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Jaal -जाल compleet

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जाल पार्ट--21

गतान्क से आगे.

समीर उसकी गंद को चूमते हुए उसकी पीठ पे आ गया था & अब उसके पूरे नंगे जिस्म पे हाथ फिराता हुआ चूम रहा था.समीर ने उसके कंधे को पकड़ उसे पलटा & बाहो मे भर उसे चूमने लगा.मदहोश रंभा पति का पूरा साथ दे रही थी.उसकी चूत मे अब बहुत कासक हो रही थी.समीर ने उसे चूमते हुए उसकी चूत मे दाए हाथ की उंगली घुसा दी & रगड़ने लगा.कुच्छ देर बाद वो अपनी उंगली उसके दाने पे गोल-2 घुमाने लगा.रंभा कमर हिलती बेसब्री से आहे भरती उसकी पकड़ मे छट-पटा रही थी.समीर ने चूत से हाथ खींचा & अपना मुँह वाहा ले गया.उसकी मस्त जाँघो को फैला वो चूत से बह आए रस को चाटने लगा.रंभा मस्ती मे बेचैन हो कमर उचकाने लगी.उसने दाई तरफ सर घुमाया तो उसकी नज़रे समीर के पास लटकते तने लंड से टकरा गयी.काली,चमकती झांतो से घिरा लंड 6 इंच लंबा था.उसका दिल तो किया उसे हाथ मे जाकड़ मुँह मे भर ले मगर अभी ऐसा करना उसे ठीक नही लगा.उस मदहोशी के आलम मे भी उसका दिमाग़ तेज़ी से काम कर रहा था.उसने तय किया कि कुच्छ दिन बाद जब दोनो पूरी तरह 1 दूसरे से खुल जाएँगे तब वो अपने पति के लंड को जी भर के चुसेगी.अभी के लिए उसने अपने दिल पे पत्थर रख अपनी हसरत को दबा लिया.

समीर तब तक उसकी चूत चाटता रहा जब तक रंभा ने उसके सर को जाँघो के बीच भींच,चूत पे दबा,कमर उचकाती झाड़ ना गयी.समीर उसकी चूत से उठा & उसकी जाँघो को फैला उसके उपर लेट गया.उसका लंड रंभा की चूत पे दबा & उसका दिल किया कि अपने हाथो से खुद वो उसे अपनी तड़पति चूत का रास्ता दिखा दे लेकिन वो मजबूर थी.समीर भी अब चुदाई के लिए उतावला था.उसने जल्दी से 1 हाथ नीचे कर लंड को चूत मे घुसाया & उसकी कसावट से हैरत मे पड़ गया.उसे लगा की रंभा बिल्कुल कुँवारी है & उसका कुँवारापन दूर करने की ख़ुशनसीबी उसी के लंड को मिली है.इस बात से वो और जोश मे आ गया & 1 ज़ोर का धक्का दिया.रंभा धक्के की तेज़ी से कराही & समीर को लगा कि उसकी दुल्हन कुँवारी चूत मे पहली बार मर्दाने अंग के घुसने से दर्द महसूस कर रही है.

उसने रंभा के खूबसूरत चेहरे को हाथो मे भर के चूमते हुए उसे दिलासा दिया कि दर्द अभी ख़त्म हो जाएगा & रंभा उस से लिपटी मन ही मन हँसने लगी..इस से बड़े लंड वो अपनी चूत & गंद मे ले चुकी थी.उसे अब बस इस लंड से झड़ना ही था.उसने समीर की पीठ पे प्यार से हाथ फेरे & अपनी कमर उचकाई.उसका इशारा समझ समीर ने धक्के लगाने शुरू कर दिए.रंभा का सर बिस्तर के किनारे पे था & उसके बाल नीचे लटक रहे थे.उसने मस्ती मे सर को पीछे करते हुए अपनी टाँगे अपने पति की कमर पे कसी & उसकी पीठ मे नाख़ून धंसा दिए & नीचे से कमर उचकाने लगी.समीर भी उसकी कसी चूत मे लंड धंसाए ज़ोर-2 से धक्के लगा रहा था.

रंभा की चूत की कसक अब अपनी चरम पे थी.अपने पति को आगोश मे कसे वो आहे भरते हुए ज़ोर से चीखी & अपना सर बिस्तर से नीचे लटका दिया & झाड़ गयी.उस वक़्त उसकी चूत ने अपनी सिकुड़ने-फैलने की मस्तानी हरकत शुरू कर दी & समीर उस अंजाने,अनोखे एहसास से पागल हो उठा.उसके लंड पे चूत की पकड़ इतनी बढ़ गयी थी कि पूछो मत!वो रंभा के सीने से सर उपर उठाके ज़ोर से चीखा & उसका बदन झटके खाने लगा.उसका लंड अपना गाढ़ा,गर्म वीर्य अपनी दुल्हन की चूत मे छ्चोड़ रहा था.वो हानफते हुए उसकी मोटी चूचियो पे गिरा तो सुकून से भरी रंभा ने उसके सर को बाहो मे भर सीने पे और दबा दिया.ऐसे कोमल,खूबसूरत तकिये पे भला किसे नींद नही आएगी!समीर भी कुच्छ पॅलो मे वैसे ही अपनी बीवी की कसी चूचियो पे सर रखे नींद की गोद मे चला गया & उसके साथ-2 अपने आने वाली ज़िंदगी की खुशली के सपने देखती रंभा भी.

रंभा & समीर की शादी को 1 महीना बीत गया & इस महीने मे 2 & नये रिश्ते जुड़े & 2 पहले से ही जुड़े रिश्ते & मज़बूत हुए.पहला रिश्ता जुड़ा विजयंत मेहरा & उसकी सेक्रेटरी या फिर यू कहे उसकी कंपनी मे ब्रिज कोठारी की जासूस सोनम रौत का.सोनम आने अपनी सहेली से जो बात मज़ाक मे कही थी,उसपे अमल किया & 1 दिन अपने बॉस को कमीज़ के 2 बटन्स खोल,कुच्छ ज़्यादा झुकते हुए कॉफी पेश कर दी.

ह्सीन सोनम के साँवले अंगो की गोलाई देख विजयंत के अंदर उसे पाने की ललक जाग उठी & अब वो अपनी सेक्रेटरी के करीब आने की कोशिश करने लगा.सोनम तो यही चाहती ही थी & 1 दिन जब उसने देर तक काम करने के बाद थोड़ी थकान मेशसूस करते विजयंत को अपनी गर्दन सहलाते देखा तो वो उसके कंधे दबाने के बहाने उसके पीछे आ गयी & अपने कोमल हाथो से उसका दर्द दूर करने की कोशिश करने लगी.

उसके हाथो की च्छुअन ने विजयंत की वासना को जगा दिया & उसने उसका हाथ पकड़ के आगे खींचा तो वो लड़खड़ाती उसकी गोद मे गिर गयी.उसका बॉस इस तरह अचानक हमला करेगा ये सोनम ने सोचा भी नही था & उसकी निगाहें शर्म से झुक गयी.अपनी गंद के नीचे वो पल-2 कड़े होते विजयंत के लंड की हरकतें महसूस कर रही थी & उसका जिस्म भी गर्म होने लगा था.

वो थोड़ा सकूचाई,थोड़ी झिझकी लेकिन फिर उसने विजयंत के इसरार पे अपनी झिझक छ्चोड़ दी & उसकी बाहो मे समा गयी.उसके मज़बूत हाथ उसकी नंगी टाँगो से होते हुए उसकी स्कर्ट मे घुसने की कोशिश करने लगे तो उसके दिल मे मस्ती & खुशी की लहरें उठने लगी.विजयंत इस खेल का माहिर खिलाड़ी था & जब तक सोनम के कपड़े उतरे तब तक वो 1 बार झाड़ चुकी थी & बहुत मस्ती मे थी.

विजयंत के इशारे पे उसने अपने हाथो से अपने बॉस को नंगा किया & उसके तगड़े लंड को देखते ही उसपे टूट पड़ी.वो ज़मीन पे बैठ गयी & कुर्सी पे बैठे विजयंत के लंड को चूसने लगी.विजयंत उसके बँधे बालो को खोल उनमे उंगलिया फिराने लगा & मज़े मे आँखे बंद कर ली & आँखे बंद करते ही उसके ज़हन मे रंभा का हसीन चेहरा कौंध उठा & उसके दिल मे फिर से उसे पाने की हसरत जोकि अब कभी पूरी नही हो सकती थी,फिर से उठने लगी.

उसने कुच्छ गुस्से,कुच्छ बेबसी & कुच्छ जिस्म मे उठती मज़े की लहरो से आहत हो अपनी सेक्रेटरी का सर अपने लंड पे & झुका दिया.सोनम का पूरा मुँह लंड से भर गया & उसे सांस लेने मे तकलीफ़ होने लगी.उसने च्चटपटाए हुए अपना सर पीछे खींचा.विजयंत अब तक खुद पे काबू पा चुका था.

"सॉरी.तुम्हारे चूसने ने मुझे जोश से पागल कर दिया था.",सफाई से झूठ बोलते हुए उसने उसे अपने डेस्क पे बिठा दिया & अपनी कुर्सी आगे खींची & उसकी चूत पे अपनी ज़ुबान फिराने लगा.सोनम कभी पीछे अपने डेस्क को पकड़ती तो कभी अपने बॉस के बालो & कंधो को.किसी मर्द ने कभी इस तरह से उसकी चूत नही चॅटी थी,ब्रिज ने भी नही.विजयंत की ज़ुबान उसकी चूत से जैसे सारा रस पी लेना चाहती थी.सोनम को होश नही रहा की वो कितनी बार झड़ी,जब होश आया तो उसने खुद को डेस्क पे लेटे पाया.उसे पता नही था मगर झड़ने से निढाल हो वो खुद ही डेस्क पे लेट गयी थी.

चूत मे दर्द सा महसूस हुआ तो उसने आँखे खोली,विजयंत अपना मोटा,लंबा,तगड़ा लंड उसकी चूत मे घुसा रहा था.ऐसे लंड से चुदवाना तो दूर सोनम ने ऐसा लंड देखा भी नही था.उसने डेस्क के किनारे पकड़ लिए & च्चटपटाने लगी.लंड उसकी चूत को फैला रहा था,उसे दर्द हो रहा था लेकिन उसे ये लंड अपने अंदर चाहिए ही था!

विजयंत ने बहुत आराम से धीरे-2 लंड उसकी चूत मे घुसाया लेकिन पूरा नही.लंड का कुच्छ हिस्सा जान-बुझ के उसने बाहर छ्चोड़ रखा था क्यूकी उसे पता था कि पूरा लंड अंदर गया तो फिर चुदाई मे वक़्त ज़्यादा लगेगा.जब चुदाई शुरू हुई तो सोनम तो हवा मे उड़ने लगी.उसके जिस्म मे मस्ती & दिल मे खुशी इतनी भर गयी थी कि पूछो मत!

विजयंत खड़ा हो उसकी छातियो मसलता उसकी चुदाई कर रहा था लेकिन उसकी आँखो के सामने रंभा का ही चेहरा घूम रहा था.उसके धक्के तेज़ होते गये & सोनम की आहे भी & कुच्छ ही पॅलो बाद वो 1 आख़िरी बार झड़ी & अपनी चूत मे उसने अपने बॉस का गर्म वीर्य च्छूटता महसूस किया.सोनम को तो सुकून मिल गया था लेकिन विजयंत को सुकून नही था,उसके दिल मे आग भड़क रही थी जोकि केवल उसकी बहू के हुस्न की बारिश से ही शांत हो सकती थी.

ये थी शुरुआत इस रिश्ते की.इसके बाद जब भी मौका मिलता विजयंत उसे दफ़्तर मे या अपने होटेल सूयीट मे चोद देता था.

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दूसरा रिश्ता जो जुड़ा वो था ब्रिज & कामया का.जब ब्रिज ने ये सुना कि विजयंत मानपुर मे फिल्म सिटी बनाने वाला है उसके ज़हन मे भी इस धंधे मे उतरने की बात घूमने लगी थी.मन ही मन वो ये जानता था की विजयंत 1 बहुत समझदार & शातिर कारोबारी था & घाटे के सौदे मे हाथ नही डालता था.इतने दिनो से फिल्म प्रोड्यूस करने से उसे तजुर्बा हो गया था & फिल्म सिटी बनाने के बाद वो तो इस धंधे का बेताज बादशाह बन जाता!

तभी उसने सोचा कि वो भी फ़िल्मे बनाना शुरू कर दे ताकि जब मानपुर वाली ज़मीन उसके हाथो मे आए तो वाहा अपनी फिल्म सिटी बनाके वो विजयंत को 1 करारी हार दे.

फिल्म प्रोडक्षन शुरू करने से पहले उसने मंत्री से 1 बहुत ज़रूरी मुलाकात की,"नमस्कार,मंत्री जी!"

"नमस्कार कोठारी साहब.आइए बैठिए.",मंत्री के दफ़्तर मे दोनो सोफे पे बैठ गये तो ब्रिज ने पहले उनका हाल-चल पुचछा & फिर अपने साथ आए अपने 1 आदमी को सिहरा किया तो उसने 1 लिफ़ाफ़ा उसे थमाया.

"मंत्री जी,आपके इंजिनियरिंग कॉलेज के लिए 1 छ्होटी सी भेंट है.",मंत्री जी के होंठो पे चेक पे लिखी रकम लालच पूरा होने की खुशी से पैदा हुई मुस्कान चमक उठी.मंत्री जानता था का ये सब मानपुर का टेंडर पाने के लिए दिया जा रहा था पर उसे क्या तकलीफ़ होनी थी इस बात से!उसका तो फ़ायदा ही फ़ायदा था.ब्रिज ने बड़ी सफाई से मंत्री जी के इलाक़े,उनके कॉलेज से बात मानपुर की ओर घुमा दी,"..अब मंत्री जी,हमसे बेहतर काम कौन कर सकता है वाहा!..& फिर आप तो जानते ही हैं की आपके साथ मिलके काम करने को मैं कितना उतावला रहता हू."

"हां,कोठारी साहब..लेकिन अब सरकारी काम मे दखल तो मैं दूँगा नही..& पहले सरकार को टेंडर निकालने तो दीजिए..फिर रकमे भरी जाएँगी..उसके बाद..-"

"-..मंत्री जी,हम तो बस आपको जानते हैं..चलिए..अब चलता हू..अपनी बात तो मैने कह दी..आगे आप मालिक हैं.",ब्रिज ने उठके हाथ जोड़ दिए तो मंत्री भी उठ खड़ा हुआ & उसे कॅबिन के दरवाज़े तक छ्चोड़ने आया,उसके साथ आया आदमी बाहर निकला & मंत्री का पीए भी तो ब्रिज रुका & घूम के फिर से मंत्री से मुखातिब हुआ,"..मैने सुना है कि आप अपने कॉलेज के साथ 1 एमबीए का कॉलेज भी खोलना चाहते हैं..मंत्री जी..आगे बढ़ें & खोल दें..हम तो हैं ही आपकी सेवा मे खड़े हुए..अच्छा.नमस्कार!"

"सर,मेहरा & कोठारी..",मंत्री का पा ब्रिज को उसकी गाड़ी तक छ्चोड़ने के बाद वापस अपने बॉस के पास आ गया था,"..दोनो लगे हैं इस टेंडर के पीछे.वैसे 1 बात पुछु?",उसने अपनी जेब से पान निकाल उन्हे पान पेश किया.

"हूँ.",मंत्री जी ने उसके हाथो से गिलोरी ले मुँह मे डाली.

"आप किसपे मेहेरबान होंगे?",पीए च्छिच्चोरे ढंग से वैसी ह्नसी हंसा जैसे सिर्फ़ चम्चे हंस सकते हैं.

"अरे भाई..",मंत्री जी ने पान के रस का स्वाद लिया,"..जो ज़्यादा चढ़ावा चढ़ाएगा,प्रसाद तो उसी को देंगे ना!अब देखो कौन ज़्यादा दिलदार है!",& कॅबिन मे ठहाके गूँज उठे.

ब्रिज ने इसके बाद कुच्छ तजुर्बेकार लोगो को अपने साथ मिला के अपनी फिल्म कंपनी खोल ली & 1 बहुत माशूर डाइरेक्टर को साइन कर लिया.इस डाइरेक्टर की पिच्छली फिल्म को ना केवल जानकरो की वाह-वाही मिली थी बल्कि बॉक्स-ऑफीस पे भी इसने खूब धमाल मचाया था.इस वक़्त उसके पास 1 बहुत ज़ोरदार कहानी थी & 1 बहुत बड़ा सूपरस्टार उसके साथ अपनी आधी फीस पे काम करने को तैय्यार था.डाइरेक्टर हेरोयिन के लिए कामया को चाहता था & इसी सिलसिले मे ब्रिज & कामया की पहली मुलाकात हुई.कामया का दिल तो किया की फ़ौरन फिल्म साइन कर ले लेकिन उसे पता था कि उसके गॉडफादर & उसके आशिक़ विजयंत को उसका ब्रिज के साथ काम करना बिल्कुल पसन्द नही आएगा मगर यू इस तरह वो ऐसी बड़ी & शर्तिया हिट फिल्म को ठुकरा भी नही सकती थी.

"कोठारी साहब.."

"ब्रिज सिर्फ़ ब्रिज."

"ओके..ब्रिज..",वो शरमाते हुए हँसी.कामया तो मर्दो की फ़ितरत पे कितना लिख सकती थी & उसे उनकी ऐसी हर्कतो से कोई फ़र्क भी नही पड़ता था,उसे बस अपने फ़ायडे से मतलब था,"..मुझे बस 2 दिन का वक़्त दीजिए.अभी जो फिल्म मैं कर रही हू,उसमने थोड़ा वक़्त भी लग सकता है..बस मैं ये देख लू क़ी कितना वक़्त & लगेगा फिर मैं आपकी फिल्म साइन कर लूँगी."

"लगता है आप झिझक रही हैं,कामया जी?",ब्रिज मुस्कुराया.

"नही ब्रिज बिल्कुल नही & ये क्या मुझे मना किया & खुद मुझे कामया जी कह रहे हैं!",कामया ने इतराते हुए कहा.

"ओके..कामया तो फिर फ़ौरन साइन करने मे क्या परेशानी है तुम्हे?",ब्रिज के होटेल मे ये मीटिंग हो रही थी.दोनो बार के सामने स्टूल्स पे बैठे थे .बार खुलने का वक़्त अभी हुआ नही था & इसलिए उन दोनो के अलावा वाहा बस उनकी ड्रिंक्स बनाता 1 बारटेंडर ही था.ब्रिज ने बारटेंडर से लेके 1 मोकक्थाइल का ग्लास कामया को थमाया & खुद स्कॉच का 1 पेग उठाया,"तो योउ.",उसने उसके नाम का जाम उठाया.

"मैने जो कहा बस वही परेशानी है,ब्रिज मेरा भरोसा करो."

"ओके..मैं 2 दिन नही 4 दिन इंतेज़ार करूँगा मगर मुझे तुम्हारी हां सुननी है."

"ओके..बाबा!",कामया हँसी & बार पे रखे उसके हाथ पे अपना हाथ रख 1 घूँट भरा & पीते हुए ग्लास के उपर से 1 शोख निगाह ब्रिज पे डाली.ब्रिज ने भी उस से नज़र मिलाई & अपनी कोट की जेब मे हाथ डाला.

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क्रमशः.......

JAAL paart--21

gataank se aage.

sameer uski gand ko chumte hue uski pith pe aa gaya tha & ab uske pure nange jism pe hath firata hua chum raha tha.sameer ne uske kandhe ko pakd use palta & baaho me bhar use chumne laga.madhosh rambha pati ka pura sath de rahi thi.uski chut me ab bahut kask ho rahi thi.sameer ne use chumte hue uski chut me daye hath ki ungli ghusa di & ragadne laga.kuchh der bad vo apni ungli uske dane pe gol-2 ghumane laga.rambha kamar hilati besabri se aahe bharti uski pakad me chhatpata rahi thi.sameer ne chut se hath khincha & apna munh vaha le gaya.uski mst jangho ko faila vo chut se beh aaye ras ko chatne laga.rambha masti me bechain ho kamar uchkane lagi.usne dayi taraf sar ghumaya to uski nazre sameer ke pas latakte tane lund se takra gayi.kali,chamakti jhanto se ghira lund 6 inch lumba tha.uska dil to kiya use hath me jakd munh me bhar le magar abhi aaisa karna use thik nahi laga.us madhoshi ke alam me bhi uska dimagh tezi se kaam kar raha tha.usne tay kiya ki kuchh din baad jab dono puri tarah 1 dusre se khul jyenge tab vo apne pati ke lund ko ji bhar ke chusegi.abhi ke liye usne apne dil pe patthar rakh apni hasrat ko daba liya.

sameer tab tak uski chut chaatata raha jab tak rambha ne uske sar ko jangho ke beech bhinch,chut pe daba,kamar uchkati jhad na gayi.sameer uski chut se utha & uski jangho ko faila uske upar let gaya.uska lund rambha ki chut pe daba & uska dil kiya ki apne hatho se khud vo use apni tadapti chut ka rasta dikha de lekin vo majbur thi.sameer bhi ab chudai ke liye utawla tha.usne jaldi se 1 hath neeche kar lund ko chut me ghusaya & uski kaswat se hairat me pad gaya.use laga ki rambha bilkul kunwari hai & uska kunwarapan door karne ki khushnasibi usi ke lund ko mili hai.is baat se vo aur josh me aa gaya & 1 zor ka dhakka diya.rambha dhakke ki tezi se karahi & sameer ko laga ki uski dulhan kunwari chut me pehli baar mardane ang ke ghusne se dard mehsus kar rahi hai.

usne rambha ke khubsurat chehre ko hatho me bhar ke chumte hue use dilasa diya ki dard abhi khatm ho jayega & rambha us se lipti man hi man hansne lagi..is se bade lund vo apni chut & gand me le chuki thi.use ab bas is lund se jhadna hi tha.usne sameer ki pith pe pyar se hath fiaraya & apni kamar uchkayi.uska ishara samajh sameer ne dhakke lagane shuru kar diye.rambha ka sar bistar ke kinare pe tha & uske baal neeche latak rahe the.usne masti me sar ko peechhe karte hue apni tange apne pati ki kamar pe kasi & uski pith me nakhun dhansa diye & neeche se kamar uchkane lagi.sameer bhi uski kasi chut me lund dhansaye zor-2 se dhakke laga raha tha.

rambha ki chut ki kasak ab apni charam pe thi.apne pati ko agosh me kase vo aahe bharte hue zor se chikhi & apna sar bsitar se neeche latka diya & jhad gayi.us waqt uski chut ne apni sikudne-failne ki mastani harkat shuru kar di & sameer us anjane,anokhe ehsas se pagal ho utha.uske lund pe chut ki pakad itni badh gayi thi ki puchho mat!vo rambha ke seene se sar upar uthake zor se chikha & uska badan jhatke khane laga.uska lund apna gadha,garm virya apni dulhan ki chut me chhod raha tha.vo hanfte hue uski moti choochiyo pe gira to sukun se bhari rambha ne uske sar ko baaho me bhar seene pe aur daba diya.aise komal,khubsurat takiye pe bhala kise nind nahi aayegi!sameer bhi kuchh palo me vaise hi apni biwi ki kasi chhatiyo pe sar rakhe nind ki god me chala gaya & uske sath-2 apne aane vali zindagi ki khushali ke sapne dekhtee rambha bhi.

Rambha & Sameer ki shadi ko 1 mahina beet gaya & is mahine me 2 & naye rishte jude & 2 pehle se hi jude rishte & mazbut hue.pehla rishta juda Vijayant Mehra & uski secretary ya fir yu kahe uski company me Brij Kothari ki jasus Sonam raut ka.sonam ane apni saheli se jo baat mazak me kahi thi,uspe amal kiya & 1 din apne boss ko kamiz ke 2 buttons khol,kuchh zyada jhukte hue coffee pesh kar di.

hseen sonam ke sanwle ango ki golayi dekh vijayant ke andar use pane ki lalak jaag uthi & ab vo apni secretary ke kareeb aane ki koshish karne laga.sonam to yehi chahti hi thi & 1 din jab usne der tak kaam karne ke baad thodi thakan meshsus karte vijayant ko apni gardan sehlate dekha to vo uske kandhe dabane ke bahane uske peechhe aa gayi & apne komal hatho se uska dard door karne ki koshish karne lagi.

uske hatho ki chhuan ne vijayant ki vasna ko jaga diya & usne uska hath pakad ke aage khincha to vo ladkhadati uski god me gir gayi.uska boss is tarah achanak humla karega ye sonam ne socha bhi nahi tha & uski nigahen sharm se jhuk gayi.apni gand ke neeche vo pal-2 kade hote vijayant ke lund ki harkaten mehsus kar rahi thi & uska jism bhi garm hone laga tha.

vo thoda sakuchayi,thodi jhijhki lekin fir usne vijayant ke israr pe apni jhijhak chhod di & uski baaho me sama gayi.uske mazbut hath uski nangi tango se hote hue uski skirt me ghusne ki koshish karne lage to uske dil me masti & khushi ki leharen uthne lagi.vijayant is khel ka mahir khiladi tha & jab tak sonam ke kapde utre tab tak vo 1 baar jhad chuki thi & bahut masti me thi.

vijayant ke ishare pe usne apne hatho se apne boss ko nanga kiya & uske tagde lund ko dekhte hi uspe toot padi.vo zameen pe baith gayi & kursi pe baithe vijayant ke lund ko chusne lagi.vijayant uske bandhe baalo ko khol unme ungliya firane laga & maze me aankhe band kar li & aankhe band karte hi uske zehan me rambha ka haseen chehra kaundh utha & uske dil me fir se use pane ki hasrat joki ab kabhi puri nahi ho sakti thi,fir se uthne lagi.

usne kuchh gusse,kuchh bebasi & kuchh jism me uthati maze ki lehro se aahat ho apni secretary ka sar apne lund pe & jhuka diya.sonam ka pura munh lund se bhar gaya & use sans lene me taklif hone lagi.usne chhatpatae hue apna sar peechhe khincha.vijayant ab tak khud pe kabu pa chuka tha.

"sorry.tumhare chusne ne mujhe josh se pagal kar diya tha.",safai se jhuth bolte hue usne use apne desk pe bitha diya & apni kursi aage khinchi & uski chut pe apni zuban firane laga.sonam kabhi peechhe apne desk ko pakadti to kabhi apne boss ke balo & kandho ko.kisi mard ne kabhi is tarah se uski chut nahi chati thi,brij ne bhi nahi.vijayant ki zuban uski chut se jaise sara ras pi lena chahti thi.sonam ko hosh nahi raha ki vo kitni baar jhadi,jab hosh aaya to usne khud ko desk pe lete paya.use pata nahi tha magar jhadne se nidhal ho vo khud hi desk pe let gayi thi.

chut me dard sa mehsus hua to usne aankhe kholi,vijayant apna mota,lumba,tagda lund uski chut me ghusa raha tha.aise lund se chudna to door sonam ne aisa lund dekha bhi nahi tha.usne desk ke kinare pakad liye & chhatpatane lagi.lund uski chut ko faila raha tha,use dard ho raha tha lekin use ye lund apne andar chahiye hi tha!

vijayant ne bahut aaram se dhire-2 lund uski chut me ghusaya lekin pura nahi.lund ka kuchh hissa jaan-bujh ke usne bahar chhod rakha tha kyuki use pata tha ki pura lund andar gaya to fir chudai me waqt zyada lagega.jab chudai shuru hui to sonam to hawa me udne lagi.uske jism me masti & dil me khushi itni bhar gayi thi ki puchho mat!

vijayant khada ho usaki chhatiya masalta uski chudai kar raha tha lekin uski aankho ke samne rambha ka hi chehra ghum raha tha.uske dhakke tez hote gaye & sonam ki aahe bhi & kuchh hi palo baad vo 1 aakhiri baar jhadi & apni chut me usne pane boss ka garm virya chhutata mehsus kiya.sonam ko to sukun mil gaya tha lekin vijayant ko sukun nahi tha,uske dil me aag bhadak rahi thi joki keval uski bahu ke husn ki barish se hi shant ho sakti thi.

ye thi shuruat is rishte ki.iske baad jab bhi mauka milta vijayant use daftar me ya pane hotel suite me chod deta tha.

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dusra rishta jo juda vo tha brij & Kamya ka.jab brij ne ye suna ki vijayant Manpur me film city banane wala hai uske zehan me bhi is dhandhe me utarne ki baat ghumne laghi thi.man hi man vo ye janta tha ki vijayant 1 bahut samajhdar & shatir karobari tha & ghate ke saude me hath nahi dalta tha.itne dino se film produce karne se use tajurba ho gaya tha & film city banaane ke baad vo to is dhandhe ka betaj badshah ban jata!

tabhi usne socha ki vo bhi filme banana shuru kar de taki jab manpur vali zamin uske hatho me aaye to vaha apni film city banake vo vijayant ko 1 karari haar de.

film production shuru karne se pehle usne mantri se 1 bahut zaruri mulakat ki,"namaskar,mantri ji!"

"namaskar kothari sahab.aaiye baithiye.",mantri ke daftar me dono sofe pe baith gaye to brij ne pehle unka haal-chal puchha & fir apne sath aaye apne 1 aadmi ko sihara kiya to usne 1 lifafa use thamaya.

"mantri ji,aapke engineerinmg college ke liye 1 chhoti si bhent hai.",mantri ji ke hotho pe check pe likhi rakam lalach pura hone ki khushi se paida hui muskan chamak uthi.mantri janta tha ka ye sab manpur ka tender pane ke liye diya ja raha tha par use kya taklif honi thi is baat se!uska to fayda hi fayda tha.brij ne badi safai se mantri ji ke ilake,unke college se baat manpur ki or ghuma di,"..ab mantri ji,humse behtar kaam kaun kar sakta hai vaha!..& fir aap to jante hi hain ki aapke sath milke kaam karne ko main kitna utawla rehta hu."

"haan,kothari sahab..lekin ab sarkari kaam me dakhal to main dunga nahi..& pehle sarkar ko tender nikalne to dijiye..fir rakme bhari jayengi..uske baad..-"

"-..mantri ji,hum to bas aapko jante hain..chaliye..ab chalta hu..apni baat to maine keh di..aage aap malki hain.",brij ne uthke hath jo diye to mantri bhi uth khada hu & use cabin ke darwaze tak chhodne aaya,uske sath aaya aadmi bahar nikla & mantri ka PA bhi to brij ruka & ghum ke fir se mantri se mukhatib hua,"..maine suna hai ki aap apne college ke sath 1 MBA ka college bhi kholna chahte hain..mantri ji..aage badhen & khol den..hum to hain hi aapki sewa me khade hue..achha.namaskar!"

"sir,mehra & kothari..",mantri ka PA brij ko uski gadi tak chhodne ke baad vapas apne boss ke paas aa gaya tha,"..dono lage hain is tender ke peechhe.vaise 1 baat puchhun?",usne apni jeb se panbatta nikal unhe paan pesh kiya.

"hun.",mantri ji ne uske hatho se gilori le munh me dali.

"aap kispe meherbaan honge?",PA chhichhore dhang se vaisi hnasi hansa jaise sirf chamche hans sakte hain.

"are bhai..",mantri ji ne paan ke ras ka swad liya,"..jo zyada chadhawa chadhayega,prasad to usi ko denge na!ab dekho kaun zyada dildar hai!",& cabin me thahake gunj uthe.

brij ne iske baad kuchh tajurbekaar logo ko apne sath mila ke apni film company khol li & 1 bahut mashoor director ko sign kar liya.is director ki pichhli film ko na keval jankaro ki vaah-vahi mili thi balki box-office pe bhi isne khub dhamal machaya tha.is waqt uske paas 1 bahut zordar kahani thi & 1 bahut bada superstar uske sath apni aadhi fees pe kaam karne ko taiyyar tha.director heroine ke liye kamya ko chahta tha & isi silsile me brij & kamya ki pehli mulakat hui.kamya ka dil to kiya ki fauran film sign kar le lekin use pata tha ki uske godfather & uske aashiq vijayant ko uska brij ke sath kaam karna bilkul pasnd nahi aayega magar yu is tarah vo aisi badi & shartiya hit film ko thukra bhi nahi sakti thi.

"kothari sahab.."

"brij sirf brij."

"ok..brij..",vo sharmate hue hansi.kamya to mardo ki fitrat pe kitan likh sakti thi & use unki aisi harkato se koi fark bhi nahi padta tha,use bas apne fayde se matlab tha,"..mujhe bas 2 din ka waqt dijiye.abhi jo film main kar rahi hu,usmne thoda waqt bhi lag sakta hai..bas main ye dekh lu ki kitna waqt & lagega fir main aapki film sign kar lungi."

"lagta hai aap jhijhak rahi hain,kamya ji?",brij muskuraya.

"nahi brij bilkul nahi & ye kya mujhe mana kiya & khud mujhe kamya ji keh rahe hain!",kamya ne itrate hue kaha.

"ok..kamya to fir fauran sign karne me kya pareshani hai tumhe?",brij ke hotel me ye meeting ho rahi thi.dono bar ke samne stools pe baithe the .bar khulne ka waqt abhi hua nahi tha & isliye un dono ke alawa vaha bas unki drinks banata 1 bartender hi tha.brij ne bartender se leke 1 mocktail ka glass kamya ko thamaya & khud scotch ka 1 peg uthaya,"to you.",usne uske naam ka jaam uthaya.

"maine jo kaha bas vahi pareshani hai,brij mera bharosa karo."

"ok..main 2 din nahi 4 din intezar karunga magar mujhe tumhari haan sunani hai."

"ok..baba!",kamya hansi & bar pe rakhe uske hath pe apna hath rakh 1 ghunt bhara & pite hue glass ke upar se 1 shokh nigah brij pe dali.brij ne bhi us se nazar milayi & apni coat ki jeb me hath dala.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--22

गतान्क से आगे.

"ये हमारी दोस्ती के नाम.",उसने हीरो का ब्रेस्लेट निकाल के उसकी बाई,गोरी कलाई पे बाँध दिया.

"वाउ!..कितना खूबसूरत है..!",कामया की आँखो मे 1 पल को लालच की चमक आ गयी थी,"..लेकिन ये बहुत कीमती होगा..मैं कैसे ले सकती हू..प्लीज़ ब्रिज इसे वापस ले लो!",उसने उतारने का नाटक किया तो ब्रिज ने उसका हाथ थाम लिया.

"प्लीज़..कामया इसे मत ठुकराव..मेरे लिए रख लो.",ब्रिज ने उसके हाथो पे पकड़ मज़बूत कर दी तो उसने ऐसी सूरत बनाई कि ना चाहते हुए भी वो उस तोहफे को कबूल रही है.

अगली मुलाकात मे कामया ने उसकी फिल्म साइन कर ली & उस खुशी मे ब्रिज ने उसे 1 हीरो का हार दिया.कामया ने उसे ये हार खुद पहनाने को कहा& उसकी ओर पीठ कर अपने खुले बाल बाए कंधे के उपर से आगे कर लिए.उसकी ड्रेस का बॅक बहुत गहरा था बल्कि उसकी कमर तक उसकी पीठ नंगी ही थी.ब्रिज उसके संगमरमरी बदन को देख जोश से भर उठा.कामया ने भी उसके दिए ब्रेस्लेट से अंदाज़ा लगा लिया था कि ब्रिज के साथ काम करने मे उसे बहुत फ़ायदा था & आज वो पूरी तैइय्यारी के साथ आई थी.

ब्रिज ने उसके गले मे हार पहनाया & उसकी पीठ पे हाथ फिराने लगा.

"इरादे ठीक नही लगते तुम्हारे!",कामया मुस्कुराइ लेकिन उस से दूर नही हुई.

"तुम्हे देख के इरादे अपनेआप बुरे हो जाते हैं.",ब्रिज की गर्म साँसे उसके दाए कंधे पे पड़ी तो वो हंस दी & सर पीछे झटका.ऐसा करने से उसकी लंबी गर्दन जिसमे ब्रिज का दिया हार चमक रहा था ब्रिज की निगाहो के सामने आई & ब्रिज उसे चूमने से खुद को रोक नही पाया.कामया उस से दूर छितकी,उसकी आँखो मे उसे दूर रहने का हुक्म था मगर साथ ही पास बुलाने की सोची भी थी.ब्रिज ऐसे खेलो का पुराना खिलाड़ी था.वो आगे बढ़ा & उसने इस बार सीधा कामया को बाहो मे भर लिया.वो कसमसाई & बस उसे मना करने के नाटक करती रही लेकिन थोड़ी ही देर बाद वो ब्रिज के साथ उसकी बाहो मे बिल्कुल नंगी बिस्तर पे पड़ी थी & खुद उसके मुँह मे अपनी ज़ुबान घुसा के उसकी किस का जवाब दे रही थी.उस शाम के ख़त्म होने तक कामया 1 कीमती हार,1 बड़ी फिल्म & 1 नये आशिक़ को हासिल कर चुकी थी.

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वो दो रिश्ते जो मज़बूत हुए उनमे पहला था सोनिया मेहरा & विजयंत का.सोनिया अब इस सच्चाई को मान चुकी थी कि वो ब्रिज & विजयंत,दोनो के बिना नही रह सकती थी & अगर उसे कभी भी इन दोनो मर्दो मे से किसी 1 को चुनने को कहा जाय तो वो ऐसा करने से मर जाना ज़्यादा पसंद करेगी.डेवाले मे दोनो को बहुत संभाल के मिलना पड़ता था.सोनिया विजयंत के किसी होटेल मे तो जा सकती नही थी इसलिए दोनो फोन पे बात करके पहले किसी पब्लिक प्लेस,जैसे कि माल या रेस्टोरेंट मे मिलना तय करे & वाहा से विजयंत उसे किसी जगह ले जाता जहा सोनिया उसके जिस्म को खुद मे उतारने लगती.

समीर के अपने परिवार से अलग होने के 2 दिन बाद ही ब्रिज मंत्री से मिलने गया था & उसकी गैरमौजूदगी का फ़ायदा उठाने के लिए सोनिया ने अपने आशिक़ को फोन किया & शहर के ट्रेंड्ज़ माल मे मिलना तय किया.सोनिया अपने ड्राइवर के साथ माल पहुँची & उसे कार पार्किंग मे ये कहते हुए इंतेज़ार करने को बोला कि उसे 2-3 घंटे लग सकते हैं शॉपिंग मे.उसके बाद वो माल मे घुसी & उसके दूसरे दरवाज़े से माल के पीछे की तरफ की एग्ज़िट से बाहर निकली जहा 1 मर्सिडीस उसका इंतेज़ार कर रही थी.वो सीधा उस कार की आगे की सीट पे बैठ गयी & अंदर बैठे विजयंत ने उसे बाहो मे भर के चूम लिया.पूरे रास्ते वो उस से चिपकी बैठी रही & उसकी शर्ट के अंदर अपने बेसब्र हाथ फिराती रही.

सोनिया ने घुटनो तक की स्कर्ट & आधे बाज़ू का गहरा नीला टॉप पहना था.जब भी कार रोकनी पड़ती विजयंत उसके कपड़ो मे हाथ डाल उसके नाज़ुक अंगो को छेड़ देता.ऐसा करने से मंज़िल तक पहुचते-2 सोनिया की स्कर्ट उसकी कमर तक उठ गयी थी & उसका टॉप तो पूरा उठा चुका था & उसका ब्रा भी & उसकी दोनो छातियाँ नंगी हो चुकी थी.गौर से देखने पे विजयंत की ज़ुबान का रस उसके कड़े निपल्स पे देखा जा सकता था.विजयंत कार 1 ऐसी इमारत मे ले गया जोकि उसी की कंपनी की थी लेकिन फिलहाल किन्ही कारण से बिल्कुल खाली पड़ी थी.दरबान ने उसकी गाड़ी देख सलाम ठोंका,उस बेचारे को क्या पता था कि काले शीशो के पीछे बैठे उसके मालिक ने उसे देखा भी नही था क्यूकी उसका ध्यान तो कार घुसते हुए अपनी महबूबा के नर्म होंठो पे था.

विजयंत कार को सीधा बिल्डिंग के दरवाज़े तक ले गया & नीचे उतरा.दरबान ने गेट बंद कर दिया था & अपने कॅबिन मे बैठ गया था.विजयंत ने सोनिया का दरवाज़ा खोला तो वो अपने कपड़े ठीक करती उतरी.विजयंत ने उसके कंधो को दाई बाँह मे घेरा & बिल्डिंग के अंदर दाखिल हो गया.उसने लिफ्ट का बटन दबाया & दरवाज़ा खुलते ही सोनिया को अंदर खींचा.सोनिया भी तेज़ी से उसकी बाहो मे आई & उचक के उसे चूमने लगी.विजयंत के हाथ उसकी जाँघो से आ लगे & वो उच्छल के उसकी गोद मे चढ़ गयी.विजयंत उसे लिफ्ट की दीवार से सटा के चूमते हुए उसकी पॅंटी के उपर से अपने लंड को दबाने लगा.सोनिया मस्ती मे आहे भरने लगी.उसे इस तरह से पकड़े जाने का ख़तरा उठा के चुदाई करने मे आने वाला रोमांच उसे बहुत भाने लगा था.

"तुम बहुत परेशान रहे ना इधर डार्लिंग?..उउम्म्म्म..!",उसकी गर्दन थामे उसकी गोद मे चढ़ि वो लिफ्ट से बाहर आई & विजयंत उसे 1 कमरे मे ले गया जहा 1 छ्होटा सा बेड लगा था & कुच्छ नही.वो उसे लिए-दिए उस बेड पे लेट गया & उसकी छातियाँ उसके टॉप के उपर से दबाते हुए छूता रहा.

"हां,परेशान तो था.",उसने उसकी पॅंटी को खींचा.सोनिया की चूत बहुत गीली थी & उसने टाँगे फैला दी थी.

"मेरा दिल कर रहा था कि उड़ के तुम्हारे पास आ जाऊं & तुम्हे बाहो मे भर लू..",सोनिया उठ बैठी थी,उसके चेहरे पे बस मस्ती & अपने आशिक़ के लिए प्यार था,"..& तुम्हारी सारी परेशानी दूर कर दू!",उसने विजयंत की कमीज़ उतार दी & उसके बालो भरे सीने को शिद्दत से चूमने लगी.विजयंत ने उसका टॉप उसके सर के उपर से निकाला तो सोनिया ने खुद हाथ पीछे ले जाके अपने काले ब्रा को उतार अपनी चूचियो को आज़ाद कर दिया.विजयंत ने उसकी चूचियो को हाथ मे भर के उसे फिर से लिटा दिया & फिर उसकी चूचियाँ चूसने लगा.सोनिया उसके बालो से खेलती आहें भरने लगी,"..विजयंत..तुम माने क्यू नही समीर की शादी के लिए?..सोचो,कितना प्यार करता है वो उस लड़की से कि सब कुच्छ छ्चोड़ दिया..उउन्न्ह..!",विजयंत उसकी स्कर्ट उठा के उसकी गीली चूत को चाट रहा था.

सोनिया की बात से उसे रंभा की याद आ गयी & उसे फिर से वही बेबसी महसूस हुई.वो अपनी हर ख्वाहिश पूरी करने का आदि था & इसीलिए रंभा के च्चीं जाने से वो बहुत बौखला गया था.उसकी सारी बौखलाहट इस वक़्त उसकी ज़ुबान के ज़रिए सोनिया की चूत पे निकल रही थी.सोनिया का तो मस्ती से बुरा हाल था.वो खुद ही अपनी चूचियाँ दबाते हुए अपनी कमर उचका रही थी.

"बात बहुत रोमानी लगती है ना..!",उसने अपनी पतलून उतारी तो सोनिया उठी & वो अंडरवेर पैरो से निकाल ही रहा था कि उसने उसका लंड मुँह मे भर लिया,"..मगर क्या केवल इश्क़ से ज़िंदगी चलती है,सोनिया?",उसने उसके बालो मे हाथ फेरा.

"तो और क्या चाहिए जीने को विजयंत?",सोनिया ने लंड को मुँह से निकाला & अपने दोनो गाल उसपे रगडे & उपर देखा.उसकी आँखो मे बस प्यार & मस्ती भरी थी.

"वो बच्चा है सोनिया!..वो लड़की उस से सच मे प्यार करती भी है या नही..पता नही..देखना,1 दिन धोखा देगी उसे..!",विजयंत बे सोनिया के बाल पकड़ अपनी बौखलाहट च्छूपाते हुए अपनी कमर हिला उसके मुँह को चोदा.

"देखो जान..",सोनिया ने उसके हाथ अपने सर से हटाते हुए उसे धकेल के बिस्तर पे गिराया & अपनी स्कर्ट उठाए हुए उसके लंड पे बैठ गयी,"..उउम्म्म्मम..उउफफफफ्फ़..!",उसके होंठो पे खुशी से भरी मुस्कान खेल रही थी & आँखे मस्ती मे बंद थी,"..उसने कमर हिलाके चुदाई शुरू की & कुच्छ देर तक विजयंत के सीने पे हाथ जमाए बस उसके लंड का लुत्फ़ उठाती रही,फिर उसने बात आगे बढ़ाई,"..पहले तो तुम्हे ऐसे नही बोलना चाहिए..ऊउउईईईईईई..!",विजयंत उसकी गंद की फांको को अपने मज़बूत हाथो से मसल रहा था,"..वो तुम्हारा बेटा है आख़िर!..& मान लो तुम उस लड़की के बारे मे सही भी हो..उउन्न्ञणणन्..",विजयंत ने उसकी कमर थाम उसे नीचे अपने उपर गिरा लिया था & अब कमर को जाकड़ नीचे से कमर उचका के उसकी चुदाई कर रहा था,"..ओह..तो भी डार्लिंग..समीर को खुद ग़लती कर उनसे सबक लेने का हक़ है...आननह..हाआंन्‍ननणणन्....क्या तुमने हमेशा सही फ़ैसले ही लिया हैं..कभी कोई ग़लती ही नही की..?..उन्हे वापस बुला लो & और किसी का नही तो कम से कम रीता का सोचो..वो माँ है..ऊव्ववववववववववव.......!",वो झाड़ गयी थी & उसके झाड़ते ही विजयंत ने उसे पलट के अपने नीचे कर लिया था & उसकी टाँगे कंधे पे चढ़ा ली थी.

इस पोज़िशन मे सोनिया की गंद हवा मे उठ गयी थी & लंड बिल्कुल उसकी कोख पे चोट कर रहा था.वो मस्ती मे चीखे जा रही थी.विजयंत ने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया था..समीर को माफ़ करने के मतलब था उसकी वापसी & उसकी वापसी का मतलब था..रंभा का समीर के बंगल मे रहना & हर वक़्त उसकी आँखो के सामने रहना.रोज़ उसे सामने देख तड़पना क्या वो बर्दाश्त कर सकता था..नही..!,"..ओईईईईईईईईईईई..विजयंत..डार्लिंग....है...हाआआअ..चोदो मुझे जान...ऊव्वववववववव..!",सोनिया मदहोशी मे चीख रही थी..नही..रंभा की नज़दीकी & उसकी बेबसी 1 ऐसा संगम थे जो उसे बर्बाद कर देते..नही..समीर वही ठीक था पंचमहल मे..उसकी नज़ोर से दूर..अब वो तभी लौटेगा जब उसकी ये ना पूरी होने वाली हसरत अपनेआप उसके दिल मे मर जाए,"..हाईईईईईईई..वीज़ा......यॅंट.....!",सोनिया उसकी बाहो मे नाख़ून धंसाए,सर पीछे फेंक,आँखे बंद किए कमर उचकाती झाड़ रही थी & रंभा का खूबसूरत चेहरा आँखो के सामने नाचते ही विजयंत के लंड से भी वीर्य छूट गया था & सोनिया की चूत मे भरने लगा था.

30 मिनिट्स बाद सोनिया अपने प्रेमी से विदा ले माल के पीछे की तरफ के दरवाज़े से अंदर दाखिल हुई & चंद समान खरीदे & वापस पार्किंग मे आ अपनी कार मे बैठ वापस अपने घर चली गयी.

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"हां..अच्छा..ठीक है..हां..तुम बस मुझे ऐसे ही वीक्ली रिपोर्ट्स देती रहो...अरे..क्या कर रही हो!",समीर बिस्तर पे लेटी रंभा की चूत मे लंड डाले उसकी चुदाई कर रहा था जब उसका मोबाइल बजा था & उसने उसे उठाया था.बात पूरी होते ही रंभा ने उसके हाथ से मोबाइल ले बिस्तर पे दूसरी तरफ फेंका & उसे अपने उपर खींच उसकी कमर पे टाँगे लपेट दी थी.

"1 तो सुबह-2 जगा देते हो..आहह..",समीर ने फिर से चुदाई शुरू कर दी थी.रंभा ने उसके बालो मे हाथ फिराते हुए दीवार घड़ी की ओर इशारा किया जिसमे 6 बज रहे थे,"..फिर आग लगा देते हो & जब बेचैन हो जाती हूँ..आननह..",वो उसकी चूचियाँ चूस रहा था,"..तो पता नही किस कामिनी के फोन के लिए मुझसे बेरूख़् हो जाते हो..हाईईईईईई..!",समीर हंसा & अपनी बीवी की ज़ुबान से ज़ुबान लड़ाने लगा.

"अरे जान,वीक्ली रिपोर्ट दे रही थी & फिर अभी मैं निकल जाउन्गा फिर कैसे ले पाता रिपोर्ट.",उसने उसकी भारी-भरकम चूचिया हाथो मे भर मसल दी,"..पता तो है कि अभी इस बिज़्नेस की नब्ज़ पकड़ी ही है तो हर बात का ख़याल रखना पड़ता है."

"हूँ..",रंभा अब कमर हिलाए जा रही थी & सर बिस्तर से उठा अपने पति को शिद्दत से चूम रही थी,"..समीर डार्लिंग..आज 1 महीना हो गया हमारी शादी को..आज तो रुक जाते..उउन्न्ञन्..!",समीर ने फिर से उसके गुलाबी होंठो का रस पीना चालू कर दिया था.

"मेरा भी दिल करता है जान कि तुमसे कभी दूर ना जाऊं..बस यू ही तुम्हारी नाज़ुक बाहो मे तुम्हारे हुस्न को पीता रहू..",उसने उसके गाल को चूमा,"..पर क्या करू जान ये काम भी तो ज़रूरी है..जब वापस आऊंगा तो जम के सेलेब्रेट करेंगे.अभी तक अपनी बीवी को हनिमून पे भी नही ले गया हू..आऊंगा तो बाहर चलेंगे."

"सच?कहा?..आननह..समीर...हाईईईईई.......नाआअहह.....!",रंभा झाड़ गयी & उसके साथ-2 समीर भी.

"वो तुम सोच के रखो..",समीर हाँफ रहा था,"..जब लौटूँगा तो जहा कहोगी वही चलेंगे."

"ओह!समीर..आइ लव यू,जान!",रंभा ने पति को चूम लिया.

"आइ लव यू टू,डार्लिंग!",समीर उसके उपर से उठा,"..अब जाने की तैय्यरी करू.",वो बाथरूम मे नहाने चला गे & रंभा बिस्तर पे नंगी लेटी उसे देखती रही..समीर जैसा पति किस्मतवलीयो को मिलता है..ये उसे यकीन हो गया था..वो हर वक़्त उसके आराम की फिल्र करता रहता था.इस घर मे भी किसी चीज़ की कमी नही होने दी थी उसने.बिज़्नेस को पूरी तरह से संभालने मे उसे काफ़ी मेहनत करनी पड़ रही थी लेकिन उसने इसके चलते 1 बार भी रंभा की अनदेखी नही की थी.रंभा भी उसकी इस बात की शुक्रगुज़ार थी & यू तो समीर ने हर काम के लिए नौकर रख छ्चोड़े थे लेकिन उसका हर काम वो खुद अपने हाथो से करती थी.वो बिस्तर से उठी & अलमारी से उसके कपड़े निकालने लगी.बहुत खुश थी वो मगर कुच्छ कमी भी थी-वो कमी थी बिस्तर मे.मसरूफ़ियत या थकान के बहाने से समीर ने कभी उसकी चुदाई ना की हो ऐसा कभी नही हुआ था.चुदाई मे वो उसके झड़ने,उसकी खुशी का पूरा ख़याल करता था लेकिन 1 तो वो उतनी चुदाई करता नही था जितनी रंभा चाहती थी.

वो 1 बार चोद के शांत हो जाता था जबकि रंभा चाहती थी कि वो उसे थोड़ी देर और प्यार करे & कम से कम 2 बार तो ज़रूर ही चोदे.उसने अभी तक समीर से इस बात का ज़िक्र नही किया था लेकिन उसने सोच लिया था कि अब जब वो हनिमून पे जाएँगे तो वो उसे बिस्तर से निकलने ही नाहिदे गी!..इस ख़याल से मुस्कुराते हुए उसने समीर का सूट निकाल बिस्तर पे रखा लेकिन क्या यही 1 परेशानी थी..नही..सबसे बड़ी कमी जो थी वो ये की समीर उसे अपना लंड छुने ही नही देता था.उसका दिल तड़प जाता था उसके लंड को हिलाने,उसे चूमने,उसे चूस-2 के उसका रस निकाल के पी लेने को लेकिन समीर तो लंड पे उंगली तक नही रखने देता था..वो उसकी चूत भी उतनी नही चाटता था जितना वो चाहती थी.चूत का ना चाटना उसे समझ मे आता था लेकिन लंड को ना पकड़ने देना..ये उसकी समझ मे नही आया था.जहा तक उसे पता था,मर्द तो मरते थे ऐसी औरत पे जो खुद अपनी मर्ज़ी से लंड से खेले.खैर जो हो..ये सारे मसले अपने हनिमून पे वो सुलझा के ही मानेगी.वो मुस्कुराइ & गाउन पहन समीर के नाश्ते की तैय्यरी करने रसोई मे चली गयी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--22

gataank se aage.

"ye humari dosti ke naam.",usne heero ka bracelet nikal ke uski bayi,gori kalayi pe bandh diya.

"wow!..kitna khubsurat hai..!",kamya ki aankho me 1 pal ko lalach ki chamak aa gayi thi,"..lekin ye bahut kimati hoga..main kaise le sakti hu..please brij ise vapas le lo!",usne utarne ka natak kiya to brij ne uska hath tham liya.

"please..kamya ise mat thukrao..mere liye rakh lo.",brij ne uske hatho pe pakd mazbut kar di to usne aisi surat banayi ki na chahte hue bhi vo us tohfe ko kabul rahi hai.

agli mulakat me kamya ne uski film sign kar li & us khushi me brij ne use 1 heero ka haar diya.kamya ne use ye haar khud pehnanae ko kaha& uski or pith kar apne khule baa baye kandhe ke upar se aage kar liye.uski dress ka back bahut gehra tha balki uski kamar tak uski pith nangi hi thi.brij uske sangmarmari badan ko dekh josh se bhar utha.kamya ne bhi uske diye bracelet se andaza laga liya tha ki brij ke sath kaam karne me use bahut fayda tha & aaj vo puri taiyyari ke sath aayi thi.

brij ne uske gale me haar pehnaya & uski pith pe hath firane laga.

"irade thik nahi lagte tumhare!",kamya muskurayi lekin us se door nahi hui.

"tumhe dekh ke irade apneaap bure ho jate hain.",brij ki garm sanse uske daye kandhe pe padi to vo hans di & sar peechhe jhatka.aisa karne se uski lambi gardan jisme brij ka diya haar chamak raha tha brij ki nigaho ke samne aayi & brij use chumne se khud ko rok nahi paya.kamya us se door chhitki,uski aankho me use door rehne ka hukm tha magar sath hi paas bulane ki shohi bhi thi.brij aise khelo ka purana khiladi tha.vo aage badha & usne is baar seedha kamya ko baaho me bhar liya.vo kasmasayi & bas use mana karne ke natak karti rahi lekin thodi hi der baad vo brij ke sath uski baaho me bilkul nangi bistar pe padi thi & khud uske munh me apni zuban ghusa ke uski kiss ka jawab de rahi thi.us sham ke khatm hone tak kamya 1 kimati haar,1 badi film & 1 naye aashiq ko hasil kar chuki thi.

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vo do rishte jo mazbut hue unme pehla tha Soniya Mehra & vijayant ka.soniya ab is sachchai ko maan chuki thi ki vo brij & vijayant,dono ke bina nahi reh sakti thi & agar use kabhi bhi in dono mardo me se kisi 1 ko chunane ko kaha gay to vo aisa krne se mar jana zyada pasand karegi.Devalay me dono ko bahut sambhal ke milna padta tha.soniya vijayant ke kisi hotel me to ja sakti nahi thi isliye dono fone pe baat karke pehle kisi public place,jaise ki mall ya restaurant me milne tay kare & vaha se vijayant use kisi jagah le jata jaha soniya uske jism ko khud me utarne lagti.

sameer ke apne parivar se alag hone ke 2 din baad hi brij mantri se milne gaya tha & uski gairmaujoodgi ka fayda uthane ke liye soniya ne apne aashiq ko fone kiya & shehar ke Trendz mall me milna tay kiya.soniya apne driver ke sath mall pahunchi & use car parking me ye kehte hue intezar karne ko bola ki use 2-3 ghante lag sakte hain shopping me.uske baad vo mall me ghusi & uske dusre darwaze se mall ke peechhe ki taraf ki exit se bahar nikli jaha 1 mercedes uska intezar kar rahi thi.vo seedha us car ki aage ki seat pe baith gayi & andar baithe vijayant ne use baaho me bhar ke chum liya.pure raste vo us se chipki baithi rahi & uski shirt ke andar apne besabr hath firati rahi.

soniya ne ghutno tak ki skirt & aadhe bazu ka gehra nila top pehna tha.jab bhi car rokni padti vijayant uske kapdo me hath daal uske nazuk ango ko chhed deta.aisa krne se manzil tak phunchte-2 soniya ki skirt uski mara tak uth gayi thi & uska top to pura utha chuka tha & uska bra bhi & uski dono chhatiya nangi ho chuki thi.gaur se dekhne pe vijayant ki zuban ka ras uske kade nipples pe dekha ja sakta tha.vijayant car 1 aisi imarat me le gaya joki usi ki company ki thi lekin filhaal kinhi karano se bilkul khali padi thi.darban ne uski gadi dekh salam thonka,us bechare ko kya pata tha ki kale shisho ke peechhe baithe uske malik ne use dekha bhi nahi tha kyuki uska dhyan to car ghusate hue apni mehbooba ke narm hotho pe tha.

vijayant car ko seedha building ke darwaze tak le gaya & neeche utra.darban ne gate band kar diya tha & apne cabin me baith gaya tha.vijayant ne soniya ka darwaza khola to vo apne kapde thik karti utri.vijayant ne uske kandho ko dayi banh me ghera & building ke andar dakhil ho gaya.usne lift ka button dabaya & darwaza khulte hi soniya ko andar khincha.soniya bhi tezi se uski baaho me aayi & uchak ke use chumne lagi.vijayant ke hath uski jangho se aa lage & vo uchhal ke uski god me chadh gayi.vijayant use lift ki deewar se sata ke chumte hue uski panty ke upar se apne lund ko dabane laga.soniya masti me aahe bharne lagi.use is tarah se pakde jane ka khatra utha ke chudai karne me aane vala romanch use bahut bhane laga tha.

"tum bahut pareshan rahe na idhar darling?..uummmm..!",uski gardan thame uski god me chadi vo lift se bahar aayi & vijayant use 1 kamre me le gaya jaha 1 chhota sa bed laga tha & kuchh nahi.vo use liye-diye us bed pe let gaya & uski chhatiya uske top ke upar se dabate hue chuta raha.

"haan,pareshan to tha.",usne uski panty ko khincha.soniya ki chut bahut gili thi & usne tange faila di thi.

"mera dil kar raha tha ki ud ke tumahre paas aa jaoon & tumhe baaho me bhar lu..",soniya uth baithi thi,uske chehre pe bas masti & apne aashiq ke liye pyar tha,"..& tumhari sari pareshani door kar du!",usne vijayant ki kamiz utar di & uske baalo bhare seene ko shiddat se chumne lagi.vijayant ne uska top uske sar ke upar se nikala to soniya ne khud hath peechhe le jake apne kale bra ko utar apni choochiyo ko azad kar diya.vijayant ne uski choochiyo ko hath me bhar ke use fir se lita diya & fir uski choochiyan chusne laga.soniya uske baalo se khelti aahen bharne lagi,"..vijayant..tum mane kyu nahi sameer ki shadi ke liye?..socho,kitna payra krta hai vo us ladki se ki sab kuchh chhod diya..uunnhhhh..!",vijayant uski skirt utha ke uski gili chut ko chaat raha tha.

soniya ki baat se use rambha ki yaad aa gayi & use fir se vahi bebasi mehsus hui.vo apni har khwahish puri karne ka aadi tha & isiliye rambha ke chhin jane se vo bahut baukhla gaya tha.uski sari baukhlahat is waqt uski zuban ke zariye soniya ki chut pe nikal rahi thi.soniya ka to masti se bura haal tha.vo khud hi apni choochiyan dabatae hue apni kamar uchka rahi thi.

"baat bahut romani lagti hai na..!",usne apni patlun utari to soniya uthi & vo underwear pairo se nikal hi raha tha ki usne uska lund munh me bhar liya,"..magar kya keval ishq se zindagi chalti hai,soniya?",usne uske baalo me hath fera.

"to aur kya chahiye jeene ko vijayant?",soniya ne lund ko munh se nikala & apne dono gaal uspe ragde & upar dekha.uski aankho me bas pyar & masti bhari thi.

"vo bachcha hai soniya!..vo ladki us se sach me pyar karti bhi hai ya nahi..pata nahi..dekhna,1 din dhokha degi use..!",vijayant be soniya ke baal pakad apni baukhlahat chhupate hue apni kamar hila uske munh ko choda.

"dekho jaan..",soniya ne uske hath apne sar se hatate hue use dhakel ke bistar pe giraya & apni skirt uthaye hue uske lund pe baith gayi,"..uummmmm..uufffff..!",uske hotho pe khushi se bhari muskan khel rahi thi & aankhe masti me band thi,"..usne kamar hilake chudai shuru ki & kuchh der tak vijayant ke seene pe hath jamaye bas uske lund ka lutf uthati rahi,fir usne baat aage badhayi,"..pehle to tumhe aise nahi bolna chahiye..oouuiiiiiiiiii..!",vijayant uski gand ki fanko ko apne mazbut hatho se masal raha tha,"..vo tumhara beta hai aakhir!..& maan lo tum us ladki ke bare me sahi bhi ho..uunnnnnn..",vijayant ne uski kamar tham use neeche apne upar gira liya tha & ab kamar ko jakad neeche se kamar uchka ke uski chudai kar raha tha,"..ohhhhhhh..to bhi darling..sameer ko khud galti kar unse sabak lene ka haq hai...aannhhhhhh..haaaannnnnnn....kya tumne humesha sahi faisle hi liya hain..kabhi koi galti hi nahi ki..?..unhe vapas bula lo & aur kisi ka nahi to kam se kam Rita ka socho..vo maan hai..oowwwwwwwwwwww.......!",vo jhad gayi thi & uske jhadte hi vijayant ne use palat ke apne neeche kar liya tha & uski tange kandhe pe chadha li thi.

is position me soniya ki gand hawa me uth gayi thi & lund bilkul uski kokh pe chot kar raha tha.vo masti me chikhe ja rahi thi.vijayant ne uski baat ka koi jawab nahi diya tha..sameer ko maaf karne ke matlab tha uski vapsi & uski vapsi ka matlab tha..rambha ka sameer ke bungle me rehna & har waqt uski aankho ke samne rehna.roz use samne dekh tadapna kya vo bardasht kar sakta tha..nahi..!,"..ouiiiiiiiiiiiiii..vijayant..darling....hai...haaaaaaa..chodo mujhe jaan...oowwwwwwwww..!",soniya madhoshi me chikh rahi thi..nahi..rambha ki nazdiki & uski bebasi 1 aisa sangam the jo use barbad kar dete..nahi..sameer vahi thik tha Panchmahal me..uski nazor se door..ab vo tabhi lautega jab uski ye na puri hone wali hasrat apneaap uske dil me mar jaye,"..haiiiiiiii..vija......yant.....!",soniya uski baaho me nakhun dhansaye,sar peechhe fenk,aankhe band kiye kamar uchakti jhad rahi thi & rambha ka khubsurat chehra aankho ke samne nachte hi vijayant ke lund se bhi virya chhut gaya tha & soniyas ki chut me bharne laga tha.

30 minutes baad soniya apne premi se vida le mall ke peechhe ki taraf ke darwaze se andar dakhil hui & chand saman kharide & vapas parking me aa apni car me baith vapas apne ghar chali gayi.

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"haan..achha..thik hai..haan..tum bas mujhe aise hi weekly reports deti raho...are..kya kar rahi ho!",sameer bistar pe leti rambha ki chut me lund dale uski chudai kar raha tha jab uska mobile baja tha & usne use uthaya tha.baat puri hote hi rambha ne uske hath se mobile le bistar pe dusri taraf fenka & use apne upar khinch uski kamar pe tange lapet di thi.

"1 to subah-2 jaga dete ho..aahhhh..",sameer ne fir se chudai shuru kar di thi.rambha ne uske baalo me hath firate hue deewar ghadi ki or ishara kiya jisme 6 baj rahe the,"..fir aag laga dete ho & jab bechain ho jati hun..aannhhhh..",vo uski choochiyan chus raha tha,"..to pata nahi kis kamini ke fone ke liye mujhse berukh ho jate ho..haiiiiiii..!",sameer hansa & apni biwi ki zuban se zuban ladane laga.

"are jaan,weekly report de rahi thi & fir abhi main nikal jaunga fir kaise le pata report.",usne uski bhari-bharkam choochiya hatho me bhar masal di,"..pata to hai ki abhi is business ki nabz pakdi hi hai to har baat ka khayal rakhna padta hai."

"hun..",rambha ab kamar hilaye ja rahi thi & sar bistar se utha apne pati ko shiddat se chum rahi thi,"..sameer darling..aaj 1 mahina ho gaya huamri shadi ko..aaj to ruk jate..uunnnn..!",sameer ne fir se uske gulabi hotho ka ras pina chalu kar diya tha.

"mera bhi dil karta hai jaan ki tumse kabhi door na jaoon..bas yu hi tumhari nazuk baaho me tumhare husn ko pita rahu..",usne uske gaal ko chuma,"..par kya karu jaan ye kaam bhi to zaruri hai..jab vapas aaoonga to jum ke celebrate karenge.abhi tak apni biwi ko honeymoon pe bhi nahi le gaya hu..aaoonga to bahar chalenge."

"sach?kaha?..aannhhhhh..sameer...haiiiiii.......naaaaahhhhhhhhh.....!",rambha jhad gayi & uske sath-2 sameer bhi.

"vo tum soch ke rakho..",sameer hanf raha tha,"..jab lautunga to jaha kahogi vahi chalenge."

"oh!sameer..i love you,jaan!",rambha ne pati ko chum liya.

"i love you too,darling!",sameer uske upar se utha,"..ab jane ki taiyyari karu.",vo bathroom me nahane chala gay & rambha bistar pe nangi leti use dekhti rahi..sameer jaisa pati kismatwaliyo ko milta hai..ye use yakin ho gaya tha..vo har waqt uske aaram ki filr karta rehta tha.is ghar me bhi kisi chiz ki kami nahi hone di thi usne.business ko puri tarah se sambhalne me sue kafi mehnat karni pad rahi thi lekin usne iske chalte 1 baar bhi rambha ki andekhi nahi ki thi.rambha bhi uski is baat ki shukraguzar thi & yu to sameer ne har kaam ke liye naukar rakh chhode the lekin uska har kaam vo khud apne hatho se karti thi.vo bistar se uthi & almari se uske kapde nikalne lagi.bahut khush thi vo magar kuchh kami bhi thi-vo kami thi bistar me.masrufiyat ya thakan ke bahane se sameer ne kabhi uski chudai na ki ho aisa kabhi nahi hua tha.chudai me vo uske jhadne,uski khushi ka pura khayal karta tha lekin 1 to vo utni chudai karta nahi tha jitni rambha chahti thi.

vo 1 baar chod ke shant ho jata tha jabki rambha chahti thi ki vo use thodi der aur pyar kare & kam se kam 2 baar to zarur hi chode.usne abhi tak sameer se is baat ka zikr nahi kiya tha lekin usne soch liya tha ki ab jab vo honeymoon pe jayenge to vo use bistar se nikalne hi nahide gi!..is khayal se muskurate hue usne sameer ka suit nikal bistar pe rakha lekin kya yehi 1 pareshani thi..nahi..sabse badi kami jo thi vo ye ki sameer use apna lund chhune hi nahid eta tha.uska dil tadap jata tha uske lund ko hilane,use chumne,use chus-2 ke uska ras nikal ke pi lene ko lekin sameer to lund pe ungli tak nahi rakhne deta tha..vo uski chut bhi utni nahi chaatata tha jitna vo chahti thi.chut ka na chhatana use samajh me aata tha lekin lund ko na pakdne dena..ye uski samajh me nahi aaya tha.jaha tak use pata tha,mard to marte the aisi aurat pe jo khud apni marzi se lund se khele.khair jo ho..ye sare masle apne honeymoon pe vo suljha ke hi manegi.vo muskurayi & gown pehan sameer ke nashte ki taiyyari karne rasoi me chali gayi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--23

गतान्क से आगे.

समीर के दादा का शुरू किया अग्री-बिज़्नेस ट्रस्ट ग्रूप के मुक़ाबले था तो बहुत छ्होटा लेकिन उसमे मुनाफ़ा बहुत होता था.पंचमहल से लेके आवंतिपुर & फिर आवंतिपुर जिन पहड़ियो के नीचे बसा था उन पहड़ियो के उपर बसे क्लेवर्त तक 5 बहुत बड़े फार्म्स थे.जब समीर के दादा ने ये बिज़्नेस शुरू किया था उस वक़्त तो वो बस किसानो से उनकी उपज खरीद आगे मंडी मे बेच देते थे लेकिन धीरे-2 पहले उन्होने ज़मीने खरीदी फिर उन ज़मीनो पे फार्म्स बनाए & फिर उनकी पैदावार को मंडी मे बेचने लगे.

विजयंत मेहरा को इस धंधे मे बहुत दिलचस्पी नही थी लेकिन उसने कभी इस धंधे से बेरूख़ी भी नही दिखाई.उसने 1 आदमी को इस बिज़्नेस का सीओ बनाके छ्चोड़ा हुआ था जो उसे हर महीने रिपोर्ट & हर 4 महीने पे हुए मुनाफ़े की रकम की जानकारी देता था.विजयंत के कहे मुताबिक Cएओ ने अपनी उपज अब मंडी से ज़्यादा सीधा बड़े-2 होटेल्स को बेचना शुरू कर दिया था.साथ-2 अब 3 फार्म्स पे सब्ज़ियो & फलो के अलावा मुर्गिया भी पाली जाने लगी थी & इसके साथ अण्दो & चिकन का धंधा भी शुरू हो गया था.

समीर ने पंचमहल आते ही सभी फार्म्स का दौरा किया था & अपने सभी बड़े क्लाइंट्स से मिल लिया था.उसे 1 फार्म का मॅनेजर ठीक नही लगा तो उसने उसे बदल दिया था,नही तो बिज़्नेस ठीक चल रहा था.समीर ने फ़ैसला किया था कि वो हर महीने 1 बार सारे फार्म्स का दौरा ज़रूर करेगा.दरअसल,उसका इरादा फार्म्स की तादाद बढ़ा बिज़्नेस को फैलाने का था & इस लिए वो पहले ये समझना चाहता था कि कौन सी सब्ज़ी या फल ज़्यादा मुनाफ़ा देगा & नये फार्म्स के लिए कौन सी जगह ठीक रहेगी.

आज सुबह भी समीर इसी काम के लिए निकला था.वो सवेरे 9 बजे घर से निकला & उसका इरादा था कि देर शाम 8 बजे तक वो क्लेवर्त वाले फार्म पे पहुँच जाए.रात वाहा बिता के सवेरे उसे वाहा से वापस लौट आना था.

रंभा भी साथ जाना चाहती थी मगर समीर ने उसे ये कह के मना कर दिया कि वो तो हर फार्म पे काम करेगा,वो बोर होती रहेगी.रंभा पंचमहल से 50 किमी दूरी पे बने सबसे नज़दीकी फार्म पे 1 बार पति के साथ गयी थी & वो जगह उसे बहुत अच्छी लगी थी.ताज़ी हवा & हरियाली ने उसका मन मोह लिया था.हर फार्म पे 1 गेस्ट कॉटेज हुआ करती थी.समीर के साथ उसने 1 दोपहर वाहा गुज़ारी थी & ठंडी हवा के झोंको के साथ चिड़ियो की चाहचाहट के बीच पति के साथ चुदाई करने मे उसे 1 अलग ही मज़ा आया था.

उस दोपहर को याद करते ही उसकी चूत गीली हो गयी.वैसे भी आज की रात उसे सूना बिस्तर कुच्छ ज़्यादा ही खल रहा था.उसने करवट ले 1 तकिये पे अपना नंगा जिस्म दबाया & पति को याद कर अपनी चूचियाँ उसपे दबाने लगी.सवेरे सोची बात उसने दिल मे पक्की कर ली की इस बार छुट्टी पे वो समीर से बिस्तर मे जिन बातो से वो झिझकता था,उनका कारण निकलवा के रहेगी अगर वो उसके बाद उसकी हसरातो को पूरा करने को तैय्यार था तो ठीक था वरना वो कोई आशिक़ ढूंड लेगी जो उसे अपने लंड से खेलने दे & उसकी चूत को जी भर के चाते.

ऐसा नही था कि वो समीर के साथ अपनी शादी की उसे परवाह नही थी बल्कि उसे तो इस बात की फ़िक्र थी कि उसकी शादी पे किसी भी तरह की कोई आँच ना पड़े लेकिन हसरातो को कुचल खास कर के जिस्मानी हसरातो को,जीना उसे मंज़ूर नही था.चुदाई उसकी ज़रूरत ही नही उसका शौक भी थी & उसमे उसे पूरी बेबाकी पसंद थी,किसी भी तरह की झिझक उसे बर्दाश्त नही थी.अपनी शादी को वो 1 ही सूरत मे ख़त्म कर सकती थी & वो ये थी कि उसे समीर से भी ज़्यादा अमीर,चाहनेवाला & जोशीला मर्द मिल जाए.

उसकी उंगलिया उसकी चूत को समझा रही थी की आज रात उसे उनसे ही काम चलाना पड़ेगा क्यूकी आज कोई लंड उसकी प्यास बुझाने को मौजूद नही था.अपने ख़यालो मे गुम जिस्म से खेलते कब उसे नींद आ गयी उसे पता ही ना चला.

रात 1 बजे उसकी नींद टूटी तो वो उठ बैठी.समीर ने सोने से पहले ज़रूर उसे फोन किया होगा,उसने अपना मोबाइल उठाके देखा मगर कोई मिस्ड कॉल नही थी.उसे ताज्जुब हुआ कि ऐसा कैसे हो गया.समीर तो उसे पल-2 की खबर देता था.वो दफ़्तर जाता तो पहुँचते ही फोन करता.उसे लौटने मे बहुत देर होती थी लेकिन फिर भी लंच मे & शाम को अपना निकलने का वक़्त बताने के लिए फोन करना वो नही भूलता था.

आज भी वो हर फार्म पे पहुँच के उसे फोन करता रहा था & जहा नेटवर्क नही मिलता था तो नेटवर्क मिलते ही फोन किया था.क्लेवर्त पहुँचने के पहले उसका फोन आया था लेकिन रात को सोने के पहले उसने फोन नही किये था..बिना ड्राइवर के चला गया है..थक गया होगा..कहा था कि ड्राइवर के साथ जाओ..लेकिन नही..ड्राइव करने मे मज़ा जो आता है!..उसने साइड-टेबल पे रखी बॉटल उठाके पानी पिया.उसका दिल किया कि 1 बार समीर को फोन लगाए लेकिन फिर उसकी नींद खराब होने के डर से उसने ऐसा किया नही & सवेरे फोन करने का फ़ैसला कर सो गयी.

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रंभा अब केवल परेशान नही थी बल्कि बहुत घबरा भी रही थी.सवेरे 7 बजे से वो समीर का फोन ट्राइ कर रही थी लेकिन फोन मिल नही रहा था.समीर ने भी कोई फोन नही किया था.उसने उसके ऑफीस मे फोन कर बात बताई तो वो लोग भी हर फार्म पे फोन से पुच्छ रहे थे लेकिन समीर कही नही था.क्लेवर्त फार्म के मॅनेजर ने कहा कि समीर ने उसके साथ ही रात का खाना खाया था लेकिन सवेरे वो उस से मिले बिना चला गया था.उसे फार्म के मेन गेट के गार्ड ने बताया था की उसने सवेरे 5 बजे ही समीर की गाड़ी को बाहर जाने देने के लिए गेट खोला था.अब दोपहर के 2 बज रहे थे लेकिन समीर का कोई पता नही था.

उसके दफ़्तर के लोगो की राई थी की पोलीस को खबर कर देनी चाहिए.रंभा के बंगल के ड्रॉयिंग हॉल मे सभी बैठे रंभा कि ओर देख रहे थे कि वो क्या फ़ैसला लेती है.रंभा बहुत हिम्मती थी लेकिन इस वक़्त उसकी समझ मे भी नही आ रहा था कि क्या करे.उसने सबसे बैठने को कहा & अपने कमरे मे आ गयी.वाहा उसने 1 आख़िरी बार समीर का फोन ट्राइ किया.फोन अभी भी नही लगा.वो कुच्छ पल खड़ी रही & फिर उसने 1 नंबर मिलाया.

"हेलो."

"हेलो,सोनम.कैसी है?मैं रंभा बोल रही हू."

"रंभा!कैसी है तुम यार?..& कितने दिनो बाद फोन किया तूने?..क्या बात है जानेमन..तेरे बॉस तुझे बहुत बिज़ी रखते हैं क्या?",उसने सहेली को छेड़ा.उसकी बात से रंभा का गला 1 पल को भर आया & वो खामोश हो गयी,"क्या बात है रंभा?सब ठीक है ना?"

"सोनम..सोनम..समीर लापता है."

"क्या?!"

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रंभा ने पोलीस मे रिपोर्ट लिखवा दी थी.1 घंटे तक पोलीस वाले उस से समीर के बारे मे हर बात पुछ्ते रहे & वो जवाब देती रही.पोलीस ने क्लेवर्त तक के सारे इलाक़े मे वाइर्ले से खबर भिजवा के समीर की खोज शुरू कर दी थी.पोलीस को शक़ था कि ये किडनॅपिंग का केस भी हो सकता है तो उन्होने ये बात मीडीया से छिपा ली थी & मेहरा आग्रिकल्चरल फार्म्स के सभी आदमियो को भी ये बात बाहर ना बताने की सख़्त ताकीद की थी लेकिन पोलीस वाले जानते थे कि ये बात छुपना मुमकिन नही है.इसके लिए खुद पंचमहल के पोलीस कमिशनर ने शहर के सभी अख़बारो & टीवी चॅनेल्स के एडिटर्स को खुद फोन कर उनसे इस खबर को दबाए रखने की गुज़ारिश की जिसे की सभी ने मान लिया.आख़िर 1 इंसान की जान का सवाल था.

समीर की खोज उस दिन 3 बजे रिपोर्ट लिखवाने के बाद से शुरू हो गयी थी लेकिन देर रात तक कोई नतीजा नही आया था.पोलिसेवालो को पक्का यकीन था कि उसे अगवा किया गया है क्यूकी उस रोज़ उस इलाक़े मे जितने भी आक्सिडेंट्स हुए थे उनमे से कोई भी कार समीर की सिल्वर ग्रे स्कोडा लॉरा नही थी ना ही उसके हुलिए का कोई शख्स उन आक्सिडेंट्स मे था.

रंभा ने कंपनी के लोगो को उनके घर जाने को कहा.वो सवेरे से अपनी मालकिन के साथ बैठे थे.2-3 लड़कियो ने रुकने की बात की लेकिन रंभा ने उन्हे वापस भेज दिया.वो जानती थी कि उसका पति बहुत बड़ी मुसीबत मे है & अब उसे अकेले ही उसे किसी तरह इस समस्या से निबटना है.किसी भी काम के लिए सहारा लेना उसे कमज़ोर बना सकता था & ये उसे गवारा नही था.

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जब रंभा का फोन आया था उस वक़्त विजयंत किसी लनचन मीटिंग पे गया था.सोनम ने सोचा कि पहले ये खबर ब्रिज को दे लेकिन उसे ये ठीक नही लगा कि बाप से भी पहले ये खबर ब्रिज को दी जाए.वो सोच ही रही थी कि उसे विजयंत ने बाहो मे भर लिया.वो ख़यालो मे ऐसी डूबी थी की दरवाज़ा खुलने & उसके दाखिल होने की उसे आहट ही नही हुई.

"किस ख़याल मे खोई हो?",विजयंत उसके पेट को उसकी शर्ट के उपर से सहलाते हुए उसके दाए कान मे ज़ुबान फिरा रहा था.

"सर..",वो उसके आगोश से नीली & उसकी ओर घूमी,"..1 प्राब्लम खड़ी हो गयी है."

"क्या?",विजयंत 1 पल मे संजीदा हो गया था.

"समीर सर लापता हैं."

"क्या?",जवाब मे सोनम ने उसे रंभा से फोन पे हुई सारी बात बता दी.विजयंत खामोश हो गया & अपनी कुर्सी पे बैठ गया & फोन उठा लिया.अगले 1 घंटे तक वो पंचमहल पोलीस & मेहरा फार्म्स के लोगो से बात करता रहा.इसी दौरान सोनिया के मोबाइल से 1 मसेज हुआ जोकि ब्रिज को मिला.ब्रिज उस वक़्त 1 बहुत ज़रूरी मीटिंग मे बड़े ही संगीन मसले पे अपने 2 आदमियो की दलीलें सुन रहा था.सोनम के मेसेज पढ़ उसके होंठो पे मुस्कान फैल गयी जिसका मतलब उसके आदमी समझ नही पाए.

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अगली सुबह जब रंभा उठी तो उसे कोई घबराहट नही थी.1 मसला था & अब उसे सुलझाना था-बस यही ख़याल था उसके दिल मे.समीर के लापता होने का उसे अफ़सोस था मगर ऐसा दुख नही कि वो बहाल हो जाए.उसे फ़िक्र इस बात की थी कि उसकी आरामदेह ज़िंदगी कही शुरू होने से पहले ही ख़त्म ना हो जाए.समीर के अपने परिवार से संबंध टूट गये थे & उसके लापता होने की सूरत मे उसे तो वो दूध की मक्खी की तरह निकाल फेंक सकते थे & उसे इस से बचना था.इसके लिए बहुत ज़रूरी था कि समीर सही-सलामत मिल जाए लेकिन अगर रंभा की किस्मत ही फूटी है & वो नही मिलता है तो उस सूरत मे उसके परिवार वालो से वो अपनी शर्तो पे अलग होगी ना कि उनकी.

सवेरे तैय्यार होने के बाद उसने अपना पर्स चेक किया तो उसके पास ज़्यादा कॅश नही था.1 सफेद,कसी पतलून & आधे बाज़ू की गुलाबी कमीज़ पहनी,आँखो पे ओवरसाइज़ धूप का चश्मा लगाया & अपना बॅग उठा एटीएम के लिए निकल पड़ी.एटीम पहुँच उसने 1 डेबिट कार्ड उसमे डाला.

इन्वलिड कार्ड

मेसेज देख उसे लगा कि कार्ड ठीक सेस्लोट मे डाला नही.उसने दोबारा कोशिश की मगर फिर से वही बात हुई.उसने पर्स से दूसरा कार्ड निकाल के डाला मगर फिर वही बात.उसका माथा ठनका.उसने अपने दोनो क्रेडिट कार्ड्स डाल के देखा मगर हर बार वो नाकाम रही.वो अपनी कार मे बैठी & अपने बॅंक फोन मिलाया & सारी बात बताई.

"मॅ'म,आप अपना कार्ड नंबर बताइए ताकि मैं स्टेटस चेक कर सकु?",रंभा ने नंबर बताया.

"मॅ'म,आपका अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया है.आपका अकाउंट मेहता आग्रिकल्चरल फार्म्स के ज़रिए खुलवाया गया था & हमे वही से ये रिक्वेस्ट आई है कि इस अकाउंट को अभी ब्लॉक कर दिया जाए."

"क्या?!",रंभा बौखला उठी & उस कॉल सेंटर एग्ज़िक्युटिव लड़की से बहस करने लगी.उसने चारो कार्ड्स के बाँक्स मे फोन किया & हर जगह यही जवाब मिला.1 और मुसीबत सामने आ गयी थी.उसका इरादा पैसे निकाल के पोलीस स्टेशन जा उनसे उनकी करवाई के बारे मे पुच्छने का था लेकिन अब उस से पहले उसे अपने कार्ड्स ब्लॉक करवाने वाले शख्स से मिलना था.उसने ड्राइवर को दफ़्तर चलने का हुक्म दिया & उसने गाड़ी उधर ही मोड़ दी.

"मेरे बॅंक अकाउंट्स किसने ब्लॉक किए मिनी?",रंभा दनदनाते हुए समीर के दफ़्तर पहुँची & उसकी सेक्रेटरी से सवाल पुचछा.

"म-मा'म..वो..सर..",उसने समीर के कॅबिन की ओर इशारा किया.

"सर!",रंभा के माथे पे शिकन पड़ गयी & फिर जैसे बड़ी राहत मिली,"समीर आ गया!",वो भागते हुए आगे बढ़ी & कॅबिन का दरवाज़ा खोल अंदर घुस गयी.

"सा..-",सामने बैठे शख्स को देख उसकी खुशी हवा हो गयी & वो जहा की ताहा ठिठक गयी.

"गुड मॉर्निंग,रंभा.",समीर की कुर्सी पे विजयंत मेहरा बैठा था.रंभा को थोड़ा वक़्त लगा मगर उसने खुद को संभाल लिया.

"आप मेरे पति के दफ़्तर मे क्या कर रहे हैं?"

"तुम भूल रही हो कि मैं तुम्हारे पति का बाप & यहा का मालिक हू."

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क्रमशः.......

JAAL paart--23

gataank se aage.

Sameer ke dada ka shuru kiya agri-business Trust Group ke mukable tha to bahut chhota lekin usme munafa bahut hota tha.Panchmahal se leke Avantipur & fir avantipur jin pahdiyo ke neeche basa tha un pahdiyo ke upar base Clayworth tak 5 bahut bade farms the.jab sameer ke dada ne ye business shuru kiya tha us waqt to vo bas kisano se unki upaj kharid aage mandi me bech dete the lekin dhire-2 pehle unhone zamine kharidi fir un zamino pe farms banaye & fir unki paidawar ko mandi me bechne lage.

Vijayant Mehra ko is dhandhe me bahut dilchaspi nahi thi lekin usne kabhi is dhandhe se berukhi bhi nahi dikhayi.usne 1 aadmi ko is business ka CEO banake chhoda hua tha jo use har mahine report & har 4 mahine pe hue munafe ki rakam ki jankari deta tha.vijayant ke kahe mutabik CEO ne apni upaj ab mandi se zyada seedha bade-2 hotels ko bechna shuru kar diya tha.sath-2 ab 3 farms pe sabziyo & phalo ke alawa murgiya bhi pali jane lagi thi & iske sath ando & chicken ka dhandha bhi shuru ho gaya tha.

sameer ne panchmahal aate hi sabhi farms ka daura kiya tha & apne sabhi bade clients se mil liya tha.use 1 farm ka manager thik nahi laga to usne use badal diya tha,nahi to business thik chal raha tha.sameer ne faisla kiya tha ki vo har mahine 1 baar sare farms ka daura zarur karega.darasal,uska irada farms ki tadad badha business ko failane ka tha & is liye vo pehle ye samajhna chahta tha ki kaun si sabzi ya phal zyada munafa dega & naye farms ke liye kaun si jagah thik rahegi.

aaj subah bhi sameer isi kaam ke liye nikla tha.vo savere 9 baje ghar se nikla & uska irada tha ki der sham 8 baje tak vo Clayworth vale farm pe pahunch jaye.raat vaha bita ke savere use vaha se vapas laut aana tha.

Rambha bhi sath jana chahti thi magar sameer ne use ye khe ke mana kar diya ki vo to har farm pe kaam karega,vo bore hoti rahegi.rambha panchmahal se 50 km doori pe bane sabse nazdiki farm pe 1 baar pati ke sath gayi thi & vo jagah use bahut achhi lagi thi.tazi hawa & hariyali ne uska man moh liya tha.har farm pe 1 guest cottage hua karti thi.sameer ke sath usne 1 dopahar vaha guzari thi & thandi hawa ke jhonko ke sath chidiyo ki chahchahat ke beech pati ke sath chudai karne me use 1 alag hi maza aaya tha.

us dopahar ko yaad karte hi uski chut gili ho gayi.vaise bhi aaj ki raat use soona bistar kuchh zyada hi khal raha tha.usne karwat le 1 takiye pe apna nanga jism dabaya & pati ko yaad kar apni chhatiya uspe dabane lagi.savere sochi baat usne dil me pakki kar li ki is baar chutti pe vo sameer se bistar me jin baato se vo jhijhakta tha,unka karan nikalwa ke rahegi agar vo uske baad uski hasrato ko pura karne ko taiyyar tha to thik tha varna vo koi aashiq dhoond legi jo use apne lund se khelne de & uski chut ko ji bhar ke chate.

aisa nahi tha ki vo sameer ke sath apni shadi ki use parwah nahi thi balki use to is baat ki fikr thi ki uski shadi pe kisi bhi tarah ki koi aanch na pade lekin hasrato ko kuchal khas kar ke jismani hasrato ko,jeena use manzur nahi tha.chudai uski zarurat hi nahi uska shauk bhi thi & usme use puri bebaki pasand thi,kisi bhi tarah ki jhijhak use bardasht nahi thi.apni shadi ko vo 1 hi surat me khatm kar sakti thi & vo ye thi ki use sameer se bhi zyada ameer,chahnewala & joshila mard mil jaye.

uski ungliya uski chut ko samjha rahi thi ki aaj raat use unse hi kaam chalana padega kyuki aaj koi lund uski pyas bujhane ko maujood nahi tha.apne khayalo me gum jism se khelte kab use nind aa gayi use pata hi na chala.

raat 1 baje uski nind tuti to vo uth baithi.sameer ne sone se pehle zarur use fone kiya hoga,usne apna mobile uthake dekha magar koi missed call nahi thi.use tajjub hua ki aisa kaise ho gaya.sameer to use pal-2 ki khabar deta tha.vo daftar jata to pahunchte hi fone karta.use lautne me bahut der hoti thi lekin fir bhi lunch me & sham ko apna nikalne ka waqt batane ke liye fone karna vo nahi bhulta tha.

aaj bhi vo har farm pe pahunch ke use fone karta raha tha & jaha network nahi milta tha to network milte hi fone kiya tha.clayworth pahunchne ke pehle uska fone aaya tha lekin raat ko sone ke pehle usne fone nahi kiay tha..bina driver ke chala gaya hai..thak gaya hoga..kaha tha ki driver ke sath jao..lekin nahi..drive karne me maza jo aata hai!..usne side-table pe rakhi bottle uthake pani piya.uska dil kiya ki 1 baar sameer ko fone lagaye lekin fir uski nind kharab hone ke darr se usne aisa kiya nahi & savere fone karne ka faisla kar so gayi.

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rambha ab keval pareshan nahi thi balki bahut ghabra bhi rahi thi.savere 7 baje se vo sameer ka fone try kar rahi thi lekin fone mil nahi raha tha.sameer ne bhi koi fone nahi kiya tha.usne uske office me fone kar baat batayi to vo log bhi har farm pe fone se puchh rahe the lekin sameer kahi nahi tha.clayworth farm ke manager ne kaha ki sameer ne uske sath hi raat ka khana khaya tha lekin savere vo us se mile bina chala gaya tha.use farm ke main gate ke guard ne bataya tha ki usne savere 5 baje hi sameer ki gadi ko bahar jane dene ke liye gate khola tha.ab dopahar ke 2 baj rahe the lekin sameer ka koi pata nahi tha.

uske daftar ke logo ki rai thi ki police ko khabar kar deni chahiye.rambha ke bungle ke drawing hall me sabhi baithe rambha ki or dekh rahe the ki vo kya faisla leti hai.rambha bahut himmati thi lekin is waqt uski samajh me bhi nahi aa raha tha ki kya kare.usne sabse baithne ko kaha & apne kamre me aa gayi.vaha usne 1 aakhiri baar sameer ka fone try kiya.fone abhi bhi nahi laga.vo kuchh pal khadi rahi & fir usne 1 number milaya.

"hello."

"hello,Sonam.kaisi hai?main rambha bol rahi hu."

"rambha!kaisi hai tum yaar?..& kitne dino baad fone kiya tune?..kya baat hai janeman..tere boss tujhe bahut busy rakhte hain kya?",usne saheli ko chheda.uski baat se rambha ka gala 1 pal ko bhar aaya & vo khamosh ho gayi,"kya baat hai rambha?sab thik hai na?"

"sonam..sonam..sameer lapata hai."

"kya?!"

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rambha ne police me report likhwa di thi.1 ghante tak police vale us se sameer ke bare me har baat puchhte rahe & vo jawab deti rahi.police ne clayworth tak ke sare ilake me wireless se khabar bhijwa ke sameer ki khoj shuru kar di thi.police ko shaq tha ki ye kidnapping ka case bhi ho sakta hai to unhone ye baat media se chhipa li thi & Mehra Agricultural Farms ke sabhi aadmiyo ko bhi ye baat bahar na batane ki sakht takeed ki thi lekin police vbale jante the ki ye baat chhupana mumkin nahi hai.iske liye khud panchmahal ke police commissioner ne shehar ke sabhi akhbaro & tv channels ke editors ko khud fone kar unse is khabar ko dabaye rakhne ki guzarish ki jise ki sabhi ne maan liya.aakhir 1 insan ki jaan ka sawal tha.

sameer ki khoj us din 3 baje report likhwane ke baad se shuru ho gayi thi lekin der raat tak koi natija nahi aya tha.policevalo ko pakka yakin tha ki use agwa kiya gaya hai kyuki us roz us ilake me jitne bhi accidents hue the unme se koi bhi car sameer ki silver grey Skoda Laura nahi thi na hi uske huliye ka koi shakhs un accidents me tha.

rambha ne company ke logo ko unke ghar jane ko kaha.vo savere se apni malkin ke sath baithe the.2-3 ladkiyo ne rukne ki baat ki lekin rambha ne unhe vapas bhej diya.vo janti thi ki uska pati bahut badi musibat me hai & ab use akele hi use kisi tarah is samasya se nibatna hai.kisi bhi kaam ke liye sahara lena use kamzor bana sakta tha & ye use gawara nahi tha.

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jab rambha ka fone aaya tha us waqt vijayant kisi luncheon meeting pe gaya tha.sonam ne socha ki pehle ye khabar brij ko de lekin use ye thik nahi laga ki baap se bhi pehle ye khabar brij ko di jaye.vo soch hi rahi thi ki use vijayant ne baaho me bhar liya.vo khayalo me aisi dubi thi ki darwaza khulne & uske dakhil hone ki use aahat hi nahi hui.

"kis khayal me khoyi ho?",vijayant uske pet ko uski shirt ke upar se sehlate hue uske daye kaan me zuban fira raha tha.

"sir..",vo uske agosh se nili & uski or ghumi,"..1 problem khadi ho gayi hai."

"kya?",vijayant 1 pal me sanjida ho gaya tha.

"sameer sir lapata hain."

"kya?",jawab me sonam ne use rambha se fone pe hui sari baat bata di.vijayant khamosh ho gaya & apni kursi pe baith gaya & fone utha liya.agle 1 ghante tak vo panchmahal police & mehra farms ke logo se baat karta raha.isi dauran soniya ke mobile se 1 meesage hua joki brij ko mila.brij us waqt 1 bahut zaruri meeting me bade hi sangin masle pe apne 2 admiyo ki daleelen sun raha tha.sonam ke message padh uske hotho pe muskan fail gayi jiska matlab uske aadmi samajh nahi paye.

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agli subah jab rambha uthi to use koi ghabrahat nahi thi.1 masla tha & ab use suljhana tha-bas yehi khayal tha uske dil me.sameer ke lapata hone ka use afsos tha magar aisa dukh nahi ki vo behaal ho jaye.use fikr is baat ki thi ki uski aaramdeh zindagi kahi shuru hone se pehle hi khatm na ho jaye.sameer ke apne parivar se sambandh toot gaye the & uske lapata hone ki surat me use to vo doodh ki makkhi ki tarah nikal fenk sakte the & use is se bachna tha.iske liye bahut zaruri tha ki sameer sahi-salamat mil jaye lekin agar rambha ki kismat hi phooti hai & vo nahi milta hai to us surat me uske parivar valo se vo apni sharto pe alag hogi na ki unki.

savere taiyyar hone ke baad usne apna purse check kiya to uske paas zyada cash nahi tha.1 safed,kasi patlun & adhe bazu ki gulabi kamiz pehni,aankho pe oversize dhoop ka chashma lagaya & apna bag utha ATM ke liye nikal padi.ATM pahunch usne 1 debit card usme dala.

INVALID CARD

message dekh use laga ki card thik seslot me dala nahi.usne dobara koshish ki magar fir se vahi baat hui.usne purse se dusra card nikal ke dala magar fir vahi baat.uska matha thanka.usne apne dono credit cards daal ke dekha magar har baar vo nakaam rahi.vo apni car me baithi & apne bank fone milaya & sari baat batayi.

"ma'am,aap apna card number bataiye taki main status check kar saku?",rambha ne number bataya.

"ma'am,aapka account block kar diya gaya hai.aapka account mehta agricultural farms ke zariye khulwaya gaya tha & hume vahise ye request aayi hai ki is account ko abhi block kar diya jaye."

"kya?!",rambha baukhla uthi & us call center executive ladki se bahas karne lagi.usne charo cards ke banks me fone kiya & har jagah yehi jawab mila.1 aur musibat samne aa gayi thi.uska irada paise nikal ke police station ja unse unki karvayi ke bare me puchhne ka tha lekin ab us se pehle use apne cards block karwane vale shakhs se milna tha.usne driver ko daftar chalne ka hukm diya & usne gadi udhar hi mod di.

"Mere bank accounts kisne block kiye Mini?",Rambha dandanate hue Sameer ke daftar pahunchi & uski secretary se sawal puchha.

"m-ma'am..vo..sir..",usne sameer ke cabin ki or ishara kiya.

"sir!",rambha ke mathe pe shikan pad gayi & fir jaise badi rahat mili,"sameer aa gaya!",vo bhagte hue aage badhi & cabin ka darwaza khol andar ghus gayi.

"sa..-",samne baithe shakhs ko dekh uski khushi hawa ho gayi & vo jaha ki taha thithak gayi.

"good morning,rambha.",sameer ki kursi pe Vijayant Mehra baitha tha.rambha ko thoda waqt laga magar usne khud ko sambhal liya.

"aap mere pati ke daftar me kya kar rahe hain?"

"tum bhool rahi ho ki main tumhare pati ka baap & yaha ka malki hu."

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--24

गतान्क से आगे.

"बाप तो हैं पर यहा के मालिक नही & मेरे कार्ड्स ब्लॉक करवाने की बेहूदा हरकत आपने क्यू की?"

"पहले ये पढ़ो,कंपनी के मालिकाना हक़ क्यू काग़ज़ात जिसपे तुम्हारे पति के भी दस्तख़त हैं.",उसने कुच्छ काग़ज़ डेस्क पे आगे सरकाए,"..पेज 4,क्लॉज़ 6..किसी भी एमर्जेन्सी की सूरत मे अगर मिस्टर.समीर मेहरा कंपनी के फ़ैसले लेने मे नाकाम या नाकाबिल हैं तो कंपनी के सारे मालिकाना हक़ अपनेआप ट्रस्ट ग्रूप को चले जाएँगे.",रंभा पे जैसे बिजली गिरी थी.उसे कुच्छ समझ नही आ रहा था.वो धाम से कुर्सी पे बैठ गयी.

"अब इत्तेफ़ाक़ कहो या तुम्हारी बदक़िस्मती की ट्रस्ट का मालिक तो मैं ही हू.",रंभा की ज़िंदगी यू उथल-पुथल हो जाएगी,ऐसा तो उसे अंदेशा ही नही था!

"लेकिन वो पैसे मेरे हैं,आप इस तरह उन्हे मुझसे नही छीन सकते..मेरे पति ने अपनी मर्ज़ी से मुझे वो दिए थे & उनपे केवल मेरा हक़ है.",उसकी हिम्मत ने अभी जवाब नही दिया था.उसने ठान ली की जो हो वो अगर हारती भी है तो बिना पूरी कोशिश किए नही हारेगी.

"वो अकाउंट्स समीर ने इस कंपनी के ज़रिए खुलवाए थे & यहा का मालिक होने के नाते मुझे लगा कि उनकी कोई ज़रूरत नही,वो बस कंपनी का खर्चा फालतू मे बढ़ा रहे हैं,इसीलिए मैने उन्हे ब्लॉक करवा दिया."

"आप जो भी दलीलें दें,मुझे वो पैसे चाहिए ही चाहिए..",वो उठ खड़ी हुई,"..मैं पोलीस स्टेशन जा रही हू,अपने पति की गुमशुदगी के बारे मे उनसे पुच्छने.आपको शायद याद नही कि इस कंपनी का मालिकाना हक़ आपको इसलिए मिला है क्यूकी आपका बेटा लापता है.",रंभा ने विजयंत को मज़किया निगाहो से देखा,"..आपको उसकी फ़िक्र नही होगी पर मुझे है.जब मैं पोलीस स्टेशन से लौटू तो मेरे अकाउंट्स फिर से चालू हो जाने चाहिए."

"बैठ जाओ.",विजयंत का चेहरा सख़्त हो चुका था & आँखो मे अजीब सा ठंडापन आ गया था.रंभा को उन नज़रो की ठंडक & भारी आवाज़ का रोब महसूस हुए & वो बैठ गयी.

"मैं कल रात यहा आया था & जिस वक़्त तुम घर मे आराम से सो रही थी मैं पोलीस से सारी जानकारी ले रहा था.मुझे इस छ्होटे से धंधे का लालची बता रही हो

& खुद मुझसे अपने पैसो के लिए लड़ रही हो!",विजयंत उठके उसके सामने आ खड़ा हुआ था & झुक के बात कर रहा था.रंभा के चेहरे से उसका चेहरा बस कुच्छ ही इंच दूर था.रंभा ने महसूस किया कि उसका दिल बहुत ज़ोरो से धड़कने लगा था & 1 अजीब सी घबराहट हो रही थी.

"तुम्हे तुम्हारे पैसे मिल जाएँगे लेकिन तुम्हे मेरी 1 शर्त माननी पड़ेगी."

"कैसी शर्त?",वो धीमी आवाज़ मे बोली.

"तुम्हे मेरे साथ हमबिस्तर होना पड़ेगा.",रंभा को इतनी ज़ोर का झटका लगा की उसकी आवाज़ ही नही निकली.वो बस मुँह खोले विजयंत को देखे जा रही थी.

"क्या कहा आपने?",काफ़ी देर बाद वो वैसे ही हैरत मे डूबी बोली.

"तुम्हे मेरे साथ सोना होगा & फिर तुम्हारे सारे अकाउंट्स चालू कर दिए जाएँगे.",रंभा वैसे ही मूरत की तरह बैठी रही,"..मैं आज रात पंचमहल मे ही रुकुंगा & रात को तुम्हारे घर आऊंगा,अगर तुम्हारा जवाब हां होगा तो ठीक है वरना..",हाथ मे थामे पेन को उसने रंभा के माथे से लेके दाए गाल पे फिराया.

रंभा बुत बनी बैठी रही लेकिन उसके दिल मे ख़यालो का तूफान उमड़ा हुआ था..ये इंसान उसका ससुर था..समीर का बाप..!..& वो उसे चोदने की बात कर रहा था..!..नही वो कैसे मान सकती है ये गलिज़ बात?..लेकिन इसमे हर्ज ही क्या है..क्या उसके दिल मे कभी विजयंत के लिए कोई गुस्ताख ख़याल नही आए थे?..हां..लेकिन वो सब शादी से पहले थे..तो तुम कब से इतनी सती-सावित्री हो गयी..इस रिश्ते से तुम्हारा फ़ायदा ही तो है!

"तुम्हे अभी जवाब देने की ज़रूरत नही है.रात को बता देना.चलो मेरे साथ.",रंभा ने उसे सवालिया नज़रो से देखा,"पोलीस स्टेशन जा रही थी ना,चलो.",रंभा उठी & उसके पीछे चल दी.

पोलीस स्टेशन मे कोई नयी बात नही पता चली थी.पोलीस वाले भी परेशान थे कि आख़िर इस तरह से समीर कार सहित कहा गायब हो गया.पंचमहल से लेके क्लेवर्त तक का सारा इलाक़ा छान मारा था लेकिन कोई सुराग तक नही मिला था.पोलिसेवालो का ये मानना था की उसे अगवा किया गया है लेकिन विजयंत & रंभा का कहना था कि समीर की ना कोई दुश्मनी थी किसी से ना कोई कहा-सुनी हुई थी फिर कौन कर सकता है ये काम!

पोलिसेवाले फिर भी छान-बीन मे लगे हुए थे.अब 1 नयी मुसीबत खड़ी हो गयी थी.लाख कोशिशो के बावजूद इस बात को च्छुपाना तो मुश्किल था.उपर से 300किमी के दायरे मे किसी इंसान की खोज हो बात लीक ना हो ऐसा तो नामुमकिन ही था.मीडीया को भनक लग गयी & ये भी पता चल गया कि इस वक़्त खुद विजयंत मेहरा पोलीस थाने मे बैठा है और उन्होने थाने के बाहर ही अपने तंबू गाढ दिए.

"प्लीज़..शांत हो जाइए..मैं बस 1 स्टेट्मेंट दूँगा..",विजयंत रंभा के साथ थाने के बाहर खड़े रिपोर्टर्स से मुखातिब था जोकि स्कूल के बच्चो से भी ज़्यादा बुरे ढंग से पेश आ रहे थे लेकिन स्टेट्मेंट लफ्ज़ सुनते ही सब कॅमरास & माइक्स तान चुपचाप खड़े हो गये,"..मेरे बेटे की परसो रात से कोई खबर नही है.मेरी बहू..",उसने पास खड़ी आँखो पे चश्मा चढ़ाए रंभा की ओर इशारा किया,"..ने पोलीस मे रिपोर्ट कल दोपहर दर्ज कराई & अब पोलीस उसकी तलाश मे जुटी है..",इसके बाद उसने कुछ सवालो के जवाब दिए & रंभा के साथ वाहा से निकल गया.

रंभा को वो पंचमहल के वाय्लेट होटेल के रेस्टोरेंट मे ले गया.रंभा अनमानी से खाना खा रही थी,"कोई ज़बरदस्ती नही कि तुम मेरी बात मान लो?..चाहो तो इनकार कर दो & अपने रास्ते चली जाओ.",रंभा ने सर उपर किया & आग बरसाती निगाहो से उसे देखा.विजयंत बस मुस्कुराता हुआ खाना ख़ाता रहा.खाना खाने के बाद दोनो नीचे आए & लॉबी के पास बने स्टोर्स के सामने से बाहर जाने लगे कि तभी विजयंत रुक गया,"रंभा.."

"ये सारी देख रही हो..",उसने शो विंडो मे 1 पुतले पे लिपटी सारी देखी,"..अगर तुम्हारा जवाब हां होगा तो रात तुम यही सारी पहनना.",वो मुस्कुराता हुआ आगे बढ़ गया.रंभा वही खड़ी उस सारी को घुरती रही.

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रात 9 बजे बंगले के अंदर के दरवाज़े पे दस्तक हुई तो रंभा ने दरवाज़ा खुद खोला.उसने सभी नौकरो को बहुत जल्दी छुट्टी दे दी थी.विजयंत अंदर दाखिल हुआ & रंभा को देखते ही उसके होंठो पे मुस्कान खेलने लगी.रंभा ने वही नारंगी सारी पहनी थी जो उसने उसे होटेल मे दिखाई थी.बॉल जुड़े मे बँधे थे & जब वो घूमी तो उसकी नज़रो के सामने उसकी गोरी पीठ चमक उठी क्यूकी उसने बॅकलेस,हॉल्टर नेक्बलॉवौस पहना था.ब्लाउस की 1 पट्टी किसी माला की तरह उसकी गर्दन मे पड़ी थी & पीछे पीठ पे बस 1 पतली पट्टी हुक्स से जुड़ी उसके सीने को ढँके हुए थी.

विजयंत के हाथ मे 1 पॅकेट था जिसे उसने दरवाज़ा बंद करने के बाद वही हॉल की मेज़ पे रखा.रंभा अपने कमरे मे चली गयी थी.विजयंत ने कोट उतारा & उसके पास पहुँचा & अपना हाथ आगे बढ़ाया.उसके दाए हाथ मे 1 सुर्ख गुलाब था.रंभा ने 1 नज़र गुलाब को देखा & 1 नज़र विजयंत को अपना मुँह घुमा उसकी ओर पीठ कर खड़ी हो गयी.

हुन्न्ञन्..!",वो सिहर उठी थी.वो सुर्ख गुलाब उसके जुड़े के ठीक नीचे उसकी गर्दन के नीचे आ लगा था & बहुत हौले-2 नीचे जा रहा था.गुलाब की कोमल छुअन ने उसके जिस्म को जगा दिया था.गुलाब उसकी कमर के बीचोबीच उसकी सारी तक पहुँचा & फिर डाई तरफ हो उसके दाए हाथ से सॅट गया.उसके नर्म हाथ & पतली कलाई से होता वो उपर उसकी गुदाज़ बाँह की ओर बढ़ा जा रहा था.गुलाब का कोमल एहसास उसे पागल कर रहा था लेकिन वो बस आँखे बंद किए खड़ी थी.

विजयंत उसकी मजबूरी का फ़ायदा उठा रहा था & आत्म-सम्मान से भरी रंभा को ये बात बिल्कुल नागवार गुज़री थी.ये सच था की विजयंत के साथ सोने मे उसे कोई हिचक,कोई परेशानी नही थी लेकिन वो फ़ैसला उसका खुद की मर्ज़ी से लिया हुआ होना चाहिए था & इसीलिए उसने तय कर लिया था क़ि वो विजयंत को कुच्छ करने से नही रोकेगी लेकिन चुद्ते वक़्त अपनी खुशी,अपनी मस्ती का इज़हार कर वो मज़ा वो अपने ससुर को नही देगी.

गुलाब अब उसके नंगे कंधे पे आ गया था & उपर बढ़ रहा था.विजयंत ने गुलाब को उसके दाए कान पे फिराया & वाहा से वो उसको उसके दाए गाल पे लाते हुए उसके सामने आ खड़ा हुआ.रंभा ने आँखे बंद ही रखी थी लेकिन वो समझ गयी थी की उसका ससुर अब उसके सामने खड़ा है.गुलाब अब उसके हसीन चेहरे पे घूम रहा था.गुलाब ने पहले उसके माथे को चूमा & फिर उसकी नाक को,उसके बाद वो उसके गुलाबी गालो से मिला & फिर उसकी पंखुड़ियो ने अपने ही जैसी उसके होंठो की पंखुड़ियो को छेड़ा.रंभा के जिस्म मे बिजली दौड़ गयी & उसकी चूत मे कसक उठने लगी.उसे बहुत अच्छा लग रहा था यू प्यार करवाना लेकिन उसकी आन उसे इस मज़े के इज़हार से रोक रही थी.

गुलाब उसके बाए कान पे गया & फिर उसकी ठुड्डी से फिसलता उसकी गर्दन पे आया & फिर उसके नीचे.रंभा की धड़कने तेज़ हो गयी.गुलाब उसकी छातियो की ओर बढ़ रहा था.विजयंत की निगाह अपनी बहू के चेहरे से ही चिपकी हुई थी.उसके सुर्ख गाल,बंद पलके उसके जिस्म मे उठ रही तरंगो से पैदा हुई मस्ती दास्तान कह रहे थे.

गुलाब नीचे आया & उसकी बाई छाती के बाहरी हिस्से को ब्लाउस के उपर से च्छुटा हुआ उसकी बाई बाँह से आ लगा फिर वो हौले-2 उसकी मांसल,रेशमी बाँह पे नीचे फिसलने लगा & उसकी कलाई तक जा पहुँचा.उसके बाद ने रंभा को अपनी आह को आवाज़ देने पे मजबूर कर ही दिया.गुलाब कलाई से सीधा उसके नर्म पेट पे आ गया & उसकी नाभि की ओर बढ़ने लगा.रंभा की आह निकल गयी थी & उसे खुद पे गुस्सा आया कि उसने क्यू अपने ससुर को उस आह का मज़ा दिया & उसने गुलाब की डंठल को दाए हाथ से पकड़ वही फर्श पे गिरा दिया.

विजयंत उसके बिल्कुल करीब आ गया,इतना करीब की उसकी गर्म सांसो को रंभा अपने चेहरे पे महसूस करने लगी.उनकी तपिश ने उसकी चूत की कसक & बढ़ा दी.उसके दिल मे अरमान अंगडायाँ ले जागने लगे लेकिन उसने आँखे नही खोली.उसका दिल चीख-2 के कह रहा था कि विजयंत को बाहो मे भर उसके होंठ चूम ले & उन गर्म सांसो की गर्मी अपने पूरे जिस्म पे महसूस करे मगर ऐसा करना उसकी आन के खिलाफ था & उसने अपनी आँखे नही खोली.

उसने महसूस किया कि उसकी साँसे उसकी आँखो के बाद नाक & फिर दोनो गालो के बाद अब वो अपनी गर्दन पे महसूस कर रही थी.विजयंत अपनी खूबसूरत बहू के चेहरे को बहुत करीब से देखने के बाद नीचे झुक रहा था & उसकी गर्दन के बाद वो उसके बहाली की दास्तान कहते उपर-नीचे होते बड़े से सीने पे झुका हुआ था.रंभा के दिल मे तो ये हसरत पैदा हुई कि वो अपना चेहरा डूबा ले उन गोलाईयो के बीच & नही तो वो खुद ही उसका सर भींच दे अपनी छातियो मे लेकिन उसने खुद को रोके रखा.

काफ़ी देर तक उसने उसकी गर्म सांसो को अपने सीने पे महसूस किया लेकिन उसकी हालत तब और बुरी हो गयी जब उन सांसो ने अपना निशाना उसके चिकने पेट को बना लिया.उसकी सारी के बगल से विजयंत उसकी गहरी नाभि को देख रहा था.बस उसके नीचे ही तो उसकी चूत थी जो मस्ती मे पागल हो रही थी.रंभा के लिए बात अब बर्दाश्त से बाहर हो रही थी & वो घूम गयी & अपनी पीठ विजयंत की ओर कर दी लेकिन अभी भी उसे राहत नही मिली.अब विजयंत की साँसे उसकी मांसल कमर को तपा रही थी.

विजयंत ने रंभा के कदमो मे पड़ा फूल उठाया & फिर उसकी पीठ को अपनी गर्म सांसो से आहत करता उपर उठा.उसका चेहरा अब रंभा के दाए कंधे के उपर झुका हुआ था.रंभा ने अपना मुँह बाई ओर फेर लिया तो विजयंत ने अपने बाए हाथ मे पकड़े फूल को उसके बाए गाल से लगा उसे दाई ओर धकेला.उस नाज़ुक से फूल के धकेलने के पीछे विजयंत की हसरत ने उसे चेहरा उसकी ओर करने पे मजबूर किया मगर ज्यो ही वो उसके दाए कंधे के उपर से उसके चेहरे की ओर झुका वो घूमी & लड़खड़ाते कदमो से उस से दूर जाने लगी.

विजयंत ने दाया हाथ बढ़ा के जाती हुई रंभा की दाई कलाई थाम ली.रंभा थोड़ा आगे जा चुकी थी & अब उसकी बाँह पूरा पीछे की ओर खींची हुई थी.वो रुकी लेकिन घूमी नही & 1 बार फिर उसके होंठो मे क़ैद 1 आह बरबस आज़ाद हो गयी.विजयंत के तपते होंठ उसके दाए हाथ की उंगलियो से आ लगे थे & उन्हे चूस रहे थे.विजयंत ने उसकी नर्म गुलाबी हथेली पे अपने आतुर होंठो से चूमा & फिर वो होंठ उसकी कलाई से होते हुए उसकी बाँह की ओर बढ़ने लगे.

उसकी हर किस पे वो सिहर उठती थी.वो बाँह छुड़ाने की बहुत मामूली सी कोशिश कर रही थी.सच तो ये था कि उसका जिस्म इस खेल मे बहुत गर्मजोशी के साथ शरीक था & उसका दिल भी लेकिन उसकी आन ही थी जिसने उसे इस बात को मानने से रोका हुआ था.विजयंत उसकी बाँह को दाई तरफ फैलाए चूमते हुए उसके कंधे तक आ पहुँचा.बहाल रंभा ने फिर से छूटने की कोशिश की तो विजयंत ने वैसे ही उसकी कलाई पकड़े हुए उसका बाया कंधा थामा & घूमके 1 दीवार से सटा दिया.

अब वो उसके & दीवार के बीच क़ैद थी.विजयंत ने उसके दोनो हाथ उपर दीवार से लगा दिए & उसके दाए कंधे से चूमते हुए उसकी गर्दन के पिच्छले हिस्से पे आया.रंभा के जिस्म की मादक खुश्बू उसे दीवाना कर रही थी.वो उसकी रीढ़ पे चूमता हुआ नीचे गया & फिर उसकी संगमरमरी पीठ को उसने अपने होंठो से तब तक भिगोया जब तक रंभा की सारी की सारी आहें आज़ाद ना हो गयी.

वो उसकी मांसल कमर को जिभर के चूमने के बाद उपर आने लगा & उसके होंठ रंभा के बाए कंधे पे आके रुक गये. & फिर आगे का सफ़र का रुख़ बाई बाँह की ओर किया.ये सफ़र उसके बाए हाथ की उंगलियो पे रुका जहा की उसके होंठो ने उन्हे बारी-2 से अंदर खींच के खूब चूसा.रंभा का जिस्म दीवार से लगा रोमांच से थरथरा रहा था.उसने महसूस किया कि विजयंत के होंठ अब वापस उसकी उपरी बाँह की ओर बढ़ रहे थे.

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क्रमशः.......

JAAL paart--24

gataank se aage.

"baap to hain par yaha ke malik nahi & mere cards block karwane ki behuda harkat aapne kyu ki?"

"pehle ye padho,company ke malikana haq kew kagzat jispe tumhare pati ke bhi dastkhat hain.",usne kuchh kagaz desk pe aage sarkaye,"..page 4,clause 6..kisi bhi emergency ki surat me agar Mr.Sameer Mehra company ke faisle lene me nakaam ya nakabil hain to company ke sare malikana haq apneaap Trust Group ko chale jayenge.",rambha pe jaise bijli giri thi.use kuchh samajh nahi aa raha tha.vo dham se kursi pe baith gayi.

"ab ittefaq kaho ya tumhari badkismati ki trust ka malik to main hi hu.",rambha ki zindagi yu uthal-puthal ho jayegi,aisa to use andesha hi nahi tha!

"lekin vo paise mere hain,aap is tarah unhe mujhse nahi chhen sakte..mere pati ne apni marzi se mujhe vo diye the & unpe keval mera haq hai.",uski himmat ne abhi jawab nahi diya tha.usne than li ki jo ho vo agar harti bhi hai to bina puri koshish kiye nahi haregi.

"vo accounts sameer ne is company ke zariye khulwaye the & yaha ka malik hone ke nate mujhe laga ki unki koi zarurat nahi,vo bas company ka kharcha faltu me badha rahe hain,siliye maine unhe block karwa diya."

"aap jo bhi daleelen den,mujhe vo paise chahiye hi chahiye..",vo uth khadi hui,"..main police station ja rahi hu,apne pati ki gumshudgi ke bare me unse puchhne.aapko shayad yaad nahi ki is company ka malikana haq aapko isliye mila hai kyuki aapka beta lapta hai.",rambha ne vijayant ko mazakiya nigaho se dekha,"..aapko uski fikr nahi hogi par mujhe hai.jab main police station se lautu to mere accounts fir se chalu ho jane chahiye."

"baith jao.",vijayant ka chehra sakht ho chuka tha & aankho me ajib sa thandapan aa gaya tha.rambha ko un nazro ki thandak & bhari aavaz ka rob mehsus hue & vo baith gayi.

"main kal raat yaha aaya tha & jis waqt tum ghar me aaram se so rahi thi main police se sari jankari le raha tha.mujhe is chhote se dhandhe ka lalchi bata rahi ho

& khud mujhse apne paiso ke liye lad rahi ho!",vijayant uthke uske samne aa khada hua tha & jhuk ke baat kar raha tha.rambha ke chehre se uska chehra bas kuchh hi inch door tha.rambha ne mehsus kiya ki uska dil bahut zoro se dhadakne laga tha & 1 ajib si ghabrahat ho rahi thi.

"tumhe tumhare paise mil jayenge lekin tumhe meri 1 shart maanani padegi."

"kaisi shart?",vo dhimi aavaz me boli.

"tumhe mere sath humbistar hona padega.",rambha ko itni zor ka jhatka laga ki uski aavaz hi nahi nikli.vo bas munh khole vijayant ko dekhe ja rahi thi.

"kya kaha aapne?",kafi der baad vo vaise hi hairat me dubi boli.

"tumhe mere sath sona hoga & fir tumhare sare accounts chalu kar diye jayenge.",rambha vaise hi murat ki tarah baithi rahi,"..main aaj raat Panchmahal me hi rukunga & raat ko tumhare ghar aaoonga,agar tumhara jawab haan hoga to thik hai varna..",hath me thame pen ko usne rambha ke mathe se leke daye gaal pe firaya.

rambha but bani baithi rahi lekin uske dil me khayalo ka toofan umda hua tha..ye insan uska sasur tha..sameer ka baap..!..& vo use chodne ki baat kar raha tha..!..nahi vo kaise maan sakti hai ye galiz baat?..lekin isme harj hi kya hai..kya uske dil me kabhi vijayant ke liye koi gustakh khayal nahi aaye the?..haan..lekin vo sab shadi se pehle the..to tum kab se itni sati-savitri ho gayi..is rishte se tumhara fayda hi to hai!

"tumhe abhi jawab dene ki zarurat nahi hai.raat ko bata dena.chalo mere sath.",rambha ne use sawaliya nazro se dekha,"police station ja rahi thi na,chalo.",rambha uthi & uske peechhe chal di.

police station me koi nayi baat nahi pata chali thi.police vale bhi pareshan the ki aakhir is tarah se sameer car sahit kaha gayab ho gaya.panchmahal se leke Clayworth tak ka sara ilaka chhan mara tha lekin koi surag tak nahi mila tha.policevalo ka ye maanana tha ki use agwa kiya gaya hai lekin vijayant & rambha ka kehna tha ki sameer ki na koi dushmani thi kisi se na koi kaha-suni hui thi fir kaun kar sakta hai ye kaam!

policevale fir bhi chhan-been me lage hue the.ab 1 nayi musibat khadi ho gayi thi.lakh koshisho ke bavjud is baat ko chhupana to mushkil tha.upar se 300km ke dayre me kisi insan ki khoj ho baat leak na ho aisa to namumkin hi tha.media ko bhanak lag gayi & ye bhi pata chal gaya ki is waqt khud vijayant mehra police thane me baitha hai ot unhone thane ke bahar hi apne tambu gaad diye.

"please..shant ho jaiye..main bas 1 statement dunga..",vijayant rambha ke sath thane ke bahar khjade reporters se mukhatib tha joki school ke bachcho se bhi zyada bure dhang se pesh aa rahe the lekin statement lafz sunte hi sab cameras & mikes taan chupchap khade ho gaye,"..mere bete ki parso raat se koi khabar nahi hai.meri bahu..",usne paas khadi ankho pe chashma chadhayi rambha ki or ishara kiya,"..ne police me report kal dopahar darj karayi & ab police uski talash me juti hai..",iske baad usne kucch sawalo ke jawab diye & rambha ke sath vaha se nikal gaya.

rambha ko vo panchmahal ke Violet hotel ke reataurant me le gaya.rambha anmani se khana kha rahi thi,"koi zabardasti nahi ki tum meri baat maan lo?..chaho to inkar kar do & apne raste chali jao.",rambha ne sar upar kiya & aag barsati nigaho se use dekha.vijayant bas muskurata hua khana khata raha.khana khane ke baad dono neeche aaye & lobby ke paas bane stores ke samne se bahar jane lage ki tabhi vijayant ruk gaya,"rambha.."

"ye sari dekh rahi ho..",usne show window me 1 putle pe lipti sari dekhi,"..agar tumhara jawab haan hoga to raat tum yehi sari pehanana.",vo muskurata hua aage badh gaya.rambha vahi khadi us sari ko ghurti rahi.

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raat 9 baje baungle ke andar ke darwaze pe dastak hui to rambha ne darwaza khud khola.usne sabhi naukro ko bahut jaldi chhutti de di thi.vijayant andar dakhil hua & rambha ko dekhte hi uske hotho pe muskan khelne lagi.rambha ne vahi narangi sari pehni thi jo usne use hotel me dikhayi thi.baal jude me bandhe the & jab vo ghumi to uski nazro ke samne uski gori pith chamak uthi kyuki usne backless,halter neckblouse pehna tha.blouse ki 1 patti kisi mala ki tarah uski gardan me padi thi & peechhe pith pe bas 1 patli patti hooks se judi uske seene ko dhanke hue thi.

vijayant ke hath me 1 packet tha jise usne darwaza band karne ke baad vahi hall ki mez pe rakha.rambha apne kamre me chali gayi thi.vijayant ne coat utara & uske paas pahuncha & apna hath aage badhaya.uske daye hath me 1 surkh gulab tha.rambha ne 1 nazar gulab ko dekha & 1 nazar vijayant ko apna munh ghuma uski or pith kar khadi ho gayi.

hunnnn..!",vo sihar uthi thi.vo surkh gulab uske jude ke thik neeche uski gardan ke neeche aa laga tha & bahut haule-2 neeche ja raha tha.gulab ki komal chhuan ne uske jism ko jaga diya tha.gulab uski kamar ke beechobeech uski sari tak pahuncha & fir dayi taraf ho uske daye hath se sat gaya.uske narm hath & patli kalai se hota vo upar uski gudaz banh ki or badha ja raha tha.gulab ka komal ehsas use pagal kar raha tha lekin vo bas aankhe band kiye khadi thi.

vijayant uski majburi ka fayda utha raha tha & aatm-samman se bhari rambha ko ye baat bilkul nagawar guzri thi.ye sach tha ki vijayant ke sath sone me use koi hichak,koi pareshani nahi thi lekin vo faisla uska khud ki marzi se liya hua hona chahiye tha & isiliye usne tay kar liya tha ki vo vijayant ko kuchh karne se nahi rokegi lekin chudte waqt apni khushi,apni masti ka izhar kar vo maza vo apne sasur ko nahi degi.

gulab ab uske nange kandhe pe aa gaya tha & upar badh raha tha.vijayant ne gulab ko uske daye kaan pe firaya & vaha se vo usko uske daye gaal pe late hue uske samne aa khada hua.rambha ne aankhe band hi rakhi thi lekin vo samajh gayi thi ki uska sasur ab uske samne khada hai.gulab ab uske haseen chehre pe ghum raha tha.gulab ne pehle uske mathe ko chuma & fir uski naak ko,uske baad vo uske gulabi galo se mila & fir uski pankhudiyo ne apne hi jaisi uske hotho ki pankhudiyo ko chheda.rambha ke jism me bijli daud gayi & uski chut me kasak uthne lagi.use bahut achha lag raha tha yu pyar karwana lekin uski aan use is maze ke izhar se rok rahi thi.

gulab uske baye kaan pe gaya & fir uski thuddi se fisalta uski gardan pe aaya & fir uske neeche.rambha ki dhadkane tez ho gayi.gulab uski chhatiyo ki or badh raha tha.vijayant ki nigah apni bahu ke chehre se hi chipki hui thi.uske surkh gaal,band palke uske jism me uth rahi tarango se paida hui masti dastan keh rahe the.

gulab neeche aaya & uski bayi chhati ke bahri hisse ko blouse ke upar se chhuta hua uski bayi banh se aa laga fir vo haule-2 uski mansal,reshmi banh pe neeche fisalne laga & uski kalai tak ja pahuncha.uske baad ne rambha ko apni aah ko aavaz dene pe majbur kar hi diya.gulab kalai se seedha uske narm pet pe aa gaya & uski nabhi ki or badhne laga.rambha ki aah nikal gayi thi & use khud pe gussa aaya ki usne kyu apne sasur ko us aah ka maza diya & usne gulab ki danthal ko daye hath se pakad vahi farsh pe gira diya.

vijayant uske bilkul karib aa gaya,itna karib ki uski garm sanso ko rambha apne chehre pe mehsus karne lagi.unki tapish ne uski chut ki kasak & badha di.uske dil me arman angdaiyan le jagne lage lekin usne aankhe nahi kholi.uska dil chikh-2 ke keh raha tha ki vijayant ko baaho me bhar uske honth chum le & un garm sanso ki garmi apne pure jism pe mehsus kare magar aisa karna uski aan ke khilaf tha & usne apni aankhe nahi kholi.

usne mehsus kiya ki uski sanse uski aankho ke baad naak & fir dono galo ke baad ab vo apni gardan pe mehsus kar rahi thi.vijayant apni khubsurat bahu ke chehre ko bahut karib se dekhne ke baad neeche jhuk raha tha & uski gardan ke baad vo uske behaali ki dastan kehte upar-neeche hote bade se seene pe jhuka hua tha.rambha ke dil me to ye hasrat paida hui ki vo apna chehra duba le un golaiyo ke beech & nahi to vo khud hi uska sar bhinch de apni chhatiyo me lekin usne khud ko roke rakha.

kafi der tak usne uski garm sanso ko apne seene pe mehsus kiya lekin uski halat tab aur buri ho gayi jab un sanso ne apna nishana uske chikne pet ko bana liya.uski sari ke bagal se vijayant uski gehri nabhi ko dekh raha tha.bas uske neeche hi to uski chut thi jo masti me pagal ho rahi thi.rambha ke liye baat ab bardasht se bahar ho rahi thi & vo ghum gayi & apni pith vijayant ki or kar di lekin abhi bhi use rahat nahi mili.ab vijayant ki sanse uski mansal kamar ko tapa rahi thi.

vijayant ne rambha ke kadmo me pada phool uthaya & fir uski pith ko apni garm sanso se aahat karta upar utha.uska chehra ab rambha ke daye kandhe ke upar jhuka hua tha.rambha ne apna munh bayi or fer liya to vijayant ne apne baye hath me pakde phool ko uske baye gaal se laga use dayi or dhakela.us nazuk se phool ke dhakelne ke peechhe vijayant ki hasrat ne use chehra uski or karne pe majbur kiya magar jyo hi vo uske daye kandhe ke upar se uske chehre ki or jhuka vo ghumi & ladkhadate kadmo se us se door jane lagi.

vijayant ne daya hath badha ke jati hui rambha ki dayi kalai tham li.rambha thoda aage ja chuki thi & ab uski banh pura peechhe ki or khinchi hui thi.vo ruki lekin ghumi nahi & 1 baar fir uske hotho me qaid 1 aah barbas azad ho gayi.vijayant ke tapte honth uske daye hath ki ungliyo se aa lage the & unhe chus rahe the.vijayant ne uski narm gulabi hatheli pe apne aatur hotho se chuma & fir vo honth uski kalai se hote hue uski banh ki or badhne lage.

uski har kiss pe vo sihar uthati thi.vo banh chhudane ki bahut mamuli si koshish kar rahi thi.sach to ye tha ki uska jism is khel me bahut garmjoshi ke sath sharik tha & uska dil bhi lekin uski aan hi thi jisne use is baat ko maanane se roka hua tha.vijayant uski banh ko dayi taraf failaye chumte hue uske kandhe tak aa pahuncha.behaal rambha ne fir se chhutne ki koshish ki to vijayant ne vaise hi uski kalai pakde hue uska baya kandha thama & ghumake 1 deewar se sata diya.

ab vo uske & deewar ke beech qaid thi.vijayant ne uske dono hath upar deear se laga diye & uske daye kandhe se chumte hue uski gardan ke pichhle hisse pe aaya.rambha ke jism ki madak khushbu use deewana kar rahi thi.vo uski reedh pe chumta hua neeche gaya & fir uski sangmarmari pith ko usne apne hotho se tab tak bhigoya jab tak rambha ki sari ki sari aahen azad na ho gayi.

vo uski mansal kamar ko jibhar ke chumne ke baad upar aane laga & uske honth rambha ke baye kandhe pe aake ruk gaye. & fir aage ka safar ka rukh bayi banh ki or kiya.ye safar uske baye hath ki ungliyo pe ruka jaha ki uske hotho ne unhe bari-2 se andar khinch ke khub chusa.rambha ka jism deewar se laga romanch se tharthara raha tha.usne mehsus kiya ki vijayant ke honth ab vapas uski upri banh ki or badh rahe the.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--25

गतान्क से आगे.

विजयंत उसकी गोरी बाँह से होता हुआ उसकी गर्दन तक पहुँचा & 1 बार फिर दाए कंधे के उपर से उसने अपनी बहू के रसीले होंठो को चूमने की ख्वाहिश जताई लेकिन इस बार भी उसने उसे धकेल के खुद से अलग किया & उस से दूर लड़खड़ाते भागी.

विजयंत ने हाथ बढ़ाया & इस बार उसके हाथ मे उसला लहराता आँचल आ गया.रंभा झटके से घूमी & वो नज़ारा देख विजयंत का हलाक सूख गया.आँचल हटने से उसकी तेज़ धड़कनो की कहानी कहता नारंगी ब्लाउस के गले मे से झँकता क्लीवेज & गोल नाभि से सज़ा उसका चिकना पेट.विजयंत उसके हुस्न को आँखो से पीते हुए उसका पल्लू पकड़े उसके गिर्द घूमने लगा.रंभा को उसकी निगाहें भी अपने जिस्म को जलती लग रही थी.वो बस आँखे बंद किए अपनी मुत्ठिया भिंचे चुपचाप खड़ी थी.कोई & मौका होता तो वो अपने आशिक़ के साथ नज़रे मिलाके उसे खुद को निहारते देखती लेकिन आज नही,आज उसे विजयंत को ये सुख नही देना था.

विजयंत घूम रहा था & लिपटी सारी खुल रही थी लेकिन पूरी तरह से नही क्यूकी वो उसकी बहू की कमर मे अटकी जो थी.रंभा ने अपनी पलके आधी खोली,उसे देखने से लग रहा था कि वो नशे मे है.विजयंत उसके करीब आया & फजूल जिसे उसने रंभा की पीठ पे होंठ फिराते वक़्त पॅंट की जेब मे रख लिया था,उसे निकाला.वो उसकी सारी को पकड़े उसे देखे जा रहा था.रंभा ने देखा उन आँखो मे उसके जिस्म की बहुत तारीफ थी.

"आहह..!",रंभा की आह ना चाहते हुए भी निकल गयी.विजयंत ने काम ही ऐसा किया था.गुलाब की लंबी डंठल को उसने उसकी सारी जहा अटकी वाहा उसकी सारी & कमर के बीच मे घुसाया & उसी डंठल से उसकी सारी की अटकी परतों को बाहर निकालने लगा.ऐसा करने से डंठल रंभा के निचले पेट को खरोंच उसके जोश को & बढ़ाने लगा.अब उसकी चूत मे उठ रही कसक बहुत तेज़ हो गयी थी.विजयंत ने फूल को बेड पे फेंका & उसकी सारी को फर्श पे गिराया & झुक के बैठ गया.

उसने बाए हाथ को रंभा की कमर की दाई तरफ जमाया & दाए हाथ की उंगलियो को उसके पेट पे फिराया,रंभा ने अपने बाल पकड़े & बड़ी मुश्किल से अपनी आह को दबाया.विजयंत आगे हुआ & उसके पेट को चूम लिया.उसके चूमने मे मस्ती थी,गर्मी थी जो रंभा की तड़प मे इज़ाफ़ा कर रही थी.वो पेट को चूमता उसकी नाभि की ओर पहुँचा & रंभा का दिल खुशी से उच्छलने लगा कि अब वो उसकी नाभि की गहराई नपेगा लेकिन नही वो नाभि के ठीक नीचे के हिस्से को होंठो मे दबा के काटने जैसी हरकत कर रहा था.रंभा को पता भी ना चला & उसकी कमर हिलने लगी & वो थोड़ा च्चटपटाने लगी.चूत की कसक अब बिल्कुल चरम पे थी.विजयंत वैसे ही उसकिनाभि के नीचे अपने होंठो से चबाए जा रहा था,फ़र्क बस ये था कि अब उसकी ज़ुबान भी उस हिस्से पे घूम रही थी.रंभा अपने बालो मे उंगलिया फिराती,सर झटकती कसमसा रही थी की उसे लगा की उसकी चूत की कसक बिकुल अपनी इंतेहा पे पहुँच गयी है & वो चीखी.उसे लगा कि उसकी टाँगे जवाब दे रही हैं.वो आँहे भरते हुए झाड़ रही थी.

विजयंत ने वैसे ही उसके पेट से खेलते हुए उसकी कमर को थाम उसे गिरने से रोक लिया & घुमा के दीवार के सहारे खड़ा कर दिया.जब वो थोड़ा संभली तो उसकी कमर के बाई तरफ लगे पेटिकोट के हुक & ज़िप को खोल दिया.पेटिकोट फ़ौरन फर्श पे गिरा नज़र आने लगा.विजयंत ने उसकी कमर से हाथ हटाए & उठ खड़ा हुआ.रंभा अभी भी थोड़ा कांप रही थी.उसने उसके दोनो हाथ थामे & उन्हे अपने सीने पे रख दिया.वो उसका इशारा समझ गयी-वो उसे अपनी कमीज़ खोलने को कह रहा था.उसने नज़रे नीची कर ली लेकिन विजयंत ने उसकी ठुड्डी पकड़ चेहरा उठाके फिर से वही इशारा किया.वो 1 बार फिर उसके & दीवार के बीच फँसी थी.उसने नज़रे नीची की & उसके बटन्स खोलने लगी.अंदर काफ़ी बाल नज़र आ रहे थे.विजयंत के इशारे पे उसने शर्ट को उसके कंधो से सरकाया & वो भी फर्श पे उसकी सारी & पेटिकोट के साथ गिरी दिखने लगी.

रंभा की आँखे फैल गयी थी.विजयंत का गोरा सीना बहुत चौड़ा & मज़बूत था & सुनहरे बालो से भरा हुआ था.ऐसे ही सीने तो उसे पसंद थे.उसका पेट ज़रा भी बाहर नही निकला था & बाजुओ का घेरा तो इतना बड़ा था कि शायद उसके दोनो हाथो मे नही समाता.कसरती बदन की 1-1 मांसपेशी जैसे तराशि हुई थी.विजयंत ने उसके हाथ सीने पे रख दिए.उसके दिल ने तो कहा की पूरे सीने को सहलाए,उसे चूमे & अपनी सारी हसरतें पूरी कर ले लेकिन नही उसे ऐसा नही करना था.वो वैसे ही खड़ी रही केवल उसका सीना उपर-नीचे होता रहा.विजयंत मुस्कुराया & उसके हाथो के उपर अपने बड़े-2 हाथ जमाए & उन्हे नीचे फिसलाने लगा.उसने रंभा के हाथ अपने पेट से होते हुए अपनी पॅंट की बेल्ट पे रख दिए.रंभा उसका इशारा समझ गयी & 1 पल के बाद उसकी पॅंट खोल दी.पॅंट सर्की तो विजयंत ने उस से अपनी टाँगे निकाली.अब बस 1 सफेद अंडरवेर उसके बदन मे था.रंभा ने सोचा था कि वो उधर नही देखेगी लेकिन उसकी निगाह पड़ी & अंडरवेर से चिपक गयी.इतना फूला अंडरवेर उसने आज तक नही देखा था.लंड के आकर की कल्पना से ही उसकी चूत मे दोबारा कसक उठने लगी.

विजयंत की जंघे किसी पेड़ की मोटी शाख जैसी थी & वो भी घने बालो से ढँकी थी.रंभा ने नज़रे उपर कर ली लेकिन विजयंत की निगाहो से नही मिलाई.विजयंत झुका & उसके होंठो से अपने होंठ सटा दिए.1 नयी बिजली की लहर रंभा के बदन मे दौड़ गयी & वो थरथरा उठी.पहली बार विजयंत ने उसके होंठ चूमे थे.उसकी किस मे गर्मजोशी थी लेकिन बदहवासी नही.अभी तक जितने मर्द उसके जिस्म का लुत्फ़ उठाने की खुशकिस्मती पाए थे,उनमे से सभी मस्ती मे पागल हो जाते थे & उनकी किस मे बड़ी बेसब्री होती थी.विजयंत की किस बहुत मस्त थी लेकिन रंभा को 1 पल को भी नही लगा कि वो उसके जिस्म को देख अपना काबू खो रहा है.उसे अच्छी लगी ये बात.विजयंत के होंठ उसके लबो को चूम उसकी मस्ती को कम नही होने दे रहे थे.वो थोड़ा लड़खड़ाई & उसके ससुर की मज़बूत बाहो ने उसे अपने आगोश मे भर लिया.उसका सीना विजयंत के चौड़े सीने से पिस गया & उसके हाथ अपने आप उसके कंधे पे लग गये.

विजयंत के होंठ उसके होंठो का रस पिए जा रहे थे & अब उसकी ज़ुबान का स्वाद भी चखना चाहते थे.रंभा ने अपने होंठ अलग करने की कोशिश की,मस्ती की शिद्दत बहुत बढ़ गयी थी & वो सिहर रही थी.विजयंत के सख़्त हाथ उसकी कमर & पीठ पे थे,उसका सीना उसकी चूचियो को दबा रहा था & नीचे चूत से उपर पेट पे उसका सख़्त लंड वो महसूस कर रही थी.उसकी चूत मे मस्ती की लहरे कसका बन के उमड़े जा रही थी.वो अब कमज़ोर पड़ रही थी & इसी बात का फ़ायदा उठाके विजयंत ने अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे घुसा दी & रंभा की ज़ुबान जैसे ही उस से टकराई & गुत्थमगुत्था हुई,उसके बदन मे तूफान आ गया जोकि उसकी चूत से उठा था.उसकी आहें ससुर के लबो से सिले होंठो के बावजूद सुनाई दे रही थी & वो 1 बार फिर कमर हिलाते काँपने लगी थी.अभी तक वो पूरी नंगी भी नही हुई थी,उसके किसी नाज़ुक अंग को उसके ससुर ने च्छुआ तक नही था & वो दोबारा झाड़ रही थी.

रंभा के पैरो ने फिर जवाब दिया तो विजयंत ने दाई बाँह जोकि उसकी कमर को कसे थी उसे उसकी गंद के नीचे लगाया & बिना किस तोड़े उसकी जाँघो को पकड़ उसे गोद मे उठा लिया & उसे बिस्तर पे ले गया.रंभा की ज़ुबान को विजयंत अपनी ज़ुबान से छेड़े चले जा रहा था.वो अपनी बाई करवट पे लेता उसे अपने से चिपकाए चूमे चला जा रहा था.उसका दाया हाथ उपर आया & अपनी बहू की पीठ के पार ब्लाउस के स्ट्रॅप के हुक्स को खोल दिया.

रंभा उसकी इस हरकत से चौंक गयी & किस तोड़ दी.विजयंत की बाई बाँह उसके उपरी पीठ के पार थी & उसने उसी मे उसे कसे हुए रंभा के ब्लाउस को दाए हाथ से पकड़ उसकी गर्दन से निकाल दिया & उसके जुड़े को खोल उसके लंबे बालो को आज़ाद किया & फिर नीचे देखा.रंभा ने नारंगी रंग का ही स्ट्रेप्लेस्स ब्रा पहना था & विजयंत के सीने से दबे होने के कारण ऐसा लगता था कि उसकी चूचिया ब्रा के उपर से छलक जाना चाहती हो.उसने गुजरात के बीच पे भी उसे ब्रा & पॅंटी मे देखा था लेकिन आज की बात ही और थी.

आज वो उसकी बाहो मे थी & माहौल बिल्कुल मस्ताना था.उसने रंभा को देखा तो उन आँखो से छलक रही उसके जिस्म की चाह से वो आहत हो गयी & उसकी बाहो से निकल के घूमी & पेट के बल बिस्तर मे मुँह च्छूपा के लेट गयी.अभी का नज़ारा भी कोई कम मस्त नही था.विजयंत ने उसके बाल उसकी पीठ से हटा के उसके दाए कंधे के उपर से बिस्तर पे कर दिए.उसकी पीठ पे बस 1 पतला सा ब्रा का ट्रॅन्स्परेंट स्ट्रॅप नज़र आ रहा था & ऐसा लगता था मानो पीठ पूरी नंगी ही है.नीचे छ्होटी सी पॅंटी मे च्छूपी उसकी मोटी गंद का दिलकश आकार दिख रहा था.विजयंत का लंड कुच्छ & खड़ा हो गया & अब उसका सिरा उसके अंडरवेर के वेस्ट बंद मे दबा नज़र आ रहा था-वो बाहर आने के लिए छॅट्पाटा रहा था.

विजयंत की निगाह बिस्तर के दूसरे कोने पे पड़े रंभा के बगल मे पड़े गुलाब के फूल पे पड़ी.उसने उसे उठाया & फिर उसकी डंठल को रंभा की गर्दन के पीछे से शुरू करते हुए उसकी नर्म पीठ पे चलाते हुए नीचे आने लगा.रंभा ने सर बिस्तर से उठाया & उसके बालो की आब्नूसी चिलमन के पीछे से विजयंत को 1 दबी आह सुनाई दी.

फूल के डंठल की राह मे ब्रा स्ट्रॅप अड़चन बना तो विजयंत ने उसे खोल दिया.अब खुला ब्रा रंभा की चूचियो के नीचे दबा था.डंठल नीचे बढ़ा चला जा रहा था.रंभा ने आज रात जैसी मस्ती पहले कभी महसूस नही की थी.उसकी चूत मे तो जैसे कसक आज शांत ही नही होने वाली थी.उसने जंघे आपस मे भींच उसे समझाने की कोशिश की.

डंठल उसकी कमर के बीचोबीच उसकी पॅंटी के वेस्ट बंद पे रुकी हुई थी.रंभा का दिल ज़ोरो से धड़क उठा.उसकी गंद उसके ससुर के सामने नंगी होने वाली थी.विजयंत ने बिना उसकी कमरको छुए पॅंटी के बीचोबीच वेयैस्टबंड मे उंगली फँसा के उसे नीचे खींचा.उसके पीछे-2 डंठल रंभा की गंद की दरार मे उतार गयी.

"आननह..!",रंभा ने सर उठाके आह भरी.अब वो बहुत मदहोश हो गयी थी.उसकी कमर बहुत हौले-2 उचक रही थी.पॅंटी उसकी गंद से नीचे उसकी टाँगो से होते हुई बाहर निकाल दी गयी.डंठल उसकी दरार मे & नीचे उतरी तो रंभा की जंघे खुद बा खुद थोड़ी फैल गयी & विजयंत को उसकी रस टपकती चूत दिखाई दी.उसके दिल मे खुशी & जोश का तूफान मच गया.चूत उस फूल से,जिसे उसने हाथ मे थामा हुआ था,भी ज़्यादा नाज़ुक & कोमल थी.

उसने डंठल नीचे की,रंभा दम साधे उसके चूत मे उतरने का इंतेज़ार कर रही थी लेकिन उसके ससुर ने डंठल को उसकी गंद के छेद के बगल से होते हुए उसकी बाई फाँक पे घुमाया & फिर नीचे उसकी बाई जाँघ के पिच्छले,मांसल हिस्से पे चलाते हुए नीचे आने लगा.रंभा ने मुँह बिस्तर मे च्छूपा लिया & आहें उसमे दफ़्न करने लगी.

डंठल उसकी पिछली टांग को सहलाते हुए उसके तलवे को गुदगुदा रही थी.रंभा ने बेचैन हो बाई टांग हवा मे उठा दी तो विजयंत ने डंठल से उसके दाए तलवे को गुदगुदाना शुरू कर दिया.वो उस टांग को भी उठाने ही वाली थी कि उसने उसे तलवे से हटा के टांग पे उपर बढ़ा दिया.डंठल उसकी गंद की दाई फाँक पे पे पहुँची & फिर अचानक उसकी चूत मे घुस गयी.

इस अचानक हमले से रंभा चौंक गयी & बहुत ज़ोर से आ भरी.विजयंत उस डंठल को उसकी चूत मे अंदर-बाहर करने लगा.रंभा के लिए ये सब बिल्कुल नया एहसास था & वो कमर उचकाती हुई तीसरी बार झाड़ गयी.विजयंत ने डंठल को चूत से निकाला & उसके काँपते जिस्म को देखता रहा.जब थरथराहट ख़त्म हुई तो उसने रंभा को सीधा कर दिया.

सामने का नज़ारा देख उसकी ज़ुबान फिर सुख गयी.ऐसा लगता था जैसे खुदा ने सारा हुस्न 1 ही जिस्म मे डाल दिया हो.चेहरे पे बिखरे बालो की चिलमन के बावजूद मस्ती की लकीरें सॉफ दिख रही थी & फिर नीचे सख़्त गुलाबी निपल्स से सजी चूचियाँ जोकि बिल्कुल कसी हुई थी.विजयंत ने अपने सीने पे हाथ फेरा,रंभा को पहली बार वो थोड़ा बेचैन नज़र आया.उसके दिल मे खुशी की 1 लहर उठी की उसके हुस्न उसके ससुर जैसे बांके मर्द को भी बेचैन कर ही दिया लेकिन फिर उसकी आन ने उसे इस खुशी के इज़हार से रोका.

विजयनत उसकी कसी,गुलाबी,चिकनी चूत को देख रहा था.औरत के जिस्म के इस अंग की ना जाने कितनी किसमे वो देख चुका था लेकिन ऐसी चूत उसने आज तक नही देखी थी,"तुम सी हसीन मैने आज तक नही देखी!",ससुर के मुँह से हुस्न की तारीफ सुन शर्म से रंभा ने अपनी आँखे बंद कर ली.उसे ताज्जुब हुआ कि उसे आज शर्म क्यू आ रही थी!..विजयंत की बेबाक नज़रे उसे खुद को चूमती हुई सी लग रही थी लेकिन जैसे उन्होने उसे बाँध भी रखा था & वो करवट ले अपने नंगे तन को च्छुपाने की कोशिश भी नही कर पा रही थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--25

gataank se aage.

vijayant uski gori banh se hota hua uski gardan tak pahuncha & 1 baar fir daye kandhe ke upar se usne apni bahu ke rasile hotho ko chumne ki khwahish jatayi lekin is baar bhi usne use dhakel ke khud se alag kiya & us se door ladkhadate bhagi.

vijayant ne hath badhaya & is baar uske hath me usla lehrata aanchal aa gaya.rambha jhatke se ghumi & vo nazara dekh vijayant ka halak sukh gaya.aanchal hatne se uski tez dhadkano ki kahani kehta narangi blouse ke gale me se jhankta cleavage & gol nabhi se saja uska chikna pet.vijayant uske husn ko aankho se peete hue uska pallu pakde uske gird ghumne laga.rambha ko uski nigahen bhi apne jism ko jalati lag rahi thi.vo bas aankhe band kiye apni mutthiya bhinche chupchap khadi thi.koi & mauka hota to vo apne aashiq ke sath nazre milake use khud ko niharte dekhti lekin aaj nahi,aaj use vijayant ko ye sukh nahi dena tha.

vijayant ghum raha tha & lipti sari khul rahi thi lekin puri tarah se nahi kyuki vo uski bahu ki kamar me atki jo thi.rambha ne apni palke aadhi kholi,use dekhne se lag raha tha ki vo nashe me hai.vijayant uske karib aaya & phjool jise usne rambha ki pith pe honth firate waqt pant ki jeb me rakh liya tha,use nikala.vo uski sari ko pakde use dekhe ja raha tha.rambha ne dekha un aankho me uske jism ki bahut tarif thi.

"aahhhh..!",rambha ki aah na chahte hue bhi nikal gayi.vijayant ne kaam hi aisa kiya tha.gulab ki lambi danthal ko usne uski sari jaha atki vaha uski sari & kamar ke beech me ghusaya & usi danthal se uski sari ki atki parto ko bahar nikalne laga.aisa karne se danthal rambha ke nichle pet ko kharonch uske josh ko & badhane laga.ab uski chut me uth rahi kasak bahut tez ho gayi thi.vijayant ne phool ko bed pe fenka & uski sari ko farsh pe giraya & jhuk ke baith gaya.

usne baye hath ko rambha ki kamar ki dayi taraf jamaya & daye hath ki ungliyo ko uske pet pe fiaraya,rambha ne apne baal pakde & badi mushkil se apni aah ko dabaya.vijayant aage hua & uske pet ko chum liya.uske chumne me masti thi,garmi thi jo rambha ki tadap me izafa kar rahi thi.vo pet ko chumta uski nabhi ki or pahuncha & rambha ka dil khushi se uchhalne laga ki ab vo uski nabhi ki gehrayi napega lekin nahi vo nabhi ke thik neeche ke hise ko hotho me daba ke kaatne jaisi harkat kar raha tha.rambha ko pata bhi na chala & uski kamar hilne lagi & vo thoda chhatpatane lagi.chut ki kasak ab bilkul charam pe thi.vijayant vaise hi uskinabhi ke neeche apne hotho se chabaye ja raha tha,fark bas ye tha ki ab uski zuban bhi us hisse pe ghum rahi thi.rambha apne baalo me ungliya firati,sar jhatakti kasmasa rahi thi ki use laga ki uski chut ki kasak bikul apni inteha pe pahunch gayi hai & vo chikhi.use laga ki uski tange jawab de rahi hain.vo caahe bharte hue jhad rahi thi.

vijayant ne vaise hi uske pet se khelte hue uski kamar ko tham use girne se rok liya & jghuma ke deewar ke sahare khada kar diya.jab vo thoda sambhli to uski kamar ke bayi taraf lage petticoat ke hook & zip ko khol diya.petticoat fauran farsh pe gira nazar aane laga.vijayant ne uski kamar se hath hataye & uth khada hua.rambha abhi bhi thoda kanp rahi thi.usne uske dono hath thame & unhe apne seene pe rakh diya.vo uska ishara samajh gayi-vo use apni kamiz kholne ko keh raha tha.usne nazre neechi kar li lekin vijayant ne uski thuddi pakad chehra uthake fir se vahi ishara kiya.vo 1 baar fir uske & deewar ke beech fansi thi.usne nazre neechi ki & uske buttons kholne lagi.andar kafi baal nazar aa rahe the.vijayant ke ishare pe usne shirt ko uske kandho se sarkaya & vo bhi farsh pe uski sari & petticoat ke sath giri dikhne lagi.

rambha ki aankhe fail gayi thi.vijayant ka gora seena bahut chauda & mazbut tha & sunehre baalo se bhara hua tha.aise hi seene to use pasand the.uska pet zara bhi bahar nahi nikla tha & bazuo ka ghera to itna bada tha ki shayad uske dono hatho me nahi samata.kasrati badan ki 1-1 manspeshi jaise tarashi hui thi.vijayant ne uske hath seene pe rakh diye.uske dil ne to kaha ki pure seene ko sehlaye,use chume & apni sari hasraten puri kar le lekin nahi use aisa nahi karna tha.vo vaise hi khadi rahi keval uska seena upar-neeche hota raha.vijayant muskuraya & uske hatho ke upar apne bade-2 hath jamaye & unhe neeche fislane laga.usne rambha ke hath apne pet se hote hue apni pant ki belt pe rakh diye.rambha uska ishara samajh gayi & 1 pal ke baad uski pant khol di.pant sarki to vijayant ne us se apni tange nikali.ab bas 1 safed underwear uske badan me tha.rambha ne socha tha ki vo udahr nahi dekhegi lekin uski nigah padi & underwear se chipak gayi.itna phoola underwear usne aaj tak nahi dekha tha.lund ke aakar ki kalpana se hi uski chut me dobara kasak uthne lagi.

vijayant ki janghe kisi ped ki moti shakh jaisi thi & vo bhi ghane baalo se dhanki thi.rambha ne nazre upar kar li lekin vijayant ki nigaho se nahi milayi.vijayant jhuka & uske hotho se apne honth sata diye.1 nayi bijli ki lehar rambha ke badan me daud gayi & vo tharthara uthi.pehli baar vijayant ne uske honth chume the.uski kiss me garmjoshi thi lekin badhawasi nahi.abhi tak jitne mard uske jism ka lutf uthane ki khushkismati paye the,unme se sabhi masti me pagal ho jate the & unki kiss me badi besabri hoti thi.vijayant ki kiss bahut mast thi lekin rambha ko 1 pal ko bhi nahi laga ki vo uske jism ko dekh apna kabu kho raha hai.use achhi lagi ye baat.vijayant ke honth uske labo ko chum uski masti ko kam nahi hone de rahe the.vo thoda ladkhadayi & uske sasur ki mazbut baaho ne use apne agosh me bhar liya.uska seena vijayant ke chaude seene se pis gaya & uske hath apne aap uske kandhe pe lag gaye.

vijayant ke honth uske hotho ka ras piye ja rahe the & ab uski zuban ka swad bhi chakhna chhate the.rambha ne apne honth alag karne ki koshish ki,masti ki shiddat bahut badh gayi thi & vo sihar rahi thi.vijayant ke sakht hath uski kamar & pith pe the,uska seena uski chhatiyo ko daba raha tha & neeche chut se upar pet pe uska sakht lund vo mehsus kar rahi thi.uski chut me masti ki lehre kaska ban ke umde ja rahi thi.vo ab kamzor pad rahi thi & isi baat ka fayda uthake vijayant ne apni zuban uske munh me ghusa di & rambha ki zuban jaise hi us se takrayi & gutthamguttha hui,uske badan me toofan aa gaya joki uski chut se utha tha.uski aahen sasur ke labo se sile hontho ke bavjud sunai de rahi thi & vo 1 baar fir kamar hilate kanpne lagi thi.abhi tak vo puri nangi bhi nahi hui thi,uske kisi nazuk ang ko uske sasur ne chhua tak nahi tha & vo dobare jhad rahi thi.

Rambha ke pairo ne fir jawab diya to Vijayant ne dayi banh joki uski kamar ko kase thi use uski gand ke neeche lagaya & bina kiss tode uski jangho ko pakad use god me utha liya & use bistar pe le gaya.rambha ki zuban ko vijayant apni zuban se chhede chale ja raha tha.vo apni bayi karwat pe leta use apne se chipakye chume chala ja raha tha.uska daya hath upar aaya & apni bahu ki pith ke paar blouse ke strap ke hooks ko khol diya.

rambha uski is harkat se chaunk gayi & kiss tod di.vijayant ki bayi banh uske upri pith ke paar thi & usne usi me use kase hue rambha ke blouse ko daye hath se pakad uski gardan se nikal diya & uske jude ko khol uske lambe baallo ko aazad kiya & fir neeche dekha.rambha ne narangi rang ka hi strapless bra pehna tha & vijayant ke seene se dabe hone ke karan aisa lagta tha ki uski chhatiya bra ke upar se chhalak jana chahti ho.usne Gujarat ke beach pe bhi use bra & panty me dekha tha lekin aaj ki baat hi aur thi.

aaj vo uski baaho me thi & mahaul bilkul mastana tha.usne rambha kode kha to un aankho se chhalak rahi uske jism ki chah se vo aahat ho gayi & uski baaho se nikal ke ghumi & pet ke bal bistar me munh chhupa ke let gayi.abhi ka nazara bhi koi kam mast nahi tha.vijayant ne uske baal uski pith se hatake uske daye kandhe ke upar se bistar pe kar diye.uski pith pe bas 1 patla sa bra ka transparent strap nazar aa raha tha & aisa lagta tha mano pith puri nangi hi hai.neeche chhoti si panty me chhupi uski moti gand ka dilkash aakar dikh raha tha.vijayant ka lund kuchh & khada ho gaya & ab uska sira uske underwear ke waist band me daba nazar aa raha tha-vo bahar aane ke liye chhatpata raha tha.

vijayant ki nigah bistar ke dusre kone pe pade rambha ke bagal me pade gulab ke phool pe padi.usne use uthaya & fir uski danthal ko rambha ki gardan ke peechhe se shuru karte hue uski narm pith pe chalate hue neeche aane laga.rambha ne sar bistar se uthaya & uske baalo ki aabnusi chilman ke peechhe se vijayant ko 1 dabi aah sunai di.

phool ke danthal ki raah me bra strap adchan bana to vijayant ne use khol diya.ab khula bra rambha ki chhatiyo ke neeche daba tha.danthal neeche badha chala ja raha tha.rambha ne aaj raat jaisi masti pehle kabhi mehsus nahi ki thi.uski chut me to jaise kasak aaj shant hi nahi hone wali thi.usne janghe aaps me bhinch use samjhane ki koshish ki.

danthal uski kamar ke beechobeech uski panty ke waist band pe ruki hui thi.rambha ka dil zoro se dhadak utha.uski gand uske sasur ke samne nangi hone vali thi.vijayant ne bina uski kamarko chhue panty ke beechobeech waistband me ungli fansa ke use neeche khincha.uske peechhe-2 danthal rambha ki gand ki darar me utar gayi.

"aannhhhhh..!",rambha ne sar uthake aah bhari.ab vo bahut madhosh ho gayi thi.uski kamar bahut haule-2 uchak rahi thi.panty uski gand se neeche uski tango se hote hui bahar nikaal di gayi.danthal uski darar me & neeche utri to rambha ki janghe khud ba khud thodi fail gayi & vijayant ko uski ras tapkati chut dikahyi di.uske dil me khushi & josh ka toofan mach gaya.chut us phool se,jise usne hath me thama hua tha,bhi zyada nazuk & komal thi.

usne danthal neeche ki,rambha dum sadhe uske chut me utarne ka intezar kar rahi thi lekin uske sasur ne danthal ko uski gand ke chhed ke bagak se hote hue uski bayi fank pe ghumaya & fir neeche uski bayi jangh ke pichhle,mansal hisse pe chalate hue eeche aane laga.rambha ne munh bistar me chhupa liya & aahen usme dafn karne lagi.

danthal uski pichli tang ko sehlate hue uske talwe ko gudguda rahi thi.rambha ne bechain ho bayi tang hawa me utha di to vijayant ne danthal se uske daye talwe ko gudgudana shuru kar diya.vo us tang ko bhi uthan ehi wali thi ki usne use talwe se hata ke tang pe upar badha diya.danthal uski gand ki day fank pe pe pahunchi & fir achanak uski chut me ghus gayi.

is achanak humle se rambha chaunk gayi & bahut zor se aah bhari.vijayant us danthal ko uski chut me andar-bahar karne laga.rambha ke liye ye sab bilkul naya ehsas tha & vo kamar uchkati hui teesri baar jhad gayi.vijayant ne danthal ko chut se nikala & uske kanpte jism ko dekhta raha.jab thartharahat khatm hui to usne rambha ko seedha kar diya.

samne ka nazar dekh uski zuban fir sukh gayi.aisa lagta tha jaise khuda ne sara husn 1 hi jism me daal diya ho.chehre pe bikhre baalo ki chilman ke bavjud masti ki lakiren saaf dikh rahi thi & fir neeche sakht gulabi nipples se saji chhatiya joki bilkul kasi hui thi.vijayant ne apne seene pe hath fera,rambha ko pehli baar vo thoda bechain nazar aaya.uske dil me khushi ki 1 lehar uthi ki uske husn uske sasur jaise banke mard ko bhi bechain kar hi diya lekin fir uski aan ne use is khushi ke izhar se roka.

vijaynat uski kasi,gulabi,chikni chut ko dekh raha tha.aurat ke jism ke is ang ki na jane kitni kisme vo dekh chuka tha lekin aisi chut usne aaj tak nahi dekhi thi,"tum si haseen maine aaj tak nahi dekhi!",sasur ke munh se husn ki tarif sun sharm se rambh ne apni aankhe band kar li.use tajjub hua ki use aaj sharm kyu aa rahi thi!..vijayant ki bebak nazre use khud ko chumti hui si lag rahi thi lekin jaise unhone use bandh bhi rakha tha & vo karwat le apne nange tan ko chhupane ki koshish bhi nahi kar pa rahi thi.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--26

गतान्क से आगे.

विजयंत ने अब डंठल थामी & गुलाब के फूल को उसके बालो से ढँके चेहरे पे फिराया & फिर नीचे ले आया.गुलाब ने उसकी बाई चूची की गोलाई के गिर्द 1 दायरा बनाया & फिर दोनो चूचियो के बीच पहुँचा & यही हरकत दाई चुची के साथ दोहराई.उसने फूल की पंखुड़ियो से उसके निपल्स को छेड़ा तो वो सिहर उठी.रंभा आँखे बंद कर बस मस्ती मे उड़ रही थी.फूल उसकी चूचियो को चूमने के बाद

नीचे उसके पेट पे आया & उसकी नाभि के गिर्द घुमाने लगा.नाभि के छेद को भी विजयंत ने पंखुड़ियो से छेड़ा.रंभा फिर से च्चटपटाने लगी थी.

फूल नीचे आया & उसकी चूत से सॅट गया,"तुम्हारी चूत की पंखुड़ियो की नज़ाकत,इनकी कोमलता के आगे इस गुलाब का हुस्न भी फीका है.मुझे तो डर है कि कही तुम्हारे इस खूबसूरत अंग से रश्क कर ये बेचारा मुरझा ना जाए!",विजयंत ने गुलाब को बिस्तर पे फेंक दिया & रंभा के दाए पैर के पास घुटनो पे बैठ गया.ऐसे शायराना अंदाज़ मे रंभा की तारीफ किसी ने नही की थी.उसका दिल उसे धिक्कार रहा था कि वो ऐसे आशिक़ का इस्तेक्बाल नही कर रही & ना ही अपनी आहो के ज़रिए उसका शुक्रिया अदा कर रही है!

उसने बालो की लड़ियो के पार देखा तो उसे विजयंत गुटनो पे बैठा नज़र आया.उसने उसके दाए पाँव को उठाके होंठो से ऐसे लगाए जैसे वो हुस्न की देवी हो & उसका ससुर उसकी इबादत कर रहा हो.उसने दोनो होंठो को मुँह के अंदर खींच अपनी आह को रोका.विजयंत उसके दाए पैर की सबसे छ्होटी उंगली को चूस रहा था.जब तक वो अंगूठे तक पहुँचा,रंभा मदहोशी मे बिस्तर पे दाए-बाए सर झटक रही थी.

विजयंत उसके पैरो की उंगलियो की पूजा करने के बाद उसकी मखमली टांग के 1-1 हिस्से को अपने होंठो से चूमता उपर उसकी मोटी जाँघ तक आया.रंभा की भारी जाँघ की कसावट उसे बहुत भाई & उसने वाहा केवल चूमा ही नही बल्कि चूस-2 के अपने होंठो के निशान उनपे छ्चोड़ दिए.रंभा अपने सर के दोनो तरफ की चादर को बेचैनी से खींचते आहे भरते कमर उचका रही थी.उसे बस इंतजार था अपने ससुर के होंठो का अपनी चूत से लगने का.

विजयंत उसकी बाई जाँघ को उठाए अपनी दाढ़ी उसपे रगड़ उसके जिस्म की बेचैनी को & बढ़ा रहा था.उसने उसकी जाँघ & कमर के जोड़ पे चूमा & फिर उसकी बाई जाँघ को उठा लिया.उसकी दाढ़ी ने वाहा भी उसे छेड़ा & उसके होंठो ने वाहा भी अपने दस्तख़त किए & फिर नीचे आ फिर से घुटनो पे बैठ वो उसके बाए पैरो की उंगलियो को पूजने लगा.रंभा बेचैनी से कमर उचका रही थी & जंघे भींच रही थी.उसने बेचैन हो अपनी चूचियो को आप ही दबाया तो विजयंत को ध्यान आया कि हुस्न के देवी के उन बला के खूबसूरत अंगो की इबादत तो उसने की ही नही!

वो उसके दाई तरफ बाई करवट पे लेटा & दाया हाथ उसके पेट पे रख सहलाते हुए अपने नाक & होंठो से उसके बालो की लड़ियो को हटा उसके कोमल चेहरे & गुलाबी होंठो को चूमने लगा.रंभा की भी तारीफ थी कि इतनी मस्ती,ऐसे रोमानी गर्म, माहौल के बावजूद उसने अभी तक 1 बार भी खुद अपनी ज़ुबान ना तो विजयंत के मुँह मे घुसाइ थी ना ही अपने हाथ उसके जिस्म पे लगा उसे इस बात का एहसास दिलाया था कि वो उसकी हर्कतो से मस्ती मे बावली हो गयी है.ये दूसरी बात थी कि कोई अँधा भी बता देता कि रंभा जोश के सातवे आसमान मे उड़ रही थी.

विजयंत ने अपनी दाढ़ी उसके सीने पे रगडी & उसकी नाभि को कुरेदा तो रंभा ने चादर भींचते हुए आह भरी & कमर उचकाई & जैसे ही उसकी बाई चूची के निपल को जीभ से चाटते हुए उसके ससुर ने उसे मुँह मे भरा & उसकी नाभि कुरेदी वो 1 बार और झाड़ गयी.विजयंत ने अपने दोनो हाथ अपनी बहू की चूचियो पे लगा दिए.उसकी छातियाँ देख मर्द पागल हो जाते थे & कई बार इतने बदहवास की रंभा को तकलीफ़ होने लगती थी.

विजयंत को भी जैसा जोश आज की रात चढ़ा था वैसा पूरी ज़िंदगी नही चढ़ा था लेकिन फिर भी रंभा ने उसके चूमने मे वो बदहवासी नही महसूस क़ी.वो जानती थी कि उसका ससुर उसके हुस्न को देख जोश से पागल हो गया है लेकिन फिर भी उसकी गर्मजोशी से भरी ज़ुबान & आतुर हाथ उसे तकलीफ़ नही पहुँचा रहे थे बल्कि जो मज़ा उसे अभी आ रहा था ऐसा उसे ना ही अपने किसी प्रेमी & ना ही पति के साथ आया था.

पता नही कितनी देर तक वो उसकी छातियो के मस्ताने उभारो से खेलता रहा & वो मदहोश होती रही.अपने हाथो को अपने ससुर के बालो को भींचने,उसके गथिले बदन को अपने आगोश मे भरने से उसने अपनी आन से मजबूर हो कैसे रोका था ये वोही जानती थी.

विजयंत ने उसके सीने से सर उठाया तो रंभा ने उसे अधखुली,नशे से बोझल पॅल्को से देखा.वो उसकी जंघे फैला के उनके बीच लेट रहा था.उसने आँखे बंद की & 1 बार फिर अपनी छातियाँ दबाने लगी.विजयंत ने उसकी चूत मे जीभ फिराई तो उसने कमर उचकाई.विजयंत ने उसकी जाँघो मे बाँह फँसा के उसके पेट को दबाते हुए उसकी चूत चाटना शुरू किया & वो अपनी चूचियाँ दबाते हुए आहे भरने लगी.उसकी कमर खुद बा खुद उच्के जा रही थी.

विजयंत उसके दाने को चाट रहा था &वो मस्ती मे उड़ रही थी.उसने अपने हाथ आगे बढ़ा उसकी चूचियो पे रखे तो रंभा ने अपने हाथ वहाँ से खीच लिए & 1 बार फिर बिस्तर की चादर की सलवटो मे इज़ाफ़ा करने लगी.

विजयंत की जीभ ने बहुत जल्द ही उसे झाड़वा दिया लेकिन उसकी चूत से अलग नही हुई.चूत से रस बहे जा रहा था & उसका ससुर उसे चाते जा रहा था.1 मुद्दत के बाद उसे 1 बार & झाड़वाने के बाद विजयंत ने अपना चेहरा उसकी गोद से लगा किया & उसकी टाँगे फैला उनके बीच खड़ा हो गया.रंभा ने अधखुली आँखो से उसे अंडरवेर उतारते देखा & जब उसका लंड बाहर आया तो उसकी आँखे हैरत से फैल गयी.

इतना बड़ा लंड!..रंभा ने ऐसा लंड केवल नंगी फ़िल्मो मे देखा था & उसे हमेशा यही लगता था कि वो फ़िल्मे बनानेवाले कोई कारस्तानी करते होंगे वरना असला ज़िंदगी मे वैसा लंबा लंड होना नामुमकिन है..लेकिनाज़ उसे पता चल रहा था कि वो ग़लत थी.विजयंत उसकी फैली जाँघो के बीच घुटनो पे बैठ गया..लंड 9 इंच से लंबा लगता है..वो नज़रो से उसके लंड को नाप रही थी & मोटाई तो 2.5 इंच से भी ज़्यादा लगती है.

विजयंत ने फॉरेस्किन पीछे की तो उसके 9.5इंच की गोरे लंड का गुलाबी सूपड़ा प्रेकुं से चमकता सामने आ गया..झांते सॉफ कर रखी है इसने.अफ!..रंभा ने आँखे बंद कर ली.उसके ससुर ने यहा आने से पहले अपने होटेल के कमरे मे अपनी झांते सॉफ की थी क्यूकी अपनी खूबसूरत बहू को चोद्ते वक़्त वो बीच मे ज़रा सी भी रुकावट नही चाहता था.

"उउन्न्ह..!",उसने अपने निचले होंठ को दाँत से काटा & चादर पे बेचैनी से हाथ चलाए.विजयंत अपना लंड उसकी चूत की दरार पे फिरा रहा था.रंभा की कमर अब उसके काबू मे नही थी & अपने आप उचकने लगी थी मानो उसकी चूत खुद ही लंड को अंदर लेना चाहती हो.विजयंत चूत की दरार पे लंड को चला उसे पागल कर रहे था & उभरे हुए उसके दाने को अपने सूपदे से छेड़ रहा था.रंभा ने अपने सर के बगल मे दोनो तरफ की चादर को हाथो मे भर के नोचा & ज़ोर से कमर उचकाई & अपना सर पीछे फेंकते हुए जिस्म कमान की तरह मोड़ा.वो लंड की हर्कतो से झाड़ गयी थी.

वो कमर उचकाते हुए झाड़ ही रही थी कि विजयंत ने सूपदे को चूत मे धकेल दिया.कुच्छ उसके धक्के कुच्छ उसकी चूत ने ही उचक के उसके सूपदे को अंदर ले लिया.रंभा के माथे पे शिकन पड़ गयी & उसने दर्द के एहसास से आँखे मींच ली.उसकी चूत को विजयंत का लंड बुरी तरह फैला रहा था.वो बेचैनी से बिस्तर की चादर को पकड़े हुए थी.उसकी आन अभी भी उसे अपने ससुर को उसकी गर्म हर्कतो से पैदा हुई मस्ती के इज़हार से रोक रही थी.

विजयंत ने उसकी चूत के गीलेपन का फ़ायदा उठा के लंड 7 इंच तक अंदर घुसा दिया.वो भी उसकी चूत की कसावट से आहत हुआ था & ज़िंदगी मे पहली बार उसे लगा था कि वो बिना लड़की को झड़वाए खुद पहले झाड़ जाएगा.रंभा को अब दर्द नही हो रहा था.विजयंत ने घुटने पे बैठे-2 ही उसकी चुदाई शुरू की.रंभा को पता ही ना चला & अपने आप उसकी जंघे हवा मे उठ गयी.विजयंत ने उन्हे अपने हाथो मे समेटा & टाँगे फैलाते हुए अपनी बहू के उपर झुक गया.

वो धक्के लगाए जा रहा था & मस्ती मे डूबी रंभा आहे भरे जा रही थी.उसकी कमर उसके ससुर के हर धक्के का जवाब दे रही थी.तभी विजयंत को अपने उपर से काबू हटता महसूस हुआ.रंभा चीख रही थी & 1 बार फिर जिस्म को कमान की तरफ उपर मोदते,सर को पीछे झटकते,बिस्तर की चादर को नोचते झाड़ रही थी & उसकी चूत झाड़ते वक़्त सिकुड-फैल रही थी.

विजयंत ने अपनी ज़िंदगी मे ना जाने कितनी लड़कियो को चोदा था मगर झाड़ते वक़्त ऐसी मस्त हरकत उसने कभी महसूस नही की थी.उसका लंड उस अनूठे एहसास की खुमारी मे खोता अपना रस उगल ही देता लेकिन उस लंड के मालिक ने अपने पे किसी तरह काबू कर ही लिया.

"आईईईईईययययईई......!",रंभा बहुत ज़ोर से चीखी.उसकी चूत की मस्तानी हरकत से आहत हो विजयंत ने ज़ोर का धक्का मारा था & लंड जड़ तक उसकी चूत मे समाता उसकी कोख से जा टकराया था.रंभा के चेहरे पे दर्द की लकीरें खिंच गयी & वो च्चटपटाने लगी.विजयंत झुक के उसके चेहरे को चूमने लगा & चुदाई रोक दी.रंभा छटपटाती रही.विजयंत के होंठ उसके होंठो के करीब आते तो वो अपने होंठ पीछे खींच लेती क्यूकी वो जानती थी कि 1 बार दोनो के लब टकराए तो वो सारी आन भूल के अपने ससुर को चूमती हुई उस से लिपट जाएगी.

कुच्छ देर बाद उसका दर्द ख़त्म हो गया तो विजयंत ने दोबारा चुदाई शुरू की.रंभा का जिस्म हर धक्के पे मज़े से कांप उठता क्यूकी लंड सीधा उसकी कोख पे चोट करता.ऐसा अनूठा मज़ा उसे आज तक नही आया था.वो बस आहें भरे जा रही थी.उसकी मदहोशी का कोई हिसाब नही था लेकिन अभी भी वो अपने ससुर को अपने होंठो का स्वाद चखने नही दे रही थी.

विजयंत उसके गाल से होठ पे पहुँचता तो वो मुँह फेर लेती.विजयंत ने उसकी चूचियो का रुख़ किया & उन्हे चूस्ते हुए अपनी बहू को चोदने लगा.रंभा ने अपनी टाँगे उसकी कमर पे लपेट दी थी लेकिन आपने हाथ अपने सर के दोनो तरफ बिस्तर की चादर पे ही लगाए रखे थे.

विजयंत अब उसकी चूचियो से उठा के अपने हाथ बिस्तर पे जमा के धक्के लगा रहा था.रंभा भी तेज़ी से कमर उचका रही थी.विजयंत भी उसकी कसी चूत के जलवे से आहत हो आहें भर रहा था.अचानक रंभा जिस्म को कमान की तरह मोदते चीखने लगी,उसकी कमर भी बुरी तरह उचक रही थी.रंभा ने झड़ने की शिद्दत इतनी इंतेहा के साथ कभी महसूस नही की थी & वो मदहोशी मे डूबी हुई बस चीखे जा रही थी.

विजयंत भी अब बहुत तेज़ी से धक्के लगा रहा था & झड़ती रंभा की चूत ने जैसे ही सिकुड़ना-फैलना शुरू किया उसके लंड ने देर से अण्दो मे उबाल रहा गर्म वीर्य उसकी चूत मे उदेलना शुरू कर दिया.विजयंत का जिस्म झटके खा रहा था & वो आहें भर रहा था.उसे ऐसा महसूस हो रहा था मानो रंभा की चूत उसके लंड को पकड़ उसके वीर्य को निचोड़-2 के निकाल रही हो.वही रंभा ने उसके वीर्य को सीधा अपनी कोख मे गिरते महसूस किया & उसके झड़ने की मस्ती दुगुनी हो गयी.

विजयंत का लंड रस बहाते ही चला जा रहा था & रंभा झाडे चले जा रही थी.

"आन्न्‍न्णनह..!",वो चीखी & बिस्तर से उठते हुए उसने ससुर के मज़बूत उपरी बाजुओ मे अपने नाख़ून धंसा दिए.

"आहह..!",नखुनो के धँसने से हल्का सा खून निकला & विजयंत कराहा & उसने 1-2 धक्के और लगा दिए & 1 बार फिर उसके लंड से वीर्य छूटने लगा.वो इतनी देर तक पहले कभी नही झाड़ा था.

रंभा झड़ने की शिद्दत से आहत हो या फिर अपनी आन की वजह से अपने ससुर का पूरे जोश के साथ साथ ना देने की मजबूरी,उसकी आँखे छलक गयी & वो रोने लगी & झाड़ के उसके उपर पड़े हान्फ्ते विजयंत को उसने खुद से अलग किया & सुबक्ती हुई बिस्तर से उतर गयी.

"इन आँसुओ की वजह क्या है?",बाथरूम की ओर जाती रंभा का रास्ता बिस्तर से उतर के विजयंत मेहरा ने रोक लिया था,"..ये कि मैने तुम्हारी मजबूरी का फ़ायदा उठाया या ये कि तुम्हारी आन ने तुम्हे खुल के हम दोनो की चुदाई का मज़ा नही लेने दिया!",रंभा की रुलाई रुक गयी & उसने हैरत से विजयंत को देखा..क्या उसने उसका मन पढ़ लिया था?

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क्रमशः.......

JAAL paart--26

gataank se aage.

vijayant ne ab danthal thami & gulab ke phool ko uske baalo se dhanke chehre pe firaya & fir neeche le aaya.gulab ne uski bayi chhati ki golai ke gird 1 dayra banaya & fir dono chhatiyo ke beech pahuncha & yehi harkat dayi chhati ke sath dohrayi.usne phool ki pankhudiyo se uske nipples ko chheda to vo sihar uthi.rambha aankhe band kar bas masti me ud rahi thi.phool uski choochiyo ko chumne ke baad

neeche uske p[et pe aaya & uski nabhi ke gird ghune laga.nabhi ke chhed ko bhi vijayant ne pankhudiyo se chheda.rambha fir se chhatpatane lagi thi.

phool neeche aaya & uski chut se sat gaya,"tumhari chut ki pankhudiyo ki nazakat,inki komalta ke aage is gulab ka husn bhi pheeka hai.mujhe to darr hai ki kahi tumhare is khubsurat ang se rashk kar ye bechara murjha na jaye!",vijayant ne gulab ko bistar pe fenk diya & rambha ke daye pair ke paas ghutno pe baith gaya.aise shayrana andaz me rambha ki tarif kisi ne nahi ki thi.uska dil use dhikkar raha tha ki vo aise aashiq ka istekbal nahi kar rahi & na hi apni aaho ke zariye uska shukriya ada kar rahi hai!

usne balo ki ladiyo ke paar dekha to use vijayant gutno pe baitha nazar aaya.usne uske daye panv ko uthake hotho se aise lagay jaise vo husn ki devi ho & uska sasur uski ibadat kar raha ho.usne dono hotho ko munh ke nadar khinch apni aah ko roka.vijayant uske daye pair ki sabse chhoti ungli ko chus raha tha.jab tak vo anguthe tak pahuncha,rambha madhoshi me bistar pe daye-baye sar jhatak rahi thi.

vijayant uske pairo ki ungliyo ki puja karne ke baad uski makhmali tang ke 1-1 hisse ko apne hotho se chumta upar uski moti jangh tak aaya.rambha ki bhari jangh ki kaswat use bahut bhayi & usne vaha keval chuma hi nahi balki chus-2 ke apne hotho ke nishan unpe chhod diye.rambha apne sar ke dono taraf ki chadar ko bechaini se khinchte aahe bharte kamar uchka rahi thi.use bas iontezar tha apne sasur ke hotho ka apni chut se lagne ka.

vijayant uski bayi jangh ko uthaye apni dadhi uspe ragad uske jism ki bechaini ko & badha raha tha.usne uski jangh & kamar ke jod pe chuma & fir uski bayi jangh ko utha liya.uski dadhi ne vaha bhi use chheda & uske hotho ne vaha bhi apne dastkhat kiye & fir neeche aa fir se ghutno pe baith vo uske baye pairo ki ungliyo ko pujne laga.rambha bechaini se kamar uchka rahi thi & janghe bhinch rahi thi.usne bechain ho apni chhatiyo ko aap hi dabaya to vijayant ko dhyan aaya ki husn ke devi ke un bala ke khubsurat ango ki ibadat to usne ki hi nahi!

vo uske dayi taraf bayi karwat pe leta & daya hath uske pet pe rakh sehlate hue apne naak & hotho se uske baalo ki ladiyo ko hata uske komal chehre & gulabi hotho ko chumne laga.rambha ki bhi tarif thi ki tini masti,aise romani garm, mahaul ke bavjud usne abhi tak 1 baar bhi khud apni zuban na to vijayant ke munh me ghusai thi na hi apne hath uske jism pe laga use is baat ka ehsas dilaya tha ki vo uski harkato se masti me bawli ho gayi hai.ye dusri baat thi ki koi andha bhi bata deta ki rambha josh ke satve aasman me ud rahi thi.

vijayant ne apni dadhi uske seene pe ragdi & uski nabhi ko kureda to rambha ne chadar bhinchte hue aah bhari & kamar uchkai & jaise hi uski bayi choochi ke nipple ko jibh se chaatate hue uske sasur ne use munh me bhara & uski nabhi kuredi vo 1 baar aur jhad gayi.vijayant ne apne dono hath apni bahu ki choochiyo pe laga diye.uski chhatiya dekh mard pagal ho jate the & kayi baar itne badhawas ki rambha ko taklif hone lagti thi.

vijayant ko bhi jaisa josh aaj ki raat chadha tha vaisa puri zindagi nahi chadha tha lekin fir bhi rambha ne uske chumne me vo badhawasi nahi mehsus ki.vo janti thi ki uska sasur uske husn ko dekh josh se pagal ho gaya hai lekin fir bhi uski garmjoshi se bhari zuban & aatur hath use taklif nahi pahuncha rahe the balki jo maza use abhi aa raha tha aisa use na hi apne kisi premi & na hi pati ke sath aaya tha.

pata nahi kitni der tak vo uski chhatiyo ke mastane ubharo se khelta raha & vo madhosh hoti rahi.apne hatho ko apne sasur ke baalo ko bhinchne,uske gathile badan ko apne agosh me bharne se usne apni aan se majbur ho kaise roka tha ye vohi janti thi.

vijayant ne uske seene se sar uthaya to rambha ne use adhkhuli,nashe se bojhal palko se dekha.vo uski janghe faila ke unke beech let raha tha.usne aankhe band ki & 1 baar fir apni chhatiya dabane lagi.vijayant ne uski chut me jibh firayi to usne kamar uchkayi.vijayant ne uski jangho me banh fansa ke uske pet ko dabate hue uski chut chaatna shuru kiya & vo apni chhatiya dabate hue aahe bharne lagi.uski kamar khud ba khud uchke ja rahi thi.

vijayant uske dane ko chat raha tha &vo masti me ud rahi thi.usne apne hath aage badha uski choochiyo pe rakhe to rambha ne apne hath vahse khicnh liye & 1 baar fir bistar ki chadar ki salwato me izafa karne lagi.

vijayant ki jibh ne bahut jald hi use jhadwa diya lekin uski chut se lag nahi hui.chut se ras bahe ja raha tha & uska sasur use chate ja raha tha.1 muddat ke baad use 1 baar & jhadwane ke baad vijayant ne apna chehra uski god se laga kiya & uski tange faila unke beech khada ho gaya.rambha ne adhkhuli ankho se use underwear utarte dekha & jab uska lund bahar aaya to uski aankhe hairat se phail gayi.

Itna bada lund!..Rambha ne aisa lund keval nangi filmo me dekha tha & use humesha yehi lagta tha ki vo filme bananevale koi karastani karte honge varna asla zindagi me vaisa lumba lund hona namumkin hai..lekinaaj use pata chal raha tha ki vo galat thi.Vijayant uski faili jangho ke beech ghutno pe baith gaya..lund 9 inch se lumba lagta hai..vo nazro se uske lund ko naap rahi thi & motai to 2.5 inch se bhi zyada lagti hai.

vijayant ne foreskin peechhe ki to uske 9.5inch ki gore lund ka gulabi supada precum se chamakta samne aa gaya..jhante saaf kar rakhi hai isne.uff!..rambha ne aankhe band kar li.uske sasur ne yaha aane se pehle apne hotel ke kamre me apni jhante saaf ki thi kyuki apni khubsurat bahu ko chodte waqt vo beech me zara si bhi rukawat nahi chahta tha.

"uunnhhhhh..!",usne apne nichle honth ko dant se kata & chadar pe bechaini se hath chalaye.vijayant apna lund uski chut ki darar pe fira raha tha.rambha ki kamar ab uske kabu me nahi thi & apne aap uchakne lagi thi mano uski chut khud hi lund ko andar lena chahti ho.vijayant chut ki darar pe lund ko chala use pagal kar rahe tha & ubhre hue uske dane ko apne supade se chhed raha tha.rambha ne apne sar ke bagal me dono taraf ki chadar ko hatho me bhar ke nocha & zor se kamar uchkayi & apna sar peechhe fenkte hue jism kaman ki tarah moda.vo lund ki harkato se jhad gayi thi.

vo kamar uchkate hue jhad hi rahi thi ki vijayant ne supade ko chut me dhakel diya.kuchh uske dhakke kuchh uski chut ne hi uchak ke uske supade ko andar le liya.rambha ke mathe pe shikan pad gayi & usne dard ke ehsas se aankhe meench li.uski chut ko vijayant ka lund buri tarah faila raha tha.vo bechaini se bistar ki chadar ko pakde hue thi.uski aan abhi bhi use apne sasur ko uski garm harkato se paida hui masti ke izhar se rok rahi thi.

vijayant ne uski chut ke gilepan ka fayda utha ke lund 7 inch tak andar ghusa diya.vo bhi uski chut ki kasawat se aahat hua tha & zindagi me pehli baar use laga tha ki vo bina ladki ko jhadwaye khud pehle jhad jayega.rambha ko ab dard nahi ho raha tha.vijayant ne ghutne pe baithe-2 hi uski chudai shuru ki.rambha ko pata hi na chala & apne aap uski janghe hawa me uth gayi.vijayant ne unhe apne hatho me sameta & tange failate hue apni bahu ke upar jhuk gaya.

vo dhakke lagaye ja raha tha & masti me doobi rambha aahe bhare ja rahi thi.uski kamar uske sasur ke har dhakke ka jawab de rahi thi.tabhi vijayant ko apne upar se kabu hatata mehsus hua.rambha chikh rahi thi & 1 baar fir jism ko kaman ki taraf upar modte,sar ko peechhe jhatakte,bistar ki chadar ko nochte jhad rahi thi & uski chut jhadte waqt sikud-fail rahi thi.

vijayant ne apni zindagi me na jane kitni ladkiyo ko choda tha magar jhadte waqt aisi mast harkat usne kabhi mehsus nahi ki thi.uska lund us anuthe ehsas ki khumari me khota apna ras ugal hi deta lekin us lund ke malik ne apne pe kisi tarah kabu kar hi liya.

"AAIIIIIYYYYEEEEEEE......!",rambha bahut zor se chjikhi.uski chut ki mastani harkat se aahat ho vijayant ne zor ka dhakka mara tha & lund jad tak uski chut me samata uski kokh se ja takraya tha.rambha ke chehre pe dard ki lakeeren khinch gayi & vo chhatpatane lagi.vijayant jhuk ke uske chere ko chumne laga & chudai rok di.rambha chhatapati rahi.vijayant ke honth uske hontho ke karib aate to vo apne honth peechhe khinch leti kyuki vo janti thi ki 1 baar dono ke lab takraye to vo sari aan bhul ke apne sasur ko chumti hui us se lipat jayegi.

kuchh der baad uska dard khatm ho gaya to vijayant ne dobara chudai shuru ki.rambha ka jism har dhakke pe maze se kanp uthata kyuki lund seedha uski kokh pe chot karta.aisa anutha maza use aaj tak nahi aaya tha.vo bas aahen bhare ja rahi thi.uski madhoshi ka koi hisab nahi tha lekin abhi bhi vo apne sasur ko apne hontho ka swad chakhne nahi de rahi thi.

vijayant uske gaal se hoth pe pahunchta to vo munh fer leti.vijayant ne uski chhatiyo ka rukh kiya & unhe chuste hue apni bahu ko chodne laga.rambha ne apni tange uski kamar pe lapet di thi lekin aapne hath apne sar ke dono taraf bistar ki chadar pe hi lagaye rakhe the.

vijayant ab uski chhatiyo se uth ke apne hath bistar pe jama ke dhakke laga raha tha.rambha bhi tezi se kamar uchka rahi thi.vijayant bhi uski kasi chut ke jalwe se aahat ho aahen bhar raha tha.achanak rambha jism ko kaman ki tarah modte chikhne lagi,uski kamar bhi buri tarah uchak rahi thi.rambha ne jhadne ki shiddat itni inteha ke sath kabhi mehsus nahi ki thi & vo madhoshi me dubi hui bas chikhe ja rahi thi.

vijayant bhi ab bahut tezi se dhakke laga raha tha & jhadti rambha ki chut ne jaise hi sikudna-failna shuru kiya uske lund ne der se ando me ubal raha garm virya uski chut me udelna shuru kar diya.vijayant ka jism jhatke kha raha tha & vo aahen bhar raha tha.use aisa mehsus ho raha tha mano rambha ki chut uske lund ko pakad uske virya ko nichod-2 ke nikal rahi ho.vahi rambha ne uske virya ko seedha apni kokh me girte mehsus kiya & uske jahdne ki masti duguni ho gayi.

vijayant ka lund ras bahate hi chala ja raha tha & rambha jhade chale ja rahi thi.

"AANNNNNHHHHH..!",vo chikhi & bistar se uthate hue usne sasur ke mazbut upri bazuo me apne nakhun dhansa diye.

"aahhhhh..!",nakhuno ke dhansne se halka sa khoon nikla & vijayant karaha & usne 1-2 dhakke aur laga diye & 1 baar fir uske lund se virya chhutne laga.vo itni der tak pehle kabhi nahi jhada tha.

rambha jhadne ki shiddat se aahat ho ya fir apni aan ki vajah se apne sasur ka pure josh ke sath sath na dene ki majburi,uski aankhe chhalak gayi & vo rone lagi & jhad ke uske upar pade hanfte vijayant ko usne khud se alag kiya & subakti hui bistar se utar gayi.

"In aansuo ki vajah kya hai?",bathroom ki or jati Rambha ka rasta bistar se utar ke Vijayant Mehra ne rok liya tha,"..ye ki maine tumhari majburi ka fayda uthaya ya ye ki tumhari aan ne tumhe khul ke hum dono ki chudai ka maza nahi lene diya!",rambha ki rulai ruk gayi & usne hairat se vijayant ko dekha..kya usne uska man padh liya tha?

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--27

गतान्क से आगे.

"रंभा,जब मैने तुम्हे पहली बार देखा तभी से तुम्हे पाने की ख्वाहिश मेरे दिल मे पैदा हो गयी थी लेकिन फिर तुमने समीर से शादी कर ली & मुझे लगा कि मेरी ये ख्वाहिश अब कभी हक़ीक़त नही बनेगी,लेकिन तक़दीर का खेल देखो कि समीर की गुमशुदगी ने मुझे ये मौका दे दिया.",रंभा अभी भी हैरत से उसे देखे जा रही थी.

"..तुम सोच रही होगी कि मैं कैसा नीच हू जोकि बेटे के मुसीबत मे होने के वक़्त भी अपनी हवस पूरी करने की सोच रहा है.पर मैं क्या करू?तुम इतनी हसीन हो & मैं हू ही ऐसा!"

"..रंभा,मैं 1 कारोबारी हू & मेरा उसूल है कि नुकसान से भी कुच्छ फ़ायदा तो निकाल ही लेना चाहिए.बस इसी लिए मैने तुमसे आज सवेरे अपनी पेशकश की जिसे तुमने मान लिया.चाहती तो तुम अपने कार्ड्स मेरे मुँह पे मार चली जाती.ऐसा तो नही कि तुम्हारे खुद के पैसे नही हैं लेकिन समीर के पैसे छ्चोड़ने तुम्हे मंज़ूर नही था.तुम भी तो मेरे जैसे ही,1 कारोबारी के जैसे ही सोच रही थी.पर ये मत समझो कि मैं तुम्हारी खिल्ली उड़ा रहा हू.नही,बल्कि मुझे ये बात पसंद आई है.तुम बहुत तरक्की करोगी.."

"रंभा,दूसरी बात जो तुम्हारी मुझे अच्छी लगी वो है तुम्हारी आन,तुम्हारा आत्म-सम्मान.तुम्हारा जिस्म मेरे साथ मज़े ले रहा था लेकिन तुमने 1 बार भी उसका इज़हार नही किया.मैं तुम्हारे इस जज़्बे की कद्र करता हू & माफी माँगता हू कि मेरी वजह से ये मोटी छल्के..",उसने उसके आँसुओ से भीगे गाल अपने हाथो से पोन्छे,"..मेरी तो यही तमन्ना रहेगी की तुम्हारे साथ ये जो रिश्ता अभी जुड़ा है उसे मैं मरते दम तक कायम रखू लेकिन अब इसका फ़ैसला तुमपे छ्चोड़ता हू.अगर तुम भी इस रिश्ते को बरकरार रखना चाहती तो ठीक है नही तो अब मैं तुम्हे हाथ नही लगाउन्गा.",& वो उसके रास्ते से हट गया.रंभा बाथरूम मे चली गयी.

उसने देखा की उसके ससुर का वीर्य उसकी चूत से निकल के उसकी जाँघो पे बह रहा था.आज तक उसकी चूत को किसी मर्द ने ऐसे नही भरा था.उसने चूत को धो के साफ किया & फिर वॉशबेसिन पे मुँह धोने लगी..उसका ससुर तो उसे किसी किताब की तरह पढ़ ले रहा था..& चुदाई भी ऐसी कमाल की की थी कि उसका रोम-2 खुशी से भर उठा था..लेकिन उसने उसे मजबूर किया था..उसके तो दिमाग़ मे ये ख़याल कभी आया ही नही था..झूठ!..गुजरात मे गेस्ट हाउस के बाथरूम मे उसने उसी को सोच के अपनी चूत पे उंगली फिराई थी & बाद मे भी 1-2 बार वो उसके शरीर ख़यालो का हिस्सा बना था..तो क्या उसे अपने ससुर का हाथ थाम लेना चाहिए..हां क्यू नही!..लेकिन उसकी सास,ननद..

वो इन्ही ख़यालो मे डूबी थी की उसके ज़हन मे बिजली सी कौंधी..विजयंत ने माना था कि उसने उसकी मजबूरी का फ़ायदा उठाने के लिए कार्ड्स ब्लॉक करवाए थे तो कही उसके जिस्म की हवस मे अँधा होकर उसी ने तो समीर को गायब नही करवाया?..हां ये मुमकिन है..अब तो ससुर जी से रिश्ता कायम रखना ही होगा!

बाथरूम से बाहर निकली तो देखा की विजयंत 2 खाने की तालिया लेके बैठा है.जब वो घर मे दाखिल हुआ था तो उसके हाथ मे जो पॅकेट था उसमे खाना ही था.रंभा की तो सवेरे की ससुर से मुलाकात के बाद भूख ही मर गयी थी लेकिन अब उसकी कारस्तानियो के बाद उसकी भूख जाग गयी थी.विजयंत ने उसे उसकी थाली थमायी & दोनो खामोशी से खाना खाने लगे.खाना ख़त्म होने पे रंभा ने ससुर के हाथ से थाली ली & झूठे बर्तन रसोई मे रखने चली गयी.

जब वो कमरे मे लौटी तो देखा की विजयंत ने वाहा बाकी बत्तियाँ बुझा के सिर्फ़ 1 मद्धम रोशनी वाला लॅंप जला रखा है & वो पलंग के हेआडबोर्ड से टेक लगाके टाँगे फैलाए,कमर तक चादर डाले बैठा है.रंभा अपने बाल ठीक करती धीरे-2 बिस्तर तक आई & उसके दाई तरफ बैठ गयी.विजयंत की बाँह पे उसके नखुनो की खरोन्चे दिख रही थी.उसने उसपे उंगलिया फिराई & फिर 2 पलो के बाद झुक के बहुत हल्के से चूम लिया.

विजयंत समझ गया कि रंभा को उन दोनो का ये रिश्ता मंज़ूर था & उसने उसे दाई बाँह के घेरे मे ले लिया.रंभा ने भी चादर मे घुसते हुए बाया हाथ उसके सीने पे रखा & अपनी छातियाँ उसकी बगल मे दबाते हुए उसके कंधे पे सर रख उसके पहलू मे आ गयी.उसका ससुर उसकी गुदाज़ दाई बाँह को प्यार से सहला रहा था.विजयंत के चौड़े सीने के घने बालो मे उंगलिया फिराना रंभा को बहुत भला लग रहा था.कितनी देर से उसने खुद को ऐसा करने से रोका था मगर अब नही,अब तो वो जितनी मर्ज़ी उतनी देर तक इस मज़बूत जिस्म से खेल सकती थी.

"समीर के साथ क्या हुआ है?..आपको क्या लगता है?",रंभा के दाए हाथ की उंगली ससुर के सीने से उसकी दाढ़ी पे आ गयी थी.उसने विजयंत की ठुड्डी चूमि & फिर उसके होंठो पे उंगली फिराई.विजयंत उसकी कलाई थामे था.उसने पहले उसकी उंगली को चूमा & उसे खुद से थोड़ा & चिपका लिया.रंभा ने भी दाई टांग उठा के ससुर की टांगो पे चढ़ा दी.

"कुच्छ समझ नही आता..",विजयंत के चेहरे पे चिंता नज़र आ रही थी,"..कोई हादसा हुआ होता तो उसकी कार मिलती या फिर..",उसके जैसा मज़बूत दिल वाला शख्स भी बेटे की मौत के बारे मे बोलने से घबरा रहा था,"..& ऐसी दुश्मनी भी नही किसी से कि कोई उसे नुकसान पहुँचाए.",रंभा गौर से उसे देख रही थी....या तो ये आदमी झूठ बोलने मे माहिर है या ये बिल्कुल सच्चा है.

"तो अब क्या करेंगे?",उसका हाथ वापस ससुर के सीने पे फिसलने लगा था & अब धीरे-2 नीचे बढ़ रहा था.उसने अपनी मुलायम तंग से विजयंत की टाँगो के उपर धीरे-2 सहलाना शुरू कर दिया था.उसने नीचे देखा तो चादर मे तंबू बन गया था.उसने चादर को हटा के नीचे फेंक दिया & सामने ताज़ा सॉफ की गयी झांतो की वजह से & लंबा दिखता विजयंत का लंड देख उसकी आँखे चमक उठी.

"सोचा है मैने कुच्छ..उउम्म्म्म..",उसकी बहू उसके सीने को चूम रही थी & चूमते हुए उसके पेट के बिल्कुल निचले हिस्से पे जहा बाल ख़त्म हो रहे थे वाहा पे सहला रही थी.रंभा को अपनी टाँगो पे विजयंत की टाँगो के बालो की छुअन मस्त कर रही थी.उसने अपने होंठो मे उसका बाया निपल लिया & चूस लिया.उसके ससुर ने आह भरते हुए उसके बालो मे उंगलिया फिरा दी.रंभा ने दूसरे निपल को भी थोड़ी देर चूसा & उसके बाद चूमते हुए नीचे जाने लगी,"..लेकिन उस से पहले कल सुबह हम डेवाले जाएँगे."

रंभा अब उसके पहलू से निकल उसकी टाँगो को फैला के उसके लंड को देख रही थी.इतना बड़ा,इतना तगड़ा लंड देख के ही उसे मस्ती चढ़ने लगी थी.उसने लंड के नीचे लटक रहे गोल्फ बॉल जैसे आंडो को थपथपाया..कितने दिनो से वो किसी मर्दाने अंग से इस तरह नही खेली थी.आज वो जी भर के खेलेगी अपने ससुर के लंड से!

उसने लंड को हाथ मे पकड़ा.वो इतना मोटा था कि उसकी मुट्ठी के घेरे मे नही आ रहा था सो उसने दूसरा हाथ भी उसपे कस दिया.अभी भी लंड का काफ़ी बड़ा हिस्सा उसके छ्होटे-2 हाथो की पकड़ के बाहर था.लंड की गर्मी ने उसके जिस्म की तपिश भी बढ़ा दी थी.वो झुकी & गुलाबी सूपदे पे पहली बार अपने होंठो की मोहर लगाई.विजयंत ने मस्ती मे आँखे बंद कर ली.

रंभा उसके लंड को हिलाते हुए सूपदे को चूस रही थी.कुच्छ देर चूसने के बाद उसने सूपदे को मुँह से निकाला & उसपे जीभ फिराई & फिर लंड को पकड़ उसे अपने दोनो गालो & होंठो पे फिराने लगी.उसने नाक लंड & आंडो के बीच की जगह पे दबाते हुए उसके 1 अंडे को मुँह मे भर के चूसा तो विजयंत अपनी कमर उचकाते हुए सीधा बैठ गया & उसके सर को थाम लिया.

रंभा उसकी मस्ती से बेपरवाह उसके दूसरे अंडे को चूस रही थी कि उसकी नज़र पास पड़े गुलाब के फूल पे पड़ी.उसके ससुर ने उस गुलाब से ही उसे पागल कर दिया था.अब उसकी बारी थी.उसने लंड को छ्चोड़ दिया & गुलाब को हाथ मे ले उसे सुपादे पे रखा.गुलाब की बड़ी सी पंखुड़ी से जब उसने विजयंत के लंड के छेद को छेड़ा तो विजयंत ने आँखे बंद करते हुए ज़ोर से आह भारी.सूपदे की नाज़ुक स्किन पे फिसलती पंखुड़ी 1 अजीब सा मज़ा उसके जिस्म मे भर रही थी.

रंभा ने गुलाब को नीचे सरकाते हुए उसके लंड को फूल से सहलाया & फिर उसके आंडो पे उसी फूल से हल्के से मारा & ससुर को देख मुस्कुराइ.विजयंत ने उसे उपर खींचा & बाहो मे भरते हुए उसके होंठो से अपने होंठ सटा दिए.जब तक वो अपनी ज़ुबान आगे करता,रंभा की ज़ुबान उसके मुँह मे दाखिल हो चुकी थी.वो उसकी मांसल कमर को दबाते हुए उसकी किस का लुत्फ़ उठा रहा था.रंभा उसके चेहरे को पकड़े उसे शिद्दत से चूमे जा रही थी.काफ़ी देर तक दोनो उस मस्तानी किस का लुत्फ़ उठाते रहे,तब तक जब ताकि सांस लेने के लिए उन्हे अलग ना होना पड़ा.

रंभा लंबी-2 साँसे लेती अपने सीने के उभारो को ससुर के मुँह से सटाने लगी.विजयंत ने उसकी गंद की फांको को दबोचा & उसकी चूचियों को चूसने लगा.जब उनके बीच की वादी मे अपना मुँह घुसा के अपनी नाक उसने रगडी तो रंभा ने मस्ती & खुशी से मुस्कुराते हुए आह भरी & अपना सर पीछे झटका.उसके ससुर ने चूत को च्छुआ भी नही था & वो बुरी तरह से कसमसाते हुए रस बहाने लगी थी.

रंभा ने अपनी छातियाँ विजयंत के मुँह से खींची & पीछे हो अपने दोनो घुटने उसकी कमर के दोनो ओर जमाए & चूत को लंड पे झुकाने लगी.उसने बाया हाथ पीछे ले जाके लंड को थामा & फिर चूत को झुका के उसके मत्थे पे रखा & बैठने लगी.उसकी आँखे बंद हो गयी & चेहरा पे बस जोश दिखने लगा.इस पोज़िशन मे लंड 7-8 इंच तक अंदर घुस गया था & उसकी चूत को पूरा भर दिया था.

रंभा उसके सीने पे हाथ जमाए उसे मस्ती भरी निगाहो से देखती कूदने लगी.1 बार फिर चुदाई शुरू हो गयी थी & इस बार दोनो प्रेमी बिना किसी उलझन के उसका लुत्फ़ उठा रहे थे.विजयंत के बड़े हाथ रंभा के पूरे जिस्म पे घूम रहे थे.जब वो उसकी गंद के उभारो को नही दबा रहे होते तो वो उसकी चूचियो की गोलाई नाप रहे होते.उसकी चूचियो को भींचते हुए विजयंत ने अपने दोनो हाथो को उनके बीच की वादी से नीचे किया & उसके पेट को सहलाया.

विजयंत ने बगल मे पड़ा फूल उठाया & इस बार उसकी डंठल को सीधा रंभा के दाने पे लगा दिया.

"आननह....!",रंभा के चेहरे पे मस्तानी शिकाने पड़ गयी & वो मुस्कुराते हुए पीछे हो गयी ताकि उसकी चूत & उसका दाना उसके ससुर को आसानी से दिखें.उसने अपने हाथ विजयंत के पेड़ के तने सरीखी टाँगो पे टिकाए & कमर हिलाने लगी.विजयंत उसकी नज़र से नज़रे मिलाता हुआ उसके दाने पे डंठल रगड़ता रहा.

रंभा की आँखे अब नशे के बोझ तले आधी ही खुली रह पा रही थी.विजयंत की ये हरकत उसे मदहोशी के आलम मे ले गयी थी & अब वो उसे देख चूमने का इशारा करती हुई उसकी जाँघ पे हाथ टिकाए बहुत ज़ोर से कमर हिला रही थी.तभी उसकी चूत ने वही हरकते शुरू कर दी जो वो झड़ने के वक़्त करती थी & विजयंत के चेहरे पे भी उसकी बहू की तरह मस्ती भरी शिकन पड़ गयी & वो आहे भरने लगा लेकिन उसने दाने पे डंठल की रगड़ को नही रोका.

"आन्न्न्नह..डॅड.....!",रंभा झड़ी & उसे अब डंठल की रगड़ नकबीले. बर्दाश्त लगी.उसने फूल को पकड़ के किनारे फेंका & अपने ससुर के उपर झुक गयी.अपनी भारी-भरकम चूचिया उसके बालो भरे सीने पे दबाते हुए वो आहे भरती सुबक्ती हुई उसे दीवानो की तरह चूमने लगी.विजयंत ने उसे बाहो मे भर लिया & उसकी किस का जवाब देता रहा.

जब रंभा थोड़ा संभली तो विजयंत ने उसे बाहो मे भरे-2 पलटा & अपने नीचे कर लिया.रंभा ने सरसुर के बालो मे उंगलिया फिराते हुए उसके सर को थाम लिया & उसकी दाढ़ी पे अपने गाल रगड़ने लगी.

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1 कार रंभा & समीर के बंगल के बाहर खड़ी थी.उसमे 1 शख्स बैठा उपरी मंज़िल की ओर देख रहा था.वो काफ़ी देर से उस बुंगले पे नज़र रखे था.उसने विजयंत को आते देखा था लेकिन अभी उसकी समझ मे ये नही आ रहा था कि उपर अभी कौन जगा था.पहले निचली मंज़िल & उपरी मंज़िल पे बत्तिया जल रही थी लेकिन अभी कुच्छ देर पहले सारे घर की बत्तिया किसी ने बुझाई मगर उपर के कमरे मे तेज़ रोशनी बंद कर मद्धम रोशनी कर दी गयी थी.

उस शख्स ने 1 सिगरेट सुलआगाई. & लाइटर की रोशनी मे उसका चेहरा दिखा जिसपे बाए गाल पे 1 निशान था,लगभग 2 इंच बड़ा.निशान किसी बड़ी पुरानी चोट का लगता था.वो आदमी लगभग 50-55 बरस का होगा & उसके बॉल डाइड थे.सिगरेट पीते हुए वो सोच रहा था..इतनी मुश्किल से उसे इस लड़की का पता मिला था.उसने सोचा था कि अब तलाश ख़त्म हुई & वो उस से बात कर लेगा लेकिन यहा तो और ही कहानी चल रही थी.अब पता नही कब उसका पति मिलेगा & कब वो उस से बात कर पाएगा!..उसने सिगरेट को खिड़की से बाहर फूटपाथ पे फेंका & पॅकेट से दूसरी निकाल के सुलगाई.

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क्रमशः.......

JAAL paart--27

gataank se aage.

"rambha,jab maine tumhe pehli baar dekha tabhi se tumhe pane ki khwahish mere dil me paida ho gayi thi lekin fir tumne Sameer se shadi kar li & mujhe laga ki meri ye khwahish ab kabhi haqeeqat nahi banegi,lekin taqdeer ka khel dekho ki sameer ki gumshudgi ne mujhe ye mauka de diya.",rambha abhi bhi hairat se use dekhe ja rahi thi.

"..tum soch rahi hogi ki main kaisa neech hu joki bete ke musibat me hone ke waqt bhi apni hawas puri karne ki soch raha hai.par main kya karu?tum itni haseen ho & main hu hi aisa!"

"..rambha,main 1 karobari hu & mera usul hai ki nuksan se bhi kuchh fayda to nikal hi lena chahiye.bas isi liye maine tumse aaj savere apni peshkash ki jise tumne maan liya.chahti to tum apne cards mere munh pe maar chali jati.aisa to nahi ki tumahre khud ke paise nahi hain lekin sameer ke paise chhodne tumhe manzur nahi tha.tum bhi to mere jaise hi,1 karobari ke jaise hi soch rahi thi.par ye mat samjho ki main tumhari khilli uda raha hu.nahi,balki mujhe ye baat pasand aayi hai.tum bahut tarakki karogi.."

"rambha,dusri baat jo tumhari mujhe achhi lagi vo hai tumhari aan,tumhara atma-samman.tumhara jism mere sath maze le raha tha lekin tumne 1 baar bhi uska izhar nahi kiya.main tumhare is jazbe ki kar karta hu & mafi mangta hu ki meri vajah se ye moti chhalke..",usne uske ansuo se bhige gaal apne hatho se ponchhe,"..meri to yehi tamnanna rahegi ki tumhare sath ye jo rishta abhi juda hai use main marte dum tak kayam rakhu lekin ab iska faisla tumpe chhodta hu.agar tum bhi is rishte ko barkarar rakhna chahti to thik hai nahi to ab main tumhe hath nahi lagaunga.",& vo uske raste se hat gaya.rambha bathroom me chali gayi.

usne dekha ki uske sasur ka virya uski chut se nikal ke uski jangho pe beh raha tha.aaj tak uski chut ko kisi mard ne aise nahi bhara tha.usne chut ko dho ke saaf kiya & fir washbasin pe munh dhone lagi..uska sasur to use kisi kitab ki tarah padh le raha tha..& chudai bhi aisi kamal ki ki thi ki uska rom-2 khushi se bhar utha tha..lekin usne use majbur kiya tha..uske to dimagh me ye khayal kabhi aaya hi nahi tha..jhuth!..Gujarat me guest house ke bathroom me usne usi ko soch ke apni chut pe ungli firayi thi & baad me bhi 1-2 baar vo uske sharir khayalo ka hissa bana tha..to kya use apne sasur ka hath tham lena chahiye..haan kyu nahi!..lekin uski saas,nanad..

vo inhi khayalo me dubi thi ki uske zehan me bijli si kaundhi..vijayant ne mana tha ki usne uski majburi ka fayda uthane ke liye cards block karwaye the to kahi uske jism ki hawas me andha hokar usi ne to sameer ko gayab nahi karwaya?..haan ye mumkin hai..ab to sasur ji se rishta kayam rakhna hi hoga!

bathroom se bahar nikli to dekha ki vijayant 2 khane ki thaliya leke baitha hai.jab vo ghar me dakhil hua tha to uske hath me jo packet tha usme khana hi tha.rambha ki to savere ki sasur se mulakat ke baad bhukh hi mar gayi thi lekin ab uski karastaniyo ke baad uski bhukh jag gayi thi.vijayant ne use uski thali thamayi & dono khamoshi se khana khane lage.khana khatm hone pe rambha ne sasur ke hath se thali li & juthe bartan rasoi me rakhne chali gayi.

jab vo kamre me lauti to dekha ki vijayant ne vaha baki battiyan bujha ke sirf 1 maddham roshni vala lamp jala rakha hai & vo palang ke heaadbord se tek lagake tange failaye,kamar tak chadar dale baitha hai.rambha apne baal thik karti dhire-2 bistar tak aayi & uske dayi taraf baith gayi.vijayant ki banh pe uske nakhuno ki kharonche dikh rahi thi.usne uspe ungliya firayi & fir 2 palo ke baad jhuk ke bahut halke se chum liya.

vijayant samajh gaya ki rambha ko un dono ka ye rishta manzur tha & usne use dayi banh ke ghere me le liya.rambha ne bhi chadar me ghuste hue baya hath uske seene pe rakha & apni chhatiya uski bagal me dabate hue uske kandhe pe sar rakh uske pehlu me aa gayi.uska sasur uski gudaz dayi banh ko pyar se sehla raha tha.vijayant ke chaude seene ke ghane baalo me ungliya firana rambha ko bahut bahla lag raha tha.kitni der se usne khud ko aisa karne se roka tha magar ab nahi,ab to vo jitni marzi utni der tak is mazbut jism se khel sakti thi.

"sameer ke sath kya hua hai?..aapko kya lagta hai?",rambha ke daye hath ki ungli sasur ke seene se uski dadhi pe aa gayi thi.usne vijayant ki thuddi chumi & fir uske hotho pe ungli firayi.vijayant uski kalai thame tha.usne pehle uski ungli ko chuma & use khud se t5hoda & chipka liya.rambha ne bhi dayi tang utha ke sasur ki tango pe chadha di.

"kuchh samajh nahi aata..",vijayant ke chere pe chinta nazar aa rahi thi,"..koi hadsa hua hota to uski car milti ya fir..",uske jaisa mazbut dil vala shakhs bhi bete ki maut ke bare me bolne se ghabra raha tha,"..& aisi dushmani bhi nahi kisi se ki koi use nuksan pahunchaye.",rambha gaur se use dekh rahi thi....ya to ye admi jhuth bolne me mahir hai ya ye bilkul sachcha hai.

"to ab kya karenge?",uska hath vapas sasur ke seene pe fisalne laga tha & ab dhire-2 neeche badh raha tha.usne apni mulayam tang se vijayant ki tango ke upar dhire-2 sehlana shuru kar diya tha.usne neeche dekha to chadar me tambu ban gaya tha.usne chadar ko hata ke neeche fenk diya & samne taza saaf ki gayi jhanto ki vajah se & lamba dikhta vijayant ka lund dekh uski aankhe chamak uthi.

"socha hai maine kuchh..uummmm..",uski bahu uske seene ko chum rahi thi & chumte hue uske pet ke bilkul nichle hisse pe jaha baal khatm ho rahe the vaha pe sehla rahi thi.rambha ko apni tango pe vijayant ki tango ke baalo ki chhuan mast kar rahi thi.usne apne hotho me uska baya nipple liya & chus liya.uske sasur ne aah bharte hue uske baalo me ungliya fira di.rambha ne dusre nipple ko bhi thodi der chusa & uske baad chumte hue neeche jane lagi,"..lekin us se pehle kal subah hum Devalay jayenge."

rambha ab uske pehlu se nikal uski tango ko faila ke uske lund ko dekh rahi thi.itna bada,itna tagda lund dekh ke hi use masti chadhne lagi thi.usne lund ke neeche latak rahe golf ball jaise ando ko thapthapaya..kitne dino se vo kisi mardane ang se is tarah nahi kheli thi.aaj vo ji bhar ke khelegi apne sasur ke lund se!

usne lund ko hath me pakda.vo itna mota tha ki uski mutthi ke ghere me nahi aa raha tha so usne dusra hath bhi uspe kas diya.abhi bhi lund ka kafi bada hissa uske chhote-2 hatho ki pakad ke bahar tha.lund ki garmi ne uske jism ki tapish bhi badh di thi.vo jhuki & gulabi supade pe pehli baar apne hotho ki mohar lagayi.vijayant ne masti me aankhe band kar li.

rambha uske lund ko hilate hue supade ko chus rahi thi.kuchh der chusne ke baad usne supade ko munh se nikala & uspe jibh firayi & fir lund ko pakad use apne dono galo & hotho pe firane lagi.usne naak lund & ando ke beech ki gaha pe dabate hue uske 1 ande ko munh me bhar ke chusa to vijayant apni kamar uchkate hue seedha baith gaya & uske sar ko tham liya.

rambha uski masti se beparwah uske dusre ande ko chus rahi thi ki uski nazar paas pade gulab ke phool pe padi.uske sasur ne us gulab se hi use pagal kar diya tha.ab uski bari thi.usne lund ko chhod diya & gulab ko hath me le use supade pe rakha.gulab ki badi si pankhudi se jab usne vijayant ke lund ke chhed ko chheda to vijayant ne aankhe band karte hue zor se aah bhari.supade ki nazuk skin pe fisalti pankhudi 1 ajib sa maza uske jism me bhar rahi thi.

rambha ne gulab ko neeche sarkate hue uske lund ko phool se sehlaya & fir uske ando pe usi phool se halke se mara & sasur ko dekh muskurayi.vijayant ne use upar khincha & baaho me bharte hue uske hotho se apne honth sata diye.jab tak vo apni zuban aage karta,rambha ki zuban uske munh me dakhil ho chuki thi.vo uski mansal kamar ko dabate hue uski kiss ka lutf utha raha tha.rambha uske chehre ko pakde use shiddat se chume ja rahi thi.kafi der tak dono us matani kiss ka lutf uthate rahe,tab tak jab taki sans lene ke liye unhe lag na hona pada.

rambha lumbi-2 sanse leti apne seene ke ubharo ko sasur ke munh se satane lagi.vijayant ne uski gand ki fanko ko dabocha & uski chhatiyo ko chusne laga.jab unke beech ki vadi me apna munh ghusa ke apni naak usne ragdi to rambha ne masti & khushi se muskurate hue aah bhari & apna sar peechhe jhatka.uske sasur ne chut ko chhua bhi nahi tha & vo buri tarah se kasmasate hue ras bahane lagi thi.

rambha ne apni chhatiya vijayant ke munh se khinchi & peechhe ho apne dono ghutne uski kamar ke dono or jamaye & chut ko lund pe jhukane lagi.usne baya hath peechhe le jake lund ko thama & fir chut ko jhuka ke uske matthe pe rakha & baithne lagi.uski aankhe band ho gayi & chehra pe bas josh dikhne laga.is position me lund 7-8 inch tak andar ghus gaya tha & uski chut ko pura bhar diya tha.

rambha uske seene pe hath jamaye use masti bhari nigaho se dekhti kudne lagi.1 baar fir chudai shuru ho gayi thi & is baar dono premi bina kisi uljhan ke uska lutf utha rahe the.vijayant ke bade hath rambha ke pure jism pe ghum rahe the.jab vo uski gand ke ubharo ko nahi daba rahe hote to vo uski choochiyo ki golayi naap rahe hote.uski choochiyo ko bhinchte hue vijayant ne apne dono hatho ko unke beech ki vadi se neche kiya & uske pet ko sehlaya.

vijayant ne bagal me pada phool uthaya & is baar uski danthal ko seedha rambha ke dane pe laga diya.

"aannhhhhhh....!",rambha ke chehre pe mastani shikane pad gayi & vo muskurate hue peechhe ho gayi taki uski chut & uska dana uske sasur ko aasani se dikhen.usne apne hath vijayant ke ped ke tane sarikhi nagho pe tikaye & kamar hilane lagi.vijayant uski nazor se nazre milata hua uske dane pe danthal ragadta raha.

rambha ki aankhe ab nashe ke bojh tale aadhi hi khuli reh pa rahi thi.vijayant ki ye harkat use madhoshi ke alam me le gayi thi & ab vo use dekh chumne ka ishara karti hui uski jangh pe hath tikaye bahut zor se kamar hila rahi thi.tabhi uski chut ne vahi harkate shuru kar di jo vo jhadne ke waqt karti thi & vijayan ke chhere pe bhi uski bahu ki tarah masti bhari shikne pad gayi & vo aah bharne laga lekin usne dane pe danthal ki ragad ko nahi roka.

"aannnnhhhhhh..dad.....!",rambha jhadi & use ab danthal ki ragad nakabile bardasht lagi.usne phool ko pakad ke kinare fenka & apne sasur ke upar jhuk gayi.apni bhari-bharkam choochiya uske balo bhare seene pe dabate hue vo aahe bharti subakti hui use deewano ki tarah chumne lagi.vijayant ne use baaho me bhar liya & uski kiss ka jawab deta raha.

jab rambha thoda sambhli to vijayant ne use baaho me bhare-2 palta & apne neeche kar liya.rambha ne sarsur ke baalo me ungliya firate hue uske sar ko tham liya & uski dadhi pe ane gaal ragadne lagi.

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1 car rambha & sameer ke bungle ke bahar khadi thi.usme 1 shakhs baitha upri manzil ki or dekh raha tha.vo kafi der se us bungle pe nazar rakhe tha.usne vijayant ko aate dekha tha lekin abhi uski samajh me ye nahi aa raha tha ki upar abhi kaun jaga tha.pehle nichli manzil & upri manzil pe battiya jal rahi thi lekin abhi kuchh der pehle sare ghar ki battiya kisi ne bujhayi magar upar ke kamre me tez roshni band kar maddham roshni kar di gayi thi.

us shakhs ne 1 cigarette sulagai & lighter ki roshni me uska chehra dikha jispe baye gaal pe 1 nishan tha,lagbhag 2 inch bada.nishan kisi badi purani chot ka lagta tha.vo aadmi lagbhag 50-5 baras ka hoga & uske baal dyed the.cigarette peete hue vo soch raha tha..itni mushkil se use is ladki ka pata mila tha.usne socha tha ki ab talash khatm hui & vo us se baat kar lega lekin yaha to aur hi kahani chal rahi thi.ab pata nahi kab uska pati milega & kab vo us se baat kar payega!..usne cigarette ko khidki se bahar footpath pe fenka & packet se dusri nikal ke sulgai.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--28

गतान्क से आगे.

"ऊहह....हान्णन्न्..",रंभा सर पीछे किए ख़ुसी से मुस्कुरा रही थी.उसके उपर सवार विजयंत उसकी गर्दन चूम रहा था & बहुत ही हल्के धक्को के साथ उसकी चुदाई कर रहा था.रंभा ने सर के उपर फैले अपने हाथ नीचे किए & अपने ससुर की पीठ सहलाई..अफ..कितना मज़बूत,कितना सख़्त जिस्म था..उसने आँखे बदन की & विजयंत के सर को चूमते हुए हाथ उसकी गंद पे ले गयी & वाहा दबाने लगी.अपने इस नये प्रेमी के गथिले जिस्म पे हाथ फेरने से भी उसकी चूत की कसक बढ़ा रही थी. विजयंत ने अभी भी लंड पूरा नही घुसाया था.

"ओईईईईईई..माआआअ..!",वो उसकी गर्दन से उठा & उसकी आँखो मे देखते हुए 1 धक्का लगाया.लंड जड तक समा गया & रंभा की कोख से टकराया.उसकी टाँगे खुद बा खुद विजयंत की कमर पे कैंची की तरह कस गयी & कमर अपनेआप हिलने लगी,"..डॅड..1 बात बताइए...आन्न्‍न्णनह..!"

"क्या?",विजय्न्त के हाथ उसकी गंद के नीचे जा लगे थे & उसकी फांको को मसल रहे थे.

"क्या मम्मी भी मुझसे नाराज़ हैं?..उउन्न्ञणनह..!",लंड कोख पे चोट पे चोट किए जा रहा था.उसका बदन उसके बस मे नही था & झटके खाए जा रहा था.वो विजयंत की पीठ को अपने नाख़ून से छल्नी कर रही थी.

"तुम्हारी वजह से उसका बेटा घर छ्चोड़ के चला गया,कुच्छ तो नाराज़गी होगी ही लेकिन मुझे नही लगता इस मुश्किल वक़्त मे रीता तुमसे कोई बेरूख़ी दिखाएगी.",विजयंत उसकी गंद मसलते हुए उसे चूमते हुए चुदाई कर रहा था.

"हूँ.....आनह....हाईईईईईईईई.....हे भगवांनणणन्..!",रंभा अब सर पीछे फेंक जिस्म को कमान की तरह मोड़ कमर पागलो की तरह उचका रही थी.उसकी कसी चूत की गिरफ़्त लंड पे & कसी तो विजयंत ने भी मस्ती मे सर पीछे फेंका & आह भरी & ज़ोरदार धक्के लगाए.उसका जिस्म झटके खाने लगा.रंभा के नाख़ून उसकी गंद मे धन्से थे & वो उसके उपर उच्छल रहा था-ससुर & बहू 1 बार फिर 1 साथ झाड़ रहे थे.

रंभा ने विजयंत को नीचे खींचा & सिसकते हुए उसके चेहरे को चूमने लगी.दोनो जानते थे कि आज की रात दोनो ही नही सोने वाले हैं.

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1 बजे वो शख्स समझ गया कि विजयंत आज रात वही रुकने वाला है.उपरी मंज़िल के कमरे की बत्ती अभी भी जल रही थी..या तो घर मे मौजूद दोनो मे से कोई 1 शख्स अपनी परेशानी की वजह से सो नही पा रहा है या फिर किसी 1 को बत्ती जला के सोने की आदत है..उसने सिगरेट का टोटा फेंका & कार वाहा से आगे बढ़ा दी.

अगली सुबह विजयंत मेहरा रंभा के साथ डेवाले पहुँच गया & सीधा ट्रस्ट ग्रूप के दफ़्तर पहुँचा.रंभा को उसने सोनम के साथ अपने कॅबिन मे छ्चोड़ा & खुद उस एमर्जेन्सी मीटिंग को हेड करने चला गया जो उसने बुलाई थी.मीडीया ने बात अब पूरी फैला दी थी & रंभा के घर से निकलते वक़्त,पंचमहल एरपोर्ट,डेवाले एरपोर्ट & फिर अपने दफ़्तर की बिल्डिंग के बाहर-हर जगह उसे प्रेस वालो का सामना करना पड़ा.

"लॅडीस & जेंटल्मेन,आप सभी जानते हैं कि ये मीटिंग क्यू बुलाई गयी है.मिस्टर.समीर मेहरा लापता हैं & अभी तक उनका कोई सुराग नही मिला है.हालाकी वो अब हमारे ग्रूप का हिस्सा नही हैं लेकिन ये हक़ीक़त है कि वो मेरे बेटे हैं & इस वक़्त मेरी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी उसे ढूढ़ना है.मीडीया की निगाह भी इस केस पे पड़ चुकी है & इसीलिए मैं चाहता हू कि इस हॉल मे जो भी बातें हो रही हैं वो यहा से बाहर ना जाएँ.."

"..मैने फ़ैसला लिया है कि जब तक समीर या उसकी सलामती की कोई खबर नही मिल जाती,मैं पंचमहल मे ही रहूँगा..",हॉल मे बैठे सभी लोग फुसफुसाने लगे.

"..लेकिन उस से ग्रूप के काम मे कोई अड़चन नही आएगी.",विजयंत ने हाथ उठा के सब को शांत रहने का इशारा किया,"..मैं अपनी जगह मिस्टर.प्रणव कपूर को तब तक के लिए अपायंट करने जा रहा हू जब तक कि मैं वापस यहा ना लौट आऊँ.क्या आपलोगो को इस बारे मे कुच्छ पुच्छना है?",बारी-2 से सभी अपने शुबहे दूर करने लगे.प्रणव खामोश बैठा था & उसके चेहरे पे कोई भाव नही था लेकिन उसका दिल बल्लियो उच्छल रहा था.

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"रंभा,यार ऐसा कैसा हो सकता है कि कोई इंसान ऐसे गायब हो जाए & उसका कोई अता-पता भी ना चले?..यार,समीर का किसी से कुच्छ झगड़ा-वॉग्डा तो नही हुआ था ना?"

"नही,यार.मेरी तो खुद कुच्छ समझ मे नही आ रहा.",रंभा ने अपनी पेशानी पे हाथ फिराया.रात को विजयंत की बाहो मे वो अपनी सारी परेशानी भूल गयी थी लेकिन सुबह होते ही फिर से उसे तनाव हो गया था.

"तो तुझे ना कुच्छ अंदाज़ा है ना ही किसी पे शक़?"

"नही,सोनम."

"हूँ.",सोनम ने तय कर लिया कि मौका मिलते ही सारी बातें ब्रिज कोठारी को ज़रूर बताएगी.

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जिस रोज़ समीर के गायब होने की खबर सोनम ने उसे दी थी,ब्रिज की तो खुशी का ठिकाना ही नही रहा था.सोनिया को उस रोज़ उसने कुच्छ ज़्यादा ही प्यार किया & उसके नशीले जिस्म को अपने आगोश मे भरे हुए उसे ये बात बताई.

"तुम खुश हो ब्रिज इस खबर से?",दोनो झाड़ चुके थे & ब्रिज उसके उपर लेटा धीरे-2 उसकी बाई चूची चाट रहा था.

"हा,जानेमन!मेरा दुश्मन कमज़ोर हो गया है.अब & क्या चाहिए!",सोनिया को उस पल अपना पति 1 अजनबी लगा.ब्रिज उसके चेहरे के भाव से अनजाना बस उसके निपल पे जीभ फिराए जा रहा था.सोनिया का दिमाग़ तेज़ी से घूम रहा था..कही ब्रिज का ही हाथ तो नही इसके पीछे?..नही..ब्रिज ऐसा नही कर सकता..विजयंत को हराने के लिए वो इस हद्द तक नही गिर सकता!

"डार्लिंग..",उसने पति के बालो मे उंगलिया फिराई,"..1 बात कहु तो ग़लत तो नही समझोगे मुझे?"

"क्या बात है,सोनिया?",ब्रिज ने मुँह उसकी चुचियो से उठाया & उसपे ठुड्डी जमा के उस से दबाया,"..तुम सवाल पुछो फिर बताउन्गा..& अगर बुरा लगा भी तो मुझे मना लेना तुम!",वो मुस्कुरा दिया तो सोनिया भी मुस्कुरा दी..शायद इसी अदा के चलते उसने उस से शादी कर ली थी.

"तुम विजयंत को हमेशा हारा हुआ देखना चाहते हो..हर कीमत पे उसे खुद से नीचे देखना चाहते हो..& मुझे डर लगता है कि कही इस चक्कर मे मैं उस ब्रिज को खो दू जिस से मैने शादी की थी."

"देखो,सोनिया.इस उम्र मे मैने तुमसे शादी की है तो कुच्छ तो खास बात होगी तुम मे जिसने मुझे दीवाना बना दिया.तो फिर तुम ये कैसे सोचती हो की मैं तुमसे दूर हो जाउन्गा?",ब्रिज ने उसका चेहरा हाथो मे ले लिया था & उसकी आँखो मे झाँक रहा था.सोनिया को उन निगाहो मे कही भी झूठ नही दिख रहा था लेकिन उसके दिल मे शक़ तो पैदा हो ही गया था.वो मुस्कुरा दी & उसे अपने सीने से लगा लिया & उसके जिस्म को प्यार से सहलाने लगी.उसने तय कर लिया था कि वो अपने शुबहे को दूर करके रहेगी.

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"डॅड,आपने जो ज़िम्मेदारी मुझे दी है मैं उसे निभाने मे पीछे नही हटूँगा लेकिन मैं यही चाहता हू कि आप जल्द से जल्द वापस आ फिर से काम संभालेंगे.",कान्फरेन्स हॉल की मीटिंग ख़त्म हो चुकी थी & अब बस वाहा ससुर & दामाद बात कर रहे थे.

"तो दुआ करो बेटा की समीर जल्दी मिल जाए."

"हां डॅड,मैं उस बारे मे भी बात करना चाहता था.आपने अभी तक की सारी बात बता दी लेकिन ये नही बताया कि आगे क्या करने वाले हैं."

"प्रणव,मैने कुच्छ सोचा है लेकिन बुरा मत मानना,मैं ये बात अभी किसी को नही बताउन्गा..",विजयंत अपनी कुर्सी से उठ खड़ा हुआ & पीछे लगे बड़े शीशे का परदा हटा के नीचे शहर को देखने लगा,"..वो नीचे जो लोग खड़े हैं,वो अंजाने मे भी समीर को नुकसान पहुँचा सकते हैं."

"कौन..प्रेस,डॅड?",उसका दामाद उसके साथ आ खड़ा हुआ था.

"हां,देखो प्रणव.1 बहुत बड़ा चान्स है कि समीर अगवा हो गया है.अब ऐसे मे अगर मीडीया को पता चल जाए कि मैं क्या करनेवाला हू तो वो तो उसे ब्रेकिंग न्यूज़ बना देंगे & समीर की सलामती के लिए ये बात ख़तरनाक है."

"आप कोई इनाम का एलान तो नही करनेवाले?"

"नही.उस से कुच्छ हासिल नही होता बस लालचियो की फौज इकट्ठी होती है अपने दरवाज़े पे.",विजयंत ने घूम के प्रणव के कंधे थाम लिए,"..प्रणव,मैं जानता हू कि तुम भी समीर के लिए बहुत चिंतित हो लेकिन मैं अभी तुम्हे ज़्यादा नही बता सकता.तुम बस ट्रस्ट को सांभलो,मैं समीर की तलाश का काम देखता हू."

"ओके,डॅड.",प्रणव वाहा से बाहर चला गया.विजयंत ने 1 नज़र उस स्टेट्मेंट पे डाली जोकि उसने खुद लिखी थी.उस स्टेट्मेंट मे उसने ये कहा था की वो अभी कुच्छ दिन पंचमहल मे ही रहेगा & प्रणव के बागडोर संभालने की बात बताई थी.साथ ही उसने कंपनी के सभी क्लाइंट्स को भरोसा भी दिलाया था कि इस से ट्रस्ट के काम-काज पे कोई भी असर नही पड़ेगा.ऐसी ही 1 दूसरी स्टेट्मेंट उसने अपनी कंपनी मे काम करनेवालो के लिए तैय्यार की थी.

अब वक़्त आ गया था समीर की तलाश के लिए पहला अहम कदम उठाने का.उसने सोनम को इंटरकम से रंभा के साथ ही रहने को कहा & हॉल से निकल गया.लिफ्ट से वो सीधा बेसमेंट पार्किंग मे पहुँचा जहा उसका ड्राइवर 1 काले शीशो वाली सफेद ज़्क्स4 की चाभी लिए कार के साथ खड़ा था.विजयंत ने चाभी ली & कार मे बैठ गया & वाहा से निकल गया.बाहर खड़े रिपोर्टर्स ने उस कार पे कोई ध्यान नही दिया.उन्हे तो बस विजयंत की मर्सिडीस का इंतेज़ार था.

कार डेवाले की 1 रिहैइयाशी कॉलोनी के मार्केट पे पहुँच के रुक गयी & उसका आगे का पॅसेंजर साइड का दरवाज़ा खुला तो वाहा पहले से खड़ा 1 40 बरस का पतली मून्छो वाला चुस्त आदमी अंदर बैठ गया.

"हेलो,बलबीर..",विजयंत ने सफेद कमीज़ के उपर गहरे नीले कोट & स्लेटी रंग की पॅंट पहने उस लंबे कद के शख्स से हाथ मिलाया.ये था बलबीर मोहन-1 माना हुआ जासूस.बलबीर फौज मे था & कयि ख़तरनाक ऑपरेशन्स का हिस्सा रहा था.उसके जिस्म पे आज भी उन मुठभेदो के निशान मौजूद थे.वो कोई भी ख़तरा उठाने से नही हिचकिचाता था & मेज़ पे कागज़ी काम करना उसे बिल्कुल पसनद नही था.जब फौज ने तरक्की के बाद उसे ऐसी ही 1 पोस्टिंग दी तो उसने फौज छ्चोड़ना ही बेहतर समझा & 1 सेक्यूरिटी एजेन्सी खोल ली.

उसकी एजेन्सी लोगो & कंपनी की हिफ़ाज़त के सभी इंतेज़ामो को देखती थी मगर उसके साथ ही वो 1 काम और भी करता था जिसके बारे मे चंद खास लोग ही जानते थे-वो था जासूसी.

"ये अभी तक की सारी डीटेल्स हैं..",विजयंत ने उसे 1 लिफ़ाफ़ा थमाया,"..बलबीर,मुझे लगता है कि समीर की गुमशुदगी मे ब्रिज का हाथ है & मैं चाहता हू कि तुम ज़रा इस बारे मे पता लगाओ.",बलबीर को लगा था कि विजयंत उसे पंचमहल जा समीर को ढूँढने को कहेगा.

"हां मगर आपके बेटे को ढूँढना भी तो है?"

"वो काम मैं खुद करूँगा.तुम बस ये पता लगाओ कि ब्रिज कोठारी का इसमे हाथ है या नही."

"मेहरा साहब,बुरा मत मानीएगा लेकिन आपको नही लगता कि उसे ढूँढने का काम किसी पेशेवर को करना चाहिए?"

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क्रमशः.......

JAAL paart--28

gataank se aage.

"oohhhhhh....haannnn..",rambha sar peechhe kiye khusi se muskura rahi thi.uske upar sawar vijayant uski gardan chum raha tha & bahut hi halke dhakko ke sath uski chudai kar raha tha.rambha ne sar ke upar faile apne hath neeche kiye & apne sasur ki pith sehlai..uff..kitna mazbut,kitna sakht jism tha..usne aankhe badan ki & vijayant ke sar ko chumte hue hath uski gand pe le gayi & vaha dabane lagi.apne is naye premi ke gathile jism pe hath ferne se bhi uski chut ki kasak badh arhi thi.vojayant ne abhi bhi lund pura nahi ghusaya tha.

"ouiiiiiiiii..maaaaaaa..!",vo uski gardan se utha & uski aankho me dekhte hue 1 dhakka lagaya.lund jud tak sama gaya & rambha ki kokh se takraya.uski tange khud ba khud vijayant ki kamar pe kainchi ki tarah kas gayi & kamar apneaap hilne lagi,"..dad..1 baat bataiye...aannnnnhhhhhh..!"

"kya?",vijaynt ke hath uski gand ke neeche ja lage the & uski fanko ko masal rahe the.

"kya mummy bhi mujhse naraz hain?..uunnnnnhhhhhh..!",lund kokh pe chot pe chot kiye ja raha tha.uska badan uske bas me nahi tha & jhatke khaye ja raha tha.vo vijayant ki pith ko apne nakhun se chhalni kar rahi thi.

"tumhari vajah se uska beta ghar chhod ke chala gaya,kuchh to narazgi hogi hi lekin mujhe nahi lagta is mushkil waqt me Rita tumse koi berukhi dikhayegi.",vijayant uski gand maslate hue use chumte hue chudai kar raha tha.

"hun.....aanhhhhh....haiiiiiiiii.....hey bhagwannnnn..!",rambha ab sar peechhe fenk jism ko kaman ki tarah mod kamar paglo ki tarah uchka rahi thi.uski kasi chut ki giraft lund pe & kasi to vijayant ne bhi masti me sar peechhe phenka & aah bhari & zordar dhakke lagaye.uska jism jhatke khane.rambha ke nakhun uski gand me dhanse the & vo uske upar uchhal raha tha-sasur & bahu 1 baar fir 1 sath jhad rahe the.

rambha ne vijayant ko neeche khincha & sisakte hue uske chehre ko chumne lagi.dono jante the ki aaj ki raat dono hi nahi sone vale hain.

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1 baje vo shakhs samajh gaya ki vijayant aaj raat vahi rukne vala hai.upri manzil ke kamre ki batti abhi bhi jal rahi thi..ya to ghar me maujood dono me se koi 1 shakhs apni pareshani ki vajah se so nahi pa raha hai ya fir kisi 1 ko batti jala ke sone ki aadat hai..usne cigarette ka tota fenka & car vaha se aage badha di.

Agli subah Vijayant Mehra Rambha ke sath Devalay pahunch gaya & seedha Trust Group ke daftar pahuncha.rambha ko usne Sonam ke sath apne cabin me chhoda & khud us emergency meeting ko head karne chala gaya jo usne bulayi thi.media ne baat ab puri faiola di thi & rambha ke ghar se nikalte waqt,Panchmahal airport,devalay airport & fir apne daftar ki building ke bahar-har jagah use press valo ka samna karna pada.

"ladies & gentlemen,aap sabhi jante hain ki ye meeting kyu bulai gayi hai.Mr.Sameer Mehra lapata hain & abhi tak unka koi surag nahi mila hai.halaki vo ab humare group ka hissa nahi hain lekin ye haqeeqat hai ki vo mere bete hain & is waqt meri sabse badi zimmedari use dhoondana hai.media ki nigah bhi is case pe pad chuki hai & isiliye main chahta hu ki is hall me jo bhi baaten ho rahi hain vo yaha se bahar na jayen.."

"..maine faisla liya hai ki jab tak sameer ya uski salamati ki koi khabar nahi mil jati,main panchmahal me hi rahunga..",hall me baithe sabhi log khuspusane lage.

"..lekin us se group ke kaam me koi adchan nahi ayegi.",vijayant ne hath utha ke sab ko shant rehne ka ishara kiya,"..main apni jagah Mr.Pranav Kapur ko tab tak ke liye appoint karne ja raha hu jab tak ki main vapas yaha na laut aaoon.kya aaplogo ko is bare me kuchh puchhna hai?",bari-2 se sabhi apne shubahe door karne lage.pranav khamosh baitha tha & uske chehre pe koi bhav nahi tha lekin uska dil balliyo uchhal raha tha.

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"rambha,yaar aisa kaisa ho sakta hai ki koi insan aise gayab ho jaye & uska koi ata-pata bhi na chale?..yaar,sameer ka kisi se kuchh jhagda-wagda to nahi hua tha na?"

"nahi,yaar.meri to khud kuchh samajh me nahi aa raha.",rambha ne apni peshani pe hath firaya.raat ko vijayant ko baaho me vo apni sari pareshani bhul gayi thi lekin subah hote hi fir se use tanav ho gaya tha.

"to tujhe na kuchh andaza hai na hi kisi pe shaq?"

"nahi,sonam."

"hun.",sonam ne tay kar liya ki mauka milte hi sari baaten Brij Kothari ko zarur batayegi.

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jis roz sameer ke gayab hone ki khabar sonam ne use di thi,brij ki to khushi ka thikana hi nahi raha tha.Soniya ko us roz usne kuchh zyada hi pyar kiya & uske nashile jism ko apne agosh me bhare hue use ye baat batayi.

"tum khush ho brij is khabar se?",dono jhad chuke the & brij uske upar leta dhire-2 uski bayi chhati chat raha tha.

"haa,janeman!mera dushman kamzor ho gaya hai.ab & kya chahiye!",soniya ko us pal apna pati 1 ajnabi laga.brij uske chehre ke bhavo se anajana bas uske nipple pe jibh firaye ja raha tha.soniya ka dimagh tezi se ghum raha tha..kahi brij ka hi hath to nahi iske peechhe?..nahi..brij aisa nahi kar sakta..vijayant ko harane ke liye vo is hadd tak nahi gir sakta!

"darling..",usne pati ke balo me ungliya firayi,"..1 baat kahu to galat to nahi samjhoge mujhe?"

"kya baat hai,soniya?",brij ne munh uski chhati se uthaya & uspe thuddi jama ke us se dabaya,"..tum sawal puchho fir bataunga..& agar bura laga bhi to mujhe mana lena tum!",vo muskura diya to soniya bhi muskura di..shayad isi ada ke chalte usne us se shadi kar li thi.

"tum vijayant ko humesha hara hua dekhna chahte ho..har keemat pe use khud se neeche dekhna chahte ho..& mujhe darr lagta hai ki kahi is chakkar me main us brij ko kho du jis se maine shadi ki thi."

"dekho,soniya.is umra me maine tumse shadi ki hai to kuchh to khas baat hogi tum me jisne mujhe deewana bana diya.to fir tum ye kaise sochti ho ki main tumse door ho jaunga?",brij ne uska chehra hatho me le liya tha & uski aankho me jhank raha tha.soniya ko un nigaho me kahi bhi jhuth nahi dikh raha tha lekin uske dil me shaq to paida ho hi gaya tha.vo muskura di & use apne seene se laga liya & uske jism ko pyar se sehlane lagi.usne tay kar liya tha ki vo apne shubahe ko door karke rahegi.

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"dad,aapne jo zimmedari mujhe di hai main use nibhane me peechhe nahi hatunga lekin main yehi chahta hu ki aap jald se jald vapas aa fir se kaam sambhalenge.",conference hall ki meeting khatm ho chuki thi & ab bas vaha sasur & damad baat kar rahe the.

"to dua karo beta ki sameer jaldi mil jaye."

"haan dad,main us bare me bhi baat karna chahta tha.aapne abhi tak ki sari baat bata di lekin ye nahi bataya ki aage kya karne vale hain."

"pranav,maine kuchh socha hai lekin bura mat maanana,main ye baat abhi kisi ko nahi bataunga..",vijayant apni kursi se uth khada hua & peechhe lage bade shishe ka parda hatake neeche shehar ko dekhne laga,"..vo neeche jo log khade hain,vo anjane me bhi sameer ko nuksan pahuncha sakte hain."

"kaun..press,dad?",uska damad uske sath aa khada hua tha.

"haan,dekho pranav.1 bahut bada chance hai ki sameer agwa ho gaya hai.ab aise me agar media ko pata chal jaye ki main kya karnewala hu to vo to use breaking news bana denge & sameer ki salamati ke liye ye baat khatarnak hai."

"aap koi inam ka elan to nahi karnewale?"

"nahi.us se kuchh hasil nahi hota bas lalchiyo ki fauj ikatthi hoti hai apne darwaze pe.",vijayant ne ghum ke pranav ke kandhe tham liye,"..pranav,main janta hu ki tum bhi sameer ke liye bahut chintit ho lekin main abhi tumhe zyada nahi bata sakta.tum bas trust ko sambhalo,main sameer ki talash ka kaam dekhta hu."

"ok,dad.",pranav vaha se bahar chala gaya.vijayant ne 1 nazar us statement pe dali joki usne khud likhi thi.us statement me usne ye kaha tha ki vo abhi kuchh din panchmahal me hi rahega & pranav ke bagdor sambhalne ki baat batayi thi.sath hi usne company ke sabhi clients ko bharosa bhi dilaya tha ki is se trust ke kaam-kaaj pe koi bhi asar nahi padega.aisi hi 1 dusri statement usne apni comapny me kaam karnevalo ke liye taiyyar ki thi.

ab waqt aa gaya tha sameer ki talash ke liye pehla aham kadam uthane ka.usne sonam ko intercom se rambha ke sath hi rehne ko kaha & hall se nikal gaya.lift se vo seedha basement parking me pahuncha jaha uska driver 1 kale shisho vali safed SX4 ki chabhi liye car ke sath khada tha.vijayant ne chabhi li & car me baith gaya & vaha se nikal gaya.bahar khade reporters ne us car pe koi dhyan nahi diya.unhe to bas vijayant ki Mercedes ka intezar tha.

car devalay ki 1 rihaiashi colony ke market pe pahunch ke ruk gayi & uska aage ka passenger side ka darwaza khula to vaha pehle se khada 1 40 baras ka patli moonchho vala chust aadmi andar baith gaya.

"hello,Balbir..",vijayant ne safed kamiz ke upar gehre nile coat & slaty rang ki pant pehne us lambe kad ke shakhs se hath milaya.ye tha Balbir Mohan-1 mana hua jasus.balbir fauj me tha & kayi khatarnak operations ka hissa raha tha.uske jism pe aaj bhi un muthbhedo ke nishan maujood the.vo koi bhi khatra uthane se nahi hichkichata tha & mez pe kagazi kaam karna use bilkul pasnad nahi tha.jab fauj ne tarakki ke baad use aisi hi 1 posting di to usne fauj chhodna hi behtar samjha & 1 security agency khol li.

uski agency logo & comapnies ki hifazat ke sabhi intezamo ko dekhti thi magar uske sath hi vo 1 kaam aur bhi karta tha jiske bare me chand khas log hi jante the-vo tha jasusi.

"ye abhi tak ki sari details hain..",vijayant ne use 1 lifafa thamaya,"..balbir,mujhe lagta hai ki sameer ki gumshudgi me brij ka hath hai & main chahta hu ki tum zara is bare me pata lagao.",balbir ko laga tha ki vijayant use panchmahal ja sameer ko dhundane kahega.

"haan magar aapke bete ko dhundana bhi to hai?"

"vo kaam main khud karunga.tum bas ye pata lagao ki Brij Kothari ka isme hath hai ya nahi."

"mehra sahab,bura mat maniyega lekin aapko nahi lagta ki use dhundane ka kaam kisi peshevar ko karna chahiye?"

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--29

गतान्क से आगे.

"तुम्हारी बात सही है लेकिन फिर ब्रिज कोठारी की छनबीन कौन करेगा.बलबीर,इस काम के मुझे तुम्हारे अलावा किसी और पे भरोसा नही है & फिर मैं खुद तो कोठारी की जासूसी कर नही सकता.मैं वाहा समीर की तलाश करूँगा & तुम यहा ये काम सम्भालो.ज़रूरत महसूस होने पे मैं तुम्हे वाहा बुला लूँगा.वैसे मुझे कुच्छ समान चाहिए था.",बलबीर के साथ विजयंत कही गया & 2 घंटे बाद वो वापस दफ़्तर लौटा.वाहा उसने रंभा को नीचे पार्किंग मे खड़ी कार मे जाने को कहा & उसके जाते ही सोनम से मुखातिब हुआ.

"मेरे जाने की खबर तो तुम्हे मिल ही गयी होगी,सोनम.मैं चाहता हू कि तुम मेरे आने तक प्रणव के साथ काम करो.ओके?"

"ओके,सर.",सोनम उसके करीब आई & उसकी टेढ़ी हुई टाइ को ठीक किया.विजयंत ने उसे गोद मे बिठा लिया तो सोनम ने अपनी बाहें उसके गले मे डाल दी.

"सोनम,तुम्हे मेरा 1 बहुत ज़रूरी काम करना है लेकिन उसकी भनक किसी को भी नही लगनी चाहिए."

"क्या सर?",उसने अपने बॉस के बालो मे उंगलिया फिराई.

"मुझे यहा से हर रोज़ की रिपोर्ट मिलेगी,ई-मैल से & फोन से लेकिन मुझे हर रोज़ तुमसे भी 1 रिपोर्ट चाहिए.",सोनम ने सवालीयो निगाहो से उसे देखा.

"मैं चाहता हू कि हर रोज़ तुम मुझे शाम मे अपने घर पहुँच के यहा हुई सभी बातो की जानकारी दो.मैं चाहता हू कि तुम अपने आँख-कान खुले रखो & कोई भी बात हो चाहे वो किसी के बारे मे भी हो..प्रणव के बारे मे भी..तो फ़ौरन मुझे बताओ.ओके?",उसने उसकी गंद थपथपा के उठने का इशारा किया तो वो उसकी गोद से उतर गयी.

"ओके.",उसने विजयंत के गले मे बाहे डाल के उचकते हुए उसे चूमा & विदा किया.सोनम मुस्कुरा रही थी..कितना भरोसा करते थे लोग उसपे!..अब विजयंत के लिए भी जासूसी करनी थी उसे लेकिन सवाल ये था कि क्या उसे ये बात ब्रिज को बतानी चाहिए या नही?उसी वक़्त इंटरकम बजा तो सोनम ने इस बात पे रात को सोचने का फ़ैसला किया.आख़िर उसे ये भी तो देखना था कि उसे किस बात से ज़्यादा फ़ायदा था.

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वो आदमी बौखलाया खड़ा था.सवेरे मेडियावालो की भीड़ के बीच उसने रंभा को अपने ससुर के साथ वाहा से जाते देखा था.वो भी अपनी गाड़ी से उनके पीछे हो लिया था.उसे लगा था कि वो लोग पोलीस स्टेशन या फिर समीर के दफ़्तर जा रहे थे लेकिन जब कार एरपोर्ट की ओर मूडी तो उसका माथा तनका.कुच्छ देर बाद उसे झल्लाता छ्चोड़ वो किसी प्लेन मे सवार पंचमहल से निकल चुके थे.

काफ़ी देर तक वो शहर का चक्कर लगाता रहा.1 रेस्टोरेंट से खाना खा के निकलने के बाद उसने कोट की जेब मे हाथ डाला तो उसे याद आया कि उसकी सिगरेट्स ख़त्म हो गयी हैं.वो 1 पान वाले की दुकान पे गया & 1 पॅकेट खरीदा.अपने लाइटर से 1 सिगरेट जलाके वो घूम ही रहा था कि उसके कानो मे पॅनवाडी के छ्होटे से टीवी पे आ रही 4 बजे की खबरो की आवाज़ सुनाई दी जोकि अभी-2 जारी हुए विजयंत के स्टेट्मेंट के बारे मे बता रहा था.

वो सिगरेट जलाके आगे बढ़ा..इसका मतलब था कि मेहरा वापस यहा ज़रूर आएगा & शायद उसके साथ उसकी बहू भी..भगवान से ऐसा ही होने की दुआ माँगते हुए वो अपनी कार मे बैठा & वाहा से चला गया.

"ये रंभा है.",बंगल के हॉल मे बैठी रीता & शिप्रा को विजयंत मेहरा ने रंभा का परिचय दिया.मा-बेटी के चेहरे पे नापसनदगी के भाव सॉफ नज़र आ रहे थे.रंभा आगे बढ़ी & सास के पाँव छुए लेकिन रीता फिर भी वैसे ही खामोश बैठी रही.शिप्रा ने भी बहुत ठण्डेपन से उसकी हेलो का जवाब दिया.रंभा समझ गयी कि ये लोग अभी भी उस से नाराज़ हैं पर जब तक विजयंत उसके साथ था,उसे इस बात की क्या परवाह थी!

1 नौकर ने विजयंत के कहने पे उसका समान समीर के कमरे मे रखवा दिया & फिर अपनी बीवी & बेटी से मुखातिब हुआ,"तुमलोगो ने सुन तो लिया ही होगा की मैं समीर को ढूँडने के काम मे जुटने वाला हू & इसीलिए अभी कुच्छ दिन पंचमहल ही रहूँगा.मैं कल ही रंभा के साथ वाहा जा रहा हू & उसके बाद समीर की तलाश मे जुट जाउन्गा.वाहा की पोलीस को अभी तक कोई सुराग नही मिला है & अब वक़्त आ गया है कि मैं खुद इस काम मे लगु."

"डॅड,समीर ऐसे अचानक कैसे गायब हो गया?आपने पता किया उसकी वाहा किसी से कुच्छ दुश्मनी या अनबन तो नही हो गयी थी?"

"नही शिप्रा,ऐसा कुच्छ भी नही था इसीलिए तो बात & पेचीदा लगती है.",विजयंत ने ब्रिज कोठारी पे शक़ होने की बात & बलबीर को उसकी छान-बीन करने के लिए लगाने की बात खुद तक रखने का ही फ़ैसला किया था.

"तो आपने इस से पुचछा दाद?",रंभा का खून खौल उठा..ये अपने को समझती क्या थी..उसका नाम लेने मे तकलीफ़ हो रही थी उसे तो ज़ुबान खींच लेती हू इस कामिनी की फिर बोलने की ही तकलीफ़ नही होगी कभी!..उसने अपने गुस्से को लफ़ज़ो की शक्ल नही दी,"..मुझे तो लगता है कि मेरे भाई की गुमशुदगी मे इसी का कुच्छ हाथ है?"

"शिप्रा!",विजयंत गरजा.सच तो ये था की रंभा के नज़दीक आने का कारण केवल उसके लिए उसकी वासना नही थी बल्कि ये बात भी थी जो उसकी बेटी कह रही थी.उसने सोचा था कि हर पल उसे अपने करीब रख वो उसपे नज़र रखेगा मगर वो रंभा को इस बात की ज़रा भी भनक नही लगने देना चाहता था,"..ये तुम्हारे भाई की बीवी है.तुम्हे पसन्द हो या ना हो लेकिन इसकी कद्र करनी होगी तुम्हे.माफी माँगो रंभा से."

"डॅड!"

"माफी माँगो,शिप्रा."

"आइ'म सॉरी.",उसने बुरा सा मुँह बनाते हुए कह. रंभा ने बस सिर हिला दिया लेकिन अपनी जलती आँखो से शिप्रा को ये एहसास भी करा दिया कि वो उसे हल्के मे लेने की ग़लती ना करे.रीता की आँखो से आँसू बहने लगे थे.शिप्रा ने उसे गले से लगा लिया,"प्लीज़ मम्मी,रो मत.सब ठीक हो जाएगा.चुप हो जाओ."

"रीता..",विजयंत अपनी बीवी के पास आया & उसका हाथ पकड़ उसे सोफे से उठाया,"आओ.",रीता पति से लिपट गयी & दोनो उपरी मंज़िल पे बने अपने कमरे की ओर चले गये.उनके जाते ही रंभा उठी & अपने कमरे मे चली गयी.

"डॅड ने बोला तो मैने माफी माँग ली मगर ये मत समझना कि तुम इस घर मे आराम से रह सकती हो.जब तक मेरे भाई का पता नही चल जाता तब तक मेरी निगाह तुमपे जमी रहेगी.",शिप्रा उसके पीछे-2 उसके कमरे तक आ गयी थी.

"क्या भाई-2 लगा रखा है?हैं!",रंभा उसके बिल्कुल करीब आ गयी & अपनी अँगारे बरसाती नज़रें उसकी आँखो से मिला दी,"..वो मेरा भी पति है & तुमसे ज़्यादा मुझे फ़िक्र है उसके हाल की & 1 बात और.तुम्हारे भाई मुझसे शादी करने को पागल हो रहा था मैं नही & आइन्दा से इस बात का ख़याल रखना कि मेरे सामने तुम अपनी तमीज़ ना भूलो.",शिप्रा उसके कमरे के दरवाज़े पे खड़ी थी.रंभा ने दरवाज़ा पकड़ा & उसके मुँह पे बंद कर दिया.अपनी मा के घर मे ऐसी बेइज़्ज़ती होने से उसकी आँखे भर आई & वो दनदनाती हुई वाहा से अपने बंगल पे चली गयी.

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सोनम ने तय कर लिया था कि वो ब्रिज को ये बात नही बताएगी की विजयंत ने उसे ट्रस्ट ग्रूप मे अपना जासूस बना दिया है.उसने तय कर लिया था कि उसे दोनो तरफ खेल खेलना चाहिए & आख़िर मे बाज़ी जिसके हक़ मे जाती दिखेगी वो भी उसी तरफ हो जाएगी.

बलबीर मोहन अपने दफ़्तर मे बैठा अपने पाइप के कश खींचता ये सोच रहा था कि ब्रिज की जासूसी कैसे की जाए.उसने सेक्यूरिटी कंपनी पैसे कमाने के लिए खोली थी & जासूसी वो अपने दिल की तसल्ली के लिए करता था & इस बात के बारे मे उसकी बीवी & कंपनी के 2-3 लोगो के अलावा & कोई नही जानता था.उसने इंटरनेट ऑन किया & सबसे पहले ब्रिज & कोठारी ग्रूप के बारे मे जानकारी जुटाने लगा.

पंचमहल मे वो शख्स 1 होटेल के कमरे मे बैठा सिगरेट फूँक रहा था.बिस्तर पे उसके पास ही रखी अश्-ट्रे जोकि वेटर ने थोड़ी देर पहले ही सॉफ की थी ,फिर से 4-5 टोटो & राख से भर गयी थी.वो शख्स अपनी ज़िंदगी के बारे मे सोच रहा था.आज वो 1 अंजान शहर मे 1 होटेल मे बैठा अपने फेफड़ो को सुलगा रहा है लेकिन सिगरेट की जलन उसके दिल की बेचैनी की आग के आगे कुच्छ भी ना थी....बस 1 बार वो इस बात को पक्का कर ले की रंभा वही है जो वो समझ रहा है तो बस उसकी तलाश पूरी हुई समझो!..उसने सिगरेट को बुझाया & अपना कोट पहना.रात हो चुकी थी & उसे ये देखने जाना था कि कही विजयंत मेहरा अपनी बहू को लेके अभी ही तो वापस नही आ गया.

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"मेरा बेटा..विजयंत..",खाना खाने के बाद रीता फिर से समीर की याद मे आँसू बहाने लगी थी.विजयंत ने उसे बाहो मे भरा & बिस्तर पे ले गया & लिटा दिया.उसने कमरे-अब उसे कमरा कहना तो ग़लत होगा,था तो वो 1 विशाल हॉल-की सारी बत्तिया बुझा दी सिवाय 1 मध्हम लॅंप के & अपने बड़े से पलंग पे आ अपनी बीवी को आगोश मे भर उसे समझाने लगा.

चुदाई इंसान कयि बातो के लिए इस्तेमाल करता है.सबसे पहला तो होता है अपने महबूब के करीब आ उसके दिल से जोड़,अपने इश्क़ का इज़हार करने का.कुच्छ गलिज़ लोग इसे किसी ना चाहते हुए इंसान के साथ कर अपनी गंदी हवस को पूरा करते हैं & कयि बार इंसान इसे अपने या अपने साथी के घाव पे मरहम लगाने के लिए भी इस्तेमाल करता है.

इस वक़्त विजयंत ने भी कुच्छ ऐसा ही किया.बीवी को ये तसल्ली देते हुए कि वो उसकी औलाद को ढूंड के ला के ही दम लेगा,उसने उसके जिस्म को सहलाया & उसके होतो को चूमा.पति की बाहो मे रीता को भी हौसला मिला & उसका जिस्म उस जाने-पहचाने एहसास से जागने भी लगा.थोड़ी ही देर मे दोनो बिल्कुल नंगे उस बड़े से पलंग पे रीता की पसंदीदा पोज़िशन मे चुदाई कर रहे थे.रीता अपने घुटनो & हाथो पे अपनी गंद निकाले हुए थी & विजयंत पीछे से उसकी कमर थाम उसकी चूत मे धक्के लगा रहा था.

रंभा ने अपना खाना कमरे मे ही मंगवा लिया था & खाना खाने के बाद कपड़े बदल रही थी.उसने पीच कलर की बस गंद के नीचे तक की सॅटिन की नेग्लिजी पहनी थी कि किसी ने कमरे का दरवाज़ा खटखटाया.दरवाज़ा बस भिड़ा हुआ था & खटखटनेवाले के हाथ की थाप से वो खुल गया.रंभा उसी वक़्त घूमी & उसी वक़्त दरवाज़ा यू खुलने से चौंकते प्रणव ने अंदर देखा & उसकी निगाहें सामने खड़ी हुस्न की हसीन मूरत से चिपक गयी.

1 पल मे ही उसकी नज़रो ने अपने साले की बीवी के जिस्म को सर से पाँव तक पूरा देख लिया.सुडोल टाँगे & कसी जंघे रोशनी मे चमक रही थी & नेग्लिजी मे उसके सीने का बड़ा सा उभार बड़ा दिलकश लग रहा था.रंभा ने उसके नीचे ब्रा तो पहना नही था & उसके निपल्स की नोक नेग्लिजी के कपड़े मे से झलक रही थी.रंभा के गुलाबी गाल शर्म से & सुर्ख हो गये & उसने जल्दी से पास मे बिस्तर पे रखा अपना ड्रेसिंग गाउन उठाके पहन लिया.

"आइ'म सॉरी!",प्रणव होश मे आया,"..वो दरवाज़ा खुला था & मैं..-"

"-..इट'स ओके.",रंभा & प्रणव 1 दूसरे से नज़रे मिलाने मे हिचकिचा रहे थे.

"आपने खाना खा लिया?"

"हां.",रंभा ने बालो को हाथो से ठीक किया.

"गुड.यहा कैसा लग रहा है आपको?",रंभा बस मुस्कुरा दी,"मैं समझता हू लेकिन क्या करें ये 1 मुश्किल वक़्त है & मम्मी बहुत परेशान हैं & शिप्रा भी.."

"..मैं अभी आया तो शिप्रा ने मुझे शाम को हुई बातें बताई.रंभा,मैं उसकी ओर से आपसे माफी माँगता हू.वो दिल की बुरी नही है मगर क्या करें बहुत बचपाना है उसमे & तैश मे आ वो ऐसी हरकतें कर बैठती है.प्लीज़,आप उसे ग़लत मत समझिएगा.1 बार ये परेशानी दूर हो जाए फिर सब ठीक हो जाएगा."

"प्लीज़,मुझे शर्मिंदा मत कीजिए.छ्चोड़िए अब उस बात को."

"थॅंक्स.",प्रणव मुस्कुराया,"..ओके,गुड नाइट!"

"गुड नाइट!",प्रणव गया तो रंभा ने कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद किया & अपना गाउन उतार बिस्तर पे लेट गयी.प्रणव ने उसे नेग्लिजी मे देख लिया था & 1 पल को उसकी आँखो मे उसके जिस्म की तारीफ & वही मर्दाना भूख चमक उठी थी जिस से वो अच्छी तरह से वाकिफ़ थी.

वो बिस्तर पे लेटी & अपना जिस्म सहलाने लगी.उसे अपने ससुर की याद आ रही थी.कल की रात उसकी ज़िंदगी की सबसे हसीन & मस्तानी रात थी.विजयंत का गतिला जिस्म,उसके हाथो की च्छुअन,होंठो की तपिश & लंड की रगड़ याद आते ही उसकी चूत कसमसाने लगी & उसका हाथ अपनी पॅंटी मे घुस गया & खुद से खेलने लगा.पॅंटी उसे इस काम मे रोड़ा अटकाती नज़र आई तो उसने जल्दी से घुटने उपर उठाते हुए मोड & उसे उतार दिया & ज़ोर-2 से अपने दाने पे गोलाई मे उंगली चलाने लगी.कुच्छ ही पॅलो मे वो झाड़ गयी लेकिन उसके जिस्म की आग ठंडी नही हुई.काफ़ी देर तक बिस्तर पे करवटें बदलने & तकियो को अपने जिस्म पे दबाने के बाद वो बेचैनी से उठ बैठी & सोचा की 1 बार चेक किया जाए की विजयंत सच मे सो गया या अभी जगा हुआ है.

ड्रेसिंग गाउन पहन वो कमरे से निकली तो देखा की बुंगले मे बस 1-2 धीमी बत्तियाँ जल रही हैं & सभी नौकर भी अपने क्वॉर्टर्स मे जा चुके हैं.उसे ये तो पता था नही कि उसके ससुर का कमरा है कौन सा.उसे बस इतना पता था कि वो कमरा उपरी मंज़िल पे है.

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क्रमशः.......

JAAL paart--29

gataank se aage.

"tumhari baat sahi hai lekin fir brij kothari ki chhanbeen kaun karega.balbir,is kaam ke mujhe tumhare alawa kisi aur pe bharosa nahi hai & fir main khud to kothari ki jasusi kar nahi sakta.main vaha sameer ki talash karunga & tum yaha ye kaam sambhalo.zarurat mehsus hone pe main tumhe vaha bula lunga.vaise mujhe kuchh saman chahiye tha.",balbir ke sath vijayant kahi gaya & 2 ghante baad vo vapas daftar lauta.vaha usne rambha ko neeche parking me khadi car me jane ko kaha & uske jate hi sonam se mukhatib hua.

"mere jane ki khabar to tumhe mil hi gayi hogi,sonam.main chahta hu ki tum mere aane tak pranav ke sath kaam karo.ok?"

"ok,sir.",sonam uske karib aayi & uski tedhi hui tie ko thik kiya.vijayant ne use god me bitha liya to sonam ne apni baahen uske gale me daal di.

"sonam,tumhe mera 1 bahut zaruri kaam karna hai lekin uski bhanak kisi ko bhi nahi lagni chahiye."

"kya sir?",usne apne boss ke balo me ungliya firayi.

"mujhe yaha se har roz ki report milegi,e-mail se & fone se lekin mujhe har roz tumse bhi 1 report chahiye.",sonam ne sawaliyo nigaho se use dekha.

"main chahta hu ki har roz tum mujhe sham me apne ghar pahunch ke yaha hui sabhi baato ki jankari do.main chahta hu ki tum apne aankh-kaan khule rakho & koi bhi baat ho chahe vo kisi ke bare me bhi ho..pranav ke bare me bhi..to fauran mujhe batao.ok?",usne uski gand thapthapa ke uthne ka ishara kiya to vo uski god se utar gayi.

"ok.",usne vijayant ke gale me baahe dal ke uchakte hue use chuma & vida kiya.sonam muskura rahi thi..kitna bharosa karte the log uspe!..ab vijayant ke liye bhi jasusi karni thi use lekin sawal ye tha ki kya use ye baat brij ko batani chahiye ya nahi?usi waqt intercom baja to sonam ne is baat pe raat ko sochne ka faisla kiya.aakhir use ye bhi to dekhna tha ki use kis baat se zyada fayda tha.

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vo aadmi baukhlaya khada tha.savere mediawalo ki bheed ke beech usne rambha ko apne sasur ke sath vaha se jate dekha tha.vo bhi apni gadi se unke peechhe ho liya tha.use laga tha ki vo log police station ya fir sameer ke daftar ja rahe the lekin jab car airport ki or mudi to uska matha thanka.kuchh der baad use jhallata chhod vo kisi plane me sawar panchmahal se nikal chuke the.

kafi der tak vo shehar ka chakkar lagata raha.1 restaurant se khana kha ke nikalne ke baad usne coat ki jeb me hath dala to use yaad aaya ki uski cigarettes khatm ho gayi hain.vo 1 paanvale ki dukan pe gaya & 1 packet kharida.apne lighter se 1 cigarette jalake vo ghum hi raha tha ki uske kaano me panvadi ke chhote se tv pe aa rahi 4 baje ki khabro ki aavaz sunai di joki abhi-2 jari hue vijayant ke statement ke bare me bata raha tha.

vo cigarette jalake aage badha..iska matlab tha ki mehra vapas yaha zarur aayega & shayad uske sath uski bahu bhi..bhagwan se aisa hi hone ki dua mangte hue vo apni car me baitha & vaha se chala gaya.

"Ye Rambha hai.",bungle ke hall me baithi Rita & Shipra ko Vijayant Mehra ne rambha ka parichay diya.maa-beti ke chehre pe napasnadgi ke bhav saaf nazar aa rahe the.rambha aage badhi & saas ke panv chhue lekin rita fir bhi vaise hi khamosh baithi rahi.shipra ne bhi bahut thandepan se uski hello ka jawab diya.rambha samajh gayi ki ye log abhi bhi us se naraz hain par jab tak vijayant uske sath tha,use is baat ki kya parwah thi!

1 naukar ne vijayant ke kehne pe uska saman sameer ke kamre me rakhwa diya & fir apni biwi & beti se mukhatib hua,"tumlogo ne sun to liya hi hoga ki main Sameer ko dhundne ke kaam me jutne wala hu & isiliye abhi kuchh din Panchmahal hi rahunga.main kal hi rambha ke sath vaha ja raha hu & uske baad sameer ki talash me jut jaunga.vaha ki police ko abhi tak koi surag nahi mila hai & ab waqt aa gaya hai ki main khud is kaam me lagu."

"dad,sameer aise achanak kaise gayab ho gaya?aapne pata kiya uski vaha kisi se kuchh dushmani ya anban to nahi ho gayi thi?"

"nahi shipra,aisa kuchh bhi nahi tha isiliye to baat & pechida lagti hai.",vijayant ne Brij Kothari pe shaq hone ki baat & Balbir ko uski chhan-been karne ke liye lagane ki baat khud tak rakhne ka hi faisla kiya tha.

"to aapne is se puchha dad?",rambha ka khoon khaul utha..ye apne ko samajhti kya thi..uska naam lene me taklif ho rahi thi use to zuban khinch leti hu is kamini ki fir bolne ki hi taklif nahi hogi kabhi!..usne apne gusse ko lafzo ki shakl nahi di,"..mujhe to lagta hai ki mere bhai ki gumshudgi me isi ka kuchh hath hai?"

"shipra!",vijayant garja.sach to ye tha ki rambha ke nazdik aane ka karan keval uske liye uski vasna nahi thi balki ye baat bhi thi jo uski beti keh rahi thi.usne socha tha ki har pal use apne karib rakh vo uspe nazar rakhega magar vo rambha ko is baat ki zara bhi bhanak nahi lagne dena chahta tha,"..ye tumhare bhai ki biwi hai.tumhe pasnad ho ya na ho lekin iski kadr karni hogi tumhe.mafi mango rambha se."

"dad!"

"mafi mango,shipra."

"i'm sorry.",usne bura sa munh banate hue kaha.ambha ne bas ar hila diya lekin apni jalti aankho se shipra ko ye ehsas bhi kara diya ki vo use halke me lene ki galti na kare.rita ki aankho se aansu behne lage the.shipra ne use gale se laga liya,"please mummy,ro mat.sab thik ho jayega.chup ho jao."

"rita..",vijayant apni biwi ke paas aaya & uska hath pakd use sofe se uthaya,"aao.",rita pati se lipat gayi & dono upri manzil pe bane apne kamre ki or chale gaye.unke jate hi rambha uthi & apne kamre me chali gayi.

"dad ne bola to maine mafi mang li magar ye mat samajhna ki tum is ghar me aaram se reh sakti ho.jab tak mere bhai ka pata nahi chal jata tab tak meri nigah tumpe jami rahegi.",shipra uske peechhe-2 uske kamre tak aa gayi thi.

"kya bhai-2 laga rakha hai?hain!",rambha uske bilkul karib aa gayi & apni angare barsati nazren uski aankho se mila di,"..vo mera bhi pati hai & tumse zyada mujhe fikr hai uske haal ki & 1 baat aur.tumhare bhai mujhse shadi karne ko pagal ho raha tha main nahi & aainda se is baat ka khayal rakhna ki mere samne tum apni tamiz na bhulo.",shipra uske kamre ke darwaze pe khadi thi.rambha ne darwaza pakda & uske munh pe band kar diya.apni maa ke ghar me aisi beizzati hone se uski aankhe bhar aayi & vo dandanati hui vaha se apne bungle pe chali gayi.

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Sonam ne tay kar liya tha ki vo brij ko ye baat nahi batayegi ki vijayant ne use Trust Group me apna jasus bana diya hai.usne tay kar liya tha ki use dono taraf khel khelna chahiye & aakhir me bazi jiske haq me jati dikhegi vo bhi usi taraf ho jayegi.

Balbir Mohan apne daftar me baitha apne pipe ke kash khinchta ye soch raha tha ki brij ki jasusi kaise ki jaye.usne security company paise kamane ke liye kholi thi & jasusi vo apne dil ki tasalli ke liye karta tha & is baat ke bare me uski biwi & company ke 2-3 logo ke alawa & koi nahi janta tha.usne internet on kiya & sabse pehle brij & kothari group ke bare me jankari jutane laga.

panchmahal me vo shakhs 1 hotel ke kamre me baitha cigarette phunk raha tha.bistar pe uske paas hi rakhi ash-tray joki waiter ne thodi der pehle hi saaf ki thi ,fir se 4-5 toto & rakh se bhar gayi thi.vo shakhs apni zindagi ke bare me soch raha tha.aaj vo 1 anjan shehar me 1 hotel me baitha apne fefdo ko sulga raha hai lekin cigarette ki jalan uske dil ki bechaini ki aag ke aage kuchh bhi na thi....bas 1 baar vo is baat ko pakka kar le ki rambvha vahi hai jo vo samajh raha hai to bas uski talsh puri hui samjho!..usne cigarette ko bujhaya & apna coat pehna.raat ho chuki thi & use ye dekhne jana tha ki kahi vijayant mehra apni bahu ko leke abhi hi to vapas nahi aa gaya.

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"mera beta..vijayant..",khana khane ke baad rita fir se sameer ki yaad me aansu bahane lagi thi.vijayant ne use baaho me bhara & bistar pe le gaya & lita diya.usne kamre-ab use kamra kehna to galat hoga,tha to vo 1 vishal hall-ki sari battiya bujha di siway 1 madhham lamp ke & apne bade se palang pe aa apni biwi ko agosh me bhar use samjhane laga.

chudai insan kayi baato ke liye istemal karta hai.sabse pehla to hota hai apne mehboob ke karib aa uske dil se jod,apne ishq ka izhar karne ka.kuchh galiz log ise kisi na chahte hue insan ke sath kar apni gandi hawas ko pura karte hain & kayi baar insan ise apne ya apne sathi ke ghavo pe marham lagane ke liye bhi istemal karta hai.

is waqt vijayant ne bhi kuchh aisa hi kiya.biwi ko ye tasalli dete hue ki vo uski aulad ko dhund ke la ke hi dum lega,usne uske jism ko sehlaya & uske hotho ko chuma.pati ki baaho me rita ko bhi hausla mila & uska jism us jane-pehchane ehsas se jagne bhi laga.thodi hi der me dono bilkul nange us bade se palang pe rita ki pasandeeda position me chudai kar rahe the.rita apne ghutno & hatho pe apni gand nikale hue thi & vijayant peechhe se uski kamar tham uski chut me dhakke laga raha tha.

rambha ne apna khana kamre me hi mangwa liya tha & khana khane ke baad kapde badal rahi thi.usne peach color ki bas gand ke neeche tak ki satin ki negligee pehni thi ki kisi ne kamre ka darwaza khatkhataya.darwaza bas bhida hua tha & khatkhatanewale ke hath ki thaap se vo khul gaya.rambha usi waqt ghumi & usi waqt darwaza yu khulne se chaunkte Pranav ne andar dekha & uski nigahen samne khadi husn ki haseen murat se chipak gayi.

1 pal me hi uski nazro ne apne sale ki biwi ke jism ko sar se panv tak pura dekh liya.sudol tange & kasi janghe roshni me chamak rahi thi & negligee me uske seene ka bada saubhar bada dilkash lag raha tha.rambha ne uske neeche bra to pehna nahi tha & uske nipples ki nok negligee ke kapde me se jhalak rahi thi.rambha ke gulabi gaal sharm se & surkh ho gaye & usne jaldi se paas me bistar pe rakha apna dressing gown uthake pehan liya.

"i'm sorry!",pranav hosh me aaya,"..vo darwaza khula tha & main..-"

"-..it's ok.",rambha & pranav 1 dusre se nazre milane me hichkicha rahe the.

"aapne khana kha liya?"

"haan.",rambha ne baalo ko hatho se thik kiya.

"good.yaha kaisa lag raha hai aapko?",rambha bas muskura di,"main samajhta hu lekin kya karen ye 1 mushkil waqt hai & mummy bahut pareshan hain & shipra bhi.."

"..main abhi aaya to shipra ne mujhe sham ko hui baaten batayi.rambha,main uski or se aapse mafi mangta hu.vo dil ki buri nahi hai magar kya karen bahut bachpana hai usme & taish me aa vo aisi harkaten kar baithati hai.please,aap use galat mat samajhiyega.1 baar ye pareshani dur ho jaye fir sab thik ho jayega."

"please,mujhe sharminda mat kijiye.chhodiye ab us baat ko."

"thanx.",pranav muskuraya,"..ok,good night!"

"good night!",pranav gaya to rambha ne kamre ka darwaza andar se band kiya & apna gown utar bistar pe let gayi.pranav ne use negligee me dekh liya tha & 1 pal ko uski aankho me uske jism ki tarif & vahi mardana bhukh chamak uthi thi jis se vo achhi tarah se vakif thi.

vo bistar pe leti & apna jism sehlane lagi.use apne sasur ki yaad aa rahi thi.kal ki raat uski zindagi ki sabse haseen & mastani raat thi.vijayant ka gathila jism,uske hatho ki chhuan,hotho ki tapish & lund ki ragad yaad aate hi uski chut kasmasane lagi & uska hath apni panty me ghus gaya & khud se khelne laga.panty use is kaam me roda atkati nazar aayi to usne jaldi se ghutne upar uthate hue mode & use utar diya & zor-2 se apne dane pe golayi me ungli chalane lagi.kuchh hi palo me vo jhad gayi lekin uske jism ki aag thandi nahi hui.kafi der tak bistar pe karwaten badalne & takiyo ko apne jism pe dabane ke baad vo bechaini se uth baithi & socha ki 1 baar check kiya jaye ki vijayant sach me so gaya ya abhi jaga hua hai.

dressing gown pehan vo kamre se nikli to dekha ki bungle me bas 1-2 dhimi battiyan jal rahi hain & sabhi naukar bhi apne quarters me ja chuke hain.use ye to pata tha nahi ki uske sasur ka kamra hai kaun sa.use bas itna pata tha ki vo kamra upri manzil pe hai.

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kramashah.......

 
जाल पार्ट--30

गतान्क से आगे.

जब बुंगले का चक्कर लगाती रंभा विजयंत & रीता के कमरे तक पहुँची तो उसने देखा कि दरवाज़ा बंद नही है बस ऐसे ही भिड़ा हुआ है.उसने उसे हल्के से खोला & अंदर का नज़ारा देख उसका बदन & ताप उठा.विजयंत घुटनो पे झुकी,अपना चेहरा बिस्तर मे धंसाए उसकी चादर को अपने हाथो मे भींचती रीता की चूत मे पीछे से बहुत ज़ोरदार धक्के लगा रहा था.रंभा की निगाह अपनी सास की उठी गंद से ससुर के बालो भरे सपाट पेट & चौड़े सीने से होते हुए उसकी आँखो तक पहुची .विजयंत ने भी उसे देखा & हल्के से मुस्कुराते हुए जाने का इशारा किया फिर हाथ को कान तक ले जाके उसे फोन करने का इशारा किया.

उसी वक़्त रीता ने ज़ोर से चीख मारते हुए अपना चेहरा बिस्तर से उठा लिया.वो झाड़ गयी थी.सास के चेहरे पे जो मस्ती का भाव था उसे देख रंभा का हाथ फिर उसकी चूत पे चला गया.वो थोड़ा पीछे हुई & दरवाज़ा & पीछे खींचा लेकिन अंदर देखती ही रही.विजयंत भी झटके खा रहा था.रंभा समझ गयी कि उसकी सास की चूत उसके ससुर के गाढ़े वीर्य से भर रही है.मदहोशी से मुस्कुराती हुई रीता बिस्तर पे ढेर हो गयी तो रंभा ने दरवाज़ा बंद किया & वापस अपने कमरे को चली गयी.

अपने बिस्तर पे आ उसने फिर से अपना गाउन उतार फेंका & अपने जिस्म से खेलने लगी.सास-ससुर की चुदाई ने उसे बहुत गरम कर दिया था.ससुर के गथिले बदन की प्यास & बढ़ गयी थी & साथ ही उसे सास से जलन भी हो रही थी.वो आधे घंटे तक खुद से खेलती रही.उसके मोबाइल बजा,देखा तो विजयंत का नंबर था,"हूँ."

"मेरे कमरे मे आओ.",रंभा फ़ौरन उठी & अपनी नेग्लिजी मे वैसे ही अपने ससुर के कमरे की ओर चली गयी.

रंभा कमरे पे पहुँची तो देखा कि कमरा अब घुप अंधेरे मे डूबा था.विजयंत उसे वाहा नही दिखा.उसने खटखटाने की सोची पर डर था कि कही रीता ना आ जाए.उसे आश्चर्य हुआ की उसे बुलाने के बाद खुद विजयंत नदारद है & वो जाने ही लगी थी कि 2 मज़बूत बाजुओ ने उसे पकड़ के कमरे के अंदर खींच लिया & दरवाज़े के बगल की दीवार से लगा दिया.वो तो रंभा हाथो की छुअन से समझ गयी की वो विजयंत है वरना वो तो ज़रूर चीख उठती.

"मम्मी कहा हैं?",वो फशहूसाइ.

"सो रही है.",विजयंत ने सर पीछे की ओर हिला के इशारा किया & उसके गुदाज़ बाज़ू दबाते हुए उसके चेहरे पे झुकाने लगा.

"प्लीज़,यहा नही.वो जाग गयी तो ग़ज़ब हो जाएगा!",वो छूटने की कोशिश करती कसमसाई.

"मुझपे भरोसा रखो.कुच्छ नही होगा.",विजयंत की गर्म साँसे उसके पहले से ही बहाल जिस्म का हाल & बुरा कर रही थी.उसने उसके सीने पे हाथ रखे उसे दूर करने को लेकिन उसके हाथ वाहा स्टेट ही विजयंत के ड्रेसिंग गाउन के उपर से ही उसके सीने को सहलाने लगे.विजयंत ने अभी 1 ट्रॅक पॅंट & उसके उपर गाउन पहन रखा था,"देखो वो गहरी नींद मे सो रही है."

"फिर भी डर लगता है.",ससुर के गाउन को भींचते हुए उसने उसके कंधे के उपर से बिस्तर पे सो रही सास को देखा.कमरा विशाल होने की वजह से बिस्तर थोड़ा दूर था & उसे भी लगा कि रीता उनकी फुसफुसाहट से शायद ना जागे.

"कुच्छ नही होगा.वो नही उठेगी.",विजयंत ने बात दोहराई & उसका दाया हाथ उसकी बाँह से उसके चेहरे पे आया.

"प्लीज़,डॅड..उउंम्म..!",विजयंत के हाथ उसके चेहरे को सहलाने के बाद उसकी गर्दन के नीचे उसकी नेग्लिजी के गले से दिख रही उसकी त्वचा पे फिरने लगे & वो उसके चेहरे पे झुकने लगे.उसकी गर्म साँसे & ऐसा रोमांच भरा माहौल पहले से ही मस्त रंभा को और मस्त करने लगे.

विजयंत के हाथ सहलाते हुए उपर आए & उसकी गर्दन से होते हुए उसके चेहरे को ऐसे थामा की उसके अंगूठे उसके कानो पे आसानी से फिर सके,फिर वो झुका & उसके होंठो को हल्के से चूमा.रंभा पीछे दीवार से लग गयी & इस बार उसने अपनी ना-नुकर बंद कर दी.उसके हाथ उसके सर के बगल मे दीवार पे आ लगे.दाया हाथ दरवाज़े की चौखट थामे उपर-नीचे हो रहता.उसकी आँखे अब मस्ती मे बंद हो गयी थी & विजयंत का हाथ 1 बार फिर नीचे जा रहा था.

"तुम्हे प्यार किए बिना तो मुझे नींद आनी नही थी.",विजयंत उसके होंठो के पास अपने लब ला फुसफुसाया & अपने हाथ उसकी गर्दन से होते हुए उसकी चूचियो की बगलो से होते हुए उसके बदन की दोनो तरफ बगल मे चलते हुए कमर पे ले गया & फिर थोड़ा सख्ती से चलते हुए उपर लाया & उसकी नेग्लिजी के उपर से ही उसकी चूचियो पे से चलता हुआ उसके कंधो पे ले गया.रंभा ने दीवार & चौखट पे और बेसब्री से हाथ फिराए.

विजयंत ने उसके दाए कंधे से नेग्लिजी का स्ट्रॅप नीचे किया तो रंभा ने बहुत धीमी आह भारी & जब विजयंत के होंठ उसके होठ के बिल्कुल बगल मे उसके बाए गाल से चिपके तो उसके हाथ अपने ससुर के कंधे से आ लगे & उसके ड्रेसिंग गाउन को बेसब्री से भींचने लगे.विजयंत झुका & उसकी गर्दन चूमि & उसकी नुमाया दाई चूची को बाए हाथ मे भरा & नीचे झुका.उसने अपनी प्यारी बहू की चूची को ना चूमा ना चूसा बस अपना पूरा मुँह खोल अपनी गरम सांसो से उसे भिगाता हुआ उसके उपर चला दिया.

रंभा अब पूरी मस्त हो गयी.ससुर की इस हरकत ने उसे अपनी सास की मौजूदगी भी भुला दी थी.विजयंत झुका & उसकी दाई चूची को दबोच के दबाया & फिर उसपे जीभ चलाते हुए चूसा.रंभा बड़ी मुश्किल से अपनी आहो को आवाज़ देने से रोक रही थी.वो अब विजयंत के सर को थामे थी.

विजयंत उसकी छाती को बड़ी शिद्दत से चूम रहा था & जब वो चूस्ते हुए थोड़ा झुका तो उसके साथ-2 उसकी बहू भी नीचे हुई & उसके बालो को खींचा.विजयंत उसकी चूची से फिर उपर गया & उसकी गर्दन पे बाई तरफ चूमते हुए अपना लंड उसकी चूत पे दबाते हुए रगड़ा.उसके बाए हाथ ने नेग्लिजी को बाए कंधे से उतरा & फिर दोनो हाथो ने रंभा के चेहरे को थामा तो उसने खुद ही आगे बढ़ अपने ससुर के होंठ चूम लिए.विजयंत ने उसके दोनो गालो पे अपनी दाढ़ी रगडी & उसकी नेग्लिजी को नीचे कर झुक के उसकी चूचियो को पीने लगा.

रंभा के दोनो कंधे दीवार से टीके थे & बाकी जिस्म आगे हो अपने ससुर के बदन से चिपका था.विजयंत उसके सीने पे अपने मुँह से मोहरे लगा रहा था.उसकी मस्ती भी बहुत बढ़ गयी थी.उसने रंभा की चूचियो के गुलाबी निपल्स को चूस्ते हुए जल्दी से अपने गाउन की बेल्ट खोल उसे नीचे गिराया & फिर उसकी कमर थाम ली.रंभा के बेचैन हाथ उसकी गर्दन मे आ फँसे & वाहा से उसकी पीठ पे फिसल अपनी बेसब्री बयान करने लगे.

विजयंत ने उसकी कमर थाम उसके जिस्म को खुद से चिपकाया & उसकी चूचियाँ चूमने & चूसने लगा.रंभा के कंधे अब भी भी दीवार से लगे थे & वो ससुर के सर को थामे अपने सीने पे दबाते हुए अपने जिस्म को उस से सताए जा रही थी.उसके होंठ खुल रहे थे लेकिन आवाज़ बाहर नही आ रही थी.अगर आती भी तो बस इतनी की वो केवल विजयंत को सुनाई दे & उसका जोश & बढ़े.

विजयंत रंभा के जिस्म का दीवाना हो गया था.उसने आज तक उसके जैसी मस्त लड़की नही देखी थी.वो झुका & उसकी दोनो चूचियो को हाथो मे थामे आपस मे दबा दी & उन्हे चूसने लगा.उसकी इस हरकत ने रंभा को बहुत मस्त कर दिया & उसकी चूत तो बिल्कुल बुरी तरह कसमसाई.विजयंत नीचे हुआ & उसके साथ-2 दोनो जिस्मो के बीच रंभा की कमर पे अटकी नेग्लिजी भी.

विजयंत नीचे बैठ गया & रंभा के पेट को चूमते हुए उसकी बाई जाँघ को अपने दाए कंधे पे चढ़ाया & उसकी गीली चूत से होंठ लगा दिए.रंभा ने दाए हाथ को सर के उपर ले जाते हुए बगल की चौखट थाम रखी थी & बाए से विजयंत के बॉल नोचती उसे अपनी चूत पे दबाए हुए थी.उसके कंधे वैसे ही दीवार से लगे थे & उसकी कमर आगे-पीछे हो रही थी.विजयंत पूरे जोश के साथ उसकी चूत मे मुँह घुमा रहा था.

रंभा की चूत का रस उसकी जाँघो पे भी बह आया था & विजयंत ने वाहा से भी उसे चाट लिया.उसका दाया हाथ रंभा की गंद बाई फाँक को बाई जाँघ के नीचे से जाते हुए पकड़ चुका था & बया उसकी कमर को थामे था.गंद दबोचते हुए वो अपनी महबूबा की चूत चाते चला जा रहा था.रंभा ने अधखुली पॅल्को से अपनी बेख़बर सो रही सास को देखा & मुस्कुराइ..अफ कितना रोमांच आ रहा था उसे..उसकी सास भी यही मौजूद थी लेकिन इस बात से अंजान की उसका पति उसकी अपनी बहू की चूत मे जीभ घुसाए उसकी बहू के कदमो मे बैठा है.

विजयंत की ज़ुबान अब रंभा को बहुत पागल कर रही थी.उसकी टाँगे कमज़ोर होती महसूस हुई तो उसने बाया हाथ भी उसके सर से हटाया & दीवार को थाम लिया लेकिन फिर भी वो नीचे झुकने लगी.विजयंत ने भी बाए हाथ मे चौखट को पकड़ा & दाए को दीवार पे लगा दिया & बहू की चूत मे ज़ुबान ऐसे घुसाने लगा मानो वो लंड हो.कंधे दीवार से लगाए रंभा दीवार के सहारे हल्की-2 आहे लेते हुए कमर विजयंत के मुँह पे थेल्ते हुए उचकाने लगी.विजयंत की ज़ुबान कुच्छ ज़्यादा अंदर गयी & रंभा के हाथ जो उसके सर के उपर थे,नीचे फिसले & चौखट & दीवार को थामे वो कमर उचकाने लगी & थोड़ी तेज़ आह भर दी.वो झाड़ गयी थी.

विजयंत फ़ौरन उठा & उसकी कमर को थाम उसे खुद से चिपका लिया.रंभा ने अपनी आहें उसके सीने मे मुँह च्छूपा के दफ़्न की.तभी रीता ने करवट ली तो दोनो बुत बन गये.,रंभा ने धीरे से विजयंत के बाए कंधे के उपर से सास को देखा तो विजयन ने भी गर्दन घुमाई.रीता को कुच्छ पता नही चला था & वो अभी भी सो रही थी.विजयंत ने रंभा को पलटा तो 1 बार फिर रंभा ने दीवार & चौखट को थामा मगर इस बार बाया हाथ चौखट पे था & दाया दीवार पे.

विजयंत ने उसकी कमर थाम उसके दाए कान को पीछे से चूमा तो रंभा ने अपनी कमर पीछे उचका उसके लंड पे अपनी मोटी गंद दबाई.विजयंत ने फ़ौरन अपनी ट्रॅक पॅंट को थोड़ा नीचे किया & उसकी टाँगे फैला दी.रंभा गंद पीछे निकालते थोड़ा झुकी & विजयंत ने 1 पल मे लंड उसकी चूत मे घुसा दिया.रंभा की गंद की मोटाई लंड को जड तक समाने से रोक रही थी लेकिन उस से उसे कोई परेशानी नही थी.लंड इतना बड़ा था कि अभी भी वो उसकी बहुत मस्त चुदाई कर रहा था.

विजयंत ने बहू की कमर को बाए हाथ मे थामा & डाए से उसके बॉल पकड़ के खींचे तो रंभा ने आह भरी & अपना सर पीछे कर अपने खुले होंठ अपने ससुर की शान मे पेश किए.विजयंत ने उसके बॉल पकड़े-2 ही उसे चूमा & फिर उसका चेहरा आगे कर थोडा पीछे हुआ तो रंभा गंद & पीछे करते हुए उस से चुद्ति & झुकी.विजयंत ने उसके रेशमी बालो को आगे करते हुए उसकी पीठ को चूमा तो रंभा ने बेसब्री से चौखट पे हाथ फिराया.

विजयंत जितना झुक सकता था,उतना झुक के बहू की मखमली पीठ पे अपने गर्म लब चला रहा था.रंभा दीवार खरोंछती उसके लंड की चोट से मस्त हो रही थी.उसकी चूत 1 बार फिर झड़ने को तैय्यार थी.विजयंत सीधा खड़ा हो उसके कंधो से लेके उपरी बाहो से होते हुए उसके जिस्म के बगल मे अपने सख़्त हाथ फिराते हुए गहरे धक्के लगा रहा था.रंभा भी गंद पीछे कर उसके धक्को का जवाब दे रही थी.

विजयंत थोड़ा आगे हो गया & उसकी कमर थाम धक्के लगाने लगा तो रंभा भी सीधी खड़ी हो गयी & गंद को पीछे कर दिया & दीवार पे दया गाल सटाके बाए पे अपने प्रेमी के तपते लबो की गर्मी महसूस करते उसके धक्को का मज़ा लेने लगी.रंभा ने चौखट को जाकड़ लिया & & दीवार पे नाख़ून चलाया & बहुत ज़ोर से कमर हिलाई.वो झड़ने लगी थी & विजयंत ने आगे झुक के उसके होंठो को अपने लाबो की क़ैद मे ले उसकी आहो को भी अपने हलक मे दफ़्न कर लिया.

रंभा धीमे-2 सिसकते हुए खड़ी थी.विजयंत ने लंड बाहर खींचा,पॅंट उपर की & उसे घुमा उसका मस्ती भरा चेहरा अपने सामने किया.रंभा की आँखे नशे मे डूबी हुई थी.उसके दोनो बाज़ू उसके सर के बगल मे दीवार से लगे थे.विजयंत का बाया हाथ उसकी गर्दन पे आया & उसके चेहरे को थामा & फिर वो उसके बाए गाल पे चूमने लगा.रंभा ने आह भरते हुए अपनी मरमरी बाहें उसकी गर्दन मे डाली तो विजयंत ने थोड़ा झुकते हुए उसकी दाई चूची को अपने बाए हाथ मे दबोचा & उसकी गर्दन चूमने लगा.

रंभा की मस्ती को आज वो ज़रा भी कम नही होने दे रहा था.रंभा ने उसे खुद से चिपका लिया & वो उसकी छाती पे चूमने लगा.उसका बाया हाथ चूची से सरका & रंभा के चेहरे पे मस्ती की शीकने पैदा करवाने के लिए उसकी चूत से जा लगा.रंभा पागलो की तरह कमर हिलाने लगी.रंभा घुटने झुकती टाँगो को फैलाती मानो ससुर की उंगली को अंदर ले लेना चाहती थी.विजयंत उसकी चूचियो को चूमता हुआ नीचे हुआ & उसके पेट पे अपने लबो के निशान छ्चोड़ता हुआ उसकी चूत पे आया & चाटने लगा.रंभा तो मस्ती मे पागल हो गयी.

विजयंत थोड़ी देर चूत को चूमने,चाटने के बाद वापस पेट से होता हुआ उपर पहुँचा & सीधा खड़ा हो बहू को बाँहो मे भरने लगा तो उसने उसके लोहे सरीखे सख़्त बाजुओ को पकड़ उसे खुद से थोडा दूर किया & दया हाथ नीचे ले जाके उसकी ट्रॅक पॅंट के उपर से लंड को दबाने लगी.विजयंत उसके चेहरे को पकड़ उसे चूमने लगा तो रंभा ने कुच्छ देर लंड को दबाने के बाद उसकी पॅंट को नीचे सरका दिया & फिर उसे बाहो मे भर उसके बालो भरे सीने को अपने सीने पे,उसके पेट को अपने चिकने पेट पे & उसके लंड को अपनी चूत पे दबा दिया.

विजयंत उसकी इस हरकत से जोश से पागल हो उठा.उसने बहू को बाहो मे भर उसकी गर्दन चूमते हुए चूत पे ऐसे ही लंड दबा के कमर गोल-2 हिलानी शुरू कर दी.उस से चिपटि उसके बाए कंधे के उपर से सास पे नज़र रखी रंभा तो बस हवा मे उड़ी जा रही थी.उसके हाथ उसकी गर्दन से फिसले & उसके मज़बूत पीठ की मांसपेशियो की गठन को महसूस करते हुए नीचे आए & उसकी पुष्ट गंद से चिपक गये.विजयंत समझ गया कि बहू अभी & चुदना चाहती है.

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क्रमशः.......

JAAL paart--30

gataank se aage.

jab bungle ka chakkar lagati rambha vijayant & rita ke kamre tak pahunchi to usne dekha ki darwaza band nahi hai bas aise hi bhida hua hai.usne use halke se khola & andar ka nazara dekh uska badan & tap utha.vijayant ghutno pe jhuki,apna chehra bistar me dhansaye uski chadar ko apne hatho me bhinchti rita ki chut me peechhe se bahut zordar dhakke laga raha tha.rambha ki nigah apni saas ki uthi gand se sasur ke baalo bhare sapat pet & chaude seene se hote hue uski aankho tak phunchi.vijayant ne bhi use dekha & halke se muskurate hue jane ka ishara kiya fir hath ko kaan tak le jake use fone karne ka ishara kiya.

usi waqt rita ne zor se chikh marte hue apna chehra bistar se utha liya.vo jhad gayi thi.saas ke chehre pe jo masti ka bhav tha use dekh rambha ka hath fir uski chut pe chala gaya.vo thoda peechhe hui & darwaza & peechhe khincha lekin andar dekhti hi rahi.vijayant bhi jhatke kha raha tha.rambha samajh gayi ki uski saas ki chut uske sasur ke gadhe virya se bhar rahi hai.madhoshi se muskurati hui rita bistar pe dher ho gayi to rambha ne darwaza band kiya & vapas apne kamre ko chali gayi.

apne bistar pe aa usne fir se apna gown utar fenka & apne jism se khelne lagi.saas-sasur ki chudai ne use bahut garam kar diya tha.sasur ke gathile badan ki pyas & badh gayi thi & sath hi use saas se jalan bhi ho rahi thi.vo aadhe ghante tak khud se khelti rahi.uske mobile baja,dekha to vijayant ka number tha,"hun."

"mere kamre me aao.",rambha fauran uthi & apni negligee me vaise hi apne sasur ke kamre ki or chali gayi.

Rambha kamre pe pahunchi to dekha ki kamra ab ghup andhere me duba tha.Vijayant use vaha nahi dikha.usne khatkhatane ki sochi par darr tha ki kahi Rita na aa jaye.use aashcharya hua ki use bulane ke baad khud vijayant nadarad hai & vo jane hi lagi thi ki 2 mazbut bazuo ne use pakad ke kamre ke andar khinch liya & darwaze ke bagal ki deewar se laga diya.vo to rambha hatho ki chhuan se samajh gayi ki vo vijayant hai varna vo to zarur chikh uthati.

"mummy kaha hain?",vo phushphusai.

"so rahi hai.",vijayant ne sar peechhe ki or hila ke ishara kiya & uske gudaz bazu dabate hue uske chehre pe jhukne laga.

"please,yaha nahi.vo jag gayi to gazab ho jayega!",vo chhutne ki koshish karti kasmasayi.

"mujhpe bharosa rakho.kuchh nahi hoga.",vijayant ki garm sanse uske pehle se hi behaal jism ka haal & bura kar rahi thi.usne uske seene pe hath rakhe use door karne ko lekin uske hath vaha state hi vijayant ke dressing gown ke upar se hi uske seene ko sehlane lage.vijayant ne abhi 1 track pant & uske upar gown pehan rakha tha,"dekho vo gehri nind me so rahi hai."

"fir bhi dfarr lagta hai.",sasur ke gown ko bhinchte hue usne uske kandhe ke upar se bistar pe so rahi saas ko dekha.kamra vishal hone ki vajah se bistar thoda door tha & use bhi laga ki rita unki phusphusahat se shayad na jage.

"kuchh nahi hoga.vo nahi uthegi.",vijayant ne baat dohrayi & uska daya hath uski banh se uske chehre pe aaya.

"please,dad..uummm..!",vijayant ke hath uske chehre ko sehlane ke baad uski gardan ke neeche uski negligee ke gale se dikh rahi uski tvacha pe firne lage & vo uske chehre pe jhukne lage.uski garm sanse & aisa romanch bhara mahaul pehle se hi mast rambha ko aur mast karne lage.

vijayant ke hath sehlate hue upar aaye & uski gardan se hote hue uske chehre ko aise thama ki uske anguthe uske kano pe aasani se fir sake,fir vo jhuka & uske hotho ko halke se chuma.rambha peechhe deewar se lag gayi & is baar usne apni na-nukar band kar di.uske hath uske sar ke bagal me deewar pe aa lage.daya hath darwaze ki chaukhat thame upar-neeche ho rahatha.uski aankhe ab masti me band ho gayi thi & vijayant ka hath 1 baar fir neeche ja raha tha.

"tumhe pyar kiye bina to mujhe nind aani nahi thi.",vijayant uske hotho ke paas apne lab la phusphusaya & apne hath uski gardan se hote hue uski chhatiyo ki baglo se hote hue uske badan ki dono taraf bagal me chalate hue kamar pe le gaya & fir thoda sakhti se chalate hue upar laya & uski negligee ke upar se hi uski chhatiyo pe se chalata hua uske kandho pe le gaya.rambha ne deewar & chaukhat pe aur besabri se hath firaye.

vijayant ne uske daye kandhe se negligee ka strap neeche kiya to rambha ne bahut dhimi aah bhari & jab vijayant ke honth uske hoth ke bilkul bagal me uske baye gaal se chipke to uske hath apne sasur ke kandhe se aa lage & uske dressing gown ko besabri se bhinchne lage.vijayant jhuka & uski gardan chumi & uski numaya dayi chhati ko baye hath me bhara & neeche jhuka.usne apni pyari bahu ki chhati ko na chuma na chusa bas apna pura munh khol apni garam sanso se use bhigata hua uske uapr chala diya.

rambha ab puri mast ho gayi.sasur ki is harkat ne use apni saas ki maujoodgi bhi bhula di thi.vijayant jhuka & uski dayi chhati ko daboch ke dabaya & fir uspe jibh chalate hue chusa.rambha badi mushkil se apni aaho ko aavaz dene se rok rahi thi.vo ab vijayant ke sar ko thame thi.

vijayant uski chhati ko badi shiddat se chum raha tha & jab vo chuste hue thoda jhuka to uske sath-2 uski bahu bhi neeche hui & uske baalo ko khincha.vijayant uski choochi se fir upar gaya & uski gardan pe bayi taraf chumte hue apna lund uski chut pe dabate hue ragda.uske baye hath ne negligee ko baye kandhe se utara & fir dono hatho ne rambha ke chehre ko thama to usne khud hi aage badh apne sasur ke honth chum liye.vijayant ne uske dono galo pe apni dadhi ragdi & uski negligee ko neeche kar jhuk ke uski choohciyo ko pine laga.

rambha ke dono kandhe deewar se tike the & baki jism aage ho apne sasur ke badan se chipka tha.vijayant uske seene pe apne munh se mohare laga raha tha.uski masti bhi bahut badh gayi thi.usne rambha ki choochiyo ke gulabi nipples ko chuste hue jaldi se apne gown ki belt khol use neeche giraya & fir uski kamar tham li.rambha ke bechain hath uski gardan me aa fanse & vaha se uski pith pe fisal apni besabri bayan karne lage.

vijayant ne uski mara tham uske jism ko khud se chipkaya & uski chhatiya chumne & chusne laga.rambha ke kandhe apbhi bhi deewar se lage the & vo sasur ke sar ko thame apne seene pe dabate hue apne jism ko us se sataye ja rahi thi.uske honth khul rahe the lekin aavaz bahar nahi a arahi thi.agar aati bhi to bas itni ki vo keval vijayant ko sunai de & uska josh & badhe.

vijayant rambha ke jism ka deewana ho gaya tha.usne aaj tak uske jaisi mast ladki nahi dekhi thi.vo jhuka & uski dono chhatiyan hatho me tha aapas me daba di & unhe chusne laga.uski is harkat ne rambha ko bahut mast kar diya & uski chut to bilkul buri tarah kasmasayi.vijayant neeche hua & uske sath-2 dono jismo ke beech rambha ki kamar pe atki negligee bhi.

vijayant neeche baith gaya & rambha ke pet ko chumte hue uski bayi jangh ko apne daye kandhe pe chadhaya & uski gili chut se hotnth laga diye.rambha ne daye hath ko sar ke upar le jate hue bagal ki chaukhat tham rakhi thi & baye se vijayant ke baal nochti use apni chut pe dabaye hue thi.uske kandhe vaise hi deewar se lage the & uski kamar aage-peechhe ho rahi thi.vijayant pure josh ke sath uski chut me munh ghuma raha tha.

rambha ki chut ka ras uski jangho pe bhi beh aaya tha & vijayant ne vaha se bhi use chaat liya.uska daya hath rambha ki gand bayi fank ko bayi jangh ke neeche se jate hue pakad chuka tha & baya uski kamar ko thame tha.gand dabochte hue vo apni mehbooba ki chut chate chala ja raha tha.rambha ne adhkhuli palko se apni bekhabar so rahi saas ko dekha & muskurayi..uff kitna romanch aa raha tha use..uski saas bhi yehi maujood thi lekin is baat se anjan ki uska pati uski apni bahu ki chut me jibh ghusaye uski bahu ke kadmo me baitha hai.

vijayant ki zuban ab rambha ko bahut pagal kar rahi thi.uski tange kamzor hoti mehsus hui to usne baya hath bhi uske sar se hataya & deewar ko tham liya lekin fir bhi vo neeche jhukne lagi.vijayant ne bhi baye hath me chaukhat ko pakda & daye ko deear pe laga diya & bahu ki chut me zuban aise ghusane laga mano vo lund ho.kandhe deewar se lagaye rambha deewar ke sahare halki-2 aahe lete hue kamar vijayant ke munh pe thelte hue uchkane lagi.vijayant ki zuban kuchh zyada andar gayi & rambha ke hath jo uske sar ke upar the,neeche fisle & chaukhat & deewar ko thame vo kamar uchkane lagi & thodi tez aah bhar di.vo jhad gayi thi.

vijayant fauran utha & uski kamar ko tham use khud se chipka liya.rambha ne apni aahen uske seene me munh chhupa ke dafn ki.tabhi rita ne karwat li to dono but ban gaye.,rambha ne dhire se vijayant ke baye kandhe ke upar se saas ko dekha to vijayan ne bhi gardan ghumai.rita ko kuchh pata nahi chala tha & vo abhi bhi so rahi thi.vijayant ne rambha ko palta to 1 baar fir rambha ne deewar & chaukhat ko thama magar is baar baya hath chaukhat pe tha & daya deewar pe.

vijayant ne uski kamar tham uske daye kaan ko peechhe se chuma to rambha ne apni kamar peechhe uchka uske lund pe apni moti gand dabayi.vijayant ne fauran apni track pant ko thoda neeche kiya & uski tange faila di.rambha gand peechhe nikalte thoda jhuki & vijayant ne 1 pal me lund uski chut me ghusa diya.rambha ki gand ki otayi lund ko jud tak samane se rok rahi thi lekin us se use koi pareshani nahi thi.lund itna bada tha ki abhi bhi vo uski bahut mast chudai kar raha tha.

vijayant ne bahu ki kamar ko baye hath me thama & daye se uske baal pakad ke khinche to rambha ne aah bhari & apna sar peechhe kar apne khule honth apne sasur ki shan me pesh kiye.vijayant ne uske baal pakde-2 hi use chuma & fir uska chehra aage kar thoda peechhe hua to rambha gand & peechhe karte hue us se chudti & jhuki.vijayant ne uske reshmi baalo ko aage karte hue uski pith ko chuma to rambha ne besabri se chaukhat pe hath firaya.

vijayant jitna jhuk sakta tha,utna jhuk ke bahu ki makhmali pith pe apne garm lab chala raha tha.rambha deewar kharonchti uske lund ki chot se mast ho rahi thi.uski chut 1 baar fir jahdne ko taiyyar thi.vijayant seedha khada ho uske kandho se leke upri baaho se hote hue uske jism ke bagal me apne sakht hath firate hue gehre dhakke laga raha tha.rambha bhi gand peechhe kar uske dhakko ka jawab de rahi thi.

vijayant thoda aage ho gaya & uski kamar tham dhakke lagane laga to rambha bhi seedhi khadi ho gayi & gand ko peechhe kar diya & deewar pe daya gaal satake baye pe apne premi ke tapte labo ki garmi mehsus karte uske dhakko ka maza lene lagi.rambha ne chaukhat ko jakad liya & & deewar pe nakhun chalaya & bahut zor se kamar hilayi.vo jhadne lagi thi & vijayant ne aage jhuk ke uske hotho ko apne labo ki qaid me le uski aaho ko bhi apne halak me dafn kar liya.

rambha dhime-2 sisakte hue khadi thi.vijayant ne lund bahar khincha,pant upar ki & use ghuma uska masti bhara chehra apne samne kiya.rambha ki aankhe nashe me dubi hui thi.uske dono bazu uske sar ke bagal me deewar se lage the.vijayant ka baya hath uski gardan pe aaya & uske chehre ko thama & fir vo uske baye gaal pe chumne laga.rambha ne aa hbharte hue apni marmari baahen uski gardan me dali to vijayant ne thoda jhukte hue uski dayi choochi ko apne baye hath me dabocha & uski gardan chumne laga.

rambha ki masti ko aaj vo zara bhi kam nahi hone de raha tha.rambha ne use khud se chipka liya & vo uski chhati pe chumne laga.uska baya hath choochi se sarka & rambha ke chehre pe masti ki shikne paida karwane ke liye uski chut se ja laga.rambha paglo ki tarah kamar hilane lagi.rambha ghutne jhukati tango ko failati mano sasur ki ungli ko andar le lena chahti thi.vijayant uski chhatiyo ko chumta hua neeche hua & uske pet pe apne labo ke nishan chhodta hua uski chut pe aaya & chatne laga.rambha to masti me pagal ho gayi.

vijayant thodi der chut ko chumne,chatne ke baad vapas pet se hota hua upar pahuncha & sedha khada ho bahu ko bahao me bharne laga to usne uske lohe sarikhe sakht bazuo ko pakad use khud se thoda door kiya & daya hath neeche le jake uski track pant ke upar se lund ko dabane lagi.vijayant uske chehre ko pakad use chumne laga to rambha ne kuchh der lund ko dabane ke baad uski pant ko neeche sarka diya & fir use baaho me bhar uske baalo bhare seene ko apne seene pe,uske pet ko apne chikne pet pe & uske lund ko apni chut pe daba diya.

vijayant uski is harkat se josh se pagal ho utha.usne bahu ko baaho me bhar uski gardan chumte hue chut pe aise hi lund daba ke kamar gol-2 hilani shuru kar di.us se chipti uske baye kandhe ke upar se saas pe nazar rakhi rambha to bas hawa me udi ja rahi thi.uske hath uski gardan se fisle & uske mazbut pith ki manspeshiyo ki gathan ko mehsus karte hue neeche aaye & uski pusht gand se chipak gaye.vijayant samajh gaya ki bahu abhi & chudna chahti hai.

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kramashah.......

 
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