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Guest
अरी कम्मो, सुन अरे ज़रा अपने जीजा को भी रंग लगा दे सीधे अपने गाल से उनके गाल पे, वो भी क्या याद करेंगें किस साली से पाला पढा है।
एक दम दीदी और आगे बढ़ के उसने अपने गोरे गुलाबी रंग से सने गाल ....सीधे उनके गालों पे, ....राजीव की तो चांदी हो गयी. इस चक्कर में अब वह कैसे उनके सीधे गोद में आ गयी उस बिचारी को पता भी नहीं चला.और गालों से गाल रगड़ते अचानक दोनों के होंठ एक पल के लिए ....कम्मो को तो जैसे करेंट लग गया ....वो वहीं ठिठुर गयी ....पर राजीव कौन रुकने वाले थे. उसके उरोजों की और साफ साफ इशारा कर के बोले,
अरी साली जी रंग तो यहाँ भी लगा है ....ज़रा इससे भी लगा दीजिये ना
वो बिचारी क्या बोलती, मैं बोली उस की और से।
अरे सब काम साली ही करेगी आख़िर तुम जीजा किस बात के हो और फ़िर तो सीधे उनके हाथ उस नव किशोरी के उभरते जोबन पे
चालाक वो बहुत थी. तुरंत बात पलटते हुए बोली ।
अरे जीजू आप इत्ती देर से आए हैं आप को अभी तक पानी भी पिलाया ....आप क्या सोचेंगें की अल्पना दीदी नहीं है तो कोई पूछने वाला नहीं है और उन की गोद से उठ के वो हिरनी ये जा ....वो जा।
और पीछे से उसके कड़े कड़े छोटे मटकते गोल नितम्बो को देख के तो राजीव की हालत ही ख़राब हो गयी. उनका बालिष्ट भर का खूंटा अब जींस के काबू में नहीं आ र्रहा था।
उसके पीछे पीछे मैं भी किचेन में पहुँची, आ चल थोड़ी तेरी हल्प करा दूँ और पास में आ के उस के कान में हल्के से कहा, अरे तू भी तो अपने जीजू का जवाब दे दे। होली का मौका है कया ऐसे ही सूखे सूखे जाने देगी उनको।
वही तो कर रही हूँ दीदी। और उसने ग्लास की और इशारा किया। जब मैंने ग्लास में झांका तो मुस्कराये बिना नहीं रह सकी।
अच्छा ये बता की कुछ कोल्ध ध्रिंक विंक है क्या। ... मैं नाश्ते का इतजाम करती हूँ और तू कर अपने जीजा का।
मेरी अच्छी दीदी. ...कोल्ध ध्रिंक फ्रिज में है और फ्रिज . वो बोली।
अरे मालुम है मुझे पहली बात नहीं आ रही हूँ, और मैं बगल के कमरे में गयी जहा फ्रिज रखा था।
स्प्राईट की एक बढ़ी बोतल निकाल के तीन ग्लास में। तब तक मेरी निगाह बगल में रखी ड्रिंक कैबिनेट पे पढी. ...उसे खोला तो वोडका। ... जिन - फ़िर क्या था. ...स्प्राईट के साथ. कुछ स्नैक्स रख के जब मैं बाहर पहुँची तो कम्मो बढ़ी अदा से सीधे अपने उरोजों से सटा के ग्लास रख के पूछ रही थी,
क्यों जीजू बहोत प्यास लगी है।
हाँ. ...बहोत। कौन जीजा मना करता।
गुलाबी रंग से उसका सफ़ेद ब्लाउज एक दम चिपक गया था और उसके किशोर उभारों की पुरी रूप रेखा, कटाव यहाँ तक की ब्रा की लाइन भी साफ साफ दिख रही थी। रगड़ा रगडी में ऊपर के एक दो बटन भी खुल गए थे। और हल्का हल्का क्लिवेज - साफ साफ. ...और जैसे ये काफी ना हो, उसने दांतों से हलके से अपने गुलाबी होंठ काटते फ़िर पूछा।
तो जीजा बुझा दूँ. ...ना
और जैसे ही उन्होंने हाथ बढाया. ...पूरा पूरा का ग्लास भर। जाडा लाल रंग उनकी झाक्काक सफ़ेद रंग की शर्त पुरी तरह लाल। और हम दोनों जोर जोर से हंसने लगे।