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स्वाभिमान और तर्क में सवाल-जवाब हो रहा था कि अचानक राधिका ने करवट बदली| रोहन ने फौरन तलवार उठायी मगर राधिका की आँखें खुल गई| वह घबराकर उठ बैठी परन्तु भय की चरम सीमा तो साहस ही होती है| हिम्मत करके वह बोली क् क्…क… कौन| ”
“मैं हूँ रोहन” रोहन ने अपनी झेंप को गुस्से के पर्दे में छिपाकर कहा|
“कौन रोहन… चले जाओ यहां से वरना मैं शोर मचा दूंगी”
“कौन रोहन… हां… तुम नाम बदलकर किशन को फंसा सकती हो शीतल मगर शायद तुम भूल गई कि आखिर मजीत हमेशा सच्चाई की होती है… इसलिए तुम्हारा पर्दा-फाश करने के लिए ऊपरवाले ने मुझे भेज दिया है,”
“रोहन … मैं शीतल नहीं बल्कि उसकी छोटी बहन राधिका हूँ और तुम किस झूठ सच की बात करते हो… किशन के साथ जो कुछ हुआ है या होगा उसके लिए वह खुद जिम्मेदार है,”
“झूठ बोल रही हो तुम… म्म्म्मै ये साबित नहीं कर सकता लेकिन अगर किशन को कुछ हो गया तो कसम पैदा करने वाले की मैं तुम्हे जिंदा नहीं छोड़ूंगा” दांत पीसते हुए रोहन ने कहा|
“कुछ हो गया मतलब… क्या हुआ किशन को"|
"किशन हास्पीटलाइज्ड़ है उसने जहर खा लिया है| वह पुलिस की कैद से भाग गया था मगर अपनी जान बचाने के लिए नहीं बल्कि अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए… क्योंकि अगर वह जान बचाने के लिए भागा होता तो उसे लौटकर घर आने की और जहर खाने की जरूरत नहीं थी… वैसे भी मरते हुए इन्सान झूठ नहीं बोलता… और उसने बार-बार कहा वह बेगुनाह है"|
"क्या… हे भगवान" वह सिर पकड़ कर बैठ गई| इसका मतलब उसके साथ बहुत गलत हुआ
… रोहन मैं जानती हूँ कि तुम मेरे खून के प्यासे हो, लेकिन पहले मेरी बात सुन लो|
“मै राधिका हूँ शीतल की छोटी बहन… शीतल तो अब इस दुनिया में भी नहीं है,” दीवार पर लगी शीतल की तस्वीर की ओर ईशारा करते हुए राधिका ने कहा|
राधिका के मुख से ये शब्द सुनकर रोहन के मस्तिष्क को गहरा झटका लगा| उसके सारे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई और उसकी कांपती नजर तस्वीर पर जा पड़ी| शीतल की तस्वीर पर फुलों की माला देखकर रोहन का दिल कांप उठा, जबान तालू से जा चिपकी|
राधिका ने रोहन को शीतल के बारे में वह सब कुछ बताया जो रोहन के आस्ट्रेलिया जाने के पश्चात् हुआ था|
रोहन की आँखें भर आई| उसका मन अब भी सच्चाई मानने के लिए पूर्णतया तैयार न था|
तस्वीर को उतारकर अपने कलेजे से लगाता हुआ वह कह अरे जालिम तू बेवफाइ न करती अगर,
तो जुदाइ एक जन्म की, कोइ बड़ा गम न था|
“तुम इतनी खुदगर्ज कैसे हो गई … मुझे कोइ गम न होता के तुम किसी दूजे के नाम का सिन्दूर लगाये मुझे दिखती, किसी दूजे के नाम का मगंलसुत्र ड़ालती… अगर मैं तुम्हें खुश पाता तो तुम नहीं जानती तुम्हे खुश देखकर मैं कितना खुश होता| मगर तुमने आत्महत्या करके मेरे प्यार को हरा दिया… तुमने मुझे यूं अकेला छोडकर जो बेवफाइ की है वह मेरे प्यार का, मेरे भरोसे का कत्ल है| तुम्हारे साथ जो हुआ वह बेशक दर्द भरा था मगर क्या तुम्हे अपने रोहन पर इतना भरोसा नहीं होना चाहिए था कि वह तुम्हे किसी भी हाल मे अपना लेगा” रोहन विचारों के बीहड़ ज़गंल में भटक रहा था, कि राधिका की आवाज सुनकर उसकी तंद्रा भंग हुई|
“मै जानती हूँ आप मेरी बहन शीतल से प्यार करते थे, मगर मुझे मालूम न था कि सीमा आपकी बहन है| किशन का वह लड़का होना भी जिसके साथ संजय का झगड़ा हुआ था मेरे लिए केवल एक संयोग था| मुझे तो यह सब बातें तब मालुम पड़ी जब सीमा की हत्या के बाद इन्सपैक्टर गुप्ता मुझसे मिले थे| लेकिन जब मुझे यह पता चला कि किशन ही वह शख्श है जिसने संजय को अपने प्यार को पाने में कामयाब नहीं होने दिया तो मेरे मन व बुद्धी के हर तर्क ने उसे मेरे परिवार की बर्बादी के लिए जिम्मेदार पाया| मेरा गुस्सा और घॄणा उसकी सच्चाई को पहचान न सके और मैंने जरूरत के समय किशन का साथ नहीं दिया| मगर सीमा के साथ जो भी हुआ वह चाहे प्रदीप ने किया हो या किशन ने मुझे उसके बारे में कोइ खबर नहीं, अगर अब भी आपको लगता है कि मैं खतावार हूँ तो आप जो सजा देना चाहें मैं भुगतने को तैयार हूँ|
“मैं हूँ रोहन” रोहन ने अपनी झेंप को गुस्से के पर्दे में छिपाकर कहा|
“कौन रोहन… चले जाओ यहां से वरना मैं शोर मचा दूंगी”
“कौन रोहन… हां… तुम नाम बदलकर किशन को फंसा सकती हो शीतल मगर शायद तुम भूल गई कि आखिर मजीत हमेशा सच्चाई की होती है… इसलिए तुम्हारा पर्दा-फाश करने के लिए ऊपरवाले ने मुझे भेज दिया है,”
“रोहन … मैं शीतल नहीं बल्कि उसकी छोटी बहन राधिका हूँ और तुम किस झूठ सच की बात करते हो… किशन के साथ जो कुछ हुआ है या होगा उसके लिए वह खुद जिम्मेदार है,”
“झूठ बोल रही हो तुम… म्म्म्मै ये साबित नहीं कर सकता लेकिन अगर किशन को कुछ हो गया तो कसम पैदा करने वाले की मैं तुम्हे जिंदा नहीं छोड़ूंगा” दांत पीसते हुए रोहन ने कहा|
“कुछ हो गया मतलब… क्या हुआ किशन को"|
"किशन हास्पीटलाइज्ड़ है उसने जहर खा लिया है| वह पुलिस की कैद से भाग गया था मगर अपनी जान बचाने के लिए नहीं बल्कि अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए… क्योंकि अगर वह जान बचाने के लिए भागा होता तो उसे लौटकर घर आने की और जहर खाने की जरूरत नहीं थी… वैसे भी मरते हुए इन्सान झूठ नहीं बोलता… और उसने बार-बार कहा वह बेगुनाह है"|
"क्या… हे भगवान" वह सिर पकड़ कर बैठ गई| इसका मतलब उसके साथ बहुत गलत हुआ
… रोहन मैं जानती हूँ कि तुम मेरे खून के प्यासे हो, लेकिन पहले मेरी बात सुन लो|
“मै राधिका हूँ शीतल की छोटी बहन… शीतल तो अब इस दुनिया में भी नहीं है,” दीवार पर लगी शीतल की तस्वीर की ओर ईशारा करते हुए राधिका ने कहा|
राधिका के मुख से ये शब्द सुनकर रोहन के मस्तिष्क को गहरा झटका लगा| उसके सारे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई और उसकी कांपती नजर तस्वीर पर जा पड़ी| शीतल की तस्वीर पर फुलों की माला देखकर रोहन का दिल कांप उठा, जबान तालू से जा चिपकी|
राधिका ने रोहन को शीतल के बारे में वह सब कुछ बताया जो रोहन के आस्ट्रेलिया जाने के पश्चात् हुआ था|
रोहन की आँखें भर आई| उसका मन अब भी सच्चाई मानने के लिए पूर्णतया तैयार न था|
तस्वीर को उतारकर अपने कलेजे से लगाता हुआ वह कह अरे जालिम तू बेवफाइ न करती अगर,
तो जुदाइ एक जन्म की, कोइ बड़ा गम न था|
“तुम इतनी खुदगर्ज कैसे हो गई … मुझे कोइ गम न होता के तुम किसी दूजे के नाम का सिन्दूर लगाये मुझे दिखती, किसी दूजे के नाम का मगंलसुत्र ड़ालती… अगर मैं तुम्हें खुश पाता तो तुम नहीं जानती तुम्हे खुश देखकर मैं कितना खुश होता| मगर तुमने आत्महत्या करके मेरे प्यार को हरा दिया… तुमने मुझे यूं अकेला छोडकर जो बेवफाइ की है वह मेरे प्यार का, मेरे भरोसे का कत्ल है| तुम्हारे साथ जो हुआ वह बेशक दर्द भरा था मगर क्या तुम्हे अपने रोहन पर इतना भरोसा नहीं होना चाहिए था कि वह तुम्हे किसी भी हाल मे अपना लेगा” रोहन विचारों के बीहड़ ज़गंल में भटक रहा था, कि राधिका की आवाज सुनकर उसकी तंद्रा भंग हुई|
“मै जानती हूँ आप मेरी बहन शीतल से प्यार करते थे, मगर मुझे मालूम न था कि सीमा आपकी बहन है| किशन का वह लड़का होना भी जिसके साथ संजय का झगड़ा हुआ था मेरे लिए केवल एक संयोग था| मुझे तो यह सब बातें तब मालुम पड़ी जब सीमा की हत्या के बाद इन्सपैक्टर गुप्ता मुझसे मिले थे| लेकिन जब मुझे यह पता चला कि किशन ही वह शख्श है जिसने संजय को अपने प्यार को पाने में कामयाब नहीं होने दिया तो मेरे मन व बुद्धी के हर तर्क ने उसे मेरे परिवार की बर्बादी के लिए जिम्मेदार पाया| मेरा गुस्सा और घॄणा उसकी सच्चाई को पहचान न सके और मैंने जरूरत के समय किशन का साथ नहीं दिया| मगर सीमा के साथ जो भी हुआ वह चाहे प्रदीप ने किया हो या किशन ने मुझे उसके बारे में कोइ खबर नहीं, अगर अब भी आपको लगता है कि मैं खतावार हूँ तो आप जो सजा देना चाहें मैं भुगतने को तैयार हूँ|