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Romance एक एहसास complete

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“अजी क्या बताऊं…

अजब सी हालत हो जाती है उनके सामने आते ही,

बहुत कुछ कहना चाहता हूँ मगर कहता कुछ नहीं|

“वैसे तो आप बहुत बोलते हो फिर एक लड़की के सामने क्यो नहीं बोल पाते”

“राधिका जी ऐसी बात नहीं है कि मैं उनके सामने कुछ नहीं बोल पाता… जिस दिन मैं उनकी आँखों में इकरार की झलक देख लूंगा‚ उस मैं सारी दुनिया के सामने इजहार कर दूंगा|

ओहो… तो आप नजरों की बातें भी समझते है|

“जी हां बिल्कुल…किसी की झलक को तरसते हैं, तो किसी का दिखना कहर होता है,

हर नजर की बात अलग होती है, अलग हर नजर का असर होता है|

“कभी-कभी आप बहुत अच्छी बातें करते हैं अगर आप जैसा कोइ खिलौना होता हो तो मुझे बताना मुझे अपने घर के लिए चाहिए” राधिका ने हंसते हुए कहा|

“राधिका जी … आप मुझे ही ले जाइये न…

कोइ हँसकर देखे तो खुशी से लुट जाता हू ये आदत मेरी है,

एक प्यार भरी नजर और दो मीठे बोल बस ये कीमत मेरी है|

राधिका शरमाकर नजरें झुकाकर बैठ गई|

ओर किशन उसकी तारिफ करता रहा—

एक तो तुम्हारी, स्माईल प्यारी,

उस पर ये आखें, हाये कजरारी|

अब दूर न जा,

दिल में समा जा,

बन जाओ राधा,

मै गिरिवरधारी,

एक तो तुम्हारी, स्माइल प्यारी,

उस पर ये आखें, हाये कजरारी|

जानेमन ए जाने जां,

कहूं क्या तेरे बिना,

जीना तो है जीना,

मरना भी भारी,

एक तो तुम्हारी, स्माइल प्यारी,

उस पर ये आखें, हाये कजरारी,

हाये दो धारी …|

“तो जनाब उनकी खूबसूरती से घायल हो गए… खैर अब हो भी क्या सकता है| आपको पहले ही अपने मन को काबू में रखना चाहिये था या फिर उसे मन की गहराई में उतरने ही न देते|

“राधिका जी बोलना तो आसान है, जरा सोचिये—

“भला क्या कहें उनको, जिनके बिना जी भी न सकें,

कैसे रोकें उस कातिल को, जो जान से भी प्यारा लगे|

“किशन जी प्लीज बताओ न वो कौन है,”

किशन ने सोचा तो था कि वह पूरी तरह से स्वस्थ हो जाने के पश्चात् इजहार करेगा मगर अब ज्यादा देर करना भी उसने उचित न समझा…

“दिल है मेरा मगर इसमे अरमान हैं तेरे,

आप ही कातिल, आप ही भगवान हो मेरे|

ये शब्द सुनकर तो मानो राधिका की खुशी का कोइ ठिकाना न रहा| वह मुस्कुराते हुए उठकर बाहर जाने लगी| किशन ने उसे पकड़ने की कोशिश की मगर जब उसे बिस्तर से उठने में तकलीफ हुई तो वह वापस लेट गया| राधिका उसे अंगूठा दिखाकर बाहर चली गई|

इस दौरान राधिका की कुछ पासपोर्ट साइज तस्वीरें नीचे गिर गई‚ जो किसी फार्म पर चिपकाने के लिए वह अपने साथ लाई थी|

तस्वीरें उठाने के लिये किशन को थोड़ा दर्द सहना पड़ा| उसने एक तस्वीर अपने तकिये के नीचे रख ली और बाकी तस्वीरें तकिये के पास रख दी|

राधिका आई ओर दरवाजे के पास से ही धीरे से बोली—“अच्छा तो हम चलते हैं…”

“अजी फिर कब मिलेंगें…” उसे अन्दर आने का इशारा करते हुए किशन ने कहा|
 
एक बार फिर राधिका उसे अंगूठा दिखाकर चली गउफ्फ ये जिद्द तेरी‚ एक हां के लिए 100 बार ना‚ क्या गुजरती है दिल पे तुझे क्या बताऊं

इतना करम करना रे जालिम‚ कभी हां न कहना‚ तु हां कहे तो कहीं मैं पागल न हो जाऊं

किशन जानता था जब राधिका को तस्वीरों की जरूरत होगी तब वह उन्हे लेने लौटकर उसके पास जरूर आएगी| इसलिए वह निशचिंत होकर आखें बंद करके लेटा रहा| उसने सोच लिया था‚ जब राधिका फोटो लेने आएगी तब वह उसे अंगूठा दिखाने के बदले में थोड़ा सबक तो जरूर सिखाएगा|

कुछ देर बाद राधिका वापस आई शायद उसे रास्ते में ही पता चल गया होगा तस्वीरें उसके पास नहीं हैं| वह दबे पांव किशन के कमरे में दाखिल हुई| वह नहीं चाहती थी कि किशन को उसके अन्दर आने का पता चले या फिर वह नहीं चाहती थी कि किशन की नींद टूटे|

मगर किशन तो पहले से ही जाग रहा था| फोटो ढ़ूंढ़ते हुए जैसे ही राधिका की पीठ किशन की ओर हुई उसने राधिका की तस्वीर हाथ में ली ओर वह बोअरे “बांगरू”क्यों करता है हर वक्त खुशामद इसकी,

वो खुद बात नहीं करते, तो उनकी तस्वीर क्या बोलेगी|

राधिका ने मुडकर देखा तो किशन ने उसका स्वागत एक शरारती मुस्कान के साथ किया|

राधिका के चहरे पर बड़ी हैरानी के भाव थे -जैसे उसने मन ही मन सोचा हो हे भगवान इस पागल के पास मेरी तस्वीरें कैसे पहुच गई|

“आपके पास ये तस्वीरें कैसे आई” राधिका ने बड़ी नजाकत के साथ पूछा

“लो कर लो बात अजी आप ही तो मुझे अपनी तस्वीर निशानी के तौर पर दी थी” राधिका को सताने के लिए उसकी तस्वीर सीने से लगाते हुए किशन ने कहा|

“आ हा हा… मैने दी थी…”

“राधिका जी शायद आपको याद नहीं है आपने मुझे ये तस्वीरें देते हुए कहा था कि मैं इनका ख्याल रखूं| अब आप चाहें तो पूछ लिजिये मैने एक पल के लिए भी इनको अपने सिने से अलग नहीं किया‚ तब से लेकर अब तक मैने प्यारी-प्यारी बातें करके इनका मन बहलाया है|

“अच्छा जी… मगर जब तक ये तस्वीरें मेरे पास थी तब तक तो ये बातें नहीं करती थी|

“अजी ये बड़ी जालिम शख्श की तस्वीर हबाते… बड़ी प्यारी … ये तुम्हारी… तस्वीर करती है,बंध जाती हैं नजरें… ये बंधन… इश्क की जंजीर करती है|

छाया एक खुमार सा है,

दिल ये बेकरार सा है,

सुध न अपनी, जबसे ये तस्वीर देखी है,

न जाने… जादू कैसा… ये तस्वीर करती है,

बाते… बड़ी प्यारी … ये तुम्हारी… तस्वीर करती है,बंध जाती हैं नजरें… ये बंधन… इश्क की जंजीर करती है|

“अच्छा-अच्छा अब आपकी बातें खत्म हो गइ हों तो लाओ मेरी तस्वीरें वापिस दो” राधिका ने अकड़ते हुए कहा

“मगर फिर मेरा वक्त कैसे कटेगा”

“प्लीज- आप ये तस्वीरें मुझे दे दीजिये… मै आपको कोइ दूसरी तस्वीर दे दूंगी” राधिका ने इतने प्यार से तस्वीरें मांगी थी कि वह किशन को दूसरी तस्वीर देने का वादा न भी करती तब भी वह उसे मना नहीं कर पाता|

“ठीक है जी ये रखी हैं आपकी तस्वीरें आप उठाकर ले जाइये” किशन ने तस्वीरें अपने सिरहाने रखते हुए कहा|
 
राधिका आगे बढ़ी| अब तस्वीरे उसके हाथों की पहुंच में थी मगर जैसे ही उसने तस्वीरें उठाने के लिए अपना हाथ बढ़ाया किशन ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने पास बिठा लि“चूमकर उनके माथे को, लगा लूंगा उनको गले से,

भा गइ ये खता, तो शायद कर लें गुनाह मर्जी से|

राधिका की धड़कने तेज हो गई थी| उसकी आंखांे का रंग बदल गया था| होंठ कुछ नशीले से हो गये थे| वह बड़े ही नशीले अदांज से किशन की आंखो में झाकने लगी|

राधिका के शरीर के स्पर्श से किशन भी बहक गया| उसने एक पल के लिए राधिका की नशीली आखों में देखते हुए उसे बाहो में भर लियाचढ़ेगा जब मेरी चाहत का रंग‚ मेरी बाहों में आकर बिखरोगे आप, यूं खूबसूरत हो आप बहुत‚ मिलकर मुझसे ओर भी निखरोगे आप|

अपने जीवन में किसी लड़की के इतने अधिक निकट उसने अपने आपको कभी नहींं पाया था| उसे ऐसा प्रतीत हुआ कि उसकी किशोरावस्था यहा समाप्त हो गई, और एक नई अवस्था का श्री गणेश हो रहा है| उसका दिल जोरों से उछलने लगा था| धड़कने तेज़ हो चली थी| उसके भीतर का भाव तीव्रता पा चुका था| भीतर की ऊष्णता उसकी आखों तक आ गई थी| समुद्र के ज्वार भाटे की तरह कोइ चीज उसमें ऊधम मचा रही थी|

कंपन और गर्म धड़कनों के साथ उसने राधिका को अपनी बाहों में बांध लिया| वह भी निर्जीव सी बंध गई|

किशन ने राधिका को अंगूठा दिखाने का सबक सिखाया|

राधिका आखें बंद करके बैठी थी| वह अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी|

एक बार फिर राधिका की प्लीज- के सामने किशन को झुकना पड़ा|

हाथ छोड़ते हुए किशन ने कहा मैं भी बोलता हूँ प्लीज- कुछ तो इलाज करो मेरे मन का|

“इसका तो अब एक ही इलाज है,”

“ओर वो इलाज है क्या| “

“भूल जाओ…” किशन को तस्वीरें दिखाकर हँसते हुए वह दरवाजे की ओर बढ गई|

किशन को भनक भी न पड़ी थी कि कब राधिका ने वे तस्वीरें उठा ली|

“मोहतरमा आपके लिए एक शेर अर्ज करता हू जरा गौर फरम“आखिर यूं पर्दा करने से भी क्या होगा,

हो सके तो हमे अपने दिल से निकाल दो,

अगर आप चाहते हो मैं भूल जाऊ आपको,

तो एक पर्दा अपनी तस्वीर पर भी ड़ाल दो|

“तस्वीर ही ले चले है जनाब” राधिका ने उसे तस्वीरें दिखाते हुए कहा|

इस पर किशन ने तकिये के नीचे रखी हुइ तस्वीर निकाली ओर बोला—शायद वो नहीं चाहते कभी भूल पाऊं मैं उनको,

नहीं तो क्यों दे रहे हैं वो अपनी तस्वीर मुझको|

राधिका पलटी| किशन के हाथ में अपनी तस्वीर देखकर वह बनावटी गुस्से में बोली—“यार ये क्या मजाक है मुझे मेरी तस्वीरें वापिस चाहिए”

“राधिका जी आपके पास 20 फोटो हैं इसलिए मैने एक अपने लिए रख ली …

“लेकिन जब मैं सही सलामत आपके साथ हूँ तो फिर आपको मेरी तस्वीर क्यों चाहिए”

“राधिका जी आपके होने मे ओर आपकी तस्वीर के होने में बहुत अन्तर है…”

“वो कैसे”

“तुमको हैं बन्दिशे हजार, तुम पर निगाहें है जमाने की,

मजबुरी तेरी लाखों हैं, आते ही बात करते हो जाने की|”

हर लड़की की तरह राधिका भी अपनी तारीफ सुनकर खुश थी| मगर दिखावे की अक्कड़ के साथ वह बोली “ओर भी कुछ बचा हो तो वो भी बता दो”

“ओरहमे अब आपसे ज्यादा लगाव है आपकी तस्वीर से,

दोस्तों का ख्याल रखना सीखा है आपकी तस्वीर से|

राधिका की तस्वीर को चुमकर सीने पर रखते हुए किशन बोला “इसकी सबसे बड़ी खूबी ये है राधिका जी इसे कितना भी प्यार करो या मजाक करो ये कभी बुरा नहीं मानती| अच्छा राधिका जी मेरा अब मेरी जान के साथ सोने का वक्त हो गया है,”

राधिका गुस्से में बाहर चली गई|

किशन बहुत खुश था|

राधिका के जाने के बाद कुछ देर तक वह दिवानों की तरह उस तस्वीर को निहारता रहा| अचानक उसे किसी के कदमों की आहट सुनाइ दी|

“शायद राधिका अपनी तस्वीर वापस लेने आई होगी” यह सोचकर किशन तस्वीर को सीने से लगाकर सोने का नाटक करने लगा| उसने महसूस किया किसी का हाथ उसके सीने पर उसके हाथों के नीचे से तस्वीर निकालने की कोशिश कर रहा है| अब तो किशन को यकीन हो गया था हो न हो यह राधिका ही है| किशन ने उस हाथ को प्यार से सहलाते हुए कहा… “हकीकत भले न हो मेरा ख्यालों में आपसे मिलना,

मगर कम्बख्त मुझे ये कोइ ख्वाब भी तो नहीं लगता|

किशन ने आखें खोली तो उसकी आखें खुली की खुली रह गई| जैसे उसे 440 V के करंट का झटका लगा हो| जिस हाथ को वह बड़े प्यार से सहला रहा था| वह श्रीहरिनारायण यानी उसके बाबू जी का हाथ था|

“बाबू जी आप कब आए| ” किशन ने हड़बड़ाते हुए पूछा|

“बेटा जब तुम सो रहे थे… किशन दर्द अब भी ज्यादा है क्या|

“किशन को अब दर्द का ख्याल ही कहां था…जी न्न्न्नही…है…अब मुझे बिल्कुल दर्द नहीं है|

“अच्छा बेटा अब तुम आराम करो… मैं कुछ काम से बाहर जा रहा हू” बोलने के बाद श्रीहरिनारायण बाहर चले गए|

किशन ने अपने सीने पर देखा तो वह अपनी मुर्खता पर तिलमिला उठा|

उसका मन किया कि वह खुद को गोली मार ले क्योकि राधिका की तस्वीर उसके सीने पर सीधी पड़ी थी|

अगले दिन राधिका फिर उससे मिलने आई| राधिका को देखते ही किशन को एहसास हुआ‚ उसे वह तस्वीर अपने पास नहीं रखनी चाहिए थी ओर इससे पहले कुछ ओर भी ऐसा हो उसे वह तस्वीर वापिस कर देनी चाहिए| मगर क्या सब कुछ जानने के बाद राधिका उससे दोबारा कभी मिलेगी| उसके मन का जवाब था “शायद नहीं” इसलिए एक बार उसने सोचा कि वह राधिका से इस बारे में कोइ बात नहीं करेगा| लेकिन उसे रोहन की एक बात याद आइ किदोस्ती की शुरूवात तो झूठ से भी हो सकती है मगर जिस रिश्ते को कायम रखने के लिए लगातार झूठ का सहारा लेना पडे, वह रिश्ता दोस्ती का नहीं हो सकता|

“राधिका जी ये लिजिए आपकी तस्वीर” किशन ने तस्वीर राधिका की तरफ बढ़ाते हुए कहा

“ये कौन सी नई शरारत है… आप ही रखो … मुझे नहीं चाहिए अब ये तस्वीर”

“राधिका जी ये शरारत नहीं है… आपने ठीक कहा था मुझे ये तस्वीर नहीं रखनी चाहिए थी|

“मै कुछ समझी नहीं… क्या हुआ| ”

किशन ने उसे सारा वॄतांत सुनाना शुरू किया| अभी वह उसे आधी बात ही बता पाया था कि बिना कुछ सोचे समझे ही राधिका हंसने लगी… आपने अपने बाबू जी का हाथ मेरा हाथ समझा ओर शेर भी सुनाया… that’s very good yaar… यार…

“आगे भी तो सुनो” किशन ने उसे बीच में टोकते हुए कहा

“अच्छा जी… अभी बाकी है क्या… सुनाओ-सुनाओ…” बोलते हुए राधिका फिर से ठहाका लगाकर हंसने लगी|

जैसे ही किशन ने बताया उसके बाबू जी ने उसके सीने पर पडी राधिका की तस्वीर भी देख ली थी तो जैसे राधिका को कोइ गहरा सदमा लगा|

वह अपना सिर पकड़कर वहीं बैठ गइ|

“हे भगवान…” वह बस इतना ही बोलकर चुप हो गइ| वह किशन को ऐसे घूरने लगी|

जैसे वह कह रही हांें कमीने मैने तुझे पहले ही कहा था मेरी तस्वीर दे दे मगर तूने मेरी एक न सुनी| लेकिन हकीकत में वह कुछ भी न बोल सकी और चुपचाप बाहर चली गई|
 
कइ महीने गुजर गये|

एक दिन सीमा किशन से मिलने आई वह कुछ परेशान थी

“क्या बात है सीमा… क्या संजय ने फिर परेशान करना शुरू कर दिया”

सीमा का जवाब सुनकर तो किशन के होश ही उड़ गये|

“भैया संजय तो अब इस दुनिया में ही नहीं है,”|

“मगर… कब … ये सब कैसे हुआ…“ कांपती हुई आवाज में किशन ने पूछा|

“भैया उसने तो ढ़ाई-तीन महीने पहले जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी”|

“आत्महत्या… ओह नो… मगर यह सब तुम्हे कैसे पता| ”

“स्कूल की मेरी एक सहेली ने बताया था”|

किशन का चेहरा उतर गया वह बोला—सीमा हमारे लिए संजय चाहे जैसा भी रहा हो आज मुझे उसके बारे में जानकर दु:ख हो रहा है… न जाने संजय के माता-पिता के दिल पर क्या गुजरेगी| … चलो जो होना था सो हो गया‚ भूल जाओ सब कुछ… अरे सीमा तुम्हारी वो एक सहेली थी न, जो उस दिन तुम्हारे साथ अस्पताल…”

“हां जी भैया... राधिका” बीच में ही सीमा ने जवाब दिया|

“हां वही … वो कभी मिलें तो उनको याद दिलाना कुछ दिन पहले मैने उनसे कुछ नोटस मांगे थे, उर्दू शायरी के बारे मे|

“जी भैया जरूर बोल दूंगी” बोलकर सीमा चली गई|

शाम के समय बिजली गुल हो जाने के पश्चात् किशन व उसके सभी दोस्त धर्मवीर सोनु नवनीत सुनील और उसका छोटा भाई सागर स्कूल ग्राऊंड़ में पहुच गये| सबके इक्कठे होते ही सुनील ने सबके सामने किशन का मजाक बनाते हुए कहा—“मित्रो क्या आपको पता है हमारे जो भाई साहब कुछ महीने पहले टूटी-फूटी हालत में बिस्तर में पड़ें थे| उनके मन से पिटाई का डर कुछ इस कदर निकल गया है‚ कि उन्होने दोबारा पिटने का बन्दोबस्त कर लिया है| लेकिन एक बात की दाद देनी पड़ेगी… सुना है इस कमीने ने बहाना बड़ा खूबसूरत ढूंंढ़ा है|

“क्या मतलब… यार सुनील सीधे शब्दों मे बताओ बात क्या है| ” नवनाीत ने पूछा|

“मतलब ये है दोस्तांे कि इस महान आत्मा ने एक सुन्दर कन्या को अपने झांसे में ले लिया है,”

नवनीत ने भी सुनील का साथ देते बचपन में शरारतें और जवानी में छेड़छाड़बुढ़ापे में सही रे बांगरू‚ कोइ अच्छा काम भी करना|

“भाई बुढ़ापे तक तो कोइ न कोइ अच्छा काम अनजाने में भी हो जाएगा… वैसे अगर आप चाहो तो एक अच्छा काम अभी कर सकते हो… हमे उसका नाम बताकर” सोनु ने कहा

“नाम तो मैं आपको जरूर बता देता…मगर भाई मेरे सबके सामने मत पूछ, मुझसे नाम उसका,

उसे बदनाम करने की सोची, तो तेरे वाली का नाम ले दूंगा

“बताओ यार… मेरे वाली का ही नाम बताओ… इसको भी तो पता चले मेरी भी गर्लफ्रेंड है,” सोनु ने सागर की ओर इशारा करते हुए कहा|

“यार किशन हम सब तुझे बुद्दु समझते थे मगर यार तुम तो बहुत होशियार निकले… तुमने उस समय में प्यार किया जब तुम्हारे पास बिस्तर में पड़े रहने के अलावा कोइ काम न था” नवनीत ने हंसते हुए कहा

“किशन भाई हमे भी बताओ ये प्यार होता कैसा है| मेरा मतलब किसी को पता कैसे चले प्यार हो गया” धर्मबीर ने बड़े भोलेपन से पूछा|

इससे पहले किशन कुछ बोलता सागर बोल पड़ा “ये कौन सी मुश्किल बात है प्यार की पहचान तो मैं भी बता सकता हूअगर आपके भी दिल में होती है कभी चुभन सी,

तो समझ लेना प्यारे प्यार होने वाला है तुझे भी|

“तू अपनी बकवास बंद कर ओर ध्यान से सुन ले आगे चल कर ये बातें अपने बहुत काम आयेंगी” ड़ांटने के से अंदाज में दीपक बोला

“क्या खाक काम आयेगी अगर हमे अपना भविष्य बनाना है तो हमे मन लगाकर पढ़ाई करनी चाहिए| ये गर्लफ्रेंड वगैरा तो बस टाइम पास के लिए होती है,” सागर ने अपनी उम्र से ज्यादा समझदारी की बात की|

मगर बिजली न होने का फायदा उठाते हुए धर्मबीर ने जवाब दिया “बिजली के बिना कोइ रात में पढ़ाइ कैसे करेगा और वैसे भी Girlfriends are not only for time pass but we can learn so many things from them.”|

“अच्छा यार… बहस बंद करो मैं बताता हू” दोनों को टोकते हुए किशन ने कहा —जब से हुआ मेरा अख्तियार उस दिल की कायनात पर,

तब से मै भी समझता हूँ खुद को “एक छोटा सा राजा”|

“क्या बात है जनाब आप तो शायरी के अलावा बात ही नहीं करते… क्या प्यार से किसी में इस कदर का बदलाव आ सकता है,” नवनीत ने कहा

नवनीत भाई बात दरअसल ये है कि राधिका को शायरी बहुत पंसद है‚ इसलिए मैं कोशिश कर रहा हूँ कि मेरी भाषा शैली ही ऐसी हो जाये, और रही बात बदलाव की तो हां —

“इश्क से जिन्दगी में थोेड़ा बदलाव तो जरूर आता है,कोइ बहुत बोलने वाला है तो वो चुप हो जाता है,

कोइ कम बोलने वाला है वो ज्यादा बातें करता है,

किसी की रंगत खो जाती है तो किसी में निखार आता है|
 
“हाए मेरी जान अब तो तुम बड़ी प्यारी बातें करने लगे हो” किशन के पास बैठते हुए सागर ने कहा|“उनकी अदाओं का हो गया असर मुझपे,

वरना मैं कब करता था इतनी प्यारी बातें|

“देखना कहीं उनकी अदाओं का असर ज्यादा न हो जाए‚ कहीं फिर शिकायत करते फिरो के लोग तुम्हे घूरते हैं,” नवनीत के इतना बोलते ही सब हँस पड़े|

मगर सुनील ने बड़े गंभीर लहजे में कहा “किशन मेरी एक बात हमेशा याद रखना किसी से भी इतना प्यार मत करना कि कभी धोखा मिले ओर बस जिन्दगी से मन भर जाये|

“भाई साहब हमारी छोड़ो… आप कुछ अपनी सुनाओ बहुत गहरी चोट खाये लगते हो… ऐसी क्या बात है उसमे|जो उसके बिना जिन्दगी से मन भर गया” किशन ने सुनील के लहजे को परखते हुए पूछा|

“मत पूछ किशन वो बात है उस सितमगर में के देखना,

एक दिन उसके लिए तलवारें चलेंगी|

“ठीक है भाई वो तो वक्त आने पर सब देखेंगे मगर अभी नवनीत से भी तो पूछो इसकी लव स्टोरी क्या है| ”

“मुझसे क्या पूछोगे यार—

“न अपनी पसन्द है कोइ, न अरमान हैं किसी के,

जो मिलेगी किस्मत से, हम हो जायेंगे उसी के|

मै तो यही प्रार्थन करता हूँ—

भगवान बचाये इन हसीनो की दोस्ती से,

ये दोस्त बनें तो जमाना दुश्मन बन जाये|

और ये बेवफा जो दु:ख दे जाते हंै सो अलग”

नवनीत की इस दलील का जवाब सुनील ने कुछ इस तरह से दिया—

इतनी सादगी, इतनी सुन्दरता और ऐसी अदायें,

के देखकर हमारा दिल तो बस मचल जाता है,

भले ही मोहब्बत में बेवफाइ का दु:ख मिलता हो,

मगर सुकुन ये है, एक अरमान तो निकल जाता है|

मगर यार सुनील ये तो आपको मानना ही पडेगा मोहब्बत मे शुकुन कम और दर्द ज्यादा है|

ये तो अपनी-अपनी किस्मत है, अपनी-अपनी सोच है दोस्त,

कोइ दगा करके भी प्यार पाता है, कोइ प्यार करके भी नहीं|

इधर सुनील का शेर खत्म हुआ और बिजली के आने से सारा मोहल्ला फिर से जगमगा उठा|

“सुनील भाई अब हम बाकी बातों को विराम देते हैं और जाने से पहले किशन भाई के दो-चार तड़कते- भड़कते शेर सुनते हैं,” जल्दी से नवनीत बोल उठा|

“जरूर भाई……दोस्तो जरा गौर फरमाइये” बोलकर किशन शुरू हो गयाकभी–कभी सोचता हूंं अगर उसका भी हुआ हाल वही जो यहां मेरा है,

तो उसका बापू तो अपनी इज्जत के लिए दो बच्चों की जान ले रहा है|

“वाह… वाह… क्या बात है किशन“

“तो फिर एक और सुनो अर्ज किया है—

जब कहा हमने के हम मर जाएंगे आपके बगैर,

जब कहा हमने के हम मर जाएंगे आपके बगैर,

वो बोली जिसे भी मरना हो, बडे शौक से मरे,

मै अपना घर बसाऊं या लोगों की जान बचाऊं|

“हाहाहा हा हा… वाह क्या बात है किशन भाई खुश कर दिया… सुनाते रहो”
 
“जरूर भाई तो फिर लिजिये आपके लिए पेश है,”

मेरे खत का जवाब आया... वाह… वाह…

मेरे खत का जवाब आया... वाह… वाह…

मेरे खत का जवाब आया... अब आगे भी तो बोल यार

उसमे ऐसी-ऐसी गालियां लिखी थी के मैं बता नहीं सकता

हा…हा … खुश कर दिया यार” बोलकर नवनीत खड़ा हो गया|

“बस एक ओर सुन लो यार” किशन ने कहा

“चल अच्छा सुना …”मेरे खत का जवाब आया, उसमे एक भी सैंटेस्ं की स्पैलिंग ठीक नहीं है,

मगर मुझे बहुत खुशी हुइ, चलो कोइ तो है जो मुझसे भी ज्यादा ड़फ्फर है|

“हा…हा … वाह…वाह… क्या बात है,” सब लोग हंसते हुए अपने-अपने घर को चले गये

दूसरे दिन सवा पांच बजे सुबह ही किशन सुनील से मिलने पहुंचा तो सुनील चौंका|

“क्या बात है भाई आज सुबह-सुबह कैसे… | ”

“सुनील भाई एक छोटी सी परेशानी है,”

“परेशानी… कैसी परेशानी…” सुनील अचकचाया

“भाई दरअसल बात ये है कि कुछ दिन से राधिका मुझसे नाराज है और मुझे समझ नहीं आता मैं उसे कैसे मनाऊं | ”

“मगर बात क्या हुई „ सुनील ने गंभीर होकर पूछा

किशन ने उसे सारी बात बता दी| सारा मामला समझने के बाद सुनील ने उसे जो सुझाव दिये वो कुछ इस प्रकार थे— “यार किशन तुझे कितनी बार समझाना पड़ेगा‚ बस ट्रेन और लड़की के पीछे कभी नहीं भागना चाहिए| ये एक जाती है तो दूसरी आ जाती है … वगैरा- वगैरा”

सुनील को बताकर उसे अपनी परेशानी का समाधान तो मिला नहीं मगर रात को स्कूल ग्राऊंड़ में अपना मजाक बनाने के लिए उसने सुनील को एक अच्छा खासा मुद्दा जरूर दे दिया था| किशन को खुद पर बहुत गुस्सा आया… वह बो“अरे ओ मुझे समझाने वाले, कहने वाले मुझको नादान,

सुधर जा, कभी मैं भी खुद को बड़ा सयाना समझता था|

सुनील ने उसकी बात को अनसुना करते हुए… उसे सब कुछ भूल जाने के लिए कहा और साथ ही नसीहत भी दी… राधिका जैसी जिन्दगी में ओर बहुत आयेंगी|“अरे मुझे समझाने वाले, एक बार तू मिल उस कयामत से,

फिर कुछ समझाने लायक तुम रहे, तो मैं जरूर समझूंगा|

किशन ने राधिका की तस्वीर सुनील के हाथ पर रख दी|

सुनील ने राधिका की तस्वीर देखी तो बस देखता ही रह गया|

“सुनील भाई अब क्या बोलते हो…”

“मै क्या बोलूं यार… कुछ समझ नहीं आया ये तुम्हे कैसे…”

“कुछ देर पहले तक जो मुझे बहुत समझा रहा था,

एक झलक क्या देखी, अब कुछ उसे समझ नहीं आता|

“अबे कमीने मेरा मतलब था ये गुलाब परी तेरे चक्कर में कैसे आ गई…| ये मेरी समझ के बाहर है… खैर वो सब छोड़… ये बता परेशानी क्या है| ”

“क्या भाई कुछ ही देर पहले तो बताया था… ं”|

“ओहो बस इतनी सी बात है … यार सिम्पल है तुम उसे समझाओ आज नहीं तो कल… घरवालों को तो सब बताना ही था” |

“किशन ने सहमत होते हुए गंभीर अंदाज में गर्दन हिलाई और वहां से चला गया|

एक शाम सागर को साथ लेकर किशन जवाहरलाल नेहरू पार्क में राधिका का इन्तजार करने लगा| वह जानता था राधिका मौलवी साहब के पास से उर्दू सीखने के लिए इसी पार्क में से गुजरती है|
 
कुछ देर बाद राधिका आई|

उसे देखते ही किशन का चेहरा खिल उठा मगर अचानक ही जब उसने प्रदीप को राधिका के साथ देखा तो वह परेशान हो गया|

वह इस गहरी सोच में डूबने वाला ही था, कि आखिर प्रदीप राधिका से क्या बात कर रहा है एक बार फिर उसके चेहरे पर खुशी झलकने लगी… जब उसने प्रदीप को वापस जाते देखा|

अब राधिका उनकी तरफ आ रही थी| किशन तेज कदमों के साथ राधिका की तरफ बढ़ गया| मगर राधिका नजरे झुकाये हुए, उससे कोइ बात किए बिना ही आगे निकल गईशरारत भी करतें हैं वो, तो बड़ी नजाकत से करतें हैं,गौर से देखोे, झुकाकर नजरें भी वो इधर ही देखते हैं|

राधिका मुस्कुराई मगर किशन को घूरते हुए उसने अपना रास्ता बदल लिया|

किशन ने फिर उसेे छेड़ते हुए कहा“क्या नजाकत है यारो, आज वो दूर-दूर से जा रहे है,

न जाने कैसी खता हुई, आज वो घूर-घूर के जा रहे है|

“क्या बात है भाई आप तो बोल रहे थे, कि ये मेरी होने वाली भाभी है, मगर ये तो आपकी बात ही नहीं सुनती और आंखांे से भी जहर उगल रही है,” सागर ने कहा

“ऐसी बात नहीं है छोटे… शायद आज इनका मूढ़ कुछ ठीक नहीं है वरना “दोनोंं जहांं की मिठाइयों से ज्यादा मिठी होती है इनकी हर एक बात”|

“मगर मैं कैसे मान लूं भाई … क्या पता आप झूठ बोल रहे हों | मेरे सामने तो ये आपकी किसी भी बात पर ध्यान नहीं दे रही”|

“छोटे तू नहीं समझेगा… ये मेरी हर बात बड़े ध्यान से सुन रही है यकीन नहीं है तो ये देख… इतना बोलकर किशन बोला अरे सुनती हो|

“सेट अप… बंद करो अपनी ये बकवास”|

“देखा मैने क्या कहा था न… ये सब सुन रही है|

“सही कहा था भाई„ सागर ने कहा और वह झूलों के पास जाकर खेलने लगा|

उसके जाते ही राधिका किशन की खबर लेने लगी “आप क्या बकवास कर रहे थे सागर के सामने”|

“अरे यार क्यों भड़कती हो इसमे कौन सी आफत आ गई… सागर तो अभी बच्चा है|

“बच्चा है इसीलिए बोल रही हंू , अगर नासमझी में उसने किसी को बता दिया, तो आफत भी आ जाएगी”|

“कोइ आफत नहीं आयेगी यार वैसे भी आज नहीं तो कल अपना प्यार जगजाहिर तो होगा ही और सागर इतना भी बच्चा नहीं है, जो काम मैं 18 साल की उम्र तक नहीं कर पाया था वो उसने 12 साल की उम्र में कर लिया है|

“क…क… क्या काम कर लिया है उसने 12 साल की उम्र मे” राधिका ने हैरानी से पूछा|

”लड़की पटाने का”

“क्या बात करते हो, क्या सागर की भी कोइ गर्लफ्रेंड है,”

“हाँ,”

“कौन है वो लड़की”

“उसके साथ ही पढ़ती है,”

“हे भगवान, ये आजकल के लड़के भी कितने तेज हो गये हैं,”

“आखिर भाई किसका है,” किशन ने मुस्कुराते हुए कहा

“आ हा हा… रहने दो तुम मत बोलो, तुम तो एकदम लल्लु हो, फिर थोड़ा रूककर वह बोली जब आप सब जानते हैं तो उसे समझाते क्यों नहीं “जिसने 12 साल की उम्र में गर्लफ्रेंड बना ली, वो जवानी आने तक तो बहुत बिगड़ जाएगा”|

“अरे नहीं बिगड़ेगा यार बल्कि सुधर जायेगा बचपन में मैं भी तो ऐसा ही था”|

“मगर आपने तो कहा था मुझसे पहले आपकी जिन्दगी में कोइ नहीं थी”

“सच ही कहा था मगर मैने ये तो नहीं कहा था के मैने कोशिश भी नहीं की थी”

“कोइ ज्यादा ही पसंद आ गई थी क्या” राधिका ने नजाकत से पूछा

“आई तो थी यार मगर मानी नहीं… थोड़ा रूककर वह बोला… तब इतनी समझ ही कहां थी”

“खैर अब तो आपको बहुत समझ आ गई है मगर ये नासमझी वाली बात कब की है,” |

“तब मेरी उम्र 6 साल थी| मैने पहली कक्षा में दाखिला लिया था| उसका नाम रितू था| वह हमारी कक्षा की सबसे होशियार लड़की थी इसलिए वह मुझे अच्छी लगने लगी|
 
राधिका ने खुद की तरफ इशारा करते हुए कहा “वैसे एक खूबी तो है आपमे… आपको बचपन से ही होशियार लोग पसंद है, खैर छोड़ो फिर क्या हुआ| … उसने आपसे दोस्ती की या नहीं”

“मैने शुरू मे ही बताया था वो एक होशियार लड़की थी, तो भला मुझसे दोस्ती क्यों करने लगी”

“अच्छा जी … तो उस होशियार लड़की का जवाब नहीं था”

“अजी नहीं … वो तो मैं ही उसे बोलने की हिम्मत नहीं कर पाया था, इसलिए मैने अपने एक दोस्त की मदद से एक खत में अपने मन की बात लिखकर रितू को बताये बिना ही वह खत उसके बैग में रख दिया|

“ओके… तो फिर क्या जवाब आया आप“यूं मेरे खत का जवाब आया,

पिस्तौल लेके उसका बाप आया|

“क्या सच मैं ऐसा हुआ था” राधिका ने हँसकर पूछा|

“हाँ यार… उसके पापा को देखकर मैं सोचने लगा

बहुत छुपाना चाहा था, मगर न जाने कैसे सबको पता चल गया,

याइला कहीं ऐसा तो नहीं, मेरा खत उसके बाप के हाथ लग गया|

“फिर क्या हुआ| ”

“होना क्या था उसका बाप फौजी था, और देखने में भी भयंकर था|

मेरी क्लास में आकर उसने रितू से पूछा “कौन है वो किशन| ”

रितू ने मेरी ओर इशारा कर दिया तो उसके पापा बोले “ओए कुत्ते इधर आ”

अभी तक मैं पूरी बात समझ नहीं पाया था इसलिए मैने उसका जवाब कुछ इस तरह दिया अंकल जी -

बुरा न मानता, आप मुझे बुलाते कुत्ता, थोड़ा प्यार से मगर,बल्कि हिलाता हुआ आता ये जबरू, इसको पूछ होती अगर|

“फिर क्या हुआ| ”

“होना क्या था एक बार तो उसके पापा हँस पड़े मगर फिर पता नहीं क्या हुआ, उन्होने मुझे जोर से झकझौर कर कहा “आज के बाद तूने रितू को परेशान किया तो मैं तुझे जान से मार दूंगा… चल अब सबके सामने रितू के पांव पकड़कर उससे माफी मांग”|

“फिर… ” राधिका ने बड़ी दिलचस्पी दिखाते हुए पूछा

“मै क्या कर सकता था| … मैं रोने लगा और रितू के पाव पकड़कर उससे माफी माग ली|

उसके पापा जाने लगे तब मैं बोलाअरे जालिम अंकल, बस मेरी इतनी ही इज्जत रख लेते,

आप मुझे कुत्ता समझते, मगर मेरा नाम तो शेरू रख लेते|

राधिका ठहाका लगाकर हँसते हुए बोली अच्छा जी तो आपको रितू के पापा ने सुधारा|

“अरे नहीं, भला कुत्ते की दुम… इतना बोलकर वह चुप हो गया| फिर बोला मैं सुधरा नहीं बल्कि मैने रितू से सबके सामने मेरी बेइज्ज्ती करने का ऐसा बदला लिया कि उसने कुछ ही दिनो में वह स्कूल छोड़ दिया”|

“वो कैसे| ”

“वो ऐसे कि उस दिन के बाद मैं हर रोज उसका लंच खा जाता था”|

“तुम उसका लंच खा जाते थे… तो उसने तुम्हारी शिकायत क्यों नहीं की| ”

“शिकायत … हाहा … अजी उसे कभी पता ही नहीं चल पाया… उसका लंच कौन खाता है,”

“क्या…| मगर उसने ये जानने की कोशिश क्यों नहीं की| ”

“उसने तो बहुत कोशिश की थी बल्कि कुछ दिन तो वह पानी पीने तक के लिए भी क्लाश रूम से बाहर नहीं जाती थी”|

”मगर जब वह कभी बाहर ही नहीं जाती थी, तब तुम उसका खाना कैसे खाते थे| ”

“वो ऐसे… मैं सुबह घर से कुछ भी खाकर नहीं जाता था| जब सब बच्चे सुबह प्रार्थन मैदान में होते थे तभी मैं उसका खाना खा जाता था और जिस दिन वह लंच लेकर नहीं आती थी तब मैं उसकी कॉपी में से किए हुए होमवर्क के पेज फाड़ दिया करता था| जिससे कइ बार उसकी पिटाइ भी हुई| बस कुछ ही दिन में तंग आकर उसने वह स्कूल छोड़ दिया”|

“इसका मतलब तुम बचपन से ही झुठे और फरेबी थे”|

“मोहब्बत और जंग में सब जायज है मैड़म और फिर इसमे फरेब की क्या बात है उसने मेरी पिटाई करवाई थी, मैने उसकी करवा दी “हिसाब बराबर”

“अच्छा… तो रितू से हिसाब बराबर होने के बाद कोइ आपकी गर्लफ्रैंड़ बनी या नहीं”|

“जी उसके बाद एक लड़की मेरी जिन्दगी में आई, जिससे मैने दोस्ती करनी चाही थी”|

“वो कौन थी| ”

“उसका नाम सुलेखा था| वह बहुत सुन्दर थी| तब उसकी उम्र 9-10 साल होगी…

“वो सब छोड़ो मुद्दे की बात बताओ तुमने उसको कैसे प्रपोज किया, ओर उसका जवाब क्या रहा” बीच में टोकते हुए राधिका ने कहा|

“ये भी मुद्दे की ही बात थी| मैं आपको समझाना चाहता था कि वह शारीरिक और मानसिक दोनों ही तौर पर मुझसे ज्यादा परिपक्व थी|
 
“प्रपोज… हम्म्म्म्म्म इस बार मैने सोच लिया था कि मैं खत नहीं लिखूगां| क्योंकि मेरे एक दोस्त ने बताया था खत तो एक सालिड़ सबूत होता है, जिसके आधार पर पुलिस केस भी हो सकता है| इसलिए मैने सोचा इस बार मैं बोलकर ही इजहार करूंगा|

एक दिन मैं स्कूल से छुट्टी के बाद उसके साथ-साथ चल रहा था| अचानक सुलेखां ने मुझे बताया कि मेरी कमीज सुलग रही है,” |

“मेरी कमीज सच में सुलग रही थी| मैने आग बुझाकर सुलेखा को धन्यवाद कहा मगर मैं काफी नर्वस हो गया था इसलिए और कुछ न बोल पाया|

“फिर…”

कुछ दूर तक हम साथ-साथ चलते रहे| फिर सुलेखा मुझसे बोली “आप कैसे हो आपकी कमीज में आग लगी थी, और आपको बिल्कुल भी पता नहीं चला”|

“सुलेखा जी असल में बात ये है कि मुझे भी सीने के पास थोड़ी जलन तो महसूस हुई थी| मगर मैने सोचा किसी हसीन को देखकर दिल के किसी कोने में पड़ा जवानी का कोइ शोला भड़क उठा होगा… उसी वजह से मुझे जलन हो रही होगी”

मेरी बात सुनकर वह मुस्कुरा दी| उसकी मुस्कान ने मेरा हौंसला बढ़ा दिया और मैं बाते करते-करते उसके घर तक उसके साथ चला गया| लेकिन उसने जो किया उससे मैं बहुत देर तक डरा-डरा घुमता रहा उसके घर में|

“क्यों ऐसा क्या किया उसने ” राधिका ने आश्चर्य से पूछा

जब मैं उसके घर गया| उसके घर पर कोइ नहीं था| उसने मुझे अपने कमरे में बुलाया| मैं बहुत खुश हुआ ओर अन्दर चला गया| सुलेखा बोली आप बैठो मैं आपके लिए चाय बनाकर लाती हूँ| मगर उस कमीनी ने कमरे से बाहर निकलते ही दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और मुझसे बोली, वह अपने पापा को बुलाने जा रही है|

“फिर तो आपकी खूब पिटाई हुई होगी” राधिका चेहरे पर शरारती हंसी लिए बोली

“मै शक्ल से इतना बेवकूफ लगता हूँ क्या … सुलेखा के जाने के बाद उसका छोटा भाई आया तो मैंने उसे बताया… यार सुलेखा ने मजाक में मुझे अन्दर बंद कर दिया है|

मेरी बात पर भरोसा करके उसने दरवाजा खोल दिया| फिर कुछ दिन मैं स्कूल ही नहीं गया|

“उसके बाद मैने कभी किसी को प्रपोज नहीं किया… आपको छोड़कर”

“फिर आपने मुझे ही प्रपोज क्यों किया”|

“Very Simple आप मुझे अच्छे लगे”

“किशन जी आपसे एक बात पूछूं|

“हां… हां … पूछो क्या पूछना है|

आपको मुझमे क्या अच्छा लगा|

“सच कहूं तो मैं किसी की खूबसूरती को कभी अहमियत नहीं देता मगर न जाने क्यों आप मुझे पहली नजर में ही पसंद आ गये थे|

“आप खूबसूरती को अहमियत क्यों नहीं देते” राधिका ने हैरत से पूछा

“राधिका जी इस दुनिया में तो एक से बढ़कर एक खूबसूरत लड़की है लेकिन मैं यअगर वफा नहीं है तो फिर खूबसूरती जहर के अलावा कुछ भी नहीं |

“फिर भी आपको मुझमे ऐसी क्या बात दिखी जो आप मुझे पसंद करने लगे”

“आपकी हाजिर जवाबी और आपकी ये भूरी-भूरी आँखें ”

“क्या मतलब”

“मतलब अजब सी हैं आपकी सारी बातें

और गजब की हैं आपकी भूरी आँखें |

राधिका नजरें झुकाकर खामोश बैठ गई जैसे वह ख्यालों में कहीं खो गई हो…

“निची निगाहें, प्यारी आवाज और चेहरे पर सादगी भी है,

कैसे यकीन दिलाऊ, मेरी कातिल देखने में भोली सी है|

यार आप भी कमाल करते हो जब भी मैं प्यार मोहब्बत की बातें करना चाहता हूँ आप नजरें झुकाकर बैठ जाते हो… क्या बात है अब किस उलझन में पड़ गये|“आप हमारी ऊल्झन की न सोचें,

कहीं ऊल्झने आपकी न बढ़ जायें|

अगर ये बात है तो आप भी हमारी ऊल्झन की न सोचो, हमने भी अच्छे-अच्छो को ऊल्झाया हैं|

“अच्छा जी ये बात है तो…लो नजर आपसे मिला लेते हैं,

देखें आप हमे उल्झाते कैसे है|

दोनों आँखों में आँखें ड़ालकर जैसे इस दुनिया को भूल ही गये थे|
 
एकाएक आवाज आई “लगे रहो इंड़िया… लगे रहो…” ये सागर के शब्द थे|

“हाँ छ…छ…छोटे… बोल क्या बात है,” किशन हड़बड़ा गया|

“बात क्या है… कब से चिल्ला रहा था मगर आपको कुछ सुने तब तो… मैं एक झूले पर इससे ज्यादा देर तक नहीं खेल सकता| अब आपको रूकना है तो रूको मगर मैं घर जा रहा हूँ|

किशन ने उसे आइसक्रीम के लिए पैसे दे दिये और सागर चला गया|

सागर के जाने के बाद किशन व राधिका फिर से अपनी बातों में मशगुल हो गये|

“किशन जी एक बात पूछूं आपसे”

“पूछो…”

“आप किस तरह की लाईफ पसंद है,”

“लाईफ… मैं इस तरह से नहीं जीना चाहूंगा के अपने आस-पड़ोस और रिस्तेदारों के सिवा किसी को पता भी न चले कब दुनिया में आये और कब चला गये| मैं अपनी मातॄभूमि की ऐसी सेवा करना चाहता हूं कि लोग मुझे भी भारतीय आन्दोलनकारियों की तरह याद रखें और मॄत्यु के बाद भी मै उनकी बातों व यादों में जिन्दा रहूं| यदि मै अपने देश के लिये कुछ ऐसा कर सका तो मै अपना जीवन सफल समझूँगा|

“ओहो … तब तो आपको लेखक बनने की बजाये फौज मे भर्ती होना पडेगा”

“राधिका जी मेरे लिएअपने आप को सुधार लेना ही संसार की सबसे बड़ी सेवा ह परन्तु ऐसा हरगिज नही है कि अपनी मातॄभूमि की सेवा करने के लिये फौज का जवान होना जरूरी है नि:सदेंह फौज के जवान देश की रक्षा करते हुए मातॄभूमि की उत्तम सेवा करते हैं लेकिन यह एकमात्र रास्ता नही हैं उदाहरण के लिये बाबा रामदेव जी को लिजिये, वे फौज के जवान नही हैं लेकिन आज के हालातों को देखते हुए बाबा रामदेव जी अपनी मातॄभूमि की अति उत्तम सेवा कर रहे हैं| हमारे समाज में आज भी बहुत सी कमियां है जिनमे सुधार करके या करने का प्रयास करके भी हम अपने देश के विकास मे मदद कर सकते है|”

“किशन जी मै आपकी बात से सहमत हूं परन्तु हर कोइ इस बात से सहमत नहीं है और शायद इसीलिए कुछ लोग उनकी आलोचना भी कर रहे हैं”

“राधिका जी मै जानता हूं कुछ लोग बाबा जी की आलोचना कर रहे हैं मगर मै उन लोगों से सहमत नहीं हूं जो यह कहते है कि बाबा रामदेव जी को सिर्फ योग सिखाना चाहिये और जिसका जो काम है वह उसको करने दें और बाबा रामदेव जी के कुछ आलोचकों के शब्दों में साफ तौर पर गुन्डागर्दी झलक रही है मैं उन लोगों से पुछना चाहता हूं काले धन का मामला पिछले कइ वर्षों से उठ रहा है जिन लोगों का इस काले धन को वापिस लाने का काम था उनको अब तक किसने रोक रखा था या जो लोग यह कहते हैं कि बाबा रामदेव जी को सिर्फ योग सिखाना चाहिये वह यह बतायें कि यदि देश मे कोइ विप्पति आयेगी या देश के हालात बिगडेंगें तो क्या उसका प्रभाव बाबा रामदेव पर नही पडेगा और यदि देश के अच्छे तथा बुरे का प्रभाव उन पर पडता है तो देश के अच्छे या बुरे हालातों पर विचार करने का और यदि उनके पास इसके बारे मे कोइ उचित उपाय है तो वह देश के समक्ष रखने का उनको पूरा अधिकार है, न सिर्फ बाबा रामदेव बल्कि इस देश के हर नागरिक को यह अधिकार है क्योंकि स्वदेशप्रेम, स्वधर्मभक्ति और स्वावलंबन आदि ऐसे गुण हैं जो प्रत्येक मनुष्य में होने चाहिए|”

“किशन जी मै आपकी बात से फिर सहमत हूं मगर यह सवाल भी तो उठ रहे है कि बाबा रामदेव जी भी राजनिति मे आना चाहतें हैं”

“अरे तो इसमे गलत क्या है| क्या संविधान में कहीं ऐसा लिखा है कि देश का भला चाहने वाला कोइ योगी या महात्मा देश की बागढ़ोर संभालने के लिये राजनिति मे नहीं आ सकता| यह तो और भी अच्छा है कि बाबा रामदेव जैसे देशभक्त मेरे देश का नेतॄत्व करें| राधिका जी मै तो उनके इस निर्णय का भी सर्मथन करता हूं और अपनी शुभकामनाएं देता हूं|”

“परन्तु उनके बारे मे भी तो कुछ गैर कानुनी बातें सामने आ रही हैं जैसे की उनकी पंतजलि योगपीठ की जमीन व टैक्स चोरी के बारे मे भी तो सवाल उठ रहे हैं|”

“राधिका जी गुणों व अवगुणों के समावेश से ही इन्सान बनता है| इन्सान जीवन में बहुत सी गलतियां करता है, मगर कुछ लोग कोइ ऐसा नेक काम कर जाते हैं कि वे मरने के बाद भी लोगों की बातों में, उनकी यादों में जिन्दा रहते हैं| यदि बाबा रामदेव पर लगाये गये आरोप सत्य हैं और यदि वे यह साबित हो जाने पर भी उन मामलों में कानुनी कमियों मे सुधार नहीं करेंगें तब उन मामलों में मै उनका विरोध भी करूगा लेकिन इसका मतलब ये कतई नही है कि मै उनके “भ्रष्टाचार मिटाओ सत्याग्रह” का समर्थन नहीं करूगा| मै स्वामी रामदेव जी के “भ्रष्टाचार मिटाओ सत्याग्रह” का समर्थक था, हूं और रहूंगा क्योंकि इस सत्याग्रह मे उनकी हर मांग राष्ट्र हित में है| जब 5अप्रैल2011 सें माननीय श्री अन्ना हज़ारे ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष करते हुए “जन लोकपाल विधेयक” पारित कराने के लिये उन्होने आमरण अनशन आरम्भ किया था तब उनके समर्थन मे मैने भी जन्तर-मन्तर से इण्डिया गेट तक हाथ में मोमबत्ती लेकर प्रदर्शन किया था| कुल मिलाकर मै यह कहना चाहता हूं कि मै आंखें बंद करके बाबा रामदेव जी का समर्थन नहीं कर रहा हूं बल्कि मै उनका समर्थन इसलिये कर रहा हूं क्योंकि उनकी हर मांग राष्ट्र हित में है और मै देश हित वाले सभी मुद्दों का समर्थन करूगा|

“मगर सुनने मे तो यह भी आ रहा है कि इस आंदोलन के पीछे आर. एस. एस., बीजेपी व सांप्रदायिक ताकतें हैं| ”

“अगर यह मान भी लिया जाए कि अन्ना और बाबा को संघ का समर्थन हासिल है तो उससे क्या आदोलन का उद्देश्य कमजोर हो जाता है| क्या जिन सवालों को लेकर अन्ना हजारे या बाबा रामदेव आदोलन कर रहे हैं, वे बेमानी हो जाते हैं| क्या आज हमारे देश में भ्रष्टाचार और काला धन राष्ट्रीय मुद्दा नहीं है| क्या देश और जनता से जुड़े इन मुद्दों को राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देने का हक नहीं है| राधिका जी भ्रष्टाचार और काला धन पूरे देश की समस्या है और आंदोलन के पीछे चाहे जिसका भी हाथ हो मगर ये मुद्दे हैं तो विशुद्ध और गंभीर| जिनके लिए कड़े कानून बनाने ही होंगे| साथ ही काले धन को देश में वापस लाने के लिए भी ठोस रणनीति अपनाने की भी सख्त जरूरत है| राधिका जी कुव्यवस्था के विरूध इस लड़ाइ में हम सभी को लड़ना चाहिए या लडने वालों का समर्थन करके उनका हाथ मजबूत करें| भ्रष्टाचार से सभी परेशान हैं इसलिये हर धर्म और मजहब के लोग इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं लेकिन सरकार काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने के बारे में अध्यादेश जारी करने की बजाए लोगों को गुमराह करने के लिये इधर-उधर की बातें कर रही है| इससे तो यही समझ आता है कि सरकार न तो लोकपाल का गठन करना चाहती है और न ही विदेशों में जमा कालाधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करना चाहती है| शायद इसके पीछे कारण यह है कि कालाधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने से सरकार के मंत्रियों और उसके सहयोगी दलों के कइ नेता बेनकाब हो जाएंगे| राधिका जी काले धन के खिलाफ कार्रवाइ मे देरी देश के लिये नुक्सानदायक है क्योंकि इस दौरान भ्रष्ट लोगों को अपने अवैध धन को मुखौटा कंपनियों में लगाने का मौका मिल जाएगा और इस बात से भी इन्कार नही किया जा सकता कि सरकार के कुछ लोग झूठे, धोखेबाज और षड़यंत्रकारी हैं| लोगों पर आधी रात में लाठियां और आंसू गैस के गोले चलाए गए लेकिन सरकार के कुछ अधिकारी उस कार्यवाई को जायज बता रहे हैं जबकि उसे षड़यंत्र के अलावा कोइ नाम नही दिया जा सकता| अहिंसा के साथ किसी भी परेशानी के लिये प्रर्दशन करने वाले लोगों पर जिसमे निर्दोष बच्चें और महिलाएं शामिल हों, इस तरह की कार्यवाइ को जो लोग जायज बता रहे हैं वे लोकतंत्र का अपमान कर रहे हैं| ऐसे कृत्य को किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता है|

“किशन जी अगर एक मिनट के लिये कार्यवाई के सही या गलत के मुद्दे को भुला दिया जाये तो आप पायेंगे कि औरतों और बच्चों को मिले कष्ट के लिये कुछ हद तक उनके माता-पिता की मुर्खता जिम्मेदार है…”

“मूर्खता… कैसी मूर्खता| ” राधिका की बात बीच मे ही काटते हुए किशन ने पूछा|

“किशन जी बच्चों को इस आंदोलन मे लाने की क्या जरूरत थी| ”

“राधिका जी बहुत जरूरत थी और जिसे आप मूर्खता कह रही है वह भविष्य की तैयारी है| यह इसलिए जरूरी है ताकि नई पीढ़ी बचपन से ही अपने अधिकारों के बारे में और गलत व्यवस्था ठीक करने का तरीका जाने| उनमें भ्रष्ट व्यवस्था से संघर्ष करने का जज्बा पैदा हो और बचपन से ही उनमें गलत चीजों को मिटाने और अच्छे संस्कार अपनाने की भावना जन्म ले|”

“मैने तो इस नजरिये से सोचा ही नही था, चलो आपकी ये बात तो मै मान लेती हूं मगर एक बात तो आपको मेरी माननी ही पड़ेगी कि हमारे देश के तत्काल सिस्टम को देखते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लडाई को कामयाबी आसानी से नहीं मिलेगी|”
 
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