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Romance एक एहसास complete

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सीमा का यह लहजा राधिका को रास न आया “सॉरी” बोलकर वह बाहर चली गई|

किशन उसे रोकना चाहता था मगर वह कुछ बोल न पाया| बस मन ही मन अभी कुछ शुकून आया था इस मन को,

और अभी आप जाने की बात करते हो|

इसके बाद कुछ देर तक किशन और सीमा की बातें होती रही| मगर किशन का मन तो इस वक्त बाहर बैठा हुआ था| उसे इन बातों में कोइ दिलचस्पी न थी|

“भैया मेरे लिए जो आपने किया है… आप तो मेरे लिए भगवान जैसे हों”|

“भगवान जैसे…” शब्द सुनकर किशन खुश हो गया| मन ही मन वह सोचने लगा “क्या किसी की मदद करने से इन्सान भगवान बन सकता है| अब तो मैं हमेशा सबकी मदद किया करूंगा| वह बोला सीमा छोड़ो इन बातों को… बहन की रक्षा करना तो भाइ का फर्ज होता है| तुम किसी बात की चिंता मत करो रोहन यहां नहीं है तो क्या हुआ| किसी भी परेशानी को तुम तक पहुंचने से पहले मुझसे निपटना पड़ेगा|

सीमा बाहर आई तो देखा राधिका मुँह फुलाये बैठी थी|

“अब आप अन्दर जाकर जो चाहो मजाक करो| मैं आप दोनोंं को ड़िस्ट्रब नहीं करूंगी” ऐसा कहते हुए सीमा ने राधिका को भीतर धकेल दिया|

राधिका अन्दर आयी तो किशन ने मुस्कान के साथ उसका स्वागत किया|

राधिका ने उसकी मुस्कान का जवाब “बाए” बोलकर दिया|

“राधिका जी… फिर कब मिलेंगें” किशन ने कातर निगाहों से देखते हुए पूछा|

“मै आपसे फिर क्यों मिलूंगी” राधिका ने बड़ी नजाकत से जवाब दिया

किशन ने उसके इस सवाल का जवाब कुछ इस अन्दाज में दिया - राधिका जी आजगाली दोगे सह लूंगा, सैंड़िल मारोगे सह लूंगा,मगर आज आप ना कहोगे, तो सह ना सकूंगा|

“अच्छा जी… तो सैंड़ल खाने की हिम्मत अभी बाकी है,”

फिर मुस्कुराकर वह बोली देखेंगे…|

अब तो किशन को दर्द का बिल्कुल भी एहसास नहीं था|

अस्पताल के बिस्तर पर पड़े-पड़े वह ख्यालों से ही अपने मन को बहलाने लगबहुत जल्द होगा, उनसे सामना ऐ दिल,

होश हमें ना होगा, खुद संभलना ऐ दिल|

किशन राधिका से हुई अपनी पहली मुलाकात की यादों में खो गया|

कुछ दिन पहले जब किशन स्कूल से आ रहा था| राधिका भी उसके पीछे-पीछे स्कूल से आ रही थी| राधिका हरे रंग की टी-शर्ट और जींस में थी| वह चलते-चलते कोइ किताब पढ़ रही थी| यूं राधिका उसकी सुन्दरता की वजह से किशन को पहली नजर में ही भा गई थी| उसपे उसकी भूरी-भूरी आखों ने तो उसे घायल ही कर दिया था| राधिका किशन की इस हालत से बिल्कुल अनजान अपनी किताब पढ़नें में मग्न थी| उसे देखकर किशन ने सोचा “क्यों न इस किताबी कीड़े को परेशान किया जाए”| इसी इरादे से वह धीरे-धीरे चलने लगा| जैसे ही राधिका उसके नजदीक पहुंची, आकाश की ओर देखता हुआ वह एकदम रूक गया|

राधिका उससे टकरा गई जिससे उसके हाथ से किताब भी गिर गई|

“स…स…सॉरी” हड़बड़ाकर वह बोली ओर किताब उठाकर आगे बढ़ गई|

किशन के लिए तो यह सब एक सोची समझी शरारत थी| उसने तो बस एक बहाना ढूंंढ़ा था राधिका को परेशान करने का|

बस बहाना मिलते ही वह शुरू हो गयाहरे-हरे रामा| हरे-हरे रामा | रामा-रामा ये हरे-हरे,

अरे भाई ये जो हरे-हरे हैं ना, ये तो बस रामा-रामा|

न चलें ये देखकर इधर-उधर,

न जाने है इनका ध्यान किधर,

खेलें हमसे टक्कर-टक्कर,

और ये खेल भी तो बस रामा-रामा|

अरे भाई ये जो हरे-हरे हैं ना, ये तो बस रामा-रामा|

जितनी हसीन - उतनी ही जालिम,

जुल्म करके ये हम पर हँस ते हैं,

यूं जालिम लाखों है मगर,

ये भूरी आँखे है ना, ये तो बस रामा-रामा

हरे-हरे रामा| हरे-हरे रामा | रामा-रामा ये हरे-हरे,

अरे भाई ये जो हरे-हरे हैं ना, ये तो बस रामा-रामा|
 
राधिका कुछ तेजी से चलने लगी, मगर साथ ही साथ वह किशन की हरकतों पर थोड़ा मुस्कुरा भी रही थी| उसकी इस मुस्कान ने किशन का हौंसला बढ़ा दिया| शायद उसकी बातें राधिका को अच्छी लग रही हो यह सोचकर वह फिर शुरू हो गया -एक तो तुम्हारी, स्माईल प्यारी,

उस पर ये आखें, हाये कजरारी|

जुल्फें झटक गई,

थोड़ी मटक गई,दिल में खटक गई,

कुड़ी कुवांरी,

एक तो तुम्हारी, स्माईल प्यारी,

उस पर ये आखें, हाये कजरारी|

नित सवेरे,

दर्शन हों तेरे,

सुन प्रभु मेरे,

विनती करता पुजारी,

एक तो तुम्हारी, स्माईल प्यारी,

उस पर ये आखें, हाये कजरारी|

राधिका को तंग करता हुआ किशन उसके साथ-साथ चलता रहा| जब किशन अपने मोहल्ले के नजदीक पहुंच गया तो उसने अपनी बकवास बंद कर दी|

“Excuse me Miss राह चलते हुए पढ़ना ठीक नहीं है,” किशन ने बात शुरू करते हुए कहा

“ठीक तो राह चलती लड़किया छेड़ना भी नहीं है,” राधिका ने सपाट शब्दों में कहा|

“मैने तो बस आपका ध्यान किताब से हटाने के लिए मजाक किया था… जरा सोचिये अगर आप मेरी बजाय किसी ट्रक से टकरा जाती तो”

“आपकी बजाय ट्रक होता तब भी कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ता| आप भी कोइ छोटी बला नहीं| मेरे हिसाब से आप हाथीं के मुकाबले थोड़े से पतले हो| इसलिए आपको कमजोर हाथी भी कहा जा सकता है,” |

खुद को कमजोर हाथी कहे जाने पर किशन को गुस्सा आया ओर अपने सीने से लेकर पेट तक हाथ फिराते हुए बोला “ऐ हैलो… जरा ईधर देखो ये सरफेश इंगलैंड़ की तेज पिचों की तरह एकदम फ्लैट है,”

“आप मजाक बर्दास्त नहीं कर सकते तो किसी के साथ मजाक किया भी मत करो” राधिका ने भी उसके रूखेपन का जवाब कड़ककर दिया और वह आगे बढ़ गई|

“स्स्स्स… सॉरी मैड़म… मुझे क्या पता था आप मजाक कर रहे हो,”

“सुनिये मिस्टर आपकी हरकतों को देखते हुए तो मुझे आपको नहीं बताना चाहिए लेकिन अगर आपकी आँख खराब हो गई तो आप और भी बुरे दिखेंगे| इसलिए मैं आपको बता रही हूँ आपकी आँख के पास कुछ कचरा लगा है,”

किशन ने तुरन्त रूमाल से अपनी आँख साफ की ओर कहा “थैंक्स ड़ियर”

“थैंक्स किस लिए” राधिका ने चेहरे पर एक शरारती हँसी के साथ पूछा

“आपने मेरी आँख में कचरा जाने से बचा लिया उसके लिए” किशन राधिका के इस प्रकार हंसने को अब तक समझ न सका था|

“आपके रूमाल पर कुछ लगा क्या… नहीं न, क्योंकी वहां कुछ था ही नहीं”

अब किशन समझा कि राधिका उससे रास्तेभर की परेशानी का बदला ले रही है|

“आप काफी दिलचस्प बातें करते होे लगता है हमारी खूब जमेगी … मुझसे दोस्ती करेंगी ”

“सरी अब मैं बच्चों के साथ नहीं खेलती” राधिका ने जवाब दिया और आगे बढ़ गई|

किशन बेवकूफ सा बना वहीं खड़ा रह गया और मन ही मन वह सोचने लगा “अजीब लड़की है किसी बात का सीधा जवाब ही नहीं देती”|

राधिका एक बात कहूं आप देखने में तो आवारा नहीं लगतेलड़कियों को घूरने से आपको क्या मिल जाता है| आपकी ये मानसिक विक्लांगता शारीरिक विक्लांगता की अपेक्षा ज्यादा खतरनाक है इस स्थिति से जल्दी से जल्दी बाहर निकलना आप के लिए बेहतर है| किशन कुछ न कह सका बस सिर झुका लिया| उसे लगा कि वह ठीक कह रही है| किशन के मन में उसके प्रति भावनाए बदल चुकी थी अब वहा आदर और शिष्टाचार ने स्थान ले लिया|
 
किशन अपनी हर उलझन के लिए रोहन से सलाह लिया करता था| शाम को स्कूल ग्राऊंड़ में मिलने पर राधिका के बारे में भी उसने रोहन को बताया|

“भाई आज एक लड़की मिली वह मेरी शायरी सुनकर बहुत खुश थी| मैं उससे दोस्ती करना चाहता हूंं और शायद वह भी मुझसे… मगर मुझे समझ नहीं आता बात को आगे कैसे बढ़ाऊं|

किशन की बात सुनकर सुझाव देने की बजाये रोहन हँसने लगा “क्या कहा उसे तेरी शायरी … तेरी शायरी सुनकर भी वो खुश थी और तुझसे दोस्ती करना चाहती है,”

“हां भाई ”

“मेरे भाई वो बेचारी कोइ बहरी होगी”|

“भाई साहब न तो वह कोइ बेचारी है और न ही बहरी” किशन ने कुछ खीझकर कहा|

“अच्छा… वैसे पूछ सकता हूँ तुझे किस बात से लगा कि वह तुमसे दोस्ती करना चाहती है,”

“क्योंकि वह बार-बार मुस्कुरा रही थी” किशन का चेहरा यह बताते हुए खिल उठा|

“शायद वो तेरी शायरी पर हंसी होगी यकैसे समझाऊं, वो तुझे देखकर क्यों मुस्कुराया करती है,

अरे बावले, शुरू-शुरू में लड़की ऐसे ही लुभाया करती है|

रोहन की व्यंगय भरी हंसी सुनकर किशन उदास होकर बोला— क्या यार तू तो जानता है एक आप ही हो जिसे मैं अपने मन की बात बता देता हूँ और अब आप भी मेरा मजाक बना रहे हो|

“सॉरी यार अब मजाक नहीं करूंगा ओके… चल अब ये बता मैं तेरे लिए क्या कर सकता हूंं|मेरे ही कत्ल के लिए हो जाए उम्र कैद उनको,

वरना न जाने कितने और बेमौत मारें जाएगंे|

“वो सब तो ठीक है मगर तू मुझसे क्या चाहता है| ”

“सुझाव……अब मैं क्या करू | „

“ओके… सबसे पहले तू उसकेे बारे में जानने की कोशिश कर जैसे उसका नाम कहां रहती है और उसकी पसंद नापसंद… वगैरा-वगैरा”|

“थैंक्स भाई…” किशन ने कहा

“थैंक्स किस लिए यार… प्रेम कहानियों को बनाना व बचाना महज प्रेमियों के हाथ में नहींं होता, हर प्रेम कहानी में एक युग के सपने गुथे होते हैं जिनको हकीकत में बदलने के लिये बहुत से लोगों का योगदान चाहिए होता है|

“अच्छा भाई मैं समझ गया मुझे क्या करना है,” किशन खुशी में उछलता हुआ घर चला गया|

अगले दिन किशन उसी रास्ते पर राधिका का इन्तजार करने लगा|

आपकी राह में बैठे, आपके एक दीदार को तरसें,

अब तो आजा रे कयामत, हमे इन्तजार है कब से|

कुछ देर बाद उसे राधिका सामने से आती हुई दिखाइ दी| रोहन के बताए अनुसार ही किशन ने उससे नाम जानने की कोशिश की

मेरा ये मन सवालों का एक सागर है,

अक्सर आपके नाम की एक लहर उठती है|

लेकिन राधिका ने उससे बात करने से इन्कार कर दिया और वह आगे बढ़ गई| अब जब कभी भी उनका सामना होता तो किशन उसको शायरी के जरिये कुछ न कुछ बोलता रहता थाबड़ा गुरूर है उनको, अभी दिल न देने पर,हम भी इतनी आसानी से न मानेंगे मगर|

“माना वो बड़े पत्थर दिल होंगे, मगर यारो,आग हम मे भी वो नहीं, जो बस मोम पिघलाये|

परन्तु राधिका पर उसकी किसी बात का कोइ असर नहीं हुआ और जब 2-4 मुलाकातों के बाद भी राधिका ने उससे बात नहीं की तब किशन ने भी उसे तंग करना बंद कर दिया|

साबित आप भी करना, और कोशिश मैं भी करूंगा,

क्या था जो मुझे न मिला, कुछ था जो आपने खोया|

इसके बाद भी कई बार दोनोंं का सामना हुआ था मगर दोनों ही चुपचाप अपने रास्ते पर आगे बढ़ जाते| उसके बाद राधिका से किशन की बात आज अस्पताल में हुइ थी| खुशी में पागल अपने मन में लड़ड़ू फोडते हुए वह सो गया|
 
किशन को अस्पताल से छुट्टी मिल गई मगर अभी वह चलने फिरने के लायक नहीं था| इसलिए अपने घर पर ही बिस्तर में पड़े-पड़े हर पल बस राधिका को याद करता रहँसे भी आपकी यादों में, याद करके आपको रोए भी हम,

याद करने को जागे तो ख्वाबों में मिलने को सोए भी हम|

कुछ देर बाद श्रीहरिनारायण अन्दर आए| उन्होने बताया बेटा जब तुम अस्पताल में भर्ती थे, तब मैं अपने मोहल्ले के कुछ लोगों के साथ प्रदीप और संजय के घर गया था| उनके साथ अपना समझौता हो गया है‚ इसलिए अब इस बारे में फिक्र करने की कोइ जरूरत नहीं है,” |

उसे समझाते हुए श्रीहरिनारायण ने कहा— बेटा अब तुम भी अपने मन में उनके लिए किसी भी प्रकार से वैर भाव मत रखना| झगड़ा परेशानियों के अलावा किसी को कुछ नहीं देता शास्त्रों में लिखा है शक्तिशाली वही होता है जो अपने गुस्से को काबू कर ले, ओर क्षमता होते हुए भी बदला लेने की बजाये झगड़ा सुलझाने की सोचे|

किशन ने श्रीहरिनारायण के फैंसले पर रजामंदी जताते हुए कहा “बाबू जी आपने जो कर दिया सो ठीक है… मैं समझ गया हूंं शब्दों की मार तलवार के वार से भी ज्यादा खतरनाक होती है| मैने संजय को मारते वक्त उसे गालियां दी जिसकी सजा मुझे मिली| लेकिन अब मेरे मन में किसी के लिए वैर नहीं है… रही बात इन जख्मों की तो ये हफ्ते भर में ठीक हो जाएगें|

श्रीहरिनारायण के जाने के बाद किशन ने मन ही मन भगवान का शुक्रिया अदा किया ओर वह फिर से सो गया|

अचानक किशन की आखें खुल गई, उसे लगा जैसे उसने राधिका की आवाज सुनी है| फिर सोचा शायद यह उसका वहम होगा मगर दोबारा उसे वही आवज सुनाई दी| तब उसेे यकीन हो गया कि राधिका उससे मिलने आई है“दिल बड़े जोर से धड़का, बहुत डर लग रहा है मुझे अपने ही घर परजो तीर–ऐ–नजर से करते हैं कत्ल, वो आये हैं मेरे घर महमान बनकर|

किशन के मन में एक अजीब सी बेचैनी थी| वह इसे राधिका के सामने जाहिर नहीं करना चाहता था| इसलिए वह जानबूझकर आंखें बंद करके सोने का नाटक करने लगा|

राधिका किशन की माता सोनिया देवी के साथ अन्दर आई|

“इसकी तो मौज हो गई बैठे-बैठे खाने को मिल जाता है न पढ़ता है, न कुछ काम धंधा करता है,” सोनिया देवी ने बड़बड़ाते हुए उसे जगाया|

“आंटी जी आप इनकी शादी करा दो… जिम्मेदारी पड़ेगी तो अपने आप ही काम करने लगेंगे” सोनिया देवी की बात में बात मिलाते हुए राधिका ने कहा”|

“हाँ माँ यही सही रहेगा… आप मेरी शादी करवा दो फिर हम दोनों बैठे खाएंगे” किशन ने मस्ती करते हुए कहा|

सोनिया देवी बड़बड़ाती हुइ बाहर चली गई|

“अगर आपकी शादी कर दी जाये तो आपको कोइ आपत्ति नहीं” राधिका ने गंभीर होकर पूछा

“आपत्ति क्यों| … मैं समझा नहीं”|

“मेरा मतलब लड़का हो या लड़की, जिंदगी में कुछ न कुछ लक्ष्य तो होना ही चाहिए| आजकल तो सभी बोलते है पहले अपने पैरों पर खड़े होंगे‚ तब शादी के बारे में सोचेंगे‚ और मेरे हिसाब से तो यही सोच सही भक्योंकि कुछ कर दिखाने की ख्वाहिश ही तो मनुष्य जाति के विकास की नींव है|”

राधिका के सवाल का जवाब उसने कुछ यूं दिय“मन के मन्दिर में सजाने के लिए,

कब से मैं अपना भगवान ढ़ूंढ़ता हू|

राधिका जी मेरे गुरू जी कहते हयूं कोइ काम नहीं है तो महोब्बत कर लो,

आजकल इसका भी स्कोप अच्छा है|

और रही बात कुछ कर दिखाने की तो मुझे पता है मुझे क्या करना है

“क्या बनना चाहते हैं आप| ”

“मेरा लक्ष्य तो, लेखन में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाना है,” किशन ने राधिका को प्रभावित करने के लिए कुछ ज्यादा ही विश्वास के साथ बताया|

“लेखक… अच्छा जी तो ये भी बता दीजिये क्या लिखा करेंगे आप” हंसते हुए राधिका ने पूछा

“हूँ… शायरी व कहानियां और मेरी पहली कहानी का नाम होगा “हमारा प्यारा भौंपू”

“अरे वाह कितना प्यारा नाम है… वैसे आप लिखने के बारे में क्या जानते हैं| ”

“क्या जानते हैं से मतलब…| ”

“मतलब ये कि शायरी लिखने के अपने कुछ नियम होते हैंै आपने इसकी शिक्षा कहांं से ली|

“राधिका जी यही तो मेरी परेशानी है मैं इसके नियमों के बारे में कुछ नहीं जानता और उससे भी बड़ी परेशानी ये है कोइ मुझे सिखाने को राजी नहीं होता”|
 
“मतलब… कौन सिखाने को राजी नहीं होता क्या आपने कभी किसी से सीखना चाहा|”

“हाँ एक मौलवी जी से सीखना चाहा था मगर उन्होने मुझे बस दो दिन के लिए ही अपना शिष्य बनाया| उसके बाद उन्होने मुझे पढ़ाने से मना कर दिया”

“मगर मौलवी साहब ऐसा क्यों करेंगे जरूर आपने ही कुछ गलती की होगी”|

“हुआ यूं के मौलवी साहब ने मुझे उर्दू शायरी का इतिहास बताया…”

“क्या है उर्दू शायरी का इतिहास” बीच में टोकते हुए राधिका ने उत्सुकता से पूछा|

“राधिका जी मौलवी साहब ने बताया था‚ उर्दू शायरी के जन्म दाता नजीर अकबराबादी साहब को माना जाता है| जिनका असली नाम “वली मुहम्मद” था| वह 18वीं शताब्दी के पहले भारतीय लेखक थे जिन्होने उर्दू में गजल और नज्में लिखी‚ जिनमे उन्होने अपना नाम “नजीर” लिखा था| उनके पिता का नाम “मुहम्मद फारूख” था| उनकी माता जी “नवाब सुलतान खान” की बेटी थी‚ जो आगरा फोर्ट के गवर्नर थे| उस समय अकबर आगरा का शासक था इसलिए आगरा शहर अकबराबाद के नाम से जाना जाता था|

“नजीर" साहब की जन्मतिथि की सही जानकारी तो उपलब्ध नहीं है मगर खगोलशास्त्री मानते हैं उनका जन्म सन, 1735 में दिल्ली में हुआ था जो उस वक्त देहली के नाम से जानी जाती थी| इत्तेफाक से उनके जन्म के बाद अजीतमें मुगल साम्राज्य का विरोध शुरू हो गया| सन, 1739 में “नादीर शाह” ने दिल्ली पर आक्रमण कर दिया और “मुहम्मद शाह रंगीला” गिरफ्तार कर लिए गए| उस वक्त “नजीर” साहब सिर्फ 4 साल के थे| हालांकि बाद में “मुहम्मद शाह रंगीला” को रिहा कर दिया गया मगर उस समय दिल्ली में अनगिनत लोग क्रूरता पूर्वक मार दिये गये थे| इस दुर्घटना का भय अब भी लोगों के दिमाग में ताजा था‚ जब “अहमद शाह अब्दाली” ने 1757 में दिल्ली पर आक्रमण किया‚ जिसके कारण बहुत से लोग दिल्ली छोड़कर दूसरे सुरक्षित शहरों में चले गये| इसी दौरान “नजीर” साहब भी अपनी माँ और दादी के साथ दिल्ली छोड़कर अकबराबाद आ गये|

राधिका जी कहा जाता है “नजीर” साहब ने 200,000 कवितायें लिखी मगर दुर्भाग्य से उसका एक बहुत बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया और आज सिर्फ 600 कविताओं की प्रिंटिड़ कॉपी ही मौजूद हैं| आज तक किसी भी उर्दू लेखक ने उर्दू के उतने शब्द इस्तेमाल नहीं किए जितने “नजीर” साहब ने किये| उनकी कविताओं की खासियत यह थी कि उनकी भाषा बहुत सरल होती थी जो लोगों में बहुत पसन्द की जाती थी| उनकी “बंजारा नामा”‚ “कलयुग नहीं करयुग है ये”‚ “आदमी नामा” जैसी कुछ यादगार कविताएं आज भी उपलब्ध है|

“नजीर” साहब अपनी नज्मों के लिए मशहूर थे| उन्होनें धर्म और त्योहारों के लिए भी नज्में लिखी| उदाहरण के लिए “दिवाली”‚ “होली”‚ “शब ए बारात” मौजूद है| इसके अलावा ‘पैसा’‚ “रूपया”‚ “रोटियं”‚ “आटा दाल”‚ “पंखा” और “कंकड़ी” पर भी नज्में लिखी| उन्होने इन्सानी जीवन के बारे में भी नज्मे लिखी जैसे “मुफलिसी” और “कोहरीनामा”| उन्होने अपनी नज्मों में जीवन के हर पहलु को दर्शाया|

सन 1830 में 98 साल की उम्र में उनका निधन हो गया”|

बस इसके बाद मौलवी साहब ने मुझे अपना शिष्य बनाने से इन्कार कर दिया|

“मगर मौलवी साहब ने आपको उर्दू सिखाने से क्यों मना किया” राधिका ने हैरानी से पूछा|

जब मौलवी साहब ने मुझे उर्दू शायरी के जन्मदाता “नजीर अकबराबादी” साहब का इतिहास बताया तो मैने भी उनको “हरियाणवी रागनी” के जन्मदाता हरियाणा के सूर्य कवि “श्री लख्मीचन्द जी” का इतिहास सुना दिया| बस यही मेरी गलती थी कि जब-जब मौलवी साहब हमें उर्दू के बारे में कुछ बताते थे‚ तब-तब मुझे हरियाणवी में उसका कोई उदाहरण याद आ जाता और मैं उसे उनको बता देता था| बस इसी वजह से उन्होने मुझे उर्दू सिखाने से मना कर दिया”|

“मगर यह तो कोइ ऐसी बात नहीं जिससे मौलवी जी आपको उर्दू सिखाने से मना करे”|

यकीन मानो राधिका जी ऐसा ही हुआ था| मुझे आज भी याद है‚ तीसरे दिन जब मैं मौलवी साहब के पास गया तो वे हाथ जोड़कर बोले “बेटा मुझपर एक कॄपा कर दो”|

मौलवी साहब हाथ जोड़कर खड़े थे‚ तो मैने भी हाथ जोड़कर कहा “आप मुझसे बड़े हैं और मेरे गुरू हैं‚ इसलिए आप मुझे आदेश दीजिये मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ | |

उन्होने मुझे वापिस चले जाने को कहा और मैं वापिस चला आया”|

“मगर तुमने इसका कारण क्यों नहीं पूछा”|

“पूछा था… उन्होने बताया मेरे आने के बाद जितने भी बच्चे उनसे उर्दू सीखने आए‚ मौलवी साहब उनसे उर्दू की बजाये हरियाणवी में बात करने लगे| साथ ही मेरे साथ वाले बच्चे भी उर्दू से ज्यादा हरियाणवी बोलने लगे थे| इसलिए कोइ भी मेरे साथ पढ़ना नहीं चाहता था”|

“ओहो तो ये बात थी| तुमने उर्दू सीखने के बजाये बाकी बच्चों को हरियाणवी सिखा कर आते थे”| “वैसे ये मौलवी उर्दू कहं सिखाते है| जिन्होने आपको दो ही दिन में पहचान लिया| बहुत ही समझदार इन्सान होंगें‚ प्लीज मुझे उनका पता बताओ मैं भी उर्दू सीखना चाहती हूँ “|

हालांकि राधिका की बातों में किशन ने कोइ गंभीरता महसूस नहीं की मगर फिर भी उसने उसे मौलवी साहब का पता बता दिया–“तलाई बाजार में घुसते ही रेलवे दरवाजे के बिल्कुल सामने”

“ओह नो… इसका मतलब अब तक आप मेरे सामने मेरे गुरू की बुराई कर रहे थे”|

“क्या मतलब आप मौलवी साहब से उर्दू सीख रही हैं” किशन ने बड़ी उत्सुकता से पूछा

“जी हाँ … मै कुरूक्षेत्रा युनिवर्सिटी से उर्दू मे एक वर्ष का कोर्स कर रही हूँ ‚ और मै मौलवी साहब से उर्दू की कोचिंग ले रही हूँ ”

“राधिका जी आपसे एक निवेदन है‚ मौलवी साहब जो भी आपको सीखाएं वही आप मुझे सिखा दिया करें‚ मैं आपको ही अपना गुरू मान लूंगा”|
 
“मगर एक शर्त है आप मुझे हरियाणवी किस्से नहीं सुनायेंगें” राधिका ने हंसते हुए कहा|

फिर दोनों इधर-उधर की बातें करते रहे और अपने को ताके जाने का ज्ञान होने के बाद, वे एक दूसरे से नजरें नहींं मिला पा रहे थे, राधिका छत को बेेवजह घूर रही थी, और खुद को ठीक से ताकने का मौका दे रही थीं| किशन यह सोचकर कि अगर वह जरा देर के लिए भी खामोश हुआ तो राधिका चली जायेगी| बड़े अपनेपन के साथ वह धाराप्रवाह ढ़ंग से उससे बतियाने में जुट गया| साथ ही उसे रोहन की बात याद आई— एक बार रोहन नेकिसी लड़की से दोस्ती करनी हो तो चाहे वो देखने में कैसी भी हो अगर आप उसकी तारीफ करोगेे तो वो खुश हो जायेगी| बरबस ही वह बोल पड“हजारो में नहीं कहूंगा मैं उनको, वो इस जहान में ही एक हैं,

सूरत से हसीन भी है मेरा दोस्त, ओर वो दिल की भी नेक है|

हल्की मुस्कुराहट के साथ राधिका ने कहा— “लगता है आप को कोइ गहरा सदमा लगा है वरना ऐसे अचानक ये क्या सुझा| ”|

“राधिका जी अचानक नहीं… न जाने कब से दिल के किसी कोने में पड़ा होगा– बस आज ये जुबान पर कैसे आया‚ ये मैं भी नहीं जानता”|

“क्या आपको शायरी पसंद है,” किशन ने बात आगे बढ़ाने के इरादे से पूछा|

“जी पसंद तो है मगर हल्की–फुल्की सी जिसे समझना आसान हो”|

किशन ने मन ही मन सोच लिया अब से जब तक राधिका उसके सामने होगी “वह खुद को गालिब साहब का भतीजा समझेगा”|

“राधिका जी कुछ तो आपको भी सुनाना पड़ेगाआप ही बताओ कैसे छिपाऊ मैं जमाने से,

हर सांस के साथ आपका नाम निकलता है|

“वाह… राधिका जी क्या बात है प्लीज ऐसा ही एक ओर…”|

“सॉरी सर बस यही याद था‚ ये भी आज क्लास में सुनाया था किसी ने”

“तो क्या… आप अभी मौलवी साहब के पास से आ रही हैं|

“जी हां मैं वहीं से आ रही हू ”|

“राधिका जी प्लीज मुझे भी बताओ आज क्या सिखाया मौलवी जी ने”

“सॉरी सर बहुत देर हो गई है‚ मुझे जाना होगा प्लीज आप बुरा मत मानना मैं वादा करती हू मैं कल आऊगी और अब तक जो भी मौलवी जी ने मुझे सिखाया है‚ वो मैं आपको बता दूंगी… लेकिन अभी मुझे जाना होगा”|

“चलिए कोइ बात नहीं… कल सही मगर जाने से पहले आपको कुछ सुनाना पड़ेगा”|

“ओह प्लीज… मुझे अभी कुछ याद नहीं है,”

“ओके नो प्रोब्लम अभी मैं सुना देता हूँ ‚ आप फिर कभी सुना देना और वह शुरू हो गया—मेरी जात, मेरा रंग, मेरा नाम न पूछ मुझसे,

मेरा घर्म, मेरे उसूल, मेरा इमान न पूछ मुझसे,

प्यार हमने भी किया है, किसी को जान से ज्यादा,

क्या मिला, फायदा या हुआ नुकसान न पूछ मुझसे|

“वाह… वाह… वाह…”

राधिका जी एक ओर जरा गौर फरमाइये

फिर मेरे अरमान मचल गये,

आसू मेरी आखों में आ गये,

दिन, महीने नहीं, वर्ष बीत गये,

छाले भी मेरे हाथों में पड़ गये,

मगर अभी अधूरा है मेरा प्रेम पत्र|

हर सांस का एक सलाम लिखा,

ठंड़ी आहों का एक पैगाम लिखा,दिल‚ जान‚ जिगर और गुर्दा,

जिसका भी जो था ब्यान लिखा,

मगर अभी अधूरा है मेरा प्रेम पत्र|

“वाह…वाह… क्या बात है जी मगर अब मैं जाऊं” राधिका ने कहा और वह जल्दी से दरवाजे की तरफ बढ़ गई”

“राधिका जी एक ओर प्लीज… बिल्कुल नया है—कैसे आयेगा ओर क्या आयेगा मेरे खत का जवाब

मेरी लिखाइ मैं खुद नहीं पढ़ पाता लिखने के बाद

राधिका मुस्कुराई और रूककर उसे हैरानी से देखते हुए बोली—“जनाब सच में आप नोरमल तो नहीं है ये मैं आपके सिर्फ इस शेर के लिए नहीं बोल रही हूँ बल्कि आपकी ज्यादातर बातें समझनी थोड़ी मुश्किल है,”

राधिका जी…इतना आसान नहीं, समझना किसी दीवाने की बातो को,

अगर समझना चाहते हो, तो दीवाने बनकर आप देखो|

“संभल जाइये जनाब आप पागलपन की हद से ज्यादा दूर नहीं हैं,”

किशन ने भी राधिका की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा— राधिका जी आप सही बोल रही हैं

मैने भी सुना था, इश्क में लोग अक्सर दीवाने हो जाते हैं,

मगर ये न सुना था, As a पागल मशहूर भी हो जाते हैं|

“किशन जी आपको ये ख्याल कहां से आते हैं‚ क्या बात है कहीं किसी से प्यार-व्यार तो नहीं हो गया” राधिका ने शरारती हंसी के साथ पूछा|
 
किशन चाहता था कि अब वह एक बार तो सीधे शब्दों में इजहार कर दे मगर फिर सोचा अगर वह अभी कहेगा तो क्या पता राधिका शर्माकर या नाराज होने का नाटक करके वहां से चली जाए| वह अभी राधिका के साथ कुछ वक्त बिताना चाहता था इसलिए उसने बात को थोड़ा बदल दिया‚ “राधिका जी-मेरे लिए तो कोइ मतलब नहीं इन सब बातों का,

कभी ये मेरा मजाक बनाती हैं ओर कभी मैं इनका|

“मैं तो समझती थी अभी कुछ कसर बाकी होगी मगर नहीं… आप तो बिल्कुल पागल हो चुके हो, अच्छा किशन जी एक बात बताओ प्यार में पागल होने के बाद कैसा महसूस होता है… क्या बहुत दर्द होता है ”|

किशन ने हँसते हुए जवाब दिया…

यूं अन्दाजे न लगाओ किसी आशिक के दर्द के,

उठो, हिम्मत करो और प्यार करके देखो किसी से|

राधिका उठ गई… “न बाबा न आपकी हालत देखकर ही मुझे तो डर लग रहा है| अच्छा जी मैं चलती हूँ और आप किसी अच्छे ड़ाक्टर से अपना इलाज करवालो आपके लिए बेहतर होगा”

“ओके बाए कल मिलेंगे” राधिका ने जाते हुए कहा

“मै इन्तजार करूंगा” मुस्कुराते हुए किशन ने कहा

“तो फिर मैं नहीं आऊंगी” नजाकत से वह बोलीहमे तो बस इन्तजार करना है आपका कयामत तक,

आप आए तो कयामत होगी, न आए तो कयामत होगी|

राधिका मुस्कुराई ओर “बाए” बोलकर खुशी में झूमती हुई बाहर चली गई|

किशन बहुत खुश था| राधिका के साथ अपने जीवन के सुनहरे पलांे के बारे में सोचते-सोचते वह सो गया|

मगर कुछ देर बाद वह दर्द के मारे चीखते हुए जाग उठा|

एक आदमी जिसकी उम्र लगभग 55-60 वर्ष होगी‚ उस पर अंधाधुंध लाठीयां बरसा रहा है| साथ ही साथ वह बोल रहा था आज मैं बताता हूँ तुझे गुंड़ागर्दी कैसे करते हैं| जोर-जोर से चिल्लाता हुआ किशन अपने बाबू जी को पुकारने लगा| चीख पुकार सुनकर श्रीहरिनारायण अन्दर आए| उस आदमी के हाथ से ड़ंड़ा छीन कर श्रीहरिनारायण उसे कमरे से बाहर ले गये| सारा मोहल्ला इक्कठा हो गया| पूछताछ के बाद पता चला कि वह संजय का पिता सुरेन्द्र पाल सिंह था| अब सारी बात श्रीहरिनारायण की समझ में आ गइ| गुस्से के साथ सुरेन्द्र पाल सिंह को किशन के कमरे में ले जाकर बोले— आपको अपने बेटे से जितना प्यार है हमे भी हमारा बेटा उतना ही प्यारा है| गलती आपके बेटे की थी किसी की लड़की को छेड़ेगा तो उसको मार ही पड़ेगी… मेरे बेटे का ये हाल बनाने वाले कोइ ओर नहीं बल्कि आपके बेटे संजय के दोस्त है| हम शान्ति पसंद लोग हझगड़े को सुलझाने के लिए समझौता करना किसी पवित्र ग्रंथ को पढ़ने के सम मानते है| लेकिन शायद आप लोग इसे हमारी कमजोरी समझतेे हैं| इसलिए अब मैं आपको सबक सिखाकर रहूंंगा| मैं अभी थाने जाकर आप पर घर में घुसकर मेरे बेटे पर जानलेवा हमला करने की रिपोर्ट लिखवाता हूँ |

परन्तु मोहल्ले के लोगों ने बीच में आकर श्रीहरिनारायण और सुरेन्द्र पाल सिंह को समझा बुझाकर एक बार फिर उनका समझौता करवा दिया|

अगले दिन राधिका किशन से मिलने आई “किशन जी कैसे हो| ”

“अजी जिस हाल में आप छोड़कर गये थे वैसा ही है और शायद मरते दम तक ऐसा ही रहने वाला है,” |

“चु…चु…चच्च्च्च… क्या थोड़ा–सा भी आराम नहीं है,” राधिका ने तरस दिखाते हुए कहा|

“क्या बताऊं राधिका जीएक बार थोड़ा प्यार से वो जिसे देख ले है,मरते दम तक फिर सुकंून उसे न मिले है|

किशन की नजरों के भाव को समझकर राधिका नजरे झुकाकर बैठ गई| अचानक उसकी नजर किशन के हाथ की सूजन पर गई|

उसने पूछा—“किशन जी कल तो आपके हाथ ठीक थे मगर आज हाथों पर भी सूजन है,” |

“अजी छोड़िये इन बातों को कल आपने वादा किया था‚ कि मौलवी साहब ने आपको अब तक जो भी सिखाया है वह आप मुझे बताओगे” किशन ने बात बदलते हुए कहा|

“कहा तो था… मगर आज मैने मौलवी साहब से इस बारे में बात की थी तो उन्होने कहा मैं आपको सिर्फ इतना बताऊं किशायरी इन्सानी जज्बात का वो खूबसूरत इजहार है‚ जो पढ़ने वाले या सुनने वाले के मन को छू जाये… बस इससे ज्यादा कुछ भी जानना आपके लिए अभी न जरूरी है और न आपके हित में ह,”|

“इससे ज्यादा जानना मेरे हित में क्यों नहींं| ” किशन ने हैरानी से पूछा

“मौलवी साहब का कहना है‚ नियमों के दायरे में रहकर तो आप शायद कभी कुछ न लिख सकें… अभी आप उस स्तर के लेखक नहीं है… सॉरी किशन जी ये शब्द मेरे नहीं बल्कि मौलवी साहब के थे| मैने तो आपको बस वो बताया जो मौलवी साहब ने मुझे बताने को कहा”|

“ओके… नो प्राब्लम यार… आप बताओ आपकी उर्दू की पढ़ाई कैसी चल रही है “

“बहुत अच्छी… अरे हां आज क्लास में मुस्दस का एक बहुत ही अच्छा उदाहरण सुनाया था, मैं आपको सुनाती हू

न किसी को परेशान करना,

न दिल दुखा ऐ दोस्त किसी का,

कमजोर की मदद को रहो तैयार,

मिटा दो नफरत, सबसे करो प्यार,

कुछ है तो धर्म भी बस यही है,

और इन्सानियत भी है नाम इसी का|

“गुरू देव आप इजाजत दंे तो कुछ मैं भी सुनाऊंं“ किशन ने शिष्य के अन्दाज में इजाजत ली|

“अवश्य सुनाओ मगर प्लीज मजाक मत करना”|
 
“अरे नहीं सुनो तो आपको अच्छा लगेगा”|

“ओके-ओके सुनाओ वैसे भी अब मेरे पास सुनाने के लिए कुछ नहीं बचा है,”

राधिका जी अर्ज किया है…

ना पुछे… कोइ हमसे… क्या-क्या हम इस दिल में… अरमान लिये बैठे हैं|

इश्क का तो कतरा भी ना संभले… फिर हम तो… तूफान लिये बैठे हैं||

जान से ज्यादा तुमको यार

हर पल किया है मैंने प्यार

मासूम से मेरे उस दिल के

टुकड़े तूने किये हजार जिस दिल में.. तुमको हम … मेरी जान लिये बैठे हैं|

इश्क का तो कतरा भी ना संभले… फिर हम तो… तूफान लिये बैठे हैं||

हंस के आँख सी मार गयी

लूट के चैन - करार गयी

क़त्ल कर गयी रे जालिम

कर बिन चाकू-तलवार गयी

अजी हम तो .. सब अपना... हरे राम किए बैठे हैं

इश्क का तो कतरा भी ना संभले… फिर हम तो… तूफान लिये बैठे हैं||

बदले एक बदले लिए हजार

गजब थी वो सौदागर यार

मुफ्त में लूट लिया सब कुछ

ऐसा किया उसने व्यापार

ऊपर से... हम दिल ये .. ईनाम दिए बैठे हैं

इश्क का तो कतरा भी ना संभले… फिर हम तो… तूफान लिये बैठे हैं||

तु कर ले लाख सितम हमपे

जो चाहे कर ले जुल्म हमपे

चाहे दे सारी उम्र का गम

इल्जाम न कोई होगा तुमपे

अजी हम तो… इनका भी… एहसान लिए बैठे हैं|

इश्क का तो कतरा भी ना संभले… फिर हम तो… तूफान लिये बैठे हैं||

क्या पाना है क्या खोना है

सब मिट्टी है सब सोना है

जो चाहे जिसका हो जाये

हमको तो बस तेरा होना है

अजी हम तो… जीवन ही… तेरे नाम किए बैठे हैं|

इश्क का तो कतरा भी ना संभले… फिर हम तो… तूफान लिये बैठे हैं||

क्या घबराना क्यूं है छुपाना

बोलकर लेकिन क्यूं है बताना

खुद ही देखो खुद ही समझो

क्या होता है जब हो दीवाना

अजी हम तो… जख्मों को… सरेआम लिये बैठे हैं|

इश्क का तो कतरा भी ना संभले… फिर हम तो… तूफान लिये बैठे हैं||

ना घर है ना है घरवाली

ना बाहर कोइ बाहरवाली

सुनसान पड़ा घर-बार मेरा

यहां तक के दिल भी खाली

देखो फिर भी… बेवफा का… इल्जाम लिए बैठे हैं

इश्क का तो कतरा भी ना संभले… फिर हम तो… तूफान लिये बैठे हैं||

समझ के दिलबर अपने को

सच कर दे मेरे सपने को

ली मन से मनको की माला

तेरे नाम की जपने को

अजी हम तो... .तुमको ही... भगवान किये बैठे हैं

इश्क का तो कतरा भी ना संभले… फिर हम तो… तूफान लिये बैठे हैं||

तेरी-मेरी एक फोटू को

लाईक मिले बड़े हॉटू को

कहा तुझे है क्यूट बड़ी

और मुझे बताया मोटू स

राधे-कृष्ण.. कहे कोई... कोई सिया-राम कहे बैठे हैं

इश्क का तो कतरा भी ना संभले… फिर हम तो… तूफान लिये बैठे हैं||

ना मिली वो तो भी क्या होगा

जी सकूँ मै खा के भी धोखा

फ़िक्र मुझे तो बस इतनी

ना जाने उसका क्या होगा

वो भी तो .. भई दिल में... सलमान लिये बैठे हैं

ना पुछे… कोइ हमसे… क्या-क्या हम इस दिल में… अरमान लिये बैठे हैं|

इश्क का तो कतरा भी ना संभले… फिर हम तो… तूफान लिये बैठे हैं||

ना पुछे… कोइ हमसे…

ना पुछे… कोइ हमसे…

ना पुछे… कोइ हमसे

“राधिका जी सच-सच बताना कैसा लगा| ”

“बहुत जोर से लगा… ” राधिका ने चिड़ाते हुए जवाब दिया|

“अच्छा जी तो फिर आप ही सुना दो कुछ अच्छा सा”

“ठीक है बताओ किस बारे में सुनना पसंद करोगे आप”

“कुछ भी ऐसा जो मुझे लगे मेरे हाल जैसा है"

“किशन जी भला मुझे क्या मालूम आपका हाल कैसा है| उसके लिए तो पहले आपको ही बताना होगा, कि आपका हाल कैसा है,” राधिका के चेहरे पर शरारती हंसी थी|मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आता, न जाने मेरी हालत कैसी है,

कभी लगता है सब ठीक है, कभी लगता है कुछ भी ठीक नहीं|

“जब आपको ही नहीं पता तो मुझे भी क्या पता जनाब”

“राधिका जी मैं तो आपके सामने हूँ … कुछ अंदाजा लगाइये न”

एक नजर भरकर उसने किशन को देखा और एक शरारती हंसी के साथ उसने कहा “हम्म्म्म्म्… मुझे नहीं पता आप किसी दूजे से पूछ लिजिये”

“अजी कितनो से पूछूं

जो भी देखता है मुझे‚ रूककर कुछ सोचने लगता है,

मगर वो बोलता कुछ नहीं‚ न जाने मेरा हाल कैसा है|

“ठीक है... ठीक है अब बस कीजिये मैं सुनाती हूं”

“ये हुइ न कुछ बात… इरशाद”

क्या कहूं, कैसा नशा है मुझे उनकी दोस्ती का,

एक उसके सिवा, मुझे कोइ अपना नहीं लगता|

वाह… राधिका जी कसम से आपकी शायरी में एक कशिश है मेरी मानें तो आप लिखना शुरू कर दीजिये|
 
“बस-बस रहने दीजिये… मैं जानती हूँ मैं लिख सकती हूँ या नहीं‚ आप लिखते रहिये हम तो आपकी कहानियां पढकर ही खुश होंगें…” राधिका ने पलटवार करते हुए कहा|

यूं न मजाक बना ऐ दोस्त मेरा,

सब जानते हैं सच क्या होगा,

जिसे पढ़ना नहीं आता ठीक से,वो लिखता भी क्या घन्टा होगा|

“राधिका जी आप बुरा न मानें तो मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूं ”

“मगर ऐसा क्या … पूछिये” थोड़ा रूककर राधिका ने कहा

“क्या आप किसी से प्यार करते हैं,”

“बस इतनी सी बात थी… अरे इसमे बुरा मानने वाली क्या बात है हर कोइ किसी न किसी से प्यार करता हैं, मैं भी करती हूँ ”|

“किससे…” किशन ने जल्दी से पूछा

“मम्मी से दीदी से ड़ैड़ी से और… सैंड़ी से”|

किशन का दिल जोर से धड़क उठा… कहीं ऐसा तो नहीं जहां वह अपना नाम सुनना चाहता था राधिका की जिंदगी में वहां सैंड़ी का नाम आता हो| वह बैचैन हो उठा और पूछे बिना न रह सका “ये सैंड़ी कौन है| ”

“सैंड़ी… हमारे कुत्ते का नाम है,” |

किशन ने राहत की सांस ली| राधिका जी अपने परिवार के सदस्यों से तो सभी प्यार करते हैं मगर मेरा मतलब आपके जीवन साथी से था|

“उस प्यार का मतलब तो मैं आपको नहीं बता सकती मगर जहां तक बात मेरे जीवन साथी की है तो मैं बस ये सोचतीउसके सिवा न कभी कोइ मेरा होगा,

ओर मेरे सिवा न कभी वो हो किसी का|

“अब आप बताइये… आपके जीवन साथी के बारे मे या फिर कुछ अपने प्यार के बारे मे‚ क्या आपने जीवन मे किसी से प्यार किया है ” राधिका ने पूछा

“राधिका जी अगर कोइ ऐसा है जिसे किसी से प्यार नहीं है तो वह बस पत्थर हो सकता है… मेरी नजर में -

प्यार पागलपन है, प्यार जवानी है,

प्यार आग है, प्यार शीतल पानी है,

प्यार धरती है, प्यार ही आकाश है,

प्यार भरोसा है, प्यार एक विश्वास है|

“अजी आपकी परिभाषा ने तो पूरी सॄष्टि को ही प्यार में समेट दिया है मगर किशन जी हकीकत इससे बहुत अलग होती है,”

“राधिका जी प्यार के बारे मे मेरा जो नजरिया था‚ मैने बता दिया… मै जानता हूँ हर किसी का नजरिया एक जैसा नहीं होता‚ जैसे कि सेक्सपीयर साहब ने कहा है प्यार अंधा होता है जिसमे प्रेमीजन उन महान मूर्खताओं को ही नहीं देख पाते जिन्हे वे स्वयं करते हैं|

“हां… देखा सेक्सपीयर साहब ने प्रेमीजनो को मूर्ख कहा है,”राधिका ने चटकारा लेते हुए कहा|

“राधिका जी किसी भी बात को सही या गलत बनाने मे इन्सान के सोचने का नजरिया बहुत हद तक जिम्मेदार होता है‚ अब देखिये न आपने ध्यान दिया कि सेक्सपीयर साहब ने प्रेमीजनो को मूर्ख कहा‚ मगर मुझे इस बात ने ज्यादा प्रभावित किया कि उन्होने प्रेमीजनो की मूर्खताओं को भी महान बताया| वैसे भी किसी की खुशी में खुश और दु:ख में दुखी रहना ही प्यार है, अब इसे कोइ मूर्खता समझे तब भी प्यार एक पवित्र एहसास है|

“ओहो… लव गुरू रूको जरा प्यार की एक परिभाषा ये हैं कि प्यार एक धोखा है… क्योंकि हम जिसे जितना प्यार करते है वो हमे उतना ही दु:ख देता है ओर अपनो को दु:ख देना धोखा ही तो है और इसकी दूसरी परिभाषा ये है कि सच्चा प्यार हमेशा बर्बाद करता है|

“अरे… रे… आप तो गुस्सा हो गये… राधिका जी मैं आपसे पुरी तरह सहमत हूँ मैं भी मानता हूँ प्यार एक धोखा है… मगर बडा ही प्यारा सा … अजी प्यार तो जल की तरह शीतल है| जिस तरह किसी गर्म वस्तु को पानी में ड़ालने पर भले ही पानी कुछ देर के लिए गर्म हो जायेगा मगर आखिर में पानी उस गरम वस्तु को ठंड़ा कर देगा, ठीक उसी तरह सच्चा प्यार करने वाले धोखा देने वालो को भी दुआ ही देते हैं‚ और एक दिन उनका भी दिल जीत लेते हैं|

“अच्छा गुरू जी आप जीते मैं हारी‚ अब चुप हो जाओ— हे भगवान इनको कोइ कैसे सहेगी|

“अजी जिसे मुझसे प्यार होगा वो सहेगी और हँसकर सहेगी… क्योंकिकिसी की खुशी की खातिर मजबुर हो जाना भी प्यार है,”|

“तुम बिल्कुल पागल हो तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता… मैं तो जा रही हंंू ”|

“अरे राधिका जी किसी की खुशी की खातिर दूर हो जाना भी प्यार ही होता है,”

“Will u please shut up & please stop your Horse laugh|”

राधिका को परेशान देखकर किशन बहुत खुश था| इतना खुश कि वह राधिका के गुस्से को भी न देख सका| राधिका का चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था| वह उठकर बाहर जाने लगी| किशन अब भी उसके गुस्से से अनजान हस रहा था| इससे राधिका का गुस्सा ओर ज्यादा भड़क गया| वह दरवाजे से बाहर चली गई| एकाएक वह दरवाजे पर आयी और एक कंकर किशन को दे मारी| दरवाजे में खड़ी-खड़ी वह उसे घूर रही थी| किशन अब भी हँस रहा था ओर मसकरी करने के मूढ़ में हाथ से कुछ फेंकने का इशारा करते हुए बोकुछ यूं झटका उसने हाथ को,

और कुछ यूं लगा मुझे,

जैसे मुझे कुछ लगा हो|

“राधिका को इतना गुस्सा आया कि उसने एक बार फिर किशन को मारना चाहा मगर उसने अपना हाथ बीच में ही रोक लिया‚ क्योंकि मारने के लिए उसके हाथ में कुछ भी नहीं था|
 
“राधिका जी आपके हाथ को जिसने रोका वह भी प्यार ही है,” ठहाका लगाकर हंसते हुए किशन ने कहा|

इतना सुनते ही राधिका ने अपनी सैंड़िल निकालकर जोर से किशन को दे मारी|

किशन को थोड़ी चोट लगी मगर फिर भी वह हँसकर बोला “राधिका जी किसी को सैंड़िल मारना भी प्यार हो सकता है,” |

गुस्से में राधिका अपनी सैंड़िल लेने अन्दर आई तथा सपाट शब्दो में बोली “मेरी सैंड़िल दो अब मुझे आपसे कोइ बात नहीं करनी… न ही आज के बाद मैं कभी आपसे मिलूंगी”|

अब किशन को उसके गुस्से का अंदाजा हुआ साथ ही उसे एहसास हुआ कि उसकी बकवास कुछ ज्यादा हो गई और अगर अभी उसने राधिका को नहीं मनाया तो फिर शायद वह कभी भी उससे नहीं मिलेगी|

“पहले आप मुस्कुराइये तब मैं आपकी सैंड़िल दूंगा राधिका जी मैं तो मजाक कर रहा था मुझे क्या पता था… प्लीज मुझे माफ कर दीजिये|”

“मै कब से… मुझे किसी का एक ही बात को बार-बार रटते रहना बिलकुल पसंद नहीं … मैने आपसे क्या पूछा था और आप बात को कहां ले गये|

“आप इस बार माफ कर दो… मै वादा करता हू अब कभी ऐसा नहीं करूंगा… अब मैं आपके सवाल का सीधा जवाब देता हंू… राधिकअगर न सोचे इन्सान सुख में जीने की,

तो खुश रह सकता है हाल में कैसे भी|

“आप कुछ सोचो या न सोचो… बस मेरी सैंड़िल दे दो मुझे देर हो रही है,”

“मगर आप मुझसे नाराज तो नहीं हैं न”

“नहीं… बस… अब मुझे मेरी सैंड़िल दे दो”

“मगर राधिका जी आपकी सैंड़िल मेरे पास कैसे आई “हल्की मुस्कान के साथ किशन ने कहा|

राधिका बिना कुछ कहे नजरे झुकाकर खड़ी थी|

किशन ने सैंड़िल नीचे रख दी|

सैंड़िल पहनकर राधिका चुपचाप बाहर जाने लगी तो वह बोला—राधिका जी जाने से पहले एक शेर सुनते जाइये”|

वह रूजो दोस्त हँसकर माफ कर दे हमारी गलती को,

जान के बदले भी मिले ऐसा दोस्त, तो भी सस्ता है|

“ओके बाए…” राधिका ने मुस्कुराकर कहा “आप भी मुझे माफ कर देना वो मैने गुस्से में …”

अजी -

जब बात जन्मो के साथ की हो,

तब छोटी-2 बातों पे नाराज न हों|

“जी… क्या मतलब| ”

“जी मतलब ये कि छोटी-छोटी बातों पर क्या नाराज होना”| राधिका मुस्कुराकर चली गई|

हंस के आँख वो मार गया

दिल का चैन - करार गया

जिसने लूटा मेरा सब कुछ

एक के बदले ले हजार गया

उसको ही.. दिल हम ये... ईनाम दिए बैठे हैं

इश्क का कतरा भी ना संभले… फिर हम तो… तूफान लिये बैठे हैं||

ना पुछे… कोइ हमसे… क्या-2 इस दिल में… अरमान लिये बैठे हैं|

ना पुछे… कोइ हमसे…

गुनगुनाते हुए राधिका अन्दर आई किशन अब भी सो रहा था|

“किशन जी आप भी कमाल करते हो जब देखो सोते रहते हो,”

“हूँ ... ऊं… राधिका जी आप… अब आप से क्या छिपाना यार जबसे प्यार हुआ है मेरी तो रातों की नींद ही उड़ गइ है,” किशन ने आँख मलते हुए कहा|

“अच्छा जी तो आप कहना चाहते हैं पहले आप को रात में नींद आती थी”

“जी हाँ बहुत अच्छी नींद आती थी मगर अब… देर रात तक तो नींद नहीं आती और सुबह में जल्दी आँख नहीं खुलती”

मगर राधिका के सवाल से उसकी सारी सुस्ती गायब हो गई “क्या आप कुदरत को झूठा साबित करना चाहते हैं,”|

“कुदरत को… क्या मतलब” किशन ने हैरानी से पूछा|

“जी मतलब ये कि सारी दुनिया जानती है उल्लू को रात में नहीं बल्कि दिन में नींद आती है और आपकी चोरी पकड़ी गई तो प्यार का बहाना बनाकर अपनी असलियत छिपाना चाहते हैं,”|

राधिका की हंसी थी कि रूकने का नाम ही नहीं ले रही थी|

राधिका को टोकते हुए उसने कहा राधिका जी … आज कुछ ज्यादा हो रहा है|

“जी नहीं ज्यादा नहीं… हिसाब बराबर हुआ है परसों आपने मुझे परेशान किया था आज मैने आपको … बस हिसाब बराबर|

“तो आप हिसाब बराबर करना चाहती है… तब जरा याद करो आपने परसों क्या किया था| राधिका नजरें झुकाकर बैठ गई |

किशन जानता था राधिका को क्या याद आया है जो वह नजरें झुकाकर बैठ गई …“कैसे करू तारीफ उनकी खूबसूरती की, मेरे पास शब्द बहुत कम हैं,

वो खूबसूरत हैं बहुत ज्यादा, और मुझे लिखने का तजुर्बा बहुत कम है|

राधिका बड़ी गंभीर निगाहो से किशन को देखने लगी|

कुछ देर की खामोशी के पश्चात् वह बोली किशन जी परसों हमारी बातें अधूरी रह गई थी— अगर आप हमे इस लायक समझते हो कि आप हमे अपने उस दोस्त के बारे में कुछ बता सकें, तो बताइये आपकी वो दोस्त कौन है वो देखने में कैसी है|

किशन राधिका के इस सवाल से हक्का–बक्का रह गया|

राधिका ने हल्की सी मुस्कान के बाद अपनी नजरें झुका ली|

राधिका के अंदाज में ही किशन ने भी जलेबी की तरह का बिल्कुल सीधा जवाब दिया—वो लबों की लाली, वो गालों की सुर्खी,

वो आखों की चमक, वो दिलकश अदाएं,

राधिका जी बस यूं समझिये—

वो दिखते भी हैं जालिम, ओर हैं भी जालिम|

आप किसी बात का जवाब सीधा-सीधा नहीं दे सकते क्या| चलिए आपकी मर्जी हमे मत बताइये मगर आपने उनको तो बता ही दिया होगा या उनको भी नहीं|

“जी अभी तक तो नहीं”

”मगर क्यों नहीं बताया”
 
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