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Romance चाहत

चाहत सामने देख रही थी। उसने देखा वो शहर से बाहर आ गए है।।। चाहत को समझ ही नहीं आ रहा था कि वो कहा

जा रहे है। चाहत गौर से रास्तों को देख रही थी। अंत में अध्यन ने अपनी बाइक एक ढाबे पर रोकी।

अध्यन बाइक से उतरा । उसने चाहत को देखा जो उस जगह को देख रही थी। उस ढाबे का नाम था "दिल खुश"

चाहत ने अध्यन को देखा.. फिर कहा - मैंने नाश्ता कर लिया है .. तुम खा लो..

अध्यन उसे देखते हुए - नाश्ता तो मैंने भी किया है.. पर आज तुम्हारे लिए यहां की स्पेशल चीज लाता हूं ।

चाहत उस जगह को देख रही थीं ।

तभी अध्यन अंदर गया। चाहत वहा पर कई लोगो को देख रही थी। जिनमे ज्यादातर ट्रक वाले थे। वे काफी मोटे थे उनकी बड़ी बड़ी मूछे थी। सिर पर पगड़ी बांधे हुए वो बड़े ही रौबीले और खडूस टाइप के भी लग रहे थे पर जब उनमें से एक ट्रक वाले अंकल ने वहा काम के रहे एक गरीब बच्चे को अपने हाथ से खाना खिलाया तो उसे लगा के दिखने में जितने भी खडूस हो पर दिल के साफ़ होते है। हमे किसी की शक्ल पर नहीं जाना चाहिए। कभी कभार पैसों से नहीं दिल से अमीर होना चाहिए।

वो ये सोच ही रही थी। तभी अध्यन आया और बोला - क्या देख रही हो।

चाहत ने हाथो से इशारा कर उन ट्रक वाले अंकल को

दिखाया और बोलने लगी - तुम्हे पता है उन अंकल ने उस बच्चे को खाना खिलाया।...... फिर उनसे नजर हटा कर ... पता है अध्यन जब भी मै किसी को किसी की हेल्प करते हुए देखते हुं ना तो हमेशा सोचती हूं........ कब इतनी बड़ी होऊंगी जब मै भी ऐसे लोगो की हेल्प कर पाऊं।

चाहत ने ये बाते ऐसे कहीं की अध्यन उसे ऐसे बोलते देख कुछ बोल ही नहीं पाया। थोड़ी देर चुप होने के बाद उसने कहा - तुम जरूर करोगी..

चाहत उसकी तरफ देख मुस्कुरा दी।

अध्यन ने कहा - चलो...

कहां??? चाहत ने तुरंत पूछा।

अध्यन - हेल्प करने.....

चाहत को समझ नहीं आया। तो अध्यन उसका हाथ पकड़ कर उसे ढाबे के सामने ले गया जहां दान पेटी रखी थी और ऊपर लिखा था " गरीब बच्चो के लिए अपना सहयोग दे"

चाहत ने मुस्कुराते हुए अध्यन को देखा अध्यन ने उसे इशारे से दान करने के कहा। उसने अपने जींस की जेब से कुछ नोट निकले और पेटी ने डाल दिया।बस इतना ही कर वो बहुत खुश थी। और उसे खुश देख अध्यन खुश था।

अध्यन ने चाहत को बाइक के पास इंतज़ार करने को कहा और खुद ढाबे के अंदर चला गया। चाहत भी बाइक के पास आकर उसका इंतज़ार करने लगी।

थोड़े देर बाद अध्यन आया और उसके बगल में खड़े हो गया । उसने चाहत को देखा ।चाहत ने पहले अध्यन को देखा ।

फिर उसकी नजर अध्यन के हाथ पर गई। उसने हाथो की तरफ इशारा करते हुए पूछा - ये क्या है...

अध्यन अपने दोनो हाथ उपर उठाते हुए - ये लस्सी...

चाहत उसके दोनो हाथ नीचे करते हुए - हा मुझे भी पता है .. पर मै इतना नहीं पी सकती ।

अध्यन उसे आश्चर्य से देखते हुए - वाह...

चाहत उसे देख कर - सच में।

चाहत के चेहरे से ही पता चल रहा था कि उससे ये पूरा नहीं पिया जाएगा। मैंने बताया था ना मैंने नाश्ता किया है सो आई कांट..

अध्यन उसकी बात समझते हुए - आधा तो पी लोगी ना।।

चाहत ने खुश होकर - हा कहा..

जिनको मै छोड़ने अाई थी... वो मेरी ..

अध्यन बीच में - दादी थी।

चाहत चौक कर - तुम्हे कैसे पता??

अध्यन - जब तुम उन्हें हाथ दिखाते हुए "बाय दादी" कह रही थी तब मै वहीं था ।

चाहत - तुम वहा क्या कर रहे थे..??

अध्यन - डेड अपनी फाइल भूल गए थे तो उन्हें देने गया था ।

चाहत - ओह ... तुम्हारे डेड ... अच्छा तुम्हारे डेड क्या करते है...

अध्यन - इंजिनियर है..

चाहत - और तुम्हारी मॉम...

अध्यन - प्रिंसिपल है।।

चाहत बाते जारी रखते हुए - और तुम्हारे घर में...
 
अध्यन ने जोर से ब्रेक लगा दी...चाहत उसके करीब आ गईं। उसने अध्यन की कमर को टाइडली पकड़ लिया और आंखे बंद कर ली। अध्यन का दिल भी ज़ोर से धड़क रहा था। उसकी सीने में किसी का हाथ वो भी उसका जिसे वो सब से प्यार करने लगा था। उसे चाहत की धड़कने साफ़ महसूस हो रही थी। वो कुछ देर इस अहसास को संभाले रखना चाहता था। उसने अपनी आंखें बंद कर ली खुद को संभाला और

धीरे से चाहत के हाथो पर अपने हाथ रख कर - चाहत तुम ठीक हो??

चाहत ने आंखे खोली फिर अपना सिर उठाया जो की अध्यन के कंधो पर था। अध्यन उसे देख रहा था । उसने हा में सिर हिलाया। अध्यन ने उसे कुछ नहीं कहा।

वो वैसे ही उसे पकड़ कर बैठी रही। अध्यन ने भी उससे कुछ नहीं कहा। वो बस अपने लेफ्ट हाथ को उसके दोनो हाथो पर रख कर गाड़ी चला रहा था। उसने देखा चाहत का हाथ उसे मजबूती से पकड़ा है। ये देख वो मुस्कुरा दिया ।

थोड़े देर में चाहत को अहसास हुआ और उसने अपना हाथ हटाया ही नहीं है ये अहसास होते ही उसने अपना हाथ हटा दिया। उसे शर्म आ रही थी।

चाहत मन में - ये क्या कर रही है... चाहत ... पता नहीं वो क्या सोच रहा होगा।... तू भी ना ध्यान कहा था तेरा...

अध्यन अचानक से - मुझ पर... चाहत उसे देखने लगी। तो उसने बात जारी रखते हुए कहा । मुझ पर भरोसा रखो .... तुम्हे सही सलामत घर छोड़ दूंगा...

चाहत ने हा में सिर हिलाया। फिर उसने खुद से कहा - कुछ भी सोच रही है।

कुछ घर पहुंचते तक अध्यन ने कुछ नहीं कहा दोनो खामोशी से चलते रहे। चाहत के घर के पास अध्यन ने बाइक रोकी । चाहत उतरी - थैंक्यू।

अध्यन मुस्कुरा दिया। चाहत भी घर चले गई।
 
चाहत का घर

चाहत ने मुस्कुराते हुए दरवाज़ा देखा जिस पर ताला था फिर उसने पास रखे गमले के नीचे से चाबी उठाई। उसने ताला खोला। चाहत ने ताला खोला और अंदर आ गई। वो दरवाज़ा बंद करने के लिए मुड़ी तो उसने देखा अध्यन उसे ही देख रहा है। वो एक बार फिर मुस्कुराई।

जैसे ही उसने दरवाजा बंद करने का सोचा वैसे ही अचानक बरसात शुरू हो गई। चाहत ने ये देखा तो दरवाज़े की तरफ पहुंची। तो उसने देखा बाहर बारिश हो रही हैं। और अध्यन ऐसे ही खड़ा है। उसने अध्यन को अपने पास बुलाया।

अध्यन उसके घर जब तक आया तब तक वो थोड़ा भीग चुका था। चाहत ने उसे टावेल दिया। वो टावेल से सिर पोछते

हुए मुड़ा तो सामने का नज़ारा देख रुक गया।

चाहत ने अपने बाल खोले थे और उन्हें कंघी कर रही थी।अध्यन उसे एकटक देख रहा था। चाहत ने अध्यन को बैठने का इशारा किया पर वो तो बस चाहत को ही देखे जा रहा था। कमर तक आते उसके काले रेशमी बाल जिन्हे वो धीरे धीरे सुलझा रही थीं।

अध्यन उसे बस देखे जा रहा था।....

चाहत ने जब देखा कि अध्यन उसकी बात नहीं सुन रहा है तो वो उसके पास गई और उसे उसके कंधो से पकड़ कर सोफे में बैठाया।

फिर उसने वापस से अपना जुड़ा बनाया और उस पर जुड़ा स्टिक लगा ली। अध्यन उसे देखने लगा। तो उसने आंखो के इशारे से पूछा क्या हुआ???

अध्यन उसके तरफ देखते हुए - तुम्हारे बाल कितने लंबे है....और घने भी जब चोटी करती हो पता भी नहीं चलता।

चाहत - वो इसीलिए क्युकी मम्मी बहुत सारा ऑयल लगा कर चोटी बढ़ती है... तुम्हे पता है मुझसे ये बाल बिल्कुल भी नहीं संभालते... इनको मम्मी ही संभालती है... और ख्याल भी रखती है। उनको पसंद है मेरे लंबे बाल .....

अध्यन को एक नजर देख बात जारी रखते हुए... ये इतने

लंबे है की मै जब भी इन्हे धोती हूं..... ये सूखने में बहुत टाइम लेते है....

अध्यन उसकी बातो को बड़े गौर से सुन रहा था। उसने चाहत को ऐसे बोलते हुए कभी नहीं सुना था। जिस तरह वो अपने बालों के बारे में बता रही थी।कोई भी कह सकता था कि वो उसके लिए कितने इंपॉर्टेंट है।

तभी चाहत ने कहा - बस यही एक चीज है जो सब को पसंद आती है मुझमें बाकी किसी को मेरी काबिलियत नहीं मेरा रंग.... ये बोल कर वो चुप हो गई।

कुछ देर चुप रहने के बाद उसने कहा - अभी भी बारिश हो रही है... मै तुम्हारे लिए चाय बनाती हूं... ये बोल वो अंदर चले गई और अध्यन उसे देखने लगा।

चाहत किचन गई और उसने चाय का बर्तन रखा । और कुछ सोचते हुए चाय बनाने लगी। थोड़े देर में चाय बन गई उसने उसे कप में छान कर रख लिया। वो बाहर अाई उसके ट्रे में बिस्किट्स और चाय का कप था।

अध्यन ने पूछा - तुम्हारी चाय ...

चाहत - मै चाय नहीं पीती ।

अध्यन उसे देखते हुए - पिता तो मैं भी नहीं ।

एक काम करो एक और कप ले आओ फिर साथ में पिते है।

चाहत ने हा कहा वह कप लेने चले गई और उसमे चाय आधी आधी कर चाय पीने लगी।

तभी अध्यन ने माहौल हल्का देख कर पूछा - वैसे तुम रो क्यों रही थी???

ये सुन चाहत उसे देखती है फिर कहती है - तुमने चाय पीली ना.... मुझे दो कप को ..... मै रख कर आती हूं।

अध्यन ने कप उसे दे दिया।

ये बोल वो वहा से चले गई।। अध्यन उसे देखते रहा।

अध्यन को अब पता चल चुका था । शायद चाहत नहीं बताना चाह रही है। उसने सोचा अब वो उससे नहीं पूछेगा। चाहत वापस आयी तो अध्यन ने उससे कहा।

अध्यन - चाहत लगता है अब बारिश रुक गई है.. मुझे चलना चाहिए... थैंक्यू ।

चाहत बस मुस्कुरा दी।

अध्यन उसकी मुस्कुराहट देख सोचता है - पहले तो तुम इतनी प्यारी हो ...और फिर बात बात पर मुस्कुरा कर सीधे दिल में वार करती हो...क्या करू मै तुम्हारा...

वो उसे देखते हुए बाहर निकल जाता है। चाहत भी उसे बाहर छोड़ने आती है। अध्यन बाइक में बैठ जाता है। चाहत उसकी बाइक के राइट साइड खड़ी हो जाती है।

अध्यन उसे देखते हुए - चाहत एक बात कहूं...

चाहत थोड़ा डर जाती है ..कहीं अध्यन दोबारा उससे वो सवाल ना पूछे जो इतने समय से पूछ रहा था।

वो बड़ी मुश्किल से अपना सिर हा में हिलती है।

अध्यन - देखो चाहत ...ये बोल उसने चाहत का हाथ अपने हाथ में लिया। फिर बोला - हम दोस्त है...और हमेशा रहेंगे इन फ्यूचर अगर मेरी किसी बात का बुरा तुम्हे लगा तो तुम मुझे तुरंत बताओगी... कुछ भी सोचने से पहले एक बार मुझसे कन्फर्म कर लोगी।

चाहत ने हा में सिर हिला दिया। और अपनी पलके नीचे झुका दी।

अध्यन - मुझे पता है आज जो मैंने सवाल किया इसका जवाब तुम मुझे नहीं देना चाहती ...,

चाहत उसकी बात सुन पलके उठा लेती है । उसने जल्दी से ना में सिर हिलाया।

अध्यन उसका हाथ मजबूती से पकड़ते हुए - मुझे इतना तो पता है तुम जब तक सामने वाले के साथ कंफर्टेबल नहीं होगी ...तब तक कुछ भी शेयर नहीं करोगी। ... बट फिर भी मै तुमसे ये कहुगा ...तुम मुझसे जो चाहो वो शेयर कर सकती हो... आई एम आलवेज देयर फॉर यू ...

चाहत ने उसके हाथो को मजबूती से पकड़ा और कहा - यस आई विल...

अध्यन ने चाहत की आंखो में अपने लिए विश्वास देखा कुछ देर तक दोनो एक दूसरे को देखते रहे फिर अध्यन ने उसका हाथ छोड़ा चाहत बाइक से दूर हटी । अध्यन ने बाइक स्टार्ट की और बाइक आगे बढ़ा दी।

चाहत उसे तब तक देखते रही जब तक उसकी बाइक आंखो से ओझल ना हो गई।

चाहत घर में अाई और उसने अपने हाथ को देखा फिर मुस्कुराने लगीं । उसे हाथ देख वो पल याद आ गया जब बाइक पर उसने अध्यन को पकड़ रखा था और अध्यन ने उसके हाथो पर अपना हाथ रखा था। उसकी झूठी लस्सी पीना सब कुछ वो इन सब बातो को याद कर इतना खो गई की कब आर्यन बाहर से आकर उसके बगल में खड़ा भी हो गया । ये चाहत को पता भी नहीं चला।

आर्यन उसके चारो तरफ घूम कर उसे देखने लगा। चाहत अपने ही ख्यालों में गुम मुस्कुरा रही थी। आर्यन को कुछ समझ ही नहीं आया। उसने उसका टॉप खिचा फिर कहा -

दी कहा खोई हो.. कब से आवाज़ दे रहा हूं।।

चाहत उसकी बात सुन जागी फिर उसने आर्यन के गाल खींचे और कहा - कहीं नहीं पपड़ी चाट ... तुझे ही याद कर रही थी।

आर्यन अपने गाल पर - दी दर्द होता है... छोड़ो मुझे ...फिर उसने जोर से आवाज़ लगाई... मम्मी....!!!!

बाहर से रीमा जी आते हुए - क्या हुआ ।।।

आर्यन उनके पास जाकर - देखो ना दी ने क्या किया... ये बोल उसने अपने गाल दिखाए। जिस पर उग्लियों के निशान थे।
 
रीमा जी ने चाहत को घुरा तो चाहत ने उन्हें बतिसी दिखा कर रूम में भाग गई। रीमा जी ने आर्यन को देखा फिर कहा - कोई बात नहीं ... जब दी वापस आयेगी .. तो मै भी उनके गाल खिचुगी।

आर्यन ने तुरंत कहा - नहीं मम्मी... आप ऐसे मत करना। उनको दर्द होगा। रीमा जी उसकी बात सुन भावुक हो गई। उन्होंने उसे गले से लगा लिया...

चाहत गेट पर खड़ी ये सब देख रही थी। वो भाग कर अाई और उसने भी आर्यन और रीमा जी को गले से लगा लिया।

अध्यन बाइक चलाते हुए सोचता है जो जो आज हुआ।

वो उसे कभी भी भूल नहीं पाएगा। उसका हाथ रह रह कर उस जगह चला जाता जहा चाहत का हाथ था। वो अपने सीने पर हाथ रख उसके हाथो को महसूस कर रहा था। अध्यन अपने कंधो पर अभी भी चाहत का सिर महसूस कर पा रहा था। वो उन एहसासों को झुठला नहीं सकता था और ना ही भूल सकता था।

वो मुस्कुराते हुए घर आया।

अध्यन का घर

गौरी जी जहा अध्यन का इंतज़ार कर रही थी। गौरी जी कुछ बोलने को हुई.. उससे पहले अध्यन बालो में हाथ घुमाते हुए आगे निकल गया।

गौरी जी हैरानी से उसे देखते हुए ... हुआ क्या इस लड़के

को।

अध्यन रूम में आया। फिर बाथरूम में जाकर अपनी शर्ट उतार कर रख दी। और लगे मिरर के सामने खुद को देख रहा था। उसे अभी भी लग रहा था। जैसे चाहत ने उसे पकड़ा हुआ हो... ये सोच वो मुस्कुराया।

उसने अपनी शर्ट जो साइड में रखी थी उसे उठा कर देखा । उस शर्ट को वो देख ही रहा था तभी उसके नाक के पास से एक खुश्बू गुजरी... उसने शर्ट को हाथो से पकड़ कर नाक के पास लाया और फिर उसकी खुशबू को सुधने लगा।

वो उसकी नहीं थी इसका मतलब ये चाहत की खुश्बू है ये सोच कर ही वो खुश हो गया और उस शर्ट को अपने कंधो में डाल लिया और उसे पेट के साइड से पहना । उसने शर्ट के दोनो स्लिव्स में अपने हाथ डाले जिससे उसमे लगने वाले बटन उसकी पीठ की तरफ हो गए। वो उसे पहन कर नाचने लगा। पता नहीं वो कब तक यू ही नाचता रहा।

पर जब गौरी जी उसके रूम में अाई तो उनको बाथरूम से आवाज़ आ रही थीं । गौरी जी ने कान धीरे से उसके बाथरूम के दरवाजे के पास जा कर खड़ी हो गई अपने दोनों हाथ और कान लगा कर सुनने लगीं।

तभी अध्यन का पैर फिसला और वो जोर से जमीन पर गिर गया। धड़ाम की आवाज़ अाई... गौरी जी का तो जैसे दिल ही बाहर आ गया। उन्होंने सीधे दरवाज़े को एक हाथ से खटखटाते हुए कहा - सोना...क्या हुआ... तुम ठीक हो ना ... दरवाज़ा खोलो ...

इधर बाथरूम में अध्यन अपनी कमर पर हाथ लिया और धीरे से उठा फिर अपनी कमर को सहलाते हुए उठा। उसने अपनी मॉम की आवाज़ सुनी फिर कहा - मै ठीक हूं मॉम... आप टैंशन ना लो..

गौरी जी बाहर से - अच्छा.. तब तो ठीक है .. पर ... कुछ गिरा था ना ... और ये आवाज़ कैसी थी ... ???

अध्यन - बाल्टी गिरी थी... और

गौरी जी - और...

अध्यन - और साथ में मै भी...

गौरी जी एक पल के लिए चुप हुई फिर जोर जोर से हंसने लगी। तभी दरवाज़ा खुला अध्यन के बाहर आने की आवाज़ अाई जिसे देख गौरी जी चुप हो गई। पर जब अध्यन पूरा बाहर आया तो उसकी हालत देख गौरीजी एकबार फिर जोर जोर से जानने लगी...

अध्यन उन्हें देख कर - क्या हुआ मॉम... आप इतना क्यू हस रही है..

गौरी जी ने उसका हाथ पकड़ा और उसे मिरर के सामने ले गई .. अध्यन कभी मिरर को तो कभी अपनी मॉम को देखता है फिर वो भी उनके साथ हसने लगता है।

अब वो दिख ही ऐसे रहा था। पहले तो उसने शर्ट उल्टी पहनी थी । उसके बाद गिरने के कारण उसके जींस की एक पैर का कपड़ा पानी से भीग गया था। और दूसरी साइड का सूखा था पर उठ कर घुटनो तक आ गया था। साथ ही उसके बाल बिखर गए थे। वो गोरा था करके उसका चेहरा शायद गिरने के वजह से लाल हो गया था। वो अपनी हालत देख कर हसने लगा। अध्यन ने जाकर अपनी मॉम को गले से लगा लिया। गौरी जी ने भी उसे अपने बाहों में समेटा कर उसके माथे को चूम लिया।

अध्यन एकदम से दूर हुआ और बोला - मॉम ये ये किस्सी विस्सी मत किया करो ...

गौरी जी उसे देखते हुए - क्या करू मेरा एक ही बेटा है... और उस पर मुझ बहुत प्यार आता है ..

अध्यन खुद को मिरर में देख - क्या सच्ची में।।

गौरी जी उसका चेहरा अपने हाथ में लेकर - मुच्ची में...

ये बोल उन्होंने अध्यन को फिर से किस किया और भाग गई।

वो भागते हुए आगे जा रही थी । भागते हुए वो किसी से टकरा गई । वो गिरने ही वाली थी तभी किसी उनके सामने वाले शख्स ने उन्हें संभाल लिया। ये शख्स कोई और नहीं बल्कि देव जी थे।

उन्होंने गौरी जी को संभाल कर पकड़ लिया था।

गौरी जी के दोनो हाथ देव जी के सीने पर थे । और देव जी के दोनो हाथ गौरी जी के कमर को पकड़े थे। वो सीधे उनकी आंखो में देख रहे थे।

इधर अध्यन शर्ट चेंज कर के बाहर आया तो अपने मॉम डेड को ऐसे देख पहले तो बहुत खुश हुआ फिर उसने देखा सारे नौकर उनको देख रहे है तो उसने गला साफ किया। जिसकी आवाज़ सुन देव और गौरी जी को होश आया।

दोनों ने अध्यन को देखा जो हाथ बंधे उनको देख रहा था। दोनों झेप गए। फिर देव जी वहा से गाना गाते हुए निकले और गौरी जी तो सीधे किचन भाग गई।

अध्यन हसने लगा। वो उन दोनों को देख कर वो खुदको और चाहत को इमेजिन करने लगा। वो सोचने लगा.. जब वो और चाहत इस तरह की सिचुएशन में होंगे तो चाहत कैसे रिएक्ट करेगी । ये सोच वो मुस्कुराने लगा।

देव जी कुछ देर बाद बाहर आते है उन्होंने देखा अध्यन अभी भी वहीं खड़ा मुस्कुरा रहा है तो पहले तो उनको कुछ समझ नहीं आया । वो अध्यन के सामने खड़े हुए उन्होंने देखा अध्यन ने अपने चेहरे पर अपना सीधा हाथ जो कि उसके चिन के पास रखा हुआ था। दूसरे हाथ से उसने अपने सीधे हाथ की कोहनी को पकड़ा था। और वो अपनी ही दुनिया में खोया हुआ था।

देव जी ने उसके चेहरे के सामने पहले हाथ हिलाया। उसके बाद भी अध्यन का ध्यान नहीं गया तो उन्होंने उसे कंधो से हिलाया तब कहीं जाकर अध्यन को होश आया।

अध्यन होश में आते हुए - हा... क्या हुआ... कैसे हुआ....

देव जी ने अपना एक हाथ उठा कर उससे पूछा - क्या चल रहा है..

अध्यन उनसे पहले दूर होता है फिर चिल्लाते हुए - ज्यादा कुछ नहीं बस छोटे भाई या बहन के बारे में सोच रहा था। की कैसे उनका वेलकम करूंगा। ये बोल वो हसने लगा और भागने लगा।

उसकी बात सुन देव जी उसके पीछे भागते है... दोनों पूरे घर में भागते रहते है।

अध्यन की बात जब गौरी जी ने सुनी तो वह भी किचन में खड़े मुस्कुरा रही थी...
 
चाहत का घर

शाम का समय

चाहत और आर्यन ने खाना खत्म किया । चाहत बर्तन उठा कर किचन में साफ़ करने लगी । थोड़े देर बाद वो सीधे रीमा जी के पास पहुंचीं वहा रीमा जी कपडे घड़ी कर अलमारी में रख रही थी।

चाहत - मम्मी ... वो

रीमा जी अलमारी का दरवाज़ा बंद करते हुए - हा बोलो..

चाहत - वो मम्मी आज अध्यन आया था... मुझे छोड़ने ... फिर बारिश हुई और मैंने उसे घर बुलाया था।

चाहत ने ये कहा तो रीमा जी उसकी तरफ देखने लगी ।

चाहत डरते हुए - बारिश के कारण ही...

वो बोल ही रही थी।

रीमा जी चाहत के पास आकर - कोई बात नहीं ..,वो आखिर दोस्त है तुम्हारा ... तुम उसे घर ला सकती हो..

चाहत ने रीमा जी की तरफ देखा। चाहत बाहर जाने को हुई तब रीमा जी ने कहा।

रीमा जी - चाहत

चाहत रुक गई फिर रीमा जी उसके पास अाई और उसका चेहरा अपने हाथों में पकड़ कर कहा।

रीमा जी - मुझे तुम पर पूरा भरोसा है.. तुम कुछ गलत नहीं करोगी ... उस दिन जो बाते भी हुई वो गुस्से में हुई थी... मैंने गलत किया था बेटा ... पर अब मुझे समझ आता है... सब समझती हूं मै ... और भरोसा भी करती हूं तुम पर।

चाहत ने जब ये सुना वो बहुत खुश हुई और अपनी मम्मी को गले लगा कर बाहर आ गईं ।

चाहत अपने रूम अाई। कपडे चेंज कर बेड पर लेट गई। एक बार फिर अध्यन का चेहरा उसके दिल में मीठा अहसास जगा गया।

चाहत उठी और मिरर के सामने आ गईं । हर बार जब भी चाहत मिरर देखती थी उसमे अपना काला रंग देखती थी ।

पर आज वो अपनी मुस्कुराहट देख रही थीं जिसे देख अध्यन ने उसकी तारीफ की थी। वो अपनी आंखो को देख रही थी । जिस पर अलग ही चमक थी।

एकाएक चाहत को काजल की बात याद आ गईं । जब काजल ने पूछा था अगर अध्यन उससे पूछेगा तो वो क्या कहेगी।

आज चाहत ने सोच लिया था। उसे क्या कहना है।...

अगली सुबह चाहत हमेशा की तरह खुश थी। उसमे एक अलग सा कॉन्फिडेंस था। वो हसी खुशी सारे काम कर रही थीं । उसने आज व्हाइट कलर की ड्रेस पहनी थी। जो उसके घुटनो तक आ रही थीं । और वो फ्रॉक टाइप थी और स्लीवलेस भी। आज उसने अपने बालो की चोटी नहीं की थी बस खुला छोड़ दिया था।

चाहत बाहर आते हुए - मम्मी मै मंदिर जा रही हूं।

रीमा जी चाहत को देखत हुए - आज कुछ है क्या...

चाहत ने उन्हें देखते हुए - नहीं तो .....पर आप ये क्यू पूछ रही है.....

रीमा जी - क्युकी मेरा बच्चा आज बहुत सुंदर लग रहा है.... तो मुझे लगा कि आज कुछ स्पेशल ही होगा....

चाहत उनके गले लगते हुए - नहीं मम्मा ऐसा कुछ नहीं है..... बस मन है...

रीमा जी चाहत के गाल पर हाथ रख कर - ठीक है ...जाओ पर जल्दी आ जाना।

चाहत - हा मै जल्दी से आती हूं...

ये बोल वो घर से बाहर निकली और पैदल ही मंदिर की तरफ चले गई।

राधा कृष्ण मंदिर

चाहत मंदिर गई वहा उसने पहली सीढ़ी के पैर छुए और घंटी बजाई.. फिर आगे आकर उसने अपने हाथ जोड़ लिए ।

चाहत हाथ जोड़े हुए - भगवान जी... कैसे है आप ...आप तो अच्छे ही होंगे ...,मै भी अच्छी हूं... आपको तो मेरे बारे में सब पता है...,और मेरे साथ जो हो रहा है वो भी आपसे छुपा नहीं है.... भगवान जी।.. कल अध्यन के साथ को चीज़े हुए ... वो चीज़े दिमाग से निकल ही नहीं रही ...मै ये नहीं कह रही की वो मुझे पसंद है ...पर वो अच्छा लड़का है .... और अब तो मेरा दोस्त भी बन गया है...उसके लिए मेरे दिल

में एक क्या है मै ये तो नहीं जानती,... पर वो मुझे दूसरों से अलग लगता है...तो मेरी यही ख्वाहिश है..की आप मेरी दोस्ती बनाए रखना.... मेरे फैमिली वाले और मुझसे रिलेटेड सभी लोग खुश रहे ... ये बोल उसने आंखे खोली तो पंडित जी उसे देख रहे थे ।

वो उनके पास गई। फिर उनके पैर छू कर बोली - प्रणाम पंडित जी... कैसे है आप।

पंडित जी - मै तो अच्छा हूं... तुम बताओ कैसी हो...

चाहत खिलखिलाते हुए - मै भी अच्छी हूं ये बोल उसने हाथ आगे बढ़ा दिया ।

पंडित जी ने उसे प्रसाद दिया। चाहत ने प्रसाद लिया और वो जाने के लिए मुड़ी ही थी। तभी पंडित जी ने उसे पीछे से आवाज दी।

पंडित जी - चाहत बेटा...

चाहत उनकी तरफ देखते हुए - क्या हुआ...

पंडित जी - ये लगा लो ... ये कह कर पंडित जी ने अपने हाथ पर रखे टिके के तरफ इशारा क्या।

चाहत उनके पास अाई और टीका लगा कर बाहर चली अाई।

चाहत घर के लिए निकालने वाली थी तभी किसी ने उसके कंधो पर हाथ रखा तो वो पलट गई।

उसने देखा कोई औरत है जो उसे देख रही हैं। उस औरत ने लाल साड़ी और लाल सिंदूर लगाया है।

चाहत ने उन्हें देखा फिर एकदम से उनके पैर छू कर कहा - आप यहां कैसे मैम।

वो औरत - बस दर्शन करने अाई थी।

चाहत - मैम मॉर्निंग शिफ्ट में सब कैसे है ।।।

औरत - ठीक है तुम बताओ ..

चाहत - सब ठीक है...

थोड़ी देर रुकने के बाद चाहत - मैम मुझे घर जाना था... तो आप??

वो औरत - हा मै भी जाने ही वाली थी... मेरे हसबैंड मुझे लेने आ रहे होंगे ।

चाहत -ओह तो ..... उनके आते तक मै रुक जाती हूं...

वो औरत - जरूर...

तभी उनकी नजर चाहत के हाथो पर गई।

वो औरत चाहत को देखते हुए - बुरा ना मानो तो एक बात कहूं...?

चाहत मैम को देख - हा कहिए ना।।

वो औरत - तुम्हारा रंग ना बहुत ही ज्यादा दबा हुआ है... तुम बेसन लगाया करो...

चाहत जिसके चेहरे में खुशी थी वो अचानक गायब हो गई।

उन्होने बात जारी रखते हुए कहा - मैंने ये बहुतों को करते हुए देखा है...। सच में ये काम करता है.....। बस हल्दी बेसन और थोड़ा सा नींबू बस रोज सुबह नहाते टाइम लगा लो और सूखने पर धो देना।... और फिर निखार देखना ... चेहरा दमकने लगेगा तुम्हारा...

ये बोल उन्होंने सामने देखा उनकी कार आ गई थी। उन्होंने कार का दरवाज़ा खोला और अंदर बैठ गई। अपनी कार का शीशा उन्होंने ऊपर किया।
 
चाहत जो सामने खड़ी थी। उसे अपना चेहरा उस शीशे में दिखा। चाहत को फिर अपना सावला रंग दिखा। वो कार धूल उड़ाती हुई वहा से चली गई। और छोड़ गई कई सवाल।

चाहत वहा से घर की तरफ आ रही थीं। चाहत के मन में उनकी बाते घूम रही थीं... क्या वो एक वेल एजुकेटेड औरत नहीं थी...। या फिर वो एक टीचर होते हुए भी कबियत की जगह रंग देखती थी... ऐसा नहीं था कि चाहत ने ये सब नहीं किया था। पर ये हर बार काम आए ये जरूरी तो नहीं...

उसने कई लोगो से ये तक सुना था... की लोग गोरी लड़की ढूंढते है शादी के लिए... और अगर वो ऐसे ही रही तो शायद उसे कोई पसंद नहीं करेगा ... कोई उसे अपने घर की बहू नहीं बनाएगा।... क्या ये एक रूढ़िवादी सोच नहीं थी।

जिस टीचर ने कभी उन्हें एकलव्य और अम्बेडकर जैसे लोगो के बारे में बताते हुए ये कहा था कि हमे कभी भेदभाव या रूढ़िवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहिए । आज उनकी खुद सोच वैसी है। क्या यही है हमारे देश के शिक्षित लोग जो आधुनिक युग में होकर भी बाहरी दिखावे को महत्व देते हैं ऐसा नहीं है कि चाहत को उनकी बातों का बुरा लगा था पर वह उनकी सोच चाहत के प्रति ऐसी हैं यह देख कर उसे बुरा लग रहा था क्योंकि वह मैम चाहत को बहुत अच्छे से जानती थी वह उसके स्कूल में पढ़ने वाली टीचर थी वह चाहत की काबिलियत से वाकिफ थी फिर भी उन्हें भी उसका रंग ही दिखा यह बात उसे ज्यादा बुरी लग रही थी।

वो ये सारी बाते याद करते हुए घर पहुंची। वो बिना किसी से कुछ कहे अपने रूम में चले गई। चाहत बाथरूम में गई। वाशबेसिन के पास आकर उसने अपना चेहरा धोया। एक बार फिर उस सावले रंग ने उसका मज़ाक उड़ाया था। उसकी खुशी छीन ली थीं । वो वाशबेसिन को पकड़ कर बहुत रोई

जब तक उसे हल्का नहीं लग गया तब तक। थोड़ी देर रो लेने के बाद वो बाहर अाई अपना ड्रेस निकाल कर स्कूल ड्रेस पहन लिया।

चाहत रूम से बाहर आई वो हाथ में कंघी पकड़ कर अपनी मम्मी के पास बैठ गई। रीमा जी ने उसके बाल पहले सुलझाए और उसकी चोटी बनाने लगी... रीमा जी ने चोटी बनाई और कहा - लो हो गया।

चाहत उनकी तरफ देख कर फिका मुस्कुरा दी।

रीमा जी चाहत को देखते हुए - कुछ हुआ है क्या?

किसी ने कुछ कहा क्या।

चाहत ने ना में सिर हिला दिया।

चाहत जाने लगी तो रीमा जी ने पीछे से उसका हाथ पकड़ा । फिर पूछा - कुछ तो हुआ है.. बोलो ।

चाहत की आंखो में एक बार फिर नमी आ गई फिर भी उसने खुद को संयत कर वो मुड़ी और कहा - मम्मी ठीक हूं मै...आप टैंशन ना लो।

चाहत अपने रूम में गई। वहा से अपना बेग ले अाई और शू

रैक से शूज निकाल कर पहनने लगी। रीमा जी अाई और उन्होंने चाहत के बेग में टिफिन डाला। उसे शूज पहनते देख कर वो बोली - चाहत तुमने नाश्ता तो किया ही नहीं...

चाहत अपने शूज के क्लिप को लगते हुए नज़रे झुकाए बैठी थी। ताकि उसके आंसू मम्मी ना देख ले।

चाहत - हा मम्मी मन नहीं है ।

रीमा जी उसके पास अाई और उसका माथा छू कर बोली - ठीक हो ना तुम..

चाहत उनका हाथ हटाते हुए - हा मा ठीक हूं मै...

रीमा जी ने चाहत को देखा फिर कहा - रुको तुम ... वो अंदर गई । जब बाहर अाई तो उनके हाथ में एक प्लेट थी जिस में पराठा और आचार था। रीमा जी ने चाहत को अपने सामने सोफे पर बिठाया।

पराठे का एक टुकड़ा लिया और उसमे आचार लगा कर उसे चाहत की तरफ बढ़ा दिया। चाहत ने पहले पराठे को देखा फिर रीमा जी को ।

रीमा जी ने इशारे से उसे खाने को कहा तो चाहत भी बिना कुछ कहे खाने लगी।

जब पराठे ख़तम हुए तो वो चाहत के तरफ देख कर बोली - जब भी खाने का मन ना हो तो मेरे पास आना मै तुम्हे अपने हाथ से खिला दूंगी। पर भूखे मत रहना.

चाहत ने हा में सिर हिला दिया।

ऐसा नहीं था कि रीमा जी को अहसास नहीं हुआ था पर कल रात हुए किस्से के बाद उनको ये बात पता थी। अगर कुछ भी हुआ तो चाहत उन्हें खुद बताएगी। वो चाहत के बोलने का वेट कर रही थी।

चाहत ने कुछ नहीं कहा उसने अपना बेग लिया और बाहर आ गई। साइकिल निकाल वो अपनी ही दुनिया में खोए स्कूल के रास्ते की तरफ बढ़ रही थी। तभी उसकी साइकिल एक पत्थर से लग कर गिर पड़ी और साथ में चाहत भी गिरी। उसके घुटने के पास छिल गया था। वो हाथ झाड़ते हुए उठी । साइकिल ठीक थी ये देख चाहत साइकिल उठा कर स्कूल की तरफ चल पड़ी ।

वो साइकिल स्टैण्ड के पास पहुंची। अपनी साइकिल रख ही रही थी। तभी किसी ने उसे पुकारा । पलट कर देखा तो

अध्यन था जो उसके पास आ रहा था। चाहत ने अध्यन को देखा और वो भी उसी तरफ जाने लगी। अध्यन उसके पास आया ही था तभी उसकी नजर चाहत के कपड़ों पर गई जिस पर मिट्टी लगी थी। वो उसके पास आकर ।

अध्यन उसके दाग़ की तरफ इशारा कर के - ये क्या हुआ...?

चाहत उस दाग़ को देखते हुए - ये... अरे...कुछ नही...वो साइकिल से गिर गई थीं।

अध्यन एकदम से उसके करीब आया और उसे कंधो से पकड़ कर चारो तरफ से घुमा कर देखता है।

अध्यन - तुम ठीक हो ना .... ज्यादा तो नहीं लगा ना ...तुम क्लास मत जाओ ...मै तुम्हे पहले डॉक्टर के पास ले चलता हूं.... फिर घर छोड़ दूंगा... ये बोल उसने चाहत का हाथ पकड़ लिया। और आगे बढ़ने लगा।

चाहत ने उसे रोकते हुए - अध्यन मै ठीक हूं ... बस घुटने में चोट लगी है ....

अध्यन उसकी बात सुन जल्दी से नीचे बैठ गया उसने उसकी स्कर्ट की तरफ हाथ बढ़ाया ही था। तभी उसे याद आया वो ऐसे नहीं कर सकता।

चाहत भी थोड़े देर के लिए डर गई थीं। अध्यन उठा उसने चाहत के बेग को अपने एक कंधे में पकड़ा और दूसरे कंधे में उसका खुद का बेग था। उसने सीधे हाथ से चाहत के एक हाथ को पकड़ा और मेडिकल रूम की तरफ ले गया। चाहत बस अपने हाथ को देख रही थी। उसके सावले रंग के हाथो को अध्यन ने अपने गोरे हाथो से मजबूती से पकड़ रखा था। अध्यन उसे मेडिकल रूम ले आया। चाहत अपने हाथ को देखना छोड़ अब अध्यन को देख रही थी जो उसे थामे आगे बढ़ रहा था।
 
मेडिकल रूम

चाहत को अध्यन ने बेड पर बिठाया । उसने दोनो के बेग को साइड में रखा फिर मेडिकल रूम की इंचार्ज को ढूंढने लगा। पर जब उसे कोई नहीं मिला तो उसने चाहत से कहा - लगता है आज डे शिफ्ट वाली मैम नहीं अाई है।

चाहत - हा अभी टाइम भी नहीं हुआ है ..... एक काम करो वो बॉक्स है ना... चाहत ने बॉक्स की तरफ इशारा कर के कहा। वो ले आओ.....

अध्यन वो बॉक्स उठा कर ले आया। फिर चाहत ने उससे वो बॉक्स लिया सामने स्टूल पर पैर रख उसने कॉटन में डेटॉल लेकर साफ़ करने के हाथ बढ़ाया और उस कॉटन को चोट पर रखते ही उसकी सिस्की निकल गई।

अध्यन उसे देख कर - क्या कर रही हो तुम.... दो मुझे ....तुम्हे देना ही नहीं चाहिए था..... और लगाओ खुद से .... दर्द हो रहा है ना.... चाहत ने कुछ कहना कहा तो ।

अध्यन - अब नहीं मत कहना.... उसने जल्दी से उसके हाथ से कॉटन लिया और चोट साफ़ करने लगा ।

अध्यन चोट पर फूक मार रहा था और बहुत धीरे धीरे चोट साफ़ कर रहा था। चोट साफ़ हो जाने के बाद उसने चोट पर दवाई लगाई फिर छोटी सी पट्टी लगा दी।

चाहत उसे देख रही थी।अध्यन को देख यही लग रहा था जैसे किसी ने चाहत को नहीं उसे चोट लगा दी हो। ये सोच कर चाहत की एक आंख से आंसू निकाल आया।

पट्टी लगा लेने के बाद अध्यन उठा उसने चाहत की आंखो में देखा। उसकी आंखो में आंसू देख कर उसे ऐसा लगा शायद दर्द के कारण उसे रोना आ रहा होगा।

उसने चाहत के आंसू को अपने हाथो से साफ किया ।

वो मुड़ा ही था तभी चाहत और जोर से रोने लगीं । अध्यन जल्दी से मुड़ा उसने चाहत को देखा जो रो रही थी।...

अध्यन को समझ नहीं आया वो इतना क्यू रो रही है। अध्यन उसके पास आया और उसे देखने लगा चाहत ने अध्यन को पास देखा फिर उसके गले एकदम से लग गई।वो उसके गले लग कर रोने लगी।

अध्यन के दोनो हाथ ऊपर उठ गए थे । पर वो उसे छोड़ भी नहीं सकता था। उसने बस चाहत का सिर सहलाना शुरू किया। जब तक वो रोती रही तब तक उसने चाहत का सिर सहलाना जारी रखा। जब उसे लगा रोना अब सिस्कियो में बदल गया है तो वो चाहत दूर हुआ।

उसने चाहत की तरफ पानी की बोतल को बढ़ाया। चाहत ने पानी पिया और अध्यन को देखने लगी।

चाहत कुछ बोलती उससे पहले ही अध्यन ने कहा - मै तुमसे कुछ नहीं पूछूंगा....क्युकी मुझे पता है .... तुम अपनी बाते अपने तक ही सीमित रखना चाहती हो.... ये बोल उसने चाहत का हाथ मजबूती से पकड़ लिया फिर बात जारी रखते हुए ।

अध्यन - पर मै बस इतना हक़ चाहता हूं... जब भी तुम दर्द

में हो..... तुम्हारा हर दर्द मेरे कंधो पर आकर ही ख़तम हो... मै अपनी चाहत को ऐसे किसी और के सामने नहीं देख पाऊंगा.....

चाहत उसे एकटक देख रही थीं। अध्यन ने बिना कहे ही उसकी सारी बात समझ ली थी।

ये बोल उसने चाहत को बेड से उठाया। फिर उसे कॉमन रूम के पास ले गया।

अध्यन ने चाहत को देख कर कहा - तुम जाओ पहले खुद को साफ़ कर लो फिर क्लास आ जाना। .....,मै बेग लेकर आता हूं...

चाहत ने हा में सिर हिला दिया और अन्दर चले गई।

स्कूल

चाहत को कॉमन रूम भेज कर अध्यन वापस मेडिकल रूम आया। उसने चाहत का बेग उठाया। वो वहा से ब्वॉयज कॉमन रूम चला गया।

ब्वॉयस कॉमन रूम

उसने देखा रूम खाली है। उसने बैग्स को साइड में रखा और अपने हाथो को देखा जिसमें खून के निशान थे। वो वाशबेसिन के पास आया वहा उसने अपने हाथ धोए और सामने लगे मिरर में उसने खुद को देखा। अध्यन के शर्ट पर उसे चाहत के आसुओ के निशान दिखे। वो अपने हाथो पर

माना पहली बार प्यार किया है...शायद इसीलिए प्यार निभाना नहीं आता पर ... फिर भी कोशिश करूंगा तुम्हे तुम से मिला सकू...तुम्हे सुकून दे सकू... ये बोल वो मुस्कुराया और अपना चेहरा साफ करने लगा।

गर्ल्स कॉमन रूम

चाहत अंदर अाई उसने खुद को मिरर में देखा । उसके सामने वो सभी चीज़े अाई जो उस मेडिकल रूम में हुई थी। चाहत खुद को देख रही थी उसने सबसे पहले तो अपने कपड़े साफ़ किए । चेहरा धोया। फिर चाहत सोचने लगी।

चाहत - ये क्या हुआ था मुझे ...,मै कैसे खुद को रोक नहीं पाई।..,जब वो मेरे पैर में चोट पर दवाई लगा रह था तो...तो ऐसा क्यों लगा कि दर्द उसे हो रहा हो,...अध्यन मेरी तकलीफ को समझ रहा है...उसकी आंखे साफ़ बया कर रही थी...उसके दर्द को ... शायद इसीलिए मै खुद को रोक नहीं पाई ...वो ये कैसे जान गया कि मै कुछ नहीं बताऊंगी... उसका मुझसे कुछ ना पूछना ... फिर मेरा ऐसे ध्यान

मौजूद निशान को साफ़ करने लगा। फिर उसने अपना चेहरा धोया।

अध्यन चेहरा साफ कर ही रहा था साथ साथ वो उस पल को भी याद कर रहा था। जब चाहत ने उसे गले लगाया था चाहत का रोना हमेशा उसे बेचैन करता था पर आज उसका रोना ।

उसने अध्यन को झंझोर कर रख दिया था। उसने मिरर में देखा । और कुछ सोचने लगा।

अध्यन - तुम जितनी शांत दिखती हो...उतनी शांत हो नहीं ...कुछ तो है...जिसने तुम्हें ऐसे रखा है...तुम आज जैसे रों रही थी... ऐसा लग रहा था ...कोई दर्द है जिसे तुम निकालना चाहती हो...कुछ है जो तुम्हे अंदर से खाए जा रहा है...अध्यन रुक गया उसने नेपकिन ली और अपना चेहरा साफ करने लगा।

अध्यन सोचते हुए - मै कोशिश करूंगा ..तुम्हारे अंदर से वो सारी चीज़े बाहर आए... जो तुमने खुद में समेटे रखी है...वो खुद ही बाहर आयेगी ... क्युकी उस पल मै तुम्हारे साथ रहूंगा...एक पल के लिए भी तुम्हे अकेला नहीं छोडूंगा...

अपने साइड किया और खुद उसकी साइड चला गया।

चाहत ने उस ग्रुप को देखा जो मस्ती में आ रहे थे और रास्ते में आने वालों को धक्का लगते हुए चल रहे थे। क्युकी वो खुद में मस्त होकर चल रहे थे। चाहत समझ गई थी ये अध्यन ने उसे प्रोटेक्ट करने के लिए किया है।

चाहत अध्यन के साथ चलने लगीं।

क्लासरूम

दोनों क्लास में आए क्लासरूम खाली था। दोनों ने अपने बैग्स रखे फिर एक दूसरे को देख मुस्कुरा दिए।

अध्यन को आज मौका मिला था वो चाहत से बात करना चाहता था। वो ये सोच ही रहा था तभी उसकी नजर चाहत के हाथो पर गई। चाहत अपनी उंगलियों को इधर उधर कर रही थी।कभी अपनी हथेली पर कुछ लिखती तो कभी डेस्क पर कुछ लिखती। अध्यन उसे देख रहा था। उसे समझ आ गया था चाहत कुछ कहना चाहती हैं पर शायद संकोच के कारण कह नहीं पा रही।

रखना ...,इस बात को साबित करता है...वह अब मुझे समझने लगा है...

चाहत ने सब सोच कर खुद को देखा एक गहरी सांस ली फिर वापस से बाहर की तरफ बढ़ गई।

बाहर आकर अध्यन का इंतज़ार करने लगी अध्यन आया उसने पहले चाहत को देखा । चाहत को अध्यन का उसका बेग पकड़े रखना अच्छा नहीं लग रहा था।

चाहत - अध्यन ये बेग मुझे दे दो..

अध्यन - पर तुम्हारी चोट ...

चाहत - मुझे कुछ नहीं हुआ है... चलो दो..

अध्यन - ठीक है ...पर अगर दर्द हो तो मुझे ये वापस दे देना...

चाहत - हा ठीक है...

चाहत ने बेग लिया फिर दोनो साथ में चलने लगे । दोनों गैलरी से होकर गुजर है रहे थे... तभी अध्यन ने देखा सामने से बच्चो का ग्रुप आ रहा है तो उसने चाहत को कंधो से पकड़ा।

चाहत ने अध्यन को देखा पर कहा कुछ नहीं । अध्यन ने उसे

अध्यन ने बात स्टार्ट करते हुए - वैसे अभी क्लास स्टार्ट होने में थोड़ा टाइम है... तुम अपने बारे में कुछ बताओ...

अध्यन के अचानक पूछने पर चाहत को थोड़ा टाइम लगा उसे समझ ही नहीं आया की अध्यन ने अभी क्या कहा... पर जब अध्यन ने सवाल दोहराया तो उसने जवाब दिया।

चाहत - मेरे बारे में...मेरे बारे में ऐसा कुछ नहीं है जो तुम नहीं जानते हो...

अध्यन उसकी तरफ मुड़ कर देखते हुए - बाहरी चीज़े तो मुझे पता है..पर मै तुम्हे जानना चाहता हूं ।

चाहत - मतलब ...

अध्यन - मतलब...रुको ... ये बोल कर उसने अपने कंधे की तरफ इशारा कर के कहा - ये जो तुमने किया...किसी ने कभी नहीं किया ... किसी के भी आंसू ने मेरी शर्ट पर ऐसे निशान नहीं छोड़े ... ये मेरे लिए नया एक्सपीरियंस था... ये साबित करता है...की तुमने अपने दिल में मेरी एक अलग जगह रखी है... मै इस जगह से खुश हूं...मै बस अपनी इस छोटी सी फ्रेंड को जानना चाहता हूं,,... क्या मुझे ये मौका दोगी....खुद के बारे में बताओगी...

चाहत उसे देखने लगी अध्यन बहुत ज्यादा खुश था। और आंखो को बच्चो की तरह छोटी कर के ये सब कह रहा था । चाहत को वो काफी क्यूट लग रहा था। चाहत मुस्कुराने लगीं। फिर उसने अध्यन के गाल खींचे और कहा - सो क्यूट..

अध्यन अपने गाल पकड़ कर उसे देखने लगा। चाहत ने एक बार फिर उसके गाल खींचे। अब अध्यन को दर्द हुआ। चाहत ने फिर उसके गाल खींचे। ऐसा उसने कई बार किया। पर जब अध्यन से बर्दास्त नहीं हुआ उसने चाहत के दोनो हाथो को पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींचा...

चाहत उसके करीब आ गई । दोनों को सांसे एक दूसरे से टकरा रही थी। दोनों बस एक दूसरे को देखे जा रहे थे।।

ऐसे ही ना जाने कितने देर तक दोनो रहे । चाहत ने कुछ पल के लिए नज़रे झुका दी। चाहत ने फिर अपनी नज़रे उठा कर अध्यन की आंखो को देखा । वो उसे ही देख रहा था।
 
चाहत को उन आंखो में कुछ अलग अहसास दिख रहा था और एक तरह का सुकून भी वो महसूस कर रही थी। थोड़ी देर बाद अध्यन चाहत से दूर हुआ।

अध्यन इधर उधर देखने लगा। तभी चाहत - मैंने कभी भी काजल के अलावा किसी के भी कंधो पर सिर नहीं रखा... ना ही मै रोई हूं.. क्युकी मुझे हमेशा से अपनी चीज़े अपने तक ही रखना पसंद है... आज जो भी हुआ.. वो मेरे साथ हमेशा होता है... मै इसे हमेशा सहती अाई हूं.... कभी किसी से नहीं कहा... पर ...

वो अध्यन को देखने लगी जो उसे ही देख रहा था। चाहत - पर आज जब तुमने ये किया ... कह कर उसने अपने घुटनों की तरफ इशारा किया..तो मैंने तुम्हारी आंखों में अपने लिए वहीं परवाह देखी जो काजल की आंखो में होती है... तुम्हे पता है जब तुमने मेरे चोट पर मरहम लगाया तो ... लगा जैसे तुमने मेरे सारे दर्द ले लिए हो... शायद इसीलिए मै भावनाओ में बह गई...और मुझसे... जो हुआ उसके लिए मै माफी मांगती हूं... I am sorry...

अध्यन ने कहा - इट्स ओके... मुझे बुरा नहीं लगा। ... मुझे तो तब बुरा लगता जब तुम... ऐसे ही रहती अपना दर्द नहीं कहती....

चाहत - तुमने कल मुझसे पूछा था ना ... मै क्यू रों रही हूं..???

अध्यन झट से - अगर तुम नहीं बताना चाहती तो ... मत बताओ ... कोई जबरदस्ती नहीं है....

चाहत ने उसे देखा फिर कहा - मै बताना चाहती हूं...

कुछ पल रुक चाहत ने कहना जारी रखा - उस दिन बस स्टैंड में मै रों रही थी क्युकी ... मेरी दादी मुझसे दूर जा रही थी। मेरी दादी द बेस्ट लेडी ... तुम्हे पता है जब मेरे पापा बहुत छोटे थे तो दादा जी उन्हें छोड़ कर चले गए थे... दादी ने ही उनकी देखभाल की ... महज 16 साल जी ऐज में उन्होंने घर संभाला।

अध्यन हैरानी से चाहत को देखने लगा।

चाहत बात को जारी रखते हुए ।

चाहत - दादी अपने मम्मी पापा की इकलौती बेटी थी। ... उनके मम्मी पापा उनको लेने आए थे... वो चाहते थे कि वो उनके साथ जाए ...ताकि वो लोग उनकी शादी कहीं और करा सके...पर दादी नहीं गई। ...उन्होंने साफ कह दिया ।

वो यही रह कर अपने बेटे ( चाहत के पापा) और अपने घर को देखेगी ... थक कर उनके पापा मम्मी भी उनके साथ रहने

लगे ...उहोंने खेतो से अपने काम कि शुरुवात की ... सब कुछ सिखा ... ताकि अपने बच्चे को अच्छा भविष्य दे सके ...

कुछ दिन तक दादी अकेले काम करती तो पापा को उनकी नानी मा संभालती इससे दादी की हेल्प हो जाती पर अचानक दादी कि पापा की डैथ हो गई... और उनके गम में दादी की मम्मी भी चल बसी ... फिर भी दादी ने हार नहीं मानी उन्होंने कभी अपने काम को नहीं छोड़ा ... वो पापा को देखभाल भी करती साथ में उनको पढ़ाती भी थी...उन्होंने पापा की शादी करवाई... जब पापा की जॉब लगी तो ... वो उनसे दूर हो गए.. ये मेरे जन्म के टाइम की बात है... मै भी गांव में रही ...पापा को लगा वहा मेरी अच्छे से पढ़ाई नहीं हो पाएगी इसीलिए वो हमे यहां इस शहर ले आए,... और हम उनसे दूर हो गए... वो अभी भी वही रहती है..अकेले अपने खेतों और गायो के बीच... उन्हें वहा सुकून मिलता है... क्युकी वहा दादा जी की यादे है... कहीं ना कहीं वो हमे भी मिस करती है...तुम्हे पता है वो मुझसे और आर्यन से बहुत प्यार करती है... पर फिर भी हमारे लिए हमसे दूर है... बस यही कारण था मेरे उस दिन रोने का... मै फिर उन्हें अकेलेपन में भेज रही थी...

अध्यन जो उसकी बात सुन रहा था। उसने देखा चाहत के

चेहरे पर उभरे दर्द को कहीं ना कहीं चाहत अपने आप को जिम्मेदार समझती थी । उसे ऐसा लगता था उसके कारण ही उसकी दादी उससे दूर है। ये बात अध्यन को समझते देर न लगी ।

अध्यन ने चाहत का हाथ पकड़ा - तुम खुद को ब्लेम मत किया करो.. चाहत ने अध्यन को देखा वो ये समझ ही नहीं पा रही थी .. की कैसे अध्यन ने ये बात समझ ली..

अध्यन - जो भी हुआ ... उसमे तुम्हारी कोई गलती नहीं थी...ये बस एक तरह से होना था ...तो हो गया । तुम्हारी दादी को जहा सुकून मिलता है... उन्हे वहीं रहने दो ... तुम बस खुश रहो... क्युकी तुम्हारी खुशी के लिए ही.. उन्होंने तुम्हे खुद से दूर रखा है... अब तुम खुद ही सोचो ... अगर तुम ऐसे रहोगी ... उनके ना होने पर खुद को ब्लेम कर के रोओगी... तो उनको कैसा लगेगा।

चाहत ने हा में सिर हिलाया।

अध्यन उसके सामने बैठा था उसने कहा - ये तो उस दिन की बात थी... पर आज ऐसा क्या हुआ को तुम ऐसे रों रही थी... कोई भी बात हो तो मुझे बताओ ... शायद मै कुछ हेल्प कर सकू...

चाहत ने उसकी बात सुनी फिर कहा - आज जो हुआ उसे तो मै ... तुम्हे नहीं बता सकती वो बस मुझ तक ही सीमित रहेगा...

अध्यन कुछ बोलने को हुआ तो चाहत ने कहा - तुम बहुत समझदार हो ... हर बात समझते हो पर ...ये बात तुम नहीं समझ पाओगे...अध्यन कुछ बाते जिस पर गुजरती है... बस उसे ही पता होती है...बाकी बस उन बातो को सुन कर उसका मज़ाक उड़ाते है.... अध्यन ने चाहत की आंखो को देखा जो बस छलकने वाली थी।

चाहत - I'm sorry

अध्यन -it's ok

अध्यन सोचते हुए - कभी ना कभी तो तुम मुझे सब बताओगी मै उस दिन का इंतज़ार करूंगा... तुम्हारे हर गम को मै समझ सकता हूं... बस तुम मुझे एक मौका तो दो... वो ये सब सोच ही रहा था तभी उसने चाहत की आंखो पर फिर से पानी देखा...

अध्यन ने उसे आज बहुत रोते देखा था...अब वो और नहीं

देख सकता था इसीलिए अध्यन ने चाहत को देख ना में सिर हिलाया। तो चाहत चुप हो गईं। उसने अपनी आंखो के पानी को साफ किया।

अध्यन ने सामने देखा तो क्लास के सभी बच्चे आ रहे थे।

अध्यन और चाहत दोनो एक दूर से थोड़ा दूर होकर बैठ गए । अध्यन ने फिर से चाहत को देखा। जो सामने काजल को देख कर मुस्कुराते हुए उसे hii बोल रही थी। और वो उठ कर उसके पास चले गई...

उसने चाहत को मुस्कुरा कर देखा। तभी अंश उसके सामने आ गया। दोनों बाते करने लगे तो चाहत ने अध्यन को देखा फिर वो भी मुस्कुरा दी और काजल से बात करने लगी...

तभी प्रेयर बेल बजी और सारे बच्चे प्रेयर ग्राउंड चले गए... जहां एक अलग सरप्राइज उनका वेट कर रहा था...
 
स्कूल

सब प्रेयर हाल में आ चुके थे..प्रेयर स्टार्ट हुई जिसमें सारे बच्चें इकठ्ठा हो गए थे। सारे बच्चों में कुछ ऐसे थे जो मन लगा कर प्रेयर कर रहे थे और कुछ बस प्रेयर खत्म होने का इंतज़ार कर रहे थे। हमारे अध्यन जी हमेशा की तरह चाहत को देख रहे थे।

प्रेयर खत्म होते ही सारे बच्चे क्लास जाने के लिए टीचर्स को देखने लगे क्युकी बिना टीचर के परमिशन वो जा नहीं सकते थे। सारे बच्चे टीचर्स को आशा भरी निगाहों से देखने लगे पर टीचर्स तो उन्हें देख भी नहीं रहे है। ये देख बेचारो ने अपना सिर नीचे झुका दिया।

तभी ग्रे कलर का कोर्ट पहने एक व्यक्ति ने प्रेयर हॉल में एंट्री ली... जिनकी हाइट लगभग 5'8" थी। उनके सिर पर बाल के नाम पर सिर के पीछे एक कान से होते हुए दूसरे कान तक बाल मौजूद थे। और सिर के ऊपर सिर्फ चार बाल थे। जिसे शायद उन्होंने तेल लगा कर सिर पर चिपका रखा था। रंग गोरा होने के कारण जब वो बाहर से अंदर आए तो लाल हो चुके थे... ये थे आदर्श विद्या मंदिर के प्रिंसिपल मि.ए.के.अरोड़ा।

मि.अरोरा - गुड मॉर्निंग एवरीवन।

सारे बच्चे एक साथ - गुड मॉर्निंग सर।

मि.अरोरा - सो आज मै आप सभी के लिए एक गुड न्यूज लाया हूं...

सारे बच्चे खुश हो गए ।

मि. अरोड़ा - नेक्स्ट मंथ आप सभी के स्पोर्ट्स वीक़ स्टार्ट हो रहा है।सारे बच्चे खुशी से ताली बजाने लगे।

मि अरोरा अपनी बात जारी रखते हुए - पहले आप सभी के स्पोर्ट्स होंगे फिर टीम सिलेक्शन होंगी फिर होंगे फाइनल जिसमे जितने वाले टीम्स इसमें पार्ट लेंगे। तो आप प्रिपेयर कर ले । इस में सेलेक्ट हुए टीम से हम बच्चे सेलेक्ट कर उसे स्कूल के ऑफिशियल टीम में लेंगे और दूसरे स्कूल के बच्चो के साथ खेलने भेजा जाएगा।

सेकंड थिंग होगी कल्चर एक्टिविटी जिसमे डांस , सिंगिंग, एंड अदर चीज़े होगी। साथ ही इसमें आप सभी के लिए मेंहदी , पेंटिग्स जैसे चीज़े होंगी । तो बी रेडी । इसमें ड्रामा भी होगा तो सब मिल कर काम करेंगे । डांस और सिंगिंग ग्रुप में हो तो भी चलेगा। बट सभी को इसमें पार्ट लेना कंपल्सरी है.. हम भी तो देखे हमारे बच्चे कितने टैलेंटेड है..

सारे बच्चे खुश होकर फिर से ताली बजने लगे । पर अब तालियों की आवाज़ पहले से तेज थी। क्युकी गर्ल्स कल्चरल वीक के लिए खुश थे और ब्वॉयज स्पोर्ट्स वीक के लिए।

मि.अरोरा - अब गुड न्यूज़ दी है तो रेडी हो जाओ अब आते है बेड न्यूज़ पर ...

सारे बच्चों की खुशी जैसे चले गई।सब ने एक दर्द भारी आह के साथ मि.अरोरा को देखा।

मि. अरोरा - आप सभी के ट्रमिनल एग्जाम नेक्सट वीक से है..

सारे बच्चे एक साथ - ओह नो...

मि.अरोरा मुस्कुराते हुए - आपकी एग्जाम के बाद ही आपका स्पोर्ट्स वीक और कल्चरल वीक स्टार्ट होगा। साथ ही आपके एनुअल फंक्शन के डेट भी बताई जाएगी। पर उससे

पहले आपको एग्जाम के लिए प्रिपेयर भी होना होगा। सो आल द बेस्ट। और हा आपके एग्जाम टाइम टेबल भी आज आपको क्लास में ही मिल जाएंगे।

इतना कहने के बाद वो चले गए। चाहत और काजल ने एक दूसरे को देखा फिर खुश हुई।

वहीं दूसरी तरफ अध्यन के चेहरे पर बारह बज चुके थे ।

उसने अंश को देखा अंश भी समझ रहा था। सारे बच्चे एक साथ लाइन से अपनें अपने क्लास जाने लगे ।

उसी बीच अध्यन अंश से - यार एग्जाम्म है नेक्स्ट वीक से एग्जाम है ।

अंश - तो

अध्यन - तो के बच्चे ... एग्जाम है और मैंने पढ़ाई भी नहीं की है।

अंश - ये तो हर साल का है... तू लास्ट मोमेंट में पढ़ता है और पास हो जाता है। ... डर क्यू रहा है...

अध्यन - डर नहीं रहा ... पहले फेल हो भी जाता तो बुरा नहीं लगता... पर अब ..

अंश - अब क्या..??

अध्यन - अब चाहत है,.. वो टॉपर है... मै उसके सामने फेल नहीं होना चाहता.. देख भाई मै टॉपर तो बन नहीं सकता

पर... पर पास तो हो है सकता हूं ना।

अंश - हा बात तो सही है..

अध्यन - अरे... कुछ सही नहीं है.. कुछ कर ना यार...

अंश - रुक सोचता हूं..

अंश सोचते हुए क्लास आ गए वहा अंश इधर उधर घूमने लगा।

अचानक से अंश चुटकी बजाते हुए - अबे मिल गया..

सारे बच्चे उसे देखने लगे।

अंश ने धीरे से कहा - मिल गया..आइडिया मिल गया...

अध्यन हाथ फैलाते हुए - तो दे...

अंश उसके हाथ को देखते हुए - अबे देने का नहीं है..

अध्यन उसका चेहरा देखते हुए - तो फिर ...

अंश उसके सिर पर हाथ मारते हुए - बताने का है...

अध्यन सिर झुका कर - बोल..

अंश उसे चिढ़ाते हुए - सुन रहा है..

अध्यन गुस्से से - अब बोल भी दे..

अंश मुस्कुराते हुए - अभी एग्जाम में एक वीक है.. तू आज से पढ़ाई स्टार्ट कर ...

अध्यन कुछ बोलने की हुआ तो अंश उसे रोकते हुए - देख भाई अगर पास होना है तो यही एक रास्ता है.. तू या तो पढ़

या तो चाहत के सामने फेल हो जाना.. अब तुझ पर है...

अध्यन सोचने लगता है,..तभी सामने से चाहत आती हुई दिखती है... अध्यन उसे देख - तुम्हारे लिए कुछ भी...

अंश उसे देख सिर पर हाथ रख कर - मजनू कहीं का...

चाहत काजल से साथ सारी गर्ल्स क्लास में जाते है.. फिर क्लास भी स्टार्ट हो जाती है 1010 मिनट में ब्रेक के साथ आधी क्लासेज हुई फिर लंच हुआ। सब लंच करने बाहर आए। चाहत और काजल भी बाहर आए। चाहत हाथ में लंच बॉक्स पकड़े अध्यन को देख रही थी। जब वो नहीं दिखा तो चुपचाप लंच करने लगी।

अंश और अध्यन क्लास में बैठ कर ।

अंश - देख भाई हिंदी इंग्लिश तो एक दिन पहले हो जाएगा।

अध्यन - मैथ्स की प्रैक्टिस मै घर पर करूंगा।

अंश उसे टोकते हुए - और तेरे सारे डाउट मै सॉल्व करूंगा .. तू हर दिन की अपडेट देगा मुझे,।

अध्यन - हा .. अब साइंस एंड सोशल साइंस उसका क्या करना है ?

अंश - वो मै तुझे लंच में बता दूंगा..

अध्यन खुश होते हुए - बाकी मै खुद कर लूंगा...

अंश - हा कोई भी हेल्प चाहिए होगी तो बताना..

अंश कुछ डर कर - देख एक साथ सारे चैप्टर मत करना..सारे सब्जेक्ट के आधे चैप्टर करना .. और हा सारे आईएमपी क्वेश्चन ही करना। इतने में तू आराम से पास हो जाएगा।

अध्यन - क्यू...???

अंश उसे समझाते हुए - तू सारे सब्जेक्ट के सारे चैप्टर करने लगा तो तू शायद ही सारे सब्जेक्ट कर पाए ।

अध्यन ने हा में सिर हिलाया।

अध्यन - हा भाई.. फिर मै पास चाहत को भी बुरा नहीं लगेगा.. वो मुझे बुद्धू भी नहीं समझेगी...

अंश - वो तो वैसे भी नहीं समझती ...

अध्यन उसे देखते हुए - हा बहुत प्यारी है .. उसे किसी से भी कोई मतलब नहीं... जो जैसा है .. वो उसे वैसे ही पसंद करती है...

अंश उसके गले में हाथ डाल उसे अपने साथ ले जाते हुए - अब बस भी कर... और चल...वरना तेरी चाहत तुझे ढूंढते

हुए.. यही आ जायेगी..

दोनों बाहर आते है। देखते है चाहत और काजल लंच कर रहे है.. हमेशा की तरह काजल चाहत को कुछ ना कुछ बता रही है.. और चाहत मुस्कुराते हुए उसे सुन रही है...

चाहत अंश और अध्यन को देख कर - तुम दोनो,..कहा थे तुम दोनो... ??

अंश अध्यन एक साथ - कहीं नहीं ..

चाहत - देखो हमने लंच भी कर लिया.. और तुम लोग .. अभी आ रहे हो..

अंश - वो कुछ काम था..

चाहत आंखे मटकाते हुए - अच्छा क्या काम था??

अंश नीचे देखते हुए - था कुछ काम .. तुम रहने दो ना..

चाहत - ठीक है.. मत बताओ ..वो अध्यन के साइड मुढ़ कर .. तुम बताओ..

अध्यन डरते हुए - नहीं... कुछ... नहीं.. और नीचे देखने लगता है...

अंश बात संभालते हुए - चलो ना क्लास ...यहां कितनी धूप है...

काजल भी उसके साथ - हा यार ...चलो ना ...

चाहत के अध्यन - हा ठीक है..चलो...

काजल और अंश साथ में आगे निकल जाते है..पीछे अध्यन और चाहत उनके पीछे चलते है..

अचानक चाहत अध्यन का हाथ पकड़ती है..अध्यन उसे देखने लगता है। चाहत उसका हाथ पकड़ उसे सीढ़ियों के पास ले जाती है।

चाहत सीढ़ियों के नीचे अध्यन के ठीक सामने खड़े होकर उसकी आंखो में देख रही होती है..

अध्यन - क.. क..क्या हुआ.. ?? तुम मुझे ऐसे क्यू...

चाहत अध्यन के चेहरे को देखते हुए - बताओ तुम क्लास में क्या कर रहे थे... बोलो... ये बोल उसने अपनी दोनो पलके झपकाई...

अध्यन - वो ..वो..

चाहत उसके और पास आ कर - हा..

अध्यन ने डर सर अपनी आंखो को बंद कर दिया। और बंद आंखो के साथ बोला - वो एग्जाम है ... और मेरी प्रिपरेशन नहीं हुई है .. तो अंश ने कहा वो मेरी हेल्प करेगा... इसीलिए हम क्लास में थे...

ये सुन चाहत उससे दूर हुई।

चाहत - ओके ये बोल जाने को हुई..

तभी अध्यन ने उसे हाथ पकड़ कर अपने पास खींच लिया। चाहत कुछ कहती इससे पहले ही अध्यन ने उसके होठों पर हाथ रख दिया फिर सामने के तरफ इशारा करते हुए कहा - देखो वहा अभी टीचर है..ऐसे में तुम बाहर गई ना..तो सर तुम्हे देख लेंगे.. अभी यही रुको ।

चाहत ने हा में सिर हिला दिया । चाहत का एक हाथ अध्यन के हाथ पर था वहीं दूसरा अध्यन ने कमर कमर पर रखे वो उसे देख रही थी। जिसकी नजर बाहर बात के रहे टीचर्स पर थी। पर चाहत की नजर तो जैसे उसके चेहरे पर जम ही गई थी। चाहत उसे एकटक देख रही थी। उसकी धड़कन बहुत तेज़ चल रही थी उसे समझ नहीं आ रहा था। की ऐसा क्यों हो रहा है...
 
अध्यन वहीं चाहत को पकड़े खड़ा रहा। जब टीचर चले गए तो अध्यन बाहर आया और उसने चाहत की तरफ हाथ बढ़ा उसे भी बाहर निकाल लिया।

चाहत अध्यन को अब देख भी नहीं पा रही थी वो आगे चलने

लगी।

तभी अध्यन - वैसे जो तुमने मुझसे पूछना था सब पूछ लिया ना...

चाहत पलट कर उसे देखने लगी।

अध्यन उसे देखते हुए - अगर कुछ रह गया हो तो मै अभी भी रेडी हूं...चाहो तो बता दो...

चाहत उसे देखने लगी।

तो अध्यन उसके पास जाकर - वैसे ऐसे किसी लड़के को कोने में नहीं ले जाते.... बेड मनर्स.. ये बोल उसने चाहत की नाक खींची और आगे बढ़ गया।..

चाहत उसे देखती रही फिर वो भी क्लास आ गई।

चाहत अपने सीट पर बैठी तो देखा अध्यन वहा नहीं है..

वहीं दूसरी ओर अध्यन कॉमन रूम में अपने फेस को देख कर - यार चाहत ऐसा मत किया करो...तुम जब ऐसा कुछ करती हो ना.. तो पता नहीं क्या हो जाता है,.. खुद को रोकना मुश्किल हो जाता है...

ये बोल उसने हाथ धोए और बाहर आ गया ।

अध्यन क्लास आया उसकी नजर चाहत से मिली । चाहत

को देख कर अध्यन को पता लग गया था कि वो डर रही है ये देख वो मुस्कुराया और उसने चाहत को आंख मर दी।

चाहत जो उसे नॉर्मल आंखो से देख रही थीं । उसकी आंखे अचानक बड़ी ही गई। और चाहत अध्यन को घूरने लगी अध्यन उसे देख मुस्कुराया और उसके पास आकर बैठ गया।

चाहत अभी भी उसे घुर रही थीं तो अध्यन ने अपने कान पकड़ कर सॉरी कहा.. वो बिल्कुल बच्चो जैसा लग रहा था ये देख चाहत मुस्कुरा दी।।।

सारी क्लासेज हुई और फिर छुट्टी सब बच्चे अपने घर की तरफ चले गए...
 
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