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“एक एहसास”
“एक एहसास” कहानी है “! शान्ति नगर” में रहने वाले एक मध्यम वर्गीय परिवार की| एक संयुक्त परिवार की तरह रहने वाले इस मोहल्ले में गली के सिरे से देखने पर गली के दोनों तरफ कुछ खूबसूरत कोठियों का सिलसिला दिखायी पड़ेगा| उस सिलसिले से थोड़ा हटकर गली में एक दो म्ंजिला मकान भी है जिसके बाहर लगी नेम प्लेट पर लिखा है श्रीहरिनारायण “माजरा नन्दकरण” वाले|
यह कहानी उसी घर में रहने वाले श्रीहरिनारायण व उसके परिवार की है| श्रीहरिनारायण की पत्नी का नाम है सोनिया देवी| उनके तीन पुत्र हैं| बड़े पुत्र का नाम कुलदीप उससे छोटा किशन और सबसे छोटे का नाम सागर हैं| कुलदीप की उम्र बाइस वर्ष, किशन अठारह वर्ष और सागर की उम्र लगभग बारह वर्ष हैं|
कुलदीप ने दो वर्ष पहले बी∙ए∙ की पढ़ाई पुरी करने के बाद पढ़ना छोड़ दिया और अब वह अपना दूध का कारोबार संभालता है| किशन सरस्वती स्कूल में बाहरवीं कक्षा का छात्र है तथा सागर नगर के स्थानीय “गायत्री मिड़ल स्कूल” में छठी कक्षा में पढ़ता है|
एक तरफ कुलदीप जिसका कद करीब छह फुट का है वह हष्ट-पुष्ट तथा अच्छे शरीर का मालिक है, और मानसिक तौर पर भी परिपक्व है| वहीं दूसरी तरफ किशन का कद 5’6” तथा साधारण कद काठी के शरीर के साथ-साथ दब्बु किस्म का लड़का है| उसके चरित्र में अभी तक बाल भाव ही प्रधान है, उसमें वही उत्सुकता, वही चंचलता, वही विनोदप्रियता विद्यमान है जो बचपन में होती हैं|
किशन के साथ एक अजीब संयोग होता है कि जब-जब वह बहुत खुश होता है उसकी पिटाइ अवश्य ह
राधिका : कहानी की नायिका|
रोहन : किशन का दोस्त|
शीतल : रोहन की प्रेमिका|
सीमा : रोहन की बहन|
सुनील : किशन का दोस्त|
ट्रिंग … ट्रिंग … ट्रिंग … ट्रिंग … फोन की घंटी बजती सुनाइ दे रही थी|
“हैलो” दूसरी तरफ से बड़ी ही मधुर आवाज आई|
“हैलो शीतल… ”
“… हैलो” कुछ देर की खामोशी के बाद फिर आवाज आई|
“शीतल मैं रोहन……” इतना बोलकर रोहन भी खामोश हो गया|
“कौन रोहन और अभी सुबह के 3:00 बजे है, ये फोन करने का कौन सा टाईम है”
“वो शीतल म्म्ममैं आज आस्ट्रेलिया जा … बात को बीच में ही काटते हुए दूसरी तरफ से आवाज आई“ यहां कोइ शीतल नहीं रहती और आप आस्ट्रेलिया जाओ या कुए में गिर जाओ… मगर दोबारा यहां फोन मत करना”|
“जी…” रोहन अभी इतना ही बोल पाया था कि दूसरी तरफ से फोन काट दिया गया|
सौफे पर बैठते हुए वह बड़बड़ाया “इसका नाम तो डाकू रानी चम्पी बाई या पुतली बाई होना चाहिए था… न जाने इसका नाम “शीतल” किसने रख दिया | ”
“कुछ देर के लिए कमरे में खामोशी रही| फिर रोहन ने फोन का रिसीवर उठाकर रिड़ायल का बटन दबा दिया”
ट्रिंग … ट्रिंग …
“हैलो शीतल मेरी बात तो सुनो… ”
“मै शीतल नहीं हूँ … आप प्लीज दोबारा फोन मत करना”
मगर रोहन तो इस आवाज को अच्छी तरह पहचानता था| वह बोला मै जिनकी खामोशी तक को पहचानता हूँ क्या मुझे उनकी आवाज को पहचानने मे धोखा हो सकता है|
“एक बार कहा ना… मैं शीतल नहीं हूँ ”|
रोहन ने भी हार न मानते हुए शायराना अंदाज में शीतल को मनाना जारी रहाए जान ले लेगी ये अदा, यूं अपने ही नाम से मुकरने की,
ओर कसम से कसम खा ले रे जालिम, कभी न सुधरने की|
रोहन से इस अंदाज में अपनी तारीफ सुनकर शीतल खुश हो गई| अब उसने गुस्सा भुलाकर नखरे भरी नाराजगी शुरू कर दी|
“आज हमारी याद कैसे आ गइ यूं ही चले जाते आखिर हम आपके हैं कौन | ”
“सॉरी यार कुछ घरेलू परेशानियां के चलते वक्त नहीं निकाल पाया मगर अब जो थोड़ा सा समय है उसे तो बेवजह झगड़े में बर्बाद मत करो”
“एक एहसास” कहानी है “! शान्ति नगर” में रहने वाले एक मध्यम वर्गीय परिवार की| एक संयुक्त परिवार की तरह रहने वाले इस मोहल्ले में गली के सिरे से देखने पर गली के दोनों तरफ कुछ खूबसूरत कोठियों का सिलसिला दिखायी पड़ेगा| उस सिलसिले से थोड़ा हटकर गली में एक दो म्ंजिला मकान भी है जिसके बाहर लगी नेम प्लेट पर लिखा है श्रीहरिनारायण “माजरा नन्दकरण” वाले|
यह कहानी उसी घर में रहने वाले श्रीहरिनारायण व उसके परिवार की है| श्रीहरिनारायण की पत्नी का नाम है सोनिया देवी| उनके तीन पुत्र हैं| बड़े पुत्र का नाम कुलदीप उससे छोटा किशन और सबसे छोटे का नाम सागर हैं| कुलदीप की उम्र बाइस वर्ष, किशन अठारह वर्ष और सागर की उम्र लगभग बारह वर्ष हैं|
कुलदीप ने दो वर्ष पहले बी∙ए∙ की पढ़ाई पुरी करने के बाद पढ़ना छोड़ दिया और अब वह अपना दूध का कारोबार संभालता है| किशन सरस्वती स्कूल में बाहरवीं कक्षा का छात्र है तथा सागर नगर के स्थानीय “गायत्री मिड़ल स्कूल” में छठी कक्षा में पढ़ता है|
एक तरफ कुलदीप जिसका कद करीब छह फुट का है वह हष्ट-पुष्ट तथा अच्छे शरीर का मालिक है, और मानसिक तौर पर भी परिपक्व है| वहीं दूसरी तरफ किशन का कद 5’6” तथा साधारण कद काठी के शरीर के साथ-साथ दब्बु किस्म का लड़का है| उसके चरित्र में अभी तक बाल भाव ही प्रधान है, उसमें वही उत्सुकता, वही चंचलता, वही विनोदप्रियता विद्यमान है जो बचपन में होती हैं|
किशन के साथ एक अजीब संयोग होता है कि जब-जब वह बहुत खुश होता है उसकी पिटाइ अवश्य ह
राधिका : कहानी की नायिका|
रोहन : किशन का दोस्त|
शीतल : रोहन की प्रेमिका|
सीमा : रोहन की बहन|
सुनील : किशन का दोस्त|
ट्रिंग … ट्रिंग … ट्रिंग … ट्रिंग … फोन की घंटी बजती सुनाइ दे रही थी|
“हैलो” दूसरी तरफ से बड़ी ही मधुर आवाज आई|
“हैलो शीतल… ”
“… हैलो” कुछ देर की खामोशी के बाद फिर आवाज आई|
“शीतल मैं रोहन……” इतना बोलकर रोहन भी खामोश हो गया|
“कौन रोहन और अभी सुबह के 3:00 बजे है, ये फोन करने का कौन सा टाईम है”
“वो शीतल म्म्ममैं आज आस्ट्रेलिया जा … बात को बीच में ही काटते हुए दूसरी तरफ से आवाज आई“ यहां कोइ शीतल नहीं रहती और आप आस्ट्रेलिया जाओ या कुए में गिर जाओ… मगर दोबारा यहां फोन मत करना”|
“जी…” रोहन अभी इतना ही बोल पाया था कि दूसरी तरफ से फोन काट दिया गया|
सौफे पर बैठते हुए वह बड़बड़ाया “इसका नाम तो डाकू रानी चम्पी बाई या पुतली बाई होना चाहिए था… न जाने इसका नाम “शीतल” किसने रख दिया | ”
“कुछ देर के लिए कमरे में खामोशी रही| फिर रोहन ने फोन का रिसीवर उठाकर रिड़ायल का बटन दबा दिया”
ट्रिंग … ट्रिंग …
“हैलो शीतल मेरी बात तो सुनो… ”
“मै शीतल नहीं हूँ … आप प्लीज दोबारा फोन मत करना”
मगर रोहन तो इस आवाज को अच्छी तरह पहचानता था| वह बोला मै जिनकी खामोशी तक को पहचानता हूँ क्या मुझे उनकी आवाज को पहचानने मे धोखा हो सकता है|
“एक बार कहा ना… मैं शीतल नहीं हूँ ”|
रोहन ने भी हार न मानते हुए शायराना अंदाज में शीतल को मनाना जारी रहाए जान ले लेगी ये अदा, यूं अपने ही नाम से मुकरने की,
ओर कसम से कसम खा ले रे जालिम, कभी न सुधरने की|
रोहन से इस अंदाज में अपनी तारीफ सुनकर शीतल खुश हो गई| अब उसने गुस्सा भुलाकर नखरे भरी नाराजगी शुरू कर दी|
“आज हमारी याद कैसे आ गइ यूं ही चले जाते आखिर हम आपके हैं कौन | ”
“सॉरी यार कुछ घरेलू परेशानियां के चलते वक्त नहीं निकाल पाया मगर अब जो थोड़ा सा समय है उसे तो बेवजह झगड़े में बर्बाद मत करो”