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Jaal -जाल compleet

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Guest
जाल पार्ट--1

दोस्तो आपकी सेवा मे मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और नई कहानी लेकर हाजिर हूँ

"और अब आपके सामने है आज की नीलामी की सबसे आख़िरी मगर सबसे खास पेशकश..",डेवाले के क्लॅसिक ऑक्षन हाउस के मेन हॉल मे स्टेज पे खड़ा इंसान 1 पैंटिंग से परदा हटा रहा था.उसके सामने 20-20 कुर्सियो की 2 कतारो मे 40 आदमी बैठे थे.अभी तक 10 चीज़ो की नीलामी हुई थी मगर सबका ध्यान इसी पैंटिंग पे था.ये पैंटिंग मशहूर पेंटर गोवर्धन दास की थी जोकि अभी कुच्छ ही दिनो पहले 1 आर्ट कॉलेज की लाइब्ररी मे पड़ी मिली थी.सभी जानकरो का मानना था कि ये दास बाबू की है,जिन्हे गुज़रे 70 से भी ज़्यादा साल हो चुके थे,सबसे उम्दा तस्वीरो मे से 1 है.

"..इस तस्वीर की नीलामी की शुरुआती कीमत 10 लाख तय की गयी है.क्या कोई है जो इस रकम से ज़्यादा बोली लगा सकता है?",सामने बाई कतार मे बैठे 1 शख्स ने अपना हाथ उपर उठाया.

"15 लाख..और कोई?",इस बार दाई कतार मे बैठे 1 शख्स ने हाथ उठाया.नीलामी करने वाला आक्षनियर मुस्कुराया.वो जानता था कि दोनो शख्स खुद के लिए नही बल्कि अपने मालिको के लिए बोली लगा रहे हैं.हॉल मे बैठे बाकी लोग भी हल्के-2 मुस्कुरा रहे थे.खेल शुरू जो हो चुका था & उन्हे ये देखना था कि इस बार कौन जीतता है!

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होटेल वाय्लेट शहर की सबसे ऊँची इमारत थी & उसकी 25वी मंज़िल पे खड़ा विजयंत मेहरा फ्लोर तो सीलिंग ग्लास से डेवाले को देख रहा था.शीशे की उस दीवार से उसे डेवाले शहर का बिल्कुल बीच का हिस्सा दिख रहा था जहा की आसमान छुति इमारतो की क़तारे लगी थी.वो उनमे से ज़्यादातर इमारतो का मालिक था & होटेल वाय्लेट का भी.विजयंत मेहरा ट्रस्ट ग्रूप का मालिक था.इस ग्रूप ने अपने कदम इनफ्रास्ट्रक्चर यानी कि सड़के,इमाराते,एरपोर्ट,बंदरगाह और ऐसी ही बुनियादी चीज़ो को बनाने के कारोबार से जमाए थे मगर आज ट्रस्ट ग्रूप ना केवल ये सब बनाता था बल्कि उसके मुल्क के 15 शहरो मे होटेल्स भी थे & पिच्छले 5 बरसो से वो फिल्म बनाने के भी धंधे मे उतर चुका था.

विजयंत के होंठो पे हल्की मुस्कुराहट खेल रही थी.यहा खड़े होके उसे अपनी ताक़त का एहसास होता था.इस शहर का बड़ा हिस्सा उसका था सिर्फ़ उसका.जहा वो खड़ा था वो वाय्लेट होटेल के उस सूयीट का बेडरूम था जिसे उसने खास खुद के लिए बनवाया था.ट्रस्ट ग्रूप का दफ़्तर होटेल से 300मीटर की दूरी पे 1 12 मंज़िला इमारत मे था.विजयंत वही से अपना कारोबार संभालता था मगर जब भी वो उस इमारत से उकता जाता था तो अपने इस सूयीट मे आ जाता था.सूयीट क्या 1 छ्होटा सा फ्लॅट ही था.1 बेडरूम,1 सा गेस्ट रूम जहा की 6-7 लोगो की मीटिंग करने का भी इंतेज़ाम था,1 अटॅच्ड बाथरूम & उसके साथ 1 किचेन थी.

"सर..",दरवाज़े पे दस्तक दे 1 लड़की अंदर दाखिल हुई.उसने ग्रे कलर की घुटनो तक की कसी फॉर्मल स्कर्ट & सफेद ब्लाउस पहना था.पैरो मे हाइ हील वाले जूते थे & बॉल 1 कसे जुड़े मे बँधे थे.ये लड़की देखने से होटेल की कर्मचारी नही लग रही थी,उनकी पोशाक वैसे भी अलग थी,"..1 घंटे मे वो शुरू होने वाला है.",वो आगे आई & हाथो मे पकड़ा फोन उसने बिस्तर पे रख दिया.विजयंत उसकी ओर पीठ किए खड़ा था.उसने बिना घूमे सर हिलाया अपनी बाहे उपर कर दी.लड़की मुस्कुराते हुए आगे आई.विजयंत ने 1 सफेद कमीज़ पहनी & काली पतलून थी.लड़की ने कमीज़ की बाजुओ के कफलिंक्स खोले & फिर विजयंत की कमीज़ के बटन खोलने लगी.अगले ही पल विजयंत का नंगा सीना उसके सामने था.

विजयंत मेहरा की उम्र 53 बरस थी मगर शायद ही उसे देख कोई उसकी असली उम्र बता सकता था.वो कही से भी 45 से ज़्यादा नही लगता था.उसका रंग इतना गोरा था की केयी लोगो को उसके विदेशी होने की ग़लतफहमी हो जाती थी.उसके बाल भी काले नही बल्कि कुच्छ भूरे रंग के थे जोकि कभी-2 सुनहले भी लगने लगते थे.चेहरे पे हल्की दाढ़ी & मूँछ थी.उसका कद 6'3" था & उसका कसरती जिस्म बहुत मज़बूत दिखता था.चमकते बालो से भरे उसके ग़ज़ब के चौड़े सीने को देख उस लड़की ने हल्के से अपने निचले होंठ को दांतो से दबाया.विजयंत मेहरा मर्दाना खूबसूरती की जीती-जागती मिसाल था.लड़की की धड़कने तेज़ हो गयी थी & उसके गाल भी लाल हो गये थे.उसने काँपते हाथो से विजयंत की पतलून उतारी.उसका बॉस अब केवल 1 अंडरवेर मे उसके सामने खड़ा था.उसने हाथ से उसे रुकने का इशारा किया.

"नीशी..",1 रोबिली & बहुत गहरी भारी,भरकम आवाज़ ने नीशी को जैसे नींद से जगाया.

"ज-जी.."

"क्या हुआ?ये कोई पहली बार तो नही.",विजयंत मुस्कुराया.

अफ!..इतनी दिलकश मुस्कान..& ये आवाज़..वो तो दफ़्तर मे उस से लेटर्स की डिक्टेशन लेते हुए ही अपनी टाँगो के बीच गीलापन महसूस करने लगती थी.

"नही सर.वो बात नही.",उसने अपनी पीठ विजयंत की तरफ की & अपने कपड़े उतारने लगी.लड़की का जिस्म बिल्कुल वैसा था जैसा विजयंत को पसंद था.बड़ी छातियाँ,चौड़ी गंद मगर सब कुच्छ कसा हुआ.2 साल से नीशी उसकी सेक्रेटरी थी & नौकरी जाय्न करने के 4 दिनो के अंदर ही वो अपने बॉस के बिस्तर मे भी ड्यूटी करने लगी थी.

"आहह..!",विजयंत ने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया था & उसके पेट को सहलाते हुए उसके दाए कान मे जीभ फिरा दी थी.वो भी पीछे हो उसके जिस्म से लग गयी.उसने महसूस किया कि उसकी निचली पीठ पे उसके बॉस का गर्म लंड दबा हुआ था.उसका दिल और ज़ोर से धड़क उठा.ना जाने कितनी बार वो लंड उसकी चूत मे उतार चुका था मगर हर बार वो उसके एहसास से रोमांचित हुए बिना नही रहती थी.ये विजयंत के लंड का जादू था या उसकी शख्सियत का?..इस सवाल का जवाब ढूँढते हुए उसे 2 बरस हो गये थे मगर वो तय नही कर पाई थी & आज शायद आख़िरी बार वो उसके साथ हमबिस्तर हो रही थी.

"आज तुम्हारा आख़िरी दिन है ट्रस्ट ग्रूप के साथ,नीशी.",विजयंत ने कान के बाद उसके तपते गालो को चूमा था & फिर उसके नर्म लबो को & फिर उसे आगे जाने की ओर इशारा किया.नीशी आगे बढ़ी & बिस्तर पे पेट के बल लेट गयी,"सभी तैय्यारियाँ हो गयी शादी की?"

"जी.",10 दिन बाद नीशी की शादी थी & वो चेन्नई जा रही थी.हर लड़की की तरह वो भी बहुत खुश थी मगर 1 अफ़सोस था कि अब वो कभी उस बांके मर्द की चुदाई का लुफ्त नही उठा पाएगी,"उउन्न्ञन्....!",विजयंत ने उसके पैरो को उपर उठाया & बाए हाथ से थाम उसकी पिंदलियो को चूमने लगा,उसका दया हाथ निश्ी की मोटी गंद को सहला रहा था.निश्ी बिस्तर की चादर को बेचैनी से भींचते हुए हल्की-2 आहे ले रही थी.विजयंत का हाथ उसकी गंद की दरार को सहला रहा था.सहलाते हुए उसने हाथ को दरार मे तोड़ा अंदर घुसाया तो अपना सर उपर झटकते हुए निश्ी ने ज़ोर से आ भारी & उसकी जंघे खुद बा खुद फैल गयी.विजयंत ने उन्हे धीरे से तोड़ा और फैलाया & नीचे झुक गया.

"आन्न्न्नह.....उउन्न्ञणनह.....!",निश्ी की आहो के साथ-2 उसके हाथो तले बिस्तर की चादर की सलवटें बढ़ने लगी.विजयंत अपनी सेक्रेटरी की चिकनी चूत को पीछे से चाट रहा था.उसकी लपलपाति ज़ुबान उस नाज़ुक अंग से बह रहे रस को सुड़कते हुए उसके दाने को छेड़ रही थी.नीशी के जिस्म मे बिजली दौड़ रही थी.रोम-2 मे 1 अजीब सा मज़ा भर गया था.उसकी गंद की फांको को दबा के फैलाता हुआ विजयंत बड़ी गर्मजोशी से उसकी चूत पे अपनी जीभ चला रहा था & जब उसने उसने अपने होंठो को उसकी चूत पे दबा ज़ोर से चूसा तो नीशी चीख मारते हुए झाड़ गयी.तभी बिस्तर पे रखा फोन बज उठा.खुमारी मे झूमती नीशी ने थोड़ी देर बाद उसे उठाया & फिर सुन के रख दिया,"शुरू हो गया.",उसने जिस्म थोड़ा बाई तरफ मोड़ के सर पीछे घुमा के अपने बॉस को नशीली नज़रो से देखा.

उसकी फैली टाँगो के बीच विजयंत घुटनो पे खड़ा था.उसके चौड़े फौलादी सीने के सुनहले बालो & उसके मज़बूत बाजुओ को देख नीशी का जिस्म 1 बार फिर से कसक से भर उठा.बड़े-2 हाथो से विजयंत उसकी गंद को सहला रहा था & उस हल्की सी हरकत से भी उसके बाजुओ की मांसपेशिया फदक रही थी.उसने थोडा नीचे देखा & उसकी निगाह विजयंत के सपाट पेट पे गयी.पेट के बीचोबीच बालो की 1 मोटी लकीर नीचे जा रही थी.जब नीशी की नज़र वाहा पहुँची तो उसकी कसक 1 बार फिर चरम पे पहुँच गयी.टाँगो के बीच बालो से घिरा विजयंत का लंड अपने पूरे शबाब पे था.9.5 इंच लंबा & बहुत ही मोटा लंड 2 बड़े-2 आंडो के उपर सीधा तना खड़ा था.

नीशी अब तक 3-4 मर्दो से चुद चुकी थी जिनमे उसका मंगेतर भी शामिल था मगर उसने विजयंत जैसा लंड किसी के पास नही देखा था.उसने 1 बार फिर निचले होंठ को दाँत से दबाया & अपना सर बिस्तर मे च्छूपाते हुए अपनी कमर उपर कर अपनी गंद को हवा मे उठा दिया.हर बार ऐसा ही होता था.बंद कमरे मे विजयंत के साथ वो सब कुच्छ भूल जाती थी केवल अपने जिस्म की खुशी का ख़याल उसके ज़हन पे हावी रहता था.मुस्कुराते हुए विजयंत ने अपना तगड़ा लंड हाथ मे पकड़ा & उसे नीशी की जानी-पहचानी चूत मे घुसने लगा.

"ऊन्नह.....!",आज तक नीशी को उस लंबे,मोटे लंड की आदत नही पड़ी थी & आज भी शुरू मे उसे हल्का दर्द होता था लेकिन उसकी चूत की आख़िरी गहराइयो मे उतार वो लंड जब अपना कमाल दिखाता तो सारा दर्द हवा हो जाता & रह जाता सिर्फ़ मज़ा,बहुत सारा मज़ा!विजयंत ने अपनी सेक्रेटरी की नाज़ुक कमर थामी & धक्के लगाने शुरू कर दिए.वो बहुत गहरे मगर धीमे धक्के लगा रहा था.लंड बड़े हौले-2 नीशी की चूत को पूरे तरीके से चोद रहा था.वो मस्ती मे पागल हो चुकी थी.पूरे सूयीट मे उसकी आहें गूँज रही थी.बिस्तर की चादर को तो शायद वो अपने बेचैन हाथो से तार-2 कर देना चाहती थी.अपने बॉस के हर धक्के का जवाब वो अपनी कमर हिला अपनी गंद को पीछे धकेल के दे रही थी.

विजयंत को भी बहुत मज़ा आ रहा था.पिच्छले 2 बरसो मे नीशी की चूत ज़रा भी ढीली नही हुई थी.उसके धक्को की रफ़्तार बढ़ी तो नीशी की मस्तानी आहे भी साथ मे बढ़ी.विजयंत ने उसकी कमर को थाम अपनी ओर खींचते हुए ज़ोर से धक्के लगाए तो नीशी 1 बार और झाड़ गयी & बिस्तर पे निढाल हो गिर गयी.विजयंत उसके उपर लेट गया & फिर उसे लिए-दिए उसने दाई करवट ली.लंड अभी भी चूत मे था,विजयंत ने अपनी दाहिनी बाँह नीशी की गर्दन के नीचे लगाई & बाई को उसके पेट पे डाला.नीशी ने गर्दन पीछे घुमाई & अपने बॉस को चूमने लगी.उसका दिल करा रहा था कि वो बस ऐसे ही पड़ी उसे चूमती रही.1 बार फिर विजयंत ने हल्के धक्को के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी.

नीशी को मजबूरन किस तोड़नी पड़ी क्यूकी चुदाई की वजह से उसका जिस्म झटके खा रहा था लेकिन उसके होंठो की प्यास बुझी कहा थी.उसने बिना लंड को निकलने देते हुए अपनी पीठ को बिस्तर पे जमा लिया & अपने हाथो मे विजयंत के चेहरे को भर उसे चूमने लगी.विजयंत भी उसकी मोटी छातियो को दबाते हुए उसकी ज़ुबान से ज़ुबान लड़ा रहा था.विजयंत ने अपने बाए बाज़ू को नीशी की भारी जाँघो के नीचे लगा के उन्हे 1 साथ हवा मे उठा दिया & उसे चोदने लगा.इस पोज़िशन मे उसका लंड जड़ तक तो उसकी चूत मे नही जा रहा था मगर फिर भी दोनो को मज़ा बहुत आ रहा था.तभी 1 बार फिर फोने बजा.नीशी ने बिना अपने बॉस के होंठो को आज़ाद किए अपने दाए हाथ से टटोलते हुए बिस्तर पे फोन को ढूंड लिया & उसे कान से लगाया,"उम्म..हेलो.....ओके."

"आप जीत गये.",उसने विजयंत के चेहरे को थाम चूम लिया.उसकी बात ने विजयंत को जोश को मानो दुगुना कर दिया.उसने अपनी दाई बाँह जोकि नीशी की गर्दन के नीचे पड़ी थी & बाई जो उसकी जाँघो को थामे थी,दोनो को मोड़ लेते हुए उसके जिस्म को अपनी ओर घुमा लिया,जैसे लेते हुए उसे गोद मे ले रहा हो & नीचे से बड़े क़ातिल धक्के लगाने लगा.नीशी की मस्ती का तो कोई हिसाब ही नही रहा,वो अपने बॉस के खूबसूरत चेहरे को चूमते हुए आहे भरते हुए उसकी चुदाई का मज़ा लेने लगी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--1

dosto aapki sevaa me main yaani aapka dost raj sharma ek our nai kahaani lekar haajir hun

"Aur ab aapke samne hai aaj ki nilami ki sabse aakhiri magar sabse khas peshkash..",Devalay ke Classic Auction House ke main hall me stage pe khada insan 1 painting se parda hata raha tha.uske samne 20-20 kursiyo ki 2 kataro me 40 aadmi baithe the.abhi tak 10 chizo ki nilami hui thi magar sabka dhyan isi painting pe tha.ye painting mashoor painter Govardhan Das ki thi joki abhi kuchh hi dino pehle 1 art college ki library me padi mili thi.sabhi jankaro ka maanana tha ki ye das babu ki,jinhe guzre 70 se bhi zyada saal ho chuke the,sabse umda tasviro me se 1 hai.

"..is tasvir ki nilami ki shuruati kimat Rs10 lakh tay ki gayi hai.kya koi hai jo is rakam se zyada boli laga sakta hai?",samne bayi katar me baithe 1 shakhs ne apna hath upar uthaya.

"15 lakh..aur koi?",is baar dayi katar me baithe 1 shakhs ne hath uthaya.nilami karne vala auctioneer muskuraya.vo janta tha ki dono shakhs khud ke liye nahi balki apne maliko ke liye boli laga rahe hain.hall me baithe baki log bhi halke-2 muskura rahe the.khel shuru jo ho chuka tha & unhe ye dekhna tha ki is baar kaun jeetata hai!

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Hotel Violet shehar ki sabse oonchi imarat thi & uski 25vi manzil pe khada Vijayant Mehra floor to ceiling glass se devalay ko dekh raha tha.shishe ki us deewar se use devalay shehar ka bilkul beech ka hissa dikh raha tha jaha ki aasmaan chhuti imarato ki qatare lagi thi.vo unme se zyadatar imarato ka malik tha & hotel violet ka bhi.vijayant mehra Trust group ka malik tha.is group ne apne kadam infrastructure yani ki sadke,imarate,airport,bandargah aur aisi hi buniyadi chizo ko banane ke karobar se jamaye the magar aaj trust group na keval ye sab banata tha balki uske mulk ke 15 sheharo me hotels bhi the & pichhle 5 barso se vo film banane ke bhi dhandhe me utar chuka tha.

vijayant ke hotho pe halki muskuarhat khel rahi thi.yaha khade hoke use apni taqat ka ehsas hota tha.is shehar ka bada hissa uska tha sirf uska.jaha vo khada tha vo violet hotel ke us suite ka bedroom tha jise usne khas khud ke liye banwaya tha.trust group ka daftar hotel se 300m ki duri pe 1 12 manzila imarat me tha.vijayant vahi se apna karobar sambhalta tha magar jab bhi vo us imarat se ukta jata tha to apne is suite me aa jata tha.suite kya 1 chhota sa flat hi tha.1 bedroom,1 sa guest room jaha ki 6-7 logo ki meeting karne ka bhi intezam tha,1 attached bathroom & uske sath 1 kitchenette.

"sir..",darwaze pe dastak de 1 ladki andar dakhil hui.usne grey color ki ghutno tak ki kasi formal skirt & safed blouse pehna tha.pairo me high heel vale jute the & baal 1 kase jude me bandhe the.ye ladki dekhne se hotel ki karmchari nahi lag rahi thi,unki poshak vaise bhi alag thi,"..1 ghante me vo shuru hone wala hai.",vo aage aayi & hatho me pakda fone usne bistar pe rakh diya.vijyant uski or pith kiye khada tha.usne bina ghume sar hilaya apni baahe upar kar di.ladki muskurate hue aage aayi.vijyant ne 1 safed kamiz pehni & kali patlun thi.ladki ne kamiz ki bazuo ke cufflinks khole & fir vijyant ki kamiz ke button kholne lagi.agle hi pal vijyant ka nanga seena uske samne tha.

vijyant mehra ki umra 53 baras thi magar shayad hi use dekh koi uski asli umra bata sakta tha.vo kahi se bhi 45 se zyada nahi lagta tha.uska rang itna gora tha ki kayi logo ko uske videshi hone ki galatfehmi ho jati thi.uske baal bhi kale nahi balki kuchh bhure rang ke the joki kabhi-2 sunahle bhi lagne lagte the.chehre pe halki dadhi & moonchh thi.uska kad 6'3" tha & uska kasrati jism bahut mazbut dikhta tha.chamakte balo se bhare uske gazab ke chaude seene ko dekh us ladki ne halke se apne nichle honth ko danto se dabaya.vijayant mehra mardana khubsurti ki jeeti-jagti misal tha.ladki ki dhadkane tez ho gayi thi & uske gaal bhi laal ho gaye the.usne kaanpte hatho se vijayant ki patlun utari.uska boss ab keval 1 underwear me uske samne khada tha.usne hath se use rukne ka ishara kiya.

"Nishi..",1 robili & bahut gehri bhari,bharkam aavaz ne nishi ko jaise nind se jagaya.

"j-ji.."

"kya hua?ye koi pehli baar to nahi.",vijayant muskuraya.

uff!..itni dilkash muskan..& ye aavaz..vo to daftar me us se letters ki dictation lete hue hi apni tango ke beech gilapan mehsus karne lagti thi.

"nahi sir.vo baat nahi.",usne apni pith vijayant ki taraf ki & apne kapde utarne lagi.ladki ka jism bilkul vaisa tha jaisa vijayant ko pasand tha.badi chhatiyan,chaudi gand magar sab kuchh kasa hua.2 saal se nishi uski secretary thi & naukri join karne ke 4 dino ke andar hi vo apne boss ke bistar me bhi duty karne lagi thi.

"aahhhhh..!",vijayant ne use peechhe se baaho me bhar liya tha & uske pet ko sehlate hue uske daye kaan me jibh fira di thi.vo bhi peechhe ho uske jism se lag gayi.usne mehsus kiya ki uski nichli pith pe uske boss ka garm lund daba hua tha.uska dil aur zor se dhadak utha.na jane kitni baar vo lund uski chut me utar chuka tha magar har baar vo uske ehsas se romanchit hue bina nahi rehti thi.ye vijayant ke lund ka jadu tha ya uski shakhsiyat ka?..is sawal ka jawab dhundte hue use 2 baras ho gaye the magar vo tay nahi kar payi thi & aaj shayad aakhiri baar vo uske sath humbistar ho rahi thi.

"aaj tumhara aakhiri din hai trust group ke sath,nishi.",vijayant ne kaan ke baad uske tapte galo ko chuma tha & fir uske narm labo ko & fir use aage jane ki or ishara kiya.nishi aage badhi & bistar pe pet ke bal let gayi,"sabhi taiyyariyan ho gayi shadi ki?"

"ji.",10 din baad nishi ki shadi thi & vo Chennai ja rahi thi.har ladki ki tarah vo bhi bahut khush thi magar 1 afsos tha ki ab vo kabhi us banke mard ki chudai ka lutf nahi utha payegi,"uunnnn....!",vijayant ne uske pairo ko upar uthaya & baye hath se tham uski pindliyo ko chumne laga,uska daya hath nishi ki moti gand ko sehla raha tha.nishi bistar ki chadar ko bechaini se bhinchte hue halki-2 aahe le rahi thi.vijayant ka hath uski gand ki darar ko sehla raha tha.sehlate hue usne hath ko darar me thoda andar ghusaya to apna sar upar jhatakte hue nishi ne zor se aah bhari & uski janghe khud ba khud fail gayi.vijayant ne unhe dhire se thoda aur failaya & neeche jhuk gaya.

"aannnnhhhhhh.....uunnnnnhhhhhhhhh.....!",nishi ki aaho ke sath-2 uske hatho tale bistar ki chadar ki salwaten badhne lagi.vijayant apni secretary ki chikni chut ko peechhe se chat raha tha.uski laplapati zuban us nazuk ang se beh rahe ras ko sudakte hue uske dane ko chhed rahi thi.nishi ke jism me bijli daud rahi thi.rom-2 me 1 ajib sa maza bhar gaya tha.uski gand ki phaanko ko daba ke failata hua vijayant badi garmjoshi se uski chut pe apni jibh chala raha tha & jab usne usne apne hotho ko uski chut pe daba zor se chusa to nishi chikh marte hue jhad gayi.tabhi bistar pe rakha fone baj utha.khumari me jhumti nishi ne thodi der baad use uthaya & fir sun ke rakh diya,"shuru ho gaya.",usne jism thoda bayi taraf mod ke sar peechhe ghuma ke apne boss ko nashili nazro se dekha.

uski faili tango ke beech vijayant ghutno pe khada tha.uske chaude fauladi seene ke sunahle baalo & uske mazbut bazuo ko dekh nishi ka jism 1 baar fir se kasak se bhar utha.bade-2 hatho se vijayant uski gand ko sehla raha tha & us halki si harkat se bhi uske bazuo ki manspeshiya phadak rahi thi.usne thoda neeche dekha & uski nigah vijayant ke sapat pet pe gayi.pet ke beechobeech baalo ki 1 moti lakir neeche ja rahi thi.jab nishi ki nazar vaha pahunchi to uski kasak 1 baar fir charam pe pahunch gayi.tango ke beech baalo se ghira vijayant ka lund apne pure shabab pe tha.9.5 inch lumba & bahut hi mota lund 2 bade-2 ando ke upar seedha tana khada tha.

nishi ab tak 3-4 mardo se chud chuki thi jinme uska mangetar bhi shamil tha magar usne vijayant jaisa lund kisi ke paas nahi dekha tha.usne 1 baar fir nichle honth ko dant se dabaya & apna sar bistar me chhupate hue apni kamar upar kar apni gand ko hawa me utha diya.har baar aisa hi hota tha.band kamre me vijayant ke sath vo sab kuchh bhul jati thi keval apne jism ki khushi ka khayal uske zehan pe havi rehta tha.muskuarate hue vijayant ne apna tagda lund hath me pakda & use nishi ki jani-pehchani chut me ghusane laga.

"oonnhhhhhh.....!",aaj tak nishi ko us lumbe,mote lund ki aadat nahi padi thi & aaj bhi shuru me use halka dard hota tha lekin uski chut ki aakhiri gehraiyo me utar vo lund jab apna kamal dikhata to sara dard hawa ho jata & reh jata sirf maza,bahut sara maza!vijayant ne apni secretary ki nazuk kamar thami & dhakke lagane shuru kar diye.vo bahut gehre magar dheeme dhakke laga raha tha.lund bade haule-2 nishi ki chut ko pure tarike se chod raha tha.vo masti me pagal ho chuki thi.pure suite me uski aahen goonj rahi thi.bistar ki chadar ko to shayad vo apne bechain hatho se taar-2 kar dena chahti thi.apne boss ke har dhakke ka jawab vo apni kamar hila apni gand ko peechhe dhakel ke de rahi thi.

vijayant ko bhi bahut maza aa raha tha.pichhle 2 barso me nishi ki chut zara bhi dhili nahi hui thi.uske dhakko ki raftar badhi to nishi ki mastani aahe bhi sath me badhi.vijayant ne uski kamar ko tham apni or khinchte hue zor se dhakke lagaye to nishi 1 baar aur jhad gayi & bistar pe nidhal ho gir gayi.vijayant uske upar let gaya & fir use liye-diye usne dayi karwat li.lund abhi bhi chut me tha,vijayant ne apni dahini banh nishi ki gardan ke neeche lagayi & bayi ko uske pet pe dala.nishi ne gardan peechhe ghumayi & apne boss ko chumne lagi.uska dil kara raha tha ki vo bas aise hi padi use chumti rahi.1 baar fir vijayant ne halke dhakko ke sath uski chudai shuru kar di.

nishi ko majburan kiss todni padi kyuki chudai ki vajah se uska jism jhatke kha raha tha lekin uske hotho ki pyas bujhi kaha thi.usne bina lund ko nikalne dete hue apni pith ko bistar pe jama liya & apne hatho me vijayant ke chehre ko bhar use chumne lagi.vijayant bhi uski moti chhatiyo ko dabate hue uski zuban se zuban lada raha tha.vijayant ne apne baye bazu ko nishi ki bhari jangho ke neeche laga ke unhe 1 sath hawa me utha diya & use chodne laga.is position me uska lund jud tak to uski chut me nahi ja raha tha magar fir bhi dono ko maza bahut aa raha tha.tabhi 1 baar fir fone baja.nishi ne bina apne boss ke hotho ko azad kiye apne daye hath se tatolte hue bistar pe fone ko dhoond liya & use kaan se lagaya,"umm..hello.....ok."

"aap jeet gaye.",usne vijayant ke chehre ko tham chum liya.uski baat ne vijayant ko josh ko mano duguna kar diya.usne apni dayi banh joki nishi ki gardan ke neeche padi thi & bayi jo uski jangho ko thame thi,dono ko mod lete hue uske jism ko apni or ghuma liya,jaise lete hue use god me le raha ho & neeche se bade qatil dhakke lagane laga.nishi ki masti ka to koi hisab hi nahi raha,vo apne boss ke khubsuart chehre ko chumte hue aahe bharte hue uski chudai ka maza lene lagi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--2

गतान्क से आगे.

"75 लाख..और कोई है जो इस से बड़ी बोली लगाना चाहता है?",उसने उमीद से दाई क़तार मे बैठे शख्स को देखा मगर उसने अपना हाथ नही उठाया,"..75 लाख..1....75 लाख..2..75 लाख....3!",उसने हात्ोड़ा अपने सामने रखे डेस्क पे मारा,"..ये बेहतरीन पैंटिंग 75 लाख रुपयो मे यहा सामने बाई क़तार मे बैठे ग्रे सूट वाले साहब की हुई.",वो शख्स विजयंत का ही 1 आदमी था जो उसके लिए यहा बोली लगा रहा था.उसे सख़्त हिदायत थी कि चाहे जो भी हो उसे ये पैटिंग ख़रीदनी ही है.उसे ताक़ीद की गयी थी कि जो शख्स दाई क़तार मे बैठा था उसका मालिक भी उस पैंटिंग को खरीदने की हर मुमकिन कोशिश करेगा मगर उसे किसी भी कीमत पे कामयाब नही होने देना है.विजयंत के आदमी ने खुशी से भी ज़्यादा चैन की सांस ली & अपने मोबाइल से अपने बॉस की सेक्रेटरी का नंबर मिलाया.बोली यहा तक पहुँचेगी ये किसी को उम्मीद नही थी.उसे समझ नही आ रहा था कि उस पैंटिंग मे ऐसा था क्या जो उसका मालिक उसकी इतनी बड़ी कीमत दे रहा था.

दाई क़तार मे बैठा शख्स थोड़ा मायूस दिख रहा था.नीलामी ख़त्म होते ही वो उठा & फ़ौरन कमरे से बाहर चला गया.बाकी लोग आए तो थे नीलामी मे शरीक होने मगर जब इन दो लोगो ने बोलिया लगानी शुरू की तो वो बस दर्शक ही बन गये थे.उन्हे बड़ा मज़ा आया था ये खेल देख के जिसमे 1 बार फिर विजयंत मेहरा जीत गया था.

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"आआअन्न्‍न्णनह......!",1 लंबी चीख मार नीशी झाड़ते हुए अपने बॉस के आगोश से छिटक उसके उपर से उतरते हुए करवट बदल लेट गयी & सुबकने लगी.झड़ने की शिद्दत उसका दिल बर्दाश्त नही कर पाया था & जज़्बातो का सैलाब उसकी आँखो से फुट पड़ा था.विजयंत प्यार से उसके बाल सहला रहा था.काफ़ी देर तक वो वैसी ही पड़ी रही.उसकी सिसकियाँ बंद हो गयी थी मगर वो घूम नही रही थी.विजयंत भी उसे घूमने को नही कह रहा था.कुच्छ पल बाद नीशी घूमी & अपने बॉस को देखा.विजयंत को उसकी आँखो मे सुकून & वासना का अजीब संगम दिखा.वो लेटे-2 ही आगे सर्की & अपने बॉस के लंड को थाम लिया.विजयंत अभी दाई करवट से लेटा था.नीशी के लंड पकड़ते ही वो पीठ के बल लेट गया.उसके लंड को हिलाते हुए नीशी उसके सीने को चूमने लगी & चूमते-2 लंड तक पहुँच गयी.उसके बाद कोई 5-7 मिनिट तक विजयंत उसके कोमल मुँह के ज़रिए जन्नत की सैर करता रहा.

नीशी जी भर के लंड से खेलने के बाद 1 बार फिर बिस्तर पे लेट गयी & अपने बॉस को अपने उपर खींचा & उसके बालो मे उंगलिया फिराते हुए सर उठा उसके चेहरे & होंठो को चूमने लगी.कुच्छ देर चूमने के बाद विजयंत ने उसकी टाँगे फैला के लंड को दोबारा उसकी चूत मे घुसाना शुरू किया तो नीशी ने खुद ही अपनी बाई टाँग उठा के उसके दाए कंधे पे रख दी.वो चाहती थी कि लंड जड तक उसकी चूत मे उतरे & जब विजयंत झाडे तो वो उसके गर्म वीर्य को अपनी चूत की आख़िरी गहराई मे अपनी कोख मे महसूस करे.विजयंत ने उसकी दूसरी टांग भी अपने कंधे पे चढ़ाई & उसकी चुदाई शुरू कर दी.

नीशी अब अपने आपे मे नही थी.उसे सिर्फ़ खुद के मज़े की परवाह थी.उसने विजयंत के गले मे बाहे डाल उसे नीचे झुकाया & खुद भी उचक के उसके चेहरे को चूमने लगी.उसकी आहे 1 बार फिर तेज़ हो रही थी.विजयंत अब उसके उपर पूरा झुक गया था & नीशी की चूचियाँ उसकी खुद की जाँघो से दब गयी थी.विजयंत काफ़ी देर तक उसे चूमते हुए चोद्ता रहा.अब उसकी भी मस्ती बहुत बढ़ गयी थी.उसने नीशी की टाँगो को कंधो से सरकाया तो उसने उन्हे उसकी कमर पे बाँध दिया.विजयंत ने अपना मुँह नीशी के भूरे निपल्स से लगाया & उन्हे चूसने लगा.नीशी के बेसबरा हाथ विजयंत की पीठ & गंद पे घूम रहे थे & वो उसकी छातियो को चूस रहा था.उसका हर धक्का नीशी की कोख पे चोट कर रहा था & अब वो मस्ती मे चीखे जा रही थी.विजयंत काफ़ी देर से उसे बिना झाडे चोद रहा था & अब उसका लंड भी झड़ने को बेकरार था.उसने नीशी के सीने से सर उठाया & अपने धक्के & तेज़ कर दिए.उसके नीचे अपने सर को बेचैनी से झटकती उस से चिपटि नीशी भी अपनी मंज़िल के करीब थी.विजयंत ने अपने लंड को उसकी कोख के दरवाज़े पे आख़िरी बार मारा & अपने बदन को उपर की ओर मोडते,चीखती नीशी झाड़ गयी.ठीक उसी वक़्त उसकी हसरत को पूरा करते हुए उसकी कोख को अपने वीर्य से भरता हुआ विजयंत भी झाड़ गया.

"ऊऊवन्न्न्नह......हाआऐययईईईईईईईईईईई..!",वो खूबसूरत लड़की झाड़ रही थी & उसे चोद्ता उसके उपर झुका मर्द भी उसकी चूत मे अपना वीर्या भर रहा था.तभी बिस्तरे के किनारे रखी साइड-टेबल पे रखा 1 मोबाइल बजा.

"हूँ.",उस मर्द ने पहले अपने नीचे पड़ी लड़की को चूमा & फिर वैसे ही उसके उपर पड़े हुए मोबाइल कान से लगाया.

"सर,वो विजयंत मेहरा ने पैंटिंग खरीद ली."

"वेरी गुड.कितने मे?",लड़की के चेहरे पे 1 अजीब भाव था.झड़ने का सुकून & उसके बाद की चमक उसके चेहरे पे सॉफ दिख रही थी मगर साथ ही वो थोड़ी खफा भी लग रही थी & अपना चेहरा बाई तरफ घुमा रखा था & मर्द को नही देख रही थी जो अभी भी उसके गाल को चूम रहा था.

"75 लाख मे,सर."

"अरे यार!कम से कम करोड़ तो खर्च करवाते!खैर,चलो.ये भी ठीक है.",उसने फोन किनारे रखा & उस लड़की का चेहरा अपनी ओर घुमा उसके होंठ चूमने चाहे मगर उस लड़की ने झल्ला के उसे परे धकेला & उसे खुद के उपर से हटाते हुए बिस्तर से उतर बाथरूम मे चली गयी.मर्द हंसा & बिस्तर से उतर कमरे की खिड़की पे आ गया & वाहा का परदा हटा के बाहर देखने लगा.

"तुम समझते हो तुम जीत गये,मेहरा!",वो दूर सामने दिखाई देते होटेल वाय्लेट की इमारत को देख मन ही मन हंसा,"..कितने ग़लत हो तुम!मैने तुम्हे जीतने दिया है,मेहरा.जीता तो मैं ही हू!",ये शख्स था ब्रिज कोठारी,कोठारी ग्रूप का मालिक.मेहरा के ट्रस्ट ग्रूप की तरह ये भी इनफ्रास्ट्रक्चर के धंधे मे था & फिर ट्रस्ट के पीछे-2 ये भी होटेल के बिज़्नेस मे आया था.पिच्छले 10 सालो मे इनके धंधे से जुड़ा जब भी कोई ठेका या टेंडर निकलता तो ज़्यादातर मुक़ाबला इन्ही दोनो के बीच होता.नतीजा ये था कि दोनो मे 1 दुश्मनी पैदा हो गयी थी.दोनो को अपनी तरक्की से ज़्यादा सामने वाले के गिरने की ज़्यादा फ़िक्र रहती थी.

ब्रिज कोठारी & विजयंत मेहरा मे काई चीज़े 1 जैसी थी.जैसे की बिज़्नेस करने का हुनर & हार ना मानने की ख़ासियत.दोनो की उम्र भी बराबर थी & कद भी.दोनो ही अपनी असल उम्र से कम के दिखते थे.ब्रिज भी 1 फौलादी जिस्म वाला शख्स था & मेहरा की तरह ही चुदाई का शौकीन भी मगर जहा विजयंत 1 गोरा & हॅंडसम शख्स था वही ब्रिज 1 साधारण शक्लोसुरत वाला सांवला इंसान था.

दोनो की ये दुश्मनी अब डेवाले मे मशहूर थी & जब भी इन दोनो की टक्कर होती सभी दम साधे ये देखते की कौन जीतता है.ट्रस्ट ग्रूप कोठारी ग्रूप से बड़ा था & लाख कोशिशो के बावजूद ब्रिज विजयंत को उतनी बार नही हरा पाया था जितना की वो चाहता था लेकिन अब शायद ये बदलने वाला था.

ब्रिज खिड़की पे खड़ा इसी बारे मे सोच रहा था..उसका प्लान कामयाब होगा या नही?..तभी दरवाज़ा खुला & वो लड़की बाहर आई.उसके चेहरे की नाराज़गी बरकरार थी.वो सीधा बिस्तर के पास फर्श पे पड़े अपने कपड़ो को उठाने लगी.

"अरे सोनम,इतनी जल्दी क्या है?",ब्रिज भले ही 53 साल का था मगर अभी भी किस जवान की तरफ फुर्तीला था.वो पलक झपकते ही लड़की के करीब पहुँचा & उसे बाहो मे भर लिया,"मेहरा ने पैंटिंग खरीद ली,मैने उसके 75 लाख पानी मे डूबा दिए!",वो हंसा,"..वो सोच रहा था कि मुझे भी वो पैंटिंग चाहिए.बस,लगवाता रहा बोलियाँ & मेरा आदमी तो बस यू ही बोलिया लगा रहा था.उसका तो मक़सद ही यही था कि मेहरा का आदमी बड़ी से बड़ी बोली लगाए & उसके पैसे बर्बाद हों!",लड़की ने उसकी बात पे कोई ध्यान नही दिया & उसकी बाहो से निकलने की कोशिश करने लगी.

"आख़िर बात क्या है,सोनम?",ब्रिज ने उस लड़की का चेहरा अपनी ओर घुमाया.लड़की की उम्र 26 बरस की थी,रंग सांवला था & जिस्म बिल्कुल कसा हुआ था.लड़की ने कुच्छ जवाब नही दिया मगर काफ़ी देर से रोकी रुलाई अब वो और ना रोक सकी.

"अरे..रो क्यू रही हो?..क्या बात है?"

"कुच्छ नही!",उसने उसे परे धकेला.

"अरे बताओ तो..ऐसा क्या हो गया?"

"आप बस मुझे इस्तेमाल कर रहे हैं..",वो अब फूट-2 के रो रही थी,"..मैं बस 1` खिलोना हू आपके लिए..रखैल बनाके रखा है आपने मुझे!",ब्रिज शांत खड़ा सुन रहा था.लड़की कुच्छ देर तक अपनी भादास निकालती रही.

"हो गया?",ब्रिज ने उसके चुप होने पे उसके कंधो पे हाथ रखा & उसे बिस्तर पे बिठा दिया,"..तुम्हे याद है आज से 3 महीने पहले जब मैने तुम्हारा इंटरव्यू लिया था तब मैने तुमसे क्या कहा था?"

"हां,यही की मुझे आप 1 बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपना चाहते हैं..मुझे क्या पता था कि वो ज़िम्मेदारी ये है!"

"नही..",ब्रिज हंसा,"..सोनम,तुम मुझे बहुत हसीन लगी & मैने तय कर लिया था कि मुझे तुम्हारे हुस्न को करीब से देखना ही है लेकिन इसका ये मतलब नही कि मुझे तुम्हारी बाकी खूबिया नही दिखी.",वो उसके बाई तरफ बैठा था,उसने अपनी दाई बाँह उसकी पीठ पे डाली थी & बाए मे उसका दाया हाथ थामे था.

"मैं हर रोज़ तुमसे मिलता हू,बातें करता हू..& तुम्हे कुच्छ बातें बताता भी हू."

"हां..",सोनम अब ये समझने की कोशिश कर रही थी कि ब्रिज कहना क्या चाह रहा था,"..आप विजयंत मेहरा के बारे मे बातें करते रहते हैं लेकिन वो तो कोई ऐसी बात नही."

"क्यू?..क्यूकी वो मेरा दुश्मन है & मैं दीवाना हू इस दुश्मनी को लेके?..सोनम,सारा शहर यही समझता है कि हम दोनो दुश्मनी मे पागल हैं लेकिन उन बेवकूफो को ये नही पता कि हम दोनो उन सब से ज़्यादा समझदार हैं.हम लड़ते हैं मगर दिमाग़ से & चाहे कुच्छ हो जाए इस दुश्मनी की आग मे खुद को आग नही लगाएँगे..हां दूसरे को जलाने की पूरी कोशिश करेंगे..आगे उपरवाले की मर्ज़ी!"

"..तुम जब मेरे दफ़्तर मे आई थी तो मैने समझ लिया था कि तुम बहुत होशियार हो & मेरा 1 खास काम कर सकती हो."

"कैसा काम?"

"तुम विजयंत की सेक्रेटरी बनोगी."

"क्या?!",सोनम की आँखे हैरत से फॅट गयी,"..आपका मतलब है कि मैं उसके यहा नौकरी करूँगी & वाहा की सारी बातें आपको बताउन्गि?"

"हां & बदले मे तुम्हे मैं अपने यहा वो पोज़िशन & पैसे दूँगा जिसकी तुम हक़दार हो.",ब्रिज ने उसका हाथ अपने लंड पे रखा & उसके कान मे जो रकम बोली वो सुन सोनम की आँखे अब तो बिल्कुल फॅट गयी.

"मगर ये बहुत मुश्किल है..कही पकड़ी गयी तो?",ब्रिज ने उसे अपने करीब खींचा तो बाहो से भिंचे जाने की वजह से उसकी छातियाँ & उभर गयी.सोनम ने उसके लंड को हिलाना शुरू किया.पिच्छले 3 महीनो मे उसे ये ज़रूर लगा था कि ब्रिज उसके जिस्म से खेल रहा था लेकिन उसे भी कम मज़ा नही आया था.वो उस जैसे मर्द से पहले कभी नही मिली थी.शुरू मे उसे लगा था की कोठारी की उम्र चुदाई मे रुकावट बनेगी मगर कितना ग़लत थी वो.ब्रिज मे किसी नौजवान से ज़्यादा जोश & माद्दा था.हर बार वो उसे पूरी तरह थका देता था & भरपूर मज़ा देता था....& उसका लंड..ओफफफफ्फ़..उसके लंड ने तो उसे पागल ही कर दिया था!..उसके हाथ मे 1 बार फिर वो अपनी 9 इंच की पूरी लंबाई तक पहुँच गया था.

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क्रमशः.......

JAAL paart--2

gataank se aage.

"75 lakh..aur koi hai jo is se badi boli lagana chahta hai?",usne umeed se dayi qatar me baithe shakhs ko dekha magar usne apna hath nahi uthaya,"..75 lakh..1....75 lakh..2..75 lakh....3!",usne hathoda apne samne rakhe desk pe mara,"..ye behtarin painting 75 lakh rupayo me yaha samne bayi qatar me baithe grey suit vale sahab ki hui.",vo shakhs vijayant ka hi 1 aadmi tha jo uske liye yaha boli laga raha tha.use sakht hidayat thi ki chahe jo bhi ho use ye paitnitng kharidni hi hai.use taqid ki gayi thi ki jo shakhs dayi qatar me baitha tha uska malik bhi us painting ko kharidne ki har mumkin koshish karega magar use kisi bhi keemat pe kamyab nahi hone dena hai.vijayant ke aadmi ne khushi se bhi zyada chain ki sans li & apne mobile se apne boss ki secretary ka number milaya.boli yaha tak pahunchegi ye kisi ko umeed nahi thi.use samajh nahi aa raha tha ki us painting me aisa tha kya jo uska malik uski itni badi keemat de raha tha.

dayi qatar me baitha shakhs thoda mayus dikh raha tha.nilami khatm hote hi vo utha & fauran kamre se bahar chala gaya.baki log aaye to the nilami me sharik hone magar jab in do logo ne boliya lagani shuru ki to vo bas darshak hi ban gaye the.unhe bada maza aaya tha ye khel dekh ke jisme 1 baar fir vijayant mehra jeet gaya tha.

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"aaaaannnnnhhhhhhhhh......!",1 lambhi chikh maar nishi jhadte hue apne boss ke agosh se chhitak uske upar se utarte hue karwat badal let gayi & subakne lagi.jhadne ki shiddat uska dil bardasht nahi kar paya tha & jazbato ka sailab uski aankho se phut pada tha.vijayant pyar se uske baal sehla raha tha.kafi der tak vo vaisi hi padi rahi.uski siskiyan band ho gayi thi magar vo ghum nahi rahi thi.vijayant bhi use ghumne ko nahi keh raha tha.kuchh pal baad nishi ghumi & apne boss ko dekha.vijayant ko uski aankho me sukun & vasna ka ajib sangam dikha.vo lete-2 hi aage sarki & apne boss ke lund ko tham liya.vijayant abhi dayi karwat se leta tha.nishi ke lund pakadte hi vo pith ke bal let gaya.uske lund ko hilate hue nishi uske seene ko chumne lagi & chumte-2 lund tak pahunch gayi.uske baad koi 5-7 minute tak vijayant uske komal munh ke zariye jannat ki sair karta raha.

nishi ji bhar ke lund se khelne ke baad 1 baar fir bistar pe let gayi & apne boss ko apne upar khincha & uske baalo me ungliya firate hue sar utha uske chehre & hontho ko chumne lagi.kuchh der chumne ke baad vijayant ne uski tange faila ke lund ko dobara uski chuit me ghusana shuru kiya to nishi ne khud hi apni bayi tnag utha ke uske daye kandhe pe rakh di.vo chahti thi ki lund jud tak uski chut me utre & jab vijayant jhade to vo uske garm virya ko apni chut ki aakhirir gehrayi me apni kokh me mehsus kare.vijayant ne uski dusri tang bhi apne kandhe pe chadhayi & uski chudai shuru kar di.

nishi ab apne aape me nahi thi.use sirf khud ke maze ki parwah thi.usne vijayant ke gale me baahe dal use neeche jhukaya & khud bhi uchak ke uske chehre ko chumne lagi.uski aahe 1 baar fir tez ho rahi thi.vijayant ab uske uapr pura jhuk gaya tha & nishi ki choochiyan uski khud ki jangho se dab gayi thi.vijayant kafid er tak use chumte hue chodta raha.ab uski bhi masti bahut badh gayi thi.usne nishi ki tango ko kandho se sarkaya to usne unhe uski kamar pe bandh diya.vijayant ne apna munh nishi ke bhure nipples se lagaya & unhe chusne laga.nishi ke besabra hath vijayant ki pith & gand pe ghum rahe the & vo uski chhatiyo ko chus raha tha.usk har dhakka nishi ki kokh pe chot kar raha tha & ab vo masti me chikhe ja rahi thi.vijayant kafi der se use bina jhade chod raha tha & ab uska lund bhi jhadne ko bekarar tha.usne nishi ke seene se sar uthaya & apne dhakke & tez kar diye.uske neeche apne sar ko bechaini se jhatakti us se chipti nishi bhi apni manzil ke karib thi.vijayant ne apne lund ko uski kokh ke darwaze pe aakhiri baar mara & apne badan ko upar ki mor modte,chikhti nishi jhad gayi.thik usi waqt uski hasrat ko pura karte hue uski kokh ko apne virya se bharta hua vijayant bhi jhad gaya.

"Ooooonnnnhhhhhh......haaaaaiiiiiiiiiiiiii..!",vo khubsurat ladki jhad rahi thi & use chodta uske upar jhuka mard bhi uski chut me apna virya bhar raha tha.tabhi bistare ke kinare rakhi side-table pe rakha 1 mobile baja.

"hun.",us mard ne pehle apne neeche padi ladki ko chuma & fir vaise hi uske upar pade hue mobile kaan se lagaya.

"sir,vo Vijayant Mehra ne painting kharid li."

"very good.kitne me?",ladki ke chehre pe 1 ajib bhav tha.jhadne ka sukun & uske baaad ki chamak uske chehre pe saaf dikh rahi thi magar sath hi vo thodi khafa bhi lag rahi thi & apna chehra bayi taraf ghuma rakha tha & mard ko nahi dekh rahi thi jo abhi bhi uske gaal ko chum raha tha.

"75 lakh me,sir."

"are yaar!kam se kam karod to kharch karwate!khair,chalo.ye bhi thik hai.",usne fone kinare rakha & us aldki ka chehra apni or ghuma uske honth chumne chahe magar us ladki ne jhalla ke use pare dhakela & use khud ke upar se hatate hue bistar se utar bathroom me chali gayi.mard hansa & bistar se utar kamre ki khidki pe aa gaya & vaha ka parda hata ke bahar dekhne laga.

"tum samajhte ho tum jeet gaye,mehra!",vo door samne dikhayi dete Hotel Violet ki imarat ko dekh man hi man hansa,"..kitne galat ho tum!maine tumhe jitne diya hai,mehra.jeeta to main hi hu!",ye shakhs tha Brij Kothari,Kothari group ka malik.mehra ke Trust group ki tarah ye bhi infrastructure ke dhandhe me tha & fir trust ke peechhe-2 ye bhi hotel ke business me aaya tha.pichhle 10 salo me inke dhandhe se juda jab bhi koi theka ya tender nikalta to zyadatar muqabla inhi dono ke beech hota.natija ye tha ki dono me 1 dushmani paida ho gay thi.dono ko apni tarakki se zyada samne vale ke girne ki zyada fikr rehti thi.

brij kothari & vijayant mehra me kayi chize 1 jaisi thi.jaise ki business karne ka hunar & haar na maanane ki khasiyat.dono ki umra bhi barabar thi & kad bhi.dono hi apni asal umra se kam ke dikhte the.brij bhi 1 fauladi jism vala shakhs tha & mehra ki tarah hi chudai ka shaukeen bhi magar jaha vijayant 1 gora & handsome shakhs tha vahi brij 1 sadharan shaklosurat vala sanwla insan tha.

dono ki ye dushmani ab Devalay me mashoor thi & jab bhi in dono ki takkar hoti sabhi dum sadhe ye dekhte ki kaun jeetata hai.trust group kothari group se bada tha & lakh koshisho ke bavjood brij vijayant ko utni baar nahi hara paya tha jitna ki vo chahta tha lekin ab shayad ye badalne vala tha.

brij khidki pe khada isi bare me soch raha tha..uska plan kamyab hoga ya nahi?..tabhi darwaza khula & vo ladki bahar aayi.uske chehre ki narazgi barkarar thi.vo seedha bistar ke paas farsh pe pade apne kapdo ko uthane lagi.

"are Sonam,itni jaldi kya hai?",brij bhale hi 53 saal ka tha magar abhi bhi kis jawan ki taraf furtila tha.vo palak jhapakte hi ladki ke karib pahuncha & use baaho me bhar liya,"mehra ne painting kharid li,maine uske 75 lakh pani me duba diye!",vo hansa,"..vo soch raha tha ki mujhe bhi vo painting chahiye.bas,lagwata raha boliyan & mera aadmi to bas yu hi boliya laga raha tha.uska to maqsad hi yehi tha ki mehra ka aadmi badi se badi boli lagaye & uske paise barbad hon!",ladki ne uski baat pe koi dhyan nahi diya & uski baaho se nikalne ki koshish karne lagi.

"aakhir baat kya hai,sonam?",brij ne us ladki ka chehra apni or ghumaya.ladki ki umra 26 baras ki thi,rang sanwla tha & jism bilkul kasa hua tha.ladki ne kuchh jawab nahi diya magar kafi ser se roki rulayi ab vo aur na ro saki.

"are..ro kyu rahi ho?..kya baat hai?"

"kuchh nahi!",usne use pare dhakela.

"are batao to..aisa kya ho gaya?"

"aap bas mujhe istemal kar rahe hain..",vo ab phut-2 ke ro rahi thi,"..main bas 1` khilona hu aapke liye..rakhail banake rakha hai aapne mujhe!",brij shant khada sun raha tha.ladki kuchh der tak apni bhadas nikalti rahi.

"ho gaya?",brij ne uske chup hone pe uske kandho pe hath rakha & use bistar pe bitha diya,"..tumhe yaad hai aaj se 3 mahine pehle jab maine tumhara interview liya tha tab maine tumse kya kaha tha?"

"haan,yehi ki mujhe aap 1 bahut badi zimmedari saunpna chahte hain..mujhe kya pata tha ki vo zimmedari ye hai!"

"nahi..",brij hansa,"..sonam,tum mujhe bahut haseen lagi & maine tay kar liya tha ki mujhe tumhare husn ko karib se dekhna hi hai lekin iska ye matlab nahi ki mujhe tumhare baki khubiya nahi dikhi.",vo uske bayi taraf baitha tha,usne apni dayi banh uski pith pe dali thi & baye me uska daya hath thame tha.

"main har roz tumse milta hu,baaten karta hu..& tumhe kuchh baaten batata bhi hu."

"haan..",sonam ab ye samajhne ki koshish kar rahi thi ki brij kehna kya chah raha tha,"..aap vijayant mehra ke bare me baaten karte rehte hain lekin vo to koi aisi baat nahi."

"kyu?..kyuki vo mera dushman hai & main deewana hu is dushmani ko leke?..sonam,sara shehar yehi samajhta hai ki hum dono dushmani me pagal hain lekin un bevkufo ko ye nahi pata ki hum dono un sab se zyada samajhdar hain.hum ladte hain magar dimagh se & chahe kuchh ho jaye is dushmani ki aag me khud ko aag nahi lagayenge..haan dusre ko jalane ki puri koshish karenge..aage uparwale ki marzi!"

"..tum jab mere daftar me aayi thi to maine samajh liya tha ki tum bahut hoshiyar ho & mera 1 khas kaam kar sakti ho."

"kaisa kaam?"

"tum vijayant ki secretary banogi."

"kya?!",sonam ki aankhe hairat se phat gayi,"..aapka matlab hai ki main uske yaha naukri karungi & vaha ki sari baaten aapko bataungi?"

"haan & badle me tumhe main apne yaha vo position & paise dunga jiski tum haqdar ho.",brij ne uska hath apne lund pe rakha & uske kaan me jo rakam boli vo sun sonam ki aankhe ab to bilkul phat gayi.

"magar ye bahut mushkil hai..kahi pakdi gayi to?",brij ne use apne karib khincha to baaho se bhinche jane ki vajah se uski chhatiya & ubhar gayi.sonam ne uske lund ko hilana shuru kiya.pichhle 3 mahino me use ye zarur laga tha ki brij uske jism se khel raha tha lekin use bhi kam maza nahi aaya tha.vo us jaise mard se pehle kabhi nahi mili thi.shuru me use laga tha ki kothari ki umra chudai me rukawat banegi magar kitna galat thi vo.brij me kisi naujawan se zyada josh & madda tha.har baar vo use puri tarah thaka deta tha & bharpur maza deta tha....& uska lund..offfff..uske lund ne to use pagal hi kar diya tha!..uske hath me 1 baar fir vo apni 9 inch ki puri lambai tak pahunch gaya tha.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--3

गतान्क से आगे.

"पकड़ी तो तुम जाओगी नही.इतना यकीन तो है मुझे तुम्हारे दिमाग़ पे.",कोठारी ने उसके होंठ चूम लिए.

"मगर मैं वाहा घुसू कैसे?वो मुझे क्यू रखेगा?",ब्रिज के इशारे पे वो उठ के उसकी गोद मे बैठ गयी.उसका गुस्सा काफूर हो चुका था & अब वो उसके लंड को छोड़ उसके सीने पे बड़े प्यार से हाथ फिरा रही थी.

"देखो,हमारे जैसी बड़ी कंपनीज को जब सेक्रेटरीस की ज़रूरत होती है तो हम अख़बारो मे इश्तेहार तो निकलते नही हैं.हम उसी एजेन्सी को बुलाते हैं जो हमारे लिए खास यही काम करती है.डेवाले मे ऐसी नामचीन 1 ही एजेन्सी है.."

"..जहा से मैं यहा आई थी.",गोद से थोड़ा उठा सोनम ने अपनी बाई चूची ब्रिज के मुँह मे दे दी.

"बिल्कुल सही..",थोड़ी देर तक चूची को चूसने के बाद ब्रिज ने उसे मुँह से निकाला & उसकी कमर पकड़ उसे उठाया तो उसका इशारा समझते हुए सोनम ने अपने घुटने उसके दोनो तरह बिस्तर पे जमाए & अपनी चूत को उसके लंड पे झुकाने लगी,"..मुझे पता चल गया है कि मेहरा की सेक्रेटरी जा रही है,उसकी शादी तय हो गयी है & अब उस एजेन्सी को ही मेहरा की नयी सेक्रेटरी के पोस्ट के लिए लड़कियो को भेजने को कहा गया है.

"उउम्म्म्मम..मगर क्या गॅरेंटी है कि वो मुझे रख लेगा?..आईय्य्यीईए..!",लंड को उसने पूरा अपने अंदर ले लिया था.

"तुम्हारा बायोदेटा मैने ऐसा कमाल बनवाया है कि कोई भी तुम्हे रख ले फिर मैने अपने आदमी के ज़रिए तुम्हारे नाम को सबसे उपर रखवाया है.बस तुम मेहरा को इंप्रेस कर दो तो हमारा काम हो जाए."

"बहुत मुश्किल है ये काम....आआहह..!",ब्रिज उसकी गंद को मसल्ते हुए उसी चूचिया चूस रहा था & वो उसके लंड पे कूद रही थी.

"कोई मुश्किल नही है.मेहरा जब तुम्हारे हुस्न को तुम्हारे बाइयडेटा के साथ देखेगा & जब तुम उसके हर सवाल का सही जवाब दोगि तो कोई मुश्किल नही होगी.तुम फ़िक्र मत करो,मैं इंटरव्यू के लिए तुम्हारी तैयारी खुद कर्वाऊंगा मगर पहले मुझे तुम्हारे हुस्न मे डूबना है.1 बार तुमने ट्रस्ट जाय्न कर लिया फिर तुम्हारे साथ ये मस्त चुदाई ना जाने मुझे कब नसीब हो.",वो सोनम की गंद थामे खड़ा हो गया & उसकी छातियो मे अपना मुँह रगड़ने लगा तो वो भी मस्ती मे बहाल हो गयी & उसकी शरारती हरकत से हंसते हुए उसके सर को चूमने लगी.

"नीशी.",विजयंत मेहरा अपने कपड़े पहन चुका था & नीशी अपनी स्कर्ट का हुक लगा रही थी.

"ये क्या है,सर?",नीशी ने मेहरा का बढ़ाया हुआ लिफ़ाफ़ा लिया.

"तुम्हारी शादी का तोहफा,नीशी.",नीशी ने लिफ़ाफ़ा खोला तो अंदर 10 लाख का स्चेक था.

"सर.."

"नीशी,इन पैसो से तुम अपना आने वाला कल महफूज़ कर सकती हो.",नीशी का गला भर आया था.उसका दिल इस बात से दुखी था कि अब कभी वो ऐसी जिस्मानी खुशी शायद ही महसूस कर सके.

"थॅंक्स,सर.अगर कभी मैं इस शहर मे आऊँ तो आपसे मिल सकती हू?"

"ज़रूर,नीशी.इसमे पुच्छने की क्या बात है.",मेहरा ने कमरे का दरवाज़ा खोला तो वो बाहर निकल गयी.

"गुडबाइ,सर."

"गुडबाइ,नीशी.",उसने दरवाज़ा बंद किया & हल्के से हंसा.ये लड़किया ऐसी बेवकूफ़ क्यू होती हैं!क्या करेगी दोबारा मुझसे मिलके..मुझसे चुदेगि..& अपनी शादीशुदा ज़िंदगी बर्बाद कर देगी!

लड़कियो का जिस्म विजयंत का खास शौक था मगर कमज़ोरी नही.उसकी नज़रो मे कोई लड़की 1 बार चढ़ जाती तो वो उसे अपने बिस्तर तक लाके ही छ्चोड़ता था मगर इसका ये मतलब नही था कि वो किसी लड़की के लिए खुद को बर्बाद कर लेता.उसने आजतक उनके जिस्मो से प्यार किया था उनके दिलो से नही.

नीशी के जाने के बाद उसने अपना ब्लॅकबेरी खोल के अपायंट्मेंट्स चेक किए.दफ़्तर के कामो & मीटिंग्स के अलावा जो सबसे खास बात थी वो ये की इस हफ्ते के आख़िर मे उसका बेटा,उसका वारिस समीर घर आ रहा था.बेटे की तस्वीर देख उसके होंठो पे खुशी & गर्व की मुस्कान फैल गयी.

समीर 1 साल पहले ही विदेश से एमबीए करके डेवाले आया था.समीर कॉलेज के दीनो से ही ट्रस्ट ग्रूप के अलग-2 कंपनीज़ के दफ़्तरो मे बतौर ट्रेनी कुच्छ ना कुच्छ काम करता रहा था लेकिन इस बार जब पढ़ाई पूरी करके वो वापस आया तो उसके पिता ने उसे 1 बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी.गुजरात के सामुद्री किनारे पे 1 बंदरगाह बनाने का बहुत बड़ा कांट्रॅक्ट उन्हे मिला था & विजयंत ने उसे पूरे प्रॉजेक्ट की ज़िम्मेदारी समीर के कंधो पे डाल दी.

ग्रूप के सभी आला अफसरो को लगा कि ये समीर के साथ ज़्यादती थी,उसे तजुर्बा ही क्या था!..& प्रॉजेक्ट भी खटाई मे पड़ सकता था मगर विजयंत मेहरा बहुत दूर की सोचता था.वो जानता था कि अगर नुकसान हुआ तो भी उसे 1 बड़ी अनमोल बात पता चलेगी-वो ये कि उसका बेटा उसके बाद ग्रूप की बागडोर संभालने के काबिल है या नही.समीर ने उसे निराश नही किया था.प्रॉजेक्ट डेडलाइन से पहले ही पूरा हो गया था & अब 10 दिन बाद खुद PM उसका इनेरेशन करने वाले थे.

विजयंत ने आगे देखा तो पाया कि सोमवार की सुबह को 10 बजे उसे अपनी नयी सेक्रेटरी की पोस्ट के लिए आई लड़कियो का इंटरव्यू लेना था.ये काम कोई भी कर सकता था लेकिन वो ऐसा नही चाहता था.उसके दफ़्तर से होके कयि ज़रूरी & अहम काग़ज़ात & बातें निकलते थे & वाहा वो कोई ऐसा इंसान नही आने देना चाहता था जोकि भरोसेमंद ना हो.उसने फोन जेब मे डाला & अपना कोट पहन सूयीट से बाहर निकल गया.

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खिड़की के पर्दो के बीच से आती रोशनी चेहरे पे पड़ने से उसकी नींद टूटी & वो बिस्तर मे उठ बैठी.उसका गोलाकार चेहरा बड़ा मासूम & ग़ज़ब का खूबसूरत था.झील सी गहरी काली आँखे अभी नज़र नही आ रही थी क्यूकी अभी भी नींद की वजह से उसकी पलके बंद थी.खड़ी नाक & रसीले,गुलाबी होंठ देखते ही उन्हे चूम लेने का दिल करता था.उसने आँखे खोली & दीवार घड़ी की ओर देखा,शाम के 4 बज रहे थे.उसने बिखरे बालो को झटका तो वो कमर से थोड़ा उपर तक लहरा उठे.वो बिस्तर से उतरी & खड़ी होके उसने अपनी नर्म,गुदाज़ बाहें हवा मे उपर उठाके अंगड़ाई ली तो उसकी 38डी साइज़ की मस्त छातियाँ थोड़ी और उभर गयी.हल्के गुलाबी निपल्स से सजी उसकी बड़ी छातियाँ इतनी बड़ी होने के बावजूद ज़रा भी नही झूली थी.वो इस वक़्त बिल्कुल नंगी खड़ी थी & तब भी बिना ब्रा के भी उसकी चूचिया बिल्कुल सीधी तनी थी.

अंगड़ाई लेने की वजह से उसका सपाट पेट थोड़ा & खींचा & उसकी गहरी नाभि थोडी और लंबी दिखने लगी.खिड़की से आती रोशनी की लकीर अब सीधा उसके पेट & उसकी बिना बालो की नर्म,गुलाबी नाज़ुक सी दिख रही चूत पे पड़ रही थी.रोशनी मे उसका शफ्फाक़ गोरा जिस्म और चमकने लगा था.अंगड़ाई लेके उसने बाथरूम की ओर कदम बढ़ाए & तो 26 इंच की उसकी पतली कमर के नीचे 38 साइज़ की चौड़ी गंद बड़े ही दिलकश अंदाज़ मे लचकी.लड़की का कद 5'8" था जिस्म बिल्कुल भरा हुआ था लेकिन कही से भी माँस का 1 टुकड़ा भी झूल नही रहा था.पूरा जिस्म बिल्कुल कसा हुआ था.उस लड़की की मा ने उसका नाम बिल्कुल ठीक ही रखा था-रंभा.भगवान इंद्रा के दरबार की खास अप्सरा रंभा भी शायद उस हुस्न की मालिका के सामने पानी ही भरती नज़र आती.

लड़की ने बाथरूम मे जाके अपना चेहरा धोया & बॉल संवार के अपने कपड़े पहन लिए.बाथरूम से बाहर आ उसने अपने बिस्तर पे नज़र डाली जहा उसका बाय्फ्रेंड अभी तक सो रहा था.उसने घड़ी देखी,अभी थोड़ा वक़्त था.वो खिड़की से बाहर देखने लगी.वो आज अपने इस छ्होटे से शहर को छ्चोड़ रही थी-हमेशा के लिए.उसने पीछे घूम के रंभा अपने बाय्फ्रेंड की ओर देखा.वो समझता था कि वो लनोव जा रही है किसी नौकरी के चक्कर मे.

"तुझे वो नौकरी नही मिलेगी,रंभा.",थोड़ी देर पहले उसकी मस्त चूचियाँ चूस्ते हुए उसने कहा था.

"तुझे इतना यकीन कैसे है?",उसके बाल पकड़ के उसका मुँह अपने सीने से उठाया.

"अरे यार!तू बस यहा रह.मैं मम्मी-पापा को मना लूँगा,फिर मुझसे शादी कर & आराम से घर मे बैठ.",उसने फिर से अपना मुँह उसकी छाती से लगा दिया & दाए हाथ से उसकी बाई जाँघ को पकड़ के सहलाने लगा.उसके बाद रंभा ने और बहस नही की थी बस मन ही मन मुस्कुराती रही & उसकी गर्म हरकतों से मस्त हो उसके साथ चुदाई के खेल मे मगन हो गयी.

सच तो ये था कि रंभा लनोव से डेवाले जा रही थी यहा कभी ना वापस लौटने के लिए.उसने नज़र घुमा के नीचे देखा,इस शहर मे उसे हमेशा ही घुटन हुई थी & यहा उसे वो भी नही मिलने वाला था जिसकी उसे तमन्ना थी.अपने सारे सपने वो डेवाले मे पूरे करके ही दम लेगी,उसने तय कर लिया था.

रंभा का जनम आज से 24 बरस पहले इसी शहर मे हुआ था.उसकी मा ने उसे पाला था,उसका बाप कौन था ये उसे आज तक पता नही.उसकी मा ने दुनिया वालो को & उसे यही बताया था कि वो उसके जन्म से पहले ही मर गये लेकिन बड़ी होते-2 रंभा को ये सच्चाई पता चल ही गयी थी कि उसकी मा को किसी मर्द ने धोखा दिया था.वो उसके जिस्म से तब तक खेलता रहा जब तक रंभा उसके पेट मे ना आ गयी & फिर उसे बीच मझदार मे छ्चोड़ के गायब हो गया.उसकी मा बदनामी के डर से अपना शहर छ्चोड़ यहा आ गयी & यही 1 नक़ली विधवा की ज़िंदगी बिताने लगी.रंभा अपनी मा की बहुत इज़्ज़त करती थी.उस अकेली औरत ने उसे कभी कोई तकलीफ़ नही महसूस होने दी & हर मा-बाप की तरह यही कोशिश करती रही की उसकी औलाद इस ज़माने की सभी परेशानियो & गलीज बातो से दूर ही रहे.

मगर रंभा जितनी ही खूबसूरत थी उतना ही तेज़ दिमाग़ पाया था उसने.पढ़ाई मे वो हमेशा ही अच्छी रही थी मगर बड़ी कम उम्र मे ही वो दुनियादारी भी समझने लगी थी.अपनी इस छ्होटी सी ज़िंदगी मे उसने कुच्छ बहुत अहम बातें समझ ली थी.सब्से पहली ये कि पैसा बहुत ज़रूरी चीज़ थी.अगर आप अमीर हैं तो आपके लिए कयि बंद दरवाज़े आसानी से खुल जाते हैं & ज़िंदगी भी आसान हो जाती है.दूसरी ये कि 1 लड़की का जिस्म उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी भी है & सबसे बड़ी ताक़त भी,ये उस लड़की पे है कि वो अपने बदन का कैसा इस्तेमाल करती है.

2 बरस पहले रंभा की मा का इंतकाल हो गया.रंभा उस वक़्त 1 पॉलिटेक्निक से सेक्रेटरी की ट्रैनिंग का कोर्स कर रही थी.कुच्छ दिन तो मा के बचाए पैसे काम आए मगर उसके बाद उसे नौकरी की ज़रूरत महसूस हुई. नौकरी खोजने मे उसे बड़ी परेशानी हुई उपर से लगभग सभी जगह मर्दो की भूखी निगाहो का सामना उसे करना पड़ा.उसे उन्हे अपना जिस्म परोसने मे कोई परहेज़ नही था मगर वो इस मामले 1 पक्के कारोबारी की तरह सोच रही थी.अब तक उसे 1 भी मर्द ऐसा नही लगा जिसे जिस्म सौंपने के बदले मे उसे बहुत बड़ा फ़ायदा हासिल होता.उसी दौरान उसकी मुलाकात रवि से हुई.रवि के पिता की शहर मे कपड़े की 4 दुकाने थी & उसे पैसे की कमी नही थी.रंभा के हुस्न का तो वो दीवाना था ही.रंभा ने भी उसके सामने मुसीबत की मारी दुखिया होने का पूरा नाटक किया.

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क्रमशः.......

JAAL paart--3

gataank se aage.

"pakdi to tum jaogi nahi.itna yakin to hai mujhe tumhare dimagh pe.",kothari ne uske honth chum liye.

"magar main vaha ghusu kaise?vo mujhe kyu rakhega?",brij ke ishare pe vo uth ke uski god me baith gayi.uska gussa kafoor ho chuka tha & ab vo uske lund ko chhod uske seene pe bade puar se hath fira rahi thi.

"dekho,humare jaisi badi comapnies ko jab secretaries ki zarurat hoti hai to hum akhbaro me ishtehar to nikalte nahi hain.hum usi agency ko bulate hain jo humare liye khas yehi kaam karti hai.devalay me aisi namchin 1 hi agency hai.."

"..jaha se main yaha aayi thi.",god se thoda utha sonam ne apni bayi chhati brij ke munh me de di.

"bilkul sahi..",thodi der tak chhati ko chusne ke baad brij ne use munh se nikala & uski kamar pakad use uthaya to uska ishara samajhte hue sonam ne apne ghutne uske dono tarah bistar pe jamaye & apni chut ko uske lund pe jhukane lagi,"..mujhe pata chal gaya hai ki mehra ki secretary ja rahi hai,uski shadi tay ho gayi hai & ab us agency ko hi mehra ki nayi secretary ke post ke liye ladkiyo ko bhejne ko kaha gaya hai.

"uummmmm..magar kya guarantee hai ki vo mujhe rakh lega?..aaiiyyyeeeee..!",lund ko usne pura apne andar le liye tha.

"tumhara biodata maine aisa kamal banwaya hai ki koi bhi tumhe rakh le fir maine apne aadmi ke zariye tumhare naam ko sabse upar rakhwaya hai.bas tum mehra ko impress kar do to humara kaam ho jaye."

"bahut mushkil hai ye kaam....aaaahhhhhhhh..!",brij uski gand ko masalte hue usi choochiya chus raha tha & vo uske lund pe kud rahi thi.

"koi mushkil nahi hai.mehra jab tumhare husn ko tumhare biodata ke sath dekhega & jab tum uske har sawal ka sahi jawab dogi to koi mushkil nahi hogi.tum fikr mat karo,main interview ke liye tumhari taiyyari khud karwaoonga magar pehle mujhe tumhare husn me doobna hai.1 baar tumne trust join kar liya fir tumhare sath ye mast chudai na jane mujhe kab nasib ho.",vo sonam ki gand thame khada ho gaya & uski chhatiyo me apna munh ragadne laga to vo bhi masti me behal ho gayi & uski shararati harkat se hanste hue uske sar ko chumne lagi.

"Nishi.",Vijayant Mehra apne kapde pehan chuka tha & nishi apni skirt ka hook laga rahi thi.

"ye kya hai,sir?",nishi ne mehra ka badhaya hua lifafa liya.

"tumhari shadi ka tohfa,nishi.",nishi ne lifafa khola to andar 10 lakh ka cheque tha.

"sir.."

"nishi,in paiso se tum apna aane vala kal mehfuz kar sakti ho.",nishi ka gala bhar aaya tha.uska dil is baat se dukhi tha ki ab kabhi vo aisi jismani khushi shayad hi mehsus kar sake.

"thanx,sir.agar kabhi main is shehar me aaoon to aapse mil sakti hu?"

"zarur,nishi.isme puchhne ki kya baat hai.",mehra ne kamre ka darwaza khola to vo bahar nikal gayi.

"goodbye,sir."

"goodbye,nishi.",usne darwaza band kiya & halke se hansa.ye ladkiya aisi bevkuf kyu hoti hain!kya karegi dobara mujhse milke..mujhse chudegi..& apni shadishuda zindagi barbad kar degi!

ladkiyo ka jism vijayant ka khas shauk tha magar kamzori nahi.uski nazro me koi ladki 1 baar chadh jati to vo use apne bistar tak lake hi chhodta tha magar iska ye matlab nahi tha ki vo kisi ladki ke liye khud ko barbad kar leta.usne aajtak unke jismo se pyar kiya tha unke dilo se nahi.

nishi ke jane ke baad usne apna Blackberry khol ke appointments check kiye.daftar ke kaamo & meetings ke alawa jo sabse khas baat thi vo ye ki is hafte ke aakhir me uska beta,uska varis Sameer ghar aa raha tha.bete ki tasvir dekh uske hotho pe khushi & garv ki muskan fail gayi.

Sameer 1 saal pehle hi videsh se MBA karke Devalay aaya tha.sameer college ke dino se hi Trust group ke alag-2 companies ke daftaro me bataur trainee kuchh na kuchh kaam karta raha tha lekin is baar jab padhai puri karke vo vapas aaya to uske pita ne use 1 bahut badi zimmedari saunpi.Gujrat ke samudri kinare pe 1 bandargah banae ka bahut bada contract unhe mila tha & vijayant ne use pure project ki zimmedari sameer ke kandho pe daal di.

group ke sabhi ala afsaro ko laga ki ye sameer ke sath zyadti thi,use tajurba hi kya tha!..& project bhi khatai me pad sakta tha magar vijayant mehra bahut door ki sochta tha.vo janta tha ki agar nuksan hua to bhi use 1 badi anmol baat pata chalegi-vo ye ki uska beta uske baad group ki bagdor sambhalne ke kabil hai ya nahi.sameer ne use nirash nahi kiya tha.project deadline se pehle hi pura ho gaya tha & ab 10 din baad khud PM uska inaugaration karne vale the.

vijayant ne aage dekha to paya ki somvar ki subah ko 10 baje use apni nayi secretary ki post ke liye aayi ladkiyo ka interview lena tha.ye kaam koi bhi kar sakta tha lekin vo aisa nahi chahta tha.uske daftar se hoke kayi zaruri & aham kagzat & baaten nikalte the & vaha vo koi aisa insan nahi aane dena chahta tha joki bharosemand na ho.usne fone jeb me dala & apna coat pehan suite se bahar nikal gaya.

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khidki ke pardo ke beech se aati roshni chehre pe padne se uski nind tuti & vo bistar me uth baithi.uska golakar chehra bada masoom & gazab ka khubsurat tha.jhil si gehri kali aankhe abhi nazar nahi aa rahi thi kyuki abhi bhi nind ki vajah se uski palke band thi.khadi naak & rasile,gulabi honth dekhte hi unhe chum lene ka dil karta tha.usne aankhe kholi & deewar ghadi ki or dekha,sham ke 4 baj rahe the.usne bikhre baalo ko jhatka to vo kamar se thoda upar tak lehra uthe.vo bistar se utri & khadi hoke usne apni narm,gudaz baahen hawa me upar uthake angdayi li to uski 38D size ki mast chhatiya thodi aur ubhar gayi.halke gulabi nipples se saji uski badi chhatiyaan itni bhaari hone ke bavjood zara bhi nahi jhooli thi.vo is waqt bilkul nangi khadi thi & tab bhi bina bra ke bhi uski choochiya bilkul seedhi tani thi.

angadayi lene ki vajah se uska sapat pet thoda & khincha & uski gehri nabhi thdoi aur lambi dikhne lagi.khidki se aati roshni ki lakir ab seedha uske pet & uski bina balo ki narm,gulabi nazuk si dikh rahi chut pe pad rahi thi.roshni me uska shaffaq gora jism aur chamakne laga tha.angadayi leke usne bathroom ki or kadam badhaye & to 26 inch ki uski patli kamar ke neeche 38 size ki chaudi gand bade hi dilkash andaz me lachki.ladki ka kad 5'8" tha jism bilkul bhara hua tha lekin kahi se bhi mans ka 1 tukda bhi jhul nahi raha tha.pura jism bilkul kasa hua tha.us ladki ki maa ne uska naam bilkul thik hi rakha tha-Rambha.bhagwan Indra ke darbar ki khas apsara rambha bhi shayad us husn ki malika ke samne pani hi bharti nazar aati.

ladki ne bathroom me jake apna chehra dhoya & baal sanvar ke apne kapde pahan liye.bathroom se bahar aa usne apne bistar pe nazar dali jaha uska boyfriend abhi tak so raha tha.usne ghadi dekhi,abhi thoda waqt tha.vo khidki se bahar dekhne lagi.vo aaj apne is chhote se shehar ko chhod rahi thi-humesha ke liye.usne peechhe ghum ke ravi apne boyfriend ki or dekha.vo samajhta tha ki vo Lucknow ja rahi hai kisi naukri ke chakkar me.

"tujhe vo naukri nahi milegi,rambha.",thodi der pehle uski mast chhatiya chuste hue usne kaha tha.

"tujhe itna yakin kaise hai?",uske baal pakad ke uska munh apne seene se uthaya.

"are yaar!tu bas yaha reh.main mummy-papa ko mana lunga,fir mujhse shadi kar & aaram se ghar me baith.",usne fir se apna munh uski chhati se laga diya & daye hath se uski bayi jangh ko pakad ke sehlane laga.uske baad rambha ne aur bahas nahi ki thi bas man hi man muskurati rahi & uski garm harkaton se mast ho uske sath chudai ke khel me magan ho gayi.

sach to ye tha ki rambha lucknow se devalay ja rahi thi yaha kabhi na vapas lautne ke liye.usne nazar ghuma ke neeche dekha,is shehar me use humesha hi ghutan hui thi & yaha use vo bhi nahi milne vala tha jiski use tamanna thi.apne sare sapne vo devalay me pure karke hi dum legi,usne tay kar liya tha.

rambha ka janam aaj se 24 baras pehle isi shehar me hua tha.uski maa ne use pala tha,uska baap kaun tha ye use aaj tak pata nahi.uski maa ne duniya valo ko & use yehi bataya tha ki vo uske janm se pehle hi mar gaye lekin badi hote-2 rambha ko ye sachai pata chal hi gayi thi ki uski maa ko kisi mard ne dhokha diya tha.vo uske jism se tab tak khelta raha jab tak rambha uske pet me na aa gayi & fir use beech majhdar me chhod ke gayab ho gaya.uski maa badnami ke darr se apna shehar chhod yaha aa gayi & yehi 1 naqli vidhva ki zindagi bitane lagi.rambha apni maa ki bahut izzat karti thi.us akeli aurat ne use kabhi koi taklif nahi mehsus hone di & har maa-baap ki tarah yehi koshish karti rahi ki uski aulad is zamane ki sabhi pareshaniyo & galiz baato se door hi rahe.

magar rambha jitni hi khubsurat thi utna hi tez dimagh paya tha usne.padhai me vo humesha hi achhi rahi thi magar badi kam umra me hi vo duniyadari bhi samajhne lagi thi.apni is chhoti si zindagi me usne kuchh bahut aham baaten samajh li thi.sbse pehli ye ki paisa bahut zaruri chiz thi.agar aap amir hain to aapke liye kayi band darwaze aasani se khul jate hain & zindagi bhi aasan ho jati hai.dusri ye ki 1 ladki ka jism uski sabse badi kamzori bhi hai & sabse badi taqat bhi,ye us ladki pe hai ki vo apne badan ka kaisa istemal karti hai.

2 baras pehle rambha ki maa ka inteqal ho gaya.rambha us waqt 1 polytechnic se secretary ki training ka course kar rahi thi.kuchh din to maa ke bachaye paise kaam ayae magar uske abad use naukri kiz arurat mehsus hui.maukri khojne me use badi pareshani hui upar se lagbhag ahr jagah mardo ki bhookhi nigahio ka samna use karna pada.use unhe apna jism parosne me koi parhez nahi tha magar vo is mamle 1 pakke karobari ki tarah soch rahi thi.ab tak use 1 bhi mard aisa nahi laga jise jism saunpne ke badle me use bahut bada fayda hasil hota.usi dauran uski mulakat ravi se hui.ravi ke pita ki shehar me kapde ki 4 dukane thi & use paise ki kami nahi thi.rambha ke husn ka to vo deewana tha hi.rambha ne bhi uske samne musibat ki mari dukhiya hone ka pura natak kiya.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--4

गतान्क से आगे.

रवि ने ही उसे अपने पिता के दोस्त के दफ़्तर मे नौकरी दिलवाई & ये नया किराए का घर भी.बदले मे उसे अपना कुँवारापन उसे सौंपना पड़ा.रवि तो उसका दीवाना हो गया & उसपे तॉहफो की बरसात करने लगा.रवि पहला मर्द था जिसने रंभा को चोदा था & उसके साथ कुच्छ दिनो की चुदाई के बाद ही उसे अपने बारे मे 1 अहम बात पता चली-उसे चुदाई बहुत पसंद थी.रवि के आने से उसकी ज़िंदगी आसान हो गयी थी मगर ये उसकी मंज़िल नही थी.वो 1 छ्होटे शहर के दुकानदार की बीवी बनके उसके भरोसे नही रहना चाहती थी.उसकी ख्वाहिश आसमान च्छुने की थी & वो यहा मुमकिन नही था.

"रवि..उठो.ट्रेन का टाइम हो गया.",उसने उसे जगाया & अपना सूटकेस & बॅग उठाके दरवाज़े के पास रखा.

"क्या यार..इतनी जल्दी..अरे बहुत वक़्त हो गया..",वो उठके जल्दी-2 कपड़े पहनने लगा,"..क्यू जा रही है,रंभा..मैं कैसे रहूँगा यहा..तू भी ना!",रंभा ने कमरा बंद किया & चाभी रवि को दी.

"मैं क्या करू इसका?"

"तू ही रख.अब जल्दी चल.",रवि ने अपनी गाड़ी मे उसका समान डाला & कुच्छ देर बाद वो उसी समान को ट्रेन मे चढ़ा रहा था.

"पहुँच के फोन कर दीजियो.",गाड़ी स्टेशन छ्चोड़ रही थी.जवाब मे रंभा मुस्कुराती रही.

"रवि..",गाड़ी अब थोड़ा रफ़्तार पकड़ रही थी.रवि उसकी खिड़की के पास आया & धीरे-2 दौड़ने लगा.

"क्या हुआ?कुच्छ भूल गयी क्या?"

"नही.कुच्छ भूली नही.",गाड़ी और तेज़ हो गयी,"..मेरा इंतेज़ार मत करना.मैं अब यहा लौट के नही आ रही."

"क्या?",रवि अब दौड़ रहा था,"..क्या मज़ाक कर रही है?"

"मज़ाक नही,रवि.मैं हमेशा के लिए जा रही हू.अब यहा नही लौटूँगी.गुडबाइ!"

"रंभा!..रंभा..!",गाड़ी अब स्टेशन से बाहर निकल चुकी थी.रवि हांफता खड़ा उसे जाते देख रहा था.

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"सब समझ गयी,सोनम?",ब्रिज कोठारी पिच्छले 3 दिनो से रोज़ सोनम को उसके इंटरव्यू के लिए तैय्यार कर रहा था.

"हाँ,लेकिन.."

"लेकिन क्या?"

"मान लीजिए,वो मुझे नही चुनता है तो?"

"तो यहा जाय्न कर लेना."

"तो यही कर लेती हू वाहा जाने की क्या ज़रूरत है?"

"तुम बहुत डरती हो!",ब्रिज उसके करीब आया & उसे बाहो मे भर लिया,"..देखो सोनम,तुम मुझे नही जानती...आज से तुम मुझे नही जानती मुझसे कभी मिली भी नही..हूँ..ऐसा सोचते हुए वाहा जाना.एजेन्सी वाले 4 लड़कियो को वाहा भेज रहे हैं.तुम्हारा बाइयडेटा उन सब से अच्छा है & तुम उन सब से कही ज़्यादा होशियार हो.अगर तुम्हे इस बात से भी तसल्ली नही हो रही तो ये सुनो मैने उन सभी लड़कियो की तस्वीरे भी निकलवा ली हैं & कोई भी तुम जितनी हसीन नही.",उसने उसके होंठो को चूम लिया.सोनम ने भी उसकी किस का जवाब दिया & उसके सीने से लग गयी.कुच्छ ही पलो मे दोनो नंगे खड़े थे & 1 दूसरे को बड़ी गर्मजोशी से चूम रहे थे.सोनम उम्र & कद,दोनो मे उसके सामने बच्ची जैसी थी मगर उसका भरा-2 जिस्म किसी भी मर्द के पसीने च्छुड़वाने के काबिल था.

साँवली सोनम की 36 साइज़ की छातियो को मुँह मे भरते हुए ब्रिज ने उसे गोद मे उठा के अपने बिस्तर पे लिटा दिया & फिर इतमीनान से उसकी चूचिया चूसने लगा.सोनम बेचैनी से उसके सर के बालो को नोचती हुई मस्ती की राह पे आगे बढ़ती रही.ब्रिज का बाया हाथ उसकी टाँगो के बीच उसकी चिकनी चूत के अंदर घुस खलबली मचा रहा था.अपने दाने पे उसकी गुस्ताख उंगलियो की रगड़ से सोनम बहाल हो गयी & अपनी 26 इंच की कमर उचकाने लगी.ब्रिज ने उंगलियो की रफ़्तार बढ़ा उसकी बेचैनी को और बढ़ा दिया & तब तक उसके दाने को रगड़ता रहा जब तक वो झाड़ ना गयी.

"1 बात बताइए..",साँसे संभालती सोनम को ब्रिज ने उसके पेट के बल लिटा दिया & उसकी मखमली पीठ को चूमते हुए उसकी 36 साइज़ की मोटी गंद पे आ गया,"..ऊहह..हाआनन्न....आपको मेहरा का ऐसा क्या राज़ जानना है?....उउन्न्नःनह..!",ब्रिज की ज़ुबान गंद की दरार की सैर करने लगी थी.

"आज से कोई 6 महीने बाद सरकार डेवाले से 20 किमी की दूरी पे बने 1 बहुत बड़े ज़मीन के हिस्से को स्पेशल एकनामिक ज़ोन यानी कि सेज़ के लिए किसी प्राइवेट पार्टी को देने का टेंडर निकालने वाली है.इस बात की जानकारी मुझे है..",सोनम अब बहुत मचल गयी थी.उसने करवट बदली & अपनी चूत चाटते ब्रिज के बालो को पकड़ उसे उपर खींचा.भारी-भरकम ब्रिज ने उसे अपने लंबे चौड़े शरीर के नीचे दबाते हुए उसके होंठो को अपनी गिरफ़्त मे ले लिया.सोनम ने उसे बाहो मे भर लिया & अपने जिस्म पे उसके जिस्म को और दबाने की कोशिश करने लगी.

"..& विजयंत मेहरा को भी ये ज़रूर पता होगा.कोठारी ग्रूप अभी से उस टेंडर की रकम तैय्यार करने मे जुटा हुआ है जबकि अभी तक सरकार ने कोई फरमान भी जारी नही किया है & यही सब ट्रस्ट ग्रूप भी कर रहा होगा.",अपनी प्रेमिका की हर्कतो का इशारा समझते हुए ब्रिज ने अपने दाए घुटने से उसकी टाँगो को फैलाया & अपना 9 इंच का तगड़ा लंड उसकी छ्होटी सी चूत की दरार पे टीका के धक्का दिया.

"ऊव्ववव..दर्द होता है ना!..हां..ऐसे ही आराम से करिए....हाईईईईई.....",लंड अंदर घुस चुका था & सोनम की चुदाई शुरू हो चुकी थी.

"आप चाहते हैं की मैं उनके टेंडर की रकम आपको पहले ही बता दू & ये भी कि वो क्या तैय्यारिया कर रहे हैं?....ययत्त्त....!",ब्रिज के तगड़े लंड की ज़ोरदार चुदाई ने आख़िरकार उसे झाड़वा ही दिया था.ब्रिज कोठारी ने फ़ौरन अपनी प्रेमिका को बाहो मे भर लिया & उसे लिए दिए अपने घुटनो पे बैठ गया.उसकी गर्दन मे बाहे डाली सोनम ने अपनी टाँगे उसकी गंद के पीछे आपस मे फँसा रखी थी & उन्ही के सहारे 1 बार फिर वो अपने मालिक के लंड पे कूदने लगी थी.

"बस मेरी जान तुम मेरा ये काम कर दो फिर कोठारी ग्रूप मे सीनियर पोज़िशन & पैसे तो मिलने ही हैं तुम्हे.",उसकी कसी गंद को दबोचता जिस्म अपने घुटनो पे बैठ अपनी कमर हिलाने लगा था.मेहरा को हराने के ख़याल से ही उसका दिल 1 अजब सी खुशी से भर गया था & वो अब दुगुने जोश के साथ चुदाई कर रहा था.सोनम अब उस से बिल्कुल चिपात गयी थी & उसके बाए कंधे पे सर टीका के उसके सर को ज़ोर से आहें भरते हुए चूम रही थी.उसके हाथ ब्रिज की पीठ पे बेसब्री से चल रहे थे & वो उसके हर धक्के पे मज़े से पागल हो रही थी.1 ज़ोरदार चीख के साथ दोनो प्रेमी 1 साथ झाड़ गये.सोनम के चेहरे पे बहुत सुकून का भाव था.कुच्छ देर बाद ब्रिज ने उसे गोद से उतार बिस्तर पे लिटाते हुए अपना सिकुदा लंड उसकी चूत से निकाला & अपने कपड़े पहनने लगा.

"जा रहे हैं?",सोनम ने बाया हाथ बढ़ा के बिस्तर के बगल मे खड़े पॅंट का हुक लगा रहे ब्रिज के बालो भरे पेट को प्यार से सहलाया.

"हां."

"कंग्रॅजुलेशन्स & बेस्ट ऑफ लक.",सोनम ने पॅंट के उपर से उसके लंड को 1 बार दबाया तो ब्रिज ने मुस्कुराते हुए सवालिया निगाहो से उसे देखा,"..इस रविवार को आपकी शादी है ना तो उसी की बधाई दे रही हू.",ब्रिज तो सचमुच भूल ही गया था इस बारे मे!सोनम के जिस्म & उसे मेहरा के यहा सेंडमरी के लिए तैय्यार करने मे वो इतना मशगूल हो गया था कि वो शीतल के बारे मे तो वो भूल ही गया था.

"तुम्हारी वजह से मैं अपनी मंगेतर को भी भूल गया!",ब्रिज ने बनावटी गुस्सा किया तो सोनम हंस पड़ी & उठ के उसके करीब आ गयी फिर टेबल से वाइन की बॉटल उठा ग्लास मे डाली & ब्रिज को पिलाई,"ये आपकी शादी के नाम..",फिर अगला घूँट खुद भरा,"..& ये मेरी ट्रस्ट ग्रूप मे नौकरी लगने के नाम.",दोनो हंस पड़े & 1 बार फिर गले लग गये.

विजयंत मेहरा चाहे जितनी भी अययाशिया करे,अगर वो डेवाले मे होता था तो सोता अपने घर मे ही था.अभी 3-4 साल पहले ही वो अपने नये बंगल मे रहने लगा था.अब उसे बुंगला कहना शायद ठीक नही होगा.1 बहुत बड़े मैदान को पहले ऊँची दीवार से घेरा गया फिर उस मैदान की लॅंडस्केपिंग की गयी & 1 छ्होटा 9 होल गोल्फ कोर्स,स्विम्मिंग पूल & काफ़ी बड़ा लॉन बनाया गया.इस मैदान के बीचोबीच 1 बड़ा बुंगला बना & उसके दोनो तरफ उस से थोड़े से ही छ्होटे 2 छ्होटे बुंगले बनाए गये.बीच वाला बुंगला विजयंत & उसकी बीवी रीता का था.दाई तरफ का बुंगला समीर के लिए बनवाया गया था & विजयंत चाहता था की शादी के बाद समीर अपने परिवार के साथ उसी बंगल मे रहे.बाई तरफ के बंगल मे विजयंत की पहली औलाद,उसकी बेटी शिप्रा अपने पति प्रणव के साथ रहती थी.

"हाई,डॅडी!",विजयंत ने जैसे ही बंगल के हॉल मे कदम रखा,उसकी बेटी उसके गले से लग गयी.

"हाई,बेटा.अभी तक सोई नही?",1 नौकर ने विजयंत का कोट & उसके ड्राइवर से उसका ब्रीफकेस ले लिया.

"नही,मेरे साथ बैठी तुम्हारा इंतेज़ार कर रही थी.",पिंक कलर के ड्रेसिंग गाउन मे रीता वाहा आई.रीता की उम्र 48 बरस थी लेकिन पति की तरह ही वो भी उम्र से छ्होटी दिखती थी & अभी भी किसी को यकीन नही होता था कि वो 1 शादीशुदा बेटी & जवान बेटे की मा है.वो अपनी जवानी मे 1 ब्युटी क्वीन रह चुकी थी & आज भी उसका हुस्न ग़ज़ब का था.

"समीर के लौटने की पार्टी प्लान कर रही है ये..",उसने कंधे तक लंबे बाल झटके & सोफे पे बैठ गयी.विजयंत को अपने लंड मे हरकत होती महसूस हुई.रीता की भारी आवाज़ ऐसी लगती थी जैसे फँसे गले से आ रही हो.विजयंत को उसकी आवाज़ बड़ी मस्तानी लगती थी.

"तो ये तो हमेशा से तुम्हारा ही डिपार्टमेंट रहा है,बेटा.",विजयंत सोफे पे बैठा तो शिप्रा 1 नोटपेड़ ले उसके साथ बैठ गयी,"..मैं क्या करू इसमे?"

"ये मेहमानो की फेहरिस्त तो आप ही फाइनल करते हैं.",उसने नोटपेड़ उसकी गोद मे पटका.

"ओह्ह..",विजयंत ने थके होने का इशारा करते हुए सर पीछे सोफे की बॅक पे रखा,"..अभी नही बेटा."

"प्लीज़,पापा!..फिर सबको इन्विटेशन देर से मिलेंगे & हमारी पार्टी बिल्कुल फ्लॉप हो जाएगी.",वो बच्चों की तरह मछली.विजयंत हंसा,उसकी बेटी अभी तक 1 बच्ची जैसी ही थी.

"ओके,मेडम.जैसा आपका हुक्म!",उसने नाटकिया अंदाज़ मे कहा & पॅड उठा लिस्ट देखने लगा.रीता मुस्कुराइ & अपनी कॉफी का कप उठाके 1 घूँट भरा.विजयंत मेहरा अपने बच्चों की कोई बात नही टालता था,वो उसकी ज़िंदगी थे.वो अपनी बीवी से शायद हर रोज़ बेवफ़ाई करता था लेकिन आज तक उसने किसी लड़की को रीता का दर्जा नही दिया था.उसका मानना था कि परिवार की जगह कोई नही ले सकता & शायद यही वजह थी कि उसका परिवार इतना खुशाल था.

"हेलो!",5'9" कद का 1 चश्मा लगाए गोरा,भले सी शक्ल वाला जवान मर्द हॉल मे दाखिल हुआ.

"हाई!प्रणव.",रीता ने जवाब दिया तो विजयंत ने पॅड से नज़र उठाई & दामाद को देख के मुस्कुराया.2 साल पहले प्रणव कपूर उसकी बेटी का पति बना था.वो अमेरिका मे किसी कंपनी मे काम करता था & वही छुट्टी मना रही शिप्रा से उसकी मुलाकात हुई थी.दोनो 1 दूसरे को चाहने लगे थे & जब शिप्रा ने उस से शादी करने की ख्वाहिश जताई तो विजयंत नही माना था.उसे भरोसा नही था शायद की उसकी बेटी सही फ़ैसला ले सकती है.

कितना ग़लत था वो!पहली मुलाकात मे ही उसने भाँप लिया था कि प्रणव 1 अच्छा लड़का है & जब उसने उसे शादी के बाद ट्रस्ट ग्रूप जाय्न करने को कहा तो उसने सॉफ मना कर दिया था.इस बात ने विजयंत के सारे शुबहे दूर कर दिए.शिप्रा शादी कर अमेरिका चली गयी लेकिन विजयंत ने अपने दामाद से वापस आ उसे जाय्न करने की गुज़ारिश नही छ्चोड़ी.1 बरस पहले प्रणव उसकी बात मान गया & तब से सब साथ रहे थे.

"क्या हो रहा है?",उसने नौकर से पानी का ग्लास लिया & सोफे पे बैठ गया,"..डॉन'ट टेल मी!..शिप्रा पार्टी प्लान कर रही है..& कभी ये इतनी खुश हो ही नही सकती!",सभी हँसने लगे & शिप्रा ने पति को बनावटी गुस्से से देखा.

"ये लो भाई तुम्हारी गेस्ट लिस्ट.कम ऑन,प्रणव.खाना खाते हैं."

"& जो हमारे डाइनिंग टेबल पड़ा है,उसका क्या होगा?",शिप्रा ने पति के दाई बाँह मे अपनी बाई बाँह फँसा दी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--4

gataank se aage.

ravi ne hi use apne pita ke dost ke daftar me naukri dilwayi & ye naya kiraye ka ghar bhi.badle me use apna kunwarapan use saunpna pada.ravi to uska deewana ho gaya & uspe tohfo ki barsat karne laga.ravi pehla mard tha jisne rambha ko choda tha & uske sath kuchh dino ki chudai ke baad hi use apne bare me 1 aham baat pata chali-use chudai bahut pasand thi.ravi ke aane se uski zindagi aasan ho gayi thi magar ye uski manzil nahi thi.vo 1 chhote shehar ke dukandar ki biwi banke uske bharose nahi rehna chahti thi.uski khwahish aasmaan chhune ki thi & vo yaha mumkin nahi tha.

"ravi..utho.train ka time ho gaya.",usne use jagaya & apna suitcase & bag uthake darwaze ke paas rakha.

"kya yaar..itni jaldi..are bahut waqt ho gaya..",vo uthke jaldi-2 kapde pehanane laga,"..kyu ja rahi hai,rambh..main kaise rahunga yaha..tu bhi na!",rambha ne kamra band kiya & chabhi ravi ko di.

"main kya karu iska?"

"tu hi rakh.ab jaldi chal.",ravi ne apni gadi me uska saman dala & kuchh der baad vo usi saman ko train me chadha raha tha.

"pahunch ke fone kar dijiyo.",gadi station chhod rahi thi.jawab me rambha muskurati rahi.

"ravi..",gadi ab thoda raftar pakad rahi thi.ravi uski khidki ke paas aaya & dhire-2 daudne laga.

"kya hua?kuchh bhul gayi kya?"

"nahi.kuchh bhuli nahi.",gadi aur tez ho gayi,"..mera intezar mat karna.main ab yaha laut ke nahi aa rahi."

"kya?",ravi ab daud raha tha,"..kya mazak kar rahi hai?"

"mazak nahi,ravi.main humesha ke liye ja rahi hu.ab yaha nahi lautngi.goodbye!"

"rambha!..rambha..!",gadi ab station se bahar nikal chuki thi.ravi hanfta khada use jate dekh raha tha.

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"sab samajh gayi,Sonam?",Brij Kothari pichhle 3 dino se roz sonam ko uske interview ke liye taiyyar kar raha tha.

"haan,lekin.."

"lekin kya?"

"maan lijiye,vo mujhe nahi chunta hai to?"

"to yaha join kar lena."

"to yahi kar leti hu vaha jane ki kya zarurat hai?"

"tum bahut darti ho!",brij uske karib aaya & use baaho me bhar liya,"..dekho sonam,tum mujhe nahi janti.pk..aaj se tum mujhe nahi janti mujhse kabhi mili bhi nahi..hun..aisa sochte hue vaha jana.agency vale 4 ladkiyo ko vaha bhej rahe hain.tumhara biodata un sab se achha hai & tum un sab se kahi zyada hoshiyar ho.agar tumhe is baat se bhi tasalli nahi ho rahi to ye suno maine un sabhi ladkiyo ki tasvire bhi nikalwa li hain & koi bhi tum jitni haseen nahi.",usne uske hontho ko chum liya.sonam ne bhi uski kiss ka jawab diya & uske seene se lag gayi.kuchh hi palo me dono nange khade the & 1 dusre ko badi garmjoshi se chum rahe the.sonam umra & kad,dono me uske samne bachchi jaisi thi magar uska bhara-2 jism kisi bhi mard ke paseene chhudwane ke kabil tha.

sanwli sonam ki 36 size ki chhatiyo ko munh me bharte hue brij ne use god me utha ke apne bistar pe lita diya & fir itmina se uski chhatiya chusne laga.sonam bechaini se uske sar ke baalo ko nochti hui masti ki raah pe aage badhti rahi.brij ka baya hath uski tango ke beech uski chikni chut ke andar ghus khalbali macha raha tha.apne dane pe uski gustakh ungliyo ki ragad se sonam behal ho gayi & apni 26 inch ki kamar uchkane lagi.brij ne ungliyo ki raftar badha uski bechaini ko aur badha diya & tab tak uske dane ko ragadta raha jab tak vo jhad na gayi.

"1 baat bataiye..",sanse sambhalti sonam ko brij ne uske pet ke bal lita diya & uski makhmali pith ko chumte hue uski 36 size ki moti gand pe aa gaya,"..oohhhhh..haaaannn....aapko mehra ka iasa kya raaz jaanana hai?....uunnnhnhhhh..!",brij ki zuban gand ki darar ki sair karne lagi thi.

"aaj se koi 6 mahine baad sarkar devalay se 20 km ki duri pe bane 1 bahut bade zamin ke hisse ko special economic zone yani ki SEZ ke liye kisi private party ko dene ka tender nikalne wali hai.is baat ki jankari mujhe hai..",sonam ab bahut machal gayi thi.usne karwat badli & apni chut chhatate brij ke baalo ko pakad use upar khincha.bhari-bharkam brij ne use apne lambe chaude sharir ke neeche dabatae hue uske hotho ko apni giraft me le liya.sonam ne use baaho me bhar liya & apne jism pe uske jism ko aur dabane ki koshish karne lagi.

"..& vijayant mehra ko bhi ye zarur pata hoga.kothari group abhi se us tender ki rakam taiyyar karne me juta hua hai jabki abhi tak sarkar ne koi farman bhi jari nahi kiya hai & yehi sab Trust group bhi kar raha hoga.",apni premika ki harkato ka ishara samajhte hue brij ne apne daye ghutne se uski tango ko failaya & apna 9 inch ka tagda lund uski chhoti si chut ki darar pe tika ke dhakka diya.

"oowwww..dard hota hai na!..haan..aise hi aaram se kariye....haiiiiii.....",lund andar ghus chuka tha & sonam ki chudai shuru ho chuki thi.

"aap chahte hain ki main unke tender ki rakam aapko pehle hi bata du & ye bhi ki vo kya taiyyariya kar rahe hain?....yaaaahhhhhhhhh....!",brij ke tagde lund ki zordar chudai ne aakhirkaar use jhadwa hi diya tha.brij kothari ne fauran apni premika ko baaho me bhar liya & use liye diye apne ghutno pe baith gaya.uski gardan me baahe dali sonam ne apni tange uski gand ke peechhe aapas me fansa rakhi thi & unhi ke sahare 1 baar fir vo apne malik ke lund pe kudne lagi thi.

"bas meri jaan tum mera ye kaam kar do fir kothari group me senior position & paise to milne hi hain tumhe.",uski kasi gand ko dabochta jism apne ghutno pe baith apni kamar hilane laga tha.mehra ko harane ke khayal se hi uska dil 1 ajab si khushi se bhar gaya tha & vo ab dugune josh ke sath chudai kar raha tha.sonam ab us se bilkul chipat gayi thi & uske baye kandhe pe sar tika ke uske sar ko zor se aahen bharte hue chum rahi thi.uske hath brij ki pith pe besabri se chal rahe the & vo uske har dhakke pe maze se pagal ho rahi thi.1 zordar chikh ke sath dono premi 1 sth jhad gaye.sonam ke chehre pe bahut sukun ka bhav tha.kuchh der baad brij ne use god se utar bistar pe litate hue apna sikuda lund uski chut se nikala & apne kapde pahanane laga.

"ja rahe hain?",sonam ne baya hath badha ke bistar ke bagal me khade pant ka hook laga rahe brij ke baalo bhare pet ko pyar se sehlaya.

"haan."

"congratulations & best of luck.",sonam ne pant ke upar se uske lund ko 1 baar dabaya to brij ne muskurate hue sawaliya nigaho se use dekha,"..is ravivar ko aapki shadi hai na to usi ki badhai de rahi hu.",brij to sachmuch bhul hi gaya tha is bare me!sonam ke jism & use mehra ke yaha sendhmari ke liye taiyyar karne me vo itna mashgul ho gaya tha ki vo Sheetal ke bare me to vo bhul hi gaya tha.

"tumhai vajah se main apni mangetar ko bhi bhul gaya!",gbrij ne banawati gussa kiya to sonam hans padi & uth ke uske karib aa gayi fir table se wine ki bottle utha glass me dali & brij ko pilayi,"ye aapki shadi ke naam..",fir agla ghunt khud bhara,"..& ye meri trust group me naukri lagne ke naam.",dono hans pade & 1 baar fir gale lag gaye.

Vijayant Mehra chahe jitni bhi ayyashiya kare,agar vo Devalay me hota tha to sota apne ghar me hi tha.abhi 3-4 saal pehle hi vo apne naye bungle me rehne laga tha.ab use bungla kehna shayad thik nahi hoga.1 bahut bade maidan ko pehle oonchi deewar se ghera gaya fir us maidan ki landscaping ki gayi & 1 chhota 9 hole golf course,swimming pool & kafi bada lawn banaya gaya.is maidan ke beechobeech 1 bada bungla bana & uske dono taraf us se thode se hi chhote 2 chhote bungle banaye gaye.beech vala bungla vijayant & uski biwi Rita ka tha.dayi taraf ka bungla Sameer ke liye banwaya gaya tha & vijayant chahta tha ki shadi ke baad sameer apne parivar ke sath usi bungle me rahe.bayi taraf ke bungle me vijayant ki pehli aulad,uski beti Shipra apne pati Pranav ke sath rehti thi.

"hi,daddy!",vijayant ne jaise hi bungle ke hall me kadam rakha,uski beti uske gale se lag gayi.

"hi,beta.abhi tak soyi nahi?",1 naukar ne vijayant ka coat & uske driver se uska briefcase le liya.

"nahi,mere sath baithi tumhara intezar kar rahi thi.",peach colour ke dressing gown me rita vaha aayi.rita ki umra 48 baras thi lekin pati ki tarah hi vo bhi umra se chhoti dikhti thi & abhi bhi kisi ko yakin nahi hota tha ki vo 1 shadishuda beti & jawan bete ki maa hai.vo apni jawani me 1 beuty queen reh chuki thi & aaj bhi uska husn gazab ka tha.

"sameer ke lautne ki party plan kar rahi hai ye..",usne kandhe tak lambe baal jhatke & sofe pe baith gayi.vijayant ko apne lund me harkat hoti mehsus hui.rita ki bhari aavaz aisi lagti thi jaise phanse gale se aa rahi ho.vijayant ko uski aavaz badi mastani latgti thi.

"to ye to humesha se tumhara hi department raha hai,beta.",vijayant sofe pe baitha to shipra 1 notepad le uske sath baith gayi,"..main kya karu isme?"

"ye mehmano ki fehrist to aap hi final karte hain.",usne notepad uski god me patka.

"ohh..",vijayant ne thake hone ka ishara karte hue sar peechhe sofe ki back pe rakha,"..abhi nahi beta."

"please,papa!..fir sabko invitation der se milenge & humari party bilkul flop ho jayegi.",vo bachchon ki tarah machli.vijayant hansa,uski beti abhi tak 1 bachchi jaisi hi thi.

"ok,madam.jaisa aapka hukm!",usne natkiya andaz me kaha & pad utha list dekhne laga.rita muskurayi & apni coffee ka cup uthake 1 ghunt bhara.vijayant mehra apne bachchon ki koi baat nahi talta tha,vo uski zindagi the.vo apni biwi se shayad har roz bewafai karta tha lekin aaj tak usne kisi ladki ko rita ka darja nahi diya tha.uska maanana tha ki parivar ki jagah koi nahi le sakta & shayad yehi vajah thi ki uska parivar itna khushaal tha.

"hello!",5'9" kad ka 1 chashma lagaye gora,bhale si shakl vala jawan mard hall me dakhil hua.

"hi!pranav.",rita ne jawab diya to vijayant ne pad se nazar uthayi & damad ko dekh ke muskuraya.2 saal pehle Pranav Kapur uski beti ka pati bana tha.vo America me kisi company me kaam karta tha & vahi chhutti mana rahi shipra se uski mulakat hui thi.dono 1 dusre ko chahne lage the & jab shipra ne us se shadi karne ki khwahish jatayi to vijayant nahi mana tha.use bharosa nahi tha shayad ki uski beti sahi faisla le sakti hai.

kitna galat tha vo!pehli mulakat me hi usne bhanp liya tha ki pranav 1 achha ladka hai & jab usne use shadi ke baad Trust group join karne ko kaha to usne saaf mana kar diya tha.is baat ne vijayant ke sare shubahe door kar diye.shipra shadi kar america chali gayi lekin vijayant ne apne damad se vapas aa use join karne ki guzarish nahi chhodi.1 baras pehle pranav uski baat maan gaya & tab se sab sath rahe the.

"kya ho raha hai?",usne naukar se pani ka glass liya & sofe pe baith gaya,"..don't tell me!..shipra party plan kar rahi hai..& kabhi ye itni khush ho hi nahi sakti!",sabhi hansne lage & shipra ne pati ko banawati gusse se dekha.

"ye lo bhai tumhari guest list.come on,pranav.khana khate hain."

"& jo humare dining table pada hai,uska kya hoga?",shipra ne pati ke dayi banh me apni bayi banh fansa di.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--5

गतान्क से आगे.

"अरे छ्चोड़ो उसको,आज यहा खाने दो.",विजयंत ने बेटी के बालो मे हाथ फिराया.

"उन..डॅडी!मैं अब बच्ची नही हू!नही..आज तो वही खाएगा..चलो!",उसने पति को फिर से उसी बनावटी गुस्से से देखा & वाहा से चली गयी.विजयंत & रीता ने मुस्कुराते हुए अपने बच्चो को देखा & फिर खाने की मेज़ की ओर चले गये.

"उम्म..छ्चोड़ो!",शिप्रा ने खुद को अपनी ओर खींचते प्रणव को झिड़का.विजयंत के बंगल से शिप्रा का बुंगला 1 बड़े ही खूबसूरत रास्ते से जुड़ा था जिसके दोनो तरफ खूबसूरत फूलो की क्यारियाँ थी & दोनो उसी पे चले जा रहे थे.

"अरे अब क्यू नाराज़ हो गयी?",प्रणव ने बीवी को मनाने की कोशिश की मगर वो खामोश रही,"अरे बाबा1 तो पार्टीस अरेंज करना तुम्हे पसंद नही..& फिर तुम्हे छेड़ने मे बड़ा मज़ा आता है!",उसने बीवी की ठुड्डी पकड़ के प्यार से हिलाया तो उसने चेहरा झटक दिया.

"ओफ्फो!अब मान भी जाओ.",उसने बीवी को बाहो मे भर के चूम लिया.

"क्या करते हो?कोई देख लेगा!",वो छितकी मगर प्रणव ने उसे फिर से अपनी ओर खींचा & इस बार बाहो मे जाकड़ के फिर से उसके गुलाबी होंठ चूम लिए.

"देखने दो.",शिप्रा को पति का यू प्यार जताना अच्छा तो लग रहा था मगर उसे डर भी था की कही कोई देख ना ले.

"घर के अंदर तो चलो..उउम्म्म्म..!",शिप्रा के ड्रेसिंग गाउन के उपर से ही प्राणव ने अपनी बीवी की गंद दबा दी थी.शिप्रा का रंग मा जैसा ही गोरा था मगर वो उतनी खूबसूरत नही थी ना ही उसका जिस्म उतना दिलकश नही था.इसका ये मतलब नही की वो हसीन नही थी या फिर मस्त नही थी.

"ऊऊहह..प्रणव...डार्लिंग.....!",अपने बंगल की बाहरी दीवार से अपनी बीवी की पीठ लगा प्रणव ने उसके गाउन की बेल्ट खोली & अपने जिस्म को उसके जिस्म पे दबा दिया.उसके हाथ अभी भी शिप्रा की 34 साइज़ की गंद दबा रहे थे & होंठ उसकी गोरी गर्दन चूम रहे थे.वो भी जानता था कि उनकी आवाज़ें सुनके कोई नौकर वाहा आ सकता था लेकिन यही तो मज़ा था इस खेल का!

"नो....प्रणव नही.....आहह....नाआआ.....!",प्रणव के दाए हाथ ने गाउन के नीचे उसकी नाइटी को उठा उसकी टाँगो के बीच उसकी गोरी,गुलाबी चूत को ढूंड लिया था & उसे कुरेद रहा था.

"मुझे पता था कि तुमने पॅंटी नही पहनी होगी,जानेमन!",उसने जोश से लड़खड़ाती आवाज़ मे कहा & अपने मुँह को नाइटी के गले मे से दिख रहे बीवी के क्लीवेज से लगा दिया & चूसने लगा.उसकी ज़ुबान ऐसे चल रही थी मानो वो अपनी ज़ुबान से ही खींच के उसकी 34सी साइज़ की चूचियो को बाहर खींच लेना चाहता हो.शिप्रा पति के हाथ की कारस्तानी से मजबूर हो कमर हिला रही थी.उसकी चूत मे मस्ती भरी कसक अपने शबाब पे पहुँच गयी थी.उसने पति की पीठ को भींचते हुए सर झुका के उसके दाए कान मे पागलो की तरह अपनी जीभ फिराई.

"आन्न्‍न्णनह..नही..प्रणव यहा नही..पागल....अंदर चलो....ओह..!",प्रणव ने बीवी का दाया हाथ अपनी पीठ से अलग किया & ज़िप खोल उसे अपनी पॅल्ट मे घुसा के तब तक दबाए रखा जब तक कि वो उसके लंड को हिलाने नही लगी,"..उउन्न्ह..डार्लिंग..कितना गर्म है ये..अंदर चलो प्लीज़..!",प्रणव का लंड 8.5 इंच लंबा था & बहुत ही मोटा.शिप्रा को अपने हाथ मे उसका एहसास पागल करने वाला लग रहा था.वो अपने को दुनिया की सबसे खुशनसीब लड़की मानती थी.उसे इतना प्यार करने वाला पति मिला था & उसका लंड तो उफफफ्फ़..!

तभी प्रणव ने उसका हाथ उपर खींचा & 1 बार फिर उसके गुलाबी होंठ चूमने लगा.कुच्छ देर तक उसके हाथ बीवी की 26 इंच की पतली कमर से लिपटे उसे सहलाते रहे फिर अचानक उसने उसकी दोनो जाँघो को थाम लिया.शिप्रा समझ गयी की वो क्या करने वाला था.

"नही..प्रणव..कोई सुन लेगा..आ जाएगा!..ओईईईई..!",बीवी की बात अनसुनी करते हुए प्रणव ने उसकी जंघे हवा मे उठाते हुए अपना लंड उसकी चूत मे घुसा दिया.लंड ने जैसे ही जान-पहचानी गीली चूत की दरार च्छुआ जैसे वो अपनेआप ही अंदर घुस गया.शिप्रा पूरी तरह मदहोश थी मगर इतना होश था उसे कि चीखे ना.उसने अपने होंठ पति के बाए कंधे के उपर कोट पे दबा दिए & आहे उसमे दफ़्न करने लगी.प्रणव के धक्के उसे मस्ती की ऊँचाहियो पे ले जा रहे थे.उसके होंठ उसकी गर्दन के बाई तरफ & उसके बाए गाल & कान को चूम रहे थे.तभी शिप्रा ने अपने नाख़ून अपने पति के दोनो कंधो पे गढ़ा दिए & चिहुनकि.वो झाड़ रही थी.उसके झाड़ते ही प्रणव ने अपनी कमर और ज़ोर से हिलाना शुरू कर दिया & कुच्छ पॅलो बाद उसकी चूत मे अपना वीर्य छ्चोड़ने लगा.

"तुम पागल हो!",प्रणव ने उसे गोद मे उठा लिया तो उसने अपनी बाहे उसके गले मे डाल प्यार से चूमा.अभी भी उसके चेहरे पे खुमारी सॉफ दिख रही थी,"..इतना बड़ा घर है हमारा लेकिन जनाब को उसके बाहर प्यार करना है!",उसने हल्के से उसके बाए गाल पे काटा.

"तो ठीक है,अब घर के अंदर प्यार करते हैं!",बंगल के अंदर दाखिल होते हुए उसने शिप्रा को चूमा.बंगल का दरवाज़ा बंद हो गया मगर कुच्छ देर तक दोनो के हँसने की आवाज़ें बाहर तक आती रही फिर खामोशी च्छा गयी & अगर कोई गौर से सुनता तो थोड़ी देर बाद फिर से दोनो की मस्तानी आहो की बड़ी धीमी आवाज़ बाहर तक आने लगी थी & ये आवाज़ें देर तक आती रही.

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"ऑफीस से कोई 1 पैंटिंग लेके आया था..",रीता बाथरूम मे दाखिल हुई तो देखा की विजयंत अपना नगा बदन तौलिए से पोछ रहा था.विजयंत ने दीवार पे लगे आदमकद शीशे मे उसे देखा & सर हिलाया.शीशे मे पति के अक्स से आँखे मिलाते हुए हल्के से मुस्कराते हुए रीता ने अपने कंधो से अपनी नाइटी की डोरिया सरका दी.उसका गोरा जिस्म शीशे मे जगमगा उठा.उम्र के साथ शरीर थोड़ा भारी हो गया था लेकिन शायद और दिलकश भी.उसने बाए हाथ से अपनी 36डी साइज़ की छातियों को दबाया & दाए को 1 बार अपनी चूत पे फेरा.उसकी कमर 32 इंच की हो गयी थी & गंद 38 की लेकिन ना वो मोटी लगती थी ना ही उसका जिस्म भद्दा.वो पति के करीब आई & उसके हाथो से तौलिया ले उसका जिस्म सुखाने लगी.

"कहा से खरीदी?",तौलिए को छ्चोड़ते हुए 5'6" कद की रीता पति के सामने आई & अपने पंजो पे उचक के उसके होंठो को चूमने लगी.

"नीलामी मे.",विजयंत बीवी की किस का जवाब देते हुए उसकी मांसल कमर को दबाने लगा.

"यानी की फिर उस कोठारी से टक्कर हुई तुम्हारी?",रीता झुक के उसके बालो भरे सीने पे अपने होंठो के निशान छ्चोड़ते हुए नीचे जाने लगी.उसकी मंज़िल थी विजयंत का तगड़ा लंड.रीता ने उसे हिलाया & फिर अपना मुँह लंड के उपर विजयंत के पेट मे घुसा दिया & उसे चूमते हुए लंड हिलाने लगी.

"हां,उसी से जीती है.",वो रीता के बालो मे हाथ फिराने लगा.रीता जीभ से लंड के सूपदे को चाट रही थी फिर उसने उसे मुँह मे भरा & चूसने लगी.विजयंत ने सर नीचे झुकाया तो बीवी के चेहरे पे उसे मस्ती दिखाई दी.लंड को मज़बूती से हिलाते हुए वो बड़ी गर्मजोशी से उसे चूस रही थी.

"आख़िर क्यू नफ़रत करते हो तुम उस से इतनी?..ओह....आननह..!",कयि पॅलो तक लंड से खलेने के बाद वो उठी & उसके उठते ही विजयंत ने उसके हाथ अपने कंधो पे रखे & उसकी जंघे उठा के अपना लंड 1 ही झटके मे उसकी चूत मे उतार दिया.2 बच्चो की मा होने के बावजूद रीता की चूत उतनी ढीली नही हुई थी & विजयंत को अभी भी उसे चोदने मे मज़ा आता था.उसकी गंद थामे बाहो मे झूलते हुए उसने 4-5 धक्के लगाए.

"क्यूकी हर बार वो मेरे रास्ते मे खड़ा हो जाता है..",विजयंत ने अपने होंठ रीता के लाबो से सटा दिए तो वो मस्ती मे बहाल हो अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे घुसा उसकी जीभ से खेलने लगी,"..जो मुझे चाहिए वही उसी पे उसकी नज़र भी रहती है.",विजयंत ने किस तोड़ी & बात पूरी कर उसे फिर से चूमते हुए बिस्तर पे ले आया & लिटा के उसके उपर लेटते हुए उसे चोदने लगा.

"आहह....एससस्स....जाआंणन्न्...चोदो & ज़ोर से....ऊऊओह....थोडा संतोष करना सीखो जान...उउन्न्ञणन्.....",विजयंत ने अपने होंठ उसकी बाई चूची के हल्के भूरे निपल से लगाए तो उसने बाए हाथ मे छाती को पकड़ उसे उसके मुँह मे भर दिया,"..क्या हुआ अगर वो जीत ही गया तो?..इतना सब कुच्छ तो है हमारे पास......आन्न्‍नणणनह..!",विजयंत के धक्को से मदमस्त हो उसने अपनी टाँगे उसकी कमर पे चढ़ाते हुए उसकी पीठ पे बेसब्री से हाथ फिराना शुरू कर दिया था & अपनी कमर भी हिला रही थी.

"नही....",उसने रीता के निपल को हल्के से काटा,"..1 बार जीता तो हर बार जीतेगा & फिर सब ख़त्म हो जाएगा..मैं उसे कभी भी किसी कीमत पे जीतने नही दे सकता.",विजयंत ने बहस ख़त्म की & अपनी पत्नी की दूसरी चूची का रुख़ किया.रीता भी समझ गई थी कि हर बार की तरह भी इस बार भी उसकी बात का कोई असर नही होने वाला है.वो उस बात को छ्चोड़ अब इस रोमानी लम्हे पे ध्यान देने लगी.उसकी चूत मे उधम मचाता पति का मोटा लंड उसे मदहोश किए जा रहा था.उसने बहाल हो विजयंत के दाए कान को काटा & उसकी गंद मे नाख़ून धँसाते हुए उसकी चुदाई का लुत्फ़ उठाने लगी.

रंभा लंच मे दफ़्तर से निकल आई.डेवाले आए उसे 6 महीने हो चुके थे.जिस सहेली के भरोसे वो यहा आई थी उसने उसकी काफ़ी मदद की थी.उसने उसे पहले प्लेसमेंट एजेन्सी के बारे मे बताया जहा से उसे 1 कंपनी मे स्क्रेटरी की नौकरी मिल गयी & साथ ही 1 वर्किंग विमन'स हॉस्टिल मे रहने की जगह भी दिलवा दी.जब वो अपने शहर मे थी तभी उसने करेस्पॉंडेन्स से एमबीए करना शुरू किया था,वो भी अब पूरा होने वाला था.कोई और लड़की होती तो खुशी-2 काम करती रही है मगर रंभा के ख्वाब तो आसमान च्छुने के थे & वो ये सब बहुत जल्दी कर लेना चाहती थी.

यही उसकी परेशानी का सबब था.1 महीने पहले हॉस्टिल की लड़कियो से उसे पता चला कि ट्रस्ट ग्रूप के मालिक विजयंत मेहरा की सेक्रेटरी की पोस्ट के लिए एजेन्सी लड़कियो को चुन रही है.एजेन्सी ने ये बात खोली नही थी & चुप-चाप कर रही थी लेकिन किसी को पता चल गया & उसने ये बात लीक कर दी.रंभा अगले ही दिन एजेन्सी पहुँची & अपना CV भी वाहा भेजने को कहा लेकिन उसे साफ मना कर दिया गया.उसने हार नही मानी & वाहा के चक्कर लगाती रही लेकिन नतीजा कुच्छ भी नही निकला.

"मैं कुच्छ नही कर सकती..आप सीनियर मॅनेजर साहब से बात कीजिए.",ये टका सा जवाब दिया था उसकी कन्सल्टेंट ने उस से & सीनियर मॅनेजर कभी मिलता ही नही था.इन्ही ख़यालो मे गुम वो सड़क पे चली जा रही थी.ज़िंदगी मे पहली बार उसे ऐसा लगा था कि वो हार जाएगी.तभी 1 रिक्षेवला उसके बहुत करीब से गुज़रा.थोड़ा और करीब होता तो वो गिर ही जाती.

"आए!अँधा है क्या!",वो झल्लाई मगर वो रिक्षेवाला तेज़ी से आगे चला गया.चिढ़ते हुए वो आगे बढ़ी,फूटपाथ पे 1 आदमी रेहदी लगाके आईने बेच रहा था & रंभा ने अपना अक्स 1 शीशे मे देखा-सामने उसे 1 चिड़चिड़ी लड़की नज़र आई.वो खड़ी होके खुद को देखने लगी..ऐसी क्यू हो गयी थी वो?

उसकी चिड़चिड़ाहट का 1 कारण और भी था.डेवाले आने के बाद से उसने 1 बार भी चुदाई नही की थी.कहा अपने शहर मे वो अपने बाय्फ्रेंड को चुदाई के लिए तड़पाती रहती थी & कहा यहा डेवाले मे वो खुद 1 अदद लंड के लिए तरस रही थी.ऐसा नही था की यहा लड़के उसके करीब नही आना चाहते थे.दरअसल जिनको वो चाहती थी वो अपनी हैसियत की लड़कियो के साथ घूमते रहते थे & वो कोई उसके शहर की लड़कियाँ तो थी नही डेवाले की तेज़-तर्रार लड़किया थी,अपने बाय्फ्रेंड को अपने चंगुल से ऐसे कैसे निकलने देती.फिर भी कुच्छ लड़को ने उसके करीब आने की कोशिश की थी मगर या तो वो उसे पसंद नही थे या फिर उनके साथ सोने मे उसे कोई फ़ायदा नही नज़र आया.

उसने शीशे मे देखा & चेहरे पे हल्की सी मुस्कान लाई..हां ये बेहतर था..उसने अपने कंधे पे बॅग ठीक किया & आगे बढ़ी..चाहे कुच्छ भी हो जाए वो एजेन्सी के उस सीनियर.मॅनेजर से मिलके रहेगी & 1 बार तो ट्रस्ट मे इंटरव्यू ज़रूर देगी.ये मलाल वो मन मे नही रखना चाहती थी कि उसने कोशिश नही की..हां,कल सवेरे उस मॅनेजर को उस से मिलना ही होगा!

वो आगे बढ़ी,जहा इलाक़े के सब-डिविषनल मॅजिस्ट्रेट का कोर्ट था.वाहा कुच्छ गहमा-गहमी थी.उसने देखा कोई जोड़ा शादी कर के कोर्ट से बाहर आ रहा था & उनके साथ के लोग उनके पीछे थे.भीड़ की वजह से उनकी शक्ल नही दिखी.उसने देखा कुच्छ फोटोग्राफर्स भी उनकी तस्वीरे खींचना चाह रहे थे.जोड़ा जल्दी से कार मे बैठ के निकल गया.रंभा उनकी शक्ल नही देख पाई.उसने घड़ी देखी,लंच टाइम ख़त्म हो रहा था.वो वापस दफ़्तर जाने को घूम गयी.

वो शादीशुदा जोड़ा & कोई नही ब्रिज मेहरा & उसकी नयी-नवेली दुल्हन सोनिया थे.रंभा को खबर नही थी कि आने वालो दिनो मे उसकी ज़िंदगी के तार कयि और लोगो की ज़िंदगियो के तारो से जुड़ने वाले थे & उनमे ब्रिज & सोनिया भी शामिल थे.

सोनिया फूलो से सजे अपने कमरे मे आई & शीशे के सामने खड़ी हो गयी.अभी-2 उसकी शादी की रिसेप्षन पार्टी ख़त्म हुई थी.कोर्ट मे शादी करने के बाद वो शाम की पार्टी के लिए तैय्यार होने मे लग गयी थी & अब पार्टी ख़त्म होने के बाद वो काफ़ी थक गयी थी.पार्टी बड़ी शानदार रही थी & उसे बहुत अच्छा लगा था.

सोनिया ने सुर्ख लाल रंग का लहंगा-चोली पहना था जोकि उसके गोरे रंग पे खूब फॅब रहा था.उसने गौर से अपने रूप को आईने मे देखा.वो 30 बरस की हो चुकी थी & ये उसकी दूसरी शादी थी लेकिन शायद ही कोई उसे देख ये बता सकता था.उसके पिता फौज के बड़े अफ़सर रहे थे & उन्होने ही उसकी शादी 1 फ़ौजी से ही करवाई थी लेकिन सोनिया को उस ज़िंदहगी से ऊब हो चुकी थी.पति तो हर वक़्त मुल्क की हिफ़ाज़त मे जुटा रहता & वो घर बैठी उकताने लगी.इसी बात को लेके मिया-बीवी मे तकरार शुरू हुई जोकि तलाक़ पे ही जाके ख़त्म हुई.

उसके बाद वो डेवाले आ गयी & अपनी 1 सहेली के साथ मिलके इवेंट मॅनेज्मेंट का काम करने लगी.अपने काम के सिलसिले मे ही 1 पार्टी मे उसकी मुलाकात ब्रिज कोठारी से हुई जिसकी ज़िंदादिली ने उसके उपर बड़ी गहरी छाप छ्चोड़ी.वो उसके पिता की उम्र का था लेकिन ये उम्र का फासला भी उनके प्यार के बीच आने ना पाया & जब ब्रिज ने उस से शादी के लिए कहा तो उसने फ़ौरन हां कर दी.उसके मा-बाप को तो उसका तलाक़ देना ही नागवार गुज़रा था,इतनी उम्र वाले आदमी से शादी की बात सुनी तो उन्होने उस से रिश्ता ही ख़त्म कर लिया मगर उसपे इस बात का कोई असर नही पड़ा & उसने ब्रिज से शादी का फ़ैसला नही बदला.

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क्रमशः.......

JAAL paart--5

gataank se aage.

"are chhodo usko,aaj yaha khane do.",vijayant ne bti ke baalo me hath firaya.

"un..daddy!main ab bachchi nahi hu!nahi..aaj to vahi khayega..chalo!",usne pati ko fir se usi banawati gusse se dekha & vaha se chali gayi.vijayant & rita ne muskurate hue apne bachcho ko dekha & fir khane ki mez ko or chale gaye.

"umm..chhodo!",shipra ne khud ko apni or khinchte pranav ko jhidka.vijayant ke bungle se shipra ka bungla 1 bade hi khubsurat raste se juda tha jiske dono taraf khubsurat phoolo ki kyariyan thi & dono usi pe chale ja rahe the.

"are ab kyu naraz ho gayi?",pranav ne biwi ko manane ki koshish ki magar vo khamosh rahi,"are baba1 to parties arrange karna tumhe pasand nahi..& fir tumhe chhedne me bada maza aata hai!",usne biwi ki thuddi pakad ke pyar se hilaya to usne chehra jhatak diya.

"offoh!ab maan bhi jao.",usne biwi ko baaho me bhar ke chum liya.

"kya karte ho?koi dekh lega!",vo chhitki magar pranav ne use fir se apni or khincha & is baar baaho me jakad ke fir se uske gulabi honth chum liye.

"dekhne do.",shipra ko pati ka yu pyra jatana achha to lag raha tha magar use darr bhi tha ki kahi koi dekh na le.

"ghar ke andar to chalo..uummmm..!",shipra ke dressing gown ke upar se hi pranva ne apni biwi ki gand daba di thi.shipra ka rang maa jaisa hi gora tha magar vo utni khubsurat nahi thi na hi uska jism utna dilkash nahi tha.iska ye matlab nahi ki vo haseen nahi thi ya fir mast nahi thi.

"oooohhhhh..pranav...darling.....!",apne bungle ki bahri deewar se apni biwi ki pith laga pranav ne uske gown ki belt kholi & apne jims ko uske jism pe daba diya.uske hath abhi bhi shipra ki 34 size ki gand daba rahe the & honth uski gori gardan chum rahe the.vo bhi janta tha ki unki aavazen sunke koi naukar vaha aa sakta tha lekin yehi to maza tha is khel ka!

"no....pranav nahi.....aahhhh....naaaaaa.....!",pranav ke daye hath ne gown ke neeche uski nighty ko utha uski tango ke beech uski gori,gulabi chut ko dhoond liya tha & use kured raha tha.

"mujhe pata tha ki tumne panty nahi pehni hogi,janeman!",usne josh se ladkhadati aavaz me kaha & apne munh ko nighty ke gale me se dikh rahe biwi ke cleavage se laga diya & chusne laga.uski zuban aise chal rahi thi mano vo apni zuban se hi khinch ke uski 34C size ki chhatiyo ko bahar khinch lena chahta ho.shipra pati ke hath ki karastani se majboor ho kamar hila rahi thi.uski chut me masti bhari kasak apne shabab pe pahunch gayi thi.usne pati ki pith ko bhinchte hue sar jhuka ke uske daye kaan me paglo ki tarah apni jibh firayi.

"aannnnnhhhhhhh..nahi..pranav yaha nahi..pagal....andar chalo....ohhhhhh..!",pranav ne biwi ka daya hath apni pith se alag kiya & zip khol use apni pamt me ghusa ke tab tak dabaye rakha jab tak ki vo uske lund ko hilane nahi lagi,"..uunnhhhh..sarling..kitna garm hai ye..andar chalo please..!",pranav ka lund 8.5 inch lumba tha & bahut hi mota.shipra ko apne hath me uska ehsas pagal karne vala lag raha tha.vo apne ko duniya ki sabse khushnasib ladki manti thi.use itna pyar karne vala pati mila tha & uska lund to uffff..!

tabhi pranav ne uska hath upar khincha & 1 baar fir uske gulabi honth chumne laga.kuchh der tak uske hath biwi ki 26 inch ki patli kamar se lipte use sehlate rahe fir achanak usne uski dono jangho ko tham liya.shipra samajh gayi ki vo kya karne vala tha.

"nahi..pranav..koi sun lega..aa jayega!..ouiiiiiii..!",biwi ki baat ansuni karte hue pranav ne uski janghe hawa me uthate hue apna lund uski chut me ghusa diya.lund ne jaise hi jaan-pehchani gili chut ki darar chhua jaise vo apneaap hi andar ghus gaya.shipra puri tarah madhosh thi magar itna hosh tha use ki chikhe na.usne apne honth pati ke baye kandhe ke upar coat pe daba diye & aahe usme dafn karne lagi.pranav ke dhakke use masti ki oonchahiyo pe le ja rahe the.uske honth uski gardan ke bayi taraf & uske baaye gaal & kaan ko chum rahe the.tabhi shipra ne apne nakhun apne pati ke dono kandho pe gada diye & chihunki.vo jhad rahi thi.uske jhadte hi pranav ne apni kamar aur zor se hilana shuru kar diya & kuchh palo baad uski chut me apna virya chhodne laga.

"tum pagal ho!",pranav ne use god me utha liya to usne apni baahe uske gale me daal pyar se chuma.abhi bhi uske chehre pe khumari saaf dikh rahi thi,"..itna bada ghar hai humara lekin janab ko uske bahar pyar karna hai!",usne halke se uske baye gaal pe kata.

"to thik hai,ab ghar ke andar pyar karte hain!",bungle ke andar dakhil hote hue usne shipra ko chuma.bungle ka darwaza band ho gaya magar kuchh der tak dono ke hansne ki aavazen bahar tak aati rahi fir khamoshi chha gayi & agar koi gaur se sunta to thodi der baad fir se dono ki mastani aaho ki badi dhimi aavaz bahar tak aane lagi thi & ye aavazen der tak aati rahi.

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"office se koi 1 painting leke aaya tha..",rita bathroom me dakhil hui to dekha ki vijayant apna naga badan tauliye se pocnhh raha tha.vijayant ne deewar pe lage aadamkade shishe me use dekha & sar hilaya.shishe me pati ke aks se aankhe milate hue halke se muskrate hue rita ne apne kandho se apni nighty ki doriya sarka di.uska gora jism shishe me jagmaga utha.umra ke sath sharir thoda bhari ho gaya tha lekin shayad aur dilkash bhi.usne baye hath se apni 36D size ki chhatiyo ko dabaya & daye ko 1 baar apni chut pe fera.uski kamar 32 inch ki ho gayi thi & gand 38 ki lekin na vo moti lagti thi na hi uska jim bhadda.vo pati ke karib aayi & uske hatho se tauliya le uska jism sukhane lagi.

"kaha se kharidi?",tauliye ko chhodte hue 5'6" kad ki rita pati ke samne aayi & apne panjo pe uchak ke uske hotho ko chumne lagi.

"nilami me.",vijayant biwi ki kiss ka jawab dete hue uski mansal kamar ko dabane laga.

"yani ki fir us kothari se takkar hui tumhari?",rita jhuk ke uske baalo bhare seene pe apne hotho ke nishan chhodte hue neeche jane lagi.uski manzil thi vijayant ka tagda lund.rita ne use hilaya & fir apna munh lund ke upar vijayant ke pet me ghusa diya & use chumte hue lund hilane lagi.

"haan,usi se jeeti hai.",vo rita ke baalo me hath firane laga.rita jibh se lund ke supade ko chat rahi thi fir usne use munh me bhara & chusne lagi.vijayant ne sar neeche jhukaya to biwi ke chehre pe use masti dikhayi di.lund ko mazbooti se hilate hue vo badi garmjoshi se use choos rahi thi.

"aakhir kyu nafrat karte ho tum us se itni?..ohhhhhh....aannhhhhhhhhhhhh..!",kayi palo tak lund se khlene ke baad vo uthi & uske uthate hi vijayant ne uske hath apne kandho pe rakhe & uski janghe utha ke apna lund 1 hi jhatke me uski chut me utar diya.2 bachcho ki maa hone ke bavjood rita ki chut utni dhili nahi hui thi & vijayant ko abhi bhi use chodne me maza aata tha.uski gand thame baaho me jhulate hue usne 4-5 dhakke lagaye.

"kyuki har baar vo mere raste me khada ho jata hai..",vijayant ne apne honth rita ke labo se sata diye to vo masti me behal ho apni zuban uske munh me ghusa suki jibh se khelne lagi,"..jo mujhe chaiye vahi usi pe uski nazar bhi rehti hai.",vijayant ne kiss todi & baat puri kar use fir se chumte hue bistar pe le aaya & lta ke uske upar letate hue use chodne laga.

"aahhhhh....yessss....jaaaannnn...chodo & zor se....ooooohhhhhhhh....thoda santsoh karna seekho jaan...uunnnnn.....",vijayant ne apne honth uski bayi chhati ke halke bhure nipple se lagaye to usne baye hath me chhati ko pakd use uske munh me bhar diya,"..kya hua agar vo jeet hi gaya to?..itna sab kuchh to hai humare paas......aannnnnnhhhhhh..!",vijayant ke dhakko se madmast ho usne apni tange uski kamar pe chadhate hue uski pith pe besabri se hath firana shuru kar diya tha & apni kamar bhi hila rahi thi.

"nahi....",usne rita ke nipple ko halke se kata,"..1 baar jeeta to har baar jeetega & fir sab khatm ho jayega..main use kabhi bhi kisi keemat pe jeetane nahi de sakta.",vijayant ne bahas khatm ki & apni patni ki dusri choochi ka rukh kiya.rita bhi samajh gaui thi ki har baar ki tarah bhi is baar bhi uski baat ka koi asar nahi hone wala hai.vo us baat ko chhod ab is romani lamhe pe dhyan dene lagi.uski chut me udham machata pati ka mota lund use madhosh kiye ja raha tha.usne behal ho vijayant ke daye kaan ko kata & uski gand me nakhun dhansate hue uski chudai ka lutf utahne lagi.

Rambha lunch me daftar se nikal aayi.Devalay aaye use 6 mahine ho chuke the.jis saheli ke bharose vo yaha aayi thi usne uski kafi madad ki thi.usne use pehle placement agency ke bare me bataya jaha se use 1 comapny me scretary ki naukri mil gayi & sath hi 1 working women's hostel me rehne ki jagah bhi dilwa di.jab vo apne shehar me thi tabhi usne correspondence se MBA akrna shuru kiya tha,vo bhi ab pura hone wala tha.koi aur ladki hoti to khushi-2 kaam karti rehi hai magar rambha ke khwab to aasmaan chhune ke the & vo ye sab bahut jaldi kar lena chahti thi.

yehi uski pareshani ka sabab tha.1 mahine pehle hostel ki ladkiyo se use pata chala ki Trust group ke malik Vijayant Mehra ki secertary ke post ke liye agency ladkiyo ko chun rahi hai.agency ne ye baat kholi nahi thi & chup-chap kar rahi thi lekin kisi ko pata chal gaya & usne ye baat leak kar di.rambha agle hi din agency pahunchi & apna CV bhi vaha bhejne ko kaha lekin use saaf mana kar diya gaya.usne haar nahi mani & vaha ke chakkar lagati rahi lekin natija kuchh bhi nahi nikla.

"main kuchh nahi kar sakti..aap senior manager sahab se baat kijiye.",ye taka sa jawab diya tha uski consultant ne us se & senior manager kabhi milta hi nahi tha.inhi khayalo me gum vo sadak pe chali ja rahi thi.zindagi me pehli baar use aisa laga tha ki vo haar jayegi.tabhi 1 rikshewala uske bahut karib se guzra.thoda aur karib hota to vo gir hi jati.

"aye!andha hai kya!",vo jhallayi magar vo rikshewala tezi se aage chala gaya.chidhte hue vo aage badhi,footpath pe 1 aadmi rehdi lagake aaine bech raha tha & rambha ne apna aks 1 shishe me dekha-samne use 1 chidchidi ladki nazar aayi.vo khadi hoke khud ko dekhne lagi..aisi kyu ho gayi thi vo?

uski chidchidahat ka 1 karan aur bhi tha.devalay aane ke baad se usne 1 baar bhi chudai nahi ki thi.kaha apne shehar me vo apne boyfriend ko chudai ke liye tadpati rehti thi & kaha yaha devalay me vo khud 1 adad lund ke liye taras rahi thi.aisa nahi tha ki yaha ladke uske karib nahi aana chahte the.darasal jinko vo chahti thi vo apni haisiyat ki ladkiyo ke sath ghumte rehte the & vo koi uske shehar ki ladkiyan to thi nahi devalay ki tez-tarrar laadkiyan thi,apne boyfriend ko apne changul se aise kaise nikalne deti.fir bhi kuchh ladko ne uske karib aane ki koshish ki thi magar ya to vo use pasand nahi the ya fir unke sath sone me use koi fayda nahi nazar aaya.

usne shishe me dekha & chehre pe halki si muskan layi..haan ye behtar tha..usne apne kandhe pe bag thik kiya & aage badhi..chahe kuchh bhi ho jaye vo agency ke us sr.manager se milke rahegi & 1 baar to trust me interview zarur degi.ye malal vo man me nahi rakhna chahti thi ki usne koshish nahi ki..haan,kal savere us manager ko us se milna hi hoga!

vo aage badhi,jaha ilake ke sub-divisional magistrate ka court tha.vaha kuchh gehma-gehmi thi.usne dekha koi joda shadi kar ke court se bahar aa raha tha & unke sath ke log unke peechhe the.bhid ki vajah se unki shakl nahi dikhi.usne dekha kuchh photographers bhi unki tasveere khinchna chah rahe the.joda jaldi se car me baith ke nikal gaya.rambha unki shakl nahi dekh payi.usne ghadi dekhi,lunch time khatm ho raha tha.vo vapas daftar jane ko ghum gayi.

vo shadishuda joda & koi nahi Brij Mehra & uski nayi-naveli dulhan Soniya the.rambha ko khabar nahi thi ki aane valo dino me uski zindagi ke taar kayi aur logo ki zindagiyo ke taro se judne vale the & unme brij & sonia bhi shamil the.

Soniya phoolo se saje apne kamre me aayi & shishe ke samne khadi ho gayi.abhi-2 uski shadi ki reception party khatm hui thi.court me shadi karne ke baad vo sham ki party ke liye taiyyar hone me lag gayi thi & ab party khatm hone ke baad vo kafi thak gayi thi.party badi shandar rahi thi & use bahut achha laga tha.

soniya ne surkh laal rang ka lehanga-choli pehna tha joki uske gore rang pe khub fab raha tha.usne gaur se apne roop ko aaine me dekha.vo 30 baras ki ho chuki thi & ye uski dusri shadi thi lekin shayad hi koi use dekh ye bata sakta tha.uske pita fuaj ke bade afsar rahe the & unhone hi uski shadi 1 fauji se hi karwayi thi lekin soniya ko us zindahgi se oob ho chuki thi.pati to har waqt mulk ki hifazat me juta rehta & vo ghar baithi uktane lagi.isi baat ko leke miya-biwi me takrar shuru hui joki talaq pe hi jake khatm hui.

uske baad vo Devalay aa gayi & apni 1 saheli ke sath milke event management ka kaam karne lagi.apne kaam ke silsile me hi 1 party me uski mulakat Brij Kothari se hui jiski zindadili ne uske up[ar badi gehri chhap chhodi.vo uske pita ki umra ka tha lekin ye umra ka fasla bhi unke pyar ke beech aane na paya & jab brij ne us se shadi ke liye kaha to usne fauran haan kar di.uske maa-baap ko to uska talaq dena hi nagawar guzra tha,itni umra wale aadmi se shadi ki baat sun to unhone us se rishta hi khatm kar liya magar uspe is baat ka koi asar nahi pada & usne brij se shadi ka faisla nahi badla.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--6

गतान्क से आगे.

दोनो ने ही कोर्ट मे शादी करने का फ़ैसला किया.सोनिया की पिच्छली शादी रीति-रिवाजो के मुताबिक हुई थी मगर वो नाकामयाब रही & उसका उन रिवाजो पे विश्वास नही था फिर उसकी सहेली का कहना था कि कोर्ट मे क़ानूनी शादी उसे खुदा ना ख़स्ते अगर आगे कोई मुसीबत आती है तो उस हालत मे तलाक़ के वक़्त काफ़ी काम आ सकती है.और ब्रिज को इस उम्र मे धूम-धड़ाके के साथ शादी करना थोड़ा जाँचा नही.वैसे उसके करीबी लोगो ने कहा भी की वो कब से दुनिया की परवाह करने लगा मगर दुनिया की नही उसे खुद की परवाह थी & उसे कोर्ट मॅरेज धूम-धाम की शादी से बेहतर ही लगी.दोनो ने शादी के बाद रिसेप्षन मे अपने दोस्तो & जानकारो को बुलाने का फ़ैसला किया था.

सोनिया ने शीशे मे अपनी 26 इंच की कमर पे हाथ रख थोड़ा सा घूम के खुद को देखा.उसकी शक्ल तो बड़ी खूबसूरत थी ही,जिस्म भी कम क़ातिल नही था.उसने अपनी 38 इंच की गंद को देखा & हल्के से मुस्कुराइ,ब्रिज को ना जाने कितनी बार उसने चोर निगाहो से अपनी गंद को घूरते पाया था.

ब्रिज बहुत चाहता था उसे & जब उसने उसका हाथ माँगा & देर तक उसने जवाब नही दिया तो वो 53 बरस का आदमी किसी नौजवान की तरह नर्वस अपने हाथ मालता खड़ा उसे क़तर निगाहो से देखता रहा था.कितनी हँसी आई थी उसकी हालत देख के उसे & उसने फ़ौरन हां कर दी थी....तो क्या उसने ब्रिज पे तरस खाया था?..उसके अक्स ने उस से सवाल किया..धात!..मैं चाहती हू उसको!..सोनिया के दिल ने जवाब दिया..सचमुच?..आईने मे उसका अक्स उसे मुँह चिढ़ाता नज़र आ रहा था.

"रहम खाओ शीशे पे,मेरी जान!",ब्रिज कमरे मे दाखिल हुआ,"..इतना हुस्न बर्दाश्त नही कर पाएगा & टूट जाएगा!",सोनिया हँसती हुई उसकी तरफ आई तो ब्रिज ने उसे बाहो मे भर लिया & चूमने लगा.

"उउन्न्ञन्..छ्चोड़ो ना इतनी भी क्या जल्दी है!",सोनिया ने पति को परे धकेला.

"शादी के पहले कहती थी कि शादी के बाद करना & अब शादी हो गयी है तो कहती हो जल्दी क्या है!",ब्रिज ने अपनी नयी-नवेली दुल्हन को बाहो मे भरा & लहँगे & चोली के बीच की नंगी जगह पे अपने मज़बूत हाथो से सहलाते हुए उसे फिर से चूमने लगा,"..बहुत इंतेज़ार कराया है तुमने,सोनिया!",वो उसके रसीले,गुलाबी होंठो को चूमने लगा.उसके गर्म हाथ & आतुर होंठ सोनिया को भी मस्त करने लगे.उसने अपने हाथ पति के कंधो पे जमाते हुए उसकी गर्दन थाम ली & उसकी किस का जवाब देने लगी.ब्रिज उसकी कमर & पीठ को सहलाते हुए उसके मुँह मे अपनी ज़बान घुसा रहा था.

सोनिया ने किस तोड़ने की कोशिश की लेकिन ब्रिज के ज़िद्दी होंठो ने उसकी 1 ना सुनी & हार कर सोनिया को अपनी जीभ उसकी जीभ से लड़ानी ही पड़ी.हर बार की तरह इस बार भी ब्रिज की किस ने उसके होश उड़ा दिए.उसके जिस्म मे मस्ती भरने लगी & चूत परेशान हो उठी.हमेशा वो इसी लम्हे खुद को पीछे खींच लेती थी लेकिन आज तो हर हद्द पार करने की रात थी.आज वो अपने महबूब को खफा नही करना चाहती थी & नतीजा ये हुआ कि सोनिया मदहोश होने लगी & उसकी टाँगे जवाब देने लगी.

मस्ती से आहत हो उसने किस तोड़ी तो ब्रिज ने उसे गोद मे उठा लिया & बिस्तर की ओर बढ़ा,"1 बात पुच्छू ब्रिज?",उसकी आँखो मे अब मदहोशी के लाल डोरे थे.

"नही,अभी नही.",ब्रिज ने उसे बिस्तर पे लिटाया & उसकी बगल मे आ गया.उसकी बाई बाँह सोनिया की गर्दन के नीचे थी,"..पहले मुझे तुम्हे जी भर के प्यार कर लेने दो फिर उम्र भर सवाल पूछती रहना,मैं जवाब देता रहूँगा."

"ओह,ब्रिज.",1 बार फिर दोनो 1 दूसरे के आगोश मे खो गये.ब्रिज के होतो की शरारत ने सोनिया को बहुत ज़्यादा मस्त कर दिया & वो बेचैनी से अपनी जंघे रगड़ अपनी कसमसाती चूत को शांत करने लगी.ब्रिज पुराना खिलाड़ी था & जानता था की उसकी बीवी अब मस्ती के नशे मे पूरी तरह डूब चुकी है.उसने उसके होंठ छ्चोड़े & उसके बाए हाथ को थाम उसमे अपने दाए हाथ की उंगलिया फँसा ली & उसे उठा अपने होंठो तक ला चूमने लगा.

सोनिया के चेहरे पे हल्की सी मुस्कान फैल गयी & वो आँखे बंद कर अपने आशिक़ की हर्कतो का मज़ा लेने लगी.ब्रिज ने दाए पैर के अंगूठे से उसके डाए पाँव को सहलाना शुरू कर दिया.सोनिया ने पाँव खींचने की कोशिश की मगर ब्रिज ना माना & अपने अंगूठे को उसके पैर से सताए ही रखा.

ये सोनिया की दूसरी सुहागरात थी मगर जो खुमारी,जो नशा अभी से ही उसपे चढ़ गया था ऐसा तो शायद पहली के अंजाम तक पहुँचने पे भी उसे महसूस नही हुआ था.उसका पहला पति तो उसे नंगी कर उसके उपर सवार हो उसके कुंवारेपन को तोड़ बस अपनी मर्दानगी के सबूत को उसकी चूत मे छ्चोड़ना चाहता था.

"हुन्ह..!",उसकी उंगलियो को चूसने के बाद ब्रिज उसकी कलाई से कंगन उतार रहा था.कंगन उतार के उसने उसकी कलाई के अन्द्रुनि हिस्से को चूमा तो वो सिहर उठी फिर उसने कुच्छ चूड़ियाँ उतारी & फिर लबो को उसकी कलाई से लगाया,सोनिया फिर से सिहरी,फिर ब्रिज ने बाकी चूड़िया उतारी & थोड़ा और नीचे उसकी बाँह पे चूमा,सोनिया का बदन अब जोश से कांप रहा था,फिर उसने चूड़ियो के साथ लगा दूसरा कंगन उतारा & उसकी कोहनी से ज़रा सा उपर थोड़ा सा चूस्ते हुए उसकी बाँह के अन्द्रुनि कोमल हिस्से को चूमा तो सोनिया तड़प उठी.

ब्रिज उसकी बाँह को चूमते हुए उसके कंधे से होता फिर से उसके हसीन चेहरे तक पहुँचा & इस बार सोनिया ने अपने लब खुद ही अपने पति के लिए खोल दिए.उसे चूमते हुए ब्रिज अपने दाए हाथ की 1 उंगली को उसके पेट की चौड़ाई पे उसकी नाभि के नीचे & लहँगे के उपर बहुत हल्के से चलाने लगा.

अब बात सोनिया के बर्दाश्त के बाहर जा रही थी.उसका जिस्म अब मचल रहा था.ब्रिज की उंगली पेट पे घूमते हुए उसकी नाभि के गिर्द दायरा बनाते हुए आख़िर उसमे घुस ही गयी & जब उसने उसे कुरेदा तो सोनिया चीख मारते हुए झाड़ गयी & दूसरी तरफ करवट ले शर्म से अपना चेहरा तकिये मे च्छूपा लिया.

ब्रिज के सामने अब उसकी पीठ थी.मुस्कुराते हुए ब्रिज ने पहले अपना कुर्ता निकाला & फिर उसकी दाई बाँह की लंबाई पे अपनी वही 1 उंगली फिराने लगा.सोनिया फिर से सिहर गयी.ब्रिज ने उसकी बाँह उठाके उसकी कलाई से कंगन निकालते हुए वही हरकत दोहराई जो उसने बाए हाथ के साथ की थी.सोनिया करवट लिए तकिये मे मूँछ छिपाए तड़प रही थी.जिस्म मे ऐसा एहसास उसे पहली बार हो रहा था.चूड़िया उतारने के बाद ब्रिज ने उसके चेहरे को अपनी ओर घुमा के उसके गुलाबी होंठ चूमे & फिर उसके बदन को मोड़ अपनी ओर किया.

अब सोनिया बाई कवट पे थी & ब्रिज दाई पे उसे अपनी बाहो मे भरे उसके गले को चूम रहा था & उसका हार उतार रहा था.हार उतारने के बाद उसने उसके बाए कान से झुमके को उतारा,"आज समझ मे आया तुम औरतें इतने गहने क्यू पहनती हो.",उसने उसके कान को काटा & फिर दाए कान से झुमका निकाला.

"क्यू?",सोनिया ने पति के चेहरे को हाथो मे भर के उसकी आँखो मे देखा.

"ताकि कोई मर्द तुम्हारे करीब ना आ पाए.कम्बख़्त,कितना चुभते हैं ये!",दोनो हंस पड़े & सोनिया उसके गले से लग गयी.ब्रिज उसके बाए कंधे के उपर से देखते हुए उसकी चोली के हुक्स खोलने लगा तो सोनिया चिहुनकि.

"नही."

"क्यू?",उसे चूमते हुए ब्रिज ने हुक्स खोल उसके ब्रा स्ट्रॅप के उपर से अपने हाथ को उसकी पीठ पे फिराया तो सोनिया ने सर झुका के उसके नंगे सीने मे मुँह च्छूपा लिया.ब्रिज के जिस्म से आती मर्दाना खुसबु उसे बहुत भली लग रही थी.बालो से भरा सीना कितना चौड़ा था & कितना मज़बूत!शरमाते हुए उसने अपना हाथ सीने पे रखा तो ब्रिज ने उसकी चोली को उसके कंधे से उतारते हुए उसकी बाई बाँह से खींच ली.सोनिया ने शरमाते हुए बाँह मोड रखी मगर इन बातो से ब्रिज को कोई फ़र्क नही पड़ रहा था.थोड़ी ही देर बाद सोनिया का लाल लेस ब्रा मे ढका सीना उसके सामने था.सोनिया ने शर्म के मारे आँखे बंद की हुई थी.अगर आँखे खोलती तो देखती कि ब्रिज कैसे 1 तक उसके खूबसूरत अंग को देखे जा रहा था.ब्रिज ने सोनिया की कमर के बगल मे लगे लहँगे के हुक्स को खोला तो सोनिया उसकी गिरफ़्त से छूटने की कोशिश करने लगी मगर ब्रिज ने उसे सीने से लगाके रोक लिया.

उसे सीने से लगाए उसके सर को चूमता वो उसकी पीठ & कमर को सहलाने लगा.सोनिया उस से चिपकी बहुत हल्के हाथो से उसके सीने को सहला रही थी.कमरे मे बिल्कुल खामोशी थी बस 2 आतुर जिस्मो की गर्म सांसो की आवाज़ आ रही थी.थोड़ी देर के बाद सोनिया के हाथ अपने पति के जिस्म के गिर्द बँध गये & ब्रिज अपने गाल उसके गालो के साथ रगड़ने लगा.दोनो करवट से लेटे थे & ब्रिज का पाजामे मे क़ैद लंड सोनिया को अपनी चूत के उपर दबा महसूस हो रहा था.उसके ज़हन मे लंड की लंबाई को लेके सवाल कौंधा & वो अपनेआप से ही शर्मा गयी.लंड के एहसास ने उसे मस्त कर दिया.आनेवाली खुशी के एहसास से उसका रोमांच बढ़ गया & तभी ब्रिज ने उसका ढीला लहंगा नीचे सरका दिया.

"हुंग....नही..प्लीज़!",नशे & शर्म से सोनिया ने आँखे बंद कर ली.ब्रिज ने लहँगे को उतार फेंका & लाल लेस ब्रा & पॅंटी मे सजे सोनिया के नशीले जिस्म को निहारने लगा.चूत से बहुत सा पानी रिसा था & पॅंटी सामने से बिल्कुल गीली हो चूत से चिपकी हुई थी.ब्रिज ने बहुत धीरे से हाथ बढ़ा के सोनिया की बाई जाँघ पे रखा मानो डर रहा था कि कही उसका गोरा जिस्म मैला ना हो जाए.उसके छुने से सोनिया चिहुनकि.38 साइज़ की बड़ी चूचियाँ जिस्म की मदहोशी की दास्तान कहती तेज़ धड़कनो के साथ उपर-नीचे हो रही थी & जंघे आपस मे भींची या तो चूत को च्छुपाने की कोशिश कर रही थी या फिर उसकी बेचैनी को शांत करने की कोशिश.काफ़ी देर तक निहारने के बाद जैसे ब्रिज नींद से जागा.उसने अपना पाजामा उतार दिया,अब वो बिल्कुल नंगा था.उसी वक़्त सोनिया ने अभी आँखे खोली जोकि सामने का नज़ारा देख हैरत से फैल गयी.ब्रिज का प्रेकुं से गीला लंड 9 इंच लंबा उसकी नज़रो के सामने तननाया खड़ा था.

उस वक़्त खुशी,मज़े,रोमांच & डर के मिले-जुले भाव ने सोनिया की धड़कनो को & बढ़ा दिया..ये लंड अब उसकी जागीर था..सिर्फ़ उसकी!..ये अब हमेशा उसी के लिए खड़ा होगा..उसकी चूत को मज़े & अपने रस से भर देगा ये..लेकिन कितना बड़ा है..बहुत दर्द होगा..उफफफ्फ़..!"..सोनिया के दिल मे खलबली मचा दी थी ब्रिज के लंड ने!

ब्रिज झुका तो सोनिया ने अपनी बाहे फैला उसे अपने आगोश मे ले लिया.पति का फौलादी जिस्म अब पूरा नंगा उसकी बाहो मे था & वो & मस्त हो गयी थी.उसका लंड उसके पेट पे दबा हुआ था ब्रिज ने हाथ पीछे ले जाके पहले उसकी ब्रा के हुक्स ढीले किए & फिर उसकी पीठ & कमर को मसल्ने लगा.उसके हाथो से उसके जोश की खबर मिल रही थी.सोनिया भी बेसब्री से उसकी पीठ पे अपने हाथो को फिरा रही थी.ब्रिज का दाया हाथ उसकी पॅंटी मे घुस गया & उसकी गंद की फांको को दबोचने लगा तो वो आहे भरने लगी.

"रूप की रानी हो तुम,सोनिया!"ब्रिज ने गंद की फाँक को दबाया तो सोनिया ने उसके बाए कंधे पे काट लिया.ब्रिज का हाथ उसकी गंद की दरार से होता पीछे से ही चूत पे पहुँचा तो सोनिया ने मस्ती से बहाल हो अपनी बाई टांग अपने महबूब की टांग के उपर चढ़ा दी.ब्रिज थोडा आगे हुआ & अपने लंड को उसकी पॅंटी पे दबा दिया & पीछे से उसकी चूत मे उंगली करते हुए उसे चूमने लगा.सोनिया ज़ोर-2 से आहे भरने लगी.उसकी चूत पे दोतरफ़ा मार पड़ रही थी & वो उसे बहुत देर तक नही झेल पाई.

"ब्रिज.....आआअन्न्न्नह...नाआअ......उफफफ्फ़.......हाईईईईईईईईईईईई..!",वो झाड़ गयी & ब्रिज ने उसकी पॅंट नीचे सरका दी.सोनिया का दाया हाथ दोनो जिस्मो के बीच दबा था & ब्रिज ने उसमे अपना लंड थमा दिया तो सोनिया ने शर्मा के उसे छ्चोड़ दिया.ब्रिज अपनी लाजाति बीवी की अदाएँ देख जोश से पागल हो गया & उसे चूमते हुए अपना लंड उसके हाथ मे दबा दिया.सच तो ये था कि 1 बार पहले भी शादी होने के बावजूद सोनिया इन मामलो मे ज़रा अनाड़ी थी.तलाक़ के बाद उसने सिर्फ़ अपनी उंगली से ही काम चलाया था & अपने पहले पति के लंड को केवल अपनी चूत मे ही महसूस किया था.ब्रिज ने उसके हाथ मे लंड पकड़वाया तो उसके गर्म,नर्म & कठोर एहसास ने उसे हैरत से भर दिया.ब्रिज के इशारे पे उसने उसे हिलाना शुरू किया तो ब्रिज मस्ती मे आहे भरने लगा.

सोनिया को बड़ा मज़ा आ रहा था यू ब्रिज को मस्त करने मे.ब्रिज लेट गया तो वो बैठ के लंड हिलाने लगी.उसका खुला ब्रा उसके कंधो पे लटका हुआ था.वो अनाड़ी थी & बहुत ज़ोर से लंड को हिला रही थी.ब्रिज जब झड़ने की कगार पे पहुँचा तो उसने उसका हाथ थाम लिया & उठ बैठा,"आइ लव यू,सोनिया!",उसने उसके चेहरे पे किस्सस की झड़ी लगा दी.सोनिया की समझ मे नही आया कि ऐसा उसने क्या किया जो ब्रिज को उसपे इतना प्यार आ रहा था.बस कुच्छ ही दिनो मे वो समझ जाने वाली थी कि मर्द के दिल का रास्ता उसके पेट से नही उसके लंड से होता है.जो भी औरत उसके अपने हाथो से & मुँह से उसके लंड को खुश करना जानती है वो उस मर्द के दिल मे खास जगह बना लेती थी.

ब्रिज ने उसके कंधो से उसका ब्रा उतारा तो सोनिया फिर से शर्मा गयी,अब वो पति के सामने पूरी तरह से नंगी जो थी.उसके हल्के भूरे निपल्स बिल्कुल तने हुए थे बड़ी चूचियाँ बिल्कुल कस गयी थी.ब्रिज ने मुँह झुकाया & उन्हे चूम लिया तो वो चिहुनक उठी.बदन मे बहुत सा रोमांच भर गया.छातियो को चूमना कब चूसने मे तब्दील हुआ,उसे पता ही ना चला.उसे बस ये होश था कि वो फिर से बिस्तर पे लेटी हुई थी & ब्रिज उसकी चूचियो की तारीफ के कसीदे पढ़ता हुआ उन्हे अपनी ज़ुबान से चूमे,चूसे,चाते जा रहा था,"..कमाल है तुम्हारी चूचियाँ,सोनिया..कितने मस्त निपल्स हैं!..इतनी रसीली चूचिया मैने आज तक नही देखी..उम्म्म्मममममम....जी करता है इन्हे चूस्ता ही रहू...दबाने पे दिल मे अजीब सा मज़ा भर जाता है..म्‍म्मम्मूऊऊुआहह..!"

उसकी चूत फिर से मचलने लगी थी.ब्रिज ने उसके सीने से सर उठाया & उसकी टाँगे फैला उनके बीच आ गया.सोनिया ने आँखे बंद कर सर बाई तरफ घुमा लिया.उसे भी बस अब इसी पल का इंतेज़ार था.ब्रिज ने लंड को दरार पे रख के पहले उसकी चूत को सहलाया & जब बेचैनी मे उसने अपनी कमर उचकाई तो उसने सूपदे को अंदर घुसा दिया.

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क्रमशः.......

JAAL paart--6

gataank se aage.

dono ne hi court me shadi karne ka faisla kiya.soniya ki pichhli shadi riti-rivajo ke mutabik hui thi magar vo nakamyab rahi & uska un rivajo pe vishwas nahi tha fir uski saheli ka kehna tha ki court me kanooni shadi use khuda na khaste agar aage koi musibat aati hai to us halat me talaq ke waqt kafi kaam aa sakti hai.aur brij ko is umra me dhoom-dhadake ke sath shadi karna thoda jancha nahi.vaise uske karibi logo ne kaha bhi ki vo kab se duniya ki parvah karne laga magar duniya ki nahi use khud ki parvah thi & use court marriage dhoom-dham ki shadi se behtar hi lagi.dono ne shadi ke baad reception me apne dosto & jankaor ko bulane ka faisla kiya tha.

soniya ne shishe me apni 26 inch ki kamar pe hath rakh thoda sa ghum ke khud ko dekha.uski shakl to badi khubsurat thi hi,jism bhi kam qatil nahi tha.usne apni 38 inch ki gand ko dekha & halke se muskurayi,brij ko na jane kitni baar usne chor nigaho se apni gand ko ghurte paya tha.

brij bahut chahta tha use & jab usne uska hath manga & der tak usne jawab nahi diya to vo 53 baras ka aadmi kisi naujawan ki tarah nervous apne hath malta khada use qatar nigaho se dekhta raha tha.kitni hansi aayi thi uski halat dekh ke use & usne fauran haan kar di thi....to kya usne brij pe taras khaya tha?..uske aks ne us se sawal kiya..dhat!..main chahti hu usko!..soniya ke dil ne jawab diya..sachmuch?..aaine me uska aks use munh chidhata nazar aa raha tha.

"reham khao shishe pe,meri jaan!",brij kamre me dakhil hua,"..itna husn bardasht nahi kar payega & tut jayega!",soniya hansti hui uski taraf aayi to brij ne use baaho me bhar liya & chumne laga.

"uunnnn..chhodo na itni bhi kya jaldi hai!",soniya ne pati ko pare dhakela.

"shadi ke pehle kehti thi ki shadi ke baad karna & ab shadi ho gayi hai to kehti ho jaldi kya hai!",brij ne apni nayi-naveli dulhan ko baaho me bhara & lehange & choli ke beech ki nangi jagah pe apne mazboot hatho se sehlate hue use fir se chumne laga,"..bahut intezar karaya hai tumne,soniya!",vo uske rasile,gulabi hotho ko chumne laga.uske garm hath & aatur honth soniya ko bhi mast karne lage.usne apne hath pati ke kandho pe jamate hue uski gardan tham li & uski kiss ka jawab dene lagi.brij uski kamar & pith ko sehlate hue uske munh me apni zaban ghusa raha tha.

soniya ne kiss todne ki koshish ki lekin brij ke ziddi hontho ne uski 1 na suni & haar kar soniya ko apni jibh uski jibh se ladani hi padi.har baar ki tarah is baar bhi brij ki kiss ne uske hosh uda diye.uske jism me masti bharne lagi & chut pareshan ho uthi.humesha vo isi lamhe khud ko peechhe khinch leti thi lekin aaj to har hadd paar karne ki raat thi.aaj vo apne mehboob ko khafa nahi karna chahti thi & natija ye hua ki soniya madhosh hone lagi & uski tange jawab dene lagi.

masti se aahat ho usne kiss todi to brij ne use god me utha liya & bistar ki or badha,"1 baat puchhu brij?",uski aankho me ab madhoshi ke laal dore the.

"nahi,abhi nahi.",brij ne use bistar pe litaya & uski bagal me aa gaya.uski bayi banh soniya ki gardan ke neeche thi,"..pehle mujhe tumhe ji bhar ke pyar kar lene do fir umra bhar sawal puchhti rehna,main jawab deta rahunga."

"oh,brij.",1 baar fir dono 1 dusre ke agosh me kho gaye.brij ke hotho ki shararat ne soniya ko bahut zyada mast kar diya & vo bechaini se apni janghe ragad apni kasmasati chut ko shant karne lagi.brij purana khiladi tha & janta tha ki uski biwi ab masti ke nashe me puri tarah doob chuki hai.usne uske honth chhode & uske baye hath ko tham usme apne daye hath ki ungliya fansa li & use utha apne hotho tak la chumne laga.

soniya ke chehre pe halki si muskan fail gayi & vo aankhe band kar apne aashiq ki harkato ka maza lene lagi.brij ne daye pair ke anguthe se uske daye panv ko sehlana shuru kar diya.soniya ne panv khinchne ki koshish ki magar brij na mana & apne anguthe ko uske pair se sataye hi rakha.

ye soniya ki dusri suhagrat thi magar jo khumari,jo nasha abhi se hi uspe chadh gaya tha aisa to shayad pehli ke anjam tak pahunchne pe bhi use mehsus nahi hua tha.uska pehla pati to use nangi kar uske upar sawar ho uske kunwarepan ko tod bas apni mardangi ke saboot ko uski chut me chhodna chahta tha.

"hunhh..!",uski ungliyo ko chusne ke baad brij uski kalai se kangan utar raha tha.kangan utar ke usne uski kalai ke andruni hisse ko chuma to vo sihar uthi fir usne kuchh choodiyan utari & fir labo ko uski kalai se lagaya,soniya fir se sihri,fir brij ne baki choodiya utari & thoda aur neeche uski banh pe chuma,soniya ka badan ab josh se kanp raha tha,fir usne choodiyo ke bada laga dusra kangan utara & uski kohni se zara sa upar thoda sa chuste hue uski banh ke andruni komal hisse ko chuma to soniya tadap uthi.

brij uski banh ko chumte hue uske kandhe se hota fir se uske haseen chehre tak pahuncha & is baar soniya ne apne lab khud hi apne pati ke liye khol diye.use shumte hue brij apne daye hath ki 1 ungli ko uske pet ki chaudai pe uski nabhi ke neeche & lehange ke upar bahut halke se chalane laga.

ab baat sonioya ke bardasht ke bahar ja rahi thi.uska jism ab machal raha tha.brij ki ungli pet pe ghumte hue uski nabhi ke gird dayra banate hue aakhir usme ghus hi gayi & jab usne use kureda to soniya chikh marte hue jhad gayi & dusri taraf karwat le sharm se apna chehra takiye me chhupa liya.

brij ke samne ab uski pith thi.muskurate hue brij ne pehle apna kurta nikala & fir uski dayi banh ki lambai pe apni vahi 1 ungli firane laga.soniya fir se sihar gayi.brij ne uski banh uthake uski kalai se kangan nikalte hue vahi harkat dohrayi jo usne baye hath ke sath ki thi.soniya karwat liye takiye me munch chhipaye tadap rahi thi.jism me aisa ehsas use pehli baar ho raha tha.choodiya utarne ke baad brij ne uske chehre ko apni or ghuma ke uske gulabi honth chume & fir uske badan ko mod apni or kiya.

ab soniya bayi kawat pe thi & brij dayi pe use apni baaho me bhare uske gale ko chum raha tha & uska haar utar raha tha.haar utarne ke baad usne uske baye kaan se jhunke ko utara,"aaj samajh me aaya tum auraten itne gehne kyu pehanti ho.",usne uske kaan ko kata & fir daye kaan se jhumka nikala.

"kyu?",soniya ne pati ke chehre ko hatho me bhar ke uski aankho me dekha.

"taki koi mard tumhare karib na aa paye.kambakht,kitna chubhte hain ye!",dono hans pade & soniya uske gale se lag gayi.brij uske baye kandhe ke upar se dekhte hue uski choli ke hooks kholne laga to soniya chihunki.

"nahi."

"kyu?",use chumte hue brij ne hooks khol uske bra strap ke upar se apne hath ko uski pith pe firaya to soniya ne sar jhuka ke uske nange seene me munh chhupa liya.brij ke jism se aati mardana khusbu use bahut bhali lag rahi thi.baalo se bhara seena kitna chauda tha & kitna mazboot!sharmate hue usne apna hath seene pe rakha to brij ne uski choli ko uske kandhe se utarte hue uski bayi banh se khinch li.soniya ne sharmate hue banh mode rakhi magar in baato se brij ko koi fark nahi pad raha tha.thodi hi der baad soniya ka laal lace bra me dhaka seena uske samne tha.soniya ne sharm ke mare aankhe band ki hui thi.agar aankhe kholti to dekhti ki brij kaise 1 tak uske khoobsurat ang ko dekhe ja raha tha.brij ne soniya ki kamar ke bagal me lage lehange ke hooks ko khola to soniya uski giraft se chhutne ki koshish karne lagi magar brij ne use seene se lagake rok liya.

use seene se lagaye uske sar ko chumta vo uski pith & kamar ko sehlane laga.soniya us se chipki bahut halke hatho se uske seene ko sehla rahi thi.kamre me bilkul khamoshi thi bas 2 aatur jismo ki garm sanso ki aavaz aa rahi thi.thdoi der ke baad soniya ke hath apne pati ke jism ke gird bandh gaye & brij apne gaal uske gaalo ke sath ragadne laga.dono karwat se lete the & brij ka pajame me qaid lund soniya ko apni chut ke upar daba mehsus ho raha tha.uske zehan me lund ki lambai ko leke sawal kaundha & vo apneaap se hi sharma gayi.lund ke ehsas ne use mast kar diya.aanevali khushi ke ehsas se uska romach badh gaya & tabhi brij ne uska dhila lehanga neeche sarka diya.

"hunh....nahi..please!",nashe & sharm se soniya ne aankhe band kar li.brij ne lehange ko utar fenka & laa lace bra & panty me saje soniya ke nashile jism ko niharne laga.chut se bahut sa pani risa tha & panty samne se bilkul gili ho chut se chipki hui thi.brij ne bahut dhire se hath badha ke soniya ki bayi jangh pe rakha mano darr raha tha ki kahi uska gora jism maila na ho jaye.uske chhune se soniya chihunki.38 size ki badi chhatiya jism ki madhoshi ki datan kehti tez dhadkano ke sath upar-neeche ho rahi thi & janghe aapas me bhinchi ya to chut ko chhupane ki koshish kar rahi thi ya fir uski bechaini ko shant karne ki koshish.kafi der tak niharne ke baad jaise brij nind se jaga.usne apna pajama utar diya,ab vo bilkul nanga tha.usi waqt soniya ne abhi aankhe kholi joki samne ka nazara dekh hairat se fail gayi.brij ka precum se gila lund 9 inch lumba uski nazro ke samne tannaya khada tha.

us waqt khushi,maze,romanch & darr ke mile-jule bhavo ne soniya ki dhadkano ko & badha diya..ye lund ab uski jagir tha..sirf uski!..ye ab humesha usi ke liye khada hoga..uski chut ko maze & apne ras se bhar dega ye..lekin kitna bada hai..bahut dard hoga..uffff..!"..soniya ke dil me khalbali macha di thi brij ke lund ne!

brij jhuka to soniya ne apni baahe faila use apne agosh me le liya.pati ka fauladi jism ab pura nanga uski baaho me tha & vo & mast ho gayi thi.uska lund uske pet pe daba hua tha brij ne hath peechhe le jake pehle uski bra ke hooks dile kiye & fir uski pith & kamar ko msalne laga.uske hatho se uske josh ki khabar mil rahi thi.soniya bhi besabri se uski pith pe apne hatho ko fira rahi thi.brij ka daya hath uski panty me ghus gaya & uski gand ki fanko ko dabochne laga to vo aahe bharne lagi.

"roop ki rani ho tum,soniya!"brij ne gand ki fank ko dabaya to soniya ne uske baye kandhe pe kaat liya.brij ka hath uski gand ki darar se hota peechhe se hi chut pe pahuncha to soniya ne masti se behal ho apni bayi tang apne mehboob ki tang ke upar chadha di.brij thoda aage hua & apne lund ko uski panty pe daba diya & peechhe se uski chut me ungli karte hue use chumne laga.soniya zor-2 se aahe bharne lagi.uski chut pe dotarfa maar pad rahi thi & vo use bahut der tak nahi jhel payi.

"brij.....aaaaannnnhhhh...naaaaa......uffff.......haiiiiiiiiiiiii..!",vo jhad gayi & brij ne uski pant neeche sarka di.soniya ka daya hath dono jismo ke beech daba tha & brij ne usme apna lund thama diya to soniya ne sharma ke use chhod diya.brij apni lajati biwi ki adayen dekh josh se pagal ho gaya & use chumte hue apna lund uske hath me daba diya.sach to ye tha ki 1 baar pehle bhi shadi hone ke bavjood soniya in mamlo me zara anadi thi.talaq ke baad usne sirf apni ungli se hi kaam chalaya tha & apne pehle pati ke lund ko keval apni chut me hi mehsus kiya tha.brij ne uske hath me lund pakadwaya to uske garm,narm & kathor ehsas ne use hairat se bhar diya.brij ke ishare pe usne use hilana shuru kiya to brij masti me aahe bharne laga.

soniya ko bada maza aa raha tha yu brij ko mast karne me.brij let gaya to vo baith ke lund hilane lagi.uska khula bra uske kandho pe latka hua tha.vo anadi thi & bahut zor se lund ko hila rahi thi.brij jab jhadne ki kagar pe pahuncha to usne uska hath tham liya & uth baitha,"i love you,soniya!",usne uske chehre pe kisses ki jhadi laga di.soniya ki samajh me nahi aaya ki aisa usne kya kiya jo brij ko uspe itna pyar aa raha tha.bas kuchh hi dino me vo samajh jane vali thi ki mard ke dil ka rasta uske pet se nahi uske lund se hota hai.jo bhi aurat uske apne hatho se & munh se uske lund ko khush karna janti hai vo us mard ke dil me khas jagah bana leti thi.

brij ne uske kandho se uska bra utara to soniya fir se sharma gayi,ab vo pati ke samne puri tarah se nangi jo thi.uske halke bhure nipples bilkul tane hue the badi chhatiya bilkul kas gayi thi.brij ne munh jhukaya & unhe chum liya to vo chihunk uthi.badan me bahut sa romanch bhar gaya.chhatiyo ko chumna kab chusne me tabdil hua,use pata hi na chala.use bas ye hosh tha ki vo fir se bistar pe leti hui thi & brij uski choochiyo ki tarif ke kaside padhta hua unhe apni zuban se chume,chuse,chate ja raha tha,"..kamal hai tumhari choochiyan,soniya..kitne mast nipples hain!..itni rasili choochiya maine aaj tak nahi dekhi..ummmmmmmmm....ji karta hai inhe chusta hi rahu...dabane pe dil me ajib sa maza bhar jata hai..mmmmmuuuuaahhhhhh..!"

uski chut fir se machalne lagi thi.brij ne uske seene se sar uthaya & uski tange faila unke beech aa gaya.soniya ne aankhe band kar sar bayi taraf ghuma liya.use bhi bas ab isi pal ka intezar tha.brij ne lund ko darar pe rakh ke pehle uski chut ko sehlaya & jab bechaini me usne apni kamar uchkayi to usne supade ko andar ghusa diya.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--7

गतान्क से आगे.

"आहह..!",उसे हल्का दर्द हुआ & फिर जब ब्रिज ने उसकी कसी चूत मे पूरा लंड अंदर घुसाना शुरू किया तो वो चीख उठी.उसे ऐसा लग रहा था कि फिर से उसका कुँवारापन लुट रहा है.इतना दर्द तो उसे पहली बार भी नही हुआ था,"ब्रिज...नही...ऊऊव्व्वव..बहुत दर्द हो रहा है...आआइइईईईई..बहुत बड़ा है तुम्हारा..ओफफफफफ्फ़.....!",मगर ब्रिज ने लंड को उसकी चिकनी चूत मे आख़िर तक उतार के ही दम लिया.

"बस हो गया मेरी जान!",उसने उसे खूब चूमा & लंड को ज़रा भी नही हिलाया.जब उसका दर्द ख़त्म हो गया तब उसने उसके चेहरे को हाथो मे भरा & अपनी कमर को हिलाना शुरू किया,अब तो दर्द नही हो रहा,जानेमन?"

"उउम्म्म्मम..नही..!",सोनिया अब मस्ती मे थी.कुच्छ ही पलो मे वो कमर हिला के अपने पति का पूरा साथ दे रही थी.उसकी चूत के आनच्छुए हिस्सो को अपनी रगड़ से आहत कर ब्रिज का लंड उसे जन्नत की सैर पे ले चला था.ब्रिज उसकी मोटी चूचियो को चूस्ता धक्को की रफ़्तार बढ़ा रहा था.सोनिया मदहोश हो अपने नखुनो से उसकी पीठ को छल्नी कर रही थी.थोड़ी देर पहले जिस लंड के घुसने से वो दर्द से बहाल हो चुकी थी अब उस लंड को वो चूत से निकलने नही देना चाहती थी.ब्रिज की गंद दबोच उसे दबाते हुए वो उसे जैसे अपने और अंदर ले लेना चाहती थी!

ब्रिज पूरे लंड को बाहर निकाल उसकी ठुड्डी चूमता उसे फिर से अंदर पेल रहा था.सोनिया की आहें कमरे मे गूँज रही थी.ब्रिज के क़ातिल धक्को के आगे उसने जल्द ही घुटने टेक दिए & उचक के उसे चूमते हुए झाड़ गयी.उसके झाड़ते ही ब्रिज ने उसे बाहो मे भर करवट बदली & उसे अपने उपर करता हुआ बिस्तर पे लेट गया.कुच्छ पल तो सोनिया अपने आप को संभालती रही फिर जब सायंत हो गयी तो ब्रिज ने नीचे से कमर उचका के दोबारा चुदाई शुरू कर दी.उसके बालो भरे सीने पे छातिया दबाए वो उसके होंठ चूमने लगी.उसके दिल मे अपने महबूब के लिए बहुत प्यार उमड़ आया था.उसकी मर्दानगी की वो मुरीद हो गयी थी & अब उसके साथ यू ही ज़िंदगी के अंत तक रहने की तमन्ना उसके दिल मे उठ रही थी.

ब्रिज ने उसकी बाहे पकड़ उसे उपर कर दिया तो उसे शर्म आ गयी.उसके लंड से पागल हो वो कमर उचका-2 के चुदाई कर रही थी & ऐसा करने से उसकी भारी छातिया बड़े मस्ताने अंदाज़ मे छल्छला रही थी.उसने शर्म से मुस्कुराते हुए अपनी आँखे बंद कर अपने सीने को अपनी बाहो से ढँक लिया.

"क्यू छिपा रही हो इन्हे?",उसकी गंद को दबोचते हुए अपने हाथो को हटा ब्रिज ने उसके हाथो को उसके सीने से हटाया,"..मुझे देखने दो इन खूबसूरत फूलो को..खेलने दो मुझे इनसे..!",उसके हाथ बीवी की चूचियो से चिपक गये & उन्हे दबाने लगे.शर्मा के सोनिया ने अपना चेहरा अपने हाथो मे च्छूपा लिया तो ब्रिज उठ बैठा & उसके हाथो को हटा उसके चेहरे को चूमने लगा.दोनो फिर से मस्ती के सागर की गहराई मे डूब रहे थे.बैठे-2 कुच्छ देर चुदाई करने के बाद ब्रिज ने सोनिया को बाँहो मे भरते हुए फिर से बिस्तर पे लिटा दिया & उसके उपर लेट उसकी चुदाई करने लगा.अब सोनिया की हया काफूर हो चुकी थी.अब बस उसे पति के साथ फिर से उस समंदर की गहराई मे पूरा डूब जाना था.वो मस्ती मे अपने हाथ अपने पति के सीने,पीठ,बाँह,चेहरे..पूरे जिस्म पे फिराते हुए उस से अपने इश्क़ का इक़रार कर रही थी,"आइ लव यू माइ डार्लिंग..ऊऊहह....मेरी जान ब्रिज...आइ लव यू...आहह..!",ब्रिज का जोश और बढ़ गया.दोनो गुत्थमगुत्था हो गये.सोनिया की टाँगे ब्रिज की कमर पे थी & बाहे पीठ पे,हाथ गंद को खरोंछते तो कभी सर के बालो को नोचते.ब्रिज उसकी चूचियो को पीता तो कभी होंठो को चूमता.उसके हाथ भी कभी उसके चेहरे को सहलाते तो कभी चूचियो को मसल्ते.कमरे मे आहो का शोर अपने चरम पे था & जिस्मो का रोमांच भी अब आख़िरी पड़ाव पे पहुँच गया था.ब्रिज के धक्को से आहत हो सोनिया ने चीख मार. & उसका नाम पुकारते झाड़ गयी & ब्रिज ने भी अपनी महबूबा के प्यार का एलान करते हुए उसकी चूत मे अपना गाढ़ा वीर्य छ्चोड़ दिया.दोनो 1 दूसरे की बाहो मे क़ैद 1 दूसरे को चूम रहे थे.दोनो के दिलो मे उमंग थी,ये उनके नये जीवन का आगाज़ था & दोनो को यकीन था कि इस रात की तरह पूरी ज़िंदगी भी ऐसे ही रंगिनियो से भरी रहेगी.

दोनो को पता नही था कि दोनो कितने ग़लत थे.

"उम्म्म्म..ब्रिज डार्लिंग..तुमने मुझसे शादी क्यू की?",सोनिया अपने पति से 2 बार चुदवाने के बाद उसकी बाई तरफ लेटी थी,उसके बाए हाथ मे उसका लंड था & उसकी चूत मे पति के दाए हाथ की उंगलिया.ये सवाल उसके दिल मे अपने कमरे मे घुसने के कुच्छ पॅलो के बाद ही आया था लेकिन पुछ्ने का मौका अभी मिला था.

"मेरी जान,मुझे आज तक शादी की कोई ज़रूरत महसूस नही हुई थी.मेरी ज़िंदगी मे ना जाने कितनी लड़कियाँ आई मगर आज तक कोई ऐसी लड़की नही मिली जिसे देख के मुझे ये लगता कि इसके साथ सारी उम्र बिताई जा सकती है..",ब्रिज ने सोनिया की चूत मे उंगली करना जारी रखा,"..तुमसे चंद मुलाक़ातों मे ही मुझे ये एहसास हो गया कि तुम ही वो लड़की हो जिसे मैं अपना जीवन-साथी बना सकता हू.सोनिया,मैं अपनी ज़िंदगी का आने वाला हर पल तुम्हारी बाहो मे गुज़रना चाहता हू.",ब्रिज ने अपने होंठ सोनिया के होंठो से लगा दिए.

ऐसा कुच्छ मुझे क्यू नही महसूस हुआ?..सोनिया ने मस्ती मे आँखे बंद कर ली मगर उसके दिल मे फिर से वही उलझन आ गयी थी..मैने क्यू की है ब्रिज से शादी?..ब्रिज के जैसा प्यार का एहसास मुझे क्यू नही महसूस होता..ब्रिज ने उसे उसकी दाई करवट पे किया तो उसने मस्त होके अपनी बाई जाँघ उसके उपर चढ़ा दी.ब्रिज ने भी अपनी उंगली की जगह अपने लंड को उसकी चूत मे घुसा दिया.सोनिया ब्रिज से लिपट गयी..क्यूकी तुम ब्रिज से प्यार ही नही करती..दीवार पे लगे कपबोर्ड के आदमकद शीशे मे उसे फिर से अपना अक्स खुद की ही हँसी उड़ाता दिखा..करती हू मैं प्यार ब्रिज से!

"आइ लव यू ब्रिज..माइ डार्लिंग..मेरी जान..आइ लव यू..आइ लव यू....आइ लव यू.....आइ लव यू..!",वो अपने अक्स को जवाब देते हुए अपने प्रेमी से चिपकी उसके सर को बेसब्री से चूमती हुई उसकी चुदाई का मज़ा ले रही थी.ब्रिज उसके प्यार का यू दीवानेपन से भरा इज़हार सुन खुशी से पागल हो गया & उसके धक्को मे & जोश भर गया.सोनिया ने आँखे बंद कर अपना चेहरा उसकी गर्दन मे च्छूपा लिया.उसे बहुत मज़ा आ रहा था & ब्रिज पे बहुत प्यार भी लेकिन दिल के किसी कोने मे वो उलझन अभी भी शायद छिपि बैठी थी.

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"वेलकम होम,माइ सन.",विजयंत मेहरा ने समीर के घर मे कदम रखते ही उसे गले से लगा लिया,"एरपोर्ट से यहा आने मे इतनी देर कैसे कर दी?",विजयंत ने बेटे को सर से पाँव तक देखा.समीर 25 बरस का 6 फ्ट का बड़ा हॅंडसम जवान था.

"डॅड,मैं वो मानपुर वाली ज़मीन देखने चला गया था.",मानपुर वही जगह थी जिसका टेंडर 6 महीने बाद निकलने वाला था & जिसपे मेहरा के अलावा कोठारी की भी नज़र जमी थी.

"वेरी बॅड,बेटा!",रीता भी वहाँ आ गयी थी & बेटे का माथा चूम लिया,"..इतने दिन बाद लौटे हो & उसपे भी पहले तुम्हे काम ही याद रहा है."

"सॉरी,मोम!",समीर हंसा,"..पर अब तो यही रहूँगा फिर सोचा कि वो ज़मीन देखने का मौका मिले ना मिले.डॅड,मैने कुच्छ सोचा है उस ज़मीन के बारे मे.."

"हां-2,मुझे पता है..",विजयंत ने उसके कंधे पे हाथ रखा,"..हम चलेंगे अगले कुच्छ दिनो मे वाहा & तब अपना प्लान बताना."

"हां..",शिप्रा & प्रणव भी वाहा आ गये थे,"..आज सिर्फ़ शाम की पार्टी की प्लॅनिंग करोगे तुम.",समीर बेहन-बहनोई से भी गले मिला & फिर पूरा परिवार हॉल मे बैठ के बातें करने लगा.

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"मगर मैं क्यू नही मिल सकती उनसे?",रंभा ने प्लेसमेंट एजेन्सी की अपनी काउनसेलर से गुस्से से पुछा.

"क्यूकी कोई फायडा नही रंभा..",वो कुच्छ लिख रही थी & उसने बिना सर उठाए जवाब दिया,"..मैने कहा ना तुम्हारा तजुर्बा कम है,हम तुम्हे ट्रस्ट ग्रूप के मालिक की सेक्रेटरी की पोस्ट के लिए कैसे भेज सकते हैं?"

"लेकिन जब मुझे मौका मिलेगा ही नही तो तजुर्बा होगा कहा से?",रंभा का गुस्से & बढ़ गया.

"प्लीज़,रंभा.तुम अपना & मेरा,सोनो का वक़्त बर्बाद कर रही हो.मैने कहा ना,तुम्हे अगले 3 महीनो मे किसी और बड़ी कंपनी मे प्लेस करवा दूँगी पर ट्रस्ट ग्रूप को तो भूल जाओ तुम फिलहाल.",वो अपना काम करती रही.रंभा को गुस्सा आ रहा था & मायूसी भी हो रही थी.वो कुर्सी से उठी & तभी उसकी नज़र सामने 1 कॅबिन पे पड़ी जिसके बाहर 1 तख़्ती पे लिखा था,"विनोद सिंग,सीनियर मॅनेजर",उसके दिल मे 1 ख़याल आया .ये आख़िरी मौका था,अगर अब भी कुच्छ नही हुआ तो वो हार ,मान लेगी लेकिन उस मॅनेजर से मिले बिना तो वो आज जाएगी नही!

उसने नीचे सर झुका के काम कर रही काउनसेलर को देखा & तेज़ी से वाहा से कॅबिन की ओर बढ़ी,"रंभा!",काउनसेलर कुर्सी से उठा के जब तक उस तक पहुँचती वो कॅबिन मे दाखिल हो चुकी थी.

"मुझे आपसे बात करनी है.",उसने डेस्क पे हाथ जमा के सामने कुर्सी पे बैठे 1 35-36 बरस की उम्र वाले शख्स से कहा जोकि उसे हैरान निगाहो से देख रहा था.

"आइ'म सॉरी,सर.",काउनसेलर अंदर आई,"रंभा,चलो यहा से,प्लीज़..मैं तुम्हे समझाती हू.",उसने रंभा की बाँह थामी तो रंभा ने उसे झटक दिया.

"मुझे आपसे कुच्छ नही समझना..मुझे अब इनसे ही समझना है सब कुच्छ.",उसने वैसे ही डेस्क पे हाथ जमाए विनोद सिंग की ओर इशारा किया.सिंग ने काउनसेलर को वाहा से जाने का इशारा किया तो वो घबराई सी बाहर चली गयी.

"क्या समझना है आपको?",उसने रांभ की ओर देखा.

"मेरा CV ट्रस्ट ग्रूप के मालिक की सेक्रेटरी की पोस्ट के लिए क्यू नही भेजा जा रहा?",रंभा ने गौर किया कि विनोद की नज़रे 1 पल के लिए उसके चेहरे से नीचे हुई & फिर उपर हो गयी.उसे ख़याल आया कि जिस तरह से वो झुकी खड़ी है,उसकी शर्ट के गले मे से उसकी छातियो का कुच्छ हिस्सा तो ज़रूर दिख रहा होगा.ये समझ मे आते ही वो थोड़ा और झुक गयी लेकिन ऐसे कि विनोद को ये एहसास नही हुआ कि वो उसे अपनी चूचियाँ दिखा रही है.

"देखिए,आपका तजुर्बा..-"

"-..वो मैं सुन चुकी हू लेकिन मुझे वाहा अप्लाइ करना ही है!",विनोद ने 1 बार फिर सफेद कमीज़ के गले से दिख रही उसकी चूचियों के थोड़े से गोरे हिस्से को देखा.

"आप वही अप्लाइ करने को इतनी उतावली क्यू हैं?",वो मुस्कुराया,उसके ज़हन मे 1 ख़याल आ रहा था.रंभा भी भाँप गयी थी कि जिस तरह वो चोर निगाहो से उसके क्लीवेज को ताक रहा था,शायद उसका काम हो सकता था.

"क्यूकी वो इस शहर की सबसे बड़ी कंपनी है & हमारे मुल्क की नामी-गिरामी कंपनीज़ मे से 1.वाहा नौकरी मिलते ही मेरा करियर बिल्कुल संवर जाएगा."

"हमारी एजेन्सी शहर की एकलौती ऐसी एजेन्सी है जोकि ट्रस्ट & उसके जैसी बड़ी-2 कंपनीज़ को उनके बड़े अफसरो के लिए सेक्रेटरीस मुहैय्या करती है..",रंभा ने डेस्क से हाथ हटा लिए थे & अब अपने सीने पे इस तरह से बाँध लिए थे कि बाहो के उपर से उसकी बड़ी छातियाँ ऐसे उभर गयी थी मानो उसकी सफेद शर्ट को फाड़ देना चाहती हो.उसने सफेद शर्ट & काली पॅंट पहनी थी & कमीज़ पॅंट मे अटकी हुई थी.इस वजह से उसके जिस्म का क़ातिलाना आकार सॉफ झलक रहा था.

"..हमारी कंपनी की साख ऐसी है कि इस धंधे का 95% हिस्सा हमारे पास है लेकिन इसी शहर मे 2-3 और एजेन्सीस हैं जोकि यही काम करती हैं & बाकी 5% हिस्सा उन्ही का है.ये हिस्सा पिच्छले बरस तक बस 3% था.अब बताओ,तुम्हे भेजूँगा तो हमारी एजेन्सी की साख का क्या होगा?",रंभा ने गौर किया कि वो आप से तुम पे आ गया था यानी कि वो उसमे दिलचस्पी ले रहा था.

"देखिए सर,जहा 4 लड़कियो को भेज रहे हैं वाहा 5 भेज दीजिए ना!",उसने थोड़ी परेशान सूरत बनाके कहा.

"सारे इंटरव्यूस विजयंत मेहरा खुद लेता है,रंभा.",वो खड़ा हुआ & उसके करीब आया & फिर उसके पीछे चला गया.रंभा की गंद देख के उसकी आँखो मे वासना के लाल डोरे तार उठे,"..ज़रा भी चूक हुई तो वो हमारी एजेन्सी को बलकक्लिस्ट कर सकता है.",उसने उसके कंधो पे पीछे से हाथ रखा,"बैठो."

रंभा मन ही मन मुस्कुराइ वो उसके पीछे से खड़ा हो उसकी कमीज़ के अंदर झाँक के उसकी चूचियो को देखने की कोशिश कर रहा था,"पर आप कुच्छ तो कर सकते हैं?",उसने अपना दाया हाथ अपने दाए कंधे पे रखे विनोद के दाए हाथ पे रखा & थोड़ा रुआंसी हो उसे देखा.

"हां,कर तो सकता हू.",उसने उसके हाथ को दबाया & उपरी बाहो को हल्के से दबाता हुआ उसके बगल मे रखी कुर्सी पे बैठ गया,"..लेकिन रंभा,अगर मैं तुम्हे वाहा भेजता हू तो मैं 1 बहुत बड़ा रिस्क उठाता हू.अब इस रिस्क के बदले मे मुझे क्या मिलेगा?",उसने उसकी स्विवेल चेर & अपनी कुर्सी को ऐसे घुमाया कि दोनो अब आमने-सामने बैठे थे & दोनो के घुटने आपस मे सॅट रहे थे.

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क्रमशः.......

JAAL paart--7

gataank se aage.

"aahhhhh..!",use halka dard hua & fir jab brij ne uski kasi chut me pura lund andar ghusana shuru kiya to vo chikh uthi.use aisa lag raha tha ki fir se uska kunwarapan lut raha hai.itna dard to use pehli baar bhi nahi hua tha,"brij...nahi...oooowwww..bahut dard ho raha hai...aaaaiyeeeeeeeeee..bahut bada hai tumhara..offffff.....!",magar brij ne lund ko uski chikni chut me aakhir tak utar ke hi dum liya.

"bas ho gaya meri jaan!",usne use khub chuma & lund ko zara bhi nahi hilaya.jab uska dard khatm ho gaya tab usne uske chehre ko hatho me bhara & apni kamar ko hilana shuru kiya,ab to dard nahi ho raha,janeman?"

"uummmmm..nahi..!",soniya ab masti me thi.kuchh hi palo me vo kamar hila ke apne pati ka pura sath de rahi thi.uski chut ke anchhue hisso ko apni ragad se aahat kar brij ka lund use jannat ki sair pe le chala tha.brij uski moti choochiyo ko chusta dhakko ki raftar badha raha tha.soniya madhosh ho apne nakhuno se uski pith ko chhalne kar rahi thi.thodi der pehle jis lund ke ghusne se vo dard se behal ho chuki thi ab us lund ko vo chut se nikalne nahi dena chahti thi.brij ki gand daboch use dabate hue vo use jaise apne aur andar le lena chahti thi!

brij pure lund ko bahar nikal uski thuddi chumta use fir se andar pel raha tha.soniya ki aahen kamre me gunj rahi thi.brij ke qatikl dhakko ke aage usne jald hi ghutne tek diye & uchak ke use chumte hue jhad gayi.uske jhadte hi brij ne use baaho me bhar karwat badli & use apne upar karta hua bistar pe let gaya.kuchh pal to soniya apne aap ko sambhalti rahi fir jab sayant ho gayi to brij ne neeche se kamar uchka ke dobara chudai shuru kar di.uske baalo bhare seene pe chhatiya dabaye vo uske honth vchumne lagi.uske dil me apne mehboob ke liye bahut pyar umad aaya tha.uski mardangi ki vo murid ho gayi thi & ab uske sath yu hi zindagi ke ant tak rahne ki tamanna uske dil me uth rahi thi.

brij ne uski baahe pakad use upar kar diya to use sharm aa gayi.uske lund se pagal ho vo kamar uchka-2 ke chudai kar rahi thi & aisa karne se uski bhari chhatiya bade mastane andaz me chhalchhala rahi thi.usne sharm se muskurate hue apni aankhe band kar apne seene ko apni baaho se dhank liya.

"kyu chhipa rahi ho inhe?",uski gand ko dabochte hue apne hatho ko hata brij ne uske hatho ko uske seene se hataya,"..mujhe dekhne do in khoobsurat phoolo ko..khelne do mujhe inse..!",uske hath biwi ki choochiyo se chipak gaye & unhe dabane lage.sharma ke soniya ne apna chehra apne hatho me chhupa liya to brij uth baitha & uske hatho ko hata uske chhere ko chumne laga.dono fir se masti ke sagar ki gehrai me doob rahe the.baithe-2 kuchh der chudai karne ke baad brij ne soniya ko bahao me bharte hue fir se bistar pe lita diya & uske upar let uski chudai karne laga.ab soniya ki haya kafoor ho chuki thi.ab bas use pati ke sath fir se us samandar ki gehrai me pura doob jana tha.vo masti me apne hath apne pati ke seene,pith,baanh,chehre..pure jism pe firate hue us se apne ishq ka iqrar kar rahi thi,"i love you my darling..oooohhhhhhh....meri jaan brij...i love you...aahhhhhhhhh..!",brij ka josh aur badh gaya.dono gutthamguttha ho gaye.soniya ki tange brij ki kamar pe thi & baahe pith pe,hath gand ko kharonchte to kabhi sar ke baalo ko nochte.brij uski choochiyo ko pita to akbhi hotho ko chumta.uske hath bhi kabhe uske chehre ko sehlate to kabhi chhatiyo ko masalte.kamre me aaho ka shor apne charam pe tha & jismo ka romanch bhi ab aakhiri padav pe pahunch gaya tha.brij ke dhakko se aahat ho soniya ne chik mahri & uska naam pukarte jhad gayi & brij ne bhi apni mehbooba ke pyar ka elan karte hue uski chut me apna gadha virya chhod diya.dono 1 dusre ki baaho me qaid 1 dusre ko chum rahe the.dono ke dilo me umang thi,ye unke naye jeewan ka aaghaz tha & dono ko yakeen tha ki is raat ki tarah puri zindagi bhi aise hi ranginiyo se bhari rahegi.

dono ko pata nahi tha ki dono kitne galat the.

"Ummmm..Brij darling..tumne mujhse shadi kyu ki?",Soniya apne pati se 2 baar chudne ke baad uski bayi taraf leti thi,uske baye hath me uska lund tha & uski chut me pati ke daye hath ki ungliya.ye sawal uske dil me apne kamre me ghusne ke kuchh palo ke baad hi aaya tha lekin puchhne ka mauka abhi mila tha.

"meri jaan,mujhe aaj tak shadi ki koi zarurat mehsus nahi hui thi.meri zindagi me na jane kitni ladkiyan aayi magar aaj tak koi aisi ladki nahi mili jise dekh ke mujhe ye lagta ki iske sath sari umra bitayi ja sakti hai..",brij ne soniya ki chut me ungli karna jari rakha,"..tumse chand mulakaton me hi mujhe ye ehsas ho gaya ki tum hi vo ladki ho jise main apna jeevan-sathi bana sakta hu.soniya,main apni zindagi ka aane vala har pal tumhari baaho me guzarna chahta hu.",brij ne apne honth soniya ke hotho se laga diye.

aisa kuchh mujhe kyu nahi mehsus hua?..soniya ne masti me aankhe band kar li magar uske dil me fir se vahi uljhan aa gayi thi..maine kyu ki hai brij se shadi?..brij ke jaisa pyar ka ehsas mujhe kyu nahi mehsus hota..brij ne use uski dayi karwat pe kiya to usne mast hoke apni bayi jangh uske upar chadha di.brij ne bhi apni ungli ki jagah apne lund ko uski chut me ghusa diya.soniya brij se lipat gayi..kyuki tum brij se pyar hi nahi karti..deewar pe lage cupboard ke aadamkad shishe me use fir se apna aks khud ki hi hansi udata dikha..karti hu main pyar brij se!

"i love u brij..my darling..meri jaan..i love you..i love you....i love you.....i love you..!",vo apne aks ko jawab dete hue apne premi se chipki uske sar ko besabri se chumti hui uski chudai ka maza le rahi thi.brij uske pyar ka yu deewanepan se bhara izhar sun khushi se pagal ho gaya & uske dhakko me & josh bhar gaya.soniya ne aankhe band kar apna chehra uski gardan me chhupa liya.use bahut maza aa raha tha & brij pe bahut pyar bhi lekin dil ke kisi kone me vo uljhan abhi bhi shayad chhipi baithi thi.

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"welcome home,my son.",Vijayant Mehra ne Sameer ke ghar me kadam rakhte hi use gale se laga liya,"airport se yaha aane me itni der kaise kar di?",vijayant ne bete ko sar se panv tak dekha.sameer 25 baras ka 6 ft ka bada handsome jawan tha.

"dad,main vo Manpur vali zameen dekhne chala gaya tha.",manpur vahi jagah thi jiska tender 6 mahine baad nikalne wala tha & jispe mehra ke alawa kothari ki bhi nazar jami thi.

"very bad,beta!",Rita bhi vajha aa gayi thi & bete ka matha chum liya,"..itne din baad laute ho & uspe bhi pehle tumhe kaam hi yaad raha hai."

"sorry,mom!",sameer hansa,"..par ab to yehi rahunga fir socha ki vo zamin dekhne ka mauka mile na mile.da,maine kuchh socha hai us zamin ke bare me.."

"haan-2,mujhe pata hai..",vijayant ne uske kandhe pe hath rakha,"..hum chalenge agle kuchh dino me vaha & tab apna plan batana."

"haan..",Shipra & Pranav bhi vaha aa gaye the,"..aaj sirf sham ki party ki planning karoge tum.",sameer behan-behanoi se bhi gale mila & fir pura parivar hall me baith ke baaten karne laga.

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"magar main kyu nahi mil sakti unse?",Rambha ne placement agency ki apni counsellor se gusse se puchha.

"kyuki koi fayda nahi rambha..",vo kuchh likh rhai thi & usne bina sar uthaye jawab diya,"..maine kaha na tumhara tajurba kam hai,hum tumhe Trust group ke malik ki secretary ki post ke liye kaise bhej sakte hain?"

"lekin jab mujhe mauka milega hi nahi to tajurba hoga kaha se?",rambha ka gusse & badh gaya.

"please,rambha.tum apna & mera,sono ka waqt barbad kar rahi ho.maine kaha na,tumhe agle 3 mahino me kisi aur badi company me place karwa dungi par trust group ko to bhul jao tum filhal.",vo apna kaam karti rahi.rambha ko gussa aa raha tha & mayusi bhi ho rahi thi.vo kursi se uthi & tabhi uski nazar samne 1 cabin pe padi jiske bahar 1 takhti pe likha tha,"Vinod Singh,Senior Manager",uske dil me 1 khayal aay.ye aakhiri mauka tha,agar ab bhi kuchh nahi hua to vo haar ,maan legi lekin us manager se mile bina to vo aaj jayegi nahi!

usne neeche sar jhuka ke kaam kar rahi counsellor ko dekha & tezi se vaha se cabin ki or badhi,"rambha!",counsellor kursi se uthke jab tak us tak pahunchti vo cabin me dakhil ho chuki thi.

"mujhe aapse baat karni hai.",usne deak pe hath jamake samne kursi pe baithe 1 35-36 baras ki umra vale shakhs se kaha joki use hairan nigaho se dekh raha tha.

"i'm sorry,sir.",counsellor andar aayi,"rambha,chalo yaha se,please..main tumhe samjhati hu.",usne rambha ki banh thami to rambha ne use jhatak diya.

"mujhe aapse kuchh nahi samajhna..mujhe ab inse hi samajhna hai sab kuchh.",usne vaise hi desk pe hath jamaye vinod singh ki or ishara kiya.singh ne counsellor ko vaha se jane ka ishara kiya to vo ghabrayi si bahar chali gayi.

"kya samajhna hai aapko?",usne rambh ki or dekha.

"mera CV trust group ke malik ki secretary ki post ke liye kyu nahi bheja ja raha?",rambha ne gaur kiya ki vinod ki nazre 1 pal ke liye uske chehre se neeche hui & fir upar ho gayi.use khayal aaya ki jis tarah se vo jhuki khadi hai,uski shirt ke gale me se uski chhatiyo ka kuchh hissa to zarur dikh raha hoga.ye samajh me aate hi vo thoda aur jhuk gayi lekin iase ki vinod ko ye ehsas nahi hua ki vo use apni chhatiya dikha rahi hai.

"dekhiye,aapka tajurba..-"

"-..vo main sun chuki hu lekin mujhe vaha apply karna hi hai!",vinod ne 1 baar fir safed kamiz ke gale se dikh rahi uski chhatiyo ke thode se gore hisse ko dekha.

"aap vahi apply karne ko itni utawli kyu hain?",vo muskuraya,uske zehan me 1 khayal aa raha tha.rambha bhi bhanp gayi thi ki jis tarah vo chor nigaho se uske cleavage ko taak raha tha,shayad uska kaam ho sakta tha.

"kyuki vo is shehar ki sabse badi company hai & humare mulk ki naami-girami companies me se 1.vaha naukri milte hi mera career bilkul sanwar jayega."

"humari agency shehar ki eklauti aisi agency hai joki trust & uske jaisi badi-2 companies ko unke bade afasro ke liye secretaries muhaiyya karati hai..",rambha ne desk se hath hata liye the & ab apne seene pe is tarahs e bandh liye the ki baaho ke upar se uski badi chhatiya aise ubhar gayi thi mano uski safed shirt ko phaad dena chahti ho.usne safed shirt & kali pant pehni thi & kamiz pant me atki hui thi.is wajah se uske jism ka qatilana aakar saaf jhalak raha tha.

"..humari company ki saakh aisi hai ki is dhandhe ka 95% hissa humare paas hai lekin isi shehar me 2-3 aur agencies hain joki yehi kaam karti hain & baki 5% hissa unhi ka hai.ye hissa pichhle baras tak bas 3% tha.ab batao,tumhe bhejunga to humari agency ki sakh ka kya hoga?",rambha ne gaur kiya ki vo aap se tum pe aa gaya tha yani ki vo usme dilchaspi le raha tha.

"dekhiye sir,jaha 4 ladkiyo ko bhej rahe hain vaha 5 bhej dijiye na!",usne thodi pareshan surat banake kaha.

"sare interviews vijayant mehra khud leta hai,rambha.",vo khada hua & uske karib aaya & fir uske peechhe chala gaya.rambha ki gand dekh ke uski aankho me vasna ke laal dore tair uthe,"..zara bhi chook hui to vo humari agency ko balcklist kar sakta hai.",usne uske kandho pe peechhe se hath rakha,"baitho."

rambha man hi man muskurayi vo uske peechhe se khada ho uski kamiz ke andar jhank ke uski chhatiyo ko dekhne ki koshish kar raha tha,"par aap kuchh to kar sakte hain?",usne apna daya hath apne daye kandhe pe rakhe vinod ke daye hath pe rakha & thoda ruansi ho use dekha.

"haan,kar to sakta hu.",usne uske hath ko dabaya & upari baaho ko halke se dabata hua uske bagal me rakhi kursi pe baith gaya,"..lekin rambha,agar main tumhe vaha bhejta hu to main 1 bahut bada risk uthata hu.ab is risk ke badle me mujhe kya milega?",usne uski swivel chair & apni kusri ko aise ghumaya ki dono ab aamne-samne baithe the & dono ke ghutne aapas me sat rahe the.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--8

गतान्क से आगे.

"क्या चाहिए आपको?..आप मेरी सॅलरी से जितने चाहें पैसे ले लीजिएगा!",रंभा वैसे ही परेशान शक्ल बनाके बोली जबकि वो समझ चुकी थी क़ी उसके हुस्न का तीर निशाने पे लगा है & विनोद सिंग उसके जिस्म की माँग करने वाला है.

"पैसो का मैं क्या करूँगा,रंभा!",वो हंसा & हंसते हुए अपना बाया हाथ उसकी दाई जाँघ पे मारा,"..देखो,रंभा.सारा दिन बस काम करता रहता हू यहा तक कि सनडे को भी मुश्किल से छुट्टी ले पता हू.मेरा कोई दोस्त नही है तो तुमको देखा तो लगा शायद तुम मेरी दोस्त बनो & मेरे साथ थोड़ा वक़्त गुज़ारो.",रंभा वक़्त गुज़ारने का मतलब समझ चुकी थी.उसका दिमाग़ तेज़ी से काम कर रहा था.विनोद की बात मानने से ट्रस्ट मे इंटरव्यू तो लग ही सकता था,उसमे नाकामयाब होने पे आगे भी कोई अच्छी नौकरी उसे विनोद के ज़रिए मिल सकती थी बशर्ते वो चालाकी से काम ले.

"पर आपकी बीवी तो होगी..वो क्या सोचेंगी हमारी दोती के बारे मे?",रंभा ने भोली-भाली लड़की का नाटक किया.उसकी दोनो जाँघो पे अब विनोद के हाथ जमे थे.

"अरे उसके पास मेरे लिए वक़्त कहा है?",वो झल्ला गया,"..उसे तो बस मेरे पैसो से शॉपिंग & अपनी सहेलियो के साथ किटी पार्टी से मतलब है.सनडे को मैं उसके साथ वक़्त गुज़ारना चाहता हू तो वो अपनी सहेलियो के साथ किटी मे मस्त हो जाती है!दरअसल मैं बहुत तन्हा इंसान हू,रंभा.",उसने लंबी सांस भरी & कुर्सी से उठ खड़ा हो अपनी पीठ रंभा की तरफ की.

"तुम सोचोगी की मैं तुम्हारे CV को भेजने के बदले मे तुमसे दोस्ती की माँग कर रहा हू लेकिन ऐसा नही है..",वो घुमा तो रंभा ने देखा कि उसने बिल्कुल सच्चे,ईमानदार इंसान जैसी शक्ल बनाई हुई है,"..तुम ना भी कर दो तो भी मैं तुम्हारा cव ट्रस्ट ग्रूप को भेज दूँगा.",रंभा का काम हो गया था.

"नही,सर ऐसे मत बोलिए!",वो खड़ी हो गयी & अपना हाथ विनोद के होंठो पे रख दिया मानो उसकी बात से वो परेशान हो उठी है,फिर शर्मा के हाथ नीचे कर लिए,"मुझे आपकी दोस्ती कबूल है.",उसने भोलेपन से शरमाते हुए नज़रे नीची की & मुस्कुराइ.

"थॅंक्स,रंभा,थॅंक्स!",विनोद खुशी से उच्छल पड़ा & उसकी बाहे थाम ली मानो उसे गले लगा लेगा.रंभा ने और शरमाने का नाटक किया तो उसने उसकी बाहे चौड़ी दी,"..आज रात बाहर चलते हैं,पहले डिस्को जाएँगे,फिर बाहर खाना खाएँगे.बताओ तुम्हे कहा से पिक करू?"

"सर.."

"सर नही विनोद कहो.अब तो हम दोस्त हैं.",उसने उसकी पीठ थपथपाई..क्या मस्त लड़की है..उसे चोदने के ख़याल से ही उसका लंड पॅंट मे च्चटपटाने लगा!

"जी वो मेरा cव.."

"अभी डलवता हू उसे ट्रस्ट की फाइल मे.",उसने इंटरकम उठाया & ज़रूरी ऑर्डर्स देने लगा.रंभा मुस्कुराती हुई उसे देख रही थी.ये कामयाबी की ओर उसका पहला कदम था.

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होटेल वाय्लेट के बॅंक्वेट हॉल मे पार्टी शुरू हो चुकी थी.शहर की नामी-गिरामी हस्तियाँ मेहरा परिवार के बेटे के लौटने की खुशी मे उनके साथ शरीक हो रही थी.फिल्मी दुनिया के सितारे & जाने-माने चेहरे भी वाहा हाज़िरी दे रहे थे,आख़िर पिच्छले 4 बरसो मे ट्रस्ट आर्ट्स हिन्दी फ़िल्मो का 1 बड़ा प्रोडक्षन हाउस बन चुका था & लगभग हर साल कमसे कम 2 बड़े बजेट की फ़िल्मे बना रहा था.कितनी ही फ़िल्मो के डिस्ट्रिब्यूशन राइट्स उनके पास थे & अब तो वो सिनिमा हॉल्स के धंधे मे भी उतर चुके थे.

"वो देखो,कामया आ गयी..& कबीर के साथ.यानी ख़बरे सही हैं..दोनो मे सच मे कुच्छ चल रहा है..",कामया रॉय इस वक़्त शायद हिन्दी फ़िल्मो की नंबर.1 अदाकारा थी.26 बरस (वैसे उसकी माने तो पिच्छले 3 बरसो से उसकी उम्र 23 बरस ही है!) की 5'8" कद की गोरे & बला के खुसबुरत बदन & हसीन शक्ल की मालकिन इस वक़्त ट्रस्ट आर्ट्स की 2 फ़िल्मे कर रही थी & आजकल चारो तरफ ये खबर थी कि हीरो कबीर के साथ उसका गरमागरम अफेर चल रहा था.उसने गुलाबी रंग की घुटनो तक कि ड्रेस पहनी थी जोकि सीने के नीचे तक कसी थी & फिर ढीली.पार्टी मे आए मर्दो की निगाहें तो उसकी गोरी,लंबी टाँगो से चिपकी हुई थी & जब नज़रे उपर होती तो ड्रेस को फाड़ के निकलने को बेताब उसकी 36 साइज़ की चूचियो से सॅट जाती.कबीर की बाँह अभी भी उसकी 26 इंच की कमर मे फँसी थी & लोगो की नज़रे बचा के उसने कामया की 36 इंच की गंद को 1-2 बार दबा भी दिया था.

शिप्रा ने रीता के साथ कामया का स्वागत किया & फिर तस्वीरे खिंचवाने का 1 दौर चला,"वेलकम बॅक,समीर!",कामया ने उसके गाल को चूमा.

"थॅंक्स,कामया.",उसने भी उसका गाल चूमा,"हे..कबीर..कैसे हो यार?..तुम्हारी लास्ट फिल्म देखी..उसमे वो लड़कियो का गेट-अप करने की क्या ज़रूरत थी,भाई!",सभी हँसने लगे.

"क्या करता यार,डाइरेक्टर पीछे ही पड़ गया था!",ऐसे ही हसी-मज़ाक चल रहा था.विजयंत भी दोनो मेहमआनो से मिला & फिर सब अपने मे मस्त हो पार्टी का लुत्फ़ उठाने लगे.शिप्रा की पार्टीस तो वैसे भी अपनी ज़िंदादिली के लिए जानी जाती थी.कुच्छ देर बाद ही कबीर अपने कुच्छ दोस्तो के साथ मशगूल हो गया & कामया भी 1 दूसरे ग्रूप के साथ बाते करने लगी,"एक्सक्यूस मी.",उनसे कुच्छ देर बाते करने के बाद वो वाहा से रेस्टरूम चली गयी.

"हा....!",रेस्टरूम से निकलते ही कामया को किसी ने खींचा & 1 कमरे मे ले गया,"ओह..विजयंत!",कमरे का दरवाज़ा बंद होते ही कामया उसकी बाहो मे झूल गयी & उसे चूमने लगी.

"आजकल कबीर के साथ काफ़ी नाम सुन रहा हू तुम्हारा?",विजयंत ने कयि पलो तक उसे चूमने के बाद उसे परे धकेला तो वो बिस्तर पे बैठ गयी.

"ओह..डार्लिंग..सब तुम्हारे लिए ही तो कर रही हू..",उसने कोट उतारते विजयंत की पॅंट का ज़िप खोला & उसके 9.5 इंचे लंबे लंड को बाहर निकाला,"..2 फाइल कर रही हू तुम्हारी कंपनी के लिए..",उसने लंड को हिलाते हुए चूमा,"..उउंम..मेरे & कबीर के बीच कुच्छ है,ये सुनते ही मीडीया पागल हो गयी है..ज़रा सोचो कितनी मुफ़्त की पब्लिसिटी मिल रही है तुम्हारी फ़िल्मो को & मज़े की बात है कि वो उल्लू कबीर भी सोचता है कि मैं सच मे उस से प्यार करती हू!",दोनो हंस पड़े & फिर वो विजयंत का लंड चूसने लगी.विजयंत ने अपने हाथ आगे बढ़ा के उसकी ड्रेस के पीठ पे लगे हुक्स खोले & उसकी मोटी चूचिया मसलने लगा.कामया के निपल्स बहुत ही हल्के भूरे रंग के थे & इस वक़्त बिल्कुल कड़े थे.

कामया के टॉप की हेरोयिन बनाने मे विजयंत का सबसे बड़ा या यू कहें कि केवल विजयंत का ही हाथ था.कोलकाता मे पली-बढ़ी कामया ने दसवी पास करते ही सोच लिया था कि उसे फ़िल्मो मे ही जाना है.12वी पास करते-2 वो मॉडेलिंग करने लगी & कॉलेज मे उसने खूब मॉडेलिंग की & ब्यूटी कॉंटेस्ट मे हिस्सा लिया.1 बड़ी अंडरगार्मेंट बनाने वाली कंपनी की ब्रा-पॅंटी का आड़ उसने किया & विजयंत ने 1 मॅगज़ीन मे उस आड़ को देखा & देखते ही कामया के जिस्म को पाने की ख्वाहिश उसके दिल मे जाग उठी.जब तक वो उसके बारे मे पता करता तब तक उसे 1 ब्यूटी कॉंटेस्ट जड्ज करने का बुलावा आ गया & वाहा 25 लड़कियो मे से कामया भी 1 थी.विजयंत ने उसे दिल खोल के मार्क्स दिए & कामया मे कोई विश्वास की कमी तो थी नही.उसने वो कॉंटेस्ट जीत लिया.ठीक उसी वक़्त विजयंत के ग्रूप ने भी फिल्म प्रोडक्षन के धंधे मे कदम रखे.विजयंत ने कामिया को शुरू मे 1-2 छ्होटे रोल दिलवाए & जिस दिन उसने उसके बिस्तर मे आने का न्योता कबूला उसी दिन उसने उसे 1 बहुत बड़ी बजेट की फ़ीम दिलवाई.कामया जितनी हसीन थी उतनी ही बढ़िया अदाकारा भी थी.फिल्म कामयाब रही & कामया का करियर आगे बढ़ने लगा.पिच्छले 4 बरसो मे विजयंत की लगभग हर बड़ी फिल्म मे कामया होती थी.जहा दूसरे प्रोड्सर्स से वो मुहमांगी कीमत लेती थी वही विजयंत के लिए वो कम पैसो मे काम करती थी,यही नही विजयंत के ग्रूप की वो ब्रांड अंबासडर भी थी.ऐसा नही था कि केवल विजयंत को ही फयडा हो रहा था,कामया को भी विजयंत से बहुत फयडा था.उसकी हर बड़ी फिल्म उसे मिल रही थी & इस इंडस्ट्री मे जहा लड़कियो की कद्र कम ही होती थी,विजयंत उसका गॉडफादर था.

"ऊहह....एसस्सस्स.....!",लंड चूसने के बाद विजयंत ने कामया को बिस्तर पे लिटा दिया था & वही ज़मीन पे बैठ उसकी टाँगे उठा उसकी चूत चाटने लगा था.कामया का विजयंत के करीब रहने का 1 और कारण था-वो था विजयंत की चुदाई.उसने अभी तक विजयंत जैसा मर्द नही देखा था.उसकी हर्कतो & उसके लंड से जो मज़ा मिलता था,वो उसने अभी तक किसी और मर्द से नही पाया था,"..आन्न्न्नह..!",उसका बदन झटके खाने लगा & उसने चूत चाटते विजयंत के बाल बेचैनी से नोच लिए,वो झाड़ चुकी थी.उसके झाड़ते ही विजयंत खड़ा हुआ & उसकी टाँगे उठा खड़े-2 ही अपना लंड उसकी चूत मे उतार दिया.

"कामया,ब्रिज कोठारी ने शादी कर ली है.",वो ज़ोरदार धक्के लगा रहा था.आमतौर पे वो कामया के साथ इतमीनान से चुदाई करता था मगर आज अगर वो ज़्यादा देर पार्टी से गायब रहते तो किसी को शक़ हो सकता था & इसलिए वो जल्दी से ये काम निपटना चाहता था.

"आननह..हां,सुना मैने.."

"तुम जानती हो उसकी बीवी को?",विजयंत ने उसकी टाँगे को और फैलाक़े और गहरे धक्के लगाए.

"हाईईईईई...हां,थोड़ा बहुत....इवेंट मॅनेज्मेंट कंपनी चलती है..उउन्न्ञणणन्.....पार्टीस मे मिलती थी अक्सर..क्यू पुच्छ रहे हो?..याआह्ह्ह्ह..हाआंणन्न्..ऐसे ही चोदो...ऊव्वववव....और अंदर...आहह.....!"

"बस ऐसे ही.",विजयंत ने उसकी टाँगे पकड़ के तब तक धक्के लगाए जब तक वो झाड़ नही गयी फिर अपना वीर्य उसकी चूत मे छ्चोड़ा & फिर लंड को बाहर खींच लिया.कुच्छ पलो बाद दोनो फिर से पार्टी मे शामिल हो गये.किसी को पता भी नही चला था कि वो कुच्छ देर तक उनके बीच नही थे.

भीड़ भरे क्लब के डॅन्स फ्लोर पे झिलमिलाती रंगीन रोशनी मे छ्होटी सी,चमकती,स्लीवेलेस्स,काली ड्रेस मे नाचती हुई रंभा सबसे अलग ही दिख रही थी.विनोद के हाथ तो उसकी लचकति कमर से मानो चिपक ही गये थे.क्लब के बाकी मर्दो को विनोद की किस्मत से जलन हो रही थी & लड़कियो को रंभा के रूप से.

विनोद रंभा की कमर पीछे से थामे उसके साथ नाच रहा था & रंभा महसूस कर रही थी कि ऐसा करते हुए वो अपना लंड उसकी गंद से दबाने का कोई मौका नही छ्चोड़ रहा था.उसकी इस हरकत से उसके दिल मे भी मस्ती पैदा होने लगी थी.डेवाले मे आने के बाद पहली बार कोई मर्द उसके इतना करीब आया था.

"चलो,कुच्छ खाते हैं.",विनोद ने रंभा की कमर थामे हुए उसके दाए कान के पास अपना मुँह लाकर कहा.उसकी गर्म साँसे जब कनपटी से टकराई तो रंभा की मस्ती और बढ़ गयी.दोनो क्लब के दूसरे हिस्से मे बने लाउंज मे पहुँचे & 1 कोने मे बैठ गये.दीवार से लगे सोफे पे दोनो साथ-2 बैठे.रंभा विनोद के बाई तरफ बैठी थी & विनोद की बाई बाँह अभी भी उसकी कमर मे थी.विनोद ने खाने का ऑर्डर दिया & फिर दोनो बातें करने लगे.सामने की मेज़ की आड़ का फयडा उठा बातें करते हुए विनोद ने अपना दाया हाथ रंभा की गोरी जाँघो से लगा दिया & उन्हे बेसब्री से सहलाने लगा.

रंभा कोई कुँवारी लड़की तो थी नही फिर इन मामलो मे वो कभी पीछे भी नही हटती थी मगर ये पहला मौका था की वो किसी क्लब मे आई थी & ऐसी भीड़ भरी जगह मे ऐसी हरकत से उसे शर्म आ गयी & उसने विनोद का हाथ अपने जिस्म से हटा दिया.उसने नज़रे घुमाई तो देखा की क्लब मे कयि जोड़े आपस मे रोमानी गुफ्तगू मे मशगूल थे इस बात से बेपरवाह की कोई उन्हे देख रहा है.

विनोद का बाया हाथ कमर से उपरी पीठ पे आया & उसकी उपरी,बाई बाँह के गुदाज़ हिस्से को सहलाने लगा.वेटर खाना रख गया तो विनोद उसे अपने हाथो से खिलाने लगा.रंभा के लिए ये सब नया एहसास था मगर थोड़ी ही देर मे उसकी हया भी काफूर हो गयी थी & उसे मज़ा आने लगा था.

खाना खाने के बाद दोनो क्लब से निकले & बेसमेंट पार्किंग मे आए.विनोद अब बिल्कुल बेकाबू हो गया था.उसने बेसमेंट मे ही रंभा को जाकड़ लिया & चूमने लगा.रंभा भी थोड़ी ना-नुकर के बाद उसका साथ देने लगी मगर तभी किसी की आहट हुई तो वो उस से अलग हो गयी & दोनो विनोद की कार मे बैठ गये.विनोद ने कार वाहा से निकली & रास्ते पे ले आया.ड्रेस के नीचे से रंभा की आधी जंघे & लंबी टाँगे दिख रही थी.ड्राइव करते विनोद का बाया हाथ बीच-2 मे उसकी जाँघो से आ लगता था.

विनोद ने कार 1 सुनसान रास्ते के किनारे रोकी & रंभा को बाहो मे भर उसके चेहरे पे किस्सस की बौच्चार कर दी.रंभा के जिस्म को बाए हाथ मे लपेटे विनोदा का दाया हाथ उसकी जाँघो के बीच घुसाने की कोशिश कर रहा था.रंभा ने मस्ती मे जंघे आपस मे भींच विनोद का हाथ फँसा लिया था.विनोद उसके बाए कान की लाउ को जीब से छेड़ता हाथ को ड्रेस के अंदर घुसाने की कॉसिश कर रहा था मगर ड्रेस इतनी कसी थी की ऐसा करना नामुमकिन था.ड्रेस के गले मे से झाँकते बहुत हल्के से क्लीवेज को चूमते हुए उसने अपना हाथ ज़बरदस्ती अंदर घुसाने की कोशिश की तो रंभा मदहोश हो गयी & उसने अपना बदन अपने इस नये आशिक़ की गिरफ़्त मे ढीला छ्चोड़ दिया लेकिन तभी पीछे से आती हुई किसी कार की रोशनी ने उसकी खुमारी तोड़ी & उसने विनोद को परे धकेल दिया.

"प्लीज़..यहा नही.",उसने अपनी ड्रेस को ठीक किया तो विनोद ने कार स्टार्ट की & आगे बढ़ाई & फिर उसे अपनी बाई बाँह के घेरे मे खींच उसे चूमते हुए बाकी का सफ़र तय किया.

विनोद की बीवी मायके गयी हुई थी & विनोद मन ही मन उपरवाले का शुक्रिया अदा कर रहा था वरना होटेल का खर्चा होता उपर से देर से लौटने पे बीवी को जवाब भी देना पड़ता.अपने घर मे घुसते ही विनोद ने बत्ती जलाने से भी पहले रंभा को बाहो मे भर लिया & चूमते हुए उसे अपने बेडरूम मे ले गया.

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क्रमशः.......

JAAL paart--8

gataank se aage.

"kya chahiye aapko?..aap meri salary se jitne chahen paise le lijiyega!",rambha vaise hi pareshan shakl banake boli jabki vo samajh chuki thi ki uske husn ka teer nishane pe laga hai & vinod singh uske jism ki mang karne vala hai.

"paiso ka main kya karunga,rambha!",vo hansa & hanste hue apna baya hath uski dayi jangh pe mara,"..dekho,rambha.sara din bas kaam karta rehta hu yaha tak ki sunday ko bhi mushkil se chhutti le pata hu.mera koi dost nahi hai to tumko dekha to laga shayad tum meri dost bano & mere sath thoda waqt guzaro.",rambha waqt guzarne ka matlab samajh chuki thi.uska dimagh tezi se kaam kar raha tha.vinod ki bata maanane se trust me interview to lag hi sakta tha,usme nakamyab hone pe aage bhi koi achhi naukri use vinod ke zariye mil sakti thi basharte vo chalaki se kaam le.

"par aapki biwi to hogi..vo kya sochengi humari doti ke bare me?",rambha ne bholi-bhali ladki ka natak kiya.uski dono jangho pe ab vinod ke hath jame the.

"are uske paas mere liye waqt kaha hai?",vo jhalla gaya,"..use to bas mere paiso se shopping & apni saheliyo ke sath kitty party se matlab hai.sunday ko main uske sath waqt guzarna chahta hu to vo apni saheliyo ke sath kitty me mast ho jati hai!darasal main bahut tanha insan hu,rambha.",usne labi sans bhari & kursi se uth khada ho apni pith rambha ki taraf ki.

"tum sochogi ki main tumhare CV ko bhejne ke badle me tumse dosti ki mang kar raha hu lekin aisa nahi hai..",vo ghuma to rambha ne dekha ki usne bilkul sachche,imandar insan jaisi shakl banayi hui hai,"..tum na bhi kar do to bhi mian tumhara cv trust group ko bhej dunga.",rambha ka kaam ho gaya tha.

"nahi,sir aise mat boliye!",vo khadi ho gayi & apna hath vinod ke hotho pe rakh diya mano uski baat se vo pareshan ho uthi hai,fir sharma ke hath neeche kar liye,"mujhe aapki dosti kabul hai.",usne bholepan se sharmate hue nazre neechi ki & muskurayi.

"thanx,rambha,thanx!",vinod khushi se uchhal pada & uski baahe tham li mano use gale laga lega.rambha ne aur sharmane ka natak kiya to usne uski baahe chood di,"..aaj raat bahar chalte hain,pehle disco jayenge,fir bahar khana khayenge.batao tumhe kaha se pick karu?"

"sir.."

"sir nahi vinod kaho.ab to hum dost hain.",usne uski pith thapthapayi..kya mast ladki hai..use chdone lke khayal se hi uska lund pant me chhatpatane laga!

"ji vo mera cv.."

"abhi dalwata hu use trust ki file me.",usne intercom uthaya & zaruri orders dene laga.rambha muskurati hui use dekh rahi thi.ye kamyabi ki or uska pehla kadam tha.

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Hotel Violet ke banquet hall me party shuru ho chuki thi.shehar ki nami-girami hastiyan mehra parivar ke bete ke lautne ki khushi me unke sath sharik ho rahi thi.filmi duniya ke sitare & jane-mane chehre bhi vaha hajiri de rahe the,aakhir pichhle 4 barso me Trust Arts hindi filmo ka 1 bada production house ban chuka tha & lagbhag har saal kamse 2 bade budget ki filme bana raha tha.kitni hi filmo ke distribution rights unke paas the & ab to vo cinema halls ke dhandhe me bhi utar chuke the.

"vo dekho,Kamya aa gayi..& kabir ke sath.yani khabre sahi hain..dono me sach me kuchh chal raha hai..",Kamya Roy is waqt shayad hindi filmo ki no.1 adakara thi.26 baras (vaise uski mane to pichhle 3 barso se uski umra 23 baras hi hai!) ki 5'8" kad ki gore & bala ke khusburat badan & haseen shakl ki malkin is waqt trust arts ki 2 filme kar rahi thi & aajkal charo taraf ye khabar thi ki hero kabir ke sath uska garmagaram affair chal raha tha.usne gulabi rang ki ghutno tak ki dress pehni thi joki seene ke neeche tak kasi thi & fir dhili.party me aaye mardo ki nigahen to uski gori,lambi tango se chipki hui thi & jab nazre upar hoti to dress ko phaad ke nikalne ko betab uski 36 size ki chhatiyo se sat jati.kabir ki banh abhi bhi uski 26 inch ki kamar me phansi thi & logo ki nazre bacha ke usne kamya ki 36 inch ki gand ko 1-2 baar daba bhi diya tha.

shipra ne rita ke sath kamya ka swagat kiya & fir tasvire khinchwane ka 1 daur chala,"welcome back,sameer!",kamya ne uske gaal ko chuma.

"thanx,kamya.",usne bhi uska gaal chuma,"hey..kabir..kaise ho yaar?..tumhari last film dekhi..usme vo ladkiyo ka get-up karne ki kya zarurat thi,bhai!",sabhi hansne lage.

"kya karta yaar,director peechhe hi pad gaya tha!",aise hi hasni-mazak chal raha tha.vijayant bhi dono mehmano se mila & fir sab apne me mast ho party ka lutf uthane lage.shipra ki parties to vaise bhi apni zindadili ke liye jani jati thi.kuchh der baad hi kabir apne kuchh dosto ke sath mashgul ho gaya & kamya bhi 1 dusre group ke sath baate karne lagi,"excuse me.",unse kuchh der baate karne ke baad vo vaha se restroom chali gayi.

"haa....!",restroom se niklate hi kamya ko kisi ne khincha & 1 kamre me le gaya,"oh..vijayant!",kamre ka darwaza band hote hi kamya uski baaho me jhul gayi & use chumne lagi.

"aajkal kabir ke sath kafi naam sun raha hu tumhara?",vijayant ne kayi palo tak use chumne ke baad use pare dhakela to vo bistar pe baith gayi.

"oh..darling..sab tumhare liye hi to kar rahi hu..",usne coat utarte vijayant ki pant ka zip khola & uske 9.5 inche lumbe lund ko bahar nikala,"..2 file kar rahi hu tumhari company ke liye..",usne lund ko hilate hue chuma,"..uumm..mere & kabir ke beech kuchh hai,ye sunte hi media pagal ho gayi hai..zara socho kitni muft ki publicity mil rahi hai tumhari filmo ko & maze ki baat hai ki vo ullu kabir bhi sochta hai ki main asch me us se pyar karti hu!",dono hans pade & fir vo vijayant ka lund chusne lagi.vijayant ne apne hath aage badha ke uski dress ke pith pe lage hooks khole & uski moti chhatiya maslane laga.kamya ke nipples bahut hi halke bure rang ke the & is waqt bilkul kade the.

kamya ke top ki heroine banane me vijayant ka sabse bada ya yu kahen ki keval vijayant ka hi hath tha.Kolkata me pali-badhi kamya ne dasvi paas karte hi soch liya tha ki use filmo me hi jana hai.12vi paas karte-2 vo modelling karne lagi & college me usne khub modelling ki & beauty contest me hissa liya.1 badi undergarment banane vali company ki bra-panty ka ad usne kiya & vijayant ne 1 magazine me us ad ko dekha & dekhte hi kamya ke jism ko pane ki khwahish uske dil me jaag uthi.jab tak vo uske bare me pata karta tab tak use 1 beauty contest judge karne ka bulawa aa gaya & vaha 25 ladkiyo me se kamya bhi 1 thi.vijayant ne use dil khol ke marks diye & kamya me koi vishwas ki kamti to thi nahi.usne vo contest jeet liya.thik usi waqt vijayant ke group ne bhi film production ke dhandhe me kadam rakhe.vijayant ne kamiyo ko shuru me 1-2 chhote role dilwaye & jis din usne uske bistar me aane ka nyota kabula usi din usne use 1 bahut badi budget ki fim dilwayi.kamya jitni haseen thi utni hi badhiya adakara bhi thi.film kamyab rahi & kamya ka career aage badhne laga.pichhle 4 barso me vijayant ki lagbhag har badi film me kamya hoti thi.jaha dusre prodecers se vo muhmangi keemat leti thi vahi vijayant ke liye vo kam paiso me kaam karti thi,yehi nahi vijayant ke group ki vo brand ambassador bhi thi.aisa nahi tha ki keval vijayant ko hi fayda ho raha tha,kamya ko bhi vijayant se bahut fayda tha.uski har badi film use mil rahi thi & is industry me jaha ladkiyo ki kadr kam hi hoti thi,vijayant uska godfather tha.

"oohhhhhh....yesssss.....!",lund chusne ke baad vijayant ne kamya ko bistar pe lita diya tha & vahi zamin pe baith uski tange utha uski chut chatne laga tha.kamya ka vijayant ke karib rehne ka 1 aur karan tha-vo tha vijayant ki chudai.usne abhi tak vijayant jaisa mard nahi dekha tha.uski harkato & uske lund se jo maza milta tha,vo usne abhi tak kisi aur mard se nahi paya tha,"..aannnnhhhhhhhhhhhh..!",uska badan jhatke kahne laga & usne chut chaatate vijayant ke baal bechaini se noch liye,vo jhad chuki thi.uske jhadte hie vijayant khada hua & uski tange utha khade-2 hi apna lund uski chut me utar diya.

"kamya,brij kothari ne shadi kar li hai.",vo zordar dhakke laga raha tha.aamtaur pe vo kamya ke sath itminan se chudai karta tha magar aaj agar vo zyada der party se gayab rehte to kisi ko shaq ho sakta tha & isliye vo jaldi se ye kaam niptana chahta tha.

"aannhhhh..haan,suna maine.."

"tum janti ho uski biwi ko?",vijayant ne uski tange ko aur failake aur gehre dhakke lagaye.

"haiiiiii...haan,thoda bahut....event management company chalati hai..uunnnnnn.....parties me milti thi aksar..kyu puchh rahe ho?..yaaaahhhh..haaaannnn..aise hi chodo...oowwwww....aur andar...aahhhhhhhhh.....!"

"bas aise hi.",vijayant ne uski tange pakad ke tab tak dhakke lagaye jab tak vo jhad nahi gayi fir apna virya uski chut me chhoda & fir lund ko bahar khinch liya.kuchh palo baad dono fir se party me shamil ho gaye.kisi ko pata bhi nahi chala tha ki vo kuchh der tak unke beech nahi the.

Bheed bhare club ke dance floor pe jhilmilati rangin roshni me chhoti si,chamakti,sleeveless,kali dress me nachti hui Rambha sabse alag hi dikh rahi thi.Vinod ke hath to uski lachakti kamar se mano chipak hi gaye the.club ke baki mardo ko vinod ki kismat se jalan ho rahi thi & ladkiyo ko rambha ke roop se.

vinod rambha ki kamar peechhe se thame uske sath nach raha tha & rambha mehsus kar rahi thi ki aisa karte hue vo apna lund uski gand se dabane ka koi mauka nahi chhod raha tha.uski is harkat se uske dil me bhi masti paida hone lagi thi.Devalay me aane ke baad pehli baar koi mard uske itna karib aaya tha.

"chalo,kuchh khate hain.",vinod ne rambha ki kamar thame hue uske daye kaan ke paas apna munh lakar kaha.uski garm sanse jab kanpati se takrayi to rambha ki masti aur badh gayi.dono club ke dusre hisse mme bane lounge me pahunche & 1 kone me baith gaye.deewar se lage sofe pe dono sath-2 baithe.rambha vinod ke bayi taraf baithi thi & vinod ki bayi banh abhi bhi uski kamar me thi.vinod ne khane ka order diya & fir dono baaten karne lage.samne ki mez ki aad ka fayda utha baaten karte hue vinod ne apna daya hath rambha ki gori jangho se laga diya & unhe besabri se sehlane laga.

rambha koi kunwari ladki to thi nahi fir in mamlo me vo kabhi peechhe bhi nahi hatati thi magar ye pehla mauka tha ki vo kisi club me aayi thi & aisi bheed bhari jagah me aisi harkat se use sharm aa gayi & usne vinod ka hath apne jism se hata diya.usne nazre ghumayi to dekha ki club me kayi jode aaps me romani guftgu me mashgul hu is baat se beparwah ki koi unhe dekh raha hai.

vinod ka baya hath kamar se upri pith pe aaya & uski upri,bayi banh ke gudaz hisse ko sehlane laga.waiter khana rakh gaya to vinod use apne hatho se khilane laga.rambha ke liye ye sab naya ehsas tha magar thodi hi der me uski haya bhi kafoor ho gayi thi & use maza aane laga tha.

khana khane ke baad dono club se nikle & basement parking me aaye.vinod ab bilkul bekabu ho gaya tha.usne basement me hi rambha ko jakad liya & chumne laga.rambha bhi thodi na-nukar ke baad uska sath dene lagi magar tabhi kisi ki aahat hui to vo us se alag ho gayi & dono vinod ki car me baith gaye.vinod ne car vaha se nikali & raste pe le aaya.dress ke neeche se rambha ki aadhi janghe & lambi tange dikh rahi thi.drive karte vinod ka baya hath beech-2 me uski jangho se aa lagta tha.

vinod ne car 1 sunsan raste ke kinare roki & rambha ko baaho me bhar uske chehre pe kisses ki bauchhar kar di.rambha ke jism ko baye hath me lapete vinoda ka daya hath uski jangho ke beech ghusne ki koshish kar raha tha.rambha ne masti me janghe aapas me bhinch vinod ka hath phansa liya tha.vinod uske baye kaan ki lau ko jisbh se chhedta hath ko dress ke andar ghusane ki kosish kar raha tha magar dress itni kasi thi ki aisa karna namumkin tha.dress ke gale me se jhankte bahut halke se cleavage ko chumte hue usne apna hath zabardasti andar ghusane ki koshish ki to rambha madhosh ho gayi & usne apna badan apne is naye aashiq ki giraft me dhila chhod diya lekin tabhi peechhe se aati hui kisi car ki roshni ne uski khumari todi & usne vinod ko pare dhakel diya.

"please..yaha nahi.",usne apni dress ko thik kiya to vinod ne car start ki & aage badhayi & fir use apni bayi banh ke ghere me khinch use chumte hue baki ka safar tay kiya.

vinod ki biwi mayke gayi hui thi & vinod man hi man uparwale ka shukriya ada kar raha tha varna hotel ka kharcha hota upar se der se lautne pe biwi ko jawab bhi dena padta.apne ghar me ghuste hi vinod ne batti jalane se bhi pehle rambha ko baaho me bhar liya & chumte hue use apne bedroom me le gaya.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--9

गतान्क से आगे.

"तुम्हारी बीवी कहा है?",अपनी गर्दन चूमते विनोद के बाल सहलाते हुए रंभा ने पुचछा.

"मयके गयी है.हर 4 दिन पे वाहा भाग जाती है,मेरी तो परवाह ही नही उसे.",रंभा जानती थी कि विनोद बस यूही झूठ बोल रहा है मगर उसे इस से क्या लेना-देना था!उसे तो बस विनोद से अपना मतलब निकालना था & मतलब के साथ अगर उसकी जिस्म की भूख भी मिट रही थी तो और भी अच्छा था.रंभा की मोटी गंद कसी ड्रेस मे और उभर आई थी & विनोद ने उसे चूमते हुए गंद को बहुत ज़ोर से भींच दिया.

रंभा चिहुनकि और थोडा पीछे हुई & उसे संभालने की कोशिश करते हुए विनोद लड़खदाया & उसे लिए-दिए बिस्तर पे गिर गया.विनोद ने साइड-टेबल पे रखे लॅंप को जलाया & फिर रंभा के उपर चढ़ उसे चूमने लगा.अब रंभा पूरी तरह से मस्ती की पकड़ मे थी.विनोद के बालो को खींचते हुए उसने अपनी जीभ विनोद के मुँह मे घुसा दी & दोनो पूरी गर्मजोशी से 1 दूसरे को चूमने लगे.

विनोद पूरी तरह से रंभा के जिस्म पे नही चढ़ा हुआ था बल्कि आधा ही जिस्म उक्से उपर डाला था ताकि उसका दाया हाथ उसके जिस्म को आसानी से च्छू सके,सहला सके.चूमते हुए उसने रंभा की चूचियाँ ड्रेस के उपर से दबाई तो रंभा ने किस तोड़ आह भरी & अपना सर पीछे कर लिया.विनोद ने उसकी गोरी गर्दन चूमते हुए उसकी बाई छाती को दबाया & फिर उसका हाथ नीचे उसकी जाँघ को सहलाने लगा.रंभा मस्ती मे आहे भरती हुई उचक के उसके सर को चूमते हुए अपनी जंघे बेचैनी से आपस मे रगड़ रही थी.

विनोद उसकी गर्दन छ्चोड़ नीचे हुआ उसके ड्रेस के गले मे से दिख रहे सीने के उपर के हिस्से को चूमने लगा,फिर उसने रंभा की चूचियों को ड्रेस के उपर से ही चूमा.1 बार फिर उसने अपने दाए हाथ को उसकी जाँघो के बीच फिराते हुए उसकी ड्रेस के अंदर घुसाने की कोशिश की & नाकाम रहा.वो उठा & रंभा की दाई टांग को उठा लिया & उसे चूमते हुए उसके हाइ हील सॅंडल को निकाल फेंका,फिर उसने यही हरकत दूसरी टांग के साथ दोहराई & फिर अपने तपते लब उसकी मुलायम जाँघो से चिपका दिए.

रंभा बिस्तर पे च्चटपटाने लगी & अपने हाथो से कभी अपने बालो को तो कभी सर के पीछे बिस्तर की चादर को अपने बेसब्र हाथो से खींचने लगी.विनोद उसकी जाँघो को चूम नही बल्कि चूस रहा था.ऐसी कसी,गुदाज़,मांसल जंघे वो ज़िंदगी मे पहली बार महसूस कर रहा था.अपने आतुर हाथ रंभा की टाँगो पे फिराते हुए उन्हे चूमते हुए उसने उसे मस्ती मे पागल कर दिया था.

उसका खुद का हाल भी बुरा था & वो अब अपनी इस नयी माशूका के नशीले जिस्म का फ़ौरन दीदार करना चाहता था.उसने उसकी जंघे पकड़ उसे पलट दिया & अपने जूते उतारे & उसकी जाँघो के पिच्छले हिस्सो को चूमने लगा.पेट के बल लेटी रंभा चादर को नोचते हुए मस्तानी आहे भरे जा रही थी.उसकी चूत से काफ़ी देर से पानी रिस रहा था & अब उसकी कसक से वो बहाल हो रही थी.

विनोद ने काफ़ी देर तक उसकी टाँगो & जाँघो को पीछे से चूमा & फिर उठ बैठा & अपनी कमीज़ निकाल दी & अपने घुटने रंभा के जिस्म के दोनो ओर जमाते हुए उसकी गंद पे बैठ गया & उसकी पीठ पे फैले उसकी कमर से कुच्छ उपर तक के लंबे बालो को हटा के उसके दाए कंधे के उपर किया & ड्रेस की बॅक से दिख रही उसकी गोरी पीठ पे अपने गर्म हाथ फिराए.रंभा उसके छुने से सिहर रही थी.अपनी गंद पे उसके लंड के दबाव से उसकी चूत दीवानी हो गयी थी & उसकी बेचैनी अब बहुत बढ़ गयी थी.

सर्र्र्ररर की आवज़ के साथ उसकी ड्रेस का ज़िप नीचे हुआ & विनोद के सख़्त हाथो ने ड्रेस के स्ट्रॅप्स उसके कंधो के नीचे सरकाए & उसकी गंद से उठ उसे नीचे खींच दिया.रंभा ने बदन को बिस्तर से थोड़ा उठा ड्रेस निकालने मे उसकी मदद की.विनोद की वासना भरी निगाहो के सामने अब काले ब्रा & पॅंटी मे ढँकी रंभा की पीठ & चौड़ी गंद थी.उसने उसके जिस्म पे खुशी & चाह से भरे हाथ चलाए & रंभा की गंद पे चपत लगाई.

"ऊव्व..!",कुच्छ दर्द मगर उस से भी ज़्यादा उन चपतो से पैदा हुई मस्ती से रंभा ने कहा & माथे पे शिकन & होंठो पे मशीली मुस्कान के साथ बाए कंधे के उपर से सर घूमाते हुए पीछे विनोद को देखा.विनोद ने उसकी बाँह पकड़ उसे पलटा & उसे उठा के बिस्तर पे बिठा दिया & उसके हाथ अपनी पॅंट पे रख दिए.

रंभा उसका इशारा समझ गयी & नशे से बोझल पलके उठा उसे देख मुस्कुराइ.विनोद का कद रंभा से 2-3 इंच ही ज़्यादा था मगर उसका सीना चौड़ा था & जिस्म गथिला था.उसके सीने पे बाल थे मगर बहुत ज़्यादा नही.रंभा ने उसकी पॅंट ढीली की & नीचे सरका दी.विनोद ने टाँगे पॅंट मे से निकली & उसका हाथ अपने अंडरवेर पे रख दिया.

रंभा का दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था.ये उसकी ज़िंदगी का दूसरा लंड था.आज तक वो केवल रवि से ही चुदी थी & उसी के लंड से खेली थी.काँपते हाथो से रंभा ने अंडरवेर नीचे किया & उसके सामने विनोद का 7 इंच लंबा लंड थरथरता हुआ खड़ा था.रवि का लंड 6 इंच का था & पतला था जबकि विनोद का लंड बहुत मोटा था.रंभा की नशे से भरी आँखे लंड को गौर से देख रही थी.उसके सूपदे पे प्रेकुं चमक रहा था.

विनोद ने उसके बालो मे उंगलिया फिराई & उसकी ठुड्डी पकड़ उसके चेहरे को उपर किया.ब्रा मे से झाँकते बड़े से क्लीवेज पे अपना दाया हाथ फिरा उसे दबाते हुए बाए से उसकी ठुड्डी थाम उसके रसीले होंठ चूमने लगा.अरसे बाद रंभा ने नंगे मर्द को देखा था & अब उसकी चूत उस लंड को देख बिल्कुल आपे से बाहर हो गयी थी.

विनोद ने चूमते हुए उसके सीने से हाथ हटा उसके दाए हाथ को पकड़ अपने लंड से लगा दिया.रंभा कांप उठी,उसके दिल मे खुशी & मस्ती की 1 नयी लहर दौड़ गयी & उसने मज़बूती से लंड को थाम लिया.विनोद ने उसके होंठो को आज़ाद किया & खड़ा हो गया.रंभा उसके लंड को हिलाने लगी.रवि के साथ जिस्मो का खेल खेलते हुए ही उसे ये एहसास हुआ था कि वो चुदाई की दीवानी है & लंड से खेलना उसे बहुत ही पसंद है.

विनोद को आगे कुच्छ कहना नही पड़ा,रंभा ने खुद ही उसके लंड को अपने मुँह मे भर लिया & चूसने लगी.पहले उसने प्रेकुं को चाट के साफ किया & फिर मत्थे को चूसने लगी.विनोद आहे भरने लगा & उसके बालो से खेलने लगा.उसके आंडो को दबा के रंभा ने लंड की लंबाई पे जीभ फिराई तो विनोद झाड़ते-2 बचा.रंभा तो चूसे ही चली जाती लेकिन विनोद ने ने उसके मुँह को अपने लंड से अलग किया & उसे बाहो मे भर बिस्तर पे लेट गया.

रंभा के जिस्म को अपने बदन के नीचे दबा वो उसे फिर से चूमने लगा & अपनी कमर हिला अपने लंड को उसकी पॅंटी मे च्छूपी चूत पे दबाने लगा.रंभा लंड की गुस्ताख हर्कतो से बिल्कुल बेकाबू हो गयी & विनोद की पीठ को बेचैनी से नोचते हुए झाड़ गयी.रवि उसी की तरह कम तजुर्बे वाला इंसान था & उसके साथ-2 ही झाड़ जाता था लेकिन विनोद तजुर्बेकार मर्द था & रंभा को पता नही था कि आज की रात उसे मज़ा तो खूब आने वाला था मगर साथ ही वो बहुत थकने भी वाली थी.

विनोद ने झड़ती हुई रंभा के चेहरे को चूमते हुए उसकी छातियो को ब्रा के उपर से ही दबाया & फिर उसके स्ट्रॅप्स को कंधो से नीचे सरका दिया.रंभा के गुलाबी निपल्स से सजी कसी छातियाँ देख उसका मुँह हैरत से खुल गया.

"वाह..",उसने जीभ से उसके कड़े निपल्स को छेड़ा,"..उउम्म्म्म..कमाल की चूचियाँ हैं तुम्हारी,रंभा!",उसने दोनो हाथो मे दोनो चूचियों को भर के दबाया & बारी-2 से निपल्स को चूसने लगा.रंभा आहे भरती हुई उसके बालो को नोचते हुए उसके सर को चूमने लगी.उसने अपनी टाँगे पूरी फैला के घुटने मोड़ लिए थे & अब अपनी चुदाई का इंतेज़ार कर रही थी.

विनोद उसकी चूचियो को देख जैसे उसके बाकी जिस्म को भूल ही गया था.उन गोलाईयो को दबाते,मसल्ते,चूस्ते,चूमते उसने रंभा की मस्ती को ज़रा भी कम नही होने दिया था.वो अब बेचैन हो अपनी कमर हिलाने लगी थी.विनोद ने उसकी छातिया छ्चोड़ी & नीचे बढ़ा.रंभा के गोल,चिकने पेट & गहरी नाभि उसकी जीभ का अगला निशाना थे.रंभा मस्ती मे थरथरा रही थी.वो कभी अपने प्रेमी के बालो को नोचती तो कभी अपने बालो को & कुच्छ समझ नही आता तो बिस्तर की चादर को खींचने लगती.

उसकी काली पॅंटी उसकी चूत से उसी के रस से चिपकी हुई थी.विनोद ने उसकी नाभि के नीचे उसके पेट को चूमते हुए पॅंटी को नीचे किया तो उतनी मस्ती मे भी रंभा को एहसास हुआ कि वो विनोद के सामने पहली बार नंगी हो रही है.कितनी भी चुदाई की शौकीन & कितनी भी मस्त क्यू ना सही थी तो वो 1 लड़की ही.हया ने उसे आ घेरा & उसने अपने हाथो से अपनी चूत को ढँक लिया.

विनोद उसकी हर अदा का दीवाना हो गया था.उसने उसके हाथो को चूमा & उन्हे उसकी चूत से हटाया & जो नज़ारा उसने देखा उसने उसके होश उड़ा दिया.उसकी साँसे & तेज़ हो गयी & उसने रंभा की भारी जाँघो को पूरा फैला के उसकी चूत को और करीब से देखा.गुलाब की पंखुड़ियो जैसी बिल्कुल चिकनी,कोमल,गुलाबी चूत से आ रही खुश्बू ने उसे मदमस्त कर दिया.उसने उसकी टाँगो के बीच आ उन्हे अपने कंधो पे चढ़ाया & झुक के अपने होंठ सटा दिए रंभा की चूत से.

"आहह..!",रंभा ने जिस्म मोडते हुए सर को पीछे कर अपनी कमर उचकाई & झाड़ गयी.विनोद उसकी चूत के अंदर अपनी ज़ुबान चला रहा था & मस्ती की शिद्दत से बहाल हो रंभा सुबकने लगी.उसकी चूत से रस की धारा बहने लगी थी & विनोद उसे चाते जा रहा था.वो अपनी जाँघो मे उसके सर को भींच रही थी,उसके बाल खींच रही थी मगर वो इस सब से बेपरवाह बस उसकी चूत चाते जा रहा था.उसकी जीभ ने उसके दाने को छेड़ा तो रंभा ने सिसकारी भरते हुए अपनी कमर उचका चूत को उसके मुँह मे और घुसाने की कोशिश की.जिस्म की आग ने अब उसे पूरा झुलसा दिया था.

विनोद ने उसकी चूत छ्चोड़ी & उसके उपर आ गया.रंभा की जंघे फैला उसने अपना लंड चूत पे लगाके धक्का मारा तो लंड फिसल गया.चूत गीली तो बहुत थी मगर थी बहुत कसी हुई.इतनी देर चाटने & 2 बार झड़ने के बावजूद वो बहुत नही खुकी थी.विनोद का जोश इस बात से & बढ़ गया.इस बार उसने बाए हाथ की 2 उंगलियो से उसकी चूत को फैलाया & धक्का मारा & लंड को अंदर धकेला,उसके बाद चूत के गीलेपन की मदद से उसना पूरा लंड अंदर धंसा दिया.

अपने हाथो पे अपना वजन जमा उसने उसकी चुदाई शुरू कर दी.रंभा आहे भरते हुए उसके चेहरे को प्यार से सहला रही थी.अपनी टाँगे मोड़ उसने उसकी कमर पे जमा दी थी & उनके सहारे उचक-2 के उसके धक्को का जवाब दे रही थी.उसके दिल मे अपने नये महबूब को चूमने की ख्वाहिश हुई & वो उसके चेहरे को थाम सर उपर उठाने लगी.

विनोद उसकी दिल की बात समझते हुए नीचे उसके जिस्म पे लेट गया & रंभा उसे चूमने लगी.उसके हाथ विनोद की पीठ पे चल रहे थे.उसे ऐसा मज़ा रवि के साथ कभी नही आया था.विनोद के धक्के उसे पागल कर रहे थे.उसने उसे बाहो मे भींच लिया & पागलो की तरह कमर उचकाने लगी.सुबक्ते हुए वो विनोद के लंड से पहली बार झाड़ गयी थी.उसकी चूत झड़ते हुए सिकुड-फैल रही थी & विनोद के लंड को मस्ती का 1 अजीबोगरीब & बिल्कुल नया एहसास दिल रही थी.

विनोद खुद को झड़ने से रोके हुए उसे चूमते हुए हल्के-2 उसकी चुदाई करता रहा.रंभा की कसी चूत उसे भी बहुत कमाल का एहसास दिला रही थी.उस खुमारी के आलम मे भी रंभा विनोद से चुदवाने के अपने मक़सद को नही भूली थी,"मेरा नाम भेज दिया तुमने ट्रस्ट ग्रूप को?..उउम्म्म्मम..",विनोद ने सर झुका के उसकी बाई चूची को मुँह मे भर लिया था.

"हां.कल तुम्हे फोन भी आ जाएगा कि मंडे सवेरे तुम्हारा इंटरव्यू है.",1 पल को निपल को छ्चोड़ा & फिर वापस उस से ज़ुबान चिपका दी.

"तुम्हे क्या लगता है कि मुझे वाहा नौकरी मिल जाएगी?",रंभा ने उसके बालो मे हाथ फिराया.

"नही..",विनोद ने उसके सीने से सर उठाया,उसने चुदाई रोकी नही थी.रंभा के माथे पे जवाब सुन के शिकन पड़ गयी थी,"..देखो,रंभा.तुमने कहा तो मैने तुम्हारा नाम वाहा भेज दिया लेकिन बाकी 4 लड़कियो का तजुर्बा तुमसे ज़्यादा है & उनमे से 1 का CV सबसे अच्छा है फिर मैं एजेन्सी मे तुम जो कहो वो कर सकता हू लेकिन ट्रस्ट ग्रूप मे मेरी क्या चलेगी.",उसने उसकी चूचियो को दबाया & फिर अपना दाया हाथ नीचे ले जा उसकी बाई जाँघ सहलाने लगा.

"किस लड़की का?",चूत की कसक बहुत बढ़ गयी थी & रंभा अब बहुत ज़ोर से कमर उचका रही थी.उसके हाथ विनोद की पुष्ट गंद पे घूम रहे थे.

"सोनम रौत.95% चान्स है कि वोही विजयंत मेहरा की सेक्रेटरी बनेगी.",उसने रंभा की गंद को दबोच लिया था & बहुत गहरे & तेज़ धक्के लगा रहा था.रंभा उसकी बात समझ रही थी.इतना तो था कि विनोद ने अपना वादा निभाया था.उसका ये कहना भी सही था कि अपनी एजेन्सी के बाहर दूसरी कंपनी मे वो कुच्छ नही कर सकता था.अब जो भी हो,इंटरव्यू मे तो वो जान लगा देगी,आगे उसकी किस्मत!

वो और कुच्छ पूछती इस से पहले ही विनोद ने उसके सवाल पुछ्ते होंठो को अपने होंठो से खामोश कर दिया.उसकी गुस्ताख ज़ुबान & चूत मे उधम मचाते लंड ने उसे जिस्म की मदहोशी का ख़याल दिलाया & उसने अपने नाख़ून अपने आशिक़ की गंद मे धंसा दिए.विनोद ने अपने धक्को की रफ़्तार मे इज़ाफ़ा किया & उसकी गंद और ज़ोर से भींच ली.दोनो 1 दूसरे से लिपटे 1 दूसरे को चूमते पागलो की तरह कमर हिलाए जा रहे थे & चाँद पलो बाद रंभा ने विनोद के होंठ छ्चोड़ अपनी कमर को उचकाते हुए अपने बदन को मोड़ अपने सर को पीछे कर ज़ोर से आह भरी.वो झाड़ रही थी & झड़ते वक़्त उसकी चूत सिकुड़ने-फैलने की मस्तानी हरकत करने लगी जो विनोद ने आज रात से पहले कभी महसूस नही की थी.उस हरकत से आहत हो उसके लंड ने भी सब्र छ्चोड़ दिया & अपने वीर्य से रंभा की प्यासी चूत को भरने लगा.सुबक्ती रंभा ने जैसे ही चूत मे गर्म वीर्य को महसूस किया उसने विनोद को अपनी बाहो मे और कस लिया & उसके सर को चूमने लगी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--9

gataank se aage.

"tumhari biwi kaha hai?",apni gardan chumte vinod ke baal sehlate hue rambha ne puchha.

"mayke gayi hai.har 4 din pe vaha bhag jati hai,meri to parwah hi nahi use.",rambha janti thi ki vinod bas yuhi jhooth bol raha hai magar use is se kya lena-dena tha!use to bas vinod se apna matlab nikalna tha & matlab ke sath agar uski jism ki bhookh bhi mit rahi thi ot aur bhi achha tha.rambha ki moti gand kasi dress me aur ubhar aayi thi & vinod ne use chumte hue gand ko bahut zor se bhinch diya.

rambha chihunki aur thoda peechhe hui & use sambhaalne ki koshish karte hue vinod ladkhadaya & use liye-diye bistar pe gir gaya.vinod ne side-table pe rakhe lamp ko jalaya & fir rambha ke upar chadh use chumne laga.ab rambha puri tarah se masti ki pakad me thi.vinod ke baalo ko khinchte hue usne apni jibh vinod ke munh me ghusa di & dono puri garmjoshi se 1 dusre ko chumne lage.

vinod puri tarah se rambha ke jism pe nahi chadha hua tha balki aadha hi jism ukse upar dala tha taki uska daya hath uske jism ko asani se chhu sake,sehla sake.chumte hue usne rambha ki chhatiya dress ke upar se dabayai to rambha ne kiss tod aah bhari & apna sar peechhe kar liya.vinod ne uski gori gardan chumte hue uski bayi chhati ko dabaya & fir uska hath neeche uski jangh ko sehlane laga.rambha masti me aahe bharti hui uchak ke uske sar ko chumte hue apni janghe bechaini se aapas me ragad rahi thi.

vinod uski gardan chhod neeche hua uske dress ke gale me se dikh rahe seene ke upar ke hisse ko chumne laga,fir usne rambha ki chhatiyo ko dress ke upar se hi chuma.1 baar fir usne apne daye hath ko uski jangho ke beech firate hue uski dress ke andar ghusane ki koshish ki & nakaam raha.vo utha & rambha ki dayi tang ko utha liya & use chumte hue uske high heel sandal ko nikal fenka,fir usne yahi harkat dusri tang ke sath dohrayi & fir apne tapte lab uski mulayam jangho se chipka diye.

rambha bistar pe chhatpatane lagi & apne hatho se kabhi apne baalo ko to kabhi sar ke peechhe bistar ki chadar ko apne besabr hatho se khinchne lagi.vinod uski jangho ko chum nahi balki chus raha tha.aisi kasi,gudaz,mansal janghe vo zindagi me pehli baar mehsus kar raha tha.apne aatur hath rambha ki tango pe firate hue unhe chumte hue usne use masti me pagal kar diya tha.

uska khud ka haal bhi bura tha & vo ab apni is nayi mashooka ke nashile jism ka fauran deedar karna chahta tha.usne uski janghe pakad use palat diya & apne joote utare & uski jangho ke pichhle hisso ko chumne laga.pet ke bal leti rambha chadar ko nochte hue mastani aahe bhare ja rahi thi.uski chut se kafi der se pani ris raha tha & ab uski kasak se vo behaal ho rahi thi.

vinod ne kafi der tak uski tango & jangho ko peechhe se chuma & fir uth baitha & apni kamiz nikal di & apne ghutne rambha ke jism ke dono or jamate hue uski gand pe baith gaya & uski pith pe faile uski kamar se kuchh upar tak ke lumbe baalo ko hata ke uske daye kandhe ke upar kiya & dress ki back se dikh rahi uski gori pith pe apne garm hath firaye.rambha uske chhune se sihar rahi thi.apni gand pe uske lund ke dabav se uski chut deewani ho gayi thi & uski bechaini ab bahut badh gayi thi.

sarrrrrr ki aavz ke sath uski dress ka zip neeche hua & vinod ke sakht hatho ne dress ke straps uske kandho ke neeche sarkaye & uski gand se uth use neeche khinch diya.rambha ne badan ko bistar se thoda utha dress nikalne me uski madad ki.vinod ki vasna bhari nigaho ke samne ab kale bra & panty me dhanki rambha ki pith & chaudi gand thi.usne uske jism pe khushi & chah se bhare hath chalaye & rambha ki gand pe chapat lagayi.

"ooww..!",kuchh dard magar us se bhi zyada un chapato se paida hui masti se rambha ne kaha & mathe pe shikan & hotho pe mashili muskan ke sath baye kandhe ke upar se sar ghumate hue peechhe vinod ko dekha.vinod ne uski banh pakad use palta & use utha ke bistar pe bitah diya & uske hath apni pant pe rakh diye.

rambha uska ishara samajh gayi & nashe se bojhal palke utha use dekh muskurayi.vinod ka kad rambha se 2-3 inch hi zyada tha magar uska seena chauda tha & jism gathila tha.uske seene pe baal the magar bahut zyada nahi.rambha ne uski pant dhili ki & neeche sarka di.vinod ne tange pant me se nikali & uska hath apne underwear pe rakh diya.

rambha ka dil bahut zoro se dhadak raha tha.ye uski zindagi ka dusra lund tha.aaj tak vo kewal Ravi se hi chudi thi & usi ke lund se kheli thi.kanpte hatho se rambha ne underwear neeche kiya & uske samne vinod ka 7 inch lumba lund thartharata hua khada tha.ravi ka lund 6 inch ka tha & patla tha jabki vinod ka lund bahut mota tha.rambha ki nashe se bhari aankhe lund ko gaur se dekh rahi thi.uske supade pe precum chamak raha tha.

vinod ne uske baalo me ungliya firayi & uski thuddi pakad uske chehre ko upar kiya.bra me se jhankte bade se cleavage pe apna daya hath fira use dabate hue baye se uski thuddi tham uske rasile honth chumne laga.arse baad rambha ne nange mard ko dekha tha & ab uski chut us lund ko dekh bilkul aape se bahar ho gayi thi.

vinod ne chumte hue uske seene se hath hata uske daye hath ko pakad apne lund se laga diya.rambha kanp uthi,uske dil me khushi & masti ki 1 nayi lehar daud gayi & usne mazbuti se lund ko tham liya.vinod ne uske hontho ko azad kiya & khada ho gaya.rambha uske lund ko hilane lagi.ravi ke sath jismo ka khel khelte hue hi use ye ehsas hua tha ki vo chudai ki deewani hai & lund se khelna use bahut hi pasand hai.

vinod ko aage kuchh kehna nahi pada,rambha ne khud hi uske lund ko apne munh me bhar liya & chusne lagi.pehle usne precum ko chat ke saaf kiya & fir matthe ko chusne lagi.vinod aahe bharne laga & uske baalo se khelne laga.uske ando ko dabake rambha ne lund ki lambai pe jibh firayi to vinod jhadte-2 bacha.rambha to chuse hi chali jati lekin vinod ne ne uske munh ko apne lund se alag kiya & use baaho me bhar bistar pe let gaya.

rambha ke jism ko apne badan ke neeche daba vo use fir se chumne laga & apni kamar hila apne lund ko uski panty me chhupi chut pe dabane laga.rambha lund ki gustakh harkato se bilkul bekabu ho gayi & vinod ki pith ko bechaini se nochte hue jhad gayi.ravi usi ki tarah kam tajurbe vala insan tha & uske sath-2 hi jhad jata tha lekin vinod tajurbekar mard tha & rambha ko pata nahi tha ki aaj ki raat use maza to khub aane vala tha magar sath hi vo bahut thakne bhi vali thi.

vinod ne jhadti hui rambha ke chehre ko chumte hue uski chhatiyo ko bra ke upar se hi dabaya & fir uske straps ko kandho se neeche sarka diya.rambha ke gulabi nipples se saji kasi chhatiyan dekh uska munh hairat se khul gaya.

"vaah..",usne jibh se uske kade nipples ko chheda,"..uummmm..kamal ki choochiyan hain tumhari,rambha!",usne dono hatho me dono choochiyon ko bhar ke dabaya & bari-2 se nipples ko chusne laga.rambha aahe bharti hui uske baalo ko nochte hue uske sar ko chumne lagi.usne apni tange puri faila ke ghutne mod liye the & ab apni chudai ka intezar kar rahi thi.

vinod uski chhatiyo ko dekh jaise uske baki jism ko bhul hi gaya tha.un golaiyo ko dabate,masalte,chuste,chumte usne rambha ki masti ko zara bhi kam nahi hone diya tha.vo ab bechain ho apni kamar hilane lagi thi.vinod ne uski chhatiyan chhodi & neeche badha.rambha ke gol,chikne pet & gehri nabhi uski jibh ka agla nishana the.rambha masti me tharthara rahi thi.vo kabhi apne premi ke baalo ko nochti to kabhi apne baalo ko & kuchh samajh nahi aata to bistar ki chadar ko khinchne lagti.

uski kali panty uski chut se usi ke ras se chipki hui thi.vinod ne uski nabhi ke neeche uske pet ko chumte hue panty ko neeche kiya to utni masti me bhi rambha ko ehsas hua ki vo vinod ke samne pehli baar nangi ho rahi hai.kitni bhi chudai ki shaukeen & kitni bhi mast kyu na sahi thi to vo 1 ladki hi.haya ne use aa ghera & usne apne hatho se apni chut ko dhank liya.

vinod uski har ada ka deewana ho gaya tha.usne uske hatho ko chuma & unhe uski chut se hataya & jo nazara usne dekha usne uske hosh uda diya.uski sanse & tez ho gayi & usne rambha ki bhari jangho ko pura faila ke uski chut ko aur karib se dekha.gulab ki pankhudiyo jaisi bilkul chikni,komal,gulabi chut se aa rahi khushbu ne use madmast kar diya.usne uski tango ke beech aa unhe apne kandho pe chadhaya & jhuk ke apne honth sata diye rambha ki chut se.

"aahhhhhhh..!",rambha ne jism modte hue sar ko peechhe kar apni kamar uchkayi & jhad gayi.vinod uski chut ke andar apni zuban chala raha tha & masti ki shiddat se behal ho rambha subakne lagi.uski chut se ras ki dhara behne lagi thi & vinod use chate ja raha tha.vo apni jangho me uske sar ko bhinch rahi thi,uske baal khinch rahi thi magar vo is sab se beparwah bas uski chut chaate ja raha tha.uski jibh ne uske dane ko chheda to rambha ne siskari bharte hue apni kamar uchka chut ko uske munh me aur ghusane ki koshish ki.jism ki aag ne ab use pura jhulsa diya tha.

vinod ne uski chut chhodi & uske upar aa gaya.rambha ki janghe faila usne apna lund chut pe lagake dhakka mara to lund fisal gaya.chut gili to bahut thi magar thi bahut kasi hui.itni der chatne & 2 baar jhadne ke bavjud vo bahut nahi khuki thi.vinod ka josh is baat se & badh gaya.is baar usne baye hath ki 2 ungliyo se uski chut ko failaya & dhakka mara & lund ko andar dhakela,uske baad chut ke gilepan ki madad se usna pura lund andar dhansa diya.

apne hatho pe apna vajan jama usne uski chudai shuru kar di.rambha aahe bharte hue uske chehre ko pyar se sehla rahi thi.apni tange mod usne uski kamar pe jama di thi & unke sahare uchak-2 ke uske dhakko ka jawab de rahi thi.uske dil me apne naye mehboob ko chumne ki khwahish hui & vo uske chehre ko tham sar upar uthane lagi.

vinod uski dil ki baat samajhte hue neeche uske jism pe let gaya & rambha use chumne lagi.uske hath vinod ki pith pe chal rahe the.use aisa maza ravi ke sath kabhi nahi aya tha.vinod ke dhakke use pagal kar rahe the.usne use baaho me bhinch liya & paglo ki tarah kamar uchkane lagi.subakte hue vo vinod ke lund se pehli baar jhad gayi thi.uski chut jhadte hue sikud-fail rahi thi & vinod ke lund ko masti ka 1 ajibogarib & bilkul naya ehsas dil rahi thi.

vinod khud ko jhadne se roke hue use chumte hue halke-2 uski chudai karta raha.rambha ki kasi chut use bhi bahut kamal ka ehsas dila rahi thi.us khumari ke aalam me bhi rambha vinod se chudne ke apne maqsad ko nahi bhuli thi,"mera naam bhej diya tumne Trust group ko?..uummmmm..",vinod ne sar jhuka ke uski bayi choochi ko munh me bhar liya tha.

"haan.kal tumhe fone bhi aa jayega ki monday savere tumhara interview hai.",1 pal ko nipple ko chhoda & fir vapas us se zuban chipka di.

"tumhe kya lagta hai ki mujhe vaha naukri mil jayegi?",rambha ne uske baalo me hath firaya.

"nahi..",vinod ne uske seene se sar uthaya,usne chudai roki nahi thi.rambha ke mathe pe jawab sun ke shikan pad gayi thi,"..dekho,rambha.tumne kaha to maine tumhara naam vaha bhej diya lekin baki 4 ladkiyo ka tajurba tumse zyada hai & unme se 1 ka CV sabse achha hai fir main agency me tum jo kaho vo kar sakta hu lekin trsut group me meri kya chalegi.",usne uski choochiyo ko dabaya & fir apna daya hath neeche le ja uski bayi jangh sehlane laga.

"kis ladki ka?",chut ki kasak bahut badh gayi thi & rambha ab bahut zor se kamar uchka rahi thi.uske hath vinod ki pusht gand pe ghum rahe the.

"Sonam Raut.95% chance hai ki vohi Vijayant Mehra ki secretary banegi.",usne rambha ki gand ko daboch liya tha & bahut gehre & tez dhakke laga raha tha.rambha uski baat samajh rahi thi.itna to tha ki vinod ne apna vada nibhaya tha.uska ye kehna bhi sahi tha ki apni agency ke bahar dusri company me vo kuchh nahi kar sakta tha.ab jo bhi ho,interview me to vo jaan laga degi,aage uski kismat!

vo aur kuchh puchhti is se pehle hi vinod ne uske sawal puchhte hotho ko apne hotho se khamosh kar diya.uski gustakh zuban & chut me udham machate lund ne use jism ki madhoshi ka khayal dilayua & usne apne nakhun apne aashiq ki gand me dhansa diye.vinod ne apne dhakko ki raftar me izafa kiya & uski gand aur zor se bhinch li.dono 1 dusre se lipte 1 dusre ko chumte paglo ki tarah kamar hilaye ja rahe the & chand palo baad rambha ne vinod ke honth chhod apni kamar ko uchakte hue apne badan ko mod apne sar ko peechhe kar zor se aah bhari.vo jhad rahi thi & jhadte waqt uski chut sikudne-failne ki mastani harkat karne lagi jo vinod ne aaj raat se pehle kabhi mehsus nahi ki thi.us harkat se aahat ho uske lund ne bhi sabr chhod diya & apne virya se rambha ki pyasi chut ko bharne laga.subakti rambha ne jaise hi chut me garm virya ko mehsus kiya usne vinod ko apni baaho me aur kas liya & uske sar ko chumne lagi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--10

गतान्क से आगे.

उस बहुत बड़े खाली मैदान मे बस जंगंग्ली झाड़िया & पेड़ उगे हुए थे.उस मैदान के कच्चे रास्ते पे 2 मर्सिडीस आके रुकी.आगे वाली कार से विजयंत & समीर मेहरा प्रणव के साथ उतरे & पीछे वाली से ट्रस्ट ग्रूप के कुच्छ ऊँचे अफ़सर,"डॅड,ये जगह डेवाले से बस 20 किमी की दूरी पे है & हमारी फिल्म सिटी के लिए बिल्कुल पर्फेक्ट है.वो देखिए,उधर 1 छ्होटी सी झील भी है.इधर पहाड़ियाँ भी हैं.इस सपाट मैदान मे दफ़्तर,स्टूडियोस पर्मनेंट & टेंपोररी सेट्स बन जाएँगे.डेवाले के स्टूडियोस पुराने हैं फिर उनकी लोकेशन ऐसी है कि बिना ट्रॅफिक जाम मे फँसे ना वाहा पहुँचा जा सकता है ना निकला जा सकता है.मानपुर एक्सप्रेसवे से जुड़ा है तो ट्रॅफिक की प्राब्लम तो है ही नही फिर इस जगह हम बिल्कुल मॉडर्न सुविधाएँ मुहैय्या करा सकते हैं."

"1 बात और,सर.",प्रणव घर के अलावा विजयंत को कभी डॅडी नही बुलाता था,उसने कार के बॉनेट पे फैले अपने साले के प्लान के 1 कोने पे उंगली रखी,"ये ज़मीन जो यहा से बस 4 किमी के फ़ासले पे है,हमारी है & यहा हम अपना रेसिडेन्षियल प्रॉजेक्ट शुरू कर रहे हैं.इस प्रॉजेक्ट के सामने सड़क के इस दूसरी तरफ हमारा होटेल भी बनाने का प्लान है.ये तीनो जगहें यानी कि ये ज़मीन जहा हम खड़े हैं & हमारे ये दोनो प्रॉजेक्ट्स मानपुर मे आते हैं & यहा डेवाले के रोड टॅक्स रेट्स नही लगेंगे & ये सारी जगह एरपोर्ट से बस 6 किमी की दूरी पे है."

"यानी ये प्रॉजेक्ट हमे मिल गया तो फायडा ही फायडा है.",विजय्न्त ने गहरे नीले रंग का सूट पहना था & आँखो पे काला चश्मा था.वो मैदान मे दूर तक देख रहा था.सामने उसे 1 छ्होटा सा बिंदु हिलता दिखा,वो 1 कार थी.वो मुस्कुराया,वो जानता था कि वो किसकी कार है.

"आउच!",मर्सिडीस का कमाल का सस्पेन्षन भी उस ऊबड़-खाबड़ रास्ते के हचको से सोनिया को नही बचा पाया था,"ये कहा आ गये हैं हम,डार्लिंग?",उसने ब्रिज कोठारी के कंधे पे सर रख उसके सीने पे हाथ फिराया.

"सोने की ख़ान मे.",वो अपनी बीवी को देख मुस्कराया.

"क्या?!"

"हां,बाकी बातें फ्लाइट पे बताउन्गा.",वो यहा से सीधा एरपोर्ट जा रहे थे जहा से वो अपने हनिमून के लिए रवाना हो रहे थे.कार रुकी & दोनो उतरे.उसके पीछे भी दूसरी कार मे उसकी कंपनी के अफ़सर आए थे & ब्रिज उनके साथ ज़मीन के बारे मे बातें करने लगा.सोनिया उनसे अलग अपनी कार के सहारे खड़ी थी.उसने छ्होटे बाज़ू का गुलाबी टॉप & पॅंट पहनी थी.उसने दूर देखा,कोई आदमी चला आ रहा था,उसने अपनी आँखो पे लगा काला चस्मा उपर अपने सर पे किया & उधर देखने लगी.चमकती धूप मे सामने से विजयंत लंबे-2 डॅग भरता अकेला चला आ रहा था.लंबा-चौड़ा डील-डौल,आँखो पे काला चस्मा,गोरे,हसीन चेहरे पे सुनेहरी दाढ़ी & विश्वास से भरे कदम..सोनिया तो उसे देखती ही रह गयी.

"हेलो,मेहरा.",ब्रिज मुस्कुराया,"शहर बसा नही लूटेरे पहले आ गये!",उसके & उसके आदमियो के साथ विजयंत भी हंसा & अपना चश्मा उतार अपनी कोट की जेब मे डाला.

"तुम शायद अपनी बात कर रहे हो,कोठारी.मैं तो मालिक हू..वैसे मैं तुम्हे मुबारकबाद देने आया था.",उसने हाथ बढ़ाया जिसे कोठारी ने थाम लिया,"..शादी मुबारक हो."

"थॅंक्स."

"& ये शायद मसेज.कोठारी हैं.",विजयंत ने उसका हाथ छ्चोड़ा & सोनिया के सामने आ खड़ा हुआ.सोनिया का दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था & उसे उसका कारण समझ नही आ रहा था.

"शादी मुबारक हो,मिसेज़.कोठारी.",उसने अपनी आँखे सोनिया की आँखो मे डाल दी & अपना हाथ आगे बढ़ाया तो सोनिया ने भी अपना कांपता दाया हाथ आगे कर दिया.विजयंत ने उसे थामा & उसे चूम लिया.इस सब के दौरान 1 पल को भी उसकी नज़रो ने सोनिया की निगाहो को देखना नही छ्चोड़ा था.उसकी पीठ ब्रिज की तरफ थी इसलिए ब्रिज उसके चेहरे & आँखो को देख नही पा रहा था.विजयंत के होंठो से हाथ सटाते ही सोनिया ने हाथ पीछे खींच लिया.ब्रिज मुस्कुराया,उसे लगा उसकी बीवी को विजयंत की ये हरकत बदतमीज़ी लगी है & उसने अपना हाथ झटक लिया है जबकि सोनिया के जिस्म मे विजयंत के होंठो की च्छुअन से बिजली दौड़ गयी थी & उसने आहत हो हाथ खींचा था.

"थॅंक्स.",उसकी आँखे उसके दिल का हाल बयान कर रही थी.उसने झट से उन्हे काले चश्मे के पीछे च्छुपाया & कार मे बैठ गयी.विजयंत मुस्कुराया & वहाँ से जाने लगा.

"मेहरा,ये ज़मीन तुम्हारे लिए सपना ही रहेगी."

"देखेंगे,कोठारी.",जाते हुए विजयंत ने पीछे खड़े ब्रिज की बात सुन बस हवा मे अलविदा का इशारा करते हुए हाथ हिलाया.

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प्लेन हवा मे था,एर होस्टेसेस सभी को ड्रिंक्स सर्व कर रही थी.बिज़्नेस क्लास मे बैठा ब्रिज अपनी बीवी को उस ज़मीन के बारे मे बता रहा था मगर वो सुन कहा रही थी.उसे अभी भी विजयंत की गहरी निगाहे खुद को देखती हुई लग रही थी.अपने हाथ पे उसके होंठो की गर्माहट वो अभी भी महसूस कर रही थी..क्या था ये सब?..उसका दिल ऐसे क्यू धड़का था उस इंसान की मौजूदगी से?..वो ब्रिज की किसी बात पे मुस्कुराइ & फिर उसकी बाँह मे अपनी बाँह फँसा खिड़की से बाहर देखा.खिड़की के शीशे मे उसे अपना धुँधला सा अक्स दिखा....विजयंत ने तुम्हारा दिल धड़का दिया इसका तो 1 ही मतलब है!..उसका अक्स फिर उसे परेशान कर रहा था..नही!..ऐसी कोई बात नही है..मैं ब्रिज की बीवी हू & केवल उसी की हू..उसने मन ही मन कहा..वो बस 1 पल की बात थी..& वैसे भी मैं अब उस इंसान से फिर कभी नही मिलने वाली..उसने खिड़की से मुँह फेरा & बोलते हुए ब्रिज के होंठ चूम लिए.वो चौंक उठा.

"मुझे नही जानना उस ज़मीन के बारे मे!",वो उसके और करीब हो गयी,"..बस अपने बारे मे बताओ.",वो उसके कंधे पे सर रख के उस से आड़ गयी.ब्रिज खुशी से मुस्कुराया & उसके सर को चूम लिया.

सोमवार की सुबह रंभा बाकी 4 लड़कियो के साथ ट्रस्ट ग्रूप के दफ़्तर की इमारत की 12वी मंज़िल पे 1 कमरे मे बैठी थी.इंटरव्यू से पहले की नर्वुसनेस ने उसे आ घेरा था.थोड़ी देर पहले कंपनी के 1 आदमी ने उन्हे आके बताया था कि बस थोड़ी ही देर मे खुद विजयंत मेहरा 1-1 करके सबका इंटरव्यू लेंगे.रंभा ने आँखो के कोने से सोनम रौत को देखा.साँवली सी लड़की खूबसूरत तो थी & इस वक़्त बड़ी विश्वास से भरी भी लग रही थी.

विजयंत अपने दफ़्तर पहुँचा & जहा सारी लड़किया बैठी थी उस कमरे मे झाँका.कमरे मे 1 शीशा लगा था जिसके पार कमरे मे बैठे लोगो को तो दिखाई नही देता मगर शीशे के उस पार खड़ा इंसान सब देख सकता था.विजयंत की नज़रे सभी लड़कियो से होती हुई रंभा पे आके टिक गयी.रंभा शीशे के बिल्कुल करीब बैठी थी & विजयंत उसे उसकी बाई तरफ से देख रहा था.उसके हुस्न को देख वो हैरान रह गया था.

रंभा ने आधे बाज़ू की सफेद शर्ट & घुटनो से थोड़ी उपर की काली स्कर्ट पहनी थी & पैरो मे हाइ हील सॅंडल्ज़ थे.विजय्न्त ने स्कर्ट से निकलती उसकी गोरी,मखमली जाँघो & लंबी टाँगो पे नज़रे दौड़ाई.शर्ट की बाजुओ से निकलती उसकी गुदाज़ बाहो को देख उसके दिल मे उन्हे थाम उस हसीना को बाहो मे भर उसके गुलाबी होंठो को चखने की बहुत तेज़ ख्वाहिश पैदा हुई और जब कमीज़ मे काफ़ी बड़ा उभार बनाते उसके सीने पे उसकी नज़र गयी तो उसने मन ही मन ये तय कर लिया की चाहे जैसे भी हो इस रूप की रानी की जवानी के समंदर मे वो ज़रूर गोते लगाएगा.रंभा को ऐसा लगा जैसे कोई उसे घूर रहा है & उसने गर्दन घुमाई मगर वाहा तो 1 शीशा लगा था जिसमे उसे अपना अक्स दिखाई दिया.

वो शीशे मे देख अपने खुले बालो को हाथो से सँवारने लगी & अपना चेहरा देखने लगी.विजयंत अब सीधा उसकी आँखो मे देख रहा था.कितना मासूम चेहरा था & कैसी बड़ी-2 काली आँखें.उसका दिल अब बिल्कुल बेचैन हो गया था & जैसे ही रंभा ने शीशे मे खुद को निहरना बंद किया,वो वाहा से अपने कॅबिन मे चला गया.

1-1 करके सभी लड़कियो को अंदर बुलाया जाने लगा.रंभा ने देखा जो भी लड़की कमरे से बाहर जाती वो वापस कमरे मे नही आती.उसके साथ जो लड़की बैठी थी,उस से उसने बात की थी & दोनो ने तय किया था कि जो भी पहले अंदर जाएगी वो दूसरी को पुछे गये सवालो के बारे मे ज़रूर बताएगी लेकिन वो लड़की तो वापस कमरे मे आई ही नही.थोड़ी देर बाद कमरे मे बस सोनम & रंभा बचे थे & फिर सोनम का नाम पुकारा गया.

"मिस.रौत,इतनी कम उम्र मे भी काफ़ी तजुर्बा है आपको?",ब्रिज कोठारी ने सोनम की तैय्यरी मे कोई कसर नही छ्चोड़ी थी.वो जानता था कि यहा इंटरव्यू देने वाली हर लड़की के CV मे लिखी 1-1 बात की सच्चाई परखने के बाद ही विजयंत उन्हे इंटरव्यू के लिए बुलाता & उसने इस बात को मद्देनज़र रखते सोनम का CV बनाया था.यहा आने से पहले सोनम को भी बहुत ज़्यादा घबराहट नही हो रही थी लेकिन विजयंत की ज़ोरदार शख्शियत & रोबिली आवाज़ ने उसके कदम लड़खड़ा दिए थे 7 उसका दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था.

"सर,मैं जिस कंपनी मे काम कर रही थी वो थी तो छ्होटी मगर उसके ऑपरेशन्स काफ़ी फैले थे इसलिए मेरे बॉस की मदद करते हुए मैने वाहा ये तजुर्बा हासिल किया.

"हूँ.",विजयंत कुच्छ सोच रहा था,"..हमारे यहा दफ़्तर आने का वक़्त तो है मगर जाने का नही,इस बात से आपको तकलीफ़ हो सकती है."

"सर,मैं यहा काम करने आना चाहती हू & मुझे काम करने मे कोई तकलीफ़ नही होती."

"हूँ.",विजयंत मुस्कुराया,"..आप बाहर इंतेज़ार कीजिए."

"थॅंक यू,सर.",सोनम कॅबिन से बाहर निकली तो उसे 1 दूसरे कमरे मे बिठा दिया गया.उसने अपने माथे पे आया पसीना पोंच्छा..इस आदमी के साथ काम करना पड़ेगा उसे!..इसे कोई कैसे धोखा दे सकता है?..ये तो इतना..इतना..उसे समझ मे नही आ रहा था कि विजयंत के रोब,उसकी चुंबकिया शख्सियत के लिए वो कौन्से लफ्ज़ इस्तेमाल करे..अरे पहले वो तुम्हे रखे तो यहा!..उसके दिल ने उसे समझाया & वो बगल मे रखे कूलर से पानी लेके गतगत पीने लगी.

"मे आइ कम इन,सर?",रंभा ने विजयंत के कॅबिन मे कदम रखा.उसे कॅबिन कहना ग़लत होगा,वो 1 बड़ा सा हॉल था.सामने 1 बड़ी डेस्क के पीछे विजयंत मेहरा बैठा था.उस हॉल के 1 कोने मे 1 सोफा सेट लगा था,1 दीवार पे बड़ा सा एलसीडी टीवी & पूरे फर्श पे मोटा कालीन बिच्छा था.कॅबिन मे रोशनी बहुत मद्धम थी विजयंत के डेस्क पे 1 लॅंप जल रहा था & पूरे हॉल मे जो कन्सील्ड लाइट्स थी उन्हे विजयंत ने जानबूझ के बहुत हल्का कर रखा था.

"यस.",उसकी रोबदार,भरी आवाज़ ने रंभा को थोड़ा और नर्वस कर दिया फिर भी वो हल्के से मुस्कुराते हुए नपे-तुले कदमो से आगे बढ़ी.उसने विजयंत की शक्ल पहली बार देखी थी & उसकी मर्दाना खूबसूरती ने उसपे गहरा असर छ्चोड़ा.विजयंत भी उसके हुस्न को आँखो से पी रहा था.जब वो लड़की उसके सामने आके बैठी तो उसका लंड उसके जिस्म की नज़दीकी & उस से आती मदमाती खुश्बू के असर से फ़ौरन खड़ा हो गया.

रंभा विजयंत के हर सवाल का जवाब दे रही थी & अब उसकी घबराहट थोड़ी कम भी हो गयी थी,"मिस.रंभा,यहा आई पाँचो लड़कियो मे से आपका तजुर्बा सबसे कम है,आप ये बात जानती हैं?"

"यस,सर."

"तो मेरी समझ मे ये नही आता कि एजेन्सी ने आपको यहा कैसे भेज दिया?",वो इस लड़की की मज़बूती को परखना चाहता था.

"क्यूकी मैने उनकी नाक मे दम कर दिया था.",रंभा ने विजयंत की आँखो मे आँखे डाल के कहा.

"क्या?!",विजयंत हंसा.उसे लड़की का जवाब पसंद आया था,"लेकिन क्यू?"

"सर,आपके लिए काम करना बहुत फख्र की बात है & फिर इतने रिप्यूटेड ग्रूप मे कौन नही काम करना चाहेगा खास कर के जब काम ग्रूप के चेअरमेन के लिए करना हो.",रंभा बहुत शालीन ढंग से मुस्कुराइ & विजयंत के ज़हन मे उस मुस्कान ने धमाका कर दिया.उसका दिमाग़ कल्पना के घोड़े दौड़ाने लगा..ये मासूम चेहरा हवस मे अँधा हो कैसा लगता होगा?..ये मस्ती मे कैसे मुस्कुराती होगी?..ये रसीले,गुलाबी होंठ मेरे लंड के गिर्द कैसे लगेंगे?..इस गोरे,तराशे जिस्म की हरारत मुझपे क्या असर करेगी?..इसका नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म से टकराएगा तो..

"आप बाहर वेट करिए.",उसने खुद पे काबू किया.

"थॅंक यू,सर.",रंभा भी उसी दूसरे कमरे मे आ गयी जहा बाकी लड़किया बैठी थी.

विजयंत पशोपेश मे पड़ा था.उसने अपनी कुर्सी के पीछे लगे पर्दे को रिमोट से खोला & सामने धूप मे चमकती डेवाले की ऊँची इमारतो को देखने लगा जिनमे से ज़्यादातर उसी की थी.वो लड़कियो का शौकीन था,जो लड़की उसके दिल को भा जाए उसे वो अपने बिस्तर की शोभा ज़रूर बनाता था लेकिन आज उसके सामने 1 अजीब सी उलझन थी.उसने अपने बिज़्नेस के रास्ते मे कभी अपने शौक को आने नही दिया था मगर आज जैसे उसका इम्तिहान लिया जा रहा था कि वो किसे तवज्जो देता है-अपने बिज़्नेस को या अपने शौक को.सोनम यक़ीनन तजुर्बे मे रंभा से कही आगे थी लेकिन उसे चुनने का मतलब रंभा को खोना था.

अपने हाथो को जोड़ अपनी नाक से लगा आँखे बंद कर वो इस परेशानी का हाल सोचने लगा कि उसका इंटरकम बजा,उसने उसे ऑन किया,"सर,समीर सर आ गये हैं.आपने बोला था उनके आने पे आपको बता दू.",अगली सेक्रेटरी के चुने जाने तक 1 टेंपोररी असिस्टेंट उसने रखी थी,ये वही थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--10

gataank se aage.

us bahut bade khali maidan me bas jungli jhadiya & ped uge hue the.us maidan ke kachche raste pe 2 Mercedes aake ruki.aage vali car se Vijayant & Sameer Mehra Pranav ke sath utre & peechhe vali se trust group ke kuchh oonche afsar,"dad,ye jagah devalay se bas 20 km ki doori pe hai & humari film city ke liye bilkul perfect hai.vo dekhiye,udhar 1 chhoti si jhil bhi hai.idhar pahadiyan bhi hain.is sapat maidan me daftar,studios & permanent & temporary sets ban jayenge.devalay ke studios purane hain fir unki location aisi hai ki bina traffic jam me fanse na vaha pahuncha ja sakta hai na nikla ja sakta hai.Manpur expressway se juda hai to traffic ki problem to hai hi nahi fir is jagah hum bilkul modern suvidhayen muhaiyya kara sakte hain."

"1 baat aur,sir.",pranav ghar ke alawa vijayant ko kabhi daddy nahi bulata tha,usne car ke bonnet pe faile apne sale ke plan ke 1 kone pe ungli rakhi,"ye zamin jo yaha se bas 4 km ke fasle pe hai,humari hai & yaha hum apna residential project shuru kar rahe hain.is project ke samne sadak ke is dusri taraf hamara hotel bhi banaane ka plan hai.ye teeno jagahen yani ki ye zamin jaha hum khade hain & humare ye dono projects manpur me aate hain & yaha devalay ke oknche tax rates nahi lagenge & ye sari jagah airport se bas 6 km ki doori pe hai."

"yani ye project hume mil gaya to fayda hi fayda hai.",vijaynat ne gehre nile ramg ka suit pehna tha & aankho pe kala chashma tha.vo maidan me door tak dekh raha tha.samne use 1 chhota sa bindu hilta dikha,vo 1 car thi.vo muskuraya,vo janta tha ki vo kiski car hai.

"ouch!",mercedes ka kamal ka suspension bhi us oobad-khabad raste ke hachko se Soniya ko nahi bacha paya tha,"ye kaha aa gaye hain hum,darling?",usne Brij Kothari ke kandhe pe sar rakh uske seene pe hath firaya.

"sone ki khan me.",vo apni biwi ko dekh muskraya.

"kya?!"

"haan,baki baaten flight pe bataunga.",vo yaha se seedha airport ja rahe the jaha se vo apne honeymoon ke liye rawana ho rahe the.car ruki & dono utre.uske peechhe bhi dusri car me uski company ke afsar aaye the & brij unke sath zamin ke bare me baaten karne laga.soniya unse alag apni car ke sahar ekhadi thi.usne chhote bazu ka gulabi top & pant pehni thi.usne door dekha,koi aadmi chala aa raha tha,usne apni aankho pe laga kala chasma upar apne sar pe kiya & udhar dekhne lagi.chamkti dhoop me samne se vijayant lambe-2 dag bharta akela chala aa raha tha.lamba-chauda deel-daul,aankho pe kala chasma,gore,haseen chehre pe sunehri dadhi & vishwas se bhare kadam..soniya to use dekhti hi reh gayi.

"hello,mehra.",brij muskuraya,"shehar basa nahi lootere pehle aa gaye!",uske & uske aadmiyo ke sath vijayant bhi hansa & apna chashma utar apni coat ki jeb me dala.

"tum shayad apni baat kar rahe ho,kothari.main to malik hu..vaise main tumhe mubarakbaad dene aaya tha.",usne hath badhaya jise kothari ne tham liya,"..shadi mubarak ho."

"thanx."

"& ye shayad Mrs.kothari hain.",vijayant ne uska hath chhoda & soniya ke samne aa khada hua.soniya ka dil bahut zoro se dhadak raha tha & use uska karan samajh nahi aa raha tha.

"shadi mubarak ho,mrs.kothari.",usne apni aankhe soniya ki aankho me daal di & apna hath aage badhaya to soniya ne bhi apna kanpta daya hath aage kar diya.vijayant ne use thama & use chum liya.is sab ke dauran 1 pal ko bhi uski nazro ne soniya ki nigaho ko dekhna nahi chhoda tha.uski pith brij ki taraf thi isliye brij uske chehre & aankho ko dekh nahi pa raha tha.vijayant ke hotho se hath satate hi soniya ne hatah peechhe khinch liya.brij muskuraya,use laga uski biwi ko vijayant ki ye harkat badtamizi lagi hai & usne apna hath jhatak liya hai jabki soniya ke jism me vijayant ke hotho ki chhuan se bijli daud gayi thi & usne aahat ho hath khincha tha.

"thanx.",uski aankhe uske dil ka haal bayan kar rahi thi.usne jhat se unhe kale chashme ke peechhe chhupaya & car me baith gayi.vijayant muskuraya & vah se jane laga.

"mehra,ye zamin tumhare liye sapna hi rahegi."

"dekhenge,kothari.",jate hue vijayant ne peechhe khade brij ki baat sun bas hawa me alvida ka ishara karte hue hath hilaya.

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plane hawa me tha,air hostesses sabhi ko drinks serve kar rahi thi.business class me baitha brij apni biwi ko us zamin ke bare me bata raha tha magar vo sun kaha rahi thi.use abhi bhi vijayant ki gehri nigahe khud ko dekhti hui lag rahi thi.apne hath pe uske hotho ki garmahat vo abhi bhi mehsus kar rahi thi..kya tha ye sab?..uska dil aise kyu dhadka tha us insan ki maujoodgi se?..vo brij ki kisi baat pe muskurayi & fir uski baanh me apni banh fansa khidki se bahar dekha.khidki ke shishe me use apna dhundhla sa aks dikha....vijayant ne tumhara dil dhadka diya iska to 1 hi matlab hai!..uska aks fir use pareshan kar raha tha..nahi!..aisi koi baat nahi hai..main brij ki biwi hu & kewal usi ki hu..usne man hi man kaha..vo bas 1 pal ki baat thi..& vaise bhi main ab us insan se fir kabhi nahi milne wali..usne khidki se munh fera & bolte hue brij ke honth chum liye.vo chaunk utha.

"mujhe nahi jaanana us zamin ke bare me!",vo uske aur karib ho gayi,"..bas apne bare me batao.",vo uske kandhe pe sar rakh ke us se ad gayi.brij khushi se muskuraya & uske sar ko chum liya.

Somvar ki subah Rambha baki 4 ladkiyo ke sath Trust group ke daftar ki imarat ki 12vi manzil pe 1 kamre me baithi thi.interview se pehle ki nervousness ne use aa ghera tha.thodi der pehle company ke 1 aadmi ne unhe aake bataya tha ki bas thodi hi der me khud Vijayant Mehra 1-1 karke sabka interview lenge.rambha ne aankho ke kone se Sonam Raut ko dekha.sanvli si ladki khubsurat to thi & is waqt badi vishwas se bhari bhi lag rahi thi.

vijayant apne daftar pahuncha & jaha sari ladkiya baithi thi us kamre me jhanka.kamre me 1 shisha laga tha jiske paar kamre me baithe logo ko to dikhayi nahi deta magar shishe ke us paar khada insan sab dekh sakta tha.vijayant ki nazre sabhi ladkiyo se hoti hui rambha pe aake tik gayi.rambha shishe ke bilkul karib baithi thi & vijayant use uski bayi taraf se dekh raha tha.uske husn ko dekh vo hairan rah gaya tha.

rambha ne aadhe bazu ki safed shirt & ghutno se thodi upar ki kali skirt pehni thi & pairo me high heel sandals the.vijaynat ne skirt se nikalti uski gori,makhmali jangho & lambi tango pe nazre daudayi.shirt ki bazuo se nikalti uski gudaz baaho ko dekh uske dil me unhe tham us haseena ko baaho me bhar uske gulabi hotho ko chakhne ki bahut tez khwahish paida hui aur jab kamiz me kafi bada ubhar banate uske seene pe uski nazar gayi to usne man hi man ye tay kar liya ki chahe jaise bhi ho is roop ki rani ki jawani ke samnadar me vo zaroor gote lagayega.rambha ko aisa laga jaise koi use ghoor raha hai & usne gardan ghumayi magar vaha to 1 shisha laga tha jisme use apna aks dikhayi diya.

vo shishe me dekh apne khule baalo ko hatho se sanwarne lagi & apna chehra dekhne lagi.vijayant ab seedha uski aankho me dekh raha tha.kitna masoom chehra tha & kaisi badi-2 kali aankhen.uska dil ab bilkul bechain ho gaya tha & jaise hi rambha ne shishe me khud ko niharna band kiya,vo vaha se apne cabin me chala gaya.

1-1 karke sabhi ladkiyo ko andar bulaya jane laga.rambha ne dekha jo bhi ladki kamre se bahar jati vo vapas kamre me nahi aati.uske sath jo ladki baithi thi,us se usne baat ki thi & dono ne tay kiya tha ki jo bhi pehle andar jayegi vo dusri ko puchhe gaye sawalo ke bare me zarur batayegi lekin vo ladki to vapas kamre me aayi hi nahi.thodi der baad kamre me bas sonam & rambha bache the & fir sonam ka naam pukara gaya.

"ms.raut,itni kam umra me bhi kafi tajurba hai aapko?",Brij Kothari ne sonam ki taiyyari me koi kasar nahi chhodi thi.vo janta tha ki yaha interview dene vali har ladki ke CV me likhi 1-1 baat ki sachchai parakhne ke baad hi vijayant unhe interview ke liye bulata & usne is baat ko maddenazar rakhte sonam ka cv banaya tha.yaha aane se pehle sonam ko bhi bahut zyada ghabrahat nahi ho rahi thi lekin vijayant ki zordar shkhsiyat & robili aavaz ne uske kadam ladkhada diye the 7 uska dil bahut zoro se dhadak raha tha.

"sir,main jis company me kaam kar rahi thi vo thi to chhoti magar uske operations kafi faile the isliye mere boss ki madad karte hue maine vaha ye tajurba hasil kiya.

"hun.",vijayant kuchh soch raha tha,"..humare yaha daftar aane ka waqt to hai magar jane ka nahi,is baat se aapko taklif ho sakti hai."

"sir,main yaha kaam karne aana chahti hu & mujhe kaam karne me koi taklif nahi hoti."

"hun.",vijayant muskuraya,"..aap bahar intezar kijiye."

"thank you,sir.",sonam cabin se bahar nikli to use 1 dusre kamre me bitha diya gaya.usne apne mathe pe aaya paseena ponchha..is aadmi ke sath kaam karna padega use!..ise koi kaise dhokha de sakta hai?..ye to itna..itna..use samajh me nahi aa raha tha ki vijayant ke rob,uski chumbakiya shakhsiyat ke liye vo kaunse lafz istemal kare..are pehle vo tumhe rakhe to yaha!..uske dil ne use samjhaya & vo bagal me rakhe cooler se pani leke gatagat peene lagi.

"may i come in,sir?",rambha ne vijayant ke cabin me kadam rakha.use cabin kehna galat hoga,vo 1 bada sa hall tha.samne 1 badi desk ke peechhe vijayant mehra baitha tha.us hall ke 1 kone me 1 sofa set laga tha,1 deewar pe bada sa LCD tv & pure farsh pe mota kaleen bichha tha.cabin me roshni bahut maddham thi vijayant ke desk pe 1 lamp jal raha tha & pure hall me jo concealed lights thi unhe vijayant ne jaanbujh ke bahut halka kar rakha tha.

"yes.",uski robdar,bhari aavaz ne rambha ko thoda uar nervous kar diya fir bhi vo halke se muskurate hue nape-tule kadmo se aage badhi.usne vijaynat ki shakl pehli baar dekhi thi & uski mardana khubsurti ne uspe gehra asar chhoda.vijayant bhi uske husn ko aankho se pee raha tha.jab vo ladki uske samne aake baithi to uska lund uske jism ki nazdiki & us se aati madmati khushbu ke asar se fauran khada ho gaya.

rambha vijayant ke har sawal ka jawab de rahi thi & ab uski ghabrahat thodi kam bhi ho gayi thi,"ms.rambha,yaha aayi pancho ladkiyo me se aapka tajurba sabse kam hai,aap ye baat janti hain?"

"yes,sir."

"to meri samajh me ye nahi aata ki agency ne aapko yaha kaise bhej diya?",vo is ladki ki mazbuti ko parakhna chahta tha.

"kyuki maine unki naak me dum kar diya tha.",rambha ne vijayant ki aankho me aankhe daal ke kaha.

"kya?!",vijayant hansa.use ladki ka jawab pasand aaya tha,"lekin kyu?"

"sir,aapke liye kaam karna bahut fakhr ki baat hai & fir itne reputed group me kaun nahi kaam karna chahega khas kar ke jab kaam group ke chairman ke liye karna ho.",rambha bahut shalin dhang se muskurayi & vijayant ke zehan me us muskan ne dhamaka kar diya.uska dimagh kalpana ke ghode daudane laga..ye masoom chehra hawas me andha ho kaisa lagta hoga?..ye masti me kaise muskurati hogi?..ye rasile,gulabi honth mere lund ke gird kaise lagenge?..is gore,tarashe jism ki hararat mujhpe kya asar karegi?..iska nanga jism mere nange jism se takrayega to..

"aap bahar wait kariye.",usne khud pe kabu kiya.

"thank you,sir.",rambha bhi usi dusre kamre me aa gayi jaha baki ladkiya baithi thi.

vijayant pashopesh me pada tha.usne apni kuris ke peechhe lage parde ko remote se khola & samne dhoop me chamakti devalay ki oonchi imarrato ko dekhne laga jinme se zyadatar usi ki thi.vo ladkiyo ka shaukeen tha,jo ladki uske dil ko bha jaye use vo apne bistar ki shobha zaroor banata tha lekin aaj uske samne 1 ajib si uljhan thi.usne apne business ke raste me kabhi apne shauk ko aane nahi diya tha magar aaj jaise uaka imtihan liya ja raha tha ki vo kise tavajjoh deta hai-apne business ko ya apne shauk ko.sonam yakinan tajurbe me rambha se kahi aage thi lekin use chunane ka matlab rambha ko khona tha.

apne hatho ko jod apni naak se laga aankhe band kar vo is pareshani ka hal sochne laga ki uska intercom baja,usne use on kiya,"sir,Sameer sir aa gaye hain.aapne bola tha unke aane pe aapko bata du.",agli secretary ke chune jane tak 1 temporary assistant usne rakhi thi,ye vahi thi.

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kramashah.......

 
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