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Guest
“अजी क्या बताऊं…
अजब सी हालत हो जाती है उनके सामने आते ही,
बहुत कुछ कहना चाहता हूँ मगर कहता कुछ नहीं|
“वैसे तो आप बहुत बोलते हो फिर एक लड़की के सामने क्यो नहीं बोल पाते”
“राधिका जी ऐसी बात नहीं है कि मैं उनके सामने कुछ नहीं बोल पाता… जिस दिन मैं उनकी आँखों में इकरार की झलक देख लूंगा‚ उस मैं सारी दुनिया के सामने इजहार कर दूंगा|
ओहो… तो आप नजरों की बातें भी समझते है|
“जी हां बिल्कुल…किसी की झलक को तरसते हैं, तो किसी का दिखना कहर होता है,
हर नजर की बात अलग होती है, अलग हर नजर का असर होता है|
“कभी-कभी आप बहुत अच्छी बातें करते हैं अगर आप जैसा कोइ खिलौना होता हो तो मुझे बताना मुझे अपने घर के लिए चाहिए” राधिका ने हंसते हुए कहा|
“राधिका जी … आप मुझे ही ले जाइये न…
कोइ हँसकर देखे तो खुशी से लुट जाता हू ये आदत मेरी है,
एक प्यार भरी नजर और दो मीठे बोल बस ये कीमत मेरी है|
राधिका शरमाकर नजरें झुकाकर बैठ गई|
ओर किशन उसकी तारिफ करता रहा—
एक तो तुम्हारी, स्माईल प्यारी,
उस पर ये आखें, हाये कजरारी|
अब दूर न जा,
दिल में समा जा,
बन जाओ राधा,
मै गिरिवरधारी,
एक तो तुम्हारी, स्माइल प्यारी,
उस पर ये आखें, हाये कजरारी|
जानेमन ए जाने जां,
कहूं क्या तेरे बिना,
जीना तो है जीना,
मरना भी भारी,
एक तो तुम्हारी, स्माइल प्यारी,
उस पर ये आखें, हाये कजरारी,
हाये दो धारी …|
“तो जनाब उनकी खूबसूरती से घायल हो गए… खैर अब हो भी क्या सकता है| आपको पहले ही अपने मन को काबू में रखना चाहिये था या फिर उसे मन की गहराई में उतरने ही न देते|
“राधिका जी बोलना तो आसान है, जरा सोचिये—
“भला क्या कहें उनको, जिनके बिना जी भी न सकें,
कैसे रोकें उस कातिल को, जो जान से भी प्यारा लगे|
“किशन जी प्लीज बताओ न वो कौन है,”
किशन ने सोचा तो था कि वह पूरी तरह से स्वस्थ हो जाने के पश्चात् इजहार करेगा मगर अब ज्यादा देर करना भी उसने उचित न समझा…
“दिल है मेरा मगर इसमे अरमान हैं तेरे,
आप ही कातिल, आप ही भगवान हो मेरे|
ये शब्द सुनकर तो मानो राधिका की खुशी का कोइ ठिकाना न रहा| वह मुस्कुराते हुए उठकर बाहर जाने लगी| किशन ने उसे पकड़ने की कोशिश की मगर जब उसे बिस्तर से उठने में तकलीफ हुई तो वह वापस लेट गया| राधिका उसे अंगूठा दिखाकर बाहर चली गई|
इस दौरान राधिका की कुछ पासपोर्ट साइज तस्वीरें नीचे गिर गई‚ जो किसी फार्म पर चिपकाने के लिए वह अपने साथ लाई थी|
तस्वीरें उठाने के लिये किशन को थोड़ा दर्द सहना पड़ा| उसने एक तस्वीर अपने तकिये के नीचे रख ली और बाकी तस्वीरें तकिये के पास रख दी|
राधिका आई ओर दरवाजे के पास से ही धीरे से बोली—“अच्छा तो हम चलते हैं…”
“अजी फिर कब मिलेंगें…” उसे अन्दर आने का इशारा करते हुए किशन ने कहा|
अजब सी हालत हो जाती है उनके सामने आते ही,
बहुत कुछ कहना चाहता हूँ मगर कहता कुछ नहीं|
“वैसे तो आप बहुत बोलते हो फिर एक लड़की के सामने क्यो नहीं बोल पाते”
“राधिका जी ऐसी बात नहीं है कि मैं उनके सामने कुछ नहीं बोल पाता… जिस दिन मैं उनकी आँखों में इकरार की झलक देख लूंगा‚ उस मैं सारी दुनिया के सामने इजहार कर दूंगा|
ओहो… तो आप नजरों की बातें भी समझते है|
“जी हां बिल्कुल…किसी की झलक को तरसते हैं, तो किसी का दिखना कहर होता है,
हर नजर की बात अलग होती है, अलग हर नजर का असर होता है|
“कभी-कभी आप बहुत अच्छी बातें करते हैं अगर आप जैसा कोइ खिलौना होता हो तो मुझे बताना मुझे अपने घर के लिए चाहिए” राधिका ने हंसते हुए कहा|
“राधिका जी … आप मुझे ही ले जाइये न…
कोइ हँसकर देखे तो खुशी से लुट जाता हू ये आदत मेरी है,
एक प्यार भरी नजर और दो मीठे बोल बस ये कीमत मेरी है|
राधिका शरमाकर नजरें झुकाकर बैठ गई|
ओर किशन उसकी तारिफ करता रहा—
एक तो तुम्हारी, स्माईल प्यारी,
उस पर ये आखें, हाये कजरारी|
अब दूर न जा,
दिल में समा जा,
बन जाओ राधा,
मै गिरिवरधारी,
एक तो तुम्हारी, स्माइल प्यारी,
उस पर ये आखें, हाये कजरारी|
जानेमन ए जाने जां,
कहूं क्या तेरे बिना,
जीना तो है जीना,
मरना भी भारी,
एक तो तुम्हारी, स्माइल प्यारी,
उस पर ये आखें, हाये कजरारी,
हाये दो धारी …|
“तो जनाब उनकी खूबसूरती से घायल हो गए… खैर अब हो भी क्या सकता है| आपको पहले ही अपने मन को काबू में रखना चाहिये था या फिर उसे मन की गहराई में उतरने ही न देते|
“राधिका जी बोलना तो आसान है, जरा सोचिये—
“भला क्या कहें उनको, जिनके बिना जी भी न सकें,
कैसे रोकें उस कातिल को, जो जान से भी प्यारा लगे|
“किशन जी प्लीज बताओ न वो कौन है,”
किशन ने सोचा तो था कि वह पूरी तरह से स्वस्थ हो जाने के पश्चात् इजहार करेगा मगर अब ज्यादा देर करना भी उसने उचित न समझा…
“दिल है मेरा मगर इसमे अरमान हैं तेरे,
आप ही कातिल, आप ही भगवान हो मेरे|
ये शब्द सुनकर तो मानो राधिका की खुशी का कोइ ठिकाना न रहा| वह मुस्कुराते हुए उठकर बाहर जाने लगी| किशन ने उसे पकड़ने की कोशिश की मगर जब उसे बिस्तर से उठने में तकलीफ हुई तो वह वापस लेट गया| राधिका उसे अंगूठा दिखाकर बाहर चली गई|
इस दौरान राधिका की कुछ पासपोर्ट साइज तस्वीरें नीचे गिर गई‚ जो किसी फार्म पर चिपकाने के लिए वह अपने साथ लाई थी|
तस्वीरें उठाने के लिये किशन को थोड़ा दर्द सहना पड़ा| उसने एक तस्वीर अपने तकिये के नीचे रख ली और बाकी तस्वीरें तकिये के पास रख दी|
राधिका आई ओर दरवाजे के पास से ही धीरे से बोली—“अच्छा तो हम चलते हैं…”
“अजी फिर कब मिलेंगें…” उसे अन्दर आने का इशारा करते हुए किशन ने कहा|