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Nanad ki training--ननद की ट्रैनिंग compleet

बात बदलने केलिए उसने पूछा, " भाभी आप तो कहती है कि आप भैया को कभी उपवास नही कराती इसलिए कल

रुकी नही पर आज"
उसका हाथ पकड़ के मैं अपनी चूत मे लेगाई और उसकी एक उंगली अपनी चूत मे घुसेड कर पूछा,

" कुछ गीला गीला लग रहा है क्या

"हाँ भाभी पर""

"ये तुम्हारे भैया का प्रसाद है, गाने के बीच मे मैं बाथ रूम गयी थी, ना, वही पीछे पीछे वो भी आ गये थे बस वही हम लोगों ने कबड्डी खेल ली." और मैने भी अब अपने दूसरे हाथ से उसकी चूत दबोच ली और कस के सहलाने लगी. अच्छी तरह गीली थी वो थोड़ी देर सहलाने मसलने के बाद मैने हल्के से उसकी बुर के पपोतोँ को फैलाकर, हल्के से अपनी उंगली घुसा दी और आगे पीछे करने लगी. अब मेरी चूंची कस के उसकी किशोर चूंची को मसल रही थी और मेरी उंगली चूत मंथन कर रही थी. दूसरे हाथ से मैने उसके चूतड़ कस कर दबोच रखे थे.

" भाभी उंगली प्लीज़" वो बोली.

" अरे तुमने जब मेरी चूत मे उंगली की तो नही सोचो मुझे तुम्हारे जीजू का ख़याल है वरना दो दो उंगली पूरी तरह से घुसेड कर अभी तुम्हारी ये कुँवारी चूत फाड़ देती पर ये मज़ा उनका है एक बार कल तुम्हारी चूत का कल उदघाटन हो जाए तो देखो इसके अंदर क्या क्या डालती हू"

" और क्या क्या भाभी" शरमाते हुए वो बोली.

" अरे ननद रानी ये चूत सब कुछ घोंटेगी उंगली कॅंडल, मोटे बैंगन, और उंगली क्या पूरा हाथ, अरे जिस चूत से इत्ता बड़ा बच्चा निकल जाता है, उसकी कैपीसीटी मे कोई कमी नही होती. अरे देखना मैं तुम्हे, मोमबत्ती और बैंगन घोंटने की इतनी अच्छी ट्रैनिंग दूँगी कि बस." उसकी कुँवारी चूत मे उंगली अंदर बाहर करते मैं बोली. अब उसको खुल कर अच्छा लग रहा था

और वह सिसकिया ले रही थी. मैने उसकी उंगली को भी अपनी बुर मे अंदरबाहर करने को कहा.

"ओह ओहपर भाभी पूरा हाथ"

" अरे, मैं आँखों देखी कह रही हू. दो साल पहले होली मे मेरी अम्मा और चाची ने मिलकर बुआ को न सिर्फ़ पूरी तरह नंगा करके पटक के रंग लगाया बल्कि पहले दो फिर धीरे धीरे कर के, सारी उंगलियाँ डाल दी और फिर मुट्ठी बना के खूब रगड़ रगड़ के चोदा." मैं अपनी उंगली अब गोल गोल उसकी कुँवारी मखमली कसी कसी चूत मे घुमा रही थी और अंगूठे से कस के क्लिट भी रगड़ रही थी. गुड्डी को अब पूरा मज़ा आ रहा था और वह नीचे से अपने चूतड़ उठा उठा के उंगली से चुदने का मज़ा लेरही थी और मेरी बुर मे भी उंगली अंदर बाहर कर रही थी. मैने धीरे से अपनी बुर उसकी उंगली पर भींच ली. मेरा दूसरा हाथ अब कस के गुड्डी की चूंची रगड़ मसल रहा था.

" हे भाभी ये क्या कर रही होमेरी उंगली"

" हाँ सीख ले ऐसे भींचना , राजीव को बहुत मज़ा आता है, कयि बार तो जब मैं उपर चढ़ कर चोदति हू ना तो बहुत देर तक लंड ऐसे ही बुर मे भींचती रहती हू. जैसे पेशाब रोकने केलिए चूत सिकॉड़ते है ना बिल्कुल वैसे ही, रोज रोज प्रैक्टिस करोगी ना तो कितना भी चुदवाओ सुबह शाम चूत वैसे ही कसी बनी रहेगी और चुदाई के समय करोगी तो लंड को जो मज़ा आएगा वो अलग" अब मेरी ननद झड़ने के कगार पे पहुँच रही थी पर मैं उससे थोड़ा अभी और खेलना चाहती थी, इसलिए, मैने गप्प से उंगली बाहर निकाल ली.

"हे भाभी" वो बोली.

"अरे रुक ना अब मैं तुम्हे बताती हू कि तुम्हारे भैया मुझे कैसे रोज चोदते है, आज तेरे कुंवारे पन की आख़िरी रात है, आज ज़रा इस रसीले कुंवारे जिस्म का मज़ा मैं लेलू." अब मैं सीधे उसके उपर आ गयी और एक चूंची मूह मे और दूसरी हाथ मे लेके मज़ा लेने लगी. मेरी बुर उसकी चूत पे धीरे धीरे घिस्सा मार रही थी. थोड़ी ही देर मे वह भी नीचे से धक्का मारने लगी. उसका रसीला जोबन दबाते हुए मैने कहा, " तुम्हे मालूम है, तुम्हारे भैया का तेरे बारे मे सोच कर खड़ा हो जाता है, जब वह दो तीन बार चोद लेते है ना, तो उसके बाद भी अगर मैं तुम्हारा नाम लेके उन्हे छेड़ती हू तो उनका मूसल झट से खड़ा हो जाता है, और फिर तो वो ऐसा चोदते है ऐसे चोदते है" और मैने कस कस के अपनी चूत से उसकी चूत रगड़नी शुरू कर दी और एक हाथ से उसकी क्लित छेड़ने लगी. वो भी अब खूब खुल के मज़ा ले रही थी.
 


" हे बता ना .तुम्हारे भैया से कुछ चक्कर था क्या तुम्हारा"
उसके कड़े निपल कस के पिंच करते मैने पूछा.

" नही नही भाभी ऐसा कुछ नही"

"इसका मतलब कुछ तो था."मैने अबकी कस के उसके निपल मरोड़ दिए. मेरी

एक उंगली उसकी चूत मे और दूसरी क्लिट पे कस के रगड़ाई कर रही थी.

" उई भाभी हाँ..नाहा, बस मैं उनको अच्छी लगती थी और वो मुझ को." मस्ती मे वो बोली.

" अरे तो चुदवा क्यों नही लेती , तुझे सौतन बनाने मे मुझे कोई एतराज नही है, चल ये सोच कि तेरे भैया तुझे कस कस के चोद रहे है तेरी चुचिया मसल रहे है." और अब मैने उसे रगड़ रगड़ के चोदना शुरू कर दिया, मेरी चूत गोल गोल खूब कस के घिस्सा मार रही थी, उंगली चूत के अंदर बाहर हो रही थी और क्लिट भी रगड़ी जा रही थी. वो भी अब पूरी तरह से चूतड़ उछाल रही थी. और अबकी जब उसने झड़ना शुरू किया तो मैने उसे रोका नही. देर तक वो झड़ती रही.

जब उसकी आँखे खुली तो मेने उसके होंठों को चूम के पूछा , " हे बोल जब झाड़ रही थी तो किसके बारे मे सोच रही थी अपने भैया के लंड के बारे मे ना"

" धत्त भाभी" शरमा कर के उसने कबुल कर लिया. उससे लेकिन रहा नही गया और उसने पूछ ही लिया,

" भाभी शाम को जो अल्पना उनके बारे मे कह रही थी वो सच था या..ऐसे ही"

" अरे बन्नो पता नही पर साइज़ तो वो ठीक ही बता रही थी, पूरे बित्ते भर का है उनका और मोटा भी खूब है और उनसे चुदवाने मे मज़ा भी खूब आता है. और वो बाहर की लड़की आज दिन मे दो बार उससे चुदा गयी और इस समय होटेल मे चुदवा रही होगी और तुम घर का माल होकरऔर तुम्हारा तो पुराना चक्कर भी था अरे कल से तुम राजीव को खुल के लाइन मारो और फिर देखना जीजा से कल चुदवा लो लेकिन जीजा तो दो दिन मे चले जाएँगे तुम ज़रा सा लिफ्ट देदो फिर देखना तुम्हारे कैसे राजीव पीछे पीछे फिरते है." और ये कह के मैने कस के उसके गुलाबी होंठ चूम लिए और फिर मेरे शरारती होंठ, पहले तो उसकी किशोर चूंचियों को कस कस के चुसते रहे रस लेते रहे और फिर उसकी गोरी गोरी जाँघो के बीच, मैने हल्के से उसकी कुँवारी चूत के पपोटो को चूम लिया. जब तक वो सम्हल्ती मैने कस के उसकी चूत को अपने होंठो के बीच दबा के चूसना शुरू कर दिया जैसे कोई संतरे की पतली फांकों को चुसते हैं, बहुत रस था उसमे. मैने अपनी जीभ भी उसकी चूत के अंदर घुसेड के कस कस के ज़ुबान से चोदना शुरू कर दिया.
 


" उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह , .उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..हाँ.हाँ.बहुत मज़ा आ रहा है भाभी.
" वह तड़प रही थी मचल

रही थी. और जब वह फिर झड़ने के कगार पे पहुच गयी तो मैने होंठ हटा लिए."

" भाभी बहोत अच्छा लग रहा था." वो बोली.

" हाँ ननद रानी, चूत और लंड दोनो चूसने और चुसवाने मे बड़ा मज़ा आता है'

"छी: भाभी लंड भी, उससे तो"

" अरे एक बार चूस लोगि ना तो फिर छोड़ॉगी नही कुछ दिन पहले मैं अपने कजिन की शादी मे मौसी के यहाँ गयी थी. वहाँ एक दिन मेरे जीजा ने मुझे पहले तो तीन बार कस कस के चोदा और फिर कुतिया बना के मेरी गान्ड कस के मारी. उसके बाद वो गान्ड से निकालने के बाद सीधे वो बाथरूम गये, उन्हे कस के पेशाब आ रही थी. चुपके से पीछे पीछे मैं भी गयी.वह आँखे बंद कर के मूतरहे थे. मैने अपनी चूंचियों से उनकी पीठ पे रगड़ा और मज़े से उनका खुन्टे जैसा खड़ा लंड पकड़ लिया. उन्होने पीछे मूड के मेरी और देखा तो मैं हंस के बोली, " अरे, क्यो शरमा रहे सबसे पहले तो तुम्हारी अम्मा ने पकड़ा होगा तब तो नही शरमाते थे"

" अरे क्या बोलती हो." वो बोले. " अरे और क्या, तुम्हारा सुपाडा खोल के बचपन मे खूब तेल लगाया होगा तभी तो ये नूनी से इतना मोटा लंड बना" और ये कहते हुए मैने उनका सुपाडा खोल दिया. मूत की आख़िरी धार बची होगी तभी मैने आगे जाकर गप्प से उनका पहाड़ी आलू ऐसा मोटा सुपाडा अपने मूह मे भर लिया और लगी चूसने वो लाख मना करते रहे, पर थोड़ी देर मे जीजू को भी मज़ा आने लगा और उन्होने जबरदस्त मेरे मूह की चुदाई की. जब मैने अपनी एक उंगली

उनकी गान्ड मे की तब वो झड़े. और पूरा का पूरा मैने अपने मूह मे लेकर गडप कर लिया. उन्होने मुझ से लाख कहा कि मैं मूह साफ कर लू पर इठला कर मैने मना कर दिया कि इतना अच्छा स्वाद मैं गवाउन्गि नही और हम दोनो ने वैसे ही नाशता किया.

" पर भाभी उसमे तो" अरे कुछ नही थोड़ा सा खारा खारा लगा था, पर उसका भी अपना अलग मज़ा है, घबडा मत अबकी बार मैं पंद्रह दिन के लिए हू तुम्हे हर चीज़ मे ट्रैंड कर दूँगी. पर चल आज तुझे 69 सिखाती हू मैं तुम्हारी चूत चुसुन्गि तू मेरी चूस. और फिर मैं उसके उपर आ गई और अपनी चूत उसके मूह मे दे दी. आधे घंटे तक सिक्स्टी नाइन का मज़ा लेने के बाद हम दोनो साथ साथ झड़े और फिर एक दूसरे से वैसे ही चिपक कर सो गये.

अगला दिन शादी का दिन था, इस लिए, सब लोग सुबह से ही बहोत बिजी थे.देर सुबह राजीव दिखे . मेरा बिना कुछ पूछे ही कहने लगे, " अल्पी को छोड़ के आ रहा हू, कम्मो मिली थी."

" कैसी लगी, मैने कहा था ना, अभी छोटी है अभी उसका चौदहवाँ लगने मे भी दो तीन महीने बचे होंगे." मैं बोली.

" अरे नही, चूंचियों का उठान बहोत मस्त है, छोटी है पर उभरती हुई चूंचियों का अलग मज़ा है, उसके पीरियड अभी शुरू हुए कि नही" कुछ सोच के उन्होने पूछा.

"हाँ, तीन चार महीने हो गये है मुझे मालूम था कि तुम पुछोगे इसलिए मैने पता लगा रखा था." हंस के मैं बोली.

" उसकी झन्टे भी अभी हल्की हल्की बस आना ही शुरू हुई है". राजीव बोले

" अच्छा तो आप झन्टो तक भी पहुँच गये." चिढ़ाते हुए मैं बोली. "ठीक है, होली मे आएँगे ना तो ट्राई कर लेना."मैने जोड़ा.

" अरे बस दो चार दिन पहले उंगली करूँगा उसकी गुलाबी कुँवारी चूत मे और फिर लंड का स्वाद चखा दूँगा, बहोत मस्त माल है." वो बोले.

तभी मैने देखा, मेरी ननद चली आ रही है, टाइट शलवार कुर्ते मे मस्त लग रही थी. दुपट्टा था पर उभार साफ उभर कर सामने आ रहे थे. मैं उसे दिखाते हुए बोली, " अरे इधर देखो क्या मस्त माल आ रहा है."
 


" अरे भाभी, ड्रेस लेने चलना है, भाभी टेलर के यहाँ आप भूल गयी क्या, भैया के चक्कर मे और हाँ भैया, डीजे का क्या हुआ, शाम के लिए.


" अरे डीजे वो तो मैं भूल ही गया , हाँ अभी कुछ करता हू" वो बोले.

मैने देखा तो वो, जैसे मैने समझाया था, अपने उभार, उभार कर खड़ी थी. और नीचे दोनो हाथ लगाकर उसने अपने टेनिस बॉल साइज के कड़े कड़े बुब्स कस के उभार रखे थे और मेरे सैया की आँखे भी उसके दोनो टीन जोबन पर गढ़ी थी.

" अरे मुझे सब मालूम है, नयी नयी साली मिली है ना, इसलिए आप सब भूल गये है." आँख नचाकर बड़ी अदा से वो बोली. तब तक मेरी देवरानी गूंजा आ गई और वह भी उसे छेड़ती, बोली." अरे नये ,माल के आगे पुराने माल को भूलना नही चाहिए."

" अरे ये भी तो नया चिकना माल है, और फिर साली की सहेली होने के नाते, एक तरह से तुम भी तो साली हुई." गुड्डी के गोरे गोरे गाल सहलाते हुए मैं बोली.

" चलिए भाभी आप भी मौका मिलते ही" और अपने मस्त चूतड़ मटकाते मुझे लेके चल दी. मैने पीछे मूड के देखा तो राजीव उसकी रसीली सेक्सी गान्ड निहार रहे थे.

बाहर निकलते ही देखा तो उसका यार खड़ा था. मैने उससे पूछा, " हे, ' चारा' लाई है क्या." सुबह ही मैने एक बहोत हाट हाट प्रेम पत्र उसकी ओर से तैयार किया था और ये तय हुआ था कि वो आज उसको मौका निकाल के दे देगी.

" हाँ भाभी." मुस्करा के वो बोली.

" तू, यही वेट कर, मैं गाड़ी निकाल के आती हू. मैने देखा कि जब वो लड़का उसकी ओर बढ़ा तो वो हिली नही बल्कि दुपट्टा ठीक करने के बहाने अब उसको गले से चिपका लिया और खुल के टाइट कुर्ते से अपने जोबन का नज़ारा अपने यार को दे रही थी. जैसे ही मैं खत ले के पास आई तो वो झुकी और अपना रुमाल और उसमे लिपटा लव लेटर गिरा दिया, और उठाते हुए उसे देख के खुल के मुस्करा दी. जैसे ही वो कर के अंदर बैठी, उसने , एक कंकड़ के साथ, एक लेटर खुली खिड़की से अंदर फेंका. मैं सीधे देखने का बहाना कर रही थी.गुड्डी ने, उस लेटर को उसे दिखा के लिपस्टिक लगे होंठों से चूमा और फिर कुर्ते मे अपने सीने के पास रख लिया.

" हे आज तो तेरा यार चक्कर खा गया." मैने प्यार से उसके गाल पे चिकोटी काटते बोला.

" भाभी आख़िर आप की स्टूडेंट हू." हंस कर वो बोली.
 


थोड़ी देर मे ही हम लोग बॉबी टेलर्स के पास पहुँच गये.

ख़लील ने हम लोगो को देखते ही ड्रेस निकाल के रख दी. जब मैं पैसे देने लगी तो वो मुस्करा के, मेरी ननद को घुरते हुए बोला, " नही भाभी जी आप ने कहा था ना कि शादी मे इस ड्रेस मे आग लगा दे, तो आज ये आग लगा दे तो कल आप पैसा भी दीजिएगा और इनाम भी. भाभी,

कैश या इनाम,


अपने दुपट्टे को सम्हाल्ने के बहाने अपने जोबन का जबरदस्त नज़ारा ख़लील को देते वो बोली."

" फीस कैश मे और इनाम क़ैद मे, ख़लील भाई बिना इनाम लिए छोड़िएगा नही मेरी इस ननद को और आग तो ये लगाएगी ही आपकी बनाई ड्रेस मे." मैं बोली.

" अगर बुरा ना माने तो बोलू आज आप की ननद बाला की लग रही है, आग तो अभी लगा रही है" उसके हुस्न के दीवाने होके ख़लील भाई बोले. उसके पायजामे से उनकी हालत का अहसास हो रहा था. हम दोनो मुस्कराते हुए वहाँ से चल दिए.

रास्ते मे मुझे लगा कि इस के ड्रेस के साथ जंक ज्वेलरी अच्छी लगेगी. पूछने पे उसने बताया कि एक लेडीज़ स्टोर है, वहाँ बहोत अच्छी एक्सेसरिज़ मिलती है लेकिन थोड़ा महेंगा है.

मैने उसके मम्मों को दबा के उसे चिढ़ाया, " अरे ये चेक बुक तो है ना हमारे पास." बाहर से देखने से ही वह बहोत

बड़ी और फेशनेबल दुकान दिखती थी. दुकान मे एक बहोत ही हॅंडसम जवान लड़का बैठा था. पर उसे देखते ही मैं चौंक गयी.

" अरे नीरज ये तुम्हारी दुकान है." नीरज हमारे घर के ठीक बगल वाले घर मे रहता था, और पड़ोस का लड़का होने के नाते देवर भाभी की हमारी छेड़खानी चलती रहती थी.

" नही भाभी, आप लोगो की." बोल वह मुझसे रहा था पर मैं देखरही थी कि उसकी निगाह मेरी किशोर ननद पे गढ़ी थी. मुस्करा के मैं बोली,

"चलो मैं तुम दोनो का परिचय करती हू, ये है मेरी ननद डाली और ये है नीरज. तुम्हारे शहर मे चाँद खिला है और तुम्हे पता ही नही."

" मेरी बदक़िस्मती भाभी, लेकिन आप का बहोत शुक्रिया कि आप ने मुलाकात करवा दी."

मैं देख रही थी की अब उसकी निगाहे, उसके खूब सूरत चेहरे से नीचे आके उसके रसीले उभारों का रस पान कर रही थी

" चलिए अब तो आप की किस्मत खुल गयी," बड़ी अदा से अपने किशोर उभारों को थोड़ा और उभार के गुड्डी बोली.

" अरे अब तो ये तुम दोनों के हाथों मे है क्या तुम खुलवाती हो और क्या क्या ये खोलता है" अब खुल के मज़ाक करते हुए मैं बोली. फिर मैने उससे जंक ज्वेलरी और एक्सेसरीज़ के लिए कहा जो उसने तुरंत मॅंगा दी. जब वो अपने हाथों से पहनाने लगा तो वो सिहर गयी. मैने फुसफुसाके उससे कहा, गनीमत है तुम ब्रा और पैंटी नही खरीद रही हो नही तो वो भी

पर नीरज ने सुन लिया और हंस के बोला वो भी है मन्गवाऊ. फिर उसने मुझ से पूछा, " कुछ ठंडा गरम चलेगा."



" अरे जिससे पूछना चाहते है उससे खुल के पूछिए ना, मेरी ननद को कोक कोला ओह..मेरा मतलब है कोका कोला पसंद है."
दुकान अभी अभी खुली थी इसीलिए ज़्यादा भीड़ नही थी. कोक पीते हुए मेरी निगाह बाकी सामानों पर दौड़ रही थी. एक समान देख के मैने पूछा, "आप एशियन स्काई शाप का समान भी रखते है क्या"
 


मेरी निगाह देख के वह समझ गया था और हंस के बोला, " अरे आप खुल के क्यो नही पूछती,ब्रेस्ट मसाजर की बात कर रही है पर आप दोनों को देख के तो लगता नही कि आप को इसकी ज़रूरत है, बल्कि इस्तेमाल के बाद की मॉडेलिंग आप अच्छी तरह कर सकती है. लीजिए ये मेरी ओर से आप को गिफ्ट है"
और ये कह के उसने उसे उतार के गुड्डी के हाथ मे पकड़ा दिया. उसकी निगाहे बेशर्मी से, उसके दोनो जोबनों को घूर रही थी.

" अरे पूछ लो कैसे इस्तेमाल करते है, वरना बाद मे फिर आओगी अकेले यही पूछने", मैने कहा.

" सिंपल ब्रा के अंदर नीचे लगा लीजिए, " वो उससे बोला.

" अरे लगा के बता दो ना" अब नीरज के शरमाने की बारी थी. नीरज ने फिर एक और पैकेट निकाला टाइट अगेन और मुझे मुस्कराते हुए देदिया. ये आप के लिए हँसते हुए हम दोनो बाहर आ गये. ज्वेलरी और बाकी सामानों पर भी उसने 50% डिसकाउंट दिया था. उसकी दुकान से फ्री मे मिली इंपोर्टेड रम चाकलेट चुभलते हुए हम दोनो वापस लौटे. मैने हंस के कहा देखा ट्रैनिंग का फ़ायदा.

वह भी मुस्करा के बोली, हाँ भाभी.

मैने उसके गाल पे पिंच कर के कहा मेरी बात मानती जाओ, देखना शहर के सारे लड़के तेरे दीवाने हो जाएँगे.

जब हम लोग घर पहुचे तो राजीव सब को दुलहन के लिए लाई ज्वेलरी दिखा रहे थे. मेरी जेठानी, देवरानी गूंजा, गुलाबो,अल्पी और घर की ढेर सारी औरते और लड़किया भी थी. चाँदी की पायल बहुत ही सुंदर थी और उसमे ढेर सारे घुंघरू लगे थे. इसी तरह करधनि मे सोने के घुंघरू लगे थे.

गुड्डी ने बहुत भोलेपन से पूछा, " भाभी, इसमे इतते घुंघरू क्यो लगे है" सब औरते मुस्कुराने लगी.

गूंजा हँसकर बोली, " अरे, अपने भैया से पूछ लो, वही तो लाए है, क्या सोचकर लाए है."

" अरे मैं बताती हू, पायल मे घुंघरू इस लिए लगे है कि जब तुम्हारी बहना नीचे होंगी, और तुम्हारे, जीजा इनकी टाँगे कंधे पे रख के कस कस के चोदेन्गे तो पायल के घुंघरू हर धक्के के साथ बज़ेंगे, और जब वह खुद उपर चढ़ के कमर से धक्का लगा लगा के चोदेन्गि तो, करधनि के घुंघरू बज़ेंगे." गुलबो हँसकर बोली

और मेरी ननद बेचारी शरमा गयी. बात बदलने के लिए वो बोली, " भैया डीजे का क्या हुआ"

.उन्होने बोला, हो गया.

गूंजा ने फिर चिढ़ाया, " और क्या, इनकी बहन चूतड़ मटका के नाचेगी, ये साथ देंगे."

हँसते हुए उसे लेकर मैं उपर छत पे गयी, किसी काम से. वहाँ नंदोई जी खड़े थे.

मैने उन्हे चिढ़ाया, " क्यों नंदोई जी किसका इंतेजर कर रहे है, अपनी बहन हेमा का."

" नही आपकी इस छोटी ननद का सुबह से तो आपके ही साथ है. " हंस कर वो बोले, फिर इशारे से उन्होने बताया कि सिगरेट पीने उपर आए है क्योंकि नीचे सब बड़े लोग है
 


मैने उन्हे छेड़ा, " अरे तो अपने इस माल से सुलगवाये ना,साली किस दिन काम आएगी."


उन्होने सिगरेट निकाल कर गुड्डी को दी. वह उसे हाथ मे पकड़े थी कि मैने बोला, " अरे ऐसे नही, होंठों के बीच लेकर सुलगाओ." उसने होंठों के बॉच लेकर सुलगाने की कोशिश की पर नही सुलगी तो वो बोले अरे ज़रा ज़ोर से सुट्टा मारो.

और फिर वह सुलग गयी. जब तक वह जीत को देती उन्होने दूसरी निकाल कर उसकी सिगरेट से सुलगा ली और मज़े मे बोले,

" उसे तुम पी लो."

उसने हंस कर फिर एक कश लिया और बोली, " अरे जीजू वो साली क्या जो मना कर दे जीजा की बात को."

जीत उससे सात कर कंधे पर हाथ रख कर खड़े थे और उसकी बात पर खुश होके कस के उसकी चूंचिया दबा दी.

तब तक नीचे से राजीव और अल्पी आ गये छत पे. गुड्डी के उभारों पर से बिना हाथ हटाए, जीत ने पूछा, " क्यों साले जी सिगरेट पीनी है."

हाँ एकदम वो बोले और उन्होने एक राजीव को भी दे दी. मेरी ननद भी बेधड़क, अपने भाई के सामने अपने जीजू से उभार

दबवा रही थी, और सुट्टा लगा रही थी. तब तक शादी का वीडियो वाला दिख गया और उन्होने उसे बुला कर कहा अरे ज़रा जीजा साली की फोटो तो खींच दो,और सबने साथ साथ फोटो खिंचवाई. और सिगरेट ख़तम कर सब नीचे आ गये.जीत को किसी रसम के लिए बुला लिया गया. तब तक मेरी देवरानी गूंजा का भाई, अजय भी वहाँ आ गया. वह गाव का था, लेकिन बड़ा ही तगड़ा और गबरू जवान, मांसपेशिया साफ झलकती थी गुड्डी को देख के उसने छेड़ा, " बहुत जम रही हो"

अब मेरी ननद भी बोलने लगी थी. " अरे जा के गूंजा भाभी को देखो, मुझसे भी ज़्यादा जम रही है." सीना उभार के वो बोली.

तब तक अजय ने झटके से उसके उभारों को सहला दिया और भाग लिया. वो भी उसके पीछे दौड़ी.थोड़ी देर मे राजीव मेरे पास आ गये, और उधर से अजय भी. वह राजीव से बोला, " आज जीजा जी थोड़े दुखी लग रहे है,"

" क्यों" भोलेपन से मैने पूछा.

" अरे आज इनका एक माल जो जा रहा है, आज."

" अरे तो क्या हुआ, माल का पार्मेनेंट इंतज़ाम तो हो गया हाँ अब एक माल बचा है." तब तक मेरी ननद जो मेरे पास आके खड़ी हो गयी थी, उसकी ओर इशारा कर के मैं बोली.

" अरे उसकी क्या चिंता मेरे साथ ठिकाने लगा दे, मैं तो हमेशा से तैयार हू." उसके कंधे पे हाथ रख के अजय ने छेड़ा.

" हाँ हाँ ज़रा मूह धोके आओ." तुनक कर कंधे पर से हाथ झिड़कते हुए वो बोली.



" अरे मूह क्या तुम जो जो कहोगी मेरा भाई धोके आएगा. और आप कह रहे थे कि अजय आज बहोत काम कर रहा है, तो दे दीजिए ना इनाम मे अपनी ये सो काल्ड बहन. और हाँ अजय ये गॅरेंटी देना कि ठीक 9 महीने मे इन्हे मामा बना देना"
मैं राजीव से बोली. वो चिढ़ रही थी और हमे उसे चिढ़ाने मे मज़ा आ रहा था.

" मैं सब समझता हू साले, तुम इसी बहाने अपनी बहनों को सलहज बना कर उनसे मज़ा लोगे." और हम सब हँसते हुए वहाँ से चल दिए.

थोड़ी देर मे शाम होने लगी और हम सब तैयार होने लगे.

भाभी, आज आप मेरा मेक आप कर दीजिए ना, इठला के मेरी छोटी ननद बोली.
 
एकदम, और मैने, उसका खूब डार्क सेक्सी मेक अप किया, है चीक बॉन्स, गुलाबी गालों पे रूज, आँखों पे, मास्कारा, आईलैशेज़, और हल्का सा काजल, और होंठों पे लाल लिपस्टिक, लंबे नाखूनों पे, गाढ़ी नेल पॉलिश और फिर मैने फोर्स करके उसके सारे कपड़े उतरवा दिए और कहा अरे खास जगहों पर भी तो मेक अप होना चाहिए. और वहाँ भी मैने, क्रीम, और हल्की सी उगलियों मे लेके मज़ाक मे लिपस्टिक लगा कर गुलाबी लेसी, खूब पतली और तंग पहना दी जो उसके चूत की पुट्तियों को भी पूरा नही ढक रही थी और पीछे, तो मैने उसके चूतड़ फैला कर सीधे, गान्ड की दरारों के बीच फँसा दी. और उसके ड्रेस के साथ, जो मैचिंग स्किन कलर की पुश अप ब्रा लाई थी, वो पहना दी. इससे उसके उभार तो उभर के सामने आ ही रहे थे, गहराई भी खूब बन रही थी. वह लेसी तो थी इत्ति जोबन से चिपकी थी कि पता ही नही चलता था कि उसने ब्रा पहन रखी है. फिर मुझे कुछ याद आया और मैने, ब्रेस्ट मसाजर, जो ब्रेस्ट एन्हन्सर का भी काम करता था, उसके

उभारों के नीचे लगा दिया और फिर तो उसके उभार उभर कर और मस्त हो गये. चोली टाइप टाप जो ख़लील, बॉबी टेलर ने ठीक किया था पहन के तो वास्तव मे वह आग लगाने लगी. वह बैकलेस तो था ही, ऑलमोस्ट पूरी गोरी पीठ दिखती थी. पर उभारों का पूरा कटाव, और निपल्स तक, ज़रा सा झुकने पे दिख सकते थे. मैने लहँगे ऐसी ड्रेस, नाभि के बहुत नीचे कूल्हे पे बाँध के पहनाई और उसके साइड स्प्लिट से गोरी गोरी पिंडलियों का भी नज़ारा साफ झलकता था, और फिर

जंक ज्वेलरी. बाल भी खूब स्टायलिश . उपर से ड्रेस मे जो चुन्नी थी वो भी ऐसी रखी कि बस एक जोबन आधा ढँका था और दूसरा पूरा झलक रहा था.

तब तक अल्पना अपनी छोटी बहन कम्मो के साथ आई. फ़िरोजी लहँगे चोली मे, वह कमाल की लग रही थी, और उससे भी बढ़ कर कम्मो, टाप और स्कर्ट मे, अच्छी ख़ासी बड़ी लग रही थी. तबतक मुझे जो मैं ओल्ड मोन्क और जिन की बोटल ले आई थी उस का ध्यान आया और मैने अल्पना के कान मे कुछ समझा के कहा, और वो मुस्करा के चल दी. तब तक राजीव आए और कम्मो उनसे ऐसे चिपक के गले मिली कि वो उस को ले के चल दिए.

" हाई क्या है नंदोई जी ने कस के सीटी मारी,


गुड्डी को देख के. उसने भी एक चक्कर मार के, झुक के अपने जोबन का पूरा नज़ारा दिखाते हुए, हंस के बोला, " बोली, जीजू मैं कैसी लगती हू"

तब तक अल्पना, रामोला और जिन मिला लिम्का के ड्रिंक ले आई और एक एक ग्लास गुड्डी और जीत को दे दिया. जीत ने फोर्स कर के अल्पी को भी एक कोला पिला दिया. अल्पी ने मुझ से कान मे कुछ कहा और मैने उससे कहा कि जीत से कहे.वो बोली, " आपकी साली सेक्सी आइटम लग रही है, पर एक कसर है जीजू."

" क्या" वो बोले. और उसने उनके कान मे कुछ फुसफुसाया.

" अभी लो" और गुड्डी को कस के अपनी बाहों मे बाँध के उसके भरे भरे गाल कच कचा के काट लिए. और जब तक वो कुछ बोलती, उसके दूसरे गालों पे अपने दाँतों के निशान बना दिए.

" जीजा के दाँतों के निशान के बिना साली के गालों का श्रिगार अधूरा है." हंस के मैने उसे चिढ़ाया.

बारात आ गयी बारात आ गयी चारों ओर शोर हुआ. हम लोग भी बाहर भागे. मेरे

नंदोई अपनी साली के ठीक पीछे थे. मैने उनका ध्यान उसके सेक्सी चूतड़ की ओर दिलाया. झलकते, ड्रेस मे उसके मखमली मुलायम गोल गोल चूतड़ साफ झलक रहे थे, और पैंटी भी गान्ड की दरार मे थी इसलिए सब कुछ झलक रहा था.

उन्होने उस भीड़ मे शरारत से कस के उसके चूतड़ दबोच लिए और गान्ड मे उंगली करते हुए चिकोटी काट ली. वो पीछे मूड के मुस्करा दी और सामने देखने लगी. बारात की लड़किया औरते लड़के खूब जम के नाच रहे थे.
 


" हे चलो ज़रा लड़के वालों को दिखा दे डॅन्स क्या होता है उनके यहाँ की लड़किया सोच रही है कि वही नाच सकती है
,"अल्पी उस को खींच के लेगयि पीछे उस के जीजू और राजीव भी पहुँच गये.



" एक दम ज़रा कस के जलवा दिखाना लड़की वालों का."
मैने भी जोश दिलाया.

वह पहुँच के सब के साथ नाच करने लगे. थोड़ी देर बाद मैने देखा कि, गुड्डी अपने जीजू के साथ डॅन्स कर रही है, और बाकी सब लोग किनारे खड़े गोल घेरा बना तालिया बजा रहे है. तब तक गाना शुरू हुआ, मेरी बेरी के बेर मत तोडो, रीमिक्स की धुन पे और फिर वो इस तरह अपने उभार उछाल उछाल के मटका रही है, चूतड़ हिला रही थी, और जीत ने भी उसके साथ.गुलाब का फूल लेकर उसने चोली मे खोंस दिया और गाना जब पीक पे पहुँचा तो जीत ने अपने होंठों से वो फूल निकाल लिया और उसके उभारों को सबके सामने हल्के से चूम लिया और इसके बाद अल्पी और राजीव शुरू हो गये.ढोल वाले बजा रहे थे और गाना था, दिल ले गयी कुड़ी पंजाब दी, दिल ले गयी. अल्पना ने, फूल अपने लहँगे मे खोंस लिया

.अबकी राजीव का नंबर था. नाचते नाचते उन्होने अल्पी को अपनी बाहों मे उठा लिया. उधर बारात द्वार पे पहुँच गयी थी और स्वागत मे गुलाबो, दुलारी, गूंजा सब औरते गाली सुना रही थी



" हाथी हाथी सोर कैले, गधहा ले के आईले रे,

दूल्हा की बहन को गधहा चोदे, अपन नाक कटवाइला रे,

रंडी रंडी सोर कईले, बहन नचावत आईले रे,

तोरी बहन की फू चोदु, गंद मरावत आईले रे"


जयमाल के बाद, डी जे के साथ तोकुछ तो रामोला का असर, कुछ जवानी का नशा, कुछ जोबन का उभार, नाचने मे आइटम गर्ल्स को भी उन्होने मात कर दिया. और चुन्नी तो उसने बारातियों के सामने ही नाचते समय गले से उतार कर कमर मे बाँध ली थी इसलिए उसके जोबन के उभार खुल्लम खुल्ला , दिख रहे थे.जब वो कूल्हे मटका मटका कर जोबन उभार के नाचती, थोड़ी देर तो उसने अपने जीजू के साथ, फिर दूल्हे के साथ और राजीव भी अल्पना और फिर कम्मो के साथ.

आज वह पूरी तरह मस्त लग रही थी. और न सिर्फ़ अपने जीजू के साथ, बारात मे आए लड़कों के साथ, दूल्हे के साथ, यहाँ तक की घर के लड़कों के साथ, आज वो खुल के अपने जलवे दिखा रही थी. नाच के बाद खाने के समय कभी, ऐसे दिखा दिखा के सॉफ्टी का कॉन चुसती जैसे कोई एक्सपर्ट लंड चूस रही हो, कभी किसी की प्लेट से कुछ निकाल लेती, कभी किसी के जॉक पे खुल के हँसती और उसके ड्रेस से तो, जोबन के उभार तो गजब ढा ही रहे थे, पतली कमर, गोरा बदन और तेज लाइट मे कभी ड्रेस के अंदर भी झलके जा रहा था.

मैं सोच रही थी आज दिन मे जो मैने उसे समझाया था, कैसे जवानी के जलवे ढाए जाय. बॉडी लैंगवेज, कभी हँसना कभी शरमाना, कभी हल्के से अदा से जोबन के जलवे दिखाना, कभी दिखा के छिपा लेना, और सब से बढ़ कर किसी को भी मना ना करना, लेकिन उसी के साथ ये भी न कोई समझे कि वो आसानी से पट जाने वाली है. मैने कहा था कि मान लो अगर कोई एकदम हमेशा कोल्ड लुक देगा, तो लड़के उसको छोड़ के दूसरे के चक्कर मे पड़ जाएँगे कि यहाँ तो कोई फ़ायदा है नही और अगर तुम आसानी से ज़्यादा लिफ्ट दे दोगि तो वो समझेंगे ये पता नही किससे पटी हो और फिर इसे तो जब चाहेंगे तब पटा लेंगे.और अगर एक के साथ चक्कर चल भी रहा हो तो दो तीन को पल्लू मे बाँध के रखो. और आज वो एकदम मेरी सिखाई हुई बातों पे अमल कर रही थी. वो जहाँ होती लड़के वही पहुँच जाते.शादी जल्दी शुरू होने वाली थी इसलिए खाने के बाद हम लोग तुरंत अंदर चले गये.

कंटिन्यूड…
 


tab tak hamane dekhaki ek young saradar aya. ek dam pas me ane par hi mai

pahachan payi ki vah alpi thi., apane lambe bal mod kar usane sar pe juda

bana liya tha shirt aur jeans mod kar rajiv ki thi aur pensil se halki mumche,

ekdam kishor 'lag raha tha'. usane mujase guddi ki or ishara kar kaha,

" he muje ye mal pasand a gaya, kya ret hai is ka"

" kis tarah se ek bar ka, ek ghante ka ya puri rat kavaise agar tum isako nacha

sako to samajo free." mai boli. usane guddi ka hath pakad ke khincha aur

apane sine se laga liya, aur nachana shuru kar diya. tab tak piche se hema ne

usaki pagadi khinch di aur usake lambe baal usake pith pe fail gaye. gumja

aur maine gana shuru kiya,

" lagay jao raja dhakke pe dhakka, lagay jao,

do do batan hai kas ke dabao, lagay jao

( guddi dance karate samay juk juk kar is ada se apane ubhar aur klivez dikha

rahi thi, ki meri sari training kaam aa gayi, aur alpna ne to pahale usaki kamar

pakadi aur phir ek hath se khul ke guddi ki chunchiya kas kas ke dabani shuru

kar di, aur ham log aur jor jor se gane lage)

are danalap ki gi lagi hai niche, lagay jao raja dhakke pe dhakka

pahale satao, phir andar ghusao, satasat, lagay jao raja dhakke pe dhakka "

donom rimiks dancers ko mat de rahi thi aur vo punjabi kudi to, jitane asan

usane sune the sab ke sab dikha diye, aur ant me usane guddi ki ek tang

uthakar is tarah apane kamar se lapet li ki guddi ki painti tak saph dikh rahi

thi. phir to ek hath se usaki chunchi kas ke dabate hue usane vo jor jor se

dhakke mare ki koyi mard bhi kya marega. khub hangame ke bich usaka

dance khatam hua. der rat ho gayi thi, mohalle ki aurate apane ghar gayi aur

baki log sone. alpi ne mujase pucha,

" didi, ap to kah rah thi ki rat jaga hoga puri rat, mammi se bhi yahi kah kar"

" are tera to rat jaga hoga hi, dekh tera kaun intajar kar raha hai, ja usake

sath." mai boli.

kone me rajiv khade usako dekh kar muskara rahe the.aj rat unako usi hotel

me rahana tha jaha janavasa tha, aur alpi ko bhi vah vahi le ja rahe the. alpi ko

maine samajaya, he apane jiju ka pura khyal rakhana. vo muskara kar rah

gayi. to maine rajiv ko cheda,

" he meri bahan ko rat bhar me puri tarah se khush kar denakuch bhi shikayat

n kare ye mujase." " "ekdam " vo bole. jab tak vo dono nikal hi rahethe ki,

guddi a gayi. use bahom me le maine kaha

" auraagar tumane use khush kar diya to inam me mai apani choti pyari nanad

de dungi."

bina sune vo bole thik hai aur nikal gaye. guddi sharma gayi.

" chal yar teri saheli to nikal gayi apane jiju ke sath chudavane, ham log kam

khatam karate hai. sab logom ke sone ka itajam karana tha, jaha abhi gana ho

raha tha vah jagah thik karani thi.sone ke intajam ke bad ham dono saphayi pe

jut gaye. usane apana dupatta kamar pe bandha aur maine bhi apana anchal

kamar me khonsa aur lag gayi. ghante bhar bad jab ham khali hue aur sone ki

jagah talash karane lage to sare kamare bhare the, jara bhi jagah nahi thi kahi.

maine drawing room me jhanka jaha hamane sab furniture shift kiye the to

muje ek chauda sa sofa kam bed dikha. mai usase boli,

" chal yar yahi so lete hai rat hi kitani bachi hai, aur fir tum itti dubali ho, bas

jara sa jake stor se ek rajayi le ao."

vah jab tak rajayi le ayi maine sofe ko chauda kar ke bed bana diya tha aur

sadi utar rahi thi

"he, bhabhi apasadi"

" are sadi pahan kar muje nind nahi ati balki jab se shadi hyi shayad hi kisi din

me kuch pahan ke soyi hu fir is sofe pe kapade krsh bhi ho jayenge. chal mai

tap les ho gayi hu tu bhi ho ja, sadi samhal kar rakhate huye, maine use cheda.

" are bhabhi ap kaha tap les huyi hai blauj to apane pahan hi rakha hai," batti

band karate huye hansate huye vo boli.

" chal tu bhi kya yad karegi," aur maine apana blauj bhi utar diya aur jaise vo

pas ayi usaka bhi tap khinch ke utar diya aur use apane sath rajayi me khinch

liya aur kas ke bhinch liya. ab ham dono bra me the. usaki bra upar se dabate

maine pucha,

" he , jiju ne dabaya kya"

"aur kya chodenge, bhabhi masal kar rakh diya."

"dekh teri saheli tujase pahale chud gayi aur ab hotel ke kamare me rat bhar

chud rahi hogi." usaki nangi pith sahalate maine cheda.

" are bhabhi chud to mai usase bhi pahale jati, par vo dulari jo agayi, jiju to

betab ho rahe the."

" chudane se to tum bachane se rahi, kal to fat hi jana hai, isepar meri dusari

shart to tum bhul hi gayi." skart ke upar se usaki bulabul ko pyar se dabochate

huye mai boli.

" kaun si dusari shart bhabhi,"

" are, bhul gayi apane us premi ko.bechara itte dino se laga hai, are tumhe

usake prem patr ka javab bhi to dena haijija to do din me chale jayenge , roj to

usi ko sarvicing karana hai."maine kas ke usaki chut masal di.

" ha vo to par" abhi bhi vo hichakicha rahi thi.

" meri banno, do bate hamesha dhyan rakhana, kisi bhi chakkar me koyi sabut

ladake ke hath me nahi chodana chahiye, isaliye, prem patr kabhi apani hand

writing me na likho aur dusara usake ant me kabhi apana nam mat likho,

tumhari jan, tumhari dilarubakuch bhi aur ho sake to usaka bhi nam mat likho

mere sapanom ke raj kumar, janam aur chitthi me bhi kuch bhi esa mat likho

jisame kisi ke, kisi jag#0079; ke bare me pata chale" pith pe hath sahalate,

usaki bra kholate mai boli.

" par bhabhi meri chitthi"

" are mai hu na, mai subah hi ek seksi lav letar likhati hu, jab dres lene

chalenge tab tum usake samane drap kar dena." halke se usake ubhar sahalati

mai boli. maine apani bhi bra khol di thi aur ab ham donom ke joban ek

dusare se ragad kha rahe the. usake pyare galom par ek halki si chummi leti

mai boli,

 
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