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Guest
बात बदलने केलिए उसने पूछा, " भाभी आप तो कहती है कि आप भैया को कभी उपवास नही कराती इसलिए कल
रुकी नही पर आज" उसका हाथ पकड़ के मैं अपनी चूत मे लेगाई और उसकी एक उंगली अपनी चूत मे घुसेड कर पूछा,
" कुछ गीला गीला लग रहा है क्या
"हाँ भाभी पर""
"ये तुम्हारे भैया का प्रसाद है, गाने के बीच मे मैं बाथ रूम गयी थी, ना, वही पीछे पीछे वो भी आ गये थे बस वही हम लोगों ने कबड्डी खेल ली." और मैने भी अब अपने दूसरे हाथ से उसकी चूत दबोच ली और कस के सहलाने लगी. अच्छी तरह गीली थी वो थोड़ी देर सहलाने मसलने के बाद मैने हल्के से उसकी बुर के पपोतोँ को फैलाकर, हल्के से अपनी उंगली घुसा दी और आगे पीछे करने लगी. अब मेरी चूंची कस के उसकी किशोर चूंची को मसल रही थी और मेरी उंगली चूत मंथन कर रही थी. दूसरे हाथ से मैने उसके चूतड़ कस कर दबोच रखे थे.
" भाभी उंगली प्लीज़" वो बोली.
" अरे तुमने जब मेरी चूत मे उंगली की तो नही सोचो मुझे तुम्हारे जीजू का ख़याल है वरना दो दो उंगली पूरी तरह से घुसेड कर अभी तुम्हारी ये कुँवारी चूत फाड़ देती पर ये मज़ा उनका है एक बार कल तुम्हारी चूत का कल उदघाटन हो जाए तो देखो इसके अंदर क्या क्या डालती हू"
" और क्या क्या भाभी" शरमाते हुए वो बोली.
" अरे ननद रानी ये चूत सब कुछ घोंटेगी उंगली कॅंडल, मोटे बैंगन, और उंगली क्या पूरा हाथ, अरे जिस चूत से इत्ता बड़ा बच्चा निकल जाता है, उसकी कैपीसीटी मे कोई कमी नही होती. अरे देखना मैं तुम्हे, मोमबत्ती और बैंगन घोंटने की इतनी अच्छी ट्रैनिंग दूँगी कि बस." उसकी कुँवारी चूत मे उंगली अंदर बाहर करते मैं बोली. अब उसको खुल कर अच्छा लग रहा था
और वह सिसकिया ले रही थी. मैने उसकी उंगली को भी अपनी बुर मे अंदरबाहर करने को कहा.
"ओह ओहपर भाभी पूरा हाथ"
" अरे, मैं आँखों देखी कह रही हू. दो साल पहले होली मे मेरी अम्मा और चाची ने मिलकर बुआ को न सिर्फ़ पूरी तरह नंगा करके पटक के रंग लगाया बल्कि पहले दो फिर धीरे धीरे कर के, सारी उंगलियाँ डाल दी और फिर मुट्ठी बना के खूब रगड़ रगड़ के चोदा." मैं अपनी उंगली अब गोल गोल उसकी कुँवारी मखमली कसी कसी चूत मे घुमा रही थी और अंगूठे से कस के क्लिट भी रगड़ रही थी. गुड्डी को अब पूरा मज़ा आ रहा था और वह नीचे से अपने चूतड़ उठा उठा के उंगली से चुदने का मज़ा लेरही थी और मेरी बुर मे भी उंगली अंदर बाहर कर रही थी. मैने धीरे से अपनी बुर उसकी उंगली पर भींच ली. मेरा दूसरा हाथ अब कस के गुड्डी की चूंची रगड़ मसल रहा था.
" हे भाभी ये क्या कर रही होमेरी उंगली"
" हाँ सीख ले ऐसे भींचना , राजीव को बहुत मज़ा आता है, कयि बार तो जब मैं उपर चढ़ कर चोदति हू ना तो बहुत देर तक लंड ऐसे ही बुर मे भींचती रहती हू. जैसे पेशाब रोकने केलिए चूत सिकॉड़ते है ना बिल्कुल वैसे ही, रोज रोज प्रैक्टिस करोगी ना तो कितना भी चुदवाओ सुबह शाम चूत वैसे ही कसी बनी रहेगी और चुदाई के समय करोगी तो लंड को जो मज़ा आएगा वो अलग" अब मेरी ननद झड़ने के कगार पे पहुँच रही थी पर मैं उससे थोड़ा अभी और खेलना चाहती थी, इसलिए, मैने गप्प से उंगली बाहर निकाल ली.
"हे भाभी" वो बोली.
"अरे रुक ना अब मैं तुम्हे बताती हू कि तुम्हारे भैया मुझे कैसे रोज चोदते है, आज तेरे कुंवारे पन की आख़िरी रात है, आज ज़रा इस रसीले कुंवारे जिस्म का मज़ा मैं लेलू." अब मैं सीधे उसके उपर आ गयी और एक चूंची मूह मे और दूसरी हाथ मे लेके मज़ा लेने लगी. मेरी बुर उसकी चूत पे धीरे धीरे घिस्सा मार रही थी. थोड़ी ही देर मे वह भी नीचे से धक्का मारने लगी. उसका रसीला जोबन दबाते हुए मैने कहा, " तुम्हे मालूम है, तुम्हारे भैया का तेरे बारे मे सोच कर खड़ा हो जाता है, जब वह दो तीन बार चोद लेते है ना, तो उसके बाद भी अगर मैं तुम्हारा नाम लेके उन्हे छेड़ती हू तो उनका मूसल झट से खड़ा हो जाता है, और फिर तो वो ऐसा चोदते है ऐसे चोदते है" और मैने कस कस के अपनी चूत से उसकी चूत रगड़नी शुरू कर दी और एक हाथ से उसकी क्लित छेड़ने लगी. वो भी अब खूब खुल के मज़ा ले रही थी.
रुकी नही पर आज" उसका हाथ पकड़ के मैं अपनी चूत मे लेगाई और उसकी एक उंगली अपनी चूत मे घुसेड कर पूछा,
" कुछ गीला गीला लग रहा है क्या
"हाँ भाभी पर""
"ये तुम्हारे भैया का प्रसाद है, गाने के बीच मे मैं बाथ रूम गयी थी, ना, वही पीछे पीछे वो भी आ गये थे बस वही हम लोगों ने कबड्डी खेल ली." और मैने भी अब अपने दूसरे हाथ से उसकी चूत दबोच ली और कस के सहलाने लगी. अच्छी तरह गीली थी वो थोड़ी देर सहलाने मसलने के बाद मैने हल्के से उसकी बुर के पपोतोँ को फैलाकर, हल्के से अपनी उंगली घुसा दी और आगे पीछे करने लगी. अब मेरी चूंची कस के उसकी किशोर चूंची को मसल रही थी और मेरी उंगली चूत मंथन कर रही थी. दूसरे हाथ से मैने उसके चूतड़ कस कर दबोच रखे थे.
" भाभी उंगली प्लीज़" वो बोली.
" अरे तुमने जब मेरी चूत मे उंगली की तो नही सोचो मुझे तुम्हारे जीजू का ख़याल है वरना दो दो उंगली पूरी तरह से घुसेड कर अभी तुम्हारी ये कुँवारी चूत फाड़ देती पर ये मज़ा उनका है एक बार कल तुम्हारी चूत का कल उदघाटन हो जाए तो देखो इसके अंदर क्या क्या डालती हू"
" और क्या क्या भाभी" शरमाते हुए वो बोली.
" अरे ननद रानी ये चूत सब कुछ घोंटेगी उंगली कॅंडल, मोटे बैंगन, और उंगली क्या पूरा हाथ, अरे जिस चूत से इत्ता बड़ा बच्चा निकल जाता है, उसकी कैपीसीटी मे कोई कमी नही होती. अरे देखना मैं तुम्हे, मोमबत्ती और बैंगन घोंटने की इतनी अच्छी ट्रैनिंग दूँगी कि बस." उसकी कुँवारी चूत मे उंगली अंदर बाहर करते मैं बोली. अब उसको खुल कर अच्छा लग रहा था
और वह सिसकिया ले रही थी. मैने उसकी उंगली को भी अपनी बुर मे अंदरबाहर करने को कहा.
"ओह ओहपर भाभी पूरा हाथ"
" अरे, मैं आँखों देखी कह रही हू. दो साल पहले होली मे मेरी अम्मा और चाची ने मिलकर बुआ को न सिर्फ़ पूरी तरह नंगा करके पटक के रंग लगाया बल्कि पहले दो फिर धीरे धीरे कर के, सारी उंगलियाँ डाल दी और फिर मुट्ठी बना के खूब रगड़ रगड़ के चोदा." मैं अपनी उंगली अब गोल गोल उसकी कुँवारी मखमली कसी कसी चूत मे घुमा रही थी और अंगूठे से कस के क्लिट भी रगड़ रही थी. गुड्डी को अब पूरा मज़ा आ रहा था और वह नीचे से अपने चूतड़ उठा उठा के उंगली से चुदने का मज़ा लेरही थी और मेरी बुर मे भी उंगली अंदर बाहर कर रही थी. मैने धीरे से अपनी बुर उसकी उंगली पर भींच ली. मेरा दूसरा हाथ अब कस के गुड्डी की चूंची रगड़ मसल रहा था.
" हे भाभी ये क्या कर रही होमेरी उंगली"
" हाँ सीख ले ऐसे भींचना , राजीव को बहुत मज़ा आता है, कयि बार तो जब मैं उपर चढ़ कर चोदति हू ना तो बहुत देर तक लंड ऐसे ही बुर मे भींचती रहती हू. जैसे पेशाब रोकने केलिए चूत सिकॉड़ते है ना बिल्कुल वैसे ही, रोज रोज प्रैक्टिस करोगी ना तो कितना भी चुदवाओ सुबह शाम चूत वैसे ही कसी बनी रहेगी और चुदाई के समय करोगी तो लंड को जो मज़ा आएगा वो अलग" अब मेरी ननद झड़ने के कगार पे पहुँच रही थी पर मैं उससे थोड़ा अभी और खेलना चाहती थी, इसलिए, मैने गप्प से उंगली बाहर निकाल ली.
"हे भाभी" वो बोली.
"अरे रुक ना अब मैं तुम्हे बताती हू कि तुम्हारे भैया मुझे कैसे रोज चोदते है, आज तेरे कुंवारे पन की आख़िरी रात है, आज ज़रा इस रसीले कुंवारे जिस्म का मज़ा मैं लेलू." अब मैं सीधे उसके उपर आ गयी और एक चूंची मूह मे और दूसरी हाथ मे लेके मज़ा लेने लगी. मेरी बुर उसकी चूत पे धीरे धीरे घिस्सा मार रही थी. थोड़ी ही देर मे वह भी नीचे से धक्का मारने लगी. उसका रसीला जोबन दबाते हुए मैने कहा, " तुम्हे मालूम है, तुम्हारे भैया का तेरे बारे मे सोच कर खड़ा हो जाता है, जब वह दो तीन बार चोद लेते है ना, तो उसके बाद भी अगर मैं तुम्हारा नाम लेके उन्हे छेड़ती हू तो उनका मूसल झट से खड़ा हो जाता है, और फिर तो वो ऐसा चोदते है ऐसे चोदते है" और मैने कस कस के अपनी चूत से उसकी चूत रगड़नी शुरू कर दी और एक हाथ से उसकी क्लित छेड़ने लगी. वो भी अब खूब खुल के मज़ा ले रही थी.