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Nanad ki training--ननद की ट्रैनिंग compleet



थोड़ी देर में ही मैं झड़ने के कगार पे थी। बिना रुके, उसनी मेरी टांगें मोड़कर मुझे दोहरा कर दिया, और एक ही धक्के में हचाक से अपना लण्ड इतना कसकर पेला की मेरी बच्चेदानी तक कांप गयी और मैं तेजी से झड़ने लगी, और मेरे हाथ ऐसे कांपें की सारी प्लेटें, क्राकरी टेबल के बाहर खनखनाती हुई नीचे। पर हम लोग अभी इन चीजों पे ध्यान देने की हालत में नहीं थे। उसका लण्ड कचकचा के मुझे हचक-हचक के चोद रहा था। उसके हाथ, मेरी बड़ी-बड़ी क्रीम में लिपटी चूचियों को कसकर मसल रहे थे, और थोड़ी देर में मैं भी अपने चूतड़ कस-कसकर उछाल रही थी, अपनी चूत सिकोड़ के उसके मोटे मूसल को अपने अंदर भींच रही थी। उसका हर धक्का सीधे मेरी बच्चेदानी पे लग रहा था और लण्ड का बेस मेरी क्लिट को रगड़ रहा था।

मेरी चूची को कसकर रगड़ते हुए उसने कहा- “हे, तेरी ननद अब बड़ी चुदवासी हो गयी है, लगता है अब हर समय लण्ड के लिये प्यासी रहती है…”


“मेरी ननद या तेरी प्यारी बहन?” हँसकर अपनी टांगों से उसे अपनी ओर खींचकर मैं बोली।



“जो भी कहो…”
और लण्ड को सुपाड़े तक बाहर निकालकर एक धक्के में अंदर तक ठेल दिया।



“अरे जब तक ये असली लण्ड तेरी बहना को नहीं मिलता ना, उसकी छिनाल चूत की प्यास नहीं बुझेगी…”
मैंने कसकर चूत में उसके लण्ड को स्क्वीज किया।

“तो दिलवा दे ना… उसकी मस्त चूचियां और चूतड़ देखकर ही ये फनफना जाता है…” वो बोले।

“तो चोद दे ना साली को इंतजार किस बात का? परसों से तो मेरे ‘वो दिन’ शुरू हो जायेंगें तब तो तुम्हें उसे ही चोदना पड़ेगा। वो भी तो तुमसे चुदवाने के लिये बेताब है…”

फिर तो उन पे वो जोश चढ़ा की सटासट मुझे चोदने लगे, फुल स्पीड से, और तब तक चोदते रहे जब तक मैं और वो दोनों एक साथ झड़ नहीं गये। और जब उन्होंने लण्ड बाहर निकाला तो मेरे होंठों ने उसे गप्प कर लिया। वीर्य से सना मोटा लण्ड, साथ में मेरी चूत के रस के साथ में चूत में बची फ्रूट क्रीम का एक अजब स्वाद मिल रहा था मुझे उनका लण्ड चूसने में आज। और थोड़ी देर में वो भी मेरे चूत का रस।

वहीं फर्श पर ही हम दोनों सिक्स्टी-नाइन का मजा लूट रहे थे। थोड़ी देर चूसने चाटने का मजा लेने के बाद उन्होंने अपना लण्ड मेरे मुँह से बाहर निकाला। बुरी तरह फनफना रहा था वह। एक कुर्सी के सहारे मुझे झुका के उन्होंने फिर कसकर चोदना शुरू कर दिया। मैं भी चूतड़ मटका के पीछे से धक्के लगाके उनकी चुदाई का जवाब दे रही थी। रात की पूरी कसर निकाल रहे थे वो। दो बार कसकर और चोदकर ही छोड़ा उन्होंने। और फिर नहाना धोना भी हम लोगों ने साथ-साथ किया, जिसमें ‘सब कुछ’ शामिल था। वो मेरी चूत कसकर चूस रहे थे और मैं उनके मुँह पे बैठी थी।

तभी मुझ ‘लगी’ तो मैंने उनसे कहा- “हे हटो जरा, मुझे उठने दो। जरा मैं करके आती हूँ, बड़ी जोर से लगी है…”

“अरे तो यहीं कर लो ना, पहले कभी किया नहीं है क्या?” मेरे मूत्र छिद्र को छेड़ते वो बोले।

“हे नहीं प्लीज, यहां ठीक नहीं। अपने घर की बात और थी। तब तो रोज पिलाती थी…” मैंने हठ किया।

“अरे भूल गयी, अपने मायके में बिना नागा। चल…”

और अबकी जब उन्होंने वहां छेड़ा तो मैं रूक नहीं पायी, और शुरू हो गयी और कहा- “हे जब वो हमारे यहां चलेगी ना तो जब उसे तेरी रखैल बनाऊँगी, तो उसे भी पिलायेंगें खारा शरबत…” मैंने अपने मन की बात कही।

“एकदम और मैं भी। तेरी गुड़िया रहेगी जो चाहे खिलाना पिलाना…”

नहाने के बाद खाना खाकर वो अपने एक दोस्त के यहां चल दिये और मैं गुड्डी का इंतजार करने लगी। कुछ ही देर में वो आई, चहकती, खुश, जैसे बादल पे चल रही हो और उसी बार डांसर वाली ड्रेस में। क्या मस्त माल लग रही थी। गहरी कटी कसी चोली में उसकी गोलाइयों का कसाव, गहराई, पूरी अंदर तक दिख रही थ। पतली कमर, कूल्हों तक बंधी साड़ी, खुली पीठ, गोरे कंधों से सरकता बरबस आंचल। उसके हाथ में एक गिफ्ट रैप्ड पैकेट था।

“हे आज चिड़िया कुछ ज्यादा ही चहक रही है। और ये पैकेट, किसने दिया, क्या है?” मैंने उसके मस्त मटकते चूतड़ों को, दबोच के मुश्कुराकर पूछा।

गुड्डी- “नीरज मिला था, भाभी। इंतेजार कर रहा था बिचारा, स्कूल के गेट पे। सारी सहेलियां जल गयीं। सईदा ने तो ये भी कहा है की, सुबह छोड़ने कोई और, और लेने कोई और, तुम तो सबका नंबर डका गयी। बात ये है, भाभी कि कितनी लड़कियां खुद उसका इंतजार करती हैं और यहां वो मेरा इंतजार कर रहा था। उसी की बाइक पे आई हूं, इत्ता ख़ूबसूरत डैशिंग लग रहा था। झांटें सुलग रही थीं सालियों की। उसके पैरेंटस आज ही गये हैं और आज ही वो स्कूल के गेट पे। बेचारा बहुत सीधा है। कह रहा था कि बस थोड़ी देर के लिये मेरे घर पे आ जाओ। शाम को तो उसको दुकान पे बैठना होता है ना। उसी ने दिया है ये पैकेट, चाकलेट हैं। इम्पोर्टेड…”

हम दोनों ने मिलकर पैकेट खोला। उसमें वास्तव में इम्पोर्टेड लिकर चाकलेट थे, रम भरा। एक उसने अपने मुँह में गड़प किया और एक मैंने।

“हे पर इस ड्रेस में, तुम्हारी सहेलियों को तुम्हारी रात की दास्तान का अंदाज़ तो नहीं लगा?” उसके उरोजों पे लगी खरोंचों और निशान पे उँगली सहलाते हुये मैंने पूछा।

गुड्डी- “अरे भाभी, हमाम में सभी नंगे। वहां किसकी साबूत बची है, सभी तो चुदवाती फिरती हैं, फँसी हैं किसी ना किसी से। हां देख सब रही थीं पर इसका फायदा भी हुआ। जो जज करने बाहर से आयीं थीं ना, सबने जम के तारीफ की मेरी। एक तो कह रही थीं, कितने परफेक्ट निशान हैं, एकदम लगता है रात भर कहीं ‘बैठ के’ आई है और मेरे ठुमके की तो सब दीवानी हो गयीं। भाभी, सब कह रही थीं की हमारा प्ले तो फर्स्ट आयेगा ही, बेस्ट ऐक्ट्रेस मेरा पक्का है…”

और होता भी क्यों ना, मुज़रा से लेकर शकीरा तक, सबकी अदायें तो मैंने उसे सिखायीं ही थी और ऊपर से झुक के, अदा से, गहराई दिखाना, उचका के जोबन की झलक, चूतड़ ग्राइंडिंग। सब कुछ।

“पर तू ये ड्रेस क्यों पहनकर आई, ऐसी खुली-खुली। तेरी यूनीफार्म?” मैंने अचरज से पूछा।

गुड्डी- “भाभी, अरे वो साली सईदा और दिया। सईदा देखने में तो चुहिया जैसी, सीधी। पर पहले उन सबका प्रोग्राम खतम हो गया और फिर जब हम लोग चेंज करके स्टेज पे गये तो उन दुष्टों ने हमारी यूनीफार्म छिपा दी और कहा की यही पहनकर जाओ। हम भी बोले- अरे डरते हैं क्या? और ठसके से चल दिये…”

“अच्छा, तू चलकर नहा धो। सुबह ऐसे ही चली गयी थी। ठीक से नहाना। नीरज पे अच्छा इम्प्रेशन पड़ना चाहिए। मैं तब तक खाना लगाती हूं और तेरे लिये ड्रेस निकालती हूं।

गुड्डी- “ठीक है भाभी…” कहकर मचलकर वो नहाने चल दी।
 


मैंने उसके लिये एक गहरे गले की टाइट वेस्टर्न ड्रेस निकाली जिसमें उसका शरीर तो ढंका रहे पर उसके सारे उभार और कटाव अच्छी तरह दिखाई दें, और खाना लगाने में लग गयी।

तैयार होकर वो इत्ती सुंदर लग रही थी जैसे करीना कपूर। लंबी, गोरी, जानदार उभार, पतली कमर बड़ी-बड़ी आँखें। उसने हल्का मेक-अप किया था जो बहुत ही अच्छा लग रग रहा था।

“हे आज चुदवा मत लेना। थोड़ा उसको तड़पाना, इंतजार करने देना…
” मैंने समझाया।

गुड्डी- “ठीक है भाभी…” वो जाने के लिये बेताब थी।

“और जल्दी आना, आधे घंटे के अंदर…”

गुड्डी- “एकदम, भाभी…” और चंचल हिरणी की तरह वो निकल भागी।

आधा घंटा, एक घंटा, डेढ घंटा वो नहीं आई। मैं इंतजार कर रही थी। पूरे दो घंटे के बाद वो कहीं प्रगट हुई।

अंगूठे और उँगली के सहारे, चुदाई के इंटरनेशनल सिम्बल को दिखाते हुए मैंने पूछा- “क्यों, हुआ क्या?”

गुड्डी- “नहीं भाभी। आपने मना किया था तो…” वो बहुत खुश लग रही थी। और उसके दोनों हाथ गिफ्ट पैक्स से भरे हुए थे। उसने मुझे दिखाया, रेवलान का इंपोटेर्ड मेक-अप किट, ढेर सारी चाकलेट और पीटर पैन की सेक्सी, लेसी इम्पोर्टेड ब्रा और पैंटी का सेट। पैंटी क्या रेड कलर की सेक्सी थांग थी।

“हे उससे बोलती, पहना देता ना…” हँसकर मैं बोली।
 


" thik hai bhabhi tab tak aap is gaav ke saale ko khilaiye. bada bhukha hai ,

bechara." aur uthate hue usane ajay ke muh se phir amalet ka bacha tukada chin

ke gadp kar liya.

mai soch rahi thi ki chalo kam se kam school uniform me usake urojom ke daag

to nahi dikhenge. vo taiyaar ho ke ayi aur boli,

" bhabhi, aj to mere ple ki dress riharsal bhi hai..usaki dress."

" ha..ha rakhi hai tere baig ke pas le le." mai boli par mai soch rahi thi ki vo

dress to 'sab dikhata hai ' style ki hai aur aj to school me sab daant ke, nakhun ke

nishan..tabhi ajay bol pada,

" chal mai tujhe apani bike pe chor deta hu, mujhe bhi nikalana hi hai." aur mai

un donom ko chodane bahar tak ayi. maine halke se guddi se pucha kal kitani

bar hua to muskara ke usane ek hath se 4 ungaliya dikha ke ishara kiya...4 baar.

vo dono dhime dhime baate kar rahe the par mujhe sab kuch sunai de raha tha.

" he kab aoge.." guddi bade pyaar se usaka hath pakad ke boli.

" tum jab kaho..." bike start karata vo bola.

" mai to kahati hu tum....jao hi nahi." larajate hue vo boli.

" he man to mera bhi yahi karata hai par ..agale haphate pakka...he tang phaila ke

baith." ajay ne usase kaha.

" raat bhar tang phailavaye raha...chain nahi mila jo bike pe bhi..dukhata hai

yaar." mai samajh rahi thi ki is tarah skirt phalane ke baad jo choti si panty usane

pahani hai , usake chutad raste bhar sit se ragadenge. ajay apani splendar start

kar , use le ke chal diya aur mud ke mai sochati rahi,

'dil ki basti bhi, ajib basti hai,

lutane vale, ko tarasati hai'

jab tak mai mudati rajiv ne mujhe pakad liya aur andar le ja ke nashte ki table pe

hi sidhe lita diya. mera gown isi beech utar chuka tha. usane table pe se fruit

cream ka baul uthaya aur sidhe meri choot pe udel diya. choot phaila ke apani

ungali se kaphi kuch usane do ungaliyom se choot ke andar thel diya aur baki

meri choot pe lapet diya. lekin usako isase smtoshh nahi tha. baul me cream ke

sath sath kuch fruit ki pisej bachi thi. kuch mango, santare aur cherries. vo bhi

usane choot ke andar kar diye. kuch cream sarak ke mere pichavade tak bhi

pahunch gayi. ab usane upani jibh se cream chatani shuru ki. pahale choot ke as

pas, phir mere choot ke honthom pe.aur jab usane dekha ki kuch bah ke piche ki

darar me pahuch gaya hai, to vah vaha bhi kyom chodata. usane apani jibh meri

gaand ki darar me dal ke khub kas kas ke chatana sharu kiya aur ek ek bund chat

gaya. ab phir choot ka number tha, aur usane jais koyi chammach se skup nikale ,

usi tarah apani lambi moti juban meri choot me ghused di aur lapet ke chatane

laga. meri masti ke mare halat kharab ho rahi thi aur mai kas kas ke chutad patak

rahi thi. par vah kyom chodata, apani jibh se usane, meri choot se maigo ki kuch

pisej nikali aur unhe maje se chus ke mere muh me de diya. mai bhi unhe ras le

ke chubhalane lagi.

tab tak usaki nigah baul pe padi jisame fresh cream rakhi thi. vo usane sari ki

sari meri chuchiyom pe udel di. ab jab usake honth meri choot choos rahe the,

jeebh andar cream saaf kar rahi thi. usake hathom ne kas kas ke meri chuchiyom

pe cream lithedani, ragadani, masalani shuru kar di. tabhi usaki juban ko cheri

mil gayi. usane tip pe le ke use bahar nikal ke, donom hothom pe le, use clit pe

ragadana shuru kar diya. thodi der me hi mai jhadane ke kagar pe thi. bina ruke,

usani meri tange mod ke mujhe dohara kar diya, aur ek hi dhakke me hachak se

apana lund itana kas ke pela ki meri bachchedani tak kaamp gayi aur mai teji se

jhadane lagi, aur mere hath aise kaampe ki,... sari plate, crokery table ke bahar

khanakhanati huyi niche...par ham log abhi in cheejom pe dhyan dene ki halat

me nahi the. usaka lund kachkacha ke mujhe hachak hachak ke chod raha tha.

usake hath, meri badi badi cream me lipati chuchiyom ko kas ke masal rahe the,

aur thodi der me mai bhi apane chutad kas kas ke uchal rahi thi, apani choot

sikod ke usake mote musal ko apane andar bhimch rahi thi. usaka har dhakka

sidhe meri bachchedani pe lag raha tha aur lund ka base meri clit ko ragad raha

tha. meri chuchi ko kas ke ragadate hue usane kaha,

" he, teri nanad ab badi chudavasi ho gayi hai, lagata hai ab har samay lund ke

liye pyasi rahati hai."

" meri nanad ya teri pyaari bahan..." hans ke apani tangom se use apani or khinch

ke mai boli.

" jo bhi kaho..." aur lund ko supade tak bahar nikal ke ek dhakke me andar tak

thel diya.

" are jab tak ye asali lund teri bahana ko nahi milata na, usaki chinal choot ki

pyas nahi bujhegi." maine kas ke choot me usake lund ko squeaze kiya.

" to dilava de na, usaki mast chuchiya aur chutad dekh ke hi ye phanaphana jata

hai." vo bole.

" to chod de na saalli ko intejaar kis baat ka...parasom se to mere 'vo din' shuru

ho jayenge tab to tumhe use hi chodana padega. vo bhi to tumase chudavane ke

liye betab hai."

phir to un pe vo josh chadha ki satasat mujhe chodane lage , phul spid se, aur tab

tak chodate rahe jab tak mai aur vo donom ek sath jhad nahi gaye.

aur jab unhone lund bahar nikala to mere hontho ne use gapp kar liya. viry se

sana mota lund, sath me meri choot ke ras ke sath me choot me bachi fruit cream

ka ..ek ajab svad mil raha tha mujhe unaka lund chusane me aj. aur thodi der me

vo bhi mere choot ka ras...vahi pharsh par hi ham dono sixty-nine ka maja lut

rahe the. thodi der chusane chatane ka maja lene ke baad unhone apana lund

mere muh se bahar nikala. buri tarah phan phana raha tha vah. ek kursi ke sahare

mujhe jhuka ke unhone phir kas ke chodana shuru kar diya. mai bhi chutad

mataka ke piche se dhakke lagake unaki chudayi ka javab de rahi thi. raat ki puri

kasar nikal rahe the vo...do bar kas ke aur chod kar hi, choda unhone.

aur phir nahana dhona bhi ham logo ne sath sath kiya, jisame 'sab kuch' shamil

tha. vo meri choot kas ke chus rahe the aur mai un ke muh pe baithi thi. tabhi '

mujhe lagi'. maine unase kaha,

" he hato jara. mujhe uthane da. jara mai kar ke aati hu, badi jor se lagi hai."

" are to yahi kar lo na, pahale kabhi kiya nahi hai kya.." mere mutra chidra ko

chedate vo bole.

" hey! nahi please, yaha theek nahi.. apane ghar ki baat aur thi.. tab to roj pilati

thi." mai ne hath kiya.

" are bhul gayi, apane mayake me bina naga.... chal" aur abaki jab uhone vaha

cheda to mai ruk nahi paayi aur.. shuru ho gayi.

" he jab vo hamare yaha chalegi na.... jab use teri rakhail banaungi, to use bhi

pilayenge khara sharabat" maine apane man ki baat kahi.

" ekdam aur mai bhi. teri gudiya rahegi jo chahe khilana pilana."

nahane ke baad khana kha ke vo apane ek dost ke yaha chal diye aur mai guddi

ka intejaar karane lagi.

kuch hi der me vo aayi, chahakati, khush, jaise baadal pe chal rahi ho aur usi bar

dancer vali dress me. kya mast maal lag rahi thi. gahari kati kasi choli me usaki

golaiyom ka kasav, gaharayi, puri andar tak dikh rahi th.patali kamar, kulhom

tak bandhi sadi, khuli pith, gore kandhom se sarakata barabas anchal. usake hath

me ek gift rapped packet tha.

" he aaj chidiya kuch jyada hi chahak rahi hai..aur ye packet, kisane diya, kya

hai." maine usake mast matakate chutadom ko, daboch ke muskarake pucha.

" niraj mila tha, bhabhi. wait kar raha tha bechara, school ke gate pe. sari

saheliya jal gayi. saida ne to ye bhi kaha ki he, subah chorane koyi aur aur lene

koyi aur. tum to sab ka number daka gayi. baat ye hai, bhabhi kitani ladakiya

khud usaka intejaar karati hai aur yaha vo... mera intejaar kar raha tha. usi ki

bike pe ayi hu, itta handsome dashing lag raha tha... jhante sulag rahi thi

saalliyom ki. us ke parents aaj hi gaye hai aur aaj hi vo school ke gate pe...

bechara bahot sidha hai... kah raha tha. bas thodi der ke liye mere ghar pe aa jao.

sham ko to usako dukan pe baithana hota hai na.. usi ne diya hai ye packet,

chocalate hai...imported."

ham dono ne mil ke packet khola. usame vastav me imporrted liquor choclet the,

rum bhara. ek usane apane muh me gadap kiya. ek maine.

" he par is dress me, tumhari saheliyom ko tumhari raat ki dastan ka andaaz to

nahi laga." usake urojom pe lagi kharomchom aur nishan pe ungali sahalate huye

maine kaha.

 
" are bhabhi hamam me sabhi nange. vaha kisaki sabut bachi hai, sabhi to

chudavati phirati hai, phansi hai kisi na kisi se. ha dekh sab rahi thi par isaka

fayada bhi hua. jo jaj karane bahar se ayi thi na, sabane jam ke tariph ki meri. ek

to kah rahi thi, kitane perfect nishan hai, ekdam, lagata hai raat bhar kahi 'baith

ke' ayi hai aur mere thumake ki to sab divani ho gayi. bhabhi, sab kah rahi thi ki

hamara ple to first ayega hi, best actress mera pakka hai."

aur hota bhi kyom na, mujara se leke shakira tak, sab ki adaye to maine use

sikhayi hi thi aur upar se jhuk ke,ada se, gaharai dikhana, uchaka ke joban ki

jhalak, hips grinding..sab kuch.

" par tu ye dress kyom pahan ke ayi, aisi khuli khuli. teri uniform.." maine

ascharya se pucha.

" bhabhi, are vo saalli saida aur diya.saida dekhane me to chuhiya jaisi, sidhi

par..pahale un sab ka program khatam ho gaya aur phir jab ham log chemj

karake stej pe gaye to un dushhto ne..hamari uniform chipa di aur kaha ki yahi

pahan ke jao. ham log bhi bole are darate hai kya. aur thasake se chal diye."

" achcha , tu chal ke naha dho. subah aise hi chali gayi thi. thik se nahana. niraj

pe achcha impreshan padana chahie. mai tab tak khana lagati hu aur tere liye

dress nikalati hu

" thik hai bhabhi..kah ke machal ke, vo nahane chal di. maine usake liye ek

gahare gale ki tight vestarn dress nikali jisame usaka sharir to dhanka rahe par

usake sare ubhar aur katav achchi tarah dikhai dem, aur khana lagane me lag

gayi.

taiyaar hoke vo itti sundar lag rahi thi jaise karina kapur .lambi, gori, jaandar

ubhar, patali kamar badi badi ankhe. usane hlka mek ap kiya tha jo bahot hi

achcha lag rag raha tha.

" he aj chudava mat lena..thoda, usako tadapana, intejaar karane dena." maine

samajhaya.

" thik hai bhabhi." vo jane ke liye betab thi.

" aur jaldi ana, adhe ghante ke andar..."

" ekadam, bhabhi." aur chanchal hirani ki tarah vo nikal bhagi.

adha ghanta, ek ghanta, dedh ghanta vo nahi ayi. mai intejaar kar rahi thi. pure

do ghante ke baad vo kahi prakat huyi. anguthe aur ungali ke sahare, chudayi ke

inter netional simbol ko dikhate hue maine pucha,

" kyom...hua kya."

" nahi bhabhi...apane mana kiya tha to,..." vo bahot khush lag rahi thi. aur usake

donom hath gipht paiks se bhare hue the. usane mujhe dikhaya, revalan ka

imported mek ap kit, dher sari chakalet aur peter pan ki sexy, lesi imported bra

aur panty ka set. panty kya red color ki sexy thong thi.

" he usase bolati, pahana deta...na" hans ke mai boli.

 


" अरे भाभी उसे इतना सीधा मत समझना, एक तो वो पहना के ही माना."
खिलखिला के वो बोली, और उसने अपने ड्रेस का शोल्डर स्ट्रॅप नीचे सरका दिया. एक प्यारी सी गुलाबी हाफ कप लेसी ब्रा मे उसके जोबन छलक रहे थे. " भाभी प्लीज़, मेरी एक रिक्वेस्ट है, प्लीज़ मेरी अच्छी भाभी, मना मत करना." मुझे बाहों मे कस के भर के वो बोली.

" ठीक है बोल... आज तक तेरी कोई बात मैने टाली है, पर पहले मेरी फीस." और मैने भी उसे कस के भींच के, उसकी ब्रा का कप स्ररका उसके गुलाबी निपल अपने मूह मे ले लिया और चूसने लगी. और कुछ देर चूस के बोली, " बोल, लेकिन ये बता... क्या क्या किया उसने ..."

" भाभी, ऑलमोस्ट सब कुछ, सिवाय उसके जो आपने मना किया था. हाँ कल उसने रिक्वेस्ट किया है मुझसे अपने साथ चलने को. उसके फार्म हाउस पे. कल सनडे है, इसलिए उसकी भी दुकान बंद रहेगी. यहाँ पे वो कहता है कि उसके सर्वेंट्स रहते है और किसी ने उसके पेरेंट्स से कह दिया तो... इसी लिए... 5-6 दिन मे उसके पेरेंट्स फिर आ जाएँगे.. प्लीज़ भाभी. खाली दिन भर की बात है. बहोत रिक्वेस्ट कर रहा था... कह रहा था कि इतने दिन से इसी दिन का इंतजार था उसे." वो बोली.

" और तेरी पहले वाली ब्रा पैंटी..."

" वो उसने अपने पास रख ली... निशानी के तौर पे. पर भाभी कल का प्रोग्राम पूरा आपके उपर है. कुछ करिए ना.

" चल ठीक है देखती हू, पर पहले घूस दे तो मुझे" और उसकी ड्रेस कमर तक नीची कर के,उसकी ब्रा से दोनों कबूतरों को मैने आज़ाद कर दिया और दोनों को बारी बारी से चूसने लगी. थोड़ी देर मे ही वो सिसकिया भर रही थी.

" अच्छा बोल, पकड़ा था उसका. कितना बड़ा है." रुक के मैने पूछा.

" भाभी अच्छा ख़ासा लंबा है, मोटा भी है. पकड़ाया तो था उसने पर. मारे शर्म के मैने आँखे बंद कर ली. हंस के वो बोली.

" अच्छा, तो सारी अदा, लटके झटके सीख लिए तूने." मैने चिढ़ाया.

वह बस फिर से हंस दी.

" बस एक प्राब्लम है. कल तेरे भैया घर पे रहेंगे, तो....दिन भर के लिए ..कैसे... चल मैं कोई रास्ता निकालती हू. और हाँ मैं जा रही हू, चाय बनाने और तू ये ड्रेस उतार के अपने असली रूप मे आ जा, फ्रॉक मे. और तुझे तो आज म्यूज़िक क्लास मे भी जाना होगा.

" हाँ भाभी. बस मैं ये ड्रेस चेंज करके आती हू अभी."

चाय पीते हुए मैने उससे कहा," मेरी प्यारी ननद रानी, मेरा एक काम कर दोगि, म्यूज़िक क्लास के बाद. ज़रा ख़लील के यहाँ चली जाना, उसे पेमेंट देना है. ये ले 500 रुपये. और हाँ अपनी नाप भी दे देना. उसे तेरे लिए मैं कुछ कपड़े दे आई थी उसे. ज़रा जल्दी जाना. आज कल वो दुकान थोड़ा जल्दी बंद कर देता है. और वैसे भी पहले तुझे म्यूज़िक क्लास से ज़्यादा तो. यार के साथ आँख मटक्का मे समय लगता था पर अभी तो वो गाव गया है.. जल्दी जाना. ये नही कि किसी नये यार को पटाने लग जाना."

" ठीक है, भाभी." चाय का प्याला रखते हुए वो बोली.

" अरे रुक ज़रा, ये बता तेरे यार के जो दोस्त थे ना, जो उसके साथ रहते थे. उनमे से तो कोई नही तुझे लाइन मारता."

" मरते है भाभी.. लड़कों को तो आप जानती ही है. कुछ कुछ बोलते है...कई तो फ्लाइयिंग किस भी देते है."

" अरे तू फिर जवाब क्यों नही देती. बेचारों का थोड़ा तो दिल रख दिया कर, ज़रा आँखों की बांकी अदा, थोड़ा कमर और चूतड़ मटका के, कभी मुस्कान, कभी जलवे."



" ठीक है भाभी."
मुस्करा के वोबोली और जैसे ही वो चलने को हुई मैने फिर रोक लिया.



" मालूम है मैने उसे बोला है. आज तेरी वो नाप वैसे ही लेगा जैसे वो मेरी चोली की लेता है, तो फिर अपनी ये चढ्ढि बनियान उतार के जाना."
और उसने मेरे सामने, दोनो उतार के मुझे दे दिया और चूतड़ मटकाती चल दी.
 
क्लास उसकी 7 बजे ख़तम होती थी. मैं सोच रही थी वो साढ़े सात बजे तक आ जाएगी.लेकिन 8 बज गया, फिर साढ़े 8, 9. मुझे चिंता होने लगी. मैने सोचा कि खुद चल के देखु क्या. बस अच्छी बात ये थी कि राजीव भी अभी नही आए थे, अपने दोस्त के यहाँ से. सवा नौ बजे वो आई, टाँगे थोड़ी फैली, थकि थकि सी. हाथ मे एक दोना जिसमे ताजी इमरतियाँ थी. उसने रुपये मुझे पूरे के पूरे वापस कर दिए.

" हे! क्या हो गया मैने तुझसे नाप देने को कहा था. तू क्या क्या दे आई. और ये पैसा, क्या लिया नही उसने . अच्छा चल मैं तेरे लिए गरम चाय ले आती हू बैठ. पूरी बात बता."
चाय पीते हुए रुक रुक कर उसने सारा किस्सा बताया.

" भाभी, पैसे के बदले उसने कुछ और ले लिया." हंस के वो बोली.



" वो तो मुझे लग रहा है, लेकिन तू साफ साफ बता. शुरू से."
मैं बोली.

" भाभी, मुझे पहुँचने मे थोड़ी देर हो गयी थी. वो शटर गिरा ही रहा था. मुझे देख के, उसने मुझे तो अंदर कर लिया और फिर अंदर से शटर गिरा के नाप लेने की तैयारी करने लगा. मुझसे पूछा, " क्यों, अपनी भाभी की तरह नाप देगी या.."

" भाभी की तरह ." मैने बोल दिया. फिर तो उसने शटर पे अंदर से लॉक लगा दिया और मुस्करा के कहा कि अब ड्रेसिंग रूम मे जाने की कोई ज़रूरत नही है यही लेता हू. फिर बोला कि तुम्हारी भाभी अपने हाथ से अपना सीना उघाड़ के देती है नाप. तू भी उठा ले. सीना तो भाभी मैने उघड़ दिया पर मारे शर्म के मेरी आँख अपने आप बंद हो गयी. और जब उसने सीने के नीचे फीता लगाया ना...भाभी मेरी तो हालत खराब हो गई. ये कहानी आप राजशर्मा स्टॉरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं मेरे निपल अपने आप खड़े हो गये. फिर उसने वहाँ से निपल तक ..फिर सीने को...मैं एकदम गीली हो गयी थी. और फिर जब सीना नाप के वो कमर का नाप लेने लगा तो मैने आँख खोली. भाभी, क्या मोटा मजबूत लंबा खुन्टा था. उसका पाजामा पूरी तरह तना था. लेकिन उसकी ग़लती नही थी. शुरुआत मुझसे ही हो गयी. जब उसने मेरा नाडा खोला, अंदर की नाप लेने के लिए तो मेरा हाथ अपने आप चला गया. मैने उसके पाजामे का नाडा खोल दिया और उसका मोटा सख़्त... बाहर आ गया और उसके बाद तो उसने फिर मुझे वही...कपड़ों के ढेर पे लिटा के.."

" कैसा था लंड उसका."

" जबरदस्त भाभी, लेकिन उसका सुपाडा तो.... एकदम अलग, उस पे कोई चमड़ा नही था और उसका रंग भी गुलाबी नही था. धूसर. लगभग उसके लंड जैसा ही, और इतना सख़्त कि..उसे देख के ही भाभी मेरा क्ंट्रोल अपने उपर से एकदम ख़तम हो गया. झुक के. मैने उसे पकड़ कर चूम लिया. इतना मोटा था कि मेरे मूह मे क्या घुसता, लेकिन मेरे होंठ अपने आप...उसे चूमने चाटने लगे..एक अलग ढंग का , जैसा अपने बताया था ना मेरी जीभ बिना कुछ सोचे समझे उसके सुपाडे के पीछे वाले हिस्से पे चाटने लगी. थूक लगा लगा के एक दम गीला कर दिया..बहोत ही कड़ा, बिना चमड़े के एकदम अलग ..."

" उन लोगों के यहा बचपन मे ही बच्चे के लंड से आगे वाला चमड़ा काट देते है इसे, ख़तना कहते है. " उसकी बात काट के मैने, समझाया .

पर वो चालू थी, " भाभी, उसने मुझे फिर लिटा के वही..बहोत रगड़ा मेरी चूत पे..और मैने भी, जैसा अपने समझाया था ना, टाँगे खूब पूरी ताक़त से फैला दी थी.एकदम हवा मे उठा के...और जब उसने चुचि पकड़ के पेला ना, तो सच बताऊ भाभी, मेरी तो जान निकल गयी...आँख के सामने तारे नाच गये..उसका सुपाडा जब घुसा ना लगा किसी ने पूरा मुक्का मेरी चूत मे पेल दिया हो. रगड़ते घिसटते..बस भाभी बता नही सकती, मैं तड़प रही थी, फदफडा रही थी लेकिन उस बेरहम ने. शुरू से ही फूल स्पीड ...जल्दी उस को भी थी और मुझे भी. हचक हचक रगड़ के चोद रहा था बिना एक मिनट भी रुके, स्पीड धीमी किए. लेकिन आधे घंटे से ज़्यादे ही चोद के झाड़ा और मैं तो दो तीन बार झाड़ चुकी थी तब तक." किस्सा सुनाते सुनाते वो फिर गरम हो गयी थी.

मैं भी उपर से प्यार से अपनी ननद के मम्मे सहला रही थी. मम्मे दबाते हुए मैने पूछा, " फिर आगे क्या हुआ, बोल ना."

" अरे भाभी मैं शायद तब भी बच के ..लेकिन वो पाजामा पहन ही रहा था कि उसके सुपाडे को देख के मेरा मन नही माना. मैने ललचा के उसकी एक चुम्मि ले ली. अब बस ..वो उसे मेरे मूह मे घुसेडने लगा. ये कहानी आप राजशर्मा स्टॉरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं मैने मूह नही खोला तो उसने मेरी नाक कस के बंद कर दी और जैसे ही मैने साँस के लिए मूह खोला, उसने मेरे बाल पकड़ के कस के घुसेड दिया. उस समय तो चुदाई के बाद तो वो थोड़ा ढीला सा था, चुदाई के जस्ट बाद, लेकिन मूह की गर्मी पा के तो वो ऐसे फूलने लगा.
 


लेकिन मैं भी, भाभी. मैं उसके सुपाडे को कस के चूसने लगी, नीचे से जीभ से चाट रही थी. डिल्डो पे अपने जैसे प्रैक्टिस करवाई थी ना ..थोड़ी ही देर मे मुझे लग रहा था मेरा गाल बर्स्ट कर जाएगा इत्ता मोटा हो गया. लेकिन मेरा सर पकड़ के वो पेलता ही रहा. पूरे हलक तक घोंटा के ही, हलक पे मुझे उसके सुपाडे की चोट लग रही थी..करीब आधा लंड तो उसने फोर्स करके चुसा ही दिया था.कुछ देर बाद उसने निकाला और मुझे अपनी मशीन के सहारे निहुरा दिया और फिर उसी तरह ऐसे कस कस के चोदा और अबकी तो भाभी और देर तक...मैं अपनी टाँगे कस के फैलाए हुए थी लेकिन हर धक्का...बहोत देर तक बिना रुके चोदता रहा और जब झाड़ा तो मैं उठ नही पा रही थी.किसी तरह कपड़ा पहना और वापस आई. पैसे उसने मेरे सीने के बीच मे वापस डाल दिए. अभी तक भाभी बस उसका मोटा सुपाडा मेरी आँख के सामने,.."


" अरे पठान का लंड है कोई मामूली चीज़ नही है. देख , उस का कारण है. जो तुम सुपाडे के रंग की बात कर रही हो ना..तो सुपाडे के उपर चमड़ा ना होने से वो रगड़ खा खा के वैसा हो जाता है. और इस का एक बहोत बड़ा फ़ायदा ये होता है कि बचपन से ही रगड़ खा खा के वो डाइसएम्सेटेज हो जाता है. और इसलिए चुदाई मे रगड़ खा के वो जल्दी नही झड़ता.ये कहानी आप राजशर्मा स्टॉरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं कयि स्प्रे भी आते है जैसे क्लाइमेक्स, वो सुपाडे को डिसेमटिसेज़ ही करते है, जिससे मर्द जल्दी ना झडे पर उनके साथ तो नेचुरल दिसेंसीतायजेशन हो जाता है." मैने उसे समझाया और हंस के बोली, " इसी लिए मेरी ननद रानी हिन्दुस्तान की ज़्यादातर लड़किया ख़ान की दीवानी होती है, शाहरुख ख़ान, सलमान ख़ान, फ़रदीन ख़ान और पहले के जमाने मे, फ़िरोज़ ख़ान, संजय ख़ान..और तूने भी तो अपने कमरे मे शोहेब अख़्तर का पोस्टर लगा रखा है. तो इस का मतलब है मन ही मन तू भी..किसी की. क्यों बोल है कोई."

" धत्त भाभी..." शर्मा के वो हंस दी. कुछ देर रुक के बोली," लेकिन भाभी आपको इतना सब कैसे मालूम है कही आपने किसी .."

" एकदम चुदाई के मामले मे मैं एकदम धर्म निरपेक्षह हू, मैने कित्ति बार..सच मे उसका मज़ा ही अलग है, अरी बुद्धू, वैरायटी इज द स्पाइस आफ लाइफ. और वैसे मालूम है तेरे भैया भी..हनीमून मे तो वो हरदम चालू ही रहते थे..इसलिए उनका सुपाडा भी हरदम खुला ही रहता था और पैंट से रगड़ रगड़ खा खा के...तो तू भी, जब भी मौका मिले छोड़ना नही." उसके गाल को पिंच करके मैं बोली.

" अरे भाभी मैं ही बुद्धू हू. मेरी सहेली है ना साइदा...उसका भाई अरमान, उससे तीन चार साल बड़ा, अलीगढ़ मे पढ़ता है...टेन्निस चॅंपियन है यूनिवर्सिटी का, स्विम्मिंग मे भी. बॉडी बिल्डिंग करता है. बड़ा हॅंडसम है. मेरे पीछे पड़ा है कस के. अभी जब छुट्टियों मे आया था ना तो, उसका बस चलता तो...और वो साइदा भी.खुल के उकसाती रहती है उसको..."

" क्यों साइदा फँसी है क्या उससे.."

"अरे नही भाभी. वो बिचारी बड़ी सीधी है, उस तरह की लड़की नही है. वो तो मेरे पीछे पड़ी है की... मैं दे दूं उसके भाई को."

" तो तो क्या साइदा का किसी से चक्कर नही है. अब तक कोरी है." मैने और छेड़ा.

" भाभी आप भी. अब इतना भी नही सीधी है वो. क्या नाम है उसका...अरे...अंजुम..अच्छी ख़ासी फँसी है उसके साथ.जबसे चौदह की हुई, तबसे चुदवा रही है,उससे. बगल मे ही घर है, जब चाहते है तब....और भाभी, वो उसकी सग़ी...खास बुआ का लड़का है...." हंस के वो बोली.



" ठीक वही रिश्ता....जो तुम्हारा और राजीव का है... क्यों."
हंस के, उसकी चुचि दबा के मैं बोली.



" धत्त भाभी...आप भी "
शर्मा के उसके गाल गुलाब हो गये.



" अरे तू शरमाती क्यों है, अर्जुन और सुभद्रा मे भी तो यही रिश्ता था , तो बोल कब प्रोग्राम है राजीव के साथ"
मैने फिर चिढ़ाया.

" जब आप कहे. आप सिर्फ़ बोलती है दिलवाती कभी नही. आपकी ये ननद पीछे हटने वाली नही" अब वह वापस अपने रंग मे आ गयी.

" और ये दोने मे इमरति. ये कहाँ से लाई." हँसते हँसते वो दुहरी हो गयी.

" अरे भाभी, जब बाबी टेलर्स से निकली तो रास्ते मे कल्लू हलवाई की दुकान पड़ती है ना. वही गरमागर्म इमरतियाँ बन रही थी. दुकान पे उस का लड़का नंदू बैठा था. आज कल उस को हमारे स्कूल की कैंटीन का ठेका मिल गया है, और वो वही बैठता है. मुझे देख के, उसने बुला के इमारती खिलाई भी और ये दी. जब मैं पैसा देने लगी तो बोला कि अरे तुमसे मैं पैसा थोड़ी लूँगा मुझे तो..और हंस के मैने बोला की अभी इंतेजार करो...."

" अरे बिचारे का दिल तोड़ दिया तुमने,.." इमारती खाती मैं बोली.

" नही भाभी...मैने मना थोड़े किया बिचारे को. बस इंतेजार करने को बोला है वो भी इमारती खाते खाते हंस के बोली.

" अच्छ चल हाथ मूह धो के किचन मे आ जा. खाना लगवाने मे मेरी मदद कर. तेरे भैया आते ही होंगे." खाना लगवाते हुए उसने फिर कहा कि कल के प्रोग्राम का क्या होगा.

जान बुझ के मैने पूछा, " कौन सा प्रोग्राम.."

" अरे भाभी वही नीरज के साथ. फार्म हाउस जाने का कुछ तो रास्ता निकालो ना भाभी. प्लीज़."

" अच्छा चल, तू भी क्या याद करेगी. मैने ये सोचा है कि एक मेरी सहेली है. उसके पीछे ये बहोत दिनों से पड़े है. यही रहते है वो लोग. आज मैने उस से बात कर ली है, कल एक रिज़ॉर्ट मे मिलने के लिए...जब वो आएँगे तो मैं उनसे बात कर लूँगी. वो तो तुरंत राज़ी हो जाएँगे . तुम्हे तो कतई वो नही ले चलना चाहेंगे पर उपर उपर पूछेंगे. तो तू कह देना कि तेरा टेस्ट है तुझे पढ़ना है इसलिए तू नही चल पाएगी. हाँ और जो वो तेरी सहेली है ना, जो उस दिन आई थी..

" दिया..जिसकी भाभी की डेलिवरी.."

" हाँ हाँ वही...तो तू ये भी कह देना कि तू बीच मे हो सकता है दिया के यहाँ जाय, जॉइंट स्टडी के लिए...तो मैं तुझे ड्यूप्लिकेट चाभी दे दूँगी."

" पर भाभी, आपकी सहेली तो शादीशुदा होगी..ना" वो बोली.



" अरे यार तुझे आम खाने से मतलब है या ..कल तू नीरज के साथ दिन भर उसके फार्म हाउस पे मस्ती करना ना..अच्छा चल बताती हू. ये ..स्वापिंग के चक्कर मे थे तो वो ...दोनो....अब मान गये है."


" स्वापिंग ..मतलब भाभी.."

" मतलब कि मैं उसके हसबेंड के साथ और वो मेरी सहेली राजीव के साथ...या दोनो मर्द मिल के मेरे साथ या ..उसके साथ. अच्छा चल राजीव आ गये है जा के दरवाजा खोल."
 


अगले दिन वैसे ही हुआ. मैं और राजीव सुबह ही रिसार्ट के लिए चल दिए. चलने के पहले मैने गुड्डी के गाल पे कस के पिंच करके बेस्ट आफ लक बोल दिया. उसके लिए मैने एक पेस्तल कलर की टी शर्ट और लो हिप हागिंग जींस निकाल के रख दी थी और 'सब कुछ' समझा भी दिया.

जब शाम को हम लोग लौटे तो तब तक वो घर नही लौटी थी. वो कुछ देर बाद आई तो मैने राजीव को सुनाते हुए कहा, हे दिया के यहाँ से आ रही है
.

" भाभी, आप को कैसे पता चला कि मैं दिया के यहाँ से आ रही हू" मुझ से धीरे से वो बोली.

" अरे .वो तो मैने ऐसे ही तेरे भैया को सुनाने के लिए कह दिया था. क्या कहती . कि किससे चुदवा के आ रही है..अच्छा चल किचन मे चल के बाते करते है. ये कहानी आप राजशर्मा स्टॉरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं आज मैं बाजार से काफ़ी कुछ पैक करवा के ले आई हू. तेरे भैया भूखे होंगे." और हम दोनों किचन मे पहुँच गये. चिकेन टिक्का और कबाब ओवेन मे रख दिए गरम होने को...और मैं मटन दो प्याजा का पॅकेट खोल रही थी, कि उसने कहा,

" भाभी पहले आप बताइए आप और भैया ने कैसे मज़ा लिया, स्वापिंग का. और हाँ मैं दिया के यहाँ से ही आ रही थी."



" अच्छा चल, बताती हू. अंजलि, मेरी सहेली, उस के हज़्बेंड को मैने देखा नही था पहले. उस की शादी मेरे शादी के एक साल के बाद हुई और हम लोग जा नही पाए थे. हाँ अंजलि ने बताया ज़रूर था उसके बारे मे. और जब मैने देखा तो...खूब गोरा चिट्टा.. लेकिन थोड़ा लड़कियों जैसा, एकदम नमकीन..चिकना, दुबला पतला. और उसे देख के एक बार तो वो चौंके ,लेकिन जैसे पुरानी पहचान हो, खुश हो के बोले
, " अरे भोन्सडी के...तू..साले..इतने दिनों के बाद..कहाँ मरा रहा था इतने

दिनों से और मेरी साली को फाँस लिया...साले."
और उसे कस के बाहों मे भर लिया.



" भाभी...भैया..ऐसे बोलते है वो भी पब्लिकलि.."
गुड्डी चकित होके बोली.

" अरे यार तूने मर्दों को सुना नही कैसे कैसे बोलते है आपस मे. हम लोगों से भी खुल के." मैने बात आगे बढ़ाई. " सुन तो टोक मत..और वो धीरे से उनके कान मे बोला, " लेकिन गुरु, तूने भी बड़ा मस्त माल फँसा है..पटाखा है..एकदम ..आगे पीछे दोनों ओर क्या उभार है, एल. पी है क्या..दोनों ओर. मिला ना भाभी से.."

" एकदम..एल पी है और वो भी 90 मिनट वाली. दोनों ओर चलती है." और मेरी ओर मूड के बोले,

" हे ये सुनील है. मेरा बचपन का दोस्त और ये तेरी भाभी."

मेरा माथा तो पहले से ही ठनका था, लेकिन नाम सुनके पक्का हो गया कि ये वही है.

" कौन भाभी" गुड्डी ने पूछा.

" अरे वही मैने बताया ना था तुझे, जिसके साथ उनकी चलती थी. सबसे पहले जब वो 8 मे पढ़ते थे, उसकी गान्ड मारी थी और फिर 4 साल तक...उसी से मेरी सहेली अंजलि की शादी हो गयी थी."

" अरे भाभी जी कहाँ खो गयी, ये देवर कब से बेचैन था आपसे मिलने के लिए. एकदम पास आ के वो हंस के बोला.

" अरे आप से तो दोहरा रिश्ता है. देवर का भी और मेरी प्यारी सहेली के पति के नाते, जीजा का भी." मैने उसे कस के पकड़ के कहा.

" तब तो मैं दोनों ओर से लूँगा." मेरे नितंबो को कसी शलवार के उपर से सहलाता धीरे से वो बोला.

" एकदम...और देवर का तो अर्थ ही होता है, द्वितीयो वर..इसलिए तो मैं आई हू. हाँ और देवर का एक और अर्थ होता है, जो भाभी से बार बार माँगे, दे बुर, दे बुर."



" तो...दो ना.."
वो अपने सीने से मेरे जोबन कस के दबा के बोला.

" अरे इसी लिए तो आई हू , लो ना जी भर के कोई कसर मत छोड़ना." जींस के उपर से उसके बुर्ज को दबा के,खुल के सहलाते. मैं मुस्करा के बोली.

" हे बहनचोद.. भोन्सडी के. कहाँ छिपा के रखा है मेरी साली को." राजीव ने बेताब होके उससे पूछा.

" अरे आ गयी मैं..जीजू." और अंजलि ने आ के सीधे उन्हे अपनी गोरी बाहों मे कस के भर लिया.

गोरी चिट्टि, बॉब कट बाल, टॉप से छलकते उसके मस्त बड़े बड़े मम्मे, कसे कसे त्राउजर को फाडते चूतड़...एकदम पक्की पंजाबी कुड़ी लग रही थी.
 


" क्या भूल गये साली की गाली को.." वो बोली. मेरी शादी मे सबसे तगड़ी गालिया खुल के उसी ने सुनाई थी.

" और तू भूल गयी कोहबर का वादा, अपने तले मे... जीजा की तली लेने का." उसके मम्मे कस के दबोच के वो बोले.

" अरे जीजू इसी लिए तो आई हू. बड़े दिन से इंतेजार था, बड़ी तारीफ सुनी थी इस तली की." और वो भी खुल के पैंट के उपर से उनके टेन्पोल को दबा के बोली.

हम दोनों पुराने फ़्रेंड है..हंस के सुनील बोला. मेरे मूह से निकलते निकलते रह गया, बचपन के.

कमरे मे पहुँच के तय हुआ कि पहले वॉटर पार्क का मज़ा लेंगे उसके बाद खाना और फिर 'प्रोग्राम'. वो दोनों बेचारे बेताब थे लेकिन हम जानते थे कि अगर 'वो' शुरू हो गया तो रिसार्ट का मज़ा धरा रह जाएगा.ड्रिंक्स के लिए भी दोनो बेताब थे. कमरे मे व्हिस्की की दो दो बोटले रखी थी पर अंजलि ने सॉफ मना कर दिया दिया कि दारू के बाद पानी मे जाना ख़तरे से खाली नही है. ये कहानी आप राजशर्मा स्टॉरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं राजीव बोले यार फिर अपना वो स्पेशल सिगरेट ही पिलाओ. सुनील ने मूड के सिगरेट बना के सुलगाई और उसको भी दी. जैसे ही दोनों ने सूतका लगाया, मुझे कुछ शक हुआ. दो चार कश के बाद मैने अंजलि को इशारा किया और उसने राजीव के होंठों से और मैने सुनील से सिगरेट छीन ली. वो बेचारे बाहर चले गये हमे गालिया देते, लॉकर रूम से कपड़ा ले के चेंज करने.

जैसे हम दोनों ने सुट्टा लगाया एकदम क्लियर हो गया , इसमे है कुछ. सीधे हमारे निपल खड़े हो गये और चूत मस्त गीली. लेकिन हम दोनो ने पूरी पी के ख़तम की. कॉलेज के दिन याद आ गये. अंजलि हम दोनो के लिए टू पीस लैयकरा की, बिकिनी लाई थी और जान बुझ के थोड़ी छोटी. वॉटर पार्क का ये नियम था कि वहाँ ड्रेस उन्ही से लेनी पड़ती थी. चुचिया खुल के छलक रही थी. हम दोनों ने सरोंग पहना और बाहर आ गये. वहाँ दोनो लोग, छोटे से स्विम्मिंग ट्रंक मे थे जिसमे से उनके बुर्ज सॉफ दिख रहे थे.

सबसे पहले हम लोग टनेल वॉटर राइड मे गये. इसमे एक लंबी टनेल स्लाइड थी जिसमे खूब तेज़ी से पानी बह रहा था और जगह जगह, तेज शावर गिर रहे थे. अंजलि को राजीव ने कस के अपनी गोद मे चिपका के बैठा रखा था और उसके

हाथ उसके उभारों से खेल रहे थे. अंजलि बेचारी टनेल स्लाइड मे जाने से घबरा रही थी कि, सुनील ने इशारा किया और मैने दोनों को हल्के से धक्का दे दिया. वे स्लाइड पे फिसलने लगे. मैं भी सुनील के गोद मे ठीक उनके पीछे थी.उसका का हाथ भी मेरी बिकिनी ब्रा मे था. थोड़ी ही देर मे हम दोनो एक दम गीले हो गये . स्लाइड मे बीच मे जहाँ तेज धार थी,

मैने अपनी जांघे फैला दी और धार सीधे मेरी..जांघों के बीच. सुनील भी कम शरारती नही था. उसने मेरी पैंटी ज़रा सी सरका दी तो धार सीधे चूत पे. हम लोग हो हो कर के, फिसलते जा रहे, मज़ा ले रहे थे और सुनील की उंगलिया...

अंजलि ने मुझे बताया था कि सुनील पक्का चूत चटोरा है और उसकी उंगलिया भी...वो चाहे तो घंटे भर तपता रहे और चाहे तो 5 मिनट मे रख कर दे. स्लाइड से निकल के हम एक फाल मे गये और और उसके बाद एक वॉटर कैनन पे..जहाँ पानी की तेज धार पाइप से आप डाल सकते है. मैने अंजलि की जाँघो को सेंटर करके धार सीधे उसके सेंटर पे डाली. उसकी थॉंग जैसी पैंटी वैसे ही उसकी चिकनी चूत मे चिपकीहुई थी. ये कहानी आप राजशर्मा स्टॉरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं अब उसके निचले लिप्स भी सॉफ दिख रहे थे. वो बचने के लिए पूल मे कूद गयी जहाँ सारी वॉटर स्लाइड मिलती थी और जहाँ से हमने शुरू किया था. राजीव ने उसका पीछा किया तो उसने राजीव को दिखा के अपनी ब्रा उतार के दूर फेंक दी और पानी से बाहर निकल अपने पानी से भीगे कड़े रस कलश दिखा के उसे ललचा रही थी. जैसे ही राजीव उसकी ओर बढ़े, वो तैर के निकल भागी, जल की मछली थी वो. पर राजीव भी कम नही थे. जल्द ही जहाँ शैलो एंड था, वहाँ उन्होने उसे पकड़ लिया.

 
सुनील की गोद मे बैठी मैं उन लोगों की जल क्रीड़ा देख रही थी और हिला हिला के अपने चूतड़ उसके खड़े शिश्न पे रगड़ रही थी. सुनील भी, उसका एक हाथ मेरी ब्रा मे था और दूसरा पैंटी मे..जाड़े के दिन होने से वॉटर पार्क पूरा खाली था और हम लोग खुल के मज़ा ले रहे थे. जब मेरी निगाह अंजलि की ओर पड़ी तो मैं मुस्काराए बिना नही रह सकी. तेरे भैया ने उसे कस के दबोच लिया . ये कहानी आप राजशर्मा स्टॉरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं उनके हाथ कस के उसके रसीले जोबन का रस ले रहे थे, मसल कर रगड़ कर..और जब मैने पूल के नीले पानी के अंदर झाँका तो...अंजलि की दोनो टाँगे फैली हुई थी और राजीव उसके बीच मे..जैसे कोई मॅसिव लंड की पिक्चर्स हो ना वैसे ही...खूब मोटा कड़ा और अंजलि की पतली कमर पकड़ के पानी के अंदर ही उसने पूरी ताक़त लगा, हचक से पेल दिया. बेचारी अंजलि. मेरे सामने बिकिनी पहनने के पहले ही उसने, दो दो उंगलियो से अपनी बुर मे स्पेशल वॉटर प्रूफ लूब्रिकॅंट जम के लगाया था लेकिन..फिर भी उसकी चीख निकल गयी. उसकी पतली कमर पकड़ के उठा के, वो अब उसे हचक हचक के पानी के अंदर चोद रहे थे. थोन्ग उसकी, उन्होने सरका दी थी.. इधर सुनील ने भी मेरा बिकनी टॉप हटा के मुझे टॉप लेस कर दिया था. उसके एक हाथ की उंगलिया मेरे खड़े निपल रोल कर रही थी और दूसरे हाथ की दो मोटी मोटी उंगलियाँ, मेरी चूत के अंदर घुस के चूत मंथन कर रही थी.

अंजलि ने सच ही कहा था कि उसकी उंगलियों मे जादू है. और मैं भी अपने रसीले चूतड़ उसके ट्रंक के अंदर तने लंड पे रगड़ रही थी और जब मैने अंजलि की ओर देखा तो वो दोनों जबर्जस्त चुदाई मे मस्त थे. राजीव का मोटा मूसल जैसा लंड उसकी कसी चूत मे सतसट जा रहा था. अंजलि की खुल के सिसकिया निकल रही थी . वो अपने दोनो हाथ से पूल मे लगे सपोर्ट को कस के पकड़े थी और अपने मस्त चूतड़ से कस कस के धक्के दे चुदाई का मज़ा लूट रही थी.ये कहानी आप राजशर्मा स्टॉरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं और जो हालत उन दोनो की थी, लग रहा था वो थोड़ी देर मे ही झड़ने के कगार पे पहुँच जाएँगे. अंजलि की चुचिया पानी के बाहर थी और वो उसे कस के निचोड़ रहे थेऔर यहाँ यही हाल मेरी चुचियों का सुनील कर रहा था. मेरी जांघे खुल के फैली थी जहा न सिर्फ़ सुनील अब उसे खुल के अपनी दो मोटी उंगलियों से सतसट चोद रहा था, बल्कि अपने एक्सपर्ट अंगूठे से मेरे क्लिट को भी कस के रगड़ रहा था.

तभी वहाँ एक वेट्रेस आई, ड्रिंक सर्व करने. मैने उससे ड्रिंक ले लिया मैं खुद भी पी रही थी और अपने हाथों से सुनील को भी पिला रही थी क्यों कि उसके तो दोनो हाथ व्यस्त थे. लेकिन मुझे एक शरारत सूझी. वहाँ पूल मे जगह जगह पानी की तेज धार गिर रही थी. मैने वेट्रेस से कहा.. और उसने मुस्करा के हामी भरी. थोड़ी ही देर मे पानी की एक मोटी तेज धार घूम के पूरी तेज़ी से राजीव और अंजलि के बीच गिरने लगी और उस का फोर्स इतना था कि.. अंजलि और राजीव अलग हो गये.. और फिर तो तैर के अंजलि किनारे जा लगी और पूल के बाहर. एक तौलिए से अपने को

सुखाने और छुपाने की बेकार कोशिश करती हुई.

सुनील ने राजीव को छेड़ा, " क्यों बॉस, के.एल.पी.डी. कर दिया.... साली ने."

" के.एल.पी.डी. क्या होता है, भाभी.." बड़े भोलेपन से गुड्डी ने पूछा.

" अरे इत्ता भी नही जानती...खड़े लंड पे धोखा." प्यार से उसके गाल पे चपत लगा के बात मैने आगे बढ़ाई."

अंजलि ने बात सम्हाली. वो बोली कि आगे का कम अब कमरे मे और राजीब को उनका लंड पकड़ के ही कमरे मे खींच ले गयी और पीछे पीछे मैं और सुनील. वो दोनो इतने दुष्ट कि हम दोनों को टॉप लेस ही रहना पड़ा.अंजलि ने ड्रिंक बनाया और हम सबने साथ साथ पीना शुरू किया. राजीव अपने खड़े मोटे लंड की ओर इशारा कर के बोले, साली..इस का क्या होगा. अभी लीजिए जीजू..और उनकी टाँगों के बीच बैठ के पहले तो उनके सुपाडे को चूमा चाटा फिर गप्प से अपने मूह मे ले लिया और कस कस के चूसने लगी. उधर सुनील की गोद मे बैठ के ड्रिंक्स बना रही थी और सुनील कस कस के मेरी चुचि चूस रहा था.ये कहानी आप राजशर्मा स्टॉरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं मुझे एक आइडिया आया. मैने ग्लास से व्हिस्की अपने मम्मों पे डालनी शुरू की और फिर दोनों को बारी बारी से पिलाना शुरू किया. पूरा मस्ती का आलम था. उधर अंजलि ने भी दो आइस क्यूब अपने मूह मे लिए और थोड़ी व्हिस्की डाल के चुभालना शुरू किया और फिर एक झटके मे....राजीव का लंड गप्प कर लिया. एक और आइस क्यूब ले के वो उसके बॉल्स पे लगाती रही और ..फिर पीछे. मम्मों के बाद अपनी आर्म्पाइट से लगा के शराब दोनों को पिलाने लगी.

सुनील व्हिस्की से सराबोर मेरी चुचिया चाट रहा था काट रहा था. मूह से लंड को निकाल के थोड़ी देर अपने गुलाबी गालों पे अंजलि सहलाती रही. फिर राजीव से बोली..क्यों बहन चोद आ रहा है मज़ा चुसवाने का तेरा वो माल..क्या नाम था यार उनकी उस बहन का जो शादी मे बहोत चूतड़ मटका रही थी. मैं मुस्करा के बोली, गुड्डी. तो फिर वो चालू हो गयी..हाँ जीजू तो तेरी वो बहना भी चुसती है ऐसे मस्त. अबतक अब तक तो उस पे हाथ सॉफ कर के छीनाल बना दिया होगा.

कंटिन्यूड…



भाग ९ समाप्त
 
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