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लेकिन वो प्लान भी फेल हो गया. उसके जीजा जीत ( जिन्होने मेरे चढाने पे उसे शादी के समय कस के चोद के उसकी , चूत का उद्घाटन किया था और बहोत ही मस्त थे) और बहन लाली, ( गुड्डी की सबसे बडी बहन....अगर आपने नन्द की ट्रेनिंग पढी हो तो ये सब आपको मालूम होगा)....देर रात को आने वाले थे. लेकिन जब हम उसके घर पहुंचे तो वो लोग पहुंचे हुये थे.
मेरे नन्दोई ने पहुंचते ही मुझे बांहों में भर लिया....लेकिन अबकी वो थोडे कम चंचल लग रहे थे....क्यों क्या हुआ...मैने पूछा तो उन्होने बताया की यहां आने से पहले उनकी बीबी ने कुछ सखत पाबंदी लगा दी...शायद उन्हे कुछ् शक हो गया की जब वो शादी में आये थे तो उन्होने गुड्डी के साथ...तो बोलना रंग खेलने तक तो ठीक है लेकिन यहां वहां छूने पे भी पाबंदी और इससे आगे तो कुछ सोच भी नहीं सकते....कूवारी लडकी है अगर कहीं उंच नीच हो गया....अपनी बीबी की आवाज की नकल करते वो बोले।
अरे जीजू इत्ती सी बात...मैने उन्हे हिम्मत बंधाई. याद है पिछली बार जब आप शादी में आये थे...आप खुद कह रहे थे ना की आप की ये साल्ली....हाथ भी नहीं रखने देती थी....लेकिन मैं ने वो चक्कर चलाया की खुद उसने आप का हाथ पकड के अपने १७ साल के जोबन पे रख दिया था ...५-६ महीने पहले की ही तो बात है...और आप से एक नहीं दो दो बार...बिना किसी ना नुकुर...के ...तो आखिर आपकी बीबी भी तो ...उसी की बहन हैं मेरी ननद हैं....और ननदों को नचाना भाभी को नहीं तो और किसे आयेगा।
अरे मैने सोचा था, की अबकी साल्ली के साथ खूब जम के होली खेलूंगा, पहली होली में तो बिदक गयी थी लेकिन अबकी भरे आंगन में सबके सामने....क्या मस्त माल है औ कया मटकते हुये चूतड हैं....तब तक गु्ड्डी हमारे सामने से आंगन से गुजर रही थी...अपने जीजू को दिखा के उसने दोनो जोबन कस के उभार दिये और जीभ निकाल के चिढाया. पीछे से उनकॊ दिखा के चूतड भी मटका दिये...।
मन करता है गांड मार लूं साल्ली की....नन्दोई जी बोली लेकिन अपने बीबी की बात सोच के मन मसोस के रह गये.।
अरे गांड भी मारिये साल्ली की और गांड का मसाला भी चखाइये भी अपनी साल्ली को...बस अपनी इस सलहज पे भरोसा रखिये और हां होली में सलहज का हक साली से कम नहीं होता...पिछली बार तो उस कंवारी साल्ली के चक्कर में मैने छोड दिया था....अबकी मैं नहीं छोडने वाली अपन हक. और मैने दोनो जांघों के बीच कस के उनके तन्नये खडे खूंटे पे रगड दिया।
एक दम...मुस्करा के वो बोले।
तब तक राजीव वहां आ गये. जीत जीजू...अल्पना पे फिदा थे लेकिन शादी के समय तो उनका पूरा समय गुड्डी के साथ ही बीता और अल्पी भी अपने नये बने जीजू राजीव के साथ...जीत ने उनसे पूछा,
क्यों साल्ले...तेरी उस पंजाबी साल्ली की क्या हाल है।
मस्त है जीजा....वो बोले।
लगता है ननदॊइ जी का जी आपकी साली पे आ गया है....क्यों नहीं आप दोनो साली अदल बदल कर लेते...मैने चिढाया।
अरे क्या अदल बदल की बात हो रही है....ये मेरी बडी ननद और जीट ननदोई जी की पत्नी....लाली थीं...मुझसे उमर में २-३ साल ही बडी होंगीं, लेकिन खूब गदराइ, भरे बदन की बडे बडे चूतड...।
अरे ननद जी....जो आफर मैने आपको पिछली बार दिया था...सैंया से सैंया बदलने का...होली का मौका भी है....मैं नंदोई जी के साथ और आप मेरे सैंया के साथ ....साथ में मेरे दो चार देवर फ्री...क्यों मंजूर।
ना बाबा ना....तुम मेरे सैया को भी रखॊ....और अपने सैंया कॊ भॊ...दोनो ओर से ...आखिर छोटी भाभी हो.....मेरी ओर से होली गिफ्ट .....वो भी कम नहीं थीं. उन्होने दहला लगाया।
ना....मुझसे ये नहीं होगा....आखिर आप का काम कैसे चलेगा...और उपर से होली का मौसम....मुझसे तो एक रात नहीं रहा जाता....अरे स्वाद बद्ल लीजिये....और मेरे सैंया का आपके सैंया से कम नहीं है कहिये तो आप के सामने दोनो का नाप के दिखा दूं....बचपन में जो आपने पकडा पकडी की होगी तो जरूर छोटा रहा होगा लेकिन अब....मैने तुरुप का पत्ता जडा।
अरे मुझे तो शक है तब तक नाउन की नयी बहू बसंती...( जो बहू होने के नाते भाभियों के साथ ही रहती थी और ननदों को खुल के गाली देती थी) भी मैदान में आ गई की लाली बीबी....कहीं होली में गली के गदहों का देख के उन्ही के साथ तो नहीं...बडी ताकत है तुम्हारी ननद रानी।
तय ये हुआ की वो, गुड्डी, और जीत कल दोपहर में हम लोगों के यहां आयेंगें।
रात भर मैं सोचती रही की लाली के शक के बाव्जूद क्या चक्कर चलाउं....की जीत और इन का दोनो का काम हो जाये.
जीत को मैने समझा दिया थी...मिल बांट के खाने को....लाली को अपने ‘सीधे साधे भाइ’ पे तो शक होगा नहीं इसलिये उन के साथ वो गुड्डी को छोडने को तैयार भी हो जायेंगी...और मैने राजीव को भी...सालीयों की अदला बदली के लिये तैयार कर लिया....तो मिल के खाओगे तो ज्यादा मजा आयेगा.....वो बिचारा ननदोइ मान भी गया।
मर्द बेचारे होते ही बुद्ढू हैं और खास कर जहां चूत का चक्कर हो..।
और साथ ही साथ अगर मेरी उस ननद को एक साथ दो मर्दों का शौक लग गया तो जो बची खुची शरम है वो भी खतम हो जायेगी और जब वो होली के बाद हम लोगों के साथ चलेगी तो....फिर उसके साथ जो कुछ होने वाला है उसके लिये....तो एक तीर से तीन शिकार...।
लेकिन लाली को वहां से ह्टाना जरूरी था....उसके सामने जीत की कुछ हिम्मत नहीं पड सकती थी....वो भी शरमाते और गुड्डी भी...।
पर उसका भी रास्ता मैने निकाल लिया...।
अगले दिन आईं मेरी ननद लाली, गुड्डी और जीत।
पतली शिफान की गुलाबी साडी और मैचिंग ब्लाउज में उनका भरा बदन और गदराया लग रह। खूब देह से चिपकी...ब्लाउज से छलकते भरे भरे जोबन...।
बांहों में भर के उन्हे चिढाती मैं बोली, बीबी जी....लगता है रात भर ननदोई जी ने चढाई की जो सुबह देर से उठीं और आने में..।
बात काट के मुझे भी वो कस के भींच के मेरे कान में बोलीं,
अरे तो क्या मेरे भाई ने छोडा होगा मेरी इस मस्त भाभी को।
उन्हे छोड के एक बार मैने फिर उपर से निहारा....वास्तब में असली मजा औरतों को इस उमर में ही आता है...गोरे चिकने गाल, कटाव खूब भरे भरे खेले खाये उभार, भरे हुये कुल्हे...और उपर से कामदार साडी...और लाल चोली कट ब्लाउज,।
सच में मैं गारंटी के साथ कहती हूं नजर न लगे आपको....आज जिस जिस मर्द ने देखा होगा ना आपको....सबका खडा हो गया होगा....इन्क्ल्युडिंग आपके गली के गधों के...वैसे ननद रानी मेरे पास होता ना तो मैं तो यहीं अभी ..।
वो सच में शरमा सी गयीं लेकिन मैं छोडने वाली नहीं थी...और मेरे ख्याल से आपके भाई का भी आपको देख के.....मैने फिर छेडा। पर वो भी..।
अरे तेरे ननदोई का तो एक दम खडा है और वो आज आये भी हैं इसलिये की सलहज कॊ अपनी पिचकारी का दम दिखायेंगें।
वो तो मैं देखूंगी ही छोडूंगी थोडी आखिर छोटी सलहज हूं और होली का मौका है ...और फिर मैने गूड्डी की ओर देखा....।
सफेद शर्ट और स्ट्राईप्ड स्कर्ट में वो भी गजब की लग रही थी...हल्का सा मेक अप....मैने उसे भी बांहों में ले के कस के भींच लिया पर तब तक मेरे नन्दोई जीत की आवाज आई,
अरे भाभी मेरा नम्बर कब लगेगा....अपकी ननदें तो बडी लकी हैं...।
और गुड्डी को छोड के मैने अपने बेताब नंदोई को बांहों में बांध लिया।
भाभी मेरा कुछ....वो बिचारे परेशान ...और निगाहें साली के मस्त उभारों पे गडी...।
देखूंगी....हो सकता है...मैं उनकॊ और परेशान कर रही थी...लेकिन ननदोई जी मेरी एक शर्त है..।
अरे आपकी शर्त मंजूर हैं बस एक घंटे के लिये अकेले में ये साल्ली मिल जाय ना..।
एक क्या पूरे तीन घंटे का सो करिये....लेकिन आज जीजा साले मिल के इस साल्ली की ऐसी सैंड विच बनाइये की चल ना पाये....आगे पीछे दोनो ओर से...मैने और आग लगाई।
एक्दम ...वो बोले और कस के अपना ८ इंच का खूंटा मेरी जांघों के बीच में..।
मैं जो खास डबल भांग वाली गुझिया बना के लाई थी वो ठंडाई के साथ ले आई।
मेरी बडी ननद लाली को पूरा शक था...।