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Raj sharma stories-एक और घरेलू चुदाई

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उषा की चूत किसी गरम भट्टी की तरह दहक रही थी जिस से प्रेम के लंड की खाल थोड़ी सी छिल गयी थी पर अभी अगर कुछ था तो वो जोश वो भूख जिसे जितना भी मिटाओ उतनी ही वो भड़कती जाती है पर हर एक शुरुआत की तरह इस खेल का अंत भी होना था उषा को ऐसा एहसास पहले कभी नही हुआ था अचानक से लगा कि उसका बदन जैसे बहुत हल्का हो गया था उसकी टाँगो मे एक कसाव सा आ गया था और उसकी साँसे जैसे रुक ही गयी थी दो चार पलों के लिए उसका जिस्म अकडा और फिर चूत से रस बहकर बाहर को गिरने लगा उषा को फिर कुछ याद नही रहा बस हो इस सुखद पल को जी भर कर जीना चाहती थी और तभी उसे अपनी चूत मे कुछ गरम गरम सा पानी गिरता महसूस हुआ

प्रेम भी झड गया था एक के बाद एक कई पिचकारिया उषा की चूत मे गिरने लगी हांफता हुआ प्रेम उसके उपर गिर गया उषा ने उसको अपनी बाहों मे भर लिया दोनो भाई बहन अपनी अपनी उखड़ी हुई सांसो को संभालने लगे………

सुबह हुई, तो उषा की आँखे खुली उसने देखा प्रेम वहाँ नही था उसने उठने की कोशिश की पर उठ नही पाई,उसके बदन का हर एक हिस्सा दर्द से दुख रहा था पूरा शरीर जैसे तप रहा था उसने पास मे पड़े अपने कपड़ो की तरफ हाथ बढ़ाया और किसी तरह से उन्हे पहनकर जल्दी से बाथ रूम मे घुस गयी वहाँ पर जाकर उसने अपनी चूत को देखा तो बुरी तरह से सूजी हुई थी वो और खून के निशान उसकी जाँघो पर और योनि के बालो मे भी थे

कल रात की चुदाई ने उसके बदन को बुरी तरह से निचोड़ डाला था उसने कल की बात को याद करते हुए नहाना शुरू किया तो उसको अच्छा लगने लगा एक ही रात मे बस एक बार की चुदाई से ही जैसे वो खिल ही गयी थी पर चूत अभी भी दर्द से कराह रही थी, जब वो नहा कर आई तो सुधा घर आ चुकी थी तो उषा थोड़ी सावधान हो गयी पर उसे क्या पता था कि उसकी माँ तो खुद अपने ख़यालो मे खोई हुई थी

खाना खाकर उषा अपने कमरे मे आकर सो गयी पर प्रेम अभी तक घर नही आया था तो सुधा ने सोचा कि चल खेत पर ही उसको खाना दे आती हूँ, और चल पड़ी खेतो की ओर इधर घर पर विनीता अकेली थी सौरभ स्कूल मे गया हुआ था विनीता सोच रही थी कि कहाँ फँस गयी मैं अच्छा ख़ासा प्रेम के साथ मज़े पे मज़े ले रही थी ना ये चोट लगती ना इधर पड़े रहना पड़ता पर तकदीर का क्या कर सकते हैं

सुधा जब खेत पर पहुचि तो उसने देखा कि प्रेम कुँए पर नहा रहा हैं उसका कसरती बदन धूप मे चमक रहा था सुधा की नज़र उसके गीले कच्छे से ढके लंड पर पड़ी जो कि सोई हुई हालत मे भी काफ़ी मोटा लग रहा था सुधा के बदन मे लहर सी दौड़ गयी प्रेम ने भी अपनी माँ को आते हुए देख लिया था तो जल्दी से उसने तौलिया लपेटा और सुधा के पास आ गया

सुधा- कितना काम करता है मेरा बेटा खाना खाने का भी होश नही रहता

प्रेम- माँ मैं बस थोड़ी देर मे घर ही आ रहा था

सुधा- कोई बात नही बेटे वैसे भी काफ़ी दिन हो गये इधर आना हो ही नही पाया तो इसी बहाने से इधर भी आ गयी जल्दी से आजा और खाना खा ले ठंडा हो रहा हैं

प्रेम खाना खाने लगा सुधा नीम के पेड़ के नीचे पड़ी खाट पर लेट गयी और हवा के झोंको से उसकी नींद सी लग गयी , रोटी खाने के बाद प्रेम पानी पी रहा था तो उसकी निगाह सोती हुई माँ पर गयी उफफफफफफफफफफ्फ़ कितनी खूबसूरत लग रही थी प्रेम ने सोचा कि माँ बिना किसी शृंगार के ही इतनी सुंदर हैं तो अगर वो सजी सँवरी रहे तो ना जाने कितने लोगो पर बिजलिया ही गिरा देगी वो अपनी माँ के पास आया और उसको देखने लगा

सुधा के पतले पतले गुलाबी होठ और उनपर बना हुआ तिल किसी पर भी अपना जादू एक पल मे ही चला सकते थे, उसकी मोटी मोटी छातिया जो ब्लाउज से बाहर आने को हमेशा ही तैयार रहती थी सुधा की साड़ी उसके घुटनो तक सरक आई थी माँ की सुंदर सुडोल पिंडलियो को देख कर प्रेम का लंड बुरी तरह से उछलने लगा प्रेम का बस चलता तो सुधा को भी चोद चुका होता वो पर उसकी अभी इतनी हिम्मत नही थी पर खड़े लंड का भी कुछ तो करना ही था

तो वो भाग कर अपने कमरे मे गया और लंड को हिलने लगा तभी पास चर रहे पशुओ ने शोर मचाना शुरू कर दिया जिस से सुधा की आँख खुल गयी उसे प्रेम नही दिखा तो वो अंदर कमरे की तरफ चल पड़ी दरवाजा खुला पड़ा था जैसे ही वो थोड़ा सा आगे को बड़ी उसके कानों को कुछ ऐसा सुनाई दिया जिसे सुन कर उसकी झान्टे सुलग ही गयी

ऊऊऊहह माआआआआआआआआआआआआआ तुम कितनी सुंदर हो कितनी मस्त गान्ड हैं तुम्हारी कब चोद पाउन्गा तुम्हे ह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह माआआआआआआआआआआआआआआआआआअ प्रेम ऐसे बड़बड़ाते हुए अपने लंड को हिला रहा था सुधा के पाँव जैसे जम ही गये थे, उसका अपना बेटा उसको चोदने का सोच कर लंड हिला रहा था, सुधा जो पिछले कुछ दिनो से अपनी चूत की बढ़ती खुजली से परेशान थी पर सीधे सीधे जाके बेटे के लंड को अपनी चूत मे भी तो नही ले सकती थी ना तो दबे पाँव वो वापिस आकर बैठ गयी

थोड़ी देर बाद प्रेम भी अपना काम पूरा करके बाहर आ गया और सुधा को जागे हुए देख कर चौंक गया और बोला- माँ, तुम कब जागी

सुधा- बस अभी अभी , खाना खा लिया तो चल घर चलते हैं

और दोनो घर को चल दिए

सौरभ स्कूल से आ चुका था और विनीता के पास बैठा था,

सौरभ- मम्मी, आप कुछ परेशान सी लग रही हैं,

विनीता- हाँ बेटा वो दरअसल आज तेरी ताई जी सुबह से नही आई हैं और मैं आज नहाई नही हूँ तो पूरे बदन मे खुजली सी मची पड़ी हैं, चैन नही मिल रहा हैं

सोरभ- तो क्या हुआ, मैं आपकी मदद कर देता हूँ, वैसे भी ताई नही थी तो भी तो आप नहाती थी ना चलो फिर नहा लो आपको आराम मिलेगा

विनीता- अरे नही बेटा, कोई बात नही तुम परेशान ना होओ

सौरभ- नही आप एक मिनिट रूको मैं सब कर देता हूँ उसने अलमारी खोली और विनीता के लिए एक अच्छी सी साड़ी बाहर निकाल दी , और जब वो उसके ब्रा-पैंटी उठा रहा था तो विनीता शरम से लाल हो गयी पर उसकी भी मजबूरी थी सौरभ उसको सहारा देकर बाथरूम तक ले गया पर पिछली बार विनीता अकेले मे गिर गयी थी और सुधा होती तो अलग बात थी पर अब क्या करे

 
मम्मी की परेशानी समझ कर सौरभ बोला मम्मी मैं आपकी मदद करता हूँ और विनीता के साथ बाथरूम मे आ गया

विनीता संकोच से बोली- पर बेटा मैं तुम्हारे सामने कैसे………

सौरभ- मम्मी मुझे भी आपकी मजबूरी का पता है और फिर मुझ से क्या शरमाना वैसे भी मैं आपको ऐसी हालत मे पहले भी देख चुका हूँ तो फिर मुझसे कैसी शरम …

विनीता ने सोचा कोई पराया तो हैं नही मेरा अपना बेटा है और फिर सही हैं पहले भी तो ये मुझे नंगी देख चुका है अब कम से कब ब्रा पैंटी तो होंगे मेरे बदन पर वैसे भी प्रेम के सामने तो फटाक से नंगी हो जाती हूँ और अब अपने बेटे की मदद भी नही ले सकती क्या ये सोचकर विनीता कहती है- हाँ बेटे, तुमसे क्या शरमाना चलो तुम्ही नहला दो मुझे अब ये खुजली बर्दास्त नही होती हैं सौरभ की खुशी का ठिकाना नही रहा और वो सहारा देकर विनीता को अंदर बाथरूम मे लेके गया

और एक कुर्सी को फवारे के नीचे रख कर उसपर विनीता को बिठा दिया और उसको चला दिया पानी की बूंदे विनीता के बदन को भिगोने लगी और जल्दी ही वो कपड़ो समेत गीली हो गयी उसके बोबे गीले ब्लाउज मे बड़े ही मस्त लग रहे थे विनीता सौरभ की भूखी नज़रो को अपने बदन पर महसूस कर रही थी पर वो एक जवान होते हुए बेटे की भावनाओ को भी अच्छे समझ रही थी उसने मन ही मन सोच लिया कि जब और लोग भी उसको घूरते है तो फिर उसके बेटे का हक तो सबसे पहले है उस पर तो अगर वो मेरे बदन को निहार भी ले तो मुझे ख़ुसी होगी

विनीता ने खुद अपना ब्लाउज उतार कर साइड मे रख दिया गुलाबी ब्रा मे क़ैद बेहद ही गोरी गोरी चूचियो को देख कर सौरभ का लंड उसके पायजामे मे टॅंट हो गया विनीता ने भी उसके खड़े लंड को देख लिया था और मंद मंद मुस्कुरा पड़ी उसने कहा बेट- ज़रा साड़ी उतारने मे मेरी मदद तो करो सौरभ को यकीन ही नही हो रहा था कि आज वो इस नज़ारे का ऐसी हालत मे लुफ्त उठाएगा उसने बिना देर किए विनीता को खड़ी किया और उसकी साड़ी और पेटिकोट को उतार कर फेक दिया ब्रा और पैंटी मे विनीता अपने बेटे की बाहों मे झूल रही थी

सौरभ का एक हाथ उसकी मम्मी की पीठ पर था और दूसरा हाथ उसके नरम कुल्हो पर उसका खड़ा लंड विनीता की टाँगो के जोड़ की जगह पर चुभ रहा था सौरभ ने अपनी बाहों का दवाब मम्मी पर डाला और विनीता भी पिघलने लगी उसकी गरमा गरम साँसे सौरभ के चेहरे पर टकरा रही थी दोनो जने माँ बेटे से ज़्यादा एक औरत मर्द के रिश्ते को फील कर रहे थे पर विनीता इस तरह अपने बेटे को कोई मोका नही देना चाहती थी इसलिए उसने सोरभ को अपने से दूर करते हुए कहा बेटा अब कब तक ऐसे ही लिए खड़ी रखेगा

जल्दी से नहाने मे मेरी मदद कर हाँ माँ हकलाते हुवे सौरभ ने कहा और विनीता को सहारा देकर कुर्सी पर बिठा दिया गुलाबी ब्रा-पैंटी मे किसी प्यारी सी गुड़िया जैसे लग रही थी उसकी मम्मी पर उसके होश तो तब उड़े जब उसकी नज़र मम्मी की पैंटी पर पड़ी कितनी छोटी सी पैंटी थी बस नाम की ही कुल्हो पर से एक लाइन ही थी जो गान्ड की दरार मे घुसी हुवी थी सौरभ का खुद पर कंट्रोल करना बड़ा मुश्किल हो रहा था

खुद को भीगने से बचाने के लिए उसने फव्वारा बंद किया और फिर बाल्टी से ठंडा पानी अपनी मम्मी के उपर डाला वैसे तो विनीता गीली ही थी पर जैसे ही पानी उसकी त्वचा से छुआ उसकी सिसकी निकल गयी विनीता बोली ला साबुन दे उपर मैं खुद लगा लूँगी तू फिर पाँवो पर लगा देना दरअसल विनीता सौरभ को उसकी चूचियों को छूने का मोका नही देना चाहती थी , तो उसने अपने हाथो पर साबुन लगाई और फिर अपने गोरे पेट पर अब बारी आई बोबो की

वो ब्रा के उपर से ही साबुन लगाने लगी पर वो अपना हाथ पीठ पर ले गयी पर उधर साबुन तभी लगता जब वो ब्रा उतार देती अब विनीता फँसी कशमकश मे उतारे या ना उतारे, उसकी उलझन देख कर सौरभ बोला मम्मी मैं आपकी हालत समझ रहा हूँ आप ब्रा उतार दो बेशक मैं बड़ा हो गया हूँ पर बचपन मे इन चूचिओ का दूध पीकर ही बड़ा हुआ हूँ तो एक बार फिर से अगर मैं देख लूँगा तो कोई आफ़त थोड़ी ना आने वाली है

बेशक ये बात उसने अपनी मम्मी को सहज करने के लिए कही थी पर इधर उसके पयज़ामे मे झूलते लंड को देख कर विनीता की चूत मे जहाँ कुछ कुछ हो रहा था उसके मन मे भावनाओ का एक तूफान चल रहा था पर हाई रे ये जालिम मजबूरी अब करे भी तो क्या करे एक स्टॅंड लेते हुए सौरभ पीछे की ओर आया और ब्रा के हुको को खोल कर उसको उतार दिया उसने विनीता के हाथों से साबुन लिया और उसकी चिकनी पीठ पर लगाने लगा

विनीता के मन को मिले जुले भाव ने घेरा हुआ था आख़िर वो भी एक औरत थी और वो भी बहुत ही कामुक मिज़ाज की औरत ना जाने कितने लोग रात को उसका ही ख़याल करके अपने लंड को हिलाया करते थे साबुन लगाते लगाते सौरभ का हाथ उसके बोबो से भी टच होने लगा था तो विनीता के बदन मे चिंगारिया भरने लगी थी हर पल उसकी आँखे जैसे किसी नशे मे डूबती जा रही थी सौरभ अब बिना किसी संकोच के अपने दोनो हाथो को आगे लाया और उसके बोबो पर साबुन लगाने लगा

36 इंच की मस्त गोलाइयाँ उसके अपने बेटे के हाथ मे थी विनीता ये सोचकर पता नही क्यो रोमांचित होने लगी थी साबुन के झाग से उसकी चूचियाँ बड़ी चिकनी हो रही थी और उसका अपना बेटा हौले हौले उन्हे दबा रहा था विनीता अपना होश खोने लगी थी अपनी आँखे बंद किए अपने दाँतों से होटो को काट ते हुए वो अपने बॉब्बे दबवा रही थी

सौरभ की उंगलिया उसके निप्पल्स को रगड़ रही थी आनंद मे विनीता की आँखे डूबी जा रही थी पर उसे अपनी भावनाओ पर कंट्रोल करना था और साथ ही बेटे को भी बहकने से रोकना था तो उसने कहा- बस कर बेटा कितनी साबुन लगाएगा यहाँ पर अब ज़रा पैरो पर भी लगा दे ये सुनकर सौरभ जैसे नींद से जागा और उसने अपनी मम्मी के बोबो को हसरत भरी निगाओ से देखा और ठंडी सांस लेकर पाँवो की तरफ आ गया

धीरे धीरे मम्मी की पिंडलियो पर साबुन लगा ने लगा विनीता के बदन को उसके पति ने भी खूब रगड़ा था और प्रेम ने भी अपनी बाहों मे मसला था पर उसको अपने बदन पर बेटे के हाथो का स्पर्श बहुत ही अच्छा लग रहा था मस्ती धीरे धीरे उसके उपर छा रही थी पर एक माँ होने की शरम उसके बहकते कदमो को रोक रही थी सौरभ के हाथ उसकी जाँघो पर आ चुके थे विनीता की टाँगे थर थराने लगी पल पल सौरभ के हाथ उपर और उपर आते जा रहे थे आख़िर अब बेटे के हाथ माँ की पैंटी पर आ गये दोनो की आँखे मिली

 
विनीता जानती थी कि अब सौरभ उसको उतारने की कहेगा पर उसने सोच लिया था कि अपने बेटे को उस जन्नत के नज़ारे को अभी नही दिखाएगी उसने कहा- बेटा पैंटी को रहने दो हमारे बीच थोड़ा परदा तो रहना चाहिए तुम इसके उपर से ही साबुन लगा लो सौरभ के लिए तो इतना भी बहुत था ,जैसे ही उसने पैंटी पर अपना हाथ रखा उसके हाथो से साबुन नीचे गिर गयी विनीता की हँसी छूट गयी सौरभ ने चूत को कच्छी के उपर से ही अपनी मुट्ठी मे भरा और दबा दिया विनीता के मुँह से आह निकली

क्या हुआ मम्मी पूछा उसने

कुछ नही बेटा तुम अपना काम करो

साबुन से चिकनी हो चुकी कच्छी और टाँगो पर काफ़ी सारा झाग हो गया था सौरभ ने थोड़ा सा आगे बढ़ने को सोचा और अपनी एक उंगली कच्छी की साइड से पैंटी के अंदर सरका दी विनीता ने इसकी उम्मीद नही की थी पर वो चुप ही रही सौरभ धीरे धीरे अपनी उंगली को मम्मी के झान्टो पर रगड़ने लगा विनीता की टाँगे अपने आप खुलती चली गयी दो चार मिनिट तक चूत के बालो से खेलने के बाद सौरभ ने अपना हाथ निकाल लिया और मम्मी को नहलाने लगा

नहलाने के बाद तौलिए से अच्छे से रगड़ा उसने विनीता के जिस्म को ख़ासकर उसकी गान्ड और चूचियो को विनीता की चूत अब फटने को आई थी उसके बेटे ने उसको बुरी तरह से उत्तेजित कर दिया था अगर रिश्तो की मर्यादा ना होती तो अभी के अभी वो उसकी लंड को अपनी चूत मे घुसा लेती पर उफफफफफफफफफफफ्फ़ ये शरम के बंधन पर कही ना कही एक चिंगारी दोनो माँ बेटे के दिल मे भड़कने लगी थी

विनीता बस जल्दी से जल्दी अपनी चूत की खुजली को उंगली से शांत करना चाहती थी कमरे मे आके सौरभ ने उसको कपड़े पहनाए दोनो का बुरा हाल था विनीता ने कहा बेटा मैं थोड़ी देर सोना चाहती हूँ तुम जाते जाते दरवाजे को बंद करके जाना , सौरभ वहाँ से सीधा बाथरूम मे आया और अपनी मम्मी की गीली ब्रा पैंटी को सूंघते हुए अपने लंड को हिलाने लगा कमरे मे विनीता अपनी चूत मे दो उंगलिया घुसाए पड़ी थी

ओह मममम्मी तुम कितनी सुंदर हो तुम्हारे बड़े बड़े बोबे और चूतड़ मम्मी एक बार दे दो ना बस एक बार ऐसे मन ही मन बुदबुदते हुवे सुरभ अपने लंड को तेज़ी से हिला रहा था और फिर थोड़ी देर बाद उसने अपना पानी गिरा दिया , विनीता भी बिस्तर पर मचल रही थी उसकी चूत से बहुत ज़्यादा रस बह रहा था उसकी उंगलियो की रफ़्तार अब बहुत तेज हो गयी थी और फिर एक लंबी सांस के बाद वो भी झाड़ गयी पर उसके मुँह से झड़ते हुए निकल गया ओह्ह्ह्ह बेटे चोद दे अपनी माआआआआआआ कूऊव आअहह

झड़ने के बाद विनीता को भी हैरानी हुई कि वो अपने बेटे को सोच कर झड़ी थी उसके होटो पर एक मुस्कान गयी और फिर थकान के मारे उसको नींद आ गयी सौरभ भी अपना काम करने लग गया ,

उषा उठ चुकी थी और नज़रे बचा बचा कर प्रेम की तरफ देख रही थी पर माँ के होते दोनो कुछ कर नही सकते थे तो बस आँख मिचोली चल रही थी दोनो को इंतज़ार था रात का की कब माँ जाए और कब दोनो बिस्तर मे उस गरम खेल को खेले

रात को सबने खाना खाया और फिर रसोई का काम निपटा कर सुधा विनीता के घर चली गयी प्रेम ने दरवाजे को बंद किया और उषा के पास पहुच गया उषा को अपनी बाहों मे भर कर चूमने लगा और वो भी उसका पूरा साथ देने लगी उषा ने अपने रसीले होटो को भाई के लिए खोल दिया और अपनी बाहें प्रेम की पीठ पर कस दी दोनो की साँसे आपस मे घुलने लगी जिस्मो मे गर्मी का दौरा बढ़ने लगा एक लंबे किस के बाद प्रेम ने उषा को अपनी गोदी मे उठाया और कमरे मे ले आया

दोनो के नज़रे मिली और फिर बेसबरो ने जल्दी जल्दी एक दूसरे के कपड़ो को उतारना शुरू कर दिया दीदी के गदराए योवन के दर्शन करते ही प्रेम के लंड की नसें फूलने लगी उषा अपनी गान्ड मटकाते हुए आगे को आई और अपने भाई की गोद मे बैठ गयी, प्रेम का लंड उषा की गान्ड की दरार मे सेट हो गया गरम लंड को गान्ड पर पहसूस करके उषा को बहुत अच्छा लग रहा था उसने अपनी गंद को थोड़ा सा हिलाया उफफफफफफफफफफफफफ्फ़ प्रेम का हाल हुआ अब बुरा

दीदी के कान के पिछले हिस्से पर किस करते हुए प्रेम ने अपने हाथों से दीदी को मस्त कबूतरों को थाम लिया और बड़े ही प्यार से उनको सहलाने लगा प्रेम के स्पर्श से उषा की आँखे गुलाबी होने लगी थी कल रात को जो धमाके दार चुदाई की थी प्रेम ने उसकी तो उषा उसकी दीवानी हो चुकी थी उसने पूरी तरह से अपने आप को भाई की बाहों मे सोन्प दिया था अब उषा थोड़ी सी साइड पर हुई और अपना हाथ नीचे ले जाकर लंड को पकड़ लिया और अपना हाथ उस पर फेर ने लगी इधर प्रेम उसके बोबो पर अपना दवाब बढ़ता जा रहा था दोनो की साँसे भारी हो चली थी

उषा बेहद कामुक हो रही थी उस से रुका नही जा रहा था तो वो गोदी मे ही झुकी और अपने होटो को लंड के सुपाडे पर टीका दिया उसके इस तरह झुकने से उसके कूल्हे उपर की तरफ उठ गये थे और प्रेम की आँखो के सामने आ गये थे लंड पर गीली जीभ के अहसास से ही प्रेम के बदन मे झुरजुरी दौड़ गयी उसको बहुत मज़ा आ रहा था उसके मुँह से निकल गया = आआआआआअ हह दीदी बहुत अच्छे ऐसे ही चूसो बहुत मज़ा आ रहा है ये सुनकर उषा और भी तेज़ी से उसका लंड चूसने लगी

उषा के चूतड़ बहुत थिरक रहे थे उसकी चूत से रस की बूंदे टपक रही थी प्रेम ने अपनी एक उंगली चूत के अंदर सरका दी तो उषा ने अपने कुल्हो को सिकोड लिया प्रेम ने उंगली को बाहर निकाला और अपने मुँह मे डाल दिया, दीदी की चूत का रस उसे बहुत स्वादिष्ट लगा तो उसने फिर से अपनी उंगली अंदर डाल दिया और हिलाने लगा उषा की टाँगे काँपने लगी उसने ने अपने मुँह से लंड नेकाला और प्रेम से कहा – मेरी चूत को चूसो ना

प्रेम तो चाहता ही था उसने तुरंत अपना मुँह चूत के गुलाबी होटो पर लगा दिया और छोटी सी चूत को झट से अपने मुँह मे ले लिया नमकीन स्वाद उसके मुँह मे घुलने लगा दोनो भाई बहन पागलो की तरह एक दूसरे के गुप्तांगो को चूस रहे थे कमरे की फ़िज़ा मे कामुक सिसकारियो का समावेश हो रहा था , उषा लंड को अपने गले तक उतार लेती थी उसके थूक मे पूरा लंड सन चुका था जबकि प्रेम भी कोई कसर बाकी ना छोड़ते हुए अपनी जीभ को गोल घुमा घुमा करके दीदी की चूत का पानी पीने की कोशिश कर रहा था

पल पल प्रेम के लंड की कठोरता और उषा की चूत की चिकनाहट बढ़ती ही जा रही थी प्रेम का लंड अब बिल्कुल तैयार था दीदी की चूत मे जाने के लिए उसने उषा को बिस्तर पर घोड़ी बनाया और उसकी पतली कमर को थामते हुवे अपने लंड को चूत के मुख से सटा दिया उषा ने एक झुरजुरी सी ली और अगले ही पल प्रेम का सुपाडा चूत मे घुस चुका था , उषा बस एक बार ही चुदि हुई चूत थी तो उसे फिर से दर्द हुआ पर वो जानती थी कि बस थोड़ी देर की ही तो बात हैं उसने अपने हाथों मे चादर को कस लिया प्रेम ने एक धक्का और मारा और लंड आधा अंदर सरक गया

उषा इस बार अपनी आह को नही रोक पाई प्रेम वही पर रुक गया और अपने हाथो को आगे लेजा कर उषा के बोबो को मसल्ने लगा उषा के कुछ नॉर्मल सा होते ही उसने एक तेज का शॉट लगाया और अपने अंडकोषो को उषा के कुल्हो से सटा दिया उषा को लगा कि उसकी चूत को किसी लंबे चाकू से चीर दिया गया हो जैसे आँसू निकल पड़े आँखो से पर वो चुदने के लिए पूरी तरह से तैयार थी कल भी तो उसने चुदाई का सुख प्राप्त किया था दीदी के बोबो को कुछ ज़ोर से भींचते हुए प्रेम अपनी कमर को आगे पीछे करने लगा

गीली चूत के रस से सारॉबार लंड ने जल्दी ही जगह बना ली और चूत की दीवारो से रगड़ खाने लगा उषा को धीरे धीरे मस्ती चढ़ने लगी थी जल्दी ही प्रेम ने अपनी रफ़्तार को पकड़ लिया और दीदी को पाने लौडे का मज़ा देने लगा जितनी ज़ोर से अब वो बहन के बोबो को मसलता उषा को उतनी ही मस्ती चढ़ती दोनो भाई बहन एक दूजे मे समाए हुए उस कमरे मे अपनी हवस को शांत कर रहे थे दोनो की आहे कमरे की दीवार से टकरा रही थी करीब पंद्रह मिनिट की चुदाई के बाद उषा झड चुकी थी और प्रेम भी बस झड़ने ही वाला था उसने उषा की कमर को कस कर जाकड़ लिया और फिर उसको लिए लिए ही बेड पर लुढ़क गया उसके वीर्य की धार उषा की चूत मे गिरने लगी दोनो अपनी मंज़िल को पा गये थे………………………….

पर ये तो बस एक शुरुआत थी पाप के रास्ते पर पहले कदम थे इनके

 
बंधुओ अपडेट दे दिया है

पर आपकी तरफ से कोई रिस्पोन्स नही मिल रहा है
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बार बार सुधा की नज़रे सौरभ के खड़े लंड पर जा रही थी उसकी चूत भी मचलने लगी थी पर सुधा बहुत शातिर औरत थी गर्मी बहुत हैं ऐसा कहकर उसने अपने आँचल को पूरी तरह से साइड मे कर दिया गोरे गोरे बोबे वैसे ही ब्लाउज से आधे से ज़्यादा बाहर आ रहे थे उपर से ताइजी मेहरबान हो रही थी सौरभ पर तो अब वो बेचारा बस रोके था खुद को किसी तरह से सौरभ का लंड उसको जीने नही दे रहा था उसे लग रहा था कि अगर उसने अभी के अभी अगर नही हिलाया तो फिर उसका पानी कच्छे मे ही निकल जाएगा सुधा का गदराया जिस्म और उसकी कामुक हरकत सौरभ के जिस्म मे गर्मी भर रही थी

सुधा अपने धोए कपड़ो को सुखाने के लिए उठी कि उसका पाँव साबुन के झाग की वजह से फिसल गया और वो सीधा पानी मे जा गिरी और उपर से नीचे तक भीग गयी ओफफफफफफफफफफफ्फ़ ये क्या हो गया उसने कहा और पानी से बाहर आने लगी गीले होने की वजह से उसके कपड़े बुरी तरह से उसके बदन पर चिपक गये थे उसकी साड़ी मे उभरी उसकी मोटी गान्ड और भी मस्त लग रही थी गीली होने की वजह से सुधा ने अब अपनी साड़ी भी उतार कर साइड मे रख दी और बस वो अब ब्लाउज और पेटिकोट मे ही थी , पेटिकोट पीछे से उसकी गान्ड की दरार मे घुसा पड़ा था सुधा फिर से अपने कपड़े धोने लगी सौरभ अपने कपड़े धो चुका था पर वो सुधा की वजह से वही पर रुक गया था

सौरभ- ताई जी आप तो पूरे गीले हो गये हो एक काम करो यही पर नहा लेना

सुधा- बेटा सोच तो मैं भी रही हूँ ऐसा ही पर क्या करूँ घर से दूसरे कपड़े भी तो नही लाई और बाकी सब के तो साबुन लगा दिया हैं तू नहाने की कह रहा हैं मैं सोच रही हूँ कि घर कैसे जाउन्गी

सौरभ- ताई जी इस साड़ी को धूप मे सूखा दो जल्दी ही सूख जाएगी और फिर जब तक आप बाकी के कपड़े धोकर नहाओगे ये तैयार सुधा को भी उसकी बात जॅंच गयी उसने कहा बेटा बात तो ठीक है तेरी पर फिर तू भी इधर ही है तेरे सामने कैसे नहाउन्गी मैं लाज आएगी मुझे

सौरभ मन ही मन मे –भोसड़ी की उस दिन चूत मे तीन तीन उंगलिया डाले हुए थी तब तो लाज नही आ रही थी तुझे आज सती-सावित्री बन रही हैं

सौरभ- ताई जी वो क्या हैं ना कि मुझे भी नहा कर ही जाना था तो रुकना ही पड़ेगा और फिर मेरे कपड़े भी तो सूझ रहे हैं

सुधा ने सोचा कि ये भी पक्का ढीठ हैं ऐसे नही मान ने वाला और वैसे भी जब सुधा जैसा सेक्स बॉम्ब इस हालत मे आँखो के सामने हो तो फिर कॉन कम्बख़्त जाए उधर से उसने कहा – तो फिर एक काम कर बेटा तू भी आजा इधर ही साथ ही नहा लेते हैं फिर इकट्ठा ही घर साथ चलेंगे

ये सुनते ही सौरभ की जैसे मूह माँगी मुराद पूरी हो गयी और थोड़े दूर दूर होकर दोनो जाने नहाने लगे ठंडा पानी सुधा के बदन को और गरम कर रहा था उधर सौरभ भी पानी मे भीग चुका था उसका खड़ा लंड का साइज़ गीले कच्छे से पूरी तरह दिख रहा था जवान लंड को देख कर सुधा की चूत भी कुलबुलाने लगी उसने सोचा कि थोड़े मज़े लेने मे क्या बुराई है और फिर सौरभ हैं तो घर का ही जब तू अपने बेटे का लंड देख सकती है तो फिर सोरभ कॉन सा पराया है उसने ट्रिक लगाते हुए कहा कि बेटा मेरा हाथ नही पहुँच पा रहा हैं तू ज़रा मेरी पीठ पर साबुन लगा दे

सौरभ तो जैसे आज मज़े के दरिया मे ही पहुच गया था सुधा खुद उसे बुला रही थी उसने कहा – ताइजी पर साबुन लगाने के लिए ब्लाउज तो उतारना पड़ेगा ना

सुधा- पर बेटे ऐसे खुले मे मैं कपड़े उतार भी तो नही सकती ना कोई भी आ निकलेगा

सौरभ- तो फिर कैसे लगाऊ ताई जी

 
सुधा तो खुद कामवासना मे बुरी तरह से तप रही थी उसने कहा –बेटा एक काम कर कुँए पर जो पिछली तरफ बिना छत का बाथरूम सा बना हैं उधर चल कर नहाते हैं कम से कम चारदीवारी को ओट तो रहेगी कोई देखेगा भी नही और फिर मैं भी थोड़ा आराम से नहा सकूँगी

ताई जी की ये बात सुनकर सौरभ को नज़ाने क्यो यकीन सा होने लगा था कि आज किस्मत उस पर कुछ ज़्यादा ही मेहरबानी दिखा रही है उसने उसी पल सोच लिया कि ताइजी के थोड़ा सा और आगे सरकते ही आज वो चूत मारने मे कोई कसर नही छोड़ेगा फिर चाहे जो कुछ भी हो जाए आज ताई जी को अपना बना कर ही रहेगा वो

उसने कहा ताइजी वो तो काफ़ी दिनो से ऐसे ही पड़ा हैं आप अपने कपड़े धो लो तब तक मैं मोटर जोड़के उधर के नलके को चालू करता हू और थोड़ा साफ भी कर देता हूँ दो जिस्मो मे एक ऐसी आग लग चुकी थी जिसे अब ये ठंडा पानी भी नही बुझा सकता था अगर कुछ था तो बस एक दूसरे को अपनी बाहो मे भरना, एक दूसरे को पा लेने की हसरते……….

दोनो के दिल बड़ी तेज़ी से धड़क रहे थे दोनो ने इस रास्ते पर आगे बढ़ने का सोच लिया था दोनो घबराए से थे, पर आग दोनो के जिस्मो को पिघला रही थी बस इस आग को एक बोछार की सख़्त ज़रूरत थी, सौरभ दौड़ कर गया और जल्दी ही उस कच्चे बाथरूम को सॉफ कर दिया और पानी की मोटर चला दी थोड़ी देर बाद सुधा भी सावधानी से इधर उधर देख कर बाथरूम मे घुस गयी टूटे से किवाड़ को बंद कर लिया

सुधा- बेटे ये सही किया तूने अब आराम से नहा सकती हूँ

सौरभ अपने हाथ मे साबुन लेते हुए, ताई जी अब मैं भी अच्छे से साबुन लगा देता हूँ सुधा ने अपना मूह दीवार की तरफ किया और अपने ब्लाउज को उतार दिया ब्रा अंदर पहनी नही थी उसके उड़ते कबूतर बाहर आकर झूल गये पर चूँकि उसकी पीठ सौरभ की ओर थी तो वो उन कयामत चूचियो के दर्शन नही कर पाया था सुधा की नंगी, मखमली पीठ देख कर ही उसका लंड बुरी तरह से झूलने लगा था उसने ताई जीकी पे पीठ पर पानी का डिब्बा डाला और साबुन रगड़ने लगा सुधा को अपने जिस्म पर जवान लड़के का स्पर्श बड़ा ही मस्त लग रहा था

सौरभ का हाथ बार बार सुधा की बगल से होते हुए चूचिओ से भी रगड़ खा रहा था सुधा की चूत बुरी तरह से रस छोड़ रही थी उसने अपनी गान्ड को और पीछे कर लिया और सौरभ के लंड पर रगड़ते हुए बोली बेटा- ये क्या है जो डंडे जैसा मेरे पीछे चुभ रहा हैं

सौरब अपना हाथ आगे को ले गया और उसके दोनो बोबो को कस कर भीचते हुए बोला ताई जी आप ही देख लो ना क्या हैं , सुधा के बोबो पर सालो बाद किसी ने छुआ था वो मस्त हो गयी उसके मूह से सिसकारिया निकालने लगी सुध बुध भूलने लगी वो सौरभ भी पूरी मस्ती से सुधा के बोबो को मसल रहा था सुधा अपना हाथ पीछे ले गयी और सौरभ के कच्छे मे हाथ डालकर उसके लंड को मसल्ने लगी, अपने लंड पर पहली बार किसी औरत के हाथ को देख कर सौरभ तो जैसे झड़ने को ही हो गया

सुधा धीरे धीरे उसके लंड को अपनी मुट्ठी मे लेकर आगे पीछे करने लगी सौरभ और कस कस कर सुधा के बोबो को दबाने लगा दोनो के जिस्मो पर पड़ता ठंडा पानी जिस्मो की आग को और भड़काए जा रहा था जब सुधा ने सौरभ की दोनो गोटियो को अपने हाथ मे भर कर दबाया तो सौरभ जैसे मस्ती से झड़ने को ही हो गया उसको पता था कि आज वो कुछ भी करे ताई जी उसको रोकने वाली नही हैं उसने अपना हाथ चूचियो से हटाया और सुधा के पेटिकोट के नाडे को खोल दिया सुधा अब पूरी तरह से नंगी हो गयी थी उसकी मदमस्त गान्ड सौरभ की आँखो के सामने थी उसने सुधा का मूह अपनी ओर किया और उसके मोटे मोटे रसीले होटो पर अपने होंठ रख दिए और ताई जी के होटो का रस चूसने लगा

बरसो बाद सुधा के प्यासे होटो पर गरम लबो का अहसास हुआ था उसने अपना मूह खोला और अपनी जीभ सौरभ के मूह मे डाल कर चुसवाने लगी सौरभ का लंड उसकी चूत पर रगड़ खा रहा था सुधा बस उसकी बाहों मे पिसना चाहती थी एक बेहद लंबे चुंबन के बाद सुधा उस से अलग हुई उसकी फूली सांस अपनी कहानी बया कर रही थी वो सौरभ की आँखो मे देख कर मुस्कुराइ और फिर अपने घुटनो के बल बैठ गयी लंड अब बिल्कुल उसके चेहरे के सामने झूल रहा था बिना देर किए सुधा ने अपना मूह खोला और लंड के सुपाडे को अपने मूह मे भर लिया

 
सुधा के मूह मे लंड जाते ही सौरभ की सिट्टी पिटी गुम हो गयी मस्ती के मारे उसकी एक एक नस नाच उठी ओह ताइईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई जीिइईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई उसके मूह से निकला, गोटियो को अपने हाथो से सहलाते हुए सुधा लंड को चूसने लगी थी खुद सुधा की हालत ऐसी हो रही थी कि जैसे किसी बच्चे को उसका मनपसंद खिलोना मिल गया हो थोड़ा थोड़ा करके उसने पूरा लंड अपने मूह मे ले लिया और दबा के चूसने लगी सौरभ ताई जी की इस अदा का दीवाना हो गया उसका खुद से काबू खोता जा रहा था सुधा के कामुक होटो लंड पर अपना जादू चलाए जा रहे थे अब सौरभ ने ताई जी के सर को अपने हाथो से दबा लिया और उसके मूह को चोदने लगा

सुधा जहाँ पूरी तरह से खेली खाई औरत थी वही सौरभ एकदम नोसखिया था वो ज़्यादा देर नही ठहर पाया और झड़ने को हो आया, उसकी आँखे मज़े से फैलती चली गयी पूरा जिस्म अकड़ गया और उसका गरमा गरम पानी सुधा के मूह मे गिरने लगा अरसे बाद सुधा आज वीर्यपान कर रही थी उसके मूह मे वो गाढ़ा नमकीन सफेद रस अच्छे से घुल गया जिसे वो चतखारे लेते हुए घूँट घूँट करके पी गयी

जब तक लंड से रस की एक एक बूँद ना चूस ली सुधा ने लंड को अपने मूह मे ही दबाए रखा सौरभ तो मस्ती के मारे पागल ही हो गया था बड़ी कातिल निगाहो से सुधा ने सौरभ की तरह देखा और फिर बाथरूम के फरश पर घोड़ी बन गयी सौरभ ने आज से पहले इतनी बड़ी गान्ड नही देखी थी सुधा की 46” की गान्ड का मस्त नज़ारा उसकी आँखो के सामने था सुधा ने अपनी टाँगो को थोड़ा सा फैला दिया जिस से उसकी चूत बाहर मूह निकाल कर लॅप लपाने लगी सुधा ने कहा बेटा बहुत तड़प रही हैं मेरी मुनिया आ तू भी इसका रस चख ले बहुत प्यासी हैं ये आजा इसका सारा रस निकाल दे सौरभ उस मदमस्त गान्ड पर झुका और अपने काँपते होंठो को उस चूत पर रख दिया …

घोड़ी बनी हुई सुधा की कई सालो से अन्छुइ चूत काम रस से गीली होकर लॅप लपा रही थी सौरभ ने अपनी जीभ को गीली किया और ताई जी की गरम चूत की खुश्बू को सूंघने लगा उसकी उत्तेजना और भी बढ़ गयी थी उसने ताई जी के विशाल नितंबो पर अपने हाथ रखे और अपने सप्निली जीभ को टच कर दिया चूत से लिस लीसी जीभ का स्पर्श चूत पर होते ही सुधा के शरीर मे जैसे भूकंप हो गया वो लड़खड़ा गयी और आगे को सरकने लगी पर सौरभ ने बड़ी मजबूती से उसको थाम रखा था तो वो सरक ना पाई

चूत के नमकीन पानी का स्वाद अपने मूह मे आते ही सौरभ को पता चल गया कि आख़िर क्यो दुनिया चूत के पीछे इतनी देवानी हुई पड़ी हैं सुधा की हिलती गांद उसे और भी उत्तेजित कर रही थी उसने अपने हाथो से छूट की मासूम पंखुड़ियो को आहिस्ता से फैलाया और अपनी जीभ को जितना अंदर डाल सकता था डाल दिया सुधा ने अपनी कामुक टाँगो मे सौरभ के चेहरे को दबा लिया और उसको अपनी चूत का पानी पिलाने लगी दोनो ताई-बेटा अपने रिश्तो की मर्यादा को भूल कर एक नया रिश्ता जोड़ने जा रहे थे जिसमे अगर था तो बस चूत और लंड का मिलन

जैसे जैसे चूत की चुसाइ होती जा रही थी सुधा की गान्ड अपने आप थिरकने लगी थी वो बस किसी तरह से अपनी आहों को रोके हुए थी उसकी फूली हुई चूत का आधे से ज़्यादा हिस्सा सौरभ के मूह मे भरा हुआ था शाबाश बेटे शाबाश वो धीमे धीमे बुदबुदते हुए सौरभ के जोश को बढ़ा रही थी सुधा ने अपनी आँखे मस्ती के मारे बंद कर ली थी अब सुधा की चूत मे इतने सालो से रस जमा हुआ था तो वो ज़्यादा देर तक सौरभ की जीभ को सहन नही कर पाई और उसके मूह मे ही झड गयी सौरभ उसके सारे पानी को पी गया शांत होने के बाद सुधा अब खड़ी हुई दोनो की नज़रे मिली सुधा ना जाने क्यो शर्मा गयी

पर सौरभ का लंड फिर से खड़ा हो गया था उसने सुधा को वही फर्श पर लिटा दिया और उसकी गद्देदार जाँघो को खोल दिया सुधा ने मस्ती से आह भरी सौरभ उसकी टाँगो के बीच आया और अपने लंड को चूत के छेद पर टिका दिया दोनो ही जानते थे कि आगे क्या होने वाला हैं बस एक पल की ही बात थी पर ये एक पल ही बहुत लंबा हो गया बाहर किसी तरह की आवाज़ हुई तो दोनो की वासना एक मिनिट मे ही कही गायब हो गयी दोनो एक दूसरे का मूह ताके कॉन आ गया इस टाइम कही वो पकड़े ना जाए सुधा घबराई सौरभ की चेहरे पर हवाइयाँ उड़ी गान्ड फट गयी उसकी की कही प्रेम तो नही आ गया

 
उसने किवाड़ हल्के से खोला तो देखा कि कुछ बकरिया घुस आई थी उस साइड मे उसने फिर से किवाड़ बंद किया और सुधा की पकड़ लिया तो सुधा बोली- नही बेटे अभी इधर कुछ भी करना ठीक नही है अगर कोई आ निकला तो शामत आ जाएगी तो फिर वो दोनो उस बाथरूम से बाहर आ गये हाथ आई चूत फिसल गयी थी तो सौरभ का मूड उखड़ सा गया था पर सुधा कोई रिस्क नही लेना चाहती थी तो फिर उसने अपने कपड़े समेटे और घर की तरफ चल दी सौरभ वही पर रुक गया

उधर घर पर विनीता को अकेली देख कर प्रेम उसके पास पहुच गया और उस पर चुंबनो की बोछार कर दी विनीता तो खुद वासना की आग मे जल रही थी उसने मज़े ले लेकर अपने होतो का रस प्रेम को पिलाया प्रेम ने उसकी चूचियो को नंगा कर दिया और बोला चाची कितना इंतज़ार करना पड़ेगा मुझे तुम्हारे बिना जीना बड़ा मुस्किल हो रहा हैं विनीता बोली- मेरी जान मेरा हाल भी ऐसा ही हैं पर ये निगोडी चोट ना जाने कब सही होगी प्रेम ने विनीता की 36” की चूचियो को दबाना शुरू किया तो वो मचलने लगी उसने हाथ आगे कर के प्रेम की चैन खोली और उसके लंड को बाहर निकाल कर हिलाना शुरू कर दिया

विनीता- आह प्रेम थोड़ा आहिस्ता से एक काम कर थोड़ा सा मेरे उपर झुक जा और मेरी चूत मे अपनी उंगली डाल कर रगड़ बड़ी बेकाबू हो रही हैं ये इसकी खुजली को मिटा बेटे पर थोड़ा ध्यान से कही मेरे पैर को ना हिला देना

प्रेम उसके उपर आया और उसने विनीता की साड़ी को कमर तक उठा दिया अंदर उसने पैंटी नही डाली थी तो कोई रुकावट की बात ही नही थी बस उसने अपनी चाची की चूत को मुट्ठी मे भर लिया और उसको मसल्ते हुए चूचियो को पीने लगा विनीता की नस नस मे हवस की आग शोलो के रूप मे भड़कने लगी वो बेकाबू हो ने लगी और ज़ोर ज़ोर से प्रेम के लंड को हिलाने लगी दोनो चाची बेटे जैसे तैसे जुगाड़ से लगे हुए थे दो उंगलिया चूत मे जाने से विनीता को थोड़ा सा आराम तो मिला था पर जिसे लंड की आदत हो उसका काम कैसे चले उंगलियो से

पर मजबूरी भी कोई चीज़ होती हैं तो काम ही चलना था प्रेम तेज़ी से चूत मे उंगलिया चला रहा था विनीता बस झड़ने ही वाली थी कि तभी उसे नीचे घर मे किसी के आने की आवाज़ सुनाई दी वो समझ गयी कि उसका बेटा ही होगा तो उसने प्रेम को भगाया वहाँ से इधर प्रेम अपनी दीवार पर उतरा उधर सीढ़िया चढ़ कर सौरभ मम्मी के कमरे मे आया अपना काम बीच मे लटक जाने से विनीता को गुस्सा तो बहुत आया पर वो बेटे के सामने कुछ भी शो नही करना चाहती थी तो उसने अपने कपड़ो को सही किया और बेटे से बात करने लगी

विनीता- कहाँ गया था बेटा कितना टाइम हुआ तुझे गये हुए

सौरभ- मम्मी वो घर पर पानी नही आया तो मैं नहाने और कपड़े धोने खेत पर चला गया था और फिर वहाँ पर कई और काम भी करने थे तो देर हो गयी

विनीता – खाना खाया तूने

सौरभ- जी हाँ खा लिया था

सौरभ- मम्मी क्या बापू आज आएँगे

विनीता- बेटे, उसका हाल तो तुझे पता ही है जब तक उसको मुफ़्त की दारू मिलती रहेगी वो घर का मूह नही देखेगे पर मैं हूँ ना बता क्या बात हैं

सौरभ- कुछ किताबें ख़रीदनी हैं तो पैसे चाहिए

विनीता- कल जब तू सहर जाएगा तो ले जाना

सौरभ- ठीक हैं अभी आपके पैर का दर्द कैसा है हाई रे, पूरे दिन मे आपके घुटने की मालिश करना तो मैं भूल ही गया मैं अभी बाम लेकर आता हूँ

सौरभ बाम लेने चला गया और विनीता को अपनी गीली चूत का ख्याल आया जो रस से भरी पड़ी थी उसको ये पता था कि जब बेटा उसके घुटने की मालिश करेगा तो अंदर का नंगा नज़ारा उसकी निगाहो से छिपा नही रह सकेगा पर उसके पास ना तो इतना टाइम था और ना ही वो इस हालत मे थी कि फटाफट से पैंटी पहन सके तो हाई रे ये मजबूरी जो जवान बेटे की आँखे अपनी गदराई हुई माँ की जवानी से सेंकने का इंतज़ाम कर रही थी उसने एक गहरी सांस ली और अपने आप को हालत के हवाले कर दिया

इधर सुधा जब घर पर पहुचि तो उसने देखा कि प्रेम अपने कमरे मे किताबो मे डूबा हुआ है उसकी नज़र आँगन मे तार पर लटकी उषा की ब्रा-पैंटी पर पड़ी तो वो उसको डाँट लगाते हुए बोली- बेशरम, थोड़ी बहुत तो शरम कर लिया कर घर मे जवान भाई है तेरे इन अन्द्रूनि कपड़ो को ऐसे खुले मे लटके देखे हुए देखेगा तो क्या सोचेगा सुधा अपने मन ही मन मे बोली और वैसे भी आजकल उसकी निगाहें कुछ और ही बयान करने लगी हैं

उषा- जी, माँ वो जब मैं नहा कर आई थी तो भाई घर पर था नही और फिर मुझे इन्हे उतारना ध्यान नही रहा , आगे से ध्यान रखूँगी ऐसा कह कर वो उनको लेकर अपने कमरे मे चली गयी

उषा कपड़ो को अलमारी मे रखते हुए- मेरी भोली माँ, अब तुम्हे क्या पता तुम इन कपड़ो की बात कर रही हो तुम्हारा भोला बेटा पूरी रात मुझे अपनी गोदी मे बिठाए रखता हैं प्रेम के साथ की चुदाई का ख्याल आते ही उषा के तन बदन मे मस्ती सी भरने लगी तो उसने देखा सुधा रसोई मे व्यस्त हैं तो वो उपर प्रेम के कमरे मे पहुच गयी

अपनी दीदी को कमरे के दरवाजे पर खड़े देख कर प्रेम मुस्कुराया और खड़ा हो गया उषा आगे आई और बिना देर किए प्रेम के जिस्म से चिपक गयी और अपने नाज़ुक नाज़ुक होंठो को अपने भाई के लिए खोल दिया प्रेम ने अपने होंटो पर जीभ फेर कर उनको गीला किया और फिर दीदी के निचले होंठ को अपने दाँतों के बीच मे फसा लिया उषा के शहद से भी मीठे लबों के रस को चूमते हुए प्रेम सलवार के उपर से ही उसकी गान्ड को सहलाने लगा अपने दोनो हाथो से उसको भीच रहा था उषा की मुनिया फिर से गीली होने लगी

 
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