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रोहन के आस्ट्रेलिया जाने के पश्चात् निर्मला देवी को लगा था कि अब उसके दु:ख भरे दिन कट गए हैं मगर आज उसकी जवान बेटी को उससे छीन लिया गया था| वह उसके पति की आखिरी निशानी थी| उसके हृदय में शूल सा उठ रहा था| उसे किसी तरह धैर्य नहीं होता| उस घोर आत्मवेदना की दशा में रह रहकर निर्मला देवी को सीमा की यादे सताने लगी|
सीमा ने बडी आकर्षक रूप पाया था| बेहद खूबसूरत थी|पूर्ण चन्द्रर्मा के आकार का खूबसूरत चेहरा| खिला रूप-गोरा खिलता तरूणई युक्त शरीर| रक्तिम होंठ जब मुस्कुराते तो उसके दोनों भरे गालों में नन्हे-नन्हे गड़ड़े पड़ जाते| उसके सौंदर्य में एक आश्चर्यजनक बात थी| उसका स्वभाव सीधा व व्यवहार शिष्ट था| उसे प्यार करना मुश्किल था, वह तो पूजने के योग्य थी| उसके चेहरे पर हमेशा एक बडी लुभावनी आत्मिकता की दीप्ति रहती थी| उसकी आंखे जिनमें लाज, गंभीरता और पवित्रता झलकती थी| उसकी एक-एक चितवन, एक-एक क्रिया एक-एक बात उसके हृदय की पवित्रता और सच्चाई का असर दिल पर पैदा करती थी|
निर्मला देवी दिन भर मातम मनाती रही उसे कोइ अपना मददगार दिखाई न दिया| कहीं आशा की झलक न थी| अगर भगवान की निश्चित की हुइ मॄत्यु ने सीमा को उससे छीना होता तो शायद वह सब्र कर लेती मगर सीमा की भयानक मौत के बारे में सोचकर वह रोती रही तड़पती रही| पड़ोस की नर्म दिल स्त्रिया आकर उसकी बेबसी पर दो बूद आंसू गिराकर चली जाती|
निर्मला देवी इतनी विवल थी कि दिन में कइ बार मूर्छित भी हुई| न घर से निकली, न चुल्हा जलाया, न हाथ मुंह धोया| पड़ोस की स्त्रियां उसे बार-बार आकर कहती ‘बहन, उठो, मुंह हाथ धोओ, कुछ खाओ पियो| कब तक इस तरह पडी रहोगी मगर निर्मला देवी के कंठ में आंसुओं का ऐसा वेग उठता कि उसे रोकने में सारी देह कांप उठती| उसे अपना जीवन मरूस्थल सा लगने लगा|
सूरज के ढ़लने के साथ साथ निर्मला देवी के जीवन का सूर्य भी अस्त हो गया|
प्रदीप की गाड़ी पुलिस स्टेशन के अहाते में पहुंच गई| गाड़ी से उतरकर वह सीधे इंस्पेक्टर गुप्ता के केबिन में प्रवेश कर गया|
इंस्पेक्टर गुप्ता ने एक कोरे कागज पर प्रदीप का बयान लिखना शुरू किया| प्रदीप बोलता गया और इंस्पेक्टर गुप्ता साथ-साथ लिखते चले गये|
रिपोर्ट तैयार करने के बाद वे प्रदीप से बोले अब आप जा सकते हैं मिस्टर प्रदीप… आगे का काम अब हमारा है|’’
प्रदीप उठ गया व हाथ जोड़कर बाहर निकल गया|
टेबल पर रखा फोन बज उठा|
“हैलो कैथल पुलिस स्टेशन’’
“जय हिन्द सर… मैं इंस्पेक्टर गुप्ता बोल रहा हूँ’’|
“जय हिन्द मिस्टर गुप्ता… सीमा हत्याकांड़ का केस कहां तक पहुंचा’’|
“सर… मामले की छानबीन में पुलिस के साथ स्पेशल स्टाफ को भी लगाया गया है| जांच की जा रही है और हमने कुछ सबुत बरामद किए हैं| जिनको फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है| जो इस हत्याकांड़ की गुत्थी को सुलझाने में मददगार हो सकते हैं|
साथ ही हमने लड़की की मां से भी पुछताछ की जिससे एक अहम बात सामने आई है कि लड़की की मां को किशन ने सीमा को पार्टी में ले जाने के लिए बहुत मिन्नतें करके मनाया था|
सीमा ने बडी आकर्षक रूप पाया था| बेहद खूबसूरत थी|पूर्ण चन्द्रर्मा के आकार का खूबसूरत चेहरा| खिला रूप-गोरा खिलता तरूणई युक्त शरीर| रक्तिम होंठ जब मुस्कुराते तो उसके दोनों भरे गालों में नन्हे-नन्हे गड़ड़े पड़ जाते| उसके सौंदर्य में एक आश्चर्यजनक बात थी| उसका स्वभाव सीधा व व्यवहार शिष्ट था| उसे प्यार करना मुश्किल था, वह तो पूजने के योग्य थी| उसके चेहरे पर हमेशा एक बडी लुभावनी आत्मिकता की दीप्ति रहती थी| उसकी आंखे जिनमें लाज, गंभीरता और पवित्रता झलकती थी| उसकी एक-एक चितवन, एक-एक क्रिया एक-एक बात उसके हृदय की पवित्रता और सच्चाई का असर दिल पर पैदा करती थी|
निर्मला देवी दिन भर मातम मनाती रही उसे कोइ अपना मददगार दिखाई न दिया| कहीं आशा की झलक न थी| अगर भगवान की निश्चित की हुइ मॄत्यु ने सीमा को उससे छीना होता तो शायद वह सब्र कर लेती मगर सीमा की भयानक मौत के बारे में सोचकर वह रोती रही तड़पती रही| पड़ोस की नर्म दिल स्त्रिया आकर उसकी बेबसी पर दो बूद आंसू गिराकर चली जाती|
निर्मला देवी इतनी विवल थी कि दिन में कइ बार मूर्छित भी हुई| न घर से निकली, न चुल्हा जलाया, न हाथ मुंह धोया| पड़ोस की स्त्रियां उसे बार-बार आकर कहती ‘बहन, उठो, मुंह हाथ धोओ, कुछ खाओ पियो| कब तक इस तरह पडी रहोगी मगर निर्मला देवी के कंठ में आंसुओं का ऐसा वेग उठता कि उसे रोकने में सारी देह कांप उठती| उसे अपना जीवन मरूस्थल सा लगने लगा|
सूरज के ढ़लने के साथ साथ निर्मला देवी के जीवन का सूर्य भी अस्त हो गया|
प्रदीप की गाड़ी पुलिस स्टेशन के अहाते में पहुंच गई| गाड़ी से उतरकर वह सीधे इंस्पेक्टर गुप्ता के केबिन में प्रवेश कर गया|
इंस्पेक्टर गुप्ता ने एक कोरे कागज पर प्रदीप का बयान लिखना शुरू किया| प्रदीप बोलता गया और इंस्पेक्टर गुप्ता साथ-साथ लिखते चले गये|
रिपोर्ट तैयार करने के बाद वे प्रदीप से बोले अब आप जा सकते हैं मिस्टर प्रदीप… आगे का काम अब हमारा है|’’
प्रदीप उठ गया व हाथ जोड़कर बाहर निकल गया|
टेबल पर रखा फोन बज उठा|
“हैलो कैथल पुलिस स्टेशन’’
“जय हिन्द सर… मैं इंस्पेक्टर गुप्ता बोल रहा हूँ’’|
“जय हिन्द मिस्टर गुप्ता… सीमा हत्याकांड़ का केस कहां तक पहुंचा’’|
“सर… मामले की छानबीन में पुलिस के साथ स्पेशल स्टाफ को भी लगाया गया है| जांच की जा रही है और हमने कुछ सबुत बरामद किए हैं| जिनको फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है| जो इस हत्याकांड़ की गुत्थी को सुलझाने में मददगार हो सकते हैं|
साथ ही हमने लड़की की मां से भी पुछताछ की जिससे एक अहम बात सामने आई है कि लड़की की मां को किशन ने सीमा को पार्टी में ले जाने के लिए बहुत मिन्नतें करके मनाया था|