaise le gaya ye vahi janta tha.kuchh rasta usne train se kuchh bus se & kuchh taxi se tay kiya.kisi ke mashoor industrialist Vijayant Mehra ko pehchan lene ka khatra tha & isiliye use itni savdhani baratni padi.Rambha ne vijayant ki betartibi se badhi dadhi & baalo ko bas thoda sa kata-chhanta & baalo ki ponytail banake use dhili t-shirt & jenas pehna di thi taki vo koi hippy jaisa lage & vo khud Devalay vapas laut gayi thi.

Sameer us waqt Bombay me tha & usne us baat ka fayda uthake uski chizo ki talashi li lekin use kuchh bhi aisa nahi mila joki gutthi suljhane me uski madad karta & tab use apni saheli Sonam ki yaad aayi & usne use milne ke liye 1 5-star hotel ke coffee shop me bulaya.

"sonam,aajkal office me sab kaisa chal raha hai?"

"thik-thak lekin tu kyu puchh rahi hai?"

"& aaj se pehle kaisa chal raha tha?",rambha ne useks awal ko nazarandaz kar diya.

"main teri baat samajh nahi pa rahi,rambha.",sonam ke mathe pe bal pad gaye.

"rambha,jab sameer lapata hua tha & dad uski khoj me gaye the to sab thik chal raha tha yaha?",ab sonam soch me pad gayi.uska dil dhadakne laga ki vo use Pranav ke bare me bataye ya nahi.use ye bhi darr tha ki lahi rambha ko uske Brij se jude hone ki baat to pata nahi chal gayi.

"kya hu sonam?tu chup kyu hai?",rambha ne uske hath ke uapr apna hath rakha to sonam ne nazre upar ki.rambha ki nazro me use koi shaq nahi dikh raha tha balki chinta dikh rahi thi.

"rambha..vo.."

"haan,bol na!"

"dekh,mujhe ye baat shayad vijayant sir ko ya tumhe ya fir sameer ko bata deni chahiye thi par main bahut ghabra gayi thi."

"magar kyu,sonam?",us waqt sonam ne faisla kiya ki ab apne dil ka bojh halka karne ke liye apnis aheli ko sab bata dena hi sahi hoga.

"yaha nahi.mere ghar chal.",dono vaha se nikle & uske ghar pahunche.

"ab to bata."

"rambha,mujhe nahi pata ki tum mere bare me kya sochogi lekin aaj main tumhe sab bata dena chahti hu..",sonam ne brij se milne se leke pranav ke Shah se koi deal karne tak ki sari baaten bata di.rambha use khamoshi se dekh rahi thi..sonam brij ki jasoos thi..& use bhanak bhi nahi lagi..us se dosti bhi kya isiliye ganthi usne?..",tu mujhe dhokhebaz samajh rahi hai na?..lekin rambha,maine teri dosti se kabhi fayda uthane ki koshsih nahi ki.haan,shuru me maine socha tha ki sameer se teri nazdiki ka fayda uthaoon & us waqt tujhe khodti bhi rehti thi taki kuchh information mere hath lage lekin baad me mujhe khud pe badi sharm aayi..",sonam ki aankhe chhalak aayi thi..kya galti thi uski?..& us se bhi bada sawal kya vo is baat ka faisla karne vali kaun hoti hai?..vo bhi to usi ke jaisi thi..bas apna fayda dekhne vali.

vo apni subakti hui saheli ke karib gayi & uski pith pe hath rakha,"kuchh galat nahi kiya tune.teri jagah main bhi hoti to shayad aisa hi karti.",sonam ke dil ka gubar uski aankho se ab phoot-2 ke behne laga & vo rambha ke gale se lag gayi,"..bas ho gaya,ab chup ho ja..kaha na teri koi galti nahi..hum jaisi ladkiyo ko aise faisle to lene hi padte hai na!bas chup ho ja!",1 bachche ki tarah usne use samjhaya.

sonam ko ab bahut halka mehsus ho raha tha,"ab meri baat gaur se sun,sonam.dad ki maut ki jo kahani humne suni hai usme kuchh jhuth hai."

"kya?!magar tujhe kaise pata?"

"vo main tujhe baad me bataungi kyuki abhi tak mujhe bhi nahi pata sahi baat ka.dekh,unki maut me Brij Kothari ka hath to nahi tha."

"kya?!"

"haan.",use deven ne bata diya tha ki Soniya us raat uske sasur ke sath hotel se nikli thi & Kamdhar pahunchi thi na ki apne pati ke sath,"..& ye kaam parivar ke hi kisi sadasya ka hai."

"matlab pranav?"

"teri baato se mujhe uspe bhi shaq hone laga hai."

"uspe bhi?"

"haan,pehle to mujhe sameer pe shaq tha."

"what?!"

"haan.ab hum dono ko ye pata lagana hai ki aakhir hai kaun & use kya fayda hua dad ki maut se?"

"fayda..hun..lekin sameer ko kya fayda hoga..group to usehi milna tha apne pita ke baad."

"haan magar mere liye jhagada kiya tha unse usne lekin..lekin fir sab hone ke baad vo mujhse hi berukh ho gaya hai."

"achha?"

"haan,yaar vo mere sath sota hai,mere jism ko pyar karta hai lekin ab uska pyar mere dil tak jaise pahunch hi nahi pata..main to uske sath pehle jaise hi bartav karti hu magar vo jaise mujhe..mujhe.."

"bhool gaya hai?",sonam ne saheli ki baat puri karni chahi.

"nahi.bhoola nahi jaise ab main uske liye koi mayne nahi rakhti."

"hun..to tujhse shadi bhi kahi uski kisi chaal ka hissa to nahi tha?",rambha ne chaunk ke saheli ko dekha..is tarah to socha bhi nahi tha usne..magar chal kya ho sakti thi & kyu?..fir vahi kyu?..yani maqsad..sameer ka maqsad kya tha?..agar shadi bhi chaal thi to us chal ka maqsad tha kya?..rambha ka sar ghumne laga tha!

"tu thi to hai,rambha?..ye le pani pi.",.sonam ne use panika glass thamaya & uske sath baith gayi.rambha gatagat sara pani pi gayi.

"yaar,hum kaha phans gayi hain!",usne apni saheli ko dekha,"..bachpan se leke jawani aise kamiyo me guzri ki daulat & ooncha tabka humari khwahish hi nahi junoon bhi ho gaya lekin kya ye sab utni zaruri chizen hain jitna ye hume lagti thi?",rambha ne bahut gehri baat keh di thi.sonam ne aankhe jhuka li thi,"chal yaar.ab aise munh mat latka.chal kahi bahar chal ke badhiya khana khate hain.is musibat se to main nipat hi lungi.koi mera istemal kare & main use sabak na sikhaoon,aisa to hoga nahi!",dono hanste hue uthe & bahar jane ki taiyyari karne lage.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--61

गतान्क से आगे......

रंभा अपने बिस्तर पे लेटी थी,सोनम की बातें उसके ज़हन मे घूम रही थी..प्रणव की हरकतें उसे शक़ के दायरे मे खड़ा ही नही कर थी बल्कि चीख-2 के कह रही थी कि वही मुजरिम है मगर फिर समीर के बदले रवैयययए,उसके झूठे बयान का राज़ क्या था?..प्रणव की हर्कतो से & जिस तरह से उसने रंभा को अपनी बातो के जाल मे फँसाने की कोशिश की थी,उस से इतना तो समझ आ ही रहा था कि वो ट्रस्ट ग्रूप का मालिक बनना चाहता है.महादेव शाह को भी जिस तरह वो कंपनी मे पैसे लगाने के बहाने घुसना चाह रहा था,उस से भी यही लगता था कि शाह उसकी कठपुतली है & उसके ज़रिए वो बाद मे कंपनी का हॉस्टाइल टेकोवर करने की कोशिश कर सकता है.तभी रंभा को याद आया कि आज रात उसने उस से मिलने की बात कही थी.अब देखना था कि वो क्या कहता है & उस से गुत्थी सुलझाने मे कोई मदद मिलती है या नही.तभी उसका मोबाइल बजा.

"हेलो."

"कैसी हो?",लाइन पे देवेन था.रंभा के जिस्म मे उसकी आवाज़ सुनते ही खुशी की लहर दौड़ गयी.वो 1 सफेद कुरती & जीन्स पहन सोनम से मिलने गयी थी & जब लौटी थी तो जीन्स उतार केवल कुरती मे आराम करने लगी थी.

"ठीक नही हू."

"क्यू?क्या हुआ?",देवेन की आवाज़ मे चिंता सॉफ झलक रही थी.

"दूर जाके पुछ्ते हैं कि मैं ठीक हू की नही!",रंभा अपने आशिक़ से मचल गयी तो वो हंस दिया.

"ओह!अब क्या करू?..हालात ही कुच्छ ऐसे हैं.",उसकी आवाज़ रंभा के ज़हन मे उसकी तस्वीर को ताज़ा कर रही थी & उसके जिस्म को भी.रंभा ने अपनी भारी जाँघो को आपस मे रगड़ा & अपनी पॅंटी पे अपना बाया हाथ रख दिया.

"हां,वो तो है.पता है,मामला उतना सीधा नही लग रहा अब.शक़ के दायरे मे केवल समीर ही नही प्रणव भी है."

"क्या?!"

"जी..",रंभा उसे सब बताने लगी.प्रेमी की आवाज़ सुन के ही उसका हाथ पॅंटी मे घुस गया था..जब बातें इतनी संजीदा थी तब तो ये हाल था अगर बाते रोमानी होती तो क्या होता!

"रंभा,मुझे कुच्छ भी ठीक नही लग रहा.बहुत ख़तरा है इस सब मे.तुम छ्चोड़ो उस परिवार को.हम मेहरा के मिलने की बात बता देते हैं & तुम समीर को छ्चोड़ मेरे पास आ जाओ.उसके जितनी दौलत नही मेरे पास पर तुम्हे कोई तकलीफ़ ना होने देने का वादा करता हू मैं!"

"पागल मत बानिए!",रंभा जज़्बाती हो गयी मगर उसकी उंगली उसके दाने को सहलाने लगी थी,"..ऐसा कैसे सोचा आपने की दौलत की वजह से आपके साथ नही रहूंगी मैं?..& अब बताएँगे तो क्या जवाब होगा हमारे पास कि हम दोनो 1 साथ उस गाँव मे कर क्या रहे थे & सनार का वो मुखिया.पोलीस उस तक तो पहुँच ही जाएगी & जब वो ये बताएगा कि हम पति-पत्नी बनके वाहा रहे थे तो फिर क्या होगा?..नही.इस मामले की तह तक पहुँचने पे ही हमे चैन मिल सकता है..आहह..!"

"क्या हुआ?कराही तुम..",मगर देवेन तब तक उसकी बात समझ गया & उसका लंड भी पॅंट मे कुलनूलने लगा,"..खुद से खेल रही हो क्या?",सुने अपने लंड को सहलाया.

"हूँ..आप तो है नही यहा..ऊव्ववव..तो निगोडी उंगली से ही काम चलना पड़ रहा है..ऊहह..कब मिलेंगे हम?..कब दोबारा आपके जिस्म के नीचे पिसुन्गि मैं?..",रंभा अपनी बातो से आप ही मस्त हो रही थी,"..आपके सख़्त हाथ कब मेरी छातियो को मसलेंगे & आपके गर्म होंठ कब उन्हे चूसेंगे?..उफफफफफ्फ़..बोलिए ना!..कब मेरे लब आपके लबो से मिलेंगे & कब आपके मज़बूत जिस्म को मैं चूम पाऊँगी?....ओह..माआआआअ..!",दाने पे उंगली की रगड़ तेज़ हो गयी थी.

"मैं भी तो बेकरार हू..",गोआ की कॉटेज मे बैठे देवेन का लंड भी पॅंट की क़ैद से बाहर आ चुका था & उसकी भींची मुट्ठी मे कसा हिल रहा था,"..तुम्हारे कोमल,नशीले जिस्म के साथ के लिए.तुम मे समाके तुमसे मिलने के लिए.."

"..हाआंन्‍ननणणन्..अब इंतेज़ार नही होता..जल्दी आइए & अपनी इस दीवानी की चूत मे अपना लंड घुसैए..ओईईईईईई..!",जोश मे आहत हो रंभा ने खुद ही अपने दाने को मसल दिया था & दर्द & मस्ती मे चीख पड़ी थी.उसकी बेबाक बातो से देवेन ना केवल चौंका बल्कि जोश मे भी भर गया.उसका दिल चीख उठा रंभा के साथ के लिए & उसके हाथ के हिलने की रफ़्तार बहुत तेज़ हो गयी.

"उउम्म्म्ममममम..आप मेरे उपर हैं..हाआआन्न्‍णणन्..मेरे अंदर..ओईईईई..& ज़ोर से..हान्ंणणन्..ज़ोर से..धक्के लगा..इए...आहह..!",वो झाड़ गयी & उसी वक़्त देवेन के लंड से भी वीर्य की तेज़ धार निकली & सामने के फर्श पे गिर गयी.दोनो कान से फोन लगाए 1 दूसरे की तेज़ सांसो को सुन रहे थे & फोन को ही चूम के अपने-2 प्यार का इज़हार कर रहे थे.

"पागल कर दिया है आपने मुझे!",रंभा ने अपने मोबाइल को चूमा.

"तुमने क्या मुझे ठीक हाल मे छ्चोड़ा है!",दोनो हँसने लगे.देवेन को खुद पे भी हँसी आ रही थी..इस उम्र मे स्कूल के लड़के के सी हरकत!

"अच्छा,मरीज़ कैसा है अब?"

"वो..डॉक्टर को दिखा तो दिया है & वो टेस्ट पे टेस्ट कर रहा है मगर यार बड़ा अजीब सा लगता है उसके साथ रहने मे."

"क्यू?",रंभा ने पॅंटी से हाथ निकल लिया था & कुरती के उपर से अपनी चूचियो को दबा रही थी.

"तुम ही सोचो,1 आदमी जो सब देखता है मगर खुद कुच्छ बोलता नही.,बस 1 रोबोट की तरह तुम्हारी हर बता मान लेता है.जल्दी से यहा आओ ताकि कुच्छ पक्का सोचें इस बारे मे."

"हूँ,करती हू कोई जुगाड़.वैसे उस डॉक्टर का क्या कहना है?"

"3-4 दीनो मे टेस्ट्स की सारी रिपोर्ट्स आ जाएँगी तभी बोलेगा कुच्छ.अच्छा चलो,रखता हू..आ रहा है मरीज़ हाथ मे पानी का ग्लास लिए हुए.प्यास लगी होगी & बॉटल मे पानी होगा नही.ओके,बाइ."

"बाइ..आइ..आइ लव यू.",वो उस से चुड चुकी थी.अभी-2 उसके साथ फोन पे भी चुदाई की थी लेकिन ये 3 लफ्ज़ कहते हुए अभी भी उसे शर्म आ जाती थी.

" आइ लव यू टू.",देवेन हंसा & फोन रख दिया.

रंभा के दरवाज़ा खोलते ही प्रणव ने उसके बंगल मे कदम रखा & हाथ पीछे ले जाके दरवाज़ा बंद किया & फिर उसे बाहो मे भर चूमने लगा,”इस तरह कहा चली गयी थी?”,उसने रंभा को बाहो मे भरे हुए दरवाज़े की बगल की दीवार से लगा दिया,”मेरा कुच्छ तो ख़याल किया होता!”,रंभा अभी भी बस कुरती & पॅंटी मे थी.देवेन के साथ हुई गुफ्तगू ने उसकी आग को बुरी तरह भड़का दिया था,अब वो तो यहा आ नही सकता था तो उसे प्रणव के ज़रिए ही उस आग को ठंडा करना था.प्रणव उसे दीवार से दबाते हुए अपना लंड उसकी चूत पे मसल रहा था & उसकी ज़ुबान से ज़ुबान लड़ा रहा था.

“तुम ही ने तो कहा था कि ग्रूप जाय्न करू..उउम्म्म्मम..!”,प्रणव उसकी कमर को लपेटे उसकी गर्देन चूम रहा था.उसके लंड की रगड़ से मस्त हो रंभा ने अपनी बाई टांग उठा के प्रणव की दाई टांग के उपर रखते हुए उसके पिच्छले हिस्से पे उपर-नीचे चलाया.

“अच्छा किया,बहुत अच्छा किया.”,प्रणव ने उसकी बाई जाँघ को दाए हाथ मे थमते हुए उसे सहलाया.उसके होंठ रंभा के चेहरे & गर्दन को भिगोये जा रहे थे.उसका बाया हाथ रंभा की कुरती मे घुस उसकी पीठ पे घूम रहा था.रंभा भी उसे चूमते हुए उसके सीने पे अपने बेसब्र हाथ चला रही थी.उसने उसे धकेल उसके होंठो को खुद से लगा किया & उसकी टी-शर्ट निकाल दी.उसके बालो भरे सीने मे अपनी उंगलिया फिराते हुए उसने फिर से उसे आगोश मे कसा & उसे चूमने लगी.उसके दिल मे देवेन के जिस्म की याद गूँज रही थी & उस से ना मिल पाने की बेबसी उसके हाथो की हर्कतो से झलक रही थी.

“तुम्हे मुझसे क्या ज़रूरी बात करनी थी,प्रणव?..ऊहह..!”,प्रणव का दाया हाथ उसकी पॅंटी के वेयैस्टबंड मे से घुसता हुआ उसकी गंद की बाई फाँक को दबाने लगा था.रंभा ने मस्ती मे आह भरते हुए सर उपर करते हुए आँखे बंद कर ली थी.

“रंभा,कल को अगर तुम्हेकोम्पनी के शेर्स मिल जाएँ & ग्रूप के अहम फ़ैसले के लिए वोटिंग हो तो तुम किसकी तरफ रहोगी?”,प्रणव ने उसकी कुरती उपर कर निकाली & केवल ब्रा & पॅंटी मे खड़ी रंभा को अपनी गोद मे उठा लिया.रंभा ने अपनी दोनो बाहें उसकी गर्देन मे डाली & उसे चूमने लगी.वो उसे उसके बेडरूम मे ले जा रहा था.

“बड़ा बेतुका सवाल किया है तुमने..ऊव्ववव..!”,प्रणव ने उसे बिस्तर पे गिराया.रंभा थोड़ा उचकी & बिस्तर के किनारे खड़े अपने आशिक़ की ट्रॅक पॅंट को नीचे किया & उसके खड़े लंड को थमते हुए उसकी झांतो को चूम लिया.

“इसमे बेतुका क्या है?..आहह..!”,रंभा की ज़ुबान उसके सूपदे को सहला रही थी.

“पहले तो मैं वोटिंग मेंबर हू नही,ना बनने की सूरत दिखती है तो फिर मैं किसके लिए वोट करूँगी इसका जवाब कैसे दू.”,उफफफफ्फ़..देवेन..ये दूरी क्यू है!..उसने प्रणव के लंड को मुँह मे भा ज़ोर से चूसा & उसकी गंद को बहुत ज़ोर से दबोचा.रंभा की आशिक़ी से झलकती बेचैनी से प्रणव को ये गुमान हुआ कि पिच्छले दिनो रंभा ने उसे बहुत मिस किया & इसीलिए अभी वो इतनी जोशमे है.उसके हाथ रंभा के बालो से नीचे गये & उसके ब्रा के हुक्स खोल दिया.

“फ़र्ज़ करने को कह रहा हू.”,उसकी मखमली पीठ पे उसने अपने हाथ चलाए.रंभा उसके लंड को हिलाते हुए चूसे जा रही थी.

“फिर भी जवाब देना मुश्किल है..आहह..!”,प्रणव ने उसके मुँह से लंड खींचा & उसे बिस्तर पे धकेल दिया & अपनी पॅंट उतार बिस्तर पे चढ़ गया.रंभा की आँखो मे अब बस वासना का नशा था.प्रणव ने उसकी दाई टांग को उठा लिया & आगे झुकते हुए उसकी दाई जाँघ के अन्द्रुनि हिस्से पे चूमने लगा,”..पता तो चले कि आख़िर वोटिंग हो किस मुद्दे पे रही है..आननह..!”,प्रणव के तपते होंठ उसकी पॅंटी की ओर बढ़ रहे थे जोकि उसकी चूत से रिस्ते रस से गीली हो गयी थी.

“मान लो वोटिंग इस बात के लिए हो रही हो की कंपनी मे किसी बाहर के शख्स को पैसे लगाने की इजाज़त दी जाए तो?”,..महादेव शाह..यही नाम बताया था सोनम ने उसे!..आख़िर प्रणव उसे क्यू कंपनी मे घुसना चाहता है?..उसे क्या फयडा होने वाला है इस से?..शाह पैसा लगाएगा तो फिर वो शेर्स भी लेगा & फिर मालिक तो वो हुआ?

“आन्न्‍ननणणनह..!”,रंभा का दिल देवेन के पास था,दिमाग़ प्रणव के मंसूबो को समझने मे उलझा था मगर जिस्म तो वही प्रणव की हर्कतो का लुत्फ़ उठा रहा था & जैसे ही प्रणव ने जोश मे भर उसकी पॅंटी के उपर से ही उसकी चूत को चूमा वो झाड़ गयी.वो आँखे बंद किए खुमारी मे तेज़ साँसे ले रही थी & वो उसकी ब्रा & पॅंटी उसके जिस्म से जुदा कर रहा था,”..उउन्न्ञणन्..ओह..हान्ंनननणणन्..चूसो ना!”,प्रणव उसके उपर लेट गया था & उसकी छातियो को चूमने के बाद उसकी गर्देन को चूमने लगा था जब रंभा ने उसके बाल पकड़ उसके मुँह को वापस अपने सीने से लगा अपनी ख्वाहिश ज़ाहिर की,”1 बात पुच्छू?..ऊन्नह..!”,प्रणव उसके निपल्स को जीभ से छेड़ते हुए उसकी छातियो को मुँह मे भर रहा था.उसका बाया हाथ तो रंभा के सीने पे ही था मगर दाया उसकी बाई जाँघ को उठाते हुए सहला रहा था.रंभा भी अपने चूत के उपर दबे उसके लंड की गर्मी से बेचैन हो बहुत धीरे-2 अपनी कमर हिला रही थी.

“पुछो ना.”,प्राणवा ने दाया हाथ भी जाँघ से खींच रंभा के सीने से लगाया & उसके दोनो उभारो को दबाते हुए उन्हे चूमने लगा.रंभा ने अपने दोनो घुटने मोड़ अपनी टाँगे फैला अपनी मस्ती का एलान किया.

“कोई दूसरा पैसे लगाएगा तो तुम्हे क्या फयडा होगा?..आईिययययययययईईईई..!”,लंड चूत मे घुस गया था.रंभा ने जिस्म कमान की तरह मोडते हुए आँखे बंद कर ली थी.समीर से मैल्कना हक अगर छीना भी तो वो इन्वेस्टर मालिक बन जाएगा..तुम तो वही के वही रह जाओगे..आन्न्‍नणणनह..हां..पूरा घुसाओ ना..रुक क्यू गये हो?!”,लंड 2 तिहाई अंदर घुसा था जब रंभा ने ये फ़ैसला लिया कि प्रणव से सीधा सवाल कर उसे परखा जाए.उसके सवाल ने प्रणव को चौंका दिया था.

ये लड़की तो बहुत होशियार है!..वो लंड घुसते हुए रुक गया था & उसके मस्ती भरे चेहरे,जिसपे लंड घुसने से हुए हल्के दर्द की लकीरें भी खींची थी,को गौर से देखने लगा.रंभा के बेचैन हाथ उसकी पीठ पे घूमते हुए उस से जैसे चुदाई आगे बढ़ाने की इल्टीजा कर रहे थे & जब उसने उसकी नही सुनी तो हाथो ने उसकी गंद को पकड़ उनमे अपने नाख़ून धंसा दिए.

“आहह..!”,नखुनो की चुभन से आहत हुए प्रणव की कमर अपनेआप हिलने लगी & चुदाई शुरू हो गयी.रंभा के होंठो पे मुस्कान खेलने लगी,”,प्रणव उसके उपर अपना पूरा भार डालते हुए लेट के धक्के लगा रहा था.रंभा को फिर से देवेन की याद आ गयी & उसने उसके जिस्म को बाहो मे भर ज़ोर से दबाया.उसकी टाँगे प्रणव की कमर पे चढ़ गयी & वो नीचे से कमर हिलाने लगी.

“देखो रंभा,तुम इस खानदान की बहू हो & मैं दामाद लेकिन हैसियत हमारी नौकरो वाली है.शिप्रा के नाम शेर्स हैं & उसकी मा के भी जबकि दोनो को ये तक पता नही कि पूरे मुल्क मे कंपनी के कितने दफ़्तर हैं..”,रंभा ने उसके कंधो को थामते हुए ज़ोर से आह भरी & उसका चेहरा ऐसा हो गया जैसे उसे बहुत तकलीफ़ हो रही हो.प्रणव की भी आह निकल गयी क्यूकी रंभा की चूत उसके लंड पे कस-फैल रही थी.उसने खुद पे काबू रखा & अपनी झड़ती महबूबा के बालो को चूमने लगा,”..मुल्क की छ्चोड़ो,दोनो से ये पुछो की डेवाले मे कितने दफ़्तर हैं हमारे तो जवाब नही दे पाएँगी लेकिन जब भी कभी वोटिंग की ज़रूरत पड़ेगी तो उन्हे बुलाया जाएगा..”

“..& हम जो इस ग्रूप की फ़िक्र करते हैं..इसके बारे मे जानते हैं,वो किनारे बैठे तमाशा देखेंगे..”,रंभा तेज़ सांसो & खुमारी के बीच भी उसकी बात को बड़े ध्यान से सुन रही थी.उसने उसके कंधे पकड़े & घूमाते हुए उसे नीचे किया & उसके उपर आ गयी.उसके सीने पे हाथ जमा उसके बालो को नोचती वो कमर हिलाने लगी तो प्रणव ने भी उसकी गंद की फांको को बेरहमी से मसला,”..इसीलिए मैं चाहता हू कि किसी बाहरी आदमी को लाऊँ.”

“ऊन्नह..”,रंभा ने उसके हाथ गंद से हटा के अपनी चूचियो से लगा दिए तो प्रणव ने उन्हे मसलना शुरू कर दिया,”..अभी भी मेरी बात का जवाब नही दिया तुमने, मगर फयडा क्या होगा इस से?..रहेंगे तो हम नौकर के नौकर ही!..आहह..!”,रंभा ने जानबूझ के ‘हम’ लफ्ज़ का इस्तेमाल किया था ताकि प्रणव को ये धोखा हो कि वो पूरी तरह से उसकी तरफ है.उसने उसकी चूचियो को पकड़े हुए ही नीचे खींचा & उसे अपने सीने से चिपकते हुए हाथो को उसकी कमर पे ला जाके उसे कसा & अपने घुटने मोड़ नीचे से ज़ोरदार धक्के लगाने लगा.

“मेरी जान,वो इन्वेस्टर पैसे लगाके ग्रूप के शेर्स लेगा मगर उन शेर्स का असली मालिक मैं रहूँगा & फिर तुम्हारे साथ मिलके मैं इस ग्रूप पे राज करूँगा..ओह..!”,उसके धक्को से आहत रंभा ज़्यादा देर तक बर्दाश्त नही कर पाई थी & फिर से झाड़ गयी थी.वो सर उठाए आँखे बंद किए कराह रही थी & उसकी चूत की हरकत से काबू खो चुका प्रणव का जिस्म झटके खा रहा था & उसका गाढ़ा वीर्य उसकी चूत मे छूट रहा था.रंभा के काँपते लबो ने उस वक़्त देवेन के होंठो की लज़्ज़ात को याद किया & उसके जिश्म मे झुरजुरी दौड़ गयी.

“वो इन्वेस्टर अपने पैसे लगाके तुम्हे मालिक क्यू बनाएगा?”,लंबी-2 साँसे लेती रंभा प्रणव के चेहरे को सहला रही थी.

“उस बेचारे को तो पता भी नही की मेरा असली मक़सद क्या है..”,प्रणव हंसा.अभी तक वो इस खेल मे अकेला था मगर अब वक़्त आ गया था 1 साथी चुनने का & रंभा से बेहतर साथी कोई हो नही सकता था.वो समझदार थी,होशियार थी & सबसे बड़ी बात,वो भी उसी की तरह सोचती थी,”..काम हो जाए उसके बाद उस इन्वेस्टर को मैं बड़ी सफाई से तस्वीर के बाहर कर दूँगा..”,प्रणव की उंगली रंभा के चेहरे पे घूम रही थी,..& फिर उस तस्वीर मे होंगे बस मैं & तुम!”,उसकी उंगली रंभा के गुलाबी लाबो पे आके रुक गयी थी.रंभा का दिल बहुत ज़ोरो से धड़का..तो कही प्रणव ही तो नही विजयंत मेहरा के इस हाल का ज़िम्मेदार?..मगर फिर समीर ने झूठा बयान क्यू दिया था?..अभी तो यही उचित था कि वो प्रणव को इस धोखे मे रखे कि वो उसी के साथ है..अब उसे गोआ जाना ही पड़ेगा.विजयंत का ठीक होना अब बहुत ज़रूरी हो गया था.वही बता सकता था कि उस रात कंधार पे हुआ क्या था..,”क्या सोचने लगी?”,वो प्रणव के सवाल से ख़यालो से बाहर आई.

“यही की प्रणव जी,आप तो बड़े च्छूपे रुस्तम हैं!”,उसने अपने होंठो पे ठहरी उसकी उंगली को काटा.दोनो हँसने लगे & प्रणव उसे बाहो मे भर चूमने लगा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--61

gataank se aage......

Rambha apne bistar pe leti thi,Sonam ki baaten uske zehan me ghum rahi thi..Pranav ki harkaten use shaq ke dayre me khada hi nahi kar thi balki chikh-2 ke keh rahi thi ki vahi mujrim hai magar fir Sameer ke badle ravaiyye,uske jhuthe bayan ka raaz kya tha?..pranav ki harkato se & jis tarah se usne rambha ko apne baato ke jaal me phansane ki koshish ki thi,us se itna to samajh aa hi raha tha ki vo Trust Group ka malik banana chahta hai.Mahadev Shah ko bhi jis tarah vo company me paise lagane ke bahane ghusana chah raha tha,us se bhi yehi lagta tha ki shah uski kathputli hai & uske zariye vo baad me company ka hostile takeover karne ki koshish kar sakta hai.tabhi rambha ko yaad aaya ki aaj raat usne us se milne ki baat kahi thi.ab dekhna tha ki vo kya kehta hai & us se gutthi sulajhne me koi madad milti hai ya nahi.tabhi uska mobile baja.

"hello."

"kaisi ho?",line pe Deven tha.rambha ke jism me uski aavaz sunte hi khushi ki lehar daud gayi.vo 1 safed kurti & jeans pehan sonam se milne gayi thi & jab lauti thi to jeans utar keval kurti me aaram akrne lagi thi.

"thik nahi hu."

"kyu?kya hua?",deven ki aavaz me chinta saaf jhalak rahi thi.

"door jake puchhte hain ki main thik hu ki nahi!",rambha apne aashiq se machal gayi to vo hans diya.

"oh!ab kya karu?..halaat hi kuchh aise hain.",uski aavaz rambha ke zehan me uski tasvir ko taza kar rahi thi & uske jism ko bhi.rambha ne apni bhari jangho ko aapas me ragda & apni panty pe apna baya hath rakh diya.

"haan,vo to hai.pata hai,mamla utna seedha nahi lag raha ab.shaq ke dayre me keval Sameer hi nahi pranav bhi hai."

"kya?!"

"ji..",rambha use sab batane lagi.premi ki aavaz sun ke hi uska hath panty me ghhus gaya tha..jab baaten itni sanjida thi tab to ye haal tha agar baate romani hoti to kya hota!

"rambha,mujhe kuchh bhi thik nahi lag raha.bahut khatra hai is sab me.tum chhodo us parivar ko.hum mehra ke milne ki baat bata dete hain & tum sameer ko chhod mere paas aa jao.uske jitni daulat nahi mere paas par tumhe koi taklif na hone dene ka vada karta hu main!"

"pagal mat baniye!",rambha jazbati ho gayi magar uski ungli uske dane ko sehlane lagi thi,"..aisa kaise socha aapne ki daulat ki vajah se aapke sath nahi rahungi main?..& ab batayenge to kya jawab hoga humare paas ki hum dono 1 sath us ganv me kar kya rahe the & Sanaar ka vo mukhiya.police us tak to pahunch hi jayegi & jab vo ye batayega ki hum pati-patni banke vaha rahe the to fir kya hoga?..nahi.is mamle ki teh tak pahunchne pe hi hume chain mil sakta hai..aahhhh..!"

"kya hua?karahi tum..",magar deven tab tak uski baats amajh gaya & uska lund bhi pant me kulnulane laga,"..khud se khel rahi ho kya?",sune apne lund ko sehlaya.

"hun..aap to hai nahi yaha..oowwww..to nigodi ungli se hi kaam chalana pad raha hai..oohhhhh..kab milenge hum?..kab dobara aapke jism ke neeche pisungi main?..",rambha apni baato se aap hi mast ho rahi thi,"..aapke sakht hath kab meri chhatiyo ko maslenge & aapke garm honth kab unhe chusenge?..uffffff..boliye na!..kab mere lab aapke labo se milenge & kab aapke mazboot jism ko main chum paoongi?....ohhhhhhhhh..maaaaaaaaa..!",dane pe ungli ki ragad tez ho gayi thi.

"main bhi to bekarar hu..",Goa ki cottage me baithe deven ka lund bhi pant ki qaid se bahar aa chuka tha & uski bhinchi mutthi me kasa hil raha tha,"..tumhare komal,nashile jism ke sat ke liye.tum me samake tumse milne ke liye.."

"..haaaannnnnnn..ab intezar nahi hota..jaldi aaiye & apni is deewani ki chut me apna lund ghusaiye..ouiiiiiiiii..!",josh me aahat ho rambha ne khud hi apne dane ko masal diya tha & dard & masti me chikh padi thi.uski bebak baato se deven na keval chaunka balki josh me bhi bhar gaya.uska dil chikh utha rambha ke sath ke liye & uske hath ke hilane ki raftar bahut tez ho gayi.

"uummmmmmmm..aap mere upar hain..haaaaaannnnn..mere andar..ouiiiiiii..& zor se..haannnnn..zor se..dhakke laga..iye...aahhhhhhhhhhhhhhh..!",vo jhad gayi & usi waqt deven ke lund se bhi virya ki tez dhar nikli & samne ke farsh pe gir gayi.dono kaan se fone lagaye 1 dusre ki tez sanso ko sun rahe the & fone ko hi chum ke apne-2 pyar ka izhar kar rahe the.

"pagal kar diya hai aapne mujhe!",rambha ne apne mobile ko chuma.

"tumne kya mujhe thik haal me chhoda hai!",dono hansne lage.deven ko khud pe bhi hansi aa rahi thi..is umra me school ke ladke ke si harkat!

"achha,mariz kaisa hai ab?"

"vo..doctor ko dikha to diya hai & vo test pe test kar raha hai magar yaar bada ajib sa lagta hai uske sath rehne me."

"kyu?",rambha ne panty se hath nikal liya tha & kurti ke uapr se apni chhatiyo ko daba rahi thi.

"tum hi socho,1 aadmi jo sab dekhta hai magar khud kuchh bolta nahi.,bas 1 robot ki tarah tumhari har bata maan leta hai.jaldi se yaha aao taki kuchh pakka sochen is bare me."

"hun,karti hu koi jugad.vaise us doctor ka kya kehna hai?"

"3-4 dino me tests ki sari reports aa jayengi tabhi bolega kuchh.achha chalo,rakhta hu..aa raha hai mariz hath me pani ka glass liye hue.pyas lagi hogi & bottle me pani hoga nahi.ok,bye."

"bye..i..i love you.",vo us se chud chuki thi.abhi-2 uske sath fone pe bhi chudai ki thi lekin ye 3 lafz kehte hue abhi bhi use sharm aa jati thi.

" i love you too.",deven hansa & fone rakh diya.

Rambha ke darwaza kholte hi Pranav ne uske bungle me kadam rakha & hath peechhe le jake darwaza band kiya & fir use baaho me bhar chumne laga,”is tarah kaha chali gayi thi?”,usne rambha ko baaho me bhare hue darwaze ki bagal ki deewar se laga diya,”mera kuchh to khayal kiya hota!”,rambha abhi bhi bas kurti & panty me thi.Deven ke sath hui guftgu ne uski aag ko buri tarah bhadka diya tha,ab vo to yaha aa nahi sakta tha to use pranav ke zariye hi us aag ko thanda karna tha.pranav use deewar se dabate hue apna lund uski chut pe masal raha tha & uski zuban se zuban lada raha tha.

“tum hi ne to kaha tha ki group join karu..uummmmm..!”,pranav uski kamar ko lapete uski garden chum raha tha.uske lund ki ragad se mast ho rambha ne apni bayi tang utha ke pranav ki dayi tang ke upar rakhte hue uske pichhle hisse pe upar-neeche chalaya.

“achha kiya,bahut achha kiya.”,pranav ne uski bayi jangh ko daye hath me thamte hue use sehlaya.uske honth rambha ke chehre & gardan ko bhigoye ja rahe the.uska baya hath rambha ki kurti me ghus uski pith peg hum raha tha.rambha bhi use chumte hue uske seene pe apne besabr hath chala rahi thi.usne use dhakel uske hotho ko khud se laga kiya & uski t-shirt nikal di.uske baalo bhare seene me apni ungliya firate hue usne fir se use agosh me kasa & use chumne lagi.uske dil me deven ke jism ki yaad gunj rahi thi & us se na mil pane ki bebasi uske hatho ki harkato se jhalak rahi thi.

“tumhe mujhse kya zaruri baat karni thi,pranav?..oohhhhhh..!”,pranav ka daya hath uski panty ke waistband me se ghusta hua uski gand ki bayi fank ko dabane laga tha.rambha ne masti me aah bharte hue sar upar karte hue aankhe band kar li thi.

“rambha,kal ko agar tumhecompany ke shares mil jayen & group ke aham faisle ke liye voting ho to tum kiski taraf rahogi?”,pranav ne uski kurti upar kar nikali & keval bra & panty me khadi rambha ko apni god me utha liya.rambha ne apni dono baahen uski garden me dali & use chumne lagi.vo use uske bedroom me le ja raha tha.

“bada betuka sawal kiya hai tumne..oowwww..!”,pranav ne use bistar pe giraya.rambha thoda uchki & bistar ke kinare khade apne aashiq ki track pant ko neeche kiya & uske khade lund ko thamte hue uski jhanto ko chum liya.

“isme betuka kya hai?..aahhhhhh..!”,rambha ki zuban uske supade ko sehla rahi thi.

“pehle to main voting member hu nahi,na banana ki surat dikhti hai to fir main kiske liye vote karungi iska jawab kaise du.”,ufffff..deven..ye duri kyu hai!..usne pranav ke lund ko munh me bha zor se chusa & uski gand ko bahut zor se dabocha.rambha ki aashiqi se jhalakti bechaini se pranav ko ye guman hua ki pichhle dino rambha ne use bahut miss kiya & isiliye abhi vo itni joshme hai.uske hath rambha ke baalo se neeche gaye & uske bra ke hooks khol diya.

“farz karne ko keh raha hu.”,uski makhmali pith pe usne apne hath chalaye.rambha uske lund ko hilate hue chuse ja rahi thi.

“fir bhi jawab dena mushkil hai..aahhhh..!”,pranav ne uske munh se lund khincha & use bistar pe dhakel diya & apni pant utar bistar pe chadh gaya.rambha ki aankho me ab bas vasna ka nasha tha.pranav ne uski dayi tang ko utha liya & aage jhukte hue uski dayi jangh ke andruni hisse pe chumne laga,”..pata to chale ki aakhir voting ho kis mudde pe rahi hai..aannhhhhhhhhhh..!”,pranav ke tapte honth uski panty ki or badh rahe the joki uski chut se riste ras se gili ho gayi thi.

“maan lo voting is baat ke liye ho rahi ho ki company me kisi bahar ke shakhs ko paise lagane ki ijazat di jaye to?”,..Mahadev Shah..yehi naam bataya tha Sonam ne use!..aakhir pranav use kyu company me ghusana chahta hai?..use kya fayda hone vala hai is se?..shah paisa lagayega to fir vo shares bhi lega & fir malik to vo hua?

“aannnnnnnhhhhhhhhhhh..!”,rambha ka dil deven ke paas tha,dimagh pranav ke mansubo ko samajhne me uljha tha magar jism to vahi pranav ki harkato ka lutf utha raha tha & jaise hi pranav ne josh me bhar uski panty ke upar se hi uski chut ko chuma vo jhad gayi.vo aankhe band kiye khumari me tez sanse le rahi thi & vo uski bra & panty uske jism se juda kar raha tha,”..uunnnnn..ohhhhhh..haannnnnnnn..chuso na!”,pranav uske upar let gaya tha & uski chhatiyo ko chumne ke baad uski garden ko chumne laga tha jab rambha ne uske baal pakad uske munh ko vapas apne seene se laga apni khwahish zahir ki,”1 baat puchhu?..oonnhhhhhh..!”,pranav uske nipples ko jibh se chhedte hue uski chhatiyo ko munh me bhar raha tha.uska baya hath to rambha ke seene pe hi tha magar daya uski bayi jangh ko uthate hue sehla raha tha.rambha bhji apne chut ke uapr dabe uske lund ki garmi se bechain ho bahut dhire-2 apni kamar hila rahi thi.

“puchho na.”,pranva ne daya hath bhi jangh se khinch rambha ke seene se lagaya & uske dono ubharo ko dabate hue unhe chumne laga.rambha ne apne dono ghutne mod apni tange faila apni masti ka elan kiya.

“koi dusra paise lagayega to tumhe kya fayda hoga?..aaiiyyyyyyyyeeeeeeeeee..!”,lund chut me ghus gaya tha.rambha ne jism Kaman ki tarah modte hue aankhe band kar lit hi.Sameer se mailkana hak agar china bhi to vo investor malik ban jayega..tum to vahi ke vahi reh jaoge..aannnnnnhhhhhhhh..haan..pura ghusao na..ruk kyu gaye ho?!”,lund 2 tihai andar ghusa tha jab rambha ne ye faisla liya ki pranav se seedha sawal kar use parkha jaye.uske sawal ne pranav ko chaunka diya tha.

Ye ladki to bahut hoshiyar hai!..vo lund ghusate hue ruk gaya tha & uske masti bhare chehre,jispe lund ghusne se hue halke dard ki lakiren bhi khinchi thi,ko gaur se dekhne laga.rambha ke bechain hath uski pith pe ghumte hue us se jaise chudai aage badhane ki iltija kar rahe the & jab usne uski nahi suni to hatho ne uski gand ko pakad unme apne nakhun dhansa diye.

“aahhhhh..!”,nakhuno ki chubhan se aahat hue pranav ki kamar apneaap hilne lagi & chudai shuru ho gayi.rambha ke hotho pe muskan khelne lagi,”,pranav uske upar apna pura bhaar dalte hue let ke dhakke laga raha tha.rambha ko fir se deven ki yaad aa gayi & usne uske jism ko baaho me bhar zor se dabaya.uski tange pranav ki kamar pe chadh gayi & vo neeche se kamar hilane lagi.

“dekho rambha,tum is khandan ki bahu ho & main damad lekin haisiyat humari naukro vali hai.Shipra ke naam shares hain & uski maa ke bhi jabki dono ko ye tak pata nahi ki pure mulk me company ke kitne daftar hain..”,rambha ne uske kandho ko thamte hue zor se aah bhari & uska chehra aisa ho gaya jaise use bahut taklif ho rahi ho.pranav ki bhi aah nikal gayi kyuki rambha ki chut uske lund pe kas-fail rahi thi.usne khud pe kabu rakha & apni jhadti mehbooba ke baalo ko chumne laga,”..mulk ki chhodo,dono se ye puchho ki Devalay me kitne daftar hain humare to jawab nahi de payengi lekin jab bhi kabhi voting ki zarurat padegi to unhe bulaya jayega..”

“..& hum jo is group ki fikr karte hain..iske bareme jante hain,vo kinare baithe tamasha dekhenge..”,rambha tez sanso & khumari ke beech bhi uski baat ko bade dhyan se sun rahi thi.usne uske kandhe pakde & gumate hue use neeche kiya & uske upar aa gayi.uske seene pe hath jama uske baalo ko nochti vo kamar hilane lagi to pranav ne bhi uski gand ki fanko ko berahmi se masla,”..isiliye main chahta hu ki kisi bahri aadmi ko laoon.”

“oonnhhhhhhh..”,rambha ne uske hath gand se hatake apni choochiyo se laga diye to pranav ne unhe masalna shuru kar diya,”..abhi bhi meri baat ka jawab nahi diya tumne, magar fayda kya hoga is se?..rahenge to hum naukar ke naukar hi!..aahhhhhhhh..!”,rambha ne janbujh ke ‘hum’ lafz ka istemal kiya tha taki pranav ko ye dhokha ho ki vo puri tarah se uski taraf hai.usne uski choochiyo ko pakde hue hi neeche khincha & use apne seene se chipkate hue hatho ko uski kamar pe la jake use kasa & apne ghutne mod neeche se zordar dhakke lagane laga.

“meri jaan,vo investor paise lagake group ke shares lega magar un shares ka asli malik main rahunga & fir tumahre sath milke main is group pe raaj karunga..ohhhhh..!”,uske dhakko se aahat rambha zyada der tak bardasht nahi kar payi thi & fir se jhad gayi thi.vo sar uthaye aankhe band kiye karah rahi thi & uski chut ki harkat se kabu kho chuka pranav ka jism jhatke kha raha tha & uska gadha virya uski chut me chhut raha tha.rambha ke kanpte labo ne us waqt deven ke hotho ki lazzaat ko yaad kiya & uske jsim me jhurjhuri daud gayi.

“vo investor apne paise lagake tumhe malik kyu banayega?”,lambi-2 sanse leti rambha pranav ke chehre ko sehla rahi thi.

“us bechare ko to pata bhi nahi ki mera asli maqsad kya hai..”,pranav hansa.abhi tak vo is khel me akela tha magar ab waqt aa gaya tha 1 sathi chunane ka & rambha se behtar sathi koi ho nahi sakta tha.vo samajhdar thi,hoshiyar thi & sabse badi baat,vo bhi usi ki tarah sochti thi,”..kaam ho jaye uske baad us investor ko main badi safai se tasveer ke bahar kar dunga..”,pranav ki ungli rambha ke chehre pe ghum rahi th,..& fir us tasvir me honge bas main & tum!”,uski ungli rambha ke gulabi labo pe aake ruk gayi thi.rambha ka dil bahut zoro se dhadka..to kahi pranav hi to nahi Vijayant Mehra ke is haal ka zimmedar?..magar fir Sameer ne jhutha bayan kyu diya tha?..abhi to yehi uchit tha ki vo pranav ko is dhokhe me rakhe ki vo usi ke sath hai..ab use Goa jana hi padega.vijayant ka thik hona ab bahut zaruri ho gaya tha.vahi bata sakta tha ki us raat Kamdhar pe hua kyat ha..,”kya sochne lagi?”,vo pranav ke sawal se khayalo se bahar aayi.

“yehi ki pranav ji,aap to bade chhupe rustam hain!”,usne apne hotho pe thehri uski ungli ko kata.dono hansne lage & pranav use baaho me bhar chumne laga.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--62

गतान्क से आगे......

"ओह!समीर..आहह..ऐसे ही प्यार करते रहो..!",अपनी डाई बाँह समीर की गर्दन मे डाले कामया उसकी गोद मे बैठी थी.उसने 1 स्कर्ट & ब्लाउस पहना था & समीर उसकी गर्दन से लेके क्लीवेज तक अपने होंठ चला रहा था.उसका बाया हाथ कामया की कमर को थामे था & दया उसकी जाँघो के बीच घुसा वाहा की कोमलता परख रहा था.

"ऊहह..शरीर कहिनके..!",कामया ने मुस्कुराते हुए आशिक़ के गाल पे प्यार भरी चपत लगाई जोकि उसकी पॅंटी मे हाथ घुसा उसकी चूत को सहला रहा था & उसके क्लीवेज को दांतो से हौले-2 काट रहा था,"..उउन्न्ञनह..हाआंन्‍ननणणन्..!",कामया के जिस्म मे बिजली दौड़ रही थी.समीर की उंगली उसकी चूत की दीवारो को रगड़ने लगी थी.

समीर अपनी नाक उसके क्लीवेज मे घुसा के रगड़ते हुए उसके सीने को चूम रहा था.कामया का दिल भी अब उसके होंठो की गर्मी को सीने पे महसूस करने को मचल रहा था.उसने खुद ही अपने ब्लाउस के बटन्स खोल दिए & अपनी छातियो को ब्रा के कप्स से आज़ाद कर दिया.समीर ने अपने मुँह मे उसकी छातियो को बारी-2 से भरना शुरू कर दिया तो कामया सर पीछे झटकते हुए बहुत तेज़ आहें लेने लगी.

"आहह..अब रहा नही जाता,समीर..ओह..जल्दी से मुझे अपनी दुल्हन बनाओ..आन्न्‍नननणणनह..!",समीर की उंगली & ज़ुबान ने उसे उस कगार से नीचे धकेल दिया था जहा से गिरने मे जो मज़ा मिलता है वो & कभी महसूस नही होता,"..फिर हर रात,सारी-2 रात तुम्हारी बाहो मे ऐसे ही गुज़ारुँगी..1 पल को भी तुम्हे खुद से दूर नही जाने दूँगी..",समीर ने उसकी पॅंटी खींची तो कामया ने खुद ही स्कर्ट & पॅंटी को निकाला & उसकी पॅंट ढीली कर उसके जिस्म के दोनो तरफ टाँगे कर उसकी गोद मे बैठते हुए उसके लंड को अपनी गीली चूत मे ले लिया,"..ऊहह..!",लंड अंदर घुसा तो उसने सर को पीछे फेंका & समीर के सर को पकड़ उसे अपनी चूचियो मे दबाते हुए कमर हिलाने लगी.

"बस मानपुर वाला टेंडर खुले & हमे मिले.उसके बाद मैं रंभा को किनारे करूँगा & तुम बनोगी म्र्स.मेहरा.",समीर उसकी कमर को जकड़े उसकी चूचियो को चूस्ते हुए अपनी कमर हिला रहा था.

"मिस्टर.मेहरा,लॅमबर्ट बॅंक के मिस्टर.सूरी आज शाम 6 बजे आपसे मिल नही पाएँगे.",अचानक दरवाज़ा खुला & किसी की गुस्से से भरी आवाज़ आई.दोनो प्रेमी चौंके & कामया ने गर्दन घुमाई.जिस कुर्सी पे दोनो चुदाई कर रहे थे वो बिल्कुल दरवाज़े के सामने थी & समीर को उनकी मोहब्बत मे खलल डालने वाले को देखने के लिए गर्दन नही घुमानी पड़ी थी.

"रंभा..त-तुम..!",समीर खड़ा होने लगा & उसी वक़्त कामया भी उसकी गोद से उतरने लगी मगर वो लड़खड़ा गयी & फर्श पे गिर गयी.समीर जैसे ही खड़ा हुआ उसकी पॅंट सरर से नीचे सरक के उसकी आएडियो के गिर्द फँस गयी.रंभा को दोनो की हालत पे बहुत हँसी आ रही थी लेकिन उसने अपने दिल के भाव को चेहरे पे नही आने दिया.उसे अंदाज़ा तो था कि दोनो का रिश्ता चुदाई तक पहुँच गया होगा & शुरू मे इस ख़याल से उसे काफ़ी गुस्सा भी आया था मगर अब उसकी ज़िंदगी मे देवेन आ चुका था.अब उसे समीर की कोई ज़रूरत नही थी मगर फिर भी इन दोनो को सज़ा तो देनी ही थी.रंभा कुच्छ पल अंगारे बरसाती आँखो से दोनो को देखती रही-दोनो जल्दी-2 अपने-2 कपड़े पहन रहे थे,& फिर दरवाज़ा ज़ोर से बंद करते हुए वाहा से निकल गयी,"..रंभा..रंभा सुनो तो..!"

गलियारे से बाहर जाती रंभा को समीर के घबराए चेहरे को याद कर बहुत हँसी आ रही थी मगर उस से भी ज़्यादा हँसी उसे आई थी उसे देख के चौंक उठे समीर की गोद से फर्श पे दोनो टाँगे फैलाए गिरती कामया को देख के.

समीर ने रंभा से कहा था कि वो आज देर रात बॉमबे से लौटेगा.यही बात सोनम को भी पता थी मगर दोपहर 12 बजे 1 फोन आया जिसे सोनम ने रिसीव किया,"ट्रस्ट ग्रूप,समीर मेहरा'स ऑफीस.हाउ मे आइ हेल्प यू?"

"हेलो,मैं लॅमबर्ट बॅंक से राजिंदर सूरी बोल रहा हू.आज शाम 6 बजे मुझे मिस्टर.मेहरा से ग्रांड वाय्लेट मे मिलना था मगर कुच्छ ऐसी एमर्जेन्सी आ गयी है कि मैं आज उनसे मिल नही पाऊँगा.मैने उनका मोबाइल ट्राइ किया था मगर वो मिल नही रहा तो प्लीज़ उन्हे ये मेसेज दे दीजिएगा & ये भी कह दीजिएगा कि इस बात के लिए मैं माफी चाहता हू.ओके..थॅंक्स!"

"जी..लेकिन..वो..",तब तक सूरी ने फोन रख दिया था,"..तो आज रात को वापस आ रहे थे.",सोनम सोच मे पड़ गयी थी & उसने ये बात फ़ौरन अपनी सहेली को बता दी जिसने उसे ये बात समीर को बताने से मना किया.जिस वक़्त सोनम का फोन आया था उस वक़्त रंभा प्रणव के साथ 1 शॉपिंग माल के बाहर कार मे बैठी थी.उस माल मे विदेशी डिज़ाइनर्स के स्टोर्स थे & वाहा उसे आज उस शख्स से मिलना था जिसका उसने अभी तक बस नाम ही सुना था-महादेव शाह.

"क्या बात है?किसका फोन था?",उसे परेशान देख प्रणव ने पुछा.

"मेरी 1 सहेली थी.उस से भी मिलना है.वही सोच रही थी."

"अच्छा,थोड़ी देर के लिए उसे भूल जाओ & ध्यान से सुनो.शाह ने मुझे कहा था कि वो तुमसे ऐसे मिलना चाहता है कि लगे कि तुम दोनो कही टकरा गये फिर वो तुमसे मेल-जोल बढ़ाएगा & मेरी तारीफ करेगा मगर कुच्छ इस तरह की तुम्हे ये शक़ ना हो कि हम मिले हैं."

"अच्छा.यानी अभी तुम दोनो हो तो मिले हुए मगर दुनिया के लिए तुमने भी डॅड की तरह उसका ऑफर ठुकरा दिया है.अब वो मुझसे तुम्हारे बारे मे ऐसे बात करेगा कि मुझे लगे की तुम दोनो दोस्त तो बिल्कुल नही हो मगर वो फिर भी तुम्हारी काबिलियत का लोहा मानता है.है ना?"

"हां.वो यही सोचता रहेगा कि वो मेरे साथ मिलके तुम्हारा इस्तेमाल कर रहा है जबकि हाक़ेक़त ये होगी कि हम दोनो उस बुड्ढे का इस्तेमाल कर रहे होंगे.",प्रणव उसकी होशियारी पे फिर हैरान हो गया था & 1 पल को उसे ये लगा कि कही उसने इस लड़की को अपने साथ मिलाके कोई ग़लती तो नही की है?..कही ऐसा ना हो कि आगे जाके वो उसे ही कोई धोखा ना दे दे..नही..नही..ऐसा नही हो सकता..इसे भी सहारे की ज़रूरत है & जब समीर जाएगा तो मेरे सिवा और मिलेगा कौन इसे?..,"..चलो,जाओ माल मे & उस से मुलाकात कर लो."

"ओके,डार्लिंग."रंभा ने उसे चूमा & फिर कार से उतार के माल मे चली गयी.कुच्छ पलो बाद 1 मशहूर इटॅलियन डिज़ाइनर का डिज़ाइन किया 1 ईव्निंग गाउन वो देख रही थी & 1 असिस्टेंट उसे उस ड्रेस के बारे मे बता रही थी जब सफेद बालो वाला 1 बूढ़ा मगर चुस्त शख्स उसके सामने आ खड़ा हुआ.असिस्टेंट उसे देख बड़ी शालीनता से पीछे हट गयी.

"एक्सक्यूस मे,आप म्र्स.मेहरा है ना?..म्र्स.रंभा मेहरा?"

"जी."

"इस तरह से आपको परेशान करने के लिए माफी चाहता हू मगर आपको देखा तो आपसे मिलने से खुद को रोक नही पाया.",रंभा ने उसे निगाहो से तोला.बुद्धा देखने मे अच्छा था & क्रीम कलर की कमीज़,भूरी टाइ & काले सूट के साथ आँखो पे चढ़ा रिमलेस चश्मा उसकी शख्सियत को रोबदार बना रहे थे.उसे देखने से ऐसा लगता था जैसे कि वो किसी ऊँचे खानदान से ताल्लुक रखता है.

"हेलो.",रंभा ने हाथ आगे बढ़ाया.

"हाई,मुझे महादेव शाह कहते हैं.",उसने रंभा का हाथ थाम उसे बड़ी शालीनता से चूमा..बुड्ढ़ा लड़कियो को इंप्रेस करना भी जानता था,"..जब आपके पति लापता हुए थे तब मैने आपको खबरों मे देखा था & आपकी हिम्मत की दाद दिए बिना नही रहा था."

"थॅंक यू."

"आपके ससुर मिस्टर.मेहरा के लिए भी मेरे दिल मे बस इज़्ज़त & तारीफ ही थी.मैं उनके साथ काम भी करना चाहता था लेकिन उन्हे मंज़ूर नही था.",रंभा ने उसे सवालीयो निगाहो से देखा.

"मैं 1 इन्वेस्टर हू.कंपनीज़ मे पैसा लगाता हू & बदले मे उनके चंद शेर्स मुझे मिलते हैं & यही मेरी कमाई का ज़रिया है.ट्रस्ट मे भी इनवेस्ट करने की मेरी ख्वाहिश थी मगर मिस्टर.मेहरा नही माने."

"ओह.ये कारोबारी बातें तो मैं नही जानती.",रंभा इस वक़्त 1 अमीर खानदान की बहू थी जिसकी ज़िंदगी बस कपड़े,गहनो & पार्टीस के गिर्द ही घूमती थी.

"& मैं आपसे कोई शिकवा भी नही कर रहा!",वो हंसा तो रंभा भी थोड़ा शरमाते हुए हंस दी..अगर उस बुड्ढे को लड़कियो से चिकनी-चुपड़ी बातें करना आता था तो वो भी मर्दों को अपनी उंगलियो पे नचाने मे माहिर थी!

"आपके पति से मिलने की ख़ुशनसीबी तो अभी तक हासिल नही हुई है मुझे मगर मिस्टर.प्रणव से मैं काई मर्तबा मिला हू.उन्होने भी मेरी पेशकश ठुकरा ही दी थी लेकिन वो आदमी बहुत काबिल हैं.जब तक वो ग्रूप मे हैं,आपकी कंपनी महफूज़ है."

"जी.वो बहुत भले इंसान है & हमसब उन्हे बहुत पसंद करते हैं.कारोबार मे आप हमारे साथ नही जुड़ पाए पर ज़ाति तौर पे तो जुड़ सकते हैं..",ये बात रंभा नेकुच्छ इस तरह से कही कि शाह को लगा कि कही वो उस से दोहरे मतलब वाली बात तो नही कर रही लेकिन रंभा के मासूमियत से मुस्कुराते चेहरे को देख उसे अपनी सोच ग़लत लगी मगर वो सोच मे तो पड़ ही गया था.यही तो रंभा चाहती थी & जान बुझ के उसने वो बात कही थी,"..कभी आइए हमारे घर.आप आदमी दिलचस्प मालूम होते हैं.",शाह फिर से उसकी बात मे मतलब ढूँढने लगा मगर 1 बार फिर रंभा के मासूम चेहरे ने उसे उलझा दिया.

"ज़रूर आऊंगा लेकिन उसके पहले आपको कभी हमारी मेहमाननवाज़ी कबूलनी पड़ेगी."

"ज़रूर.ऐसा करना तो मेरे लिए बड़ी खुशी की बात होगी."

"मेरा यकी कीजिए रंभा जी,आपसे ज़्यादा खुशी मुझे होगी.अच्छा,अब बहुत वक़्त लिया आपका.अब & परेशान नही करूँगा.",वो 1 किनारे हो गया तो रंभा ने अपना हाथ फिर से आगे बढ़ाया.

"नाइस मीटिंग यू,मिस्टर.शाह."

"सेम हियर.",शाह ने उसके हाथ को दोबारा चूमा & फिर स्टोर से बाहर चला गया.

रंभा कोई 15 मिनिट बाद कुच्छ समान खरीद माल से निकली & प्रणव को फोन किया,"मिल लिया उस से.सब ठीक रहा."

"वेरी गुड,डार्लिंग.",रंभा का अगला पड़ाव था ट्रस्ट फिल्म्स का ऑफीस.वो फिल्म जिसके बारे मे रंभा ने गौर किया था कि अगर उसमे 1 साइड हेरोयिन का रोल थोड़ा बढ़ा दिया जाए तो वो और निखर जाएगी,उसकी शूटिंग 70% हो गयी थी & उसी फुटेज को आज डाइरेक्टर,एडिटर,कॅमरमन,राइटर & बाकी लोग देखने वाले थे.फिल्म का हीरो अभी शहर से बाहर था & कामया विदेश से अभी लौटी नही थी.

सोनम के फोन से रंभा का माथा ठनका था & उसने ये फ़ैसला किया कि पहले तो ये पता करेगी कि कामया शहर मे है या नही.अगर वो शहर मे होती तो बहुत मुमकिन था कि उस से मिलने के लिए समीर ने झूठ बोला हो.रंभा कार चलाते हुए सोच रही थी कि कौन हो सकता है जो उसे कामया के शहर मे होने की सही खबर दे सकता था.उसने 1-2 फोन घुमाए तो पता चला कि कामया के शहर मे 4 मकान हैं.वो जिस मकान मे रहती है उसमे उसकी मा भी साथ ही रहती है.2 उसने किराए पे दे रखे हैं.अब बचा 1 & 1 फिल्मी रिपोर्टर से उसे पता चला कि यही वो कबीर के साथ रंगरलियाँ मनाती है.

रंभा ने फिल्म कंपनी के 1 कर्मचारी को कामया से कोई कॉस्ट्यूम्स की फिटिंग सेशन्स का अपायंटमेंट फिक्स करने के बहाने उसी फ्लॅट पे भेजा.लेकिन काम वैसे तो कामया के सेक्रेटरी का था मगर उस से कहने से ये पता नही चलता कि कामया शहर मे थी या नही.लड़का तेज़-तर्रार था & 1 घंटे मे ही इस खबर के साथ वापस लौटा की कामया फ्लॅट पे तो नही थी मगर शहर मे थी.वो सवेरे ही लौटी थी & सीधा अपने फ्लॅट पे गयी थी लेकिन उस लड़के के वाहा पहुचने से 30 मिनिट पहले ही वो वाहा से अकेली कही चली गयी थी.

रंभा अब समझ गयी थी कि कामया कहा मिलेगी.वो प्रीव्यू थियेटर पहुँची & बाकी लोगो के साथ फिल्म के रशस देखने लगी,"अब मुझे फिल्म मेकिंग की बारीकियो के बारे मे तो पता नही..",सारी फुटेज देखने के बाद वो डाइरेक्टर से मुखातिब हुई,"..मगर जो देखा वो कमाल का था!"

"थॅंक यू,मा'म.",डाइरेक्टर तारीफ सुन खुश हो गया था.प्रोड्यूसर्स अमूमन ऐसा कम ही करते थे.

"वैसे 1 बात कहने की हिमाकत करू?"

"अरे!कैसी बात कर रही हैं,मॅ'म!आप प्रोड्यूसर हैं.आप हुक कीजिए."

"जी नही..",.रंभा हँसी,"..हुक्म नही करूँगी वो आपका काम है.1 बात पुच्छनी थी मुझे."

"हां-2."

"वो जो साइड हेरोयिन है उसका किरदार बड़ा पवरफुल है.मान लीजिए उसे थोड़ा बढ़ाते हैं तो फिल्म और अच्छी नही हो जाएगी?",डाइरेक्टर उसके सवाल पे कुच्छ बोला नही & साथ बैठे राइटर को देखा & फिर एडिटर & कॅमरमन को.

"देखिए,मॅ'म.असल कहानी वैसी ही है जैसी आप कह रही हैं लेकिन कामया फिर फिल्म मे काम नही करती & उसे खोने का रिस्क हम ले नही सकते थे."

"ओके.तो उस लड़की के बस 3-4 सीन्स बढ़ाते हैं.कहानी तो तब भी मज़बूत हो जाएगी.कामया का रोल काटने की भी ज़रूरत नही है."

"तो फिर फिल्म की लंबाई बढ़ जाएगी,मॅ'म."

"कोई बात नही.अभी फिल्म 130 मिनिट की है.हमारे एडिटर साहब अगर उसे किसी तरह बस 140 मिनिट या उस से कम की कर दें तो ज़्यादा फ़र्क नही पड़ेगा.",डाइरेक्टर ने एडिटर को देखा तो उसने हां मे सर हिलाया.

"पर मॅ'म 1 दूसरी उलझन खड़ी हो जाएगी फिर."

"वो क्या?"

"कामया को शायद ये पसन्द ना आए कि उसके स्टारिंग रोल वाली फिल्म मे सपोर्टिंग आक्ट्रेस का भी दमदार रोल है."

"डाइरेक्टर साहब..",रंभा हँसी,"..कामया भूल गयी होगी कि उसकी शुरुआत भी इसी तरह हुई होगी छ्होटे-मोटे रोल्स से मगर आप तो नही भूले होंगे.सबसे अहम चीज़ है फिल्म,ना कामया ना वो सपोर्टिंग हेरोयिन.लोग अपने पैसे खर्च कर फिल्म केवल कामया को देखने के लिए नही जाते,वो जाते हैं 1 अच्छी फिल्म देखने अब चाहे वो कामया के फॅन्स हो चाहे ना हों.अगर केवल किसी सितारे की वजह से ही फिल्म देखी जाती तो बच्चन साहब की कोई फिल्म तो कभी पिटी ही नही होती क्यूकी उनसे ज़्यादा फॅन्स तो शायद ही किसी सितारे के होंगे!"

"ओके.मॅ'म.",उसकी आख़िरी बात पे सभी हंस पड़े थे,"..जैसा आप कहें."

"ओके,डाइरेक्टर साहब.कामया को मैं संभाल लूँगी.आप उसकी फ़िक्र मत कीजिएगा.",इसके बाद रंभा सीधा वाहा पहुँची थी जहा कि उसे पता था कि कामया & समीर उसे ज़रूर मिलेंगे-कामया के दफ़्तर.कामया शहर मे थी नही तो दफ़्तर बंद होगा & वाहा कोई स्टाफ भी नही आएगा.अब ऐसी जगह से बेहतर जगह कौन होगी छुप के मिलने के लिए.2 घंटे बाद रंभा की सोच बिल्कुल सही साबित हुई थी.

वो कामया के दफ़्तर से निकली & अपनी कार मे बैठ अपने बंगल की ओर चल दी.पिच्छले 3 दिनो से वो इस बात को लेके परेशान थी कि देवेन से मिलने & विजयंत मेहरा की हालत के बारे मे जानने के लिए गोआ जाए तो क्या बहाना बना के जाए.आज उसके पति ने खुद ही उसे बहाना पेश कर दिया था..थॅंक यू,समीर!..वो हँसी & कार की रफ़्तार बढ़ा दी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--62

gataank se aage......

"Oh!Sameer..aahhhhh..aise hi pyar karte raho..!",apni dayi banh sameer ki gardan me dale Kamya uski god me baithi thi.usne 1 skirt & blouse pehna tha & sameer uski gardan se leke cleavage tak apne honth chala raha tha.uska baya hath kamya ki kamar ko thame tha & daya uski jangho ke beech ghusa vaha ki komalta parakh raha tha.

"oohhhh..sharir kahinke..!",kamya ne muskurate hue aashiq ke gaal pe pyar bhari chapat lagayi joki uski panty me hath ghusa uski chut ko sehla raha tha & uske cleavage ko danto se haule-2 kaat raha tha,"..uunnnnhhhhh..haaaannnnnnn..!",kamya ke jism me bijli daud rahi thi.sameer ki ungli uski chut ki deewaro ko ragadne lagi thi.

sameer apni naak uske cleavage me ghusa ke ragadte hue uske seene ko chum raha tha.kamya ka dil bhi ab uske hotho ki garmi ko seene pe mehsus karne ko machal raha tha.usne khud hi apne blouse ke buttons khol diye & apnmi chhatiyo ko bra ke cups se azad kar diya.sameer ne apne munh me uski chhatiyo ko bari-2 se bharna shuru kar diya to kamya sar peechhe jhatakte hue bahut tez aahen lene lagi.

"aahhhhh..ab raha nahi jata,sameer..ohhhhhhh..jaldi se mujhe apni dulhan banao..aannnnnnnnhhhhhhhhhh..!",sameer ki ungli & zuban ne use us kagar se neeche dhakel diya tha jaha se girne me jo maza milta hai vo & kabhi mehsus nahi hota,"..fir har raat,sari-2 raat tumhari baaho me aise hi guzarungi..1 pal ko bhi tumhe khud se door nahi jane dungi..",sameer ne uski panty khinchi to kamya ne khud hi skirt & panty ko nikala & uski pant dhili kar uske jism ke dono taraf tange kar uski god me baithate hue uske lund ko apni gili chut me le liya,"..oohhhhhhhh..!",lund andar ghusa to usne sar ko peechhe fenka & sameer ke sar ko pakad use apni chhatiyo me dabate hue kamar hilane lagi.

"bas Manpur vala tender khule & hume mile.uske baad main Rambha ko kinare karunga & tum banogi Mrs.Mehra.",sameer uski kamar ko jakde uski choochiyo ko chuste hue apni kamar hila raha tha.

"Mr.Mehra,Lambert Bank ke Mr.Suri aaj sham 6 baje ki aapse mil nahi payenge.",achanak darwaza khula & kisi ki gusse se bhari aavaz aayi.dono premi chaunke & kamya ne gardan ghumayi.jis kursi pe dono chudai kar rahe the vo bilkul darwaze ke samne thi & sameer ko unki mohabbat me khalal dalne vale ko dekhne ke liye gardan nahi ghumani padi thi.

"rambha..t-tum..!",sameer khada hone laga & usi waqt kamya bhi uski god se utarne lagi magar vo ladkhada gayi & farsh pe gir gayi.sameer jaise hi khada hua uski pant sarr se neeche sarak ke uski aediyo ke gird phans gayi.rambha ko dono ki halat pe bahut hansi aa rahi thi lekin usne apne dil ke bhav ko chehre pe nahi aane diya.use andaza to tha ki dono ka rishta chudai tak pahunch gaya hoga & shuru me is khayal se use kafi gussa bhi aaya tha magar ab uski zindagi me Deven aa chuka tha.ab use sameer ki koi zarurat nahi thi magar fir bhi in dono ko saza to deni hi thi.rambha kuchh pal angaray barsati aankho se dono ko dekhti rahi-dono jaldi-2 apne-2 kapde pehan rahe the,& fir darwaza zor se band karte hue vaha se nikal gayi,"..rambha..rambha suno to..!"

galiyare se bahar jati rambha ko sameer ke ghabraye chehre ko yaad kar bahut hansi aa rahi thi magar us se bhi zyada hansi use aayi thi use dekh ke chaunk uthe sameer ki god se farsh pe dono tange failayi girti kamya ko dekh ke.

Sameer ne rambha se kaha tha ki vo aaj der raat Bombay se lautega.yehi baat Sonam ko bhi pata thi magar dopahar 12 baje 1 fone aaya jise sonam ne receive kiya,"Trust Group,Sameer Mehra's office.how may i help you?"

"hello,main lambert bank se Rajinder Suri bol raha hu.aaj sham 6 baje mujhe mr.mehra se Grand Violet me milna tha magar kuchh aisi emergency aa gayi hai ki main aaj unse mil nahi paoonga.maine unka mobile try kiya tha magar vo mil nahi raha to please unhe ye message de dijiyega & ye bhi keh dijiyega ki is baat ke liye main mafi chahta hu.ok..thanx!"

"ji..lekin..vo..",tab tak suri ne fone rakh diya tha,"..to aaj raat ko vapas aa rahe the.",sonam soch me pad gayi thi & usne ye baat fauran apni saheli ko bata di jisne use ye baat sameer ko batane se mana kiya.jis waqt sonam ka fone aaya tha us waqt rambha Pranav ke sath 1 shopping mall ke bahar car me baithi thi.us mall me videshi designers ke stores the & vaha use aaj us shakhs se milna tha jiska usne abhi tak bas naam hi suna tha-Mahadev Shah.

"kya baat hai?kiska fone tha?",use pareshan dekh pranav ne puchha.

"meri 1 saheli thi.us se bhi milna hai.vahi soch rahi thi."

"achha,thodi der ke liye use bhool jao & dhyan se suno.shah ne mujhe kaha tha ki vo tumse aise milna chahta hai ki lage ki tum dono kahi takra gaye fir vo tumse mel-jol badhayega & meri tarif karega magar kuchh is tarah ki tumhe ye shaq na ho ki hum mile hain."

"achha.yani abhi tum dono ho to mile hue magar duniya ke liye tumne bhi dad ki tarah uska offer thukra diya hai.ab vo mujhse tumhare bare me aise baat karega ki mujhe lage ki tum dono dost to bilkul nahi ho magar vo fir bhi tumhari kabiliyat ka loha manta hai.hai na?"

"haan.vo yehi sochta rahega ki vo mere sath milke tumhara istemal kar raha hai jabki haqeqat ye hogi ki hum dono us buddhe ka istemal kar rahe honge.",pranav uski hoshiyari pe fir hairan ho gaya tha & 1 pal ko use ye laga ki kahi usne is ladki ko apne sath milake koi galti to nahi ki hai?..kahi aisa na ho ki aage jake vo use hi koi dhokha na de de..nahi..nahi..aisa nahi ho sakta..ise bhi sahare ki zarurat hai & jab sameer jayega to mere siwa & milega kaun ise?..,"..chalo,jao mall me & us se mulakat kar lo."

"ok,darling."rambha ne sue chuma & fir car se utar ke mall me chali gayi.kuchh palo baad 1 mashoor italian designer ka design kiya 1 evening gown vo dekh rahi thi & 1 assistant use us dress ke bare me bata rahi thi jab safed balo vala 1 boodha magar chust shakhs uske samne aa khada hua.assistant use dekh badi shalinta se peechhe hat gayi.

"excuse me,aap Mrs.Mehra hai na?..Mrs.rambha Mehra?"

"ji."

"is tarah se aapko pareshan karne ke liye mafi chahta hu magar aapko dekha to aapse milne se khud ko rok nahi paya.",rambha ne use nigaho se tola.buddha dekhne me achha tha & cream color ki kamiz,bhuri tie & kale suit ke sath aankho pe chadha rimless chashma uski shakhsiyat ko robdar bana rahe the.use dekhne se aisa lagta tha jaise ki vo kisi oonche khandan se talluk rakhta hai.

"hello.",rambha ne hatha aage badhaya.

"hi,mujhe mahadev shah kehte hain.",usne rambha ka hath tham use badi shalinta se chuma..buddha ladkiyo ko impress karna bhi janta tha,"..jab aapke pati lapata hue the tab maine aapko khabron me dekha tha & aapki himmat ki daad diye bina nahi raha tha."

"thank you."

"aapke sasur mr.mehra ke liye bhi mere dil me bas izzat & tarif hi thi.main unke sath kaam bhi karna chahta tha lekin unhe manzoor nahi tha.",ramnbha ne sue sawaliyo nigaho se dekha.

"main 1 investor hu.companies me paisa lagata hu & badle me unke chand shares mujhe milte hain & yehi meri kmayai ka zariya hai.Trust me bhi invest karne ki meri khwahish thi magar mr.mehra nahi mane."

"oh.ye karobari baaten to main nahi janti.",rambnha is waqt 1 amir khandan ki bahu thi jiski zindagi bas kapde,gehno & parties ke gird hi ghumti thi.

"& main aapse koi shikva bhi nahi kar raha!",vo hansa to rambha bhi thoda sharmate hue hans di..agar us buddhe ko ladkiyo se chikni-chupdi baaten karna aata tha to vo bhi mardon ko apni ungliyo pe nachane me mahir thi!

"aapke pati se milne ki khushnasibi to abhi tak hasil nahi hui hai mujhe magar Mr.Pranav se main kayi martaba mila hu.unhone bhi meri peshkash thukra hi di thi lekin vo aadmi bahut kabil hain.jab tak vo group me hain,aapki company mehfuz hai."

"ji.vo bahut bhale insan hai & humsab unhe bahut pasand karte hain.karobar me aap huamre sath nahi jud paye par zati taur pe to jud sakte hain..",ye baat rambha nekuchh is tarah se kahi ki shah ko laga ki kahi vo us se dohre matlab vali baat to nahi kar rahi lekin rambha ke masoomiyat se muskurate chehre ko dekh use apni soch galat lagi magar vo soch me to pad hi gaya tha.yehi to rambha chahti thi & jaan bujh ke usne vo baat kahi thi,"..kabhi aaiye humare ghar.aap aadmi dilchasp malum hote hain.",shah fir se uski baat me matlab dhundane laga magar 1 baar fir rambha ke masoom chehre ne use uljha diya.

"zarur aaoonga lekin uske pehle aapko kabhi huamri mehmannawazi kabulni padegi."

"zarur.aisa karna to mere liye badi khushi ki baat hogi."

"mera yaki kijiye rambha ji,aapse zyada khushi mujhe hogi.achha,ab bahut waqt liya aapka.ab & pareshan nahi karunga.",vo 1 kinare ho gaya to rambha ne apna hath fir se aage badhaya.

"nice meeting you,mr.shah."

"same here.",shah ne uske hath ko dobara chuma & fir store se bahar chala gaya.

Rambha koi 15 minute baad kuchh saman kahrid mall se nikli & Pranav ko fone kiya,"milk liya us se.sab thik raha."

"very good,darling.",rambha ka agla padav tha Trust Films ka office.vo film jiske bare me rambha ne gaur kiya tha ki agar usme 1 siede heroine ka role thoda badha diya jaye to vo & nikhar jayegi,uski shooting 70% ho gayi thi & usi footage ko aaj director,editor,cameraman,writer & baki log dekhne vale the.film ka hero abhi shehar se bahar tha & Kamya videsh se abhi lauti nahi thi.

Sonam ke fone se rambha ka matha thanka tha & usne ye faisla kiya ki pehle to ye pata karegi ki kamya shehar me hai ya nahi.agar vo shehar me hoti to bahut mumkin tha ki us se milne ke liye sameer ne jhuth bola ho.rambha car chalate hue soch rahi thi ki kaun ho sakta hai jo use kamya ke shehar me hone ki sahi khabar de sakta tha.usne 1-2 fone ghumaye to pata chala ki kamya ke shehar me 4 makan hain.vo jis makan me rehti hai usme uski maa bhi sath hi rehti hai.2 usne kiraye pe de rakhe hain.ab bacha 1 & 1 filmi reporter se use pata chala ki yahi vo Kabir ke sath rangraliyan manati hai.

rambha ne film company ke 1 karmchari ko kamya se koi costumes ki fitting sessions ka appointment fix karane ke bahane usi flat pe bheja.lye kaam vaise to kamya ke secretary ka tha magar us se kehne se ye pata nahi chalta ki kamya shehar me thi ya nahi.ladka tez-tarrar tha & 1 ghante me hi is khabar ke sath vapas lauta ki kamya flat pe to nahi thi magar shehar me thi.vo savere hi lauti thi & seedha apne flat pe gayi thi lekin us ladke ke vaha pahuchane se 30 minute pehle hi vo vaha se akeli kahi chali gayi thi.

rambha ab samajh gayi thi ki kamya kaha milegi.vo preview theater pahunchi & baki logo ke sath film ke rushes dekhne lagi,"ab mujhe film making ki barikiyo ke bare me to pata nahi..",sari footage dekhne ke baad vo director se mukhatib hui,"..magar jo dekha vo kamal ka tha!"

"thank you,ma'am.",director tarif sun khush ho gaya tha.producers amuman aisa kam hi karte the.

"vaise 1 baat kahne ki himakat karu?"

"are!kaisi baat kar rahi hain,ma'am!aap producer hain.aap huk kijiye."

"ji nahi..",.rambha hansi,"..hukm nahi karungi vo aapka kaam hai.1 baat puchhni thi mujhe."

"haan-2."

"vo jo side heroine hai uska kirdar bada powerful hai.maan lijiye use thoda badhate hain to film & achhi nahi ho jayegi?",director uske sawal pe kuchh bola nahi & sath baithe writer ko dekha & fir editor & cameraman ko.

"dekhiye,ma'am.asal kahani vaisi hi hai jaisi aap keh rahi hain lekin kamya fir film me kaam nahi karti & use khone ka risk hu le nahi sakte the."

"ok.to us ladki ke bas 3-4 scenes badhate hain.kahani to tab bhi mazbut ho jayegi.kamya ka role katne ki bhi zarurat nahi hai."

"to fir film ki lambai badh jayegi,ma'am."

"koi baat nahi.abhi film 130 minute ki hai.humare editor sahab agar use kisi tarah bas 140 minute ya us se kam ki kar den to zyada fark nahi padega.",director ne editor ko dekha to usne haan me sar hilaya.

"par ma'am 1 dusri uljhan kahdi ho jayegi fir."

"vo kya?"

"kamya ko shayad ye pasnd na aaye ki uske starring role vali film me supporting actress ka bhi dumdar role hai."

"director sahab..",rambha hansi,"..kamya bhul gayi hogi ki uski shuruat bhi isi tarah hui hogi chhote-mote roles se magar aap to nahi bhule honge.sabse aham chiz hai film,na kamya na vo supporting heroine.log apne paise kharch kar film keval kamya ko dekhne ke liye nahi jate,vo jate hain 1 achhi film dekhne ab chahe vo kamya ke fans ho chahe na hon.agar keval kisi sitare ki vajah se hi film dekhi jati to Bachchan Sahab ki koi film to kabhi piti hi nahi hoti kyuki unse zyada fans to shayad hi kisi sitare ke honge!"

"ok.ma'am.",uski aakhiri baat pe sabhi hans pade the,"..jaisa aap kahen."

"ok,director sahab.kamya ko main sambhal lungi.aap uski fikr mat kijiyega.",iske baad rambha seedha vaha pahunchi thi jaha ki use pata tha ki kamya & sameer use zarur milenge-kamya ke daftar.kamya shehar me thi nahi to daftar band hoga & vaha koi staff bhi nahi ayega.ab aisi jagah se behtar jagah kaun hogi chhup ke milne ke liye.2 ghante baad rambha ki soch bilkul sahi sabit hui thi.

vo kamya ke daftar se nikli & apni car me baith apne bungle ki or chal di.pichhle 3 dino se vo is baat ko leke pareshan thi ki Deven se milne & Vijayant Mehra ki halat ke bare me jaanane ke liye Goa jaye to kya bahana bana ke jaye.aaj uske pati ne khud hi use bahana pesh kar diya tha..thank you,sameer!..vo hansi & car ki raftar badha di.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--63

गतान्क से आगे......

“रंभा..प्लीज़..समझने की कोशिश करो..वो बहुत परेशान थी & हम दोनो जज़्बातों मे बह गये थे..ग़लती हो गयी मुझसे..आइ’म सॉरी!”,रंभा अपनी अलमारी से कपड़े निकाल के सूटकेस मे भर रही थी.

“समीर,मैने अपनी आँखो से देखा है सब.प्लीज़,इस तरह से झूठ बोल के खुद को खुद की ही नज़रो मे मत गिराव.”,रंभा ने सूटकेस बंद किया.

“ऐसे इस वक़्त कहा जाओगी तुम?..अभी गुस्से मे हो..मैं समझ सकता हू तुम्हारा गुस्सा,रंभा..”,समीर उसके सामने उसके कंधो पे हाथ रख के खड़ा हो गया था,”..मगर बातों से सब हल हो सकता है ना?”

“हां,मैं गुस्से मे हू & बातो से सब हल भी हो सकता है मगर अभी मैं कोई भी बात करने की हालत मे नही हू.”,उसने सूटकेस बेड से उतार के फर्श पे रखा & अपना हॅंडबॅग कंधे पे टांग 1 दूसरा बॅग सूटकेस के उपर रखा,”..इसीलिए मैं जा रही हू,समीर.तुम्हारे साथ इस घर मे..इस कमरे मे 1 पल भी और गुज़ारा तो मैं पागल हो जाऊंगी.”,उसने उसके हाथ अपने कंधो से हटाए & सूटकेस के पुल्लिंग हॅंडल को बाहर निकल उसे पहियो के सहारे खींचा,”..मुझे ढूँढने की कोशिश मत करना..”,वो कमरे के दरवाज़े पे पहुँच के रुकी & मूडी,”..घबराओ मत मैं कुच्छ दिनो मे लौट आऊँगी.तुम्हारा ये राज़ राज़ ही रहेगा & जब तक तुम मानपुर का टेंडर जीत के उसपे काम नही शुरू कर देते,तब तक मैं म्र्स.समीर मेहरा ही रहूंगी.पर प्लीज़,समीर आज से तुम्हारे & मेरे रास्ते अलग हैं इसीलिए मेरी ज़िंदगी मे दखल देने की कोशिश मत करना.”,वो कमरे से बाहर निकल गयी.उसका दिल खुशी से झूम रहा था.इतनी जल्दी उसे फिर से देवेन के पास जाने का मौका मिलेगा ये उसने सपने मे भी नही सोचा था & अब समीर की बेवकूफी ने खुद ही उसकी आगे की मुश्किल भी आसान कर दी थी.अब तलाक़ तो होना ही था & वो भी उसकी शर्तो पर.

“हाई!प्रणव..”,एरपोर्ट पहुँच उसने गोआ की अगली फ्लाइट का टिकेट लिया,”..मैं कुच्छ दिनो के लिए बाहर जा रही हू.”

“क्या?क्यू..& कहा,रंभा?!”

“वो सब मैं बता नही सकती.बस इतना समझो की जाना पड़ रहा है.”

“कोई मुश्किल है रंभा?”

“नही.मैं तुम्हे फोन करती रहूंगी & जब भी तुम्हे अपने काम मे मेरी ज़रूरत पड़ेगी,मैं आ जाऊंगी.ओके,बाइ!”,प्रणव अपने मोबाइल को थामे बैठा सोच रहा था कि अचानक आख़िर ऐसा हुआ क्या?अगला फोन रंभा ने सोनम को किया.उसने उसे ना तो पहले देवेन & विजयंत मेहरा के बारे मे बताया था ना अब बताया.बस इतना कहा क़ि समीर की बेवफ़ाई से दुखी हो वो जा रही है.उसने उस से भी फोन करते रहने की बात कही.

डबोलिं एरपोर्ट पे शाम 8 बजे उतार वो टॅक्सी से सीधा हॉलिडे इन्न गोआ गयी & 2 लोगो के लिए 1 कमरा बुक किया & फिर देवेन को फोन किया.देवेन ने उस से कहा कि वो 1 घंटे मे उसके पास पहुँच रहा था.वो 1 घंटा रंभा ने होटेल के कमरे मे चहलकदमी करते काटा.अब उस से 1 पल भी इंतेज़ार नही हो रहा था.अपने महबूब के शहर पहुँच गयी थी वो & अब बस उसकी बाहो मे समा जाना चाहती थी वो.रंभा ने हल्के नीले रंग की कसी जीन्स & काले रंग की गोल गले की कसी टी-शर्ट पहनी थी.इस लिबास मे उसके जिस्म के कटाव पूरी तरह से उभर रहे थे.उपर से महबूब से जल्द ही मिलने की उमंग का खुशनुमा रंग उसके चेहरे पे झलक रहा था & उसका हुस्न & भी दिलकश लग रहा था.

दरवाज़े की घंटी बजी तो वो भागती हुई गयी & दरवाज़ा खोला.सामने देवेन खड़ा था.उसकी आँखो मे हैरत थी & खुशी भी & दिलरुबा की चाहत भी.दोनो 1 पल 1 दूसरे को देखते रहे फिर देवेन आगे बढ़ा & कमरे मे दाखिल हुआ.उसने दरवाज़े के अंदर के नॉब से लटका ‘डू नोट डिस्टर्ब’ का कार्ड निकाला & बाहर के नॉब पे लटका दिया.इस सबके दौरान दोनो प्रेमियो की आँखे आपस मे उलझी रही-ना देवेन ने पालक झपकाई ना ही रंभा ने.रंभा का दिल अब बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था & उसकी कसी टी-शर्ट मे क़ैद उसके उभर उपर-नीचे हो उसके आशिक़ को उसका हाल बयान कर रहे थे.देवेन ने बिना घूमे हाथ पीछे ले जाके दरवाज़ा बंद किया & उसके बाद जैसे कमरे मे तूफान आ गया.

रंभा भागती हुई आगे बढ़ी & उस से लिपट गयी.देवेन ने भी उसे बाहों मे भर लिया & दोनो 1 दूसरे को चूमने लगे,पागलो की तरह,दीवानो की तरह.कहने मुश्किल था कि किसकी ज़ुबान किसके मुँह मे थी & कौन किसके चेहरे पे अपने बेसबरे लब फिरा रहा था.रंभा देवेन के गले मे बाहें डाले उसके बॉल खिचती उसे चूम रही थी & वो उसकी कमर को बहुत ज़ोर से जकड़े हुए उसकी ज़ुबान का लुत्फ़ उठा रहा था.देवेन ने उसे कमर से उठाया & कमरे मे रखे 1 शेल्फ पे बिठा दिया.खुद को संभालती कनपटी रंभा ने हाथ शेल्फ पे रखे & उसपे रखा गुल्दान उसके हाथो से टकरा के नीचे गिर गया.उस शेल्फ पे फोन & और भी कुच्छ सजावटी समान रखे थे.देवेन ने उन सारे सामानो को अपने हाथो से धकेल के नीचे गिराया & अपनी महबूबा की खुली टाँगो के बीच खड़ा हो उसकी चूत पे लंड दबाते हुए उसे चूमने लगा.रंभा के हाथ देवेन की पीठ पे घूम रहे थे.

देवेन उसकी ज़ुबान चूस्ते हुए उसकी बाई छाती को शर्ट के उपर से ही दबा रहा था & वो अब ज़ोर-2 से आहें भर रही थी.रंभा ने उसके कोट को उसके कंधो से नीचे सरकया & उसकी कमीज़ के उपर से ही उसके चौड़े सीने & कंधो पे हाथ फिराया.देवेन ने उसकी टी-शर्ट उपर की & उसके ब्रा को उपर कर झुक के उसकी नुमाया छातियो को चूसने लगा.

“आन्न्न्नह..देवेन..!”,रंभा की आँखे बिल्कुल फैल गयी थी & वो सर उपर किए अपने प्रेमी के बालो को खींचती झटके खा रही थी.देवेन उसकी छातियो को जैसे मुँह मे पूरा भर के चूसना चाहता था.उन भारी-भरकम मगर पुष्ट गोलैईयों को वो अपने मुँह मे बार-2 भरने की कोशिश करते हुए चूस रहा था.नीचे रंभा की चूत पे उसका सख़्त लंड वैसे ही लगातार रगड़ खा रहा था.शाम से ही रंभा उस से मिलने की हसरत की उमंग से भरी थी & अब उसके मिल जाने पे उसके जिस्म की नज़दीकी & उसकी दीवानगी भरी हर्कतो ने उसके सब्र का बाँध तोड़ दिया था & वो झाड़ रही थी.

देवेन ने उसकी टी-शर्ट को सर के उपर से खींच के निकाला तो उसकी चूचियो ने छल्छलाते हुए ब्रा की क़ैद से छूटने की ख्वाहिश जताई.अपनी दिलरुबा के मस्ताने उभारो की इल्टीजा ना मानने की हिमाकत भला देवेन कैसे कर सकता था.उसने उसके ब्रा स्ट्रॅप्स को कंधो के उपर से पकड़ा & इतनी ज़ोर से खींचा की उसके हुक्स अलग हो गये & खुली ब्रा उसके हाथो मे आ गयी.उसने ब्रा को उच्छाल दिया & झुक के रंभा की दिलकश चूचियो से अपने प्यासे होंठ सटा दिए.वो उन्हे ऐसे चूस रहा था मानो उनसे दूध निकाल के अपनी प्यास बुझाना चाहता हो.रंभा के हुस्न को देख मर्द अपना आपा खो देते थे लेकिन फिर भी ये शिद्दत,ये दीवानापन उसने कभी किसी & के प्यार करने मे नही महसूस किया था.खुद देवेन भी हराड मे उस रात ऐसा दीवाना कहा था.

रंभा का भी हाल देवेन से अलग थोड़े ही था.वो भी बावली हो गयी थी.उसने महबूब के बाल पकड़ उसके सर को अपने सीने से अलग किया & उपर कर 1 लंबी किस दी.उसके हाथ देवेन की शर्ट को उसकी पॅंट से बाहर खींच रहे थे.अब उसे भी सब्र नही था & उसने उसकी कमीज़ को पकड़ के इस तरह खींचा की सारे बटन टूट गये.खुली कमीज़ को उसने देवेन के कंधो से उतार फेंका & आगे झुक उसके सीने के बालो मे मुँह घुसा के रगड़ने लगी.उसके गले से अजीब सी आवाज़ें निकाल रही थी जो उसके मस्ती मे सब भूल जाने का सबूत थी.उसने देवेन के निपल्स को चूसा & फिर काट लिया.देवेन ने सर उपर किया & कराहा मगर रंभा के सर को सीने से अलग करने के बजाय उसे और सटा दिया.रंभा के हाथ उसके बदन के बगल मे घूमते हुए उसके कंधो & मज़बूत बाजुओ पे फिर रहे थे.रंभा गर्देन झुका के उसके सीने से चूमते हुए उसके पेट पे जहा तक जा सकती थी,जाके चूम रही थी.वो & झुकने मे असमर्थ थी & उसके होंठ देवेन के लंड तक नही पहुँच रहे थे तो उसने अपने हाथो मे ही उसके लंड & अंदो को दबोच लिया & ज़ोर-2 से दबाने लगी.

“ओह..रंभा..!”,देवेन मस्ती मे आहत हो गया & उसके बाल पकड़ के उपर खींचा & 1 बार फिर उसके गुलाबी लबो को अपने लबो की क़ैद मे ले लिया.वो रंभा की कमर के गुदाज़ हिस्से को दबाते हुए चूम रहा था & वो उसके लंड को.देवेन के हाथ दिलरुबा की रेशमी पीठ पे सरक रहे थे.हाथ उसकी कमर से उपर गर्दन तक गये & फिर वापस लौटे & इस बार & नीचे गये & उसकी गंद से सॅट गये.रंभा चिहुनकि & उसने देवेन की पॅंट खोल अपना हाथ अंदर डाल दिया.देवेन फिर से कराहा & रंभा शेल्फ से उतर गयी & देवेन की कमर पकड़ उसे शेल्फ की बगल की दीवार से लगा दिया.

उसने देवेन की पॅंट को फ़ौरन नीचे किया & उसके अंडरवेर को भी.सामने प्रेकुं से भीगा उसका 9.5 इंच लंबा लंड अपने पूरे शबाब मे उसकी निगाहो के सामने था.रंभा अपने पंजो पे बैठ गयी & देवेन की गंद के बगल मे हाथ लगते हुए उसे आगे खींचा & खुद आगे झुकाते हुए उसके लंड के सूपदे को मुँह मे भर लिया.देवेन ने दीवार पे हाथ लगाए & सर उठाके आह भरी.रंभा उसकी झांतो मे नाक घुसा के वही हरकत दोहराई जो कुच्छ देर पहले उसने उसके सीने पे की थी.उसने देवेन के लंड को उठा उसके पेट से सटा दिया & अपनी जीभ को लंड की जड़ से लेके उसके सूपदे की नोक तक चलाया.देवेन का जिस्म सिहर उठा.रंभा की जीभ सूपदे से वापस जड़ तक आई & उसके भी नीचे देवेन के आंडो के बीच पहुँच के रुकी.उसने अपनी नाक लंड की जड़ मे घुसा के दबाते हुए उसके आंडो को मुँह मे भर के चूसना शुरू कर दिया.देवेन उसके बालो को पकड़ सर को अपनी गोद मे दबा रहा था.रंभा ने आंडो को मुँह से निकाला & लंड को मुँह मे भर लिया.अंगूठे & पहली उंगली का दायरा बना लंड को उसमे फँसा उसे हिलाते हुए उसने उसे चूसना शुरू कर दिया.देवेन अब कमर हिलाते हुए उसके मुँह को चोद रहा था.रंभा उसके अंग को मुँह मे भरे बस उस से खेलती चली जा रही थी.देवेन को लगा कि अगर वो इसी तरह जुटी रही तो वो फ़ौरन झाड़ जाएगा.उसने झुक के रंभा के कंधे पकड़ उसे उपर उठाया & उसे बाहो मे भर चूमते हुए उसकी कमर को जाकड़ हवा मे उठा लिया & शेल्फ के दूसरी तरफ रखी राइटिंग टेबल पे बिठा दिया.

उसने रंभा को धकेलते हुए टेबल पे लिटाया मगर उसपे रखे राइटिंग पेपर्स,पेन स्टॅंड,टेबल लॅंप वग़ैरह आड़े आ रहे थे.देवेन ने दोनो हाथो से सारे समान को धकेला तो रंभा ने भी लेटते हुए अपने हाथ फैला दिए.ज़ोर की आवाज़ के साथ लॅंप फर्श पे गिर के चूर-2 हो गया.बाकी चीज़ें भी नीचे गिर के च्चितरा गयी मगर दोनो को इन बातों से कोई मतलब नही था.रंभा को टेबल पे लिटा के उसकी गर्देन चूमते हुए वो उसकी चूचियो पे आया & उनके निपल्स को दांतो से पकड़ के खींचा.

“आईईयईईए..!”,रंभा मस्ती भरे दर्द से कराही.देवेन अब उसके पेट को चूमते हुए,उसकी नाभि को चूस्ते हुए नीचे आया & उसकी जीन्स के बटन को खोला & ज़िप खींची.देवेन ने जीन्स को नीचे खींचा तो रंभा ने भी गंद उपर उठा दी.अगले ही पल जीन्स & उसकी काली पॅंटी कमरे के फर्श पे बिखरे बाकी समान का हिस्सा थे.देवेन उसकी बाई टांग को उठा के चूम रहा था & रंभा अपने दाए पैर को उसके सीने पे चला रही थी.

“ओह..!”,देवेन कराहा.रंभा ने दाए पाँव के अंगूठे & उंगली के बीच उसके बाए निपल को फँसा खीच दिया था.देवेन ने उसकी दाई टांग को पकड़ बाए कंधे पे रखा & चूमते हुए बल्कि यू कहा जाए कि चूस्ते हुए उसकी जाँघ की तरफ बढ़ने लगा.

“आननह..उउम्म्म्ममममम..हान्ंननणणन्..ऊहह..!”,रंभा मस्ती मे चीख रही थी.देवेन उसकी मोटी जाँघो को होटो से काट रहा था & चूस रहा था.जब वो होठ हटता तो वाहा पे 1 निशान दिखने लगता.कुच्छ ही देर मे रंभा की दोनो अन्द्रुनि जंघे आशिक़ के होटो के दस्तख़त से भर गयी थी,”..उउन्न्ञनननणणनह..!”,रंभा अपनी कमर उचकाते हुए अपनी चूचिया अपने ही हाथो से दबा रही थी.रंभा ने अपने दोनो पाँव अब घुटने मोड़ टेबल पे जमा दिए थे & देवेन की ज़ुबान उसकी चूत तक पहुँच गयी थी & उस से बह रहे रस को लपलपाते हुए चाट रही थी.देवेन उसकी चूत मे जीभ घुसाते हुए उसके दाने को दाए हाथ की उंगली से रगडे जा रहा था.अगले ही पल रंभा कमर उचकती हुई झाड़ गयी.देवेन ने उसकी टाँगे फैलाई & अपने कंधो पे चढ़ा ली & 1 ज़ोर दार धक्के मे ही अपने लंड को जड तक उसकी चूत मे घुसा दिया.

“ऊउउईईईईईई माआआआआअ..!”,रंभा चीखी & दोनो हाथ सर के पीछे ले जाके टेबल को पकड़ लिया.देवेन उसकी जाँघो को सहलाता,उसकी टाँगो को चूमता उसे चोद रहा था.रंभा टेबल को पकड़े अपनी कमर उचका रही थी.बस 3 दिनो की जुदाई का ये असर था!

देवेन का लंड रंभा की कोख पे लगातार चोट कर रहा था & जब भी वो उसके नरित्व के सबसे अहम हिस्से से टकराता तो 1 अनोखे,मस्ताने दर्द से वो तड़प उठती जिसमे बेइंतहा मज़ा भी च्छूपा होता.दोनो की नासो मे मानो लहू की जगह बेसब्री बह रही थी जोकि जिस्मो के मिलने के बावजूद ख़त्म होने का नाम ही नही ले रही थी.देवेन के चेहरे पे भी अचानक दर्द के भाव आ गये.रंभा की चूत ने सिकुड़ने-फैलने की हरकत शुरू कर दी थी & उसका लंड अब उसकी कसी चूत के & कसने की वजह से जैसे चूत की फांको मे पीस रहा था मगर कितना मज़ा था..कितनी खुशी..उसका दिल किया की अभी इसी पल झाड़ जाए मगर नही.अभी उसे अपनी जान से प्यारी महबूबा के साथ जन्नत की & सैर करनी थी.रंभा टेबल को थामे कमर उचकाती अपने सीने को उपर उठती & सर को पीछे फेंकती चीखती झाड़ रही थी मगर देवेन अपने उपर काबू रखे वैसे ही धक्के लगा रहा था.

रंभा ने हाथ सर के पीछे टेबल से हटाए & आगे लाके अपने दिलबर के सीने & पेट के बालो मे हसरत से फिराए तो उसने भी उसकी टाँगो को कंधो से उतार दिया & उसकी मरमरी बाहें थाम उसे उपर खींचा.रंभा उठाते हुए उसके आगोश मे आ गयी & अपनी बाहें उसके कंधे पे रखते हुए उसकी गर्देन मे डाल दी & उसकी गर्देन चूमने लगी.देवेन भी धक्के लगाता हुआ उसके डाए कान मे जीभ फिरने लगा.रंभा के होंठ उसके कंधो पे पहुँचे & वो उनपे हौले-2 काटने लगी.देवेन उसकी हरकत से & जोश मे आ गया & उसने कुच्छ ज़्यादा ही तेज़ धक्के लगाने शुरू कर दिए.जिस्म मे उठे दर्द & मज़े के मिलेजुले मस्ताने एहसास से आहत हो रंभा ने उसके दाए कंधे के उपर थोडा ज़ोर से दाँत गढ़ा दिए.

“ओह..!”,देवेन कराहा & रंभा की पुष्ट जाँघो के नीचे बाहें घुसके उसकी गंद की फांको को अपने हाथो मे थमते हुए उसने उसे मेज़ से उठाया & घुमा के कमरे की दूसरी तरफ की दीवार से लगा दिया & ज़ोर-2 से धक्के लगाने लगा.रंभा आहें भरती हुई उसके कंधो के उपर से बाहें ले जाते हुए उसकी पीठ को नोच रही थी.देवेन का लंड सीधा उसकी कोख पे क़ातिल चोटें कर रहा था & बस चंद लम्हो मे ही वो उसके लंड से दोबारा झाड़ गयी & अपने हाथ पीछे अपने सर के उपर ले जाते हुए अपने नाख़ून दीवार पे ज़ोर से रगड़ उसपे अपनी बेचैनी के निशान छ्चोड़ दिए.

देवेन उसे उठाए हुए घुमा & बिस्तर पे लिटा दिया & धक्के लगाने लगा.धक्के लगाते हुए वो बिस्तर पे घुटने जमाके उपर चढ़ने लगा तो रंभा भी अपने हाथ बिस्तर पे रख उसके सहारे उपर होने लगी.देवेन उसके उपर लेटा उसके चेहरे,उसकी गर्देन को चूमते हुए उसे चोद रहा था.रंभा बेचैनी से बिस्तर पे अपने हाथ फिरा रही थी & चादर को खींच रही थी.उसका बाया हाथ तकिये से टकराया तो उसने उसे उठाके फर्श पे फेंक दिया.देवेन के धक्के अब बहुत तेज़ हो गये थे & उसका लंड अब चूत की दीवारो को बहुत बुरी तरह रगड़ रहा था.रंभा कनपटी आवाज़ मे चीख रही थी.उसकी टाँगे देवेन की कमर से लेके उसके घुटनो के पिच्छले हिस्सो तक घूम रही थी & वो उन्ही के सहारे कमर उचका भी रही थी.देवेन के हर धक्के पे उसका जिस्म सिहर उठता.वो बहुत तेज़ी से अपनी मंज़िल की ओर बढ़ रही थी.

देवेन का लंड भी उसकी चूत की कसावट से अब बहाल हो गया था.उसके आंडो मे मीठा दर्द होने लगा था & उनमे उबल रहा उसका लावा अब फूटने को बिल्कुल तैय्यर था.रंभा उसकी पीठ से लेके उसकी गंद तक अपने हाथ चलाते हुए उसे नोच रही थी.2 जिस्म अब 1 दूसरे के सहारे अपनी-2 मंज़िल के बिल्कुल करीब पहुँच चुके थे.देवेन ने अपनी बाई बाँह रंभा की गर्देन के नीचे & दाई उसकी कमर के नीचे सरका उसे अपने आगोश मे क़ैद कर खुद से बिल्कुल चिप्टा लिया था.रंभा भी उसे अपनी बाहो & टाँगो मे बाँध चुकी थी.

“देवेन्न्ननननननननणणन्.......रंभा....................!”,तभी जैसे ज़ोर का धमाका हुआ जिसमे कोई आवाज़ नही थी बस बहुत तेज़,चमकीली रोशनी थी जो केवल दोनो प्रेमियो को ही दिखी.रंभा के थरथरते होंठो से सिसकियाँ निकल रही थी ,उसकी आँखो से आँसू बह रहे थे.उसका जिस्म दिलबर की बाहो मे मस्ती की इंतेहा से कांप रहा था.उसकी चूत मे मज़े की नदी सारे बंधन तोड़ सैलाब की शक्ल इकतियार कर चुकी थी.वो झाड़ रही थी,ऐसे जैसे पहले कभी नही झड़ी थी.देवेन के आंडो का मीठा दर्द अपने चरम पे पहुँचा & उसी वक़्त उसके लंड मे भी ज्वालामुखी फूटा & उसका गर्म लावा उसकी महबूबा की चूत मे भरने लगा.रंभा की चूत तो अपनी मस्तानी हरकत किए चली जा रही थी & देवेन के लंड को निचोड़ रही थी.देवेन उसे बाहों मे भरे,सर उपर उठाए आहें भरता चला जा रहा था.जिस्म मे ऐसा मज़ा उसने भी अपनी ज़िंदगी मे पहले कभी महसूस नही किया था.उसने सर नीचे किया तो रंभा की आँखो से मोती छलक्ते नज़र आए.वो झुका & उन मोतियो को चखने लगा.इश्क़ के शिद्दत भरे इज़हार के अंजाम पे पहुँचने का एलान करती उन बूँदो को अपनी ज़ुबान पे महसूस करते ही देवेन को & उसकी ज़ुबान का उसके गालो से उन बूँदो को उठाना महसूस करते ही रंभा को उस सुकून से भी बड़ा सुकून मिला जो उन्हे अभी-2 चुदाई ख़त्म होने पे मिला था.रंभा के काँपते होठ मुस्कुराने लगे तो उन्हे देख देवेन के लब भी हंस दिए.दिल मे खुशी की लहर उठी तो दोनो सुकून & चैन से भरे जिस्म 1 दूसरे को आगोश मे भर चूमने लगे.

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क्रमशः.......

JAAL paart--63

gataank se aage......

“Rambha..please..samajhne ki koshish karo..vo bahut pareshan thi & hum dono jazbaton me beh gaye the..galti ho gayi mujhse..i’m sorry!”,Rambha apni almari se kapde nikal ke suitcase me bhar rahi thi.

“Sameer,maine apni aankho se dekha hai sab.please,is tarah se jhuth bol ke khud ko khud ki hi nazro me mat girao.”,rambha ne suitcase band kiya.

“aise is waqt kaha jaogi tum?..abhi gusse me ho..main samajh sakta hu tumhara gussa,rambha..”,sameer uske samne uske kandho pe hath rakh ke khada ho gaya tha,”..magar baton se sab hal ho sakta hai na?”

“haan,main gusse me hu & baato se sab hal bhi ho sakta hai magar abhi main koi bhi baat karne ki halat me nahi hu.”,usne suitcase bed se utar ke farsh pe rakha & apna handbag kandhe pe tang 1 dusra bag suitcase ke upar rakha,”..isiliye main ja rahi hu,sameer.tumhare sath is ghar me..is kamre me 1 pal bhi & guzara to main pagal ho jaoongi.”,usne uske hath apne kandho se hataye & suitcase ke pulling handle ko bahar nikal use pahiyo ke sahare khincha,”..mujhe dhoondane ki koshish mat karna..”,vo kamre ke darwaze pe pahunch ke ruki & mudi,”..ghabrao mat main kuchh dino me laut aaoongi.tumhara ye raaz raaz hi rahega & jab tak tum Manpur ka tender jeet ke uspe kaam nahi shuru kar dete,tab tak main Mrs.Sameer Mehra hi rahungi.par please,sameer aaj se tumhare & mere raste alag hain isiliye meri zindagi me dakhal dene ki koshish mat karna.”,vo kamre se bahar nikal gayi.uska dil khushi se jhoom raha tha.itni jaldi use fir se Deven ke paas jane ka mauka milega ye usne sapne me bhi nahi socha tha & ab sameer ki bevkufi ne khud hi uski aage ki mushkil bhi aasan kar di thi.ab talaq to hona hi tha & vo bhi uski sharto par.

“hi!Pranav..”,airport pahunch usne Goa ki agli flight ka ticket liya,”..main kuchh dino ke liye bahar ja rahi hu.”

“kya?kyu..& kaha,rambha?!”

“vo sab main bata nahi sakti.bas itna samjho ki jana pad raha hai.”

“koi mushkil hai rambha?”

“nahi.main tumhe fone karti rahungi & jab bhi tumhe apne kaam me meri zarurat padegi,main aa jaoongi.ok,bye!”,pranav apne mobile ko thame baitha soch raha tha ki achanak aakhir aisa hua kya?agla fone rambha ne sonam ko kiya.usne use na to pehle deven & Vijayant Mehra ke bare me bataya than a ab bataya.bas itna kaha ki sameer ki bewafai se dukhi ho vo ja rahi hai.usne us se bhi fone karte rehne ki baat kahi.

Dabolim airport pe sham 8 baje utar vo taxi se seedha Holiday Inn Goa gayi & 2 logo ke liye 1 kamra book kiya & fir deven ko fone kiya.deven ne us se kaha ki vo 1 ghante me uske paas pahunch raha tha.vo 1 ghanta rambha ne hotel ke kamre me chahalkadmi karte kaata.ab us se 1 pal bhi intezar nahi ho raha tha.apne mehboob ke shehar pahunch gayi thi vo & ab bas uski baaho me sama jana chahti thi vo.rambha ne halke nile rang ki kasi jeans & kale rang ki gol gale ki kasi t-shirt pehni thi.is libas me uske jism ke katav puri tarah se ubhar rahe the.upar se mehboob se jald hi milne ki umang ka khushnuma rang uske chehre pe jhalak raha tha & uska husn & bhi dilkash lag raha tha.

Darwaze ki ghanti baji to vo bhagti hui gayi & darwaza khola.samne deven khada tha.uski aankho me hairat thi & khushi bhi & dilruba ki chahat bhi.dono 1 pal 1 dusre ko dekhte rahe fir deven aage badha & kamre me dakhil hua.usne darwaze ke andar ke knob se latka ‘do not disturb’ ka card nikala & bahar ke knob pe latka diya.is sabke dauran dono premiyo ki aankhe aapas me uljhi rahi-na deven ne palak jhapkayi na hi rambha ne.rambha ka dil ab bahut zoro se dhadak raha tha & uski kasi t-shirt me qaid uske ubhar upar-neeche ho uske aashiq ko uska haal bayan kar rahe the.deven ne bina ghume hath peechhe le jake darwaza band kiya & uske baad jaise kamre me toofan aa gaya.

Rambha bhagti hui aage badhi & us se lipar gayi.deven ne bhi use baahon me bhar liya & dono 1 dusre ko chumne lage,paglo ki tarah,deewano ki tarah.kehne mushkil tha ki kiski zuban kiske munh me thi & kaun kiske chehre pe apne besabr lab fira raha tha.rambha deven ke gale me baahen dale uske baal khincti use chum rahi thi & vo uski kamar ko bahut zor se jakde hue uski zuban ka lutf utha raha tha.deven ne use kamar se uthaya & kamre me rakhe 1 shelf pe bitha diya.khud ko sambhalti kanpti rambha ne hath shelf pe rakhe & uspe rakha guldan uske hatho se takra ke neeche gir gaya.us shelf pe fone & aur bhi kuchh sajawati saman rakhe the.deven ne un sare samano ko apne hatho se dhakel ke neeche giraya & apni mehbooba ki khuli tango ke beech khada ho uski chut pe lund dabate hue use chumne laga.rambha ke hath deven ki pith pe ghum rahe the.

Deven uski zuban chuste hue uski bayi chhati ko shirt ke upar se hi daba raha tha & vo ab zor-2 se aahen bhar rahi thi.rambha ne uske coat ko uske kandho se neeche sarkaya & uski kamiz ke upar se hi uske chaude seene & kandho pe hath firaya.deven ne uski t-shirt upar ki & uske bra ko upar kar jhuk ke uski numaya chhatiyo ko chusne laga.

“aannnnhhhhhh..deven..!”,rambha ki aankhe bilkul phail gayi thi & vo sar upar kiye apne premi ke baalo ko khinchti jhatke kha rahi thi.deven uski chhatiyo ko jaise munh me pura bhar ke chusna chahta tha.un bhari-bharkam magar pusht golaiyon ko vo apne munh me baar-2 bharne ki koshish karte hue chus raha tha.neeche rambah ki chut pe uska sakht lund vaise hi lagatar ragad kha raha tha.sham se hi rambha us se milne ki hasrat ki umang se bhari thi & ab uske mil jane pe uske jism ki nazdiki & uski deewangi bhari harkato ne uske sabr ka bandh tod diya tha & vo jhad rahi thi.

Deven ne uski t-shirt ko sar ke upar se khinch ke nikala to uski choochiyo ne chhalchhalate hue bra ki qaid se chhutne ki khwahish jatayi.apni dilruba ke mastane ubharo ki iltija na maanane ki himakat bhala deven kaise kar sakta tha.usne uske bra straps ko kandho ke upar se pakda & itni zor se khincha ki uske hooks alag ho gaye & khuli bra uske hatho me aa gayi.usne bra ko uchhal diya & jhuk ke rambha ki dilkash choochiyo se apne pyase honth sata diye.vo unhe aise chus raha tha mano unse doodh nikal ke apni pyas bujhana chahta ho.rambha ke husn ko dekh mard apna aapa kho dete the lekin fir bhi ye shiddat,ye deewanapan usne kabhi kisi & ke pyar karne me nahi mehsus kiya tha.khud deven bhi Haraad me us raat aisa deewana kaha tha.

Rambha ka bhi haal deven se alag thode hi tha.vo bhi bawli ho gayi thi.usne mehboob ke baal pakad uske sar ko apne seene se alag kiya & upar kar 1 lambi kiss di.uske hath deven ki shirt ko uski pant se bahar khinch rahe the.ab use bhi sabr nahi tha & usne uski kamiz ko pakad ke is tarah khincha ki sare button toot gaye.khuli kamiz ko usne deven ke kandho se utar fenka & aage jhuk uske seene ke baalo me munh ghusa ke ragadne lagi.uske gale se ajib si aavazen nikal rahi thi jo uske masti me sab bhul jaane ka sabot thi.usne deven ke nipples ko chusa & fir kaat liya.deven ne sar upar kiya & karaha magar rambha ke sar ko seene se alag karne ke bajay use & sata diya.rambha ke hath uske badan ke bagal me ghumte hue uske kandho & mazbut bazuo pe fir rahe the.rambha garden jhuka ke uske seene se chumte hue uske pet pe jaha tak ja sakti thi,jake chum rahi thi.vo & jhukne me asamarth thi & uske honth deven ke lund tak nahi pahunch rahe the to usne apne hatho me hi uske lund & ando ko daboch liya & zor-2 se dabane lagi.

“ohhhhhh..rambha..!”,deven masti me aahat ho gaya & uske baal pakad ke upar khincha & 1 baar fir uske gulabi labo ko apne labo ki qaid me le liya.vo rambha ki kamar ke gudaz hisse ko dabate hue chum raha tha & vo uske lund ko.deven ke hath dilruba ki reshmi pith pe sarak rahe the.hath uski kamar se upar gardan tak gaye & fir vapas laute & is baar & neeche gaye & uski gand se sat gaye.rambha chihunki & usne deven ki pant khol apna hath andar daal diya.deven fir se karaha & rambha shelf se utar gayi & deven ki kamar pakad use shelf ki bagal ki deewar se laga diya.

Usne deven ki pant ko fauran neeche kiya & uske underwear ko bhi.samne precum se bhiga uska 9.5 inch lumba lund apne pure shabab me uski nigaho ke samne tha.rambha apne panjo pe baith gayi & deven ki gand ke bagal me hath lagate hue use aage khincha & khud aage jhukte hue uske lund ke supade ko munh me bhar liya.deven ne deewar pe hath lagaye & sar uthake aah bhari.rambha uski jhanto me naak ghusa ke vahi harkat dohrayi jo kuchh der pehle usne uske seene pe kit hi.usne deven ke lund ko utha uske pet se sata diya & apni jibh ko lund ki jad se leke uske supade ki nok tak chalaya.deven ka jism sihar utha.rambha ki jibh supade se vapas jad tak aayi & uske bhi neeche deven ke ando ke beech pahunch ke ruki.usne apni naak lund ki jad me ghusa ked abate hue uske ando ko munh me bahr ke chusna shuru kar diya.deven uske baalo ko pakad sar ko apni god me daba raha tha.rambha ne ando ko munh se nikala & lund ko munh me bhar liya.anguthe & pehli ungli ka dayra bana lund ko usme phansa use hilate hue usne use chusna shuru kar diya.deven ab kamar hilate hue uske munh ko chod raha tha.rambha uske ang ko munh me bhare bas us se khelti chali ja rahi thi.deven ko laga ki agar vo isi tarah juti rahi to vo fauran jhad jayega.usne jhuk ke rambha ke kandhe pakad use upar uthaya & use baaho me bhar chumte hue uski kamar ko jakad hawa me utha liya & shelf ke dusri taraf rakhi writing table pe bitha diya.

Usne rambha ko dhakelte hue table pe litaya magar uspe rakhe writing papers,pen stand,table lamp vagairah aade aa rahe the.deven ne dono hatho se sare saman ko dhakela to rambha ne bhi letate hue apne hath faila diye.zor ki aavaz ke sath lamp farsh pe gir ke chur-2 ho gaya.baki chizen bhi neeche gir ke chhitra gayi magar dono ko in baton se koi matlab nahi tha.rambha ko table pe lita ke uski garden chumte hue vo uski choochiyo pe aaya & unke nipples ko danto se pakad ke khincha.

“aaiiyyeeeee..!”,rambha masti bhare dard se karahi.deven ab uske pet ko chumte hue,uski nabhi ko chuste hue neeche aaya & uski jeans ke button ko khola & zip khinchi.deven ne jeans ko neeche khincha to rambha ne bhi gand upar utha di.agle hi pal jeans & uski kali panty kamre ke farsh pe bikhre baki saman ka hissa the.deven uski bayi tang ko utha ke chum raha tha & rambha apne daye pair ko uske seene pe chala rahi thi.

“ohhhhhh..!”,deven karaha.rambha ne daye panv ke anguthe & ungli ke beech uske baye nipple ko fansa khicnh diya tha.deven ne uski dayi tang ko pakad baye kandhe pe rakha & chumte hue balki yuk aha jaye ki chuste hue uski jangh ki taraf badhne laga.

“aannhhhhhhhh..uummmmmmmm..haannnnnnn..oohhhhhhhhhhh..!”,rambah masti me chikh rahi thi.deven uski moti jangho ko hotho se kaat raha tha & chus raha tha.jab vo hoth hatata to vaha pe 1 nishan dikhne lagta.kuchh hi der me rambha ki dono andruni janghe aashiq ke hotho ke dastkhat se bhar gayi thi,”..uunnnnnnnnnhhhhhhhh..!”,rambha apni kamar uchkate hue apni choochiya apne hi hatho se daba rahi thi.rambha ne apne dono panv ab ghutne mod table pe jama diye the & deven ki zuban uski chut tak pahunch gayi thi & us se beh rahe ras ko laplapate hue chaat rahi thi.deven uski chut me jibh ghusate hue usk dane ko daye hath ki ungli se ragde ja raha tha.agle hi pal rambha kamar uchkati hui jhad gayi.Deven ne uski tange failayi & apne kandho pe chadha li & 1 zor daar dhakke me hi apne lund ko jud tak uski chut me ghusa diya.

“OOUUIIIIIIIIII MAAAAAAAAAAA..!”,rambha chikhi & dono hath sar ke peechhe le jake table ko pakad liya.deven uski jangho ko sehlata,uski tango ko chumta use chod raha tha.rambha table ko pakde apni kamar uchka rahi thi.bas 3 dino ki judai ka ye asar tha!

Deven ka lund rambha ki kokh pe lagatar chot kar raha tha & jab bhi vo uske naritva ke sabse aham hisse se takrata to 1 anokhe,mastane dard se vo tadap uthati jisme beintaha maza bhi chhupa hota.dono ki naso me mano lahu ki jagah besabri beh rahi thi joki jismo ke milne ke bavjud khatm hone ka naam hi nahi le rahi thi.deven ke chehre pe bhi achanak dard ke bhav aa gaye.rambha ki chut ne sikudne-failne ki harkat shuru kar di thi & uska lund ab uski kasi chut ke & kasne ki vajah se jaise chut ki fanko me pis raha tha magar kitna maza tha..kitni khushi..uska dil kiya ki abhi isi pal jhad jaye magar nahi.abhi use apni jaan se pyari mehbooba ke sath jannat ki & sair karni thi.rambha table ko thame kamar uchkati apne seene ko upar uthati & sar ko peechhe fenkti chikhti jhad rahi thi magar deven apne upar kabu rakhe vaise hi dhakke laga raha tha.

Rambha ne hath sar ke peechhe table se hataye & aage lake apne dilbar ke seene & pet ke balo me hasrat se firaye to usne bhi uski tango ko kandho se utar diya & uski marmari baahen tham use upar khincha.rambha uthate hue uske agosh me aa gayi & apni baahen uske kandhe pe rakhte hue uski garden me daal di & uski garden chumne lagi.deven bhi dhakke lagata hua uske daye kaan me jibh firane laga.rambha ke honth uske kandho pe pahunche & vo unpe haule-2 kaatne lagi.deven uski harkat se & josh me aa gaya & usne kuchh zyada hi tez dhakke lagane hsuru kar diye.jism me uthe dard & maze ke milejule mastane ehsas se aahat ho rambha ne uske daye kandhe ke upar thoda zor se dant gada diye.

“ohhhhhhh..!”,deven karaha & rambha ki pusht jangho ke neeche baahen ghusake uski gand ki fanko ko apne hatho me thamte hue usne use mez se uthaya & ghuma ke kamre ki dusri taraf ki deewar se laga diya & zor-2 se dhakke lagane laga.rambha ahen bharti hui uske kandho ke upar se baahen le jate hue uski pith ko noch rahi thi.deven ka lund seedha uski kokh pe qatil choten kar raha tha & bas chand lamho me hi vo uske lund se dobara jhad gayi & apne hath peechhe apne sar ke upar le jate hue apne nakhun deewar pe zor se ragad uspe apni bechaini ke nishan chhod diye.

Deven use uthaye hue ghuma & bistar pe lita diya & dhakke lagane laga.dhakke lagate hue vo bistar pe ghutne jamake upar chadhne laga to rambha bhi apne hath bistar pe rakh uske sahare upar hone lagi.deven uske upar leta uske chehre,uski garden kom chumte hue use chod raha tha.rambha bechaini se bistar pe apne hath fira rahi thi & chadar ko khinch rahi thi.uska baya hath takiye se takraya to usne use uthake farsh pe fenk diya.deven ke dhakke ab bahut tez ho gaye the & uska lund ab chut ki deewaro ko bahut buri tarah ragad raha tha.rambha kanpti aavaz me chikh rahi thi.uski tange deven ki kamar se leke uske ghutno ke pichhle hisso tak ghum rahi thi & vo unhi ke sahare kamar uchka bhi rahi thi.deven ke har dhakke pe uska jism sihar uthata.vo bahut tezi se apni manzil ki or badh rahi thi.

Deven ka lund bhi uski chut ki kasawat se ab behaal ho gaya tha.uske ando me nitha dard hone laga tha & unme ubal raha uska lava ab phutne ko bilkul taiyyar tha.rambha uski pith se leke uski gand tak apne hath chalate hue use noch rahi thi.2 jism ab 1 dusre ke sahare apni-2 manzil ke bilkul karib pahunch chuke the.deven ne apni bayi banh rambha ki garden ke neeche & dayi uski kamar ke neeche sarka use apne agosh me qaid kar khud se bilkul chipta liya tha.rambha bhi use apni baaho & tango me bandh chuki thi.

“devennnnnnnnnnnnn.......rambha....................!”,Tabhi jaise zor ka dhamaka hua jisme koi aavaz nahi thi bas bahut tez,chamkili roshni thi jo keval dono premiyo ko hi dikhi.rambha ke thartharate hontho se siskiyan nikalr rahi thi ,uski aankho se aansoo beh rahe the.uska jism dilbar ki baaho me masti ki inteha se kanp raha tha.uski chut me maze ki nadi sare bandhan tod sailab ki shakl ikhtiyar kar chuki thi.vo jhad rahi thi,aise jaise pehle kabhi nahi jhadi thi.deven ke ando ka mitha dard apne charam pe pahuncha & usi waqt uske lund me bhi jwalamukhi phuta & uska garm lava uski mehbooba ki chut me bharne laga.rambha ki chut to apni mastani harkat kiye chali ja rahi thi & deven ke lund ko nichod rahi thi.deven use baahon me bhare,sar upar uthaye aahen bharta chala ja raha tha.jism me aisa maza usne bhi apni zindagi me pehle kabhi mehsus nahi kiya tha.usne sar neeche kiya to rambha ki aankho se moti chhalakte nazar aaye.vo jhuka & un motiyo ko chakhne laga.ishq ke shiddat bhare izhar ke anjam pe pahunchne ka elan karti un boondo ko apni zuban pe mehsus karte hi deven ko & uski zuban ka uske galo se un boondo ko uthana mehsus karte hi rambha ko us sukun se bhi bada sukun mila jo unhe abhi-2 chudai khatm hone pe mila tha.rambha ke kanpte hoth muskurane lage to unhe dekh deven ke lab bhi hans diye.dil me khushi ki lehar uthi to dono sukun & chain se bhare jism 1 dusre ko agosh me bhar chumne lage.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--64

गतान्क से आगे......

"इस तरह अचानक कैसे आ गयी तुम?",जो बात उसे आते ही पुच्छनी चाहिए थी,वो देवेन अब पुच्छ रहा था.इसमे उसकी भी ग़लती नही थी.दिले मे उठते तूफान को शांत करते वक़्त & किसी बात का होश कहा था उसे & रंभा को.वो उसके उपर अभी भी सवार था & लंड सिकुड़ने के बावजूद चूत के अंदर ही था.

"आपकी याद ने इतना तडपया कि मुझसे रहा नही गया.",रंभा उसके गाल के निशान को सहला रही थी.

"अच्छा?",देवेन को जैसे यकीन नही हुआ.वो मुस्कुराते हुए उसकी ठुड्डी के नीचे के हिस्से पे अपने दाए हाथ का पिच्छला हिस्सा फेर रहा था.

"तो क्या झूठ बोल रही हू मैं?",रंभा ने प्यार भरी नाराज़गी से पुछा तो देवेन हंस दिया.

"नही,झूठ नही बोल रही मगर कुच्छ छुपा भी रही हो.क्या बोलके आई हो वाहा?"

"कुच्छ बोल के नही आई.सब छ्चोड़ आई हूँ.",रंभा ने नज़रे झुका ली थी.उसकी आवाज़ की संजीदगी से देवेन के माथे पे शिकन पड़ गयी.उसने लंड बाहर खींचा & तकिये के सहारे लेटते हुए अपनी महबूबा को अपने आगोश मे खींच दोनो के जिस्मो के उपर चादर डाल ली.

"चलो,अब पूरी बात बताओ.",देवेन के सीने पे सर रखे उसके बालो मे उंगलिया फिराती रंभा ने उसे सारी बात बता दी.

"& तुम उसे छ्चोड़ आई?"

"हां तो क्या करती?",रंभा बाई कोहनी को बिस्तर पे जमा बाए हाथ पे सर को उसी हाथ पे टिकाते हुए देवेन को देखने लगी.उसका दाया हाथ अभी भी देवेन के सीने पे घूम रहा था.

"बुरा मत मानना मगर बेवफ़ाई तो तुम भी उस से करती आ रही थी.",देवेन उसके बालो को संवार रहा था.

"हां,मगर हालात क्या थे मेरे आपको पता है?..",रंभा की आवाज़ मे गुस्सा था,"..जब वो लापता था तब मैं उसके बाप के साथ सो रही थी क्यूकी उसके बाप ने शर्त रखी थी मेरे सामने की अगर मैं उसके साथ हुम्बिस्तर हुई तभी वो मुझे मेहरा खानदान का हिस्सा बना रहने देगा वरना बाहर कर देगा!"

"..मेरी कमज़ोरी थी कि मैने उसे ना नही किया.कुच्छ दौलत का लालच..कुच्छ..",रंभा की नज़रे झुक गयी,"..कुच्छ जिस्म की माँग & मैने उसकी बात मान ली.फिर डॅड अपनी ज़बान के पक्के थे.मेरे साथ पहली बार सोने के बाद ही उन्होने मुझसे कह दिया था कि आऐइन्दा वो मेरी मर्ज़ी के बिना मुझे नही चोदेन्गे.उसके बाद की सारी चुदाई मे मैं उनके साथ मर्ज़ी से शरीक थी.",रंभा चाह के भी देवेन से निगाहें नही मिला पा रही थी.

"पर समीर..वो तो जैसे मेरा इस्तेमाल कर रहा था.चाहे कुच्छ भी हो,मैं डॅड के साथ उसे ढूँढने तो निकली थी & वो..उसे तो मेरी परवाह ही नही..जब आपके साथ ये रिश्ता शुरू हुआ तो मैं उसकी बेवफ़ाई के बारे मे जानती थी & फिर..",रंभा खामोश हो गयी.

"& फिर क्या?",देवेन ने दाई करवट पे होते हुए उसे फिर से आगोश मे भर लिया & उसके दूसरी तरफ घूमे चेहरे को अपनी नाक से धकेल अपने चेहरे के सामने किया.

"मुझे चुदाई बहुत पसंद है..इसके बिना जी नही सकती मैं मगर इसका मतलब ये नही है की मैं कोई बाज़ारु औरत..कोई वेश्या हू!"

"रंभा!",देवेन को उसकी बात बहुत बुरी लगी थी.

"शादी से पहले भी मेरे मर्दो के साथ संबंध थे.शादी के बाद पति के अलावा मैने अपना जिस्म डॅड & प्रणव को भी सौंपा मगर आपसे मिलने के बाद मैने जाना कि मेरे किसी भी मर्द के साथ सोने की असल वजह मेरा चुदाई का शौक या मेरी मतलबपरस्ती नही थी..",रंभा की आँखो मे पानी आ गया था/

"..मुझे तलाश थी किसी की जोकि उस गाँव मे उस रात यहा आके..",उसने देवेन के सीने पे अपना हाथ रख वाहा इशारा किया,"..पूरी हो गयी.आपकी बाहो मे आने के बाद अब किसी & की चाहत नही रह गयी है मुझे.ये सच है कि मैने वापस जाने के बाद प्रणव के साथ चुदाई की है मगर मैं उसे अपने जाल मे उलझाए रखना चाहती हू ताकि जान सकु की डॅड की हालत के पीछे उसका हाथ है या नही.आप..-",देवेन ने बाया हाथ उसकी कमर से हटा उसके होंठो पे रख दिया.

"चुप!बिल्कुल चुप!..सफाई देके मुझे शर्मिंदा कर रही हो?..तुमसे प्यार करने का मतलब ये थोड़े ही है कि मैं तुम्हारी ज़िंदगी का मालिक बन गया..नही!तुम 1 समझदार,काबिल लड़की हो जो अपने फ़ैसले खुद लेने का माद्दा रखती है.हां,मुझे रश्क होता है तुम्हारी ज़िंदगी के बाकी मर्दो से लेकिन उसका मतलब ये नही कि मैं तुम्हे सबसे रिश्ता तोड़ने को कहु.मेरी मोहब्बत की बुनियाद इतनी कमज़ोर नही है."

"ओह!देवेन..",रंभा ने उसे बाहो मे भर लिया.उसकी आँखो का पानी उसके गालो को भिगोने लगा था.देवेन उसके दाए कंधे के उपर सर रखे उसके गले से लगा उसकी पीठ थपथपा रहा था,"..बस..1 बार मेहरा खानदान की गुत्थी सुलझ जाए,उसके बाद मैं सब छ्चोड़ बस आपकी बाहो मे यू ही सारी ज़िंदगी पड़ी रहूंगी.",उसकी बात सुन देवेन की पकड़ और कस गयी & उस्ने दाई बाँह उसकी गर्दन के नीचे सरकाते हुए उसे फिर से पीठ पे लिटा दिया & उसके माथे को चूमने लगा.

"फ़िक्र मत करो.बहुत जल्द ये सारी उलझने ख़त्म हो जाएँगी.मुझे तफ़सील से सारी बात बताओ कि आख़िर वो प्रणव क्या हरकतें कर रहा है?",रंभा ने देवेन को सब कुच्छ बताया.उसने महादेव शाह के बारे मे भी बताया.

"हूँ..",देवेन का लंड रंभा के जिस्म की च्छुअन से फिर से खड़ा हो रहा था & उसके साथ-2 रंभा ने भी इस बात को महसूस किया,"..तुम्हे शाह से मिलके क्या लगा?..वो किस तरह का आदमी है?..क्या उसे वैसे बेवकूफ़ बनाया जा सकता है जैसे प्रणव सोच रहा है?",देवेन अब दाई करवट पे था & रंभा अपनी बाई करवट पे.वो बाए हाथ से उसके लंड को दबा रही थी & दाए को उसके जिस्म पे फिराते हुए उसके सीने के बालो मे मुँह घुमा रही थी.

"उउंम..नही मुझे तो वो बुड्ढ़ा बड़ा चालाक लगा..आहह..!",देवेन ने उसके सर को अपने सीने से उठाया & उसके बाल पकड़ पीछे कर उसकी गर्दन अपने सामने की ओर चूमने लगा.

"1 तरकीब सूझी है!",अचानक देवेन ने उसके होंठो से लब अलग किए & उसके चेहरे को देखा.रंभा को उसकी ये हरकत बिल्कुल भी अच्छी नही लगी & उसने उसके सर को पकड़ वापस अपनी गर्दन पे दबाया,"..क्यू ना हम दोनो के साथ ये खेल खेलें & कंपनी की मालकिन तुम बन जाओ."

"क्या?!",इस बार रंभा ने खुद देवेन के बाल पकड़ उसके सर को उपर कर दिया.

"हां,हम ये पता करते हैं कि विजयंत मेहरा के इस हाल का ज़िम्मेदार कौन है मगर साथ-2 शाह & प्रणव के साथ ये खेल भी खेलते रहते हैं.जैसे ही मामला सुलझेगा तो अगर प्रणव मुजरिम होगा तो वो सलाखो के पीछे होगा & अगर नही तो भी हम उसे & शाह को किनारे कर देंगे,फिर तुम कंपनी की मालकिन बनी रहोगी.",रंभा उसके चेहरे को गौर से देखते हुए उसे समझने की कोशिश कर रही थी.

"मगर 1 बात और है."

"क्या?"

"प्रणव का सारा प्लान इस बात पे टिका है कि समीर के शेर्स तुम्हे मिलें."

"हां."

"अब अगर तुम समीर को तलाक़ देती हो तो उसकी सारी मेहनत बर्बाद हो जाएगी."

"हां."

इसका मतलब तुम्हे अभी समीर की पत्नी बनाकर रहना होगा हां एक बात और भी है."

"वो क्या?"

"समीर के शेर्स तुम्हारे पास तो केवल 1 ही सूरत मे आ सकते हैं..",रंभा जानती थी वो सूरत क्या थी,"..जब उसकी मौत हो जाए.तो कभी ना कभी शाह या प्रणव तुम्हे टटोलेंगे कि तुम इस बात के लिए तैय्यार हो या नही और तुम्हे उन्हे यकीन दिलाना है कि तुम्हे समीर की मौत से कोई परेशानी नही बल्कि तुम खुद समीर को रास्ते से हटाओगि उनके लिए.",रंभा कुछ पल देवेन को देखती रही.उसे उसकी बात समझ आ गयी थी & उसके होंठो पे मुस्कान खेलने लगी.उसे मुस्कुराता देख देवेन भी मुस्कुराने लगा & अगले ही पल दोनो हंसते हुए 1 दूसरे को बाँहो मे बाहर बिस्तर पे लोटने लगे.रंभा जानती थी कि देवेन का प्लान कमाल का था & आगे की उनकी सारी ज़िंदगी बड़े सुकून से कटने वाली थी.

बिस्तर पे यू लोटने से उनके जिस्मो पे पड़ी चादर उनके गिर्द लिपट गयी थी मगर उन्हे किसी बात का होश नही था.1 बार फिर रंभा नीचे थी & देवेन उसके उपर.वो उसकी छातिया चूस्ते हुए लंड को चूत पे दबा रहा था.रंभा तो बस अपने बेचैन हाथो से उसके पूरे जिस्म को च्छू रही थी,"..उउम्म्म्म..भूख लग रही है मुझे..शाम से कुच्छ नही खाया है."

"अच्छा..",देवेन उस से अलग होने लगा.

"उउन्ण..जा कहा रहे हैं!"

"अरे!तो फोन तक कैसे जाऊं?",देवेन उसके बच्पने पे मुस्कुरा दिया.

"मुझे नही पता पर मुझसे अलग होना मना है!",देवेन को उसकी बात पे हँसी आ गयी.

"अच्छा बाबा!जैसा तुम कहो.",उसने रंभा को चादर समेत बाहो मे भरा & लिए दिए बिस्तर से उतर गया & चलते हुए शेल्फ के पास पहुँचा जिसके नीचे फोने & मेनू कार्ड गिरा था.उसने दोनो चीज़ें उठा के उपर रखी & फिर रूम सर्विस को ऑर्डर किया.वो रंभा को वैसे ही बाहो मे भरे हुए चूमते हुए दरवाज़े तक गया & उसे खोला & फिर उसे गोद मे उठा लिया & बिस्तर पे आ गया.दोनो हंसते हुए फिर से प्यार करने लगे.

चादर के नीचे देवेन रंभा के उपर चढ़ा उसे चूम रहा था & उसकी चूचिया दबा रहा था.रंभा भी उचक के बीच-2 मे उसके सीने को चूम रही थी & उसके निपल्स को अपनी उंगलियो से नोच रही थी की दरवाज़े की घंटी बजी.देवेन उसके उपर से उतर बिस्तर पे लेट गया & रंभा उसकी दाई बाँह के घेरे मे आ गयी & चादर को अपने गले तक खींच लिया.

"कम इन.",देवेन के कहने पे वेटर दरवाज़ा खोल 1 ट्रॉली धकेल्ता अंदर आया & कमरे की हालत & बिस्तर पे दोनो को देख चौंक गया मगर वो 1 नामी होटेल का वेटर था & उसने फ़ौरन खुद को संभाला.

"गुड ईव्निंग,मॅ'म!..गुड ईव्निंग,सर!",वो बिस्तर के दूसरी तरफ रखी 2 कुर्सियो & मेज़ की तरफ फर्श पे गिरे समान से बचाते हुए ट्रॉली को ले जा रहा था.

"अरे भाई!इस ट्रॉली को यही इधर लगा दो.",देवेन ने अपने दाई तरफ बिस्तर के किनारे इशारा किया.रंभा का दाया हाथ चादर के नीचे से सरक के देवेन के लंड पे आ गया था & वो उस से खेलने लगी थी.वेटर से चादर के नीचे होती हुलचूल छुपि तो नही ना ही च्छूपा था चादर के नीचे रंभा के नंगी होने का एहसास.

रंभा 1 बेबाक लड़की थी मगर इस हद्द तक जाने की उसने भी कभी नही सोची थी लेकिन आज जैसे सारी हदें टूट गयी थी.वेटर की मौजूदगी से उसे थोड़ी शर्म तो आई थी मगर जब उसने देखा कि वो उसे सीधा देखने से बच रहा है तो उसे हँसी आने लगी थी.देवेन की बाहो मे खुद को बहुत महफूज़ महसूस कर रही थी वो.

वेटर ट्रॉली लगाके जाने लगा तो रंभा ने देवेन को उसे टिप देने को कहा.देवेन ने वेटर को बुलाया तो वो उसके करीब आया & टिप लेते हुए उसकी नज़र नीचे हुई & चादर मे बना तंबू और उसमे होती हुलचूल उसे और करीब से दिखी.वेटर को पसीना आ गया.ऐसा नही था कि उसने कभी जोड़ो को इस तरह से 1 दूसरे से प्यार करते नही देखा था.विदेशी जोड़े अक्सर 1 दूसरे को चूमते लिपटाते रहते थे मगर ये पहला मौका था जब उसने किसी जोड़े को इस तरह बिस्तर मे देखा था.वो टिप लेके दरवाज़े की ओर गया & वाहा पहुचते ही आदत के मुताबिक घुमके 'हॅव ए नाइस स्टे!' बोलने ही वाला था कि सामने का नज़र देख उसका हलक सुख गया.

रंभा उसके घूमते ही देवेन के उपर आ गयी थी और उसे चूम रही थी.चादर उसकी कमर तक सरक गयी थी & उसकी गोरी पीठ कमरे की रोशनी मे चमक रही थी.उसकी दाई छाती का थोड़ा सा हिस्सा उसकी बगल से दिख रहा था.देवेन के हाथ उसकी कमर के मांसल हिस्से को दबा रहे थे.वेटर की आवाज़ उसके हलक मे ही अटक गयी थी.उसने दरवाज़ा बंद किया & माथे का पसीना पोन्छ्ता वाहा से चला गया.

"पहले खाना तो खा लो.",देवेन ने चादर के नीचे हाथ सरका के उसकी गंद को दबाया & फिर कमर पकड़ उसे अपने उपर से हटाया,"..फिर तुम्हे बताना है कि मुझे क्या नया पता चला है दयाल के बारे मे."

"दयाल के बारे मे?",रंभा ट्रॉली से प्लेट उठाके उसमे खाना परोसने लगी.

"ह्म..अब दयाल के बारे मे तो नही मगर समझो कि 1 नया सुराग मिला है.",देवेन ने रंभा को अपनी ओर खींचा.वो पलंग के हेडबोर्ड से टिक के बैठ गया था & उसने अपनी दाई बाँह रंभा के दाए कंधे के गिर्द डाल दी.रंभा उसे चम्चे से खाना खिलाने लगी & खुद भी खाने लगी,"..रंभा गोआ का 1 चेहरा जो तुम जानती हो या जिसके बारे मे तुमने सुना होगा,वो है इसके खूबसूरत,चमकीली रेत वाले बीचस,समंदर का नीला पानी..",उसने महबोबा के हाथ से 1 नीवाला लिया,"..यहा के लोगो की धीमी चाल से चलती आरामदेह ज़िंदगी,फेणी & यहा का म्यूज़िक."

"..मगर इस जगह का 1 दूसरा चेहरा भी है जो की इसके पहले चेहरे से बिल्कुल उलट है..",रंभा गौर से उसे सुन रही थी.देवेन के सीने के दाए हिस्से पे उसका बाया निपल चुभ रहा था & देवेन को मस्त कर रहा था.उसने अपना बाया हाथ अपनी महबूबा के सीने के दिलकश उभारो से लगा दिया,"..वो चेहरा है जुर्म का,ड्रग्स का,जिस्म्फरोशी का,करप्षन का.",वो रंभा की छातियो को हौले-2 दबा रहा था.रंभा को बहुत भला लग रह था उसके हाथो का दबाव मगर फिर भी उसे छेड़ने की गरज से वो चिहुनकि & बुरा सा मुँह बनाया तो देवेन ने उसके बाए गाल को चूम लिया & मुँह खोल अगले नीवाले को मुँह मे डालने की ख्वाहिश ज़ाहिर की.

"मैं यहा से पहले तमिल नाडु मे था & मैने हर तरह के काम किए वाहा-क़ानूनी भी & गैर क़ानूनी भी.",इस बार रंभा ने सच मे बुरा मुँह बनाया,"..रंभा,जैल से निकले शख्स को सभी ग़लत ही समझते हैं.तुम्हे पता नही कितनी मुश्किल होती है सज़ायाफ़्ता इंसान को वापस 1 आम ज़िंदगी जीने मे.तुम्हे इतना यकीन दिलाता हू कि अब मैं कोई ग़लत काम नही करता.",रंभा को उसकी आँखो मे ईमानदारी की झलक दिखी & उसने अगला नीवाला उसके मुँह मे डाला & उसके दाए गाल को चूम लिया.

"..तो मेन समाज मे उस लकीर के,जो अच्छे & बुरे को अलग करती है,दोनो तरफ के लोगो को अच्छे से जानता हू,समझता हू.यहा गोआ मे जुर्म का जो संसार है उसमे हुमारे मुल्क के लोग तो हैं ही मगर साथ-2 रशियन & इज़्रेली भी हैं.ये लोग यहा के ड्रग्स & जिस्म्फरोशी के धंधे को कंट्रोल करते हैं.मैं इन दोनो मुल्को के लोगो को जानता हू..",खाना ख़त्म हो चुका था.दोनो ने पानी पिया & देवेन ने अपनी महबूबा को बैठे हुए ही अपनी गोद मे खींचा & उसकी छातियो को चूसने लगा.उसके लंड पे बैठी उसके सर को प्यार से अपनी हाथो मे पकड़ चूमते हुए रंभा आँहे भरने लगी.

"..बालम सिंग अपने फार्म पे चरस उगाता था & उसी का धंधा करता था.उसके मरने पे ड्रग्स की गंदी दुनिया मे उथल-पुथल मच गयी & ये खबर यहा गोआ भी पहुँची..",देवेन की ज़ुबान रंभा को मस्त किए जा रही थी.वो अपने जिस्म का बाया हिस्सा उसके सीने से सटा अपनी दोनो टाँगे उसके जिस्म के बाई तरफ फैलाए उसकी गोद मे छॅट्पाटा रही थी.देवेन का लंड उसकी मुलायम गंद के दबाव से फ़ौरन खड़ा हो गया था.

"..तब मुझे पता चला कि बलम सिंग अपने जैल मे काम करने के दिनो से ही ड्रग्स के धंधे से जुड़ा था.पहले तो वो बस दयाल जैसे लोगो से लेके क़ैदियो को ड्रग्स सप्लाइ करता था मगर बाद मे वो उन लोगो के साथ मिलके इस धंधे मे पूरा उतर गया..",रंभा मस्त हो अपनी बाई बाँह देवेन के दाए कंधे पे टिकाते हुए उसकी गर्दन को जकड़ते हुए उसके दाए कान मे अपनी जीभ फिरा रही थी.

"आईिययययई..!",उसके चेहरे पे शिकन पड़ गयी & साथ ही 1 मस्त मुस्कान भी खेलने लगी.देवेन ने उसकी मोटी जाँघो के नीचे बाई बाँह लगाते हुए उन्हे उठाया था & जब नीचे किया तो उसकी चूत मे देवेन का लंबा,मोटा लंड घुस चुका था.उसने उसके सीने से सर उठाया तो रंभा ने अपना सर झुका उसके होंठ चूम लिए.दोनो की आँखो मे वासना के लाल डोरे तेर रहे थे.देवेन उसकी जाँघो को थाम के उपर-नीचे करते हुए उसकी चुदाई कर रहा था.रंभा की दोनो जंघे सटी होने की वजह से उसकी कसी चूत और कस गयी थी & उसकी दीवारो पे देवेन का लंड बहुत बुरी तरह रगड़ रहा था.

"..मगर बालम कोई बहुत बड़ी मछली नही था.उसका असली बॉस यहा से दूर मारिटियस मे बैठा है.अब मज़े की बात सुनो.बलम के बॉस से हमे कोई मतलब नही है.हमे मतलब है उस बॉस के धंधे के तरीके से.वो आदमी भी ड्रग्स & जवाहरतो का ग़ैरक़ानूनी धंधा 1 साथ करता है & सभी मुल्को की पोलीस से लेके इंटररपोल उसके दोनो धंधो मे उलझी रहती है मगर कोई 1 भी उसे रंगे हाथ नही पकड़ पाती..",रंभा लंड की ज़ोरदार रगड़ से बहुत मस्त हो गयी थी & उसने अपने दिलबर की गर्दन को जकड़ते हुए उसके सर को अपने सीने से चिपका लिया & कमर हिलाती च्चटपटाने लगी.उसने देवेन के बाल पकड़ पीछे खींचे & अपने लरजते लब उसके लबो से चिपका दिए & उसके लंड पे अपनी चूत की गिरफ़्त को & कस दिया.वो झाड़ रही थी & देवेन उसे वैसे ही गोद मे उच्छलते हुए चोद रहा था.

रंभा ने सिसकते हुए उसके हाथ को पानी जाँघो के नीचे से हटाया & दोनो टाँगे उसकी टाँगो के उपर करते हुए उसके सीने से टेक लगाके बैठ गयी & फिर कमर उच्छालने लगी.देवेन ने भी उसकी कमर थाम ली & उसकी पीठ & कंधे चूमने लगा.

"..जिस वक़्त दयाल मुझे फँसा के यहा से भागा उसके कुच्छ अरसे बाद ही बालम के बॉस ने जवाहरतो का भी धंधा शुरू किया था.खेल बहुत सीधा है.जैसे मुझे फँसाया गया था उसी तरह किसी मासूम शख्स से जवाहरतो की स्मुगलिंग कराई जाती.पोलीस का ध्यान उसपे रहता & इस बीच ड्रग्स किसी दूसरे रास्ते स्मगल हो जाते.ये तरीका सीधा दयाल की ओर इशारा करता है..",रंभा ज़ोर-2 से उछल रही थी & बीच-2 मे गर्दन घूमके अपने प्रेमी को चूम भी रही थी.

"..लेकिन इंटररपोल की रिपोर्ट के मुताबिक वो शख्स मारिटियस का ही कोई बंदा था-रोशन पेरषद.पर मेरा दिल कहता है कि वो दयाल ही था & आदत से मजबूर नाम बदल के काम कर रह था.खैर,वो रोशन पेरषद काफ़ी दिनो तक इस धंधे से जुड़े रहने के बाद अचानक 1 दिन गायब हो गया..",रंभा ने अपने होंठ भींच लिए थे.उसके दिल मे मस्ती का 1 गुबार उठ रहा था,प्री जिस्म मे दौड़ती मस्ती बस 1 धमाके के साथ फूटने ही वाली थी.

"..कुछ दिनो बाद इसी तरीके से युरोप मे ड्रग्स स्मुग़ले किए गये & वाहा जो नाम सामने आया वो था दानिश सुलेमान.मेरे हिसाब से ये भी दयाल ही था.इंटररपोल वाले भी समझ गये थे कि हो ना हो ये सब 1 ही इंसान हैं जो नाम बदल के उन्हे हर बार गुमराह कर रहा है मगर 1 रोज़ आम्सटरडॅम के बदनाम डे वॉलेन इलाक़े मे सुलेमान की लाश मिली & उस तरीके से स्मुगलिंग भी बंद हो गयी.कुच्छ दिनो बाद इंटररपोल ने भी फाइल बंद कर दी."

"आहह..!",1 लंबी आह के साथ रांभ अपनी कमर बेचिनी से हिलाती & जिस्म को कमान की तरह मोदती झाड़ गयी & निढाल हो लंबी-2 साँसे भरती देवेन के सीने पे गिर गयी.देवेन ने दाई बाँह उसके पेट पे कसी & बाई उसकी चूचियो के नीचे & नीचे से ज़ोर-2 से कमर उचक के धक्के लगाने लगा.रंभा आहें भरती उसके सर को थामे उसके बाए गाल को चूमती उसका भरपूर साथ दे रही थी & चंद पॅलो बाद दोनो प्रेमियो ने 1 साथ आह भरी & रंभा के चेहरे पे मस्ती भरी मुस्कान खेलने लगी-वो अपनी चूत मे अपने प्रेमी के वीर्य को भरता सॉफ महसूस कर रही थी.

"..मगर मुझे अंदर की बात पता है कि सुलेमान ने अपनी जगह किसी & शख्स की लाश फिंकवा दी थी & अपने मरने की अफवाह उड़वा दी थी.किसी भी एजेन्सी के पास दयाल/पेरषद/सुलेमान का कोई डीयेने या बाइयोलॉजिकल रेकॉर्ड था नही & जब स्मगलिंग का वो तरीका बंद हो गया तो उन्होने भी उसकी मौत को सही मान लिया.."

"..जहा सारी एजेन्सीस धोखा खा गयी वाहा आपको कैसे पता ये सब,जानेमन?",रंभा अभी भी वैसे ही देवेन के बाए कंधे पे सर रखे उसके दाए गाल को सहलाती बाए को चूम रही थी.

"क्यूकी जिस शख्स ने पेरषद & सुलेमान के नामो के झूठे पासपोर्ट्स बनाए थे उसे मैं जानता हू

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क्रमशः.......

JAAL paart--64

gataank se aage......

"Is tarah achanak kaise aa gayi tum?",jo baat use aate hi puchhni chahiye thi,vo Deven ab puchh raha tha.isme uski bhi galti nahi thi.dile me uthate toofan ko shant karte waqt & kisi baat ka hosh kaha tha use & rambha ko.vo uske upar abhi bhi sawar tha & lund sikudne ke bavjud chut ke andar hi tha.

"aapki yaad ne itna tadpaya ki mujhse raha nahi gaya.",rambha uske gaal ke nishan ko sehla rahi thi.

"achha?",deven ko jaise yakin nahi hua.vo muskurate hue uski thuddi ke neeche ke hisse pe apne daye hath ka pichhla hissa fer raha tha.

"to kya jhuth bol rahi hu main?",rambha ne pyar bhari narazgi se puchha to deven hans diya.

"nahi,jhuth nahi bol rahi magar kuchh chhupa bhi rahi ho.kya bolke aayi ho vaha?"

"kuchh bol ke nahi aayi.sab chhod aayi hun.",rambha ne nazre jhuka li thi.uski aavaz ki sanjidgi se deven ke mathe pe shikan pad gayi.usne lund bahar khincha & takiye ke sahare letate hue apni mehbooba ko apne agosh me khinch dono ke jismo ke upar chadar daal li.

"chalo,ab puri baat batao.",deven ke seene pe sar rakhe uske baalo me ungliya firati rambha ne use sari baat bata di.

"& tum use chhod aayi?"

"haan to kya karti?",rambha bayi kohni ko bistar pe jama baye hath pe sar ko usi hath pe tikate hue deven ko dekhne lagi.uska daya hath abhi bhi deven ke seene pe ghum raha tha.

"bura mat maanana magar bewafai to tum bhi us se karti aa rahi thi.",deven uske baalo ko sanwar raha tha.

"haan,magar halaat kya the mere aapko pata hai?..",rambha ki aavaz me gussa tha,"..jab vo lapata tha tab main uske baap ke sath so rahi thi kyuki uske baap ne shart rakhi thi mere samne ki agar main uske sath humbistar hui tabhi vo mujhe Mehra khandan ka hissa bana rehne dega varna bahar kar dega!"

"..meri kamori thi ki maine use naa nahi kiya.kuchh daulat ka lalach..kuchh..",rambha ki nazre jhuk gayi,"..kuchh jism ki mang & maine uski baat maan li.fir dad apni zaban ke pakke the.mere sath pehli baar sone ke baad hi unhone mujhse keh diya tha ki aaainda vo meri marzi ke bina mujhe nahi chodenge.uske baad ki sari chudai me main unke sath marzi se sharik thi.",rambha chah ke bhi deven se nigahen nahi mila pa rahi thi.

"par Sameer..vo to jaise mera istemal kar raha tha.chahe kuchh bhi ho,main dad ke sath use dhoondane to nikli thi & vo..use to meri parwah hi nahi..jab aapke sath ye rishta shuru hua to main uski bewafai ke bare me janti thi & fir..",rambha khamosh ho gayi.

"& fir kya?",deven ne dayi karwat pe hote hue use fir se agosh me bhar liya & uske dusri taraf ghume chehre ko apni naak se dhakel apne chehre ke samne kiya.

"mujhe chudai bahut pasand hai..iske bina ji nahi sakti main magar iska matlab ye nahi hai ki main koi bazaru aurat..koi veshya hu!"

"rambha!",deven ko uski baat bahut buri lagi thi.

"shadi se pehle bhi mere mardo ke sath sambandh the.shadi ke baad pati ke alawa maine apna jism dad & Pranav ko bhi saunpa magar aapse milne ke baad maine jana ki mere kisi bhi mard ke sath sone ki asal vajah mera chudai ka shauk ya meri matlabparasti nahi thi..",rambha ki aankho me pani aa gaya tha/

"..mujhe talash thi kisi ki joki us ganv me us raat yaha aake..",usne deven ke seene pe apna hath rakh vaha ishara kiya,"..puri ho gayi.aapki baaho me aane ke baad ab kisi & ki chahat nahi reh gayi hai mujhe.ye sach hai ki maine vapas jane ke baad pranav ke sath chudai ki hai magar main use apne jaal me uljhaye rakhna chahti hu taki jaan saku ki dad ki halat ke peechhe uska hath hai ya nahi.aap..-",deven ne baya hath uski kamar se hata uske hotho pe rakh diya.

"chup!bilkul chup!..safai deke mujhe sharminda kar rahi ho?..tumse pyar karne ka matlab ye thode hi hai ki main tumhari zindagi ka malik ban gaya..nahi!tum 1 samajhdar,kabil ladki ho jo apne faisle khud lene ka madda rakhti hai.haan,mujhe rashk hota hai tumahri zindagi ke baki mardo se lekin usk matlab ye nahi ki main tumhe sabse rishta todne ko kahu.meri mohabbat ki buniyad itni kamzor nahi hai."

"oh!deven..",rambha ne use baaho me bhar liya.uski aankho ka pani uske galo ko bhigone laga tha.deven uske daye kandhe ke upar sar rakhe uske gale se laga uski pith thapthapa raha tha,"..bas..1 baar mehra khandan ki gutthi sulajh jaye,uske baad main sab chhod bas aapki baaho me yu hi sari zindagi padi rahungi.",uski baat sun deven ki pakad & kas gayi & usne dayi banh uski gardan ke neeche sarkate hue use fir se pith pe lita diya & uske mathe ko chumne laga.

"fikr mat karo.bahut jald ye sari uljhane khatm ho jayengi.mujhe tafsil se sari baat batao ki aakhir vo pranav kya harkaten kar raha hai?",rambha ne deven ko sab kuchh bataya.usne Mahadev Shah ke bare me bhi bataya.

"hun..",deven ka lund rambha ke jism ki chhuan se fir se khada ho raha tha & uske sath-2 rambha ne bhi is baat ko mehsus kiya,"..tumhe shah se milke kya laga?..vo kis tarah ka admi hai?..kya use vaise bevkuf banaya ja sakta hai jaise pranav soch raha hai?",deven ab dayi karwat pe tha & rambha apni bayi karwat pe.vo baye hath se uske lund ko daba rahi thi & daye ko uske jism pe firate hue uske seene ke baalo me munh ghuma rahi thi.

"uumm..nahi mujhe to vo buddha bada chalak laga..aahhhhh..!",deven ne uske sar ko apne seene se uthaya & uske baal pakad peechhe kar uski gardan apne samne ki & chumne laga.

"1 tarkib sujhi hai!",achanak deven ne uske hothos e lab alag kiye & uske chehre ko dekha.rambha ko uski ye harkat bilkul bhi achhi nahi lagi & usne suke sar ko pakad vapas apni gardan pe dabaya,"..kyu na hum dono ke sath ye khel khelen & company ki malkin tum ban jao."

"kya?!",is baar rambha ne khud deven ke baal pakad uske sar ko upar kar diya.

"haan,hum ye pata karte hain ki Vijayant Mehra ke is haal ka zimmedar kaun hai magar sath-2 shah & pranav ke sath ye khel bhi khelte rehte hain.jaise hi mamla suljhega to agar pranav mujrim hoga to vo salakho ke peechhe hoga & agar nahi to bhi hum use & shah ko kinare kar denge,fir tum company ki malkin bani rahogi.",rambha uske chehre ko gaur se dekhte hue use samajhne ki koshish kar rahi thi.

"magar 1 baat & hai."

"kya?"

"pranav ka sara plan is baat pe tika hai ki sameer ke shares tumhe milen."

"haan."

"ab agar tum sameer ko talaq deti ho to uski sari mehnat barbad ho jayegi."

"haan."

"to tumhe filhal sameer ki patni bana rehna padega.lekin 1 baat & bhi hai."

"vo kya?"

"sameer ke shares tumhare paas to keval 1 hi surat me aa sakte hain..",rambha janti thi vo surat kya thi,"..jab uski maut ho jaye.to kabhi na kabhi shah ya pranav tumhe tatolenge ki tum is baat ke liye taiyyar ho ya nahi & tumhe unhe yakin dilana hai ki tumhe sameer ki maut se koi pareshani nahi balki tum khud sameer ko raste se hataogi unke liye.",rambha kuichh pal deven ko dekhti rahi.use uski baat samajh aa gayi thi & uske hotho pe muskan khelne lagi.use muskurata dekh deven bhi muskurane laga & agle hi pal dono hasnte hue 1 dusre ko bahao me bahr bistar pe lotne lage.rambha janti thi ki deven ka plan kamal ka tha & aage ki unki sari zindagi bade sukun se katne vali thi.

bistar pe yu lotne se unke jismo pe padi chadar unke gird lipat gayi thi magar unhe kisi baat ka hosh nahi tha.1 baar fir rambha neeche thi & deven uske upar.vo uski chhatiya chuste hue lund ko chut pe daba raha tha.rambha to bas apne bechain hatho se uske pure jism ko chhu rahi thi,"..uummmm..bhukh lag rahi hai mujhe..sham se kuchh nahi khaya hai."

"achha..",deven us se alag hone laga.

"uunn..ja kaha rahe hain!"

"are!to fone tak kaise jaoon?",deven uske bachpane pe muskura diya.

"mujhe nahi pata par mujhse alag hona mana hai!",deven ko uski baat pe hansi aa gayi.

"achha baba!jaisa tum kaho.",usne rambha ko chadar samet baaho me bhara & liye diye bistar se utar gaya & chalte hue shelf ke paas pahuncha jiske neeche fone & menu card gira tha.usne dono chizen utha ke upar rakhi & fir room service ko order kiya.vo rambha ko vaise hi baaho me bhare hue chumte hue darwaze tak gaya & use khola & fir use god me utha liya & bistar pe aa gaya.dono hanste hue fir se pyar karne lage.

chadar ke neeche deven rambha ke upar chadha use chum raha tha & uski choochiya daba raha tha.rambha bhi uchak ke beech-2 me uske seene ko chum rahi thi & uske nipples ko apni ungliyo se noch rahi thi ki darwaze ki ghnati baji.deven uske upar se utar bistar pe let gaya & rambha uski dayi banh ke ghere me aa gayi & chadar ko apne gale tak khinch liya.

"come in.",deven ke kehne pe waiter darwaza khol 1 trolley dhakelta andar aaya & kamre ki halat & bistar pe dono ko dekh chaunk gaya magar vo 1 nami hotel ka waiter tha & usne fauran khud ko sambhala.

"good evening,ma'am!..good evening,sir!",vo bistar ke dusri taraf rakhi 2 kursiyo & mez ki taraf farsh pe gire saman se bachate hue trolley ko le ja raha tha.

"are bhai!is trolley ko yehi idhar laga do.",deven ne apne dayi taraf bistar ke kinare ishara kiya.rambha ka daya hath chadar ke neeche se sarak ke deven ke lund pe aa gaya tha & vo us se khelne lagi thi.waiter se chadar ke neeche hoti hulchul chhupi to nahi na hi chhupa tha chadar ke neeche rambha ke nangi hone ka ehsas.

rambha 1 bebak ladki thi magar is hadd tak jane ki usne bhi kabhi nahi sochi thi lekin aaj jaise sari haden toot gayi thi.waiter ki maujoodgi se use thodi sharm to aayi thi magar jab usne dekha ki vo use seedha dekhne se bach raha hai to use hansi aane lagi thi.deven ki baaho me khud ko bahut mehfuz mehsus kar rahi thi vo.

waiter trolley lagake jane laga to rambha ne deven ko use tip dene ko kaha.deven ne waiter ko bulaya to vo uske karib aaya & tip lete hue uski nazar neeche hui & chadar me bana tambu & usme hoti hulchul use & karib se dikhi.waiter ko pasina aa gaya.aisa nahi tha ki usne kabhi jodo ko is tarah se 1 dusre se pyar karte nahi dekha tha.videshi jode aksar 1 dusre ko chumte lipatate rehte the magar ye pehla mauka tha jab usne kisi jode ko is tarah bistar me dekha tha.vo tip leke darwaze ki or gaya & vaha pahuchte hi aadat ke mutabik ghumke 'have a nice stay!' bolne hi vala tha ki samne ka nazar dekh uska halak sukh gaya.

rambha uske ghumte hi deven ke upar aa gayi thi & use chum rahi thi.chadar uski kamar tak sarak gayi thi & uski gori pith kamre ki roshni me chamak rahi thi.uski dayi chhati ka thoda sa hissa uski bagal se dikh raha tha.deven ke hath uski kamar ke mansal hisse ko daba rahe the.waiter ki aavaz uske halak me hi atak gayi thi.usne darwaza band kiya & mathe ka pasina ponchhta vaha se chala gaya.

"pehle khana to kha lo.",deven ne chadar ke neeche hath sarka ke uski gand ko dabaya & fir kamar pakad use apne upar se hataya,"..fir tumhe batana hai ki mujhe kya naya pata chala hai Dayal ke bare me."

"Dayal ke bare me?",Rambha trolley se plate uthake usme khana parosne lagi.

"hmm..ab dayal ke bare me to nahi magar samjho ki 1 naya surag mila hai.",Deven ne rambha ko apni or khincha.vo palang ke headboard se tik ke baith gaya tha & usne apni dayi banh rambha ke daye kandhe ke gird dal di.rambha use chamche se khana khilane lagi & khud bhi khane lagi,"..rambha Goa ka 1 chehra jo tum janti ho ya jiske bare me tumne suna hoga,vo hai iske khubsurat,chamkili ret vale beaches,samandar ka nila pani..",usne mehboba ke hath se 1 nivala liya,"..yaha ke logo ki dhimi chal se chalti aramdeh zindagi,feni & yaha ka music."

"..magar is jagah ka 1 dusra chehra bhi hai jo ki iske pehle chehre se bilkul ulat hai..",rambha gaur se use sun rahi thi.deven ke seene ke daye hisse pe uska baya nipple chubh raha tha & deven ko mast kar raha tha.usne apna baya hath apni mehbooba ke seene ke dilkash ubharo se laga diya,"..vo chehra hai jurm ka,drugs ka,jismfaroshi ka,corruption ka.",vo rambha ki chatiyo ko haule-2 daba raha tha.rambha ko bahut bhala lag rah tha uske hatho ka dabav magar fir bhi use chhedne ki garaj se vo chihunki & bura sa munh banaya to deven ne uske baye al ko chum liya & munh khol agle nivale ko munh me dalne ki khwahish zahir ki.

"main yaha se pehle Tamil Nadu me tha & maine har tarah ke kam kiye vaha-kanooni bhi & gair kanooni bhi.",is bar rambha ne sach me bura munh banay,"..rambha,jails e nikle shakhs ko sabhi galat hi samajhte hain.tumhe pata nahi kitni mushkil hoti hai sazayafta insan ko vapas 1 aam zindagi jine me.tumhe itna yakin dilata hu ki ab main koi galat kam nahi karta.",rambha ko uski aankho me imandari ki jhalak dikhi & usne agla niwala uske munh me dala & uske daye gaal ko chum liya.

"..to main samaj me us lakir ke,jo achhe & bure ko alag karti hai,dono taraf ke logo ko achhe se janta hu,samajhta hu.yaha goa me jurm ka jo sansar hai usme humare mulk ke log to hain hi magar sath-2 russian & israeli bhi hain.ye log yaha ke drugs & jismfaroshi ke dhandhe ko control karte hain.main in dono mulko ke logo ko janta hu..",khana khatm ho chuka tha.dono ne pani piya & deven ne apni mehbooba ko baithe hue hi apni god me khincha & uski chatiyo ko chusne laga.uske lund pe baithi uske sar ko pyar se apni hatho me pakad chumte hue rambha he bharne lagi.

"..Baalam Singh apne farm pe charas ugata tha & usi ka dhandha karta tha.uske marne pe drugs ki gandi duniya me uthal-puthal mach gayi & ye khabar yaha goa bhi pahunchi..",deven ki zuban rambha ko mast kiye ja rahi thi.vo apne jism ka baya hisa uske seene se sataye apni dono tange uske jism ke bayi taraf failaye uski god me chhatpata rahi thi.deven ka lund uski mulayam gand ke dabav se fauran khada ho gaya tha.

"..tab mujhe pata chala ki balam singh apne jail me kaam karne ke dino se hi drugs ke dhandhe se juda tha.pehle to vo bas dayal jaise logo se leke qaidiyo ko drugs supply karta tha magar bad me vo un logo ke sath milke is dhandhe me pura utar gaya..",rambha mast ho apni bayi banh deven ke daye kandhe pe tikate hue uski gardan ko jakadte hue uske daaye kaan me apni jibh fira rahi thi.

"aaiiyyyyeeee..!",uske chehre pe shikan pad gayi & sath hi 1 mast muskan bhi khelne lagi.deven ne uski moti jangho ke neche bayi banh lagate hue unhe uthaya tha & jab neeche kiya to uski chut me deven ka lamba,mota lund ghus chuka tha.usne uske sene se sar uthay to rambha ne apna sar jhuka uske honth chum liye.dono ki ankho me vasna ke laal dore tair rahe the.deven uski jangho ko tham ke upar-neeche karte hue uski chudai kar raha tha.rambha ki dono janghe sati hone ki vajahs e uski kasi chut & kas gayi thi & uski deewaro pe deven ka lund bahut buri tarah ragd raha tha.

"..magar baalam koi bahut badi machli nahi tha.uska asli boss yaha se door Mauritius me baitha hai.ab maze ki baat suno.balam ke boss se hume koi matlab nahi hai.hume matlab hai us boss ke dhandhe ke tarike se.vo aadmi bhi drugs & jawaharato ka gairkanooni dhandha 1 sath karta hai & sabhi mulko ki police se leke interpol uske dono dhandho me uljhi rehti hai magar kisi 1 me bhi use range hath nahi pakad pati..",rambha lund ki zordar ragad se bahut mast ho gayi thi & usne apne dilbar ki gardan ko jakadte hue uske sar ko apne seene se chipka liya & kamar hilati chhatpatane lagi.usne deven ke baal pakad peechhe khinche & apne larajte lab uske labo se chipka diye & uske lund pe apni chut ki giraft ko & kas diya.vo jhad rahi thi & deven use vaise hi god me uchhalte hue chod raha tha.

rambha ne sisakte hue uske hath ko pani jangho ke neeche se hataya & dono tange uski tango ke upar karte hue uske seene se tek lagake baith gayi & fir kamar uchhalne lagi.deven ne bhi uski kamar tham li & uski pith & kandhe chumne laga.

"..jis waqt dayal mujhe phansa ke yaha se bhaga uske kuchh arse bad hi balam ke boss ne jawaharato ka bhi dhandha shuru kiya tha.khel bahut seedha hai.jaise mujhe phansaya gay tha usi tarah kisi masom shakhs se jawaharato ki smugling karayi jati.police ka dhyan uspe rehta & is beech drugs kisi dusre raste smuggle ho jate.ye tarika seedha dayal ki or ishara karta hai..",rambha zor-2 se uchal rahi thi & beech-2 me gardan ghumake apne premi ko chum bhi rahi thi.

"..lekin interpol ki report ke mutabik vo shakhs mauritius ka hi koi banda tha-Roshan Pershad.par mera dil kehta hai ki vo dayal hi tha & adat se majbur nam badal ke kam kar rah tha.khair,vo roshan pershad kafi dino tak is dhandhe se jude rehne ke bad achanak 1 din gayab ho gaya..",rambha ne apne honth bhinch liye the.uske dil me masti ka 1 gubar uth raha tha,pre jism me daudati masti bas 1 dhamake ke sath phootne hi vali thi.

"..kuch dino baad isi tarike se Europe me drugs smugle kiye gaye & vaha jo naam samne aya vo tha Danish Suleman.mere hisab se ye bhi dayal hi tha.interpol vale bhi samajh gaye the ki ho na ho ye sab 1 hi insan hain jo nam badal ke unhe har bar gumrah kar raha hai magar 1 roz Amsterdam ke badnam De Wallen ilake me suleman ki lash mili & us tarike se smugling bhi band ho gayi.kuchh dino bad interpol ne bhi file band kar di."

"AAHHHHHHHH..!",1 lambi ah ke sath rambh apni kamar bechini se hilati & jism ko kaman ki tarah modti jhad gayi & nidhal ho lambi-2 sane bharti deven ke seene pe gi r gayi.deven ne dayi banh uske pet pe kasi & bayi uski chochiyo ke neeche & neeche se zor-2 se kamar uchak ke dhakke lagane laga.rambha ahen bharti uske sar ko thame uske baye gal ko chumti uska bharpur sath de rahi thi & chand palo bad dono premiyo ne 1 sath ah bhari & rambha ke chehre pe masti bhari muskan khelne lagi-vo apni chut me apne premi ke virya ko bharta saaf mehsus kar rahi thi.

"..magar mujhe andar ki bat pata hai ki suleman ne apni jagah kisi & shakhs ki lash phinkwa di thi & apne marne ki afwah udwa di thi.kisi bhi agency ke pas dayal/pershad/suleman ka koi DNA ya biological record tha nahi & jab smuggling ka vo tarika band ho gaya to unhone bhi uski maut ko sahi maan liya.."

"..jaha sari agencies dhokha kha gayui vaha aapko kaise pata ye sab,janeman?",rambha abhi bhi vaise hi deven ke baye kandhe pe sar rakhe uske daye gal ko sehlati baye ko chum rahi thi.

"kyuki jis shakhs ne pershad & suleman ke namo ke jhuthe passports banaye the use main janta hu

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--65

गतान्क से आगे......

"क्या?!..कैसे?!",रंभा चौंकी.देवेन ने उसकी चूत से लंड निकालते हुए उसे बिस्तर पे लिटाया तो वो बाई करवट पे लेट गयी.देवेन उसके पीछे उसी की तरह लेटा और दाई बाँह मे उसके जिस्म को घेर लिया.

"क्या और कैसे क़ी तो 1 अलग ही दास्तान है.तुम बस इतना जानो कि उस जालसाज़ ने मुझे ये बताया की उसने मारिटियस मे 1 हमारे मुल्क के शख्स को वो 3 नक़ली पासपोर्ट्स बना के दिए थे जिनमे से पहला पेरषद के नाम का मारिटियस का था.दूसरा सुलेमान के नाम का बांग्लादेश का & तीसरा था बीसेसर गोबिंद के नाम का जोकि फिर से मारिटियस का ही था..",रंभा उनिंदी हो रही थी मगर देवेन की बातें उसे बड़ी दिलचस्प भी लग रही थी.

"..इस तीसरे पासपोर्ट के नाम वाला शख्स अभी तक दुनिया के किसी भी पोलीस एजेन्सी की नज़र मे नही आया है.इसका 1 ही मतलब है कि दयाल अब ड्रग्स का धंधा नही कर रहा.आम्सटरडॅम मे अपनी मौत की अफवाह उड़वा के वो किसी दूसरी पहचान को अपना के किसी & ग़लत काम मे जुट गया है."

"मगर इतनी बड़ी दुनिया के किस कोने मे वो है ये हमे कैसे पता चलेगा?",रंभा ने उबासी ली.

"मुझे पता चल गया है."

"क्या?!",रंभा 1 बार फिर चौंकी & गर्दन पीछे घुमाई.देवेन मुस्कुरा रहा था.

"मैने अपनी ज़िंदगी मे काई अच्छे-बुरे लोगो की मदद की है,रंभा & अब उस सब को भूना रहा हू.मुझे पक्का पता है कि 1 लंबे समय का वीसा ले बीसेसर गोबिंद मुल्क मे दाखिल हो चुका है.अब वो कहा है,क्या कर रहा है ये पता लगाने के लिए मुझे उसे या तो ललचाना है या फिर डराना है."

"मगर कैसे करेंगे ये?",रंभा ने करवट ली & अपनी चूचियाँ अपने प्रेमी के सीने मे दबाती हुई उस से बिल्कुल सॅट गयी & चादर को दोनो के जिमो पे डाल लिया.देवेन ने उसका माथा चूमा & उसकी कमर के गुदाज़ हिस्से को सहलाने लगा.

"उसे डराउँगा कि मुझे पता चल गया है कि गोबिंद & दयाल 1 ही शख्स के 2 नाम हैं & चारा डालूँगा जिसे खाने के चक्कर मे वो अपने बिल से बाहर आए & फिर मैं उसे वो सज़ा दू जिसे देने के बाद ही मुझे चैन & मेरी सुमित्रा की रूह को सुकून मिलेगा.",उसकी मा के लिए देवेन के प्यार भरे जज़्बे को देख वो भी जज़्बाती हो गयी.उसका दिल भर आया & उसने अपना चेहरा देवेन के सीने मे च्छूपा लिया & उसके जिस्म के गिर्द अपनी बाहें & कस दी.

"मगर वो चारा होगा क्या?",वो वैसे ही मुँह च्छुपाए उस से चिपकी थी.

"क्या नही कौन.वो चारा होगा खुद मैं.",रंभा ने फ़ौरन मुँह उपर किया.उसका दिल ज़ोरो से धड़क उठा था.वो इस शख्स को खोना नही चाहती थी..उसे खोने का मतलब था फिर से वही तलाश..1 बिस्तर से दूसरे बिस्तर तक का अंतहीन लगने वाला सफ़र..क्या ज़रूरत थी इंटेक़ाम लेने की?..सब भूल के इस खूबसूरत जगह दोनो 1 दूसरे मे समाए क्या पूरी उम्र नही बिता सकते?

"मैं तुम्हे अकेला नही छ्चोड़ूँगा..",देवेन ने जैसे उसके दिल मे घूमाड़ते सवालो को सुन लिया था,"..इतने दिनो बाद मेरी ज़िंदगी मे तुम्हारी शक्ल मे खुशी आई है.मगर सुमित्रा की तकलीफो का खामियाज़ा तो उस कामीने को चुकाना ही पड़ेगा ना!..1 भरपूर ज़िंदगी तुम्हारे साथ बिताने का वादा करता हू मैं तुमसे & फ़िक्र मत करो ये वादा तोड़ूँगा नही.",रंभा ने उसे बहुत कस के जाकड़ लिया & उसके सीने मे चेहरा च्छूपा लिया.देवेन ने हाथ पीछे ले जा कमरे की बत्ती बुझाई & अपनी महबूबा को आगोश मे भर उसके साथ ख्वाबो की दुनिया की सारी करने लगा.

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"मोम..",प्रणव रीता के कमरे मे खड़ा उसके गाउन मे नीचे से दाया हाथ घुसा रहा था & बाए हाथ से उसकी कमर को जकड़े उसकी गर्दन चूम रहा था.रीता दामाद की हर्कतो से खुशी मे मुस्कुरा रही थी.विजयंत के जाने के बाद उसे बड़ा हल्का लगने लगा था.दामाद के साथ यू छुप-2 के इश्क़ लड़ाना उसे बहुत मज़ेदार लगने लगा था & अब तो उसे इसका नशा हो गया था.हर रात बिस्तर मे वो खुद से खेलती उसका इंतेज़ार करती.जिस रात वो नही आता,वो रात तो मायूसी मे बीतती मगर इस से अगली मुलाकात मे उसका जोश दुगुना हो जाता था & फिर चुदाई मे वो मज़ा आता था कि पुछो मत!

"हूँ..",रीता ने उसक्के बालो को बाए हाथ मे पकड़ उसके सर को नीचे अपने सीने की ओर धकेला & दाए हाथ से उसकी ट्रॅक पॅंट के उपर से उसकी पुष्ट गंद दबाई.प्रणव ने जैसे उसे फिर से जवान कर दिया था.उसका हाथ अगले ही पल उसकी पॅंट मे घुसा & प्रणव की नंगी गंद को हसरत से खरोंछने लगा.

"समीर & रंभा के बीच कुच्छ अनबन हुई है क्या?",प्रणव का हाथ सास की पॅंटी मे घुस गया था & अब वो भी वही कर रहा था जो रीता उसकी गंद के साथ कर रही थी.

"उउम्म्म्म..मुझे क्या पता!..इस वक़्त उस मनहूस लड़की का नाम लेके मेरा मूड मत खराब करो.",रीता ने उसकी गंद पे चिकोटी काटी & फिर पॅंट को नीचे सरका दिया.प्रणव ने फ़ौरन टाँगे बारी-2 से उपर कर पॅंट को अपने जिस्म से अलग किया & बाए हाथ को उपर कर उसके गाउन के स्ट्रॅप को उसके दाए कंधे से नीचे सरका के उसकी दाई छाती को नुमाया किया & फिर उसे चूस्ते हुए उसकी गंद की दरार मे से उंगली सरकाते हुए पीछे से ही उसकी चूत कुरेदने लगा,"..आहह..ओह..प्रणव....!"

"फिर भी मोम समीर की तो फ़िक्र है आपको.उस से पुछिये..हो सकता है बेचारा परेशान हो मगर अपनी परेशानी आपसे या किसी & से भी कहते हिचकिचा रहा हो.",प्रणव ने गाउन के दूसरे स्ट्रॅप को भी नीचे सरका दिया था & अब बाई चूची भी उसकी ज़ुबान से गीली हो रही थी.रीता ने मस्ती मे उसकी टी-शर्ट मे हाथ घुसा के अपने नाख़ून उसकी पीठ पे चलाए & फिर उसे भी निकाल अपने दामाद को नंगा कर दिया.

"ओह..& चूसो..हाआंन्‍णणन्..उसे भी तो मेरी खबर लेने आना चाहिए,प्रणव..ऊव्ववव..शरीर कहिनके..काटते क्यू हो?..मगर देखा तुमने उसे आजकल..बस ऐसे मिलके चला जाता है मानो कोई काम पूरा कर रहा हो..हाईईईईईईईई..आराम से घुसाओ ना..ओईईईईईईई..दर्द होता है..आन्न्‍नननणणनह..!",रीता ने दामाद के मोटे लंड को जाकड़ के उसके मुँह को अपने सीने पे ज़ोर से दबाया तो उसने भी उसके बाए निपल पे हल्के से काट लिया & फिर उसकी पॅंटी नीचे कर दी & उसकी चूत मे ज़ोर-2 से उंगली करने लगा.

"वाउ!",दरवाज़ा खुला & 1 लड़की की आवाज़ से दोनो चौंक के अलग हो गये,"..क्या नज़ारा है!..दामाद & सास नंगे 1 दूसरे की बाहो मे..वाह!",कमरे की दहलीज़ पे उस से बाया हाथ लगाए & दाया अपनी कमर पे रखे शिप्रा खड़ी थी,"..तो माइ डार्लिंग हज़्बेंड..",वो आगे आई.उसके होंठो पे 1 मुस्कान थी जिसे दोनो समझने की कोशिश कर रहे थे,"..तो ये है तुम्हारा ज़रूरी काम.सास की सेवा!",उसने व्यंग्य से कहा.रीता शर्म से पानी-2 हो गयी थी & सर झुका लिया था.उसकी पॅंटी उसके घुटनो पे फँसी हुई थी.उसने हाथ नीचे घुसा उसे उपर करना चाहा तो शिप्रा ने तेज़ी से आगे बढ़ उसका हाथ पकड़ लिया.रीता चौंक के बेटी को देखने लगी.

शिप्रा ने मुस्कुराते हुए पॅंटी को घुटने से भी नीचे सरकया & फिर सीधी खड़ी हो दाई टांग उठाके पॅंटी को पूरा नीचे कर दिया.रीता का शर्म & हैरत से बुरा हाल था.प्रणव भी अपनी बीवी को समझाने की कोशिश कर रहा था,"प्लीज़ मोम,अपनी खूबसूरती देखने तो दो मुझे.",शिप्रा उसके सामने खड़ी उसे सर से पाँव तक निहार रही थी,"..हूँ..मैं समझ सकती हू कि प्रणव क्यू दीवाना है तुम्हारा,मोम.तुम अपनी असल उम्र से कितनी छ्होटी लगती हो & तुम्हारा जिस्म अभी भी कितना कसा हुआ है!",उसकी बातो मे सच्ची तारीफ थी.

"पर प्रणव..",उसकी आँखे च्चालच्छला आई थी,"..तुम्हे मेरा ज़रा भी ख़याल नही है ना!..मैं वाहा अकेली पड़ी रहती थी & तुम यहा..",वो सिसकी तो प्रणव ने उसे बाहो मे भर लिया.

"आइ'म सॉरी,बेबी!",वो उसकी पीठ सहला रहा था,"..सब कब,कैसे अचानक हुआ कुच्छ पता ही नही चला &..-",शिप्रा ने फ़ौरन सर उपर उठाया.

"-..पर अब तो सबको सब पता चल गया ना!",शिप्रा मुस्कुरा रही थी.प्रणव ने उसे देखा & दोनो हँसने लगे.प्रणव ने उसे बाहो मे भरा & दोनो 1 दूसरे को चूमने लगे.प्रणव ने जल्दी से बीवी के गाउन की बेल्ट खोल उसे उसके कंधो से सरकाया & फिर उसकी नेग्लिजी को उपर करने लगा.रीता दोनो को हैरत से देख रही थी.शिप्रा ने किस तोड़ी & खुद बाहे उपर कर अपनी नेग्लिजी निकल अपनी मा के सामने खड़ी हो गयी.

"मोम,इतनी अकेली थी आप!",उसने उसके चेहरे को हाथो मे भर लिया,"..& आपने मुझे क्यू नही बताया आप दोनो के बारे मे..हूँ?",रीता हैरत से उसे देख रही थी,"..वो तो आज मैने सोने का बहाना किया & फिर इस बदमाश के पीछे-2 आई देखने की आख़िर ये रात को करता क्या है!",उसने घूम के पति को देखा,"..पर आपसे नाराज़ हू.मुझे बताना तो चाहिए था या फिर सारा मज़ा अकेले-2 ही लूटना चाहती थी..हूँ?!",उसने शरारत से पुछा.अब रीता को एहसास हुआ कि उसकी बेटी उस से नाराज़ नही थी.

"सॉरी बेटा!",वो बस इतना कह पाई.बेटी के सामने यू नंगी रहने मे उसे अभी भी शर्म आ रही थी.प्रणव आगे बढ़ा & बाया हाथ शिप्रा की पीठ & दया रीता की पीठ पे रखा.

"इस सब का ज़िम्मेदार मैं हू.",उसने कहा & दोनो की पीठ सहलाई.

"तो अब इसकी सज़ा भी मिलेगी तुम्हे.अब दोनो को खुश करो 1 साथ.",शिप्रा ने अपना बाया हाथ आगे कर उसका लंड पकड़ के दबाया & दाए हाथ को मा के बाए कंधे पे रखा.रीता उसकी बात सुन हैरान हो गयी लेकिन उसका दिल भी ज़ोरो से धड़क उठा.प्रणव बीवी की बात सुन मुस्कुराने लगा & उसकी तरफ झुक उसके होंठ चूमे & फिर दूसरी तरफ गर्दन घुमा सास को चूमा जोकि अभी भी थोड़ी झिझकति दिख रही थी.

प्रणव ने रीता को अपनी तरफ खींच अपने सीने से चिपका लिया.रीता ने थोड़ा शरमाते हुए बेटी को देखा मगर वो तो बिंदास मुस्कुरा रही थी.प्रणव ने अपनी दोनो बाहे सास की कमर मे डाल उसे अपने से बिल्कुल चिपका लिया & उसके गुलाबी होंठो के पार अपनी ज़ुबान घुसा दी.रीता शुरू मे तो थोड़ा झिझक रही थी,बेटी की मौजूदगी उसे अभी भी सहज नही होने दे रही थी मगर प्रणव की आतुर ज़ुबान ने उसे जल्दी ही मस्त कर दिया & उसने भी अपनी बाहे उसके बदन पे लपेट दी & उसकी पीठ & कंधो पे हाथ फिराते हुए उसकी किस का जवाब देने लगी.शिप्रा मुस्कुराते हुए प्रणव के पीछे आई & उसके मज़बूत बाजुओ पे अपने हसरत भरे हाथ फिराते हुए उसके दोनो कंधो को चूमने लगी.

उसके हाथ पति के जिस्म पे फिसलते हुए उसके बगल से नीचे आ आगे गये & उसके लंड & आंडो को पकड़ लिया & उनसे खेलने लगी.प्रणव के हाथ भी नीचे आके सास की चौड़ी गंद से चिपक गये थे.रीता अब मस्त हो गयी थी & बेटी की मौजूदगी अब उसे असहज नही कर रही थी बल्कि अब उसे इस खेल मे मज़ा आ रहा था.उसने भी अपने हाथ नीचे किए & अपने दामाद की पुष्ट गंद को दबाने लगी.उसके होंठ प्रणव के होंठो को छ्चोड़ नीचे आ रहे थे & उसके सीने पे घूम रहे थे.उसके बालो को जीभ से अलग करती वो उसके निपल्स को छेड़ रही थी.

"ओह्ह..प्रणव..आइ लव यू,डार्लिंग!",शिप्रा ने हाथ पति के नाज़ुक अंगो से उपर खींच उसके सीने पे लगाए तो उसकी मा के होंठ और नीचे चले गये & दामाद की नाभि तक पहुँच गये.शिप्रा प्रणव की पीठ मे अपनी छातिया धँसती उसके कंधे को चूमते हुए अपने प्यार का इज़हार कर रही थी.उसने भी सर बाए कंधे के उपर से पीछे घुमाया & अपनी बीवी के गुलाबी होंठ चूम लिए.

"आहह..!",उसने शिप्रा के होंठ छ्चोड़ नीचे देखा.फर्श पे बैठी रीता उसके लंड को चूसने मे जुट गयी थी.शिप्रा उसके बाए कंधे से होंठ नीचे ले जाते हुए उसके बाए,उपरी बाज़ू को काट रही थी.प्रणव ने अपने हाथ नीचे किए और दाया सास के सर पे रख उसे अपने लंड पे दबाया & बाए को पीछे ले गया तो शिप्रा थोड़ा बाई तरफ हुई & उसने उसकी चूत मे उंगली घुसा दी.रीता ने लंड चूस्ते हुए बेटी की छ्होटी सी कसी चूत को देखा & दिल ही दिल मे उसकी खूबसूरती की तारीफ किए बिना नही रह सकी.शिप्रा ने पति के हाथ के अपने नाज़ुक अंग को सहलाते ही दोबारा उसके होंठो से अपने होठ सटा दिए.

उसका बाया हाथ पति के जिस्म पे फिरता नीचे आया तो उसे रीता ने थाम अपनी ओर खींचा.शिप्रा ने चौंक के मा को देखा जो लंड चुस्ती उसे अपनी ओर बुला रही थी.शिप्रा प्रणव के सामने गयी तो रीता ने उसे भी अपने साथ बिठा लिया & दामाद का लंड अपने मुँह से निकाल बेटी के मुँह मे दे दिया.शिप्रा ने मुस्कुराते हुए मा को देखा & लंड चूसने लगी.रीता दामाद के आंडो को अपने हाथो से दबा रही थी.

रीता की निगाह शिप्रा की गोल छातियों पे पड़ी तो वो उन्हे छुने से खुद को रोक नही पाई.शिप्रा मा के हाथो की च्छुअन से सिहर उठी & लंड चूस्ते हुए मा को देखा.रीता ने झिझक भरी मुस्कान के साथ हाथ पीछे खिचना चाहा तो शिप्रा ने हाथ वापस अपनी छातियो पे दबा दिया.अब रीता बाए हाथ से प्रणव के अंडे & दाए से शिप्रा की छातिया दबाने लगी.प्रणव तो इस वक़्त खुशी से पागल हुआ जा रहा था.2-2 खूबसूरत औरतें उसके कदमो मे बैठी उसकी मर्दानगी की इबादत कर रही थी.1 मर्द के लिए इस से मस्तानी बात क्या हो सकती थी!

शिप्रा की छातियो मे दर्द हो रहा था & उसका दिल कर रहा था की कोई उन्हे मसले & जम के चूसे.प्रणव तो खड़ा था तो उसने मा की गर्दन पकड़ उसके मुँह को ही अपनी चूचियो पे दबा दिया.रीता चौंकी तो ज़रूर मगर बेटी की हसरत पूरी करते हुए उसने उसकी चूचियो को मुँह मे भर ज़ोर-2 से चूसना शुरू कर दिया.दोनो औरतो के लिए ये पहला मौका था जब वो किसी दूसरी औरत के जिस्म से यू खेल रही थी & दोनो को एहसास हुआ की दोनो को इसमे काफ़ी मज़ा आ रहा था.

कुच्छ देर बाद शिप्रा ने मा के सर को अपने सीने से उठाया & उसके होटो पे हल्के से चूमा & फिर उसके मुँह मे अपने पति का लंड दिया & फिर अपना मुँह मा की भारी-भरकम & थोड़ी सी लटकी मगर दिलकश छातियो से लगा

दिया.रीता के जिस्म मे तो जैसे बिजली की लहर दौड़ गयी & उसके होंठ प्रणव के लंड पे & कस गये.प्रणव ने आह भरी & रीता ने भी.बेटी के चूचिया चूसने से ही वो झाड़ गयी थी.

उसने लंड मुँह से निकाला & उसे शिप्रा की तरफ मोदते हुए प्रणव के आंडो को मुँह मे भर लिया & उन्हे चूसने लगी.शिप्रा ने भी मा की छातियो छ्चोड़ अपना मुँह प्रणव के लंड से लगा दिया.प्रणव ने कैसे खुद को झड़ने से रोका था ये वोही जानता था.उसने अपना ध्यान इन दो मस्तानी हुसनपरियो से थोड़ा भटकने के लिए फिर से समीर & रंभा की बात छेड़ दी,"..मगर मोम आपको समीर से पुच्छना चाहिए कि उसकी शादीशुदा ज़िंदगी मे कुच्छ गड़बड़ तो नही."

"रीता ने फिर बुरा सा मुँह बनाया & उसके आंडो के उपर की त्वचा को आगे के दन्तो मे पकड़ के हल्के से खींचा तो प्रणव की आह निकल गयी,"..फिर वही बात.मैने कहा ना समीर आजकल मेरी परवाह नही करता.",मा & बेटी प्रणव की अन्द्रुनि टाँगो & जाँघो पे हाथ फिराते हुए उसकी गंद को भी मसल रही थी.

"वैसे मोम,आजकल समीर प्रणव की भी इज़्ज़त नही करता.",शिप्रा ने शिकायत की.

"क्या?!"

"छ्चोड़ो शिप्रा.",प्रणव ने बीवी के मुँह से लंड निकाला & दोनो औरतो को खड़ा कर अपने आगोश मे भर लिया & बारी-2 से चूमने लगा.उसके दाया हाथ रीता को थामे था & बाया शिप्रा को.रीता का बाया प्रणव की कमर मे था और दाया शिप्रा की और शिप्रा दाए हाथ से पति के बदन को पकड़े थी & बाए मे मा की पीठ.दोनो के होटो का रस पीने के बाद प्रणव ने दोनो को बिस्तर पे जाने का इशारा किया.दोनो औरतें बिस्तर पे चढ़ि.दोनो ही 1 दूसरे के जिस्मो को निहार रही थी.

"नही प्रणव.समीर का रवैयय्या कुच्छ ठीक नही आजकल.ये क्या कि बस कंपनी की परवाह है उसे हम सब की नही!",रीता ने बेटी को बाहो मे भर लिया तो उसने मा की चूचियो मे अपना चेहरा दफ़्न कर दिया,"..आहह..तू तो बड़ी शरारती है!",रीता ने अपने निपल को दन्तो से काटती शिप्रा के बाए गाल पे प्यार भरी चपत लगाई & अपना हाथ उसकी चूत पे रख दिया तो शिप्रा ने शरारत से हंसते हुए मा का हाथ हटाया & उसे पलंग पे चित लिटा दिया & बिजली की तेज़ी से नीचे हो उसकी टाँगो को फैला उसकी चूत से ज़ुबान लगा दी.

"आहह..!",रीता करही & अपनी कोहनियो पे उचकति हुई टाँगे और फैला दी.शिप्रा की लपलपाति जीभ उसकी चूत से बहते रस को चाते जा रही थी.प्रणव ने दाई बाँह सास की गर्दन के नीचे लगाते हुए उसकी छातियों को दोनो हाथो से दबवाते हुए उन्हे चूसना शुरू कर दिया.

"मगर रंभा का उसकी बीवी बने रहना बहुत ज़रूरी है.",उसने सास की चूचियो को अपने होंठो के निशानो से ढँकने के बाद अपने जिस्म को अपने घुटनो पे किया & रीता के मुँह मे अपना लंड दे दिया जिसे वो बड़ी खुशी से चूसने लगी.उसकी आँखो मे दामाद की बात सुन सवालिया भाव उभर आए थे,"..वो इसीलिए की मुझे लगता है कि रंभा को कंपनी की मालकिन बनाना हम सब के फ़ायदे मे होगा.",प्रणव ने बहुत सोच समझ के आज सास को अपनी तरफ पूरी तरह से करने का फ़ैसला कर लिया था.

"ऊहह..!",रीता उसके लंड को छ्चोड़ बिस्तर पे गिर गयी & च्चटपटाने लगी.शिप्रा की जीभ ने उसकी चूत मे उधम मचाके उसे झड़ने पे मजबूर कर दिया था.कुच्छ देर बाद वो संभली तो वो उठी & शिप्रा अपने घुटनो पे खड़ी हो गयी & मा-बेटी 1 दूसरे को शिद्दत से चूमने लगी.प्रणव बिजली की तेज़ी से बीवी के पीछे आया और उसकी नुमाया चूत से मुँह लगा दिया.

"ओवववव..प्रणव..क्या करते हो!..& उस लड़की को हमारे सर पे बिठाने की क्या बकवास कर रहे थे..ऊहह..मोम....आप भी..!",शिप्रा प्रणव की ज़ुबान के चूत मे घुसते ही घुटनो पे खड़ी हो गयी थी & उसी वक़्त रीता ने उसे बाहो मे भर उसकी चूचियो से मुँह लगा दिया था और बहुत ज़ोर-2 से चूसने लगी थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--65

gataank se aage......

"Kya?!..kaise?!",Rambha chaunki.Deven ne uski chut se lund nikalte hue use bistar pe litaya to vo bayi karwat pe let gayi.deven uske peechhe usi ki tarah leta & dayi banh me uske jism ko gher liya.

"kya & kaise ki to 1 alag hi dastan hai.tum bas itna jano ki us jalsaaz ne mujhe ye bataya ki usne Mauritius me 1 humare mulk ke shakhs ko vo 3 naqli passports bana ke diye the jinme se pehla Pershad ke naam ka mauritius ka tha.dusra Suleman ke naam ka Bangladesh ka & teesra tha Bisesar Gobind ke naam ka joki fir se mauritius ka hi tha..",rambha unindi ho rahi thi magar deven ki baaten use badi dilchasp bhi lag rahi thi.

"..is teesre passport ke naam vala shakhs abhi tak duniya ke kisi bhi police agency ki nazar me nahi aaya hai.iska 1 hi matlab hai ki Dayal ab drugs ka dhandha nahi kar raha.Amsterdam me apni maut ki afwah udwa ke vo kisi dusri pehchan ko apna ke kisi & galat kaam me jut gaya hai."

"magar itni badi duniya ke kis kone me vo hai ye hume kaise pata chalega?",rambha ne ubasi li.

"mujhe pata chal gaya hai."

"kya?!",rambha 1 baar fir chaunki & gardan peechhe ghumayi.deven muskura raha tha.

"maine apni zindagi me kayi achhe-bure logo ki madad ki hai,rambha & ab us sab ko bhuna raha hu.mujhe pakka pata hai ki 1 lumbe samay ka visa le bisesar gobind mulk me dakhil ho chuka hai.ab vo kaha hai,kya kar raha hai ye pata lagane ke liye mujhe use ya to lalchana hai ya fir darana hai."

"magar kaise karenge ye?",rambha ne karwat li & apni chhatiya apne premi ke seene me dabati hui us se bilkul sat gayi & chadar ko dono ke jimo pe daal liya.deven ne uska matha chuma & uski kamar ke gudaz hisse ko sehlane laga.

"use daraunga ki mujhe pata chal gaya hai ki gobind & dayal 1 hi shakhs ke 2 naam hain & chara dalunga jise khane ke chakkar me vo apne bil se bahar aaye & fir main use vo saza du jise dene ke baad hi mujhe chain & meri Sumitra ki rooh ko sukun milega.",uski maa ke liye deven ke pyar bhare jazbe ko dekh vo bhi jazbati ho gayi.uska dil bhar aaya & usne apna chehra deven ke seene me chhupa liya & uske jism ke gird apni baahen & kas di.

"magar vo chara hoga kya?",vo vaise hi munh chhupaye us se chipki thi.

"kya nahi kaun.vo chara hoga khud main.",rambha ne fauran munh upar kiya.uska dil zoro se dhadak utha tha.vo is shakhs ko khona nahi chahti thi..use khone ka matlab tha fir se vahi talash..1 bistar se dusre bistar tak ka antheen lagne vala safar..kya zarurat thi inteqam lene ki?..sab bhool ke is khubsurat jagah dono 1 dusre me samaye kya puri umra nahi bita sakte?

"main tumhe akela nahi chhodunga..",deven ne jaise uske dil me ghumadte sawalo ko sun liya tha,"..itne dino baad meri zindagi me tumhari shakl me khushi aayi hai.magar sumitra ki taklifo ka khamiyaza to us kamine ko chukana hi padega na!..1 bharpur zindagi tumhare sath bitane ka vada karta hu main tumse & fikr mat karo ye vada todunga nahi.",rambha ne use bahut kas ke jakad liya & uske seene me chehra chhupa liya.deven ne hath peechhe le ja kamre ki batti bujhayi & apni mehbooba ko agosh me bhar uske sath khwabo ki duniya ki sari karne laga.

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"mom..",Pranav Rita ke kamre me khada uske gown me neeche se daya hath ghusa raha tha & baye hath se uski kamar ko jakde uski gardan chum raha tha.rita damad ki harkato se khushi me muskura rahi thi.Vijayant ke jane ke baad use bada halka lagne laga tha.damad ke sath yu chhup-2 ke ishq ladana use bahut mazedar lagne laga tha & ab to use iska nasha ho gaya tha.har raat bistar me vo khud se khelti uska intezar karti.jis raat vo nahi aata,vo raat to maayusi me beetati magar is se agli mulakat me uska josh duguna ho jata tha & fir chudai me vo maza aata tha ki puchho mat!

"hun..",rita ne uskke baalo ko baye hath me pakad uske sar ko neeche apne seene ki or dhakela & daye hath se uski track pant ke upar se uski pusht gand dabayi.pranav ne jaise use fir se jawan kar diya tha.uska hath agle hi pal uski pant me ghusa & pranav ki nangi gand ko hasrat se kharonchne laga.

"Sameer & rambha ke beech kuchh anban hui hai kya?",pranav ka hath saas ki panty me ghus gaya tha & ab vo bhi vahi kar raha tha jo rita uski gand ke sath kar rahi thi.

"uummmm..mujhe kya pata!..is waqt us manhus ladki ka naam leke mera mood mat kharab karo.",rita ne uski gand pe chikoti kati & fir pant ko neeche sarka diya.pranav ne fauran tange bari-2 se upar kar pant ko apne jism se alag kiya & baye hath ko upar kar uske gown ke strap ko uske daye kandhe se neeche sarka ke uski dayi chhati ko numaya kiya & fir use chuste hue uski gand ki darar me se ungli sarkate hue peechhe se hi uski chut kuredne laga,"..aahhhhhh..ohhhhhhh..pranav....!"

"fir bhi mom sameer ki to fikr hai aapko.us se puchhiye..ho sakta hai bechara pareshan ho magar apni pareshani aapse ya kisi & se bhi kehte hichkicha raha ho.",pranav ne gown ke dusre strap ko bhi neeche sarka diya tha & ab bayi chhati bhi uski zuban se gili ho rahi thi.rita ne masti me uski t-shirt me hath ghusa ke apne nakhun uski pith pe chalaye & fir use bhi nikal apne damad ko nanga kar diya.

"ohhhhh..& chuso..haaaannnnn..use bhi to meri khabar lene aana chahiye,pranav..oowwww..sharir kahinke..kaatate kyu ho?..magar dekha tumne use aajkal..bas aise milke chala jata hai mano koi kaam pura kar raha ho..haiiiiiiiii..aaram se ghusao na..ouiiiiiiiiii..dard hota hai..aannnnnnnnhhhhhhhh..!",rita ne damad ke mote lund ko jakad ke uske munh ko apne seene pe zor se dabaya to usne bhi uske baye nipple pe halke se kaat liya & fir uski pantgy neeche kar di & uski chut me zor-2 se ungli karne laga.

"wow!",darwaza khula & 1 ladki ki aavaz se dono chaunk ke alag ho gaye,"..kya nazara hai!..damad & saas nange 1 dusre ki baaho me..vaah!",kamre ki dehliz pe us se baya hath lagaye & daya apni kamar pe rakhe Shipra khadi thi,"..to my darling husband..",vo aage aayi.uske hotho pe 1 muskan thi jise dono samajhne ki koshish kar rahe the,"..to ye hai tumhara zaruri kaam.saas ki seva!",usne vyangya se kaha.rita sharm se pani-2 ho gayi thi & sar jhuka liya tha.uski panty uske ghutno pe phansi hui thi.usne hath neeche ghusa use upar karna chaha to shipra ne tezi se aage badh uska hath pakad liya.rita chaunk ke beti ko dekhne lagi.

shipra ne muskurate hue panty ko ghutne se bhi neeche sarkaya & fir seedhi khadi ho dayi tang uthake panty ko pura neeche kar diya.rita ka sharm & hairat se bura haal tha.pranav bhi apni biwi ko samajhne ki koshish kar raha tha,"please mom,apni khubsurti dekhne to do mujhe.",shipra uske samne khadi use sar se panv tak nihar rahi thi,"..hun..main samajh sakti hu ki pranav kyu deewana hai tumhara,mom.tum apni asal umra se kitni chhoti lagti ho & tumhara jism abhi bhi kitna kasa hua hai!",uski baato me sachchi tarif thi.

"par pranav..",uski aankhe chhalchhala aayi thi,"..tumhe mera zara bhi khayal nahi hai na!..main vaha akeli padi rahti thi & tum yaha..",vo siski to pranav ne use baaho me bhar liya.

"i'm sorry,baby!",vo uski pith sehla raha tha,"..sab kab,kaise achanak hua kuchh pata hi nahi chala &..-",shipra ne fauran sar upar uthaya.

"-..par ab to sabko sab pata chal gaya na!",shipra muskura rahi thi.pranav ne use dekha & dono hansne lage.pranav ne use baaho me bhara & dono 1 dusre ko chumne lage.pranav ne jaldi se biwi ke gown ki belt khol use uske kandho se sarkaya & fir uski negligee ko upar karne laga.rita dono ko hairat se dekh rahi thi.shipra ne kiss todi & khud baahe upar kar apni negligee nikal apni maa ke samne khadi ho gayi.

"mom,itni akeli thi aap!",usne uske chehre ko hatho me bhar liya,"..& aapne mujhe kyu nahi bataya aap dono ke bare me..hun?",rita hairat se use dekh rahi thi,"..vo to aaj maine sone ka bahana kiya & fir is badmash ke peechhe-2 aayi dekhne ki aakhir ye raat ko karta kya hai!",usne ghum ke pati ko dekha,"..par aapse naraz hu.mujhe batana to chahiye tha ya fir sara maza akele-2 hi lootna chahti thi..hun?!",usne shararat se puchha.ab rita ko ehsas hua ki uski beti us se naraz nahi thi.

"sorry beta!",vo bas itna keh payi.beti ke samne yu nangi rehne me use abhi bhi sharm aa rahi thi.pranav aage badha & baya hath shipra ki pith & daya rita ki pith pe rakha.

"is sab ka zimmedar main hu.",usne kaha & dono ki pith sehlayi.

"to ab iski saza bhi milegi tumhe.ab dono ko khush karo 1 sath.",shipra ne apna baya hath aage kar uska lund pakad ke dabaya & daye hath ko maa ke baye kandhe pe rakha.rita uski baat sun hairan ho gayi lekin uska dil bhi zoro se dhadak utha.pranav biwi ki baat sun muskurane laga & uski taraf jhuk uske honth chume & fir dusri taraf gardan ghuma saas ko chuma joki abhi bhi thodi jhijhakti dikh rahi thi.

pranav ne rita ko apni taraf khinch apne seene se chipka liya.rita ne thoda sharmate hue beti ko dekha magar vo to bindas muskura rahi thi.pranav ne apni dono baahe saas ki kamar me daal use apne se bilkul chipka liya & uske ghulabi hotho ke paar apni zuban ghusa di.rita shuru me to thoda jhijhak rahi thi,beti ki maujoodgi use abhi bhi sahaj nahi hone de rahi thi magar pranav ki aatur zuban ne use jaldi hi mast kar diya & usne bhi apni baahe uske badan pe lapte di & uski pith & kandho pe hath firate hue uski kiss ka jawab dene lagi.shipra muskurate hue pranav ke peechhe aayi & uske mazbut bazuo pe apne hasrat bhare hath firate hue uske dono kandho ko chumne lagi.

uske hath pati ke jism pe fisalte hue uske bagal se neeche aa aage gaye & uske lund & ando ko pakad liya & unse khelne lagi.pranav ke hath bhi neeche aake saas ki chaudi gand se chipak gaye the.rita ab mast ho gayi thi & beti ki maujudgi ab use asahaj nahi kar rahi thi balki ab use is khel me maza aa raha tha.usne bhi apne hath neeche kiye & apne damad ki pusht gand ko dabane lagi.uske honth pranav ke hotho ko chhod neeche aa rahe the & uske seene pe ghum rahe the.uske baalo ko jibh se alag karti vo uske nipples ko chhed rahi thi.

"ohh..pranav..i love you,darling!",shipra ne hath pati ke nazuk ango se upar khinch uske seene pe lagaye to uski maa ke honth & neeche chale gaye & damad ki nabhi tak pahunch gaye.shipra pranav ki pith me apni chhatiya dhansati uske kandhe ko chumte hue apne pyar ka izhar kar rahi thi.usne bhi sar baye kandhe ke upar se peechhe ghumaya & apni biwi ke gulabi honth chum liye.

"aahhhhhhh..!",usne shipra ke honth chhod neeche dekha.farsh pe baithi rita uske lund ko chusne me jut gayi thi.shipra uske baye kandhe se honth neeche le jate hue uske baye,upri bazu ko kaat rahi thi.pranav ne apne hath neeche kiye & daya saas ke sar pe rakh use apne lund pe dabaya & baye ko peechhe le gaya to shipra thoda bayi taraf hui & usne uski chut me ungli ghusa di.rita ne lund chuste hue beti ki chhoti si kasi chut ko dekha & dil hi dil me uski khubsurti ki tarif kiye bina nahi reh saki.shipra ne pati ke hath ke apne nazuk ang ko sehlate hi dobara uske hotho se apne hoth sata diye.

uska baya hath pati ke jism pe firta neeche aaya to use rita ne tham apni or khincha.shipra ne chaunk ke maa ko dekha jo lund chusti use apni or bula rahi thi.shipra pranav ke samne gayi to rita ne use bhi apne sath bitha liya & damad ka lund apne munh se nikal beti ke munh me de diya.shipra ne muskurate hue maa ko dekha & lund chusne lagi.rita damad ke ando ko apne hatho se daba rahi thi.

rita ki nigah shipra ki gol chhatiyo pe padi to vo unhe chhune se khud ko rok nahi payi.shipra maa ke hatho ki chhuan se sihar uthi & lund chuste hue maa ko dekha.rita ne jhijhak bhari muskan ke sath hath peechhe khichna chaha to shipra ne hath vapas apni chhatiyo pe daba diya.ab rita baye hath se pranav ke ande & daye se shipra ki chhatiya dabane lagi.pranav to is waqt khushi se pagal hua ja raha tha.2-2 khubsurat auraten uske kadmo me baithi uski mardangi ki ibadat kar rahi thi.1 mard ke liye is se mastani baat kya ho sakti thi!

shipra ki chhatiyo me dard ho raha tha & uska dil kar raha tha ki koi unhe masle & jum ke chuse.pranav to khada tha to usne maa ki gardan pakad uske munh ko hi apni choochiyo pe daba diya.rita chaunki to zarur magar beti ki hasrat puri karte hue usne uski choochiyo ko munh me bhar zor-2 se chusna shuru kar diya.dono aurato ke liye ye pehla mauka tha jab vo kisi dusri aurat ke jism se yu khel rahi thi & dono ko ehsas hua ki dono ko isme kafi maza aa raha tha.

kuchhd er baad shipra ne maa ke sar ko apne seene se uthaya & uske hotho pe halke se chuma & fir uske munh me apne pati ka lund diya & fir apna munh maa ki bhari-bharkam & thodi si latki magar dilkash chhatiyo se lag

diya.rita ke jism me to jaise bijli ki lehar daud gayi & uske honth pranav ke lund pe & kas gaye.pranav ne aah bhari & rita ne bhi.beti ke choochiya chusne se hi vo jhad gayi thi.

usne lund munh se nikala & use shipra ki taraf modte hue pranav ke ando ko munh me bhar liya & unhe chusne lagi.shipra ne bhi maa ki chhatiya chhod apna munh pranav ke lund se laga diya.pranav ne kaise khud ko jhadne se roka tha ye vohi janta tha.usne apna dhyan in do mastani husnpariyo se thoda bhatkane ke liye fir se sameer & rambha ki baat chhed di,"..magar mom aapko sameer se puchhna chhaiye ki uski shadishuda zindagi me kuchh gadbad to nahi."

"rita ne fir bura sa munh banaya & uske ando ke upar ki tvacha ko aage ke danto me pakad ke halkes e khincha to pranav ki aah nikal gayi,"..fir vahi baat.maine kaha na sameer aajkal meri parvah nahi karta.",maa & beti pranav ki andruni tango & jangho pe hath firate hue uski gand ko bhi masal rahi thi.

"vaise mom,aajkal sameer pranav ki bhi izzat nahi karta.",shipra ne shikayat ki.

"kya?!"

"chhodo shipra.",pranav ne biwi ke munh se lund nikala & dono aurato ko khada kar apne agosh me bhar liya & bari-2 se chumne laga.uske daya hath rita ko thame tha & baya shipra ko.rita ka baya pranav ki kama me tha & daya shipra ki & shipra daye hath se pati ke badan ko pakde thi & baye me maa ki pith.dono ke hotho ka ras pine ke baad pranav ne dono ko bistar pe jane ka ishara kiya.dono auraten bistar pe chadi.dono hi 1 dusre ke jismo ko nihar rahi thi.

"nahi pranav.sameer ka ravaiyya kuchh thik nahi aajkal.ye kya ki bas company ki parvah hai use hum sab ki nahi!",rita ne beti ko baaho me bhar liya to usne maa ki choochiyo me apna chehra dafn kar diya,"..aahhhhh..tu to badi shararati hai!",rita ne apne nipple ko danto se kaatati shipra ke baye gaal pe pyar bhario chapat lagayi & apna hath uski chut pe rakh diya to shipra ne sharata se hanste hue maa ka hath hataya & use palang pe chit lita diya & bijli ki tezi se neeche ho uski tango ko faila uski chut se zuban laga di.

"aahhhhh..!",rita karahi & apni kohniyo pe uchakti hui tange & faila di.shipra ki laplapati jibh uski chut se behte ras ko chaate ja rahi thi.pranav ne dayi banh saas ki gardan ke neeceh lagate hue uski chhatiyo ko dono hatho se dsabate hue unhe chusna shuru kar diya.

"magar rambha ka uski biwi bane rehna bahut zaruri hai.",usne saas ki chhatiyo ko apne hotho ke nishano se dhankne ke baad apne jism ko apne ghutno pe kiya & rita ke munh me apna lund de diya jise vo badi khushi se chusne lagi.uski aankho me damad ki baat sun sawaliya bhav ubhar aaye the,"..vo isiliye ki mujhe lagta hai ki rambha ko company ki malkin banana hum sab ke fayde me hoga.",pranav ne bahut soch samajh ke aaj saas ko apni taraf puri tarah se karne ka faisla kar liya tha.

"oohhhhhhhhh..!",rita uske lund ko chhod bistar pe gir gayi & chhatpatane lagi.shipra ki jibh ne uski chut me udham machake use jhadne pe majbur kar diya tha.kuchh der baad vo sambhli to vo uthi & shipra apne ghutno pe khadi ho gayi & maa-beti 1 dusre ko shiddat se chumne lagi.pranav bijli ki tezi se biwi ke peechhe aaya & uski numaya chut se munh laga diya.

"owwww..pranav..kya karte ho!..& us ladki ko humare sar pe bithane ki kya bakwas kar rahe the..oohhhhhhh..mom....aap bhi..!",shipra pranav ki zuban ke chut me ghuste hi ghutno pe khadi ho gayi thi & usi waqt rita ne use baaho me bhar uski chhatiyo se munh laga diya tha & bahut zor-2 se chusne lagi thi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--66

गतान्क से आगे......

"क्यूकी वो हमारे काबू मे रहेगी.जिस रास्ते समीर चल रहा है,उसपे आगे जाके वो रंभा को किनारे कर किसी & लड़की से शादी करेगा.",रीता ने बेटी की चूचियाँ छ्चोड़ी & उसकी कमर थाम उसे आगे झुका उसके हाथो पे किया & उसकी गंद को सहलाने लगी.

"तुमने कभी मेरी बेटी की गंद मारी है,प्रणव?",उसने बेटी की गंद के छेद को चूमा.

"नही,मोम.",वो सास के बेबाक सवाल से चौंक गया था.

"बहुत ग़लत बात है.मेरी बच्ची की इस खुशी से महरूम रखा है तुमने.",वो अपनी 1 उंगली शिप्रा की गंद मे घुसा तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगी.

"ओईईईईईई..मोम..नहियीईई..बहुत..दा..र्द..होगा.....हाईईईईईईईईईईईईईईईई..!",वो सर उपर झटकती च्चटपटाने लगी.प्रणव जल्दी-2 उसकी चूत चाट रहा था.शिप्रा झाड़ रही थी.रीता ने दामाद को मुस्कुरा के आँखो से इशारा किया & वो फ़ौरन घुटनो पे हो अपना लंड शिप्रा की गीली चूत मे घुसाने लगा.

"उउन्न्ह..हाईईईईईईई..!..तो क्या हुआ?..उस मनहूस की जगह कोई दूसरी ढंग की लड़की आए तो अच्छा ही होगा..आईियययययईए..नाहहिईीईईईईई..प्रनाववववववववव..!",प्रणव ने लंड को कुच्छ धक्को मे चूत के रस से गीला कर शिप्रा की गंद मे डाल दिया था & वो दर्द से कराह उठी थी.रीता ने बेटी के होंठ अपने होंठो मे कस लिए & उसकी चूचिया दबा उसे समझाने लगी.

"बस बेटा..हो गया..शुरू मे दर्द होता है फिर बहुत मज़ा आता है..!"

"तो आप लीजिए ना अपनी गंद मे इसे..हाईईईईईईईईईई..मर गयी मैं तो!..प्रणव तुम्हे देख लूँगी मैं!..ओवववव..",प्रणव ने बीवी की चूत के दाने को हाथ नीचे ले जाके रगड़ना शुरू कर दिया था,"..प्रणव..तुम्हे मोम की गंद भी मारनी होगी..आननह..!",मस्ती मे भीगी आवाज़ मे उसने पति से फरमाइश की.

"हां,मेरी जान ज़रूर."

"चुप बदतमीज़ो.शर्म नही आती मोम के बारे मे ऐसी बातें करते हुए..चलो बताओ कि समीर की दूसरी शादी से क्या नुकसान है हमे?",प्रणव के लंड & उंगली के कमाल से शिप्रा मस्ती मे पागल हो गयी थी & अपनी मस्तानी,आहो भरी आवाज़ मे अपने जिस्म के खुशी मे डूबे होने की बात कर रही थी.

"थॅंक्स मोम,आपकी वजह..से....आननह..आज मुझे..उफफफफफफ्फ़....ये खुशी मिली..आन्न्न्नह..!",वो सर उपर उठाते हुए झाड़ गयी तो प्रणव ने लंड गंद से निकाला & उसकी चूत मे डाल दिया.शिप्रा घुटनो पे खड़ी हो गयी & अपनी बाँह पीछे ले जा पति को थाम लिया.प्रणव ने उसके जिस्म को अपनी बाँहो मे कस लिया & उसकी चूचियाँ दबाते उसके चेहरे & गर्दन को चूमते उसे चोदने लगा.रीता सामने से दोनो के जिस्मो को बाहो मे भर घुटनो पे खड़ी हो गयी & शिप्रा & प्रणव-दोनो के होंठो का बारी-2 से लुत्फ़ उठाने लगी.उसके हाथ दामाद की गंद से लेके बेटी की चूचियो तक घूम रहे थे.

"जहा तक मैं जानता हू..",प्रणव ने रीता को चूमा जोकि शिप्रा की चूत को बाए हाथ से रगड़ते हुए दाए से उसकी चूचियाँ दबा रही थी,"..समीर रंभा को छ्चोड़ कामया से शादी करेगा."

"उउन्न्ह..तो इसमे बुराई क्या है कामया उस लड़की से कही ज़्यादा अच्छी है..ऊव्वववव..!",प्रणव के धक्को ने शिप्रा को मस्ती की कगार से नीचे धकेल दिया था & वो निढाल हो आगे गिरी तो रीता भी लड़खड़ा गयी & बिस्तर पे गिर गयी.प्रणव के लिए भी अब खुद को रोकना मुश्किल था & उसने बहुत ज़ोर से आह भरी & बीवी की कसी गंद की फांको को हाथो मे भींचते हुए अपना गर्म वीर्य उसकी चूत मे छ्चोड़ दिया.शिप्रा मा के उपर गिरी थी & रीता ने भी उसे बाहो मे भर लिया था.दोनो की चूचियाँ दोनो के जिस्मो के बीच आपस मे पिस गयी थी & दोनो 1 दूसरे को बड़ी शिद्दत से चूम रही थी.प्रणव घुटनो पे खड़ा उन्हे देख रहा था.

शिप्रा ने चूमते हुए करवट ली & अपनी मा को अपने उपर ले लिया.रीता का जोश से बुरा हाल था & वो अब बेटी के उपर सवार उसकी छातियों को अपनी चूचियो से पीसती उसकी चूत पे अपनी चूत दबाते हुए उसकी ज़ुबान चूस रही थी.शिप्रा ने आँखो से पति को मा की गंद की तरफ इशारा किया & उसका इशारा समझते हुए प्रणव धीरे से रीता के पीछे आ गया.

"कामया अगर इस घर मे आ गयी तो फिर हम सबका पत्ता तो कटा ही समझिए.",प्रणव ने सिकुदे लंड को थोड़ा हिलाया & फिर आगे झुक सास की गंद मे डाल दिया.

"आईईयइईईई..प्रणव....हाईईईईईईईईईईईईईई..!",लंड गंद के सुराख मे घुसते ही सख़्त होने लगा था & उसकी मोटाई ने रीता की गंद को फैला दिया था.वो दर्द से चीख उठी थी.इस से पहले विजयंत मेहरा ने काई बार उसकी गंद मारी थी मगर प्रणव ने अचानक उसकी नाज़ुक गंद पे हमला कर उसे चौंका दिया था.

"और समीर से तो किसी सहारे की उम्मीद बाकी रही नही है.आप और शिप्रा बस नाम के शेर्होल्डर्स रहेंगे & मैं तो हू ही नौकर ही.",प्रणव ने कमर पकड़ रीता को उपर कर लिया था & वो अब अपने घुटनो & हाथो पे झुकी दामाद से गंद मरवा रही थी.शिप्रा उठ के घुटनो पे खड़ी हो गयी थी & रीता उसकी चूत को जीभ से छेड़ रही थी. प्रणव आगे झुका & अपनी बीवी के होंठ चूमने लगा,"..इसीलिए कह रहा हू कि अगर समीर & रंभा की शादी बरकरार रहे तो हमारे लिए अच्छा है & उस से भी अच्छा होगा अगर रंभा हमारा मोहरा बन कंपनी की मालकिन बन जाए."

"उउम्म्म्मम...हुउन्न्ञणणन्..!",बेटी की चूत मे मुँह घुसाए गंद मरवाती रीता झाड़ रही थी मगर दामाद की बात से उसके कान खड़े हो गये थे.

"उउन्न्ह..मोम..!",उसने झाड़ते हुए मस्ती मे शिप्रा के दाने को हल्के से काट लिया था & वो चिहुनक उठी थी & उस से दूर च्चितक गयी थी.प्रणव ने सास की गंद से लंड निकाला & उसे सीधा किया & उसकी चूत मे लंड घुसा दिया.अब वो घुटनो पे खड़ा सास की टाँगे थामे उसे चोद रहा था.शिप्रा मा के सर के पीछे आई & अपनी चूत उसके मुँह पे लगा आगे झुकी & उसकी चूत के दाने को चाटने लगी.चूत पे दोहरी मार से रीता मस्ती मे पागल हो गयी & शिप्रा की गंद को भींचते,आहे भरते हुए उसकी चूत चाट कमर हिलाने लगी.

"तुम..आहह..क्या कहना चाह रहे हो..प्रा..नाव...खुल के कहो..नाआआआआअ....!..समीर मालिक है कंपनी का..ऊहह..वो कैसे हटेगा?..उउन्न्ह..!",प्रणव ने बीवी को उसकी मा के उपर से उठाया & सास के उपर लेट के उसे चूमते हुए उसकी चूचिया दबाते हुए उसे चोदने लगा.

"कुच्छ सोचना पड़ेगा कोई ऐसा उपाय की समीर को कोई तकलीफ़ भी ना पहुचे & रंभा कंपनी की मालकिन बन जाए.",शिप्रा को दोनो को इस तरह लिपटे देख कुच्छ जलन सी महसूस हुई & उसने प्रणव को मा के उपर से उठा दिया & फिर से मा के मुँह पे अपनी चूत रख के बैठ गयी & अपने पति के उपरी बाज़ू पकड़ उसे आगे खींचा & चूमने लगी.रीता बेटी की हरकत पे मुस्कुराते हुए उसकी चूत चाटने लगी.

"मगर हम ही क्यू नही बन जाते मालिक?..उउफफफफफफफ्फ़..!",शिप्रा मस्ती मे कमर उचकाते हुए पति के सीने पे हसरत भरे हाथ फिराने लगी.उसकी मस्ती अब बहुत बढ़ गयी थी.

"क्यूकी समीर की मौत या उसके कंपनी चलाने के नकबिल होने की सूरत मे सारे शेर्स रंभा के नाम हो जाएँगे इसीलिए वो मामूली सी लड़की हमारे लिए बहुत खास हो गयी है.",प्रणव खुशी मे पागल बीवी की चूचियाँ मसलता सास की चूत मे ज़ोरदार धक्के लगाए जा रहा था.रीता भी उसके धक्को के जवाब मे कमर उचकाती नीचे से बेटी की गुलाबी चूत चाट रही थी & शिप्रा मा की ज़ुबान का लुत्फ़ उठाते हुए पति के हाथो से अपनी चूचिया मसळवती,उसे चूम रही थी.

कमरे मे 3 मस्तानी आहें 1 साथ गूँजी & तीनो वासना मे डूबे जिस्म खेल के अंजाम तक 1 साथ पहुँचे.शिप्रा मा की ज़ुबान से झाड़ आगे अपने पति की बाहो मे झूल रही थी जोकि सास की चूत मे वीर्य की बौच्चरें छ्चोड़े जा रहा था & उस वीर्य और उसे चोदने वाले लंड की रगड़ से बहाल हो रीता दोनो के नीचे झाडे जा रही थी.कुच्छ पॅलो बाद प्रणव बिस्तर के बीच लेटा था & उसकी दाई बाँह मे रीता & बाई मे शिप्रा उस से चिपकी लेटी थी.रीता की दाई & शिप्रा की बाई टांग उसके जिस्म के उपर थी & दोनो उसे चूमे जा रही थी,"तुम्हे जो भी करना है करो,प्रणव..",रीता ने दामाद के होंठो को चूमा,"..अब हम तीनो 1 साथ हैं.",उसने बेटी की ओर देखा तो उसने मा के दाए हाथ को मुस्कुराते हुए थामा & पति को चूम लिया.तीनो वसाना के मस्ताने खेल मे 1 बार फिर डूब गये.

रंभा कार से उतरी & सामने के घर को देखने लगी.देवेन कार पार्क कर रहा था.दोनो अभी-2 सवेरे का नाश्ता कर होटेल छ्चोड़ के निकले थे.1 रात के किराए के साथ-2 देवेन ने अपनी दीवानगी भरी चुदाई के दौरान कमरे की हालत बिगाड़ने का मुआवज़ा भी भरा.सामने का घर ना बहुत बड़ा था ना ही बहुत छ्होटा.लकड़ी के छ्होटे से गेट को खोल देवेन & वो घर के अहाते मे दाखिल हुए.सामने 1 सिल्वर कलर की मारुति ज़ेन खड़ी & उसके दोनो तरफ फूलो की क्यारिया थी.देवेन आगे बढ़ा & घर के बरामदे के दरवाज़े के बाहर लगी घंटी का स्विच दबाया.

"हेलो,देवेन.",घर का दरवाज़ा 1 मोटे,बूढ़े करीबन 60-65 बरस के विदेशी ने खोला.दोनो मर्दो ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया.

"हेलो,डॉक्टर.",देवेन ने रंभा की ओर इशारा किया,"..ये रंभा है,डॉक्टर."

"हेलो,रंभा.",डॉक्टर ने अपना हाथ रंभा की ओर बढ़ाया & उसे तारीफ भरी निगाहो से देखा.रंभा ने फूलों के प्रिंट वाली पीली सारी & स्लीव्ले ब्लाउस पहना था.सारी के झीने कपड़े से उसका गोल पेट & ब्लाउस के गले मे से झँकता क्लेवेज़ तो नुमाया हो ही रहे थे साथ ही उसकी नर्म,गुदाज़ बाहे भी सभी के देखने के लिए खुली थी,"..कैसी हैं आप?"

"हाई..ठीक हू.",उसकी बिल्कुल सॉफ लहजे मे बोली हिन्दुस्तानी सुन रंभा चौंक उठी.उस विदेशी के गोरे चेहरे पे गर्मी की वजह से गुलाबी चकत्ते पड़े हुए थे.लगता था जैसे उसे यहा की गर्मी की आदत नही थी.शक्ल से ही वो बहुत खुशमिजाज़ इंसान लग रहा था,"..आप कैसे हैं?"

"बहुत अच्छा.",उसने रंभा से हाथ मिलाया,"..मेरा नाम यूरी पोपव है.आप मुझे यूरी कह सकती हैं."

"यही हमारे मरीज़ के डॉक्टर हैं,रंभा.",देवेन & डॉक्टर उसके हैरत भर्रे चेहरे को देख हंस रहे थे,"..तुम इनकी हिन्दुस्तानी सुन चौंक गयी हो ना!लो डॉक्टर,1 & देसी तुम्हे देख चौंक गया!",दोनो ने फिर ठहाका लगाया,"..रंभा,ड्र.पोपव रशिया से हैं & हमारे मुल्क मे पिच्छले 20 सालो से रह रहे हैं.इनके घर & इस क्लिनिक..",दोनो घर के ड्रॉयिंग रूम से होते हुए 1 गलियारे से हो घर के पिच्छले हिस्से मे आ गये थे जहा यूरी का क्लिनिक था.दरअसल ये घर का पिच्छला हिस्सा नही सामने का हिस्सा था,"..को देख ये मत सोचना कि ये कोई मामूली डॉक्टर हैं.यूरी इंसान के जिस्म की कोई भी बीमारी ठीक कर सकता है."

"ना!",यूरी ने दोनो को बैठने का इशारा किया & खुद अपनी कुर्सी पे बैठ गया,"..ठीक करना केवल ऑल्माइटी के हाथ मे है.मैं बस बीमारी समझ के ट्राइ कर सकता हू."

"ओके,भाई.चलो अब हमारे मरीज़ के बारे मे बताओ."

"उस से पहले ज़रा मैं मोहतार्मा की थोड़ी खातिर तो कर लू!",यूरी उठा & कमरे से बाहर गया जब वापस आया तो उसके हाथो मे 3 ग्लास & 1 जग था.उसने तीनो के लिए नींबू-पानी धारे & दोनो को 1-1 ग्लास दिया & खुद भी 1 ग्लास ले लिया,"..मैने विजयंत के काफ़ी टेस्ट्स किए.इनके जिस्म मे इनका दिल,हाज़मे के अंग,किड्नी,लिवर वग़ैरह सब बिल्कुल ठीक काम कर रहे हैं.इनका जो भी आक्सिडेंट हुआ उसमे इन अंगो को ना ही कोई नुकसान पहुँचा & ना ही जिस्म की कोई भी हड्डी टूटी..",उसने अपना कंप्यूटर ओन कर स्क्रीन रंभा की ओर किया.

"..पर इनको सर पे चोट लगी है जोकि उस वाइड ने अपनी जड़ी बूटियो से ठीक करने की कोशिश की.उसकी दवा से उपर चमड़ी का घाव तो भर गया लेकिन अन्द्रुनि चोट पे कोई असरा नही हुआ.मैने उसके दिमाग़ के हर तरह के स्कॅन्स किए हैं.अब चोट इतनी भी गहरी नही लगती उन रिपोर्ट्स के मुताबिक की उसे कोई बहुत नुकसान पहुचे मगर इंसानी जिस्म के बारे मे आप कुच्छ कह नही सकते..",वो अपना शरबत पीना तो भूल ही गया था & बस विजयंत के केस के बारे मे बोले जा रहा था.

"..वो बोल सकता है,अपने सारे काम कर सकता है मगर जैसे इस कंप्यूटर की हार्ड डिस्क्स कोई डेलीट कर दे,उसी तरह वो भी सब भूल गया है.सब कुच्छ!"

"तो कोई तरीका नही डॉक्टर,जिस से याददाश्त वापस आए?"

"कंप्यूटर मे डाटा तो रिट्रीव हो सकता है मगर मेडिकल साइन्स ने कोई ऐसी दवा तो ईजाद की नही है लेकिन हा हम कोशिश कर सकते हैं."

"कैसी कोशिश?"

"उस से बातें कीजिए.उसे उसकी पिच्छली ज़िंदगी के बारे मे बताइए.फोटोस दिखाइए,उन जगहो पे ले जाइए जहा वो गया था या जिनसे कुच्छ ज़रूरी यादें जुड़ी हैं."

"ऐसे लोग जिनसे उसकी ज़िंदगी की ज़रूरी यादें जुड़ी हो,उनसे भी तो मिलवा सकते हैं?"

"हां ज़रूर.बस इतना ध्यान रहे की इसके दिमाग़ पे बहुत ज़्यादा ज़ोर ना पड़े वरना हो सकता है की उसके दिमाग़ को झटका लगे & उसे डॅमेज हो जाए."

"हूँ."

"विजयंत!",डॉक्टर ने आवाज़ दी तो अंदर के 1 कमरे से विजयंत बाहर आया.रंभा ने उसे देखा.सलीके से रहने की वजह से अब वो अच्छा लग रहा था मगर उसकी आँखे अभी भी वैसे ही बेनूर थी.

"मैने कल रात तुम्हारा फोन आने पे इसे यूरी के पास छ्चोड़ दिया था.",देवेन उठ खड़ा हुआ था,"ओके,यूरी चलते हैं.थॅंक्स फॉर एवेरतिंग.अरे हां..1 मिनिट.",देवेन बाहर गया & कुच्छ देर बाद वापस आया तो उसके हाथ मे 1 पॅकेट था,"..कार मे छूट गया था.ये लो.अभी-2 मँगवाया है खास तुम्हारे लिए.",यूरी ने पॅकेट खोला & अंदर से निकली असली रशियन वोड्का देख उसकी आँखे चमक उठी.

"बैठी,दोस्त.इसे ख़त्म कर के जाना."

"नही यूरी..",देवेन हंसा,"..आज तो तुम इसे अकेले ही ख़त्म करो या फिर वेरा को बुला लो.",उसने शरारत से कहा तो दोनो दोस्त फिर हंस पड़े.कुच्छ देर बाद देवेन,रंभा & विजयंत देवेन की कार मे बैठे उसके घर जा रहे थे

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क्रमशः.......

JAAL paart--66

gataank se aage......

"kyuki vo huamre kabu me rahegi.jis raste sameer chal raha hai,uspe aage jake vo rambha ko kinare kar kisi & ladki se shadi karega.",rita ne beti ki chhatiya chhodi & uski kamar tham use aage jhuka uske hatho pe kiya & uski gand ko sehlane lagi.

"tumne kabhi meri beti ki gand mari hai,pranav?",usne beti ki gand ke chhed ko chuma.

"nahi,mom.",vo saas ke bebak sawal se chaunk gaya tha.

"bahut galat baat hai.meri bachchi ki is khushi se mehrum rakha hai tumne.",vo apni 1 ungli shipra ki gand me ghusa tezi se andar-bahar karne lagi.

"ouiiiiiiiii..mom..nahiiiiii..bahut..da..rd..hoga.....haiiiiiiiiiiiiiiiii..!",vo sar upar jhatakti chhatpatane lagi.pranav jaldi-2 uski chut chaat raha tha.shipra jhad rahi thi.rita ne damad ko muskura ke aankho se ishara kiya & vo fauran ghutno pe ho apna lund shipra ki gili chut me ghusane laga.

"uunnhhhhh..haiiiiiiii..!..to kya hua?..us manhus ki jagah koi dusri dhang ki ladki aaye to achha hi hoga..AAIIYYYYYEEEEE..NAHHHHHIIIIIIIII..PRANAVVVVVVVVV..!",pranav ne lund ko kuchh dhakko me chut ke ras se gila kar shipra ki gand me daal diya tha & vo dard se karah uthi thi.rita ne beti ke honth apne hotho me kas liye & uski choochiya daba use samjhane lagi.

"bas beta..ho gaya..shuru me dard hota hai fir bahut maza aata hai..!"

"to aap lijiye na apni gand me ise..haiiiiiiiiiii..mar gayi main to!..pranav tumhe dekh lungi main!..owwww..",pranav ne biwi ki chut ke dane ko hath neeche le jake ragadna shuru kar diya tha,"..pranav..tumhe mom ki gand bhi marni hogi..aannhhhhhhhh..!",masti me bhigi aavaz me usne pati se farmaish ki.

"haan,meri jaan zarur."

"chup badtamizo.sharm nahi aati mom ke bare me aisi baaten karte hue..chalo batao ki sameer ki dusri shadi se kya nuksan hai hume?",pranav ke lund & ungli ke kamal se shipra masti me pagal ho gayi thi & apni mastani,aaho bhari aavaz me apne jism ke khushi me doobe hone ki baat kar rahi thi.

"thanx mom,aapki vajah..se....aannhhhhh..aaj mujhe..ufffffff....ye khushi mili..aannnnhhhhhhhhh..!",vo sar upar uthate hue jhad gayi to pranav ne lund gand se nikala & uski chut me daal diya.shipra ghutno pe khadi ho gayi & apni banh peechhe le japati ko tham liya.pranav ne uske jism ko apni bahao me kas liya & uski chhatiya dabate uske chehre & gardan ko chumte use chodne laga.rita samne se dono ke jismo ko baaho me bhar ghutno pe khadi ho gayi & shipra & pranav-dono ke hotho ka bari-2 se lutf uthane lagi.ukse hath damad ki gand se leke beti ki choochiyo tak ghum rahe the.

"Jaha tak main janta hu..",Pranav ne Rita ko chuma joki Shipra ki chut ko baye hath se ragadte hue daye se uski chhatiyan daba rahi thi,"..Sameer Rambha ko chhod Kamya se shadi karega."

"uunnhhhhhhhh..to isme burai kya hai kamya us ladki se kahi zyada achhi hai..oowwwww..!",pranav ke dhakko ne shipra ko masti ki kagar se neeche dhakel diya tha & vo nidhal ho aage giri to rita bhi ladkhada gayi & bistar pe gir gayi.pranav ke liye bhi ab khud ko rokna mushli tha & usne bahut zor se aah bhari & biwi ki kasi gand ki fanko ko hatho me bhinchte hue apna garm virya uski chut me chhod diya.shipra maa ke upar giri thi & rita ne bhi use baaho me bhar liya tha.dono ki chhatiya dono ke jismo ke beech aapas me pis gayi thi & dono 1 dusre ko badi shiddat se chum rahi thi.pranav ghutno pe khada unhe dekh raha tha.

shipra ne chumte hue karwat li & apni maa ko apne upar le liya.rita ka josh se bura haal tha & vo ab beti ke upar sawar uski chhatiyo ko apni choochiyo se peesti uski chut pe apni chut dabate hue uski zuban chus rahi thi.shira ne aankho se pati ko aa ki gand ki taraf ishara kiya & uska ishar samajhte hue pranav dhire se rita ke peechhe aa gaya.

"Kamya agar is ghar me aa gayi to fir hum sabka patta to kata hi samajhiye.",pranav ne sikude lund ko thoda hilaya & fir aage jhuk saas ki gand me daal diya.

"AAIIYYEEEEEEEEE..PRANAV....HAIIIIIIIIIIIIIII..!",lund gand ke surakh me ghuste hi sakht hone laga tha & uski motai ne rita ki gand ko phaila diya tha.vo dard se chikh uthi thi.is se pehle Vijayant Mehra ne kayi baar uski gand mari thi magar pranav ne achanak uski nazuk gand pe humla kar use chaunka diya tha.

"& sameer se to kisi sahare ki umeed baki rahi nahi hai.aap & shipra bas naam ke shareholders rahenge & main to hu hi naukar hi.",pranav ne kamar pakad rita ko upar kar liya tha & vo ab apne ghutno & hatho pe jhuki damad se gand marwa rahi thi.shipra uth ke ghutno pe khadi ho gayi thi & rita uski chut ko jibh se chhed rahi thi.ranav aage jhuka & apni biwi ke honth chumne laga,"..isiliye keh raha hu ki agar sameer & rambha ki shadi barkarar rahe to humare liye achha hai & us se bhi achha hoga agar rambha humara mohra ban company ki malkin ban jaye."

"uummmmm...huunnnnnn..!",beti ki chut me munh ghusaye gand marwati rita jhad rahi thi magar damad ki baat se uske kaan khade ho gaye the.

"uunnhhhhhhhh..mom..!",usne jhadte hue masti me shipra ke dane ko halke se kaat liya tha & vo chihunk uthi thi & us se door chhitak gayi thi.pranav ne saas ki gand se lund nikala & use seedha kiya & uski chut me lund ghusa diya.ab vo ghutno pe khada saas ki tange thame use chod raha tha.shipra maa ke sar ke peechhe aayi & apni chut uske munh pe laga aage jhuki & uski chut ke dane ko chatne lagi.chut pe dohri maar se rita masti me pagal ho gayi & shipra ki gand ko bhinchte,aahe bharte hue uski chut chat kamar hilane lagi.

"tum..aahhhhh..kya kehna chah rahe ho..pra..nav...khul ke kaho..naaaaaaaaaaa....!..sameer malik hai company ka..oohhhhhhhhh..vo kaise hatega?..uunnhhhhhhhh..!",pranav ne biwi ko uski maa ke upar se uthaya & saas ke upar let ke use chumte hue uski choochiya dabate hue use chodne laga.

"kuchh sochna padega koi aisa upay ki sameer ko koi taklif bhi na pahuche & rambha company ki malkin ban jaye.",shipra ko dono ko is tarah lipte dekh kuchh jalan si mehsus hui & usne pranav ko maa ke upar se utha diya & fir se maa ke munh pe apni chut rakh ke baith gayi & apne pati ke upri bazu pakad use aage khincha & chumne lagi.rita beti ki harkat pe muskurate hue uski chut chatne lagi.

"magar hum hi kyu nahi ban jate malik?..uuffffffff..!",shipra masti me kamar uchkate hue pati ke seene pe hasrat bhare hath firane lagi.uski masti ab bahut badh gayi thi.

"kyuki sameer ki maut ya uske company chalane ke nakabil hone ki surat me sare shares rambha ke naam ho jayenge isiliye vo mamuli si ladki humare liye bahut khas ho gayi hai.",pranav khushi me pagal biwi ki choochiyan masalta saas ki chut me zordar dhakke lagaye ja raha tha.rita bhi uske dhakko ke jawab me kamar uchkati neeche se beti ki gulabi chut chaat rahi thi & shipra maa ki zuban ka lutf uthate hue pati ke hatho se apni choochiya masalwati,use chum rahi thi.

kamre me 3 mastani aahen 1 sath gunji & teeno vasna me doobe jism khel ke anjam tak 1 sath pahunche.shipra maa ki zuban se jhad aage apne pati ki baaho me jhul rahi thi joki saas ki chut me virya ki bauchharen chhode ja raha tha & us virya & use chhodne vale lund ki ragad se behaal ho rita dono ke neeche jhade ja rahi thi.kuchh palo baad pranav bistar ke beech leta tha & uski dayi banh me rita & bayi me shipra us se chipki leti thi.rita ki dayi & shipra ki bayi tang uske jism ke upar thi & dono use chume ja rahi thi,"tumhe jo bhi karna hai karo,pranav..",rita ne damad ke hotho ko chuma,"..ab hum teeno 1 sath hain.",usne beti ki or dekha to usne maa ke daye hath ko muskurate hue thama & pati ko chum liya.teeno vsana ke mastane khel me 1 baar fir doob gaye.

Rambha car se utri & samne ke ghar ko dekhne lagi.Deven car park kar raha tha.dono abhi-2 savere ka nashta kar hotel chhod ke nikle the.1 raat ke kiraye ke sath-2 deven ne apni deewangi bhari chudai ke dauran kamre ki halat bigadne ka muawaza bhi bhara.samne ka ghar na bahut bada tha na hi bahut chhota.lakdi ke chhote se gate ko khol deven & vo ghar ke ahate me dakhil hue.samne 1 silver color ki Maruti Zen khadi & uske dono taraf phoolo ki kyariya thi.deven aage badha & ghar ke baramde ke darwaze ke bahar lagi ghanti ka switch dabaya.

"hello,deven.",ghar ka darwaza 1 mote,boodhe kariban 60-65 baras ke videshi ne khola.dono mardo ne garmjoshi se hath milaya.

"hello,doctor.",deven ne rambha ki or ishara kiya,"..ye rambha hai,doctor."

"hello,rambha.",doctor ne apna hath rambha ki or badhaya & use tarif bhari nigaho se dekha.rambha ne phoolon ke print vali pili sari & sleeveless blouse pehna tha.sari ke jhine kapde se uska gol pet & blouse ke gale me se jhankta clevagae to numaya ho hi rahe the sath hi uski narm,gudaz baahe bhi sabhi ke dekhne ke liye khuli thi,"..kaisi hain aap?"

"hi..thik hu.",uski bilkul saaf lehje me boli Hindustani sun rambha chaunk uthi.us videshi ke gore chehre pe garmi ki vajah se gulabi chakatte pade hue the.lagta tha jaise use yaha ki garmi ki aadat nahi thi.shakl se hi vo bahut khushmijaz insan lag raha tha,"..aap kaise hain?"

"bahut achha.",usne rambha se hath milaya,"..mera naam Yuri Popov hai.aap mujhe yuri keh sakti hain."

"yehi huamre mariz ke doctor hain,rambha.",deven & doctor uske hairat bharre chehre ko dekh hans rahe the,"..tum inki hindustani sun chaunk gayi ho na!lo doctor,1 & desi tumhe dekh chaunk gaya!",dono ne fir thahaka lagaya,"..rambha,dr.popov Russia se hain & huamre mulk me pichhle 20 salo se reh rahe hain.inke ghar & is clinic..",dono ghar ke drawing room se hote hue 1 galiyare se ho ghar ke pichhle hisse me aa gaye the jaha yuri ka clinic tha.darasal ye ghar ka pichhla hissa nahi samne ka hissa tha,"..ko dekh ye mat sochna ki ye koi mamuli doctor hain.yuri insan ke jism ki koi bhi bimari thik kar sakta hai."

"na!",yuri ne dono ko baithne ka isha kiya & khud apni kursi pe baith gaya,"..thik karna keval almighty ke hath me hai.main bas bimari samajh ke try kar sakta hu."

"ok,bhai.chalo ab humare mariz ke bare me batao."

"us se pehle zara main mohtarma ki thodi khatir to kar lu!",yuri utha & kamre se bahar gaya jab vapas aaya to uske hatho me 3 glass & 1 jug tha.usne teeno ke liye nimbu-pani dhaare & dono ko 1-1 glass diya & khud bhi 1 glass le liya,"..maine vijayant ke kafi tests kiye.inke jism me inka dil,hazme ke ang,kidney,liver vagairah sab bilkul thik kaam kar rahe hain.inka jo bhi accident hua usme in ango ko na hi koi nuksan pahuncha & na hi jism ki koi bhi haddi tuti..",usne apna computer on kar screen rambha ki or ki.

"..par inko sar pe chot lagi hai joki us vaid ne apni jadi butiyo se thik karne ki koshish ki.uski dawa se upar chamdi ka ghav to bhar gaya lekin andruni chot pe koi asra nahi hua.maine uske dimagh ke har tarah ke scans kiye hain.ab chot itni bhi gehri nahi lagtyi un reports ke mutabik ki use koi bahut nuksan pahuche magar insani jism ke bare me aap kuchh keh nahi sakte..",vo apna sharbat pina to bhul hi gaya tha & bas vijayant ke case ke bare me bole ja raha tha.

"..vo bol sakta hai,apne sare kaam kar sakta hai magar jaise is computer ki hard disks koi delete kar de,usi tarah vo bhi sab bhool gaya hai.sab kuchh!"

"to koi tarika nahi doctor,jis se yaddasht vapas aaye?"

"computer me data to retrieve ho sakta hai magar medical science ne koi aisi dawa to ijad ki nahi hai lekin haa hum koshish kar sakte hain."

"kaisi koshish?"

"us se baaten kijiye.use uski pichhli zindagi ke bare me bataiye.photos dikhaiye,un jagaho pe le jaiye jaha vo gaya tha ya jinse kuchh zaruri yaaden judi hain."

"aise log jinse uski zindagi ki zaruri yaaden judi ho,unse bhi to milwa sakte hain?"

"haan zarur.bas itna dhyan rahe ki iuske dimagh pe bahut zyada zor na pade varna ho sakta hai ki uske dimagh ko jhatka lage & use damage ho jaye."

"hun."

"vijayant!",doctor ne aavaz di to andar ke 1 kamre se vijayant bahar aaya.rambha ne use dekha.salike se rehne ki vajah se ab vo achha lag raha tha magar uski aankhe abhi bhi vaise hi benoor thi.

"maine kal raat tumhara fone aane pe ise yuri ke paas chhod diya tha.",deven uth khada hua tha,"ok,yuri chalte hain.thanx for everything.are haan..1 minute.",deven bahar gaya & kuchh der baad vapas aaya to uske hath me 1 packet tha,"..car me chhut gaya tha.ye lo.abhi-2 mangwaya hai khas tumahre liye.",yuri ne packet khola & andar se nikli asli Russian Vodka dekh uski aankhe chamak uthi.

"baithi,dost.ise khatm kar ke jana."

"nahi yuri..",deven hansa,"..aaj to tum ise akele hi khatm karo ya fir Vera ko bula lo.",usne shararat se kaha to dono dost fir hans pade.kuchh der baad deven,rambha & vijayant deven ki car me baithe uske ghar ja rahe the

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--67

गतान्क से आगे......

"ये ड्र.यूरी गोआ मे कब से हैं?",रंभा कार की खिड़की से बाहर के नज़ारे को देख रही थी.कार गोआ के भीड़-भाड़ वाले इलाक़े से बाहर निकल आई थी.

"उस इंसान के बारे मे तुम्हारे दिल मे सवाल पे सवाल मचल रहे हैं.है ना?",देवेन हंसा,"..रंभा,यूरी 1 नुरोसर्जन है.रशिया मे वो क्या करता था मुझे ठीक से नही पता,बस लोगो से कभी-कभार ये सुना है की वो शायद पुराने सोवियट संघ यानी यूयेसेसार की जासूसी एजेन्सी केजीबी मे काम करता था.अब वाहा क्या हुआ कि उसे अपना मुल्क छ्चोड़ यहा आना पड़ा ये मुझे नही पता.बस इतना जानता हू कि,वो 1 कमाल का डॉक्टर है & मैने उसे आज तक किसी के मर्ज़ को नही पकड़ते नही देखा है."

"हूँ.",रंभा ने सर घुमा के विजयंत मेहरा को देखा.वो बस खिड़की से बाहर देखे जा रहा था.उसने रंभा को देखा तो रंभा मुस्कुरा दी मगर उसके चेहरे पे कोई भाव नही आए.रंभा ने सर आगे किया & सामने के रास्ते को देखने लगी.कुच्छ ही देर मे कार देवेन के घर के अहाते मे खड़ी थी.

देवेन का घर कोई बुंगला तो नही था मगर था काफ़ी बड़ा.देवेन ने कार अहाते मे लगा के गेट बंद किया & डिकी से रंभा का समान निकाल घर के अंदर चला गया.उसके पीछे-2 रंभा भी आगे बढ़ी.

आगे बढ़ती रंभा अचानक रुक गयी & पीछे घूम के देखा.विजयंत मेहरा उसका आँचल पकड़े खड़ा था.रंभा घूमी तो आँचल उसके सीने से पूरा हट गया & उसका स्लीव्ले ब्लाउस मे ढँका सीना & गोरा पेट दिखने लगे.रंभा विजयंत के चेहरे को गौर से देख रही थी,उसकी आँखे अब बेजान नही बल्कि उलझन से भरी दिख रही थी.रंभा ने गर्देन घुमाई & देवेन को देखा.उसका समान कमरे मे रख के वापस लौटने के बाद वो भी विजयंत की हरकत देख चौंक गया था.उसने भी रंभा को देखा & हल्के से सर हिलाया जैसे ये कह रहा हो कि उसे भी कुच्छ समझ नही आ रहा था.रंभा ने वापस चेहरा विजयंत की ओर किया & उसकी आँखो मे आँखे डाल दी.उसे ज़रूर कुच्छ याद आया था & तभी उसने उसका आँचल पकड़ा था..शायद रंभा & उसकी पहली रात याद आई थी उसे.ये ख़याल आते ही रंभा के दिमाग़ मे बिजली कौंधी..ड्र.पोपव ने कहा था कि उन्हे विजयंत को बीती बाते याद दिलाने के लिए उसे उन बातो के बारे मे बताना चाहिए..& अगर बताने के बजाय जताया जाए तो!

रंभा ने 1 क़ातिल मुस्कान अपने ससुर की ओर फेंकी & घूमते हुए कमरे मे आगे देवेन की ओर बढ़ने लगी,इस तरह की उसकी सारी खुलती जा रही थी.देवेन अब उसे भी हैरत से देख रहा था कि तभी उसके दिमाग़ मे बिजली कौंधी & उसे अपनी प्रेमिका की हरकत की वजह समझ आ गयी & वो भी मुस्कुराने लगा.रंभा अब अपने दोनो प्रेमियो के बिल्कुल बीच मे खड़ी थी.विजयंत उसे कुच्छ पल देखता रहा & फिर उसके करीब आने लगा.रंभा के करीब पहुँच उसने उसका आँचल छ्चोड़ दिया.वो अपनी बहू के बिल्कुल करीब खड़ा उसकी आँखो मे देख रहा था.अपने चेहरे पे उसकी गर्म साँसे महसूस करते ही रंभा को भी उसके साथ बिताए पॅलो की याद आ गयी & उसका दिल धड़क उठा.अब उसका दिल देवेन का था मगर विजयंत के साथ भी उसने केयी खुशनुमा पल बिताए थे.

विजयंत की आँखे अभी भी उलझन भरी जैसे कुच्छ समझने की कोशिश करती दिख रही थी.वो बहुत धीरे-2 आगे झुक रहा था.रंभा के होंठ खुद बा खुद खुल गये थे.वो समझ गये थे कि विजयंत के लब उनसे मिलने ही वाले थे & अगले ही पल वही हुआ.विजयंत उसके होंठ चूम रहा था & वो उसका पूरा साथ दे रही थी.उसकी आँखे बंद हो गयी & वो बस अपने होंठो पे विजयंत के होंठो की लज़्ज़त महसूस किए जा रही थी.काई पॅलो बाद जब किस तोड़ी & उसने आँखे खोली तो विजयंत को वैसे ही कुच्छ समझने की कोशिश करते उसे देखता पाया.वो कुच्छ करती उस से पहले ही 1 जोड़ी हाथो ने उसकी उपरी बाहे थाम उसे थोड़ा पीच्चे किया & फिर उसके दाए कंधे के उपर से 1 सर आगे झुका & देवेन के होंठ उसके होंठो के रस को पीने लगे.रंभा की आँखे फिर मूंद गयी.घर की दहलीज़ पे कदम रखते हुए उसने सोचा भी नही था कि यहा माहौल ऐसा नशीला हो जाएगा.

“हुन्न्ञन्..!”,उसने देवेन के होंठ छ्चोड़े तो विजयंत ने फिर उसके होंठो को अपने लबो की गिरफ़्त मे ले लिया था.इधर विजयंत उसके गुलाबी होंठो को चूमते हुए उसकी ज़ुबान से ज़ुबान लड़ा रहा था & उधर देवेन उसके बालो को उठा उसकी गर्देन के पिच्छले हिस्से को चूम रहा था.रंभा इतनी सी देर मे ही पूरी तरह से मस्त हो गयी थी विजयंत की जीभ को पूरे जोश से चूस रही थी.देवेन उसकी गर्देन को चूमते हुए नीचे जा रहा था.उसके तपते होंठ रंभा की रीढ़ पे चलते हुए नीचे जा रहे थे.रंभा का जिस्म सिहर रहा था.देवेन उसकी पीठ के बीचोबीच चूमता उसकी कमर तक पहुँच गया था & दोनो तरफ के मांसल हिस्सो को दबाते हुए चूमे जा रहा था.

विजयंत अपने चेहरे को घूमाते हुए उसकी ज़ुबान से खेल रहा था की रंभा ने महसूस किया की देवेन के हाथ उसकी कमर की बगलो से आगे आए & उसके पेट को सहलाते हुए उसकी कमर मे अटकी सारी को खींच दिया.उसी वक़्त विजयंत उसके होंठो को छ्चोड़ उसके गालो & ठुड्डी को चूमने लगा.देवेन उसकी सारी को उसके जिस्म से अलग कर चुक्का था & उसके होंठ अब रंभा की पीठ पे उपर बढ़ने लगे थे.विजयंत उसकी गर्देन चूमता हुआ नीचे आया & ब्लाउस के गले मे से झँकते उसके क्लीवेज को चूमा.रंभा की धड़कने अब बहुत तेज़ हो गयी थी.देवेन उसके ब्लाउस की बॅक से दिखती उसकी पीठ चूम रहा था & विजयंत उसकी चूचियाँ.देवेन थोड़ा & उपर बढ़ा & विजयंत नीचे.थोड़ी ही देर बाद रंभा पीछे हुई & देवेन के चौड़े सीने के सहारे खड़ी हो गयी.देवेन उसकी गुदाज़ बाहो को दबाता हुआ उसके होंठ चूम रहा था & विजयंत उसकी कमर को थामे उसके पेट पे अपनी ज़ुबान फिरा रहा था.

“उउम्म्म्ममम..आन्न्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..!”,रंभा का जिस्म कांप रहा था & उसने देवेन के होंठो से अपने होठ खींच लिए.विजयंत उसकी नाभि की गहराई मे अपनी जीभ उतारे बैठा था & देवेन उसकी गर्दन & दाए कंधे को चूमे जा रहा था.रंभा की शक्ल देख ऐसा लग रहा था कि वो बहुत तकलीफ़ मे है जबकि हक़ीक़त ये थी कि इस वक़्त तो वो खुशियो के आसमान मे उड़ रही थी.वो दोनो प्रेमियो की हर्कतो से पहली बार झाड़ गयी थी.देवेन ने पाने हाथ आगे किए & उसकी कसी छातियो की गोलाईयो पे अपने दोनो हाथो की 1-1 उंगली को चलाने लगा.विजयंत भी उसके पेटिकोट के उपर से उसकी गंद की फांको पे अपनी हथेलिया फिरा रहा था.रंभा ने खुद को दोनो मर्दो को बिल्कुल सौंप दिया था.वो कुच्छ भी नही कर रही थी बस उनकी हर्कतो का लुत्फ़ उठा रही थी.

देवेन के हाथ उसकी चूचियो पे घूमने के बाद उनके बीच आए & उसके ब्लाउस के हुक्स खोल दिए.विजयंत भी उसकी कमर की दाई तरफ लगे पेटिकोट के हुक्स को खोल रहा था.जब देवेन ने उसकी बाहे पीछे करते हुए उसके ब्लाउस को निकाला,तब विजयंत ने भी उसके आख़िरी हुक को खोल उसके पेटिकोट को उसकी कमर से नीचे सरका दिया.अब रंभा पीले लेस की ब्रा & पॅंटी मे थी.विजयंत लेस के झीने कपड़े मे से झँकति अपनी बहू की चूत को देख रहा था & देवेन अपनी महबूबा के कड़े निपल्स को ब्रा मे नुकीले उभार बनाते हुए.रंभा अपने ससुर की गर्म साँसे पॅंटी के जालीदार लेस से होती हुई सीधी अपनी गीली चूत पे महसूस कर रही थी.देवेन उसकी चूचियो के नीचे अपनी हथेलिया जमा उसकी गर्दन & कंधो को चूम रहा था & विजयंत उसकी गंद को दबाते हुए उसकी पॅंटी के वेयैस्टबंड & नाभि के बीच के पेट के हिस्से को.रंभा अब ज़ोर-2 से आहे ले रही थी.

वो बेचैन हो घूमी & अपने पंजो पे थोड़ा उचक के अपने महबूब के होंठो को बड़ी शिद्दत से चूमा.नीचे बैठा विजयंत उसकी इस हरकत पे चौंका मगर अगले ही पल उसके होठ रंभा की चिकनी कमर & पीठ को चखने मे लग गये.रंभा ने अपने बेसब्र हाथो से अपने आशिक़ की कमीज़ के बटन्स खोल उसे उसके जिस्म से जुदा किया & उसके बालो भरे सीने को चूमने लगी.उसके हाथ देवेन की पीठ को उपर से नीचे तक खरोंच रहे थे.देवेन के सीने को जी भर के चूमने के बाद वो फिर घूमी & विजयंत को उपर उठाया & उसकी टी-शर्ट निकाल उसके साथ भी वैसा ही बर्ताव किया.जब वो विजयंत के सीने को चूम रही थी देवेन उसकी पीठ से लेके गंद तक अपने हाथ चला रहा था.

रंभा विजयंत के सीने को चूमते हुए नीचे उसके पेट तक पहुँच गयी थी & उसकी नाभि मे जीभ घुसा उसे मस्त करते हुए उसने उसकी जीन्स उतार दी & फिर उसके अंडरवेर के उपर से ही उसके लंड को चूम लिया.देवेन के दिल मे जलन की लहर दौड़ गयी.उसका दिल किया कि इसी वक़्त रंभा को खींच विजयंत से अलग करे & अपने कमरे मे ले जाए.उसने अपना सर झटका..वो जो भी कर रही थी उस शख्स की याददाश्त लौटाने की गरज से कर रही थी..आख़िर वो उसकी बहू के अलावा उसकी प्रेमिका भी रही थी..& अगर वो उस इरादे से नही बल्कि अपनी वासना के चलते भी ऐसा कर रही थी तो भी उसके दिल मे इस जलन के पैदा होने का कोई मतलब नही था..जब रंभा की मर्ज़ी ही यही थी तो वो क्या कर सकता था!..,”..आहह..!”,अपने लंड पे 1 गीला & गर्म एहसास होते ही वो चौंक उठा & अपने ख़यालो से बाहर आ नीचे देखा.

जब तक वो सोच मे डूबा था तब तक रंभा ने विजयंत के अंडरवेर को उतार उसे पूरा नंगा कर दिया था & उसके लंड & आंडो को जम के चूसा था.मगर इस सब के दौरान वो देवेन को भूली नही थी & पंजो पे बैठे हुए ही उसने घूम के उसकी पतलून की ज़िप नीचे कर उसके अंडरवेर मे सेउसके खड़े लंड को निकाल अपने मुँह मे भर लिया था.उसके दाए हाथ मे विजयंत का लंड था जिसे वो हिला रही थी & बाए मे देवेन के अंडे.देवेन ने उसके सर को पकड़ उसकी निगाहो से निगाहें मिलाई & रंभा उसके दिल का हाल समझ गयी.उसने लंड को हलक तक उतार लिया & देवेन को मस्ती मे पागल कर दिया.देवेन अपने उपर काबू खोने ही वाला था कि किसी तरह उसने लंड को बाहर खींचा & फ़ौरन उसे उपर उठाया.

“अच्छा नही लगा..-“,उसने देवेन को बाहो मे भर अपनी चूचियो को उसके सीने से दबाते हुए आगे बढ़ने की इजाज़त माँगनी ही चाही थी कि देवेन ने उसके होंठो को अपने होंठो से बंद कर उसे सवाल करने से रोक दिया.

“माफ़ करना,जान..”,उसने उसकी ब्रा के हुक्स खोले तो रंभा ने अपनी बाहे उसके जिस्म से अलग कर ब्रा को उतार दिया,”..पर क्या करू?..मर्द हू ना..अपनी महबूबा को दूसरे के साथ देख के जलन तो होगी ही.पर मेरी छ्चोड़ो & वोही करो जो तुम्हारा दिल कहता है.”,रंभा आगे बढ़ी & उसे बाहो मे कस लिया & उसे पागलो की तरह चूमने लगी..बस जल्द से जल्द ये उलझने सुलझे & फिर वो इस शख्स के साथ सारी ज़िंदगी यू ही उसकी बाहो मे बिताएगी!

“उउन्न्ह..ऊव्वववववव..!”,देवेन आगे झुक उसकी चूचिया चूस रहा था & अपने हाथो से उन मस्त उभारो को दबा रहा था.रंभा मस्ती मे आहे भर रही थी की उसे अपनी गंद पे कुच्छ महसूस हुआ.उसने गर्देन पीछे घुमाई तो देखा कि विजयंत उसकी पॅंटी उतार उसकी गंद चूम रहा था..इसे कुच्छ याद आ रहा था या बस इसके अंदर का मर्द जगा था?..मगर उसने उसका आँचल पकड़ के रोका था..यानी की उसे उनकी पहली रात की कुच्छ तो याद आई थी..अब देखना था कि इस खेल का उसपे क्या असर होता था.

विजयंत उसकी कमर को जकड़े उसकी मोटी गंद को चूमे जा रहा था.उसकी ज़ुबान रंभा के गंद के छेद से लेके गीली चूत तक घूम रही थी.रंभा ने आहे भरते हुए अपना सर पीछे कर लिया & देवेन के सर को जाकड़ अपने सीने पे और दबा दिया.देवेन उसकी चूचियो को मुँह मे भरे जा रहा था.रंभा का जिस्म दोनो मर्दो की हर्कतो से जोश मे पागल हो गया था.उसने अपने जिस्म को दोनो की बाहो मे बिल्कुल ढीला छ्चोड़ दिया था.देवेन की ज़ुबान उसके निपल्स को छेड़ रही थी & विजयंत की ज़ुबान उसके दाने को.रंभा की चूत मे फिर वही तनाव पैदा हो गया था जिसके चरम पे पहुचने के बाद वोही अनोखी खुशी मिलती थी.उसने बाए हाथ से देवेन के बालो को नोचते हुए उसके सर को अपनी चूचियो पे दबाते हुए चूमा & दाए को नीचे ले जाके पीछे की ओर किया & विजयंत के सर को अपनी गंद पे ऐसे दबाया की उसकी ज़ुबान चूत मे और अंदर घुसा गयी.

"आननह..!",उसने सर झटका & ज़ोर से करही.वो दोबारे झाड़ रही थी.कुच्छ पल वो वैसे ही अपने जिस्म को अपने दोनो प्रेमियो की बाहो के सहारे छ्चोड़ खड़ी रही.उसके बाद जब समभली तो उसने विजयंत के बाल पकड़ उसे उठाया & उसे सामने ला देवेन के बाई तरफ खड़ा किया & दोनो को धकेलने लगी.दोनो पीछे हुए तो उसने दोनो को हॉल मे रखे बड़े सोफे पे बिठा दिया.बाया हाथ देवेन के सीने & दाया विजयंत के सीने पे दबाते हुए वो आगे झुकी & पहले देवेन & फिर विजयंत के होंठो को चूमा.दोनो ने उसे पकड़ के सोफे पे अपने बीच गिराने की कोशिश की मगर उसने उनकी कोशिश नाकाम कर दी & सोफे के पीछे चली गयी.

रंभा ने अपना दाया हाथ देवेन के सीने पे रखा & बाया विजयंत मेहरा के सीने पे & उनके सीने के बालो से खेलते हुए सोफे की बॅक के उपर से इस तरह से झुकी उसकी छातियो दोनो मर्दो के बीच लटक गयी.दोनो ने फ़ौरन अपने-2 मुँह उसकी छातियो से लगा दिए.देवेन उसकी दाई चूची चूस रहा था & विजयंत बाई.रंभा ने अपने ससुर को देखा,उसकी हरकतें तो पूरी जोश से भरी हुई थी मगर अभी भी उसके चेहरे पे पुराने भाव नही आए थे.उसके हाथ दोनो मर्दो के सीनो से होते हुए नीचे गये & उनके लंड से खेलने लगे.

दोनो मर्दो ने भी अपना 1-1 हाथ पीछे ले जाके उसकी गंद की 1-1 फाँक को दबोच लिए & मुँह से उसकी चूचियो को & हाथो से गंद को मसलने लगे.रंभा मुस्कुराती हुई आहे बढ़ने लगी.इस मस्ताने खेल मे अब उसे बहुत मज़ा आ रहा था.तभी विजयंत ने उसे चौंका दिया.उसने उसकी चूची से मुँह हटाते हुए उसके जिस्म को पकड़ उसे सोफे की बॅक के उपर से आगे खींचा.रंभा अचानक की गयी इस हरकत से समभाल नही पाई & आगे गिर गयी.उसका मुँह सीधा विजयंत की गोद मे उसके लंड से जा टकराया.विजयंत ने उसकी कमर को पकड़ा & उसकी गंद की दरार मे जीभ फिराते हुए उसकी गंद की छेद मे उंगली अंदर-बाहर करने लगा.देवेन उसे गौर से देख रहा था.शुरू मे उसे लगा था कि विजयंत को सब याद है & वो बस भूलने का नाटक कर रहा है मगर अभी की थोड़ी जुंगलिपने वाली हरकत ने उसकी सोच को ग़लत साबित कर दिया था.रंभा भी हैरत से बाहर आ गयी थी & विजयंत के लंड को चूसने लगी थी.विजयंत ने उसकी कमर को अपनी तरफ किया & उसकी दोनो टाँगो के बीच मुँह घुसा उसकी चूत चाटते हुए उसकी गंद मे उंगली करता रहा.देवेन से यू अलग-थलग रहना बर्दाश्त नही हुआ & फिर वो उसकी महबूबा थी,विजयंत की नही!

उसने फ़ौरन रंभा की बाहे पकड़ उसे खींचा तो उसके मुँह से विजयंत का लंड निकल गया.रंभा मुस्कुराइ & जैसे ही देवेन ने उसके सर को अपनी ओर किया उसने सर झुका के उसके लंड को मुँह मे भर लिया/देवेन आहे भरता उसकी मखमली पीठ और कमर पे अपने बेसब्र हाथ चलाने लगा.अब उस से बर्दाश्त नही हो रहा था.उसे अब रंभा के जिस्म से मिलना ही था.उसने उसके सर को अपनी गोद से उठाया & उसके कंधे पकड़ के खींचा तो विजयंत के मुँह से रंभा की चूत अलग हो गयी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--67

gataank se aage......

"Ye Dr.Yuri Goa me kab se hain?",Rambha car ki khidki se bahar ke nazare ko dekh rahi thi.car Goa ke bhid-bhad vale ilake se bahar nikal aayi thi.

"us insan ke bare me tumhare dil me sawal pe sawal machal rahe hain.hai na?",Deven hansa,"..rambha,yuri 1 neurosurgeon hai.Russia me vo kya karta tha mujhe thik se nahi pata,bas logo se kabhi-kabhar ye suna hai ki vo shayad purane Soviet Sangh yani USSR ki jasoosi agency KGB me kaam karta tha.ab vaha kya hua ki use apna mulk chhod yaha aana pada ye mujhe nahi pata.bas itna janta hu ki,vo 1 kamal ka doctor hai & maine use aaj tak kisi ke marz ko nahi pakadte nahi dekha hai."

"hun.",rambha ne sar ghuma ke Vijayant Mehra ko dekha.vo bas khidki se bahar dekhe ja raha tha.usne rambha ko dekha to rambha muskura di magar uske chehre pe koi bhav nahi aaye.rambha ne sar aage kiya & samne ke raste ko dekhne lagi.kuchh hi der me car deven ke ghar ke ahate me khadi thi.

deven ka ghar koi bungla to nahi tha magar tha kafi bada.deven ne car ahate me laga ke gate band kiya & dicky se rambha ka saman nikal ghar ke andar chala gaya.uske peechhe-2 rambha bhi aage badhi.

Aage badhti Rambha achanak ruk gayi & peechhe ghum ke dekha.Vijayant Mehra uska aanchal pakde khada tha.rambha ghumi to aanchal uske seene se pura hat gaya & uska sleeveless blouse me dhanka seena & gora pet dikhne lage.rambha vijayant ke chehre ko gaur se dekh rahi thi,uski aankhe ab bejan nahi balki uljhan se bhari dikh rahi thi.rambha ne garden ghumayi & Deven ko dekha.uska saman kamre me rakh ke vapas lautne ke baad vo bhi vijayant ki harkat dekh chaunk gaya tha.usne bhi rambha ko dekha & halke se sar hilaya jaise ye keh raha ho ki use bhi kuchh samajh nahi aa raha tha.rambha ne vapas chehra vijayant ki or kiya & uski aankho me aankhe daal di.use zaroor kuchh yaad aaya tha & tabhi usne uska aanchal pakda tha..shayad rambha & uski pehli raat yaad aayi thi use.ye khayal aate hi rambha ke dimagh me bijli kaundhi..Dr.Popov ne kaha tha ki unhe vijayant ko beeti baate yaad dilane ke liye use un baato ke bare me batana chahiye..& agar batane ke bajay jataya jaye to!

Rambha ne 1 qatil muskan apne sasur ki or fenki & ghumte hue kamre me aage deven ki or badhne lagi,is tarah ki uski sari khulti ja rahi thi.deven ab use bhi hairat se dekh raha tha ki tabhi uske dimagh me bijli kaundhi & use apni premika ki harkat ki vajah samajh aa gayi & vo bhi muskurane laga.rambha ab apne dono premiyo ke bilkul beech me khadi thi.vijayant use kuchh pal dekhta raha & fir uske karib aane laga.rambha ke karib pahunch usne uska aanchal chhod diya.vo apni bahu ke bilkul karib khada uski aankho me dekh raha tha.apne chehre pe uski garm sanse mehsus karte hi rambha ko bhi uske sath bitaye palo ki yaad aa gayi & uska dil dhadak utha.ab uska dil deven ka tha magar vijayant ke sath bhi usne kayi khushnuma pal bitaye the.

Vijayant ki aankhe abhi bhi uljhan bhari jaise kuchh samajhne ki koshish karti dikh rahi thi.vo bahut dhire-2 aage jhuk raha tha.rambha ke honth khud ba khud khul gaye the.vo samajh gaye the ki vijayant ke lab unse milne hi vale the & agle hi pal vahi hua.vijayant uske honth chum raha tha & vo uska pura sath de rahi thi.uski aankhe band ho gayi & vo bas apne hotho pe vijayant ke hotho ki lazzat mehsus kiye ja rahi thi.kayi palo baad jab kiss todi & usne aankhe kholi to vijayant ko vaise hi kuchh samajhne ki koshish karte use dekhta paya.vo kuchh karti us se pehle hi 1 jodi hatho ne uski upri baahe tham use pthoda peechhe kiya & fir uske daye kandhe ke upar se 1 sar aage jhuka & deven ke honth uske hotho k eras ko pine lage.rambha ki aankhe fir mund gayi.ghar ki dehleez pe kadam rakhte hue usne socha bhi nahi tha ki yaha mahaul aisa nashila ho jayega.

“hunnnn..!”,usne deven ke honth chhode to vijayant ne fir uske hontho ko apne labo ki giraft me le liya tha.idhar vijayant uske gulabi hotho ko chumte hue uski zuban se zuban lada raha tha & udhar deven uske baalo ko utha uski garden ke pichhle hisse ko chum raha tha.rambha itni si der me hi puri tarah se mast ho gayi thi vijayant ki jibh ko pure josh se chus rahi thi.deven uski garden ko chumte hue neeche ja raha tha.uske tapte honth rambha ki ridh pe chalte hue neeche ja rahe the.rambha ka jism sihar raha tha.deven uski pith ke beechobeech chumta uski kamar tak pahunch gaya tha & dono taraf ke mansal hisso ko dabate hue chume ja raha tha.

Vijayant apne chehre ko ghumata hue uski zuban se kehl raha tha ki rambha ne mehsus kiya ki deven ke hath uski kamar ki baglo se aage aaye & uske pet ko sehlate hue uski kamar me atki sari ko khinch diya.usi waqt vijayant uske hotho ko chhod uske galo & thuddi ko chumne laga.deven uski sari ko uske jism se alag kar chukka tha & uske honth ab rambha ki pith pe upar badhne lage the.vijayant uski garden chumta hua neeche aaya & blouse ke gale me se jhankte uske cleavage ko chuma.rambha ki dhadkane ab bahut tez ho gayi thi.deven uske blouse ki back se dikhti uski pith chum raha tha & vijayant uski chhatiyan.deven thoda & upar badha & vijayant neeche.thodi hi der baad rambha peechhe hui & deven ke chaude seene ke sahare khadi ho gayi.deven uski gudaz baaho ko dabata hua uske honth chum raha tha & vijayant uski kamar ko thame uske pet pe apni zuban fira raha tha.

“uummmmmm..aanngghhhhhhhhhh..!”,rambha ka jism kanp raha tha & usne deven ke hotho se apne hoth khinch liye.vijayant uski nabhi ki gehrayi me apni jibh utare baitha tha & deven uski gardan & daye kandhe ko chume ja raha tha.rambha ki shakl dekh aisa lag raha tha ki vo bahut taklif me hai jabki haqeeqat ye thi ki is waqt to vo khushiyo ke aasman me ud rahi thi.vo dono premiyo ki harkato se pehli baar jhad gayi thi.deven ne pane hath aage kiye & uski kasi chhatiyo ki golaiyo pe apne dono hatho ki 1-1 ungli ko chalane laga.vijayant bhi uske petticoat ke upar se uski gand ki fanko pe apni hatheliya fira raha tha.rambha ne khud ko dono mardo ko bilkul saunp diya tha.vo kuchh bhi nahi kar rahi thi bas unki harkato ka lutf utha rahi thi.

Deven ke hath uski chhatiyo pe ghumne ke baad unke beech aaye & uske blouse ke hooks khol diye.vijayant bhi uski kamar ki dayi taraf lage petticoat ke hooks ko khol raha tha.jab deven ne uski baahe peechhe karte hue uske blouse ko nikala,tab vijayant ne bhi uske aakhiri hook ko khol uske petticoat ko uski kamar se neeche sarka diya.ab rambha pile lace ki bra & panty me thi.vijayant lace ke jhine kapde me se jhankti apni bahu ki chut ko dekh raha tha & deven apni mehbooba ke kade nipples ko bra me nukile ubhar banate hue.rambha apne sasur ki garm sanse panty ke jalidar lace se hoti hui seedhi apni gili chut pe mehsus kar rahi thi.deven uski chhatiyo ke neeche apni hatheliya jama uski gardan & kandho ko chum raha tha & vijayant uski gand ko dabate hue uski panty ke waistband & nabhi ke beech ke pet ke hisse ko.rambha ab zor-2 se aahe le rahi thi.

Vo bechain ho ghumi & apne panjo pe thoda uchak ke apne mehboob ke hotho ko badi shiddat se chuma.neeche baitha vijayant uski is harkat pe chaunka magar agle hi pal uske hoth rambha ki chikni kamar & pith ko chakhne me lag gaye.rambha ne apne besabr hatho se apne aashiq ki kamiz ke buttons khol use uske jism se juda kiya & uske baalo bhare seene ko chumne lagi.uske hath deven ki pith ko upar se neeche tak kharonch rahe the.deven ke seene ko ji bhar ke chumne ke baad vo fir ghumi & vijayant ko upar uthaya & uski t-shirt nikal uske sath bhi vaisa hi bartav kiya.jab vo vijayant ke seene ko chum rahi thi deven uski pith se leke gand tak apne hath chala raha tha.

Rambha vijayant ke seene ko chumte hue neeche uske pet tak pahunch gayi thi & uski nabhi me jibh ghusa use mast karte hue usne uski jeans utar di & fir uske underwear ke upar se hi uske lund ko chum liya.deven ke dil me jalan ki lehar daud gayi.uska dil kiya ki isi waqt rambha ko khinch vijayant se laga kare & apne kamre me le jaye.usne apna sar jhatka..vo job hi kar rahi thi us shakhs ki yaddasht lautaane ki garaj se kar rahi thi..aakhir vo uski bahu ke alawa uski premika bhi rahi thi..& agar vo us irade se nahi balki apni vasna ke chalet bhi aisa kar rahi thi to bhi uske dil me is jalan ke paida hone ka koi matlab nahi tha..jab rambha ki marzi hi yehi thi to vo kya kar sakta tha!..,”..aahhhhh..!”,apne lund pe 1 gila & garm ehsas hote hi vo chaunk utha & apne khayalo se bahar aa neeche dekha.

Jab tak vo soch me dooba tha tab tak rambha ne vijayant ke underwear ko utar use pura nanga kar diya tha & uske lund & ando ko jum ke chusa tha.magar is sab ke dauran vo deven ko bhooli nahi thi & panjo pe baithe hue hi usne ghum ke uski patlun ki zip neeche kar uske underwear me seuske khade lund ko nikal apne munh me bhar liya tha.uske daye hath me vijayant ka lund tha jise vo hila rahi thi & baye me deven ke ande.deven ne uske sar ko pakad uski nigaho se nigahen milayi & rambha uske dil ka haal samajh gayi.usne lund ko halak tak utar liya & deven ko masti me pagal kar diya.deven apne upar kabu khone hi vala tha ki kisi tarah usne lund ko bahar khincha & fauran use upar uthaya.

“achha nahi lag..-“,usne deven ko baaho me bhar apni choochiyo ko uske seene se dabate hue aage badhne ki ijazat mangni hi chahi thi ki deven ne uske hotho ko apne hotho se band kar use sawal karne se rok diya.

“maaf karna,jaan..”,usne uski bra ke hooks khole to rambha ne apni baahe uske jism se alag kar bra ko utar diya,”..par kya karu?..mard hu na..apni mehbooba ko dusre ke sath dekh ke jalan to hogi hi.par meri chhodo & vohi karo jo tumhara dil kehta hai.”,rambha aage badhi & use baaho me kas liya & use paglo ki tarah chumne lagi..bas jald se jald ye uljhane suljhe & fir vo is shakhs ke sath sari zindagi yu hi uski baaho me bitayegi!

“uunnhhhhhh..oowwwwwww..!”,deven aage jhuk uski choochiya chus raha tha & apne hatho se un mast ubharo ko daba raha tha.rambha masti me aahe bhar rahi thi ki use apni gand pe kuchh mehsus hua.usne garden peechhe ghumayi to dekha ki vijayant uski panty utar uski gand chum raha tha..ise kuchh yaad aa raha tha ya bas iske andar ka mard jaga tha?..magar usne uska aanchal pakad ke roka tha..yani ki use unki pehli raat ki kuchh to yaad aayi thi..ab dekhna tha ki is khel ka uspe kya asar hota tha.

vijayant uski kamar ko jakde uski moti gand ko chume ja raha tha.uski zuban rambha ke gand ke chhed se leke gili chut tak ghum rahi thi.rambha ne aahe bharte hue apna sar peechhe kar liya & deven ke sar ko jakad apne seene pe & daba diya.deven uski chhatiyo ko munh me bhare ja raha tha.rambha ka jism dono mardo ki harkato se josh me pagal ho gaya tha.usne apne jism ko dono ki baaho me bilkul dhila chhod diya tha.deven ki zuban uske nipples ko chhed rahi thi & vijayant ki zuban uske dane ko.rambha ki chut me fir vahi tanav paida ho gaya tha jiske charam pe pahuchane ke baad vohi anokhio khushi milti thi.usne baye haths e deven ke baalo ko nochte hue uske sar ko apni choochiyo pe dabate hue chuma & daye ko neeche le jake peechhe ki or kiya & vijayant ke sar ko apnmi gand pe aise dabaya ki uski zuban chut me & andar ghusa gayi.

"aannhhhhhh..!",usne sar jhatka & zor se karahi.vo dobare jhad rahi thi.kuchh pal vo vaise hi apne jism ko apne dono premiyo ki baaho ke sahare chhod khadi rahi.uske baad jab samabhli to usne vijayant ke baal pakad use uthaya & use samne la deven ke bayi taraf khada kiya & dono ko dhakelne lagi.dono peechhe hue to usne dono ko hall me rakhe bade sofe pe bitha diya.baya hath deven ke seene & daya vijayant ke seene pe dabate hue vo aage jhuki & pehle deven & fir vijayant ke hotho ko chuma.dono ne use pakad ke sofe pe apne beech girane ki koshsih ki magar usne unki koshish nakaam kar di & sofe ke peechhe chali gayi.

Rambha ne apna daya hath Deven ke seene pe rakha & baya Vijayant Mehra ke seene pe & unke seene ke balo se khelte hue sofe ki back ke upar se is tarah se jhuki uski chhatiya dono mardo ke beech latak gayi.dono ne fauran apne-2 munh uski chhatiyo se laga diye.deven uski dayi choochi chus raha tha & vijayant bayi.rambha ne apne sasur ko dekha,suki harkaten to puri josh se bhari hui thi magar abhi bhi uske chehre pe purane bhav nahi aaye the.uske hath dono mardo ke seeno se hote hue neeche gaye & unke lundo se khelne lage.

dono mardo ne bhi apna 1-1 hath peechhe le jake uski gand ki 1-1 fank ko daboch liye & munh se uski choochiyo ko & hatho se gand ko maslane lage.rambha muskurati hui aahe bahrne lagi.is mastane khel me ab use bahut maza aa raha tha.tabhi vijayant ne use chaunka diya.usne uski choochi se munh hatate hue uske jism ko pakad use sofe ki back ke upar se aage khincha.rambha achanak ki gayi is harkat se samabhal nahi payi & aage gir gayi.uska munh seedha vijayant ki god me uske lund se ja takraya.vijayant ne uski kamar ko pakda & uski gand ki darar me jibh firate hue uski gand ki chhed me ungli andar-bahar karne laga.deven use gaur se dekh raha tha.shuru me use laga tha ki vijayant ko sab yaad hai & vo bas bhulne ka natak kar raha hai magar abhi ki thodi junglipane vali harkat ne uski soch ko galat sabit kar diya tha.rambha bhi hairat se bahar aa gayi thi & vijayant ke lund ko chusne lagi thi.vijayant ne uski kamar ko apni taraf kiya & uski dono tango ke beech munh ghusa uski chut chatate hue uski gand me ungli karta raha.deven se yu alag-thalag rehna bardasht nahi hua & fir vo uski mehbooba thi,vijayant ki nahi!

usne fauran rambha ki baahe pakad use khincha to uske munh se vijayant ka lund nikal gaya.rambha muskurayi & jaise hi deven ne uske sar ko apni or kiya usne sar jhuka ke uske lund ko munh me bhar liya/deven aahe bharta uski makihmali pith & kara pe apne besabr hath chalane laga.ab us se bardasht nahi ho raha tha.use ab rambha ke jism se milna hi tha.usne uske sar ko apni god se uthaya & uske kandhe pakad ke khincha to vijayant ke munh se rambha ki chut alag ho gayi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--68

गतान्क से आगे......

देवेन ने उसकी कमर थाम उसे अपनी गोद मे अपने लंड पे बिठाया तो रंभा ने भी दाया हाथ पीछे ले जा उसके लंड को थाम उसे अपनी चूत का रास्ता दिखाया.रंभा उसके कंधो पे कोहनिया टीका उसे चूमते हुए उसके लंड पे कूदने लगी.देवेन भी उसकी कमर के मांसल हिस्सो को दबाते हुए,उसकी पीठ को जकड़ते हुए उसकी किस का जवाब दे रहा था.उसने रंभा की गर्दन को जम के चूम & फिर अपने होंठ उसकी चूचियो से लगा दिए.

"एयेयीयैआइयीईयेयीईयी..!",रंभा चीखी तो देवेन ने भी चौंक के उसके सीने से सर उठाया.कब विजयंत सोफे से उठ रंभा के पीछे आ गया था & उसकी गंद मे अपना लंड घुसा दिया था उसे पता ही नही चला था.देवेन की आँखो मे गुस्सा उतर आया & वो विजयंत को परे धकेलने ही वाला था कि रंभा ने आँखो से इशारा कर उसे रोका & उसे चूमा.विजयंत आधा लंड अंदर घुसा बहुत धीरे-2 उसकी गंद मार रहा था.रंभा ने अपने दाए कंधे के उपर से गर्दन घुमाई तो वो आगे झुका & उसके होंठ चूमने लगा.

"उउंम..मैं कौन हू,डॅड..आपको याद है?",रंभा ने दाई बाँह उसकी गर्दन मे डाल दी.वो मस्ती मे पागल हो गयी थी.विजयंत ने उसके होंठो को छ्चोड़ा & उसे देखने लगा जैसे याद करने की कोशिश कर रहा हो कि वो कौन है.उसके माथे पे शिकन पड़ती जा रही थी & रंभा को लगा कि कही वो दिमाग़ पे ज़्यादा ज़ोर ना डाल ले & उसने दोबारा उसके सर को नीचे झुका उसके होंठो को चूम लिया.विजयंत & देवेन दोनो ही उसकी चूचियाँ मसल रहे थे & जब 1 उसके होंठ छ्चोड़ता तो दूसरा चूमने लगता.

"आननह..!",रंभा फिर चीखी.विजयंत ने लंड & अंदर धकेल दिया था.इतनी अंदर तक उसकी गंद मे कुच्छ भी नही घुसा था & उसे दर्द हो रहा था.उसकी कमर थामे विजयंत हल्के-2 उसकी गंद मार रहा था & वो चूत मे घुसे देवेन के लंड पे उच्छल रही थी.उसकी आँखे बंद हो गयी थी & जिस्म मे जैसे जान ही नही थी बस मस्ती ही मस्ती थी.वो झाडे जा रही थी मगर दोनो मर्द रुकने का नाम ही नही ले रहे थे.देवेन ने उसके सीने के उभारो को छूने के बाद सर उठाया तो महबूबा की हालत समझ गया.

"विजयंत,रूको.",उसने बड़ी सायंत मगर हुक्म देती आवाज़ मे विजयंत से कहा.विजयंत रुक गया,"..लंड बाहर खिँचो.",उसने वैसा ही किया.रंभा आश्चर्य से देख रही थी.दुनिया भर को हुक्म देने वाला विजयंत देवेन के हुक्म कैसे मान रहा था!देवेन ने रंभा की कमर को बाहो मे जकड़ा & उसे थाम के खड़ा हुआ & फिर सोफे पे लिटा के उसके उपर आ उसे चूमते हुए चोदने लगा.विजयंत दोनो को खड़ा देख रहा था.

"उउंम..ऊव्ववव..",देवेन का लंड उसकी कोख पे चोट कर रहा था & वो मस्ती मे उसकी पीठ नोच रही थी,"..सुनिए..बुरा मत मानिए प्लीज़..पर इन्हे आने दीजिए ना!..मुझे लगता है इन्हे इस से...आहह..कुच्छ याद आ जाए..उउन्न्ह..!",विजयंत के लंड ने उसे कगार के उपर से धकेल दिया था & वो फिर मस्ती की खुमारी मे खो गयी थी.

देवेन का दिल तो नही कर रहा था मगर रंभा की बात सही थी लेकिन उसने सोच लिया था कि इस बार वो उसे उसके जिस्म के साथ जुंगली पने से नही खेलने देगा.उसने रंभा को दाई करवट पे घुमाया & उसके पीछे आया & बाई बाँह उसकी कमर पे डाल उसके पेट को सहलाते हुए उसकी गर्दन चूमने लगा.वो भी बाया हाथ पीछे ले जा मुस्कुराते हुए उसके बालो से खेलने लगी.देवेन उसकी गर्दन चूमते हुए उसकी पीठ पे आया & उसे पेट के बल लिटा उसकी चिकनी पीठ को अपने होंठो से तपाने लगा.रंभा सोफे मे मुँह च्चिपाए चिहुनक रही थी.देवेन उसकी पीठ चूमते हुए नीचे उसकी गंद तक आया & उसकी फांको को फैला उसकी गंद के छेद को चूमने लगा.रंभा उसका इरादा भाँप गयी,"..उउन्न्ह..नही..वाहा बहुत दर्द होता है..ऊहह..!",देवेन अपनी उंगली से उसकी गंद मारने लगा था.रंभा आहे भरती अपनी कमर उचका रही थी.

"आननह..!",देवेन ने उसकी कमर थाम उसकी गंद को हवा मे उठाया & अगले ही पल उसका आधा लंड उसकी महबूबा की गंद मे था.इस बार वो उसके इस नाज़ुक अंग के साथ विजयंत को कोई बेरेहमी करने का मौका नही देना चाहता था.लंड गंद मे धंसाए बिना हिलाए वो उसके उपर लेट गया & उसकी गर्दन & बाल चूमने लगा.जब रंभा थोड़ा संभली तो उसके सीने के नीचे हाथ घुसा उसकी चूचियो को बहुत हल्के-2 दबा के उसने उसकी गंद मारना शुरू किया.रंभा अब आहे भर रही थी & उसके हाथ उसकी बेचैनी की कहानी कहते सोफे के गद्दे मे धँस रहे थे.देवेन ने रंभा के जिस्म को अपनी बाहो मे कसा & करवट ली & अगले पल वो उसके उपर लेटी थी & वो उसके नीचे.

"आओ,विजयंत.",अपने दिल पे पत्थर रख देवेन ने विजयंत को अपनी प्रेमिका की चूत चोदने का न्योता दिया.विजयंत आगे बढ़ा & सोफे पे दोनो के पैरो के पास घुटनो पे बैठ गया.रंभा का दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था.विजयंत ने उसकी चूत मे उंगली घसाई तो वो चिहुनक उठी & उसके बदन मे सिहरन दौड़ गयी.उसकी चूत बहुत गीली थी.विजयंत ने उसकी टाँगे फैलाई & आगे झुक के लंड को उसकी चूत मे घुसाया & उसके उपर झुकने लगा.थोड़ी देर बाद लंड जड तक चूत मे था & वो उसके उपर झुका उसकी आँखो मे देख रहा था.रंभा ने अपने हाथ उसके मज़बूत उपरी बाजुओ पे लगाए & उचक के उसके होंठ चूमे तो विजयंत ने कमर हिला उसकी चुदाई शुरू कर दी.रंभा उसके होंठ छ्चोड़ नीचे हुई & आँखे बंद कर देवेन के सीने पे लेटी दोनो लंड का मज़ा लेने लगी.

विजयंत की आँखे अभी भी उसे जैसे पहचानने की कोशिश कर रही थी.उसका दिल,उसका दिमाग़ शायद उसे नही पहचानते थे मगर उसके जिस्म को तो रंभा के जिस्म से मिलते ही मानो सब याद आ गया था.उसका लंड उसकी चूत की दीवारो को रगड़ते हुए उसकी कोख पे चोट कर रहा था.रंभा ने अपना सर देवेन के दाए कंधे पे रख दिया था & वो कभी उसे चूमती तो कभी उपर झुके विजयंत को.अब तीनो के जिस्म मस्ती के आसमान मे बहुत ऊँचे उड़ रहे थे.दोनो मर्दो ने भी बहुत देर से अपने उपर काबू रखा हुआ था & अब बात उनके बस के भी बाहर थी.वो भी अब बस जल्द से जल्द अपनी मंज़िल पे पहुचना चाहते थे.देवेन उसकी कमर थामे नीचे से अपनी कमर उचका के आधे लंड से उसकी गंद मार रहा था & उसके उपर झुका मस्ती की शिद्दत से दाँत पिसता विजयंत उसकी चूत मे बहुत तेज़ धक्के लगा रहा था.रंभा को अब कुच्छ होश नही था.पिच्छले कुच्छ पलो मे वो कितनी बार झड़ी थी उसे कुच्छ होश ही नही था बल्कि उसे तो ये लग रहा था कि वो1 लंबी झदान है जो ख़त्म ही नही हो रही है.

"याआह्ह्ह्ह्ह..!",देवेन करहा & रंभा ने गंद मे उसके गर्म वीर्य की बौच्चरें महसूस की & उसकी चूत ने भी जवाब दे दिया.

"आननह..!",उसने आह भरी & उसका जिस्म अकड़ सा गया & वो जिस्म को कमान की तरह मोदते झड़ने लगी.उसकी चूत विजयंत के लंड पे सिकुड़ने-फैलने लगी & उस वक़्त विजयंत के दिमाग़ मे जैसे 1 धमाका सा हुआ.उसके ज़हन मे काई तस्वीरे 1 साथ कौंध गयी.हर तस्वीर मे वो लड़की जिसकी चूत मे वो लंड धंसाए था उस से चिपकी मदहोश हो रही थी & वो उसके साथ अपने जोश को शांत कर रहा था.

"रंभा..!",वो चीखा & उसने रंभा की चूत मे अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया.रंभा हैरान होके उसे देखने लगी & देवेन भी..क्या उसकी याददाश्त वापस आ गयी थी?विजयंत उसके उपर झुका हुआ हाँफ रहा था,"..तुम रंभा हो.",उसे अभी भी भरोसा नही था.

"हां,मैं रंभा हू.",रंभा खुश हो गयी & उसका चेहरा थामा,"..क्या लगती हू मैं आपकी बताइए?",विजयंत सोचने लगा.उसके माथे पे पहले हल्की शिकन पड़ी मगर धीरे-2 वो गहरी होने लगी.उसके चेहरे पे दर्द के भाव आने लगे,"बस..नही याद आता तो छ्चोड़ दीजिए.",रंभा ने उसे खींच अपने सीने पे उसका सर रख लिया & सहलाने लगी.

कुच्छ पॅलो बाद उसने उसके सर को उठाया & अपने उपर से उठने का इशारा किया तो विजयंत ने उसकी चूत से लंड बाहर खींचा & खड़ा हो गया.रंभा ने अपनी गंद से देवेन का सिकुदा लंड बाहर निकाला & सोफे से नीचे उतरी.देवेन भी उसके पीछे-2 उठा & रंभा को गोद मे उठा लिया & अपने कमरे की ओर बढ़ गया.उनके पीछे-2 विजयंत भी आगे बढ़ा.

"बस,अब ये आराम करेगी,विजयंत.ठीक है?",कमरे की दहलीज़ पे वो रुका & विजयंत से मुखातिब हुआ.विजयंत ने हां मे सर हिलाया,"..& इस कमरे मे तुम इसे नही चोदोगे.ओके?..यहा के अलावा कही भी..पर इस कमरे मे नही..हूँ..अब जाओ..कपड़े पहन अपने कमरे मे आराम करो.मैं कुच्छ देर बाद हम खाना खाएँगे.",विजयंत ने समझने का इशारा करते हुए सर हिलाया & अपने कमरे मे चला गया.

"थोड़ी देर मेरे पास रहिए.",देवेन रंभा को बिस्तर पे लिटा के वाहा से जा रहा था कि उसने उसे रोक लिया.वो उसके बगल मे लेट गया तो रंभा उसके पहलू मे आ गयी,"..इस कमरे मे उन्हे क्यू नही आने दिया?",उसकी आँखो मे शरारत थी,चुदाई के दौरान भी देवेन की उलझन उस से छिपि नही थी & उसे इस वक़्त बहुत प्यार आ रहा था अपने प्रेमी पे.

"तुम्हे नही पता क्या?..कोई और हालात होते तो..",उसने बात अधूरी छ्चोड़ दी.

"तो?",रंभा ने उसके निपल को खरोंचा.

"तो मैं यहा से बाहर चला जाता.तुमपे अपना ज़ोर चलाने की हिमाकत तो कभी नही करूँगा मगर इस तरह गैर की बाहो मे देखना मेरे लिए बहुत मुश्किल होता है."

"ओह!देवेन..",रंभा ने उसे पीठ के बल लिटाया,"..आइ'म सॉरी!..मेरा यकीन मानिए..बस 1 बार ये उलझने ख़त्म हो जाएँ..फिर इस दिल,इस बदन को आपके सिवा किसी & को सौंपने के बजाय मर जाना पसंद करूँगी.",

"चुप!",देवेन ने उसके होंठो पे अपना हाथ रखा,"..ऐसी मनहूस बात आगे मत करना.मुझे पूरा भरोसा है तुमपे,रंभा.मैं तो बस अपने दिल का हाल कह रहा था.",उसने उसे अपने आगोश मे भर लिया,"..चलो अब सो जाओ.बहुत थकाया है तुम्हे हमने.",वो प्यार से उसे थपकीया देते हुए सुलाने लगा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--68

gataank se aage......

deven ne uski kamar tham use apni god me apne lund pe bithaya to rambha ne bhi daya hath peechhe le ja uske lund ko tham use apni chut ka rasta dikhaya.rambha uske kandho pe kohniya tika use chumte hue uske lund pe kudne lagi.deven bhi uski kamar ke mansal hisso ko dabate hue,uski pith ko jakadte hue uski kiss ka jawab de raha tha.usne rambha ki gardan ko jum ke chum & fir apne honth uski choochiyo se laga diye.

"AAIIYYYYEEEEEE..!",rambha chikhi to deven ne bhi chaunk ke uske seene se sar uthaya.kab vijayant sofe se uth rambha ke peechhe aa gaya tha & uski gand me apna lund ghusa diya tha use pata hi nahi chala tha.deven ki aankho me gussa utar aaya & vo vijayant ko pare dhakelne hi wala tha ki rambha ne aankho se ishara kar use roka & use chuma.vijayant aadha lund andar ghsua bahut dhire-2 uski gand maar raha tha.rambha ne apne daye kandhe ke uapr se gardan ghumayi to vo aage jhuka & uske honth chumne laga.

"uumm..main kaun hu,dada..aapko yaad hai?",rambha ne dayi banh uski gardan me daal di.vo masti me pagal ho gayi thi.vijayant ne uske hotho ko chhoda & use dekhne laga jaise yaad karne ki koshish kar raha ho ki vo kaun hai.uske mathe pe shikan padti ja rahi thi & rambha ko laga ki kahi vo dimagh pe zyada zor na daal le & usne dobara uske sar ko neeche jhuka uske htoho ko chum liya.vijayant & deven dono hi uski choochiyan masal rahe the & jab 1 uske honth chhodta to dusra chumne lagta.

"AANNHHHHH..!",rambha fir chikhi.vijayant ne lund & andar dhakel diya tha.itni andar tak uski gand me kuchh bhi nahi ghsua tha & use dard ho raha tha.uski kamar thame vijayant halke-2 uski gand maar raha tha & vo chut me ghuse deven ke lund pe uchhal rahi thi.uski aankhe band ho gayi thi & jism me jaise jaan hi nahi thi bas masti hi masti thi.vo jhade ja rahi thi magar dono mard rukne ka naam hi nahi le rahe the.deven ne uske seene ke ubharo ko chune ke baad sar utahya to mehbooba ki halat samajh gaya.

"vijayant,ruko.",usne badi sayant magar hukm deti aavaz me vijayant se kaha.vijayant ruk gaya,"..lund bahar khincho.",usne vaisa hi kiya.rambha aashcharya se dekh rahi thi.duniya bhar ko hukm dene vala vijayant deven ke hukm kaise maan raha tha!deven ne rambha ki kamar ko baaho me jakda & use tham ke khada hua & fir sofe pe lita ke uske upar aa use chumte hue chodne laga.vijayant dono ko khada dekh raha tha.

"uumm..oowwww..",deven ka lund uski kokh pe chot kar raha tha & vo masti me uski pith noch rahi thi,"..suniye..bura mat maniye please..par inhe aane dijiye na!..mujhe lagta hai inhe is se...aahhhhh..kuchh yaad aa jaye..uunnhhhhhh..!",vijayant ke lund ne use kagar ke upar se dhakel diya tha & vo fir masti ki khumari me kho gayi thi.

deven ka dil to nahi kar raha tha magar rambha ki baat sahi thi lekin usne soch liya tha ki is baar vo use uske jism ke sath jungli pane se nahi khelne dega.usne rambha ko dayi karwat pe ghumaya & uske peechhe aaya & bayi banh uski kamar pe daal uske pet ko sehlate hue uski gardan chumne laga.vo bhi baya hath peechhe le ja muskurate hue uske baalo se khelne lagi.deven uski gardan chumte hue uski pith pe aaya & use pet ke bal lita uski chikni pith ko apne hotho se tapaane laga.rambha sofe me munh chhipaye chihunk rahi thi.deven uski pith chumte hu neeche uski gand tak aaya & uski fanko ko faila uski gand ke chhed ko chumne laga.rambha uska irada bhanp gayi,"..uunnhhhh..nahi..vaha bahut dard hota hai..oohhhhh..!",deven apni ungli se uski gand marne laga tha.rambha aahe bharti apni kamar uchka rahi thi.

"AANNHHHHH..!",deven ne uski kamar tham uski gand ko hawa me uthaya & agle hi pal uska aadha lund uski mehbooba ki gand me tha.is baar vo suke is nazuk ang ke sath vijayant ko koi berehmi karne ka mauka nahi dena chahta tha.lund gand me dhansaye bina hilaye vo uske upar let gaya & uski gardan & baal chumne laga.jab rambha thoda sambhli to uske seene ke neeche hath ghusa uski chhatiyo ko bahut halke-2 daba ke usne uski gand marna shuru kiya.rambha ab aahe bhar rahi thi & uske hath uski bechaini ki kahani kehte sofe ke gadde me dhans rahe the.deven ne rambha ke jism ko apni baaho me kasa & karwat li & agle pal vo uske upar leti thi & vo uske neeche.

"aao,vijayant.",apne dil pe patthar rakh deven ne vijayant ko apni premika ki chut chodne ka nyota diya.vijayant aage badha & sofe pe dono ke pairo ke paas ghutno pe baith gaya.rambha ka dil bahut zoro se dhadak raha tha.vijayant ne uski chut me ungli ghsayi to vo chihunk uthi & uske badan me sihran daud gayi.uski chut bahut gili thi.vijayant ne uski tange failayi & aage jhuk ke l;und ko uski chut me ghusaya & uske upar jhukne laga.thodi der baad lund jud tak chut me tha & vo uske upar jhuka uski aankho me dekh raha tha.rambha ne apne hath uske mazbut upri bazuo pe lagaye & uchak ke uske honth chume to vijayant ne kamar hila uski chudai shuru kar di.rambha uske honth chhod neeche hui & anakhe band kar deven ke seene pe leti dono lundo ka maza lene lagi.

vijayant ki aankhe abhi bhi use jaise pehchanane ki koshish kar rahi thi.uska dil,uska dimagh shayad use nahi pehchante the magar uske jism ko to rambha ke jism se milte hi mano sab yaad aa gaya tha.uska lund uski chut ki deewaro ko ragadte hue uski kokh pe chot kar raha tha.rambha ne apna sar deven ke daye kandhe pe rakh diya tha & vo kabhi use chumti to kabhi upar jhuke vijayant ko.ab teeno ke jism masti ke aasman me bahut oonche ud rahe the.dono mardo ne bhi bahut der se apne upar kabu rakha hua tha & ab baat unke bas ke bhi bahar thi.vo bhi ab bas jald se jald apni manzil pe pahuchana chahate the.deven uski kamar thame neeche se apni kamar uchka ke aadhe lund se uski gand maar raha tha & uske uapr jhuka masti ki shiddat se dant pista vijayant uski chut me bahut tez dhakke laga raha tha.rambha ko ab kuchh hosh nahi tha.pichhle kuchh palo me vo kitni baar jhadi thi use kuchh hosh hi nahi tha balki use to ye lag raha tha ki vo1 lambi jhadan hai jo khatm hi nahi ho rahi hai.

"yaaaahhhhh..!",deven karaha & rambha ne gand me uske garm virya ki bauchharen mehsus ki & uski chut ne bhi jawab de diya.

"aannhhhhhhhhh..!",usne aah bhari & uska jism akad sa gaya & vo jism ko kaman ki tarah modte jhadne lagi.uski chut vijayant ke lund pe sikudne-failnae lagi & us waqt vijayant ke dimagh me jaise 1 dhamaka sa hua.uske zehan me kayi tasveere 1 sath kaundh gayi.har tasveer me vo ladki jsiki chut me vo lund dhansaye tha us se chipki madhosh ho rahi thi & vo uske sath apne josh ko shant kar raha tha.

"rambha..!",vo chikha & usne rambha ki chut me apna garm virya chod diya.rambha hairan hoke use dekhne lagi & deven bhi..kya uski yaaddasht vapas aa gayi thi?vijayant uske upar jhuka hua hanf raha tha,"..tum rambha ho.",use abhi bhi bharosa nahi tha.

"haan,main rambha hu.",rambha khush ho gayi & uska chhera thama,"..kya lagti hu main aapki bataiye?",vijayant sochne laga.uske mathe pe pehle halki shikan padi magar dhire-2 vo gehri hone lagi.uske chehre pe dard ke bhav aane lage,"bas..nahi yaad aata to chhod dijiye.",rambha ne use khinch apne seene pe uska sar rakh liya & sehlane lagi.

kuchh palo baad usne uske sar ko uthaya & apne uapr se uthne ka ishara kiya to vijayant ne uski chut se lund bahar khincha & khada ho gaya.rambha ne apni gand se deven ka sikuda lund bahar nikala & sofe se neeche utri.deven bhi uske peechhe-2 utha & rambha ko god me utha liya & apne kamre ki or badh gaya.unke peechhe-2 vijayant bhi aage badha.

"bas,ab ye aaram karegi,vijayant.thik hai?",kamre ki dehleez pe vo ruka & vijayant se mukhatib hua.vijayant ne haan me sar hilaya,"..& is kamre me tum ise nahi chodoge.ok?..yaha ke alawa kahi bhi..par is kamre me nahi..hun..ab jao..kapde pehan pane kamre me aaram karo.main kuchh der baad hum khana khayenge.",vijayant ne samajhne ka ishara karte hue sar hilaya & apne kamre me chala gaya.

"thodi der mere paas rahiye.",deven rambha ko bistar pe lita ke vaha se ja raha tha ki usne use rok liya.vo uske bagal me let gaya to rambha uske pehlu me aa gayi,"..is kamre me unhe kyu nahi aane diya?",uski aankho me shararat thi,chudai ke dauran bhi deven ki uljhan us se chhipi nahi thi & use is waqt bahut pyar aa raha tha apne premi pe.

"tumhe nahi pata kya?..koi & halaat hote to..",usne baat adhuri chhod di.

"to?",rambha ne uske nipple ko kharoncha.

"to main yaha se bahar chala jata.tumpe apna zor chalane ki himakat to kabhi nahi karunga magar is tarah gair ki baaho me dekhna mere liye bahut mushkil hota hai."

"oh!deven..",rambha ne use pith ke bal litaya,"..i'm sorry!..mera yakin maniye..bas 1 baar ye uljhane khatm ho jayen..fir is dil,is badan ko aapke siwa kisi & ko saunpne ke bajay mar jana pasand karungi.",

"chup!",deven ne uske htoho pe apna hath rakha,"..aisi manhus baat aage mat karna.mujhe pura bharosa hai tumpe,rambha.main to bas apne dil ka haal keh raha tha.",usne use apne agosh me bhar liya,"..chalo ab so jao.bahut thakaya hai tumhe humne.",vo pyar se use thapkiya dete hue sulane laga.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--69

गतान्क से आगे......

प्रणव की समझ मे नही आ रहा था कि रंभा आख़िर अचानक इस तरह कहा चली गयी थी.रीता ने भी सवेरे नाश्ते के दौरान उसकी & शिप्रा की मौजूदगी मे समीर से जानने की कोशिश की थी मगर उसने टाल दिया था.1 बात और उसे परेशान कर रही थी.उसकी सास ने उस से अपने बेटे की शिकायत की थी कि आजकल वो उसपे भी ध्यान नही देता मगर नाश्ते की मेज़ पे तो समीर का रवैयय्या ऐसा बिल्कुल भी नही था.....तो क्या रीता ने झूठ बोला था मगर उसे झूठ बोलने की क्या ज़रूरत थी?

अब उसे जल्द से जल्द समीर को रास्ते से हटाना था & रंभा को मोहरा बना ट्रस्ट ग्रूप को अपने शिकंजे मे जकड़ना था.शाह के साथ मिलके उसने तय कर लिया था कि समीर को मारना ही होगा पर अब ये सोचना था कि वो उसे कैसे मारे कि समीर की मा & बेहन को ज़रा भी शक़ ना हो & वो वैसे ही उसपे भरोसा करती रहें & सबसे ज़रूरी बात कि समीर की मौत ऐसी हो की क़ानून को उसकी साज़िशो की भनक भी ना लगे.

इधर अपने कॅबिन मे बैठा प्रणव अपने ख़तरनाक मंसूबो के बारे मे सोच रहा था उधर सोनम अपनी सहेली से फोन पे बात कर रही थी,"तेरे मना करने के बावजूद समीर तुझे ढूंड रहा है.कल शाम अपने ऑफीस के फोन से उसने किसी मोहन को फोन किया था.."

"बलबीर मोहन.जानती हू उस आदमी को.उसने क्या बोला?"

"उसने समीर को अपने दफ़्तर या यहा हमारे दफ़्तर मिलने को कहा.वो फोन पे इस बारे मे ज़्यादा बात करना नही चाहता था."

"हूँ.फिर कहा मिल रहे हैं दोनो?"

"अभी वो मोहन हमारे दफ़्तर पहुचा है & समीर ने उसे सीधा अपने कॅबिन मे बुलाया है."

"अच्छा.सुन,तू ज़्यादा ख़तरा मत मोल लेना.उनकी बाते सुनने की भी ज़रूरत नही.ठीक है?"

"अच्छा."

"& सोनम,अगर ज़्यादा परेशानी महसूस हो तो इस नौकरी को लात मारने मे हिचकना नही.मैं हू ना!तुझे कोई तकलीफ़ नही होने दूँगी."

"तू भी ना यार.दोस्ती मे तकलीफ़ कैसी!",दोनो सहेलियो ने कुच्छ और बाते की & फिर फोन काट दिया.

"क्या हुआ?..किस सोच मे डूबी हो?",रंभा ने अभी-2 दोनो मर्दो के साथ नाश्ता ख़त्म किया था & रसोई मे ही खड़ी हो सोनम से फोन पे बाते कर रही थी.देवेन ने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया था & उसके बॉल चूम रहा था.रंभा ने उसे सोनम से हुई बात के बारे मे बताया,"..अच्छा,बलबीर मोहन के गोआ पहुँचते ही मैं उस से मुलाकात करता हू."

"नही.उसकी नौबत ही नही आएगी.",रंभा घूमी & देवेन को बाहो मे भर उसके सीने पे सर रख दिया.

"अच्छा.क्या करोगी?",देवेन उसके बालो मे उंगलिया फिरा रहा था.

"जब कर लूँगी तो बता दूँगी..ये क्या?",उसने उसके कपड़ो पे नज़र डाली,"..कहा की तय्यारि है?..& मुझे साथ नही ले जा रहे?"

"नही.मैं बीसेसर गोबिंद नाम की मच्चली को जाल मे फँसाने के लिए चारा डालने जा रहा हू."

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दोपहर 2 बजे देवेन पॅनजिम मे गोआ के फॉरिनर्स रेजिस्ट्रेशन ऑफीस के बाहर अपनी कार लगा रहा था.इमारत के बाहर केयी विदेशी घूम रहे थे & उनका काम करने का भरोसा दिलाते कुच्छ सच्चे,कुच्छ झूठे दलाल भी.देवेन इमारत के बाहर खड़ा उसके मेन गेट को देख रहा था.वक़्त हो गया था.उसे जिस से मिलना था वो बस अंदर से निकलने ही वाला था,या यू कहा जाए की उसकी कार अंदर से निकलने ही वाली थी.कोई 5 मिनिट बाद 1 सफेद मारुति आल्टो अंदर से निकली & देवेन ने अपनी कार उसके पीछे लगा दी.वो आल्टो पॅनजिम की सड़को पे भागी जा रही थी.देवेन समझ गया था कि वो डोना पॉला की ओर जा रहा था.

कुच्छ देर बाद देवेन डोना पॉला के 1 बीच शॅक के बाहर अपनी कार मे बैठा अपनी दूसरी सिगरेट ख़त्म कर रहा था.सिगरेट ख़त्म होते ही वो कार से उतरा & शॅक के दरवाज़े को खटखटाने लगा.2-3 मिनिट बाद 1 गोरी विदेशी लड़की ने दरवाज़ा तोड़ा सा खोला,"यस?..वॉट डू यू वॉंट?",देवेन ने देखा कि लड़की बाए हाथ से दरवाज़े को पकड़े थी & दाए से सीने पे कोई कपड़ा दबाए थी.उसे समझते देर नही लगी कि लड़की नंगी थी & उस कपड़े से अपने सीने को ढाकी थी.

"आइ वॉंट टू मीट दा गाइ यू'रे फक्किंग,सिनॉरीटा!",देवेन ने दरवाज़े को ज़ोर से धकेला & अंदर घुसा गया.वो लड़की चीखती उसपे झपटी मगर उसने उसका हाथ पकड़ उसे घुमाया & उसकी दाई बाँह को उसके जिस्म के पीछे जाकड़ लिया & अपनी बाई बाँह से उसकी गर्दन दबोच ली,"आइ'म नोट हियर तो हर्ट यू,ओके?",लड़की के सीने पे दबा कपड़ा गिर गया था & अब वो पूरी नंगी थी,"..मुझे आपसे काम है बपत साहब.सामने के बिस्तर पे लेटा 1 करीब 36-37 बरस का आदमी अपने नागेपन को च्छूपाते हुए हड़बड़ा के उठ बैठा था.देवेन ने लड़की को उस आदमी पे धकेला & जैसे ही दोनो 1 साथ बिस्तर पे गिरे देवेन ने अपने मोबाइल से दोनो की खटखट 3-4 तस्वीरें खींच ली.

"साले,कुतरेया..@#$%^&*..तू कौन है बे?..अभी तुझे मज़ा चखाता हू!",गलिया बकता वो बौखलाया सा चादर से अपनी कमर को ढँकता देवेन की ओर झपटा.देवेन ने अपने कोट से च्छूपी पॅंट की कमर मे अटकी पिस्टल निकाल के सामने तान दी.बपत जहा का ताहा रुक गया.

उसने 1 कुर्सी खींची & बैठ गया.पास ही 1 आइसबॉक्स मे बियर के कॅन्स पड़े थे.उसने 1 कॅन खोला & पीने लगा,"मिस्टर.अमोल बपत,मुझे आपकी ज़ाति ज़िंदगी से कोई लेना-देना नही है,ना ही मुझे इस बात से कोई मतलब है कि आप कितने करप्ट हैं.आराम से बैठिए.यू टू,सिनॉरीटा.",उसने बंदूक से दोनो को इशारा किया.

"आइ'म नोट हियर टू हर्ट यू,लेडी.प्लीज़ रिलॅक्स.आइ'म हियर टू मीट दिस गाइ & 1 हॅव ए बिज़्नेस प्रपोज़िशन फॉर हिम."

"क्या कारोबार करना चाहता है तू मेरे साथ?..साले है कौन तू?!",बपत चीखा.

"बपत साहब,आप गोआ आने से पहले मुंबई के फ्ररो मे काम करते थे.है ना?"

"हां."

"तो मुझे आपके ज़रिए 1 शख्स के बारे मे पता करवाना है कि वो हमारे मुल्क मे कब घुसा & कहा से आया.जो तस्वीरें इस मोबाइल मे हैं,मैं उनके ज़रिए आपको बलcक्मैल नही करना चाहता.आप मेरा काम कर दीजिए मैं ये मोबाइल ही आपको दे दूँगा फिर उस से आप चाहें अपनी और इसकी..",उसने बियर का कॅन खाली कर उस लड़की की ओर इशारा किया,"..फोटो खीचें या म्‍मस बनाए!",वो हंसा & दूसरा कॅन खोला.

"साले,तू जानता नही मैं कौन हू और तेरा..-"

"बपत साहब,इस तरह से आपसे मिलने का मुझे कोई शौक़ नही था मगर जो बात आपसे करनी है वो ना आपके दफ़्तर मे हो सकती थी ना घर पे & फिर ये बताइए कि मैं आपके पास आके आपको अपना ऑफर देता तो क्या आप मान लेते?..नही ना.अब ध्यान से सुनिए मेरी बात..ये लीजिए..",उसने बियर के 2 कॅन्स खोल बपत और उस लड़की की ओर उच्छाले,"..पीजिए.इट विल कूल युवर माइंड.",वो लड़की की ओर देख के मुस्कुराया.लड़की बिल्कुल नंगी बैठी थी & उसे इस बात की परवाह भी नही थी कि देवेन उसका ननगपन देख सकता है.देवेन उस जैसी ना जाने कितनी लकड़ियो को इस खूबसूरत जगह मे देख चुका था.सब अपने मुल्क को छ्चोड़ घूमते-घामते यहा पहुँचती थी & फिर कभी ड्रग्स या कभी यहा की खूबसूरती & आसान ज़िंदगी से प्रभावित हो या फिर किसी & चक्कर मे फँस बस यही रह जाना चाहती थी.बपत से भी वो अपने वीसा को बढ़वाने के चक्कर मे मिल रही होगी.अजीब जगह थी ये गोआ!

"मैं जिस शख्स को ढूंड रहा हू वो 1 पेशेवर मुजरिम है.उसकी पूरी कहानी आपको सुनाउन्गा तो आप हैरत से पागल हो जाएँगे.उसने हमारी पोलीस को ही नही बल्कि दूसरे मुल्को को & यहा तक की इंटररपोल को भी चकमा दिया है.अब ज़रा सोचिए की अगर उस इंसान को आप पकड़वा दें तो आपकी साख कितनी बढ़ जाएगी!",देवेन ने बाज़ी का सबसे मज़बूत पत्ता फेंका था.उसे पता था कि बपत 1 भ्रष्ट अफ़सर है & इधर उसकी हर्कतो की खबर थोड़ा उपर र्पहुचि है & बहुत मुमकिन था की उसके खिलाफ कोई करवाई भी हो.बपत को भी इस बात की भनक थी.उसकी जागह कोई और होता तो अपने सारे उल्टे-सीधे काम रोक देता,कम से कम तब तक जब तक मामला ठंडा नही पड़ जाता,मगर देवेन जानता था बपत जैसे लोगो के खून मे ही करप्षन होता है & वो उसके बिना जी नही सकते & इसीलिए आज वो उसके सामने इस शॅक मे इस तरह बैठा था.

"साले मुझे कितना बड़ा चूतिया समझता है तू?!",बपत बियर पीते हुए हंसा,"..दा बस्टर्ड थिंक्स आइ'म अन अशोल!",वो लड़की को देख हंसा & फिर उसकी छाती दबाई.लड़की भी हंस दी & 1 झूठ-मूठ की आह भरते हुए बियर पीने लगी.देवेन ने उसकी आँखो मे 1 पल को आया नफ़रत का भाव देख लिया था & लड़की ने जब उस से नज़रे मिलाई तो उसे भी समझ आ गया कि देवेन ने उसके असली भाव समझ लिए हैं.लड़की ने नज़रे झुका ली.देवेन हंसा & बियर का घूँट भरा.

"बपत साहब,आपको सारी कहानी सुनाउन्गा तब आपको यकीन होगा.ये कहानी उस वक़्त शुरू होती है जब मैं जवान था..",देवेन ने दयाल की कहानी सुनना शुरू किया.इस कहानी मे उसने सुमित्रा का बस उतना ज़िक्र किया जितना की ज़रूरी था & रंभा का तो नाम तक नही लिया.

"हूँ.पर यार 1 बात बता मैं पता भी कर लू कि ये बीसेसर गोबिंद या दयाल जो भी नाम है इसका ये यहा आ भी गया है तो भी उसे ढूंदेंगे कैसे?पोलीस को बताए तो वो साला तो फ़ौरन चौकन्ना हो जाएगा!"

"इसका मतलब है कि आप मेरी बात मान गये हैं?"

"केवल ये कि मैं तुझे गोबिंद के मुल्क मे घुसने की डीटेल्स दूँगा."

"ओके.उसके बाद का काम मैं खुद कर लूँगा & दयाल को आपके हवाले कर दूँगा फिर आप वाहवाही लुटीएगा."

"हूँ..पर यार और क्या फ़ायदा है इसमे?"

"बपत साहब,कभी तो पैसो के अलावा कोई & फयडा भी सोचा करो!"

"सोचता हू ना!",बपत के होंठो पे छिछोरि मुस्कान फैल गयी & उसने साथ बैठी लड़की को अपने पास खींच 1 बार फिर उसकी छाती को मसला.

"क्या साहब आप भी!",देवेन ने हवा मे दोनो हाथ उठाए,"..& वो जो डिपार्टमेंट आपकी हर्कतो के बारे मे सोच रहा है वो?..अरे साहब,1 बार ये आदमी पकड़ा गया फिर कौन अमोल बपत के खिलाफ आंटी-करप्षन के केस चलाने की सोचेगा!",बपत उस गहरी निगाहो से देख रहा था.देवेन समझ गया था कि बपत समझ चुका है कि वो देवेन को कमज़ोर समझने की ग़लती नही कर सकता.

"हूँ.ठीक है.मैं पता करता हू पर तुझे कैसे बताउन्गा?अपना नंबर दे."

"नंबर क्या साहब आप फोन ले लेना.",देवेन ने हंसते हुए अपना मोबाइल उसे दिखाया & उठ खड़ा हुआ,"..1 हफ्ते बाद आपसे मिलूँगा."

"पर कहा?"

"आप उसकी फ़िक्र मत करो साहब.आप बस मेरा काम करो & फिर उसका फ़ायदा उठाओ.",देवेन दरवाज़े तक पहुँच गया था.

"& ये मोबाइल की फोटो?"

"वादे का पक्का हू,बपत साहब.आप बस अपना काम करो.उसके बाद फोन आपका & इस बीच इन तस्वीरो के बारे मे किसी को कुच्छ पता नही चलेगा.",देवेन दरवाज़ा खोल के घुमा,"..लेकिन अगर आपने कुच्छ ग़लत किया तो सारी तस्वीरें गोआ के हर अख़बार & हर न्यूज़ चॅनेल की शोभा बढ़ाती दिखेंगी.अच्छा,खुदा हाफ़िज़!",वो बाहर निकल गया.

"हुंग!",बपत ने मायूसी मे सर हिलाया,"क्लोज़ दा डोर बेबी.लेट'स फिनिश वॉट वी हॅड स्टार्टेड.",उसने फिर से उस गोरी को देखते हुए छिछोरि मुस्कान फेंकी & बिस्तर पे लेट गया.

"मिस्टर.मोहन?"

"जी बोल रहा हू.कहिए."

"मैं रंभा बोल रही हू."

"ओह..हेलो,म्र्स.मेहरा.कैसी हैं आप?"

"मैं अच्छी हू & आप शायद मेरी तलश मे निकलने वाले हैं.",बलबीर चौंक गया..आख़िर इसे पता कैसे चला?..किसने बताया होगा इसे?

"आप सोच रहे होंगे कि मुझे पता कैसे चला..है ना?",रंभा घर के पिच्छले हिस्से मे खड़ी थी.यहा केयी गम्लो मे फूल-पौधे लगे थे & छ्होटा सा लॉन था.देवेन का घर कुच्छ ऊँचाई पे बना था & रंभा सामने समंदर के चमकते नीले पानी को देख रही थी,"..मुझे ये तो पता ही था कि डॅड की तरह समीर भी ऐसे काम के लिए आप ही को याद करेगा.सवाल ये था कि कब करेगा तो उसका जवाब मैने ढूंड ही लिया."

"तो आप कहा हैं मुझे ये भी बता दीजिए,म्र्स.मेहरा ताकि मेरा काम भी आसान हो जाए."

"आप तो मेरी इस कॉल को ट्रेस कर के भी ये काम कर सकते हैं,मिस्टर.मोहन."

"जी हां,सो तो है."

"मिस्टर.मोहन,आप मेरे पति से कह दीजिए की मैं गोआ मे हू & चंद दिनो मे डेवाले वापस आ जाऊंगी लेकिन इस दौरान वो मुझे कॉंटॅक्ट करने की कोई कोशिश ना करें ना ही यहा आके मुझे परेशान करें वरना जो तलाक़ उनकी सुविधा के समय पे होगा,उसकी अर्ज़ी अभी कोर्ट मे दाखिल कर मैं उन्हे परेशान कर दूँगी."

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क्रमशः.......

JAAL paart--69

gataank se aage......

Pranav ki samajh me nahi aa raha tha ki Rambha aakhir achanak is tarah kaha chali gayi thi.Rita ne bhi savere nashte ke dauran uski & Shipra ki maujudgi me Sameer se jaanane ki koshish ki thi magar usne taal diya tha.1 baat & use pareshan kar rahi thi.uski saas ne us se apne bete ki shikayat ki thi ki aajkal vo uspe bhi dhyan nahi deta magar nashte ki mez pe to sameer ka ravaiyya aisa bilkul bhi nahi tha.....to kya rita ne jhuth bola tha magar use jhuth bolne ki kya zarurat thi?

ab use jald se jald sameer ko raste se hatana tha & rambha ko mohra bana Trust Group ko pane shikanje me jakadna tha.Shah ke sath milke usne tay kar liya tha ki Sameer ko marna hi hoga par ab ye sochna tha ki vo use kaise mare ki sameer ki maa & behan ko zara bhi shaq na ho & vo vaise hi uspe bharosa karti rahen & sabse zaruri baat ki sameer ki maut aisi ho ki kanoon ko uski sazisho ki bhanak bhi na lage.

idhar apne cabin me baitha pranav apne khatarnak mansubo ke bare me soch raha tha udhar Sonam apni saheli se fone pe baat kar rahi thi,"tere mana karne ke bavjud sameer tujhe dhoond raha hai.kal sham apne office ke fone se usne kisi Mohan ko fone kiya tha.."

"Balbir Mohan.janti hu us aadmi ko.usne kya bola?"

"usne sameer ko apne daftar ya yaha humare daftar milne ko kaha.vo fone pe is bare me zyada baat karna nahi chahta tha."

"hun.fir kaha mil rahe hain dono?"

"abhi vo mohan huamre daftar pahucha hai & sameer ne use seedha apne cabin me bulaya hai."

"achha.sun,tu zyada khatra mat mol lena.unki baate sunane ki bhi zarurat nahi.thik hai?"

"achha."

"& sonam,agar zyada pareshani mehsus ho to is naukri ko laat marne me hichakna nahi.main hu na!tujhe koi taklif nahi hone dungi."

"tu bhi na yaar.dosti me taklif kaisi!",dono asheliyo ne kuchh & baate ki & fir fone kaat diya.

"kya hua?..kis soch me dubi ho?",rambha ne abhi-2 dono mardo ke sath nashta khatm kiya tha & rasoi me hi khadi ho sonam se fone pe baate kar rahi thi.Deven ne use peechhe se baaho me bhar liya tha & uske baal chum raha tha.rambha ne use sonam se hui baat ke bare me bataya,"..achha,balbir mohan ke Goa pahunchte hi main us se mulakat karta hu."

"nahi.uski naubat hi nahi aayegi.",rambha ghumi & deven ko baaho me bhar uske seene pe sar rakh diya.

"achha.kya karogi?",deven uske baalo me ungliya fira raha tha.

"jab kar lungi to bata dungi..ye kya?",usne uske kapdo pe nazar dali,"..kaha ki tayyari hai?..& mujhe sath nahi le ja rahe?"

"nahi.main Bisesar Gobind naam ki machhli ko jaal me phansane ke liye chara dalne ja raha hu."

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dopahar 2 baje deven Panjim me goa ke foreigners registration office ke bahar apni car laga raha tha.imarat ke bahar kayi videshi ghum rahe the & unka kaam karane ka bharosa dilate kuchh sachche,kuchh jhuthe dalal bhi.deven imarat ke bahar khada uske main gate ko dekh raha tha.waqt ho gaya tha.use jis se milna tha vo bas andar se nikalne hi wala tha,ya yu kaha jaye ki uski car andar se niklane hi wali thi.koi 5 minute baad 1 safed Maruti Alto andar se nikli & deven ne apni car uske peechhe laga di.vo alto panjim ki sadko pe bhagi ja rahi thi.deven samajh gaya tha ki vo Dona Paula ki or ja raha tha.

kuchh der baad deven dona paula ke 1 beach shack ke bahar apni car me baitha apni dusri cigarette khatm kar raha tha.cigarette khatm hote hi vo car se utra & shack ke darwaze ko khatkhatane laga.2-3 minute baad 1 gori videshi ladki ne darwaza thoda sa khola,"yes?..what do you want?",deven nedekha ki ladki baye hath se darwaze ko pakde thi & daye se seene pe koi kapda dabaye thi.use samjhte der nahi lagi ki ladki nangi thi & us kapde se apne seene ko dhaki thi.

"i want to meet the guy you're fucking,senorita!",deven ne darwaze ko zor se dhakela & andar ghusa gaya.vo ladki chikhti uspe jhapti magar usne uska hath pakad use ghumaya & uski dayi banh ko uske jism ke peechhe jakad liya & apni bayi banh se uski gardan daboch li,"i'm not here to hurt you,ok?",ladki ke seene pe daba kapda gir gaya tha & ab vo puri nangi thi,"..mujhe aapse kaam hai Bapat sahab.samne ke bistar pe leta 1 karib 36-37 baras ka admi apne nagepan ko chhupate hue hadbada ke uth baitha tha.deven ne ladki ko us aadmi pe dhakela & jaise hi dono 1 sath bistar pe gire deven ne apne mobile se dono ki khatakhat 3-4 tasveeren khinch li.

"sale,kutreya..@#$%^&*..tu kaun hai be?..abhi tujhe maza chakhata hu!",galiya bakta vo baukhlaya sa chadar se apni kamar ko dhankta deven ki or jhapta.deven ne apne coat se chhupi pant ki kamar me atki pistol nikal ke samne taan di.bapat jaha ka taha ruk gaya.

usne 1 kursi khinchi & baith gaya.paas hi 1 icebox me beer ke cans pade the.usne 1 can khola & pine laga,"Mr.Amol Bapat,mujhe aapki zati zindagi se koi lena-dena nahi hai,na hi mujhe is baat se koi matlab hai ki aap kitne corrupt hain.aaram se baithiye.you too,senorita.",usne banduk se dono ko ishara kiya.

"i'm not here to hurt you,lady.please relax.i'm here to meet this guy & 1 have a business proposition for him."

"kya karobar karna chhata hai tu mere sath?..sale hai kaun tu?!",bapat chikha.

"bapat sahab,aap goa aane se pehle Mumbai ke FRRO me kaam karte the.hai na?"

"haan."

"to mujhe aapke zariye 1 shakhs ke bare me pata karwana hai ki vo humare mulk me kab ghusa & kaha se aaya.jo tasveeren is mobile me hain,main unke zariye aapko balckmail nahi karna chahta.aap mera kaam kar dijiye main ye mobile hi aapko de dunga fir us se aap chahen apni & iski..",usne beer ka can khali kar us ladki ki or ishara kiya,"..photo khichen ya MMS banaye!",vo hansa & dusra can khola.

"sale,tu janta nahi main kaun hu & tera..-"

"bapat sahab,is tarah se aapse milne ka mujhe koi shauq nahi tha magar jo baat aapse karni hai vo na aapke daftar me ho sakti thi na ghar pe & fir ye bataiye ki main aapke paas aake aapko apna offer deta to kya aap maan lete?..nahi na.ab dhyan se suniye meri baat..ye lijiye..",usne beer ke 2 cans khol bapat & us ladki ki or uchhale,"..pijiye.it will cool your mind.",vo ladki ki or dekh ke muskuraya.ladki bilkul nangi baithi thi & use is bata ki parwah bhi nahi thi ki deven uska nangapan dekh sakta hai.deven us jaisi na jane kitni lakdiyo ko is khubsurat jagah me dekh chuka tha.sab apne mulk ko chhod ghumte-ghamte yaha pahunchti thi & fir kabhi drugs ya kabhi yaha ki khubsurti & aasan zindgi se prabhavit ho ya fir kisi & chakkar me phans bas yehi reh jana chahti thi.bapat se bhi vo apne visa ko badhwane ke chakkar me mil rahi hogi.ajib jagah thi ye goa!

"main jis shakhs ko dhoond raha hu vo 1 peshevar mujrim hai.uski puri kahani aapko sunaunga to aap hairat se pagal ho jayenge.usne humari police ko hi nahi balki dusre mulko ko & yaha tak ki interpol ko bhi chakma diya hai.ab zara sochiye ki agar us insan ko aap pakadwa den to aapki sakh kitni badh jayegi!",deven ne bazi ka sabse mazbut patta fenka tha.use pata tha ki bapat 1 bhrasht afsar hai & idhar uski harkato ko khabar thoda upa rpahuchi hai & bahut mumkin tha ki uske khilaf koi karvayi bhi ho.bapat ko bhi is baat ki bhanak thi.uski jaagh koi & hota to apne sare ulte-seedhe kaam rok deta,kam se kam tab tak jab tak mamla thanda nahi pad jata,magar deven janta tha bapat jaise logo ke khoon me hi corruption hota hai & vo uske bina ji nahi sakte & isiliye aaj vo uske samne is shack me is tarah baitha tha.

"sale mujhe kitna bada chutiya samajhta hai tu?!",bapat beer pite hue hansa,"..the bastard thinks i'm an asshole!",vo aldki ko dekh hansa & fir uski chhati dabayi.ladki bhi hans di & 1 jhuth-muth ki aah bharte hue beer pine lagi.deven ne uski aankho me 1 pal ko aaya nafrat ka bhav dekh liya tha & ladki ne jab us se nazre milayi to use bhi samajh aa gaya kid even ne uske asli bhavs amajh liye hain.ladki ne nazre jhuka li.deven hansa & beer ka ghunt bhara.

"bapat sahab,aapko sari kahani sunaunga tab aapko yakin hoga.ye kahnai us waqt shuru hoti hai jab main jawan tha..",deven ne Dayal ki kahani sunana shuru kiya.is kahani me usne Sumitra ka bas utna zikr kiya jitna ki zaruri tha & rambha ka to naam tak nahi liya.

"hun.par yaar 1 baat bata main pata bhi kar lu ki ye Bisesar Gobind ya dayal jo bhi naam hai iska ye yaha aa bhi gaya hai to bhi use dhundenge kaise?police ko batay to vo sala to fauran chaukanna ho jayega!"

"iska matlab hai ki aap meri baat maan gaye hain?"

"keval ye ki main tujhe gobind ke mulk me ghusane ki details dunga."

"ok.uske baad ka kaam main khud kar lunga & dayal ko aapke hawale kar dunga fir aap vaahvahi lutiyega."

"hun..par yaar & kya fayda hai isme?"

"bapat sahab,kabhi to paiso ke lawa koi & fayda bhi socha karo!"

"sochta hu na!",bapat ke hotho pe chhichhori muskan fail gayi & usne sath baithi ladki ko apne paas khinch 1 baar fir uski chhati ko masla.

"kya sahab aap bhi!",deven ne hawa me dono hath uthaye,"..& vo jo department aapki harkato ke bare me soch raha hai vo?..are sahab,1 baar ye aadmi pakda gaya fir kaun amol bapat ke khilaf anti-corruption ke case chalane ki sochega!",bapat us gehri nigaho se dekh raha tha.deven samajh gaya tha ki bapat samajh chuka hai ki vo deven ko kamzor samajhne ki galti nahi kar sakta.

"hun.thik hai.main pata karta hu par tujhe kaise bataunga?apna number de."

"number kya sahab aap fone le lena.",deven ne hanste hue apna mobile use dikhaya & uth khada hua,"..1 hafte baad aapse milunga."

"par kaha?"

"aap uski fikr mat karo sahab.aap bas mera kaam karo & fir uska fayda uthao.",deven darwaze tak pahunch gaya tha.

"& ye mobile ki foto?"

"vade ka pakka hu,bapat sahab.aap bas apna kaam karo.uske baad fone aapka & is beech in tasviro ke bare me kisi ko kuchh pata nahi chalega.",deven darwaza khol ke ghuma,"..lekin agar aapne kuchh galat kiya to sari tasveeren goa ke har akhbar & har news channel ki shobha badhati dikhengi.achha,khuda hafiz!",vo bahar nikal gaya.

"hunh!",bapat ne mayusi me sar hilaya,"close the door baby.let's finish what we had started.",usne fir se us gori ko dekhte hue chhichhori muskan fenki & bistar pe let gaya.

"Mr.Mohan?"

"ji bol raha hu.kahiye."

"main Rambha bol rahi hu."

"oh..hello,Mrs.mehra.kaisi hain aap?"

"main achhi hu & aap shayad meri talsh me nikalne wale hain.",Balbir chaunk gaya..aakhir ise pata kaise chala?..kisne bataya hoga ise?

"aap soch rahe honge ki mujhe pata kaise chala..hai na?",rambha ghar ke pichhle hisse me khadi thi.yaha kayi gamlo me phool-paudhe lage the & chhota sa lawn tha.Deven ka ghar kuchh oonchai pe bana tha & rambha samne samandar ke chamakte nile pani ko dekh rahi thi,"..mujhe ye to pata hi tha ki dad ki tarah Sameer bhi aise kaam ke liye aap hi ko yaad karega.sawal ye tha ki kab karega to uska jawab maine dhoond hi liya."

"to aap kaha hain mujhe ye bhi bata dijiye,mrs.mehra taki mera kaam bhi aasan ho jaye."

"aap to meri is call ko trace kar ke bhi ye kaam kar sakte hain,mr.mohan."

"ji haan,so to hai."

"mr.mohan,aap mere pati se keh dijiye ki main Goa me hu & chand dino me Devalay vapas aa jaoongi lekin is dauran vo mujhe contact karne ki koi koshsih na karen na hi yaha aake mujhe pareshan karen varna jo talaq unki suvidha ke samay pe hoga,uski arzi abhi court me dakhil kar main unhe pareshan kar dungi."

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kramashah.......

 
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